Scholarly Research Journal for Humanity Science & English Language, Online ISSN 2348-3083, SJIF 2016 = 4.44, www.srjis.com UGC Approved Sr. No.48612, AUG-SEPT 2017, VOL- 4/23 https://doi.org/10.21922/srjhsel.v4i23.9637
सामान्य व्यक्ति के जीवन में क्तदनचयाा, धमा से सम्बन्ध एवं गहरी क्तचंतन की प्रक्तिया में आध्याक्तममकता की भूक्तमका ाऄममत कुमार मिपाठी 1 & मोहम्मद एहसान 2 1
सहायक प्रोफे सर, मनोमिज्ञान मिभाग, म. गाां. ाऄ. महन्दी मिश्वमिद्यालय, िर्ाा
2
एम. मफल. शोर्ार्थी, मनोमिज्ञान मिभाग, म. गाां. ाऄ. महन्दी मिश्वमिद्यालय, िर्ाा Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com
प्रस्ततु शोर् के ाऄतां गात सामान्य व्यमि के जीिन में मदनचयाा, र्मा से सम्बन्र् एिां गहरी मचांतन की प्रमिया में ाअध्यामममकता की भमू मका को समझा गया। भारत र्मा की मिमिर्ताओ ां का स्र्थल माना जाता है, जहााँ ाऄमर्कतर लोग ाअध्यामममकता को व्यमिगत र्मा से जोड़ कर देखते हैं, हालामां क ऐसा नहीं है मक ाअध्यामममकता सभी र्मों से सबां र्ां नहीं रखता है। प्रायाः ाआस शोर् में मिमभन्न र्मों में ाअस्र्था का एक महमिपर्ू ा महस्सा होने के रूप में ाअध्यामममकता पर ाऄमर्क ज़ोर मदया गया है। र्मा और ाअध्यामम के िास्तमिक ाऄर्थों को समझने की ाअिश्यकता है। प्रस्ततु शोर् ाऄध्ययन के ाऄतां गात प्रमतभामगयों के रूप में िारार्सी जनपद (ाईत्तर-प्रदेश) के कबीर-मठ ि कबीर कृ मतममां दर, ममहला ाअश्रम-लांका, द्वाररकार्ीश ममां दर (ाऄस्सी-घाट), ममां दर और ममस्जद में रहने िाले 40 व्यमियों (ममहला/परुु ष) को प्रमतभागी के रूप में समम्ममलत मकया गया। मि ु ाईत्तर िाले प्र्ों के द्वारा प्रमतभामगयों से सामान्य व्यमि के जीिन में मदनचयाा, र्मा से सम्बन्र् एिां गहरी मचांतन की प्रमिया में ाअध्यामममकता की भमू मका को समझा गया। प्राप्त प्रद्दत से ज्ञात होता है मक मिमभन्न र्मों (महन्द/ू ाआस्लाम/कबीर पांर्थ) से सांबांमर्त िृद्ध प्रमतभामगयों का मानना है मक ाअध्यामममकता, मदन चयाा में ाऄमर्क महमि रखता है और ाआसके मलए ज्यादा से ज्यादा समय भी िे मनकालते है। ाआसी प्रकार िे ाअध्यामममकता का र्मा से गहरे सांबांर् को भी मानते हैं। मचांतन प्रमिया के रूप में महन्दू र्मा के िृद्ध प्रमतभामगयों ने ाअमम ि स्ि की खोज को माना, जबमक कबीर पांर्थ के प्रमतभमगयों ने मानि कल्यार् के रूप में तर्था Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies