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।। Swapnil Saundarya e-zine ।। ।।

व नल स दय ई-ज़ीन ।।

Volume - 03 , Issue -03 , 2015


व नल स दय ई-ज़ीन - प रचय कला , सा ह य, फ़ैशन, लाइफ टाइल व स दय को सम पत भारत क पहली ह द अथात तृत ् ीय

वष म आप सभी का

वागत है . फ़ैशन व लाइफ टाइल

खास, पहँु चेगी आप तक , हर पल , हर व त, जब तक थम एवं

तीय

वष क सफलता और आप सभी पाठक के अपार

-मािसक ह द प का के तीसरे चरण

से जुड़ हर वो बात जो है हम सभी के िलये व नल स दय के साथ ह आप.

ेम व

ो साहन

के बाद अब

( Swapnil Saundarya ezine ) के तृत ् ीय वष को एक नए रं ग - प व कले व र के साथ

व नल स दय ई-ज़ीन

तु त कया जा रहा है ता क आप

अपनी ज़ंदगी को अपने सपन क दिनया बनाते रह. सुं दर सपने दे खते रह और अपने हर सपने को साकार करते रह .तो ु जुड़े र हये ' व नल स दय' लॉग व ई-ज़ीन

के साथ .

और ..............

बनाय अपनी ज़ंदगी को अपने सपन क दिनया . ु ( Make your Life just like your Dream World ) Launched in June 2013, Swapnil Saundarya ezine has been the first exclusive lifestyle ezine from India available in Hindi language ( Except Guest Articles ) updated bi- monthly . We at Swapnil Saundarya ezine , endeavor to keep our readership in touch with all the areas of fashion , Beauty, Health and Fitness mantras, home decor, history recalls, Literature, Lifestyle, Society, Religion and many more. Swapnil Saundarya ezine encourages its readership to make their life just like their Dream World . www.issuu.com/swapnilsaundaryaezine


Founder - Editor ( सं थापक - सं प ादक ) : Rishabh Shukla ( ऋषभ शु ला ) Managing Editor (कायकार सं प ादक) : Suman Tripathi (सु म न

पाठ )

Chief Writer (मु य ले खका ) : Swapnil Shukla ( व नल शु ला ) Art Director ( कला िनदे श क) : Amit Chauhan (अिमत चौहान ) Marketing Head ( माक टं ग

मु ख ) :

Vipul Bajpai ( वपु ल बाजपई )

' व नल स दय - ई ज़ीन ' ( Swapnil Saundarya ezine ) म पू णतया मौिलक, अ कािशत ले ख को ह कॉपीराइट बे स पर वीकार कया जाता है . कसी भी बे नाम ले ख/ योगदान पर हमार कोई ज़ मे दार नह ं होगी . जब तक क खासतौर से कोई िनदश न दया गया हो , सभी फोटो ा स व िच

केवल रे खां कत उ े य से ह इ ते म ाल कए जाते ह . ले ख म दए

गए वचार ले खक के अपने ह , उस पर सं प ादक क सहमित हो , यह आव यक नह ं है . हालां क सं प ादक को पू र तरह से जाँ च- परख कर ह , ोड

कािशत करते ह, फर भी उसक शत- ितशत क

स से सं बं िधत जानका रयाँ , फोटो ा स, िच

, इल

कािशत ववरण

ज़ मे दार उनक नह ं है . ो

टस

े श न आ द के िलए ' व नल स दय - ई ज़ीन ' को ज़ मे दार

नह ं ठहराया जा सकता .

कॉपीराइट : ' व नल स दय - ई ज़ीन ' ( Swapnil Saundarya ezine ) के कॉपीराइट सु र अिधकार आर या सं पू ण

त ह . इसम

कािशत कसी भी ववरण को कॉपीराइट धारक से िल खत अनुम ित

प से पु न: कािशत करना , सु धारकर

सं

हत करना या कसी भी

या यां क , ितिल प, रकॉ डग करना या दिनया के कसी भी ह से म ु ज़ीन ' के सवािधकार ' ऋषभ शु ल' ( Rishabh Shukla ) के पास सु र

त ह और इसके सभी ा

कए बना आंिशक

प या अथ म अनुव ा दत करके इले

ॉिनक

कािशत करना िनषे ध है . ' व नल स दय - ई त ह . इसका कसी भी

कार से पु न: काशन

िनषे ध है .

चेत ावनी : ' व नल स दय - ई ज़ीन ' ( Swapnil Saundarya ezine ) म घरे लु नु खे, स दय िनखार के िलए ट स एवं विभ न िच क सा प ितय के सं बं ध म त यपू ण जानकार दे ने क हमने पू र सावधानी बरती है . फर भी पाठक को चेत ावनी द जाती है क अपने वै य

य क शार रक श

या िच क सक आ द क सलाह से औषिध ल , य क ब च , बड़ और कमज़ोर

अलग अलग होती है , जससे दवा क मा ा

मता के अनुस ार िनधा रत करना ज र है .


संपादक य

य पाठक ....... आप सभी को नम ते ! व नल स दय ई-ज़ीन के तृ त ् ीय वष के तृ त ् ीय अंक म आप सभी का

वागत है .

' हारे हए ु लोग ' ..... 'हार' , 'असफलता' , 'मात' बड़े ह िनराशावाद श द ह.... शायद ह कोई ऐसा य नाम के साथ इन श द को जोड़ना पसंद करे गा. पर आ खर कौन होते ह व ' ........

हो जो अपने

कन लोग को कहगे आप ' हारे हए ु लोग

हमम से बहत ु से लोग अ सर यह दावा करते ह क उ ह ने ज़ंदगी म जो चाहा वो पाया, जीवन के हर रं ग को अपने अनु प चुना और उस रं ग म ढल गए. ऐसे लोग के अनुसार उनका जीवन परफे ट होता है जसम सपने , र ते, सुख , सु वधाएं व सार दिनया उनक अपनी होती है . जीवन उ साह और रस से भरा होता है और वे िन ु मनचाहे जीवन म म न होते ह.

ंतता से अपने


अपनी ज़ंदगी से खुश होना अ छ बात है , अपनी खूबसूरत ज़ंदगी पर इतराना भी अ छ बात है परं तु अपनी सो कॉ ड परफे ट ज़ंदगी को आधार बनाकर दसर क ू

ज़ंदगी का मज़ाक बनाने वाल को अचानक िनयित उठाकर एक

ऐसी अनजान दिनया म ला पटकती है जहाँ वे, वे नह ं रहते . उस व त ऐसा लगता है जैसे वे अपना जीवन छोड़कर ु कसी और का जीवन जीने लग गए ह . दिनया , र ते सब पराए लगने लगते ह. उ साह , उमंग, रस सब कुछ ख म ु हो जाता है .. प र थितय के आगे वे सब हार जाते ह. उस व त ह जीवन के असली रं ग उनके सामने आते ह क कहाँ अपना मनचाहा जीवन जीने के रं गीन सपने संजोकर बैठे थे और अब खुद ह प र थितय के इशार पर नाचने को मजबूर हो गए और एक अनमने, उदासीनता से भरे जीवन जीने क

ासद सहनी पड़ रह है , जसे

ाय: वे

वीकार नह ं कर पाते और फर शु

पड़ने वाले तमाच को िछपाने क ज ोज़ेहद .

होती है अपने मुँह पर


वो जो मनचाहा नह ं पा सके , उसे दसर ने पाया या नह ं , टटोलना चाहते ह. ' ना ' सुनकर अजीब सा सुकून िमलता ू है , चाहे दखाने के िलए दख ु

दिशत कर. ' हाँ ' सुनकर दखाने के िलए खुशी

कट करते ह पर अंदर से खुद के िलए

एक हाय, एक कसक उठती है और वे अपने दख ु को सहलाते रह जाते ह. उनक बो झल पलक के पीछे मन म कह ं एक कसक सी उठती रहती है क आ खर वे ह भी

या ? ह तो बस ' हारे

हए ु लोग '।

आप सभी पाठक के साथ यह बात साँझा करते हए ु बेहद तीसरे चरण अथात तृ त ् ीय वष म कदम रख चुके ह. के सम

' सफ़केशन

स नता का अहसास हो रहा है क हम अपनी प का के

तीय वष म

व नल स दय ई- प का के साथ हमने आप सभी

' व ' एिसड - डाइ यूट या कॉनसन े टेड ?????? ' नामक दो ई- पु तक

स मिलत कहािनयाँ आप ह पाठक

ारा आपके बेपनाह

नेह व आशीवाद के साथ हम

हु

तुत क ं ... जनम जसम आप ने अपने

जीवन के अनमोल अनुभव का समावेश कया . इसके फल व प हम सभी को जीवन के अनगिनत रं ग व कड़वी स चाईय को समझने का व इनसे अवगत होने का अवसर कहानी को हमारे पाठक क ओर से समु

सा अनंत

हआ ...........'सफ़केशन' व 'एिसड' म ु

कािशत हर

ेम िमला और आप सभी पाठक के ढे र मे स ने हम

व भाव वभोर कया. इसके िलए आप सभी को तहे दल से शु

या .

ो सा हत


आप सभी पाठक के िनरं तर िमल रहे प

म अ सर इस बात का ज

होता है क हम अपनी प का को अब

ं स के ज रये दे श भर के विभ न पु तक भंडार म उपल ध कराएं ... अत: हम यह बेहद गव के साथ घो षत कर रहे ह क हम

इस वष के अंत तक अभी तक के

कािशत सभी अंक म आपके

लेख व कवर

टोर ज़ को एक त कर , व नल स दय ई-ज़ीन के तीन वष के संकलन को इस वष के अंत तक लाँच अव य करगे.

ारा चुने गए सबसे अिधक


व नल स दय लेबल

ारा गत वष के अंत तक हमने फ़ैशन , वे स व लाइफ टाइल पर आधा रत ' फ़ैशन पं डत' व

इं ट रयर डज़ाइन, ीन हो स, वा तु एवं फगशुई पर आधा रत ' सु ीम होम थेर प ' नामक पु तक

कािशत क . इ ह

दे श भर म काफ पसंद कया गया . इन पु तक क सीिमत कृ ् ितयाँ अभी हमारे ई- टोर पर उपल ध ह. आप को जानकर कर हष होगा क

सभी

व नल स दय ई-ज़ीन के इस अंक के साथ हम इस वष लेकर आए ह ' लाव या ::

डांिसंग डॉ स आफ इं डया ' ( Lavanya : The Dancing Dolls of India ) नामक एक नव सेगमट , जसम आप पाठक का सा ा कार होगा उन नामचीन , लोक य व अ तीय कला क धनी शा ीय संगीत न नृ ् य म पारं गत नृ ् यांगनाओं से ज ह ने शा ीय नृ ् य के इसके साथ ह

अपने अभूतपूव

योगदान

ारा अपनी द ता का लोहा मनवाया है .

व नल स दय ई-ज़ीन म इस वष कई नए सेगम स से आपका प रचय भी होगा . आशा है आपके

ेम , ट प णय व सलाह

ारा हर पल हम और बेहतर काय करने क

ेरणा िमलती रहे गी .....तो जुड़े र हये '

व नल स दय ई- ज़ीन ' के साथ ....... और ............... बनाइये अपनी ज़ंदगी को अपने सपन क दिनया ु MA K E Y O U R L I F E J U S T L I K E Y O U R D R E A M W O R L D


व नल स दय ई-ज़ीन के तृत ् ीय वष के तृत ् ीय अंक

म हम जन विभ न पहलुओं व जानका रय

स मिलत कर रहे ह वे िन नवत ह : वशे ष : लाव या ~ ओ ड़सी नृ ् य का

व णम गौरव :: अयोना भादड़ ु ( Ayona Bhaduri ) ( ऋषभ शु ला ) स दय : रोक बाल का झड़ना

आभूषण चचा : सोना व िनवेश फ़ैशन

ान : हॉट

वेल र

पकवान : गोभी पकौड़ा

( व नल शु ला ) ( व नल शु ला )

( द या द

इं ट रयस : दपण से उठाय लाभ , फगशुई के साथ

त ) ( ऋषभ शु ला )

नानी माँ क बात : एिस डट व गैस क सम या से पाइये छुटकारा ( सुम न

पाठ )

सा ह य : अपूवा :: 03 ( व नल शु ला ) अधूरा यार ( कुमार डायर : मे रे हमराज़

तीक )

( शािलनी अव थी )

व वध : सद क महानाियका को सुर ..... लय ..... ताल : गायन , वादन

ृं ांजिल ( ऋषभ शु ला ) तथा

नृ ् य कला

शुभ कामनाओं स हत , आपका , ऋषभ

( Rishabh )

( ऋषभ शु ला )

को


वशेष : लाव या ~ द डांिसंग डॉ स

आफ इं डया ' ( Laavanya : The Dancing Dolls of India )


ODISSI DANCER 'AYONA

BHADURI'


ओ ड़सी नृ ् य का

व णम गौरव :: अयोना भादड ु ़ ( Ayona Bhaduri )

ओ ड़सी नृ ् य ( Odissi Dance ), आठ शा ीय नृ ् य म से एक है . ओ ड़सी, ओ ड़शा शैली है . इसका इितहास 2000 वष से भी पूव का है . अ तन काल म गु कया . ओ ड़सी नृ ् य ( Odissi Dance ) का

ांत, भारत क एक शा ीय नृ ् य

केलुचरण महापा

ने इसका पुन व तार

टश राज के दौरान दमन कया गया परं तु भारत के

वतं

होते ह

ओ ड़सी ने अपना अ त व पुन: था पत कया.

ओ ड़सी नृ ् य ( Odissi Dance ) क मु य वशेषता इसका शा ीय नृ ् य से िभ न है . व

भंगी ( Tribhangi ) होना है और इसी कारणवश यह अ य

भंगी का अथ है : िसर (head) , छाती (chest ) , व

या व विभ न मु ाओं

ारा ओ ड़सी नृ ् य को

विभ न भंग ( Bhanga ) ह. उदाहरण के

ोणीय ( Pelvis ) क

वतं

तुत करना .ओ ड़सी नृ ् य ( Odissi Dance ) क

प म भंग ( bhanga) , अभंग

(abhanga) , अितभंग

गित , चाल

विश ता इसके

( atibhanga ) ,

भंग

(

tribhanga ) . ाचीन नृ ् य होने के बावजूद ओ ड़सी को बतौर शा ीय नृ ् य मा यता 1950 म , ओ ड़सी नृ ् य के व ान व नृ त ् क एवं नृ ् यांगनाओं के क ठन

यास के बाद िमली. पारं प रक ओ ड़सी रं गपटल ( Repertoire) का य द

वणन कर तो ओ ड़सी नृ ् य ( Odissi Dance) के अंतगत सव थम मंगलचरण ( Mangalacharana ) का जाता है जसके

ारा भगवान जग नाथ का आ वाहन कया जाता है . मंगलचरण के अंतगत भूिम pranam) व

खंड

णाम

( trikhandi pranam ) भी शािमल ह.

दशन कया णाम ( bhumi


ु भैरव ( च ड नृ ् य ) जसे भगवान िशव के आदर म बटु नृ ् य ( Battu Nritya ) या बटक नृ ् य को ओ ड़सी नृ ् य का सवािधक ज टल वषय माना जाता है . नृ ् य का विभ न

ृ ं खलाओं

दिशत कया जाता है . बटु

ारं भ मूितवत भंिगमाओं poses क

ारा कया जाता है जसम नृ त ् क या नृ ् यांगनाएं वीणा (lute) , पखावज (drum) , करताल (

cymbals) या बाँसुर

( flute ) बजाते हए ु िभ न- िभ न भंिगमाओं को िच त करते ह.

प लवी ( Pallavi ) , ओ ड़सी नृ ् य का एक अंग है जसके व ेप अिभनय (Abhinaya) के अंतगत

ारा कसी राग को ने

संचालन , मु ाओं , ज टल पाद -

ारा सुप र कृ ् त कया जाता है .

कसी गीत या क वता को अिभनय

को विभ न मु ाओं ( ह त मु ाओं ) और भाव , ने

ारा

दिशत कया जाता है , जहाँ कसी कहानी

संचालन और शर र संचालन

ारा

दिशत कया जाता है .


डांस

ामा ( Dance drama ), अिभनय से लंबा होता है और एक से अिधक नृ त ् क या नृ ् यांगनाओं ारा

जाता है .डांस

दिशत कया

ामा के अंतगत बा य लीला, कृ ् ण -सुदामा, द ु यंत- शकुंतला, य सेनी, मेघदत ू आ द नाटक अ यिधक चिलत ह.

मो

( Moksha ) , ओ ड़सी नृ ् य का समाि

इसके अित र

अंग है , जसका अथ है आ मक वमु

करण ( Spiritual Liberation ).

ओ ड़सी नृ ् य म आलाप, आवतन, बानी, भाग, भजन, गोट आ द जैसे श द का साधारणतय: योग होता है .

ओ ड़सी नृ ् य के नृ त ् क व नृ ् यांगनाएं , तारकसी कला (Taarkasi ) से लैस आभूषण को धारण करते ह जो क 500 वष से भी अिधक

ाचीन व एक ज टल कला है . आभूषण के अंतगत ट का, माथा प ट , झुमका, हार , बाजूबंद, कनकना, मुकुट आ द शािमल ह. नृ त ् क व नृ ् यांगनाओं के हाथ - पाँव , लाल आलते से रं गे जाते ह.

भारत क लोक य व िनपुण ओ ड़सी नृ ् यांगनाओं म ' अयोना भादड़ ु ' ( Odissi Dancer Ayona Bhaduri ) कसी पहचान क मोहताज नह ं . ओ ड़सी नृ ् य के शा ीय नृ ् य क

म अपनी बेिमसाल

विधवत िश ा नृ ् य ाम , बगलु ) और सु पा सेन

ितभा का लोहा मनवा चुक , अयोना भादड़ ु , ने

( Nrityagram, Bangalore ) से बजैनी सतपथी ( Bijayini Satpathy

( Surupa Sen ) जी के मागदशन म संपूण क .

अयोना ( Odissi Dancer Ayona Bhaduri ) ने भरतनाटयम नृ ् य क साढ़े सात वष तक िश ा ( Architecture ) एवं नृ ् य ( Dance ) के बीच नृ ् य को चुना और ओ ड़सी नृ ् य के

हण क और वा तुकला

म अपनी अ तीय

ितभा व


कड़े प र म

ारा अनेक योगदान दए. नृ ् य ाम म ओ ड़सी नृ ् य क

विधवत िश ा के साथ , अयोना ने अिभनय,

योग , आधुिनक नृ ् य , बैले तकनीक ( Ballet Technique ) , ची- गुंग ( Chi gung ) , िथयेटर ( Theatre ), injury prevention ), ट चस

ित िनवारण (

े िनंग मेथ स ( Teacher's training methods ) आ द मह वपूण वषय क भी जानकार कर .


नृ ् य के विभ न पहलुओं को गहराई से समझने हे तु ओ ड़सी नृ ् यांगना अयोना भादड ु ़ ( Odissi Dancer Ayona Bhaduri ), कोलकाता क लोक य नृ ् यकला वशेष

( कॉ रआ फ़र ) शिमला बसवास ( Kolkata-based leading

choreographer Sharmila Biswas ) के साथ जुड़ ं और उनके इं ट यू

' ओ ड़सी व न एंड मूवमट सटर ' ( Odissi Vision

& Movement Centre ) म जुलाई 2008 से मई 2012 तक बतौर सीिनयर रे परटर डांसर व एडिमिन Repertory dancer and Administrator ) के

प म काय कया . इ ह िमिन

आफ कलचर , भारत सरकार ( Ministry of

Culture, Govt. of India ) ारा 2001- 2003 के दौरान ओ ड़सी म सीिनयर 2010 म इ ह ओ ड़सी नृ ् य के

े टव ( Senior

कॉलरिशप

दान क गई. इसके अित र

म इनक अतुलनीय द ता , िनपुणता व यो यता के चलते नालंदा नृ ् य िनपुण

अवाड ( Nalanda Nritya Nipuna Award ) व 2009 म ओ ड़सी

योित पदवी ( Odissi Jyoti title ) से नवाज़ा गया.

ओ ड़सी नृ ् यांगना अयोना भादड ु ़ ( Odissi Dancer Ayona Bhaduri ) के नृ ् य म , पद संचालन, अिभनय , मु ाएं व ने संचालन का उिचत सामंज य दे खते ह बनता है . यह ओ ड़सी नृ ् य के

म इनक

विधवत िश ा व अनुभव को

वत: ह दशाता है व दशक गढ़ इनके स दरपरक नृ ् य कला के स मोहन म बँधता चला जाता है . ओ ड़सी नृ ् य के येक प

पर कड़ पकड़ रखने वाली अयोना क हर

तुित

भावशाली व भेदकार बन पड़ती है .


ओ ड़सी नृ ् यांगना अयोना भादड ु ़ ( Odissi Dancer Ayona Bhaduri ) का नाम इं डयन काउं िसल फॉर कलचरल रलेशन , भारत सरकार { Indian Council for Cultural Relations (ICCR), Govt of India }और इं डया व ड कलचरल फ़ॉरम World Cultural Forum (IWCF)} क सूची म शािमल है . इसके साथ ह अयोना , एक कुशल व नृ ् य

िश क के

प म नृ ् य ाम , बगलु

{India

ितभासंप न ओ ड़सी

( Nrityagram, Bangalore ) व ओ. वी. एम. सी ( Odissi Vision &

Movement Centre ) , कोलकाता म अपनी सफल भागीदार दे चुक ह. अयोना ने 2011 म SPICMACAY, कोटा ( राज थान ) म नृ ् य क वकशाप का आयोजन भी कया. 2014 म बहार म SPICMACAY वरासत िसर ज़ के िलए नृ ् य ाम व ओ. वी. एम ( Odissi Vision & Movement Centre ) के विभ न डांस फे टवल के िलए एक कुशल हाल ह म सेहर इं डया ( Seher India ) ारा संयो जका के

तुत इं डयन प म अपनी स

आ म व ास, लािल य से प रपूण , भावािभ य का

व णम गौरव कहना अितशयो

ओ ड़सी नृ ् य

ारा

बंधक के

प म इनक भूिमका अ यंत सराहनीय है . इ ह ने अभी लैिसकल डांसेस पर दो दवसीय गो

' ित बंब ' क

य भागीदार दज कराई.

म िनपुण अयोना ( Odissi Dancer Ayona Bhaduri ) को ओ ड़सी नृ ् य

न होगा . 2011 म भारतीय व ा भवन म सूप नखा कथा जैसे ज टल वषय को

दिशत कर , अयोना भादड़ ु ने ढे र दशक के सम

अयोना क नृ ् य शैली दे ख यह कहना कसी भी

कार से अनुपयु

अपने अभूतपूव कौशल का प रचय दया.

न होगा क अयोना भादड़ ु ( Odissi Dancer Ayona

Bhaduri ) ओ ड़सी नृ ् य क एक दे द यमान नृ ् यांगना ह. अयोना भादड ु ़ , इस समय कोलकाता म बतौर कलाकार के

प म स

य ह.

वतं


ओ ड़सी नृ ् यांगना अयोना भादड ु ़

( Odissi Dancer Ayona Bhaduri ) के वल ण

बयां करने म श द शायद कम पड़ जाएं . पता नह ं

ितभा को

व नल स दय ई-ज़ीन के वशेष कॉलम के ज़ रये अयोना

भादड ु ़ को आप सभी पाठक के कतना िनकट ला पाया हँू . अयोना भादड ु ़ के य े

व को व उनक व व ओ ड़सी

म उनके योगदान के बारे म िलखते हए क अयोना भादड ु ़ का नृ ् य के ु ऐसा महसूस हआ ु

नृ ् य के ित समपण

अदभुत है . अपने म खो जाना ह तो , कभी कसी का हो जाना है " ...... ओ ड़सी नृ ् यांगना अयोना भादड ु ़ Odissi Dancer Ayona Bhaduri ) ने नृ ् य कला को अपने

नृ ् य क एक बेहतर न व

व म इस

(

कार समा िलया है और उसम खो के वे

ितभावान पयाय बन गई ह. व नल स दय ई-ज़ीन ट म ( Swapnil Saundarya

ezine Team ) क ओर से

अयोना जी को ढे र सार शुभकामनाएं व आभार .

Website : www.ayonabhaduri.com - ऋषभ शु ला ( Rishabh Shukla ) ( सं थापक - संपादक { Founder-Editor } )


स दय

रोक बाल का झड़ना ::

- अंडे म नींबू का रस िमलाकर िसर पर मसाज करने से बाल क जड़ मज़बूत होती ह. - हर धिनया क प

य को पीसकर जूस िनकाल और िसर पर मसाज कर.

- आंवले के रस म नींबू का रस िमलाकर बाल म लगाने से बाल मज़बूत होते ह और ड फ से भी छु कारा िमलता है . - नीम क प

य को एक घंटे पानी म उबाल और ठं डा होने द. बाल को इसी पानी से धोएं . चाह तो ना रयल तेल म नीम का तेल िमलाकर िसर पर लगा सकते ह.


आभूषण चचा सोना व िनवेश ::

क मती धातुओं क

े णी म 'सोना' सबसे

यात इ वे टमट ( िनवेश ) के

प म जाना जाता है . भारत म शु

सोने का वशेष मह व रहा है . िनवेश के िलहाज से लोग इसे वतमान समय म भी सबसे सुर वक प मानते ह. बाज़ार म िनवेश के अनेक दे ते ह . शेयर , मु ा व

से ह

त और व सनीय

वक प होने के बावजूद लोग आज भी सोने म िनवेश को ह

ाथिमकता

ापट को लेकर िनवेशक के वचार भले ह बदलते रह परं तु सोने म िनवेश को लेकर उनके

वचार म कोई बदलाव नह ं आता , चाहे दाम म जतनी भी अिधक बढो र हो जाए उनका सोने के कायम रहता है . सोने के िस के ( गो ड कॉइन ), इस उ सव या योहार म भी इ ह उपहार के

ित व ास

े णी म एक बेहतर न वक प ह. वशेष अवसर या कसी पव,

प म बाँटने का

चलन है . परं तु इनक खर द करते व त कुछ वशेष बात

पर गौर अव य फरमाएं. सोने के िस के ( कॉइन) या बार ( प ट ) क य द बात क जाए तो यह सोने व अ य धातुओं के िम ण से तैयार कए जाते ह ता क इनम मजबूती आ सके. इनम वधमान सोने क प र कृ ् तता व शु ता को " per mil ," या thousandths ारा

कया जाता है . उदाहरण के िलए, य द एक सोने क िस ली ( ingot ) को 0.999 fine अथात

प र कृ ् त माना गया है तो इसका अथ यह होगा क उसम

999/1000 शु ह.

सोना है व 1/1000 अ य धातुओं के िम ण


कैरे ट वेट , एक पारं प रक

ै कशन बेसड िस टम है जो सोने क प र कृ ् तता का

ोतक है परं तु आधुिनक व ेषण

तकनीक के चलते , सोने क िस ली व बुिलयन को दशमलव ( decimal ) प ित

ारा दशाया जाता है जसके तहत

1.000 फाइननेस अथात प र कृ ् तता, शु कारणवश , इसे िस के या िस ली के

सोने क

ोतक है . हालां क शत ् ितशत शु

सोना अ यिधक लचीला होने के

प म उपयोग म नह ं लाया जा सकता . अत: व

तर पर 0.999 या इससे

अिधक प र कृ ् त सोने को 24 कैरे ट सोने क सं ा द गई है . कैरे ट व फाइननेस ( प र कृ ् तता ) के बीच सह- संबंधता ::  24 karats = .999 fine or above  23 karats = .958 fine  22 karats = .917 fine (the UK gold coin standard)  21 karats = .875 fine  20 karats = .833 fine  18 karats = .750 fine  16 karats = .667 fine  14 karats = .583 fine  10 karats = .417 fine फाइननेस अथात प र कृ ् तता को

ाय: ितशत के

प म प रवितत कर दया जाता है . उदाहरण के िलए य द कसी

सोने के िस के क प र कृ ् तता 0.900 है , तो इसका अथ है क वह 90.0% शु प र कृ ् तता 0.850 है तो इसका अथ है क वह 85.0% शु

सोना है . य द कसी सोने के िस के क सोने से लैस है .


य द कॉइन

े डं ग क बात करे तो

ारं िभक समय म इसके िलए तीन साधारण श द का

फाइन एवं अनसर यूलेटेड . परं तु 19 वीं शता द के अंत व 20 वीं शता द क

योग कया जाता था : गुड,

ारं भ तक एक ठोस कॉइन

े डं ग क

आव यकता हई ु . इसी संदभ म 1987 म नूिमज़मै टक गारं ट कॉपरे शन ( Numismatic Guaranty Corporation ) क

थापना

हई ु . भारत म िनवेशक सोने म िनवेश करने के िलए आभूषण , िग नी, ब कट और गो ड बार जैसे पारं प रक तर क को अपनाते आ ह रहे ह , वह ं आधुिनक तकनीक के इस युग म कई ऐसे िनवेशक भी ह जो सोने म िनवेश करने के िलए गो ड

यूचुअल फंड, गो ड ईट एफ और ई- गो ड जैसे आधुिनक तर क पर भी गौर फरमा रहे ह. िनवेश के ये

विभ न तर के पारं प रक तर क से काफ लाभदायक ह

य क पारं प रक मा यम से कए गए िनवेश को बेचते समय

कई तरह के शु क काटे जाते ह जब क आधुिनक तर के कई इसी संदभ म य द गो ड

यूचुअल फंड क बात कर तो इनके

म िनवेश कर सकते ह. इसका एक फायदा यह है क गो ड इनवे के

कार के लाभ िनवेशक को

ारा, आप सोने के खनन म लगी कंपिनय के यूचुअल फंड के ज रये िनवेशक को िस

मट लान ( िसप ) का वक प िमलता है जसम िनवेशक अपनी

ारा िनवेश को कम या

यादा कया जा सकता है .आप

दान करते ह. टॉ स

मै टक

मता से इसमे िनवेश कर सकता है . िसप

इसके ज रये 500 पए जैसी छोट रकम ् भी इसम लगा

सकते ह. इसके िलए िनवेशक का बक ड मैट खाता होना चा हये .गो ड

यूचुअल फंड उन िनवेशक के िलए िनवेश का

बेहतर ज रया बनता जा रहा है जो बाज़ार म बड़े खेल नह ं खेलना चाहते और हाई - र क से बचना चाहते ह. अ य वक प के

प म दे खा जाए तो गो ड ईट एफ या गो ड ए सचज

े डेड फंड सोने म िनवेश का एक ज रया है .

आप अपने ड मैट एकाउं ट के ज रये 0.5 ाम सोने क खर दार कर सकते ह. यह एक यूिनट फंड है और इसम सोने क शु ता का पूरा आ ासन दया जाता है . गो ड ईट एफ म िनवेश करने का सबसे बड़ा फायदा यह है क आपको सोने के रख - रखाव , बीमा और सुर ा क िचंता नह ं करनी होती है . इसम का एं इसके अित र म इले

ोकरे ज शु क को छोड़कर कसी भी तरह

और ए सट शु क नह ं लगता .

ई- गो ड भी आधुिनक समय म िनवेश का एक बेहतर न वक प है . माँग को दे खते हए ु िनवेशक सोने

ॉिनक

प से भी िनवेश कर सकते ह. इसमे िनवेशक को अपने पेपर गो ड को वा त वक गो ड म त द ल

करने का मौका िमल जाता है . िनवेशक के िलए इसम एक फायदा यह है क सोने क खर द - ब

बड़े ह पारदश

तर के से क जा सकती है . ईट एफ क तुलना म ई- गो ड म चीज़ काफ साफ ह. िनवेशक अपनी मज़ से सोने क खर द व ब

कर सकते ह.यहाँ कोई

अलग- अलग ह. इसके अित र गो ड क

बंधन शु क नह ं है जब क कर के िनयम भी छोट व लंबी अविध के िलए

यहाँ िनवेशक क और से िनणय लेने के िलए कोई थड पाट मौजूद नह ं होती है . ई-

े डं ग तकर बन दन म 14 घंटे क जा सकती है जब क बाज़ार म ईट एफ क

े डं ग सात घंटे से कम ह

होती है . आभूषण , िग नी और गो ड बार जैसे पारं प रक मा यम के साथ - साथ सोने म िनवेश का पेपर फॉरमेट लोग को काफ लुभा रहा है . महं गाई होने के बावजूद िनवेशक इसम िनवेश करके काफ मुनाफा कमा रहे ह. -

व नल शु ला ( Swapnil Shukla ) ( swapniljewels.blogspot.com )


* फ़ैशन, आभूषण व लाइफ टाइल से जुड़ हर छोट से छोट बात व ् विभ न नया िनखार और बन जाइये फ़ैशन पं ड़त

( Fashion Pandit ) , वेलर

टाइल मं

ारा द जए अपने य

व को एक

डजाइनर व फ़ैशन कंसलटट ' व नल शु ला' (

Swapnil Shukla )क नई पु तक ' फ़ैशन पं ़डत ' ( Fashion Pandit ) के साथ. अिधक जानकार के िलए विसट कर :: www.swapnilsaundaryaestore.blogspot.com

The above article has published in one of the leading Nationalised Magazines .......


फ़ैशन

हॉट

हॉट

वेलर

े ज़ लोग के िसर चढ़ बोल रहा है . फंगस पर

टाइिलश लुक दे ती ह.इसक खािसयत यह है क अगर आप डज़ाइन और शेप

याल रख तो ये लगभग हर तरह क पसनेिलट को सूट करती है . तो आइये इस संदभ म जानते ह क कस तरह क

अगर आपक

स ::

डस क य द बात क जाए तो आजकल कॉकटे ल रं ग का

बड़ कलरफुल कॉकटे ल रं ग आपको का थोड़ा सा

वेल र

ान :

फंगस पर कौन से शेप और

फंगस लंबी और पतली ह तो मारक ज शेप के बड़े

टाइल क रं ग सूट करे गी. टोन वाली रं ग अवॉइड कर. इससे आपक

बहत ु पतली लगगी. ऐसी फंगस पर ओवल और पीयर शेप क जगह राउं ड शेप क कॉकटे ल रं स

फंगस

यादा सूट करगी.


अगर आपक

फंगस

यादा पतली ह तो पल और म ट पल

शाट फंगस के िलए मारक ज शेप राउं ड शेप क

टोन वाली

लोरल रं ग सेले ट कर.

टोन वाली रं ग सूटेबल है . इससे फंगस पर लंबे होने का इ यूज़न

रं ग अवॉइड कर. ये आपक

फंगस को छोटा दखाती ह. छोट उं गिलय पर बड़ सी रे ट यूलर डज़ाइन क

नैरो फंगस पर हाट और राउं ड शेप क

एट होगा.

रं ग काफ खूबसूरत लगती है .

रं ग सूट नह ं करती . च ड़े बड जैसी डज़ाइन क

लगगी. िथक बड रं ग पर हॉ रजाइं टल डज़ाइन का एक बड़ा

रं ग से फंगस थोड़ वाइड

टोन भी सूट करता है साथ ह ये आपको

लासी लुक

दे ता है . चौड़ उं गिलय पर छोट या

ल टर

का वाइडर पाट शो ना हो. बड

टोन रं स टाइल क

यादा सूट करती ह. रं ग का डज़ाइन ऐसा हो जसम आपक रं ग पर एक बड़ा सा राउं ड

टोन आपक

फंगस को सूट करे गा .

फंगर


इसके अित र

हॉट

वेलर

डस

के अंतगत खूबसूरत मोती के आकषण को नज़रअंदाज़ नह ं कया जा सकता ह. इन

दन मोती के आभूषण कुछ बदले अंदाज़ म, युवितय को लुभा रहे ह. बड़े मोती के ऊपर मढ़े छोटे मोती काफ अलग व खूबसूरत लगते ह. इ ह जो कर आप अपनी मन पसंद डज़ायन क माला भी तैयार कर सकती ह. ये आपको काफ फसी लुक दे गी. इस माला म कई रं ग के मोती परोने पर आप अपनी विभ न रं ग क पोशाक के साथ इसे पहन सकती ह. वह डबल शेड के आकषण से सजे मोती भी बेहद खूबसूरत लगते ह. बड़ा मोती य द सफेद रं ग का है और उसके ऊपर कसी अ य रं ग के छोटे मोती लगे है तो इससे डबल शेड का आकषण उ प न होगा. विभ न रं ग के मोती को आप इस डबल शेड के आकषण से सजाकर मोती क माला को अपनी खास फ़ैशन ए सेसर ज़ बना सकती ह. विभ न

योहार के म क

पर अलग - अलग ए सेसर ज़ और आउट फट खर दने से बेहतर है क कुछ

खर द और इ ह िम स ् - एंड- मैच करके हर दन

एट कर अपना एक अलग

ड पीस

टाइल . ऐसे म आप अपने नेक के

िलए ल म ट लेयड चेन ज ह एक दन आप बतौर नेक पीस पहन सकती ह और चिनया- चोली के साथ इसे साइड


वे ट बड क तरह भी ये काफ खूबसूरत लगेगा.

चंक डगलस ज ह बतौर डगलस पहन सकती ह, डफरट लुक के िलए इसे मांग ट के के तौर पर और एक दन इसे आप चेन के साथ अटै च करके पडट क तरह भी कैर कर सकती ह. डगलस पहनते व त गले पर है वी

यान रख क इनके साथ

वेलर ना पहन. -

वेलर

व नल शु ला ( Swapnil Shukla )

डज़ाइनर ( Jewellery Designer )

फ़ैशन कंसलटट ( Fashion Consultant ) ( swapnilsaundarya.blogspot.com )


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पकवान : द या क

पाक- कला- वीण ' द या द वा द

त' ( Divya Dixit ) क

किचन से ::

किचन से सीधे लेकर आएं ह हम आपके िलए कुछ चुिनंदा

यंजन जससे हर गृ ह् णी व कामकाजी म हला क हर रोज़ क

राहत . हर दन

किचन संबंधी सम याओं से उ ह िमलेगी

या नया बनाएं, या खाएं और अपन को खलाएं जो हर कसी को रास आए और लोग के दल म

आप छा जाएं और बन जाएं

माट किचन

वीन , इन

के हल व एक से बढ़कर एक लज़ीज़ रे िसपीस के िलए

जुड़े र हये ' द या क

किचन से '.

गोभी पकौड़ा :: साम ी : 1 कट हई ु फूलगोभी 1 कप बेसन आधा ट पून लाल िमच पाउडर 1 कप पानी तमने के िलए रफाइं ड तेल 1 ट पून अमचूर पाउडर नमक

वादानुसार

विध : फूलगोभी को धोकर काट ल. बेसन म आव यकतानुसार पानी िमलाकर गाढ़ा घोल बनाएं. लाल िमच पाउडर , ु नमक और अमचूर िमलाएं. इस घोल म फूलगोभी के टकड़ को डु बोकर रफाइं ड तेल म ड प साथ गरम- गरम सव कर.

ाई कर. हर चटनी के


इं ट रयस दपण से उठाय लाभ , फगशुई के साथ ::

आज के प रवेश म लोग अपने आस - पास के वातावरण को शाँितपूण , आरामदायक , सुगम व आकषक बनाने के िलए हर संभव

यास म लगे रहते ह. इस कड़ म फगशुई क य द बात कर तो यह एक ऐसी व ा है जसके

आवासीय व यवसाियक एक खुशहाल व सुचा

थान के वातावरण म सह सामंज य

था पत कर य

सकारा मक ऊजा को आमं त कर

जीवनशैली को अपना सकता है . फगशुई का ता पय है जल व वायु . यह चीन क एक

कला व व ान है जो हमारे आस- पास के वातावरण म व मान ऊजाओं के बीच सह संतुलन बेहतर न यु

ाचीन

था पत कर एक

थान क रचना करने म सहायक होती है .

आज भवन िनमाण म लोग फगशुई को अपनाकर अनेक चम कार वा तुदोष िमटाने के िलए

ारा

भाव से लाभा वत हो रहे ह. फगशुई के अंतगत

कए जाने वाले उपाय बेहद सरल व सुगम होते ह. आइये इस संदभ म जानते ह

फगशुई के अंतगत ' दपण ' क उपयोिगता व कस

कार दपण के

ारा हम हमारे आस- पास के वातावरण को

सकारा मक ऊजाओं से प रपूण कर सकते ह. फगशुई के अंतगत दपण का अथ वे सम त चमक ली व तुएं ह जनम हम

ित ब ब दे ख सक, जैसे शीशा, ेनाइट प थर आ द. दपण के सह तर के क उपयोग

ारा शुभ ऊजाओं के

वाह


को बढाया जा सकता है . तो आइये जानते ह दपण के कुछ समृ ् * भवन के ईशान

अथात उ र- पूव दशा म य द दपण

कारक

था पत करा जाए तो आय वृ ्

* य द शो- म या दकान क छत पर दपण लगा रहे ह तो इस बात का वशेष ु े * भवन म द

ण -प

म अथा

नेऋ य , द

योग के बारे म :म लाभ होता है .

यान रख क छत के ईशान व म य

पर दपण न लगाएं.

ण - पूव ( आ नेय ) व उ र- प

म ( वाय य ) दशा म दपण कदा प

न लगाएं. य द इन दशाओं म दपण लगे ह और हटाना संभंव न हो तो इ ह ढक कर रख. * फगशुई के अनुसार किचन म काम करने वाले य नह ं होनी चा हये . य द ऐसा संभव न हो तो

टोव

को किचन म आने जाने वाले लोग को दे खने म कोई अ चन के पास दपण लगवाएं ता क उससे दरवाज़ा दखाई दे ता रहे व

आने - जाने वाले लोग क जानकार िमलती रहे . *दपण को भोजन क

म ऐसे

थान पर लगाएं जहाँ भोजन करते समय सुख- समृ ्

*शयनक

व थ जीवन के िलए अचूक उपाय है .

म बेड के पायताने के स मुख दपण न लगाएं वयं का

ित बंब दे खकर

*शयन क

ित बंब दखाई दे ता रहे . यह प रवार क

य क रात म नींद से अचानक आँ ह खुलने पर य िमत या च क सकता है .

म गोल दपण को

थान द.

*दपण को सदै व साफ- सुथरा रख अ यथा नकारा मक प रणाम *भवन के मु य

वेश ार के सामने

साधन क

् गोचर हो सकते ह.

नह ं होना चा हये. य द ऐसा हो तो

साधन क

के दरवाज़े पर एक

दपण लगाएं और उस दरवाजे को सदै व बंद रख. *कमरे म य द कोई लटकती हई ु बीम है तो उसके नीचे कसी भी

कार का फन चर न हो पर य द ऐसी

फन चर हटा पाना संभव न हो तो बीम के नीचे दपण लगा के दोष के नकारा मक

थित म

भाव को ख म कया जा सकता

है . *कमरे के फन चर कभी भी इस

कार यव थत न कर क उनके पीछे खड़क या दरवाज़ा हो . य द ऐसा संभव न

हो तो उस फन चर के सामने वाली द वार पर दपण लगाएं ता क दपण क सहायता से फन चर पर बैठा य

उसके

पीछे दरवाज़े से आने- जाने वाले को आसानी से दे ख सक. - ऋषभ शु ल ( Rishabh Shukla )

इं ट रयर डज़ाइनर ( Interior Designer ) वा तु एवं फग शुई कंसलटट ( Vastu & Feng shui Consultant )


अगर आप उन लोग म से एक ह , जो अपने आस - पास, स दयपरक , सुगम व सु यव थत वातावरण क संरचना करना चाहते ह और अपने आिशयाने को बनाना वाहते ह अपने सपन का घर , तो यक न मािनये ' सु ीम होम थेर प ' केवल आप के िलए ह िलखी गई है .होम डे कॉर , कला मक व तुओं क म पु तक

ीन इं ट रयर ़डज़ाइन , डे कोरे टं ग म

ा आ द तमाम म

या कर और

या न कर, वा तु एवं फग शुई,

वपूण जानका रय से लैस है , डज़ाइनर व पटर ' ऋषभ शु ला' ारा िल खत

' सु ीम होम थेर प ', जो आपके मकान को बना दे गी आपके सपन का घर . पु तक : सु ीम होम थेर प लेखक :ऋषभ शु ला वधा : नॉन- फ शन भाषा : अं ेज़ी वषय : होम डे कॉर काशक : व नल स दय प लकेश स विसट कर : www.riatheestudio.blogspot.com


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नानी माँ क बात :

एिस डट व गैस क सम या से पाइये छुटकारा :: - सुबह दो केले खाकर एक कप दघ ू पीने से कुछ ह

दन म एिस डट से आराम िमलता है .

- चोकर स हत आटे क रोट खाने से भी फायदा होता है . - खाना खाने के बाद दध ू के साथ दो बड़े च मच ईसबगोल लेने से एिस डट म लाभ होता है . - दन म दो- तीन बार अदरक के रस म पुद ने का रस बराबर मा ा म िमलाकर पीने से लाभ िमलता है . - अदरक का रस और शहद भी बराबर मा ा म लेने से गैस म लाभ िमलता है .

- सुमन

पाठ ( Suman Tripathi )


सा ह य अपूवा :: 03

खुदा

का साथ हम कुछ इस कदर िमला

क हर ल हा हम क मत पर फ

होने लगा

रह - रह कर हम खुद पर गुमां होने लगा या कभी ज़ंदगी इस कदर मु कुराती है फूल ह फूल राह पे बछाती है यूं लग रहा है आँचल म मोितय क बरसात हो रह है तेरा साथ िमल गया खुदा िमल गया हमने क पना भी न क थी मोह बत ऐसी होती है मानो जैसे जहाँ िमल गया डर तो है खुद से , पर भी तेरे यार से कह दे ते खुद खुदा आप से क जब आपका हमको साथ है िमला तो जीबन भँवर से पार लगाय हमको खुदा. - व नल शु ला ( Swapnil Shukla ) www.swapnilsworldofwords.blogspot.com


अधूरा यार ........

एक रोज़ उनसे मुलाकात कुछ ऐसी हई ु , ना सोच सकते थे वो बात कुछ ऐसी हई ु . दल ने धीरे धीरे उसे अपना कहा , पर कह ना सके हाल-ए- दल उसे कुछ ऐसा हआ ु . नज़र के सामने वो आती तो ज़ुबान बंद हो जाती, नज़र से दरू जाती तो हाल-ए- दल कहना चाहते थे, रह गए इसी मश कत म क कह दगे एक दन, मगर वो

ठ न जाए इसी क मकश ने,

मेर चाहत को इजाज़त न द ...........


* अपने दल क बात को जुबां पे लाने म समय यथ नह ं करना चा हये वरना आप उन अपन को हमेशा के िलए खो सकते है , जो शायद िसफ आप के िलए बने ह. * - कुमार

एम. बी. ए. ड ी हो डर '

तीक ' ( Pratik ) क

रहती है . फर भी इस भाग- दौड़ भर

तीक ( Kumar Pratik )

ज़ंदगी अिधकतर कॉपरट (Corporate ) जगत के इद- िगद ह घूम ती

ज़ंदगी म भी उ ह ने अपने ले खन के शौक़ को पं ख दए ह. इनक रचनाएं ज़ंदगी

क स यता, त हाई व

ृ ंगार रस पर के

त ह.


डायर मेरे हमराज़ ::


य डायर , आज म, मोनाली , अपनी ज़ंदगी से बेहद खुश हँू . लोग मुझे सौभा यशाली कहते ह, भा यशाली कहते ह. और मेरे जैसे जीवन क कामना करते ह. खूबसूरत हँू , पित मेरे इशार पे नाचता है , मेरा मुँह दे ख- दे ख कर जीता है और एक ब ची क माँ हँू . मेरे ससुराल वाल क म सबसे

य हँू . सीधे श द म कहा जाए तो मेर

ज़ंदगी परफे ट है . पर मेर

ज़ंदगी

के हालात हमेशा से ऐसे नह ं थे . मेर शानदार ज़ंदगी के अतीत के प न म घनघोर अंधेरा है , अनेक राज़ ह. मने अपने अतीत म बहत ु से बुरे काय कए . आज मेरे पास सब कुछ है पर मुझे मेरे ह कृ ् य बुरे रा

को काले नाग के

व न के

प म हर

प म डसते ह. म रात म सो नह ं पाती और ये ऐसी बात ह जो म कसी को बता नह ं सकती

. इसिलए आज अपने दल के बोझ को िल खत

प से तु हारे साथ बाँट रह हँू . िन: संदेह तुम एक िनज व व तु हो

पर फर भी अपने गुनाह को एक बार कसी के सामने ' ए मट ' कर शायद खुद क घुटन को कुछ हद तक कम कर सकूँ. म जैसी आज हँू वैसी 10 वष पूव न थी . माँसल थी , सीधे श द म कहँू तो मोट थी .मेर शाद शेखर से हई ु .शेखर एक खूबसूरत युवक था फर भी मुझ जैसी लड़क से ववाह करने को कैसे तैयार हो गया , मुझे नह ं पता. पर ववाह के बाद शेखर ने मुझे प ी के

प म कभी न

वीकारा . शेखर के दसर युवितय के साथ संबंध थे. वो हर व त मुझे ू

दतकारता रहता था. उसका कहना था क म, उसके जीवन का काला सच हँू . म दन पर दन तनाव ु

त होती गई.

म, आईने म खुद को दे ख पीटती , अपने नाखून से खुद को नोचती . शेखर को मेर इस हालत पर सहानुभूित तो दरू तरस तक न आता. मेरे सास- ससुर सब कुछ जानते हए ु भी अंजान बने रहते . समय बीतता गया .. घर पर एक उ सव के दौरान मेर मुलाकात शेखर के दो त मो हत से हई ु . अपने नाम क ह भाँित मो हत का य क कोई भी

ी उसक ओर आक षत होती चली जाए. मो हत के

व इतना आकषक था

प म मुझे एक अ छा दो त िमल गया था. धीरे -

धीरे हमार मुलाकात का िसलिसला बढ़ने लगा . मो हत पेशे से फटनेस

े नर था. उसने मुझे यायाम और उिचत

आहार के बारे म बताया . उसक बातचीत म इतना आकषण था क म , उसक कह हर बात मानती. मुझे उसके म एक स चा दो त िमल गया था . मो हत ने भी एक अ छे दो त के सारे दािय व िनभाए. मा

6 मह ने म मेरे

प प

- यौवन म चम कार बदलाव आया. हर कोई मेरे रं ग- प क तर फ़ करता न थकता. अब म पूण तया बदल गई थी. अब शेखर क तरह कोई भी मेरे मोटापे को लेकर मेरा मज़ाक न उड़ा पाता था. म अपनी नई ज़ंदगी से बेहद खुश थी. और मो हत को दल ह

दल चाहने लगी थी और एक दन म अपनी भावनाओं पर िनयं ण न रख सक और वो कर

बैठ जो समाज क नज़र म पाप है . म मो हत के ब चे क माँ बनने वाली थी .मने घबराकर जब ये बात मो हत को बताई तो अचानक उसके रवैये म बदलाव आ गया . उसने न जाने मुझे का दबाव बनाया . उसने मुझे वै या तक क सं ा

या- या कहा और मेरे ऊपर ब चा िगराने

दे डाली. म अपनी ह परे शािनय से जूझ रह थी क एक दन

अचानक मने अपने पित शेखर के मोबाइल पर एक एम.एम. एस दे खा. वह एम.एम.एस दे ख मेरे हाथ- पाँव फूल गए. शेखर , एक पु ष के साथ ............. ये सब करते हए ु दे खा तो वह अचानक मेरे सम

या था ? शेखर समिलंगी था . जब शेखर ने मुझे वो एम.एम.एस चेक िगड़िगड़ाने लगा . म घुट रह थी .... मुझे समझ न आ रहा था क

या

शेखर ने मुझसे िसफ इसिलए शाद क थी ता क म उसक इस असिलयत पर पदा डाल सकूँ . और फर य द वो ऐसा है तो मुझे उसने सदै व

य दतकारा .. मेरा आ मबल ु

य तोड़ कर रख दया . म हर व त उसे खुश करने क

कोिशश करती रह पर बदले म मुझे उसक िसफ और िसर दतकार ह िमली. ु


शेखर मेरे सामने िगड़िगड़ा रहा था क म उसके राज़ को राज़ ह रखूँ. तभी मेरे भीतर क

ी का मने गला घ ट दया

. मने शेखर को उसक कमी को लेकर बहत ु ज़लील कया. उसे अपनी गभाव था के बारे म नह ं बताया ब क उस पर लाँछन लगाया क वो तो कभी पता भी नह ं बन सकता . मने उसको अपश द कहे , उसके अ त व पर ह

िच ह

लगा दया .शेखर हाथ जोड़ कर मेरे सामने रोता रहा , िगड़िगड़ाता रहा और म कमरे के बाहर चली गई. दो दन होटल म

कने के बाद म शेखर के पास गई और उससे कहा क म उसके राज़ को राज़ रखूँगी , बस उसे मेरा हर कहा

मानना होगा . शेखर ने मेर सार शत मान लीं. पर फर भी म अपमान क अ न म जल रह थी. मने शेखर को खाने म फैट चीज़ दे नी शु

क ..उसे दन रात चॉकले स खलाती ,

ट फूड खलाती और हर पल शेखर को मानिसक

ता ड़त करने का एक भी मौका न छोड़ती . मेर खूबसूरती दन - दन बढ़ती जा रह थी और शेखर का वज़न , उसके खान -पान व तनाव के कारण बढ़ता जा रहा था दे खते ह दे खते शेखर क खूबसूरती , बदसूरती म त द ल हो गई. इतनी मानिसक

ताड़ना वह बदा त न कर पाया . शेखर अब अपना रं ग - प खो चुका था . लोग मेर खूबसूरती क

तार फ करते और शेखर से कहते क वो क मत वाला है जो उसे इतनी सुंदर बीवी िमली वरना ............... . शेखर दन पर दन घुटा जा रहा था . पर एक दन अचानक मेर वो बार- बार मुझसे

ेगनसी रपोट शेखर के हाथ लग गई. शेखर आग बबूला हो गया और मुझपे चीखने लगा.

कर रहा था क ये ब चा कसका है ? पल भर के िलए तो म सकपका सी गई पर फर मने

खुद को संभालते हए ु शेखर को एक तमाचा मारा और उससे कहा क जब पित ह ऐसा है तो दन बाद लोग मुझसे

या करती म? कुछ

करते तो कहाँ से ब चा पैदा करती म? या तुम हो बाप बनने लायक ? फर तु हारा राज़

दिनया के सामने आ जाता .. तब ु

या करते तुम ?मुझे कोई फक नह ं पड़ता . तुम चाहो तो मुझे तलाक दे सकते हो ,

मेरे चाहने वाल क कमी नह ं पर फर तु हारा

या होगा , इस पर गौर ज र फरमाना. " शेखर ये सब सुन

त ध रह

गया .. वह सीधे मेरे घुटने पकड़कर मुझसे दया क भीख माँगने लगा . तब मने शेखर से कहा, " डािलग आ खर ये सब म तु हारे िलए ह तो कर रह ं हँू .. आ खर म ह तो हँू तु हार हमराज़ . " धीरे - धीरे सब कुछ ठ क हो रहा था . अचानक मो हत ने दे खा क मेर

ज़ंदगी मे पुन: वापस आ गया . जब मो हत

ेगनसी को लेकर घर पर कोई हं गामा नह ं हआ तो अचानक मो हत मुझे लैक - मेल करने लगा . ु

वो िनरं तर मुझे धमक दे रहा था बेवकूफ को

हण क तरह मेर

क वो मेरे और उसके काले सच के बारे म शेखर को सब कुछ बता दे गा. अब उस

या मालूम था क शेखर को मने इस लायक ह न छोड़ा था क वो मेरे खलाफ अब कुछ कर भी पाए .

पर मो हत मेरे िलए गले का काँटा बन गया था . अत: मने एक बड़ा कदम उठाना बेहतर समझा. म य रा

के समय

म मो हत के पास गई. उसको अपनी मीठ - मीठ बात से बहलाया . उसके सामने िगड़िगड़ाई , उसके पैर तक िगर गई. मो हत मेर इस हालत पर बराबर हँ स रहा था . आ खरकार उस बेचारे का दल पसीज ह गया और उसने मुझसे दस लाख क माँग क और कहा क वो हमेशा हमेशा के िलए मेर उसक ये

ज़ंदगी से चला जाएगा . मने उससे कहा क

वा हश ज र पूर क ँ गी. म उसके गले लग गई. हमने साथ म डनर कया और फर कॉफ पी . कॉफ के

ज रये मने मॉर फया के ओवरडोज़ को मो हत के शर र म उतार दया , जससे उसक मौत हो गई. म य रा

का

समय था और मेरा और मो हत का र ता दिनया क नज़र म िसफ जम ( यायामशाला ) तक ह सीिमत था . अत: ु मेरा उसके क ल म कह ं से भी लेना - दे ना सा बत न हो सका .


9 माह बाद मने एक पर सी सुंदर ब ची को ज म दया जसका नाम मने अंजिल रखा. शेखर को आज दन तक नह ं मालूम पड़ पाया है क जस ब ची को मने ज म दया उसका असली बाप कौन था. ई र ने मेर गोद म जब अंजिल को डाला तब उसका चेहरा दे ख मेर आँख से आंसू िनकल पड़े . मने अपनी ब ची क श ल दे ख खुद से ये

ण िलया

क म अपनी ब ची, अपनी अंजिल को कभी भी अपनी तरह नह ं बनाऊँगी . म उसे अपने जैसा कभी भी बनने न दँ ग ू ी. ये थी मेरे पाप क काली कहानी ... म नह ं चाहती क मेर बेट अंजिल को उसक माँ के अतीत के िघनौने कृ ् य के बारे म पता चले . अत: हे ई र ! हे डायर ! मेरा साथ दे ना और मेरे हर राज़ को राज़ ह रहने दे ना . तु हार , कम से ब सूरत

मोनाली

- शािलनी अव थी

अं ेज़ी सा ह य म परा नातक

( Shalini Awasthi )

ीमती शािलनी अव थी ( Shalini Awasthi ) जंदगी क कठोर व कड़वी स चाईय को

सा ह य के रं ग म रं गना बखूब ी जानती ह.

ी वमश ,

ह नह ं अ पतु हमार आ मा तक को हला कर रख द. करने वाली कहािनयाँ अब

ी सं घष को उजागर करती ऐसी कहािनयाँ जो हमारे म त क को ीमती शािलनी अव थी के

ारा रिचत

व नल स दय ई-ज़ीन का िनरं त र ह सा ह गी.

दल म कचोटन पै दा


व वध : सद क महानाियका को

ृ ांजिल :

ु ु " टकड़े - टकड़े दन बीता , ध जी - ध जी रात िमली, जसका जतना आँचल था, उतनी ह सौगात िमली ." इन कुछ पं

य से लेखक के भीतर िछपे दद का हर कोई अहसास कर सकता है . ये पं

याँ ह िसने जगत क

मशहर ू अदाकारा 'मीना कुमार ' क . 'मीना कुमार ' जो अपने बेहतर न अिभनय के िलए आज भी जानी जाती ह. मीना कुमार को उनके बेहतर न अिभनय कारण ' े जड

मता के कारण व नार के दद व घुटन को पद पर सश

वीन ' के नाम से संबोिधत कया जाता है . दभा ु यवश 31 माच 1972 को मीना कुमार हमारे बीच नह ं रह ं पर उनक याद आज भी िसने जगत के

आज हम

प से उतारने के

ेिमय व उनके

शंसक के दल म कायम ह.

ृ ांजिल दे रह ह उस नामचीन अिभने ी को जसने बॉलीवुड इं

मीना कुमार क

म एक अलग पहचान कायम क .

गत ज़ंदगी कई उतार - चढ़ाव से िघर रह . अपने पित से तलाक के बाद मीना कुमार खुद को संभाल न पायीं, उस दद को उ ह ने अपनी कुछ क वताओं म उतारा.

मीना कुमार का ज म 1 अग त 1932 को मुंबई म एक गर ब प रवार म हआ . उनके ज म का नाम बेगम मेहज़बीन ु बानो था. उनके पता अली ब श पेशे से

यूजीिशयन थे. मीना कुमार क पहले फ म थी ' लेदरफेस' जो 1939 म

आई. इस फ म म मीना कुमार बाल कलाकार के तरह

प म उभर ं हालां क मीना कुमार बचपन म अ य ब च क ह

कूल जाना चाहती थीं पर पता के दबाव व गर बी के चलते उ ह ने अपना डे यू इसी फ म से कया. 1940 से


मीना कुमार ह अकेले दम अपने प रवार का पालन पोषण करने लगीं. बचपन से ह मीना कुमार का जीवन अित संघषमय रहा पर फर भी अपार जगत म बेहतर न अिभने ी के

मताओं व गुण के कारण वे फ म

प म उभर .ं 1953 म फ म ' बैजू बावरा' के िलए मीना कुमार को फ म फेयर बे ट अिभने ी का अवाड िमला.

1962 म मीना कुमार ने उनक अवाडस म

फ म 'आरती', 'म चुप रहँू गी' और 'सा हब , बीवी और गुलाम' के िलए फ म फेयर

अिभने ी के िलए 3 नॉिमनेशन पाकर इितहास रचा. हालां क उ ह अवाड फ म सा हब, बीवी और

गुलाम के िलए िमला जसम उ ह ने छोट बहु का करदार बखूबी िनभाया, जसे

ट स ने भारतीय िसनेमा क

सबसे बेहतर न परफामस माना. उस फ म म छोट बहु के करदार को मीना कुमार ने ऐसे िनभाया क फ म म जब वो अपने पित के िलए साज

ृ ं गार करतीं तो िथयेटर म उप थत प लक भी उस

जब पित क बेवफाई के कारण छोट बहु के करदार का घुटन भरा

ृ ं गार रस म डू ब जाती और

प प लक के सामने आता तो लोग क आँख म

आँसू का सागर भर जाता. पर इस फ म क अपार सफलता के बाद मीना कुमार अपने तनावपूण य

गत जीवन

क वजह से ड ेशन का िशकार हो ग . शायद ज़ंदगी क क मकश व घुटन के चलते वो शराब क आद हो ग 1968 तक उनका

वा

और

िगरता चला गया. उनके तनाव का मु य कारण उनके पित कमाल अमरोह से तलाक था

जो क 1964 म हआ था. 1952 म मीना कुमार , कमाल अमरोह , जो क पेशे से फ म डायरे टर थे, उनसे ु

ेम

करने लगीं थी और फर शाद कर ली . कमाल अमरोह मीना कुमार से 15 साल उ

म बड़े थे और शाद शुदा भी थे. पर स चे यार के आगे कुछ समझ

नह ं आता . मीना कुमार ने कमाल अमरोह से शाद कर ली . वे कमाल से असीम

ेम करती थीं. कमाल अमरोह के

िलए उ ह ने िलखा: " दल सा जब साथी पाया,

बैचेनी भी वो साथ ले आया ." पर तलाक के बाद मीना कुमार इस तनाव से उबर नह ं पायी और कमाल के िलए अपनी भावनाओं व दख ु को उ ह ने कुछ इन श द म बयां कया :" तुम

या करोगे सुनकर मुझसे मेर कहानी,

बेलु फ ज़ंदगी के क से ह फ के- फ के." हालां क बाद म 'पाक ज़ा' फ म हो क कमाल अमरोह भर

ारा िनदिशत थी , उसम मीना कुमार ने तवायफ क घुटन

ज़ंदगी को पद पर दशाया. पाक ज़ा को बनने म 14 वष लगे. पाक ज़ा के रलीस के 3 ह ते बाद मीना कुमार क हालत तेजी से बगड़ने लगी और लीवर क

बेहद दभा ु य क बात है क अपनी कुशल व सश

बमार के चलते उ ह ने 31 माच 1972 को दम तोड़ दया . अिभनय

मता का परचम लहराने वाली बेहद खूबसूरत और

नामचीन अिभने ी के पास मृ ् यु के समय अ पताल का बल भरने के िलए भी पैसे नह ं थे. पाक ़ज़ा सुपर हट सा बत


हई ु . पर पाक ज़ा के च र

को जीवंत करने वाली मीना कुमार हमीरे बीच न थीं.

अिभनय के अलावा मीना कुमार एक शानदार क वय ी भी थीं. उ ह ने ' आई राइट आई रसाइट ' के नाम से अपनी क वताओं क एक ड क भी तैयार कराई थी. मीना कुमार क क वताओं पर अगर गौर कर तो उनक

ज़ंदगी के

तनाव क गहराइय का अंदाज़ा लगाया जा सकता है . जैसे ' त हाई ' पर आधा रत इस क वता पर नज़र डाल :" चाँद त हा है , आसमाँ त हा,

दल िमला है कहाँ- कहाँ त हा. बुझ गई आस , छुप गया तारा, थरथराता रहा धुआँ त हा. ज़ंदगी

या इसी को कहते ह,

ज म त हा है और जाँ त हा. हम सफर कोई गर िमले भी कह ं, दोन चलते रह त हा - त हा. जलती बुझती सी रोशनी के तरे , िसमटा - िसमटा सा एक मकान त हा, राह दे खा करे गा स दय तक, छोड़ जाएंगे ये जहाँ त हा. " सच, मीना कुमार क अिभनय

मताओं क ह तरह उनक क वताओं म भी गहराई, ज़ंदगी क स चाई , ज़ंदगी के

दद व घुटन का कोई भी अहसास कर सकता है . आइये , उस अतु य अिभनय क वय ी को हम याद करते ह व

मताओं क धनी अिभने ी व

ृ ांजिल अ पत करते ह. भले ह मीना कुमार हमारे बीच नह ं पर उनक याद हर

एक के दल म ज़ंदा ह. आज भी उनके हनर का कायल पूरा बॉलीवुड है . जीवन के तमाम संघष के बाद भी सफलता ु के सव च िशखर पर अपना परचम लहराने व कायम रखने वाली उस अिभने ी को हमारा सलाम !

ु ु " टकड़े - टकड़े दन बीता , ध जी - ध जी रात िमली. जसका जतना आँचल था, उतनी ह सौगात िमली.


जब चाहा दल को समझे, हँ सने क आवाज़ सुनी, जैसे कोई कहता हो, ले फर तुझको मात िमली. माते कैसी , घात

या,

चले रहना आज कहे , दल सा साथी जब पाया, बेचैनी भी साथ िमली. "

- ऋषभ शु ला ( Rishabh Shukla ) The above article has published in one of the leading Nationalised Magazines .......


सुर ..... लय ..... ताल गायन , वादन

तथा

नृ ् य

कला ::

भारतीय संगीत म गायन , वादन तथा नृ ् य के साथ ताल संबंधी वा . उपल ध

ाचीन संगीत के इितहास म हम ताल संबंधी वा

अनेक ताल वा

का

का

योग न जाने कब से होता चला आ रहा है

योग कह -ं कह ं िमलता है . पौरा णक कथाओं म

क चचा क गई है . ाचीन काल के जन ताल संबंधी वा

का उ लेख िमलता है , उनम आघाती,

आद बर , वान पित, भेर , ददर ु ु , ढोल, नगाड़ा तथा मृ द् ं ग या पखावज आ द मु य ह. पखावज का कभी कभी दे खने को िमलता है और ढोलक का आधुिनक युग के ताल संबंधी वा अनेक मत ह . कुछ के अनुसार ज म का संबंध फारस के वा

म सबसे

मुख

योग तो आज भी

योग उ र भारत के लोक गीत के साथ खूब कया जाता है . थान तबले को

ाचीन काल के ददर ु ु नामक वा

है . इसक उ प

का आधुिनक

के वषय म व ान म

प तबला है . कुछ लोग तबले के

त ल से जोड़ते ह . कुछ लोग का कहना है क पखावज को बीच से काटकर तबले को

ज म दया गया . बहत दन तक बादशाह अलाउ न खलजी के काल के अमीर खुसरो को तबला के ज मदाता का ु ेय

होता रहा है . परं तु बाद म खोज के बाद यह त य गलत मालूम हआ ु . डा. अ ण कुमार सेन के अनुसार

मुह मद शाह { दसरे } के समय सन 1734 म रहमान खाँ नामक एक ू खुसरो था . इस अमीर खुसर ने सदारं ग से कुछ दन तक उपयु के पु

तबला नामक वा

िस

पखावजी थे , उनके पु

का नाम अमीर

याल गायन सीखा और उस गायन शैली क संगित के

को ज म दया . एक व ान का मत है क मुह मद शाह रं गीले के समय म िनरमोल खाँ

िनयामत खाँ एक अ छे संगीतज़ थे , उनका उपनाम सदारं ग था और इनके एक छोटे भाई का नाम खुसरो खाँ

था . इ ह ं खुसरो खाँ ने तबले का आ व कार कया . मुह मद शाह रं गीले का रा यकाल सन 1719 से 1748 ई. के


आस- पास का था , अत: तबले का ज म भी इसी काल म मानते ह.

तबले का ज म कसी भी को आधुिनक

प दे ने का

कार हआ हो , कंतु इतना तो उपल ध इितहास के अनुसार िन ु े य द ली के

िस

िस

उसके वादन

उ ताद िस ार खाँ अथवा िसधार खाँ को है , ज ह ने पखावज के

बोल को तबले पर बजाने के यो य बनाया तथा उसके कया और द ली के

त है क

प म सुधार लाकर आधुिनक तबले का

प दे कर इसका

चार

घराने ' द ली घराने ' क नींव डाली . उ ह ं क वंश-परं परा तथा िश य- परं परा ने भारत म तबले का

चार कया और वतमान घरान क नींव डाली .

कहा जाता है क संगीत धम , अथ , काम और मो

ाि

इितहास है , जसम मनव का संपूण

का अ तीय साधन है . संगीत का इितहास एक ऐसा प

ित ब बत होता है .

- ऋषभ शु ला

( Rishabh Shukla )

{ The Writer has attained musical degree ' Sangeet Prabhakar ' in Indian Classical Percussion Instrument ' Tabla' from Prayag Sangeet Samiti , Allahabad in First Class First division. }


आपके प आपके प

* व नल स दय क नव पेशकश

..... आपका नज़ रया :

'लाव या ' अ यंत पसंद आई . शा ीय संगीत व नृ ् य के

म िनपुण व

नृ ् यांगनाओं

से हमे प रिचत कराने के िलए आपक ट म को बहत ु - बहत ु बधाई. लाव य श द क ह भाँित आपक प का भी सह मायन म है

- लाव या .

शुभकामनाओं स हत, - मो हत झा, वाराणसी * व नल स दय ई- ज़ीन के गत अंक म मुझे आपक प का

कािशत इविनंग गाउन व वा तु शा

के बारे म रोचक जानका रयाँ हािसल हई ु जो

ारा ह हािसल हु . अ यंत उ च तर य लेख व प का क बेिमसाल

वािल ट के िलए संपादक मं ल को

अनेक बधाईयाँ . - िमथुन भटनागर , मथुर ा * प का ने दे खते ह दे खते अपने तीसरे चरण म कदम रख िलया और अब इसके साथ विभ न पाठक व लेखक भी जुड़ गए. इतने कम समय म प का ने अपने उ च

तर के कारण अपनी एक विश

छाप छोड़ है . प का क साज स जा, कवर , लेख

और बेिमसाल भाव से लैस व बेहद संजीदा िच कार , प का क आ मा ह. - डॉ काँ त ा

साद, द ली

* व नल स दय ई- प का के एक - एक अंक को

कािशत करने से पूव उसके

िलए जो मेहनत क जाती है वो अतु नीय है . व नल स दय एक

येक लेख क

विश ता को कायम रखने के

व न लोक क भाँित है पर वा त वकता क जड़ से जुड़

हई ु है . यह प का क मौिलकता है . बधाई व शुभकामनाएं. - नफ सा खान, अलीगढ़ * एक बेहतर न लाइफ टाइल व सामा जक प का जो भारतीय स दय, सं कृ ् ित व अनमोल वरासत को सहे जने व उसे जन- जन तक बेहद रोचक व स दयपरक तर के से पेश करने म स म है . इसम श द म या या इस - मनीषा

पाठ , कोटा

कार क ँ गी : A PRICELESS EZINE

कािशत सभी िच ण व लेख अनमोल ह. प का क तीन


य पाठक ! आपक ओर से िनरं तर

तरफ से आप सभी को आपक

हो रह सकारा मक

ित

याओं के िलए ' व नल स दय ई ज़ीन' क पूर ट म क

दय से आभार . अपने आशीवाद, ेम व ्

ो साहन क वषा हम पर सदै व करते रह .

ट प णय , सलाह एवं मागदशन का हम बेस ी से इतंज़ार रहता है . प का के िलए आपके लेख, रचनाय

आ द सादर आमं त ह. कृ ् या अपने प

के साथ अपना पूरा नाम ,पता, फोन नंo व पासपोट साइज़ फोटो अव य संल न कर.

ई- मेल : swapnilsaundarya@gmail.com shuklarishabh52@gmail.com व नल स दय ई- ज़ीन म रचनाय भेजने व व नल स दय ई- ज़ीन ( ई- प का ) म रचना - रचना साफ - सुथर हो व

कािशत कराने हे तु िनयम :

े षत करते समय कृ ् या िन न बात का

यान रख -

Word Text Format अथवा Rich Text Format पे िलखी गई हो .

- भेजी गई रचना मौिलक , अ कािशत व अ सा रत होनी चा हये. कसी भी प - प का से चुराई गई रचना कृ ् या न भेज. य द रचना चुराई गई है , और यह सा बत हो गया तो उ

पर कोट म कारवाई क जाएगी.

- रचना के साथ आपका पूरा नाम, पता, पनकोड व पासपोट साइज़ फोटो अव य भेज. - रचना पर शीषक के ऊपर मौिलकता के संबंध म साफ - साफ िलख अ यथा रचना पर वचार नह ं कया जाएगा. - रचना िसंपल फांट ( Font ) म िलखी गई हो . - रचना भेजते समय अपने बारे म सं

योरा ज र द . य द

िलए रचना भेज रहे ह तो उस -

येक

व नल स दय ई-ज़ीन के कसी

थायी

तंभ के

तंभ का शीषक िलखना न भूल .

वीकृ ् त रचना का कॉपीराइट ( सवािधकार ) प का के कॉपीराइट धारक का है और कोई

कािशत रचना कॉपीराइट धारक से पूविल खत अनुम ित िलए बना अ य

अनु दत , कािशत या

वीकृ ् त / सा रत नह ं

होनी चा हये.

- व नल स दय ई-ज़ीन ट म

( Swapnil Saundarya ezine Team )


copyrightŠ2013-Present .Rishabh Shukla.All rights reserved No part of this publication may be reproduced , stored in a retrieval system or transmitted , in any form or by any means, electronic, mechanical, photocopying, recording or otherwise, without the prior permission of the copyright owner. Copyright infringement is never intended, if I published some of your work, and you feel I didn't credited properly, or you want me to remove it, please let me know and I'll do it immediately.

Swapnil Saundarya ezine Volume -03, Issue- 03, 2015  
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