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SWAPNIL SAUNDARYA e-zine Presents

Diary of a Young Poet ~ Sanjay Chauhan Vol -04 , Year 2016

( From the Desk of Swapnil Saundarya ezine ) *************************************


व नल स दय ई-ज़ीन - प रचय कला , सा ह य, फ़ैशन, लाइफ टाइल व स दय को सम पत भारत क पहली ह द चरण अथात चतुथ वष म आप सभी का फ़ैशन व लाइफ टाइल

व नल स दय के साथ ह आप.

तीय व तृतीय वष क सफलता और आप सभी पाठक के अपार

स दय ई-ज़ीन

वागत है .

से जुड़ हर वो बात जो है हम सभी के िलये खास, पहँु चेगी आप तक , हर पल , हर व त, जब तक

थम,

-मािसक प का के चतुथ

( Swapnil Saundarya ezine ) के चतुथ

ेम व

ो साहन

के बाद अब

व नल

वष को एक नई उमंग, जोश व लािल य के साथ

तुत कया जा रहा है ता क आप अपनी ज़ंदगी को अपने सपन क दिनया बनाते रह. सुंदर सपने दे खते रह ु और अपने हर सपने को साकार करते रह .तो जुड़े र हये ' व नल स दय' लॉग व ई-ज़ीन ..............

के साथ और

बनाय अपनी ज़ंदगी को अपने सपन क दिनया . ु ( Make your Life just like your Dream World ) Launched in June 2013, Swapnil Saundarya ezine has been the first exclusive lifestyle ezine from India available in Hindi language ( Except Guest Articles ) updated bi- monthly . We at Swapnil Saundarya ezine , endeavor to keep our readership in touch with all the areas of fashion , Beauty, Health and Fitness mantras, home decor, history recalls, Literature, Lifestyle, Society, Religion and many more. Swapnil Saundarya ezine encourages its readership to make their life just like their Dream World . www.issuu.com/swapnilsaundaryaezine


Founder - Editor ( सं थापक - संपादक ) : Rishabh Shukla ( ऋषभ शु ला ) Managing Editor (कायकार संपादक) : Suman Tripathi (सुम न

पाठ )

Chief Writer (मु य ले खका ) : Swapnil Shukla ( व नल शु ला) Art Director ( कला िनदे शक) : Amit Chauhan (अिमत चौहान) Marketing Head ( माक टं ग

मुख ) :

Vipul Bajpai ( वपुल बाजपई) ' व नल स दय - ई ज़ीन ' ( Swapnil Saundarya ezine ) म पूणतया मौिलक, अ कािशत लेख को ह कॉपीराइट बेस पर

वीकार कया जाता है . कसी भी बेनाम लेख/ योगदान पर हमार कोई ज़ मेदार नह ं होगी . जब तक

क खासतौर से कोई िनदश न दया गया हो , सभी फोटो ा स व िच

केवल रे खां कत उ े य से ह इ तेम ाल

कए जाते ह . लेख म दए गए वचार लेखक के अपने ह , उस पर संपादक क सहमित हो , यह आव यक नह ं है . हालां क संपादक ितशत क

कािशत ववरण को पूर तरह से जाँच- परख कर ह

ज़ मेदार उनक नह ं है . ो

टस , ोड

कािशत करते ह, फर भी उसक शत-

स से संबंिधत जानका रयाँ, फोटो ा स, िच

, इल

े शन

आ द के िलए ' व नल स दय - ई ज़ीन ' को ज़ मेदार नह ं ठहराया जा सकता .

कॉपीराइट : ' व नल स दय - ई ज़ीन ' ( Swapnil Saundarya ezine ) के कॉपीराइट सुर सभी अिधकार आर

त ह . इसम

बना आंिशक या संपूण अनुवा दत करके इले

त ह और इसके

कािशत कसी भी ववरण को कॉपीराइट धारक से िल खत अनुम ित

प से पुन: कािशत करना , सुधारकर

सं

हत करना या कसी भी

प या अथ म

ॉिनक या यां क , ितिल प, रकॉ डग करना या दिनया के कसी भी ह से म ु

कािशत

करना िनषेध है . ' व नल स दय - ई ज़ीन ' के सवािधकार ' ऋषभ शु ल' ( Rishabh Shukla ) के पास सुर . इसका कसी भी

कए

त ह

कार से पुन: काशन िनषेध है .

चेतावनी : ' व नल स दय - ई ज़ीन ' ( Swapnil Saundarya ezine ) म घरे लु नु खे, स दय िनखार के िलए ट स एवं विभ न िच क सा प ितय के संबंध म त यपूण जानकार दे ने क हमने पूर सावधानी बरती है . फर भी पाठक को चेतावनी द जाती है क अपने वै बड़ और कमज़ोर य

य क शार रक श

या िच क सक आ द क सलाह से औषिध ल , य क ब च , अलग अलग होती है , जससे दवा क मा ा

िनधा रत करना ज र है .

मता के अनुस ार


Diary of a young Poet ~ Sanjay Chauhan

संजय चौहान ( Sanjay Chauhan ) ,इटावा जला (Etawah ) का मूल िनवासी

हँू .वतमान म म इटावा जले के एक छोटे से क बे लखना म रहता हँू . म एक म यमवग य कसान प रवार से हँू और मेरे पताजी एक कसान ह . मेर

ारं िभक

िश ा चकरनगर म हई ु तथा मै क क पढ़ाई के िलए म, लखना आ गया .वह ं से मने बकेबर के जनता इ टर कॉलेज से इ टरमी डएट क पर व

व ालय (CSJM University ) से

नातक क पर

व कानपुर

ा उ ीण क है . बचपन से ह

मुझे पढ़ने िलखने का बहत ु शौक रहा है . मेरे पसंद दा लेखक म ' दनकर जी', 'मैथलीशरण गु

जी' आ द कई लेखक

मुख ह. म भ व य म मी डया

म अपनी

सफल भागीदार दे ना चाहता हँू और इसके िलए म सोचा करता था क अ छा बोलने के िलए अ छा िलखना भी आना चा हये .इसिलए जो मन म आता था, उसे प न पर उतारा करता था और आज वह श द मेर मेरे जीवन म मेर माँ मुझे सबसे

ज़ंदगी ह.

यादा यार ह . आज दस साल से उनसे दरू हँू पर

यार म कई गुना बढ़ो र हो गई है .वह मेरे िलए सब कुछ ह

य क उ ह मुझपे


भरोसा है क म वो क ँ गा जो कोई नह ं कर सका और मुझे मेर माँ के भरोसे पर भरोसा है . मेर

ज़ंदगी मेर माँ और मेरे दो त के इद िगद घूमती है . िनिश चौहान व

पारस ,मेरे उन दो त म से ह ज ह ने मेरे लेखन को हर पल सराहा है व मुझे ो सा हत कया

है . आज म जीवन म जतना आगे बढ़ पाया हँू , वो इनके सहयोग

से ह संभव हो पाया है और अपन क उ मीद पर खरा उतरते हए ु सा ह य को उस ऊँचाई तक ले जाना चाहता हँू जहाँ तक कोई न पहँु चा हो. इसके िलए म िनरं तर यासरत हँू और सबसे मह वपूण म, अपने उदाहरण

ामीण

के लोग के सम

तुत करना चाहता हँू क हम भी और क तरह व

एक

पटल पर नाम रोशन

कर सकते ह...... व नल स दय ईज़ीन ( Swapnil Saundarya Ezine ) का म, तहे दल से शु कहना चाहँू गा

या

य क इनके ज रये मुझे अपनी डायर ( Diary of a young Poet ) के

इन पृ

को आप सभी के सम

आपके

ेम और आशीवाद

कािशत हो रह मेर यह

तुत करने का अवसर िमल रहा है . उ मीद है

पी वषा म म भीग जाऊँगा. व नल स दय ई ज़ीन म वरिचत रचनाय आपको पसंद आएं ,इस व ास के साथ

म संजय चौहान अपने कलम को यह ं वराम दे रहा हँू ......... आभार - संजय चौहान ( Sanjay Chauhan )


आज से ठ क एक साल पहले कसी ने अल वदा कहा था मुझे...... आज उस दद को अपनी रचना के साथ बयां कर रहा हँू .............

आज ये खुशनुमा चेहरा फर से उदास है , शायद उनके लौट आने क अब न इसे आस है . दो पल साथ रहकर वो हम जो खुशी दे गए, जाते-जाते उससे

यादा कई गम-ओ-िसतम दे गए.

हमने आस न क थी कभी उनक

सवाई क ,

पर वो आए और चैन ओ सुकून ले गए. जी रहे थे इससे पहले भी हम उनके बना, पर अब तो वो जीने क वजह भी ले गए. सपने दे खे थे हमने उनक याद म ह सह , पर अब तो वो रात क नींद भी ले गए. गर छोड़ के जाना ह था, तो आए ह यार जैसे सपने बुनाये ह

य ?

य ?

ू है मेरा आज भी उस शीशे क तरह, दल टटा जसे समेटू ं तो चुभने का डर और न समेटू ं तो भी चुभने का डर.

***********************************************


दो त क दो ती के नाम मेर कुछ रचनाएं ............

खुदा तूने रहमत का खज़ाना दया, इतने सारे दो त का तराना दया. ताह उ

रहगे हम कजदार तेरे,

तूने हम खुिशय का ठकाना दया. नफ़रत के दौर म जल रहे थे हम, तूने ठं ड़ हवाओं का नज़राना दया. खुदा तूने रहमत का खज़ाना दया, इतने सारे दो त का तराना दया. माँ-बाप ने पाला और बड़ा कर दया, बेसहारे को जैसे पैर के बल खड़ा कर दया. कमी महसूस हई ु फर भी,एक अदव सहारे क मुझ,े दो त ने आ के उस कमी को भी पूरा कर दया. ह मत, हौसला, सुख दख ु बन कर ,दो त ने भी करतव कर दया. कृ ण-सुदामा सर खी दो ती िनभाकर, हमार दो ती को भी अमर कर दया. खुदा तूने रहमत का खज़ाना दया, इतने सारे दो त का तराना दया. ***********************************************


ू कर चकनाचूर हो जाऊँगा , म आइने क तरह टट जस दन भी तु हारे जैसे दो त से दरू हो जाऊँगा . जब तक पास म हँू कदर कर लो मेर , हाथ से जो िनकला को हनूर हो जाऊँगा. ू मेर अ छाईय म भी यूं जो ऐब ढ़ढती रहती हो, दे ख लेना फर तो म बुरा ज र हो ह जाऊँगा. सुना है लोग जलते ह हमार दो ती से, पर म िलखूँगा अपनी दो ती ह , और मशहर ू हो जाऊँगा . कभी खोना नह ं चाहँू गा म, तुम जैसे दो त को दल से, य क तु ह खो के शायद म, और भी नासूर हो जाऊँगा. मुझे िमला है तुमसा को हनूर बन माँग,े अब दिनया ु

या, म भी उस खुदा का ,

शु गुज़ार हो जाऊँगा. ***********************************************


गौ र ा पर मेर रचना ............. िलख रहा हँू म, क वा सच, सबको याद दलाने को, गौ माता अब भाग रह , अपनी लाज बचाने को. नींद से जागो हे गौ

ेमी !

तुमको ये बतलाना है , लुट रह आब

माँ क ,

तुमको उसे बचाना है . अपनी माँ गौर का , अब तुम कुछ मान रखो, गौ के

ेमी गौ र क !

अब तो तुम कुछ

यान करो,

इन जहाद ज लाद का, अब तुम न स कार करो. मार भगाओ इन दै य को, और अब संहार करो. या हो जाती है बूढ़ माँ, तो बाज़ार म बेचा करते हो, तो

य थोड़े से लालच के पीछे ,

गौ माँ को स क पे छोड़ा करते हो. न िलखा ये बाइबल म, न िसखाती हमको ये कुरान , न पढ़ा हमने कसी वेद म, न है ये गीता का

ान .


नर नह ं नपुंसक है वो, जनको गौ माता से यार नह ,ं भ क है जो भी मेर माँ का, उसे जीने काअिधकार नह .ं गौ र ा क इस मु हम क , हम सबको अलख जगानी है , अपनी यार गौ माता क , अब हमको लाज बचानी है . *********************************************** - संजय चौहान ( Sanjay Chauhan )

युवा क व/ लेखक


य पाठक ! आपक ओर से िनरं तर

तरफ से आप सभी को आपक

हो रह सकारा मक

ित

याओं के िलए ' व नल स दय ई ज़ीन' क पूर ट म क

दय से आभार . अपने आशीवाद, ेम व ्

ो साहन क वषा हम पर सदै व करते रह .

ट प णय , सलाह एवं मागदशन का हम बेस ी से इतंज़ार रहता है . प का के िलए आपके लेख, रचनाय

आ द सादर आमं त ह. कृ ् या अपने प

के साथ अपना पूरा नाम ,पता, फोन नंo व पासपोट साइज़ फोटो अव य संल न कर.

ई- मेल : swapnilsaundarya@gmail.com

व नल स दय ई- ज़ीन म रचनाय भेजने व

व नल स दय ई- ज़ीन ( ई- प का ) म रचना - रचना साफ - सुथर हो व

कािशत कराने हे तु िनयम :

े षत करते समय कृ ् या िन न बात का

यान रख -

Word Text Format अथवा Rich Text Format पे िलखी गई हो .

- भेजी गई रचना मौिलक , अ कािशत व अ सा रत होनी चा हये. कसी भी प - प का से चुराई गई रचना कृ ् या न भेज. य द रचना चुराई गई है , और यह सा बत हो गया तो उ

पर कोट म कारवाई क जाएगी.

- रचना के साथ आपका पूरा नाम, पता, पनकोड व पासपोट साइज़ फोटो अव य भेज. - रचना पर शीषक के ऊपर मौिलकता के संबंध म साफ - साफ िलख अ यथा रचना पर वचार नह ं कया जाएगा. - रचना िसंपल फांट ( Font ) म िलखी गई हो . - रचना भेजते समय अपने बारे म सं

योरा ज र द . य द

िलए रचना भेज रहे ह तो उस -

येक

व नल स दय ई-ज़ीन के कसी

थायी

तंभ के

तंभ का शीषक िलखना न भूल .

वीकृ ् त रचना का कॉपीराइट ( सवािधकार ) प का के कॉपीराइट धारक का है और कोई

कािशत रचना कॉपीराइट धारक से पूविल खत अनुम ित िलए बना अ य

अनु दत , कािशत या

वीकृ ् त / सा रत नह ं

होनी चा हये.

- व नल स दय ई-ज़ीन ट म

( Swapnil Saundarya ezine Team )


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