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Timeline : 2006-2009 Characters & Series – Doga, Anthony, Thrill Horror Suspense, Tilismdev, Nagraj & General. Stories – Doom Platoon, Doctrine of Tilismdev, Bahut Dair Ho Gayi, Badhti Tabahi, Stunt, Detrik mey Dwand, Team & Har Har Gange. Artists – Anand Jadhav, Inderjeet Bhanoo, Sourabh, Abhishek Singh. Author – Mohit Sharma (Trendy Baba / Trendster)


1. Doom Platoon (Anthony-THS)


सन ् 1947 रूऩनगय के ऩास जॊगरों औय सभुद्र से सटे तटवती इराके भे दो फडे स्थानीम कफीरों ने ववद्रोह ककमा जजसके दभन के लरए कननर

भाकन डडकोस्टा के नेत्रत्व भे 50 सैननको वारी एक 'डूभ ऩराटून' को बेजा

गमा....उनका रक्ष्म था उस स्थान औय कफीरे भे ब्रिटटश याज को कामभ कयना. ऩय रगबग उस ही हफ्ते इॊग्रैंड की सयकाय ने बायत छोडने की अऩनी आधधकारयक घोषणा की. ऩय डूभ ऩराटून अऩने लभशन के फीच भे थी

जहाॉ उन्हें बायत की स्वतॊत्रता की जानकायी नहीॊ लभरी. अॊग्रेजो से धचढे

फाकी कफीरे बी डूभ ऩराटून को लभरकय ख़त्भ कयने भे उन दो कफीरों के साथ लभर गए. ऩराटून को उम्भीद थी की उनकी भदद के लरए

इॊग्रैंड सयकाय कुछ कये गी ऩय फडी घटनाओ के फीच मे फात दफ सी गमी औय डूभ ऩराटून के साये लसऩाही कुछ टदनों के सॊघषन के फाद भाये गए.

कुछ टदनों फाद उन तटवती इराकों भे फसे कफीरों औय जॊगरो भे अजीफ घटनामे होने रगी औय वहाॊ के साये कफीरे एक के फाद एक यहस्मभम तयीके से ख़त्भ हो गए. कुछ भहीनो फाद वहाॊ रूऩनगय से गज़ ु यती नदी की फाढ़ का ऐसा असय हुआ की वो ऩयू ा इराका जरभग्न हो गमा जो सभम के साथ धीये -धीये ठीक होता गमा. फहुत सारो फाद रूऩनगय का

ववस्ताय कयने को जगह ढूॉढ यहे उद्मोगऩनतमों औय सयकाय की नज़य उस तटवती इराके औय जॊगरो ऩय ऩडी...जॊगर के कुछ टहस्सों की कटाई

औय ननभानण का काभ शुरू हुआ.....जहाॉ हजायो भजदयू ों के साभने कपय से आई डूभ ऩराटून क्मोकक वो अबी बी ब्रिटटश सयकाय के आदे शानस ु ाय उन इराकों भे लसपन ब्रिटटश याज स्थावऩत कयना चाहते थे. हजायो


भजदयू ों भे से कुछ को भाय कय डूभ ऩराटून ने भजदयू ों भे अऩनी दहशत पैराई औय वहाॉ आई फहुत सी ननभानण साभग्री से भजदयू ों को ब्रिटटश कारीन इभायते फनाने का ननदे श टदमा. उन्होंने भजदयू ों औय उनके

भालरको भे कोई बेद-बाव नहीॊ ककमा औय सबी से फॊधवा भजदयू ी शुरू कयवामी.

क्या है डूम पलाटून *) - डूभ ऩराटून के सबी सैननक अऩनी रार वदी भे है औय उनका भुखिमा है कननर भाकन डडकोस्टा.

*) - मे सबी 1947 भे रूऩनगय के तटवती औय जॊगरी इराकों भे भय चक ु े है .

*) - इनके हधथमाय इनकी ऩयु ानी फॊदक ू े है जजनकी गोलरमाॊ कबी ख़त्भ नहीॊ होती.

*) - इस ऩराटून को इॊग्रैंड सयकाय से आदे श लभरा था की उन तटवती औय जॊगरी इराकों भे ब्रिटटश याज दोफाया स्थावऩत हो मे आज बी उस आदे श ऩय चर यहे है औय जो बी इनके यास्ते भे आएगा उसे मे भाय दें गे.

*) - मे ब्रफना थके सारो से उस इराके की यऺा कय यहे है औय ब्रिटटश सयकाय की भदद का इॊतज़ाय कय यहे है .


वरॊस के सौजन्म से मे िफय कुछ ही दे य भे एॊथोनी तक ऩहुॊची....औय एॊथोनी तॊयु त रूऩनगय के उस ननजनन इराके तक ऩहुॊचा जहाॉ आज कापी हरचर थी. एॊथोनी को डूभ ऩराटून की कहानी ऩता चरी औय उसका औय डूभ ऩराटून का सॊघषन शुरू हो गमा......मे सॊघषन अॊतहीन सा रग

यहा था....ऩय जल्द ही वरॊस की िफय ऩय वेनू उर्फन सजा बी एॊथोनी की भदद कयने आ गमी. एॊथोनी ने वेनू के नतलरस्भ की भदद से डूभ

ऩराटून को एक जगह फाॉध कय उनऩय एकसाथ ठॊ डी आग का रहाय

ककमा वो आत्भामें कुछ दे य तडऩने के फाद गामफ हो गमी. एॊथोनी को

रगा की सभस्मा सर ु झ गमी औय उसने वहाॉ पसे ही रोगो को ननकरा औय वाऩस रूऩनगय शहय के भुख्म इराकों की औय चर ऩडा.

ऩय कुछ ही सभम फाद उसे ऩता चरा की उस जॊगरी इराके के आस-

ऩास फनी रयहाइशी कॉरोननमों भे डूभ ऩराटून अऩना आतॊक भचा यही है औय वहाॉ के रोगो को ज़फयदस्ती ऩकड कय जॊगर भे अधयू े ऩडे ननभानण को फनाने.....ऐसा इसलरए हो यहा था क्मोकक उद्मोगऩनतमों औय सयकाय ने जॊगरी इराकों की कापी कटाई कयवा दी थी जजस वजह से डूभ

ऩराटून को वो कॉरोननमाॊ बी अऩने ऺेत्र का टहस्सा रगने रगी. एॊथोनी कपय वहाॉ ऩहुॊचा औय एक फाय कपय से थोडे सॊघषन के फाद डूभ ऩराटून गामफ हो गमी.....मे लसरलसरा चरता यहा. एक रडाई के दौयान एॊथोनी के मे ऩछ ू ने ऩय की सफ ख़त्भ हो जाने के इतने सार फाद बी डूभ

ऩराटून वो ऺेत्र छोड कय जाती क्मों नहीॊ तो कननर भाकन डडकोस्टा का कहना था की उन्हें ब्रिटटश सयकाय का आदे श लभरा है ......आखियकाय

फहुत सोच-ववचाय के फाद एॊथोनी टदल्री से इॊग्रैंड के दत ू ावास से कुछ ब्रिटटश अधधकायीमों को रामा औय उनसे आतॊक भचा यही डूभ ऩराटून


को मे आदे श टदरवामा की वो अफ ककसी बायतीम को ऩये शान ना कये

औय मे ऺेत्र छोड कय ऩास ही सभद्र ु भे फने छोटे से ननजनन दहरवी द्वीऩ ऩय यहे .....डूभ ऩराटून ने तुॊयत ही ब्रिटटश अधधकायीमों के आडनय का ऩारन ककमा.

....डूभ ऩराटून आज बी दहरवी द्वीऩ ऩय 19 शदाब्दी के ब्रिटटश

साम्राज्म की यऺा कय यही है ....क्मा आऩ दहरवी द्वीऩ ऩय जाना चाहें ग?े

2. Doctrine of Tilismdev


सन ् 1848 अफ के ऩव ू न उत्तय बायत के हजायो वगन भीर भे पैरे नागोय याज्म का याजा ववन्धेव तत्कालरन ईस्ट इॊडडमा कॊऩनी द्वाया बायत भे

अऩना याज पैरा यहे अॊग्रेजो औय ऩडोसी याज्मों की साजजश का लशकाय

होकय भाया गमा था. अफ याज गद्दी ऩय आसीन था उनका मव ु ा 19 वषीम ऩत्र ु जमेश..

नागोय याज्म की मे यीत थी की 25 वषन के िह्भचमन ऩारन के फाद ही

ककसी व्मजक्त का वववाह होता था. अॊग्रेजो औय ऩडोसी याज्मों को मही सही भौका रगा जमेश की हत्मा कयके नागोय याज्म हधथमाने का.

क्मोकक तफ ईस्ट इॊडडमा कॊऩनी ने 'Doctrine of lapse' की नननत अऩना यिी थी जजसके तहत अगय ककसी याज्म ऩय याज कयने वारे याजा का

कोई वारयस नहीॊ होता था उस याज्म को ईस्ट इॊडडमा कॊऩनी हधथमा रेती थी. औय जमेश का वववाह होने भे अबी 6-7 वषन रगने वारे थे. तफ

नागोय के कुछ भॊब्रत्रमों ने अऩने लभत्र औय शाॊनतवरम याज्म उल्रासनगय

जाकय वहाॉ के यऺक नतलरस्भदे व को सायी जस्थनत से अवगत कयामा औय उनसे भदद भाॊगी.

नतलरस्भदे व सभझ गए की ईस्ट इॊडडमा कॊऩनी की नीनतमाॉ सभस्त बायत के ववरूद्व है . उन्होंने ऩातार रोक भे अऩने याज्म नागरोक के सबी

सऩो को नागद्वीऩ बेजने का रफॊध ककमा.....वो चाहते थे की सारो तक बायतवषन की यऺा के दौयान कोई फयु े इयादों वारा शजक्तधायक नागरोक के अद्भत ु सऩो का गरत इस्तेभार ना कये . तफ नतलरस्भदे व नागोय की


यऺा कयने रगे. औय उन्होंने कई फाय ऩडोसी याज्मों औय अॊग्रेजो की

टुकडडमों को िदे डा..... तफ एक ऩडोसी याजा शीरनाथजो नतलरस्भदे व का

यहस्म जानता था उसके गुप्तचयों ने उसे सूचना दी की नागरोक के सबी सऩन कहीॊ ऩरामन कय यहे है ...शीरनाथ ने अऩने गुप्तचयों को ऐसे ककसी नाग से मे बेद रेने को कहा की वो कहाॉ जा यहे है .....औय जल्द ही शीरनाथ के साभने नागद्वीऩ का यहस्म िुर गमा. तफ शीरनाथ ने ववषॊधय के साथ लभर कय एक मोजना फनामीॊ. ववषॊधय ने अऩने

ववश्वासऩात्र सऩो की भदद से नागद्वीऩ भे मे िफय पैरा दी की धयती

ऩय नागो के एकछत्र एकाधधऩत्म के लरए नागरोक के साये सऩन नागद्वीऩ ऩय हभरा कयने आ यहे है ....ऩहरे तो ककसी नागद्वीऩ वासी ने इस फात

को नहीॊ भाना ऩय जफ उन्हें सभुद्र से नागद्वीऩ की तयप आते नागरोक के हजायो नागो को दे िा तो उनभे अपया-तपयी भच गमी...नागरोक के

सऩो के नागद्वीऩ ऩय आते ही नागद्वीऩ के नागो ने उन ऩय ब्रफना कोई भौका टदए हभरा कय टदमा औय दोनों दर मे सभझ कय एक दस ू ये से रडने रगे की दस ू या दर धयती ऩय नागो का एकाधधऩत्म चाहता है .

नतलरस्भदे व तक मे फात ऩहुॊची तो वे तॊयु त नागद्वीऩ ऩहुॊचे औय नागरोक व नागद्वीऩ के सऩो का घभासान रुकवामा. इस मद्ध ु भे दोनों

दरो के हजायो नाग भाये गए. तफ नतलरस्भदे व ने वहाॊ दोफाया नागो की फस्ती फसवामी.

कुछ टदनों फाद जफ नतलरस्भदे व नागोय याज्म रौटे तो उन्हें ऩता चरा

की वऩछरी ही यात उनकी अनऩ ु जस्थनत का पामदा उठाकय अॊग्रेजो औय ऩडोसी याज्मों के याजाओ ने जमेश की बी धोिे से हत्मा कय दी औय

अगरी सुफह वो अऩनी सेना के साथ नागोय याज्म को हनतमाने वारे थे.


���तलरस्भदे व मव ु ा शयू वीय याजा का भत ृ शयीय दे ि कय ववषाद भे डूफ गए. वो सभझ गए की नागरोक औय नागद्वीऩ के सऩो भे मद्ध ु कयवा कय उन्हें वहाॉ जाने ऩय भजफयू कयने की ककसी की चार थी जो उनके ना

यहने ऩय जमेश को भायना चाहता था. जमेश की भत्ृ मु की िफय अबी

नागोय की आभ जनता तक नहीॊ ऩहुॉची थी. अगरे टदन अॊग्रेज़ औय ऩडोसी याज्म के याजा अऩने दर-फर के साथ नागोय की तयप फढे .....ऩय उनका यास्ता नागोय की सीभा ऩय नागोय की सेना औय उसके याजा

जमेश ने योक लरमा. वो सफ जमेश को जजॊदा दे ि कय हतरब यह गए. कपय बी उनकी सॊमक् ु त फडी सेना ने नागोय की सेना से मद्ध ु ककमा.

जजसभे जमेश ने अऩनी कुशरता से अऩने दश्ु भनों को हयामा. दयअसर

अफ नतलरस्भदे व जमेश के शयीय भे आकय नागोय याज्म सॊबार कय ऩयू े

बायत भे अॊग्रेज़ ववयोधी अलबमान चराना चाहते थे जजस वजह से उन्होंने

जमेश का शयीय चन ु ा. इस से अॊग्रेजो का Doctrine of lapse के आधाय ऩय नागोय ऩय कब्ज़ा कयने का ववचाय बी चरा गमा. इस तयह नतलरस्भदे व ने नागद्वीऩ औय बायत के दश्ु भनों के ववरूद्व अऩनी रडाई स्वमॊ शुरू की.


3. Badi Dair Ho Gayi!

There is a college going girl Sonia....jo public transport se college jaati hai. Uske college jaate waqt aksar ek ladka Ravi apne dosto kay saath mil kar usse chhedta hai. Kai weeks tak Ravi aur uske dosto dwara teasing ka ye silsila jaari rehta hai. Sonia ab Ravi ki harkato se tanng aa chuki thi par wo sab kuch chup-chap seh rahi thi. Sonia akeli ladki nahi thi jo awara Ravi aur uske gang ki nazro mey thi...balki aksar uske jaisi kuch ladkiyon ko pareshaan karna unke liye manoranjan ka saadhan tha. Kabhi koi ladki Ravi ki harkaton ka virodh kar deti to usko 2-4 thappad maarne kay baad hi Ravi ko santushti milti thi. Uski boli mey virodh karne waali ladkiyon ki pitaai karna "Par-Katiyon ko sabak sikhana" hota tha. Tabhi ek din Ravi ki behan Rashmi aatmhatya kar leti hai....usne apni suicide ki wajah apne college kay ek ladke Tarun ko bataya tha jo college, raaste mey ....phone se aksar Rashmi ko pareshaan karta tha. Gussey se bhara Ravi apne dosto ko saath lekar kisi tarah Tarun kay ghar ka pata karta hai aur wo uske ghar ka darwaza peet ta hai....Darwaza ghabrai hui Sonia kholti hai jisse Ravi roz chhedta tha. Darasal Sonia Tarun ki behan thi. ......avaak Ravi wahin zameen par baith apna sar pakad kar ronay lagta hai.


The End. ------------------------------------------------------------------------------------

4. Badhti Tabahi (Anthony Version)

Gunakar se milta hai vaigyanik Crasher jo usse phir se apradh karne ko uksata hai aur Gunakar ki bahugunit honay ki khaasiyat ko aur bhi logo mey pahunchane kay liye (jo sirf Gunakar kay aadesh anusaar chale) uss se Nuclear fuel laane ko kehta hai jiska bhandaar Roopnagar mey tha. Roopnagar mey nuclear fuel lene ki kosish karte huey Gunakar Anthony se mutbhed karta hai aur nuclear fuel ki thodi maatra le jaane mey safal ho jaata hai. Phir parishkrit nuclear fuel ki maatra ko wo apne saathiyon


par prayog karta hai. Uske saathi aur unke pratiroop Roopnagar mey tabahi machana shuru kar dete hai. Anthony ye tabahi rookta hai aur issi beech wo dekhta hai ki usne ek gunde ko maara to apne aap uske saare pratiroop bhi nishkriye ho gaye. Tab Anthony apne aatma honay ka faayda utthata hai aur asli aadmiyon (Gunakar kay saathiyon) aur unke pratiroop mey antar karke sabhi asli gundo ko maar deta hai jinke saath apne aap unke pratiroop maare jaate hai. Annt mey (read 'Badhti Tabahi') Gunakar aur Crasher mutbhed kay dauraan bachi hui Nuclear fuel ki maatra ko Anthony kay shareer mey pahuncha dete hai. Anthony kay uski jaisi hi shakti waale pratiroop uske shareer se nikalne lagte hai. Anthony unn pratiroopo ka saamna nahi kar paa raha tha aur asahay ho gaya tha. Uska shareer bhi iss ladaai mey bahut shat vikshat ho gaya tha. Anthony tab apne roopo se ladta hua Crusher ko maar deta hai, Crusher ko bachane kay liye anjaane mey hi Anthony kay pratiroop Anthony ka shareer lagbhag poori tarah nasht kar dete hai. Phir Anthony ka poora shareer marre huey Crusher kay shareer se ban jaata hai aur naya shareer honay kay kaaran Anthony kay pratiroop bhi nishkriye ho jaate hai. Anthony Gunakar ko maarne hi waala tha ki DCP Itihaas usse rook deta hai aur Gunakar ko Giraftaar kar leta hai. The End.


5. Stunt (Thrill Horror Suspense)

Ek mahatvkanshi film project jo aaj tak ki sabse zyada stunts waali film banne jaa rahi thi jiske baare mey har jagah characha abhi se tez ho gayi thi. Uss film ki kahani ek laalchi builder ki thi jiski nazar ek poore gaon ki zameen par thi aur jisse hathiyaane kay liye wo kuch bhi karne ko tayyar tha…..gaon waalo ki jaan bhi lena uske liye khel tha par uska ek dardnaak annt hota hai. Itne saare stunts aur production ka budget kum karne kay liye uss film kay producer nay ek door daraz kay peechde gaon ko chuna, jaha kay gaon waalo se usse shooting kay liye badi jagah aasani se bhi mil gayi aur film kay liye bahut hi kum paiso mey khatarnaak stunts bina „safety equipments‟ kay saath karne ko bahut se bhole bhaale gaon waale raazi ho gaye. Wo laachi Producer saare intezaam se santusht hokar apne production house ka kaam sambhalne waapas Mumbai chala jaata hai. Wo iss film ki beech beech mey khabar lene laga.Ussi Producer kay nirdesho kay


anusaar film unit dwara bina safety measures kay gaon waalo se bahut se khatarnaak stunts karvaye gaye jisme kai gaon waalo maare gaye ya ghayal ho gaye. Film ki kaafi shooting abhi baaki thi aur inn durghatnaao kay kaaran film unit par sthaniye logo aur police ka dabaav badh raha tha. Gaon waalo ka gussa dekh film unit producer ko salah deti hai ki wo Mumbai se hi gaon waalo ko film ki kamaai ka 99% hissa dene ka kagazi vaada kar lijiye. Baad mey unhe thoda bahut muaawza dekar iss 99% profit baantne waale papers ko farzi saabit karva denge….(”Ye bevkoof gaon waale hum logo se case ladne aa jaayein wo hi bahut hoga….usse jeetna to door ki baat hai.”) Producer ye baat maankar gaon mey wo legal papers bhijwa deta hai jinme likha hota hai ki iss film se honay waali kamaai ka 99% hissa gaon waalo ko diya jaayega. 1% profit bhi film ki unit ka kharcha poora karne kay liye liya jaa raha hai. Iss film se gaon ko bahut badi aarthik madad milegi aur faayda hoga. Aisa karne se gaon waalo aur police ka dabaav phir se kum ho jaata hai. Kuch dino baad, Film ki unit ab producer se phone par ajeeb tarah se baatein karne lagi thi. Producer ko laga ki wo sabhi gaon mey itne zyada din rehne kay kaaran irritate ho gaye honge. Kuch hi dino mey film kay director ka Producer ko phone aata hai ki film ka aakhri schedule shoot hona hai jiska udghatan film ki poori unit aur gaon waale aapki upastithi mey aapke haatho se hi chahte hai. Waha pahunchkar sabhi ka bartaav usse atpatta sa lagta hai. Sabhi aakhri scene ki shooting turant chahte thay. Aakhri seen ek bridge par shoot hona tha producer jaise hi ribbon kaat ta hai. Ek daravni hassi kay saath director bhoot mey badal jaata hai aur bolta hai. “Lights……camera……action.” Ye sunte hi ab tak uss film mey kai stunts kay dauraan maare gaye gaon waalo kay shat vikshat shav achanak se prakat ho kar uss producer ki taraf badhte hai…..darr se kaamp raha producer madad kay liye film Unit kay logo ki taraf daudta hai par wo bhi bhooto mey badal chuke hotay hai. Tab uss producer ko film ka bhoot director batata hai ki marre huey gaon waalo ki aatmao


nay poori film unit ko bhi maar daala tha.....aur issi kaaran unka bartaav ajeeb ho gaya tha. Producer ki dardnaak maut kay saath hi film ka aakhri schedule poora hota hai. Uss film kay prints apne aap hi unn legal papers ki copy kay saath desh bhar kay distributors kay paas pahunch jaatein hai. Film superhit hoti hai aur marre aur ghayal gaonwaalo kay parijano ko unka haq milta hai. The End.

6. Detrik mey Dwand (Nagraj)

Ek chhota sa desh 'Detrik' jo Africa kay madhya mey basa hai. Jungle iss desh ka bahut bada hissa khud mey samete hue hai. Yaha ki sarkaar ki arthik sthiti nazuk hai aur iss desh ki zyadatar aabadi Jungli kabilo se bani hai. Yahi sab baatein Aatankvaadiyo kay liye iss jagah ko swrag banati hai.


Yaha ki sarkaar bhi apratyaksh roop se inke saath hai kyoki yahi log iss sarkaar ko paisa muhaiya karte hai. Yaha par Aatankvaadiyo kay Training Camps chalte hai aur kai bade hathiyaaro kay parikshan bhi hotay hai.Shaktishaali desh Detrik par hamla karna to chahte hai par unke paas abhi tak paryaapt saboot nahi hai upar se Detrik kay padosi desh bhi Detrik ka inn gatividhiyo mey sahyoog kar rahe hai. Par Detrik ka bhala chahne waale bhi kum nahi aur iss sarkaar se asantusht logo nay ek bahut bada sangathan banaya hai jiske sadasya poore desh mey chhupkar aatankvaad aur maujooda sarkar se ladte hai. Iss sangathan ka naam hai "Detrik Dukes" jisse waha ki sarkar nay pratibandith kar diya hai. Aur ab to hadd ho gayi jab khule aam ak Parmanu Hathiyaar ka parikshan ho raha tha."Detrik Dukes" sangathan mey itni shakti nahi thi ki wo iss parikshan ko rook sake aur iss parikshan kay honay ka matlab tha aatankvaadiyo kay hoonslo ka aasmaanko chuuna aur aage aise kai parikshano ka hona. Koi bhi desh "Detrik Dukes" jaise chhote sangathan ko maanyata bhi nahi de raha tha. Aise mey bas ek hi raasta dikha "Detrik Dukes" ki sanchalika Ryma ko vishva aatankvaad kay khatmey par nikale Nagraj ko madad kay liye bulana. Nagraj ka aana hi iss desh ko bacha sakta tha......ab sawal ye tha ki kya Nagraj waha tak pahuncha ? Aaj uss bade Parmanu hathiyaar kay parikshan ka waqt aa chuka tha. Parikshan ki tayariya chal rahi thi aur jiski ummeed thi wo kuch jaldi hi ho gaya..........Nagraj Detrik mey aa gaya tha. Aatankvaadiyo ki sena bhi Nagraj kay samne bekar thi aur Nagraj aasani se sabko bebas karta hua "Parikshan Kendra" ki taraf badh raha tha.Tabhi ak jalti hui aakriti nay uska raasta rooka. "Bas ruk jaa Nagraj......tera safar yahi tak tha." Nagraj -Tum mujhe jaante ho.......kab maar khaayi thi tumne mujhse......mujhe kuch yaad nahi aa raha. "Tum mujhe nahi jaante par tumhare baare mey mujhe bahut kuch pata


hai......Kya tum Parmanu ko jaante ho ? Nagraj - Haan, wo mera bahut achchha dost hai...kya tumne Parmanu se maar khaayi hai ? "Lagta hai Parmanu nay mere baare mey tumhe nahi bataya." Nagraj - Haan, hum dono ko aapas mey apni problems discuss karne ki aadat nahi hai........par ab tumne keh diya hai to aage se dhyaan rakhunga. "Tu zinda bachega tab......Mera naam Angaar hai.....Parmanu se haarne kay baad itne saal gumnaami mey kaate hai aur apni Shaktiya badhayi hai.....mujhe laga ki yahan mere laayak kya kam hoga par mujhe to bin maange tujhe maarne ka mauka mil gaya.....ab Angaar raato raat mashoor bhi ho jayega." Nagraj - Tumse milkar khushi hui Angaar......mai tumhe Parmanu se achcha Treatment dunga. Angaar ab baatein karne kay mood mey nahi tha....aur Nagraj par apni nayi shaktiyo ka pradarshan karne laga. Nagraj par Angar se shareer se nikal rahi angaaro si jalti goliyo ki baarish ho rahi thi jo uske sukshma sarpo ko bahut tezi se maar rahi thi aur issi wajah se Nagraj kay zakhm jaldi bhar nahi paa rahe thay. Tadapta hua Nagraj adrashya hua to Angaar nay aas-paas kay poore vatavaran mey heat wave chhodi jo adrashya Nagraj ko aur dard dene lagi. Nagraj nay Angaar ko Sheet Nagkumar se jama diya aur Nagraj ko laga ki usne Angaar par jeet haasil kar li hai par Angaar jami barf mey bhi dehak raha tha aur jald hi saari barf pighal gayi. Angaar - Haa...ha..ha....oxygen to paani mey bhi hoti hai aur barf se pighla halka sa paani mere liye kaafi tha aag ko dobara bhadkaane kay liye.


Ab Angaar kay haatho nay nukile hathiyaaro ka roop dhaaran kar liya aur uske jalte nukile haath Nagraj kay shareer ko makhan ki tarah katkar chhalni banane lage. Halaki Angaar ko Nagraj ki iss kamzoori ka pata nahi tha ki uske anng agar ek baat jadd se kat jaaye to wo dobara nahi ugg sakte. Lekin kuch hi dair mey apne lagataar vaaro se wo aisa kar sakta tha. Nagraj kay shareer ko samanya hota dekh Angaar nay apne vaaro mey tezi laani shuru kar di aur Nagraj phir bebas ho gaya. Angaar nay phir se Nagraj par Angaaro ki goliyo ki varsha karni shuru kar di.....ab Nagraj ka shareer shithil padta jaa raha tha. Nagraj kay aadesh kay bina Nagu uske shareer se nikla aur apni Mani se ek Angaar se bhi bada 'Nag-Angaar' uske saamne khada kar diya. Angaar nay apni urja se light waves ko mani se iss tarah paravartit kiya ki Nagu ki mani se bane Nag-Angaar nay Nagu aur Nagraj par hi vaar kiya aur majboor hokar Nagu ko bhi lautna pada. Nagraj ki aakhri umeed Nagfani sarpo ko Angaar kay gale mey pada divya locket rook raha tha..........aisa lag raha tha ki itne saalo mey Angaar nay har tarah ki shakti se ladne kay liye khud ko tayyar kiya tha. Ab Nagraj ka sar kisi bhi pal mey uske dhad se alag ho sakta tha........Nagraj nay aakhri kosish ki Apni Teevr Vish Funkar Angaar par chhodi aur saath hi dobara Sheet Nagkumar se Angaar kay charo taraf apni funkar ko jamane ko kaha aur Angaar iss baar, iss anokhi barf se bahar nahi aa paaya. Sheet Nagkumar - Arre wah, Nagraj ye kamaal tumne kaise kiya ? Nagraj - Angaar ki jeet pakki thi par isne apni kamzoori khud hi mujhe bata di. Isse khud mey lagi aag ko bhadkaane aur vikraal roop dharney kay liye oxygen ki zaroorat padti hai jo iss vatavaran mey har jagah maujood hai jab tumne isse apni barf mey jamaya tab bhi usme maujood oxygen se ye dehak uttha par ye bhool gaya ki barf ka ek roop "Dry Ice" bhi kehlata hai jo Carbon di Oxide se banti hai.....aur mere vish ko jamakar tumne ussi dry ice ka aur bhi ghatak aavran iske chaaro aur bana diya. Par abhi hume rukna nahi hai isse kisi Cold Storahe mey issi avastha mey chhodkar aana hai....Detrik se aatankvaad ka safaya kar ke isse Bharat wapas le chalenge. Wahan ye Parmanu se bhi mil lega.


Lekin Angaar jaisi shaktiyo kay dhaarak ka yahan hona iss baat ka saboot hai ki yaha kuch bahut asamanya ho raha hai aur Angaar to bas ak mohra tha asli khiladi koi aur hi hai. Yahan Angaar ki tarah aur bhi shaktishaali log aatanvaadiyo kay saath honge. Par ab Detrik se aatankvaad ka nash hi mera lakshya hai. Nagraj DETRIK SEY AATANKVAAD KA SAMOOL NAASH KARNE NIKAL PADA THA. Aise hi aur bhi khatro se nipatnekay baad, Detrik Dukes ko Nagraj Detrik se aatankvaad ka naash karke waha ki baagdaur de deta hai. The End.


7. Team

*My first story on RC Website back in 2006. Principal Parmanu ki wajah se dilli chood kar Mumbai aa jaata hai, wahan wo aapne network aur crime college ke students ki madad se apni pahchan badal kar "pracharya" naam ka rajtitik baan jaata hai. Rajniti ki


aad me wo aapne gair kanooni dhandhe karne laagta hai. Doga Principal ki asliyet jaan jaata hai aur usse marne ke liye uske peeche paad jaata hai. Doga ko maarne ke chaakar me pracharya rupi Principal aapne kai aadmi kho deeta hai.tab wo Doga ko khatarnak aapradhi ghoshit kaar usse pakadne ya maarne ke liye desh bhar se chune hue policewalo ki ak team banata hai jisme shamil hoote hai Ins. Steel,Ins. Vinay,sub Ins. Salma(Steel's friend), Ins. Surya. Team naa chahte hue bhi Doga ko pakarne ka kaam aapne haato mein leeti hai. Crime college ke students ko pracharya ki party mein shaamil aur unki ghatiwidhiyo ko dekh kar Ins. Vinay chouk jaata hai. Woh samajh jaata hai ki Prinicipal hi pracharya hai. Parmanu ke roop me wo Doga se milta hai, aur dono Prinicipal ki asliyet saab ke saamne laane ke shapath leete hai.agli raat jab team Doga ko gherti hai to wo halka dhamaka kar ke gayab ho jaata hai, Ins. Vinay bhi dhamake me gayab ho jaata hai taki wo Parmanu baankar Doga ki madad kar saake. Prinicipal Doga par Vinay ke aapaharan ka ilzam lagata hai aur team ko Doga ko maarne ka aadesh deeta hai. Agli raat jaab Doga Prinicipal ko marne ja raha hota hai to team usse gher leti hai aur muthbhed shuru ho jaati hai Doga ka palda halka paad raha tha ki tabhi Parmanu aakar ladai rokta hai aur saari asliyet sabko batata hai. Sab Doga se maafi mangte hai. Inhi baato ka fayda uthakar Vinay ke roop me Parmanu team me shamil ho jaata hai aur chup kar tehkikat karna, gayab hone ka bahana banata hai. Sab Doga ko laut jaane ko kehte hai aur Prinicipal ko pakadne nikal padte hai. Aapne ghar par Team ko dekh aur puri kahani sun Prinicipal "Team" ko aapne students ki madad se bandhak bana leta hai. Prinicipal unhe maarne wala hota hai aur majburi me Vinay Parmanu banene wala hoota hai ki Doga aakar unhe bacha leta hai.Prinicipal ko to team daga se bacha leti hai par pure Mumbai ke crime college ke students ko Doga maar deta hai aur Prinicipal ka network dhwast karta hai. Prinicipal ak baar phir kala pani pahuch jata hai THE END


8. Har Har Gange (Doga)

Mumbai kay andar apradh karna mushkil hota hai par uske samudri kinaro par smugglers ko khoob mauke mil jaate hai par jab Doga ko kisi apradh ki gandh aati hai to uss apradh aur uss se judde logo ko cheerefaade bina usse chainn nahi milta. Shehar ki samudri seema par lagatar ho rahi smuggling ki gandh Doga ko mil chuki thi........ab baaki tha to bas cheerna faadna. Doga ko khabar mili ki ak Ship drugs ka zakhira lekar Mumbai kay coast par aa raha hai. Doga pehle hi coast par intezaar kar rahe smugglers ko maar chuka tha. Ship se signal aaya to usney ak bache huey smugglers par gun taan kar usse Ship ko aane ka signal dene ko kaha.Ship ab sunsaan tatt ki taraf badh raha tha.


"Ye aawaz kaisi?" "Boss...ek steamer humari taraf badh raha hai. Shayad,Police aa chuki hai." Boss - Nahi ye Police nahi hai......ye zaroor Doga hoga....aur iske Steamer me to barood bhara hai. Jaldi sab unn bracelets ko dabaao jo maine tumhe diye thay. Ship to Steamer ki takkar kay saath hi udd gaya aur Doga bhi usme se kudd chuka tha par koodne se pehle uski aankhon kay saamne se Ship par maujood sabhi log gayab ho gaye thay. Ab Mumbai mey aise apradho ki sankhya bhi badhne lagi jab kai apradhi apradh karte waqt ya uske baad jab Police ya Doga ko dekhte hi apne haath ka bracelet dabate aur gayab ho jaate. Ek aise hi apradhi ko Doga nay mauka milne se pehle hi behosh kar diya aur jab usse hoosh aaya to uske haath pair bandhe huey thay aur Doga uske saamne khada tha. Doga ko dekhkar wo darr key maare sab kuch batata chala gaya. Usne bataya ki Bengal mey Sundarban kay jungleo kay taskaro nay apne Mumbai kay saathoyo ko kuch bracelets baante thay jinhe dabate hi pehanne waala gayab ho jaata tha. Inhi bracelets ka faayda utthakar aajkal sab Mumbai mey khule aam apradh kar rahe thay. Musibat ki jadd ki khoj mey Doga Sunderban kay jungleo mey gaya. Doga ko waha se door basey sthaniye logo se pata chala ki inn jungleo mey sainkdo ki taadad mey taskar, smugglers aur anya apradhi reh rahe hai. Doga nay jungleo ka chuppkar mauayna kiya to baat sach nikli. Inn sabhi taskaro kay paas wahi chamatkari bracelets thay jinke kaaran prashshan aur sarkar inn apradhiyo ka thikana jaan ne kay baad bhi inhe nahi pakad paa rahi hai. Unhi Sthaniye logo nay inn bracelets ki chamatkaari shaktiyo ka kaaran uss bade se kile ko diya jo Jungle kay ak bahut bade hisse mey tha aur jisme shaitani rooho ka saaya tha. Ye sabhi apradhi inn rooho ki prathna karte thay aur issi kaaran inn sabhi ko unka sanrakshan prapt tha. Kile aur apradhik tatvo ki dehshat ki wajah se


sthaniye log wahan se kuch kilometers alag bas chuke the. Unki purani basti mey ab taskaro aur apradhiyon ka vaas tha. Doga nay wo kila dekha aur usse kuch-kuch iss kahani par vishvaas bhi honay laga kyoki uski aankhien usse dokha nahi de sakti thi. Doga nay paas hi beh rahi Ganga nadi par bane ek chhote baandh ko dhamake se udda diya aur Sunderban kay jungleo ke us bhaag aura aas-paas k shetra mey baadh aa gayi. Kai apradhi iss baadh mey doob kar maare gaye aur jo bache unka shikaar Doga apne tareke se kar raha tha. Wo zehar kay inn saudagaro ko maut se kum kuch nahi dena chahta tha. Lagbhag sabhi apradhiyo kay mare honay ki tasali kay baad Doga nay uss kile ki taraf rukh kiya jo usse bhi bhootiya prateet ho raha tha.Doga uss kile kay saamne pahuncha to usse aawaz aayi. "Wah, daad deni hogi teri himmat ki........tujhe darr nahi lag raha....aisa lag raha hai jaise tu hume darane aaya hai." Doga - Kaun hai....saamne aao.... "Hum to tere saamne hi hai.....ye kila hi hum sab rooho ka shareer hai...." Achanak Doga ko apne shareer par dabaav mehsoos hua......Doga nay apni gun ki saari goliya kile par khaali kar di par kile ko koi nuksaan nahi hua. Doga nay kuch handgranades bhi uss kile par fainke par kila jas ka tas tha. Doga ki khaal dheere dheere dabaav kay kaaran hat rahi thi aur uske khoon ki dhaar beh rahi thi.Sama ko daravna banate charo aur rooho kay thahake goonj rahe thay. Doga nay Adrak chacha ka diya taabiz nikal kar Kile par fainka to kile par halki rakh uddi aur aawaz aayi. "Ha ha ha ha ha....Arre Pagal......Iss ek taabiz se humare mazboot kila


numa shareer par bas halka sa fark padega....humey khatm kay liye to aise hazaro-lakho taabiz bhi kum padenge." Doga ka shareer bejaan ho raha tha aur uski saanse bhi atak rahi thi. Lagta tha jaise doga ka annt aa raha hai. Tabhi Doga nay apne peeche ki aur dhyaan diya aur nishana laga kar ek kay baad ek granades se nishchit sthaano par dhamaake kiye. "Lagta hai tu darr se sach me pagal ho gaya hai.....dushman tere saamne hai aur tu apne peeche dhamake kar raha hai." Doga nay ek dhamaka aur kiya aur Ganga nadi ki ak moti dhaar nay Kile kay charo taraf paani bhar diya aur saath hi dhamako kay ghaddo se wo uss kile ki neev mey bhi pahunch gaya. Kile se tadapne ki aawaze aane lagi aur jald hi wo aawaze aani bandh ho gayi aur Doga par pad raha dabaav bhi khatm ho gaya. The End.


Miscellaneous (Trendy Baba Series)