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THINGS FALL APART: A POSTCOLONIAL STUDY

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442001, Abstract

प्रस्ततु शोध पत्र मदरसा शशक्षा पर अधाररत है | मदरसा मशु स्िम शशक्षा के के न्द्र होते हैं | आसके दो मख्ु य ऄशभकरण होते हैं-मकतब तथा मदरसा | मकतबों में प्रारंशभक शशक्षा दी जाती है जबशक मदरसों में ईच्च शशक्षा की व्यवस्था रहती है | ये प्रायः दो ऄथों में शिए जाते हैं- सामान्द्य ऄथथ में शवद्यािय तथा दसू रे ऄथथ में एक ऐसा शशक्षा सस्ं थान जो धाशमथक शशक्षा प्रदान करता है | आस शोध के माध्यम से मदरसा शशक्षा के गौरवपणू थ आशतहास, वतथमान में ईसकी शस्थशत पर प्रकाश डािा गया है | शजसके तहत मदरसों के ईद्देश्य, पाठ्यकमथ एवं ईनके शवचारों को जाने की कोशशश की गयी है | Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com

मदरसा मशु स्िम शशक्षा के के न्द्र होते हैं | आसके दो मख्ु य ऄशभकरण होते हैं -मकतब तथा मदरसा | मकतबों में प्रारंशभक शशक्षा दी जाती है जबशक मदरसों में ईच्च शशक्षा की व्यवस्था रहती है | ये प्रायः दो ऄथों में शिए जाते हैं- सामान्द्य ऄथथ में शवद्यािय तथा दसू रे ऄथथ में एक ऐसा शशक्षा सस्ं थान जो धाशमथक शशक्षा प्रदान करता है, िेशकन ये के वि हदीस और कुरान तक ही सीशमत नहीं हैं। (आन्द्सैक्िोशपशडया ऑफ़ आस्िाम, 1974) | ऄथाथत यह धाशमथक और धमथशनरपेक्ष दोनों ही प्रकार की शशक्षा प्रदान करता है | यह ऄरबी भाषा के दसथ MAY-JUNE 2017, VOL- 4/31

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शब्द से बना है शजसका ऄथथ है शकसी को कुछ पढ़ाना/शसखाना (ऄिजनु ैद और हुसैन 2005) | वह सस्ं थान जो दसवी तक की शशक्षा प्रदान करते हैं, ईन्द्हें मदरसा कहते हैं दारुिईिमू शब्द का ईपयोग बारहवीं की आस्िाशमक शशक्षा के शिए शकया जाता है, जबशक जाशमया शब्द शवशिद्यािय स्तर की शशक्षा के शिए ईपयोग शकया जाता है (ररयाज़, 2008) | सक्ष ू की कुरान की शशक्षा प्रदान करता है, ं ेप में ऐसा कोइ सस्ं थान जो आस्िाशमक मि मदरसा कहिाता है | आनका ईद्देश्य अशिम का शनमाथण करना होता है, जो आस्िाशमक शशक्षा का प्रसार कर िोगों की शखदमत करे (बानो, 2008) दसू रे शब्दों में हम कह सकते हैं शक मदरसा एक ऐसी सस्ं था है जहा​ाँ शशक्षण-ऄशधगम प्रशिया चिती है, चाँशू क मदरसा शशक्षा का मख्ु य कायथ परम्परागत आस्िाशमक शशक्षा का प्रसार करना है ,आसशिए मदरसा शशक्षा और ईसके ईद्देश्यों को समझने के शिए ये अवश्यक है शक आस्िाशमक शशक्षा को समझा जाये | आससे हमें यह समझने में सहायता शमिेगी शक मदरसा शशक्षा शकस प्रकार ऄनौपचाररक शशक्षा से शभन्द्न है | इस्लाम में शिक्षा आस्िाम पणू थतः ऄल्िाह के प्रशत समपथण है और मसु िमान वो है जो समपथण करता है जबशक कुरान आस्िाम और आस्िाशमक शशक्षा का के न्द्र है एवं यह सभी प्रकार की आस्िाशमक शशक्षा में एक महत्वपणू थ भशू मका ऄदा करता है | कुरान के ऄशतररक्त आस धमथ के प्रवतथक हजरत मोहमद साहब का आस्िाशमक शशक्षा व्यवस्था में एक बेशकीमती स्थान है (शसकंद, 2004) | दसू रे शब्दों में हम कह सकते हैं शक आस्िाशमक ज्ञानमीमांसा धमथ और अध्याशत्मकता से पररपणू थ है (ऄि-ज़ीरा, 2001) | आस्िाम में शशक्षा पर बहुत जोर शदया गया है, पशवत्र ग्रन्द्थ कुरान के ऄनसु ार शशक्षा प्राप्त करना प्रत्येक व्यशक्त का कतथव्य है | MAY-JUNE 2017, VOL- 4/31

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महु म्मद साहब के ऄनसु ार ज्ञान की खोज करो चाहे आसके शिए चीन ही क्यों ना जाना पड़े ( शमया साशहब, 1991) | कुरान की पहिी अयत ही आकरा से शरू ु होती है शजसका ऄथथ है पढ़ना | कुरान में कहा गया है शक प्रत्येक मदथ और औरत को शशक्षा हाशसि करना ऄशनवायथ है। ऄशशशक्षत व्यशक्त एक मरे हुए आसं ान की तरह है ऄथाथत वह शारीररक तौर पर तो शजदं ा है िेशकन ईसकी रूह मर चक ु ी है | शशक्षा पर ज़ोर देते हुए कहा गया है शक शशक्षा मा​ाँ की गोद से शरू ु होकर कब्र की गोद तक हाशसि की जाये, शजसे ऄरबी में ‘लहद से लेकर अहद’ तक कहा गया है (साशजद कासमी 2005) | आसशिए सामशू हक मसु िमानों को शशशक्षत करने के शिए एक प्रणािी शवकशसत की गयी शजसे मदरसा शशक्षा प्रणािी कहा जाता है | मदरसा शिक्षा का इशिहास मदरसा शशक्षा का आशतहास ईतना ही परु ाना है शजतना की आस्िाम धमथ | आस्िाम धमथ के प्रवतथक महु म्मद साहब के द्वारा आस्िाशमक शशक्षा (मदरसा शशक्षा) की शरु​ु अत मक्का में सफा पहाड़ी के पास ‘दारुि ऄकरम’ से होती है (साशजद कासमी,2005) | 622 इ0 में जब महु म्मद साहब मक्का से मदीना गए तब वहां पर मशस्जद-ए–नबवी शशक्षा का के न्द्र बना । यहा​ाँ पर स्त्री एवं परू ु ष दोनों ही शशक्षा हाशसि करने के शिए अते थे (ऄिवी,1998) | हज़रत महु म्मद साहब के यगु के बाद ऄरब प्रायद्वीप के बाहर मदरसों और ईल्िेमाओ ं ने धाशमथक शवशेषज्ञों के रूप में आस्िाशमक शशक्षा के प्रसार में योगदान शदया (योगेन्द्र शसकंद, 2011) | बग़दाद में ईमयया​ाँ वंश में मदरसे का प्रचिन हुअ, आस यगु में जो पहिे से ऄनौपचाररक शशक्षा चि रही थी ईसे औपचाररक शशक्षा का रूप शदया गया, ऄशधकांश मशस्जद, घर एवं दक ु ानों को प्राथशमक शशक्षा के के न्द्र के रूप में तब्दीि कर शदया गया MAY-JUNE 2017, VOL- 4/31

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(ऄहमद, 1985) | ऄब्बासी यगु के दौरान जब मशु स्िम सभ्यता और संस्कृशत ऄपने चरम सीमा पर थी तब मशु स्िम न के वि यनू ाशनयों के साशहत्य और दशथन में कुशि थे बशल्क शवज्ञान में भी पारंगत हो गये | आस ऄवशध के दौरान ऄि-मॉमनू ने 830 इ० में बैत-ईिशहकमा शशक्षा संस्था के रूप में स्थाशपत शकया (कासमी, 2005) | यह एक ईच्च शशक्षा का सस्ं थान था शजसमें शोध कायथ के शिए प्रशसद्ध शवद्वानों को शनयक्त ु शकया गया | आन शवद्वानों में इसाइ, यहूदी, भारतीय और मसु िमान थे | ऄि मामनू द्वारा वैज्ञाशनकों के काम करने के शिए एक वैधशािा का शनमाथण कराया | संस्थान में एक ईत्कृष्ट पस्ु तकािय भी था, शजसमें दि ु थभ पांडुशिशपया​ाँ और पस्ु तकें शाशमि थीं | यह सस्ं थान अिमणकारी हजाजी खान द्वारा 1258 इ० में जिा शदया गया | ऐसा कहा जाता है शक जब पांडुशिशपया​ाँ फें की गयी तो ईसकी श्याही से टाआगरस नदी का पानी कािा हो गया था | पहिी आस्िाशमक सस्ं था जो व्यापक स्तर पर स्थाशपत हुइ | ऄि-मआु ज़ (925-975 A.D) द्वारा ऄि-ऄजहर काशहरा शवशिद्यािय के रूप में ऄशस्तत्व में अया (ितीफ़, 1998) | 9 वीं शताब्दी में बग़दाद शवि में ज्ञान का के न्द्र बन गया | शविभर के दशथनशास्त्री, गशणतज्ञ तथा वैज्ञाशनक अशद बग़दाद अये | शवशभन्द्न पस्ु तकों का ऄनवु ाद प्रत्येक ज़बान जैसे- िैशटन, फ्रेंच, संस्कृत अशद में कराया गया | आब्न-ए-रूशद और आब्न-ए- शसना ने ऄरस्तु के कायों को सरु शक्षत करने में महत्वपणू थ योगदान शदया | बीजगशणत, शत्रकोणशमशत, ऄशभयांशत्रकी तथा खगोि शवज्ञान अशद शजनकी बात अज हम करते हैं ईसकी शरु​ु अत कइ सौ वषथ पहिे बग़दाद में हो चक ु ी थीं (आस्िाम: एम्पायर ऑफ़ फे थ, 2013) | स्टेनिी िीन्द्पोि (2012) की पस्ु तक A World Without Islam के ऄनसु ार दशथन, शचशकत्सा तथा सगं ीत के क्षेत्र में ऄरब सभ्यता ने महत्वपणू थ योगदान शदया तथा कइ शशक्षा संस्थाएं ऄशस्तत्व में अयीं जैसे बग़दाद MAY-JUNE 2017, VOL- 4/31

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का मदरसा मस्ु तम सररयाह एवं जाशमया शनज़ाशमया, ईत्तर ऄफ्रीका का करावें शविशवद्यािय ,काशहरा का ऄि-ऄज़हर तथा स्पेन का कोराडोवा शविशवद्यािय | ऄि-गज़ािी जैसा महान शोधाथी आन्द्ही संस्थाओ ं की ईपज है | आन संस्थानों में धाशमथक एवं धमथ-शनरपेक्ष दोनों ही प्रकार की शशक्षा दी जाती थी (मजमू दार, 2003) | आन सारे मदरसों ने शवि को महान गशणतज्ञ, वैज्ञाशनक तथा दशथनशास्त्री शदए | The Medico (Novel) के ऄनसु ार स्पेन का कोराडोवा शविशवद्यािय शजसे ऄब शगरजाघर बना शदया गया है, वहां पर पादररयों ने िगभग 10 िाख शकताबों को जिा शदया, शजसमें गशणत, शवज्ञान एवं दशथन अशद की शकताबें शाशमि थीं | महान आशतहासकार A.J.Joybee की शकताब ‘आशतहास का ऄध्ययन’ में 600 साि की 25 संस्कृशतयों का ऄध्ययन कर बताया शक जब परू ा यरू ोप ऄन्द्धकार में जी रहा था तो ईनको रोशनी में िाने का कायथ ऄरबवाशसयों ने ही शकया था | भारि में मदरसा शिक्षा भारत में मशु स्िम हुकूमत 12 वीं शताब्दी से 19 वीं शताब्दी तक चिी | भारत में मदरसा शशक्षा को दो प्रमख ु कािखडं ो में देख सकते हैं सल्तनत काि के दौरान मदरसा शशक्षा मगु िकािीन मदरसा शशक्षा भारत में सल्तनत काि की शरू ु अत शहाबद्दु ीन महु म्मद गौरी (1203-1206) से हुइ | आसने शशक्षा के शवकास के शिए ‘िाजुल मशसर’ नाम से मदरसे की बशु नयाद डािी | साथ में कइ मकतब और मदरसे स्थाशपत शकये | सि ु तान आल्ततु शमश (1206-1210) ने ‘मदरसा मोशिया’ कायम शकया (खान,1973) । आसके बाद कइ और सल्ु तानों जैसे नसीरुद्दीन महु म्मद (नसररया मदरसा) बिबन ,ऄिाईद्दीन शखिजी (मकबरा-ए- ऄिाईद्दीन शखिजी) MAY-JUNE 2017, VOL- 4/31

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शफरोज़ शाह तगु िक तथा शसकंदर िोदी अशद ने मदरसे की स्थापना कर शशक्षा के क्षेत्र में योगदान शदया | सल्ु तान महमदू शाह (1375-1395) ने शशक्षा प्रदान करने के शिए प्रशतशित शवद्वानों को अमंशत्रत शकया तथा ऄनाथों एवं ज़रूरतमंदों के शिए मफ्ु त भोजन एवं रहने की व्यवस्था की तथा बीदर में मदरसा और पस्ु तकािय बनवाया | शजसमें 30,000 पस्ु तकें थीं (ऄहमद 2008) | जब तैमरू िंग ने भारत पर अिमण शकया, तब कुछ वक्त के शिए शशक्षा व्यवस्था ऄस्त व्यस्त हो गयी थी परन्द्तु शसकंदर िोदी ( 1489-1395 ) ने आसमें सधु ार शकया और जौनपरु , ऄहमदाबाद, शबहार,गि ु बगाथ, बीदर, दौिताबाद अशद में मदरसे की स्थापना की | मगु ल िासन के दौरान मदरसा शिक्षा पवू थवती मसु िमान शासकों की ऄपेक्षा मगु िों की शशक्षा में ऄशधक रुशच थी | भारत में मगु िों के समय में यह परम्परा थी शक ज़मीन का एक छोटा शहस्सा शजसे मदद-ए-महास (अशथथक सहायता) कहा जाता था ईसे ईिेमा को ज्ञान के प्रसार के शिए शदया जाता था | पहिे मग़ु ि बादशाह ज़हीरुद्दीन बाबर (1526-1530) ने पहिे से स्थाशपत मदरसों की मरम्मत करायी | ऄकबर ने महाभारत, रामायण, ऄथथवेद अशद का ऄनवु ाद कराया तथा अगरा फतेहपरु और कइ जगहों पर मदरसे स्थाशपत शकये | जहा​ाँगीर ने एक काननू बनाया शक जो व्यशक्त िावाररस मरे गा ईसकी सपं शत्त शवद्याियों तथा धाशमथक भवनों की मरम्मत के शिए आस्तेमाि की जाएगी (भटनागर एवं कुमार, 2005) | आसके ऄिावा , शाहजहा​ाँ तथा औरंगजेब अशद ने मदरसे के शवकास में महत्वपणू थ योगदान शदया | आसी यगु में मदरसा व्यवस्था में दसथ-ए-शनज़ामी के रूप में महत्वपणू थ शवकास हुअ | पहिे मदरसे का पाठ्यिम जो मल्ु िा शनजामद्दु ीन (1089-1161) द्वारा बनाया गया, जो शवज्ञान, किा और धाशमथक MAY-JUNE 2017, VOL- 4/31

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शशक्षा पर अधाररत था (िान, 1973) | और शफर मगु िों के दौर में कइ यरू ोपीय शशक्तयां व्यापार करने के शिए भारत अइ ं | ऄग्रं ेजों का दखि शासन व्यवस्था के साथ-साथ सभी क्षेत्रों पर पड़ा । वारे न होशस्टंग द्वारा 1781 में किकत्ता मदरसा की बशु नयाद डािी गइ तथा साथ ही हुगिी में मदरसा मोहशसशनया​ाँ कायम शकया गया (ऄखिाक,1985) | आसी प्रकार शदल्िी, पंजाब, गजु रात, शबहार एवं शसधं आत्याशद में कइ मदरसे कायम हुए, शजन्द्होंने शशक्षा के क्षेत्र में महत्वपणू थ योगदान शदया | सर सययद ऄहमद खां ऄपनी प्रशसद्ध पस्ु तक “ऄसरऄि-सनादीद” में शिखते हैं शक मग़ु ि काि के दौरान मकतब तथा मदरसे देश और देश के बाहर तक फै िे हुए थे वह अगे शिखते हैं शक मग़ु ि साम्राज्य का पतन औरंगजेब के समय से ही शरू ु हो गया था िेशकन मदरसे की स्थापना ऄंशतम मग़ु ि शासक तक होती रही (हक़, 2013) | शिशि​ि भारि में मदरसा शिक्षा मग़ु ि साम्राज्य के पतन के बाद शब्रशटश साम्राज्य का प्रशतस्थापन हुअ | आसका ऄसर देश के प्रत्येक क्षेत्र राजनीशत, समाज, सस्ं कृशत एवं शशक्षा पर हुअ | मदरसा शशक्षा भी आससे ऄछूता नहीं रहा क्योंशक सत्ता का ऄंतर के वि एक राजनैशतक शशक्त तक ही सीशमत नहीं था बशल्क मशु स्िम समदु ाय के सामाशजक, अशथथक संस्कृशत एवं भावात्मक शस्थशत पर भी पड़ा | ईस समय मदरसा शशक्षा प्रणािी िोगों को तैयार कर रही थी परन्द्तु ऄब आसमें तेज़ी से पररवतथन अ रहा था मदरसा ईन संस्थानों में से एक था शजसने ईस समय के पररवतथन के कड़वे स्वाद को चखा (हक़, 2011) | शफर 1836 में ऄंग्रेजी सरकार द्वारा मैकािे शशक्षा पद्धशत िागू शकये जाने के बाद शहन्द्दू और मसु िमान दोनों वगों को ऄपनी ऄपनी ऄशस्मता के शिए संघषथ करना पड़ा | मसु िमानों को ये डर था शक ईनकी सभ्यता और संस्कृशत नष्ट हो MAY-JUNE 2017, VOL- 4/31

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जाएगी शिहाज़ा 1866 इ० में ईत्तर प्रदेश के नानौता शनवासी हजरत मौिाना महु म्मद याकूब नानौतवी ने सहारनपरु एवं मज़ु फ्फरनगर के बीच देवबंद कस्बे में एक पेड़ के नीचे ऄपने एकमात्र शशष्य महमदू हसन को पढ़ाना शरू ु शकया | अज यह मदरसा दारूि-ईिमू के नाम से प्रशसद्ध है (दशाशहद रहीम) | आस मदरसे ने अधशु नक शैशक्षक प्रथाओ ं जैसे वाशषथक परीक्षाएाँ, शडग्री देना तथा दीक्षांत समारोह को ऄपनाया तथा शशक्षा को ऄिग ऄिग शवभाग में शवभाशजत शकया, सबसे महत्वपणू थ शवभाग दारुि आफ्ता या न्द्यायशात्र शवभाग था शजसका कायथ मशु स्िम समदु ाय द्वारा सामाशजक राजनैशतक तथा अशथथक मद्दु ों पर पछ ू े गए प्रश्नों पर प्रशतशिया व्यक्त करना था | आसी शसिशसिे में जाशमया शनज़ाशमया (1876) नदवति ु ईिेमा (1894) अशद मदरसे स्थाशपत शकये गये (ऄखिाक, 1985) | वितमान में मदरसे की शस्िशि आसमें कोइ सदं हे नहीं है शक मदरसा ने सशदयों से आस्िाशमक शशक्षा को बढ़ावा देने में ऄहम भशू मका शनभाइ है, साथ आस्िाशमक शवचारों के शवकास एवं मशु स्िम समदु ाय की प्रगशत में महत्तवपणू थ भशू मका ऄदा की है | यह कहना गित नहीं होगा शक मशु स्िम समदु ाय का कोइ ऐसा पहिू नहीं है जो मदरसे से ऄछूता रह गया हो | मदरसे ने समाज के सभी वगों को प्रभाशवत शकया | ऄगर हम आसका आशतहास देखे तो पता चिता है शक महान शवद्वान दशथनशास्त्री एवं गशणतज्ञ अशद को जन्द्म शदया, परन्द्तु ऄगर हम अज के पररपेक्ष्य में देखें तो आसकी शस्थशत काफी शपछड़ी हुइ है, आसको रूढ़ीवादी जबशक अधशु नक शशक्षा को प्रगशतशीि माना जाता है | अज जब मदरसा शवद्याथी शडशग्रया​ाँ िेकर प्रशतवषथ रोजगार की तिास में बाहर शनकिते है तो ईन्द्हें शकसी मल्ु क में ईम्मीद की कोइ शकरण नहीं शदखाइ देती

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है | मदरसा शशक्षा मसु िमानों की शैशक्षक शस्थशत में सधु ार क्यू नहीं कर पा रहा है आसके शिए शनम्न मद्दु ों को देखना होगा |  आसका प्रमख ु कारण परंपरागत मदरसा पाठ्यिम | यह पारंपररक शवषयों पर ऄशधक ज़ोर देते है और अधशु नक शवषयों के प्रशत नकारात्मक दृशष्टकोण ऄपनाते है (सना एवं शाशज़ि, 2015) | और जब वो राशष्िय स्तर की परीक्षाओ ं में भाग िेना चाहते है तो ईनको कइ बाधाओ ं और चनु ौशतयों का सामना करना पड़ता है और ऐसा माना जाता है शक ये बधाएं अधशु नक शवषयों जैसे शवज्ञान, गशणत एवं कंप्यटू र का ज्ञान न होने के कारण अती हैं |  ऄशधकतर मदरसे सरकरी मान्द्यता प्राप्त नहीं होते हैं शजससे ईन्द्हे ऄनदु ान प्राप्त नहीं होता है और अशथथक समस्याओ ं से जझू ते रहते हैं |  मदरसे अधारभतू सशु वधाओ ं से वशं चत हैं | शशक्षा, नइ शशक्षा तकनीकी से ऄनशभज्ञ है के वि परम्परागत शशक्षा प्रणािी ही िागू है | “अपरे शन ब्िैक बोडथ” के ऄनसु ार बताइ गयी सशु वधाओ ं से वशं चत है ऄधथ-वाशषथक तथा वाशषथक परीक्षा के ऄिावा कोइ ऄशतररक्त परीक्षा नहीं िी जाती है | शवद्याशथथयों का शारीररक व मानशसक शवकास नहीं हो रहा है | पाठ्यपस्ु तक समय से नहीं दी जाती | शशक्षकों का वेतन कम होने से कौशि यक्त ु शशक्षकों की कमी है, ऄशधकांश शवद्याथी गरीब घर से अते हैं (ऄिी, 2014) |

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 मदरसे में शशक्षक कौशि यक्त ु नहीं हैं | प्रशशक्षण की कमी है | ऄशधकांश शवद्याथी के वि शनःशल्ु क अवास व शशक्षा के शिए ही प्रवेश िेते हैं (नेहि, सिमा एवं हुसैन, 2016) |  सीखने सीखने की परंपरागत शशक्षण शवशध,  परीक्षा और मल्ू याकन की दोषपणू थ प्रणािी,  शवशभन्द्न मकतब और मदरसों के बीच अपसी समजं स्य की कमी,  शनयोजन और प्रशासन की दोषपणू थ गणु वत्ता,  नवाचार की कमी सझ ु ाव शोधकताथओ ं नें मदरसे की शस्थशत को सधु ारने के शिए शनम्न सझु ाव शदये सरकार को राष्िीय मानक के ऄनसु ार गावों ब्िाक तथा मशु स्िम महु ल्िों में प्राथशमक, माध्यशमक तथा ईच्च स्तर के शवद्यािय खोिने चाशहए | मदरसों में दीनी तािीम के साथ अधशु नक तािीम पर भी गौर करना होगा |  सरकार को ऄंग्रेजी भाषा की पाठ्यपस्ु तकों में कुछ ऐसे पाठ् जोड़ने चाशहए जो ईसकी शदनचयाथ में शाशमि हो और साथ ही ऐसी तकनीक पर भी ध्यान देना चाशहए जो मदरसे के बच्चों के ऄग्रं ेजी भाषा ऄशधगम में सहायक शसद्ध हो |  मदरसा शशक्षा के ईद्देश्य एवं िक्ष्य को शवशशष्ट प्रकार से पररभाशषत होना चाशहए ,

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 मदरसे के पाठ्यिम में धाशमथक शशक्षा के साथ अधशु नक पाठ्यिम को भी स्थान देना चाशहए,  एक ऐसी सशमशत स्थाशपत करनी चाशहए जो मकतब एवं मदरसा दोनों में ही अधारभतू अवश्यकताओ ं का ऄध्ययन करे |  गणु वत्तापणू थ शशक्षा को प्रोत्साशहत करना चाशहए |  शशक्षक प्रशशक्षण कायथिम का प्रावधान होना चाशहए जो शक मदरसा शशक्षा के साथ सहयोग करने के शिए जाते हैं | ईन्द्हें या तो शविशवद्याियों से संबद्ध मौजदू ा प्रशशक्षण संस्थानों में समायोशजत होना चाशहए, या ईनके शिए प्रशशक्षण का एक ऄिग व्यवस्था करनी चाशहए |  कें र एवं राज्य सरकार दोनों को ही मदरसों को ऄनदु ान देना चाशहए |  मशु स्िम बच्चों को राष्िीय शशक्षा प्रणािी के मानकों को प्राप्त करने में सक्षम बनाने के शिए मदरसा के सभी स्तर पर पस्ु तकों और शशक्षण-ऄशधगम-सामग्री की ईपिब्धता अवश्यक है |  शवद्याशथथयों के शारीररक शवकास के शिए मदरसों में खेि के ईपकरण प्रदान करने चाशहए तथा आसके शिए भशू म की प्रमख ु ता सशु नशित करनी चाशहए और साथ में ही अंतररक मदरसा खेि प्रशतयोशगता को प्रोत्साहन देना चाशहए |  मदरसे में सामाशजक और सांस्कृशतक कायथिमों का प्रावधान होना चाशहए ताशक एक शवद्याथी के सपं पणू थ व्यशक्तत्व का शवकास हो |

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शनष्कषथ आस ऄध्ययन में भारतीय मसु िमानों की वतथमान शैशक्षक शस्थशत, मदरसे में ईनका नामांकन तथा ईनके गौरवपणू थ आशतहास पर प्रकाश डािा गया है | साथ ही भारतीय मदरसों की शैशक्षक समस्याओ ं एवं ईनकी शस्थशत में सधु ार के शिए कुछ सझु ाव भी शदया गया है | ईत्तर अधशु नक यगु में मदरसों की शशक्षा व्यवस्था में गणु ात्मकता एवं सचू ना, प्रौद्योशगकी एवं शवज्ञान अशद पर ज़ोर देना चाशहए ताशक मदरसा को समाज की मख्ु यधारा में शाशमि शकया जा सके शजससे वह से ईत्तीणथ हुए शवद्याथी समाज के शिए ईपयोगी नागररक बन सके | सन्दभत ग्रन्ि-सूची .नारायण, के . अर. (2013). स्कीम फॉर प्रोवाआशडंग क्वाशिटी एजक ु े शन आन मदरसा आवैल्यएू शन स्टडी ररपोटथ, सेंटर फॉर दशित एडं माआनरटीज़ स्टडीज़, जाशमया शमशिया आस्िाशमया, नइ शदल्िी. http://mhrd.gov.in/sites/upload_files/mhrd/files/upload_documents/SPQEM_O.p df

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