Scholarly Research Journal for Humanity Science & English Language, Online ISSN 2348-3083, SJ IMPACT FACTOR 2016 = 4.44, www.srjis.com PEER REVIEWED JOURNAL, APR-MAY 2018, VOL- 6/27
अभििावकीय आकाांक्षा एवां शैभक्षक उपलभधध के सम्बन्ध का अध्ययन देवेन्र कुमार यादव शोधछात्र, म. गा. अं. , हहन्दी हि. हि. िधाा Abstract
आज के इस प्रहियोगी यगु में प्रत्येक नागररक सफलिा के उच्चिम हशखर िक पहचुँ ना चाहिा है| परन्िु सफलिा प्राहि के हलए िह हकन साधनों का का उपयोग करिा है, यह बाि मायने रखिी है | यहद हम अपने बच्चे की रुहच एिं योग्यिा को नजरअंदाज करिे हए अपने आकांक्षा के अनसु ार उसे डॉक्टर या अहभयांहत्रक के रूप में देखना चाहिे हैं,िो यह बहि ही असंभि काया है | हमें अपने बच्चे की रूहच एिं योग्यिा के अनसु ार काया करने देना चाहहए िभी हमारा बच्चा सफल होगा | प्रस्िुि शोध में अहभभािकों की आकांक्षा एिं शैहक्षक उपलहधध का अध्ययन हकया गया है |अहभभािकीय आकांक्षा जानने हेिु स्िहनहमाि उपकरण एिं शैहक्षक उपलहधध हेिु हिद्याहथायों के स्कोर काडा का प्रयोग हकया गया है | अध्ययन के मख्ु य पररणाम में पाया गया हक ग्रामीण एिं शहरी हिद्याहथायों की उपलहधध ग्रेड में कोई हिशेष अंिर नहीं है यहाुँ दोनों क्षेत्र के हिद्याहथायों ने अपनी उपलहधध में अच्छा हनष्पादन हकया है | ग्रामीण एिं शहरी हिद्याहथायों की शैहक्षक उपलहधध में कोई साथाक अिं र नहीं है | ग्रामीण एिं शहरी अहभभािकों के बच्चों की शैहक्षक उपलहधध सम्बंहधि आकांक्षा में साथाक अंिर है | हिद्याहथायों की शैहक्षक उपलहधध एिं उनके अहभभािकों की आकांक्षा के मध्य हनम्न स्िर का सहसंबंध है |इस शोध के माध्यम से शोधाथी इस िथ्य पर समाज का ध्यान आकहषाि करना चाहिा है हक हमें अपनी आकाक्ष ं ा अपने बच्चों पर नहीं थोपना चाहहए बहकक उनकी रुहच के अनसु ार िे जो बनना चाहिे हैं, उन्हें स्िछन्द छोड़ देना चाहहए िभी हमारे बच्चे एक सफल नागररक बन पायेंगे| Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com
प्रस्तावना अज की दनु नया नदन प्रनि-नदन प्रनिस्पधी होिी जा रही है | प्रदर्शन की गणु वत्ता व्यनिगि प्रगनि के निए महत्वपणू श कारक बनिी जा रही है । ईत्कृ ष्टिा नवर्ेष रूप से , ऄकादनमक और प्रायःऄन्य सभी क्षेत्रों में एक महत्वपणू श पहिू के रूप में दे खी जािी है । प्रत्येक मािा–नपिा की आच्छा होिी है नक ईनके बच्चे ईत्कृ ष्ट प्रदर्शन करें | आस ईपिनधध के ईच्च स्िर की आच्छा से हमारे बच्चों, छात्रों, नर्क्षकों, संस्थाओ ं और सामान्य नर्क्षा प्रणािी में बहुि ही दबाव पड़िा है िथा ऐसा प्रिीि होिा है नक नर्क्षा की परू ी व्यवस्था र्ैनक्षक ईपिनधध के आदश–नगदश ही घमू िी रहिी है | आस प्रकार, हम देखिे हैं नक ऄनधकांर् स्कूिों में के वि यही प्रयास रहिा है नक वे बच्चों की र्ैनक्षक ईपिनधध की वृनि कै से करें ? र्ैनक्षक र्ोधकिाशओ ं के निए यह र्ोध का नवषय है नक कौन- से कारक छात्रों की ईपिनधध को बढावा देिे हैं | कौन से कारक ऄकादनमक ईत्कृ ष्टिा की नदर्ा में योगदान करिे हैं ? ऐसे प्रश्नों के ईत्तर देना मानव व्यनित्व की जनिििा के कारण असान नहीं हैं । ईत्कृ ष्टिा में सधु ार के निए हम प्रायः प्रयास करिे हैं एवं िरहCopyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
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िरह की यनु ि का प्रयोग करिे हैं | आसनिए र्ोधकिाशओ ं द्वारा ऄनेक कारकों की पररकल्पना की जािी है और र्ोध भी नकए नकये जािे हैं | वे नवनभन्न ननष्कषश के साथ ऄपने पररणाम को सामान्यीकृ ि करिे हैं | र्ैक्षनणक ईपिनधध पाररवाररक वािावरण, माननसक स्वास््य एवं ऄध्ययन की अदि से भी ननधाशररि होिी है | आकाांक्षा कोइ व्यनि जो भी कायश करिा है ईसमें एक नननिि िक्ष्य या प्रवीणिा प्राप्त करना चाहिा है | िक्ष्य एवं अकांक्षायें व्यनि की क्षमिाओ ं के ऄनरूप, ईससे ईच्च ऄथवा ननम्न हो सकिी हैं | अभििावकीय आकाांक्षा यनद हम ऄनभभावकीय अकाक्ष ं ा को पररभानषि करिे हैं , िो हमें पवू शविी र्ोधों में दो र्धद नमििे हैं एक Aspiration (अकाक्ष ं ा ) और दसू रा Expectations (ऄपेक्षा ) | ऄनभभावकीय अकाक्ष ं ा एवं ऄनभभावकीय ऄपेक्षा में कुछ नवरोधाभास है | ऄनभभावकीय अकांक्षा का िात्पयश ऄनभिाषा, कामना या ऐसा िक्ष्य नजसे ऄनभभावक ऄपने बच्चों के भावी भनवष्य के निए ननमाशण करिे हैं एवं ऄपेक्षा र्धद का प्रयोग बच्चा यथाथश में क्या प्राप्त करेगा आसकी अर्ा की जािी है | औभित्य प्रत्येक ऄनभभावक की यह अकांक्षा होिी है नक हमारे बच्चे नर्नक्षि होकर एक सफि नागररक ब नें| परन्िु ऄनभभावकों की अकांक्षा भी ईच्च स्िर की होिी है
| बच्चों की क्षमिा एवं रूनच को जाने नबना हमारे
ऄनभभावक यह अकांक्षा रखिे हैं नक हमारा बच्चा एक सफि नचनकत्सक, ऄनभयांनत्रक एवं अइ.ए.एस.ऄनधकारी ही बने हमारे ऄनभभावक यह नहीं जानने का प्रयास करिे हैं नक हमारे बच्चे की रूनच क्या है? दसू री ओर यनद हम ऄपना ध्यान अकनषशि करिे हैं िो यह पािे हैं नक जब बच्चा स्कूि में प्रवेर् करिा है िो प्रत्येक ऄनभभावक का ध्यान बच्चों के स्कोर कार्श पर रहिा है यानन नवगि परीक्षा में हमारा बच्चा नकिना ऄक ं हानसि नकया | व्यनिगि नभन्निा (individual differences) का ध्यान देिे हुए एवं प्रनिभार्ािी बच्चों को छोड़कर यनद हम ऄपना ध्यान बच्चों के स्कोर कार्श पर आनं गि करिे हैं िो पािे हैं नक ऄनधकार् ं
बच्चों की
ईपिनधध नकसी न नकसी एक नवषय में कम ही रहिी है | ऄमक ु नवषय में कम ऄक ं क्यों है आसका पिा िगाये नबना हमारे ऄनभभावक ऄपने बच्चों से यह ऄपेक्षा रखिे हैं नक प्रत्येक नवषय में हमारे बच्चे का ऄनधक ऄक ं क्यों नहीं हैं? अज की मल्ू यांकन पिनि चाहे कै सी भी क्यों न हो हमारे ऄनभभावकों की यह आच्छा होिी है नक हमारे बच्चे ईच्चिम् से ईच्चिम् नर्खर पर पहुचं े |यनद हम ऄपना ध्यान राष्रीय पाठ्यचयाश,( 2005 ) पर आनं गि करिे हैं Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
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िो बच्चों के र्ैनक्षक मल्ू यांकन में यह बाि कही गयी है नक भारिीय नर्क्षा में मल्ू यांकन र्धद परीक्षा, िनाव और दनु िंिा से जड़ु ा हुअ है....नर्क्षा का सरोकार एक साथशक व ईत्पादन जीवन की िैयारी से होिा है और मल्ू यांकन अिोचनात्मक प्रनिपनु ष्ट देने का िरीका होना चानहए| र्ैनक्षक ईपिनधध की वृनि के चक्कर में हमारी नर्क्षा प्रणािी अज भी रिंि पिनि को जन्म देिी है
| जैसे नक
पॉि फ्रेरे द्वारा निनखि ईत्पीनड़िों का नर्क्षार्ास्त्र में वे कहिे हैं नक नर्क्षक छात्रों को पात्र या बिशन बना देिे हैं, नजन्हें नर्क्षक द्वारा भरा जाना होिा है | जो आन पात्रों को नजिना ज्यादा भर सके वह ईिना ही ऄच्छा नर्क्षक है | जो नजिने दधबपू न के साथ स्वयं को भरने दे, वे ईिने ही ऄच्छे छात्र हैं | आस प्रकार नर्क्षा बैंक में पैसा जमा करने के भानं ि छात्रों में ज्ञान रानर् जमा करने का माध्यम बन जािी है, नजसमें नर्क्षक जमाकिाश होिा है और छात्र जमादार (नर्पोनजिरी) होिे हैं | शोध उद्देश्य 1. कक्षा 7 के नवद्यानथशयों की र्ैनक्षक ईपिनधध का ऄध्ययन करना | 2. नवद्यानथशयों की ऄनभभावकीय अकांक्षा का ऄध्ययन करना | 3. ग्रामीण एवं र्हरी नवद्यानथशयों की र्ैनक्षक ईपिनधध का िि ु नात्मक ऄध्ययन करना | 4. ग्रामीण एवं र्हरी ऄनभभावकों के बच्चों की र्ैनक्षक ईपिनधध सम्बनन्धि अकांक्षा का िि ु नात्मक ऄध्ययन करना | 5. नवद्यानथशयों की र्ैनक्षक ईपिनधध एवं ईनके ऄनभभावकों की अकांक्षा के मध्य सम्बन्ध का ऄध्ययन करना | शोध भवभध यह र्ोध नमनिि नवनध पर अधाररि है | नजसमे वणशनात्माक ऄनसु न्धान का प्रयोग नकया गया है | जहााँ हम ऄनभभावकीय अकाक्ष ं ा के अधार पर नवद्यानथशयों की ईपिनधध का ऄध्ययन नकये हैं साथ ही साथ हम गणु ात्मक अकंड़ों को भी एकनत्रि नकये हैं, नजससे यह जानने का प्रयास नकया गया नक ऄनभभावकों की अकांक्षा नवद्यानथशयों की र्ैनक्षक ईपिनधध को कै से प्रभानवि करिी है?
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जनसख् ां या प्रस्ििु ऄध्ययन में र्ोधकिाश द्वारा जनसंख्या के रूप में महाराष्र राज्य के वधाश नजिे के र्हरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के नवद्यानथयों को निया गया है और आन्हीं नवद्यानथशयों के ऄनभभावकों को जनसंख्या के रूप में र्ानमि नकया गया है| न्यादशश न्यादर्श के रूप में ऄग्रगामी हाइस्कूि नपपरी मेघे के 64 नवद्यानथशयों को निया गया है जो कक्षा 8 में पढिे है और आनके ही ऄनभभावकों को र्ानमि नकया गया है | प्रयुक्त उपकरण प्रस्ििु ऄध्ययन में अक ं ड़ों के सग्रं हण के निए र्ोधकिाश द्वारा आस ईद्देश्य हेिु
ऄनभभावकीय अकाक्ष ं ा से
सम्बंनधि स्वनननमशि प्रश्नाविी का ननमाशण नकया गया । प्रश्नाविी में र्ैनक्षक ईपिनधध से सम्बंनधि साि प्रश्न , ऄनभभावकीय अकांक्षा से सम्बंनधि ऄट्ठारह प्रश्न एवं पाठ्यसहगामी निया से सम्बंनधि अठ प्रश्नों का ननमाशण नकया गया है | नवद्यानथशयों की र्ैनक्षक ईपिनधध के अकिन हेिु कक्षा 7 पास के स्कोर कार्श का प्रयोग नकया गया है | अध्ययन के पररणाम एवां व्याख्या
उद्देश्य 1: कक्षा 7 के भवद्याभथशयों की शैभक्षक उपलभधध का अध्ययन करना | ग्रामीण/शहरी भवद्याभथशयों की सांख्या व उसका प्रभतशत प्रभतशत रेंज
ग्रेड
ग्रामीण भवद्याभथशयों की सख् ां या
शहरी भवद्याभथशयों की सख् ां या
प्रभतशत (ग्रामीण)
प्रभतशत (शहरी)
91-100 81-90 71-80 61-70 51-60 41-50
A1 A2 B1 B2 C1 C2
0 9 7 12 4 1
1 8 12 6 4 0
0 27 21 36 12 4
4 26 39 19 12 0
33
31
100
100
कुल
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ग्रामीण एवां शहरी भवद्याभथशयों की उपलभधध A1 ग्रेर् प्राप्त करने वािे ग्रामीण नवद्यानथशयों की संख्या नगण्य है एवं 4 प्रनिर्ि र्हरी नवद्यानथशयों ने A 1 ग्रेर् प्राप्त नकये हैं | 27 प्रनिर्ि ग्रामीण और 26 प्रनिर्ि र्हरी नवद्यानथशयों ने A2 ग्रेर् नकया है | नजससे हम यह कह सकिे हैं नक A2 ग्रेर् प्राप्त करने वािे ग्रामीण एवं र्हरी नवद्यानथशयों में के वि 1 प्रनिर्ि का ऄिं र है | 21 प्रनिर्ि ग्रामीण एवं 39 प्रनिर्ि र्हरी नवद्यानथशयों ने B 1 ग्रेर् प्राप्त नकया है, जहााँ 18 प्रनिर्ि का ऄिं र दृनष्टगोचर होिा है | 36 प्रनिर्ि ग्रामीण एवं 19 प्रनिर्ि र्हरी नवद्यानथशयों ने B 2 ग्रेर् प्राप्त नकया है यहााँ दोनों नवद्यानथशयों में मध्य प्रनिर्ि का ऄिं र है | C 1 ग्रेर् प्राप्त करने वािे ग्रामीण एवं र्हरी नवद्यानथशयों की सख्ं या
17
समान है जहााँ दोनों
भागीदारी 12 -12 प्रनिर्ि है | C2 ग्रेर् मात्र एक ग्रामीण नवद्याथी ने प्राप्त नकया है जबनक कोइ भी र्हरी नवद्याथी C2 ग्रेर् नहीं प्राप्त नकया है | यहााँ हम यह देखिे हैं नक ग्रामीण एवं र्हरी नवद्यानथशयों की ईपिनधध में कोइ नवर्ेष ऄिं र नहीं है यहााँ दोनों क्षेत्र के नवद्यानथशयों ने ऄपनी ईपिनधध में ऄच्छा ननष्पादन नकया है | उद्देश्य 2: भवद्याभथशयों की अभििावकीय आकाांक्षा का अध्ययन करना | ग्रामीण एवां शहरी अभििावकों की आकाक्ष ां ा ऄनभभावकीय अकांक्षा से पिा चिा नक ऄनधकांर् ऄनभभावक ऄपने बच्चे को र्ॉक्िर, आजं ीननयर, एवं अइ.ए.एस एवं पी.सी.एस .ही बनाना चाहिे हैं | बहुि ही नाम मात्र के ऄनभभावक नमिे जो ऄपने बच्चे की रूनच एवं क्षमिा के ऄनसु ार मागशदर्शन करिे हैं | यह हमारे समाज की नवर्म्बना है नक सारे ऄनभभावक ऄपनी अकांक्षा को ऄपने बच्चों के उपर थोपिे हैं | साथ ही साथ हम यह कह सकिे हैं नक ऄगर समाज का प्रत्येक व्यनि ऄपने बच्चों को र्ॉक्िर , आजं ीननयर एवं अइ.ए.एस. ही बनाना चाहेगा िो समाज का ऄन्य कायश कै से होगा | र्ोधाथी के एक प्रश्न में सगं ीिज्ञ/ किाकार / निशक /नखिाड़ी का नवकल्प था नजसमें यह पछू ा गया था नक ऄगर अप का बच्चा ईपयशि ु नवकल्प का चयन करिा है , िो अप यह बाि पसदं करेंगे िो प्रश्न के जबाब में नाम मात्र के ही ऄनभभावकों को यह बाि पसंद अइ | जब र्ोधाथी दसू री बार क्षेत्र में सबसे कम अकांक्षा वािे एवं सबसे ज्यादा अकांक्षा प्राप्तांक वािे ऄनभभावकों से नमिा और पछू ा नक अप ऄपने बच्चे को संगीिज्ञ /किाकार/ निशक/ नखिाड़ी/ क्यों नहीं बनाना चाहिे हैं िो ईन्होंने जबाब नदया नक नजनके बच्चे पढाइ- निखाइ में ऄच्छे नहीं होिे हैं वे आन सभी चीजों में रुनच िेिे हैं | मात्र एक ऄनभभावक का नवचार ऄन्य ऄनभभावकों के नवचार से ऄिग Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
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था वह ऄपने बच्चे को प्रकृ नि से सम्बंनधि र्ोध कायश करवाना चाहिे थे और एक ऄन्य ऄनभभावक थे जो ऄपने बच्चे को ऄच्छा नागररक,नेक इमानदार आसं ान, गरीब एवं नवकिागों की सेवा हेिु देखना चाहिे थे | कुछ ऐसे भी ऄनभभावक थे जो ऄपने बच्चे को आजं ीननयर ही बनाना चाहिे थे परन्िु ईनके बच्चों का र्ैक्षनणक ररकॉर्श नबिकुि ही ऄच्छा नहीं था जो ऄपने परीक्षा में C2 ग्रेर् से ईत्तीणश हुए थे | उद्देश्य 3: ग्रामीण एवां शहरी भवद्याभथशयों की शैभक्षक उपलभधध का तुलनात्मक अध्ययन करना | H01: ग्रामीण एवां शहरी भवद्याभथशयों की शैभक्षक उपलभधध में कोई साथशक अांतर नहीं है | ग्रामीण एवां शहरी भवद्याभथशयों की शैभक्षक उपलभधध हेतु ताभलका िर
माध्य
मानक भविलन
N
df
t-मान
ग्रामीण
71.86
10.79
33
62
1.99*
शहरी
73.93
9.99
31
*साथकश ता स्तर 0.05 हमारे र्ोध पररणाम में ग्रामीण एवं र्हरी नवद्यानथशयों की र्ैनक्षक ईपिनधध में कोइ साथशक ऄिं र नहीं है ऄथाशि् हम कह सकिे हैं नक ग्रामीण एवं र्हरी नवद्यानथशयों की र्ैनक्षक ईपिनधध एक समान है | जबनक पवू शविी र्ोध पररणाम हमारे र्ोध पररणाम से नभन्न है | जोर्ी और िीवास्िव ( 2009) ने ऄपने र्ोध पररणाम में पाया नक र्हरी एवं ग्रामीण नकर्ोरों की र्ैनक्षक ईपिनधध के बीच साथशक ऄिं र है | र्हरी नकर्ोर ग्रामीण नकर्ोरों के ऄपेक्षा ज्यादा ऄक ु ना में नकर्ोरों का अत्म सम्मान उाँचा पाया गया र्ैनक्षक ं हानसि नकये | नकर्ोररयों की िि ईपिनधध में निंगीय भेद पाया गया | नकर्ोरों की िि ु ना में नकर्ोररयों की र्ैनक्षक ईपिनधध साथशक रूप से उाँची पाइ गयी | हमारा र्ोध पररणाम पवू शविी र्ोध पररणामों से आसनिए नभन्न हैं क्योंनक अज के समाज में प्रत्येक वगश के िोग पढाइ के प्रनि जागरूक हो गए हैं, चाहे वे ग्रामीण हों या र्हरी हों अजकि सचू ना एवं ऄनदु ेर्न िकनीकी का नवस्िार धीरे - धीरे र्हरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में समान रूप से होने िगा है, आस भौगोनिकरण के यगु में प्रत्येक मािा –नपिा की ऄपने बच्चों से ईत्कृ ष्टिा की ईम्मीदें बढिी जा रही हैं, आसनिए वे ऄपने बच्चों को ऄच्छे से ऄच्छे स्कूि में दानखिा नदिाना चाहिे हैं, ईनकी ईनचि देखभाि करिे हैं, गृहकायश में मदद करिे हैं, पस्ु िक मेिा, नवज्ञान प्रदर्शनी एवं र्ैनक्षक भ्रमण में िे जाना, र्ैनक्षक सीर्ी देखने का ऄवसर प्रदान करवािे हैं | आस िरह से हम देखिे हैं नक अजकि के नवद्याथी चाहे वे ग्रामीण हो या र्हरी ऄनभभावक ईनके प्रत्येक Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
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र्ैनक्षणक कायश में सहायिा करिे हैं यनद ग्रामीण ऄनभभावक ऄपने बच्चों की पढाइ- निखाइ में स्वयं सहायिा नहीं कर पािे हैं िो वे होम ि्यर् ू न िगािे हैं, ईनकी यही अकांक्षा रहिी है नक मेरा बच्चा पढ-निखकर एक महान आसं ान बने | दसू री ओर हम देखिे है अज कि समावेर्ी एवं एकीकृ ि नर्क्षा का नवस्िार िेजी से हो गया है, नजससे हमारे नदव्यांग बच्चों को भी नकसी प्रकार की समस्या नहीं हो रही है, राष्रीय नर्क्षा नीनि, 2015 में नीचे से उपर बढने की नीनि ऄपनाइ गइ है, नजससे समदु ाय की चचाश/ बहस, प्रनिभानगिा अरम्भ होिी है | आस नीनि की यह ऄनठू ी नवर्ेषिा है और नीनि ननमाशिाओ ं को समदु ाय की नचिं ा एवं वस्िु नस्थनि समझाने हेिु िथा नीनिगि ढाचा में आन मद्दु ों को पयाशप्त रूप से र्ानमि करने हेिु प्रनिभानगिा वािा दृनष्टकोण अवश्यक था | समावेर्ी नर्क्षा पर राष्रीय नर्क्षा नीनि 2015 आस प्रयास में सफि है | राष्रीय नर्क्षा नीनि, 2015 ने नर्क्षा व्यवस्था के सभी ऄगं ों में नवकिांगिा को र्ानमि नकया है चाहे नर्क्षा में प्रवेर् हो, नर्क्षण की रणनीनियां हों, पठन सामग्री हो, मल्ू यांकन व्यवस्था हो, अभासी नर्क्षा माध्यम हो | (योजना, मइ 2016) आस प्रकार से हम देखिे हैं नक अज हमारे समाज की र्ैनक्षक नवषमिाओ ं को कम करने के निए हमारी अधनु नक नर्क्षा प्रणािी ननदानात्मक एवं ईपचारात्मक नर्क्षण, संरचनावादी ईपागम, स्मािश क्िास,सचू ना एवं जनसंचार िकनीकी और साथ ही साथ संनवधान का 73वााँ व 74वााँ संर्ोधन स्थानीय समदु ायों को ऄपने बच्चों के निए नर्क्षा में ननणशय िेने की प्रनिया में भाग िेने के निए एक वैधाननक संस्थागि ऄवसर महु यै ा करवािा है जो एक महत्त्वपणू श बदिाव है | उद्देश्य - 4: ग्रामीण एवां शहरी अभििावकों के बच्िों की शैभक्षक उपलभधध सम्बांभधत आकाांक्षा का तुलनात्मक अध्ययन करना | H02: ग्रामीण एवां शहरी अभििावकों के बच्िों की शैभक्षक उपलभधध सम्बांभधत आकाांक्षा के मध्यमानों में कोई साथशक अांतर नहीं है | ताभलका: ग्रामीण एवां शहरी अभििावकों के बच्िों की शैभक्षक उपलभधध सम्बभां धत आकाक्ष ां ाहेतु ताभलका िर
माध्य
ग्रामीण 57.24 शहरी 58.84 *साथकश ता स्तर 0.05
मानक भविलन
N
df
t-मान
6.36 3.96
33 31
62
2.05*
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यहााँ t-मान 2.05 और df 62 है | यह मल्ू य ‘t’ िानिका के 0.05 स्िर के मल्ू य से ज्यादा है | आसनिए ‘t’ प्राप्तांक मल्ू य साथशक होने की वजह से र्न्ू य पररकल्पना ऄस्वीकृ ि की जािी है | आससे यह स्पष्ट होिा है नक ग्रामीण एवं र्हरी ऄनभभावकों के बच्चों की र्ैनक्षक ईपिनधध सम्बंनधि अकांक्षा में वास्िव में ऄिं र है | मध्यमानों को देखने से यह ज्ञाि होिा है नक र्हरी ऄनभभावकों की ईपिनधध अकांक्षा सम्बंनधि मध्यमान (58.84) िथा ग्रामीण ऄनभभावकों का ईपिनधध अकांक्षा सम्बंनधि मध्यमान (57.24 ) है | ऄिः हम कह सकिे हैं नक र्हरी ऄनभभावकों की अकाक्ष ं ा ग्रामीण ऄनभभावकों की अकाक्ष ं ा से उाँची है | यहााँ पर हम ग्रामीण एवं र्हरी ऄनभभावकों की अकाक्ष ं ा के मानक नवचिन को देखिे हैं िो दोनों में 2.4 का ऄिं र नदखाइ देिा है, नकन्िु माध्य में 1.6 का ऄिं र नदखिा है | जबनक िानिका मल्ू य देखने से पिा चििा है नक साथशक रूप से ऄिं र है | पवू शविी र्ोध पररणाम भी हमारे र्ोध पररणाम के ही समान है | यामामोिो और होिोवे (2010) ने ऄपने र्ोध र्ीषशक ‘ऄनभभावकीय अकांक्षा और बच्चों की ऄकादनमक ननष्पनत्त का सामानजक सांस्कृ निक सन्दभश’ में ऄध्ययन नकया नजसमें एनर्यन ऄमेररकन ऄनभभावकों की अकांक्षा वगीय समहू (Racial/ Ethnic ) के ऄनभभावकों से उाँची थी | जैकब और हावे (2005) ने ऄपने र्ोध पररणाम में यह पाया नक ईच्च िेणी के नवद्यािय में पढने वािे नवद्यानथशयों के ऄनभभावकों की अकांक्षा साथशक रूप से औसि िेणी के नवद्यािय में पढने वािे नवद्यानथशयों की ऄनभभावकीय अकांक्षा से उाँची पाइ गयी और ईच्च िेणी के नवद्यािय में पढने वािे नवद्यानथशयों के ऄनभभावक ऄपनी अकांक्षा िम्बे समय िक बनाये रखिे हैं | गॅनिक और व्हाआि (2004) ने ऄपने र्ोध में एनर्यन ऄनभभावकों और िेनिनो ऄनभभावकों की अकांक्षा का िि ु नात्मक ऄध्ययन नकया | नजसमे ईन्होंने ने एनर्यन ऄनभभावकों की अकांक्षा िेनिनो ऄनभभावकों की अकाक्ष ं ा से उाँची पाया | उद्देश्य 5: भवद्याभथशयों की शैभक्षक उपलभधध एवां उनके अभििावकों की आकाांक्षा के मध्य सहसम्बन्ध का अध्ययन करना | H02: भवद्याभथशयों की शैभक्षक उपलभधध एवां उनके अभििावकों की आकाांक्षा के मध्य कोई सहसम्बन्ध नहीं है |
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साथशक
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ताभलका :भवद्याभथशयों की शैभक्षक उपलभधध एवां उनके अभििावकों की आकाक्ष ां ा के मध्य सहसम्बन्ध हेतु ताभलका िर (Variable) सख् ां या (N) भवद्याथी एवां 128 अभििावक * 0.05 स्िर पर ‘r’ का मान = 0.174
सहसबां ध ां (r) 0.347
मक्त ु ाश ां (df ) 126
नवद्यानथशयों की र्ैनक्षक ईपिनधध एवं ईनके ऄनभभावकों की अकांक्षा के मध्य सहसम्बन्ध ‘r’ = 0.347 एवं df 124 है | यह ‘r’ िानिका के 0.05 स्िर से ज्यादा है | आसनिए ‘r’ का मल्ू य साथशक होने की वजह से पररकल्पना ऄस्वीकृ ि हो जािी है | ऄिः यह स्पष्ट होिा है नक नवद्यानथशयों की र्ैनक्षक ईपिनधध एवं ईनके ऄनभभावकों की अकांक्षा के मध्य ननम्न स्िर का सहसबं धं है | नकन्िु पवू शविी र्ोध पररणाम हमारे र्ोध पररणाम से नबिकुि नभन्न है नजसे हम देख सकिे हैं | जैकब (2010) ने ऄपने र्ोध में पाया नक जो मािा - नपिा कॉिेज के बारे में जानकारी रखिे है एवं बच्चों का घर एवं घर के बाहर ध्यान देिे हैं गृह कायश में मदद करिे है ईन बच्चों की र्ैनक्षक ईपिनधध उाँची होिी है | Glick और White (2004) ने ऄपने र्ोध में एनर्यन ऄनभभावकों और िेनिनो ऄनभभावकों की अकांक्षा का िि ु नात्मक ऄध्ययन नकया | नजसमे ईन्होंने एनर्यन ऄनभभावकों की अकांक्षा िेनिनो ऄनभभावकों की अकांक्षा से उाँची पाया| फे न और चेन (2001) ने ऄपने ऄध्ययन में ऄनभभावकीय अकांक्षा और र्ैनक्षक ईपिनधध के बीच मजबिू सहसंबंध पाया और यहााँ r .60 के बीच देखने को नमिा | नसंह (1996) ने ऄपने ऄध्ययन में पाया नक उाँची सामानजक अनथशक नस्थनि और र्ैनक्षक ईपिनधध में धनात्मक सहसम्बन्ध होिा है | ऄिः हम कह सकिे हैं नक अजकि के नवद्याथी स्व ऄनभप्रेररि होिे हैं | ऄनभभावकों की अकांक्षा का ईनके उपर कोइ प्रभाव नहीं पड़िा है | नजसका कारण नवद्याियी वािावरण, समाज, पाररवाररक वािावरण एवं सचू ना एवं ऄनदु ेर्न िकनीकी हो सकिी है |
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शैभक्षक भनभहताथश ऄनभभावकों को व्यनिगि नभन्निा का ध्यान रखिे हुए प्रत्येक बच्चे से एक समान र्ैनक्षक ईपिनधध की अकांक्षा नहीं करना चानहए | बच्चों की क्षमिा एवं रुनच के ऄनसु ार ईनके कै ररयर चनु ाव की स्विंत्रिा देना चानहए | हमें प्रत्येक बच्चे से र्ॉक्िर, आजं ीननयर, एवं अइ.ए.एस बनने की ऄपेक्षा नहीं करना चानहए | ऄनभभावकों को हमें परामर्श देना चानहए िानक वे ऄपने बच्चों की िि ु ना ऄन्य बच्चों से न करें | स्कूि स्िर पर कै ररयर चनु ाव के निए व्यवसानयक ननदेर्न की व्यवस्था होनी चानहए | दसू री ओर हम देखिे हैं नक र्ैनक्षक ईपिनधध की वृनि के चक्कर में अज भी हमारी नर्क्षा प्रणािी रिंि पिनि को जन्म दे रही है | आसके निए हमें सरं चनावादी ईपागम से ऄध्ययन ऄध्यापन पर जोर देना चानहए | ऄगर हमारा बच्चा परीक्षा में कम ऄक ं िािा है िो हमें र्ािना नहीं चानहए बनल्क ऄगिी बार ऄच्छे करने के निए ईसका ईत्साहवधशन करना चानहए | नवद्यािय में ननदानात्मक एवं ईपचारात्मक नर्क्षण की व्यवस्था होनी चानहए | नदव्यांग बच्चों को भी हमें ऄपने स्कूि में अत्मसाि करना चानहए | व्यनि नकसी भी स्थान पर हो, नकसी भी ईम्र का हो, स्त्री हो या परुु ष ऄथवा नवकिांग हो, प्रत्येक जीवन की एक योजना है, एक ईद्देश्य है, एक मल्ू य है | यह स्वीकार करने की अवश्यकिा है नक नवकिांग व्यनि सवाशनधक प्रेरणास्पद व्यनि होिे हैं | ईन्हें समान ऄवसर देना चानहए और ऄपनी ऄिग क्षमिाओ ं के साथ वे सामान्य व्यनियों से ऄनधक र्ानिर्ािी िथा क्षमिावान नसि होंगे और यनद हम सभी आसे स्वीकार कर िेिे है िो समाज में पररविशन हो सकिा है | ऄिं िः आस र्ोध ऄध्ययन से ननष्कषश अिा है नक हमें ऄनभभावकों को परामर्श देने की अवश्किा है एवं ऄध्ययन- ऄध्यापन की प्रणािी में सधु ार िाने की अवश्किा है |
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