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Maithili - The New Testament

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नव ननयम


नवषयवस् तानिका मत् के स्समाचार

1

मरक्स के स्समाचार

27

िूका के स्समाचार

43

यूहना के स्समाचार

70

पेररतित के काय्

91

रिमन के पत

117

किररन् के पनहि पत

128

किररन् के दिसर पत

139

गिात् के पत

147

इनिनसयित के पत

151

निनिप् के पत

155

क्ि्स् के पत

158

निसि्न्नकयित के पनहि पत

161

निसि्न्नकयित के दिसर पत

164

त्म्निय्स के पनहि पत

166

नतम्निय्स के दिसर पत

169

त्त्स के पत

171

नि​िेमिन के पत

172

इबाननयित के पत

173

याकूब के पत

181

पत्स के पिम पत

184

पत्स के दिसर पत

187

यूहना के पिम पत

189

यूहना के दिसर पत

192

यूहना के त्सरा पत

192

यहदा के पत

193

पकानातवाव

194


मैथ्

23 दे खू, हुा्रर हन् गभ्िती भऽ हऽ एहर् बेर् पैद् हरत आ ओहर न्ा इा्नुएल र्खत, जहर अथ् अनछ जे , “रार् सभह संग पराेश् िर”त 24 तखन यूसुफ नीद ं सँ उनि हऽ पभुह स् िग्दूतह आज्ह अनुस्र ह्ज हयलनन आ अपन स् ती हेँ अपन् लग ल’ लेलननत 25 ज्बत धरर ओ अपन जेि पुत हेँ ननर जन लेत त् धरर ओहर् ननर नँनलननत

अध्य 1 1 अब्राह पुत द्ऊदह पुत यीशु ासीरह पीढीह पुसहत 2 अब्रा इसर्ह सँ जनालननत इसर्हह जन य्हूब भेलननत य्हूबह जन यहद् आ ओहर भ्य सभ सँ भेलननत 3 यहद् थ्ा्रह फ्रे स आ जर्ह जनालननत फ्रे सह जन एस्ा भेलननत एस्ा सँ अर्ाह जन भेलननत 4 अर्ाह जना अाीन्दब भेलननत अाीन्दब सँ न्स्न भेलननत न्स्न सँ स्ान भेलत 5 सल्न हेँ र्ह्बह बूज भेलननत बूजह जन रथह ओबेद भेलननत ओबेदह जेसी भेलननत 6 येसी र्ज् द्ऊदह जनालननत र्ज् द्ऊद उररय्सह पती ाे सँ सुलेा्नह जन दे लननत 7 सुलेा्नह र्ब्आाह जन भेलननत र्ब्आा सँ अनबय्ह जन भेलननत आ अनबय् सँ आस्ह जन भेलननत 8 आस् सँ य्स्फ्तह जन भेलननत य्श्फ्तह य्र्ाह जन भेलननत य्र्ाह जन ओनजय्स भेलननत 9 ओनजय्स सँ य्आथाह जन भेलननत य्आथा सँ अह्जह जन भेलननत आख्जह जन इजनहय्रह भेलननत 10 इजनहय्रह जना ानश सँ भेलननत ानसे सँ अा्न भेलननत आा्न सँ य्नशय्रह जन भेलननत 11 ओनर साय ाे य्नशय्र यह्ननय् आ ओहर भ्य सभ हेँ जनालननत 12 हनह् सभ हेँ ब्बुल पहँ ँल्ह ब्द यह्ननय्ह सल्नथएल भेलननत सल्नथएल सँ जर्ब्बेलह जन भेलननत 13 जर्ब्बेलह अबीउदह जन भेलननत अबीउदह जन एनलय्हीा भेलननत एनलय्हीा सँ अस्रह जन भेलननत 14 अज्र सँ स्द्हह जन भेलननत सद्ह सँ अहीा भेलननत अहीा सँ एलीउदह जन भेलननत 15 एलीयुदह जन एनलय्जर भेलननत एनलय्जरह जन ाथन भेलननत ातन सँ य्हूबह जन भेलननत 16 य्हूब सँ ाररयाह पनत यूसुफह जन भेलनन, नजनह् सँ यीशुह जन भेलनन, जहर् ासीर हरल ज्इत छननत 17 अब्रा सँ लऽ हऽ द्ऊद धरर ँौदर पीढी अनछत द्ऊद सँ ल' ह' बेनबल्न ाे ल' जेब् धरर ँौदर पीढी अनछत ब्बुल ाे लऽ गेल्ह ब्द सँ ासीर धरर ँौदर पीढी अनछत 18 यीशु ासीरह जन एनर तररे ँ भेलनन, जखन हनहर ा्य ाररयाह नि​ि्र यूसुफ सँ भेल छलनन, तखन ओ पनित आत्‍ा् सँ गभ्िती प्नब गेलीरत 19 तखन ओहर पनत यूसुफ धा् ल्ह ररब्ह ह्रणे ँ ओहर् स्ि्जननह रपे ँ दे खय लेल तैय्र ननर छलत 20 जखन ओ एनर ब्त सभ पर स्ँैत ह्ल पभुह स् िग्दूत स् ाे हनह् पगर भऽ हऽ हरलनथन, “रे द्ऊदह पुत यूसुफ, अपन पती ाररया हेँ अपन् लग लऽ हऽ ननर डे र्उ, नहएह तँ हनह् ाे जे गभ्िती भेल अनछ से अनछत” पनित आत् हेत 21 ओ एहर् पुतह जन दे तीर आ अर्ँ ओहर न्ा यीशु र्खख दे बनन, नहएह तँ ओ अपन ल्ह हेँ प्प सँ बँ्ओतत 22 ई सभ ब्त एनर लेल भेल जे पभु पराेश् िरह पिह् त् द्र् हरल गेल ब्त पूर् भऽ ज्यत

अध्य 2 1 र्ज् रे र्दे सह साय ाे जखन यीशु यहनदय्ह बेतलेरेा ाे जनाल छल्र, तखन पूब नदस सँ बुख्ा्न ल्ह यरशलेा आनब गेल्रत 2 ओ हरलनथन, “यहदी सभह र्ज् हतय अनछ?” रा सभ हनहर त्र् पूब नदस दे खख हऽ हनहर आर्धन् हरऽ आयल छीत 3 र्ज् रे र्दे स एनर ब्त सभ हेँ सुनन हऽ हनह् संग सास यरशलेा घबर् गेल्रत 4 ओ ल्ह सभह सभ ाुख्‍य पुर्नरत आ धा्-नशकह सभ हेँ एह ि्ा जा् हऽ हऽ हनह् सभ सँ पूछलनथन जे ासीरह जन हतऽ रे ब्ह ँ्रीत 5 ओ सभ हनह् हरलनथन, “यहनदय्ह बेतलेरेा ाेत 6 अर्ँ यहद् दे शह बेतलेरेा, यहद्ह ाुखखय् सभ ाे सबसँ छ्र ननर छी, नहएह तँ अर्ँ ाे सँ एहर् र्जप्ल ननहलत जे रार पज् इस्एलह श्सन हरतत 7 तखन रे र्दे स गुप रपे ँ ज्नी सभ हेँ बज् हऽ हनह् सभ सँ नीह जह्ँ पुछलनथन जे त्र् ह्न साय ाे आयल अनछत 8 ओ ओहर् सभ हेँ बेतलेरेा पि् हऽ हरलनथन, “ज्उ आ ओनर छ्र बच् हेँ पूर् त्हबत जखन अर्ँ सभ हनह् प्नब लेब तखन रार् फेर सँ खबरर नदअ जे राहँ आनब हऽ हनहर आर्धन् हरीत” 9 र्ज्ह ब्त सुनन ओ सभ निद् भऽ गेल्रत पूब नदस दे खननर्र त्र् हनह् सभह आगू बनढ गेल ज्बत धरर ओ ओनर ि्ा आनब हऽ ि्ढ भऽ गेल जतय छ्र बच् छलत 10 ओ सभ त्र् दे खख ओ सभ बहत रन्​्त भऽ गेल्रत 11 घर ाे पहँ ँल् पर ओ सभ ओनर बच् हेँ ओहर ा्य ाररयाह संग दे खख हऽ खनस पडल्र आ ओहर आर्धन् हयलननत स्न्, ल्ब्न आ गंधहत 12 पराेश् िर सपन् ाे ँेत्ओल गेल्र जे ओ सभ रे र्दे स लग ननर घुरर ज्य, तखन ओ सभ द्सर रस् ाे अपन दे श नदस निद् भऽ गेल्रत 13 ओ सभ निद् भेल् पर पभुह स् िग्दूत स् ाे यूसुफ हेँ पगर भऽ हऽ हरलनथन, “उनि हऽ छ्र बच् आ ओहर ा्य हेँ लऽ हऽ नास दे श ाे भ्नग ज्उ, आ ज्बत रा अर्ँ हेँ खबरर ननर दऽ दे ब त्बत धरर ओतनर रहत” रे र्दे स छ्र बच् हे ख्जत जे ओहर् नष हरयत 14 ओ उिल् पर र्नत ाे छ्र बच् आ ओहर ा्य हेँ लऽ हऽ नास नदस निद् भेल्रत 15 ओ रे र्दे सह ाृतु धरर ओतनर ररल्र, ज्नर सँ ई ब्त पूर् भऽ ज्य जे पभु पराेश् िरह पिह् त् द्र् हरल गेल छलनन जे , “रा अपन बेर् हेँ नास दे श सँ बजौने छीत” 16 तखन रे र्दे स जखन दे खख जे बुख्ा्न सभह उपर्स हयल ज् ररल अनछ, तखन ओ बहत क्नधत भऽ गेल्र आ बेतलेरेा आ ओहर सास प्र ाे दू ि्​् आ ओनर सँ हा उमह सभ

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ाैथू

बच् सभ हेँ ा्रर दे लनन जे साय ओ बुख्ा्न ल्हनन सँ लगन सँ पूछने छल्र | 17 तखन जेरेाी भनिषिय् द्र् हरल गेल ब्त पूर् भेलत 18 र्ा ाे एहर् आि्ज सुनल गेल, निल्प, ह्नब आ बहत श्ह, र्रे ल अपन बच् सभह लेल ह्नैत छल, ाुद् ओहर् सभ हेँ स्न्न् ननर भेरय ँ्रै त छल, नहएह तँ ओ सभ ननर अनछत 19 जखन रे र्दे स ारर गेल्र तँ दे खैत छी जे नास ाे पभुह स् िग्दूत यूसुफ हेँ सपन् ाे दे ख्ओल गेल्रत 20 ओ हरै त छनथ, “उिू आ छ्र बच् आ ओहर ा्य हेँ लऽ हऽ इस्एल दे श ज्उ, नहएह तँ ओ सभ ारर गेल अनछ जे छ्र बच्ह ज्न ँ्रने छलत” 21 ओ उनि हऽ छ्र बच् आ ओहर ा्य हेँ लऽ हऽ इस्एल दे श ाे आनब गेल्रत 22 ाुद् जखन ओ ई सुनन जे अँ्ल्स यहनदय् ाे अपन नपत् रे र्दे सह ह्िली ाे र्ज हरै त छनथ, तखन ओ ओतय जेब् ाे डर् गेल्रत 23 ओ न्सरत न्ाह नगर ाे आनब हऽ रनर गेल्र, ज्नर सँ ई ब्त पूर् भऽ ज्य जे पिह् त् सभ द्र् हरल गेल छल, “ओ न्सरत हरल ज्यतत”

14 ाुद् यूरन् न् हनह् ान् हऽ दे लनथन, “रार् अर्ँ सँ बपनतस् ा् लेबऽ पडत आ ही अर्ँ रार् लग आनब ररल छी?” 15 यीशु हनह् उतर दे लनथन, “ एखन एरन र्बऽ नदयौहत तखन हनह् हष भ्नग दे लननत 16 यीशु बपनतस् ा् लेलनन तँ तुरर प्नन ाे सँ ब्रर ननहनल गेल्र आ दे खलहँ जे हनह् लेल आह्श खुनज गेलननत 17 स् िग् सँ आि्ज आयल जे , “ई रार नपय पुत छनथ, नजनह् पर रा पसर छीत” अध्य 4 1 तखन यीशु हेँ आत् ा् द्र् ननज्न ाे लऽ गेल गेलनन ज्नर सँ हनह् शैत्नह परीक् ाे पनड ज्यत 2 ँ्लीस नदन ँ्लीस र्नत उपि्स हेल्ह ब्द ओ भूखल भऽ गेल्रत 3 जखन पल्भन दे ननर्र हनह् लग आनब गेल्र तँ हरलनथन, “अर्ँ पराेश् िरह पुत छी तँ एनर प्थर सभ हेँ र्री बनेब्ह आज् नदयौहत” 4 ाुद् ओ उतर दे लनथन, “धा्श्स् त ाे नलखल अनछ जे , “ ानु्​् य ा्त र्री सँ ननर, बल् नह पराेश् िरह ाुँर सँ ननहलय बल् सभ ब्त सँ जीनित ररतत” 5 तखन शैत्न ओहर् पनित नगर ाे लऽ ज् हऽ ाख्रह एहर् नशखर पर बैस् दै त अनछत 6 ओ हनह् हरलनथन, “जँ अर्ँ पराेश् िरह पुत छी तँ अपन् हेँ नीँ्ँ फेनह नदअ, नहएह तँ नलखल अनछ जे, ‘ओ अर्ँ ह नि्य ाे अपन स् िग्दूत सभ हेँ आज् दे नथन एहर् प्थरह निर्त 7 यीशु हनह् हरलनथन, “ नफर सँ धा्श्स्‍त ाे नलखल अनछ, “अर्ँ अपन पभु पराेश् िर हेँ परख ननर हरत” 8 फेर शैत्न ओहर् एहर् बहत ऊँ​ँ पर्ड पर लऽ ज्इत छै ह आ ओहर् संस्रह सभ र्ज आ ओहर ानरा् दे ख् दै त छै हत 9 ओ हनह् हरलनथन, “जँ अर्ँ खनस हऽ रार आर्धन् हरब तँ रा अर्ँ हेँ ई सभर् ँीज दऽ दे बत” 10 तखन यीशु हनह् हरलनथन, “ रे शैत्न, एतय सँ रनर ज्उ, नहएह तँ धा्श्स् त ाे नलखल अनछ जे, “अर्ँ अपन पभु पराेश् िरह आर्धन् हर आ ा्त हनहर सेि् हरत” 11 तखन शैत्न हनह् छ्नड हऽ ँनल गेल्र आ दे खू, स् िग्दूत सभ आनब हऽ हनहर सेि् हयलननत 12 यीशु ई सुनन हऽ जे यूरन् न् जेल ाे र्खल गेल अनछ, तखन ओ गलील निद् भेल्रत 13 न्सरत छ्नड हऽ ओ हफरनहा ाे रनर गेल्र जे साुदह ह्त ाे अनछ, जबूल्न आ नेफलीाह सीा् ाेत 14 ज्नर सँ यश्य्र पिह् त् द्र् हरल गेल ब्त पूर् भऽ ज्यत 15 जबूल्न आ नेफलीा दे श, साुदह ब्र ाे, यरदनह ओनर प्र, गैर-यहदी सभह गलीलत 16 अन्र ाे बैसल ल्ह सभ बहत इज्त दे खलहत आ जे सभ ाृतुह केत आ छ्य् ाे बैसल छल, ओहर् लेल इज्त उगैत अनछत 17 तनरय् सँ यीशु पँ्र हरऽ लगल्र आ हरय लगल्र, “ पश्त्प हर, नहएह तँ स् िग्ह र्ज् य लग आनब गेल अनछत”

अध्य 3 1 ओनर साय ाे यूरन् न् बपनतस् ा् दे ननर्र यहनदय् पदे श ाे पँ्र हरै त छल्रत 2 ओ हरलनन, “अर्ँ सभ पश्त्प हर, नहएह तँ स् िग्ह र्ज् य लग आनब गेल अनछत” 3 यश्य्र पिह् त् द्र् ई हरल गेल छलनन जे , “ारभूना ाे एह ग्रे ह आि्ज जे, “पभुह ब्र तैय्र हर, हनहर ब्र स्झ हरत” 4 ओ यूरन् न् ऊँरह हेशह िस आ हार ाे ँाड्ह पटी पनररने छल्रत ओहर ा्ं स नरडी आ जंगली ाधु छलैहत 5 तखन यरशलेा आ सास यहनदय् आ यरदनह ँ्रह्तह सास इल्ह् हनह् लग गेल्रत 6 ओ सभ अपन प्प हेँ सीह्र हरै त यरदन ाे हनह् द्र् बपनतस् ा् लेलननत 7 ाुद् जखन ओ बहत् फररसी आ सदु ही सभ हेँ बपनतस् ा् लेबय लेल अबैत दे खख हनह् सभ हेँ हरलनथन, “रे स्ँ प सभह पीढी, आग्ाी क्ध सँ पल्यन हरब्ह लेल हे ँेतौने अनछ?” 8 ते ँ पश्त्प हरब्ह लेल उनँत फल पैद् हरत 9 अर्ँ सभ ान ाे ई ननर हरब जे , “रार् सभह नपत् अब्रा छनथत” 10 आब ग्छह जनड धरर हुल्डी र्खख दे ल गेल अनछ, ते ँ जे ग्छ नीह फल ननर दै त अनछ, तहर् ह्नर हऽ आनग ाे फेनह दे ल ज्इत अनछत 11 रा अर्ँ सभ हेँ पश्त्प हरब्ह लेल प्नन सँ बपनतस् ा् दै त छी, ाुद् जे रार् प्छ्ँ आओत से रार् सँ बेसी शखयश्ली अनछ, जहर जूत् रा सरन हरब्ह य्ग ननर छीत 12 ओहर र्थ ाे ओहर पंख् छै ह, आ ओ अपन गहा हेँ गहा ाे जा् हरतत ाुद् ओ भूस् हेँ अनार आनग सँ जर् दे तत 13 तखन यीशु गलील सँ यरदन नदी यूरन् न् लग अयल्र जे हनह् सँ बपनतस् ा् लेब्ह लेलत

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ाैथू

18 यीशु गलील साुदह ह्त ाे ँलैत दू र् भ्य हेँ दे खलनन, नसा्न न्ाह पतुस आ हनहर भ्य अख्डय्स साुद ाे ज्ल फेनह ररल छल्रत 19 ओ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ रार प्छ्ँ ँलू, रा अर्ँ सभ हेँ ानु्​् यह ा्छ ा्रय बल् बन् दे बत” 20 ओ सभ तुरत अपन ज्ल छ्नड हनहर प्छ्ँ ल्नग गेल्रत 21 ओतय सँ आगू बढै त ओ दू र् भ्य हेँ दे खलनन, जेबदीह पुत य्हूब आ हनहर भ्य यूरन् न्, अपन नपत् जबदीह संग न्ि ाे बैसल अपन ज्ल िीह हऽ ररल छल्रत ओ हनह् सभ हेँ बजौलननत 22 ओ सभ तुरत न्ि आ अपन नपत् हेँ छ्नड हनहर प्छ्ँ प्छ्ँ ँनल गेल्रत 23 यीशु पूर् गलील ाे घुना हऽ हनह् सभह सभ्घर ाे नशक् दै त छल्र आ र्जह सुसा्ँ्र पँ्र हरै त छल्र आ ल्ह सभह बीँ सभ तररह बीा्री आ सभ तररह र्ग हेँ िीह हरै त छल्रत 24 पूर् सीररय् ाे हनहर पनसख् बनढ गेलनन आ ओ सभ हनह् लग सभर् बीा्र ल्ह सभ हेँ अनलनन जे सभ तररह र्ग आ य्तन् सँ गनसत छल्र, आ दु ्​् र्त् ा् सँ गनसत ल्ह सभ, प्गल आ पक्घ्त सँ पीनडत ल्ह सभ हेँ हनह् लग अनलननत ओ ओहर् सभ हेँ िीह हऽ दे लहत 25 गलील, दह्प्नलस, यरशलेा, यहनदय् आ यरदन नदीह ओनर प्र सँ बहत र्स ल्ह हनह् प्छ्ँ -प्छ्ँ आनब ररल छलत

ह्न् ह्ज ाे नीह ननर, नसि्य ब्रर फेहल जेब्ह आ ानु्​् य सभह पएर ाे दब्ओल जेब्हत 14 अर्ँ सभ संस्रह इज्त छीत पर्डी पर बैसल शरर नुह्यल ननर ज् सहैत अनछत 15 आ ने हेओ दीय् जर् हऽ हर्ह नीँ्ँ ननर र्खैत अनछ, बल् नह दीय् पर र्खख दै त अनछत घर ाे ररननर्र सभ हेँ इज्त दै त अनछत 16 अर्ँ सभह इज्त ानु्​् य सभह स्ाने एन् ँाहय, ज्नर सँ ओ सभ अर्ँ ह नीह ह्ज हेँ दे खख हऽ अर्ँ सभह स् िग् ाे ररननर्र नपत्ह ानरा् हरनथत 17 ई ननर स्ँू जे रा धा्-ननया ि् पिह् त् सभ हेँ नष हरब्ह लेल आयल छीत 18 रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे ज्बत धरर स् िग् आ पृथ् िी बीनत ननर ज्यत, त्बत धरर सभ नहछु पूर् ननर भऽ ज्यत, त्बत धरर धा्-ननयाह एक् य् एह छ्र-छ्र ब्त ननर खता र्यतत 19 एनर लेल जे हेओ एनर छ्र-छ्र आज् ाे सँ ह्न् एह आज् हेँ त्नड हऽ ानु्​् य हेँ एन् नसख्ओत, से स् िग्ह र्ज् य ाे छ्र-छ्र हरल ज्यतत 20 रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे ज्बत धरर अर्ँ सभह ध्ना्हत् श्सी आ फररसी सभह ध्ना्हत् सँ बेसी ननर र्यत, त्बत अर्ँ सभ स् िग्ह र्ज् य ाे पिेश ननर हरबत 21 अर्ँ सभ सुनने छी जे पनरने ल्ह सभ हरै त छल जे , “रत् ननर हरत” आ जे नहय् ा्रत से न्यह खतर् ाे पनड ज्यतत 22 ाुद् रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे जे हेओ अपन भ्य पर नबन् ह्न् ह्रणे ँ क्नधत र्यत, से न्यह खतर् ाे पनड ज्यत , नरहह आनग हे खतर् ाे ररतत 23 ते ँ जँ अर्ँ अपन िरद्न िेदी पर अनब आ ओतनर ा्न र्खब जे अर्ँ ह भ्य हेँ अर्ँ पर ह्न् तररह ह्न् आपनत अनछत 24 अपन िरद्न ओतनर िेदीह साक छ्नड ज्उत पनरने अपन भ्य सँ ाेल नाल्प हर, तखन आनब हऽ अपन िरद्न अनप्त हरत 25 ज्बत अर्ँ ओहर् संग ब्र ाे ररब त्बत अपन पनतदं दीह संग जली-जली सरात भऽ ज्उत हरी ं हनरय् शतु अर्ँ हेँ न्य्धीशह र्थ ाे ननर सौंप नदअ आ न्य्धीश अर्ँ हेँ अनधह्रीह र्थ ाे ननर सौंप नदअ आ अर्ँ जेल ाे ननर र्खल ज्यत 26 रा अर्ँ हेँ सत् य हरै त छी जे ज्बत धरर अर्ँ सभर् फ्ँ स ननर दऽ लेब त् धरर ओतऽ सँ हनरय् ननर ननहलबत” 27 अर्ँ सभ सुनने छी जे पनरने ल्ह सभ हरै त छल जे, “अर्ँ वनभँ्र ननर हरत” 28 ाुद् रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे जे हेओ स् ती हेँ ि्सन् हरब्ह लेल तहैत अनछ, ओ पनरने सँ अपन ा्न ाे ओहर् संग वनभँ्र हऽ लेने अनछत 29 जँ अर्ँ ह दनरन् आँ खख अर्ँ हेँ द्​्ी िररबैत अनछ तँ ओहर् उख्नड हऽ फेनह नदयौह, नहएह तँ अर्ँ ह लेल ई ल्भ र्यत जे अर्ँ ह एहर् अंगह न्श भऽ ज्य, ननर नह अर्ँ ह पूर् शरीर नरह ाे फेनह दे ल ज्यत 30 जँ अर्ँ ह दनरन् र्थ अर्ँ हेँ द्​्ी िरर्बैत अनछ तँ ओहर् ह्नर हऽ फेनह नदयौह, नहएह तँ अर्ँ ह लेल ई ल्भ र्यत जे अर्ँ ह एहर् अंगह न्श भऽ ज्य, ननर नह अर्ँ ह पूर् शरीर नरह ाे फेनह दे ल ज्यत

अध्य 5 1 ल्ह सभ हेँ दे खख ओ एहर् पर्ड पर ँनढ गेल्रत 2 ओ ाुँर ख्नल हऽ हनह् सभ हेँ नसखबैत हरलनथनत 3 धन अनछ जे आत् ा् ाे गरीब अनछ, नहएह तँ स् िग्ह र्ज् य हनह् सभह अनछत 4 धन अनछ जे श्ह हरै त अनछ, नहएह तँ ओहर् सभ हेँ स्न्न् भेरतैहत 5 धन अनछ नम ल्ह, नहएह तँ ओ सभ पृथ् िी पर उतर्नधह्री बनतत 6 धन छनथ जे ध्ना्हत्ह भूख-प्स हरै त छनथ, नहएह तँ ओ सभ तृप भऽ जेत्रत 7 धन छनथ दय्लु , नहएह तँ हनह् सभ पर दय् भेरतननत 8 धन छनथ जे शु् हदयह ल्ह सभ, नहएह तँ ओ सभ पराेश् िर हेँ दे खत्रत 9 धन अनछ श्खर हरननर्र, नहएह तँ ओ सभ पराेश् िरह सन् त्न हरल ज्यतत 10 धन अनछ जे ध्ना्हत्ह ह्रणे ँ सत्ओल ज्इत अनछ, नहएह तँ स् िग्ह र्ज् य हनह् सभह अनछत 11 अर्ँ सभ धन छी, जखन ल्ह अर्ँ सभ हेँ नन्​् हरत, अर्ँ सभ हेँ सत्ओत आ रार् लेल अर्ँ सभह निर् सभ तररह दु ्​् र ब्त हरतत 12 आनख्त र्उ आ बहत आनख्त र्उ, नहएह तँ स् िग् ाे अर्ँ सभह इन्ा बहत पैघ अनछ, नहएह तँ ओ सभ अर्ँ सभ सँ पनरने जे पिह् त् सभ छल्र, हनह् सभ हेँ एन् सत्बैत ररल्रत 13 अर्ँ सभ पृथ् िीह नून छी, ाुद् जँ नूनह सुगंध खता भऽ गेल अनछ तँ ओहर् ह्न तररे ँ नून बन्ओल ज्यत? तनरय् सँ ई

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ाैथू

31 हरल गेल अनछ जे , “जे हेओ अपन स् ती हेँ छ्नड दे त, ओहर् तल्हह पत दऽ नदयौहत” 32 ाुद् रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे जे हेओ अपन स् ती हेँ वनभँ्रह ह्रण छ्नड हऽ छ्नड दै त अनछ, से ओहर् वनभँ्र हर् दै त अनछत 33 फेर अर्ँ सभ सुनने छी जे पुर्न सायह ल्ह सभ हरै त छल जे , “अर्ँ अपन् हेँ गलत शपथ ननर हर, बल् नह पभुह पनत अपन शपथ पूर् हरत” 34 ाुद् रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे, एह्र् शपथ ननर हरत ने सग्ह द्र्त ह्रण, ई पराेश् िरह नसंर्सन अनछत 35 आ ने पृथीह द्र्त नहएह तँ ई ओहर पएरह िे हन अनछ, आ ने यरशलेात ह्रण, ई ार्न र्ज्ह नगर नथहत 36 अर्ँ अपन ा्थह शपथ ननर ख्उ, नहएह तँ अर्ँ एह् हेश हेँ उजर ि् ह्री ननर हऽ सहैत छीत 37 ाुद् अर्ँ सभह गप-सप, “रँ, रँ ” र्उत ननर, नहएह तँ एनर सभ सँ बेसी जे नहछु अनछ से अधल्र सँ अबैत अनछत 38 अर्ँ सभ सुनने छी जे हरल गेल अनछ जे, “एहर् आँ खख आ एह द्ँ तह बदल् द्ँ तत” 39 ाुद् रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे अर्ँ सभ अधल्रह निर्ध ननर हरत 40 जँ हेओ अर्ँ पर धा्-ननयाह आध्र पर ाुहदा् हरऽ ँ्रै त अनछ आ अर्ँ ह िस छीन लेत तँ ओहर् अर्ँ ह हपड् सेर् र्खख नदयौहत 41 जे हेओ अर्ँ हेँ एह ाील ँलब्ह लेल ब्ध हरत, ओहर् संग दू ाील ज्उत 42 जे अर्ँ सँ ा्ँ गैत अनछ तहर् दऽ नदयौह आ जे अर्ँ सँ उध्र लेबय ँ्रै त अनछ ओहर् सँ अर्ँ ाुँर ननर घुा्उत 43 अर्ँ सभ सुनलहँ जे ई हरल गेल अनछ जे, “अपन पड्सी सँ पेा हर आ अपन शतु सँ घृण् हरत” 44 ाुद् रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे, “अपन शतु सभ सँ पेा हर, जे अर्ँ सभ हेँ ग्रर पढै त अनछ, हनह् सभ हेँ आशीि्​् द नदअ, जे अर्ँ सभ सँ घृण् हरै त अनछ, हनह् सभह भल्ई हर आ जे सभ अर्ँ सभ हेँ घृण् हरै त अनछ आ अर्ँ सभ हेँ सतबैत अनछ, हनह् सभह लेल प्थ्न् हरत “ 46 जँ अर्ँ सभ जे अर्ँ सभ सँ पेा हरै त अनछ, हनह् सभ सँ पेा हरै त छी तँ अर्ँ सभ हेँ ही इन्ा भेरत? हरद्त् सभ सेर् ओनरन् ननर हरै त छनथ? 47 जँ अर्ँ सभ ा्त अपन भ्य सभ हेँ पण्ा हरै त छी तँ अर्ँ सभ आन ल्ह सँ बेसी ही हरब? हरद्त् सभ सेर् एरन ननर हरै त अनछ? 48 ते ँ अर्ँ सभ नस् रह, जेन् अर्ँ सभह स् िग् ाे ररननर्र नपत् नस् छनथत

3 ाुद् जखन अर्ँ नभक् दे ब तँ अर्ँ ह ब्ा् र्थ हेँ ई ननर बुझब्ह ँ्री जे अर्ँ ह दनरन् र्थ ही हरै त अनछत 4 ज्नर सँ अर्ँ ह नभक् गुप ररय, आ अर्ँ ह नपत् जे गुप रप सँ दे खैत छनथ, ओ अर्ँ हेँ खुनल हऽ फल दे नथनत 5 जखन अर्ँ प्थ्न् हरब तँ प्खंडी सभ जह्ँ ननर बनब, नहएह तँ हनह् सभ हेँ सभ्घर आ सडहह ह्न-ह्न ाे ि्ढ भऽ हऽ प्थ्न् हरब नीह लगैत छनन ज्नर सँ ानु्​् य सभह नजरर पडयत रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे हनह् सभ हेँ अपन फल भेरैत छननत 6 ाुद् अर्ँ जखन प्थ्न् हरब तखन अपन ह्िरी ाे पिेश हर आ जखन अपन दरबज् बर हऽ लेब तखन अपन नपत् सँ प्थ्न् हर जे गुप रप सँ छनथत आ त्रर नपत् जे गुप रप सँ दे खैत छनथ, ओ अर्ँ हेँ खुनल हऽ इन्ा दे त्रत” 7 ाुद् जखन अर्ँ सभ प्थ्न् हरै त छी तँ ज्नत-ज्नत सभ जह्ँ वथ् द्रर्ि ननर हरत 8 ते ँ अर्ँ सभ हनह् सभह सा्न ननर बनू, नहएह तँ अर्ँ सभ हनह् सँ ा्ँ गब् सँ पनरने अर्ँ सभह नपत् जनैत छनथ जे अर्ँ सभ हेँ ह्न ँीजह आिशहत् अनछत 9 ते ँ अर्ँ सभ एनर तररे ँ प्थ्न् हर, “रे रार सभह नपत् जे स् िग् ाे छी, अर्ँ ह न्ा पनित र्अयत” 10 त्रर र्ज आऊत जेन् सग् ाे र्इत अनछ तनरन् पृथी पर सेर् अर्ँ ह इच् पूर् र्त 11 आइ रार् सभ हेँ अपन सभ नदनह र्री नदअत 12 अपन् सभह ऋण का् हर, जेन् रा सभ अपन ऋणी हेँ का् हरै त छीत 13 रार् सभ हेँ परीक् ाे ननर लऽ ज्उ, बल् नह रार् सभ हेँ अधल्र सँ बँ्उत आाीनत 14 जँ अर्ँ सभ ानु्​् य सभह अपर्ध का् हरब तँ अर्ँ सभह स् िग्य नपत् सेर् अर्ँ सभ हेँ का् हरत्रत 15 ाुद् जँ अर्ँ सभ ानु्​् यह अपर्ध हेँ ा्फ ननर हरब तँ अर्ँ सभह नपत् सेर् अर्ँ सभह अपर्ध हेँ ा्फ ननर हरत्रत 16 जखन अर्ँ उपि्स हरै त छी तँ प्खंडी सभ जह्ँ उद्स ाुँर ननर बनू, नहएह तँ ओ सभ अपन ाुँर नबग्नड दै त अनछ ज्नर सँ ओ सभ ल्ह हेँ उपि्स हरै त दे ख् सहयत रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे हनह् सभ हेँ अपन फल भेरैत छननत 17 ाुद् अर्ँ जखन उपि्स हरब तँ ा्थ पर अनभ्ेह हर आ ाुँर ध्उत 18 एनर लेल जे अर्ँ ानु्​् य सभह स्ाने उपि्स हरब्ह लेल ननर, बल् नह अर्ँ ह नपत् जे गुप रप सँ दे खैत छनथ, अर्ँ हेँ खुनल हऽ इन्ा दे नथनत 19 जतऽ पतंग आ जंग खर्ब हरै त अनछ आ जतऽ ँ्र त्नड हऽ ँ्र् लैत अनछ, ओनर पृथ् िी पर अपन् लेल धन ननर जा् हरत 20 ाुद् स् िग् ाे अपन् लेल खज्न् जा् हर, जतऽ ने पतंग आ ने जंग खर्ब हरै त अनछ आ जतऽ ँ्र ननर त्डै त अनछ आ ने ँ्री हरै त अनछत 21 नहएह तँ जतऽ अर्ँ ह खज्न् ररत, ओतनर अर्ँ ह ा्न सेर् ररतत 22 शरीरह इज्त आँ खख अनछ, ते ँ जँ अर्ँ ह आँ खख एहल ररत तँ अर्ँ ह सास शरीर इज्त सँ भरल र्यतत

अध्य 6 1 स्िध्न रह जे ानु्​् यह साक अपन नभक् ननर हर ज्नर सँ ओ सभ दे खबत 2 ते ँ जखन अर्ँ अपन नभक् दे ब तँ अपन् स्झ्ँ ाे तुररी ननर बज्उ जेन् प्खंडी सभ सभ्घर आ गली-गली ाे हरै त छनथ, ज्नर सँ हनह् सभ हेँ ानु्​् य सभह ानरा् भेरयत रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे हनह् सभ हेँ अपन फल भेरैत छननत

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23 ाुद् जँ अर्ँ ह आँ खख अधल्र र्यत तँ अर्ँ ह सास शरीर अन् र्र सँ भरल ररतत ते ँ जँ अर्ँ ाे जे इज्त अनछ से अन्र अनछ तँ ओ अन्र हतेह पैघ अनछ! 24 हेओ दू ा्नलहह सेि् ननर हऽ सहैत अनछ, नहएह तँ ओ एह सँ घृण् हरत आ द्सर सँ पेा हरतत नै तँ एहहेँ पहनड हऽ द्सरहेँ नतरस्र हरतत अर्ँ सभ पराेश् िर आ धनसमतीह सेि् ननर हऽ सहैत छीत 25 ते ँ रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे , अर्ँ सभ ही ख्एब आ ही पीब, त्नर पर ह्न् नँरन ननर हरत आ ने एखन धरर अपन शरीरह लेल जे पनररबत ही जीिन ा्ं स सँ बेसी आ शरीर िस सँ बेसी ननर? 26 आह्शह नँडै सभ हेँ दे खू, नहएह तँ ओ सभ ब्न ननर हरै त अनछ आ ने ह्नर लैत अनछ आ ने ह्िी ाे जा् र्इत अनछत तइय् अर्ँ ह स् िग्य नपत् हनह् सभह प्​्ण हरै त छनथत ही अर्ँ सभ हनह् सभ सँ बहत नीह ननर छी? 27 अर्ँ सभ ाे सँ हे स्नँ हऽ अपन हद ाे एह र्थ ज्नड सहैत अनछ? 28 अर्ँ सभ िसह लेल नहएह स्ँैत छी? खेतह हुाुद पर निँ्र हर जे ह्न् बढै त अनछत ओ सभ पररशा ननर हरै त अनछ आ ने घुाैत अनछत 29 तइय् रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे सुलेा्न सेर् अपन सास ानरा् ाे एनर ाे सँ ह्न् एहर् जह्ँ सजल ननर छल्रत 30 एनर लेल जँ पराेश् िर खेतह घ्स हेँ एन् हपड् पनरर् दे नथन, जे आइ अनछ आ ह्खल भ्ज ाे फेहल गेल अनछ, तँ ही ओ अर्ँ सभ हेँ एनर सँ बेसी हपड् ननर पनरर्ओत? 31 ते ँ ई हनर हऽ जे, “रा सभ ही ख्एब?” ि्, रा सभ ही पीब? ि्, रा सभ ह्न ँीजह हपड् पनररब? 32 (नहएह तँ गैर-यहदी सभ एनर सभ ब्तह ख्ज हरै त अनछत) नहएह तँ अर्ँ सभह स् िग्य नपत् जनैत छनथ जे अर्ँ सभ हेँ एनर सभ िसुह आिशहत् अनछत 33 ाुद् अर्ँ सभ पनरने पराेश् िरह र्ज् य आ हनहर ध्ना्हत्ह ख्ज हरत ई सभ ब्त अर्ँ सभह संग ज्डल ज्यतत” 34 ते ँ परसूह लेल ह्न् नँंतन ननर हर, नहएह तँ ह्खल अपन ब्त पर नँंतन हरतत नदनह लेल पय्​् प अनछ ओहर बुर्ईत

6 हुहुर सभ हेँ पनित िसु ननर नदयौह आ ने अपन ा्ती सुगर सभह साक फेनह नदयौह, ज्नर सँ ओ सभ ओहर् सभह पएर नीँ्ँ रौंनद हऽ फेर घुना हऽ अर्ँ सभ हेँ फ्नड ननर दे तत 7 ा्ँ गू, तखन अर्ँ सभ हेँ दे ल ज्यतत ख्जू, तऽ प्नब ज्यबत खरखर्उ, तखन अर्ँ सभह लेल खुजल ररतत 8 जे हेओ ा्ँ गैत अनछ, से भेरैत अनछत जे ख्जै छै , से प्बै छै त जे खरखर्ओत तहर् लेल ओ ख्लल ज्यतत” 9 अर्ँ सभ ाे सँ हेओ अनछ जे जँ ओहर बेर् र्री ा्ँ गत तँ ओहर् प्थर दऽ दे तैह? 10 आनह जँ ओ ा्छ ा्ँ गत तँ ओहर् स्ँ प दे त? 11 तखन जँ अर्ँ सभ अधल्र भऽ हऽ अपन सन् त्न सभ हेँ नीह िरद्न दे बऽ जनैत छी तँ अर्ँ सभह नपत् जे स् िग् ाे छनथ, हनह् सभ हेँ हतेह बेसी नीह ँीज दे नथन? 12 ते ँ अर्ँ सभ जे नहछु ँ्रै त छी जे ानु्​् य अर्ँ सभह संग हरनथ, से अर्ँ सभ हनह् सभह संग सेर् हरत 13 अर्ँ सभ संहीण् फ्रह पर पिेश हर, नहएह तँ निन्श नदस ज्यबल् फ्रह ँौड् आ ब्र ँौड् अनछत 14 नहएह तँ जीिन नदस ज्यबल् फ्रह संहीण् अनछ आ ब्र संहीण् अनछ आ ओहर् प्बननर्र हा अनछत 15 झूि पिह् त् सभ सँ स्िध्न रह, जे भेड ँ ्ह िस ाे अर्ँ सभ लग अबैत छनथ, ाुद् भीतर सँ ओ सभ भेनडय्धस्न छनथत 16 अर्ँ सभ ओहर् सभह फल सँ नँनबत ही ानु्​्‍य ह्ँ रह अंगूर जुरबैत अनछ आनह ह्ँ रह अंजीर? 17 तनरन् सभ नीह ग्छ नीह फल दै त अनछत ाुद् जडल ग्छ अधल्र फल दै त अनछत 18 नीह ग्छ अधल्र फल ननर दऽ सहैत अनछ आ ने गडबड ग्छ नीह फल दऽ सहैत अनछत 19 जे ग्छ नीह फल ननर दै त अनछ से ह्नर हऽ आनग ाे फेनह दे ल ज्इत अनछत 20 ते ँ हनह् सभह फल सँ अर्ँ सभ हनह् सभ हेँ नँनबत 21 जे हेओ रार् हरै त अनछ, “पभु , पभु, से सभ स् िग्ह र्ज् य ाे पिेश ननर हरतत ाुद् जे रार स् िग् ाे ररननर्र नपत्ह इच् पूर् हरै त अनछत 22 ओनर नदन रार् बहत् ल्ह हरत जे, “पभु , पभु, ही रा सभ अर्ँ ह न्ा सँ भनिषि्णी ननर हेने छी?” आ त्रर न्ा सँ दु ष्त् सभ हेँ भग् दे ने छी? आ त्रर न्ा सँ बहत र्स अद् भुत ह्ज हेलहँ ? 23 तखन रा हनह् सभ हेँ ई ब्त हरब जे , “रा अर्ँ सभ हेँ हनरय् ननर नँनलहँ त” 24 ते ँ जे हेओ रार ई ब्त सुनैत अनछ आ ओहर् प्लन हरत, रा ओहर् एहर् एरन बुख्ा्न आदाी सँ उपा् दे ब जे अपन घर प्थर पर बनौने छलत 25 बरख् भेल आ ब्नढ आनब गेल आ रि् बरल आ ओनर घर पर ा्रर दे लहत ओ ननर खसल, नहएह तँ ओ ँट्न पर नीिं पडल छलत 26 जे हेओ रार ई ब्त सुनैत अनछ आ ओहर प्लन ननर हरत, ओहर् ओनर ाूख् आदाी सँ उपा् दे ल ज्यत जे ब्लु पर अपन घर बनौने छलत 27 बरख् भेल आ ब्नढ आनब गेल आ रि् बरल आ ओनर घर पर ा्रर दे लहत ओ खनस पडल, आ ओहर पतन बहत पैघ भेलत 28 यीशु ई ब्त सभ सा्प हऽ हऽ ल्ह सभ हनहर नशक् दे खख आशय्ँनहत भऽ गेलत

अध्य 7 1 न्य ननर हर, ज्नर सँ अर्ँ सभह न् य्य ननर र्त 2 अर्ँ सभ ज्नर न्प सँ न् य्य हरब, तहर न् य्य अर्ँ सभ हेँ हयल ज्यतत 3 अर्ँ अपन भ्इह आँ खख ाे जे हण अनछ तहर् नहएह दे खैत छी, ाुद् अपन आँ खख ाे जे बीा अनछ तहर् पर निँ्र ननर हरै त छी? 4 अर्ँ अपन भ्य हेँ ह्न् हरब जे , “रा अर्ँ ह आँ खख सँ हररर ननह्नल नदअत” दे खू, त्रर आँ खख ाे एहर् बीा अनछ? 5 रे प्खंडी, पनरने अपन आँ खख सँ बीन ननह्नल नदयौहत तखन अर्ँ अपन भ्इह आँ खख ाे सँ हररर ननह्लब्ह लेल स्फस्फ दे खबत”

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29 नहएह तँ ओ हनह् सभ हेँ अनधह्रध्री जह्ँ नशक् दै त छल्र, ननर नह श्सी सभ जह्ँ त

22 यीशु हनह् हरलनथन, “ रार् प्छ्ँ ँलूत आ ाुद्​् अपन ाुद्​् हेँ ग्डयत 23 जखन ओ न्ि ाे बैसल्र तँ हनहर नश्​्‍य सभ हनह् प्छ्ँ -प्छ्ँ ँनल गेल्रत 24 साुद ाे एहर् पैघ तूफ्न उिल जे न्ि लररर सँ झ्ँ नप गेल, ाुद् ओ सुतल छलत 25 हनहर नश्​् य सभ हनह् लग आनब हऽ हनह् जगबैत हरलनथन, “पभु, रार् सभ हेँ बँ्उत 26 ओ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ रे हा निश् ि्सह ल्ह सभ, अर्ँ सभ नहएह भयभीत छी? तखन ओ उनि हऽ रि् आ साुद हेँ ड्ँ नर दे लहत आ बहत श्खर भेलत 27 ाुद् ल्ह सभ आशय्ँनहत भऽ हऽ हरलनथन, “ई हेरन ानुख अनछ जे रि् आ साुद सेर् ओहर आज् ा्नैत अनछ!” 28 जखन ओ ओनर प्र गेग्सी ल्हह दे श ाे पहँ ँल्र तखन हनह् सँ दू ग्रे दु ्​् र्त् ा् सँ गनसत भऽ हबर सभ सँ ब्रर ननहनल गेल्र, ज्नर सँ नहय् ओनर ब्र सँ ननर गुजरर सहयत 29 ओ सभ नँनँय् उिल, “रे पराेश् िरह पुत यीशु, अर्ँ सँ रार् सभह ही संबंध अनछ?” ही अर्ँ साय सँ पनरने रार् सभ हेँ सत्बय लेल एतय आयल छी? 30 हनह् सभ सँ बहत दू र पर बहत र्स सुगरह झुंड छल जे भ्जन हऽ ररल छलत 31 तखन दु ष्त् सभ हनह् सँ निनती हरै त हरलहनन, “जँ अर्ँ रार् सभ हेँ ब्रर ननह्नल दे ब तँ रार् सभ हेँ सुगरह झुंड ाे जेब्ह अनुानत नदअत” 32 ओ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ ज्उत” जखन ओ सभ ब्रर ननहलल्र तँ ओ सभ सुगरह झुंड ाे गेल्र आ दे खलहँ जे सास सुगरह झुंड एहर् खड् जगर पर ज्र-ज्र सँ दौनड हऽ साुद ाे आनब गेल आ प्नन ाे नष भऽ गेलत 33 ओहर् सभह रखननर्र सभ भ्नग हऽ नगर ाे ज् हऽ सभ ब्त आ दु ्​् र्त् ा् सभह संग जे घरन् भेल छल से सुनबैत ररल्रत 34 दे खू, पूर् नगर यीशु सँ भेर हरब्ह लेल ननहनल गेल्र, आ हनह् दे खख हनह् सँ निनती हयलनन जे ओ अपन इल्ह् सँ निद् भ’ ज्नथत

अध्य 8 1 जखन ओ पर्ड सँ उतरल्र तखन बहत र्स भीड हनह् प्छ्ँ -प्छ्ँ आनब गेल्रत 2 एहर् ह्ढी आनब हऽ ओहर आर्धन् हऽ हऽ हरलह, “पभु, जँ ँ्रै छी तँ रार् शु् हऽ सहैत छीत” 3 यीशु र्थ बढ् हऽ हनह् छूनब हऽ हरलनथन, “ रा ँ्रबत अर्ँ शु् रहत आ तुरर हनहर ह्ढ शु् भऽ गेलननत 4 यीशु हनह् हरलनथन, “ दे खू, अर्ँ हहर् ननर हरबत ाुद् ज्उ, पुर्नरतह साक अपन् हेँ दे ख्उ आ ाूस्ह आज् दे ल गेल उपर्र हेँ ँढ्उ, ज्नर सँ हनह् सभह गि्री र्त” 5 यीशु हफरनहा ाे पहँ ँल् पर एहर् सेन्पनत हनह् लग आनब गेल्रत 6 ओ हरलनन, “पभु, रार सेिह लहि्गस भय घर ाे पडल अनछत” 7 यीशु हनह् हरलनथन, “ रा आनब हऽ हनह् िीह हरबत” 8 सेन्पनत उतर दे लनथन, “पभु, रा एनर य्ग ननर छी जे अर्ँ रार छत ाे आनब ज्उ, ाुद् ा्त िँन ब्जू, तखन रार सेिह िीह भ’ ज्यतत” 9 रा अनधह्रह अधीन छी आ रार् अधीन सैननह सभ अनछत आ द्सर हेँ, “आउ, ओ आनब ज्यतत” आ रार सेिह हेँ, “ई हर, आ ओ पूर् हरै त अनछत” 10 यीशु ई ब्त सुनन आशय्ँनहत भऽ प्छ्ँ -प्छू ाे बैसल ल्ह सभ हेँ हरलनथन, “ रा अर्ँ सभ हेँ सत्‍य हरै त छी जे , रार् इस्एल ाे एतेह पैघ निश् ि्स ननर भेरल अनछत” 11 रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे पूब आ पनशा सँ बहत् ल्ह आनब अब्रा, इसर्ह आ य्हूबह संग स् िग्ह र्ज् य ाे बैसत्रत 12 ाुद् र्जह सर्न सभ ब्ररह अन्र ाे फेहल ज्यत, ओतनर ह्नब आ द्ँ त हरै त र्यतत 13 यीशु सेन्पनत हेँ हरलनथन, “ ज्उत जनरन् अर्ँ निश् ि्स हेलहँ, तेन् अर्ँ ह संग सेर् र्अयत” ओरी साय ाे ओहर सेिह िीह भ’ गेलैत 14 यीशु जखन पतुसह घर ाे अयल्र तँ दे खलनन जे हनहर स् तीह ा्य ब्ख्र सँ बीा्र पडल छनथत 15 ओ हनहर र्थ छूनब लेलह आ ब्ख्र ओहर् छ्नड दे लहत 16 स्ँ झ भेल् पर ओ सभ बहत् दु ्​् र्त् ा् सँ गनसत ल्ह सभ हेँ हनह् लग अनलननत 17 ई ब्त पूर् भऽ ज्य जे यश्य्र पिह् त् द्र् हरल गेल छलनन जे, “ओ रार् सभह दु ब्लत् हेँ ल’ हऽ रार् सभह बीा्री सभ हेँ उि् लेलननत” 18 यीशु हनह् ँ्र ह्त बहत भीड दे खख ओ आज् दे लनथन जे ओ द्सर ह्त ँनल ज्उत 19 एहर् धा्श्सी आनब हनह् हरलनथन, “गुरजी, अर्ँ जतय ज्यब, रा अर्ँ ह प्छ्ँ -प्छ्ँ ँलबत” 20 यीशु ओहर् हरलनथन, “ ल्ाडी सभह छे द र्इत छै ह आ आह्शह नँडै सभह ख्ंत् र्इत छै हत ाुद् ानु्​् य-पुत हेँ ा्थ र्खय लेल हतय ननर छननत 21 हनहर द्सर नश्​् य हनह् हरलनथन, “पभु, रार् पनरने ज् हऽ अपन नपत् हेँ दफन् नदअत”

अध्य 9 1 ओ न्ि ाे बैनस हऽ ओनर प्र हऽ अपन नगर ाे आनब गेल्रत 2 ओ सभ एहर् लहि्गस आदाी हेँ ओछ्ओन पर पडल हनह् लग अनलननत बेर्, रौसल् बढ्उ; त्रर प्प का् भऽ गेलौत 3 नहछु श्सी सभ ान ाे ब्जल, “ई आदाी नन्​् हरै त अनछत” 4 यीशु हनह् सभह निँ्र हेँ ज्नन हऽ हरलनथन, “ अर्ँ सभ अपन ा्न ाे अधल्र नहएह स्ँैत छी? 5 नहएह तँ ई हरब जे , ‘अर्ँ ह प्प का् भऽ गेलहँ त आनह ई हरब जे, “उनि हऽ ँलू?” 6 ाुद् एनर लेल जे अर्ँ सभ ई ज्नन सहब जे ानु्​् यह पुत हेँ पृथ् िी पर प्प का् हरब्ह अनधह्र छनन, (तखन ओ पक्घ्ती हेँ हरलनथन, “ उिू, अपन नबछ्ओन उि् हऽ अपन घर ज्उत” 7 ओ उनि हऽ अपन घर नदस निद् भेल्रत

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8 ाुद् ल्ह सभ ई दे खख आशय्ँनहत भऽ हऽ पराेश् िरह ानरा् हयलह जे ानु्​् य सभ हेँ एरन स्ाथ्​् य दे लननत हेँ दे खनथन जे हरि्ल् पर बैसल छलत ओ उनि हऽ हनह् प्छ्ँ -प्छ्ँ ँनल गेल्रत 10 यीशु जखन घर ाे भ्जन हरऽ बैसल छल्र तखन दे खलहँ जे बहत् हर लेननर्र आ प्पी हनह् आ हनहर नश्​् य सभह संग बैनस गेल्रत 11 फररसी सभ ई दे खख हनहर नश्​् य सभ हेँ हरलनथन, “अर्ँ सभह गुर हर िसूली आ प्पी सभह संग नहएह भ्जन हरै त छनथ?” 12 यीशु ई ब्त सुनन हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ स् हेँ िैदह आिशहत् ननर, बल् नह बीा्र हेँत” 13 ाुद् अर्ँ सभ ज्उ आ एनर ब्तह अथ् सीखू जे रा दय् हरब, बनलद्न ननर, नहएह तँ रा धा् ल्ह सभ हेँ बजबय लेल ननर आयल छी, बल् नह प्पी सभ हेँ पश्त्प हरब्ह लेल आयल छीत 14 तखन यूरन् न्ह नश्​् य सभ हनह् लग आनब हऽ हरलनथन, “रा सभ आ फररसी सभ बेर-बेर उपि्स नहएह हरै त छी, ाुद् अर्ँ ह नश्​् य सभ उपि्स नहएह ननर हरै त अनछ?” 15 यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ ही हननय्ँ ह बच् सभ त्बत धरर श्ह ह’ सहैत अनछ ज्बत धरर िर हनह् सभह संग ररत?” ाुद् ओ नदन आओत जखन िर ओहर् सभ सँ रनर जेत्र, तखन ओ सभ उपि्स हरत्रत 16 पुर्न िस ाे नि हपड्ह रु हडी हेओ ननर लग्बैत अनछ, नहएह तँ ओनर हपड् ाे जे हपड् भरब्ह लेल र्खल ज्इत अनछ से ओनर िस ाे सँ ननह्नल लैत अनछ आ ओहर फ्रल आओर बेसी भ’ ज्इत अनछत 17 आ ने हेओ निह् ानदर् पुर्न ब्तल ाे ननर दै त अनछ, ननर तऽ ब्तल रू नर ज्इत अनछ आ शर्ब खता भऽ ज्इत अनछ आ ब्तल नष भऽ ज्इत अनछ, बल् नह नि ानदर् हेँ निह् ब्तल ाे र्खख दै त अनछ आ दु नू सुरनकत भऽ ज्इत अनछत 18 जखन यीशु हनह् सभ हेँ ई ब्त हनर ररल छल्र, तखन एहर् श्सह आनब हनहर आर्धन् हयलनन, “रार बेरी एखन ारर गेल अनछत 19 यीशु उनि हऽ हनहर प्छ्ँ -प्छ्ँ ँनल गेल्र आ हनहर नश्​् य सभ सेर्त 20 एह स् ती जे ब्रर ि्​् धरर खूनह रु हडी सँ गस छलीर, हनह् प्छ्ँ आनब हऽ हनहर िसह ह्त छूनब लेलननत 21 ओ ाने-ान हरै त छलीर, “जँ रा हनहर िस हेँ छूनब सहैत छी तँ रा िीह भऽ ज्यबत” 22 यीशु ओहर् घुा् हऽ ओहर् दे खख हरलनथन, “ बेरी, स्न्न् रहत त्रर निश् ि्स त्र् िीह हऽ दे लहत ओनर घडी सँ ओ स् ती िीह भऽ गेलीरत 23 यीशु जखन श्सहह घर ाे अयल्र, तखन ि्दह आ ल्ह सभ हेँ रल् हरै त दे खलननत 24 ओ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ ्​्न नदअ, नहएह तँ द्सी ननर ारर गेल अनछ, बल् नह सुतल अनछत” आ ओ सभ ओहर् नतरस्र हरय लेल रँ नस दे लहत 25 ाुद् ल्ह सभ हेँ ब्रर ननह्नल हऽ ओ भीतर ज् हऽ ओहर र्थ पहनड लेलह आ द्सी उनि गेलत 26 एनर ब्तह पनसख् ओनर सास दे श ाे पसरर गेलत

27 यीशु ओतय सँ निद् भेल्र तँ दू र् आनर हनह् प्छ्ँ -प्छ्ँ ँनल गेल्र, “रे द्ऊदह पुत, रार् सभ पर दय् हरत” 28 घर ाे अयल् पर आनर सभ हनह् लग आनब गेल्र, आ यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ ही अर्ँ सभ हेँ निश्स अनछ जे रा ई ह्ज हऽ सहैत छी?” ओ सभ हनह् हरलनथन, “रँ , पभुत” 29 तखन यीशु हनह् सभह आँ खख छूनब हऽ हरलनथन, “ अर्ँ सभह निश् ि्सह अनुस्र अर्ँ सभह लेल र्अयत” 30 हनह् सभह आँ खख खुनज गेलननत यीशु ओहर् सभ हेँ हड् आज् दे लनथन, “ दे खू जे ई ब्त हहर् ननर बुझल र्त” 31 ाुद् ओ सभ निद् भेल् पर हनहर पनसख् ओनर सास दे श ाे पस्रर दे लनथनत 32 जखन ओ सभ ब्रर ननहलैत छल्र तखन ओ सभ एहर् गूंग् आदाी हेँ हनह् लग अनलनन जे दु ष्त् सँ गस छलत 33 जखन शैत्न हेँ ब्रर ननह्नल दे ल गेल तखन गूंग् ल्ह सभ ब्जल, आ ल्ह सभ आशय्ँनहत भऽ हऽ हरलह जे , “इस्एल ाे एरन हनरय् ननर दे खल गेल छलत” 34 ाुद् फररसी सभ हरलनथन, “ओ दु ्​् र्त् ा् सभह अध् यकह द्र् दु ्​् र्त् ा् सभ हेँ भग् दै त छनथत” 35 यीशु सभ नगर आ ग्ा ाे घुना हऽ अपन सभ्घर ाे नशक् दै त छल्र आ र्ज् यह सुसा्ँ्र पँ्र हरै त छल्र आ ल्ह सभह बीँह सभ बीा्री आ सभ बीा्री हेँ िीह हरै त छल्रत 36 ाुद् ल्ह सभ हेँ दे खख हनह् सभ पर दय् आनब गेलनन, नहएह तँ ओ सभ बेर्श भऽ गेल छल आ ओ सभ ओनर भेड ँ ् जह्ँ नछनडय् गेल छल, जहर् ँरब्र ननर र्त 37 तखन यीशु अपन नश्​् य सभ हेँ हरलनथन, “ सते फसल बहत अनछ, ाुद् ाजदू र हा अनछत 38 ते ँ अर्ँ सभ फसलह ा्नलह सँ प्थ्न् हर जे ओ अपन फसल ाे ाजदू र सभ हेँ पि्बनथत अध्य 10 1 ओ अपन ब्रर नश्​्‍य हेँ अपन् लग बजौलनन तँ हनह् सभ हेँ अशु् आत् ा् सभ हेँ ब्रर ननह्लब्ह आ सभ तररह बीा्री आ सभ तररह र्ग हेँ िीह हरब्ह अनधह्र दे लननत 2 ब्रर पेररतह न्ा ई अनछत पनरल नसा्न, जहर् पतुस हरल ज्इत छै ह, आ ओहर भ्य अख्डय्सत जबदीह पुत य्हूब आ ओहर भ्य यूरन् न्त 3 नफनलप, आ ब्थ्ल्लूत थॉास, आ ाैथू हरद्त्; अलीसह पुत य्हूब आ लेबीस, नजनहर उपन्ा थदे युस छलननत 4 नसा्न हन्नी आ यहद् इसररय्ती, जे हनह् ध्ख् दे लहत 5 यीशु एनर ब्रर ग्रे हेँ पि् हऽ आज् दे लनथन जे, “ गैरयहदी सभह ब्र ाे ननर ज्उ आ स्ारी सभह ह्न् नगर ाे ननर ज्उत 6 ाुद् इस्एलह घर्न्ह रे र्यल भेड ँ ् सभ लग ज्उत 7 ज् हऽ अर्ँ सभ एनर ब्तह पँ्र हर जे, “सग्ह र्ज् य साीप आनब गेल अनछत” 8 बीा्र सभ हेँ िीह हर, ह्ढी सभ हेँ शु् हर, ाृत् यु हेँ जीबैत हर, दु ्​् र्त् ा् सभ हेँ ब्रर ननह्लूत 9 ने स्न्, ने ँ्नी, आ ने पीतल पस् ाे र्खूत 10 आ ने अर्ँ ह य्त्ह लेल ँीर-फ्ड, ने दू र् ह्र, ने जूत् आ ने ल्िी, नहएह तँ ाजदू र अपन भ्जनह य्ग अनछत

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11 अर्ँ सभ ज्नर नगर ि् नगर ाे पिेश हरब, से पूनछ नलअ जे ओनर शरर ाे हे य्ग अनछत ज्बत धरर अर्ँ सभ ओतय सँ ननर ज्यब त्बत धरर ओतनर रहत 12 जखन अर्ँ सभ ह्न् घर ाे अबैत छी तँ ओहर् पण्ा हरत 13 जँ घर य्ग अनछ तँ ओहर् पर अर्ँ ह श्खर आनब ज्यत 14 जे हेओ अर्ँ सभह स्गत ननर हरत आ ने अर्ँ ह ब्त सुनत, तखन अर्ँ सभ ओनर घर ि् नगर सँ ब्रर ननहलब तँ अपन पएरह धूर् हेँ नरल् नदयौहत 15 रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे न्यह नदन सद्ा आ अा्र् दे शह लेल ओनर नगर सँ बेसी सरनशील र्यतत 16 दे खू, रा अर्ँ सभ हेँ भेनडय्धस्नह बीँ ाे भेड ँ ् जह्ँ पि् ररल छीत 17 ाुद् ानु्​् य सभ सँ स्िध्न रह, नहएह तँ ओ सभ अर्ँ सभ हेँ परर्द् ाे सौंनप दे त आ अपन सभ्घर ाे अर्ँ सभ हेँ ह्ड् ा्रतत 18 रार् लेल अर्ँ सभ हेँ र्जप्ल आ र्ज् सभह साक आनल ज्एत, ज्नर सँ ओ सभ आ गैर-यहदी सभह निर् गि्री भेरतत 19 ाुद् जखन ओ सभ अर्ँ सभ हेँ सौंनप दे ब तखन अर्ँ सभ ह्न् ब्जब आ ही ब्जब से ह्न् निँ्र ननर हरत 20 नहएह तँ अर्ँ सभ ननर बजैत छी, बल् नह अर्ँ सभह नपत्ह आत् ा् अर्ँ सभ ाे बजैत अनछत 21 भ्य भ्य हेँ आ ब्प बच् हेँ सौंनप दे त, आ बच् सभ अपन ा्त्-नपत्ह निर् उनि हऽ ओहर् सभ हेँ ा्रर दे तत 22 रार न्ाह ह्रणे ँ अर्ँ सभ सँ घृण् र्यत, ाुद् जे अन् त धरर सरन हरत से उ्​्र प्ओतत 23 ाुद् जखन ओ सभ एनर नगर ाे अर्ँ सभ हेँ सत्ओत तँ अर्ँ सभ द्सर नगर ाे भ्नग ज्उ, नहएह तँ रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे ज्बत धरर ानु्​् य-पुत ननर आओत त् धरर अर्ँ सभ इस्एलह नगर सभ हेँ प्र ननर हऽ सहबत” 24 नशष अपन गुर सँ ऊपर ननर अनछ आ ने सेिह अपन ा्नलह सँ बेसीत 25 नशषह लेल ई ह्फी अनछ जे ओ अपन गुर जह्ँ आ सेिह अपन ा्नलह जह्ँ त जँ ओ सभ घरह ा्नलह हेँ बेलजबूब हरने अनछ तँ ओहर् सभ हेँ ओहर घरह ल्ह हेँ हतेह बेसी हरत? 26 ते ँ ओहर् सभ सँ डे र्उ ननर, नहएह तँ ह्न् एरन ह्न् ब्त ननर अनछ जे पगर ननर र्यतत आ नुह्यल, जे पत् ननर ँलतत 27 रा अन्र ाे जे हरै त छी से इज्त ाे ब्जू, आ ह्न ाे जे सुनैत छी से घरह ँ्री पर पँ्र हरत 28 जे शरीर हेँ ा्रर दै त अनछ, ाुद् प्ण हेँ ा्रर ननर प्नब सहैत अनछ, त्नर सँ ननर डे र्उ, बल् नह ओनर सँ डे र्उ जे नरह ाे प्ण आ शरीर दु नू हेँ नष हऽ सहैत अनछत 29 ही दू र् गौरै य् एह फ्नरट ग ाे ननर बेँल ज्इत अनछ? आ ओनर ाे सँ एह ग्रे अर्ँ ह नपत्ह नबन् जाीन पर ननर खसतत 30 ाुद् अर्ँ ह ा्थह हेश सभ नगनल गेल अनछत 31 ते ँ अर्ँ सभ ननर डे र्उ, अर्ँ सभह ा्ल बहत् गौरै य् सँ बेसी अनछत 32 एनर लेल जे हेओ रार् ानु्​् यह साक सीह्र हरत, रा सेर् अपन स् िग् ाे ररननर्र नपत्ह साक हनह् सीह्र हरबत

33 ाुद् जे हेओ ानु्​् यह साक रार् असीह्र हरत, रा सेर् अपन स् िग् ाे ररननर्र नपत्ह साक ओहर् असीह्र हरबत 34 ई ननर स्ँू जे रा पृथ् िी पर श्खर पिे ब्ह लेल आयल छीत 35 रा एह आदाी हेँ ओहर नपत् सँ, बेरी हेँ ओहर ा्य सँ, आ पुत्ह हेँ स्सु सँ, नि​ि्द हरब्ह लेल आयल छीत 36 ानु्​् यह दु शन ओहर अपन घरह ल्ह र्यतत 37 जे रार् सँ बेसी नपत् ि् ा्य सँ पेा हरै त अनछ से रार् य्ग ननर अनछत 38 जे अपन कूस ननर लऽ हऽ रार् प्छ्ँ ँलैत अनछ, से रार् य्ग ननर अनछत 39 जे अपन प्ण प्नब लेत से ओहर् गा्ओतत 40 जे अर्ँ सभ हेँ गरण हरै त अनछ, से रार् गरण हरै त अनछ आ जे रार् गरण हरै त अनछ, से रार् पिे ननर्र हेँ गरण हरै त अनछत 41 जे ह्न् पिह् त्ह न्ा सँ पिह् त् हेँ गरण हरै त अनछ, तहर् पिह् त्ह इन्ा भेरतैहत जे ह्न् धा् ानु्​्‍यह न्ा पर धा्​् त् हेँ गरण हरै त अनछ, तहर् धा्​् त्ह इन्ा भेरतत “ अध्य 11 1 यीशु अपन ब्रर नश्​् य सभ हेँ आज् दऽ हऽ ओतऽ सँ हनह् सभह नगर सभ ाे नशक् दे बऽ आ पँ्र हरऽ लेल निद् भऽ गेल्रत 2 यूरन् न् जेल ाे ासीरह ह्ज सुनन हऽ अपन दू र् नश्​् य हेँ पिौलननत 3 ओ हनह् पुछलनथन, “ही अर्ँ ओ जे आबय बल् छी, आनह रा सभ द्सरह पतीक् हरै त छी?” 4 यीशु हनह् सभ हेँ उतर दे लनथन, “ ज्उ अर्ँ सभ जे सुनैत छी आ दे खैत छी से यूरन् न् हेँ फेर सँ दे ख्उत 5 आनर सभ दे खख सहैत अनछ, लंगड् सभ ँलैत अनछ, ह्ढी सभ शु् भऽ ज्इत अनछ, बरीर सभ सुनैत अनछ, ाृतह सभ जीनब उिै त अनछ आ गरीब सभ हेँ सुसा्ँ्र पँ्र हयल ज्इत अनछत 6 ओ धन अनछ जे हेओ रार् पर ह्न् आपनत ननर हरतत 7 ओ सभ निद् र्इत ह्ल यीशु यूरन् न्ह नि्य ाे ल्ह सभ हेँ पुछय लगल्र, “ अर्ँ सभ जंगल ाे ही दे खय लेल गेलहँ?” रि्सँ नरलल खढ? 8 ाुद् अर्ँ सभ ही दे खय लेल ननहललहँ ? ह्ाल िस पनररने आदाी? दे खू, ह्ाल िस पनररननर्र सभ र्ज्ह घर ाे अनछत 9 ाुद् अर्ँ सभ ही दे खय लेल ननहललहँ ? एहर् भनिषिय्? रँ , रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी, आ एहर् भनिषिय् सँ बेसीत 10 ई ओ छनथ, नजनह् ब्रे ाे नलखल अनछ, “दे खू, रा अर्ँ ह स्ाने अपन दू त हेँ पि् ररल छी जे अर्ँ ह आगू ाे ब्र तैय्र हरतत” 11 रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे स् तीगण सँ जनाल ल्ह सभ ाे यूरन् न् बपनतस् ा् दे ननर्र सँ पैघ नहय् ननर उिल अनछत 12 यूरन् न् बपनतस् ा् दे ननर्रह साय सँ एखन धरर स् िग्ह र्ज् य ाे नरं स् र्इत अनछ आ नरं सह ल्ह सभ ओहर् जबरदसी पहनड लैत अनछत

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13 नहएह तँ यूरन् न् धरर सभ पिह् त् आ धा् -ननयाह पराेश् िर पराेश् िरह भनिषि्णी हयल गेलत 14 जँ अर्ँ सभ ओहर् गरण हरय ँ्रै त छी तँ ई एनलय्र छनथ जे आबऽ िल् छल्रत 15 जहर् सुनब्ह लेल ह्न अनछ, ओ सुनयत 16 ाुद् रा एनर पीढी हेँ ह्न तररह तुलन् हरब? ई ओनर बच् सभ जह्ँ अनछ जे बज्र ाे बैसल अपन संगी सभ हेँ बजबैत अनछत 17 ओ हरलनथन, “रा सभ अर्ँ सभ हेँ प्इप बज् हऽ अर्ँ सभ ननर न्ँलहँ त रा सभ अर्ँ सभह श्ह हेलहँ , ाुद् अर्ँ सभ निल्प ननर हेलहँ त 18 यूरन् न् ने ख्इत-पीबैत आयल छल्र आ ओ सभ हरै त छनथ जे, “ओहर् ाे दु ्​् र्त् ा् छननत” 19 ानु्​् यह पुत ख्इत-पीबैत आनब गेल्र आ ओ सभ हरै त छनथ जे, “दे खू, एहर् पेरू आ शर्ब पीननर्र, हर िसूली आ प्पी सभह नातत” ाुद् बुख् ओहर संत्नह लेल ज्यज अनछत 20 तखन यीशु ओनर शरर सभ हेँ ड्ँ रय लगल्र ज्नर ाे हनहर अनधह्ं श पर्का भेल छलनन, नहएह तँ ओ सभ पश्त्प ननर हेलहत 21 नधक्र, ह्र्ऩन! नधक्र अनछ, बेतसैद्! नहएह तँ जँ अर्ँ सभ ाे जे पर्का हयल गेल अनछ से स्र आ सीद्न ाे हयल गेल ररै त तँ ओ सभ बहत पनरने ब्र् आ र्ख ाे पश्त्प हऽ लेने रनरतनथत 22 रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे न्यह नदन स्र आ सीद्न हेँ अर्ँ सभ सँ बेसी सरनशील र्यतत 23 अर्ँ हफरनहा, जे स् िग् ाे उद्त भेल छी, नरह ाे उत्रल ज्यतत 24 ाुद् रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे न्यह नदन सद्ा दे श हेँ अर्ँ सभ सँ बेसी सरनशील र्यतत 25 ओनर साय यीशु उतर दे लनथन, “ रे नपत्, आह्श-पृथीह ा्नलह, रा अर्ँ हेँ धनि्द दै त छी, नहएह तँ अर्ँ ई सभ ब्त बुख्ा्न आ बुख्ा्न सभ सँ नुह् हऽ बच् सभ हेँ पगर हयलहँ त” 26 रे नपत्, तनरन्, अर्ँ ह नजरर ाे एन् नीह ल्गलत 27 रार नपत् द्र् सभ नहछु रार् सौंपल गेल अनछत आ ने हेओ नपत् हेँ जनैत अनछ, नसि्य पुत आ जहर् पर पुत ओहर् पगर हरऽ ँ्रै त अनछत 28 अर्ँ सभ जे पररशा आ ब्नझल छी, रार् लग आनब ज्उ, आ रा अर्ँ सभ हेँ निश्ा दे बत 29 रार जुआ अपन् ऊपर उि्उ आ रार् सँ सीखूत रा नम आ नम हदय ाे छीत 30 रार जुआ सरज अनछ आ रार भ्र रलुह अनछत

3 ाुद् यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ ही अर्ँ सभ ननर पढने छी जे द्ऊद आ हनह् संग जे ल्ह सभ भूखल छल्र तखन ही हेलनथत 4 पराेश् िरह घर ाे पिेश हऽ हऽ ओ दे ख्बरी र्री खयलनन, जे हनह् आ हनह् संग ररननर्र सभह लेल ननर, बल् नह पुर्नरत सभह लेल ननर छल? 5 ही अर्ँ सभ धा्-ननया ाे ननर पढने छी जे निश्ा-नदन ाे ान् नदर ाे पुर्नरत सभ निश्ा-नदन हेँ अपनित हरै त छनथ आ ननद्​् छनथ? 6 ाुद् रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे एनर ि्ा ाख्र सँ पैघ एहर् अनछत 7 ाुद् जँ अर्ँ सभ ई जनैत रनरतहँ जे एनर ब्तह ही अथ् अनछ, “रार् दय् हरब, बनलद्न ननर, तँ अर्ँ सभ ननद्​् हेँ द्​्ी ननर िररौने रनरतहँ त” 8 ानुख-पुत निश्ा-नदनह पभु छनथत 9 ओतऽ सँ निद् भेल् पर ओ हनह् सभह सभ्घर ाे गेल्रत 10 एहर् एरन आदाी छल जहर र्थ ाुरझ् गेल छलैहत ओ सभ हनह् सँ पुछलनथन, “ही निश्ा-नदन ाे िीह हरब उनँत अनछ?” ज्नर सँ ओ सभ हनह् पर आर्प लग्बनथत 11 ओ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ अर्ँ सभ ाे एरन हेओ भेड ँ ् र्यत जहर एहर् भेड ँ ् निश्ा-नदन ाे गड् ाे खनस पडत तँ ही ओ ओहर् पहनड हऽ ब्रर ननर ननह्लत? 12 तखन भेड ँ ् सँ ानुख हतेह नीह अनछ? ते ँ निश्ा-नदन ाे नीह ह्ज हरब उनँत अनछत 13 तखन ओ ओनर आदाी हेँ हरलनथन, “ अपन र्थ बढ्उत” ओ ओहर् पस्रर दे लहत आ द्सर जह्ँ पूर् भऽ गेलत 14 तखन फररसी सभ ब्रर ननहनल हऽ हनह् निर् एहर् परर्द् हऽ लेलह जे ओ सभ हनह् ह्न् नष हऽ सहैत अनछत 15 यीशु ई ब्त बुनझ ओतऽ सँ रनर गेल्रत 16 ओ सभ हनह् सभ हेँ आज् दे लनथन जे ओ सभ हनह् सभह पररँय ननर हरनथत 17 ज्नर सँ यश्य्र पिह् त् द्र् हरल गेल ब्त पूर् भऽ ज्यत 18 दे खू रार सेिह, जहर् रा ँुनने छीत रार नपयजन, नजनह् पर रार प्ण पसर अनछत 19 ओ झगड् ननर हरत आ ने ह्नतत आ ने हेओ गली-गली ाे ओहर आि्ज सुनतत 20 ओ खढल खढ हेँ ननर त्डत आ धुँआध्र सन हेँ ननर बुझ्ओत, ज्बत धरर ओ न् य्य हेँ निजय नदस ननर पि्ओतत 21 गैर-यहदी सभ हनहर न्ा पर भर्स् हरतत 22 तखन हनह् लग एहर् आनर आ गूंग् एहर् दु ्​् र्त् ा् सँ गनसत आनल गेलनन आ ओ हनह् िीह हऽ दे लनथन जे आनर आ गूंग् दु नू ब्नज ररल छल आ दे खैत छलत 23 सभ ल्ह ँनहत भऽ हऽ हरलनथन, “ही ई द्ऊदह पुत ननर अनछ?” 24 फररसी सभ ई ब्त सुनन हऽ हरलनथन, “ई आदाी दु ्​् र्त् ा् सभ हेँ ननर भग्बैत अनछ, बल् नह दु ्​् र्त् ा् सभह सरद्र बेलजबूबह द्र्त” 25 यीशु हनह् सभह निँ्र हेँ ज्नन हऽ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ पतेह र्ज् य अपन-अपन निर्ध ाे निभ्नजत भऽ गेल अनछत एह-एहर् नगर ि् घर अपन्-अपन निर्ध ाे निभ्नजत ननर र्यतत

अध्य 12 1 ओनर साय ाे यीशु निश्ा-नदन ाे ध्नह बीँ ाे गेल्रत हनहर नश्​्‍य सभ भूखल छल्र आ ध्नह ह्न त्नड हऽ ख्य लगल्रत 2 फररसी सभ जखन ई दे खख हनह् हरलनथन, “दे खू, अर्ँ ह नश्​् य सभ ओ ह्ज हरै त अनछ जे निश्ा-नदन ाे हरब्ह उनँत ननर अनछत”

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26 जँ शैत्न शैत्न हेँ ब्रर ननह्नल दै त अनछ तँ ओ अपन् आप ाे बँनर गेल अनछत तखन ओहर र्ज ह्न् ि्ढ ररत? 27 जँ रा बेलजबुलह द्र् दु ्​् र्त् ा् सभ हेँ भग्बैत छी तँ अर्ँ सभह सन् त्न हेहर् द्र् ओहर् सभ हेँ ब्रर ननह्लैत अनछ? ते ँ ओ सभ अर्ँ ह न्य्धीश रे त्रत” 28 ाुद् जँ रा पराेश् िरह आत् ा् द्र् दु ्​् र्त् ा् सभ हेँ भग् दै त छी तँ पराेश् िरह र्ज् य अर्ँ सभ लग आनब गेल अनछत 29 जँ पनरने बलि्नह घर ाे घुनस हऽ ओहर सा् पनत ह्न् लूरत? आ तखन ओ अपन घर नबग्नड लेतत 30 जे रार् संग ननर अनछ से रार् निर्ध ाे अनछत जे रार् संग ननर जा् हरै त अनछ, से नततर-नबतर भ’ ज्इत अनछत” 31 ते ँ रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे, सभ तररह प्प आ नन्​् ानु्​् य हेँ ा्फ हयल ज्यतत 32 जे हेओ ानु्​् यह पुतह निर् ह्न् ब्त हरत तँ ओहर् ा्फ हयल ज्यतत 33 ग्छ हेँ नीह बन्उ आ ओहर फल नीह बन्उत ननर तऽ ग्छ हेँ नष हऽ नदयौह आ ओहर फल हेँ नष हऽ नदयौह, ह्रण ग्छ ओहर फल सँ नँनल ज्इत छै हत 34 रे स्ँ पह पीढी, अर्ँ सभ अधल्र भऽ हऽ नीह ब्त ह्न् ब्नज सहैत छी? ह्रण, हदयह पँुरत् सँ ाुँर बजैत अनछत 35 नीह ल्ह हदयह नीह भंड्र ाे सँ नीह ब्त ननह्लैत अनछ, आ अधल्र ल्ह अधल्र भंड्र सँ अधल्र ब्त ननह्लैत अनछत 36 ाुद् रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे, ानु्​् य सभ जे नहछु बेह्र ब्त हरत, ओहर नरस्ब-नहत्ब न्यह नदन दे तत 37 नहएह तँ अर्ँ अपन ब्तह द्र् धा् िरर्ओल ज्यब आ अर्ँ ह िँन द्र् अर्ँ हेँ द्​्ी िरर्ओल ज्यतत 38 तखन नहछु धा्श्सी आ फररसी सभ उतर दे लनथन, “गुर, रा सभ अर्ँ ह नदस सँ ह्न् संहेत दे खय ँ्रै त छीत” 39 ाुद् यीशु हनह् सभ हेँ उतर दे लनथन, “ एहर् दु ्​् र आ वनभँ्री पीढी ह्न् नँन् रह ख्ज ाे ल्गल अनछत ओहर् ह्न् नँन् र, नसि्य य्न् पिह् त्ह नँन् रत 40 जनरन् य्न्स तीन नदन आ तीन र्नत हे लह पेर ाे ररल्रत तनरन् ानु्​् यह पुत तीन नदन आ तीन र्नत पृथ् िीह हदय ाे ररत्रत 41 न्यह साय ाे नीनिेह ल्ह सभ एनर पीढीह संग उनि हऽ ओहर् द्​्ी िरर्ओतत आ दे खू, य्न्स सँ पैघ एहर् एतय अनछत 42 दनकणह र्नी एनर पीढीह संग न्यह साय ाे उनि हऽ ओहर् द्​्ी िरर्ओतत आ दे खू, सुलेा्न सँ पैघ एहर् एतय अनछत” 43 जखन ानु्​् य ाे सँ अशु् आत् ा् ब्रर ननहनल ज्इत अनछ तँ ओ शुष ्​्न ाे घुाैत अनछ आ निश्ाह ख्ज ाे ज्इत अनछ, ाुद् ओहर् नहय् ननर भेरैत अनछत 44 तखन ओ हरलनथन, “रा अपन घर ाे घुरर ज्यब, जतय सँ रा ननहललहँ त जखन ओ अबैत छनथ तँ ओहर् ख्ली, झ्डल आ सज्ओल प्नब ज्इत छनथत 45 तखन ओ ज् हऽ अपन् सँ बेसी दु ष स्तर् आन आत् ा् हेँ अपन् संग लऽ ज्इत अनछ आ ओ सभ ओनर ाे पिेश हऽ हऽ रनर ज्इत अनछत तनरन् एनर दु ष पीढीह लेल सेर् र्यतत

46 जखन ओ ल्ह सभ सँ गप हऽ ररल छल्र तखन हनहर ा्य आ भ्य सभ हनह् सँ गप हरब्ह इच् हरै त ब्रर ि्ढ छल्रत 47 तखन एह ग्रे हनह् हरलनथन, “दे खू, अर्ँ ह ा्य आ अर्ँ ह भ्य सभ ब्रर ि्ढ छनथ आ अर्ँ सँ गप हरब्ह इच् रखैत छनथत” 48 ाुद् ओ हनह् ई ब्त हरननर्र हेँ उतर दे लनथन, “ रार ा्य हे छनथ?” रार भ्इ सभ हे छनथ? 49 ओ अपन नश्​् य सभ नदस र्थ बढ् हऽ हरलनथन, “ दे खू, रार ा्य आ रार भ्य सभ! 50 नहएह तँ जे हेओ रार स् िग् ाे ररननर्र नपत्ह इँ् छ् पूर् हरत, से रार भ्य, बनरन आ ा्य छनथत अध्य 13 1 ओरी नदन यीशु घर सँ ब्रर ननहनल साुदह ह्त ाे बैसल्रत 2 बहत् भीड हनह् लग जा् भऽ गेल्र, ज्नर सँ ओ एहर् न्ि ाे बैनस हऽ बैनस गेल्रत सास भीड नहन्र पर ि्ढ भ’ गेलत 3 ओ हनह् सभ हेँ दष्र ाे बहत् ब्त हरलनथन, “ दे खू, एहर् ब्ननर्र ब्ननय लेल ननहलल छलत 4 जखन ओ ब्इल्र तँ ब्र ह्त ाे नहछु बीय् खनस पडल आ नँडै सभ आनब हऽ ओहर् सभ हेँ ख् गेलत 5 नहछु ग्रे प्थरह ्​्न पर खनस पडल्र, जतऽ हनह् सभ लग बेसी ा्नर ननर छलननत 6 रौद ननहलल् पर ओ सभ जरर गेलत जनड ननर ररब्ह ह्रणे ँ ओ सभ ाुरझ् गेलत 7 नहछु ह्ँ रह बीँ खनस पडलत ह्ँ र उगनल हऽ ओहर् सभह गल् दब् दे लहत 8 ाुद् नहछु नीह जाीन ाे खनस पडल आ नहछु सौ गुन्, नहछु स्नि गुन्, नहछु तीस गुन् फल दे लहत 9 जहर् सुनब्ह ह्न अनछ, ओ सुनयत 10 नश्​्‍य सभ आनब हऽ हनह् पुछलनथन, “अर्ँ हनह् सभ सँ दष्र ाे नहएह बजैत छी? 11 ओ हनह् सभ हेँ उतर दे लनथन, “ नहएह तँ अर्ँ सभ हेँ स् िग्ह र्ज् यह ररस् य सभ हेँ ज्नब्ह अनधह्र दे ल गेल अनछ, ाुद् हनह् सभ हेँ ई ब्त ननर दे ल गेल अनछत” 12 जहर् लग अनछ, ओहर् दे ल ज्यत आ ओहर् बेसी पँुरत् भेरतैहत 13 ते ँ रा हनह् सभ हेँ दष्र ाे ब्नज ररल छीत सुनन हऽ ओ सभ ननर सुनैत अनछ आ ने बुझैत अनछत 14 हनह् सभ ाे यश्य्रह भनिषि्णी पूर् र्इत अनछ जे हरै त अनछ जे , “सुनन हऽ अर्ँ सभ सुनब आ ननर बुझबत” अर्ँ सभ दे खब, ाुद् ननर बुझबत 15 एनर ल्ह सभह हदय ्ूल भऽ गेल अनछ आ ह्न सुनब् ाे नीरस भऽ गेल अनछ आ आँ खख ाुनन गेल अनछत हरी ं ओ सभ हनरय् आँ खख सँ दे खख हऽ ह्न सँ सुनत आ हदय सँ बुनझ ननर सहनथ आ धा् पररित्न ननर हऽ सहनथ आ रा हनह् सभ हेँ िीह हऽ सहबत” 16 ाुद् अर्ँ ह आँ खख धन अनछ, नहएह तँ ओ दे खैत अनछ, आ ह्न सुनैत अनछत 17 रा अर्ँ सभ हेँ सत्‍य हरै त छी जे अर्ँ सभ जे नहछु दे खैत छी, तहर् बहत् पिह् त् आ धा् ल्ह सभ दे खब्ह इच्

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रखैत छनथत आ जे ब्त अर्ँ सभ सुनैत छी, तहर् सुनैत छी, ाुद् ननर सुनने छीत 18 ते ँ अर्ँ सभ ब्ननर्रह दष्र सुनूत 19 जखन हेओ र्जह िँन सुनैत अनछ आ ओहर् ननर बुझैत अनछ, तखन दु ष आनब हऽ अपन हदय ाे जे नहछु ब्रल छल, तहर् पहनड लैत अनछत ई ओ छनथ नजनह् ब्र ह्त ाे बीय् भेरलननत 20 ाुद् जे बीय् प्थरह ्​्न पर लऽ गेल अनछ, से ओ अनछ जे िँन सुनैत अनछ आ आन् सँ ओहर् गरण हरै त अनछत 21 तैय् ओ अपन् ाे जनड ननर जा् लेने अनछ, बल् नह नहछु सायह लेल नरहल अनछ, नहएह तँ जखन िँनह ह्रणे ँ हष ि् सत्ओल ज्इत अनछ तखन ओ तस भऽ ज्इत अनछत 22 जे ह्ँ रह बीँ ाे बीय् प्नब गेल अनछ, से ओ अनछ जे िँन सुनैत अनछत एनर संस्रह नँर् आ धनह छल-पपंँ िँन हेँ गल् घ्ंरैत अनछ आ ओ ननषल भऽ ज्इत अनछत 23 ाुद् नीह भूना ाे जे बीय् लऽ गेल अनछ से ओ अनछ जे िँन सुनैत अनछ आ ओहर् बुझैत अनछत जे फल सेर् दै त अनछ आ नहछु सौ गुन्, नहय् स्नि, नहछु तीस गुन् फल दै त अनछत 24 ओ हनह् सभ हेँ एहर् आओर दष्र दै त हरलनथन, “ सग्ह र्ज् य ओनर आदाीह उपा् अनछ जे अपन खेत ाे नीह बीय् ब्नन ररल अनछत 25 ाुद् जखन ल्ह सभ सुतल छल तखन ओहर शतु आनब हऽ गहा ाे खरपति्र ब्नन हऽ ँनल गेलत 26 ाुद् जखन हररर उगनल हऽ फल दे लह तऽ खरपति्र सेर् पहर भेलत 27 घरह न्हर सभ आनब हऽ हनह् हरलनथन, “ार्र्ज, ही अर्ँ अपन खेत ाे नीह बीय् ननर र्पलहँ ?” तखन ई हतय सँ खरपति्र अनछ? 28 ओ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “एहर् शतु ई ह्ज हेलह अनछत” न्हर सभ हनह् हरलनथन, “तखन ही अर्ँ ँ्रै त छी जे रा सभ ज् हऽ ओहर् सभ हेँ जा् हरी?” 29 ाुद् ओ हरलनथन, “ननरत हरी ं ज्बत अर्ँ सभ खरपति्र जा् हरब तखन गहा सेर् ओहर् संग जनड ननर उख्नड दे बत” 30 हरनी धरर दु नू ग्रे एह संग बढय नदयौह, आ हरनीह साय ाे रा हरनी हरयिल् सभ हेँ हरब जे, “पनरने खरपति्र हेँ जा् हर आ ओहर् जरे ब्ह लेल गिरी ाे ब्खन नदयौह, ाुद् गहा हेँ रार ह्िी ाे जा् हरत” 31 ओ हनह् सभ हेँ एहर् आओर दष्र दै त हरलनथन, “ सग्ह र्ज् य एहर् सरस्हह द्न् जह्ँ अनछ, जहर् ानु्​् य अपन खेत ाे ब्नन लेलहत 32 ई सभ बीय् ाे सभ सँ छ्र अनछ, ाुद् जखन ई बनढ ज्इत अनछ तखन ओ जडी-बूरी ाे सबसँ पैघ र्इत अनछ आ ग्छ बनन ज्इत अनछ, ज्नर सँ आह्शह नँडै सभ आनब हऽ ओहर ड्रर ाे िररर ज्इत अनछत 33 ओ हनह् सभ हेँ एहर् आओर दष्र बजौलननत स् िग्ह र्ज् य खाीर जह्ँ अनछ, जे स् ती लऽ हऽ तीन न्प आर् ाे नुह् लेलह, ज्बत धरर पूर् खाीर ननर भऽ गेलत 34 ई सभ ब्त यीशु ल्ह सभ हेँ दष्र ाे हरलननत ओ हनह् सभ सँ नबन् ह्न् दष्रह ब्त ननर हरलननत 35 ज्नर सँ ई ब्त पूर् भऽ ज्य जे पिह् त् द्र् हरल गेल छलनन जे, “रा द्​् र्न् त ाे अपन ाुँर ख्लबत” रा ओनर ब्त सभ हेँ ब्जब जे संस्रह नीिं सँ गुप र्खल गेल अनछत

36 तखन यीशु ल्ह सभ हेँ निद् हऽ घर ाे गेल्र आ हनहर नश्​् य सभ हनह् लग आनब हऽ हरलनथन, “रार् सभ हेँ खेतह खरपति्रह दष्र सुन्उत” 37 ओ हनह् सभ हेँ उतर दे लनथन, “ जे नीह बीय् ब्बैत अनछ से ानु्​् यह पुत अनछत 38 खेत संस्र अनछत नीह बीय् र्जह संत्न अनछत ाुद् खरपति्र दु षह संत्न अनछत 39 जे शतु ओहर् सभ हेँ ब्नन दे लह से शैत्न अनछत फसल संस्रह अंत अनछ; आ फसल ह्रननर्र स् िग्दूत छनथत 40 जनरन् खरपति्र जा् हऽ आनग ाे जर्ओल ज्इत अनछत एनर संस्रह अर ाे सेर् एरने र्यतत 41 ानु्​् यह पुत अपन स् िग्दूत सभ हेँ पि्ओत आ ओ सभ अपन र्ज् य सँ सभर् अपर्ध आ अधा् हरयिल् सभ हेँ जा् हऽ लेत्रत 42 ओ सभ ओहर् सभ हेँ आनग हेर भटी ाे फेनह दे तैहत 43 तखन धा्​् त् सभ अपन नपत्ह र्ज् य ाे सूय् जह्ँ ँाहतत जेहर् सुनै हे ह्न छै , िू सुनैत 44 फेर स् िग्ह र्ज् य खेत ाे नुह्यल खज्न् जह्ँ अनछत जे जखन हेओ भेनर ज्इत अनछ तँ ओ नुह् लैत अनछ आ ओहर आन् ाे ज् हऽ अपन सभर् ँीज बेनँ हऽ ओनर खेत हेँ हीनन लैत अनछत 45 फेर स् िग्ह र्ज् य एहर् बननय् जह्ँ अनछ जे नीह ा्तीह ख्ज हरै त अनछत 46 ओ एहर् पैघ ा्ती भेरल् पर ज् हऽ अपन सभ नहछु बेनँ हऽ हीनन लेलहत 47 फेर स् िग्ह र्ज् य ज्ल जह्ँ अनछ जे साुद ाे फेहल गेल छल आ सभ तररह जा् हयल गेल छलत 48 ओ सभ जखन भरर गेल तखन ओ सभ नहन्र पर आनब बैनस गेल आ नीह हेँ बत्न ाे जा् हऽ लेलह, ाुद् अधल्र हेँ फेनह दे लहत 49 संस्रह अन् त ाे सेर् एरने र्यत, स् िग्दूत सभ आनब हऽ दु ्​् र ल्ह सभ हेँ ध्ना्ह ल्ह सभ ाे सँ अलग हऽ दे त्रत 50 ओ सभ ओहर् सभ हेँ आनग हेर भटी ाे फेनह दे तैहत 51 यीशु हनह् सभ हेँ पुछलनथन, “ ही अर्ँ सभ ई सभ ब्त बुनझ गेलहँ ?” ओ सभ हनह् हरलनथन, “रँ , पभुत” 52 तखन ओ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “एनर लेल जे श्सी हेँ स् िग्ह र्ज् यह नशक् दे ल ज्इत अनछ, से ओनर घरह ा्नलह जह्ँ अनछ जे अपन भंड्र सँ नि-पुर्न िसु सभ ननह्लैत अनछत” 53 यीशु एनर दष्र सभ हेँ सा्प हऽ हऽ ओतऽ सँ ँनल गेल्रत 54 ओ अपन दे श पहँ ँल् पर हनह् सभ हेँ सभ्घर ाे नशक् दे लनथन, ज्नर सँ ओ सभ आशय्ँनहत भऽ हऽ हरलनथन, “एनर आदाी हेँ ई बुख् आ ई सभ पर्का हतय सँ भेरल अनछ?” 55 ही ई बढईह बेर् ननर अनछ? ही ओहर ा्यह न्ा ाररया ननर छै ह? हनहर भ्य य्हूब, यूसुस, नसा्न आ यहद्? 56 हनहर बनरन सभ, ही ओ सभ रार् सभह संग ननर अनछ? तखन ई सभ ब्त एनर आदाी हेँ हतय सँ भेरल अनछ? 57 ओ सभ हनह् पर आरत भऽ गेल्रत यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ पिह् त् अपन दे श आ अपन घर छ्नड हऽ ह्न् आदररीन ननर र्इत अनछत” 58 ओतऽ हनह् सभह अनिश् ि्सह ह्रणे ँ ओ बहत र्स पर्का ननर हयलननत

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अध्य 14

24 ओ न्ि साुदह बीँ्बीँ छल आ लररर सँ झरनह ररल छलत 25 र्नत ाे ँ्ररा परर ाे यीशु साुद पर ँलैत हनह् सभह लग गेल्रत 26 नश्​् ‍य सभ जखन यीशु हेँ साुद पर ँलैत दे खख हऽ ँनहत भऽ हऽ हरलनथन, “ई आत् ा् अनछत ओ सभ डरसँ नँनँय् उिलत 27 यीशु तुरर हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ रै र रहत ई रा छी; डरब ननरत 28 पतुस हनह् उतर दे लनथन, “पभु, जँ अर्ँ छी तँ रार् प्नन पर अर्ँ ह लग आबय लेल हरबत” 29 ओ हरलनथन, “आउत” जखन पतुस न्ि सँ उतरल्र तँ ओ प्नन पर ँनल हऽ यीशु लग जेब्ह लेल ँनल गेल्रत 30 ाुद् जखन ओ रि्ह उधा ाँबैत दे खलनन तँ ओ भयभीत भऽ गेल्रत ओ डूबय लगल्र, “पभु , रार् बँ्उत” 31 तुरर यीशु र्थ बढ् हऽ हनह् पहनड हऽ हरलनथन, “ रे हा निश् ि्सह ल्ह, अर्ँ हेँ नहएह शंह् भेल? 32 जखन ओ सभ न्ि ाे बैसल्र तखन रि् रनह गेलत 33 तखन न्ि ाे बैसल ल्ह सभ आनब हऽ हनहर आर्धन् हयलनन आ हरलनथन, “सते अर्ँ पराेश् िरह पुत छीत” 34 ओ सभ ओनर प्र ँनल गेल्र आ ओ सभ गेनेसरे त दे श ाे आनब गेल्रत 35 ओनर ि्ाह ल्ह सभ हेँ हनह् ब्रे ाे पत् ँलल् पर ओ सभ ँ्रह्तह सास दे श ाे पि् दे लनथन आ सभ बीा्र हेँ हनह् लग अनलननत 36 ओ हनह् सँ निनती हयलनन जे ओ सभ ा्त हनहर िसह ह्त हेँ छु नब सहयत

1 ओनर साय ाे र्जप्ल रे र्दे स यीशुह पनसख् सुनलननत 2 ओ अपन न्हर सभ हेँ हरलनथन, “ई यूरन् न् बपनतस् ा् दे ननर्र छनथत ओ ाृत् यु ाे सँ जीनब उिल अनछत आ ते ँ हनह् ाे पर्काह ह्ज दे ख्इत अनछत 3 रे र्दे स यूरन् न् हेँ पहनड हऽ ब्खन हऽ जेल ाे र्खख दे ने छल्र, जे हनहर भ्य नफनलपुसह स् ती रे र्नदय्ह ह्रणे ँ छलननत 4 यूरन् न् हनह् हरलनथन, “अर्ँ हेँ हनह् संग ररब उनँत ननर अनछत” 5 जखन यीशु हनह् ा्रर दे बऽ ँ्रै त छल्र तँ ओ ल्ह सभ सँ डे र् गेल्र, नहएह तँ ओ सभ हनह् भनिषिय् बुझैत छल्रत 6 ाुद् जखन रे र्दे सह जननदन ान्ओल गेल तखन रे र्नदय्ह बेरी हनह् सभह स्झ्ँ न्ँैत रे र्दे स हेँ पसर हयलननत 7 तखन ओ शपथ गरण हयलनन जे ओ जे नहछु ा्ँ गनथन से दे बननत 8 ओ अपन ा्यह ननद् श सँ पनरने बजलीर, “रार् एतय यूरन् न् बपनतस् ा् दे ननर्रह ा्थ एहर् प्नन ाे दऽ नदअत” 9 र्ज् दु खी भऽ गेल्र, ाुद् शपथह ह्रणे ँ आ हनह् संग भ्जन हरय बल् सभ हेँ ओ ओहर् दे ब्ह आज् दे लनथनत 10 ओ जेल ाे यूरन् न्ह नसर ह्नर हऽ पि् दे लनथनत 11 ओहर ा्थ एहर् बत्न ाे आनन हऽ ओनर हन् हेँ दे ल गेलननत 12 हनहर नश्​् य सभ आनब हऽ शि हेँ लऽ हऽ ग्नड हऽ यीशु हेँ हरलनथनत 13 यीशु ई ब्त सुनन हऽ ओतऽ सँ न्ि सँ अलग-अलग ारभूना ाे निद् भेल्रत 14 यीशु ननहनल गेल्र आ बहत र्स भीड दे खख हनह् सभ पर दय् आनब गेल्र आ हनह् सभह बीा्र सभ हेँ िीह हयलननत 15 स्ँ झ भेल् पर हनहर नश्​् य सभ हनह् लग आनब हऽ हरलनथन, “ई ारभूना अनछ आ आब साय बीनत गेल अनछत ल्ह सभ हेँ निद् हर, ज्नर सँ ओ सभ ग्ा-घर ज् हऽ अपन् लेल भ्जन हीनन सहयत” 16 यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ ओहर् सभ हेँ जेब्ह पय्जन ननरत अर्ँ सभ ओहर् सभ हेँ ख्य लेल दऽ नदयौहत 17 ओ सभ हनह् हरलनथन, “रार् सभ लग प्ँ ँर् र्री आ दू र् ा्छ ा्त अनछत” 18 ओ हरलनथन, “ओ सभ एतय रार् लग आनन नदअत” 19 ओ ल्ह सभ हेँ घ्स पर बैसब्ह आज् दे लनथन आ प्ँ ँर् र्री आ दू र् ा्छ लऽ हऽ स् िग् नदस तहैत आशी् दऽ हऽ त्नड हऽ र्री सभ अपन नश्​् य सभ हेँ आ नश्​् य सभ हेँ भीड हेँ दऽ दे लनथन . 20 ओ सभ भ्जन हऽ हऽ तृप भऽ गेलत 21 जे सभ भ्जन हेने छल, से स् तीगण आ बच् सभह अनतररय हरीब प्ँ ँ रज्र पुर् छलत 22 यीशु तुरर अपन नश्​्‍य सभ हेँ न्ि ाे ँढब्ह लेल ब्ध हयलनन आ हनह् सँ आगू बनढ हऽ द्सर ह्त ँनल गेल्रत 23 ल्ह सभ हेँ निद् हऽ हऽ ओ अलग-अलग पर्ड पर प्थ्न् हरब्ह लेल ँनल गेल्रत

अध्य 15 1 तखन यरशलेाह धा्श्सी आ फररसी सभ यीशु लग आनब हऽ हरलनथनत 2 त्रर नश्​् य सभ बूढ-पुर्न सभह परमर्ह उलंघन नहएह हरै त अनछ? र्री ख्इत ह्ल र्थ ननर ध्बैत छनथत 3 ाुद् यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ अर्ँ सभ सेर् अपन परमर् सँ पराेश् िरह आज्ह उलंघन नहएह हरै त छी? 4 पराेश् िर आज् दे लनथन जे, “अपन ब्प-ा्ए हेँ आदर हरत” 5 ाुद् अर्ँ सभ हरै त छी जे , जे हेओ अपन ब्प-ा्ए हेँ हरत जे , ‘ई िरद्न अनछ, ज्नर सँ अर्ँ हेँ रार् सँ ल्भ भ’ सहैत अनछत 6 ओहर ब्प आ ा्यह आदर ननर हर, ओ सतंत ररतत एनर तररे ँ अर्ँ सभ अपन परमर् सँ पराेश् िरह आज् हेँ बेह्र हयलहँ त 7 अर्ँ सभ प्खंडी सभ, यश्य्र अर्ँ सभह नि्य ाे नीह जह्ँ भनिषि्णी हयलननत 8 ई ल्ह अपन ाुँर सँ रार् लग अबैत अनछ आ अपन ि्र सँ रार् आदर हरै त अनछत ाुद् हनह् ल्हननह हदय रार् सँ दू र अनछत 9 ाुद् ओ सभ वथ् ाे रार आर्धन् हरै त छनथ, आ ानु्​् यह आज्ह नशक्ह लेल नसख्बैत छनथत 10 ओ ल्ह सभ हेँ बज् हऽ हरलनथन, “ सुनू आ बुझतू 11 जे ाुँर ाे ज्इत अनछ से ानु्​् य हेँ अशु् ननर हरै त अनछत ाुद् जे ाुँर सँ ननहलैत अनछ, से ानु्​् य हेँ अशु् हरै त अनछत”

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12 तखन हनहर नश्​् य सभ आनब हऽ हनह् पुछलनथन, “ही अर्ँ जनैत छी जे फररसी सभ ई ब्त सुनन हऽ आरत भऽ गेल्र?” 13 ाुद् ओ उतर दे लनथन, “ रार स् िग्य नपत् जे ह्न् पौध् ननर र्पने छनथ, से जनड सँ उख्नड दे ल ज्यतत” 14 ओहर् सभ हेँ छ्डू, ओ सभ आनर सभह आनर नेत् बनूत आनर जँ आनर हेँ आगू बढबैत अनछ तँ दु नू ख्नध ाे खनस पडतत 15 तखन पतुस हनह् हरलनथन, “रार् सभ हेँ ई दष्र सुन्उत” 16 यीशु पुछलनथन, “ ही अर्ँ सभ सेर् अखन् बुनझ ननर ररल छी?” 17 ही अर्ँ सभ एखन धरर ई ननर बुझैत छी जे ाुँर ाे जे नहछु पिेश हरै त अनछ से पेर ाे ज्इत अनछ आ बरर् ाे फेनह दे ल ज्इत अनछ? 18 ाुद् जे ब्त ाुँर सँ ननहलैत अनछ से हदय सँ ननहलैत अनछत ओ सभ ानु्​् य हेँ अशु् हरै त अनछत 19 हदय सँ अधल्र निँ्र, रत्, वनभँ्र, वनभँ्र, ँ्री, झूि गि्री आ नन्​् ननहलैत अनछत 20 ई सभ ानुख हेँ अशु् हरै त अनछ, ाुद् र्थ ननर ध्ओल गेल भ्जन हरब ानु्​् य हेँ अशु् ननर हरै त अनछत 21 यीशु ओतय सँ ज् हऽ स्र आ सीद्न पदे श ाे निद् भेल्रत 22 ओनर इल्ह् सँ हन्नह एहर् स् ती हनह् नँनँय् हऽ हरलनथन, “रे पभु , रे द्ऊदह पुत, रार् पर दय् हरत रार बेरी एहर् शैत्नसँ बहत परे श्न अनछत 23 ाुद् ओ ओहर् एह् शब ननर उतर दे लनथनत हनहर नश्​् य सभ आनब हऽ हनह् सँ निनती हयलनन जे, “ओहर् निद् हऽ नदयौहत नहएह तँ ओ रार् सभह प्छ्ँ -प्छ्ँ ह्नैत छनथत 24 ाुद् ओ उतर दे लनथन, “ रा इस्एलह घर्न्ह रे र्यल भेड ँ ् सभह नदस छ्नड ननर पि्ओल गेल छीत” 25 तखन ओ आनब हऽ हनहर आर्धन् हयलनन आ हरलनथन, “पभु, रार सर्यत् हरत” 26 ाुद् ओ उतर दे लनथन, “ बच् सभह र्री लऽ हऽ हुहुर सभह र्थ ाे फेनह दे ब उनँत ननरत” 27 ओ बजलीर, “सत रे पभु , तइय् हुहुर सभ अपन ा्नलहह रे बुल पर सँ खसैत रु हडी ख्इत अनछत” 28 तखन यीशु हनह् उतर दे लनथन, “ रे स् ती, अर्ँ ह निश् ि्स बहत पैघ अनछत ओनर घडी सँ ओहर बेरी िीह भ’ गेलैत 29 यीशु ओतऽ सँ निद् भऽ गलील साुदह साीप पहँ ँल्रत एह पर्ड पर ँनढ हऽ ओतनर बैनस गेल्रत 30 बहत र्स भीड हनह् लग आनब हऽ लंगड्, आनर, गूंग्, अपंग आ बहत् ल्ह सभ हनह् सभ हेँ यीशुह पएर लग फेनह दे लहननत ओ ओहर् सभ हेँ िीह हयलननत 31 ल्ह सभ गूंग् सभ हेँ बजैत दे खख, अपंग सभ हेँ स्, लंगड् सभ हेँ ँलैत आ आनर सभ हेँ दे खख हऽ दे खख आशय्ँनहत भऽ गेलत 32 तखन यीशु अपन नश्​् य सभ हेँ बज् हऽ हरलनथन, “ रार् ओनर भीड पर दय् आनब ररल अनछ, नहएह तँ ओ सभ एखन तीन नदन धरर रार् संग ररै त अनछ आ नहछु ननर ख्य पडै त अनछत 33 हनहर नश्​् य सभ हनह् पुछलनथन, “रार् सभ हेँ जंगल ाे एतेह र्री हतय सँ भेरत जे एतेह र्स भीड हेँ भरर सहब?”

34 यीशु हनह् सभ हेँ पुछलनथन, “ अर्ँ सभ लग हतेह र्री अनछ?” ओ सभ हरलहनन, “स्त आ नहछु छ्र-छ्र ा्छत” 35 ओ ल्ह सभ हेँ जाीन पर बैसब्ह आज् दे लनथनत 36 ओ स्तर् र्री आ ा्छ लऽ हऽ धन् यि्द दऽ हऽ त्नड हऽ अपन नश्​् य सभ हेँ आ नश्​् य सभ हेँ भीड हेँ दऽ दे लनथनत 37 ओ सभ भ्जन हऽ हऽ तृप भऽ गेलत 38 भ्जन हरऽ िल् ँ्रर रज्र पुर् छल, स् ती आ बच् सभह अनतररयत 39 ओ ल्ह सभ हेँ निद् हऽ जर्ज पर ँनढ ागदल् पदे श ाे आनब गेल्रत अध्य 16 1 फररसी सभ सेर् सदु ही सभह संग आनब हऽ हनह् सभ हेँ परीक् लेलह जे स् िग् सँ हनह् सभ हेँ ह्न् ँात् ह्र दे ख्बयत 2 ओ हनह् सभ हेँ उतर दे लनथन, “ स्ँ झ भेल् पर अर्ँ सभ हरै त छी जे नीह ाौसा र्यत, नहएह तँ आह्श ल्ल भऽ गेल अनछत” 3 भ्रे -भ्र, “आइ नदन अधल्र ाौसा र्यत, नहएह तँ आह्श ल्ल आ उडै त अनछत” रे प्खंडी सभ, अर्ँ सभ आह्शह ाुँर हेँ बूनझ सहैत छीत ाुद् ही अर्ँ सभ सायह संहेत हेँ ननर बुनझ सहैत छी? 4 दु ष आ वनभँ्री पीढी ह्न् नँन् रह ख्ज ाे ल्गल अनछत ओहर् ह्न् नँन् र, नसि्य य्न् पिह् त्ह नँन् रत” ओ ओहर् सभ हेँ छ्नड हऽ ँनल गेल्रत 5 जखन हनहर नश्​् य सभ ओनर ह्त पहँ ँल्र तँ ओ सभ र्री लेबऽ नबसरर गेल छल्रत 6 तखन यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ फररसी आ सदु ही सभह खाीर सँ स्िध्न रह आ स्िध्न रहत” 7 ओ सभ आपस ाे निँ्र-निाश् हरै त हरलनथन, “रा सभ र्री ननर लेने छीत” 8 यीशु ई ब्त बुनझ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ रे हा निश् ि्सह ल्ह सभ, अर्ँ सभ आपस ाे नहएह तह्-नितह् हरै त छी, नहएह तँ अर्ँ सभ र्री ननर अनलहँ ?” 9 ही अर्ँ सभ एखन धरर ननर बुझैत छी आ ने प्ँ ँ रज्र ाे सँ प्ँ ँ र्री आ हतेह र्हरी उिौलहँ से ा्न ननर अनछ? 10 ँ्रर रज्र ाे सँ स्तर् र्री आ हतेह र्हरी अर्ँ सभ ननर उिौलहँ? 11 अर्ँ सभ ह्न् ननर बुझैत छी जे रा अर्ँ सभ हेँ र्रीह नि्य ाे ई ब्त ननर हरलहँ जे अर्ँ सभ फररसी आ सदु ही सभह खाीर सँ स्िध्न रह? 12 ओ सभ बुनझ गेल्र जे ओ हनह् सभ हेँ र्रीह खाीर सँ ननर, बल् नह फररसी आ सदु ही सभह नशक् सँ स्िध्न ररब्ह लेल हरै त छनथत 13 यीशु हैसररय् नफनलपी पदे श ाे पहँ ँल् पर अपन नश्​् य सभ सँ पुछलनथन, “ ानु्​् य सभह पुत हे हरै त अनछ?” 14 ओ सभ हरलनथन, “नहछु ल्ह हरै त अनछ जे अर्ँ यूरन् न् बपनतस् ा् दे ननर्र छीत आ द्सर ल्ह नया्य्र ि् ह्न् भनिषिय्त 15 ओ हनह् सभ हेँ पुछलनथन, “ ाुद् अर्ँ सभ हे हरै त छी जे रा हे छी?”

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16 नसा्न पतुस उतर दे लनथन, “अर्ँ ासीर, जीनित पराेश् िरह पुत छीत” 17 यीशु हनह् उतर दे लनथन, “ रे नसा्न बरज्न्, अर्ँ धन छी, नहएह तँ अर्ँ हेँ ई ब्त ा्ं स आ खून ननर, बल् नह रार स् िग् ाे ररननर्र नपत् पगर हयलनन अनछत” 18 रा अर्ँ हेँ ईर् हरै त छी जे, अर्ँ पतुस छी, आ एनर ँट्न पर रा अपन ाण् डली बनबैत छीत आ नरहह फ्रह ओहर् पर र्िी ननर र्यतत 19 रा अर्ँ हेँ स् िग्ह र्ज् यह ँ्भी दऽ दे बत 20 तखन यीशु अपन नश्​् य सभ हेँ आज् दे लनथन जे ओ सभ हहर् ई ननर हरनथ जे ओ यीशु ासीर छनथत 21 तनरय् सँ यीशु अपन नश्​्‍य सभ हेँ ई दे ख्बय लगल्र जे हनह् यरशलेा ज् हऽ प्ँीन-पुर्नरत आ धा्-नशकह सभह बहत हष भ्नग हऽ ा्रल जेब्ह ँ्री आ तेसर नदन जीनब उिबत 22 तखन पतुस हनह् पहनड हऽ ड्ँ रय लगल्र, “रे पभु, अर्ँ सँ दू र रहत” 23 ाुद् ओ घुना हऽ पतुस हेँ हरलनथन, “रे शैत्न, अर्ँ रार् प्छ्ँ रनर ज्उत 24 तखन यीशु अपन नश्​् य सभ हेँ हरलनथन, “ जँ हेओ रार् प्छ्ँ आबय ँ्रै त अनछ तँ ओ अपन् हेँ त्नग अपन कूस उि् हऽ रार् प्छ्ँ ल्गयत” 25 जे हेओ अपन प्ण बँ्ओत से ओहर् गा्ओतत 26 जँ ानु्​्‍य सास संस्रह ल्भ उि् लेत आ अपन प्ण गा् लेत तँ ओहर् ही फ्यद्? आनह ानु्​् य अपन प्णह बदल् ाे ही दे त? 27 ानुख-पुत अपन नपत्ह ानरा् ाे अपन स् िग्दूत सभह संग आनब ज्यतत तखन ओ पतेह हेँ अपन ह्जह अनुस्र फल दे नथनत 28 रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे एतय नहछु एरन ल्ह छनथ जे ज्बत धरर ानु्​् य-पुत हेँ अपन र्ज् य ाे अबैत ननर दे खत त् धरर ाृत् युह स्द ननर लेतत

9 जखन ओ सभ पर्ड सँ उतरै त छल्र तखन यीशु हनह् सभ हेँ आज् दे लनथन, “ ज्बत धरर ानु्​् य-पुत ाृत् यु ाे सँ जीनब उित त्बत धरर ई दश्न हहर् ननर हनर नदअत” 10 हनहर नश्​् य सभ हनह् सँ पुछलनथन, “तखन श्सी सभ नहएह हरै त छनथ जे एनलय्र हेँ पनरने आबय पडतनन?” 11 यीशु हनह् सभ हेँ उतर दे लनथन, “ सते एनलय्र पनरने आनब हऽ सभ नहछु िीह हऽ लेत्रत” 12 ाुद् रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे एनलय्र पनरने सँ आनब गेल छनथ, ाुद् ओ सभ हनह् ननर नँनलनन, ाुद् हनह् संग जे नहछु ँ्रै त छल्र से हयलननत तनरन् ानु्​् य-पुत सेर् हनह् सभह हष उि्ओतत 13 तखन नश्​् य सभ बुनझ गेल्र जे ओ हनह् सभ हेँ बपनतस् ा् दे ननर्र यूरन् न्ह नि्य ाे हरै त छनथत 14 ल्ह सभ ल्ह लग पहँ ँल् पर एह ग्रे हनह् लग िे हन रे ह हऽ हरलनथनत 15 पभु, रार बेर् पर दय् हर, नहएह तँ ओ प्गल आ घबर्रनर ाे अनछ, नहएह तँ ओ बेर-बेर आनग ाे खनस पडै त अनछ आ बेर-बेर प्नन ाे खनस पडै त अनछत 16 रा हनह् अर्ँ ह नश्​् य सभह लग अनलहँ , ाुद् ओ सभ हनह् िीह ननर हऽ सहल्रत 17 तखन यीशु उतर दे लनथन, “ रे अनिश्स आ निहृत पीढी, रा अर्ँ सभह संग हतेह नदन धरर ररब? रा अर्ँ हेँ हतेह नदन धरर हष सरब? ओहर् एतय रार् लग आनन नदयौहत 18 यीशु शैत्न हेँ ड्ँ नर दे लनथनत ओनर साय सँ ओ बच् िीह भऽ गेल्रत 19 तखन नश्​् य सभ अलग-अलग यीशु लग आनब पुछलनथन, “रार् सभ हनह् नहएह ननर भग् सहलहँ ?” 20 यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “अर्ँ सभह अनिश् ि्सह ह्रणे ँ रा अर्ँ सभ हेँ सत्‍य हरै त छी जे जँ अर्ँ सभह निश् ि्स सरस्हह द्न् जह्ँ अनछ तँ अर्ँ सभ एनर पर्ड हेँ हरब जे , ‘एतय सँ ओतऽ रनर ज्उत आ ओ रनर ज्यतत आ अर्ँ सभह लेल ह्न् ब्त असंभि ननर र्यतत 21 ाुद् एनर तररह ननर, बल् नह प्थ्न् आ उपि्स सँ ब्रर ननहलैत अनछत 22 जखन ओ सभ गलील ाे ररै त छल्र तखन यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ ानु्​् य-पुत हेँ ानु्​् य सभह र्थ ाे सौंपल ज्यतत 23 ओ सभ ओहर् ा्रर दे तैह आ तेसर नदन ओ जीनब उितत आ ओ सभ अतनधह दु ःखी छल्रत 24 जखन ओ सभ हफरनहा पहँ ँल्र तखन हरह प्इ लेननर्र सभ पतुस लग आनब हऽ हरलनथन, “ही अर्ँ ह ा्नलह हर ननर दै त छनथ?” 25 ओ हरलनथन, “रँ त” घर ाे अयल् पर यीशु हनह् र्नह हऽ हरलनथन, “ नसा्न, अर्ँ ह ही निँ्र अनछ?” पृथीह र्ज् हेहर् सँ रीनत-ररि्ज ि् हर लैत छनथ? अपन संत्नह, आनह अनज्न ल्हह? 26 पतुस हनह् हरलनथन, “परदे शी ल्हहत” यीशु हनह् हरलनथन, “तखन बच् सभ सतंत भऽ गेल अनछत” 27 ाुद्, हरी ं रा सभ हनह् सभ हेँ िे स ननर पहँ ँ्बी, साुद ाे ज् हऽ रडू फेनह हऽ जे ा्छ पनरने उिै त अनछ, तहर् उि्उत जखन अर्ँ हनहर ाुँर ख्लब तखन अर्ँ हेँ एहर् प्इ भेरतत

अध्य 17 1 छर नदनह ब्द यीशु पतुस, य्हूब आ हनहर भ्य यूरन् न् हेँ लऽ हऽ अलग-अलग ऊँ​ँ पर्ड पर लऽ गेल्रत 2 ओ हनह् सभह स्झ्ँ बदनल गेल्रत 3 ओतऽ ाूस् आ एनलय्र हनह् सभ हेँ गप हरै त पहर भेल्रत 4 तखन पतुस यीशु हेँ हरलनथन, “पभु , रार् सभह लेल एतय ररब नीह अनछत एहर् अर्ँ ह लेल, एहर् ाूस्ह लेल, आ एह एनलय्रह लेलत 5 जखन ओ बजैत छल्र, तखन दे खलहँ जे एहर् ँाहैत ाेघ हनह् सभ पर छ्ररर गेल छलनन, आ ाेघ ाे सँ एहर् आि्ज ननहललनन जे हरै त छल, “ई रार नपय पुत छनथ, नजनह् पर रा पसर छीत हनहर ब्त सुनूत 6 नश्​् य सभ ई ब्त सुनन हऽ ओ सभ ाुँर पर खनस पडल्र आ बहत भयभीत भऽ गेल्रत 7 यीशु आनब हऽ हनह् सभ हेँ छूनब हऽ हरलनथन, “ उिू आ ननर डे र्उत” 8 ओ सभ आँ खख उि् हऽ यीशु हेँ छ्नड हहर् ननर दे खलहत

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अध्य 18

20 नहएह तँ जतऽ दू -तीन ग्रे रार न्ा पर जा् भऽ गेल छनथ, ओतनर रा हनह् सभह बीँ ाे छीत 21 तखन पतुस हनह् लग आनब हऽ हरलनथन, “पभु , रार भ्य रार् पर हतेह बेर प्प हरत आ रा ओहर् का् हऽ दे ब?” स्त बेर धरर? 22 यीशु हनह् हरलनथन, “ रा अर्ँ हेँ स्त बेर धरर ननर हरै त छीत 23 ते ँ स् िग्ह र्ज् य हेँ ह्न् र्ज् सँ उपा् दे ल गेल अनछ जे अपन सेिह सभह नरस्ब-नहत्ब लेतत 24 जखन ओ नरस्ब-नहत्ब हरऽ लगल्र तँ हनह् लग एहर् एरन वखय आनल गेलनन जे हनह् पर दस रज्र र्ल् हज् छलननत 25 ाुद् हनह् प्इ ननर दे ब्ह छलनन, ते ँ हनहर ा्नलह हनह् आज् दे लनथन जे हनह्, हनहर पती, बच् सभ आ हनहर सभ नहछु बेनँ दे ल ज्यत 26 ओ न्हर खनस हऽ हनहर आर्धन् हयलनन आ हरलनथन, “पभु, रार् संग धैय् र्खू, रा अर्ँ हेँ सभर् प्इ दऽ दे बत” 27 तखन ओनर न्हरह ा्नलह हेँ दय् आनब गेलनन आ ओ ओहर् छ्नड हऽ हज् ा्फ हऽ दे लनथनत 28 ओ न्हर ब्रर ननहनल हऽ अपन एहर् सरहा् हेँ भेरल, जहर् पर सय प्इह बह्य् छलैहत 29 हनहर संगी द्स हनह् पएर लग खनस हऽ हनह् सँ निनती हरै त हरलनथन, “रार् संग धैय् र्खू , रा अर्ँ हेँ सभ नहछु ँुह् दे बत” 30 ओ ननर ँ्रै त छल्र, बल् नह ज्बत धरर ओ हज् ननर ँुह्बनथ त्बत धरर हनह् जेल ाे र्खख दे लनथनत 31 जखन हनहर संगी द्स सभ ई घरन् दे खख बहत दु खी भऽ गेल्र आ अपन ा्नलह हेँ जे नहछु भेल छल से सुनौलननत 32 तखन हनहर ा्नलह हनह् बज् हऽ हरलनथन, “रे दु ष सेिह, रा अर्ँ ह सभर् ऋण ा्फ हऽ दे लहँ , ह्रण अर्ँ रार् सँ ँ्रलहँ त 33 ही अर्ँ हेँ सेर् अपन संगी द्स पर दय् ननर हरब्ह ँ्री छल जेन् रा अर्ँ पर दय् हरै त छलहँ ? 34 ओहर ा्नलह क्नधत भऽ हऽ ओहर् य्तन् दे बयिल् सभह र्थ ाे सौंनप दे लह ज्बत धरर ओ अपन सभर् बह्य् ननर ँुह् लेतत 35 रार स् िग्य नपत् सेर् अर्ँ सभह संग तनरन् हरत्र, जँ अर्ँ सभ अपन-अपन भ्य हेँ अपन अपर्ध हेँ हदय सँ का् ननर हरबत

1 ओरी साय ाे नश्​् य सभ यीशु लग आनब पुछलनथन, “सग्ह र्ज् य ाे हे सभ सँ पैघ अनछ?” 2 यीशु एहर् छ्र बच् हेँ बज् हऽ हनह् सभह बीँ ाे बैस् दे लनथनत 3 ओ हरलनथन, “ रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे ज्बत धरर अर्ँ सभ धा् पररित्न ननर हरब आ छ्र-छ्र बच् जह्ँ ननर बनब, त्बत अर्ँ सभ स् िग्ह र्ज् य ाे पिेश ननर हरबत” 4 एनर लेल जे हेओ एनर बच् जह्ँ अपन् हेँ नम बन् लेत, से स् िग्ह र्ज् य ाे सभ सँ पैघ अनछत 5 जे हेओ रार् न्ा पर एरन एहर् छ्र बच् हेँ गरण हरत, से रार् गरण हरै त अनछत 6 ाुद् जे रार् पर निश् ि्स हरयिल् एनर छ्र-छ्र बच् सभ ाे सँ ह्न् एहर् हेँ िे स पहँ ँबैत अनछ, ओहर् लेल नीह र्यत जे ओहर गरदनन ाे ँकीह प्थर र्ँ नग दे ल ज्य आ साुदह गरीरं ाे डूनब ज्यत 7 अपर्धह ह्रणे ँ संस्रह नधक्र! ह्रण, ई जररी छै नह अपर्ध आबै छै ; ाुद् नधक्र ओनर आदाी पर, जहर् द्र् अपर्ध र्इत छै ह! 8 ते ँ जँ अर्ँ ह र्थ ि् पैर अर्ँ हेँ िे स पहँ ँबैत अनछ तँ ओहर् ह्नर हऽ फेनह नदयौहत 9 जँ अर्ँ ह आँ खख अर्ँ हेँ द्​् दै त अनछ तँ ओहर् उख्नड हऽ फेनह नदयौहत 10 स्िध्न रह जे एनर छ्र-छ्र बच् सभ ाे सँ एह् हेँ नतरस्र ननर हरत रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे स् िग् ाे हनह् सभह स् िग्दूत सभ सनदखन रार स् िग् ाे ररननर्र नपत्ह ाुँर दे खैत ररै त छनथत 11 ानुखह पुत जे रे र्यल छल ओहर् बँ्बऽ लेल आयल छनथत 12 अर्ँ सभ हेरन स्ँैत छी? जँ हहर् सौ भेड ँ ् अनछ आ ओनर ाे सँ एहर् भरहल अनछ तँ ही ओ उननबेर् भेड ँ ् हेँ छ्नड पर्ड ाे ज् हऽ भरहल ँीज हेँ तहैत ननर अनछ? 13 जँ ओ ओहर् प्नब लैत अनछ तँ रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे ओ ओनर उननबे भेड ँ ् सँ बेसी आनख्त र्इत अनछ जे भरहल ननर छलत 14 तनरन् अर्ँ सभह स् िग् ाे ररननर्र नपत्ह इँ् छ् ननर अनछ जे एनर छ्र-छ्र बच् सभ ाे सँ एह ग्रे ह न्श भऽ ज्यत 15 जँ अर्ँ ह भ्य अर्ँ ह अपर्ध ाे अपर्ध हरत तँ ज्उ आ ओहर् असगर अर्ँ आ हनह् बीँ ओहर द्​् बत्उत 16 ाुद् जँ ओ अर्ँ ह ब्त ननर सुनत तँ एह-दू ग्रे आओर अपन् संग लऽ ज्उ, ज्नर सँ दू -तीन गि्रह ाुँर सँ सभ ब्त नस् भऽ ज्यत 17 जँ ओ हनह् सभह ब्त सुनब् ाे उपेक् हरै त छनथ तँ ाण् डली हेँ हह, ाुद् जँ ओ ाण् डली हेँ सुनब् ाे उपेक् हरै त छनथ तँ ओ अर्ँ ह लेल गैर-यहदी आ हरद्त् जह्ँ र्नथत 18 रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे अर्ँ सभ जे नहछु पृथ् िी पर ब्नब से स् िग् ाे ब्नल ररतत 19 रा अर्ँ सभ हेँ फेर हरै त छी जे जँ अर्ँ सभ ाे सँ दू ग्रे पृथ् िी पर एहात भऽ ज्यब जे ओ सभ जे नहछु ा्ँ गत्र, तँ ई रार स् िग् ाे ररननर्र नपत् द्र् हयल ज्यतत

अध्य 19 1 यीशु ई सभ ब्त पूर् हऽ हऽ गलील सँ निद् भऽ यरदन नदीह ओनर प्र यहनदय् पदे श ाे आनब गेल्रत 2 बहत र्स भीड हनह् प्छ्ँ -प्छ्ँ ँनल गेलत ओतनर हनह् सभ हेँ िीह हयलननत 3 फररसी सभ सेर् हनह् परखैत हनह् लग आनब हऽ पुछलनथन, “ही पुर् हेँ ह्न् ह्जह ह्रणे ँ अपन पती हेँ छ्डब उनँत अनछ?” 4 ओ हनह् सभ हेँ उतर दे लनथन, “ ही अर्ँ सभ ई ननर पढने छी जे शुर ाे एहर् सभ हेँ बनौननर्र नर-ा्री बनौलननत 5 ओ हरलनथन, “एनर लेल पुर् ब्प-ा्ए हेँ छ्नड हऽ अपन पती सँ नँपहल ररतत”

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6 ते ँ आब ओ सभ दू ग्रे ननर, बल् नह एह शरीर बनन गेल छनथत ते ँ जे पराेश् िर एह संग ज्डने छनथ, तहर् ानु्​् य अलग ननर हरयत 7 ओ सभ हनह् पुछलनथन, “तखन ाूस् नहएह आज् दे लनथन जे तल्ह पत दऽ हऽ ओहर् छ्नड दे ल ज्य? 8 ओ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ अर्ँ सभह हदयह हि्रत्ह ह्रणे ँ ाूस् अर्ँ सभ हेँ अपन स् ती हेँ छ्डब्ह अनुानत दे लननत 9 रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे जे हेओ अपन स् ती हेँ वनभँ्रह ह्रणे ँ छ्नड हऽ द्सर नि​ि्र हरत, ओ वनभँ्र हरै त अनछत 10 हनहर नश्​् य सभ हनह् हरलनथन, “जँ पुरखह स् तीह संग एरन अनछ तँ नि​ि्र हरब नीह ननरत” 11 ाुद् यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ ई ब्त नजनह् दे ल गेल अनछ, तहर् छ्नड सभ ल्ह ई ब्त ननर गरण हऽ सहैत अनछत” 12 नहएह तँ नहछु नपुंसह अनछ जे अपन ा्यह ह्खसँ एन् जनल अनछ आ नहछु नपुंसह अनछ जे ानु्​् यह नपुंसह बन्ओल गेल अनछत जे एहर् गरण हरब् ाे सका अनछ, से ओहर् गरण हरयत 13 तखन हनह् लग छ्र-छ्र बच् सभ हेँ आनल गेलनन जे ओ हनह् सभ पर र्थ र्खख प्थ्न् हरनथत 14 यीशु हरलनथन, “ बच् सभ हेँ रार् लग आबय सँ ान् हर, नहएह तँ स् िग्ह र्ज् य एरन सभह अनछत” 15 ओ हनह् सभ पर र्थ र्खख हऽ ओतय सँ निद् भऽ गेल्रत 16 एह ग्रे हनह् लग आनब हऽ हरलनथन, “गुरजी, रा ह्न नीह ह्ज हरब ज्नर सँ रार् अनर जीिन भेरय?” 17 ओ हनह् पुछलनथन, “ अर्ँ रार् नीह नहएह हरै त छी? एहर् नीह हेओ ननर अनछ, अथ्​् त पराेश् िरत 18 ओ हनह् पुछलनथन, “ह्न? यीशु हरलनथन, “ रत् ननर हर, वनभँ्र ननर हर, ँ्री ननर हर, झूि गि्री ननर नदअत 19 अपन नपत् आ ा्यह आदर हरत 20 युिह हनह् हरलनथन, “रा अपन जि्नी सँ ई सभ ब्त र्खने छीत 21 यीशु हनह् हरलनथन, “ जँ अर्ँ नस् बनय ँ्रै त छी तँ ज् हऽ जे नहछु अनछ से बेनँ हऽ गरीब सभ हेँ दऽ नदयौह, तखन अर्ँ लग स् िग् ाे धन-सा् पनत भेरतत 22 ाुद् ओ युिह ई ब्त सुनन दु खी भऽ गेल्र, नहएह तँ हनह् लग बहत समनत छलननत 23 तखन यीशु अपन नश्​् य सभ हेँ हरलनथन, “ रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे, धननह आदाी हेँ स् िग्ह र्ज् य ाे पिेश हरब हनिन अनछत” 24 रा फेर अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे , धननह आदाी हेँ पराेश् िरह र्ज् य ाे पिेश सँ बेसी सुईह आँ खख सँ उँ र हेँ गुजरब आस्न अनछत 25 ई ब्त सुनन हनहर नश्​् य सभ बहत आशय्ँनहत भऽ हऽ हरलनथन, “तखन हे उ्​्र प्नब सहैत अनछ?” 26 यीशु ओहर् सभ हेँ दे खख हऽ हरलनथन, “ ानु्​् य सभह लेल ई असंभि अनछत ाुद् पराेश् िरह लेल सभ नहछु संभि अनछत 27 तखन पतुस हनह् हरलनथन, “दे खू, रा सभ सभ नहछु छ्नड अर्ँ ह प्छ्ँ ल्नग गेलहँ त ते ँ रार् सभ हेँ ही भेरत?

28 यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे , अर्ँ सभ जे सभ रार् प्छ्ँ ँललहँ , पुनज्न ाे जखन ानु्​् यह पुत अपन ानरा्ह नसंर्सन पर बैसत्र, तखन अर्ँ सभ सेर् ब्रर नसंर्सन पर बैनस हऽ ब्रर ग्तह न्य हरब इजर्यलत 29 जे हेओ रार न्ाह ह्रणे ँ घर-घर, भ्य, बनरन, ि् नपत्, ा्ए, पती, संत्न ि् जाीन छ्नड दे त, ओहर् सय गुन् भेरत आ अनर जीिनह उतर्नधह्र भेरतत 30 ाुद् बहत् जे सभ पनरने छनथ, ओ सभ ब्द ाे ररत्रत आ अंनता ल्ह सभ पनरने र्यतत अध्य 20 1 स् िग्ह र्ज् य एहर् घरह ा्नलह जह्ँ अनछ जे भ्रे -भ्र अपन अंगूरह बगीँ् ाे ाजदू र र्खय लेल ननहलल छलत 2 ओ ाजूर सभ सँ एह प्इ पनतनदनह लेल तैय्र भऽ गेल्र आ ओहर् सभ हेँ अपन अंगूरह बगीँ् ाे पि् दे लननत 3 ओ हरीब तेसर बजे ब्रर गेल्र आ दे खलनन जे आन ल्ह सभ बज्र ाे बेह्र ि्ढ अनछत 4 ओ हनह् सभ हेँ हरलनथनत अर्ँ सभ सेर् अंगूरह बगीँ् ाे ज्उ, आ जे नहछु उनँत अनछ से रा अर्ँ सभ हेँ दऽ दे बत” आ ओ सभ अपन ब्र पर ँनल गेल्रत 5 ओ फेर हरीब छिा-नौा बजे ब्रर ननहनल गेल्रत 6 हरीब एग्ररा बजे ओ ब्रर ननहलल्र आ द्सर ल्ह सभ हेँ बेह्र ि्ढ प्नब हरलनथन, “अर्ँ सभ नदन भरर बेह्र नहएह ि्ढ छी?” 7 ओ सभ हनह् हरलनथन, “नहएह तँ रार् सभ हेँ नहय् भ्ड् पर ननर लेने अनछत” ओ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “अर्ँ सभ सेर् अंगूरह बगीँ् ाे ज्उत आ जे नहछु उनँत अनछ, से अर्ँ सभ हेँ भेरतत” 8 स्ँ झ भेल् पर अंगूरह बगीँ्ह ा्नलह अपन भंड्री हेँ हरलनथन, “ाजदू र सभ हेँ बज् हऽ ओहर् सभ हेँ ओहर भ्ड् दऽ नदयौहत” 9 हरीब एग्ररा बजे जखन भ्ड् पर बैसल ल्ह सभ अयल्र, तखन हनह् सभ हेँ एह-एहर् प्इ भेनर गेलननत 10 ाुद् जखन पनरल ल्ह सभ अयल्र तखन ओ सभ स्ँलनन जे हनह् सभ हेँ बेसी भेनर सहैत छलननत तनरन् हनह् सभ हेँ एह-एहर् प्इ भेरैत छलननत 11 ओ सभ ई प्नब घरह ा्नलहह निर् गुनगुन्इत ररल्रत 12 ओ हरलनन जे , “अंनता ल्ह सभ ा्त एह घंर् ह्ज हेलह, आ अर्ँ ओहर् सभ हेँ रार् सभह बर्बर बन् दे नलयैह, जे नदनह ब्झ आ गा् उि्ओल गेल अनछत” 13 ाुद् ओ हनह् सभ ाे सँ एह ग्रे हेँ उतर दे लनथन, “नात, रा अर्ँ पर ह्न् दु ्​् र ननर हरै त छीत 14 जे अनछ से लऽ हऽ ज्उत 15 ही रार् लेल उनँत ननर अनछ जे रा अपन अपन संग जे ँ्रै त छी से हरब? ही त्रर आँ खख अधल्र अनछ, ह्रण रा नीह छी? 16 एनर तररे ँ अंनता ल्ह सभ पनरने आ पनरल सभ ब्द ाे ररत, नहएह तँ बहत् ल्ह बज्ओल गेल अनछ, ाुद् ँुनल गेल ल्ह हात 17 यीशु यरशलेा ज् हऽ ब्रर नश्​् य हेँ ब्र ाे अलगअलग लऽ हऽ हनह् सभ हेँ हरलनथनत

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18 दे खू, रा सभ यरशलेा ज् ररल छीत ानु्​्‍य-पुत हेँ ाुख्‍यपुर्नरत आ श्सी सभह साक सौंपल ज्यतत 19 ओ गैर-यहदी सभह र्थ ाे ओहर् उपर्स हरब्ह लेल, ह्ड् ा्रब्ह लेल आ कूस पर ँढ्बय लेल सौंनप दे त्रत 20 तखन जबदीह सर्न सभह ा्य अपन पुत सभह संग हनह् लग आनब हनहर आर्धन् हयलनन आ हनह् सँ नहछु ब्त ँ्रै त छलीरत 21 ओ हनह् पुछलनथन, “ अर्ँ ही ँ्रै त छी?” ओ हनह् हरलनथन, “रार ई दु नू बेर् हेँ एहर् अर्ँ ह दनरन् ह्त आ द्सर ब्ा् ह्त, अर्ँ ह र्ज ाे बैसब्ह अनुानत नदअत” 22 यीशु उतर दे लनथन, “ अर्ँ सभ ही ा्ँ गैत छी से ननर जनैत छीत” ही अर्ँ सभ ओनर प्ल् ाे सँ पीनब सहैत छी ज्नर सँ रा बपनतस् ा् लैत छी? ओ सभ हनह् हरलनथन, “रा सभ सका छीत” 23 ओ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ अर्ँ सभ रार प्ल् सँ पीनब हऽ ओनर बपनतस् ा् सँ बपनतस् ा् लेब ज्नर सँ रा बपनतस् ा् लेने छी नजनह् लेल रार नपत् द्र् तैय्र हयल गेल अनछ, हनह् सभ हेँ दे ल गेल अनछत 24 दस ग्रे ई ब्त सुनन दु नू भ्इ पर आक्नशत भऽ गेल्रत 25 यीशु हनह् सभ हेँ बज् हऽ हरलनथन, “ अर्ँ सभ जनैत छी जे गैर-यहदी सभह ाुखखय् सभ हनह् सभ पर पभु् रखैत छनथ आ पैघ ल्ह सभ हनह् सभ पर अनधह्र रखैत छनथत” 26 ाुद् अर्ँ सभह बीँ एरन ननर र्यतत 27 जे हेओ अर्ँ सभ ाे पाुख बनय ँ्रै त अनछ, से अर्ँ सभह सेिह बनयत 28 जनरन् ानुख-पुत सेि् हरऽ लेल ननर, बल् नह सेि् हरऽ लेल आ बहत् ल्हह नफरौतीह रप ाे अपन प्ण दे बऽ लेल आयल छल्रत 29 जखन ओ सभ यरीर् सँ निद् भेल्र तँ बहत र्स भीड हनह् प्छ्ँ -प्छ्ँ आनब गेल्रत 30 ब्र ह्त ाे बैसल दू र् आनर यीशु हेँ ओनर ि्ा सँ गुजरै त दे खख नँनँय् उिलनन, “रे पभु , रे द्ऊदह पुत, रार् सभ पर दय् हरत” 31 ल्ह सभ हनह् सभ हेँ ँुप ररब्ह ह्रणे ँ ड्ँ नर दे लहनन, ाुद् ओ सभ आर् बेसी नँनँय् उिलनन, “रे पभु, रे द्ऊदह पुत, रार् सभ पर दय् हरत” 32 यीशु ि्ढ भऽ हनह् सभ हेँ बज् हऽ हरलनथन, “ अर्ँ सभ ही ँ्रै त छी जे रा अर्ँ सभह संग ही हरी?” 33 ओ सभ हनह् हरलनथन, “पभु , रार् सभह आँ खख खुनज ज्यत” 34 यीशु हनह् सभ पर दय् हऽ हनह् सभह आँ खख हेँ छु नब गेल्रत

4 ई सभ ब्त एनर लेल भेल जे पिह् त् द्र् हरल गेल ब्त पूर् भऽ ज्यत 5 अर्ँ सभ नसय्नह बेरी हेँ हनर नदयौह जे, “दे खू, अर्ँ ह र्ज् नम, गदर् पर बैसल आ गदर्ह बछड् पर बैसल अर्ँ लग आनब ररल छनथत” 6 नश्​्‍य सभ ज् हऽ यीशुह आज्ह अनुस्र ह्ज हयलननत 7 ओ सभ गदर् आ बछड् हेँ आनन हऽ ओहर् सभ हेँ हपड् पनररर हऽ ओहर् सभ पर बैस् दे लहत 8 बहत पैघ भीड ब्र ाे अपन िस पस्रर लेलहत द्सर ल्ह ग्छह ड्रर ह्नर हऽ ब्र ाे भूस् लग् दे लहत 9 आगू जे ल्ह सभ आ प्छ्ँ -प्छ्ँ ँलैत छल, ओ सभ नँनँय् उिल, “द्ऊदह पुत हेँ र्स्न्त उचता ाे र्सर्त 10 यीशु यरशलेा पहँ ँल् पर पूर् शरर ँनहत भऽ हऽ हरलह जे , “ई हे अनछ?” 11 ल्ह सभ ब्जल, “ई गलीलह न्सरतह पिह् त् यीशु छनथत” 12 यीशु पराेश् िरह ान् नदर ाे ज् हऽ ान् नदर ाे बेँननर्र आ हीनननर्र सभ हेँ ब्रर ननह्नल दे लनथनत 13 ओ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ धा्श्स् त ाे नलखल अनछ जे, “रार घर हेँ प्थ्न्ह घर हरल ज्यतत” ाुद् अर्ँ सभ एहर् ँ्र सभह ा्ं द बन् दे नलयैहत 14 आनर आ लंगड् सभ ान् नदर ाे हनह् लग आनब गेल्रत ओ ओहर् सभ हेँ िीह हऽ दे लहत 15 जखन ाुखखय् पुर्नरत आ धा्नशकह सभ हनहर अद् भुत ह्ज सभ हेँ दे खलनन आ ान् नदर ाे बच् सभ नँनँय् ररल छल आ हरै त छल जे , “द्ऊदह पुत हेँ र्स्न्त” ओ सभ घ्र न्र्ज छल्र, 16 ओ हनह् हरलनथन, “ही अर्ँ सभ सुनैत छी जे ई सभ ही हरै त अनछ?” यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “रँ त ही अर्ँ सभ हनरय् ननर पढने छी जे, “नशशु आ दू ध नपल्बल् सभह ाुँर सँ अर्ँ पशंस् नस् हेलहँ?” 17 यीशु ओहर् सभ हेँ छ्नड नगर सँ ब्रर बेतननय् नदस निद् भेल्रत आ ओतनर िररर गेल्रत 18 भ्रे -भ्र जखन ओ नगर ाे घुरैत छल्र तखन हनह् भूख ल्नग गेलननत 19 ब्र ाे अंजीरह ग्छ दे खख ओहर् लग आनब हऽ ओनर पर प्त छ्नड नहछु ननर भेरलनन आ हरलनथन, “ आब सँ अनर ह्ल धरर अर्ँ पर ह्न् फल ननर उगय नदयौहत” आ समनत अंजीरह ग्छ ाुरझ् गेलत 20 नश्​् ‍य सभ ई दे खख आशय्ँनहत भऽ हऽ हरलनथन, “अंजीरह ग्छ हतेह जली ाुरझ् गेल अनछ?” 21 यीशु हनह् सभ हेँ उतर दे लनथन, “ रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे जँ अर्ँ सभह निश् ि्स अनछ आ शंह् ननर अनछ तँ अर्ँ सभ अंजीरह ग्छह संग जे ह्ज हयल गेल अनछ, से ा्त ननर हरब, बल् नह जँ अर्ँ सभ एनर पर्ड हेँ हरब जे, “रनर ज्उत” , आ साुद ाे फेहल ज्उत हयल ज्यतत 22 अर्ँ सभ निश् ि्स हरै त प्थ्न् ाे जे नहछु ा्ँ गब, से अर्ँ सभ हेँ भेरतत 23 जखन ओ ान् नदर ाे पहँ ँल्र तखन ओ नसख्बैत ह्ल ाुख्‍यपुर्नरत आ ल्हह बूढ-पुर्न सभ हनह् लग आनब पुछलनथन, “अर्ँ ई सभ ह्न अनधह्र सँ हरै त छी?” आ अर्ँ हेँ ई अनधह्र हे दे लह?

अध्य 21 1 जखन ओ सभ यरशलेा लग पहँ ँल्र आ जैतूनह पर्ड पर बेतफ्गे पहँ ँल्र, तखन यीशु दू र् नश्​् य हेँ पिौलननत 2 हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ अर्ँ सभह स्ानेह ग्ा ाे ज्उ, तखन तुरर एहर् गदर् ब्नल आ ओहर् संग एहर् बछड्ह बच् भेरतत” 3 जँ हेओ अर्ँ सभ हेँ ह्न् ब्त हरत तँ अर्ँ सभ हरब जे , ‘पभु हेँ हनह् सभह आिशहत् छननत आ तुरर हनह् सभ हेँ पि् दे त्रत

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24 यीशु हनह् सभ हेँ उतर दे लनथन, “ राहँ अर्ँ सभ सँ एहर् ब्त पूछब जे जँ अर्ँ सभ रार् हरब तँ राहँ अर्ँ सभ हेँ हरब जे रा ह्न अनधह्र सँ ई सभ ह्ज हरै त छीत” 25 यूरन् न्ह बपनतस् ा् हतऽ सँ भेल? सग् सँ आनह ानुकह? ओ सभ ाने-ान-संगे तह्-नितह् हरै त हरलनथन, “जँ रा सभ हरब जे , ‘सग् सँ ! ओ रार् सभ हेँ हरत्र, “तखन अर्ँ सभ हनह् पर निश् ि्स नहएह ननर हेलहँ ?” 26 ाुद् जँ रा सभ ई हरब जे , ‘ानु्​्‍यह’त रा ल्हसँ डरै त छी; नहएह तँ सभ यूरन् न् हेँ भनिषिय् बुझैत छनथत 27 ओ सभ यीशु हेँ उतर दे लनथन, “रा सभ ननर हनर सहैत छीत” ओ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ रा अर्ँ सभ हेँ ई ननर हरै त छी जे रा ह्न अनधह्र सँ ई सभ ह्ज हरै त छीत” 28 ाुद् अर्ँ सभह ही निँ्र अनछ? एह आदाी हे दू र् बेर् छलत ओ पनरलुह् लग आनब हरलनथन, “बौआ, आइ रार अंगूरह बगीँ् ाे ह्ज हरत” 29 ओ उतर दे लनथन, “रा ननर ँ्रब, ाुद् तहर ब्द ओ पश्त्प हऽ हऽ ँनल गेल्रत” 30 ओ द्सरह लग आनब हऽ एरने हरलनथनत ओ उतर दे लनथन, “रा ज् ररल छी, ा्नलह, ाुद् ननर गेल्रत” 31 दु नू ाे सँ हे अपन नपत्ह इच् पूर् हेलह? ओ सभ हनह् हरलनथन, “पनरलह्त” यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे , हर िसूली आ िेश् सभ अर्ँ सभ सँ पनरने पराेश् िरह र्ज् य ाे ज्इत अनछत” 32 यूरन् न् ध्ना्हत्ह ब्र ाे अयल्र, ाुद् अर्ँ सभ हनह् पर निश् ि्स ननर हेलहँ , ाुद् हरद्त् आ िेश् सभ हनह् पर निश् ि्स हयलननत 33 एहर् आओर दष्र सुनू, “एहर् घरह ा्नलह छल जे अंगूरह बगीँ् र्पने छल आ ओहर् ँ्र ह्त ब्ड लग् दे ने छल आ ओनर ाे द्रह ँूर् ख्दने छल आ एहर् बुज् बनौने छल आ ओहर् नहस्न सभ हेँ छ्नड हऽ दू र दे श ाे गेल छलत 34 जखन फलह साय लग आनब गेल तँ ओ अपन न्हर सभ हेँ नहस्न सभ लग पिौलनन जे ओ सभ फल प्नब सहयत 35 नहस्न सभ हनहर न्हर सभ हेँ लऽ हऽ एहर् हेँ ा्ररपीनर द्सर हेँ ा्रर दे लह आ द्सर हेँ प्थर सँ ा्रर दे लहत 36 फेर ओ पनरल न्हर सँ बेसी आन न्हर पिौलननत 37 ाुद् अंत ाे ओ अपन बेर् हेँ हनह् सभ लग पिौलनन जे , “ओ सभ रार बेर् हेँ आदर हरतत” 38 नहस्न सभ बेर् हेँ दे खख हऽ आपस ाे हरलनथन, “ई उतर्नधह्री छनथत आऊ, ओहर् ा्रर नदयौह आ ओहर उतर्नधह्र पर हब् ह’ लीत” 39 ओ सभ ओहर् पहनड हऽ अंगूरह बगीँ् सँ ब्रर ननह्नल हऽ ा्रर दे लहत 40 जखन अंगूरह बगीँ्ह ा्नलह आनब जेत्र तखन ओ ओनर नहस्न सभह संग ही हरत्र? 41 ओ सभ हनह् हरलनथन, “ओ ओनर दु ष सभ हेँ दयनीय रप सँ नष हऽ दे त आ अपन अंगूरह बगीँ् आन नहस्न सभ हेँ छ्नड दे त, जे सभ ओहर् अपन-अपन फल दे नथनत” 42 यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ ही अर्ँ सभ हनरय् धा्श्स् त ाे ननर पढने छी जे, “जे प्थर बनौननर्र सभ असीह्र हयलनन, से ह्नह नसर बनन गेल अनछत” 43 ते ँ रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे पराेश् िरह र्ज् य अर्ँ सभ सँ छीन हऽ ओनर ज्नत हेँ दे ल ज्यत जे ओहर फल दे तत “

45 जखन ाुखपुर्नरत आ फररसी सभ हनहर दष्र सुनन हऽ बुनझ गेल्र जे ओ हनह् सभह नि्य ाे ब्नज ररल छनथत 46 ाुद् जखन ओ सभ हनह् पर र्थ रखब्ह पय्स हयलनन तँ ओ सभ भीड सँ डे र् गेल्र, नहएह तँ ओ सभ हनह् पराेश् िरह पिह् त् ा्नैत छल्रत अध्य 22 1 यीशु उतर दे लनथन आ फेर दष्रह द्र् हनह् सभ हेँ हरलनथनत 2 स् िग्ह र्ज् य ह्न् र्ज् जह्ँ अनछ जे अपन पुतह लेल नि​ि्र हयलननत 3 ओ अपन न्हर सभ हेँ पि् दे लनथन जे ओ सभ नि​ि्र ाे बज्ओल गेल ल्ह सभ हेँ बज्बयत 4 फेर ओ द्सर न्हर सभ हेँ पि् हऽ हरलनथन, “जे सभ बज्ओल गेल अनछ, ओहर् सभ हेँ हनर नदयौह जे, रा अपन भ्जन तैय्र हऽ लेने छीत 5 ाुद् ओ सभ एनर ब्त हेँ रलुह हऽ हऽ एह अपन खेत नदस निद् भऽ गेल्रत 6 शे् ल्ह सभ हनहर न्हर सभ हेँ पहनड हऽ हनह् सभ हेँ घृण् हऽ हऽ ा्रर दे लहननत 7 ाुद् र्ज् ई ब्त सुनन हऽ क्नधत भऽ गेल्र आ ओ अपन सेन् पि् हऽ ओनर रत्र् सभ हेँ नष हऽ दे लनथन आ हनह् सभह नगर हेँ जर् दे लनथनत 8 तखन ओ अपन न्हर सभ हेँ हरलनथन, “नि​ि्र तऽ तैय्र भऽ गेल अनछ, ाुद् जे सभ बज्ओल गेल छल से सभ य्ग ननर छलत” 9 ते ँ अर्ँ सभ र्जा्ग् पर ज्उ आ जे नहय् भेरत, तहर् नि​ि्रह लेल ब्ली लग्उत 10 तखन ओ न्हर सभ र्जा्ग् पर ननहनल गेल आ जे सभ हेँ अधल्र-नीह भेरल, ओहर् सभ हेँ एह ि्ा जा् हऽ लेलहत 11 र्ज् जखन प्हन सभ हेँ दे खब्ह लेल भीतर गेल्र तँ ओतऽ एहर् एरन आदाी हेँ दे खलनन जे नि​ि्रह िस ननर पनररने छलत 12 ओ हनह् पुछलनथन, “नात, अर्ँ नि​ि्रह िस ननर लऽ हऽ एतय ह्न् आनब गेलहँ?” आ ओ बेजुब्न भ’ गेल्रत 13 तखन र्ज् न्हर सभ हेँ हरलनथन, “ओहर र्थ-पैर ब्खन हऽ लऽ ज्उ आ ब्ररह अन्र ाे फेनह नदयौहत ओतय ह्नब आ द्ँ त हरौन्इ र्यतत 14 नहएह तँ बहत् ल्ह बज्ओल गेल अनछ, ाुद् नहछु ए ँुनल गेल अनछत 15 तखन फररसी सभ ज् हऽ निँ्र-निाश् हयलनन जे हनह् ह्न् हनहर ब्त ाे फँस्ओल ज् सहैत अनछत 16 ओ सभ रे र्दीसह संग अपन नश्​् य सभ हेँ हनह् लग पिौलनन जे, “गुर, रा सभ जनैत छी जे अर्ँ सत् य छी आ पराेश् िरह ब्र पराेश् िरह ब्र सत् य ाे नसख्बैत छी, आ अर्ँ हहर् परि्र ननर हरै त छीत 17 ते ँ रार् सभ हेँ हह जे, अर्ँ ह ही निँ्र अनछ? ही हैसर हेँ हर दे ब उनँत अनछ ि् ननर? 18 यीशु हनह् सभह दु षत् बुनझ हरलनथन, “ रे प्खंडी सभ, अर्ँ सभ रार् नहएह परीक् दै त छी?” 19 रार् हरह प्इ दे ख्उत ओ सभ एह प्इ हनह् लग अनलननत

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20 ओ हनह् सभ हेँ पुछलनथन, “ ई ाूनत् आ उपर पराेश् िर हेहर अनछ?” 21 ओ सभ हनह् हरलनथन, “हैसरहत” तखन यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ ते ँ जे सभ हैसरह अनछ से हैसर हेँ दऽ नदयौहत आ पराेश् िरह जे नहछु अनछ से पराेश् िरह लेलत 22 ई ब्त सुनन ओ सभ आशय्ँनहत भऽ हनह् छ्नड हऽ ँनल गेल्रत 23 ओरी नदन सदु ही सभ हनह् लग आनब हऽ पुछलनथनत 24 “गुर, ाूस् हरलनथन, “जँ हेओ ारर ज्यत, जहर संत्न ननर अनछ त’ ओहर भ्य अपन पती सँ नि​ि्र ह’ ह’ अपन भ्य हेँ संत्न पैद् हरतत” 25 रार् सभह संग स्तर् भ्य छल्र, आ पनरल भ्य स् ती हेँ नि​ि्र हऽ हऽ ाृत भऽ गेल्र आ ह्न् संत्न ननर ररल् पर अपन स् ती हेँ अपन भ्य हेँ छ्नड दे लननत 26 तनरन् द्सर आ तेसर स्ता धररत 27 अंत ाे ओ स् ती सेर् ारर गेलीरत 28 ते ँ पुनरु्न ाे ओ स्त ाे सँ हेहर पती रे तीर? नहएह तँ हनह् सभ लग ओ छलननत 29 यीशु हनह् सभ हेँ उतर दे लनथन, “ अर्ँ सभ श्स आ पराेश् िरह स्ाथ्​् य हेँ ननर ज्नन हऽ गलती हरै त छीत 30 पुनरु्न ाे ओ सभ ने नि​ि्र हरत आ ने नि​ि्र ाे दे ल ज्यत, बल् नह स् िग् ाे पराेश् िरह स् िग्दूत जह्ँ ररतत 31 ाुद् ाृत् युह पुनरु्नह नि्य ाे ही अर्ँ सभ पराेश् िर द्र् अर्ँ सभ हेँ हरल गेल ब्त ननर पढने छीत 32 रा अब्रा, इसर्ह आ य्हूबह पराेश् िर छी? पराेश् िर ाृतहह पराेश् िर ननर, बल् नह जीनित ल्हह पराेश् िर छनथत 33 ई ब्त सुनन ल्ह सभ हनहर नशक् दे खख आशय्ँनहत भऽ गेलत 34 फररसी सभ ई सुनन हऽ जे ओ सदु ही सभ हेँ ँुप हर् दे ने छनथ तँ ओ सभ एह ि्ा जा् भऽ गेल्रत 35 तखन हनह् सभ ाे सँ एह ग्रे ह्नून-नशकह हनह् सँ एहर् प् पुछलनथन आ हनह् पल्भन हऽ हऽ हरलनथनत 36 गुर, धा्-ननया ाे ह्न पैघ आज् अनछ? 37 यीशु हनह् हरलनथन, “ अर्ँ अपन पभु पराेश् िर सँ पूर् ा्न, पूर् प्ण आ पूर् ान सँ पेा हरत” 38 ई पनरल आ पैघ आज् अनछत 39 द्सर एनर तररह अनछ जे , “अपन पड्सी सँ अपन् जह्ँ पेा हरत” 40 एनर दु नू आज् पर सभ धा्-ननया आ पिह् त् सभ लरहल अनछत 41 फररसी सभ जा् भेल् पर यीशु हनह् सभ सँ पुछलनथनत 42 ओ हरलनथन, “ अर्ँ सभ ासीरह ब्रे ाे ही स्ँैत छी?” हेहर बेर् छै ? ओ सभ हनह् हरलनथन, “द्ऊदह पुतत” 43 ओ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ तखन द्ऊद आत् ा् ाे हनह् पभु ह्न् हरै त छनथनत 44 पराेश् िर रार पभु हेँ हरलनथन, “जखन धरर रा अर्ँ ह शतु सभ हेँ अर्ँ ह पैरह िे हन ननर बन् लेब, त्बत धरर अर्ँ रार दनरन् ह्त बैसल रह?” 45 तखन जँ द्ऊद हनह् पभु हरै त छनथ तँ ओ हनहर पुत ह्न् छनथ?

46 ओनर नदन सँ नहय् हनह् सँ ह्न् ब्तह उतर ननर दऽ सहल आ ने हहर् हनह् सँ आओर ह्न् प् पूछब्ह नरमत ननर भेलत अध्य 23 1 तखन यीशु भीड आ अपन नश्​् य सभ हेँ हरलनथनत 2 ओ हरलनन, “धा्श्सी आ फररसी सभ ाूस्ह आसन पर बैसल छनथत 3 ते ँ ओ सभ जे नहछु आज् दै त छनथन, से सभ प्लन हर आ पूर् हरत ाुद् अर्ँ सभ हनह् सभह ह्जह अनुसरण ननर हर, नहएह तँ ओ सभ हरै त छनथ, ाुद् ननर हरै त छनथत 4 ओ सभ भ्री ब्झ ब्खन हऽ ानु्​् य सभह ह्न पर र्खख दै त छनथत ाुद् ओ सभ सयं एह आँ गुरसँ ननर नरल्ओतत 5 ाुद् ओ सभ अपन सभ ह्ज ानु्​् यह दश्नह लेल हरै त अनछत 6 भ्ज-भ्ज ाे उपरह् ह्िली आ सभ्घर ाे पाुख आसन सभ सँ पेा हरत 7 बज्र-बज्र ाे पण्ा हयल ज्इत अनछ आ ानु्​् य सभह द्र् रबी, रबी हरल ज्यत 8 ाुद् अर्ँ सभ रबी ननर हरल ज्उ, नहएह तँ अर्ँ सभह गुर एहे छनथ, ासीरत आ अर्ँ सभ भ्इ छीत 9 आ पृथ् िी पर हहर् अपन नपत् ननर हरब, नहएह तँ अर्ँ सभह नपत् एह छनथ जे स् िग् ाे छनथत 10 अर्ँ सभ हेँ ा्नलह ननर हरल ज्उ, नहएह तँ अर्ँ सभह गुर एहे छनथ, ासीरत 11 ाुद् अर्ँ सभ ाे जे पैघ अनछ से अर्ँ ह द्स बनतत 12 जे हेओ अपन् हेँ ऊपर उिबैत अनछ, से नीँ्ँ हयल ज्यतत जे अपन् हेँ नम बन्ओत से ऊँ​ँ हयल ज्यतत” 13 ाुद् अर्ँ सभ, प्खंडी सभ, धा्श्सी आ फररसी सभ, अर्ँ सभ पर नधक्र! नहएह तँ अर्ँ सभ स् िग्ह र्ज् य हेँ ानु्​् यह निर् बंद हऽ दै त छी, नहएह तँ अर्ँ सभ ने अपन् भीतर ज्इत छी आ ने पिेश हरऽ िल् सभ हेँ भीतर ज्य दै त छीत 14 अर्ँ सभ नधक्र अनछ, अर्ँ सभ श्सी आ फररसी सभ, प्खंडी सभ! नहएह तँ अर्ँ सभ निधि् सभह घर ख्इत छी आ न्रहह ह्रणे ँ नारर प्थ्न् हरै त छीत 15 अर्ँ सभ नधक्र अनछ, अर्ँ सभ श्सी आ फररसी सभ, प्खंडी सभ! नहएह तँ अर्ँ सभ साुद आ भूनाह ँकर लग् हऽ एहर् धा् पररित्न हरयिल् बन् लैत छी आ जखन ओ बनैत अनछ तखन ओहर् अपन् सँ दू गुन् बेसी नरहह संत्न बन् दै त छीत 16 अर्ँ सभ हेँ नधक्र अनछ, अर्ँ सभ आनर ा्ग्दश्ह सभ, जे हरै त छी जे, “जे हेओ ान् नदरह शपथ लेत, से नहछु ननरत” ाुद् जे नहय् ाख्रह स्न्ह शपथ लेत, से ऋणी अनछ! 17 अर्ँ सभ ाूख् आ आनर सभ, नहएह तँ एनर सँ पैघ अनछ, स्न् आ नह ान् नदर जे स्न् हेँ पनित हरै त अनछ? 18 “जे हेओ िेदीह शपथ लेत, से नहछु ननरत” ाुद् जे नहय् ओनर िरद्नह शपथ लैत अनछ, से द्​्ी अनछत 19 अर्ँ सभ ाूख् आ आनर सभ, नहएह तँ एनर सँ पैघ अनछ जे िरद्न आ िेदी जे िरद्न हेँ पनित हरै त अनछ? 20 ते ँ जे हेओ िेदीह शपथ लैत अनछ, से ओनर िेदी आ ओनर ाे र्खल सभ िसुह शपथ लैत अनछत

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अध्य 24

21 जे हेओ ान् नदरह शपथ लैत अनछ, ओ ओनर ान् नदर आ ओनर ाे ररननर्रह शपथ लैत अनछत 22 जे स् िग्ह शपथ लेत से पराेश् िरह नसंर्सन आ ओनर पर बैसल ल्हह शपथ लैत अनछत 23 अर्ँ सभ नधक्र अनछ, अर्ँ सभ श्सी आ फररसी सभ, प्खंडी सभ! ह्रण, अर्ँ सभ पुदीन्, सौंफ आ जीर्ह दसा भ्ग दै त छी, आ धा् -ननया, न्य, दय् आ निश्सह पैघ ब्त सभ हेँ छ्नड दे लहँ त 24 अर्ँ सभ आनर ा्ग्दश्ह सभ, जे ँील हेँ ँ्र हरै त छी आ ऊँर हेँ ननगलैत छीत 25 नधक्र अर्ँ सभ, रे श्सी आ फररसी सभ, प्खंडी सभ! अर्ँ सभ प्ल् आ थ्लीह ब्ररी भ्ग हेँ स्फ हरै त छी, ाुद् भीतर ओ सभ लूर-प्र आ अनतशय सँ भरल अनछत 26 रे आनर फरीसी, पनरने प्ल् आ थ्ली ाे जे नहछु अनछ तहर् स्फ हर, ज्नर सँ ओहर ब्ररी भ्ग सेर् शु् भ’ ज्यत 27 नधक्र अर्ँ सभ, रे श्सी आ फररसी सभ, प्खंडी सभ! नहएह तँ अर्ँ सभ उजर हएल हब जह्ँ छी, जे ब्रर सँ सु्र लगैत अनछ, ाुद् भीतर सँ ाृत् युह रडी आ सभर् अशु्त् सँ भरल अनछत 28 तनरन् अर्ँ सभ सेर् ब्ररी रप सँ ानु्​् य सभह स्ाने धा् बुझ्इत छी, ाुद् भीतर सँ अर्ँ सभ प्खंड आ अधा् सँ भरल छीत 29 अर्ँ सभ नधक्र अनछ, अर्ँ सभ श्सी आ फररसी सभ, प्खंडी सभ! नहएह तँ अर्ँ सभ पिह् त् सभह हब बनबैत छी आ धा् सभह हब सभ हेँ सज्बैत छीत 30 ओ हह जे, “जँ रा सभ अपन पूि्जह साय ाे रनरतहँ तँ हनह् सभह संग पिह् त् सभह खून ाे सरभ्गी ननर रनरतहँ त” 31 ते ँ अर्ँ सभ अपन् पर गि्र बनू जे अर्ँ सभ पिह् त् सभ हेँ ा्रर दे ननर्र सभह सन् त्न छीत 32 तखन अर्ँ सभ अपन पूि्जह न्प भरत 33 रे स्ँ प सभ, रे स्ँ पह पीढी, अर्ँ सभ नरहह दण सँ ह्न् बनँ सहब? 34 ते ँ दे खू, रा अर्ँ सभ लग भनिषिय्, ज्नी आ श्सी सभ पि् ररल छीत अर्ँ सभ ओहर् सभ ाे सँ नहछु हेँ अपन सभ्घर ाे ह्ड् ा्रब आ नगर-नगर ाे ओहर् सभ हेँ पत्नडत हरबत 35 एनर लेल जे धा् र्नबल हेर खून सँ ल’ ह’ बरनहय्ह पुत जहरय्रह खून धरर, नजनह् अर्ँ सभ ान् नदर आ िेदीह बीँ ाे ा्रर दे लहँ , पृथ् िी पर बरौल गेल सभ ध्ना्ह खून अर्ँ सभ पर आनब ज्यत 36 रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे ई सभ ब्त एनर पीढी पर आओतत 37 रे यरशलेा, यरशलेा, रे यरशलेा, जे पिह् त् सभ हेँ ा्रर दै त छी आ अर्ँ लग पि्ओल गेल ल्ह सभ हेँ प्थर सँ ा्रर दै त छी, रा हतेह बेर अर्ँ ह बच् सभ हेँ एह ि्ा जा् हररतहँ , जेन् ाुग् अपन ाुग् हेँ प्ँ खख नीँ्ँ जा् हरै त अनछ, ाुद् अर्ँ सभ ननर ँ्रै त छलहँ ! 38 दे खू, अर्ँ ह घर अर्ँ सभह लेल उज्ड भ’ गेल अनछत 39 रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे , अर्ँ सभ रार् त्बत धरर ननर दे खब ज्बत धरर अर्ँ सभ ई ननर हरब जे , “धन अनछ जे पभुह न्ा सँ अबैत अनछत”

1 यीशु ाख्र सँ ब्रर ननहनल गेल्र आ हनहर नश्​् य सभ हनह् लग ाख्रह भिन दे ख्बय लेल आयल छल्रत 2 यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ अर्ँ सभ ई सभ ब्त ननर दे खख ररल छी?” रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे एतऽ एह प्थर पर एह प्थर ननर बँल ररत जे ननर फेहल ज्यतत” 3 जखन ओ जैतूनह पर्ड पर बैसल छल्र तखन नश्​् य सभ हनह् लग एह्ं त आनब हऽ पुछलनथन, “हह जे ई सभ हनरय् र्यत?” त्रर आगान आ संस्रह अनह ह्न ननश्नी र्यत? 4 यीशु हनह् सभ हेँ उतर दे लनथन, “ स्िध्न रह जे हेओ अर्ँ सभ हेँ ध्ख् ननर दऽ सहयत” 5 रार् न्ा सँ बहत् ल्ह आनब हऽ हरत जे, “रा ासीर छीत” आ बहत् हेँ ध्ख् दे तत 6 अर्ँ सभ यु् आ यु्ह अफि्र सुनबत 7 नहएह तँ ज्नत-ज्नत ज्नत-ज्नतह निर् उित आ र्ज् यर्जह निर् भऽ ज्यतत 8 ई सभ दु खह आरं भ अनछत 9 तखन ओ सभ अर्ँ सभ हेँ हषह लेल सौंनप हऽ ा्रर दे तत 10 तखन बहत् ल्ह िे स पहँ ँत आ एह-द्सर हेँ ध्ख् दे त आ एह-द्सर सँ घृण् हरतत 11 बहत् झूि पिह् त् सभ उित आ बहत् हेँ ध्ख् दे तत 12 अधा्ह भरा्र रे ब्ह ह्रणे ँ बहत् ल्हह पेा िं ढ् भऽ ज्यतत 13 ाुद् जे अर धरर सरन हरत, से उ्​्र प्ओतत 14 र्जह ई सुसा्ँ्र सास संस्र ाे पँ्ररत हयल ज्यत, ज्नर सँ सभ ज्नत हेँ गि्री बनतत तखन अंत आओतत 15 जखन अर्ँ सभ द्ननयल भनिषिय् द्र् हरल गेल उज्डह घृनणत ब्त हेँ पनित ्​्न ाे ि्ढ दे खबत 16 तखन यहनदय् ाे ररननर्र सभ पर्ड पर भ्नग ज्यत 17 जे घरह ँ्री पर अनछ से अपन घर सँ ह्न् िसु ननह्लब्ह लेल ननर उतरयत 18 आ जे खेत ाे अनछ से अपन हपड् लऽ हऽ घुरर हऽ ननर आबयत 19 ओनर नदन ाे गभ्िती आ दू ध दे बयिल् सभह लेल नधक्र! 20 ाुद् अर्ँ सभ प्थ्न् हर जे अर्ँ सभह पल्यन ज्ड ाे आ निश्ा-नदन ाे ननर र्त 21 नहएह तँ तखन बहत पैघ केश र्यत जे संस्रह प्रासँ एखन धरर ननर छल आ ने हनरय् र्यतत 22 ज्बत ओ नदन छ्र ननर भऽ ज्यत, त्बत धरर ह्न् शरीरह उ्​्र ननर र्यतत 23 तखन जँ हेओ अर्ँ सभ हेँ ई हरत जे, “दे खू, एतऽ ासीर ि् ओतनर छनथत” निश्स ननर हरत 24 नहएह तँ ओतऽ झूि ासीर आ झूि् पिह् त् सभ उित आ पैघ-पैघ नँन् त आ ँात् ह्र दे खौत्रत एतेह धरर जे जँ संभि र्इत तँ ओ सभ ँुनल ल्ह सभ हेँ ध्ख् दे तत 25 दे खू, रा अर्ँ सभ हेँ पनरने हनर दे ने छीत 26 ते ँ जँ ओ सभ अर्ँ सभ हेँ ई हरत जे , ‘दे खू, ओ ारभूना ाे अनछत ब्रर ननर ज्उ, दे खू, ओ गुप ह्िली ाे अनछत निश्स ननर हरत 27 नहएह तँ जनरन् पूब नदससँ नबजली अबैत अनछ आ पनशा धरर ँाहैत अनछत तनरन् ानु्​् यह पुतह आगान सेर् र्यतत

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28 नहएह तँ जतए शि अनछ, ओतनर गरड सभ जा् भऽ ज्यतत 29 ओनर नदनह केशह तुरंत ब्द सूय् अन्र भ’ ज्यत, आ ँ्न अपन इज्त ननर दे त, आह्श सँ त्र् खनस पडत आ आह्शह शखय नरलतत 30 तखन स् िग् ाे ानु्​् यह पुतह नँन् र पहर र्यतत 31 ओ अपन स् िग्दूत सभ हेँ तुररीह ज्र-ज्र सँ पि्ओत आ ओ सभ अपन ँुनल ल्ह सभ हेँ ँ्र रि् सँ आह्शह एह छ्र सँ द्सर छ्र धरर जा् हरतत 32 आब अंजीरह ग्छह दष्र सीखूत जखन ओहर ड्रर एखन धरर ह्ाल र्इत छै ह आ प्त ननहलैत छै ह तखन अर्ँ सभ जनैत छी जे गा् लग आनब गेल अनछत 33 तनरन् अर्ँ सभ जखन ई सभ ब्त दे खब तँ ई ज्नन नलअ जे ओ दरबज् सभ लग अनछत 34 रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे ज् धरर ई सभ ब्त पूर् ननर भऽ ज्यत त् धरर ई पीढी ननर बीततत 35 आह्श आ पृथ् िी सा्प भऽ ज्यत, ाुद् रार िँन सा्प ननर र्यतत 36 ाुद् ओनर नदन आ सायह नि्य ाे हेओ ननर जनैत अनछ, स् िग्ह स् िग्दूत ननर, नसि्य रार नपत् ा्त हेँत 37 ाुद् जेन् न्आह साय छल, तनरन् ानु्​् य-पुतह आगान सेर् र्यतत 38 जनरन् जलपलय सँ पनरने हे नदन ाे ओ सभ ख्इत-पीबैत छल्र, नि​ि्र हरै त छल्र आ नि​ि्र हरै त छल्र, ज्बत धरर न्र जर्ज ाे पिेश ननर हेलननत 39 ज्बत धरर ब्नढ आनब हऽ सभ हेँ ननर ल’ गेलनन त्बत धरर ननर बुझलननत तनरन् ानु्​् यह पुतह आगान सेर् र्यतत 40 तखन दू ग्रे खेत ाे ररत्रत एहर् लऽ जेतै, आ द्सर छ्नड दे ल ज्यतत 41 दू र् सी ँकी ाे पीसैत ररतीरत एहर् लऽ जेतै, आ द्सर छ्नड दे ल ज्यतत 42 ते ँ ज्गरह रह, नहएह तँ अर्ँ सभ ननर जनैत छी जे अर्ँ सभह पभु ह्न साय ाे आओतत 43 ाुद् ई ज्नन नलअ जे जँ घरह ा्नलह हेँ बुझल ररै त जे ँ्र ह्न परर ाे आओत तऽ ओ ज्गल ररै त आ अपन घर त्डय ननर दै तत 44 ते ँ अर्ँ सभ सेर् तैय्र रह, नहएह तँ ानु्​् य-पुत ज्नर साय ाे अर्ँ सभ ननर स्ँैत छी, आओतत 45 तखन एरन निश्सी आ बुख्ा्न सेिह हे अनछ, जहर् अपन ा्नलह अपन घरह घरह ा्नलह बनौने छनथ, जे साय पर हनह् सभ हेँ भ्जन दे ब्ह लेल? 46 धन अनछ ओ सेिह, जहर् ा्नलह आनब हऽ एन् हरै त दे खत्रत 47 रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे ओ ओहर् अपन सभ सा् पनतह अनधपनत बन्ओतत 48 ाुद् जँ ओ दु ष सेिह ा्न ाे ई हरत जे, ‘रार ा्नलह अपन आगान ाे दे री ह’ ररल छनथत 49 ओ अपन संगी द्स सभ हेँ ा्रर-पीर हरऽ ल्गत आ नश् ाे धुत ल्ह सभह संग भ्जन-पीन हरऽ ल्गतत ओनर न्हरह ा्नलह ओनर नदन आनब जेत्र जखन ओ ओहर् पर नजरर ननर र्खत आ ओनर घडी ाे जखन ओहर् ननर बुझल र्यतत

51 ओ ओहर् ह्नर हऽ प्खंडी सभह संग ओहर भ्ग र्खतत अध्य 25 1 तखन स् िग्ह र्ज् य दस हुा्रर हन्ह उपा् हयल ज्यत, जे अपन दीप लऽ हऽ िर सँ भेर हरब्ह लेल ननहललीरत 2 ओनर ाे सँ प्ँ ँ ग्रे बुख्ा्न आ प्ँ ँ ग्रे ाूख् छल्रत 3 ाूख् सभ अपन दीप लऽ हऽ गेल आ तेल ननर लऽ गेलत 4 ाुद् ज्नी ल्हनन अपन दीपह संग अपन बत्न ाे तेल ल’ लेलननत 5 िर ज्बत दे री हऽ ररल्र, ओ सभ सुनत गेल्र आ सुनत गेल्रत 6 आध् र्नत ाे नँनँय् उिल, “दे खू, िर आनब ररल छनथत अर्ँ सभ हनह् सँ भेर हरय लेल ननहलूत 7 तखन ओ सभ हुा्रर सभ उनि हऽ अपन दीप हेँ छं रनी हयलननत 8 ाूख् ल्हनन बुख्ा्न सभ हेँ हरलनथन, “अपन तेल रार् सभ हेँ नदअत नहएह तँ रार् सभह दीप बुनझ गेल अनछत 9 ाुद् बुख्ा्न ल्हनन उतर दे लनथन, “एन् ननरत हरी ं रार् सभ आ अर्ँ सभह लेल पय्​् प ननर भ’ ज्य, बल् नह अर्ँ सभ बेँननर्र सभह लग ज्उ आ अपन् लेल हीनन नलअत” 10 जखन ओ सभ हीनय गेल्र तखन िर आनब गेल्रत तैय्र ल्ह सभ हनह् संग नि​ि्र ाे पिेश हयलननत 11 तहर ब्द आन हुा्रर सभ सेर् आनब हऽ हरलनथन, “पभु , पभु, रार् सभह लेल ख्लूत” 12 ाुद् यीशु उतर दे लनथन, “रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे रा अर्ँ सभ हेँ ननर नँनै त छीत” 13 ते ँ ज्गरह रह, नहएह तँ अर्ँ सभ ानु्​् य-पुत ह्न नदन आओत, से ननर जनैत छीत 14 स् िग्ह र्ज् य ओनरन् अनछ जेन् ह्न् ल्ह दू र-दू र दे श ाे ज् हऽ अपन न्हर सभ हेँ बज् हऽ अपन सा् पनत ओहर् सभ हेँ सौंप दे लहत 15 एह ग्रे हेँ प्ँ ँ त्र्, द्सर हेँ दू र्ह् आ द्सर हेँ एह र्ल् दे लननत पतेह आदाी हे अपन अनेह कात् हे अनुस्र; आ स्झे अपन य्त् पर ननहनल गेलत 16 तखन जे प्ँ ँ त्र् प्नब गेल छल, से ओनर ाे सँ व्प्र हऽ हऽ ओहर् सभ हेँ प्ँ ँ त्र् आन हऽ दे लहत 17 तनरन् जे दू र् प्नब गेल छल, ओहर् दू र् आन ल्भ सेर् भेरलैहत 18 ाुद् जे एहर् गरण हेने छल, ओ ज् हऽ धरती ाे ख्दलह आ अपन ा्नलहह प्इ नुह् लेलहत 19 बहत नदनह ब्द ओनर न्हर सभह ा्नलह आनब हऽ हनह् सभह नरस्ब-नहत्ब हरै त छनथत 20 एनर तररे ँ जे प्ँ ँ र्ल् प्नब गेल छल, ओ आनब हऽ प्ँ ँ त्र् आओर आनन हऽ हरलह, “पभु , अर्ँ रार् प्ँ ँ त्र् सौंपलहँ त 21 हनहर ा्नलह हनह् हरलनथन, “रे नीह आ निश्सी सेिह, नीह ह्ज हेलहँ, अर्ँ नहछु ब्त पर निश्सी ररलहँ, रा अर्ँ हेँ बहत् ब्त पर श्सह बन् दे बत 22 ओ दू र् र्ल् सेर् आनब हऽ हरलनथन, “पभु , अर्ँ रार् दू र्ह् सौंनप दे लहँ त

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23 हनहर ा्नलह हनह् हरलनथन, “रे नीह आ निश्सी सेिह, नीह हेलहँ त अर्ँ नहछु ब्त पर निश्सी ररलहँ , रा अर्ँ हेँ बहत् ब्त पर श्सह बन् दे बत 24 तखन एह र्ल् लऽ हऽ हऽ हरलनथन, “पभु, रा अर्ँ हेँ जनैत छलहँ जे अर्ँ हि्र आदाी छी, जतय अर्ँ ननर ब्अने छी, ओतनर ह्नर हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ हऽ दे लहत 25 रा घबर् गेलहँ आ ज् हऽ त्रर रै लेर धरती ाे नुह् हऽ र्खख दे लहँ त 26 हनहर ा्नलह उतर दे लनथन, “रे दु ष आ आलसी सेिह, अर्ँ जनैत छलहँ जे रा जतऽ ब्न् ननर हेने छी, ओतनर ह्नर ह्नर लैत छी आ जतऽ भूस् ननर र्पने छी, ओतय ह्नर लैत छीत 27 ते ँ अर्ँ हेँ रार प्इ आद्न-पद्न हरननर्र सभ लग र्खख दे ब्ह ँ्री छल, तखन रार् अयल् पर रार् अपन प्इ सूदह संग गरण हरब्ह ँ्री छलत 28 ते ँ ओहर् सँ त्र् लऽ हऽ जे दस त्र् अनछ तहर् दऽ नदयौहत 29 जहर् लग अनछ ओहर् सभ हेँ पँुरत् भेरतैहत 30 अर्ँ सभ ओनर बेह्र सेिह हेँ ब्ररी अन्र ाे फेनह नदयौहत 31 जखन ानु्​् यह पुत अपन ानरा् ाे आ सभ पनित स् िग्दूत हनह् संग आओत, तखन ओ अपन ानरा्ह नसंर्सन पर बैसत्रत 32 हनह् स्ाने सभ ज्नत जा् भऽ ज्यत, आ ओ ओहर् सभ हेँ एह-द्सर सँ अलग हऽ लेत्र, जेन् ँरब्र अपन भेड ँ ् हेँ बहरी सँ अलग हरै त अनछत 33 ओ बरद सभ हेँ अपन दनरन् ह्त र्खत, ाुद् बहरी सभ हेँ ब्ा् ह्तत 34 तखन र्ज् अपन दनरन् ह्त ाे बैसल ल्ह सभ हेँ हरत्र, “रे रार नपत्ह आशीि्​् नदत ल्ह सभ, आऊ, संस्रह सृनष सँ अर्ँ सभह लेल तैय्र हयल गेल र्जह उतर्नधह्री बनूत 35 रा भूखल छलहँ आ अर्ँ सभ रार् भ्जन दऽ दे लहँ , रा प्सल छलहँ आ अर्ँ सभ रार् पीबैत छलहँ त 36 अर्ँ सभ रार् नंगरे , आ अर्ँ सभ रार् हपड् पनरर् दे लहँ , रा बीा्र छलहँ आ अर्ँ सभ रार् सँ भेर हयल, रा जेल ाे छलहँ आ अर्ँ सभ रार् लग आनब गेलहँ त 37 तखन धा् ल्ह सभ हनह् उतर दे त्र, “पभु , रा सभ अर्ँ हेँ हनरय् भूखल दे खलहँ आ अर्ँ हेँ भ्जन हरौलहँ ?” ि् प्सल, आ अर्ँ हेँ पीनब दे लह? 38 रा सभ अर्ँ हेँ हनरय् परदे शी दे खख हऽ अपन् ाे साेनर लेलहँ? आनह नंगरे , आ त्र् हपड् पनरर् दे नलयैह? 39 रा सभ अर्ँ हेँ बीा्र ि् जेल ाे हनरय् दे खलहँ आ अर्ँ लग आनब गेलहँ? 40 र्ज् हनह् सभ हेँ उतर दे त्र, “रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे अर्ँ सभ रार एनर छ्र-छ्र भ्य सभ ाे सँ एह ग्रे ह संग ई ह्ज हेलहँ , तनरन् अर्ँ सभ रार् लेल ई ह्ज हेलहँ त” 41 तखन ओ ब्ा् ह्तह ल्ह सभ हेँ सेर् हरत्र, “रे श्नपत, रार् सँ ँनल ज्उ, अनर आनग ाे जे शैत्न आ ओहर स् िग्दूत सभह लेल तैय्र हयल गेल अनछत

42 रा भूखल छलहँ आ अर्ँ सभ रार् भ्जन ननर दे नलयैहत 43 रा परदे शी छलहँ , ाुद् अर्ँ सभ रार् नंगरे ननर पहडलहँ , आ अर्ँ सभ रार् हपड् ननर पनररलहँ त 44 तखन ओ सभ हनह् उतर दे त्र, “पभु, रा सभ अर्ँ हेँ भूखल ि् प्सल ि् परदे शी, नंगरे , बीा्र ि् जेल ाे हनरय् दे खलहँ आ अर्ँ ह सेि् ननर हेलहँ ? 45 तखन ओ हनह् सभ हेँ उतर दे त्र, “रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे अर्ँ सभ एनर ाे सँ एह ग्रे ह संग ई ह्ज ननर हेलहँ , ते ँ रार् संग ननर हेलहँ त” 46 ई सभ अनर दण ाे ँनल ज्यत, ाुद् धा् अनर जीिन ाेत अध्य 26 1 यीशु ई सभ ब्त सा्प हऽ हऽ अपन नश्​् य सभ हेँ हरलनथनत 2 अर्ँ सभ जनैत छी जे दू नदनह ब्द फसर-पि्ह प्बनन अनछ आ ानु्​् य-पुत हेँ कूस पर ँढ्बय लेल ध्ख् दे ल ज्यतत 3 तखन ाुख्‍यपुर्नरत सभ, धा् -नशकह आ ल्हह बूढ-पुर्नरत सभ, ार्पुर्नरतह ारल ाे जा् भ’ गेल्र, जहर् ह्इफ् हरल ज्इत छलत 4 ओ सभ निँ्र-निाश् हयलनन जे ओ सभ ँतुर्ई सँ यीशु हेँ पहनड हऽ ा्रर सहयत 5 ाुद् ओ सभ हरलनथन, “पि्ह नदन ननर, हरी ं ल्हह बीँ रं ग्ा् ननर भऽ ज्यत” 6 यीशु जखन ह्ढी नसा्नह घर ाे बेतननय् ाे छल्रत 7 एह स् ती हनह् लग अयलीर, नजनह् लग एहर् अल्ब्सरह नडब् छलनन, ज्नर ाे बहत हीाती ाररा छलनन, आ ओ भ्जनह साय ाे हनह् ा्थ पर ढ्रर दे लननत 8 ाुद् हनहर नश्​् य सभ ई दे खख क्नधत भऽ हऽ हरलनथन, “ई ह्न ह्जह लेल उज्डल ज् ररल अनछ?” 9 ई ाररा बहत द्ा ाे बेनँ हऽ गरीब सभ हेँ दे ल ज् सहैत छलत 10 यीशु ई ब्त बुनझ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ अर्ँ सभ स् ती हेँ नहएह परे श्न हरै त छी? नहएह तँ ओ रार् पर नीह ह्ज हेने छनथत 11 नहएह तँ अर्ँ सभह संग गरीब सभ सनदखन ररै त अनछत ाुद् रार् अर्ँ सभ सनदखन ननर छीत 12 ओ रार शरीर पर ई ाररा ढ्रर दे लनन आ रार् दफन हरब्ह लेल हयलननत 13 रा अर्ँ सभ हेँ सत् य हरै त छी जे , जतए-जतय ई सुसा्ँ्र सा् पूण् संस्र ाे पँ्ररत र्यत, ओतनर एनर स् तीह द्र् हयल गेल ब्त सेर् हरल ज्यतत 14 ब्रर ाे सँ एह ग्रे यहद् इसररय्ती न्ाह पुर्नरत सभह लग गेल्रत 15 ओ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “अर्ँ सभ रार् ही दे ब आ रा ओहर् अर्ँ सभह र्थ ाे सौंनप दे ब?” ओ सभ ँ्नीह तीस रु हडीह लेल हनह् संग ि्ँ् हयलननत 16 ओनर साय सँ ओ हनह् ध्ख् दे ब्ह अिसर तहैत ररल्रत 17 अखाीरी र्रीह पि्ह पनरल नदन नश्​् य सभ यीशु लग आनब हऽ पुछलनथन, “अर्ँ ँ्रै छी जे रा सभ फसर-प्बनन अर्ँ लेल हतऽ तैय्र हरी?”

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18 ओ हरलनथन, “ एरन आदाी लग नगर ाे ज्उ आ ओहर् हह जे, ‘गुर हरै त छनथ, ‘रार साय लग आनब गेल अनछत रा अपन नश्​्‍य सभह संग अर्ँ ह घर ाे फसर-प्बनन ान्एबत 19 नश्​्‍य सभ जेन् यीशु द्र् ननयुय हयल गेल छल, तेन् हयलननत ओ सभ फसर-प्बनन तैय्र हयलननत 20 स्ँ झ भेल् पर ओ ब्रर ग्रे ह संग बैनस गेल्रत 21 ओ सभ भ्जन हरै त ह्ल ओ हरलनथन, “ रा अर्ँ सभ हेँ सते हरै त छी जे अर्ँ सभ ाे सँ नहय् रार् ध्ख् दे तत” 22 ओ सभ बहत दु खी भऽ हऽ एह-एह ग्रे ओहर् हरऽ लगल्र, “पभु, ही रा छी?” 23 ओ उतर दे लनथन, “ जे रार् संग बत्न ाे र्थ डु ब्बैत अनछ, से रार् ध्ख् दे तत” 24 ानु्​् यह पुत ओनरन् ँलैत छनथ जेन् हनह् ब्रे ाे नलखल अनछ, ाुद् नधक्र ओनर आदाी पर, जहर् द्र् ानु्​् यह पुत हेँ ध्ख् दे ल गेल अनछत ओनर आदाीह लेल नीह रनरतैह जँ ओ जन ननर लेने रनरतैहत 25 तखन हनह् ध्ख् दे ननर्र यहद् उतर दे लनथन, “गुर, ही रा छी?” ओ ओहर् हरलनथन, “ अर्ँ हरलहँ त” 26 ओ सभ भ्जन हरै त ह्ल यीशु र्री लऽ हऽ आशी् दऽ हऽ ओहर् त्नड हऽ नश्​् य सभ हेँ दऽ दे लनथन आ हरलनथन, “ लीर, ख्उत ई रार दे र अनछत 27 ओ प्ल् लऽ हऽ धन् यि्द दऽ हऽ हनह् सभ हेँ दे लनथन आ हरलनथन, “ अर्ँ सभ एनर ाे सँ पीबूत 28 ई रार नि ननयाह खून अनछ जे प्पह का्ह लेल बहत् ल्हह लेल बर्ओल गेल अनछत 29 ाुद् रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे , रा आब सँ एनर बेल हेर फल ाे सँ त्बत धरर ननर पीब, ज्बत धरर रा अर्ँ सभह संग अपन नपत्ह र्ज ाे नि-नि फल ननर पीबत 30 ओ सभ स्त ग्नब हऽ जैतूनह पर्ड पर ननहनल गेल्रत 31 तखन यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ आइ र्नत अर्ँ सभ रार् ह्रणे ँ आरत र्यबत 32 ाुद् रा जीनब उिल्ह ब्द अर्ँ सभ सँ पनरने गलील ज्यबत 33 पतुस उतर दे लनथन, “अर्ँ ह ह्रणे ँ भले सभ ल्ह आरत भऽ ज्य, ाुद् रा हनरय् आरत ननर र्यबत” 34 यीशु हनह् हरलनथन, “ रा अर्ँ हेँ सते हरै त छी जे आइ र्नत ाुग्​् ब्जब् सँ पनरने अर्ँ रार् तीन बेर असीह्र हरबत” 35 पतुस हनह् हरलनथन, “रा जँ अर्ँ ह संग ारर ज्यब, ाुद् रा अर्ँ हेँ असीह्र ननर हरबत” तनरन् सभ नशष सेर् हरलननत 36 तखन यीशु हनह् सभह संग गेरसानी न्ाह ्​्न पर आनब नश्​् य सभ हेँ हरलनथन, “ जखन धरर रा ओतऽ ज्बऽ प्थ्न् हरऽ ज् ररल छी त्बत अर्ँ सभ एतऽ बैनस ज्उत” 37 ओ पतुस आ जबदीह दु नू बेर् हेँ अपन् संग ल’ गेल्रत 38 तखन ओ हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ रार प्ण ाृत् यु धरर बहत दु खी अनछत 39 ओ हनेह आगू बनढ हऽ ाुँर पर खनस हऽ प्थ्न् हयलनन, “ रे रार नपत्, जँ संभि र् तँ ई प्ल् रार् सँ ँनल ज्उत 40 यीशु नश्​् य सभह लग आनब हऽ हनह् सभ हेँ सुतल प्नब हऽ पतुस हेँ पुछलनथन, “ ही, अर्ँ सभ रार् संग एह घंर् धरर ननर ज्नग सहलहँ?” 41 ज्गरह आ प्थ्न् हर जे अर्ँ सभ परीक् ाे ननर पडयत

42 ओ द्सर बेर ँनल गेल्र आ प्थ्न् हयलनन, “ रे रार नपत्, जँ ई प्ल् रार् सँ ननर ँनल ज्यत, ज्बत रा एहर् ननर पीब, तँ अर्ँ ह इच् पूर् र्यतत” 43 ओ फेर आनब हऽ हनह् सभ हेँ सुतल दे खलनन, ह्रण हनह् सभह आँ खख भ्री छलननत 44 ओ हनह् सभ हेँ छ्नड फेर ँनल गेल्र आ तेसर बेर प्थ्न् हयलननत 45 तखन यीशु अपन नश्​् य सभह लग आनब हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ आब सुनत रह आ निश्ा हरत 46 उिू, रा सभ ज्इत 47 जखन ओ बजैत छल्र तखन ब्रर ाे सँ एह यहद् आ हनह् संग तलि्र आ ल्िी लऽ हऽ बहत र्स भीड आनब गेल्रत 48 हनह् ध्ख् दे ननर्र हनह् सभ हेँ एहर् संहेत दे लनथन जे , “रा जहर् ँुम् लेब, ओ िैर अनछत” 49 ओ तुरर यीशु लग आनब हरलनथन, “रे गुर! आ ँुम् लेलहत 50 यीशु हनह् पुछलनथन, “ नात, अर्ँ नहएह आनब गेल छी?” तखन ओ सभ आनब हऽ यीशु पर र्थ र्खख हऽ हनह् पहनड लेलहत 51 यीशुह संग ररननर्र ाे सँ एह ग्रे अपन र्थ पस्रर हऽ अपन तलि्र ननह्नल ार्पुर्नरतह एहर् न्हर हेँ ा्रर दे लह आ ओहर ह्न ह्नर लेलहत 52 तखन यीशु हनह् हरलनथन, “ अपन तलि्र हेँ फेर सँ ओहर जगर पर र्खख नदयौहत 53 ही अर्ँ स्ँैत छी जे आब रा अपन नपत् सँ प्थ्न् ननर हऽ सहैत छी आ ओ रार् एखन ब्रर सँ बेसी स् िग्दूतह सेन् दऽ दे त्र? 54 तखन ई धा्श्स् त ह्न् पूर् र्यत जे एनर तररे ँ र्बऽ पडत? 55 ओरी साय यीशु ल्ह सभ हेँ हरलनथन, “ ही अर्ँ सभ रार् पहडब्ह लेल तलि्र आ ल्िी ल’ ह’ ँ्र जह्ँ ननहलल छी?” रा अर्ँ सभह संग ननत ान् नदर ाे नशक् दै त बैसल ररी, ाुद् अर्ँ सभ रार् पर ह्न् पहड ननर रखलहँ त 56 ाुद् ई सभ ब्त एनर लेल भेल जे पिह् त् सभह धा्श्स् त पूर् भऽ ज्यत तखन सभ नश्​् य हनह् छ्नड हऽ भ्नग गेल्रत 57 यीशु हेँ पहडने ल्ह सभ हनह् ार्पुर्नरत हैफ् लग लऽ गेल्र, जतय धा्श्सी आ बूढ-पुर्न सभ जा् छलत 58 ाुद् पतुस हनह् प्छ्ँ -प्छ्ँ दू र-दू र धरर ार्पुर्नरतह ारल धरर गेल्र आ अंत दे खब्ह लेल न्हर सभह संग बैनस गेल्रत 59 ाुख्‍यपुर्नरत सभ, प्ँीन-पुर्नरत सभ आ सा्‍पूण् परर्द् यीशुह निर् झूि गि्री तहलनन जे हनह् ा्रर दे ल ज्यत 60 ाुद् नहय् ननर भेरलत अंत ाे दू र् झूि गि्र आयल, 61 ओ हरलनथन, “ई आदाी हरलह जे , रा पराेश् िरह ान् नदर हेँ धस हऽ तीन नदन ाे बन् सहैत छीत” 62 ार्पुर्नरत उनि हऽ हरलनथन, “ही अर्ँ नहछु उतर ननर दऽ ररल छी?” ई सभ अर्ँ ह निर् ही गि्री दै त अनछ? 63 ाुद् यीशु ँुप ररल्रत ार्पुर्नरत हनह् उतर दे लनथन, “रा अर्ँ हेँ जीनित पराेश् िरह शपथ दै त छी जे अर्ँ रार् सभ हेँ ई बत्उ जे अर्ँ पराेश् िरह पुत ासीर छी ि् ननरत”

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64 यीशु हनह् हरलनथन, “ अर्ँ हरलहँ , तइय् रा अर्ँ सभ हेँ हरै त छी जे आब अर्ँ सभ ानु्​् य-पुत हेँ स्ाथ्ह दनरन् ह्त बैसल आ स् िग्ह ाेघ ाे आनब ररल दे खबत” 65 तखन ार्पुर्नरत अपन िस फ्नड हऽ हरलनथन, “ओ नन्​् हयलनन अनछत रार् सभ हेँ गि्रह आओर ही आिशहत् अनछ? दे खू, आब अर्ँ सभ हनहर नन्​् सुनलहँ त 66 अर्ँ सभह ही निँ्र अनछ? ओ सभ उतर दे लनथन, “ओ ाृतुह द्​्ी छनथत” 67 तखन ओ सभ हनह् ाुँर पर थूह फेनह हऽ ा्रर दे लहननत आ द्सर ल्ह हनह् र्थह रथेली सँ ा्रर दे लहननत 68 ओ हरलनन, “रे ासीर, रार् सभ हेँ भनिषि्णी हर, जे अर्ँ हेँ ा्रर दे लह?” 69 पतुस ब्रर ारल ाे बैसल छल्र आ एहर् लडही हनह् लग आनब हऽ हरलनथन, “अर्ँ सेर् गलील ननि्सी यीशुह संग छलहँ त” 70 ाुद् यीशु हनह् सभह स्झ्ँ नह्रै त हरलनथन, “रार् ननर बुझल अनछ जे अर्ँ ही हरै त छीत” 71 यीशु ओस्र् ाे ननहलल् पर एहर् आओर द्सी हनह् दे खख हऽ हरलनथन, “ई आदाी सेर् न्सरतह यीशुह संग छलत” 72 ओ फेर शपथ दऽ हऽ असीह्र हयलनन, “रा ओनर आदाी हेँ ननर नँनै त छीत” 73 नहछु सायह ब्द ओनर ि्ा ि्ढ ल्ह सभ हनह् लग आनब हऽ पतुस हेँ हरलनथन, “अर्ँ सेर् हनह् सभ ाे सँ एह छीत नहएह तँ त्रर ब्जब त्र् झगड् हरै त अनछत” 74 तखन ओ ग्रर पढय लगल्र आ शपथ दे बय लगल्र, “रा ओनर आदाी हेँ ननर नँनै त छीत” आ तुरर ाुग्​् कू भ गेलत 75 पतुस यीशुह िँन ा्न प्डलनन जे हनह् हरलनथन, “ाुग्​् ब्जब् सँ पनरने अर्ँ रार् तीन बेर असीह्र हरबत” ओ ब्रर ननहनल हऽ हरु ह्नय ल्गलत

9 तखन जेरेाी पिह् त् द्र् हरल गेल ब्त पूर् भेल जे, “ओ सभ ँ्नीह तीस रु हडी लऽ लेलह, जहर द्ा छल, जहर ा्ल इस्एलह सन् त्न ाे सँ हयल गेल छलत 10 ओ सभ हुम्रह खेतह लेल दे लनन, जेन् पभु रार् दे लननत 11 यीशु र्जप्लह साक ि्ढ भऽ गेल्र आ र्जप्ल हनह् सँ पुछलनथन, “ही अर्ँ यहदी सभह र्ज् छी?” यीशु हनह् हरलनथन, “ अर्ँ हरै त छीत” 12 जखन हनह् पर ाुखखय् पुर्नरत आ बूढ-पुर्न सभह आर्प लगलनन तँ ओ नहछु ओ उतर ननर दे लनथनत 13 तखन नपल्तुस हनह् हरलनथन, “ही अर्ँ ननर सुनैत छी जे ओ सभ अर्ँ पर हतेह गि्री दै त छनथ?” 14 ओ हनह् हनरय् एह् शब ननर हरलनथनत एतेह जे र्जप्ल बहत आशय्ँनहत भ' गेल्रत 15 ओनर भ्ज ाे र्जप्लह आदनत छलनन जे ल्ह सभह लेल एहर् हैदी हेँ छ्नड दै त छल्र, जहर् ओ सभ ँ्रै त छल्रत 16 तखन हनह् सभह एहर् उलेखनीय हैदी छलनन, जहर न्ा छल बरब्त 17 तखन ओ सभ जा् भेल् पर नपल्तुस हनह् सभ हेँ हरलनथन, “अर्ँ सभ ँ्रै त छी जे रा अर्ँ सभ हेँ हहर् छ्नड दी?” बरब्, आनह यीशु जहर् ासीर हरल ज्इत छै ह? 18 ओ जनैत छल्र जे ईष्​् ह ह्रणे ँ ओ सभ हनह् बँ​ँौने छनथत 19 जखन ओ न्यह आसन पर बैसल छल्र तखन हनहर पती हनह् लग पिौलनन जे, “ओनर धा् पुर् सँ अर्ँ ह ह्न् संबंध ननर अनछ, ह्रण आइ हनह् ह्रणे ँ रार् सपन् ाे बहत हष भेल अनछत” 20 ाुद् ाुख्‍यपुर्नरत आ बूढ-पुर्न सभ ल्ह सभ हेँ ान् लेलह जे बरब् सँ पूनछ हऽ यीशु हेँ नष हऽ नदयौहत 21 र्जप्ल हनह् सभ हेँ उतर दे लनथन, “अर्ँ सभ एनर दु नू ाे सँ हे ँ्रै त छी जे रा अर्ँ सभ हेँ छ्नड दी? ओ सभ हरलहनन, “बरब्त” 22 नपल्तुस हनह् सभ हेँ हरलनथन, “तखन रा यीशु हेँ ही हरब, जहर् ासीर हरल ज्इत अनछ?” ओ सभ हनह् हरलनथन, “ओहर् कूस पर ँढ्ओल ज्यत” 23 र्जप्ल पुछलनथन, “ओ ही अधल्र हेलनथ?” ाुद् ओ सभ आओर बेसी नँनँय् उिल जे , “ओहर् कूस पर ँढ्ओल ज्यत” 24 जखन नपल्तुस दे खलनन जे ओ नहछु ओ पर्स ननर भऽ सहैत छनथ, बल् नह रं ग्ा् भऽ ररल अनछ, तखन ओ प्नन लऽ हऽ भीडह साक र्थ ध् लेलनन आ हरलनथन, “रा एनर धा् वखयह खून सँ ननद्​् छीत” 25 तखन सभ ल्ह उतर दे लनथन, “ओहर खून रार् सभ पर आ रार् सभह बच् सभ पर र्त” 26 तखन ओ बरब् हेँ हनह् सभह र्थ ाे छ्नड दे लनन आ यीशु हेँ ह्ड् ा्रर हऽ कूस पर ँढ्बय लेल सौंनप दे लननत 27 तखन र्जप्लह नसप्री सभ यीशु हेँ आा सभ्ग्र ाे लऽ गेल आ सास सैननह सभह दल हेँ हनह् लग जा् हऽ लेलहत 28 ओ सभ ओहर हपड् उत्रर हऽ ल्ल रं गह िस पनररर लेलहत 29 ओ सभ ह्ँ रह ाुहुर गनढ हऽ ओहर ा्थ पर आ दनरन् र्थ ाे खढ लग् दे लहत 30 ओ सभ हनह् पर थूह फेनह हऽ खढ लऽ हऽ ा्थ पर पर्र हयलननत

अध्य 27 1 भ्र भेल् पर सभ ाुख्‍यपुर्नरत आ पज्ह बूढ-पुर्न सभ यीशुह निर् निँ्र हयलनन जे हनह् ा्रर दे ल ज्यत 2 ओ सभ ओहर् ब्खन हऽ ओहर् लऽ गेल आ र्जप्ल प्ख्युस नपल्तुसह र्थ ाे सौंप दे लहत 3 तखन यीशु हेँ ध्ख् दे लह यहद् हनह् द्​्ी िरर्ओल गेल दे खख अपन् हेँ पश्त्प हयलनन आ ओनर तीस र् ँ्नीह रु हडी हेँ ाुख्‍यपुर्नरत आ बूढ-पुर्नरत सभह लग फेर सँ अनलननत 4 ओ हरलनन, “रा प्प हेलहँ जे रा ननद्​् खूनह संग ध्ख् हऽ दे लहँ त” ओ सभ पुछलनथन, “रार् सभह लेल ई ही अनछ?” दे खू अर्ँ ओनर ब्त हेँत 5 ओ ँ्नीह रु हडी सभ ान् नदर ाे फेनह हऽ ँनल गेल्र आ फ्ँ सी पर फँनस गेल्रत 6 ाुखपुर्नरत सभ ँ्नीह रु हडी सभ लऽ हऽ हरलनथन, “ह्​् ाे र्खब उनँत ननर अनछ, नहएह तँ ई खूनह ा्ल अनछत” 7 ओ सभ निँ्र-निाश् हऽ हऽ परदे शी सभ हेँ ग्डब्ह लेल हुम्रह खेत हीनन लेलहत 8 ते ँ ओनर खेत हेँ आइ धरर “खूनह खेत” हरल गेलत

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ाैथू

31 ओ सभ हनहर उपर्स हेल्ह ब्द हनह् सँ िस उत्रर हऽ हनहर अपन िस पनररर हऽ हनह् कूस पर ँढ्बय लेल लऽ गेल्रत 32 जखन ओ सभ ब्रर ननहलैत छल्र तखन हनह् सभ हेँ हुरे नह एहर् आदाी भेरलनन, जहर न्ा नसा्न छलननत 33 ओ सभ ग्ल्थ् न्ाह ्​्न पर पहँ ँल्र, अथ्​् त् ख्पडीह ्​्न पर पहँ ँल्रत 34 ओ सभ ओहर् नपत नाल्ओल नसरह् पीबय लेल दे लह, ाुद् ओहर स्द ँखल् पर ओ ननर पीबय ल्गलत 35 ओ सभ हनह् कूस पर ँढ् दे लनथन आ हनहर हपड् ब्ँ नर हऽ नँटी ननह्नल दे लनथन, ज्नर सँ ई ब्त पूर् भऽ ज्य जे पिह् त् द्र् हरल गेल छल, “ओ सभ रार िस ओहर् सभह बीँ ब्ँ नर दे लह आ रार िस पर नँटी लग् दे लहत” 36 ओ सभ बैनस हऽ ओतऽ हनह् दे खैत ररल्रत 37 ओहर ा्थ पर अपन आर्प लग् दे लनथन जे , “ई यहदी सभह र्ज् यीशु छनथत” 38 तखन हनह् संग दू र् ँ्र कूस पर ँढ्ओल गेल छल, एहर् दनरन् ह्त आ द्सर ब्ा् ह्तत 39 ओनर ि्ा सँ गुजरय बल् ल्ह सभ ा्थ नरल्बैत हनह् ग्रर दे लहत 40 ओ हरलनथन, “अर्ँ जे ान् नदर हेँ त्नड हऽ तीन नदन ाे बनबैत छी, से अपन् हेँ बँ्उत” जँ अर्ँ पराेश् िरह पुत छी तँ कूस पर सँ उतरर ज्उत 41 तनरन् ाुख्‍यपुर्नरत सभ सेर् श्सी आ बूढ-पुर्न सभह संग हनहर उपर्स हरै त हरलनथनत 42 ओ द्सर् हेँ उ्​्र हयलननत अपन् हेँ ओ ननर बँ् सहैत अनछत जँ ओ इस्एलह र्ज् छनथ तँ आब कूस पर सँ उतरर ज्नथ आ रा सभ हनह् पर निश् ि्स हरबत 43 ओ पराेश् िर पर भर्स् हयलननत जँ ओहर् ँ्री तँ आब ओहर् बँ्बऽ नदयौह, नहएह तँ ओ हरने छल जे रा पराेश् िरह पुत छीत” 44 हनह् संग कूस पर ँढल ँ्र सभ सेर् हनह् द्ँ त ाे फेनह दे लहत 45 छिा बजे सँ निा बजे धरर पूर् दे श ाे अन्र भऽ गेलत 46 हरीब नौा बजे यीशु ज्र-ज्र सँ नँनँय् उिल्र, “ एली, एली, ल्ा् सबकनी?” अथ्​् त् “रार पराेश् िर, रार पराेश् िर, अर्ँ रार् नहएह छ्नड दे लहँ ?” 47 ओतऽ ि्ढ नहछु ल्ह सभ ई ब्त सुनन हऽ हरलनथन, “ई आदाी एनलय्र हेँ बज् ररल अनछत” 48 एह ग्रे तुरत दौडल एहर् संज लऽ हऽ ओनर ाे नसरह् भरर हऽ खढ पर र्खख ओहर् पीबय दे लहत 49 ब्ँ ही ल्ह सभ हरलनथन, “आउ, दे खब जे एनलय्र ओहर् बँ्बऽ आओत नह ननरत” 50 यीशु फेर ज्र-ज्र सँ नँनँय् उिल्रत 51 दे खू, ाख्रह पद्​् ऊपर सँ नीँ्ँ धरर दू भ्ग ाे फ्नर गेल छलत पृथी ह्ँ नप गेल आ प्थर फ्नर गेलत 52 हबर सभ खुजलत सुतल पनित ल्हह बहत र्स शरीर उनि गेलत 53 यीशु जीनब उिल्ह ब्द हबर सभ सँ ब्रर ननहनल पनित नगर ाे ज् हऽ बहत् ल्हह साक पगर भेल्रत 54 जखन सेन्पनत आ हनह् संग जे यीशु हेँ दे खैत छल्र, भूहम आ घरन् सभ दे खख ओ सभ बहत भयभीत भऽ हऽ हरलनथन, “सते ई पराेश् िरह पुत छल्रत”

55 ओतऽ बहत् स् तीगण दू र सँ दे खैत छलीर जे गलील सँ यीशुह प्छ्ँ -प्छ्ँ हनहर सेि् हऽ ररल छलीरत 56 ओनर ाे ाररया ागदलीनी, य्हूब आ य्सेसह ा्य ाररया आ जबदीह सर्नह ा्य ाररया सेर् छलीरत 57 स्ँ झ भेल् पर अररानथय्ह यूसुफ न्ाह एहर् धनी आदाी अयल्र जे यीशुह नश्​् य सेर् छल्रत 58 ओ नपल्तुस लग ज् हऽ यीशुह ल्श ा्ँ नग लेलहत तखन नपल्तुस शि हेँ छ्डब्ह आज् दे लननत 59 यूसुफ ल्श लऽ हऽ एहर् स्फ नलनन हपड् ाे लपेनर लेलहत 60 ओ ओहर् अपन नि हब ाे र्खख दे लनथन, जहर् ओ ँट्न ाे उख्डने छल्र, तखन ओ एहर् पैघ प्थर हेँ हबह दरबज् पर गुडह् हऽ ँनल गेल्रत 61 ाररया ागदलीनी आ द्सर ाररया हबह स्ाने बैसल छलीरत 62 तैय्रीह नदनह ब्द द्सर नदन ाुख्‍यपुर्नरत आ फररसी सभ नपल्तुस लग आनब गेल्रत 63 ओ हरलनन, “ार्र्ज, रार् सभ हेँ ा्न अनछ जे ओ ध्खेब्ज जीनित ररै त हरने छल जे , “तीन नदनह ब्द रा जीनब उिबत” 64 ते ँ आज् नदयौह जे तेसर नदन धरर हब हेँ सुरनकत र्खल ज्य, ज्नर सँ हनहर नश्​् य सभ र्नत ाे आनब हऽ ओहर् ँ्र् हऽ ल्ह सभ हेँ ननर हरनथ जे, “ओ ाृत् यु ाे सँ जीनब उिल छनथत” 65 नपल्तुस हनह् सभ हेँ हरलनथन, “अर्ँ सभ लग परर् अनछत 66 ओ सभ ज् हऽ हब हेँ पक् हऽ हऽ प्थर पर ाुरर लग् हऽ परर् लग् दे लहत अध्य 28 1 निश्ा-नदनह अंत ाे जखन सप्रह पनरल नदन भ्र र्बय ल्गल तखन ाररया ागदलीनी आ द्सर ाररया हब दे खय लेल अयलीरत 2 दे खू, एहर् पैघ भूहम भेल, ह्रण पभुह स् िग्दूत स् िग् सँ उतरर हऽ दरबज् पर सँ प्थर हेँ प्छू घुा् हऽ ओनर पर बैनस गेल्रत 3 हनहर ँेरर् नबजली जह्ँ आ िस बफ् जह्ँ उजर छलननत 4 हनहर डर सँ रकह सभ नरलैत-डु लैत ाृत् यु जह्ँ भऽ गेल्रत 5 स् िग्दूत स् तीगण सभ हेँ उतर दे लनथन, “अर्ँ सभ ननर डे र्उ, नहएह तँ रा जनैत छी जे अर्ँ सभ कूस पर ँढ्ओल गेल यीशु हेँ तहैत छीत” 6 ओ एतय ननर छनथ, नहएह तँ ओ जीनब गेल छनथ, जेन् ओ हरलननत आऊ, दे खू ओ ्​्न जतय पभु पडल छल्रत 7 जली-जली ज् हऽ हनहर नश्​् य सभ हेँ हनर नदयौन जे ओ ाृत् यु ाे सँ जीनब उिल छनथत ओ अर्ँ सभह आगू-प्छू गलील ज्इत छनथत ओतनर अर्ँ सभ हनह् दे खबननत 8 ओ सभ भय आ बहत र्​्ह संग जली-जली हब सँ निद् भऽ गेल्रत आ अपन नश्​् य सभ हेँ खबरर अनब्ह लेल दौडलत 9 जखन ओ सभ हनहर नश्​् य सभ हेँ ई ब्त हरय ज् ररल छल्र तँ यीशु हनह् सभ सँ भेर हऽ हऽ हरलनथन, “ सब जय र्त” ओ सभ आनब हऽ हनहर पएर पहनड हऽ हनहर आर्धन् हयलननत

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ाैथू

10 तखन यीशु हनह् सभ हेँ हरलनथन, “ ननर डरत 11 जखन ओ सभ ज् ररल छल्र तँ दे खलहँ जे पररे द्रह नहछु ल्ह नगर ाे आनब हऽ ाुख् यपुर्नरत सभ हेँ सभर् ह्जह ब्त हरलहननत 12 जखन ओ सभ बूढ-पुर्न सभह संग जा् भऽ गेल्र आ निँ्र-निाश् हयलनन, तखन ओ सभ नसप्री सभ हेँ पैघ प्इ दऽ दे लनथनत 13 ओ हरलनथन, “हह जे, हनहर नश्​् य सभ र्नत ाे आनब हऽ हनह् ँ्र् हऽ ँनल गेल्र जखन रा सभ सुतल छलहँ त” 14 जँ ई ब्त र्जप्लह ह्न ाे आनब ज्यत तँ रा सभ हनह् ान् हऽ अर्ँ सभ हेँ सुरनकत र्खबत 15 ओ सभ प्इ लऽ हऽ जेन् नसख्ओल गेल छल, तेन् हऽ ररल छलत 16 तखन ओ एग्ररर् नश्​्‍य गलील, ओनर पर्ड पर ँनल गेल्र, जतऽ यीशु हनह् सभ हेँ ननयुय हेने छल्रत 17 ओ सभ हनह् दे खख हनहर आर्धन् हयलननत 18 यीशु हनह् सभ लग आनब हऽ हरलनथन, “ सग् आ पृथ् िी ाे रार् सभर् स्ाथ्​् य दे ल गेल अनछत” 19 ते ँ अर्ँ सभ ज्उ आ सभ ज्नत हेँ नपत्, पुत आ पनित आत् ा्ह न्ा सँ बपनतस् ा् दऽ हऽ नसख्उत 20 रा अर्ँ सभ हेँ जे नहछु आज् दे ने छी, तहर् सभ हेँ प्लन हरब्ह नसख्रत आाीनत

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मरकुस के सुसमाचार

23 हनका सभक सभाघर मे अशुद आत् माक संग एक आदमी ि​िर ओ लचलचया उठिर 24 ओ कहिलन, “हमरा सभ केँ िोलड लदयौकर हे नासरतक यीशु, तोरा सँ हमरा सभक की िेना-दे ना अलि? की अहाँ हमरा सभक नाश करय िेि आयि िी? हम तोरा जनैत िी जे अहाँ के िी, परमेश् वरक पलवतर 25 यीशु हनका डाँ टैत कहिलिन, “ अपन चुप रह आ हनका मे सँ बाहर लनकिूर” 26 अशुद आत् मा हनका फालड कऽ जोर-जोर सँ लचलचया उठिलनर 27 ओ सभ आशय्चलकत भऽ गेिाह जे ओ सभ आपस मे प्चौडा करै त रहिाह जे, “ई की बात अलि?” ई कोन नव लसदां त अलि? लकएक तँ ओ अशुद आत् मा सभ केँ सेहो अलधकार सँ आजा दै त िलि आ ओ सभ हनकर आजा मानैत िलिर 28 तुरन हनकर पलसकद गिीि चारकातक समस पदे श मे पसरर गेिलनर 29 ओ सभ तुरन सभाघर सँ बाहर लनकि​िा पर याकूब आ यूहन् नाक संग लसमोन आ अन् दे यासक घर मे पवेश कयिलनर 30 लसमोनक स् तीक माय बोखार सँ बीमार पडि ि​िीह आ ओ सभ हनका हनकर बारे मे कहै त िलिनर 31 ओ आलब कऽ ओकर हाि पकलड कऽ उठौिलनर तुरन बोखार ओकरा िोलड दे िक आ ओ हनका सभक सेवा कयिलनर 32 साँ झ मे जखन सूया् स भेि तखन ओ सभ बीमार आ दु ष् टात् मा सँ गलसत सभ केँ हनका िग अनिलनर 33 पूरा शहर दरबजा पर जमा भ’ गेि ि​िर 34 ओ बहत रास दु ष् टात् मा सभ केँ भगा दे िलिनर ओ दु ष् टात् मा सभ केँ बाजऽ नलह दे िक, लकएक तँ ओ सभ ओकरा लचनै त ि​िर 35 भोरे लदन सँ बहत पलहने उलठ कऽ एकां त सान पर लवदा भेिाह आ ओतलह पाि्ना कयिलनर 36 लसमोन आ हनकर संग रहलनहार सभ हनका पािाँ -पािाँ चि​िलनर 37 ओ सभ हनका पालब कऽ कहिलिन, “सब िोक तोरा तकैत अलिर” 38 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ आउ, हम सभ बगिक नगर सभ मे जाउ, जालह सँ हम ओतलह सेहो पचार कऽ सकबर 39 ओ पूरा गिीि मे हनका सभक सभाघर मे पचार कयिलन आ दु ष् टात् मा सभ केँ भगा दे िलनर 40 एकटा को़ी हनका िग आलब कऽ हनका िग लवनती कऽ कऽ हनका िग ठे हन टे कने कहिलिन, “अहाँ चाहै िी तँ हमरा शुद कऽ सकैत िीर” 41 यीशु दया कऽ कऽ हाि ब़ा कऽ हनका िूलब कऽ कहिलिन, “ हम चाहबर अहाँ शुद रहर 42 यीशु बजैत दे री हनका तुरन को़ चलि गेिलन आ ओ शुद भऽ गेिाहर 43 ओ हनका कडा आजा दे िलिन आ तुरन हनका लवदा कऽ दे िलिनर 44 ओ हनका कहिलिन, “ दे खू, अहाँ ककरो सँ लकिु नलह बाजू, बि् लक जाउ, पुरोलहतक समक अपना केँ दे खाउ आ अपन शुकद िेि ओलह बात सभ केँ च़ाउ जे मूसा आजा दे ने ि​िाह, जालह सँ हनका सभक गवाही होर” 45 मुदा ओ बाहर लनकलि गेिाह आ एलह बात केँ बेसी पचार करऽ िगिाह आ एलह बात केँ धधकय िगिाह जे यीशु आब खुलि कऽ शहर मे पवेश नलह कऽ सकिाह, बि् लक बाहर मरभूलम मे रलह गेिाहर

अधाय 1 1 परमेश् वरक पुत यीशु मसीहक सुसमाचारक पारार 2 जेना पवक् ता सभ मे लिखि अलि, “दे खू, हम अपन दू त केँ अहाँ क सामने पठा रहि िी जे अहाँ क आगू मे बाट तैयार करतर” 3 मरभूलम मे एक गोटे क आवाज, “पभुक बाट तैयार कर, हनकर बाट सोझ करर” 4 यूहन् ना जंगि मे बपलतस् मा दै त ि​िाह आ पापक कमाक िेि पशातापक बपलतस् माक पचार करै त ि​िाहर 5 यहलदयाक समस दे श आ यरशिेमक िोक सभ हनका िग गेिाह आ सभ अपन पाप सीकार करै त यरदन नदी मे हनका सँ बपलतस् मा िेिलनर 6 यूहन् ना ऊँटक केश पलहरने ि​िाह आ कमर मे चमडाक पटी पलहरने ि​िाहर ओ लटडी आ जंगिी मधु खाइत ि​िर 7 ओ पचार कऽ कऽ कहिलिन, “हमरा बाद हमरा सँ बेसी शक्शािी केओ अबैत अलि, जकर जूताक कुंडी हम झुलक कऽ खोिबाक योग नलह िीर” 8 हम अहाँ सभ केँ पालन सँ बपलतस् मा दे ने िी, मुदा ओ अहाँ सभ केँ पलवत आत् मा सँ बपलतस् मा दे ताहर 9 ओलह समय मे यीशु गिीिक नासरत सँ आलब यरदन नदी मे यूहन् ना दारा बपलतस् मा िेिलनर 10 तुरन पालन सँ बाहर लनकिैत दे खिलन जे आकाश खुलज गेि अलि आ आत् मा कबूतर जकाँ हनका पर उतरर रहि अलिर 11 तखन स् वग् सँ एकटा आवाज आयि जे , “अहाँ हमर लपय पुत िी, लजनका पर हम पसर िीर” 12 तुरन आत् मा हनका जंगि मे धकेलि दै त िलिनर 13 ओ चािीस लदन धरर जंगि मे रहिाह, शैतानक परीका मेर जंगिी जानवर सभक संग ि​िर स् वग्दूत सभ हनकर सेवा करै त ि​िाहर 14 यूहन् ना जेि मे बंद भेिाक बाद यीशु गिीि मे परमेश्‍वरक राज्‍यक सुसमाचार पचार करै त गेिाहर 15 ओ कहिलन, “ समय पूरा भऽ गेि अलि आ परमेश् वरक राज् य िग आलब गेि अलिर 16 जखन ओ गिीि समुदक कात मे चिैत ि​िाह तखन ओ दे खिलन जे लसमोन आ हनकर भाय अक्डयास समुद मे जाि फेलक रहि िलिर 17 यीशु हनका सभ केँ कहिलिन, “ अहाँ सभ हमरा पािाँ आलब जाउ, हम अहाँ सभ केँ मनुष् यक माि मारय बिा बना दे बर” 18 ओ सभ तुरत अपन जाि िोलड हनकर पािाँ िालग गेिाहर 19 ओतऽ सँ कनेक आगू बल़ कऽ ओ जबदीक पुत याकूब आ हनकर भाय यूहन् ना केँ दे खिलन जे जहाज मे बैसि जाि ठीक करै त ि​िाहर 20 ओ तुरत हनका सभ केँ बजौिलन आ ओ सभ अपन लपता जबदी केँ भाडाक नोकर सभक संग नाव मे िोलड हनकर पािाँ िालग गेिाहर 21 ओ सभ कफरनहम मे गेिाहर लवशाम-लदन मे ओ तुरन सभाघर मे जा कऽ लशका दे बय िगिाहर 22 ओ सभ हनकर लशका दे कख आशय्चलकत भऽ गेिाह, लकएक तँ ओ हनका सभ केँ शासी सभ जकाँ नलह, बिुक अलधकारधारी जकाँ लशका दै त ि​िाहर

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मरकुस के सुसमाचार

अधाय 2

21 पुरान वस पर नवका कपडाक टु कडी सेहो केओ नलह लसयैत अलि, नलह तऽ ओलह मे भरि नवका कपडा पुरान कपडा मे सँ हलट जाइत अलि आ ओकर फाटि आओर बेसी भ’ जाइत अलिर 22 नव मलदरा केँ केओ पुरान लडबा मे नलह डािैत अलि, नलह तऽ नवका मलदरा बोति सभ केँ फालड दै त अलि आ मलदरा उझलि जायत आ बोति सभ खराब भऽ जायतर 23 लवशाम-लदन मे ओ धानक खेत मे घुलम गेिाहर हनकर लशष् य सभ जाइत-जाइत धानक कान तोडय िगिाहर 24 फररसी सभ हनका पुि​िलिन, “दे खू, लवशाम-लदन मे ओ सभ लकएक एहन काज करै त अलि जे उलचत नलह अलि?” 25 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ की अहाँ सभ कलहयो नलह प़ने िी जे दाऊद आ हनका संग रहलनहार सभ जे काज कयिलन? 26 महापुरोलहत अलबयािरक समय मे यीशु कोना परमेश् वरक घर मे जा कऽ ओ रोटी खा गेिाह, जे पुरोलहत सभक िोलड कऽ खाएब उलचत नलह अलि आ हनका संग रहलनहार सभ केँ सेहो दऽ दे िलन? 27 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ लवशाम-लदन मनुष् यक िेि बनि अलि, आ मनुष् य लवशाम-लदनक िेि नलहर 28 ते ँ मनुष् य-पुत लवशाम-लदनक पभु सेहो िलिर

1 ओ लकिु लदनक बाद फेर कफरनहम मे पवेश कयिलनर आ हला भेि जे ओ घर मे िलिर 2 तुरन बहतो िोक सभ एक ठाम जमा भऽ गेिाह जे हनका सभ केँ गहर करबाक िेि कोनो जगह नलह ि​ि, दरबजाक आसपास सेहो नलह ि​िलनर 3 ओ सभ चारर गोटे क िकवागस केँ ि’ क’ हनका िग आलब गेिाहर 4 जखन ओ सभ दबाबक काररे ँ हनका िग नलह आलब सकिाह तखन ओ सभ ित केँ खोलि दे िलिन जतय ओ ि​िलिनर 5 यीशु हनका सभक लवश् वास दे कख िकवागस केँ कहिलिन, “ बौआ, अहाँ क पाप कमा भऽ गेिर” 6 मुदा ओतऽ लकिु धम्शासी सभ बैसि ि​िाह आ मोन मे तक्-लवतक् करै त ि​िाहर 7 ई आदमी एलह तरहे ँ लनना लकएक कहै त अलि? केवि परमेश् वर िोलड के पाप कमा कऽ सकैत अलि? 8 जखन यीशु अपन आत् मा मे बुलझ गेिाह जे ओ सभ अपना मे एना लवचार करै त िलि, तखन ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ अहाँ सभ एलह बात सभक मोन मे लकएक लवचार कऽ रहि िी?” 9 पकाघाती केँ ई कहब की सहज अलि जे, ‘अहाँ क पाप कमा भऽ गेिर आलक ई कहब जे, “उलठ कऽ अपन लबिौन उठा कऽ चिू?” 10 मुदा अहाँ सभ ई जालन कऽ जे मनुष् यक पुत केँ पाप कमा करबाक अलधकार पृि् वी पर िलनर ” 11 हम अहाँ केँ कहै त िी जे उठू आ अपन ओिाओन उठा कऽ अपन घर मे जाउर 12 ओ तुरन उलठ कऽ ओिाओन उठौिलन आ सभ गोटे क आगू बल़ गेिाहर एतेक धरर जे ओ सभ आशय्चलकत भऽ परमेश् वरक मलहमा कऽ कऽ कहिलिन, “हम सभ कलहयो एलह तरहे ँ नलह दे खिहँ र” 13 ओ फेर समुदक कात मे लवदा भेिाहर सभ भीड हनका िग आलब गेिाह आ ओ हनका सभ केँ लसखबैत ि​िाहर 14 ओलह ठाम सँ गुजरै त काि ओ अलीसक पुत िेवी केँ दरसखाना पर बैसि दे कख कहिलिन, “ हमर पािाँ चिूर” ओ उलठ कऽ हनका पािाँ -पािाँ चलि गेिाहर 15 जखन यीशु अपन घर मे भोजन करऽ बैसि ि​िाह तखन यीशु आ हनकर लशष् य सभक संग बहतो कर वसूिी आ पापी सभ सेहो बैसि ि​िाहर 16 धम्शासी आ फररसी सभ हनका कर वसूिी आ पापी सभक संग भोजन करै त दे कख हनकर लशष् य सभ केँ पुि​िलिन, “ओ करदाता आ पापी सभक संग भोजन आ पीबैत कोना? 17 यीशु ई बात सुलन कऽ हनका सभ केँ कहिलिन, “ सस केँ वैदक आवशकता नलह, बि् लक बीमार केँर 18 यूहन् ना आ फररसी सभक लशष् य सभ उपवास करै त ि​िाह, तखन ओ सभ आलब कऽ हनका पुि​िलिन, “यूहरा आ फररसी सभक लशष् य सभ उपवास लकएक करै त िलि, मुदा अहाँ क लशष् य सभ उपवास लकएक नलह करै त िलि?” 19 यीशु हनका सभ केँ पुि​िलिन, “की वरक संग रहबाक िेि वरक बचा सभ उपवास कऽ सकैत अलि?” जा धरर वर संग रहै त िलि ता धरर उपवास नलह क' सकैत िलिर 20 मुदा ओ लदन आओत जखन वर केँ हनका सभ सँ दू र कऽ दे ि जायत आ ओलह लदन मे ओ सभ उपवास करताहर

अधाय 3 1 ओ फेर सभाघर मे पवेश कयिलनर ओतय एकटा आदमी ि​ि जकर हाि मुरझा गेि ि​िैकर 2 ओ सभ हनका पर नजरर रखिलन जे लवशाम-लदन मे ओ हनका ठीक करत लक नलहर जालह सँ ओ सभ हनका पर आरोप िगाबलिर 3 ओ मुरझाएि हाि बिा आदमी केँ कहिलिन, “ आगू ठा़ रहर” 4 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ की लवशाम-लदन मे नीक काज करब उलचत अलि आलक अधिाह?” जान बचाबय िेि, आलक मारय िेि? मुदा ओ सभ चुप रहिाहर 5 ओ हनका सभक हदयक कठोरताक काररे ँ दु खी भऽ कऽ चार कात तामस मे तकिलन, तखन ओ ओलह आदमी केँ कहिलिन, “ अपन हाि ब़ाउर” ओ ओकरा पसारर दे िक आ ओकर हाि दोसर जकाँ ठीक भ’ गेिैर 6 फररसी सभ लनकलि कऽ तुरत हे रोदीसक िोक सभ सँ हनका लवरद लवचार-लवमश् कयिलन जे ओ सभ हनका कोना नष कऽ सकैत िलिर 7 यीशु अपन लशष् य सभक संग समुद लदस लवदा भऽ गेिाहर 8 यरशिेम, इदु लमया आ यरदन नदीक ओलह पार सँर सोर आ सीदोनक आसपासक िोक सभ हनकर पैघ-पैघ काज सुलन हनका िग आलब गेिाहर 9 ओ अपन लशष्‍य सभ केँ कहिलिन जे , िोकक भीडक काररे ँ एकटा िोट नाव हनका पर पतीका करलि, जालह सँ ओ सभ हनका मे भीड नलह िगाओतर 10 ओ बहतो केँ ठीक कऽ दे ने ि​िाहर एतेक तक लक ओ सभ ओकरा िूबय िेि दबा दे िक, जे लकयो लवपल् सँ पीलडत ि​िर 11 अशुद आत् मा सभ हनका दे कख हनका सामने खलस कऽ लचलचया उठिलन आ कहिलिन, “अहाँ परमेश् वरक पुत िीर” 12 ओ हनका सभ केँ कडा आजा दे िलिन जे ओ सभ हनका सभक पररचय नलह करलिर

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मरकुस के सुसमाचार

13 ओ पहाड पर चल़ कऽ जकरा चाहलि तकरा बजबैत िलिर 14 यीशु बारह गोटे केँ लनयु् कयिलन जे ओ सभ हनका संग रहलि आ पचार करऽ िेि पठा सकलिर 15 आ ओकरा मे बीमारी सभ केँ ठीक करबाक आ दु ष् टात् मा सभ केँ बाहर लनकािबाक सामि्​् य अलिर 16 ओ लसमोन पतुसक उपनाम रखिलनर 17 जबदीक पुत याकूब आ याकूबक भाय यूहन् नार ओ हनका सभक उपनाम बोअनेग्स रखिलन, अिा् त्, गरजबाक बेटा सभर 18 आक्यास, लफलिपुस, बाि्िोलू , म्ी, िोमा, अलीसक पुत याकूब, िदे युस आ कनानक लसमोनर 19 यहदा इसररयोती जे हनका धोखा दे िकलनर 20 िोक सभ फेर एकठाम भऽ जाइत अलि जे ओ सभ रोटी तक नलह खा सकिर 21 जखन हनकर संगी सभ ई बात सुलन कऽ हनका पकडबाक िेि लनकलि गेिाहर 22 यरशिेम सँ उतरि शासी सभ कहिलिन, “ओकरा िग बेिजबूब अलि आ ओ दु ष् टात् मा सभक मुख् य दारा दु ष् टात् मा सभ केँ भगा दै त अलिर” 23 ओ हनका सभ केँ अपना िग बजा कऽ दषान मे कहिलिन, “ शैतान शैतान केँ कोना भगा सकैत अलि?” 24 जँ कोनो राज अपना आप मे बँलट जाय तँ ओ राज ठा़ नलह भऽ सकैत अलिर 25 जँ कोनो घर अपना आप मे बँलट गेि तँ ओ घर ठा़ नलह भऽ सकैत अलिर 26 जँ शैतान अपना पर उलठ कऽ लवभालजत भऽ जायत तँ ओ ठा़ नलह भऽ सकैत अलि, बि् लक ओकर अंत भऽ जायतर 27 केओ बिगरक घर मे जा कऽ ओकर सम् पल् िूलट नलह सकैत अलि, जाबत ओ पलहने बिवान केँ बाकन नलह िेतर आ तखन ओ अपन घर लबगालड िेतर 28 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे, मनुष् यक सन् तान सभ केँ सभ पाप माफ कयि जायतर 29 मुदा जे पलवत आत् माक लनना करत, तकरा कलहयो कमा नलह भेटैत िै क, बि् लक अनन दणक खतरा अलिर 30 लकएक तँ ओ सभ कहै त ि​ि जे , “ओकरा मे अशुद आत् मा अलिर” 31 तखन हनकर भाय आ माय सभ आलब कऽ बाहर ठा़ भऽ हनका बजा कऽ हनका िग पठौिलनर 32 िोक सभ हनका चार कात बैसि िोक सभ हनका कहिलिन, “दे खू, अहाँ क माय आ अहाँ क भाय सभ बाहर अहाँ केँ खोलज रहि िलिर” 33 यीशु हनका सभ केँ उ्र दे िलिन, “ हमर माय आ हमर भाय सभ के िलि?” 34 ओ अपन चार कात बैसि िोक सभ लदस तकैत बजिाह, “ दे खू, हमर माय आ हमर भाय सभ! 35 लकएक तँ जे केओ परमेश् वरक इच् िा पूरा करत, से हमर भाय, बलहन आ माय िलिर

2 ओ हनका सभ केँ दषान दारा बहत लकिु लसखबैत ि​िाह आ अपन लशका मे हनका सभ केँ कहिलिनर 3 सुनूर दे खू, एकटा बोलनहार बोलनहार लनकि​ि ि​िर 4 जखन ओ रोपैत ि​िाह तखन लकिु बाट कात मे खलस पडि आ आकाशक लचडै सभ आलब कऽ ओकरा खा गेिर 5 लकिु गोटे पािरक जमीन पर खलस पडि, जतय ओलह ठाम बेसी मालट नलह ि​िर ओ तुरन उिलि गेि, लकएक तऽ ओकरा मे मालटक गहराई नलह ि​िैकर 6 मुदा रौद उगिा पर ओ जरर गेिर आ जलड नलह रहबाक काररे ँ ओ मुरझा गेिर 7 लकिु काँ टक बीच खलस पडि आ काँ ट बल़ कऽ ओकरा गिा दबा दे िक आ कोनो फि नलह दे िकर 8 आन िोक नीक जमीन पर खलस पडि आ फि उगैत आ ब़ै त गेिर लकयो तीस, लकयो सालठ, आ लकयो सयर 9 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ जेकरा सुनबाक िेि कान अलि, ओ सुनयर” 10 जखन ओ असगर ि​िाह तखन बारह गोटे क संग हनका िग मे बैसि िोक सभ हनका सँ दषान पुि​िलिनर 11 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ अहाँ सभ केँ परमेश् वरक राज् यक रहस् य जानबाक अलधकार दे ि गेि अलिर 12 जालह सँ ओ सभ दे कख कऽ दे कख सकलि आ नलह बुलझ सकलिर सुलन कऽ सुलन सकैत िलि, मुदा नलह बुलझ सकैत िलिर कही ं कलहयो ओ सभ धम् पररवत्न नलह कऽ सकैत िलि आ हनका सभक पाप कमा नलह भ’ जेतलनर” 13 यीशु हनका सभ केँ कहिलिन, “ की अहाँ सभ ई दषान नलह जनैत िी? तखन अहाँ सभ दषान कोना बुझब? 14 बोलनहार वचन बोलन िैत अलिर 15 ई सभ बाट कात मे अलि, जतय वचन बोओि गेि अलिर मुदा जखन ओ सभ सुनैत अलि तँ शैतान तुरन आलब कऽ हनका सभक हदय मे जे वचन रोपि गेि ि​ि से िऽ िैत अलिर 16 ई सभ तलहना पािरक जमीन पर बोओि गेि अलिर ओ सभ जखन ओ सभ वचन सुलन कऽ तुरन पसरता सँ गहर करै त िलिर 17 ओ सभ अपना मे जलड नलह रखैत िलि आ लकिु समय धरर लटकैत रहै त िलि, बाद मे जखन वचनक काररे ँ कष वा सताओि जाइत िलन तखन तुरन हनका सभ केँ आपल् होइत िलनर 18 ई सभ काँ टक बीच बोओि गेि अलिर जेना वचन सुनब, 19 एलह संसारक लचना आ धन-दौितक ि​ि आ आन-आन वसुक वासना सभ वचन केँ गिा घोंटैत अलि आ ओ लनषि भऽ जाइत अलिर 20 ई सभ नीक जमीन पर बोओि गेि अलिर जे वचन सुनैत अलि आ ओकरा गहर करै त अलि आ फि दै त अलि, लकयो तीस गुना, लकयो सालठ आ लकयो सयर 21 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ की मोमब्ी आनि जाइत अलि, जकरा कटाक नीचाँ राखि जाइत अलि आलक ओिाओनक नीचाँ ? आ मोमब्ी पर नलह राखि जाय? 22 लकएक तँ एहन कोनो बात नुकायि नलह अलि जे पगट नलह होयतर आ ने कोनो बात गुप राखि गेि ि​ि, बि् लक लवदे श मे आलब जायर 23 जँ ककरो सुनबाक कान अलि तँ ओ सुनयर 24 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “अहाँ सभ जे सुनैत िी से सावधान रहर 25 लकएक तँ जकरा िग अलि से ओकरा दे ि जायतर

अधाय 4 1 ओ फेर समुदक कात मे लशका दे बऽ िगिाह, तखन हनका िग बहत रास भीड जमा भऽ गेिलन, जालह सँ ओ एकटा नाव मे बैलस समुद मे बैलस गेिाहर समस भीड समुदक कात मे जमीन पर ि​िर

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मरकुस के सुसमाचार

26 ओ कहिलिन, “ परमेश् वरक राज् य तलहना अलि, जेना मनुष् य जमीन मे बीया फेलक दै त अलिर 27 ओ रालत-लदन सुलत कऽ उठत आ बीया उगैत आ बल़ जायत, से ओकरा कोना बुझि िै कर 28 पृि् वी अपना सँ फि दै त अलिर पलहने बेड, फेर कान, तकर बाद कान मे भरि मकईर 29 मुदा जखन फसि लनकलि जाइत अलि तँ तुरन हँ सुआ िगा दै त िलिन, लकएक तँ फसिक समय आलब गेि अलिर 30 ओ पुि​िलिन, “ हम सभ परमेश् वरक राज् य केँ कोन तरहक उपमा दे ब?” आलक कोन तुिनासँ एकर तुिना करब? 31 ई सरसोंक दाना जकाँ अलि, जे जखन पृि् वी पर बोओि जाइत अलि तँ पृि् वी मे जे बीया अलि तालह सँ कम भऽ जाइत अलिर 32 मुदा जखन ओ बोओि जाइत अलि तखन ओ ब़ै त अलि आ सभ जडी-बूटी सँ पैघ भऽ जाइत अलि आ पैघ-पैघ डारर सभ केँ उखालड दै त अलिर जालह सँ हवाक लचडै सभ ओकर िाया मे बैलस जायर 33 ओलह तरहक बहत रास दषान सँ यीशु हनका सभ केँ वचन बजौिलनर 34 मुदा ओ हनका सभ केँ लबना कोनो दषानक बात नलह कहिलनर 35 ओही लदन साँ झ भेिा पर ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ आउ, ओलह पार जाउर” 36 िोक सभ केँ लवदा कऽ कऽ नाव मे बैसि जलहना हनका िऽ गेिलनर आ हनका संग आन िोट-िोट जहाज सेहो ि​िर 37 तखन एकटा पैघ हवाक तूफान उठि आ िहरर नाव मे धडलक गेि जे आब नाव भरर गेिर 38 ओ नावक पािू मे तलकया पर सुति ि​िाह, तखन ओ सभ हनका जगबैत कहिलिन, “गुर, अहाँ केँ ई लचना नलह अलि जे हम सभ नाश भ’ जायब?” 39 ओ उलठ कऽ हवा केँ डाँ लट कऽ समुद केँ कहिलिन, “ शां लत रह, शान रहर” हवा रलक गेिै आ बहत शान भ गेिैर 40 यीशु हनका सभ केँ कहिलिन, “ अहाँ सभ एतेक डराएि लकएक िी? अहाँ सभक लवश् वास कोना नलह अलि? 41 ओ सभ बहत भयभीत भऽ एक दोसरा सँ कहिलिन, “ई केहन मनुख अलि जे हवा आ समुद सेहो ओकर आजा मानैत अलि?”

7 ओ जोर-जोर सँ लचलचया उठिलन, “हे परमेश् वर परमेश् वरक पुत यीशु, अहाँ सँ हमरा की संबंध अलि?” हम अहाँ केँ परमेश् वरक शपि दै त िी जे अहाँ हमरा यातना नलह लदअर 8 ओ हनका कहिलिन, “ हे अशुद आत् मा, ओलह आदमी मे सँ बाहर लनकिूर” 9 ओ पुि​िलिन, “ तोहर नाम की अलि?” ओ उ्र दे िलिन, “हमर नाम िेलजओन अलि, कारर हम सभ बहत िीर” 10 ओ हनका सँ बहत लवनती कयिलन जे ओ हनका सभ केँ दे श सँ बाहर नलह पठाबलिर 11 पहाडक िग मे सुगरक एकटा पैघ झुंड ि​ि जे भोजन कऽ रहि ि​िर 12 सभ दु षाटा हनका सँ लवनती करै त कहिलिन, “हमरा सभ केँ सुगर मे पठा लदयौक, जालह सँ हम सभ ओलह मे पवेश करीर” 13 यीशु तुरन हनका सभ केँ लवदा दऽ दे िलिनर अशुद आटा सभ बाहर लनकलि कऽ सुगर सभ मे घुलस गेि, आ झुंड सभ एकटा खडा जगह सँ समुद मे दौलड गेि, (ओ सभ करीब दू हजार ि​ि) आ समुद मे घुटन भ’ गेिर 14 सुगर चराबय बिा सभ भालग कऽ नगर आ खेत मे ई बात सुनौिलनर आ ओ सभ बाहर लनकलि गेिाह जे ई की कयि गेि अलिर 15 ओ सभ यीशु िग पहँ लच कऽ ओलह परमेश् वर केँ दे कख जे जे शैतान सँ गलसत ि​ि आ सेना ि​ि, बैसि, कपडा पलहरने आ ठीक-ठीक लवचार मेर 16 ई दे खलनहार सभ हनका सभ केँ कहिलिन जे शैतान सँ गलसत िोकक संग आ सुगर सभक लवषय मे सेहो कोना भेिलनर 17 ओ सभ हनका सँ पाि्ना करऽ िगिाह जे ओ सभ अपनअपन पदे श सँ लवदा भऽ जालिर 18 जखन ओ नाव मे बैलस गेिाह तँ जे शैतानक भूत सवार ि​ि, हनका सँ पाि्ना कयिलन जे ओ हनका संग रहलिर 19 मुदा यीशु हनका िोलड नलह दे िलिन, बि् लक हनका कहिलिन, “ अपन लमत सभ िग जा कऽ हनका सभ केँ कलह लदअ जे पभु अहाँ क िेि कतेक पैघ काज कयिलन आ अहाँ पर दया कयिलनर” 20 ओ लवदा भेिाह आ दकापोलिस मे पचार करऽ िगिाह जे यीशु हनका िेि कतेक पैघ काज कयिलनर 21 जखन यीशु फेर जहाज सँ दोसर कात पहँ चिाह तँ बहत िोक हनका िग जमा भऽ गेिाहर 22 आराधनाियक एकटा शासक याइरस नामक एक गोटे आलब रहि िलिर ओकरा दे कखते ओ पयर पर खलस पडिाहर 23 ओ हनका सँ बहत लवनती करै त कहिलिन, “हमर िोटकी बेटी मृतुक सीमा मे पडि अलिर ओ जीलवत रहतीहर 24 यीशु हनका संग गेिाहर बहत िोक हनका पािाँ -पािाँ आलब कऽ भीड िगा दे िकर 25 एकटा स् ती केँ बारह वष् धरर खूनक गरदलन कऽ रहि ि​िलनर 26 ओ बहत रास वैदक दारा बहत कष भोलग कऽ ओकर सभटा खचा् कऽ िेिक, मुदा ओ लकिु नीक नलह भऽ गेि, बि् लक ओ आओर खराब भऽ गेिर 27 यीशुक नाम सुलन कऽ पािाँ मे बैलस कऽ हनकर वस िूलब िेिलनर 28 ओ बजिीह, “जँ हम हनकर कपडा िोलड कऽ िूलब सकब तँ हम सस भऽ जायबर”

अधाय 5 1 ओ सभ समुदक ओलह पार गदरे नी सभक दे श मे आलब गेिाहर 2 जखन ओ नाव सँ उतरिाह तँ तुरन कबर मे सँ एकटा अशुद आत् मा सँ िऽ कऽ हनका सँ भेट कयिलनर 3 ओ कब सभक बीच मे लनवास करै त ि​िाहर आ केओ ओकरा जंजीर सँ नलह बाकन सकैत ि​िर 4 एलह िेि जे हनका बेर-बेर बेडी आ जंजीर सँ बानि जाइत ि​िलन आ जंजीर सभ केँ तोलड दे ि गेि ि​िलन आ बेडी सभ टू लट गेि ि​िलनर 5 ओ सलदखन रालत-लदन पहाड आ कब मे कानैत रहै त ि​िाह आ पािर सँ अपना केँ कालट िैत ि​िाहर 6 मुदा यीशु केँ दू र दे कख ओ दौलड कऽ हनकर आराधना कयिलनर

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मरकुस के सुसमाचार

29 तुरत हनकर खूनक फवारा सुखा गेिलनर आ ओकरा अपन शरीर मे िागि जे ओ ओलह लवपल् सँ ठीक भ’ गेि अलिर 30 यीशु तुरन ई जालन कऽ जे हनका मे सँ सद् गुर लनकलि गेि अलि, ओ हनका दमदार मे घुलम कऽ कहिलिन, “ हमर कपडा के िूलब िेिक?” 31 हनकर लशष् य सभ हनका कहिलिन, “अहाँ दे खै िी जे भीड अहाँ पर भीड िगा रहि अलि आ कहै त िी जे , ‘हमरा के िूलब िेिक?” 32 ओ चार कात दे कख कऽ दे खिक जे ई काज केने ि​िीहर 33 मुदा ओ स् ती डरै त आ काँ लप-काँ लप कऽ हनका मे की भेि ि​ि से जालन हनका सामने आलब कऽ हनका सभटा सत् य बजौिलनर 34 ओ हनका कहिलिन, “ बेटी, अहाँ क लवश् वास अहाँ केँ ठीक कऽ दे िकर शाकनपूव्क जाउ, आ अपन लवपल् सँ सस भ’ जाउर” 35 जखन ओ बजैत ि​िाह तखन सभाघरक शासक घर सँ लकिु िोक आलब कऽ कहिलिन, “अहाँ क बेटी मरर गेि अलिर 36 यीशु जखन कहि गेि बात सुलन सभाघरक शासक केँ कहिलिन, “ डरब नलह, मात लवश् वास करर” 37 ओ पतुस, याकूब आ याकूबक भाय यूहन् ना केँ िोलड ककरो हनका पािाँ नलह चिय दे िलनर 38 ओ सभाघरक शासकक घर पहँ लच कऽ हला-हला आ बहत कानय बिा सभ केँ दे खिलनर 39 ओ घर मे अयिा पर हनका सभ केँ पुि​िलिन, “ अहाँ सभ एलह तरहक हं गामा आ कानब लकएक? युवती मरि नलह अलि, बि् लक सुलत रहि अलिर 40 ओ सभ हनका लतरसृत करै त हँ सैत रहिाहर मुदा सभ केँ बाहर लनकालि कऽ ओ युवतीक बाप-माए आ संग मे रहलनहार सभ केँ िऽ कऽ ओलह मे पवेश कऽ जाइत िलि जतय ओ कना पडि ि​िर 41 ओ युवतीक हाि पकलड कऽ कहिलिन, “ तलि​िा जीरर जकर अि् अलि, “बची, हम अहाँ केँ कहै त िी, उठूर” 42 ओ युवती तुरत उलठ कऽ चलि गेिर कारर ओ बारह वष्क ि​िीहर ओ सभ बहत आशय्चलकत भऽ गेिाहर 43 यीशु ओकरा सभ केँ कडा आजा दे िलिन जे ई बात केओ नलह जालनर आ आजा दे िलिन जे हनका लकिु खाय िेि दे ि जायर

5 ओतऽ ओ कोनो पराकमी काज नलह कऽ सकिाह, लसवाय एलह बातक जे ओ लकिु बीमार िोक पर हाि राकख हनका सभ केँ ठीक कऽ दे िलिनर 6 ओ हनका सभक अलवश् वासक काररे ँ आशय्चलकत भऽ गेिाहर ओ गाम-घर मे घुलम-घुलम प़बैत रहिाहर 7 ओ बारह गोटे केँ बजा कऽ दू -दू गोटे केँ पठाबऽ िगिाहर आ ओकरा सभ केँ अशुद आत् मा सभ पर अलधकार दे िकर 8 ओ हनका सभ केँ आजा दे िलिन जे याताक िेि मात िाठी िोलड लकिु नलह िऽ जाउर कोनो क्प, रोटी आ पस् मे पाइ नलहर 9 मुदा चपि पलहरने रहर आ दू कोट नलह पलहरबर 10 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ अहाँ सभ जालह ठाम कोनो घर मे पवेश करब, ताबत धरर ओतलह रहब जाबत धरर अहाँ सभ ओलह सान सँ नलह लनकिबर” 11 जे केओ अहाँ सभक सागत नलह करत आ नलह सुनत, तखन अहाँ सभ ओतय सँ लनकि​िा पर अपन पएरक नीचाँ क धूरा केँ लहिा लदयौक, जालह सँ हनका सभक लवरद गवाही भेलट जायर हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे , नायक लदन सदोम आ अमोरा केँ ओलह नगर सँ बेसी सहनशीि होयतर 12 ओ सभ बाहर जा कऽ पचार करऽ िगिाह जे मनुष् य सभ पशाताप करलिर 13 ओ सभ बहतो दु ष् टात् मा सभ केँ भगा दे िक आ बहतो बेमार सभ केँ तेि िगा कऽ ओकरा सभ केँ ठीक कऽ दे िकर 14 राजा हे रोदे स हनका बारे मे सुनिलनर (लकएक तँ हनकर नाम पसरि ि​िलन) आ ओ कहिलन, “बपलतस् मा दे लनहार यूहन् ना मृत् यु मे सँ जीलब उठिाह, आ ते ँ हनका मे पराकमक काज दे खा रहि अलिर” 15 दोसर िोक सभ कहिलिन, “ई एलियाह अलिर” दोसर िोक कहिलिन, “ई एकटा पवक् ता िलि वा पवक् ता सभ मे सँ एक जकाँ र” 16 मुदा हे रोदे स ई बात सुलन कऽ कहिलिन, “हम यूहन् ना िलि लजनकर माि कालट दे िहँ र 17 लकएक तँ हे रोदे स सयं पठा कऽ यूहन् ना केँ पकलड कऽ जेि मे बाकन दे ने ि​िाह, जे हनकर भाय लफलिपुसक स् ती हे रोलदयाक काररे ँ ि​िलनर 18 यूहन् ना हे रोदे स केँ कहने ि​िाह जे , “अहाँ केँ अपन भाइक स् ती धारर करब उलचत नलह अलिर” 19 ते ँ हे रोलदयास हनका संग झगडा कऽ कऽ हनका मारर दे बऽ चाहै त ि​िाहर मुदा ओ नलह क' सकिीह: 20 हे रोदे स यूहन् ना केँ डरै त ि​िाह, ई जालन जे ओ धम् आ पलवत िोक िलि आ हनकर पािन करै त ि​िाहर हनकर बात सुलन कऽ ओ बहत काज कयिलन आ खुशी-खुशी हनकर बात सुनिलनर 21 जखन कोनो नीक लदन आलब गेि तखन हे रोदे स अपन जनलदन पर अपन मालिक, सेनापलत आ गिीिक मुकखया सभक िेि भोजन कयिलनर 22 जखन उकलकखत हे रोलदयाक बेटी भीतर आलब कऽ नाचैत हे रोदे स आ हनका संग बैसि िोक सभ केँ पसर कयिलन तँ राजा ओलह कना केँ कहिलिन, “अहाँ जे चाहब से हमरा सँ माँ गू, हम अहाँ केँ दऽ दे बर” 23 ओ हनका शपि िेिलन, “अहाँ जे लकिु हमरा सँ माँ गब, हम अहाँ केँ अपन आधा राज धरर दऽ दे बर”

अधाय 6 1 ओतऽ सँ लनकलि कऽ अपन दे श मे आलब गेिाहर आ हनकर लशष् य सभ हनकर पािाँ -पािाँ चिैत िलिर 2 लवशाम-लदन आलब गेिा पर यीशु सभाघर मे लशका दे बऽ िगिाह, मुदा हनकर बात सुलन कऽ बहतो िोक आशय्चलकत भऽ कऽ कहिलिन, “ई सभ ई सभ कतऽ सँ आयि अलि?” ओकरा कोन बुकद दे ि गेि िै क जे एहन पराकमी काज सेहो ओकर हाि सँ कयि जाइत िै क? 3 की ई याकूब, योसेस, यहदा आ लसमोनक भाय मररयमक पुत ब़ई नलह िलि? आ की हनकर बलहन सभ एतय हमरा सभक संग नलह िलि? ओ सभ हनका पर आहत भऽ गेिाहर 4 यीशु हनका सभ केँ कहिलिन, “ पवक् ताक आदर-सतार नलह होइत अलि, बि् लक अपन दे श मे, अपन-अपन पररजन मे आ अपन घर मेर

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मरकुस के सुसमाचार

24 ओ बाहर जा कऽ अपन माय सँ पुि​िलिन, “हम की माँ गब?” ओ बजिीह, “यूहरा बपलतस् मा दे लनहारक मािर” 25 ओ तुरन राजा िग आलब पुि​िलिन, “हम चाहै त िी जे अहाँ हमरा बपलतस् मा दे लनहार यूहन् नाक माि एक बेर-बेर एकटा बत्न मे दऽ लदअर” 26 राजा बहत दु खी ि​िाहर तइयो अपन शपिक काररे ँ आ हनका सभक िेि जे हनका संग बैसि ि​िाह, हनका सभ केँ असीकार नलह कयिलनर 27 राजा तुरत एकटा जलाद पठा कऽ हनकर माि आनबाक आजा दे िलिनर 28 ओ अपन माि एकटा बत्न मे आलन कऽ ओलह कना केँ दऽ दे िकर 29 जखन हनकर लशष् य सभ ई बात सुलन कऽ हनकर शव केँ िऽ कऽ कब मे राकख दे िलनर 30 पेररत सभ यीशु िग जमा भऽ हनका सभ लकिु कहिलिनर 31 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ अहाँ सभ अिग-अिग मरभूलम मे आलब कऽ कनेक लवशाम करर 32 ओ सभ एकां त मे जहाज सँ एकटा मरभूलम लदस लवदा भेिाहर 33 िोक सभ हनका सभ केँ लवदा होइत दे कख बहतो िोक हनका लचनिलन आ सभ नगर सँ दौलड कऽ हनका सभ केँ आगू बल़ कऽ हनका िग आलब गेिाहर 34 यीशु जखन बाहर लनकि​िाह तँ बहत िोक सभ केँ दे कख हनका सभ पर दया आलब गेिाह, लकएक तँ ओ सभ ओलह भेड ँ ा जकाँ ि​ि जकर चरबाह नलह ि​िर 35 लदन लबतिा पर हनकर लशष् य सभ हनका िग आलब कऽ कहिलिन, “ई मरभूलम अलि आ आब समय बहत बीलत गेि अलिर 36 ओकरा सभ केँ लवदा कऽ लदयौक जे ओ सभ चारकात आ गाम-घर मे जा कऽ अपना िेि रोटी कीलन सकय, लकएक तँ ओकरा सभ िग लकिु नलह अलिर 37 ओ हनका सभ केँ उ्र दे िलिन, “ अहाँ सभ हनका सभ केँ भोजन दऽ लदयौकर” ओ सभ हनका पुि​िलिन, “की हम सभ जा कऽ दू सय पाइक रोटी कीलन कऽ ओकरा सभ केँ खाय दे ब?” 38 ओ हनका सभ केँ पुि​िलिन, “ अहाँ सभ िग कतेक रोटी अलि?” जा कऽ दे खूर जखन ओ सभ बुलझ गेिाह तँ ओ सभ कहै त िलिन, “पाँ च आ दू टा मािर” 39 ओ हनका सभ केँ आजा दे िलिन जे सभ गोटे केँ हररयर घास पर दि-दि मे बैसा दे ि जायर 40 ओ सभ सैकडों आ पचासक पाँ लत मे बैलस गेिाहर 41 ओ पाँ च रोटी आ दू टा माि िऽ कऽ स् वग् लदस तकिलन आ आशीष दऽ कऽ रोटी सभ केँ तोलड कऽ अपन लशष् य सभ केँ दऽ दे िलिन जे ओ सभ ओकरा सभक सोझाँ राकख दे लिर दु नू माि सभ मे बाँ लट दे िकर 42 ओ सभ भोजन कऽ कऽ तृप भऽ गेिर 43 ओ सभ बारह टा टोकरी मे टु कड-टु कड आ माि सभ सँ भरि ि​िर 44 रोटी खेलनहार सभ करीब पाँ च हजार आदमी ि​िर 45 ओ तुरन अपन लशष् ‍य सभ केँ नाव मे बैसबाक िेि बाध कयिलन, आ िोक सभ केँ लवदा कयिलनर 46 यीशु हनका सभ केँ लवदा कऽ एकटा पहाड पर पाि्ना करबाक िेि लवदा भेिाहर

47 जखन साँ झ भेि तखन नाव समुदक बीच मे ि​ि आ ओ असगरे जमीन पर ि​िर 48 ओ ओकरा सभ केँ नाव चिाबऽ मे पररशम करै त दे खिकर लकएक तँ हवा हनका सभक लवपरीत ि​ि, आ रालत मे चाररम पहरक करीब ओ समुद पर चिैत हनका सभक िग आलब गेिाह आ हनका सभक िग सँ गुजरय चाहै त ि​िाहर 49 मुदा ओ सभ यीशु केँ समुद पर चिैत दे कख कऽ ई बुलझ कऽ जे ई आत् मा अलि आ लचलचया उठिर 50 लकएक तँ ओ सभ हनका दे कख कऽ घबरा गेिाहर ओ तुरन हनका सभ सँ गप कयिलन आ कहिलिन, “ साहस राखूर डरब नलहर 51 ओ नाव मे बैलस हनका सभक िग चलि गेिाहर हवा रलक गेिै, आ ओ सभ अपना आप मे बहत आशय्चलकत भ’ गेि आ आशय्चलकत भ’ गेिैर 52 ओ सभ रोटीक चमतार पर लवचार नलह करै त ि​िाह, लकएक तँ हनका सभक मोन कठोर भऽ गेि ि​िलनर 53 ओ सभ पार कऽ कऽ गेनेसरे त दे श मे आलब कऽ लकनार पर आलब गेिाहर 54 जखन ओ सभ नाव सँ उतरिाह तँ तुरन हनका लचनिलनर 55 ओलह पूरा इिाका मे दौडै त गेिाह आ ओतऽ बीमार िोक सभ केँ ओिाओन पर ि’ क’ घुम’ िगिाह, जतय हनका सभ केँ सुनि गेि ि​िलनर 56 ओ सभ गाम-गाम-गाम वा नगर वा दे हात मे जतय-जतय घुसैत ि​िाह, ओ सभ बीमार सभ केँ गिी-गिी मे राकख दै त ि​िाह आ हनका सँ लवनती करै त ि​िाह जे जँ हनकर वसक सीमा मात िूलब सकैत ि​िलनर अधाय 7 1 तखन फररसी सभ आ यरशिेम सँ आयि लकिु धम्शासी सभ हनका िग आलब गेिाहर 2 जखन ओ सभ हनकर लकिु लशष् य सभ केँ अशुद वा अधोिा हाि सँ रोटी खाइत दे खिलन तँ हनका सभ केँ दोष बुझना गेिलनर 3 फररसी आ समस यहदी सभ, जाबत ओ सभ बेर-बेर हाि नलह धोबैत िलि, तखन धरर बू़-पुरान सभक परमरा केँ पािन करै त भोजन नलह करै त िलिर 4 जखन ओ सभ बजार सँ अबैत िलि, जाबत धरर नहै त िलि, तखन ओ सभ भोजन नलह करै त िलिर आरो बहत रास चीज जे ओकरा सभ केँ पकडबाक िेि भेटि अलि, जेना कटोरा, घैि, पीति के बत्न आ टे बुि धोबय के काजर 5 तखन फररसी आ शासी सभ हनका सँ पुि​िलिन, “अहाँ क लशष् य सभ बू़-पुरान सभक पिाक अनुसार लकएक नलह चिैत िलि, बि् लक अधो हाि सँ रोटी खाइत िलि?” 6 ओ हनका सभ केँ उ्र दे िलिन, “ यशायाह अहाँ सभ पाखंडी सभक लवषय मे नीक भलवषवारी केने िलि, जेना लक धम्शास् त मे लिखि अलि, “ई िोक सभ हमरा अपन ठोर सँ आदर करै त अलि, मुदा ओकर सभक मोन हमरा सँ दू र अलिर” 7 मुदा ओ सभ वि् मे हमर आराधना करै त िलि, मनुष् यक आजाक लशकाक िेिर 8 अहाँ सभ परमेश् वरक आजा केँ िोलड कऽ मनुष् यक परमरा केँ मानैत िी जेना घैि आ पािा धोबर

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मरकुस के सुसमाचार

9 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ अहाँ सभ परमेश् वरक आजा केँ पूरा तरहे ँ असीकार करै त िी, जालह सँ अहाँ सभ अपन परं परा केँ पािन करीर” 10 मूसा कहिलिन, “अपन लपता आ मायक आदर करर आ, “जे केओ बाप वा माय केँ गारर प़ै त अलि, ओकरा मृतुक बाद मरर जायर” 11 मुदा अहाँ सभ कहै त िी जे, “जँ केओ अपन लपता वा माय केँ कहत जे, ‘कोब्न अलि, अिा् त् वरदान, जालह सँ अहाँ केँ हमरा सँ िाभ भ’ सकैत अलिर ओ सतंत हे ताहर 12 अहाँ सभ ओकरा आब अपन लपता वा मायक िेि कोनो काज नलह करय दै त िीर 13 परमेश् वरक वचन केँ अहाँ सभ जे परमराक पचार-पसार कयिहँ , तकरा दारा बेकार करै त िीर 14 ओ सभ िोक केँ अपना िग बजा कऽ कहिलिन, “ अहाँ सभ मे सँ एक-एक गोटे हमर बात सुनू आ बुझरू 15 मनुखक बाहर सँ कोनो एहन बात नलह होइत िै क जे ओकरा मे घुलस कऽ ओकरा अशुद कऽ सकैत अलिर 16 जँ ककरो सुनबाक कान अलि तँ ओ सुनयर 17 जखन ओ िोक सभ सँ घर मे पवेश कयिलन तखन हनकर लशष् य सभ हनका सँ दषानक लवषय मे पुि​िलिनर 18 ओ हनका सभ केँ पुि​िलिन, “ की अहाँ सभ सेहो एहन तरहे ँ बेबुलनयाद िी?” की अहाँ सभ ई नलह बुझैत िी जे बाहर सँ जे लकिु मनुष् य मे पवेश करै त अलि, से ओकरा अशुद नलह कऽ सकैत अलिर 19 लकएक तँ ई बात हनकर हदय मे नलह, बि् लक पेट मे पवेश करै त अलि आ सभ भोजन केँ शुद करै त बहरा मे लनकिैत अलि? 20 ओ कहिलिन, “ जे मनुष् य मे सँ लनकिैत अलि, से मनुष् य केँ अशुद करै त अलिर” 21 मनुखक भीतर सँ, मनुष् यक हदय सँ अधिाह लवचार, वलभचार, वलभचार, हतार 22 चोरी, िोभ, दु षता, ि​ि, कामुकता, दु ष नजरर, लनना, घमंड, मूख्तार 23 ई सभ अधिाह बात भीतर सँ अबैत अलि आ मनुष् य केँ अशुद करै त अलिर 24 ओतऽ सँ उलठ कऽ सोर आ सीदोनक सीमा मे गेिाह आ एकटा घर मे घुलस गेिाह, मुदा ई बात केओ नलह जानय चाहै त ि​ि, मुदा ओ नुका नलह सकिाहर 25 लकएक तँ एकटा स् ती, लजनकर िोटकी बेटी मे अशुद आत् मा ि​िलन, ओ हनकर बात सुलन कऽ हनका पयर िग खलस पडिीहर 26 ओ स् ती यूनानी, जालत सँ लसरोफेनीलशयन ि​िर ओ हनका सँ लवनती केिलन जे ओ हनकर बेटी मे सँ शैतान केँ बाहर लनकालि दे लिनर 27 यीशु ओकरा कहिलिन, “ पलहने बचा सभ केँ पेट भरय लदयौकर 28 ओ हनका उ्र दे िलिन, “हँ, पभु , तइयो टे बुिक नीचाँ क कुकुर सभ बचा सभक टु कडी खाइत अलिर” 29 ओ ओकरा कहिलिन, “ एलह बातक काररे ँ जाउर तोहर बेटी मे सँ शैतान लनकलि गेि अलिर 30 जखन ओ अपन घर पहँ चिीह तँ दे खिलन जे शैतान बाहर लनकलि गेि ि​ि आ ओकर बेटी ओिाओन पर पडि ि​िर 31 ओ फेर सोर आ सीदोन पदे श सँ लवदा भऽ कऽ दकापोलिस पदे शक बीच सँ गिीि समुद मे पहँ चिाहर

32 ओ सभ हनका िग एकटा बहीर केँ अनिलन जे बजबा मे बाधा ि​िर ओ सभ हनका सँ लवनती करै त िलि जे हनका पर हाि राकख लदयौकर 33 ओ ओकरा भीड मे सँ अिग कऽ कऽ कान मे आँ गुर दऽ कऽ िूक फेलक कऽ जीह िूलब िेिकर 34 ओ स् वग् लदस तकैत आह भरिलन आ कहिलिन, “एफािा, अिा् त खुलज जाउर” 35 तुरत हनकर कान खुलज गेिलन आ जीहक डोरी खुलज गेिलन आ ओ साफ-साफ बालज उठिाहर 36 ओ हनका सभ केँ आजा दे िलिन जे ओ सभ ककरो नलह कहलिन, मुदा ओ सभ जतेक आजा दै त ि​िाह, ओ सभ ओतबे बेसी पचार करै त ि​िाहर 37 ओ सभ अच्‍चलकत भऽ कऽ कहिलिन, “ओ सभ काज नीक जकाँ कयिलनर अधाय 8 1 ओलह समय मे भीड बहत बेसी ि​ि आ खाएबिा लकिु नलह ि​ि, ते ँ यीशु अपन लशष् य सभ केँ बजा कऽ हनका सभ केँ कहिलिनर 2 हमरा ओलह भीड पर दया आलब रहि अलि, लकएक तँ ओ सभ हमरा संग तीन लदन भऽ गेि अलि आ ओकरा सभ िग लकिु नलह अलिर 3 जँ हम हनका सभ केँ उपवास कऽ अपन घर लदस लवदा कऽ दे बलन तँ ओ सभ बाट मे बेहोश भऽ जेताहर 4 हनकर लशष् य सभ हनका उ्र दे िलिन, “एतय जंगि मे एलह िोक सभ केँ रोटी कतऽ सँ तृप कऽ सकैत अलि?” 5 ओ हनका सभ सँ पुि​िलिन, “ अहाँ सभ िग कतेक रोटी अलि?” ओ सभ कहिलिन, “सातर” 6 ओ िोक सभ केँ जमीन पर बैसबाक आजा दे िलिनर ओ सभ ओकरा सभ केँ िोकक समक राकख दे िकर 7 हनका सभ िग लकिु िोट-िोट माि ि​िलन, तखन ओ आशीवा् द दे िलिन आ ओकरा सभ केँ सेहो हनका सभक सोझाँ राखबाक आजा दे िलिनर 8 ओ सभ भोजन कऽ कऽ तृप भऽ गेिाहर 9 जे सभ भोजन केने ि​ि, से करीब चारर हजार ि​िर 10 ओ तुरत अपन लशष् य सभक संग नाव मे बैलस कऽ दिमनुिा पदे श मे आलब गेिाहर 11 फररसी सभ बाहर आलब कऽ हनका सँ झगडा करय िगिाह आ स् वग् सँ हनका परीका मे कोनो लचन् हक माँ गय िगिाहर 12 ओ अपन आत् मा मे गहीरं आह भरर कऽ कहिलिन, “ ई पी़ी कोनो लचन् ह लकएक चाहै त अलि?” हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे एलह पी़ी केँ कोनो लचन् ह नलह दे ि जायतर” 13 ओ ओकरा सभ केँ िोलड फेर नाव मे बैलस कऽ दोसर कात लवदा भेिाहर 14 लशष्‍य सभ रोटी िेब लबसरर गेि ि​िाह आ नाव मे हनका सभक संग एक रोटी सँ बेसी रोटी नलह ि​िलनर 15 यीशु हनका सभ केँ आजा दे िलिन, “ सावधान रह, फररसी सभक खमीर आ हे रोदे सक खमीर सँ सावधान रहर” 16 ओ सभ आपस मे लवचार-लवमश् करै त कहिलिन, “हमरा सभ िग रोटी नलह अलिर” 17 यीशु ई बात जालन कऽ हनका सभ केँ कहिलिन, “ अहाँ सभ लकएक तक्-लवतक् करै त िी जे अहाँ सभ िग रोटी नलह अलि?”

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मरकुस के सुसमाचार

अहाँ सभ एखन धरर नलह बुझैत िी आ ने बुझैत िी? की अहाँ सभक मोन एखन धरर कठोर भ' गेि अलि? 18 आँ कख अलि, अहाँ सभ नलह दे खैत िी? कान अलि, अहाँ सभ नलह सुनैत िी? की अहाँ सभ मोन नलह रखैत िी? 19 जखन हम पाँ च हजार िोकक बीच पाँ च रोटी तोलड दे िहँ तँ अहाँ सभ कतेक टोकरी मे टु कडी-टु कडा उठा िेिहँ ? ओ सभ हनका कहिलिन, “बारह गोटे र” 20 चारर हजार मे सँ सात गोटे तखन अहाँ सभ कतेक टोकरी मे टु कडी-टु कडा उठा िेिहँ? ओ सभ कहिलिन, “सातर” 21 ओ हनका सभ केँ पुि​िलिन, “ अहाँ सभ कोना नलह बुझैत िी? 22 ओ बेतसैदा पहँ चिाहर ओ सभ एकटा आनर केँ हनका िग िऽ कऽ हनका िूबऽ िेि लवनती कयिलनर 23 ओ आनरक हाि पकलड कऽ नगर सँ बाहर िऽ गेिाहर आँ कख पर िूक फेलक कऽ हाि राकख कऽ पुि​िलिन जे की अहाँ केँ कोनो काज दे खबा मे अबैत अलिर 24 ओ आँ कख उठा कऽ बजिाह, “हम आदमी केँ गाि जकाँ चिैत दे खैत िीर” 25 तकर बाद ओ फेर अपन आँ कख पर हाि राकख कऽ आँ कख उठा कऽ दे खौिलनर 26 ओ हनका अपन घर पठा दे िलिन जे , “ नलह नगर मे जाउ आ ने नगर मे ककरो ई बात कलह लदयौकर” 27 यीशु अपन लशष् य सभ संग कैसररया लफलिपी नगर मे गेिाह आ बाट मे ओ अपन लशष् य सभ सँ पुि​िलिन, “ हमरा के कहै त अलि?” 28 ओ सभ उ्र दे िलिन, “बपलतस् मा दे लनहार यूहन् नार आ दोसर, “भलवषव्ा मे सँ एकर” 29 ओ हनका सभ केँ पुि​िलिन, “ मुदा अहाँ सभ के कहै त िी जे हम के िी?” पतुस उ्र दे िलिन आ कहिलिन, “अहाँ मसीह िीर” 30 ओ हनका सभ केँ आजा दे िलिन जे ओ सभ हनकर लवषय मे ककरो नलह कहलिर 31 ओ हनका सभ केँ लसखाबय िगिाह जे मनुष् यक पुत केँ बहत कष भोगय पडतलन, आ बू़-पुरोलहत आ मुख्‍य पुरोलहत आ शासी सभक दारा लतरसृत कयि जायत आ मारि जायत आ तीन लदनक बाद जीलब उठतलनर 32 ओ ई बात खुलि कऽ बाजिर पतुस ओकरा पकलड कऽ डाँ टय िगिाहर 33 मुदा जखन ओ घुलम कऽ अपन लशष् य सभ लदस तकिक तँ ओ पतुस केँ डाँ लट कऽ कहिलिन, “ हे शैतान, हमरा पािाँ हलट जाउ, लकएक तँ अहाँ परमेश् वरक बात नलह, बि् लक मनुष् यक बातक साद िैत िीर” 34 ओ अपन लशष् य सभक संग िोक सभ केँ अपना िग बजा कऽ कहिलिन, “ जे लकयो हमरा पािाँ आबय चाहै त िलि, से अपना केँ नकारर कऽ अपन कूस उठा कऽ हमरा पािाँ पडयर” 35 जे केओ अपन पार बचाबय चाहै त अलि, से ओकरा गमा दे तर मुदा जे केओ हमरा आ सुसमाचारक काररे ँ अपन पार गमा िेत, से ओकरा बचाओतर 36 जँ मनुष्‍य समस संसारक िाभ उठा िेत आ अपन पार गमा िेत तँ ओकरा की फायदा? 37 आलक मनुष् य अपन पारक बदिा मे की दे त? 38 एलह वलभचारी आ पापी पी़ी मे केओ हमरा आ हमर वचन पर िकजत होयतर मनुष् यक पुत सेहो जखन पलवत स् वग्दूत

सभक संग अपन लपताक मलहमा मे आओत तखन हनका सँ िकजत होयतर अधाय 9 1 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे एतय ठा़ लकिु िोक सभ केँ ताबत धरर मृतुक साद नलह भेटत जाबत धरर ओ सभ परमेश् वरक राज् य केँ सामि्​् य सँ अबैत नलह दे कख िेतर” 2 िह लदनक बाद यीशु पतुस, याकूब आ यूहन् ना केँ अपना संग िऽ गेिाह आ हनका सभ केँ अिग-अिग एकटा ऊँच पहाड पर िऽ गेिाहर 3 हनकर वस बफ् जकाँ उजर भऽ गेिलनर जेना पृथी पर कोनो फुिर ओकरा सभ केँ उजर नलह क' सकैत अलिर 4 ओ सभ एलियाह मूसाक संग पगट भेिाहर 5 पतुस यीशु केँ उ्र दे िलिन, “गुर, हमरा सभक िेि एतय रहब नीक अलिर एकटा अहाँ क िेि, एकटा मूसाक िेि, आ एक एलियाहक िेिर 6 लकएक तँ ओकरा ई नलह बुझि िै क जे ओ की कहतर लकएक तँ ओ सभ बहत डरा गेि ि​िर 7 एकटा मेघ हनका सभ पर िाँ लट गेिलन, तखन मेघ मे सँ एकटा आवाज आयि जे , “ई हमर लपय पुत िलि, हनकर बात सुनूर” 8 अचानक ओ सभ चार कात दे कख कऽ आब ककरो नलह दे खिक, लसवाय यीशु केँ मात अपना संगर 9 ओ सभ पहाड सँ उतरै त काि यीशु हनका सभ केँ आजा दे िलिन जे जाबत धरर मनुष् य-पुत मृत् यु मे सँ जीलब नलह उठत ता धरर ओ सभ जे लकिु दे खिहँ से ककरो नलह बताउर 10 ओ सभ एक-दोसर केँ एलह बात केँ मन मे रखिलन, जे मृत् यु मे सँ जीलब उठबाक अि् की हे बाक चाहीर 11 ओ सभ हनका सँ पुि​िलिन, “धम्शासी सभ लकएक कहै त िलि जे एलियाह केँ पलहने आबय पडतलन?” 12 ओ हनका सभ केँ उ्र दे िलिन, “ एलियाह पलहने आलब कऽ सभ लकिु ठीक करै त िलिर आ मनुष् यक पुतक लवषय मे कोना लिखि गेि अलि जे ओकरा बहत कष भोगय पडतैक आ ओकरा लनद्ष भऽ जेतैर 13 मुदा हम अहाँ सभ केँ कहै त िी जे एलियाह स्े आलब गेि िलि आ ओ सभ हनका संग जे लकिु चाहै त ि​िाह से कयिलनर 14 जखन ओ अपन लशष् य सभक िग पहँ चिाह तँ दे खिलन जे हनका सभक चार कात बहत रास भीड आ धम्शासी सभ हनका सभ सँ झगडा कऽ रहि िलिर 15 तुरन सभ िोक हनका दे कख बहत आशय्चलकत भऽ हनका िग दौलड कऽ हनका पराम कयिलनर 16 ओ शासी सभ सँ पुि​िलिन, “ अहाँ सभ हनका सभ सँ की प् करै त िी?” 17 िोक मे सँ एक गोटे उ्र दे िलिन, “गुर, हम अपन बेटा केँ अहाँ िग अनने िी, जकरा मे गूंगा आत् मा अलिर 18 ओ जतऽ-जतय ओकरा िऽ जाइत अलि, ओ ओकरा नोचैत अलि, फेन फँलस कऽ दाँ त कटै त अलि आ चीर-फाड करै त अलिर आ ओ सभ नलह कऽ सकिर 19 ओ हनका उ्र दे िलिन, “ हे अलवशासी पी़ी, हम अहाँ सभक संग कतेक लदन धरर रहब?” हम अहाँ केँ कतेक लदन धरर कष सहब? ओकरा हमरा िग आलन लदयौकर

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मरकुस के सुसमाचार

20 ओ सभ हनका िग अनिलनर ओ जमीन पर खलस पडि आ फेन बलन कऽ िंगडा गेिर 21 ओ अपन लपता सँ पुि​िलिन, “ ई बात हनका िग कतेक लदन भऽ गेि?” ओ कहिलिन, “एकटा बचाकर” 22 बेर-बेर ओकरा नष करबाक िेि ओकरा आलग आ पालन मे फेलक दे िकर 23 यीशु हनका कहिलिन, “ जँ अहाँ लवश् वास कऽ सकैत िी तँ लवश् वास करयविा िेि सभ लकिु संभव अलिर” 24 ओलह बचाक लपता तुरन लचलचया उठिाह आ कालन कऽ कहिलिन, “पभु , हम लवश् वास करै त िीर हमर अलवशास मे अहाँ सहायता करर 25 यीशु दे कख जे िोक सभ दौलड-दौडै त आलब रहि अलि, तखन ओ दु षाटा केँ डाँ लट कऽ कहिलिन, “ हे गूंगा आ बहीर आत् मा, हम अहाँ केँ आजा दै त िी जे , हनका मे सँ बाहर लनकिू आ फेर हनका मे पवेश नलह करर” 26 ओ आत् मा लचलचया उठि आ ओकरा फालड कऽ ओकरा मे सँ बाहर लनकलि गेिर एतेक धरर जे बहतो िोक कहिलन जे, “ओ मरर गेि िलिर” 27 यीशु हनकर हाि पकलड कऽ उठौिलनर आ उलठ गेिाहर 28 ओ घर मे अयिा पर हनकर लशष् य सभ हनका सँ एकां त पुि​िलिन, “हम सभ हनका लकएक नलह भगा सकिहँ ?” 29 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ एलह तरहक कोनो तरहे ँ पाि्ना आ उपवास िोलड लकिु ओ नलह भऽ सकैत अलिर” 30 ओ सभ ओतऽ सँ लवदा भऽ गिीि सँ गुजरर गेिाहर आ ओ ई नलह चाहै त ि​ि जे ककरो ई बात जालन जायर 31 ओ अपन लशष् य सभ केँ लसखाबैत कहिलिन, “ मनुष् य-पुत केँ मनुष् य सभक हाि मे सौंपि गेि अलि आ ओ सभ ओकरा मारर दे तर मारि गेिाक बाद तेसर लदन जीलब उठतर 32 मुदा ओ सभ ई बात नलह बुझिलन आ हनका सँ पूिबा मे डरै त रहिाहर 33 ओ कफरनहम पहँ चिाह आ घर मे रलह कऽ हनका सभ सँ पुि​िलिन, “ बात मे अहाँ सभ आपस मे की लववाद केिहँ ?” 34 मुदा ओ सभ चुप रहिाह, लकएक तँ बाट मे ओ सभ आपस मे लववाद कऽ रहि ि​ि जे के सभ सँ पैघ होयतर 35 ओ बैलस कऽ बारह गोटे केँ बजा कऽ कहिलिन, “ जँ केओ पलहि बनबाक इचा रखैत अलि तँ ओ सभ सँ अंलतम आ सभक सेवक होयतर” 36 ओ एकटा बचा केँ िऽ कऽ हनका सभक बीच मे बैसा दे िलिनर 37 जे केओ हमरा नाम सँ एहन संतान मे सँ एक केँ गहर करै त अलि, से हमरा गहर करै त अलि, आ जे हमरा गहर करै त अलि, से हमरा नलह, बि् लक हमरा पठे लनहार केँ गहर करै त अलिर 38 यूहन् ना हनका उ्र दे िलिन, “गुर, हम सभ दे खिहँ जे एक गोटे अहाँ क नाम सँ दु षाटा सभ केँ भगा रहि ि​ि, मुदा ओ हमरा सभक पािाँ नलह चिैत अलिर 39 यीशु कहिलिन, “ ओकरा मना नलह करर 40 जे हमरा सभक लवरोध मे नलह अलि से हमरा सभक पक मे अलिर 41 हम अहाँ सभ केँ मसीहक होयबाक काररे ँ जे केओ अहाँ सभ केँ हमर नाम सँ एक पािा पालन पीबय िेि दे त, से हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे, ओ अपन इनाम नलह गमाओतर “

43 जँ अहाँ क हाि अहाँ केँ दोषी ठहराबैत अलि तँ ओकरा कालट लदयौकर 44 जतय ओकर कीडा नलह मरै त अलि आ आलग नलह बुझैत अलिर 45 जँ अहाँ क पएर अहाँ केँ दोषी ठहराबैत अलि तँ ओकरा कालट लदयौकर 46 जतय ओकर कीडा नलह मरै त अलि आ आलग नलह बुझैत अलिर 47 जँ अहाँ क आँ कख अहाँ केँ दोषी ठहरबैत अलि तँ ओकरा उखालड लदयौकर 48 जतय ओकर कीडा नलह मरै त अलि आ आलग नलह बुझैत अलिर 49 लकएक तँ सभ केँ आलग मे नून दे ि जायत आ सभ बलिदान केँ नून मे नून दे ि जायतर 50 नून नीक होइत िै क, मुदा जँ नूनक नमकीनता खतम भऽ गेि अलि तँ अहाँ सभ ओकरा कोन तरहे ँ मसािा दे ब? अपना मे नून राखू , आ एक-दोसर मे शाकन राखूर अधाय 10 1 ओतऽ सँ उलठ कऽ यरदन नदीक दू र-दू र धरर यहलदया पदे श मे आलब गेिाहर आ, जेना हनका आदलत ि​िलन, ओ हनका सभ केँ फेर सँ लसखबैत ि​िाहर 2 फररसी सभ हनका िग आलब पुि​िलिन, “की पुरख अपन स् ती केँ िोडब उलचत अलि?” ओकरा पिोभन दै तर 3 ओ हनका सभ केँ उ्र दे िलिन, “ मूसा अहाँ सभ केँ की आजा दे िलन?” 4 ओ सभ कहिलिन, “मूसा तिाकक पत लिकख कऽ ओकरा िोलड दे बऽ दे िलिनर” 5 यीशु हनका सभ केँ उ्र दे िलिन, “ अहाँ सभक हदयक कठोरताक काररे ँ ओ अहाँ सभ केँ ई उपदे श लिखने िलिर 6 मुदा सृलषक पारालह सँ परमेश् वर हनका सभ केँ सी-पुरष बनौिलनर 7 एलह िेि पुरष अपन बाप-माता केँ िोलड कऽ अपन पती सँ लचपकि रहतर 8 दु नू गोटे एक शरीर भऽ जेताह, ते ँ आब दु नू गोटे दू गोटे नलह, बि् लक एक शरीर भऽ गेिाहर 9 एलह िेि परमेश् वर जे लकिु जोडने िलि, तकरा मनुष् य अिग नलह करयर 10 घर मे हनकर लशष् य सभ हनका सँ फेर ओलह लवषय मे पुि​िलिनर 11 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ जे केओ अपन स् ती केँ िोलड कऽ दोसर लववाह करै त अलि, से ओकरा संग वलभचार करै त अलिर” 12 जँ कोनो स् ती अपन पलत केँ िोलड कऽ दोसर सँ लववाह कऽ िेत तँ ओ वलभचार करै त अलिर 13 ओ सभ िोट-िोट बचा सभ केँ हनका िग अनिलन जालह सँ ओ ओकरा सभ केँ िूबलिर 14 यीशु ई दे कख बहत नाराज भऽ हनका सभ केँ कहिलिन, “ बचा सभ केँ हमरा िग आबय लदयौक आ ओकरा सभ केँ मना नलह करर 15 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे परमेश् वरक राज् य केँ िोट जकाँ नलह गहर करत, ओ ओलह मे पवेश नलह करतर

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मरकुस के सुसमाचार

16 ओ ओकरा सभ केँ कोरा मे उठा कऽ ओकरा सभ पर हाि राकख आशीवा् द दे िलिनर 17 जखन ओ बाट पर लनकि​िाह तँ एक गोटे दौडै त आलब हनका िग ठे हन टे कैत पुि​िलिन, “गुरजी, हम की करब जालह सँ हम अनन जीवनक उ्रालधकारी भ’ सकब?” 18 यीशु हनका पुि​िलिन, “ अहाँ हमरा नीक लकएक कहै त िी? एकटा नीक, अिा् त भगवान् के अिावा लकयो नीक नलह अलिर 19 अहाँ ई आजा जनैत िी जे, “वलभचार नलह कर, हता नलह कर, चोरी नलह कर, झूठ गवाही नलह लदअ, धोखा नलह कर, अपन लपता-माँ क आदर नलह करर” 20 ओ हनका उ्र दे िलिन, “गुर, हम ई सभटा बात अपन जवानी सँ दे खैत िीर” 21 यीशु हनका दे कख हनका सँ पेम कयिलन आ कहिलिन, “ अहाँ मे एकटा बातक कमी अलि, जाउ, जे लकिु अलि से बेलच कऽ गरीब केँ दऽ लदयौक, तखन अहाँ िग स् वग् मे धन भऽ जायत हमरा पािाँ पडूर 22 ओ ई बात सुलन दु खी भऽ गेिाह, लकएक तँ हनका िग बहत रास समल् ि​िलनर 23 यीशु चार कात तकैत अपन लशष्‍य सभ केँ कहिलिन, “ धनी-पती सभ केँ परमेश् वरक राज् य मे पवेश कतेक कलठन अलि!” 24 हनकर बात सुलन लशष् य सभ चलकत भऽ गेिाहर यीशु फेर उ्र दे िलिन, “ बचा सभ, धन-दौित पर भरोसा करलनहार सभक िेि परमेश् वरक राज् य मे पवेश करब कतेक कलठन अलि!” 25 धलनक आदमी केँ परमेश् वरक राज् य मे पवेश करबा सँ बेसी ओँट केँ सुईक आँ कख सँ गुजरब सहज अलिर 26 ओ सभ अचंलभत भऽ कऽ आपस मे कहिलिन, “तखन के उदार पालब सकैत अलि?” 27 यीशु ओकरा सभ लदस तकैत बजिाह, “ मनुष् यक िेि ई असंभव अलि, मुदा परमेश् वरक िेि नलह, लकएक तँ परमेश् वरक िेि सभ लकिु संभव अलिर” 28 तखन पतुस हनका कहिलिन, “दे खू, हम सभ सभ लकिु िोलड अहाँ क पािाँ िालग गेिहँ र” 29 यीशु उ्र दे िलिन, “ हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे हमरा आ सुसमाचारक काररे ँ कोनो एहन केओ नलह अलि जे घर वा भाइ, बलहन, बाप, माय, पती, संतान वा जमीन िोलड गेि होर” , २. 30 मुदा एलह समय मे ओकरा सय गुना घर-घर, भाइ, बलहन, माय, बचा, आ दे श-पताडक संग सताओतर आ आबै बिा संसार मे अनन जीवनर 31 मुदा बहतो जे सभ पलहने िलि, ओ सभ बाद मे रहताहर आ अंलतम पलहिर 32 ओ सभ यरशिेम जा रहि बाट मे ि​िाहर यीशु हनका सभक आगू बल़ गेिाहर आ पािू-पािू चिैत काि ओ सभ डरा गेिर ओ बारह गोटे केँ फेर सँ िऽ कऽ हनका सभ केँ कहय िगिाह जे हनका संग की हे बाक चाहीर 33 ओ कहिलन, “ दे खू, हम सभ यरशिेम जा रहि िीर मनुष्‍य-पुत केँ मुख्‍यपुरोलहत आ धम् -लशकक सभक हाि मे सौंपि जायतर ओ सभ ओकरा मृतुदंड दऽ दे तैक आ ओकरा गैर-यहदी सभक हाि मे सौंलप दे तैकर 34 ओ सभ ओकर उपहास करत, कोडा मारत, िूक फेकत आ मारर दे तैकर

35 जबीक पुत याकूब आ यूहन् ना हनका िग आलब कऽ कहिलिन, “गुर, हम सभ चाहै त िी जे अहाँ हमरा सभक िेि जे लकिु चाहै त िी से करर” 36 ओ हनका सभ केँ पुि​िलिन, “ अहाँ सभ की चाहै त िी जे हम अहाँ सभक िेि की करी?” 37 ओ सभ हनका कहिलिन, “हमरा सभ केँ एकटा अहाँ क दलहना कात आ दोसर बामा कात, अहाँ क मलहमा मे बैसबाक अनुमलत लदअर” 38 यीशु हनका सभ केँ कहिलिन, “ अहाँ सभ की माँ गैत िी से अहाँ सभ केँ नलह बुझि अलिर आ ओलह बपलतस् मा सँ बपलतस् मा िेब, जालह सँ हम बपलतस् मा िैत िी? 39 ओ सभ हनका कहिलिन, “हमरा सभ कऽ सकैत िीर” यीशु हनका सभ केँ कहिलिन, “ हम जे पािा पीबैत िी, तालह मे सँ अहाँ सभ स्े पीबर हम जालह बपलतस् मा सँ बपलतस् मा िेने िी, तालह सँ अहाँ सभ बपलतस् मा िेबर 40 मुदा हमर दलहना आ बामा हाि पर बैसब हमर नलह अलिर मुदा लजनका िेि ई तैयार कयि गेि अलि, तकरा सभ केँ दे ि जायतर” 41 दस गोटे ई बात सुलन कऽ याकूब आ यूहन् ना सँ बहत नाराज भऽ गेिाहर 42 यीशु हनका सभ केँ अपना िग बजा कऽ कहिलिन, “ अहाँ सभ जनैत िी जे गैर-यहदी सभ पर शासन करबाक िेि मानि गेि अलिर आ ओकर पैघ िोक सभ ओकरा सभ पर अलधकार रखैत िलिर 43 मुदा अहाँ सभक बीच एहन नलह होयत, मुदा जे केओ अहाँ सभक बीच पैघ बनय चाहै त अलि, से अहाँ सभक सेवक बनतर 44 अहाँ सभ मे सँ जे लकयो पैघ बनय चाहै त िी, से सभक सेवक बनतर 45 मनुख-पुत सेहो सेवा कर’ िेि नलह, बि् लक सेवा कर’ िेि आ बहतो िोकक मुक् मे अपन पार दे ब’ िेि आयि ि​िाहर 46 ओ सभ यरीहो पहँ चिाह, जखन यीशु अपन लशष् य सभ आ बहत रास िोकक संग यरीहो सँ बाहर लनकिैत ि​िाह, तखन लतलमयोक पुत आनर बरतीलमयस राजमाग्क कात मे बैसि भीख मां गैत ि​िाहर 47 जखन ओ ई सुलन कऽ जे ई नासरतक यीशु िलि, तखन ओ लचलचयाबय िगिाह आ कहिलिन, “हे दाऊदक पुत यीशु, हमरा पर दया करर” 48 बहतो िोक हनका चुप रहबाक आजा दे िलिन, मुदा ओ आर बेसी लचलचया उठिलन, “हे दाऊदक पुत, हमरा पर दया करर” 49 यीशु ठा़ भऽ कऽ हनका बजाबऽ आजा दे िलिनर ओ सभ आनर केँ बजा कऽ कहिलिन, “सान्ना रह, उठूर ओ अहाँ केँ बजबैत िलिर 50 ओ अपन वस फेलक कऽ उलठ कऽ यीशु िग आलब गेिाहर 51 यीशु हनका उ्र दे िलिन, “ अहाँ की चाहै त िी जे हम अहाँ क संग की करी? आनर ओकरा कहिकलन, “पभु, हमरा दलष भेटयर” 52 यीशु हनका कहिलिन, “ जाउर तोहर लवश् वास तोरा ठीक कऽ दे िकर ओ तुरत दे कख कऽ यीशुक पािाँ -पािाँ बाट मे आलब गेिाहर

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मरकुस के सुसमाचार

अधाय 11

संदेह नलह करत, बि् लक ओ लवशास करत जे ओ जे बात कहै त िलि से पूरा होयतर जे लकिु कहत से ओकरा भेटतैकर 24 ते ँ हम अहाँ सभ केँ कहै त िी जे अहाँ सभ पाि्ना करबा काि जे लकिु चाहै त िी, से लवशास कर जे अहाँ सभ केँ ओ सभ भेटैत अलिर 25 जखन अहाँ सभ पाि्ना करै त ठा़ िी तँ जँ अहाँ सभ केँ ककरो लवरद कोनो आपल् होअय तँ कमा करर 26 मुदा जँ अहाँ सभ कमा नलह करब तँ अहाँ सभक लपता जे स् वग् मे िलि तँ अहाँ सभक अपराध केँ कमा नलह करताहर 27 ओ सभ फेर यरशिेम आलब गेिाह, जखन यीशु मन् लदर मे घुमैत ि​िाह, तखन ओतऽ मुख् यपुरोलहत, शासी आ बू़-पुरान सभ हनका िग आलब गेिाहर 28 ओ हनका पुिलिन, “अहाँ ई सभ कोन अलधकार सँ करै त िी?” आ अहाँ केँ ई सभ करबाक अलधकार के दे िक? 29 यीशु हनका सभ केँ उ्र दे िलिन, “ हमहँ अहाँ सभ सँ एकटा प् पूिब आ हमरा उ्र दे ब आ हम अहाँ सभ केँ कहब जे हम कोन अलधकार सँ ई सभ काज करै त िीर” 30 यूहन् नाक बपलतस् मा स् वग् सँ भेि ि​ि आलक मनुष् यक? हमरा जवाब लदयौकर 31 ओ सभ मने-मन-मन-लवमश् करै त कहिलिन, “जँ हम सभ कहब जे, ‘सग् सँ आयि िीर ओ कहताह, “तखन अहाँ सभ हनका पर लवश् वास लकएक नलह केिहँ?” 32 मुदा जँ हम सभ ई कहब जे , “मनुष्‍यक”र ओ सभ िोक सभ सँ डे राइत ि​ि, लकएक तँ सभ िोक यूहन् ना केँ मानैत ि​ि जे ओ स्े एकटा भलवषव्ा िलिर 33 ओ सभ यीशु केँ उ्र दे िलिन, “हम सभ नलह कलह सकैत िीर” यीशु हनका सभ केँ उ्र दे िलिन, “ हम अहाँ सभ केँ ई नलह कहै त िी जे हम कोन अलधकार सँ ई सभ काज करै त िीर”

1 जखन ओ सभ यरशिेम, जैतूनक पहाड पर बेतफाग आ बेतलनयाक समीप पहँ चिाह, तखन ओ अपन दू टा लशष् य केँ पठौिलनर 2 ओ ओकरा सभ केँ कहिलिन, “ अपन सामनेक गाम मे जाउर ओकरा ढीिा कऽ लदयौकर 3 जँ केओ अहाँ सभ केँ कहै त अलि जे , “अहाँ सभ ई लकएक करै त िी?” अहाँ सभ कहब जे पभु केँ हनकर आवशकता िलनर आ तुरन ओ ओकरा एतय पठा दे तर 4 ओ सभ जा कऽ बिडाक बिडा केँ बाहर दरबजा मे बानि दे खिलन, जतय दू बाट लमिैत ि​िर आ ओकरा ढीिा क’ दै त िलिर 5 ओतऽ ठा़ लकिु िोक हनका सभ केँ कहिलिन, “अहाँ सभ बिडा केँ खोलि कऽ की करै त िी?” 6 ओ सभ यीशुक आजाक अनुसार हनका सभ केँ कहिलिनर 7 ओ सभ बिडा केँ यीशु िग अनिलन आ हनका पर अपन वस पलहरर िेिलनर ओ हनका पर बैलस गेिाहर 8 बहतो िोक बाट मे अपन वस पसारर िेिक, आ लकिु गोटे गािक डारर कालट कऽ बाट मे भूसा फेलक दे िकर 9 आगू ब़लनहार सभ आ पािाँ -पािाँ चिलनहार सभ लचलचया उठिलन जे , “होसाना!” धन अलि जे पभुक नाम सँ अबैत अलिर 10 हमरा सभक लपता दाऊदक राज् य, जे परमेश् वरक नाम सँ आलब रहि अलि, ओकर राज्‍य धन होअयर 11 यीशु यरशिेम आ मन् लदर मे पवेश कऽ गेिाह आ चार कात दे कख कऽ साँ झ भऽ गेिाह आ बारह गोटे क संग बेतलनया चलि गेिाहर 12 दोसर लदन जखन ओ सभ बेतलनया सँ अयिाह तँ हनका भूख िागि ि​िलनर 13 ओ दू र सँ एकटा अंजीरक गाि केँ पात बिा दे कख ओ अयिाह, जँ ओकरा पर कोनो वसु भेलट जायर लकएक तँ अंजीरक समय एखन धरर नलह भेि ि​िर 14 यीशु ओकरा उ्र दे िलिन, “ अहाँ क फि केओ अनन काि धरर नलह खायतर” हनकर लशष् य सभ ई बात सुनिलनर 15 ओ सभ यरशिेम पहँ चिाह, तखन यीशु मन् लदर मे जा कऽ मन् लदर मे बेचलनहार आ कीनलनहार सभ केँ भगाबय िगिाह आ पाइ बदिलनहार सभक टे बुि आ कबूतर बेचलनहार सभक आसन सभ उखालड दे िलनर 16 ओ मन्‍लदर मे ककरो कोनो बत्न िऽ कऽ चिय नलह दे लिनर 17 ओ हनका सभ केँ लशका दै त कहिलिन, “ की धम्शास्‍त मे लिखि नलह अलि जे , ‘हमर घर केँ सभ जालतक िेि पाि्नाक घर कहि जायत?” मुदा अहाँ सभ एकरा चोर सभक मां द बना दे लियैकर 18 धम् -लशकक आ मुख्‍य पुरोलहत सभ ई बात सुलन कऽ हनका कोना नष कऽ सकैत िलि, तकरा खोजैत रहिाहर 19 साँ झ भेिा पर ओ नगर सँ बाहर लनकलि गेिाहर 20 भोरे -भोर ओ सभ अंजीरक गाि जलड सँ सुखायि दे खिलनर 21 पतुस हनका मोन पालड कऽ कहिलिन, “गुर, दे खू, अंजीरक गाि जकरा अहाँ शाप दे ने ि​िहँ , से मुरझा गेि अलिर” 22 यीशु हनका सभ केँ उ्र दे िलिन, “ परमेश् वर पर लवश् वास करर” 23 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे केओ एलह पहाड केँ कहत जे, ‘हलट कऽ समुद मे फेलक दे ि जाउर ओ अपन हदय मे

अधाय 12 1 ओ हनका सभ सँ दषानक दारा बाज’ िगिाहर एक आदमी अंगूरक बगीचा िगा कऽ ओकरा चार कात बेडी िगा दे िक आ दारक खेतक िेि जगह खोदिक आ एकटा बुज् बनौिक आ ओकरा लकसान सभक िेि िोलड दे िक आ दू रक दे श मे चलि गेिर 2 ओलह समय मे ओ लकसान सभ िग एकटा नोकर पठौिलन जे ओ लकसान सभ सँ अंगूरक बगीचाक फि गहर करलिर 3 ओ सभ ओकरा पकलड कऽ मारर-पीलट कऽ खािी लवदा भऽ गेिर 4 ओ फेर हनका सभ िग एकटा आओर नोकर पठौिलनर ओ सभ ओकरा पर पािर फेलक कऽ माि मे चोट िगा दे िक आ ओकरा िकजत कऽ कऽ लवदा कऽ दे िकर 5 ओ फेर दोसर केँ पठौिलनर ओकरा ओ सभ मारर दे िकैक, आओर बहतो िोक केँर लकिु केँ मारर-पीलट, आ लकिु केँ मारर दे बर 6 ते ँ एकटा पुत अपन लपय पुत रहिा पर ओ हनका सभ िग पठा दे िलिन जे, “ओ सभ हमर पुत केँ आदर करतर” 7 मुदा ओ लकसान सभ आपस मे कहिलिन, “ई उ्रालधकारी िलिर आऊ, ओकरा मारर लदयौक, आ उ्रालधकार हमरा सभक भ’ जायतर” 8 ओ सभ ओकरा पकलड कऽ मारर दे िक आ अंगूरक बगीचा सँ बाहर फेलक दे िकर

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मरकुस के सुसमाचार

9 ते ँ अंगूरक बगीचाक मालिक की करताह? ओ आलब कऽ लकसान सभ केँ नष कऽ दे त आ अंगूरक बाग दोसर केँ दऽ दे तर 10 की अहाँ सभ ई धम्शास् त नलह प़ने िीर जे पािर लबलर सभ असीकार केिक से कोनक माि बलन गेि अलिर 11 पभुक ई काज ि​िलन आ हमरा सभक नजरर मे ई अद् भुत अलि? 12 ओ सभ हनका पकडबाक पयास कयिलन, मुदा िोक सभ सँ डरै त रहिाह, लकएक तँ ओ सभ जनैत ि​ि जे ई दषान हनका सभक लवरद बाजि अलिर 13 ओ सभ फररसी आ हे रोदीस मे सँ लकिु गोटे केँ हनका िग पठा दे िलिन जे हनका अपन बात मे पकलड िेलिनर 14 जखन ओ सभ आलब कऽ ओ सभ हनका कहिलिन, “गुर, हम सभ जनैत िी जे अहाँ सत् य िी आ ककरो परवाह नलह करै त िी, लकएक तँ अहाँ मनुष् य सभक आदर नलह करै त िी, बि् लक परमेश् वरक बाट सत् य मे लसखाबैत िी सीजर के शदां जलि दे ब, आलक नलह? 15 हम सभ दे ब वा नलह दे ब? मुदा ओ हनका सभक पाखंड केँ जालन हनका सभ केँ कहिलिन, “ अहाँ सभ हमरा लकएक परीका दै त िी?” हमरा िेि एक पाइ आलन लदअ, जालह सँ हम दे ख सकबर 16 ओ सभ ओकरा अनिलनर ओ हनका सभ सँ पुि​िलिन, “ ई मूलत् आ उपर केकर अलि?” ओ सभ हनका कहिलिन, “कैसरकर” 17 यीशु हनका सभ केँ उ्र दे िलिन, “ कैसरक जे लकिु अलि से कैसर केँ आ परमेश् वरक जे लकिु अलि से परमेश् वर केँ दऽ लदयौकर” ओ सभ हनका दे कख आशय्चलकत भऽ गेिाहर 18 तखन सदु की सभ हनका िग आलब गेिाह जे कहै त िलि जे पुनरुान नलह होयतर ओ सभ हनका सँ पुि​िलिनर 19 गुर, मूसा हमरा सभ केँ लिखने िलि, “जँ ककरो भाय मरर कऽ अपन पती केँ िोलड कऽ कोनो संतान नलह िोडै त अलि तँ ओकर भाय ओकर पती केँ िऽ कऽ अपन भाय केँ बीया पैदा कऽ िेतर” 20 सात भाय ि​ि, पलहि भाय स् ती िऽ कऽ मरर कऽ कोनो संतान नलह िोडिकर 21 दोसर ओकरा पकलड कऽ मरर गेि, आ ने कोनो बीया िोलड गेिर 22 ओलह सात गोटे क संग ओ ि​िलन, मुदा कोनो संतान नलह िोडिलनर 23 तखन पुनरुान मे जखन ओ सभ जीलब उठताह तखन ओ हनका सभ मे सँ केकर पती हे तीह? लकएक तँ सात गोटे क पती ि​िलनर 24 यीशु हनका सभ केँ उ्र दे िलिन, “की अहाँ सभ शास आ ने परमेश् वरक सामि्​् य केँ नलह जनैत िी, ते ँ की अहाँ सभ गिती नलह कऽ रहि िी?” 25 जखन ओ सभ मृत् यु मे सँ जीलब उठत तखन ओ सभ ने लववाह करत आ ने लववाह मे दे ि जायतर मुदा स् वग् मे रहलनहार स् वग्दूत जकाँ िलिर 26 मृत् यु केँ जीलब उठबाक लवषय मे की अहाँ सभ मूसाक लकताब मे नलह प़ने िी जे कोना झाडी मे परमेश् वर हनका कहिलिन जे , “हम अबाहम आ इसहाक आ याकूबक परमेश् वर िीर” ? 27 ओ मृतकक परमेश् वर नलह, बि् लक जीलवत िोकक परमेश् वर िलिर

28 एक गोटे शासी सभ आलब कऽ हनका सभ केँ एक संग लवमश् करै त सुलन हनका सभ केँ नीक जकाँ उ्र दे िलिन से बुलझ हनका सँ पुि​िलिन, “सब सँ पलहि आजा कोन अलि?” 29 यीशु हनका उ्र दे िलिन, “ सब आजा मे पलहि आजा अलि, “हे इसाएि, सुनूर” हमर सभक परमेश् वर पभु एक पभु िलिर 30 अहाँ अपन परमेश् वर परमेश् वर सँ पूरा हदय सँ , पूरा पार सँ, पूरा मन आ पूरा सामि्​् य सँ पेम करर 31 दोसर एहन अलि जे , “अहाँ अपन पडोसी सँ अपना जकाँ पेम करर” एलह सभ सँ पैघ कोनो आजा नलह अलिर 32 धम्शासी हनका कहिलिन, “अचा, गुर, अहाँ सत् य कहिहँ , लकएक तँ परमेश् वर एकेटा िलिर आ हनका िोलड दोसर लकयो नलह अलिर 33 ओकरा सँ पूरा हदय सँ, पूरा बुकद सँ, पूरा पार सँ आ पूरा शक् सँ पेम करब आ अपन पडोसी सँ अपना जकाँ पेम करब, सब होमबलि आ बलिदान सँ बेसी अलिर 34 यीशु जखन ई दे कख जे ओ लववेकपूव्क उ्र दे िलन, तखन ओ हनका कहिलिन, “ अहाँ परमेश् वरक राज् य सँ दू र नलह िीर” आ तकर बाद कोनो केओ हनकासँ कोनो प् करबाक लहमत नलह केिकर 35 यीशु मन् लदर मे लशका दै त काि उ्र दे िलिन, “ धम्शासी सभ कोना कहै त िलि जे मसीह दाऊदक पुत िलि?” 36 लकएक तँ दाऊद सयं पलवत आत् माक दारा कहिलिन, “परमेश् वर हमर पभु केँ कहिलिन, “जाबत धरर हम अहाँ क शतु सभ केँ अहाँ क पैरक ठे हन नलह बना िेब, ताबत धरर अहाँ हमर दलहना कात बैसि रहर” 37 ते ँ दाऊद हनका पभु कहै त िलिर तखन ओ अपन पुत कतय सँ िलि? आ आम िोक हनकर बात हष्लास सँ सुनिकर 38 ओ अपन लशका मे हनका सभ केँ कहिलिन, “ धम्शासी सभ सँ सावधान रह, जे नमर वस पलहरर कऽ जायब आ बजार मे पराम करऽ चाहै त िलिर 39 भोज-भोज मे सभाघर मे पमुख आसन आ उपरका कोठिी मेर 40 ओ सभ लवधवा सभक घर खाइत अलि आ नाटकक काररे ँ नमहर पाि्ना करै त अलिर 41 यीशु खजानाक कात मे बैसि ि​िाह आ दे खैत ि​िाह जे िोक सभ कोना कोष मे पाइ फेकैत अलिर 42 एकटा गरीब लवधवा आलब गेिीह, आ ओ दू टा माइटी फेलक दे िलन, जालह सँ एक फारलिंग भेटैत अलिर 43 ओ अपन लशष्‍य सभ केँ बजा कऽ कहिलिन, “ हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे ई गरीब लवधवा ओलह सभ सँ बेसी धनरालश मे फेकने िलिर 44 लकएक तँ ओ सभ अपन पचुरता मे सँ सभ लकिु लनकालि दे िलनर मुदा ओ अपन अभाव मे सँ अपन सभ लकिु आ अपन सभटा जीवन-यापन केँ फेलक दे िकर अधाय 13 1 ओ मन् लदर सँ बाहर लनकिैत काि हनकर एकटा लशष् य हनका कहिलिन, “गुर, दे खू, एतय केहन पािर आ केहन भवन अलि!” 2 यीशु हनका उ्र दे िलिन, “ की अहाँ ई सभ पैघ भवन सभ दे खैत िी?” एक पािर दोसर पर नलह बचि रहत जे नलह फेकि जायतर

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मरकुस के सुसमाचार

3 जखन ओ मन् लदरक समक जैतूनक पहाड पर बैसि ि​िाह तखन पतुस, याकूब, यूहन् ना आ अन् लदयस हनका सँ एकां त पुि​िलिनर 4 कह जे ई सभ कलहया होयत? जखन ई सभ बात पूरा होयत तखन की लचन होयत? 5 यीशु हनका सभ केँ उ्र दे िलिन, “ सावधान रह जे लकयो अहाँ सभ केँ धोखा नलह दऽ सकयर 6 हमरा नाम सँ बहतो िोक आलब कऽ कहत जे , “हम मसीह िीर” आ बहतो केँ धोखा दे तर 7 जखन अहाँ सभ युद आ युदक अफवाह सुनब तखन अहाँ सभ घबराहट नलह करर मुदा अन् त एखन धरर नलह आओतर 8 लकएक तँ जालत-जालत जालत-जालतक लवरद उठत, आ राज्‍यराजक लवर द राज्‍य उठतर 9 मुदा अपना सभ केँ सावधान रह, लकएक तँ ओ सभ अहाँ सभ केँ पररषद् मे सौंलप दे तर आराधनािय मे अहाँ सभ केँ मारर-पीट कयि जायतर 10 सुसमाचार पलहने सभ जालत मे पचाररत हे बाक चाहीर 11 मुदा जखन ओ सभ अहाँ सभ केँ िऽ जायत आ अहाँ सभ केँ सौंलप दे त तखन पलहने सँ कोनो लवचार नलह कर जे अहाँ सभ की बाजब आ ने पलहने सँ सोचू पलवत आटा केर 12 भाय भाय केँ मारर दे बाक िेि धोखा दे त, आ लपता बेटा केँर बचा सभ अपन माता-लपताक लवरद उलठ कऽ ओकरा सभ केँ मारर दे तर” 13 हमर नामक काररे ँ अहाँ सभ सँ घृरा होयत, मुदा जे अन् त धरर सहन करत, से उदार पाओतर 14 मुदा जखन अहाँ सभ ओलह उजाडक घृलरत बात केँ दे खब जे दालनयि भलवषव्ा दारा कहि गेि ि​ि, जे ओतलह ठा़ नलह हो, (जे प़ै त अलि, से बुझय,) तखन यहलदया मे रहलनहार सभ पहाड लदस भालग जायर 15 घरक चोटी पर जे अलि से घर मे नलह जाउ आ ने घर मे पवेश करलिर 16 खेत मे रहलनहार अपन वस धारर करबाक िेि घुरर कऽ नलह जायर 17 मुदा ओलह लदन मे गभ्वती आ दू ध दे बयविा सभक िेि लधकार! 18 अहाँ सभ पाि्ना कर जे अहाँ सभक पिायन जाड मे नलह होर 19 लकएक तँ ओलह लदन मे एहन कष होयत जे परमेश् वरक सृलषक पारा सँ आइ धरर नलह ि​ि आ नलह होयतर 20 जँ परमेश् वर ओलह लदन सभ केँ िोट नलह कऽ दे लिन तँ कोनो माँ सक उदार नलह भऽ सकैत ि​िर 21 तखन जँ केओ अहाँ सभ केँ कहत जे , “दे खू, मसीह एतय िलिर” वा दे खू, ओ ओतलह िलिर हनका पर लवशास नलह करर 22 लकएक तँ झूठ मसीह आ झूठा पवक् ता सभ उलठ जेताह आ लचन् त आ चमत् कार करलि जे जँ साव भऽ सकैत ि​ि तँ चुनि िोक सभ केँ सेहो बहकाबलिर 23 मुदा अहाँ सभ सावधान रहर 24 मुदा ओलह केशक बाद ओलह लदन मे सूय् अनार भऽ जायत आ चान ओकरा इजोत नलह करतर 25 आकाशक तारा खलस पडत आ स् वग् मे जे सामि्​् य अलि से लहितर 26 तखन ओ सभ मनुष् य-पुत केँ मेघ मे बहत सामि्​् य आ मलहमा सँ अबैत दे खताहर

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27 तखन ओ अपन स् वग्दूत सभ केँ पठाओत आ चार हवा सँ िऽ कऽ स् वग्क अन भाग धरर अपन चुनि िोक सभ केँ एक ठाम जमा करतर 28 आब अंजीरक गािक दषान सीखूर जखन ओकर डारर एखन धरर कोमि होइत िै क आ पात लनकिैत िै क तखन अहाँ सभ जनैत िी जे गम् िग आलब गेि अलिर 29 एलह तरहे ँ अहाँ सभ जखन ई सभ घटना घटै त दे खब तँ ई जालन लिअ जे ई सभ दरबजा पर िग आलब गेि अलिर 30 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे जा धरर ई सभ काज नलह भऽ जायत ता धरर ई पी़ी नलह बीततर 31 आकाश आ पृथी समाप भऽ जायत, मुदा हमर वचन समाप नलह होयतर 32 मुदा ओलह लदन आ ओलह समयक लवषय मे केओ नलह जनैत अलि, ने स् वग् मे रहलनहार स् वग्दूत आ ने पुत, लसवाय लपता केँर 33 अहाँ सभ सावधान रह, जागि रह आ पाि्ना करर 34 लकएक तँ मनुष् य-पुत ओलहना अलि जेना दू र-दू र धरर जा रहि अलि, जे अपन घर िोलड अपन नोकर सभ केँ आ पत् येकअपन काज केँ अलधकार दऽ दे िक आ दरबजा रखलनहार केँ चौकस करबाक आजा दे िकर 35 ते ँ अहाँ सभ जागि रह, लकएक तँ अहाँ सभ नलह जनैत िी जे घरक मालिक कखन अबैत िलि, साँ झ मे वा आधा रालत मे वा मुग्क बाजैत वा भोर मेर 36 कही ं अचानक आलब कऽ अहाँ सभ केँ सुति नलह पालब जायर 37 हम अहाँ सभ केँ जे कहै त िी से सभ केँ कहै त िी जे जागि रहर” अधाय 14 1 दू लदनक बाद फसह-पाबलन आ अखमीरी रोटीक पाबलन भेि, तखन मुख्‍य पुरोलहत आ धम्लशकक सभ ओकरा चािबाजी मे पकलड कऽ मारर दे िकर 2 मुदा ओ सभ कहिलिन, “पव्क लदन नलह, कही ं िोक मे हं गामा नलह भ’ जायर” 3 को़ी लसमोनक घर मे बेतलनया मे जखन ओ भोजन पर बैसि ि​िाह तखन एकटा स् ती अिाबासरक लडबा िऽ कऽ अयिाह, जकरा मे बहत कीमती मिबक मिहम ि​िर ओ लडबा तोलड कऽ ओकर माि पर ढारर दे िकर 4 लकिु िोक सभ अपना मे कोलधत भऽ कऽ कहिलिन, “ई मरहम लकएक बबा् द कयि गेि?” 5 तीन सय पेस सँ बेसी मे बेलच कऽ गरीब सभ केँ दऽ दे ि जा सकैत ि​िर ओ सभ हनका पर बडबडाइत रहिाहर 6 यीशु कहिलिन, “ ओकरा िोलड लदयौकर अहाँ सभ ओकरा लकएक परे शान करै त िी? हमरा पर नीक काज केने िलिर 7 लकएक तँ अहाँ सभक संग गरीब सभ सलदखन रहै त अलि, आ जखन-जखन अहाँ सभ चाहै त िी, हनका सभक नीक काज कऽ सकैत िी, मुदा हमरा अहाँ सभक संग सलदखन नलह अलिर 8 ओ जे लकिु कऽ सकिीह से कऽ सकिीहर 9 हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहै त िी जे , जतए-जतय ई सुसमाचार सम् पूर् संसार मे पचाररत होयत, ओतलह हनकर दारा कयि गेि बात सेहो हनकर सररक िेि कहि जायतर 10 बारह मे सँ एक यहदा इसररयोती मुख् यपुरोलहत सभक िग गेिाहर


मरकुस के सुसमाचार

11 ई बात सुलन ओ सभ खुश भऽ गेि आ ओकरा पाइ दे बाक वचन दे िकर आ ओ खोजैत रहिाह जे कोना सुलवधापूव्क ओकरा संग लवशासघात क' सकैत अलिर 12 अखमीरी रोटीक पलहि लदन जखन फसह-पाबलन मारिलन तखन हनकर लशष् य सभ हनका पुि​िलिन, “अहाँ चाहै त िी जे हम सभ कतय जा कऽ फसह-पाबलनक भोजन तैयार करी?” 13 ओ अपन दू टा लशष् य केँ पठा कऽ कहिलिन, “ अहाँ सभ नगर मे जाउ, तखन अहाँ सभ सँ एक आदमी पालनक घैि िऽ कऽ भेट करतर” 14 ओ कतह भीतर जायत, अहाँ सभ घरक मालिक केँ कह जे , ‘गुर कहै त िलि, ‘अलतलि कक कतय अलि, जतय हम अपन लशष् य सभक संग फसह-भोज खायब? 15 ओ अहाँ सभ केँ ऊपरक एकटा पैघ कोठिी दे खाओत जे सुसकजत आ तैयार कयि गेि अलिर 16 हनकर लशष् य सभ जा कऽ नगर मे आलब कऽ हनका सभ केँ जेना कहने ि​िाह तेना पालब गेिाहर 17 साँ झ मे ओ बारह गोटे क संग अबैत िलिर 18 ओ सभ बैसि भोजन करै त काि यीशु कहिलिन, “ हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे अहाँ सभ मे सँ जे हमरा संग भोजन करै त अलि, से हमरा धोखा दे तर” 19 ओ सभ दु खी भऽ कऽ एक-एक कऽ हनका पुिऽ िगिाह, “की हम िी?” दोसर कहिकलन, “की हम िी?” 20 ओ हनका सभ केँ उ्र दे िलिन, “ ई बारह मे सँ एक अलि जे हमरा संग बत्न मे डु बकी िगा रहि अलिर” 21 मनुष् यक पुत जलहना हनका लवषय मे लिखि अलि, तेना जाइ िलिर नीक रहै त जे ओलह आदमीक िेि जँ कलहयो जन नलह िेने रलहतैकर 22 जखन ओ सभ भोजन करै त ि​ि तखन यीशु रोटी िऽ कऽ आशीष दऽ कऽ तोलड कऽ ओकरा सभ केँ दे िलिन आ कहिलिन, “ िीह, खाउ, ई हमर शरीर अलिर” 23 ओ पािा िऽ कऽ धन् यवाद दऽ कऽ ओकरा सभ केँ दऽ दे िलिनर 24 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ ई हमर नव लनयमक खून अलि जे बहतो िोकक िेि बहौि गेि अलिर” 25 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे , जाबत धरर हम परमेश् वरक राज् य मे नव-नव बेि केर फि नलह पीबर 26 ओ सभ सोत गालब कऽ जैतूनक पहाड पर लनकलि गेिाहर 27 यीशु हनका सभ केँ कहिलिन, “ आइ रालत अहाँ सभ हमरा काररे ँ आहत भऽ जायबर 28 मुदा हम जीलब उठिाक बाद अहाँ सभ सँ पलहने गिीि जायबर 29 पतुस हनका कहिलिन, “भिे सभ आहत भऽ जायत, मुदा हम नलह करबर” 30 यीशु हनका कहिलिन, “ हम अहाँ केँ स्े कहै त िी जे आइ रालत मे मुगा् दू बेर बाजबा सँ पलहने अहाँ हमरा तीन बेर असीकार करबर” 31 मुदा ओ आर जोर सँ बजिाह, “जँ हम अहाँ क संग मरर जायब तँ हम अहाँ केँ कोनो तरहे ँ असीकार नलह करबर” तलहना सेहो कहिलन ओ सबर 32 ओ सभ गेटसमनी नामक सान पर पहँ चिाह, तखन ओ अपन लशष् य सभ केँ कहिलिन, “ जाबत हम पाि्ना करब ताबत अहाँ सभ एतय बैसि रहर”

33 ओ पतुस, याकूब आ यूहन् ना केँ अपना संग िऽ कऽ बहत आशय्चलकत भऽ गेिाहर 34 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ हमर पार मृतुक िेि बहत दु खी अलिर 35 ओ कनेक आगू बल़ कऽ जमीन पर खलस पडिाह आ पाि्ना कयिलन जे जँ संभव हो तऽ समय हनका सँ बीलत जायर 36 ओ कहिलिन, “ अबा, लपता, अहाँ क िेि सभ लकिु संभव अलिर ई पािा हमरा सँ िीन लिअ, तिालप जे हम चाहै त िी से नलह, बि् लक अहाँ जे चाहै त िीर 37 यीशु आलब कऽ हनका सभ केँ सुति दे कख पतुस केँ कहिलिन, “ लसमोन, की अहाँ सुति िी?” की अहाँ एक घंटा नलह जालग सकैत ि​िहँ ? 38 अहाँ सभ जागि रह आ पाि्ना कर, जालह सँ अहाँ सभ परीका मे नलह पलड जायबर आटा सचमुच तैयार िै , िेलकन शरीर कमजोर िै र 39 ओ फेर जा कऽ पाि्ना कऽ कऽ वैह बात बजिाहर 40 जखन ओ घुरिाह तँ फेर हनका सभ केँ सुति दे खिलन, लकएक तँ हनका सभक आँ कख भारी ि​िलनर 41 ओ तेसर बेर आलब हनका सभ केँ कहिलिन, “ आब सुलत जाउ आ आराम करर दे खू, मनुष् यक पुत पापी सभक हाि मे सौंपि गेि अलिर 42 उठू, चिूर दे खू, जे हमरा धोखा दे त से िग आलब गेि अलिर” 43 जखन ओ एखन धरर बालज रहि ि​िाह तखन तुरन बारह मे सँ एक यहदा आ हनका संग तिवार आ िाठी िऽ कऽ बहत रास भीड आलब गेिाहर 44 हनका धोखा दे लनहार हनका सभ केँ एकटा लनशानी दऽ कऽ कहने ि​ि जे, “हम जकरा चुमा िेब, ओ वैह अलिर” ओकरा िऽ कऽ सुरलकत िऽ जाउर 45 ओ अयिा पर सोझे हनका िग जा कऽ कहिलिन, “गुर, गुर! आ चुमा िेिकर 46 ओ सभ हनका पर हाि राकख हनका पकलड िेिलनर 47 ओतय ठा़ िोक मे सँ एक गोटे तिवार लनकालि महापुरोलहतक एकटा नोकर केँ मारर कऽ ओकर कान कालट िेिकर 48 यीशु हनका सभ केँ उ्र दे िलिन, “ की अहाँ सभ हमरा पकडबाक िेि तिवार आ िाठी िऽ कऽ चोर जकाँ लनकि​ि िी?” 49 हम सभ लदन अहाँ सभक संग मन् लदर मे लशका दै त ि​िहँ , मुदा अहाँ सभ हमरा नलह पकडिहँ र 50 ओ सभ हनका िोलड कऽ भालग गेिाहर 51 एकटा युवक हनका पािाँ -पािाँ आलब गेि ि​ि, जे अपन नंगटे शरीर मे लिनन कपडा पलहरने ि​िर युवक सभ हनका पकलड िेिकलनर 52 ओ लिन कपडा िोलड ओकरा सभ सँ नंगटे भालग गेिर 53 ओ सभ यीशु केँ महापुरोलहतक िग िऽ गेिाह आ हनका संग सभ मुखपुरोलहत, बू़-पुरोलहत आ शासी सभ जमा भऽ गेिाहर 54 पतुस हनका पािाँ -पािाँ दू र-दू र धरर महापुरोलहतक महि मे गेिाहर 55 मुख्‍यपुरोलहत सभ आ सम्‍पूर् पररषद् यीशु केँ मारबाक िेि गवाही ताकय िगिाहर आ कोनो नलह भेटिर 56 लकएक तँ बहतो िोक हनका लवरद झूठ गवाही दै त ि​िाह, मुदा हनका सभक गवाही एक संग नलह ि​िर

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मरकुस के सुसमाचार

57 लकिु िोक उलठ कऽ हनका पर झूठ गवाही दे िलिनर “ 59 मुदा दु नूक गवाह सेहो एक संग नलह ि​िर 60 महापुरोलहत बीच मे ठा़ भऽ यीशु सँ पुि​िलिन, “की अहाँ लकिु उ्र नलह दऽ रहि िी?” ई सभ अहाँ क लवरद की गवाही दै त अलि? 61 मुदा ओ चुप रहिाह आ लकिु ओ उ्र नलह दे िलनर फेर महापुरोलहत हनका सँ पुि​िलिन, “की अहाँ मसीह, धनक पुत िी?” 62 यीशु कहिलिन, “ हम िीर 63 तखन महापुरोलहत अपन कपडा फालड कऽ कहिलिन, “हमरा सभ केँ आओर गवाहक की चाही?” 64 अहाँ सभ लनना सुनिहँ र ओ सभ हनका मृतुक दोषी ठहरौिलनर 65 लकिु िोक हनका पर िूक फेकय िगिाह, हनकर मुँह झाँ लप कऽ मारर-पीट करऽ िगिाह आ कहय िगिाह जे, “भलवषवारी कऽ लदयौकर” 66 जखन पतुस महि मे नीचाँ मे ि​िाह तखन महापुरोलहतक एकटा दासी आलब गेिाहर 67 पतुस केँ गरम करै त दे कख ओ हनका लदस तकिीह आ बजिीह, “अहाँ सेहो नासरतक यीशुक संग ि​िहँ र” 68 मुदा ओ एलह बात केँ नकारै त कहिलिन, “हम नलह जनैत िी आ नलह बुझैत िी जे अहाँ की कहै त िीर” ओ ओसारा मे लनकलि गेिाहर आ मुगा् चािक दिर 69 एकटा दासी हनका फेर सँ दे कख कऽ ठा़ िोक सभ केँ कहय िगिीह, “ई ओलह मे सँ एक िलिर” 70 ओ फेर एलह बात केँ असीकार कयिलनर लकिु ए काि बाद ओतय ठा़ िोक सभ फेर पतुस केँ कहिलिन, “अहाँ हनका सभ मे सँ एक िीर 71 मुदा ओ गारर प़य िगिाह आ कसम खाय िगिाह, “हम एलह आदमी केँ नलह लचनै त िी, जकरा बारे मे अहाँ सभ बजैत िीर” 72 आ दोसर बेर मुगा् कूर भऽ गेिर पतुस यीशु केँ कहि बात मोन पाडिलन, “ मुगा् दू बेर बाजबा सँ पलहने अहाँ हमरा तीन बेर असीकार कऽ दे बर” जखन ओ एलह बात पर सोलच कऽ कालन उठिाहर

7 बरबा नामक एक गोटे ि​िाह जे हनका संग लवदोह केलनहार िोक सभक संग बानि ि​ि आ लवदोह मे हता केने ि​िाहर 8 िोक सभ जोर-जोर सँ चीतार करय िागि जे ओ हनका सभक संग जेना करै त ि​िाह, तेना करलिर 9 लपिातुस हनका सभ केँ उ्र दे िलिन, “की अहाँ सभ चाहै त िी जे हम यहदी सभक राजा केँ अहाँ सभ केँ िोलड दी?” 10 ओ जनैत ि​िाह जे मुख्‍य पुरोलहत सभ हनका ईषा् क काररे ँ सौंपने िलिर 11 मुदा मुख्‍यपुरोलहत सभ िोक सभ केँ एलह िेि पेररत कयिलन जे ओ बरबा केँ िोलड दे बलनर 12 तखन लपिातुस हनका सभ केँ फेर सँ कहिलिन, “तखन अहाँ सभ की चाहै त िी जे हम जकरा अहाँ सभ यहदी सभक राजा कहै त िी?” 13 ओ सभ फेर लचलचया उठि, “ओकरा कूस पर च़ा लदयौकर” 14 तखन लपिातुस हनका सभ केँ कहिलिन, “ओ की अधिाह काज कयिलन?” ओ सभ आर बेसी लचलचया उठि, “ओकरा कूस पर च़ा लदयौकर” 15 एलह तरहे ँ लपिातुस िोक सभ केँ संतुष करऽ चाहै त ि​िाह आ बरबा केँ हनका सभक हाि मे िोलड दे िलिन आ यीशु केँ कोडा मारर कऽ कूस पर च़ाबय िेि िोलड दे िलनर 16 लसपाही सभ हनका पैटोररयम नामक दिान पर िऽ गेिाहर आ पूरा दि केँ एक ठाम बजबैत िलिर 17 ओ सभ ओकरा बैगनी रं गक कपडा पलहरा कऽ काँ टक मुकुट पालन कऽ माि पर िगा दे िकर 18 ओ हनका पराम करय िगिाह, “हे यहदी सभक राजा! 19 ओ सभ ओकर माि पर ख़ सँ मारर दे िक आ िूक फेकिक आ ठे हन झुलक कऽ ओकर आराधना कयिकर 20 ओ सभ हनकर उपहास कऽ कऽ हनका सँ बैगनी रं गक कपडा उतारर कऽ हनका अपन कपडा पलहरर कऽ कूस पर च़ाबय िेि िऽ गेिाहर 21 ओ सभ लसकनर आ रफसक लपता कुरे लनयाक लसमोन केँ अपन कूस उठाबऽ िेि बाध करै त िलिर 22 ओ सभ हनका गोलोिा सान पर िऽ जाइत िलि, जकर अि् होइत अलि खोपडीक सानर” 23 ओ सभ हनका गनक संग मलदरा पीबय दे िलिन, मुदा हनका नलह भेटिलनर 24 ओ सभ हनका कूस पर च़ा कऽ हनकर वस बाँ लट कऽ हनका सभ पर लचटी िगा दे िलिन जे पतेक के की िेबाक चाहीर 25 तेसर घंटा भऽ गेिै आ ओ सभ हनका कूस पर च़ा दे िलिनर 26 ओकर आरोपक ऊपर लिखि गेि ि​ि, “यहदी सभक राजार” 27 हनका संग दू टा चोर केँ कूस पर च़ा दै त िलिर एकटा दलहना कात आ दोसर बामा कातर 28 धम्शास् त पूरा भऽ गेि जे कहै त अलि जे, “ओ अपराधी सभक संग लगनि गेिाहर” 29 ओलह ठाम सँ गुजरय बिा िोक सभ माि लहिाबैत हनका गारर कऽ कऽ कहिलिन, “अह, अहाँ जे मन् लदर केँ तोलड कऽ तीन लदन मे बनबैत िीर 30 अपना केँ बचाउ आ कूस पर सँ उतरर जाउर 31 तलहना मुकखया पुरोलहत सभ सेहो शासी सभक संग उपहास करै त कहिलिन, “ओ दोसरो केँ बचा िेिलनर अपना केँ ओ नलह बचा सकैत अलिर

अधाय 15 1 भोरे -भोर मुख् यपुरोलहत सभ बू़-पुरान सभ आ धम्-लशकक सभ आ समस पररषद् सँ लवचार-लवमश् कयिलन आ यीशु केँ बाकन कऽ िऽ गेिाह आ लपिातुस केँ सौंप दे िलनर 2 लपिातुस हनका पुि​िलिन, “की अहाँ यहदी सभक राजा िी?” यीशु उ्र दे िलिन, “ अहाँ ई बात कहै त िीर” 3 मुखपुरोलहत सभ हनका पर बहत रास आरोप िगौिलन, मुदा ओ लकिु ओ उ्र नलह दे िलनर 4 लपिातुस फेर पुि​िलिन, “की अहाँ लकिु उ्र नलह दऽ रहि िी?” दे खू, ओ सभ अहाँ क लवरद कतेक गवाही दै त िलिर 5 मुदा यीशु एखन धरर लकिु ओ उ्र नलह दे िलिनर ते ँ लपिातुस आशय्चलकत भ’ गेिाहर 6 ओलह भोज मे ओ हनका सभक िेि एकटा कैदी केँ िोलड दे िलिन, जकरा ओ सभ चाहलिर

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मरकुस के सुसमाचार

32 इसाएिक राजा मसीह कूस पर सँ उतरर जाउ, जालह सँ हम सभ दे कख कऽ लवश् वास करीर हनका संग कूस पर च़ाओि गेि िोक सभ हनका लनना कयिकलनर 33 िठम बजे भेिा पर नवम बजे धरर पूरा दे श पर अनार भऽ गेिर 34 नौम बजे यीशु जोर-जोर सँ लचलचया उठिाह, “ एिोई, एिोई, िामा सबकनी?” जकर अि् अलि, “हमर परमेश् वर, हमर परमेश् वर, अहाँ हमरा लकएक िोलड दे िहँ ?” 35 ओतय ठा़ लकिु िोक सभ ई बात सुलन कऽ कहिलिन, “दे खू, ओ एलियाह केँ बजा रहि िलिर” 36 एक गोटे दौलड कऽ एकटा संज मे लसरका भरर कऽ एकटा ख़ पर राकख कऽ ओकरा पीबय दे िक आ कहिक, “अहाँ िोडूर दे खू जे एलियास ओकरा उतारय िेि आओत लक नलहर 37 यीशु जोर-जोर सँ लचलचया उठिाह आ भूत िोलड दे िलनर 38 मंलदरक पदा् ऊपर सँ नीचाँ धरर दू भाग मे फालट गेिर 39 जखन हनका सामने ठा़ सेनापलत दे खिलन जे ओ एतेक लचलचया रहि िलि आ पार िोलड रहि िलि, तखन ओ कहिलिन, “ई आदमी स्े परमेश् वरक पुत ि​िाहर” 40 ओलह मे सँ स् तीगर सभ सेहो दू र लदस तकैत ि​िीह, जालह मे मररयम मगदिीनी, याकूब िोट आ योसेक माय मररयम आ सिोमी ि​िीहर 41 (ओ गिीि मे रहिा पर हनकर पािाँ -पािाँ चिैत ि​िाह आ हनकर सेवा करै त ि​िाहर) आओर बहत रास स् तीगर जे हनका संग यरशिेम गेि ि​िीहर 42 आब जखन साँ झ भऽ गेि ि​ि, लकएक तँ ओ तैयारी ि​ि, अिा् त् लवशाम-लदन सँ एक लदन पलहनेर “ 44 लपिातुस आशय्चलकत भऽ गेिाह जे ओ पलहने सँ मरर गेि िलिर 45 जखन ओ सेनापलत केँ ई बात बुलझ गेिलन तँ ओ िाश यूसुफ केँ दऽ दे िलिनर 46 ओ नीक सन लिनन कीलन कऽ ओकरा उतारर कऽ ओकरा लिनेन मे िपेलट कऽ पािर सँ काटि कब मे राकख दे िक आ कबक दरबजा पर पािर गुडका दे िकर 47 मररयम मगदिीनी आ योसेक माय मररयम हनका कतय राखि गेि ि​िलन से दे खिलनर

6 ओ ओकरा सभ केँ कहिलिन, “अहाँ सभ नलह डे राउर ओ एतय नलह िलि, दे खू ओ सभ ओलह सान पर जतय ओ सभ ओकरा राकख दे ने ि​िाहर” 7 मुदा जाउ, हनकर लशष् य सभ आ पतुस केँ कलह लदअ जे ओ अहाँ सभ सँ पलहने गिीि जाइत िलिर 8 ओ सभ जली-जली लनकलि कऽ कब सँ भालग गेिर ओ सभ काँ लप उठि आ चलकत भऽ गेिर लकएक तँ ओ सभ डरा गेि ि​िर 9 सपाहक पलहि लदन जखन यीशु भोरे -भोर जीलब उठिाह तखन ओ पलहने मररयम मगदिीनी केँ पकट भेिाह, लजनका मे सँ ओ सातटा दु षाटा केँ बाहर लनकािने ि​िाहर 10 ओ सभ जा कऽ हनका संग रहलनहार सभ केँ कहिलिनर 11 ओ सभ जखन ई सुलन कऽ जे यीशु जीलवत िलि आ हनका सँ दे खि गेिाह, तखन ओ सभ लवश् वास नलह कयिलनर 12 तकर बाद ओ दू गोटे केँ चिैत-लफरै त आ दे श मे जाइत काि दोसर रप मे पकट भेिाहर 13 ओ सभ जा कऽ शेष िोक सभ केँ ई बात कहिलिनर 14 तकर बाद ओ एगारह गोटे केँ भोजनक समय मे दश्न कयिलन आ हनका सभक अलवशास आ कठोर हदय सँ डाँ लट दे िलन, लकएक तँ ओ सभ हनका जीलब उठिाक बाद जे सभ हनका दे खने ि​िाह, हनका सभ पर लवश् वास नलह कयिलनर 15 ओ हनका सभ केँ कहिलिन, “ अहाँ सभ संसार मे जाउ आ सभ पारी केँ सुसमाचार पचार करर” 16 जे लवश् वास करै त अलि आ बपलतस् मा िैत अलि, से उदार पाओतर मुदा जे लवश् वास नलह करत से दोषी ठहराओि जायतर 17 ई सभ लचन् ह सभ लवश् वास करयविा सभक पािाँ चितर हमर नाम पर ओ सभ दु ष् टात् मा सभ केँ भगाओतर ओ सभ नव भाषा मे बाजतर 18 ओ सभ साँ प केँ पकलड िेतर जँ ओ सभ कोनो घातक वसु पीबलि तँ ओकरा सभ केँ कोनो नुकसान नलह होयतर ओ सभ बीमार सभ पर हाि राखत आ ओ सभ ठीक भऽ जेताहर 19 तखन परमेश् वर हनका सभ सँ बात कयिा पर हनका स् वग् मे िऽ गेिाह आ परमेश् वरक दलहना कात बैसिाहर 20 ओ सभ जा कऽ सभ ठाम पचार कयिलन, पभु हनका सभक संग काज करै त ि​िाह आ हनका सभक बाद लचन् त सभक संग वचन केँ पुष कयिलनर आमीनर

अधाय 16 1 लवशाम-लदन बीतिा पर मररयम मगदिीनी आ याकूब आ सिोमीक माय मररयम मीठ मसािा कीलन िेिलन जालह सँ ओ सभ आलब कऽ हनका अलभषेक करलिर 2 सपाहक पलहि लदन भोरे -भोर ओ सभ सूय्दय मे कब पर पहँ चिाहर 3 ओ सभ आपस मे कहिलिन, “कबरक दरबजा पर सँ पािर के गुडका दे त?” 4 जखन ओ सभ दे खिक तँ दे खिक जे पािर गुडलक गेि अलि, लकएक तँ ओ पािर बहत पैघ ि​िर 5 ओ सभ कब मे पवेश करै त दे खिक जे एकटा युवक केँ दलहना कात बैसि ि​ि, जे नमहर उजर वस पलहरने ि​िर ओ सभ घबरा गेिाहर

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लूका के सुसमाचार

21 लति जिरयाहि पतीरा मे लागल िल आ आशयाचकित िल जे ओ एतेि कतन धरर मन् कतर मे रहलाह। 22 ओ बाहर कनिलला पर हनिा सभ सँ गप नकह िऽ सिलाह आ ओ सभ बुकझ गेलाह जे ओ मन् कतर मे ितनत तशान ते खने िकथ, किएि तँ ओ हनिा सभ िेँ इशारा ियलकन आ बेजुबान रकह गेलाह। 23 ओ अपन सेिाि कतन पूरा हतइते अपन घर कतस किता भेलाह। 24 ओकह कतनि बात हनिर पती एकलजाबेथ गभािती भऽ पाँ च मास धरर नुिा िऽ िहलकथन। 25 जाकह कतन मे ओ हमरा कतस तिलकन, ताकह कतन मे पभु हमरा संग एकह तरहे ँ विहार ियलकन जाकह सँ मनुद् यि बीच हमर अपमान िेँ तू र ियल जाय। 26 िठम मास मे परमेश् िरि कतस सँ कजबाईल स् िगातूत िेँ नासरत नामि गलील नगर मे पठा ते ल गेलकन। 27 ताऊति िंशज यूसुि नामि युि​ि सँ कि​िाह ियलकन। िुमारी िे नाम मररयम िे लै। 28 तखन स् िगातूत हनिा लग आकब िऽ िहलकथन, “हे यौ परमेश् िर परमेश् िर परमेश् िर अहाँ ि संग िकथ। 29 ओ हनिा ते खख हनिर ई बात सँ घबरा गेलीह आ मतन मे आकब गेलीह जे ई ितन तरहि अकभिातन हतयत। 30 स् िगातूत हनिा िहलकथन, “हे मररयम, नकह डे राउ, किएि तँ अहाँ परमेश् िरि अनुगह पाकब गेलहँ ।” 31 ते खू, अहाँ अपन गभा मे गभािती भऽ िऽ एिटा पुत पैता िरब आ ओिर नाम यीशु राखब। 32 ओ महान हतयत आ परमेश् िरि पुत िहल जायत। 33 ओ यािूबि घराना पर अनन िाल धरर राज िरत। ओिर राजि ितनत अंत नकह हतयत। 34 मररयम स् िगातूत िेँ िहलकथन, “हम एि आतमी िेँ नकह कचनै त िी, ई ितना हतयत?” 35 स् िगातूत उतर ते लकथन, “पकित आत् मा ततरा पर आकब जायत आ परमेश् िरि सामथ्ा य ततरा पर िा जायत। 36 ते खू, अहाँ ि कपकतयौत बकहन एकलजाबेथ सेहत बु़ापा मे एिटा बेटाि गभािती भऽ गेल िकथ। 37 परमेश् िरि लेल ितनत बात असंभि नकह हतयत। 38 मररयम िहलकथन, “ते खू, पभुि तासी िकथ। अहाँ ि िचनि अनुसार हमरा लेल हत।” स् िगातूत हनिा सँ किता भऽ गेलाह। 39 ओकह कतन मे मररयम उकठ िऽ हडबडा िऽ पहाडी इलािा मे, यहताि एिटा नगर मे चकल गेलीह। 40 जिरयाहि घर मे जा िऽ एकलजाबेथ िेँ प्ाम ियलकन। 41 एकलजाबेथ मररयमि अकभिातन सुकन िऽ ओ बचा हनिर पेट मे िूकत गेल। एकलजाबेथ पकित आत् मा सँ भरर गेलीह। 42 ओ जतर-जतर सँ बजलीह, “अहाँ स् तीग् मे धन िी आ अहाँ ि गभाि िल धन अकि।” 43 हमरा ई ितय सँ अकि जे हमर पभुि माय हमरा लग आकब जाकथ? 44 ते खू, जकहना अहाँ ि अकभिातनि आिाज हमरा िान मे बाजल तकहना ओ बचा हमरा पेट मे हदा सँ उिकल गेल। 45 ओ धन िकथ जे किश् िास ियलकन, किएि तँ पभुि कतस सँ जे बात हनिा िहल गेल िलकन से पूरा हतयत। 46 मररयम िहलकथन, “हमर पा्ी पभुि मकहमा िरै त अकि। 47 हमर आत् मा हमर उ्ारिता​ा परमेश् िर मे आनखनत भेल अकि। 48 किएि तँ ओ अपन तासीि नीच समकत िेँ धान मे रखैत िकथ, किएि तँ ते खू, आब सँ सभ पी़ी हमरा धन िहत।

अधाय 1 1 किएि तँ बहतत लति सभ अपना सभि बीच जे बात सभ पर किश् िास ियल गेल अकि, तिरा सभि पचार-पसार िरबाि लेल हाथ मे उठौने िकथ। 2 जेना ओ सभ हमरा सभि हाथ मे सौंपने िलाह, जे सभ शुर सँ प्रतशय आ िचनि सेि​ि िलाह। 3 हे परम शेर कथयतकिलस, हमरा सभ िेँ पकहने सँ सभ बात िेँ पूरा तरहे ँ बुझल िल। 4 जाकह बाति अहाँ िेँ कशरा ते ल गेल अकि, तिर कनशय अहाँ िेँ जाकन सिब। 5 यहकतयाि राजा हे रतते सि समय मे जिरयाह नामि एिटा पुरतकहत िल जे अकबयाि िंशि िल, ओिर पती हारनि बेटी मे सँ िल आ ओिर नाम एकलजाबेथ िल। 6 ओ तु नू गतटे परमेश् िरि समर धमय िलाह, पभुि सभ आजा आ कनयम मे कनत्द चलैत िलाह। 7 हनिा सभि ितनत संतान नकह िलकन, किएि तँ एकलजाबेथ बंजर िलीह आ तु नू गतटे ि उम बक़ गेल िलकन। 8 जखन ओ अपन कमि अनुसार परमेश् िरि समर पुरतकहति िाज पूरा िरै त िलाह। 9 पुरतकहति पथाि अनुसार हनिर भाग परमेश् िरि मन् कतर मे जाइत िाल धूप जरे बाि िलकन। 10 धूप-पानीि समय मे लति​ि पूरा भीड बाहर पाथाना िऽ रहल िल। 11 धूप-िेतीि तकहना िात परमेश् िरि स् िगातूत हनिा तशान ियलकन। 12 जिरयाह हनिा ते खख िऽ घबरा गेलाह आ भय भऽ गेलकन। 13 मुता स् िगातूत हनिा िहलकथन, “जिराह, नकह डे राउ, किएि तँ अहाँ ि पाथाना सुनल गेल अकि। ततहर पती एकलजाबेथ ततरा एिटा बेटा पैता िरतीह आ ओिर नाम यूहना राखबह। 14 अहाँ िेँ आनन आ आनन भेटत। हनिर जन पर बहतत गतटे आनखनत हे ताह। 15 किएि तँ ओ पभुि नजरर मे महान हतयत आ ने मकतरा पीत आ ने मदपान। ओ अपन मायि ितखख सँ पकित आत् मा सँ भरल रहत। 16 ओ इसाएलि बहतत लति िेँ अपन परमेश् िर परमेश् िर कतस घुरताह। 17 ओ एकलयाहि आत् मा आ सामथ्ा य मे हनिा सँ आगू बक़ िऽ कपता-कपता सभि मतन िेँ सन् तान सभि कतस आ आजा नकह मानकनहार सभि मतन िेँ धमय लति​ि बुख् कतस घुमा ते त। पभुि लेल तैयार लति िेँ तैयार िरबाि लेल। 18 जिरयाह स् िगातूत िेँ िहलकथन, “हम ई बात ितना बुझब?” किएि तँ हम बू़ िी, आ हमर पती सेहत बू़ िी। 19 स् िगातूत हनिा िहलकथन, “हम कजबाईल िी, जे परमेश् िरि समर ठा़ िी। हम अहाँ सँ गप िरबाि लेल पठाओल गेल िी आ अहाँ िेँ ई शुभ समाचार सुनाबय लेल पठाओल गेल िी।” 20 ते खू, जाबत धरर ई सभ िाज पूरा नकह हतयत, ताबत धरर अहाँ गूंगा रहब आ बाजऽ मे सरम नकह रहब, किएि तँ अहाँ हमर बात पर किशास नकह िरै त िी जे अपन समय मे पूरा हतयत।

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लूिा िे सुसमाचार

49 किएि तँ जे पराकमी अकि, से हमरा संग बहत पैघ िाज ियलि। आ ओिर नाम पकित अकि। 50 यीशुि तया ओकह सभ पर रहै त िकन जे हनिा डरै त िकथ, पी़ी-तर-पी़ी। 51 ओ अपन बाँ कह सँ सामरा ते खौलकन। घमंडी लति िेँ हतयि िलना मे किकडया ते ने िकथ। 52 ओ पराकमी सभ िेँ अपन आसन पर सँ उतारर िऽ नीचाँ ि लति सभ िेँ ऊपर उठौलकन। 53 ओ भूखल िेँ नीि-नीि चीज सँ भरर ते लकन। आ धकनि लति िेँ ओ खाली पठा ते लकन। 54 ओ अपन तयाि सर् मे अपन सेि​ि इसाएल िेँ पिडने िकथ। 55 जेना ओ हमरा सभि पूिाज, अबाहम आ हनिर िंशज सँ अनन िाल धरर िहने िलाह। 56 मररयम िरीब तीन मास धरर हनिा संग रहलाह आ अपन घर िापस आकब गेलीह। 57 एकलजाबेथि पसि​ि पूरा समय आकब गेलकन। ओ एिटा बेटाि जन ते लकन। 58 ओिर पडतसी आ ओिर कपकतयौत भाइ सभ सुनलिै जे पभु ओिरा पर बहत तया िेलिै। ओ सभ हनिा संग आनखनत भऽ गेलाह। 59 आठम कतन ओ सभ बचाि खतना िरऽ लेल अयलाह। ओ सभ ओिरा जिरयाह, ओिर कपताि नाम पर राखख ते लि। 60 हनिर माय उतर ते लकथन, “एना नकह। मुता हनिा यूहन् ना िहल जायत। 61 ओ सभ हनिा िहलकथन, “अहाँ ि पररजन मे सँ कियत एहन नकह अकि जे एकह नाम सँ बजाओल गेल हत।” 62 ओ सभ हनिर कपता िेँ संिेत ियलकन जे ओ ितना हनिा बजाबय चाहै त िकथ। 63 ओ कलखबाि पाटी माँ कग िऽ कलखलकन जे, “ओिर नाम यूहन् ना अकि।” आ ओ सभ सभ आशयाचकित भऽ गेल। 64 तुरन हनिर मुँह खुकज गेलकन आ जीह खुकज गेलकन। 65 हनिा सभि चार िात रहकनहार सभ लति सभ िेँ भय भऽ गेलकन आ ई सभ बात यहकतयाि समस पहाडी इलािा मे पचाररत भऽ गेलकन। 66 एकह बात सभि बात सुनकनहार सभ अपना मतन मे राखख िऽ िहलकथन, “ई िेहन बचा हतयत?” पभुि हाथ हनिा संग िल। 67 ओिर कपता जिरयाह पकित आत् मा सँ भरर गेलाह आ भकिषिा्ी ियलकन। 68 इसाएलि परमेश् िर परमेश् िरि धन हतउ। किएि तँ ओ अपन लति सभ िेँ घुकम िऽ मुि् त ियलकन। 69 ओ अपन सेि​ि ताऊति घर मे हमरा सभि लेल उ्ारि सीग ं उठौलकन। 70 जेना ओ अपन पकित पि​ि् ता सभि मुँह सँ िहने िलाह जे संसारि पाराकह सँ अकि। 71 जाकह सँ हम सभ अपन शतु सभ सँ आ हमरा सभ सँ घृ्ा िरयिला सभि हाथ सँ उ्ार पाकब सिब। 72 अपन पूिाज सभि पकतजा ियल गेल तया िेँ पूरा िरबाि लेल आ हनिर पकित िाचाि सर् िरबाि लेल। 73 ओ हमरा सभि पूिाज अबाहम िेँ जे शपथ गह् ियलकन। 74 ओ हमरा सभ िेँ ई अनुमकत ते कथन जे हम सभ अपन शतु सभि हाथ सँ मुक भऽ िऽ कनभयि हनिर सेिा िऽ सिब। 75 जीिन भरर हनिा सामने पकित आ धाकमािता मे रह।

76 हे बची, अहाँ परमेश् िरि पि​ि् ता िहल जाएब, किएि तँ अहाँ पभुि मुँहि सतझाँ जा िऽ हनिर बाट तैयार िरब। 77 ओ अपन पापि रमा दारा अपन पजा सभ िेँ उ्ारि जान ते ब। 78 हमरा सभि परमेश् िरि ितमल तयाि िार्े।ँ जाकह सँ ऊपर सँ कतनि िसंत हमरा सभ िेँ आकब गेल अकि। 79 अनार आ मृ्ुि िाया मे बैसल लति सभ िेँ इजतत ते बाि लेल हमरा सभि पएर िेँ शाखनि बाट मे मागातशान िरबाि लेल। 80 ओ बचा ब़ै त गेल आ आत् मा मजबूत हतइत गेल आ इसाएलि समर पगट िरबाि कतन धरर मरभूकम मे रहल। अधाय 2 1 ओकह समय मे सीजर अगसि आजा ते ल गेल जे पूरा संसार मे िर लगाओल जाय। 2 (आ ई िर पकहल बेर तखन भेल जखन िुरे कनयुस सीररयाि गिनार िलाह।) 3 सभ कियत अपन-अपन नगर मे िर लगाबय लेल गेलाह। 4 यूसुि सेहत नासरत नगर सँ गलील सँ यहकतया मे ताऊति नगर मे चकल गेलाह, जिरा बेतलेहेम िहल जाइत िै ि। (किएि तँ ओ ताऊति घर आ िंशि िलाह।) 5 गभािती भेला पर हनिर कि​िाकहत पती मररयमि संग िर लगाओल जायत। 6 जखन ओ सभ ओतऽ रहकथ ताबत हनिर पसि​ि कतन पूरा भऽ गेलकन। 7 ओ अपन जेठ पुत िेँ लऽ िऽ िस मे लपेकट िऽ चरबाह मे राखख ते लकथन। िार् सराय मे हनिा लतिकनि लेल ितनत जगह नकह िलकन। 8 ओकह ते श मे चरबाह सभ खेत मे रहै त िल आ राकत मे अपन भेड ँ ाि पहरा तै त िल। 9 ते खू, परमेश् िरि स् िगातूत हनिा सभ पर आकब गेलाह आ पभुि मकहमा हनिा सभि चार िात चमकि गेलकन। 10 स् िगातूत हनिा सभ िेँ िहलकथन, “नकह डर, किएि तँ हम अहाँ सभ िेँ बहत आननि शुभ समाचार तऽ रहल िी जे सभ लति​ि लेल हतयत।” 11 अहाँ सभि लेल आइ ताऊति नगर मे एिटा उ्ारिता​ा ि जन भेल अकि, जे मसीह पभु िकथ। 12 ई अहाँ सभि लेल कचन् ह। अहाँ सभ िेँ ओकह बचा िेँ लपेटल िपडा मे लपेटल भेटत, जे चरबाह मे पडल अकि। 13 अचानि स् िगातूति संग स् िगयय सेनाि भीड परमेश् िरि सुकत िऽ िऽ िहलि। 14 परमेश् िरि मकहमा हतउ, आ पृथ् िी पर शान् कत आ मनुद् यि पकत सदािना। 15 जखन स् िगातूत सभ हनिा सभ सँ स् िगा मे चकल गेलाह तखन चरबाह सभ एि-ततसर सँ िहलकथन, “आउ, आब बेतलेहेम जा िऽ ई घटना ते खब जे पभु दारा ियल गेल अकि।” हम सब। 16 ओ सभ जलबाजी मे आकब िऽ मररयम, यूसुि आ बचा िेँ चरबाह मे पडल ते खलकन। 17 ओ सभ एिरा ते खख िऽ ओ सभ एकह बचाि किदय मे जे बात िहल गेल िल, तिरा सभ िेँ पचाररत ियलकन।

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18 ई बात सुनकनहार सभ लति सभ आशयाचकित भऽ गेलाह जे चरबाह सभ हनिा सभ िेँ िहल गेल िलकन। 19 मररयम एकह सभ बात िेँ अपना मतन मे मनन िरै त रहलीह। 20 चरबाह सभ ओकह सभ बाति लेल परमेश् िरि मकहमा आ सुकत िरै त घुरर गेलाह, जेना हनिा सभ िेँ िहल गेल िलकन। 21 जखन बचाि खतना िरबाि आठ कतन पूरा भेल तखन ओिर नाम यीशु राखल गेल, जिर नाम स् िगातूत दारा गभा मे रहबा सँ पकहने राखल गेल िल। 22 मूसाि धमा-कनयमि अनुसार ओिर शुख्िर्ि कतन पूरा भेला पर ओ सभ हनिा यरशलेम लऽ िऽ पभुि समर पसुत ियलकन। 23 (जेना कि पभुि कनयम मे कलखल अकि जे , “जे पुरद गभा खतलत, ओिरा पभुि लेल पकित िहल जायत।” 24 परमेश् िरि कनयम मे जे िहल गेल अकि, “एि जतडी िबूतर िा तू टा िबूतरि बचाि अनुसार बकल च़ाओल जाय।” 25 यरशलेम मे एि आतमी िल, जिर नाम कशमतन िल। िएह आतमी धमय आ भखकशील िल आ इसाएलि सान्नाि पतीरा मे िल। 26 पकित आत् मा दारा हनिा ई पगट ियल गेलकन जे पभुि मसीह िेँ ते खबा सँ पकहने ओ मृ्ु नकह ते खकथ। 27 ओ आत् माि दारा मन् कतर मे आकब गेलाह। 28 तखन यीशु हनिा ितरा मे लऽ िऽ परमेश् िरि आशीद तऽ िहलकथन। 29 पभु, आब अहाँ अपन सेि​ि िेँ अपन िचनि अनुसार शाखनपूिाि किता हतमय कतयौि। 30 किएि तँ हमर आँ खख अहाँ ि उ्ार ते खख लेलि। 31 जे अहाँ सभ लति​ि सतझाँ तैयार िएने िी। 32 गैर-यहती सभ िेँ आ अहाँ ि पजा इसाएलि मकहमा िेँ रतशन िरबाि लेल इजतत। 33 यूसुि आ हनिर माय हनिा बारे मे जे बात िहल गेल िलकन से ते खख आशयाचकित भऽ गेलाह। 34 कशमतन हनिा सभ िेँ आशीिा​ा त ते लकथन आ अपन माय मररयम िेँ िहलकथन, “ते खू, ई बचा इसाएल मे बहतत लति​ि पतन आ जीकब उठबाि लेल राखल गेल अकि। आ एिटा एहन कचनि लेल जिर किरतध ियल जायत। 35 (हँ , तलिार ततहर अपन पा् मे सेहत िे तत) जाकह सँ बहतत हतयि किचार पिट भ’ जाय। 36 आसेर िंशि िनुएलि बेटी हना एिटा पि​ि् ता िलीह। 37 ओ िरीब चारर सतरर िदाि किधिा िलीह जे मंकतर सँ नकह किता भेलीह, बल् कि राकत-कतन उपिास आ पाथाना िरै त परमेश् िरि सेिा िरै त िलीह। 38 ओ ओकह र् आकब िऽ पभु िेँ धनिात ते लकन आ यरशलेम मे मतरि पतीरा मे रहल सभ लति सभ सँ हनिर बारे मे बजलीह। 39 ओ सभ पभुि कनयमि अनुसार सभ िाज पूरा िऽ िऽ ओ सभ गलील, अपन नगर नासरत घुरर गेलाह। 40 ओ बचा ब़ै त गेल आ बुख् सँ भरल आत् मा मजबूत भऽ गेल। 41 हनिर माता-कपता सभ साल िसह-पाबकन मे यरशलेम जाइत िलाह। 42 यीशु बारह िदाि भेला पर ओ सभ भतजि पथाि अनुसार यरशलेम चकल गेलाह।

43 ओ सभ कतन पूरा भेला पर जखन ओ सभ घुरर िऽ अबैत िलाह तँ बचा यीशु यरशलेम मे रकह गेलाह। यूसुि आ ओिर माय िेँ ई बात नकह बुझल िलैि। 44 मुता ओ सभ हनिा संगमे रहल बुकझ एि कतनि याता किता भेलाह। ओ सभ अपन पररजन आ पररकचत लति​ि बीच हनिा तिलकन। 45 जखन ओ सभ हनिा नकह भेटलकन तँ ओ सभ हनिा तिबाि लेल यरशलेम घुरर गेलाह। 46 तीन कतनि बात ओ सभ हनिा मन् कतर मे, िैदि बीच बैसल पाकब गेलाह, जे तु नू गतटे हनिा सभि बात सुनैत िलाह आ हनिा सभ सँ प् पूिैत िलाह। 47 हनिर बात सुनकनहार सभ हनिर समझ आ उतर ते खख आशयाचकित भऽ गेलाह। 48 हनिा ते खख ओ सभ आशयाचकित भऽ गेलाह, तखन हनिर माय हनिा िहलकथन, “बौआ, अहाँ हमरा सभि संग एहन विहार किएि िेलहँ ?” ते खू, हम आ अहाँ ि कपता अहाँ िेँ तु खी भ’ ि’ तिलहँ ।” 49 ओ हनिा सभ िेँ पुिलकथन, “ अहाँ सभ हमरा ितना तिलहँ ?” िी अहाँ सभ नकह जे हमरा अपन कपताि िाज मे रहबाि चाही? 50 ओ सभ हनिा सभ िेँ िहल बात नकह बुझलकन। 51 यीशु हनिा सभि संग जा िऽ नासरत आकब हनिा सभि अधीन रहलाह। 52 यीशु बुख् आ ित मे बक़ गेलाह आ परमेश् िर आ मनुद् यि अनुगह मे बक़ गेलाह। अधाय 3 1 कतबेररयस िैसरि शासनि पनहम िदा मे, पतख्युस कपलातुस यहकतयाि राजपाल, हे रतते स गलील पते शि राजपाल, ओिर भाय किकलप इटु ररया आ ताितकनकटस रेति राजपाल, आ लाइसाकनया अकबलीनि राजपाल। 2 हना आ िाइिा महापुरतकहत िलाह, मुता जंगल मे जिरयाहि पुत यूहन् ना िेँ परमेश् िरि िचन आयल। 3 ओ पापि रमाि लेल पशाताप िरबाि बपकतस् माि पचार िरै त यरतनि चारिाति समस ते श मे आकब गेलाह। 4 जेना यशायाह पि​ि् ताि िचनि पुसि मे कलखल अकि जे , “मरभूकम मे एिटाि आिाज, “पभुि बाट तैयार िर, हनिर बाट सतझ िर।” 5 हर घाटी भरर जायत, हर पहाड आ पहाडी नीचाँ खसा ते ल जायत। टे ़-टे ़ बाट सतझ भ’ जायत, आ खुरतु रा बाट कचिना भ’ जायत। 6 सभ मनुष परमेश् िरि उ्ार ते खख लेत। 7 तखन यीशु बपकतस् मा लेबऽ लेल कनिलल भीड सभ िेँ िहलकथन, “हे साँ पि पी़ी, आगामी कतध सँ पलायन िरबाि लेल िे चेतौने अकि?” 8 ते ँ पशाताप िरबाि यतग िल पैता िर आ अपना भीतर ई नकह िहब जे , ‘हमरा सभि कपता अबाहम िकथ, किएि तँ हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे परमेश् िर एकह पाथर सभ सँ अबाहमि संतान पैता िरबा मे सरम िकथ।” 9 आब गाि​ि जकड धरर िुलाडी राखख ते ल गेल अकि। 10 लति सभ हनिा सँ पुिलकथन, “तखन हम सभ िी िरब?”

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11 ओ हनिा सभ िेँ उतर ते लकथन, “जेिरा लग तू टा ितट अकि, ओिरा ओ ितट नकह अकि। आ जिरा भतजन अकि, तिरा सेहत एहने िरऽ। 12 तखन िर लेकनहार सेहत बपकतस् मा लेबाि लेल आकब िऽ पुिलकथन, “गुर, हम सभ िी िरब?” 13 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “अहाँ सभ िेँ जे कि​िु कनधा​ा ररत ियल गेल अकि, ताकह सँ बेसी नकह िर।” 14 कसपाही सभ सेहत हनिा सँ पूिलकथन, “हम सभ िी िरब?” ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ि​िरत पर ितनत कहं सा नकह िर आ ने ि​िरत पर झूठ आरतप लगाउ। आ अपन मजतू री पर संतुष रह। 15 जकहना लति सभ पतीरा मे िल आ सभ लति मतन मे यूहना पर कचंतन िरै त िल जे ओ मसीह िकथ िा नकह। 16 यूहन् ना सभ िेँ उतर ते लकथन, “हम अहाँ सभ िेँ पाकन सँ बपकतस् मा तै त िी। मुता हमरा सँ बेसी शखकशाली िेओ आकब रहल अकि, जिर जूताि पटी हम खतलबाि यतग नकह िी। 17 ओिर हाथ मे ओिर खंभा िै ि आ ओ अपन िशा िेँ नीि जिाँ साि िऽ लेत आ गहम िेँ अपन भंडार मे जमा िरत। मुता भूसा िेँ ओ अकमट आकग मे जरा ते त। 18 ओ अपन उपते श मे आरत बहत रास बात लति सभ िेँ पचार ियलकन। 19 मुता राजिीय हे रतते स अपन भाय किकलप िेर पती हे रतकतया आ हे रतते स दारा ियल गेल सभटा तु षमाि िार्े ँ हनिा दारा डाँ टल गेलकन। 20 सभ सँ बेसी ई बात जतकड ते लकन जे ओ यूहन् ना िेँ जेल मे बंत िऽ ते लकन। 21 जखन सभ लति बपकतस् मा लेलि तँ यीशु सेहत बपकतस् मा लैत आ पाथाना िरै त स् िगा खुकज गेल। 22 पकित आत् मा िबूतर जिाँ शरीरि आिार मे हनिा पर उतरर गेलाह आ स् िगा सँ एिटा आिाज आयल जे “अहाँ हमर कपय पुत िी।” अहाँ मे हम पसन िी। 23 यीशु अपन उमेर िरीब तीस िदाि भऽ गेलाह। 24 ओ मति पुत िल, जे लेिीि पुत िल, जे मलीि पुत िल, जे जनाि पुत िल, जे यूसुि​ि पुत िल। 25 ओ मताकथयासि पुत िल, जे आमतसि पुत िल, जे नाउमि पुत िल, जे एसीि पुत िल, जे नगे िे पुत िल। 26 ओ माथि पुत िल, जे मतीयासि पुत िल, जे सेमेईि पुत िल, जे यूसुि​ि पुत िल, जे यहताि पुत िल। 27 ओ यतआनाि पुत िल, जे रे साि पुत िल, जे सतरतबाबेलि पुत िल, जे सलाकथएलि पुत िल, जे नेरीि पुत िल। 28 ओ मलीि पुत िल, जे अतीि पुत िल, जे ितसमि पुत िल, जे एलमततामि पुत िल, जे एरि पुत िल। 29 ओ यतसेि पुत िल, जे एलीएजरि पुत िल, जे यतरीमि पुत िल, जे मति पुत िल, जे लेिीि पुत िल। 30 ओ कशमतनि पुत िल, जे यहताि पुत िल, जे यूसुि​ि पुत िल, जे यतनानि पुत िल, जे एकलयािीमि पुत िल। 31 ओ मेलेआि पुत िल, जे मेनानि पुत िल, जे मतथाि पुत िल, जे नाथनि पुत िल, जे ताऊति पुत िल। 32 ओ जेसीि पुत िल, जे ओबेति पुत िल, जे बूजि पुत िल, जे सलतनि पुत िल, जे नासतनि पुत िल। 33 ओ अमीनातबि पुत िल, जे अरामि पुत िल, जे एसतमि पुत िल, जे िारे सि पुत िल, जे यहताि पुत िल।

34 ओ यािूबि पुत िल, जे इसहाि​ि पुत िल, जे अबाहमि पुत िल, जे थाराि पुत िल, जे नाितरि पुत िल। 35 ओ सरचि पुत िल, जे रगौि पुत िल, जे िालेकि पुत िल, जे हे बरि पुत िल, जे सालाि पुत िल। 36 ओ िैननि पुत िल, जे अिा​ा कति पुत िल, जे सेमि पुत िल, जे नतआि पुत िल, जे लामेि​ि पुत िल। 37 ओ मथुसाला िे पुत िल, जे हनति िे बेटा िल, जे यारे त िे बेटा िल, जे मलेएल िे बेटा िल, जे िैनन िे बेटा िल। 38 ओ हनतसि पुत िल, जे सेति पुत िल, जे आतमि पुत िल, जे परमेश् िरि पुत िल। अधाय 4 1 यीशु पकित आत् मा सँ भरल यरतन सँ घुरर अयलाह आ आत् मा दारा कनजान रेत मे लऽ गेलाह। 2 चालीस कतन धरर शैतानि परीरा मे पडल रहलाह। ओकह कतन मे ओ कि​िु नकह खाइत िलाह, आ जखन ओ सभ समाप भेलाह तखन हनिा भूख लाकग गेलकन। 3 शैतान हनिा िहलकथन, “जँ अहाँ परमेश् िरि पुत िी तँ एकह पाथर िेँ रतटी बनेबाि आजा कतयौि।” 4 यीशु हनिा उतर ते लकथन, “ धमाशास् त मे कलखल अकि जे , “मनुद् य मात रतटी सँ नकह, बल् कि परमेश् िरि पत् येि िचन सँ जीकित रहत।” 5 शैतान ओिरा एिटा ऊँच पहाड पर लऽ िऽ र् भरर मे ओिरा संसारि सभ राज ते खा ते लि। 6 शैतान हनिा िहलकथन, “हम अहाँ िेँ ई सभ सामरा आ हनिा सभि मकहमा ते बकन। आ जिरा हम चाहब ओिरा तऽ तै त िी। 7 ते ँ जँ अहाँ हमर आराधना िरब तँ सभ कि​िु अहाँ ि हतयत। 8 यीशु उतर ते लकथन, “ शैतान, हमरा पािू हकट जाउ, किएि तँ धमाशास् त मे कलखल अकि जे , “अहाँ अपन पभु परमेश् िरि आराधना िर आ मात हनिर सेिा िर।” 9 ओ ओिरा यरशलेम लऽ िऽ मन् कतरि कशखर पर बैसा िऽ िहलकथन, “अहाँ जँ परमेश् िरि पुत िी तँ एतऽ सँ नीचाँ िेकि कतअ। 10 धमाशास् त मे कलखल अकि जे , “ओ अहाँ ि ररा िरबाि लेल अपन स् िगातूत सभ िेँ आजा ते कथन।” 11 ओ सभ अहाँ िेँ अपन हाथ मे उठा लेत, जाकह सँ अहाँ िकहयत अपन पैर पाथर पर नकह ठतकि ते ब। 12 यीशु हनिा उतर ते लकथन, “ िहल गेल अकि जे, “अहाँ अपन पभु परमेश् िर िेँ परीरा नकह ते ब।” 13 जखन शैतान सभ परीरा िेँ समाप िऽ लेलि तँ ओ कि​िु समयि लेल हनिा सँ किता भऽ गेलाह। 14 यीशु आत् माि सामथ्ा य मे गलील घुरर गेलाह। 15 ओ सभ हनिा सभि सभाघर मे कशरा तै त िलाह आ सभ लति​ि मकहमा हतइत िलकन। 16 ओ नासरत पहँ चलाह, जतय हनिर पालन-पतद् भेल िलकन। 17 तखन हनिा यशायाह पि​ि् ताि पुसि सौंपल गेलकन। ओ पतथी खतकल िऽ ओ स् थान भेटलकन जतय कलखल िलकन। 18 पभुि आत् मा हमरा पर अकि, किएि तँ ओ हमरा गरीब सभ िेँ सुसमाचार पचार िरबाि लेल अकभदेि ियलकन। ओ हमरा टु टल-िुटल मतन िेँ ठीि िरबाि लेल पठौलकन अकि, जे

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लूिा िे सुसमाचार

हम बंती सभ िेँ उ्ार िरबाि पचार िरी, आ आनर सभ िेँ दकष ठीि हतयबाि पचार िरी। 19 पभुि सीिाया िदाि पचार िरबाि लेल। 20 ओ किताब बन िऽ िऽ सेि​ि िेँ िेर सँ तऽ िऽ बैकस गेलाह। सभाघर मे रहकनहार सभि नजरर हनिा पर कटिल िलकन। 21 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ आइ ई शास अहाँ सभि िान मे पूरा भऽ गेल अकि।” 22 सभ हनिा गिाही ते लकथन आ हनिर मुँह सँ कनिलल िृपालु िचन ते खख आशयाचकित भऽ गेलाह। ओ सभ पुिलकथन, “िी ई यूसुि​ि बेटा नकह अकि?” 23 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ अहाँ सभ हमरा ई ि​िडा अिश िहब, “िैद, अपना िेँ ठीि िर।” 24 ओ िहलकथन, “ हम अहाँ सभ िेँ सत् य िहै त िी जे , ितनत पि​ि् ता िेँ अपन ते श मे सीिार नकह ियल जाइत अकि।” 25 मुता हम अहाँ सभ िेँ सत् य िहै त िी जे एकलयाहि समय मे इसाएल मे बहतत किधिा िल, जखन तीन िदा िह मास धरर स् िगा बंत िल, जखन पूरा ते श मे बहत अिाल पकड गेल िल। 26 मुता एकलयाह िेँ कसततन नगरि सरे पा िेँ ितकड िऽ किनित किधिा स् ती िेँ नकह पठाओल गेल। 27 एलीकसया पि​ि् ताि समय मे इसाएल मे बहतत ित़ी िल। अरामी नामान ितकड ओिरा सभ मे सँ कियत शु् नकह भेल। 28 सभाघर मे बैसल सभ लति सभ ई बात सुकन िऽ कतकधत भऽ गेलाह। 29 ओ सभ उकठ िऽ ओिरा नगर सँ बाहर कनिाकल िऽ ओकह पहाडी पर लऽ गेलाह जाकह पर हनिा लतिकनि नगर बनल िलकन। 30 मुता यीशु हनिा सभि बीच सँ गुजरर गेलाह। 31 ओ गलीलि ि​िरनहम नगर मे उतरर िऽ किशाम-कतन मे हनिा सभ िेँ कशरा तै त िलाह। 32 ओ सभ हनिर कशरा ते खख आशयाचकित भऽ गेलाह, किएि तँ हनिर िचन सामराि संग िलकन। 33 सभाघर मे एि आतमी िल, जिरा मे अशु् तु षाटा िल आ जतर-जतर सँ कचकचया उठल। 34 ओ िहलकन, “हमरा सभ िेँ ितकड कतयौि। हे नासरति यीशु, ततरा सँ हमरा सभि िी लेना-ते ना अकि? िी अहाँ हमरा सभि नाश िरय लेल आयल िी? हम ततरा जनैत िी जे अहाँ िे िी। परमेश् िरि पकित। 35 यीशु हनिा डाँ टैत िहलकथन, “ अपन चुप रह आ हनिा मे सँ बाहर कनिलू।” जखन शैतान हनिा बीच मे िेकि ते लिकन तखन ओ हनिा मे सँ बाहर कनिकल गेलाह आ हनिा ितनत चतट नकह पहँ चौलकन। 36 ओ सभ आशयाचकित भऽ िऽ आपस मे बजैत रहलाह, “ई िेहन बात अकि?” किएि तँ ओ अशु् आत् मा सभ िेँ अकधिार आ सामथ्ा य सँ आजा तै त िकथ आ ओ सभ बाहर कनिकल जाइत िकथ। 37 हनिर पकसख् चार िात इलािा मे चकल गेलकन। 38 ओ सभाघर सँ उकठ िऽ कसमतनि घर मे पिेश ियलकन। कसमतनि पतीि माय िेँ बहत बतखार भ’ गेलकन। ओ सभ हनिा सँ हनिा लेल किनती ियलकन। 39 ओ ओिरा ऊपर ठा़ भऽ बतखार िेँ डाँ कट ते लि। ओ ओिरा ितकड ते लि।

40 सूया​ा स भेला पर सभ तरहि बीमारी सँ पीकडत सभ हनिा सभ िेँ हनिा लग अनलकन। ओ सभ एि-एिटा पर हाथ राखख िऽ हनिा सभ िेँ ठीि िऽ ते लकथन। 41 बहतत लति​ि बीच सँ तु षाटा सभ सेहत कचकचयाइत बाजल, “अहाँ परमेश् िरि पुत मसीह िी।” ओ ओिरा सभ िेँ डाँ कट िऽ ओिरा सभ िेँ बाजऽ नकह ते लकथन, किएि तँ ओ सभ जनैत िल जे ओ मसीह िकथ। 42 भतर भेला पर यीशु किता भऽ िऽ मरभूकम मे चकल गेलाह आ लति सभ हनिा खतकज िऽ हनिा लग आकब िऽ हनिा रतकि ते लिकन जाकह सँ ओ हनिा सभ सँ नकह हटकथ। 43 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ हमरा परमेश् िरि राज् यि पचार आन नगर सभ मे सेहत िरबाि अकि। 44 ओ गलीलि सभाघर मे पचार िरै त िलाह। अधाय 5 1 जखन लति सभ परमेश् िरि िचन सुनबाि लेल हनिा पर धडिैत िल, तखन ओ गेनेसरत झील लग ठा़ भऽ गेलाह। 2 ओ पतखरर िात मे तू टा नाि ठा़ ते खलकन, मुता मलाह सभ ओकह मे सँ कनिकल गेल िल आ जाल धत रहल िल। 3 तखन ओ कसमतनि एिटा नाि मे बैकस िऽ हनिा सँ पाथाना ियलकन जे ओ ते श सँ िनेि बाहर कनिाकल कतअ। ओ बैकस िऽ लति सभ िेँ नाि सँ बाहर कसखबैत रहलाह। 4 जखन ओ बाजब ितकड िऽ कसमतन िेँ िहलकथन, “ गकहर मे उतारर िऽ अपन जाल िेँ खसबाि लेल उतार।” 5 कसमतन उतर ते लकथन, “गुर, हम सभ राकत भरर मेहनकत िऽ िऽ कि​िु नकह लेलहँ । 6 ई िाज पूरा िऽ िऽ ओ सभ बहत रास माि पिकड लेलि आ ओिर जाल टू कट गेल। 7 ओ सभ ततसर नाि मे बैसल अपन साथी सभ िेँ इशारा ियलकन जे ओ सभ आकब िऽ हनिा सभि सहायता िरकथ। ओ सभ आकब िऽ तु नू नाि िेँ भरर ते लि आ ओ सभ डूबऽ लागल। 8 कसमतन पतुस जखन ई ते खख यीशुि ठे हन पर खकस पडलाह आ िहलकथन, “हमरा सँ चकल जाउ। िार्, हे पभु, हम पापी िी। 9 ओ सभ माि​ि झतंि ते खख ओ आ ओिर संग मे रहकनहार सभ चकित भऽ गेलाह। 10 जखन कसमतनि संगी यािूब आ यूहन् ना सेहत िलाह। यीशु कसमतन िेँ िहलकथन, “ डरब नकह। आब सँ अहाँ मनुष िेँ पिडब।” 11 जखन ओ सभ अपन नाि सभ जमीन पर आकन िऽ सभटा ितकड हनिर पािाँ लाकग गेलाह। 12 जखन ओ ितनत नगर मे िलाह तखन ित़ सँ भरल एिटा आतमी ते खलकन। 13 ओ हाथ ब़ा िऽ ओिरा िूकब िऽ िहलकथन, “ हम चाहब। तखने ित़ हनिा सँ तू र भऽ गेलकन। 14 ओ हनिा आजा ते लकथन जे ओ ि​िरत नकह िहकथ, बल् कि जाउ, पुरतकहत िेँ ते खाउ आ मूसाि आजा अनुसार अपन शुख् लेल च़ा कतयौि, जाकह सँ हनिा सभि गिाही हत। 15 मुता ओतेि बेसी हनिर पकसख् बक़ गेलकन। 16 ओ मरभूकम मे हकट िऽ पाथाना ियलकन। 17 एि कतन जखन ओ कशरा तै त िलाह तँ ओकह ठाम िररसी आ धमा-कनयमि िैद सभ बैसल िलाह, जे गलील, यहकतया आ

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लूिा िे सुसमाचार

यरशलेमि प्ेि नगर सँ बाहर कनिलल िलाह हनिा सभिेँ ठीि िरबाि लेल उपख्त िलाह। 18 लति सभ एिटा लि​िा मारल गेल आतमी िेँ ओिाओन पर अनलि। 19 जखन ओ सभ लति​ि िार्े ँ ओिरा ितन बाट सँ आकन सिैत अकि से नकह पाकब सिलाह, तखन ओ सभ घरि ऊपर चक़ गेलाह आ ओिरा खपडाि बीच मे बैसा िऽ यीशुि सतझाँ मे बैसा ते लकथन। 20 ओ हनिा सभि किश् िास ते खख िऽ िहलकथन, “ यौ, ततहर पाप माि भऽ गेलौ।” 21 धमाशासी आ िररसी सभ तिा-कितिा िरय लगलाह, “ई िे अकि जे कनना िरै त अकि?” पाप िे रमा ि सिैत अकि, मुता िेिल भगिान्? 22 यीशु हनिा सभि किचार बुकझ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ अहाँ सभ मतन मे िी तिा तै त िी?” 23 ई िहब जे , ‘अहाँ ि पाप रमा भऽ गेलौह, से एकह सँ बेसी सहज अकि। आकि ई िहब जे “उकठ िऽ चलू?” 24 मुता एकह लेल जे अहाँ सभ ई जाकन सिब जे मनुख-पुत िेँ पृथ् िी पर पाप रमा िरबाि अकधिार िकन, (ओ लि​िागस िेँ िहलकथन, “ हम अहाँ िेँ िहै त िी जे उठू आ अपन सतिा उठा िऽ अपन घर मे जाउ।” 25 ओ तुरत हनिा सभि सतझाँ उकठ िऽ परमेश् िरि मकहमा िरै त अपन घर कतस किता भेलाह। 26 ओ सभ आशयाचकित भऽ गेलाह आ परमेश् िरि मकहमा िऽ िऽ भयभीत भऽ गेलाह जे , “आइ हम सभ किकचत बात ते खलहँ ।” िेँ तरसखाना पर बैसल ते खलकन। 28 ओ सभ कि​िु ितकड उकठ िऽ हनिा पािाँ -पािाँ चकल गेलाह। 29 लेिी हनिा अपन घर मे एिटा पैघ भतज बनौलकन, आ िर लेकनहार आ आन लति​ि बहत रास मंडली हनिा सभि संग बैसल िलाह। 30 मुता ओिर सभि शासी आ िररसी सभ हनिर कशद् य सभ पर बडबडाइत िहलकथन, “अहाँ सभ िर िसूली आ पापी सभि संग किएि खा-पीबैत िी?” 31 यीशु हनिा सभ िेँ उतर ते लकथन, “ स् लति िेँ िैदि आिशिता नकह। मुता जे बीमार अकि। 32 हम धमय लति िेँ नकह बल् कि पापी सभ िेँ पशाताप िरबाि लेल बजबय लेल आयल िी। 33 ओ सभ हनिा िहलकथन, “यूहनाि कशद् य सभ बेर-बेर उपिास आ पाथाना किएि िरै त िकथ आ िररसी सभि कशद् य सभ सेहत किएि। मुता ततहर खाइत-पीबैत िी? 34 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ िी अहाँ सभ िरि संग रहबाि समय मे बररयाती सभ िेँ उपिास िऽ सिैत िी?” 35 मुता ओ कतन आओत जखन िर िेँ हनिा सभ सँ तू र िऽ ते ल जायत आ ओकह कतन मे ओ सभ उपिास िरताह। 36 ओ हनिा सभ िेँ एिटा दषान सेहत िहलकथन। नि िसि टु िडी पुरान िस पर िेओ नकह पकहरै त अकि। जँ से नकह तँ नि​िा तु नूि किराया भेटैत िै ि आ नि​िा मे सँ जे टु िडा कनिालल गेल िलैि से पुरनिा सँ मेल नकह खाइत िै ि। 37 नि मकतरा िेओ पुरान कडबा मे नकह डालैत अकि। नकह तऽ नि​िा मकतरा बततल सभ िाकड िऽ उझकल जायत आ बततल सभ नष भऽ जायत।

38 मुता नि​िा मकतरा िेँ नि​िा बततल मे राखय पडत। आ तु नू सुरकरत अकि। 39 पुरान शराब पीकब िऽ िेओ तुरन नि​िा शराबि इचा नकह िरै त अकि, किएि तँ ओ िहै त अकि जे, “पुरान शराब नीि अकि।” अधाय 6 1 पकहल किशाम-कतनि बात ततसर किशाम-कतन मे ओ धानि खेत मे घुकम गेलाह। हनिर कशद् य सभ धानि िान ततकड िऽ हाथ मे रगडै त खाइत रहलाह। 2 कि​िु िररसी सभ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “अहाँ सभ किशाम-कतन मे जे िाज िरबाि उकचत नकह अकि से किएि िरै त िी?” 3 यीशु हनिा सभ िेँ उतर ते लकथन, “ िी अहाँ सभ एतेि नकह प़ने िी जे ताऊत आ हनिा संग जे लति सभ भूखल िलाह तखन िी िेलकथ। 4 ओ ितना परमेश् िरि घर मे जा िऽ ते खाबटी रतटी लऽ िऽ खा गेलाह आ अपन संग रहकनहार सभ िेँ सेहत तऽ ते लकथन। जिरा खाएब उकचत नकह अकि, बल् कि मात पुरतकहत सभि लेल? 5 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “मनुष-पुत किशाम-कतनि पभु सेहत िकथ।” 6 ततसर किशाम-कतन मे ओ सभाघर मे जा िऽ कशरा तै त िलाह। 7 धमाशासी आ िररसी सभ हनिा पर नजरर रखलकन जे ओ किशाम-कतन मे ठीि िरताह कि नकह। जाकह सँ हनिा पर ितनत आरतप लागय। 8 मुता ओ हनिा सभि किचार िेँ जाकन िऽ मुरझाएल हाथ बला आतमी िेँ िहलकथन, “ उकठ िऽ बीच मे ठा़ भऽ जाउ।” ओ उकठ िऽ ठा़ भऽ गेलाह। 9 तखन यीशु हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ हम अहाँ सभ सँ एिटा बात पूिब। किशाम-कतन मे नीि िाज िरब उकचत अकि आकि अधलाह? जान बचाबय लेल, आकि ओिरा नष िरय लेल? 10 चार िात ते खख ओ ओकह आतमी िेँ िहलकथन, “ अपन हाथ ब़ाउ।” ओ एना ियलकन आ हनिर हाथ ततसर जिाँ ठीि भऽ गेलकन। 11 ओ सभ पागलपन सँ भरर गेल। ओ सभ एि-ततसर सँ गपशप िरै त िलाह जे ओ सभ यीशुि संग िी ि’ सिैत िकथ। 12 ओकह कतन मे ओ एिटा पहाड पर पाथाना िरबाि लेल कनिललाह आ भरर राकत परमेश् िर सँ पाथाना िरै त रहलाह। 13 भतर भेला पर ओ अपन कशद् य सभ िेँ अपना लग बजौलकन आ ओकह मे सँ बारह गतटे िेँ चुनलकन। 14 कसमतन, (जिर नाम ओ पतुस सेहत रखलकन) आ हनिर भाय आखनयास, यािूब आ यूहन् ना, किकलप आ बाथ्लतलू। 15 मती आ थतमा, अलीसि पुत यािूब आ कसमतन जेलतत नामि। 16 यािूबि भाय यहता आ यहता इसररयतती जे गदार िलाह। 17 यीशु हनिा सभि संग नीचाँ आकब िऽ मैतान मे ठा़ भऽ गेलाह आ हनिर कशद् य सभि संगत आ समस् त यहकतया आ यरशलेम आ सतर आ कसततनि समुदि िात सँ बहत रास लति सभ जे हनिर बात सुनय लेल आयल िलाह। आ अपन रतग सँ ठीि भ’ जेबाि लेल। 18 ओ सभ अशु् आत् मा सँ तस िल आ ओ सभ ठीि भऽ गेल।

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लूिा िे सुसमाचार

19 सभ लति हनिा िूबय चाहै त िल, किएि तँ हनिा मे सँ सत् गु् कनिकल गेल िल आ सभ िेँ ठीि िऽ ते लिकन। 20 ओ अपन कशद् य सभ पर नजरर उठा िऽ िहलकथन, “ धन हतउ गरीब सभ, किएि तँ परमेश् िरि राज् य अहाँ सभि अकि।” 21 धन िी अहाँ सभ जे आब भूखल िी, किएि तँ अहाँ सभ तृप भऽ जायब। धन िी अहाँ सभ जे एखन िाकन रहल िी, किएि तँ अहाँ सभ हँ सब। 22 अहाँ सभ धन िी, जखन मनुद् य-पुति लेल अहाँ सभ सँ घृ्ा िरत आ अहाँ सभ िेँ अपन संगकत सँ अलग िऽ ते त आ अहाँ सभ िेँ कनना िरत आ अहाँ ि नाम िेँ तु ष बुकझ बाहर कनिालत। 23 ओकह कतन अहाँ सभ आनखनत रह आ आनन सँ उिकल जाउ, किएि तँ स् िगा मे अहाँ सभि इनाम बहत पैघ अकि, किएि तँ हनिा सभि पूिाज सेहत ओकहना पि​ि् ता सभि संग ियलकन। 24 मुता अहाँ सभ धकनि लति सभ िेँ कधकार! किएि तँ अहाँ सभ िेँ सान्ना भेकट गेल अकि।” 25 कधकार अहाँ सभ जे पेट भऽ गेल िी! किएि तँ अहाँ सभ भूखल रहब।” कधकार अहाँ सभ जे एखन हँ सैत िी! किएि तँ अहाँ सभ शति िरब आ िानब।” 26 अहाँ सभ िेँ कधकार हतयत, जखन सभ लति अहाँ सभि नीि बात िहत! किएि तँ हनिा सभि पूिाज सभ झूठ पि​ि् ता सभ िेँ सेहत एहने िरै त िलाह। 27 मुता हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे, “अपन शतु सभ सँ पेम िर, जे अहाँ सभ सँ घृ्ा िरै त अकि, हनिा सभि संग भलाई िर। 28 जे अहाँ सभ िेँ गारर प़ै त अकि, तिरा सभ िेँ आशीद कतअ आ जे सभ अहाँ सभ िेँ घृ्ा िरै त अकि, तिरा सभि लेल पाथाना िर। 29 जे अहाँ ि एि गाल पर पहार िरत ओिरा ततसर गाल सेहत च़ाउ। जे अहाँ ि िस िीन लेत से अहाँ ि िस सेहत नकह लेबऽ सँ मना िर।” 30 जे िेओ अहाँ सँ माँ गैत अकि, ओिरा तऽ कतयौि। जे ततहर समकत िीन लेत से िेर ओिरा सँ नकह माँ ग।” 31 जकहना अहाँ सभ चाहै त िी जे लति अहाँ सभि संग िरकथ, तेना अहाँ सभ हनिा सभि संग सेहत एकहना िर। 32 जँ अहाँ सभ जे अहाँ सभ सँ पेम िरै त अकि, तिरा सभ सँ पेम िरै त िी तँ अहाँ सभि िी धन्‍यिात? किएि तँ पापी सभ सेहत पेम िरै त अकि जे ओिरा सभ सँ पेम िरै त अकि। 33 जँ अहाँ सभ अहाँ सभि भलाई िरयिला सभि संग भलाई िरै त िी तऽ अहाँ सभि िी धनिात? किएि तँ पापी सभ सेहत एहने िाज िरै त अकि। 34 जँ अहाँ सभ हनिा सभ िेँ उधार तै त िी, कजनिा सभ सँ अहाँ सभ िेँ भेटबाि आशा अकि, तँ अहाँ सभ िेँ िी धनिात? किएि तँ पापी सभ सेहत पापी सभ िेँ उधार तै त अकि, जाकह सँ ओतबे िेर सँ भेटय। 35 मुता अहाँ सभ अपन शतु सभ सँ पेम िर, आ नीि िाज िर आ िेर कि​िु नकह िरबाि आशा मे उधार कतअ। अहाँ सभि इनाम बेसी हतयत, आ अहाँ सभ परमेश् िरि सन् तान बनब, किएि तँ ओ िृतघ आ अधलाह लति​ि पकत तयालु िकथ। 36 ते ँ अहाँ सभ तयालु बनू, जेना अहाँ सभि कपता सेहत तयालु िकथ।

37 नाय नकह िर, आ अहाँ सभि न् याय नकह हतयत, ततदी नकह िर, आ अहाँ सभ िेँ ततदी नकह ठहराओल जायत। 38 कतअ, तखन अहाँ सभ िेँ ते ल जायत। नीि नाप, तबाओल, कहलल-डतलल आ तौडै त-तौडै त, लति अहाँ ि ितरा मे तऽ ते त। िार्, जे नाप अहाँ सभ नापब, ओकह नाप सँ अहाँ सभ िेँ िेर सँ नापल जायत। 39 ओ हनिा सभ िेँ एिटा दषान बजलाह, “ िी आनर आनर िेँ लऽ जा सिैत अकि?” िी तु नू गतटे खाकध मे नकह खकस पडत? 40 कशद् य अपन गुर जिाँ नकह अकि, मुता जे कियत कस् अकि से ओिर गुर जिाँ हतयत। 41 अहाँ अपन भायि आँ खख मे जे िण अकि तिरा किएि ते खैत िी, मुता अपन आँ खख मे जे किर् अकि तिरा नकह बुझैत िी? 42 अहाँ अपन भाय िेँ ितना िकह सिैत िी जे, ‘भाई, हम अहाँ ि आँ खख मे जे चीर अकि से कनिाकल कतअ, जखन कि अहाँ अपन आँ खख मे जे बीम अकि से नकह ते खैत िी? हे पाखंडी, पकहने अपन आँ खख सँ बीम कनिाकल कतयौि, तखन अहाँ सष ते खब जे अहाँ अपन भाइि आँ खख मे जे िडाही अकि तिरा कनिाकल सिब। 43 किएि तँ नीि गाि भष िल नकह तै त अकि। आ ने जडल गाि नीि िल तै त अकि। 44 किएि तँ हरे ि गाि अपन िल सँ कचनल जाइत अकि। किएि तँ िाँ टसँ अंजीर नकह जुटाबैत अकि आ ने िां टेतार झाडीसँ अंगूर बटतरै त अकि। 45 नीि मनुद् य अपन हतयि नीि भंडार सँ नीि चीज कनिालैत अकि। आ तु ष मनुद्‍य अपन हतयि अधलाह भंडार सँ अधलाह बात कनिालैत अकि, किएि तँ हतयि पचुरताि बात ओिर मुँह बजैत अकि। 46 अहाँ सभ हमरा पभु, पभु किएि िहै त िी आ हम जे िहै त िी से नकह िरै त िी? 47 जे िेओ हमरा लग आकब िऽ हमर बात सुनत आ ओिर पालन िरत, हम अहाँ सभ िेँ ई ते खा ते ब जे ओ िेिरा सन अकि। 48 ओ ओकह आतमी जिाँ अकि जे घर बना िऽ गहीरं धरर खततने आ पाथर पर नीिं रखलि . 49 मुता जे सुनैत अकि आ नकह िरै त अकि, से ओकह आतमी जिाँ अकि जे कबना नीिं ि पृथ् िी पर घर बनौने अकि। जिरा किर् धार जतरसँ मारर ते लिैि आ तुरन खकस पडल। आ ओकह घरि खंडहर बहत पैघ िल। अधाय 7 1 ओ लति सभि समर अपन सभ बात समाप िऽ िऽ ि​िरनहम मे पिेश ियलकन। 2 एिटा सेनापकति नतिर जे हनिर कपय िलकन, ओ बीमार िल आ मरबा लेल तैयार िल। 3 यीशुि नाम सुकन ओ यहती सभि बू़-पुरान सभ िेँ हनिा लग पठौलकन जे ओ अपन नतिर िेँ ठीि िऽ िऽ आकब जाउ। 4 ओ सभ यीशु लग पहँ चला पर तुरन हनिा सँ किनती ियलकथन, “जेिरा लेल ओ ई िाज िरकथ, से ओ यतग िकथ। 5 ओ हमरा सभि जाकत सँ पेम िरै त िकथ आ हमरा सभि सभाघर बनौने िकथ।

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लूिा िे सुसमाचार

6 तखन यीशु हनिा सभि संग गेलाह। जखन ओ घर सँ तू र नकह िलाह तखन सेनापकत हनिा लग कमत सभ पठौलकन जे , “पभु , अपना िेँ परे शान नकह िर, िार् हम एकह यतग नकह िी जे अहाँ हमर ित मे पिेश िरी। 7 ते ँ हम अपना िेँ अहाँ लग एबाि यतग नकह बुझलहँ , बल् कि एि िचन मे िह, तखन हमर सेि​ि ठीि भऽ जायत। 8 हमहँ अकधिारि अधीन िी, हमरा अधीन सैकनि सभ अकि, आ हम एि गतटे िेँ िहै त िी जे , जाउ, ओ चकल जायत। आ ततसर िेँ, “आउ, ओ आकब जायत।” आ हमर सेि​ि िेँ, “ई िर, आ ओ पूरा िरै त अकि।” 9 यीशु ई बात सुकन िऽ हनिा ते खख आशयाचकित भऽ हनिा घुकम िऽ हनिा पािाँ -पािाँ चलय बला लति सभ िेँ िहलकथन, “ हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे , हमरा एतेि पैघ किश् िास नकह भेटल अकि, इसाएल मे नकह।” 10 पठाओल गेल लति सभ घर कतस घुरर िऽ ओकह नतिर िेँ स् पाकब गेल जे बीमार िल। 11 ओिर ततसर कतन ओ नैन नामि नगर मे गेलाह। हनिर बहतत कशद् य आ बहतत लति हनिा संग चकल गेलाह। 12 जखन ओ नगरि िाटि लग पहँ चलाह तँ ते खलहँ जे एिटा मृत् यु िेँ बाहर लऽ गेल िल, जे ओिर मायि एिलौता बेटा िल आ ओ किधिा िल। 13 पभु ओिरा ते खख िऽ ओिरा पर तया आकब िहलकथन, “ नकह िानब।” 14 यीशु आकब िऽ मृत् यु िेँ िु कब गेलाह आ ओिरा लऽ िऽ लेकनहार सभ ठा़ भऽ गेलाह। ओ िहलकथन, “ युि​ि, हम अहाँ िेँ िहै त िी जे उठू।” 15 मरल लति उकठ िऽ बैकस िऽ बाजऽ लागल। ओ ओिरा अपन मायि हाथ मे सौंप ते लि। 16 लति सभ परमेश् िरि मकहमा भऽ गेलकन आ ओ सभ परमेश् िरि सुकत ियलकन जे , “हमरा सभि बीच एिटा पैघ पि​ि् ता उकठ गेल िकथ। आ “परमेश् िर अपन लति​ि तशान ियलकन।” 17 यीशुि ई अि​िाह पूरा यहकतया आ चार िाति समस पते श मे पसरर गेल। 18 यूहन् नाि कशद् य सभ हनिा ई सभ बाति बारे मे बता ते लकथन। 19 यूहन् ना अपन तू टा कशद् य हनिा सभ िेँ बजा िऽ यीशु लग पठौलकथन, “िी अहाँ ओ जे आब’ बला िी?” आकि हम सभ ततसर ताकि रहल िी? 20 लति सभ हनिा लग पहँ चला पर िहलकथन, “यूहना बपकतस् मा ते कनहार हमरा सभ िेँ ई िहबाि लेल पठौलकन अकि जे , “िी अहाँ ओ जे आब’ बला िकथ?” आकि हम सभ ततसर ताकि रहल िी? 21 ओकह समय मे ओ हनिा सभि बहत रास तु बालता आ किपकत आ तु द् टाटा सभ िेँ ठीि ियलकन। आनर बहतत िेँ ओ दकष तऽ ते लकथन। 22 तखन यीशु हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ जाउ, अहाँ सभ जे कि​िु ते खलहँ आ सुनलहँ से यूहन् ना िेँ िकह कतअ। ितना आनर ते खैत अकि, लंगडा चलैत अकि, ित़ी सभ शु् भ' जाइत अकि, बहीर सुनैत अकि, मृति जीकब उठै त अकि, गरीब सभ िेँ सुसमाचार पचार ियल जाइत अकि। 23 ओ धन अकि जे िेओ हमरा पर ितनत आपकत नकह िरत।

24 जखन यूहन् नाि तू त सभ चकल गेलाह तखन ओ लति सभ सँ यूहनाि किदय मे िहय लगलाह, “ अहाँ सभ जंगल मे िी ते खय लेल गेलहँ?” हिासँ कहलल ख़? 25 मुता अहाँ सभ िी ते खय लेल कनिललहँ ? ितमल िस पकहरने आतमी? ते खू, जे सभ सुनर िस पकहरने िकथ आ नाजुि जीिन जीबैत िकथ, से राजा सभि आँ गन मे िकथ। 26 मुता अहाँ सभ िी ते खय लेल कनिललहँ ? एिटा भकिषिका? हँ , हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी, आ एिटा भकिषिका सँ बहत बेसी। 27 ई ओ िकथ, कजनिा बारे मे कलखल अकि, “ते खू, हम अपन तू त िेँ अहाँ ि सामने पठा रहल िी जे अहाँ ि आगू मे बाट तैयार िरत।” 28 हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे, जे सभ स् तीग् सँ जन लेने िकथ, ताकह मे यूहन् ना बपकतस् मा ते कनहार सँ पैघ ितनत पि​ि् ता नकह िकथ। 29 हनिर बात सुनकनहार सभ लति आ िरताता सभ यूहन् नाि बपकतस् मा सँ बपकतस् मा लैत परमेश् िर िेँ धाकमाि ठहरौलकन। 30 मुता िररसी आ धमा -कनयमि लति सभ परमेश् िरि बपकतस् मा नकह लेलकन। 31 परमेश् िर िहलकथन, “ तखन हम एकह पी़ीि लति सभि उपमा ितन तरहे ँ ते ब?” आ िेहन िकथ? 32 ओ सभ ओकह बचा सभ जिाँ अकि जे बजार मे बैसल एिततसर िेँ बजबैत िहै त अकि जे , “हम सभ अहाँ सभ िेँ चीरिाड बजौलहँ , मुता अहाँ सभ नकह नाचलहँ । हम सभ अहाँ सभि शति िेलहँ, मुता अहाँ सभ नकह िानलहँ । 33 बपकतस् मा ते कनहार यूहन् ना ने रतटी खाइत आ ने मकतरा पीबैत अयलाह। अहाँ सभ िहै त िी जे, “ओिरा मे शैतान अकि।” 34 मनुद्‍य-पुत खाइत-पीबैत आकब गेल िकथ। अहाँ सभ िहै त िी जे, “ते खू, पेटू आ मकतरा पीकनहार, िरताता आ पापी सभि कमत!” 35 मुता बुख् ओिर सभ संतानि दारा धमय ठहराओल गेल अकि। 36 एिटा िररसी हनिा सँ आगह ियलकन जे ओ हनिा संग भतजन िरकथ। ओ िरीसीि घर मे जा िऽ भतजन िरऽ बैसलाह। 37 ओकह नगर मे एिटा स् ती पापी िल, जखन ओ जनैत िलीह जे यीशु िररसी सभि घर मे भतजन पर बैसल िकथ। 38 ओ हनिा पािाँ -पािू िाकन-िाकन िऽ ठा़ भऽ िऽ हनिर पएर नतर सँ धतबय लगलाह आ हनिर माथि िेश सँ पतकि िऽ हनिर पयर चुमा लेलकन आ मरहम सँ अकभदेि ियलकन। 39 ओ िररसी जे हनिा बजौने िल, से ते खख मने-मन बजलाह, “ई आतमी जँ पि​ि् ता रकहतकथ तऽ बुकझ गेल रहै त जे ई िेहन स् ती िकथ जे हनिा िूबैत िकथ, किएि तँ ओ पापी िकथ।” 40 यीशु हनिा उतर ते लकथन, “ कसमतन, हमरा अहाँ सँ कि​िु िहबाि अकि।” ओ िहलकथन, “गुर, आगू ब़ू।” 41 एिटा एहन लेनतार िल, जिर तू टा िजातार िल, एिटा पर पाँ च सय पेस आ ततसर पचास पेस। 42 जखन हनिा सभ िेँ कि​िु ते बाि नकह िलकन तँ ओ तु नू गतटे िेँ साि-साि माि िऽ ते लकथन। ते ँ हमरा िह जे ओिरा सभ मे सँ िे ओिरा सँ बेसी पेम िरत? 43 कसमतन उतर ते लकथन, “हमरा बुझने ओ, जिरा ओ बेसी रमा ियलकन।” ओ हनिा िहलकथन, “ अहाँ ठीिे न् याय िेलहँ ।”

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लूिा िे सुसमाचार

44 यीशु ओकह स् ती कतस घुकम िऽ कसमतन िेँ पुिलकथन, “ िी अहाँ एकह स् ती िेँ ते खैत िी?” हम अहाँ ि घर मे घुसलहँ , अहाँ हमरा पएर लेल पाकन नकह ते कलयैि, मुता ओ हमर पैर नतर सँ धत ते लकन आ माथि िेश सँ पतकि ते लकन। 45 अहाँ हमरा चुमा नकह ते लहँ , मुता जकहया सँ हम भीतर आयल िी, ई स् ती हमर पएर चुमा नकह ितडने अकि। 46 अहाँ हमर माथ पर तेल नकह लगौलहँ , मुता ई स् ती हमर पएर पर तेल लगाओल गेल अकि। 47 ते ँ हम अहाँ िेँ िहै त िी जे हनिर बहत पाप रमा भऽ गेलकन। किएि तँ ओ बहत पेम िरै त िलीह, मुता जिरा िम रमा ियल जाइत िै ि, से िम पेम िरै त िै ि। 48 ओ ओिरा िहलकथन, “ ततहर पाप रमा भऽ गेल अकि।” 49 यीशुि संग भतजन िरऽ िला सभ मन मे िहऽ लगलाह, “ई िे अकि जे पाप िेँ सेहत रमा िरै त अकि?” 50 ओ स् ती िेँ िहलकथन, “ अहाँ ि किश् िास अहाँ िेँ बचा लेलि। चैन सँ जाउ।

किलास मे घुटन भ’ जाइत अकि आ पू्ाता मे ितनत िल नकह तै त अकि। 15 मुता नीि जमीन पर ओ सभ अकि जे ईमानतार आ नीि मतन सँ िचन सुकन िऽ ओिरा पालन िरै त अकि आ धैयापूिाि िल तै त अकि। 16 िेओ तीया जरा िऽ ओिरा बतान सँ झाँ कप नकह तै त अकि आ ने ओिाओनि नीचाँ राखख तै त अकि। मुता ओिरा कतयातार पर राखख तै त अकि, जाकह सँ ओकह मे पिेश िरय बला इजतत ते खय। 17 किएि तँ ितनत एहन ितनत बात गुप नकह अकि जे पगट नकह हतयत। आ ने ितनत एहन बात नुिायल जे नकह जाकन िऽ बाहर आकब जायत। 18 ते ँ सािधान रह जे ितना सुनैत िी। जिरा लग नकह िै ि, ओिरा सँ जे कि​िु भेटैत िै ि से िीन लेल जायत।” 19 तखन हनिर माय आ हनिर भाय सभ हनिा लग आकब गेलाह, मुता तबाि​ि िार्े ँ हनिा पर नकह आकब सिलाह। 20 हनिा ई बात िहल गेलकन जे, “अहाँ ि माय आ भाय सभ अहाँ िेँ ते खबाि इचा िरै त बाहर ठा़ िकथ।” 21 ओ हनिा सभ िेँ उतर ते लकथन, “ हमर माय आ हमर भाय सभ ई सभ िकथ जे परमेश् िरि िचन सुनैत िकथ आ पूरा िरै त िकथ।” 22 एि कतन यीशु अपन कशद् य सभि संग नाि मे बैकस गेलाह आ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ आउ, हम सभ पतखररि ओकह पार जाउ।” आ ओ सभ आगू बक़ गेल। 23 मुता जखन ओ सभ जहाज पर चलैत िलाह तखन ओ सुकत गेलाह। ओ सभ पाकन सँ भरर गेल िल आ खतरा मे पकड गेल िल। 24 ओ सभ हनिा लग आकब िऽ हनिा जगबैत िहलकथन, “गुर, गुर, हम सभ नाश भऽ जाइत िी।” तखन ओ उकठ िऽ हिा आ पाकन िे पितप िेँ डाँ कट ते लकथन। 25 ओ हनिा सभ िेँ पुिलकथन, “ अहाँ सभि किश् िास ितऽ अकि?” ओ सभ डरै त-डरै त एि-ततसर सँ िहै त रहलाह, “ई िेहन आतमी अकि!” किएि तँ ओ हिा आ पाकन िेँ सेहत आजा तै त िकथ आ ओ सभ हनिर आजा मानैत िकथ।” 26 ओ सभ गतारीि ते श मे पहँ चलाह जे गलीलि सामने अकि। 27 जखन ओ जमीन पर गेलाह तँ नगर सँ बाहर एिटा एहन आतमी हनिा सँ भेट ियलकन, जिरा मे बहत कतन सँ तु षाटा िलकन आ ओ ितनत िपडा नकह पकहरने िल आ ने ितनत घर मे रहै त िल, बखल िब मे रहै त िल। 28 यीशु िेँ ते खख ओ कचकचया उठलाह आ हनिा सतझाँ खकस पडलाह आ जतर-जतर सँ बजलाह, “हे परमेश् िर परमेश् िरि पुत यीशु, हमरा अहाँ सँ िी लेना-ते ना अकि?” हम अहाँ सँ किनती िरै त िी जे हमरा सताब नकह। 29 (किएि तँ ओ अशु् आत् मा िेँ ओकह आतमी मे सँ बाहर कनिलबाि आजा ते ने िलाह। किएि तँ ओ बहत बेर ओिरा पिडने िल। ) २. 30 यीशु हनिा पुिलकथन, “ ततहर नाम िी अकि?” ओ िहलकथन, “सेना। 31 ओ सभ हनिा सँ किनती ियलकन जे ओ हनिा सभ िेँ गहीरं मे जेबाि आजा नकह ते कथन। 32 ओतऽ पहाड पर बहत रास सुगरि झंुड िल आ ओ सभ हनिा सभ िेँ किनती ियलकन जे ओ सभ ओिरा सभ िेँ ओकह मे पिेश िरऽ ते कथन। आ ओ हनिा सभ िेँ िष भतकग ते लकन।

अधाय 8 1 तिर बात ओ सभ नगर आ गाम मे घुकम िऽ परमेश् िरि राज् यि शुभ समाचार पचार िरै त आ सुनबैत गेलाह। 2 तु षाटा आ तु बालता सँ ठीि भेल कि​िु स् तीग्, मगतलीनी नामि मररयम, कजनिा मे सँ सातटा तु द् टात् मा कनिलल िल। 3 हे रतते सि भणारी चूजाि पती यतआना, सुसाना आ आन बहतत लति जे हनिा अपन समकति सेिा िरै त िलाह। 4 जखन बहतत लति जमा भऽ िऽ सभ नगर सँ हनिा लग आकब गेलाह तँ ओ दद् टान् त दारा बजलीह। 5 एिटा बतकनहार अपन बीया बतबय लेल कनिलल, जखन ओ बीया बतकन रहल िल तखन कि​िु बाट िात मे खकस पडल। ओिरा तबा ते ल गेलै आ हिाि कचडै सभ ओिरा खा गेलै। 6 कि​िु गतटे चटान पर खकस पडलाह। उगैत ते री ओ मुरझा गेल, िार् ओिरा मे नमीि अभाि िलैि। 7 कि​िु िाँ टि बीच खकस पडल। ओिरा संग िाँ ट उगकल िऽ ओिर गला तबा ते लि। 8 आन लति नीि जमीन पर खकस पडल आ उगकल िऽ सौ गुना िल ते लि। ई बात िकह िऽ ओ कचकचया उठलकन, “ जेिरा सुनबाि िान अकि, से सुनय।” 9 हनिर कशद् य सभ हनिा सँ पुिलकथन, “ई दषान िी भऽ सिैत अकि?” 10 ओ िहलकथन, “ अहाँ सभ िेँ परमेश् िरि राज् यि रहस् य सभ िेँ जानब ते ल गेल अकि। जे ते खख िऽ ओ सभ नकह ते खकथ आ सुकन िऽ नकह बुकझ सिकथ। 11 दषान ई अकि जे बीया परमेश् िरि िचन अकि। 12 रसाि िात मे जे सभ अकि से सुनैत अकि। तखन शैतान आकब िऽ हनिा सभि हतय सँ िचन हटा तै त अकि, जाकह सँ ओ सभ किशास नकह िऽ िऽ उ्ार नकह पाकब सिैत अकि। 13 चटान पर ओ सभ ओ सभ अकि जे सुकन िऽ हदाि संग िचन गह् िरै त अकि। आ एकह सभि ितनत जकड नकह अकि जे कि​िु िाल धरर किशास िरै त अकि आ पलतभनि समय मे खकस पडै त अकि। 14 िाँ ट-िाँ ट मे खसल ओ सभ अकि जे सुकन िऽ बाहर कनिकल जाइत अकि आ एकह जीिनि कचना आ धन-समकत आ भतग-

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लूिा िे सुसमाचार

33 तखन ओकह आतमी मे सँ तु षाटा सभ बाहर कनिकल सुगर सभ मे घुकस गेल। 34 जखन ओिरा सभि चरबाहि लति सभ ई िाज ते खख िऽ भाकग गेल आ नगर आ ते श मे ई बात सुनौलि। 35 तखन ओ सभ बाहर कनिकल गेलाह जे िी भेल अकि। यीशु लग पहँ कच िऽ ओकह आतमी िेँ ते खलकन, जिरा मे सँ तु द् टात् मा सभ चकल गेल िल, जे यीशुि पएर मे बैसल िल, िपडा पकहरने आ अपन सत् बुख् मे बैसल िल। 36 ई ते खकनहार सभ हनिा सभ िेँ िहलकथन जे ओ तु द् टात् मा सभि आतंि ितन तरहे ँ ठीि भऽ गेलाह। 37 तखन चार िात गतरे नी सभि भीड हनिा सभ सँ किता हतबऽ लेल किनती ियलकन। किएि तँ ओ सभ बहत भय भऽ गेलाह। 38 जाकह आतमी मे सँ तु द् टात् मा सभ चकल गेल िल, ओ हनिा संग रहबाि लेल किनती ियलि। 39 अपन घर जाउ आ ते खाउ जे परमेश् िर अहाँ ि संग ितेि पैघ िाज ियलकन। यीशु जा िऽ पूरा नगर मे पचार िरऽ लगलाह जे यीशु हनिा संग ितेि पैघ िाज िेलकथन। 40 यीशु घुरला पर लति सभ खुशी-खुशी हनिा सागत ियलकन। 41 ते खख, याइरस नामि एि आतमी आकब गेलाह, आ ओ सभाघरि अकधिारी िलाह। 42 हनिा एिटा एिमात बेटी िलकन जे िरीब बारह िदाि िलकन। मुता जकहना-जकहना ओ जाइत िलाह, लति सभ हनिा पर भीड लगा ते लिकन। 43 बारह िदाि खूनि समसा िल, जे अपन पूरा जीिन िैदि िाज मे कबता ते ने िल, आ ने ि​िरत सँ ठीि भऽ सिल। 44 हनिा पािाँ आकब िऽ हनिर िसि सीमा िूकब गेलकन। 45 यीशु पुिलकथन, “ हमरा िे िूकब लेलि?” जखन सभ असीिार ियलकन तँ पतुस आ हनिर संगी सभ िहलकथन, “गुर, भीड अहाँ िेँ भीड लगा िऽ तबाबैत अकि आ अहाँ िहै त अकि जे , “ हमरा िे िूलि?” 46 यीशु िहलकथन, “ कियत हमरा िूकब लेलि, किएि तँ हम बुकझ रहल िी जे हमरा मे सँ सत् गु् कनिकल गेल अकि।” 47 जखन ओ स् ती ते खलि जे ओ नुिायल नकह अकि, तखन ओ िाँ कप िऽ आकब गेलीह आ हनिा सामने खकस पडलीह आ सभ लति​ि समर हनिा िहलकथन जे ओ हनिा ितन िार् सँ िूकब लेलकन आ ितना तुरन ठीि भऽ गेलीह। 48 ओ ओिरा िहलकथन, “ बेटी, सान्ना रह। चैन सँ जाउ। 49 जखन ओ बजैत िलाह तखन सभाघरि माकलि सँ एि गतटे आकब िऽ िहलकथन, “ततहर बेटी मरर गेल अकि। परे शानी माकलि नकह। 50 यीशु ई बात सुकन िऽ िहलकथन, “ डरब नकह, मात किश् िास िर, तखन ओ ठीि भऽ जेतीह।” 51 ओ घर मे अयला पर पतुस, यािूब, यूहन् ना, िनाि कपता आ माय िेँ ितकड ि​िरत भीतर नकह जाय ते लि। 52 सभ िाकन िऽ किलाप ियलकन, मुता ओ िहलकन, “ नकह िानू। ओ मरर गेल नकह अकि, बल् कि सुतल अकि। 53 ओ सभ ई जाकन िऽ जे ओ मरर गेल िलीह, हनिा कतरसृत िरै त हँ सैत रहलाह। 54 ओ सभ ओिरा सभ िेँ बाहर कनिाकल िऽ ओिर हाथ पिकड िऽ बजौलकन, “ तासी, उठू।”

55 हनिर आत् मा िेर आकब गेलकन आ ओ तुरन उकठ गेलीह आ ओ हनिा भतजन ते बाि आजा ते लकथन। 56 ओिर माय-बाप आशयाचकित भऽ गेलाह, मुता ओ हनिा सभ िेँ आजा ते लकथन जे िी भेल अकि से ि​िरत नकह िहय। अधाय 9 1 तखन ओ अपन बारह कशद् य िेँ एि ठाम बजा िऽ सभ तु द् टात् मा पर आ रतग सभ िेँ ठीि िरबाि अकधिार आ अकधिार ते लकन। 2 ओ हनिा सभ िेँ परमेश् िरि राज् यि पचार िरऽ आ बीमार सभ िेँ ठीि िरबाि लेल पठौलकन। 3 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ अपन याताि लेल कि​िु नकह लऽ जाउ, ने लाठी, ने चीर, ने रतटी आ ने पाइ। ने तू -तू ितट अकि। 4 अहाँ सभ जाकह घर मे घुसब, ओतकह रह आ ओतय सँ चकल जाउ। 5 जे िेओ अहाँ सभ िेँ गह् नकह िरत, तखन जखन अहाँ सभ ओकह नगर सँ बाहर कनिलब तँ हनिा सभि किर् गिाही ते बाि लेल अपन पएरि धूरा िेँ कहला कतयौि। 6 ओ सभ किता भऽ गेलाह आ नगर सभ मे घुकम िऽ सुसमाचार पचार िरै त आ सभ ठाम ठीि िरै त गेलाह। 7 राजिीय हे रतते स हनिा दारा ियल गेल सभ िाज सुकन िऽ ओ आशयाचकित भऽ गेलाह, किएि तँ कि​िु लति​ि ई बात िहल गेल िल जे यूहन् ना मृत् यु मे सँ जीकब उठल िकथ। 8 कि​िु गतटे मे एकलयाह पिट भेलाह। आ कि​िु गतटे ि िहब िलकन जे पुरान पि​ि् ता सभ मे सँ एि गतटे जीकब उठलाह। 9 हे रतते स िहलकथन, “हम यूहन् नाि माथ िाकट ते लहँ, मुता ई िे अकि, जिरा बारे मे हम एहन बात सुनैत िी?” आ हनिा ते खबाि इचा भेलकन। 10 जखन ओ सभ पेररत सभ घुरर िऽ आकब गेलाह तँ हनिा सभि सभ िाज हनिा िहलकथन। ओ ओिरा सभ िेँ लऽ िऽ बेतसैता नगरि एिटा मरभूकम मे एि-ततसर भऽ गेलाह। 11 लति सभ ई जाकन िऽ हनिर पािाँ -पािाँ चकल गेलाह आ ओ हनिा सभ िेँ गह् ियलकन आ हनिा सभ िेँ परमेश् िरि राज् यि किदय मे िहलकन आ जे सभ ठीि िरबाि आिशिता िलकन तिरा सभ िेँ ठीि ियलकन। 12 जखन कतन कघकसयाय लागल तखन बारह गतटे आकब िऽ िहलकथन, “भीड िेँ किता िऽ कतअ, जाकह सँ ओ सभ चारिाति नगर आ ते हात मे जा िऽ ठहरर िऽ भतजन िरकथ मरभूकम ्ान। 13 मुता यीशु हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ अहाँ सभ ओिरा सभ िेँ भतजन तऽ कतयौि।” ओ सभ िहलकथन, “हमरा सभ लग पाँ च रतटी आ तू टा माि ितकड आओर कि​िु नकह अकि। कसिाय एकह सब लति​ि लेल मां स िीनय लेल जा ि'। 14 ओ सभ िरीब पाँ च हजार आतमी िल। ओ अपन कशद् य सभ िेँ िहलकथन, “पचास गतटे िेँ एि संग बैसा कतयौि।” 15 ओ सभ एना िऽ िऽ सभ िेँ बैसा ते लि। 16 तखन ओ पाँ चटा रतटी आ तू टा माि लऽ िऽ स् िगा कतस तिैत ओिरा सभ िेँ आशीद तऽ िऽ ततकड िऽ कशद् य सभ िेँ तऽ ते लकथन जे ओ सभ लति​ि सतझाँ राखख ते कथ। 17 ओ सभ भतजन िऽ िऽ सभ तृप भऽ गेलाह आ ओकह मे सँ बारह टा टतिरी जमा भऽ गेलाह।

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लूिा िे सुसमाचार

18 जखन ओ असगरे पाथाना िऽ रहल िलाह तखन हनिर कशद् य सभ हनिा संग िलाह आ पुिलकथन, “ लति सभ हमरा िे िहै त अकि?” 19 ओ सभ उतर ते लकथन, “यूहना बपकतस् मा ते कनहार। मुता कि​िु गतटे िहै त िकथ, “एकलयास!” आ कि​िु लति िहै त िकथ जे पुरान पि​ि् ता सभ मे सँ एि गतटे जीकब उठल िकथ। 20 ओ हनिा सभ िेँ पुिलकथन, “ मुता अहाँ सभ िे िहै त िी जे हम िे िी?” पतुस उतर ते लकथन, “परमेश् िरि मसीह।” 21 यीशु ओिरा सभ िेँ िडा आजा ते लकथन जे ई बात ि​िरत नकह िहब। 22 ओ िहलकथन, “ मनुष-पुत िेँ बहत िष भतगय पडतकन, आ बू़-पुरतकहत आ धमा -कशरि सभि दारा असीिार ियल जायत आ तेसर कतन मारल जेबाि चाही आ जीकब उठल जायत।” 23 ओ सभ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ जँ िेओ हमरा पािाँ आबय चाहै त अकि तँ ओ अपना िेँ निारय आ पकतकतन अपन कूस उठा िऽ हमरा पािाँ लागय।” 24 जे िेओ अपन पा् बचाबय चाहै त अकि, से ओिरा गमाओत, मुता जे कियत हमरा लेल अपन पा् गमा लेत, से ओिरा बचाओत। 25 जँ मनुद् यि समस संसार िेँ लाभाख्त िऽ िऽ अपना िेँ गमा लेलि आकि िेकि ते ल जाय तँ ओिरा िी िायता? 26 जे िेओ हमरा आ हमर बात पर लजत, तखन मनुद् यि पुत जखन अपन मकहमा मे आ अपन कपता आ पकित स् िगातूत सभि मकहमा मे आओत तखन ओिरा लख्त हतयत। 27 मुता हम अहाँ सभ िेँ सत् य िहै त िी जे एतय कि​िु एहन लति िकथ जे जा धरर परमेश् िरि राज् य नकह ते खत ता धरर मृत् युि सात नकह लेत। 28 एकह बात सभि िरीब आठ कतनि बात ओ पतुस, यूहन् ना आ यािूब िेँ लऽ िऽ एिटा पहाड पर पाथाना िरबाि लेल चकल गेलाह। 29 जखन ओ पाथाना िरै त िलाह तखन हनिर चेहराि रप बतकल गेलकन आ हनिर िस उ्र आ चमिैत िलकन। 30 यीशु सँ तू गतटे गप िऽ रहल िलाह, जे नाम िल मूसा आ एकलयाह। 31 ओ मकहमा मे पगट भेलाह आ यरशलेम मे हनिर मृ्ुि किदय मे बजलाह। 32 पतुस आ हनिा संग रहकनहार सभ नीत ं मे भारी पकड गेलाह, जखन ओ सभ जागल िलाह तखन हनिर मकहमा आ हनिा संग ठा़ तु नू आतमी िेँ ते खलकन। 33 जखन ओ सभ हनिा सँ किता हतइत िलाह तँ पतुस यीशु िेँ िहलकथन, “गुर, हमरा सभि लेल एतय रहब नीि अकि। एिटा अहाँ ि लेल, एिटा मूसाि लेल आ एि एकलयाहि लेल। 34 ई बात िहै त िाल मेघ आकब िऽ ओिरा सभ पर िाहरर तऽ ते लि। 35 मेघ मे सँ एिटा आिाज आयल जे, “ई हमर कपय पुत िकथ। 36 जखन आिाज बीकत गेल तखन यीशु असगरे पाकब गेलाह। ओ सभ ओिरा लग मे राखख िऽ ओकह समय मे ि​िरत नकह िहलि जे ओ सभ ते खने िल। 37 ततसर कतन जखन ओ सभ पहाडी पर सँ उतरलाह तँ बहत लति हनिा सँ भेट ियलकन। 38 ओकह तलि एि आतमी कचकचया िऽ बाजल, “गुर, हम अहाँ सँ किनती िरै त िी जे हमर बेटा िेँ ते खू, किएि तँ ओ हमर एिमात संतान अकि।”

39 एि आत् मा ओिरा पिकड लैत अकि आ ओ अचानि कचकचया उठै त अकि। ओिरा नतचैत िै ि जे िेर िेन बकन जाइत िै ि आ ओिरा िुचलैत ओिरा सँ मुख्ल सँ तू र भ’ जाइत िै ि। 40 हम अहाँ ि कशद् य सभ सँ किनती िेलहँ जे हनिा बाहर कनिाकल कतयौि। आ ओ सभ नकह िऽ सिल। 41 यीशु उतर ते लकथन, “ हे अकिशास आ कि​िृत पी़ी, हम अहाँ सभि संग ितेि कतन धरर रहब आ अहाँ सभ िेँ सहन िरब? अपन बेटा िेँ एतय आनू। 42 जखन ओ एखन धरर आकब रहल िलाह तखन शैतान हनिा नीचाँ िेकि ते लिकन आ ओिरा िाकड ते लिकन। यीशु अशु् आत् मा िेँ डाँ कट ते लकथन आ ओकह बचा िेँ ठीि ियलकन आ ओिरा अपन कपता िेँ िेर सँ सौंप ते लकथन। 43 ओ सभ परमेश् िरि पराकमी सामथ्ा य ते खख चकित भऽ गेलाह। यीशुि सभ िाज पर सभ एि-एि गतटे आशयाचकित भऽ गेलाह, तखन यीशु अपन कशद् य सभ िेँ िहलकथन। 44 ई बात अहाँ सभि िान मे डूकब जाउ, किएि तँ मनुद् य-पुत मनुद् यि हाथ मे सौंपल जायत। 45 मुता ओ सभ ई बात नकह बुझलकन आ ई बात हनिा सभ सँ नुिायल रकह गेलकन जे ओ सभ ई बात नकह बुकझ सिलाह। 46 तखन हनिा सभि बीच एिटा कि​िात भेल जे हनिा सभ मे सँ ितन पैघ हतयत। 47 यीशु हनिा सभि मतनि किचार बुकझ एिटा बचा िेँ लऽ िऽ ओिरा लग बैसा ते लकथन। 48 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ जे िेओ हमरा नाम सँ एकह बचा िेँ गह् िरत, से हमरा गह् िरै त अकि। 49 यूहन् ना उतर ते लकथन, “गुर, हम सभ ते खलहँ जे एि गतटे अहाँ ि नाम सँ तु षाटा सभ िेँ भगा रहल िल। हम सभ हनिा मना िऽ ते कलयकन, किएि तँ ओ हमरा सभि संग नकह चलैत िकथ। 50 यीशु हनिा िहलकथन, “ ओिरा मना नकह िर, किएि तँ जे हमरा सभि किरतध मे नकह अकि से हमरा सभि पर मे अकि।” 51 जखन हनिा उठयबाि समय आकब गेलकन तखन ओ द़तापूिाि यरशलेम जेबाि लेल मुकड गेलाह। 52 हनिा सामने तू त पठौलकन, आ ओ सभ सामरी सभि गाम मे जा िऽ हनिा लेल तैयारी िरऽ लगलाह। 53 ओ सभ हनिा स् िागत नकह ियलकन, किएि तँ हनिर मुँह एना िल जेना ओ यरशलेम जायब। 54 जखन हनिर कशष यािूब आ यूहन् ना ई ते खख िहलकथन, “पभु, िी अहाँ चाहै त िी जे हम सभ एकलयाह जिाँ आकग स् िगा सँ उतरर िऽ ओिरा सभ िेँ भस िऽ कतअ?” 55 मुता यीशु घुकम िऽ हनिा सभ िेँ डाँ कट िऽ िहलकथन, “ अहाँ सभ नकह जनैत िी जे अहाँ सभ ितन तरहि आत् माि िी।” 56 मनुखि पुत मनुद् यि पा् िेँ नष िरबाि लेल नकह, बल् कि ओिरा बचाबऽ लेल आयल िकथ। आ ततसर गाम चकल गेलाह। 57 जखन ओ सभ बाट मे जाइत िलाह तखन एि आतमी हनिा िहलकथन, “पभु, अहाँ जतय जायब, हम अहाँ ि पािाँ पािाँ चलब।”

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लूिा िे सुसमाचार

58 यीशु हनिा िहलकथन, “ लतमडीि िे त हतइत िै ि आ आिाशि कचडै सभि खतंता हतइत िै ि। मुता मनुद् य-पुत िेँ माथ राखय लेल ितय नकह िकन। 59 ओ ततसर िेँ िहलकथन, “ हमरा पािाँ चलू।” मुता ओ िहलकथन, “पभु, हमरा पकहने जा िऽ अपन कपता िेँ तिना कतयौि।” 60 यीशु हनिा िहलकथन, “ मृति िेँ अपन मुता​ा िेँ गाडय कतयौि। 61 ततसरत िहलि, “पभु , हम अहाँ ि पािाँ चलब। मुता पकहने हम हनिा सभिेँ किताई िरऽ जाइ, जे हमर घरमे घरमे अकि। 62 यीशु हनिा िहलकथन, “ ितनत हल पर हाथ राखख िऽ पािू घुकम िऽ ते खख िऽ परमेश् िरि राज् यि यतग नकह अकि।”

17 सतरर गतटे हकदात भऽ िऽ घुरर िऽ िहलकथन, “पभु, अहाँ ि नामि िार्े ँ तु द् टात् मा सभ सेहत हमरा सभि अधीन अकि।” 18 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ हम शैतान िेँ स् िगा सँ कबजली जिाँ खसैत ते खलहँ ।” 19 ते खू, हम अहाँ सभ िेँ साँ प आ कबचू आ शतुि सभ सामथ्ा य पर रौतबाि अकधिार तै त िी। 20 मुता एकह बात पर आनखनत नकह हतउ जे आत् मा अहाँ सभि अधीन अकि। बल् कि आनखनत हतउ, किएि तँ अहाँ सभि नाम स् िगा मे कलखल अकि। 21 ओकह समय मे यीशु आत् मा मे आनखनत भऽ िहलकथन, “ हे कपता, आिाश-पृथीि पभु , हम अहाँ िेँ धनिात तै त िी जे अहाँ ई सभ बात बुख्मान आ बुख्मान सभ सँ नुिा िऽ बचा सभ िेँ पगट ियलहँ । िार्, अहाँ ि नजरर मे एना नीि लागल। 22 हमर कपता दारा सभ कि​िु हमरा सौंपल गेल अकि। कपता िे िकथ, पुत ितकड, आ पुत कजनिा सामने पगट िरताह। 23 यीशु हनिा अपन कशद् य सभ कतस घुकम िऽ एिां त मे बजलाह, “ धन अकि ओ आँ खख जे अहाँ सभ जे ते खैत िी। 24 हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे अहाँ सभ जे कि​िु ते खैत िी से ते खबाि लेल बहतत पि​ि् ता आ राजा सभ चाहै त िलाह। आ जे बात अहाँ सभ सुनैत िी, तिरा सुनैत िी, मुता नकह सुनने िी। 25 एि गतटे िानून-किचाया ठा़ भऽ िऽ हनिा परखैत िहलकथन, “गुर, हम अनन् त जीिनि उतराकधिारी बनबाि लेल िी िरब?” 26 ओ हनिा पुिलकथन, “ धमा-कनयम मे िी कलखल अकि?” अहाँ ितना प़ै त िी? 27 ओ उतर ते लकथन, “अहाँ अपन परमेश् िर परमेश् िर सँ पूरा हतय सँ, पूरा पा् सँ, अपन समस सामथ्ा य आ पूरा मन सँ पेम िर। आ अपन पडतसी अपना जिाँ । 28 ओ हनिा िहलकथन, “ अहाँ सही उतर ते कलयैि। 29 मुता ओ अपना िेँ धमय ठहराबय चाहै त यीशु िेँ िहलकथन, “हमर पडतसी िे अकि?” 30 यीशु उतर ते लकथन, “ एिटा आतमी यरशलेम सँ यरीहत जा िऽ चतर सभि बीच खकस पडल, जे ओिर िपडा उतारर िऽ घायल िऽ िऽ ओिरा आधा मृत ितकड िऽ चकल गेल। 31 संयतगिश एिटा पुरतकहत ओकह बाट सँ उतरर गेलाह आ हनिा ते खख ओ ओकह पार सँ गुजरर गेलाह। 32 तकहना एिटा लेिी ओकह ्ान पर पहँ चला पर आकब िऽ हनिा कतस तिलि आ ओकह िात सँ गुजरर गेल। 33 मुता एिटा सामरी िंशज ओतऽ पहँ कच गेल। 34 ओ हनिा लग जा िए हनिर घाि िेँ तेल आ मकतरा ढारर िऽ अपन पशु पर बैसा िऽ एिटा सराय मे लऽ गेलाह आ हनिर ते खभाल ियलकन। 35 ततसर कतन जखन ओ किता भेलाह तँ तू पाइन कनिाकल िऽ सेना िेँ तऽ ते लकथन आ िहलकथन, “ओिर ते खभाल िर। अहाँ जे कि​िु बेसी खचा िरब तखन हम िेर आकब जायब तखन हम अहाँ िेँ पकतिल ते ब।” 36 अहाँ सतचैत िी जे एकह तीनू मे सँ िे चतर सभि बीच खकस पडलाि पडतसी िल? 37 ओ िहलकथन, “जे हनिा पर तया ियलकन।” तखन यीशु हनिा िहलकथन, “जाउ आ अहाँ सेहत एहने िर।” 38 ओ सभ जाइत िाल यीशु एिटा गाम मे पिेश ियलकन आ माथा​ा नामि एिटा स् ती हनिा अपन घर मे समेकट लेलकन।

अधाय 10 1 एकह बाति बात परमेश् िर आरत सतरर गतटे िेँ कनयुक ियलकन आ हनिा सभ िेँ तू -तू गतटे िेँ अपन सामने सँ ओकह नगर सभ मे पठा ते लकथन, जतय ओ सयं जेताह। 2 ते ँ ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ सते िसल बहत अकि, मुता मजतू र िम अकि। 3 जाउ, हम अहाँ सभ िेँ भेकडयाधसानि बीच मेमना जिाँ पठा रहल िी। 4 ने पसा, ने चीर आ ने जूता, आ बाट मे ि​िरत प्ाम नकह िर। 5 अहाँ सभ जाकह घर मे जाउ, पकहने िहब जे, “एकह घर मे शाखन हत।” 6 जँ शाखनि पुत ओतय रहत तँ अहाँ सभि शाखन ओिरा पर रहत। 7 ओकह घर मे रह, जे कि​िु ओ सभ ते ल जाइत अकि, से खाउपीबू, किएि तँ मजतू र अपन भाडाि पात अकि। घर-घर नकह जाउ। 8 अहाँ सभ जाकह नगर मे जाउ आ ओ सभ अहाँ सभ िेँ गह् िरै त िकथ, से अहाँ सभि सतझाँ जे कि​िु राखल गेल अकि, से खाउ। 9 ओकह मे जे बीमार अकि, ओिरा सभ िेँ ठीि िर आ ओिरा सभ िेँ िकह कतयौि जे , “परमेश् िरि राज् य अहाँ सभि समीप आकब गेल अकि।” “ 11 अहाँ सभि नगरि जे धूरा हमरा सभ पर कचपिल अकि, तिरा हम सभ अहाँ सभि किर् पतिै त िी। 12 मुता हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे ओकह कतन सततम िेँ ओकह नगर सँ बेसी सहनशील हतयत। 13 कधकार, ितराक़न! कधकार अकि, बेतसैता! किएि तँ जँ सतर आ सीततन मे जे पराकमी िाज अहाँ सभ मे भेल अकि से भेल रहै त तँ ओ सभ बहत कतन पकहने बतरा आ राख मे बैसल पशाताप िऽ लेने रकहतकथ। 14 मुता नायि समय सतर आ सीततन िेँ ई बात अहाँ सभ सँ बेसी सहनशील हतयत। 15 अहाँ ि​िरनहम, जे स् िगा मे उतात िी, नरि मे खसा ते ल जायब। 16 जे अहाँ सभि बात सुनैत अकि से हमर बात सुनैत अकि। जे अहाँ सभ िेँ कतरसृत िरै त अकि, से हमरा कतरसृत िरै त अकि। जे हमरा कतरसार िरै त अकि, से हमरा पठे कनहार िेँ कतरसार िरै त अकि।

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लूिा िे सुसमाचार

39 हनिर एिटा बकहन मररयम नामि िलीह, जे यीशुि पएर लग बैसल हनिर िचन सुनैत िलीह। 40 मुता माथा​ा बहत रास सेिा िरबा मे बतकझल िलीह आ हनिा लग आकब िऽ िहलकथन, “पभु , िी अहाँ िेँ एकह बाति ितनत परिाह नकह जे हमर बकहन हमरा असगरे सेिा िरबाि लेल ितकड ते लकन?” ते ँ ओिरा आगह िर जे ओ हमरा मतकत िरकथ। 41 यीशु हनिा उतर ते लकथन, “ माता​ा , माथा​ा , अहाँ बहत रास बात मे सािधान आ कचंकतत िी। 42 मुता एिटा बाति आिशिता अकि, मररयम ओकह नीि भाग िेँ चुनने िकथ जे हनिा सँ नकह हँ टल जायत।

16 ततसर लति सभ हनिा परखैत स् िगा सँ कचन् त तिैत िल। 17 मुता ओ हनिा सभि किचार िेँ जाकन हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ प्ेि राज जे अपना-अपना किर् बँटल अकि, से उजाड भऽ जाइत अकि। घरि किर् बँटल घर खकस पडै त अकि। 18 जँ शैतान सेहत अपना आप मे बँकट जायत तँ ओिर राज ितना ठा़ हतयत? किएि तँ अहाँ सभ िहै त िी जे हम बेलजबूबि दारा तु द् टात् मा सभ िेँ भगा तै त िी।” 19 जँ हम बेलजबूबि दारा तु द् टात् मा सभ िेँ भगाबैत िी तँ अहाँ सभि पुत सभ िेिरा दारा ओिरा सभ िेँ बाहर कनिालैत अकि? ते ँ ओ सभ अहाँ सभि नायाधीश हे ताह।” 20 मुता जँ हम परमेश् िरि आँ गुर सँ तु द् टात् मा सभ िेँ भगा तै त िी तँ परमेश् िरि राज् य अहाँ सभ पर आकब गेल अकि। 21 जखन बलिान आतमी हकथयारबंत अपन महल रखैत अकि तखन ओिर समकत शाखन मे रहै त अकि। 22 मुता जखन ओिरा सँ बेसी बलिान ओिरा पर आकब िऽ ओिरा पर किजय पाप िऽ तै त िै ि तँ ओ ओिरा सँ ओिर सभटा ि​िच िीकन लैत िै ि जिरा पर ओिरा भरतसा िलैि आ ओिर लूट-पाट बँकट लैत िै ि। 23 जे हमरा संग नकह अकि से हमरा किरतध मे अकि, आ जे हमरा संग नकह जमा िरै त अकि से कततर-कबतर िरै त अकि। 24 जखन अशु् आत् मा मनुद् य मे सँ कनिकल जाइत अकि तँ ओ शुष स् थान मे घुकम िऽ किशामि खतज मे चलैत अकि। कत नकह भेटला पर ओ िहै त िकथ, “हम अपन घर मे घुरर जायब, जतय सँ हम कनिललहँ ।” 25 जखन ओ अबैत िकथ तँ ओिरा झाकड-झूडल आ सजाओल पाबैत िकथ। 26 तखन ओ जा िऽ अपना सँ बेसी तु ष सातटा आन आत् मा िेँ अपना लग लऽ जाइत िकथ। ओ सभ ओकह मे पिेश िऽ िऽ ओतऽ रकह जाइत अकि, आ ओकह आतमीि अंकतम अि्ा पकहलुि ख्कत सँ बेसी खराब अकि। 27 जखन यीशु ई सभ बात िकह रहल िलाह तखन ओकह तलि एिटा स् ती हनिा आिाज उठा िऽ िहलकथन, “धन अकि ओ गभा जे अहाँ िेँ जन ते लि आ जे पेट चूसने िी।” 28 मुता ओ िहलकथन, “ बल् कि परमेश् िरि िचन सुनकनहार आ ओिर पालन िरकनहार सभ धन िकथ।” 29 जखन लति सभ मतटगर जमा भऽ गेल तँ ओ िहय लगलाह, “ ई सभ तु द् ट पी़ी अकि। एकह पर ितनत कचन् ह नकह, कसिाय यतनास पि​ि् ताि कचन् ह। 30 जकहना यतना नीनिी लति​ि लेल कचन् ह, तकहना मनुद् य-पुत सेहत एकह पी़ीि लेल सेहत हतयत। 31 तकर्ि रानी नायि समय मे एकह पी़ीि लति सभि संग उकठ िऽ हनिा सभ िेँ ततदी ठहराओतकन, किएि तँ ओ पृथ् िीि अन भाग सँ सुलेमानि बुख् सुनबाि लेल आयल िलीह। आ ते खू, सुलेमान सँ पैघ एिटा एतय अकि।” 32 नीनि​ि लति सभ एकह पी़ीि संग नायि समय मे उकठ िऽ ओिरा ततदी ठहराओत। आ ते खू, यतनास सँ पैघ एिटा एतय अकि। 33 िेओ तीया जरा िऽ ओिरा गुप ्ान पर नकह राखख तै त अकि, ने ितनत झाडीि नीचाँ , बल् कि तीया पर अबैत अकि। 34 शरीरि इजतत आँ खख अकि, ते ँ जखन अहाँ ि आँ खख एिल रहै त अकि तखन अहाँ ि पूरा शरीर सेहत इजतत सँ भरल अकि।

अधाय 11 1 जखन ओ एि ठाम पाथाना िऽ रहल िलाह तखन हनिर एिटा कशद् य हनिा िहलकथन, “पभु , हमरा सभ िेँ पाथाना िरब कसखाउ जेना यूहन् ना अपन कशद् य सभ िेँ सेहत कसखबैत िलाह।” 2 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ जखन अहाँ सभ पाथाना िरै त िी तँ िह जे , ‘हमर सभि कपता जे स् िगा मे िी, अहाँ ि नाम पकित ियल जाय।” ततहर राज आऊ। ततहर इचा पूरा हतउ, जेना सगा मे, पृथी मे सेहत। 3 हमरा सभ िेँ कतन-पकतकतन अपन कतनि रतटी कतअ। 4 आ हमरा सभि पाप रमा िर। किएि तँ हम सभ सेहत रमा िऽ तै त िी जे हमरा सभि ऋ्ी अकि। आ हमरा सभ िेँ परीरा मे नकह लऽ जाउ। मुता हमरा सभ िेँ अधलाह सँ बचाउ। 5 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ अहाँ सभ मे सँ ि​िरत कमत हतयत आ आधा राकत मे हनिा लग जा िऽ िहत जे, “कमत, हमरा तीन टा रतटी उधार कतअ।” 6 किएि तँ हमर एिटा कमत अपन याता मे हमरा लग आकब गेल अकि, आ हमरा लग ओिरा सामने ितनत बात नकह अकि? 7 ओ भीतर सँ उतर ते ताह, “हमरा परे शान नकह िर। हम उकठ िऽ ततरा नकह तऽ सिैत िी। 8 हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे, भले ओ उकठ िऽ ओिरा अपन कमत हे बाि िार्े ँ नकह ते कथन, मुता अपन आगहि िार्े ँ ओ उकठ िऽ ओिरा जतेि चाही से ते त। 9 हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे माँ गू, तखन अहाँ सभ िेँ ते ल जायत। खतजू, तऽ पाकब जायब। खटखटाउ, तखन अहाँ सभि लेल खुजल रहत।” 10 जे िेओ माँ गैत अकि, से भेटैत अकि। जे खतजै िै , से पाबै िै । जे खटखटाओत तिरा लेल ओ खतलल जायत।” 11 जँ ितनत बेटा अहाँ सभ मे सँ कियत कपता सँ रतटी माँ गत तऽ िी ओिरा पाथर ते त? जँ माि माँ गत तँ माि​ि बतला मे साँ प तऽ ते तैि? 12 आकि जँ ओ अंडा माँ गत तँ ओिरा कबचू च़ाओत? 13 जँ अहाँ सभ तु ष भऽ िऽ अपन सन् तान सभ िेँ नीि िरतान ते बऽ जनैत िी तँ अहाँ सभि स् िगयय कपता हनिा सँ माँ गकनहार सभ िेँ पकित आत् मा ितेि बेसी ते कथन? 14 ओ एिटा तु द् टात् मा िेँ बाहर कनिाकल रहल िल आ ओ गूंगा िल। जखन शैतान बाहर कनिकल गेल तखन गूंगा सभ बाकज उठल। आ लति सभ आशयाचकित भ’ गेल। 15 मुता हनिा सभ मे सँ कि​िु गतटे िहलकथन, “ओ तु द् टात् मा सभि पमुख बेलजबूबि दारा तु द् टात् मा सभ िेँ भगाबैत िकथ।”

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लूिा िे सुसमाचार

मुता जखन अहाँ ि आँ खख अधलाह हतइत अकि तखन अहाँ ि शरीर सेहत अनार सँ भरल रहै त अकि। 35 ते ँ सािधान रह जे अहाँ मे जे इजतत अकि से अनार नकह हत। 36 जँ अहाँ ि समस शरीर इजतत सँ भरल रहत आ ितनत भाग अनार नकह हतयत तँ पूरा शरीर इजतत सँ भरल रहत, जेना जखन तीयाि तेज चमि अहाँ िेँ इजतत तै त अकि। 37 जखन ओ बाकज रहल िलाह तखन एिटा िरीसी हनिा संग भतजन िरबाि लेल किनती ियलकन। 38 िररसी ई ते खख आशयाचकित भऽ गेलाह जे ओ पकहने भतजन िरबा सँ पकहने नकह नहौलकन। 39 परमेश् िर हनिा िहलकथन, “ अब अहाँ सभ िररसी सभ पाला आ थालीि बाहर साि िऽ रहल िी। मुता अहाँ ि भीतरि भाग खरखर आ तु षता सँ भरल अकि। 40 अहाँ सभ मूखा सभ, िी जे बाहरि चीज बनौलि से भीतरि चीज सेहत नकह बनौलि? 41 बल् कि अहाँ सभि जे कि​िु अकि, ताकह सँ कभरा कतअ। ते खू, अहाँ सभि लेल सभ कि​िु शु् अकि। 42 मुता, अहाँ सभ िेँ कधकार अकि, िररसी सभ! किएि तँ अहाँ सभ पुतीना आ रई आ सभ तरहि जडी-बूटीि तसम भाग तै त िी आ नाय आ परमेश् िरि पेम िेँ पार िरै त िी। 43 हे िररसी सभ, अहाँ सभ िेँ कधकार! किएि तँ अहाँ सभ सभाघर मे सभ सँ ऊपरि आसन आ बजार मे शुभिामना सँ पेम िरै त िी। 44 अहाँ सभ कधकार अकि, अहाँ सभ शासी आ िररसी सभ, पाखंडी सभ! किएि तँ अहाँ सभ ओकह िब जिाँ िी जे नकह ते खाइत अकि, आ ओकह पर चलयिला लति सभ ओिरा सभि ितनत जान नकह रखैत अकि।” 45 तखन एि गतटे ि्‍यि्‍कत-कशरि हनिा िहलकथन, “गुर, ई िकह अहाँ हमरा सभ िेँ सेहत कनना िरै त िी।” 46 ओ िहलकथन, “ अहाँ सभ िेँ सेहत कधकार अकि, हे ि् ‍यि्‍तिसु सभ! किएि तँ अहाँ सभ मनुद्‍य सभ पर िकठन भार उठाबैत िी, आ अहाँ सभ एि आँ गुर सँ भार िेँ नकह िूबैत िी। 47 कधकार अहाँ सभ िेँ! किएि तँ अहाँ सभ पि​ि् ता सभि िब बनबैत िी आ अहाँ सभि पूिाज ओिरा सभ िेँ मारर ते लि। 48 अहाँ सभ सते गिाही तै त िी जे अहाँ सभ अपन पूिाज सभि िाज िेँ अनुमकत तै त िी। 49 ते ँ परमेश् िरि बुख् सेहत िहलकथन, “हम हनिा सभ िेँ पि​ि् ता आ पेररत सभ पठा ते बकन आ हनिा सभ मे सँ कि​िु िेँ मारर िऽ सताओत। 50 जाकह सँ संसारि सृकष सँ बहराएल सभ पि​ि् ता सभि खून एकह पी़ी सँ माँ गल जाय। 51 हाकबल िेर खून सँ ल’ ि’ जिरयाहि खून धरर जे िेती आ मखनरि बीच मे नष भ’ गेल िल। 52 हे ि​िील सभ, अहाँ सभ िेँ कधकार! अहाँ सभ जानि चाभी िीकन लेलहँ , अहाँ सभ अपना मे पिेश नकह िेलहँ आ जे सभ पिेश िरै त िल, तिरा सभ िेँ अहाँ सभ रतकि ते कलयैि। 53 जखन यीशु हनिा सभ िेँ ई बात िकह रहल िलाह तखन धमाशासी आ िररसी सभ हनिा पर जतर-जतर सँ आगह िरय लगलाह आ हनिा बहत रास बात िहय लेल उिसाबय लगलाह।

54 हनिर पतीरा िरै त िलाह आ हनिर मुँह सँ कि​िु कनिालबाि पयास िरै त िलाह जाकह सँ हनिा पर आरतप लगाओल जा सिय। अधाय 12 1 एकह बीच जखन असंख लति सभ एि ठाम जमा भ’ गेल िल, जाकह सँ ओ सभ एि-ततसर पर तबाकड गेल, तखन ओ सभ सँ पकहने अपन कशद् य सभ िेँ िहय लगलाह, “ िररसी सभि खमीर सँ सािधान रह, जे पाखंड अकि।” 2 किएि तँ ितनत एहन ितनत बात नकह अकि जे पगट नकह हतयत। आ ने नुिाएल, जे पता नकह चलत। 3 ते ँ अहाँ सभ जे कि​िु अनार मे िहलहँ से इजतत मे सुनल जायत। जे बात अहाँ सभ ितठरी मे िान मे बाजल िी से घरि चतटी पर पचाररत ियल जायत। 4 हम अहाँ सभ िेँ हमर कमत लतिकन िेँ िहै त िी जे, जे शरीर िेँ मारर तै त अकि, आ तिर बात ओिरा सभ िेँ आब ितनत िाज नकह, ताकह सभ सँ नकह डे राउ। 5 मुता हम अहाँ सभ िेँ पकहने सँ चेतािनी ते ब जे अहाँ सभ ि​िरा सँ डरब। हँ , हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे , हनिा सँ डर।” 6 िी पाँ च गौरै या तू िारथ मे कबिाइत अकि आ परमेश् िरि सामने एिटा गौरै या कबसरल नकह जाइत अकि? 7 मुता अहाँ ि माथि िेश सेहत सभ कगनल गेल अकि। ते ँ नकह डे राउ, अहाँ सभ बहतत गौरै या सँ बेसी मतलगर िी। 8 हम अहाँ सभ िेँ सेहत िहै त िी जे जे िेओ मनुद् यि समर हमरा स् िीिार िरत, से मनुद् य-पुत सेहत परमेश् िरि स् िगातूत सभि समर हनिा सीिार िरत। 9 मुता जे िेओ मनुद् यि समर हमरा असीिार िरत, से परमेश् िरि स् िगातूत सभि समर असीिार ियल जायत। 10 जे िेओ मनुद् यि पुति किर् ितनत बात िहत तँ ओिरा माि ियल जायत। 11 जखन ओ सभ अहाँ सभ िेँ सभाघर, मकजस् े ट आ अकधिार सभि समर अनताह तखन अहाँ सभ एकह बाति ितनत किचार नकह िर जे अहाँ सभ ितना उतर ते ब आ िी िहब। 12 किएि तँ पकित आत् मा अहाँ सभ िेँ ओकह समय मे कसखाओत जे अहाँ सभ िेँ िी िहबाि चाही। 13 ओकह तल मे सँ एि गतटे हनिा िहलकथन, “गुर, हमर भाय सँ िह जे ओ हमरा संग उतराकधिार बँटकथ।” 14 ओ हनिा पुिलकथन, “ यार, हमरा अहाँ सभि नायाधीश िा बँटिारा िे बनौलकन?” 15 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ सािधान रह आ लतभ सँ सािधान रह, किएि तँ मनुद् यि जीिन ओकह िसुि पचुरता मे नकह हतइत िै ि।” 16 ओ हनिा सभ िेँ एिटा दषान बजौलकन, “ एिटा धनी लति​ि जमीन मे पचुर माता मे खेती भेलैि। 17 ओ मने-मन सतचैत िहलकथन, “हम िी िरब, किएि तँ हमरा लग अपन िल ते बाि ितनत जगह नकह अकि?” 18 ओ िहलकथन, “हम ई िाज िरब। आ ओतकह हम अपन सभ िल आ समकत तान िरब। 19 हम अपन पा् िेँ िहब जे , “अहाँ िेँ बहत िदा धरर बहत रास समकत जमा ियल गेल अकि। आराम िर, खाउ, पीबू आ मस रह।

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लूिा िे सुसमाचार

20 मुता परमेश् िर हनिा िहलकथन, “हे मूखा, आइ राकत अहाँ ि पा् माँ गल जायत। 21 जे अपना लेल धन जमा िरै त अकि, मुता परमेश् िरि पकत धकनि नकह अकि। 22 ओ अपन कशद् य सभ िेँ िहलकथन, “ एही लेल हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे, अहाँ सभ िी खाएब, ताकह पर ितनत कचना नकह िर। आ ने शरीरि लेल, जे पकहरब। 23 जीिन भतजन सँ बेसी अकि, आ शरीर िस सँ बेसी अकि। 24 िाग पर किचार िर। जिरा मे ने भंडार अकि आ ने ितठी। परमेश् िर ओिरा सभ िेँ पतसैत िकथ, अहाँ सभ कचडै सभ सँ ितेि नीि िी? 25 अहाँ सभ मे सँ िे सतकच िऽ अपन ित मे एि हाथ ब़ा सिैत अकि? 26 जँ अहाँ सभ ितट-ितट िाज नकह िऽ सिैत िी तँ शेदि लेल अहाँ सभ किएि सतचैत िी? 27 िुमुत पर किचार िर जे ओ ितना ब़ै त अकि। तैयत हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे सुलेमान अपन समस मकहमा मे एकह मे सँ ितनत एिटा जिाँ सजल नकह िलाह। 28 जँ परमेश् िर घास िेँ एना िपडा पकहरा तै त िकथन जे आइ खेत मे अकि आ िाखल भतज मे िेिल जायत अकि। हे अल किश् िासि लति सभ, ओ अहाँ सभ िेँ ितेि बेसी िपडा पकहराओत? 29 अहाँ सभ िी खाएब आ िी पीब से नकह तािब आ ने अहाँ सभ संतेह मे रह। 30 संसारि जाकत सभ एकह सभ बाति खतज िरै त अकि। 31 बल् कि अहाँ सभ परमेश् िरि राज् य िेँ तािब। ई सभ बात अहाँ सभि संग जतडल जायत।” 32 हे ितट झुंड, नकह डे राउ। किएि तँ अहाँ सभि कपता अहाँ सभ िेँ राज्‍य ते बऽ चाहै त िकथ। 33 जे कि​िु अकि से बेकच िऽ कभरा कतअ। अपना लेल झतरा जे पुरान नकह हतइत अकि, आिाश मे एिटा एहन खजाना जे री् नकह हतइत अकि, जतय चतर लग नकह अबैत अकि आ ने पतंग भष नकह िरै त अकि। 34 किएि तँ जतऽ अहाँ ि खजाना रहत, ओतकह अहाँ ि मतन सेहत रहत। 35 अहाँ ि िमर मे पटी बानल रह आ अहाँ ि इजतत जरै त रहय। 36 अहाँ सभ ओकह लति जिाँ िी जे अपन माकलि​ि पतीरा िरै त अकि जखन ओ कि​िाह सँ घुरताह। जाकह सँ जखन ओ आकब िऽ खटखटौताह तँ तुरन हनिा सामने खतकल सिकथन। 37 धन िकथ ओ सेि​ि सभ, जे पभु आकब िऽ हनिा सभ िेँ पहरा तै त पाकब लेताह। 38 जँ ओ ततसर पहर मे आकब िा तेसर पहर मे आकब िऽ ओिरा सभ िेँ ओकहना पाकब लेत तऽ धन ओ सेि​ि सभ। 39 ई जाकन कलअ जे जँ घरि माकलि िेँ बुझल रहै त जे चतर ितन समय मे आओत तऽ ओ जागल रहै त आ अपन घर ततडय नकह तै त। 40 ते ँ अहाँ सभ सेहत तैयार रह, किएि तँ मनुद् य-पुत ओकह समय मे आकब रहल िकथ जखन अहाँ सभ नकह सतचैत िी। 41 तखन पतुस हनिा िहलकथन, “पभु, िी अहाँ ई दषान हमरा सभ िेँ िहै त िी िा सभ िेँ?” 42 परमेश् िर िहलकथन, “ तखन ओ किश् िासपू्ा आ बुख्मान भंडारी िे अकि, जिरा अपन माकलि अपन घरि लति पर

शासि बनाओत आ समय पर हनिा सभ िेँ भतजनि भाग ते कथन?” 43 धन अकि ओ सेि​ि, जिरा माकलि आकब िऽ एना िरै त ते खताह। 44 हम अहाँ सभ िेँ सत् य िहै त िी जे ओ ओिरा अपन सभ कि​िु पर अध् यर बनाओत। 45 मुता जँ ओ सेि​ि मतन मे िहै त अकि जे , ‘हमर माकलि अपन आबय मे ते री ि’ रहल िकथ। आ पुरद-तासी-िना सभ िेँ मारर-पीट िर’ लागत, आ खा-पीब आ नशा मे धुत हतब’ लागत। 46 ओकह नतिरि माकलि ओकह कतन मे आकब जेताह जखन ओ ओिरा नकह ताित आ ओकह समय मे जखन ओिरा नकह बुझल हतयत। 47 जे नतिर अपन माकलि​ि इचा िेँ जनैत िल आ अपना िेँ तैयार नकह िरै त िल आ ने ओिर इचाि अनुसार िरै त िल, ओिरा बहत मारल जायत। 48 मुता जे नकह जनैत िल आ पहारि यतग िाज िरै त अकि, तिरा िम पहार सँ मारल जायत। िार्, जिरा बहत कि​िु ते ल जायत, ओिरा सँ बहत कि​िु माँ गल जायत। 49 हम पृथी पर आकग पठे बाि लेल आयल िी। आ जँ पकहने सँ जरर गेल अकि तँ हम िी िरब? 50 मुता हमरा बपकतस् मा लेबऽ पडत। आ जा धरर ई पूरा नकह भ' जायत ता धरर हम ितना संिुकचत िी! 51 अहाँ सभ ई माकन लैत िी जे हम पृथ् िी पर शाखन ते बऽ लेल आयल िी? हम िहै त िी, नकह; बखल किभाजन: 52 आब सँ एि घर मे पाँ च गतटे बँटल रहताह, तीन गतटे तू गतटे ि किर् आ तू गतटे तीन गतटे ि किर्। 53 कपता बेटाि किर् आ बेटा कपताि किर् बँटल रहत। माय बेटीि किर् आ बेटी मायि किर्। सासु अपन पुततहि किर् आ पुततह अपन सासुि किर्। 54 ओ लति सभ िेँ सेहत िहलकथन, “ पशच्‍च कतस सँ मेघ उठै त ते खख िऽ तुरत िहै त िी जे , ‘बृकष अबैत अकि। आ से सेहत अकि। 55 जखन अहाँ सभ तकर्ि हिा बहै त ते खख िऽ िहै त िी जे , गमय हतयत। आ से हतइत िै ि। 56 अहाँ सभ पाखंडी सभ, अहाँ सभ आिाश आ पृथ् िीि मुँह िेँ बूकझ सिैत िी। मुता एकह बेर अहाँ सभ ितना नकह बुझैत िी? 57 हँ, आ अहाँ सभ अपना सँ किएि नकह मानैत िी जे उकचत अकि? “ िही ं ओ अहाँ िेँ नायाधीशि समर नकह राखख ते त, आ नायाधीश अहाँ िेँ अकधिारीि हाथ मे नकह सौंकप ते त, आ अकधिारी अहाँ िेँ जेल मे नकह राखख ते त।” 59 हम अहाँ िेँ िहै त िी जे जाबत धरर अहाँ अंकतम माइटी नकह चुिा लेब ता धरर ओतय सँ नकह कनिलब। अधाय 13 1 ओकह समय मे कि​िु लति हनिा गलील लति​ि किदय मे िहै त िलाह, कजनिर खून कपलातुस हनिा सभि बकलतान मे कमला ते ने िलाह। 2 यीशु हनिा सभ िेँ उतर ते लकथन, “ िी अहाँ सभ ई मानैत िी जे ई गलील लति सभ गलील लति सभ सँ बेसी पापी िकथ, िार् हनिा सभ िेँ एहन िष भेलकन?”

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लूिा िे सुसमाचार

3 हम अहाँ सभ िेँ नकह िहै त िी, मुता, जाबत अहाँ सभ पशाताप नकह िरब, ताबत धरर अहाँ सभ तकहना नाश भऽ जायब। 4 आकि ओ अठारह गतटे , कजनिा पर कसलतआमि बुजा खकस पडलकन आ हनिा सभ िेँ मारर ते लिकन, से अहाँ सभ सतचैत िी जे ओ सभ यरशलेम मे रहकनहार सभ लति सँ बेसी पापी िलाह? 5 हम अहाँ सभ िेँ नकह िहै त िी, मुता, जाबत अहाँ सभ पशाताप नकह िरब, ताबत धरर अहाँ सभ तकहना नाश भऽ जायब। 6 ओ ई दषान सेहत िहलकन। एि आतमीि अंगूरि बगीचा मे अंजीरि गाि रतपल िल। ओ आकब िऽ ओकह पर िल तािैत रहलाह, मुता ितनत िल नकह भेटलकन। 7 तखन ओ अपन अंगूरि बगीचाि साज-स्ा िरयिला िेँ िहलकथन, “ते खू, तीन साल सँ हम एकह अंजीरि गाि पर िल तािैत आकब रहल िी, मुता ितनत नकह भेटैत अकि। एिरा जमीन पर किएि बतकझल अकि? 8 ओ हनिा उतर ते लकथन, “पभु , एकह साल सेहत ितडू, जाबत हम ओिरा चार िात खततब आ ओिरा गतबर नकह ते ब। 9 जँ ओ िल तै त अकि तँ नीि, आ जँ नकह, तँ तिर बात ओिरा िाकट ते ब। 10 ओ किशाम-कतन मे एिटा सभाघर मे कशरा तऽ रहल िलाह। 11 एिटा स् ती िल, जिरा अठारह िदाि तु बालताि आत् मा िलकन, ओ एि संग प्ाम िएने िलीह आ अपना िेँ ितनत तरहे ँ उकठ नकह सिलीह। 12 यीशु ओिरा ते खख िऽ ओिरा अपना लग बजा िऽ िहलकथन, “ हे स् ती, अहाँ अपन तु बालता सँ मुक भऽ गेल िी।” 13 ओ ओिरा पर हाथ राखख ते लि आ तुरन ओ सतझ भऽ गेलीह आ परमेश् िरि मकहमा ियलकन। 14 सभाघरि माकलि कतकधत भऽ िऽ उतर ते लकथन, किएि तँ यीशु किशाम-कतन मे ठीि ियलकन आ लति सभ िेँ िहलकथन, “िह कतन मे लति िेँ िाज िरबाि चाही सब िे कतन। 15 तखन परमेश् िर हनिा उतर ते लकथन, “ हे पाखंडी, िी अहाँ सभ मे सँ एि-एि गतटे किशाम-कतन मे अपन बैल िा अपन गतहा िेँ ठे हन सँ नकह खतकल िऽ पाकन पीबय लेल नकह लऽ जाइत िी?” 16 िी ई स् ती अबाहमि बेटी, जिरा शैतान एकह अठारह िदा मे बाखन ते ने िकथ, किशामि कतन एकह बंधन सँ मुक नकह हे बाि चाही? 17 यीशु ई बात िकह िऽ हनिर सभ किरतधी सभ लख्त भऽ गेलाह। 18 तखन ओ पुिलकथन, “ परमेश् िरि राज् य िेहन अकि?” आ हम एिरा ितन तरहे ँ कमलैत-जुलैत रहब? 19 ई एिटा सरसति ताना जिाँ अकि, जिरा मनुद् य लऽ िऽ अपन गािी मे िेकि ते लि। ओ बक़ िऽ एिटा पैघ गाि​ि मतम बकन गेल। आ आिाशि कचडै सभ ओिर डारर मे बैकस गेल। 20 ओ िेर पुिलकथन, “ हम परमेश् िरि राज् य िेँ ितन उपमा ते ब?” 21 ई खमीर जिाँ अकि, जिरा स् ती तीन नाप आटा मे नुिा िऽ रखने िल, जाबत धरर पूरा खमीर नकह भऽ गेल। 22 ओ नगर-गाम मे घुकम िऽ कशरा तै त रहलाह आ यरशलेम कतस किता भेलाह।

23 तखन एि गतटे हनिा पुिलकथन, “पभु , िी उ्ार पाबकनहार िम अकि?” ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ 24 संिी्ा िाटि पर पिेश िरबाि लेल पयास िर, किएि तँ हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे , बहतत लति पिेश िरबाि पयास िरताह, मुता नकह िऽ सिैत िकथ। 25 जखन एि बेर घरि माकलि उकठ िऽ तरब्ा बन िऽ ते लि आ अहाँ सभ बाहर ठा़ भऽ िऽ तरब्ा खटखटाबय लगैत िी जे , “पभु, पभु, हमरा सभ िेँ खतकल कतयौि।” ओ अहाँ सभ िेँ उतर ते ताह, “हम अहाँ सभ िेँ नकह जनैत िी जे अहाँ सभ ितय सँ आयल िी। 26 तखन अहाँ सभ िहब जे , “हम सभ अहाँ ि सतझाँ मे भतजनपीना िेलहँ आ अहाँ हमरा सभि गली-गली मे कशरा ते लहँ ।” 27 मुता ओ िहताह, “हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे हम अहाँ सभ िेँ नकह जनैत िी जे अहाँ सभ ितय सँ आयल िी। हे सभ अधमािमय, हमरा सँ तू र भ’ जाउ।” 28 जखन अहाँ सभ परमेश् िरि राज् य मे अबाहम, इसहाि, यािूब आ सभ पि​ि् ता सभ िेँ ते खब आ अहाँ सभ िेँ बाहर कनिाकल ते ल गेल अकि। 29 ओ सभ पूब, पकशम, उतर आ तकर् सँ आकब परमेश् िरि राज् य मे बैसत। 30 ते खू, अंकतम लति सभ पकहने हतयत, आ पकहल लति सभ अंकतम हतयत। 31 ओही कतन कि​िु िररसी सभ हनिा लग आकब िऽ िहलकथन, “नकह जाउ आ एतऽ सँ चकल जाउ। 32 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ जाउ, ओकह लतमडी िेँ िकह कतयौि जे , “ते खू, हम तु द् टात् मा सभ िेँ भगा तै त िी आ आइिाखल इलाज िरै त िी, आ तेसर कतन हम कस् भऽ जायब।” 33 तैयत हमरा आइ, िाखल आ ततसर कतन चलब, किएि तँ ई नकह भऽ सिैत अकि जे यरशलेम सँ ितनत भकिषिका नष भऽ जाय। 34 हे यरशलेम, यरशलेम, जे भकिषिका सभ िेँ मारर तै त िी आ अहाँ लग पठाओल गेल लति सभ िेँ पाथर सँ मारर तै त िी। हम ितेि बेर अहाँ ि बचा सभ िेँ एि ठाम जमा िररतहँ , जेना मुगय अपन बचा सभ िेँ पाँ खख नीचाँ जमा िरै त अकि, मुता अहाँ सभ नकह चाहै त िलहँ ! 35 ते खू, अहाँ सभि घर अहाँ सभि लेल उजाड भऽ गेल अकि, आ हम अहाँ सभ िेँ सत् य िहै त िी जे , जाबत धरर अहाँ सभ हमरा नकह ते खब, जाबत धरर अहाँ सभ िहब जे , “धन अकि जे पभुि नाम सँ आओत।” अधाय 14 1 जखन ओ किशाम-कतन मे एिटा मुख्‍य िरीसीि घर मे रतटी खाय गेलाह तखन ओ सभ हनिा पर नजरर रखलकन। 2 ते खू, हनिा आगू मे एिटा एहन आतमी िल जे बूंति बीमारी सँ पीकडत िल। 3 यीशु धमा-कनयमि ि् ‍यापि आ िररसी सभ िेँ िहलकथन, “ िी किशाम-कतन मे ठीि िरब उकचत अकि?” 4 ओ सभ चुप रहलाह। ओ ओिरा लऽ िऽ ठीि िऽ िऽ ओिरा ितकड ते लि। 5 ओ हनिा सभ िेँ उतर ते लकथन, “ अहाँ सभ मे सँ िेिर गतहा िा बैल गडा मे खकस पडत आ किशाम-कतन मे ओिरा तुरन बाहर नकह कनिालत?”

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लूिा िे सुसमाचार

6 ओ सभ हनिा िेर सँ एकह बाति उतर नकह तऽ सिलाह। 7 ओ सभ बजौल गेल लति सभ िेँ एिटा दषान ते लकन, जखन ओ सभ पमुख ितठली सभ िेँ ितना चुनलकन। हनिा सभ िेँ िहलकथन। 8 जखन अहाँ िेँ ि​िरत कि​िाह मे बजाओल जायत तखन अहाँ िेँ सि्च ितठली मे नकह बैसब। िही ं ततरा सँ बेसी आतर्ीय आतमी ओिरा सँ नकह बजाओल जायत। 9 जे अहाँ आ हनिा बजौने िल, से आकब िऽ अहाँ िेँ िहै त अकि जे , “एकह आतमी िेँ जगह कतअ।” आ अहाँ लाज सँ नीचाँ ि ितठली लेबय लगैत िी। 10 मुता जखन अहाँ िेँ बजाओल जायत तखन जाउ आ नीचाँ ि ितठली मे बैकस जाउ। जाकह सँ जखन अहाँ िेँ बजौने िकथ, तखन ओ अहाँ िेँ िहकथन जे, “कमत, ऊपर चकल जाउ।” 11 किएि तँ जे िेओ अपना िेँ ऊपर उठबैत अकि, से नीचाँ ियल जायत। जे अपना िेँ नम िरै त अकि, से ऊँच ियल जायत।” 12 तखन ओ हनिा आजा ते कनहार िेँ सेहत िहलकथन, “ जखन अहाँ भतजन िा भतजन िरब तखन अपन कमत, भाय, ने अपन ररशेतार आ ने अपन धनी पडतसी िेँ बजाउ। िही ं ओहत सभ अहाँ िेँ िेर सँ नकह बजा लेत आ अहाँ िेँ ितनत पकतिल नकह भेकट जाय।” 13 मुता जखन अहाँ भतज िरब तखन गरीब, अपंग, लंगडा आ आनर िेँ बजाउ। 14 अहाँ धन हतयब। किएि तँ ओ सभ ततहर पकतिल नकह तऽ सिैत अकि, किएि तँ धमय लति​ि जीकब उठला पर ततहर पकतिल भेटतौि।” 15 जखन हनिा संग भतजन िरय बला लति मे सँ एि गतटे ई बात सुकन िऽ िहलकथन, “धन अकि जे परमेश् िरि राज् य मे रतटी खाओत।” 16 तखन ओ हनिा िहलकथन, “ एिटा आतमी बहत रास भतज ियलकन आ बहतत िेँ बजौलकन। 17 भतजनि समय मे अपन नतिर िेँ पठौलकन जे बजाओल गेल लति सभ िेँ िहय, “आउ।” किएि तँ आब सभ कि​िु तैयार भऽ गेल अकि। 18 ओ सभ एि सहमकत सँ बहाना बनाबय लगलाह। पकहल लति हनिा िहलकथन, “हम एिटा जमीन िीकन लेने िी, आ ओिरा ते खय लेल जाय पडत। 19 ततसर गतटे िहलकथन, “हम पाँ चटा जुआ बैल िीकन लेने िी आ ओिरा सभ िेँ परखय जा रहल िी।” 20 ततसर िहलि, “हम पतीि कि​िाह िएने िी, ते ँ हम नकह आकब सिैत िी।” 21 ओ नतिर आकब िऽ अपन माकलि िेँ ई सभ बात बता ते लि। तखन घरि माकलि तमसा ि’ अपन नतिर िेँ िहलकथन, “जली सँ शहरि गली-गली मे कनिलू, आ गरीब, अपंग, रिल आ आनर िेँ एतय आकन कतयौि।” 22 सेि​ि िहलकथन, “पभु , अहाँ ि आजानुसार ई िाज भऽ गेल, मुता तैयत जगह अकि।” 23 पभु नतिर िेँ िहलकथन, “राजमागा आ बाग मे जाउ आ ओिरा सभ िेँ बाध िर जाकह सँ हमर घर भरर जाय।” 24 हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे , जे लति सभ िेँ बजाओल गेल िल, ताकह मे सँ कियत हमर भतजनि सात नकह लेत। 25 हनिा संग बहत रास भीड गेल।

26 जँ िेओ हमरा लग आकब िऽ अपन कपता, माय, पती, संतान, भाय, बकहन, हँ, आ अपन पा् सँ सेहत घृ्ा नकह िरै त अकि, तँ ओ हमर कशद् य नकह बकन सिैत अकि। 27 जे िेओ अपन कूस नकह उठा िऽ हमरा पािाँ नकह आओत, से हमर कशद् य नकह भऽ सिैत अकि। 28 किएि तँ अहाँ सभ मे सँ िेओ बुजा बनेबाि इच् िा िरै त अकि जे पकहने बैकस िऽ खचाि ग्ना नकह िरै त अकि जे ओिरा पूरा िरबाि लेल पया​ा प अकि िी नकह? 29 जँ ओ नीिं राखख िऽ ओिरा पूरा नकह िऽ पबैत िकथ तँ सभ ते खकनहार सभ हनिर उपहास िरऽ लगकथन। 30 ओ िहलकथन, “ई आतमी कनमा​ा ् िरऽ लागल, मुता िाज पूरा नकह िऽ सिल।” 31 िी राजा ततसर राजाि संग यु् िरऽ जा िऽ पकहने बैकस िऽ ई किचार नकह िरै त अकि जे िी ओ तस हजारि संग बीस हजारि संग आबयिला सँ भेट िऽ सिैत अकि? 32 जँ ततसरत बहत तू र अकि तँ ओ तू त पठा िऽ शाखनि शता चाहै त अकि। 33 तकहना अहाँ सभ मे सँ जे िेओ अपन सभ कि​िु नकह ितडै त अकि, से हमर कशद् य नकह बकन सिैत अकि। 34 नून नीि हतइत अकि, मुता जँ नूनि सुगंध खतम भऽ गेल अकि तँ ओिरा ितन तरहे ँ मसाला ते ल जायत? 35 ई ने ते शि लेल उपयुक अकि आ ने गतबरि खेति लेल। मुता मनुष ओिरा बाहर िेकि तै त अकि। जेिरा सुनै िे िान िै , ओिरा सुनै। अधाय 15 1 तखन सभ िरताता आ पापी हनिर बात सुनबाि लेल हनिा लग आकब गेलाह। 2 िररसी आ धमाशासी सभ बडबडाइत िहलकथन, “ई आतमी पापी सभ िेँ गह् िरै त अकि आ ओिरा सभि संग भतजन िरै त अकि।” 3 यीशु ई दषान हनिा सभ िेँ िहलकथन। 4 अहाँ सभ मे सँ िेिरत सय भेड ँ ा लऽ िऽ जँ ओिरा मे सँ एिटा भेड ँ ा गमा लेत तँ उननबेटा भेड ँ ा िेँ जंगल मे ितकड िऽ जे हे रायल अकि ताबत धरर ओिरा पािाँ नकह चलत? 5 जखन ओ ओिरा पाकब िऽ हकदात भऽ िऽ िान पर राखख तै त िकथ। 6 घर अबैत िाल ओ अपन कमत आ पडतसी सभ िेँ बजा िऽ िहै त िकथन, “हमरा संग आनखनत रह। किएि तँ हम अपन बरत जे हे रायल िल, से पाकब गेल िी। 7 हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे, स् िगा मे एिटा पापी पर पशाताप िरयिला पर, ओकहना उननबे धमय लति सँ बेसी आनन हतयत, कजनिा पशाताप िरबाि आिशिता नकह। 8 या िी जे स् ती चानीि तस टु िडी लऽ िऽ एि टु िडी गमा लेत तँ ओ तीया नकह जरा िऽ घर झाकड िऽ ताबत धरर लगन सँ तिैत नकह अकि? 9 जखन ओ ओिरा पाकब िऽ अपन कमत आ पडतसी सभ िेँ बजा िऽ िहै त िकथ जे, “हमरा संग आनखनत रह।” िार् जे टु िडा हम गमा लेने रही से हमरा भेकट गेल अकि। 10 तकहना हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे, परमेश् िरि स् िगातूत सभि सामने एिटा पापी पर आनन् ध अकि जे पश् चाताप िरै त अकि।

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लूिा िे सुसमाचार

अधाय 16

11 ओ िहलकथन, “ एिटा आतमीि तू टा बेटा िल। 12 हनिा सभ मे सँ ितटिा अपन कपता िेँ िहलकथन, “कपता, हमरा जे समकत अकि से हमरा कतअ।” ओ हनिा सभ िेँ अपन गुजर-बसर बाँ कट ते लकन। 13 कि​िु ए कतनि बात ितटिा बेटा सभ गतटे िेँ एि ठाम जमा भ’ गेल आ तू र-तू र धरर याता ियलि आ ओतकह उधम मचाबय मे अपन समकत िेँ बबा​ा त ि’ ते लि। 14 जखन ओ सभ खचा िऽ िऽ ओकह ते श मे पबल अिाल पकड गेल। आ ओ अभाि मे पडय लगलाह। 15 ओ जा िऽ ओकह ते शि ितनत नागररि​ि संग जुकड गेलाह। ओ ओिरा अपन खेत मे सुगर चराबय लेल पठौलकन। 16 ओ सुगर सभ जे किलिा खाइत िल, ओकह मे सँ अपन पेट भरर ते कथन। 17 जखन ओ मन मे आकब िऽ िहलकथन, “हमर कपताि ितेि भाडाि नतिर लग रतटी आ बचल अकि, आ हम भूख सँ नाश भऽ जाइत िी! 18 हम उकठ िऽ अपन कपता लग जा िऽ हनिा िहबकन जे , “कपता, हम स् िगा आ अहाँ ि समर पाप िेलहँ । 19 आब हम अपन बेटा िहबाि यतग नकह िी। 20 ओ उकठ िऽ अपन कपता लग आकब गेलाह। मुता जखन ओ बहत तू र िलाह तखन हनिर कपता हनिा ते खख िर्ा भेलाह आ तौकड िऽ हनिर गरतकन पर खकस पडलाह आ चुमा लेलकन। 21 पुत हनिा िहलकथन, “कपता, हम स् िगा आ अहाँ ि नजरर मे पाप िेलहँ आ आब अहाँ ि बेटा िहबाि यतग नकह िी।” 22 मुता कपता अपन नतिर सभ िेँ िहलकथन, “सब नीि िस कनिाकल िऽ ओिरा पकहरर कलअ। हाथ मे अंगूठी आ पएर मे जूता लगा ते लकथन। 23 ओ मतटगर बिडा िेँ एतय आकन िऽ मारर कतयौि। आउ, खाइ आ मस रह। 24 हमर ई बेटा मरर गेल िल आ िेर जीकित अकि। ओ हे रा गेल िल, आ भेकट गेल अकि। आ ओ सभ मस हतबय लगलाह। 25 हनिर जेठिा बेटा खेत मे िल, जखन ओ घर लग आकब गेलाह तखन ओ संगीत आ नाच सुनलकन। 26 ओ एिटा नतिर िेँ बजा िऽ पुिलकथन जे एकह बात सभि िी अथा अकि। 27 ओ हनिा िहलकथन, “ततहर भाय आकब गेलाह। अहाँ ि कपता मतटिा बिडा िेँ मारर ते लकन, िार् ओ ओिरा सुरकरत आ स् गह् ियलकन। 28 ओ कतकधत भऽ िऽ भीतर नकह जाय चाहै त िलाह, ते ँ हनिर कपता बाहर आकब हनिा सँ किनती ियलकन। 29 ओ अपन कपता िेँ उतर ते लकथन, “ते खू, हम ितेित िदा सँ अहाँ ि सेिा िरै त िी, आ ने अहाँ ि आजाि उलंघन िेलहँ । 30 मुता जकहना अहाँ ि ई बेटा आकब गेल, जे िेशा सभि संग अहाँ ि जीिन-यापन िेँ खा गेल अकि, तखन अहाँ ओिरा लेल मतटिा बिडा िेँ मारर ते कलयैि। 31 ओ हनिा िहलकथन, “बौआ, अहाँ सकतखन हमरा संग रहै त िी, आ हमरा लग जे कि​िु अकि से अहाँ ि अकि।” 32 हमरा सभ िेँ हँ सी-खुशी िरब उकचत िल, किएि तँ ई अहाँ ि भाय मरर गेल िल आ जीकित अकि। आ हे रा गेल, आ भेटैत अकि।

1 ओ अपन कशद् य सभ िेँ सेहत िहलकथन, “ एिटा धनी लति िल, जिर एिटा भणारी िल। आ ओिरा पर आरतप लगाओल गेल जे ओ अपन समकत बबा​ा त ि' ते लि। 2 ओ हनिा बजा िऽ पुिलकथन, “हम अहाँ ि ई बात ितना सुनैत िी?” अपन भणारीपनि कहसाब कतयौि। किएि तँ अहाँ आब भंडारी नकह बकन सिैत िी। 3 तखन ओ भणारी मने-मन पुिलकथन, “हम िी िरब?” हमर माकलि हमरा सँ भंडारी िीन लैत िकथ। भीख माँ गय लेल हमरा लाज हतइत अकि। 4 हम सतकच लेने िी जे िी िरब, जाकह सँ जखन हम भंडारी सँ बाहर भऽ जायब तँ ओ सभ हमरा अपन घर मे गह् िऽ सिकथ। 5 ओ अपन माकलि​ि ऋ्ी सभ मे सँ एि-एिटा िेँ बजा िऽ पकहल िेँ िहलकथन, “अहाँ हमर माकलि​ि ितेि ऋ्ी िी?” 6 ओ िहलकथन, “सौ नाप तेल।” ओ ओिरा िहलकथन, “अपन कबल लऽ िऽ जली-जली बैकस जाउ आ पचासटा कलखू।” 7 तखन ओ ततसर िेँ िहलकथन, “अहाँ पर ितेि िजा अकि?” ओ िहलकथन, “सौ नाप गहम।” ओ ओिरा िहलकथन, “अपन कबल लऽ िऽ सतरटा कलखू।” 8 पभु अधमय भणारी िेँ पशंसा ियलकन, किएि तँ ओ बुख्मानी सँ िाज ियलकन। 9 हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे , अधमाि धन सँ अपना िेँ कमत बनाउ। जाकह सँ जखन अहाँ सभ कि​िल रहब तँ ओ सभ अहाँ सभ िेँ अनन कनिास मे समेकट लेत। 10 जे ितट-ितट बात मे किश् िास िरै त अकि, से बहत कि​िु मे सेहत किश् िास िरै त अकि। 11 ते ँ जँ अहाँ सभ अधमाि धन मे किश् िास नकह ियलहँ तँ िे अहाँ सभि भरतसा मे सत् य धन िेँ सौंपत? 12 जँ अहाँ सभ ततसरि बात मे किश् िास नकह ियलहँ तँ अहाँ सभ िेँ िे ते त? 13 ितनत नौिर तू माकलि​ि सेिा नकह िऽ सिैत अकि, किएि तँ ओ एि सँ घृ्ा िरत आ ततसर सँ पेम िरत। नै तँ एि​िेँ पिकड िऽ ततसरिेँ कतरसार िरत। अहाँ सभ परमेश् िर आ धन-समतीि सेिा नकह िऽ सिैत िी। 14 लतभी िररसी सभ सेहत ई सभ बात सुनलकन। 15 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ अहाँ सभ मनुद् यि समर अपना िेँ धाकमाि ठहराबऽ िला िी। मुता परमेश् िर अहाँ सभि हतय िेँ जनैत िकथ, किएि तँ मनुद् य मे जे आतर ियल जाइत अकि से परमेश् िरि नजरर मे घृक्त अकि। 16 धमा -कनयम आ पि​ि् ता सभ यूहन् ना धरर िल। 17 धमा -कनयमि एि ितट-मतट खंडि कि​िलता सँ स् िगा आ पृथ् िीि पाररत हतयब आसान अकि। 18 जे िेओ अपन स् ती िेँ ितकड िऽ ततसर कि​िाह िरै त अकि, से वकभचार िरै त अकि। 19 एिटा एहन धनी आतमी िल, जे बैगनी आ महीन कलनन िपडा पकहरने िल आ सभ कतन धूमधाम सँ चलैत िल। 20 लाजर नामि एिटा कभखारी िल, जे हनिर िाटि पर घाि सँ भरल िल। 21 ओ धकनि लति​ि टे बुल पर सँ खसल टु िड-टु िड सँ भतजन िरऽ चाहै त िल।

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लूिा िे सुसमाचार

22 ओ कभखारी मरर गेल आ स् िगातूत सभ ओिरा अबाहमि ितरा मे लऽ गेल। 23 ओ नरि मे िष मे पकड िऽ आँ खख उठा िऽ अबाहम िेँ तू र सँ आ लाजर िेँ ितरा मे ते खैत िकथ। 24 ओ कचकचया िऽ िहलकथन, “हे कपता अबाहम, हमरा पर तया िर आ लाजर िेँ पठा कतअ जे ओ अपन आँ गुरि नति पाकन मे डु बा िऽ हमर जीह ठं ढा िरकथ। िार् हम एकह जाला मे सताओल गेल िी। 25 मुता अबाहम िहलकथन, “बौआ, मतन राखू जे अहाँ िेँ जीिनिाल मे नीि-नीि चीज भेटल िल आ लाजर िेँ सेहत अधलाह बात भेटल अकि। 26 एकह सभि अकतररक हमरा सभ आ अहाँ सभि बीच एिटा पैघ खाडी ठा़ अकि, जाकह सँ जे सभ एतय सँ अहाँ सभ लग पहँ चय चाहै त अकि से नकह िऽ सिैत अकि। आ ने ओ सभ हमरा सभ लग जा सिैत अकि, जे ओतय सँ आकब सिैत िल। 27 तखन ओ िहलकथन, “हे कपता, हम अहाँ सँ किनती िरै त िी जे अहाँ हनिा हमर कपताि घर पठा कतअ। 28 हमरा पाँ च भाय अकि। जाकह सँ ओ हनिा सभ िेँ गिाही ते कथन, जाकह सँ ओहत सभ एकह यातनाि ्ान मे नकह आकब जाय।” 29 अबाहम हनिा िहलकथन, “ओिरा सभ लग मूसा आ पि​ि् ता सभ िकथ। हनिा सभ िेँ सुनय कतयौन। 30 ओ िहलकथन, “नकह, कपता अबाहम, मुता जँ िेओ मृत् यु मे सँ हनिा सभि लग गेल तँ ओ सभ पशाताप िरत।” 31 ओ हनिा िहलकथन, “जँ ओ सभ मूसा आ पि​ि् ता सभि बात नकह सुनत तँ ओ सभ मृत् यु मे सँ जीकब गेलाि बातत नकह मनाओल जायत।”

9 िी ओ ओकह नतिर िेँ धनिात तै त िकथन जे ओ जे िाज हनिा ते ल गेल िलकन से ियलकन? हम ट् त नकह िरै त िी। 10 तकहना अहाँ सभ जखन आजा ते ल गेल सभ िाज पूरा िऽ लेब तँ िहब जे , “हम सभ बेिार तास िी।” 11 ओ यरशलेम जाइत िाल सामररया आ गलीलि बीच सँ गुजरर गेलाह। 12 एि गाम मे पिेश िरै त िाल हनिा सँ तू र ठा़ तस गतट ित़ी आतमी भेटलकन। 13 ओ सभ अपन आिाज उठा िऽ िहलकथन, “हे गुर, यीशु, हमरा सभ पर तया िर।” 14 यीशु ओिरा सभ िेँ ते खख िऽ िहलकथन, “ जाउ, पुरतकहत सभि समर ते खाउ।” जखन ओ सभ जाइत-जाइत शु् भऽ गेलाह। 15 हनिा सभ मे सँ एि गतटे हनिा ठीि भऽ गेला पर घुरर गेलाह आ जतर-जतर सँ परमेश् िरि मकहमा ियलकन। 16 ओ हनिा परमेश् िरि पएर लग मुँह पर खकस िऽ हनिा धन् यिात ते लकन। 17 यीशु उतर ते लकथन, “ िी तस गतटे शु् नकह भेलाह?” मुता नौ ितय अकि? 18 एकह परते शी िेँ ितकड परमेश् िरि मकहमा िरबाि लेल घुरर िऽ आयल लति नकह भेटैत अकि। 19 ओ हनिा िहलकथन, “ उठू, जाउ। 20 िररसी सभ हनिा सँ पुिलकथन जे परमेश् िरि राज् य िकहया आओत, तँ ओ हनिा सभ िेँ उतर ते लकथन, “ परमेश् िरि राज् य ते खख िऽ नकह अबैत अकि। 21 आ ने ओ सभ िहत जे , “एतय ते खू!” िा, लत ओतय! किएि तँ ते खू, परमेश् िरि राज् य अहाँ सभि भीतर अकि।” 22 ओ कशद् य सभ िेँ िहलकथन, “ ओ कतन आओत जखन अहाँ सभ मनुद् य-पुति एि कतन ते खबाि इचा िरब, मुता अहाँ सभ ओिरा नकह ते खब।” 23 ओ सभ अहाँ सभ िेँ िहत जे, “एतय ते खू।” िा, ओतकह ते खू: हनिा सभि पािाँ नकह जाउ आ ने हनिा सभि पािाँ पडू। 24 किएि तँ जकहना आिाशि नीचाँ ि एि भागसँ कबजली जकहना आिाशि नीचाँ ततसर भाग धरर चमिैत अकि। तकहना मनुद्‍यि पुत सेहत अपन समय मे रहताह।” 25 मुता पकहने ओिरा बहत िष भतगय पडतैि आ एकह पी़ी मे ओिरा असीिार ियल जाय। 26 जकहना नतहि समय मे भेल िल, तकहना मनुद् य-पुति समय मे सेहत हतयत। 27 जाबत धरर नतह जहाज मे पिेश नकह िऽ गेलाह, ताबत धरर ओ सभ खाइत-पीबैत, स् तीग्ि कि​िाह िरै त, कि​िाह ियल गेल। 28 तकहना लूति समय मे सेहत िल। खाइत िल, पीबैत िल, िीनैत िल, बेचैत िल, रतपैत िल, बनबैत िल। 29 मुता जाकह कतन लूत सततम सँ बाहर कनिललाह, ओकह कतन स् िगा सँ आकग आ गंधि बरसैत सभ िेँ नष िऽ ते लि। 30 जखन मनुद् यि पुत पगट हतयत तखन सेहत एहने हतयत। 31 ओकह कतन घरि चतटी पर आ घर मे अपन सामान उतारय लेल नकह उतरय। 32 लूति पती िेँ मतन पाडू। 33 जे िेओ अपन पा् बचाबय चाहै त अकि, से ओिरा गमा ते त। आ जे कियत अपन पा् गमा लेत से ओिरा बचाओत।

अधाय 17 1 तखन ओ कशद्‍य सभ िेँ िहलकथन, “ अपन अपराधि बातत असंभि अकि। 2 एकह ितट-ितट बचा सभ मे सँ एिटा िेँ ठे स पहँ चबा सँ नीि जे हनिा लेल चकीि पाथर गरतकन मे लटिा ते ल जाय आ ओ समुद मे िेकि ते ल जाय। 3 अपना िेँ सािधान रह, जँ अहाँ ि भाय अहाँ सभि किर् अपराध िरै त अकि तँ ओिरा डाँ कट कतयौि। आ जँ ओ पशाताप िरत तँ ओिरा रमा िर। 4 जँ ओ अहाँ पर एि कतन मे सात बेर अपराध िरै त अकि आ एि कतन मे सात बेर अहाँ कतस घुरर िऽ ई िहै त अकि जे , “हम पशाताप िरै त िी।” अहाँ ओिरा रमा िऽ ते ब। 5 पेररत सभ पभु िेँ िहलकथन, “हमरा सभि किश् िास ब़ाउ।” 6 परमेश् िर िहलकथन, “ जँ अहाँ सभि किश् िास सरसति ताना जिाँ रहै त तँ अहाँ सभ एकह कसिकमनि गाि िेँ िकह सकितहँ जे , ‘जकड सँ उखाकड िऽ समुद मे रतपल जाउ। आ ओिरा अहाँ ि बात मानबाि चाही। 7 मुता अहाँ सभ मे सँ िेिर नतिर जततैत िा माल-जाल चरबैत अकि, तखन जखन ओ खेत सँ अबैत अकि तखन-तखन ओिरा िहत जे , “जाउ आ भतजन िरबाि लेल बैकस जाउ?” 8 ओ हनिा ई नीि नकह िहकथन जे , जाबत धरर हम भतजन आ पीब नकह लेब, ताबत धरर हम जे कि​िु भतजन िऽ सिब ताकह सँ तैयार रह आ िकट मे बाखन िऽ हमर सेिा िर। तिर बात अहाँ खा-पीब?

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लूिा िे सुसमाचार

34 हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे ओकह राकत मे तू गतटे एि पलंग पर बैसल रहताह। एिटा लऽ जायत आ ततसर ितकड ते ल जायत। 35 तू टा सी एि संग पीसैत रहतीह। एिटा लऽ जेतै, आ ततसर ितकड ते ल जायत। 36 तू आतमी खेत मे रहत। एिटा लऽ जेतै, आ ततसर ितकड ते ल जायत। 37 ओ सभ उतर ते लकथन, “पभु, ितय?” ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ जतय-जतय शि अकि, ओतय गरड सभ जमा हतयत।”

17 हम अहाँ सभ िेँ सत् य िहै त िी जे परमेश् िरि राज् य िेँ ितट बचा जिाँ नकह गह् िरत। 18 एिटा शासि हनिा पुिलकथन, “अचा गुर, अनन जीिनि उतराकधिारी बनबाि लेल हम िी िरब?” 19 यीशु हनिा पुिलकथन, “ अहाँ हमरा नीि किएि िहै त िी? एिटा अथा​ा त भगिान् ितकड कियत नीि नकह अकि। 20 अहाँ ई आजा जनैत िी जे , “वकभचार नकह िर, ह्ा नकह िर, चतरी नकह िर, झूठ गिाही नकह िर, अपन कपता आ मायि आतर िर।” 21 ओ िहलकथन, “हम अपन जिानी सँ ई सभटा राखने िी।” 22 यीशु ई बात सुकन िऽ िहलकथन, “ अहाँ मे एिटा चीजि िमी अकि, जे कि​िु अकि से बेकच िऽ गरीब सभ मे बाँ कट कतअ, तखन अहाँ लग स् िगा मे धन भऽ जायत। 23 ई बात सुकन ओ बहत तु खी भऽ गेलाह, किएि तँ ओ बहत धकनि िलाह। 24 यीशु जखन ते खख िऽ बहत तु खी िकथ तँ ओ िहलकथन, “ धनतार सभ िेँ परमेश् िरि राज् य मे पिेश ितेि िकठन अकि!” 25 ओँट िेँ सुईि आँ खख सँ गुजरब, धकनि िेँ परमेश् िरि राज् य मे पिेश सँ बेसी सहज अकि। 26 ई बात सुनकनहार सभ िहलकथन, “तखन िे उ्ार पाकब सिैत अकि?” 27 ओ िहलकथन, “ जे बात मनुद् यि लेल असंभि अकि, से परमेश् िरि लेल साि अकि।” 28 तखन पतुस िहलकथन, “ते खू, हम सभ सभ कि​िु ितकड अहाँ ि पािाँ लाकग गेलहँ ।” 29 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ हम अहाँ सभ िेँ सत् य िहै त िी जे परमेश् िरि राज् य लेल घर, माता-कपता, भाय, स् ती िा संतान िेँ ितकड िऽ गेल िेओ एहन िेओ नकह अकि। 30 एकह समय मे आ आगामी संसार मे अनन जीिन मे ओ सभ बेसी सँ बेसी नकह पाओत। 31 तखन ओ बारह गतटे िेँ अपना लग लऽ िऽ िहलकथन, “ ते खू, हम सभ यरशलेम जा रहल िी आ मनुद् य-पुति किदय मे पि​ि् ता सभ दारा कलखल गेल सभ बात पूरा भऽ जायत।” 32 किएि तँ ओ गैर-यहती सभि हाथ मे सौंपल जेताह, आ हनिा उपहास ियल जायत, किनती ियल जायत आ थूि िेिल जायत। 33 ओ सभ ओिरा ितडा मारर िऽ मारर ते तैि। 34 ओ सभ एकह मे सँ ितनत बात नकह बुझलकन आ ई बात हनिा सभ सँ नुिायल िलकन आ ने ओ सभ िहल गेल बात सभ जनैत िलाह। 35 जखन ओ यरीहत लग पहँ चलाह तँ एिटा आनर बाट िात मे बैसल भीख माँ गैत िल। 36 लति सभ िेँ ओकह ठाम सँ गुजरै त सुकन ओ पुिलकथन जे एिर िी अथा अकि। 37 ओ सभ हनिा िहलकथन जे, “नासरति यीशु ओकह ठाम सँ गुजरै त िकथ।” 38 ओ कचकचया उठलकन, “हे ताऊति पुत यीशु, हमरा पर तया िर।” 39 पकहने जे लति सभ हनिा चुप रहबाि लेल डाँ कट ते लिकन, मुता ओ आर बेसी कचकचया उठलकन, “हे ताऊति पुत, हमरा पर तया िर।” 40 यीशु ठा़ भऽ िऽ हनिा लग अनबाि आजा ते लकथन।

अधाय 18 1 ओ हनिा सभ िेँ एकह लेल एिटा दषान िहलकथन जे मनुद् य सभ िेँ सकतखन पाथाना िरबाि चाही आ बेहतश नकह रहबाि चाही। 2 ओ िहलकन, “ एिटा नगर मे एिटा नायाधीश िलाह जे परमेश् िर सँ नकह डे रैत िलाह आ ने मनुद् य िेँ मानैत िलाह। 3 ओकह नगर मे एिटा किधिा िलीह। ओ हनिा लग आकब िहलकथन, “हमर शतु सँ हमरा सँ बतला कलअ।” 4 ओ कि​िु िाल धरर नकह चाहय लगलाह, मुता बात मे ओ मनेमन बजलाह, “हम परमेश् िर सँ नकह डरै त िी आ मनुद् य िेँ परिाह नकह िरै त िी। 5 तैयत ई किधिा हमरा परे शान िरै त अकि, ते ँ हम ओिर बतला लेब, जाकह सँ ओ कनरं तर आकब िऽ हमरा थिा नकह ते तीह। 6 पभु िहलकथन, “ सुनू जे अधमय नायाधीश िी िहै त िकथ।” 7 िी परमेश् िर अपन चुनल लति सभि बतला नकह लेताह जे कतन-राकत हनिा सँ पुिारै त िकथ, भले ओ हनिा सभ िेँ बहत कतन धरर सहन िरै त िकथ? 8 हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे ओ जली-जली हनिा सभि बतला लेताह। मुता जखन मनुद् यि पुत आओत तँ िी ओिरा पृथ् िी पर किश् िास भेटतैि? 9 ओ ई दषान ओकह कि​िु लति सभ िेँ िहलकथन जे अपना पर भरतसा िरै त िल जे ओ सभ धाकमाि अकि आ ततसर िेँ कतरसार िरै त िल। 10 तू गतटे पाथाना िरबाि लेल मन् कतर मे चकल गेलाह। एिटा िररसी, आ ततसर िर िसूली। 11 िररसी ठा़ भऽ िऽ मने-मन पाथाना ियलकन, “हे परमेश् िर, हम अहाँ िेँ धनिात तै त िी जे हम आन लति जिाँ लूटपाट िरयिला, अनायी, वकभचारी िा एकह िरताता जिाँ नकह िी।” 12 हम सपाह मे तू बेर उपिास िरै त िी, जे कि​िु अकि ताकह मे सँ तसम भाग तै त िी। 13 िर लेकनहार तू र ठा़ भऽ िऽ स् िगा कतस एतेि नजरर नकह उठौलकन, बल् कि हनिर िाती पर चतट लगा िऽ िहलकथन, “परमेश् िर हमरा पापी पर तया िरकथन।” 14 हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे ई आतमी ततसर सँ बेसी धमय भऽ िऽ अपन घर गेल। जे अपना िेँ नम िरै त अकि, से ऊँच ियल जायत।” 15 ओ सभ कशशु सभ िेँ सेहत हनिा लग अनलकन जाकह सँ ओ ओिरा सभ िेँ िूबकथ। 16 यीशु ओिरा सभ िेँ बजा िऽ िहलकथन, “ बचा सभ िेँ हमरा लग आबय कतयौि आ ओिरा सभ िेँ मना नकह िर।

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लूिा िे सुसमाचार

41 ओ िहलकथन, “ अहाँ िी चाहै त िी जे हम अहाँ ि संग िी िरी?” ओ िहलकथन, “पभु, हम अपन दकष पाकब सिब।” 42 यीशु हनिा िहलकथन, “ अहाँ ि किश् िास ते खख जाउ। 43 ओ तुरत ते खख िऽ परमेश् िरि मकहमा िरै त हनिा पािाँ पािाँ चकल गेलाह।

21 हम अहाँ सँ डरै त िलहँ , किएि तँ अहाँ तपसी लति िी, अहाँ जे कि​िु नकह कबिाओल िल, तिरा उठा लैत िी आ जे नकह बतएलहँ से िाकट लैत िी। 22 ओ ओिरा िहलकथन, “हे तु ष सेि​ि, हम ततहर मुँह सँ ततहर नाय िरब।” अहाँ जनैत िलहँ जे हम तपसी लति िी, जे हम नकह कबिलहँ , तिरा उठा रहल िी आ जे नकह बतएलहँ , तिरा िाकट लैत िी। 23 तखन अहाँ हमर पाइ बैि मे किएि नकह ते कलयैि जे हमरा अयला पर हम अपन पाइ सूति संग माँ कग सकितहँ ? 24 ओकह ठाम ठा़ लति सभ िेँ िहलकथन, “ओिरा सँ ओ पाउं ड ल’ कलअ आ जिरा लग तस पाउं ड अकि ओिरा तऽ कतयौि।” 25 (ओ सभ हनिा िहलकथन, “पभु , हनिा लग तस पाउं ड अकि।” 26 हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे जे कियत अकि से सभ िेँ ते ल जायत। जे नकह अकि, तिरा सँ जे कि​िु अकि, तिरा ओिरा सँ िीन लेल जायत।” 27 मुता हमर शतु सभ जे नकह चाहै त अकि जे हम ओिरा सभ पर राज िरी, ओ सभ एतय आकन िऽ हमरा सतझाँ ओिरा सभ िेँ मारर कतयौि। 28 ई बात िकह िऽ ओ यरशलेम चक़ िऽ आगू बक़ गेलाह। 29 जखन ओ जैतूनि पहाड नामि पहाड पर बेतिागे आ बेतकनयाि समीप पहँ चलाह, तखन ओ अपन तू टा कशद् य िेँ पठौलकन। 30 ओ िहलकन, “अहाँ सभ अपन सामनेि गाम मे जाउ। जाकह मे अहाँ सभ िेँ पिेश िरबा िाल एिटा बिडा बानल भेटत, जाकह पर एखन धरर िेओ नकह बैसल िल। 31 जँ िेओ अहाँ सभ सँ पूिैत अकि जे , “अहाँ सभ ओिरा किएि खतलैत िी?” अहाँ सभ हनिा एकह तरहे ँ िहबकन जे , “पभु िेँ हनिर आिशिता िकन।” 32 पठाओल गेल लति सभ जा िऽ ओकहना पाकब गेल जेना यीशु हनिा सभ िेँ िहने िलाह। 33 जखन ओ सभ बिडा िेँ खतलैत िलाह तखन ओिर माकलि सभ ओिरा सभ िेँ िहलकथन, “अहाँ सभ बिडा िेँ किएि खतलैत िी?” 34 ओ सभ िहलकथन, “पभु िेँ हनिर आिशिता िकन।” 35 ओ सभ हनिा यीशु लग अनलकन आ ओ सभ अपन िस बिडा पर िेकि ते लकन आ यीशु िेँ ओकह पर बैसा ते लकन। 36 यीशु जाइत िाल ओ सभ अपन िपडा बाट मे पसारर ते लकथन। 37 जखन यीशु लग अयलाह तँ जैतूनि पहाड पर उतरला पर सभ कशद् य सभि भीड हकदात हतमऽ लगलाह आ परमेश् िरि सुकत िरबाि लेल जतर-जतर सँ परमेश् िरि सुकत िरऽ लगलाह। 38 ओ िहलकन, “पभुि नाम सँ जे राजा अबैत िकथ, हनिर धन हतउ। 39 लति​ि बीच सँ कि​िु िररसी हनिा िहलकथन, “गुर, अपन कशद् य सभ िेँ डाँ कट कतयौि।” 40 ओ हनिा सभ िेँ उतर ते लकथन, “ हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे जँ ई सभ चुप भ’ जायत तँ पाथर तुरन कचकचया उठत।” 41 यीशु लग पहँ चला पर ओ नगर िेँ ते खख िऽ िाकन रहलाह।

अधाय 19 1 यीशु यरीहत सँ पिेश िऽ गेलाह। 2 जकै नामि एि आतमी िल, जे िर लेकनहार मे पमुख िल आ ओ धकनि िल। 3 ओ यीशु िेँ ते खय चाहै त िलाह जे ओ िे िकथ। आ पेसि लेल नकह ि' सिल, िार् ओ ित िम िल। 4 ओ आगू तौकड िऽ ओिरा ते खबाि लेल एिटा कसितमतरि गाि पर चक़ गेलाह। 5 यीशु ओकह ्ान पर पहँ चला पर आँ खख उठा िऽ ते खलकन आ हनिा ते खख िहलकथन, “ जकै, जली-जली उतरर जाउ। किएि तँ आइ हमरा अहाँ ि घर मे रहबाि अकि।” 6 ओ जली-जली उतरर िऽ हकदात भऽ हनिा सागत ियलकन। 7 ओ सभ ई ते खख सभ गुनगुनाइत बजलाह, “ओ एिटा पापी लति​ि संग पाहन बनय लेल चकल गेलाह।” 8 जिरयाह ठा़ भऽ पभु िेँ िहलकथन। ते खू, पभु, हमर आधा समकत हम गरीब िेँ तै त िी। जँ हम ि​िरत सँ ितनत बात झूठ आरतप लगा िऽ लेने िी तँ ओिरा चारर गुना िापस िऽ तै त िी। 9 यीशु हनिा िहलकथन, “ आइ एकह घर मे उ्ार आकब गेल अकि, िार् ओहत अबाहमि पुत िकथ।” 10 किएि तँ मनुद् य-पुत जे हे रायल अकि तिरा तिबाि आ उ्ार िरबाि लेल आयल िकथ। 11 जखन ओ सभ ई बात सुकन िऽ ओ एिटा दषान बजौलकन, किएि तँ ओ यरशलेमि नजतीि िलाह आ हनिा सभ िेँ ई बुझल िल जे परमेश् िरि राज् य तुरन पगट भऽ जायत। 12 ओ िहलकथन, “ एिटा िुलीन लति तू र-तू र धरर जा िऽ अपना लेल राज् य लऽ िऽ घुरबाि लेल गेलाह।” 13 ओ अपन तस नतिर िेँ बजा िऽ तस पाउं ड तऽ ते लकथन आ िहलकथन, “जाबत हम नकह आकब जायब ताबत धरर िबा मे रह।” 14 मुता हनिर नागररि सभ हनिा सँ घृ्ा िरै त हनिा पािाँ पािाँ एिटा संतेश पठौलकन जे , “हमरा सभ पर ई आतमी हमरा सभ पर राज िरयिला नकह हतयत।” 15 जखन ओ राज्‍य पाकब िऽ घुरर अयलाह, तखन ओ एकह नतिर सभ िेँ बजाओल जेबाि आजा ते लकन, जाकह सभ िेँ ओ पाइ ते ने िलाह, जाकह सँ ओ ई जाकन सिकथ जे वापार सँ प्ेि िेँ ितेि लाभ भेलकन। 16 तखन पकहल लति आकब िऽ िहलकथन, “पभु, अहाँ ि पाउं ड मे तस पाउं ड बक़ गेल अकि।” 17 ओ हनिा िहलकथन, “अचा, हे नीि सेि​ि। 18 ततसर गतटे आकब िऽ िहलकथन, “पभु, अहाँ ि पाउं ड मे पाँ च पाउं ड बक़ गेल अकि।” 19 ओ हनिा िहलकथन, “अहाँ सेहत पाँ च नगरि पराधीन रह।” 20 एि गतटे आकब िऽ िहलकथन, “पभु , ते खू, एतऽ अहाँ ि पाउं ड अकि, जे हम नैपकिन मे राखख ते ने िी।

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लूिा िे सुसमाचार

42 ओ िहलकथन, “ अहाँ जँ िम सँ िम आइ अपन कतन मे अहाँ िेँ ओकह बात िेँ बुझल रकहतहँ जे अहाँ ि शाखनि बात अकि।” मुता आब ओ सभ अहाँ ि आँ खख सँ नुिायल अकि। “ 44 ओ ततरा जमीनि संग आ ततहर सनान सभ सेहत ततहर भीतर राखख ते त। ओ सभ अहाँ मे एि पाथर पर एि पाथर नकह ितडत। किएि तँ अहाँ अपन मुलािाति समय नकह जनैत िलहँ । 45 ओ मन् कतर मे जा िऽ ओकह मे बेचकनहार आ िीनकनहार सभ िेँ भगाबय लगलाह। 46 ओ सभ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ धमाशास् त मे कलखल अकि जे , “हमर घर पाथानाि घर अकि।” 47 ओ सभ कतन मन् कतर मे कशरा तै त िलाह। मुता मुख्‍यपुरतकहत आ धमाकशरि आ पजाि मुख्‍य सभ हनिा नाश िरऽ चाहलि। 48 ओ सभ िी िऽ सिैत िल, से नकह पाकब सिल, किएि तँ सभ लति हनिर बात सुनबा मे बहत उतुि िल।

14 किसान सभ हनिा ते खख िऽ आपस मे किचार-किमशा िरै त िहलकथन, “ई उतराकधिारी िकथ। 15 ओ सभ ओिरा अंगूरि बगीचा सँ बाहर कनिाकल िऽ मारर ते लि। ते ँ अंगूरि बगीचाि माकलि हनिा सभ िेँ िी िरताह? 16 ओ आकब िऽ एकह किसान सभ िेँ नष िऽ ते त आ अंगूरि बगीचा ततसर िेँ तऽ ते त। ई बात सुकन िऽ िहलकथन, “भगिान नकह िरकथ।” 17 यीशु हनिा सभ िेँ ते खख िऽ िहलकथन, “ तखन ई िी कलखल अकि जे, “जे पाथर बनौकनहार सभ असीिार िऽ ते लि, से ितनि माथ बकन गेल?” 18 जे कियत ओकह पाथर पर खकस पडत से टू कट जायत। मुता जिरा पर खसत, ओिरा पीकस िऽ चू्ा िऽ ते त। 19 ओकह समय मे मुख्‍यपुरतकहत आ धमाकशरि सभ हनिा पर हाथ रखबाि पयास ियलकन। ओ सभ लति सभ सँ डरै त िल, किएि तँ ओ सभ बुकझ गेल िल जे ई दषान हनिा सभि किर् बाजल अकि। 20 ओ सभ हनिा पर नजरर रखलकन आ जासूस सभ पठा ते लकथन जे अपना िेँ धमय लति​ि रप मे ते खाबकथ, जाकह सँ ओ सभ हनिर बात िेँ पिकड सिकथ, जाकह सँ ओ सभ हनिा राजपालि अकधिार आ अकधिार मे सौंकप सिकथ। 21 ओ सभ हनिा सँ पुिलकथन, “गुर, हम सभ जनैत िी जे अहाँ सही बात िहै त िी आ कसखाबैत िी आ ने ि​िरत वखक िेँ सीिार िरै त िी, बल् कि परमेश् िरि बाट सत् य कसखाबैत िी। 22 िी हमरा सभ िेँ िैसर िेँ िर ते ब उकचत अकि िा नकह? 23 मुता यीशु हनिा सभि धूताता बुकझ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ अहाँ सभ हमरा किएि परीरा तै त िी?” 24 हमरा एि पाइ ते खाउ। िेिर िकि आ उपलेख अकि? ओ सभ उतर ते लकथन, “िैसरि।” 25 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ एकह लेल िैसरि जे कि​िु अकि से िैसर िेँ आ परमेश् िरि जे कि​िु अकि से परमेश् िर िेँ तऽ कतयौि।” 26 ओ सभ लति​ि समर हनिर बात िेँ नकह पिकड सिलाह आ हनिर उतर ते खख ओ सभ आशयाचकित भऽ चुप भऽ गेलाह। 27 तखन सतु िी सभ मे सँ कि​िु गतटे हनिा लग आकब गेलाह जे एकह बात िेँ निारै त िकथ जे ितनत पुनरुान नकह हतयत। ओ सभ हनिा सँ पुिलकथन। 28 “गुर, मूसा हमरा सभ िेँ कलखने िकथ, “जँ ि​िरत भाय स् ती लऽ िऽ मरर जाय आ कबना संतानि मरर जाय तँ ओिर भाय ओिर स् ती िेँ लऽ िऽ अपन भाय िेँ संतान पैता िरय।” 29 एकह लेल सातटा भाय िलाह, आ पकहल भाय स् ती कि​िाह िऽ िऽ कबना संतानि मरर गेलाह। 30 ततसर लति ओिरा कि​िाह िऽ लेलि आ ओ कनःसंतान मरर गेल। 31 तेसर ओिरा पिकड लेलि। तकहना सात गतटे सेहत सनान नकह ितकड िऽ मरर गेलाह। 32 बात मे ओ स् ती सेहत मरर गेलीह। 33 ते ँ पुनरुानि समय मे ओ ि​िर पती िकथ? किएि तँ सात गतटे ि पतीि संग िलकन। 34 यीशु हनिा सभ िेँ उतर ते लकथन, “ एकह संसारि बचा सभ कि​िाह िरै त अकि आ कि​िाह मे ते ल जाइत अकि।

अधाय 20 1 ओकह कतन मे सँ एि कतन जखन ओ मन् कतर मे लति सभ िेँ कशरा तै त िलाह आ सुसमाचार पचार िरै त िलाह तखन मुख्‍यपुरतकहत आ धमा-कशरि सभ बू़-पुरान सभि संग हनिा पर आकब गेलाह। 2 ओ हनिा सँ िहलकथन, “हमरा सभ िेँ िह जे अहाँ ितन अकधिार सँ ई सभ िाज िरै त िी?” आकि िे अकि जे अहाँ िेँ ई अकधिार ते लि? 3 ओ हनिा सभ िेँ उतर ते लकथन, “ हमहँ अहाँ सभ सँ एिटा बात पूिब। आ हमरा उतर कतयौि। 4 यूहन् नाि बपकतस् मा स् िगा सँ िल आ कि मनुखि? 5 ओ सभ मने-मन-मन-किमशा िऽ िऽ िहलकथन, “जँ हम सभ िहब जे , ‘सगा सँ आयल िी। ओ िहताह, “तखन अहाँ सभ हनिा पर किश् िास किएि नकह िेलहँ ?” 6 मुता जँ हम सभ िहै त िी जे, “मनुद् य सभि।” सभ लति हमरा सभ िेँ पाथर मारर ते त, किएि तँ ओिरा सभ िेँ ई बात बुझल िै ि जे यूहन् ना एिटा भकिषिका िलाह। 7 ओ सभ उतर ते लकथन जे ई ितय सँ आयल अकि से नकह बुकझ सिल। 8 यीशु हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ हम अहाँ सभ िेँ ई नकह िहै त िी जे हम ितन अकधिार सँ ई सभ िाज िरै त िी।” 9 तखन ओ लति सभ िेँ ई दषान बजबय लगलाह। एि आतमी अंगूरि बगीचा रतपलि आ ओिरा किसान सभि हाथ मे ितकड ते लि आ बहत कतन धरर तू रि ते श मे चकल गेल। 10 ओकह समय मे ओ एिटा नौिर िेँ किसान सभ लग पठौलकन जे ओ सभ ओिरा अंगूरि बगीचा मे सँ िल तऽ ते कथन। 11 िेर ओ एिटा आओर नतिर पठौलकन, आ ओ सभ ओिरा सेहत मारर-पीकट िऽ ल्ापूिाि किनती ियलि आ ओिरा खाली किता िऽ ते लि। 12 ओ िेर तेसर िेँ पठौलकन आ ओ सभ ओिरा घायल िऽ िऽ बाहर कनिाकल ते लि। 13 तखन अंगूरि बगीचाि माकलि िहलकथन, “हम िी िरब?” हम अपन कपय पुत िेँ पठा ते ब, भ' सिैत अकि जे ओ सभ ओिरा ते खखते ओिर आतर िरत।

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लूिा िे सुसमाचार

35 मुता जे सभ ओकह संसार आ मृत् यु मे सँ पुनरुान िरबाि यतग मानल जायत, से सभ ने कि​िाह िरै त अकि आ ने कि​िाह मे ते ल जाइत अकि। 36 ओ सभ आब नकह मरर सिैत अकि, किएि तँ ओ सभ स् िगातूत सभि बराबर अकि। आ पुनरुानि संतान बकन परमेश् िरि संतान िी। 37 आब जखन मृत् यु सभ जीकब उठल अकि, तखन मूसा सेहत झाडी पर पगट ियलकन, जखन ओ पभु िेँ अबाहमि परमेश् िर, इसहाि​ि परमेश् िर आ यािूबि परमेश् िर िहै त िकथ। 38 ओ मृत् युि परमेश् िर नकह, बल् कि जीकित लति​ि परमेश् िर िकथ। 39 तखन कि​िु शासी सभ उतर ते लकथन, “गुर, अहाँ नीि बात िहलहँ ।” 40 तिर बात ओ सभ हनिा सँ ितनत तरहि प् िरबाि कहमत नकह ियलकन। 41 ओ हनिा सभ िेँ पुिलकथन, “ ओ सभ ितना िहै त िकथ जे मसीह ताऊति पुत िकथ?” 42 ताऊत सयं भजन पुसि मे िहै त िकथ, “परमेश् िर हमर पभु िेँ िहलकथन, “अहाँ हमर तकहना िात बैसल रह।” 43 जाबत हम ततहर शतु सभ िेँ ततहर पैरि ठे हन नकह बनाबी। 44 ते ँ ताऊत हनिा पभु िहै त िकथन, तखन ओ हनिर पुत ितना िकथ? 45 तखन सभ लति​ि समर यीशु अपन कशद् य सभ िेँ िहलकथन। “ 47 ओ सभ किधिा सभि घर खाइत अकि आ पेमि लेल नमहर-नमहर पाथाना िरै त अकि। अधाय 21 1 ओ आँ खख उठा िऽ ते खलि जे धनी लति सभ अपन िरतान खजाना मे िेकि रहल अकि। 2 ओ एिटा गरीब किधिा िेँ सेहत ते खलकन जे ओतऽ तू टा िटहर िेकि रहल िलीह। 3 ओ िहलकथन, “ हम अहाँ सभ िेँ सत् य िहै त िी जे ई गरीब किधिा सभ सँ बेसी धनराकश ते लि। 4 किएि तँ ई सभ अपन पचुरता मे सँ परमेश् िरि बकलतान मे डालने िकथ। 5 जखन कि​िु लति मखनरि किदय मे िहै त िलाह जे ओ नीि पाथर आ िरतान सँ सजाओल गेल अकि। 6 अहाँ सभ जे ते खब, से एहन कतन आओत, जाकह मे एि पाथर ततसर पर नकह बचल रहत जे नकह िेिल जायत। 7 ओ सभ हनिा सँ पुिलकथन, “गुर, मुता ई सभ िकहया हतयत?” जखन ई सभ घटना घटत तखन ितन संिेत हतयत? 8 ओ िहलकथन, “ सािधान रह जे अहाँ सभ धतखा नकह खाउ। समय लग आकब रहल अकि, ते ँ अहाँ सभ हनिा सभि पािाँ नकह जाउ।” 9 मुता जखन अहाँ सभ यु् आ हं गामा सभि किदय मे सुनब तँ डरब नकह, किएि तँ ई सभ पकहने हतबऽ पडत। मुता अंत धीरे धीरे नकह हतइत िै ि। 10 तखन ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ जाकत जाकत पर आ राज् य राज् यि किर् उठत।

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11 किकभन ्ान पर पैघ भूिम आ अिाल आ महामारी आओत। आ स् िगा सँ भयािह दश आ पैघ-पैघ कचह हतयत। 12 मुता एकह सभ सँ पकहने ओ सभ अहाँ सभ पर हाथ राखख अहाँ सभ िेँ सताओत आ हमरा नामि िार्े ँ अहाँ सभ िेँ सभाघर आ जेल मे सौंकप ते त। 13 ई गिाही लेल अहाँ सभि कतस घुरत। 14 ते ँ अहाँ सभि मतन मे ई बात राखू जे अहाँ सभ जे उतर ते ब ताकह सँ पकहने मनन नकह िर। 15 हम अहाँ सभ िेँ एिटा एहन मुँह आ बुख् ते ब, जिरा अहाँ सभि सभ किरतधि किरतध नकह िऽ सिैत अकि आ ने किरतध िऽ सिैत अकि। 16 अहाँ सभ िेँ माय-बाबू, भाय, ररशेतार आ कमत तु नू दारा धतखा ते ल जायत। अहाँ सभ मे सँ कि​िु गतटे िेँ ओ सभ मारर ते कथन। 17 हमर नामि िार्े ँ अहाँ सभ िेँ सभ लति घृ्ा िरत। 18 मुता अहाँ ि माथि एित िेश नकह नष हतयत। 19 अहाँ सभ धैया राखख िऽ अपन पा्ी िेँ अपना मे राखख कलअ। 20 जखन अहाँ सभ यरशलेम िेँ सेना सभि घेराबंती ते खब तँ ई जाकन कलअ जे ओिर उजडबाि समय लग आकब गेल अकि। 21 तखन यहकतया मे रहकनहार सभ पहाड कतस भाकग जाय। जे सभ ओिर बीच मे अकि, से सभ बाहर कनिकल जाय। आ ते श मे रहकनहार लति सभ ओकह मे नकह जाउ। 22 किएि तँ ई पकतशतधि कतन हतयत, जाकह सँ सभ बात पूरा भऽ जाय। 23 मुता ओकह कतन मे गभािती आ तू ध ते बयिला सभि लेल कधकार! िार्, एकह ते श मे बहत संिट आ एकह लति पर कतध हतयत। 24 ओ सभ तलिारि धार मे खकस पडत आ सभ जाकत मे बंती बनाओल जायत। 25 रौत, चान आ तारा मे कचन् ह। आ पृथ् िी पर जाकत-जाकत सभि किपकत, भमि संग। समुद आ लहरर गज्त; 26 मनुद् यि हतय डर सँ आ पृथ् िी पर आबय बला बात िेँ ते खबाि िार्े ँ री् भऽ जायत। 27 तखन ओ सभ मनुद् य-पुत िेँ मेघ मे सामथ्ा य आ बहत मकहमा सँ अबैत ते खताह। 28 जखन ई सभ बात हतबऽ लागत तखन आँ खख उठा िऽ माथ उठाउ। किएि तँ अहाँ ि मतर लग आकब गेल अकि। 29 ओ हनिा सभ िेँ एिटा दषान बजौलकन। ते खू अंजीरि गाि आ सभटा गाि। 30 जखन ओ सभ अखन कनिलैत अकि तँ अहाँ सभ अपना आप िेँ ते खैत िी आ बुझैत िी जे आब गमय लग आकब गेल अकि। 31 तकहना अहाँ सभ जखन ई सभ घटना घटै त ते खब तँ ई जाकन कलअ जे परमेश् िरि राज् य नजतीि आकब गेल अकि। 32 हम अहाँ सभ िेँ सत् य िहै त िी, जाबत धरर सभ कि​िु पूरा नकह भऽ जायत ता धरर ई पी़ी नकह बीतत। 33 आिाश आ पृथी समाप भऽ जायत, मुता हमर िचन समाप नकह हतयत। 34 अहाँ सभ अपना िेँ सािधान रह, जाकह सँ अहाँ सभि मतन मे ितनत समय मे अकतशयतखक, नशा आ एकह जीिनि कचना सँ बेसी भार नकह आकब जाय। 35 किएि तँ ई सभ पृथ् िी पर रहकनहार सभ पर जाल जिाँ आकब जायत।


लूिा िे सुसमाचार

36 ते ँ अहाँ सभ जागल रह आ सकतखन पाथाना िर जाकह सँ अहाँ सभ एकह सभ घटना सँ बचबाि आ मनुद् य-पुति समर ठा़ रहबाि यतग मानल जाय। 37 कतन मे ओ मन् कतर मे कशरा तै त िलाह। राकत मे ओ बाहर कनिकल गेलाह आ ओकह पहाड पर रहै त िलाह जे जैतूनि पहाड िहल जाइत अकि। 38 सभ लति भतरे -भतर मन् कतर मे हनिा लग हनिर बात सुनबाि लेल आकब गेलाह।

20 तकहना भतजनि बात पाला सेहत िहै त िल जे, “ ई पाला हमर खून मे नि कनयम अकि जे अहाँ सभि लेल बहौल गेल अकि।” 21 मुता ते खू, जे हमरा धतखा ते त, ओिर हाथ हमरा संग टे बुल पर अकि। 22 मनुद् यि पुत जेना कनधा​ा ररत ियल गेल िल, तेना जाइत िकथ, मुता कधकार ओकह आतमी पर, जिरा दारा ओिरा धतखा ते ल गेल अकि। 23 ओ सभ आपस मे पूिताि िरऽ लगलाह जे ई िाज िरऽ िला मे सँ िे अकि। 24 हनिा सभ मे झगडा सेहत भेल जे हनिा सभ मे सँ िेिरा सभ सँ पैघ मानल जायत। 25 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ गैर-यहती सभि राजा सभ हनिा सभ पर पभु् रखैत िकथ। आ जे ओिरा सभ पर अकधिार रखैत अकि, ओिरा परतपिारी िहल जाइत िै ि। 26 मुता अहाँ सभ एहन नकह रहब, मुता जे अहाँ सभ मे पैघ अकि, से ितटिा जिाँ हतअय। जे मुखखया अकि से सेिा िरकनहार जिाँ । 27 किएि तँ िी पैघ अकि जे भतजन पर बैसल अकि आ कि सेिा िरऽ िला? िी ओ भतजन पर बैसल नकह अकि? मुता हम अहाँ सभि बीच ओकहना िी जेना सेिा िरऽ िला अकि।” 28 अहाँ सभ ओ सभ िी जे हमर परीरा मे हमरा संग बनल रहलाह। 29 हम अहाँ सभि लेल एिटा राज् य कनयुक िरै त िी, जेना हमर कपता हमरा लेल कनधा​ा ररत िेने िकथ। 30 अहाँ सभ हमर राज मे हमर टे बुल पर खा-पीब आ कसंहासन पर बैकस इसाएलि बारह गतति नाय िरब। 31 परमेश् िर िहलकथन, “ कसमतन, कसमतन, ते खू, शैतान अहाँ सभ िेँ गहम जिाँ िानबाि लेल चाहै त अकि। 32 मुता हम अहाँ ि लेल पाथाना िेलहँ जे अहाँ ि किश् िास री् नकह हत। 33 ओ हनिा िहलकथन, “पभु, हम अहाँ ि संग जेल आ मृ्ु तु नू मे जेबाि लेल तैयार िी।” 34 ओ िहलकथन, “ हम पतुस, हम अहाँ िेँ िहै त िी जे आइ मुगा​ा नकह बाजत, ताकह सँ पकहने अहाँ तीन बेर एकह बात सँ इनिार िरब जे अहाँ हमरा कचनै त िी।” 35 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ जखन हम अहाँ सभ िेँ कबना पसा, ख्प आ जूताि कबना पठे लहँ , तखन अहाँ सभ िेँ ितनत चीजि िमी िल? ओ सभ िहलकथन, “कि​िु नकह।” 36 तखन ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ मुता आब, जिरा लग पसा अकि, ओ ओिरा ल’ लेत आ तकहना ओिर तलिार सेहत। 37 हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे ई बात हमरा मे एखन धरर पूरा हे बाि चाही जे, “ओ अपराधी सभि बीच मे कगनल गेलाह।” 38 ओ सभ िहलकथन, “पभु, ते खू, तू टा तलिार अकि।” ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ बहत भऽ गेल।” 39 ओ अपन आतकत जिाँ जैतूनि पहाड पर कनिकल गेलाह। हनिर कशद् य सभ सेहत हनिर पािाँ -पािाँ चकल गेलाह। 40 यीशु ओकह ्ान पर पहँ चला पर हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ पाथाना िर जे अहाँ सभ परीरा मे नकह पडय।” 41 ओ पाथरि ढाल पर हनिा सभ सँ हकट गेलाह आ ठे हन टे िने पाथाना ियलकन। 42 ओ िहलकन, “ कपता, जँ अहाँ चाहै त िी तँ ई पाला हमरा सँ हटा कतयौि।

अधाय 22 1 अखमीरी रतटीि पाबकन लग आकब गेल िल, जिरा िसह िहल जाइत अकि। 2 मुख्‍यपुरतकहत आ धमाकशरि सभ ओिरा ितना मारर सिैत अकि। किएि तँ ओ सभ लतिसँ डे राइत िल। 3 तखन शैतान बारह गतटे ि संखा मे सँ इसररयतती नामि यहता मे पिेश ियलकन। 4 यीशु जा िऽ मुख् यपुरतकहत आ सेनापकत सभ सँ गपशप ियलकन जे ओ हनिा सभ िेँ ितना धतखा तऽ सिैत िकथ। 5 ओ सभ पसन भऽ हनिा पाइ ते बाि िाचा ियलकन। 6 ओ िचन ते लकथन आ लति​ि अनुपख्कत मे हनिा सभ िेँ धतखा ते बाि अिसर तिलकन। 7 तखन अखमीरी रतटीि कतन आकब गेल, जखन िसह-पाबकन िेँ मारबाि चाही। 8 ओ पतुस आ यूहन् ना िेँ पठौलकन जे , “ जाउ आ हमरा सभ िेँ िसह-पाबकन तैयार िर जाकह सँ हम सभ भतजन िरी।” 9 ओ सभ हनिा पुिलकथन, “अहाँ चाहै त िी जे हम सभ ितऽ तैयार िरी?” 10 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ ते खू, जखन अहाँ सभ नगर मे पिेश िरब तखन एि आतमी अहाँ सभ सँ भेट िरत, जे पाकन ि घैल ल’ ि’ चलत। ओिर पािाँ -पािाँ ओकह घर मे जाउ जतय ओ पिेश िरै त अकि। 11 अहाँ सभ घरि माकलि िेँ िहब जे , ‘गुर अहाँ िेँ िहै त िकथ जे , ‘अकतकथ िर ितय अकि, जतय हम अपन कशद् य सभि संग िसह-भतज खायब? 12 ओ अहाँ सभ िेँ एिटा पैघ ितठली ते खौताह जे सुसख्त अकि। 13 ओ सभ जा िऽ ओ सभ जेना हनिा सभ िेँ िहने िलाह, तेना पाकब गेलाह। 14 जखन समय आकब गेल तखन ओ बारह पेररत आ हनिा संग बैकस गेलाह। 15 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ हमरा िष सँ पकहने अहाँ सभि संग ई िसह भतजन िरबाि इचा अकि। 16 हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे , जाबत धरर परमेश् िरि राज् य मे ई पूरा नकह भऽ जायत ता धरर हम आब एिर िल नकह खाएब। 17 ओ पाला लऽ िऽ धनिात तै त िहलकथन, “ ई लऽ िऽ आपस मे बाँ कट कलअ। 18 हम अहाँ सभ िेँ िहै त िी जे जा धरर परमेश् िरि राज् य नकह आओत ता धरर हम बेल िेर िल नकह पीब। 19 ओ रतटी लऽ िऽ धनिात ते लकथन आ ओिरा ततकड िऽ हनिा सभ िेँ ते लकथन, “ ई हमर शरीर अकि जे अहाँ सभि लेल ते ल गेल अकि।

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लूिा िे सुसमाचार

43 तखन स् िगा सँ एिटा स् िगातूत हनिा सामथ्ा य तऽ िऽ पगट भेलाह। 44 ओ पीडा िऽ िऽ आरत गंभीरता सँ पाथाना ियलकन आ पसीना ओकहना भऽ गेलाह जेना जमीन पर खसैत खूनि पैघ-पैघ बूंत। 45 यीशु पाथाना सँ उकठ िऽ अपन कशद् य सभि लग पहँ चलाह तँ हनिा सभ िेँ तु ःख सँ सुतल ते खलकन। 46 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ अहाँ सभ किएि सुतैत िी?” उठू आ पाथाना िर, जाकह सँ अहाँ सभ परीरा मे नकह पकड जायब।” 47 जखन ओ एखन धरर बाजैत िलाह तखन ते खलहँ जे बहतत लति आ बारह गतटे मे सँ एि यहता नामि लति हनिा सभि आगाँ बक़ िऽ यीशु लग आकब गेलाह जे हनिा चुमा लेकथ। 48 यीशु हनिा पुिलकथन, “ यहता, िी अहाँ मनुद् य-पुत िेँ चुमा तऽ िऽ धतखा तऽ तै त िी?” 49 हनिा लगि लति सभ जखन हनिा बात िी हतयत से ते खलकन तँ हनिा पुिलकथन, “पभु, िी हम सभ तलिार सँ मारर ते ब?” 50 ओकह मे सँ एि गतटे महापुरतकहति नतिर िेँ मारर िऽ ओिर तकहना िान िाकट लेलि। 51 यीशु उतर ते लकथन, “ अहाँ सभ एखन धरर सहन िर।” ओ हनिर िान िूकब िऽ हनिा ठीि िऽ ते लकथन। 52 तखन यीशु हनिा लग आयल मुख् यपुरतकहत सभ, मन् कतरि सेनापकत सभ आ बू़-पुरान सभ िेँ िहलकथन, “ िी अहाँ सभ चतर जिाँ तलिार आ लाठी लऽ िऽ कनिलल िी?” 53 जखन हम सभ कतन अहाँ सभि संग मन् कतर मे िलहँ तँ अहाँ सभ हमरा पर हाथ नकह ब़बैत िलहँ । 54 तखन ओ सभ हनिा पिकड िऽ महापुरतकहति घर मे अनलकन। पतुस तू र-तू र धरर पािू-पािू चकल गेलाह। 55 ओ सभ तलानि बीच मे आकग जरा िऽ एि संग बैकस गेलाह, तखन पतुस हनिा सभि बीच बैकस गेलाह। 56 मुता एिटा तासी हनिा आकग लग बैसल ते खख िऽ हनिा कतस तिलकन आ िहलकथन, “ई आतमी सेहत हनिा संग िल।” 57 ओ हनिा निारै त िहलकथन, “मारी, हम हनिा नकह कचनै त िी।” 58 कि​िु ए िालि बात एि गतटे हनिा ते खख िहलकथन, “अहाँ सेहत हनिा सभि मे सँ िी।” पतुस िहलकथन, “यार, हम नकह िी।” 59 िरीब एि घंटाि बात एि गतटे किश्‍िासपूिाि िहलकथन, “सते ई आतमी सेहत हनिा संग िल। 60 पतुस िहलकथन, “यार, अहाँ िी िहै त िी से हमरा नकह बुझल अकि।” जखन ओ एखन धरर बजैत िलाह तखन तुरन मुगा​ा खसकि गेल। 61 पभु घुकम िऽ पतुस कतस तिलकन। पतुस पभुि िचन मतन पाडलकन जे ओ हनिा िहने िलाह, “ मुगा​ा बाजबा सँ पकहने अहाँ हमरा तीन बेर असीिार िऽ ते ब।” 62 पतुस बाहर कनिकल िऽ िटु िानय लागल। 63 यीशु िेँ पिडने लति सभ हनिर उपहास िऽ िऽ मारर ते लिकन। 64 ओ सभ हनिा आँ खख पर पटी बाखन िऽ हनिा मुँह पर पहार ियलकन आ पुिलकथन, “भकिषिा्ी िर, अहाँ िेँ िे मारर ते लि?” 65 ओ सभ आरत बहत रास बात हनिा पर कनना ियलकन।

66 भतर हतइते लति​ि बू़-पुरतकहत आ शासी सभ एि ठाम आकब िऽ हनिा अपन पररदत् मे लऽ गेलकन आ िहलकथन। 67 िी अहाँ मसीह िी? बताइए। ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ हम अहाँ सभ िेँ िहब तँ अहाँ सभ किश् िास नकह िरब। 68 जँ हमहँ अहाँ सभ सँ पूिब तँ अहाँ सभ हमरा ितनत उतर नकह ते ब आ ने हमरा जाय ते ब। 69 आब मनुद् यि पुत परमेश् िरि सामथ्ा यि तकहना िात बैसताह। 70 तखन ओ सभ पुिलकथन, “िी अहाँ परमेश् िरि पुत िी?” ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ अहाँ सभ िहै त िी जे हम िी।” 71 ओ सभ पुिलकथन, “हमरा सभ िेँ आओर गिाहि िी चाही?” किएि तँ हम सभ हनिे मुँह सँ सुनने िी। अधाय 23 1 ओ सभ लति सभ उकठ िऽ हनिा कपलातुस लग लऽ गेलाह। 2 ओ सभ हनिा पर आरतप लगाबय लगलाह जे, “हमरा सभ िेँ ई आतमी राष् िेँ कि​िृत िरै त ते खलहँ आ िैसर िेँ िर ते बऽ सँ मना िरै त ते खलहँ जे ओ सयं मसीह राजा िकथ।” 3 कपलातुस हनिा पुिलकथन, “िी अहाँ यहती सभि राजा िी?” ओ हनिा उतर ते लकथन, “ अहाँ ई बात िहै त िी।” 4 तखन कपलातुस मुखपुरतकहत आ लति सभ िेँ िहलकथन, “हमरा एकह आतमी मे ितनत ततद नकह भेटैत अकि।” 5 ओ सभ आर भयंिर भऽ िऽ बाजल, “ओ गलील सँ ल’ िऽ एकह ठाम धरर समस यहती सभ मे कशरा तै त लति सभ िेँ भडिाबैत िकथ।” 6 कपलातुस गलीलि किदय मे सुकन पुिलकथन जे िी ओ आतमी गलील अकि। 7 जकहना हनिा बुझलकन जे ओ हे रतते सि अकधिार रेत मे िकथ, तखन ओ हनिा हे रतते स लग पठौलकन, जे ओकह समय मे यरशलेम मे सेहत िलाह। 8 हे रतते स यीशु िेँ ते खख िऽ बहत खुश भऽ गेलाह, किएि तँ ओ बहत कतन सँ हनिा ते खबाि इचा रखैत िलाह। आ हनिा आशा िलकन जे हनिा दारा ियल गेल ितनत चमतार ते खल गेल हतयत। 9 तखन ओ हनिा सँ बहत रास बात मे पूिताि ियलकन। मुता ओ ओिरा कि​िु उतर नकह ते लि। 10 तखन मुख्‍य पुरतकहत आ धमाकशरि सभ ठा़ भऽ हनिा पर घतर आरतप लगौलकन। 11 हे रतते स अपन यु्िमय सभि संग हनिा घृ्ा िऽ िऽ हनिर मजाि उडौलकन आ एिटा सुनर िस पकहरर िऽ िेर सँ कपलातुस लग पठा ते लकथन। 12 ओही कतन कपलातुस आ हे रतते स एि संग ततसी भऽ गेलाह, किएि तँ पकहने तु नू गतटे ि बीच शतुता िलकन। 13 कपलातुस जखन ओ मुख् यपुरतकहत सभ, शासि सभ आ लति सभ िेँ बजौलकन। 14 हनिा सभ िेँ िहलकथन, “अहाँ सभ एकह आतमी िेँ हमरा लग अनलहँ जेना लति िेँ कि​िृत िरयिला अकि। 15 हे रतते स सेहत नकह, किएि तँ हम अहाँ सभ िेँ हनिा लग पठौने िलहँ । ते खू, ओिरा संग ितनत मृ्ुि यतग ितनत िाज नकह हतइत िै ि। 16 ते ँ हम ओिरा डाँ कट ते ब आ ओिरा ितकड ते ब।

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लूिा िे सुसमाचार

17 (किएि तँ हनिा सभ िेँ भतज मे एिटा िेँ ितकड ते बाि चाही।” 18 ओ सभ एके बेर कचकचया उठलकन, “एकह आतमी िेँ तू र िर आ हमरा सभि लेल बरबा िेँ ितकड कतअ।” 19 (ओ नगर मे किदतह आ ह्ाि िार्े ँ जेल मे डालल गेलाह।) 20 कपलातुस यीशु िेँ ितकड ते बऽ चाहै त िलाह आ िेर हनिा सभ सँ बात ियलकन। 21 मुता ओ सभ कचकचया उठलकन, “ओिरा कूस पर च़ाउ, कूस पर च़ाउ।” 22 ओ तेसर बेर हनिा सभ िेँ पुिलकथन, “ओ िी अधलाह िाज ियलकन?” हम ओिरा मे मृ्ुि ितनत िार् नकह भेटल अकि, ते ँ हम ओिरा सजा ते ब आ ओिरा ितकड ते ब। 23 ओ सभ तुरन जतर-जतर सँ बजैत िलाह जे हनिा कूस पर च़ाओल जाय। ओ सभ आ मुख्‍य पुरतकहत सभि आिाज पबल भऽ गेल। 24 तखन कपलातुस सजा ते लकथन जे ओ सभ ओकहना हतअय। 25 ओ किदतह आ ह्ाि िार्े ँ जेल मे डालल गेल िल, जिरा ओ सभ चाहने िल, ओिरा सभ िेँ ितकड ते लि। मुता यीशु िेँ हनिा सभि इचा मे सौंप ते लकन। 26 जखन ओ सभ हनिा लऽ जा रहल िल तखन ओ सभ िुरे कनयाि कसमतन िेँ पिकड लेलि आ यीशुि पािाँ -पािाँ कूस राखख ते लि। 27 यीशुि पािाँ -पािाँ बहत रास लति आ स् तीग् सभ सेहत हनिा किलाप आ किलाप िरै त िल। 28 यीशु हनिा सभ कतस घुकम िऽ िहलकथन, “ हे यरशलेमि बेटी सभ, हमरा लेल नकह िानब, बल् कि अपना आ अपन बचा सभि लेल िानब।” 29 ते खू, ओ कतन आकब रहल अकि जाकह मे ओ सभ िहताह जे , “धन अकि बंजर, जे गभा िकहयत नकह जनैत िल, आ ओ बचा जे िकहयत तू ध नकह पबैत िल।” 30 तखन ओ सभ पहाड सभ िेँ िहय लागत जे, “हमरा सभ पर खकस पडत।” आ पहाडी कतस, हमरा सभिेँ झाँ कप कतयौि। 31 जँ ओ सभ हररयर गाि मे ई सभ िाज िरत तँ सुखल गाि मे िी हतयत? 32 हनिा संग तू टा आओर अपराधी सेहत िल, जिरा मारर ते बाि लेल लऽ गेल िल। 33 ओ सभ जखन िलिारी नामि ्ान पर पहँ चलाह, तखन ओ सभ हनिा आ अपराधी सभ िेँ एिटा तकहना िात आ ततसर बामा िात कूस पर च़ा ते लकन। 34 तखन यीशु िहलकथन, “ कपता, हनिा सभ िेँ रमा िर। किएि तँ ओ सभ िी िरै त िकथ से नकह जनैत िकथ। ओ सभ ओिर िस बाँ कट िऽ कचटी लगा ते लि। 35 लति सभ ते खख िऽ ठा़ भऽ गेल। हनिा सभि संग शासि सभ सेहत हनिर उपहास िरै त िहलकथन, “ओ ततसरत िेँ बचा लेलकन। जँ ओ परमेश् िरि चुनल मसीह िकथ तँ अपना िेँ बचाबकथ। 36 कसपाही सभ हनिा लग आकब िऽ कसरिा च़ा िऽ हनिर उपहास िेलि। 37 ओ िहलकथन, “अहाँ जँ यहती सभि राजा िी तँ अपना िेँ बचाउ।” 38 हनिा ऊपर यूनानी, लैकटन आ कहबू भादाि अरर मे कलखल िलकन, “ई यहती सभि राजा िकथ।”

39 िाँ सी पर लटिल अपराधी मे सँ एि गतटे हनिा गारर िऽ िऽ िहलकथन, “अहाँ जँ मसीह िी तँ अपना िेँ आ हमरा सभ िेँ बचाउ।” 40 मुता ततसर लति हनिा डाँ कट िऽ िहलकथन, “िी अहाँ परमेश् िर सँ नकह डे रैत िी, किएि तँ अहाँ ओकहना ततदी ठहराओल गेल िी?” 41 हम सभ सते नायपूिाि। िार्, हमरा सभ िेँ अपन िाजि उकचत िल भेटैत अकि। 42 ओ यीशु िेँ िहलकथन, “पभु, जखन अहाँ अपन राज् य मे आकब जायब तखन हमरा मतन पाडू।” 43 यीशु हनिा िहलकथन, “ हम अहाँ िेँ सते िहै त िी जे आइ अहाँ हमरा संग सगा मे रहब।” 44 लगभग िठम बजे भऽ गेल िल आ निम बजे धरर पूरा पृथ् िी पर अन् हार भऽ गेल। 45 रौत अनार भऽ गेल आ मखनरि पता​ा बीच मे िाकट गेल। 46 यीशु जतर-जतर सँ कचकचया उठलाह, “ कपता , हम अपन आत् मा अहाँ ि हाथ मे सौंकप रहल िी। 47 सेनापकत ई बात ते खख परमेश् िरि मकहमा िऽ िऽ िहलकथन, “ई तँ धमय लति िलाह।” “ 49 हनिर सभ पररकचत आ गलील सँ हनिा पािाँ -पािाँ आबय बला स् तीग् सभ तू र ठा़ भऽ िऽ ई सभ बात ते खैत रहलाह। 50 यूसुि नामि एि आतमी िल जे सलाहिार िल। ओ नीि लति आ धमय िलाह। 51 (ओ हनिा सभि सलाह आ िाज सँ सहमत नकह िलाह।) ओ यहती सभि नगर अररमाकथयाि िलाह। 52 ई आतमी कपलातुस लग जा िऽ यीशुि लाश माँ कग लेलि। 53 ओ ओिरा उतारर िऽ कलनेन मे लपेकट िऽ पाथर मे उखाडल िब मे राखख ते लकथन, जाकह मे पकहने िकहयत ि​िरत नकह राखल गेल िल। 54 ओकह कतन तैयारी भऽ गेल िल आ किशामि कतन आकब गेल िल। 55 गलील सँ हनिा संग आयल स् ती सभ सेहत पािाँ -पािाँ चकल गेलीह आ िब िेँ ते खख रहल िलीह जे हनिर लाश ितना राखल गेल िलकन। 56 ओ सभ घुरर िऽ मसाला आ मरहम तैयार ियलकन। आजाि अनुसार किशाम-कतन किशाम ियलकन। अधाय 24 1 सपाहि पकहल कतन भतरे -भतर ओ सभ अपन बनाओल मसाला आ कि​िु आन लति सभ िेँ ल’ िऽ िब पर पहँ चलाह। 2 ओ सभ पाथर िब पर सँ गुडकि िऽ गेल ते खलकन। 3 ओ सभ भीतर गेलाह, मुता पभु यीशुि शि नकह भेटलकन। 4 जखन ओ सभ एकह किदय मे बहत असमंजस मे पकड गेल िल, तखन ते खलहँ जे तू गतटे चमिैत िस पकहरने हनिा सभि लग मे ठा़ िलाह। 5 ओ सभ डरा िऽ पृथ् िी कतस मुँह झुिा िऽ िहलकथन, “अहाँ सभ मृत् युि बीच जीकित लति िेँ किएि तिैत िी?” 6 ओ एतय नकह िकथ, बल् कि जीकब उठल िकथ। 7 ओ िहलकन, “मनुष-पुत िेँ पापी लति​ि हाथ मे सौंपल जाय आ कूस पर च़ाओल जाय आ तेसर कतन जीकब उठय पडतैि।” 8 ओ सभ हनिर बात मतन पाडलकन।

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लूिा िे सुसमाचार

9 ओ िब पर सँ घुरलाह आ ई सभ बात एगारह गतटे िेँ आ बाँ िी सभ िेँ िहलकथन। 10 मररयम मगतलीनी, यतआना, यािूबि माय मररयम आ हनिा सभि संग रहकनहार आन स् तीग् सभ पेररत सभ िेँ ई बात िहने िलीह। 11 ओ सभ हनिा सभि बात बेिार िथा जिाँ बुझाइत िलकन, मुता ओ सभ ओिरा सभ पर किशास नकह ियलकन। 12 तखन पतुस उकठ िऽ िब कतस तौडल गेलाह। झुकि िऽ ओ कलनेन िपडा सभ िेँ अपना-अपन कबिल ते खख िऽ किता भऽ गेलाह। 13 ओकह कतन तू गतटे यरशलेम सँ िरीब साकठ िीट तू र इमाऊस नामि गाम मे गेलाह। 14 ओ सभ एकह सभ घटनाि किदय मे एि संग गप ियलकन। 15 जखन ओ सभ एि संग गप-सप िरै त िल, तखन यीशु हनिा सभि संग आकब गेलाह। 16 मुता हनिा सभि नजरर कटिल िलकन जे ओ सभ हनिा नकह कचनकथ। 17 यीशु हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ अहाँ सभ चलैत-चलैत आ तु खी हतइत िाल एि-ततसर सँ ितन तरहि संिात हतइत अकि? 18 हनिा सभ मे सँ एि गतटे कजनिर नाम ख्ओपास िलकन, हनिा िहलकथन, “िी अहाँ यरशलेम मे मात परते शी िी आ एकह कतन मे ओकह ठाम जे घटना घटल अकि से नकह जनैत िी?” 19 यीशु हनिा सभ िेँ पुिलकथन, “ िी बात? ओ सभ हनिा िहलकथन, “नासरति यीशुि किदय मे, जे परमेश् िर आ समस लति​ि समर िाज आ िचन मे पराकमी पि​ि् ता िलाह। 20 मुख्‍य पुरतकहत आ हमरा सभि शासि सभ हनिा मृ्ुि सजाय ते बाि लेल सौंकप ते लकन आ कूस पर च़ा ते लकन। 21 मुता हमरा सभ िेँ भरतसा िल जे ओ इसाएल िेँ मुि् त िरबाि िल, आ एकह सभि अकतररक आइ ई सभ िाज भेलाि तेसर कतन अकि। 22 हँ , हमरा सभि संगकति कि​िु स् तीग् सभ सेहत हमरा सभ िेँ आशयाचकित िऽ ते लि जे िब पर भतरे -भतर िल। 23 जखन हनिा सभ िेँ हनिर लाश नकह भेटलकन तँ ओ सभ आकब िऽ िहलकथन जे ओ सभ स् िगातूत सभि तशान सेहत ते खलकन जे ओ जीकित िकथ। 24 हमरा सभि संग मे सँ कि​िु गतटे िब पर जा िऽ ओकहना भेटलकन जेना स् तीग् सभ िहने िलीह। 25 तखन यीशु हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ हे मूखा सभ, आ पि​ि् ता सभि सभ बात पर किश् िास िरबा मे मंत हतय मे रहकनहार। 26 िी मसीह िेँ ई सभ िष भतकग िऽ अपन मकहमा मे पिेश नकह िरबाि चाही िल? 27 मूसा आ सभ पि​ि् ता सभ सँ शुर भऽ ओ सभ धमाशास् त मे हनिा सभ िेँ अपन किदय मे बुझा ते लकथन। 28 ओ सभ ओकह गामि नजतीि आकब गेलाह, जतय ओ सभ जाइत िलाह। 29 मुता ओ सभ हनिा बाध िऽ िऽ िहलकथन, “हमरा सभि संग रह, किएि तँ साँ झ भऽ गेल अकि आ कतन भऽ गेल अकि।” ओ हनिा सभि संग रहबाि लेल भीतर गेलाह। 30 जखन ओ हनिा सभि संग भतजन पर बैसल िलाह तखन ओ रतटी लऽ िऽ आशीद तऽ हनिा सभ िेँ ततकड िऽ ते लकथन। 31 हनिा सभि आँ खख खुकज गेलकन आ ओ सभ हनिा कचनलकन। आ ओ हनिा सभि नजरर सँ किलुप भ’ गेलाह।

32 ओ सभ एि-ततसर सँ िहलकथन, “िी हमरा सभि हतय मे जरल नकह िल जखन ओ हमरा सभ सँ बाट मे गप िरै त िलाह आ जाबत ओ हमरा सभ िेँ धमाशास िेँ खतलैत िलाह? 33 ओही समय ओ सभ उकठ िऽ यरशलेम घुरर गेलाह आ हनिा सभि संग रहकनहार सभ एगारह गतटे िेँ जमा ियल गेल ते खलकन। 34 ओ िहलकन, “पभु सते जीकब उठल िकथ आ कसमतन िेँ पगट भऽ गेलाह।” 35 ओ सभ बाट मे िी-िी भेल आ रतटी ततडबा मे हनिा सभ िेँ ितना कचनल गेलकन से िहलकथन। 36 जखन ओ सभ ई बात िकह रहल िलाह तखन यीशु हनिा सभि बीच ठा़ भऽ िऽ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ अहाँ सभ िेँ शाखन हत।” 37 मुता ओ सभ आतंकित आ भयभीत भऽ गेलाह आ सतचलकन जे ओ सभ ितनत आत्‍मा िेँ ते खख लेने िकथ। 38 ओ हनिा सभ िेँ पुिलकथन, “ अहाँ सभ किएि घबरा गेल िी? आ अहाँ सभि हतय मे किचार किएि उठै त अकि? 39 हमर हाथ आ पएर ते खू जे हम सयं िी। किएि तँ आत् माि मां स आ हडी नकह हतइत िै ि, जेना अहाँ सभ हमरा ते खैत िी। 40 ई बात िकह िऽ ओ हनिा सभ िेँ अपन हाथ आ पएर ते खौलकन। 41 जखन ओ सभ खुशी सँ किश् िास नकह िऽ रहल िल आ आशयाचकित भऽ गेल िल, तखन यीशु ओिरा सभ िेँ िहलकथन, “ िी अहाँ सभ िेँ एतय भतजन अकि?” 42 ओ सभ ओिरा भुजल माि​ि टु िडी आ मधुि िताि टु िडी ते लि। 43 ओ ओिरा लऽ िऽ हनिा सभि समर भतजन ियलकन। 44 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ हम अहाँ सभि संग रहै त िाल अहाँ सभ िेँ ई बात िहने रही जे मूसाि धमा-कनयम, भकिषिका आ भजन मे कलखल सभ बात पूरा हतबऽ पडत। हमरा संबंध मे। 45 तखन यीशु हनिा सभि बुख् खतललकन जाकह सँ ओ सभ धमाशास् त िेँ बुकझ सिकथ। 46 ओ हनिा सभ िेँ िहलकथन, “ एकह तरहे ँ धमाशास् त मे कलखल अकि आ मसीह िेँ तेसर कतन मृत् यु मे सँ जीकब उठबाि चाही। 47 यरशलेम सँ शुर भऽ िऽ सभ जाकत मे हनिर नाम पर पशाताप आ पापि रमाि पचार ियल जाय। 48 अहाँ सभ एकह बाति गिाह िी। 49 ते खू, हम अपन कपताि पकतजा अहाँ सभ पर पठा रहल िी, मुता अहाँ सभ यरशलेम नगर मे ताबत धरर रह जाबत धरर अहाँ सभ िेँ ऊपर सँ सामथ्ा य नकह भेकट जायत। 50 ओ हनिा सभ िेँ बेतकनया धरर लऽ गेलाह आ हाथ उठा िऽ हनिा सभ िेँ आशीिा​ा त ते लकन। 51 जखन यीशु हनिा सभ िेँ आशीद तै त िलाह तखन हनिा सभ सँ अलग भऽ गेलाह आ स् िगा मे लऽ गेलाह। 52 ओ सभ हनिर आराधना ियलकन आ बहत हदा सँ यरशलेम घुरर गेलाह। 53 ओ सभ कतन मन् कतर मे परमेश् िरि सुकत आ आशीद तै त रहलाह। आमीन।

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जॉन अध्य 1 1 शुर मे वचन छल, आ वचन परमेश् वरक संग छल, आ वचन परमेश् वर छलाह। 2 शुर मे परमेश् वरक संग सेहो वैह छल। 3 सभ ककछु हनका दारा बनाओल गेल अकछ। आ हनका कबना कोनो एहन चीज नकह बनल जे बनल छल। 4 हनका मे जीवन छलकन। आ जीवन मनुष् यक इजोत छल। 5 अनार मे इजोत चमकैत अकछ। आ अनार ओकरा नकह बुझलक। 6 परमेश् वर दारा पठाओल गेल एक आदमी छल, जकर नाम यूहन् ना छल। 7 ओ इजोतक गवाही दे बाक लेल अयलाह जाकह सँ सभ लोक हनका दारा कवश् वास करकि। 8 ओ इजोत नकह छलाह, बल् कक ओकह इजोतक गवाही दे बाक लेल पठाओल गेल छलाह। 9 ओ सत् य इजोत छल जे संसार मे अबैत सभ मनुष् य केँ इजोत दै त अकछ। 10 ओ संसार मे छलाह, आ संसार हनका दारा बनाओल गेल छल, मुदा संसार हनका नकह कचनलक। 11 ओ अपन लोक लग आकब गेलाह, मुदा अपन लोक हनका नकह गहर कयलकन। 12 मुदा जे सभ हनका गहर कयलकन, हनका सभ केँ परमेश् वरक पुत बनबाक अकिकार दे लकन। 13 ओ सभ खून सँ नकह, आ ने शरीरक इचा सँ, आ ने मनुष् यक इचा सँ, बल् कक परमेश् वर सँ। 14 ओ वचन शरीर बकन कऽ हमरा सभक बीच रहलाह, आ हम सभ हनकर मकहमा, कपताक एकलौताक मकहमा जकाँ दे खलहँ । 15 यूहन् ना हनका बारे मे गवाही दै त कचकचया उठलाह, “हम हनका बारे मे कहने छलहँ जे , “हमरा बाद जे आओत से हमरा सँ बेसी नीक अकछ।” 16 हनकर पूर्ता सँ हमरा सभ केँ अनुगहक बदला मे अनुगह भेटल अकछ। 17 िम्-कनयम मूसा दारा दे ल गेल अकछ, मुदा अनुगह आ सत् य यीशु मसीहक दारा भेल। 18 परमेश्‍वर केँ केओ ककहयो नकह दे खने अकछ। एकलौता पुत, जे कपताक कोरा मे अकछ, ओ हनका पचार कयलकन अकछ। 19 यूहन् नाक ई गवाही अकछ जखन यहदी सभ यरशलेम सँ पुरोकहत आ लेवी सभ केँ पठौलकन जे ओ हनका सँ पूछकि जे , “अहाँ के छी?” 20 ओ स् वीकार कऽ कऽ असीकार नकह कयलकन। मुदा सीकार कयलकन जे , “हम मसीह नकह छी।” 21 ओ सभ हनका सँ पुछलकिन, “तखन की?” की अहाँ एकलयाह छी? ओ कहलकिन, “हम नकह छी।” की अहाँ ओ भकवषवया छी? ओ उतर दे लकिन, “नकह।” 22 तखन ओ सभ हनका पुछलकिन, “अहाँ के छी?” जाकह सँ हम सभ जे हमरा सभ केँ पठौलकन, तकरा सभ केँ उतर दऽ सकब।” अहाँ अपना बारे मे की कहै त छी?

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23 ओ कहलकिन, “हम जंगल मे एकटा एहन लोकक आवाज छी जे “पभुक बाट सोझ कर, जेना यशायाह भकवषवया कहने छलाह।” 24 जे सभ पठाओल गेल छल, से फररसी सभ मे सँ छल। 25 ओ सभ हनका सँ पुछलकिन, “तखन अहाँ ओ मसीह आ ने एकलयाह आ ने ओ भकवषवया नकह छी तँ अहाँ बपकतस् मा ककएक दै त छी?” 26 यूहन् ना हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “हम पाकन सँ बपकतस् मा दै त छी। 27 ओ छकि जे हमरा पाछाँ आकब रहल छकि, हमरा सँ बेसी नीक छकि, कजनकर जूताक कुंडी खोलबाक योग नकह छी। 28 ई सभ यरदन नदीक ओकह पारक बेताबरा मे भेल, जतऽ यूहन् ना बपकतस् मा दऽ रहल छलाह। 29 दोसर कदन यूहन् ना यीशु केँ हनका लग अबैत दे खख कहलकिन, “दे खू, परमेश् वरक मेमना जे संसारक पाप केँ दू र करै त छकि।” 30 ई ओ छकि कजनका बारे मे हम कहने छलहँ जे , “हमरा बाद एकटा एहन आदमी अबैत अकछ जे हमरा सँ बेसी शेर अकछ।” 31 हम हनका नकह कचनै त छलहँ , मुदा एकह लेल जे ओ इसाएलक समक पगट होकि, ते ँ हम पाकन सँ बपकतस् मा दै त आयल छी। 32 यूहन् ना गवाही दै त कहलकिन, “हम दे खलहँ जे आत् मा कबूतर जकाँ स् वग् सँ उतरै त अकछ आ ओ हनका पर बैसल छल।” 33 हम हनका नकह कचनै त छलहँ , मुदा जे हमरा पाकन सँ बपकतस् मा दे बाक लेल पठौलकन, से हमरा कहलकिन, “अहाँ जकरा पर आत् मा उतरै त दे खब आ ओकरा पर रहत, वैह पकवत आत् मा सँ बपकतस् मा दै त अकछ।” 34 हम दे खलहँ आ गवाही दे लहँ जे ई परमेश् वरक पुत छकि। 35 दोसर कदन यूहन् ना आ हनकर दू टा कशष् य फेर ठाढ भऽ गेलाह। 36 चलैत काल यीशु कदस तकैत कहलकिन, “दे खू परमेश् वरक मेमना!” 37 दु नू कशष् य हनका बजैत सुकन यीशुक पाछाँ -पाछाँ चकल गेलाह। 38 तखन यीशु घुकम कऽ हनका सभ केँ पाछाँ -पाछाँ चलैत दे खख पुछलकिन, “ अहाँ सभ की चाहै त छी?” ओ सभ हनका पुछलकिन, “गुर, जकर अि् अकछ, “गुर” अहाँ कतय रहै त छी?” 39 ओ हनका सभ केँ कहलकिन, “ आउ आ दे खू।” ओ सभ आकब कऽ दे खलक जे ओ कतऽ रहै त छकि आ ओकह कदन हनका संग रकह गेलाह, ककएक तँ करीब दसम घंटा भऽ गेल छल। 40 यूहन् नाक गप सुकन हनका पाछाँ -पाछाँ चलय बला दु नू मे सँ एक छल कसमोन पतुसक भाय अन् दे या। 41 ओ पकहने अपन भाय कसमोन केँ पाकब कऽ कहलकिन, “हमरा सभ केँ मसीह भेकट गेल अकछ। 42 ओ हनका यीशु लग अनलकन। यीशु हनका दे खख कहलकिन, “ अहाँ योनाक पुत कसमोन छी। 43 ओकर बादक कदन यीशु गलील जाय चाहै त छलाह आ कफकलपुस केँ पाकब कऽ कहलकिन, “ हमर पाछाँ चलू।” 44 कफकलपुस बेतसैदाक छलाह जे अख्डया आ पतुसक नगर छल। 45 कफकलपुस निनील केँ पाकब कऽ कहलकिन, “हमरा सभ केँ ओ यूसुफक पुत नासरतक यीशु, जकरा बारे मे मूसा आ पवक् ता सभ कलखने छलाह, हनका पाकब गेलहँ ।”


जॉन

46 निनील हनका कहलकिन, “की नासरत सँ कोनो नीक बात कनककल सकैत अकछ?” कफकलपुस हनका कहलकिन, “आउ आ दे खू।” 47 यीशु निनेल केँ हनका लग अबैत दे खख कहलकिन, “ दे खू, एकटा इसाएली अकछ, जकरा मे कोनो िोखा नकह अकछ! 48 निनील हनका पुछलकिन, “अहाँ हमरा कतऽ सँ कचनै त छी?” यीशु उतर दे लकिन, “ कफलपस अहाँ केँ बजाबय सँ पकहने जखन अहाँ अंजीरक गाछक नीचाँ छलहँ तखन हम अहाँ केँ दे खलहँ ।” 49 निनेल उतर दे लकिन, “गुर, अहाँ परमेश् वरक पुत छी। अहाँ इसाएलक राजा छी। 50 यीशु उतर दे लकिन, “ हम अहाँ केँ अंजीरक गाछक नीचाँ दे खलहँ, ताकह लेल की अहाँ कवश् वास करै त छी?” अहाँ एकह सभ सँ पैघ बात दे खब। 51 ओ हनका कहलकिन, “हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे आब अहाँ सभ स् वग् केँ खुजल दे खब आ परमेश् वरक स् वग्दूत सभ केँ मनुष् य-पुत पर चढै त-उतरै त दे खब।”

17 हनकर कशष् य सभ केँ मोन पडलकन जे िम्शास् त मे कलखल छल, “अहाँ क घरक उताह हमरा खा गेल अकछ।” 18 तखन यहदी सभ हनका कहलकिन, “अहाँ ई सभ काज कऽ रहल छी, हमरा सभ केँ की चमतार कऽ रहल छी?” 19 यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ ई मन् कदर केँ नष कऽ कदअ, आ हम तीन कदन मे एकरा ठाढ कऽ दे ब।” 20 तखन यहदी सभ कहलकिन, “ई मख्र कछयालीस वष् सँ बनल छल, आ की अहाँ एकरा तीन कदन मे ठाढ करब?” 21 मुदा ओ अपन शरीरक मन् कदरक कवषय मे बजलाह। 22 जखन यीशु मृत् यु मे सँ जीकब उठलाह तखन हनकर कशष् य सभ केँ मोन पडलकन जे ओ हनका सभ केँ ई बात कहने छलाह। ओ सभ िम्शास् त आ यीशुक कहल बात पर कवश् वास कयलकन। 23 जखन यीशु फसह-पाबकन मे यरशलेम मे छलाह, तखन हनका दारा कयल गेल चमतार दे खख बहतो लोक हनकर नाम पर कवश् वास कयलकन। 24 मुदा यीशु सभ मनुष् य केँ जनैत छलाह, ते ँ हनका सभक हाि मे अपना केँ नकह सौंपलकन। 25 मनुष् यक गवाही दे बाक आवशकता नकह छल, ककएक तँ ओ मनुष् य मे की अकछ से जनैत छल।

अध्य 2 1 तेसर कदन गलील पदे शक काना मे कववाह भेल। यीशुक माय ओतकह छलीह। 2 यीशु आ हनकर कशष् य सभ केँ कववाह मे बजाओल गेलकन। 3 जखन हनका सभ केँ मकदराक अभाव भेलकन तँ यीशुक माय हनका कहलकिन, “ओकरा सभ लग मकदरा नकह अकछ।” 4 यीशु हनका पुछलकिन, “ मकहला, अहाँ सँ हमरा की लेना-दे ना अकछ?” हमर घडी एखन िरर नकह आकब सकल अकछ। 5 हनकर माय नोकर सभ केँ कहलकिन, “ओ अहाँ सभ केँ जे ककछु कहत, से कर।” 6 ओतऽ यहदी सभक शुदताक अनुसार पािरक छहटा घैल राखल छल, जाकह मे दू -तीन टा फरकीन छल। 7 यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ घैल मे पाकन भरर कदयौक।” ओ सभ ओकरा सभ केँ ककनार िरर भरर दे लक। 8 ओ हनका सभ केँ कहलकिन, “ आब बाहर कनकाकल कऽ भोजक गवन्र केँ लऽ जाउ।” आ ओ सभ ओकरा उघारर दे लक। 9 जखन भोजक शासक मकदरा बनल पाकन चखख कऽ नकह बुझलकन जे ई पाकन कतऽ सँ आयल अकछ। 10 ओ हनका कहलकिन, “शुरआत मे सभ केओ नीक मकदरा पीबैत अकछ। जखन मनुष्‍य नीक जकाँ पीकब लेत तँ ओ सभ अिलाह अकछ। 11 यीशु गलील पदे शक काना मे चमतार सभक पारं भ कयलकन आ अपन मकहमा पकट कयलकन। हनकर कशष् य सभ हनका पर कवश् वास कयलकन। 12 तकर बाद ओ अपन माय, भाय आ कशष् य सभ कफरनहम गेलाह। 13 यहदी सभक फसह-पाबकन लग आकब गेल छल आ यीशु यरशलेम गेलाह। 14 मख्र मे बैल-भेड आ कबूतर बेचकनहार लोक सभ आ पाइ बदलकनहार सभ बैसल भेटल। 15 ओ छोट-छोट डोरी सँ कोडा मारर कऽ सभ केँ मन् कदर सँ भगा दे लकिन। बदलकनहार सभक पाइ उझकल कऽ टे बुल सभ उखाकड दे लक। 16 ओ कबूतर बेचकनहार सभ केँ कहलकिन, “ एकह सभ केँ एतय सँ लऽ जाउ। हमर कपताक घर केँ माल-जालक घर नकह बनाउ।

अध्य 3 1 फररसी सभ मे सँ एक आदमी कनकोदे मुस नामक छल, जे यहदी सभक शासक छल। 2 ओ राकत मे यीशु लग आकब कऽ कहलकिन, “गुर, हम सभ जनैत छी जे अहाँ परमेश् वर कदस सँ आयल गुर छी। 3 यीशु हनका उतर दे लकिन, “ हम अहाँ केँ सते कहै त छी जे जाबत िरर केओ नव जन नकह लेत, ताबत िरर ओ परमेश् वरक राज् य नकह दे खख सकैत अकछ।” 4 कनकोदे मुस हनका पुछलकिन, “मनुख बूढ भऽ कऽ कोना जन भऽ सकैत अकछ?” की ओ दोसर बेर अपन मायक गभ् मे पवेश क' क' जन लेत? 5 यीशु उतर दे लकिन, “ हम अहाँ केँ सत् य कहै त छी जे जाबत िरर केओ पाकन आ आत् मा सँ नकह जनम लेत, ताबत िरर ओ परमेश् वरक राज् य मे पवेश नकह कऽ सकैत अकछ।” 6 जे शरीर सँ जनल अकछ से मां स अकछ। आ जे आत् मा सँ जनमल अकछ से आत् मा अकछ। 7 आशय् नकह कर जे हम अहाँ केँ कहकलयकन जे, ‘अहाँ सभ केँ नव जन लेबय पडत। 8 हवा जतय चाहै त अकछ ओतय बहै त अकछ, आ अहाँ ओकर आवाज सुनैत छी, मुदा ई नकह बुकझ सकैत छी जे ओ कतय सँ अबैत अकछ आ कतय जाइत अकछ। 9 कनकोदे म हनका उतर दे लकिन, “ई सभ कोना भ’ सकैत अकछ?” 10 यीशु हनका उतर दे लकिन, “ की अहाँ इसाएलक माकलक छी आ ई सभ बात नकह जनैत छी?” 11 हम अहाँ केँ सत् य कहै त छी जे हम सभ ई बात बजैत छी जे हम सभ जनैत छी आ गवाही दै त छी जे हम सभ दे खलहँ । आ अहाँ सभ हमरा सभक गवाही नकह गहर करै त छी। 12 जँ हम अहाँ सभ केँ पाकि्व बात कहने छी आ अहाँ सभ कवश् वास नकह करब तँ अहाँ सभ कोना कवश् वास करब, जँ हम अहाँ सभ केँ स् वग्य बात कहब?

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13 स् वग् मे जे मनुखक पुत छकि, स् वग् मे बैसल लोकक छोकड कऽ केओ स् वग् मे नकह चढल अकछ। 14 जकहना मूसा मरभूकम मे साँ प केँ ऊपर उठौलकन, तकहना मनुष् य-पुत केँ ऊपर उठाओल जेबाक चाही। 15 जे केओ हनका पर कवश् वास करै त अकछ, से नष नकह भऽ जाय, बल् कक अनन् त जीवन पाओत। 16 परमेश् वर संसार सँ एतेक पेम कयलकन जे ओ अपन एकलौता पुत केँ दऽ दे लकिन जाकह सँ जे ककयो हनका पर कवश् वास करै त अकछ, तकरा नाश नकह भऽ जाय, बल् कक अनन् त जीवन भेटय। 17 परमेश् वर अपन पुत केँ संसार मे दोषी ठहराबय लेल नकह पठौलकन। मुदा एकह लेल जे हनका दारा संसारक उदार हो। 18 जे हनका पर कवश् वास करै त अकछ, तकरा दोषी नकह ठहराओल जाइत अकछ, मुदा जे कवश् वास नकह करै त अकछ, से पकहने सँ दोषी ठहराओल गेल अकछ, ककएक तँ ओ परमेश् वरक एकलौता पुतक नाम पर कवश् वास नकह केने अकछ। 19 ई दोष ई अकछ जे संसार मे इजोत आकब गेल अकछ आ मनुष् य इजोत सँ बेसी अनार केँ पेम करै त छल, ककएक तँ ओकर काज अिलाह छल। 20 ककएक तँ जे केओ अिलाह काज करै त अकछ, से इजोत सँ घृरा करै त अकछ आ ने इजोत मे अबैत अकछ, जाकह सँ ओकर काज केँ डाँ ट नकह भेटय। 21 मुदा जे सत् य करै त अकछ से इजोत मे अबैत अकछ जाकह सँ ओकर काज परमेश् वर मे कयल गेल अकछ। 22 एकह बातक बाद यीशु आ हनकर कशष् य सभ यहकदया दे श मे अयलाह। ओतकह हनका सभक संग रकह कऽ बपकतस् मा लेलकन। 23 यूहन् ना सेहो सलीमक समीप एनोन मे बपकतस् मा दऽ रहल छलाह, ककएक तँ ओतऽ बहत पाकन छलकन। 24 यूहन् ना एखन िरर जेल मे नकह राखल गेल छलाह। 25 तखन यूहन् नाक ककछु कशष् य आ यहदी सभक बीच शुखदकररक कवषय मे प् उठल। 26 ओ सभ यूहन् ना लग आकब कऽ कहलकिन, “गुर, जे अहाँ क संग यरदन नदीक ओकह पार छल, जकरा अहाँ गवाही दे लहँ , ओ बपकतस् मा दऽ रहल अकछ आ सभ लोक हनका लग अबैत अकछ।” 27 यूहन् ना उतर दे लकिन, “मनुष् य केँ स् वग् सँ ककछु नकह भेकट सकैत अकछ।” 28 अहाँ सभ हमरा गवाही दै त छी जे हम कहलहँ जे, ‘हम मसीह नकह छी, बल् कक हनका सँ पकहने पठाओल गेल छी। 29 जे ककनयाँ रखैत छकि से वर छकि, मुदा वरक कमत जे ठाढ भऽ हनका सुनैत छकि, से वरक आवाज पर बहत आनख्त होइत छकि। 30 ओकरा बढय पडतैक, मुदा हमरा घटय पडतैक। 31 जे ऊपर सँ अबैत अकछ से सभ सँ ऊपर अकछ, पृि् वी सँ जे अकछ से पृि् वी सँ ऊपर अकछ। 32 ओ जे दे खलकन आ सुनलकन से गवाही दै त छकि। ओकर गवाही केओ नकह गहर करै त अकछ। 33 जे हनकर गवाही गहर केने अकछ, से अपन मोहर लगा दे ने अकछ जे परमेश् वर सत् य छकि। 34 परमेश् वर जकरा पठौलकन अकछ से परमेश् वरक वचन बजैत अकछ। 35 कपता पुत सँ पेम करै त छकि आ सभ ककछु अपना हाि मे दऽ दे ने छकि।

36 जे पुत पर कवश् वास करै त अकछ ओकरा अनन जीवन भेटैत छै क। मुदा परमेश् वरक कोि हनका पर कटकल रहै त छकन। अध्य 4 1 जखन पभु केँ ई जाकन गेलकन जे फररसी सभ कोना सुनलकन जे यीशु यूहन् ना सँ बेसी कशष् य बनौलकन आ बपकतस् मा दे लकन। 2 (यकद यीशु सयं बपकतस् मा दे लकन, बल् कक हनकर कशष् य सभ बपकतस् मा दे लकन।” 3 ओ यहकदया छोकड फेर गलील कवदा भेलाह। 4 ओकरा सामररया मे जाय पडतैक। 5 तखन ओ सामररयाक एकटा नगर मे पहँ चलाह, जे कसकर नामक अकछ, जे जमीनक समीप अकछ जे याकूब अपन पुत यूसुफ केँ दे ने छलाह। 6 याकूबक इनार ओतकह छल। यीशु अपन याता सँ िाकक गेलाह, एकह तरहे ँ इनार पर बैसल रहलाह। 7 ओतऽ एकटा सामररयाक स् ती पाकन लऽ कऽ अयलीह। 8 (ककएक तँ हनकर कशष् य सभ भोजन कीनबाक लेल नगर चकल गेल छलाह।” 9 तखन सामररयाक स् ती हनका पुछलकिन, “अहाँ यहदी भऽ कऽ हमरा सामररयाक स् ती सँ पीबय कोना माँ कग रहल छी?” कारर, यहदी सभक सामरी सभक संग कोनो ववहार नकह अकछ। 10 यीशु हनका उतर दे लकिन, “ जँ अहाँ परमेश् वरक वरदान केँ जनैत रकहतहँ आ जे अहाँ केँ कहै त छकि जे, हमरा पीबय कदअ।” अहाँ हनका सँ माँ गने रकहतहँ आ ओ अहाँ केँ जीकवत पाकन दऽ दै तकिन। 11 ओ स् ती हनका पुछलकिन, “महाराज, अहाँ लग कोनो चीज नकह अकछ, आ इनार गहीरं अकछ। 12 की अहाँ हमरा सभक कपता याकूब सँ पैघ छी, जे हमरा सभ केँ इनार दऽ दे लकन, आ ओकह मे सँ सयं, अपन बचा सभ आ अपन माल-जाल पीकब लेलकन? 13 यीशु उतर दे लकिन, “ जे केओ एकह पाकन सँ पीबैत अकछ, से फेर सँ पास लागत। 14 मुदा जे पाकन हम दे ब से पीबैत अकछ, से ककहयो पास नकह लागत। मुदा हम जे पाकन ओकरा दे बकन से हनका मे जलक इनार बनत जे अनन जीवन मे उगैत अकछ। 15 ओ स् ती हनका कहलकिन, “महाराज, हमरा ई पाकन कदअ, जाकह सँ हमरा पास नकह लागय आ ने एतय पाकन पीबय लेल आकब जाय।” 16 यीशु ओकरा कहलकिन, “ जाउ, अपन पकत केँ बजा कऽ एतय आकब जाउ।” 17 ओ स् ती उतर दे लकिन, “हमरा लग कोनो पकत नकह अकछ।” यीशु ओकरा कहलकिन, “ अहाँ नीक जकाँ कहलहँ जे , “हमर कोनो पकत नकह अकछ।” 18 अहाँ क पाँ चटा पकत भेल अकछ। आब जे अहाँ लग अकछ से अहाँ क पकत नकह अकछ। 19 ओ स् ती हनका कहलकिन, “महाराज, हम बुकझ रहल छी जे अहाँ एकटा पवक् ता छी।” 20 हमरा सभक पूव्ज एकह पहाड पर आरािना करै त छलाह। अहाँ सभ कहै त छी जे यरशलेम मे ओ जगह अकछ जतय लोक केँ आरािना करबाक चाही।”

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21 यीशु ओकरा कहलकिन, “ मारी, हमरा पर कवशास कर, ओ समय आकब रहल अकछ जखन अहाँ सभ ने एकह पहाड पर आ ने यरशलेम मे कपताक आरािना करब।” 22 अहाँ सभ की आरािना करै त छी से नकह जनैत छी, हम सभ जनैत छी जे हम सभ की आरािना करै त छी, ककएक तँ उदार यहदी सभ सँ भेटैत अकछ। 23 मुदा ओ समय आकब रहल अकछ आ आब आकब गेल अकछ, जखन सत् य उपासक सभ आत् मा आ सत् य सँ कपताक आरािना करताह। 24 परमेश् वर एकटा आत् मा छकि। 25 ओ स् ती हनका कहलकिन, “हम जनैत छी जे मसीह आकब रहल छकि, जकरा मसीह कहल जाइत अकछ। 26 यीशु हनका कहलकिन, “ हम जे अहाँ सँ बात करै त छी।” 27 एकह बात पर हनकर कशष् य सभ आकब कऽ आशय्चककत भऽ गेलाह जे ओ स् ती सँ गप कऽ रहल छकि। वा, अहाँ ओकरा संग ककएक गप करै त छी? 28 ओ स् ती अपन घैल छोकड नगर मे जा कऽ पुरष सभ केँ कहलकिन। 29 एकटा एहन आदमी केँ दे खय लेल जाउ, जे हमरा जे ककछु करै त छलहँ , से हमरा कहने छल। 30 तखन ओ सभ नगर सँ बाहर कनककल हनका लग आकब गेलाह। 31 एकह बीच हनकर कशष् य सभ हनका सँ पाि्ना करै त कहलकिन, “गुर, भोजन कर।” 32 मुदा यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ हमरा लग एहन भोजन अकछ जे अहाँ सभ केँ नकह बुझल अकछ।” 33 ते ँ कशष् य सभ एक-दोसर सँ कहलकिन, “की केओ ओकरा भोजन करबाक लेल अनने अकछ?” 34 यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ हमर भोजन अकछ जे हमरा पठौकनहारक इचा पूरा करब आ हनकर काज पूरा करब।” 35 अहाँ सभ ई नकह कहब जे आब चारर मास बाँ की अकछ, तखन फसल काकट आकब जायत?” दे खू, हम अहाँ सभ केँ कहै त छी जे , आँ खख उठा कऽ खेत कदस दे खू। कारर, फसल काटय लेल पकहने सँ उजर भ' गेल अकछ। 36 जे फसल काकट लैत अकछ, तकरा मजदू री भेटैत अकछ आ अनन जीवनक लेल फल जुटाबैत अकछ, जाकह सँ बोकनहार आ काटकनहार दु नू गोटे एक संग आनख्त होकि। 37 एकह मे ई कहब सत अकछ जे , “एक गोटे बोनैत अकछ आ दोसर फसल काकट लैत अकछ।” 38 हम अहाँ सभ केँ ओकह काज केँ काकट लेबाक लेल पठौने रही जाकह पर अहाँ सभ कोनो मेहनकत नकह केलहँ । 39 ओकह नगरक बहतो सामरी लोककन हनका पर कवश् वास कयलकन जे ओकह स् तीक गवाही दे लकन जे , “हम जे ककछु केलहँ से सभ हमरा कहलकन।” 40 जखन सामरी सभ हनका लग आकब गेलाह तँ हनका सभ सँ कवनती कयलकन जे ओ हनका सभक संग रहकि। 41 हनकर अपन वचनक काररे ँ आरो बहतो लोक कवश् वास कयलकन। 42 ओ स् ती केँ कहलकिन, “आब हम सभ कवश् वास करै त छी, अहाँ क एकह बातक काररे ँ नकह, ककएक तँ हम सभ सयं हनकर बात सुनने छी आ जनैत छी जे ई सते संसारक उदारकता् मसीह छकि।” 43 दू कदनक बाद ओ ओतय सँ कवदा भऽ गलील गेलाह।

44 यीशु सयं गवाही दै त छलाह जे , पवक् ता केँ अपन दे श मे कोनो आदर नकह होइत छै क। 45 जखन ओ गलील पहँ चलाह तँ गलीलवासी सभ हनका यरशलेम मे पाबकन मे जे ककछु कयलकन से दे खख हनका सागत कयलकन। 46 यीशु फेर गलील पदे शक काना पहँ चलाह, जतय ओ पाकन केँ मकदरा बनाओल गेलाह। कफरनहम मे एकटा कुलीन लोक छल, जकर बेटा कफरनहम मे बीमार छल। 47 जखन ओ ई सुकन जे यीशु यहकदया सँ गलील आकब गेल छकि, तखन ओ हनका लग जा कऽ हनका सँ कवनती कयलकन जे ओ उतरर कऽ अपन बेटा केँ ठीक कऽ कदयौक। 48 यीशु हनका कहलकिन, “ जाबत िरर अहाँ सभ कचन् त आ चमतार नकह दे खब, ताबत िरर अहाँ सभ कवश् वास नकह करब।” 49 ओ कुलीन ओकरा कहलकिन, “महाराज, हमर बचा मरबा सँ पकहने उतरर जाउ।” 50 यीशु हनका कहलकिन, “जाउ। तोहर बेटा जीबैत अकछ। ओ आदमी यीशु दारा कहल गेल बात पर कवश् वास कऽ कऽ चकल गेल। 51 यीशु उतरै त काल हनकर नोकर सभ हनका सँ भेट कऽ कऽ कहलकिन, “तोहर बेटा जीकवत अकछ।” 52 तखन ओ हनका सभ सँ पूछलकन जे ओ कोन समय मे सुिार करय लगलाह। ओ सभ हनका कहलकिन, “काख् सातम बजे बोखार हनका छोकड दे लककन।” 53 बाप केँ बुझल छलकन जे ओकह समय मे यीशु हनका कहलकिन, “ तोहर बेटा जीकवत अकछ। ” 54 ई फेर दोसर चमतार अकछ जे यीशु यहकदया सँ गलील मे अयला पर कयलकन। अध्य 5 1 एकर बाद यहदी सभक भोज भेल। यीशु यरशलेम गेलाह। 2 यरशलेम मे बरदक बजारक कात मे एकटा पोखरर अकछ, जकरा कहबू भाषा मे बेिेसा कहल जाइत अकछ, जकर पाँ चटा ओसारा अकछ। 3 एकह सभ मे नपुंसक लोकक बहत रास भीड पडल छल, जे आनर, रकल, मुरझा गेल छल, जे पाकन केँ कहलबाक पतीका मे छल। 4 एकटा स् वग्दूत एक समय मे पोखरर मे उतरर कऽ पाकन केँ झकझोरर दे लक। 5 ओतय एक आदमी छल, जे अडतीस वष्क दु ब्लता मे छल। 6 यीशु जखन हनका पडल दे खख कऽ बुकझ गेलाह जे ओ बहत कदन सँ एहन ख्कत मे छकि, तखन ओ हनका पुछलकिन, “ की अहाँ ठीक भऽ जायब?” 7 ओ नपुंसक हनका उतर दे लकिन, “महाराज, हमरा लग पाकन चकनाचूर भेला पर हमरा पोखरर मे राखयवला केओ नकह अकछ। 8 यीशु हनका कहलकिन, “ उठू, अपन कबछाओन उठा कऽ चलू।” 9 तखने ओ आदमी ठीक भऽ गेल आ ओछाइन उठा कऽ चकल गेल। 10 यहदी सभ ठीक भेल केँ कहलकिन, “कवशाम-कदन अकछ।” 11 ओ हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “जे हमरा ठीक करौलकन, से हमरा कहलकिन, “अपन कबछाओन उठा कऽ चलू।” 12 तखन ओ सभ हनका सँ पुछलकिन, “की आदमी अहाँ केँ कहने छल जे, ‘अपन ओछाओन उठा कऽ चलू?”

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13 जे लोक ठीक भऽ गेल छल से नकह बुझल छल जे ई के अकछ, ककएक तँ यीशु ओकह ठाम मे बहतो लोक छल। 14 तकर बाद यीशु हनका मन् कदर मे पाकब कऽ कहलकिन, “ दे खू, अहाँ ठीक भऽ गेलहँ । 15 ओ आदमी कवदा भेलाह आ यहदी सभ केँ कहलकिन जे यीशु छकि जे हनका ठीक कयलकन। 16 एकह लेल यहदी सभ यीशु केँ सताबैत छलाह आ हनका मारबाक पयास कयलकन, कारर ओ कवशाम-कदन मे ई सभ काज कयलकन। 17 यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ हमर कपता एखन िरर काज करै त छकि आ हमहँ काज करै त छी।” 18 एकह लेल यहदी सभ हनका मारबाक लेल आओर बेसी चाहै त छल, ककएक तँ ओ कवशाम-कदन केँ नकह तोकड दे लकन, बल् कक ईहो कहै त छल जे परमेश् वर हनकर कपता छकि आ अपना केँ परमेश् वरक बराबर बना लेलकन। 19 तखन यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे पुत अपना सँ ककछु नकह कऽ सकैत अकछ, बल् कक कपता केँ जे काज करै त दे खैत अकछ, से कऽ सकैत अकछ। 20 ककएक तँ कपता पुत सँ पेम करै त छकि आ अपना सभ काज हनका दे खाबैत छकि। 21 ककएक तँ जकहना कपता मृत् यु केँ जीबैत छकि आ ओकरा सभ केँ जीकवत करै त छकि। तकहना पुत जकरा चाहै छै ओकरा जीवंत करै छै । 22 ककएक तँ कपता ककरो न् याय नकह करै त छकि, बल् कक सभ न् याय पुतक हाि मे सौंकप दे ने छकि। 23 सभ लोक पुतक आदर करकि जेना कपताक आदर करै त छकि। जे पुतक आदर नकह करै त अकछ, से कपताक आदर नकह करै त अकछ जे ओकरा पठौने छकि। 24 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे जे हमर वचन सुनैत अकछ आ हमरा पठे कनहार पर कवश् वास करै त अकछ, ओकरा अनन जीवन भेटैत छै क, मुदा ओ दोषी नकह ठहराओत। मुदा मृतु सँ जीवन मे आकब गेल अकछ। 25 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे ओ समय आकब रहल अकछ आ आब आकब रहल अकछ, जखन मृत् यु परमेश् वरक पुतक आवाज सुनत। 26 ककएक तँ जकहना कपता केँ अपना मे जीवन छकन। तकहना ओ पुत केँ अपना मे जीवन पाब’ लेल द’ दे लकन। 27 ओ मनुष् यक पुत छकि, ताकह लेल हनका न् याय करबाक अकिकार सेहो दे लकन अकछ। 28 एकह बात पर आशय् नकह होउ, ककएक तँ ओ समय आकब रहल अकछ जाकह मे कबर मे रहकनहार सभ हनकर आवाज सुनत। 29 ओ बाहर आकब जायत। जे सभ नीक काज केने अकछ, से सभ जीवनक पुनरुानक लेल। आ जे सभ अिलाह काज केने अकछ, तकरा सभ केँ दणक पुनरुान कयल जायत। 30 हम अपना सँ ककछु नकह कऽ सकैत छी, जेना सुनैत छी तेना हम नाय करै त छी। कारर, हम अपन इचा नकह, बल् कक हमरा पठे कनहार कपताक इचा चाहै त छी। 31 जँ हम अपना गवाही दै त छी तँ हमर गवाही सत् य नकह अकछ। 32 एकटा आओर अकछ जे हमर गवाही दै त अकछ। हम जनैत छी जे ओ हमरा कवषय मे जे गवाही दै त छकि से सत अकछ।

33 अहाँ सभ यूहन् ना लग पठौलहँ आ ओ सत् यक गवाही दे लकन। 34 मुदा हमरा मनुष् यक गवाही नकह भेटैत अकछ, मुदा ई सभ बात हम अहाँ सभक उदार करबाक लेल कहै त छी। 35 ओ एकटा जरै त आ चमकैत इजोत छलाह। 36 मुदा हमरा यूहन् ना सँ बेसी गवाही अकछ, कारर जे काज कपता हमरा पूरा करबाक लेल दे ने छकि, जे काज हम करै त छी, से हमरा गवाही दै त अकछ जे कपता हमरा पठौने छकि। 37 हमरा पठौकनहार कपता सयं हमरा गवाही दे लकन। अहाँ सभ ने ओकर आवाज ककहयो सुनने छी आ ने ओकर आकार दे खलहँ । 38 अहाँ सभ मे हनकर वचन नकह बनल अकछ। 39 शास मे खोज कर। ककएक तँ अहाँ सभ सोचैत छी जे अहाँ सभ केँ अनन जीवन भेटैत अकछ। 40 अहाँ सभ हमरा लग नकह आबय चाहै त छी जे अहाँ सभ केँ जीवन भेटय। 41 हमरा मनुष् यक आदर नकह भेटैत अकछ। 42 मुदा हम अहाँ सभ केँ जनैत छी जे अहाँ सभ मे परमेश् वरक पेम नकह अकछ। 43 हम अपन कपताक नाम सँ आयल छी, मुदा अहाँ सभ हमरा गहर नकह करै त छी। “ 45 ई नकह सोचू जे हम अहाँ सभ पर कपताक समक आरोप लगा दे ब। 46 जँ अहाँ सभ मूसा पर कवश् वास कररतहँ तँ हमरा पर कवश् वास कररतहँ । 47 मुदा जँ अहाँ सभ हनकर लेखन पर कवशास नकह करब तँ हमर बात पर कोना कवशास करब? अध्य 6 1 एकह बातक बाद यीशु गलील समुदक ओकह पार गेलाह जे कतबेररयाक समुद अकछ। 2 बहतो भीड हनका पाछाँ -पाछू चकल गेल, कारर ओ सभ हनकर चमतार दे खख रहल छल जे ओ बीमार लोक सभ पर कयलकन। 3 यीशु एकटा पहाड पर चकढ कऽ ओतऽ अपन कशष् य सभक संग बैसलाह। 4 फसह-पाबकन यहदी सभक पाबकन लग आकब गेल छल। 5 यीशु जखन आँ खख उठा कऽ एकटा पैघ दल केँ हनका लग आकब रहल दे खख कफकलपुस केँ पुछलकिन, “ हम सभ रोटी कतऽ सँ कीनब जाकह सँ ई सभ खा सकब?” 6 ओ ई बात हनका परखबाक लेल कहलकन, ककएक तँ ओ अपना केँ बुझल छल जे ओ की करत। 7 कफकलपुस हनका उतर दे लकिन, “दू सय पाइक रोटी हनका सभक लेल पया् ा नकह अकछ, जाकह सँ एक-एक गोटे ककन-मकन रोटी ल’ सककि।” 8 हनकर एकटा कशष कसमोन पतुसक भाय आख्यास हनका कहलकिन। 9 एतय एकटा लडका अकछ, जकरा लग पाँ चटा जौक रोटी आ दू टा छोट-छोट माछ अकछ। 10 यीशु कहलकिन, “ लोक सभ केँ बैसा कदयौक।” आब ओकह ठाम बहत घास भ गेल छल। ते ँ आदमी सभ बैकस गेलाह, संखा मे करीब पाँ च हजार।

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11 यीशु रोटी लऽ लेलकन। िनवाद दऽ कऽ कशष् य सभ केँ आ कशष् य सभ केँ बैसल लोक सभ केँ बाँ कट दे लकिन। आ तकहना माछ सभक सेहो जतेक चाहत। 12 जखन ओ सभ पेट भरर गेल तखन ओ अपन कशष् य सभ केँ कहलकिन, “ जे ककछु बचल अकछ से सभ केँ जमा कर जाकह सँ ककछु नकह हे रा जाय।” 13 ते ँ ओ सभ ओकरा सभ केँ एक ठाम जमा कऽ कऽ बारह टोकरी मे जौक पाँ चटा रोटीक टु कडी भरर दे लक जे भोजन केकनहार सभक लेल बँचल छल। 14 ओ सभ यीशुक चमतार दे खख कहलकिन, “सते ई ओ पवक् ता छकि जे संसार मे आकब रहल छकि।” 15 यीशु जखन बुकझ गेलाह जे ओ सभ हनका राजा बनेबाक लेल जबरदसी पककड लेताह, तखन ओ असगरे एकटा पहाड पर चकल गेलाह। 16 साँ झ भेला पर हनकर कशष् य सभ समुद कदस उतरर गेलाह। 17 ओ नाव मे बैकस समुदक ओकह पार कफरनहम कदस गेलाह। आब अनार भऽ गेल छल, आ यीशु हनका सभ लग नकह आयल छलाह। 18 एकटा तेज हवाक काररे ँ समुद उकठ गेल। 19 ओ सभ करीब पाँ च बीस-तीस फरॉनग िरर नाव चला कऽ यीशु केँ समुद पर चलैत आ नाव लग अबैत दे खलकन। 20 मुदा यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ हम छी। डरब नकह। 21 तखन ओ सभ सेचा सँ ओकरा नाव मे बैसा लेलक आ तुरन जहाज ओकह भूकम पर पहँ कच गेल जतय ओ सभ जा रहल छल। 22 दोसर कदन समुदक ओकह पार ठाढ लोक सभ दे खलक जे ओतऽ दोसर नाव नकह अकछ, कसवाय ओकह नावक, जाकह मे हनकर कशष् य सभ पवेश कयलकन, आ यीशु अपन कशष् य सभक संग नाव मे नकह, बल् कक हनकर नाव मे बैसलाह कशष सभ असगरे चकल गेलाह। 23 (मुदा परमेश् वरक ि़न्‍यावादक बाद कतकबररयास सँ आन नाव सभ ओकह ठामक लग मे आकब गेल।” 24 जखन लोक सभ दे खलक जे यीशु ओतऽ नकह छकि आ ने हनकर कशष् य सभ, तँ ओ सभ जहाज पर चकढ कऽ कफरनहम पहँ कच कऽ यीशुक खोज मे आकब गेलाह। 25 ओ सभ ओकरा समुदक ओकह पार पाकब कऽ पुछलकिन, “गुर, अहाँ एतऽ ककहया आयल छी?” 26 यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे अहाँ सभ हमरा तकैत छी, एकह लेल नकह जे अहाँ सभ चमत् कार दे खलहँ , बल् कक अहाँ सभ रोटी खा कऽ तृा भऽ गेलहँ ।” 27 जे भोजन नाश होइत अकछ, ताकह लेल पररशम नकह कर, बल् कक ओकह भोजनक लेल पररशम कर जे अनन जीवनक लेल कटकैत अकछ, जे मनुष् यक पुत अहाँ सभ केँ दे किन। 28 तखन ओ सभ हनका पुछलकिन, “हम सभ की करब जाकह सँ हम सभ परमेश् वरक काज कऽ सकब?” 29 यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ परमेश् वरक काज ई अकछ जे अहाँ सभ ओकह पर कवश् वास कर जकरा ओ पठौने छकि।” 30 ओ सभ हनका पुछलकिन, “तखन अहाँ कोन कचन कऽ रहल छी जाकह सँ हम सभ दे खख कऽ अहाँ पर कवश् वास कऽ सकब?” अहाँ की काज करै त छी?

31 हमरा सभक पूव्ज मरभूकम मे मना खाइत छलाह। जेना िम्शास् त मे कलखल अकछ, “ओ हनका सभ केँ स् वग् सँ रोटी दऽ दे लकन।” 32 तखन यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे, मूसा अहाँ सभ केँ स् वग् सँ रोटी नकह दे लकन। मुदा हमर कपता अहाँ सभ केँ सत् य रोटी स् वग् सँ दै त छकि। 33 परमेश् वरक रोटी ओ छकि जे स् वग् सँ उतरर कऽ संसार केँ जीवन दै त छकि। 34 तखन ओ सभ हनका कहलकिन, “पभु, हमरा सभ केँ ई रोटी सकदखन कदअ।” 35 यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ हम जीवनक रोटी छी। जे हमरा पर कवश् वास करत से ककहयो पास नकह करत। 36 मुदा हम अहाँ सभ केँ कहकलयकन जे अहाँ सभ सेहो हमरा दे खलहँ आ कवशास नकह करै त छी। 37 कपता हमरा जे ककछु दै त छकि से हमरा लग आकब जायत। जे हमरा लग आओत तकरा हम कोनो तरहे ँ बाहर नकह कनकालब।” 38 हम स् वग् सँ उतरर कऽ अपन इचा पूरा करबाक लेल नकह, बल् कक हमरा पठे कनहारक इचा पूरा करबाक लेल उतरलहँ । 39 हमरा पठौकनहार कपताक इच् छा ई अकछ जे ओ हमरा जे ककछु दे ने छकि, ताकह मे सँ हम ककछु नकह गमाबी, बल् कक अंकतम कदन ओकरा फेर सँ कजयाब। 40 हमरा पठे कनहारक इच् छा ई अकछ जे जे ककयो पुत केँ दे खख हनका पर कवश् वास करै त अकछ, ओकरा अनन जीवन भेटय। 41 तखन यहदी सभ हनका पर बडबडाइत रहलाह, कारर ओ कहलकिन, “हम ओ रोटी छी जे स् वग् सँ उतरल अकछ।” 42 ओ सभ पुछलकिन, “की ई यूसुफक पुत यीशु नकह छकि, कजनकर कपता आ माय केँ हम सभ जनैत छी?” तखन ओ कोना कहै त छकि जे , “हम स् वग् सँ उतरलहँ ?” 43 यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ अहाँ सभ आपस मे गुनगुनाहट नकह कर।” 44 हमरा पठौकनहार कपता ताबत िरर ककयो हमरा लग नकह आकब सकैत अकछ। 45 पवक् ता सभ मे कलखल अकछ जे , “ओ सभ परमेश् वरक दारा कसखाओल जायत।” ते ँ जे केओ कपता परमेश् वरक बात सुनने आ सीखने अकछ, से हमरा लग अबैत अकछ। 46 ई नकह जे केओ कपता केँ दे खने अकछ, कसवाय जे परमेश् वरक अकछ, ओ कपता केँ दे खने अकछ। 47 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे, जे हमरा पर कवश् वास करै त अकछ, ओकरा अनन जीवन भेटैत छै क। 48 हम जीवनक रोटी छी। 49 अहाँ सभक पूव्ज जंगल मे मना खाइत छलाह आ मरर गेल छकि। 50 ई ओ रोटी अकछ जे स् वग् सँ उतरै त अकछ, जाकह सँ मनुष् य ओकह मे सँ खा कऽ मरर नकह सकैत अकछ। 51 हम स् वग् सँ उतरल जीकवत रोटी छी। 52 यहदी सभ आपस मे झगडा कऽ कऽ कहलकिन, “ई मनुष् य हमरा सभ केँ अपन मां स कोना दऽ सकैत अकछ?” 53 तखन यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे जाबत अहाँ सभ मनुष् य-पुतक मां स नकह खायब आ हनकर खून नकह पीब, ताबत िरर अहाँ सभ मे जीवन नकह रहत।”

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54 जे हमर मां स खाइत अकछ आ हमर खून पीबैत अकछ, ओकरा अनन जीवन भेटैत छै क। आ हम ओकरा अंकतम कदन मे कजआ दे ब। 55 हमर मां स सते भोजन अकछ आ हमर खून सते पेय अकछ। 56 जे हमर मां स खाइत अकछ आ हमर खून पीबैत अकछ, से हमरा मे रहै त अकछ आ हम ओकरा मे रहै त छी। 57 जकहना जीकवत कपता हमरा पठौलकन अकछ आ हम कपताक दारा जीबैत छी, तकहना जे हमरा खायत से हमरा दारा जीकवत रहत। 58 ई ओ रोटी अकछ जे स् वग् सँ उतरल छल, से नकह जेना अहाँ सभक पूव्ज मना खाइत छलाह आ मरर गेल छलाह। 59 ई सभ बात ओ कफरनहम मे कशका दै त सभाघर मे बजलाह। 60 यीशुक बहतो कशष् य सभ ई बात सुकन कऽ कहलकिन, “ई बात ककठन अकछ। के सुकन सकैत अकछ? 61 यीशु जखन मने-मन बुकझ गेलाह जे हनकर कशष् य सभ एकह बात पर बडबडाइत छकि, तखन ओ हनका सभ केँ कहलकिन, “ की ई बात अहाँ सभ केँ ठे स पहँ चबैत अकछ?” 62 जँ अहाँ सभ मनुष् य-पुत केँ जतऽ पकहने छलाह, ओतय चढै त दे खब तँ की? 63 ई आत् मा अकछ जे जीकवत करै त अकछ। शरीरक कोनो फायदा नकह होइत छै क, हम जे बात अहाँ सभ केँ कहै त छी, से आत् मा अकछ आ जीवन अकछ। 64 मुदा अहाँ सभ मे सँ ककछु एहन अकछ जे कवश् वास नकह करै त अकछ। ककएक तँ यीशु शुरए सँ जनैत छलाह जे ओ सभ के छकि जे कवश् वास नकह करै त छकि आ के हनका िोखा दे बाक चाही। 65 ओ कहलकिन, “ एही लेल हम अहाँ सभ केँ कहलहँ जे, जाबत िरर हमर कपता हनका नकह दे ल जायत, ताबत िरर केओ हमरा लग नकह आकब सकैत अकछ।” 66 ओकह समय सँ हनकर बहतो कशष् य सभ घुरर कऽ चकल गेलाह आ आब हनका संग नकह चललकन। 67 तखन यीशु बारह गोटे केँ कहलकिन, “ की अहाँ सभ सेहो जायब?” 68 कसमोन पतुस हनका उतर दे लकिन, “पभु, हम सभ केकरा लग जायब?” अहाँ लग अनन जीवनक वचन अकछ। 69 हम सभ कवश् वास करै त छी आ कनकशंत छी जे अहाँ ओ मसीह, जीकवत परमेश् वरक पुत छी। 70 यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ की हम अहाँ सभ केँ बारह गोटे केँ नकह चुनने छी आ अहाँ सभ मे सँ एक गोटे शैतान अकछ?” 71 ओ कसमोनक पुत यहदा इसररयोतीक कवषय मे कहलकन, ककएक तँ ओ बारह मे सँ एक छलाह जे हनका िोखा दे बय बला छल।

4 ककएक तँ एहन केओ नकह अकछ जे गुा रपे ँ कोनो काज करै त अकछ आ ओ सयं खुकल कऽ कचनबाक पयास करै त अकछ। जँ अहाँ ई सभ काज करै त छी तँ संसारक सामने अपना केँ दे खाउ। 5 ककएक तँ हनकर भाय सभ हनका पर कवश् वास नकह कयलकन। 6 तखन यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ हमर समय एखन िरर नकह आकब सकल अकछ। 7 संसार अहाँ सभ सँ घृरा नकह कऽ सकैत अकछ। मुदा ओ हमरा सँ घृरा करै त अकछ, कारर हम एकर गवाही दै त छी जे ओकर काज अिलाह अकछ। 8 अहाँ सभ एकह भोज मे जाउ। ककएक तँ हमर समय एखन िरर पूरा नकह भेल अकछ। 9 यीशु हनका सभ केँ ई बात ककह कऽ ओ गलील मे रकह गेलाह। 10 मुदा जखन हनकर भाय सभ चकल गेलाह तखन ओ सेहो भोज मे खुकल कऽ नकह, बल् कक गुा रप सँ भोज मे चकल गेलाह। 11 तखन यहदी सभ भोज मे हनका खोकज कऽ पुछलकिन, “ओ कतय छकि?” 12 लोक सभ मे हनका कवषय मे बहत गुनगुनाहकट भेल, ककएक तँ ककछु लोक कहै त छल जे, “ओ नीक लोक छकि।” मुदा लोक सभ केँ िोखा दै त अकछ। 13 मुदा यहदी सभक डर सँ केओ हनका बारे मे खुकल कऽ नकह बजलक। 14 भोजक बीच मे यीशु मन् कदर मे जा कऽ कशका दै त छलाह। 15 यहदी सभ आशय्चककत भऽ कऽ कहलकिन, “ई आदमी ककहयो कचटी नकह जनैत अकछ?” 16 यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ हमर कशका हमर नकह, बल् कक हमरा पठौकनहारक अकछ।” 17 जँ केओ अपन इच् छा पूरा करऽ चाहै त अकछ तँ ओकरा बुझल हे तैक जे ई कशका परमेश् वरक अकछ आकक हम अपना सँ बजैत छी। 18 जे अपन मकहमा बजैत अकछ से अपन मकहमा तकैत अकछ, मुदा जे ओकरा पठे कनहार मकहमा चाहै त अकछ, से सत् य अकछ आ ओकरा मे कोनो अिम् नकह अकछ। 19 की मूसा अहाँ सभ केँ िम्-कनयम नकह दे लकन, मुदा अहाँ सभ मे सँ ककयो िम्-कनयमक पालन नकह करै त अकछ? अहाँ सभ हमरा मारय बला ककएक जा रहल छी? 20 लोक सभ उतर दे लककन, “अहाँ क दु ष् टात् मा अकछ। 21 यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ हम एकेटा काज केलहँ आ अहाँ सभ आशय्चककत छी।” 22 मूसा अहाँ सभ केँ खतना कयलकन। (ई मूसा सँ नकह, बल् कक कपता-कपताक दारा अकछ।) आ अहाँ सभ कवशाम-कदन मे मनुष् यक खतना करै त छी। 23 कवशाम-कदन मे जँ केओ खतना कराओल जायत तँ मूसाक कनयमक उलंघन नकह हो। की अहाँ सभ हमरा पर तमसाइत छी, ककएक तँ हम कवशाम-कदन मे एक-एक आदमी केँ ठीक कऽ दे लहँ ? 24 दे खबाक अनुसार नाय नकह कर, बल् कक िाकम्क न् याय पर नाय कर। 25 तखन यरशलेम मे सँ ककछु लोक कहलकिन, “की ई ओ नकह अकछ, जकरा ओ सभ मारय चाहै त छकि?” 26 मुदा, दे खू, ओ कनभ्कतापूव्क बजैत छकि, मुदा ओ सभ हनका ककछु नकह कहै त छकि। की शासक सभ सते जनैत छकि जे ई मसीह छकि?

अध्य 7 1 एकह बातक बाद यीशु गलील मे चकल गेलाह, ककएक तँ ओ यहदी िम् मे नकह चलय चाहै त छलाह, ककएक तँ यहदी सभ हनका मारय चाहै त छलाह। 2 यहदी सभक तमूक पाबकन लग आकब गेल छल। 3 हनकर भाय सभ हनका कहलकिन, “एतय सँ जाउ आ यहकदया मे जाउ, जाकह सँ अहाँ क कशष् य सभ सेहो दे खकि जे अहाँ जे काज करै त छी।”

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27 मुदा हम सभ एकह मनुख केँ जनैत छी जे ओ कतय सँ आयल अकछ। 28 तखन यीशु मन् कदर मे कसखाबैत काल कचकचया उठलाह, “ अहाँ सभ हमरा जनैत छी आ हम कतय सँ आयल छी से अहाँ सभ जनैत छी। 29 मुदा हम हनका कचनै त छी, ककएक तँ हम हनका सँ छी आ ओ हमरा पठौने छकि। 30 तखन ओ सभ हनका पकडबाक पयास कयलकन, मुदा केओ हनका पर हाि नकह लगेलक, कारर हनकर समय एखन िरर नकह आकब सकल छलकन। 31 लोक मे सँ बहतो लोक हनका पर कवश् वास कऽ कऽ कहलकिन, “जखन मसीह आकब जेताह तँ की ओ एकह आदमी सँ बेसी चमत् कार करताह?” 32 फररसी सभ सुनलकन जे लोक सभ हनका कवषय मे एहन गडबडी करै त अकछ। फररसी आ मुखखया पुरोकहत सभ हनका पकडबाक लेल अकिकारी सभ पठौलकन। 33 तखन यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ हम अहाँ सभक संग कनेक काल मे रहब, तखन हम हमरा पठे कनहार लग जायब।” 34 अहाँ सभ हमरा ताकब, मुदा हमरा नकह पाकब सकब। 35 तखन यहदी सभ आपस मे पुछलकिन, “ओ कतय जेताह, जाकह सँ हम सभ ओकरा नकह पाकब सकब?” की ओ गैर-यहदी सभक बीच कछकडयाएल लोक सभ लग जा कऽ गैर-यहदी सभ केँ कसखाओत? 36 ई कोन तरहक कहब अकछ जे , “अहाँ सभ हमरा ताकब, मुदा हमरा नकह भेटत।” 37 अंकतम कदन, पव्क ओकह पैघ कदन मे यीशु ठाढ भऽ कऽ कचकचया उठलाह, “ जँ केओ कपयासैत अकछ तँ ओ हमरा लग आकब कऽ पीबय।” 38 जे हमरा पर कवश् वास करत, जेना िम्शास् त मे कहल गेल अकछ, ओकर पेट सँ जीकवत जलक नदी बहत। 39 (मुदा ई बात ओ आत् माक कवषय मे कहलकन जे हनका पर कवश् वास करयवला सभ केँ भेटबाक चाही। 40 बहतो लोक ई बात सुकन कऽ कहलकिन, “सते ई भकवषवया छकि।” 41 दोसर लोक कहलकिन, “ई मसीह छकि।” मुदा ककछु गोटे कहलकिन, “की मसीह गलील सँ बाहर आकब जेताह?” 42 की िम्शास् त मे ई नकह कहल गेल अकछ जे, “मसीह दाऊदक वंशज मे सँ आ बेतलेहेम नगर सँ बाहर आकब रहल छकि, जतय दाऊद छलाह?” 43 ते ँ हनका काररे ँ लोक मे कवभाजन भऽ गेल। 44 ककछु गोटे हनका पककड लेताह। मुदा ककयो हनका पर हाि नकह लगेलक। 45 तखन अफसर सभ मुख् यपुरोकहत आ फररसी सभक लग आकब गेलाह। ओ सभ ओकरा सभ केँ पुछलकिन, “अहाँ सभ ओकरा ककएक नकह अनलहँ ?” 46 अकिकारी सभ उतर दे लकिन, “एकह आदमी जकाँ केओ ककहयो नकह बाजल।” 47 तखन फररसी सभ हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “की अहाँ सभ सेहो िोखा खा गेल छी?” 48 की हनका पर कोनो शासक आ फररसी सभ मे सँ कवश् वास केने छकि? 49 मुदा ई लोक सभ जे िम् -कनयम केँ नकह जनैत अकछ, से शाकपत अकछ।

50 कनकोदे मुस हनका सभ केँ कहलकिन, “जे राकत मे यीशु लग आयल छलाह।” 51 की हमर सभक वव्ा ककरो सुनबा सँ पकहने ओकर नाय करै त अकछ आ ओकरा की करै त अकछ? 52 ओ सभ हनका पुछलकिन, “की अहाँ सेहो गलील के छी?” खोजू आ दे खू, ककएक तँ गलील सँ कोनो पवक् ता नकह उठै त अकछ। 53 एक-एक गोटे अपन-अपन घर चकल गेलाह। अध्य 8 1 यीशु जैतूनक पहाड पर गेलाह। 2 भोरे -भोर ओ फेर मन् कदर मे आकब गेलाह आ सभ लोक हनका लग आकब गेलाह। ओ बैकस कऽ हनका सभ केँ कसखबैत रहलाह। 3 िम्शासी आ फररसी सभ वकभचार मे पकडल गेल स् ती केँ हनका लग अनलकन। जखन ओ सभ ओकरा बीच मे बैसा लेलक। 4 ओ सभ हनका कहलकिन, “गुर, ई स् ती वकभचार मे पकडल गेल छल।” 5 मूसा िम्-कनयम मे हमरा सभ केँ आजा दे लकन जे एहन लोक सभ केँ पािर मारर दे ल जाय, मुदा अहाँ की कहै त छी? 6 ओ सभ हनका परीका मे ई बात कहलकिन जे हनका पर आरोप लगाबय पडय। मुदा यीशु झुकक गेलाह आ अपन आँ गुर सँ जमीन पर कलखख गेलाह जेना ओ हनका सभक बात नकह सुनने होकि। 7 जखन ओ सभ हनका सँ पुछैत रहलाह तँ ओ उकठ कऽ हनका सभ केँ कहलकिन, “ अहाँ सभ मे जे कोनो पाप नकह अकछ, से पकहने ओकरा पर पािर फेकय।” 8 ओ फेर झुकक कऽ जमीन पर कलखलकन। 9 ई बात सुनकनहार सभ अपन कववेक सँ दोषी भऽ कऽ एक-एक कऽ जेठका सँ शुर भऽ कऽ अंकतम लोक िरर बाहर कनककल गेलाह। 10 यीशु उकठ कऽ ओकह स् ती केँ छोकड ककरो नकह दे खलकन तँ पुछलकिन, “ एकह स् ती, ओ सभ अहाँ पर आरोप लगाबऽ वला सभ कतऽ छकि?” की तोहर केओ दोषी नकह ठहरौलक? 11 ओ बजलीह, “पभु, केओ नकह।” यीशु ओकरा कहलकिन, “ हमहँ तोरा दोषी नकह ठहरा रहल छी। 12 यीशु फेर हनका सभ सँ कहलकिन, “ हम संसारक इजोत छी। 13 फररसी सभ हनका कहलकिन, “अहाँ अपन गवाही दै त छी। तोहर ररकाड् सत नकह अकछ। 14 यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ हम भले अपन गवाही दै त छी, मुदा हमर गवाही सत् य अकछ। मुदा हम कतय सँ आयल छी आ कतय जा रहल छी से अहाँ सभ नकह ककह सकैत छी। 15 अहाँ सभ शरीरक अनुसार नाय करै त छी। हम कोनो आदमीक नाय नकह करै त छी। 16 मुदा जँ हम न् याय करै त छी तँ हमर न् याय सत् य अकछ, ककएक तँ हम असगर नकह, बल् कक हम आ ओ कपता छी जे हमरा पठौलकन। 17 अहाँ क िम्-कनयम मे सेहो कलखल अकछ जे दू आदमीक गवाही सत् य अकछ। 18 हम अपना बारे मे गवाही दै त छी आ जे कपता हमरा पठौलकन से हमर गवाही दै त छकि। 19 तखन ओ सभ हनका पुछलकिन, “अहाँ क कपता कतय छकि?” यीशु उतर दे लकिन, “ अहाँ सभ हमरा नकह जनैत छी आ ने हमर

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कपता केँ, जँ अहाँ सभ हमरा कचखनतहँ तँ हमर कपता केँ सेहो कचखनतहँ । 20 यीशु मन् कदर मे कशका दै त काल कोष मे ई बात कहलकन। ककएक तँ हनकर समय एखन िरर नकह आकब सकल छलकन। 21 तखन यीशु हनका सभ केँ फेर कहलकिन, “ हम जा रहल छी, अहाँ सभ हमरा ताकब आ अपन पाप मे मरर जायब। 22 तखन यहदी सभ कहलकिन, “की ओ अपना केँ मारर लेताह?” कारर ओ कहै त छकि, “हम जतय जा रहल छी, अहाँ सभ नकह आकब सकैत छी।” 23 यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ अहाँ सभ नीचाँ क छी। हम ऊपर सँ छी, अहाँ सभ एकह संसारक छी। हम एकह संसारक नकह छी। 24 हम अहाँ सभ केँ कहकलयकन जे अहाँ सभ अपन पाप मे मरर जायब, ककएक तँ जँ अहाँ सभ कवशास नकह करब जे हम ओ छी तँ अहाँ सभ अपन पाप मे मरर जायब। 25 तखन ओ सभ हनका पुछलकिन, “अहाँ के छी?” यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “जे हम अहाँ सभ केँ शुर सँ कहने रही।” 26 हमरा अहाँ सभक कवषय मे बहत ककछु कहबाक आ नाय करबाक अकछ, मुदा जे हमरा पठौलकन से सत् य अकछ। हम संसार सँ ओ बात कहै त छी जे हम हनका बारे मे सुनने छी। 27 ओ सभ ई नकह बुझलकन जे ओ हनका सभ केँ कपताक कवषय मे बाकज रहल छकि। 28 तखन यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ जखन अहाँ सभ मनुष् य-पुत केँ ऊपर उठौब तखन अहाँ सभ बुझब जे हम ओ छी आ हम अपना सँ ककछु नकह करै त छी। मुदा जेना हमर कपता हमरा कसखबैत छकि, हम ई सभ बात कहै त छी। 29 जे हमरा पठौलकन से हमरा संग अकछ। कारर, हम सकदखन वैह काज करै त छी जे हनका नीक लगैत छकन। 30 यीशु ई बात सभ बजैत काल बहतो लोक हनका पर कवश् वास कयलकन। 31 यीशु हनका पर कवश् वास करऽ वला यहदी सभ केँ कहलकिन, “ जँ अहाँ सभ हमर वचन पर चलैत रहब तँ अहाँ सभ सते हमर कशष् य छी। 32 अहाँ सभ सत् य केँ जानब आ सत् य अहाँ सभ केँ सतंत बना दे त। 33 ओ सभ हनका उतर दे लकिन, “हम सभ अबाहमक वंशज छी, आ ककहयो ककरो दास नकह भेलहँ । 34 यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे केओ पाप करै त अकछ, ओ पापक दास अकछ।” 35 सेवक घर मे सदाक लेल नकह रहै त अकछ, मुदा पुत अनन काल िरर रहै त अकछ। 36 जँ पुत अहाँ सभ केँ सतंत बना दे त तँ अहाँ सभ सते सतंत भऽ जायब। 37 हम जनैत छी जे अहाँ सभ अबाहमक वंशज छी। मुदा अहाँ सभ हमरा मारय चाहै त छी, ककएक तँ हमर वचन अहाँ सभ मे कोनो ्ान नकह अकछ। 38 हम अपन कपताक संग जे दे खलहँ से कहै त छी। 39 ओ सभ उतर दे लकिन, “अबाहम हमरा सभक कपता छकि।” यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ अहाँ सभ अबाहमक सन् तान रकहतहँ तँ अबाहमक काज कररतहँ ।” 40 मुदा आब अहाँ सभ हमरा मारय चाहै त छी, जे सत् य अहाँ सभ केँ कहने छी जे हम परमेश् वर सँ सुनने छी।

41 अहाँ सभ अपन कपताक काज करै त छी। तखन ओ सभ हनका कहलकिन, “हम सभ वकभचार सँ नकह जनमल छी। हमरा सभक एकेटा कपता छकि, ओ परमेश् वर छकि। 42 यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ जँ परमेश् वर अहाँ सभक कपता रकहतकि तँ अहाँ सभ हमरा सँ पेम कररतहँ । आ ने हम अपने सँ आयल छी, बल् कक ओ हमरा पठौलकन। 43 अहाँ सभ हमर बात ककएक नकह बुझैत छी? एतेक तक कक अहाँ सभ हमर वचन नकह सुकन सकैत छी। 44 अहाँ सभ अपन कपता शैतान सँ छी आ अपन कपताक वासना केँ पूरा करब। ओ शुरए सँ हतारा छल, आ सत् य मे नकह रहै त छल, ककएक तँ ओकरा मे कोनो सत् य नकह अकछ। जखन ओ झूठ बाजैत अकछ तँ ओ अपन बात कहै त अकछ, ककएक तँ ओ झूठ बाजकनहार अकछ आ ओकर कपता अकछ। 45 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी ते ँ अहाँ सभ हमरा पर कवश् वास नकह करै त छी। 46 अहाँ सभ मे सँ के हमरा पापक कवषय मे बुझबैत अकछ? जँ हम सत् य कहै त छी तँ अहाँ सभ हमरा पर कवश् वास ककएक नकह करै त छी? 47 जे परमेश् वरक अकछ से परमेश् वरक वचन सुनैत अकछ, ते ँ अहाँ सभ परमेश् वरक नकह छी। 48 तखन यहदी सभ हनका उतर दे लकिन, “हम सभ नीक नकह कहै त छी जे अहाँ सामरी छी आ अहाँ मे दु षाटा अकछ?” 49 यीशु उतर दे लकिन, “ हमरा लग कोनो शैतान नकह अकछ। मुदा हम अपन कपताक आदर करै त छी आ अहाँ सभ हमरा अपमान करै त छी। 50 हम अपन मकहमा नकह चाहै त छी। 51 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे जँ केओ हमर बात मानैत अकछ तँ ओ ककहयो मृतु नकह दे खख सकैत अकछ। 52 तखन यहदी सभ हनका कहलकिन, “आब हमरा सभ केँ बुझल अकछ जे अहाँ मे दु ष् टात् मा अकछ।” अबाहम आ भकवषवया सभ मरर गेल छकि। आ अहाँ कहै त छी जे जँ केओ हमर बात मानैत अकछ तँ ओ ककहयो मृतुक साद नकह लेत।” 53 की अहाँ हमरा सभक कपता अबाहम सँ पैघ छी जे मरर गेल छकि? परमेश् वरक पवक् ता सभ मरर गेल अकछ। 54 यीशु उतर दे लकिन, “ जँ हम अपना केँ आदर करै त छी तँ हमर आदर ककछु नकह। हनका बारे मे अहाँ सभ कहै त छी जे ओ अहाँ सभक परमेश् वर छकि। 55 तैयो अहाँ सभ हनका नकह कचनलहँ । मुदा हम ओकरा कचनै त छी, आ जँ हम कहब जे हम ओकरा नकह कचनै त छी तऽ हमहँ अहाँ जकाँ झूठ बाजब। 56 अहाँ क कपता अबाहम हमर कदन दे खख आनख्त भेलाह। 57 तखन यहदी सभ हनका कहलकिन, “अहाँ एखन पचास वष्क नकह भऽ गेलहँ आ की अहाँ अबाहम केँ दे खलहँ?” 58 यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे अबाहम सँ पकहने हम छी।” 59 ओ सभ हनका पर पािर फेकबाक लेल पािर उठौलकन। अध्य 9 1 यीशु ओकह ठाम सँ गुजरै त काल एकटा एहन आदमी केँ दे खलकन जे जन सँ आनर छल। 2 हनकर कशष्‍य सभ हनका सँ पुछलकिन, “गुर, ई आन्‍हर जनम सँ के पाप केलक?

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3 यीशु उतर दे लकिन, “ ने ई आदमी पाप केलक आ ने ओकर माता-कपता, बल् कक परमेश् वरक काज हनका मे पगट होअय।” 4 हमरा जे हमरा पठौलकन, ताबत कदन मे हमरा पठौकनहारक काज करबाक चाही। 5 जा िरर हम संसार मे छी ता िरर संसारक इजोत छी। 6 ई बात ककह कऽ ओ जमीन पर िूकक कऽ िूक सँ माकट बनौलकन आ ओकह आनरक आँ खख पर माकट सँ अकभषेक कयलकन। 7 ओ हनका कहलकिन, “ जाउ, कसलोआमक पोखरर मे िोउ, जकर अि् अकछ जे पठाओल गेल अकछ।” 8 पडोसी सभ आ जे सभ पकहने हनका आनर दे खने छल, ओ सभ पुछलकिन, “की ई ओ नकह अकछ जे बैकस कऽ भीख माँ गैत छल?” 9 ककछु गोटे कहलकिन, “ई ओ छकि, ककछु गोटे कहलकिन, “ओ हनका सन छकि।” 10 ओ सभ हनका पुछलकिन, “अहाँ क आँ खख कोना खुजल? 11 ओ उतर दे लकिन, “यीशु नामक एक आदमी माकट बना कऽ हमरा आँ खख पर अकभषेक कऽ हमरा कहलक जे, “कसलोआमक पोखरर मे जा कऽ िोउ।” 12 तखन ओ सभ हनका पुछलकिन, “ओ कतय छकि?” ओ कहलकन, हमरा नकह बुझल अकछ। 13 ओ सभ पकहने आनर केँ फररसी सभक लग अनलकन। 14 ओ कवशाम-कदन छल जखन यीशु माकट बनौलकन आ आँ खख खोललकन। 15 तखन फेर फररसी सभ हनका सँ पुछलकिन जे अहाँ कोना दे खलहँ । ओ हनका सभ केँ कहलकिन, “ओ हमर आँ खख पर माकट लगा दे लकन, आ हम िोलहँ आ दे खैत छी।” 16 एकह लेल ककछु फररसी सभ कहलकिन, “ई आदमी परमेश् वरक नकह अकछ, ककएक तँ ओ कवशाम-कदन नकह मानैत अकछ।” दोसर लोक सभ कहलककन, “जे पापी अकछ, से एहन चमतार कोना क’ सकैत अकछ? आ हनका लोककनक बीच कवभाजन भ' गेलकन। 17 ओ सभ फेर आनर केँ पुछलकिन, “अहाँ ओकरा बारे मे की कहै त छी जे ओ अहाँ क आँ खख खोकल दे लक?” ओ कहलकन, “ओ एकटा भकवषवया छकि।” 18 मुदा यहदी सभ हनका पर कवशास नकह केलक जे ओ आनर भऽ कऽ दे खख नकह सकलाह, जाबत िरर ओ सभ दे खकनहारक माता-कपता केँ नकह बजौलकन। 19 ओ सभ हनका सभ सँ पुछलकिन, “की ई अहाँ क बेटा अकछ, जकरा अहाँ सभ कहै त छी जे आनर भेल अकछ?” तखन आब कोना दे खैत अकछ? 20 हनकर माता-कपता हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “हम सभ जनैत छी जे ई हमर सभक बेटा अकछ आ ओ आनर भऽ गेल अकछ। 21 मुदा आब ओ कोन तरहे ँ दे खैत छकि, से हम सभ नकह जनैत छी। जे आँ खख खोलने अकछ से हम सभ नकह जनैत छी। ओकरा सँ पूछू, ओ अपना लेल बाजत। 22 ई बात हनकर माता-कपता यहदी सभ सँ डरबाक काररे ँ कहलकन, ककएक तँ यहदी सभ पकहने सँ सहमत भऽ गेल छल जे जँ केओ अपना केँ मसीह छी तँ ओकरा सभाघर सँ बाहर कऽ दे ल जाय। 23 ते ँ हनकर माता-कपता कहलकिन, “ओ उम बकढ गेल छकि। ओकरासँ पूछू।

24 ओ सभ फेर ओकह आनर केँ बजा कऽ कहलकिन, “परमेश् वरक सुकत कर। 25 ओ उतर दे लकिन, “ओ पापी छकि वा नकह, हमरा नकह बुझल अकछ। 26 तखन ओ सभ फेर हनका सँ पुछलकिन, “ओ अहाँ केँ की कयलकन?” ओ अहाँ क आँ खख कोना खोललक? 27 ओ हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “हम अहाँ सभ केँ पकहने सँ ककह दे ने छी, मुदा अहाँ सभ नकह सुनलहँ । की अहाँ सभ सेहो हनकर कशष्‍य बनब? 28 तखन ओ सभ हनका गारर कऽ कहलकिन, “अहाँ हनकर कशष् य छी। मुदा हम सभ मूसाक कशष् य छी। 29 हम सभ जनैत छी जे परमेश् वर मूसा सँ बात कयलकन। 30 ओ आदमी हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “एकह मे आशय्क बात ककएक अकछ जे अहाँ सभ केँ ई नकह बुझल अकछ जे ओ कतऽ सँ आयल अकछ, मुदा ओ हमर आँ खख खोकल दे लक।” 31 आब हम सभ जनैत छी जे परमेश् वर पापी सभक बात नकह सुनैत छकि। 32 जकहया सँ संसार शुर भेल अकछ तकहया सँ ई सुनबा मे नकह आयल जे आनर जन सँ केओ आँ खख खोलैत अकछ। 33 जँ ई आदमी परमेश् वरक नकह रकहतकि तँ ओ ककछु नकह कऽ सकैत छलाह। 34 ओ सभ उतर दे लकिन, “अहाँ एकदम पाप मे जन लेने छी आ की अहाँ हमरा सभ केँ कसखाबैत छी?” ओ सभ ओकरा बाहर कनकाकल दे लक। 35 यीशु सुनलकन जे ओ सभ हनका बाहर कनकाकल दे लककन। ओ ओकरा पाकब कऽ कहलकिन, “ की अहाँ परमेश् वरक पुत पर कवश् वास करै त छी?” 36 ओ उतर दे लकिन, “हे पभु, ओ के छकि, जाकह सँ हम हनका पर कवश् वास करी?” 37 यीशु हनका कहलकिन, “ अहाँ दु नू गोटे हनका दे खलहँ आ ओ अहाँ सँ गप करै त छकि।” 38 ओ कहलकिन, “पभु, हम कवश् वास करै त छी।” आ ओ हनकर आरािना केलकन। 39 यीशु कहलकिन, “ हम नायक लेल एकह संसार मे आयल छी जाकह सँ जे सभ नकह दे खैत अकछ से दे खय। आ दे खकनहार सभ आनर भऽ जाय।” 40 हनका संग रहकनहार ककछु फररसी सभ ई बात सुकन हनका पुछलकिन, “की हमहँ सभ आनर छी?” 41 यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ अहाँ सभ जँ आनर रकहतहँ तँ अहाँ सभक पाप नकह रहै त। ते ँ अहाँ सभक पाप बनल अकछ।” अध्य 10 1 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे, जे दरबजा सँ भेड ँ ाक घर मे पवेश नकह करै त अकछ, बल् कक कोनो आन बाट पर चढै त अकछ, से चोर आ डकैत अकछ। 2 मुदा जे दरबजा पर पवेश करै त अकछ से भेड ँ ाक चरबाह अकछ। 3 दरबजा ओकरा लेल खोलैत अकछ। बरद सभ ओकर आवाज सुनैत अकछ, आ ओ अपन भेड ँ ा सभ केँ नाम सँ बजबैत अकछ आ ओकरा सभ केँ बाहर कनकाकल दै त अकछ।

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4 जखन ओ अपन भेड ँ ा सभ केँ बाहर कनकालैत अकछ तँ ओकरा सभक आगू बढै त अकछ आ भेड ँ ा सभ ओकर पाछाँ -पाछाँ चलैत अकछ। 5 ओ सभ परदे शी लोकक पाछाँ नकह चलत, बल् कक ओकरा सँ भाकग जायत, ककएक तँ ओ सभ परदे शी लोकक आवाज नकह जनैत अकछ। 6 यीशु हनका सभ केँ ई दषान बजौलकन। 7 तखन यीशु हनका सभ केँ फेर कहलकिन, “ हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे , हम भेड ँ ा सभक दरबजा छी।” 8 हमरा सँ पकहने जे सभ आयल छल, से सभ चोर आ डकैत अकछ, मुदा बरद सभ ओकर बात नकह सुनलक। 9 हम दरबजा छी, जँ केओ भीतर पवेश करत तँ हमरा दारा उदार भेटत। 10 चोर नकह, बल् कक चोरी करबाक लेल अबैत अकछ, मारर मारबाक लेल आ नष करबाक लेल अबैत अकछ। 11 हम नीक चरबाह छी, नीक चरबाह भेड ँ ाक बदला मे अपन पार दै त अकछ। 12 मुदा जे भाडाक काज करै त अकछ, चरबाह नकह, जकर भेड ँ ा अपन नकह अकछ, से भेकडया केँ अबैत दे खख भेड ँ ा केँ छोकड कऽ भाकग जाइत अकछ। 13 भाडाक लोक भाकग जाइत अकछ, ककएक तँ ओ भाडाक लोक अकछ आ भेड ँ ाक कोनो परवाह नकह करै त अकछ। 14 हम नीक चरबाह छी, आ अपन भेड ँ ा केँ जनैत छी आ हमर भेड ँ ा केँ सेहो कचनै त छी। 15 जकहना कपता हमरा जनैत छकि, तकहना हम कपता केँ सेहो जनैत छी। 16 हमरा लग आन भेड ँ ा सभ अकछ जे एकह झुंडक नकह अकछ। एकटा झुंड आ एकटा चरबाह रहत। 17 ते ँ हमर कपता हमरा सँ पेम करै त छकि, कारर हम अपन पार दऽ दै त छी जाकह सँ हम ओकरा फेर सँ लऽ सकब। 18 हमरा सँ केओ नकह छीन लैत अकछ, बल् कक हम अपना सँ एकरा दऽ दै त छी। हमरा ओकरा कबछाबय के सामर् अकछ, आ फेर लेबय के सामर् अकछ। ई आजा हमरा अपन कपता सँ भेटल अकछ। 19 एकह बात सभक काररे ँ यहदी सभक बीच फेर सँ कवभाजन भऽ गेल। 20 ओ सभ मे सँ बहतो लोक कहलकिन, “ओकरा मे दु ष् टात् मा अकछ आ ओ बताह अकछ। अहाँ सभ हनकर बात ककएक सुनैत छी? 21 दोसर लोक सभ कहलकिन, “ई सभ दु ष् टात् माक बात नकह अकछ।” की शैतान आनरक आँ खख खोकल सकैत अकछ? 22 यरशलेम मे समप्रक पव् छल आ जाडक मास छल। 23 यीशु सुलेमानक ओसारा मे मन् कदर मे घुमैत छलाह। 24 तखन यहदी सभ हनका चार कात आकब कऽ कहलकिन, “अहाँ हमरा सभ केँ कतेक कदन िरर शंका करबैत छी?” जँ अहाँ मसीह छी तँ हमरा सभ केँ साफ-साफ कह। 25 यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ हम अहाँ सभ केँ कहकलयकन, मुदा अहाँ सभ कवश् वास नकह कयलहँ । 26 मुदा अहाँ सभ कवश् वास नकह करै त छी, ककएक तँ अहाँ सभ हमर भेड ँ ा मे सँ नकह छी, जेना हम अहाँ सभ केँ कहने रही। 27 हमर भेड ँ ा सभ हमर आवाज सुनैत अकछ आ हम ओकरा सभ केँ कचनै त छी आ ओ सभ हमरा पाछाँ -पाछाँ चलैत अकछ।

28 हम ओकरा सभ केँ अनन जीवन दै त छी। ओ सभ ककहयो नाश नकह होयत आ ने केओ ओकरा सभ केँ हमरा हाि सँ उखाकड लेत।” 29 हमर कपता जे हनका सभ केँ हमरा दे लकन, ओ सभ सँ पैघ छकि। हमर कपताक हाि सँ केओ ओकरा सभ केँ उखाकड नकह सकैत अकछ। 30 हम आ हमर कपता एक छी। 31 तखन यहदी सभ हनका पािर मारबाक लेल फेर सँ पािर उठौलकन। 32 यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ हम अहाँ सभ केँ अपन कपता सँ बहत नीक काज दे खौलहँ । ओकह मे सँ कोन काजक लेल अहाँ सभ हमरा पािर मारर रहल छी? 33 यहदी सभ हनका उतर दे लकिन, “हम सभ अहाँ केँ नीक काजक काररे ँ अहाँ केँ पािर नकह मारलहँ । मुदा कन्ा करबाक लेल। आ एकह लेल जे अहाँ मनुख भ' क' अपना केँ परमेश् वर बना लैत छी। 34 यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ की अहाँ सभक कनयम मे ई नकह कलखल अकछ जे हम कहलहँ , ‘अहाँ सभ दे वता छी? 35 जँ ओ ओकरा सभ केँ दे वता कहै त छल, कजनका लग परमेश् वरक वचन आयल छल, आ िम्शास् त केँ तोकड नकह दे ल जा सकैत अकछ। 36 अहाँ सभ ओकह परमेश् वर केँ कह जे कपता पकवत कयलकन आ संसार मे पठौलकन, “अहाँ कन्ा करै त छी। कारर हम कहलहँ , “हम परमेश् वरक पुत छी?” 37 जँ हम अपन कपताक काज नकह करै त छी तँ हमरा पर कवशास नकह कर। 38 मुदा जँ हम करब तँ अहाँ सभ हमरा पर कवश् वास नकह करै त छी तँ काज सभ पर कवश् वास कर। 39 ते ँ ओ सभ फेर हनका पकडबाक पयास कयलकन, मुदा ओ हनका सभक हाि सँ बकच गेलाह। 40 ओ फेर यरदन नदीक ओकह पार चकल गेलाह, जतय यूहन् ना पकहने बपकतस् मा दे ने छलाह। ओतकह रकह गेलाह। 41 बहतो लोक हनका लग आकब कऽ कहलकिन, “यूहना कोनो चमतार नकह केलकन। 42 ओतऽ बहतो लोक हनका पर कवश् वास कयलकन। अध्य 11 1 मररयम आ ओकर बकहन मािा् क नगरक बेतकनयाक लाजर नामक एक आदमी बीमार छल। 2 (ओ मररयम छलीह जे पभु केँ मरहम सँ अकभषेक कयलकन आ अपन केश सँ हनकर पएर पोछलीह, कजनकर भाय लाजर बीमार छलाह।” 3 ते ँ हनकर बकहन सभ हनका लग पठौलकन जे , “पभु, दे खू, अहाँ जकरा सँ पेम करै त छी, से बीमार अकछ।” 4 यीशु ई बात सुकन कहलकिन, “ ई बीमारी मृतुक लेल नकह, बल् कक परमेश् वरक मकहमाक लेल अकछ, जाकह सँ परमेश् वरक पुतक मकहमा होयत।” 5 यीशु मािा् , ओकर बकहन आ लाजर सँ पेम करै त छलाह। 6 ओ सुकन कऽ जे ओ बीमार छकि, तखन ओ दू कदन िरर ओकह ठाम रकह गेलाह जतय ओ छलाह। 7 तकर बाद ओ अपन कशष् य सभ केँ कहलकिन, “ आउ, फेर यहकदया जाउ।”

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8 हनकर कशष् य सभ हनका कहलकिन, “गुर, यहदी सभ अहाँ केँ पािर मारय चाहै त छल। आ फेर ओतऽ जायब? 9 यीशु उतर दे लकिन, “की कदन मे बारह घंटा नकह होइत छै क?” जँ केओ कदन मे चलैत अकछ तँ ओ ठोकर नकह खाइत अकछ, ककएक तँ ओ एकह संसारक इजोत दे खैत अकछ। 10 मुदा जँ केओ राकत मे चलैत अकछ तँ ओ ठोकर खाइत अकछ, ककएक तँ ओकरा मे इजोत नकह अकछ। 11 ओ ई सभ बात कहलकिन, तकर बाद ओ हनका सभ केँ कहलकिन, “ हमर सभक कमत लाजर सुकत रहल छकि। मुदा हम जाइ छी, जाकह सँ हम ओकरा नीद ं सँ जगबैत छी। 12 तखन हनकर कशष् य सभ कहलकिन, “पभु, जँ ओ सुकत रहल छकि तँ ओ नीक भऽ जेताह।” 13 मुदा यीशु अपन मृतुक बात कहलकन, मुदा ओ सभ सोचलकन जे ओ नीद ं मे कवशाम करबाक बात कऽ रहल छकि। 14 तखन यीशु हनका सभ केँ साफ-साफ कहलकिन, “ लाजर मरर गेल छकि।” 15 हम अहाँ सभक लेल पसन छी जे हम ओतऽ नकह छलहँ , जाकह सँ अहाँ सभ कवश् वास करी। तैयो हम सभ हनका लग जाइ। 16 तखन िोमस जे कदकदमस कहल जाइत अकछ, अपन कशष् य सभ केँ कहलकिन, “हमरा सभ सेहो जाउ, जाकह सँ हम सभ हनका संग मरर सकब।” 17 यीशु जखन अयलाह तँ दे खलकन जे ओ चारर कदन पकहने सँ कब मे पडल छकि। 18 बेिानी यरशलेम सँ करीब प्ह फरलोंग दू र छल। 19 बहतो यहदी सभ मािा् आ मररयम लग अपन भाय केँ सान्ना दे बऽ लगलाह। 20 मािा् यीशुक अयबाक बात सुकन कऽ हनका सँ भेट कयलकन। 21 मािा् यीशु केँ कहलकिन, “पभु , जँ अहाँ एत’ रकहतहँ तँ हमर भाय नकह मरर गेल रकहतकि।” 22 मुदा हम जनैत छी जे एखनह अहाँ परमेश् वर सँ जे ककछु माँ गब, परमेश् वर अहाँ केँ दऽ दे ताह।” 23 यीशु ओकरा कहलकिन, “ तोहर भाय जीकब उठत।” 24 मािा् हनका कहलकिन, “हम जनैत छी जे ओ अंकतम कदन मे पुनरुान मे जीकब उठताह।” 25 यीशु ओकरा कहलकिन, “ हम पुनरुान आ जीवन छी। 26 जे केओ जीकवत रहत आ हमरा पर कवश् वास करत से ककहयो नकह मरत। की अहाँ एकह बात पर कवशास करै त छी? 27 ओ हनका कहलकिन, “हँ , पभु , हमरा कवशास अकछ जे अहाँ परमेश् वरक पुत मसीह छी जे संसार मे आकब जेताह।” 28 ई बात ककह कऽ ओ जा कऽ अपन बकहन मररयम केँ गुा रप सँ बजा कऽ कहलकिन, “गुर आकब गेलाह आ अहाँ केँ बजा रहल छकि।” 29 ई बात सुकन कऽ ओ जली-जली उकठ कऽ हनका लग आकब गेलीह। 30 यीशु एखन िरर ओकह नगर मे नकह आयल छलाह, बल् कक ओकह ठाम छलाह जतय मािा् हनका सँ भेट केलकन। 31 ओ सभ जे यहदी सभ हनका संग घर मे छल आ हनका सान्ना दै त छल, मररयम केँ हडबडा कऽ उकठ कऽ बाहर कनकलल दे खख हनका पाछाँ -पाछाँ आकब कऽ कहलक जे , “ओ ओतऽ कानय लेल कचता पर जाइत छकि।”

32 मररयम जखन यीशु लग पहँ कच कऽ हनका दे खख हनका पयर पर खकस पडलीह आ कहलकिन, “पभु , जँ अहाँ एतऽ रकहतहँ तँ हमर भाय नकह मरर गेल रकहतहँ ।” 33 यीशु हनका कानैत आ हनका संग आयल यहदी सभ केँ सेहो कानैत दे खख कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ घबरा गेलाह। 34 ओ पुछलकिन, “ अहाँ सभ ओकरा कतय राखख दे लहँ ?” ओ सभ हनका कहलकिन, “पभु, आऊ आ दे खू।” 35 यीशु कानय लगलाह। 36 तखन यहदी सभ कहलकिन, “दे खू, ओ हनका सँ कतेक पेम करै त छलाह! 37 ओ सभ मे सँ ककछु गोटे कहलकिन, “की ई आदमी जे आनर सभक आँ खख खोलने छल, से ई नकह कऽ सकैत छल जे ई आदमी सेहो नकह मरर सकैत छल?” 38 यीशु फेर अपना मे कुहरै त कचता लग आकब गेलाह। ओ गुफा छल, आ ओकह पर एकटा पािर पडल छल। 39 यीशु कहलकिन, “ अहाँ सभ पािर छीकन कलअ।” मरला के बकहन मािा् ओकरा कहलकिन, “पभु, एखन िरर ओकरा दु ग्ग आकब रहल छै क, ककएक तँ ओ चारर कदन सँ मरर गेल अकछ।” 40 यीशु हनका कहलकिन, “ की हम अहाँ सँ ई नकह कहलहँ जे जँ अहाँ कवश् वास करब तँ परमेश् वरक मकहमा दे खब?” 41 तखन ओ सभ ओकह ठाम सँ पािर उतारर लेलक जतय मृतक सभ राखल गेल छल। यीशु आँ खख उठा कऽ कहलकिन, “ कपता, हम अहाँ केँ िनवाद दै त छी जे अहाँ हमर बात सुनलहँ ।” 42 हम जनैत छलहँ जे अहाँ हमरा सकदखन सुनैत छी, मुदा बगल मे ठाढ लोक सभक काररे ँ हम ई बात कहलहँ जाकह सँ ओ सभ कवशास करकि जे अहाँ हमरा पठौने छी। 43 ई बात ककह कऽ ओ जोर-जोर सँ कचकचया उठलकन, “ लाजर, बाहर आकब जाउ।” 44 मृत् युक हाि-पैर कबरक वस सँ बाखन कऽ बाहर कनकलल। यीशु ओकरा सभ केँ कहलकिन, “ ओकरा छोकड कदयौक आ ओकरा छोकड कदयौक।” 45 तखन बहतो यहदी सभ मररयम लग आकब कऽ यीशुक काज दे खख कऽ हनका पर कवश् वास कयलकन। 46 मुदा हनका सभ मे सँ ककछु गोटे फररसी सभक लग जा कऽ यीशुक काज सभ केँ कहलकिन। 47 तखन मुख्‍यपुरोकहत आ फररसी सभ एकटा पररषद् जमा कऽ कऽ कहलकिन, “हम सभ की करी?” ककएक तँ ई आदमी बहत रास चमतार करै त अकछ। 48 जँ हम सभ हनका एकह तरहे ँ छोकड दे बकन तँ सभ लोक हनका पर कवश् वास करत। 49 ओकह साल महापुरोकहत कैफा नामक एक गोटे हनका सभ केँ कहलकिन, “अहाँ सभ ककछु नकह जनैत छी। 50 आ ने ई बुझू जे हमरा सभक लेल ई उकचत अकछ जे एक आदमी लोकक लेल मरर जाय आ पूरा जाकत नष नकह भऽ जाय। 51 ई बात ओ अपना सँ नकह बाजल, बल् कक ओकह वष् महापुरोकहतक रप मे ओ भकवषवारी कयलकन जे यीशु ओकह जाकतक लेल मरताह। 52 ओ मात ओकह जाकतक लेल नकह, बल् कक ओ परमेश् वरक सन् तान सभ केँ एक ठाम जमा करबाक लेल जे सभ कततरकबतर छल। 53 ओकह कदन सँ ओ सभ हनका मारर दे बाक लेल कवचार-कवमश् कयलकन।

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54 यीशु आब यहदी सभक बीच खुकल कऽ नकह चललाह। मुदा ओतकह सँ कनज्न केतक समीप एपैम नामक नगर मे गेलाह आ ओतकह हनकर कशष् य सभक संग रकह गेलाह। 55 यहदी सभक फसह-पाबकन लग आकब गेल छल आ बहतो लोक फसह-पाबकन सँ पकहने दे श सँ बाहर यरशलेम चकल गेलाह। 56 तखन ओ सभ यीशु केँ खोकज कऽ मन् कदर मे ठाढ भऽ कऽ आपस मे बजैत रहलाह, “अहाँ सभ केँ की लगैत अकछ जे ओ भोज मे नकह आओत?” 57 मुख्‍यपुरोकहत आ फररसी दु नू गोटे एकटा आजा दऽ दे ने छलाह जे जँ केओ जनैत अकछ जे ओ कतय छकि तँ ओ ओकरा पककड लेत।

बात हनका कवषय मे कलखल गेल अकछ आ ओ सभ हनका संग ई सभ काज कयलकन। 17 जखन ओ लाजर केँ अपन कब सँ बजौलकन आ मृत् यु मे सँ जीकब उठौलकन तखन हनका संग रहकनहार लोक सभ गवाही दे लक। 18 एकह काररे ँ लोक सभ हनका सँ भेट कयलकन, ककएक तँ ओ सभ सुनलकन जे ओ ई चमतार कयलकन। 19 फररसी सभ आपस मे कहलकिन, “अहाँ सभ बुझैत छी जे अहाँ सभ कोना ककछु पर कवजय नकह पाकब रहल छी?” दे खू, संसार हनका पाछाँ चकल गेल अकछ। 20 ओकह मे सँ ककछु यूनानी लोक सभ छल जे भोज मे आरािना करबाक लेल आकब गेल छल। 21 ओ गलील पदे शक बेतसैदाक कफकलपुस लग आकब कऽ हनका सँ आगह कयलकन जे, “महाराज, हम सभ यीशु केँ दे खय चाहै त छी।” 22 कफकलपुस आकब कऽ आख्यास केँ कहलकिन, और फेर अन् दे या आ कफकलपुस यीशु केँ कहलकिन। 23 यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ ओ समय आकब गेल अकछ जे मनुष् यक पुतक मकहमा होयत।” 24 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे , जाबत िरर कोनो गहमक िान माकट मे खकस कऽ नकह मरर जायत, तखन ओ असगरे रहै त अकछ। 25 जे अपन पार सँ पेम करै त अकछ, से ओकरा गमा लेत। जे एकह संसार मे अपन जीवन सँ घृरा करै त अकछ, से ओकरा अनन जीवनक लेल राखत। 26 जँ केओ हमर सेवा करै त अकछ तँ ओ हमरा पाछाँ पडय। आ जतऽ हम छी, ओतकह हमर सेवक सेहो रहत। 27 आब हमर पार तस अकछ। आ हम की कहब? कपता, हमरा एकह समय सँ बचाउ, मुदा हम एकह समय मे आकब गेलहँ । 28 कपता, अपन नामक मकहमा कर। तखन सग् सँ एकटा आवाज आयल जे , “हम एकर मकहमा क’ दे लहँ आ फेर एकर मकहमा करब।” 29 ओतय ठाढ लोक सभ ई बात सुकन कऽ बाजल जे गरजैत अकछ। 30 यीशु उतर दे लकिन, “ ई आवाज हमरा काररे नकह, बल् कक अहाँ सभक लेल आयल अकछ।” 31 आब एकह संसारक न् याय अकछ, आब एकह संसारक राजकुमार केँ बाहर कनकाकल दे ल जायत। 32 जँ हम पृि् वी पर सँ उठाओल जायब तँ सभ लोक केँ अपना लग खीच ं ब। 33 ई बात ओ ई बात ककह कऽ कहलकिन जे ओ कोन मृत् युक मरब। 34 लोक सभ हनका उतर दे लकिन, “हम सभ िम् -कनयम सँ सुनने छी जे मसीह अनन काल िरर रहताह। ई मनुष् यक पुत के अकछ? 35 तखन यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ अखन ककछु ए काल मे इजोत अहाँ सभक संग रहत।” जाबत अहाँ सभ लग इजोत अकछ ताबत चलू, जाकह सँ अहाँ सभ पर अनार नकह आकब जाय, ककएक तँ जे अनार मे चलैत अकछ से नकह जनैत अकछ जे ओ कतय जा रहल अकछ। 36 जाबत अहाँ सभ लग इजोत अकछ, ताबत िरर इजोत पर कवश् वास कर जाकह सँ अहाँ सभ इजोतक सन् तान बकन सकब। यीशु ई बात ककह कऽ चकल गेलाह आ हनका सभ सँ नुका गेलाह।

अध्य 12 1 फसह-पाबकन सँ छह कदन पकहने यीशु बेतकनया पहँ चलाह, जतय लाजर छलाह जे मृत् यु मे सँ कजया दे लकन। 2 ओतकह ओ सभ हनका भोजनक भोजन बनौलकन। मािा् सेवा करै त छलीह, मुदा लाजर हनका संग टे बुल पर बैसल लोक मे सँ एक छलाह। 3 मररयम बहत महग एक पाउं ड मलम मलम लऽ कऽ यीशुक पएर पर अकभषेक कयलकन आ हनकर केश सँ हनकर पएर पोकछ लेलकन। 4 तखन हनकर एकटा कशष् य, कसमोनक पुत यहदा इसररयोती कहलकिन। 5 ई मरहम तीन सय पेस मे बेकच कऽ गरीब सभ केँ ककएक नकह दे ल गेल? 6 ई बात ओ ई नकह कहलकन जे ओ गरीबक कचना करै त छलाह। मुदा एकह लेल जे ओ चोर छल, ओकरा लग झोरा छल आ ओकह मे राखल गेल चीज लऽ कऽ चलैत छल। 7 तखन यीशु कहलकिन, “ ओ ओकरा छोकड कदयौक। 8 ककएक तँ अहाँ सभक संग गरीब सभ सकदखन रहै त अकछ। मुदा हमरा अहाँ सभ सकदखन नकह छी। 9 यहदी सभ मे सँ बहतो लोक सभ जनैत छल जे ओ ओतय छकि, मुदा ओ सभ मात यीशुक लेल नकह, बल् कक लाजर केँ सेहो दे खबाक लेल आयल छल, जकरा ओ मृत् यु मे सँ कजया दे ने छलाह। 10 मुदा मुख्‍यपुरोकहत सभ कवचार-कवमश् कयलकन जे लाजर केँ सेहो मारर दे ल जाय। 11 ककएक तँ हनका काररे ँ बहतो यहदी सभ यीशु पर कवश् वास कऽ कऽ चकल गेलाह। 12 दोसर कदन भोज मे आयल बहतो लोक सभ सुनलक जे यीशु यरशलेम आकब रहल छकि। 13 ताडक गाछक डारर पककड हनका सँ भेट करबाक लेल कनककल गेलाह आ कचकचया उठलकन, “होसाना, “िन छकि इसाएलक राजा जे पभुक नाम सँ आकब रहल छकि।” 14 यीशु एकटा गदहाक बचा पाकब ओकह पर बैसलाह। जेना कलखल अकछ, 15 हे कसयोनक बेटी, नकह डे राउ, दे खू, तोहर राजा गदहाक बछडा पर बैसल आकब रहल छकि। 16 ई बात सभ पकहने हनकर कशष् य सभ केँ नकह बुझल छलकन, बल् कक यीशुक मकहमा भेला पर ओ सभ मोन पाडलकन जे ई सभ

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37 मुदा ओ सभ हनका सभ सँ पकहने एतेक चमतार कयलकन, मुदा ओ सभ हनका पर कवश् वास नकह कयलकन। 38 जाकह सँ यशायाह पवक् ताक ई बात पूरा भऽ जाय जे ओ कहलकन, “पभु , हमरा सभक बात पर के कवशास केलक?” आ पभुक बाँ कह केकरा पर पगट भेल अकछ? 39 ते ँ ओ सभ कवश् वास नकह कऽ सकलाह, ककएक तँ यशायाह फेर ई बात कहलकन। 40 ओ हनका सभक आँ खख आनर कऽ दे लकन आ हदय केँ कठोर कऽ दे लकन। जे ओ सभ आँ खख सँ नकह दे खकि आ ने हदय सँ बुझकि आ िम् पररवत्न नकह करकि आ हम हनका सभ केँ ठीक करी। 41 यशायाह अपन मकहमा दे खख कऽ हनका बारे मे बजला पर ई बात कहलकन। 42 मुदा पमुख शासक सभक बीच सेहो बहतो लोक हनका पर कवश् वास कयलकन। मुदा फररसी सभक काररे ँ ओ सभ हनका सभ केँ नकह छोकड दे लकिन। 43 ओ सभ परमेश् वरक सुकत सँ बेसी मनुष् यक सुकत सँ बेसी पेम करै त छलाह। 44 यीशु कचकचया कऽ कहलकिन, “ जे हमरा पर कवश् वास करै त अकछ, से हमरा पर नकह, बल् कक हमरा पठे कनहार पर कवश् वास करै त अकछ।” 45 जे हमरा दे खैत अकछ, से हमरा पठे कनहार केँ दे खैत अकछ। 46 हम संसार मे इजोत आकब गेल छी, जाकह सँ केओ हमरा पर कवश् वास करै त अकछ, अन् हार मे नकह रहय। 47 जँ केओ हमर बात सुनैत अकछ आ कवशास नकह करै त अकछ तँ हम ओकर नाय नकह करै त छी, ककएक तँ हम संसारक नाय करबाक लेल नकह, बल् कक संसारक उदार करबाक लेल आयल छी। 48 जे हमरा असीकार करै त अकछ आ हमर वचन नकह गहर करै त अकछ, ओकर नाय करयवला अकछ। 49 हम अपना बारे मे नकह बजलहँ । मुदा जे कपता हमरा पठौलकन, ओ हमरा एकटा आजा दे लकन जे हम की कहब आ की बाजब। 50 हम जनैत छी जे हनकर आजा अनन जीवन अकछ।

7 यीशु हनका उतर दे लकिन, “ हम की कऽ रहल छी से अहाँ एखन नकह जनैत छी। मुदा अहाँ केँ बादमे पता चलत। 8 पतुस हनका कहलकिन, “अहाँ हमर पएर ककहयो नकह िोउ।” यीशु हनका उतर दे लकिन, “ जँ हम अहाँ केँ नकह िोबी तँ अहाँ क हमरा संग कोनो भाग नकह अकछ।” 9 कसमोन पतुस हनका कहलकिन, “पभु, हमर पएर मात नकह, बल् कक हमर हाि आ माि सेहो।” 10 यीशु हनका कहलकिन, “ जेकरा िोओल गेल अकछ, ओकरा पएर िोबय के अलावा ओकर पएर िोबाक आवशकता नकह छै क, बल् कक एक-एकटा शुद अकछ। 11 ककएक तँ ओ जनैत छल जे ओकरा िोखा दे बय पडतैक। ते ँ ओ कहलकन, “अहाँ सभ शुद नकह छी।” 12 ओ हनका सभक पएर िो कऽ अपन वस लऽ कऽ फेर बैसलाह, “की अहाँ सभ जनैत छी जे हम अहाँ सभक संग की केलहँ ?” 13 अहाँ सभ हमरा गुर आ पभु कहै त छी। कारर हमहँ एहने छी। 14 तखन जँ हम अहाँ क पभु आ गुर अहाँ क पएर िोने छी। अहाँ सभ केँ सेहो एक-दोसरक पएर िोबाक चाही। 15 हम अहाँ सभ केँ एकटा उदाहरर दे लहँ जे अहाँ सभ जेना हम अहाँ सभक संग केलहँ , तेना कर। 16 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे सेवक अपन माकलक सँ पैघ नकह होइत अकछ। आ ने पठाओल गेल ओकरा पठे कनहार सँ पैघ नकह। 17 जँ अहाँ सभ ई सभ बात जनैत छी तँ जँ अहाँ सभ ई सभ बात करब तँ अहाँ सभ िन छी। 18 हम अहाँ सभक कवषय मे नकह बजैत छी, हम केकरा चुनने छी से हम जनैत छी, मुदा एकह लेल जे िम्शास् त पूरा होअय जे, “जे हमरा संग रोटी खाइत अकछ, से हमरा पर अपन एडी उठौने अकछ।” 19 आब हम अहाँ सभ केँ ई अयबा सँ पकहने कहै त छी जे जखन ई बात पूरा होयत तखन अहाँ सभ कवशास करी जे हम वैह छी। 20 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे जे हम जकरा पठबैत छी तकरा गहर करै त अकछ, से हमरा गहर करै त अकछ। जे हमरा गहर करै त अकछ, से हमरा पठे कनहार केँ गहर करै त अकछ।” 21 यीशु ई बात कऽ कऽ घबरा गेलाह आ गवाही दे लकिन, “ हम अहाँ सभ केँ सते कहै त छी जे अहाँ सभ मे सँ ककयो हमरा िोखा दे त।” 22 तखन कशष् ‍य सभ एक-दोसर कदस तकैत रहलाह आ शंका करै त छलाह जे ओ केकरा पर गप करै त छकि। 23 यीशुक एकटा कशष् य, जकरा यीशु पेम करै त छलाह, यीशुक छाती पर झुकल छलाह। 24 कसमोन पतुस हनका इशारा कऽ कऽ पुछलकिन जे ओ केकरा बारे मे बजैत छकि। 25 यीशुक छाती पर पडल ओ हनका पुछलकिन, “पभु, ई के अकछ?” 26 यीशु उतर दे लकिन, “ ओ वैह छकि, जकरा हम एक सोप डु बा कऽ दऽ दे ब।” ओ सोना डु बा कऽ कसमोनक पुत यहदा इसररयोती केँ दऽ दे लकिन। 27 पीलाक बाद शैतान हनका मे पवेश कयलकन। तखन यीशु हनका कहलकिन, “जे अहाँ करै त छी, से जली कर।”

अध्य 13 1 फसह-पव्क पाबकन सँ पकहने जखन यीशु बुकझ गेलाह जे हनकर समय आकब गेल अकछ जे ओ एकह संसार सँ बाहर कनककल कऽ कपता लग जेताह। 2 भोजन समा​ा भेला पर शैतान कसमोनक पुत यहदा इसररयोतीक हदय मे राखख दे लककन जे हनका िोखा दऽ दे किन। 3 यीशु जनैत छलाह जे कपता सभ ककछु हनका हाि मे दऽ दे ने छकि आ परमेश् वरक कदस सँ आयल छकि आ परमेश् वर लग गेलाह। 4 ओ भोजन कऽ कऽ उकठ कऽ अपन वस एक कात राखख दे लक। एकटा तौकलया लऽ कऽ कमरबंद कऽ लेलक। 5 तकर बाद ओ एकटा बेसन मे पाकन ढारर दे लकन आ कशष् य सभक पएर िोबय लगलाह आ जाकह तौकलया सँ ओ कमरबंद छलाह, ताकह सँ पोछय लगलाह। 6 तखन ओ कसमोन पतुस लग आकब गेलाह, तखन पतुस हनका पुछलकिन, “पभु, की अहाँ हमर पएर िोबैत छी?”

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28 टे बुल पर बैसल केओ नकह जनैत छल जे ओ हनका कोन उदे श सँ ई बात कहलकन। 29 यहदाक झोरा रहबाक काररे ँ हनका सभ मे सँ ककछु गोटे सोचैत छलाह जे यीशु हनका कहलकिन, “भोज मे जे ककछु हमरा सभ केँ चाही से कीकन कलअ।” वा, जे गरीबकेँ ककछु दे बाक चाही। 30 ओ सोप लऽ कऽ तुरन बाहर कनककल गेलाह। 31 एकह लेल यीशु बाहर कनकलला पर कहलकिन, “ आब मनुष् यक पुतक मकहमा भऽ गेलकन आ हनका दारा परमेश् वरक मकहमा भेलकन।” 32 जँ हनका दारा परमेश् वरक मकहमा होयतकन तँ परमेश् वर हनका अपना मे मकहमा सेहो करताह आ तुरन हनकर मकहमा करताह। 33 छोट-छोट बचा सभ, तइयो ककछु काल िरर हम अहाँ सभक संग छी। अहाँ सभ हमरा ताकब। ते ँ आब हम अहाँ सभ केँ कहै त छी। 34 हम अहाँ सभ केँ एकटा नव आजा दै त छी जे अहाँ सभ एकदोसर सँ पेम कर। जेना हम अहाँ सभ सँ पेम केलहँ , तकहना अहाँ सभ सेहो एक-दोसर सँ पेम कर। 35 जँ अहाँ सभ एक-दोसर सँ पेम करब तँ सभ लोक एकह बात सँ जनत जे अहाँ सभ हमर कशष् य छी। 36 कसमोन पतुस हनका पुछलकिन, “पभु, अहाँ कतय जा रहल छी?” यीशु हनका उतर दे लकिन, “ हम जतय जा रहल छी, अहाँ एखन हमरा पाछाँ नकह जा सकैत छी। मुदा अहाँ बाद मे हमरा पाछाँ चलब।” 37 पतुस हनका कहलकिन, “पभु, हम आब अहाँ क पाछाँ ककएक नकह पाकब सकैत छी?” हम अहाँ क लेल अपन पार दे ब। 38 यीशु हनका उतर दे लकिन, “ की अहाँ हमरा लेल अपन पार दे ब?” हम अहाँ केँ सते कहै त छी जे जाबत अहाँ हमरा तीन बेर असीकार नकह करब ता िरर मुगा् नकह बाजत।

10 की अहाँ ई नकह मानैत छी जे हम कपता मे छी आ कपता हमरा मे छी? हम जे बात अहाँ सभ केँ कहै त छी से हम अपना सँ नकह कहै त छी, बल् कक हमरा मे रहकनहार कपता ओ काज करै त छकि। 11 हमरा कवशास कर जे हम कपता मे छी आ कपता हमरा मे छी। 12 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे जे हमरा पर कवश् वास करत, से हम जे काज करै त छी से सेहो करत। आ एकह सभ सँ पैघ काज ओ करत। कारर हम अपन कपता लग जाइत छी। 13 अहाँ सभ हमरा नाम सँ जे ककछु माँ गब, से हम करब जाकह सँ कपताक मकहमा पुत मे हो। 14 जँ अहाँ सभ हमरा नाम सँ कोनो बात माँ गब तँ हम पूरा करब। 15 जँ अहाँ सभ हमरा सँ पेम करै त छी तँ हमर आजा सभक पालन कर। 16 हम कपता सँ पाि्ना करब जे ओ अहाँ सभ केँ एकटा आओर सान्ना दे किन जाकह सँ ओ अहाँ सभक संग अनन काल िरर रहकि। 17 सतक आत् मा सेहो। संसार ओकरा नकह गहर कऽ सकैत अकछ, ककएक तँ ओकरा नकह दे खै छै आ ने ओकरा कचनै छै । ककएक तँ ओ अहाँ सभक संग रहै त अकछ आ अहाँ सभ मे रहत।” 18 हम अहाँ सभ केँ अस् नकह छोडब, हम अहाँ सभ लग आकब जायब। 19 ककछु ए काल मे संसार हमरा आब नकह दे खख रहल अकछ। मुदा अहाँ सभ हमरा दे खैत छी। 20 ओकह कदन अहाँ सभ बुझब जे हम अपन कपता मे छी, अहाँ सभ हमरा मे छी आ हम अहाँ सभ मे छी। 21 जे हमर आजा रखैत अकछ आ ओकर पालन करै त अकछ, से हमरा सँ पेम करै त अकछ, आ जे हमरा सँ पेम करै त अकछ, से हमर कपता पेम करत, आ हम ओकरा सँ पेम करब आ ओकरा सामने पकट करब। 22 इसररयोती नकह, यहदा हनका पुछलकिन, “पभु , अहाँ हमरा सभक सामने कोना पगट होयब, संसारक सामने नकह?” 23 यीशु उतर दे लकिन, “ जँ केओ हमरा सँ पेम करै त अकछ तँ ओ हमर वचनक पालन करत। 24 जे हमरा सँ पेम नकह करै त अकछ से हमर बात नकह मानैत अकछ, आ जे वचन अहाँ सभ सुनैत छी से हमर नकह, बल् कक हमरा पठे कनहार कपताक अकछ। 25 ई सभ बात हम अहाँ सभक संग रकह कऽ अहाँ सभ केँ कहलहँ । 26 मुदा ओ सान्ना दे कनहार पकवत आत् मा छकि, कजनका कपता हमर नाम सँ पठौताह, ओ अहाँ सभ केँ सभ ककछु कसखाओत आ सभ ककछु अहाँ सभ केँ मोन पाडत, जे हम अहाँ सभ केँ कहलहँ । 27 हम अहाँ सभक संग शाखन छोडै त छी, अपन शाखन अहाँ सभ केँ दै त छी। अहाँ क मोन नकह घबराउ आ ने डरय। 28 अहाँ सभ सुनने छी जे हम अहाँ सभ केँ कोना कहलहँ जे हम जा रहल छी आ फेर अहाँ सभ लग आकब रहल छी। जँ अहाँ सभ हमरा सँ पेम कररतहँ तँ अहाँ सभ आनख्त रकहतहँ , कारर हम कहलहँ जे , “हम कपता लग जाइत छी, ककएक तँ हमर कपता हमरा सँ पैघ छकि।” 29 आब हम अहाँ सभ केँ ई बात होबऽ सँ पकहने ककह दे ने छी जे जखन ई बात पूरा होयत तखन अहाँ सभ कवश् वास करी। 30 आब हम अहाँ सभ सँ बेसी गप नकह करब, ककएक तँ एकह संसारक राजकुमार आकब रहल छकि आ हमरा मे ककछु नकह छकन।

अध्य 14 1 अहाँ सभ परमेश् वर पर कवश् वास कर आ हमरा पर सेहो कवश् वास कर। 2 हमर कपताक घर मे बहत रास भवन अकछ, जँ एहन नकह रहै त तऽ हम अहाँ सभ केँ ककहतहँ । हम अहाँ क लेल जगह तैयार करय लेल जाइत छी। 3 जँ हम जा कऽ अहाँ सभक लेल जगह तैयार करब तँ फेर आकब कऽ अहाँ सभ केँ अपना लग गहर करब। जाकह सँ हम जतय छी, अहाँ सभ सेहो ओतकह रहब।” 4 हम कतय जा रहल छी से अहाँ सभ जनैत छी आ रसा सेहो अहाँ सभ जनैत छी। 5 िोमा हनका कहलकिन, “पभु , हम सभ नकह जनैत छी जे अहाँ कतय जा रहल छी। आ बाट कोना जाकन सकब? 6 यीशु हनका कहलकिन, “ हम बाट, सत् य आ जीवन छी। 7 जँ अहाँ सभ हमरा कचखनतहँ तँ हमर कपता केँ सेहो कचखनतहँ । 8 कफकलपुस हनका कहलकिन, “पभु, हमरा सभ केँ कपता केँ दे खा कदअ, तखन हमरा सभ केँ काफी अकछ।” 9 यीशु हनका पुछलकिन, “ की हम एतेक कदन अहाँ सभक संग छी, मुदा अहाँ हमरा नकह कचनलहँ , कफकलपुस?” जे हमरा दे खने अकछ, ओ कपता केँ दे खने अकछ। तखन अहाँ कोना कहै त छी जे , “हमरा सभ केँ कपता दे खाउ?”

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31 मुदा संसार ई जाकन जे हम कपता सँ पेम करै त छी। आ जकहना कपता हमरा आजा दे लकन, तकहना हमहँ करै त छी। उठू, एतय सँ चकल जाउ।

अकछ तँ अहाँ सभ केँ सेहो सताओत। जँ ओ सभ हमर बात पूरा कएने छकि तँ अहाँ क बात सेहो पालन करताह। 21 मुदा ई सभ काज ओ सभ हमरा नामक लेल अहाँ सभक संग करत, ककएक तँ ओ सभ हमरा पठौकनहार केँ नकह कचनै त अकछ। 22 जँ हम हनका सभ सँ नकह आकब कऽ गप नकह कररतहँ तँ हनका सभ लग पाप नकह होइतकन। 23 जे हमरा सँ घृरा करै त अकछ, से हमर कपता सँ सेहो घृरा करै त अकछ। 24 जँ हम हनका सभक बीच एहन काज नकह केने रकहतहँ जे आन केओ नकह केने रकहतकि तँ हनका सभक पाप नकह होइतकन। 25 मुदा ई बात एकह लेल होइत अकछ जे हनका सभक िम्-कनयम मे कलखल वचन पूरा भऽ जाय जे, “ओ सभ हमरा सँ बेवजह घृरा केलक।” 26 मुदा जखन ओ सान्ना दे कनहार, जकरा हम कपताक कदस सँ अहाँ सभ लग पठौबकन, से सतक आत् मा, जे कपता सँ कनकलैत अकछ, तखन ओ हमरा बारे मे गवाही दे त। 27 अहाँ सभ सेहो गवाही दे ब, ककएक तँ अहाँ सभ शुरए सँ हमरा संग छी।

अध्य 15 1 हम सत् य बेल छी, आ हमर कपता ककसान छकि। 2 हमरा मे जे डारर फल नकह दै त अकछ, तकरा ओ हटा दै त अकछ, आ जे डारर फल दै त अकछ, ओकरा शुद करै त अकछ, जाकह सँ ओ बेसी फल दै त अकछ। 3 आब हम जे वचन अहाँ सभ केँ कहकलयकन, ताकह सँ अहाँ सभ शुद भऽ गेलहँ । 4 हमरा मे रह, आ हम अहाँ मे। जेना डारर अपन फल नकह दऽ सकैत अकछ, जाबत ओ बेल मे नकह रहै त अकछ। जँ अहाँ सभ हमरा मे नकह रहब ताबत अहाँ सभ आब नकह कऽ सकैत छी।” 5 हम बेल छी, अहाँ सभ डारर छी। 6 जँ केओ हमरा मे नकह रहै त अकछ तँ ओ डारर जकाँ फेकल जाइत अकछ आ मुरझा जाइत अकछ। लोक सभ ओकरा सभ केँ जमा कऽ आकग मे फेकक दै त अकछ आ ओ सभ जरर जाइत अकछ। 7 जँ अहाँ सभ हमरा मे रहब आ हमर वचन अहाँ सभ मे रहत तँ अहाँ सभ जे चाहब से माँ गब आ से अहाँ सभक लेल पूरा होयत। 8 हमर कपताक मकहमा एकह तरहे ँ होइत अकछ जे अहाँ सभ बहत फल दै त छी। तकहना अहाँ सभ हमर कशष् य बनब।” 9 जकहना कपता हमरा सँ पेम कयलकन, तकहना हम अहाँ सभ सँ पेम केलहँ । 10 जँ अहाँ सभ हमर आजा सभक पालन करब तँ हमर पेम मे रहब। जेना हम अपन कपताक आजाक पालन करै त छी आ हनकर पेम मे रहै त छी। 11 ई सभ बात हम अहाँ सभ केँ एकह लेल कहलहँ जे हमर आन् अहाँ सभ मे रहय आ अहाँ सभक आन् पूर् हो। 12 हमर ई आजा अकछ जे अहाँ सभ एक-दोसर सँ पेम कर जेना हम अहाँ सभ सँ पेम केलहँ । 13 एकह सँ पैघ पेम ककरो नकह छै क जे मनुष्‍य अपन कमतक लेल अपन पार दऽ दै त अकछ। 14 अहाँ सभ हमर कमत छी, जँ हम अहाँ सभ केँ जे आजा दै त छी से करब। 15 आब हम अहाँ सभ केँ दास नकह कहै त छी। ककएक तँ नोकर अपन माकलक की करै त अकछ से नकह जनैत अकछ, मुदा हम अहाँ सभ केँ कमत कहने छी। कारर, जे ककछु हम अपन कपताक कवषय मे सुनने छी, से हम अहाँ सभ केँ बुझा दे लहँ । 16 अहाँ सभ हमरा नकह चुनलहँ, बल् कक हम अहाँ सभ केँ चुनने छी आ अहाँ सभ केँ एकह लेल कनयुय कयलहँ जे अहाँ सभ जा कऽ फल पैदा कर आ अहाँ सभक फल बनल रहय . 17 हम अहाँ सभ केँ ई आजा दै त छी जे अहाँ सभ एक-दोसर सँ पेम कर। 18 जँ संसार अहाँ सभ सँ घृरा करै त अकछ तँ अहाँ सभ जनैत छी जे ओ अहाँ सभ सँ घृरा करबा सँ पकहने हमरा सँ घृरा करै त छल। 19 जँ अहाँ सभ संसारक रकहतहँ तँ संसार अपन लोक सभ सँ पेम करै त, मुदा अहाँ सभ संसारक नकह छी, मुदा हम अहाँ सभ केँ संसार मे सँ चुनने छी, ते ँ संसार अहाँ सभ सँ घृरा करै त अकछ। 20 हम अहाँ सभ केँ जे बात कहने रही, से मोन राखू , “सेवक अपन माकलक सँ पैघ नकह होइत अकछ।” जँ ओ सभ हमरा सतौने

अध्य 16 1 हम अहाँ सभ केँ ई बात कहलहँ जे अहाँ सभ केँ कोनो आपकत नकह हो। 2 ओ सभ अहाँ सभ केँ सभाघर सँ बाहर कनकाकल दे त। 3 ओ सभ अहाँ सभक संग ई सभ काज करताह, ककएक तँ ओ सभ कपता केँ नकह कचनने छकि आ ने हमरा। 4 मुदा ई सभ बात हम अहाँ सभ केँ एकह लेल कहलहँ जे जखन समय आओत तखन अहाँ सभ केँ मोन पडय जे हम अहाँ सभ केँ ई सभ बात कहने रही। ई बात हम अहाँ सभ केँ शुर मे नकह कहलहँ , कारर हम अहाँ सभक संग छलहँ । 5 मुदा आब हम ओकह लोक लग जा रहल छी जे हमरा पठौलकन। अहाँ सभ मे सँ ककयो हमरा सँ नकह पुछैत अकछ जे, “अहाँ कतय जा रहल छी?” 6 मुदा हम अहाँ सभ केँ ई बात कहने छी, ते ँ अहाँ सभक मोन मे दु ःख भरर गेल अकछ। 7 तैयो हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी। अहाँ सभक लेल ई उकचत अकछ जे हम चकल जाइ, ककएक तँ जँ हम नकह जायब तँ सान्ना दे बयवला अहाँ सभक लग नकह आओत। मुदा जँ हम चकल जायब तँ ओकरा अहाँ सभ लग पठा दे ब।” 8 जखन ओ आकब जेताह तखन ओ संसार केँ पाप, िाकम्कता आ नायक कवषय मे डाँ टताह। 9 पापक कवषय मे, ककएक तँ ओ सभ हमरा पर कवश् वास नकह करै त अकछ। 10 िाकम्कताक काररे,ँ ककएक तँ हम अपन कपता लग जाइत छी आ अहाँ सभ हमरा आब नकह दे खब। 11 नायक कारर, ककएक तँ एकह संसारक राजकुमारक न् याय होइत अकछ। 12 हमरा अहाँ सभ केँ बहत ककछु कहबाक अकछ, मुदा अहाँ सभ एखन सहन नकह कऽ सकैत छी। 13 मुदा जखन ओ सत् य आत् मा आकब जेताह तखन ओ अहाँ सभ केँ सभ सत् य मे माग्दश्न करताह। मुदा जे ककछु सुनत, से बाजत। 14 ओ हमरा मकहमा करत।

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अध्य 17

15 कपताक जे ककछु अकछ से हमर अकछ, ते ँ हम कहकलयकन जे ओ हमर मे सँ ककछु लऽ कऽ अहाँ सभ केँ दे खाओत। 16 ककछु ए काल मे अहाँ सभ हमरा नकह दे खब। 17 तखन हनकर ककछु कशष् य सभ आपस मे कहलकिन, “ओ हमरा सभ केँ ई की कहै त छकि जे , “ककन काल मे अहाँ सभ हमरा नकह दे खब।” बाबू? 18 ओ सभ पुछलकिन, “ई की कहै त छकि जे, “ककन काल?” ओ की कहै त छकि से हम सभ नकह ककह सकैत छी। 19 यीशु बुकझ गेलाह जे ओ सभ हनका सँ पूछय चाहै त छकि आ हनका सभ केँ कहलकिन, “ की अहाँ सभ आपस मे एकह बातक पूछताछ कर जे हम कहलहँ जे कनेक काल मे हमरा नकह दे खब।” ? 20 हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे अहाँ सभ कानब आ कवलाप करब, मुदा संसार आनख्त होयत। 21 सी केँ पसव भेला पर दु ःख होइत छै क, कारर ओकर समय आकब गेलैक, मुदा जकहना ओकरा बचाक जन होइत छै क, तखन ओकरा आब ओकह पीडा केँ मोन नकह पडै त छै क, एकह खुशी सँ जे पुरष संसार मे जन लेलक। 22 आब अहाँ सभ केँ दु ख अकछ, मुदा हम अहाँ सभ केँ फेर सँ दे खब, आ अहाँ सभक मोन आनख्त होयत आ अहाँ सभक आन् केँ केओ अहाँ सभ सँ नकह हँ टत। 23 ओकह कदन अहाँ सभ हमरा सँ ककछु नकह माँ गब। हम अहाँ सभ केँ सत् य कहै त छी जे अहाँ सभ कपता सँ जे ककछु माँ गब, ओ अहाँ सभ केँ दऽ दे ताह। 24 एखन िरर अहाँ सभ हमर नाम सँ ककछु नकह माँ गलहँ , माँ गू, आ अहाँ सभ केँ भेकट जायत, जाकह सँ अहाँ सभक आन् पूर् हो। 25 ई सभ बात हम अहाँ सभ केँ फकडा मे कहलहँ , मुदा समय आकब रहल अकछ जखन हम अहाँ सभ केँ फकडा मे नकह बाजब, बल् कक हम अहाँ सभ केँ कपताक कवषय मे सष रप सँ दे खा दे ब। 26 ओकह कदन अहाँ सभ हमर नाम सँ माँ गब, मुदा हम अहाँ सभ केँ ई नकह कहै त छी जे हम अहाँ सभक लेल कपता सँ पाि्ना करब। 27 ककएक तँ कपता अपने अहाँ सभ सँ पेम करै त छकि, ककएक तँ अहाँ सभ हमरा सँ पेम कयलहँ आ कवशास कयलहँ जे हम परमेश् वर सँ कनकलल छी। 28 हम कपता सँ कनकलल छी आ संसार मे आकब गेल छी। 29 हनकर कशष् य सभ हनका कहलकिन, “दे खू, आब अहाँ साफ-साफ बाकज रहल छी आ कोनो फकडा नकह बजैत छी।” 30 आब हमरा सभ केँ ई पका भऽ गेल अकछ जे अहाँ सभ ककछु जनैत छी आ ककरो अहाँ सँ पूछबाक आवशकता नकह अकछ। 31 यीशु हनका सभ केँ उतर दे लकिन, “ की अहाँ सभ आब कवश् वास करै त छी?” 32 दे खू, ओ समय आकब रहल अकछ, आब आकब गेल अकछ, जखन अहाँ सभ अपन-अपन घर मे कततर-कबतर भ’ जायब आ हमरा असगर छोकड दे ब। 33 ई सभ बात हम अहाँ सभ केँ एकह लेल कहलहँ जे हमरा मे शाखन भेटय। संसार मे अहाँ सभ केँ कष भेटत। हम दु कनयाँ पर कवजय पाकब गेल छी।

1 यीशु ई बात कहलकन आ स् वग् कदस बकढ कऽ कहलकिन, “ कपता, समय आकब गेल अकछ। अपन पुतक मकहमा कर जाकह सँ अहाँ क पुत सेहो अहाँ क मकहमा करकि। 2 जेना अहाँ ओकरा सभ पारी पर अकिकार दऽ दे लहँ जे ओ जे सभ ओकरा दे लहँ , तकरा सभ केँ अनन जीवन दे ब। 3 ई अनन जीवन अकछ, जाकह सँ ओ सभ अहाँ केँ एकमात सत् य परमेश् वर आ यीशु मसीह केँ, कजनका अहाँ पठौने छी, हनका कचनकि। 4 हम पृि् वी पर तोहर मकहमा कऽ दे लहँ , जे काज अहाँ हमरा करऽ दे लहँ से हम पूरा कऽ लेलहँ । 5 आब, हे कपता, अहाँ हमरा अपना संग ओकह मकहमा सँ मकहमा कर जे हमरा संसारक अखस् सँ पकहने अहाँ क संग छल। 6 हम अहाँ क नाम ओकह लोक सभ केँ पकट कऽ दे लहँ जे अहाँ हमरा संसार सँ बाहर दे लहँ । ओ सभ अहाँ क वचनक पालन कयलकन। 7 आब ओ सभ बुकझ गेल अकछ जे अहाँ हमरा जे ककछु दे कलयैक से सभ अहाँ सँ अकछ। 8 अहाँ हमरा जे वचन दे लहँ से हम हनका सभ केँ दऽ दे ने छी। ओ सभ ओकरा सभ केँ गहर कऽ लेलक आ कनशय बुकझ गेल जे हम अहाँ सँ बाहर कनकललहँ , आ ओ सभ कवशास केलक जे अहाँ हमरा पठौने छी।” 9 हम हनका सभक लेल पाि्ना करै त छी। ककएक तँ ओ सभ तोहर अकछ। 10 हमर सभटा तोहर अकछ आ तोहर हमर अकछ। आ हम हनका सभ मे मकहमामंकडत छी। 11 आब हम संसार मे नकह छी, बल् कक ई सभ संसार मे अकछ आ हम अहाँ लग आकब रहल छी। पकवत कपता, जे सभ हमरा दे ने छी, तकरा अपन नाम सँ राखू , जाकह सँ ओहो सभ हमरा सभ जकाँ एक भ' जाय। 12 जाबत हम हनका सभक संग संसार मे छलहँ , ताबत हम हनका सभ केँ अहाँ क नाम सँ रखलहँ । जाकह सँ शास पूरा भ' जाय। 13 आब हम अहाँ क लग आकब रहल छी। आ ई सभ बात हम संसार मे कहै त छी, जाकह सँ ओ सभ हमर आन् केँ अपना मे पूरा करय। 14 हम ओकरा सभ केँ तोहर वचन दऽ दे कलयैक। आ संसार हनका सभ सँ घृरा केलक अकछ, ककएक तँ ओ सभ संसारक नकह अकछ, जेना हम संसारक नकह छी। 15 हम ई पाि्ना नकह करै त छी जे अहाँ ओकरा सभ केँ संसार सँ बाहर कनकाकल कदयौक, बल् कक ओकरा सभ केँ अिलाह काज सँ बचाउ। 16 ओ सभ संसारक नकह छकि, जेना हम संसारक नकह छी। 17 अपन सत् य दारा ओकरा सभ केँ पकवत कर। 18 जकहना अहाँ हमरा संसार मे पठा दे लहँ , तकहना हमहँ हनका सभ केँ संसार मे पठा दे लहँ । 19 हम हनका सभक लेल अपना केँ पकवत करै त छी, जाकह सँ ओहो सभ सत् य दारा पकवत कयल जाय। 20 हम मात एकह सभक लेल पाि्ना नकह करै त छी, बल् कक हनका सभक लेल सेहो जे सभ अपन वचनक दारा हमरा पर कवश् वास करताह।

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21 जाकह सँ ओ सभ एक भऽ जाय। जेना अहाँ हे कपता, अहाँ हमरा मे छी आ हम अहाँ मे छी, जाकह सँ ओहो सभ हमरा सभ मे एक भ’ जाय। 22 अहाँ हमरा जे मकहमा दे लहँ से हम हनका सभ केँ दऽ दे लहँ । जकहना हम सभ एक छी तकहना ओ सभ एक भऽ जाय। 23 हम ओकरा सभ मे छी आ अहाँ हमरा मे, जाकह सँ ओ सभ एक मे कसद भऽ जाय। आ एकह तरहे ँ संसार ई जाकन लेत जे अहाँ हमरा पठौने छी आ ओकरा सभ सँ पेम केलहँ, जेना अहाँ हमरा सँ पेम केलहँ ।” 24 यौ कपता, हम चाहै त छी जे अहाँ जे सभ हमरा दे ने छी, ओ सभ सेहो हमरा संग रहकि जतय हम छी। जाकह सँ ओ सभ हमर मकहमा दे खकि जे अहाँ हमरा दे ने छी। 25 हे िम् कपता, संसार अहाँ केँ नकह कचनलक, मुदा हम अहाँ केँ कचनलहँ आ ई सभ जनैत अकछ जे अहाँ हमरा पठौने छी। 26 हम हनका सभ केँ अहाँ क नाम सुनौने छी आ पचार करब, जाकह सँ अहाँ जाकह पेम सँ हमरा सँ पेम केलहँ से हनका सभ मे रहय आ हम हनका सभ मे रहब।

15 कसमोन पतुस यीशुक पाछाँ -पाछाँ आ एकटा आओर कशष् य सेहो गेलाह। 16 मुदा पतुस बाहर दरबजा पर ठाढ छलाह। तखन ओ दोसर कशष् य जे महापुरोकहतक कचनल छलकन से बाहर कनककल कऽ दरबजा रखकनहार सँ बात कऽ पतुस केँ भीतर अनलकन। 17 दरबजा रखकनहार युवती पतुस केँ कहलकिन, “की अहाँ सेहो एकह आदमीक कशष् य मे सँ एक नकह छी?” ओ कहै त छकि, “हम नकह छी।” 18 कोयला सँ आकग लगा कऽ नोकर आ अकिकारी सभ ओतकह ठाढ छलाह। ठं ढा छल, ओ सभ गरम भ’ गेल, पतुस हनका सभक संग ठाढ भ’ क’ गरम भ’ गेलाह। 19 तखन महापुरोकहत यीशु सँ हनकर कशष् य सभ आ हनकर कशकाक कवषय मे पुछलकिन। 20 यीशु हनका उतर दे लकिन, “ हम संसार सँ खुकल कऽ बजलहँ । हम ककहयो सभाघर मे आ मन् कदर मे कशका दै त छलहँ , जतय यहदी सभ सकदखन सहारा लैत छकि। आ गुा रपे ँ हम ककछु नकह कहलहँ । 21 अहाँ हमरा ककएक पूछैत छी? हमर बात सुनकनहार सभ सँ पूछू जे हम की कहकलयकन। 22 यीशु ई बात ककह कऽ ओकहठाम ठाढ एकटा अकिकारी यीशु केँ हािक हिेली सँ मारर कऽ कहलकिन, “की अहाँ महापुरोकहत केँ एना उतर दऽ रहल छी?” 23 यीशु हनका उतर दे लकिन, “ जँ हम अिलाह बजलहँ तँ अिलाह बातक गवाही कदअ। 24 हना हनका बाखन कऽ महापुरोकहत कैफा लग पठौने छलाह। 25 कसमोन पतुस ठाढ भऽ कऽ गरम भऽ गेलाह। ओ सभ हनका पुछलकिन, “की अहाँ सेहो हनकर कशष् य मे सँ एक नकह छी?” ओ एकरा नकारै त कहलकिन, “हम नकह छी।” 26 महापुरोकहतक एकटा सेवक, ओकर ररशेदार छल, कजनकर कान पतुस काकट दे ने छलाह, ओ कहलकिन, “की हम अहाँ केँ हनका संग बगीचा मे नकह दे खलहँ?” 27 तखन पतुस फेर सँ इनकार कयलकन आ तुरन मुगा् खसकक गेल। 28 तखन ओ सभ यीशु केँ कैफा सँ न् यायालय मे लऽ गेलाह। ओ सभ न् ‍यायालय मे नकह गेलाह, जाकह सँ ओ सभ अशुद नकह भ’ जाय। मुदा एकह लेल जे ओ सभ फसह-पाबकन खा सकय। 29 तखन कपलातुस हनका सभ लग जा कऽ पुछलकिन, “अहाँ सभ एकह आदमी पर की आरोप लगाबैत छी?” 30 ओ सभ उतर दे लकिन, “जँ ओ अपरािी नकह रकहतकि तँ हम सभ ओकरा अहाँ क हाि मे नकह सौंकपतहँ ।” 31 तखन कपलातुस हनका सभ केँ कहलकिन, “अहाँ सभ हनका लऽ जाउ आ अपन कनयमक अनुसार हनकर नाय कर।” यहदी सभ हनका कहलकिन, “हमरा सभक लेल ककरो मारर दे ब उकचत नकह अकछ। 32 एकह लेल यीशुक ई बात पूरा भऽ जाय जे ओ कोन तरहक मृत् युक मृत् युक लेल बजलाह। 33 तखन कपलातुस फेर नायशाला मे जा कऽ यीशु केँ बजा कऽ पुछलकिन, “की अहाँ यहदी सभक राजा छी?” 34 यीशु हनका उतर दे लकिन, “ की अहाँ ई बात अपने सँ कहै त छी आ कक आन लोक हमरा कवषय मे कहलक?” 35 कपलातुस उतर दे लकिन, “की हम यहदी छी?” तोहर जाकत आ मुख्‍यपुरोकहत सभ तोरा हमरा हाि मे सौंपने अकछ। 36 यीशु उतर दे लकिन, “ हमर राज एकह संसारक नकह अकछ।

अध्य 18 1 यीशु ई बात ककह कऽ अपन कशष् य सभक संग कसदोन नदीक ओकह पार गेलाह, जतऽ एकटा बगीचा छल, जाकह मे ओ आ अपन कशष् य सभ पवेश कयलकन। 2 हनका िोखा दे कनहार यहदा सेहो ओकह ्ान केँ जनैत छलाह, ककएक तँ यीशु अपन कशष् य सभक संग बेर-बेर ओतऽ घुमैत छलाह। 3 तखन यहदा मुख् यपुरोकहत आ फररसी सभ सँ एक दल आ अकिकारी सभ केँ ल’ कऽ लालटे न आ मशाल आ हकियार लऽ कऽ ओतऽ आकब गेलाह। 4 यीशु हनका पर आबय बला सभ बात जाकन कऽ हनका सभ केँ कहलकिन, “ अहाँ सभ ककरा तकैत छी?” 5 ओ सभ हनका उतर दे लकिन, “नासरतक यीशु।” यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ हम ओ छी।” यहदा जे हनका िोखा दे लककन, से हनका सभक संग ठाढ भऽ गेलाह। 6 जकहना यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “हम ओ छी, तखन ओ सभ पाछू घुकम कऽ जमीन पर खकस पडलाह।” 7 ओ फेर पुछलकिन, “ अहाँ सभ ककरा तकैत छी?” ओ सभ कहलकिन, “नासरतक यीशु।” 8 यीशु उतर दे लकिन, “ हम अहाँ सभ केँ कहने छी जे हम ओ छी। 9 एकह लेल जे ओ कहने छलाह जे, “ अहाँ हमरा जे ककछु दे लहँ , ताकह मे सँ हम कोनो गमा नकह दे लहँ ।” 10 तखन कसमोन पतुस तलवार लऽ कऽ तलवार कनकाकल महापुरोकहतक सेवक केँ मारर दे लकिन आ ओकर दकहना कान काकट लेलकन। नौकरक नाम मलूस छल। 11 तखन यीशु पतुस केँ कहलकिन, “ अपन तलवार मान मे राखू। 12 तखन ओकह दल आ सेनापकत आ यहदी सभक सेनापकत सभ यीशु केँ पककड कऽ बाखन लेलक। 13 पकहने हनका हना लग लऽ गेलकन। ककएक तँ ओ काइफाक ससुर छलाह, जे ओकह वष् महापुरोकहत छलाह। 14 कैफा छल जे यहदी सभ केँ सलाह दै त छल जे लोक सभक लेल एक आदमी मरब उकचत।

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37 कपलातुस हनका पुछलकिन, “तखन की अहाँ राजा छी?” यीशु उतर दे लकिन, “ अहाँ कहै त छी जे हम राजा छी।” हम एकह लेल जन लेलहँ आ एकह लेल हम संसार मे आयल छी जे हम सतक गवाही दी। जे ककयो सत् य अकछ से हमर आवाज सुनैत अकछ। 38 कपलातुस हनका पुछलकिन, “सत की होइत छै क?” ई बात ककह कऽ ओ फेर यहदी सभक लग जा कऽ कहलकिन, “हमरा हनका मे कोनो दोष नकह भेटैत अकछ।” 39 मुदा अहाँ सभक पिा अकछ जे हम अहाँ सभ केँ फसहपाबकन मे एक गोटे केँ छोकड दे ब। 40 ओ सभ फेर कचकचया उठलकन, “ई आदमी नकह, बरबा।” आब बरबा डकैत छल।

16 तखन यीशु हनका कूस पर चढाबय लेल हनका सभक हाि मे सौंप दे लकन। ओ सभ यीशु केँ लऽ कऽ लऽ गेलाह। 17 ओ अपन कूस लऽ कऽ एक ठाम गेलाह जकरा कहबू भाषा मे गोलोिा कहल जाइत छै क। 18 ओ सभ हनका कूस पर चढा दे लकिन, आ दू गोटे हनका संग, एक कात आ बीच मे यीशु केँ कूस पर चढा दे लकिन। 19 कपलातुस एकटा उपाकि कलखख कूस पर राखख दे लकन। ओकह पर कलखल छल, “यहदी सभक राजा नासरतक यीशु।” 20 तखन ई उपाकि बहतो यहदी सभ पकढ रहल छल, ककएक तँ जतऽ यीशु केँ कूस पर चढाओल गेल छल, ओतऽ नगरक समीप छल। 21 तखन यहदी सभक मुख् यपुरोकहत सभ कपलातुस केँ कहलकिन, “यहदी सभक राजा, ई नकह कलखू। मुदा ओ कहलकन जे , “हम यहदी सभक राजा छी।” 22 कपलातुस उतर दे लकिन, “हम जे कलखने छी से हम कलखने छी।” 23 तखन कसपाही सभ यीशु केँ कूस पर चढा कऽ हनकर वस लऽ कऽ चारर भाग मे बाँ कट लेलकन। आ ओकर कोट सेहो, आब कोट कबना सीमक छल, जे ऊपर सँ पूरा बुनल छल। 24 ओ सभ आपस मे कहलकिन, “आउ, एकरा फाकड कऽ नकह, बल् कक एकरा लेल कचटी लगाबी जे ई केकर होयत, जाकह सँ िम्शास् त पूरा भऽ जाय जे कहै त अकछ जे , “ओ सभ हमर वस ओकरा सभ मे बाँ कट दे लक आ हमर वसक लेल ओ सभ कचटी लगा दे लक।” ते ँ कसपाही सभ ई सभ काज केलक। 25 यीशुक कूस लग हनकर माय, मायक बकहन, ख्ओफाक पती मररयम आ मररयम मगदलीनी ठाढ छलीह। 26 यीशु जखन अपन माय आ ओकह कशष् य केँ ठाढ दे खख, कजनका सँ ओ पेम करै त छलाह, तखन ओ अपन माय केँ कहलकिन, “ हे स् ती, दे खू तोहर बेटा! 27 तखन ओ कशष केँ कहलकिन, “ दे खू, अहाँ क माय! ओकह समय सँ ओ कशष ओकरा अपन घर लऽ गेलाह। 28 एकर बाद यीशु ई जाकन जे आब सभ काज पूरा भऽ गेल अकछ, जाकह सँ िम्शास् त पूरा भऽ जाय, ओ कहलकन, “ हमरा पास लागल अकछ।” 29 एकटा बत्न मे कसरका सँ भरल राखल छल, आ ओ सभ एकटा संज मे कसरका भरर कऽ कहसोप पर लगा कऽ हनका मुँह मे राखख दे लक। 30 यीशु कसरका लऽ कऽ कहलकिन, “ समा​ा भऽ गेल।” 31 यहदी सभ कवशाम-कदन मे कूस पर शव सभ केँ कूस पर नकह रहबाक तैयारी छल, (ककएक तँ ओ कवशाम-कदन एकटा ऊँच कदन छल) कपलातुस सँ कवनती कयलकन जे हनकर सभक टां ग टू कट जाय आ ओ सभ टू कट जाय छीन लेलक। 32 तखन कसपाही सभ आकब कऽ पकहल आ दोसर जे हनका संग कूस पर चढल गेल छल, ओकर टां ग तोकड दे लक। 33 मुदा जखन ओ सभ यीशु लग पहँ कच कऽ दे खलक जे ओ मरर गेल छकि, तखन हनकर टां ग नकह तोडलकन। 34 मुदा एकटा कसपाही भाला लऽ कऽ ओकर कात मे छे द कऽ दे लक आ तुरन ओतऽ खून आ पाकन कनककल गेल। 35 जे दे खलक से गवाही दे लक आ ओकर गवाही सत् य अकछ। 36 ई सभ बात एकह लेल भेल जे िम्शास् त पूरा भऽ जाय जे , “ओकर हडी नकह टू टत।” 37 फेर एकटा आओर िम्शास् त कहै त अकछ, “ओ सभ जकरा बेिने छल, तकरा कदस तकत।”

अध्य 19 1 तखन कपलातुस यीशु केँ पककड कऽ कोडा मारर दे लकिन। 2 कसपाही सभ काँ टक मुकुट चढा कऽ हनकर माि पर लगा दे लक आ बैगनी रं गक वस पकहरर लेलक। 3 ओ कहलकिन, “हे यहदी सभक राजा! ओ सभ ओकरा हाि सँ मारर दे लकैक। 4 कपलातुस फेर जा कऽ हनका सभ केँ कहलकिन, “दे खू, हम हनका अहाँ सभ लग अनैत छी जाकह सँ अहाँ सभ ई जाकन सकब जे हमरा हनका मे कोनो दोष नकह भेटैत अकछ।” 5 तखन यीशु काँ टक मुकुट आ बैगनी रं गक वस पकहरने बाहर कनकललाह। कपलातुस हनका सभ केँ कहलकिन, “दे खू, ओ आदमी!” 6 मुख्‍यपुरोकहत आ अकिकारी सभ हनका दे खख कचकचया उठलकन, “ओकरा कूस पर चढाउ, कूस पर चढाउ।” कपलातुस ओकरा सभ केँ कहलकिन, “अहाँ सभ ओकरा लऽ कऽ कूस पर चढा कदयौक। 7 यहदी सभ हनका उतर दे लकिन, “हमरा सभक कनयम अकछ, आ हमरा सभक कनयमक अनुसार हनका मरबाक चाही, ककएक तँ ओ अपना केँ परमेश् वरक पुत बना लेलकन।” 8 कपलातुस ई बात सुकन कऽ ओ आर भयभीत भऽ गेलाह। 9 फेर न् यायालय मे जा कऽ यीशु सँ पुछलकिन, “अहाँ कतऽ सँ छी?” मुदा यीशु हनका कोनो उतर नकह दे लकिन। 10 तखन कपलातुस हनका कहलकिन, “की अहाँ हमरा सँ नकह बाकज रहल छी?” की अहाँ नकह जनैत छी जे हमरा अहाँ केँ कूस पर चढे बाक सामर् अकछ आ अहाँ केँ छोडबाक सामर् अकछ? 11 यीशु उतर दे लकिन, “ अहाँ क हमरा कवरद कोनो अकिकार नकह भऽ सकैत छल जाबत तोरा ऊपर सँ नकह दे ल गेल हो। 12 तकहया सँ कपलातुस हनका छोडबाक पयास कयलकन, मुदा यहदी सभ कचकचया उठलकन, “जँ अहाँ एकह आदमी केँ छोकड दै त छी तँ अहाँ कैसरक कमत नकह छी।” 13 कपलातुस ई बात सुकन यीशु केँ बाहर लऽ कऽ नायक आसन पर बैकस गेलाह जे फुटपाि कहल जाइत अकछ, मुदा कहबू मे गबािा कहल जाइत अकछ। 14 फसह-पव्क तैयारी आ लगभग छठम घंटा छल, तखन ओ यहदी सभ केँ कहलकिन, “दे खू, अहाँ सभक राजा!” 15 मुदा ओ सभ कचकचया उठल, “ओकरा दू र कर, ओकरा दू र कर, कूस पर चढा कदयौक।” कपलातुस हनका सभ केँ कहलकिन, “की हम अहाँ क राजा केँ कूस पर चढा दे ब?” मुखखया पुरोकहत सभ उतर दे लकिन, “हमरा सभ लग कैसरक अकतररय कोनो राजा नकह अकछ।”

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38 एकर बाद अररमाकियाक यूसुफ यीशुक कशष् य छलाह, मुदा यहदी सभक डर सँ गुा रप सँ कपलातुस सँ कवनती कयलकन जे ओ यीशुक शव केँ लऽ जाकि। ओ यीशुक लाश लऽ कऽ आकब गेलाह। 39 कनकोदे म सेहो आकब गेलाह जे पकहने राकत मे यीशु लग आकब गेल छलाह आ गंिक आ मुसबरक कमशर लगभग सौ पाउं ड भार अनने छलाह। 40 तखन ओ सभ यीशुक शव केँ लऽ कऽ सुगंिक संग कलनन वस मे गाकड लेलक, जेना यहदी सभक गाडबाक तरीका होइत छै क। 41 जाकह ठाम हनका कूस पर चढाओल गेल छलकन, ओकह ठाम एकटा बगीचा छल। आ गाछी मे एकटा नव कब छल, जाकह मे एखन िरर मनुष् य ककहयो नकह राखल गेल छल। 42 यहदी सभक तैयारीक कदनक काररे ँ ओ सभ यीशु केँ ओतकह राखख दे लक। ककएक तँ कब लग लग छल।

16 यीशु ओकरा कहलकिन, “मररयम।” ओ घुकम कऽ हनका कहलकिन, “रबोनी!” जे कहब अकछ, गुर। 17 यीशु ओकरा कहलकिन, “ हमरा हाि नकह लगाउ। कारर, हम एखन िरर अपन कपता लग नकह चढल छी। आ हमर परमेश् वर आ अहाँ क परमेश् वर केँ। 18 मररयम मगदलीनी आकब कऽ कशष् य सभ केँ कहलकिन जे ओ पभु केँ दे खख लेने छकि आ ओ हनका सँ ई बात कहलकन। 19 ओही कदन साँ झ मे सा​ाहक पकहल कदन जखन यहदी सभक भय सँ जतऽ कशष् य सभ जमा छल, ओकह ठामक दरबजा सभ बंद भऽ गेल छल, तखन यीशु बीच मे ठाढ भऽ कऽ हनका सभ केँ कहलकिन, “ अहाँ सभ केँ शाखन हो।” 20 ई ककह कऽ ओ हनका सभ केँ अपन हाि आ कात दे खौलकिन। तखन पभु केँ दे खख कशष् य सभ पसन भऽ गेलाह। 21 तखन यीशु हनका सभ केँ फेर कहलकिन, “ अहाँ सभ केँ शाखन भेटय। 22 ई बात ककह कऽ ओ हनका सभ पर साँ स छोकड कऽ कहलकिन, “ पकवत आत् मा गहर कर। 23 जकर पाप अहाँ सभ कमा करै त छी, ओकरा सभ केँ कमा कयल जाइत छै क। आ जकर पाप अहाँ सभ राखख लैत छी, से पकडल जाइत अकछ। 24 जखन यीशु अयलाह तखन बारह गोटे मे सँ एक गोटे िोमस, जकरा कदकदमस कहल जाइत छल, हनका सभक संग नकह छल। 25 आन कशष् य सभ हनका कहलकिन, “हम सभ पभु केँ दे खलहँ ।” मुदा ओ हनका सभ केँ कहलकिन, “जखन िरर हम हनकर हाि मे नाखूनक छाप नकह दे खब आ नाखूनक छाप मे अपन आँ गुर नकह राखब आ हनकर कात मे हाि नकह िऽ दे ब, तखन िरर हम कवशास नकह करब।” 26 आठ कदनक बाद फेर हनकर कशष् य सभ भीतर आकब गेलाह आ िोमस सेहो हनका सभक संग छलाह, तखन यीशु दरबजा सभ बन कऽ कऽ आकब कऽ बीच मे ठाढ भऽ गेलाह आ कहलकिन, “ अहाँ सभ केँ शाखन हो।” 27 तखन ओ िोमस केँ कहलकिन, “ अपन आँ गुर एतय पहँ कच कऽ हमर हाि दे खू। आ अपन हाि एतऽ बढा कऽ हमरा कात मे िकेकल कदअ। 28 िोमा उतर दे लकिन, “हमर पभु आ हमर परमेश् वर।” 29 यीशु हनका कहलकिन, “ तोमा, हमरा दे खख कवश् वास कऽ लेलहँ ।” 30 यीशु अपन कशष् य सभक समक सत् य आरो बहत रास कचन् ह सभ कयलकन, जे एकह पुसक मे नकह कलखल अकछ। 31 मुदा ई सभ एकह लेल कलखल गेल अकछ जे अहाँ सभ कवश् वास करी जे यीशु परमेश् वरक पुत मसीह छकि। आ कवश् वास कऽ कऽ अहाँ सभ हनकर नाम सँ जीवन पाकब सकब।”

अध्य 20 1 सा​ाहक पकहल कदन मगदलीनी मररयम भोरे -भोर जखन अनार छल तखन कब पर अबैत छकि आ कब पर सँ पािर उतारल दे खैत छकि। 2 तखन ओ दौकड कऽ कसमोन पतुस आ दोसर कशष् य लग आकब कऽ कहलकिन, “ओ सभ पभु केँ कबर सँ कनकाकल लेलक, मुदा हमरा सभ केँ ई नकह बुझल अकछ जे ओ सभ हनका कतय राखख दे लकन।” 3 पतुस आ ओ आन कशष् य सेहो कबर मे गेलाह। 4 दु नू गोटे एक संग दौडल गेलाह आ दोसर कशष् य पतुस केँ पछाकड कऽ पकहने कब पर पहँ कच गेलाह। 5 ओ झुकक कऽ भीतर तकैत दे खलक जे सनीक कपडा पडल अकछ। तैयो गेल ओ भीतर नकह। 6 तखन कसमोन पतुस हनका पाछाँ -पाछाँ आकब कब मे गेलाह आ कलनक कपडा पडल दे खलकन। 7 हनका मािक चार कात जे नैपककन छलकन से कलनन कपडाक संग नकह पडल छलकन, बल् कक एक ठाम एक ठाम लपेटल छलकन। 8 तखन ओ दोसर कशष् य सेहो भीतर गेलाह जे पकहने कब पर आयल छलाह आ ओ दे खख कवश् वास कयलकन। 9 ओ सभ एखन िरर ई िम्शास् त नकह जनैत छल जे ओ मृत् यु मे सँ जीकब उठब। 10 तखन कशष्‍य सभ फेर अपन-अपन घर चकल गेलाह। 11 मुदा मररयम कब पर बाहर ठाढ भऽ काकन रहल छलीह आ कानैत काल ओ झुकक कऽ कब कदस तकलीह। 12 ओ दू टा स् वग्दूत केँ उजर वस मे बैसल दे खलकन, एकटा माि पर आ दोसर पएर पर, जतय यीशुक लाश पडल छल। 13 ओ सभ हनका पुछलकिन, “मकहला, अहाँ ककएक कानैत छी?” ओ ओकरा सभ केँ कहलकिन, “ककएक तँ ओ सभ हमर पभु केँ छीन लेलक आ हमरा नकह बुझल अकछ जे ओ सभ ओकरा कतय राखख दे लक।” 14 ई बात ककह कऽ ओ पाछू घुकम कऽ यीशु केँ ठाढ दे खलकन। 15 यीशु ओकरा पुछलकिन, “ मारी, अहाँ ककएक कानैत छी? अहाँ केकरा तकैत छी? ओ ओकरा माली बुकझ कहलकिन, “महाराज, जँ अहाँ ओकरा एतय सँ लऽ गेलहँ तँ हमरा कह जे अहाँ ओकरा कतय राखख दे लहँ , हम ओकरा लऽ जायब।”

अध्य 21 1 एकह बातक बाद यीशु कतबेररयाक समुद मे कशष् य सभ केँ फेर सँ दे खौलकन। आ एकह तरहे ँ ओ अपना केँ दे खौलकन। 2 ओतऽ कसमोन पतुस, कदकदमुस नामक िोमा, गलील मे काना कनवासी निनील, जबीक पुत आ हनकर दू टा आओर कशष् य एक संग छलाह। 3 कसमोन पतुस हनका सभ केँ कहलकिन, “हम माछ मारय जा रहल छी।” ओ सभ हनका कहलकिन, “हम सभ सेहो अहाँ क संग

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जॉन

जाइत छी।” ओ सभ आगू बकढ कऽ तुरन जहाज मे बैकस गेलाह। आ ओकह राकत ओ सभ ककछु नकह पकडलकन। 4 भोर भेला पर यीशु ककनार पर ठाढ भऽ गेलाह। 5 तखन यीशु हनका सभ केँ पुछलकिन, “ बचा सभ, अहाँ सभ ककछु भोजन की? ओ सभ हनका उतर दे लकिन, “नकह।” 6 ओ हनका सभ केँ कहलकिन, “ नावक दकहना कात जाल फेकक कदयौक, तखन अहाँ सभ केँ भेटत।” ओ सभ फेकक दे लक, आब माछक भरमारक काररे ँ ओकरा नकह खीकं च सकल। 7 ते ँ ओ कशष् य कजनका सँ यीशु पेम करै त छलाह, पतुस केँ कहलकिन, “ई पभु छकि।” कसमोन पतुस जखन ई सुकन कऽ जे ई पभु छकि, तखन ओ अपन मलाहक वस हनका लग बाखन दे लकन, (ककएक तँ ओ नंगटे छलाह) आ अपना केँ समुद मे फेकक दे लकन। 8 आन कशष् ‍य सभ एकटा छोट नाव मे बैकस कऽ आकब गेलाह। (ककएक तँ ओ सभ जमीनसँ दू र नकह छल, बल् कक दू सय हाि जकाँ छल) माछक संग जाल घीकच रहल छल। 9 ओ सभ जकहना जमीन पर पहँ चलाह तँ ओतऽ कोयलाक आकग आ ओकह पर माछ आ रोटी कबछल दे खलकन। 10 यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “ अखन जे माछ पकडने छी, तकरा सभ केँ आनू।” 11 कसमोन पतुस चकढ कऽ जाल खीकं च कऽ जमीन पर पहँ चलाह जे एक सय तेपचास माछ सँ भरल छल। 12 यीशु हनका सभ केँ कहलकिन, “आउ आ भोजन कर।” कशष्‍य सभ मे सँ ककयो हनका सँ ई पुछबाक कहमत नकह कयलकन जे, “अहाँ के छी?” ई जाकन जे ई पभु छकि। 13 तखन यीशु आकब कऽ रोटी लऽ कऽ ओकरा सभ केँ आ माछ सेहो दऽ दे लकिन। 14 यीशु मृत् यु मे सँ जीकब उठलाक बाद ई तेसर बेर अपन कशष् य सभ केँ अपना केँ दे खौलकन। 15 ओ सभ भोजन कऽ कऽ यीशु कसमोन पतुस केँ कहलकिन, “ कसमोन, योनासक पुत, की अहाँ हमरा सँ एकह सभ सँ बेसी पेम करै त छी?” ओ हनका कहलकिन, “हँ , पभु! अहाँ जनैत छी जे हम अहाँ सँ पेम करै त छी। ओ ओकरा कहलकिन, “ हमर मेमना केँ पोसब।” 16 ओ दोसर बेर पुछलकिन, “ कसमोन, योनासक पुत, की अहाँ हमरा सँ पेम करै त छी?” ओ हनका कहलकिन, “हँ , पभु! अहाँ जनैत छी जे हम अहाँ सँ पेम करै त छी। ओ ओकरा कहलकिन, “ हमर भेड ँ ा केँ चराउ।” 17 ओ तेसर बेर पुछलकिन, “ कसमोन, योनाक पुत, की अहाँ हमरा सँ पेम करै त छी?” पतुस दु खी भेलाह, कारर ओ तेसर बेर हनका कहलकिन, “की अहाँ हमरा सँ पेम करै त छी?” ओ हनका कहलकिन, “पभु , अहाँ सभ बात जनैत छी। अहाँ जनैत छी जे हम अहाँ सँ पेम करै त छी। यीशु हनका कहलकिन, “ हमर भेड ँ ा सभ केँ चराउ।” 18 हम अहाँ केँ सत् य कहै त छी, जखन अहाँ छोट रही तखन अहाँ अपना केँ कमरबंद कऽ कऽ जतय चाहै त छलहँ , मुदा जखन अहाँ बूढ भऽ जायब तखन अहाँ अपन हाि पसारर लेब आ दोसर अहाँ केँ कतरा मे बाखन कऽ अहाँ केँ ओतय लऽ जायत wouldest नकह। 19 ओ ई बात बजैत छलाह जे ओ कोन मृतु दारा परमेश् वरक मकहमा करकि। ई बात ककह कऽ ओ हनका कहलकिन, “ हमर पाछाँ चलू।”

20 तखन पतुस घुकम कऽ दे खलकन जे ओ कशष् य कजनका सँ यीशु पेम करै त छलाह। ओ सभ भोजनक समय हनकर छाती पर झुकक कऽ कहलकिन, “पभु , अहाँ केँ िोखा दे बयवला के अकछ?” 21 पतुस हनका दे खख यीशु केँ पुछलकिन, “पभु, ई आदमी की करत?” 22 यीशु हनका पुछलकिन, “ जँ हम चाहै त छी जे ओ जाबत िरर हम नकह आकब जायब, ताबत िरर ओ कटकल रहय तऽ अहाँ क की अकछ?” हमरा पाछाँ चलू। 23 तखन भाइ सभक बीच ई बात पचाररत भऽ गेल जे ओ कशष् य नकह मरर जाय। मुदा, “ जँ हम चाहब जे जाबत िरर ओ हमरा अयब ताबत िरर कटकय, त’ ई अहाँ क की अकछ?” 24 ई ओ कशष् य छकि जे एकह बात सभक गवाही दै त छकि आ ई सभ बात कलखने छकि। 25 यीशु दारा कयल गेल आरो बहत रास काज सेहो अकछ, जे जँ पतेक केँ कलखल जाय तँ हमरा बुझने जे संसार मे सेहो ओकह पुसक सभ केँ नकह राखल जा सकैत छल जे कलखल जाय। आमीन।

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प्रेरित क् कार्

19 यरशलेम मे रहथनहार सभ लोक केँ ई बात पता चललथन। एतेक धरर जे ओथह खेत केँ हनका लोकथनक उथचत भाषा मे असेलमा अिा् त् खूनक खेत कहल जाइत छै क | 20 भजन-संगहक पुसक मे थलखल अथछ जे, “ओकर थनरास उजाड हो आ ओथह मे केओ नथह रहय।” 21 एथह लेल एथह लोक सभ मे सँ जे सभ थदन पभु यीशु हमरा सभक बीच मे घुमैत-थिरै त हमरा सभक संग रहै त छथि। 22 यूहन् नाक बपथतस् मा सँ शुर भऽ कऽ ओथह थदन धरर जखन ओ हमरा सभ सँ उठाओल गेलाह, तकरा हमरा सभक संग हनकर पुनरुानक गराह बनयबाक चाही। 23 ओ सभ दू गोटे केँ थनयुक कयलथन, जे यूसुि नामक बरसाबास नामक छल, जकर नाम छल यूस् तु आ मथिया। 24 ओ सभ पाि्ना कऽ कऽ कहलथिन, “हे पभु , जे सभ मनुष् यक हदय केँ जनैत छी, अहाँ एथह दु नू मे सँ चुनने छी थक नथह। 25 एथह लेल ओ एथह सेरा आ पेररतक काज मे भाग लेथि, जाथह सँ यहदा अपराधक कारमे ँ खथस पडलाह, जाथह सँ ओ अपन सान पर जा सकथि। 26 ओ सभ अपन भाग दे लक। थचटी मथियस पर पडल। ओ एगारह पेररतक संग थगनल गेलाह।

अधार 1 1 हे थियोथिलस, हम ओथह सभ बातक पूर्क ग् बनौने छी जे यीशु जे थकछु करय लगलाह आ थसखाबय लगलाह। 2 जाबत धरर यीशु ऊपर उठाओल गेलाह, तकर बाद ओ पथरत आत् मा दारा ओथह पेररत सभ केँ आजा नथह दे लथिन, थजनका सभ केँ ओ चुनने छलाह। 3 ओ हनका सभ केँ चलीस थदन धरर दे खख कऽ परमेश् ररक राज् यक थरषय मे बजैत बहत रास अचूक पमामक दारा अपना केँ जीथरत दे खाओल गेलाह। 4 हनका सभक संग जमा भऽ हनका सभ केँ आजा दे लथिन जे यरशलेम सँ नथह थरदा भऽ जाउ, बल् थक थपताक पथतजाक पतीता कर । 5 यूहन् ना पाथन सँ बपथतस् मा दे लथन। मुदा अहाँ सभ केँ बहत थदनक बाद पथरत आत् मा सँ बपथतस् मा लेल जायत। 6 ओ सभ जखन एक ठाम आथब कऽ हनका सँ पुछलथिन, “पभु , की अहाँ एथह समय मे इसाएलक राज िेर सँ दऽ दे ब?” 7 ओ हनका सभ केँ कहलथिन, “ अहाँ सभक काज नथह अथछ जे अहाँ सभ समय आ समय केँ जानब, जे थपता अपन सामि्​् य मे राखने छथि।” 8 पथरत आत् मा अहाँ सभ पर आथब गेलाक बाद अहाँ सभ केँ सामि्​् य भेटत, आ अहाँ सभ यरशलेम, समस यहथदया, सामररया आ पृि् रीक अन् त भाग धरर हमर गराह बनब। 9 ई सभ बात कथह कऽ ओ सभ दे खैत रहलाह। एकटा मेघ हनका सभक नजरर सँ बाहर आथब गेलथन। 10 जखन ओ सभ स् रग् थदस तकैत छल, तखन ओ सभ उजर रस मे दू गोटे हनका सभक लग मे ठाढ छल। 11 ओ सभ सेहो कहलथिन, “हे गलील लोक सभ, अहाँ सभ स् रग् थदस तकैत थकएक ठाढ छी?” ई यीशु जे अहाँ सभ सँ स् रग् मे चढाओल गेल छथि, तथहना आओत जेना अहाँ सभ हनका स् रग् मे जाइत दे खलहँ । 12 ओ सभ जैतून नामक पहाड सँ यरशलेम रापस आथब गेलाह। 13 जखन ओ सभ भीतर पहँ चलाह तखन ओ सभ ऊपरका कोठली मे चथल गेलाह, जतय पतुस, याकूब, यूहना, अख्डयास, थिथलपुस, िोमस, बाि्लोलू, मती, अलीसक पुत याकूब आ थसमोन जेलोतस दु नू रहै त छलाह। आ याकूबक भाय यहदा। 14 ई सभ स् तीगम आ यीशुक माय मररयम आ हनकर भाय सभक संग एक-मते पाि्ना आ थरनती करै त रहलाह। 15 ओथह समय मे पतुस थशष् य सभक बीच मे ठाढ भऽ कऽ कहलथिन, “एकटा नामक संखा करीब एक सय बीस छल।” 16 यौ भाइ लोकथन, ई धम्शास् त पूरा भऽ गेल हे तथन, जे पथरत आत् मा दाऊदक मुँह सँ पथहने यहदाक थरषय मे कहने छलाह, जे यीशु केँ लऽ कऽ लेथनहार सभक माग्दश्क छल। 17 ओ हमरा सभक संग थगनल गेल छलाह आ एथह सेराक थकछु थहसा सेहो पार कऽ लेने छलाह। 18 ई आदमी अधम्क िल सँ खेत कीथन लेलक। आ माि पर खथस पडै त बीच मे िाथट गेल आ ओकर सभटा आं त बाहर थनकथल गेल।

अधार 2 1 जखन पेनेकोकक थदन पूम् रपेम आथब गेल तखन सभ एकएक ठाम एक-एकटा भऽ गेलाह। 2 एकाएक आकाश सँ तेज हराक आराज जकाँ आराज आयल आ ओ सभ ओथह घर मे भरर गेल जतय ओ सभ बैसल छलाह। 3 हनका सभ केँ आथग जकाँ िाटल जीह दे खा पडलथन आ ओ सभ हनका सभ मे सँ एक-एकटा पर बैसल। 4 ओ सभ पथरत आत् मा सँ भरर गेलाह आ आत् मा हनका सभ केँ बजबाक अनुसार आन भाषा मे बाजय लगलाह। 5 यरशलेम मे स् रग्क नीचाँ क सभ जाथत मे सँ यहदी सभ, भखक-धम् लोक सभ रहै त छलाह। 6 एथह बातक हला भेला पर लोक सभ एक ठाम आथब कऽ लखजत भऽ गेल। 7 ओ सभ आशय्चथकत भऽ आशय्चथकत भऽ एक-दोसर केँ कहलथिन, “दे खू, की ई सभ गलील नथह अथछ?” 8 हम सभ कोना अपन-अपन भाषा मे सुनैत छी जाथह मे हम सभ जन लेने छी? 9 पाथि्या, मादी, एलामी, मेसोपोटाथमया, यहथदया, कप्ोथसया, पोनुस आ एथशया मे रहथनहार। 10 थमस मे थ्थगया आ पख्िथलया आ कुरे नेक आसपासक लीथबयाक इलाका मे आ रोम मे परदे शी, यहदी आ धम् परररत्न करयरला लोक। 11 केते आ अरबी, हम सभ ओकरा सभ केँ अपना सभक भाषा मे परमेश् ररक अद् भुत काज कहै त सुनैत छी। 12 ओ सभ आशय्चथकत भऽ कऽ एक-दोसर सँ पुछैत रहलाह, “एकर की अि् अथछ?” 13 दोसर लोक सभ उपहास करै त बाजल, “ई सभ नरका मथदरा सँ भरल अथछ।” 14 पतुस एगारह गोटे क संग ठाढ भऽ कऽ हनका सभ केँ कहलथिन, “हे यहथदया आ यरशलेम मे रहथनहार सभ लोक, ई बात अहाँ सभ केँ बुझू आ हमर बात सुनू। 15 थकएक तँ ई सभ नशा मे धुत नथह छथि जेना अहाँ सभ सोचैत छी, थकएक तँ ई सभ थदनक तेसर घंटा मात अथछ। 16 मुदा ई बात योएल परक् ता दारा कहल गेल अथछ।

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पेररत सभक काज

17 परमेश् रर कहै त छथि जे , “अंथतम थदन मे हम अपन आत् मा सभ शरीर पर बहायब, आ अहाँ क बेटा-बेटी सभ भथरषरामी करत, आ अहाँ क युरक सभ दश्न दे खत आ अहाँ क बूढ-पुरान सभ सपना दे खत।” : १. 18 ओथह थदन मे हम अपन सेरक आ दासी सभ पर अपन आत् मा उझथल दे ब। ओ सभ भथरषरामी करत। 19 हम ऊपर स् रग् मे चमत् कार आ नीचाँ पृि् री पर थचन् त दे खब। खून, आथग आ धुँआक राष। 20 पभुक ओथह महान आ उलेखनीय थदन आबय सँ पथहने सूय् अनार मे बदथल जायत आ चान खून मे बदथल जायत। 21 “जे केओ पभुक नाम पुकारत, से उदार पाओत।” 22 हे इसाएलक लोक सभ, ई बात सुनू। नासरतक यीशु, अहाँ सभक बीच परमेश् ररक चमत् कार आ चमत् कार आ थचन् त सभक दारा स् रस् ि कयलथन, जे परमेश् रर हनका दारा अहाँ सभक बीच कयलथन। 23 अहाँ सभ परमेश् ररक थनथशत सलाह आ पूर्जान सँ हनका बचाओल गेलहँ आ दु ष हाि सँ कूस पर चढा कऽ मारल गेलहँ । 24 परमेश् रर हनका मृत् युक कष केँ खोथल कऽ थजआ दे लथन अथछ। 25 दाऊद हनका थरषय मे कहै त छथि, “हम पभु केँ सथदखन अपन मुँह सँ पथहने दे खैत छलहँ , कारम ओ हमर दथहना कात छथि, जाथह सँ हम नथह थहलब। 26 ते ँ हमर मोन आनख्त भेल आ हमर जीह आनख्त भेल। हमर शरीर सेहो आशा मे आराम करत। 27 कारम, अहाँ हमर पाम केँ नरक मे नथह छोडब आ ने अपन पथरत केँ थरनाश दे खय दे ब। 28 अहाँ हमरा जीरनक बाट बुझा दे लहँ । अहाँ हमरा अपन मुँह सँ आन् सँ भरल बना दे ब। 29 यौ भाइ लोकथन, हम अहाँ सभ केँ कुलपथत दाऊदक थरषय मे ई बात कहब जे ओ मरर गेल छथि आ दिना गेल छथि आ हनकर कब आइ धरर हमरा सभक संग अथछ। 30 ते ँ ओ परक् ता छलाह आ ई जाथन जे परमेश् रर हनका शपि गहम कएने छथि जे हनकर कमरक िल मे सँ शरीरक अनुसार मसीह केँ ठाढ कऽ लेताह। 31 ओ पथहने ई दे खख मसीहक पुनरुानक थरषय मे बजलाह जे हनकर पाम नरक मे नथह रथह गेलथन आ ने हनकर शरीर भष भऽ गेलथन। 32 एथह यीशु केँ परमेश् रर जीथब उठौलथन, जकर हम सभ गराह छी। 33 ते ँ परमेश् ररक दथहना हाि मे उदात भऽ गेलाह आ थपता सँ पथरत आत् माक पथतजा गहम कयलथन। 34 दाऊद स् रग् मे नथह चढल छथि, मुदा ओ मने-मन कहै त छथि, “परमेश् रर हमर पभु केँ कहलथिन, “अहाँ हमर दथहना कात बैसल रह।” 35 जाबत हम तोहर शतु सभ केँ तोहर पैरक ठे हन नथह बना लेब। 36 ते ँ इसाएलक समस घराना केँ ई बात थनशय कऽ कऽ जाथन जे परमेश् रर ओथह यीशु केँ पभु आ मसीह बना दे लथन, जकरा अहाँ सभ कूस पर चढा दे लहँ । 37 ई बात सुथन हनका सभक मोन मे चुभन भऽ गेलथन आ पतुस आ बाँ की पेररत सभ केँ कहलथिन, “हे भाइ लोकथन, हम सभ की करब?”

38 तखन पतुस हनका सभ केँ कहलथिन, “अपन पशाताप कर आ पापक तमाक लेल अहाँ सभ मे सँ एक-एक गोटे यीशु मसीहक नाम सँ बपथतस् मा थलअ, तखन अहाँ सभ केँ पथरत आत् माक ररदान भेटत।” 39 थकएक तँ ई पथतजा अहाँ सभ, अहाँ सभक सन् तान सभ आ दू र-दू रक सभ लोकक लेल अथछ, जकरा सभ हमरा सभक परमेश् रर पभु बजौताह। 40 ओ आरो बहत रास बात सभक संग गराही दे लथन आ आगह कयलथन जे , “एथह अशुभ पीढी सँ अपना केँ बचाउ।” 41 तखन जे सभ हनकर रचन केँ खुशी-खुशी गहम कयलथन, से सभ बपथतस् मा लेलथन। 42 ओ सभ पेररत सभक थशता आ संगथत मे, रोटी तोडबा मे आ पाि्ना मे अथ्ग रहलाह। 43 सभ लोक पर भय भऽ गेल आ पेररत सभक दारा बहत रास चमत् कार आ थचन् त सभ कयल गेल। 44 थरश् रास करऽ रला सभ एक संग रहऽ रला सभ बात एक समान छल। 45 ओ सभ अपन सम् पथत आ सम् पथत बेथच कऽ सभ लोकक लेल बाँ थट दे लथिन। 46 ओ सभ थदन-पथतथदन एक-मने मन् थदर मे रहै त छलाह आ घर-घर रोटी तोडै त छलाह आ हष् आ मोन सँ एक-एकटा भऽ कऽ भोजन करै त छलाह। 47 परमेश् ररक सुथत करब आ सभ लोकक अनुगह करब। आ पभु मम् ्ली मे रोज एहन जोड दै त छलाह जेकरा उदार भेटबाक चाही। अधार 3 1 पतुस आ यूहन् ना पाि्नाक समय मे एक संग मन् थदर मे चथल गेलाह। 2 मायक कोखख सँ एकटा लंगडा आदमी केँ लऽ कऽ गेल छल, जकरा ओ सभ मख्र मे परेश करय बला सभ सँ थभता माँ गबाक लेल थनत मख्रक दार पर सुता दै त छल जे सु्र कहल जाइत अथछ। 3 ओ पतुस आ यूहन् ना केँ मन् थदर मे जायबला दे खख थभता मंगलथन। 4 पतुस यूहन् नाक संग हनका पर नजरर गडौने कहलथिन, “हमरा सभ केँ दे खू।” 5 ओ हनका सभ सँ थकछु भेटबाक आशा मे हनका सभक बात पर धान दे लथन। 6 तखन पतुस कहलथिन, “हमरा लग चानी आ सोना नथह अथछ। मुदा जे हमरा लग अथछ से हम अहाँ केँ दऽ दै त छी। 7 यीशु हनकर दथहना हाि पकथड कऽ ऊपर उठौलथिन, तखने हनकर पएर आ टखने मे बल भेथट गेलथन। 8 ओ कूथद कऽ ठाढ भऽ गेलाह आ हनका सभक संग मन् थदर मे परेश कयलथन, चलैत-उछथल कऽ परमेश् ररक सुथत करै त। 9 सभ लोक हनका चलैत आ परमेश् ररक सुथत करै त दे खलक। 10 ओ सभ बुथझ गेल जे मख्रक सु्र िाटक पर थभताक लेल बैसल रैह छथि। 11 जखन ओ लंगडा ठीक भेल छल, पतुस आ यूहन् ना केँ पकडने छल, तखन सभ लोक बहत आशय्चथकत भऽ कऽ सुलेमानक ओसारा मे दौडल गेल।

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पेररत सभक काज

12 पतुस ई दे खख लोक सभ केँ कहलथिन, “हे इसाएलक लोक सभ, अहाँ सभ एथह बात पर थकएक आशय्चथकत छी? रा अहाँ सभ हमरा सभ केँ एतेक गंभीरता सँ थकएक दे खैत छी जेना हम सभ अपन सामि्​् य रा पथरतता सँ एथह आदमी केँ चलय दे लहँ ? 13 अबाहम, इसहाक आ याकूबक परमेश् रर, जे हमरा सभक पूर्जक परमेश् रर छथि, अपन पुत यीशुक मथहमा कयलथन। अहाँ सभ ओकरा छोथड दे लहँ आ थपलातुसक समत हनका छोथड दे बथन। 14 मुदा अहाँ सभ पथरत आ धम् केँ असीकार कयलहँ आ चाहै त छलहँ जे अहाँ सभ केँ एकटा हतारा दे ल जाय। 15 ओ जीरनक राजकुमार केँ मारर दे लथिन, जकरा परमेश् रर मृत् यु मे सँ थजया दे ने छथि। जकर हम सभ गराह छी। 16 हनकर नाम पर थरश् रासक कारमे ँ हनकर नाम एथह आदमी केँ मजगूत बना दे लकथन, जकरा अहाँ सभ दे खैत छी आ जनैत छी। 17 आब, भाइ लोकथन, हमरा बुझल अथछ जे अहाँ सभ अजानताक कारमे ँ ई काज केलहँ , जेना अहाँ सभक शासक सभ सेहो कयलथन। 18 मुदा जे बात परमेश् रर पथहने अपन सभ परक् ता सभक मुँह सँ कहने छलाह जे मसीह केँ कष् ट भोगय पडतथन से ओ पूरा कयलथन। 19 ते ँ अहाँ सभ पशाताप कर आ धम् परररत्न कर जाथह सँ अहाँ सभक पाप मेटाओल जाय, जखन पभुक साथनध सँ आरामक समय आथब जायत। 20 ओ यीशु मसीह केँ पठौताह जे पथहने अहाँ सभ केँ पचार कयल गेल छल। 21 परमेश् रर संसारक पाराथह सँ अपन सभ पथरत परक् ता सभक मुँह सँ कहने छथि, ताबत धरर स् रग् केँ हनका सभ केँ गहम करबाक चाही। 22 मूसा पूर्ज सभ केँ सत् य कहने छलाह जे , “अहाँ सभक परमेश् रर अहाँ सभक भाय सभ मे सँ हमरा सन एकटा परक् ता ठाढ करताह। ओ जे थकछु कहताह से अहाँ सभ हनका सुनब।” 23 जे सभ परक् ताक बात नथह सुनत, से लोक सभक बीच सँ नष भऽ जायत। 24 हँ , शमूएल सँ आ ओकर बादक सभ परक् ता सभ सेहो एथह थदन सभक बात कहने छथि। 25 अहाँ सभ परक् ता सभक सन् तान छी आ ओथह राचा सभक सन् तान छी जे परमेश् रर हमरा सभक पूर्ज सभक संग अबाहम केँ कहलथिन, “अहाँ क रंशज मे पृि् रीक सभ जाथत धन होयत।” 26 परमेश् रर अपन पुत यीशु केँ जीथब कऽ पथहने अहाँ सभ लग पठौलथन जे अहाँ सभ मे सँ एक-एक गोटे केँ अपन अपराध सँ दू र कऽ दे लथिन।

4 मुदा रचन सुनथनहार मे सँ बहतो लोक थरश् रास कयलथन। ओथह आदमी सभक संखा करीब पाँ च हजार छल। 5 दोसर थदन हनका सभक शासक, बुजुग् आ शासी सभ। 6 महापुरोथहत हना, कैिा, यूहन् ना, थसक्र आ महापुरोथहतक पररजन सभ यरशलेम मे जमा भ’ गेल छलाह। 7 ओ सभ ओकरा सभ केँ बीच मे बैसा कऽ पुछलथिन, “अहाँ सभ कोन सामि्​् य सँ रा कोन नाम सँ ई काज केलहँ ?” 8 तखन पतुस पथरत आत् मा सँ भरल हनका सभ केँ कहलथिन, “हे लोक सभक शासक आ इसाएलक बूढ सभ। 9 जँ आइ हमरा सभ केँ ओथह नपुंसक संग कयल गेल नीक काजक परीतम कयल जाय तँ ओ कोन तरहे ँ सस भऽ गेल अथछ। 10 अहाँ सभ आ इसाएलक समस लोक केँ ई बुझल रहय जे नासरतक यीशु मसीहक नाम सँ, थजनका अहाँ सभ कूस पर चढा दे लहँ , थजनका परमेश् रर मृत् यु मे सँ थजया दे लथन, हनका दारा ई आदमी एतय अहाँ सभक सोझाँ सस अथछ। 11 ई ओ पािर अथछ जे अहाँ सभ बनौथनहार सभ दारा थकछु नथह कयल गेल छल, जे कोनक थसर बथन गेल अथछ। 12 आ ने कोनो आन मे उदार नथह अथछ, थकएक तँ स् रग्क नीचाँ मनुष् य मे कोनो आन नाम नथह दे ल गेल अथछ जाथह सँ हमरा सभ केँ उदार भेटबाक चाही। 13 ओ सभ पतुस आ यूहन् नाक साहस दे खख कऽ बुथझ गेल जे ओ सभ अथशथतत आ अजानी लोक छथि, तखन ओ सभ आशय्चथकत भऽ गेलाह। ओ सभ हनका सभ केँ बुथझ गेलाह जे ओ सभ यीशुक संग छथि। 14 ओ सभ ठीक भेल आदमी केँ हनका सभक संग ठाढ दे खख कऽ ओ सभ एथह बातक थररोध मे थकछु नथह कथह सकलाह। 15 मुदा ओ सभ हनका सभ केँ पररषद् सँ बाहर थनकलबाक आजा दे लथिन। 16 ओ कहलथिन, “हमरा सभ एथह लोक सभक की करब?” कारम, यरशलेम मे रहथनहार सभ लोक केँ ई सष अथछ जे हनका सभक दारा एकटा उलेखनीय चमतार कयल गेल अथछ। आ हम सभ एकरा नकारर नथह सकैत छी। 17 मुदा लोक मे ई बात आओर नथह पसरर जाय, ताथह लेल हम सभ ओकरा सभ केँ कडा धमकी दी जे आब सँ ओ सभ एथह नाम सँ ककरो सँ नथह बाजथि। 18 ओ सभ हनका सभ केँ बजा कऽ हनका सभ केँ आजा दे लथिन जे यीशुक नाम सँ एकदम नथह बाजथि आ ने थसखाउ। 19 पतुस आ यूहन् ना हनका सभ केँ उतर दे लथिन, “परमेश् ररक नजरर मे परमेश् रर सँ बेसी अहाँ सभक बात सुनब उथचत अथछ थक नथह, तँ अहाँ सभ नाय कर।” 20 हम सभ जे दे खलहँ आ सुनलहँ से नथह बाथज सकैत छी। 21 तखन ओ सभ ओकरा सभ केँ आरो धमकबैत ओकरा सभ केँ छोथड दे लक, मुदा लोक सभक कारमे ँ ओकरा सभ केँ कोनो तरहक सजाय नथह भेटलैक। 22 ओ आदमी चालीस रष् सँ बेसी उमक छल, जकरा पर ई चमतार कयल गेल छल। 23 छोथड कऽ ओ सभ अपन-अपन दल मे जा कऽ मुख् यपुरोथहत सभ आ बूढ-पुरान सभ दारा कहल गेल सभ बातक सूचना दे लथिन। 24 ई बात सुथन ओ सभ एक मोन मे परमेश् रर थदस आराज उठा कऽ कहलथिन, “पभु, अहाँ परमेश् रर छी जे स् रग्, पृि् री, समुद आ ओथह मे जे थकछु अथछ, तकरा बनौने छी।

अधार 4 1 जखन ओ सभ लोक सभ सँ गप करै त छलाह तखन पुरोथहत सभ, मन् थदरक सेनापथत आ सदु की सभ हनका सभ पर आथब गेलाह। 2 ओ सभ दु खी भेलाह जे ओ सभ लोक सभ केँ थसखबैत छलाह आ यीशुक दारा मृत् यु मे सँ जीथब उठबाक पचार कयलथन। 3 ओ सभ ओकरा सभ पर हाि राखख कऽ दोसर थदन धरर ओकरा सभ केँ रोथक दे लक।

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पेररत सभक काज

25 ओ अहाँ क सेरक दाऊदक मुँह सँ कहलथिन जे , “जाथत-जाथत सभ थकएक कोथधत भेल आ लोक सभ वि्क कलना थकएक कयलक?” 26 पृि् रीक राजा सभ ठाढ भऽ गेलाह आ शासक सभ पभु आ हनकर मसीहक थररद एक ठाम जमा भऽ गेलाह। 27 सच मे अहाँ क पथरत सनान यीशुक थररद, जकरा अहाँ अथभषेक केने छी, हे रोदे स आ पोखनयुस थपलातुस, गैर-यहदी आ इसाएलक लोक सभ एक ठाम जमा भऽ गेल छलाह। 28 थकएक तँ जे थकछु अहाँ क हाि आ अहाँ क सलाह पथहने थनधा् ररत कएने छल, से पूरा करबाक लेल। 29 आब हे पभु, हनका सभक धमकैत दे खू, आ अपन सेरक सभ केँ ई अनुमथत दऽ थदयौक जे ओ सभ थनभ्कता सँ अहाँ क रचन बाजथि। 30 ठीक करबाक लेल अपन हाि पसारर कऽ। आ अहाँ क पथरत संतान यीशुक नाम सँ थचन् त आ चमत् कार कयल जाय। 31 ओ सभ पाि्ना कऽ कऽ ओ जगह थहल गेल। ओ सभ पथरत आत् मा सँ भरर गेल छलाह आ परमेश् ररक रचन थनभ्कता सँ बजैत छलाह। 32 थरश् रास करथनहार सभक भीड एक हदय आ एक पामी छल। मुदा दु नूक सभटा बात समान छल। 33 पेररत सभ बहत सामि्​् य सँ पभु यीशुक पुनरुानक गराही दे लथन। 34 ओ सभ मे सँ थकयो कमी नथह छल, थकएक तँ जे सभ जमीन रा घरक माथलक छल, से सभ ओकरा बेथच कऽ बेचल गेल रसुक दाम अनैत छल। 35 ओ सभ ओकरा सभ केँ पेररत सभक पएर लग राखख दे लथिन। 36 योसेस, जे पेररत सभक दारा बरनबास नाम दे ल गेल छल, जे लेरी आ साइपस दे शक छल। 37 जमीन छलथन ओ बेथच कऽ ओ पाइ आथन कऽ पेररत सभक पएर मे राखख दे लथन।

9 तखन पतुस हनका पुछलथिन, “अहाँ सभ पभुक आत् मा केँ परीता दे बाक लेल कोना सहमत भेलहँ?” दे खू, अहाँ क पथतक गाथड दे थनहार सभक पएर दरबजा पर अथछ आ अहाँ केँ बाहर लऽ जायत।” 10 तखन ओ तुरन हनकर पएर पर खथस पडलीह आ भूत केँ छोथड दे लथन, तखन युरक सभ भीतर आथब हनका मृत पाथब गेलाह आ हनका लऽ कऽ हनका पथतक लग गाथड दे लथन। 11 सभ मम् ्लीक लोक आ ई सभ बात सुनथनहार सभ केँ बहत भय भऽ गेल। 12 पेररत सभक हाि सँ लोक सभक बीच बहत रास थचन् त आ चमत् कार कयल गेल। (आओर सभ गोटे एक-मने सुलेमानक ओसारा मे छलाह।” 13 बाँ की सभ मे सँ केओ ओकरा सभक संग जुडबाक साहस नथह केलक, मुदा लोक सभ ओकरा सभक आदर-सतार कयलक। 14 थरश् रासी सभ पभुक पथत बेसी बथढ गेलाह, सी-पुरषक भीड।” 15 ओ सभ बीमार सभ केँ सडक पर लऽ कऽ ओछाओन आ पलंग पर सुता दे लक जे कम सँ कम ओथह ठाम सँ गुजरै त पतुसक छाया हनका सभ मे सँ थकछु गोटे केँ छाँ थक सकय। 16 यरशलेमक चार कातक नगर सभ सँ भीड आथब कऽ बीमार लोक सभ आ अशुद आत् मा सँ तस लोक सभ केँ अनलक। 17 तखन महापुरोथहत आ हनकर संग रहथनहार सभ लोक सभ उथठ कऽ आकोथशत भऽ गेलाह। 18 ओ सभ पेररत सभ पर हाि राखख कऽ हनका सभ केँ सार्भौथमक जेल मे राखख दे लथिन। 19 परमेश् ररक स् रग्दूत राथत मे जेलक दरबजा खोथल कऽ ओकरा सभ केँ बाहर थनकाथल कऽ कहलथिन। 20 जाउ, मन् थदर मे ठाढ भऽ कऽ लोक सभ केँ एथह जीरनक सभटा रचन बाजू। 21 ई बात सुथन ओ सभ भोरे -भोर मन् थदर मे परेश कऽ कऽ थशता दे बऽ लगलाह। मुदा महापुरोथहत आ हनका संग रहथनहार सभ आथब कऽ पररषद् आ इसाएलक समस मं्ली केँ बजा कऽ जेल मे पठा दे लथिन जे हनका सभ केँ आनय। 22 मुदा जखन अथधकारी सभ आथब कऽ जेल मे हनका सभ केँ नथह भेटलथन तँ ओ सभ घुरर कऽ कहलथिन। 23 ओ कहलथिन, “जेल मे हमरा सभ केँ सते सुरथतत रप सँ ब् भऽ गेल, आ पहरे दार सभ बाहर दरबजा सभक सोझाँ ठाढ भऽ गेल। 24 जखन महापुरोथहत आ मन् थदरक सेनापथत आ मुख् यपुरोथहत सभ ई बात सुथन कऽ हनका सभ केँ शंका भेलथन जे ई बात कोन तरहे ँ बथढ जायत। 25 तखन एक गोटे आथब कऽ हनका सभ केँ कहलथिन, “दे खू, जे लोक सभ केँ अहाँ सभ जेल मे राखख दे लहँ , से सभ मन् थदर मे ठाढ भऽ लोक सभ केँ थशता दऽ रहल छथि।” 26 तखन सेनापथत अिसर सभक संग जा कऽ ओकरा सभ केँ थबना कोनो थहं सा केँ अनलक। 27 ओ सभ ओकरा सभ केँ आथन कऽ पररषद् क समत राखख दे लक। 28 ओ कहलथिन, “की हम सभ अहाँ सभ केँ कडा आजा नथह दे थलयैक जे अहाँ सभ एथह नाम सँ थशता नथह थदयौक?” दे खू,

अधार 5 1 मुदा अनथनया नामक एक आदमी अपन पती सिीराक संग अपन समथत बेथच दे लक। 2 ओ दाम मे सँ थकछु भाग केँ राखख कऽ हनकर पती केँ सेहो जानकारी छलथन। 3 पतुस कहलथिन, “अनथनयाह, पथरत आत् मा सँ झूठ बाजबाक लेल शैतान अहाँ क मोन केँ थकएक भरर दे लक आ दे शक दाम मे सँ थकछु भाग केँ रोथक लेलक?” 4 जाबत धरर ओ रहल छल, की ओ अहाँ क अपन नथह छल? बेचलाक बाद की ई अहाँ क अपन अथधकार मे नथह छल? अहाँ अपन मोन मे ई बात थकएक गभ् मे रखने छी? अहाँ मनुष् यक संग नथह, बल् थक परमेश् रर सँ झूठ बाजल छी। 5 अनथनया ई बात सुथन कऽ खथस पडलाह आ पाम छोथड दे लथन। 6 युरक सभ उथठ कऽ ओकरा घायल कऽ कऽ बाहर लऽ कऽ गाथड दे लक। 7 लगभग तीन घंटाक बाद हनकर पती केँ ई नथह बुझल छलथन जे की भेल छलथन। 8 पतुस हनका उतर दे लथिन, “हमरा कह जे अहाँ सभ ओथह जमीन केँ एतेक दाम मे बेथच दे लहँ ?” ओ बजलीह, “हँ , एतेक बातक लेल।”

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पेररत सभक काज

अहाँ सभ यरशलेम केँ अपन थशता सँ भरर दे लहँ आ एथह आदमीक खून हमरा सभ पर अनबाक इरादा रखैत छी। 29 तखन पतुस आ आन पेररत सभ उतर दे लथिन, “हमरा सभ केँ मनुष् य सँ बेसी परमेश् ररक आजा मानबाक चाही।” 30 हमरा सभक पूर्ज सभक परमेश् रर यीशु केँ जीथब उठौलथन, जकरा अहाँ सभ मारर कऽ गाछ पर लटका दे लहँ । 31 परमेश् रर हनका अपन दथहना हाि सँ एकटा राजकुमार आ उदारकता् बथन कऽ ऊपर उठौलथन, जाथह सँ ओ इसाएल केँ पशाताप करथि आ पापक तमा करथि। 32 हम सभ हनकर गराह छी। आ पथरत आत् मा सेहो, थजनका परमेश् रर हनकर आजा मानथनहार सभ केँ दे ने छथि। 33 ई बात सुथन कऽ ओ सभ मोन मे खखथसया गेलाह आ ओकरा सभ केँ मारर दे बाक लेल थरश् रास कयलथन। 34 तखन पररषद् मे एकटा िरीसी गमलीएल नामक एकटा िरीसी ठाढ भऽ गेलाह, जे सभ लोकक बीच पथतथित छलाह। 35 ओ सभ हनका सभ केँ कहलथिन, “हे इसाएलक लोक सभ, अहाँ सभ एथह लोक सभक संबंध मे की करय चाहै त छी, से अपना केँ सारधान रह।” 36 एथह थदन सभ सँ पथहने थूदास उथठ कऽ अपना केँ थकयोक रप मे घमं् करै त उठलाह। हनका सभक संग करीब चारर सय लोक सभ थमथल गेलाह। जे सभ हनकर आजा मानैत छल, सभ थततर-थबतर भऽ गेल आ अन भऽ गेल। 37 एकर बाद करक समय मे गलीलक यहदा उठलाह आ बहत लोक केँ हनका पाछाँ खीच ं लेलथन। आ सभ, जे सभ हनकर आजा मानैत छल, थततर-थबतर भ' गेल। 38 आब हम अहाँ सभ केँ कहै त छी जे , एथह लोक सभ सँ परहे ज कर आ ओकरा सभ केँ छोथड थदयौक। 39 मुदा जँ ई परमेश् ररक अथछ तँ अहाँ सभ ओकरा उखाथड नथह सकैत छी। कही ं अहाँ सभ परमेश् ररक संग लडय मे सेहो नथह भेथट जायब।” 40 ओ सभ हनका सँ सहमत भऽ गेलाह। 41 ओ सभ थरश्‍रासक समत सँ हथष्त भऽ गेलाह जे हनका सभ केँ हनकर नामक कारमे ँ लखजत करबाक योग मानल गेलथन। 42 ओ सभ थदन मन् थदर मे आ घर-घर मे यीशु मसीहक थशता आ पचार करब नथह छोडै त छलाह।

6 ओ सभ हनका सभ केँ पेररत सभक समत राखख दे लथिन। 7 परमेश् ररक रचन बढै त गेल। यरशलेम मे थशष् य सभक संखा बहत बथढ गेल। आ पुरोथहत सभक एकटा पैघ दल थरश् रासक आजाकारी छल। 8 थरश् रास आ सामि्​् य सँ भरल कीिन लोक सभक बीच बहत पैघ आशय् आ चमत् कार कयलथन। 9 तखन थकछु लोक सभाघर, जकरा मुखकनी सभक सभाघर कहल जाइत अथछ, कुरे थनयाक लोक, थसक्ररयाक लोक आ थकथलथसया आ एथशयाक लोक सभ मे सँ थकछु लोक उथठ कऽ कीिन सँ थरराद कयलथन। 10 ओ सभ ओथह बुखद आ आत् माक थररोध नथह कऽ सकलाह जाथह सँ ओ बजैत छलाह। 11 तखन ओ सभ लोक सभ केँ ्ाँ थट दे लकथन जे , “हम सभ हनका मूसा आ परमेश् ररक थररद थन्ा बजैत सुनने छी।” 12 ओ सभ लोक सभ, बूढ-पुरान सभ आ शासी सभ केँ भडका दे लक आ हनका पर आथब कऽ हनका पकथड कऽ पररषद् मे लऽ गेलथन। 13 ओ झूठ गराह सभ केँ ठाढ कऽ कऽ कहलक जे, “ई आदमी एथह पथरत सान आ धम् -थनयमक थररद थन्ा करब नथह छोडै त अथछ। “ 15 पररषद् मे बैसल सभ लोक हनका थदस तकैत हनका थदस तकलथन। अधार 7 1 तखन महापुरोथहत पुछलथिन, “की ई सभ बात एहन अथछ?” 2 ओ कहलथिन, “हे भाय सभ, आ बाप-बाप सभ, सुनू। मथहमा के परमेश् रर हमरा सभक पूर्ज अबाहम मेसोपोटाथमया मे रहलाह, तखन ओ चरन मे रहबा सँ पथहने पगट भेलाह। 3 ओ हनका कहलथिन, “अहाँ अपन दे श आ अपन पररजन सँ बाहर थनकथल जाउ, जाथह दे श मे हम अहाँ केँ दे खा दे ब।” 4 तखन ओ कलीक दे श सँ थनकथल कऽ चरन मे रथह गेलाह आ ओतऽ सँ जखन हनकर थपता मरर गेलाह तखन हनका एथह दे श मे ल’ गेलाह, जाथह मे अहाँ सभ एखन रहै त छी। 5 ओ ओकरा ओथह मे कोनो उतराथधकार नथह दे लथिन, एतेक तक जे ओ अपन पैर राखख सकैत छलाह, मुदा ओ रचन दे लथिन जे ओ ओकरा समथतक रप मे आ ओकर बादक रंशज केँ दे बथन, जखन थक हनका एखन धरर कोनो संतान नथह छलथन . 6 परमेश् रर एथह तरहे ँ कहलथिन, “ओकर रंशज परदे श मे रहय। ओ सभ चारर सय रष् धरर ओकरा सभ केँ गुलाम बना कऽ ओकरा सभ सँ बुराई करथि। 7 परमेश् रर कहलथन जे , जकरा ओ सभ दास बनत, तकरा हम नाय करब। 8 ओ हनका खतनाक राचा दे लथिन, आ अबाहम इसहाकक जन दे लथन आ आठम थदन हनकर खतना कयलथन। इसहाकक जन याकूब भेलथन। आ याकूब बारह टा कुलपथतक जन दे लथन। 9 कुलपथत सभ ईषा् कऽ कऽ यूसुि केँ थमस दे श मे बेथच दे लथिन, मुदा परमेश् रर हनका संग छलाह। 10 ओ हनका अपन सभ दु ःख सँ मुक कऽ दे लथिन आ थमसक राजा थिरौनक समत हनका अनुगह आ बुखद दे लथन। ओ ओकरा थमस आ ओकर समस घरक राजपाल बना दे लक। 11 पूरा थमस आ कनान दे श मे कमी आ बहत कष आथब गेल।

अधार 6 1 ओथह समय मे जखन थशष् य सभक संखा बथढ गेल तँ यूनानी सभ इबानी सभक थररद गुनगुनाहथट उठल, कारम ओकर सभक थरधरा सभ थनत सेरा मे उपेता कयल गेल छल। 2 तखन बारह गोटे थशष् य सभक भीड केँ बजा कऽ कहलथिन, “ई कोनो कारम नथह जे हम सभ परमेश् ररक रचन छोथड कऽ टे बुल परोसब।” 3 ते ँ यौ भाइ लोकथन, अहाँ सभ अपना सभक बीच पथरत आत् मा आ बुखद सँ भरल सातटा लोक केँ दे खू, थजनका हम सभ एथह काज मे थनयुखक कऽ सकैत छी। 4 मुदा हम सभ सथदखन पाि्ना आ रचनक सेरा मे अपना केँ समथप्त करब। 5 ओ सभ ई बात सभ लोक केँ नीक लागल आ ओ सभ थरश् रास आ पथरत आत् मा सँ भरल कीिन केँ चुनलथन, थिथलपुस, पोकोरस, थनकानोर, थतमोन, परमेनास आ थनकोलस जे अनाथकयाक धम् परररत्न कयलथन।

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पेररत सभक काज

12 मुदा जखन याकूब सुनलथन जे थमस मे धान अथछ, तखन ओ पथहने हमरा सभक पूर्ज केँ पठा दे लथन। 13 दोसर बेर यूसुि केँ अपन भाय सभ केँ जात कयल गेलथन। यूसुिक पररजन केँ थिरौन केँ बताओल गेलथन। 14 तखन यूसुि केँ पठौलथन जे ओ अपन थपता याकूब आ ओकर सभ पररजन केँ अपना लग बजौलथन। 15 तखन याकूब थमस दे श जा कऽ ओ आ हमरा सभक पूर्ज सभ मरर गेलाह। 16 ओ सभ थसकेम मे लऽ जा कऽ ओथह कब मे राखख दे ल गेल जे अबाहम थसकेमक थपता एमोरक पुत सभ सँ पाइ मे कीनने छलाह। 17 मुदा जखन परमेश् रर अबाहमक पथतजाक समय लग आथब गेल तँ थमस मे लोक सभ बथढ गेल आ बथढ गेल। 18 जाबत धरर दोसर राजा नथह उठलाह जे यूसुि केँ नथह थचनै त छल। 19 ओ हमरा सभक पररजन सभक संग छल-पपंच करै त छल आ हमरा सभक पूर्ज सभ सँ अधलाह थरनती करै त छल जे ओ सभ अपन छोट-छोट बचा सभ केँ बाहर थनकाथल दे लक जाथह सँ ओ सभ जीथरत नथह रहय। 20 ओथह समय मे मूसाक जन भेलथन आ ओ बहत सु्र छलाह आ तीन मास धरर अपन थपताक घर मे पोसलाह। 21 जखन हनका बाहर थनकालल गेलथन तखन थिरौनक बेटी हनका लऽ कऽ अपन बेटाक लेल पोसलीह। 22 मूसा थमसक सभ बुखद मे थरदान छलाह आ बात आ काज मे पराकमी छलाह। 23 जखन ओ चालीस रष्क भऽ गेलाह तखन हनका मोन मे आथब गेलथन जे ओ अपन भाय इसाएलक सन् तान सभ सँ भेट करथि। 24 हनका सभ मे सँ एक गोटे केँ दु ष् ट कष होइत दे खख ओ हनकर बचार कयलथन आ दबलल लोकक बदला लेलथन आ थमसरासी केँ मारर दे लथन। 25 थकएक तँ ओ सोचैत छलाह जे हनकर भाय सभ ई बुथझ लेताह जे परमेश् रर हनका सभ केँ कोना उदार करै त छथि। 26 दोसर थदन ओ हनका सभ केँ झगडा करै त अपना केँ दे खा दे लथिन आ हनका सभ केँ िेर सँ एक भ’ क’ कहय चाहै त छलाह जे , “हे माथलक, अहाँ सभ भाइ सभ छी। अहाँ सभ एक दोसरा पर थकएक अनाय करै त छी? 27 मुदा जे अपन पडोसी पर अधलाह केने छल, ओकरा भगा दे लक आ कहलक जे , “अहाँ केँ हमरा सभक पर शासक आ नायाधीश के बनौलक?” 28 की अहाँ हमरा मारर दे ब जेना काख् थमसरासी केँ मारने रही? 29 एथह बात सुथन मूसा भाथग गेलाह आ मदीन दे श मे परदे शी भऽ गेलाह, जतय हनका दू टा बेटा भेलथन। 30 चालीस रष् बीतला पर सीना पर्तक जंगल मे पभुक एकटा स् रग्दूत झाडी मे आथग मे आथग मे दश्न कयलथन। 31 मूसा ई दे खख कऽ ई दे खख आशय्चथकत भऽ गेलाह। 32 ओ कहलथन, “हम अहाँ क पूर्ज सभक परमेश् रर छी, अबाहमक परमेश् रर, इसहाक आ याकूबक परमेश् रर छी।” तखन मूसा काँ थप उठलाह, मुदा दे खबाक थहमत नथह भेलथन। 33 तखन परमेश् रर हनका कहलथिन, “अपन पएर सँ जूता उतार, थकएक तँ अहाँ जतऽ ठाढ छी से पथरत भूथम अथछ।” 34 हम दे खलहँ आ दे खलहँ जे थमस मे अपन पजाक कष केँ दे खलहँ आ हनका सभक कुहरब सुनलहँ आ ओकरा सभ केँ

उदार करबाक लेल उतरलहँ । आब आउ, हम अहाँ केँ थमस दे श पठा दे ब।” 35 एथह मूसा केँ ओ सभ असीकार कऽ कऽ कहलथिन, “अहाँ केँ के शासक आ नायाधीश बनौलथन?” रएह परमेश् रर झाडी मे पकट भेल स् रग्दूतक हाि सँ शासक आ उदारकता् बनय लेल पठौलथन। 36 ओ ओकरा सभ केँ बाहर अनलथन, जखन ओ थमस दे श मे , लाल सागर मे आ थनज्न मे चालीस रष् धरर चमतार आ थचन् त सभ केँ दे खौलथन। 37 ई ओ मूसा छथि जे इसाएलक सन् तान सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभक परमेश् रर अहाँ सभक भाय सभ मे सँ हमरा सन एकटा परक् ता ठाढ करताह। हनका सुनब। 38 ई ओ छथि जे मम् ्ली मे सीना पहाड पर हनका सँ गप करथनहार स् रग्दूत आ हमरा सभक पूर्ज सभक संग छलाह। 39 हमरा सभक पूर्ज हनका सभक आजा नथह मानैत छलाह, बल् थक हनका सभ केँ भगा दे लथिन आ हनका सभक मोन मे िेर थमस थदस घुरर गेलाह। 40 हारन केँ कहलथिन, “हमरा सभ केँ आगू बढबाक लेल दे रता बनाउ। 41 ओथह समय मे ओ सभ एकटा बछडा बनौलथन आ मूथत् केँ बथल चढबैत छलाह आ अपन हािक काज मे आनख्त होइत छलाह। 42 तखन परमेश् रर घुथम कऽ स् रग्क सेनाक आराधना करबाक लेल हनका सभ केँ छोथड दे लथन। जेना भथरषरका सभक पुसक मे थलखल अथछ, “हे इसाएलक घराना, की अहाँ सभ हमरा लेल जंगल मे चालीस रष्क समय मे मारल गेल पशु आ बथल चढा दे लहँ ?” 43 हँ, अहाँ सभ मोलोकक तमू आ अपन दे रता रे ्िानक तारा केँ लऽ गेलहँ जे अहाँ सभ ओकरा सभक आराधना करबाक लेल बनौने रही। 44 हमरा सभक पूर्ज सभ जंगल मे गराही दे बाक तमू केँ ओथहना रखने छलाह, जेना ओ मूसा सँ बजैत छलाह जे ओ दे खने छलाह, ओथहना बनाबथि। 45 हमरा सभक पूर्ज सभ सेहो यीशु केँ संग गैर-यहदी सभक अथधकार मे अनलथन, थजनका परमेश् रर हमरा सभक पूर्ज सभक सामने भगा दे लथन, दाऊदक समय धरर। 46 ओ परमेश् ररक समत अनुगह पाथब याकूबक परमेश् ररक लेल एकटा तम् बू ताकय चाहै त छलाह। 47 मुदा सुलेमान हनका लेल घर बनौलथन। 48 मुदा परमेश् रर हाि सँ बनल मन् थदर मे नथह रहै त छथि। जेना भथरषरका कहै त छथि। 49 स् रग् हमर थसंहासन अथछ आ धरती हमर पैरक आधार अथछ। पभु कहै त छथिन, रा हमर थरशामक सान की अथछ? 50 की हमर हाि ई सभ बात नथह बनौने अथछ? 51 अहाँ सभ कठोर गद् न आ कान मे खतना नथह कयल, अहाँ सभ सथदखन पथरत आत् माक थररोध करै त छी। 52 अहाँ सभक पूर्ज मे सँ कोन परक् ता केँ नथह सताओल गेल अथछ? ओ सभ ओथह सभ केँ मारर दे लक जे पथहने सँ धम् परमेश् ररक आगमनक सूचना दै त छल। अहाँ सभ आब हनका सभक धोखा दे बयरला आ हतारा बथन गेल छी। 53 ओ सभ स् रग्दूत सभक स् िान मे धम्-थनयम गहम कयलथन आ ओकर पालन नथह कयलथन। “

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पेररत सभक काज

55 मुदा ओ पथरत आत् मा सँ भरल भऽ कऽ स् रग् थदस तकलथन आ परमेश् ररक मथहमा आ यीशु केँ परमेश् ररक दथहना कात ठाढ दे खलथन। 56 ओ कहलथिन, “दे खू, हम आकाश खुजल दे खैत छी आ मनुष् य-पुत परमेश् ररक दथहना कात ठाढ अथछ।” 57 तखन ओ सभ जोर-जोर सँ थचथचया उठल आ कान रोथक कऽ एक मोन सँ हनका पर दौडल। 58 ओ ओकरा नगर सँ बाहर िेथक दे लक आ पािर मारर दे लक। 59 ओ सभ कीिन केँ पािर मारर कऽ परमेश् रर केँ पुकारै त कहलथिन, “पभु यीशु, हमर आत् मा गहम कर।” 60 ओ ठे हन टे कैत जोर-जोर सँ थचथचया उठलाह, “पभु , एथह पाप केँ हनका सभक थजमा नथह थदयौक।” ई कथह कऽ ओ सुथत गेलाह।

17 तखन ओ सभ हनका सभ पर हाि राखख पथरत आत् मा गहम कयलथन। 18 जखन थसमोन दे खलथन जे पेररत सभक हाि राखख कऽ पथरत आत् मा हनका सभ केँ पाइ चढा दे लथन। 19 ओ कहलथन, “हमरा ई सामथ् सेहो थदअ, जाथह सँ हम जकरा पर हाि राखब, ओ पथरत आत् मा पाथब सकय।” 20 पतुस ओकरा कहलथिन, “तोहर पाइ तोहर संग नष भऽ जाउ, थकएक तँ अहाँ सोचने छी जे परमेश् ररक ररदान पाइ सँ कीनल जा सकैत अथछ।” 21 एथह थरषय मे अहाँ क ने भाग अथछ आ ने भाग, थकएक तँ परमेश् ररक नजरर मे अहाँ क मोन ठीक नथह अथछ। 22 ते ँ अपन एथह दु षम् सँ पशाताप कर आ परमेश् रर सँ पाि्ना कर, जँ अहाँ क हदयक थरचार तमा भऽ जाय।” 23 हम बुझैत छी जे अहाँ कटु ताक थपत आ अधम्क बंधन मे छी। 24 तखन थसमोन उतर दे लथिन, “अहाँ सभ हमरा लेल पभु सँ पाि्ना कर जे अहाँ सभ जे कहलहँ ताथह मे सँ कोनो बात हमरा पर नथह आथब जाय।” 25 ओ सभ गराही दऽ कऽ पभुक रचन सुनौलथन आ यरशलेम घुरर कऽ सामरी लोकक बहतो गाम मे सुसमाचार पचार कयलथन। 26 परमेश् ररक स् रग्दूत थिथलपुस केँ कहलथिन, “उठू आ दथतम थदस ओथह बाट पर जाउ जे यरशलेम सँ गाजा धरर जाइत अथछ, जे मरभूथम अथछ।” 27 ओ उथठ कऽ चथल गेलाह, इथियोथपयाक एकटा इथियोथपयाक एकटा नपुंसक, जे इथियोथपयाक रानी क्ासीक अधीन छल, जे अपन सभटा धनक पभारी छल आ आराधना करबाक लेल यरशलेम आयल छल। 28 ओ घुरर कऽ अपन रि मे बैसल यशायाह परक् ता केँ पढलथन। 29 तखन आत् मा थिथलपुस केँ कहलथिन, “आप जाउ आ एथह रि मे जुडू।” 30 थिथलपुस हनका लग दौडल गेलाह आ हनका यशायाह भथरषरका केँ पढै त सुनलथन आ कहलथिन, “की अहाँ जे पढै त छी से बुझैत छी?” 31 ओ पुछलथिन, “हम कोना कऽ सकब, जाबत धरर केओ हमरा माग्दश्न नथह करत?” ओ थिथलपुसक इचा केलथन जे ओ ऊपर आथब हनका संग बैसथि। 32 ओ धम्शास् तक स् िान ई छल, “ओ भेड ँ ा जकाँ रधक लेल लऽ गेलाह। ओ अपन कातरथनहारक सामने गूंग मेमना जकाँ मुँह नथह खोललक। 33 अपमाथनत भेला पर हनकर न् याय हथट गेलथन। थकएक तँ ओकर पाम पृि् रीसँ हथट गेल अथछ। 34 ओ नपुंसक थिथलपुस केँ उतर दे लथिन, “पाि्ना अथछ, भथरषरका ई बात केकर कहै त छथि?” अपन, आथक कोनो आन आदमीक? 35 तखन थिथलपुस अपन मुँह खोथल कऽ ओही धम्शास् त सँ शुर कयलथन आ हनका यीशुक पचार कयलथन। 36 जखन ओ सभ जाइत काल एकटा पाथन लग पहँ चलाह, तखन ओ नपुंसक कहलथिन, “दे खू, एतय पाथन अथछ। हमरा बपथतस् मा लेबय मे की बाधा उतन करै त अथछ?

अधार 8 1 साउल अपन मृतुक लेल सहमथत दऽ रहल छलाह। ओथह समय मे यरशलेम मे मम् ्ली पर बहत पताडना भेल। ओ सभ पेररत सभ केँ छोथड यहथदया आ सामररया पदे श मे थछथडया गेल छल। 2 धम्परायम लोक सभ कीिन केँ दिनाबऽ लेल लऽ गेलाह आ हनका पर बहत थरलाप कयलथन। 3 साउलक थरषय मे ओ मम् ्ली केँ थरनाश कयलथन, घर-घर मे घुथस कऽ सी-पुरष केँ मारर कऽ जेल मे राखख दे लथन। 4 एथह लेल जे सभ थततर-थबतर भऽ गेल छल, सभ ओतह सभ रचनक पचार करै त गेलाह। 5 तखन थिथलपुस सामररया नगर मे जा कऽ हनका सभ केँ मसीहक पचार कयलथन। 6 थिथलपुसक चमतार सुथन आ दे खख लोक सभ एक-मने ओथह बात सभ पर धान दे लक। 7 थकएक तँ बहतो लोक सभ मे सँ अशुद आत् मा सभ जोर-जोर सँ थचथचयाइत छल। 8 ओथह नगर मे बहत आन् भेल। 9 मुदा थसमोन नामक एक आदमी छल, जे पथहने ओही नगर मे जादू -टोना करै त छल आ सामररयाक लोक सभ केँ जादू -टोना करै त छल आ अपना केँ कोनो पैघ मानैत छल। 10 ओ सभ छोट-छोट सँ पैघ-पैघ धरर हनका सभक बात मानैत रहलाह जे, “ई आदमी परमेश् ररक महान सामि्​् य छथि।” 11 ओ सभ हनका सभक पथत आदर करै त छलाह, थकएक तँ ओ बहत थदन सँ हनका सभ केँ जादू -टोना करै त छलथन। 12 मुदा जखन ओ सभ थिथलपुस परमेश् ररक राज् य आ यीशु मसीहक नामक थरषय मे पचार करै त थरश् रास कयलथन, तखन ओ सभ सी-पुरष बपथतस् मा लेलथन। 13 तखन थसमोन सयं सेहो थरश् रास कयलथन आ बपथतस् मा लेला पर ओ थिथलपुसक संग रथह गेलाह। 14 जखन यरशलेम मे रहथनहार पेररत सभ सुनलथन जे सामररया परमेश् ररक रचन गहम कऽ लेने अथछ, तखन ओ सभ पतुस आ यूहन् ना हनका सभ लग पठौलथन। 15 ओ सभ उतरर कऽ हनका सभक लेल पाि्ना कयलथन जाथह सँ ओ सभ पथरत आत् मा गहम करथि। 16 (थकएक तँ एखन धरर ओ हनका सभ मे सँ थकनको पर नथह खसल छल।”

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पेररत सभक काज

37 थिथलपुस कहलथिन, “जँ अहाँ सभ मोन सँ थरश् रास करै त छी तँ अहाँ थरश् रास कऽ सकैत छी।” ओ उतर दे लथिन, “हमरा थरशास अथछ जे यीशु मसीह परमेश् ररक पुत छथि।” 38 ओ रि केँ ठाढ रहबाक आजा दे लथिन, तखन ओ सभ थिथलप आ नपुंसक दु नू गोटे पाथन मे उतरर गेलाह। ओ हनका बपथतस् मा दे लथिन। 39 जखन ओ सभ पाथन सँ बाहर थनकललाह तँ परमेश् ररक आत् मा थिथलप केँ लऽ गेलाह, जाथह सँ ओ नपुंसक हनका िेर नथह दे खख सकलाह। 40 थिथलपुस अजोत मे भेटलाह, ओ सभ नगर मे जाबत कैसररया नथह पहँ चलाह ताबत धरर पचार करै त रहलाह।

16 हम हनका ई दे खा दे बथन जे हमरा नामक लेल हनका कतेक पैघ कष भोगय पडतथन। 17 अननाह जा कऽ घर मे परेश कयलथन। ओ हनका पर हाि राखख कहलथिन, “भय साउल, पभु, यीशु, जे अहाँ अबैत काल बाट मे पकट भेलाह, हमरा पठौलथन जे अहाँ अपन दथष पाथब पथरत आत् मा सँ भरल रहब।” 18 तुरन हनकर आँ खख सँ तराजू जकाँ खथस पडलथन। 19 जखन ओ भोजन पाथब गेलाह तँ ओ बलरान भऽ गेलाह। तखन साउल थकछु थदन दथमश मे थशष् य सभक संग रहथि। 20 ओ तुरन सभाघर मे मसीहक पचार कयलथन जे ओ परमेश् ररक पुत छथि। 21 मुदा हनकर बात सुनथनहार सभ आशय्चथकत भऽ कऽ कहलथिन। की ई ओ नथह जे यरशलेम मे एथह नामक पुकारथनहार सभ केँ नष कऽ दे लक आ एथह लेल एतय आयल छल जे ओ ओकरा सभ केँ बानल-बना कऽ मुख् यपुरोथहत सभक लग पहँ चा दे लक? 22 मुदा साउल आरो बल बढै त गेलाह आ दथमश मे रहथनहार यहदी सभ केँ लखजत कऽ दे लथिन जे ई थसद कयलथन जे ई मसीह छथि। 23 बहत थदन पूरा भेलाक बाद यहदी सभ हनका मारबाक योजना बना लेलक। 24 मुदा हनका सभक पतीता साउल केँ पता चललथन। ओ सभ ओकरा मारबाक लेल थदन-राथत िाटक पर नजरर रखलथन। 25 तखन थशष् य सभ राथत मे हनका लऽ कऽ दे बाल लग एकटा टोकरी मे उतारर दे लथिन। 26 जखन साउल यरशलेम पहँ चलाह तखन ओ थशष् य सभक संग जुडबाक पयास कयलथन। 27 बरनबास हनका लऽ कऽ पेररत सभ लग अनलथन आ हनका सभ केँ कहलथिन जे ओ पभु केँ कोना बाट मे दे खलथन आ हनका सँ बात कयलथन आ कोना ओ दथमश मे यीशुक नाम पर थनभ्कतापूर्क पचार कयलथन। 28 ओ यरशलेम मे अबैत-जाइत हनका सभक संग छलाह। 29 ओ पभु यीशुक नाम सँ थनभ्कतापूर्क बजैत रहलाह आ यूनानी सभक थररोध मे थरराद कयलथन। 30 भाय सभ ई जाथन कऽ हनका कैसररया लऽ कऽ तरसुस पठा दे लथिन। 31 तखन समस यहथदया, गलील आ सामररया मे मम् ्ली सभ केँ थरशाम कयल गेल। पभुक भय आ पथरत आत् माक आराम मे चलैत बथढ गेलाह। 32 जखन पतुस चार कात घुमैत छलाह तखन ओ लुदा मे रहथनहार पथरत लोक सभक लग सेहो उतरर गेलाह। 33 ओतऽ हनका एथनयस नामक एक आदमी भेटलथन जे आठ रष् धरर अपन थबछौन पर बैसल छल आ पताघात सँ बीमार छल। 34 पतुस ओकरा कहलथिन, “एथनयस, यीशु मसीह तोरा ठीक करै त छथि। आ ओ तुरन उथठ गेलाह। 35 लुदा आ सरोन मे रहथनहार सभ हनका दे खख पभु थदस घुथम गेलाह। 36 यािा मे तबीता नामक एकटा थशष छल, जकर अि् मे ्ोरकास कहल जाइत छै क। 37 ओथह थदन मे ओ बीमार भऽ गेलीह आ मरर गेलीह।

अधार 9 1 शाऊल परमेश् ररक थशष् य सभक थररद धमकैत आ रध करै त महापुरोथहतक लग गेलाह। 2 ओ हनका सँ दथमश केँ सभाघर सभ मे थचटी मँगैत छलाह जे जँ हनका एथह बाट मे सँ कोनो बात भेथट जाय, चाहे ओ पुरष होथि रा सी, तखन ओ ओकरा सभ केँ बानल-बनल यरशलेम लऽ जाथि। 3 याता करै त काल ओ दथमश लग पहँ चलाह आ अचानक हनका चार कात सग् सँ इजोत चमथक गेलथन। 4 ओ धरती पर खथस पडलाह आ एकटा आराज सुनलथन जे , “ साउल, साउल, अहाँ हमरा थकएक सताबैत छी?” 5 ओ पुछलथिन, “हे पभु , अहाँ के छी?” पभु कहलथिन, “ हम यीशु छी जकरा अहाँ सताबैत छी।” 6 ओ काँ थप कऽ चथकत भऽ कऽ कहलथिन, “पभु, अहाँ हमरा सँ की करऽ चाहै त छी?” पभु हनका कहलथिन, “ उथठ कऽ नगर मे जाउ, तखन अहाँ केँ कहल जायत जे अहाँ केँ की करबाक चाही।” 7 हनका संग याता करऽ रला लोक सभ कोनो आराज सुनैत, मुदा ककरो नथह दे खख कऽ बेजुबान ठाढ भऽ गेलाह। 8 साउल पृि् री पर सँ उथठ गेलाह। जखन हनकर आँ खख खुथज गेलथन तँ ओ ककरो नथह दे खलथन, मुदा ओ सभ हनका हाि पकथड कऽ दथमश लऽ गेलथन। 9 तीन थदन धरर ओ दथषहीन रहलाह आ ने खाइत छलाह आ ने पीबैत छलाह। 10 दथमश मे अनथनया नामक एकटा थशष् य छल। पभु एकटा दश्न मे हनका कहलथिन, “अनथनयाह।” ओ कहलथिन, “दे खू, हम एतय छी, पभु।” 11 परमेश् रर हनका कहलथिन, “ उथठ कऽ सोझ गली मे जाउ आ यहदाक घर मे तारसक शाऊल नामक एक गोटे क पूछताछ कर। 12 ओ दश्न मे अनथनया नामक एक आदमी केँ भीतर आथब कऽ ओकरा पर हाि राखख कऽ दे खलक जे ओ दे खख सकथि। 13 तखन अनथनया उतर दे लथिन, “पभु, हम एथह आदमीक बहतो लोकक थरषय मे सुनने छी जे ओ यरशलेम मे अहाँ क पथरत लोक सभक संग कतेक दु ष् ट कयलथन। 14 एतय हनका मुख् यपुरोथहत सभ सँ अथधकार छथन जे ओ अहाँ क नाम बजथनहार सभ केँ बाखन सकैत छथि। 15 मुदा परमेश् रर हनका कहलथिन, “ जाउ, थकएक तँ ओ हमरा लेल एकटा चुनल पात छथि जे गैर-यहदी, राजा आ इसाएलक सन् तान सभक सोझाँ हमर नाम लऽ जायब।

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पेररत सभक काज

38 जखन थक थलदा यािाक लग मे छल आ थशष् य सभ पतुसक ओतय रहबाक बात सुथन कऽ हनका लग दू गोटे केँ पठौलथन जे ओ हनका सभ लग आबऽ मे दे री नथह करथि। 39 तखन पतुस उथठ कऽ हनका सभक संग चथल गेलाह। यीशु पहँ चला पर ओ सभ हनका ऊपरका कोठली मे अनलथन, आ सभ थरधरा सभ हनका लग काथन रहल छलीह आ ्ोरकास हनका सभक संग रहबाक समय मे जे रस आ रस बनौने छलीह से दे खा रहल छलीह। 40 पतुस सभ केँ बाहर थनकाथल कऽ ठे हन टे कैत पाि्ना कयलथन। ओकरा दे ह थदस घुमा कऽ कहलकै, “तबीता, उठू।” ओ अपन आँ खख खोथल कऽ पतुस केँ दे खख उथठ कऽ बैथस गेलीह। 41 ओ ओकरा हाि दऽ कऽ ओकरा उठौलथिन आ पथरत आ थरधरा सभ केँ बजा कऽ ओकरा जीथरत कऽ दे लथिन। 42 पूरा यािा मे ई बात जात भेल। बहतो लोक पभु पर थरश् रास कयलथन। 43 ओ यािा मे बहत थदन धरर एकटा थसमोन जे चमडाक काज करयरला छलाह, हनका संग रहलाह।

13 तखन हनका लग एकटा आराज आयल, “हौ पतुस, उठू। मारर कऽ खाउ। 14 पतुस कहलथिन, “हे पभु, से नथह। थकएक तँ हम कथहयो कोनो अशुद रा अशुद रसु नथह खयलहँ । 15 ओ आराज िेर हनका सँ बाजल, “जे परमेश् रर शुद कयलथन, तकरा अहाँ अशुद नथह कहब।” 16 ई तीन बेर भेल आ ओ बत्न िेर सँ स् रग् मे चढाओल गेल। 17 जखन पतुस मने-मन शंका करै त छलाह जे ई दश्न जे ओ दे खलथन से की हे तथन, तखन दे खू, कुरनेथलयुस सँ पठाओल गेल लोक सभ थसमोनक घरक थरषय मे पूछताछ कऽ कऽ िाटकक समत ठाढ भऽ गेलाह। 18 ओ िोन कऽ कऽ पुछलथिन जे की थसमोन, जे पतुस नामक छल, ओतथह ठहरल छथि। 19 पतुस ओथह दश्न पर सोचैत काल आत् मा हनका कहलथिन, “दे खू, तीन गोटे अहाँ केँ खोथज रहल छथि।” 20 ते ँ उथठ कऽ उतर आ हनका सभक संग जाउ, एथह पर कोनो संदेह नथह, थकएक तँ हम हनका सभ केँ पठौने छी। 21 तखन पतुस ओथह लोक सभक लग गेलाह जे कुरनेथलयुस सँ हनका लग पठाओल गेल छल। ओ कहलथिन, “दे खू, हम रैह छी जकरा अहाँ सभ ताथक रहल छी। 22 ओ सभ कहलथिन, “सेनापथत कुरनेथलयुस, जे धम् आ परमेश् रर सँ भय मानैत छथि, आ यहदी सभक समस जाथत मे नीकनीक पथतथित छलाह, हनका परमेश् रर दारा एकटा पथरत स् रग्दूत दारा चेतारनी दे ल गेलथन जे अहाँ केँ अपन घर मे बजा कऽ सुनबाक लेल पठाबथि।” तोहर बात। 23 तखन ओ ओकरा सभ केँ बजौलथन आ ओकरा सभ केँ ठहरौलथन। दोसर थदन पतुस हनका सभक संग चथल गेलाह आ यािाक थकछु भाय हनका संग गेलाह। 24 ओकर दोसर थदन ओ सभ कैसररया मे परेश कयलथन। कुरनेथलयुस हनका सभक पतीता मे रहलाह आ अपन पररजन आ नजदीकी थमत सभ केँ एक ठाम बजा लेने छलाह। 25 पतुस भीतर अबैत काल कुरनेथलयुस हनका सँ भेट कयलथन आ हनकर पयर पर खथस पडलाह आ हनकर आराधना कयलथन। 26 पतुस हनका उठा कऽ कहलथिन, “उथठ जाउ। हम सयं सेहो पुरष छी। 27 जखन ओ हनका सँ गप करै त छलाह तखन ओ भीतर गेलाह आ बहतो लोक सभ एक ठाम आथब गेल छलाह। 28 ओ हनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ जनैत छी जे यहदीक संग रहब रा दोसर जाथतक संग रहब गैर-कानूनी अथछ। मुदा परमेश् रर हमरा ई दे खा दे लथिन जे हम ककरो अशुद रा अशुद नथह कहब।” 29 एथह लेल हम अहाँ सभ लग थबना कोनो गडबडी केने आथब गेलहँ , जथहना हमरा बजाओल गेल। 30 कुरनेथलयुस कहलथिन, “चारर थदन पथहने हम आइ धरर उपरास कऽ रहल छलहँ । नरम बजे हम अपन घर मे पाि्ना केलहँ आ दे खलहँ जे एकटा आदमी चमकैत रस मे हमरा सोझाँ ठाढ छल। 31 ओ कहलथिन, “कन्थलयुस, अहाँ क पाि्ना सुनल गेल अथछ आ परमेश् ररक नजरर मे अहाँ क थभताक सरम कयल गेल अथछ।”

अधार 10 1 कैसररया मे कुरनेथलयुस नामक एक आदमी छल, जे इटाथलयन दल नामक दलक सेनापथत छल। 2 एकटा भक मनुष् य आ अपन सम् पूम् घरक संग परमेश् ररक भय मानैत छल, जे लोक सभ केँ बहत थभता दै त छल आ सथदखन परमेश् रर सँ पाि्ना करै त छल। 3 ओ एकटा दश्न मे दे खलथन जे थदनक करीब नौ बजे परमेश् ररक स् रग्दूत हनका लग आथब कऽ हनका कहलथिन, “कुन्थलयुस!” 4 जखन ओ हनका थदस तकलथन तँ ओ ्रर गेलाह आ कहलथिन, “हे पभु , ई की अथछ?” ओ हनका कहलथिन, “अहाँ क पाि्ना आ थभता परमेश् ररक समत सरमक रप मे आथब गेल अथछ।” 5 आब यािा मे लोक सभ केँ पठा कऽ एकटा थसमोन केँ बजाउ, थजनकर उपनाम पतुस अथछ। 6 ओ एकटा थसमोन जे चमडाक काज करै त अथछ, ओकर घर समुदक कात मे रहै त अथछ। 7 जखन कुरनेथलयुस सँ गप करथनहार स् रग्दूत थरदा भेलाह तँ ओ अपन घरक दू टा नोकर आ हनकर पतीता मे रहथनहार सभ मे सँ एकटा भक थसपाही केँ बजौलथन। 8 ई सभ बात हनका सभ केँ सुना कऽ हनका सभ केँ यािा पठा दे लथिन। 9 दोसर थदन जखन ओ सभ याता पर जा कऽ नगरक नजदीक आथब गेलाह तखन पतुस घरक ऊपर चथढ कऽ पाि्ना करऽ लगलाह। 10 ओ बहत भूखल भऽ गेलाह आ भोजन करय चाहै त छलाह, मुदा जखन ओ सभ तैयार भऽ गेलाह तखन ओ समाथध मे पथड गेलाह। 11 ओ स् रग् खुथज गेल आ एकटा बत्न हनका लग उतरर रहल छल जे चार कोन मे एकटा पैघ चादर जकाँ बुनल गेल छल आ पृि् री पर उतारल गेल छल। 12 एथह मे पृि् रीक चारर पैरक जानरर, जंगली जानरर, रे गैत पामी आ आकाशक थचडै सभ छल।

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पेररत सभक काज

32 ते ँ यािा मे पठा कऽ थसमोन केँ बजाउ, थजनकर उपनाम पतुस छथन। ओ समुदक कात मे चमडाक काज करयरला थसमोनक घर मे ठहरल छथि। 33 ते ँ हम तुरन अहाँ लग पठौलहँ । आ अहाँ नीक काज केलहँ जे अहाँ आथब गेलहँ । आब हम सभ परमेश् ररक आजा सुनबाक लेल परमेश् ररक समत उपखसत छी। 34 तखन पतुस अपन मुँह खोथल कऽ कहलथिन, “हम सते बुथझ रहल छी जे परमेश् रर ककरो कोनो आदर नथह करै त छथि। 35 मुदा हरे क जाथत मे जे हनका सँ ्े राइत अथछ आ धाथम्कताक काज करै त अथछ, से हनका सीकार कयल जाइत अथछ। 36 परमेश् रर इसाएलक सन् तान सभ केँ यीशु मसीहक दारा शान् थतक पचार करै त पठौलथन। 37 हम कहै त छी, अहाँ सभ जनैत छी जे ई रचन पूरा यहथदया मे पचाररत भेल छल आ यूहन् ना बपथतस् माक पचारक बाद गलील सँ शुर भेल छल। 38 परमेश् रर नासरतक यीशु केँ पथरत आत् मा आ सामि्​् य सँ अथभषेक कयलथन। थकएक तँ परमेश् रर हनका संग छलाह। 39 हम सभ ओथह सभ काजक गराह छी जे ओ यहदी सभक दे श आ यरशलेम मे कयलथन। जकरा ओ सभ मारर कऽ गाछ पर लटका दे लक। 40 परमेश् रर तेसर थदन हनका थजया कऽ हनका खुथल कऽ दे खौलथिन। 41 सभ लोक केँ नथह, बल् थक परमेश् ररक दारा पथहने चुनल गेल गराह सभ केँ, हमरा सभ केँ, जे हनकर जीथब उठलाक बाद हनका संग भोजन-पीन केलहँ । 42 ओ हमरा सभ केँ आजा दे लथिन जे हम सभ लोक सभ केँ पचार करी आ गराही दी जे परमेश् रर दारा जीथरत आ मृत् युक नायाधीश बनबाक लेल थनयुक कयल गेल अथछ। 43 सभ भथरषरका हनका गराही थदयौन जे हनकर नाम सँ जे केओ हनका पर थरश् रास करत से पापक तमा भेटतथन। 44 जखन पतुस एखन धरर ई बात सभ बाथज रहल छलाह तखन पथरत आत् मा ओथह सभ लोक पर पथड गेलाह जे रचन सुनने छलाह। 45 खतना करऽ रला लोक सभ पतुसक संग आयल सभ आशय्चथकत भऽ गेलाह, थकएक तँ पथरत आत् माक ररदान गैरयहदी सभ पर सेहो उझलल गेल छल। 46 ओ सभ हनका सभ केँ अन्‍य भाषा मे बजैत आ परमेश् ररक आदर करै त सुनलथन। तखन पतुस उतर दे लथिन। “ 48 ओ हनका सभ केँ पभुक नाम मे बपथतस् मा लेबाक आजा दे लथिन। तखन ओ सभ हनका सँ थकछु थदन रकबाक पाि्ना कयलथन।

4 मुदा पतुस शुरए सँ एथह थरषय केँ सुनौलथन आ आदे शक अनुसार हनका सभ केँ बतबैत कहलथिन। 5 हम यािा नगर मे पाि्ना कऽ रहल छलहँ आ समाथध मे एकटा दश्न दे खलहँ जे , “एकटा बत्न जे एकटा पैघ चादर जकाँ नीचाँ उतरर रहल छल, जे सग् सँ चारर कोन सँ नीचाँ उतरर गेल छल। ई बात हमरा लग आथब गेल। 6 जखन हम अपन आँ खख पर नजरर गडौने रही तखन हम सोथच कऽ दे खलहँ जे पृि् रीक चारर पैरक जानरर, जंगली जानरर, रे गैत पामी आ आकाशक थचडै सभ। 7 तखन हम एकटा आराज सुनलहँ जे हमरा कहै त अथछ, “हौ पतुस, उठू। मारर कऽ खाउ। 8 मुदा हम कहथलयथन, “हे पभु, से नथह, थकएक तँ हमरा मुँह मे कोनो अशुद रा अशुद कोनो बात नथह आयल अथछ।” 9 मुदा स् रग् सँ हमरा िेर सँ ई आराज उतर दे लक जे, “जे परमेश् रर शुद कयलथन, तकरा अहाँ अशुद नथह कहब।” 10 ई तीन बेर भेल आ सभ गोटे िेर सँ स् रग् मे खीच ं लेल गेलाह। 11 तखन तुरन तीन गोटे पथहने सँ ओथह घर मे आथब गेल छलाह, जे कैसररया सँ हमरा लग पठाओल गेल छलाह। 12 आत् मा हमरा हनका सभक संग जेबाक लेल कहलथिन, एथह मे कोनो संदेह नथह। ई छओ भाय हमरा संग गेलाह आ हम सभ ओथह आदमीक घर मे परेश कयलहँ । 13 ओ हमरा सभ केँ ई दे खा दे लथिन जे कोना ओ अपन घर मे एकटा स् रग्दूत केँ दे खख कऽ कहलथिन, “यािा मे लोक सभ केँ पठा कऽ थसमोन केँ बजाउ, थजनकर उपनाम पतुस अथछ। 14 के अहाँ केँ ई बात कहत जे अहाँ आ अहाँ क समस घरक लोकक उदार होयत। 15 जखन हम बाजऽ लगलहँ तँ पथरत आत् मा हनका सभ पर पथड गेलाह जेना शुर मे हमरा सभ पर छल। 16 तखन हम पभुक रचन मोन पाडलहँ जे ओ कहने छलाह जे , “ यूहना पाथन सँ बपथतस् मा दे लथन।” मुदा अहाँ सभ पथरत आत् मा सँ बपथतस् मा लेब। 17 ते ँ परमेश् रर हनका सभ केँ ओथहना ररदान दे लथन जेना ओ हमरा सभ केँ जे पभु यीशु मसीह पर थरश् रास करै त छलहँ । हम की छलहँ , जे हम परमेश् रर केँ सहन कऽ सथकतहँ ? 18 ई बात सुथन ओ सभ चुप भऽ कऽ परमेश् ररक मथहमा कऽ कऽ कहलथिन, “तखन परमेश् रर गैर-यहदी सभ केँ सेहो जीरनक लेल पशाताप करबाक मौका दे लथन अथछ।” 19 खसिनुसक थरषय मे जे पताडना भेल छल ताथह पर जे सभ थततर-थबतर भऽ गेल छल, से सभ िीथनक, साइपस आ अनाथकया धरर पहँ थच गेल आ केरल यहदी सभ केँ छोथड ककरो सँ ई रचन नथह सुनौलक। 20 ओथह मे सँ थकछु गोटे साइपस आ कुरे नक लोक छलाह, जे सभ अंताथकया पहँ चला पर यूनानी सभ सँ पभु यीशुक पचार करै त छलाह। 21 परमेश् ररक हाि हनका सभक संग छलथन आ बहत लोक थरश् रास कए पभु थदस घुथम गेलाह। 22 तखन यरशलेम मे रहथनहार मम् ्लीक कान मे एथह बातक खबरर आयल आ ओ सभ बरनबास केँ पठा दे लथिन जे ओ अंताथकया धरर जाथि। 23 ओ जखन परमेश् ररक कृपा दे खख कऽ पसन भऽ हनका सभ केँ आगह कयलथन जे ओ सभ मन सँ पभु सँ थचपकल रहथि।

अधार 11 1 यहथदया मे रहथनहार पेररत आ भाय सभ सुनलथन जे गैर-यहदी सभ सेहो परमेश् ररक रचन गहम कएने छथि। 2 पतुस यरशलेम पहँ चला पर खतना करथनहार लोक सभ हनका सँ झगडा कयलथन। 3 ओ कहलथिन, “अहाँ खतना नथह भेल लोक सभक लग गेलहँ आ ओकरा सभक संग भोजन केलहँ ।”

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पेररत सभक काज

24 ओ नीक लोक छलाह, पथरत आत् मा आ थरश् रास सँ भरल छलाह। 25 बरनबास साउल केँ ताकबाक लेल तरसुस थरदा भेलाह। 26 जखन ओ हनका पाथब कऽ हनका अंताथकया लऽ गेलाह। एक साल भरर ओ सभ मम् ्ली मे जुथट गेलाह आ बहत लोक केँ थशता दै त रहलाह। थशष् य सभ केँ पथहने अंताथकया मे मसीही कहल गेल। 27 एथह थदन मे यरशलेम सँ परक् ता सभ अनाथकया आथब गेलाह। 28 ओथह मे सँ एक गोटे अगाबस नामक ठाढ भऽ कऽ आत् मा दारा ई संकेत दे लक जे पूरा संसार मे बहत कमी होयत। 29 तखन थशष् य सभ अपन-अपन सामथ्क अनुसार यहथदया मे रहथनहार भाय सभ केँ सहायता पठे बाक संकल कयलथन। 30 ओ सभ सेहो ई काज कऽ कऽ बरनबास आ साउलक हाि मे बुजुग् सभ लग पठौलथन। अधार 12 1 ओथह समय मे राजा हे रोदे स मम् ्ली मे थकछु लोक केँ परे शान करबाक लेल अपन हाि बढौलथन। 2 ओ यूहन् नाक भाय याकूब केँ तलरार सँ मारर दे लक। 3 ओ यहदी सभ केँ ई बात केँ नीक लागल, ते ँ ओ पतुस केँ सेहो पकथड लेलक। (तखन अखमीरी रोटीक थदन छल।) 4 ओ ओकरा पकथड कऽ जेल मे राखख दे लक आ ओकरा रखबाक लेल चारर चौिाई सैथनकक हाि मे सौंप दे लक। ईकर के बाद हनका लोक के सामने लाबै के इरादा छे लै। 5 पतुस केँ जेल मे राखल गेल छल, मुदा मम् ्ली हनका लेल परमेश् रर सँ अथरराम पाि्ना कयल गेल। 6 ओथह राथत जखन हे रोदे स हनका बाहर अनबाक इचा रखैत छलाह तखन पतुस दू टा जंजीर मे बानल दू टा थसपाहीक बीच सुतल छलाह आ दरबजाक आगूक रखराला सभ जेल केँ राखख रहल छलाह। 7 परमेश् ररक स् रग्दूत हनका पर आथब गेलाह आ जेल मे एकटा इजोत चमथक गेलथन। हािसँ जंजीर खथस पडलथन। 8 तखन स् रग्दूत हनका कहलथिन, “अपना चपल बाखन थलअ।” आ से ओ केलथन। ओ हनका कहलथिन, “अपन रस अपना चार कात िेथक कऽ हमरा पाछाँ लाथग जाउ।” 9 ओ बाहर थनकथल कऽ हनका पाछाँ -पाछाँ चथल गेलाह। आ ई नथह बुझल छल जे ई बात सत् य छल जे स् रग्दूत दारा कयल गेल छल। मुदा सोचलक जे एकटा दश्न दे खाइ पडल। 10 पथहल आ दोसर रा्​् सँ आगू बथढ कऽ ओ सभ लोहाक िाटक लग पहँ चलाह जे शहर थदस जाइत अथछ। जे हनका सभक लेल खुजल छलथन, आ ओ सभ एक गली मे थनकथल गेलाह। आ तुरन स् रग्दूत हनका सँ थरदा भऽ गेलाह। 11 पतुस जखन मन मे आथब गेलाह तँ ओ कहलथिन, “हमरा ई पका बुझल अथछ जे पभु अपन स् रग्दूत पठौलथन आ हमरा हे रोदे सक हाि सँ आ यहदी सभक सभ आशा सँ बचा लेलथन।” 12 यीशु एथह बात पर थरचार कऽ कऽ यूहनाक माय मररयमक घर पहँ चलाह, थजनकर उपनाम मरकुस छलथन। जतय बहतो गोटे पाि्ना करै त जमा भ' गेल छलाह। 13 जखन पतुस िाटक दरबजा खटखटौलथन तखन रोदा नामक एकटा युरती सुनबाक लेल आथब गेलीह।

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14 पतुसक आराज बुथझ ओ खुशीक कारमे ँ िाटक नथह खोललीह, बल् थक दौथड कऽ भीतर आथब गेलीह जे पतुस कोना िाटकक आगू ठाढ छलाह। 15 ओ सभ ओकरा कहलथिन, “अहाँ बताह छी।” मुदा ओ लगातार एथह बातक पुथष करै त रहलीह जे एतबो अथछ । तखन ओ सभ कहलथिन, “ई ओकर स् रग्दूत अथछ।” 16 पतुस खटखटबैत रहलाह, तखन ओ सभ दरबजा खोथल कऽ हनका दे खख कऽ आशय्चथकत भऽ गेलाह। 17 मुदा ओ हनका सभ केँ चुप रहबाक लेल हाि सँ इशारा करै त हनका सभ केँ ई बात सुनौलथन जे कोना पभु हनका जेल सँ बाहर थनकाथल दे लथन। ओ कहलथिन, “जाउ, याकूब आ भाइ सभ केँ ई बात सभ केँ दे खाउ।” ओ थरदा भऽ दोसर ठाम चथल गेलाह। 18 भोर होइते थसपाही सभक बीच कोनो छोट हलचल नथह भेल जे पतुसक की भेलैक। 19 हे रोदे स हनका खोथज कऽ नथह पाथब कऽ रखबार सभ सँ पूथछ कऽ आजा दे लथिन जे हनका सभ केँ मारर दे ल जाय। ओ यहथदया सँ कैसररया गेलाह आ ओतथह रथह गेलाह। 20 हे रोदे स सोर आ थसदोनक लोक सभ सँ बहत नाराज भऽ गेलाह, मुदा ओ सभ एक-मथत मे हनका लग आथब गेलाह आ बाकस केँ राजाक कोठरी मे बैसल केँ अपन थमत बना कऽ शाखन चाहै त छलाह। कारम हनका लोकथनक दे शक पोषम राजाक दे श सँ होइत छलथन | 21 एक थदन मे हे रोदे स राज-रस पथहरने अपन थसंहासन पर बैथस कऽ हनका सभ केँ रचन दे लथिन। 22 लोक सभ थचथचया उठल जे, “ई दे रताक आराज अथछ, मनुकक नथह।” 23 परमेश् ररक स् रग्दूत तुरन हनका मारर दे लथिन, थकएक तँ ओ परमेश् ररक मथहमा नथह दे लथन। 24 मुदा परमेश् ररक रचन बढै त गेल आ बढै त गेल। 25 बरनबास आ साउल अपन सेरा पूरा कऽ कऽ यरशलेम सँ घुरर कऽ अपना संग यूहन् ना लऽ गेलाह, थजनकर उपनाम मरकुस छलथन। अधार 13 1 अनाथकयाक मम् ्ली मे थकछु परक् ता आ थशतक सभ छलाह। जेना बरनबास, नाइजर नामक थशमोन, कुरे नक लूथसयस आ मनैन, जे हे रोदे सक राजकीय संग पालल गेल छलाह, आ साउल। 2 जखन ओ सभ पभुक सेरा करै त छल आ उपरास करै त छल, तखन पथरत आत् मा कहलथिन, “हमरा लेल बरनबास आ साउल केँ अलग कऽ थदअ जे हम हनका सभ केँ बजौने छी।” 3 ओ सभ उपरास आ पाि्ना कऽ कऽ ओकरा सभ पर हाि राखख कऽ ओकरा सभ केँ थरदा कऽ दे लक। 4 ओ सभ पथरत आत् मा दारा पठाओल गेलाह आ सेलुथसया थदस थरदा भेलाह। ओतय सँ ओ सभ जहाज सँ साइपस गेलाह। 5 ओ सभ सलामी मे पहँ चला पर यहदी सभक सभाघर मे परमेश् ररक रचन पचार कयलथन। 6 ओ सभ ओथह दीप सँ पािोस पहँ चला पर हनका सभ केँ एकटा जादू गर, एकटा झूठा परक् ता आ एकटा यहदी भेटलथन, जकर नाम बरयशु छल।


पेररत सभक काज

7 ओ दे शक सथज्यस पौलुसक संग छलाह जे एकटा बुखदमान छलाह। ओ बरनबास आ साउल केँ बजा कऽ परमेश् ररक रचन सुनबाक इचा रखैत छलाह। 8 मुदा एलीमास जादू गर (थकएक तँ ओकर नाम सेहो एहने अथछ) ओकरा सभ केँ थरश् रास सँ थरश् रास करबाक पयास कयलक। 9 तखन पथरत आत् मा सँ भरल शाऊल हनका पर नजरर रखलथन। 10 ओ कहलथिन, “हे शैतानक सनान, सभ धाथम्कताक शतु, की अहाँ पभुक सही बाट केँ थरकृत करब नथह छोडब? 11 आब दे खू, पभुक हाि अहाँ पर अथछ, आ अहाँ आनर भऽ जायब, आ एक काल धरर सूय् नथह दे खब। तुरन हनका पर धुंध आ अनार पथड गेलथन। ओ थकछु गोटे केँ ताकैत घुथम गेलाह जे हनकर हाि पकथड लेथि। 12 तखन ओ थरश् रासी पभुक थशता पर आशय्चथकत भऽ थरश् रास कयलथन। 13 जखन पौलुस आ हनकर दल पािोस सँ मुक भऽ गेलाह तँ ओ सभ पख्िथलयाक पेगा् पहँ चलाह। 14 पेगा् सँ थरदा भेला पर ओ सभ थपथसथदयाक अनाथकया पहँ चलाह आ थरशाम-थदन मे सभाघर मे जा कऽ बैथस गेलाह। 15 धम्-थनयम आ परक् ता सभ पढलाक बाद सभाघरक शासक सभ हनका सभ लग पठौलथन जे , “हे भाइ लोकथन, जँ अहाँ सभक लेल लोक सभक लेल कोनो उपदे शक बात अथछ तँ आगू बढू।” 16 तखन पौलुस ठाढ भऽ कऽ हाि सँ इशारा करै त कहलथिन, “इसाएलक लोक आ अहाँ सभ परमेश् ररक भय मानब।” 17 एथह इसाएलक लोकक परमेश् रर हमरा सभक पूर्ज सभ केँ चुनलथन आ थमस दे श मे परदे शी बथन कऽ लोक सभ केँ ऊपर उठौलथन। 18 चालीस रष्क समय मे ओ थनज्न मे हनका लोकथनक आचरम केँ सहन कयलथन। 19 ओ कनान दे श मे सात जाथत केँ नष कऽ कऽ ओकरा सभक दे श थचटी मे बाँ थट दे लथिन। 20 तकर बाद ओ हनका सभ केँ लगभग चारर सय पचास रष् धरर नायाधीश सभ केँ दे लथिन, जाबत धरर शमूएल भथरषरका नथह छलाह। 21 तकर बाद ओ सभ राजाक आगह कयलथन आ परमेश् रर हनका सभ केँ चालीस रष्क समय मे थससक पुत साउल केँ दे लथिन। 22 ओ हनका सभ केँ हटा कऽ दाऊद केँ हनका सभक राजा बनयबाक लेल ठाढ कयलथन। ओ हनका सभ केँ गराही दै त कहलथिन, “हमरा थयशैक पुत दाऊद केँ भेटल अथछ, जे हमर सभक इचा पूरा करत।” 23 एथह आदमीक रंश मे सँ परमेश् रर अपन पथतजाक अनुसार इसाएलक लेल एकटा उदारकता् यीशु केँ ठाढ कयलथन अथछ। 24 जखन यूहन् ना अपन अयला सँ पथहने सभ इसाएलक लोक सभ केँ पशाताप करबाक बपथतस् माक पचार कयलथन। 25 यूहन् ना अपन बाट पूरा करै त कहलथिन, “अहाँ सभ हमरा के बुझैत छी?” हम ओ नथह छी। मुदा, दे खू, हमरा बाद एकटा एहन लोक आथब रहल अथछ, जकर जूता हम ओकर पएरक जूता खोलबाक योग नथह छी। 26 यौ भाइ लोकथन, अबाहमक रंशक सन् तान आ अहाँ सभ मे जे केओ परमेश् रर सँ ्रै त अथछ, से अहाँ सभ केँ ई उदारक रचन पठाओल गेल अथछ।

27 यरशलेम मे रहथनहार आ ओकर सभक शासक सभ हनका नथह थचनै त छलाह आ ने परक् ता सभक जे सभ थरशाम-थदन पढल जाइत अथछ, तकरा हनका सभ केँ दोषी ठहराबैत हनका सभ केँ पूरा कयलथन। 28 ओ सभ हनका मे मृतुक कोनो कारम नथह भेटलथन, मुदा ओ सभ थपलातुस सँ आगह कयलथन जे हनका मारर दे ल जाय। 29 ओ सभ हनका थरषय मे थलखल सभ बात पूरा कऽ कऽ हनका गाछ पर सँ उतारर कऽ कब मे राखख दे लथिन। 30 मुदा परमेश् रर हनका मृत् यु मे सँ थजया दे लथिन। 31 हनका संग गलील सँ यरशलेम आयल लोक सभ केँ बहत थदन धरर दे खल गेलथन। 32 हम सभ अहाँ सभ केँ शुभ समाचार सुनबैत छी जे जे पथतजा पूर्ज सभ सँ कयल गेल छल। 33 परमेश् रर हमरा सभ हनका सभक सन् तान सभक लेल ओथहना पूरा कयलथन जे ओ यीशु केँ जीथब उठौलथन। जेना दोसर भजन मे सेहो थलखल अथछ, “अहाँ हमर पुत छी, आइ हम अहाँ केँ जनम दे लहँ ।” 34 ओ हनका मृत् यु मे सँ जीथब उठौलथन, आब आब भषाचार मे नथह आथब सकैत छथि, ताथह थरषय मे ओ एथह तरहे ँ कहलथन जे , “हम अहाँ सभ केँ दाऊदक थनशय दया दे ब।” 35 ते ँ ओ दोसर भजन मे सेहो कहै त छथि, “अहाँ अपन पथरत केँ भष नथह होमय दे ब।” 36 थकएक तँ दाऊद परमेश् ररक इच् छा सँ अपन पीढीक सेरा कऽ कऽ नीद ं आथब गेलाह आ अपन पूर्ज सभक समत राखल गेलाह आ भष भऽ गेलाह। 37 मुदा परमेश् रर जकरा जीथब उठौलथन, तकरा कोनो भषाचार नथह दे खलथन। 38 एथह लेल, यौ भाइ लोकथन, अहाँ सभ केँ ई जाथन थलअ जे एथह आदमीक दारा अहाँ सभ केँ पापक तमाक पचार कयल गेल अथछ। 39 हनका दारा थरश् रास करयरला सभ सभ ओथह सभ बात सँ धम् ठहराओल गेल अथछ, जाथह सँ अहाँ सभ मूसाक धम् थनयमक दारा धम् नथह ठहरा सकलहँ । 40 ते ँ सारधान रह जे अहाँ सभ पर जे बात परक् ता सभ मे कहल गेल अथछ से नथह आथब जाय। 41 दे खू, अहाँ सभ थतरसृत करऽ रला सभ, आशय्चथकत भऽ कऽ नाश भऽ जाउ, थकएक तँ हम अहाँ सभक समय मे एहन काज करै त छी, जे काज अहाँ सभ केँ कोनो तरहे ँ थरशास नथह करब, जँ केओ अहाँ सभ केँ ई बात सुनबैत अथछ। 42 जखन यहदी सभ सभाघर सँ बाहर थनकललाह तँ गैर-यहदी सभ थरनती कयलथन जे अथगला थरशाम-थदन हनका सभ केँ ई बात सुनाओल जाय। 43 जखन मं्ली टू थट गेल तखन बहतो यहदी आ धम् परररत्न करयरला लोक पौलुस आ बरनबासक पाछाँ -पाछाँ चथल गेलाह। 44 दोसर थरशाम-थदन परमेश् ररक रचन सुनबाक लेल लगभग पूरा शहर एक ठाम आथब गेल। 45 मुदा यहदी सभ लोक सभ केँ दे खख ईषा् सँ भरर गेल आ पौलुसक कहल बात सभक थररोध मे आ थन्ा करै त बजलाह। 46 तखन पौलुस आ बरनबास थनभ्क भऽ कऽ कहलथिन, “पथहने परमेश् ररक रचन अहाँ सभ केँ कहल जायब आरशक छल .

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पेररत सभक काज

47 परमेश् रर हमरा सभ केँ एना आजा दे लथन जे , “हम अहाँ केँ गैर-यहदी सभक इजोत बनौने छी, जाथह सँ अहाँ पृि् रीक छोर धरर उदारक लेल बथन जाउ।” 48 ई बात सुथन गैर-यहदी सभ पसन भऽ पभुक रचनक मथहमा कयलथन। 49 पभुक रचन समस पदे श मे पचाररत भेल। 50 मुदा यहदी सभ भक आ आदरमीय स् तीगम सभ आ नगरक मुखखया सभ केँ भडका दे लक आ पौलुस आ बरनबास पर सताओल गेल आ ओकरा सभ केँ अपन इलाका सँ भगा दे लक। 51 मुदा ओ सभ अपन पएरक धूरा झटकारर कऽ इकोथनयम पहँ चलाह। 52 थशष्‍य सभ हष् आ पथरत आत् मा सँ भरल भऽ गेलाह।

17 तैयो ओ अपना केँ गराही रथहत नथह छोथड कऽ नीक काज कयलथन आ हमरा सभ केँ स् रग् सँ रषा् आ िल-िूलक समय दे लथन, जाथह सँ हमरा सभक हदय भोजन आ आन् सँ भरर दे लथन। 18 एथह बात सभक कारमे ँ ओ सभ लोक सभ केँ बहत कम रोकलथन जे ओ सभ ओकरा सभक लेल बथलदान नथह दे लक। 19 अनाथकया आ इकोथनयम सँ थकछु यहदी सभ ओतऽ आथब कऽ लोक सभ केँ मना लेलक आ पौलुस केँ पािर मारर कऽ ओकरा मरर गेल बुथझ शहर सँ बाहर थनकाथल दे लक। 20 मुदा जखन थशष् य सभ हनका चार कात ठाढ छलाह तखन ओ उथठ कऽ नगर मे आथब गेलाह। 21 ओ सभ ओथह नगर मे सुसमाचार पचार कऽ कऽ बहतो केँ थशता दऽ कऽ िेर लुसा, इकोथनयम आ अन् ताथकया घुरर गेलाह। 22 थशष् य सभक आत् मा केँ दढ कऽ कऽ हनका सभ केँ थरश् रास मे रहबाक लेल आगह करै त छी आ हमरा सभ केँ बहत केशक बीच परमेश् ररक राज् य मे परेश करबाक अथछ। 23 ओ सभ मम् ्ली मे बूढ-पुरान बना कऽ उपरास कऽ कऽ पाि्ना कऽ कऽ हनका सभ केँ पभुक समत सौंप दे लथिन, थजनका पर ओ सभ थरश् रास करै त छलाह। 24 ओ सभ थपथसथदया मे घुथम कऽ पख्िथलया पहँ चलाह। 25 ओ सभ पगा् मे रचनक पचार कऽ कऽ अताथलया मे उतरर गेलाह। 26 ओतऽ सँ जहाज सँ अनाथकया गेलाह, जतय सँ ओ सभ परमेश् ररक कृपा मे स् रस् िा कयल गेल छल। 27 जखन ओ सभ आथब कऽ मम् ्ली केँ जमा कऽ कऽ परमेश् रर हनका सभक संग जे थकछु कयलथन आ कोना ओ गैर-यहदी सभक लेल थरश् रासक दरबजा खोललथन से सुनौलथन। 28 ओ सभ ओतऽ बहत थदन धरर थशष् य सभक संग रहलाह।

अधार 14 1 आइकोथनयम मे दु नू गोटे एक संग यहदी सभक सभाघर मे जा कऽ एना बाजल जे यहदी आ यूनानी सभक बहत रास भीड थरश् रास कयलक। 2 मुदा अथरश् रासी यहदी सभ गैर-यहदी सभ केँ भडका दे लक आ भाय सभक थररद अपन थरचार केँ दु ष् ट कयल गेल। 3 ओ सभ बहत थदन धरर पभु मे थनभ्कतापूर्क बजैत रहलाह, जे हनकर कृपाक रचनक गराही दै त छलाह आ हनका सभक हाि सँ थचन् त आ चमतार करबाक अनुमथत दै त छलाह। 4 मुदा नगरक भीड बँथट गेल, आ थकछु यहदी सभक संग आ थकछु पेररत सभक संग। 5 जखन गैर-यहदी आ यहदी सभ अपन शासक सभक संग मारर-पीट कयल गेल। 6 ओ सभ जाथन कऽ लूकाओथनयाक नगर लुसा आ दब् आ चार कातक इलाका मे भाथग गेलाह। 7 ओतथह ओ सभ सुसमाचार पचार कयलथन। 8 लुसा मे एकटा एहन आदमी बैसल छल, जे अपन मायक पेट सँ अपंग छल, जे कथहयो चलल नथह छल। 9 ओ पौलुसक गप सुनलथन। 10 जोर-जोर सँ कहलथिन, “पएर पर ठाढ रह।” आ ओ उछथल कऽ चलल। 11 पौलुसक काज दे खख लोक सभ लूकाओथनयाक बाज मे आराज उठा कऽ बाजल, “दे रता सभ मनुष् यक रप मे हमरा सभ लग उतरर गेल छथि।” 12 ओ सभ बरनबास केँ बृहसथत कहलथिन। आ पौलुस, बुध, थकएक तँ ओ मुख रका छलाह। 13 तखन बृहसथतक पुरोथहत जे हनका सभक नगरक आगू छल, ओ सभ बैल आ माला सभ िाटक पर अनलथन आ लोक सभक संग बथल चढाबय चाहै त छलाह। 14 जखन पेररत सभ बरनबास आ पौलुस ई बात सुथन कऽ ओ सभ अपन रस िाथड कऽ लोक सभक बीच दौथड कऽ थचथचया उठलाह। 15 ओ पुछलथिन, “हे सर, अहाँ सभ ई सभ थकएक करै त छी?” हमहँ सभ अहाँ सभक संग एक समान भारुक लोक छी आ अहाँ सभ केँ पचार करै त छी जे अहाँ सभ एथह वि्ता सभ सँ जीथरत परमेश् रर थदस मुथड जाउ, जे स् रग्, पृि् री, समुद आ ओथह मे रहल सभ रसु केँ बनौलथन। 16 ओ सभ पथहने सभ जाथत केँ अपन-अपन बाट पर चलय दे लथन।

अधार 15 1 यहथदया सँ उतरल थकछु लोक भाय सभ केँ थशता दै त कहलथिन, “जाबत धरर अहाँ सभ मूसाक अनुसार खतना नथह कयल जायत, ताबत धरर अहाँ सभक उदार नथह भऽ सकैत अथछ।” 2 जखन पौलुस आ बरनबास केँ हनका सभक संग कोनो छोट मतभेद आ थरराद भेलथन तखन ओ सभ थनम्य कयलथन जे पौलुस आ बरनबास आ हनका सभ मे सँ थकछु गोटे यरशलेम एथह थरषय मे पेररत आ पाचीन सभ लग जाथि। 3 ओ सभ मम् ्लीक बाट मे आथन गेलाह आ ओ सभ गैर-यहदी सभक धम् परररत्नक सूचना दै त िीनीक आ सामररया मे सँ गुजरर गेलाह। 4 जखन ओ सभ यरशलेम पहँ चलाह तखन हनका सभ केँ मम् ्ली, पेररत सभ आ पाचीन सभ दारा सागत कयल गेलथन आ ओ सभ जे थकछु परमेश् रर हनका सभक संग कयलथन, से सभ बात सुनौलथन। 5 मुदा थरश् रास करयरला िररसी सभक थकछु पंि उथठ कऽ कहलक जे, “ओथह सभ केँ खतना करऽ आ मूसाक थनयमक पालन करबाक आजा दे बऽ आरश् यक अथछ।” 6 पेररत आ पाचीन सभ एथह थरषय पर थरचार करबाक लेल एक ठाम आथब गेलाह।

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पेररत सभक काज

7 जखन बहत थरराद भेल तखन पतुस उथठ कऽ हनका सभ केँ कहलथिन, “हे भाइ लोकथन, अहाँ सभ जनैत छी जे बहत थदन पथहने परमेश् रर हमरा सभ मे सँ ई चुथन लेलथन जे गैर-यहदी सभ हमर मुँह सँ सुसमाचारक रचन सुनथि। आ थरशास कर। 8 परमेश् रर, जे हदय केँ जनैत छथि, हनका सभ केँ गराही दे लथन, जेना ओ हमरा सभक संग पथरत आत् मा दे लथन। 9 हमरा सभ आ हनका सभक बीच कोनो भेद नथह राखू, थरशास सँ हनका सभक हदय केँ शुद कर। 10 आब अहाँ सभ परमेश् रर केँ थशष् य सभक गरदथन मे एकटा जुआ लगाबय लेल थकएक परखैत छी, जे हमरा सभक पूर्ज आ ने हम सभ सहन कऽ सकलहँ ? 11 मुदा हम सभ थरश् रास करै त छी जे पभु यीशु मसीहक कृपा सँ हमहँ सभ हनका सभक उदार पाथब सकब। 12 तखन सभ भीड चुप भऽ गेल आ बरनबास आ पौलुस केँ सुनय लगलाह जे परमेश् रर हनका सभक दारा गैर-यहदी सभक बीच कोन-कोन चमत् कार आ आशय् कयलथन। 13 ओ सभ चुप भऽ गेलाक बाद याकूब उतर दे लथिन, “हे भाइ लोकथन, हमर बात सुनू। “ 15 भथरषरका सभक रचन एथह बात पर सहमत अथछ। जेना थलखल अथछ, 16 एकर बाद हम घुरब आ दाऊदक तमू केँ िेर सँ बना दे ब जे खथस पडल अथछ। हम ओकर खं्हर केँ िेर सँ बना दे ब आ ओकरा ठाढ करब। “ 18 परमेश् रर संसारक पाराथह सँ हनकर सभ काज केँ जनैत छथि। 19 ते ँ हमर राक अथछ जे हम सभ गैर-यहदी सभक बीच सँ परमेश् रर थदस घुरल लोक सभ केँ परे शान नथह कर। 20 मुदा हम सभ हनका सभ केँ ई थलखख दी जे ओ सभ मूथत्क अशुखद, वथभचार, गला रे तब आ खून सँ परहे ज करथि। 21 पूर्काल मे मूसाक पचार-पसारक लोक सभ नगर मे सभ रहै त छथि आ सभ थरशाम-थदन सभाघर मे पढल जाइत छथि। 22 तखन पेररत आ बूढ-पुरान सभ आ समस मम् ्लीक संग मनुष् य कयलथन जे पौलुस आ बरनबासक संग अपन-अपन चुनल-चुनल लोक सभ केँ अंताथकया पठा दे ल जाय। अिा् त् बरसाबास नामक यहदा आ भाय सभक पमुख पुरष थसलास। 23 ओ सभ एथह तरहे ँ हनका सभक दारा पत थलखैत छलाह। पेररत आर पाचीन आ भाय सभ अनाथकया आ सीररया आ थकथलथसया मे गैर-यहदी भाइ सभ केँ अथभरादन करै त छथि। 24 हम सभ सुनलहँ जे हमरा सभक बीच सँ थनकलल थकछु लोक अहाँ सभ केँ एथह बात सँ परे शान कऽ रहल अथछ जे अहाँ सभ केँ खतना कऽ कऽ धम्-थनयमक पालन करऽ पडत। “ 26 जे लोक सभ हमरा सभक पभु यीशु मसीहक नामक लेल अपन जान खतरा मे ्ालने अथछ। 27 ते ँ हम सभ यहदा आ थसलास केँ पठौने छी जे ओ सभ सेहो अहाँ सभ केँ ई बात मुँह सँ कहताह। 28 पथरत आत् मा आ हमरा सभ केँ ई नीक लागल जे हम सभ एथह आरशक बात सभ सँ पैघ भार अहाँ सभ पर नथह उठाबी। 29 मूथत् सभक लेल चढाओल भोजन, खून, गला घोंटल रसु आ वथभचार सँ परहे ज कर। िेयर ये रेल।

30 ओ सभ थरदा भेला पर ओ सभ अनाथकया पहँ चलाह आ लोक सभ केँ जमा कऽ कऽ ओ सभ पत पहँ चा दे लथिन। 31 ओ सभ पथढ कऽ ओ सभ सान्नाक लेल आनख्त भऽ गेलाह। 32 यहदा आ थसलास, जे सयं परक् ता छलाह, ओ भाय सभ केँ बहत रास बात सँ उपदे श दे लथन आ हनका सभ केँ दढ कयलथन। 33 ओ सभ ओतऽ थकछु काल रकलाक बाद हनका सभ केँ शाखनपूर्क भाय सभक थदस सँ पेररत सभक लग छोथड दे ल गेलथन। 34 मुदा थसलास केँ ओतथह रहब नीक लागल। 35 पौलुस आ बरनबास सेहो बहतो लोकक संग अंताथकया मे पभुक रचनक थशता आ पचार करै त रहलाह। 36 थकछु थदनक बाद पौलुस बरनबास केँ कहलथिन, “आउ, हम सभ िेर जा कऽ अपन भाय सभक ओथह नगर सभ मे जा कऽ दे खब, जतऽ हम सभ पभुक रचन पचार केने छी। 37 बरनबास यूहन् ना, जकर उपनाम मरकुस छल, अपना संग ल’ जेबाक थनम्य कयलथन। 38 मुदा पौलुस हनका सभ केँ अपना संग लऽ जायब नीक नथह लागल, जे पख्िथलया सँ हनका सभ सँ थरदा भऽ गेलाह आ हनका सभक संग काज मे नथह गेलाह। 39 दु नू गोटे क बीच झगडा एतेक तेज भऽ गेल जे ओ सभ एकदोसर सँ अलग भऽ गेलाह। 40 पौलुस थसलास केँ चुथन कऽ चथल गेलाह, जखन थक भाय सभ परमेश् ररक अनुगहक लेल थरश्‍रास कयलथन। 41 ओ सीररया आ थकथलथसया मे जा कऽ मम् ्ली सभ केँ पुष करै त गेलाह। अधार 16 1 तखन ओ दब् आ लुसा मे गेलाह आ दे खलहँ जे ओतय एकटा थशष थतमुथियुस नामक छल, जे एकटा यहदी मथहलाक पुत छल आ थरशासी छल। मुदा ओकर थपता यूनानी छलाह। 2 लुसा आ इकोथनयम मे रहथनहार भाय सभ एथह बात केँ नीक जकाँ सुनाबैत छलाह। 3 पौलुस केँ हनका संग जेबाक चाही। ओ ओथह इलाका मे रहथनहार यहदी सभक कारमे ँ हनका लऽ कऽ खतना कऽ लेलथन। 4 जखन ओ सभ नगर सभ मे घुमैत-थिरै त ओ सभ यरशलेम मे रहथनहार पेररत आ पाचीन सभ दारा थनधा् ररत थनयम सभक पालन करबाक लेल ओकरा सभ केँ सुनौलथन। 5 एथह तरहे ँ मम् ्ली सभ थरश् रास मे दढ भऽ गेल आ पथतथदन बढै त गेल। 6 ओ सभ ्ीथगया आ गलाथतया पदे श मे जा कऽ पथरत आत् मा दारा एथशया मे रचन पचार नथह कयल गेल। 7 थमथसया पहँ चलाक बाद ओ सभ थबथिथनया मे जेबाक पयास कयलथन। 8 थमथसया सँ गुजरै त लोक सभ तोआस मे उतरर गेलाह। 9 पौलुस केँ राथत मे एकटा दश्न दे खलथन। मथकदु थनयाक एक आदमी ठाढ भऽ कऽ हनका सँ पाि्ना करै त कहलथिन, “मथकदु थनया मे आथब कऽ हमरा सभक सहायता कर।” 10 ओ दश्न दे खलाक बाद तुरन हम सभ मथकदु थनया मे जेबाक पयास केलहँ आ ई थनथशंत रपे ँ ई बुथझ कऽ जे पभु हमरा सभ केँ हनका सभ केँ सुसमाचार पचार करबाक लेल बजौने छथि।

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पेररत सभक काज

11 ते ँ हम सभ तोआस सँ मुक भऽ कऽ सोझ रसा सँ समोथाथसया आ दोसर थदन थनयोपोथलस पहँ चलहँ । 12 ओतऽ सँ थिथलपी, जे मथकदु थनयाक ओथह भागक पमुख नगर आ उपथनरेशक तेत अथछ, ओथह नगर मे थकछु थदन धरर रहलहँ । 13 थरशाम-थदन मे हम सभ नगर सँ नदीक कात मे थनकललहँ , जतय पाि्ना करबाक आदथत छल। हम सभ बैथस कऽ ओथह स् तीगम सभ सँ गप केलहँ । 14 थियाथतरा नगरक बैगनी रं गक कपडा बेचथनहार थलथ्या नामक एकटा स् ती जे परमेश् ररक आराधना करै त छलीह, हमरा सभक बात सुनलथन। 15 जखन ओ आ अपन घरक लोक बपथतस् मा लेलथन तँ ओ हमरा सभ केँ थरनती करै त कहलथिन, “जँ अहाँ सभ हमरा पभुक पथत थरश् रासयोग् य मानलहँ तँ हमर घर मे आथब कऽ ओतथह रह।” आ ओ हमरा सभकेँ बाध क’ दे लथन। 16 जखन हम सभ पाि्ना करऽ जा रहल छलहँ तँ एकटा एहन युरती हमरा सभ सँ भेट केलक जे भथरषरामीक आत् मा सँ गस छल आ अपन माथलक सभ केँ भथरषरामी कऽ कऽ बहत िायदा भेलैक। 17 ओ पौलुस आ हमरा सभक पाछाँ -पाछाँ आथब कऽ थचथचया उठलथन, “ई सभ परमेश् रर परमेश् ररक सेरक छथि, जे हमरा सभ केँ उदारक बाट दे खबैत छथि।” 18 ओ बहत थदन धरर ई काज केलथन। मुदा पौलुस दु खी भऽ कऽ आत् मा केँ कहलथिन, “हम अहाँ केँ यीशु मसीहक नाम सँ आजा दै त छी जे अहाँ ओकरा मे सँ बाहर थनकलू।” आ ओही घडी बाहर आथब गेलाह। 19 जखन ओकर माथलक सभ दे खलथन जे हनका सभक लाभक आशा खतम भऽ गेलथन, तखन ओ सभ पौलुस आ थसलास केँ पकथड कऽ बजार मे लऽ गेलाह। 20 ओ हनका सभ केँ दं ्क सभ लग लऽ कऽ कहलथिन, “ई सभ यहदी सभ भऽ कऽ हमरा सभक नगर केँ बहत परे शान करै त छथि। 21 ओ सभ एहन रीथत-ररराज सभ केँ थसखाउ जे हमरा सभ केँ रोमी लोक केँ गहम करब आ ने पालन करब उथचत नथह अथछ। 22 लोक सभ एक संग हनका सभक थररद उथठ गेल आ दं ्क सभ हनका सभक कपडा िाथड कऽ हनका सभ केँ मारर-पीट करबाक आजा दे लथन। 23 ओ सभ ओकरा सभ पर बहत मारर मारर कऽ जेल मे ्ाथल दे लक आ जेलर केँ सुरथतत राखबाक आजा दे लक। 24 ओ सभ एथह तरहक आजा पाथब हनका सभ केँ भीतरक जेल मे राखख दे लथिन आ हनका सभक पएर कोठली मे ठाढ कऽ दे लथिन। 25 आधा राथत मे पौलुस आ थसलास पाि्ना कऽ कऽ परमेश् ररक सुथत गाथब रहलाह। 26 अचानक एकटा पैघ भूकम आथब गेल जे जेलक नीरं थहल गेल। 27 जेलक रखराला नीद ं सँ जाथग कऽ जेलक दरबजा खुजल दे खख ओ अपन तलरार थनकाथल कऽ अपना केँ मारय चाहै त छल, ई माथन कऽ जे कैदी सभ भाथग गेल अथछ। 28 पौलुस जोर-जोर सँ थचथचया उठलाह, “अपना केँ कोनो अधलाह नथह कर, थकएक तँ हम सभ एतय छी।” 29 तखन ओ इजोत बजा कऽ उछथल कऽ भीतर आथब गेलाह आ काँ पैत पौलुस आ थसलासक सोझाँ खथस पडलाह।

30 ओ सभ ओकरा सभ केँ बाहर लऽ कऽ कहलथिन, “हे सर, हमरा उदार पाबऽ लेल की करब?” 31 ओ सभ कहलथिन, “पभु यीशु मसीह पर थरश् रास कर, तखन अहाँ आ अपन घरक लोक उदार पाथब जायब।” 32 ओ सभ हनका आ हनकर घर मे रहथनहार सभ केँ पभुक रचन कहलथिन। 33 ओथह समय राथत मे यीशु हनका सभ केँ लऽ कऽ हनका सभक कोडा धोबय लगलाह। ओ आ ओकर सभ गोटे तुरन बपथतस् मा लेलथन। 34 जखन ओ हनका सभ केँ अपन घर मे अनलथन तखन ओ हनका सभक सोझाँ मे भोजन राखख कऽ हनका सभक समत परमेश् रर पर थरश् रास करै त आनख्त भऽ गेलाह। 35 भोर भेला पर मथजकड े ट सभ साज्ट सभ केँ पठौलथन जे , “ओथह लोक सभ केँ छोथड थदयौक।” 36 जेलक रखराला पौलुस केँ ई बात कहलथिन, “अहाँ सभ केँ छोडबाक लेल दं ्ाथधकारी सभ पठौलथन अथछ। 37 पौलुस हनका सभ केँ कहलथिन, “ओ सभ रोमी रथह कऽ हमरा सभ केँ थनद्ष रप सँ मारर-पीट कऽ जेल मे राखख दे लक। आब की ओ सभ हमरा सभ केँ गुर रप सँ बाहर थनकाथल दै त छथि? नै सते ; मुदा ओ सभ अपने आथब कऽ हमरा सभ केँ बाहर आनय। 38 साज्ट सभ ई बात सभ दं ्ाथधकारी सभ केँ कहलथिन आ ओ सभ ई सुथन कऽ जे ओ सभ रोमी छी, तखन ओ सभ ्रर गेलाह। 39 ओ सभ आथब कऽ हनका सभ केँ थरनती कयलथन आ हनका सभ केँ बाहर अनलथन आ नगर सँ बाहर थनकलबाक लेल थनहोरा कयलथन। 40 ओ सभ जेल सँ बाहर थनकथल थलथ्याक घर मे परेश कयलथन। अधार 17 1 ओ सभ अख्िपोथलस आ अपोलोथनया मे सँ गुजरर कऽ थिसलुथनका पहँ चलाह, जतय यहदी सभक सभाघर छल। 2 पौलुस जेना-तेना हनका सभ लग गेलाह आ तीन थरशाम-थदन हनका सभक संग धम्शास् तक थरषय मे चचा् कयलथन। 3 ई बात खोथल कऽ आरोप लगाबैत छथि जे मसीह केँ कष भोथग कऽ मृत् यु मे सँ जीथब उठल हे बाक चाही। आ ई यीशु, थजनका हम अहाँ सभ केँ पचार करै त छी, ओ मसीह छथि।” 4 ओ सभ मे सँ थकछु गोटे थरश् रास कयलथन आ पौलुस आ थसलासक संग संगथत कयलथन। आ भक यूनानी सभक बहत रास भीड आ मुखखया स् तीगम मे सँ थकछु ए नथह। 5 मुदा जे यहदी सभ थरश् रास नथह केलक, से ईषा् कऽ कऽ थकछु थनषपट लोक सभ केँ अपना लग ल’ लेलक आ एकटा दल जमा कऽ लेलक आ पूरा नगर मे हं गामा मचा दे लक आ यासोनक घर पर आकमम कऽ ओकरा सभ केँ बाहर थनकालबाक पयास कयलक जनता के। 6 जखन ओ सभ ओकरा सभ केँ नथह भेटल तँ ओ सभ यासोन आ थकछु भाइ सभ केँ नगरक शासक सभक लग खीच ं लेलक आ थचथचया उठल, “जे सभ संसार केँ उला-पुला कऽ दे लक अथछ, से सभ एत’ सेहो आथब गेल अथछ। 7 यासोन हनका गहम कयलथन अथछ, आ ई सभ कैसरक थनयमक थरपरीत कहै त छथि जे एकटा आओर राजा छथि, जे यीशु छथि।

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पेररत सभक काज

8 ई बात सुथन ओ सभ लोक आ नगरक राजकीय सभ केँ परे शान कऽ दे लक। 9 ओ सभ यासोन आ दोसरक सुरता लऽ कऽ ओकरा सभ केँ छोथड दे लक। 10 भाय सभ तुरन पौलुस आ थसलास केँ राथत मे थबररया मे थरदा कऽ दे लथिन। 11 ओ सभ थिसलुनीकीक लोक सभ सँ बेसी कुलीन छलाह, कारम ओ सभ सत् य सँ रचन गहम करै त छलाह आ थनत धम्शास् त मे खोज करै त छलाह जे ई बात सभ सत् य अथछ रा नथह। 12 ते ँ हनका सभ मे सँ बहतो गोटे थरश् रास कयलथन। आदरमीय सीगमक सेहो जे यूनानी छलीह, आ पुरषक सेहो, थकछु ए नथह। 13 मुदा जखन थिसलुनीकीक यहदी सभ केँ ई बुझबा मे आथब गेलथन जे पौलुस दारा परमेश् ररक रचन बेररया मे पचार कयल गेल अथछ, तखन ओ सभ ओतऽ सेहो आथब कऽ लोक सभ केँ भडका दे लक। 14 तखने भाय सभ तुरन पौलुस केँ समुद मे जेबाक लेल थरदा कऽ दे लथिन। 15 पौलुसक माग्दश्न करथनहार लोक सभ हनका एिेस लऽ गेलाह आ थसलास आ थतमुथियुस केँ आजा लऽ कऽ जे ओ सभ तेजी सँ हनका लग आथब जायब। 16 जखन पौलुस एिेस मे हनका सभक पतीता मे रहलाह, तखन ओ शहर केँ मूथत्पूजा मे पूम् रप सँ समथप्त दे खख हनका मोन मे मोन भडथक गेलथन। 17 ते ँ यीशु सभाघर मे यहदी सभ सँ आ भखक-भक सभ सँ आ बजार मे पथतथदन हनका सँ भेट करयरला लोक सभ सँ थरराद करै त छलाह। 18 तखन इथपकुररयन आ कोइकक थकछु दाश्थनक हनका सँ भेट कयलथन। थकछु गोटे कहलथिन, “ई बकबक की कहत? दोसर थकछु गोटे , “ओ परदे शी दे रता सभक थरश् रास करयरला बुझाइत छथि।” 19 ओ सभ हनका पकथड कऽ अरे ओपगस लग अनलथन आ कहलथिन, “की हम सभ जाथन सकैत छी जे ई नर थशता जे अहाँ बजैत छी, की अथछ?” 20 अहाँ हमरा सभक कान मे थकछु थरथचत बात अनैत छी। 21 (थकएक तँ ओतऽ सभ एिेसरासी आ परदे शी लोक सभ अपन समय आन कोनो काज मे नथह थबताबैत छल, थसराय कोनो नर बात कहबाक रा सुनबाक लेल।” 22 तखन पौलुस मंगल गहक पहाडक बीच ठाढ भऽ कहलथिन, “हे एिेसक लोक सभ, हम बुझैत छी जे अहाँ सभ सभ बात मे बेसी अंधथरशासी छी।” 23 जखन हम ओथह ठाम सँ गुजरै त छलहँ आ अहाँ सभक भखक केँ दे खैत छलहँ तखन हमरा एकटा रेदी भेटल जाथह पर ई थलखल छल, “अजात परमेश् ररक लेल।” ते ँ जकरा अहाँ सभ अनजान भऽ कऽ आराधना करै त छी, हम ओकरा अहाँ सभ केँ कहै त छी। 24 परमेश् रर जे संसार आ ओथह मे रहल सभ रसु केँ बनौलथन, ओ स् रग् आ पृि् रीक माथलक छथि, ओ हाि सँ बनल मन् थदर मे नथह रहै त छथि। 25 मनुषक हाि सँ पूथजत नथह होइत छै क जेना ओकरा कोनो रसुक आरशकता हो, थकएक तँ ओ सभ केँ जीरन, साँ स आ सभ थकछु दै त अथछ।

26 एक खून सँ मनुष् यक सभ जाथत केँ पूरा पृि् री पर रहबाक लेल बना दे लक आ पथहने थनधा् ररत समय आ ओकर थनरासक सीमा थनधा् ररत कयल गेल अथछ। 27 जाथह सँ ओ सभ पभु केँ तकबाक लेल ताकथि, जँ ओ सभ पभुक पाछाँ -पाछाँ पाथब सकैत छथि आ हनका पाथब सकैत छथि, यदथप ओ हमरा सभ मे सँ पतेक सँ दू र नथह छथि। 28 हम सभ हनका मे जीबैत छी, चलैत छी आ अपन अखस् अथछ। जेना अहाँ क अपन कथर मे सँ थकछु गोटे सेहो कहने छथि, “हम सभ सेहो हनकर संतान छी।” 29 थकएक तँ अपना सभ परमेश् ररक संतान छी, ते ँ हमरा सभ केँ ई नथह बुझबाक चाही जे परमेश् रर सोना रा चानी रा पािर जकाँ छथि जे कला आ मनुष् यक युखक सँ उकेरल गेल छथि। 30 एथह अजानताक समय पर परमेश् रर आँ खख थमचौलथन। मुदा आब सभ लोक केँ पशाताप करबाक आजा दै त अथछ। 31 थकएक तँ ओ एकटा एहन थदन थनधा् ररत कएने छथि, जाथह थदन ओ ओथह आदमीक दारा संसारक धाथम्कतापूर्क नाय करताह। ओ सभ मनुष्‍य केँ एथह बातक आशासन दे लथन जे ओ ओकरा मृत् यु मे सँ थजया दे लथन। 32 जखन ओ सभ मृत् युक पुनरुानक थरषय मे सुनलथन तऽ थकयो मजाक उडौलथन। 33 पौलुस हनका सभक बीच सँ चथल गेलाह। 34 मुदा थकछु लोक हनका सँ थचपकल रथह कऽ थरश् रास कयलथन। अधार 18 1 एथह बातक बाद पौलुस एिेस सँ थरदा भऽ कोरर् आथब गेलाह। 2 ओ अकीला नामक एकटा यहदी केँ भेटलथन, जे पोनुस मे जनल छलाह, आ अपन पती थपखसला संग इटली सँ आयल छलाह। (थकएक तँ काउथ्यस सभ यहदी सभ केँ रोम सँ थरदा हे बाक आजा दे ने छलाह।) आ हनका सभक लग आथब गेलाह। 3 ओ एकथह कारीगर रहबाक कारमे ँ ओ हनका सभक संग रथह कऽ काज करै त रहलाह, थकएक तँ हनका सभक काज मे ओ सभ तमू बनबैत छलाह। 4 ओ सभ थरशाम-थदन सभाघर मे तक्-थरतक् करै त छलाह आ यहदी आ यूनानी सभ केँ मनाबैत छलाह। 5 जखन थसलास आ तीमुथियुस मथकदु थनया सँ अयलाह तँ पौलुसक आत् मा मे दबंग भऽ गेलाह आ यहदी सभ केँ गराही दे लथिन जे यीशु मसीह छथि। 6 जखन ओ सभ अपना केँ थररोध कयलथन आ थन्ा कयलथन तँ ओ अपन रस थहला कऽ कहलथिन, “अहाँ सभक खून अहाँ सभक माि पर रहय। हम शुद छी, आब सँ हम गैर-यहदी सभ लग जायब। 7 ओतऽ सँ थरदा भेलाह आ युसु नामक एक आदमीक घर मे परेश कयलथन, जे परमेश् ररक आराधना करै त छलाह, थजनकर घर सभाघर मे जोर-जोर सँ जुथड गेल छलथन। 8 सभाघरक मुखखया थकसस अपन सम् पूम् घरक संग पभु पर थरश् रास कयलथन। कोरर्ीक बहतो लोक सुथन कऽ थरश् रास कयलथन आ बपथतस् मा लेलथन। 9 तखन पभु राथत मे पौलुस केँ एक दश्न मे कहलथिन, “ ्रब नथह, बल् थक बाजू आ चुप नथह रह।

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पेररत सभक काज

अधार 19

10 थकएक तँ हम अहाँ क संग छी, आ केओ अहाँ पर कोनो आघात पहँ चाबऽ पडत, थकएक तँ एथह नगर मे हमरा बहत लोक अथछ। 11 ओ एक साल छह मास धरर ओतऽ हनका सभक बीच परमेश् ररक रचन थसखाबैत रहलाह। 12 जखन गथलओ अखायाक उपस् ‍यपथत छलाह तँ यहदी सभ एक-मथत भऽ पौलुसक थररद थरदोह कऽ हनका न् यायालय पर लऽ गेलाह। 13 ओ कहै त छथि, “ई आदमी मनुष् य केँ धम्-थनयमक थरपरीत परमेश् ररक आराधना करबाक लेल मनाबैत अथछ।” 14 जखन पौलुस अपन मुँह खोलय बला छलाह तखन गथलओ यहदी सभ केँ कहलथिन, “हे यहदी सभ, जँ ई कोनो गलत रा दु ष अशीलताक बात होइत तँ हम अहाँ सभ केँ सहन करी। 15 मुदा जँ ई बात शब आ नाम आ अहाँ सभक धम्-थनयमक थरषय मे अथछ तँ अहाँ सभ ओकरा थदस दे खू। कारम, हम एथह तरहक बातक कोनो नायाधीश नथह बनब। 16 ओ हनका सभ केँ नायक आसन सँ भगा दे लथिन। 17 तखन सभ यूनानी सभाघरक पमुख सोसनीस केँ पकथड कऽ नायाधीशक आसनक आगू मे मारर दे लक। आ गैथलयो ओथह मे सँ कोनो बातक परराह नथह केलक। 18 तकर बाद पौलुस बहत दे र धरर ओतऽ रहलाह आ ओथह भाय सभ सँ थरदा लऽ कऽ ओतऽ सँ थपस्‍थकला आ अकीला आ हनका संग जहाज सँ अराम मे थरदा भऽ गेलाह। कंकररया मे अपन माि काथट लेलक, कारम हनका वत छलथन। 19 ओ इथिसुस आथब कऽ हनका सभ केँ ओतथह छोथड गेलाह, मुदा ओ सयं सभाघर मे जा कऽ यहदी सभक संग थरमश् कयलथन। 20 जखन ओ सभ हनका सँ बेसी थदन रहबाक आगह कयलथन, तखन ओ सहमत नथह भेलाह। 21 मुदा हनका सभ केँ थरदाई कऽ कऽ कहलथिन, “हमरा यरशलेम मे आबय बला ई भोज पूरा तरहे ँ मनाबय पडत। ओ इथिसुस सँ जहाज सँ थरदा भेलाह। 22 ओ कैसररया मे उतरर कऽ मम् ्ली केँ पमाम कयलथन। 23 ओतऽ थकछु समय थबता कऽ ओ थरदा भऽ गेलाह आ सभ थशष् य सभ केँ मजबूत करै त गलाथतया आ थ्थगयाक समस दे श केँ कम मे घुथम गेलाह। 24 अलेकेथ्डया मे जनल अपोलोस नामक एकटा यहदी इथिसुस आथब गेलाह। 25 एथह आदमी केँ पभुक बाट पर थशता दे ल गेलथन। ओ आत् मा मे उग भऽ कऽ पभुक बात सभ लगन सँ बजैत छलाह आ थसखाबैत छलाह, मात यूहन् नाक बपथतस् मा केँ जनैत छलाह। 26 ओ सभाघर मे थनभ्कतापूर्क बाजऽ लगलाह, अकीला आ थपखसला हनका सभक बात सुथन कऽ हनका अपना लग लऽ गेलाह आ परमेश् ररक बाट केँ आरो थसद तरीका सँ बुझा दे लथिन। 27 जखन यीशु अखाया नगर मे जाय चाहै त छलाह तखन भाय सभ पत थलखख कऽ थशष् ‍य सभ केँ हनका गहम करबाक लेल आगह कयलथन। 28 थकएक तँ ओ यहदी सभ केँ आ ओथह बात केँ सार्जथनक रप सँ आशस कयलथन आ धम्शास् तक दारा ई दे खाबैत छलाह जे यीशु मसीह छथि।

1 जखन अपोलोस कोरर् मे छलाह तखन पौलुस ऊपरका इलाका मे जा कऽ इथिसुस पहँ चलाह। 2 ओ हनका सभ केँ पुछलथिन, “जथहया सँ अहाँ सभ थरश् रास केलहँ तथहया सँ पथरत आत् मा पाथब गेलहँ? ओ सभ हनका कहलथिन, “हमरा सभ एतेक तक नथह सुनलहँ जे पथरत आत् मा अथछ थक नथह।” 3 ओ हनका सभ केँ पुछलथिन, “तखन अहाँ सभ की बपथतस् मा लेलहँ ? ओ सभ कहलथिन, “यूहनाक बपथतस् मा लेल।” 4 तखन पौलुस कहलथिन, “यूहन् ना पशातापक बपथतस् मा सँ बपथतस् मा दे लथन आ लोक सभ केँ कहलथिन जे ओ सभ हनकर बाद जे आओत, अिा् त मसीह यीशु पर थरश् रास कर।” 5 ई बात सुथन ओ सभ पभु यीशुक नाम मे बपथतस् मा लेलक। 6 पौलुस हनका सभ पर हाि राखख कऽ पथरत आत् मा हनका सभ पर आथब गेलाह। ओ सभ अनजान भाषा मे बजैत छलाह आ भथरषरामी करै त छलाह। 7 सभ आदमी करीब बारह रष्क छल। 8 ओ सभाघर मे जा कऽ तीन मास धरर थनभ्कतापूर्क बजैत रहलाह। 9 मुदा जखन गोताखोर कठोर भऽ गेलाह आ थरश् रास नथह कयलथन, बल् थक भीडक समत एथह बात पर अधलाह बजैत छलाह, तखन ओ हनका सभ सँ थरदा भऽ गेलाह आ थशष् य सभ केँ अलग कऽ दे लथन आ एक टा अताचारक थरदालय मे पथतथदन थरराद करै त छलाह। 10 दू साल धरर ई बात चलैत रहल। एथह तरहे ँ एथशया मे रहथनहार सभ यहदी आ यूनानी पभु यीशुक रचन सुनलथन। 11 परमेश् रर पौलुसक हाि सँ थरशेष चमत् कार कयलथन। 12 एथह तरहे ँ हनकर शरीर सँ बीमार गमछा रा एपन आनल गेलथन आ हनका सभ सँ रोग दू र भऽ गेलथन आ ओथह मे सँ दु षाटा सभ बाहर थनकथल गेलथन। 13 तखन थकछु आरारा यहदी सभ, जे भूत-पेत केँ भगाबैत छल, ओकरा सभ केँ ओथह दु षाटा सभ केँ पभु यीशुक नाम सँ बजबैत कहलक, “हम सभ अहाँ सभ केँ यीशुक शपि दै त छी, थजनकर पचार पौलुस करै त छथि।” 14 एक सेराक सातटा पुत छल जे यहदी छल आ पुरोथहतक पमुख छल। 15 ओ दु षाटा उतर दे लकथन, “हम यीशु केँ जनैत छी आ पौलुस केँ हम जनैत छी। मुदा अहाँ के छी? 16 जाथह आदमी मे दु षाटा छल, ओकरा सभ पर कूथद कऽ ओकरा सभ पर थरजय पार कयलक आ ओकरा सभ पर थरजय पार कयलक, जाथह सँ ओ सभ नंगटे आ घायल भऽ ओथह घर सँ बाहर भाथग गेल। 17 ई बात इथिसुस मे रहथनहार सभ यहदी आ यूनानी सभ केँ सेहो बुझल छलथन। हनका सभ पर भय भऽ गेलथन आ पभु यीशुक नाम बथढ गेलथन। 18 बहतो थरश् रास करऽ रला सभ आथब कऽ अपन कम् केँ स् रस् तु कयलक। 19 ओथह मे सँ बहतो लोक सभ जे कौतुहलक काज करै त छल, अपन थकताब सभ केँ एक ठाम आथन सभ लोकक सोझाँ जरा दे लक। 20 एथह तरहे ँ परमेश् ररक रचन बढै त गेल आ थरजयी भेल।

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पेररत सभक काज

21 एथह बात सभक समापन भेला पर पौलुस मथकदु थनया आ अखाया सँ गुजरर कऽ यरशलेम जेबाक आत्‍मा सँ मनन कयलथन जे , “हमरा ओतय गेलाक बाद हमरा रोम केँ सेहो दे खय पडत।” 22 ओ अपन सेरा करऽ रला दू गोटे थतमुथियुस आ इरासस केँ मथकदु थनया पठौलथन। मुदा ओ सयं एक मौसम एथशया मे रहलाह। 23 ओथह समय मे ओथह बाट पर कोनो छोट हलचल नथह भेल। 24 थकएक तँ दे मेथतयुस नामक एक आदमी चानीक थमिक बनबैत छल, जे ्ायनाक लेल चानीक तीि् बनबैत छल, से कारीगर सभ केँ कोनो छोट लाभ नथह दे लक। 25 ओ हनका सभ केँ ओथहना काजक मजदू र सभक संग बजा कऽ कहलथिन, “हे महोदय, अहाँ सभ जनैत छी जे एथह कम् सँ हमरा सभक धन-समथत अथछ।” 26 अहाँ सभ दे खैत आ सुनैत छी जे ई पौलुस असगरे इथिसुस मे नथह, बल् थक लगभग समस एथशया मे बहत लोक केँ बुझा कऽ घुमा दे ने छथि जे ओ सभ हाि सँ बनल दे रता नथह छथि। 27 एथह तरहे ँ हमरा सभक कारीगरी केँ मात एथह तरहे ँ थनषृत हे बाक खतरा मे नथह अथछ। मुदा ईहो जे महान दे री ्ायना के मंथदर के थतरसार कयल जाय आ ओकर भवता के नष कयल जाय, थजनकर आराधना पूरा एथशया आ दु थनया करै त अथछ | 28 ई बात सुथन ओ सभ कोध सँ भरर कऽ थचथचया उठलथन जे , “इथिथसयोंक ्ायना महान छथि।” 29 पूरा नगर उलझन सँ भरर गेल आ पौलुसक संगी मथकदु थनयाक गाइयुस आ अररसाक्स केँ पकथड कऽ ओ सभ एक-मथत सँ रं गमंच मे दौथड गेलाह। 30 जखन पौलुस लोकक बीच परेश करऽ चाहै त छलाह तँ थशष् य सभ हनका अनुमथत नथह दे लथन। 31 एथशयाक थकछु मुखखया जे हनकर थमत छलाह, हनका लग पठौलथन जे ओ रं गमंच मे साहस नथह करथि। 32 एथह लेल थकयो एक बात कथह रहल छल आ थकयो दोसर, थकएक तँ सभा भथमत छल। आ बेसी लोक केँ ई नथह बुझल छलैक जे ओ सभ थकएक एक ठाम आथब गेल अथछ। 33 ओ सभ थसकंदर केँ भीड मे सँ बाहर थनकाथल लेलक आ यहदी सभ ओकरा आगू बढा दे लक। थसक्र हाि सँ इशारा कयलथन आ लोक सभक सामने अपन बचार करऽ चाहै त छलाह। 34 मुदा जखन ओ सभ ई जाथन गेल जे ओ यहदी छथि, तखन सभ एकथह आराज मे दू घंटाक बीच थचथचया उठलथन, “इथिथसयोंक ्ायना महान छथि।” 35 जखन नगरपाथलका लोक सभ केँ शान कऽ कऽ कहलथिन, “हे इथिसुसक लोक सभ, इथिसुसक नगर महादे री ्ायना आ बृहसथत सँ खसल मूथत्क आराधक अथछ, से नथह जनैत अथछ।” ? 36 एथह बात सभक थररोध मे नथह कहल जा सकैत अथछ, ते ँ अहाँ सभ केँ चुप रहबाक चाही आ बेधडक थकछु नथह करबाक चाही। 37 अहाँ सभ एथह लोक सभ केँ एतय अनलहँ जे ने मम् ्ली मे ्कैत छथि आ ने अहाँ क दे रीक थन्ा करै त छथि। 38 ते ँ जँ दे मेथतयु आ ओकर संग रहथनहार थशली सभ केँ ककरो थररद कोनो बात होअय तँ धम्-थनयम खुजल अथछ आ ओथह मे कोनो पथतयोगी सभ सेहो अथछ। 39 मुदा जँ अहाँ सभ कोनो आन थरषय मे पूछताछ करब तँ ओकर थनम्य कोनो थरथधरत सभा मे कयल जायत।

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40 एथह थदनक हं गामा मे हमरा सभ केँ थररादक खतरा मे पथड गेल अथछ। 41 ई बात कथह कऽ ओ सभा केँ थरदा कऽ दे लथिन। अधार 20 1 हं गामा समार भेला पर पौलुस थशष् य सभ केँ बजा कऽ हनका सभ केँ गला लगा कऽ मथकदु थनया जाय लेल थरदा भेलाह। 2 यीशु ओथह पदे श सभ पर जा कऽ हनका सभ केँ बहत उपदे श दऽ कऽ यूनान दे श मे आथब गेलाह। 3 तीन मास ओतऽ रहलाह। जखन यहदी सभ हनकर पतीता कयलथन, जखन ओ अराम मे जहाज सँ जा रहल छलाह, तखन ओ मथकदु थनया मे घुमबाक योजना बनौलथन। 4 ओतऽ ओतऽ हनका संग आथशया मे बीररयाक सोपाटर गेलाह। आ थिसलुनीथकयों मे सँ अररसाक् आ सेकुं्स। आ दब्क गैयस आ थतमुथियुस। आ एथशयाक थतकीकस आ टड ोथिमस। 5 ई सभ पथहने जा रहल छल, हमरा सभक लेल तोआस मे रथह गेल। 6 हम सभ अखमीरी रोटीक बाद थिथलपी सँ जहाज सँ थरदा भेलहँ आ पाँ च थदन मे हनका सभ लग तोआस पहँ चलहँ । जतऽ हम सभ सात थदन रहलहँ । 7 सराहक पथहल थदन जखन थशष्‍य सभ रोटी तोडबाक लेल एकथतत भेलाह तँ पौलुस हनका सभ केँ परसू थरदा करबाक लेल तैयार भऽ कऽ हनका सभ केँ पचार कयलथन। आ आधा राथत धरर अपन भाषम जारी रखलथन। 8 ऊपरका कोठली मे बहत रास इजोत छल, जतय ओ सभ एक ठाम जमा छल। 9 एकटा खखडकी पर यूथटकस नामक एकटा युरक बैसल छल जे गहीरं नीद ं मे पडल छल, तखन पौलुस बहत थदन धरर पचार करै त रहलाह, तखन ओ नीद ं मे ्ूथब गेलाह आ तेसर मचान सँ खथस पडलाह आ मृत भऽ कऽ उठौल गेलाह। 10 पौलुस उतरर कऽ हनका पर खथस पडलाह आ हनका गला लगा कऽ कहलथिन, “अपना सभ केँ परे शान नथह कर। थकएक तँ ओकर पाम ओकरा मे छै क। 11 ओ िेर ऊपर आथब रोटी तोथड कऽ भोजन कऽ कऽ थदन भोर धरर बहत दे र धरर गप-सप कऽ कऽ थरदा भेलाह। 12 ओ सभ ओथह युरक केँ जीथरत अनलथन, मुदा कथनको सान्ना नथह भेटलथन। 13 हम सभ पथहने जहाज पर चथल गेलहँ आ ओथह ठाम पौलुस केँ अपना मे समेथट लेबाक इच् छा कऽ असोस पहँ चलहँ । 14 जखन ओ असोस मे हमरा सभ सँ भेट कयलथन तखन हम सभ हनका अपना मे समेथट कऽ थमथटलेन पहँ चलहँ । 15 हम सभ ओथह ठाम सँ जहाज सँ थरदा भेलहँ आ दोसर थदन थकओसक ओथह पार आथब गेलहँ । दोसर थदन हम सभ सामोस पहँ चलहँ आ टड ोथगथलयम मे रकलहँ । दोसर थदन हम सभ थमलेतुस पहँ चलहँ । 16 पौलुस इथिसुसक कात मे जहाज सँ याता करबाक थनम्य कऽ लेने छलाह, थकएक तँ ओ एथशया मे समय नथह थबताबय चाहै त छलाह, थकएक तँ जँ हनका संभर हो तँ पेनेकोकक थदन यरशलेम मे पहँ चबाक लेल जलबाजी कयलथन। 17 थमथलटस सँ इथिसुस पठा कऽ मम् ्लीक पाचीन सभ केँ बजौलथन।


पेररत सभक काज

18 जखन ओ सभ हनका लग पहँ चलाह तँ ओ हनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ जनैत छी, जथहया सँ हम एथशया मे आयल रही, ताथह थदन सँ हम अहाँ सभक संग केहन समय मे रहै त छी। 19 हम सभ थरनमताक संग पभुक सेरा करै त छी, आ बहत रास नोर आ परीता सभक संग जे हमरा पर यहदी सभक पतीता मे पडल छल। 20 हम अहाँ सभक लेल कोनो लाभक बात नथह रोकलहँ , बल् थक अहाँ सभ केँ दे खा दे लहँ आ अहाँ सभ केँ सार्जथनक रप सँ आ घर-घर मे थशता दे लहँ । 21 यहदी आ यूनानी सभ केँ सेहो गराही दै त छी जे परमेश् ररक पथत पशाताप कर आ हमरा सभक पभु यीशु मसीह पर थरश् रास कर। 22 आब दे खू, हम आत् मा मे बानल यरशलेम जा रहल छी, मुदा ओतऽ हमरा पर की होयत से नथह जनैत छी। 23 थसराय एथह बातक जे पथरत आत् मा हर नगर मे गराही दै त छथि जे हमरा बंधन आ केश थटकैत अथछ। 24 मुदा एथह मे सँ कोनो बात हमरा नथह थहलाबैत अथछ आ ने हम अपन पाम केँ अपना लेल थपय मानैत छी, जाथह सँ हम अपन माग् आ पभु यीशु सँ भेटल सेरा केँ पूरा कऽ सकब जे हम परमेश् ररक कृपाक सुसमाचारक गराही दे ब . 25 आब दे खू, हम जनैत छी जे अहाँ सभ, थजनका सभक बीच हम परमेश् ररक राज् यक पचार करै त गेलहँ , आब हमर मुँह नथह दे खब। 26 ते ँ हम आइ अहाँ सभ केँ गराही दै त छी जे हम सभ लोकक खून सँ शुद छी। 27 हम अहाँ सभ केँ परमेश् ररक सभटा थरश् रास सुनाबय सँ परहे ज नथह कयलहँ । 28 ते ँ परमेश् ररक मम् ्लीक चरबाही करबाक लेल अपना केँ आ ओथह समस भेड ँ ा सभक पथत सारधान रह, जकरा पर पथरत आत् मा अहाँ सभ केँ पय्रेतक बना दे ने छथि। 29 हम ई जनैत छी जे हमर गेलाक बाद अहाँ सभक बीच कष भेथडयाधसान परेश करत, जे भेड ँ ा केँ नथह छोडत। 30 अहँ सभ अपनथह सँ लोक सभ उठत, जे थरकृत बात बाजत आ थशष् य सभ केँ अपना पाछाँ खीच ं य। 31 ते ँ जागरक रह आ मोन राखू जे तीन रष् धरर हम एक-एक राथत-थदन नोर बहै त चेताबय नथह छोडलहँ । 32 आब, भाइ लोकथन, हम अहाँ सभ केँ परमेश् रर आ हनकर कृपाक रचनक समत सौंथप रहल छी जे अहाँ सभ केँ मजबूती दे बऽ मे सतम अथछ आ पथरत कयल गेल सभ लोकक बीच अहाँ सभ केँ उतराथधकार दे बऽ मे सतम अथछ। 33 हम ककरो चानी, सोना आ पररधानक लालसा नथह केलहँ । 34 हँ , अहाँ सभ सयं जनैत छी जे ई हाि हमर आ हमरा संग रहथनहार सभक आरशकताक सेरा केलक। 35 हम अहाँ सभ केँ सभ थकछु दे खा दे लहँ जे एतेक पररशम करै त अहाँ सभ केँ कमजोर लोकक भरम-पोषम करबाक चाही आ पभु यीशुक एथह बात केँ मोन पाडबाक चाही जे ओ कहलथन जे, “ पाखर सँ बेसी दे ब धन अथछ।” 36 ई बात कथह कऽ ओ सभ गोटे क संग ठे हन टे कने पाि्ना कयलथन। 37 ओ सभ बहत काथन कऽ पौलुसक गरदथन पर खथस पडल आ चुमा लेलक।

38 सभ सँ बेसी दु खी भेलाह जे ओ सभ ओथह बात सभक कारमे ँ जे ओ सभ आब हनकर मुँह नथह दे खथि। ओ सभ हनका संग जहाज पर पहँ थच गेलाह। अधार 21 1 हम सभ ओकरा सभ सँ हथट कऽ जहाज पर चढलाक बाद सोझ रसा धऽ कऽ कूस आ दोसर थदन रो्​् स आ ओतय सँ पटारा पहँ चलहँ । 2 जखन एकटा जहाज िीथनक थदस जा रहल छल, तखन हम सभ चथढ कऽ थरदा भेलहँ । 3 जखन हम सभ साइपस केँ खोथज कऽ ओकरा बामा कात छोथड अररया मे जा कऽ सोर मे उतरलहँ , कारम ओतथह जहाज पर अपन भार उतारबाक छल। 4 हम सभ थशष् य सभ केँ पाथब सात थदन धरर ओतऽ रहलहँ , ओ सभ आत् माक दारा पौलुस केँ कहलथिन जे ओ यरशलेम नथह जाउ। 5 हम सभ ओथह थदन सभ केँ पूरा कऽ कऽ थरदा भऽ गेलहँ । ओ सभ हमरा सभ केँ स् ती-बचा सभक संग, जाबत धरर हम सभ शहर सँ बाहर नथह थनकललहँ , ताबत धरर हमरा सभ केँ रसा मे अनलथन। 6 हम सभ एक-दोसर सँ थरदा लऽ कऽ जहाज पर चथढ गेलहँ । आ ओ सभ िेर घर घुरर गेलाह। 7 जखन हम सभ सोर सँ अपन बाट पूरा कऽ कऽ टोलेमैस पहँ चलहँ आ एक थदन भाय सभ केँ पमाम कयलथन आ हनका सभक संग रथह गेलहँ । 8 दोसर थदन हम सभ पौलुसक संगथत थरदा भेलहँ आ कैसररया पहँ चलहँ । आ हनका संग रथह गेलाह। 9 ओही आदमीक चाररटा बेटी कुमारर छलथन, जे भथरषरामी करै त छलीह। 10 जखन हम सभ ओतऽ बहत थदन धरर रहलहँ तँ यहथदया सँ अगाबस नामक एकटा परक् ता उतरलाह। 11 जखन ओ हमरा सभ लग पहँ चलाह तँ पौलुसक पटी लऽ कऽ अपन हाि-पएर बाखन कऽ कहलथिन, “पथरत आत् मा ई कहै त छथि जे यरशलेम मे यहदी सभ ओथह आदमी केँ बाखन कऽ ओकरा मे सौंथप दे ताह।” गैर-यहदी सभक हाि। 12 जखन हम सभ ई बात सुथन हम सभ आ ओथह ठामक लोक सभ हनका सँ यरशलेम नथह जेबाक लेल थरनती कयलथन। 13 तखन पौलुस उतर दे लथिन, “अहाँ सभ कानब आ हमर मोन तोडब की चाहै त छी?” कारम, हम मात बानल नथह, बल् थक पभु यीशुक नामक लेल यरशलेम मे मरबाक लेल सेहो तैयार छी। 14 जखन ओ मनुष्‍य नथह करऽ चाहलाह तँ हम सभ ई कहै त रथक गेलहँ जे , “पभुक इच् छा पूरा होअय।” 15 ओथह थदनक बाद हम सभ अपन गाडी उठा कऽ यरशलेम चथल गेलहँ । “ 17 जखन हम सभ यरशलेम पहँ चलहँ तँ भाय सभ हमरा सभ केँ खुशी-खुशी सागत कयलथन। 18 दोसर थदन पौलुस हमरा सभक संग याकूब लग गेलाह। आ सभ बुजुग् सभ उपखसत छलाह। 19 ओ हनका सभ केँ पमाम कऽ कऽ थरशेष रप सँ बता दे लथिन जे परमेश् रर अपन सेराक दारा गैर-यहदी सभक बीच की-की काज कयलथन।

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पेररत सभक काज

20 ई बात सुथन ओ सभ पभुक मथहमा कऽ कऽ कहलथिन, “हे भाइ, अहाँ दे खैत छी जे कतेक हजार यहदी अथछ जे थरश् रास करै त अथछ। ओ सभ धम् -थनयमक पथत उताही छथि। 21 हनका सभ केँ अहाँ सँ सूथचत कयल गेल अथछ जे अहाँ गैरयहदी सभ केँ मूसा केँ छोडबाक थसखाबैत छी जे हनका सभ केँ अपन बचा सभक खतना नथह करबाक चाही आ ने रीथतररराजक पालन करबाक चाही। 22 ते ँ ई की अथछ? भीड के जररत एक ठाम आबै के चाही, थकएक तँ ओ सभ सुनत जे अहाँ आथब गेलहँ ।” 23 ते ँ हम सभ जे कहै त छी, से कर, हमरा सभक चाररटा पुरष छथि, थजनका सभ पर वत छथन। 24 ओ सभ लऽ कऽ ओकरा सभक संग अपना केँ शुद कर आ ओकरा सभक संग आरोप लगाउ जे ओ सभ माि मुं्न करथि। मुदा अहाँ सेहो वरखसत रह आ धम् -थनयमक पालन कर।” 25 थरश् रास करयरला गैर-यहदी सभक थरषय मे हम सभ थलखख कऽ ई थनषष् थनकाललहँ जे ओ सभ एहन कोनो बात नथह मानैत अथछ, थसराय एथह बातक जे ओ सभ मूथत् सभक लेल चढाओल गेल रसु सभ सँ, खून सँ, गला घोंटला सँ आ वथभचार सँ अपना केँ बचाबय। 26 तखन पौलुस ओथह आदमी सभ केँ लऽ गेलाह आ दोसर थदन हनका सभक संग पथरत भऽ कऽ मन् थदर मे परेश कयलथन, जाथह सँ पथरतताक थदन पूरा हे बाक बातक संकेत दे लथन, जाबत धरर हनका सभ मे सँ एक-एक गोटे क लेल बथलदान नथह चढाओल जायत। 27 सात थदन समार भऽ गेल तखन एथशयाक यहदी सभ हनका मन् थदर मे दे खख सभ लोक केँ भडका दे लक आ हनका पर हाि राखख दे लक। 28 “इसाएलक लोक सभ, मदथद कर, “ई ओ आदमी अथछ जे सभ लोक केँ लोक आ धम् -थनयम आ एथह स् िानक थररद सभ ठाम थशता दै त अथछ। 29 (थकएक तँ ओ सभ पथहने हनका संग नगर मे इथिसीक टड ोथिमस केँ दे खने छलाह, जकरा ओ सभ बुझैत छलाह जे पौलुस मन् थदर मे अनने छथि।” 30 पूरा नगर हथट गेल आ लोक सभ दौडल, पौलुस केँ पकथड कऽ मन् थदर सँ बाहर थनकाथल दे लक। 31 जखन ओ सभ हनका मारबाक लेल जा रहल छलाह तखन सेनाक पमुख केँ ई खबरर भेटलथन जे पूरा यरशलेम मे हं गामा भ’ गेल अथछ। 32 ओ सभ तुरन थसपाही आ सेनापथत सभ केँ लऽ कऽ दौडल हनका सभक लग आथब गेलाह। 33 तखन सेनापथत लग आथब कऽ हनका पकथड कऽ दू जंजीर मे बानबाक आजा दे लथिन। आ माँ ग केलक जे ओ के अथछ आ की केने अथछ। 34 लोकक बीच थकयो एक-एकटा, थकयो दोसर बात थचथचया उठल, आ जखन ओ एथह हं गामा मे कोनो बात नथह बुथझ सकलाह, तखन ओ हनका महल मे ल’ जेबाक आजा दे लथन। 35 जखन ओ सीढी पर पहँ चलाह तँ लोक सभक थहं साक कारमे ँ थसपाही सभ हनका लऽ गेलथन। 36 लोकक भीड पाछू-पाछू थचथचया रहल छल, “ओकरा छोथड थदयौक।” 37 जखन पौलुस केँ महल मे ल’ जेबाक छलथन तखन ओ सेनापथत केँ कहलथिन, “की हम अहाँ सँ बात क’ सकैत छी?” के कहलक जे, की अहाँ यूनानी बाथज सकैत छी?

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38 की अहाँ ओ थमसरासी नथह छी जे एथह थदन सँ पथहने हं गामा कऽ कऽ चारर हजार हतारा केँ जंगल मे लऽ गेल छल? 39 पौलुस कहलथिन, “हम थकथलथसयाक नगरक तरसुसक यहदी छी आ कोनो नगरक नागररक छी। 40 जखन ओ हनका अनुमथत दऽ दे लथिन तखन पौलुस सीढी पर ठाढ भऽ कऽ लोक सभ केँ हाि सँ इशारा कयलथन। जखन बडका चुप भऽ गेलथन तँ ओ थहबू भाषा मे हनका सभ केँ कहलथिन। अधार 22 1 यौ भाइ आ बाप-बाप, अहाँ सभ हमर बचार सुनू जे हम एखन अहाँ सभक सोझाँ राखख रहल छी। 2 (ओ सभ ई सुथन जे यीशु हनका सभ सँ थहबू भाषा मे बाजैत छथि, तखन ओ सभ आओर चुप भ’ गेलाह।” 3 हम सते एकटा यहदी छी, जे थकथलथसयाक एकटा नगर तरसुस मे जनल छी, तैयो एथह नगर मे गमालीएलक चरम मे पललबढल छी आ थपता-थपताक धम्-थनयमक थसद तरीकाक अनुसार थशता दै त छलहँ आ एथह मे उतुक छलहँ परमेश् रर, जेना अहाँ सभ आइयो छी। 4 हम एथह तरहे ँ मृत् यु धरर सताबैत रहलहँ, सी-पुरष केँ बाखन कऽ जेल मे राखख दे थलयैक। 5 जेना महापुरोथहत हमरा आ बूढ-पुरान सभक समथत सेहो गराही दै त छथि, हनका सभ सँ हम भाय सभ केँ पत लऽ कऽ दथमश गेलहँ जे ओतऽ बानल लोक सभ केँ यरशलेम लऽ कऽ दं थ्त कयल जाय। 6 जखन हम दु पहर मे याता करै त दथमश लग पहँ चलहँ तँ अचानक स् रग् सँ हमरा चार कात एकटा पैघ इजोत चमथक गेल। 7 हम जमीन पर खथस पडलहँ आ एकटा आराज सुनलहँ जे हमरा कहै त छल, “ साउल, साउल, अहाँ हमरा थकएक सताबैत छी?” 8 हम उतर दे थलयैक, “हे पभु, अहाँ के छी?” ओ हमरा कहलथिन, “ हम नासरतक यीशु छी, जकरा अहाँ सताबैत छी।” 9 हमरा संग जे सभ छल, से सभ इजोत दे खख कऽ भयभीत भऽ गेल। मुदा ओ सभ हमरा सँ गप करथनहारक आराज नथह सुनलथन। 10 हम कहथलयथन, “हे पभु, हम की करब? पभु हमरा कहलथिन, “उथठ कऽ दथमश जाउ। ओतथह अहाँ केँ ओथह सभ काजक बारे मे कहल जायत जे अहाँ केँ करबाक लेल थनधा् ररत कयल गेल अथछ।” 11 जखन हम ओथह इजोतक मथहमाक कारमे ँ दे खख नथह सकलहँ, तखन हम अपना संग रहथनहार सभक हाि सँ दथमश आथब गेलहँ । “ 13 हमरा लग आथब कऽ ठाढ भऽ हमरा कहलथिन, “साउल भाइ, दे खख थलअ।” आ ओही घडी हम आँ खख उठा कऽ हनका थदस तकलहँ । 14 ओ कहलथिन, “हमरा सभक पूर्ज सभक परमेश् रर अहाँ केँ एथह लेल चुनलथन जे अहाँ हनकर इचा केँ जाथन कऽ ओथह धम् केँ दे खब आ हनकर मुँहक आराज सुनब।” 15 अहाँ सभ लोकक सामने हनकर गराह बनब जे अहाँ जे दे खलहँ आ सुनलहँ ।


पेररत सभक काज

16 आब अहाँ थकएक दे री कऽ रहल छी? उठू, बपथतस् मा थलअ, आ पभुक नाम पुकारै त अपन पाप केँ धोउ।” 17 जखन हम यरशलेम घुरर कऽ मख्र मे पाि्ना करै त छलहँ तखन हम समाथध मे छलहँ । 18 ओ हमरा ई कहै त दे खलथन जे , “ जली-जली यरशलेम सँ बाहर थनकलू। 19 हम कहथलयथन, “पभु, ओ सभ जनैत छथि जे हम सभ सभाघर मे जे सभ अहाँ पर थरश् रास करै त छल, तकरा सभ केँ जेल मे राखख कऽ मारर-पीट करै त छलहँ । 20 जखन अहाँ क शहीद कीिनक खून बहल गेल तखन हमहँ ठाढ छलहँ आ हनकर मृतुक लेल सहमथत दै त छलहँ आ हनका मारर दे थनहार सभक रस राखख रहल छलहँ । 21 ओ हमरा कहलथिन, “ जाउ, थकएक तँ हम अहाँ केँ एतऽ दू र सँ गैर-यहदी सभक लग पठा दे ब।” 22 ओ सभ यीशु केँ ई बात सुथन कऽ बाजल, “एहन आदमी केँ पृि् री पर सँ दू र कर, थकएक तँ ओ जीथरत रहब उथचत नथह।” 23 ओ सभ थचथचया कऽ अपन कपडा उतारर कऽ हरा मे धूरा िेथक दे लक। 24 पधान सेनापथत हनका महल मे अनबाक आजा दे लथिन आ कहलथिन जे हनका कोडा मारर कऽ जाँ च कयल जाय। जाथह सँ ओ बुथझ सकथि जे ओ सभ हनका थररद थकएक एना थचथचया उठलथन। 25 जखन ओ सभ हनका पेटी सँ बाखन रहल छलाह तखन पौलुस ओथहठाम ठाढ सेनापथत केँ कहलथिन, “की अहाँ सभ केँ रोमी आ थनद्ष केँ कोडा मारब उथचत अथछ?” 26 सेनापथत ई बात सुथन कऽ सेनापथत केँ कहलथिन, “अहाँ जे काज करै त छी से सारधान रह। 27 तखन सेनापथत आथब कऽ पुछलथिन, “की अहाँ रोमी छी?” ओ कहलक, हँ । 28 पधान सेनापथत उतर दे लथिन, “हमरा ई सतंतता बहत रास रकम सँ भेटल अथछ।” पौलुस कहलथिन, “मुदा हम सतव जनल छी।” 29 तखन ओ सभ तुरन हनका सँ थरदा भऽ गेलाह जे हनका सँ जाँ च करबाक छलथन। 30 दोसर थदन ओ ई जाथन चाहै त छल जे यहदी सभक दारा हनका पर आरोप थकएक कयल गेल छलथन, ते ँ ओ हनका अपन दल मे सँ मुक कऽ दे लथन आ मुखपुरोथहत सभ आ हनकर सभ पररषद् केँ उपखसत हे बाक आजा दे लथन आ पौलुस केँ नीचाँ उतारर कऽ हनका सभक सोझाँ बैसा दे लथन।

5 तखन पौलुस कहलथिन, “हे भाइ लोकथन, हमरा ई नथह बुझल अथछ जे ओ महापुरोथहत छलाह, थकएक तँ धम्शास् त मे थलखल अथछ जे, “अहाँ सभ अपन पजाक शासकक आपथत नथह कर।” 6 मुदा पौलुस केँ बुथझ पडलथन जे एक भाग सदु की आ दोसर िररसी अथछ, तखन ओ पररषद् मे थचथचया उठलथन, “भाइ लोकथन, “हम िररसी छी, िरीसीक पुत छी।” प् मे। 7 यीशु ई कथह कऽ िररसी आ सदु की सभक बीच थरराद भऽ गेल। 8 सदु की सभ कहै त छथि जे पुनरुान नथह अथछ, ने स् रग्दूत आ ने आत् मा, मुदा िररसी सभ दु नू बात केँ सीकार करै त छथि। 9 तखन एकटा बडका थचथचया उठल आ िररसी सभक धम्शासी सभ उथठ कऽ झगडा कऽ कऽ कहलक जे, “हमरा सभ केँ एथह आदमी मे कोनो अधलाह नथह भेटैत अथछ ईशर। 10 जखन बहत रास झगडा भेल तँ सेनापथत सभ एथह ्रसँ जे पौलुसक टु कड-टु कड नथह भऽ जाएत, सेनापथत सभ केँ आजा दे लथिन जे ओ सभ नीचाँ जा कऽ ओकरा सभ मे सँ जबरदसी पकथड कऽ महल मे आथन थदअ। 11 ओकर बादक राथत परमेश् रर हनका लग ठाढ भऽ कहलथिन, “ हौ पौलुस, साहब रह। 12 भोर भेला पर थकछु यहदी सभ जमा भऽ कऽ शाप मे बाखन कऽ कहलथिन जे जाबत धरर पौलुस केँ नथह मारर दे ब ताबत धरर नथह खाएब आ नथह पीब। 13 ओ सभ चालीस सँ बेसी छल जे ई षडंत रचने छल। 14 ओ सभ मुख्‍यपुरोथहत आ बूढ-पुरान सभ लग आथब कऽ कहलथिन, “हम सभ अपना केँ एकटा पैघ शाप मे बानल छी जे जा धरर पौलुस केँ नथह मारर दे ब ता धरर थकछु नथह खाएब।” 15 एथह लेल अहाँ सभ पररषद् क संग मे सेनापथत केँ ई बात कथह थदअ जे ओ काख् हनका अहाँ सभक लग उतारर जेताह, जेना अहाँ सभ हनका बारे मे थकछु आओर नीक जकाँ पूथछ सकैत छी। 16 पौलुसक बथहनक बेटा जखन हनका सभक ठे हन मे पडल रहबाक बात सुनलथन तँ ओ महल मे जा कऽ पौलुस केँ कहलथिन। 17 तखन पौलुस एकटा सेनापथत केँ बजा कऽ कहलथिन, “एथह युरक केँ सेनापथत लग आथन थदयौक। 18 ओ हनका लऽ कऽ सेनापथत लग अनलथन आ कहलथिन, “कैदी पौलुस हमरा अपना लग बजौलथन आ हमरा सँ पाि्ना कयलथन जे एथह युरक केँ अहाँ लग अनबाक अथछ। 19 तखन पधान सेनापथत हनकर हाि पकथड कऽ हनका संग एकां त मे जा कऽ पुछलथिन, “अहाँ केँ हमरा की कहबाक अथछ?” 20 ओ कहलथिन, “यहदी सभ अहाँ सँ ई चाह कऽ लेने छथि जे काख् पौलुस केँ पररषद् मे उतारर थदअ, जेना ओ सभ हनका सँ थकछु आओर नीक जकाँ पूछताछ करथि।” 21 मुदा अहाँ हनका सभक समत नथह मानू, थकएक तँ चालीस सँ बेसी लोक हनका सभक पतीता मे अथछ, जे शपि सँ बानल अथछ जे जाबत धरर ओकरा नथह मारर दे त ता धरर ओ सभ नथह खाओत आ नथह पीत। तोरासँ कोनो पथतजा ताथक रहल छी। 22 तखन पधान सेनापथत ओथह युरक केँ छोथड दे लथिन आ हनका आजा दे लथिन, “दे खू, अहाँ ककरो ई बात नथह कहब जे अहाँ हमरा ई सभ बात कहलहँ ।”

अधार 23 1 पौलुस सभ पररषद् केँ गंभीरता सँ दे खख कहलथिन, “हे भाइ लोकथन, हम आइ धरर परमेश् ररक समत सभ सथदरेक सँ जीबैत छी।” 2 महापुरोथहत अननाह हनका लग ठाढ लोक सभ केँ आजा दे लथिन जे हनका मुँह पर पहार करथिन। 3 तखन पौलुस ओकरा कहलथिन, “हे उजर दे बाल, परमेश् रर तोरा मारर दे थिन, थकएक तँ की अहाँ हमरा पर धम् -थनयमक अनुसार नाय करबाक लेल बैसल छी आ हमरा वरसाक थरपरीत पहार करबाक आजा दै त छी?” 4 ओथह ठाम ठाढ लोक सभ कहलथिन, “की अहाँ परमेश् ररक महापुरोथहत केँ थन्ा करै त छी?”

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पेररत सभक काज

23 ओ दू टा सेनापथत केँ बजा कऽ कहलथिन, “राथतक तेसर बजे दू सय सैथनक आ सथठ घुडसरार आ दू सय भाला बजौथनहार केँ कैसररया जाय लेल तैयार कर। 24 ओकरा सभ केँ पशु-पती सभक वरसा कर जाथह सँ ओ सभ पौलुस केँ सरार कऽ कऽ राजपाल िेथलक लग सुरथतत राखख सकथि। 25 ओ एथह तरहे ँ एकटा पत थलखलथन। 26 काउथ्यस थलथसयास महान राजपाल िेथलक केँ अथभरादन पठौलथन। 27 ई आदमी यहदी सभ पकथड लेलक आ ओकरा सभक हाि सँ मारल जेबाक चाही छल, तखन हम एकटा सेनाक संग आथब कऽ ओकरा बचा लेलहँ । 28 जखन हम हनका सभ पर आरोप लगाबय के कारम जानय चाहै त छलहँ , तखन हम हनका हनका सभक पररषद् मे अनलहँ । 29 हम हनका सभ पर हनका सभक धम्-थनयमक थरषय मे आरोप लगाओल गेल बुझलहँ , मुदा हनका पर कोनो तरहक आरोप नथह छल जे मृतु रा बंधनक योग नथह अथछ। 30 जखन हमरा ई बात कहल गेल जे यहदी सभ ओथह आदमीक पतीता कोना कऽ रहल अथछ, तखन हम तुरन अहाँ लग पठौलहँ आ ओकर आरोप लगाबयरला सभ केँ सेहो आजा दे लहँ जे अहाँ सभक सोझाँ हनका सभक थररद की अथछ। थरदायी। 31 तखन थसपाही सभ पौलुस केँ लऽ कऽ राथत मे एं टीपैथटड स लऽ कऽ अनलथन। 32 दोसर थदन ओ सभ घुडसरार सभ केँ हनका संग जेबाक लेल छोथड कऽ महल थदस घुरर गेलाह। 33 ओ सभ कैसररया पहँ थच कऽ राजपाल केँ पत पहँ चा दे लथिन। 34 राजपाल पत पथढ कऽ पुछलथिन जे अहाँ कोन पां तक छी। जखन ओ बुथझ गेलाह जे ओ थकथलथसयाक छथि। 35 ओ कहलथन, जखन तोहर आरोप लगाबयरला सभ सेहो आथब जेताह तखन हम अहाँ क बात सुनब। ओ हनका हे रोदे सक न् यायालय मे राखबाक आजा दे लथिन।

8 हम सभ ओकरा पर आरोप लगाबय बला सभ केँ आजा दै त छी जे ओ अहाँ लग आबय। 9 यहदी सभ सेहो सहमत भेलाह जे ई सभ बात एहन अथछ। 10 तखन पौलुस राजपाल हनका बजबाक लेल इशारा कऽ कऽ उतर दे लथिन, “हम जनैत छी जे अहाँ एथह जाथत मे बहत रष् सँ नायाधीश छी, हम अपना लेल आओर हँ सी-खुशी सँ उतर दै त छी। 11 थकएक तँ अहाँ बुथझ सकब जे आब बारह थदन भऽ गेल अथछ जखन हम यरशलेम आराधना करबाक लेल गेलहँ । 12 ओ सभ ने हमरा मन् थदर मे ककरो सँ थरराद करै त दे खलक आ ने लोक सभ केँ उठबैत आ ने सभाघर मे आ ने नगर मे। 13 ओ सभ आब हमरा पर आरोप लगाओल गेल बात सभ केँ पररषृत नथह कऽ सकैत अथछ। 14 मुदा हम अहाँ केँ ई बात सीकार करै त छी जे ओ सभ जाथह बाट केँ पाखण कहै त छथि, तेना हम अपन पूर्ज सभक परमेश् ररक आराधना करै त छी, जे सभ बात पर थरश् रास करै त छी जे धम्-थनयम आ परक् ता सभ मे थलखल अथछ। 15 परमेश् ररक पथत आशा राखू, जे ओ सभ सेहो अनुमथत दै त छथि जे धम् आ अधम् दु नूक मृत् युक पुनरुान होयत। 16 हम एथह परमेश् रर आ मनुष् यक पथत सदै र थरश् रास रथहत थररेक रखैत छी। 17 बहत रष्क बाद हम अपन जाथत केँ थभता आ बथलदान अनबाक लेल आयल छी। 18 एथशयाक थकछु यहदी सभ हमरा मन् थदर मे शुद कयल गेल, ने भीडक संग आ ने हं गामा मे। 19 जँ हमरा थररद कोनो आपथत कररतथि तँ केकरा सभ केँ अहाँ सँ पथहने एतय आथब कऽ आपथत करबाक चाही छल। 20 नथह तँ एथहठाम ई सभ कहथि जे , “हम पररषद् क समत ठाढ रहला पर हमरा मे कोनो अधलाह काज दे खलथन अथछ। 21 थसराय एथह एकथह आराजक जे हम हनका सभक बीच ठाढ भऽ कऽ थचथचया उठलहँ , “मृतक सभक पुनरुान केँ छूथब कऽ आइ अहाँ सभ हमरा पर सराल ठाढ कऽ रहल छी।” 22 िेथलक ई बात सुथन कऽ ओथह बाट पर बेसी पूम् जान भऽ कऽ ओकरा सभ केँ सथगत कऽ दे लथिन आ कहलथिन, “जखन पमुख सेनापथत लूथसया उतरताह तखन हम अहाँ क बातक पूरापूरा बात बुझब।” 23 ओ एकटा सेनापथत केँ आजा दे लथिन जे ओ पौलुस केँ रखबाक लेल आ हनका सतंतता दे थिन आ अपन कोनो पररथचत केँ हनकर सेरा करबा सँ रा हनका लग आबय सँ मना नथह करथि। 24 थकछु थदनक बाद जखन िेथलक अपन पती दु थसलाक संग अयलाह, जे यहदी छलीह, तखन ओ पौलुस केँ बजौलथन जे मसीह पर थरशास करबाक थरषय मे हनकर बात सुनलथन। 25 जखन ओ धाथम्कता, संयम आ आबय बला नायक थरषय मे थरचार करै त छलाह, तखन िेथलक काँ थप उठलाह आ उतर दे लथिन, “एथह समय लेल जाउ। जखन हमरा कोनो सुथरधाजनक मौसम होयत तखन हम अहाँ केँ बजा लेब। 26 ओ आशा करै त छलाह जे पौलुस हनका ढीला करबाक लेल पाइ दऽ दे लकथन। 27 मुदा दू रष्क बाद पोथक्यस िेकस िेथलकक कोठली मे आथब गेलाह, आ िेथलक यहदी सभ केँ पसनता दे बऽ चाहै त छलाह, पौलुस केँ बानल छोथड दे लथन।

अधार 24 1 पाँ च थदनक बाद महापुरोथहत अनथनया बूढ-पुरोथहत सभक संग आ ततु्लुस नामक एकटा रका संग उतरलाह। 2 जखन हनका बजाओल गेलथन तखन ततु्लुस हनका पर आरोप लगाबय लगलाह, “अहाँ क दारा हमरा सभ केँ बहत शानता भेटैत अथछ आ अहाँ क पयोजन सँ एथह जाथत केँ बहत योग काज कयल जाइत अथछ। 3 हम सभ एकरा सथदखन सीकार करै त छी, आ सभ ठाम, परम कुलीन िेथलक, पूरा धनरादक संग। 4 मुदा हम अहाँ सँ आओर िकाऊ नथह भऽ जायब, हम अहाँ सँ थरनती करै त छी जे अहाँ हमरा सभ केँ अपन दयाक थकछु शब सुनब। 5 हम सभ ई आदमी एकटा महामारी आ संसारक समस यहदी सभक बीच थरदोहक आ नासरीक समदायक सरगना पाथब गेलहँ । 6 ओ मन् थदर केँ अपथरत करबाक लेल चथल गेलाह। 7 मुदा पमुख सेनापथत थलथसया हमरा सभ पर आथब कऽ हमरा सभक हाि सँ हनका दू र कऽ लेलक।

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पेररत सभक काज

अधार 25

19 मुदा हनका पर अपन अंधथरशास आ एकटा यीशुक थरषय मे थकछु प् छलथन जे मरल छलाह, जकरा पौलुस जीथरत रहबाक पुथष कयलथन। 20 एथह तरहक प् पर हमरा शंका छल, ते ँ हम हनका सँ पुछथलयथन जे की अहाँ यरशलेम जायब आ ओतथह एथह बात सभक नाय कयल जायत। 21 मुदा जखन पौलुस अगसक सुनराई मे राखख दे बाक लेल आगह कयलथन तखन हम हनका कैसर लग नथह पठा सकब ता धरर हनका राखल जाय। 22 तखन अथगपा िेकस केँ कहलथिन, “हमहँ ओथह आदमीक बात सुनय चाहै त छी।” काख्, ओ कहलथन, अहाँ हनकर बात सुनब। 23 दोसर थदन जखन अथगपा आ बन्स बहत धूमधाम सँ आयल छलाह आ नगरक पमुख सेनापथत आ पमुख लोक सभक संग सुनबाक सान मे परेश कयलथन, तखन िेसक आजा पर पौलुस केँ बाहर आनल गेलाह। 24 िेसूस कहलथिन, “राजा अथगपा आ हमरा सभक संग जे सभ लोक हमरा सभक संग छथि, अहाँ सभ एथह आदमी केँ दे खैत छी, जकरा बारे मे यहदी सभक भीड यरशलेम मे आ एतय सेहो हमरा संग वरहार कयलथन अथछ आब जीथरत रहब। 25 मुदा जखन हम पाथब गेलहँ जे ओ मृत् युक योग कोनो काज नथह केने छथि आ सयं अगसक समत अपील केने छथि, तखन हम हनका पठे बाक थनम्य कऽ लेलहँ । 26 हनका बारे मे हमरा लग कोनो खास बात नथह अथछ जे हम अपन माथलक केँ थलखब। ते ँ हम हनका अहाँ क समत आ थरशेष रप सँ अहाँ क समत अनने छी, हे राजा अथगपा, जाथह सँ परीतमक बाद हमरा थकछु थलखबाक मौका भेटय। 27 थकएक तँ कैदी केँ पठा दे ब आ ओकरा पर लगाओल गेल अपराधक संकेत नथह दे ब हमरा बेरजह बुझाइत अथछ।

1 िेसस पदे श मे पहँ चला पर तीन थदनक बाद कैसररया सँ यरशलेम चथल गेलाह। 2 तखन महापुरोथहत आ यहदी सभक मुखखया पौलुसक थररद हनका सूचना दे लथिन आ हनका सँ थरनती कयलथन। 3 ओ हनका पर अनुगहक आगह कयलथन जे ओ हनका यरशलेम बजा कऽ हनका मारबाक लेल बाट मे बैसल रहथि। 4 मुदा िेसु उतर दे लथिन जे पौलुस केँ कैसररया मे राखल जाय आ ओ सयं ओतऽ जखलये थरदा भऽ जेताह। 5 ते ँ अहाँ सभ मे सँ जे सभ सामथ् अथछ, से सभ हमरा संग जा कऽ एथह आदमी पर आरोप लगाबथि। 6 यीशु हनका सभक बीच दस थदन सँ बेसी रथह कऽ कैसररया चथल गेलाह। दोसर थदन नाय आसन पर बैसल पौलुस केँ अनबाक आजा दे लथिन। 7 यीशु अयला पर यरशलेम सँ उतरल यहदी सभ चार कात ठाढ भऽ कऽ पौलुसक थररद बहत रास आ कषक थशकायत कयलथन, जकरा ओ सभ नथह कऽ सकलाह। 8 ओ अपना लेल उतर दे लथिन, “हम ने यहदी सभक थनयमक थररद, ने मन् थदरक थररद आ ने कैसरक थररद, हम कोनो अपराध नथह केलहँ ।” 9 मुदा िेसु यहदी सभ केँ पसनता करऽ चाहै त पौलुस केँ कहलथिन, “की अहाँ यरशलेम जा कऽ ओतऽ हमरा सोझाँ एथह बात सभक नाय करऽ चाहै त छी?” 10 तखन पौलुस कहलथिन, “हम कैसरक न् यायालय पर ठाढ छी, जतय हमरा पर नाय करबाक चाही। 11 जँ हम अपराधी छी रा मृतुक योग कोनो काज केने छी तँ हम मरबा सँ मना नथह करै त छी, मुदा जँ एथह मे सँ कोनो एहन बात नथह अथछ जाथह सँ ई सभ हमरा पर आरोप लगाबैत छथि तँ केओ हमरा हनका सभक हाि मे नथह सौंप सकैत अथछ। हम कैसर सँ अपील करै त छी। 12 तखन िेसु सभ पररषद् सँ चचा् कऽ कऽ कहलथिन, “की अहाँ कैसरक समत अपील केलहँ ?” अहाँ कैसर लग जायब।” 13 थकछु थदनक बाद राजा अथगपा आ बथन्का िेकस केँ पमाम करबाक लेल कैसररया पहँ चलाह। 14 ओ सभ बहत थदन धरर ओतऽ रहला पर िेसूस पौलुसक बात राजा केँ कहलथिन, “एकटा आदमी िेथलक दारा बान मे छोथड गेल अथछ। 15 जखन हम यरशलेम मे छलहँ तखन यहदी सभक मुख् यपुरोथहत आ बूढ-पुरान सभ हमरा हनका पर न् याय करबाक इच् छा कयलथन। 16 हम हनका सभ केँ उतर दे थलयथन, “रोम लोकक ई तरीका नथह अथछ जे ओ ककरो मरबा लेल छोथड दे थिन, जाथह सँ पथहने जे पर आरोप लगाओल गेल अथछ, ओकरा पर आरोप लगाब’ बला सभ सँ आमने-सामने आ ओकरा पर लगाओल गेल अपराधक थरषय मे अपना लेल जराब दे बाक अनुमथत भेटय।” 17 ते ँ जखन ओ सभ एतय पहँ चलाह तँ परसू थदन थबना कोनो दे री केने हम नायक आसन पर बैथस गेलहँ आ ओथह आदमी केँ बाहर अनबाक आजा दे थलयथन। 18 जखन ओ सभ आरोप लगाबय बला सभ ठाढ भऽ गेलाह तँ ओ सभ एहन कोनो आरोप नथह लगौलथन जेना हमरा बुझने छल।

अधार 26 1 तखन अथगपा पौलुस केँ कहलथिन, “अहाँ केँ अपन बात कहबाक अथधकार अथछ।” तखन पौलुस हाि बढा कऽ अपना लेल उतर दे लथिन। 2 हे राजा अथगपा, हम अपना केँ खुश बुझैत छी, थकएक तँ हम आइ अहाँ क समत अपना लेल उतर दे ब, जाथह सभ बात पर हमरा पर यहदी सभक आरोप अथछ। 3 एथह लेल जे हम अहाँ केँ यहदी सभक बीचक सभ रीथत-ररराज आ प् मे थनपुम बुझैत छी। 4 हमर यरशलेम मे हमर अपन जाथत मे पथहने जे जीरन-शैली छल, से सभ यहदी सभ जनैत अथछ। 5 ओ सभ हमरा शुरए सँ जनैत छलाह, जँ ओ सभ गराही दै त छथि जे हमरा सभक धम्क सभ सँ कठोर पंिक अनुसार हम िररसी जकाँ जीबैत छी। 6 आब हम ठाढ छी आ हमरा सभक पूर्ज सभ केँ परमेश् रर दारा कयल गेल पथतजाक आशाक कारमे ँ न् याय कयल गेल अथछ। 7 हमरा सभक बारह गोत, जे थदन-राथत परमेश् ररक सेरा करै त अथछ, ताथह पथतजाक आशा करै त अथछ। जाथह आशाक कारमे,ँ राजा अथगपा, हमरा पर यहदी सभक आरोप अथछ। 8 परमेश् रर मृत् यु सभ केँ जीथब उठबैत छथि, अहाँ सभक लेल ई बात थकएक अथरश् रास नथह बुझल जायत?

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पेररत सभक काज

9 हम मने-मन सोचैत छलहँ जे हमरा नासरतक यीशुक नामक थरपरीत बहत रास काज करबाक चाही। 10 ई काज हम यरशलेम मे सेहो केलहँ , आ बहतो पथरत लोक सभ केँ जेल मे राखख दे लहँ, जे मुखपुरोथहत सभक अथधकार पाथब गेलहँ । जखन हनका सभ केँ मारल गेलथन तखन हम हनका सभक थररद अपन आराज दे लहँ । 11 हम सभ सभाघर मे हनका सभ केँ बेर-बेर दं थ्त करै त छलहँ आ हनका सभ केँ थन्ा करबाक लेल बाध करै त छलहँ । हम हनका सभक थररद बहत पागल भऽ कऽ हनका सभ केँ परदे शी शहर धरर सताबैत रहलहँ । 12 तखन हम मुख्‍यपुरोथहत सभक अथधकार आ आजाक संग दथमश गेल रही। 13 हे राजा, दु पहर मे हम बाट मे स् रग् सँ एकटा इजोत दे खलहँ जे सूय्क तेज सँ ऊपर हमरा आ हमरा संग याता करय बला सभक चार कात चमथक रहल छल। 14 जखन हम सभ पृि् री पर खथस पडलहँ तँ हमरा एकटा आराज सुनलहँ जे इबानी भाषा मे कहै त छल, “ साउल, साउल, अहाँ हमरा थकएक सताबैत छी?” तोरा चुभन पर लात मारब कथठन अथछ। 15 हम पुछथलयथन, “हे पभु, अहाँ के छी?” ओ कहलथिन, “ हम यीशु छी थजनका अहाँ सताबैत छी।” 16 मुदा उठू आ अपन पएर पर ठाढ भ’ जाउ, थकएक तँ हम अहाँ केँ एथह काज मे सेरक आ गराह बनेबाक लेल पगट भेलहँ जे अहाँ दे खलहँ आ जाथह बात मे हम अहाँ केँ पकट करब। 17 हम अहाँ केँ ओथह लोक आ गैर-यहदी सभ सँ मुक कऽ रहल छी। 18 हनका सभक आँ खख खोथल कऽ हनका सभ केँ अन् हार सँ इजोत मे आ शैतानक सामि्​् य सँ परमेश् रर थदस घुमाबथि जाथह सँ हनका सभ केँ पापक तमा आ हमरा पर जे थरश् रास अथछ ताथह दारा पथरत कयल गेल लोक सभक बीच उतराथधकार भेटय। 19 हे राजा अथगपा, हम स् रग्य दश्नक आजा नथह मानलहँ । 20 मुदा पथहने दथमश, यरशलेम आ यहथदयाक समस इलाका मे आ िेर गैर-यहदी सभ केँ ई बात कहथलयथन जे ओ सभ पशाताप कऽ परमेश् रर थदस घुरथि आ पशाताप करबाक लेल उथचत काज करथि। 21 एथह कारमे ँ यहदी सभ हमरा मन् थदर मे पकथड लेलक आ हमरा मारबाक लेल चथल गेल। 22 एथह लेल परमेश् ररक सहायता पाथब हम आइ धरर छोट-पैघ सभ केँ गराही दै त रथह रहल छी, जे परक् ता आ मूसा जे परक् ता आ मूसा कहने छलाह जे आब आओत, तकरा छोथड आन थकछु नथह कहै त छी। 23 मसीह कष उठाबथि आ मृत् यु मे सँ पथहने जीथब उठताह आ लोक आ गैर-यहदी सभ केँ इजोत दे थिन। 24 जखन ओ अपना लेल ई बात बाथज रहल छलाह तखन िेसु जोर सँ कहलथिन, “पौलुस, अहाँ बौक भऽ गेल छी। बहत थरदा अहाँ केँ बताह बना दै त अथछ। 25 मुदा ओ कहलथिन, “हम पागल नथह छी, परम कुलीन िेकस। मुदा सत आ संयमक रचन बाजू। 26 थकएक तँ राजा ई सभ बात जनैत छथि आ हम हनका सामने मुक रप सँ बजैत छी। थकएक तँ ई काज कोनो कोन मे नथह भेल छल।

27 राजा अथगपा, की अहाँ परक् ता सभ पर थरश् रास करै त छी? हम जनैत छी जे अहाँ थरशास करै त छी। 28 तखन अथगपा पौलुस केँ कहलथिन, “अहाँ हमरा मसीही बनबाक लेल लगभग मना रहल छी।” 29 पौलुस कहलथिन, “हम परमेश् रर सँ चाहै त छी जे अहँ टा नथह, बल् थक आइ जे सभ हमर बात सुनैत अथछ, से सभ सेहो लगभग आ एकदम हमरा जेकाँ रहब, एथह बंधन सभक छोथड।” 30 ई बात कथह कऽ राजा, राजपाल, बन्स आ हनका सभक संग बैसल लोक सभ उथठ गेलाह। 31 जखन ओ सभ एक थदस गेलाह तँ ओ सभ आपस मे गपसप करै त कहलथिन, “ई आदमी कोनो एहन काज नथह करै त अथछ जे मृतुक योग रा बंधन मे बानल जाय।” 32 तखन अथगपा िेकस केँ कहलथिन, “जँ ओ कैसरक समत अपील नथह कररतथि तऽ ई आदमी मुक भऽ सकैत छल।” अधार 27 1 जखन ई थनम्य भेल जे हमरा सभ केँ इटली जायब, तखन ओ सभ पौलुस आ थकछु आन कैदी सभ केँ अगसक दलक एकटा सेनापथत जूथलयस नामक एक गोटे क हाि मे सौंप दे लक। 2 हम सभ अदाथमतीयमक जहाज पर बैथस गेलहँ , जकर अि् छल एथशयाक तट पर चलब। एकटा अररसाक्स, जे थिसलुनीकीक मथकदु थनयाक छल, हमरा सभक संग छल। 3 दोसर थदन हम सभ सीदोन मे पहँ चलहँ । जूथलयस पौलुस केँ थरनमतापूर्क थरनती कयलथन आ हनका अपन थमत सभ लग जा कऽ अपना केँ आराम दे बाक लेल सतंतता दे लथन। 4 हम सभ ओतऽ सँ थनकथल कऽ साइपसक नीचाँ चथल गेलहँ , कारम हरा सभ उनुख छल। 5 थकथलथसया आ पख्िथलया समुदक पार कऽ हम सभ लूथकयाक नगर माइरा पहँ चलहँ । 6 ओतथह सेनापथत केँ थसकंदररयाक एकटा जहाज इटली थदस जा रहल भेटलथन। ओ हमरा सभ केँ ओथह मे राखख दे लथन। 7 जखन हम सभ कतेको थदन धरर धीरे -धीरे जहाज पर चथल गेलहँ आ ख्​्सक ओथह पार बहत कम पहँ थच गेलहँ , आ हरा हमरा सभ केँ नथह रोकलक, तखन हम सभ केतेक नीचाँ सलोनक ओथह पार थरदा भेलहँ । 8 मुखशल सँ ओथह ठाम सँ गुजरै त एकटा एहन सान पर पहँ चलहँ जे सु्र थठकाना कहल जाइत अथछ। जथह लग लाथसया नगर छल। 9 जखन बहत समय बीथत गेल छल आ जहाज पर चलब आब खतरनाक भऽ गेल छल, कारम आब उपरास पथहने सँ बीथत गेल छल, तखन पौलुस हनका सभ केँ सलाह दे लथिन। 10 ओ हनका सभ केँ कहलथिन, “हे महोदय, हम बुझैत छी जे ई याता मात भार आ जहाज पर नथह, बल् थक हमरा सभक जान केँ सेहो आहत आ बहत नुकसान होयत।” 11 मुदा सेनापथत पौलुसक कहल बात सँ बेसी जहाजक माथलक आ माथलक पर थरश् रास कयलथन। 12 जाडक थबताबऽ लेल ओतऽ अभयारण सुगम नथह रहबाक कारमे ँ बेसी लोक जँ कोनो तरहे ँ िीनीक आ ओतऽ जाडक समय मे पहँ थच सकथि तँ ओतऽ सँ सेहो थरदा भऽ जेबाक सलाह दे लथन। जे केतेक आशय सल अथछ आ दथतम पथशम आ उतर पथशम थदस पडै त अथछ।

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पेररत सभक काज

13 जखन दथतमक हरा मंद-मंद बहल, ई बुथझ जे ओ सभ अपन उदे श पूरा कऽ लेलक, तखन ओ सभ केते लग पहँ थच गेल। 14 मुदा बहत थदनक बाद ओथह पर एकटा तूिानी हरा उठल, जकर नाम यूरोकाइ्न कहल गेल। 15 जखन नार पकथड कऽ हरा मे सहन नथह कऽ सकल तँ हम सभ ओकरा चलाबऽ दे थलयैक। 16 काउ्ा नामक एकटा दीपक नीचाँ दौडै त हमरा सभ केँ नार सँ बहत काज करबाक छल। 17 जखन ओ सभ जहाज पर चथढ कऽ जहाज पर पटी बाखन कऽ सहायताक उपयोग करै त छलाह। आ ई ्र सँ जे कही ं ओ सभ जीरंत बालु मे नथह खथस पडत, पाल ठोथक दे लक आ एथह तरहे ँ भगा दे ल गेल। 18 हमरा सभ केँ आँ धी-तूिान सँ बहत झकझोरर कऽ दोसर थदन ओ सभ नार केँ हलुक कऽ दे लक। 19 तेसर थदन हम सभ अपन हाि सँ नारक सामान बाहर िेथक दे थलयैक। 20 जखन बहत थदन मे ने सूय् आ ने तारा पकट भेल आ कोनो छोट-मोट तूिान हमरा सभ पर नथह आयल, तखन हमरा सभक उदार करबाक समस आशा दू र भ’ गेल। 21 मुदा बहत थदनक बाद पौलुस हनका सभक बीच मे ठाढ भऽ कऽ कहलथिन, “हे माथलक सभ, अहाँ सभ केँ हमर बात सुनबाक चाही छल, आ केते सँ नथह छूथट गेल रहै त छल आ ई हाथन आ हाथन नथह भेटैत छल।” 22 आब हम अहाँ सभ केँ हँ सैत रहबाक आगह करै त छी, थकएक तँ अहाँ सभ मे नार छोथड ककरो पामक हाथन नथह होयत। 23 आइ राथत हमरा लग परमेश् ररक स् रग्दूत ठाढ छलाह, थजनकर हम छी आ हनकर सेरा करै त छी। 24 ओ कहलथिन, “पौलुस, नथह ्े राउ। तोरा कैसरक समत लऽ जेबाक चाही। 25 ते,ँ यौ महोदय, हौसला राखू , थकएक तँ हम परमेश् रर पर थरश् रास करै त छी जे हमरा जेना कहल गेल छल, तेना होयत। 26 मुदा हमरा सभ केँ कोनो खास दीप पर िेकल जाय पडत। 27 चौदहम राथत जखन हमरा सभ केँ अथदया मे ऊपर-नीचा होइत छल, तखन करीब आधा राथत मे जहाज पर बैसल लोक सभ बुथझ गेल जे ओ सभ कोनो दे शक नजदीक आथब गेल अथछ। 28 ओ सभ बजौलथन आ ओ बीस िाटक दू री पर भेटलथन। 29 तखन ओ सभ एथह ्र सँ जे कही ं हम सभ पािर पर नथह खथस पथडतहँ , ते ँ ओ सभ जहाजक पाछाँ सँ चारर टा लंगर िेथक दे लक आ थदनक इचा केलक। 30 जखन नारक लोक सभ नार सँ बाहर भागय बला छल, तखन ओ सभ नार केँ समुद मे उतारर दे लक जेना ओ सभ अगगामी जहाज सँ लंगर िेकैत हो। 31 पौलुस सेनापथत आ थसपाही सभ केँ कहलथिन, “जखन धरर ई सभ नार मे नथह रहत, ताबत धरर अहाँ सभक उदार नथह भऽ सकैत अथछ।” 32 तखन थसपाही सभ नारक रसी काथट कऽ ओकरा खसय दे लक। 33 थदन अबैत काल पौलुस सभ केँ भोजन करबाक लेल थरनती कयलथन, “आइ चौदहम थदन अथछ जखन अहाँ सभ थकछु नथह खयलहँ ।”

34 ते ँ हम अहाँ सभ सँ आगह करै त छी जे अहाँ सभ थकछु भोजन कर, थकएक तँ ई अहाँ सभक सावक लेल अथछ, थकएक तँ अहाँ सभ मे सँ ककरो माि सँ केश नथह खसत। 35 ई बात कथह कऽ ओ रोटी लऽ कऽ सभक समत परमेश् रर केँ धन् यराद कयलथन। 36 तखन सभ गोटे हथष्त भऽ गेलाह आ थकछु भोजन सेहो लऽ गेलाह। 37 हम सभ ओथह नार मे दू सय सोलह पामी छलहँ । 38 ओ सभ भोजन कऽ कऽ नार केँ हलुक कऽ कऽ गहम समुद मे िेथक दे लक। 39 भोर भेला पर ओ सभ ओथह दे श केँ नथह जनैत छलाह, मुदा एकटा एहन खाडी दे खलथन, जकर थकनार छल, जाथह मे जँ संभर हो तऽ नार केँ धकेथल दे बाक थरचार छलथन। 40 ओ सभ लंगर उठा कऽ समुद मे सथट गेल आ पतरारक पटी खोथल कऽ मुख पाल केँ हरा मे ऊपर उठा कऽ थकनार थदस बथढ गेल। 41 ओ सभ ओथह ठाम खथस पडल जतय दू टा समुदक थमलन छल आ ओ सभ जहाज केँ पटथक दे लक। आ अगभाग जोरसँ थचपकल रहल आ अचल रहल, मुदा पाछूक भाग लहररक थहं सासँ टू थट गेल। 42 थसपाही सभक सलाह छल जे कैदी सभ केँ मारर दे ल जाय, जाथह सँ थकयो हे थल कऽ बाहर नथह थनकथल जाय। 43 मुदा सेनापथत पौलुस केँ बचाबऽ चाहै त छलाह आ हनका सभ केँ अपन उदे श सँ दू र कयलथन। ओ आजा दे लथिन जे जे सभ हे थल सकैत अथछ से सभ पथहने समुद मे िेथक कऽ जमीन पर पहँ थच जाय। 44 बाकी थकछु तखा पर आ थकछु नारक टू टल-िूटल टु कडी पर। आ एना भेल जे ओ सभ सुरथतत रपे ँ जमीन पर पहँ थच गेल। अधार 28 1 जखन ओ सभ भाथग गेलाह तखन ओ सभ बुथझ गेलाह जे ओथह दीपक नाम मेथलता अथछ। 2 बब्र लोक सभ हमरा सभ पर कथनको दया नथह केलक, थकएक तँ रत्मान बरखा आ जाडक कारमे ँ ओ सभ हमरा सभ केँ आथग जरा कऽ हमरा सभ केँ सागत कयलक। 3 पौलुस लाठीक गठरी जमा कऽ आथग पर राखख दे लथिन तँ आँ च मे सँ एकटा साँ प थनकथल कऽ हनकर हाि मे बाखन दे लक। 4 बब्र सभ जखन ओथह जहरीला जानरर केँ ओकर हाि पर लटकल दे खख कऽ आपस मे बजलाह, “थनसंदेह ई आदमी एकटा हतारा अथछ, जे समुद सँ बथच गेलाक बादो, पथतशोधक लेल जीथरत नथह रहय दै त अथछ।” 5 ओ ओथह जानरर केँ आथग मे झटका दे लक आ ओकरा कोनो हज् नथह भेलैक। 6 मुदा जखन ओ सूजबाक चाही छल तखन ओ सभ तकलथन, रा अचानक मरर कऽ खथस पडलाह, मुदा बहत दे र तकलाक बाद ओ सभ हनका कोनो हाथन नथह होइत दे खलथन। 7 ओही इलाका मे ओथह दीपक मुखखयाक समथत छलथन, थजनकर नाम पखबयस छलथन। जे हमरा सभ केँ सागत कयलथन आ तीन थदन धरर थरनमतापूर्क ठहरौलथन। 8 पौलुसक थपता बोखार आ खूनक बहार सँ बीमार पडल छलाह।

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पेररत सभक काज

9 ई काज भेला पर ओथह दीप मे रोग सँ पीथडत आन लोक सभ सेहो आथब कऽ ठीक भऽ गेलाह। 10 ओ हमरा सभक आदर-सतार सेहो कयलथन। आ जखन हम सभ थरदा भेलहँ तँ ओ सभ हमरा सभ पर एहन-एहन रसुक बोझ दऽ दे लक जे आरशक छल। 11 तीन मासक बाद हम सभ अलेकेथ्डयाक जहाज पर बैसल थरदा भेलहँ , जे ओथह दीप पर जाड थबताओल गेल छल, जकर थचन छल कैकर आ पोलुक। 12 हम सभ थसराकूज मे उतरर तीन थदन धरर ओतथह रहलहँ । 13 ओतऽ सँ हम सभ कमास लऽ कऽ रे थगयम पहँ चलहँ आ एक थदनक बाद दथतमक हरा बहल आ दोसर थदन पुतेओली पहँ चलहँ । 14 ओतऽ हमरा सभ केँ भाय सभ भेटल, आ हनका सभक संग सात थदन रहबाक आगह कयल गेल। 15 ओतऽ सँ भाय सभ हमरा सभक थरषय मे सुथन हमरा सभ सँ भेट करय लेल अखपयो मंच आ तीनू ढाबा धरर पहँ चलाह। 16 जखन हम सभ रोम पहँ चलहँ तँ सेनापथत सभ कैदी सभ केँ पहरे दारक सेनापथतक हाि मे सौंप दे लथिन। 17 तीन थदनक बाद पौलुस यहदी सभक मुखखया सभ केँ एक ठाम बजौलथन आ ओ सभ हनका सभ केँ कहलथिन, “हे भाइ लोकथन, यदथप हम अपन पूर्ज सभक लोक रा रीथत-ररराज सभक थररद थकछु नथह केलहँ ।” , तइयो हमरा यरशलेम सँ कैदी बथन रोमी सभक हाि मे सौंपल गेल। 18 ओ सभ हमरा सँ जाँ च कऽ कऽ हमरा छोडय चाहै त छल, थकएक तँ हमरा मे मृतुक कोनो कारम नथह छल। 19 मुदा जखन यहदी सभ एथह बातक थररोध मे बाजल तँ हमरा कैसरक समत अपील करबाक लेल बाध भऽ गेल। एहन नथह जे हमरा अपन राषड पर आरोप लगेबाक चाही छल। 20 एथह लेल हम अहाँ सभ केँ दे खबाक आ अहाँ सभ सँ गप करबाक लेल बजौलहँ । 21 ओ सभ हनका कहलथिन, “हमरा सभ केँ यहथदया सँ अहाँ क थरषय मे कोनो पत नथह भेटल आ ने कोनो भाय जे आथब गेलाह, से अहाँ क कोनो तरहक अधलाह बात कहने रा बाजल। 22 मुदा हम सभ अहाँ क थरचार सुनय चाहै त छी, थकएक तँ एथह समदायक थरषय मे हम सभ जनैत छी जे कतह एथह समदायक थररोध कयल जाइत अथछ। 23 जखन ओ सभ हनका एक थदनक समय थनधा् ररत कयलथन तखन हनका लग बहतो लोक हनका लग आथब गेलाह। ओ हनका सभ केँ परमेश् ररक राज् यक वाखा आ गराही दे लथन आ हनका सभ केँ यीशुक थरषय मे मनबैत छलाह, मूसाक धम् थनयम आ परक् ता सभ सँ, भोर सँ साँ झ धरर। 24 थकछु गोटे बाजल बात पर थरश् रास कयलथन आ थकछु गोटे थरश् रास नथह कयलथन। 25 पौलुस एक बात कथह कऽ ओ सभ थरदा भऽ गेलाह, “पथरत आत् मा यशायाह परक् ताक दारा हमरा सभक पूर्ज सभ केँ नीक बात कहलथन। 26 ई कहै त, “ई लोक सभ लग जा कऽ कह जे, ‘सुथन कऽ अहाँ सभ सुनब आ नथह बुझब। अहाँ सभ दे खब, मुदा नथह बुझब। 27 एथह लोक सभक हदय सूल भऽ गेल अथछ आ कान सुनबा मे नीरस भऽ गेल अथछ आ आँ खख मुथन गेल अथछ। कही ं ओ सभ आँ खख सँ दे खख कऽ कान सँ सुनत आ हदय सँ बुथझ नथह सकथि आ िेर बदथल कऽ हम ओकरा सभ केँ ठीक नथह कऽ सकब।”

28 ते ँ अहाँ सभ केँ ई जाथन थलअ जे परमेश् ररक उदार गैरयहदी सभ केँ पठाओल गेल अथछ आ ओ सभ ई बात सुनत। 29 यीशु ई बात कथह कऽ यहदी सभ थरदा भऽ गेलाह। 30 पौलुस पूरा दू साल अपन भाडाक घर मे रहलाह आ हनका लग आयल सभ गोटे केँ गहम कयलथन। 31 परमेश् ररक राज् यक पचार करै त छलाह आ पभु यीशु मसीहक थरषय मे बात सभ केँ पूरा भरोसा सँ थसखाबैत छलाह, आ केओ हनका मना नथह करै त छल।

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रोमन

परमेश् वरक सृष् वट सँ बुझल जाइर अवछ। जावह सँ ओ सभ वबना बहाना के छवर: 21 वकएक रँ ओ सभ परमेश् वर केँ वचनै र काल हनका परमेश् वरक रप मे मवहमा नवह कयलवन आ ने कृरतरा कयलवन। मुदा हनका लोकवनक कलना मे वरथ भ' गेलवन आ मूखथ हदय अनार भ' गेलवन। 22 ओ सभ अपना केँ बुस्मान कहै र मूखथ बवन गेल। 23 ओ अववनाशी परमेश् वरक मवहमा केँ ववनाशकारी मनुष, वच़ै -चुनमुनी, चारर पैरक जानवर आ रे गैर जीव-जनुक समान पवररप मे बदवल दे लवन। 24 रे ँ परमेश् वर हनका सभ केँ अपन हदयक इचाक कारणे ँ अशु्रा मे समपथण कयलवन, जावह सँ ओ सभ अपन शरीरक अपमान करवर। 25 ओ परमेश् वरक सर् य केँ झूठ मे बदवल दे लवन आ सृव्कराथ सँ बेसी सृव्क आराधना आ सेवा कयलवन, जे अनन काल धरर धन छवर। आमीन। 26 एवह कारणे ँ परमेश् वर हनका सभ केँ घृवणर सेह मे छोव़ दे लवन, वकएक रँ हनका सभक स् तीगण सभ सेहो स् वभावक उपयोग केँ सभावक ववरोध मे बदवल दे लवन। 27 रवहना पुरख सभ सेहो स् तीक स् वभाव केँ छोव़ एकदोसरक पवर वासना मे जरर गेलाह। आदमी के सार आदमी जे अयोग काम करै छै , आरो खुद मे अपनऽ गलरी के वू पवरफल गहण करै छै जे उवचर छे लै। 28 जवहना ओ सभ परमेश् वर केँ अपन तान मे राखब पवसन नवह करै र छल, रवहना परमेश् वर हनका सभ केँ अधलाह मन मे सौंवप दे लवरन जे ओ सभ काज नवह करवर। 29 हम सभ अधमथ, ववभचार, दु ्रा, लोभ आ दु भाथ वना सँ भरल छी। ईषाथ , हता, बहस, छल, दु भाथ वना सँ भरल; फुसफुसाइर, २. 30 परमेश् वरक घृणा करवनहार, घृवणर, घमंडी, घमंडी, अधलाह बारक आववषारक, मारा-वपराक आता नवह मानवनहार। 31 बुस्हीन, वाचा रो़वनहार, साभाववक सेह रवहर, अदम, वनदथ य। 32 ओ सभ परमेश् वरक न् याय केँ जावन कऽ जे एहन काज करऽ वला सभ मृर् युक पात छवर, रे ँ मात ओवहना नवह करै र छवर, बल् वक ओवह काज सभक काज करयवला सभ मे पस्रा करै र छवर।

अध्य 1 1 पौलुस, यीशु मसीहक सेवक, जे परमेश् वरक सुसमाचार सुनय लेल अलग भऽ गेलाह। 2 (जे ओ पववत शास मे अपन भववषवया सभक दारा पवहने सँ पवरता केने छलाह।) 3 हनकर पुत यीशु मसीहक ववषय मे, जे दाऊदक वंशज सँ शरीरक अनुसार बनल छलाह। 4 ओ मृर् यु मे सँ जीवब उठला सँ पववतराक आर् माक अनुसार सामर्थ य सँ परमेश् वरक पुत होयबाक घोषणा कयलवन। 5 हनकर नामक लेल सभ जावर मे ववशासक आतापालन करबाक लेल हनका दारा अनुगह आ पेरररि भेटल अवछ। 6 अहाँ सभ सेहो हनका सभक बीच यीशु मसीहक बजाओल गेल छी। 7 रोम मे रहवनहार सभ लोक, जे परमेश् वरक वपय लोक सभ, पववत लोक बनबाक लेल बजाओल गेल अवछ। 8 पवहने हम अहाँ सभक लेल यीशु मसीहक दारा अपन परमेश् वर केँ धनवाद दै र छी जे अहाँ सभक ववश् वासक ववषय मे पूरा संसार मे चचाथ कयल गेल अवछ। 9 हम परमेश् वर हमर गवाह छवर जे हम हनकर पुतक सुसमाचार मे अपन आर् मा सँ सेवा करै र छी, जे हम अपन पारथना मे सवदखन अहाँ सभक चचाथ करै र छी। 10 हम आगह करै र छी जे जँ आब हमरा परमेश् वरक इच् छा सँ अहाँ सभ लग आवब कऽ एकटा सम् याता भऽ सकैर अवछ। 11 हम अहाँ सभ केँ दे खबाक लेल ररसैर छी जावह सँ हम अहाँ सभ केँ वकछु आर् वमक वरदान दऽ सकब जावह सँ अहाँ सभ स्र भऽ सकब। 12 अराथ र् अहाँ सभ आ हमरा दु नू गोटे क आपसी ववशास सँ हम अहाँ सभक संग सानिना पावब सकब। 13 भाइ लोकवन, हम अहाँ सभ केँ ई बार नवह बुझय चाहै र छी जे हम अहाँ सभ लग बहर बेर आबय चाहै र छलहँ , (मुदा एखन धरर हमरा छोव़ दे ल गेल अवछ) जावह सँ अहाँ सभ मे सेहो वकछु फल भेटय, जेना आन गैर-यहदी सभक बीच। 14 हम यूनानी आ बबथर दु नूक ऋणी छी। बुस्मान आ अतानी दु नू केँ। 15 रे ँ हमरा मे जरेक अवछ, हम रोम मे रहवनहार सभ केँ सेहो सुसमाचार पचार करबाक लेल रैयार छी। 16 हम मसीहक सुसमाचार पर लाज नवह करै र छी, वकएक रँ ई परमेश् वरक सामर्थ य अवछ जे सभ ववश् वास करै र अवछ। पवहने यहदी केँ आ यूनानी केँ सेहो। 17 वकएक रँ परमेश् वरक धावमथकरा ववश् वास सँ ववश् वास मे पगट होइर अवछ। 18 वकएक रँ परमेश् वरक कोध स् वगथ सँ पगट होइर अवछ जे मनुष् य सभक सभ अभसय आ अधमथक ववर् पगट होइर अवछ। 19 वकएक रँ परमेश् वरक ववषय मे जे वकछु जावन सकैर अवछ से हनका सभ मे पगट होइर अवछ। वकएक रँ परमेश् वर हनका सभ केँ ई बार दे खौलवन अवछ। 20 वकएक रँ संसारक सृव् सँ हनकर अदृ वसु सभ स् रप सँ दे खबा मे अबैर अवछ, जे हनकर अनन सामर्थ य आ

अध्य 2 1 रे ँ हे मनुख, अहाँ जे केओ न् याय करै र छी, रकरा अहाँ अकम छी, वकएक रँ अहाँ जावह मे दोसरक न् याय करै र छी, रावह मे अहाँ अपना केँ दोषी ठहरबैर छी। वकएक रँ अहाँ नाय करऽ वला काज सभ वैह काज करै र छी।” 2 मुदा हमरा सभ केँ ववशास अवछ जे परमेश् वरक न् याय एवह ररहक काज करयवला सभक ववर् सतक अनुसार होयर। 3 हे मनुष् य, जे एहन काज करवनहार सभक न् याय करै र छी, आ ओवहना करै र छी, की अहाँ ई सोचैर छी जे परमेश् वरक न् याय सँ बवच जायब? 4 की अहाँ हनकर भलाई आ सहनशीलरा आ धैयथक धन केँ वररसार करै र छी। ई नवह जनैर छी जे परमेश् वरक भलाई अहाँ केँ पशाराप करबाक लेल लऽ जाइर अवछ? 5 मुदा परमेश् वरक कोध आ परमेश् वरक धावमथक न् यायक पगटीकरणक वदनक ववर् कोध केँ अपना लेल जमा कर। 6 ओ सभ एक-एक केँ अपन काजक अनुसार पवरफल दे र।

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रोमन

7 जे सभ धैयथपूवथक नीक काज करै र छवर, हनका सभ केँ अनन जीवन भेटरवन। 8 मुदा जे सभ वववाद करै र छवर आ सतक आता नवह मानैर छवर, बल् वक अधमथक आता मानैर छवर, आकोश आ कोध। 9 अधलाह करऽ वला मनुष् य पर, पवहने यहदी आ गैर-यहदी सभक आर् मा पर केश आ केश। 10 मुदा जे सभ नीक काज करै र अवछ, ओकरा पवहने यहदी आ गैर-यहदी केँ सेहो मवहमा, आदर आ शासन भेटय। 11 वकएक रँ परमेश् वरक समक लोकक कोनो आदर नवह होइर छै क। 12 जे सभ धमथ-वनयमक वबना पाप केने छवर, से सभ धमथ वनयमक वबना पाप केने छवर, से सभ धमथ -वनयमक अनुसार न् याय कयल जायर। 13 (वकएक रँ परमेश् वरक समक धमथ -वनयमक सुनवनहार सभ धावमथक नवह छवर, बल् वक धमथ -वनयमक पालन करवनहार सभ धावमथक ठहराओल जायर।” 14 वकएक रँ जखन गैर-यहदी सभ धमथ-वनयम नवह रखैर छवर, ओ सभ सभाव सँ धमथ-वनयम मे वनवहर बार सभ केँ पूरा करै र छवर, रखन ओ सभ धमथ-वनयम नवह रखैर छवर। 15 ओ सभ अपन हदय मे वलखल धमथ-वनयमक काज केँ दे खाबैर छवर, अपन वववेक सेहो गवाही दै र छवर, आ एक-दोसर पर आरोप लगाबैर वा नवह रऽ बहाना बनाबैर हनका सभक ववचार नीच अवछ।” 16 जावह वदन परमेश् वर हमर सुसमाचारक अनुसार यीशु मसीहक दारा मनुष् यक रहसक न् याय करराह। 17 दे खू, अहाँ यहदी कहल गेल छी, आ धमथ -वनयम मे ववशाम करै र छी आ परमेश् वरक घमंड करै र छी। 18 ओकर इचा केँ जावन कऽ धमथ -वनयमक वशका सँ बेसी नीक बार केँ सीकार कर। 19 अहाँ केँ ववशास अवछ जे अहाँ आनर सभक मागथदशथक छी, अनार मे रहवनहार सभक इजोर छी। 20 मूखथ सभक उपदे शक, वशशु सभक वशकक, जे धमथ -वनयम मे तान आ सतक रप धारण करै र अवछ। 21 रे ँ अहाँ जे दोसर केँ वसखाबैर छी, की अहाँ अपना केँ नवह वसखाबैर छी? जे मनुष् यक पचार करै र छी, रकरा चोरी नवह करबाक चाही, की अहाँ चोरी करै र छी? 22 अहाँ जे कहै र छी जे ककरो ववभचार नवह करबाक चाही, की अहाँ ववभचार करै र छी? मूवरथ सँ घृणा करयवला, की अहाँ बवलदान करै र छी? 23 अहाँ जे धमथ -वनयमक घमंड करै र छी, से धमथ-वनयमक उलंघन कऽ कऽ अहाँ परमेश् वरक अपमान करै र छी? 24 वकएक रँ अहाँ सभक दारा गैर-यहदी सभक बीच परमेश् वरक नामक वनना कयल गेल अवछ। 25 जँ अहाँ धमथ-वनयमक पालन करै र छी रँ खरना सते लाभ होइर छै क, मुदा जँ अहाँ धमथ -वनयमक उलंघन करै र छी रँ अहाँ क खरना अखरना भऽ जाइर अवछ। 26 एवह लेल जँ अखरना केवनहार लोक धमथ-वनयमक धावमथकराक पालन करै र अवछ रँ की ओकर खरना नवह भेला केँ खरना मे नवह मानल जायर? 27 की जे अखरना सभाव सँ अवछ, जँ ओ धमथ -वनयम केँ पूरा करै र अवछ रँ अहाँ पर नाय नवह करर, जे पत आ खरना दारा वव्ाक उलंघन करै र छी?

28 ओ यहदी नवह छवर जे बाहरी रप सँ एक अवछ। आ ने ओ खरना अवछ जे शरीर मे बाहरी अवछ। 29 मुदा ओ यहदी छवर, जे भीरर सँ एक छवर। खरना हदयक, आर् मा मे होइर छै क, आ अकर मे नवह। वजनकर सुवर मनुष् यक नवह, बल् वक परमेश् वरक अवछ। अध्य 3 1 रखन यहदी केँ की फायदा? वा खरना सँ कोन लाभ होइर छै क? 2 बहर वकछु एवह लेल जे परमेश् वरक वचन हनका सभ केँ सौंपल गेल छलवन। 3 जँ वकछु लोक ववश् वास नवह करररवर रँ की हे रवन? की हनका सभक अववशास परमेश् वरक ववश् वास केँ बेकार बना दे र? 4 परमेश् वर नवह करवर, परमेश् वर सर् य रहवर, मुदा सभ वकयो झूठ बाजब। जेना धमथशास् त मे वलखल अवछ, “अहाँ अपन बार मे धावमथक ठहराबऽ आ जखन अहाँ क न् याय होयर रखन अहाँ ववजयी भऽ सकब।” 5 मुदा जँ हमरा सभक अधमथ परमेश् वरक धावमथकराक पशंसा करै र अवछ रँ हम सभ की कहब? की परमेश् वर अधम् छवर जे पवरशोध लैर छवर? (हम पुरष बवन बजैर छी) 6 परमेश् वर नवह करवर, वकएक रँ परमेश् वर संसारक न् याय कोना करराह? 7 जँ परमेश् वरक सर् य हमर झूठक कारणे ँ हनकर मवहमा मे बेसी बव़ गेल अवछ। एखनो हमरा पापी के रप मे वकएक नाय कयल जाइर अवछ? 8 बल् वक हमरा सभ केँ वनना कयल जाइर अवछ आ वकछु लोक कहै र अवछ जे, “अधलाह काज कर जावह सँ नीक भ’ सकय?” वजनकर अवभशाप नायसंगर अवछ। 9 रखन की? की हम सभ हनका सभसँ नीक छी? कोनो ररहे ँ नवह, वकएक रँ हम सभ पवहने यहदी आ गैर-यहदी सभ केँ ई वस् कऽ चुकल छी जे ओ सभ पापक अधीन अवछ। 10 जेना धमथशास् त मे वलखल अवछ, “केओ धम्, ने एको नवह। 11 एहन केओ नवह अवछ जे बुझैर अवछ आ केओ नवह अवछ जे परमेश् वरक खोज करै र अवछ। 12 सभ बाट सँ हवट गेल अवछ, एक संग बेकार भऽ गेल अवछ। नीक काज करयवला केओ नवह अवछ, एको नवह अवछ। 13 हनका सभक कंठ खुजल कब अवछ। अपन जीह सँ छलक पयोग केने छवर। एस के जहर हनका लोकवनक ठोर के नीचा अवछ। 14 हनका सभक मुँह गारर-गरौबवल आ कटु रा सँ भरल अवछ। 15 हनका सभक पएर खून बहाबय मे रेज अवछ। 16 ववनाश आ दु ःख हनका सभक बाट मे अवछ। 17 शासनक बाट ओ सभ नवह जनैर छवर। 18 हनका सभक नजरर मे परमेश् वरक कोनो भय नवह। 19 आब हम सभ जनैर छी जे धमथ-वनयम जे वकछु कहै र अवछ, से सभ धमथ-वनयमक अधीन रहवनहार सभ केँ कहै र अवछ, जावह सँ सभ लोकक मुँह रोकल जा सकय आ सभ संसार परमेश् वरक समक दोषी भऽ जाय। 20 रे ँ धमथ-वनयमक कमथ सँ कोनो मनुष्‍य ओकरा सामने धम् नवह ठहराओल जायर, वकएक रँ धमथ-वनयमक दारा पापक तान होइर अवछ।

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रोमन

21 मुदा आब परमेश् वरक धावमथकरा वबना धमथ -वनयमक पगट भऽ गेल अवछ। 22 यीशु मसीह पर ववश् वासक कारणे ँ परमेश् वरक धावमथकरा सभ आ सभ ववश् वास करयवला सभक लेल भेटैर अवछ। 23 वकएक रँ सभ पाप कऽ कऽ परमेश् वरक मवहमा सँ कम भऽ गेल अवछ। 24 मसीह यीशु मे जे मोक भेटैर अवछ, रावह दारा हनकर कृपा सँ मुसय सँ धम् ठहराओल गेल। 25 परमेश् वर हनका सभ केँ अपन खून मे ववश् वासक दारा पायवशर करबाक लेल रैयार कयलवन अवछ, जावह सँ परमेश् वरक सहनशीलराक दारा बीरल पापक कमाक लेल अपन धावमथकराक पचार कयलवन। 26 हम एवह समय मे हनकर धावमथकराक पचार करबाक लेल कहै र छी, जावह सँ ओ धम् होवर आ यीशु पर ववश् वास करवनहार केँ धावमथक ठहराबवर। 27 रखन घमंड करय अवछ? एकरा बवहषृर अवछ। कोन कानून दारा ? के रचना के? नवह, मुदा ववश् वासक वनयमक दारा। 28 रे ँ हम सभ ई वनषषथ वनकालैर छी जे धमथ -वनयमक कमथ केने मनुष्‍य ववश् वासक कारणे ँ धम् ठहराओल जाइर अवछ। 29 की ओ केवल यहदी सभक परमेश् वर छवर? की ओ गैरयहदी सभक सेहो नवह अवछ? हँ , गैर-यहदी सभक सेहो। 30 एकवह परमेश् वर छवर जे ववश् वासक कारणे ँ खरना केँ धम् ठहरौराह आ ववश् वासक कारणे ँ अखरना केँ धम् ठहरौराह। 31 रखन की हम सभ ववश् वासक कारणे ँ धमथ-वनयम केँ अमान करै र छी? परमेश् वर नवह करवर, हँ, हम सभ कानून केँ ्ावपर करै र छी।

11 हनका खरनाक वचन् ह, जे ववश् वासक धावमथकराक मोहर छलवन जे ओ एखन धरर खरना नवह कयल गेल छलाह। जावह सँ हनका सभ केँ सेहो धावमथकरा मानल जाय। “ 13 वकएक रँ ई पवरता जे ओ संसारक उतरावधकारी बनराह, से अबाहम आ हनकर वंशजक लेल धमथ-वनयमक दारा नवह, बल् वक ववश् वासक धावमथकराक कारणे ँ छल। 14 जँ धमथ-वनयमक उतरावधकारी बनैर अवछ रँ ववश् वास अयोग् य भऽ गेल अवछ आ पवरता बेकार भऽ गेल अवछ। 15 वकएक रँ धमथ-वनयम कोध उत् करै र अवछ, वकएक रँ जरऽ कोनो वव्ा नवह अवछ, ओरऽ कोनो उलंघन नवह होइर अवछ। 16 रे ँ ई ववश् वासक कारणे ँ अवछ जे ई अनुगहक कारणे ँ हो। अंर धरर पवरता सभ बीयाक लेल वनवशर भ' सकैर अवछ। केवल धमथवनयमक लेल नवह, बल् वक अबाहमक ववश् वास सँ जु़ल लोक केँ सेहो। जे हमरा सभक वपरा छवर, 17 (जेना वक धमथशास् त मे वलखल अवछ, “हम अहाँ केँ बहर रास जावरक वपरा बना दे लहँ अवछ,) वजनका पर ओ ववश् वास कयलवन, ओ परमेश् वर छवर, जे मृर् यु केँ जीववर करै र छवर आ जे नवह अवछ रकरा सभ केँ ओवहना कहै र छवर। 18 ओ आशाक ववर् आशा मे ववश् वास कयलवन, जावह सँ ओ बहर रास जावरक वपरा बवन जाय, जेना कहल गेल छल जे , “अहाँ क वंशज एना होयर।” 19 ओ ववश् वास मे कमजोर नवह रहबाक कारणे ँ ओ अपन शरीर केँ मृर नवह बुझलवन, जखन ओ करीब सय वषथक छलाह आ ने साराक गभथक मृर् यु। 20 ओ अववश् वासक कारणे ँ परमेश् वरक पवरता पर डगमगाइर नवह रहलाह। मुदा परमेश् वरक मवहमा करै र ववश् वास मे मजगूर रहलाह। 21 ओ पूणथ ववशास भऽ गेलाह जे ओ जे पवरता केने छलाह से पूरा कऽ सकलाह। 22 रे ँ हनका धावमथकराक रप मे मानल गेलवन। 23 ई बार मात हनका लेल नवह वलखल गेल छल जे ई बार हनका पर लगाओल गेल अवछ। 24 जँ हम सभ ओवह पर ववश् वास करै र छी जे हमरा सभक पभु यीशु केँ मृर् यु मे सँ जीवब उठौलवन। 25 ओ हमरा सभक अपराधक कारणे ँ छोव़ दे ल गेलाह आ हमरा सभक धम् ठहरबाक लेल जीवब उठलाह।

अध्य 4 1 रखन हम सभ की कहब जे हमरा सभक वपरा अबाहम केँ शरीरक संबंध मे भेटल अवछ? 2 जँ अबाहम केँ काजक कारणे ँ धम् ठहराओल गेलवन रँ हनका एवह बारक गौरव करबाक अवछ। मुदा परमेश् वरक समक नवह। 3 वकएक रँ धमथशास् त की कहै र अवछ? अबाहम परमेश् वर पर ववश् वास कयलवन, आ ई हनका धावमथकरा मे वगनल गेलवन। 4 जे काज करै र अवछ, रकरा पर कृपा अनुगहक रप मे नवह, बल् वक ऋणक रप मे मानल जाइर छै क। 5 मुदा जे काज नवह करै र अवछ, बल् वक अभय केँ धम् ठहराबऽ वला पर ववश् वास करै र अवछ, ओकर ववश् वास धावमथकरा मे वगनल जाइर अवछ। 6 जेना दाऊद ओवह आदमीक आशीवाथ दक वणथन करै र छवर, जकरा परमेश् वर वबना काजक धावमथकरा मानैर छवर। 7 ओ कहलवन, “धन छवर ओ सभ वजनकर पाप कमा कयल गेल अवछ आ वजनकर पाप झाँ पल गेल अवछ।” 8 धन अवछ ओ आदमी जकरा पर परमेश् वर पाप नवह मानराह। 9 रखन ई आशीवाथ द मात खरना केवनहार लोक पर आवब रहल अवछ आ वक अखरना केने लोक पर सेहो? हम सभ कहै र छी जे ववश् वास अबाहम केँ धावमथकराक रप मे मानल गेल छल। 10 रखन एकर वहसाब कोना भेल? जखन ओ खरना मे छलाह वा अखरना मे? खरना मे नवह, अखरना मे।

अध्य 5 1 रे ँ हम सभ ववश् वासक कारणे ँ धम् ठहराओल गेल छी आ अपना पभु यीशु मसीहक दारा परमेश् वरक संग शान् वर अवछ। 2 हनका दारा ववश् वास दारा हम सभ एवह अनुगह मे पहँ वच सकैर छी जावह मे हम सभ ठा़ छी आ परमेश् वरक मवहमाक आशा मे आनसनर छी। 3 एरबे नवह, बल् वक हम सभ केश मे सेहो घमंड करै र छी। 4 आ धैयथ, अनुभव। आ अनुभव, आशा: 5 आशा लस्र नवह करै र अवछ। वकएक रँ परमेश् वरक पेम हमरा सभक हदय मे ओवह पववत आर् मा दारा बहा गेल अवछ जे हमरा सभ केँ दे ल गेल अवछ। 6 जखन हमरा सभ केँ सामरथ नवह छल, रखन समय पर मसीह अभय सभक लेल मरर गेलाह।

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7 वकएक रँ धम् लोकक लेल मरर कऽ मरर। 8 मुदा परमेश् वर हमरा सभक पवर अपन पेम केँ एवह ररहे ँ दे खबैर छवर जे जखन हम सभ पापी रही रखन मसीह हमरा सभक लेल मरर गेलाह। 9 आब हम सभ हनकर खून दारा धम् ठहराओल गेल छी आ हनका दारा कोध सँ उ्ार पावब जायब। 10 जखन हम सभ शतु रही रखन परमेश् वरक पुतक मृतुक कारणे ँ अपना सभक संग मेल-वमलाप भऽ गेलहँ रँ फेर मेलवमलाप कऽ कऽ हम सभ हनकर पाण सँ उ्ार पावब सकब। 11 एरबे नवह, बल् वक हम सभ अपन पभु यीशु मसीहक दारा परमेश् वर मे आनसनर सेहो छी, वजनका दारा हमरा सभ केँ आब पायवशर कयल गेल अवछ। 12 एवह लेल, जेना एक आदमीक दारा पाप संसार मे आवब गेल आ पापक कारणे ँ मृतु। एवह ररहे ँ सभ मनुष्‍य पर मृतु भऽ गेल, वकएक रँ सभ पाप कयने अवछ। 13 (वकएक रँ जाबर धरर धमथ-वनयम नवह बनैर अवछ राबर धरर पाप संसार मे छल। 14 रैयो आदम सँ मूसा धरर, जे सभ आदमक अपराधक समान पाप नवह केने छल, रकरा सभ पर मृतुक राज छल। 15 मुदा अपराधक समान नवह, रवहना मुफ वरदान सेहो अवछ। जँ एक गोटे क अपराधक कारणे ँ बहरो लोक मरर गेल छवर रँ परमेश् वरक कृपा आ कृपाक वरदान जे एक आदमी यीशु मसीह दारा दे ल गेल अवछ से बहर बेसी बव़ गेल अवछ। 16 ओवहना नवह जेना पाप केवनहार दारा कयल गेल छल, रवहना वरदान सेहो नवह, वकएक रँ नाय एक गोटे क दारा दोषी ठहराओल गेल छल, मुदा मुफ वरदान बहर रास अपराधक कारणे ँ धम् ठहराओल जाइर अवछ। 17 एक आदमीक अपराधक कारणे ँ एक गोटे क मृतुक राज भेलैक। जे सभ अनुगह आ धावमथकराक वरदानक पचुररा पाबैर छवर, से सभ एक गोटे यीशु मसीहक दारा जीवन मे राज करर।” 18 एवह ररहे ँ जेना एकवह न् यायक अपराधक कारणे ँ सभ मनुष् य केँ दोषी ठहराओल गेल। रवहना एक गोटे क धावमथकराक कारणे ँ जीवनक धावमथक ठहरबाक लेल सभ मनुष्‍य पर मुफ वरदान आवब गेल। 19 एक आदमीक आता नवह मानला सँ बहरो लोक पापी बवन गेलाह, रवहना एक गोटे क आतापालन सँ बहरो लोक धम् बनराह। 20 धमथ-वनयम सेहो एवह लेल पवेश कयलक जे अपराधक भरमार भऽ जाय। मुदा जरय पापक पचुररा छल, ओरय अनुगह बहर बेसी छल। 21 जावह ररहे ँ पाप मृतु धरर राज केलक अवछ, रवहना हमरा सभक पभु यीशु मसीहक दारा धावमथकराक दारा अनुगह अनन् र जीवनक लेल राज करय। अध्य 6 1 रखन की कहब? की हम सभ पाप मे रहब जावह सँ अनुगहक भरमार हो? २ भगवान नवह करवर। हम सभ जे पापक लेल मरर गेल छी, आब ओवह मे कोना जीववर रहब? 3 की अहाँ सभ ई नवह जनैर छी जे हमरा सभ मे सँ जे सभ यीशु मसीह मे बपवरस् मा लेने छी, हनकर मृतु मे बपवरस् मा लेल गेल?

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4 रे ँ हम सभ हनका संग मृर् यु मे बपवरस् मा दऽ कऽ दफना गेल छी, जावह सँ जवहना मसीह वपराक मवहमा दारा मृर् यु मे सँ जीवब उठलाह, रवहना हमहँ सभ नव जीवन मे चलब। 5 जँ हम सभ हनकर मृतुक पवररप मे एक संग रोपल गेल छी रँ हनकर पुनरुानक उपमा मे सेहो रहब। 6 ई जावन कऽ जे हमरा सभक बू़ लोक हनका संग कूस पर च़ाओल गेल छवर, जावह सँ पापक शरीर न् भऽ जाय, जावह सँ आब हम सभ पापक सेवा नवह करी। 7 वकएक रँ जे मृर अवछ से पाप सँ मुय भऽ गेल अवछ। 8 जँ हम सभ मसीहक संग मरर गेल छी रँ ववश् वास करै र छी जे हम सभ हनका संग सेहो जीववर रहब। 9 ई जावन जे मसीह मृर् यु मे सँ जीवब उठलाह, आब मरै र नवह छवर। आब ओकरा पर मृतुक पभुि नवह छै क। 10 ओ मरर कऽ एक बेर पापक लेल मरर गेलाह। 11 रवहना अहाँ सभ अपना केँ पापक लेल मृर बुझ,ू मुदा अपना सभक पभु यीशु मसीहक दारा परमेश् वरक लेल जीववर छी। 12 रे ँ पाप अहाँ सभक नशर शरीर मे राज नवह करय, जावह सँ अहाँ सभ ओकर कामना मे ओकर आता मानब। 13 अहाँ सभ अपन अंग-अंग केँ पाप मे अधमथक औजार नवह बनाउ, बल् वक मृर् यु मे सँ जीववर लोक जकाँ परमेश् वरक समक समवपथर कर आ अपन अंग-अंग केँ धावमथकराक औजार बवन परमेश् वरक समक समवपथर कर। 14 पापक अहाँ सभ पर पभुि नवह राखर, कारण अहाँ सभ धमथवनयमक अधीन नवह छी, बल् वक कृपाक अधीन छी। 15 रखन की? की हम सभ पाप करब, कारण हम सभ वव्ाक अधीन नवह छी, बल् वक अनुगहक अधीन छी? भगवान नवह करवर। “ पापक मृतुक कारणे,ँ आवक धावमथकराक आतापालनक कारणे?ँ 17 मुदा परमेश् वरक धनवाद जे अहाँ सभ पापक सेवक छलहँ , मुदा अहाँ सभ ओवह वशकाक रप केँ हदय सँ मानलहँ जे अहाँ सभ केँ मुय कयल गेल छल। 18 पाप सँ मुय भऽ अहाँ सभ धावमथकराक सेवक बवन गेलहँ । 19 हम अहाँ सभक शरीरक दु बथलराक कारणे ँ मनुष् यक ढं ग सँ बजैर छी। रवहना आब अपन अंग-अंग केँ पववतराक लेल धावमथकराक दास बनाउ। 20 जखन अहाँ सभ पापक सेवक छलहँ रखन अहाँ सभ धावमथकरा सँ मुय छलहँ । 21 रखन अहाँ सभ केँ कोन फल भेटल छल जावह सँ अहाँ सभ एखन लस्र छी? वकएक रँ ओवह बार सभक अंर मृतु अवछ। 22 आब अहाँ सभ पाप सँ मुय भऽ परमेश् वरक सेवक बवन गेल छी, रँ अहाँ सभ केँ पववतराक फल भेवट गेल अवछ आ अन् र अनन् र जीवन। 23 पापक मजदू री मृतु वरक। मुदा परमेश् वरक वरदान हमरा सभक पभु यीशु मसीहक दारा अनन जीवन अवछ। अध्य 7 1 भाइ लोकवन, की अहाँ सभ ई नवह जनैर छी जे , हम धमथ -वनयम केँ जनवनहार सभ सँ बार करै र छी जे जा धरर मनुष् यक जीववर अवछ राबर धरर धमथ-वनयमक अवधकार अवछ? 2 जे स् तीक पवर छवन, राबर धरर अपन पवर जीबैर काल धमथ वनयमक अनुसार बानल रहै र छवर। मुदा जँ पवर मरर गेल छवर रँ ओ अपन पवरक वनयमसँ मुय भऽ जाइर छवर।


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3 रखन जँ ओकर पवर जीबैर काल दोसर पुरष सँ वववाह कऽ लेरीह रँ ओकरा ववभचारी कहल जायर। जावह सँ ओ कोनो ववभचारी नवह छवर, भले ओ दोसर पुरष सँ वववाह क' लेने होवर। 4 रे,ँ हमर भाइ लोकवन, अहाँ सभ सेहो मसीहक शरीरक दारा धमथ-वनयमक लेल मरर गेल छी। अहाँ सभक वववाह दोसर सँ, जे मृर् यु मे सँ जीवब उठल अवछ, रावह सँ भऽ जाय, जावह सँ हम सभ परमेश् वरक लेल फल दे ब।” 5 जखन हम सभ शरीर मे छलहँ रखन पापक गवर जे धमथ वनयमक दारा कयल गेल छल, से हमरा सभक अंग मे काज करै र छल जे मृतुक फल दै र छल। 6 मुदा आब हम सभ ओवह धमथ -वनयम सँ मुय भऽ गेल छी। जे हम सभ आर् माक नवरा मे सेवा करी, आ अकरक पुरानरा मे नवह। 7 रखन हम सभ की कहब? की वव्ा पाप अवछ? भगवान नवह करवर। नवह, हम पाप नवह जनैर छलहँ , बल् वक धमथ वनयमक दारा, वकएक रँ हम काम-वासना केँ नवह जनैर छलहँ , जाबर धरर वव्ा नवह कहने छल जे, “रोँ लोभ नवह कर।” 8 मुदा पाप आताक कारणे ँ हमरा मे सभ ररहक कामुकरा उत् कऽ दे लक। कारण, वव्ाक वबना पाप मरर गेल छल। 9 हम एक बेर धमथ-वनयमक वबना जीववर छलहँ , मुदा जखन आता आवब गेल रखन पाप जीववर भऽ गेल आ हम मरर गेलहँ । 10 आता जे जीवनक लेल दे ल गेल छल, से हमरा मृतुक लेल भेटल। 11 पाप आताक कारणे ँ हमरा धोखा दे लक आ ओकरा दारा हमरा मारर दे लक। 12 रे ँ धमथ -वनयम पववत अवछ, आता पववत, धावमथक आ नीक अवछ। 13 रखन की नीक बार हमरा लेल मृतु बवन गेल छल? भगवान नवह करवर। मुदा पाप एवह लेल पाप परीर होअय, जे नीक बारक दारा हमरा मे मृतुक काज करै र अवछ। आताक दारा पाप अतवधक पापपूणथ भ' जाय। 14 हम सभ जनैर छी जे धमथ-वनयम आर् मक अवछ, मुदा हम शारीररक छी आ पापक अधीन बेचल गेल छी। 15 हम जे काज करै र छी से नवह दै र छी। मुदा हमरा जे घृणा अवछ, से हम करै र छी। 16 जँ हम ओ काज करै र छी जे हम नवह चाहै र छी रँ हम धमथ वनयमक बार सँ सहमर छी जे ई नीक अवछ। 17 आब हम ई काज नवह कऽ रहल छी, बल् वक पाप जे हमरा मे बसल अवछ। 18 हम जनैर छी जे हमरा मे (अराथ र हमर शरीर मे) कोनो नीक वसु नवह रहै र अवछ। मुदा जे नीक अवछ से कोना करब से हमरा नवह लगैर अवछ। 19 हम जे नीक चाहै र छी से नवह करै र छी, मुदा जे अधलाह हम नवह चाहै र छी से करै र छी। 20 जँ हम ओ काज करै र छी जे हम नवह चाहै र छी रँ आब हम नवह करै र छी, बल् वक पाप जे हमरा मे रहै र अवछ। 21 रखन हमरा एकटा वनयम भेटैर अवछ जे जखन हम नीक काज करय चाहै र छी रखन हमरा संग अधलाह अवछ। 22 हम परमेश् वरक धमथ-वनयम मे आनररक मनुष् य मे रमैर छी।

23 मुदा हम अपन अंग-अंग मे एकटा आओर वनयम दे खैर छी जे हमर मनक वनयमक ववर् ल़ै र अवछ आ हमरा ओवह पापक वनयमक बंदी बना दै र अवछ जे हमर अंग मे अवछ। 24 हे दयनीय आदमी जे हम छी! एवह मृतुक दे ह सँ हमरा के मुय करर? 25 हम अपन पभु यीशु मसीहक दारा परमेश् वर केँ धनवाद दै र छी। रखन हम सयं मन सँ परमेश् वरक वनयमक सेवा करै र छी। मुदा शरीरक संग पापक वनयम। अध्य 8 1 एवह लेल आब मसीह यीशु मे रहवनहार सभ केँ कोनो दोषी नवह ठहराओल जा सकैर अवछ, जे सभ शरीरक अनुसरण नवह, बल् वक आर् माक अनुसार चलैर अवछ। 2 वकएक रँ मसीह यीशु मे जीवनक आर् माक वनयम हमरा पाप आ मृतुक वव्ा सँ मुय कऽ दे लक। 3 धमथ-वनयम जे काज नवह कऽ सकल, से शरीरक कारणे ँ कमजोर छल, परमेश् वर अपन पुत केँ पापपूणथ शरीरक रप मे पठौलवन आ पापक कारणे ँ शरीर मे पापक दोषी ठहरौलवन। 4 एवह लेल जे धमथ -वनयमक धावमथकरा हमरा सभ मे पूरा होअय जे शरीरक अनुसरण नवह, बल् वक आर् माक अनुसार चलैर छी। 5 वकएक रँ जे सभ शरीरक अनुसरण करै र छवर, से सभ शरीरक बार सभ पर ववचार करै र छवर। मुदा जे आर् माक अनुसरण करै र छवर, से आर् माक बार करै र छवर। 6 शारीररक ववचार करब मृतु वरक। मुदा आधासाक ववचार करब जीवन आ शासन वरक। 7 कारण, शारीररक मन परमेश् वरक पवर शतुरा अवछ, वकएक रँ ओ परमेश् वरक वनयमक अधीन नवह अवछ आ ने भऽ सकैर अवछ। 8 रे ँ शरीर मे रहवनहार सभ परमेश् वर केँ पस् नवह कऽ सकैर अवछ। 9 मुदा अहाँ सभ शरीर मे नवह, बल् वक आर् मा मे छी, जँ परमेश् वरक आर् मा अहाँ सभ मे रहै र अवछ। जँ केकरो मे मसीहक आर् मा नवह अवछ रँ ओ ओकर वकयो नवह अवछ। 10 जँ मसीह अहाँ सभ मे छवर रँ पापक कारणे ँ शरीर मरर गेल अवछ। मुदा आर् मा धावमथकराक कारणे ँ जीवन अवछ। 11 मुदा जँ यीशु केँ मृर् यु मे सँ जीवब उठौवनहारक आर् मा अहाँ सभ मे रहै र अवछ रँ जे मसीह केँ मृर् यु मे सँ जीवब उठौलवन, से अहाँ सभ मे रहवनहार आर् मा दारा अहाँ सभक नशर शरीर केँ सेहो जीववर करराह। 12 रे ँ यौ भाइ लोकवन, हम सभ शरीरक ऋणी नवह छी, आ शरीरक अनुसार जीवन जीबाक लेल। 13 जँ अहाँ सभ शरीरक अनुसार जीववर रहब रँ मरब। 14 वकएक रँ जे सभ परमेश् वरक आर् माक मागथदशथन मे छवर, ओ सभ परमेश् वरक पुत छवर। 15 अहाँ सभ केँ फेर सँ डरबाक आर् मा नवह भेटल अवछ। मुदा अहाँ सभ केँ गोद लेबाक आर् मा भेटल अवछ, जावह सँ हम सभ पुकारै र छी, “अबा, वपरा।” 16 आर् मा हमरा सभक आर् माक संग गवाही दै र अवछ जे हम सभ परमेश् वरक सन् रान छी। 17 जँ संरान अवछ रँ उतरावधकारी। परमेश् वरक उतरावधकारी आ मसीहक संग उतरावधकारी। जँ हम सभ हनका संग क् भोगैर छी रँ हम सभ एक संग मवहमा सेहो पावब सकब।”

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रोमन

18 हम मानैर छी जे एवह समयक क्क रुलना ओवह मवहमा सँ करबाक योग नवह अवछ जे हमरा सभ मे पगट होयर। 19 वकएक रँ सृव् परमेश् वरक पुत सभक पगटराक परीका करै र अवछ। 20 वकएक रँ सृष् वट व् यवहारक अधीन नवह, बल् वक ओवह परमेश् वरक कारणे,ँ जे आशाक कारणे ँ ओकरा अधीन कयलक। 21 कारण, सृव् सयं सेहो भ्राक बंधन सँ मुय भऽ कऽ परमेश् वरक सन् रान सभक गौरवशाली मुसय मे आवब जायर। 22 वकएक रँ हम सभ जनैर छी जे समस सृव् एखन धरर एक संग कुहरै र अवछ आ क् सँ क् करै र अवछ। 23 ओ सभ मात नवह, बल् वक अपना सभ सेहो, जे आर् माक पवहल फल पावब रहल छी, हम सभ अपना भीरर कुहरै र छी, अपना मे गोद लेबाक परीका मे, अराथ र् अपन शरीरक मोकक परीका मे। 24 हम सभ आशाक कारणे ँ उ्ार पावब गेल छी, मुदा जे आशा दे खल जाइर अवछ, से आशा नवह होइर अवछ, वकएक रँ मनुष् य जे दे खैर अवछ रकर आशा वकएक करै र अवछ? 25 मुदा जँ हम सभ ओवह बारक आशा करै र छी जे हम सभ नवह दे खैर छी, रखन हम सभ धैयथपूवथक ओकर परीका करै र छी। 26 रवहना आर् मा हमरा सभक दु बथलरा मे सेहो सहायरा करै र अवछ, वकएक रँ हमरा सभ केँ ई नवह बुझल अवछ जे हमरा सभ केँ जेना चाही रेना की पारथना करबाक चाही, मुदा आर् मा सयं हमरा सभक लेल ववनरी करै र अवछ, जकरा नवह कहल जा सकैर अवछ। 27 जे हदयक जाँ च करै र अवछ से जनैर अवछ जे आर् माक मन की होइर छै क, वकएक रँ ओ परमेश् वरक इच् छाक अनुसार पववत लोक सभक लेल ववनरी करै र अवछ। 28 हम सभ जनैर छी जे परमेश् वर सँ पेम करयवला सभक लेल, जे सभ हनकर उदे ृक अनुसार बजाओल गेल छवर, हनका सभक लेल सभ वकछु एक संग भलाईक लेल काज करै र अवछ। 29 हनका सभ केँ ओ पवहने सँ जनैर छलाह, ओ अपन पुतक पवररपक अनुरप बनबाक लेल सेहो पूवथ वनधाथ ररर कयलवन, जावह सँ ओ बहरो भाइ सभक बीच जेठ बवन जाय। 30 ओ वजनका सभ केँ पवहने सँ वनधाथ ररर केने छलाह, हनका सभ केँ सेहो बजौलवन, आ वजनका सभ केँ बजौलवन, हनका सभ केँ सेहो धम् ठहरौलवन। 31 रखन हम सभ एवह बार सभक की कहब? जँ परमेश् वर हमरा सभक पक मे छवर रँ हमरा सभक ववर् के भऽ सकैर अवछ? 32 जे अपन पुत केँ नवह दय दे लक, बल् वक हमरा सभक लेल ओकरा सौंवप दे लक, से ओ हमरा सभ केँ कोना मुफ मे नवह दे र? 33 परमेश् वरक चुनल लोक सभ पर के कोनो आरोप लगाओर? ई परमेश् वर छवर जे धम् ठहराबैर छवर। 34 के अवछ जे दोषी ठहराबैर अवछ? ई मसीह छवर जे मरर गेलाह, बल् वक जीवब उठल छवर, जे परमेश् वरक दवहना कार सेहो छवर आ हमरा सभक लेल सेहो ववनरी करै र छवर। 35 मसीहक पेम सँ हमरा सभ केँ के अलग करर? की केश, ववपवत, परा़ना, अकाल, नगरा, खररा वा रलवार? 36 धमथशास् त मे वलखल अवछ, “अहाँ क कारणे ँ हम सभ वदन भरर मारल जाइर छी। हमरा सभ केँ वधक लेल बरद जकाँ मानल जाइर अवछ।

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37 एवह सभ बार मे हम सभ ओवह सँ बेसी ववजयी छी जे हमरा सभ सँ पेम कयलवन। 38 हमरा ववशास अवछ जे ने मृतु, ने जीवन, ने स् वगथदूर, ने ररयासर, ने अवधकार, आ ने वरथमान वसु आ ने आगामी। 39 ने ऊँचाई, ने गहीरं , आ ने कोनो आन पाणी हमरा सभ केँ परमेश् वरक पेम सँ अलग कऽ सकैर अवछ, जे हमरा सभक पभु मसीह यीशु मे अवछ। अध्य 9 1 हम मसीह मे सर् य कहै र छी, हम झूठ नवह बजैर छी, हमर वववेक सेहो पववत आर् मा मे हमरा गवाही दै र अवछ। 2 जे हमरा हदय मे बहर भारी बोझ आ वनरं रर दु ःख अवछ। 3 हम चाहै र छलहँ जे हम अपन भाय सभक कारणे ँ मसीह सँ अवभशावपर भऽ गेलहँ, जे हमर शरीरक अनुसार अपन ररशेदार सभ अवछ। 4 के इसाएली छवर। हनका सभक लेल गोद लेबय, मवहमा, वाचा, धमथ-वनयम दे ब, परमेश् वरक सेवा आ पवरता सभ अवछ। 5 हनका सभक वपरा-वपरा हनका सभक छवर आ हनका सभ सँ मसीह अयलाह। आमीन। 6 एहन नवह जेना परमेश् वरक वचन कोनो पभाव नवह प़ल हो। वकएक रँ ओ सभ इसाएल नवह अवछ जे इसाएलक अवछ। 7 ओ सभ अबाहमक वंशज हे बाक कारणे ँ सभ संरान नवह अवछ। 8 अराथ र् जे सभ शरीरक सन् रान अवछ, से सभ परमेश् वरक सन् रान नवह अवछ। 9 पवरताक वचन ई अवछ जे, “हम एवह समय मे आवब जायब, आ सारा केँ एकटा पुत होयर।” 10 आ एरबे नवह। मुदा जखन ररबेका सेहो हमरा सभक वपरा इसहाक सँ एक गोटे सँ गभथवरी भेलीह। 11 (वकएक रँ सन् रान सभ एखन धरर नवह भेल अवछ आ ने कोनो नीक वा अधलाह काज केने अवछ, जावह सँ परमेश् वरक उदे श् य चुनल गेल अवछ, काज सभक कारणे ँ नवह, बल् वक बजौवनहारक दारा।” 12 हनका कहल गेलवन, “जेठका छोटकाक सेवा करर।” 13 धमथशास् त मे वलखल अवछ, “हम याकूब सँ पेम केलहँ , मुदा एसाव सँ घृणा केलहँ ।” 14 रखन हम सभ की कहब? की परमेश् वरक संग अधमथ अवछ? भगवान नवह करवर। 15 ओ मूसा केँ कहलवरन, “हम जकरा पर दया करब, रकरा पर दया करब, आ जकरा पर हम दया करब, रकरा पर दया करब।” 16 रे ँ ई चाहवनहार आ दौ़वनहारक नवह, बल् वक परमेश् वरक दया करै र अवछ। 17 वकएक रँ धमथशास् त वफरौन केँ कहै र अवछ, “हम अहाँ केँ एवह लेल उठौने छी जावह सँ हम अहाँ मे अपन सामरथ दे खा सकब आ हमर नाम पूरा पृर् वी मे पचाररर भऽ जाय।” 18 रे ँ जकरा पर ओ दया करय चाहै र अवछ, रकरा पर दया करै र अवछ आ जकरा पर ओ कठोर करै र अवछ। 19 रखन अहाँ हमरा कहब जे, “ओ एखनो दोष वकएक पावब रहल अवछ?” वकएक रँ ओकर इचा के ववरोध केलकै? 20 मुदा, हे मनुष् य, अहाँ के छी जे परमेश् वरक ववर् उतर दै र छी? की बनल वसु ओकरा बनौवनहार केँ कहर जे, “अहाँ हमरा एवह ररहे ँ वकएक बनेलहँ ?”


रोमन

21 की कुमार केँ मावट पर, एकवह गां ठ सँ एक बरथन केँ आदरक लेल आ दोसर केँ अपमावनर करबाक लेल बनाबय के अवधकार नवह छै क? 22 जँ परमेश् वर अपन कोध केँ पगट करऽ आ अपन सामर्थ य केँ पगट करऽ चाहै र छलाह आ ववनाशक योग कोधक बरथन सभ केँ बहर धैयथ सँ सहै र रहवरन। 23 ओ अपन मवहमाक धन केँ ओवह दयाक पात सभ पर, जे ओ पवहने सँ मवहमाक लेल रैयार केने छलाह। 24 ओ हमरा सभ केँ, जकरा ओ खाली यहदी सभ मे सँ नवह, बल् वक गैर-यहदी सभ मे सँ सेहो बजौने छवर? 25 जेना ओ ओसी मे सेहो कहै र छवर, “हम हनका सभ केँ अपन लोक कहब, जे हमर लोक नवह छल। आ ओकर वपयरम, जे वपय नवह छल। 26 जावह ठाम हनका सभ केँ कहल गेल छलवन जे, “अहाँ सभ हमर पजा नवह छी।” ओरय ओ सभ जीववर परमेश् वरक संरान कहल जायर। 27 यशायाह इसाएलक ववषय मे सेहो वचवचयाइर छवर, “इसाएलक सन् रानक संखा समुदक बालु जकाँ हो, मुदा बचेलाहा लोकक उ्ार होयर। 28 ओ काज पूरा कऽ कऽ धावमथकरा मे ओकरा छोट कऽ दे र, वकएक रँ पभु पृर् वी पर छोट काज बनाओर। 29 जेना यशायाह पवहने कहने छलाह, “जखन रक दलक पभु हमरा सभ केँ एकटा वंश नवह छो़ने रवहरवर रँ हम सभ सदोम जकाँ भऽ गेल रवहरहँ आ अमोरा जकाँ भऽ गेल रवहरहँ ।” 30 रखन हम सभ की कहब? जे गैर-यहदी सभ धावमथकराक पाछाँ नवह चललवन, से धावमथकरा केँ पार कयलवन अवछ, जे धावमथकरा ववश् वास सँ भेटैर अवछ। 31 मुदा इसाएल जे धावमथकराक वनयमक पालन करै र छल, से धावमथकराक वव्ा नवह पावब सकल अवछ। 32 वकयैक? कारण, ओ सभ ववश् वास सँ नवह, बल् वक धमथ वनयमक कमथ सँ एकरा खोजलवन। वकएक रँ ओ सभ ओवह ठोकरक पारर पर ठोकर खा गेल। 33 जेना धमथशास् त मे वलखल अवछ, “दे खू, हम वसयोन मे ठोकरक पारर आ अपराधक चटान रासख रहल छी। अध्य 10 1 भाइ लोकवन, इसाएलक लेल हमर हदयक इचा आ परमेश् वर सँ पारथना अवछ जे ओ सभ उ्ार पावब सकय। 2 हम हनका सभ केँ गवाही दै र छी जे हनका सभ मे परमेश् वरक पवर उताह अवछ, मुदा तानक अनुसार नवह। 3 ओ सभ परमेश् वरक धावमथकरा सँ अनवभत भऽ अपन धावमथकरा केँ स् रावपर करबाक लेल चवल रहल अवछ। 4 वकएक रँ मसीह धमथ -वनयमक अन् र छवर जे सभ ववश् वास करै र छवर। 5 मूसा धमथ-वनयमक धावमथकराक वणथन करै र छवर जे , जे मनुष् य ओवह काज सभ केँ करै र अवछ, से ओवह सभ सँ जीववर रहर। 6 मुदा ववश् वासक कारणे ँ जे धावमथकरा होइर अवछ से एवह ररहे ँ बजैर अवछ जे, “अपन मोन मे ई नवह कहब जे, के स् वगथ मे च़र?” (अराथ र मसीह केँ ऊपर सँ उरारब।) 7 वा, गहीरं मे के उररर? (अराथ र मसीह केँ मृर् यु मे सँ पुनज्ववर करबाक लेल)।

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8 मुदा ई की कहै र अवछ? वचन रोहर समीप अवछ, रोहर मुँह आ हदय मे। 9 जँ अहाँ अपन मुँह सँ पभु यीशु केँ सीकार करब आ अपन हदय मे ववशास करब जे परमेश् वर हनका मृर् यु मे सँ वजया दे लवन रँ अहाँ उ्ार पावब जायब। 10 वकएक रँ मनुष् य हदय सँ धावमथकराक लेल ववश् वास करै र अवछ। आ मुँह सँ मुसय लेल सीकार कयल जाइर अवछ। 11 वकएक रँ धमथशास् त मे कहल गेल अवछ जे , “केओ ओकरा पर ववश् वास करर, ओकरा लाज नवह होयर।” 12 यहदी आ यूनानी मे कोनो अंरर नवह अवछ, कारण, एकवह पभु सभ पर जे सभ हनका पुकारै र छवर, हनका लेल धवनक छवर। 13 वकएक रँ जे केओ पभुक नाम पुकारर, से उ्ार पाओर। 14 रखन ओ सभ ओकरा कोना बजाओर जकरा पर ओ सभ ववश् वास नवह केने अवछ? आ जकरा बारे मे ओ सभ नवह सुनने अवछ, ओकरा पर कोना ववश् वास करर? वबना कोनो पचारक के कोना सुनर? 15 जाबर धरर ओकरा सभ केँ नवह पठाओल जायर, राबर धरर ओ सभ कोना पचार करर? जेना धमथशास् त मे वलखल अवछ, “शां वर के सुसमाचार पचारक आ नीक बारक शुभ समाचार अनवनहार सभक पएर करेक सुनर अवछ!” 16 मुदा ओ सभ सुसमाचारक आता नवह मानने छवर। यशायाह कहै र छवर, “पभु , हमरा सभक बार पर के ववशास केलक?” 17 रे ँ ववश् वास सुनला सँ अबैर अवछ आ सुनब परमेश् वरक वचन सँ अबैर अवछ। 18 मुदा हम कहै र छी जे, की ओ सभ नवह सुनने छवर? हँ, सते , हनका लोकवनक आवाज समस पृथी मे गेल, आ हनकर सभक वचन संसारक अंर धरर पहँ वच गेलवन। 19 मुदा हम कहै र छी जे, की इसाएल नवह जनैर छल? पवहने मूसा कहलवरन, “हम अहाँ सभ केँ ईषाथ करबैर छी जे कोनो लोक नवह अवछ, आ मूखथ जावर दारा अहाँ सभ केँ कोवधर करब।” 20 मुदा यशायाह बहर साहसी भऽ कऽ कहै र छवर जे, “जे हमरा नवह रकलवन, से सभ हमरा पावब गेलहँ । जे सभ हमर पाछाँ नवह माँ गलवन, रकरा सभ केँ हम पगट भऽ गेलहँ । 21 मुदा इसाएल केँ ओ कहलवरन, “हम भरर वदन एकटा आता नवह मानय बला आ आताकारी लोकक समक अपन हार पसारर रहल छी।” अध्य 11 1 रखन हम कहै र छी, की परमेश् वर अपन लोक केँ फेवक दे लवन? भगवान नवह करवर। हमहँ इसाएली छी, अबाहमक वंशज आ वबनामीन गोतक। 2 परमेश् वर अपन लोक सभ केँ नवह फेवक दे लवरन जे ओ पवहने सँ जनैर छलाह। धमथशास् त एवलयाहक ववषय मे की कहै र अवछ, से अहाँ सभ केँ नवह बुझल अवछ? कोना ओ इसाएलक ववर् परमेश् वरक वबनरी करै र अवछ। 3 पभु , ओ सभ अहाँ क पवक् रा सभ केँ मारर कऽ अहाँ क वेदी सभ केँ खोदने अवछ। आ हम असगरे रवह गेल छी, आ ओ सभ हमर जान रकैर अवछ। 4 मुदा परमेश् वर हनका की कहै र छवरन? हम अपना लेल सार हजार आदमी सुरवकर रखने छी, जे बालक मूवरथक समक ठे हन नवह झुकौने अवछ।


रोमन

5 रवहना एवह समय मे सेहो अनुगहक चयनक अनुसार वकछु शेष अवछ। 6 जँ अनुगहक कारणे ँ रँ आब काजक कारणे ँ नवह, नवह रँ अनुगह आब कृपा नवह अवछ। मुदा जँ काज काजक अवछ रँ की ई कृपा नवह, नवह रँ काज आब काज नवह अवछ। 7 रखन की? इसाएल के जे चाहै छै , ओकरा नै वमललै। मुदा चुनाव रँ पावब गेल अवछ आ बाँ की सभ आनर भऽ गेल 8 (धमथशास् त मे वलखल अवछ, “परमेश् वर हनका सभ केँ वन्क आर् मा, आँ सख जे ओ सभ नवह दे खय आ कान दे लवन जे ओ सभ नवह सुनय।) आइ धरर। 9 दाऊद कहलवरन, “ओकरा सभक टे बुल हनका सभक लेल जाल, जाल आ ठोकर आ बदला बवन जाय। 10 हनका सभक आँ सख अनार भऽ जाय, जावह सँ ओ सभ नवह दे खवर, आ सवदखन पीठ झुकाबवर। 11 रखन हम कहै र छी, की ओ सभ ठोकर खा कऽ खवस प़ल? परमेश् वर नवह करवरन, बल् वक हनका सभक परन सँ गैरयहदी सभ केँ ईषाथ करबाक लेल उ्ार आवब गेलवन। 12 जँ हनका सभक परन संसारक धन-समवत अवछ आ ओकर सभक कम होयब गैर-यहदी सभक धन अवछ। करेक बेसी हनकर पूणथरा? 13 हम अहाँ सभ गैर-यहदी सभ सँ कहै र छी जे हम गैर-यहदी सभक पेररर छी, हम अपन पद केँ पैघ करै र छी। 14 जँ हम कोनो ररहे ँ अपन शरीरक अनुकरण करबाक लेल उकसा सकैर छी आ ओकरा सभ मे सँ वकछु केँ बचा सकैर छी। 15 जँ ओकरा सभ केँ फेवक दे ब संसारक संग मेल-वमलाप करबाक बार होयर रँ ओकरा सभ केँ गहण करब की होयर, मुदा मृर् यु सँ जीवन छोव़? 16 जँ पवहल फल पववत अवछ रँ गां ठ सेहो पववत अवछ। 17 जँ वकछु डारर टू वट गेल आ अहाँ जंगली जैरूनक गाछ छी रँ ओकरा सभ मे कलम लगाओल गेल आ ओकरा सभक संग जैरूनक गाछक जव़ आ मोटाई मे भाग लेब। 18 डारर सभक ववर् घमंड नवह कर। मुदा जँ घमंड करै र छी रँ जव़ नवह, जव़ अहाँ धारण करै र छी। 19 रखन अहाँ कहब जे , डारर सभ रोव़ दे ल गेल, जावह सँ हमरा मे कलम लगाओल जाय।” 20 खैर; अववशासक कारणे ँ ओ सभ टू वट गेल छल, आ अहाँ ववशासक कारणे ँ ठा़ छी। उच ववचार नवह कर, बस् डर। 21 जँ परमेश् वर पाकृवरक डारर सभ केँ नवह दयालवन रँ सावधान रह जे ओ अहाँ केँ सेहो नवह दय सकवर। 22 रे ँ परमेश् वरक भलाई आ कठोररा दे खू। मुदा जँ अहाँ हनकर भलाई मे रहब रँ अहाँ क पवर भलाई। 23 जँ ओ सभ अववश् वास मे स्र नवह रहर रँ ओकरा सभ केँ कलम लगाओल जायर। 24 जँ अहाँ सभाव सँ जंगली जैरूनक गाछ मे सँ कावट कऽ पकृवरक ववपरीर नीक जैरूनक गाछ मे कलम लगाओल गेलहँ रँ ई सभ जे पाकृवरक डारर अवछ, से अपन जैरूनक गाछ मे करेक बेसी कलम नवह लगाओल जायर? 25 भाइ लोकवन, हम ई नवह चाहै र छी जे अहाँ सभ एवह रहस सँ अनवभत रहब, जावह सँ अहाँ सभ अपन अवभमान मे बुस्मान नवह भऽ जायब। वक इसाएल के सार कुछ हद रक आनर होय जाय छै , जबे रक वक गैर-यहदी वसनी के पूणथरा नै आबी जाय छै । 26 एवह ररहे ँ समस इसाएल उ्ार होयर।

27 कारण, जखन हम हनका सभक पाप केँ दू र करब, रखन हम हनका सभक संग हमर ई वाचा अवछ। 28 सुसमाचारक ववषय मे ओ सभ अहाँ सभक लेल शतु छवर, मुदा चुनल गेल बार मे ओ सभ वपरा-वपराक लेल वपय छवर। 29 वकएक रँ परमेश् वरक वरदान आ बजाओल पशाराप नवह कयल जाइर अवछ। 30 वकएक रँ जवहना अहाँ सभ पवहने परमेश् वर पर ववश् वास नवह कयलहँ , रवहना आब हनका सभक अववश् वासक कारणे ँ दया पावब गेलहँ । 31 एवह ररहे ँ ई सभ सेहो आब ववश् वास नवह कऽ सकलाह जावह सँ अहाँ सभक दयाक कारणे ँ ओ सभ सेहो दया पावब सकवर। 32 वकएक रँ परमेश् वर सभ केँ अववश् वास मे समावहर कयलवन, जावह सँ ओ सभ पर दया करवर। 33 हे परमेश् वरक बुस् आ तान दु नूक धनक गहीरं अवछ! ओकर वनणथय करेक अनजान अवछ, आ ओकर बाट सेहो परा नवह चलबा मे आवब गेल अवछ! 34 पभुक मन के के जनैर अवछ? आवक ओकर सलाहकार के रहल अवछ? 35 वा पवहने के दे लकवन जे ओकरा फेर सँ पवरफल दे ल जायर? 36 वकएक रँ सभ वकछु हनका दारा, हनका दारा आ हनका दारा कयल गेल अवछ। आमीन। अध्य 12 1 एवह लेल, भाइ लोकवन, परमेश् वरक दयाक दारा हम अहाँ सभ सँ ववनरी करै र छी जे अहाँ सभ अपन शरीर केँ जीववर बवलदान, पववत आ परमेश् वरक सीकायथ बवलदानक रप मे पसुर कर, जे अहाँ सभक उवचर सेवा अवछ। 2 एवह संसारक अनुरप नवह बनू, बल् वक अहाँ सभ अपन मनक नवीकरणक दारा पररववरथर भऽ जाउ, जावह सँ अहाँ सभ ई जावन सकब जे परमेश् वरक इच् छा की नीक, सीकायथ आ वस् अवछ। 3 हम अहाँ सभक बीच जे एक-एक आदमी हमरा दे ल गेल कृपाक कारणे ँ कहै र छी जे अपना केँ ओवह सँ बेसी ऊँच नवह बुझ।ू बल् वक परमेश् वर पर् येक मनुष् यक ववश् वासक नापजोखक अनुसारे ँ सोवच-समवझ कऽ सोचू। 4 एक शरीर मे हमरा सभक अनेक अंग अवछ, आ सभ अंगक एक समान पद नवह अवछ। 5 रे ँ हम सभ बहरो भऽ कऽ मसीह मे एक शरीर छी आ पतेक एक-दोसरक अंग छी। 6 रखन हमरा सभ केँ जे अनुगह दे ल गेल अवछ, रावह अनुसारे ँ वभ्-वभ् वरदान भेटैर अवछ, चाहे ओ भववषवाणी हो, रँ हम सभ ववश् वासक अनुपारक अनुसार भववषवाणी करी। 7 वा सेवा करबाक लेल, हम सभ अपन सेवा करबाक परीका कर, वा जे वशका दै र अवछ, से वशका दे बाक लेल परीका कर। 8 वा जे उपदे श दै र अवछ, से उपदे श दै र अवछ। जे शासन करै र अवछ, से लगन सँ। जे दया करै र अवछ, ओकरा हँ सी-खुशी सँ। 9 पेम रवहर रहय। अधलाह बार सँ घृणा कर। जे नीक अवछ रावह सँ वचपकल रह। 10 भाइ-बवहनक पेमक संग एक-दोसर पर दयालु सेह कर। एक दोसरा के पारवमकरा दे बय के समान मे; 11 कारोबार मे आलसी नवह। भावना मे उग; पभुक सेवा करब;

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रोमन

12 आशा मे आनसनर रह। केश मे धैयथवान; पारथना मे कणवह मे वनरं रर रहब; 13 पववत लोकक आवृकराक अनुसार बाँ टब। सतार के लेल दे ल गेल। 14 जे अहाँ सभ केँ सराबैर अवछ, रकरा सभ केँ आशीष वदअ। 15 जे सभ आनसनर होइर अवछ, ओकर संग आनसनर रह आ कानवनहार सभक संग कानब। 16 एक-दोसरक पवर एकवह ववचार राखू। उच बार पर मोन नवह, बस् वनम समवत के आदमी के पवर कमाशील रह। अपन अवभमान मे बुस्मान नवह बनू। 17 अधलाहक बदला ककरो अधलाहक बदला नवह वदयौक। सब मनुष के नजर मे ईमानदार चीज के वव्ा कर। 18 जँ समव भऽ जाय रँ सभ मनुष् य सभक संग शासनपूवथक रह। 19 वपय वपयरम, अपना सँ बदला नवह वलअ, बल् वक कोध केँ जगह वदयौक। हम पवरफल दे ब, पभु कहै र छवर। 20 रे ँ जँ अहाँ क शतु केँ भूख लागल रँ ओकरा खुआ वदयौक। जँ ओकरा पास लागल रँ ओकरा पीवब वदयौक, वकएक रँ अहाँ ओकरा मार पर आवग के कोयला के ढे र लगा दे ब।” 21 अधलाह पर हावी नवह होउ, बल् वक नीक सँ अधलाह पर ववजय पार कर।

11 ओ समय केँ जावन कऽ जे आब नीद ं सँ जागबाक समय आवब गेल अवछ, वकएक रँ आब हमरा सभक उ्ार ओवह समय सँ बेसी नजदीक अवछ जखन हम सभ ववश् वास केने रही। 12 रावर दू र भऽ गेल अवछ, वदन लग आवब गेल अवछ, रे ँ अनारक काज सभ केँ छोव़ कऽ इजोरक कवच पवहरर ली। 13 वदन मे जेकाँ हम सभ ईमानदारी सँ चलब। दं गा आ नशा मे नवह, चंगुल आ बेहदापन मे नवह, झग़ा आ ईषाथ मे नवह। 14 मुदा अहाँ सभ पभु यीशु मसीहक धारण कर आ शरीरक वासना केँ पूरा करबाक लेल ओकर पबंध नवह कर। अध्य 14 1 जे ववश् वास मे कमजोर अवछ रकरा अहाँ सभ गहण कर, मुदा संदेहक वववाद मे नवह। 2 वकएक रँ एक गोटे ववशास करै र अवछ जे ओ सभ वकछु खा सकैर अवछ, दोसर जे कमजोर अवछ ओ ज़ी-बूटी खाइर अवछ। 3 जे भोजन करै र अवछ से नवह खाइर अवछ। जे नवह खाइर अवछ, से भोजन करवनहार पर नाय नवह करवर, वकएक रँ परमेश् वर ओकरा स् वागर कऽ लेने छवर। 4 अहाँ के छी जे दोसरक नोकरक नाय करै र छी? अपन मावलक लग ठा़ भ' जाइर अवछ वा खवस प़ै र अवछ। हँ , ओकरा पक़ल जायर, वकएक रँ परमेश् वर ओकरा ठा़ करबा मे सकम छवर। 5 एक गोटे एक वदन केँ दोसर वदन सँ बेसी मानैर अवछ, दोसर सभ वदन केँ एक समान मानैर अवछ। पतेक मनुष्‍य अपन-अपन मनमे पूणथ रपेण ववन् ‍वासी रहय। 6 जे केओ वदन केँ मानैर अवछ, से पभुक समक मानैर अवछ। जे वदन केँ नवह मानैर अवछ, से पभुक पवर कोनो आदर नवह करै र अवछ। जे भोजन करै र अवछ, से पभुक लेल भोजन करै र अवछ, वकएक रँ ओ परमेश् वर केँ धनवाद दै र अवछ। जे नवह खाइर अवछ, से पभु केँ नवह खाइर अवछ आ परमेश् वर केँ धनवाद दै र अवछ। 7 हमरा सभ मे सँ वकयो अपना लेल नवह जीबैर अवछ आ केओ अपना लेल नवह मरै र अवछ। 8 हम सभ जीबैर छी, मुदा पभुक लेल जीबैर छी। मरब, पभुक लेल मरर जाइर छी। 9 एवह लेल मसीह मरर गेलाह, जीवब उठलाह आ जीववर भऽ गेलाह जावह सँ ओ मृर् यु आ जीववर दु नूक पभु बनवर। 10 मुदा अहाँ अपन भाय पर वकएक नाय करै र छी? वा अहाँ अपन भाय केँ वकएक बेकार करै र छी? वकएक रँ हम सभ मसीहक नायक आसनक समक ठा़ रहब। 11 धमथशास् त मे वलखल अवछ, “जखन हम जीबैर छी, पभु कहै र छवर, सभ ठे हन हमरा पणाम करर आ सभ जीह परमेश् वरक समक सीकार करर।” 12 रखन हमरा सभ मे सँ एक-एक गोटे परमेश् वरक समक अपना-अपन वहसाब दे ब। 13 रे ँ आब एक-दोसरक न् याय नवह कर, बल् वक एवह बारक न् याय कर जे केओ अपन भायक बाट मे कोनो ठोकर वा खसबाक कारण नवह बनाबय। 14 हम ई जनैर छी आ पभु यीशु दारा ववशास कयल गेल अवछ जे अपना आप मे कोनो अशु् नवह अवछ, मुदा जे कोनो वसु केँ अशु् मानैर अवछ, ओकरा लेल ओ अशु् अवछ।

अध्य 13 1 पतेक पाणी उच शसयक अधीन रहय। वकएक रँ परमेश् वरक वसवाय कोनो सामर्थ य नवह अवछ। 2 रे ँ जे केओ सामर्थ यक ववरोध करै र अवछ, से परमेश् वरक वनयमक ववरोध करै र अवछ। 3 वकएक रँ शासक सभ नीक काजक लेल आरंवकर नवह होइर अवछ, बल् वक अधलाह काजक लेल। रखन की अहाँ सामरथ सँ नवह डे राएब? जे नीक अवछ से कर, रखन अहाँ केँ ओकर पशंसा होयर। 4 ओ अहाँ क भलाईक लेल परमेश् वरक सेवक छवर। मुदा जँ अहाँ अधलाह काज करै र छी रँ डर। वकएक रँ ओ अनेरे रलवार नवह लऽ कऽ चलैर अवछ, वकएक रँ ओ परमेश् वरक सेवक अवछ आ अधलाह काज करऽ वला पर कोध करबाक बदला लेबऽ वला अवछ। 5 रे ँ अहाँ सभ केँ मात कोधक कारणे ँ नवह, बल् वक वववेकक लेल सेहो अधीन रहबाक आवृकरा अवछ। 6 एवह लेल अहाँ सभ कर सेहो वदयौक, वकएक रँ ओ सभ परमेश् वरक सेवक छवर आ एवह काज मे सवदखन धान दै र छवर। 7 रे ँ हनका सभक बकाया सभ केँ कर वदयौक। परा केकरा परा; डर जकरा डर; समान वजनका समान। 8 एक-दोसर सँ पेम करबाक अवरररय ककरो कोनो ऋण नवह राखू, वकएक रँ जे एक-दोसर सँ पेम करै र अवछ, से धमथ -वनयम केँ पूरा कऽ लेने अवछ। 9 एवह लेल, “अवभववभचार नवह कर, हता नवह कर, चोरी नवह कर, झूठ गवाही नवह कर, लोभ नवह कर। आ जँ कोनो आन आता अवछ रँ एवह उसय मे संकेप मे बुझल गेल अवछ जे, अहाँ अपन प़ोसी सँ अपना जकाँ पेम कर। 10 पेम अपन प़ोसीक लेल कोनो अधलाह काज नवह करै र अवछ, रे ँ पेम धमथ-वनयमक पूवरथ वरक।

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रोमन

15 मुदा जँ अहाँ क भाय अहाँ क भोजनक कारणे ँ दु खी भऽ जाइर छवर रँ आब अहाँ दानपूवथक नवह चलैर छी। जकरा लेल मसीह मरर गेलाह, ओकरा अपन भोजन सँ न् नवह कर। 16 रखन अहाँ क नीक बार पर अधलाह बार नवह होउ। 17 परमेश् वरक राज् य भोजन-पान नवह अवछ। मुदा धमथ, शासन आ पववत आर् मा मे आनन। 18 वकएक रँ जे केओ एवह सभ बार मे मसीहक सेवा करै र अवछ, से परमेश् वरक स् वस् रु आ मनुष् य सभक अनुकूल अवछ। 19 रे ँ हम सभ ओवह बार सभक अनुसरण करी जे शासनक कारण बनैर अवछ आ ओवह बार सभक अनुसरण करी जावह सँ एक दोसर केँ ब़ा सकैर अवछ। 20 वकएक रँ भोजन परमेश् वरक काज केँ न् नवह कर। सब वसु सते शु् अवछ; मुदा जे आदमी अपमावनर भ' क' भोजन करै र अवछ, रकरा लेल ई अधलाह अवछ। 21 ई नीक अवछ जे ने मां स खाउ, ने मवदरा पीब, आ ने कोनो एहन चीज जावह सँ अहाँ क भाय ठोकर खाइर अवछ, आवक ठे स पहँ चैर अवछ, वा कमजोर भ’ जाइर अवछ। 22 की अहाँ क ववश् वास अवछ? परमेश् वरक समक अपना लग राखू। ओ धन अवछ जे ओवह काज मे अपना केँ दोषी नवह ठहराबैर अवछ। 23 जे कोनो संदेह करै र अवछ से जँ खाइर अवछ रँ ओकरा दोषी ठहराओल जाइर छै क, वकएक रँ ओ ववश् वासक कारणे ँ नवह खाइर अवछ। अध्य 15 1 रखन हम सभ जे बलवान छी, ओकरा कमजोर लोकक दु बथलरा केँ सहन करबाक चाही, आ अपना केँ पस् नवह करबाक चाही। 2 हमरा सभ मे सँ पतेक अपन प़ोसी केँ ओकर भलाईक लेल पस् करी। 3 मसीह सेहो अपना केँ पस् नवह कयलवन। मुदा, जेना धमथशास् त मे वलखल अवछ, “अहाँ केँ वनना करयवला सभक वनना हमरा पर प़ल।” 4 वकएक रँ पवहने जे वकछु वलखल गेल छल, से हमरा सभक वशकाक लेल वलखल गेल अवछ, जावह सँ हम सभ धैयथ आ धमथशास् तक सानिनाक कारणे ँ आशा रासख सकब। 5 धैयथ आ सानिना दे वनहार परमेश् वर अहाँ सभ केँ मसीह यीशुक अनुसार एक-दोसरक पवर एक समान ववचार रखबाक अनुमवर दै र छवर। 6 जावह सँ अहाँ सभ एक ववचार आ एक मुँह सँ परमेश् वर, जे हमरा सभक पभु यीशु मसीहक वपरा छवर, हनकर मवहमा कऽ सकब। 7 रे ँ अहाँ सभ एक-दोसर केँ गहण कर, जेना मसीह सेहो हमरा सभ केँ परमेश् वरक मवहमा मे गहण कयलवन। 8 आब हम कहै र छी जे यीशु मसीह परमेश् वरक सतराक लेल खरनाक सेवक छलाह, जावह सँ पूवथज सभक पवरता सभक पुव् कयल जा सकय। 9 एवह लेल जे गैर-यहदी सभ परमेश् वरक दयाक कारणे ँ परमेश् वरक मवहमा करवर। जेना धमथशास् त मे वलखल अवछ, “एवह लेल हम गैर-यहदी सभक बीच अहाँ केँ सीकार करब आ अहाँ क नामक लेल गाबब।”

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10 ओ फेर कहै र छवर, “हे गैर-यहदी सभ, अपन लोक सभक संग आनसनर होउ।” 11 फेर, “हे सभ गैर-यहदी, पभुक सुवर कर। आ अहाँ सभ लोक, हनकर पशंसा कर।” 12 फेर यशायाह कहै र छवर, “वयशैक जव़ आ जे गैर-यहदी सभ पर राज करबाक लेल उठर। गैर-यहदी सभ हनका पर भरोसा करर। 13 आशाक परमेश् वर अहाँ सभ केँ ववश् वास मे सभ आनन आ शान् वर सँ भरर दे वरन, जावह सँ अहाँ सभ पववत आर् माक सामर्थ य दारा आशा मे पचुर होयब। “ 15 मुदा, यौ भाइ लोकवन, परमेश् वर दारा हमरा पर जे कृपा कयल गेल अवछ, रावह कारणे ँ हम अहाँ सभ केँ मोन मे राखय लेल आरो वनभ्करा सँ वलखने छी। 16 एवह ररहे ँ हम गैर-यहदी सभ यीशु मसीहक सेवक बनब आ परमेश् वरक सुसमाचारक सेवा करब जावह सँ गैर-यहदी सभक बवलदान सीकायथ हो, पववत आर् मा दारा पववत कयल जाय। 17 एवह लेल हमरा लग एहन अवछ जे हम यीशु मसीहक दारा परमेश् वरक ववषय मे गवथ कऽ सकैर छी। 18 हम ओवह मे सँ कोनो बार कहबाक साहस नवह करब जे मसीह हमरा दारा नवह कयलवन, जावह सँ गैर-यहदी सभ केँ आताकारी बनाओल जाय। 19 परमेश् वरक आर् माक सामर्थ य दारा पराकमी वचन् त आ चमर् कार सभक दारा। एवह ररहे ँ हम यरशलेम सँ आ चार कार इवलररकम धरर मसीहक सुसमाचार पूरा ररहे ँ पचार कयलहँ । 20 हमहँ एवह ररहे ँ सुसमाचार पचार करबाक लेल पयास केलहँ , जरऽ मसीहक नाम राखल गेल छल, रावह ठाम नवह, जावह सँ हम दोसरक नीवं पर नवह बनब। 21 मुदा धमथशास् त मे वलखल अवछ जे , “जेकरा सँ हनकर बार नवह कयल गेल छल, ओ सभ दे खर।” 22 एवह कारणे ँ हमरा अहाँ सभ लग अयबा मे बहर बाधा पहँ चल अवछ। 23 मुदा आब एवह इलाका मे आब जगह नवह रवह गेल अवछ आ एवह बहरो वषथ सँ अहाँ सभ लग आबय के बहर इचा अवछ। 24 हम जखन कखनो सेन मे याता करब रखन हम अहाँ सभक लग आवब जायब, वकएक रँ हमरा ववशास अवछ जे जँ पवहने अहाँ सभक संगवर सँ वकछु भरर गेलहँ रँ अहाँ सभ केँ दे खब आ अहाँ सभक दारा ओरऽ जायब। 25 मुदा आब हम यरशलेम जा रहल छी, पववत लोक सभक सेवा करऽ लेल। 26 वकएक रँ मवकदु वनया आ अखायाक लोक सभ यरशलेम मे रहवनहार गरीब पववत लोक सभक लेल वकछु योगदान दे बऽ चाहै र छवर। 27 ई बार हनका सभ केँ सते नीक लगलवन। आ ओकर ऋणी ओ सभ छवर। कारण, जँ गैर-यहदी सभ हनका सभक आर् मक ववषय मे भाग लेने छवर रँ हनका सभक करथव सेहो अवछ जे ओ सभ शारीररक ववषय मे हनका सभक सेवा करवर। 28 जखन हम ई काज पूरा कऽ कऽ हनका सभ केँ एवह फल पर मोहर लगा दे ब रखन हम अहाँ सभक बीच सँ सेन आवब जायब। 29 हमरा ववशास अवछ जे जखन हम अहाँ सभ लग आवब जायब रँ मसीहक सुसमाचारक आशीषक पूणथरा मे आवब जायब।


रोमन

30 भाइ लोकवन, पभु यीशु मसीहक लेल आ आर् माक पेमक लेल हम अहाँ सभ सँ ववनरी करै र छी जे अहाँ सभ हमरा लेल परमेश् वर सँ पारथना मे हमरा संग वमवलकय संघषथ कर। 31 जावह सँ हम यहवदया मे ववश् वास नवह करवनहार सभ सँ मुय भऽ सकब। आ जे हमर सेवा यरशलेमक लेल अवछ, से पववत लोक सभ सीकार करवर। 32 जावह सँ हम परमेश् वरक इच् छा सँ अहाँ सभ लग हवषथर भऽ कऽ आवब सकब आ अहाँ सभक संग स् रान पावब सकब। 33 आब शासनक परमेश् वर अहाँ सभक संग रहवर। आमीन।

19 वकएक रँ अहाँ सभक आता सभक आता सभ मनुष् य मे पहँ वच गेल अवछ। रे ँ हम अहाँ सभक लेल पस् छी, मुदा रैयो हम चाहै र छी जे अहाँ सभ नीक काज मे बुस्मान आ अधलाह ववषय मे सरल रह। 20 शासनक परमेश् वर अहाँ सभक पएरक नीचाँ शैरान केँ जस्ये कुचलराह। हमरा सभक पभु यीशु मसीहक कृपा अहाँ सभक संग रहय। आमीन। 21 हमर सहकम् वरमुवरयुस, लूवसयस, यासोन आ सोवसपाटर, हमर ररशेदार, अहाँ सभ केँ पणाम करै र छवर। 22 ई पत वलखवनहार हम रेवटथ यस अहाँ सभ केँ पभु मे पणाम करै र छी। 23 हमर सेना आ समस मण् डलीक गाइयुस अहाँ सभ केँ पणाम करै र अवछ। नगरक कोठरी इरासस आ भाय कारुथस अहाँ सभ केँ पणाम करै र अवछ। 24 हमरा सभक पभु यीशु मसीहक कृपा अहाँ सभक संग रहय। आमीन। 25 हमरा सुसमाचार आ यीशु मसीहक पचारक अनुसार अहाँ सभ केँ स्र करबाक सामर्थ य अवछ, जे संसारक पारं भ सँ गुर राखल गेल रहसक पगटीकरणक अनुसार। 26 मुदा आब पगट भऽ गेल अवछ आ भववषवया सभक धमथशास् त दारा अनन परमेश् वरक आताक अनुसार सभ जावर केँ ववश् वासक आतापालन करबाक लेल पगट कयल गेल अवछ। 27 बुस्मान परमेश् वरक मवहमा अनन् र काल धरर यीशु मसीहक दारा होउ। आमीन। (कोररनस सँ रोमी लोकवन केँ वलखल गेल छल, आ कंकररया मे मण् डलीक सेवक फेबे दारा पठाओल गेल छल।)

अध्य 16 1 हम अहाँ सभ केँ अपन बवहन फेबी केँ पशंसा करै र छी जे कंकररया मे मण् डलीक सेवक छवर। 2 अहाँ सभ हनका पभु मे गहण कर जेना पववत लोक सभ केँ चाही आ जे काज हनका अहाँ सभक आवृकरा होवन रावह मे हनकर सहायरा कर। 3 मसीह यीशु मे हमर सहायक वपससला आ अकीला केँ अवभवादन कर। 4 ओ सभ हमर पाणक लेल अपन गरदवन रासख लेने छवर। 5 रवहना हनका सभक घर मे जे मण् डली अवछ, रकरा नमसार कर। हमर वपय इपैनेरुस केँ पणाम कर, जे मसीहक लेल अखायाक पवहल फल छवर। 6 मररयम केँ पणाम कर, जे हमरा सभ केँ बहर मेहनवर कयलवन। 7 हमर ररशेदार आ हमर संगी कैदी सभ एन्ोवनकस आ जुवनया केँ नमसार कर, जे पेररर सभक बीच मे नामी छवर, जे हमरा सँ पवहने मसीह मे छलाह। 8 पभु मे हमर वपय अस्पयस केँ नमसार कर। 9 मसीह मे हमर सभक सहायक उब्न आ हमर वपय साकीस केँ नमसार कर। 10 मसीह मे अनुमोवदर अपेल केँ नमसार कर। अररसोबुलसक घरक लोक सभ केँ पणाम कर। 11 हमर पररजन हे रोवदयोन केँ पणाम कर। नावसथवस के घरक लोक सभ केँ अवभवादन कर जे पभु मे छवर। 12 पभु मे पररशम करै र वतफेना आ वतफोसा केँ पणाम कर। वपय पवसथस केँ नमसार कर, जे पभु मे बहर पररशम केलवन। 13 पभु मे चुनल गेल रफस केँ आ हनकर माय आ हमरा पणाम कर। 14 अवसंवकटस, फेगोन, हरमास, पट् ोबास, हम्स आ हनका सभक संग रहवनहार भाय सभ केँ पणाम कर। 15 वफलोलोगस, जूवलया, नेरेयस, ओकर बवहन, ओवलमस आ हनका सभक संग रहवनहार सभ पववत लोक केँ पणाम कर। 16 एक-दोसर केँ पववत चुमा सँ नमसार कर। मसीहक मण् डली सभ अहाँ सभ केँ पणाम करै र अवछ। 17 भाइ लोकवन, हम अहाँ सभ सँ ववनरी करै र छी जे अहाँ सभ जे वशका वसखलहँ रावह सँ ववपरीर ववभाजन आ अपराध उत् करयवला लोक सभ केँ वचसनर कर। आ ओकरा सभसँ बचू। 18 वकएक रँ एहन लोक सभ हमरा सभक पभु यीशु मसीहक सेवा नवह करै र अवछ, बल् वक अपन पेटक सेवा करै र अवछ। आ नीक बार आ वनषक भाषण सँ सरल लोकक हदय केँ धोखा दै र अवछ।

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1 कोरिन्

21 छकएक रँ परमेश् वरक बुनद सँ संसार बुनद सँ परमेश् वर केँ नछह छचनलक, और परमेश् वर केँ ई पसन् न कयलछन जे ओ छवश् वासी सभ केँ उदार करछि। 22 यहिी सभ एकटा छचन् नाक माँ गैर अछछ आ यूनानी सभ बुनदक खोज मे लागल अछछ। 23 मुिा हम सभ कूस पर चृाओल गेल मसीहक पचार करै र छी, यहिी सभक लेल ठोकर आ यूनानी सभक लेल मूख्रा। 24 मुिा जे सभ बजाओल गेल अछछ, यहिी आ यूनानी, मसीह परमेश् वरक सामि्​् य आ परमेश् वरक बुनद छछि। 25 छकएक रँ परमेश् वरक मूख्रा मनुद् य सँ बेसी बुनदमान अछछ। आ परमेश् वरक कमजोरी मनुद् य सँ बेसी बलवान अछछ। 26 यौ भाइ लोकछन, अहाँ सभ अहाँ सभक आहान केँ िे खैर छी जे शरीरक अनुसार बहर रास जानी, बहरो पराकमी आ बहरो कुलीन नछह बजाओल गेल अछछ। 27 मुिा परमेश् वर संसारक मूख्रापूण् बार सभ केँ चुनलछन जे जानी केँ लन्र करछि। परमेश् वर संसारक कमजोर वसु सभ केँ चुनलछन जे शन्शाली वसु सभ केँ लन्र करछि। 28 परमेश् वर संसारक नीच चीज आ छररसृर वसु सभ केँ चुनलछन अछछ, जे छकछु नछह अछछ, रकरा सभ केँ छनषृर करबाक लेल। 29 जाछह सँ कोनो शरीर हनकर साछ्न मे घमंड नछह करछि। 30 मुिा अहाँ सभ हनका दारा मसीह यीशु मे छी, जे परमेश् वरक दारा हमरा सभक लेल बुनद, धाछम्करा, पछवतरा आ मोत बनौलछन। 31 एछह ररहे ँ धम्शास् त मे छलखल अछछ जे, “जे घमंड करै र अछछ, ओ पभु पर घमंड करय।”

अध्य 1 1 पौलुस, जे परमेश् वरक इच् छा दारा यीशु मसीहक पेररर बनबाक लेल बजाओल गेल अछछ आ हमरा सभक भाय सोस् नीस। 2 कोररन मे परमेश् वरक मण् डली केँ, जे सभ मसीह यीशु मे पछवत कयल गेल अछछ आ पछवत लोकक लेल बजाओल गेल अछछ, आ जे सभ जगह पर हमरा सभक पभु यीशु मसीहक नाम पुकारै र अछछ, ओकर आ हमरा सभक नामक संग। 3 हमरा सभक छपरा परमेश् वर आ पभु यीशु मसीहक अनुगह आ शान् अहाँ सभ पर हो। 4 हम अहाँ सभक लेल अपन परमेश् वर केँ सछिखन धनवाि िै र छी, जे परमेश् वरक कृपा अहाँ सभ केँ यीशु मसीह दारा कयल गेल अछछ। 5 अहाँ सभ हनका दारा सभ छकछु मे, सभ बार आ सभ जान मे समृद भऽ जायब। 6 जेना मसीहक गवाही अहाँ सभ मे पुष भेल। 7 एछह ररहे ँ अहाँ सभ कोनो वरिान नछह िऽ कऽ पाछू नछह आछब रहल छी। अपन पभु यीशु मसीहक आगमनक परीता मे। 8 ओ अहाँ सभ केँ अन् र धरर दृ करराह, जाछह सँ अहाँ सभ हमरा सभक पभु यीशु मसीहक छिन मे छनि्द भऽ जायब। 9 परमेश् वर छवश् वासी छछि, छजनका दारा अहाँ सभ हनकर पुत यीशु मसीह हमरा सभक पभुक संगछर मे बजाओल गेल छी। 10 भाइ लोकछन, हम अपना सभक पभु यीशु मसीहक नाम सँ अहाँ सभ सँ छवनरी करै र छी जे अहाँ सभ एके बार कहब आ अहाँ सभ मे कोनो ररहक भेि नछह हो। मुिा एकछह छवचार आ एकछह छनण्य मे अहाँ सभ पूण् रप सँ जुछ़ जाउ। 11 हमर भाइ लोकछन, अहाँ सभक बीच ई बार कहल गेल अछछ जे अहाँ सभक बीच छववाि भऽ रहल अछछ। 12 आब हम ई कहै र छी जे अहाँ सभ मे सँ एक-एक गोटे कहै र छी जे हम पौलुसक छी। आ हम अपोलोसक। आ हम केफाक। आ हम मसीहक। 13 की मसीह बँटल छछि? की पौलुस अहाँ क लेल कूस पर चृाओल गेल छल? की अहाँ सभ पौलुसक नाम सँ बपछरस् मा लेने छलहँ ? 14 हम परमेश् वर केँ धनवाि िै र छी जे हम अहाँ सभ मे सँ ककरो बपछरस् मा नछह िे लहँ , छसवाय छकरस आ गैयस केँ। 15 छकयो ई नछह कहय जे हम अपन नाम पर बपछरसा लेने छी। 16 हम सीफनसक घरक लोक केँ सेहो बपछरस् मा िे छलयैक। 17 मसीह हमरा बपछरस् मा िे बाक लेल नछह, बल् छक सुसमाचार पचार करबाक लेल पठौलछन। 18 छकएक रँ कूसक पचार हनका सभक लेल मूख्रा अछछ। मुिा हमरा सभ जे उदार पाछब गेल छी, राछह लेल ई परमेश् वरक सामि्​् य अछछ। 19 धम्शास् त मे छलखल अछछ, “हम बुनदमानक बुनद केँ नष कऽ िे ब आ बुनदमान लोकक बुनद केँ नष कऽ िे ब।” 20 जानी करय अछछ? लेखक करय छछि ? एछह संसारक छववािक करय अछछ? की परमेश् वर एछह संसारक बुनद केँ मूख् नछह बनौलछन?

अध्य 2 1 भाइ लोकछन, जखन हम अहाँ सभ लग आयल रही रँ अहाँ सभ केँ परमेश् वरक गवाही सुना कऽ अयलहँ । 2 हम अहाँ सभक बीच यीशु मसीह आ कूस पर चृाओल गेल हनका छोछ़ कऽ कोनो बार नछह जानब। 3 हम अहाँ सभक संग कमजोरी, भय आ बहर काँ छप रहल छलहँ । 4 हमर बाजब आ पचार मनुद् यक बुनदक पलोभन वचन सँ नछह, बल् छक आर् मा आ सामि्​् यक पगटरा मे छल। 5 अहाँ सभक छवश् वास मनुद् यक बुनद मे नछह, बल् छक परमेश् वरक सामि्​् य मे ठाृ रहय। 6 मुिा हम सभ छसद लोक सभक बीच बुनद बजैर छी, मुिा एछह संसारक आ ने एछह संसारक अध्‍यत सभक बुनद नछह। 7 मुिा हम सभ परमेश् वरक बुनद एकटा रहस मे बजैर छी, जे नुकायल बुनद अछछ, जे परमेश् वर हमरा सभक मछहमा लेल संसारक समत छनधा् ररर कयलछन। 8 ई बार एछह संसारक अध् यत मे सँ छकयो नछह जनैर छल, छकएक रँ जँ ओ सभ ई बार जछनरछि रँ मछहमा-मछहमाक पभु केँ कूस पर नछह चृौने रछहरछि। 9 मुिा जेना धम्शास् त मे छलखल अछछ, “परमेश् वर जे छकछु परमेश् वर हनका सँ पेम करय बला सभक लेल रैयार कयलछन अछछ, से आँ नख नछह िे खलक आ कान नछह सुनलक आ ने मनुद् यक हिय मे पवेश केलक।” 10 मुिा परमेश् वर अपन आर् मा दारा हमरा सभ केँ ओकरा सभ केँ पगट कयलछन, छकएक रँ आर् मा परमेश् वरक गहीरं बार सभ केँ जाँ च करै र अछछ।

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1 कोररनी

11 मनुद् यक बार केँ के जनैर अछछ, छसवाय मनुद् यक आर् मा केँ जे ओकरा मे अछछ? रछहना परमेश् वरक बार परमेश् वरक आर् मा छोछ़ ककरो नछह जनैर अछछ। 12 आब हमरा सभ केँ संसारक आर् मा नछह, बल् छक परमेश् वरक आर् मा भेटल अछछ। जाछह सँ हम सभ ओछह बार सभ केँ जाछन सकब जे परमेश् वर हमरा सभ केँ मुफ मे िे ल गेल अछछ। 13 ई बार हम सभ मनुद् यक बुनद छसखाओल वचन मे नछह, बल् छक पछवत आर् मा दारा छसखाओल गेल वचन मे नछह बजैर छी। आनानाक वसुक रुलना आनानाक वसुक संग करब। 14 मुिा साभाछवक मनुद् य परमेश् वरक आर् माक बार नछह गहण करै र अछछ, छकएक रँ ओ सभ ओकरा लेल मूख्रा अछछ, आ ने ओ ओकरा सभ केँ जाछन सकैर अछछ, छकएक रँ ओ सभ आर् माक दछष सँ बूझल अछछ। 15 मुिा जे आर् मक अछछ, से सभ बारक न् याय करै र अछछ, मुिा ओ सयं ककरो दारा नाय नछह कयल जाइर अछछ। 16 पभुक छवचार के के जनैर अछछ जे ओ हनका छशता िे छिन? मुिा हमरा सभ लग मसीहक मन अछछ।

15 जँ ककरो काज जरर जायर रँ ओकरा नुकसान होयरैक। रइयो आछगसँ जेना। 16 की अहाँ सभ ई नछह जनैर छी जे अहाँ सभ परमेश् वरक मन् छिर छी आ परमेश् वरक आर् मा अहाँ सभ मे छनवास करै र अछछ? 17 जँ केओ परमेश् वरक मन् छिर केँ अशुद करर रँ परमेश् वर ओकरा नष कऽ िे छिन। छकएक रँ परमेश् वरक मन् छिर पछवत अछछ, जे मन् छिर अहाँ सभ छी।” 18 केओ अपना केँ धोखा नछह छियौक। जँ अहाँ सभ मे सँ केओ एछह संसार मे बुनदमान बुझैर अछछ रँ ओ मूख् बछन जाय जाछह सँ ओ बुनदमान बनय। 19 एछह संसारक बुनद परमेश् वरक लेल मूख्रा अछछ। धम्शास् त मे छलखल अछछ जे, “ओ बुनदमान केँ अपन धूर्रा मे पकछ़ लैर छछि।” 20 फेर, “पभु जानी सभक छवचार केँ जनैर छछि जे ओ सभ वि् अछछ।” 21 रे ँ केओ मनुद्‍य पर घमंड नछह करए। छकएक रँ सभ छकछु अहाँ क अछछ। 22 चाहे पौलुस, अपोलोस, कफा, संसार, जीवन, मृ्ु, वा वर्मान वसु आ आगामी बार। सब अहाँ क अछछ। 23 अहाँ सभ मसीहक छी। आ मसीह परमेश् वरक छछि।

अध्य 3 1 भाइ लोकछन, हम अहाँ सभ केँ आर् मक लोक जकाँ नछह बाछज सकलहँ, बल् छक शारीररक आ मसीह मे बचा सभक संग जेना गप कऽ सकलहँ । 2 हम अहाँ सभ केँ िू ध सँ खुआबैर छी, भोज सँ नछह, छकएक रँ अहाँ सभ एखन धरर सहन नछह कऽ सकलहँ आ एखन धरर अहाँ सभ नछह सछह सकलहँ । 3 अहाँ सभ एखनो शारीररक छी, छकएक रँ अहाँ सभ मे ईरा् , झग़ा आ छवभाजन अछछ, की अहाँ सभ शारीररक नछह छी आ मनुद् य जकाँ चलैर छी? 4 जखन छक केओ कहै र अछछ जे , “हम पौलुसक छी।” आ िोसर, “हम अपोलोसक छी।” की अहाँ सभ शारीररक नछह छी? 5 रखन पौलुस के छछि आ अपोलोस के छछि, मुिा सेवक के छछि, छजनका दारा अहाँ सभ छवश् वास केलहँ , जेना पभु सभ एक-एक केँ िे लछन? 6 हम रोपने छी, अपोलोस पाछन िे लछन। मुिा भगवान् बृौलछन। 7 रे ँ ने छकछु रोपछनहार आ ने पाछन िे छनहार। मुिा बृबैर परमेश् वर। 8 रोपछनहार आ पाछन िे छनहार एक अछछ, आ प्ेक केँ अपन पररशमक अनुसार अपन-अपन इनाम भेटरछन। 9 हम सभ परमेश् वरक संग मजिू र छी। 10 परमेश् वरक कृपाक अनुसार जे हमरा िे ल गेल अछछ, राछह अनुसार हम एकटा बुनदमान माछलक बनौछनहारक रप मे नीवं रखलहँ आ िोसर ओछह पर छनमा् ण करै र अछछ। मुिा प्ेक केओ सावधान रहय जे ओ एछह पर कोना छनमा् ण करै र अछछ। 11 छकएक रँ जे नीवं राखल गेल अछछ, जे यीशु मसीह छछि, राछह सँ बेसी केओ िोसर नीवं नछह रानख सकैर अछछ। 12 जँ केओ एछह नीवं पर सोना, चानी, कीमरी पािर, लक़ी, घास, कू़ा-करकट बनबैर अछछ। 13 प्ेक मनुद्‍यक काज पगट होयर, छकएक रँ ओ आछग दारा पगट होयर। आछग हरे क आिमीक काज के परखर जे ओ कोन ररहक काज अछछ। 14 जँ केओक काज ओछह पर बनल रहर रँ ओकरा फल भेटरैक।

अध्य 4 1 केओ हमरा सभ केँ मसीहक सेवक आ परमेश् वरक रहस सभक भणारी जकाँ मानय। 2 भणारी सभ मे ई सेहो जररी अछछ जे मनुद् यक छवश् वासयोग् य पाओल जाय। 3 मुिा हमरा लेल ई बहर छोट बार अछछ जे अहाँ सभक वा मनुद् यक न् याय सँ हमरा न् याय कयल जाय। 4 हम अपना सँ छकछु नछह जनैर छी। रैयो हम एछह दारा धम् नछह ठहराओल गेल छी, मुिा जे हमरा पर न् याय करै र अछछ, से पभु छछि। 5 रे ँ समय सँ पछहने कोनो बारक न् याय नछह कर जाबर धरर पभु नछह आओराह, जे अन् हार मे नुकायल बार सभ केँ पकाश मे अनराह आ हियक छवश् वास केँ पगट करराह। 6 भाइ लोकछन, ई सभ बार हम अहाँ सभक लेल अपना आ अपोलोसक आकृछर मे सानां रररर कऽ िे लहँ अछछ। जाछह सँ अहाँ सभ हमरा सभ मे ई सीख सकब जे अहाँ सभ मे सँ छकयो एक-िोसरक छवरोध मे कोनो एहन बार नछह होअय। 7 अहाँ केँ िोसर सँ छभ् के बनबैर अछछ? आ अहाँ लग की अछछ जे अहाँ केँ नछह भेटल? आब जँ अहाँ एकरा पाछब लेलहँ रँ अहाँ छकएक घमंड करै र छी जेना अहाँ केँ ई नछह भेटल हो? 8 आब अहाँ सभ पेट भरर गेलहँ , आब अहाँ सभ धछनक भऽ गेलहँ , अहाँ सभ हमरा सभक छबना राजा बछन कऽ राज कएलहँ । 9 हम सोचैर छी जे परमेश् वर हमरा सभ पेररर सभ केँ ओछहना अंछरम सान पर रानख िे लछन जेना मृ्ुक लेल छनधा् ररर कयल गेल छल, छकएक रँ हम सभ संसार, स् वग्िूर आ मनुद् य सभक लेल रमाशा बछन गेल छी। 10 हम सभ मसीहक लेल मूख् छी, मुिा अहाँ सभ मसीह मे बुनदमान छी। हम सभ कमजोर छी, मुिा अहाँ सभ बलवान छी। अहाँ सभ आिरणीय छी, मुिा हम सभ छररसृर छी।

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11 आइ धरर हम िु नू गोटे भूखल-पासल छी, नंगटे छी, माररपीट खाइर छी, आ कोनो छनछ्र छनवास सान नछह अछछ। 12 अपना हाि सँ पररशम करै र छी। हम सभ सराओल जाइर छी, हम सभ ई कष सहै र छी। 13 हम सभ बिनाम भऽ कऽ छवनरी करै र छी, हम सभ संसारक गंिगी जकाँ बछन गेल छी आ आइ धरर सभ वसुक ग़ब़ी छी। 14 हम ई सभ बार अहाँ सभ केँ लन्र करबाक लेल नछह छलखैर छी, बल् छक अपन छपय पुत सभक रप मे अहाँ सभ केँ चेराबैर छी। 15 जँ अहाँ सभक मसीह मे िस हजार उपिे शक छछि, मुिा अहाँ सभक बहर रास छपरा नछह अछछ, छकएक रँ हम अहाँ सभ केँ मसीह यीशु मे सुसमाचारक दारा जनम िे लहँ । 16 रे ँ हम अहाँ सभ सँ छवनरी करै र छी जे अहाँ सभ हमर अनुयायी बनू। 17 एछह लेल हम छरमुछियुस केँ पठौने छी, जे हमर छपय पुत आ पभु मे छवश् वास रखैर छछि, जे अहाँ सभ केँ हमर मसीह मे रहबाक माग्क सरण कराओर, जेना हम सभ मण् डली मे सभ ठाम छसखाबैर छी। 18 आब छकछु गोटे धूमधाम मे आछब गेल छछि जेना हम अहाँ सभ लग नछह आबय चाहै र छी। 19 मुिा जँ पभु चाहछि रँ हम अहाँ सभ लग जन्ये आछब जायब आ उ़ब़बला लोक सभक बाजब नछह, बल् छक सामि्​् य केँ बुझब। 20 परमेश् वरक राज् य वचन मे नछह, बल् छक सामि्​् य मे अछछ। 21 अहाँ सभ की चाहै र छी? की हम अहाँ सभ लग छ़ी लऽ कऽ आयब आछक पेम मे आ नमराक आर् मा सँ?

10 रैयो एछह संसारक वछभचारी सभक संग, लोभी, वा लूटपाट वा मूछर्पूजक सभक संग नछह। कारण रखन अहाँ सभ केँ संसार सँ बाहर छनकलबाक आवशकरा अछछ। 11 मुिा आब हम अहाँ सभ केँ छलखने छी जे जँ केओ भाय कहल जाइर अछछ, ओ वछभचारी, लोभी, मूछर्पूजक, वा बिमाश, वा शराबी वा लूटपाट करयवला अछछ रँ संगछर नछह कर। एहन एकटाक संग नछह खाएब। 12 हमरा की करबाक अछछ जे हम बाहरक लोक सभक सेहो न् याय करी? की अहाँ सभ भीररक लोक सभक नाय नछह करै र छी? 13 मुिा परमेश् वरक छवहीन लोक सभक नाय करै र छछि। रे ँ ओछह िु ष केँ अपना मे सँ िू र कऽ छियौक। अध्य 6 1 अहाँ सभ मे सँ छकयो िोसरक छवरद कोनो बार रखबाक छहमर कऽ सकैर छी जे पछवत लोक सभक समत नछह, अधम् सभक समत कानून मे जायब? 2 की अहाँ सभ नछह जनैर छी जे पछवत लोक सभ संसारक न् याय करराह? जँ अहाँ सभक दारा संसारक न् याय होयर रँ की अहाँ सभ छोट-छोट बार सभक न् याय करबाक अयोग छी? 3 की अहाँ सभ नछह जनैर छी जे हम सभ स् वग्िूर सभक न् याय करब? करेक बेसी बार जे एछह जीवन सँ संबंछधर अछछ? 4 जँ अहाँ सभ केँ एछह जीवनक छवदय मे न् याय अछछ रँ ओकरा सभ केँ न् याय करबाक लेल राखू जे मण् डली मे जे सभ कम मानैर अछछ। 5 हम अहाँ क लाजक बार कहै र छी। की एहन अछछ जे अहाँ सभ मे कोनो जानी नछह अछछ? नछह, एहन नछह जे अपन भाय सभक बीच नाय क’ सकैर अछछ? 6 मुिा भाय भाइ सभक संग छवधा मे जाइर छछि आ से अछवशासी सभक समत। 7 आब अहाँ सभ मे एकिम िोद अछछ, छकएक रँ अहाँ सभ एकिोसरक संग व्‍यवस्‍िाक पालन करै र छी। अहाँ सभ गलर काज छकएक नछह मानैर छी? अहाँ सभ अपना केँ ठकबाक लेल छकएक नछह छो़ै र छी? 8 नछह, अहाँ सभ अधलाह करै र छी आ ठकैर छी, आ से अहाँ सभक भाय सभ। 9 की अहाँ सभ नछह जनैर छी जे अधम् केँ परमेश् वरक राज् य नछह भेटर? धोखा नछह खाउ, ने वछभचारी, ने मूछर्पूजक, ने वछभचारी, ने सीछलंग, आ ने मनुद्‍य-जाछरक संग िु व्वहार करछनहार। 10 ने चोर, ने लोभी, ने शराबी, ने गारर-गरौबछल, आ ने लूटपाट करछनहार, परमेश् वरक राज् य मे उतराछधकारी बनर। 11 अहाँ सभ मे सँ छकछु एहने छलहँ , मुिा अहाँ सभ धोआ गेल छी, मुिा पछवत कयल गेल छी, मुिा पभु यीशुक नाम सँ आ हमरा सभक परमेश् वरक आर् मा दारा धम् ठहराओल गेल छी। 12 हमरा लेल सभ छकछु उछचर अछछ, मुिा सभ छकछु उछचर नछह अछछ। 13 पेटक बिला मे भोजन, आ पेट भोजनक बिला मे, मुिा परमेश् वर ओकरा आ ओकरा िु नू केँ नष कऽ िे छिन। आब शरीर वछभचारक लेल नछह, बल् छक पभुक लेल अछछ। आ शरीरक लेल पभु।

अध्य 5 1 अहाँ सभक बीच मे वछभचार अछछ आ गैर-यहिी सभक बीच एहन वछभचार अछछ, जे छकयो अपन छपराक पती केँ पाछब लैर अछछ। 2 अहाँ सभ घमंड कऽ कऽ शोक नछह कऽ रहल छी, जाछह सँ ई काज केछनहार केँ अहाँ सभक बीच सँ हँ टा िे ल जाय। 3 छकएक रँ हम शरीर मे अनुपनसर छी, मुिा आर् मा मे उपनसर छी, ओछह पर पछहने सँ न् याय कऽ लेने छी जेना हम उपनसर छी। 4 जखन अहाँ सभ अपन पभु यीशु मसीहक सामि्​् य सँ हमरा सभक पभु यीशु मसीहक नाम सँ एकछतर भऽ जायब। 5 एहन लोक केँ शरीरक छवनाशक लेल शैरान केँ सौंपब जाछह सँ पभु यीशुक छिन मे आर् मा उदार पाछब सकय। 6 अहाँ क घमंड नीक नछह अछछ। की अहाँ सभ नछह जनैर छी जे कछन खमीर सँ पूरा गाँ ठ खमीर भ' जाइर अछछ? 7 रे ँ पुरना खमीर केँ शुद कर, जाछह सँ अहाँ सभ अखमीर जकाँ नव गां ठ बछन जायब। छकएक रँ मसीह हमरा सभक लेल फसहपाबछन बछल चृाओल गेल छछि। 8 रे ँ हम सभ पुरना खमीर सँ नछह आ ने िु भा् वना आ िु षराक खमीर सँ भोज मनाबी। मुिा छनशलरा आ स्क अखमीरी रोटी सँ। 9 हम अहाँ सभ केँ पत मे छलखने छी जे वछभचारी सभक संगछर नछह कर।

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14 परमेश् वर पभु केँ जीछब उठौलछन आ अपना सामि्​् य सँ हमरा सभ केँ छजयार सेहो। 15 की अहाँ सभ नछह जनैर छी जे अहाँ सभक शरीर मसीहक अंग अछछ? रखन की हम मसीहक अंग-अंग सभ केँ लऽ कऽ वेशाक अंग बना लेब? भगवान नछह करछि। 16 की ? अहाँ सभ ई नछह जनैर छी जे वेशा सँ जु़ल एक शरीर अछछ? कारण िू गोटे , ओ कहै र छछि, एक शरीर होयर। 17 मुिा जे पभुक संग जु़ल अछछ से एक आर् मा अछछ। 18 वछभचार सँ भाछग जाउ। मनुर जे पाप करै र अछछ से शरीरक बाहर होइर अछछ। मुिा जे वछभचार करै र अछछ से अपन शरीरक छवरद पाप करै र अछछ। 19 की ? अहाँ सभ ई नछह जनैर छी जे अहाँ सभक शरीर पछवत आर् माक मन् छिर अछछ जे अहाँ सभ मे अछछ, जे अहाँ सभ परमेश् वरक दारा अछछ, आ अहाँ सभ अपन नछह छी? 20 छकएक रँ अहाँ सभ िाम सँ कीनल गेल छी, रे ँ अपन शरीर आ आर् मा मे परमेश् वरक मछहमा कर।

16 हे पती, अहाँ की जनैर छी जे अहाँ अपन पछरक उदार करब वा नछह? हे मनुख, अहाँ कोना जनैर छी जे अहाँ अपन पती केँ उदार करब वा नछह? 17 मुिा जेना परमेश् वर सभ एक-एक केँ बाँ छट िे ने छछि, जेना पभु सभ केँ बजौने छछि, रेना ओ चलय। आ हम सभ मण् डली मे एछह ररहे ँ छनयुन् करै र छी। 18 की केओ खरना करबाक लेल बजाओल गेल अछछ? खरना नछह होबय। छकयो अखरना मे बजाओल गेल अछछ? खरना नछह होउ। 19 खरना छकछु नछह, आ खरना नछह करब छकछु नछह, बल् छक परमेश् वरक आजाक पालन करब। 20 प्ेक केओ ओछह आहान मे रहय जाछह मे ओकरा बजाओल गेल छल। 21 की अहाँ नोकर बछन कऽ बजाओल गेल छी? एकर परवाह नछह कर, मुिा जँ अहाँ सरंत भ' सकैर छी र' एकर उपयोग कर। 22 जे केओ पभु मे बजाओल गेल अछछ, सेवक बछन कऽ पभुक सरंत लोक अछछ। 23 अहाँ सभ िाम सँ कीनल गेल छी। अहाँ सभ मनुद् यक सेवक नछह बनू।” 24 भाइ लोकछन, प्ेक केओ जाछह मे बजाओल गेल अछछ, ओछह मे परमेश् वरक संग रहय। 25 कुमारर सभक छवदय मे हमरा परमेश् वरक कोनो आजा नछह अछछ। 26 रे ँ हम कहै र छी जे ई मनुखक लेल एहन रहब नीक अछछ। 27 की अहाँ पतीक संग बानल छी? ढीला नछह होबय के कोछशश कर। की अहाँ पतीसँ मु् भऽ गेल छी? पतीक खोज नछह कर। 28 मुिा जँ अहाँ छववाह करब रँ पाप नछह केलहँ । आ जँ कना छववाह करै र छछि रँ ओ पाप नछह केने छछि। रैयो एहन लोक सभ केँ शरीर मे कष होयर, मुिा हम अहाँ सभ केँ बखैर छी। 29 भाइ लोकछन, हम ई कहै र छी जे समय कम अछछ। 30 जे कानैर अछछ से सभ जेना नछह काछन रहल हो। जे सभ आनन्र होइर अछछ, से सभ जेना आनन्र नछह होइर अछछ। कीनछनहार सभ, जेना ओकरा सभ केँ कोनो समछत नछह हो। 31 जे सभ एछह संसारक उपयोग करै र अछछ, से सभ एकर िु रपयोग नछह करै र अछछ, छकएक रँ एछह संसारक फैशन समाप भऽ जाइर अछछ। 32 मुिा हम अहाँ सभ केँ छबना कोनो सावधान रहने चाहै र छी। जे अछववाछहर अछछ, से पभुक बार सभक छच्ा करै र अछछ जे ओ पभु केँ कोना पस् क' सकैर अछछ। 33 मुिा छववाछहर केओ संसारक वसु सभक छच्ा करै र अछछ जे ओ अपन पती केँ कोना पस् कऽ सकय। 34 पती आ कुमारर मे सेहो अंरर होइर छै क। अछववाछहर सी पभुक बारक छच्ा करै र अछछ, जाछह सँ ओ शरीर आ आा​ा िु नू मे पछवत हो, मुिा छववाछहर सी संसारक बारक छच्ा करै र अछछ जे ओ अपन पछर केँ कोना पस् करर। 35 हम ई बार अहाँ सभक अपन लाभक लेल कहै र छी। हम एछह लेल नछह जे हम अहाँ सभ पर जाल फेछक सकब, बल् छक जे नीक अछछ राछह लेल आ अहाँ सभ छबना कोनो छवचछलर केने पभुक सेवा करी। 36 मुिा जँ केओ ई सोचैर अछछ जे ओ अपन कुमारर कनाक पछर अधलाह ववहार करै र अछछ, जँ ओ अपन कुमारर कनाक

अध्य 7 1 अहाँ सभ हमरा ओछह बार सभक छवदय मे छलखने छी जे , “पुरदक लेल स् ती केँ हाि नछह लगेनाइ नीक अछछ।” 2 रइयो वछभचार सँ बचबाक लेल प्ेक पुरदक अपन स् ती होअय आ पर् येक स् तीक अपन पछर हो। 3 पछर पती पर उछचर उपकार करछि। 4 पती केँ अपन शरीर सँ अछधकार नछह, बल् छक पछरक अछधकार छछन। 5 अहाँ सभ एक-िोसर केँ धोखा नछह कर, जाबर छकछु समयक लेल सहमछर सँ नछह होउ, जाछह सँ अहाँ सभ अपना केँ उपवास आ पाि्ना मे नछह िऽ सकब। आ फेर एक ठाम आछब जाउ, जाछह सँ शैरान अहाँ सभक असंयमराक कारणे ँ अहाँ सभ केँ पलोभन नछह करय। 6 मुिा हम ई बार आजा सँ नछह, आजा सँ नछह, अनुमछर सँ कहै र छी। 7 हम चाहै र छी जे सभ लोक हमरा जकाँ हो। मुिा परमेश् वरक अपन उछचर वरिान अछछ, एक एछह ररहे ँ आ िोसर एछह ररहे ।ँ 8 रे ँ हम अछववाछहर आ छवधवा सभ केँ कहै र छी जे , जँ ओ सभ हमरा जकाँ छटकल रहछि रँ हनका सभक लेल नीक होयर। 9 मुिा जँ ओकरा सभ केँ समारर नछह सकैर अछछ रँ छववाह कर, छकएक रँ जरे बा सँ नीक जे छववाह करब। 10 छववाछहर सभ केँ हम आजा िै र छी, मुिा हम नछह, बल् छक पभु केँ, “पती केँ अपन पछर सँ नछह छविा होबय।” 11 मुिा जँ ओ चछल जाइर छछि रँ ओ अछववाछहर रहछि वा अपन पछरक संग मेल छमलाप करछि। 12 मुिा बाँ की सभ केँ हम पभु नछह कहै र छी। 13 जकरा स् तीक पछर छवश् वास नछह करै र अछछ आ जँ ओ ओकरा संग रहय चाहै र अछछ रँ ओ ओकरा छोछ़ नछह जाय। 14 अछवशासी पछर केँ पती दारा पछवत कयल गेल अछछ आ अछवशासी पती केँ पछर दारा पछवत कयल गेल अछछ। मुिा आब ओ सभ पछवत अछछ। 15 मुिा जँ अछवशासी सभ चछल जाय रँ ओ चछल जाय। एहन मे कोनो भाइ वा बछहन बंधन मे नछह रहै र अछछ, मुिा परमेश् वर हमरा सभ केँ शान् मे बजौने छछि।

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संग अधलाह ववहार करै र अछछ, आ जँ ओकरा एछह बारक आवशकरा होअय रँ ओ जे चाहै र अछछ से करऽ, ओ पाप नछह करै र अछछ। 37 मुिा जे मन मे दृरापूव्क ठाृ रहै र अछछ, जकरा मे कोनो आवश् यकरा नछह अछछ, बल् छक अपन इचा पर अछधकार रखैर अछछ, आ अपन मन मे एहन छनण्य कएने अछछ जे ओ अपन कुमारर केँ रानख लेर, से नीक करै र अछछ। 38 रे ँ जे ओकरा छववाह मे िै र अछछ से नीक काज करै र अछछ। मुिा जे ओकरा छववाह मे नछह िै र अछछ, से नीक काज करै र अछछ। 39 पती जाबर धरर पछर जीबैर छछि राबर धरर धम्-छनयमक पालन मे बानल रहै र छछि। मुिा जँ ओकर पछर मरर गेल अछछ रँ ओकरा जकरासँ चाहै छै ओकरासँ छववाह करबाक सरंतरा छै क। केवल पभु मे। 40 मुिा हमर न् यायक अनुसार जँ ओ एछहना छटकैर रहरीह रँ ओ बेसी खुश रहरीह।

13 रे ँ जँ भोजन हमर भाय केँ ठे स पहँ चबैर अछछ रँ हम संसार ठाृ रहै र कोनो मां स नछह खायब, जाछह सँ हम अपन भाय केँ ठे स नछह पहँ चाबी। अध्य 9 1 की हम पेररर नछह छी? की हम सरंत नछह छी? की हम अपन पभु यीशु मसीह केँ नछह िे खलहँ? की अहाँ सभ पभु मे हमर काज नछह? 2 जँ हम िोसरक लेल पेररर नछह छी रँ छनसंिेह हम अहाँ सभक लेल छी। 3 जे सभ हमरा परखैर छछि हनका सभक पछर हमर उतर ई अछछ। 4 की हमरा सभ केँ खाय-पीबाक सामर् नछह अछछ? 5 की हमरा सभ केँ कोनो बछहन, पती, आन पेररर सभ आ पभुक भाय आ केफा जकाँ घुमबाक अछधकार नछह अछछ? 6 की हम आ बरनबास केँ काज करब छो़बाक अछधकार नछह अछछ? 7 के अपन आजा पर कछहयो युद मे जाइर अछछ? के अंगूरक बगीचा रोपैर अछछ आ ओकर फल नछह खाइर अछछ? वा के भे़ ँ ाक चरबाह करै र अछछ आ भे़ ँ ाक िू ध नछह खाइर अछछ? 8 हम ई सभ बार मनुद् य जकाँ कहै र छी? वा धम्-छनयम सेहो वैह नछह कहै र अछछ? 9 मूसाक धम्-छनयम मे छलखल अछछ जे , “अहाँ जे बैल धान केँ रौंिैर अछछ, ओकर मुँह मे िूिन नछह लगाउ।” की भगवान बैल के िे खभाल करै र छछि? 10 आछक ओ हमरा सभक लेल एकिम सँ कहै र छछि? हमरा सभक लेल, छनसंिेह, ई छलखल गेल अछछ जे जोरछनहार आशा मे जोरय। आ आशा मे जे कुरल करै र अछछ, से ओकर आशा मे भाग लेर।” 11 जँ हम सभ अहाँ सभक लेल आर् छमक वस् रु सभ बोछन लेने छी रँ की हम सभ अहाँ सभक शारीररक वसु सभ काछट लेब? 12 जँ आन लोक अहाँ सभ पर एछह अछधकारक भागीिार अछछ रँ की हम सभ एछह सँ बेसी नछह चाहै र छी? रइयो हम सभ एछह शन्क पयोग नछह केलहँ ; मुिा सभ छकछु कष छलअ, जाछह सँ हम सभ मसीहक सुसमाचार मे बाधा नछह पहँ चाबी। 13 की अहाँ सभ नछह जनैर छी जे पछवत वसुक सेवा करऽ वला सभ मन्रक वसु सभ सँ जीबैर अछछ? जे वेिी पर परीता करै र अछछ, से वेिी मे भाग लैर अछछ? 14 रछहना परमेश् वर एछह ररहे ँ छनदेछचर कयलछन अछछ जे सुसमाचार पचार करछनहार सभ केँ सुसमाचार सँ जीछवर रहबाक चाही। 15 मुिा हम एछह सभ मे सँ कोनो बारक पयोग नछह केलहँ , आ ने हम ई सभ बार छलखने छी जे हमरा संग एहन कयल जाय, छकएक रँ एछह सँ नीक जे हम मरब, जखन छक केओ हमर घमंड केँ शून कऽ िै र अछछ। 16 हम सुसमाचार पचार करै र छी, मुिा हमरा कोनो गौरव करबाक कोनो बार नछह अछछ। हँ , हमरा लेल छधकार अछछ, जँ हम सुसमाचार नछह पचार करब! 17 जँ हम ई काज सेचा सँ करब रँ हमरा इनाम भेटैर अछछ, मुिा जँ हमर इचाक छवपरीर अछछ रँ सुसमाचारक पबंध हमरा सौंपल गेल अछछ।

अध्य 8 1 मूछर् सभक लेल चृाओल गेल वसुक छवदय मे हम सभ जनैर छी जे हमरा सभ केँ जान अछछ। जान फुलाबैर अछछ, मुिा िान संसाररर करै र अछछ। 2 जँ केओ बुझैर अछछ जे ओ कोनो बार जनैर अछछ रऽ ओ एखन धरर छकछु नछह जनैर अछछ जेना ओकरा बुझबाक चाही। 3 मुिा जँ केओ परमेश् वर सँ पेम करै र अछछ रँ ओकरा परमेश् वर सँ बूझल जाइर अछछ। 4 मूछर् सभक बछलिान मे चृाओल जायवला वसु सभक सेवनक छवदय मे हम सभ जनैर छी जे मूछर् संसार मे छकछु नछह अछछ आ एकटा परमेश् वरक अछररर् कोनो आन परमेश् वर नछह अछछ। 5 जँ स् वग् मे वा पृि् वी पर िे वरा कहल जायवला लोक सभ छछि, जेना बहरो िे वरा आ पभु बहरो छछि।” 6 मुिा हमरा सभक लेल एकेटा परमेश् वर छछि, जे छपरा छछि, छजनका सँ सभ छकछु अछछ आ हम सभ हनका मे छी। आ एकटा पभु यीशु मसीह, छजनका दारा सभ छकछु अछछ आ हम सभ हनका दारा। 7 मुिा सभ मनुद्‍य मे ई जान नछह अछछ, छकएक रँ छकछु लोक आइ धरर मूछर्क छववेशक संग मूछर् केँ चृाओल गेल वसुक रप मे खाइर छछि। आ ओकर सभक छववेक कमजोर भेला पर अशुद भऽ जाइर छै क। 8 मुिा भोजन हमरा सभ केँ परमेश् वरक समत नछह िै र अछछ, छकएक रँ जँ हम सभ भोजन करी रँ हम सभ नीक नछह छी। आ ने जँ हम सभ नछह खाइ छी रँ हम सभ बेसी खराब छी। 9 मुिा सावधान रह जे अहाँ क ई सरंतरा कमजोर लोक सभक लेल कोनो ररहे ँ ठोकर नछह बछन जाय। 10 जँ केओ अहाँ केँ जान रखछनहार मूछर्क मन् छिर मे भोजन करऽ बला िे खैर अछछ रँ की कमजोरक छववेक मूछर्क लेल चृाओल गेल वसु सभ केँ खाय लेल छहमर नछह िे ल जायर। 11 अहाँ क जानक कारणे ँ ओ कमजोर भाय नष भऽ जेराह, जकरा लेल मसीह मरर गेलाह? 12 मुिा जखन अहाँ सभ भाइ सभक छवरद एहन पाप करै र छी आ हनकर कमजोर छववेक केँ घाव िै र छी रँ मसीहक छवरद पाप करै र छी।

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18 रखन हमर की इनाम अछछ? सते एछह लेल जे जखन हम सुसमाचार पचार करै र छी रँ मसीहक सुसमाचार छबना कोनो आपछत मे पहँ चा सकब, जाछह सँ हम सुसमाचार मे अपन शन्क िु रपयोग नछह कऽ सकब। 19 हम सभ मनुद् य सँ मु् भऽ कऽ अपना केँ सभक सेवक बना लेने छी जाछह सँ हम बेसी लाभ उठा सकब। 20 यहिी सभक लेल हम यहिी सभ जकाँ बछन गेलहँ । धम् छनयमक अधीन रहछनहार सभ केँ, जेना धम्-छनयमक अधीन अछछ, राछह लेल हम धम्-छनयमक अधीन रहछनहार सभ केँ लाभान्र कऽ सकब। 21 धम् -छनयमक छवहीन लोक सभ केँ, कानून-छवहीन जकाँ , परमेश् वरक लेल छनयम-छवहीन नछह, बल् छक मसीहक छनयमक अधीन रहब, जाछह सँ हम कानून-छवहीन लोक सभ केँ लाभान्र कऽ सकब। 22 कमजोर लोकक लेल हम कमजोर जकाँ बछन गेलहँ, जाछह सँ हम कमजोर लोक केँ लाभ उठा सकब। 23 हम ई काज सुसमाचारक लेल करै र छी जाछह सँ हम अहाँ सभक संग एछह मे भागी भऽ सकब। 24 की अहाँ सभ नछह जनैर छी जे िौ़ मे िौ़छनहार सभ िौ़ै र अछछ, मुिा पुरसार एक गोटे केँ भेटैर अछछ? रे ँ िौ़ू, जाछह सँ अहाँ सभ पाछब सकब। 25 जे केओ पभुभक लेल झग़ा करै र अछछ, से सभ काज मे संयमी होइर अछछ। आब ओ सभ ई काज नाशवान मुकुट पाप करबाक लेल करै र छछि; मुिा हम सभ अछवनाशी छी। 26 रे ँ हम ओछहना िौ़ै र छी, ओरेक अछनछ्ररापूव्क नछह। रे ँ हम ल़ै र छी, जेना हवा केँ मारर िै र अछछ। 27 मुिा हम अपन शरीरक अधीन रहै र छी आ ओकरा अधीन करै र छी, जाछह सँ हम जखन िोसर केँ पचार कऽ िे ब रखन हम सयं कोनो ररहे ँ पलायन नछह कऽ सकब। अध्य 10 1 यौ भाइ लोकछन, हम ई नछह चाहै र छी जे अहाँ सभ एछह बार सँ अनछभज रहब जे हमरा सभक सभ पूव्ज मेघक नीचाँ छलाह आ सभ समुद मे सँ गुजरै र छलाह। 2 ओ सभ मेघ आ समुद मे मूसाक बपछरस् मा लेलछन। 3 सभ एके आर् मक भोजन करै र छलाह। 4 ओ सभ एकछह आर् छमक पेय पीबैर छलाह, छकएक रँ ओ सभ ओछह आर् छमक चटान सँ पीबैर छलाह जे हनका सभक पाछाँ चलैर छल। 5 मुिा हनका सभ मे सँ बहरो केँ परमेश् वर पस् नछह भेलाह, छकएक रँ ओ सभ जंगल मे उखाछ़ गेल छलाह। 6 ई सभ बार हमरा सभक उिाहरण छल, जाछह सँ हम सभ अधलाह काजक लालसा नछह करी, जेना ओ सभ सेहो चाहै र छल। 7 आ अहाँ सभ मूछर्पूजक नछह बनू, जेना छकछु लोक छल। जेना छलखल छै क, “लोक सभ खाइ-पीबै लेल बैछस गेल आ खेलाइर उछठ गेल।” 8 आ हम सभ वछभचार नछह करी, जेना छक छकछु गोटे एक छिन मे रीन बीस हजार लोकक मृ्ु भ’ गेलछन। 9 आ हम सभ मसीह केँ परीता नछह िे ब, जेना छकयो हनका सभ मे सँ छकछु गोटे केँ सेहो परीता िे लछन आ साँ प सँ नष भऽ गेलाह।

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10 आ ने अहाँ सभ गुनगुनाह, जेना छकयो हनका सभ मे सँ छकछु गोटे गुनगुना कए छवनाशक दारा नष भऽ गेलाह। 11 ई सभ बार हनका सभ केँ उिाहरणक रप मे घछटर भेलछन, आ ई सभ हमरा सभक उपिे शक लेल छलखल गेल अछछ, जाछह पर संसारक अंर आछब गेल अछछ। 12 रे ँ जे केओ अपना केँ ठाृ बुझैर अछछ, से सावधान रहय जे ओ नछह खछस प़य। 13 अहाँ सभ केँ कोनो एहन परीता नछह आयल अछछ जे मनुद् यक सामान अछछ। मुिा परीता सँ बचबाक बाट सेहो बनाओर जाछह सँ अहाँ सभ सहन कऽ सकब।” 14 रे ँ हे हमर छपय छपयरम, मूछर्पूजा सँ भाछग जाउ। 15 हम बुनदमान लोकक बार कहै र छी। हम जे कहब से अहाँ सभ नाय कर। 16 जे आशीवा् िक पाला हम सभ आशीवा् ि िै र छी, की ई मसीहक खूनक साझीिारी नछह अछछ? जे रोटी रो़ै र छी, से मसीहक शरीरक साझीिारी नछह अछछ? 17 हम सभ बहरो भऽ कऽ एके रोटी आ एक शरीर छी, छकएक रँ हम सभ एकछह रोटीक भाग लैर छी। 18 इसाएल केँ शरीरक अनुसार िे खू। 19 रखन हम की कहै र छी? छक मूछर् कोनो वसु अछछ आ मूछर् सभक बछलिान मे जे चृाओल जाइर अछछ से कोनो वसु अछछ? 20 मुिा हम कहै र छी जे गैर-यहिी सभ जे बछलिान िै र छछि से परमेश् वरक नछह, बल् छक िु द् टार् मा सभक बछलिान िै र छछि। 21 अहाँ सभ पभुक पाला आ िु द् टार् मा सभक पाला नछह पीछब सकैर छी। 22 की हम सभ पभु केँ ईरा् करबैर छी? की हम सभ हनकासँ बेसी मजबूर छी? 23 हमरा लेल सभ छकछु उछचर अछछ, मुिा सभ छकछु उछचर नछह अछछ। 24 केओ अपन समछत नछह राकय, बल् छक िोसरक धनक खोज करय। 25 जे छकछु ग़ब़ मे बेचल जाइर अछछ, से खाउ, छववेकक कारणे ँ कोनो प् नछह पूछू। 26 छकएक रँ पृि् वी पभुक अछछ आ ओकर पूण्रा। 27 जँ छवश् वास नछह कयछनहार सभ मे सँ छकयो अहाँ सभ केँ भोज मे बजाबय आ अहाँ सभ जेबाक लेल रैयार भऽ जायब। जे छकछु अहाँ सभक सोझाँ राखल गेल अछछ, से खाउ, छववेकक कारणे ँ कोनो प् नछह कर। 28 मुिा जँ केओ अहाँ सभ केँ कहै र अछछ जे, ‘ई बछलिान मूछर् सभक लेल बछल चृाओल जाइर अछछ, रँ ओकरा ई बार बछल िे छनहार आ छववेकक कारणे ँ नछह खाउ, छकएक रँ पृि् वी पभुक अछछ आ ओकर पूण्रा। 29 हम अहाँ क छववेक नछह, बल् छक िोसरक छववेक कहै र छी। 30 जँ हम अनुगहक कारणे ँ सहभागी छी रँ हम जकरा लेल धनवाि िै र छी राछह लेल हमरा पर अधलाह छकएक कहल जा रहल अछछ? 31 रे ँ अहाँ सभ चाहे खाइ छी वा पीबैर छी आ जे छकछु करब, सभ छकछु परमेश् वरक मछहमाक लेल कर। 32 ने यहिी, ने गैर-यहिी आ ने परमेश् वरक मण् डली केँ कोनो िोद नछह छियौक।


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33 जछहना हम सभ बार मे सभ लोक केँ पस् करै र छी, अपन लाभ नछह, बल् छक बहरो लोकक लाभ चाहै र छी जाछह सँ ओ सभ उदार पाछब सकय। अध्य 11 1 जछहना हम मसीहक अनुयायी छी रछहना अहाँ सभ हमर अनुयायी बनू। 2 भाइ लोकछन, हम अहाँ सभक पशंसा करै र छी जे अहाँ सभ हमरा सभ बार मे मोन पा़ै र छी आ छनयम सभक पालन करै र छी, जेना हम अहाँ सभ केँ सौंपने रही। 3 मुिा हम चाहै र छी जे अहाँ सभ ई जाछन ली जे सभ मनुखक माि मसीह छछि। आ स् तीक माि पुरख अछछ। मसीहक छसर परमेश् वर छछि। 4 जे केओ अपन माि झाँ छप कऽ पाि्ना वा भछवरवाणी करै र अछछ, ओ अपन मािक अपमान करै र अछछ। 5 मुिा जे स् ती अपन माि उघार कऽ पाि्ना करै र अछछ वा भछवरवाणी करै र अछछ, ओ अपन मािक अपमान करै र अछछ। 6 जँ स् ती केँ झाँ प नछह कयल गेल रँ ओकरा सेहो काछट िे ल जाय। 7 पुरद केँ अपन माि नछह झाँ पबाक चाही, छकएक रँ ओ परमेश् वरक पछररप आ मछहमा अछछ। 8 छकएक रँ पुरख स् तीक नछह अछछ। मुिा पुरखक सी। 9 आ ने पुरख स् तीक लेल बनाओल गेल अछछ। मुिा सी पुरदक लेल। 10 एछह लेल स् वग्िूर सभक कारणे ँ स् ती केँ माि पर अछधकार रहबाक चाही। 11 रैयो पभु मे पुरख छबना स् तीक आ ने स् ती छबना पुरखक। 12 जछहना सी पुरद सँ होइर अछछ, रछहना पुरख सेहो सी सँ होइर अछछ। मुिा परमेश् वरक सभ छकछु । 13 अहाँ सभ अपना मे नाय कर, की ई उछचर अछछ जे स् ती उघार परमेश् वर सँ पाि्ना करछि? 14 की पकृछर सेहो अहाँ सभ केँ ई नछह छसखाबैर अछछ जे जँ मनुद् यक केश नमर अछछ रँ ओकरा लेल लाजक बार अछछ? 15 मुिा जँ स् तीक केश नमर अछछ रँ ओकरा लेल मछहमा अछछ, छकएक रँ ओकर केश ओकरा आवरणक रप मे िे ल गेल छै क। 16 मुिा जँ केओ छववाि करयवला बुझाइर अछछ रँ हमरा सभक आ ने परमेश् वरक मण् डली मे एहन कोनो पिा नछह अछछ। 17 हम अहाँ सभ केँ एछह बारक पशंसा नछह करै र छी जे अहाँ सभ नीक लेल नछह, बल् छक अधलाह लेल एक ठाम आछब रहल छी। 18 सभ सँ पछहने जखन अहाँ सभ मण् डली मे जमा होइर छी रँ सुनैर छी जे अहाँ सभ मे छवभाजन भऽ रहल अछछ। आ हम आं छशक रपे ँ मानैर छी। 19 अहाँ सभ मे पाखण सेहो रहबाक चाही, जाछह सँ अहाँ सभक बीच जे सभ सीकृर छछि, से सभ पगट भ’ सकय। 20 रे ँ जखन अहाँ सभ एक ठाम एक ठाम आछब जायब रँ पभुक भोज नछह खाएब। 21 छकएक रँ भोजन करबामे सभ केओ अपन भोजन कऽ लैर अछछ। 22 की ? की अहाँ सभ भोजन-पीनक घर नछह छी? आछक अहाँ सभ परमेश् वरक मण् डली केँ छररस् कार करै र छी आ जे सभ नछह अछछ रकरा सभ केँ लन्र करै र छी? हम अहाँ केँ की

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कहब? की हम एछह मे अहाँ क पशंसा करब? हम अहाँ क पशंसा नछह करै र छी। 23 जे हम अहाँ सभ केँ सौंपने रही से पभुक छिस सँ भेटल अछछ जे जाछह राछर पभु यीशु केँ धोखा िे ल गेल छलछन, ओछह राछर रोटी लेलछन। 24 ओ धनवाि िऽ कऽ ओकरा रोछ़ कऽ कहलछिन, “ लीह, खाउ, ई हमर शरीर अछछ जे अहाँ सभक लेल टू टल अछछ।” 25 ओछहना भोजन कऽ कऽ ओ पाला लऽ कऽ कहलछिन, “ ई पाला हमर खून मे नव छनयम अछछ। 26 जाबर अहाँ सभ ई रोटी खाइर छी आ ई पाला पीबैर छी, राबर धरर पभुक मृ्ुक सूचना िै र रहै र छी। 27 रे ँ जे केओ अयोग रपे ँ ई रोटी खाइर आ एछह पाला केँ पीबैर अछछ, से पभुक शरीर आ खूनक िोदी ठहराओल जायर। 28 मुिा केओ अपना केँ परखय, आ एछह ररहे ँ ओ ओछह रोटी मे सँ खाए आ ओछह पाला मे सँ पीबय। 29 छकएक रँ जे केओ अयोग रपे ँ खाइर-पीबैर अछछ, पभुक शरीर केँ नछह बूछझ कऽ अपना लेल िोदी खाइर-पीबैर अछछ। 30 एछह लेल अहाँ सभ मे बहरो लोक कमजोर आ बीमार छछि आ बहरो लोक सुछर रहल छछि। 31 जँ हम सभ अपना केँ न् याय करय चाहै र छी रँ हमरा सभक न् याय नछह होइर। 32 मुिा जखन हमरा सभक न् याय होइर अछछ रँ पभु दारा हमरा सभ केँ िं छडर कयल जाइर अछछ जाछह सँ हमरा सभ केँ संसारक संग िोदी नछह ठहराओल जाय। 33 रे ँ हे भाइ लोकछन, जखन अहाँ सभ भोजन करऽ लेल एकछतर होयब रँ एक-िोसराक लेल रहब। 34 जँ केओ भूखल अछछ रँ घर मे भोजन करऽ। जे अहाँ सभ िोदी ठहरबाक लेल एक ठाम नछह आछब जाउ।” आ बाकी के हम आछब क' कमबद क' िे ब। अध्य 12 1 यौ भाइ लोकछन, आर् छमक वरिानक छवदय मे हम अहाँ सभ केँ अनछभज नछह चाहै र छी। 2 अहाँ सभ जनैर छी जे अहाँ सभ गैर-यहिी छलहँ , जेना अहाँ सभ केँ एछह गूंगा मूछर् सभक छिस लऽ गेल छलहँ । 3 रे ँ हम अहाँ सभ केँ ई बुछझ सकैर छी जे परमेश् वरक आर् मा दारा बजछनहार केओ यीशु केँ शाछपर नछह कहै र अछछ। 4 आब अनेक ररहक वरिान अछछ, मुिा एकछह आर् मा। 5 आ पशासन मे मरभेि अछछ, मुिा पभु एकेटा छछि। 6 काज-धंधा मे ररह-ररह होइर अछछ, मुिा ओ एकछह परमेश् वर छछि जे सभ छकछु मे काज करै र छछि। 7 मुिा परमेश् वरक आर् माक पगटरा सभ केँ लाभक लेल िे ल गेल अछछ। 8 आर् मा दारा बुनदक वचन िे ल गेल अछछ। िोसर केँ ओही आर् मा दारा जानक वचन िे ल जाइर छै क। 9 ओही आर् माक दारा िोसर छवश् वास मे। िोसर केँ ओही आर् मा दारा चंगाईक वरिान िे ल जाइर छै क। 10 िोसर केँ चमतार करब। िोसर भछवरवाणी पर; िोसर केँ आर् माक भेि करबाक लेल; िोसर केँ गोराखोर ररहक भादा; िोसर भादाक वाया। 11 मुिा ई सभ काज एकछह आर् मा करै र अछछ, जे प्ेक मनुद् य केँ अपन इचानुसार अलग-अलग बाँ छट िै र अछछ।


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12 जछहना शरीर एक अछछ, बहरो अंग अछछ, आ ओछह एक शरीरक सभ अंग बहरो होइरो एक शरीर अछछ। 13 हम सभ एकछह आर् मा दारा एक शरीर मे बपछरस् मा लेल गेल छी, चाहे हम सभ यहिी छी वा गैर-यहिी, चाहे हम सभ िास छी वा सरंत। आ सभ केँ एके आर् मा मे पीबय िे ल गेल अछछ। 14 शरीर एक अंग नछह, बल् छक बहरो अंग अछछ। 15 जँ पएर कहर जे , “हम हाि नछह छी रे ँ हम शरीरक नछह छी।” रे ँ की ई शरीरक नछह अछछ? 16 जँ कान कहर जे हम आँ नख नछह छी रे ँ हम शरीरक नछह छी। रे ँ की ई शरीरक नछह अछछ? 17 जँ पूरा शरीर आँ नख रहै र रऽ सुनय बला करय छल? जँ पूरा सुनैर छल रऽ गंध करय छल? 18 मुिा आब परमेश् वर हनका सभ मे सँ एक-एकटा अंग सभ केँ शरीर मे रानख िे लछन, जेना हनका नीक लगलछन। 19 जँ सभ एक अंग रछहरछि रँ शरीर करऽ रछहरछि? 20 मुिा आब ओ सभ बहर अंग अछछ, मुिा एकेटा शरीर अछछ। 21 आँ नख हाि केँ नछह कछह सकैर अछछ जे , ‘हमरा अहाँ क कोनो आवशकरा नछह अछछ, आ ने माि पैर धरर, “हमरा अहाँ क कोनो आवशकरा नछह अछछ।” 22 शरीरक ओ अंग जे बेसी कमजोर बुझाइर अछछ, से बेसी जररी अछछ। 23 शरीरक जे अंग सभ केँ हम सभ कम आिरक मानैर छी, ओकरा सभ केँ बेसी आिर िै र छी। आ हमरा सभक अशोभनीय अंग मे बेसी पचुर सौ्य् अछछ। 24 छकएक रँ हमरा सभक सु्र अंग सभक कोनो आवश् यकरा नछह अछछ, मुिा परमेश् वर शरीर केँ एक संग संयछमर कयलछन आ ओछह अंग केँ बेसी आिर िे लछन। 25 शरीर मे कोनो ररहक छवभाजन नछह हो। मुिा जे सिस सभ एक-िोसरक पछर एके ररहक िे खभाल करछि। 26 एक अंग केँ कष होइर छै क, से सभ अंग ओकरा संग कष होइर छै क। एक अंगक आिर कयल जाय, सभ अंग ओकरा संग आनन्र भ' जायर। 27 अहाँ सभ मसीहक शरीर छी आ छवशेद रप सँ अंग-अंग। 28 परमेश् वर मण् डली मे छकछु गोटे केँ पछहने पेररर, िोसर मे भछवरव्ा, रेसर मे छशतक, रकर बाि चमर् कार, फेर चंगाईक वरिान, सहायरा, सरकार, छवछभ् भादाक वरिान। 29 की सभ पेररर छछि? सब भछवरव्ा छछि? सब छशतक छछि? सब चमतार करयवला छछि? 30 की सभ चंगाईक वरिान अछछ? की सब िोसर भादा मे बजैर अछछ? सब वाया करै र छछि? 31 मुिा नीक-नीक वरिानक लालसा राखू, मुिा हम अहाँ सभ केँ एकटा आओर नीक बाट िे खा रहल छी।

3 जँ हम अपन सभटा सम् पछत गरीब सभक पेट भरबाक लेल िऽ िै र छी आ जँ हम अपन शरीर केँ जरे बाक लेल िऽ िै र छी आ पेम नछह करै र छी रँ हमरा कोनो लाभ नछह होइर अछछ। 4 पेम िीघ्काल धरर सहै र अछछ आ ियालु होइर अछछ। िान ईरा् नछह करै र अछछ। िान अपना केँ घमंड नछह करै र अछछ, नछह उम़ै र अछछ। 5 अयोग ववहार नछह करै र अछछ, अपन नछह खोजैर अछछ, सहजछह कोछधर नछह होइर अछछ, कोनो अधलाह नछह सोचैर अछछ। 6 अधम् मे आनन्र नछह होइर अछछ, बल् छक सर् य मे आनन्र होइर अछछ। 7 सभ छकछु सहै र अछछ, सभ बार पर छवश् वास करै र अछछ, सभ बारक आशा करै र अछछ, सभ छकछु सहै र अछछ। 8 पेम कछहयो तीण नछह होइर अछछ, मुिा जँ भछवरवाणीक बार हो, ओ सभ खा भऽ जायर। जँ भादा सभ अछछ रँ ओ सभ समाप भऽ जायर। जान हो या नछह, ओ छवलुप भऽ जायर। 9 छकएक रँ हम सभ छकछु -छकछु जनैर छी आ छकछु -छकछु भछवरवाणी करै र छी। 10 मुिा जखन छसद अछछ से आछब जायर रखन जे छकछु अछछ से समाप भऽ जायर। 11 जखन हम बचा रही रखन बचा जकाँ बजैर छलहँ , बचा जकाँ बुझैर छलहँ , बचा जकाँ सोचैर छलहँ । 12 आब हम सभ काँ च मे अनार मे िे खैर छी। मुिा रखन आमने-सामने: आब हम आं छशक रपे ँ जनैर छी। मुिा रखन हम ओछहना जानब जेना हमरा छचनल जाइर अछछ। 13 आब छवशास, आशा, पेम, ई रीनू अछछ। मुिा एछह मे सबसँ पैघ िान अछछ। अध्य 14 1 पेमक अनुसरण कर आ आर् छमक वरिानक इचा कर, बल् छक अहाँ सभ भछवरवाणी करबाक लेल। 2 जे अनजान भादा मे बजैर अछछ से मनुद् य सँ नछह, बल् छक परमेश् वर सँ बजैर अछछ। मुिा ओ आर् मा मे रहस बजैर छछि। 3 मुिा जे परमेश् वर परमेश् वरक परमेश् वरक बार करै र अछछ, से मनुद् यक संग बजैर अछछ जे ओकरा बृाबऽ, उपिे श आ सानभना िे ल जाय। 4 जे अनजान भादा मे बजैर अछछ, से अपना केँ सुदृ करै र अछछ। मुिा जे भछवरवाणी करै र अछछ, से मण् डली केँ सुदृ करै र अछछ। 5 हम चाहै र छी जे अहाँ सभ िोसर भादा मे बाजब, बल् छक अहाँ सभ परमेश् वरक पचार-पसार करब, छकएक रँ जे परमेश् वर परमेश् वरक गप-सप करै र अछछ, राछह सँ पैघ अछछ जे ओ सभ अन् य भादा मे बाजैर अछछ, जाबर रक ओ वाया नछह करै र अछछ, जाछह सँ मण् डली केँ बृयबाक मौका भेटय। 6 भाइ लोकछन, जँ हम अहाँ सभ लग िोसर भादा मे बजैर आछब जायब रँ हमरा अहाँ सभ केँ की फायिा होयर, जखन छक हम अहाँ सभ सँ या रऽ पगटीकरण दारा वा जान दारा, वा भछवरवाणी दारा वा छशता दारा नछह बाजब? 7 छबना जीवन िे छनहार वसु सभ, चाहे ओ नली हो वा वीणा, जँ आवाज मे कोनो भेि नछह करर, रखन ई कोना परा चलर जे की बजाओल जाइर अछछ वा वीणा?

अध्य 13 1 जँ हम मनुद् यक आ स् वग्िूर सभक भादा मे बजैर छी आ पेम नछह करै र छी, मुिा हम बाजैर पीरल वा झंझरी जकाँ बछन गेल छी। 2 जँ हमरा लग भछवरवाणी करबाक वरिान अछछ, आ सभ रहस आ सभ जान बुझैर छी। जँ हमरा लग सभटा छवश् वास अछछ, जाछह सँ हम पहा़ सभ केँ हछट सछकरहँ , मुिा पेम नछह अछछ, मुिा हम छकछु नछह छी।

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8 जँ रुरही अछनछ्र आवाज िे र रँ युदक लेल के रैयार करर? 9 रछहना अहाँ सभ जँ जीह सँ सहज बार नछह बाजब, रखन ई कोना बुझल जायर जे की कहल गेल अछछ? छकएक रँ अहाँ सभ हवा मे बाजब।” 10 भऽ सकैर अछछ जे संसार मे एरेक ररहक आवाज अछछ, आ ओछह मे सँ कोनो आवाज कोनो अि्हीन नछह अछछ। 11 रे ँ जँ हम आवाजक अि् नछह जनैर छी रँ हम ओछह बजछनहारक लेल बब्र बनब आ जे बजैर अछछ से हमरा लेल बब्र होयर। 12 रछहना अहाँ सभ आर् छमक वरिानक पछर उताछहर छी, एछह लेल पयास कर जे अहाँ सभ मण् डली केँ बृाबऽ मे नीक भऽ सकब। 13 रे ँ जे अनजान भादा मे बजैर अछछ, से पाि्ना करछि जे ओ वाया करछि। 14 जँ हम अनजान भादा मे पाि्ना करै र छी रँ हमर आर् मा पाि्ना करै र अछछ, मुिा हमर बुनद छनषल अछछ। 15 रखन की अछछ? हम आर् मा सँ पाि्ना करब, आ बुनद सँ सेहो पाि्ना करब। 16 जँ अहाँ आर् मा सँ आशीवा् ि िे ब रखन अछवदानक कोठली मे बैसल लोक अहाँ क धनवािक समय मे कोना आमेन कहर, जखन छक अहाँ क बार नछह बुझल अछछ? 17 छकएक रँ अहाँ सते नीक जकाँ धन् यवाि िै र छी, मुिा िोसरक उर् पािन नछह होइर अछछ। 18 हम अपन परमेश् वर केँ धनवाि िै र छी, अहाँ सभ सँ बेसी अन्‍य भादा मे बजैर छी। 19 रैयो मण् डली मे हम अपन समझ मे पाँ च टा शब बाजब पछसन करै र छलहँ , जाछह सँ हम अपन आवाज सँ िोसरो केँ छसखा सकब, नछह छक अनजान भादा मे िस हजार शब। 20 भाइ लोकछन, बुनद मे सन् रान नछह बनू, रिाछप अहाँ सभ िु भा् वना मे संरान बनू, बल् छक बुनद मे मनुद् य बनू। 21 धम्-छनयम मे छलखल अछछ जे , “हम एछह लोक सभ सँ िोसर भादा आ िोसर ठोर सँ बार करब। मुिा रैयो जे सभ चाहछि राछह लेल ओ सभ हमर बार नछह सुनैर छछि, पभु कहै र छछि। 22 रे ँ भादा सभ छवश् वास करयवला सभक लेल नछह, बल् छक छवश् वास नछह करयवला सभक लेल छचन् हक रप मे अछछ। 23 जँ समस मण् डली एक ठाम आछब कऽ सभ िोसर भादा मे बजैर अछछ आ अछवदान वा अछवशासी लोक सभ भीरर आछब जाइर अछछ रँ की ओ सभ ई नछह कहर जे अहाँ सभ बराह छी? 24 मुिा जँ सभ भछवरवाणी करऽ वला आ छवश् वास नछह करछनहार वा अछशछतर केओ अयलाह रँ ओ सभ पर छवश् वास भऽ जाइर अछछ। 25 एछह ररहे ँ हनकर हियक रहस पकट कयल गेल अछछ। आ एछह ररहे ँ मुँह पर खछस कऽ ओ परमेश् वरक आराधना करर आ ई खबरर िे र जे परमेश् वर अहाँ सभ मे सर् य अछछ। 26 रखन, भाइ लोकछन, केहन अछछ? जखन अहाँ सभ एक ठाम अबैर छी रँ अहाँ सभ मे सँ प्ेकक एकटा भजन होइर अछछ, एक-एकटा छशता होइर अछछ, एकटा जीह अछछ, एकटा पगटीकरण होइर अछछ आ ओकर वाया होइर अछछ। सब छकछु संसाररर करबाक लेल कयल जाय। 27 जँ केओ अनजान भादा मे बजैर अछछ रँ ओ िू गोटे वा बेसी सँ बेसी रीन गोटे आ ओ एक बेर-बेर। आ वाया कयल जाय। 28 मुिा जँ कोनो िु भाछदया नछह अछछ रँ ओ मण् डली मे चुप रहय। ओ अपना सँ आ परमेश् वर सँ गप करछि।

29 पवक् रा सभ िू -रीन गोटे बाजछि आ िोसर सभ नाय करछि। 30 जँ ओछह ठाम बैसल िोसर केँ कोनो बार पगट कयल जाय रँ पछहने चुप रहय। 31 छकएक रँ अहाँ सभ एक-एक कए भछवरवाणी कऽ सकैर छी, जाछह सँ सभ छसखय आ सभ केँ सानभना भेटय। 32 भछवरव्ा सभक आर् मा पवक् रा सभक अधीन रहै र अछछ। 33 छकएक रँ परमेश् वर भमक छनव्हन नछह, बल् छक पछवत लोकक सभ मण् डली मे जेकाँ शान् छरक जनक छछि। 34 अहाँ सभक सीगण सभ मण् डली मे चुप रह, छकएक रँ ओकरा सभ केँ बजबाक अनुमछर नछह छै क। मुिा हनका सभ केँ आजापालन करबाक आजा िे ल गेल छछन, जेना छक ववसा मे सेहो कहल गेल अछछ। 35 जँ ओ सभ छकछु सीखय चाहै र छछि रँ घर मे अपन पछर सँ पूछछ लेछिन, छकएक रँ स् तीगण सभक लेल मण् डली मे बाजब लाजक बार अछछ। 36 की ? अहाँ सभ सँ परमेश् वरक वचन छनकलल? आछक ई मात अहाँ सभक लग आछब गेल? 37 जँ केओ अपना केँ परमेश् वरक पवक् रा वा आर् मक बुझैर अछछ रँ ओ ई बार सीकार करछि जे हम जे बार अहाँ सभ केँ छलखैर छी से पभुक आजा अछछ। 38 मुिा जँ केओ अजानी अछछ रँ ओ अजानी रहय। 39 रे ँ यौ भाइ लोकछन, भछवरवाणी करबाक लोभ कर आ िोसर भादा मे बाजब सँ मना कर। 40 सभ काज छशष आ कम मे होअय। अध्य 15 1 भाइ लोकछन, हम अहाँ सभ केँ ओ सुसमाचार सुनबैर छी जे हम अहाँ सभ केँ सुनौने रही, जे अहाँ सभ केँ सेहो भेटल अछछ आ जाछह मे अहाँ सभ ठाृ छी। 2 जँ हम अहाँ सभ केँ जे उपिे श िे लहँ से मोन मे राखब, जँ अहाँ सभ वि् मे छवश् वास नछह कयलहँ । 3 हम सभ सँ पछहने जे छकछु हमरा सेहो भेटल अछछ से अहाँ सभ केँ सौंपलहँ जे मसीह धम्शास् तक अनुसार हमरा सभक पापक लेल मरर गेलाह। 4 धम्शास् तक अनुसार ओ रेसर छिन जीछब उठलाह। 5 ओ केफास सँ िे खल गेलाह, रखन बारह मे सँ। 6 रकर बाि पाँ च सय सँ बेसी भाय सभ केँ एके बेर मे िे खल गेलछन। छजनका मे सँ बेसी भाग एखन धरर रछह गेल अछछ, मुिा छकछु गोटे सुछर गेल छछि। 7 रकर बाि हनका याकूब सँ िे खल गेलछन। रखन सभ पेररर सभक। 8 आ अंर मे ओ हमरा दारा सेहो ओछहना िे खल गेलाह जेना समय सँ बाहर जनल वन्क रप मे। 9 हम परमेश् वरक मण् डली केँ सराबैर रहबाक कारणे,ँ हम पेररर सभ मे सभ सँ छोट छी, जे पेररर कहल जायब योग नछह छी। 10 मुिा परमेश् वरक कृपा सँ हम जे छी से छी। मुिा हम सभ सँ बेसी पररशम केलहँ , मुिा हम नछह, बल् छक परमेश् वरक कृपा जे हमरा संग छल।

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1 कोररनी

11 रे ँ हम रछहरहँ वा ओ सभ, हम सभ एना पचार करै र छी आ अहाँ सभ एछह ररहे ँ छवश् वास कयलहँ । 12 जँ मसीह मृर् यु मे सँ जीछब उठलाह रकर पचार कयल जाय रँ अहाँ सभ मे सँ छकछु लोक कोना कहै र छछि जे मृर् युक पुनरुान नछह होयर? 13 मुिा जँ मृर् युक पुनरुान नछह होयर रँ मसीह जीछब उठल नछह छछि। 14 जँ मसीह जीछब उठल नछह छछि रँ हमरा सभक पचार वि् अछछ आ अहाँ सभक छवश् वास सेहो वि् अछछ। 15 हम सभ परमेश् वरक झूठ गवाह पाओल गेल छी। छकएक रँ हम सभ परमेश् वरक गवाही िऽ िे ने छी जे ओ मसीह केँ जीछब उठौलछन। 16 जँ मृर् यु नछह जीछब उठलाह रँ मसीह जीछब उठल नछह छछि। 17 जँ मसीह नछह जीछब उठलाह रँ अहाँ सभक छवश् वास वि् अछछ। अहाँ सभ एखनो अपन पाप मे छी। 18 रखन जे सभ मसीह मे सुछर गेल अछछ, से सभ सेहो नष भऽ गेल अछछ। 19 जँ एछह जीवन मे मात मसीह मे आशा अछछ रऽ हम सभ लोक मे सँ बेसी ियनीय छी। 20 मुिा आब मसीह मृर् यु मे सँ जीछब उठल छछि आ सुरल लोक सभक पछहल फल बछन गेल छछि। 21 छकएक रँ मनुखक दारा मृर् युक कारणे ँ मृर् युक पुनरुान सेहो भेल। 22 जछहना आिम मे सभ मरर जाइर अछछ, रछहना मसीह मे सभ जीछवर भऽ जायर। 23 मुिा प्ेक अपन-अपन कम मे: मसीह पछहल फल। रकर बाि मसीहक अयला पर जे सभ मसीहक छछि। 24 रखन अन् र आओर, जखन ओ राज्‍य परमेश् वर, छपरा परमेश् वर केँ सौंछप िे राह। जखन ओ सभ शासन आ सभ अछधकार आ सामर् केँ नीचाँ रानख लेराह। 25 जाबर धरर ओ सभ शतु केँ अपन पएरक नीचाँ नछह रानख लेर राबर धरर ओकरा राज करबाक चाही। 26 अंछरम शतु जे नष होयर, ओ अछछ मृ्ु। 27 छकएक रँ ओ सभ छकछु अपन पएरक नीचाँ रानख िे लछन। मुिा जखन ओ कहै र छछि जे सभ छकछु हनका अधीन कयल गेल अछछ रँ ई रष अछछ जे ओ अपवाछिर छछि जे सभ छकछु हनका अधीन कयलछन। 28 जखन सभ छकछु हनका वश मे कयल जायर रखन पुत सेहो ओछह लोकक अधीन भऽ जेराह जे सभ छकछु हनका अधीन कयलछन, जाछह सँ परमेश् वर सभ छकछु मे सभ छकछु बनछि। 29 जँ मृर् युक लेल बपछरस् मा लैर अछछ रँ ओ सभ की करर? रखन ओ सभ मृरकक लेल बपछरस् मा छकएक लैर छछि? 30 हम सभ छकएक पछर घंटा खररा मे पछ़ जाइर छी? 31 हम अहाँ सभक हद्क कारणे ँ छवरोध करै र छी जे हमरा अपन पभु मसीह यीशु मे अछछ, हम सभ छिन मरै र छी। 32 जँ हम इछफसुस मे जानवरक संग मनुखक ररीका जकाँ ल़लहँ रँ जँ मृर् यु नछह जीछब उठर रँ हमरा की फायिा? खाइपीब। कारण कान् हम सभ मरर जाइर छी। 33 धोखा नछह खाउ, अधलाह संवाि नीक आचरण केँ छबगा़ै र अछछ। 34 धाछम्कराक लेल जागू, आ पाप नछह कर। छकएक रँ छकछु गोटे केँ परमेश् वरक जान नछह छछन।

35 मुिा केओ कहर जे, “मुिा् कोना जीछब उठै र अछछ?” आ कोन शरीरक संग अबैर छछि? 36 हे मूख्, जे छकछु बोबैर छी, से राबर धरर जीछवर नछह होइर अछछ जाबर धरर ओ मरर नछह जायर। 37 अहाँ जे बोछन बोछन रहल छी से ओछह िे ह नछह, बल् छक नंगध़ं ग अनाज, जे गहम वा कोनो आन अनाज भऽ सकैर अछछ। 38 मुिा परमेश् वर ओकरा अपन मनक अनुसार शरीर िै र छछि आ सभ बीया केँ अपन शरीर िै र छछि। 39 सभ मां स एके मां स नछह अछछ, मुिा मनुद् यक एक ररहक मां स, िोसर जानवरक मां स, िोसर माछक आ िोसर छच़ै सभक मां स अछछ। 40 आकाशीय छपण आ पाछि्व शरीर सेहो अछछ, मुिा आकाशीयक मछहमा एक अछछ आ पाछि्व शरीरक मछहमा िोसर अछछ। 41 सूय्क एक मछहमा, चानक िोसर मछहमा आ रारा सभक िोसर मछहमा, छकएक रँ एक रारा िोसर रारासँ मछहमा मे छभ् होइर अछछ। 42 रछहना मृरकक पुनरुान सेहो होइर छै क। भषाचार मे बोओल जाइर अछछ; ओ अछवनाशी मे जीछब उठै र अछछ। 43 ई बेइ्री मे बोओल जाइर अछछ। मछहमा मे जीछब उठै र अछछ, कमजोरी मे बोओल जाइर अछछ। सता मे उठल अछछ: 44 एकरा पाकृछरक शरीरक रप मे बोओल जाइर अछछ। एकरा आनानाक शरीर के रप मे उठै लऽ जाय छै । पाकृछरक शरीर छै , आ आनानाक शरीर छै । 45 धम्शास् त मे छलखल अछछ, “पछहल मनुख आिम जीछवर पाणी बछन गेलाह। अंछरम आिम केँ जीवंर आा​ा बना िे ल गेल। 46 मुिा ओ सभ पछहने आर् मक नछह, बल् छक साभाछवक छल। आ रकर बाि जे आनानाक अछछ। 47 पछहल आिमी पृि् वीक अछछ, माछटक, िोसर आिमी स् वग् सँ पभु छछि। 48 जेना माछटक लोक सभ एहन अछछ जे माछटक लोक सभ सेहो अछछ। 49 जेना हम सभ पृि् वीक पछररप धारण कएने छी, रछहना स् वग्य लोकक पछररप सेहो धारण करब। 50 यौ भाइ लोकछन, हम ई कहै र छी जे माँ स आ खून परमेश् वरक राज् य मे उतराछधकारी नछह भऽ सकैर अछछ। आ ने भषाचार अछवनाशी के उतराछधकारी होइर अछछ। 51 िे खू, हम अहाँ सभ केँ एकटा रहस िे खा रहल छी। हम सब नछह सुरब, मुिा हम सब बिछल जायब, 52एक तण मे आँ नखक पलक झपकैर अंछरम रुरही बाजर, छकएक रँ रुरही बाजर आ मृरक सभ अछवनाशी रपे ँ जीछब उठर आ हम सभ बिछल जायब। 53 छकएक रँ एछह नाशवला केँ अछवनाशी धारण करबाक चाही आ ई नशर केँ अमररा धारण करबाक चाही। 54 रखन जखन ई नाशवश अछवनाशी धारण करर आ ई नशर अमररा पछहरर लेर, रखन ई कहावर पूरा होयर जे छलखल अछछ जे , “मृ्ु छवजय मे छनगल गेल अछछ।” 55 हे मृ्ु, अहाँ क डं क करय अछछ? हे कब, अहाँ क छवजय करय अछछ? 56 मृ्ुक िं श पाप छिक। आ पापक बल धम्-छनयम अछछ। 57 मुिा परमेश् वरक धनवाि जे हमरा सभक पभु यीशु मसीहक दारा हमरा सभ केँ छवजय पिान करै र छछि।

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1 कोररनी

58 एछह लेल, हमर छपय भाइ लोकछन, अहाँ सभ दृ, अचल, पभुक काज मे सछिखन पचुर रह, छकएक रँ अहाँ सभ जनैर छी जे पभु मे अहाँ सभक पररशम वि् नछह अछछ।

21 हमरा पौलुसक अछभवािन हमर अपन हाि सँ। 22 जँ केओ पभु यीशु मसीह सँ पेम नछह करै र अछछ रँ ओ अनािेमा मरनाि हो। 23 हमरा सभक पभु यीशु मसीहक कृपा अहाँ सभक संग रहय। 24 हमर पेम अहाँ सभक संग मसीह यीशु मे रहय। आमीन। (कुररननयों के पछहल पत छफछलपी सँ सीफनास आ फॉरू्नाटस आ अकैकस आ छरमुछियुस दारा छलखल गेल छल।)

अध्य 16 1 पछवत लोक सभक लेल संगहक छवदय मे जेना हम गलाछरयाक मण् डली सभ केँ आिे श िे ने छी, रेना अहाँ सभ सेहो कर। 2 सपाहक पछहल छिन अहाँ सभ मे सँ एक-एक गोटे हनका लग मे भंडार मे राखू, जेना परमेश् वर हनका समृनद िे ने छछि, जाछह सँ हम आछब कऽ कोनो ररहक सभा नछह हो। 3 जखन हम आछब जायब, जकरा अहाँ सभ अपन पतक दारा अनुमोिन करब, रखन हम ओकरा सभ केँ पठा िे ब जे अहाँ सभक उिाररा यरशलेम आछन सकय। 4 जँ हमहँ जायब रँ ओ सभ हमरा संग चछल जेराह। 5 जखन हम मछकिु छनया सँ गुजरब रखन अहाँ सभ लग आछब जायब, कारण हम मछकिु छनया सँ गुजरै र छी। 6 आ भऽ सकैर अछछ जे हम अहाँ सभक संग रहब, आ जा़ छबराब, जाछह सँ अहाँ सभ हमरा हमर याता मे आछन सकब, जरय हम जायब। 7 आब हम अहाँ सभ केँ बाट मे नछह िे खब। मुिा हमरा भरोसा अछछ जे जँ पभु अनुमछर िे र रँ अहाँ सभक संग छकछु काल रहब। 8 मुिा हम पेनेकोस धरर इछफसुस मे रहब। 9 छकएक रँ हमरा लेल एकटा पैघ िरब्ा खुजल अछछ आ बहर रास छवरोधी अछछ। 10 जँ छरमुछियुस अबैर छछि रँ ई िे खू जे ओ अहाँ सभक संग छनभ्क रहछि, छकएक रँ ओ हमरा जकाँ पभुक काज करै र छछि। 11 रे ँ केओ हनका छररसृर नछह करय, बल् छक हनका शान्पूव्क चलाउ जाछह सँ ओ हमरा लग आछब सकय, छकएक रँ हम हनका भाइ सभक संग परीता करै र छी। 12 हमरा सभक भाय अपोलोसक छवदय मे हम हनका सँ बहर चाहै र छलहँ जे ओ भाय सभक संग अहाँ सभ लग आबछि। मुिा जखन ओकरा सुछवधाजनक समय भेटरैक रखन ओ आओर। 13 अहाँ सभ जागरक रह, छवश् वास मे दृरा सँ ठाृ रह, मनुद् य जकाँ छोछ़ जाउ, बलवान रह। 14 अहाँ क सभ काज पेमक संग होउ। 15 भाइ लोकछन, हम अहाँ सभ सँ छवनरी करै र छी जे, अहाँ सभ सीफनासक घराना केँ जनैर छी जे ई अखायाक पछहल फल अछछ आ ओ सभ पछवत लोक सभक सेवा मे अपना केँ लर लगा िे लक।” 16 अहाँ सभ एहन आ जे छकयो हमरा सभक संग सहायरा करै र अछछ आ पररशम करै र अछछ, ओकर अधीन रह। 17 हमरा सीफनास, फोरु्नारुस आ अखाइकसक आगमन पर खुशी भ’ रहल अछछ। 18 छकएक रँ ओ सभ हमर आ अहाँ सभक आर् मा केँ सूछर् िऽ िे लक। 19 एछशयाक मण् डली सभ अहाँ सभ केँ पणाम करै र अछछ। अकीला आ छपनसला हनका सभक घर मे जे मण् डली अछछ, हनका सभक संग पभु मे अहाँ सभ केँ बहर पणाम करै र छछि। 20 सभ भाय अहाँ सभ केँ पणाम करै र छछि। एक-िोसर केँ पछवत चुमा सँ अछभवािन कर।

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2 कोरिन्

18 मुदा परमेश् वर सर् य छति, रे ँ अहाँ सभक पतर हमर सभक वचन हाँ आ नतह छल। 19 परमेश् वरक पुत यीशु मसीह, जे हमरा सभ दारा अहाँ सभक बीच मे पचार कयल गेलाह, हम आ तसलानुस आ तरमुतियुस दारा, ओ हाँ आ नतह छल, बल् तक हनका मे हाँ छल। 20 परमेश् वरक सभ पतरजा हनका मे हँ , आ हनका मे आमेन अतछ, जातह सँ हमरा सभक दारा परमेश् वरक मतहमा होयर। 21 जे हमरा सभ केँ मसीह मे अहाँ सभक संग न्र करै र छति आ हमरा सभ केँ अतभषेक कयलतन, ओ परमेश् वर छति। 22 ओ हमरा सभ पर मोहर लगा दे लतन आ हमरा सभक हदय मे आर् माक गंभीररा दे लतन। 23 हम परमेश् वर केँ अपन पाण पर गवाही दै र छी जे हम एखन धरर अहाँ सभ केँ बख् य करबाक लेल कोररन् ि नतह आयल छी। 24 एतह लेल नतह जे हम सभ अहाँ सभक तवश् वास पर पभु् रखैर छी, बल् तक अहाँ सभक आन्क सहायक छी।

अध्य 1 1 पौलुस, जे परमेश् वरक इच् छा सँ यीशु मसीहक पेररर छी, आ हमरा सभक भाय तरमुतियुस, परमेश् वरक मण् डली जे कोररन् ि मे अतछ आ समस् र अखाया मे रहतनहार सभ पतवत लोक सभक संग। 2 हमरा सभक तपरा परमेश् वर आ पभु यीशु मसीहक अनुगह आ शान् अहाँ सभ पर हो। 3 परमेश् वर, हमरा सभक पभु यीशु मसीहक तपरा, दयाक तपरा आ सभ सान्नाक परमेश् वर, धन होउ। 4 ओ हमरा सभक समस केश मे हमरा सभ केँ सान्ना दै र छति, जातह सँ हम सभ कोनो तवपत् मे पडल लोक केँ सान्ना दऽ सकब। 5 जतहना मसीहक कष हमरा सभ मे बढै र अतछ, रतहना मसीहक दारा हमरा सभक सान्ना सेहो पचुर होइर अतछ। 6 हम सभ जँ दु ःनखर होयब, से अहाँ सभक सान्ना आ उदारक लेल अतछ, जे हमरा सभ केँ सेहो जे कष भोगैर अतछ, रकरा सहन करबा मे पभावी होयर। 7 अहाँ सभ सँ हमरा सभक आशा दढ अतछ, ई जातन जे जतहना अहाँ सभ कष् ट मे भागी छी, रतहना अहाँ सभ सेहो सान्ना पाप् र करब। 8 भाइ लोकतन, हम सभ ई नतह चाहै र छी जे अहाँ सभ एतशया मे हमरा सभक तवपत् सँ अनतभज रहब जे हमरा सभ केँ सामर् सँ बेसी दबाओल गेल, जातह सँ हम सभ जीवनक लेल सेहो तनराश भऽ गेलहँ । 9 मुदा हमरा सभ केँ मृतुक सजा हमरा सभ मे छल जे हम सभ अपना पर भरोसा नतह करी, बल् तक मृर् यु केँ जीबैर परमेश् वर पर भरोसा करी। 10 ओ हमरा सभ केँ एरेक पैघ मृतु सँ उदार कयलतन आ उदार करै र छति। 11 अहाँ सभ सेहो हमरा सभक लेल पाि्ना कऽ कऽ सहयोग करै र छी, जातह सँ बहरो लोकक दारा हमरा सभ केँ जे वरदान दे ल गेल अतछ, रातह लेल बहरो लोक हमरा सभक तदस सँ धनवाद दऽ सकय। 12 तकएक रँ हमरा सभक हष् ई अतछ, जे हमर सभक तववेकक गवाही अतछ जे , सादगी आ परमेश् वरक तनशलरा सँ शारीररक बुनद सँ नतह, बल् तक परमेश् वरक कृपा सँ हम सभ संसार मे आ बेसी सँ बेसी अहाँ सभक संग गप-सप कयलहँ । 13 हम सभ अहाँ सभ केँ जे तकछु पढै र छी वा सीकार करै र छी रातह सँ बेसी आन तकछु नतह तलखैर छी। आ हमरा तवशास अतछ जे अहाँ सभ अंर धरर सीकार करब। 14 जतहना अहाँ सभ पभु यीशुक तदन मे अहाँ सभ सेहो हमरा सभक आनन्र होयब, रतहना अहाँ सभ हमरा सभ केँ तकछु तकछु सीकार कयलहँ । 15 एतह तवशास मे हम पतहने अहाँ सभ लग आब’ चाहै र छलहँ जातह सँ अहाँ सभ केँ दोसर लाभ भेटय। “ 17 जखन हम एतह ररहे ँ सोचलहँ रँ की हम हलुकराक पयोग केलहँ? वा जे बार हम सोचैर छी, की हम शरीरक अनुसार चाहै र छी जे हमरा संग हाँ , आ नतह?

अध्य 2 1 मुदा हम अपना आप सँ ई रय कऽ लेलहँ जे हम फेर सँ अहाँ सभ लग भारी पतड कऽ नतह आतब जायब। 2 जँ हम अहाँ सभ केँ दु खी कऽ दै र छी रँ ओ के अतछ जे हमरा पसर करै र अतछ, मुदा ओएह जे हमरा दारा दु ःनखर कयल गेल अतछ? 3 हम अहाँ सभ केँ ई बार तलखने रही, जातह सँ हम आतब कऽ हमरा ओतह लोक सभ सँ दु ख नतह भऽ जाय। अहाँ सभ पर भरोसा रानख जे हमर आन् अहाँ सभक आन् अतछ। 4 हम बहर कष आ हदयक पीडा सँ अहाँ सभ केँ बहर रास नोर सँ तलखने छी। एतह लेल नतह जे अहाँ सभ दु खी होयब, बल् तक अहाँ सभ एतह लेल जे पेम अहाँ सभ सँ बेसी अतछ, से जातन सकब। 5 मुदा जँ केओ दु खी केने अतछ रँ ओ हमरा नतह, बल् तक तकछु तकछु दु खी केलक अतछ, जातह सँ हम अहाँ सभ केँ बेसी शुल नतह दऽ सकब। 6 एहन आदमीक लेल ई दं ड पया् ा अतछ, जे बहरो केँ दे ल गेल छल। 7 एतह ररहे ँ अहाँ सभ केँ ओकरा कमा करबाक चाही आ ओकरा सान्ना दे बाक चाही, जातह सँ एहन लोक केँ बेसी दु ःख सँ तनगल नतह जाय। 8 रे ँ हम अहाँ सभ सँ तवनरी करै र छी जे अहाँ सभ हनका पतर अपन पेम केँ दढ करी। 9 हम एतह लेल सेहो तलखने छी जे हम अहाँ सभक पमाण बुति सकब जे अहाँ सभ बार मे आजाकारी छी वा नतह। 10 अहाँ सभ जकरा कोनो बार कमा करै र छी, हमहँ कमा करै र छी, तकएक रँ जँ हम कोनो बार माफ कऽ दे लहँ , जकरा हम माफ केलहँ रँ अहाँ सभक लेल मसीहक रप मे ओकरा कमा कऽ दे लहँ । 11 शैरान केँ हमरा सभ सँ कोनो फायदा नतह होअय, तकएक रँ हम सभ ओकर षडंत सँ अनतभज नतह छी। 12 संगतह जखन हम मसीहक सुसमाचार पचार करबाक लेल तोआस पहँ चलहँ रँ पभुक दारा हमरा लेल एकटा दरबजा खुजल। 13 हमरा अपन भाय रीरुस नतह भेटलाक कारणे ँ हमरा मोन मे कोनो तवशाम नतह छल, मुदा हम हनका सभ सँ तवदा लऽ कऽ ओरय सँ मतकदु तनया चतल गेलहँ ।

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2 कोररनी

14 आब परमेश् वर केँ धनवाद जे हमरा सभ केँ मसीह मे सतदखन तवजय पा​ा करै र छति आ हमरा सभक दारा अपन जानक सुगन सभ ठाम पगट करै र छति। 15 हम सभ परमेश् वरक लेल मसीहक मधुर गंध छी, उदार पातब वला आ नाश भऽ वला मे। 16 जकरा लेल हम सभ मृतुक गंध छी। आ दोसर के जीवन के लेल जीवन के सुगंध। आ एतह सभ लेल के पया् ा अतछ? 17 तकएक रँ हम सभ ओतहना नतह छी जे परमेश् वरक वचन केँ भष करै र अतछ, बल् तक ईमानदारी सँ, बल् तक परमेश् वरक रप मे मसीह मे बजैर छी।

17 पभु ओ आर् मा छति। 18 मुदा हम सभ मुँह खोतल कऽ पभुक मतहमा केँ काँ च जकाँ दे खैर छी, जेना पभुक आर् मा दारा मतहमा सँ मतहमा मे ओतह पतररप मे बदतल गेल छी। अध्य 4

अध्य 3 1 की हम सभ फेर अपना केँ पशंसा करय लगैर छी? वा हमरा सभ केँ तकछु आन लोक जकाँ अहाँ सभक पशंसा पतक आवशकरा अतछ, वा अहाँ सभक पशंसा पतक आवशकरा अतछ? 2 अहाँ सभ हमरा सभक हदय मे तलखल पत छी, जे सभ लोक जनैर अतछ आ पढै र अतछ। 3 तकएक रँ अहाँ सभ हमरा सभक दारा सेवा कयल गेल मसीहक पत बुिल अतछ, जे साही सँ नतह, बल् तक जीतवर परमेश् वरक आर् मा सँ तलखल गेल अतछ। पािरक पाटी मे नतह, बल् तक हदयक मां सल पटी मे। 4 हमरा सभ केँ मसीहक दारा परमेश् वरक पतर एहन भरोसा अतछ। 5 ई नतह जे हम सभ अपना लेल पया् ा छी जे कोनो बार अपना लेल बुति सकैर छी। मुदा हमरा सभक पया् ारा परमेश् वरक अतछ। 6 ओ हमरा सभ केँ नव तनयमक सेवक बनौलतन। अकरक नतह, बल् तक आर् माक, तकएक रँ अकर मारै र अतछ, मुदा आर् मा जीवन दै र अतछ। 7 मुदा जँ पािर मे तलखल आ उकेरल मृतुक सेवा गौरवशाली छल, जातह सँ इसाएलक स्ान मूसाक चेहराक मतहमा लेल हनकर मुँह केँ दढरापूव्क नतह दे नख सकैर छल। ओतह मतहमा केँ समा​ा होमय बला छल। 8 आर् माक सेवा कोना बेसी मतहमामंतडर नतह होयर? 9 जँ दोषी ठहरबाक सेवा मतहमा अतछ रँ धातम्कराक सेवा मतहमा मे बहर बेसी अतछ। 10 तकएक रँ जे मतहमा बतढ गेल छल, रकरा एतह मतहमा मे कोनो मतहमा नतह छलतन। 11 तकएक रँ जे तकछु समा​ा भऽ गेल अतछ से मतहमामय छल रँ जे बचल अतछ से बहर बेसी मतहमामंतडर अतछ। 12 हमरा सभ केँ एहन आशा अतछ, रे ँ हम सभ बहर साफ-साफ बार करै र छी। 13 मूसा जकाँ नतह, जे हनका मुँह पर पदा् लगा दे लतन, जातह सँ इसाएलक सन् रान सभ जे तकछु समा​ा भऽ गेल अतछ, रकरा अन् र तदस नतह दे नख सकलाह। 14 मुदा हनका लोकतनक मन आनर भऽ गेलतन, तकएक रँ आइ धरर पुरान तनयमक पाठ मे वैह पदा् नतह हटाओल गेल अतछ। जे पदा् मसीह मे समा​ा भ' गेल अतछ। 15 मुदा आइ धरर जखन मूसा केँ पढल जाइर छतन रखनो हनका सभक हदय पर पदा् पतड जाइर छतन। 16 मुदा जखन ई पभुक तदस घुरर रखन पदा् छीन लेल जायर।

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1 रे ँ हमरा सभ केँ ई सेवा कयल गेल अतछ, जेना हमरा सभ केँ दया भेटल अतछ, हम सभ बेहोश नतह होइर छी। 2 मुदा अहाँ सभ बेईमानी केर नुकायल बार सभ केँ ताग कऽ दे लहँ , आ ने धूर्रा मे चलैर छी आ ने परमेश् वरक वचन केँ छल-पपंच सँ समारै र छी। मुदा परमेश् वरक नजरर मे सर् य केँ पगट कऽ कऽ पर् येक मनुष् यक तववेकक समक अपना केँ पगट करै र छी। 3 मुदा जँ हमर सभक सुसमाचार नुकाएल अतछ रँ ओ हे रायल लोक सभक लेल नुकाएल अतछ। 4 एतह संसारक दे वरा हनका सभक मन केँ आनर कऽ दे ने छति जे परमेश् वरक पतररप छति, जातह सँ मसीहक गौरवशाली सुसमाचारक इजोर हनका सभ केँ नतह चमकय। 5 हम सभ अपने नतह, बल् तक मसीह यीशु पभुक पचार करै र छी। आ हम सभ यीशुक लेल अहाँ क सेवक छी। 6 तकएक रँ परमेश् वर जे अन् हार मे सँ इजोर चमकयबाक आजा दे लतन, ओ हमरा सभक हदय मे चमतक गेल छति जे यीशु मसीहक मुँह मे परमेश् वरक मतहमाक जानक इजोर दे ब। 7 मुदा हमरा सभ लग ई खजाना मातटक बर्न मे अतछ, जातह सँ सामर्क शेररा हमरा सभक नतह, परमेश् वरक हो। 8 हम सभ चार कार परे शान छी, मुदा वतिर नतह छी। हम सभ भतमर छी, मुदा तनराश नतह छी। 9 सराओल गेल, मुदा छोडल नतह गेल। नीचाँ फेकल गेल, मुदा नष नतह भेल। 10 पभु यीशुक मृतु केँ सतदखन शरीर मे सहै र रह, जातह सँ यीशुक जीवन सेहो हमरा सभक शरीर मे पगट हो। 11 हम सभ जे जीतवर छी, यीशुक कारणे ँ सभ तदन मृतुक लेल सौंपल जाइर छी, जातह सँ यीशुक जीवन सेहो हमरा सभक नशर शरीर मे पगट होयर। 12 रे ँ मृतु हमरा सभ मे काज करै र अतछ, मुदा अहाँ सभ मे जीवन। 13 हमरा सभ केँ ओतहना तवश् वासक आर् मा अतछ, जेना धम्शास् त मे तलखल अतछ, “हम तवश् वास केलहँ आ रे ँ हम बजलहँ । हम सभ सेहो तवश् वास करै र छी, आ रे ँ बजैर छी। 14 ई जातन जे पभु यीशु केँ जीतब उठौतनहार हमरा सभ केँ सेहो यीशुक दारा जीतब उठौराह आ अहाँ सभक संग हमरा सभ केँ पसुर करराह। 15 तकएक रँ सभ तकछु अहाँ सभक लेल अतछ, जातह सँ बहरो लोकक धनवादक दारा पचुर अनुगह परमेश् वरक मतहमा मे बढय। 16 एतह लेल हम सभ बेहोश नतह होइर छी। मुदा हमर सभक बाहरी लोक भले नाश भ’ जाइर अतछ, मुदा भीररक लोक तदनपतरतदन नव होइर रहै र अतछ। 17 तकएक रँ हमरा सभक हलुक केश जे तकछु कणक लेल अतछ, हमरा सभक लेल बहर बेसी आ अन् मतहमाक भार दै र अतछ।


2 कोररनी

18 जखन तक हम सभ जे दे खल जाइर अतछ रकरा नतह, बल् तक जे नतह दे खल जाइर अतछ, रकरा दे खैर छी। मुदा जे तकछु नतह दे खल जाइर अतछ से अन् अतछ।

20 आब हम सभ मसीहक लेल दू र छी, जेना परमेश् वर हमरा सभक दारा अहाँ सभ केँ तवनरी कयलतन। 21 ओ हमरा सभक लेल पाप बनौलतन, जे कोनो पाप नतह जनैर छल। जातह सँ हम सभ हनका दारा परमेश् वरक धातम्करा बतन सकब।

अध्य 5

अध्य 6

1 हम सभ जनैर छी जे जँ एतह रमूक हमर सभक पाति्व घर भंग भऽ गेल रँ हमरा सभ लग परमेश् वरक भवन अतछ, जे हाि सँ नतह बनल घर अतछ, जे स् वग् मे अन् अतछ। 2 हम सभ एतह बारक कारणे ँ कुहरै र छी आ स् वग् सँ आयल घरक संग वस पतहरय चाहै र छी। 3 जँ वस पतहरने रही रँ हम सभ नंगटे नतह पातब सकब। 4 हम सभ जे सभ एतह रमू मे छी, हम सभ बोि सँ कुहरै र छी, एतह लेल नतह जे हम सभ वस नतह उरारब, बल् तक कपडा पतहरब जातह सँ मृर् यु केँ जीवन सँ तनगल जाय। 5 जे हमरा सभ केँ एकतह काजक लेल काज कयलतन, ओ परमेश् वर छति, जे हमरा सभ केँ आर् माक आर् माक आर् मा सेहो दे लतन। 6 रे ँ हम सभ सतदखन तवश्‍वास रखैर छी, ई जातन जे जाबर हम सभ शरीर मे घर मे रहै र छी, राबर हम सभ पभु सँ तवरक छी। 7 (हम सभ तवश् वास सँ चलैर छी, दश्न सँ नतह।) 8 हम कहै र छी जे हम सभ तवश्‍वास रखैर छी, आ शरीर सँ दू र रहब आ पभुक संग रहय चाहै र छी। 9 रे ँ हम सभ पररशम करै र छी, जातह सँ हम सभ उपन्र रहब वा अनुपन्र रहब, हनका दारा सीकार कयल जाय। 10 तकएक रँ हमरा सभ केँ मसीहक न् यायक पीठक समक उपन्र हे बाक चाही। जातह सँ तकयो अपन शरीर मे जे काज केने अतछ, से नीक हो वा अधलाह। 11 रे ँ पभुक भयावहरा केँ जातन हम सभ मनुष् य केँ बुिबैर छी। मुदा हम सभ परमेश् वरक समक पगट भऽ गेल छी। आ हमरा तवशास अतछ जे अहाँ सभक तववेक मे सेहो पकट होइर अतछ। 12 तकएक रँ हम सभ फेर अहाँ सभक समक अपना केँ पशंतसर नतह करै र छी, बल् तक अहाँ सभ केँ अपना सभक पतर घमंड करबाक अवसर दै र छी, जातह सँ अहाँ सभ केँ तकछु उ्र दऽ सकब जे जे सभ हदय मे नतह, दे खाबटी मे घमंड करै र छति। 13 तकएक रँ हम सभ बौक भऽ गेल छी, से परमेश् वरक लेल अतछ। 14 मसीहक पेम हमरा सभ केँ बाध करै र अतछ। तकएक रँ हम सभ एतह ररहे ँ नाय करै र छी जे जँ तकयो सभक लेल मरर गेल रँ सभ मरर गेल। 15 ओ सभ सभक लेल मरर गेलाह, जातह सँ आब जे सभ जीतवर छति से अपना लेल नतह, बल् तक जे हनका सभक लेल मरर गेलाह आ जीतब उठलाह, हनका लेल जीतवर रहति। 16 रे ँ आब हम सभ ककरो शरीरक अनुसार नतह तचनै र छी। 17 रे ँ जँ केओ मसीह मे अतछ रँ ओ नव सृतष अतछ। दे खू, सभ तकछु नव भ’ गेल अतछ। 18 सभ बार परमेश् वरक अतछ जे यीशु मसीहक दारा हमरा सभ केँ अपना संग मेल तमलाप कयलतन आ मेल-तमलापक सेवा हमरा सभ केँ दे लतन। 19 ई अिा् र् ई जे परमेश् वर मसीह मे छलाह, जे संसार केँ अपना संग मेल तमलाप करै र छलाह, आ हनका सभक अपराध केँ नतह मानैर छलाह। आ हमरा सभ केँ मेल-तमलापक वचन सौंपने छति।

1 हम सभ हनका संग काज करयवला बतन अहाँ सभ सँ तवनरी करै र छी जे अहाँ सभ परमेश् वरक अनुगह वि् नतह पातब। 2 (तकएक रँ ओ कहै र छति जे , “हम अहाँ क बार केँ सीकार कयल गेल समय मे सुनलहँ , आ उदारक तदन मे हम अहाँ क सहायरा केलहँ । 3 कोनो बार मे कोनो अपराध नतह कर जातह सँ सेवाक दोषी नतह ठहराओल जाय। 4 मुदा सभ बार मे अपना केँ परमेश् वरक सेवकक रप मे स् वस् रु करै र रह, बहर धैय्, कष् ट, आवश् यकरा आ तवपत् मे। 5 पहार मे, जेल मे, हं गामा मे, शम मे, पहरा मे, उपवास मे। 6 शुदरा सँ, जान सँ, धैय् सँ, दया सँ, पतवत आता सँ , तनतव्वाद पेम सँ। 7 सतक वचन दारा, परमेश् वरक सामि्​् य दारा, दतहना आ बामा कार धातम्क कवच दारा। 8 आदर आ अपमान, अधलाह आ नीक खबरर सँ, धोखा दे बयवला जकाँ , मुदा सर् य। 9 जेना अनजान, मुदा रैयो सुपतसद। जेना मरै र छी, आ दे खू, हम सभ जीबैर छी। जेना सजा दे ल गेल अतछ, आ मारल नतह गेल अतछ। 10 जेना दु खी, मुदा सतदखन आनन्र रहब। गरीब जकाँ , रैयो बहरो केँ धतनक बना रहल अतछ। जेना तकछु नतह अतछ, आ रैयो सभ वसुक मातलक अतछ। 11 हे कोररनीवासी, हमरा सभक मुँह अहाँ सभक लेल खुजल अतछ, हमर सभक मोन बतढ गेल अतछ। 12 अहाँ सभ हमरा सभ मे संकुतचर नतह छी, बल् तक अहाँ सभ अपन आं र मे संकुतचर छी। 13 आब ओही बारक पतरफलक लेल (हम अपन स्ान सभ केँ जेकाँ बजैर छी) अहाँ सभ सेहो बतढ जाउ। 14 अहाँ सभ अतवशासी सभक संग असमान जुआ मे नतह बाँ टल रह। आ अनारक संग इजोर के कोन सािीदारी होइर छै क? 15 मसीहक बेतलयाल संग की मेल अतछ? आतक जे तवश् वास करै र अतछ रकरा कातफरक संग कोन भाग होइर छै क? 16 परमेश् वरक मन् तदरक मूतर् सभक संग की समिौरा अतछ? तकएक रँ अहाँ सभ जीतवर परमेश् वरक मन् तदर छी। जेना परमेश् वर कहने छति, “हम ओकरा सभ मे रहब आ ओकरा सभ मे चलब।” हम हनका सभक परमेश् वर बनब आ ओ सभ हमर पजा होयर। 17 रे ँ हनका सभक बीच सँ बाहर तनकलू आ अहाँ सभ अलग भऽ जाउ, पभु कहै र छति। हम अहाँ सभ केँ गहण करब। 18 अहाँ सभक लेल तपरा बनब आ अहाँ सभ हमर बेटा-बेटी बनब, सव्शनकमान पभु कहै र छति।

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2 कोररनी

अध्य 7

अध्य 8

1 रे ँ तपय तपयजन सभ एतह पतरजा सभ केँ पातब हम सभ परमेश् वरक भय मे पतवतरा केँ तसद करै र शरीर आ आर् माक सभ गंदगी सँ अपना केँ शुद करी। 2 हमरा सभ केँ गहण कर; हम सभ ककरो पर अनाय नतह केलहँ, कोनो ककरो भष नतह केलहँ , ककरो संग धोखा नतह केलहँ । 3 हम ई बार अहाँ सभ केँ दोषी ठहराबऽ लेल नतह कहै र छी, तकएक रँ हम पतहने कतह चुकल छी जे अहाँ सभ हमरा सभक मोन मे मरब आ अहाँ सभक संग जीबऽ वला छी। 4 हमर अहाँ सभक पतर बजबाक साहस पैघ अतछ, अहाँ सभक पतर हमर मतहमा पैघ अतछ, हम सान्ना सँ भरल छी, हम अपन सभ केश मे बहर आनन्र छी। 5 हम सभ जखन मतकदु तनया पहँ चलहँ रँ हमरा सभक शरीर केँ कोनो तवशाम नतह भेटल, मुदा हम सभ चार कार घबरा गेलहँ । तबना छल िगडा, भीरर छल भय। 6 रैयो परमेश् वर जे पतरर सभ केँ सान्ना दै र छति, ओ हमरा सभ केँ रीरुसक अयला सँ सान्ना दे लतन। 7 मात हनकर अयला सँ नतह, बल् तक अहाँ सभ मे जे सान्ना भेटलतन, जखन ओ हमरा सभ केँ अहाँ सभक आशंका, अहाँ सभक शोक, अहाँ सभक मोन केँ हमरा पतर गडबड मोन केँ बरौलतन। जातह सँ हम ररेक बेसी आनन्र भेलहँ । 8 हम एक पत सँ अहाँ सभ केँ दु खी कऽ दे लहँ, मुदा पशाराप नतह करै र छी, तकएक रँ हम बुिैर छी जे ओएह पत अहाँ सभ केँ दु खी कऽ दे लक, भले ओ तकछु समयक लेल हो। 9 आब हम एतह बार पर नतह खुश छी जे अहाँ सभ केँ दु ख भेल, बल् तक अहाँ सभ पशाराप करबाक लेल दु खी भेलहँ । 10 तकएक रँ परमेश् वरक शोक पशाराप करै र उदारक लेल पशाराप करै र अतछ जातह सँ पशाराप नतह कयल जा सकैर अतछ। 11 तकएक रँ दे खू ई बार जे अहाँ सभ परमेश् वरक तवश् वासक कारणे ँ दु खी भेलहँ , ई अहाँ सभ मे केहन सावधानरा केलक, हँ , केहन कोध, हँ , केहन आकोश, हँ , केहन भय, हँ, केहन पचंड इचा, हँ, केहन उताह। हँ , केहन बदला! अहाँ सभ एतह तवषय मे सष रहबाक लेल अपना केँ सहमर छी। 12 एतह लेल हम अहाँ सभ केँ तलखने रही, मुदा हम हनकर काजक लेल नतह केलहँ जे गलर काज केने छल, आ ने हनकर काज जे गलर कष् ट कऽ सकल छल, बल् तक परमेश् वरक नजरर मे अहाँ सभक पतर हमर सभक तच्ा अहाँ सभ केँ पगट हो। 13 रे ँ अहाँ सभक सान्ना सँ हमरा सभ केँ सान्ना भेटल। 14 जँ हम हनका अहाँ सभक तवषय मे तकछु घमंड केने छी रँ हमरा लाज नतह होइर अतछ। मुदा जतहना हम सभ अहाँ सभ केँ सर् य मे कहलहँ , रतहना हमरा सभक घमंड, जे हम रीरुसक समक केने रही, से सर् य पाओल गेल अतछ।” 15 जखन ओ अहाँ सभक आजापालन केँ मोन पाडै र अतछ, जे अहाँ सभ हनका कोना भय आ काँ पैर गहण कयलतन। 16 रे ँ हम हतष्र छी जे हमरा सभ बार मे अहाँ सभ पर भरोसा अतछ।

1 यौ भाइ लोकतन, हम सभ अहाँ सभ केँ परमेश् वरक कृपा जे मतकदु तनयाक मण् डली सभ पर कयल गेल अतछ, रकरा सभक जानकारी दै र छी। 2 करेक दु ःखक परीका मे हनका लोकतनक आन्क पचुररा आ गहीरं गरीबी हनका सभक उदारराक धनक पचुररा बतढ गेलतन। 3 कारण, हम हनका सभक सामर्क गवाही दै र छी, हँ, आ हनका सभक सामर् सँ बेसी ओ सभ अपना आप सँ इचु क छलाह। 4 ओ हमरा सभ केँ बहर तवनरी करै र छी जे हम सभ ओतह वरदान केँ गहण करी आ पतवत लोक सभक सेवा करबाक संगतर अपना सभ केँ अपना ऊपर उठाबी। 5 ओ सभ ई काज हमरा सभक आशाक अनुसार नतह कयलतन, बल् तक पतहने परमेश् वरक इचा सँ पभु केँ आ हमरा सभ केँ अपना केँ समतप्र कयलतन। 6 हम सभ रीरुस केँ चाहै र छलहँ जे जेना ओ शुर केने छलाह, रेना ओ अहाँ सभ मे सेहो वैह कृपा पूरा करति। 7 रे ँ जतहना अहाँ सभ सभ बार मे, तवश् वास, बाजब, जान, सभ पररशम आ हमरा सभक पतर पेम मे पचुररा करै र छी, रेना अहाँ सभ एतह अनुगह मे सेहो पचुर होयब। 8 हम आजा सँ नतह, बल् तक दोसरक आगू बढबाक आ अहाँ क पेमक तनशलरा केँ तसद करबाक लेल बजैर छी। 9 अहाँ सभ हमरा सभक पभु यीशु मसीहक कृपा केँ जनैर छी जे ओ धतनक रतहरो अहाँ सभक लेल गरीब भऽ गेलाह जातह सँ अहाँ सभ हनकर गरीबी सँ धतनक भऽ सकब। 10 हम एतह पर अपन सलाह दै र छी, तकएक रँ ई अहाँ सभक लेल उतचर अतछ जे सभ पतहने सँ एक साल पतहने सँ काज करब नतह, बल् तक आगू बढब सेहो शुर कएने छी। 11 रे ँ आब एकरा पूरा कर। जातह ररहे ँ इचा करबाक लेल रैयारी छल, रतहना अहाँ सभक जे तकछु अतछ रातह मे सँ एकटा काज सेहो होयर। 12 जँ पतहने इचु क मन होअय रँ ओ मनुष् यक जे तकछु अतछ रातह अनुसारे सीकार कयल जाइर अतछ, नतह तक ओकर नतह। 13 हम ई नतह चाहै र छी जे आन लोक सभ केँ हलुक भऽ जाय आ अहाँ सभ बोि पर पतड जाय। 14 मुदा एक समानराक कारणे ँ आब एतह समय मे अहाँ क पचुररा हनका सभक अभावक भरण-पोषण बतन जाय, जातह सँ हनका सभक पचुररा सेहो अहाँ क अभावक भरण-पोषण बतन जाय। 15 धम्शास् त मे तलखल अतछ, “जेकरा बहर तकछु जमा केने छल, ओकरा तकछु नतह भेलैक। जे कम जमा केने छल ओकरा कोनो कमी नतह छलैक। 16 मुदा परमेश् वर केँ धनवाद जे ओ अहाँ सभक लेल रीरुसक हदय मे ओतहना गंभीर तच्ा रखलतन। 17 ओ एतह उपदे श केँ सीकार कयलतन। मुदा आगू बतढ कऽ ओ अपना मज् सँ अहाँ सभक लग गेलाह। 18 हम सभ हनका संग ओतह भाय केँ पठौने छी, तजनकर पशंसा सभ मण् डली मे शुभ समाचार मे होइर छतन। 19 एरबे नतह, बल् तक मण् डली सभ मे सँ सेहो चुनल गेलाह जे एतह कृपा सँ हमरा सभक संग याता करति, जे हमरा सभ दारा एकतह पभुक मतहमा आ अहाँ सभक रतर तवचारक घोषणा कयल गेल अतछ।

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2 कोररनी

20 एतह बार सँ बचू जे हमरा सभक दारा दे ल गेल पचुररा मे केओ हमरा सभ केँ दोषी नतह ठहराबय। 21 परमेश् वरक नजरर मे मात नतह, बल् तक मनुष् य सभक नजरर मे सेहो ईमानदार काजक वव्ा कर। 22 हम सभ हनका सभक संग अपन भाय केँ पठौने छी, तजनका हम सभ बेर-बेर बहरो काज मे लगनशील तसद करै र छी, मुदा आब अहाँ सभ पर हमरा जे बहर भरोसा अतछ, रातह पर बहर बेसी मेहनतर कयल गेल अतछ। 23 जँ केओ रीरुस सँ पूछराछ करर, ओ हमर संगी आ अहाँ सभक तवषय मे सहकम् छति, वा हमरा सभक भाय सभ सँ पूछराछ कयल जाय, ओ सभ मण् डली सभक दू र आ मसीहक मतहमा छति। 24 रे ँ अहाँ सभ हनका सभ केँ आ मण् डली सभक समक अपन पेमक पमाण आ हम सभ अहाँ सभक तदस सँ घमंड करबाक पमाण दे खाउ।

12 तकएक रँ एतह सेवाक संचालन मात पतवत लोक सभक अभाव केँ पूरा नतह करै र अतछ, बल् तक परमेश् वरक बहर रास धनवादक दारा सेहो पचुर माता मे भेटैर अतछ। 13 ओ सभ एतह सेवाक पयोग सँ परमेश् वरक मतहमा करै र छति जे अहाँ सभ मसीहक सुसमाचारक अधीन रहबाक बार कहै र छी आ अहाँ सभ हनका सभ केँ आ सभ मनुष् य केँ उदाररापूव्क बाँ टबाक लेल। 14 ओ सभ अहाँ सभक लेल पाि्ना करै र छति जे अहाँ सभ मे परमेश् वरक अततधक कृपाक लेल रानैर छति। 15 परमेश् वरक अकिनीय वरदानक लेल धनवाद। अध्य 10 1 आब हम पौलुस अहाँ सभ केँ मसीहक नमरा आ सौमराक दारा तवनरी करै र छी, जे अहाँ सभ मे सतरतहर छी, मुदा अनुपन्र रतह अहाँ सभक पतर साहसी छी। 2 मुदा हम अहाँ सभ सँ तवनरी करै र छी जे जखन हम ओतह तवशासक संग उपन्र रहब रखन हम साहस नतह कऽ सकब, जातह सँ हम सभ तकछु लोकक तवरद साहसी होयब बुिैर छी, जे हमरा सभ केँ एना बुिैर अतछ जे हम सभ शरीरक अनुसार चलैर छी। 3 हम सभ शरीरक अनुसार चलैर छी, मुदा शरीरक अनुसरण नतह करै र छी। 4 (तकएक रँ हमरा सभक युदक हतियार शारीररक नतह अतछ, बल् तक परमेश् वरक दारा गढ सभ केँ रोडबाक लेल पराकमी अतछ।) 5 परमेश् वरक जानक तवरोध मे अपना केँ ऊपर उठयवला सभ बार केँ नीचाँ फेतक कऽ मसीहक आजापालन करबाक लेल सभ तवचार केँ बंदी बना दै र छी। 6 जखन अहाँ सभक आजा पूरा भऽ जायर रखन सभ आजा नतह आजाक बदला लेबऽ लेल रैयार रह। 7 की अहाँ सभ बाहरी रप सँ चीज केँ दे खैर छी? जँ केओ अपना पर भरोसा करै र अतछ जे ओ मसीहक अतछ रँ ओ अपना पर फेर सँ ई सोचय जे जेना ओ मसीहक अतछ, रतहना हम सभ मसीहक छी। 8 जँ हम अपना सभक अतधकारक बारे मे तकछु बेसी घमंड करब, जे पभु हमरा सभ केँ अहाँ सभक तवनाशक लेल नतह, बल् तक अहाँ सभक तवनाशक लेल दे लतन अतछ, मुदा हमरा लाज नतह होयर। 9 जातह सँ हमरा ई नतह लागय जेना हम अहाँ सभ केँ पत-पततक दारा आरंतकर कऽ दे ब। 10 ओ सभ कहै र छति जे हनकर पत सभ भारी आ सामर्पूण् अतछ। मुदा ओकर शारीररक उपन्तर कमजोर अतछ आ ओकर बाजब तररसृर अतछ। 11 एहन लोक ई सोचय जे, जखन हम सभ अनुपन्र रहब रखन जेना पत-पतक दारा वचन मे रहब, रतहना हम सभ उपन्र रहब रखन सेहो एहन काज करब। 12 हम सभ अपना केँ ओतह संखा मे दे खबाक साहस नतह करै र छी आ ने तकछु अपना केँ पशंसा करयवला लोक सभ सँ रुलना करबाक साहस नतह करै र छी। 13 मुदा हम सभ अपन नाप-जोखक बारक घमंड नतह करब, बल् तक परमेश् वर जे तनयम हमरा सभ केँ बाँ तट दे ने छति, रकरा अनुसार अहाँ सभ धरर पहँ चब।

अध्य 9 1 पतवत लोक सभक सेवाक तवषय मे हमरा अहाँ सभ केँ तलखब अनावशक अतछ। 2 हम अहाँ सभक तवचारक आगू बढबाक बार जनैर छी, जातह लेल हम मतकदु तनयाक लोक सभक समक अहाँ सभक तवषय मे घमंड करै र छी जे एक साल पतहने अखाया रैयार छल। आ अहाँ क उताह बहर लोक केँ भडका दे लक। 3 रैयो हम भाय सभ केँ पठौने छी, जातह सँ अहाँ सभक पतर हमरा सभक घमंड एतह लेल वि् नतह भऽ जाय। जेना हम कहलहँ , अहाँ सभ रैयार रहब। 4 जँ मतकदु तनयाक लोक सभ हमरा संग आतब कऽ अहाँ सभ केँ अपसुर पातब सकैर छी रँ हम सभ एतह तवशासपूव्क घमंड मे लनजर नतह भऽ जायब। 5 रे ँ हम भाय सभ केँ ई आगह करब आवशक बुिलहँ जे ओ सभ पतहने सँ अहाँ सभ लग जा कऽ अहाँ सभक ओतह वरदान केँ पतहने सँ पूरा कऽ लेति, जकरा अहाँ सभ पतहने दे खने छलहँ , जातह सँ ओ सभ लोभक कारणे ँ नतह, बल् तक वरदानक तवषय मे रैयार रहति . 6 मुदा हम ई कहै र छी जे जे कम बोतन लेर से कम फसल सेहो कातट लेर। जे बहर रास बोतन लेर से भरपूर फसल सेहो कातट लेर। 7 पतेक केओ अपन मोन मे जेना चाहै र अतछ, रेना दे बाक चाही। अतनचा सँ आ आवशकरा सँ नतह, तकएक रँ परमेश् वर हँ सी-खुशी दान करयवला सँ पेम करै र छति। 8 परमेश् वर अहाँ सभ पर सभ कृपा करऽ मे सकम छति। एतह ररहे ँ अहाँ सभ केँ सभ काज मे सतदखन पया् ारा रानख कऽ सभ नीक काज मे पचुररा भेटय। 9 (जेना धम्शास् त मे तलखल अतछ, “ओ तररर-तबरर भऽ गेलाह, गरीब केँ दऽ दे लतन।” 10 जे बीया बीयाक सेवा करै र अतछ, से अहाँ सभक भोजनक लेल रोटी सेहो दै र अतछ आ अहाँ सभक बीज बढबैर अतछ आ अहाँ सभक धातम्कराक फल बढबैर अतछ।” 11 हम सभ तकछु मे धतनक भऽ जाइ छी, जातह सँ हमरा सभक दारा परमेश् वरक धन् यवाद भेटैर अतछ।

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2 कोररनी

14 हम सभ अपना केँ अपन नाप सँ बेसी नतह रानैर छी जेना अहाँ सभ लग नतह पहँ चलहँ , तकएक रँ हम सभ मसीहक सुसमाचार पचार करै र अहाँ सभ लग सेहो पहँ तच गेल छी। 15 अपना सभक नाप-जोखक बार, अिा् र् दोसर लोकक पररशमक घमंड नतह करब। मुदा जखन अहाँ सभक तवश् वास बतढ जायर रँ आशा अतछ जे अहाँ सभक दारा हमरा सभ केँ पचुर माता मे बढाओल जायर। 16 अहाँ सभ सँ आगूक केत सभ मे सुसमाचार पचार करब, आ हमरा सभक हाि मे रैयार कयल गेल दोसरक बार पर घमंड नतह करब। 17 मुदा जे घमंड करै र अतछ, से पभु पर घमंड करऽ। 18 तकएक रँ जे अपना केँ पशंसा करै र अतछ से नतह, बल् तक पभु जकर पशंसा करै र छति।

14 आ कोनो आशय् नतह। कारण, शैरान सयं पकाशक दू र मे बदतल गेल अतछ। 15 रे ँ जँ हनकर सेवक सभ सेहो धातम्कराक सेवक बतन कऽ बदतल जाय रँ ई कोनो पैघ बार नतह। तजनकर अंर हनका सभक काजक अनुसार होयर। 16 हम फेर कहै र छी जे , हमरा केओ मूख् नतह बुिय। जँ से नतह रँ हमरा मूख् जकाँ गहण कर, जातह सँ हम अपना केँ कनेक घमंड क' सकब। 17 हम जे बजैर छी से पभुक अनुसार नतह, बल् तक मूख्रा जकाँ एतह घमंड करबाक तवशास मे कहै र छी। 18 ई दे नख जे बहरो लोक शरीरक गौरव करै र अतछ, हमहँ घमंड करब। 19 अहाँ सभ मूख् सभ केँ खुशी-खुशी कष दै र छी, तकएक रँ अहाँ सभ बुनदमान छी। 20 जँ केओ अहाँ सभ केँ दास मे रानख दै र अतछ, जँ केओ अहाँ सभ केँ खा जाइर अतछ, जँ केओ अहाँ सभ केँ ल’ लेर, जँ केओ अहाँ सभ केँ ऊपर उठबैर अतछ आ जँ केओ अहाँ सभ केँ मुँह पर मारर दै र अतछ। 21 हम एहन बार कहै र छी जेना हम सभ कमजोर भ’ गेल होइ। मुदा जँ केओ साहसी होइर अतछ, हम मूख्रापूव्क बजैर छी, हमहँ साहसी छी। 22 की ओ सभ इबानी छति? हमहँ छी।की ओ सभ इसाएली छति? हमहँ रतहना छी।की ओ सभ अबाहमक वंशज छति? रतहना हमहँ छी। 23 की ओ सभ मसीहक सेवक छति? (हम मूख् जकाँ बजैर छी) हम बेसी छी; शम मे बेसी पचुर माता मे, नाप सँ बेसी पटी मे, जेल मे बेसी बेर, मृतु मे बेसी काल। 24 यहदी सभ मे सँ एक केँ छोतड पाँ च बेर चालीस टा पहार भेल। 25 रीन बेर डं डासँ मारल गेलहँ , एक बेर पािर मारल गेलहँ , रीन बेर जहाज डूतब गेलहँ, एक रातर एक तदन गहीरं मे रहलहँ । 26 पायः याता मे, पातनक खररा मे, डकैरक खररा मे, अपन दे शवासीक खररा मे, तवधम् खररा मे, शहर मे खररा मे, जंगल मे खररा मे, समुद मे खररा मे, िूठक बीच खररा मे भाइ लोकतन; 27 िकान आ कष मे, बेर-बेर दे खबा मे, भूख-पास मे, बेर-बेर उपवास मे, जाड आ नंगटे मे। 28 बाहरक चीज सभक अतरररक जे हमरा पर पतरतदन अबैर अतछ, सभ मण् डली सभक तच्ा। 29 के कमजोर अतछ आ हम कमजोर नतह छी? के आहर होइर अतछ, आ हम नतह जरर रहल छी? 30 जँ हमरा गौरवक आवशकरा पडर रँ हम अपन दु ब्लराक तवषय मे गौरव करब। 31 हमरा सभक पभु यीशु मसीहक तपरा परमेश् वर, जे अन् काल धरर धन छति, ओ जनैर छति जे हम िूठ नतह बजैर छी। 32 दतमश मे राजा अरे रासक अधीन राजपाल दतमनशयन नगर केँ एकटा सैन दलक संग रखलतन, जे हमरा पकडय चाहै र छलाह। 33 एकटा टोकरी मे राखल नखडकी सँ हम दे बाल लग खसा दे ल गेलहँ आ हनकर हाि सँ बतच गेलहँ ।

अध्य 11 1 परमेश् वरक काश जे अहाँ सभ हमरा मूख्रा मे कनेक सहन कऽ सकब। 2 हम अहाँ सभ पर परमेश् वरक ईरा् क संग ईरा् करै र छी, तकएक रँ हम अहाँ सभ केँ एक पतर सँ तववाह कऽ लेने छी जातह सँ हम अहाँ सभ केँ मसीहक समक एकटा पतरवरा कुमारर जकाँ पसुर कऽ सकब। 3 मुदा हमरा डर अतछ जे जतहना साँ प अपन चरुराई सँ हवा केँ बहका दे लक, रेना अहाँ सभक मोन मसीह मे जे सादगी अतछ, रातह सँ भष नतह भऽ जाय। 4 जँ केओ आतब रहल अतछ, ओ दोसर यीशुक पचार करै र अतछ, जकर पचार हम सभ नतह केने छी, वा जँ अहाँ सभ केँ कोनो आन आर् मा भेटैर अतछ, जे अहाँ सभ केँ नतह भेटल अतछ, वा कोनो आन सुसमाचार जे अहाँ सभ केँ सीकार नतह कयल गेल अतछ, रँ अहाँ सभ हनका सहन कऽ सकैर छी। 5 हमरा बुिने, हम सभ पैघ पेररर सभ सँ तकछु ओ पाछू नतह छलहँ । 6 मुदा हम बजबा मे अभद छी, मुदा जान मे नतह। मुदा हम सभ अहाँ सभक बीच सभ बार मे पगट भ’ गेल छी। 7 की हम अहाँ सभ केँ परमेश् वरक शुभ समाचारक पचारपसार करबाक कारणे ँ अहाँ सभ केँ ऊपर उठयबाक लेल अपना केँ नीचाँ खसा दे लहँ ? 8 हम अहाँ सभक सेवा करबाक लेल आन मण् डलीक मजदू री लऽ कऽ लूतट लेलहँ । 9 जखन हम अहाँ सभक संग रहब आ अभाव मे छलहँ रखन हम ककरो पर आरोप नतह लगाओल गेलहँ , कारण जे कमी छल, मतकदु तनया सँ आयल भाय सभ भोजन करै र छलाह की हम अपनाकेँ राखब। 10 जेना मसीहक सर् य हमरा मे अतछ, अखाया पदे श मे हमरा एतह घमंड सँ केओ नतह रोकर। 11 तकयैक? कारण हम अहाँ सँ पेम नतह करै र छी? भगवान् जनैर छति। 12 मुदा हम जे करै र छी से एतह लेल करब जे अवसर चाहतनहार सभ सँ अवसर केँ कातट सकब। जातह सँ ओ सभ घमंड करै र छति, रे ँ हमरा सभ जकाँ भेतट जाय।” 13 तकएक रँ एहने िूठ पेररर सभ छति, धोखा दे बयवला काज करै र छति आ अपना केँ मसीहक पेररर मे बदतल लैर छति।

अध्य 12 1 हमरा लेल मतहमा करब तनसंदेह उतचर नतह अतछ। हम पभुक दश्न आ पकाशन पर आतब जायब।

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2 कोररनी

2 हम चौदह वष् पतहने मसीह मे एकटा एहन आदमी केँ तचनै र छलहँ , जे शरीर मे अतछ, से हम नतह कतह सकैर छी, आ शरीर सँ बाहर अतछ, से हम नतह कतह सकैर छी, परमेश् वर जनैर छति। 3 हम एहन आदमी केँ तचनै र छलहँ , (शरीर मे वा शरीर सँ बाहर, हम नतह कतह सकैर छी। 4 ओ कोना सग् मे लऽ गेलाह आ अकिनीय बार सुनलतन, जे मनुष् य केँ कहब उतचर नतह अतछ। 5 हम एहन लोकक गौरव करब, रैयो हम अपना पर गौरव नतह करब, बल् तक अपन दु ब्लरा मे। 6 हम भले घमंड करऽ चाहै र छी, मुदा मूख् नतह बनब। तकएक रँ हम सर् य कहब, मुदा आब हम सहन कऽ रहल छी जे तकयो हमरा ओतह बार सँ बेसी नतह सोतच सकय जे ओ हमरा बुिैर अतछ आ जे हमरा सुनैर अतछ। 7 जातह सँ हमरा पचुरराक पशसराक कारणे ँ हमरा नाप सँ बेसी ऊँच नतह कयल जा सकैर अतछ, रे ँ हमरा शरीर मे एकटा काँ ट दे ल गेल छल, जे शैरानक दू र छल जे हमरा मारर दे र, जातह सँ हम नाप सँ बेसी ऊँच नतह भ’ जायब। 8 एतह लेल हम रीन बेर पभु सँ तवनरी केलहँ जे ई हमरा सँ दू र भऽ जाय। 9 ओ हमरा कहलतिन, “ हमर कृपा रोरा लेल पया् ा अतछ, तकएक रँ हमर सामि्​् य कमजोरी मे तसद भऽ जाइर अतछ।” रे ँ हम अपन दु ब्लरा पर बहर खुशी सँ घमंड करब, जातह सँ मसीहक सामर् हमरा पर तटकल रहय। 10 रे ँ हम मसीहक लेल दु ब्लरा मे, अपमान मे, आवश् यकरा मे, पराडन मे, संकट मे पसर होइर छी, कारण जखन हम कमजोर होइर छी रखन हम बलवान होइर छी। 11 हम घमंड करबा मे मूख् बतन गेल छी। अहाँ सभ हमरा मजबूर कऽ दे लहँ , तकएक रँ हमरा अहाँ सभक दारा पशंसा करबाक चाही छल, तकएक रँ हम तकछु ओ नतह रतहरहँ , कोनो बार मे पैघ-पैघ पेररर सभ सँ पाछू नतह छी। 12 अहाँ सभक बीच एकटा पेरररक तचन् त सभ धैय्, तचन् त आ चमर् कार आ पराकमक काज मे कयल गेल अतछ। 13 तकएक रँ अहाँ सभ आन मण् डली सँ नीचाँ कोन बार छल, जखन तक हम सयं अहाँ सभक लेल बोतिल नतह छलहँ ? हमरा ई गलरी कमा कर। 14 दे खू, रेसर बेर हम अहाँ सभ लग आबय लेल रैयार छी। हम अहाँ सभक लेल बोि नतह बनब, तकएक रँ हम अहाँ क नतह, बल् तक अहाँ सभक खोज मे छी, तकएक रँ बचा सभ केँ मारातपराक लेल जमा नतह करबाक चाही, बल् तक मारा-तपरा केँ बचा सभक लेल जमा करबाक चाही। 15 हम अहाँ सभक लेल बहर खुशी-खुशी खच् करब आ खच् करब। यदतप हम अहाँ सँ जरेक बेसी पेम करै र छी, ररेक कम पेम होइर अतछ। 16 मुदा एहन हो, हम अहाँ सभ पर कोनो बोि नतह दे लहँ , मुदा धूर् भऽ अहाँ सभ केँ छल-पपंच सँ पकतड लेलहँ । 17 जे हम अहाँ सभ लग पठौने रही, हनका सभ मे सँ तकयो अहाँ सभ सँ लाभ उठे लहँ ? 18 हम रीरुस सँ तवनरी केलहँ आ हनका संग एकटा भाय पठौलहँ । की रीरुस अहाँ केँ कोनो फायदा केलक? चलल हम एकतह भावना मे नतह? चलल हम एकतह डे ग पर नतह? 19 फेर अहाँ सभ सोचैर छी जे हम सभ अहाँ सभक समक अपना केँ बहाना बना रहल छी? हम सभ परमेश् वरक समक

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मसीह मे बजैर छी, मुदा, तपय तपयरम, हम सभ तकछु अहाँ सभक संसारक लेल करै र छी। 20 हम डरै र छी जे कही ं हम आतब कऽ अहाँ सभ केँ ओतहना नतह पातब सकब जेना हम चाहै र छी आ हम अहाँ सभक लेल एहन नतह पातब सकब जेना अहाँ सभ नतह चाहै र छी। सूजन, कोलाहल : १. 21 जखन हम फेर आतब जायब रखन हमर परमेश् वर हमरा अहाँ सभक बीच मे नम नतह करराह आ हम बहरो लोक केँ तवलाप करब जे पतहने सँ पाप कएने छति आ ओ सभ अशुदरा आ वतभचार आ कामुकराक लेल पशाराप नतह केने छति। अध्य 13 1 हम रेसर बेर अहाँ सभ लग आतब रहल छी। दू -रीन गवाहक मुँह मे एक-एकटा बार ्ातपर होयर। 2 हम अहाँ सभ केँ पतहने कहने रही आ अहाँ सभ केँ ओतहना पूवा् भास कऽ रहल छी जेना हम दोसर बेर उपन्र छी। आब अनुपन्र रतह हम हनका सभ केँ तलखैर छी जे एखन धरर पाप केतनहार सभ केँ आ आन सभ केँ तलनख रहल छी जे जँ हम फेर आतब जायब रँ हम एतह बार केँ नतह छोडब। 3 तकएक रँ अहाँ सभ मसीह हमरा मे बजबाक पमाण रकैर छी जे अहाँ सभक लेल कमजोर नतह अतछ, बल् तक अहाँ सभ मे पराकमी अतछ। 4 तकएक रँ ओ कमजोरीक कारणे ँ कूस पर चढाओल गेलाह, मुदा परमेश् वरक सामि्​् य दारा जीबैर छति। हम सभ सेहो हनका मे कमजोर छी, मुदा अहाँ सभक पतर परमेश् वरक सामि्​् य सँ हनका संग जीतवर रहब। 5 अपना केँ परखू जे अहाँ सभ तवश् वास मे छी तक नतह। अपन तसद कर। की अहाँ सभ अपना केँ नतह जनैर छी जे यीशु मसीह अहाँ सभ मे कोना छति, जाबर धरर अहाँ सभ केँ तररसृर नतह कयल जायर? 6 मुदा हमरा तवशास अतछ जे अहाँ सभ ई बुति जायब जे हमरा सभ केँ तररसृर नतह कयल गेल अतछ। 7 आब हम परमेश् वर सँ पाि्ना करै र छी जे अहाँ सभ कोनो अधलाह काज नतह कर। ई नतह जे हम सभ अनुतचर दे खाबी, बल् तक अहाँ सभ ईमानदारी सँ काज करी, भले हम सभ तनन्र छी। 8 हम सभ सतक तवरोध मे तकछु नतह कऽ सकैर छी, बल् तक सर् यक लेल। 9 हम सभ जखन कमजोर होइर छी आ अहाँ सभ बलवान होइर छी रखन हम सभ पसर होइर छी। 10 रे ँ हम ई सभ बार अनुपन्र रतह कऽ तलखैर छी, जातह सँ हम उपन्र रतह कऽ रीकणराक पयोग नतह कऽ सकब, जे पभु हमरा ओतह सामि्​् य दारा दे ल गेल अतछ, जे हमरा तवनाशक लेल नतह, बल् तक तवनाशक लेल दे ल गेल अतछ। 11 अंर मे, भाइ लोकतन, तवदाई। तसद रह, नीक आराम सँ रह, एक तवचार राखू, शान् सँ रह। पेम आ शान्क परमेश् वर अहाँ सभक संग रहराह। 12 एक-दोसर केँ पतवत चुमा सँ अतभवादन कर। 13 सभ पतवत लोक अहाँ सभ केँ पणाम करै र छति। 14 पभु यीशु मसीहक कृपा, परमेश् वरक पेम आ पतवत आर् माक सािीदारी अहाँ सभक संग रहय। आमीन। (कुररननयों के


2 कोररनी

दोसर पत मतकदु तनया के एक शहर तफतलपी से रीरुस आर लुकास दारा तलखलो गेलै।)

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गलाती अधाय 1 1 पौलुस, जे पेरेर छी, (मनुष सँ नहि, आ ने मनुष् यक द्े्, बल् हक यीशु मसीि आ हपर् पेमेश् वे द्े्, जे हनक् मृर् यु मे सँ हजय् दे लहन। 2 िमे् संग जे सभ भ्य छहि, गल्रीक मण् डली सभ केँ। 3 अि्ँ सभ पेमेश् वे हपर् पेमेश् वे आ िमे् सभक पभु यीशु मसीिक कृप् आ श्न् हर िो। 4 ओ िमे् सभक प्पक लेल अपन् केँ समहपपर कऽ दे लहन ज्हि सँ ओ िमे् सभ केँ एहि अधल्ि संस्े सँ मुक कऽ सकहि। 5 हनक् सभक महिम् अनन क्ल धरे ेिय। आमीन। 6 िमे् आशयप लगैर अहछ जे अि्ँ सभ एरेक जली ओहि लोक सँ दू े भऽ गेल छी जे अि्ँ सभ केँ मसीिक कृप् मे बजौलहन आ दोसे सुसम्च्े सुनौलहन। 7 जे दोसे नहि अहछ। मुद् हकछु एिन अहछ जे अि्ँ सभ केँ पे​े श्न केै र अहछ आ मसीिक सुसम्च्े केँ हवकृर केय च्िै र अहछ। 8 मुद् जँ िम सभ व् स् वगप सँ आयल कोनो स् वगपदूर अि्ँ सभ केँ ओहि सुसम्च्ेक अहररेक कोनो आन सुसम्च्े सुनबैर छी, मुद् ओ अहभशप िोअय। 9 जेन् िम सभ पहिने किलहँ , आब फे​े किै र छी जे जँ केओ अि्ँ सभ केँ जे सुसम्च्े भेटल अहछ र्हि सँ अलग कोनो सुसम्च्े सुनबैर अहछ रँ ओके् अहभशप िोअय। 10 आब िम मनुष्‍य केँ मन्बैर छी आहक पेमेश् वे केँ? आहक िम मनुष्‍य केँ पसर केब्क पय्स केै र छी? हकएक रँ जँ िम एखन धरे मनुष् य केँ पसर केै र छी रँ मसीिक सेवक नहि बहन सहकरहँ ।” 11 मुद्, भ्इ लोकहन, िम अि्ँ सभ केँ ई पम्हणर केै र छी जे िमे् हदस सँ जे सुसम्च्े पच्े कयल गेल अहछ, से मनुष् य सभक अनुस्े नहि अहछ। 12 हकएक रँ िम ई ब्र नहि मनुष् य सँ गिण केलहँ आ ने िमे् हसख्ओल गेल, बल् हक यीशु मसीिक पगटीकेण द्े्। 13 अि्ँ सभ पहिने यहदी सभक धमप मे िमे गप-सप सुनने छी जे िम पेमेश् वेक मण् डली केँ अि्ि सर्बैर छलहँ आ ओके् बब्प द कऽ दे लहँ । 14 िमे पूवपजक पेमे्क पहर बेसी उत्िी ेिब्क क्ेणे ँ िम अपन ज्हर मे िमे समकक बहरो सँ बेसी यहदी सभक धमप मे ल्भ उठे लहँ । 15 मुद् जखन पेमेश् वे नीक लगलहन, जे िमे् म्यक कोखख सँ अलग कऽ दे लहन आ अपन कृप् सँ िमे् बजौलहन। 16 िम अपन पुत केँ िमे् मे पगट केहि ज्हि सँ िम हनक् पेमेश् वेक पच्े-पस्े कऽ सकब। रुेन िम म्ं स-मज् सँ सम्ौर् नहि केलहँ । 17 आ िम यरशलेम मे िमे् सँ पहिने जे सभ पेरेर छल्ि, रके् लग नहि गेलहँ । मुद् िम अेब मे गेलहँ आ फे​े दहमश घुरे गेलहँ । 18 रीन वषपक ब्द िम पतुस केँ दे खब्क लेल यरशलेम गेलहँ आ पनि हदन हनक् संग ेिलहँ ।

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19 मुद् पभुक भ्य य्कूब छोह़ िम आन पेरेर सभ मे सँ हकयो नहि दे खलहँ । 20 िम जे ब्र अि्ँ सभ केँ हलखैर छी, से पेमेश् वेक समक िम ्ूठ नहि बजैर छी। 21 रके ब्द िम सीरेय् आ हकहलहसय् पदे श मे आहब गेलहँ । 22 मसीि मे ेिहनि्े यहहदय्क मण् डली सभ हनक् मुँि सँ अनहचन्े छलहन। 23 मुद् ओ सभ म्त सुनने छल जे , जे पहिने िमे् सभ केँ सर्बैर छल, आब ओहि हवश् व्सक पच्े केै र अहछ जके् ओ पहिने नष कऽ दे ने छल। 24 ओ सभ िमे् मे पेमेश् वेक महिम् कयलहन। अधाय 2 1 चौदि वषपक ब्द िम बेनब्सक संग यरशलेम गेलहँ आ रीरुस केँ सेिो अपन् संग ल’ गेलहँ । 2 िम पगट पतक द्े् चह़ गेलहँ आ गैे-यहदी सभक बीच जे सुसम्च्े पच्े केै र छी, रके् सभ केँ एक्ं र मे सुन्बैर छलहँ , ज्हि सँ िम कोनो रेिे ँ विप नहि दौह़ सकब व् दौ़लहँ । 3 मुद् िमे् संग ेिहनि्े रीरुस सेिो यून्नी ेिब्क क्ेणे ँ खरन् केब्क लेल ब्ध नहि भेल्ि। 4 ओ सभ ्ूठ भ्इ सभक क्ेणे ँ अनज्ने मे आनल गेल्ि, जे सभ िमे् सभ केँ मसीि यीशु मे िमे् सभक सरंतर्क ज्सूसी केब्क लेल गुप रप सँ आहब गेल्ि ज्हि सँ ओ सभ िमे् सभ केँ गुल्म बन्बहि। 5 िम सभ एक घंट्क लेल नहि, हनक् सभक अधीन ेहि गेलहँ । ज्हि सँ सुसम्च्ेक सतर् अि्ँ सभक संग बनल ेिय। 6 मुद् एहि सभ मे सँ जे हकछु एिन बु्​्इर छल, िमे् लेल कोनो फकप नहि प़ै र अहछ। 7 मुद् जखन ओ सभ दे खलक जे खरन् नहि भेल लोकक सुसम्च्े िमे् ि्ि मे सौंपल गेल अहछ, जेन् खरन् केहनि्ेक सुसम्च्े पतुस केँ दे ल गेल छल। 8 (हकएक रँ जे पतुसक संग खरन् केऽ वल् पेरेरक रप मे क्ज कयलहन, से िमे् मे गैे-यहदी सभक पहर पे्कमी छल।” 9 जखन य्कूब, कफ् आ यूिन् न्, जे स् बु्​्इर छल्ि, िमे् पे दे ल गेल अनुगि केँ बुह् कऽ िमे् आ बेनब्स केँ संगहरक दहिन् ि्ि दे लहन। ज्हि सँ िम सभ ज्हर-ज्हर मे ज्इ आ ओ सभ खरन् केऽ वल् लोक सभ लग। 10 ओ सभ म्त ई च्िै र छल जे िम सभ गेीब सभक सेण केी। वैि जे िमहँ केब् लेल आगू ेिी। 11 मुद् जखन पतुस अंर्हकय् पहँ चल्ि रँ िम हनक् मुँिे सँ हवेोध कऽ दे हलयहन, हकएक रँ हनक् दोषी ठिे्ओल गेल छलहन। 12 हकएक रँ य्कूबक बीच सँ हकछु लोक अयल् सँ पहिने ओ गैे-यहदी सभक संग भोजन केै र छल्ि। 13 आन यहदी सभ सेिो हनक् संग ठे स लगबैर छल्ि। एरेक धरे जे बेनब्स सेिो हनक् सभक छल-पपंच केँ ल' क' चहल गेल्ि। 14 मुद् जखन िम दे खलहँ जे ओ सभ सुसम्च्ेक सतर्क अनुस्े सो् नहि चलैर छहि रँ िम सभ पतुस केँ किहलयहन, “जँ अि्ँ यहदी भऽ कऽ गैे-यहदी सभक आच्े-हवच्ेक अनुस्े जीबैर छी, आ यहदी सभ जक्ँ नहि, रँ अि्ँ हकएक ब्ध केै र छी।” गैे-यहदी सभ यहदी सभक सम्न जीबय लेल?


गल्री

15 िम सभ जे सभ्व सँ यहदी छी, आ गैे-यहदी सभक प्पी नहि छी। 16 ई ज्हन कऽ जे मनुष् यक धमप-हनयमक कमप सँ नहि, बल् हक यीशु मसीि पे हवश् व्स द्े् ध्हमपक ठिे्ओल ज्इर अहछ, रे ँ िम सभ यीशु मसीि पे हवश् व्स कयलहँ , ज्हि सँ िम सभ मसीि पे हवश् व्स द्े् धम् ठिे् सकब, धमप-हनयमक क्ज सँ नहि : हकएक रँ धमप-हनयमक क्जक क्ेणे ँ कोनो मनुष धम् नहि ठिे्ओल ज्यर। 17 मुद् जँ िम सभ मसीिक द्े् ध्हमपक ठिे्बऽ च्िै र छी रँ अपन् सभ प्पी प्हब गेल छी रँ की मसीि प्पक सेवक छहि? भगव्न नहि केहि। 18 जँ िम ओहि वसु सभ केँ फे​े सँ बनबैर छी जके् िम नष कऽ दे लहँ रँ िम अपन् केँ अपे्धी बन् लैर छी। 19 िम धमप-हनयमक क्ेणे ँ धमप-हनयमक लेल मरे गेल छी, ज्हि सँ िम पेमेश् वेक लेल जीहब सकब। 20 िम मसीिक संग कूस पे च़्ओल गेल छी। रैयो िम नहि, बल् हक मसीि िमे् मे जीबैर छहि। 21 िम पेमेश् वेक कृप् केँ कहर नहि केै र छी, हकएक रँ जँ धमप-हनयमक द्े् ध्हमपकर् अबैर अहछ रँ मसीि विय मरे गेल छहि।

12 धमप-हनयम हवश् व्स सँ नहि बनैर अहछ, बल् हक “जे मनुष् य ओके् सभ केँ प्लन केै र अहछ, से ओके् सभ मे जीहवर ेिर।” 13 मसीि िमे् सभ केँ धमप-हनयमक अहभश्प सँ मुक कऽ दे लहन आ िमे् सभक लेल अहभश्प बहन गेल्ि। 14 ज्हि सँ अब्िमक आशीष यीशु मसीिक द्े् गैे-यहदी सभ पे आहब ज्य। ज्हि सँ िम सभ हवश् व्स द्े् आर् म्क पहरज् प्हब सकब। 15 भ्इ लोकहन, िम मनुष् यक ढं ग सँ बजैर छी। भले ँ ई मनुष्‍य के व्च् म्त िो, मुद् जँ ओके् पुष भऽ ज्य रँ केओ ओके् खंडन नहि कऽ सकैर अहछ आ ने ओके् जोह़ नहि दै र अहछ। 16 अब्िम आ हनके वंशज केँ पहरज् कयल गेल छल। ओ ई नहि किै र छहि जे, “आ बीय् केँ, जेन् बहरो केँ।” मुद् एक गोटे क रप मे “आ अि्ँ क वंशज, जे मसीि छहि।” 17 िम ई किै र छी जे , जे व्च् पेमेश् वे द्े् पहिने मसीि मे पुष कयल गेल छल, से च्रे सय रीस वषपक ब्द भेल धमप-हनयम केँ खंडन नहि कऽ सकैर अहछ, ज्हि सँ ई पहरज् केँ बेक्े नहि भऽ ज्य। 18 जँ धमप -हनयमक उते्हधक्े अहछ रँ आब ओ पहरज्क आध्े पे नहि अहछ। 19 रखन धमप-हनयमक सेव् हकएक िोइर अहछ? अपे्धक क्ेणे ँ ई जो़ल गेल छल, ज्बर धरे ओ वंश नहि आहब ज्यर, जके् सँ पहरज् कयल गेल छल। आ एकट् मध्क ि्ि मे स् वगपदूर द्े् एके् हनयुक कयल गेल छल। 20 आब मध् एकक मध् नहि िोइर अहछ, बल् हक पेमेश् वे एक छहि। 21 रखन की धमप -हनयम पेमेश् वेक पहरज्क हवरद अहछ? पेमेश् वे नहि केहिन, हकएक रँ जँ कोनो एिन हनयम दे ल गेल ेिै र जे जीवन दऽ सकैर छल, रँ धमप -हनयमक द्े् ध्हमपकर् भऽ ज्इर। 22 मुद् धमपश्स् त सभ केँ प्प मे सम्हिर कयल गेल अहछ, ज्हि सँ यीशु मसीि पे हवश् व्स द्े् पहरज् हवश् व्स केयवल् सभ केँ दे ल ज्य। 23 मुद् हवश् व्स अयब् सँ पहिने िम सभ धमप -हनयमक अधीन ेहि गेल ेिी, आ ओहि हवश् व्सक लेल बन ेहि गेल ेिी जे ब्द मे पगट िोयर। 24 रे ँ धमप -हनयम िमे् सभ केँ मसीि लग अनब्क लेल िमे् सभक स् कूल-हशकक छल, ज्हि सँ िम सभ हवश् व्स द्े् ध्हमपक ठिे् सकब। 25 मुद् ओहि हवश् व्सक ब्द आब िम सभ सूलक म्सेनीक अधीन नहि छी। 26 अि्ँ सभ मसीि यीशु पे हवश् व्स केब्क क्ेणे ँ पेमेश् वेक सन् र्न छी। 27 अि्ँ सभ मे सँ जे हकयो मसीि मे बपहरस् म् लेने छी, से सभ मसीि केँ पहिेने छी। 28 ने यहदी अहछ आ ने यून्नी, ने द्स अहछ आ ने सरंत, ने पुरष आ ने सी, हकएक रँ अि्ँ सभ मसीि यीशु मे एक छी। 29 जँ अि्ँ सभ मसीिक छी रँ अि्ँ सभ अब्िमक वंशज छी आ पहरज्क अनुस्े उते्हधक्ेी छी।

अधाय 3 1 िे मूखप गल्री, अि्ँ सभ केँ के ज्दू कयलक जे अि्ँ सभ सतक आज् नहि म्नब, जके आँ खखक सो्​्ँ यीशु मसीि केँ अि्ँ सभक बीच कूस पे च़्ओल गेल छहि? 2 िम अि्ँ सभ सँ म्त ई ब्र सीखय च्िै र छी जे अि्ँ सभ धमप-हनयमक क्ज सँ आर्‍म् केँ प्हब लेलहँ आ हक हवश् व्सक ब्र सुनल् सँ? 3 की अि्ँ सभ एरेक मूखप छी? आर् म् सँ शुर कऽ कऽ अि्ँ सभ आब शेीेक क्ेणे ँ हसद भऽ गेल छी?” 4 की अि्ँ सभ एरेक कष विप मे भोगलहँ ? जँ एखन धरे विप अहछ। 5 रे ँ जे अि्ँ सभक आर् म्क सेव् केै र अहछ आ अि्ँ सभक बीच चमर् क्े केै र अहछ, से ओ धमप -हनयमक क्ज सँ केै र अहछ व् हवश् व्सक ब्र सुनब्क क्ेणे? 6 जहिन् अब्िम पेमेश् वे पे हवश् व्स कयलहन आ हनक् ध्हमपकर् म्नल गेलहन। 7 रे ँ अि्ँ सभ ई ज्हन हलअ जे हवश् व्स मे ेिहनि्े सभ अब्िमक सन् र्न छहि। 8 धमपश्स् त पहिने ई दे खख कऽ जे पेमेश् वे हवश् व्सक क्ेणे ँ गैे-यहदी सभ केँ ध्हमपक ठिेौर्ि, आ अब्िम केँ सुसम्च्ेक समक सुसम्च्े पच्े कयलक जे , “अि्ँ मे सभ ज्हर केँ आशीव्प द भेटर।” 9 रे ँ हवश् व्सक लोक सभ हवश् व्सक अब्िमक संग आशीष प्हब ेिल छहि। 10 हकएक रँ जे सभ धमप -हनयमक क्ज मे ल्गल अहछ, से सभ अहभश्प मे अहछ, हकएक रँ धमपश्स् त मे हलखल अहछ जे, “जे केओ धमप-हनयमक पुसक मे हलखल सभ ब्र मे नहि चलैर अहछ, से श्हपर अहछ।” 11 मुद् पेमेश् वेक नजरे मे धमप-हनयमक क्ेणे ँ केओ ध्हमपक नहि ठिे्ओल ज्इर अहछ, से सष अहछ, हकएक रँ, “धम् लोक हवश् व्स सँ जीहवर ेिर।”

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गल्री

अधाय 4 1 आब िम किै र छी जे उते्हधक्ेी ज्बर धरे बच् अहछ, र्बर धरे द्स सँ कोनो हभर नहि िोइर अहछ, भले ओ सभक म्हलक िो। 2 मुद् हपर्क हनध्प रेर समय धरे टूटे आ गवनपेक अधीन ेिै र अहछ। 3 रहिन् िम सभ जखन बच् ेिी रखन संस्ेक रतक अधीन ेहि गेल ेिी। 4 मुद् जखन समयक पूणपर् भेल रखन पेमेश् वे अपन पुत केँ पठौलहन, जे स् ती सँ बनल आ धमप-हनयमक अधीन बनल छल। 5 धमप -हनयमक अधीन ेिहनि्े सभ केँ मुक केब्क लेल, ज्हि सँ िम सभ पुतक रप मे अपन् सभ केँ प्हब सकब। 6 अि्ँ सभ पुत छी रे ँ पेमेश् वे अपन पुतक आर् म् अि्ँ सभक हदय मे पठौलहन जे, “अब्, हपर्।” 7 रे ँ अि्ँ आब द्स नहि, बल् हक बेट् छी। आ जँ पुत छी रँ मसीिक द्े् पेमेश् वेक उते्हधक्ेी छी। 8 मुद् जखन अि्ँ सभ पेमेश् वे केँ नहि जनैर छलहँ रखन अि्ँ सभ ओहि लोक सभक सेव् केै र छलहँ जे सभ्वरव कोनो दे वर् नहि छहि। 9 मुद् आब अि्ँ सभ पेमेश् वे केँ हचनल्क ब्द व् किी जे पेमेश् वे सँ हचनल गेलहँ , रखन अि्ँ सभ फे​े ओहि कमजोे आ हभख्ेी रत सभक हदस कोन् घुेैर छी, जके् अि्ँ सभ फे​े सँ द्स बनब्क इच् ेखैर छी? 10 अि्ँ सभ हदन, म्स, समय आ वषपक प्लन केै र छी। 11 िम अि्ँ सभ सँ डेै र छी, ज्हि सँ िम अि्ँ सभ केँ विप मे परेशम नहि कऽ दे ब। 12 भ्इ लोकहन, िम अि्ँ सभ सँ हवनरी केै र छी जे िमे् जक्ँ ेह। िमहँ अि्ँ सभ जक्ँ छी। 13 अि्ँ सभ जनैर छी जे िम पहिने शेीेक दु बपलर्क क्ेणे ँ अि्ँ सभ केँ सुसम्च्े पच्े केलहँ । 14 िमे शेीे मे आयल िमे पेीक् केँ अि्ँ सभ हरेसृर नहि केलहँ आ ने हरेसृर केलहँ । मुद् िमे् पेमेश् वेक स् वगपदूर जक्ँ मसीि यीशु जक्ँ गिण कयलहन। 15 रखन अि्ँ सभ जे आशीव्प दक ब्र किलहँ से करय अहछ? िम अि्ँ सभ केँ गव्िी दै र छी जे जँ स्व िोइर रँ अि्ँ सभ अपन आँ खख उख्ह़ कऽ िमे् दऽ हदहरयैक।” 16 रे ँ की िम अि्ँ सभक शतु बहन गेल छी, क्ेण िम अि्ँ सभ केँ सर् य किै र छी? 17 ओ सभ जोश सँ अि्ँ सभ केँ पभ्हवर केै र अहछ, मुद् नीक नहि। िँ , ओ सभ अि्ँ सभ केँ बहिषृर कऽ दै र छल, ज्हि सँ अि्ँ सभ हनक् सभ केँ पभ्हवर कऽ सकब। 18 मुद् जखन िम अि्ँ सभक संग ेिब रखने नहि जे नीक क्ज मे सहदखन जोश सँ पभ्हवर ेिब नीक अहछ। 19 िमे छोट-छोट बच् सभ, ज्बर धरे मसीि अि्ँ सभ मे नहि बनर, र्बर धरे िम फे​े सँ पसव केै र छी। 20 िम च्िै र छी जे एखन अि्ँ सभक संग ेिब आ अपन आव्ज बदलब। क्ेण, िमे् अि्ँ पे संदेि अहछ। 21 अि्ँ सभ जे धमप-हनयमक अधीन ेिय च्िै र छी, िमे् कह जे की अि्ँ सभ धमप -हनयमक ब्र नहि सुनैर छी? 22 धमपश्स् त मे हलखल अहछ जे, अब्िम केँ दू ट् पुत छलहन, एकट् द्सी सँ , दोसे एकट् सरंत स् ती सँ।

149

23 मुद् जे द्सी मे सँ छल, से शेीेक अनुस्े जन लेलक। मुद् सरंत महिल्क ओ वचन सँ छल। 24 ई सभ ब्र एकट् रपक अहछ, हकएक रँ ई दु नू व्च् अहछ। हसनै पवपर सँ जे द्स बनैर अहछ, जे आगे अहछ। 25 ई अग्े अेब मे हसन्ई पि़् अहछ आ यरशलेम केँ उते दै र अहछ जे एखन अहछ आ अपन संर्न सभक संग द्स मे अहछ। 26 मुद् ऊपेक यरशलेम सरंत अहछ, जे िमे् सभक म्य अहछ। 27 धमपश्स् त मे हलखल अहछ, “िे बंजे जे बच् नहि दै र छी, आनखनर ेह। िे पसव नहि केयवल्, रोह़ कऽ क्नब, हकएक रँ उज़ल लोकक पहर सँ बेसी संर्न िोइर छै क। 28 भ्इ लोकहन, िम सभ इसि्क जक्ँ पहरज्क संर्न छी। 29 ओहि समय मे जहिन् शेीेक अनुसन्न मे जन लेहनि्े आर् म्क अनुस्े जनल लोक केँ सर्बैर छल, रहिन् एखन सेिो अहछ। 30 रैयो धमपश्स् त की किै र अहछ? द्सी आ ओके बेट् केँ ब्िे हनक्हल हदयौक, क्ेण द्सीक बेट् मुक सीक बेट्क संग उते्हधक्ेी नहि िोयर। 31 रे ँ भ्इ लोकहन, िम सभ द्सीक सन् र्न नहि, बल् हक स् वरंतक संर्न छी। अधाय 5 1 रे ँ मसीि ज्हि सरंतर् सँ िमे् सभ केँ मुक कयलहन अहछ, र्हि मे द़र्पूवपक ठ़् ेह, आ फे​े द्सर्क जुआ मे नहि फँहस ज्उ। 2 दे खू, िम पौलुस अि्ँ सभ केँ किै र छी जे जँ अि्ँ सभक खरन् कयल ज्य रँ मसीि अि्ँ सभ केँ कोनो ल्भ नहि केर। 3 िम एक-एक आदमी केँ फे​े सँ गव्िी दै र छी जे खरन् कयल गेल अहछ जे ओ पूे् धमप-हनयमक प्लन केब्क ऋणी अहछ। 4 अि्ँ सभ मे सँ जे केओ धमप -हनयमक द्े् धम् ठिे्ओल गेल अहछ, अि्ँ सभक लेल मसीि कोनो अिप मे नहि अहछ। अि्ँ सभ कृप् सँ पहरर छी। 5 िम सभ आर् म्क द्े् हवश् व्स द्े् ध्हमपकर्क आश्क परीक् केै र छी। 6 हकएक रँ यीशु मसीि मे खरन् भेल् सँ कोनो फ्यद् नहि िोइर छै क आ ने खरन् नहि भेलैक। मुद् ओ हवश् व्स जे पेम सँ क्ज केै र अहछ। 7 अि्ँ सभ नीक जक्ँ दौ़लहँ । अि्ँ सभ केँ के ेोकलक जे अि्ँ सभ सतक आज् नहि म्नब? 8 जे अि्ँ सभ केँ बजबैर अहछ, रके् सँ ई ब्र नहि भेटैर अहछ। 9 कहन खमीे पूे् ग्ँ ठ केँ खमीे बन् दै र अहछ। 10 िमे् पभुक द्े् अि्ँ सभ पे भेोस् अहछ जे अि्ँ सभ कोनो आन ब्र नहि े्खब। 11 भ्इ लोकहन, जँ िम एखन धरे खरन्क पच्े केै र छी रँ िमे् एखनो सर्ओल हकएक भ’ ेिल अहछ? रखन कूसक अपे्ध सम्प भ' ज्इर छै क। 12 िम च्िै र छी जे ओ सभ रऽ कहट गेल ेिहि जे अि्ँ सभ केँ पे​े श्न केै र अहछ।


गल्री

13 भ्इ लोकहन, अि्ँ सभ मुखक लेल बज्ओल गेल छी। केवल सरवर्क उपयोग शेीेक अवसेक लेल नहि कर, बल् हक पेम सँ एक-दोसेक सेव् कर। 14 क्ेण, सभ धमप-हनयम एकहि वचन मे पूे् िोइर अहछ। अि्ँ अपन प़ोसी सँ अपन् जक्ँ पेम कर। 15 मुद् जँ अि्ँ सभ एक-दोसे केँ क्हट कऽ ख्इर छी रँ स्वध्न ेह जे एक-दोसेक न्श नहि भऽ ज्य। 16 रखन िम ई किै र छी जे , आर् म्क अनुस्े चलू, रखन अि्ँ सभ शेीेक व्सन् पूे् नहि केब। 17 हकएक रँ शेीेक इच् आर् म्क हवरद आ आर् म् शेीेक हवरद अहछ। 18 मुद् जँ अि्ँ सभ आर् म्क म्गपदशपन मे छी रँ अि्ँ सभ धमप-हनयमक अधीन नहि छी। 19 शेीेक क्ज सभ पगट भऽ गेल अहछ जे ई सभ अहछ। वहभच्े, वहभच्े, अशुदर्, क्मुकर्, 20 मूहरपपूज्, ज्दू -टोन्, घृण्, हवचलन, अनुकेण, कोध, कलि, हवदोि, प्खण, 21 ईष्प , ित्, नश्, मसी आ एिन रेिक ब्र, िम अि्ँ सभ केँ पहिने किै र छी, जेन् हक िम अि्ँ सभ केँ पहिने सेिो किने ेिी जे एिन क्ज केयवल् सभ पेमेश् वेक े्ज् य मे उते्हधक्ेी नहि िोयर। 22 मुद् आर् म्क फल अहछ पेम, आनन, श्खन, धैयप, कोमलर्, भल्ई, हवश् व्स। 23 नमर्, संयम। 24 मसीिक लोक सभ सेि आ व्सन् सभक संग शेीे केँ कूस पे च़् दे लक। 25 जँ िम सभ आर् म् मे जीबैर छी रँ आर् म् मे सेिो चलब। 26 िम सभ विप महिम्क इच् नहि कर, एक-दोसे केँ कोहधर कर आ एक-दोसे सँ ईष्प नहि कर।

10 रे ँ जहिन् िमे् सभ केँ अवसे भेटैर अहछ, रे ँ सभ मनुष्‍यक संग भल्ई केी, ख्स कऽ हवश् व्सक घेक लोक सभक लेल। 11 अि्ँ सभ दे खैर छी जे िम अि्ँ सभ केँ करेक पैघ पत अपन ि्ि सँ हलखने छी। 12 जे सभ शेीे मे नीक-नीक दे ख्बटी केऽ च्िै र छहि, ओ सभ अि्ँ सभ केँ खरन् केब्क लेल ब्ध केै र छहि। केवल एहि लेल जे मसीिक कूसक क्ेणे ँ हनक् सभ केँ सर्ओल नहि ज्य। 13 हकएक रँ खरन् केऽ वल् सभ सेिो धमप -हनयमक प्लन नहि केै र अहछ। मुद् अि्ँ सभक खरन् के्बऽ च्िै र छी, ज्हि सँ ओ सभ अि्ँ सभक शेीे पे घमंड केहि। 14 मुद् पेमेश् वे िमे् घमंड नहि केहि, हसव्य अपन पभु यीशु मसीिक कूस पे, हजनक् द्े् संस्े िमे् लेल कूस पे च़्ओल गेल अहछ आ िम संस्ेक लेल। 15 हकएक रँ मसीि यीशु मे ने खरन् कोनो क्ज आ ने खरन् नहि, बल् हक एकट् नव सृहष। 16 जे सभ एहि हनयमक अनुस्े चलैर छहि, हनक् सभ पे श्खन आ दय् आ पेमेश् वेक इस्एल पे ेिय। 17 आब सँ केओ िमे् पे​े श्न नहि केय, हकएक रँ िम अपन शेीे मे पभु यीशुक हनश्नी ध्ेण केै र छी। 18 भ्इ लोकहन, िमे् सभक पभु यीशु मसीिक कृप् अि्ँ सभक आर् म्क संग ेिय। आमीन। (ेोम सँ हलखल गल्री लोकहन केँ।)

अधाय 6 1 भ्इ लोकहन, जँ केओ दोष मे पह़ ज्यर, अि्ँ सभ जे आर् मक छी, रँ एिन वखक केँ नमर्क आर् म् सँ पुन्​्प हपर कर। अपन् पे हवच्े कर, किी ं अि्ँ सेिो पेीक् मे नहि पह़ ज्यब।” 2 अि्ँ सभ एक-दोसेक भ्े उठ्उ आ एहि रेिे ँ मसीिक वव्​् केँ पूे् कर। 3 जँ केओ अपन् केँ हकछु बु्ैर अहछ, जखन हक ओ हकछु नहि अहछ रँ ओ अपन् केँ धोख् दै र अहछ। 4 मुद् पतेक केओ अपन क्ज पेखय, रखन ओके् असगे अपन् मे आनखनर िोयर, दोसे मे नहि। 5 हकएक रँ पतेक मनुष्‍य अपन भ्े उठ्ओर। 6 जे केओ वचन मे हसख्ओल ज्इर अहछ, से सभ नीक ब्र मे हशक् दे हनि्े सँ गप केहि। 7 धोख् नहि ख्उ। पेमेश् वेक उपि्स नहि कयल ज्इर अहछ, हकएक रँ मनुष् य जे हकछु बोनर, से क्हट सेिो क्हट लेर। 8 जे केओ अपन शेीेक लेल बोहन लेर, से शेीे मे सँ हवन्श क्हट लेर। मुद् जे आर् म्क लेल बोहन लेर से आर् म् सँ अनन् र जीवन क्हट लेर। 9 नीक क्ज केब् मे ि्हक नहि ज्उ, हकएक रँ जँ बेिोश नहि भऽ ज्यब रँ उहचर समय पे फसल क्हट लेब।

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इफिफियों के

20 ओ मसीह मे काज कयलफि, जखि ओ हिका मृर् यु मे सँ जीफब कऽ स् वरव मे अपि दफहिा कार रानख दे लफि। 21 एफह संसार मे मात िफह, बल् फक आबय बला संसार मे सेहो, सभ राज् य, सामथ्व य, सामथ्व य आ पभुभ आ सभ िाम सँ बहर ऊपर। 22 ओ सभ फकछु अपि पएरक िीचाँ रानख कऽ मर् डलीक सभ वसुक मुनखया बिय दे लफि। 23 ओ ओकर शरीर अफछ, जे सभ केँ सभ केँ भरर दै र अफछ।

अध्य 1 1 पौलुस, परमेश् वरक इच् छा सँ यीशु मसीहक पेररर छी, इफिसुस मे रहफिहार पफवत लोक सभ आ मसीह यीशु मे फवश् वास रखफिहार सभ केँ। 2 हमरा सभक फपरा परमेश् वर आ पभु यीशु मसीहक अिुगह आ शान् अहाँ सभ पर हो। 3 हमरा सभक पभु यीशु मसीहक परमेश् वर आ फपरा परमेश् वरक धन होउ, जे मसीह मे स् वर्य स् थाि मे सभ आर् मक आशीष दऽ हमरा सभ केँ आशीवाव द दे लफि। 4 जफहिा ओ संसारक सृफ् सँ पफहिे अपिा सभ केँ अपिा मे चुि​िे छफथ, जाफह सँ हम सभ पेम मे हिका सामिे पफवत आ फिद्ष रहब। 5 यीशु मसीहक दारा अपि इचाक अिुसार अपिा लेल संराि गहर करबाक लेल हमरा सभ केँ पूवव फिधाव ररर कयलफि। 6 हिकर कृपाक मफहमाक पशंसा करबाक लेल, जाफह मे ओ हमरा सभ केँ फपयजि मे गहर कयलफि। 7 हिका दारा हिकर खूि दारा हमरा सभ केँ मोक भेटैर अफछ, पापक कमा, हिकर कृपाक धिक अिुसार। 8 एफह ररहे ँ ओ हमरा सभक समक सभ बुन् आ फववेकक पचुररा दे लफि। 9 ओ हमरा सभ केँ अपि इच् छाक रहसक बार हमरा सभ केँ बुझा दे लफथि, जेिा ओ अपिा मे जे पसीद बिौिे छफथ। 10 एफह लेल जे समयक पूरवराक समय मे ओ स् वरव मे आ पृथ् वी पर जे फकछु अफछ, सभ फकछु मसीह मे एक ठाम जमा कऽ सकफथ। एरय रक फक हिका मे सेहो। 11 जे अपि इचाक अिुसार सभ काज करै र अफछ, ओकर उदे दक अिुसार हमरा सभ केँ सेहो हिका मे उतराफधकार भेटल अफछ। 12 एफह लेल हम सभ हिकर मफहमाक सुफर होउ, जे पफहिे मसीह पर भरोसा केिे छलाह। 13 अहाँ सभ सर् य वचि, अपि उ्ारक सुसमाचार सुिलाक बाद हिका पर भरोसा केलहँ । 14 ई हमरा सभक उतराफधकारक उर्‍पफत अफछ, जाबर धरर फकिल समफतक उ्ार िफह भऽ जायर, जाफह सँ हिकर मफहमाक सुफर होयर। 15 रे ँ हमहँ सभ पभु यीशु मे अहाँ सभक फवश् वास आ सभ पफवत लोक सभक पफर पेमक फवषय मे सुिलहँ । 16 हमर पाथविा मे अहाँ सभक लेल धनवाद दे ब िफह छोडू। 17 जाफह सँ हमरा सभक पभु यीशु मसीहक परमेश् वर, जे मफहमाक फपरा छफथ, अहाँ सभ केँ हिका जाि मे बुन् आ परटीकररक आर् मा दे फथि। 18 अहाँ क बुन्क आँ नख पबु् भऽ जाय। जाफह सँ अहाँ सभ ई जाफि सकब जे हिका बजाओल रेलाक आशा की अफछ आ पफवत लोक सभ मे हिकर उतराफधकारक मफहमा के की धि अफछ। 19 हिकर सामरवक काजक अिुसार हमरा सभ जे फवश् वास करै र छी, हिका सभक लेल हिकर सामथ्व य की अतफधक अफछ।

अध्य 2 1 ओ अहाँ सभ केँ जीफवर कयलफि, जे अपराध आ पाप मे मरर रेल छलहँ । 2 पफहिे अहाँ सभ एफह संसारक कमक अिुसार चलैर छलहँ , हवाक शन्क पधाि, जे आर् मा आब आजा िफह मािय बला सि् राि सभ मे काज करै र अफछ। 3 हिका सभक बीच पफहिे हम सभ अपि शरीरक वासिा मे रप-सप करै र छलहँ आ शरीर आ मिक इचा केँ पूरा करै र छलहँ । आ सभाव सँ कोधक संराि छलाह, जेिा आि लोक। 4 मुदा परमेश् वर, जे दयाक धिी छफथ, हिकर बहर पेमक काररे,ँ जाफह सँ ओ हमरा सभ सँ पेम कयलफि। 5 जखि हम सभ पाप मे मरर रेल छलहँ रखिो मसीहक संर हमरा सभ केँ जीफवर कयलफि। 6 ओ हमरा सभ केँ एक संर ठाढ कयलफि आ मसीह यीशु मे स् वरव मे एक संर बैसा दे लफि। 7 आरामी युर मे ओ मसीह यीशुक दारा हमरा सभ पर अपि दयाक काररे ँ अपि कृपाक अतफधक धिक पदशवि करफथ। 8 फकएक रँ फवश् वासक काररे ँ अहाँ सभक उ्ार भेल अफछ। आ से अहाँ सभ सँ िफह, ई परमेश् वरक वरदाि अफछ। 9 काजक काररे ँ िफह, जाफह सँ केओ घमंड िफह करय। 10 फकएक रँ हम सभ हिकर कारीरर छी, मसीह यीशु मे िीक काज करबाक लेल सृफजर छी, जे परमेश् वर पफहिे फिधाव ररर कएिे छफथ जे हम सभ ओफह मे चलब। 11 रे ँ मोि राखू जे अहाँ सभ पफहिे सँ शरीर मे रैर-यहदी छी, जे हाथ सँ बिल शरीर मे खरिा िफह कफह रहल छी। 12 ओफह समय मे अहाँ सभ इसाएलक रा्​् सँ परदे शी आ पफरजाक वाचा सँ परदे शी छलहँ , आ संसार मे कोिो आशा िफह आ परमेश् वरक फबिा रहब। 13 मुदा आब मसीह यीशु मे अहाँ सभ जे कखिो दू र रहै र छलहँ , मसीहक खूिक काररे ँ िजदीक आफब रेल छी। 14 फकएक रँ ओ हमरा सभक शान् छफथ, जे दु िू रोटे केँ एक बिा दे लफि आ हमरा सभक बीचक बीचक बीचक दे बाल केँ रोफड दे लफि। 15 ओ अपि शरीर मे शतुरा केँ समाप कऽ दे लफि, आजाफियमक फियम केँ, जे फियम मे समाफहर अफछ। फकएक रँ ओ अपिा मे दू टा मे सँ एक िव मिुष्‍य बिबैर छफथि। 16 ओ कूस पर एक शरीर मे दु िू रोटे केँ परमेश् वरक संर मेल फमलाप करफथ। 17 ओ सभ आफब कऽ अहाँ सभ केँ दू र-दू र मे रहफिहार आ लर मे रहफिहार सभ केँ शान्क पचार कयलफि। 18 हिका दारा हम दु िू रोटे एक आर् मा दारा फपरा लर पहँ फच सकैर छी। 19 आब अहाँ सभ आब परदे शी आ परदे शी िफह छी, बल् फक पफवत लोक सभ आ परमेश् वरक घरक संरी-साथी छी।

151


इफिफसयों के

20 ओ सभ पेररर आ पवक् रा सभक िीवं पर बिल अफछ, जाफह मे यीशु मसीह सयं कोि-कोिक पाथर छफथ। 21 हिका मे सभ भवि एक संर बफि कऽ पभु मे पफवत मि् फदर बिैर अफछ। 22 अहाँ सभ सेहो आर् माक दारा परमेश् वरक फिवासक लेल एक संर बिल छी।

21 मसीह यीशुक दारा मर् डलीक मर् डली मे सभ युर मे , अंरहीि संसार मे हिकर मफहमा होअय। आमीि। अध्य 4 1 रे ँ हम पभुक कैदी अहाँ सभ सँ फविरी करै र छी जे अहाँ सभ ओफह आहािक योग चलब। 2 सभ िमरा आ िमराक संर, धैयवक संर पेम मे एक-दोसर केँ सहिशील रह। 3 आर् माक एकरा केँ शान्क बंधि मे रखबाक पयास कर। 4 एक शरीर आ एक आर् मा अफछ, जेिा अहाँ सभ अपि बजाओल रेल आशा मे बजाओल रेल छी। 5 एक पभु, एक फवश् वास, एक बपफरस् मा। 6 एकटा परमेश् वर आ सभक फपरा, जे सभ सँ ऊपर छफथ, सभ सँ ऊपर आ अहाँ सभ मे छफथ। 7 मुदा मसीहक वरदािक िाप मे हमरा सभ मे सँ पतेक केँ कृपा कयल रेल अफछ। 8 रे ँ ओ कहै र छफथ, “जखि ओ ऊँच पर चढलाह रँ बंदी बिा कऽ मिुष् य सभ केँ वरदाि दे लफि।” 9 (आब जखि ओ चफढ रेलाह, रखि की अफछ जे ओ पफहिे पृथ् वीक फिचला भार मे उररलाह? 10 जे िीचाँ उररल अफछ से वैह अफछ जे समस आकाश सँ बहर ऊपर चढल छल जाफह सँ ओ सभ फकछु केँ भरर सकय।” 11 ओ फकछु रोटे केँ पेररर सभ केँ दे लफथि। आ फकछु , भफवषव्ा। आ फकछु , सुसमाचार पचारक। आ फकछु , पादरी आ फशकक; 12 पफवत लोक सभ केँ फस् करबाक लेल, सेवाक काज करबाक लेल आ मसीहक शरीरक फिमाव र करबाक लेल। 13 जाबर धरर हम सभ फवश् वास आ परमेश् वरक पुतक जािक एकरा भऽ कऽ मसीहक पूरवराक कदक िाप मे फस् मिुष् य लर िफह पहँ चब। 14 आब हम सभ आब संराि िफह भऽ जायब, जे फशकाक हर हवाक संर मिुखक छल-पपंच आ धूरव छल-पपंचक काररे ँ ओ सभ धोखा दे बाक लेल परीका मे पडल रहै र अफछ। 15 मुदा पेम मे सर् य बजैर छी आ सभ बार मे हिका मे बढब, जे फसर छफथ, मसीह। 16ओकरा सँ समस शरीर एक दोसरा सँ जोफड कऽ हर जोडक आपूफरव सँ संकुफचर भऽ कऽ पतेक अंरक पभावक अिुसार शरीरक वृन् करै र अफछ आ पेम मे अपिा केँ संसाररर करै र अफछ। 17 एफह लेल हम ई बार कहै र छी आ पभु मे रवाही दै र छी जे आब अहाँ सभ ओफहिा िफह चलब जेिा आि रैर-यहदी सभ अपि वथव फवचार मे चलैर छफथ। 18 हिका सभक हदयक आनरराक काररे ँ ओ सभ परमेश् वरक जीवि सँ दू र भऽ रेलाह। 19ओ सभ अशु्रा सँ अपिा केँ कामुकरा मे समफपवर कऽ रेल छफथ आ लोभक संर सभटा अशु्रा करबाक लेल। 20 मुदा अहाँ सभ मसीह केँ एिा िफह फसखलहँ । 21 जँ अहाँ सभ हिकर बार सुिलहँ आ हिका दारा फसखाओल रेल छी, जेिा यीशु मे सर् य अफछ। 22 अहाँ सभ बूढ-पुराि लोक केँ छोफड फदयौक, जे छल-कपटक वासिा सभक काररे ँ ि् भऽ रेल अफछ। 23 आ अपि मिक आर् मा मे िव भऽ जाउ।

अध्य 3 1 एफह लेल हम पौलुस, जे अहाँ सभ रैर-यहदी सभक लेल यीशु मसीहक कैदी छी। 2 जँ अहाँ सभ परमेश् वरक कृपाक पबंधक फवषय मे सुि​िे छी जे हमरा अहाँ सभ केँ दे ल रेल अफछ। 3 ओ परटीकररक दारा हमरा एफह रहसक जािकारी दे लफि। (जेिा हम पफहिे फकछु शब मे फलखिे रही, 4 एफह ररहे ँ अहाँ सभ जखि पढब रँ मसीहक रहस मे हमर जाि बुफझ सकब। 5 ई बार आि युर मे मिुष् यक स्ाि सभ केँ िफह कहल रेल छल, जेिा फक आब ओकर पफवत पेररर आ पवक् रा सभ केँ आर् मा दारा परट कयल रेल अफछ। 6 एफह ररहे ँ रैर-यहदी सभ सह-उतराफधकारी आ एकफह शरीरक आ सुसमाचारक दारा मसीह मे हिकर पफरजाक भारीदार बिय। 7 परमेश् वरक ओफह कृपाक वरदािक अिुसार जे हम हिकर सेवक बिौलहँ । 8 हम, जे सभ पफवत लोक सभ मे सँ छोट छी, हमरा पर ई कृपा दे ल रेल अफछ जे हम रैर-यहदी सभक बीच मसीहक अिजाि धिक पचार करी। 9 आ सभ लोक केँ ई दे खबाक लेल जे ओ रहसक संरफर की अफछ, जे संसारक पाराफह सँ परमेश् वर मे िुकायल अफछ, जे यीशु मसीहक दारा सभ फकछु क सृजि कयलफि। 10एफह लेल जे आब स् वर्य स् थाि सभक राज् य आ अफधकार सभ केँ मर् डलीक दारा परमेश् वरक अिेक बुन्क जाि भेटय। 11 ओफह अि् उदे दक अिुसार जे ओ हमरा सभक पभु मसीह यीशु मे बिौिे छलाह। 12 हिका पर फवश् वासक काररे ँ हमरा सभ केँ हिका पर धैयव आ फवश्‍वासक संर पवेश भेटैर अफछ। 13 रे ँ हम चाहै र छी जे अहाँ सभ अहाँ सभक लेल हमर केश मे बेहोश िफह होउ, जे अहाँ क मफहमा अफछ। 14 एफह लेल हम अपि पभु यीशु मसीहक फपराक समक ठे हि टे किे छी। 15 स् वरव आ पृथ् वीक समस वंशक िाम हिका सँ भेल अफछ। 16 ओ अहाँ सभ केँ अपि मफहमाक धिक अिुसार अपि आर् माक दारा अपिा भीररक मिुष् य मे सामथ्व य सँ बल दे बऽ दे फथि। 17 जाफह सँ मसीह फवशास सँ अहाँ सभक हदय मे रहफथ। फक अहाँ सभ पेम मे जफड-जफड आ जमीिी भ' क'। 18 सभ पफवत लोकक संर ई बुफझ सकब जे चौडाई, लमाई, रहीरं आ ऊँचाई की अफछ। 19 अहाँ सभ परमेश् वरक समस पूरवरा सँ भरल मसीहक पेम केँ जाफि कऽ जे जाि सँ बेसी अफछ। 20 जे हमरा सभ मे जे सामथ्व य काज करै र अफछ, ओकर अिुसार जे फकछु माँ रैर छी वा सोचैर छी राफह सँ बेसी काज करबा मे सकम अफछ।

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इफिफसयों के

24 अहाँ सभ िव मिुष् य केँ पफहरब, जे परमेश् वरक अिुसार धाफमवकरा आ सर् य पफवतरा मे सृफजर अफछ। 25 रे ँ झूठ बाजब छोफड, एक-एक रोटे अपि पडोसी सँ सर् य बाजू, फकएक रँ हम सभ एक-दोसरक अंर छी। 26 अहाँ सभ कोफधर रह आ पाप िफह कर। 27 आ िे शैराि केँ जरह फदअ। 28 चोरी केफिहार आब चोरी िफह करय, बल् फक ओ अपि हाथ सँ िीक काज कऽ कऽ मेहिफर करय, जाफह सँ ओकरा जरररमंद केँ दे बाक चाही। 29 अहाँ सभक मुँह सँ कोिो भ् रप िफह फिकलू , बल् फक ओफह बार सँ फिकलय जे िीक बिय, जाफह सँ ओ सुिफिहार सभक अिुगहक सेवा करय। 30 परमेश् वरक पफवत आर् मा केँ दु खी िफह कर, जाफह सँ अहाँ सभ केँ मोकक फदिक लेल मोहर लराओल रेल अफछ। 31 अहाँ सभ सँ सभ ररहक कटु रा, कोध, कोध, हला आ दु ष् ट बाजब, सभ दु ष् टराक संर दू र भऽ जाय। 32 अहाँ सभ एक-दोसर पर दया कर, कोमल हदय सँ एकदोसर केँ कमा कर, जेिा परमेश् वर मसीहक काररे ँ अहाँ सभ केँ कमा कयलफि।

17 रे ँ अहाँ सभ बुन्माि िफह बिू, बल् फक पभुक इचा की अफछ से बुझ।ू 18 मफदराक िशा मे िफह रह, जाफह मे अफरशयोन् अफछ। मुदा आर् मा सँ भरल रह। 19 अहाँ सभ भजि, सोत आ आर् फमक रीर मे अपिा आप सँ रप कर, पभुक लेल अपि हदय मे राफब कऽ रार-राि कर। 20 अपि पभु यीशु मसीहक िाम सँ सभ फकछु क लेल सफदखि परमेश् वर आ फपरा केँ धनवाद दै र रह। 21 परमेश् वरक भय मे एक-दोसरक अधीि रह। 22 पती सभ, पभुक समक अपिा पफरक अधीि रह। 23 पफर पतीक फसर होइर छफथ, जेिा मसीह मर् डलीक फसर छफथ। 24 एफह लेल जेिा मर् डली मसीहक अधीि अफछ, रफहिा स् ती सभ सभ काज मे अपि पफरक अधीि रहफथ। 25 पफर सभ, अहाँ सभ अपि पती सभ सँ पेम कर, जेिा मसीह सेहो मर् डली सँ पेम कयलफि आ ओकरा लेल अपिा केँ समफपवर कयलफि। 26 जाफह सँ ओ वचि दारा पाफि सँ धो कऽ पफवत कऽ कऽ शु् करफथ। 27 जाफह सँ ओ अपिा केँ एकटा रौरवशाली मर् डलीक रप मे पसुर कऽ सकफथ, जाफह मे कोिो दार वा झुर् वा एहि कोिो बार िफह हो। मुदा पफवत आ फिद्ष हो। 28 रफहिा पुरख केँ अपि स् ती केँ अपि शरीर जकाँ पेम करबाक चाही। जे अपि पती सँ पेम करै र अफछ, से अपिा सँ पेम करै र अफछ। 29 फकएक रँ एखि धरर केओ अपि शरीर सँ घृरा िफह केलक। मुदा पभु मर् डली जकाँ ओकरा पोसैर अफछ आ पोसैर अफछ। 30 हम सभ हिकर शरीरक अंर छी, हिकर शरीर आ हडीक अंर छी। 31 एफह काररे ँ पुरष अपि बाप-मारा केँ छोफड कऽ अपि पतीक संर फमलर आ दु िू रोटे एक शरीर भऽ जेराह। 32 ई एकटा पैघ रहस अफछ, मुदा हम मसीह आ मर् डलीक फवषय मे कहै र छी। 33 रैयो अहाँ सभ मे सँ पतेक अपि स् ती केँ अपिा जकाँ पेम कर। आ पती दे खैर छफथ जे ओ अपि पफरक आदर करै र छफथ।

अध्य 5 1 रे ँ अहाँ सभ फपय स्ाि जकाँ परमेश् वरक अिुयायी बिू। 2 पेम मे चलू, जेिा मसीह हमरा सभ सँ पेम कयलफि, आ हमरा सभक लेल अपिा केँ परमेश् वरक लेल बफलदाि आ बफलदाि मे सुरन्र सुर्क रप मे दे लफि। 3 मुदा वफभचार आ सभ अशु्रा वा लोभ केँ एको बेर अहाँ सभ मे िफह राखल जाय, जेिा पफवत लोक सभ केँ होइर छै क। 4 िे रंदरी, िे मूखवरापूरव रप, आ िे मजाक, जे कोिो अिुकूल िफह अफछ, बल् फक धनवाद दे ब। 5 अहाँ सभ ई जिैर छी जे मसीह आ परमेश् वरक राज् य मे कोिो वेदा वा अशु् आ लोभी आ मूफरवपूजक केँ कोिो उतराफधकार िफह भेटैर छै क। 6 केओ अहाँ सभ केँ वथव बार सँ धोखा िफह फदयौक, फकएक रँ एफह बार सभक काररे ँ परमेश् वरक कोध आजा िफह मािय बला सि् राि सभ पर अबैर अफछ। 7 रे ँ अहाँ सभ हिका सभक संर सहभारी िफह बिू। 8 अहाँ सभ कफहयो अनार मे छलहँ , मुदा आब पभु मे इजोर छी। 9 (फकएक रँ आर् माक िल सभ भलाई आ धाफमवकरा आ सर् य मे अफछ।) 10 पभुक लेल जे सीकायव अफछ से परखल जाउ। 11 अनारक फिषल काज मे संरफर िफह राखू , बल् फक ओकरा सभ केँ डाँ फट फदयौक। 12 फकएक रँ एफह बारक रप करब सेहो लाजक बार अफछ जे हिका सभक फवषय मे रुप रप सँ कयल रेल अफछ। 13 मुदा जे फकछु डाँ टल जाइर अफछ से इजोर दारा परट होइर अफछ, फकएक रँ जे फकछु परट करै र अफछ से इजोर अफछ। 14 रे ँ ओ कहै र छफथ, “हे सुरल लोक जाफर जाउ, आ मृर् यु मे सँ जीफब जाउ, रखि मसीह अहाँ केँ इजोर दे राह।” 15 एफह लेल दे खब जे अहाँ सभ मूखव जकाँ िफह, बल् फक बुन्माि जकाँ सावधािीपूववक चलैर रह। 16 समय केँ उ्ार कर, फकएक रँ फदि अधलाह अफछ।

अध्य 6 1 बचा सभ, पभु मे अपि मारा-फपराक आजा मािू, फकएक रँ ई उफचर अफछ। 2 अपि फपरा आ मायक आदर कर। (जे पफरजाक संर पफहल आजा अफछ;) 3 जाफह सँ रोहर िीक होअय आ अहाँ पृथ् वी पर बेसी फदि जीफवर रहब। 4 हे फपरा सभ, अपि बचा सभ केँ कोफधर िफह कर, बल् फक पभुक पालि-पोषर आ उपदे श मे ओकरा सभ केँ पालि-पोषर कर। 5 हे दास सभ, जे सभ अहाँ सभक माफलक छफथ, रकरा सभक आजाकारी भऽ कऽ मसीहक आजाकारी रह। 6 पुरषक पसरराक रप मे आँ नखक सेवा मे िफह। मुदा मसीहक सेवक जकाँ परमेश् वरक इच् छा केँ हदय सँ पालि करै र छी।

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इफिफसयों के

7 सदाविा सँ सेवा करब, जेिा पभुक सेवा करब, मुदा मिुष् यक िफह। 8 ई जाफि कऽ जे केओ जे फकछु िीक काज करर, से ओकरा पभु सँ भेटरैक, चाहे ओ दास हो वा सरंत। 9 अहाँ सभ माफलक सभ, धमकाबय केँ सहि करै र हिका सभक संर वैह काज कर। आ िे हिका संर वन्क आदर होइर छफि। 10 अंर मे, हमर भाइ लोकफि, पभु मे आ हिकर सामथ्व य मे बलवाि बिू। 11 परमेश् वरक पूरा कवच पफहरर फलअ जाफह सँ अहाँ सभ शैरािक छल-पपंचक फवर् ठाढ भऽ सकब। 12 हम सभ खूि-मां स सँ िफह, बल् फक राज् य-शास् य सभक फवर्, एफह संसारक अि् हारक शासक सभक फवर् आ आर् मक दु ष् टराक फवर् ऊँच साि पर कुशी करै र छी। 13 रे ँ परमेश् वरक समस कवच अपिा लर ल’ फलअ जाफह सँ अहाँ सभ अधलाह फदि मे सामिा कऽ सकब आ सभ फकछु कऽ कऽ ठाढ भऽ सकब। 14 रे ँ अपि कमर सर् य सँ बानल आ धाफमवकराक छारी पफहरिे ठाढ रह। 15 अहाँ सभक पएर शान्क सुसमाचारक रैयारीक लेल जूरा पफहरिे रहफथ। 16 सभ सँ बेसी फवश् वासक िाल लऽ फलअ, जाफह सँ अहाँ सभ दु ष् ट लोकक सभ आफर सि बार केँ बुझा सकब। 17 उ्ारक हे लमेट आ आर् माक रलवार, जे परमेश् वरक वचि अफछ, लऽ फलअ। 18 आर् मा दारा सभ पाथविा आ फविरीक संर सफदखि पाथविा करै र रह, आ सभ पफवत लोकक लेल सभ धैयव आ फविरीक संर ओफह बारक पफर जाररक रह। 19 हमरा लेल ई बार दे ल जाय जे हम फिभ्करापूववक अपि मुँह खोफल कऽ सुसमाचारक रहस केँ जाफपर कऽ सकब। 20 एफह लेल हम बान मे राजदू र छी, जाफह सँ हम ओफह मे फिभ्करापूववक बाजब, जेिा हमरा कहबाक चाही। 21 मुदा अहाँ सभ सेहो हमर काज आ हमर काज-धंधा केँ बुफझ सकब, रे ँ फरकीकुस, जे फपय भाय आ पभु मे फवश् वासयोर् य सेवक छफथ, अहाँ सभ केँ सभ बार बराओर। 22 हम हिका एफह लेल पठौिे छी जे अहाँ सभ हमरा सभक काज बुफझ सकब आ ओ अहाँ सभक मोि केँ सानभिा दे फथ। 23 फपरा परमेश् वर आ पभु यीशु मसीहक फदस सँ भाय सभ केँ शान् आ फवश् वासक संर पेम भेटय। 24 जे सभ अपि पभु यीशु मसीह सँ फिशलरा सँ पेम करै र छफथ, हिका सभक संर कृपा हो। आमीि। (रोम सँ फलखल इफिफसयों केँ, फरनखकस दारा।)

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फिफिप्पिय के अध्प 1 1 यीशु मसीहक सेवक पौलुस आ तिमुतियुस, मसीह यीशु मे जे सभ पतवत लोक छति, जे सभ तितलपी मे छति, हुकक सभक संग तिशप आ डीकु सभक संग। 2 हमरक सभक तपिक परमेश् वर आ पभु यीशु मसीहक अु​ुगह आ शकन् अहकँ सभ पर भेटय। 3 हम अहकँ सभक सरम करै ि अपु परमेश् वर केँ धनवकव वै ि छी। 4 अहकँ सभक लेल हमर हरे क पकिाुक मे सतवखु आुन सँ तवुिी करै ि छी। 5 पतहल तवु सँ एखु धरर सुसमकचकर मे अहकँ सभक संगति अतछ। 6 एतह िकि पर तवश्‍वकस अतछ जे जे केओ अहकँ सभ मे ुीक ककज शुर केुे अतछ, से यीशु मसीहक तवु धरर पूरक करि। 7 जतहुक अहकँ सभ केँ ई सोचि हमरक लेल उतचि अतछ, तकएक िँ हमरक मोु मे अहकँ सभ अतछ। हमर िकन मे आ सुसमकचकरक रकक आ पुत् मे अहकँ सभ हमर अु​ुगहक भकगीवकर छी। 8 परमेश् वर हमर गवकही छति जे हम यीशु मसीहक आं ि मे अहकँ सभक लेल किेक िकडै ि छी। 9 हम ई पकिाुक करै ि छी जे अहकँ सभक पेम जकु आ सभ ु् यकय मे आओर िेसी िढय। 10 जकतह सँ अहकँ सभ ुीक िकि केँ ुीक लकगय। जकतह सँ मसीहक तवु धरर अहकँ सभ तुशल आ तुव्द रहि। 11 हम सभ धकतमाकिकक िल सँ भरल छी जे यीशु मसीहक दकरक भेटल अतछ, जकतह सँ परमेश् वरक मतहमक आ सुति होयि। 12 भकइ लोकतु, हम चकहै ि छी जे अहकँ सभ ई िुति ली जे हमरक संग जे घटुक घटल अतछ से सुसमकचकर केँ आगू िढे िक मे िेसी पडल अतछ। 13 एतह िरहे ँ मसीह मे हमर िंधु सभ महल आ आु सभ ठकम पगट भऽ गेल अतछ। 14 हमर िकन सँ पभु मे िहिो भकय सभ आशस भऽ कऽ तुभ्क वचु िजिक मे िहि िेसी सकहसी छति। 15 तकछु गोटे ईरका आ िगडक सँ मसीहक पचकर करै ि छति। आ तकछु सदकवुकक सेहो। 16 केओ वकव-तववकवक पचकर करै ि अतछ, ईमकुवकरी सँ ुतह, आ ई सोतच कऽ जे हमर िकन मे केश िढकि। 17 मुवक वोसर पेमक ककरमे ँ ई जकतु जे हम सुसमकचकरक रककक लेल रकखल गेल छी। 18 िखु की? मुवक, सभ िरहे ,ँ चकहे ओ ढोंग मे हो वक सत मे, मसीहक पचकर कयल जकइि अतछ। हम ओतह मे आुननि छी, हँ , आ आुननि होयि। 19 हम जुैि छी जे ई अहकँ सभक पकिाुक आ यीशु मसीहक आि् मकक आवकु-पवकुक दकरक हमर उदकर तवस घुरर जकयि। 20 हमर ई आशक आ आशकक अु​ुसकर जे हम कोुो िकि मे लकज ुतह करि, िल् तक सभ तवु जककँ सभ तुभ्किक सँ आि मसीह सेहो हमर शरीर मे मतहमकमंतडि भऽ जेिकह, चकहे ओ जीवु सँ हो वक मृतुक दकरक। 21 हमरक लेल जीतवि रहि मसीह अतछ आ मरि लकभ अतछ।

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22 मुवक जँ हम शरीर मे जीिैि छी िँ ई हमर पररशमक िल अतछ। 23 हम वू गोटे क िीच संकट मे पतड रहल छी, जकतह सँ हम चतल जकयि आ मसीहक संग रहि। जे कही ं ुीक अतछ : १. 24 िैयो अहकँ सभक लेल शरीर मे रहि िेसी आवशक अतछ। 25 हमरक ई तवशकस अतछ जे हम अहकँ सभक संग रहि आ अहकँ सभक संग रहि, जकतह सँ अहकँ सभक आगू िढि आ तवशकसक आुन भेटि। 26 एतह लेल जे हम अहकँ सभ लग िेर सँ आति कऽ हमरक लेल यीशु मसीह मे अहकँ सभक आुन िेसी भऽ जकय। 27 मकत अहकँ सभक गप-सप ओतहुक होउ जेुक मसीहक सुसमकचकर सु​ुिक मे अिैि अतछ, जकतह सँ हम अहकँ सभ केँ वे नख कऽ आति कऽ ुतह रहि वक ुतह िँ अहकँ सभक ककज सुतु सकि जे अहकँ सभ एक आि् मक मे दढिकपूवाक ठकढ भऽ कऽ तवश् वकसक लेल एक-एक मु सँ िगडक करै ि छी सुसमकचकर के; 28 अहकँ सभक तवपकी सभ सँ कोुो आिंतकि ुतह भऽ गेलहँ । 29 मसीहक लेल अहकँ सभ केँ ई अतधककर वे ल गेल अतछ जे अहकँ सभ हुकक पर तवश् वकस करि मकत ुतह, िल् तक हुकक लेल कद् ट भोगि सेहो। 30 अहकँ सभ हमरक मे जे िगडक वे खलहँ आ आि हमरक मे रहिकक िकि सु​ुैि छी। अध्प 2 1 जँ मसीह मे कोुो सकन्ुक भेटैि अतछ, जँ पेम सँ कोुो सकन्ुक भेटैि अतछ, आ आि् मकक संगति, जँ कोुो आं ि आ वयक। 2 अहकँ सभ हमर आुन केँ पूरक कर जे अहकँ सभ एकतह िरहक पेम रकखू, एक तवचकर आ एक तवचकरक संग रहि। 3 िगडक-िंिट वक विाक घमंड सँ कोुो ककज ुतह होअय। मुवक ुमिक मे पतेक वोसर केँ अपुक सँ ुीक मकुय। 4 पतेक केओ अपु िकि पर ुतह, िल् तक वोसरक िकि पर सेहो वे खू। 5 ई मु अहकँ सभ मे रह जे मसीह यीशु मे सेहो छल। 6 ओ परमेश् वरक रप मे रतह कऽ परमेश् वरक िरकिर रहि डकैिी ुतह िुिलतु। 7 मुवक अपुक केँ कोुो पतिति​ि ुतह कऽ कऽ ुोकरक रप धकरम कऽ लेलक आ मु​ुद् य सभक रप मे िुल। 8 मु​ुद् यक रप मे पकति ओ अपुक केँ ुम भऽ गेलकह आ कूस पर मरिक धरर मृतु धरर आजकककरी भऽ गेलकह। 9 एतह लेल परमेश् वर हुकक िहि ऊपर उठौलतु आ सभ ुकम सँ िेसी ुकम वे लतु। 10 एतह सँ यीशुक ुकम पर सभ ठे हु िुकय, स् वगा मे, पृि् वी मे आ पृि् वीक ुीचकँ क सभ ठे हु। 11 आ सभ जीभ ई िकि सीककर करति जे यीशु मसीह पभु छति, जकतह सँ तपिक परमेश् वरक मतहमक होयि। 12 िे ँ हे हमर तपयजु सभ, जेुक अहकँ सभ सतवखु आजक मकुैि रहलहँ , मकत हमर सकत्न मे ुतह, िल् तक आि हमर अु​ुपन्ति मे िहि िेसी, भय आ ककँ पैि अपु उदकरक ककज कर। 13 तकएक िँ परमेश् वर छति जे अहकँ सभ मे अपु इच् छक आ मु मे ककज करिकक लेल ककज करै ि छति। 14 सभ ककज तिुक कोुो गु​ुगु​ुकहट आ तववकव केुे कर।


तितलनपयों के

15 एतह लेल जे अहकँ सभ परमेश् वरक पुत सभ तुव्द आ तुव्द भऽ जकउ, जकरक मे अहकँ सभ एकटक कुतटल आ तवकृि जकतिक िीच मे तुव्द आ तुव्द भऽ जकउ। 16 जीवुक वचु केँ आगू िढिैि रह। मसीहक तवु मे हम आुननि रहि जे हम विा ुतह वौडलहँ आ ुे विा पररशम केलहँ । 17 हँ, जँ हम अहकँ सभक तवश् वकसक ितलवकु आ सेवक पर चढकओल जकयि िँ हम अहकँ सभक संग आुननि आ आुननि छी। 18 एतह लेल अहकँ सभ सेहो हमरक संग आुननि होउ आ हमरक संग आुननि होउ। 19 मुवक हम पभु यीशु पर भरोसक करै ि छी जे ओ सभ जन्ये तिमुतियुस केँ अहकँ सभ लग पठक वे िकह, जकतह सँ हमहँ अहकँ सभक न्ति केँ िुति कऽ सकन्ुक पकति सकि। 20 तकएक िँ हमरक कोुो एहु तवचकरक केओ ुतह अतछ जे सकभकतवक रपे ँ अहकँ क अव्कक तच्क करि। 21 तकएक िँ सभ अपु-अपु चीजक खोज करै ि अतछ, ुतह तक यीशु मसीहक अतछ। 22 मुवक अहकँ सभ हुकर ई पमकम जुैि छी जे तपिकक संग िेटक जककँ हमरक संग सुसमकचकर मे सेवक कयलतु। 23 िे ँ हम आशक करै ि छी जे जतहुक हम वे खि जे ई हमरक संग कोुक चलि, हुकक िुर् पठक वे ि। 24 मुवक हम पभु पर भरोसक करै ि छी जे हमहँ जन्ये आति जकयि। 25 िैयो हम ई जररी िुिलहँ जे हमर भकय इपकफोवीिुस आ शतमक संगी आ संगी सैतुक, मुवक अहकँ क वू ि आ हमर अभकवक सेवक करयवलक केँ अहकँ सभ लग पठकिी। 26 ओ अहकँ सभक लेल िरसैि छलकह आ भकरी पतड गेल छलकह, तकएक िँ अहकँ सभ सु​ु​ुे छलहँ जे ओ िीमकर छति। 27 ओ मृि् युक समीप िीमकर छलकह, मुवक परमेश् वर हुकक पर वयक कयलतु। आ खकली हुकक पर ुतह, िल् तक हमरक पर सेहो, जकतह सँ हमरक वु ख पर वु ख ुतह भ’ जकय। 28 िे ँ हम हुकक आओर सकवधकुीपूवाक पठक वे तलयतु जे जखु अहकँ सभ हुकक िेर सँ वे खि िँ अहकँ सभ आुननि होयि आ हमरक कम वु खी भऽ जकय। 29 िे ँ हुकक पभु मे िहि आुन सँ गहम कर। आ एहु पति​िक मे रकखि: 30 तकएक िँ मसीहक ककजक ककरमे ँ ओ मृतुक समीप छलकह, आ अहकँ सभक सेवकक अभकव केँ पूरक करिकक लेल अपु जीवुक कोुो परवकह ुतह कयलतु।

4 यदतप हमरक शरीर पर सेहो भरोसक भऽ सकैि अतछ। जँ केओ ई सोचैि अतछ जे ओकरक लग एहु अतछ जे ओकरक शरीर पर भरोसक क' सकैि अतछ, ि' हम िेसी। 5 आठम तवु इसकएलक वंश मे , तिनकमीु गोत मे, इबकुी मे सँ इबकुी मे सँ खिुक कयल गेल। धमा-तुयमक तवदय मे िररसी छी। 6 उतकहक तवदय मे, मम् डली केँ सिकिैि। धमा-तुयम मे जे धकतमाकिक अतछ िकरक छु ति कऽ तुव्द। 7 मुवक जे तकछु हमरक लेल लकभ छल, िकरक हम मसीहक ककरमे ँ हकतु मकुैि छलहँ । 8 तुसंवेह, हम अपु पभु मसीह यीशुक जकुक उतमिकक ककरमे ँ सभ तकछु केँ हकतु मकत िुिैि छी। 9 हुकक मे हमर अपु धकतमाकिक ुतह, जे धमा -तुयम सँ तुकलैि अतछ, िल् तक मसीह पर तवश् वकसक ककरमे ँ जे धकतमाकिक तवश् वकस दकरक परमेश् वर सँ भेटैि अतछ। 10 हम हुकक आ हुकर पु​ुरुकुक सकमरा आ हुकर क्क संगति केँ हुकर मृतुक अु​ुरप िुकओल जक सकैि छी। 11 जँ कोुो िरहे ँ हम मृि् युक पु​ुरुकु मे पहँ तच सकि। 12 जँ हम पतहुे सँ पकष कऽ लेुे छी आ ुे तसद छी, मुवक हम ओकर पकछकँ चलैि छी, जकतह सँ हम ओतह िकि केँ िुति सकि जकरक लेल हम मसीह यीशु केँ पकडुे छी। 13 भकइ लोकतु, हम अपुक केँ पकडुे ुतह िुिैि छी, मुवक हम ई एकटक ककज करै ि छी, पकछूक िकि सभ केँ तिसरर कऽ आगूक िकि सभ धरर पहँ तच जकइि छी। 14 हम मसीह यीशु मे परमेश् वरक उच आहकुक पुरसकरक लेल तुशकु तवस िढै ि छी। 15 िे ँ हम सभ जे सभ तसद छी, से सभ एतह िरहे ँ सोचू। 16 िैयो, जकतह मे हम सभ पतहुे सँ पहँ तच गेल छी, ओतह तुयमक अु​ुसकर चलि आ एकतह िकि पर तवचकर करी। 17 भकइ लोकतु, एक संग हमर अु​ुयकयी िुू आ जे सभ चलैि छति, िकरक सभ केँ ओतहुक तचननि कर जेुक अहकँ सभ हमरक सभ केँ उवकहरम िुक रहल छी। 18 (तकएक िँ िहिो लोक चलैि छति, तजुकक सभक िकरे मे हम अहकँ सभ केँ िेर-िेर कहुे छी आ आि अहकँ सभ केँ ककुैिककुैि कहै ि छी जे ओ सभ मसीहक कूसक शतु छति। 19 जकर अंि तवुकश अतछ, जकर परमेश् वर हुकक सभक पेट छति, आ हुकर मतहमक हुकक सभक लकज मे छतु, जे सकं सकररक िकि सभ पर तचंिु करै ि छति।” 20 तकएक िँ हमरक सभक गप स् वगा मे अतछ। हम सभ उदकरकिका पभु यीशु मसीह केँ किय सँ िकैि छी। 21 ओ हमरक सभक ुीच शरीर केँ िवतल वे ि, जकतह सँ ओ अपु गौरवशकली शरीरक समकु िुय, जकतह सँ ओ सभ तकछु केँ अपुक अधीु कऽ सकैि अतछ।

अध्प 3 1 अंि मे, हमर भकइ लोकतु, पभु मे आुननि होउ। अहकँ सभ केँ सेहो वैह िकि तलखि हमरक लेल सते वु खव ुतह अतछ, मुवक अहकँ सभक लेल ई सुरतकि अतछ। 2 कुकुर सँ सकवधकु रह, वु ् ककज करयवलक सँ सकवधकु रह, संतकषिक सँ सकवधकु रह। 3 हम सभ खिुक केतुहकर छी जे आि् मक दकरक परमेश् वरक आरकधुक करै ि छी आ मसीह यीशु मे आुननि होइि छी आ शरीर पर भरोसक ुतह करै ि छी।

अध्प 4 1 िे,ँ हमर तपय आ िरसैि भकय सभ, हमर आुन आ मुकुट, िे ँ पभु मे दढिकपूवाक ठकढ रह, हमर तपय तपयजु। 2 हम यूओतडयकस आ तसनीके सँ तवुिी करै ि छी जे पभु मे एकतह िरहक तवचकर रकखति। 3 हम अहकँ सँ तवुिी करै ि छी जे, अहकँ सि् य जुआक संगी, जे स् तीगम सभ हमरक संग सुसमकचकर मे पररशम कयलतु, केमेट

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तितलनपयों के

आ हमर आु सहकम् सभक संग, तजुकर ुकम जीवुक पुसक मे तलखल अतछ। 4 पभु मे सतवखु आुननि रह। 5 अहकँ सभक संयम सभ लोक केँ िुिल रहय। पभु लग मे छति। 6 कोुो िकिक लेल सकवधकु रह। मुवक सभ िकि मे पकिाुक आ तवुिी आ धनवकवक संग परमेश् वरक समक अहकँ सभक तुहोरकक जकुककरी वे ल जकय। 7 परमेश् वरक शकन् जे सभ िुनद सँ िेसी अतछ, मसीह यीशुक दकरक अहकँ सभक हवय आ मु केँ सुरतकि रकखि। 8 अंि मे, भकइ लोकतु, जे तकछु सत अतछ, जे तकछु ईमकुवकर अतछ, जे तकछु नकयसंगि अतछ, जे तकछु शुद अतछ, जे तकछु तपय अतछ, जे तकछु ुीक जककँ अतछ। जँ कोुो गुम अतछ आ जँ कोुो पशंसक अतछ िँ एतह सभ िकि पर सोचू। 9 जे िकि अहकँ सभ हमरक मे तसखलहँ , गहम केलहँ , सु​ुलहँ आ वे खलहँ, से कर। 10 मुवक हम पभु मे िहि आुननि भेलहँ जे आि अंि​िः अहकँ सभक हमरक पति तच्क िेर सँ ितढ गेल अतछ। जकतह मे अहकँ सभ सेहो सकवधकु रहलहँ, मुवक अहकँ सभक अवसरक अभकव छल। 11 ई ुतह जे हम अभकवक तवदय मे िजैि छी, तकएक िँ हम जे अव्क मे छी, िकतह मे संिु् रहि सीखलहँ । 12 हम ुीच रहि आ पचुरिक करि वु ुू जुैि छी। 13 हम मसीहक दकरक सभ तकछु कऽ सकैि छी जे हमरक िल वै ि छति। 14 मुवक अहकँ सभ ुीक ककज केलहँ जे अहकँ सभ हमर वु ःखक संग समकरलहँ । 15 अहकँ सभ तितलनपयों केँ ईहो जुैि छी जे सुसमकचकर सुसमकचकरक पकरं भ मे जखु हम मतकवु तुयक सँ तववक भेलहँ िँ कोुो मम् डली हमरक सँ वे ि आ गहमक तवदय मे ुतह िजौलक, तसवकय अहकँ सभ केँ छोतड। 16 तकएक िँ अहकँ सभ तिसलु​ुीकी मे सेहो एक िेर-िेर हमरक आवश् यकिकक लेल पठौलहँ । 17 हम एतह लेल ुतह जे हम वरवकु चकहै ि छी, िल् तक हम एहु िल चकहै ि छी जे अहकँ सभक तहसकि सँ भरपूर हो। 18 मुवक हमरक लग सभ तकछु अतछ आ पचुरिक अतछ। 19 मुवक हमर परमेश् वर मसीह यीशुक दकरक अपु मतहमक मे अपु धुक अु​ुसकर अहकँ क सभ आवशकिकक पूतिा करिकह। 20 आि परमेश् वर आ हमरक सभक तपिकक मतहमक अु​ु् ि ककल धरर रहय। आमीु। 21 मसीह यीशु मे पतेक पतवत लोक केँ पमकम कर। जे भकय सभ हमरक संग छति, अहकँ सभ केँ पमकम करै ि छति। 22 सभ पतवत लोक अहकँ सभ केँ पमकम करै ि छति, खकस कऽ कैसरक घरक लोक सभ। 23 हमरक सभक पभु यीशु मसीहक कृपक अहकँ सभक संग रहय। आमीु। (रोम सँ तलखल तितलनपयों केँ, इपकफोतडटस दकरक।)

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कुलुस् के लोग

22 मृतुक क्ररे ँ अपि शरीरक शरीर मे अह्ँ सभ केँ पतवत आ ति​ि्ष आ हिक् स्मिे अिम पसुर करब्क लेल। 23 जँ अह्ँ सभ तवश् व्स मे तटकल आ न्र रहब आ ओतह सुसम्च्रक आश् सँ िू र ितह भऽ ज्यब जे अह्ँ सभ सुि​िे छी आ जे स् वराक िीच्ँ क सभ प्री केँ पच्र कयल रेल छल। हम पौलुस जकर सेवक बि्ओल रेल छी। 24 ओ सभ आब अह्ँ सभक लेल हमर कष् ट मे आिन्र भऽ कऽ मसीहक कष् ट सँ हमर् शरीर मे अपि कष् ट सँ भरै र छी। 25 परमेश् वरक वचि केँ पूर् करब्क लेल परमेश् वरक जे वव्​् हमर् िे ल रेल अतछ, र्तह अिुस्रे ँ हम एतह ब्रक सेवक बि्ओल रेल छी। 26 ओ रहस जे युर-युर सँ िुक्यल अतछ, मुि् आब ओकर पतवत लोक सभ केँ परट कयल रेल अतछ। 27 परमेश् वर हिक् सभ केँ ई बर्बय च्है र छति जे रैर-यहिी सभक बीच एतह रहसक मतहम् मे की अतछ। जे मसीह अह्ँ सभ मे मतहम् के आश् अतछ। 28 हम सभ हिक् सभक पच्र करै र छी, पतेक केँ चेर्बैर छी आ सभ बुन् सँ तसख्बैर छी। ज्तह सँ हम सभ पतेक केँ मसीह यीशु मे तस् पसुर करी। 29 हमहँ हिकर क्जक अिुस्र संघषा करै र पररशम करै र छी जे हमर् मे स्मरापूवाक क्ज करै र अतछ।

अध्य 1 1 पौलुस, जे परमेश् वरक इच् सँ यीशु मसीहक पेररर छी आ हमर् सभक भ्य तरमुतियुस। 2 कुलुसी मे मसीह मे रहतिह्र पतवत आ तवश्सी भ्य सभ केँ, “अपि तपर् परमेश् वर आ पभु यीशु मसीह द्र् अह्ँ सभक कृप् आ श्न् भेटय।” 3 हम सभ अह्ँ सभक लेल सतिखि प्िाि् करै र अपि पभु यीशु मसीहक तपर् परमेश् वर केँ धनव्ि िै र छी। 4 हम सभ मसीह यीशु मे अह्ँ सभक तवश् व्स आ सभ पतवत लोक सभक पतर अह्ँ सभक पेमक तवषय मे सुि​िे छी। 5 अह्ँ सभक लेल जे आश् स् वरा मे र्खल रेल अतछ, से अह्ँ सभ पतहिे सुसम्च्रक सतर्क वचि मे सुि​िे छलहँ । 6 ई ब्र अह्ँ सभ लर आयल अतछ जेि् समस संस्र मे अतछ। ओ फल िै र अतछ जेि् अह्ँ सभ मे सेहो फल िै र अतछ, जतहय् सँ अह्ँ सभ ई ब्र सुिलहँ आ परमेश् वरक कृप् केँ सर् य मे जिलहँ । 7 जेि् अह्ँ सभ सेहो हमर् सभक तपय सहकम् इप्फ्स सँ सीखलहँ जे अह्ँ सभक लेल मसीहक तवश् व्सपूरा सेवक छति। 8 ओ हमर् सभ केँ आर् म् द्र् अह्ँ सभक पेमक पच्र कयलति। 9 एतह क्ररे ँ हम सभ सेहो, जतहय् सँ ई ब्र सुिलहँ , अह्ँ सभक लेल प्िाि् करब ितह छोडै र छी आ ई इच् करै र छी जे अह्ँ सभ हिकर इच्क ज्ि सँ भरल रहब। 10 एतह ररहे ँ अह्ँ सभ पभुक योग भऽ कऽ सभ केँ पसर करब्क लेल चलब। 11 अपि रौरवश्ली स्मराक अिुस्र सभ स्मराक संर बलव्ि भऽ कऽ सभ धैया आ धैया आ हषाक संर धैया र्खब। 12 तपर् परमेश् वरक धि् यव्ि कर, जे हमर् सभ केँ इजोर मे पतवत लोक सभक उतर्तधक्र मे भ्र लेब्क योग बिौलति। 13 ओ हमर् सभ केँ अन्रक स्मि्ा य सँ मुक कऽ कऽ अपि तपय पुतक र्ज् य मे लऽ रेल्ह। 14 हिक् सँ हमर् सभ केँ हिकर खूि सँ मुनक भेटैर अतछ, प्पक कम्। 15 ओ अदृ परमेश् वरक पतररप छति, जे सभ प्रीक जेठ छति। 16 तकएक रँ हिक् द्र् स् वरा मे आ पृि् वी मे जे तकछु अतछ, से सभ दृ आ अदृ, च्हे ओ तसंह्सि हो, व् पभु, व् ररय्सर, व् अतधक्र, हिक् द्र् बि्ओल रेल अतछ। 17 ओ सभ तकछु सँ पतहिे छति आ हिक् द्र् सभ तकछु बिल अतछ। 18 ओ शरीरक तसर, मर् डलीक म्ि छति। ज्तह सँ सभ ब्र मे हिक् पध्िर् भेतट ज्य। 19 तपर् केँ ई िीक ल्रलति जे हिक् मे सभ पूरार् रहय। 20 अपि कूसक खूिक द्र् हिक् द्र् सभ तकछु केँ अपि् संर मेल तमल्प करब्क लेल श्ं तर कयलति। हम हिक् द्र् कहै र छी, च्हे ओ सभ पृि् वीक वसु हो व् स् वराक। 21 अह्ँ सभ जे कखिो िु षमाक क्ररे ँ पर्य् भऽ रेल छलहँ आ मि मे शतु छलहँ , मुि् आब ओ मेल तमल्प कऽ लेलक

अध्य 2 1 हम च्है र छी जे अह्ँ सभ ई ज्ति ली जे हम अह्ँ सभक लेल आ लौिीतकय् मे हिक् सभक लेल आ जे सभ हमर मुँह शरीर मे ितह िे खिे छति, र्तह लेल हमर् करेक पैघ झरड् अतछ। 2 एतह ररहे ँ हिक् सभक हिय केँ स्न्ि् भेटय, पेम मे रूंिल रहय, आ बुन्क पूरा आश्सिक समस धि मे, परमेश् वर, तपर् आ मसीहक रहस केँ सीक्र करब्क लेल। 3 हिक् मे बुन् आ ज्िक सभट् खज्ि् िुक्यल अतछ। 4 हम ई ब्र कतह रहल छी, ज्तह सँ केओ अह्ँ सभ केँ लोभय बल् ब्र सँ बहक् ितह िे र। 5 जँ हम शरीर मे ितह छी, मुि् आर् म् मे अह्ँ सभक संर छी आ अह्ँ सभक कम आ मसीह मे अह्ँ सभक तवश् व्सक दृर् केँ िे नख आिन्र भऽ रहल छी। 6 एतह लेल जेि् अह्ँ सभ मसीह यीशु केँ पभु केँ गहर कयलति, रतहि् अह्ँ सभ हिक् मे चलैर रह। 7 हिक् मे जतड जम् कऽ कऽ बिौिे रह आ तवश्स मे दृ रह, जेि् अह्ँ सभ केँ तसख्ओल रेल अतछ। 8 स्वध्ि रह जे मसीहक अिुस्र ितह, मिुष् यक परमर्क अिुस्र, संस्रक प्रनरक ब्रक अिुस्र, िशाि-िशाि आ विा छल-पपंच द्र् केओ अह्ँ सभ केँ ितह लूटय। 9 तकएक रँ शरीरक रपे ँ परमेश् वरक समस पूरार् हिक् मे तिव्स करै र अतछ। 10 अह्ँ सभ हिक् मे पूरा छी, जे समस र्ज् य आ स्मि्ा यक मुनखय् छति। 11 अह्ँ सभ मसीहक खरि् द्र् शरीरक प्प सभक शरीर केँ उर्रब्क लेल तबि् ह्िक खरि् सँ खरि् कयल रेल छी। 12 बपतरस् म् मे हिक् संर िफि कयल रेल, ज्तह मे अह्ँ सभ हिक् संर जीतब रेल छी, परमेश् वरक तवश् व्स द्र्, जे हिक् मृर् यु मे सँ तजय् िे लति। 13 अह्ँ सभ अपि प्प आ शरीरक खरि् ितह भेल् पर मृर भऽ कऽ ओ अह्ँ सभक सभ अपर्ध कम् कऽ हिक् संर जीतवर कयलति।

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कुलुसी के लोर

14हमर् सभक तवरोध मे जे तियम छल, ओकर् मेट् कऽ अपि कूस पर कील ठोतक कऽ ब्ट सँ हट् िे लक। 15 ओ र्ज् य आ अतधक्र सभ केँ लूतट कऽ ओकर् सभ केँ खुतल कऽ िे खौलति आ ओतह मे ओकर् सभ पर तवजय प्र कयलति। 16 रे ँ केओ अह्ँ सभ केँ भोजि व् पेय पि्िा व् कोिो पतवत ति​ि व् अम्वस् व् तवश्म-ति​िक तवषय मे न्य ितह करय। 17 जे सभ आबै बल् ब्र सभक छ्य् अतछ। मुि् शरीर मसीहक अतछ। 18 केओ अह्ँ सभ केँ सेच् सँ तविमर् आ स् वरािूर सभक आर्धि् कऽ कऽ अह्ँ सभ केँ जे तकछु ितह िे खिे अतछ, र्तह मे घुतस कऽ अपि श्रीररक मि सँ विा उमतड कऽ अह्ँ सभ केँ ितह बहक्बय। 19 ओतह म्ि केँ ितह पकडब, ज्तह मे सँ सभ शरीर जोड आ पटी सँ पोषर करै र छल आ एक संर बुिैर छल, परमेश् वरक बृै र-बृै र बृै र अतछ। 20 एतह लेल जँ अह्ँ सभ संस्रक प्रं तभक क्ल सँ मसीहक संर मरर रेल छी रँ अह्ँ सभ संस्र मे रहय बल् तियमक अधीि तकएक छी। 21 (सशा ितह कर; स्ि ितह तलअ; संभ्ल ितह कर। 22 जे सभ मिुष् यक आज् आ तशक्क अिुसन्िक अिुस्र सभ उपयोरक संर ि्श भऽ ज्यर? 23 एतह ब्र सभ मे इचु कर्क आर्धि्, तविमर् आ शरीरक उपेक् मे बुन्क पिशाि होइर अतछ। शरीरक रृनर लेल कोिो आिर मे ितह। अध्य 3 1 रखि जँ अह्ँ सभ मसीहक संर जीतब उठल छी रँ ओतह ऊपरक चीज सभक खोज कर जरय मसीह परमेश् वरक ितहि् क्र बैसल छति। 2 अपि सेह पृथी पर ितह, ऊपरक वसु पर र्खू। 3 अह्ँ सभ मरर रेल छी आ अह्ँ सभक जीवि परमेश् वर मे मसीहक संर िुक्यल अतछ। 4 जखि मसीह, जे हमर् सभक जीवि छति, रखि अह्ँ सभ सेहो हिक् संर मतहम् मे परट होयब। 5 रे ँ पृि् वी पर अपि अंर-अंर सभ केँ म्रर तियौक। वतभच्र, अशु्र्, अततधक सेह, िु ष क्मि् आ लोभ, जे मूतरापूज् अतछ। 6 एतह ब्रक क्ररे ँ परमेश् वरक कोध आज् ितह म्िय बल् सि् र्ि सभ पर अबैर अतछ। 7 अह्ँ सभ सेहो तकछु समय धरर एतह ररहे ँ चलैर रहलहँ , जखि तक अह्ँ सभ ओतह मे रहै र छलहँ । 8 मुि् आब अह्ँ सभ सेहो एतह सभ ब्र केँ छोतड तियौक। कोध, कोध, िु भ्ा वि्, ति्​्, रंि् संव्ि अह्ँ क मुँह सँ ब्हर तिकतल रेल। 9 एक-िोसर केँ झूठ ितह ब्जू, तकएक रँ अह्ँ सभ बूृ आिमी केँ ओकर क्ज सँ उर्रर िे तलयैक। 10ओ िव मिुष् य केँ पतहरब, जे ओकर् सृतष करतिह्रक पतररपक अिुस्र ज्ि मे िव होइर अतछ। 11 जरऽ िे यूि्िी आ िे यहिी, खरि् आ िे खरि् ितह, बबार, तसतिय्, ि्स आ िे सरंत, मुि् मसीह सभ छति आ सभ मे छति।

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12 रे ँ परमेश् वरक चुिल लोक, पतवत आ तपयजि जक्ँ िय्, िय्, तविमर्, िमर् आ धैयाक आं र पतहर। 13 जँ केओ ककरो सँ झरड् करै र अतछ रँ एक-िोसर केँ सहि कर आ एक-िोसर केँ कम् कर। 14 एतह सभ ब्र सँ बेसी पेम केँ ध्रर कर, जे तस्र्क बंधि अतछ। 15 परमेश् वरक श्ि् तर अह्ँ सभक हिय मे र्ज करऽ, जकर् लेल अह्ँ सभ एक शरीर मे बज्ओल रेल छी। आ अह्ँ सभ धन रह। 16 मसीहक वचि अह्ँ सभ मे सभ बुन् सँ भरपूर रहय। भजि, भजि आ आध्नाक रीर मे एक-िोसर केँ तसख्बैर आ उपिे श िै र रह, पभु केँ हिय मे कृप् सँ र्तब रहल छी। 17 अह्ँ सभ जे तकछु वचि व् क्ज मे करब, से सभ पभु यीशुक ि्म पर कर आ हिक् द्र् तपर् परमेश् वर केँ धि् यव्ि कर। 18 पती सभ, पभु मे जेि् उतचर होयर, अपि पतरक अधीि रह। 19 पतर सभ, अपि पती सभ सँ पेम कर आ हिक् सभक पतर कटु ितह रह। 20 बच् सभ, सभ ब्र मे अपि म्र्-तपर्क आज् म्िू, तकएक रँ ई पभु केँ िीक लरैर छति। 21 हे तपर् सभ, अपि बच् सभ केँ कोतधर ितह कर, कही ं ओ सभ हरोत्तहर ितह भ’ ज्य। 22 हे ि्स सभ, सभ ब्र मे अपि म्तलक सभक आज् म्िू। आँ नखक सेव्क संर ितह, जेि् पुरषक पसर करयवल्। मुि् परमेश् वरक भय एक हिय मे। 23 अह्ँ सभ जे तकछु करब, से मिुष् य सँ कर, जेि् पभुक लेल कर। 24 ई ज्ति कऽ जे अह्ँ सभ पभुक द्र् उतर्तधक्रक फल भेटर, तकएक रँ अह्ँ सभ पभु मसीहक सेव् करै र छी। 25 मुि् जे अधल्ह करै र अतछ, रकर् अपि अधल्हक बिल् मे भेटरैक। अध्य 4 1 म्तलक सभ, अह्ँ सभ अपि ि्स सभ केँ जे न्य आ सम्ि अतछ, से तिअ। ई ज्ति कऽ जे अह्ँ सभ सेहो स् वरा मे एकट् म्तलक छति।” 2 प्िाि् करै र रह आ धनव्िक संर ज्ररक रह। 3 हमर् सभक लेल सेहो प्िाि् करै र रहल्ह जे परमेश् वर हमर् सभक लेल एकट् ब्जब्क िरबज् खोलति ज्तह सँ हम सभ मसीहक रहस बजब। 4 ज्तह सँ हम एकर् परट कऽ सकब, जेि् हमर् कहब्क च्ही। 5 समय केँ मुक करै र ब्हरक लोकक पतर बुन्पूवाक चलैर रह। 6 अह्ँ सभक रप सतिखि अिुगहक संर रह, आ िूि सँ मस्लेि्र रह, ज्तह सँ अह्ँ सभ केँ बुझल ज् सकैर अतछ जे अह्ँ सभ केँ कोि् उतर िे ब्क च्ही। 7 हमर सभट् न्तर तरकीकुस अह्ँ सभ केँ बर्ओर, जे तपय भ्इ छति आ पभु मे तवश् व्सयोर् य सेवक आ सह-सेवक छति।


कुलुसी के लोर

8 हम हिक् अह्ँ सभ लर एतह लेल पठौिे छी जे ओ अह्ँ सभक समतत केँ ज्ति आ अह्ँ सभक मोि केँ स्न्ि् िऽ सकति। 9 ओिेतसमस, एकट् तवश्सी आ तपय भ्इ, जे अह्ँ सभ मे सँ एक छति। ओ सभ एरय जे तकछु होइर अतछ, से अह्ँ सभ केँ बर्ओर। 10 हमर संरी कैिी अररस्कास आ बरिब्सक बतहिक पुत म्कास केँ पर्म करै र छति। 11 यीशु, तजिक् युसस कहल ज्इर अतछ, जे खरि् करतिह्र लोक छति। ई सभ म्त परमेश् वरक र्ज् य मे हमर सहकम् छति, जे हमर् लेल स्न्ि् रहल अतछ। 12 एप्फ् जे अह्ँ सभ मे सँ एक छति, मसीहक सेवक छति, अह्ँ सभ केँ पर्म करै र छति आ अह्ँ सभक लेल प्िाि् मे सतिखि पय्सरर छति, ज्तह सँ अह्ँ सभ परमेश् वरक सभ इच् मे पूरा आ पूरा ठ्ृ रहब। 13 हम हिक् रव्ही िै र छी जे अह्ँ सभ आ लौिीतकय् आ तहयर्पोतलस मे रहतिह्र लोक सभक पतर हिक् बहर उत्ह अतछ। 14 तपय वैद लूक् आ िे म्स अह्ँ सभ केँ पर्म करै र छति। 15 लौिीतकय् मे रहतिह्र भ्य सभ केँ, तिमफ् आ हिकर घर मे रहतिह्र मर् डली केँ पर्म कर। 16 जखि ई पत अह्ँ सभक बीच पृल ज्यर रँ लौिीतकय्क मर् डली मे सेहो पृल ज्य। आ अह्ँ सभ रतहि् लौिीतकय् सँ तलखल पत पृू।” 17 आ आतकापस केँ कह, “पभु मे जे सेव् अह्ँ केँ भेटल अतछ, र्तह पर स्वध्ि रह, ज्तह सँ अह्ँ ओकर् पूर् कर।” 18 हमर् पौलुसक पर्म। हमर बंधि मोि र्खू। कृप् अह्ँ क संर रहय। आमीि। (रोम सँ कुलुसी धरर तरकीकस आ ओिेतसमस द्र् तलखल रेल अतछ।)

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१ थिस्सलुथीकिय

7 मुि् हम स् अह्ँ स्ी बुच ीिमल िलहँ , जेव् ीिवि वसा अपव बच् स् ीेँ पिसैि असि। 8 हम स् अह्ँ स् सँ सेह सँ इच् ि् ीरै ि िलहँ , िे ँ अह्ँ स् ीेँ म्त परमेश् वरी सुसम्च्र वसह, बल् सी अपव प्ण सेहि अह्ँ स् ीेँ िे ब्ी लेल िैय्र िलहँ , सीएी िँ अह्ँ स् हमर् स्ी सपय िलहँ । 9 ्​्इ लिीसव, अह्ँ स् अपव पररशम आ पररशम ीेँ मिव प्डै ि िु, सीएी िँ हम स् र्सि-सिव पररशम ीरै ि िलहँ , ी्रण हम स् अह्ँ स् मे सँ सीवीि ीिवि आ्​्र वसह लेबऽ च्है ि िलहँ , िे ँ हम स् अह्ँ स् ीेँ परमेश् वरी सुसम्च्र पच्र ीयलसव। 10 अह्ँ स् आ परमेश् वर सेहि गव्ह िु जे अह्ँ स् सवश् व्स ीरयवल् स्ी बुच हम स् ीिेी पसवत आ न्यपूणा आ सवि्ष ववह्र ीेलहँ । “ 12 अह्ँ स् परमेश् वरी यिग रप मे चलब, जे अह्ँ स् ीेँ अपव र्ज् य आ मसहम् मे बजौवे िसि। 13 एसह लेल हम स् परमेश् वर ीेँ असवर्म धनव्ि िै ि िु, सीएी िँ जखव अह्ँ स् परमेश् वरी वचव जे अह्ँ स् हमर् स् सँ सुवलहँ , िीर् मवुष् यी वचव जी्ँ वसह, बल् सी सि् य मे जेव् असि, परमेश् वरी वचव ीेँ गहण ीयल अह्ँ स् मे सेहि ी्ज ीरै ि असि जे सवश् व्स ीरै ि िु। 14 ्​्इ लिीसव, अह्ँ स् परमेश् वरी मण् डलु स्ी अवुय्यु बसव गेलहँ जे यहसिय् मे मसुह युशु मे असि। 15 ओ स् प्ु युशु आ अपव पवी् ि् स् ीेँ म्रर ीऽ हमर् स् ीेँ सि्बैि रहल्ह। ओ स् परमेश् वर ीेँ पसर वसह ीरै ि असि आ स् मवुष् यी सवरिध मे असि। 16 ओ हमर् स् ीेँ गैर-यहिु स् सँ ब्ि ीरब् सँ मव् ीऽ रहल िसि ज्सह सँ ओ स् उद्र प्सब सीसि आ अपव प्प स् ीेँ ससिखव ्रर िे सि। 17 मुि्, ्​्इ लिीसव, हम स् हिय मे वसह, ि​िडे ी ी्ल लेल अह्ँ स्ी स्मवे सँ हसट गेलहँ । 18 िे ँ हम पौलुस, हम स् एी बेर-बेर अह्ँ स् लग आसब सीैि िलहँ । मुि् शैि्व हमर् स् ीेँ ब्सधि ीेली। 19 सीएी िँ हमर् स्ी आश्, आवव्‍ि आ आवनी मुीुट ीु असि? ीु अह्ँ स् सेहि हमर् स्ी प्ु युशु मसुही आगमव मे हवीर स्सरन मे वसह िु? 20 अह्ँ स् हमर् स्ी मसहम् आ आवन िु।

अध्क 1 1 पौलुस, ससल्वस, सिमुसियुस, सिसलुवुसीयियी मण् डलुी पत जे सपि् परमेश् वर आ प्ु युशु मसुह मे असि, अह्ँ स् ीेँ ीृप् आ श्न् ्ेटय। 2 हम स् अह्ँ स्ी लेल परमेश् वर ीेँ ससिखव धनव्ि िै ि िु आ प्िाव् मे अह्ँ स्ी उलेख ीरै ि िु। 3 हम स् अपव् स्ी सवश् व्सी ी्ज, पेमी पररशम आ अपव् स्ी प्ु युशु मसुह मे आश्ी धैया ीेँ असवर्म ीरै ि रह। 4 हे सपय ्​्इ लिीसव, अह्ँ स् परमेश् वर द्र् चुवल गेल िु, अह्ँ स् ीेँ जवैि िु। 5 सीएी िँ हमर् स्ी सुसम्च्र अह्ँ स् लग म्त वचव मे वसह, बल् सी स्मि्ा य आ पसवत आि् म् आ बहि आश् व्स सँ सेहि आयल असि। जेव् अह्ँ स् जवैि िु जे हम स् अह्ँ स्ी बुच ीेहव लिी िलहँ । 6 अह्ँ स् हमर् स्ी आ प्ुी अवुय्यु बसव गेलहँ । 7 एसह िरहे ँ अह्ँ स् मसीिु सवय् आ अख्य् मे सवश् व्स ीरयवल् स् लिी​ी लेल उि्हरण बसव गेलहँ । 8 अह्ँ स् सँ प्ुी वचव म्त मसीिु सवय् आ अख्य् मे वसह, बल् सी स् ठ्म परमेश् वरी पसि अह्ँ स्ी सवश् व्स पसरल असि। ज्सहसँ हमर् स्ीेँ ीिवि ब्ि बजब्ी आवशीि् वसह। 9 ओ स् हमर् स्ी सवषय मे ई िे ख्बैि िसि जे हमर् स् ीेँ अह्ँ स्ी सयग ीिव िरही पवेश ीयल गेल िल आ अह्ँ स् मूसिा सँ परमेश् वर सिस घुसम ीऽ जुसवि आ सि् य परमेश् वरी सेव् ीयल गेलहँ । 10 आ स् वगा सँ अपव पुती पिुत् ीरब, सजवी् ओ मृि् यु मे सँ सजय् िे लसव, युशु युशु जे हमर् स् ीेँ आबय बल् किध सँ मुक ीयलसव। अध्क 2 1 यौ ्​्इ लिीसव, अह्ँ स् सयय जवैि िु जे हमर् स्ी पवेश अह्ँ स् मे ्ेल जे ई विा वसह ्ेल। 2 मुि् सिसलपु मे हमर् स् ीेँ पसहवे ीष ीऽ ीऽ लज्पूवाी सवविु ीयल गेल्ी ब्ि​ि अपव् परमेश् वर मे स्हस ीयल गेल जे अह्ँ स् ीेँ बहि सवव्िी सयग परमेश् वरी सुसम्च्र बजलहँ । 3 सीएी िँ हमर् स्ी उपिे श िल, वे अशुदि् आ वे िली ी्रणे।ँ 4 मुि् जेव् परमेश् वर हमर् स् ीेँ सुसम्च्र पर ्रिस् ीरब्ी अवुमसि िे लसव, िेव् हम स् एव् बजैि िु। मवुष् य ीेँ पसर ीरब्ी लेल वसह, बल् सी परमेश् वर, जे हमर् स्ी हिय ीेँ परुत् िै ि िसि। 5 सीएी िँ हम स् ीसहयि च्पलूसुी ब्ि वसह ीहलहँ , जेव् अह्ँ स् जवैि िु, आ वे लि्ी वस। ्गव्व गव्ह िसि: 6 हम स् मसुही पेररि जी्ँ बिसिल ्ऽ सीैि िलहँ , आ वे अह्ँ स्ी आ वे आव लिी​ी मसहम् च्है ि िलहँ ।

अध्क 3 1 िे ँ जखव हम स् आब सहव वसह ीऽ सीलहँ िँ एिेस मे असगरे रहब वुी बुिलहँ । 2 ओ हमर् स्ी ्​्य, परमेश् वरी सेवी आ मसुही सुसम्च्र मे हमर् स्ी सहीम् सिमुसियुस ीेँ पठौलसव जे अह्ँ स् ीेँ मजबूि ीरसि आ अह्ँ स्ी सवश् व्सी सवषय मे स्न्व् िे सि। 3 एसह केश स् सँ ीेओ वसह चसीि वसह हि, सीएी िँ अह्ँ स् सयय जवैि िु जे हम स् एसह िु ःख स्ी लेल सवयुक िु। 4 हम स् जखव अह्ँ स्ी सयग िलहँ िखव पसहवे अह्ँ स् ीेँ ीहवे रहु जे हमर् स् ीेँ ीषी स्मव् ीरब्ी च्हु। जेव् ्ेल िल आ अह्ँ स् जवैि िु। 5 एसह ी्रणे ँ जखव हम आब सहव वसह ीऽ सीलहँ िँ अह्ँ स्ी सवश् व्स ीेँ ज्वय लेल पठौलहँ , ज्सह सँ ीिवि िरहे ँ

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१ सिसलुवुसीयिय

पलि्व िे बयवल् अह्ँ स् ीेँ परुत् वसह िऽ सीैि असि आ हमर स्ी पररशम विा वसह ्ऽ ज्य। 6 मुि् आब जखव सिमुसियुस अह्ँ स्ी सिस सँ हमर् स् लग आसब गेल्ह आ अह्ँ स्ी सवश् व्स आ पेमी शु् सम्च्र हमर् स् ीेँ अवलसव आ अह्ँ स् हमर् स् ीेँ ससिखव वुी जी्ँ मिव प्डै ि रहब। 7 िे ँ ्​्इ लिीसव, अह्ँ स्ी सवश् व्स सँ हमर् स् ीेँ अपव स् ीष आ सवपस् मे अह्ँ स्ी द्र् स्न्व् ्ेटल। 8 जँ अह्ँ स् प्ु मे दृि् सँ ठ्ृ रहब िँ आब हम स् जुबैि िु। 9 हम स् अह्ँ स्ी लेल अह्ँ स्ी लेल परमेश् वर ीेँ ीु धव् यव्ि िऽ सीब, ज्सह सँ हम स् अपव् स्ी परमेश् वरी समत अह्ँ स्ी लेल आवननि ्ऽ रहल िु। 10 र्सि-सिव बहि प्िाव् ीरै ि िु जे हम स् अह्ँ ी मुँह िे नख सीब आ अह्ँ स्ी सवश् व्स मे जे ीमु असि िीर् ससद ीऽ सीब? 11 आब परमेश् वर आ हमर् स्ी सपि्, आ हमर् स्ी प्ु युशु मसुह हमर् स्ी ब्ट अह्ँ स् लग सवि् सशि ीरै ि िसि। 12 प्ु अह्ँ स् ीेँ एी-ि​िसर आ स् लिी​ी पसि पेम बृ्बसि, जेव् हम स् अह्ँ स्ी पसि पेम ीरै ि िु। 13 ओ अह्ँ स्ी हिय ीेँ सवि्ष पसवति् मे ठ्ृ ीऽ सीैि िसि, जे हमर् स्ी सपि् परमेश् वरी समत हमर् स्ी प्ु युशु मसुही आगमव मे अपव स् पसवत लिी स्ी सयग पसवति् मे सवि्ष ्ऽ सीैि िसि।

10 अह्ँ स् मसीिु सवय्ी समस ्​्य स्ी पसि ई ी्ज ीरै ि िु। 11 अह्ँ स् चुपच्प रहब्ी लेल, अपव ी्ज ीरब्ी लेल आ अपव् ह्ि सँ ी्ज ीरब्ी लेल, जेव् हम स् अह्ँ स् ीेँ आज् िे वे रहु। 12 ज्सह सँ अह्ँ स् ब्हरी लिी स्ी पसि ईम्वि्रु सँ चलब आ अह्ँ स् ीेँ ीिवि चुजी अ्​्व वसह रहय। 13 ्​्इ लिीसव, हम ई वसह च्है ि िु जे अह्ँ स् सुिल लिी स्ी सवषय मे अवस्ज रह, ज्सह सँ अह्ँ स् िु खु वसह हिउ, जेव् आव लिी स्ी आश् वसह असि। 14 जँ हम स् ई म्वैि िु जे युशु मरर गेल्ह आ जुसब उठल्ह, िसहव् युशु मे सुिल लिी स् ीेँ सेहि परमेश् वर हवी् सयग अवि्ह। 15 हम स् प्ुी वचव द्र् अह्ँ स् ीेँ ई ीहै ि िु जे हम स् जे जुसवि िु आ प्ुी आगमव धरर रहब, सुिल लिी स् ीेँ वसह रिीब। 16 सीएी िँ प्ु स् वगा सँ सचसचय्हसट, मह्सगािूिी आव्ज आ परमेश् वरी िुरहुी सयग उिरि्ह। 17 िखव हम स् जे जुसवि िु आ बचल िु, ओीर् स्ी सयग मेघ मे उठ्ओल ज्यब, ज्सह सँ हम स् प्ुी सयग हव् मे ्ेट ीरु। 18 िे ँ एसह ब्ि स् सँ एी-ि​िसर ीेँ स्न्व् सिअ। अध्क 5 1 मुि्, ्​्इ लिीसव, समय आ समयी सवषय मे अह्ँ स् ीेँ ीिवि आवश् यीि् वसह असि जे हम अह्ँ स् ीेँ सलनख िु। 2 सीएी िँ अह्ँ स् वुी जी्ँ जवैि िु जे प्ुी सिव ओसहव् अबैि असि जेव् र्सि मे चिर हिइि असि। 3 जखव ओ स् ीहि्ह जे , “श्य सि आ सुरत्।” िखव अच्वी सवव्श हवी् स् पर अबैि िसव जेव् ग्ाविु सु ीेँ पसव हिइि िसव। आ ओ स् वसह बँचि। 4 मुि्, यौ ्​्इ लिीसव, अह्ँ स् अन्र मे वसह िु, ज्सह सँ ओ सिव अह्ँ स् ीेँ चिर जी्ँ पीसड सीय। 5 अह्ँ स् इजि​िी सव् ि्व िु आ सिवी सव् ि्व िु। 6 िे ँ हम स् आव लिी जी्ँ सुिब वसह। मुि् हम स् ज्गल रह आ सि​ि रह। 7 सीएी िँ सुिल लिी स् र्सि मे सुसि रहल असि। जे वश् मे धु् असि से र्सि मे वश् मे धु् ्’ ज्इि असि। 8 मुि् हम स् जे सिवी लिी िु, सवश् व्स आ पेमी ि्िु पसहरवे सि​ि रह। आ हे लमेटी लेल उद्री आश्। 9 परमेश् वर हमर् स् ीेँ किधी लेल वसह, बल् सी हमर् स्ी प्ु युशु मसुही द्र् उद्र प्बय लेल सवयुक ीयलसव। 10 ओ हमर् स्ी लेल मरर गेल्ह, ज्सह सँ हम स् ज्गल रहब व् सुिब, हम स् हवी् सयग रहब। 11 िे ँ अह्ँ स् एी-ि​िसर ीेँ स्न्व् सिअ आ एी-ि​िसर ीेँ आरि बढ्ओ, जेव् अह्ँ स् सेहि ीरै ि िु। 12 ्​्इ लिीसव, हम स् अह्ँ स् सँ सवविु ीरै ि िु जे अह्ँ स्ी बुच जे पररशम ीरै ि िसि आ प्ु मे अह्ँ स् पर ी्ज ीरै ि िसि आ अह्ँ स् ीेँ सल्ह िै ि िसि, िीर् स् ीेँ सचनह।

अध्क 4 1 एसह परमेश् वर, ्​्इ लिीसव, हम स् प्ु युशुी द्र् अह्ँ स् सँ सवविु ीरै ि िु आ आगह ीरै ि िु जे जसहव् अह्ँ स् ीेँ हमर् स् सँ ई बुिल असि जे अह्ँ स् ीेँ ीिव् चलब्ी च्हु आ परमेश् वर ीेँ पसर ीरब्ी च्हु, िेव् अह्ँ स् बेसु सँ बेसु पचुर हियब। 2 अह्ँ स् जवैि िु जे हम स् प्ु युशुी द्र् अह्ँ स् ीेँ ीिव-ीिव आज् िे लहँ । 3 परमेश् वरी इच् ि् असि जे अह्ँ स्ी पसवति् असि जे अह्ँ स् वस्च्र सँ परहे ज ीरु। 4 अह्ँ स् मे सँ प्ेी ीेँ पसवति् आ आिरी लेल अपव प्ती म्सली बवब बुिल ज्य। 5 जे गैर-यहिु स् परमेश् वर ीेँ वसह जवैि असि, िसहव् लि्ी व्सव् मे वसह। 6 सीयि एसह सँ आगू बसृ ीऽ अपव ्​्य ीेँ ीिवि ब्ि मे धिख् वसह िे सिव, सीएी िँ प्ु एहव स्ी पसिशिध लेसवह्र िसि। 7 परमेश् वर हमर् स् ीेँ अशुदि्ी लेल वसह, बल् सी पसवति्ी लेल बजौलसव असि। 8 िे ँ जे सिरस् ी्र ीरै ि असि, से मवुष् य ीेँ वसह, बल् सी परमेश् वर ीेँ सिरस् ी्र ीरै ि असि, जे हमर् स् ीेँ अपव पसवत आि् म् सेहि िे लसव। 9 मुि् ्​्इ-बसहवी पेमी सवषय मे अह्ँ स् ीेँ ई सलखब्ी आवशीि् वसह असि जे हम अह्ँ स् ीेँ सलखब, सीएी िँ अह्ँ स् ीेँ परमेश् वर द्र् एी-ि​िसर सँ पेम ीरब्ी ससख्ओल गेल असि।

162


१ सिसलुवुसीयिय

13 आ अपव ी्जी लेल पेम मे हवी् स् ीेँ बहि पैघ म्वब। आ आपस मे श्न् मे रह। 14 ्​्इ लिीसव, हम स् अह्ँ स् ीेँ आगह ीरै ि िु जे , अशुद स् ीेँ चेि्उ, ीमजिर मिव ीेँ स्न्व् सियौी, ीमजिर ीेँ सह्र् सियौी आ स् लिी​ी पसि धैया र्खू। 15 ई िे खू जे ीेओ ी​ीरि अधल्ही बिल् मे अधल्ही बिल् वसह सियौी। मुि् अह्ँ स्ी बुच आ स् मवुष् य स्ी लेल ससिखव वुी ी्जी प्लव ीर। 16 ससिखव आवननि रह। 17 असवर्म प्िाव् ीर। 18 स् ब्ि मे धनव्ि सिअ, सीएी िँ अह्ँ स्ी सवषय मे मसुह युशु मे परमेश् वरी इच् ि् असि। 19 आि् म् ीेँ वसह बुि्उ। 20 ्सवषव्णु ीेँ सिरस्र वसह ीर। 21 स् ब्िी परुतण ीर। जे वुी असि से मजबूिु सँ पीडू। 22 अधल्ही स् पी्र सँ परहे ज ीर। 23 श्न्ी परमेश् वर अह्ँ स् ीेँ पूणा रप सँ पसवत ीर। हम परमेश् वर सँ प्िाव् ीरै ि िु जे अह्ँ ी समस आि् म् आ प्ण आ शरुर हमर् स्ी प्ु युशु मसुही आगमव धरर सवि्ष सुरसति रहय। 24 जे अह्ँ स् ीेँ बजबैि असि, से सवश् व्सयिग् य असि। 25 ्​्इ लिीसव, हमर् स्ी लेल प्िाव् ीर। 26 स् ्​्य ीेँ पसवत चुम् सँ अस्व्िव ीर। 27 हम प्ुी व्म सँ अह्ँ स् ीेँ आज् िै ि िु जे ई पत स् पसवत ्​्य ीेँ पठ्ओल ज्य। 28 हमर् स्ी प्ु युशु मसुही ीृप् अह्ँ स्ी सयग रहय। आमुव। (सिसलुवुसीयिय ीे पसहल पत एिेस सँ सलखल गेल िल।)

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२ थिस्सलुथीकिय

5 अह्ँ सभ केँ ई मोव वसह असि जे जखव हम अह्ँ सभक संग रही िखव हम अह्ँ सभ केँ ई सभ ब्ि कहवे रही? 6 आब अह्ँ सभ जव़ि िी जे हवक् अपव समय मे पगट करब्क लेल की रोक़ि असि। 7 सकएक िँ अधम्क रहस पसहवे सँ क्ज कऽ रहल असि। 8 िखव ओ िु ष पगट होयि, जकर् पभु अपव मुँहक आि् म् सँ वष कऽ िे ि्ह आ अपव आगमवक िेज सँ वष कऽ िे ि्ह। 9 ओ जे श़ि्वक आगमवक ब्ि सभ स्मि्​् य आ सचव् त आ झदठक चमि् क्र सभक संग होयि। 10 आ व्श भऽ वल् सभ मे अधम्क सभ धोख्क संग। सकएक िँ ओ सभ सि् य पेम वसह प्सब सकल्ह ज्सह सँ ओ सभ उद्र प्सब सकसि। 11 एसह लेल परमेश् वर हवक् सभ केँ एकट् झदठ पर सवश् व्स करब्क लेल पबल भम पठौि्ह। 12 एसह लेल जे सभ सि् य पर सवश् व्स वसह कयलसव, बल् सक अधम् मे पसरि् कयलसव, हवक् सभ केँ िोषी ठहर्ओल ज्यि। 13 मुि्, पभुक सपय भ्इ लोकसव, अह्ँ सभक लेल परमेश् वर केँ ससिखव धव् यव्ि िे बऽ पडि, सकएक िँ परमेश् वर शुरए सँ अह्ँ सभ केँ आि् म्क पसवति् आ सि् य पर सवश् व्स द्र् उद्रक लेल चुववे िसि। 14 ओ हमर् सभक सुसम्च्र द्र् अह्ँ सभ केँ बजौलसव ज्सह सँ हमर् सभक पभु यीशु मसीहक मसहम् भेटय। 15 िे ँ भ्इ लोकसव, ठ्ढ रह आ ओसह परमर् सभक प्लव कर जे अह्ँ सभ केँ ससख्ओल गेल असि। 16अपव पभु यीशु मसीह सयं आ परमेश् वर, हमर सपि्, जे हमर् सभ सँ पेम कयलसव आ अवुगहक द्र् हमर् सभ केँ अव् स्न्व् आ वीक आश् िे लसव। 17 अपव हिय केँ स्न्व् सिअ आ सभ वीक वचव आ क्ज मे अह्ँ सभ केँ न्र कर।

अध्क 1 1 पौलुस, ससल्वस आ सिमुसियुस, हमर् सभक सपि् परमेश् वर आ पभु यीशु मसीह मे सिसलुवीकीक मण् डली केँ। 2 हमर् सभक सपि् परमेश् वर आ पभु यीशु मसीह द्र् अह्ँ सभ केँ कृप् आ श्न् भेटय। 3 भ्इ लोकसव, अह्ँ सभक लेल परमेश् वर केँ ससिखव धनव्ि िे बऽ पडि, सकएक िँ अह्ँ सभक सवश् व्स बहि बढ़ ि असि आ अह्ँ सभ मे सँ प्ेकक एक-िोसरक पसि पेम बढ़ ि असि। 4 हम सभ अपव् सभ परमेश् वरक मण् डली मे अह्ँ सभक ध़य् आ सवश् व्सक क्रणे ँ अह्ँ सभ पर गौरव कऱ ि िी जे अह्ँ सभ जे पि्डव आ केश सह़ ि िी। 5 ई परमेश् वरक ध्सम्क व् य्यक पगट पिीक असि ज्सह सँ अह्ँ सभ परमेश् वरक र्ज् यक योग म्वल ज्यब। 6 परमेश् वरक लेल ई ध्सम्क ब्ि असि जे अह्ँ सभ केँ परे श्व करयवल् सभ केँ कषक बिल् िे सिव। 7 अह्ँ सभ जे घबर्हसट मे िी, िखव हमर् सभक संग सवश्म कर, जखव पभु यीशु स् वग् सँ अपव पर्कमी स् वग्िदि सभक संग पगट भऽ जेि्ह। 8 जे सभ परमेश् वर केँ वसह जव़ि असि आ जे हमर् सभक पभु यीशु मसीहक सुसम्च्र वसह म्व़ि असि, िकर् सभक पसिशोध लऽ कऽ ज्ल्मुखी आसग मे लग्उ। 9 पभुक समक आ हवकर स्मि्​् यक मसहम् सँ अव् सवव्शक सज्य प्ओल ज्यि। 10 ओसह सिव जखव ओ अपव पसवत लोक मे मसहम् होबय आ सभ सवश् व्स करयवल् मे पशंससि होयब्क लेल आओि। 11 िे ँ हम सभ अह्ँ सभक लेल ससिखव प्ि्व् कऱ ि िी जे हमर् सभक परमेश् वर अह्ँ सभ केँ एसह आह्वक योग म्वसि आ अपव भल्ई आ सवश् व्सक क्ज केँ स्मि्​् य सँ पदर् करसि। 12 हमर् सभक परमेश् वर आ पभु यीशु मसीहक अवुगहक अवुस्र अह्ँ सभ मे आ अह्ँ सभ हवक् मे हमर् सभक पभु यीशु मसीहक व्मक मसहम् होयि।

अध्क 3 1 अंि मे, भ्इ लोकसव, हमर् सभक लेल प्ि्व् कर, ज्सह सँ पभुक वचव केँ सिंत रप सँ भेटय आ मसहम् भेटय, जेव् अह्ँ सभक संग होइि असि। 2 एसह लेल जे हम सभ असववेकी आ िु ष लोक सभ सँ मुक भऽ सकब, सकएक िँ सभ लोकक सवश् व्स वसह असि। 3 मुि् पभु सवश् व्सयोग् य िसि, जे अह्ँ सभ केँ न्र करि्ह आ अधल्ह सँ बच्ओि। 4 हमर् सभ केँ सवश्स असि जे पभु अह्ँ सभ केँ िदसब रहल िसि जे अह्ँ सभ जे आज् अह्ँ सभ केँ आज् ि़ ि िी से कऱ ि िी आ पदर् करब। 5 पभु अह्ँ सभक हिय केँ परमेश् वरक पेम मे आ मसीहक पिीक् मे ध़य् रखसवह्र मे सवि् सशि कर। 6 यौ भ्इ लोकसव, हम सभ अपव् सभक पभु यीशु मसीहक व्म सँ अह्ँ सभ केँ आज् ि़ ि िी जे अह्ँ सभ हरे क भ्इ सँ िद र भऽ ज्उ जे अववन्ि चल़ि असि, आ ओसह परमर्क अवुस्र वसह। 7 अह्ँ सभ केँ हमर् सभक प्ि्ँ -प्ि्ँ कोव् चलब्क च्ही से अह्ँ सभ केँ बुझल असि। 8 आ वे हम सभ ककरो रोटी बेक्र वसह खयलहँ । मुि् र्सिसिव पररशम आ पररशम मे पररशम कऱ ि िी, ज्सह सँ हम सभ अह्ँ मे सँ ककरो पर कोवो आरोप वसह लग् सकब।

अध्क 2 1 भ्इ लोकसव, हम सभ अपव् सभक पभु यीशु मसीहक आगमव आ हवक् लग जम् होयब्क क्रणे ँ अह्ँ सभ सँ सवविी कऱ ि िी। 2 एसह िरहे ँ अह्ँ सभ जन्ये मोव मे वसह सहलब, आ वे आि् म् सँ, आ वे वचव सँ, आ वे हमर् सभक पत द्र्, जेव् मसीहक सिव लग आसब गेल असि। 3 अह्ँ सभ केँ केओ कोवो िरहे ँ धोख् वसह सियौक, सकएक िँ ओ सिव ि्बि धरर वसह आओि ज्बि धरर पसहवे खसब वसह आओि आ ओ प्प करऽ वल् सवव्शक पुत पगट वसह भऽ ज्यि। 4 जे परमेश् वर कहल ज्इि असि व् पदसजि लोकक सवरोध कऱ ि असि आ अपव् केँ ऊपर उठब़ि असि। िे ँ ओ परमेश् वर जक्ँ परमेश् वरक मव् सिर मे ब़सल िसि आ अपव् केँ ई िे ख्ब़ि िसि जे ओ परमेश् वर िसि।

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२ सिसलुवीसकयों

9 हमर् सभ लग स्मर् वसह असि ि्सह लेल वसह, बल् सक हम सभ अपव् केँ अपव् केँ उि्हरण बव् कऽ अह्ँ सभक प्ि्ँ चलब्क लेल। 10 हम सभ जखव अह्ँ सभक संग िलहँ िखवो हम सभ अह्ँ सभ केँ ई आज् िे लहँ जे जँ केओ क्ज वसह करय च्ह़ ि असि िँ ओ भोजव वसह करसि। 11 हम सभ सुव़ि िी जे सकिु एहव लोक असि जे अह्ँ सभक बीच अववन्ि रपे ँ चल़ि असि, क्ज वसह कऱ ि असि, बल् सक व् असि। 12 एसह िरहक लोक सभ केँ हम सभ अपव पभु यीशु मसीहक द्र् आज् ि़ ि िी आ आगह कऱ ि िी जे ओ सभ चुपच्प क्ज कर आ अपव रोटी ख्उ। 13 मुि् यौ भ्इ लोकसव, अह्ँ सभ वीक क्ज मे ि्सक कऽ वसह ज्उ। 14 जँ केओ एसह पतक द्र् हमर् सभक वचव वसह म्व़ि असि िँ ओसह आिमी केँ ध्व सियौक आ ओकर् संग कोवो संगसि वसह कर ज्सह सँ ओ लन्ि भऽ ज्य। 15 ि़यो ओकर् शतु वसह बुझ,द बल् सक ओकर् भ्य जक्ँ उपिे श सिअ। 16 श्न्क पभु सयं अह्ँ सभ केँ ससिखव श्न् िे सिव। पभु अह्ँ सबहक संग रहसि। 17 पौलुसक पण्म हमर् अपव ह्ि सँ कयल गेल असि, जे प्ेक पत मे सचन्ि असि। 18 हमर् सभक पभु यीशु मसीहक कृप् अह्ँ सभक संग रहय। आमीव। (सिसलुवीसकयों के िोसर पत एिेस सँ सलखल गेल िल।)

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१ तीमुथियुस

18हे पुत छरमुछियुस, हम रोरा पर पछहने जे भछवषवापी कयल गेल छल, राछह अनुसारे ँ ई आजा दै र छी जे अहाँ ओकरा ्ारा नीक युद करब। 19 छवशास राखि आ नीक छववेक राखि। जे छकछु छवश् वासक छवषय मे छोछ़ कऽ जहाज डिबा दे लक। 20 हनका मे सँ छहमेछनयस आ छसकनर छछि। हम हनका सभ केँ शैरान केँ सौंपने छी जाछह सँ ओ सभ छनना नछह करब सीखय।

अध्य 1 1 पौलुस, जे हमरा सभक उदारकरार परमेश् वर आ पभु यीशु मसीहक आजा सँ यीशु मसीहक पेररर छी, जे हमरा सभक आशा अछछ। 2 छवशास मे हमर अपन पुत छरमुछियुस केँ: कृपा, दया आ शान्, हमरा सभक छपरा परमेश् वर आ हमरा सभक पभु यीशु मसीहक छदस सँ। 3 जखन हम मछकदु छनया मे गेल रही रखन अहाँ केँ इछिसुस मे न्र रहबाक लेल छवनरी केलहँ , जाछह सँ अहाँ छकछु लोक केँ आजा दे ब जे ओ सभ कोनो आन छशका नछह छसखाबछि। 4 आ ने छवश् वास मे परमेश् वरक भन्पिपर उर् पादन करबाक बजाय दं रकिा आ अंरहीन वंशावली पर धान नछह छदयौक। 5 आजाक अंर शुद हदय आ सछ्वेकी आ छनछवरवाद छवश् वास सँ पेम अछछ। 6 जाछह सँ छकछु लोक भटछक कऽ विर जंगला मे घुछम गेल अछछ। 7 धमर-छनयमक छशकक बनबाक इचा रखैर छछि। ओ सभ की कहै र छछि आ ने कोन बारक पुछ् करै र छछि से बुझैर छछि। 8 हम सभ जनैर छी जे धमर-छनयम नीक अछछ, जँ केओ ओकरा छवछधवर पयोग करै र अछछ। 9 ई जाछन कऽ जे धमर-छनयम कोनो धम् आदमीक लेल नछह, बल् छक अछनयम आ अवजाकारी, अभ् आ पापी, अपछवत आ अपछवत, छपराक हतारा आ मायक हतारा, नर-हता करयवला लेल बनाओल गेल अछछ। 10 वेशावला सभक लेल, मनुष् यक संग अपना केँ अशुद करयवला सभक लेल, माछसक चोरी करछनहार सभक लेल, झिठ बाजछनहार सभक लेल, झिठ गपशप करयवला सभक लेल आ जँ कोनो आन बार अछछ जे सर् य छशकाक छवपरीर अछछ। 11 धन परमेश् वरक गौरवशाली सुसमाचारक अनुसार जे हमरा भरोसा मे राखल गेल छल। 12 हम अपना सभक पभु मसीह यीशु केँ धनवाद दै र छी जे हमरा सकम बनौलछन, छकएक रँ ओ हमरा छवश् वासपिपर मानैर छछि आ हमरा सेवा मे रानख दे लछन। 13 ओ पछहने छनना करयवला, सराबयवला आ अपराध करयवला छलाह, मुदा हम दया पाछब गेलहँ , कारप हम अछवशास मे अनजानरा मे ई काज केलहँ । 14 मसीह यीशु मे छवशास आ पेमक संग हमरा सभक पभुक कृपा बहर बेसी छल। 15 ई बार छवश् वासपिपर आ सभ सीकारक योग अछछ जे मसीह यीशु पापी सभ केँ उदार करबाक लेल संसार मे आयल छछि। छजनका मे हम पमुख छी। 16 मुदा एछह कारपे ँ हम दया पाछब गेलहँ , जाछह सँ पछहने यीशु मसीह हमरा मे सभ धैयर रखछि, जाछह सँ हनका सभक लेल एकटा नमिना बनय जे आब हनका पर छवश् वास करछि आ अनन् र जीवनक लेल। 17 अन्, अमर, अदश, एकमात बुनदमान परमेश् वरक राजाक आदर आ मछहमा अन् काल धरर रहय। आमीन।

अध्य 2 1 रे ँ हम आगह करै र छी जे सभ सँ पछहने सभ मनुष्‍यक लेल छवनरी, पािरना, छवनरी आ धनाद-पदान कयल जाय। 2 राजा सभक लेल आ सभ अछधकारक लेल। जाछह सँ हम सभ सभ भन् आ ईमानदारी सँ शा् आ शां छरपिपर जीवन जीबी। 3 ई बार हमरा सभक उदारकरार परमेश् वरक नजरर मे नीक आ सीकायर अछछ। 4 ओ सभ मनुष् य केँ उदार पाबऽ चाहै र छछि आ सर् यक जान मे आबय चाहै र छछि। 5 परमेश् वर आ मनुष् यक बीच एकेटा परमेश् वर छछि आ मनुष् य मसीह यीशु छछि। 6 ओ अपना केँ सभक लेल छिरौरीक रप मे दे लछन, जाछह सँ उछचर समय पर गवाही दे ल जाय। 7 एछह लेल हमरा पचारक आ पेररर छनयु् कयल गेल अछछ, (हम मसीह मे सर् य कहै र छी, मुदा झिठ नछह बजैर छी। 8 रे ँ हम चाहै र छी जे मनुष् य सभ सभ ठाम पछवत हाि उठा कऽ छबना कोध आ संदेहक पािरना करछि। 9 रछहना स् तीगप सभ लजा आ संयमक संग छवनम पररधान मे सजब। झा़ल केश, सोना, मोरी आ महग सरपी सँ नछह। 10 मुदा (जे स् तीगप सभ परमेश् वरक भन् मानैर छछि) नीक काजक संग। 11 स् ती चुपचाप सभ वश्‍यकरा कऽ कऽ सीखय। 12 मुदा हम स् ती केँ छशका दे बऽ नछह दै र छी आ ने पुरख पर अछधकार ह़पय, बल् छक चुपचाप रहय दै र छी। 13 छकएक रँ पछहने आदमक छनमार प भेलछन, रखन हवा। 14 आदम धोखा नछह दे लक, बल् छक धोखा मे प़ल स् ती अपराध मे छल। 15 मुदा जँ ओ सभ छवश् वास आ पेम आ पछवतरा मे संयम रहछि रँ ओ संरान पैदा करबा मे उदार पाछब लेरीह। अध्य 3 1 ई बार सर् य अछछ जे जँ केओ छबशपक पदक इचा करै र अछछ रँ ओ नीक काज चाहै र अछछ। 2 रखन छबशप केँ छनद्ष होबाक चाही, एक पतीक पछर, सरकर, सोझ, नीक ववहारक, सतार करय बला, छसखाबय मे योग। 3 मछदरा पीबय नछह, पहार नछह करयवला आ गंदगीक लोभी नछह। मुदा धैयरवान, झग़ा करयवला नछह, लोभी नछह; 4 जे अपन घर मे नीक जकाँ शासन करै र अछछ आ अपन संरान केँ पिरा गुरुाकषरप सँ अधीन करै र अछछ। 5 (छकएक रँ जँ केओ अपन घरक शासन नछह जनैर अछछ रँ ओ परमेश् वरक मप् डलीक दे खभाल कोना करर?” 6 नवछसखुआ नछह, कही ं घमंड सँ उछठ कऽ शैरानक दण मे नछह पछ़ जाय।

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१ रीमुछियुस

7 संगछह ओकरा बाहरक लोकक नीक-नीक खबरर भेटबाक चाही। कही ं ओ अपमान आ शैरानक जाल मे नछह पछ़ जाय। 8 रछहना डीकन सभ केँ गंभीर होबाक चाही, दु भाछषया नछह होबाक चाही, बेसी मछदरा नछह पीबाक चाही, आ गंदगीक लोभी नछह होबाक चाही। 9 शुद छववेक मे छवशासक रहस केँ पक़ने। 10 पछहने ई सभ सेहो परखल जाय। रखन ओकरा सभ केँ छनद्ष पाओल जाइर, एकटा डीकनक पदक उपयोग करय छदयौक। 11 रछहना हनका सभक स् ती केँ गंभीर होबाक चाही, छनना करयवला नछह, सोझ आ सभ काज मे छवश् वास करयवला। 12 डीकन सभ एक स् तीक पछर होछि आ अपन संरान आ अपन घर पर नीक जकाँ शासन करछि। 13 छकएक रँ जे सभ डीकनक पद पर नीक जकाँ काज कऽ लेने छछि, से सभ अपना लेल नीक-नीक छडगी आ मसीह यीशु पर जे छवश् वास अछछ, राछह मे बहर साहस करै र छछि। 14 हम अहाँ केँ ई बार छलनख रहल छी जे जन्ये अहाँ लग आछब सकब। 15 मुदा जँ हम बहर छदन धरर छटकब रँ अहाँ केँ बुझल जा सकैर अछछ जे अहाँ केँ परमेश् वरक घर मे कोना ववहार करबाक चाही, जे जीछवर परमेश् वरक मप् डली अछछ, जे सतक स् आ आधार अछछ। 16 परमेश् वरक भन्-छववादक रहस बहर पैघ अछछ, परमेश् वर शरीर मे पगट भेलाह, आर् मा मे धाछमरक ठहराओल गेलाह, स् वगरदिर सभ केँ दे खल गेलाह, गैर-यहदी सभ केँ पचार कयलछन, संसार मे छवश् वास कयल गेलाह आ मछहमा मे चढल गेलाह। अध्य 4 1 आर् मा स् रप सँ कहै र अछछ जे बादक समय मे छकछु लोक छवश् वास सँ हछट कऽ बहकाबय बला आर् मा आ दु ष् टार् मा सभक छशका पर धान दे र। 2 बजब पाखंड मे प़ै र अछछ। हनका सभक छववेक गरम लोहा सँ जरा दे ल गेल छलछन। 3 छववाह करबा सँ मना करै र छछि आ ओछह भोजन सँ परहे ज करबाक आजा दै र छलाह, जे परमेश् वर सृष् छट कयलछन अछछ जे ओ सभ छवश् वास करै र अछछ आ सर् य केँ जनैर अछछ। 4 परमेश् वरक पर् येक सृछ् नीक अछछ, जँ ओकरा धनवादक संग गहप कयल जाय रँ ओकरा कोनो असीकार नछह कयल जा सकैर अछछ। 5 परमेश् वरक वचन आ पािरना ्ारा पछवत कयल गेल अछछ। 6 जँ अहाँ भाइ सभ केँ एछह बार सभक सरप करबैर छी रँ अहाँ यीशु मसीहक नीक सेवक बनब, जे अहाँ छवश् वास आ नीक छशकाक वचन मे पोसल जायब। 7 मुदा बिढ स् ती सभक अशुद आ बिढ स् ती सभक दं रकिा सभ केँ असीकार कर। 8 शरीरक वायाम सँ कम लाभ होइर छै क, मुदा परमेश् वरक भन् सभ वसुक लेल लाभकारी होइर छै क, कारप एखन जे जीवन अछछ आ आगामी जीवनक पछरजा अछछ। 9 ई बार छवश् वासपिपर अछछ आ सभ सीकार करबाक योग अछछ। 10 रे ँ हम सभ पररशम करै र छी आ अपमाछनर होइर छी, छकएक रँ हम सभ जीछवर परमेश् वर पर भरोसा करै र छी, जे सभ मनुष्

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यक उदारकरार छछि, खास कऽ छवश् वास करयवला सभक उदारकरार छछि। 11 ई सभ आजा दै र अछछ आ छसखबैर अछछ। 12 अहाँ क जवानी केँ केओ छररसार नछह करय। मुदा अहाँ छवश् वासी सभक उदाहरप बनि, वचन मे, गप-सप मे, पेम मे, आर् मा मे, छवश् वास मे आ शुदरा मे। 13 जाबर हम नछह आएब राबर धरर पढब, उपदे श आ उपदे श मे धान राखब। 14 अहाँ मे जे वरदान अछछ, जे अहाँ केँ भछवषवापीक ्ारा दे ल गेल अछछ, रकरा परमेश् वरक हाि रानख कऽ उपेका नछह कर। 15 एछह सभ बार पर मनन कर। अपना केँ पिपर रप सँ हनका सभक हाि मे दऽ छदयौक। राछक रोहर लाभ सभ केँ पगट हो। 16 अपना आ छशकाक पछर सावधान रह। ओकरा सभ मे रह, छकएक रँ एछह काज मे अहाँ अपना केँ आ जे अहाँ क बार सुनछनहार सभ केँ सेहो उदार करब।” अध्य 5 1 बिढ केँ डाँ टब नछह, बल् छक ओकरा छपरा जकाँ छवनरी कर। आ नवरुररया सभ भाइ जकाँ । 2 ब़की मछहला सभ मायक रप मे। छोटका बछहन जकाँ , समस पछवतराक संग। 3 ओछह छवधवा सभक आदर कर जे सते छवधवा छछि। 4 मुदा जँ कोनो छवधवाक संरान वा भाछरज अछछ रँ पछहने घर मे धमरपरायपरा दे खब आ अपन मारा-छपरा केँ पछरिल दे ब सीखय। 5 जे सते छवधवा आ उज़ल छछि, ओ परमेश् वर पर भरोसा करै र छछि आ राछर-छदन छवनरी आ पािरना करै र रहै र छछि। 6 मुदा जे भोग-छवलास मे जीबैर अछछ, से जीछवर रहै र मरर गेल अछछ। 7 ओ सभ छनद्ष रहबाक लेल ई सभ काज समारर छदयौक। 8 मुदा जँ केओ अपन आ खास कऽ अपन घरक लोकक भरपपोषप नछह करै र अछछ रँ ओ छवश् वास केँ असीकार कऽ लेने अछछ आ काछिर सँ बेसी खराब अछछ। 9 छवधवा केँ एक आदमीक पती भेला पर सछठ वषर सँ कम उमक संखा मे नछह राखल जाय। 10 नीक काजक लेल नीक जकाँ कहल गेल अछछ। जँ ओ संरानक पालन-पोषप केने छछि, जँ परदे शी लोक केँ ठहरौने छछि, जँ पछवत लोकक पएर धोने छछि, जँ पीछ़र केँ आराम दे ने छछि, जँ ओ सभ नीक काज मे लगन सँ पालन केने छछि। 11 मुदा छोटका छवधवा सभ मना कऽ दै र छछिन, छकएक रँ जखन ओ सभ मसीहक छवरद बेहदा होबऽ लगलाह रँ ओ सभ छववाह करर। 12 ओ सभ अपन पछहल छवश् वास केँ छोछ़ दे लछन। 13 ओ सभ घर-घर घुमैर-छिरै र बेकार रहब सीखैर अछछ। आ बेकारे नछह, बल् छक गप-सप करयवला आ वस लोक सेहो, जे बार बजैर अछछ जे ओकरा सभ केँ नछह करबाक चाही। 14 रे ँ हम चाहै र छी जे छोटकी स् ती सभ छववाह करछि, संरान पैदा करछि, घरक मागरदशरन करछि, छवपकी केँ छनना करबाक कोनो अवसर नछह दे छिन। 15 छकएक रँ छकछु गोटे शैरानक पाछाँ पछहने सँ भटछक गेल छछि।


१ रीमुछियुस

16 जँ केओ छवश् वास करयवला पुरष वा स् ती केँ छवधवा अछछ रँ ओकरा सभ केँ राहर दे बाक चाही आ मप् डली केँ कोनो आजा नछह दे ल जाय। जाछह सँ छवधवा सभ केँ आराम भेटय।” 17 नीक शासन करऽ वला पाचीन सभ केँ दु गुना आदरक योग मानल जाय, खास कऽ ओ सभ जे वचन आ छशका मे पररशम करै र छछि। 18 छकएक रँ धमरशास् त मे कहल गेल अछछ जे, “जे बैल धानक रौदै र अछछ, रकरा ि​ि​िन नछह लगाउ।” आ, मजदि र अपन इनामक योग अछछ। 19 कोनो पाचीन पर कोनो आरोप नछह, बल् छक दि -रीन गवाहक समक पर आरोप लगाउ। 20 पाप करछनहार सभ केँ सभक समक डाँ टैर अछछ, जाछह सँ दोसरो लोक सभ डरय। 21 हम अहाँ केँ परमेश् वर आ पभु यीशु मसीह आ चुनल गेल स् वगरदिर सभक समक आजा दै र छी जे अहाँ एक-दोसर सँ आगि नछह बछढ कऽ एछह बार सभ केँ पालन कर। 22 अचानक ककरो पर हाि नछह राखि आ ने दोसरक पाप मे सहभागी बनि। 23 आब पाछन नछह पीबि, बल् छक अपन पेट आ बेर-बेर दु बरलराक कारपे ँ कनेक मछदरा पीबि। 24 छकछु लोकक पाप पछहने सँ खुजल अछछ आ पछहने सँ न् याय मे जाइर अछछ। आ छकछु आदमीक पाछाँ -पाछाँ चलैर छछि। 25 रछहना छकछु गोटे क नीक काज सेहो पछहने सँ पकट होइर अछछ। आ जे अनिा अछछ से नुकायल नछह जा सकैर अछछ।

11 मुदा, हे परमेश् वरक लोक, अहाँ एछह सभ बार सँ भाछग जाउ। आ धमर, भन्, छवशास, पेम, धैयर, नमराक पालन कर। 12 छवशासक नीक ल़ाई ल़ि, अन् जीवन केँ पकछ़ छलअ, जकरा लेल अहाँ सेहो बजाओल गेल छी आ बहरो गवाहक समक नीक सीकार केलहँ । 13हम अहाँ केँ परमेश् वरक नजरर मे आजा दै र छी जे सभ छकछु केँ जीछवर करै र छछि आ मसीह यीशुक समक, जे पोन् छरयो छपलारुसक समक नीक सीकारोन्क गवाह छलाह। 14जखन धरर हमरा सभक पभु यीशु मसीहक पगट नछह भऽ जायर, राबर धरर अहाँ एछह आजाक छनद्ष आ छनद्ष रप सँ पालन कर। 15 ओ अपन समय मे ई दे खाओर जे के धन आ एकमात सामररवान छछि, राजा सभक राजा आ पभु सभक पभु छछि। 16 ओकरा केवल अमररा अछछ, ओ ओछह इजोर मे रहै र अछछ जकरा लग केओ नछह जा सकैर अछछ। जकरा केओ नछह दे खने अछछ आ ने दे नख सकैर अछछ। आमीन। 17 एछह संसार मे धछनक लोक सभ केँ आजा छदअ जे ओ सभ उनाद नछह करछि, आ अछनछ्र धन मे भरोसा नछह करछि, बल् छक जीछवर परमेश् वर पर भरोसा करछि, जे हमरा सभ केँ सभ छकछु भोगक लेल धछनक रप सँ दै र छछि। 18 ओ सभ नीक काज करछि, नीक काज मे धनी होछि, बाँ टय लेल रैयार होछि, संवाद करऽ लेल रैयार होछि। 19 आगामी समयक पछर अपना लेल नीक नीवं रानख कऽ अनन् र जीवन केँ पकछ़ सकछि। 20 हे छरमुछियुस, अपछवत आ विर बकबक आ छवजानक छवरोध सँ बचैर जे अपन भरोसा मे राखल गेल अछछ, रकरा राखि। 21 ई बार कहय बला छकछु लोक छवश् वासक छवषय मे गलरी केने छछि। कृपा अहाँ क संग हो। आमीन। (पछहल छरमुछियुस केँ लौदीछकया सँ छलखल गेल छल, जे फीछगया पकाछटयाना केर सबसँ पमुख शहर अछछ।)

अध्य 6 1 जे सभ सेवक जुआक नीचाँ अछछ, से सभ अपन माछलक केँ सभ आदरक योग मानछि, जाछह सँ परमेश् वरक नाम आ हनकर छशकाक छनना नछह कयल जाय। 2 जे सभ छवशासी माछलक छछि, हनका सभ केँ छररसृर नछह करछि, छकएक रँ ओ सभ भाय छछि। बल् छक हनका सभक सेवा कर, छकएक रँ ओ सभ छवश् वासपिपर आ छपय छछि आ लाभक भागीदार छछि। ई सभ बार छसखाबैर अछछ आ उपदे श दै र अछछ। 3 जँ केओ दोसर ररहक छशका दै र अछछ आ सर् य वचन, अिार र् हमरा सभक पभु यीशु मसीहक वचन आ परमेश् वरक धाछमरक छशका पर सहमर नछह अछछ। 4 ओ घमंडी अछछ, ओ छकछु नछह जनैर अछछ, बल् छक प्छववाद आ वचन-झग़ा मे लोभ करै र अछछ। 5 भ् छवचारक आ सत सँ वंछचर लोक सभक छवकृर छववाद, ई बुछझ जे लाभ भन् अछछ। 6 मुदा संरोषक संग परमेश् वरक भन् बहर लाभ होइर अछछ। 7 हम सभ एछह संसार मे छकछु नछह अनलहँ , आ ई छनछ्र अछछ जे हम सभ छकछु ओ नछह ल’ सकैर छी। 8 भोजन आ वस भेने हम सभ ओछह मे संरु् रहब। 9 मुदा जे सभ धछनक होबय चाहै र छछि, ओ सभ परीका आ जाल मे आ बहर रास मिखररापिपर आ आहर करयवला कामना मे पछ़ जाइर छछि, जे मनुष केँ छवनाश आ छवनाश मे डिबा दै र अछछ। 10 छकएक रँ पैसाक पेम सभ अधलाहक जछ़ अछछ, जकर लालच छकछु लोक करै र छल, रखन ओ सभ छवश् वास सँ भटछक गेल अछछ आ बहर दु खक संग अपना केँ छे छद लेलक।

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2 तीमुथियुस

अध्य 2 1 रे ँ हे हमर बेटि, मसीह यीशु मे जे अनुगह अ्छ, रि्ह मे बलविन बनू। 2 अहिँ हमरि सँ बहरो गविहक बीच जे बिर सुनने छी, से अहिँ ्वशिसी लोक सभक हि​ि मे रिनख ्दयौक, जे दोसरो केँ ्सखिबय मे सकम होयर। 3 रे ँ अहिँ यीशु मसीहक नीक ्सपिही जकिँ कठोररि सहै र रह। 4 युद करयवलि केओ ए्ह जीवनक किज मे उलझैर न्ह अ्छ। जे ओकरि ्सपिही बनय लेल चुनने अ्छ ओकरि पसर करय। 5 जँ केओ पभुभक लेल सेहो झगडि करै र अ्छ रँ ओकरि रिज न्ह प्हरिओल जियर, जिबर रक ओ ्व्धवर संघर् न्ह करर। 6 जे ्कसिन पररशम करै र अ्छ, रकरि प्हने िल मे भिग लेबिक चिही। 7 हम जे कहै र छी रि्ह पर ्वचिर कर। आ पभु रोरि सभ बिरक समझ दे ्िन।” 8 मोन रिखू जे दिऊदक वंशजक यीशु मसीह हमर सुसमिचिरक अनुसिर मृर् यु मे सँ जी्ब उठलिह। 9 ए्ह सँ हम एकटि दु र् ट कर्नहिर जकिँ कष भोगैर छी। मुदि परमेश् वरक वचन बिनल न्ह अ्छ। 10 रे ँ हम चुनल लोक सभक लेल सभ ्कछु सहै र छी, जि्ह सँ ओ सभ सेहो अनन् र म्हमिक संग मसीह यीशु मे जे उदिर पि्ब रहल अ्छ। 11 ई ्वश् विसपूम् कहब अ्छ जे जँ हम सभ हनकि संग मरर गेल छी रँ हनकि संग सेहो जी्वर रहब। 12 जँ हम सभ कष उठिब रँ हम सभ हनकि संग रिज करब। 13 जँ हम सभ ्वश् विस न्ह करै र छी रँ ओ ्वश् विसपूम् रहर। 14 हनकि सभ केँ ए्ह बिर सभक सरम मे रिखू, पभुक समक हनकि सभ केँ आति दै र रह जे ओ सभ कोनो लिभक बिर न्ह, बल् ्क सुन्नहिर केँ उखि्ड िेकबिक लेल झगडि करै र छ्ि। 15 अपनि केँ परमेश् वरक अनुग्हर करबिक लेल अधयन कर, जे किज करयवलि अ्छ, जकरि लिज करबिक आवदकरि न्ह अ्छ आ सतक वचन केँ सही ररीकि सँ बिँ ्ट रहल अ्छ। 16 मुदि अप्वत आ वि् बकबक सँ परहे ज कर, ्कएक रँ ओ सभ आरो अभनक ्दस ब्ृ जियर। 17 हनकि सभक वचन कंस जकिँ खि जियर। 18 ओ सभ सतक ्वरय मे गलरी कऽ कऽ कऽ कऽ जे पुनरुिनक समय प्हने सँ बी्र गेल अ्छ। आ ्कछु गोटे क ्वशिस उखि्ड ्दयौक। 19 मुदि परमेश् वरक नीवं दृ अ्छ, जि्ह पर ई मोहर अ्छ जे , “पभु अपन लोक सभ केँ जनैर छ्ि।” “जे केओ मसीहक निम लैर अ्छ, से अधम् सँ ह्ट जिय।” 20 मुदि पैघ घर मे सोनि-चिनीक बर्न मित न्ह, मुदि लकडी आ मि्टक बर्न सेहो रहै र अ्छ। आ ्कयो आदर करबिक लेल आ ्कयो बेइजर करबिक लेल। 21 जँ केओ ए्ह सभ सँ अपनि केँ शुद कऽ लेर रँ ओ आदरक पित, प्वत आ मि्लकक उपयोगक योग आ सभ नीक किजक लेल रैयिर भऽ जियर। 22 युविवसिक विसनि सँ सेहो पलियन कर, मुदि शुद हदय सँ पभुक आहिन कर्नहिर सभक संग धि्म्करि, ्वश् विस, पेम आ शिन्क पिलन कर।

अध्य 1 1 पौलुस, मसीह यीशु मे जीवनक प्रतिक अनुसिर परमेश् वरक इचि सँ यीशु मसीहक पेररर छी। 2 हमर ्पय पुत ्रमु्ियुस केँ, ्परि परमेश् वर आ हमरि सभक पभु मसीह यीशुक कृपि, दयि आ शिन् भेटय। 3 हम परमेश् वर केँ धनविद दै र छी, ्जनकर सेवि हम अपन पूव्ज सभ सँ शुद ्ववेक सँ करै र छी, जे हम रि्र-्दन पि​ि्नि मे अहिँ क सरम करै र छी। 4 हम अहिँ केँ दे खबिक बहर इचि रखैर छी, अहिँ क नोर पर मोन रिनख, जि्ह सँ हम आनन सँ भरर सकब। 5 जखन हम अहिँ मे जे अशुद ्वश् विस अ्छ, रकरि मोन पिडब, जे प्हने अहिँ क दिदी लोइस आ अहिँ क मिय यूनीस मे छल। आ हमरि ्वशिस अ्छ जे अहिँ मे सेहो ई बिर। 6 रे ँ हम अहिँ केँ मोन पिडै र छी जे अहिँ परमेश् वरक वरदिन केँ भडकिबैर छी जे हमर हि​ि लगि कऽ अहिँ मे अ्छ। 7 परमेश् वर हमरि सभ केँ भयक आर् मि न्ह दे ल्न। बल् ्क सिमि्​् य आ पेम आ सुदृ मनक। 8 रे ँ अहिँ हमरि सभक पभुक गविही पर लिज न्ह कर आ ने हम हनकर कैदी पर। 9 ओ हमरि सभ केँ उदिर कयल्न आ हमरि सभ केँ प्वत बजिओल गेलिह, हमरि सभक किजक अनुसिर न्ह, बल् ्क हनकर अपन उदे द आ कृपिक अनुसिर जे संसिरक पिरा सँ प्हने मसीह यीशु मे हमरि सभ केँ दे ल गेल छल। 10 मुदि आब हमरि सभक उदिरकरि् यीशु मसीहक पगट भेलि सँ पगट भऽ गेल अ्छ, जे मृतु केँ समिप कऽ दे ल्न आ सुसमिचिर दिरि जीवन आ अमररि केँ इजोर मे अनने छ्ि। 11 ए्ह लेल हमरि गैर-यहदी सभक पचिरक, पेररर आ ्शकक ्नयुक कयल गेल अ्छ। 12 ए्ह किरमे ँ हमहँ ई सभ कष भोगैर छी, रि​ि्प हमरि लिज न्ह होइर अ्छ, ्कएक रँ हम जनैर छी जे हम केकरि पर ्वश् विस केने छी आ ्वशिस अ्छ जे ओ ओ्ह ्दन धरर जे ्कछु हम ओकरि सौंपने छी रकरि पूरि कऽ सकैर अ्छ। 13 मसीह यीशु मे जे ्वश्‍विस आ पेम अ्छ, रि्ह मे जे सुदृ वचन सुनने छी, रकरि मजबूरी सँ पकडू। 14 जे नीक किज अहिँ केँ सौंपल गेल अ्छ, से प्वत आर् मि हमरि सभ मे रह्नहिर दिरि रिखू। 15 अहिँ ई बिर जनैर छी जे ए्शयि मे जे सभ अ्छ से सभ हमरि सँ ्वमुख भऽ गेल अ्छ। ्जनकि मे ्िगेलस आ हरमोजी्नस छ्ि। 16 पभु ओने्सिोरसक घरिनि पर दयि कर्ि। ्कएक रँ ओ हमरि बेर-बेर आरिम दै र छलिह आ हमर जंजीर मे लिज न्ह करै र छलिह। 17 मुदि जखन ओ रोम मे छलिह रखन ओ हमरि बहर मेहन्र सँ रकल्न आ हमरि पि्ब गेलिह। 18 पभु ओकरि ओ्ह ्दन पभुक दयि कर्िन।

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2 रीमु्ियुस

अध्य 4

23 मुदि मूख्रिपूम् आ अ्श्कर प् सभ सँ बचू, ई जि्न जे ई सभ लै्गक ्वविद करै र अ्छ। 24 पभुक सेवक केँ झगडि न्ह करबिक चिही। मुदि सभ लोकक प्र कोमल रह, ्शकि दे बिक योग रह, धैय् रिखू। 25 नमरिपूव्क अपन ्वरोध मे लोक केँ ्शकि दै र रह। जँ परमेश् वर शियद हनकि सभ केँ सत केँ सीकिर करबिक लेल पशिरिप दे ्िन; 26 आ ए्ह लेल जे ओ सभ शैरिनक जिल सँ बिहर ्नक्ल सक्ि, जे हनकर इचिनुसिर हनकि दिरि बंदी बनिओल गेल अ्छ।

1 रे ँ हम अहिँ केँ परमेश् वर आ पभु यीशु मसीहक समक आति दै र छी जे जी्वर आ मृर् यु सभक न् यिय कररिह। 2 वचनक पचिर कर। मौसम मे क्मक रहब, मौसम सँ बिहर; सभ धैय् आ ्शकिक संग डिँ टब, डिँ टब, उपदे श दे ब। 3 ्कएक रँ एहन समय आओर जखन ओ सभ सर् य ्शकि केँ सहन न्ह करर। मुदि ओ सभ अपन-अपन विसनि जकिँ किन मे खुजली बलि गुर सभक ढे र लगिओर। 4 ओ सभ सर् य सँ किन मो्ड कऽ दं रकि​ि ्दस घुरर जियर। 5 मुदि अहिँ सभ बिर मे जिगरक रह, कष सह, सुसमिचिर पचिरक किज कर आ अपन सेविक पूम् पमिम बनिउ। 6 हम आब चृिबऽ लेल रैयिर छी, आ हमर ्वदिक समय लग आ्ब गेल अ्छ। 7 हम नीक लडिइ लडलहँ , अपन बिट पूरि कऽ लेलहँ , ्वश् विस केँ पिलन केलहँ । 8 आब सँ हमरि लेल धि्म्करिक मुकुट रिखल गेल अ्छ, जे ओ्ह ्दन परमेश् वर, धि्म्क नियिधीश, हमरि दे ्िन। 9 जन्ये हमरि लग आ्ब जेबिक लेल अपन पररशम कर। 10 ्कएक रँ दे मिस ए्ह संसिर सँ पेम कऽ कऽ हमरि छो्ड ्िसलुनीकी च्ल गेल अ्छ। ्​्सेस गलि्रयि, रीरुस डिल्मयि। 11 हमरि संग मित लूकि अ्छ। मरकुस केँ लऽ कऽ ओकरि अपनि संग ल’ जिउ, ्कएक रँ ओ हमरि लेल सेविक लेल लिभकिरी अ्छ। 12 हम ्रनखकस केँ इ्िसुस पठि दे ने छी। 13 हम जे वस तोआस मे किप्सक संग छोडने छलहँ रखन अहिँ आ्ब कऽ आओर। 14 रिमकिर ्सकनर हमरि पर बहर दु र् ट कयल्न। 15 अहिँ हनकि सँ सेहो सिवधिन रह। ्कएक रँ ओ हमरि सभक बिरक बहर ्वरोध कयल्न। 16 हमर प्हल उ्र मे ्कयो हमरि संग ठिृ न्ह भेल, मुदि सभ लोक हमरि छो्ड दे लक। 17 मुदि परमेश् वर हमरि संग ठिृ रहलिह आ हमरि मजबूर कयल्न। जि्ह सँ हमरि दिरि पचिर-पसिर पूरि ररहे ँ परि चलर आ सभ गैर-यहदी सभ सुन्ि। 18 पभु हमरि सभ अधलिह किज सँ मुक कररिह आ हमरि अपन स् वग्य रिज् य मे सुर्कर रखरिह। आमीन। 19 ्पसि आ अकीलि आ ओने्सिोरसक घरक लोक केँ पमिम कर। 20 इरिसस कोररन मे रहलिह, मुदि ट् ो्िमस केँ हम ्मलेरुम मे बीमिर छो्ड दे लहँ । 21 जिडक प्हने आबय लेल अपन लगन कर। यूबुलस, पुडेस, ्लनस, किउ्डयि आ सभ भिय केँ अहिँ केँ अ्भविदन करै र छ्ि। 22 पभु यीशु मसीह अहिँ क आर् मिक संग रह्ि। कृपि अहिँ क संग रहय। आमीन। (इ्ि्सयों के कली्सयि के प्हल ्बशप के रप मे ्नयुक ्रमु्ियुस के दोसर पत रोम से ्लखलो गेलै, जबेॅ पौलुस के दोसरऽ बिर नीरो के सिमने लिनलऽ गेलै।)

अध्य 3 1 ईहो जि्न ्लअ जे अं्रम समय मे ्वप्​्पूम् समय आओर। 2 ्कएक रँ मनुर् य अपन पेमी, लोभी, घमंडी, घमंडी, ्ननि करयवलि, मिरि-्परिक आति न्ह मिनय बलि, कृरघ न्ह करयवलि, अप्वत होयर। 3 ्बनि सिभि्वक सेह, युद्वरिम रोड्नहिर, झूठ आरोपक, असंयम, उग, नीक लोकक ्ररसिर करयवलि। 4 गदिर, मिदक, उच ्वचिरक, परमेश् वरक पेमी सँ बेसी भोग्वलिसक पेमी। 5 अहिँ सभ परमेश् वरक भनकक रप धिरम करै र छी, मुदि ओकर सिमि्​् य केँ असीकिर करै र छी। 6 ्कएक रँ ए्ह ररहक लोक सभ घर-घर मे घु्स कऽ पिप सँ भिररर मूख् स् तीगम सभ केँ बंदी बनि कऽ लऽ जिइर छ्ि। 7 स्दखन सीखैर रहब, आ सतक तिन मे क्हयो न्ह आ्ब सकैर छी। 8 ज्हनि यिनेस आ यिमेस मूसिक ्वरोध कयल्न, रेनि ई सभ सेहो सतक ्वरोध करै र छ्ि। 9 मुदि ओ सभ आगू न्ह बृरिह, ्कएक रँ हनकि सभक मूख्रि सभ लोकक सिमने पगट होयर, जेनि हनकि सभक मूख्रि सेहो छल्न। 10 मुदि अहिँ हमर ्शकि, जीवन-शैली, उदे द, ्वश् विस, धैय्, पेम, धैय्, पूम् रप सँ जनैर छी। 11 हमरि लग अ्ि्कयि, इको्नयम आ लुसि मे हमरि लग आयल परिडनि आ कष। हम केहन परिडनि सहलहँ , मुदि पभु हमरि ओ्ह सभ मे सँ बचि लेल्न। 12 हँ , जे सभ मसीह यीशु मे परमेश् वरक भनक मे रहय चिहै र छ्ि, रकरि सरिओर। 13 मुदि दु र् ट लोक आ बहकिविबलि सभ आओर बेसी खरिब भऽ जियर, धोखि दै र आ धोखि खिइर रहर। “ 15 अहिँ बचपन सँ प्वत शिस सभ केँ जनैर छी जे मसीह यीशु पर ्वश् विस दिरि अहिँ केँ उदिरक लेल बुनदमिन बनि सकैर अ्छ। 16 सभ धम्शिस् त परमेश् वरक पेरमि सँ दे ल गेल अ्छ आ ्शकि, डिँ ट, सुधिर आ धि्म्करिक ्शकिक लेल लिभकिरी अ्छ। 17 ए्ह लेल परमेश् वरक मनुर् य ्सद हो्ि आ सभ नीक किजक लेल पूरि ररहे ँ सजग हो्ि।

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टाइटस

10 चोरी नवह करब, बल् वक सभ नीक वनषा दे खब। जावह सँ ओ सभ हमरा सभक उदारकरार परमेश् वरक वशका केँ सभ बार मे शोभा बढा सकय। 11 वकएक रँ परमेश् वरक कृपा सभ मनुद् य केँ प्र कयल ्ेल अवछ जे उदार पावब रहल अवछ। 12 हमरा सभ केँ ई वसखबैर छी जे अभक् आ सां साररक वासना केँ असीकार कऽ कऽ एवह संसार मे सज्, ोावमरक आ परमेश् वरक भक् ररापूवरक रहब। 13 हम सभ ओवह ोन आशा आ महान परमेश् वर आ हमरा सभक उदारकरार यीशु मसीहक ्ौरवशाली दशरनक परीका मे छी। 14 ओ हमरा सभक लेल अपना केँ समवपरर कयलवन जावह सँ ओ हमरा सभ केँ सभ अोमर सँ मु् कऽ सकवि आ नीक काज मे उतुक लोक केँ अपना लेल शुद करवि 15 ई बार सभ अवोकार सँ बाजू, उपदे श वदअ आ डाँ वर वदयौक। केओ रोरा वररसार नवह करय।

अधाय 1 1 पौलुस, परमेश् वरक सेवक आ यीशु मसीहक पेररर छी, परमेश् वरक चुनल लोक सभक ववश् वास आ परमेश् वरक भक् मे सर् य केँ सीकार करबाक अनुसार। 2 अनन जीवनक आशा मे, जे परमेश् वर, जे झूठ नवह बावज सकैर छवि, संसारक पारं भ सँ पवहने वचन दे ने छलाह। 3 मुदा ओ समय पर अपन वचन पचारक दारा प्र कयलवन, जे हमरा सभक उदारकरार परमेश् वरक आजाक अनुसार हमरा सौंपल ्ेल अवछ। 4 हमर अपन पुत रीरुस केँ सावरभौवमक ववश् वासक अनुसार: कृपा, दया आ शाकन, वपरा परमेश् वर आ हमरा सभक उदारकरार पभु यीशु मसीहक दारा। 5 एवह लेल हम अहाँ केँ केरे मे छोव़ दे वलयैक जे अहाँ जे वकछु कमी अवछ रकरा ववकवर कर आ हर न्र मे बूढ-पुरानक वनयुक् कर जेना हम अहाँ केँ वनयु् केने रही। 6 जँ केओ वनद्द अवछ, रँ एक पतीक पवर, जकर ववश् वासयो्​् य संरान अवछ, जकरा पर दं ्ा वा अशुदराक आरोप नवह हो। 7 परमेश् वरक भणारी जकाँ वबशप केँ वनद्द रहबाक चाही। सािा नवह, जक्ये कोवोर नवह, शराब मे नवह, ह़राली नवह, ्ंदा लाभ मे नवह; 8 मुदा सतार पेमी, नीक लोकक पेमी, सोझ, ोमा, पववत, संयमी। 9 ओ ववश् वासक वचन केँ जेना वसखाओल ्ेल अवछ, रेना पकव़ कऽ राखू, जावह सँ ओ सर् य वशकाक दारा ववपकी लोक सभ केँ उपदे श दे बऽ आ मनाबय मे सकम भऽ सकय। 10 वकएक रँ बहर रास अशुद आ विर ्प करऽ वला आ ो​ोखा दे बयवला अवछ, खास कऽ खरना करऽ वला लोक। 11 जकर मुँह रोकल जेबाक चाही, जे ्ंदा लाभक लेल पूरा घर केँ उखाव़ फेकैर अवछ, जे वकछु नवह करबाक चाही से वसखाबैर अवछ 12 अपना मे सँ एक ्ोरे अपन पवक् रा बजलाह, “केरेक लोक सभ सवदखन झूठ बाजवनहार, दु ष जानवर आ मंद पेर अवछ।” 13 ई ्वाह सत अवछ। रे ँ हनका सभ केँ जोर-जोर सँ डाँ वर वदयौक जावह सँ ओ सभ ववश् वास मे सर् य रहवि। 14 यहदी सभक दं रकिा आ मनुद् य सभक आजा पर धान नवह वदयौक जे सर् य सँ हवर जाइर अवछ। 15 शुद लोकक लेल सभ वकछु शुद अवछ, मुदा अशुद आ अववशासी सभक लेल कोनो शुद नवह अवछ। मुदा हनका लोकवनक मन आ वववेक सेहो अशुद अवछ। 16 ओ सभ ई बार कहै र छवि जे ओ सभ परमेश् वर केँ जनैर छवि। मुदा काज मे ओ सभ घृविर आ आजा नवह मानैर अवछ आ हर नीक काज मे वररसृर भ' क' ओकरा असीकार करै र अवछ।

अधाय 3 1 हनका सभ केँ ररयासर आ अवोकारक अोीन रहबाक, दं डावोकारीक आजा मानबाक आ सभ नीक काज करबाक लेल रैयार रहबाक लेल मोन राखू। 2 ककरो बुराई नवह बाजब, कोनो झ़्ा करयवला नवह, बल् वक सभ मनुद् यक समक सभ नमरा दे खब। 3 वकएक रँ हम सभ सेहो कखनो-कखनो मूखर, आजा नवह मानैर, ो​ोखा खाइर छलहँ, ररह-ररह केर काम-वासना आ भो्-ववलासक सेवा करै र छलहँ , दु भार वना आ ईरार मे रहै र छलहँ , घृिा करै र छलहँ आ एक-दोसर सँ घृिा करै र छलहँ । 4 मुदा रकर बाद हमरा सभक उदारकरार परमेश् वरक दया आ पेम मनुद् यक पवर प्र भेल। 5 हम सभ ोावमरकराक काज दारा नवह, बल् वक ओ अपन दयाक अनुसार हमरा सभ केँ पुनजरज केँ ो​ोबय आ पववत आर् माक नवीकरि दारा हमरा सभ केँ उदार कयलवन। 6 ओ हमरा सभक उदारकरार यीशु मसीहक दारा हमरा सभ पर पचुर माता मे बहा दे लवन। 7 हनकर कृपा सँ ोमा ठहराओल ्ेल आ अनन् र जीवनक आशाक अनुसार हम सभ उतरावोकारी बवन जायब। 8 ई बार ववश् वासपूिर अवछ आ हम चाहै र छी जे अहाँ सवदखन ई बार सभ केँ पुष करै र रह जावह सँ परमेश् वर पर ववश् वास कयवनहार सभ नीक काज केँ वनवार ह करबाक लेल सावोान रहवि। ई सभ बार मनुद् यक लेल नीक आ लाभदायक अवछ। 9 मुदा मूखररापूिर प्, वंशावली, वववाद आ ोमर-वनयमक ववदय मे झ़्ा सँ बचू। कारि, ओ सभ बेकार आ विर अवछ। 10 जे आदमी पवहल आ दोसर उपदे शक बाद पाखणी अवछ, रकरा असीकार कर। 11 ई जावन कऽ जे जे एहन अवछ से उखाव़ कऽ पाप करै र अवछ, अपना पर दोदी ठहराओल ्ेल अवछ 12 जखन हम आर्मास केँ अहाँ ल् पठा दे ब, रखन हम वनकोपोवलस हमरा ल् अयबा मे ल्न। 13 कानून-वकील जेनास आ अपोलोस केँ याता पर ल्न सँ आवन वदयौक, जावह सँ हनका सभक कोनो कमी नवह हो। 14 आ हमरा सभ सेहो नीक काज केँ आवश् यक उपयो्क लेल वनवार ह करब सीखू, जावह सँ ओ सभ वनषल नवह हो। 15 हमरा सं् जे सभ अवछ, से सभ अहाँ केँ पिाम करै र अवछ। जे हमरा सभ सँ ववश् वास मे पेम करै र अवछ, रकरा सभ केँ अवभवादन कर। कृपा अहाँ सबहक सं् रहय। आमीन। (ई मैवसडोवनया के वनकोपोवलस से केरे के कलीवसया के पवहल वबशप के रप मे वनयु् रीरुस के वलखल ्ेल छल।)

अधाय 2 1 मुदा अहाँ ओवह बार सभ केँ बाजू जे सर् य वशका बवन जाइर अवछ। 2 वृद लोक सभ सोझ, ्ंभीर, संयमशील, ववशास मे, पेम मे आ ोैयर मे सव रहवि। 3 वृद मवहला सभ सेहो एवह ररहे ँ पववतराक अनुसार ववहार करवि, नवह वक झूठ आरोप ल्ाबय बला आ बेसी मवदरा नवह पीबय बला, नीक बारक वशकक नवह। 4 ओ सभ युवरी सभ केँ सोझ रहब, अपन पवर सँ पेम करबाक आ अपन बचा सभ सँ पेम करबाक वसखाबवि। 5 वववेकी, पवरवरा, घरक पालन करवनहार, नीक, अपन पवरक आजाकारी बनू, जावह सँ परमेश् वरक वचनक वनना नवह कयल जाय। 6 युवक सभ सेहो सोझ रहबाक लेल आगह करै र छवि। 7 सभ बार मे अपना केँ नीक काजक नमूना दे खाउ। 8 नीक वािी, जकर वनना नवह कयल जा सकैर अवछ। एवह ररहे ँ जे केओ उला अवछ, से लजा जायर, जकरा अहाँ सभक ववदय मे कोनो अोलाह बार नवह कवह सकैर अवछ। 9 दास सभ केँ आगह कर जे ओ अपन मावलकक आजाकारी रहवि आ सभ काज मे हनका सभ केँ नीक जकाँ पसर करवि। फेर कोनो उतर नवह दे ब;

171


फिलेमोन अध्याय 1 1 यीशु मसीहक कैदी पौलुस आ हमर सभक भाय तिमुथियुस, हमरा सभक प्रिय आ सहकमी फिलेमोन केँ। 2 हमर सभक प्रिय अफिया आ अपन सहसैतनक आफकिप्पस आ अहा​ाँक घरक मण ् डली केँ।

3 हमरा सभक प्रपिा परमेश ् वर आ िभु यीशु मसीह द्वारा अहा​ाँ सभ केँ कृपा आ शान्ति भेटय। 4 हम अपन िाि​िना मे सददखन अहा​ाँक नाम दै ि अपन परमेश ् वर केँ धतयवाद दै ि छी। 5 िभु यीशु आ सभ पप्रवत्र लोकक िति अहा​ाँक िेम आ प्रवश ् वासक प्रवषय मे सन ु ैि छी।

6 मसीह यीशु मे जे फकछु नीक बाि अहा​ाँ सभ मे अतछ, िकरा स्वीकार कऽ कऽ अहा​ाँक प्रवश ् वासक संवाद िभावी भऽ जाय।

7 भाइ, अहा​ाँक िेम मे हमरा सभ केँ बहुि आनतद आ सात्वना भेटैि अतछ, फकएक िाँ अहा​ाँ साँ पप्रवत्र लोक सभक आतिर स्िूति​ि भेटैि अतछ।

8 एदह लेल हम मसीह मे बहुि साहस कऽ कऽ अहा​ाँ केँ जे फकछु उथि​ि आज्ञा दऽ सकब।

9 िैयो हम िेमक कारणेँ अहा​ाँ साँ प्रवनिी करै ि छी, हम पौलुस जका​ाँ वद् ृ ध छी आ आब यीशु मसीहक कैदी छी। 10 हम अहा​ाँ साँ अपन पुत्र ओनेससमसक लेल प्रवनिी करै ि छी, जकरा हम अपन बंधन मे जनमने छी। 11 पदहने ई बाि अहा​ाँक लेल बेकार छल, मुदा आब अहा​ाँ आ हमरा लेल लाभकारी अतछ। 12 हम हुनका िेर पठौने छी, िेँ अहा​ाँ हुनका अिाि​ि हमर अपन आंि केँ ग्रहण करू।

13 हम हुनका अपना संग राखख िाहैि छलहुाँ जादह साँ अहा​ाँक बदला मे ओ सुसमािारक बातह मे हमर सेवा करथि।

14 मुदा अहा​ाँक प्रविारक बबना हम फकछु नदह कररिहुाँ। जे अहा​ाँक लाभ आवश्यकिा जका​ाँ नदह, अप्रपिु स्वेच्छा साँ हो। 15 एदह लेल ओ फकछु समयक लेल िसल गेलाह जादह साँ अहा​ाँ हुनका अनति काल धरर ग्रहण कऽ सकब।

16 आब दास जका​ाँ नदह, बल ् फक सेवक साँ ऊपर, हमरा लेल प्रिय भाइ, मुदा अहा​ाँ केँ शरीर आ िभु दन ु ू मे किेक बेसी? 17 िेँ जाँ अहा​ाँ हमरा संगी मानैि छी िाँ हुनका अपना जका​ाँ ग्रहण करू।

18 जाँ ओ अहा​ाँ पर अतयाय केने अतछ वा अहा​ाँ पर कोनो ऋणी अतछ िाँ हमरा दहसाबे राखू। 19 हम पौलुस एकरा अपन हाि साँ सलखने छी जे, “हम एकर बदला दे ब।” 20 हाँ, भाइ, हमरा िभु मे अहा​ाँ साँ आनन्तदि होउ।

21 हम अहा​ाँक आज्ञापालन पर भरोसा राखख अहा​ाँ केँ सलखलहुाँ, ई जातन जे अहा​ाँ सेहो हमरा साँ बेसी काज करब।

22 मुदा हमरा लेल रहबाक जगह सेहो िैयार करू, फकएक िाँ हमरा प्रवश्वास अतछ जे अहा​ाँ सभक िाि​िनाक कारणेँ हम अहा​ाँ सभ केँ दे ल जायब।

23 ओिऽ अहा​ाँ केँ िणाम करै ि छी जे मसीह यीशु मे हमर संगी कैदी एपाफ्रास। 24 माकिस, अररस्िाकिस, दे मास, लक ु ास, हमर सहकमी।

25 हमरा सभक िभु यीशु मसीहक कृपा अहा​ाँ सभक आि ् माक संग रहय। आमीन।

172


हिब् अध्य 1 1 परमेश् वर, जे पूव् मे पूव्ज सभ सँ पूव्ज सभ सँ भववषवयव सभक दवरव बजैत छलवह। 2 ओ एवह अंवतम विन मे अपन पुतक दवरव हमरव सभ सँ बवत कयलवन, वजनकव ओ सभ वसुक उतरववाकवरा वनयुय कयलवन, वजनकव दवरव ओ संसवर सभ सेहो बनौलवन। 3 ओ अपन मवहमवक तेज आ अपन व्यक स् पवततप छलवह आ अपन सवमर्​् यक वचन दवरव सभ वकछु केँ समर्न करै त छलवह, जखन ओ अपनव सँ हमरव सभक पवप केँ शुद कयलवन, तखन महवमवहमक िवहनव कवत ऊँच पर बैवस गेलवह। 4 ओ स् वग्िूत सभ सँ बहत नाक बनलवह, वकएक तँ उतरववाकवरक कवरणे ँ हनकव सभ सँ बेसा उतम नवम पवर कयलवन अवछ। 5 वकएक तँ ओ कौन स् वग्िूत केँ कवहयो कहलवरन, “अहवँ हमर पुत छा, आइ हम अहवँ केँ जनम िे लहँ?” फेर, “हम हनकव लेल वपतव बनब, आ ओ हमरव लेल पुत बनतवह?” 6 जखन ओ जेठकव केँ संसवर मे अनैत छवर तँ ओ कहै त छवर, “परमेश् वरक सभ स् वग्िूत हनकर आरवानव करवर।” 7 ओ स् वग्िूत सभक ववषय मे कहै त छवर, “जे अपन स् वग्िूत सभ केँ आत्‍मव आ सेवक सभ केँ आवग केर लौ बनव िै त छवर।” 8 मुिव पुत केँ कहै त छवरन, “हे परमेश् वर, अहवँ क वसंहवसन अनन कवल ारर अवछ। 9 अहवँ ाववम्कतव सँ पेम कयलहँ आ अाम् सँ घृणव कयलहँ । ते ँ परमेश् वर, अहवँ क परमेश् वर, अहवँ केँ अहवँ क संगा सभ सँ बेसा आननक तेल सँ अवभषेक कयलवन। 10 “हे पभु , अहवँ आवि मे पृर् वाक नावं रखलहँ । आ आकवश अहवँ क हवरक कवज अवछ। 11 ओ सभ नवश भऽ जवयत। मुिव अहवँ रवह जवइत छा। ओ सभ वस जकवँ बूढ भऽ जवयत। 12 अहवँ ओकरव सभ केँ वस जकवँ मोव़ कऽ बिवल जवयत। 13 मुिव स् वग्िूत मे सँ कोन स् वग्िूत केँ ओ कवहयो कहने छलवह जे , “हमर िवहनव कवत बैसल रह, जवबत हम अहवँ क शतु सभ केँ अहवँ क पैरक ठे हन नवह बनव िे ब?” 14 का ओ सभ सेवव करऽ वलव आत् मव नवह अवछ जे उदवरक उतरववाकवरा सभक सेवव करऽ लेल पठवओल गेल अवछ? अध्य 2

5 आगवमा संसवर जकरव बवरे मे हम सभ बजैत छा, तकरव ओ स् वग्िूत सभक अा​ान नवह कयलवन। 6 मुिव एक ठवम एक गोटे गववहा िै त कहलवरन, “मनुष का होइत अवछ जे अहवँ ओकरव बवरे मे मोन पव़ै त छा?” आवक मनुष्‍यक पुत जे अहवँ ओकरव परख करै त छा? 7 अहवँ ओकरव स् वग्िूत सभ सँ कनेक नाचवँ बनव िे वलयैक। अहवँ ओकरव मवहमव आ आिरक मुकुट पवहरव िे वलयैक आ ओकरव अपन हवरक कवज पर रव्ख िे वलयैक। 8 अहवँ सभ वकछु हनकर पएरक नाचवँ रव्ख िे लहँ । वकएक तँ ओ सभ वकछु केँ अपनव अा​ान कयलवन, ते ँ ओ कोनो एहन चाज नवह छो़लवन जे हनकव अा​ान नवह कयल गेल हो। मुिव आब हमरव सभ केँ एखन ारर सभ वकछु हनकव अा​ान नवह रवखल गेल अवछ। 9 मुिव हम सभ याशु केँ िे खैत छा जे मृत् युक क्क कवरणे ँ स् वग्िूत सभ सँ कनेक नाचवँ बनवओल गेल छलवह। जे परमेश् वरक कृपव सँ सभ मनुष् यक लेल मृत् युक सवि चखय। 10 वजनकव लेल सभ वकछु अवछ आ वजनकव दवरव सभ वकछु अवछ, हनकव बहतो पुत केँ मवहमव मे आवन कऽ हनकव सभक उदवरक सेनवपवत केँ क्क दवरव वसद करबवक अवाकवर भेलवन। 11 वकएक तँ पववत करयवलव आ पववत कयल गेल सभ एकवह अवछ। 12 ओ कहै त छवर, “हम अपन भवय सभ केँ अहवँ क नवम सुनौब, मण् िलाक बाच मे अहवँ क सुवत गवबय।” 13 फेर, हम हनकव पर भरोसव रवखब। फेर, “िे खू, हम आ ओवह बचव सभ केँ जे परमेश् वर हमरव िे ने छवर।” 14 वकएक तँ जवहनव संतवन सभ मवं स-मजव मे भवग लैत अवछ, तेनव ओ सयं सेहो ओवह मे सँ भवग लेलवन। जववह सँ ओ मृतुक सवमर् रखवनहवर अरव् त शैतवन केँ मृतुक दवरव न् कऽ सकवर। 15 आ ओवह सभ केँ उदवर कत जे सभ मृतुक भय सँ जावन भरर िवसतवक अा​ान रहलवह। 16 वकएक तँ ओ स् वग्िूतक सभवव अपनव पर नवह ावरण कयलवन। मुिव ओ अबवहमक वंशज केँ अपनव मे समेवट लेलवन। 17 ते ँ सभ बवत मे हनकव अपन भवय सभक समवन बनवबऽ प़तवन जववह सँ ओ परमेश् वरक ववषय मे ियवलु आ ववशवसा महवपुरोवहत बवन लोक सभक पवप सभक लेल मेल-वमलवप करवर। 18 वकएक तँ ओ अपनव पराकव मे कष् ट कऽ कऽ कऽ कऽ पराकव मे प़ल लोक सभक सहवयतव कऽ सकैत अवछ। अध्य 3 1 ते,ँ हे पववत भवइ लोकवन, जे स् वग्य बजवओल गेल छा, अहवँ सभ अपनव सभक पेररत आ महवपुरोवहत मसाह याशु पर ववचवर कत। 2 ओ हनकव वनयुय केवनहवरक पवत वफविवर छलवह, जेनव मूसव सेहो अपन सम् पूण् घर मे ववश् ववस रखैत छलवह। 3 वकएक तँ ई मनुष् य मूसव सँ बेसा मवहमवक योग मवनल गेल छल, वकएक तँ घर बनौवनहवर केँ घर सँ बेसा आिर भेटैत छै क। 4 वकएक तँ पतेक घर कोनो ने कोनो आिमा बनबैत अवछ। मुिव सभ वकछु बनौवनहवर परमेश् वर छवर। 5 मूसव अपन सभ घर मे एकटव नोकर जकवँ ववश् ववस रखैत छलवह, जववह सँ ओवह बवतक गववहा िे ल जव सकैत छल।

1 ते ँ हमरव सभ केँ जे बवत सुनलहँ तववह पर बेसा धवन िे बवक चवहा, जववह सँ हम सभ कवहयो ओकरव वफसलय नवह िे ब। 2 जँ स् वग्िूत सभक दवरव कहल गेल वचन अविग रहै त आ हर अपरवा आ आजव नवह मवनलव पर उवचत फल भेटैत छल। 3 जँ एतेक पैघ उदवरक उपेकव करब तँ हम सभ कोनव बवच सकब। जे सभ पवहने पभु दवरव बवजब शुत कयल गेल छल आ हनकर बवत सुनवनहवर लोकवन दवरव हमरव सभ केँ दढतव भेटलवन। 4 परमेश् वर हनकव सभक गववहा िै त छवर, वचन् त आ चमत् कवर सभ सँ , आ तरह-तरह सँ चमत् कवर आ पववत आत् मवक वरिवन सभ सँ, अपन इचवक अनुसवर?

173


वहबू

6 मुिव मसाह अपन घरक ऊपर बेटव जकवँ । हम सभ केकर घर छा, जँ हम सभ आशवक ववश्‍ववस आ आनन केँ अंत ारर दढतवपूव्क पक़ब।” 7 एवह लेल (जवहनव पववत आत् मव कहै त छवर, “आइ जँ अहवँ सभ हनकर आववज सुनब। 8 जंगल मे पलोभनक विन जेकवँ पलोभनक विन मे अहवँ सभक हिय केँ कठोर नवह कत। 9 जखन अहवँ सभक पूव्ज सभ हमरव पराकव िे लवन, हमरव परखलवन आ चवलास वष् ारर हमर कवज सभ िे खलवन। 10 ते ँ हम ओवह पाढाक संग िु खा भऽ कऽ कहवलयवन, “ओ सभ सविखन अपन मोन मे गलता करै त अवछ। ओ सभ हमर बवट नवह जनैत अवछ। 11 ते ँ हम अपन कोा मे शपर खयलहँ जे, “ओ सभ हमर ववशवम मे नवह जवयत।” 12 यौ भवइ लोकवन, सववावन रह, जववह सँ अहवँ सभ मे सँ वकयो अववश् ववसक िु ष् ट हिय नवह रहय आ जाववत परमेश् वर सँ वविव भऽ जवय। 13 मुिव, जवबत तक आइ कहल जवइत अवछ, एक-िोसर केँ पवतविन उपिे श िै त रह। पवपक छल-पपंच सँ अहवँ सभ मे सँ वकयो कठोर नवह भ' जवय। 14 हम सभ मसाहक भवगािवर बवन गेल छा, जँ हम सभ अपन ववश् ववसक पवरं भ केँ अन् त ारर दढतवपूव्क रवखब। 15 जखन वक कहल गेल अवछ जे, “आइ जँ अहवँ सभ हनकर आववज सुनब तँ अहवँ सभ अपन हिय कठोर नवह कत जेनव वक पकोप कयल गेल छल।” 16 वकएक तँ वकछु गोटे सुवन कऽ कोवात कयलवन, मुिव मूसवक दवरव वमस सँ वनकलल सभ लोक नवह। 17 मुिव चवलास वष् तक ओ केकरव सँ िु खा रहलवह? का पवप केवनहवर सभक संग नवह छल, जकर लवश जंगल मे खवस प़ल? 18 ओ केकरव शपर लेलक जे ओ सभ हनकर ववशवम मे नवह पवेश करवर, बल् वक ववश् ववस नवह करवनहवर सभ केँ? 19 ते ँ हम सभ िे खैत छा जे ओ सभ अववश् ववसक कवरणे ँ ओवह मे पवेश नवह कऽ सकलवह।

8 जँ याशु हनकव सभ केँ ववशवम िऽ िे ने रवहतवर तँ बवि मे िोसर विनक गप नवह कररतवर। 9 ते ँ परमेश् वरक लोक सभक लेल ववश् ववस रवह गेल अवछ। 10 वकएक तँ जे केओ अपन ववशवम मे पवेश करै त अवछ, तेनव परमेश् वर अपन कवज सँ छोव़ िे लक। 11 ते ँ हम सभ ओवह ववशवम मे पवेश करबवक लेल पररशम करा, जववह सँ केओ अववश् ववसक अनुकरणक अनुसरण नवह करय। 12 वकएक तँ परमेश् वरक वचन कोनो िु ावरा तलववर सँ तेज, श्यशवला आ तेज होइत अवछ, जे पवण आ आत् मव आ जो़ आ मजव केँ ववभववजत करबव ारर बेाैत अवछ आ हियक ववचवर आ अवभपवय केँ बूवि सकैत अवछ। 13 आ ने कोनो एहन पवणा अवछ जे हनकव नजरर मे पगट नवह हो, बल् वक सभ वकछु नंगटे अवछ आ वजनकव संग हमरव सभ केँ कवज करबवक अवछ, ओकर आँ ्ख मे खुजल अवछ। 14 हमरव सभ लग एकटव पैघ महवपुरोवहत छवर जे स् वग् मे गेल छवर, जे परमेश् वरक पुत याशु छवर, ते ँ हम सभ अपन साकवरो्य केँ दढतव सँ पकव़ ला। 15 वकएक तँ हमरव सभक एहन महवपुरोवहत नवह अवछ जे हमरव सभक िु ब्लतवक बोा नवह कऽ सकैत अवछ। मुिव सभ तरहे ँ हमरव सभ जकवँ पलोवभत भेलवह, मुिव पवप नवह। 16 ते ँ हम सभ वनभ्कतवपूव्क अनुगहक वसंहवसन पर आवब जवउ, जववह सँ हम सभ ियव पववब सकब आ आवशकतवक समय मे सहवयतव करबवक लेल कृपव पववब सकब। अध्य 5

अध्य 4 1 ते ँ हम सभ िरै त रह जे कहा ं हनकर ववशवम मे पवेश करबवक पवतजव हमरव सभ केँ छोव़ िे ल गेल अवछ, ते ँ अहवँ सभ मे सँ वकयो एवह सँ कम नवह बुवि जवय। 2 वकएक तँ हमरव सभ केँ सेहो सुसमवचवर पचवर कयल गेल छल, मुिव सुसमवचवर सुनवनहवर सभ मे ववशवस नवह भेलवन। 3 हम सभ जे ववश् ववस करै त छा, से सभ ववश् ववस मे पवेश करै त छा, जेनव ओ कहलवन जे, “जवहनव हम अपन कोा मे शपर केने छा, जँ ओ सभ हमर ववशवम मे पवेश करतवह।” 4 ओ सवतम विन एक ठवम एवह तरहे ँ बजलवह, “परमेश् वर सवतम विन अपन सभ कवज सँ ववशवम कयलवन।” 5 एवह ठवम फेर, “जँ ओ सभ हमर ववशवम मे पवेश करत।” 6 एवह लेल ई अवछ जे वकछु गोटे केँ ओवह मे पवेश करबवक चवहा, आ जेकरव सभ केँ पवहने ई पचवर कयल गेल छल, से सभ अववश् ववसक कवरणे ँ ओवह मे पवेश नवह कयलवन। 7 फेर ओ िवऊि मे एक विन केँ सावमत कऽ िै त छवरन, “आइ एतेक विनक बवि। जेनव कहल गेल अवछ, “आइ जँ अहवँ सभ हनकर आववज सुनब तँ अपन हिय कठोर नवह कत।”

174

1 वकएक तँ मनुष् यक बाच सँ हटवओल गेल पतेक महवपुरोवहत परमेश् वरक ववषय मे मनुष् यक लेल वनयुय कयल गेल अवछ, जववह सँ ओ पवपक लेल वरिवन आ बवलिवन िु नू चढव सकय। 2 ओ अजवना आ बवट सँ बवहर रहवनहवर पर ियव कऽ सकैत अवछ। वकएक तँ ओ सयं िु ब्लतव सँ घेरल छवर। 3 एवह कवरणे ँ ओकरव पवपक लेल बवलिवन करबवक चवहा जेनव लोक सभक लेल, अपनव लेल सेहो। 4 ई आिर केओ अपनव लेल नवह लैत अवछ, वसववय हवतन जकवँ जे परमेश् वर दवरव बजवओल गेल अवछ। 5 तवहनव मसाह सेहो महवपुरोवहत बनेबवक लेल अपनव केँ मवहमव नवह कयलवन। मुिव जे हनकव कहलवरन, “अहवँ हमर पुत छा, आइ हम अहवँ केँ जनम िे लहँ ।” 6 जेनव ओ िोसर ठवम कहै त छवर, “अहवँ मलासेिेकक कम मे अनन कवल ारर पुरोवहत छा।” 7 ओ अपन शरारक समय मे जखन ओ मृत् यु सँ बचवबऽ मे सकम भेलव पर जोरिवर चातवर आ नोरक संग पवर्नव आ ववनता कयलवन। 8 ओ पुत रवहतो ओवह क् सँ आजवपवलन साखलवन। 9 ओ वसद भऽ गेलवह जे हनकर आजव मवनवनहवर सभ केँ अनन उदवरक पिवतव बवन गेलवह। 10 परमेश् वर दवरव मलासेिेकक अनुसवर महवपुरोवहत कहल गेलवन। 11 हनकव सभक ववषय मे हमरव सभ केँ बहत रवस बवत कहबवक अवछ आ कहब कवठन अवछ, कवरण अहवँ सभ सुनबव मे नारस छा। 12 जखन अहवँ सभ केँ वशकक बनबवक चवहा तखन अहवँ सभ केँ फेर सँ एहन व्यक आवशकतव अवछ जे अहवँ सभ केँ फेर सँ


वहबू

वसखवबय जे परमेश् वरक उपिे शक पवहल वसदवं त अवछ। आ एहन बवन जवइत छवर जेकरव िू ाक आवशकतव होइत छै क, बलुक मवं सक नवह। 13 वकएक तँ जे केओ िू ाक सेवन करै त अवछ, से ाववम्कतवक वचन मे वनपुण अवछ, वकएक तँ ओ बचव अवछ। 14 मुिव मजगूत भोजन ओवह लोकक होइत छै क जे पूण् उमक भऽ गेल अवछ, ओ सभ जे उपयोगक कवरणे ँ नाक आ अालवह िु नू केँ बूवि कऽ बूवि लैत अवछ। अध्य 6 1 ते ँ मसाहक वशकवक वसदवं त छोव़ वसदतव विस बढब। मृत कम् सँ पशवतवप करबवक आ परमेश् वरक पवत ववश् ववस करबवक नावं नवह रवखब। 2 बपवतस् मव, हवर रखबवक, मृत् युक पुनरुवन आ अनन न् यवयक वशकवक ववषय मे। 3 जँ परमेश् वर अनुमवत िे वर तँ हम सभ ई कवज करब। 4 वकएक तँ जे सभ पवहने पबुद भेलवह आ स् वग्य वरिवनक सवि चखने छवर आ पववत आत् मवक भवगािवर बवन गेलवह, हनकव सभक लेल ई असंभव अवछ। 5 परमेश् वरक नाक वचन आ आगवमा संसवरक सवमर्​् य सभक सवि चखलहँ । 6 जँ ओ सभ खवस प़त तँ फेर ओकरव सभ केँ पशवतवप करबवक लेल नवानाकरण करबवक लेल। ओ सभ परमेश् वरक पुत केँ नव-नव कूस पर चढव कऽ ओकरव ल्जत कऽ िे लक। 7 वकएक तँ जे पृर् वा बरखव मे बेर-बेर अबैत अवछ आ जकरव दवरव सजैत अवछ तकरव लेल उवचत ज़ा-बूटा पैिव करै त अवछ, ओकरव परमेश् वरक आशाष भेटैत अवछ। 8 मुिव जे कवँ ट-कवँ ट-कवँ ट फ़ै त अवछ, से असाकवर कयल जवइत अवछ आ गवरर-गरौबवल के कराब अवछ। जकर अंत जरे बवक अवछ। 9 मुिव हे वपयतम, हम सभ एवह तरहे ँ बजैत छा, अहवँ सभ सँ नाक बवत आ उदवरक संग आबय बलव बवत हमरव सभ केँ बुिल अवछ। 10 परमेश् वर अाम् नवह छवर जे अहवँ सभक कवज आ पेमक पररशम केँ वबसरर गेलवह, जे अहवँ सभ हनकर नवमक पवत िे खलहँ, जववह सँ अहवँ सभ पववत लोक सभक सेवव कयलहँ आ सेवव कयलहँ । 11 हम सभ चवहै त छा जे अहवँ सभ मे सँ पतेक गोटे अंत ारर आशवक पूण् आशवसन िे बवक लेल एके तरहक लगन करवर। 12 अहवँ सभ आलसा नवह बल् वक ओवह सभक अनुयवया बनू जे ववश् ववस आ ाैय्क कवरणे ँ पवतजव सभक उतरववाकवरा बनैत अवछ। 13 परमेश् वर अबवहम सँ वचन िे लवरन, कवरण ओ एवह सँ पैघ शपर नवह खव सकैत छलवह, तखन ओ अपनव नवमक शपर लेलवन। 14 ओ कहलवरन, “हम अहवँ केँ आशाष िऽ कऽ आशाष िऽ िे ब, आ बढै त-बढै त अहवँ केँ बढव िे ब।” 15 एवह तरहे ँ ाैय्पूव्क सहन कयलव पर ओ पवतजव पवर कयलवन। 16 वकएक तँ मनुष् य सभ पैघक शपर खवइत अवछ, आ पुव् लेल शपर हनकव सभक लेल सभ िग़वक अन् त होइत अवछ।

175

17 एवह बवत पर परमेश् वर पवतजवक उतरववाकवरा सभ केँ अपन ववचवरक अपररवत्नायतव केँ बेसा सँ बेसा िे खवबय चवहै त छलवह। 18 िू टव अपररवत्नाय बवत दवरव, जववह मे परमेश् वर केँ िूठ बवजब असंभव छल, हमरव सभ केँ एकटव पबल सवन्नव भेटय, जे सभ हमरव सभक सोिवँ रवखल आशव केँ पक़बवक लेल शरण मे भववग गेल छा। 19 ई आशव हमरव सभ केँ आत् मवक लंगर जकवँ अवछ, ्​्र आ दढ आ जे पिव् मे पवेश करै त अवछ। 20 जववह ठवम हमरव सभक लेल अगिू त छवर, याशु मलासेिेकक अनुसवर अनन कवल ारर महवपुरोवहत बनौलवन। अध्य 7 1 सलेमक रवजव मलासेिेक, परमेश् वरक पुरोवहत, जे रवजव सभक वा कऽ कऽ घुरैत अबवहम सँ भेट कऽ हनकव आशावव् ि िे लवन। 2 अबवहम हनकव सभ केँ िसम भवग िे लवरन। पवहने ववयवक अनुसवर ाम्क रवजव, आ तकर बवि सलेमक रवजव सेहो, जे शव्नक रवजव अवछ। 3 वबनव वपतवक, वबनव मवयक, वबनव वंशक, ने विनक पवरं भ आ ने जावनक अंत। मुिव परमेश् वरक पुतक समवन बनवओल गेल। पुरोवहत सविखन रहै त अवछ। 4 आब ववचवर कत जे ई आिमा कतेक पैघ छल, जकरव कुलपवत अबवहम सेहो लूट के िसम भवग िऽ िे ने छलवह। 5 लेवाक पुत सभ मे सँ जे पुरोवहतक पि गहण करै त छवर, हनकव सभ केँ ई आजव छवन जे ओ सभ अबवहमक कमर मे सँ वनकलल लोक सभ सँ िशमवं श गहण करवर : १. 6 मुिव वजनकर वंशज हनकव सभ मे सँ नवह वगनल गेल अवछ, ओ अबवहम सँ िसम भवग लऽ कऽ ओवह पवतजव सभ केँ आशाष िे लक। 7 आ वबनव कोनो ववरोावभवस के कम के नाक के आशावव् ि भेटैत छै क। 8 एवह ठवम जे लोक मरै त अवछ, तकरव िसम भवग भेटैत छै क। मुिव ओतवह हनकव सभ केँ गहण करै त छवर, वजनकव सभक गववहा अवछ जे ओ जाववत छवर। 9 हम ई कवह सकैत छा जे, लेवा सेहो जे िसम भवग लैत छवर, अबवहम मे िसम भवग िे लवन। 10 जखन मलासेिेक हनकव सँ भेट केलवन तखन ओ अपन वपतवक कमर मे छलवह। 11 जँ लेवाक पुरोवहतक दवरव वसदतव भेटैत छल, (वकएक तँ लोक सभ केँ ाम्-वनयम भेटैत छल) तँ आओर का आवशकतव छल जे मलासेिेकक कम मे िोसर पुरोवहत उवठ जवय आ हवतनक कम मे नवह कहल जवय? 12 वकएक तँ पुरोवहतक कवज बिवल कऽ ाम्-वनयम मे सेहो पररवत्न आवश् यक भऽ गेल अवछ। 13 कवरण, जकरव बवरे मे ई बवत कहल गेल अवछ, ओ िोसर गोतक अवछ, जकरव मे सँ केओ वेिा पर सेवव नवह िे लक। 14 ई स् अवछ जे हमरव सभक पभु यहिव सँ वनकलल छवर। जववह गोतक ववषय मे मूसव पुरोवहतक ववषय मे वकछु नवह कहलवन। 15 ई बवत आओर बेसा स् अवछ, वकएक तँ मलासेिेकक तप मे एकटव आओर पुरोवहत उठै त छवर।


वहबू

16 ओ शवराररक आजवक अनुसवर नवह, बल् वक अंतहान जावनक सवमर्क अनुसवर बनल छवर। 17 ओ गववहा िै त छवरन, “अहवँ मलासेिेकक कम मे अनन कवल ारर पुरोवहत छा।” 18 वकएक तँ पवहने जे आजव िे ल गेल छल, ओकर कमजोरा आ अलवभकवरातवक कवरणे ँ ओकरव तोव़ िे ल जव रहल अवछ। 19 वकएक तँ ाम्-वनयम वकछु ओ वसद नवह बनौलक, बल् वक नाक आशवक आनन भेल। जकरव दवरव हम सभ परमेश् वरक लग अबैत छा। 20 जववह तरहे ँ हनकव वबनव शपर केने पुरोवहत बनवओल गेलवन। 21 (वकएक तँ ओ पुरोवहत सभ वबनव शपर केने बनवओल गेल छल। 22 एतेक कवरणे ँ याशु केँ एकटव नाक वनयमक बंाक बनवओल गेलवन। 23 ओ सभ सते बहतो पुरोवहत छलवह, वकएक तँ हनकव सभ केँ मृतुक कवरणे ँ नवह रहय िे ल गेलवन। 24 मुिव ई मनुष् यक अनन कवल ारर चलैत रहबवक कवरणे ँ अपररवत्नाय पुरोवहतक पि अवछ। 25 ते ँ ओ हनकव सभक लेल ववनता करबवक लेल सविखन जाववत रहबवक कवरणे ँ जे सभ परमेश् वर लग अबैत छवर, तकरव सभ केँ सेहो उदवर पववब सकैत छवर। 26 वकएक तँ एहन महवपुरोवहत हमरव सभ बवन गेलवह जे पववत, वनि्ष, वनम्ल, पवपा सभ सँ अलग आ आकवश सँ ऊँच बनवओल गेल छवर। 27 ओवह महवपुरोवहत सभ जकवँ पवहने अपन पवपक लेल आ फेर लोकक पवपक लेल बवल चढे बवक आवशकतव नवह छवन। 28 वकएक तँ ाम्-वनयम िु ब्लतवक लोक सभ केँ महवपुरोवहत बनव िै त अवछ। मुिव ओवह शपरक वचन जे ाम्-वनयमक बवि सँ आयल छल, से पुत केँ बनबैत अवछ जे अनन कवल लेल पववत कयल गेल अवछ। अध्य 8 1 आब हम सभ जे बवत कहलहँ तकर सवर ई अवछ जे हमरव सभ लग एहन महवपुरोवहत छवर जे आकवश मे महवमवहमक वसंहवसनक िवहनव कवत बैसल छवर। 2 पववत ्वन आ सत् य तमूक सेवक छा, जे पभु ठवढ कयलवन, मुिव मनुष् य नवह। 3 कवरण, पतेक महवपुरोवहत केँ वरिवन आ बवल चढवबय लेल वनयुय कयल गेल अवछ। 4 जँ ओ पृर् वा पर रवहतवर तँ ओ पुरोवहत नवह बवनतवर, वकएक तँ एहन पुरोवहत छवर जे ाम् -वनयमक अनुसवर वरिवन चढबैत छवर। 5 ओ सभ स् वग्य वसुक उिवहरण आ छवयवक सेवव करै त छा, जेनव मूसव केँ परमेश् वर दवरव सलवह िे ल गेल छलवन जखन ओ तमू बनबऽ जव रहल छलवह। 6 मुिव आब ओ एवह सँ बेसा नाक सेवव पवर कयलवन अवछ, जववह सँ ओ एकटव नाक ववचवक मध् छवर, जे नाक पवतजव पर ्ववपत भेल छल। 7 जँ ओ पवहल ववचव वनि्ष रहै त तँ िोसर ववचव लेल कोनो ्वन नवह तवकल रहै त।

176

8 ओ हनकव सभ मे िोष पववब कहलवरन, “िे खू, एहन विन आवब रहल अवछ, जखन हम इसवएलक घरवनव आ यहिवक घरवनवक संग नव ववचव करब। 9 ओवह विन मे जे ववचव हम हनकव सभक पूव्ज सभक संग केने रहा, तववह विन मे नवह, जखन हम हनकव सभक हवर पकव़ वमस िे श सँ बवहर वनकववल लेने रहा। वकएक तँ ओ सभ हमर ववचव मे नवह रहलवह आ हम हनकव सभ केँ परववह नवह केलहँ , पभु कहै त छवर। 10 एवह विनक बवि हम इसवएलक घरवनवक संग ई ववचव करब, पभु कहै त छवर। हम अपन वनयम हनकव सभक मोन मे रवखब आ हनकव सभक मोन मे वलखब। 11 ओ सभ अपन-अपन प़ोसा आ अपन भवय केँ ई नवह वसखवओत जे , “पभु केँ वचनह।” 12 हम हनकव सभक अाम्क पवत ियव करब, आ हनकव सभक पवप आ अाम् केँ हम आब नवह मोन पव़ब। 13 ओ ई कहै त छवर जे, “एकटव नव करवर, ओ पवहल केँ पुरवन करव िे लवन।” आब जे स़ै त अवछ आ बूढ होइत अवछ से ववलुर होबय लेल तैयवर अवछ। अध्य 9 1 तखन पवहल ववचव मे परमेश् वरक सेववक वनयम आ सवं सवररक पववत स् रवन सेहो छल। 2 ओतऽ एकटव तमू बनल छल। पवहल, जववह मे िायव, टे बुल आ िे खवबटा रोटा छल। जकरव अभयवरण कहल जवइत अवछ। 3 िोसर पिव् क पवछवँ ओ तमू, जकरव सभसँ पवबतर कहल जवइत अवछ। 4 ओवह मे सोनवक ाूप-पवत आ चवत कवत सोनव सँ लपेटल ववचवक सनिू क छल, जववह मे सोनवक घैल छल जववह मे मनव छल, हवतनक छ़ा जे कलम उठै त छल, आ ववचवक फलक छल। 5 ओकर ऊपर मवहमव करब सभ ियवक आसन पर छवयव करै त अवछ। जकर चचव् आब ववशेष तप स नवह क सकैत छा। 6 जखन ई सभ बवत एवह तरहे ँ वनाव् ररत भऽ गेल छल, तखन पुरोवहत सभ परमेश् वरक सेवव पूरव करै त सविखन पवहल तमू मे जवइत छलवह। 7 मुिव िोसर मे महवपुरोवहत असगरे सवल मे एक बेर जवइत छलवह, वबनव खूनक नवह, जे ओ अपनव लेल आ लोकक गलताक लेल चढवबैत छलवह। 8 पववत आत् मव ई बतबैत छवर जे पवहल तमू एखन ारर ठवढ छल, सभ सँ पववत ्वनक बवट एखन ारर पकट नवह भेल छल। 9 ई ओवह समयक आकृवत छल, जववह मे वरिवन आ बवलिवन िु नू चढवओल जवइत छल, जे सेवव करवनहवर केँ वववेकक अनुसवर वसद नवह कऽ सकैत छल। 10 ओ सभ मवत भोजन आ पेय पिवर्, आ तरह-तरह केर ाोनव आ शवराररक संसवर मे ठवढ छल, जे सुावरक समय ारर ओकरव सभ पर रोपल गेल छल। 11 मुिव मसाह आबै बलव नाक बवतक महवपुरोवहत बनलवह, एकटव पैघ आ वसद तमूक दवरव, जे हवर सँ नवह बनल अवछ, अरव् त् एवह भवनक नवह। 12 ओ बकरा आ बछ़वक खून सँ नवह, बल् वक अपन खून सँ एक बेर पववत ्वन मे पवेश कयलवन आ हमरव सभक लेल अनन मोक पववब गेलवह।


वहबू

13 जँ बैल-बकरा सभक खून आ अशुद केँ वछ़कैत बछ़वक छवउर शरार केँ शुद करबवक लेल पववत करै त अवछ। 14 मसाहक खून, जे अनन आत् मव दवरव अपनव केँ वनि्ष परमेश् वरक समक अवप्त कयलवन, अहवँ सभक वववेक केँ जाववत परमेश् वरक सेवव करबवक लेल मृत कम् सँ कतेक बेसा शुद करत? 15 एवह कवरणे ँ ओ नव वनयमक मध् छवर, जववह सँ मृतुक दवरव पवहल वनयमक अा​ान जे अपरवाक मु्य भेटैत छल, ओकरव सभ केँ अनन उतरववाकवरक पवतजव भेटय। 16 वकएक तँ जतऽ कोनो वसायत अवछ तँ वसायत करवनहवरक मृतु सेहो आवशक अवछ। 17 वकएक तँ मनुष् यक मृत् युक बवि कोनो वसायत बलशवला होइत अवछ, नवह तऽ वसायत करऽ वलव जाबैत कवल ओकर कोनो सवमर्​् य नवह। 18 एवह बवतक बवि मे सँ कोनो पवहल वनयम केँ वबनव खूनक समवप्त नवह कयल गेल। 19 मूसव ाम्-वनयमक अनुसवर सभ लोक केँ सभ आजव सुनौलवन, तखन ओ बछ़व आ बकरा सभक खून, पववन, लवल ऊन आ वहसोप लऽ कऽ वकतवब आ समस लोक सभ केँ वछ़वक िे लवन। 20 ओ कहलवरन, “ई ओवह वनयमक खून अवछ जे परमेश् वर अहवँ सभ केँ आजव िे ने छवर।” 21 ओ तमू आ सेववक सभ बत्न पर खून वछ़वक िे लवन। 22 ाम्-वनयमक अनुसवर पवया सभ वकछु खून सँ शुद कयल गेल अवछ। आ वबनव खून बहौने कोनो छूट नवह। 23 ते ँ ई आवशक छल जे आकवश मे वसुक नमुनव सभ केँ एवह सभ सँ शुद कयल जवय। मुिव स् वग्य वसु सभ एवह सभ सँ नाक बवलिवनक संग। 24 वकएक तँ मसाह ओवह पववत ्वन सभ मे नवह पहँ चल छवर जे सत् यक आकृवत अवछ। बल् वक स् वग् मे आवब कऽ आब हमरव सभक लेल परमेश् वरक समक पगट भऽ जवयब। 25 आ ते ँ ओ बेर-बेर अपनव केँ बवल चढवबय, जेनव महवपुरोवहत सभ सवल िोसरक खून ल’ क’ पववत ्वन मे पवेश करै त छवर। 26 वकएक तँ संसवरक सन् ृ​ृ व् भेलवसँ ओ बहत बेर कष् ट कऽ रहल हे तवह, मुिव आब एक बेर संसवरक अंतमे ओ अपनव बवलिवनक दवरव पवप केँ िू र करबवक लेल पगट भऽ गेल छवर। 27 जेनव मनुष् यक एक बेर मरब वनाव् ररत अवछ, मुिव ओकर बवि न् यवय होयत। 28 एक बेर मसाह केँ बहतो लोकक पवप सहन करबवक लेल बवलिवन कयल गेलवन। जे सभ हनकर पताकव करै त अवछ, तकरव सभ केँ ओ िोसर बेर वबनव पवप के पकट होयत, जववह सँ उदवर भेवट जवयत।

4 वकएक तँ ई समव नवह अवछ जे बैल आ बकरा सभक खून पवप िू र भऽ जवय। 5 एवह लेल जखन ओ संसवर मे अयलवह तखन ओ कहै त छवर, “अहवँ बवलिवन आ चढववव नवह चवहै त छलहँ , मुिव अहवँ हमरव लेल एकटव शरार तैयवर कऽ िे लहँ । 6 पवपक होमबवल आ बवलिवन मे अहवँ केँ कोनो पसनतव नवह भेल। 7 तखन हम कहवलयवन, “हे परमेश् वर, हम अहवँ क इच् छव पूरव करबवक लेल आवब रहल छा।” 8 ऊपर जखन ओ कहलवरन, “बवलिवन आ बवलिवन आ होमबवल आ पवपक बवलिवन आ पवपक बवलिवन अहवँ नवह चवहै त छलहँ आ ने एवह मे पसनतव भेलहँ । जे कवनून दवरव चढवओल जवइत अवछ; 9 तखन ओ कहलवरन, “हे परमेश् वर, हम अहवँ क इच् छव पूरव करबवक लेल आवब रहल छा।” ओ पवहलुकव छान लैत अवछ, जववह सँ िोसर केँ ्ववपत क' सकय। 10 जववह इचव सँ हम सभ याशु मसाहक शरारक बवलिवन एक बेर सिवक लेल चढव कऽ पववत कयल गेल छा। 11 पतेक पुरोवहत सभ विन-पवतविन ठवढ भऽ कऽ सेवव करै त छवर आ बेर-बेर वैह बवल चढबैत छवर, जे पवप केँ कवहयो नवह िू र कऽ सकैत अवछ। 12 मुिव ई मनुष् य पवप सभक लेल एक बवल चढव कऽ परमेश् वरक िवहनव कवत बैवस गेलवह। 13 आब सँ तवबत ारर पताकव करै त रहलवह जवबत ारर हनकर शतु सभ हनकर पैरक आावर नवह बनवओल जवयत। 14 एकवह बवलिवन दवरव पववत कयल गेल लोक सभ केँ सिवक लेल वसद कयलवन। 15 पववत आत् मव सेहो हमरव सभक लेल गववह छवर। 16 पभु कहै त छवर जे हम ओवह विनक बवि हनकव सभक संग जे ववचव करब, हम हनकव सभक मोन मे अपन वनयम रवखब आ हनकव सभक मोन मे वलखब। 17 आब हम हनकव सभक पवप आ अाम्क सरण नवह करब। 18 आब जतऽ एवह सभक कमव होइत अवछ, ओतऽ पवपक बवलिवन नवह भेटैत अवछ। 19 एवह लेल यौ भवइ लोकवन, याशुक खूनक दवरव परम पववत ्वन मे पवेश करबवक सवहस अवछ। 20 एकटव नव आ जाववत बवट दवरव, जे ओ हमरव सभक लेल पववत कयलवन अवछ, पिव् , अरव् त् अपन शरारक दवरव। 21 परमेश् वरक घर पर एकटव महवपुरोवहत छवर। 22 आउ, हम सभ ववश् ववसक पूण् आशवसन मे सत् य हिय सँ समाप आवब जवइ, अपन हिय पर िु ष् ट वववेक सँ वछ़कवव कयल गेल आ अपन शरार शुद पववन सँ ाोओल गेल। 23 आउ, हम सभ अपन ववश् ववसक साकवर केँ वबनव िगमगवने पक़ने रह। (वकएक तँ ओ ववशवसा अवछ जे पवतजव केने छल।) 24 एक-िोसर केँ पेम आ नाक कवज मे उकसवबय लेल ववचवर कत। 25 अपनव सभ केँ एक ठवम जमव होयब नवह छो़ू, जेनव वकछु लोकक आचरण होइत छै क। मुिव एक-िोसर केँ उपिे श िै त रह। 26 वकएक तँ जँ हम सभ सत् य जवन पववब कऽ जववन-बुवि कऽ पवप करब तँ पवपक बवलिवन आब नवह रवह जवयत। 27 मुिव एकटव भयववह न् यवय आ आवग सन कोाक पताकव, जे ववरोा​ा सभ केँ भस कऽ िे त।

अध्य 10 1 वकएक तँ ाम् -वनयम मे आबै बलव नाक-नाक चाजक छवयव अवछ, आ ओवह वसु सभक पवततप नवह, ओ सभ सवल िर सवल जे बवलिवन िै त छल, ओवह बवलिवन सभ सँ कवहयो ओवह मे आबय बलव सभ केँ वसद नवह कऽ सकैत अवछ। 2 तखन का ओ सभ चढब नवह छोव़तवर? कवरण जे एक बेर शुद कयल गेल उपवसक लोकवन केँ आब पवपक वववेक नवह रहबवक चवहा छलवन। 3 मुिव ओवह बवलिवन सभ मे सभ सवल फेर सँ पवपक सरण कयल जवइत अवछ।

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वहबू

28 जे मूसवक ाम्-वनयम केँ वतरसृत करै त छल, से िू -तान गववहक अा​ान वबनव ियव कऽ मरर गेल। 29 अहवँ सभ ई मववन वलअ जे परमेश् वरक पुत केँ पएर नाचवँ िबव कऽ ओवह करवरक खून केँ अपववत मवनलवन, आ ओवह करवरक खून केँ अपववत मवनलवन अनुगहक आतव? 30 पभु कहै त छवर जे, “पवतशोा हमर अवछ, हम पवतफल िे ब।” आ फेर, “पभु अपन लोकक नवय करतवह।” 31 जाववत परमेश् वरक हवर मे प़ब भयववह बवत अवछ। 32 मुिव पवहने के विनक सरण कत, जववह समय मे अहवँ सभ रोशन भेलवक बवि अहवँ सभ क्क बहत पैघ ल़वइ सहलहँ । 33 जखन वक अहवँ सभ केँ वननव आ क् िु नूक कवरणे ँ अहवँ सभ केँ एकटक िे खयवलव बवन गेलहँ । आ आं वशक तपे ,ँ जखन वक अहवँ सभ ओवह लोक सभक संगा बवन गेलहँ । 34 वकएक तँ अहवँ सभ हमरव पर ियव कऽ कऽ हमरव बवन मे रव्ख कऽ हवष्त भऽ गेलहँ आ अपनव मे ई जववन कऽ जे अहवँ सभ केँ स् वग् मे एकटव नाक आ ्वया सम् पवत अवछ। 35 ते ँ अपन ववशवस केँ नवह फेवक वियौक, जकरव बहत फल भेटैत छै क। 36 अहवँ सभ केँ ाैय् रखबवक आवशकतव अवछ जववह सँ अहवँ सभ परमेश् वरक इच् छव पूरव कऽ कऽ पवतजव पववब सकब। 37 वकएक तँ कनेक कवल मे जे आओत से आवब जवयत, मुिव वटकल नवह। 38 ाम् लोक ववश् ववस सँ जाववत रहत, मुिव जँ केओ पवछू हवट जवयत तँ हमर पवण ओकरव पर कोनो पसनतव नवह होयत। 39 मुिव हम सभ ओवह लोक मे सँ नवह छा जे ववनवश विस पवछू हवट जवइत छा। मुिव जे ववश् ववस करै त अवछ, तकरव आत् मवक उदवरक लेल।

छलवन तखन ओ आजव मवनलवह। ओ कतय गेलवह से नवह जववन बवहर वनकवल गेलवह। 9 ओ ववश् ववसक कवरणे ँ पवतजवक िे श मे पववस कयलवन जेनव परिे श मे रवह गेलवह। 10 ओ एकटव एहन नगरक पताकव करै त छलवह जकर नावं अवछ, जकर वनमव् तव आ वनमव् तव परमेश् वर छवर। 11 ववश् ववसक कवरणे ँ सवरव केँ बायव गभ्ावरण करबवक सवमर्​् य भेटलवन, आ हनकर उमेर बढलव पर हनकव एकटव संतवनक पसव भेलवन, वकएक तँ ओ हनकव पवतजव केवनहवर ववश् ववसपूण् मवनैत छलाह। 12 ते ँ ओतऽ एक गोटे मृत् यु जकवँ, आकवशक तवरव जकवँ आ असंय समुदक कवत मे बवलु जकवँ उगवल गेल। 13 ई सभ ववश् ववस मे मरर गेलवह, पवतजव नवह पववब, बल् वक िू र-िू र सँ िे ्ख कऽ ओकरव सभ केँ मनव कऽ गलव लगव लेलक आ साकवर कयलवन जे ओ सभ पृर् वा पर परिे शा आ तार्यवता छा। 14 वकएक तँ जे सभ एहन बवत कहै त अवछ, से सवफ-सवफ कहै त अवछ जे ओ सभ िे शक खोज मे अवछ। 15 आ सच मे जँ ओ सभ ओवह िे शक मोन मे रवहतवर जतय सँ ओ सभ वनकलल रवहतवर तँ हनकव सभ केँ घुरबवक अवसर भेवट सकैत छलवन। 16 मुिव आब ओ सभ नाक िे श अरव् त स् वग्य िे श चवहै त छवर, ते ँ परमेश् वर हनकव सभक परमेश् वर कहबव मे लवज नवह करै त छवर। 17 ववशवसक कवरणे ँ अबवहम पराकव मे इसहवक केँ बवलिवन कयलवन। 18 हनकव सभक ववषय मे कहल गेल छल जे , “तोहर वंशज इसहवक मे कहल जवयत।” 19 ई वहसवब लगव कऽ जे परमेश् वर हनकव मृत् यु मे सँ जाववत कऽ सकलवह। जतय सँ सेहो हनकव आकृवत मे गहण कयलवन | 20 ववशवसक कवरणे ँ इसहवक आगवमा घटनवक ववषय मे यवकूब आ एसवव केँ आशावव् ि िे लवन। 21 ववशवसक कवरणे ँ यवकूब मरै त कवल यूसुफक िु नू पुत केँ आशावव् ि िे लवन। आ अपन लवठाक चोटा पर िुवक पूजव केलवन। 22 ववश् ववसक कवरणे ँ यूसुफ मरलव पर इसवएलक सन् तवन सभक वविव होयबवक बवत कयलवन। ओ अपन हडाक ववषय मे आजव िे लवन। 23 ववश् ववसक कवरणे ँ मूसवक जन भेलव पर अपन मवतव-वपतव सँ तान मवस ारर नुकवओल गेल छलवन, वकएक तँ ओ सभ हनकव नाक संतवन बुिैत छलवह। रवजवक आजव सँ ओ सभ िरै त नवह छलवह। 24 ववश् ववसक कवरणे ँ मूसव बूढ भेलव पर वफरौनक बेटाक बेटव कहय सँ मनव कऽ िे लवरन। 25 एक समयक लेल पवपक भोग मे रहबव सँ नाक जे परमेश् वरक लोक सभक संग क् भोगब पवसन कयलवन। 26 ओ मसाहक वननव केँ वमस िे शक खजवनव सँ बेसा ान मवनैत छलवह, वकएक तँ ओ फलक पवतफलक आिर करै त छलवह। 27 ववशवसक कवरणे ँ ओ रवजवक कोा सँ नवह िे रवइत वमस छोव़ गेलवह। 28 ववशवसक कवरणे ँ ओ फसह-पवबवन आ खूनक वछ़कवव मनवबैत रहलवह, जववह सँ जे जेठ बचव केँ न् करयवलव ओकरव सभ केँ नवह छु वब सकय।

अध्य 11 1 ववश् ववस आशव कयल गेल वसु सभक सवर अवछ आ नवह िे खल गेल बवत सभक पमवण अवछ। 2 एवह सँ बुजुग् सभ नाक खबरर पवर कयलवन। 3 ववशवसक कवरणे ँ हम सभ ई बुिैत छा जे संसवर सभ परमेश् वरक वचन दवरव बनवओल गेल अवछ, जववह सँ जे वकछु िे खल जवइत अवछ, से पगट वसु सँ नवह बनल अवछ। 4 ववश् ववसक कवरणे ँ हववबल परमेश् वरक समक कैन सँ बेसा उतम बवलिवन चढौलवन, जववह सँ ओ ाम् हे बवक गववहा पववब गेलवह, परमेश् वर अपन वरिवनक गववहा िै त छलवह। 5 ववश् ववसक कवरणे ँ हनोक केँ मृत् यु नवह िे खबवक लेल अनुववि कयल गेलवन। परमेश् वर हनकव अनुववि कयलवन, वकएक तँ परमेश् वर हनकव अनुववि कयलवन, वकएक तँ हनकव ई गववहा छलवन जे ओ परमेश् वर केँ पसन कयलवन। 6 मुिव ववश् ववसक वबनव ओकरव पसन करब असंभव अवछ, वकएक तँ परमेश् वर लग जे अबैत अवछ ओकरव ई ववशवस करबवक चवहा जे ओ छवर आ जे सभ हनकव लग चवहै त छवर, तकरव ओ पवतफल िै त छवर। 7 ववश् ववसक कवरणे ँ नूह केँ परमेश् वर दवरव एखन ारर नवह िे खल गेल बवत सभक चेतववना िे ल गेलवन। जववह सँ ओ संसवरक िोषा ठहरौलवन आ ववशवसक कवरणे ँ जे ाववम्कतवक उतरववाकवरा बवन गेलवह। 8 ववश् ववसक कवरणे ँ अबवहम जखन ओवह ्वन पर जेबवक लेल बजवओल गेलवह जे हनकव उतरववाकवरक तप मे भेटबवक

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वहबू

29 ववश् ववसक कवरणे ँ ओ सभ लवल सवगर मे जेनव शुष भूवम सँ गुजरै त गेलवह। 30 ववश् ववसक कवरणे ँ यराहोक िे बवल सभ लगभग सवत विनक चवतकवत खवस प़ल। 31 ववश् ववसक कवरणे ँ वेशव रवहवब ववश् ववस नवह रखवनहवर सभक संग नवह मरर गेलाह, जखन वक ओ जवसूस सभ केँ शव्न सँ सवगत कयलवन। 32 आओर का कहब? वकएक तँ हमरव वगिोन, बरवक, वशमशोन आ यफरवक ववषय मे कहबव मे समय नवह आवब जवयत। िवऊि, शमूएल आ भववषवयव सभक सेहो। 33 ओ ववश् ववसक कवरणे ँ रवज सभ केँ वश मे कयलवन, ाववम्कतव कयलवन, पवतजव पवर कयलवन, वसंह सभक मुँह रोकलवन। 34 आवगक वहं सव बुिेलवन, तलववरक ावरसँ बवच गेलवह, कमजोरासँ मजबूत भेलवह, युदमे वार भऽ गेलवह, परिे शा सभक सेनव सभकेँ भगवबऽ लेल घुवम गेलवह। 35 स् तागण सभ अपन मृत् यु केँ फेर सँ जाववत कऽ लेलक। जववह सँ ओ सभ नाक पुनरुवन पववब सकय। 36 िोसर लोक सभ केँ कूर उपहवस आ को़व-मको़वक पराकव भेलैक, आ तवह मे बवन आ जेल मे रवखल गेल। 37 ओ सभ पवरर मवरल गेल, ओकरव सभ केँ कववट िे ल गेल, पराकव िे ल गेल, तलववर सँ मवरल गेल। वनरववशत, पाव़त, सतवओल गेल; 38 ओ सभ मरभूवम मे, पहव़ मे आ पृर् वाक मवं ि आ गुफव मे भटकैत रहलवह। 39 ई सभ ववश् ववसक कवरणे ँ नाक-नाक खबरर पववब गेलवह। 40 परमेश् वर हमरव सभक लेल वकछु नाक चाजक वव्व कयलवन जववह सँ हमरव सभक वबनव ओ सभ वसद नवह भऽ जवय। अध्य 12 1 ते ँ अपनव सभ सेहो एतेक पैघ गववहक मेघ सँ घेरल छा, ते ँ आउ, हम सभ अपन सभ भवर आ पवप केँ एक कवत रव्ख जे हमरव सभ केँ एतेक सहजतव सँ घेरने अवछ, आ ाैय्पूव्क ओवह िौ़ केँ िौ़ब जे हमरव सभक सोिवँ रवखल गेल अवछ। 2 हम सभ अपनव सभक ववश् ववसक रचवयतव आ समवपन करयवलव याशु विस तकैत छा। ओ हनकव सवमने रवखल गेल आननक कवरणे ँ लजव केँ तुच बुिैत कूस केँ सहन कयलवन आ परमेश् वरक वसंहवसनक िवहनव कवत बैसल छवर। 3 वकएक तँ ओवह पर ववचवर कत जे पवपा सभक अपनव ववरद एहन ववरोावभवस सहने छल, जववह सँ अहवँ सभ रववक कऽ बेहोश नवह भऽ जवयब। 4 अहवँ सभ एखन ारर पवप सँ ल़ै त खूनक ववरोा नवह केलहँ । 5 अहवँ सभ ओवह उपिे श केँ वबसरर गेल छा जे अहवँ सभ केँ बचव सभ जकवँ कहै त अवछ, “हे बेटव, अहवँ पभुक िं ि केँ वतरसृत नवह कत आ जखन अहवँ केँ िवँ टल जवयत तखन बेहोश नवह होउ।” 6 परमेश् वर जकरव सँ पेम करै त छवर, तकरव परमेश् वर िण िै त छवर आ जकरव ओ गहण करै त छवर, तकरव को़व मवरै त छवर।

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7 जँ अहवँ सभ तव़ब सहै त छा तँ परमेश् वर अहवँ सभक संग ओवहनव ववहवर करै त छवर जेनव बेटव सभक संग। वकएक तँ ओ कोन पुत अवछ जकरव बवप िण नवह िै त अवछ? 8 मुिव जँ अहवँ सभ िणहान छा, जववह मे सभ भवग लैत छा, तखन अहवँ सभ हरवमा छा, बेटव नवह। 9 हम सभ अपन शरारक वपतव सभ सेहो छवर जे हमरव सभ केँ सुावरै त छलवह आ हनकव सभ केँ आिर-सतवर कयलवन। 10 वकएक तँ ओ सभ वकछु विन ारर हमरव सभ केँ अपन इचवक अनुसवर िं वित कयलवन। मुिव ओ हमरव सभक लवभक लेल, जववह सँ हम सभ हनकर पववततवक भवगािवर बवन सकब। 11 वत्मवन समय मे कोनो िण आननिवयक नवह बुिवइत अवछ, बल् वक िु खि बुिवइत अवछ। 12 ते ँ जे हवर लटकल अवछ आ कमजोर ठे हन केँ ऊपर उठवउ। 13 अहवँ सभक पएरक लेल सोि बवट बनवउ, जववह सँ लंग़व सभ बवट सँ हवट नवह जवय। मुिव एकरव ठाक भऽ जवय। 14 सभ लोकक संग शव्न आ पववततवक पवलन कत, जकरव वबनव केओ पभु केँ नवह िे ्ख सकैत अवछ। 15 अहवँ सभ एवह बवतक धवन रवखब जे परमेश् वरक कृपव सँ केओ ववफल नवह भऽ जवय। कतह कटु तवक कोनो जव़ अहवँ सभ केँ परे शवन नवह करय आ एवह सँ बहतो लोक अशुद नवह भ' जवय। 16 कहा ं एसवव जकवँ कोनो ववभचवरा वव अपववत व्य नवह हो, जे एक कटहर भोजनक बिलव मे अपन जेय अवाकवर बेवच िे लक। 17 अहवँ सभ जनैत छा जे बवि मे जखन ओ आशावव् िक उतरववाकवरा बनय चवहै त छलवह तखन हनकव असाकवर कयल गेलवन। 18 वकएक तँ अहवँ सभ ओवह पहव़ पर नवह पहँ चलहँ जकरव सश् कएल जव सकैत अवछ आ जे आवग सँ जरल छल, आ ने कवरा, अनवर आ आँ ा​ा-तूफवन मे आयल छा। 19 तुरहाक आववज आ शबक आववज। ओवह आववज केँ सुनवनहवर सभ ववनता कयलवन जे आब हनकव सभ केँ ई वचन नवह कहल जवय। 20 (वकएक तँ ओ सभ ओवह आजव केँ सहन नवह कऽ सकलवह जे जँ कोनो जवनवर पहव़ केँ छु बैत अवछ तँ ओकरव पवरर मवरर िे ल जवयत आवक बवण सँ फेकल जवयत। 21 ई दश एतेक भयववह छल जे मूसव कहलवरन, “हम बहत िरै त छा आ कवँ वप रहल छा।” 22 मुिव अहवँ सभ वसयोन पव्त आ जाववत परमेश् वरक नगर, स् वग्य यतशलेम आ असंय स् वग्िूत सभक समूह मे पहँ वच गेल छा। 23 जेठ बचव सभक आम सभव आ मण् िला जे स् वग् मे वलखल अवछ, आ सभक नवयवा​ाश परमेश् वर आ वसद कयल गेल ाम् लोक सभक आत् मव केँ। 24 नव करवरक मध् याशु आ वछ़कववक खून केँ जे हववबल सँ नाक बवत कहै त छवर। 25 िे खू जे बवजवनहवर केँ असाकवर नवह कत। जँ पृर् वा पर बजवनहवर केँ असाकवर केवनहवर जँ ओ सभ नवह बवच सकलवह तँ हम सभ स् वग् सँ बवजवनहवर सँ िू र भऽ कऽ नवह बवच सकब। 26 तखन हनकर आववज पृर् वा केँ वहलव िे लकवन, मुिव आब ओ वचन िे लवन जे, “हम एक बेर फेर सँ मवत पृर् वा केँ नवह, बल् वक स् वग् केँ सेहो वहलव िे ब।”


वहबू

27 ई शब, “एक बेर फेर, जे चाज वहलैत अवछ, ओकरव सभ केँ बनवओल गेल वसु जकवँ हटव िे बवक बोा करवबैत अवछ, जववह सँ जे चाज वहलल नवह जव सकैत अवछ, से रवह जवय।” 28 ते ँ हमरव सभ केँ एहन रवज भेटैत अवछ जे वहलल नवह जव सकैत अवछ, ते ँ हमरव सभ केँ कृपव भेटय जववह सँ हम सभ परमेश् वरक सेवव आिर आ भक् वतक संग साकवय् तप सँ कऽ सकब। 29 वकएक तँ हमरव सभक परमेश् वर भस करयवलव आवग छवर। अध्य 13 1 भवइ-बवहनक पेम बनल रहय। 2 अनजवन लोकक सवगत करब नवह वबसरब, वकएक तँ एवह तरहे ँ वकछु गोटे अनजवने मे स् वग्िूत सभक सवगत कयलवन अवछ। 3 जे सभ बवनल अवछ, ओकरव सभ केँ मोन पव़ू जेनव ओकरव सभक संग बवनल अवछ। आ जे सभ ववपवत मे भोगैत छवर, से सभ अपनव शरार मे सेहो बनैत छा। 4 ववववह सभ मे मवन-समवन अवछ आ वबछौन वनम्ल अवछ, मुिव वेशव आ ववभचवरा सभक परमेश् वर नवय करतवह। 5 अहवँ सभक गप-सप मे लोभ नवह हो। अहवँ सभ जे वकछु अवछ तववह सँ संतु् रह, वकएक तँ ओ कहने छवर जे हम अहवँ केँ कवहयो नवह छो़ब आ ने अहवँ केँ छो़ब।” 6 एवह लेल हम सभ वनभ्कतवपूव्क कवह सकैत छा जे, “पभु हमर सहवयक छवर, आ हम एवह बवतक िर नवह जे मनुष् य हमरव संग का करत।” 7 जे सभ अहवँ सभ पर शवसन करै त छवर, जे सभ अहवँ सभ केँ परमेश् वरक वचन कहने छवर, तकरव सभ केँ मोन पव़ू। 8 याशु मसाह कव्​्, आइ आ अनन कवल ारर वैह छवर। 9 ववववा आ वववचत वशकवक संग नवह घुमवउ। वकएक तँ ई नाक बवत अवछ जे हिय कृपवक संग ्​्र भऽ जवय। मवं सक संग नवह, जववह मे ओवह मे रहवनहवर लोक केँ कोनो फवयिव नवह भेलैक। 10 हमरव सभ लग एकटव वेिा अवछ, जववह मे सँ हनकव सभ केँ भोजन करबवक अवाकवर नवह छवन जे तमूक सेवव करै त छवर। 11 वकएक तँ ओवह पशु सभक शव, जकर खून पवपक कवरणे ँ महवपुरोवहत पववत ्वन मे अनैत अवछ, से िे रवक बवहर जरव िे ल जवइत अवछ। 12 ते ँ याशु सेहो अपन खून सँ लोक सभ केँ पववत करबवक लेल फवटकक बवहर क् भोगलवह। 13 ते ँ हम सभ हनकर वननव लऽ कऽ िे रवक बवहर हनकव लग जवइ। 14 वकएक तँ एतऽ हमरव सभक कोनो ्वया नगर नवह अवछ, बल् वक हम सभ एकटव आबय बलव नगरक खोज मे छा। 15 ते ँ हनकव दवरव परमेश् वरक सुवतक बवलिवन सविखन चढबैत रह, अरव् त् हनकर नवमक ानववि िै त अपन ठोरक फल। 16 मुिव नाक कवज करब आ गप-सप करब वबसरर नवह जवउ, वकएक तँ एहन बवलिवन पर परमेश् वर पसन होइत छवर। 17 जे सभ अहवँ सभ पर शवसन करै त अवछ, ओकर आजव मवनू आ अपनव केँ अा​ान कत, वकएक तँ ओ सभ अहवँ सभक पवण पर नजरर रवखैत अवछ, जेनव वहसवब िे बवक चवहा, जववह सँ ओ

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सभ खुशा सँ कवज करवर, मुिव शोक सँ नवह, वकएक तँ ई अहवँ सभक लेल बेकवर अवछ। 18 हमरव सभक लेल पवर्नव कत। 19 मुिव हम अहवँ सभ सँ एवह सँ बेसा ववनता करै त छा जे अहवँ सभ केँ ई कवज करब, जववह सँ हम अहवँ सभ केँ ज्​्ये ववपस आवब सकब। 20 शव्नक परमेश् वर, जे हमरव सभक पभु याशु केँ, भे़ ँ व सभक ओवह महवन चरबवह केँ, अनन ववचवक खूनक दवरव मृत् यु मे सँ पुनज्ववत कयलवन। 21 याशु मसाहक दवरव अहवँ सभ केँ सभ नाक कवज मे हनकर इचव पूरव करबवक लेल वसद बनवउ। हनकर मवहमव अनन कवल ारर रहय। आमान। 22 भवइ लोकवन, हम अहवँ सभ सँ ववनता करै त छा जे उपिे शक वचन केँ सहन कत। 23 अहवँ सभ ई जववन वलअ जे हमरव सभक भवय वतमुवरयुस केँ मुय कयल गेल अवछ। वजनकव संग जँ ओ ज्​्ये आवब जेतवह तँ हम अहवँ सभकेँ िे खब। 24 जे सभ अहवँ सभ पर रवज करै त छवर आ सभ पववत लोक केँ पणवम कत। इटला के ओ सब अहवँ के नमन करै त छवर। 25 कृपव अहवँ सभक संग रहय। आमान।


जेम

22 मरदा अहाँ स् वचिक पालि करयवला बिू, मात सरितिहार ितह, अपिा केँ धोखा दै ि। 23 जँ केओ वचि सरितिहार अतछ आ कम् करय बला ितह अतछ, िँ ओ ओतहिा अतछ जेिा ककरो काँ च मे अपि सा्ातवक मरँह दे खैि अतछ। 24 तकएक िँ ओ अपिा केँ दे नख कऽ चतल जाइि अतछ आ िररन तबसरर जाइि अतछ जे ओ केहि मिरष् य छल। 25 मरदा जे केओ सिंतिाक तसद तियम तदस िकैि अतछ आ ओतह मे तटकैि रहि, ओ तबसरर कऽ सरितिहार ितह, बल् तक काज करयवला अतछ, ओ अपि काज मे धन होयि। 26 जँ अहाँ स् मे सँ केओ धातम्क बरझैि अतछ आ अपि जीह पर लगाम ितह लगाबैि अतछ, बल् तक अपि हदय केँ धोखा दै ि अतछ िँ एतह आदमीक धम् वि् अतछ। 27 परमेश् वर आ तपिाक समक शरद आ तिम्ल धम् ई अतछ, जे तपिामह आ तवधवा स्क केश मे तवश् वास करब आ संसार सँ अपिा केँ तिद्ष राखब।

अध्य 1 1 परमेश् वर आ प्र यीशर मसीहक सेवक याकूब, ति​िर-तबिरल बारह गोत केँ प्ाम कऽ रहल छी। 2 हमर ्ाइ लोकति, जखि अहाँ स् िरह-िरह केर परीका मे पडब िखि एकरा स् केँ आिन्ि बरझ।ू 3 ई जाति कऽ जे अहाँ स्क तवश् वासक परीका मे धैय् होइि अतछ। 4 मरदा धैय् केँ ओकर तसद काज होअय जातह सँ अहाँ स् तसद आ पू्​् ्ऽ सकब आ तकछर ओक अ्ाव ितह रहब। 5 जँ अहाँ स् मे सँ तकिको बरनदक अ्ाव अतछ िँ ओ परमेश् वर सँ माँ गय जे स् लोक केँ उदारिापूव्क दऽ दै ि छति आ ितह डाँ टैि छति। आ ओकरा दे ल जेिै। 6 मरदा ओ तवश् वास मे माँ गय, तकछर ितह डगमगाइि। तकएक िँ जे डगमगाइि अतछ से समरदक लहरर जकाँ अतछ जे हवाक संग धकेतल कऽ उछालल जाइि अतछ। 7 तकएक िँ ओ मिरष् य ई ितह सोचय जे ओकरा प्र सँ तकछर ्ेटिैक। 8 दोग तवचारक लोक अपि स् बाट मे अन्र होइि अतछ। 9 िीच ्ाय केँ उदात होयबाक कार्े ँ आिन्ि होअय। 10 मरदा धतिक लोक केँ िीच बिाओल जाइि छै क, तकएक िँ ओ घासक फूल जकाँ समाप ्ऽ जायि। 11 तकएक िँ सूरज जतड कऽ उगैि ितह अतछ, मरदा ओ घास केँ मररझा दै ि अतछ आ ओकर फूल खतस पडै ि अतछ आ ओकर फैशिक अिरगह िष ्ऽ जाइि अतछ। 12 धन अतछ जे परीका सहै ि अतछ, तकएक िँ जखि ओकरा परीका मे आओि िखि ओकरा जीविक मरकरट ्ेटिैक, जे प्र ओकरा सँ पेम करतिहार स् सँ पतिता केिे छति। 13 जखि केओ परीका मे पडै ि अतछ िखि ई ितह कहय जे , ‘हम परमेश् वरक परीका मे छी, तकएक िँ परमेश् वर अधलाहक परीका ितह कयल जा सकैि अतछ आ िे ककरो परीका मे पतड सकैि अतछ। 14 मरदा पि् येक मिरष् य अपि वासिा सँ दू र ्ऽ कऽ लोत्ि ्ेला पर परीका मे पडै ि अतछ। 15 जखि वासिा ग्​् मे आतब जाइि अतछ िँ पाप उत् करै ि अतछ आ पाप समाप ्ेला पर मृतरक जन दै ि अतछ। 16 हे हमर तपय ्ाइ लोकति, कोिो गलिी ितह कर। 17 स् िीक वरदाि आ स् तसद वरदाि ऊपर सँ अतछ आ इजोिक तपिा सँ उिरै ि अतछ, तजिका संग कोिो पररवि्िशीलिा आ िे घरमबाक छाया ितह अतछ। 18 ओ अपि इचा सँ हमरा स् केँ सि् य वचि सँ जिम दे लति, जातह सँ हम स् हिकर सृतष मे एक िरहक पतहल फल बिब। 19 िे ँ हे हमर तपय ्ाइ लोकति, स् केओ सरिबा मे दे री, बाजबा मे दे री आ कोध मे दे री। 20 तकएक िँ मिरष् यक कोध परमेश् वरक धातम्किा ितह बिबैि अतछ। 21 िे ँ एतह लेल स् गंदगी आ िटखटिाक फालिूिा केँ अलग कर आ कलमल वचि केँ िमिा सँ गह् कर जे अहाँ स्क पा् केँ बचाबय मे सकम अतछ।

अध्य 2 1 हमर ्ाइ लोकति, हमरा स्क प्र यीशर मसीह पर तवश् वास ितह कर, जे मतहमा के प्र छति। 2 जँ अहाँ स्क स्ा मे सोिाक अंगूठी ल’ क’ िीक वस पतहरिे कोिो गरीब आदमी सेहो आतब जायि। 3 अहाँ स् ओतह समलैतगक वस पतहरतिहार केँ आदर करै ि छी आ ओकरा कहै ि छी जे, “अहाँ एिय िीक जगह पर बैसू।” गरीब स् केँ कतह तदयौक जे , “अहाँ ठाढ रह वा एिय हमर पैरक िीचाँ बैसू।” 4 िखि की अहाँ स् अपिा मे पकपािपू्​् ितह छी आ अधलाह तवचारक नायाधीश बति गेल छी? 5 हमर तपय ्ाइ लोकति, सरिू, की परमेश् वर एतह संसारक गरीब स् केँ तवश् वास मे धतिक आ ओतह राज् यक उतरातधकारी ितह चरि​िे छति जे ओ हिका सँ पेम करयवला स् केँ पतिता केिे छति? 6 मरदा अहाँ स् गरीब केँ िरच बरझलहँ । की धतिक लोक अहाँ स् पर अताचार ितह करै ि अतछ आ अहाँ स् केँ नायक आसि स्क समक ितह खीच ं ैि अतछ? 7 की ओ स् ओतह योग िामक ति्ा ितह करै ि अतछ, जातह िाम सँ अहाँ स् बजाओल गेल छी? 8 जँ अहाँ स् धम्शास् तक अिरसार राजकीय तियम केँ पूरा करब, “अपि पडोसी सँ अपिा जकाँ पेम कर, िँ अहाँ स् िीक करै ि छी। 9 मरदा जँ अहाँ स् लोकक पति आदर करै ि छी िँ अहाँ स् पाप करै ि छी आ धम्-तियमक उलंघि करै ि छी। 10 तकएक िँ जे केओ समस वव्ाक पालि करै ि अतछ आ एकतह बाि मे दोषी ठहराबैि अतछ, से स् दोषी अतछ। 11 तकएक िँ जे कहलक जे, “वत्चार ितह कर, ओ ईहो कहलक जे , “हता ितह कर।” जँ अहाँ वत्चार ितह करब िँ जँ मारर दे ब िँ धम्-तियमक उलंघि बति गेल छी। 12 अहाँ स् एिा बाजब आ ओतहिा कर जेिा ओ स् सिंतिाक तियमक अिरसार नाय कयल जायि। 13 जे कोिो दया ितह केिे होति, ओकरा तबिा दयाक ि् याय होयि। दया नायक तवरद आिन्ि होइि अतछ। 14 हमर ्ाइ लोकति, जँ केओ कहै ि अतछ जे ओकरा तवशास अतछ, मरदा ओकर काज ितह अतछ? की तवशास ओकरा बचा सकैि अतछ?

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जेम

15 जँ कोिो ्ाय वा बतहि िंगटे छति आ तित ्ोजि सँ वंतचि छति। 16 अहाँ स् मे सँ एक गोटे हिका स् केँ कहै ि छति​ि, “शां ति सँ चतल जाउ, अहाँ स् गरम आ िृप रह। मरदा अहाँ स् ओकरा स् केँ ओ स् ितह दै ि छी जे शरीरक लेल आवशक अतछ। एकरा की फायदा होइि छै क? 17 ितहिा तवश् वास जँ काज ितह करै ि अतछ िँ असगरे रतह कऽ मरर गेल अतछ। 18 एक आदमी कतह सकैि अतछ जे , ‘अहाँ क तवश् वास अतछ आ हमरा काज अतछ। 19 अहाँ तवश् वास करै ि छी जे परमेश् वर एकेटा छति। अहाँ िीक काज करै ि छी। 20 मरदा, हे वि् मिरष, की अहाँ जिैि छी जे तबिा काजक तवश् वास मरर गेल अतछ? 21 की हमरा स्क तपिा अबाहम अपि परत इसहाक केँ वेदी पर चढा कऽ अपि काजक कार्े ँ धम् ितह ठहराओल गेलाह? 22 की अहाँ दे खैि छी जे कोिा तवश् वास हिकर काजक संग काज करै ि छल आ कम्क कार्े ँ तवश् वास तसद ्ेल? 23 धम्शास् त पूरा ्ऽ गेल जे कहै ि अतछ, “अबाहम परमेश् वर पर तवश् वास कयलति, आ ओकरा धातम्किाक रप मे मािल गेलति।” 24 अहाँ स् दे खैि छी जे कोिा मिरष्‍य केवल तवश् वासक कार्े ँ ितह बल् तक काजक कार्े ँ धातम्क ठहराओल जाइि अतछ। 25 ितहिा की वेशा राहाब केँ सेहो काजक कार्े ँ धम् ितह ठहराओल गेल छल, जखि ओ दू ि स् केँ स्‍वीकार कऽ कऽ दोसर बाट पर पठा दे लक? 26 तकएक िँ जतहिा तबिा आि् माक शरीर मरर गेल अतछ, ितहिा तबिा काजक तवश् वास सेहो मरर गेल अतछ।

9 हम स् तपिा परमेश् वर केँ एतह िरहे ँ आशीष दै ि छी। हम स् परमेश् वरक उपमाक अिरसार बिल लोक स् केँ एतह िरहे ँ शाप दै ि छी। 10 एकतह मरँह सँ आशीवा् द आ शाप तिकलैि अतछ। हमर ्ाइ लोकति, ई स् बाि एहि ितह हे बाक चाही। 11 की फवारा एकतह ठाम मीठ आ िीि पाति पठबैि अतछ? 12 हे ्ाइ लोकति, की अंजीरक गाछ जैिूिक जामरि पैदा कऽ सकैि अतछ? या िऽ बेल, अंजीर? िे ँ कोिो फवारा िमकीि पाति आ िाजा दर िू ितह दऽ सकैि अतछ । 13 अहाँ स् मे बरनदमाि आ ताि सँ सम् के अतछ? ओ िीक गप-सप सँ अपि काज केँ िमिाक संग दे खाबति। 14 मरदा जँ अहाँ स्क मोि मे कटर ईषा् आ झगडा अतछ िँ घमंड ितह कर आ सतक तवरद झूठ ितह बाजू। 15 ई बरनद ऊपर सँ ितह उिरै ि अतछ, बल् तक सां साररक, कामरक आ शैिािी अतछ। 16 तकएक िँ जिऽ ईषा् आ झगडा होइि छै क, ओितह भम आ स् अधलाह काज होइि छै क। 17 मरदा ऊपर सँ जे बरनद ्ेटैि अतछ से पतहिे शरद अतछ, िखि शाननपू्​्, सौम आ सहज ववहार मे ्रल, दया आ िीक फल सँ ्रल, तबिा पकपाि आ पाखंडक ितह। 18 धातम्किाक फल शानन मे बोओल जाइि अतछ जे स् शानन करऽ वला अतछ। अध्य 4 1 अहाँ स्क बीच यरद आ झगडा किऽ सँ होइि अतछ? ओ स् एिय सँ ितह आयल अतछ, अहाँ स्क वासिा सँ जे अहाँ स्क अंग-अंग मे यरद करै ि अतछ? 2 अहाँ स् वासिा चाहै ि छी, मरदा ितह अतछ, मारै ि छी, आ पाब’ चाहै ि छी, मरदा ितह पातब सकैि छी। 3 अहाँ स् माँ गैि छी, मरदा ितह गह् करै ि छी, तकएक िँ अहाँ स् गलि माँ गैि छी, जातह सँ अहाँ स् ओकरा अपि वासिा पर ्स कऽ सकब। 4 हे वत्चारी आ वत्चारी, अहाँ स् ई ितह जिैि छी जे संसारक दोसी परमेश् वरक संग वैर्ाव तिक? जे तकयो संसारक तमत बिय चाहै ि अतछ, ओ परमेश् वरक शतर अतछ। 5 की अहाँ स् केँ लगैि अतछ जे धम्शास् त वि् मे कहै ि अतछ जे , “हमरा स् मे जे आि् मा अतछ, से ईषा् करबाक इचा रखैि अतछ?” 6 मरदा ओ बेसी कृपा करै ि छति। िे ँ ओ कहै ि छति जे , “परमेश् वर घमंडी लोकक तवरोध करै ि छति, मरदा तविम लोक पर कृपा करै ि छति।” 7 िे ँ परमेश् वरक अधीि रह। शैिािक तवरोध कर, िखि ओ अहाँ स् सँ ्ातग जायि। 8 परमेश् वर लग आतब जाउ, िँ ओ अहाँ स्क लग आतब जेिाह। हे पापी स्, अपि हाि साफ कर। अहाँ स् दोगदोसर तवचारक लोक स्, अपि हदय केँ शरद कर। 9 दर ःनखि रह, शोक कर आ कािू, अहाँ स्क हँ सी शोक मे बदतल जाय आ अहाँ क आि् शोक मे बदतल जाय। 10 प्रक समक अपिा केँ िम बिाउ, िखि ओ अहाँ स् केँ ऊपर उठौिाह। 11 यौ ्ाइ लोकति, एक-दोसर पर अधलाह ितह बाजू। जे अपि ्ाय पर अधलाह बजैि अतछ आ अपि ्ाय पर नाय करै ि

अध्य 3 1 हमर ्ाइ लोकति, ई जाति कऽ जे हमरा स् केँ एतह सँ बेसी दोषी ठहराओल जायि, से बेसी मातलक ितह बिू। 2 हम स् बहिो बाि मे स् केँ ठे स पहँ चबैि छी। जँ केओ वचि मे आपतत ितह करै ि अतछ िँ ओ तसद आदमी अतछ आ पूरा शरीर पर लगाम लगाबय मे सकम अतछ। 3 दे खू, हम स् घोडा स्क मरँह मे कटहर लगा दै ि छी, जातह सँ ओ स् हमरा स्क आता मािति। आ हम स् हिका स्क पूरा शरीर मे घरतम जाइि छी। 4 ओतह िाव स् केँ सेहो दे खू जे ओ स् एिेक पैघ ्ऽ कऽ पचंड हवा सँ चलैि अतछ, मरदा ओ स् बहि छोट पिवार सँ घरमाओल जाइि अतछ, जिय राजपाल चाहै ि छति। 5 ितहिा जीह छोट-छोट अंग अतछ आ पैघ-पैघ बािक घमंड करै ि अतछ। दे खू, किेक आतग किेक पैघ बाि अतछ! 6 जीह आतग अतछ, अधम्क संसार अतछ। आ ओकरा िरकक आतग लगा दे ल जाइि छै क। 7 तकएक िँ स् िरहक पशर -पकी, तचडै -चरिमरिी, साँ प आ समरदक वश मे कयल गेल अतछ। 8 मरदा जीह केओ वश मे ितह कऽ सकैि अतछ। ई एकटा बेकाबू बरराई अतछ, जे घािक जहर सँ ्रल अतछ।

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जेम

अतछ, से धम् -तियमक अधलाह बजैि अतछ आ धम् -तियमक नाय करै ि अतछ, मरदा जँ अहाँ धम्-तियमक नाय करै ि छी िँ अहाँ धम्-तियमक पालि करयवला ितह, बल् तक नायकिा् छी। 12 एकटा एहि तियम दे तिहार अतछ जे उदार आ तविाश करबा मे सकम अतछ। 13 अहाँ स् जे कहै ि छी जे, आइ वा कान् हम स् एहि िगर मे जाउ, आ एक साल धरर ओिय रहब आ कीिब-बेचब आ ला् पातब लेब। 14 मरदा अहाँ स् ितह जिैि छी जे परसू की होयि। अहाँ क जीवि की अतछ? एिेक धरर जे वाष सेहो अतछ, जे कति काल लेल पकट होइि अतछ, आ फेर तवलरप ्' जाइि अतछ। 15 अहाँ स् केँ ई कहबाक चाही जे जँ प्र चाहति िँ हम स् जीतवि रहब आ ई वा ओ काज करब।” 16 मरदा आब अहाँ स् अपि घमंड मे आिन्ि छी। 17 िे ँ जे केओ िीक काज करब जिैि अतछ आ से ितह करै ि अतछ, ओकरा लेल पाप अतछ। अध्य 5 1 हे धतिक लोक स्, एखि जाउ, अहाँ स् पर जे दर ःख आओि, िातह लेल कािब आ करहरब। 2 िोहर धि-समतत भष ्ऽ गेल अतछ, आ िोहर वस चीरफाड ्ऽ गेल अतछ। 3 िोहर सोिा-चािी किक ्ऽ गेल अतछ। ओकरा स्क जंग अहाँ स्क तवरद गवाह बि​ि आ अहाँ क मां स आतग जकाँ खा जायि। अहाँ स् अंतिम तदिक लेल धिक ढे र लगा दे िे छी। 4 दे खू, जे मजदू र अहाँ स्क खेि मे फसल कातट लेलक, ओकर ्ाडा, जे अहाँ स् मे सँ धोखाधडी सँ रोकल गेल अतछ, तचतचया रहल अतछ। 5 अहाँ स् पृि् वी पर ्ोग-तवलास कऽ कऽ रहल छी। अहाँ स् अपि हदय केँ पोसिे छी जेिा वधक तदि मे होइि अतछ। 6 अहाँ स् धम् लोक केँ दोषी ठहरा कऽ मारर दे तलयैक। ओ अहाँ स्क तवरोध ितह करै ि अतछ। 7 िे ँ ्ाइ लोकति, प्रक आगमि धरर धैय् राखू। दे खू, तकसाि पृथीक अिमोल फलक पिीका करै ि अतछ आ ओकरा लेल बहि तदि धरर धैय् रखैि अतछ जाबि धरर ओकरा ्ोरे -्ोर आ बादक वषा् ितह ्ेटैि छै क। 8 अहाँ स् सेहो धैय् राखू। अपि हदय केँ न्र कर, तकएक िँ प्रक आगमि िजदीक आतब रहल अतछ।” 9 यौ ्ाइ लोकति, एक-दोसर सँ घृ्ा ितह कर, जातह सँ अहाँ स् केँ दोषी ितह ठहराओल जायि। 10 हमर ्ाइ लोकति, प्रक िाम सँ बजतिहार पवक् िा स् केँ कष् ट ्ोगबाक आ धैय्क उदाहर् बिाउ। 11 दे खू, हम स् ओकरा स् केँ सरखी मािैि छी जे तटकैि अतछ। अहाँ स् अयूबक धैय्क तवषय मे सरिलहँ आ प्रक अंि दे खलहँ । तक प्र बहि कर् आ कोमल दयालर छति। 12 मरदा, हमर ्ाइ लोकति, स् सँ ऊपर, िे स् वग् आ िे पृि् वी आ िे कोिो आि शपिक शपि ितह कर। आ अहाँ क ितह, ितह; कही ं अहाँ स् दण मे ितह पतड जायब।” 13 की अहाँ स् मे सँ तकयो दर ःनखि अतछ? पाि्िा करति। कोिो मसी अतछ की? ्जि गाबय।

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14 अहाँ स् मे तकयो बीमार अतछ? ओ म्​् डलीक पाचीि स् केँ बजाबय। प्रक िाम सँ हिका िेल सँ अत्षेक करै ि हिका पर पाि्िा करति​ि। 15 तवश् वासक पाि्िा बीमार केँ उदार करि आ प्र ओकरा जीतब लेिाह। आ जँ ओ पाप केिे अतछ िँ ओकरा कमा कयल जायि। 16 एक-दोसर केँ अपि दोष सीकार कर आ एक-दोसरक लेल पाि्िा कर जातह सँ अहाँ स् ठीक ्ऽ सकब। धम् मिरष्‍यक पखर पाि्िा बहि ला्ान्ि करै ि अतछ। 17 एतलयाह हमरा स् जकाँ राग-दे षक अधीि छलाह, आ ओ गं्ीरिा सँ पाि्िा करै ि छलाह जे बरखा ितह हो, आ िीि वष् छह मास धरर पृथी पर बरखा ितह ्ेल। 18 ओ फेर पाि्िा कयलति, आ आकाश मे बरखा ्ेल आ पृि् वी अपि फल दे लक। 19 ्ाइ लोकति, जँ अहाँ स् मे सँ तकयो सि् य सँ ्टकैि अतछ आ तकयो ओकरा धम् पररवि्ि करै ि अतछ। 20 ओ ई जाति लेति जे जे पापी केँ अपि भषाचार सँ बदतल दै ि अतछ, से कोिो पा्ी केँ मृतर सँ बचाओि आ बहि रास पाप केँ िरकाओि।


१ पत्र अध्य 1 1 यीशु मसीहक प्रेर पतुस पोनुस, गलातरया, कप्ोतसया, एतशया आ तितितिया म् तित़याएल पेद् शी सभ क्ँ पठौलति। 2 तपरा पेम्श् वेक पूव्वािक अिुसाे आर् माक पतवतीकेकक दाेा यीशु मसीहक आवापालि आ खूि ति़किाक ल्ल चुिू। 3 हमेा सभक पभु यीशु मसीहक तपरा पेम्श् वेक धन होअय, ज् अपि पचुे दयाक अिुसाे यीशु मसीहक मृर् यु म् सँ जीति उठला सँ हमेा सभ क्ँ एकटा जीवंर आशाक ल्ल पुिज्ज द् लति। 4 अतविाशी आ अशुद आ कीक ितह होमय िला उतेातधकाे ज् अहाँ सभक ल्ल स् वग् म् सुेतकर अति। 5 ओ सभ पेम्श् वेक सामि्​् य दाेा तवश् वास दाेा उदाेक ल्ल ेाखल ग्ल अति ज् अंतरम समय म् पगट होमय ल्ल रैयाे अति। 6 अहाँ सभ एतह िार पे िहर आिन्र िी, यदतप आि तकिु समयक ल्ल, जँ आवशकरा प़य रँ अहाँ सभ अि्क रेहक पेीका म् भाेी पत़ ेहल िी। 7 एतह ल्ल ज् अहाँ सभक तवश् वासक पेीका आतग म् पेखल ग्लाक िादो िाश होमय िला सोिा सँ िहर ि्सी कीमरी अति। 8 अहाँ सभ ओकेा ितह द् नख कऽ प्म केै र िी। अहाँ सभ हिका पे भल् आि हिका ितह द् खैर िी, मुदा तवश् वास केै र िी, मुदा अहाँ सभ अकि​िीय आ मतहमा सँ भेल आि् सँ आिन्र िी। 9 अहाँ सभक तवश् वासक अि् र आ पाकक उदाे पाति। 10 पवक् रा सभ ओतह उदाेक तवषय म् सोतच-तचंरि आ खोजख कयलति अति, ज् अहाँ सभ पे ज् अिुगह आओर, रातह पे भतवषवाकी कयलति। 11 मसीहक आर् मा ज् हिका सभ म् िल, स् क्हि समयक संक्र दै र िल, जखि ओ मसीहक कष आ ओके िादक मतहमा क्ँ पतहि् सँ गवाही दै र िल। “ ज्केा पे सग्दूर द् खै क् इचा ेखै िै । 13 र् ँ यीशु मसीहक पगट भ्ला पे ज् अिुगह अहाँ सभ पे आिल जायर, रातह पे अन धरे आशा ेाखू। 14 आवाकाेी सि् राि जकाँ अपिा क्ँ अवािरा म् पूव्क वासिा जकाँ ितह ि​िाउ। 15 मुदा जतहिा अहाँ सभ क्ँ िजौि् िति, रतहिा अहाँ सभ सभ रेहक गप-सप म् पतवत ेह। 16 तकएक रँ धम्शास्‍त म् तलखल अति, “पतवत ेह। तकएक रँ हम पतवत िी। 17 जँ अहाँ सभ तपरा क्ँ पुकाेै र िी, ज् कोिो वनयक काजक अिुसाे नाय केै र िति, रँ अहाँ सभक पवासक समय एतह ठाम भयभीर भऽ कऽ तिराउ। 18 तकएक रँ अहाँ सभ जिैर िी ज् अहाँ सभ क्ँ चािी आ सोिा जकाँ िाशवाि वसु सभ सँ मुनय ितह भ्टल अति। 19 मुदा मसीहक अिमोल खूि सँ, ज्िा कोिो तिद्ष आ तिद्ष म्मिाक खूि। 20 ओ संसाेक सृतष सँ पतहि् पतहि् सँ तिधा् रेर िलाह, मुदा एतह अंतरम समय म् अहाँ सभक ल्ल पगट भ्लाह।

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21 ओ हिका दाेा पेम्श् वे पे तवश् वास केै र िति ज् हिका मृर् यु म् सँ तजया कऽ हिका मतहमा द् लति। जातह सँ अहाँ सभक तवश् वास आ आशा पेम्श् वे म् ेहय। 22 अहाँ सभ आर् मा दाेा सर् य क्ँ आवा मािैर अपि पाक क्ँ शुद कयलहँ , जातह सँ भाय सभक पतर अशुद प्म भऽ ग्ल। 23 हम पेम्श् वेक वचिक दाेा, ज् जीतवर अति आ अि​ि् र काल धरे ेहर, िाशवाि िीया सँ ितह, िल् तक अतविाशी िीया सँ िव जज ल्ि् िी। 24 तकएक रँ सभ पाकी घास जकाँ अति आ मिुष् यक समस मतहमा घासक फूल जकाँ अति। घास मुेझा जाइर अति आ ओके फूल खतस प़ै र अति। 25 मुदा पेम्श् वेक वचि सदाक ल्ल तटकैर अति। ई ओ वचि अति ज् सुसमाचाे दाेा अहाँ सभ क्ँ पचारेर कयल ग्ल अति। अध्य 2 1 र् ँ अहाँ सभ दु ष् टरा, सभ िल-पपंच, पाखं्, ईषा् आ सभटा अधलाह िार क्ँ एक कार ेाखू। 2 िवजार तशशु जकाँ वचिक तिशल दू धक इचा कर जातह सँ अहाँ सभ एतह सँ ित़ सकि। 3 जँ अहाँ सभ ई द् खलहँ ज् पभु कृपालु िति। 4 हिका सभ क्ँ जीतवर पािे जकाँ आिय सँ मिुष् य सभक अिुमतर ितह िलति, मुदा पेम्श् वेक चुिल आ अिमोल। 5 अहाँ सभ स्हो जीवंर पािे जकाँ आर् मक घे, पतवत पुेोतहरक दल ि​िाओल ग्ल िी, जातह सँ आर् तमक ितलदाि च़ाओल जाय, ज् यीशु मसीहक दाेा पेम्श् वे क्ँ सीकाे कयल जाय। 6 र् ँ धम्शास् त म् स्हो कहल ग्ल अति ज् , “द् खू, हम तसयोि म् एकटा पमुख कोिाक पािे ेानख ेहल िी, ज् चुिल आ अिमोल अति। 7 र् ँ अहाँ सभ ज् तवश् वास केै र िी, ओकेा ल्ल ओ िहमू​ू अति, मुदा ज् सभ आवा ितह मािैर अति, ओकेा ल्ल ज् पािे ि​िौतिहाे सभ असीकाे कऽ द् लक, रकेा ल्ल ओ कोिकोिक तसे ि​िा द् ल ग्ल अति। 8 ओ सभ ठोकेक पािे आ पािेक पािे, ज् सभ वचि पे ठोके खाइर अति, आ आवा ितह मािैर अति। 9 मुदा अहाँ सभ चुिल पी़ी, ेाजपुेोतहर, पतवत जातर, तवतशष पजा िी। ज् अहाँ सभ क्ँ अनाे म् सँ अपि अद् भुर इजोर म् िजौि् िति, हिके सुतर अहाँ सभ क्ँ द् खि। 10 ओ सभ पतहि् कोिो पजा ितह िल, िल् तक आि पेम्श् वेक पजा अति। 11 तपय तपयरम, हम अहाँ सभ क्ँ पेद् शी आ रीि्याती जकाँ तविरी केै र िी ज्, शाेीरेक वासिा सँ पेह् ज कर ज् आर् मा सँ ल़ै र अति। 12 गैे-यहदी सभक िीच अहाँ सभक गप-सर् यपूक् ेह, जातह सँ ओ सभ अहाँ सभक तवेोध म् दु षम्क रप म् िजैर अति, रखि ओ सभ अहाँ सभक िीक काज सभ सँ, ज् ओ सभ द् खराह, रातह दाेा पेम्श् वेक मतहमा केति। 13 पभुक ल्ल मिुष्‍यक प्​्क तियमक अधीि ेह। 14 वा ेाजपाल सभ क्ँ, ज्िा हिका दाेा दु षम्क सजा आ िीक काज केयवला सभक पशंसा केिाक ल्ल पठाओल ग्ल अति। 15 पेम्श् वेक इच् िा एहि अति ज् िीक काज कऽ कऽ अहाँ सभ मूख् लोकक अवािरा क्ँ चुप कऽ सकि।


१ पतुस

16 ज्िा सरंत आ अपि सरंतरा क् दु भा् विा क् चोला क् ल्ल िै िन् भगवाि क् स्वक क् रप मे उपयोग केि। 17 सभ लोकक आदे कर। भाईचाेा स् प्म। भगवाि् स् भय। ेाजा क् समाि कर। 18 ह् दास सभ, सभ भय सँ अपि मातलक सभक अधीि ेह। िीक आ सौम लोक क्ँ मात ितह, फूह़ लोक क्ँ स्हो। 19 जँ पेम्श् वेक पतर तवव्कक ल्ल मिुष् य गलर कष् ट कऽ कऽ दु ःख सहै र अति रँ ई धनवादक पात अति। 20 जँ अहाँ सभ अपि दोषक काेक् ँ जखि अहाँ सभ क्ँ मारेपीट कयल जायर रँ अहाँ सभ धैय्पूव्क ओकेा पक़ि रँ कोि मतहमा? मुदा जँ अहाँ सभ िीक काज केै र िी आ ओकेा ल्ल कष भोगैर िी रँ धैय्पूव्क ओकेा पक़ै र िी रँ ई िार पेम्श् वेक ल्ल सीकाय् अति। 21 तकएक रँ अहाँ सभ एतह ल्ल िजाओल ग्ल िी, तकएक रँ मसीह स्हो हमेा सभक ल्ल कष भोतग कऽ हमेा सभक ल्ल एकटा उदाहेक िोत़ कऽ अहाँ सभ हिके कदम पे चतल जाउ। 22 ओ कोिो पाप ितह क्लक आ ि् ओके मुँह म् िल। 23 जखि हिका गारे द् ल ग्लति रखि फ्े गारे ितह द् लति। जखि ओकेा कष भ्लैक रखि ओ धमकी ितह द् लक। िल् तक धातम्क नाय केतिहाे क्ँ अपिा क्ँ सौंप द् लति। 24 ओ अपि पाप क्ँ अपि शेीे म् गाि पे उराेलति जातह सँ हम सभ पापक ल्ल मरे ग्ल िी आ धातम्कराक ल्ल जीति सकि। 25 अहाँ सभ भटकल भ़् ँ ा जकाँ िलहँ । मुदा आि अहाँ सभक आताक चेिाह आ तिशप लग घुरे ग्ल िी।

10 ज् जीवि सँ प्म केै र अति आ िीक तदि द् खय चाहै र अति, स् अपि जीह क्ँ अधलाह सँ पेह् ज केय आ अपि ठोे क्ँ कोिो धोखा ितह िजय। 11 ओ अधलाह सँ िचय आ िीक काज केय। ओ शाननक खोज केय आ ओके पािाँ लागय। 12 तकएक रँ पभुक िजरे धम् लोक सभ पे ेहै र िति आ हिके काि हिका सभक पाि्िाक पतर खुजल िति, मुदा पभुक मुँह अधलाह लोक सभक तवरद िति। 13 जँ अहाँ सभ िीक काजक अिुयायी ेहि रँ क् अति ज् अहाँ सभक हाति केर? 14 मुदा जँ अहाँ सभ धातम्कराक काेक् ँ कष उठािैर िी रँ अहाँ सभ धन िी। 15 मुदा अपि हदय म् पभु पेम्श् वे क्ँ पतवत कर। 16 िीक तवव्क ेाखि। जातह सँ ओ सभ अहाँ सभ क्ँ दु ष् ट केऽ वला िार जकाँ अधलाह िजैर अति, मुदा मसीह म् अहाँ सभक िीक गप-सपक झूठ-झूठ आेोप लगाियवला सभ क्ँ लाज भऽ जाय। 17 जँ पेम्श् वेक इच् िा अति रँ अधलाह काजक काेक् ँ अहाँ सभ िीक काजक काेक् ँ कष भोगि िीक। 18 तकएक रँ मसीह स्हो एक ि्े पापक ल्ल कष उठौलति, धम् अधम् सभक ल्ल, जातह सँ ओ हमेा सभ क्ँ पेम्श् वे लग पहँ चा सकति। 19 जातह सँ ओ ज्ल म् ेहल आर् मा सभ क्ँ पचाे कयलति। 20 ओ सभ कखिो काल आवा ितह मािैर िल, जखि तक एक ि्े िूहक समय म् पेम्श् वेक धैय् परीका केै र िल, जखि तक जहाज रैयाे कयल ग्ल िल, जातह म् पाति सँ कम, अिा् र् आठ पाकी उदाे पाति ग्ल िल। 21 ज् आकृतर िपतरस् मा स्हो हमेा सभ क्ँ यीशु मसीहक पुिरुाि दाेा अपिा सभक उदाे केै र अति (शेीेक गंदगी क्ँ दू े केि ितह, िल् तक पेम्श् वेक पतर सतदव्कक उते द् ि)। 22 ओ स् वग् म् चतल ग्ल िति आ पेम्श् वेक दतहिा कार िति। सग्दूर आ अतधकाे आ अतधकाे हिका अधीि कयल ग्ल।

अध्य 3 1 रतहिा, अहाँ सभ पती सभ, अपि पतरक अधीि ेह। जातह सँ जँ क्ओ वचिक आवा ितह मािैर अति रँ ओ सभ स्हो ति​िा वचिक स् ती सभक गप-सप सँ जीरल जा सकय। 2 जखि तक ओ सभ अहाँ क पतरवरा गप क्ँ भय सँ जु़ल द् खैर िति। 3 जके शृंगाे ओ िाहेी शृंगाे ितह हो ज् क्श गुि​ि आ सोिाक पतहेि आ परेधाि पतहेि। 4 मुदा ओ हदयक िुकायल आदमी हो, ज् िाश ितह भऽ सकैर अति, ओ िम आ शान आर् माक आभूषक हो, ज् पेम्श् वेक िजरे म् िहर कीमरी अति। 5 पुेिा समय म् पेम्श् वे पे भेोसा केऽ वला पतवत स् ती सभ स्हो एतह रेह् ँ अपि पतरक अधीि भऽ कऽ अपिा क्ँ सजिैर िलीह। 6 ज्िा साेा अबाहम क्ँ पभु कहै र आवा मािैर िलीह। 7 रतहिा, अहाँ सभ पतर सभ, हिका सभक संग वािक अिुसाे ेह, पती क्ँ कमजोे िर्ि जकाँ आदे कर आ जीविक कृपाक उतेातधकाेी िति कऽ ेह। ज् अहाँ क पाि्िा म् िाधा ितह आिय। 8 अंर म्, अहाँ सभ एक-एक तवचाेक ेह, एक-दोसे पे दया कर, भाय-ितहि जकाँ प्म कर, दयालु ेह आ तशष ेह। 9 अधलाहक िदला अधलाहक िदला म् ितह, आ ितहय् गारेगेौितल क् िदला म् गारे-गेौितल ितह तदयौक। अहाँ सभ ई जाति कऽ ज् अहाँ सभ एतह ल्ल िजाओल ग्ल िी, ज् अहाँ सभ क्ँ आशीषक उतेातधकाे भ्टर।”

अध्य 4 1 तकएक रँ मसीह हमेा सभक ल्ल शेीे म् कष भोगलति, र्िा अहाँ सभ स्हो ओतहिा सशस ेह। 2 आि ओ अपि श्ष समय मिुखक इचाक अिुसाे ितह, िल् तक पेम्श् वेक इचाक अिुसाे शेीे म् जीिैर ेहति। 3 हम सभ अपि जीविक िीरल समय सँ गैे-यहदी सभक इचा क्ँ पूेा केिाक ल्ल पया् ा भऽ सकैर अति, जखि हम सभ कामुकरा, काम-वासिा, मतदेाक अतरे् क, मसी-मजाक, भोजभार आ घृतकर मूतर्पूजा म् चलैर िलहँ । 4 ओ सभ ई िार अजीि िुझैर िति ज् अहाँ सभ हिका सभक संग ओरि् िवाल ितह दौ़ै र िी आ अहाँ सभक आपतत ितह केै र िी। 5 ज् जीतवर आ मृर् युक ि् याय केिाक ल्ल रैयाे अति, रकेा ओ तहसाि द् र। 6 एतह काेक् ँ मृर् यु सभ क्ँ स्हो सुसमाचाे पचाे कयल ग्ल िल, जातह सँ ओ सभ शेीे म् मिुष् यक अिुसाे नाय कयल जाय, मुदा आर् मा म् पेम्श् वेक अिुसाे जीतवर ेहय।

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१ पतुस

7 मुदा सभ िारक अि् र आति ग्ल अति। 8 आ सभ सँ ि्सी अहाँ सभ आपस म् पिल प्म कर, तकएक रँ प्म पापक भेमाे क्ँ झाँ तप द् र। 9 एक-दोसेक संग ति​िा कोिो आपतत क्ि् सताे कर। 10 ज्िा सभ क्ओ वेदाि भ्टल अति, र्िा पेम्श् वेक अि्क अिुगहक िीक भणाेी िति एक-दोसेक स्वा कर। 11 जँ क्ओ िजैर अति रँ पेम्श् वेक वचि जकाँ िाजर। जँ क्ओ स्वा केऽ वला रँ पेम्श् वे ज् सामि्​् य दै र िति​ि, स् केऽ, जातह सँ पेम्श् वेक मतहमा सभ िार म् यीशु मसीहक दाेा कयल जाय। आमीि। 12 तपयरम, अहाँ सभक पेीका म् ज् आतग सि पेीका अति, रातह म् कोिो अजीि िार ितह िुझ।ू 13 मुदा अहाँ सभ मसीहक कष म् सहभागी िी, रािर धरे आिन्र ेह। जखि हिके मतहमा पगट होयर रखि अहाँ सभ स्हो अ्तधक आि् सँ आिन्र होयि।” 14 जँ मसीहक िामक काेक् ँ अहाँ सभ क्ँ ति्ा कयल जायर रँ अहाँ सभ धन िी। तकएक रँ मतहमा आ पेम्श् वेक आर् मा अहाँ सभ पे तटकल अति। 15 मुदा अहाँ सभ म् सँ क्ओ ह्ाेा, चोे, दु षम् वा दोसेक काज म् वसराक रप म् कष ितह उठािय। 16 रैयो जँ क्ओ मसीही िति कष् ट कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ ितह ल्र। मुदा एतह ल्ल पेम्श् वेक मतहमा केति। 17 तकएक रँ समय आति ग्ल अति ज् पेम्श् वेक घे म् ि् याय शुर होयर, आ जँ पतहि् हमेा सभ सँ शुर होयर रँ पेम्श् वेक सुसमाचाे ितह माितिहाे सभक अि् र की होयर? 18 जँ धम् लोकक उदाे िहर कम होयर रँ अभय आ पापी करऽ द् खाओर? 19 र् ँ ज् सभ पेम्श् वेक इच् िाक अिुसाे कष भोतग ेहल अति, स् सभ अपि आर् मा क्ँ िीक काज केै र हिका लग सौंतप तदअ, ज्िा कोिो तवश् वासपूक् सृतषकरा् क्ँ। अध्य 5 1 अहाँ सभक िीच ज् पाचीि सभ िति, रकेा सभ क्ँ हम आगह केै र िी, ज् मसीहक कषक गवाही आ पगट होमय िला मतहमा म् स्हो भाग ल्तिहाे िति। 2 अहाँ सभक िीच ज् पेम्श् वेक भ़् ँ ा अति रकेा चेाउ आ ओके द् खे् ख कर, िाधरा सँ ितह, िल् तक स्चा सँ। गंदा लाभक ल्ल ितह, िल् तक रैयाे मिक ल्ल। 3 पेम्श् वेक धेोहेक मातलक ितह, िल् तक झुं्क ल्ल िमूिा ि​ि​ि। 4 जखि पमुख चेिाह पकट होयर रखि अहाँ सभ क्ँ एकटा एहि मतहमाक मुकुट भ्टर ज् फीका ितह होयर। 5 रतहिा, अहाँ सभ िोट, ज्ठक अधीि ेह। हँ , अहाँ सभ एकदोसेक अधीि ेह आ तविमराक वस पतहरे तलअ, तकएक रँ पेम्श् वे घमं्ी लोक सभक तवेोध केै र िति आ तविम लोक सभ पे कृपा केै र िति। 6 र् ँ पेम्श् वेक पेाकमी हािक िीचाँ अपिा क्ँ िम ि​िाउ, जातह सँ ओ समय पे अहाँ सभ क्ँ ऊपे उठािति।

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7 अपि सभटा तचना हिका पे ेाखू। तकएक रँ ओ अहाँ सभक तचना केै र अति। 8 सोझ ेह, सरक् ेह। तकएक रँ अहाँ सभक शतु शैराि गज्र तसंह जकाँ घुमैर-तफेै र अति, जकेा ओ ओकेा खा सकैर अति। 9 ओ सभ तवश् वास म् द़रापूव्क तवेोध कर, ई जाति कऽ ज् अहाँ सभक संसाे म् ेहतिहाे भाय सभ म् स्हो वैह कष पूेा होइर अति। 10 मुदा सभ कृपाक पेम्श् वे, ज् हमेा सभ क्ँ मसीह यीशुक दाेा अपि अिन मतहमा म् िजौलति, रके िाद अहाँ सभ क्ँ तकिु कष भोगलाक िाद, अहाँ सभ क्ँ तसद, न्े, मजिूर आ न्ेीकेक केै र िति। 11 हिके मतहमा आ पभुभ अिन काल धरे ेहय। आमीि। 12 हम अहाँ सभक ल्ल एकटा तवश् वासपूक् भाय तसलािुसक दाेा, ज्िा हमेा िुझि्, हम संक्प म् तलखि् िी, जातह म् अहाँ सभ ठा़ िी, ई पेम्श् वेक सर् य कृपा अति। 13 िािुल म् ज् मक् ्ली अति, ज् अहाँ सभक संग चुिल ग्ल अति, स् अहाँ सभ क्ँ पकाम केै र अति। आ हमे ि्टा माक्स स्हो। 14 अहाँ सभ एक-दोसे क्ँ प्मक चुमा सँ अतभवादि कर। अहाँ सभक संग शानन हो ज् मसीह यीशु म् अति। आमीि।


पत्र के दोरर पत

सदनक भोे नसह भ’ जायर आ अहाँ िभक हदय मे सदनक राेा नसह उसि जायर। 20 पसहने ई जासन कऽ जे धमरशाि् तक कोनो भसवषवाणीक कोनो सनजी अरर नसह असछ। 21 सकएक रँ ई भसवषवाणी मन्ष् यक इष् छा िँ पसहने नसह भेल छल, िल् सक पसवत आर् माक पे​ेणा िँ पेमेश् वेक पसवत लोक िभ िजैर छल।

अध्य 1 1 सिमोन पत्ि, जे यीश् मिीहक िेवक आ पेरेर छी, अहाँ िभ पेमेश् वे आ हमेा िभक उदाेकरार यीश् मिीहक धासमरकराक काेणे ँ हमेा िभक िंग अनमोल सवश् वाि पासि लेने छी। 2 पेमेश् वे आ हमेा िभक पभ् यीश्क जान िँ अहाँ िभ पे कृपा आ शान् सर िढय। 3 जेना हनके पेमेश् वेक िामर्र य हमेा िभ केँ जीवन आ पेमेश् वेक िभ सकछ् दऽ दे लसन असछ, जे हमेा िभ केँ मसहमा आ िद् ग्णक लेल िजौने छसर। 4 एसह िँ हमेा िभ केँ िहर पैघ आ अनमोल पसरजा दे ल गेल असछ, जासह िँ अहाँ िभ एसह िभक दाेा पेमेश् वेक सभावक भागीदाे िनि आ काम-वािना दाेा िंिाे मे जे भ्ाषाे असछ रासह िँ िसष गेलहँ । 5 एके असररेक िभ परेशम कर, अहाँ िभक सवश् वाि मे िद् ग्ण जोड़। आ ग्ण जान के लेल; 6 आ जानक लेल िंयम। आ िंयमक लेल धैयर; आ धैयरक लेल भकक; 7 आ पेमेश् वेक पसर भाई-िसहनक दया। आ भाईषाेा के दान के लेल। 8 जँ ई िभ िार अहाँ िभ मे असछ आ पष्ेरा असछ रँ अहाँ िभ हमेा िभक पभ् यीश् मिीहक जान मे ने िंजे ेहि आ ने सनषल ेहि। 9 म्दा जकेा एसह िभ िारक अभाव असछ िे आने असछ, द़ े धरे नसह दे कि िकैर असछ आ ओ सि​िरे गेल असछ जे ओ अपन प्ेान पाप िँ श्द भ’ गेल छल। 10 एसह लेल, भाइ लोकसन, अहाँ िभ अपन िजाओल गेल आ ष्नल गेल िार केँ सनशय केिाक लेल पयाि कर। 11 एसह रेहे ँ अहाँ िभक लेल हमेा िभक पभ् आ उदाेकरार यीश् मिीहक अनन ेाज् य मे पवेशक पष्े िेवा कयल जायर। 12 रे ँ हम अहाँ िभ केँ ई िार िभ केँ िसदिन मोन पाडिा मे कोनो कोराही नसह केि, यदसप अहाँ िभ एसह िार िभ केँ जनैर छी आ वररमान िर् य मे दढ भऽ गेल छी। 13 हमेा ि्झने ई उसषर असछ जे जािर हम एसह रम़ मे ेहि, अहाँ िभ केँ मोन पासड अहाँ िभ केँ भडकाि। “ 15 हम ई पयाि केि जे हमे मृत्क िाद अहाँ िभ एसह िार िभ केँ िसदिन सेण मे ेाकि िकि। 16 हम िभ जिन अहाँ िभ केँ अपन पभ् यीश् मिीहक िामर्र य आ अयिाक िार अहाँ िभ केँ जनौने ेही रिन हम िभ ध़ररराप़वरक गढल दं रकरा िभक पालन नसह केलहँ । 17 सकएक रँ ओ सपरा पेमेश् वेक सदि िँ आदे आ मसहमा पासि गेलाह, जिन हनका लग एहन आवाज आयल जे, “ई हमे सपय प्त छसर, सजनका पे हम पिर छी।” 18 जिन हम िभ हनका िंग पसवत पहाड पे छलहँ रिन ि् वगर िँ ई आवाज ि्नलहँ । 19 हमेा िभ लग भसवषवाणीक एकटा आओे सनसशर वषन िेहो असछ। अहाँ िभ नीक काज केै र छी जे अहाँ िभ िावधान ेहि, जेना अनाे जगह पे षमकैर इजोर पे, जािर धरे

अध्य 2 1 म्दा लोक िभक िीष झ़ि पवक् रा िभ िेहो छलाह, जेना अहाँ िभक िीष मे झ़िा पवक् रा िभ िेहो ेहराह, जे ग्प रप िँ दोषी पािण आसन दे राह, जे पभ् केँ कीसन लेसनहाे पभ् केँ असीकाे कऽ कऽ अपना पे शीघ सवनाश आसन दे राह। 2 िहरो लोक ओके सवनाशकाेी िाट पे षलर। जकेा काेणे ँ ितक िाट पे अधलाह िार कयल जायर। 3 ओ िभ लोभक काेणे ँ अहाँ िभक िंग धोिाधडी िजौराह। 4 जँ पेमेश् वे पाप केऽ वला ि् वगरद़र िभ केँ नसह छोसड दे लसरन, िल् सक ओकेा िभ केँ नेक मे फेसक दे लसरन आ ओकेा िभ केँ अन् हाे मे जंजीे मे िाकन दे लसरन, जासह िँ ओ िभ नायक लेल ि्ेस्र ेहसर। 5 ओ प्ेान िंिाे केँ नसह िखलसन, िल् सक धमरक पषाेक आिम प्रष ऩह केँ िषा लेलसन आ अभक लोकक िंिाे पे जलपलय अनलसन। 6 िदोम आ अमोेा नगे िभ केँ ेाि मे िदसल कऽ ओकेा िभ केँ उिासड कऽ दोषी िहेाओल गेल आ ओकेा िाद मे जे िभ अभककप़णर जीवन मे ेहय रासह लेल एकटा उदाहेण िसन गेल। 7 ओ द् ष् ट लोकक गंदा-गंदगी िँ त् धम् ल़र केँ िषा लेलसन। 8 (सकएक रँ ओ धमार ा​ा जे हनका िभक िीष ेहै र छल, दे कि​ि्सन कऽ अपन धमार ा​ा केँ सदन-पसरसदन हनका िभक गैेकाऩनी काज िँ पे​े शान केै र छल।) 9 पेमेश् वे ई जनैर छसर जे कोना पेमेश् वेक भकक केयवला िभ केँ पेी्ा िँ म्क कयल जा िकैर असछ आ अधम् केँ दणक सदन धरे ि्ेस्र ेाकि िकैर असछ। 10 म्दा िाि कऽ ओ िभ जे अश्दराक वािना मे शेीेक अन्िेण केै र असछ आ शािन केँ सरेसाे केै र असछ। असभमानी छसर, सार् छसर, मयार दाक ि्ेाई केिा मे डेै र नसह छसर । 11 जिन सक ि् वगरद़र िभ जे िामर्र य आ िामर्र य मे िेिी छसर, पभ्क िम् हनका िभ पे कोनो रेहक आेोप नसह लगािैर छसर। 12 म्दा ई िभ पाकृसरक पश्-प्ी जकाँ पकसड कऽ न् केिाक लेल िनाओल गेल असछ, जे िार ओकेा िभ केँ नसह ि्झल छै क, रकेा िभक आपस् केै र असछ। आ अपन भ्ाषाे मे िवररा न् भऽ जायर। 13 ओ अधमरक फल पाओर, जेना सदन मे दं गा केि नीक ि्झैर असछ। ओ िभ दाग आ दाग असछ, जिन ओ िभ अहाँ िभक िंग भोज केै र असछ, अपन छल-पपंष िँ अपना केँ िेलाइर असछ। 14 वसभषाे िँ भेल आँ कि असछ आ पाप िँ नसह रसक िकैर असछ। अक्े आा​ा के िहकािै वाला: एकटा हदय जेकेा ओ ि​ि लोभी ववहाे के िार पयोग केने छै र। शासपर िचा : १. 15 ओ िभ िही िाट छोसड कऽ भटकल असछ आ िोिोेक प्त सिलामक िाट पे षलैर असछ जे अधमरक मजद़ ेी िँ पेम केै र छल।

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पत्ि के दोिे पत

16 म्दा ओके अधमरक काेणे ँ ओकेा डाँ टल गेलैक। 17 ई िभ पासन ेसहर इनाे असछ, मेघ असछ जे आं धी-ऱफान िँ लऽ जाइर असछ। सजनका लेल अनाेक ध्ंध िदा-िदा लेल ि्ेस्र असछ। 18 ओ िभ जिन ओ िभ वररक िड-िडका ि़जन वाला िार िभ िजैर छसर रँ ओ िभ शेीेक वािना आ िहर िेवक़फी िँ लोसभर केै र छसर जे ओ िभ श्द छल जे गलर ेहसनहाे िभ िँ िषल छल। 19 जिन सक ओ िभ ओकेा िभ केँ सरंतराक वषन दै र असछ, म्दा ओ िभ सयं भ्राक िेवक असछ। 20 जँ पभ् आ उदाेकरार यीश् मिीहक जानक काेणे ँ िंिाेक पद़ षण िँ िसष गेलाक िाद फे​े ओसह मे ओझेा गेल आ सवजयी भऽ गेल रऽ िादक अंर हनका िभक लेल श्र िँ िेिी िेाि असछ। 21 सकएक रँ ई नीक ेहै र जे ओ िभ धासमरकराक िाट नसह जसनरसर, जिन सक ओ िभ ओकेा िभ केँ दे ल गेल पसवत आजा िँ म्सड कऽ आसि गेलाह। 22 म्दा हनका िभक िंग िर् य फकडाक अन्िाे भेलसन जे , “क्क्े फे​े अपन उली सदि घ्सम गेल असछ। आ जे िोआ धोआ गेल छल िे दलदल मे लहलहाइर छल। अध्य 3 1 सपय समत लोकसन, हम आि अहाँ िभ केँ ई दोिे पत सलकि ेहल छी। द् ऩ मे हम अहाँ िभक श्द मोन केँ सेणक रप मे उ्ेसजर केै र छी। 2 जासह िँ अहाँ िभ पसवत पवक् रा िभ दाेा पसहने जे िार कहल गेल छल आ हमेा िभ पभ् आ उदाेकरार क पेरेर िभक आजा पे मोन ेाि​ि। 3 हम िभ पसहने ई जासन कऽ जे अंसरम िमय मे उपहाि केयवला लोक िभ आओर, जे अपन इचाक अन्िेण केर। 4 ओ प्छलसरन, “ओके अयिाक पसरजा करय असछ?” सकएक रँ जसहयािँ सपरा-सपरा िभ ि्सर गेलाह रँ िृस्क पाेािँ िभ सकछ् ओसहना षलैर असछ। 5 ओ िभ एसह िार िँ अनसभज असछ जे पेमेश् वेक वषनक काेणे ँ पसहने आकाश आ पृर् वी पासन मे आ पासन मे िाढ छल। 6 रसहयाक िंिाे पासन िँ उमसड कऽ न् भऽ गेल। 7 म्दा एिन जे आकाश आ पृर् वी असछ, रकेा ओसह वषन दाेा आसग मे ेािल गेल असछ आ अभक मन्ष् य िभक न् याय आ सवनाशक सदन मे आसग मे ेािल गेल असछ। 8 म्दा, सपयरम, एसह एक िार िँ अनसभज नसह ेह जे पभ्क लेल एक सदन हजाे वषर आ हजाे वषर एक सदन जकाँ होइर छै क। 9 पभ् अपन पसरजाक सवषय मे ढील नसह छसर, जेना सकछ् लोक सशसरलरा ि्झैर छसर। म्दा हमेा िभक पसर धैयर ेिैर असछ, ई नसह षाहै र असछ जे ककेो नाश भ’ जाय, िल् सक िभ पशाराप केिाक लेल आसि जाय। 10 म्दा पभ्क सदन ेासर मे षोे जकाँ आसि जायर। जासह मे आकाश िहर हला िँ ग्जेर, आ रत िभ पषंड राप िँ सपघसल जायर, पृथी आ ओसह मे जे काज असछ िे िेहो जरे जायर। 11 ई िभ िार भंग भऽ जायर, रे ँ अहाँ िभ केँ पसवत आषेण आ पेमेश् वेक भकक मे केहन वकक िनिाक षाही। “

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13 रैयो हम िभ हनके पसरजाक अन्िाे नव आकाश आ नव पृर् वीक परी्ा केै र छी, जासह मे धासमरकरा सनवाि केर। 14 रे ँ सपयजन लोकसन, अहाँ िभ एसह रेहक िारक परी्ा मे लागल ेह, जासह िँ अहाँ िभ हनका िँ शाकन मे, सनद्ष आ सनद्ष पासि जायि। 15 आ सहिाि कर जे हमेा िभक पभ्क धैयर उदाे असछ। जेना हमेा िभक सपय भाय पौल्ि िेहो हनका दे ल गेल ि्कदक अन्िाे अहाँ िभ केँ सलिने छसर। 16 जेना हनके िभ पत मे एसह िार िभक सवषय मे िजैर छलाह। जासह मे सकछ् िार ि्झि कसिन असछ, जकेा असशस्र आ अक्े लोक िभ आन शासक िमान क्शी केै र असछ, जासह िँ अपन सवनाश भ' जाइर असछ। 17 एसह लेल, सपयजन लोकसन, अहाँ िभ ई िभ िार पसहने जनैर छी, रे ँ िावधान ेह जे अहाँ िभ िेहो द् ष् ट लोकक भ्ाषाे िँ द़ े भऽ कऽ अपन दढरा िँ नसह िसि पडि। 18 म्दा अपना िभक पभ् आ उदाेकरार यीश् मिीहक जान मे अन्गह मे िढ़। हनके मसहमा एिन आ अनन काल धरे हो। आमीन।


यूहन् के पहहल पत अध्य 1 1 जे शुर सँ छल, जे हम सभ सुनलहँ , जे हम सभ अपन आँ खि सँ दे िलहँ , जे हम सभ जीवनक वचन केँ दे िलहँ आ अपन हाथ समाहलहँ ह 2 (ककएक तँ जीवन प्र भेल छल आ हम सभ ओकहा दे िलहँ आ ्वाही दै त छी आ अहाँ सभ केँ ओ अनन जीवन, जे कपताक सं् छल आ हमहा सभक समक प्र भेल छल, से अहाँ सभ केँ दे िा हहल छीह) 3 हम सभ जे दे िलहँ आ सुनलहँ से अहाँ सभ केँ बता हहल छी, जाकह सँ अहाँ सभ सेहो हमहा सभक सं्कत हाखि सकबह 4 हम सभ ई सभ बात अहाँ सभ केँ कलखि हहल छी जाकह सँ अहाँ सभक आनन पूर् होह 5 तिन हम सभ हनका कवषय मे सुनने छी आ अहाँ सभ केँ ई संदेश दै त छी जे पहमेश् वह इजोत छकथ आ हनका मे कोनो अनाह नकह छकथह 6 जँ हम सभ कहै त छी जे हनका सं् सं्कत अकछ आ अनाह मे चलैत छी तँ हम सभ झूठ बाजैत छी आ सत केँ नकह कहै त छीह 7 मुदा जँ हम सभ इजोत मे चलैत छी, जेना ओ इजोत मे हहै त छकथ तकहना हमहा सभ केँ एक-दोसहक सं्कत अकछ आ हनकह पुत यीशु मसीहक िून हमहा सभ केँ सभ पाप सँ शुद कहै त अकछह 8 जँ हम सभ कहै त छी जे हमहा सभ ल् कोनो पाप नकह अकछ तँ अपना केँ धोिा दै त छी आ सत् य हमहा सभ मे नकह अकछह 9 जँ हम सभ अपन पाप सीकाह कहै त छी तँ ओ कवशासी आ धम् छकथ जे हमहा सभक पाप कमा कहकथ आ सभ अधम् सँ शुद कहकथह 10 जँ हम सभ कहै त छी जे हम सभ पाप नकह केलहँ तँ ओकहा झूठ बाजऽ बला बना दै त छी आ ओकह वचन हमहा सभ मे नकह अकछह अध्य 2 1 हमह बचा सभ, हम ई सभ बात अहाँ सभ केँ कलखि हहल छी जाकह सँ अहाँ सभ पाप नकह करह जँ केओ पाप कहै त अकछ तँ हमहा सभक कपताक सं् एकरा वकालत अकछ, जे यीशु मसीह धम् छकथह 2 ओ हमहा सभक पापक पायकयत छकथह 3 जँ हम सभ हनकह आजा सभक पालन कहै त छी तँ एकह तहहे ँ हम सभ जनैत छी जे हम सभ हनका कचनै त छीह 4 जे ई कहै त अकछ जे , “हम ओकहा कचनै त छी, आ ओकह आजाक पालन नकह कहै त अकछ, ओ झूठ बाजैत अकछ आ सत् य ओकहा मे नकह अकछह” 5 मुदा जे केओ अपन वचनक पालन कहै त अकछ, से हनका मे पहमेश् वहक पेम कसद होइत अकछह 6 जे कहै त अकछ जे हम अपना मे करकैत छी, ओकहा अपना केँ ओकहना चलबाक चाही जेना ओ चलैत छलह 7 भाइ लोककन, हम अहाँ सभ केँ कोनो नव आजा नकह कलिैत छी, बल् कक एकरा पुहान आजा जे अहाँ सभक शुर आत सँ छलह पुहान आजा ओ वचन अकछ जे अहाँ सभ शुर सँ सुनने छीह

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8 फेह हम अहाँ सभ केँ एकरा नव आजा कलिैत छी जे हनका आ अहाँ सभ मे सत् य अकछह 9 जे कहै छ जे हम इजोत मे छी आ अपन भाय सँ घृरा कहै त अकछ, से एिन धरह अनाह मे अकछह 10 जे अपन भाय सँ पेम कहै त अकछ, से इजोत मे हहै त अकछ, आ ओकहा मे कोनो तहहक ठोकह नकह पडै त छै कह 11 मुदा जे अपन भाय सँ घृरा कहै त अकछ से अनाह मे अकछ आ अनाह मे चलैत अकछ, मुदा ओ कतय जा हहल अकछ से नकह जनैत अकछ, ककएक तऽ ओ अनाह ओकह आँ खि आनह कऽ दे ने अकछह 12 हे बचा सभ, हम अहाँ सभ केँ एकह लेल कलिैत छी जे हनकह नामक काहरे ँ अहाँ सभक पाप कमा कयल ्ेल अकछह 13 हे कपता-कपता, हम अहाँ सभ केँ एकह लेल कलखि हहल छी जे अहाँ सभ शुर सँ कचन्‍हैत छीह हे युवक सभ, हम अहाँ सभ केँ एकह लेल कलिैत छी जे अहाँ सभ दु ष पह कवजय पाकब ्ेलहँ ह हे बचा सभ, हम अहाँ सभ केँ एकह लेल कलिैत छी जे अहाँ सभ कपता केँ कचनने छीह 14 हे कपता-कपता सभ, हम अहाँ सभ केँ एकह लेल कलिने छी जे अहाँ सभ शुर सँ कचन्‍त छीह हे युवक सभ, हम अहाँ सभ केँ एकह लेल कलिने छी जे अहाँ सभ बलवान छी आ पहमेश् वहक वचन अहाँ सभ मे करकल अकछ आ अहाँ सभ दु ष पह कवजय पाकब ्ेलहँ ह 15 संसाह सँ पेम नकह कर आ ने संसाह मे जे ककछु अकछह जँ केओ संसाह सँ पेम कहै त अकछ तँ कपताक पेम ओकहा मे नकह अकछह 16 ककएक तँ संसाह मे जे ककछु अकछ, शहीहक वासना, आँ खिक वासना आ जीवनक घमंड, कपताक नकह, बल् कक संसाहक अकछह 17 संसाह आ ओकह वासना समाप भऽ जाइत अकछ, मुदा जे पहमेश् वहक इच् छा कहै त अकछ से अनन् त काल धरह हहै त अकछह 18 बचा सभ, ई अंकतम समय अकछह जइसँ हमहा सभकेँ बुझल अकछ जे ई अंकतम बेह अकछह 19 ओ सभ हमहा सभ सँ बाहह कनककल ्ेल, मुदा ओ सभ हमहा सभक बीच सँ नकह छलह जँ ओ सभ हमहा सभ मे सँ हकहतकथ तँ कनसंदेह हमहा सभक सं् हकहतकथह 20 मुदा अहाँ सभ केँ पकवत पहमेश् वहक अकभषेक अकछ आ अहाँ सभ सभ ककछु जनैत छीह 21 हम अहाँ सभ केँ एकह लेल नकह कलिने छी जे अहाँ सभ सत् य केँ नकह जनैत छी, बल् कक अहाँ सभ एकहा जनैत छी आ कोनो झूठ सत सँ नकह कनकलैत अकछह 22 के झूठ बाजैत अकछ, कसवाय ओ के जे ई बात केँ नकाहै त अकछ जे यीशु मसीह छकथ? ओ मसीह-कवहोधी छकथ, जे कपता आ पुत केँ नकाहै त छकथह 23 जे केओ पुत केँ असीकाह कहै त अकछ, ओकह कपता नकह अकछह 24 ते ँ जे बात अहाँ सभ शुर सँ सुनने छी, से अहाँ सभ मे हहयह जँ अहाँ सभ जे बात शुर सँ सुनने छी से अहाँ सभ मे हहत तँ अहाँ सभ सेहो पुत आ कपता मे हहबह 25 ओ हमहा सभ केँ जे पकतजा केने छकथ, से अनन् त जीवन अकछह 26 हम ई सभ बात अहाँ सभ केँ बहकाबऽ वला सभक कवषय मे कलिने छीह 27 मुदा जे अकभषेक अहाँ सभ केँ हनका सँ भेरल अकछ से अहाँ सभ मे हहै त अकछ, आ अहाँ सभ केँ केओ कसिाबय के जरहत नकह अकछ, बल् कक वैह अकभषेक अहाँ सभ केँ सभ बातक बाहे मे


यूहना के पकहल पत

कसिाबैत अकछ, आ सत् य अकछ आ कोनो झूठ नकह अकछ आ जेना ई कसिाओल ्ेल अकछ अहाँ सभ हनका मे हहबह” 28 आब हे बचा सभ, हनका मे हहह जाकह सँ जिन ओ पकर हे ताह तिन हमहा सभ केँ भहोसा भ’ जायत, आ हनकह अयला पह हनका सामने लाज नकह होयतह 29 जँ अहाँ सभ जनैत छी जे ओ धाकम्क छकथ तँ अहाँ सभ जनैत छी जे जे ककयो धाकम्कता कहै त अकछ से हनका सँ जनल अकछह

20 जँ हमहा सभक हदय हमहा सभ केँ दोषी ठहहबैत अकछ तँ पहमेश् वह हमहा सभक हदय सँ पैघ छकथ आ सभ ककछु जनैत छकथह 21 कपयतम, जँ हमहा सभक हदय हमहा सभ केँ दोषी नकह ठहहाबैत अकछ, तिन हमहा सभ केँ पहमेश् वहक पकत भहोसा अकछह 22 हम सभ जे ककछु माँ ्ैत छी से हनका सँ भेरैत अकछ, ककएक तँ हम सभ हनकह आजा सभक पालन कहै त छी आ हनकह नजरह मे जे ककछु नीक ल्ैत अकछ से कहै त छीह 23 हनकह आजा ई अकछ जे हम सभ हनकह पुत यीशु मसीहक नाम पह कवश् वास कही आ एक-दोसह सँ पेम कही जेना ओ हमहा सभ केँ आजा दे ने छलाहह 24 जे हनकह आजाक पालन कहै त अकछ से हनका मे हहै त अकछ आ ओ हनका मे हहै त अकछह हम सभ एकह सँ जनैत छी जे ओ हमहा सभ मे जे आत् मा दे ने छकथ, ताकह दाहा हमहा सभ मे हहै त छकथह

अध्य 3 1 दे िू, कपता हमहा सभ केँ केहन पेम कयलकन जाकह सँ हम सभ पहमेश् वहक पुत कहल जाइह 2 कपयजन, आब हम सभ पहमेश् वहक पुत छी, मुदा एिन धरह ई नकह दे िा हहल अकछ जे हम सभ केहन हहबह काहर, हम सभ ओकहा ओकहना दे िबह 3 जे केओ ओकहा पह ई आशा हिैत अकछ, ओ अपना केँ शुद कहै त अकछ, जेना ओ शुद अकछह 4 जे केओ पाप कहै त अकछ, से धम्-कनयमक उलंघन सेहो कहै त अकछ, ककएक तँ पाप धम्-कनयमक उलंघन अकछह 5 अहाँ सभ जनैत छी जे ओ हमहा सभक पाप केँ दू ह कहबाक लेल प्र भेलाहह आ हनका मे कोनो पाप नकह अकछह 6 जे केओ हनका मे हहै त अकछ, ओ पाप नकह कहै त अकछ, जे ककयो पाप कहै त अकछ, से ओकहा नकह दे िलक आ ने ओकहा कचनलकह 7 बचा सभ, अहाँ सभ केँ केओ धोिा नकह कदयौकह 8 जे पाप कहै त अकछ से शैतानक अकछह ककएक तँ शैतान शुरए सँ पाप कहै त अकछह एकह लेल पहमेश् वहक पुत प्र भेलाह जाकह सँ ओ शैतानक काज सभ केँ नष कऽ सककथह 9 जे केओ पहमेश् वह सँ जनमल अकछ, से पाप नकह कहै त अकछह ककएक तँ ओकह संतान ओकहा मे हहै त छै कह 10 एकह मे पहमेश् वहक सन् तान आ शैतानक सन् तान सभ प्र होइत अकछह 11 अहाँ सभ शुर सँ ई संदेश सुनलहँ जे हम सभ एक-दोसह सँ पेम कहीह 12 कैन जकाँ नकह, जे ओकह दु षक मे सँ छलाह आ अपन भाय केँ मारह दे लकनह आ ओकहा ककएक मारह दे लकैक? ककएक तँ ओकह अपन काज अधलाह छल आ भाइक धम्ह 13 हे भाइ लोककन, जँ संसाह अहाँ सभ सँ घृरा कहै त अकछ तँ आयय् नकह करह 14 हम सभ जनैत छी जे हम सभ मृत् यु सँ जीवन कदस चकल ्ेलहँ , काहर हम सभ भाइ सभ सँ पेम कहै त छीह जे अपन भाय सँ पेम नकह कहै त अकछ, से मृतु मे हहै त अकछह 15 जे केओ अपन भाय सँ घृरा कहै त अकछ, ओ हताहा अकछह 16 एकह सँ पहमेश् वहक पेम केँ बुझना जाइत अकछ, ककएक तँ ओ हमहा सभक लेल अपन पार दऽ दे लकनह 17 मुदा जकहा एकह संसाहक भलाई अकछ आ अपन भाय केँ जरहत दे खि कऽ ओकहा सँ दयाक आं त बंद कऽ दै त अकछ, तिन पहमेश् वहक पेम ओकहा मे कोना करकल अकछ? 18 हमह बचा सभ, हम सभ बात मे आ ने भाषा मे पेम नकह कहीह मुदा कम् आ सत मेह 19 एकह सँ हम सभ जनैत छी जे हम सभ सत् य मे छी आ हनका समक अपन हदय केँ आश् कहबह

अध्य 4 1 कपयतम, सभ आत् मा पह कवश् वास नकह कर, बल् कक आत् मा पहमेश् वहक अकछ कक नकह, ताकह पह जाँ च करह 2 अहाँ सभ पहमेश् वहक आत् मा केँ एकह तहहे ँ जनैत छीह 3 जे आत् मा ई नकह मानैत अकछ जे यीशु मसीह शहीह मे आकब ्ेल छकथ, से पहमेश् वहक नकह अकछह आ एिनह पकहने सँ संसाह मे अकछह 4 हे बचा सभ, अहाँ सभ पहमेश् वहक छी आ ओकहा सभ पह कवजय पाकब ्ेलहँ ह 5 ओ सभ संसाहक अकछह 6 हम सभ पहमेश् वहक छीह जे पहमेश् वहक नकह अकछ से हमहा सभक बात नकह सुनैत अकछह एकह सँ हम सभ सतक आत् मा केँ जनैत छी, आ तुकरक आत् मा केँह 7 कपयतम, हम सभ एक-दोसह सँ पेम कही, ककएक तँ पेम पहमेश् वहक अकछह जे पेम कहै त अकछ से पहमेश् वह सँ जनमल अकछ आ पहमेश् वह केँ जनैत अकछह 8 जे पेम नकह कहै त अकछ से पहमेश् वह केँ नकह जनैत अकछह ककएक तँ पहमेश् वह पेम छकथह 9 एकह तहहे ँ पहमेश् वहक पेम हमहा सभक पकत प्र भेलकन, ककएक तँ पहमेश् वह अपन एकलौता पुत केँ संसाह मे पठौलकन जाकह सँ हम सभ हनका दाहा जीकब सकबह 10 एकह मे पेम अकछ जे हम सभ पहमेश् वह सँ पेम केलहँ, बल् कक ओ हमहा सभ सँ पेम कयलकन आ अपन पुत केँ हमहा सभक पापक पायकयत कहबाक लेल पठौलकनह 11 कपयतम, जँ पहमेश् वह हमहा सभ सँ एतेक पेम कयलकन तँ हमहा सभ केँ सेहो एक-दोसह सँ पेम कहबाक चाहीह 12 पहमेश्‍वह केँ केओ ककहयो नकह दे िने अकछह जँ हम सभ एक दोसहा सँ पेम कहै त छी तँ पहमेश् वह हमहा सभ मे हहै त छकथ आ हनकह पेम हमहा सभ मे कसद भऽ जाइत अकछह 13 एकह सँ हम सभ जनैत छी जे हम सभ हनका मे हहै त छी आ ओ हमहा सभ मे हहै त छी, ककएक तँ ओ हमहा सभ केँ अपन आत् मा दे लकनह 14 हम सभ दे िलहँ आ ्वाही दै त छी जे कपता पुत केँ संसाहक उदाहकता् बनबाक लेल पठौलकनह

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यूहना के पकहल पत

15 जे केओ ई बात सीकाह कहत जे यीशु पहमेश् वहक पुत छकथ, पहमेश् वह हनका मे हहै त छकथ आ ओ पहमेश् वह मे हहै त छकथह 16 हम सभ पहमेश् वहक पेम केँ जाकन कऽ कवश् वास कयलहँ ह भ्वान् पेम छकथ; जे पेम मे हहै त अकछ से पहमेश् वह मे हहै त अकछ आ पहमेश् वह हनका मे हहै त अकछह 17 एकह तहहे ँ हमहा सभक पेम कसद भऽ ्ेल अकछ जाकह सँ नायक कदन हमहा सभ केँ साहस भऽ सकबह 18 पेम मे कोनो भय नकह होइत छै कह मुदा पूर् पेम भय केँ बाहह कनकालैत अकछ, काहर भय सँ यातना होइत छै कह जे डहै त अकछ से पेम मे कसद नकह होइत अकछह 19 हम सभ हनका सँ पेम कहै त छी, ककएक तँ ओ पकहने हमहा सभ सँ पेम कयलकनह 20 जँ केओ कहै त अकछ जे , “हम पहमेश् वह सँ पेम कहै त छी, आ अपन भाय सँ घृरा कहै त अकछ, तँ ओ झूठ बाजऽ वला अकछह 21 हमहा सभ केँ हनका सँ ई आजा भेरैत अकछ जे , जे पहमेश् वह सँ पेम कहै त अकछ, से अपन भाय केँ सेहो पेम कहै त अकछह अध्य 5 1 जे केओ कवशास कहै त अकछ जे यीशु मसीह छकथ, से पहमेश् वहक जन भेल अकछह 2 जिन हम सभ पहमेश् वह सँ पेम कहै त छी आ हनकह आजा सभक पालन कहै त छी तिन हम सभ एकह बात सँ जनैत छी जे हम सभ पहमेश् वहक सन् तान सभ सँ पेम कहै त छीह 3 पहमेश् वहक पेम ई अकछ जे हम सभ हनकह आजा सभक पालन कहीह 4 ककएक तँ पहमेश् वहक जे ककछु जनमल अकछ से संसाह पह कवजय पाप कहै त अकछह 5 के अकछ जे संसाह पह कवजय पाप कहै त अकछ, मुदा जे ई कवशास कहै त अकछ जे यीशु पहमेश् वहक पुत छकथ? 6 ई यीशु मसीह छकथ जे पाकन आ िून सँ आयल छकथह मात पाकन सँ नकह, पाकन आ िून सँह आत् मा ्वाही दै त अकछ, ककएक तँ आत् मा सत् य अकछह 7 स् व्​् मे तीन ्ोरे ्वाही दै त छकथ, कपता, वचन आ पकवत आत् माह 8 पृथ् वी पह तीन ्ोरे ्वाही दै त छकथ, आत् मा, पाकन आ िूनह 9 जँ हम सभ मनुष् य सभक ्वाही गहर कहै त छी तँ पहमेश् वहक ्वाही बेसी अकछ, ककएक तँ ई पहमेश् वहक ्वाही अकछ जे ओ अपन पुतक ्वाही दे ने छकथह 10 जे पहमेश् वहक पुत पह कवश् वास कहै त अकछ, तकहा अपना मे ्वाही अकछह ककएक तँ पहमेश् वह अपन पुतक कवषय मे जे ्वाही दे ने छलाह, ताकह पह ओ कवश् वास नकह कहै त छकथह 11 ई ्वाही अकछ जे पहमेश् वह हमहा सभ केँ अनन जीवन दे ने छकथ आ ई जीवन हनकह पुत मे अकछह 12 जकहा पुत अकछ ओकहा जीवन भेरैत छै कह जकहा पहमेश् वहक पुत नकह अकछ ओकहा जीवन नकह छै कह 13 हम अहाँ सभ केँ ई बात कलिने छी जे पहमेश् वहक पुतक नाम पह कवश् वास कहै त छीह जाकह सँ अहाँ सभ ई जाकन सकब जे अहाँ सभ केँ अनन जीवन अकछ आ अहाँ सभ पहमेश् वहक पुतक नाम पह कवश् वास कहीह 14 हमहा सभ केँ हनका पह ई भहोसा अकछ जे जँ हम सभ हनकह इचाक अनुसाह कोनो बात माँ ्ैत छी तँ ओ हमहा सभक बात सुनैत छकथह

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15 जँ हम सभ जनैत छी जे ओ हमहा सभक बात सुनैत छकथ आ हम सभ जे ककछु माँ ्ैत छी तँ हम सभ जनैत छी जे हमहा सभ ल् ओ सभ कनवेदन अकछ जे हम सभ हनका सँ चाहै त छलहँ ह 16 जँ केओ अपन भाय केँ एहन पाप पाप कहत जे मृतुक लेल नकह हो, तँ ओ माँ ्त आ जे मृतुक पाप नकह कहै त अकछ, तकहा लेल ओकहा जीवन दऽ दे तैकह मृतुक पाप अकछ, हम ई नकह कहै त छी जे ओ एकहा लेल पाथ्ना कहतह 17 सभ अधम् पाप अकछह 18 हम सभ जनैत छी जे केओ पहमेश् वह सँ जनमल अकछ, ओ पाप नकह कहै त अकछह मुदा जे पहमेश् वहक जन भेल अकछ से अपना केँ समाहै त अकछ, आ ओ दु ष ओकहा नकह छूबैत अकछह 19 हम सभ जनैत छी जे हम सभ पहमेश् वहक छी आ सम् संसाह दु ष् रता मे पडल अकछह 20 हम सभ जनैत छी जे पहमेश् वहक पुत आकब ्ेल छकथ आ हमहा सभ केँ ई बात बुकझ ्ेलाह जे हम सभ सत् य केँ कचन सकब आ जे सत् य छकथ, हनकह पुत यीशु मसीह मे छीह ई सत् य पहमेश् वह छकथ, आ अनन् त जीवनह 21 छोर-छोर बचा सभ, मूकत् सभ सँ अपना केँ बचाउह आमीनह


दोसर यूहन् अध्य 1 1 ज् य चु नल महिला आ ओकर सनान सभ क्ँ, हिनका सँ िम सत् य म् प्म करै त छी। आ िमरा मात नहि, बल् हक सभ सत् य क्ँ िनहनिार सभ स् िो। 2 सत् यक ल्ल ि् िमरा सभ म् रिै त अहछ आ अनन काल धरर िमरा सभक सं ग रित। 3 अिाँ सभक सं ग कृपा, दया आ शानन, हपता परम् श् वर आ हपताक पुत पभु यीशु मसीिक दारा सत् य आ प्म म् भ् टय। 4 िम बहत आनन्त भ् लहँ ि् िम अिाँ क बचा सभ क्ँ सत् य म् चलैत द् खलहँ , ि्ना िमरा सभ क्ँ हपताक आजा भ् टल अहछ। 5 आब िम अिाँ सँ हवनती करै त छी ि् िम अिाँ क्ँ कोनो नव आजा हलखन् िोइ, बल् हक ि् िमरा सभ लग शुर सँ छल, ि् िम सभ एक-दोसर सँ प्म कर। 6 प्म अहछ ि् िम सभ हनकर आजाक अनु सार चलब। ई आजा अहछ ि्, ि्ना अिाँ सभ शुर सँ सु नन् छी, ओहि म् चलब।” 7 हकएक तँ बहतो धोख् बाि सं सार म् आहब ग्ल अहछ, ि् ई नहि सीकार करै त अहछ ि् यीशु मसीि शरीर म् आहब ग्ल छहि। ई धोखा द् बय वाला आ मसीि हवरोधी अहछ। 8 अिाँ सभ अपना क्ँ द् खब ि् िम सभ ि् काि क्न् छी स् नहि गमाबी, बल् हक िमरा सभ क्ँ पूरा इनाम भ् टय। 9 ि् क्ओ मसीिक उपद् श म् नहि रिै त अहछ, तकरा परम् श् वर नहि अहछ। ि् मसीिक हशका म् हटकैत अहछ, ओकरा हपता आ पुत दु नू अहछ। 10 िँ क्ओ अिाँ सभक लग आहब कऽ ई हशका नहि अनै त अहछ तँ ओकरा अपन घर म् नहि गिर कर आ न् परम् श् वर ओकरा िली नहि आजा हदयौक। 11 हकएक तँ ि् क्ओ परम् श् वर क्ँ शीघ किै त अहछ, स् ओकर दु ष् ट कम् म् सिभागी िोइत अहछ। 12 अिाँ सभ क्ँ बहत रास बात हलखबाक ल्ल िम कागि आ सािी सँ नहि हलखब। 13 अिाँ क चु नल बहिनक सनान सभ अिाँ क्ँ पराम करै त अहछ। आमीन। तेसर जॉन अध्य 1 1 ज् य ओ हपय गायस क्ँ, हिनका सँ िम सत् य म् प्म करै त छी। 2 हपयतम, िम सभ सँ ब्सी चािै त छी ि् ि्ना अिाँ क पार समृ द िोइत अहछ, तहिना अिाँ स् िो समृ नद आ स् रह। 3 िम िखन भाय सभ आहब कऽ अिाँ म् ि् सत् य अहछ ताहि पर गवािी द् लहन, तहिना अिाँ सभ सत् य म् चलैत छी। 4 िमरा एहि सँ पैघ खु शी नहि अहछ ि् ई सु हन कऽ ि् िमर बचा सभ सत् य म् चलैत अहछ। 5 हपयतम, अिाँ ि् हकछु भाइ सभ आ परद् शी सभक सं ग करै त छी स् हवशासपूव्क करै त छी। 6 ओ सभ मर् डलीक समक अिाँ क प्मक गवािी दै त अहछ। 7 हकएक तँ हनकर नामक कारर् ँ ओ सभ गैर-यहदी सभ म् सँ हकछु नहि लऽ कऽ हनकलल। 8 त् ँ िमरा सभ क्ँ एिन लोक क्ँ गिर करबाक चािी िाहि सँ िम सभ सत् य म् सि-सियोगी बहन सकब। 9 िम मर् डली क्ँ हलखन् रिी, मु दा हदयोहतहिस, ि् हनका सभ म् आहधपत रखनाइ चािै त छहि, िमरा सभ क्ँ नहि गिर करै त छहि। 10 त् ँ िँ िम आहब िायब तँ िम हनकर ओहि काि सभ क्ँ मोन पाडब ि् ओ िमरा सभक हवरद दु भा् वनापूर् बात सभ क्ँ किै त छहि। 11 हपय हमत लोकहन, अधलािक पालन नहि कर, बल् हक नीक बातक पालन कर। ि् नीक काि करै त अहछ स् परम् श् वरक अहछ, मु दा ि् अधलाि काि करै त अहछ, स् परम् श् वर क्ँ नहि द् खलक। “ अिाँ सभ िनै त छी ि् िमर सभक गवािी सत् य अहछ। 13 िमरा बहत हकछु हलखबाक छल, मु दा िम सािी आ कलम सँ अिाँ क्ँ नहि हलखब। 14 मु दा िमरा हवशास अहछ ि् िम अिाँ क्ँ िनलय् भे ट करब आ िम सभ आमन् -सामन् गप करब। अिाँ क्ँ शानन िो। िमर हमत अिाँ क् पराम करै त छहि। हमतों को नाम स् अहभवादन करे ।

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जूड अध्याय 1 1 यीशु मसीहक सेवक आ याकूबक भाय यहूदा, जे सभ पिता िरमेश ् वर द्वारा िपवत्र कयल गेल अछि आ सुरक्षित कयल गेल अछि यीशु मसीह मे, आ कहल जाइत अछि।

2 अहा​ाँ सभ िर कृिा आ शान्तत आ प्रेम बढ़य।

3 पप्रयतम, जखन हम अहा​ाँ सभ केँ सामातय उद्धारक पवषय मे ललखबाक िूरा प्रयास केलहुाँ, तखन हमरा लेल ई आवश्यक िल

अहा​ाँ सभ केँ ललखैत अछि आ अहा​ाँ सभ केँ आग्रह करै त अछि जे एक बेर िपवत्र लोक सभ केँ दे ल गेल पवश्वासक लेल गंभीरतािूववक संघषव करू सौंिल गेल अछि।

4 ककएक ताँ ककिु लोक अनजाने मे घुलस गेल अछि, जे एहह तयायक लेल िूववछनधावररत अछि, दष्ु ट

जे लोग हमरऽ िरमेश ् वर के अनुग्रह कॅ स्वतंत्रता में बदली दै िै आरू एकमात्र प्रभु िरमेश ् वर आरू हमरऽ प्रभु यीशु मसीह िै त्याग कयलछन

5 तखन हम अहा​ाँ सभ केँ मोन िाड़ब, यद्यपि अहा​ाँ सभ एक बेर ई बात जनैत िलहुाँ, जे प्रभु, जखन ओ लोक सभ केँ बाहर िठौलछन लमस्र केँ बचा लेलक, तखन अपवश्वासी सभ केँ नष्ट कयलक।

6 जे स ् वगवदत ू सभ अिन िहहल स्थान नहह रखलछन, बल ् कक अिन छनवास िोडड़ दे लछन, हुनका नीचा​ाँ अनतत जंजीर मे बान्तह दे लछन अछि महान हदनक तयाय धरर अतहार राखल गेल।

7 ओहहना सदोम आ अमोरा आ ओकर आसिासक नगर सभ जका​ाँ व्यलभचार आ...

पवचचत्र मांसक िािा​ाँ गेलाह, उदाहरण बनू, जखन कक ओ सभ अनतत आचग केर प्रछतशोध भोगैत िचथ |

8 तहहना ई गंदा सिना दे खछनहार सभ शरीर केँ अशुद्ध करै त िचथ, प्रभुत्व केँ छतरस्कृत करै त िचथ आ मयावदाक अधलाह बजैत िचथ। 9 मुदा महास्वगवदत ू माइकल जखन मूसाक शवक पवषय मे जे शैतान साँ झगड़ा कयलछन, तखन ओ नहह कयलछन

हुनका िर कोनो छनतदनीय आरोि लगेबाक हहम्मत नहह केलछन, बल ् कक कहलछन: प्रभु अहा​ाँ केँ डा​ाँटचथ। 10 मुदा ओ सभ जे बात नहह जनैत अछि, तकरा िर अधलाह बजैत अछि। मुदा जे प्रकृछत साँ जनैत अछि, से क्रूर जानवर जका​ाँ, एहह साँ अिना केँ नष्ट क' लैत अछि। 11 चधक्कार हुनका सभक लेल! ककएक ताँ ओ सभ कैनक बाट िर चलल गेल आ लोभ साँ बबलामक गलतीक िािा​ाँ दौड़ल िुरस्कार, आ कोर के पवरोधाभास में नष्ट भ गेल।

12 ई सभ अहा​ाँ सभक प्रेमक भोज मे दाग अछि, जखन ओ सभ अहा​ाँ सभक संग भोज करै त अछि आ छनभीक भोज करै त अछि

की ओ सभ िाछन रहहत, हवाक कारणेँ घुमाओल जाइत अछि। गाि जकर फल मुरझा जाइत अछि, बबना फल के, दू बेर मरर गेल, तक जडड़ उखाडड़ दे ल गेल;

13 समुद्रक उग्र लहरर, अिन लाज फेन बछन रहल अछि। भटकैत तारा, न्जनका अतहार के अतहार सदाक लेल सुरक्षित अछि।

14 आदम साँ सातम हनोक सेहो हुनका सभक पवषय मे भपवष्यवाणी कयलछन आ कहलछन, “दे खू, प्रभु दस हजार लोकक संग आबब रहल िचथ ओकर संत, २.

15 सभ िर न ् याय करबाक लेल आ ओकरा सभ मे साँ सभ दष्ु ट केँ अिन सभ दष्ु कमवक दोषी ठहराबय लेल

जे ओ सभ दष्ु टतािूववक कयलछन, आ ओकर सभ कठोर बात जे दष्ु ट िािी सभ हुनका पवरुद्ध कयलछन अछि।

16 ई सभ गुनगुनाहहट आ लशकायत करऽ वला अछि जे अिन इच्िाक अनुसार चलैत अछि। आ हुनका लोकछनक मुह ाँ बहुत उत्साह बजैत अछि शब्द, लोक के फायदा उठाबय के प्रशंसा के संग.

17 मुदा, पप्रय लमत्र लोकछन, हमरा सभक प्रभु यीशु मसीहक प्रेररत सभक द्वारा िहहने कहल गेल बात सभ केँ मोन राखू।

18 ओ सभ अहा​ाँ सभ केँ कोना कहलचथन जे अंछतम समय मे एहन उिहास करयवला लोक सभ होयत जे अिन दष ु ् ट लोकक अनुसार काम-वासना अवश्य चलैत अछि।

19 ई सभ ओ सभ िचथ जे आत ् माक बबना कामुक रूिेँ अिना केँ अलग करै त िचथ।

20 मुदा, पप्रयतम, अहा​ाँ सभ िपवत्र आत ् मा साँ प्राथवना करै त अिन िरम िपवत्र पवश ् वास िर अिना केँ मजबूत करू। 21 अिना केँ िरमेश ् वरक प्रेम मे राखू, जाबत धरर अहा​ाँ सभ हमरा सभक प्रभु यीशु मसीहक दयाक आशा मे रहू अनतत जीवन।

22 ककिु गोटे क संग दया करू, जाहह साँ कोनो फकव िड़ैत अछि।

23 आ दोसर लोक सभ आचग मे साँ छनकालल कऽ डर साँ उद्धार करै त अछि। मांस साँ दागदार वस्त्र साँ सेहो घृणा करू। 24 जे अहा​ाँ सभ केँ खसय साँ बचा सकैत अछि आ अिन महहमाक सामने अहा​ाँ सभ केँ छनदोष राखख सकैत अछि

बहुत आनतद साँ सेट, 25 एकमात्र ज्ञानी िरमेश ् वर, जे हमरा सभक उद्धारकताव िचथ, केँ महहमा आ महहमा, प्रभुत्व आ सामथ ्व य एखन आ अनन ् त काल मे रहय। आमीन

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प्रकाशिरव

19 जे सभ दे खलहँ , जे क्छु अकछ, आ जे क्छु आ्रँ होयश, श्ीर कलखदि 20 हमी दकहुर हरि मे जे सरश शरीर दे खलहँ , आ सोुर् सरशरर दीयर् ीहसि सरश शरीर सरश मक् डली् स् ि्​्ददश अकछ, आ सरशरर दीयर जे अहरँ दे खलहँ से सरश मक् डली अकछि

अध रय 1

अध रय 2

1 यीाु मसीह् प्री्ीक पीमेा् िी हु्र दे लकिु जे ओ अपु सेि् सभ ्ेँ ओकह बरश सभ ्ेँ दे खरबकि जे जल्ये होमय पडशकुि ओ अपु स् ि्​्ददश दरीर अपु सेि् यदहु् ुर ्ेँ पठौलकुि 2 ओ पीमेा् िी् िचु आ यीाु मसीह् ्िरही आ सभ जे क्छु दे खलकु, श्ी ्िरही दे लकुि 3 धन अकछ जे एकह भकिषिरकी् िचु सभ ्ेँ पढ़ श आ ओकह मे कलखल बरश ्ेँ परलु ्ी़ श अकछ, क्ए् शँ समय ल् आकब ्ेल अकछि 4 यदहु् ुर एकायर् सरशरर मक् डली ्ेँ ्ह़ श छी जे , जे अकछ, जे छल, आ जे आबऽ िलर अकछ, से अहरँ सभ पी ्ृपर आ ारल् भेरयि आ हु्ी कसंहरसु् समक जे सरश आश् मर अकछि 5 यीाु मसीह सँ, जे किा् िरसयो्​् य ्िरह छकि, आ मृश् यु मे पकहल पुत आ पृि् िी् ीरजर सभ् ीरज्ुमरी छकि​ि जे हमीर सभ सँ पेम ्ेल् आ अपुर खदु मे हमीर सभ ्ेँ परप सँ धो दे ल्ि 6 ओ हमीर सभ ्ेँ पीमेा् िी आ हु्ी कपशर् ीरजर आ पुीोकहश बुौलकुि हु्र मकहमर आ पभुभ अु् ्रल धरी ीहयि आमीुि 7 दे खद, ओ मेघ् सं् आकब ीहल छकि​ि सभ आँ लख ओ्ीर दे लख लेश आ जे सभ ओ्ीर बेधुे छलि शइयो, आमीुि 8 हम अलर आ ओमे्र छी, आीं भ आ अंश, पभु ्ह़ श छकि, जे अकछ, जे छल, आ जे आबय बलर अकछ, सि्ालकमरुि 9 हम यदहु् ुर, जे अहरँ सभ् भरय छी आ केा आ यीाु मसीह् ीरज् य आ ध़य् मे सं्ी छी, पीमेा् िी् िचु आ यीाु मसीह् ्िरही लेल परशमोस ुरम् दीप मे छलहँ ि 10 हम पीमेा् िी् कदु मे आश् मर मे छलहँ आ परछरँ शुीही बज़श बज़श आिरज सु​ुलहँ ि 11 ओ ्हलकिु, “ हम अलर आ ओमे्र छी, पकहल आ अंकशमि इकिसुस, सुर् , प्​्मोस, कियरशी​ीर, सीदीस, किलरडे ललयर आर लौदीक्यर श्ि 12 हम घुकम ्ऽ ओकह आिरज ्ेँ दे खलहँ जे हमीर सं् बरज़श छलि घुकम ्ऽ दे खलहँ जे सरशरर सोुर् दीयरि 13 सरश रर दीयर् बीच मे ए्रर मु​ुष् य् पुत ज्रँ ए् ्ोरे प़ी धरी िस पकहीुे छलरह आ सोुर् पटी सँ पटी मे बरनुे छलरहि 14 ओ्ी मरि आ ्ेा ऊु ज्रँ उजी, बि् ज्रँ उजी छलि ओ्ी आँ लख आक् ्ेी लौ ज्रँ छल़्ि 15 ओ्ी पएी महीु पीशल ज्रँ, जेुर भटी मे जी़ श होि आ ओ्ी आिरज अुे् परकु् आिरज ज्रँ ि 16 हु्ी दकहुर हरि मे सरश रर शरीर छलकु आ हु्ी मुँह सँ ए्रर शेज दद धरी​ी शलिरी कु्लल छलकुि 17 हम हु्र दे लख मृश् यु ज्रँ हु्ी पएी पी खकस पडलहँ ि ओ हमीर पी अपु दकहुर हरि ीरलख हमीर ्हलकिु, “ डीब ुकहि हम पकहल आ अंकशम छी: 18 हम ओ जीब़श छी आ मरी ्ेल छलहँ ि आ, दे खद, हम अु् ्रल धरी जीकिश छी, आमीुि आ ुी् आ मृतु् चरभी सेहो अकछि

1 इकिसुस् मक् डली् स् ि्​्ददश ्ेँ कलखदि जे सरश शरीर दकहुर हरि मे प्डुे छकि आ सरशरर सोुर् दीयर् बीच मे चल़श छकि, से ई बरश ्ह़ श छकि​ि 2 हम अहरँ ् ्रज, अहरँ ् परीशम, आ अहरँ ् ध़य् ्ेँ जु़श छी, आ अहरँ जे अधलरह लो् सभ ्ेँ ्ोुर सहु ुकह ्ऽ स़्श छीि 3 अहरँ सहु ्ी़ श छी, ध़य् ीख़श छी, आ हमी ुरम् लेल परीशम ्यलहँ आ बेहोा ुकह भेलहँ ि 4 श़यो हमीर अहरँ ् किीोध मे क्छु अकछ, क्ए् शँ अहरँ अपु पकहल पेम छोकड दे लहँ ि 5 शे ँ अहरँ ्शय सँ खसल छी से मोु परडद आ पशरशरप ्र आ पकहल ्रज ्रि ुकह शऽ हम ज्ी-ज्ी शोीर ल् आकब जरयब आ शोही दीमबती ्ेँ ओ्ी ज्ह सँ हरर दे ब, जरबश धरी अहरँ पशरशरप ुकह ्ीबि” 6 मुदर अहरँ ्ेँ ई बरश अकछ जे अहरँ कु्ोलरई् लो् सभ् ्रज सँ घृकर ्ी़ श छी, ज्ीर हमहँ घृकर ्ी़ श छीि 7 ज्ीर ्रु अकछ, ओ सु​ुय जे आश् मर मक् डली सभ ्ेँ ्ी ्ह़ श अकछि जे जीशश ओ्ीर हम जीिु् ्रछ् िल खरय दे ब जे पीमेा् िी् स्​्​् बीच मे अकछि 8 सुर् मे मक् डली् स् ि्​्ददश ्ेँ कलखदि ई बरश पकहल आ अंकशम, जे मरी ्ेल छल आ जीकिश अकछ, से ्ह़ श अकछि 9 हम अहरँ ् ्रज, केा आ ्ी​ीबी ्ेँ जु़श छी, (मुदर अहरँ धकु् छी) आ जे सभ यहदी ्ह़ श छकि, मुदर ा़शरु् सभरघी छी, हु्र सभ् कुनर हम जु़श छीि 10 अहरँ सभ जे ्ष् र भो्ब शरकह मे सँ ्ोुो बरश सँ ुकह डे ीरउि अहरँ सभ ्ेँ दस कदु् ्ष होयश, अहरँ मृतु धरी किा् िरस ीरखद , आ हम अहरँ ्ेँ जीिु् मु्ुर दऽ दे बि” 11 ज्ीर ्रु अकछ, ओ सु​ुय जे आश् मर मक् डली सभ ्ेँ ्ी ्ह़ श अकछि जे जीशश, ओ्ीर दोसी मृतु सँ ्ोुो आहश ुकह होयशि 12 प्र् मोस् मक् डली् स् ि्​्ददश ्ेँ कलखदि जे्ीर दद धरी िरलर शेज शलिरी छ़ , ओ्ीर ई बरश ्ह़ छ़ ि 13 हम अहरँ ् ्रज ्ेँ जु़श छी आ अहरँ ्शय ीह़ श छी, ा़शरु् आसु ्शय अकछ, आ अहरँ हमी ुरम ्ेँ मजबदशी सँ प्डुे छी, आ हमी किशरस ्ेँ असी्री ुकह ्ेलहँ , ओकह कदु मे जखु एं रीपरस हमी किशरसपरत ाहीद छल, जे अहरँ सभ् बीच मे मरील ्ेल छल, जशय ा़शरु कुिरस ्ी़ श अकछि 14 मुदर हमीर अहरँ ् किरु क्छु बरश अकछ, क्ए् शँ अहरँ ल् ओ सभ छकि जे कबलरम् काकर् परलु ्ी़ श छकि, जे बरलर् ्ेँ इसरएल् सु् शरु सभ् सोझरँ ठो्ी खरयब, मदकश् सभ् बकलदरु ्यल ्ेल िसु सभ ्ेँ खरय आ वकभचरी ्ीबर् काकर दे लकुि 15 शकहुर शोीर सेहो अकछ जे कु्ुलरई् काकर् परलु ्ी़ श अकछ, ज्ीर हम घृकर ्ी़ श छीि 16 पशरशरप ्रि ु़ शँ हम ज्ी-ज्ी शोीर ल् आकब ्ऽ मुँह् शलिरीसँ ओ्ीर सभसँ लडबि”

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प्रकाशिरव

17 जे ्रु ीख़श अकछ, ओ सु​ुय जे आश् मर मक् डली सभ ्ेँ ्ी ्ह़ श अकछि जे जीश हरकसल ्ीश ओ्ीर हम ु​ु्रयल मनर मे सँ खरय दे ब आ ओ्ीर ए्रर उजी परिी दे ब आ ओकह परिी मे ए्रर ुि ुरम कलखल जे ओ्ीर गहक ्ीयिलर ्े छोकड ्ेओ ुकह जु़श अकछि 18 कियरकशीर मे मक् डली् स् ि्​्ददश ्ेँ कलखदि ई बरश पीमेा् िी् पुत ्ह़ श छकि, कजु्ी आँ लख आक् ्ेी लौ ज्रँ अकछ आ पएी महीु पीशल ज्रँ अकछि 19 हम अहरँ ् ्रज, पेम, सेिर, किशरस, अहरँ ् ध़य् आ अहरँ ् ्रज ्ेँ जु़श छीि आ अंकशम पकहलसँ बेसीि 20 मुदर हमीर अहरँ ् किरु क्छु बरश अकछ, क्ए् शँ अहरँ ईजेबेल स् ती ्ेँ, जे अपुर ्ेँ पि्​् शर ्ह़ श छकि, हमीर सेि् सभ ्ेँ वकभचरी ्ीबर् लेल कसखरबऽ आ बह्रबऽ आ मदकश् सभ् बकलदरु ्यल ्ेल िसु सभ ्ेँ खरयबर् अु​ुमकश द़ श छीि 21 हम ओ्ीर अपु वकभचरी सँ पशरशरप ्ीबर् लेल ज्ह दे कलय़्ि ओ पशरशरप ुकह ्ेलकुि 22 दे खद, हम ओ्ीर ओछरओु पी िेक् दे ब आ ओ्ीर सं् वकभचरी ्ीकुहरी सभ ्ेँ बहश सं्र मे डरलब, जरबश ओ सभ अपु ्रज सँ पशरशरप ुकह ्ीशि 23 हम ओ्ी बचर सभ ्ेँ मररी दे बि सभ मक् डली् लो् ई जरकु लेश जे हमही ं छी जे बर्डोी आ हदय् जरँ च ्ी़ श छीि 24 मुदर हम अहरँ सभ ्ेँ ्ह़ श छी आ कियरकशीर मे जे सभ ई काकर ुकह ीख़श छकि आ जे सभ ा़शरु् ्हीरई ्ेँ ुकह जु़श छकि, जेुर ओ सभ बज़श छकि​ि हम अहरँ पी आु ्ोुो बोझ ुकह ीरखबि 25 मुदर जे क्छु अहरँ सभ पकहुे सँ ीखुे छी शरबश धरी हम अयब धरी प्कड ्ऽ ीरखदि 26 जे ्ेओ जीशश आ हमी ्रज सभ ्ेँ अन धरी परलु ्ीश, ओ्ीर हम जरकश-जरकश सभ पी अकध्री दे बि 27 ओ लोहर् डं डर सँ ओ्ीर सभ् ारसु ्ीशि ्ुमरी् बश्ु ज्रँ ओ सभ कसहरी जरयशि 28 हम ओ्ीर भोी्र शरीर दऽ दे बकुि 29 जे ्रु ीख़श छकि, से सु​ुकि जे आश् मर मक् डली सभ ्ेँ ्ी ्ह़ श छकि​ि अध रय 3 1 सीदीस् मक् डली् स् ि्​्ददश ्ेँ कलखदि जे पीमेा् िी् सरश आश् मर आ सरश शरीर अकछ, से ई बरश ्ह़ श अकछि हम अहरँ ् ्रज ्ेँ जु़श छी जे अहरँ ् ुरम अकछ जे अहरँ जीकिश छी आ मरी ्ेल छीि 2 जर्र् ीह आ जे क्छु बचल अकछ, श्ीर सभ ्ेँ मजबदश ्र जे मीबर लेल श़यरी अकछि 3 शे ँ मोु ीरखद जे अहरँ ्ोुर गहक ्ेलहँ आ ्ोुर सु​ुलहँ , आ दढशरपदि्​् प्कड ्ऽ पशरशरप ्रि शे ँ जँ अहरँ जर्ल ुकह ीहब शँ हम चोी ज्रँ अहरँ पी आकब जरयब आ अहरँ ्ेँ ई ुकह बुझल होयश जे हम अहरँ पी ्ोु समय आकब जरयबि” 4 सीदी मे सेहो अहरँ ् क्छु एहु ुरम अकछ जे अपु िस ्ेँ अाु​ु ुकह ्ेुे अकछि ओ सभ हमीर सं् उजी ्पडर मे चलश, क्ए् शँ ओ सभ योग अकछि”

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5 जे जीशश, से उजी िस पकहीुे ीहशि हम हु्ी ुरम जीिु् पुस् मे सँ ुकह मेरर दे ब, बल् क् हम अपु कपशर आ हु्ी स् ि्​्ददश सभ् समक हु्ी ुरम सी्री ्ीबि 6 ज्ीर ्रु अकछ, ओ सु​ुय जे आश् मर मक् डली सभ ्ेँ ्ी ्ह़ श अकछि 7 किलरडे ललयर् मक् डली् स् ि्​्ददश ्ेँ कलखदि ई बरश ्ह़ श अकछ जे पकित अकछ, जे सश् य अकछ, जे दरऊद् चरभी ीख़श अकछ, ओ खोल़श अकछ आ ्ेओ बंद ुकह ्ी़ श अकछि बंद ्ऽ द़ श अकछ, आ ्ेओ ुकह खोल़श अकछि 8 हम अहरँ ् ्रज ्ेँ जु़श छी, दे खद, हम अहरँ ् सोझरँ ए्रर खुजल दीबजर ीरलख दे ुे छी, आ ओ्ीर ्ेओ बंद ुकह ्ऽ स़्श अकछ, क्ए् शँ अहरँ मे ्ुे् सरमर् अकछ आ हमी िचु् परलु ्ेलहँ आ हमी ुरम ्ेँ असी्री ुकह ्ेलहँ ि 9 दे खद, हम ा़शरु् सभरघी मे सँ लो् सभ ्ेँ बुर दे ब, जे सभ यहदी ्ह़ श छकि, मुदर ुकह छकि, मुदर झदठ बरज़श छकि​ि दे खद, हम हु्र सभ ्ेँ अहरँ ् पएी् सोझरँ आकब ्ऽ आीरधुर ्ीऽ दे बकु आ ई बुझर दे बकु जे हम अहरँ सँ पेम ्यलहँ ि” 10 अहरँ हमी ध़य्​् िचु ्ेँ परलु ्ेलहँ , शे ँ हमहँ अहरँ ्ेँ ओकह पी​ीकर् समय सँ बचर लेब, जे समस संसरी पी आओश, जरकह सँ पृि् िी पी ीहकुहरी सभ ्ेँ पीखबि 11 दे खद, हम ज्ी-ज्ी आकब ीहल छीि 12 जे जीशश श्ीर हम अपु पीमेा् िी् मु् कदी मे ए्रर खंभर बुर दे ब, आ ओ आब बरही ुकह कु्लश , जे हमी पीमेा् िी् कदस सँ स् ि्​् सँ उशी़ श अकछ आ हम हु्र पी अपु ुि ुरम कलखबि 13 ज्ीर ्रु अकछ, ओ सु​ुय जे आश् मर मक् डली सभ ्ेँ ्ी ्ह़ श अकछि 14 लौदीक्यर् मक् डली् स् ि्​्ददश ्ेँ कलखदि ई बरश सभ ्ह़ श छकि जे आमेु, जे किा् िरसपदक् आ सश् य ्िरह छकि, जे पीमेा् िी् सृकष् परीं भ अकछि 15 हम अहरँ ् ्रज ्ेँ जु़श छी जे अहरँ ुे ठं ढर छी आ ुे ्ीमि 16 शे ँ अहरँ ्ु​ु्ु​ुर छी आ ुे ठं ढर आ ुे ्ीम, शे ँ हम अहरँ ्ेँ मुँह सँ उ्लबि 17 अहरँ ्ह़ श छी जे , “हम धकु् छी, समकत मे बकढ ्ेल छी, आ हमीर क्छु ् आिश्शर ुकह अकछि” अहरँ ई ुकह जु़श छी जे अहरँ दयुीय, दयुीय, ्ी​ीब, आनी आ ुं्रे छीि 18 हम अहरँ ्ेँ सलरह द़ श छी जे आक् मे पी​ीकर ्यल सोुर हमीर सँ ्ीकु कलअ, जरकह सँ अहरँ धकु् बुबि आ उजी िस पकहर, जरकह सँ अहरँ ्पडर पकहरी स्ब आ अहरँ ् ुं्रे पु् लरज ुकह दे खरबि आ आँ लख पी दिर् अकभषे् ्र जरकह सँ अहरँ दे लख स्बि” 19 जरकह सभ सँ पेम ्ी़ श छी, श्ीर सभ ्ेँ हम डरँ ऱश छी आ शरडब द़ श छीि 20 दे खद, हम दीबजर पी ठरढ भऽ खरखरब़श छी, जँ ्ेओ हमी आिरज सुकु ्ऽ दीबजर खोलब शँ हम ओ्ीर ल् आकब ्ऽ ओ्ीर सं् भोजु ्ीब आ ओ हमीर सं्ि 21 जे जीशश ओ्ीर हम अपु कसंहरसु पी अपुर सं् ब़सय दे ब, जेुर हमहँ किजयी भेलहँ आ अपु कपशर् सं् हु्ी कसंहरसु पी ब़सल छीि 22 ज्ीर ्रु अकछ, ओ सु​ुय जे आश् मर मक् डली सभ ्ेँ ्ी ्ह़ श अकछि


प्रकाशिरव

अध रय 4 1 ए्ी बरद हम दे खलहँ जे स् ि्​् मे ए्रर दीबजर खुजल छल, आ पकहल बेी जे आिरज सु​ुलहँ से शुीही ज्रँ हमीर सं् बरज़श छलि ओ ्हुे छल जे , “एशय चढद, आ हम अहरँ ्ेँ ओकह बरश सभ ्ेँ दे खर दे ब जे आब जे क्छु होयशि” 2 हम शुी् आश् मर मे आकब ्ेलहँ, शखु स् ि्​् मे ए्रर कसंहरसु ब़सल छल आ ए् ्ोरे कसंहरसु पी ब़सल छलि 3 ब़सल लो्​् ुजरी यरसी आ सरकड् ु परिी ज्रँ दे खरइ पड़ श छल़् आ कसंहरसु् चरर ्रश इं दधु​ुष छल़् जे पनर ज्रँ दे खरइ पड़ श छल़्ि 4 कसंहरसु् चरर ्रश बीसरर आसु छल, आ आसु पी हम दे खलहँ जे चररी बीस बदढ उजी िस पकहीुे ब़सल छलरहि हु्र सभ् मरि पी सोुर् मु्ुर छलकुि 5 कसंहरसु सँ कबजली, ्ीज आ आिरज कु्ल़श छल, कसंहरसु् आ्द मे सरश रर आक् दीदी जी़ श छल, जे पीमेा् िी् सरश आश् मर अकछि 6 कसंहरसु् आ्द सकर् सु ्रँ च समुद छल, आ कसंहरसु् बीच आ कसंहरसु् चरर ्रश आ्द-परछद आँ लख सँ भील चररीरर परकी छलि 7 पकहल जरुिी कसंह ज्रँ छल, दोसी बछडर ज्रँ , शेसी जरुिी् मुँह मु​ुख ज्रँ छल, आ चररीम परकी उड़ श ्रड ज्रँ छलि 8 चरर जरुिी् चरर ्रश छह रर परँ लख छल़्ि ओ सभ भीशी् आँ लख सँ भील छल, मुदर ओ सभ कदु-ीरकश किशरम ुकह ्ी़ श अकछ जे , “पकित, पकित, पकित, सि्ालकमरु पभु पीमेा् िी, जे छल, अकछ आ आबऽ िलर अकछि” 9 जखु ओ सभ परकी सभ कसंहरसु पी ब़सल, जे अु् ्रल धरी जीब़श छकि, हु्र मकहमर आ आदी आ धनिरद दे शि 10 चरर बीस बदढ सभ कसंहरसु पी ब़सल लो्​् आ्द खकस पड़ श छकि आ अु् ्रल धरी जीकिश ीहकुहरी् आीरधुर ्ी़ श छकि आ कसंहरसु् सोझरँ अपु मु्ुर िेक् ्ऽ ्ह़ श छकि​ि 11 हे पभु, अहरँ मकहमर, आदी आ सरमर् परर ्ीबर् योग छी, क्ए् शँ अहरँ सभ िसु् सृजु ्ेलहँ आ अहरँ ् पसनशर् लेल ओ सभ अकछ आ सृकष भेल अकछि अध रय 5 1 हम कसंहरसु पी ब़सल लो्​् दकहुर हरि मे ए्रर क्शरब दे खलहँ जे भीशी आ परछद मे कलखल छल, जरकह पी सरश रर मोही ल्रओल ्ेल छलि 2 हम दे खलहँ जे ए्रर बलारली स् ि्​्ददश जोी-जोी सँ पचरी ्ी़ श छल, “पुस् खोलबर् आ ओ्ी मोही खोलबर् योग ्े अकछ?” 3 स् ि्​् मे आ ुे पृि् िी मे आ ुे पृि् िी् ुीचरँ ्ेओ क्शरब खोकल स्ल आ ुे ओ्ीर कदस दे लख स्लि 4 हम बहश ्रुलहँ , क्ए् शँ क्यो क्शरब खोलबर् आ पढबर् आ ुे दे खबर् योग ुकह परओल ्ेलि 5 ए्रर बुजु्​् हमीर ्हलकिु, “ुकह ्रुद, दे खद, यहदर ्ोत् कसंह, दरऊद् जकड, क्शरब खोलबर मे आ ओ्ी सरशरर मोही खोलबर मे किजयी भ’ ्ेल अकछि”

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6 हम दे खलहँ , कसंहरसु आ चरर परकी आ बुजु्​् सभ् बीच मे ए्रर मेमुर ठरढ छल जेुर ओ्ीर मरील ्ेल छल, ज्ी सरशरर सी् ं आ सरशरर आँ लख छल, जे सरशरर आश् मर अकछ पीमेा् िी् पठरओल ्ेल सभ पृि् िी पीि 7 ओ आकब ्ऽ कसंहरसु पी ब़सल लो्​् दकहुर हरि सँ पोिी कु्रकल लेलकुि 8 ओ क्शरब लऽ ्ऽ चरर परकी आ चररी बीस बदढ मेमुर् सोझरँ खकस पडलरह, जरकह मे पते् ्ेँ िीकर आ ्ंध सँ भील सोुर् ्रोीर छलकु, जे पकित लो् सभ् परि्ुर अकछि 9 ओ सभ ए्रर ुि ्ीश ्रकब ्ऽ ्हलकिु, “अहरँ क्शरब लऽ ्ऽ ओ्ी मोही खोलबर् योग छी, क्ए् शँ अहरँ मरील ्ेलहँ आ हमीर सभ ्ेँ अपु खदु दरीर सभ जरकश, भरषर आ लो् मे सँ पीमेा् िी् लेल छु डर दे लहँ ि आ ीरष्; 10 ओ हमीर सभ ्ेँ अपु पीमेा् िी् लेल ीरजर आ पुीोकहश बुौलकुि 11 हम दे खलहँ आ कसंहरसु, पाु आ बुजु्​् सभ् चरर ्रश बहशो स् ि्​्ददश सभ् आिरज सु​ुलहँ ि 12 जोी-जोी सँ बजलरह, “ओ मेमुर जे मरील ्ेल छल, से सरमि्​् य, धु, बुलु, बल, आदी, मकहमर आ आाीिर् द परर ्ीबर् योग अकछि” 13 स् ि्​् मे, पृि् िी पी, पृि् िी् ुीचरँ , समुद मे जे क्छु अकछ, आ ओकह मे जे क्छु अकछ, से सभ हम ई ्ह़ श सु​ुलहँ जे , “आाीष, आदी, मकहमर आ सरमर् होि” कसंहरसु पी ब़सल लो् ्ेँ आ मेमुर ्ेँ अु् ्रल धरीि 14 चरर परकी ्हल्, “आमेुि” चररी बीस बुजु्​् खकस पडलरह आ अु् ्रल धरी जीकिश ीहकुहरी् आीरधुर ्यलकुि अध रय 6 1 हम दे खलहँ जे मेमुर जखु ए्रर मोही खोलल् शँ हम चरर परकी मे सँ ए्रर ठु्र् आिरज सु​ुलहँ जे , “आउ आ दे खदि” 2 हम दे खलहँ जे ए्रर उजी घोडर छलि ओ्ीर मु्ुर दे ल ्ेल़ुि 3 जखु ओ दोसी मोही खोलल् शँ हम दोसी परकी ्ेँ ्ह़ श सु​ुलहँ जे , “आउ आ दे खदि” 4 ए्रर आओी घोडर लरल ीं ्​् घोडर कु्कल ्ेल, आ ओकह पी ब़सल लो् ्ेँ पृथी सँ ारल् कु्रलबर् आ ए्-दोसी ्ेँ मरीबर् अकध्री दे ल ्ेलकुि 5 जखु ओ शेसी मोही खोललकु शँ हम शेसी परकी ्ेँ ई ्ह़ श सु​ुलहँ जे , “आउ आ दे खदि” हम दे खलहँ, ए्रर ्री​ी घोडरि जे ओ्ीर पी ब़सल छल, ओ्ी हरि मे ए् जोडी शीरजद छल़्ि 6 चरर परकी् बीच मे ए्रर आिरज सु​ुलहँ जे , “ए् परइ मे ए् ुरप ्हम आ ए् परइ मे शीु ुरप जौि दे खद, शेल आ मकदीर ्ेँ चोर ुकह पहँ चर ीहल छीि 7 जखु ओ चररीम मोही खोललकु शँ हम चररीम परकी् आिरज सु​ुलहँ जे , “आउ आ दे खदि” 8 हम दे खलहँ शँ दे खलहँ जे ए्रर पीयी घोडर ओ्ीर पी ब़सल ओ्ी ुरम मृतु छल़् आ ओ्ी परछरँ -परछरँ ुी् सेहो चल़श छल़्ि पृथी् चररीम भर् पी हु्र सभ ्ेँ शलिरी, भदख, मृतु आ पृि् िी् जरुिी सभ् सं् मरीबर् अकध्री दे ल ्ेलकुि


प्रकाशिरव

9 जखु ओ परँ चम मोही खोललकु शँ हम िेदी् ुीचरँ दे खलहँ जे पीमेा् िी् िचु आ ओकह ्िरही सभ् ्रीके ँ मरील ्ेल लो् सभ् परकी छलि 10 ओ सभ जोी-जोी सँ कचकचयर उठल, “हे पभु , पकित आ सश् य, अहरँ ्शे् कदु धरी पृि् िी पी ीहकुहरी सभ पी हमी सभ् खदु् बदलर ुकह लेब? 11 ए्-ए् ्ोरे ्ेँ उजी िस दे ल ्ेलकुि हु्र सभ ्ेँ ्हल ्ेलकु जे , जरबश धरी हु्र सभ् सं्ी-सेि् आ भरय सभ, जे हु्र सभ ज्रँ मरील जरयश, शरबश धरी क्छु ्रल धरी किशरम ्रि 12 हम दे खलहँ जे जखु ओ छठम मोही खोललकु शखु ए्रर प़घ भद्म आकब ्ेलि सदय् ्ेा् बोीर ज्रँ ्री​ी भ’ ्ेल आ चरु खदु ज्रँ भ’ ्ेलि 13 आ्रा् शरीर सभ पृथी पी खकस पडल, जेुर अंजी​ी् ्रछ अपु असमय अंजी​ी ्ेँ िेक् द़ श अकछ, जखु ओ शेज हिर सँ कहल़श अकछि 14 आ्रा ्ुड्लर पी ए्रर ग्​् रप मे चकल ्ेलि आ हीे ् पहरड आ दीप अपु-अपु सरुसँ हकर ्ेलि 15 पृि् िी् ीरजर सभ, महरपुरष सभ, धकु् लो् सभ, सीसेुरपकश सभ, पीरकमी सभ, पश् ये् दरस सभ, आ पश् ये् स् िशंत लो् सभ, मरध् यम आ पहरड् चटरु सभ मे ु​ु्र ्ेलरहि 16 ओ पहरड आ चटरु सभ ्ेँ ्हलकिु, “हमीर सभ पी खकस जरउ आ कसंहरसु पी ब़सल लो्​् मुँह सँ आ मेमुर् कोध सँ ु​ु्र कदयौ्ि 17 क्ए् शँ हु्ी कोध् प़घ कदु आकब ्ेल अकछि आ ्े ठरढ भ’ स़्श अकछ?

छलि कबनरमीु ्ोत मे सँ बरीह हजरी पी मोही ल्रओल ्ेल छलि 9 ए्ी बरद हम दे खलहँ जे, सभ जरकश, जरकश-जरकश, जरकश-जरकश आ भरषर् बहश ीरस भीड, ज्ी क्ुशी ्ेओ ुकह ्’ स़्श छल, जे उजी िस आ हिेली पकहीुे कसंहरसु आ मेमुर ्े सरमुे ठरढ छल हु्र लो्कु् हरि मे; 10 ओ जोी-जोी सँ कचकचयर उठलरह, “हमीर सभ् पीमेा् िी जे कसंहरसु पी ब़सल छकि आ मेमुर ्ेँ उुरीि” 11 सभ स् ि्​्ददश कसंहरसु् चरर ्रश, बदढ-पुीरु आ चरर परकी् चरर ्रश ठरढ भऽ कसंहरसु् सोझरँ मुँह पी खकस पडलरह आ पीमेा् िी् आीरधुर ्यलकुि 12 ओ ्हलकिु, “आमीु, आाीष, मकहमर, बुलु, धनिरद, आदी, सरमि्​् य आ सरमि्​् य हमीर सभ् पीमेा् िी् लेल अु​ु् श ्रल धरी ीहयि” आमीुि 13 ए्रर बुजु्​् हमीर पुछलकिु, “ई सभ उजी िस पकहीुे ्ी छकि?” आ ओ सभ ्शऽ सँ आयल छल? 14 हम हु्र ्हकलयकु, “महरीरज, अहरँ जु़श छीि” ओ हमीर ्हलकिु, “ई सभ महरसं्र सँ बरही कु्लल अकछ आ मेमुर् खदु मे अपु िस धो ्ऽ उजी ्ऽ दे ल्ि” 15 शे ँ ओ सभ पीमेा् िी् कसंहरसु् समक ीह़ श छकि आ हु्ी मु् कदी मे कदु-ीरकश हु्ी सेिर ्ी़ श छकि​ि 16 आब ओ्ीर सभ ्ेँ भदख ुकह लर्श आ ुे परस लर्शि ुे सदय् ओ्ीर सभ पी इजोश ्ीश आ ुे ्ोुो ्म्ि 17 जे मेमुर कसंहरसु् बीच मे अकछ, से ओ्ीर सभ ्ेँ पोसश आ ओ्ीर सभ ्ेँ जीकिश परकु् झीुर मे लऽ जरयशि अध रय 8

अध रय 7

1 जखु ओ सरशम मोही खोललकु शँ ्ी​ीब आधर घंरर् अंशीरल पी स् ि्​् मे मौु भऽ ्ेलि 2 हम ओकह सरशरर स् ि्​्ददश ्ेँ दे खलहँ जे पीमेा् िी् समक ठरढ छलरहि आ हु्र सभ ्ेँ सरश रर शुीही दे ल ्ेलकुि 3 ए्रर आओी स् ि्​्ददश सोुर् धदप-परत लऽ ्ऽ िेदी पी आकब ्ऽ ठरढ भऽ ्ेलरहि हु्र बहश धदप दे ल ्ेलकु जे ओ सभ पकित लो्​् परि्ुर् सं् कसंहरसु् आ्द मे ीरखल सोुर् िेदी पी चढरबकि​ि 4 पकित लो्​् परि्ुर् सं् धदप् धुँआ पीमेा् िी् समक चकढ ्ेलि 5 स् ि्​्ददश धदप-परत ्ेँ लऽ ्ऽ िेदी् आक् सँ भरी ्ऽ पृि् िी पी िेक् दे लकिुि 6 ओ सरशरर स् ि्​्ददश जे सरश रर शुीही बजब़श छलरह, ओ सभ अपुर ्ेँ बजबय लेल श़यरी भऽ ्ेलरहि 7 पकहल स् ि्​्ददश बजौलकु आ ओ्ी परछरँ ओलर आ आक् खदु मे कमलरओल ्ेल आ ओ सभ पृथी पी िेक् दे ल ्ेलि 8 दोसी स् ि्​्ददश बजौलकु आ आक् मे जी़ श ए्रर प़घ पहरड ज्रँ समुद मे िेक् दे ल ्ेलकुि 9 समुद मे जे परकी छल, ओ्ी ए् कशहरई भर् मरी ्ेलि जहरज सभ् शेसी भर् ुष भ’ ्ेलि 10 शेसी स् ि्​्ददश बजौलकु आ आ्रा सँ ए्रर प़घ शरीर खकस पडल जे दीप ज्रँ जी़ श छल आ ओ ुदी सभ् कशहरई भर् आ परकु सभ् िवरीर पी खकस पडलि

1 एकह बरश् बरद हम चररीरर स् ि्​्ददश ्ेँ पृि् िी् चरर ्ोु मे ठरढ दे खलहँ , जे पृि् िी् चररी हिर ्ेँ प्डुे छलरह, जरकह सँ हिर पृथी पी, समुद पी आ ुे ्ोुो ्रछ पी ुकह बहयि 2 हम दे खलहँ जे पदीब कदस सँ ए्रर आओी स् ि्​्ददश जीब़श पीमेा् िी् मुही ल’ ्ऽ चढ़ श छलरह आ ओ जोी-जोी सँ ओकह चरर स् ि्​्ददश ्ेँ कचकचयर उठलकुि 3 ओ ्हलकु, “जखु धरी हम सभ अपु पीमेा् िी् सेि् सभ ्ेँ ्परी पी मोही ुकह ल्र दे ब, शरबश धरी पृि् िी ्ेँ, ुे समुद ्ेँ आ ुे ्रछ-कबरीछ ्ेँ चोर ुकह पहँ चरउि” 4 हम मुही ल्रओल ्ेल लो्​् संखर सु​ुलहँ , आ इसरएल् सभ ्ोत मे सँ ए् लरख चौिरलीस हजरी लो् पी मोही ल्रओल ्ेल छलि 5 यहदर ्ोत मे सँ बरीह हजरी पी मोही ल्रओल ्ेल छलि रबेु ्ोत मे सँ बरीह हजरी पी मोही ल्रओल ्ेल छलि ्रद ्ोत मे सँ बरीह हजरी पी मोही ल्रओल ्ेल छलि 6 आसेी ्ोत् बरीह हजरी पी मोही ल्रओल ्ेल छलि ुेपिरकलम ्ोत मे बरीह हजरी पी मोही लर्ल छलि मुसस ्ोत मे सँ बरीह हजरी पी मोही ल्रओल ्ेल छलि 7 कामोु् ्ोत मे सँ बरीह हजरी लो् पी मोही ल्रओल ्ेल छलि लेिी ्ोत मे सँ बरीह हजरी पी मोही ल्रओल ्ेल छलि इसर्ी ्ोत मे सँ बरीह हजरी पी मोही ल्रओल ्ेल छलि 8 जरबुलु ्ोत मे सँ बरीह हजरी लो् पी मोही ल्रओल ्ेल छलि यदसुि् ्ोत मे सँ बरीह हजरी पी मोही ल्रओल ्ेल

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प्रकाशिरव

11 ओकह शरीर ्े ुरम ्ृकम ्हल जरइश छ़ ्, आ परकु ्े कशहरई भर् ्ृकम बकु ्ेलि परकु ्रु भऽ ्ेलर् ्रीके ँ बहशो लो् मरी ्ेलि 12 चररीम स् ि्​्ददश बजौलकु आ सदय्​् ए् कशहरई भर् आ चरु् कशहरई भर् आ शरीर सभ् कशहरई भर् पहरी ्यलकुि जकहुर हु्र सभ् ए् कशहरई भर् अनरी भऽ ्ेल छल आ ए् कशहरई भर् कदु ुकह चम़्श छल आ ीरकश सेहोि 13 हम दे खलहँ आ ए्रर स् ि्​्ददश ्ेँ स् ि्​्​् बीचोबीच उड़ श सु​ुलहँ जे जोी-जोी सँ ्ह़ श छल, “कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, हरय, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, हरय, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी, कधकरी अकछ, शीुद स् ि्​्ददश् शुीही् आु आिरज् ्रीकेिँ ” एखु धरी बरजब ुकह!

14 शुीही बजौकुहरी छठम स् ि्​्ददश ्ेँ ्हलकिु, “ओकह चररीरर स् ि्​्ददश ्ेँ ढीलर ्र जे महरु िीरश ुदी मे बरनल छकि​ि” 15 ए् घंरर, ए् कदु, ए् मरस आ ए् सरल् लेल श़यरी चरर स् ि्​्ददश ्ेँ छोकड दे ल ्ेलकु जे मु​ुष् य् कशहरई भर् ्ेँ मरीबर् लेल श़यरी ्यल ्ेल छलि 16 घुडसिरी् सेुर् संखर दद लरख छलि 17 एकह शीहे ँ हम दा्ु मे घोडर सभ आ ओकह पी ब़सल लो् सभ ्ेँ दे खलहँ, ज्ी छरशी मे आक्, जेकस् आ ्ंध् छलि हु्र लो्कु् मुँह सँ आक् आ धुँआ आ ्ंध् कु्ल़श छल | 18 एकह शीुद ्ोरे ् ्रीके ँ आक्, धुँआ आ ्ंध् जे हु्र सभ् मुँह सँ कु्ल़श छल, शरकह सँ ए् कशहरई भर् मृश् यु भेलकुि 19 क्ए् शँ ओ्ी सभ् सरमर् ओ्ीर सभ् मुँह आ पदँछ मे छ़ ्, क्ए् शँ ओ्ी सभ् पदँछ सरँ प ज्रँ छल़्, ओ्ी मरि छल़् आ ओ्ीर सभ् सं् ओ सभ चोर ्ी़ श छ़ ्ि 20 बर्ी लो् सभ जे एकह किपकत सँ ुकह मरील ्ेल छल, ओ सभ अपु हरि् ्रज सँ पशरशरप ुकह ्ेल्, जरकह सँ ओ सभ दु षरटर, सोुर, चरुी, पीशल, परिी आ ल्डी् मदकश् सभ् पदजर ुकह ्ीकि ुे दे ख स़्श अकछ, ुे सु​ु़श अकछ आ ुे चल़श अकछि 21 ुे ओ सभ अपु हतर, ुे अपु जरदद -रोुर, ुे अपु वकभचरी आ ुे अपु चोी​ी-कछपे पी पशरशरप ्ेल्ि

अध रय 9 1 परँ चम स् ि्​्ददश बजौलकु आ हम दे खलहँ जे ए्रर शरीर स् ि्​् सँ पृि् िी पी खस़श अकछि 2 ओ अिरह ्डर खोललकुि ओकह ्डर सँ ए्रर धुँआ कु्लल जे ्ोुो प़घ भटी् धुँआ ज्रँ कु्ल़श अकछि आ ्डर् धुँआ् ्रीके ँ ीौद आ हिर अनरी भ’ ्ेलि 3 धुँआ मे सँ करडी सभ पृि् िी पी कु्लल आ ओ्ीर सभ ्ेँ ओकहुर ालक दे ल ्ेल़् जेुर पृथी् कबचद सभ ्ेँ सरमि्​् य होइश छ़ ्ि 4 हु्र सभ ्ेँ आजर दे ल ्ेलकु जे ओ सभ पृथी् घरस-परश, ्ोुो हरीयी-हरीयी िसु आ ुे ्ोुो ्रछ ्ेँ चोर ुकह पहँ चरबकि​ि मुदर ्ेिल ओकह आदमी सभ् ्परी पी पीमेा् िी् मोही ुकह अकछि 5 ओ्ीर सभ ्ेँ ई अकध्री दे ल ्ेल छल़् जे ओ सभ ओ्ीर सभ ्ेँ मररी ुकह कदयौ्, बल् क् ओ्ीर सभ ्ेँ परँ च मरस धरी ्ष दे ल जरयि 6 ओकह कदु मे मु​ुष मृतु् खोज ्ीश, मुदर ओ्ीर ुकह भेरश़्ि मीबर् इचर ्ीश, आ मृतु ओ्ीर सभ सँ भरक् जरयशि” 7 करडी् आ्री यु​ु् लेल श़यरी घोडर ज्रँ छलि मरि पी सोुर् मु्ुर ज्रँ छल आ मुँह मु​ुष् य् मुँह ज्रँ छलि 8 हु्र लो्कु् ्ेा सी्क् ्ेा ज्रँ छलकु आ दरँ श कसंह् दरँ श ज्रँ छलकुि 9 हु्र सभ् छरशी मे लोहर् छरशी ज्रँ छलकुि आ हु्र लो्कु् परँ लख् आिरज ओकहुर छल जेुर यु​ु मे दौड़ श अुे् घोडर् ीि् आिरज होइश छल | 10 ओ्ीर सभ् पदँछ कबचद ज्रँ छल़् आ ओ्ी पदँछ मे डं ् छल़्ि 11 हु्र सभ् ऊपी ए्रर ीरजर छलकु, जे अिरह ्डर् स् ि्​्ददश छल, ज्ी ुरम कहबद भरषर मे अबरदोु अकछ, मुदर यदुरुी भरषर मे ओ्ी ुरम अपोकलयु अकछि 12 ए्रर कधकरी बीकश ्ेल अकछि आ दे खद, आ्द दद रर किपकत आओी आकब ीहल अकछि 13 छठम स् ि्​्ददश बजौलकु आ हम पीमेा् िी् समक सोुर् िेदी् चरर सी् ं सँ आिरज सु​ुलहँ ि

अध रय 10 1 हम दे खलहँ जे ए्रर आओी पीरकमी स् ि्​्ददश मेघ् िस पकहीुे स् ि्​् सँ उशी़ श छकि, आ हु्ी मरि पी इं दधु​ुष छलकु, हु्ी मुँह सदय् ज्रँ छलकु आ हु्ी पएी आक् ्ेी खंभर ज्रँ छलकुि 2 हु्र हरि मे ए्रर छोर सु क्शरब खुजल छलकुि 3 ओ जोी-जोी सँ कचकचयर उठल जेुर कसंह ्ज्श अकछि 4 जखु सरश ्ज्ुर अपु आिरज कु्रकल लेल् शखु हम कलखय जर ीहल छलहँ , शखु हम स् ि्​् सँ ए्रर आिरज सु​ुलहँ जे हमीर ्ह़ श छल जे , “सरश मे ्ज्ुर जे बरश बरजल छल, शरकह पी मोही ल्र कदयौ् आ ुकह कलखदि” 5 हम जे स् ि्​्ददश समुद आ पृि् िी पी ठरढ दे खलहँ से स् ि्​् कदस अपु हरि उठौलकुि 6 ओ जे अु् ्रल धरी जीब़श अकछ, जे स् ि्​्, ओकह मे जे क्छु अकछ, पृि् िी, ओकह मे जे अकछ, समुद आ ओकह मे जे अकछ, श्ीर सप्‍ि खयलकु जे समय ीहश आब ुकह: 7 मुदर सरशम स् ि्​्ददश् आिरज् समय मे जखु ओ बरजब ाुर ्ीशरह शखु पीमेा् िी् ीहस समरर भऽ जेशरह, जेुर ओ अपु सेि् पि्​् शर सभ ्ेँ ्हुे छकि​ि 8 स् ि्​् सँ जे आिरज सु​ुलहँ से हमीर िेी सँ बरजल, “जरउ, समुद आ पृि् िी पी ठरढ स् ि्​्ददश् हरि मे खुजल छोर्र क्शरब ल’ कलअि” 9 हम स् ि्​्ददश ल् जर ्ऽ ्हकलयकु, “हमीर ई छोर सु पोिी कदअि” ओ हमीर ्हलकिु, “ए्ीर लऽ ्ऽ खर कलअि ओ अहरँ ् पेर ्ेँ ्रु ्ऽ दे श, मुदर मुँह मे मधु ज्रँ मीठ ीहशि 10 हम स् ि्​्ददश् हरि सँ छोर्र क्शरब कु्रकल ्ऽ खर ्ेलहँ ि हमी मुँह मे मधु ज्रँ मीठ भ’ ्ेल छल, आ जकहुर हम ए्ीर खर लेलहँ शकहुर हमी पेर ्रु भ’ ्ेलि

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प्रकाशिरव

11 ओ हमीर ्हलकिु, “अहरँ ्ेँ िेी सँ बहश ीरस जरकश, जरकश, भरषर आ ीरजर् समक भकिषिरकी ्ीबर् चरहीि” अध रय 11 1 हमीर लरठी ज्रँ खढ दे ल ्ेल, शखु स् ि्​्ददश ठरढ भऽ ्ऽ ्हलकिु, “उकठ ्ऽ पीमेा् िी् मु् कदी आ िेदी आ ओकह मे आीरधुर ्ीऽ िलर सभ ्ेँ ुरपऽि” 2 मुदर मंकदी् बरही जे आँ ्ु अकछ, ओ्ीर छोकड कदयौ् आ ओ्ीर ुरकप ुकह कदयौ्ि क्ए् शँ ई ़्ी-यहदी सभ ्ेँ दे ल ्ेल अकछि 3 हम अपु दु ुद ्िरह ्ेँ अकध्री दे बकु आ ओ सभ बोीर पकहीुे ए् हजरी दद सय सरकठ कदु् भकिषिरकी ्ीशि 4 ई दु ुद ज़शदु् ्रछ आ पृि् िी् पीमेा् िी् समक ठरढ दद रर दीप-दरुी अकछि 5 जँ ्ेओ ओ्ीर सभ ्ेँ चोर पहँ चरबय चरह़ श अकछ शँ ओ्ीर सभ् मुँह सँ आक् कु्कल ्ऽ ओ्ी ातु सभ ्ेँ भस ्ऽ द़ श छ़ ्ि 6 हु्र सभ ्ेँ स् ‍ि्​् ्ेँ बंद ्ीबर् अकध्री छकु, जरकह सँ हु्र सभ् भकिषिरकी् समय मे बीखर ुकह होअय, आ परकु पी हु्र खदु मे बदलबर् अकध्री छकु आ पृि् िी ्ेँ सभ किपकत सँ मररी दे बर् अकध्री छकुि 7 जखु ओ सभ अपु ्िरही समरर ्ऽ लेश शखु अिरह ्डर सँ चढयिलर जरुिी ओ्ीर सभ् किरु यु​ु ्ीश आ ओ्ीर सभ पी किजय परकब ओ्ीर सभ ्ेँ मररी दे शि 8 ओ्ी सभ् लरा ओकह महरु ु्ी् ्ली मे पडल ीहश, ज्ीर आधरलट् रप सँ सदोम आ कमस ्हल जरइश छ़ ्, जशय हमीर सभ् पभु ्ेँ कदस पी चढरओल ्ेल छलि 9 सरढे शीु कदु धरी लो्, जरकश-जरकश, भरषर आ जरकश मे सँ लो् सभ अपु मृश् यु ्ेँ दे लख लेश आ अपु मृश् यु ्ेँ ्बी मे ुकह ीरखय दे शि 10 पृि् िी पी ीहकुहरी सभ ओ्ीर सभ पी आुलनश होयश आ आुलनश होयश आ ए्-दोसी ्ेँ िीदरु पठरओशि क्ए् शँ ई दु ुद पि्​् शर पृि् िी पी ीहकुहरी सभ ्ेँ पशरकडश ्यलकुि 11 सरढे शीु कदु् बरद पीमेा् िी् जीिु् आश् मर हु्र सभ मे पिेा ्यलकु आ ओ सभ अपु पएी पी ठरढ भऽ ्ेलरहि ओ सभ दे खकुहरी सभ ्ेँ बहश भय भऽ ्ेलकुि 12 ओ सभ स् ि्​् सँ ए्रर प़घ आिरज सु​ुलकु जे , “एशय चढदि” ओ सभ मेघ मे ब़कस ्ऽ स् ि्​् मे चकढ ्ेलरहि आ ओ्ीर सभ् ातु सभ ओ्ीर सभ ्ेँ दे खल्ि 13 ओही समय ए्रर प़घ भद्म भेल आ ाही् दसम भर् खकस पडल आ भद्म मे सरश हजरी लो्​् मरील ्ेलि 14 दोसी किपकत बीकश ्ेलि औी दे खद, शेसी किपकत ज्ी आकब ीहल अकछि 15 सरशम स् ि्​्ददश बजौलकुि स् ि्​् मे जोी-जोी सँ आिरज आकब ीहल छल जे, “एकह संसरी् ीरज् य हमीर सभ् पभु आ हु्ी मसीह् ीरज् य बकु ्ेल अकछि” ओ अु् ्रल धरी ीरज ्ीशि 16 पीमेा् िी् समक अपु आसु पी ब़सल चौबीस बदढ सभ मुँह पी झुक् ्ऽ पीमेा् िी् आीरधुर ्यलकुि 17 ओ ्हलकिु, “हे सि्ालकमरु पभु पीमेा् िी, जे अकछ आ आबऽ िलर अकछ, हम सभ शोीर धनिरद द़ श छीि ्रीक, अहरँ अपु महरु ालक ्ेँ अपुर ल् लऽ ्ऽ ीरज ्ऽ लेलहँ ि”

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18 जरकश सभ कोकधश भऽ ्ेल, आ शोही कोध आ मृश् सभ् समय आकब ्ेल अकछ जे ओ्ीर सभ् नरय ्यल जरय आ अहरँ अपु सेि् पि्​् शर सभ ्ेँ, आ पकित लो् सभ ्ेँ आ अपु ुरम सँ डीय बलर सभ ्ेँ इुरम दे बि छोर-छोर आ प़घ; आ पृथी ्े ुरा ्ीय िरलर ्े ुष ्ऽ कदयौ्ि 19 पीमेा् िी् मु् कदी स् ि्​् मे खुजल आ हु्ी मु् कदी मे हु्ी कुयम् सनदद ् दे खल ्ेलि अध रय 12 1 स् ि्​् मे ए्रर प़घ आशय् दे खरय पडलि सदय्​् िस पकहीुे सी, प़ी् ुीचर चरु आ मरि पी बरीह शरीर् मु्ुरि 2 ओ ्भ्िशी भऽ ्ऽ ्रु़श बजलीह, पसि् समय मे पसि ्ऽ ीहल छलीह आ पसि मे ्ष होइश छलीहि 3 शखु स् ि्​् मे ए्रर आओी चमतरी दे खबर मे आयलि ए्रर प़घ लरल अज्ी, ज्ी सरश रर मरि आ दस रर सी् ं आ मरि पी सरश रर मु्ुर अकछि 4 ओ्ी पदँछ स् ि्​्​् शरीर सभ् कशहरई भर् खीकं च ्ऽ पृि् िी पी िेक् दे ल्ि 5 ओ ए्रर पुरष बचर् जन दे लकिु जे लोहर् डं डर सँ सभ जरकश ्ेँ ारसु ्ीबर् छलि 6 ओ स् ती जं्ल कदस भरक् ्ेलीह, जशऽ पीमेा् िी दरीर ओ्ीर ए् हजरी दद सय सरकठ कदु धरी भोजु ्ीरबय लेल श़यरी ्यल ्ेल अकछि 7 स् ि्​् मे यु​ु भेल, मरइ्ल आ ओ्ी स् ि्​्ददश अज्ी् सं् लडलि अज्ी आ ओ्ी स् ि्​्ददश सभ लडलि 8 ओ किजयी ुकह भेलि आ ुे हु्र सभ् सरु आब स् ि्​् मे भेरलकुि 9 ओ महरु अज्ी, जे बदढ सरँ प, ज्ीर ा़शरु आ ा़शरु ्हल जरइश अकछ, जे समस संसरी ्ेँ धोखर द़ श अकछ, ओ्ीर बरही कु्रकल दे ल ्ेलि 10 शखु हम स् ि्​् मे ए्रर जोीदरी आिरज सु​ुलहँ जे , “आब हमीर सभ् पीमेा् िी् उुरी, सरमि्​् य आ हमीर सभ् पीमेा् िी् ीरज् य आ हु्ी मसीह् सरमि्​् य आकब ्ेल अकछ आ ीरकशि 11 ओ सभ मेमुर् खदु आ अपु ्िरही सँ हु्र पी किजय परर ्यलकुि ओ सभ अपु परक सँ मृतु धरी पेम ुकह ्यलकुि 12 शे ँ हे स् ि्​् आ ओकह मे ीहकुहरी सभ, आुलनश होउि पृथी आ समुद् कुिरसी सभ् कधकरी! क्ए् शँ ा़शरु अहरँ सभ ल् बहश कोकधश भऽ उशरी ्ेल अकछ, क्ए् शँ ओ जु़श अकछ जे ओ्ीर ल् क्छु ए समय अकछि 13 अज्ी जखु दे खल् जे ओ्ीर पृि् िी पी िे्ल ्ेल अकछ, शखु ओ ओकह स् ती ्ेँ पशरकडश ्ऽ दे ल् जे पुरष संशरु ्ेँ जन दे ल्ि 14 ओकह स् ती ्ेँ ए्रर प़घ ्रड् दद रर परँ लख दे ल ्ेलकु, जरकह सँ ओ जं्ल मे उकड ्ऽ अपु सरु पी पहँ कच स्य, जशय ओ्ीर सरँ प् मुँह सँ क्छु समय, आ आधर समय धरी पोसल जरइश छ़ ्ि 15 सरँ प ओकह स् ती् परछरँ -परछरँ बरकढ ज्रँ परकु अपु मुँह सँ बरही कु्रकल दे ल्, जरकह सँ ओ ओ्ीर बरकढ सँ लऽ जरयि


प्रकाशिरव

16 पृि् िी स् ती ्ेँ सहरयशर ्यल् आ धीशी ओ्ी मुँह खोकल ्ऽ ओकह बरकढ ्ेँ कु्ल ्ेल जे अज्ी ओ्ी मुँह सँ बरही कु्रकल दे ल्ि 17 अज्ी ओकह स् ती पी कोकधश भऽ ्ेल आ ओ्ी िंाज् ाेष लो् सभ सँ यु​ु ्ीऽ लेल ्ेल जे पीमेा् िी् आजर् परलु ्ी़ श अकछ आ यीाु मसीह् ्िरही परकब ीहल अकछि

18 एशय बुलु अकछि बुलुमरु लो् जरुिी् संखर क्ुय, क्ए् शँ ओ मु​ुष् य् संखर अकछि आ ओ्ी संखर छह सौ छह छह अकछि अध रय 14 1 हम दे खलहँ शँ कसयोु पहरड पी ए्रर मेमुर ठरढ छल आ ओ्ीर सं् ए् लरख चौिरलीस हजरी लो्, ज्ी ्परी पी ओ्ी कपशर् ुरम कलखल छल़्ि 2 हम स् ि्​् सँ ए्रर आिरज सु​ुलहँ जे बहश ीरस परकु् आिरज आ ए्रर प़घ ्ीज् आिरज ज्रँ अकछि 3 ओ सभ कसंहरसु् समक, चरर परकी आ बदढ-पुीरु सभ् सोझरँ ुि ्ीश ज्रँ ्ब़श ीहलरह, मुदर ओ ्ीश पृि् िी सँ मुक ्यल ्ेल ए् लरख चौिरलीस हजरी लो्​् अकशरीक क्यो ुकह कसलख स्लि 4 ई सभ स् ती्क् सं् अाु​ु ुकह भेलरहि क्ए् शँ ओ सभ ्ुमररी छकि​ि ई सभ मेमुर् परछरँ -परछरँ चल़श अकछि ई सभ मु​ुष् य् बीच सँ मु्​् श ्यल ्ेलरह, जे पीमेा् िी आ मेमुर् पकहल िल छलि 5 हु्र सभ् मुँह मे ्ोुो छल ुकह भेरलकु, ्रीक पीमेा् िी् कसंहरसु् समक ओ सभ कुद्ष छकि​ि 6 हम दे खलहँ जे स् ि्​्​् बीच मे ए्रर आओी स् ि्​्ददश उकड ीहल छल, ओ्ीर ल् अु् सुसमरचरी छल जे ओ पृथी पी ीहकुहरी सभ ्ेँ, सभ जरकश-जरकश, सभ-जरकश, भरषर आ लो् सभ ्ेँ पचरी ्ीकि​ि 7 जोी-जोी सँ बजलरह, “पीमेा् िी सँ डे ीरउ आ हु्ी मकहमर ्रि क्ए् शँ हु्ी ु् यरय् समय आकब ्ेल अकछ, आ स् ि्​्, पृि् िी, समुद आ परकु् झीुर बुौकुहरी् आीरधुर ्रि” 8 ए्रर आओी स् ि्​्ददश परछरँ -परछरँ आकब ्ऽ ्हलकिु, “ओ महरु ु्ी बरबुल पकशश अकछ, खसल अकछ, क्ए् शँ ओ सभ जरकश ्ेँ अपु वकभचरी् कोध् मकदीर पीकब दे ल्ि” 9 शेसी स् ि्​्ददश हु्र सभ् परछरँ -परछरँ आकब जोी-जोी सँ बजलरह, “जँ ्ेओ पाु आ ओ्ी मदकश्​् आीरधुर ्ी़ श अकछ आ ओ्ी ्परी पी िर हरि मे ओ्ी कुारु ल्र ल़श अकछि 10 ओ पीमेा् िी् कोध् मकदीर पीकब लेश, जे हु्ी कोध् परलर मे कबुर ्ोुो कमशक् ढरील जरइश अकछि पकित स् ि्​्ददश आ मेमुर ्े सरमुे आक् आ ्ंध् सँ सशरओल जरयशि 11 हु्र सभ् यरशुर् धुँआ अु् ्रल धरी चढ़ श ीह़ श अकछ, आ जे जरुिी आ ओ्ी मदकश्​् आीरधुर ्ी़ श अकछ आ जे क्यो ओ्ी ुरम् कुारु परब़श अकछ, ओ्ीर सभ ्ेँ कदु-ीरकश ्ोुो किशरम ुकह भेऱश छ़ ्ि 12 एशय पकित लो् सभ् ध़य् अकछि 13 शखु हम स् ि्​् सँ ए्रर आिरज सु​ुलहँ जे हमीर ्ह़ श छल, ‘कलखद, ‘धन अकछ ओ मृश् सभ जे आब सँ पभु मे मी़ श अकछि आ हु्र सभ् ्रज हु्र सभ् परछरँ पड़ श अकछि 14 हम दे खलहँ शँ ए्रर उजी मेघ दे खलहँ आ मेघ पी मु​ुष् य-पुत ज्रँ ब़सल छल, मरि पी सोुर् मु्ुर आ हरि मे शेज हँ सुआि 15 ए्रर आओी स् ि्​्ददश मु् कदी सँ बरही आकब मेघ पी ब़सल लो् ्ेँ जोी-जोी सँ कचकचयर उठलरह, “अपु हँ सुआ िेक् ्ऽ ्रुी ्रि क्ए् शँ पृथी् िसल परक् ्ेल अकछि

अध रय 13 1 हम समुद् बरलु पी ठरढ भऽ दे खलहँ जे समुद मे सँ ए्रर जरुिी उकठ ीहल छल, ज्ी सरश रर मरि आ दस रर सी् ं छल, आ ओ्ी सी् ं पी दस रर मु्ुर आ मरि पी कुनर् ुरम छलि 2 हम जे जरुिी दे खलहँ से शेनदु आ ज्रँ छल, ओ्ी पएी भरलद् पएी ज्रँ छल आ ओ्ी मुँह कसंह् मुँह ज्रँ छलि 3 हम हु्ी ए्रर मरि जेुर घरयल भऽ ्ेल छल, शेुर दे खलहँ ि ओ्ी घरश् घरि ठी् भ’ ्ेल़, आ सभ संसरी ओकह जरुिी् परछरँ आशय्चक्श भ’ ्ेल़ि 4 ओ सभ ओकह अज्ी् आीरधुर ्यल् जे ओकह जरुिी ्ेँ अकध्री दे ल्ि ्े ओ्ीरसँ यु​ु ्ीबरमे सकम अकछ? 5 हु्र ए्रर मुँह दे ल ्ेलकु जे ओ बड्र-बड्र बरश आ कुनर ्ी़ श छलि बयरलीस मरस धरी ीहबर् अकध्री हु्र दे ल ्ेलकुि 6 ओ पीमेा् िी् कुनर ्ी़ श अपु मुँह खोकल ्ऽ हु्ी ुरम, अपु शमद आ स् ि्​् मे ीहकुहरी सभ् कुनर ्यलकुि 7 ओ्ीर पकित लो् सभ सँ यु​ु ्ीबर् आ ओ्ीर सभ पी किजय दे बर् अकध्री दे ल ्ेलकुि 8 पृि् िी पी ीहकुहरी सभ हु्ी आीरधुर ्ीश, कजु्ी ुरम संसरी् सृकष सँ मरील ्ेल मेमुर् जीिु् पुस् मे ुकह कलखल अकछि 9 जँ ्​्ीो ्रु अकछ शँ ओ सु​ुयि 10 जे बंदी बुर लेश से बंदी मे चकल जरयशि एशय संश लो्कु् ध़य् आ किशरस अकछि 11 हम दे खलहँ जे पृि् िी पी सँ ए्रर आओी जरुिी आकब ीहल अकछि ओ्ीर मेमुर ज्रँ दद रर सी् ं छल़् आ ओ अज्ी ज्रँ बज़श छल़्ि 12 ओ अपु समक पकहल पाु् समस सरमर्​् पयो् ्ी़ श अकछ आ पृि् िी आ ओकह मे ीहकुहरी सभ ्ेँ ओकह पकहल जरुिी् आीरधुर ्ीब़श अकछ, ज्ी घरश् घरि ठी् भऽ ्ेल छलि 13 ओ प़घ-प़घ चमतरी ्ी़ श अकछ, जरकह सँ लो्​् ुजरी मे स् ि्​् सँ आक् पृि् िी पी उशरी़ श अकछि 14 पृि् िी पी ीहकुहरी सभ ्ेँ ओकह चमश् ्री सभ् दरीर धोखर द़ श छकि जे हु्र ओकह जरुिी् ुजरी मे ्ीबर् सरमर् छलकुि पृि् िी पी ीहकुहरी सभ ्ेँ ्हलकिु जे ओ सभ ओकह जरुिी् मदकश् बुरउ जे शलिरी सँ घरि भऽ ्ेल छल आ जीकिश अकछि 15 ओ्ीर ओकह जरुिी् मदकश् ्ेँ जीिु दे बर् अकध्री छल़्, जरकह सँ ओ जरुिी् मदकश् बरजश आ जे क्यो जरुिी् मदकश्​् आीरधुर ुकह ्ीश ओ्ीर मररी दे ल जरयि 16 छोर-बड, धकु्-्ी​ीब, सशंत आ दरस सभ ्ेँ दकहुर हरि िर ्परी पी कुारु ल्रब़श छकि​ि “

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प्रकाशिरव

16 मेघ पी ब़सल लो् अपु हँ सुआ धीशी पी ध्ेकल दे ल्ि आ धीशी िसल ्रकर लेल्ि 17 ए्रर आओी स् ि्​्ददश स् ि्​्​् मु् कदी सँ बरही कु्ललरह, हु्र सं् ए्रर शेज हँ सुआ सेहो छलकुि 18 ए्रर आओी स् ि्​्ददश िेदी पी सँ कु्ललरह जे आक् पी अकध्री ीख़श छलि ओ शेज हँ सुआ प्डकुहरी ्ेँ जोी-जोी सँ कचकचयर उठलकु, “अपु शेज हँ सुआ घुसर कदयौ् आ पृथी् बेल ्ेी ्ुचर सभ ्ेँ जमर ्रि ्रीक ओ्ी अं्दी पदीर परक् ्ेल अकछि 19 स् ि्​्ददश अपु हँ सुआ धऽ ्ऽ पृि् िी् बेल ्ेँ जमर ्ऽ पीमेा् िी् कोध् बड्र दरर-्ुछ मे िेक् दे लकिुि 20 ु्ी् बरही दरर् ्ोडर दबरओल ्ेल आ दररदुरा मे सँ घोडर् ल्रम धरी ए् हजरी छह सय िीलों् धरी खदु कु्कल ्ेलि

3 दोसी स् ि्​्ददश अपु ्रोीर समुद पी उझकल दे लकुि ओ मृश् यु् खदु ज्रँ भऽ ्ेल, आ सभ जीकिश परकी समुद मे मरी ्ेलि 4 शेसी स् ि्​्ददश अपु ्रोीर ुदी आ परकु् िवरीर पी उझकल दे लकुि आ ओ सभ खदु बकु ्ेलि 5 हम परकु् स् ि्​्ददश ्ेँ ई ्ह़ श सु​ुलहँ जे , “हे पभु , अहरँ धम् छी, जे छी आ ीहब आ ीहब, क्ए् शँ अहरँ एकह शीहे ँ ु् यरय ्ेलहँ ि” 6 ओ सभ पकित आ भकिषिकर सभ् खदु बहौलकु आ अहरँ ओ्ीर सभ ्ेँ पीबय लेल खदु दऽ दे लहँ ि क्ए् शँ ओ सभ योग छकि​ि 7 हम िेदी पी सँ दोसी ्ेँ ्ह़ श सु​ुलहँ जे , “हे सि्ालकमरु पभु पीमेा् िी, अहरँ ् ु् यरय सश् य आ धरकम्​् अकछि” 8 चररीम स् ि्​्ददश अपु ्रोीर ीौद पी उझकल दे लकुि ओ्ीर आक् सँ मु​ुष्‍य ्ेँ जीे बर् अकध्री दे ल ्ेलकुि 9 लो् सभ बहश ्म् सँ झुलकस ्ेल आ पीमेा् िी् ुरम् कुनर ्यल् जे एकह किपकत सभ पी अकध्री ीख़श छकि​ि 10 परँ चम स् ि्​्ददश अपु ्रोीर ओकह जरुिी् आसु पी उझकल दे लकुि ओ्ी ीरज अनरी सँ भील छल़्ि ओ सभ पीडर् ्रीके ँ अपु जीह ्ऱ श ीहलरहि 11 ओ अपु पीडर आ घरि् ्रीके ँ स् ि्​्​् पीमेा् िी् कुनर ्यलकु आ अपु ्म् पी पशरशरप ुकह ्यलकुि 12 छठम स् ि्​्ददश अपु ्डरही यदफेकरस् प़घ ुदी पी उझकल दे लकुि ओ्ी परकु सुखर ्ेल़, जरकह सँ पदीब् ीरजर सभ् बरर श़यरी भ’ जरयि 13 हम दे खलहँ जे बे् ज्रँ शीुरर अाु​ु आश् मर अज्ी् मुँह सँ , जरुिी् मुँह सँ आ झदठ पि्​् शर् मुँह सँ कु्ल़श अकछि 14 क्ए् शँ ओ सभ दु ष् ररश् मर सभ् आश् मर सभ अकछ जे चमश् ्री ्ी़ श अकछ, जे पृि् िी आ समस संसरी् ीरजर सभ ल् जर ्ऽ सि्ालकमरु पीमेा् िी् ओकह महरु कदु् यु​ु मे जुररबय लेल जरइश अकछि 15 दे खद, हम चोी ज्रँ आकब ीहल छीि धन अकछ जे जर्ल ीह़ श अकछ आ अपु िस ीरख़श अकछ, जरकह सँ ओ ुं्रे ुकह चलश आ ओ्ी लरज ुकह दे लख लेशि 16 ओ ओ्ीर सभ ्ेँ ए् ठरम जमर ्ऽ दे लकिु ज्ीर कहबद भरषर मे आीमर्ेडोु ्हल जरइश छ़ ्ि 17 सरशम स् ि्​्ददश अपु ्रोीर हिर मे उझकल दे लकुि स् ि्​्​् मु् कदी सँ कसंहरसु सँ ए्रर जोीदरी आिरज आयल जे , “ई ्रज भऽ ्ेलि” 18 शखु आिरज, ्ीज आ कबजली् आिरज भेलि आ ए्रर प़घ भद्म भेल, जे जकहयर सँ मु​ुष पृथी पी छल शखु सँ ुकह भेल छल, एशे् ालकारली भद्म आ एशे् प़घि 19 महरु ु्ी शीु भर् मे बँकर ्ेल आ जरकश-जरकश् ु्ी सभ खकस पडल, आ महरु बरबुल पीमेा् िी् समक मोु परकड ्ऽ ओ्ीर पीमेा् िी् कोध् पचंड मकदीर् परलर दे बर् लेल आकब ्ेलि 20 सभ दीप भरक् ्ेल आ पहरड सभ ुकह भेरलि 21 स् ि्​् सँ मु​ुष् य सभ पी ए्रर प़घ ओलर पकड ्ेल, जे ए्ए् रर्र भरी छलि क्ए् शँ ओ्ी किपकत बहश बेसी छलि

अध रय 15 1 हम स् ि्​् मे ए्रर आओी कचु् ह दे खलहँ, जे प़घ आ अद् भुश छल, सरशरर स् ि्​्ददश ्ेँ अंकशम सरशरर किपकत छलकुि क्ए् शँ पीमेा् िी् कोध हु्र सभ मे भील अकछि 2 हम दे खलहँ जे ्रँ च समुद ज्रँ आक् कमलरओल ्ेल अकछ, आ जे सभ ओकह जरुिी पी, ओ्ी मदकश् पी, ओ्ी कुारुी पी आ ओ्ी ुरम् संखर पी किजय परर ्एुे लो् सभ ्रँ च समुद पी ठरढ अकछ , पीमेा् िी् िीकर् सं्ि 3 ओ सभ पीमेा् िी् सेि् मदसर् ्ीश आ मेमुर् ्ीश ्रकब ्ऽ ्ह़ श छकि जे , “हे सि्ालकमरु पीमेा् िी, शोही ्रज सभ प़घ आ अद् भुश अकछि हे पकित लो्​् ीरजर, शोही बरर धम् आ सश् य अकछि 4 हे पभु , अहरँ सँ ्े ुकह डे ीश आ अहरँ ् ुरम् मकहमर ुकह ्ीश? क्ए् शँ अहरँ मरत पकित छी, क्ए् शँ सभ जरकश अहरँ ् सोझरँ आकब ्ऽ आीरधुर ्ीशि क्ए् शँ अहरँ ् ु् यरय सभ प्र भऽ ्ेल अकछि” 5 श्ी बरद हम दे खलहँ जे स् ि्​् मे ्िरही-मु् त् मु् कदी खुजल अकछि 6 शखु सरशरर स् ि्​्ददश मु् कदी सँ बरही कु्ललरह, जरकह मे सरशरर किपकत छलकु, ाु​ु आ उजी कलु​ु ्पडर पकहीुे छलरह आ छरशी मे सोुर् पटी बरनुे छलरहि 7 चरर परकी मे सँ ए् परकी सरशरर स् ि्​्ददश ्ेँ सरश रर सोुर् ्डरही दे ल् जे पीमेा् िी् कोध सँ भील छल, जे अु् ्रल धरी जीब़श छकि​ि 8 पीमेा् िी् मकहमर आ हु्ी सरमि्​् य सँ मु् कदी धुँआ सँ भरी ्ेलि जरबश धरी सरश स् ि्​्ददश् सरशरर किपकत पदीर ुकह भऽ ्ेल शरबश धरी ्ेओ मु् कदी मे पिेा ुकह ्ऽ स्लि अध रय 16 1 शखु हम मु् कदी सँ ए्रर जोीदरी आिरज सु​ुलहँ जे सरशरर स् ि्​्ददश ्ेँ ्ह़ श छल, “जरउ आ पीमेा् िी् कोध् ्रोीर सभ ्ेँ पृि् िी पी उझकल कदयौ्ि” 2 पकहल लो् जर ्ऽ अपु ्रोीर धीशी पी उझकल दे ल्ि ओकह जरुिी् कुारुी पी आ ओ्ी मदकश्​् पदजर ्ीयिलर लो् सभ पी ए्रर ाोी्ुल आ ्ंभी​ी घरि पकड ्ेलि

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प्रकाशिरव

अध रय 17

अध रय 18

1 सरशरर ्रोीर लऽ ्ऽ सरशरर स् ि्​्ददश मे सँ ए् ्ोरे हमीर सँ ्प ्ऽ ्ऽ ्हलकिु, “एशऽ आकब जरउि हम अहरँ ्ेँ ओकह महरु िेशर् नरय दे खरयब जे बहश ीरस परकु पी ब़सल अकछि 2 पृि् िी् ीरजर सभ हु्र सं् वकभचरी ्ेुे छकि आ पृि् िी पी ीहकुहरी सभ हु्ी वकभचरी् मकदीर मे ुार मे धुत भऽ ्ेल छकि​ि 3 ओ हमीर आश् मर मे मरभदकम मे लऽ ्ेलरह आ हम दे खलहँ जे ए्रर स् ती ्ेँ लरल ीं ्​् जरुिी पी ब़सल छल, जे कुनर् ुरम सँ भील छल, ज्ी सरश रर मरि आ दस रर सी् ं छलि 4 ओ स् ती बै्ुी आ लरल ीं ्​् ्पडर पकहीुे छलीह आ सोुर आ ्ीमशी परिी आ मोशी सँ सजल छलीह, हरि मे सोुर् परलर छलकु जे घृककश आ वकभचरी् ्ंद्ी सँ भील छलकुि 5 ओ्ी ्परी पी ए्रर ुरम कलखल छल़्, “ीहस, महरु बेकबलोु, िेशर आ पृि् िी् घृककश बरश् मरयि” 6 हम ओकह स् ती ्ेँ पकित लो् सभ् खदु आ यीाु् ाहीद सभ् खदु सँ ुार मे धुत दे खलहँ ि 7 स् ि्​्ददश हमीर ्हलकिु, “अहरँ क्ए् आशय्चक्श भेलहँ? हम अहरँ ्ेँ ओकह सी आ ओ्ीर लऽ ्ऽ चलय बलर जरुिी् ीहस ्हब, ज्ी सरश मरि आ दस सी् ं अकछि 8 अहरँ जे जरुिी दे खलहँ से छल, आब ुकह अकछि आ अिरह ्डर सँ चकढ ्ऽ किुरा मे चकल जरयश, आ पृि् िी पी ीहकुहरी सभ आशय्चक्श भऽ जेशरह, ज्ी ुरम संसरी् सृकष सँ जीिु् पुस् मे ुकह कलखल ्ेल छल, जखु ओ सभ ओकह जरुिी ्ेँ दे खशरह जे छल आ ुकह अकछ, आ श़यो अकछि 9 आ एशय ओ मु अकछ ज्ीर मे बुलु अकछि सरश मरि सरश पहरड अकछ, जरकह पी सी ब़सल छकि​ि 10 सरशरर ीरजर छकि, परँ चरर खकस पडल छकि, ए्रर अकछ, आ दोसी एखु धरी ुकह आयल अकछि आ जखु ओ आओश शखु ओ्ीर िोडे ् ्रल धरी ीहय पडश़्ि 11 जे जरुिी छल, मुदर ुकह अकछ, ओ आठम अकछ आ सरश मे सँ अकछ आ किुरा मे चकल जरयशि 12 अहरँ जे दस सी् ं दे खलहँ से दसरर ीरजर अकछ, ज्ीर एखु धरी ्ोुो ीरज ुकह भेरल अकछि मुदर ओकह जरुिी् सं् ए् घंरर ीरजर् रप मे अकध्री परर ्रि 13 ई सभ ए् किचरी ीख़श छकि आ अपु सरमि्​् य आ सरमि्​् य पाु ्ेँ दऽ दे शरहि 14 ई सभ मेमुर सँ लडश आ मेमुर ओ्ीर सभ पी किजय परर ्ीश, क्ए् शँ ओ पभु सभ् पभु आ ीरजर सभ् ीरजर छकि​ि 15 ओ हमीर ्हलकिु, “जे परकु अहरँ दे खलहँ , जशऽ िेशर ब़सल अकछ, से लो्, भीड, जरकश आ भरषर अकछि” 16 अहरँ ओकह जरुिी पी जे दस सी् ं दे खलहँ, से ई सभ िेशर सँ घृकर ्ीश आ ओ्ीर उजरड आ ुं्रे बुर दे श आ ओ्ी मरं स खर ्ऽ आक् मे जीर दे शि 17 पीमेा् िी हु्र सभ् मोु मे अपु इचर पदीर ्ीबर् लेल, ए्मश ्ीबर् लेल आ अपु ीरज् य पाु ्ेँ दऽ दे बर् लेल ीरलख दे ुे छकि, जरबश धरी पीमेा् िी् िचु पदीर ुकह भऽ जरयशि 18 जे स् ती ्ेँ अहरँ दे खलहँ से ओ महरु ु्ी अकछ जे पृि् िी् ीरजर सभ पी ीरज ्ी़ श अकछि

1 एकह बरश सभ् बरद हम ए्रर आओी स् ि्​्ददश ्ेँ स् ि्​् सँ उशी़ श दे खलहँ जे बहश सरमि्​् य छलि ओ्ी मकहमर सँ धीशी हलु् भऽ ्ेल़ि 2 ओ जोी-जोी सँ कचकचयर उठलरह, “बड्र बरबुल पकशश भऽ ्ेल अकछ, खकस पडल अकछ, आ दु षरटर सभ् आिरस बकु ्ेल अकछ, आ सभ अाु​ु आ घृककश कचड़ सभ् कपंजीर बकु ्ेल अकछि” 3 क्ए् शँ सभ जरकश ओ्ी वकभचरी् कोध् मकदीर पीकब ्ेल अकछ आ पृि् िी् ीरजर सभ ओ्ीर सं् वकभचरी ्ेल् आ पृि् िी् वरपरी​ी सभ ओ्ी पचुी भोजु् ्रीके ँ धुी भऽ ्ेल अकछि 4 हम स् ि्​् सँ ए्रर आओी आिरज सु​ुलहँ जे , “हे हमी पजर, ओ्ीर सँ बरही कु्लद, जरकह सँ अहरँ सभ ओ्ी परप मे भर्ी ुकह बुब आ ओ्ी किपकत सँ ुकह परकब जरउि” 5 क्ए् शँ ओ्ी परप स् ि्​् धरी पहँ कच ्ेल अकछ आ पीमेा् िी ओ्ी अधम्​् सीक ्यलकुि 6 जेुर ओ अहरँ सभ ्ेँ इुरम दे लकु, शकहुर ओ्ीर पकशिल कदअ आ ओ्ी ्रज् अु​ुसरी ओ्ीर दु ्ु​ुर ्ऽ कदयौ्ि 7 ओ ्शे् मकहमरमंडु ्ऽ ्ऽ सरकदष जीिु जीब़श छकि, शे ँ ओशे् यरशुर आ दु ःख दऽ कदयौु, क्ए् शँ ओ मोु मे ्ह़ श छकि जे , “हम ीरुी ब़सल छी, आ किधिर ुकह छी आ ्ोुो दु ःख ुकह दे खबि” 8 शे ँ ए् कदु मे ओ्ी किपकत आओश, मृतु, ाो् आ अ्रलि ओ आक् मे पदक् रप सँ जरी जेशीह, क्ए् शँ ओ्ी ु् यरय ्ीयिलर पभु पीमेा् िी बलिरु छकि​ि 9 पृि् िी् ीरजर सभ जे सभ वकभचरी ्ेुे छकि आ हु्र सं् ीमकीय जीिु जीब़श छकि, ओ सभ जखु हु्ी जी़ श धुँआ दे खशरह शखु हु्र किलरप ्ीशरह आ हु्र लेल किलरप ्ीशरहि 10 ओ अपु यरशुर् भय सँ दद ी ठरढ भऽ ्ऽ ्हलकिु, “हरय, ओ महरु ु्ी बरबुल, ओ पीरकमी ु्ी!” क्ए् शँ ए् घंरी मे अहरँ ् ु् यरय आकब ्ेल अकछि” 11 पृि् िी् वरपरी​ी सभ ओ्ीर पी ्रुश आ ाो् ्ीशि क्ए् शँ आब ्ेओ अपु मरल-जरल ुकह ्ीुशि “ , पीशल, लोहर, सं्मीमी ्ेि 13 दरलचीुी, ्ंध, मीहम, लोबरु, मकदीर, शेल, महीु आरर, ्हम, पाु, भेड, घोडर, ीि, दरस आ मु​ुष् य् परकि 14 अहरँ ् परकी जे िल चरह़ श छल, से अहरँ सँ चकल ्ेल अकछ, आ सभ क्छु सरकदष आ ुी् िसु अहरँ सँ चकल ्ेल अकछ, आ अहरँ ्ेँ ओ सभ आब ए्दम ुकह भेरशि 15 एकह बरश् वरपरी​ी सभ जे हु्र दरीर धकु् बुरओल ्ेल छलकु, ओ सभ हु्ी यरशुर् भय सँ दद ी ठरढ भऽ ्ऽ ्रकु्रकु आ किलरप ्ी़ श ीहशरहि 16 ओ ्हलकु, “हरय, ओ महरु ु्ी, जे महीु कलुेु, बै्ुी, लरल ीं ्​् ्पडर पकहीुे छल, आ सोुर, ्ीमशी परिी आ मोशी सँ सजल छल! 17 क्ए् शँ ए् घंरर मे एशे् प़घ धु-दौलश अन भऽ ्ेलि जहरज् मरकल्, जहरज पी ब़सल सभ दल, ुरकि् आ समुद् मर्​् मे वरपरी ्ीयिलर सभ लो् दद ी ठरढ भ' ्ेलरहि 18 हु्ी जी़ श धुँआ दे लख ओ सभ कचकचयर उठलकु जे , “ई महरु ु्ी् ्ेहु ाही अकछ?”

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प्रकाशिरव

19 ओ सभ अपु मरि पी धदीर िेक् ्ऽ ्रु़श आ ्रु़श कचकचयर उठलरह, “हरय, ओ महरु ाही, ज्ी मह् ्रीके समुद मे जहरज ीखकुहरी सभ धुी भ’ ्ेल छल! ्रीक ए् घंरर मे ओ उजरड भ’ ्ेल छकि​ि 20 हे स् ि्​्, आ अहरँ सभ पकित पेरीश आ पि्​् शर सभ, हु्र पी आुलनश ीहि क्ए् शँ पीमेा् िी अहरँ सभ ्ेँ ओ्ी बदलर लेुे छकि​ि” 21 ए्रर पीरकमी स् ि्​्ददश ए्रर प़घ चकी् परिी ज्रँ परिी उठर ्ऽ समुद मे िेक् दे लकिु आ ्हलकिु, “ओ प़घ ु्ी बरबुल एकह शीहे ँ कहं सर् सं् िेक् दे ल जरयश आ िेी ्कहयो ुकह भेरशि” 22 आब अहरँ मे िीकर बजरबय बलर, िरज बजकुहरी, ुली बजरबय बलर आ शुीही बजौकुहरी् आिरज ुकह सु​ुल जरयशि आब अहरँ मे ्ोुो ्री​ी्ी, जे क्छु ्री​ी्ी हो, ुकह भेरशि आब शोीर मे चकी परिी् आिरज ए्दम ुकह सु​ुल जरयशि 23 आब अहरँ मे दीयर् इजोश ए्दम ुकह चम्शि आब अहरँ मे िी आ ्कुयरँ ् आिरज ए्दम ुकह सु​ुल जरयशि ्रीक, अहरँ ् जरदद -रोुर सँ सभ जरकश धोखर दे ल ्ेलि 24 हु्र मे भकिषिकर, पकित लो् आ पृि् िी पी मरील ्ेल सभ लो्​् खदु भेरल छलि अध रय 19 1 एकह बरश् बरद हम स् ि्​् मे बहशो लो्​् आिरज सु​ुलहँ जे, “अलेलुयर! उुरी, मकहमर, आदी आ सरमर् , हमीर सभ् पीमेा् िी पीमेा् िी् लेलि 2 ्रीक, हु्ी ु् यरय सश् य आ धरकम्​् अकछ, क्ए् शँ ओ ओकह महरु िेशर पी ु् यरय ्यलकु, जे अपु वकभचरी सँ पृि् िी ्ेँ किुरा ्ऽ दे लकु आ ओ्ी हरि सँ अपु ुो्ी सभ् खदु् बदलर लेलकुि 3 ओ सभ िेी ्हलकिु, “अलेलुयर!” आ ओ्ी धुँआ सदर् लेल उकठ ्ेल़ि 4 चरर बीस बदढ आ चररी परकी खकस पडलरह आ कसंहरसु पी ब़सल पीमेा् िी् आीरधुर ्यलकु आ ्हलकिु, “आमेु! एलेलुइयरि 5 शखु कसंहरसु सँ ए्रर आिरज कु्लल जे, “हे हु्ी सभ सेि् आ हु्र सँ डीय बलर छोर-प़घ, हमीर सभ् पीमेा् िी् सुकश ्रि” 6 हम बहश भीड् आिरज आ बहश ीरस परकु् आिरज आ पबल ्ीजबर् आिरज ज्रँ सु​ुलहँ जे , “अलेलुयर! 7 हम सभ आुलनश भऽ आुलनश भऽ हु्र आदी ्ी​ी, क्ए् शँ मेमुर् कि​िरह भऽ ्ेल अकछ आ हु्ी स् ती अपुर ्ेँ श़यरी ्ऽ लेुे छकि​ि 8 ओ्ीर महीु कलु​ु, सरि आ उजी िस मे सजल ीहबर् अु​ुमकश दे ल ्ेल़्, क्ए् शँ महीु कलु​ु पकित लो्​् धरकम्​्शर कि्ि 9 ओ हमीर ्हलकिु, “कलखद, “धन अकछ ओ सभ जे मेमुर् कि​िरह् भोज मे बजरओल ्ेल अकछि” ओ हमीर ्हलकिु, “ई सभ पीमेा् िी् सश् य बरश अकछि” 10 हम हु्ी आीरधुर ्ीबर् लेल हु्ी पयी पी खकस पडलहँ ि ओ हमीर ्हलकिु, “दे खद, अहरँ ई ्रज ुकह ्रि

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11 हम स् ि्​् खुजल दे खलहँ आ दे खलहँ जे ए्रर उजी घोडरि जे हु्र पी ब़सल छल, ओ्ीर किशरसी आ सचर ्हल ्ेल छल, आ धरकम्​्शर मे ओ नरय ्ी़ श अकछ आ यु​ु ्ी़ श अकछि 12 हु्ी आँ लख आक् ्े लौ ज्रँ छलकु आ मरि पी बहश ीरस मु्ुर छलकुि हु्र ए्रर एहु ुरम कलखल छलकु जे हु्र छोकड ्​्ीो ुकह बुझल छलकुि 13 ओ खदु मे डु बरओल िस पकहीुे छलरह आ हु्ी ुरम पीमेा् िी् िचु अकछि 14 स् ि्​् मे जे सेुर सभ उजी घोडर पी सिरी भऽ ्ऽ हु्र परछरँ -परछरँ चल़श छल, जे महीु कलु​ु, उजी आ सरि-सुिीर ्पडर पकहीुे छलि 15 ओ्ी मुँह सँ ए्रर शेज शलिरी कु्ल़श छ़ ्, जरकह सँ ओ जरकश सभ ्ेँ मररी दे श़्, आ ओ लोहर् छडी सँ ओ्ीर सभ पी ीरज ्ीशि 16 ओ्ी िस आ जरँ घ पी ए्रर ुरम कलखल छ़ ्, “ीरजर सभ् ीरजर आ पभु सभ् पभुि” 17 हम ए्रर स् ि्​्ददश ्ेँ ीौद मे ठरढ दे खलहँ ि ओ जोी-जोी सँ कचकचयर उठलरह आ स् ि्​्​् बीच उडय बलर सभ कचड़ सभ ्ेँ ्हलकिु, “आउ आ महरु पीमेा् िी् भोज मे अपुर ्ेँ जमर ्रि 18 अहरँ सभ ीरजर सभ् मरं स, सेुरपकश सभ् मरं स, पीरकमी सभ् मरं स, घोडर सभ् मरं स आ ओकह पी ब़सल लो् सभ् मरं स आ सभ लो्​् मरं स, सशंत आ दरस दु ुद् मरं स खर स्ब छोर-छोर आ प़घि 19 हम दे खलहँ जे ओ जरुिी आ पृि् िी् ीरजर सभ आ ओ्ी सेुर सभ घोडर पी ब़सल लो् आ ओ्ी सेुर् किरु यु​ु ्ीबर् लेल जमर भऽ ्ेल छलि 20 ओ जरुिी आ ओ्ीर सं् ओ झदठर भकिषिकर सेहो प्कड लेल ्ेल जे ओ्ीर सरमुे चमतरी ्ी़ श छल, जरकह सँ ओ जरुिी् कुारुी परकब ीहल लो् सभ आ ओ्ी मदकश्​् पदजर ्ीयिलर सभ ्ेँ धोखर दे ल्ि ई दु ुद ्ोरे जीब़श ्ंध् सँ जी़ श आक् ्ेी पोखरी मे िेक् दे ल ्ेलि 21 ाेष लो् सभ घोडर पी ब़सल लो्​् शलिरी सँ मरील ्ेल, जे शलिरी हु्ी मुँह सँ कु्लल छलि अध रय 20 1 हम ए्रर स् ि्​्ददश ्ेँ स् ि्​् सँ उशी़ श दे खलहँ , ज्ीर हरि मे अिरह ्डर् चरभी आ ए्रर प़घ जंजी​ी छलि 2 ओ अज्ी, ओकह बदढ सरँ प ्ेँ, जे ा़शरु आ ा़शरु अकछ, ्ेँ प्कड लेल् आ ओ्ीर हजरी िष् धरी बरलन दे ल्ि 3 ओ्ीर अिरह ्डर मे िेक् कदयौ् आ ओ्ीर बंद ्ऽ कदयौ् आ ओ्ीर पी मोही ल्र कदयौ् जे जर धरी हजरी िष् पदीर ुकह भऽ जरयश शर धरी ओ जरकश सभ ्ेँ आब धोखर ुकह दे शि 4 हम कसंहरसु दे खलहँ आ ओ्ीर सभ पी ब़सल आ ओ्ीर सभ ्ेँ नरय ्यल ्ेलि ुे ओ्ी पकशरप आ ुे ओ्ीर सभ् ्परी पी आ ुे ओ्ीर सभ् हरि मे ओ्ी कुारु पडल छल़्ि ओ सभ मसीह् सं् ए् हजरी िष् धरी जीकिश ीहलरह आ ीरज ्ेलकुि 5 मुदर बरँ ्ी मृश् सभ िेी सँ जीकिश ुकह भेल जरबश धरी हजरी िष् पदीर ुकह भऽ ्ेलि ई पकहल पु​ुरुरु अकछि


प्रकाशिरव

6 धन आ पकित अकछ जे पकहल पु​ुरुरु मे भर् ल़श अकछ, एहु लो् पी दोसी मृतु् ्ोुो अकध्री ुकह अकछ, बल् क् ओ सभ पीमेा् िी आ मसीह् पुीोकहश होयश आ हु्र सं् हजरी िष् धरी ीरज ्ीशि 7 जखु हजरी िष् समरर भऽ जरयश शखु ा़शरु ्ेँ अपु जेल सँ मुक ्ऽ दे ल जरयशि 8 पृि् िी् चरर ्रश मे जे जरकश अकछ, ्ो् आ मर्ो् ्ेँ धोखर दे बय लेल कु्लश, जरकह सँ ओ्ीर सभ ्ेँ यु​ु मे जुररबय पडश़्ि 9 ओ सभ पृथी् चौडरई पी चकढ ्ऽ पकित लो् सभ् डे ीर आ कपय ु्ी् चरर ्रश घुकम ्ेलि 10 जे ा़शरु ओ्ीर सभ ्ेँ धोखर दे ल्, ओ्ीर आक् आ ्ंध्​् पोखरी मे िेक् दे ल ्ेल, जशय ओ जरुिी आ झदठर भकिषिकर अकछ, आ ओ्ीर सभ ्ेँ कदु-ीरकश अु् ्रल धरी ्ष दे ल जरयशि 11 हम ए्रर प़घ उजी कसंहरसु आ ओकह पी ब़सल लो् ्ेँ दे खलहँ, ज्ी मुँह सँ पृथी आ आ्रा भरक् ्ेल छलि आ हु्र सभ् लेल ्ोुो ज्ह ुकह भेरलकुि 12 हम दे खलहँ जे छोर-प़घ मृश् सभ पीमेा् िी् समक ठरढ अकछि क्शरब सभ खुजल, आ ए्रर आओी क्शरब खुजल, जे जीिु् क्शरब अकछ, आ मृश् सभ् ु् यरय ओकह बरश सभ मे सँ ्यल ्ेल जे क्शरब सभ मे कलखल छल, ओ्ी सभ् ्रज् अु​ुसरीि 13 समुद ओकह मृश् यु सभ ्ेँ छोकड दे ल्ि मृतु आ ुी् ओ्ीर सभ मे जे मृश् छल, ओ्ीर सभ ्ेँ सौंप दे ल्ि 14 मृतु आ ुी् आक्​् पोखरी मे िेक् दे ल ्ेलि ई दोसी मृतु कि्ि 15 जे ्ेओ जीिु् पुस् मे कलखल ुकह भेरल, ओ्ीर आक्​् पोखरी मे िेक् दे ल ्ेलि

8 मुदर भयभीश, अकिशरसी, घृककश, हतरीर, िेशर, जरदद ्ी, मदकश्पदज् आ सभ झदठ बरजकुहरी, आक् आ ्ंध् सँ जी़ श झील मे अपु भर् लेशि 9 ओकह सरशरर स् ि्​्ददश मे सँ ए् ्ोरे हमीर ल् आकब ्ेलरह, कजु्र ल् सरशरर अंकशम किपकत सँ भील सरशरर ाीाी छलकु, आ हमीर सँ ्प ्यलकु जे, “एशय आउ, हम अहरँ ्ेँ ्कुयरँ , मेमुर् पती ्ेँ दे खर दे बि” 10 ओ हमीर आश् मर सँ ए्रर प़घ आ ऊँच पहरड पी लऽ ्ेलरह आ पीमेा् िी् कदस सँ स् ि्​् सँ उशी़ श महरु ु्ी पकित यरालेम हमीर दे खर दे लकुि 11 हु्र पीमेा् िी् मकहमर छलकुि 12 ओ्ी ए्रर दे बरल प़घ आ ऊँच, बरीह रर िरर् आ िरर् पी बरीह स् ि्​्ददश आ ओकह पी ुरम कलखल छल, जे इसरएल् बरीह ्ोत् ुरम अकछि 13 पदब कदस शीु रर िरर्ि उती कदस शीु िरर्; दककक कदस शीु िरर्; आ पकशम कदस शीु रर िरर्ि 14 ाही् दे बरल पी बरीह रर ुीिं छल आ ओकह मे मेमुर् बरीह पेरीश् ुरम कलखल छलि 15 जे हमीर सं् ्प ्ी़ श छल, ओ्ीर ल् सोुर् खढ छल जे ु्ी, ओ्ी िरर् आ ओ्ी दे बरल ुरप़श छलि 16 ओ ाही चररी चौ्ोी अकछ आ ओ्ी लमरई चौडरई ज्रँ प़घ अकछि ए्ी लमरई आ चौडरई आ ऊँचरई बीरबी अकछ ि 17 ओ ओ्ी दे बरल ए् सय चौिरलीस हरि ुरकप लेल्, जे ए् आदमी् ुरप अिर् श स् ि्​्ददश् ुरप ्े अु​ुसरी छलि 18 ओ्ी दे िरल् कुमर् क यरसी् छल आ ु्ी ाु​ु ्रँ च ज्रँ ाु​ु सोुर् छलि 19 ु्ी् दे बरल् ुीिं सभ शीह् ्ीमशी परिी सँ सजरओल ्ेल छलि पकहल ुीिं जेसी छल; दोसी, ुीलमकक; शेसी, ए्रर चरलीडोुी; चररीम, ए्रर पनर; 20 परँ चम, सरड्कुनि छठम, सरकड् यस; सरशम, करइसोलरइर; आठम, बेरील; ुिम, ए्रर पुखीरज; दसम, ए्रर करइसोपरसस; ए्रीहम, ए्रर ज़कस्; बरीहम, ए् ुीलमि 21 बरीह िरर् बरीह रर मोशी छलि ही ्शे्ो िरर् ए् मोशी् छल, आ ाही् ्ली ाु​ु सोुर् छल, जेुर परीदा् ्रँ चि 22 हम ओकह मे ्ोुो मु् कदी ुकह दे खलहँ , क्ए् शँ सि्ालकमरु पभु पीमेा् िी आ मेमुर ए्ी मु् कदी अकछि 23 ओकह ु्ी मे ीौद आ ुे चरु ्ेी पयोजु ुकह छल़्, क्ए् शँ पीमेा् िी् मकहमर ओ्ीर इजोश ्ऽ दे ल़्् आ मेमुर ओ्ी इजोश छ़ ि 24 उुरी परओल जरकश सभ ए्ी इजोश मे चलश आ पृि् िी् ीरजर सभ अपु मकहमर आ आदी एकह मे अु़श अकछि 25 कदु मे ओ्ी िरर् ए्दम बंद ुकह होयश, क्ए् शँ ओशऽ ीरकश ुकह ीहशि 26 ओ सभ जरकश-जरकश सभ् मकहमर आ आदी एकह मे आुशि 27 ओकह मे ्ोुो अाु​ु ्ीकुहरी आ ुे घृककश ्रज िर झदठ बरजकुहरी ्ोुो िसु ओकह मे पिेा ुकह ्ीशि

अध रय 21 1 हम ए्रर ुि स् ि्​् आ ुि पृि् िी दे खलहँ , क्ए् शँ पकहल स् ि्​् आ पकहल पृि् िी समरर भऽ ्ेलि आब समुद ुकह ीकह ्ेलि 2 हम यदहु् ुर पकित ु्ी, ुि यरालेम ्ेँ पीमेा् िी् कदस सँ स् ि्​् सँ उशी़ श दे खलहँ , जे अपु पकश् लेल सुाोकभश ्कुयरँ ज्रँ श़यरी छलि 3 शखु हम स् ि्​् सँ ए्रर जोीदरी आिरज सु​ुलहँ जे , “दे खद, पीमेा् िी् शमद मु​ुष् य सभ् सं् अकछ आ ओ हु्र सभ् सं् ीहशरह आ ओ सभ हु्ी पजर होयश आ पीमेा् िी हु्र सभ् सं् ीहशरह आ हु्र सभ् पीमेा् िी बुशरहि” 4 पीमेा् िी हु्र सभ् आँ लख सँ सभ ुोी पोछशरहि आब ुे मृतु होयश, ुे दु ख, ुे ्रुब, आ ुे ्ोुो पीडर, क्ए् शँ पकहुे ्े बरश बीकश ्ेल अकछि 5 कसंहरसु पी ब़सल लो् ्हलकिु, “दे खद, हम सभ क्छु ुि बुर ीहल छीि” ओ हमीर ्हलकिु, “कलखद , क्ए् शँ ई बरश सभ सश् य आ किा् िरसयो्​् य अकछि” 6 ओ हमीर ्हलकिु, “ई ्रज भऽ ्ेलि” हम अलर आ ओमे्र छी, ाुरआश आ अंशि जे परसल अकछ ओ्ीर हम जीिु् जल् िवरीर मुफ मे दे बि 7 जे जीशश से सभ िसु् उतीरकध्री​ी होयशि हम हु्ी पीमेा् िी बुब आ ओ हमी पुत बुशरहि

अध रय 22 1 ओ हमीर पीमेा् िी आ मेमुर् कसंहरसु सँ कु्ल़श सकर् ज्रँ सरि जीिु् जल् ाु​ु ुदी दे खौलकुि

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प्रकाशिरव

2 ओ्ी ्ली आ ुदी् दु ुद ्रश जीिु् ्रछ छल जे बरीह शीह् िल द़ श छल आ ही महीुर अपु िल द़ श छल ीरष् सभि 3 आब ्ोुो अकभारप ुकह होयश, मुदर पीमेा् िी आ मेमुर् कसंहरसु ओकह मे ीहशि ओ्ी सेि् सभ ओ्ी सेिर ्ीशि 4 ओ सभ हु्ी मुँह दे लख लेशरहि हु्ी ुरम हु्र सभ् ्परी मे ीहशकुि 5 ओशऽ ीरकश ुकह ीहशि आ ुे ओ्ीर सभ्ेँ मोमबती आ ुे ीौद् इजोश चरहीि क्ए् शँ पभु पीमेा् िी हु्र सभ ्ेँ इजोश द़ श छकिुि 6 ओ हमीर ्हलकिु, “ई बरश सभ किा् िरसपदक् आ सश् य अकछि 7 दे खद, हम ज्ी-ज्ी आकब ीहल छीि 8 हम यदहु् ुर ई सभ दे खलहँ आ सु​ुलहँ ि जखु हम सु​ुलहँ आ दे खलहँ शँ हम ओकह स् ि्​्ददश् पएी् सोझरँ आीरधुर ्ीबर् लेल खकस पडलहँ जे हमीर ई सभ बरश दे खौलकुि 9 शखु ओ हमीर ्हलकिु, “दे खद, अहरँ ई ्रज ुकह ्र, क्ए् शँ हम अहरँ ् सं्ी-सेि् छी, अहरँ सभ् भरय पि्​् शर सभ् आ एकह पुस् मे कलखल बरश सभ् परलु ्ीकुहरी सभ् सं्ी-सेि् छीि 10 ओ हमीर ्हलकिु, “एकह पुस्​् भकिषिरकी् बरश पी मोही ुकह ल्रउ, क्ए् शँ समय ल् आकब ्ेल अकछि” 11 जे अधम् अकछ, ओ अधम् ीहय, आ जे ्ंदर अकछ, से एखुो ्ंदर ीहयि 12 दे खद, हम ज्ी-ज्ी आकब ीहल छीि हमी इुरम हमीर सं् अकछ जे हम पते् ्े अपु ्रज ्े अु​ुसरी दे बि” 13 हम अलर आ ओमे्र छी, आीं भ आ अंश, पकहल आ अंकशमि 14 धन छकि जे हु्ी आजर् परलु ्ी़ श छकि, जरकह सँ हु्र सभ ्ेँ जीिु् ्रछ पी अकध्री भेकर जरय आ ओ सभ िरर् सँ ु्ी मे पिेा ्ऽ स्कि​ि 15 बरही ्ु्ुी, जरदद ्ी, िेशर, हतरीर, मदकश्पदज् आ जे क्यो झदठ पेम ्ी़ श अकछ आ झदठ बरज़श अकछ, अकछि 16 हम यीाु अपु स् ि्​्ददश ्ेँ पठौुे छी जे अहरँ सभ ्ेँ मक् डली मे एकह बरश सभ् ्िरही दे बि हम दरऊद् जकड आ संशरु छी, आ उजल आ भोी्र शरीर छीि 17 आश्‍मर आ ्कुयरँ ्ह़ श छकिु, “आउि” जे सु​ु़श अकछ से ्हय, “आउि” आ जे परसल अकछ से आबयि आ जे चरहकि, ओ जीिु् परकु मुफ मे ल' लेकि​ि 18 हम एकह पुस्​् भकिषिरकी् िचु सु​ुकुहरी सभ ्ेँ ्िरही द़ श छी जे , “जँ ्ेओ एकह सभ मे क्छु जोडश शँ पीमेा् िी ओ्ीर एकह पुस् मे कलखल किपकत सभ ्ेँ जोकड दे शरहि 19 जँ ्ेओ एकह भकिषिरकी् पुस्​् िचु सभ सँ हकर लेश शँ पीमेा् िी जीिु् पुस् आ पकित ु्ी आ एकह पुस् मे कलखल बरश सभ सँ ओ्ी कहसर छीु लेशरहि 20 जे एकह बरश सभ् ्िरही द़ श अकछ से ्ह़ श अकछ जे , “हम ज्ीए आकब ीहल छीि” आमीुि शइयो, आऊ, पभु यीाुि 21 हमीर सभ् पभु यीाु मसीह् ्ृपर अहरँ सभ् सं् ीहयि आमीुि

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