बोनिहारक दृा् मत् १३:१-२३ 1 ओह् निि य्शु घर सँ बाहर निकनि समुदक कात मे बैसिाह। 2 बहतो भ्ड हिका िग जमा भऽ गेिाह आ ओ एकटा िाव मे बैनस कऽ बैनस गेिाह। समस भ्ड नकिार पर ठाढ भ’ गेि। 3 ओ हिका सभ केँ दृा् मे बहतो बात कहिनिि, “ िे खू, एकटा बोनिहार बोनिय िेि निकिि छि। 4 जखि ओ बोइिाह तँ बाट कात मे नकछु ब्या खनस पडि आ निडै सभ आनब कऽ ओकरा सभ केँ खा गेि। 5 नकछु गोटे पािरक साि पर खनस पडिाह, जतऽ हिका सभ िग बेस् मानट िनह छिनि। 6 रौि उगिा पर ओ सभ जरर गेिाह। जनड िनह रहबाक कारणे ँ ओ सभ मुरझा गेि। 7 नकछु काँ टक ब्ि खनस पडि। काँ ट उगनि कऽ ओकरा सभक गिा िबा िे िक। 8 मुिा नकछु ि्क जम्ि मे खनस पडि आ नकछु सौ गुिा, नकछु सानठ गुिा, नकछु त्स गुिा फि िे िक। 9 जकरा सुिबाक काि अनछ, ओ सुिय। 10 नशष्य सभ आनब कऽ हिका पुछिनिि, “अहाँ हिका सभ सँ दृा् मे नकएक बजैत छ्? 11 ओ हिका सभ केँ उतर िे िनिि, “ नकएक तँ अहाँ सभ केँ स् वग्क राज् यक रहस् य सभ केँ जािबाक अनिकार िे ि गेि अनछ, मुिा हिका सभ केँ ई बात िनह िे ि गेि अनछ।” 12 जकरा िग अनछ, ओकरा िे ि जायत आ ओकरा बेस् पिुरता भेटतैक। 13 ते ँ हम हिका सभ केँ दृा् मे बानज रहि छ्। सुनि कऽ ओ सभ िनह सुिैत अनछ आ िे बुझैत अनछ। 14 हिका सभ मे यशायाहक भनवषवाण् पूरा होइत अनछ जे कहै त अनछ जे, “सुनि कऽ अहाँ सभ सुिब आ िनह बुझब।” अहाँ सभ िे खब, मुिा िनह बुझब। 15 एनह िोक सभक हिय सूि भऽ गेि अनछ आ काि सुिबा मे ि्रस भऽ गेि अनछ आ आँ खख मुनि गेि अनछ। कह् ं ओ सभ कनहयो आँ खख सँ िे खख कऽ काि सँ सुित आ हिय सँ बुनझ िनह सकनि आ िम् पररवत्ि िनह कऽ सकनि आ हम हिका सभ केँ ठ्क कऽ सकब।” 16 मुिा अहाँ क आँ खख िन अनछ, नकएक तँ ओ िे खैत अनछ, आ काि सुिैत अनछ।
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17 हम अहाँ सभ केँ सत्य कहै त छ् जे अहाँ सभ जे नकछु िे खैत छ्, तकरा बहतो पवक् ता आ िम् िोक सभ िे खबाक इचा रखैत छनि। आ जे बात अहाँ सभ सुिैत छ्, तकरा सुिैत छ्, मुिा िनह सुििे छ्। 18 ते ँ अहाँ सभ बोनिहारक दृा् सुिू। 19 जखि केओ राजक विि सुिैत अनछ आ ओकरा िनह बुझैत अनछ, तखि िु ृ आनब कऽ अपि हिय मे जे नकछु बोरि छि, तकरा पकनड िैत अनछ। ई ओ छनि नजिका रसाक कात मे ब्या भेटिनि। 20 मुिा जे ब्या पािरक साि पर िऽ गेि अनछ, से ओ अनछ जे विि सुिैत अनछ आ आिन सँ ओकरा गहण करै त अनछ। 21 तैयो ओ अपिा मे जनड िनह जमा िेिे अनछ, बि् नक नकछु समयक िेि नटकि अनछ, नकएक तँ जखि वििक कारणे ँ कृ वा सताओि जाइत अनछ तखि ओ तस भऽ जाइत अनछ। 22 जे काँ टक ब्ि मे ब्या पानब गेि अनछ, से ओ अनछ जे विि सुिैत अनछ। एनह संसारक नि्ा आ ििक छि-पपंि विि केँ गिा घोंटैत अनछ आ ओ निषि भऽ जाइत अनछ। 23 मुिा ि्क भूनम मे जे ब्या िऽ गेि अनछ से ओ अनछ जे विि सुिैत अनछ आ ओकरा बुझैत अनछ। जे फि सेहो िै त अनछ आ नकछु सौ गुिा, नकयो सानठ, नकछु त्स गुिा फि िै त अनछ।
मरकु स 4:1-20 1 ओ फेर समुदक कात मे नशका िे बय िगिाह, तखि हिका िग बहत रास भ्ड जमा भ’ गेिनि, जानह सँ ओ एकटा िाव मे बैनस समुद मे बैनस गेिाह। समस भ्ड समुदक कात मे जम्ि पर छि। 2 ओ हिका सभ केँ दृा् दारा बहत नकछु नसखबैत छिाह आ अपि नशका मे हिका सभ केँ कहिनिि। 3 सुिू। िे खू, एकटा बोनिहार बोनिहार निकिि छि। 4 जखि ओ रोपैत छिाह तखि नकछु बाट कात मे खनस पडि आ आकाशक निडै सभ आनब कऽ ओकरा खा गेि। 5 नकछु गोटे पािरक जम्ि पर खनस पडि, जतय ओनह ठाम बेस् मानट िनह छि। ओ तुर् उछनि गेि, नकएक तऽ ओकरा मे मानटक गहराई िनह छिैक। 6 मुिा रौि उगिा पर ओ जरर गेि। आ जनड िनह रहबाक कारणे ँ ओ मुरझा गेि। 7 नकछु काँ टक ब्ि खनस पडि आ काँ ट बनढ कऽ ओकरा गिा िबा िे िक आ कोिो फि िनह िे िक। 8 आि िोक ि्क जम्ि पर खनस पडि आ फि उगैत आ बढै त गेि। नकयो त्स, नकयो सानठ, आ नकयो सय। 9 ओ हिका सभ केँ कहिनिि, “ जेकरा सुिबाक िेि काि अनछ, ओ सुिय।” 10 जखि ओ असगर छिाह तखि बारह गोटे क संग हिका िग मे बैसि िोक सभ हिका सँ दृा् पुछिनिि। 11 ओ हिका सभ केँ कहिनिि, “ अहाँ सभ केँ परमेश् वरक राज् यक रहस् य जािबाक अनिकार िे ि गेि अनछ। 12 जानह सँ ओ सभ िे खख कऽ िे खख सकनि आ िनह बुनझ सकनि। सुनि कऽ सुनि सकैत छनि, मुिा िनह बुनझ सकैत छनि। कह् ं कनहयो ओ सभ िम् पररवत्ि िनह कऽ सकैत छनि आ हिका सभक पाप कमा िनह भ’ जेतनि।” 13 य्शु हिका सभ केँ कहिनिि, “ क् अहाँ सभ ई दृा् िनह जिैत छ्? तखि अहाँ सभ दृा् कोिा बुझब? 14 बोनिहार विि बोनि िैत अनछ। 15 ई सभ बाट कात मे अनछ, जतय विि बोओि गेि अनछ। मुिा जखि ओ सभ सुिैत अनछ तँ शैताि तुर् आनब कऽ हिका सभक हिय मे जे विि रोपि गेि छि से िऽ िैत अनछ।
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16 ई सभ तनहिा पािरक जम्ि पर बोओि गेि अनछ। ओ सभ जखि ओ सभ विि सुनि कऽ तुर् पसरता सँ गहण करै त छनि। 17 ओ सभ अपिा मे जनड िनह रखैत छनि आ नकछु समय िरर सहि करै त छनि, तकर बाि जखि वििक कारणे ँ कृ वा पताडिा उतर होइत छनि तँ तुर् हिका सभ केँ आपनत होइत छनि। 18 ई सभ काँ टक ब्ि बोओि गेि अनछ। जेिा विि सुिब, 19 एनह संसारक नि्ा आ ििक छि-पपंि आ आि-आि वसुक वासिा सभ विि केँ गिा घोंटैत अनछ आ ओ निषि भऽ जाइत अनछ। 20 ई सभ ि्क जम्ि पर बोओि गेि अनछ। जे विि सुिैत अनछ आ ओकरा गहण करै त अनछ आ फि िै त अनछ, नकयो त्स गुिा, नकयो सानठ आ नकयो सय।
िूक ा 8:4-15 4 जखि बहतो िोक जमा भऽ कऽ सभ िगर सँ हिका िग आनब गेिाह तँ ओ दष् टाि् त दारा बजि्ह। 5 एकटा बोनिहार अपि ब्या बोबय िेि निकिि, जखि ओ ब्या बोनि रहि छि तखि नकछु बाट कात मे खनस पडि। ओकरा िबा िे ि गेिै आ हवाक निडै सभ ओकरा खा गेिै। 6 नकछु गोटे िटाि पर खनस पडिाह। उगैत िे र् ओ मुरझा गेि, कारण ओकरा मे िम्क अभाव छिैक। 7 नकछु काँ टक ब्ि खनस पडि। ओकरा संग काँ ट उगनि कऽ ओकर गिा िबा िे िक। 8 आि िोक ि्क जम्ि पर खनस पडि आ उगनि कऽ सौ गुिा फि िे िक। ई बात कनह कऽ ओ निनिया उठिनि, “ जेकरा सुिबाक काि अनछ, से सुिय।” 9 हिकर नशष् य सभ हिका सँ पुछिनिि, “ई दृा् क् भऽ सकैत अनछ?” 10 ओ कहिनिि, “ अहाँ सभ केँ परमेश् वरक राज् यक रहस् य सभ केँ जािब िे ि गेि अनछ। जे िे खख कऽ ओ सभ िनह िे खनि आ सुनि कऽ िनह बुनझ सकनि। 11 दृा् ई अनछ जे ब्या परमेश् वरक विि अनछ। 12 रसाक कात मे जे सभ अनछ से सुिैत अनछ। तखि शैताि आनब कऽ हिका सभक हिय सँ विि हटा िै त अनछ, जानह सँ ओ सभ नवशास िनह कऽ कऽ उदार िनह पानब सकैत अनछ। 13 िटाि पर ओ सभ ओ सभ अनछ जे सुनि कऽ हष्क संग विि गहण करै त अनछ। आ एनह सभक कोिो जनड िनह अनछ, जे नकछु काि िरर नवशास करै त अनछ आ पिोभिक समय मे खनस पडै त अनछ। 14 काँ ट-काँ ट मे खसि ओ सभ अनछ जे सुनि कऽ बाहर निकनि जाइत अनछ आ एनह ज्विक नि्ा आ ििसमनत आ भोग-नविास मे घुटि भ’ जाइत अनछ आ पूण्ता मे कोिो फि िनह िै त अनछ। 15 मुिा ि्क जम्ि पर ओ सभ अनछ जे ईमाििार आ ि्क मोि सँ विि सुनि कऽ ओकरा पािि करै त अनछ आ िैय्पूव्क फि िै त अनछ।
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