इस िबल में अिधग्रहण, अवािप्त, िचिन्हत करना अस्पष्ट है इस िबल में यह स्पष्ट नहीं है की िकसान की अथवा अन्य ज़मीन िकस प्रकार ली जाएगी। यह तो साफ़ िलखा है िक क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण का गठन होने पर िचिन्हत भूिम तुरत ं क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण में िनिहत हो जाएगी और उसके अिधकार और िनयंत्रण में आ जाएगी। पृष्ठ संख्या 29 पर, अध्याय 6, धारा 27 में िलखा है की — “िवशेष िविनधान रीजन (special investment region) में िस्थत भूिम धारा 9 के अधीन क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण का गठन होने पर तुरंत राज्य सरकार के िनिमत्त क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण में िनिहत और उसके व्ययनाधीन — उसके disposal, क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण के अिधकार, िनयंत्रण — में रखी समझी जायेगी…” िनजी खातेदारों की भूिम ही नहीं स्थानीय प्रािधकरण यानी की पंचायती राज संस्था, या नगर पािलका, या आवासन बोडर्, या नगर सुधार न्यास या कोई अन्य िवकास प्रािधकरण की ज़मीनें भी इन SIR के क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरणों िनयंत्रण अथवा अिधकार में दी जा सकेगी। पृष्ठ संख्या 30 पर धारा 27 की उपधारा 2 में इस बाबत िलखा है िक “अगर राज्य सरकार को लगेगा की कोई भूिम जो की स्थानीय प्रािधकरण में िनिहत है वह क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण द्वारा अपेिक्षत है तो वह िकसी राजस्थान िविध में िकसी बात के अंतिवर् ष्ट होते हुए भी, अिधसूचना द्वारा क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरणों के व्ययनाधीन रख सकेगी।” ये SIR स्थानीय प्रािधकरण की अिधका िरता से भी बाहर होंगे । पृष्ठ सं ख्या 10 पर धारा 6 में विणर् त है की “िवशेष िविनधान रीजन (special investment region) स्थानीय प्रािधकरण की अिधकािरता के बाहर होंगे।” तो िकसानों, व्यापािरयों, कमर्चािरयों की जो भूिम-भवन है और स्थानीय िनकायों की भी जो ज़मीनें हैं वे सब एक नोिटिफ़केशन द्वारा इन SIR के िनयंत्रण में ली जा सकेंगी। पृष्ठ संख्या 31 पर धारा 27 की उपधारा 4 में िलखा है िक “राज्य सरकार, इस अिधिनयम के प्रयोजनों के िलए, भूिम के अिधग्रहण — acquisition — के िलए, अिधग्रहण के समय जो भूिम अिधग्रहण का क़ानून होगा उसके आधार पर भूिम अिधग्रिहत करेगी।” आगे धारा 28 में िलखा है िक “क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण िनजी पक्षकारों से, यानी Private Party से, ज़मीन ख़रीद कर ले सकता है, पट्टे पर — lease पर ले सकता है, िविनयम यानी अदला-बदली — exchange — के आधार पर ले सकता है, समझौता यानी agreement करके या िफर अन्यथा ले सकता है — यानी िबना agreement या िबना समझौते के भी ले सकता है, और ज़मीन का पूल बना कर भी ले सकता है।” ज़मीन का पूल बनाने का अथर् है िक कोई ज़मीन है, उसका कोई मािलक है या खातेदार है या “अिभधारी” अथार्त िकरायेदार है, वह अपनी ज़मीन का मािलकाना हक़ SIR के िलए जो Regional Development Aauthority “क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण” बनेगा उसको समिपर् त कर आपसी सहमित से बदले में Regional Development Aauthority से जब SIR में िवकास िकया जाएगा तब िवकिसत ज़मीन का िहस्सा ले ले अथवा नक़द मुआवज़ा ले ले।
कई प्रकार से ये लाखों बीघा ज़मीन ये क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण उनके मािलकों से ले सकते हैं। ये सारी स्वतंत्रता और क़ानूनी अिधकार ये िवधेयक “क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण” को देता है। अिधग्रहण के बारे में स्पष्ट नहीं है इस िबल में इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है की भूिम का अिधग्रहण — • िब्रिटश राज के समय के 1894 के भूिम अिधग्रहण क़ानून के आधार पर होगा, िक •
UPA की सरकार के “The Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013, के आधार पर होगा, अथवा
•
वतर्मान NDA सरकार के Land Acquisition Amendment Bill िजसको Land Bill 2015 भी कहा जाता है, उसके आधार पर होगा, या िक
- इस सम्बंध में राज्य सरकार का कोई क़ानून है िजसके आधार पर भूिम का अिधग्रहण होगा? यह भी स्पष्ट नहीं है की िकसान से या भूिम के मािलक से जब उसकी ज़मीन अिधग्रहीत की जाएगी तो उसको िकतना मुआवज़ा िमलेगा? अिधग्रहण के प्रश्न के साथ यह प्रश्न िबना िकसी अपवाद के जुड़ा है िक िकसान से अगर उसकी ज़मीन अिधग्रहीत की जाएगी तो उसको िकतना मुआवज़ा िमलेगा? इसके साथ यह तीसरा प्रश्न जुड़ा है की जो मुआवज़ा िमलेगा वह िकतने िदनों में िमलेगा? िबल में ये तीनों बातें स्पष्ट नहीं हो रही — भूिम अिधग्रहण का कौनसा क़ानून लागू होगा? भिवष्य में कोई नया क़ानून आए वो अलग बात है। अगर आज राज्य सरकार “क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण” के माध्यम से राजस्थान के िकसानों की ज़मीन अिधग्रहीत करती है तो भूिम अिधग्रहण का कौन सा क़ानून आज राज्य में लागू है िजसके आधार पर ज़मीन का अिधग्रहण होगा? और िकस आधार पर मुआवज़ा िमलेगा? कब तक िमलेगा? िचंता का िवषय यह है की सरकार एक तरफ़ कह रही है की उसका ख़ज़ाना ख़ाली है दस ू री तरफ़ लाखों बीघा ज़मीन को िचिन्हत करने और अिधग्रहण की तैयारी हो रही है! ऐसी िस्थित में आप िकसानों की जो हज़ारों-लाखों बीघा ज़मीन अिधग्रहण करेंगे उसका मुआवज़ा कहाँ से देंगे? कब देंगे? िबल में यह भी स्पष्ट नहीं है की लैंड पूल होगा तो िकतने प्रितशत िवकिसत भूिम िकस-िकस लैंड यूज की िकसान को या ज़मीन के मािलक को वािपस दी जाएगी? कौन से ज़ोन में दी जाएगी? िकसान से ज़मीन लेकर िकतने िदनों में उसे िवकिसत ज़मीन का उसका िहस्सा वािपस िमलेगा?
वैसे तो ये जो ज़ोन का प्रावधान है वह ख़तरनाक है। िकसी जोन में ज़मीन आ गयी तो िकसान का तो गला ही घोंट िदया ऐसी िस्थित हो जाएगी सरकार और कोप्रोर्रेट िमलकर तय कर देंगे की इस-इस जगह ये ज़ोन बनेगा — यहाँ औद्योिगक ज़ोन बनेगा, यहाँ मनोरंजन पाकर् बनेगा इत्यािद। अब उस ज़ोन में आने वाले िकसान की ज़मीन तो उसी ज़ोन का काम करने वाली कम्पनी को बेची जा सकेगी! आज एक िकसान अपनी ज़मीन बेचने का िनणर्य करता है तो वह िकसी को भी बेच सकता है। उसको स्वतंत्रता है। लेिकन एक बार आपने अपने “िवकास प्रािधकरण” के माध्यम से कम्पनी के लोगों के साथ बैठ कर जो प्लान बनाएँ गे उसमें तय कर िदया की ये ज़मीन केवल मनोरंजन पाकर् के िलए काम में ली जा सकेगी तो िकसान की िववाशता हो गयी िक वह उस ज़मीन को िकसी और उपयोग के िलए नहीं बेच सकता। आपने उसे बाँध िदया। अव्वल तो इतने लोग िमलेंगे नहीं की उस रीजन में उस काम के िलए उस पिटर् क्युलर िकसान की ज़मीन ख़रीदने के िलए भीड़ लग गयी। केवल कुछ एक लोग इं ट्रेस्टेड होंगे। अब अगर दो-चार व्यापारी जो इं ट्रेस्ट ले रहे हैं उन्होंने काटैर्ल बना िलया की हम तो बस इतना ही पैसा देंगे तो िकसान क्या करेगा? इधर तो सरकार है — िजसने कोप्रोर्रेट के साथ बैठ कर ज़ोन बना दी िजसके बाहर िकसान नहीं जा सकेगा। उधर वो कम्पनी वाले हैं िजन्होंने काटैर्ल बना िलया। एक तरह से इस िबल के माध्यम से इस प्रकार की िस्थित िनिमर् त हो जाएगी िक िकसान सरकार और कारपोरेट के बीच फूटबाल बन जाएगा। वस्तुतः िकसान को मजबूर िकया जाएगा की वह अपनी ज़मीन ख़ून के घूँट पी कर बेचे और रवाना हो जाए। SIR की नोिटिफ़केशन द्वारा घोषणा होगी और िकसी भी प्रकार की भूिम को िचिन्हत िकया जा सकेगा िबल के पृष्ठ सं ख्या 8 पर धारा 3 में िलखा है िक “राज्य सरकार, अिधसूचना द्वारा, भूिम के िकसी भी क्षेत्र को, स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन के रूप में घोिषत कर सकेगी।” इसमें औद्योिगक क्षेत्र — जैसे की िदल्ली के नज़दीक के िभवाड़ी, नीमराणा इत्यािद औद्योिगक क्षेत्र, या राजस्थान के प्रमुख शहरों के नज़दीक के औद्योिगक क्षेत्र — भी िलए जा सकेंगे। इसमें राज्य के गाँवों-क़स्बों के गोचर की ज़मीन, चारागाह की ज़मीनें, िकसान की खातेदारी की ज़मीन, िकसी छोटे दक ु ानदार की ज़मीन, िकसी का कोई प्लाट िलया हुआ है िकसी िनजी आवासीय योजना में तो वो भी — “भूिम के िकसी भी क्षेत्र को” िलया जा सकेगा। सरकार एक नोिटिफ़केशन िनकाल कर ये घोिषत कर देगी की — ये जो 50 हज़ार बीघा ज़मीन है अलवर के पास, या — ये जो 70 हज़ार बीघा ज़मीन है उदयपुर के पास, अथवा — ये जो एक लाख बीघा ज़मीन है जयपुर-अजमेर या जयपुर-िदल्ली हाइवे के दोनों ओर, या — राज्य में से गुज़ारने वाले िदल्ली-मुंबई औद्योिगक कॉिरडोर के दोनों तरफ़ की लाखों बीघा जमीन — ये स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन बनेगा। SIR के िलए क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण का गठन
ये जो स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन बनेगा इसका राज्य स्तर पर एक “बोडर्” होगा और अपने-अपने क्षेत्रों में “क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण” होंगे। िवधेयक के पृष्ठ सं ख्या 12 पर विणर् त है की “क्षे त्रीय िवकास प्रािधकरण” के गठन के बारे में धारा 9 लागों होगी । इसमें िलखा है िक राज्य सरकार, अिधसूचना द्वारा, Special Investment Regions के िल ए “क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण” गिठत करेगी। जहाँ एक से अिधक Special Investment Regions होंगे वहाँ उनके िल ए “एकल क्षेत्रीय िव कास प्रािधकरण” का गठन होगा। पृष्ठ संख्या 13 पर धारा 9 के उप-धारा 2 में उल्लेख है की ये जो “क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण” होंगे इनमें अध्यक्ष रहेगा राज्य सरकार का िदल्ली-मुंबई औद्योिगक कािरडोर िवभाग का मंत्री। तथा इसके सदस्य होंगे Special Investment Region में शािमल िकए गए क्षेत्रों के लोक सभा और िवधान सभा के सदस्य। यहाँ दो बातें माननीय सदस्यों के समझने की है — पहली यह की यहाँ यह और अिधक स्पष्ट हो जाता है की एक स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन इतना बड़ा हो सकता है िक उसमें कई िवधानसभा क्षेत्र और लोकसभा क्षेत्र आ जाएँ । इसीिलए िवधेयक में िलखा है “िवशेष िविनधान रीजन में सिम्मिलत समस्त लो कसभा और राजस्थान िवधानसभा के सदस्य।”— इससे आप ये अंदाज़ा लगा सकते हैं की ये रीजन हज़ारों बीघा क्षेत्र को अपने में शािमल करेंगे। दस ू री बात ये समझने की है िक िवधायकों और सांसदों को अनेकों इस प्रकार के प्रािधकरणों में सदस्य बनाया जाता है और वे नाम के सदस्य होते हैं उनका कोई महत्व नहीं होता। लेिकन ये जो प्रािधकरण बनेंगे िजसमें ये िवधायक और सांसद सदस्य होंगे इसका महत्व होगा। और बड़ा गम्भीर महत्व होगा। कैसे? इसे समझें। इस बात को समझने के िलए हमको पृष्ठ संख्या 14 पर सेक्शन 10 “क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण की शिक्तयाँ और कृत्य” देखना पड़ेगा िजसमें िलखा है िक “क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण िनम्निलिखत कृत्यों का िनवर्हन करेगा और िनम्निलिखत शिक्तयों का प्रयोग करेगा।” इसको पढ़ते हुए जब हम पृष्ठ संख्या 15 पर धारा 10 के (ज) तक पहुँ चेंगे तो उसमें िलखा है िक “धारा 49 के उपबंधों (यानी provisions, प्रावधानों) — के अध्यधीन (यानी अधीन रहते हुए) सवेर्क्षण करने, जाँच, िनरीक्षण, परीक्षण करने या माप लेने के िलए िकसी भूिम पर या भवन में प्रवेश करना;” तो िजसके आप लोग िवधायक और सांसद सदस्य होंगे वह क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण “धारा 49 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए सवेर्क्षण करने, जाँच, िनरीक्षण, परीक्षण करने या माप लेने के िलए िकसी भूिम पर या भवन में प्रवेश करने की शिक्त रखेगा।” धारा 49 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए अब देखें की धारा 49 के प्रावधान क्या हैं? ये देखें पृष्ठ संख्या 41 पर। धारा 49 है “प्रवेश की शिक्त” और इसके प्रावधान हैं — इसकी उपधारा 1 में िलखा है “क्षेत्रीय िवकास प्रा िधकरण िकसी भी व्यिक्त को authorise कर सकता है,” अंग्रेज़ी में िलखा है पृष्ठ संख्या 114 पर — “The Regional Development Authority may authorise any person”
“क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण िकसी भी व्यिक्त को, उसके सहायकों या कमर्कारों सिहत — यानी िकसी भी व्यिक्त को उसके साथ कारीगरों, मज़दूरों, कामगारों सिहत — या उनके िबना, यानी अकेले भी, िकसी भी भूिम या भवन में या उसके ऊपर िनम्निलिखत प्रयोजनों के िलए प्रवेश कराने के िलए प्रािधकृत authorise कर सकेगा — इसका अथर् है की िजसकी भी प्रॉपटीर् चाहे वो खेत हो, छोटी-बड़ी दुकान हो, मकान हो, फ़्लैट हो, होटल हो, ढाबा हो, मंिदर हो, स्कूल हो, िसनेमा हो — जो भी ज़मीन SIR में िचिन्हत हो गयी और उसका नोिटिफ़केशन िनकल गया — क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण को ये िबल ये शिक्त प्रदान करेगा की वह िकसी भी व्यिक्त को उस खेत के, दुकान के, मकान के, फ़्लैट के अंदर, उस व्यिक्त के साथ के मज़दूरों सिहत या उनके िबना अकेले जाने के िलए authorise कर सकेगा। िकन-िकन कामों के िलए ये आगे िलखा है। इस उपधारा के सेक्शन (च) में िलखा है “कोई जाँच, िनरीक्षण या तलाशी के िलए,” और सेक्शन (छ) में िलखा है “कोई भी अन्य कायर् के िलए जो इस अिधिनयम के दक्षतापूणर् प्रशासन (efficient administration) के िलए आवश्यक हो”
इसका अथर् क्या है? इसका अथर् है की क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण िकसी भी व्यिक्त को िकसान के खेत में, व्यापारी की दुकान में, िकसी के भी मकान में, फ़्लैट में, उस व्यिक्त के साथ के मज़दूरों सिहत या उनके िबना अकेले जाने के िलए authorise कर सकेगा! िबना वारं ट के पुिल स भी िकसी के घर में तलाशी के िल ए नहीं घु स सकती! ये अिधिनयम कैसे िकसी भी िवकास प्रािधकरण के व्यिक्त को — सरकार के कमर्चारी को भी नहीं — िकसी भी व्यिक्त को — यह अनुमित दे सकता है की वह उस योजना में आए िकसी भी खेत में, मकान में, फ़्लैट में जाँच, िनरीक्षण या तलाशी के िलए चला जाएगा? राज्य की लाखों जनता के घरों में, दक ु ानों में आप ज़मीन हिथयाने वाले गुंडों और मािफ़या के जाने का रास्ता बना रहे हो?! और ये काम िकसके माथे पड़ेगा? क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण के सदस्य िवधायक और सांसदों के। क्यों — क्योंिक आप इसके सदस्य होंगे। सदस्य होने का वैसे तो कोई महत्व ही नहीं है इस प्रकार के प्रािधकरणों में लेिकन िवकास प्रािधकरण में कोई भी दूर बैठा नेता या अफ़सर िनणर्य ले इस प्रकार के काम का सारा दोष पड़ेगा आप पर। और आप लोग आज इस िबल को िवधासभा में पास करोगे?! मैं पूछना चाहता हूँ यहाँ उपिस्थत सभी िवधायकों से — आप अपने ख़ुद के घर में कोई भी कभी भी तलाशी के िलए, िनरीक्षण के िलए घुस जाए इसका िबल पास करेंगे? अगर आप अपने घर की तलाशी के िलए नहीं करेंगे तो राज्य की जनता के घरों की तलाशी के िलए क्यों करेंगे! इसिलए की उन्होंने भरोसे में आकर आपको चुन कर भेज िदया? आगे इस िबल में पृष्ठ संख्या 42 पर क्या िलखा है ज़रा यह भी देख लें — “परंतु सूयोर्दय और सूयार्स्त के बीच के समय के िसवाय — अिधभोगी (यानी वहाँ रहने वाला — िकरायेदार, िनवासी, इत्यािद) को, और अगर िनवासी नहीं हो तो भूिम अथवा भवन के स्वामी को कम से कम चौबीस घंटे का युिक्तसंगत नोिटस िदए िबना ऐसा प्रवेश नहीं िकया जाएगा,”
इसका अथर् हुआ की अगर सुबह 5-5:30 बजे सूयोर्दय होता है तो 5 बजे ये लोग घरों में जा सकते हैं, और शाम 7:30-8 बजे सूयार्स्त होता है तो तब तक जा सकते हैं या उस भूिम अथवा भवन में रह सकते हैं! आगे िलखा है िक — “प्रत्येक बार सूचना दी जाएगी तािक िकसी अपाटर्मेंट की अंत:वासी मिहलाओं के िलए रखे गए िकसी भाग से मिहलाएँ िकसी ऐसे भाग में जा सकें जहाँ उनकी व्यिक्तक एकांतता में िवघ्न ना हो!” इसमें िलखा है — “प्रत्ये क बार!” — “कोई जाँच, िनरीक्षण या तलाशी के िलए, — पचास छोटे-बड़े कामों के िलए जो इसमें िलखे हैं — नाप करना, िनशान लगाना, सफ़ाई करना — कोई कुछ भी बहाना बना ले — क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण िकसी भी व्यिक्त को, उसके सहायकों या कमर्कारों सिहत — यानी िकसी भी व्यिक्त को उसके साथ कारीगरों, मज़दूरों, कामगारों सिहत — या उनके िबना, यानी अकेले भी, िकसी भी भूिम या भवन के अं दर या उसके ऊपर प्रवेश कराने के िलए प्रािधकृत authorise कर सकेगा! सूयार्स्त और सू योर्दय के बीच कभी भी! और एक बार नहीं बार-बार कर सकेगा!” पृष्ठ 42 पर ही आगे िलखा है “प्रािधकृत िकसी व्यिक्त के िलए नीरीक्षण या तलाशी के प्रयोजन के िलए िकसी दरवाज़े, फाटक या अन्य अवरोध को खोलने या खुलवाने के िलए प्रवेश करना िविधपूणर् होगा” “और यिद िनवासी अनुपिस्थत है या उपिस्थत होने पर वह ऐसे दरवाज़े, फाटक या अन्य अवरोध को खोलने से इं कार करता है” इसका अथर् है की क्षेत्री य िवका स प्रािध करण द्वारा प्रािधकृ त व्यिक्त अपने मज़दरू ों के सा थ नीरी क्षण या तलाशी के िलए िकसी दरवाज़े, फाटक या अन्य अवरोध को तोड़कर भी जा सकते हैं चाहे वहाँ का िनवासी उपिस्थत हो या ना हो। और अगर इस ज़ो र-ज़बरदस्ती, धक्का-मुक्की, में भूिम या भवन के िनवासी को को ई नु क़सान होता है तो उसकी भरपाई ये प्रािधकृत व्यिक्त उसी समय करेगा। और अगर िनवासी को या मािलक को लगता है िक रक़म कम है तो वह अपील प्रािधकरण को करेगा िजसका िनणर्य अंितम होगा! कारावास का प्रावधान इसी पृष्ठ संख्या 43 पर धारा 50 में िलखा है िक जो प्रवेश में बाधा पहुँ चायेगा तो उसे 6 महीने का कारावास अथवा एक हज़ार रुपया जुमार्ना अथवा दोनों से दंिडत िकया जा सकता है। आगे िलखा है पृष्ठ संख्या 117 पर अंग्रेज़ी में सेक्शन 54 में “No court shall take cognisance of any offence punishable under this Act, except 1. the offence under section 45, or any rule or regulation made thereunder, 2. or except upon a complaint in writing of the facts constituting such offence made by a Regional Development Authority, 3. or by a person expressly authorised in this behalf by the Regional Development Authority इसका अथर् है िक हम न्यायालयों को भी पाबंद कर रहे हैं िक वे भी “कोई भी न्यायालय — हाई कोटर् भी नहीं, सुप्रीम कोटर् भी नहीं! इस धारा में विणर् त के िसवा इस अिधिनयम के अधीन दंडनीय िकसी अप्राद का संज्ञान नहीं करेगा!” इसी प्रकार पृष्ठ संख्या 60 पर धारा 77 में िलखा है िक “इस अिधिनयम में यथा अन्यथा उपबंिधत के िसवाय — यानी इस अिधिनयम में जो प्रावधान िकए गए हैं उन्हें छोड़कर — इस अिधिनयम के प्रावधान राजस्थान के िकसी अन्य क़ानून में अगर कोई बात इस अिधिनयम से असंगत है तो भी, इस अिधिनयम के प्रावधान ही प्रभावी होंगे।” ये अिधिनयम राजस्थान के अन्य सभी सब क़ानूनों के ऊपर होगा।
आगे पृष्ठ संख्या 61 पर धारा 81 में िलखा है िक “कोई भी िसिवल न्यायालय, ऐसे िकसी मामले का संज्ञान नहीं करेगा जो राज्य सरकार, SIR का बोडर्, क्षेत्रीय िवकास प्रािधकरण, या अपील प्रािधकरण द्वारा इस अिधिनयम के उपबंधों — प्रावधानों के अधीन िविनिश्चत िकया जाना अपेिक्षत हो या िकया जा सके”
इस िबल के माध्यम से एक नयी ज़मींदारी प्रथा का उदय होगा। राज्य की लाखों बीघा ज़मीन इन नए ज़मींदारों के हाथों में सरकार दे देगी। आज जो ज़मीन का मािलक है — िजसे ज़मींदारी प्रथा के उन्मूलन के बाद ज़मीन िमली थी वह िफर से केवल मज़दूर बन कर रह जाएगा। जनसंघ के समय से हमने ज़मींदारी प्रथा का िवरोध िकया। राजस्थान में भैरों िसंह शेखावत के नेतृत्व में ज़मींदारी उन्मूलन हुआ और िकसान अपनी ज़मीन का मािलक बना। अब वािपस िकसान से ज़मीन छीनने का काम हो रहा है। ज़मींदार के आदमी िदन में की रात में िकसी भी घर में घुस सकते थे। िकसी को भी कभी भी पकड़ के जेल में डाल सकते थे। वही काम ये िबल करेगा।
अगर ये िबल ऐसा ही पास हो गया तो होगा क्या? राजस्थान के लोगों की लाखों बीघा खेती की ज़मीन, हज़ारों बीघा गोचर की ज़मीन, सैंकड़ों गाँवों की ज़मीन को सरकार SIR के रूप में िचिन्हत करेगी। कुछ नेता और कुछ कोरपोरेट घराने िमलीभगत करेंगे, तथाकिथत िवकास के नाम पर ज़मीनों का अिधग्रहण होगा, वे ज़मीनें पूँजीपितयों की जेब में चली जाएँ गी। कमज़ोर िकसान बेचारा बेघर होकर दो टके की मज़दूरी करने िकसी आस-पास के शहर में चला जाएगा। थोड़ा जो मज़बूत िकसान है वह धरने-प्रदशर्न चालू करेगा। गाँव-गाँव में इसके िख़लाफ़ आं दोलन होगा। सारे राजस्थान में लूट मचेगी और सारे राजस्थान में आग लगेगी। ये िबल सारे राजस्थान के गाँवों, क़स्बों — िकसानों और सामान्य पिरवारों के जीवन को तहस-नहस कर देगा। बीसों सालों तक ये िकसान ना इधर के रहेंगे ना उधर के। पिरवारों में झगड़ा, सरकार के साथ क़ानूनी झंझट,… मैं आज कह रहा हूँ इस एक िबल के कारण पूरा राजस्थान अशांत हो जाएगा और जो थोड़ा बहुत िवकास आदमी ख़ुद की मेहनत से कर रहा है वह भी ठप्प हो जाएगा। ये िबल राजस्थान को लूटने, अशांत करने, मुक़द्दमों में फँसाने का िबल सािबत होगा। राजस्थान के गाँव-गाँव में आं दोलन खड़े होंगे। ये एक िबल राजस्थान में पाटीर् को साफ़ कर देगा। िपछले 40-45 साल की तपस्या से खड़े िकये संगठन और िवचारधारा को साफ़ कर देगा। अगले 15 साल तक पाटीर् राजस्थान में खड़ी नहीं हो पाएगी। मुक्त बाज़ार का प्रश्न ये सरकार नव-उदारवाद की मुक्त बाज़ार की नीितयों से प्रभािवत है। अगर मुक्त-बाज़ार की अथर्व्यवस्था ही सरकार लाना चाहती है, अगर सब चीज़ों का िनजीकरण ही करना चाहती है तो िफर सरकार को छोड़ देना चािहए िकसान और कॉपर्रश े न को मुक्त रूप से मोल-भाव करने के िलए। जो अपनी ज़मीन
बेचना चाहे वह अपनी आवश्यकता और अपनी मज़ीर् से बेचे। जो ख़रीदना चाहे वो अपनी आवश्यकता और अपनी मज़ीर् से ख़रीदे। बेचने वाला और ख़रीदने वाला दोनों स्वतंत्र हैं। सरकार बीच में दलाली क्यों करना चाहती है? सरकार ज़मीन अिधग्रहण के नाम पर िकसान को डरा धमका कर सस्ती दर पर ज़मीन लेकर िनजी कम्पिनयों को क्यों देना चाहती है?