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Maithili - Judith

Page 1

अध्याय 1 1 नबूकोदोनोसोरक शासनक बारहम वर्ष मे, जे महान नगर नीनवे मे राज केलनन। अर्ाष क्सादक समय मे, जे एकबतान मे मादी पर राज करै त छल। 2 एकबतान मे चारू कात तीन हाथ चौडा आ छह हाथ नमहर पाथरक दे बाल बनौलनन आ दे बालक ऊँचाई सत्तर हाथ आ चौडाई पचास हाथ बनौलनन। 3 ओकर र्ाटक पर ओकर बुजष सभ सय हाथ ऊँच आ नीवीं मे सानि हाथ चौडाई राखि नदयौक। 4 ओ ओकर र्ाटक सभ केँ सत्तरर हाथ ऊँच र्ाटक बनौलनन आ ओकर चौडाई चालीस हाथ छलै क, जानह सँ ओकर पराक्रमी सेना सभक बाहर ननकलबाक आ अपन पैदल सैननक सभक नसलनसला मे बैसबाक लेल। 5 ओनह समय मे राजा नबूचोदोनोसोर राजा अर्ाष क्सद सँ ओनह महान मैदान मे युद्ध कयलनन, जे रगौक सीमा मे मैदान अनछ। 6 पहाडी इलाका मे रहननहार सभ लोक, यूफ्रेनटस, टाइनिस आ नहदास्पेस, एलीनमयाक राजा अररओकक मैदान मे रहननहार सभ आ केलोदक बहुत रास जानत हुनका लग जमा भ’ गे लाह युद्ध के नलये। 7 तिन अश्शूरक राजा नबूकदोनोसोर र्ारस मे रहननहार सभ, पनिम नदस रहननहार सभ, नकनलनसया, दनमश्क, नलबानस, एीं टीनलबानस आ समुद्रक कात मे रहननहार सभ केँ पिौलनन। 8 कमेल, गलाद, उपर गलील आ एस्द्द्रे लोमक महान मैदानक जानत मे सँ लोक सभ केँ। 9 सामररया आ ओकर नगर सभ मे, यरदन नदीक ओनह पार यरूशलेम, बेताने, चेलुस, कादे स, नमस्रक नदी, तर्नेस, रामसे आ पूरा गेसेम दे श धरर। 10 जाबत धरर अहाँ सभ तननस आ मेखफर्सक ओनह पार आ नमस्रक समस्त ननवासी सभक बीच ननह पहुँ चब, जाबत धरर अहाँ सभ इनथयोनपयाक सीमा मे ननह पहुँ चब। 11 मुदा ओनह दे शक सभ ननवासी अश्शूरक राजा नबूकोदोनोसोरक आज्ञा केँ हल्लुक कयलनन आ ने हुनका सींग युद्ध मे गेलाह। नकएक तँ ओ सभ हुनका सँ डरै त ननह छलनन। 12 एनह लेल नबूकदोनोसोर एनह समस्त दे श पर बहुत क्रोनधत भऽ अपन नसींहासन आ राज्यक शपथ लेलनन जे ओ नकनलनसया, दनमश्क आ अररयाक ओनह समस्त तट पर बदला लेत आ ओनह मे रहननहार सभ लोक केँ तलवार सँ मारर दे त मोआब दे श, अम्मोनक सन् तान, समस्त यहूनदया आ नमस्र मे रहननहार सभ, जाबत अहाँ दु नू समुद्रक सीमा मे ननह पहुँ चब।” 13 तिन ओ सत्रहम वर्ष मे अपन शखिक सींग राजा अर्ाष क्सदक नवरुद्ध युद्ध मे सजल छलाह आ अपन युद्ध मे नवजयी भेलाह, नकएक तँ ओ अर्ाष क्सदक समस्त शखि आ अपन सभ घुडसवार आ अपन सभ रथ केँ उिानड र्ेनक दे लनन। 14 ओ अपन नगर सभक मानलक बनन एकबताने पहुँ चलाह आ बुजष सभ केँ पकनड लेलनन आ ओकर गली-गली सभ केँ लूनट लेलनन आ ओकर सुन्दरता केँ लज्जा मे बदनल दे लनन। 15 ओ रगौक पहाड मे अर्षक्सद केँ सेहो पकनड ले लक आ ओकरा बाण सँ मारर दे लक आ ओनह नदन ओकरा एकदम सँ नष्ट कऽ दे लक। 16 तकर बाद ओ नीनवे घुरर गेलाह, ओ आ ओकर समस्त जानतक दल दु नू गोटे बहुत बेसी युद्धक लोक छल, आ ओतनह ओ अपन सेना आ अपन सेना दु नू गोटे एक सय बीस नदन धरर भोज-भात कयलनन। अध्याय 2 1 अिारहम वर्ष मे, पनहल मासक दू -बीसम नदन, अश्शूरक राजा नबूकोदोनोसोरक घर मे चचाष भेल जे ओ जेना कहलनन, पूरा पृथ्वी पर अपन बदला लेनथ।

2 तिन ओ अपन सभ अनधकारी आ अपन सभ कुलीन लोक केँ हुनका सभ केँ बजा कऽ हुनका सभ सँ अपन गुप्त सलाह दे लनन आ समस्त पृथ्वीक कष्ट केँ अपन मुँह सँ समाप्त कयलनन। 3 तिन ओ सभ ओनह सभ प्राणी केँ नष्ट करबाक आज्ञा दे लनथन जे हुनकर मुँहक आज्ञा ननह मानैत छल। 4 जिन ओ अपन सलाह समाप्त कऽ कऽ अश्शूरक राजा नबूकोदोनोसोर अपन सेनाक प्रमुि सेनापनत होलोर्नेस केँ बजा कऽ कहलनथन। 5 महान राजा, समस्त पृथ्वीक स्वामी ई कहै त छनथ, “दे िू, अहाँ हमरा सोझाँ सँ ननकनल जायब आ अपन शखि पर भरोसा करयवला लोक केँ अपना सींग ल’ जायब, पैदल चलननहार मे सँ एक लाि बीस हजार। आ घोडाक सींख्या अपन सवारक सींग बारह हजार। 6 अहाँ पनिमक समस्त दे शक नवरुद्ध जायब, नकएक तँ ओ सभ हमर आज्ञाक आज्ञा ननह मानलक। 7 ओ सभ हमरा लेल मानट आ पानन तैयार कऽ कऽ कहब, नकएक तँ हम हुनका सभक नवरुद्ध अपन क्रोध मे ननकलब आ अपन से नाक पएर सँ पूरा धरती केँ झाँनप दे ब आ ओकरा सभ केँ लूट मे दऽ दे ब हुनकर: 8 जानह तरहे ँ ओकर सभक मारल गेल लोक ओकर घाटी आ धार सभ केँ भरर दे त आ नदी ओकर मृत् यु सँ भरर जायत जाबत धरर ओ उमनड ननह जायत। 9 हम ओकरा सभ केँ बींदी बना कऽ समस्त पृथ्वीक अन्त्य भाग धरर लऽ जायब। 10 ते ँ अहाँ आगू बढ़ब। आ हमरा लेल पनहने सँ ओकर सभक समस्त क्षेत्र लऽ नलअ। 11 मुदा नवद्रोह करयवला सभक नवर्य मे अहाँ क नजरर ओकरा सभ केँ ननह दया। मुदा ओकरा सभ केँ वध मे राखि नदयौक आ जतय जाउ, ओकरा सभ केँ लूनट नदयौक।” 12 हम जनहना जीबैत छी आ अपन राज्यक सामर्थ्षक कारणे ँ जे नकछु कहलहुँ , से हम अपन हाथ सँ करब। 13 अहाँ सावधान रहू जे अहाँ अपन प्रभुक कोनो आज्ञाक उल्लींघन ननह करू, बल् नक हमरा आज्ञा जकाँ पूणष रूप सँ पूरा करू आ ओकरा पूरा करबा मे स्द्थनगत ननह करू। 14 तिन होलोर्नेस अपन मानलकक सोझाँ सँ ननकनल गेलाह आ अस्सूरक सभ गवनषर आ से नापनत सभ आ सेनापनत सभ केँ बजौलनन। 15 ओ अपन मानलकक आज्ञाक अनुसार चु नल लोक सभ केँ युद्धक लेल एक लाि बीस हजार आ घोडा पर सवार बारह हजार धनुधषर धरर जमा कयलनन। 16 ओ ओकरा सभ केँ ओनहना राखि दे लक जेना युद्धक लेल एकटा पैघ सेना केँ आदे श दे ल गेल छै क। 17 ओ बहुत पैघ सींख्या मे ऊँट आ गदहा केँ गाडी मे ल’ लेलनन। आ अपन भरण-पोर्णक लेल भे ड ँ ा-बकरी आ बकरी सभ अननगनत। 18 सेनाक प्रत्येक आदमीक लेल भरपूर भोजन आ राजाक घर सँ बहुत रास सोना-चानी। 19 तिन ओ अपन समस्त शखिक सींग यात्रा मे राजा नबूकोदोनोसोरक आगू बनढ़ गेलाह आ पनिम नदस अपन रथ, घुडसवार आ अपन चुनल पैदल सैननक सँ पनिम नदसक समस्त भूभाग केँ झाँ नप दे लनन। 20 बहुतो लोक ओकरा सभक सींग नटड्डी आ पृथ् वीक बालु जकाँ आनब गेल। 21 ओ सभ नीनवे सँ तीन नदनक यात्रा पर बेखिलेथक मैदान नदस बढ़लाह आ बेखिलेथ सँ ऊपर नकनलनसयाक बामा कातक पहाडक समीप िाढ़ भऽ गे लाह। 22 तिन ओ अपन सभ से ना, पैदल सवार, घुडसवार आ रथ केँ लऽ कऽ ओतय सँ पहाडी इलाका मे चनल गेलाह।


23 र्ुद आ लूद केँ नष्ट कऽ दे लक आ चेनलयनक दे शक दनक्षण मे जींगल नदसक सभ रास आ इस्राएलक सन् तान सभ केँ लूनट ले लक। 24 तिन ओ यूफ्रेनटस पार कऽ मेसोपोटानमया होइत गेल आ अबोनै नदीक समस्त ऊँच नगर सभ केँ नष्ट कऽ दे लक जाबत धरर अहाँ सभ समुद्र मे ननह पहुँ चब। 25 ओ नकनलनसयाक सीमा केँ पकनड लेलक आ ओकर नवरोध करयवला सभ केँ मारर दे लक आ यार्ेतक सीमा मे पहुँ नच गे ल जे दनक्षण नदस अरबक सामने छल। 26 ओ मदीयानक सभ सन् तानक चारू कात घुनम कऽ ओकर सभक तम्बू सभ जरा दे लक आ ओकर सभक भेड ँ ाक घर लूनट लेलक। 27 तिन ओ गहूम कटबाक समय मे दनमश्कक मैदान मे उतरर गेलाह, ओकर सभ िेत केँ जरा दे लनन, ओकर भेड ँ ा आ भेड ँ ा केँ नष्ट क’ दे लनन, ओकर सभक नगर सभ केँ लूनट लेलनन, ओकर सभक दे श केँ एकदम बबाष द क’ दे लनन आ ओकर सभ युवक केँ मारर दे लनन तलवारक धार। 28 एनह लेल समुद्रक कात मे रहननहार सभ नसदोन आ सोर मे रहननहार, सुर आ ओसीना मे रहननहार आ यम्नान मे रहननहार सभ लोक पर हुनका भय आ भय भऽ गेलनन। अजोतुस आ अस्कलोन मे रहननहार लोक सभ हुनका सँ बहुत डरै त छल। अध्याय 3 1 ओ सभ हुनका लग राजदू त पिौलनथन जे ओ सभ शान् नतक सींग रहनथ। 2 दे िू, हम सभ महान राजा नबूकोदोनोसोरक सेवक सभ अहाँ क सोझाँ पडल छी। हमरा सभ केँ ओनहना उपयोग करू जे ना अहाँ क नजरर मे नीक होयत। 3 दे िू, हमर सभक घर-घर, हमरा सभक सभ िाम, हमरा सभक सभ गहूमक िेत, भे ड ँ ा-बदल आ भेड ँ ा-बदल आ हमर सभक डे राक सभटा िे हुन अहाँ क सोझाँ पडल अनछ। जेना अहाँ क इच्छा हो, ओकर उपयोग करू। 4 दे िू, हमरा सभक नगर आ ओनह मे रहननहार सभ सेहो अहाँ क सेवक अनछ। आऊ आ ओकरा सभक सींग जेना नीक लागय, तेना व्यवहार करू।” 5 ओ लोक सभ होलोर्नेस लग आनब कऽ हुनका एनह तरहे ँ सुनौलनन। 6 तिन ओ आ अपन सेना दु नू समुद्रक कात मे उतरर कऽ ऊँच नगर सभ मे सेना रिलक आ ओनह मे सँ चुनल-चुनल लोक सभ केँ सहायताक लेल ननकानल लेलक। 7 ते ँ ओ सभ आ चारू कातक लोक सभ हुनका सभ केँ माला, नाचगान आ धुन-धना सँ स्वागत कयलनन। 8 तइयो ओ हुनका सभक सीमा केँ र्ेनक दे लनन आ ओकर सभक बगीचा सभ केँ कानट दे लनन, नकएक तँ ओ एनह दे शक सभ दे वता केँ नष्ट करबाक आज्ञा दे ने छलाह जे सभ जानत मात्र नबूकोदोनोसोरक आराधना करनथ आ सभ भार्ा आ गोत्र हुनका दे वता बनन पुकारनथ। 9 ओ यहूनदयाक समीप एस्द्द्रे लोनक ओनह पार आनब गेलाह। 10 ओ गेबा आ खस्कथोपोनलसक बीच मे िसिस िाढ़ कयलनन आ ओतनह एक मास भरर रहलाह जानह सँ ओ अपन से नाक सभ गाडी केँ एक िाम जमा कऽ सकनथ। अध्याय 4 1 यहूनदया मे रहननहार इस्राएलक लोक सभ सुनलक जे अश्शू रक राजा नबूकोदोनोसोरक प्रमुि सेनापनत होलोर्नेस जानत सभक सींग केने छल आ ओकरा सभक सभ मखन्दर केँ लूनट कऽ ओकरा सभ केँ अनवनाशी कऽ दे लक।

2 ते ँ ओ सभ हुनका सँ बहुत भयभीत भऽ गेलाह आ यरूशलेम आ अपन परमेश् वर परमेश् वरक मन् नदरक लेल त्रस्त भऽ गेलाह। 3 ओ सभ बींदी मे सँ नव-नव घुरल छल आ यहूनदयाक सभ लोक सभ जखिये एक िाम जमा भऽ गे ल छल। 4 ते ँ ओ सभ सामररयाक समस्त प्रदे श, गाम-घर, बेथोरोन, बेलमे न, यरीहो, चोबा, एसोरा आ सलेम घाटी मे पिा दे लक। 5 ओ सभ ऊँच पहाडक सभ चोटी पर पनहने सँ अपना केँ अपना केँ अपना मे समेनट लेलनन आ ओनह गाम सभ केँ मजबूत कऽ लेलनन आ युद्धक पोर्णक लेल भोजन-पानी जमा कयलनन। 6 ओनह समय मे यरूशलेम मे महापुरोनहत योआसीम बेतुनलया आ बेतोमेस्टम मे रहननहार लोक सभ केँ पत्र नलखि दे लनथन जे एस्द्द्रे लोनक सामने अनछ, जे दोथैमक समीप अनछ। 7 हुनका सभ केँ पहाडी इलाकाक बाट सभ केँ सुरनक्षत रिबाक आज्ञा दै त छलनन, नकएक तँ हुनका सभक द्वारा यहूनदया मे प्रवेश करबाक द्वार छल, आ ऊपर आबय बला सभ केँ रोकब आसान छल, कारण ओ बाट सोझ छल, बेसी सँ बेसी दू गोटे क लेल। 8 इस्राएलक सन् तान सभ यरूशलेम मे रहननहार सभ इस्राएलक प्राचीन लोक सभक सींग जेना महापुरोनहत योआसीम आज्ञा दे ने छलाह, तेना कयलक। 9 तिन इस्राएलक प्रत् येक मनुर्​् य बहुत जोर सँ परमेश् वर सँ पुकारलनन आ बहुत जोर सँ अपन प्राण केँ नम्र कयलनन। 10 ओ सभ, स् त्रीगण, सींतान, माल-जाल, सभ परदे शी आ भाडाकरकट आ अपन नोकर सभ जे पाइ सँ कीनैत छल, दु नू गोटे अपन कमर मे बोरा पनहरने छलाह। 11 एनह तरहे ँ सभ स्त्री-पुरुर् आ छोट-छोट बच्चा आ यरूशलेमक ननवासी मखन्दरक सोझाँ िनस पडलाह आ अपन माथ पर राि र्ेकलनन आ प्रभुक मुँह पर अपन बोरा पसारर दे लनन। 12 ओ सभ इस्राएलक परमेश् वर सँ एक सहमनत सँ पुकारलनन जे ओ हुनका सभक सींतान केँ लूट मे ननह दे नथन, आ हुनकर स् त्री केँ लूट मे ननह दऽ दे ताह, आ हुनकर सभक उत्तरानधकारक नगर सभ केँ नवनाश मे ननह दऽ दे ताह, आ पनवत्र स्द्थान केँ अपनवत्र आ ननन्दा मे ननह दऽ दे ताह जानत-जानत सभकेँ आनखन्दत करबाक लेल। 13 परमेश् वर हुनका सभक प्राथष ना सुनलनन आ हुनका सभक कर्​् ट सभ नदस तकलनन, नकएक तँ लोक सभ पूरा यहूनदया आ यरूशलेम मे सवषशखिमान प्रभुक पनवत्र स्द्थानक समक्ष बहुत नदन धरर उपवास करै त रहलाह। 14 महापुरोनहत योआसीम आ प्रभुक समक्ष िाढ़ सभ पुरोनहत आ प्रभुक सेवा करननहार सभ अपन कमर मे बोरा पनहरने छलाह आ लोक सभक प्रनतज्ञा आ मुफ्त उपहारक सींग ननत्य होमबनल चढ़बैत छलाह। 15 ओ सभ ओकरा सभक छाती पर राखि कऽ अपन समस्त सामथ्ष य सँ प्रभु सँ पुकारलनन जे ओ सभ इस्राएलक वींशज केँ कृपापूवषक दे िनथ। अध्याय 5 1 तिन अस्सूरक सेनाक प्रमुि होलोर्नेस केँ ई बात कहल गेलनन जे इस्राएलक सन्तान सभ युद्धक लेल तैयार भऽ गेल अनछ आ पहाडी इलाकाक बाट सभ केँ बींद कऽ दे ने अनछ आ ऊँच पहाड सभक सभ चोटी केँ मजबूत कऽ दे ने अनछ आ ओकरा सभ लग अनछ चैंनपयननशप दे शोीं में बाधा नबछाया: 2 एनह बात पर यीशु बहुत क्रोनधत भऽ मोआबक समस्त राजकुमार सभ, अम्मोनक से नापनत सभ आ समुद्रक कातक समस्त राज्यपाल सभ केँ बजौलनन। 3 ओ हुनका सभ केँ कहलनथन, “हे कनानक सन्तान सभ, हमरा कहू जे ई पहाडी इलाका मे रहय बला लोक के अनछ आ ओ सभ कोनकोन शहर मे रहै त अनछ आ ओकर सेना के सींख्या केहन अनछ आ ओकर सभक सेना कतय अनछ।” शखि आ सामर्थ्ष, आ ओकरा


सभ पर कोन राजा, वा ओकरा सभक से नाक कप्तान रािल गेल अनछ। 4 पनिमक सभ ननवासी सँ बेसी ओ सभ नकएक ननणषय कऽ लेने छनथ जे हमरा सँ भेंट करय लेल ननह आओत। 5 तिन अम्मोनक समस्त पुत्र सभक सेनापनत अकीओर कहलनथन, “हमर मानलक आब अहाँ क सेवकक मुँह सँ कोनो बात सुननथ आ हम अहाँ केँ एनह लोकक नवर्य मे सत्‍य बता दे ब जे अहाँ क लग मे रहै त अनछ आ पहाडी इलाका मे रहै त अनछ।” : आ तोहर नोकरक मुँह सँ कोनो झूि ननह ननकलत। 6 ई लोक किीक वींशज अनछ। 7 ओ सभ एिन धरर मेसोपोटानमया मे प्रवास करै त रहलाह, कारण ओ सभ अपन पूवषजक दे वता सभक पालन ननह करय चाहै त छलाह जे कखिया दे श मे छलाह। 8 ओ सभ अपन पूवषजक बाट छोनड स् वगषक परमेश् वरक आराधना कयलनन, नजनका ओ सभ जनैत छलाह। 9 तिन हुनका सभक परमेश् वर हुनका सभ केँ आज्ञा दे लनथन जे ओ सभ जतऽ प्रवासी छलाह, ओनह िाम सँ चनल कऽ कनान दे श मे जाउ। 10 मुदा जिन पूरा कनान दे श मे अकाल पनड गेल तिन ओ सभ नमस्र दे श मे जा कए ओतनह प्रवास कयलनन, जिन नक ओ सभ पोसैत रहलाह आ ओतय बहुत रास भीड भ’ गेलाह, जानह सँ नकयो अपन राष्टरक नगनती ननह क’ सकलाह। 11 ते ँ नमस्रक राजा हुनका सभक नवरुद्ध उनि कऽ हुनका सभक सींग छल-प्रपींच कयलनन आ ईींटाक पररश्रम मे हुनका सभ केँ नीचाँ उतारर कऽ हुनका सभ केँ गुलाम बना दे लनन। 12 तिन ओ सभ अपन परमेश् वर केँ पुकारलनन आ ओ सभ नमस्र दे श केँ असाध्य नवपनत्त सँ मारर दे लनन। 13 परमेश् वर हुनका सभक सामने लाल समुद्र केँ सुिाय दे लनन। 14 ओ सभ ओकरा सभ केँ सीना आ कादे स-बाने पवषत पर लऽ गेल आ जींगल मे रहननहार सभ केँ र्ेनक दे लक। 15 ओ सभ अमोरी सभक दे श मे रनह गेल आ अपन सामथ्ष य सँ एसेबोनक सभ लोक केँ नष्ट कऽ दे लक आ यरदन पार करै त सभ पहाडी इलाका पर कब्जा कऽ लेलक। 16 ओ सभ कनानी, र्रे जी, यबूसी, सुकेमी आ समस्त गेगेसी केँ अपना सभक सोझाँ मे र्ेनक दे लनथन आ ओ सभ ओनह दे श मे बहुत नदन धरर रहलाह। 17 जाबत ओ सभ अपन परमेश् वरक समक्ष पाप ननह कयलनन, तिन ओ सभ सर्ल भे लाह, नकएक तँ अधमष सँ घृणा करयवला परमेश् वर हुनका सभक सींग छलाह। 18 मुदा जिन ओ सभ ओनह बाट सँ नवदा भेलाह, तिन ओ सभ बहुतो युद्ध मे बहुत कष्ट मे नष्ट भऽ गे लाह आ बींदी बना कऽ ओनह दे श मे लऽ गेलाह जे हुनका लोकननक ननह छलनन, आ हुनका लोकननक परमेश् वरक मन् नदर जमीन पर र्ेनक दे ल गेलनन आ हुनकर सभक शहर सभ सेहो भ’ गेलनन दु श्मन द्वारा लेल गेल। 19 मुदा आब ओ सभ अपन परमेश् वर लग घुरर गेल छनथ आ जतऽ ओ सभ नछनडयाएल छलाह, ओनह िाम सँ चनढ़ कऽ यरूशलेम पर कब्जा कऽ लेने छनथ, जतऽ हुनका सभक पनवत्र स्द्थान अनछ आ पहाडी इलाका मे बैसल छनथ। नकएक तँ उजाड भऽ गे ल छल। 20 आब, हमर मानलक आ राज्यपाल, जँ एनह लोक सभक नवरुद्ध कोनो गलती भऽ जाय आ ओ सभ अपन परमेश् वरक नवरुद्ध पाप करनथ तँ हम सभ ई मानब जे ई हुनका सभक नवनाश होयत आ हम सभ चनढ़ कऽ ओकरा सभ पर नवजय पानब सकब। 21 मुदा जँ हुनका सभक जानत मे कोनो अधमष ननह होयत तँ हमर प्रभु आब ओनह िाम सँ गुजरर जाउ, जानह सँ हुनकर प्रभु हुनका सभक रक्षा ननह करनथ आ हुनकर परमेश् वर हुनका सभक लेल ननह रहनथ आ हम सभ सींसारक समक्ष अपमाननत ननह बनन जायब।

22 अकीओर ई सभ बात समाप्त कऽ कऽ डे राक चारू कात िाढ़ सभ लोक बडबडाइत रहलाह आ होलोर्नेसक मुखिया आ समुद्रक कात मे आ मोआब मे रहननहार सभ लोक सभ हुनका मारर दे बाक लेल कहलनथन। 23 ओ सभ कहै त छनथ जे, हम सभ इस्राएलक सन् तान सभक मुँह सँ ननह डे रब, नकएक तँ ई एहन लोक अनछ जकरा मे कोनो सामथ्ष य आ ने सामथ्ष य युद्धक सामथ्ष य अनछ 24 आब, प्रभु होलोर्ने स, हम सभ चढ़ब, आ ओ सभ अहाँ क समस्त सेनाक नशकार भऽ जायत। अध्याय 6 1 जिन पररर्द् मे बैसल लोक सभक हीं गामा समाप्त भऽ गेल तिन अस्सूरक सेनाक प्रमु ि होलोर्ने स आन जानतक समस्त दलक समक्ष अकीओर आ समस्त मोआबी लोकनन केँ कहलनथन। 2 अकीओर आ एप्रैमक मजदू र सभ के छी जे आइ जेकाँ हमरा सभक नवरुद्ध भनवष्यवाणी कऽ कऽ कहलहुँ जे हम सभ इस्राएलक लोक सभक सींग यु द्ध ननह करब, नकएक तँ ओकर सभक परमेश् वर ओकरा सभक रक्षा करताह? आ नबूचोदोनोसोर छोनड परमेश् वर के छनथ? 3 ओ अपन सामथ्ष य पिाओत आ पृथ् वी पर सँ ओकरा सभ केँ नष्ट कऽ दे तैक, आ ओकर सभक परमेश् वर ओकरा सभ केँ ननह बचाओत। कारण ओ सभ हमरा सभक घोडाक सामर्थ्ष केँ नटकय मे सक्षम ननह अनछ। 4 नकएक तँ ओकरा सभक सींग हम सभ ओकरा सभकेँ पएर नीचाँ चढ़ब, ओकर सभक पहाड ओकर सभक िूनसँ नशा मे धुत्त भऽ जायत, ओकर सभक िेत ओकर सभक मृत शरीरसँ भरर जायत, आ ओकर सभक कदम हमरा सभक सोझाँ िाढ़ ननह भऽ सकैत अनछ, नकएक तँ ओ सभ एकदम नाश भऽ जायत। राजा नबूकोदोनोसोर, समस्त पृथ्वीक मानलक कहै त छनथ, कारण ओ कहलनन जे, “हमर कोनो बात व्यथष ननह होयत।” 5 अहाँ अम्मोनक भाडा-करकट अकीओर, जे अहाँ क अधमषक नदन ई बात कहने छी, आइ सँ आब हमर मुँह ननह दे िब, जाबत हम नमस्र सँ ननकलल एनह जानत सँ बदला ननह लेब। 6 तिन हमर सेनाक तलवार आ हमर सेवा करननहार सभक भीड अहाँ क कात मे सँ गुजरत आ जिन हम घुरैत छी तिन अहाँ हुनका सभक मारल गेल लोकक बीच िनस पडब। 7 आब हमर सेवक सभ अहाँ केँ पहाडी इलाका मे वापस आनन दे त आ अहाँ केँ ओनह मागषक कोनो शहर मे बैसा दे त। 8 जाबत धरर अहाँ हुनका सभक सींग नष्ट ननह भऽ जायब ताबत धरर अहाँ नष्ट ननह होयब। 9 जँ अहाँ अपना केँ मने-मन बुझबैत छी जे ओ सभ पकडल जायत, तँ अहाँ क मुँह ननह िसय। 10 तिन होलोर्नेस अपन डे रा मे प्रतीक्षा मे रहननहार सेवक सभ केँ आज्ञा दे लनथन जे अनकओर केँ पकनड कऽ बेतुनलया मे आनन कऽ इस्राएलक सन् तान सभक हाथ मे सौींप नदअ। 11 तिन हुनकर नोकर सभ हुनका लऽ कऽ डे रासँ बाहर मैदानमे लऽ गेलनन आ मैदानक बीचसँ पहाडी इलाकामे जा कऽ बेतुनलयाक नीचाँ क र्व्वारा सभ लग पहुँ नच गेलाह। 12 जिन नगरक लोक सभ ओकरा सभ केँ दे खि, ओ सभ अपन हनथयार उिा कऽ नगर सँ बाहर पहाडीक चोटी पर चनल गेल। 13 मुदा ओ सभ गुप्त रूप सँ पहाडक नीचाँ पहुँ नच कऽ अनकओर केँ बाखि कऽ नीचाँ र्ेनक दे लक आ पहाडक पाँ नत मे छोनड अपन मानलक लग घुरर गेल। 14 इस्राएली सभ अपन नगर सँ उतरर हुनका लग आनब गेलाह आ हुनका िोनल कऽ बेतुनलया लऽ गेलनन आ नगरक गवनषर सभक समक्ष राखि दे लनथन।


15 ओनह समय मे नशमोनक वींशक मीकाक पुत्र ओनजयास आ गोथोनीएलक पुत्र कानिस आ मल्कीएलक पुत्र करमीस छलाह। 16 ओ सभ नगरक सभ प्राचीन लोक सभ केँ एक िाम बजा ले लक आ ओकर सभ युवा आ अपन स् त्रीगण सभ केँ एक सींग दौनड कऽ सभा मे आनब गेल। तिन ओनजयास ओकरासँ पुछलकै जे की भेलै। 17 ओ उत्तर दे लनथन आ हुनका सभ केँ होलोर्नेसक पररर्द् क वचन आ अस्सूरक राजकुमार सभक बीच जे नकछु कहने छलाह आ जे नकछु होलोर्ने स इस्राएलक वींशक नवरुद्ध गवषपूवषक कहलनन से सुनौलनन। 18 तिन लोक सभ िनस कऽ परमेश् वरक आराधना कयलक आ परमेश् वर सँ पुकारल। कहै त, 19 हे स् वगषक परमेश् वर, हुनका सभक घमींड केँ दे िू आ हमरा सभक जानतक नीचता पर दया करू, आ आइ जे सभ अहाँ केँ पनवत्र कयल गेल अनछ, हुनकर सभक मुँह दे िू। 20 तिन ओ सभ अनकओर केँ सान्त्वना दे लक आ ओकर बहुत प्रशींसा कयलक। 21 ओनजयास हुनका सभा मे सँ बाहर लऽ कऽ अपन घर मे लऽ गेलाह। ओ सभ ओनह रानत भरर इस्राएलक परमेश् वर सँ सहायताक लेल पुकारलनन। अध्याय 7 1 दोसर नदन होलोर्नेस अपन सभ से ना आ हुनकर सभ लोक जे हुनकर भाग लेबाक ले ल आयल छल, से आज्ञा दे लनथन जे ओ सभ अपन डे रा बेतुनलयाक नवरुद्ध हनट जाय, जे पहाडी इलाकाक चढ़ाईक स्द्थान पनहने सँ पकनड लेनथ आ इस्राएलक सन् तान सभक नवरुद्ध युद्ध करनथ . 2 ओनह नदन ओकर सभक बलवान सभ अपन डे रा हटा दे लक, आ युद्धकमीक सेना मे एक लाि सत्तरर हजार पैदल सैननक आ बारह हजार घुडसवार, सामानक बगल मे आ आन लोक सभ छल जे ओकरा सभक बीच पैदल चलैत छल, बहुत पैघ भीड . 3 ओ सभ बेतुनलयाक लगक घाटी मे, र्व्वारा लग डे रा िसा लेलक आ दोथाइम सँ बेलमैम धरर आ बेथुनलया सँ लमहर मे एस्द्डर े लोनक समक्ष नसनामोन धरर पसरल। 4 इस्राएलक लोक सभ हुनका सभक भीड दे खि बहुत घबरा गेल आ सभ अपन-अपन पडोसी केँ कहलनथन, “आब ई लोक सभ पृथ् वी केँ चानट लेत। कारण, ने ऊँच पहाड, ने उपत्यका, आ ने पहाडी अपन भार उिा सकैत अनछ। 5 तिन एक-एक गोटे अपन-अपन यु द्धक हनथयार उिौलनन आ अपन-अपन बुजष पर आनग लगा कऽ ओनह रानत भरर दे िैत रहलाह। 6 मुदा दोसर नदन होलोर्नेस अपन सभ घु डसवार केँ बेतुनलया मे रहननहार इस्राएलक सन् तान सभक सोझाँ अनलनन। 7 ओ शहर नदसक बाट सभ दे खि ओकर सभक पानन सभक र्व्वारा नदस आनब ओकरा सभ केँ पकनड ले लक आ ओकरा सभ पर युद्धक सैननक सभक सेना लगा दे लक आ ओ स्वयीं अपन लोक नदस चनल गेल। 8 तिन एसावक सभ मुखिया, मोआबक समस्त राज्यपाल आ समुद्रक कातक सेनापनत सभ हुनका लग आनब कहलनथन। 9 हमरा सभक प्रभु आब एकटा बात सुनू जे अहाँ क सेना मे कोनो उिानड ननह पडय। 10 नकएक तँ इस्राएलक सन्तानक लोकसभ अपन भालापर भरोसा ननह करै त छनथ, अनपतु पहाडक ऊँचाईमे जतय ओ रहै त छनथ, नकएक तँ अपन पहाडक चोटी धरर आबब आसान ननह अनछ। 11 ते ँ आब, हमर प्रभु, हुनका सभक सींग युद्धक नसलनसला मे ननह लडू, आ अहाँ क प्रजा मे सँ एको आदमीक नाश ननह होयत। 12 अपन डे रा मे रहू, आ अपन सेनाक सभटा आदमी के रािू आ अहाँ क सेवक सभ पाननक र्व्वारा अपन हाथमे आनब जाय, जे पहाडक तलहटी सँ ननकलैत अनछ।

13 नकएक तँ बेतुनलयाक सभ लोकक पानन ओतनह सँ भेटैत अनछ। तनहना प्यास ओकरा सभ केँ मारर दे तैक आ ओ सभ अपन शहर छोनड दे तैक, आ हम सभ आ हमर लोक सभ लगक पहाड सभक चोटी पर चनढ़ कऽ ओकरा सभ पर डे रा िसा दे ब जे शहर सँ नकयो बाहर ननह ननकनल जाय।” 14 ते ँ ओ सभ आ ओकर स् त्रीगण आ सींतान सभ आनग मे भस्म भऽ जेताह आ तलवार हुनका सभ पर अयबा सँ पनहने ओ सभ ओनह गली मे उिानड दे ल जेताह। 15 एनह तरहे ँ अहाँ हुनका सभ केँ अधलाह र्ल दे बनन। नकएक तँ ओ सभ नवद्रोह केलक आ अहाँ सभक सींग शाखन्तपूवषक ननह भेंट केलक। 16 ई बात होलोर्नेस आ ओकर सभ सेवक सभ केँ नीक लागल आ ओ सभ अपन बातक अनुसार काज करबाक लेल ननयुखि कयलनन। 17 अम्मोनक डे रा आ अश्शूरक पाँ च हजार लोकक सींग नवदा भऽ गेल आ ओ सभ घाटी मे डे रा िसा लेलक आ इस्राएलक पानन आ पानन सभक र्व्वारा सभ केँ पकनड ले लक। 18 तिन एसावक लोक सभ अम्मोनक सन् तान सभक सींग चनढ़ कऽ दोथैमक समक्ष पहाडी इलाका मे डे रा िसा लेलक आ नकछु गोटे केँ दनक्षण नदस आ पूब नदस एकरे बेलक ओनह पार पिा दे लक जे चूसीक समीप अनछ मोचमुर धार पर; अश्शूरक शेर् सेना मैदान मे डे रा िसा ले लक आ पूरा दे श केँ झाँ नप दे लक। आ हुनका लोकननक डे रा आ गाडी सभ बहुत पैघ भीडक लेल िाढ़ भ’ गे ल छलनन। 19 तिन इस्राएलक लोक सभ अपन परमेश् वर परमेश् वर सँ पुकारलनन, नकएक तँ हुनका सभक मोन क्षीण भऽ गेलनन, नकएक तँ हुनका सभक सभ शत्रु हुनका सभ केँ चारू कात घेरने छलनन आ हुनका सभक बीच सँ बचबाक कोनो उपाय ननह छलनन। 20 एनह तरहे ँ असूरक समस्त दल, अपन पैदल सैननक, रथ आ घुडसवार दु नू गोटे चारर-तीस नदन धरर हुनका सभक चारूकात रहल, जानह सँ हुनका सभक सभ जलक पात्र बेथुनलयाक सभ ननरोधक सभ केँ क्षीण कऽ दे लक। 21 कुँहा सभ िाली भऽ गे ल छल आ एक नदन धरर हुनका सभ लग पेट पीबय लेल पानन ननह छलनन। नकएक तँ ओ सभ नाप-जोि मे हुनका सभ केँ पीबैत छलाह। 22 एनह लेल हुनका सभक छोट-छोट बच्चा सभक मोन मे उत्कर्ष भऽ गेल छलनन आ ओकर सभक स्त्री-युवक सभ प्यास सँ बेहोश भऽ गेलाह आ नगरक गली-गली मे आ र्ाटक सभक बाट मे िनस पडलाह आ हुनका सभ मे आब कोनो शखि ननह रनह गेलनन। 23 तिन सभ लोक ओनजयास आ नगरक मुखिया, युवक-युवती आ बच्चा सभ लग जमा भ’ गेल आ जोर-जोर सँ नचनचया उिल आ सभ बुजुगष सभक सोझाँ कहलक। 24 परमेश् वर हमरा सभ आ अहाँ सभक बीच न्याय करनथ, नकएक तँ अहाँ सभ हमरा सभ केँ बहुत दु र्​् ट कऽ दे लहुँ जे अहाँ सभ अस्सूरक सन् तान सभ सँ शाखन्त ननह माँ गलहुँ । 25 आब हमरा सभक कोनो सहायक ननह अनछ, मुदा परमेश् वर हमरा सभ केँ हुनका सभक हाथ मे बेनच दे लनन, जानह सँ हमरा सभ केँ प्यास आ बहुत नवनाशक सीं ग हुनका सभक सोझाँ र्ेनक दे ल जाय। 26 आब ओकरा सभ केँ अहाँ सभ लग बजाउ आ पूरा नगर केँ होलोर्नेसक लोक आ ओकर समस्त सेना केँ लूट मे सौींनप नदयौक। 27 नकएक तँ प्यासक कारणे ँ मरबासँ नीक जे हम सभ हुनका सभक लेल लूट बनन जायब, नकएक तँ हम सभ हुनकर दास बनब जानहसँ अपन प्राण जीनवत रहब आ ने अपन नशशु सभक मृ त्यु हमरा सभक आँ खिक सोझाँ ननह दे िब आ ने अपन स् त्रीगणक सोझाँ हमर बच्चा सभ के मरय लेल। 28 हम सभ अहाँ सभक नवरुद्ध आकाश-पृथ्वी आ अपन परमेश् वर आ हमरा सभक पूवषजक प्रभु, जे हमरा सभक पाप आ हमरा सभक पूवषजक पापक अनुसार दीं नडत करै त छनथ, तकरा अहाँ सभक नवरुद्ध गवाही दै त छी जे ओ आइ जेना कहलहुँ , तेना ननह करै त छनथ।


29 तिन सभा मे एक सहमनत सँ बहुत कानब भेल। ओ सभ जोरजोर सँ प्रभु परमेश् वर सँ पुकारलनन। 30 तिन ओनजयास हुनका सभ केँ कहलनथन, “हे भाइ लोकनन, साहस करू, हम सभ एिन धरर पाँ च नदन धरर सहन करी, जानह काल मे हमर सभक परमेश् वर प्रभु हमरा सभ पर अपन दया घु मा सकनथ। नकएक तँ ओ हमरा सभ केँ एकदम ननह छोडत।” 31 जँ ई नदन बीनत गेल आ हमरा सभक कोनो सहायता ननह आओत तँ हम अहाँ क वचनक अनुसार काज करब। 32 ओ लोक सभ केँ अपन-अपन आज्ञाक अनुसार नततर-नबतर कऽ दे लनथन। ओ सभ अपन नगरक दे बाल आ बुजष पर जा कऽ स्त्रीगण आ बच्चा सभ केँ अपन घर मे पिा दे लक। अध्याय 8 1 ओनह समय मे जूनडथ ई बात सुनलीह जे यूसुर्क पुत्र बै ल केर पुत्र मेरारीक पुत्र छलीह, ओजेल केर पुत्र छलाह, जे एखियाक पुत्र छलाह, जे अनननयाक पुत्र छलाह, जे रर्ाइमक पुत्र नगदोनक पुत्र छलाह , अनसथोक पुत्र, एनलयाबक पुत्र, एनलयाबक पुत्र, नतनएलक पु त्र, सामएलक पुत्र, इस्राएलक पुत्र सलासादालक पुत्र। 2 मनशस हुनकर पनत छलनन, जे हुनकर गोत्र आ पररजन मे छलाह, जे जौक र्सल मे मरर गेलाह। 3 जिन ओ िेत मे गुच्छा बािननहार सभक दे िरे ि मे िाढ़ छलाह तिन हुनकर माथ पर गमी आनब गेलनन आ ओ अपन नबछाओन पर िनस पडलाह आ बेतुनलया नगर मे मरर गेलाह . 4 जूनडथ तीन वर्ष चारर मास धरर अपन घर मे नवधवा छलीह। 5 ओ अपन घरक चोटी पर एकटा डे रा बनौलनन आ कमर मे बोरा पनहरर कऽ अपन नवधवाक वस्त्र पनहरने छलीह। 6 ओ अपन नवधवाक सभ नदन उपवास करै त रहलीह, नसवाय नवश्राम-नवश्राम-नदन, अमावस्याक पूवष सींध्या, अमावस्या आ इस्राएलक घरानाक पवष आ गींभीर नदनक। 7 ओ सुन्दर चेहराक छलीह आ दे िबा मे बहुत सुन्दर छलीह। ओ ओकरा सभ पर रनह गेलीह। 8 नकयो एहन ननह छल जे ओकरा अधलाह बात कहलक। जे ना ओ भगवान् सँ बहुत डरै त छलीह। 9 जिन ओ राज्यपालक नवरुद्ध लोक सभक अधलाह बात सुनलीह जे ओ सभ पाननक अभाव मे बेहोश भऽ गेलाह। कारण, जूदीत ओनजयास द्वारा कहल गेल सभ बात सुनने छलाह आ पाँ च नदनक बाद शहर केँ अश्शूर सभक हाथ मे सौींपबाक शपथ लेने छलाह। 10 तिन ओ अपन प्रतीक्षारत मनहला केँ पिौलनन जे हुनका लग सभ नकछु क शासन छलनन जे ओनजयास आ चानिस आ चनमषस केँ शहरक प्राचीन लोक कहनथन। 11 ओ सभ हुनका लग आनब गेलाह आ ओ हुनका सभ केँ कहलनथन, “हे बेथुनलयाक ननवासी सभ, आब हमर बात सुनू, नकएक तँ अहाँ सभ आइ लोकक समक्ष जे बात कहलहुँ से िीक ननह अनछ परमेश् वर आ अहाँ सभक बीच, आ वचन दे ने छी जे एनह नगर केँ हमरा सभक शत्रु सभक हाथ मे ननह दऽ दे ब, जाबत धरर एनह नदन सभक भीतर प्रभु अहाँ क मदनद ननह करनथ। 12 आब अहाँ सभ के छी जे आइ परमेश् वरक परीक्षा कयलहुँ आ मनुर्​् यक सन् तान सभक बीच परमेश् वरक बदला मे िाढ़ छी? 13 आब सवषशखिमान प्रभुक परीक्षण करू, मुदा अहाँ सभ कनहयो कोनो बात ननह बुझब। 14 नकएक तँ अहाँ सभ मनुर्​् यक हृदयक गहीरीं ता ननह पानब सकैत छी आ ने ओकर नवचार केँ बुनझ सकैत छी। हे भाइ लोकनन, हमरा सभक परमेश् वर परमेश् वर केँ क्रोनधत ननह करू। 15 जँ ओ एनह पाँ च नदनक भीतर हमरा सभक सहायता ननह करताह तँ ओकरा सभ नदन जिन चाहनथ तिन हमरा सभक रक्षा करबाक सामर्थ्ष छनन वा शत्रु सभक समक्ष हमरा सभ केँ नष्ट करबाक अनधकार छनन।

16 हमरा सभक परमेश् वर परमेश् वरक नवश् वास केँ ननह बान् बू, नकएक तँ परमेश् वर मनुि जकाँ ननह छनथ जानह सँ हुनका धमकाबय पडय। आ ने मनु र्​् यक पुत्र जकाँ अनछ जे ओ डगमगाइत रहय। 17 ते ँ हम सभ हुनकर उद्धारक प्रतीक्षा करू आ हुनका अपना सभक सहायता करबाक लेल आह्वान करी आ जँ हुनका नीक लागय तँ ओ हमरा सभक आवाज सुनताह। 18 हमरा सभक युग मे नकयो एहन ननह भे ल अनछ आ ने आइ-काखि मे ने कोनो गोत्र, ने कुल, आ ने लोक आ ने शहर, जे पनहने जकाँ हाथ सँ बनल दे वता सभक आराधना करै त अनछ। 19 एनह कारणे ँ हमरा सभक पूवषज तलवार आ लूट लेल चढ़ाओल गेलाह आ हमरा सभक शत्रु सभक सामने बहुत िनस पडलाह। 20 मुदा हम सभ कोनो आन दे वता केँ ननह जनैत छी, ते ँ हमरा सभ केँ भरोसा अनछ जे ओ हमरा सभ केँ आ ने हमरा सभक कोनो जानत केँ नतरस्कृत करत। 21 जँ हमरा सभ केँ एना पकडल जाय तँ पूरा यहूनदया उजाड भऽ जायत आ हमर सभक पनवत्र स्द्थान लूनट जायत। आ ओ हमरा सभक मुँह पर एकर अपनवत्रताक माँ ग करताह। 22 हमरा सभक भाइ सभक वध, दे शक बींदी आ हमरा सभक उत्तरानधकारक उजाड, ओ हमरा सभक माथ पर गैर-यहूदी सभक बीच घुमा दे त, जतय हम सभ दासता मे रहब। आ हमरा सभ केँ जे सभ हमरा सभ केँ अपना मे बैसल अनछ, तकरा सभक लेल हम सभ अपराध आ ननन्दा बनन जायब। 23 कारण, हमरा सभक दासता अनुिह नदस ननह होयत, बल् नक प्रभु परमेश् वर एकरा अपमाननत कऽ दे नथन। 24 हे भाइ लोकनन, आब हम सभ अपन भाय सभ केँ एकटा उदाहरण दे िाउ, नकएक तँ हुनकर सभक मोन हमरा सभ पर ननभषर अनछ, पनवत्र स्द्थान, घर आ वेदी हमरा सभ पर अनछ। 25 हम सभ अपना सभ परमे श् वर परमेश् वर केँ धन्यवाद दी, जे हमरा सभक पूवषज सभ जकाँ हमरा सभ केँ परीक्षा दै त छनथ। 26 मोन रािू जे ओ अिाहमक सींग केहन काज केने छलाह, इसहाक केँ कोना परीक्षा लेलनन, आ अरामक मेसोपोटानमया मे याकूबक सींग की भेल छलनन, जिन ओ अपन मायक भाय लाबानक भेड ँ ा सभ केँ पोसैत छलाह। 27 नकएक तँ ओ हमरा सभ केँ आनग मे परीक्षा ननह दे लक जेना ओकरा सभक हृदयक परीक्षण करबाक लेल ओ हमरा सभक प्रनतशोध ननह लेलक। 28 ओनजयास ओकरा कहलनथन, “अहाँ जे नकछु कहलहुँ से सभ नीक मोन सँ बाजल छी, मुदा अहाँ क बात केँ नवरोध करयवला नकयो ननह अनछ।” 29 नकएक तँ ई पनहल नदन ननह अनछ जिन अहाँ क बुखद्ध प्रगट होयत। मुदा तोहर नदनक प्रारीं भ सँ सभ लोक अहाँ क समझ केँ जनैत अनछ, नकएक तँ अहाँ क हृदयक स्वभाव नीक अनछ। 30 मुदा लोक सभ बहुत प्यासल छल आ हमरा सभ केँ बाध्य कऽ दे लक जे हम सभ जे ना कहने छी तेना ओकरा सभक सींग करऽ आ अपना पर शपथ आनब, जकरा हम सभ ननह तोडब। 31 ते ँ आब अहाँ हमरा सभक लेल प्राथष ना करू, नकएक तँ अहाँ परमेश् वरक भक् त स् त्री छी, आ प्रभु हमरा सभक कुींड सभ केँ भरबाक लेल बरिा पिौताह आ हम सभ आब बेहोश ननह रहब। 32 तिन जूनडथ हुनका सभ केँ कहलनथन, “हमर बात सुनू, हम एकटा एहन काज करब जे सभ पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमरा सभक जानतक सन् तान सभक बीच चलत।” 33 अहाँ सभ आइ रानत र्ाटक मे िाढ़ रहब आ हम अपन प्रतीक्षारत मनहलाक सींग ननकलब। 34 मुदा अहाँ सभ हमर काजक नवर्य मे ननह पूछू, नकएक तँ जा धरर हम जे काज कऽ रहल छी से पूरा ननह भऽ जायत, ताबत धरर हम अहाँ सभ केँ ई बात ननह कहब।


35 ओनजयास आ राजकुमार सभ हुनका कहलनथन, “शाीं नत सँ जाउ, आ प्रभु परमेश् वर अहाँ क समक्ष रहनथ, जानह सँ हमरा सभक शत्रु सभक प्रनतशोध ली।” 36 ओ सभ डे रा पर सँ घुरर कऽ अपन-अपन वाडष मे चनल गेलाह। अध्याय 9 1 जूनडथ मुँह पर िनस पडलीह आ माथ पर राि राखि कऽ ओनह बोरा केँ िोनल लेलनन जानह सँ ओ पनहरने छलीह। जिन ओनह साँ झक धूप यरूशलेम मे प्रभुक घर मे चढ़ाओल गेल छल, ओनह समय मे जूदीत जोर-जोर सँ नचनचया उिलीह। 2 हे हमर नपता नशमोनक परमेश् वर परमेश् वर, नजनका अहाँ परदे शी सभक प्रनतशोध लेबाक लेल तलवार दऽ दे नलयैक, जे एकटा दासी केँ अशुद्ध करबाक लेल ओकर पट्टी केँ ढीला कऽ दे लक आ ओकर लाजक लेल जाँ घक पता लगा दे लक आ ओकर कुमाररव केँ ओकर अपमाननत कऽ दे लक। नकएक तँ अहाँ कहलहुँ जे, “एना ननह होयत।” आ तैयो ओ सभ एना केलनन। 3 ते ँ अहाँ हुनका सभक शासक सभ केँ मारर दे बाक लेल दे नलयैक, जानह सँ ओ सभ धोिा िा कऽ अपन नबछौन केँ िू न सँ रीं नग दे लक आ अपन मानलक सभक सींग नोकर सभ केँ आ नसींहासन पर बैसल मानलक सभ केँ मारर दे लक। 4 अपन स् त्री सभ केँ नशकार बना कऽ अपन बेटी सभ केँ बींदी बना कऽ दऽ दे ने छनथ आ अपन सभटा लूट-पाट केँ अहाँ क नप्रय सींतान सभक बीच बाँ नट दे लहुँ । जे सभ तोहर उत्साह सँ भावुक भऽ गेल छल, आ अपन िू नक प्रदू र्ण सँ घृणा करै त छल, आ अहाँ केँ सहायताक लेल पुकारै त छल, हे परमेश् वर, हे हमर परमेश् वर, हमर नवधवा सेहो सुनू। 5 नकएक तँ अहाँ मात्र ओनह काजे ननह, बल् नक पनहने जे काज भऽ गेल छल आ ओकर बादक काज सेहो केलहुँ । अहाँ एिन जे नकछु अनछ आ आबय बला बात पर नवचार केने छी। 6 हँ , जे बात अहाँ ननधाष ररत केलहुँ से सभ तैयार भऽ गेल छल आ कहलक जे, “दे िू, हम सभ एतय छी, नकएक तँ अहाँ क सभ बाट तैयार भऽ गेल अनछ आ अहाँ क न् याय अहाँ क पूवष ज्ञान मे अनछ।” 7 दे िू, अश्शूर सभक सामथ्ष य बनढ़ गेल अनछ। घोडा आ मनुक्खक सींग ऊँच कयल जाइत छनथ। अपन पैदल चलननहारक बल पर घमींड करै त छनथ। ढाल, भाला, धनुर् आ गोर्न पर भरोसा करै त छनथ। आ ई ननह जानन जे अहाँ युद्ध तोडय बला प्रभु छी। 8 हुनका सभक सामथ्ष य केँ अपन सामथ्ष य मे र्ेनक नदयौक आ हुनका सभक सामथ्ष य केँ अपन क्रोध मे उतारर नदयौक, नकएक तँ ओ सभ अहाँ क पनवत्र स्द्थान केँ अशुद्ध करबाक आ अहाँ क गौरवशाली नामक स् न् ता केँ अशुद्ध करबाक आ अहाँ क वेदीक सीग ीं केँ तलवार सँ र्ेनक दे बाक योजना बनौने छनथ। 9 हुनका सभक घमींड दे िू, आ अपन क्रोध हुनका सभक माथ पर पिाउ। 10 हमर िोरक छल सँ नौकर केँ राजकुमारक सींग आ राजकुमार केँ नौकर केँ मारर नदयौक। 11 नकएक तँ तोहर सामथ्ष य भीड मे िाढ़ ननह अनछ आ ने बलवान लोक मे, नकएक तँ अहाँ दु ुः िी सभक परमेश् वर छी, दबल-कुचलल लोकक सहायक, कमजोर लोकक सहारा, नवरि लोकक रक्षक आ आशाहीन लोकक उद्धारकताष छी . 12 हे हमर नपताक परमेश् वर आ इस्राएलक उत्तरानधकारक परमेश् वर, आकाश आ पृथ् वीक प्रभु, जलक सृनष्टकताष , सभ प्राणीक राजा, हमर प्राथषना सुनू। 13 हमर बात आ छल केँ हुनका सभक घाव आ चोट बनाउ, जे सभ अहाँ क वाचा आ अहाँ क पनवत्र घर आ नसयोनक चोटी आ अहाँक सन्तान सभक सम्पनत्तक घरक नवरुद्ध क्रूर काज करबाक योजना बनौने छनथ।

14 आ सभ जानत आ गोत्र केँ ई स्वीकार कराउ जे अहाँ सभ सामथ्ष य आ सामथ्ष यक परमेश् वर छी, आ अहाँ छोनड इस्राएलक लोक सभक रक्षा करयवला आन नकयो ननह अनछ। अध्याय 10 1 ओकर बाद ओ इस्राएलक परमेश् वर लग पुकारब छोनड दे लक आ एनह सभ बात केँ समाप्त कऽ लेलक। 2 ओ जतय िसल छलीह ओतय उनि कऽ अपन दासी केँ बजा कऽ ओनह घर मे उतरर गेलीह जानह मे ओ नवश्राम-नदन आ पाबनन मे रहैत छलीह। 3 ओ जे बोरा पनहरने छलीह से उतारर कऽ अपन नवधवाक वस्त्र उतारर कऽ अपन शरीरक चारू कात पानन सँ धो लेलनन आ अनमोल मरहम सँ अनभर्ेक कयलनन आ माथक केश केँ बेनी कऽ टायर पनहरर लेलनन ओ अपन हर्षक वस्त्र पनहरने छलीह, जे ओ अपन पनत मनशक जीवन मे पनहरने छलीह। 4 ओ अपन पएर पर चप्पल लऽ कऽ अपन कींगन, जींजीर, अींगूिी, झुमका आ सभटा आभूर्ण पनहरर कऽ बहादु री सँ सजौलीह, जानह सँ हुनका दे िय बला सभ लोकक आँ खि लोभाबय। 5 तिन ओ अपन नौकरानी केँ मनदराक बोतल आ तेलक एकटा क्रूस दे लनथन आ एकटा झोरा मे सुिायल धान, अींजीरक गाीं ि आ नीक रोटी भरर दे लनन। ते ँ ओ एनह सभ वस्तु केँ एक िाम मोनड कऽ अपन ऊपर राखि दे लनन। 6 एनह तरहे ँ ओ सभ बेतुनलया नगरक र्ाटक नदस बढ़लाह आ ओनजयास आ ओनह नगरक प्राचीन लोक सभ, चानिस आ चनमषस केँ िाढ़ भेटलाह। 7 जिन ओ सभ ओकरा दे िलक जे ओकर चेहरा बदनल गेल छलैक आ ओकर पररधान बदनल गेलैक तऽ ओकर सुन्दरता पर बहुत आियषचनकत भऽ ओकरा कहलकैक। 8 परमेश् वर, हमरा सभक पूवषज सभक परमेश् वर, अहाँ पर कृपा करनथ आ इस्राएलक सन् तान सभक मनहमा आ यरूशलेमक उदात्तताक ले ल अपन काज पूरा करू। तिन भगवानक आराधना केलनन। 9 ओ हुनका सभ केँ कहलनथन, “नगरक र्ाटक हमरा ले ल िुजबाक आज्ञा नदअ जानह सँ हम जे बात अहाँ सभ हमरा सँ कहलहुँ से पूरा करबाक लेल ननकनल सकब।” ते ँ ओ सभ युवक सभ केँ आज्ञा दे लनथन जे, जे ना ओ कहने छलीह, हुनका सामने िोनल नदयौक। 10 ओ सभ एना कऽ कऽ जूनडथ आ ओकर दासी आ ओकरा सींग बाहर ननकनल गेलीह। नगरक लोक सभ ओकरा ताबत धरर दे िैत रहल, जाबत धरर ओ पहाड पर सँ ननह उतरर गेल आ जाबत धरर ओ घाटी सँ ननह गुजरर गेल आ ओकरा आब ननह दे खि सकल। 11 एनह तरहे ँ ओ सभ सोझे घाटी मे नवदा भेलाह। 12 ओ ओकरा पकनड कऽ पुछलनथन, “अहाँ कोन लोकक छी?” आ अहाँ कतय सँ आयल छी? आ अहाँ कतय जा रहल छी? ओ बजलीह, “हम इिानी सभक स् त्री छी आ ओकरा सभ सँ भानग गेल छी। 13 हम अहाँ क सेनाक प्रमुि होलोर्नेसक सोझाँ आनब रहल छी जे सत्यक बात कहब। हम ओकरा एकटा एहन बाट दे िा दे बनन जानह सँ ओ जा कऽ पूरा पहाडी इलाका केँ जीत लेत, नबना कोनो आदमीक शरीर आ प्राण गमा लेने। 14 लोक सभ हुनकर बात सुनन हुनकर चेहरा दे खि हुनकर सुन्दरता दे खि बहुत आियषचनकत भऽ हुनका कहलनथन। 15 अहाँ हमरा सभक प्रभुक सानिध मे जिबाजी मे उतरर कऽ अपन जान बचा लेलहुँ । 16 जिन अहाँ हुनका सोझाँ िाढ़ रहब तँ अपन मोन मे ननह डे राउ, बल् नक हुनका अपन वचनक अनुसार दे िाउ। ओ तोरा नीक जकाँ नवनती करत।


17 तिन ओ सभ ओकरा आ ओकर दासी केँ सींग दे बाक लेल ओनह मे सँ एक सय आदमी केँ चुनलनन। ओ सभ ओकरा होलोर्नेसक डे रा मे अनलनन। 18 तिन पूरा डे रा मे जमा भे ल, नकएक तँ डे रा सभक बीच मे हुनकर आगमनक हल्ला होइत छल आ ओ सभ हुनका चारू कात घुनम रहल छल, जाबत धरर ओ होलोर्नेसक डे राक बाहर िाढ़ छलीह। 19 ओ सभ ओकर सौन्दयष दे खि आियषचनकत भऽ ओकरा कारणे ँ इस्राएलक सन् तान सभक प्रशींसा कयलक आ सभ अपन पडोसी केँ कहलक, “एनह लोक केँ के तु च्छ बुझत, जकरा मे एहन स् त्रीगण अनछ?” नननित रूप सँ ई नीक बात ननह जे हुनका सभ मे सँ एक आदमी छोनड दे ल जाय जे छोनड दे ल गेल अनछ जे पूरा पृथ्वी केँ धोिा द' सकय। 20 होलोर्नेसक समीप पडल लोक सभ आ हुनकर सभ नोकर आ ओ सभ हुनका डे रा मे अनलनन। 21 होलोर्नेस अपन नबछौन पर बैंगनी, सोना, पिा आ कीमती पाथर सँ बुनल गेल छत्ताक नीचाँ बैसल छलाह। 22 ओ सभ हुनका हुनकर नवर्य मे दे िौलनन। ओ चानीक दीप ल' क' अपन डे राक आगू बढ़लाह। 23 जिन जूदीत हुनका आ हुनकर नोकर सभक सोझाँ आनब गेलीह तिन ओ सभ हुनकर चे हराक सुन्दरता दे खि आियषचनकत भ’ गेलाह। ओ मुँह पर िनस पडलीह आ हुनका आदर कयलनन। अध्याय 11 1 तिन होलोर्नेस ओकरा कहलनथन, “हे नारी, सान्त्वना रहू, हृदय मे ननह डे राउ, नकएक तँ हम कनहयो एहन ककरो चोट ननह पहुँ चेलहुँ जे समस्त पृथ्वीक राजा नबूकोदोनोसोरक सेवा करऽ चाहै त छल।” 2 आब, जँ अहाँ क लोक जे पहाड पर रहै त अनछ, जँ हमरा द्वारा इजोत ननह दे ल गेल रहै त तऽ हम हुनका सभक नवरुद्ध अपन भाला ननह उिौने रनहतहुँ । 3 मुदा आब हमरा कहू जे अहाँ हुनका सभ सँ नकएक भानग गेलहुँ आ हमरा सभ लग नकएक आनब गेलहुँ , नकएक तँ अहाँ रक्षाक लेल आयल छी। सान्त्वना रािू, अहाँ आइ रानत आ परलोक मे जीनवत रहब। 4 नकएक तँ केओ तोरा चोट ननह पहुँ चाओत, बल् नक तोरा नीक जकाँ नवनती करत, जेना हमर मानलक राजा नबूकोदोनोसोरक सेवक सभ करै त अनछ। 5 तिन जूनडथ हुनका कहलनथन, “अपन नौकरक बात िहण करू आ अपन दासी केँ अहाँ क सोझाँ मे बाज’ नदयौक, आ हम आइ रानत अपन मानलक केँ कोनो झूि ननह बाजब।” 6 जँ अहाँ अपन दासीक बातक पालन करब तँ परमेश् वर अहाँ क लग मे ओ बात केँ पूणष रूप सँ पूरा कऽ दे नथन। आ हमर प्रभु अपन उद्दे श्य सँ नवर्ल ननह होयत। 7 जेना समस्त पृथ्वीक राजा नबूकोदोनोसोर जीनवत छनथ आ हुनकर सामथ्ष य जीनवत छनथ, जे अहाँ केँ सभ जीव-जन्तुक भरण-पोर्णक लेल पिौने छनथ, नकएक तँ अहाँ क द्वारा मात्र लोक हुनकर सेवा ननह करत, बल् नक िेतक जानवर आ पशु-पक्षी सेहो। आ आकाशक नचडै सभ, नबूकोदोनोसोर आ ओकर समस्त घरक अधीन अहाँ क सामर्थ्ष सँ जीनवत रहत। 8 हम सभ अहाँ क बुखद्ध आ अहाँ क नीनत सभक नवर्य मे सु नने छी आ समस्त पृथ्वी मे ई िबरर भेटैत अनछ जे अहाँ मात्र राज्य मे श्रेष्ठ छी, ज्ञान मे पराक्रमी छी आ युद्धक पराक्रम मे अद् भुत छी। 9 अकीयोर जे बात अहाँ क पररर्द् मे कहलनन, तानह नवर्य मे हम सभ हुनकर बात सुनलहुँ । नकएक तँ बेतुनलयाक लोक सभ हुनका उद्धार कयलनन आ ओ हुनका सभ केँ ओ सभ बात सुनौलनन जे ओ अहाँ सँ कहने छलाह। 10 ते ँ हे प्रभु आ राज्यपाल, हुनकर वचनक आदर ननह करू। मुदा एकरा अपन हृदय मे रािू, नकएक तँ ई सत् य अनछ, नकएक तँ हमरा

सभक जानत केँ सजा ननह भे टतैक आ ने तलवार ओकरा सभ पर हावी भऽ सकैत छै क, जाबत ओ सभ अपन परमेश् वरक नवरुद्ध पाप ननह करत।” 11 आ आब, जिन हमर मानलक अपन उद्दे श्य सँ परानजत आ नवर्ल ननह भ’ जाय, आब हुनका सभ पर मृत्यु सेहो पनड गेल अनछ, आ हुनका सभक पाप हुनका सभ पर आनब गेल अनछ, जानह सँ ओ सभ जिन किनो ओ सभ एहन काज करत जे ओ सभ अपन परमेश् वर केँ क्रोनधत करताह कयल गेल: 12 नकएक तँ हुनका सभक अि-पानन ितम भऽ जाइत छनन आ सभ पानन कम भऽ जाइत छनन, आ ओ सभ अपन मवेशी पर हाथ रिबाक ननणषय कएने छनथ आ ओनह सभ वस्तु सभ केँ भस्म करबाक योजना बना लेने छनथ, जे परमेश् वर हुनका सभ केँ अपन ननयमक अनुसार भोजन करबा सँ मना कऽ दे ने छनथ। 13 हम सभ सींकखित छी जे ओ सभ मनदरा आ तेलक दसम भागक पनहल र्ल िचष करब, जकरा ओ सभ पनवत्र कएने छलाह आ हमरा सभक परमेश् वरक सामने यरूशलेम मे सेवा करयवला पुरोनहत सभक लेल सुरनक्षत कएने छलाह। जे बात कोनो लोकक लेल एते क जायज ननह अनछ जे हाथ सँ छूब। 14 नकएक तँ ओ सभ नकछु गोटे केँ यरूशलेम पिौने छनथ, नकएक तँ ओतऽ रहननहार सभ सेहो एनह तरहक काज कएने छनथ जे हुनका सभ केँ सीनेट सँ लाइसेंस अनबाक लेल। 15 जिन ओ सभ हुनका सभ केँ िबरर आनत तिन तुरन्त ई काज कऽ लेताह आ ओही नदन अहाँ केँ नष्ट करबाक लेल दे ल जायत। 16 ते ँ हम अहाँ क दासी ई सभ जानन हुनका सभक सोझाँ सँ भानग गेल छी। परमेश् वर हमरा अहाँ क सींग एहन काज करबाक लेल पिौलनन अनछ, जानह सँ समस्त पृथ्वी आियषचनकत भऽ जायत आ जे केओ सुनत।” 17 नकएक तँ अहाँ क सेवक धमषपरायण अनछ आ नदन-रानत स् वगषक परमेश् वरक सेवा करै त अनछ किन ओ सभ अपन पाप केने छनथ से हमरा कहताह। 18 हम आनब कऽ अहाँ केँ ई बात दे िा दे ब, तिन अहाँ अपन समस्त सेनाक सींग ननकनल जायब, आ ओनह मे सँ नकयो अहाँ क नवरोध ननह करत। 19 हम अहाँ केँ यहूनदयाक बीच मे ताबत धरर लऽ जायब जाबत धरर अहाँ यरूशलेमक समक्ष ननह पहुँ चब। हम अहाँ क नसींहासन ओकर बीच मे रािब। अहाँ ओकरा सभ केँ ओनह भेड ँ ा जकाँ भगा दे ब जकरा चरबाह ननह छै क, आ कुकुर अहाँ पर मुँह तक ननह िोलत, नकएक तँ ई सभ बात हमरा पूवषज्ञानक अनुसार कहल गेल छल आ ई सभ हमरा बताओल गेल छल आ हम ई कहबाक लेल पिाओल गे ल छी।” तोरा। 20 तिन ओकर बात होलोर्नेस आ ओकर सभ नौकर सभ केँ नीक लागल। ओ सभ हुनकर बुखद्ध पर आियषचनकत भऽ कहलनथन। 21 पृथ् वीक एक छोर सँ दोसर छोर धरर एहन स् त्री ननह अनछ, जे मुि-सुन्दरता आ बातक बुखद्ध दु नू अनछ। 22 तनहना होलोर्नेस ओकरा कहलनथन। परमेश् वर नीक कयलनन जे अहाँ केँ लोक सभक सोझाँ पिा दे लनन, जानह सँ हमरा सभक हाथ मे सामथ्ष य आ हमर प्रभु केँ हल्लु क बुझननहार सभ पर नवनाश हो। 23 आब अहाँ अपन चेहरा मे सुन्दर आ अपन बात मे चुटीला दु नू छी, जँ अहाँ जे ना कहलहुँ ते ना करब तँ अहाँ क परमेश् वर हमर परमेश् वर हे ताह आ राजा नबूकोदोनोसोरक घर मे रहब आ पूरा तरहे ँ प्रनसद्ध भऽ जायब धरती. अध्याय 12 1 तिन ओ आज्ञा दे लनथन जे जतऽ हुनकर थारी रािल गेल छलनन, ओतनह हुनका भीतर आनन दे ल जाय। आ आदे श दे लनथन जे ओ सभ हुनका ले ल हुनकर अपन भोजन तैयार करनथन आ ओ हुनकर मनदरा सँ पीबनथन।


2 तिन जूनदथ कहलनथन, “हम एकर र्ल ननह िायब, जानह सँ कोनो अपराध ननह भ’ जाय, मुदा जे नकछु हम अनने छी, तानह सँ हमरा लेल व्यवस्द्था कयल जायत।” 3 तिन होलोर्नेस ओकरा कहलनथन, “जँ तोहर भोजन ननह भ’ जायत त’ हम सभ अहाँ केँ एहने तरहक भोजन कोना दे ब?” नकएक तँ हमरा सभक सींग अहाँ क जानत मे सँ नकयो ननह अनछ।” 4 तिन जूनदथ हुनका कहलनथन, हमर मानलक, अहाँ क दासी हमरा लग जे नकछु अनछ, तकरा िचष ननह करत, जिन नक प्रभु हमरा हाथ सँ जे नकछु ननधाष ररत केने छनथ, तकरा काज ननह करत। 5 तिन होलोर्नेसक नौकर सभ हुनका डे रा मे लऽ गेलनन आ ओ आधा रानत धरर सुनत गेलीह आ भोरक समय मे ओ उनि गेलीह। 6 ओ होलोर्नेस लग पिौलनन जे, “हमर मानलक आब आज्ञा दे नथन जे अहाँ क दासी प्राथषना करय लेल ननकनल जाय।” 7 तिन होलोर्नेस अपन पहरे दार सभ केँ आज्ञा दे लनथन जे ओ सभ ओकरा ननह रोकनथ, एनह तरहे ँ ओ तीन नदन धरर डे रा मे रहलाह आ रानत मे बेतुनलयाक घाटी मे ननकनल गेलीह आ डे राक कात मे पाननक र्व्वारा मे नहा गेलीह। 8 जिन ओ बाहर ननकललीह तिन ओ इस्राएलक परमेश् वर परमेश् वर सँ नवनती कयलनन जे ओ अपन प्रजाक सन् तान सभक पुनरुत्थान नदस अपन बाट ननदे नशत करनथ। 9तिन ओ सार्-सुथरा भीतर आनब तम्बू मे रनह गेलीह, जाबत धरर साँ झ मे भोजन ननह कऽ ले लनन। 10 चाररम नदन होलोर्नेस मात्र अपन नोकर सभक ले ल भोज कयलनन आ कोनो अनधकारी केँ भोज मे ननह बजौलनन। 11 तिन ओ बगोआस नपुींसक केँ कहलनथन, जे हुनका लग सभ नकछु क नजम्मा रिैत छलाह, “अिन जाउ आ एनह नहिू स् त्री केँ बुझा नदअ जे ओ हमरा सभक सींग आनब कऽ हमरा सभक सींग भोजनपीन करनथ।” 12 दे िू, जँ हम सभ एहन स् त्री केँ छोनड दे ब, जँ ओकरा सींग ननह रनह जाय तँ हमरा सभक ले ल ई लाजक बात होयत। कारण जँ हम सभ ओकरा अपना नदस ननह िीच ीं ब तँ ओ हमरा सभ केँ नतरस्कार करै त हँ नस दे तीह। 13 तिन बगोआस होलोर्नेसक सोझाँ सँ जा कऽ हुनका लग आनब कहलनथन, “ई सुन्दर कन्या हमर मानलक लग आनब कऽ हुनका सामने आदररत होयब आ मनदरा पीबऽ सँ आ हमरा सभक सींग मस्त भऽ कऽ रहय सँ ननह डरय।” ई नदन अश्शूर के बेटी में से एक के रूप में बनैलकै, जे नबूचोदोनोसोर के घर में सेवा करै छै । 14 तिन जूनदथ हुनका पुछलनथन, “हम आब के छी जे हम अपन प्रभुक नवरोध करब?” नननित रूप सँ जे नकछु हुनका नीक लागत से हम जिी करब, आ ई हमर मृत्युक नदन धरर हमर आनन्द होयत। 15 ओ उनि कऽ अपन पररधान आ अपन स् त्रीक सभटा पररधान सँ सजौलनन आ हुनकर दासी जा कऽ हुनका ले ल होलोर्नेसक समक्ष जमीन पर कोमल चमडा नबछा दे लनथन, जे हुनका बगोआस सँ हुनका ननत्य उपयोगक लेल भे टल छलनन, जानह सँ ओ बैनस सकनथ आ हुनका सभ पर िाउ। 16 जिन जूनडथ भीतर आनब कऽ बैनस गेलीह तँ होलोर्नेस हुनका मोन मे खिनसया गेलाह आ हुनकर मोन चनकत भऽ गेलनन आ हुनकर सींगनतक बहुत इच्छा भेलनन। कारण, जनहया सँ ओ ओकरा दे िने छल, तानह नदन सँ ओ ओकरा धोिा दे बय लेल नकछु समय प्रतीक्षा क’ रहल छल। 17 तिन होलोर्नेस ओकरा कहलनथन, “अिन पीबू आ हमरा सभक सींग मस्त रहू।” 18 तिन जूनडथ कहलनथन, “हे मानलक, हम आब पीबब, नकएक तँ हमर जन्मक बादक सभ नदन सँ बेसी आइ हमरा मे हमर जीवन बनढ़ गेल अनछ।” 19 तिन ओ अपन दासी जे नकछु तैयार केने छल, से लऽ कऽ ियलीह आ पीनब गेलीह।

20 होलोर्नेस हुनका पर बहुत प्रसि भेलाह आ जन्मक बाद सँ एक नदन मे जतेक शराब पीने छलाह तानह सँ बेसी शराब पीनब लेलनन। अध्याय 13 1 साँ झ भेला पर हुनकर नोकर सभ जिी-जिी नवदा भऽ गेलाह आ बगोआस अपन डे रा बाहर बि कऽ दे लनन आ अपन मानलकक सोझाँ सँ पररचारक सभ केँ नवदा कऽ दे लनन। ओ सभ अपन नबछाओन पर चनल गेलाह, नकएक तँ ओ सभ थानक गेल छलाह, कारण भोज बहुत नदन भ’ गेल छलनन। 2 जूनडथ तम्बू मे असगरे रनह गेलाह आ होलोर्नेस असगरे अपन नबछौन पर पडल छलाह, कारण ओ मनदरा सँ भरल छलाह। 3 जूनडथ अपन दासी केँ आज्ञा दे ने छलीह जे ओ अपन पलींगक कोिलीक बाहर िाढ़ भ’ क’ हुनकर प्रतीक्षा करनथ। जेना ओ सभ नदन करै त छलीह, तेना ओ बाहर ननकलैत छलीह, कारण ओ कहने छलीह जे ओ अपन प्राथषना मे जेतीह, आ ओ बगोआस सँ सेहो ओही उद्दे श्य सँ गप्प करै त छलीह। 4 ते ँ सभ गोटे आगू बनढ़ गेलाह आ नकयो ओछाओन मे ननह रनह गेल, ने छोट आ ने पैघ। तिन जूनडथ हुनकर पलींगक कात मे िाढ़ भ’ क’ मोन मे बजलीह, “हे सवष शखिमान परमेश् वर, यरूशलेमक उदात्तीकरणक लेल हमर हाथक काज सभ केँ दे िू।” 5 आब समय आनब गेल अनछ जे अहाँ अपन उत्तरानधकारक सहायता करू आ हमरा सभक नवरुद्ध उिल शत्रु सभक नवनाशक लेल अपन उद्यम केँ पूरा करू। 6 तिन ओ होलोर्नेसक माथ पर ओछाओनक िींभा लग पहुँ चलीह आ ओतय सँ हुनकर र्ाँ स उतारलनन। 7 ओ अपन नबछौन लग पहुँ नच कऽ हुनकर माथक केश पकनड कऽ कहलनथन, “हे इस्राएलक परमेश् वर, आइ हमरा बल दऽ नदअ।” 8 ओ अपन पूरा ताकत सँ हुनकर गरदनन पर दू बेर प्रहार कयलनन आ हुनकर माथ छीन लेलनन। 9 ओ अपन दे ह पलींग पर सँ नीचाँ िसा दे लक आ िीं भा सभ पर सँ छतरी केँ उतारर दे लक। ओ बाहर ननकनल कऽ होलोर्नेस केँ अपन दासी केँ अपन माथ दऽ दे लनथन। 10 ओ ओकरा अपन झोरा मे राखि दे लनथन, तिन दु नू गोटे अपनअपन प्रथाक अनुसार प्राथषना करबाक लेल नवदा भेलाह, आ जिन ओ सभ डे रा सँ गुजरर गेलाह तँ घाटी केँ घेरर कऽ बेतुनलया पहाड पर चनढ़ कऽ ओकर र्ाटक पर पहुँ नच गेलाह। 11 तिन दू र सँ जूदीत र्ाटक परक चौकीदार सभ केँ कहलनथन, “अिन र्ाटक िोलू, हमरा सभक परमेश् वर हमरा सभक सींग छनथ जे यरूशलेम मे एिन धरर अपन सामथ्ष य आ शत्रु सभक नवरुद्ध अपन सेना केँ दे िाबनथ कयल गेल ई नदन। 12 जिन हुनकर नगरक लोक सभ हुनकर आवाज सुनन कऽ जिीजिी अपन नगरक र्ाटक पर उतरर गेलाह आ नगरक बुजुगष सभ केँ बजौलनन। 13 तिन दु नू गोटे छोट-पैघ दु नू गोटे एक सींग दौडल गे लाह, नकएक तँ हुनका सभक लेल ई बात अजीब छल जे ओ सभ ओनहना आनब गेलीह। 14 तिन ओ हुनका सभ केँ जोर-जोर सँ बजलीह, “परमेश् वरक स्तुनत करू, परमेश् वरक स्तुनत करू, परमेश् वरक स्तुनत करू, हम कहै त छी, नकएक तँ ओ इस्राएलक घराना सँ अपन दया ननह छीनन लेलनन, बल् नक आइ रानत हमरा सभक शत्रु सभ केँ हमर हाथ सँ नष्ट कऽ दे लनन।” 15 ओ झोरा मे सँ माथ ननकानल कऽ ओकरा सभ केँ कहलनथन, “अस्सूरक सेनाक प्रमुि होलोर्नेसक माथ दे िू, आ दे िू ओ छतरी, जानह मे ओ नशा मे पडल छलाह। परमेश् वर ओकरा स् त्रीक हाथ सँ मारर दे लनथन।


16 जनहना प्रभु जीबैत छनथ, जे हमरा अपन बाट मे राखि दे लनन, हमर चेहरा हुनका नवनाशक लेल धोिा दे लकनन, मुदा ओ हमरा सींग पाप ननह कयलनन, जानह सँ ओ हमरा अशुद्ध आ लखज्जत करनथ। 17 तिन सभ लोक आियषचनकत भऽ कऽ प्रणाम कऽ परमेश् वरक आराधना कयलक आ एक मोन सँ कहलक, “हे हमर परमेश् वर, अहाँ धन्य होउ, जे आइ अहाँ क लोकक शत्रु सभ केँ ननर्​् ट कऽ दे लहुँ ।” 18 ओनजयास ओकरा कहलनथन, “हे बेटी, अहाँ पृथ् वी पर सभ स् त्रीगण सभ सँ बेसी परमेश् वरक धन्य छी। आ परमेश् वर परमेश् वरक धन्य होअय, जे आकाश आ पृथ् वी केँ बनौलनन, जे अहाँ केँ हमरा सभक शत्रु सभक मुखियाक माथ कानट दे बाक लेल ननदे नशत कयलनन। 19 अहाँ सभक नवश्वास ओनह मनुर्​् य सभक हृदय सँ ननह हनट जायत जे परमेश् वरक सामथ्ष य केँ सदाक लेल मोन पाडै त अनछ। 20 परमेश् वर ई सभ बात अहाँक नदस सदा स्तुनतक लेल घुमा दै त छनथन, आ नीक-नीक बात मे अहाँ क दशषन करबाक लेल, नकएक तँ अहाँ हमरा सभक जानतक क्लेशक लेल अपन प्राण ननह बँचलहुँ , बल् नक हमरा सभक परमेश् वरक समक्ष सोझ बाट पर चलैत हमरा सभक नवनाशक बदला लेलनन। सभ लोक बाजल। तनहना हो, तनहना हो।

12 मुदा अश्शूर सभ हुनका सभ केँ दे खि अपन सरदार सभ केँ लग पिौलनन, जे सभ अपन-अपन से नापनत-सेनापनत सभ आ अपन-अपन एक-एकटा शासक लग आनब गेलाह। 13 तिन ओ सभ होलोर्नेसक तम्बू मे आनब कऽ जे हुनकर सभ वस्तुक प्रभारी छलनन हुनका कहलनथन, “हमर मानलक, जगू, नकएक तँ दास सभ हमरा सभक नवरुद्ध युद्ध मे उतरबाक साहस कयलक जानह सँ ओ सभ एकदम नष्ट भऽ जाय।” 14 तिन बगोआस मे जा कऽ डे राक दरबज्जा िटिटौलनन। नकएक तँ ओकरा लागलै जे ओ जूनडथक सींग सुतल अनछ। 15 मुदा नकयो जबाब ननह दे लक ते ँ ओ ओकरा िोनल कऽ ओछाओन मे गेलाह आ ओकरा मरर कऽ र्शष पर र्ेकल दे िलनन आ ओकर माथ छीन लेल गेलनन। 16 ते ँ ओ जोर-जोर सँ कानैत, आह-कान, आ जोर-जोर सँ नचनचया उिलाह आ अपन वस्त्र र्ानड ले लनन। 17 यीशु ओनह तम्बू मे गेलाह, जतऽ जूनदथ िहरल छलीह। 18 ई दास सभ धोिाधडी केलक। इिानी मे सँ एक स् त्री राजा नबूकदोनोसोरक घर मे लखज्जत कयलनन अनछ, नकएक तँ दे िू, होलोर्नेस नबना माथक जमीन पर पडल अनछ। 19 अश्शूरक सेनापनत सभ ई बात सुनन कऽ ओ सभ अपन कोट र्ानड लेलक आ ओकर सभक मोन आियषचनकत भऽ गेल।

अध्याय 14

अध्याय 15

1 तिन जूनडथ हुनका सभ केँ कहलनथन, “हे भाइ लोकनन, आब हमर बात सुनू, आ ई माथ लऽ कऽ अहाँ सभक दे बाल सभक सभसँ ऊँच स्द्थान पर लटका नदयौक।” 2 जनहना भोर भ’ जायत आ पृथ्वी पर सूयष ननकलत, अहाँ सभ प्रत्येक अपन-अपन शस्त्र-शस्त्र लऽ कऽ हरे क वीर केँ शहर सँ बाहर ननकनल जाउ आ ओकरा सभ पर एकटा सेनापनत बनाउ जेना अहाँ सभ चाहै त छी अश्शूरक पहरा नदस िेत मे उतरर जाउ। मुदा नीचाँ ननह जाउ। 3 तिन ओ सभ अपन कवच लऽ कऽ अपन डे रा मे जा कऽ असूरक सेनाक सेनापनत सभ केँ िाढ़ कऽ कऽ होलोर्नेसक डे रा नदस दौडत, मुदा ओकरा ननह भेटतैक अहाँ क मुँहक सोझाँ भानग जायत। 4 ते ँ अहाँ सभ आ इस्राएलक तट पर रहननहार सभ हुनका सभक पाछाँ -पाछाँ चलब आ जाइत-जाइत ओकरा सभ केँ उिानड दे ब। 5 मुदा अहाँ सभ एनह सभ काज करबा सँ पनहने हमरा अम्मोनी अनकयोर कनह नदअ, जानह सँ ओ ओनह लोक केँ दे खि सकनथ जे इस्राएलक घराना केँ तुच्छ बुनझ कऽ हमरा सभ लग पिौलनन। 6 तिन ओ सभ ओनजयासक घर सँ अकीओर केँ बजा लेलक। जिन ओ आनब कऽ लोकक सभा मे एक आदमीक हाथ मे होलोर्नेसक माथ दे िलनन तँ ओ मुँह पर िनस पडलाह आ हुनकर आत् मा क्षीण भऽ गेलनन। 7 मुदा जिन ओ सभ हुनका बरामद कऽ लेलक तँ ओ जूदीथक पएर पर िनस पडलाह आ हुनका आदर कयलनन आ कहलनथन, “यहूदाक सभ तम्बू मे आ सभ जानत मे अहाँ धन्य छी, जे अहाँ क नाम सुनन कऽ आियषचनकत भऽ जायत।” 8 आब एनह नदन मे जे काज केलहुँ से सभ हमरा कहू। तिन जूनदथ हुनका लोकक बीच मे अपन सभ काज सुनौलनथन, जानह नदन सँ ओ बाहर ननकललीह, ताबत धरर जे ओ हुनका सभ सँ बजलीह। 9 जिन ओ बाजब छोनड दे लनन तँ लोक सभ जोर-जोर सँ नचनचया उिल आ अपन शहर मे हर्षक हल्ला मचल। 10 अकीओर इस्राएलक परमेश् वरक सभ काज दे खि कऽ परमेश् वर पर बहुत नवश् वास कयलनन आ अपन अिचमषक माीं सक ितना कयलनन आ आइ धरर इस्राएलक घराना सँ जुनड गेलाह। 11 भोर होइते ओ सभ होलोर्ने सक माथ दे बाल पर टाँनग दे लक आ सभ अपन-अपन हनथयार लऽ कऽ ओ सभ पट्टी-बाडी मे बैनस पहाडक सींकट नदस नवदा भेल।

1 डे रा मे बैसल लोक सभ जिन ई बात सुनलक तँ ओ सभ एनह बात केँ दे खि आियषचनकत भऽ गेल। 2 हुनका सभ पर भय आ काँ नप उिलनन, जे नकयो अपन पडोसीक नजरर मे रहबाक नहम्मत ननह केलक, मुदा सभ गोटे एक सींग दौनड कऽ मैदान आ पहाडी इलाका मे भानग गेलाह। 3 बेतुनलयाक चारूकातक पहाड पर डे रा िसा कऽ बैसल लोक सभ सेहो भानग गेल। तिन इस्राएलक लोक सभ, जे नकयो योद्धा छल, ओकरा सभ पर दौनड गेल। 4 तिन ओनजयास केँ बेतोमास्टे म, बेबाई, चोबाई, कोला आ इस्राएलक समस्त प्रदे श मे पिौलनन, जे सभ जे नकछु भेल छल, आ सभ अपन शत्रु सभ पर दौनड कऽ ओकरा सभ केँ नष्ट करनथ। 5 इस्राएलक लोक सभ ई बात सुनन कऽ सभ एक सहमनत सँ हुनका सभ पर िनस पडल आ चोबाई धरर मारर दे लक अपन शत्रु सभक डे रा मे) आ गलाद आ गलील मे रहननहार लोक सभ हुनका सभ केँ बहुत मारर कऽ पीछा करै त रहलाह जाबत धरर ओ सभ दनमश्क आ ओकर सीमा सभ सँ आगू ननह भ’ गेलाह। 6 बेतुनलया मे रहननहार शेर् लोक सभ असूरक डे रा पर िनस पडल आ ओकरा सभ केँ लूनट लेलक आ बहुत समृद्ध भऽ गेल। 7 वध कऽ कऽ घुरल इस्राएली सभ केँ जे नकछु बचल छलैक। पहाड आ मैदान मे गाम-गाम आ नगर सभ मे बहुत रास लूट-पाट भेल। 8 तिन महापुरोनहत योआसीम आ यरूशलेम मे रहननहार इस्राएलक प्राचीन लोक सभ, परमेश् वर इस्राएल केँ जे नीक बात दे िौलनन, से दे िबाक लेल आ जूदीत केँ दे िबाक लेल आ हुनका प्रणाम करबाक लेल आनब गेलाह। 9 जिन ओ सभ हुनका लग पहुँचलाह तँ हुनका एक-मने आशीर् दऽ कऽ कहलनथन, “अहाँ यरूशले मक उदात्त लोक छी, इस्राएलक महान मनहमा छी, अहाँ हमरा सभक जानतक महान आनखन्दत छी। 10 अहाँ ई सभ काज अपन हाथ सँ केलहुँ , इस्राएलक लेल बहुत नीक काज केलहुँ आ परमेश् वर एनह बात सँ प्रसि छनथ। सभ लोक बाजल, “एना हो।” 11 लोक सभ तीस नदनक समय धरर डे रा लूनट लेलक आ जूनडथ होलोर्नेस केँ ओकर डे रा, ओकर सभटा थारी, ओछाओन, बतषन आ ओकर सभ सामान दऽ दे लक। ओ अपन गाडी सभ तैयार कऽ कऽ ओनह पर राखि दे लक।


12 तिन इस्राएलक सभ स् त्री सभ हुनका दे िबाक लेल दौडल गेलीह आ हुनका आशीवाष द दे लनन आ हुनका सभक बीच मे नाच केलनन। 13 ओ सभ ओकरा आ ओकर सींग रहननहार दासी पर जैतूनक माला पनहरा दे लनथन आ ओ सभ स्त्रीगणक नेतृव करै त सभ लोकक आगू बनढ़ गेलीह मुँह मे। अध्याय 16 1 तिन जूनदथ समस्त इस्राएल मे ई धन्यवाद गाबय लगलीह आ सभ लोक हुनका पाछाँ ई स्तुनत गीत गबैत छलाह। 2 तिन जूनडथ कहलनथन, “हमर परमेश् वरक लेल झींझरी सँ शुरू करू, हमर प्रभु केँ झाँ झ सँ गाउ। 3 परमेश् वर लडाइ सभ केँ तोनड दै त छनथ, नकएक तँ ओ हमरा सताओननहार सभक हाथ सँ हमरा प्रजाक बीच मे डे रा सभक बीच मे छोनड दे लनन। 4 अस्सूर उत्तर नदस सँ पहाड सँ ननकलल, दस हजार सेनाक सींग आनब गेल, जकर भीड धार केँ रोनक दे लक आ ओकर घुडसवार सभ पहाडी सभ केँ झाँ नप लेलक। 5 ओ डी​ींग मारलक जे ओ हमर सीमा जरा कऽ हमर युवक सभ केँ तलवार सँ मारर दे त, आ दू ध नपबैत बच्चा सभ केँ जमीन पर पटनक दे त, आ हमर नशशु सभ केँ नशकार बना दे त आ हमर कुमारर सभ केँ लूट-पानी बना दे त। 6 मुदा सवषशखिमान प्रभु एकटा स् त्रीक हाथ सँ हुनका सभ केँ ननराश कऽ दे लनन। 7 नकएक तँ पराक्रमी युवक सभक हाथ मे ननह िसल आ ने टाइटनक बेटा सभ ओकरा मारर दे लकैक आ ने ऊँच नदग्गज ओकरा पर बैसलैक। 8 ओ इस्राएल मे दबल-कुचलल लोकक उदात्तताक ले ल अपन नवधवाक वस्त्र उतारर कऽ अपन मुँह पर अमल सँ अनभर्ेक कयलनन आ केश केँ टायर मे बाखि लेलनन आ हुनका धोिा दे बाक लेल नलनेन वस्त्र लऽ ले लनन। 9 ओकर चप्पल ओकर आँ खि केँ चोरा लेलक, ओकर सौन्दयष ओकर मोन केँ बींदी बना लेलक आ ओकर गरदनन सँ मुिौटा गुजरर गेलै। 10 ओकर साहस दे खि र्ारसी सभ काँ नप उिल आ मादी सभ ओकर किोरता दे खि डरा गेल। 11 तिन हमर दु िी लोक सभ िुशी सँ नचनचया उिल आ हमर कमजोर लोक सभ जोर-जोर सँ नचनचया उिल। मुदा ओ सभ आियषचनकत भऽ गेलाह, ई सभ अपन आवाज उिौलनन, मुदा ओ सभ उिानड गेलाह। 12 कुमारर सभक पुत्र सभ ओकरा सभ केँ बेनध कऽ घायल कऽ दे लक जे ओ सभ प्रभुक युद्ध मे नष्ट भऽ गे ल। 13 हम प्रभु केँ एकटा नव गीत गबैत छी, “हे प्रभु, अहाँ महान आ मनहमाशाली छी, बल मे अद् भुत आ अजेय छी। 14 सभ प्राणी अहाँ क सेवा करऽ, नकएक तँ अहाँ बाजलहुँ आ ओ सभ बनल अनछ, अहाँ अपन आत् मा पिौलहुँ आ ओ ओकरा सभ केँ सृनजत केलहुँ , मुदा अहाँ क आवाजक नवरोध करयवला केओ ननह अनछ। 15 पहाड सभ अपन नीवीं सँ पाननक सींग हनट जायत, चट्टान सभ अहाँ क सोझाँ मोम जकाँ नपघनल जायत। 16 नकएक तँ सभ बनलदान अहाँ क लेल मधुर गींधक लेल बहुत कम अनछ, आ सभटा चबी अहाँ क होमबनल लेल पयाष प्त ननह अनछ। 17 नधक्कार अनछ ओनह जानत सभक जे हमर पररजन सभक नवरुद्ध उिै त अनछ! सवषशखिमान प्रभु न्याय के नदन ओकरा नसनी के बदला लेतै, ओकरा नसनी के माीं स में आनग आरो कीडा डालै। ओ सभ ओकरा सभ केँ महसूस करत आ अनन्त काल धरर कानत।

18 यरूशलेम मे प्रवेश करै त दे री ओ सभ प्रभुक आराधना कयलनन। लोक सभ केँ शुद्ध होइते ओ सभ अपन होमबनल, मुफ्त बनल आ अपन वरदान चढ़ा दे लक। 19 जूनडथ सेहो होलोर्नेसक सभटा सामान जे लोक सभ ओकरा दे ने छल, ओकरा समनपषत कऽ दे लक आ ओकर पलींगक कोिली सँ ननकालल गेल छतरी केँ प्रभु केँ उपहार मे दे लक। 20 तिन लोक सभ यरूशलेम मे पनवत्र स्द्थानक समक्ष तीन मास धरर भोज करै त रहलाह आ जूदीत हुनका सभक सींग रहलीह। 21 एनह समयक बाद सभ अपन-अपन उत्तरानधकार मे घुरर गेलाह आ जूनडथ बेतुनलया गेलीह आ अपन सम्पनत्त मे रनह गेलीह आ अपन समय मे पूरा दे श मे आदरणीय छलीह। 22 बहुतो लोक हुनका सँ आिह करै त छलाह, मुदा हुनकर जीवन भरर नकयो हुनका ननह नचिै त छलनन, जिन नक हुनकर पनत मनसेस मरर गेलाह आ हुनकर लोकक सींग जमा भ’ गेलाह। 23 मुदा ओ अपन पनतक घर मे बूढ़ भ’ गेलीह आ अपन दासी केँ मुि क’ दे लनन। ते ँ ओ बेतुनलया मे मरर गेलीह। 24 इस्राएलक वींशज हुनका सात नदन धरर नवलाप केलक, आ हुनकर मरबा सँ पनहने ओ अपन सम्पनत्त अपन पनत मनशसक नजदीकी लोक सभ मे बाँ नट दे लनन। 25 जूदीतक समय मे आ हुनकर मृत्युक बहुत नदनक बाद सेहो एहन केओ ननह छल जे इस्राएलक सन् तान सभ केँ आरो डरा दे लक।


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