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प्रथम विश्व युद्ध के कारण और परिणाम

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प्रथम विश्व युद्ध के कारण और परिणाम

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 Harshit Tiwari  4:09 Pm

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By Harshit Tiwari स्वागत है आपका मेरे इस लेख में इस लेख में मैं आपको प्रथम विश्व युद्ध और प्रथम विश्व युद्ध के कारण को बताने वाला हूं प्रथम विश्व युद्ध ने पूरे विश्व को झकझोर के रख दिया था और आज इस लेख में मैं आपको प्रथम विश्व युद्ध से जुड़ी सारी जानकारी को share करने वाला हूं तो कृ पया इस लेख को आप पुरा पढ़ें।

प्रथम विश्व युद्ध

प्रथम विश्व युद्ध इतिहास में हुए खतरनाक युद्धों में से एक था। प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत 28 जुलाई 1914 को हुआ था और समाप्त 11 नवंबर 1918 को हुआ था। प्रथम विश्व युद्ध को ग्रेट वार और ग्लोबल वार भी कहा जाता है। इस युद्ध में देश दो पक्षों में बंट गया था जो मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र था। मित्र राष्ट्र के पक्ष में रूस, अमेरिका, इंग्लैंड और जापान जैसे देश थे वहीं धुरी राष्ट्र में ऑस्ट्रिया, जर्मनी और इटली जैसे देश शामिल थे। यह युद्ध चार वर्षों से भी अधिक समय तक चला था। प्रथम विश्व युद्ध के कारण बहुत से लोगों की मृत्यु हो गई थी। बहुत से राष्ट्र अपने विस्तार के लिए प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हुए थे। इन्हें भी पढ़ें - इतिहास के प्रमुख युद्ध ऐसा कहा जाता था कि प्रथम विश्व युद्ध के कारण सभी युद्धों की समाप्ति हो जायेगी लेकिन दुर्भाग्यवश वैसा नहीं हुआ अतः इसके बाद भी विश्व को द्वितीय विश्वयुद्ध जैसे खतरनाक युद्धों का सामना करना पड़ा।

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युद्ध में लड़ते हुए सैनिक

प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत कै से हुई? सर्बिया और ऑस्ट्रिया हंगरी के बीच आपसी संबंध बिल्कु ल भी ठीक नहीं था जिसका परिणाम यह हुआ कि 28 जून 1914 को सर्बिया ने ऑस्ट्रिया हंगरी के उत्तराधिकारी को सर्बिया के आर्क ड्युक फ्रांज़ फर्डिंनेंड की हत्या कर दिया जिसके बाद ऑस्ट्रिया क्रोध से आग बबूला हो उठा उसके बाद ऑस्ट्रिया ने सर्बिया को कु छ शर्तों को मानने के लिए पत्र भेजा लेकिन सर्बिया ने इसे इंकार कर दिया जिसके बाद ऑस्ट्रिया और भी ज्यादा आग बबूला हो उठा और अंततः ऑस्ट्रिया ने सर्बिया के विरुद्ध युद्ध करने का निश्चय किया । इस युद्ध में बहुत से लोगों की जान चली गई। इस प्रकार प्रथम विश्व युद्ध के रूप में विश्व को बहुत सारे मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

प्रथम विश्व युद्ध में किन देशों की जीत हुई थी ? जैसा कि आपने पढ़ा कि प्रथम विश्व युद्ध दो पक्षों मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र में विभाजित था जिसमें मित्र राष्ट्र की ओर से इंग्लैंड, अमेरिका और रूस आदि देश थे और धुरी राष्ट्र की ओर से जर्मनी और ऑस्ट्रिया आदि देश थे। इन दोनों पक्षों की ओर बहुत खतरनाक युद्ध हुआ जिसमें मित्र राष्ट्र के देशों ने धुरी राष्ट्र को हरा दिया जिससे जर्मनी और ऑस्ट्रिया को आत्मसमर्पण करना पड़ा जिससे 11 नवंबर 1918 को प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति हुई।

प्रथम विश्व युद्ध के कारण सत्ता की लालच सत्ता की लालच यह भी प्रथम विश्व युद्ध होने का एक प्रमुख कारण था। प्रथम विश्व युद्ध के पहले देशों के बीच सत्ता हासिल करने की लालच मन में आ गया था एक देश दूसरे देश को दबाने की कोशिश कर रहे थे जिससे देश अपना विस्तार और विकास कर सके । उस समय उपनिवेशवाद की भावना देशों के बीच पनपने लगी थी जिससे देशों के बीच आपसी संबंध ठीक नहीं रहने लगे और ऐसी सोच और विचार ने विश्व युद्ध जैसे महामारी को पनपने का मौका दिया।

औधोगिकरण को तीव्र रखने की होड़ धीरे धीरे औधोगिकरण भी फै लने लगा था जिसमें देश अपने औधोगिकरण की प्रक्रिया को तेज रखना चाहते थे जिससे औधोगिकरण विश्व में तेजी से फै ल रहा था और जो देश विकसित हो चुके थे उन्होंने औधोगिकरण में उपयोग किये जाने वाले संसाधनों का भरपूर उपयोग कर लिया था जिससे उनके संसाधन खत्म हो चुके थे जबकि वैसे देशों के पास बहुत ज्यादा संसाधन मौजूद थे जो अभी विकसित नहीं हुए थे इस कारण

11:35 Am


उन देशों के पास संसाधनों का उपयोग भी नहीं हो रहा था क्योंकि उन देशो में औधोगिकरण की प्रक्रिया तेज नहीं थी इसलिए उन देशों के पास बहुत संसाधन थे और संसाधन की लालच में ही एक देश दूसरे देशों को दबाना चाहने लगे जिससे देशों के बीच युद्ध की भावना जागरुत हुई।

जर्मनी की नई विकासशील नीति सम्राट विल्हेम द्वितीय जो जर्मनी का एक महान सम्राट था जिसने 1890 में एक नई अंतर्राष्ट्रीय नीति अपनाने का प्रयास किया जिसमें जर्मनी के विकास और विस्तार के लिए नई नीति लागू करने का सोचा इसे बाकि देशों ने इसे एक नकारात्मक दृष्टि से देखा और सोचा कि यदि जर्मनी अपने को विकसित या शक्तिशाली कर लेगा तो यह अन्य देशों के लिए खतरा बन जायेगा और ऐसी सोच विचार और भावनाओं ने आपसी संबंध को बिगाड़ के रख दिया जिससे अंतर्राष्ट्रीय देशों के बीच संबंध ठीक नहीं रहने लगी।

परस्पर रक्षा सहयोग कई देशों के बीच में रक्षा को लेकर कु छ संधियाँ हुई जिसका अर्थ यह है कि रक्षा के बदले रक्षा मतलब उदाहरण के लिए यदि अमेरिका की रक्षा संधि रूस के साथ हुई है तब यदि कोई देश अमेरिका पर हमला या कब्जा करना चाहता है तब रूस का कर्तव्य बनता है कि वह अमेरिका का साथ दे और अमेरिका का रक्षा करे और इसी प्रकार रूस का भी अमेरिका के प्रति कर्तव्य बनता है। ऐसी नीति ने अंतराष्ट्रीय संबंध को बिगाड़ देने का कार्य किया।

सम्राज्यवाद उस समय अफ़्रीका का क्षेत्र बहुत ही ज्यादा बड़ा था जिसके लालच में सभी देश अफ़्रीका पर कब्जा कर रहे थे जिससे उनके सीमा क्षेत्र का विस्तार हो । फ्रांस और जर्मनी आदि देश अफ़्रीका के क्षेत्रों पर कब्जा कर रहे थे। ब्रिटेन उस समय बहुत ही ज्यादा शक्तिशाली और विकसित देश था इसी कारण इन देशों का नेतृत्व ब्रिटेन कर रहा था । यह भी प्रथम विश्व युद्ध का कारण बना।

राष्ट्रवाद देशों में रहने वाले लोगों के मन में राष्ट्रवाद की भावना जगने लगी और वे अपने देश के क्षेत्रफल के विस्तार के लिए युद्धों में शामिल होने लगे और ऐसी सोच लेकर शामिल हुए कि हम युद्ध को जीतकर अपने देश का विस्तार करेंगे और अपने देश को शक्तिशाली बनाएंगे। ऐसी सोच, विचार और भावनाओं ने प्रथम वि​िश्व युद्ध को बढ़ावा दिया।

सैन्यवाद 20वीं सदी के शुरुआत में ही औजारों और हथियारों को ज्यादा महत्व दिया जाने लगा जिसके फलस्वरूप लगभग सभी देश में सैन्य शक्ति को मजबूत और हथियारों के निर्माण की प्रक्रिया को तेज रखने की सोच उत्पन्न हो गया जिससे देशों के मध्य इसको लेकर प्रतियोगिता छिड़ गई।

कोई प्रभावशाली संस्था न होना प्रथम विश्व युद्ध के पहले अंतराष्ट्रीय स्तर पर ऐसा कोई भी संस्था या संगठन नहीं था जो युद्धों का समझौता कर सके और देशों के गतिविधियों पर नियंत्रण कर सके । प्रभावशाली संस्था न होने के कारण देशों के अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं हो सकने लगा । देश अपनी मनमानी करने लग गए जिससे अंतराष्ट्रीय स्थिति बिगड़ने लगी जिसके कारण विश्व को विश्व युद्ध जैसी महामारी को झेलना पड़ा।

आर्क ड्युक फ्रांज़ फ़र्डिनेंड की हत्या यह प्रथम विश्व युद्ध के कारण में मुख्य कारण है। 28 जून 1914 में ऑस्ट्रिया के राजकु मार आर्क ड्युक फ्रांज़ फ़र्डिनेंड की हत्या सर्बिया के लोगों द्वारा कर दिया गया जिसके कारण ऑस्ट्रिया क्रोधित हो गया और उसने सर्बिया को पत्र लिखकर कु छ शर्तों को मानने को कहा लेकिन सर्बिया ने इसे खारिज यानि इंकार कर दिया जिससे ऑस्ट्रिया क्रोध से आग बबूला हो गया और उसने युद्ध की घोषणा कर दिया।

प्रथम विश्व युद्ध के परिणाम प्रथम विश्व युद्ध ने विश्व को झकझोर के रख दिया। प्रथम विश्व युद्ध के परिणाम निम्न थे -

सामाजिक परिणाम प्रथम विश्व युद्ध का परिणाम यह था कि इससे महिलाओं की सामाजिक स्थिति में सुधार हुआ। महिलाओं की सामाजिक स्तर पर विकास हुआ। शिक्षा का भी विकास हुआ लेकिन लोगों की भारी संख्या में जान भी चली गई।

आर्थिक परिणाम


प्रथम विश्व युद्ध ने विश्व को आर्थिक दृष्टि से भी बहुत नुकसान पंहुचाया जिसके परिणाम स्वरूप देशों में बेरोजगारी बढ़ने लगी और वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि होने लगी जिससे विश्व को आर्थिक दृष्टि से भी बहुत नुकसान हुआ।

राजनीतिक परिणाम प्रथम विश्व युद्ध का राजनीतिक परिणाम यह था कि इससे प्राचीन सम्राटों का राजशाही पद समाप्त हो गया अर्थात राजतंत्र समाप्त हो गया और जन तंत्र की स्थापना किया गया। यूरोप में गणतंत्रामक व्यवस्था लागू किया गया और यूरोप के कु ल 11 देशों में गणतंत्रामक शासन व्यवस्था की स्थापना किया गया इन 11 देशों में रूस, पोलैंड, ऑस्ट्रिया और जर्मन आदि देश थे।

प्रथम विश्व युद्ध में भारत की भूमिका प्रथम विश्व युद्ध में भारत की भूमिका भी अहम थी क्योंकि भारतीय ब्रिटिश के तरफ से लड़ने के लिए भेजा और ब्रिटिश को प्रथम विश्व युद्ध में सहायता प्रदान किया। इन्हें भी पढ़ें - मुगल साम्राज्य - विस्तार से इन्हें भी पढ़ें - दिल्ली सल्तनत

अंतिम शब्द आशा करते हैं कि प्रथम विश्व युद्ध के कारण और परिणाम का एक विस्तारित लेख आपको पसंद आया होगा यदि आपके मन में प्रथम विश्व युद्ध से संबंधित कोई Doubt है तो आप मुझसे कॉमेंट करके पूछ सकते हैं मैं आपको आपके Doubt को दूर करने का पुरा प्रयास करूँ गा।

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प्रस्तुतकर्ता HARSHIT TIWARI

मेरा नाम हर्षित तिवारी है और मैं सीखते रहिये ब्लॉग का मालिक हूँ और मुझे पढ़ाना बहुत अच्छा लगता है। साथ ही मुझे लोगों का मदद करना अच्छा लगता है।

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