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A Murder Mystery By Sudhir Halakhandi

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A Murder Mystery by Sudhir Halakhandi

Full Novel A Murder Mystery by Sudhir Halakhandi

A Murder Mystery By Sudhir Halakhandi ह्त्या का उलझा रहस्य सुधीर हालाखंडी

ऑनलाइन खाने का सामान सप्लाई करने वाली कम्पनी बीटा -2 के डिलीवरी बॉय

ववकास ने सेक्टर -7 की एक बड़ी सी बबल्ि​िंग की

पार्किंग में अपनी मोटर साइर्कल खड़ी की, हे लमेट गािी के साथ लॉक र्कया और खाने का पैकेट हाथ में लेकर ललफ्ट की और बढ गया . उसे सातवीिं मिंलिल पर िाना था . वहािं पहुँच कर उसने फ्लैट नम्बर 703 की घिंटी बिाई . कोई िवाब नहीिं आया तो उसने थोिा इन्तिार र्कया र्िर उसे लगा र्क दरवािा बिंद नहीिं है उसने धीरे से दरवािा अन्दर की धकेला और आवाि दी सर .... लेर्कन कोई िवाब नहीिं आया. उसने घिी दे खी उसकी क्लास का समय होने वाला तो वह उतावला होकर अन्दर की तरि आवाि दे ते हए चला गया . आगे दे खा तो वह काुँप गया. सोिे पर एक व्यलक्त खन ू से लथपथ था और उसके सीने में चाकू धिंसा था. 1


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ववकास एक बार तो एक ही िगह िड़ हो गया लेर्कन र्िर उसने सोचा शायद अभी इस व्यलक्त में िान हो और वो आगे बढ़ा और उसने सीने से चाकू खीिंच कर बाहर

ननकाल ललया लेर्कन तभी एक

खट की आवाि आई और फ्लैट का दरवािा बिंद हो गया वो दौड़ कर दरवािे तक गया और उसे खीिंच कर खोलने लगा लेर्कन उसके प्राण तब सूख गए िब उससे दरवािा खला नहीिं .. वो समझ गया दरवािा बाहर से बिंद हो गया है और वह...... वह बरी तरह ि​िंस चका है . ववकास ने खखड़की की और दे खा लेर्कन 7 मिंलिल बहत अधधक उिं चाई थी और ननकलना सिंभव नहीिं था . दरवािा पीटने से कोई िायदा नहीिं था बल्क नक्सान ही होता . वह िोर -िोर से सािंस लेने लगा . उसे कोई रास्ता समझ नहीिं आ रहा था र्क क्या करे , वह एक कसी पर बैठ गया और सोचने लगा . वह परू ा पसीने से भर चका था वह समझ गया था र्क घर में कोई नहीिं है और वह व्यलक्त लिसके सीने से उसने चाक़ू ननकाला वह मर चका है .आगे र्क क्पना कर वह पत्ते की तरह काुँप उठा और थोड़ी दे र यों ही बैठा रहा . कछ समय बीता और फ्लैट का दरवािा खला और एक पललस ऑर्िसर अपने दो मातहतों के साथ अन्दर आया और आते ही उसने चारों और का मआयना र्कया. अपने मातहत को बोला मामला साि है इस लड़के को धगरफ्तार कर थाने ले चलो . ववकास ने कहा – सर ! मेरी बात तो सननए, मैं एक MBA का छात्र हूुँ. पाटट टाइम डिलीवरी बॉय का काम करता हूुँ. उसने सारी बात ज्यों

की त्यों सना दी. इिंस्पेक्टर का नाम चेतन प्रकाश यादव था और वो एक सीननयर पललस ऑर्िसर था.उसने ववकास से कहा बेटा, हालात 2


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इस वक्त तम्हारे खखलाि है मझे तम्हे धगरफ्तार करना ही होगा लेर्कन यदद तम बेगनाह हो तो कोई भी तम्हे सिा नहीिं दे सकता. इिंस्पेक्टर यादव ने एक हवलदार को कहा र्क चलो तम इस लड़के को नीचे िीप में ले िाकर बैठा दो , ननगरानी रखना, मैं बस आ रहा हूुँ. हवलदार रोते हए लड़के ववकास को लेकर फ्लैट के बाहर ननकला. इिंस्पेक्टर यादव ने िोरें लसक टीम और अपने थाने पर िोन र्कया. उन्हें हालत समझाते हए तरिं त आने को कहा .दस ू रे हवलदार को ननदे श ददए र्क कोई चीि छे िी नहीिं िाए और यह कह कर उसने फ्लैट का एक बार मआयना र्कया र्िर बाहर ननकल गया . इस मिंलिल पर 4 फ्लैट थे. इिंस्पेक्टर यादव ने दे खा र्क कछ लोग बाहर खड़े थे. यादव ने उनके पास िाकर एक बिगट व्यलक्त की और ध्यान दे ते हए पछ ू ा कछ बताइये सामने वाले फ्लैट में रहने वाले के बारे में. बिगट ने बताया शमाट िी है नाम है वववेक प्रसाद िी शमाट ,ररटायिट बैंक मैनेिर हैं. अकेले रहते हैं यहाुँ और उनके दोनों लिके दोनों बाहर हैं. लेर्कन साब, हआ क्या है िो आपको आना पिा ? इिंस्पेक्टर चेतन प्रकाश यादव ने बताया आपके पिौसी का क़त्ल हो गया है . इसके आगे कछ कहता इसके पहले ही वो बिगट वही​ीँ िमीन पर बैठ गए . अरे ! वो मेरे दोस्त थे , रोि का लमलना था , बड़े ही भले आदमी थे . उन्हें कोई क्यों मारे गा ? बाकी लोग भी इसी तरह आश्चयट प्रकट करने लगे.

यादव ने उनसे उनके दोनों बेटों के नाम

एविं नम्बर ललए और कहा आप कृपया उन्हें सधू चत कर दें और ध्यान रखें फ्लैट के आस -पास या अन्दर कोई नहीिं िाये और बाहर भी कोई छे ड़छाड़ ना हो . हमारी िोरें लसक टीम और मेरे थाने से कछ और लोग आने वाले हैं आप प्लीि उनसे सहयोग करें . 3


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उस बबल्ि​िंग की हर मिंलिल पर 4 फ्लैट थे और बेसमेंट में पार्किंग थी और पार्किंग से ही ललफ्ट ऊपर िाती थी. यादव िब तक नीचे आया तब तक उसकी टीम आ चकी थी सब इिंस्पेक्टर ननतेश रावल के साथ . रावल एक नया ऑर्िसर था पर यादव का ववश्वसनीय था . यादव ने उसे ललफ्ट मेन , चोकीदार और पड़ोलसयों से पछ ू ताछ के ननदे श ददए और वहािं लगे सीसीटीवी दे खने के ललए भी कहा और फ्लैट से भी र्ि​िं गर वप्रिंट्स उठाने , लाश के िोटो लेने , हधथयार बबना हाथ लगाये िब्त करने और लाश को पोस्ट माटट म के ललए भेिने के ननदे श ददए और उसके बाद वो िीप की तरि बढ़ गया िहाुँ ववकास एक हवलदार और िीप ड्राईवर के साथ बैठा था . *

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ववकास को लेकर िीप थाने पहच गई . इिंस्पेक्टर यादव ने पहले खानापनू तट परू ी की इसमें भी कािी समय लगा . ववकास से उसके बारे में कछ सवाल उसने व्यलक्तगत पूछे और र्िर उसे अपने कमरे बैठा कर समझाया – दे खो

बेटा, र्कसी ि्दबािी या क्षखणक आवेश में

तमसे यह गलती हो गई है तो सीधे – सीधे बता दो . मझे सख्ती के ललए मिबरू मत करो क्यों र्क तम्हारी मासम ू शक्ल दे खकर मैं ऐसा कछ भी करना नहीिं चाहता लेर्कन ि​िंस तो तम बरी तरह से चके हो. ववकास ने बड़े ही धीमे और स्वर में

कहा – सर, मैंने कछ नहीिं

र्कया है और हआ वही है िो मैंने आपको वहािं बताया था लेर्कन मैं आपकी बात समझ रहा हूुँ . अभी थोड़ी दे र पहले तक तो मैं बहत ज्यादा िर गया था लेर्कन सर अब मै भी समझ रहा हूुँ र्क मैं बरी तरह ि​िंस गया हूुँ और ये मेरी तकदीर है . मैं उनका क़त्ल क्यों करिंगा ? मैं तो उन्हें िानता भी नहीिं . इिंस्पेक्टर चेतन प्रकाश यादव

ने कहा – िब तम ि​िंस गए हो तो र्िर तम्ही बताओ तम्हे र्कसने ि​िंसाया . ववकास

बोला – सर, ये तो मैं कैसे कह सकता हूुँ . ना तो

मैं मत ृ क को िानता हूुँ ना ही उस िगह को. मैं तो उस बबल्ि​िंग में ही पहली बार गया था 5

इसललए कौन मझे िुँसाएगा ये तो मझे नहीिं


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पता पर ये पता है र्क क़त्ल मैंने नहीिं र्कया . अब िो भी है इसका सामना तो मझे धैयट से ही करना होगा. इिंस्पेक्टर यादव ने सामने पड़े ग्लास की और इशारा कर कहा र्क चलो तम पहले पानी पी लो र्िर सोचो र्क कौन है िो तम्हे िुँसाएगा और अगर तम्हे र्कसी पर शक भी नहीिं है तो र्िर तम ही सोचो इन हालात में तम कैसे बचोगे. ये तो मेरी गारिं टी है र्क तमने यदद क़त्ल नहीिं र्कया है तो तम्हे कोई सिा नहीिं लमलेगी लेर्कन इस बीच की तकलीि तो तम्हें उठानी ही पड़ेगी. लेर्कन यदद यह क़त्ल तमसे हआ है तो र्िर कानन ू तम्हारी कोई मदद नहीिं कर पायेगा और सिा तम्हारी तय है . ववकास के मन में पललस की िो छवव थी उसने यादव को उससे बबलकल ववपरीत पाया और ववकास आश्चयट से उसकी और दे ख रहा था . यादव ने उसके मन की बात समझते हए कहा दे खो ववकास यदद यह क़त्ल तमसे हआ है चाहे अनिाने में ही तो र्िर तम्हें कोई नहीिं बचा सकता लेर्कन मैं एक सीननयर पललस ऑर्िसर हूुँ . 25 साल की सववटस में कई कानतल पकड़ें है तो अब मेरी इच्छा केवल

केस हल कर दे ने के ललए तम्हें ि​िंसा द ू ऐसी भी नहीिं है . मेरा एक बेटा है बबलकल तम्हारी तरह और तम्हारी ही उम्र का . दे खो गलती र्कसी से भी हो सकती है और दघटटना भी र्कसी के साथ भी हो सकती है लेर्कन अब तम्हारे साथ क्या हआ है यह तो तम्हें ही साबबत करना होगा. कल तम्हें कोटट में पेश करें गे और बकाया पूछताछ के ललए मझे तम्हारा ररमािंि मािंगना ही पिेगा.

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ववकास ने कहा सर ! मैं एक िोन कर सकता हूुँ ? हाुँ थाने के िोन से कर लो. तम्हारा िोन तो हमने िब्त कर ललया है . ववकास ने कहा सर , मेरा एक दोस्त है उसके पापा है केप्टन कवपल क्या मैं उनसे बात कर सकता हूुँ . उसके बाद मैं

अपने पापा से बात करिंगा.

यादव ने कहा केप्टन कवपल तमसे बात कर लेंगें . ववकास ने कहाहाुँ सर, उनका बेटा सशािंत मेरा बचपन का दोस्त है अक्सर मैं उनके बेटे सशािंत से लमलने उनके घर िाता रहता हूुँ . मझे िानते हैं अच्छी तरह और कई बार सशािंत अपने मम्मी पापा के साथ मेरे घर भी आ चका है . मैं भी बचपन से उनके यहाुँ िाता रहा हूुँ. इिंस्पेक्टर यादव ने कहा ठीक है – कर लो िोन लिसे भी तम्हे करना हो . ववकास ने अपने दोस्त को िोन लगाया और सारी बात बताई . सशािंत बोला दे खो दोस्त , िो हआ वो बरा हआ . तू धैयट रख और बबलकल िर मत.

मैं पापा से बात करता हूुँ . तू धचिंता मत कर और

अिंकल को भी िोन मत कर . मैं पापा से कहता हूुँ और हम

तेरे घर

िाकर तेरे पापा को लेकर थाने आ रहें है . बस तू थोड़ी शािंनत रख. मैं थोड़ी दे र में पापा के साथ आ रहा हूुँ. ववकास ने कहा – हूुँ .... और िोन कट गया .

ववकास ने सारी बात इिंस्पेक्टर यादव को बताई. यादव ने कहा ठीक है केप्टन साब को आने दो , मैं उन्हें बहत अच्छे से िनता हूुँ. कई केस में हम टकराए भी हैं और साथ भी काम र्कया है लेर्कन बस तम

कोई बेवकूिी मत कर बैठना . ववकास- बेवकूिी मतलब सर . यादवमतलब भागने की कोलशश

, खद को नक्सान पहुँचाने की कोलशश

िैसे आत्महत्या !!!!!! ववकास- सर, आप मझ पर भरोसा रखखये .मैं 7


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एक पढ़ा ललखा यवक हूुँ और समझ चका हूुँ र्क हालात ऐसे हैं र्क मैं ि​िंस चका हूुँ तो ननकलना तो धैयट से ही पड़ेगा. यादव ने कहा चलो – मेरा भरोसा कायम रखना , चलो मैं तम्हारे ललए कछ खाने को मिंगवाता हूुँ. क्या खाओगे ? ववकास की आुँखों में आिंसू आ गए और उसने भावक होकर वो यादव के सामने झकता चला गया .. सर आप क्यों इतनी तकलीि कर रहें है अभी अिंकल के साथ पापा आ ही रहे हैं . यादव ने कहा – बेटा तम्हारे पापा तम पर बीती इस घटना के बाद शायद ही सामान्य रह पाए

.. उसने एक मातहत को ववकास के

ललए कछ खाने को लाने को कहा और साथ में चाय भी. यादव के आुँखों के आगे उससे खद के बेटे का चेहरा घूम गया और वह ववकास के मासूम चेहरे को दे खते हए सोचने लगा – क्या यह लड़का क़त्ल कर सकता है . अब शाम होने को थी . ववकास उदास बैठा हआ था और अब उसको यादव ने लॉकअप

में बिंद कर ददया था और वह इस केस के बारे में

सोचने लगा . थोड़ी दे र बाद एक हवलदार ने लॉकअप का ताला खोला और उसे इिंस्पेक्टर के कमरे में ले गया िहाुँ उसने दे खा र्क केप्टन कवपल इिंस्पेक्टर के सामने वाली कसी पर बैठे थे. यादव ने आते ही कहा- केप्टन साब ! आप इससे यही बात कर लो . केप्टन कवपल ने कहा यादव साब ! मेरी एक बात माननए . लड़के के पापा बाहर बैठे हैं . इसे एक बार लमलवा दो . वो मेरे बेटे के साथ बाहर बैठे है . यादव ने कहा – ठीक है , आप यही लमलवा दो . मझे भी लसक्यरू रटी का ख्याल रखना पिेगा. मैं बाहर चला िाता हूुँ. केप्टन कवपल ने कहा – यादव साब ! आप कहीिं मत िाइए . हम लोग यही लमल लेते हैं. केप्टन कवपल ने आवाि दी – सशािंत ! अिंकल को अन्दर ले आ . 8


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ववकास के वपता रमेश नारायण एक स्पोट्टस शॉप चलाते थे . सामान तो वो र्िकेट , फ़टबाल , हॉकी , टे ननस इत्यादद सबका रखते थे लेर्कन रप से वे र्िकेट पर ननभटर थे और वे खद भी एक अच्छे र्िकेटर रह चके थे .शहर के मख्य चौराहे पर उनकी दकान थी और उसी मागट पर एक सरकारी और दो प्राइवेट स्कल भी थे तो दकान ठीक ठाक चलती थी. पहले तो िब मैच होते तो ही काम ठीक चलता था लेर्कन आईपीएल के बाद दननयाभर में र्िकेट हर ददन होने लगा तब से उनका बबज़नस अच्छा चल रहा था . धन का अभाव नहीिं था और ववकास को भी पढ़ाई के अलावा कोई और काम करने की िरुरत नहीिं थी और उन्होंने भी उसे कई बार मना भी र्कया था . वो अभी भी सबह बच्चों एक र्िकेट एकेिेमी में कोधचिंग दे ते थे . ववकास ने केप्टन कवपल से कहा – अिंकल पापा का क्या हाल होगा ये सब दे खकर ! केप्टन कवपल ने कहा ववकास तम सच सच बता दो र्क बात वही है िो तमने सशािंत को बताया या तमसे कोई गलती हो गई है . िो तमने बताया है वह मैं तम्हारे पापा को बता चका हूुँ. तब

तक सशािंत और रमेश िी ने इिंस्पेक्टर के कमरे में प्रवेश र्कया और रमेश िी ने ववकास को गले लगा ललया है . ववकास ने बोला पापा मैंने कछ नहीिं र्कया . रमेश िी ने कहा - हाुँ सशािंत ने मझे बताया सबकछ . तम हत्या तो कर ही नहीिं सकते लेर्कन बेटा यदद कोई गलती उत्तेिना वश हो गई है तो बता दो तार्क हम उसी दहसाब से तम्हारी मदद करें . पापा – मैंने कछ नहीिं र्कया ... लेर्कन अब मैं ि​िंस चका हूुँ आप धैयट रखें और अपना और मम्मी का ध्यान रखें . ववकास का गला भराट गया . रमेश िी की भी आखें गीली हो गई.

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केप्टन कवपल और ववकास के पापा ने ववकास से कछ दे र और बात की , तब तक एक हवलदार चाय वाले को ले आया . साथ में एक प्लेट में कछ बबलस्कट भी थे

. केप्टन कवपल और इिंस्पेक्टर यादव

का ररश्ता बहत पराना िो था . केप्टन कवपल ने ववकास से परू ी बात ववस्तार से सनी . एक एक चीि ब्योरे वार .... बार -बार पछ ू ा कछ भूल तो नहीिं रहे हो. ववकास ने पूरा याद करते हए एक -एक बात बताई . इिंस्पेक्टर यादव भी एक -एक बात सन रहा था और साथ साथ बीच में कछ नोट भी कर रहा था. यादव ने बीच में पूछा र्क ववकास दे खो ढिं ग से सब कछ सोच लो . एक बात बताओिं र्क िब फ्लैट दे खता

दरवािा बिंद हआ तो तमने

क्या दे खा . ववकास बोला – सर मैं कैसे दे खता ? मेरा ध्यान तो उस व्यलक्त की और था लिसके चाक़ू लगा था और

पीछे तो मेरा ध्यान

था ही नहीिं. वैसे भी होता तो भी मैं क्या कर लेता सर ! कोई खखड़की उधर तो थी नहीिं और मझे बाहर का क्या ही ददखता ? यादव ने कहा – हूुँ .... मेरी सहानभनू त तम्हारे साथ होने का एक ही कारण है र्क हम िब एक गमनाम काल से वहािं पिंहचे तब वह फ्लैट बाहर से बिंद

था उसका बाहर का किं दा लगा हआ था . अब या तो यह खूनी की करतूत थी या र्िर अनिाने में कोई और बात .

... सच -सच बोल

दो. ववकास – सर, अभी तो मेरा हाल यह है र्क मैं आपसे तो झिंठ ू नहीिं बोल सकता . इिंस्पेक्टर यादव ने कहा र्िर ठीक है कल तम्हारा कोटट से ररमािंि मािंग लेता हूुँ और अब कछ ददन तम हमारे मेहमान

रहो और तब तक तम मेरे पास यहाुँ सरक्षक्षत हो. याद रखो लिस ददन मझे कछ लमल गया र्क तम ननदोष नहीिं हो उस ददन समझ 10


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लेना तम्हारी खैर नहीिं है . ववकास ने कहा – सर मेरा ववश्वास कीलिये आपको मझसे ननराश नहीिं होना पिेगा. आप मझ पर भरोसा रखते हए अपनी कानून कायटवाही करते रदहये. आि पूरी रात मैं और ढिं ग से सोचिंग ू ा हो सकता है कछ और काम की बात मेरे िहन में आ िाए . इिंस्पेक्टर यादव ने अपनी टे बल के साथ लगी घिंटी बिाई और अपने मातहत को कहा – इसे ले िाओ . इिंस्पेक्टर ने हवलदार को बलाया और कहा ववकास को ले िाओ. उसके बाद वो रमेश िी की और मड़े. रमेश िी ने हाथ िोड़कर कहा – इिंस्पेक्टर साब , आपका सहयोग मैं कभी नहीिं भूलूिंगा . आप ववश्वास कीलिये ववकास ऐसा नहीिं है . यादव ने कहा – रमेश िी ! मैं तो आपको तब से िानता हूुँ िब आप कोलेि में मेरे सीननयर थे और हमारी र्िकेट टीम के कप्तान थे . आि भी मेरा बेटा रोहन आपसे ही कोधचिंग ले रहा है . मैं तो आपको दे खते ही पहचान गया था . आप धचिंता मत कररए अगर यह ननदोष है तो मैं इसकी पूरी मदद करिंगा . केप्टन कवपल तो है ही साथ. इनके साथ मैंने कई

केसेि में काम र्कया है और कई केसेि में हम

एक दस ू रे के खखलाि भी काम र्कया है पर मैं इनके होलशयारी और अक्लमिंदी का कायल हूुँ . आप घर िाइए और मैं कछ दे र केप्टन कवपल से अकेले बात करना चाहूिंगा.

रमेश िी और सशािंत बाहर ननकल गए . सशािंत एक बार वावपस आया और कार की चाबी दे ते हए बोला पापा मैं और अिंकल ऑटो से िा रहें है . आप कार की चाबी रखखये. केप्टन कवपल ने कहा बेटा , तम अिंकल के घर साथ िाना और अिंकल – आिंटी का ध्यान रखना और िरुरत समझो तो आि रात वही​ीँ रुक िाना . उन्हें कहना बरा 11


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वक्त है गिर िाएगा. सशािंत ने बोला – ठीक है पापा , मैं िैसा िरुरी होगा मैं दे ख लूिंगा. आप पूरा ध्यान इस केस पर लगाएिं आवाि सशािंत की भी भराट गई थी . दोस्ती ररश्ता ही ऐसा है और ववकास तो उसका बचपन का दोस्त था. वो बाहर चला गया. इिंस्पेक्टर यादव ने अब केप्टन कवपल के सामने बैठते हए कहा –

दे खखये केप्टन कवपल ! अब आप क्या करें गे. केप्टन कवपल ने कहा – भाई मेरे बेटे का लिगरी दोस्त है अब मझे तो मदद करनी होगी ही . उसे ननदोष साबबत करने के ललए सबूत तो िटाने ही पड़ेंगे. मझे

आपका सहयोग भी लमलेगा इसकी उम्मीद तो मैं कर ही सकता हूुँ. यादव ने कहा - केप्टन साहब ! मैं आपकी इस योिना में शालमल तो हो सकता हूुँ पर मेरी एक शतट है और शतट भी बहत बड़ी है .

केप्टन कवपल चौंक गया !! उसने यादव के साथ तो कई बार काम र्कया था. अपनी नौकरी छोड़ने के बाद उसने िब अपनी डिटे लक्टव

एिेंसी का काम शर र्कया था तो पहले केस में ही उसका पाला

यादव से पिा था और तब से कई बार वो कभी साथ तो कभी आमने सामने रहें है पर हमेशा उसने यादव को एक ननभीक , ईमानदार और

सही का साथ दे ने वाला पाया . अपराधधयों पर तो वो कहर था लेर्कन उसकी

ईमानदारी पर तो कभी कोई शक ही नहीिं हआ था. यों पललस

ववभाग में यादव की छवव एक सख्त लमिाि अिसर की थी लेर्कन ये शतट की बात सनकर केप्टन चौंक गया. वो कछ बोला नहीिं .

केप्टन कवपल ने अपने िैकेट के िेब से लसगरे ट का पैकेट ननकाला और एक लसगरे ट सलगा कर धीरे -धीरे कछ सोचते हए कश लेने लगा. यादव को उसने लसगरे ट ऑिर नहीिं की क्यों र्क वह िानता था यादव इन सब चीिों से दरू ही रहता है , 12

ववकास से उसको भी लगाव


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था इसललए कछ सोचने के बाद बोला – बोलो यादव , क्या चादहए ? यादव मस्करा उठा और बोला – केप्टन साब ! आ गए ना आप अपनी िासूसी औकात पर. मेरी बात सनने के पहले ही र्कतना सोचने लगे. आपका काम तो चल िाएगा ववकास को ननदोष साबबत

करने से पर मेरे िैसे कानन ू के रक्षक को तो असली हत्यारा चादहए. बोलो आप तब तक इस केस पर काम करोगे िब तक या तो ववकास

हत्यारा साबबत ना हो िाए या र्िर असली हत्यारा नहीिं पकड़ा िाए , बोललए मिंिूर है ? केप्टन कवपल ह्का सा मस्कराया और र्िर यादव साब का हाथ धीरे

से दबाते हए बोला – यादव , तम्हे शायद मालूम नहीिं र्क हमने भी मोचे पर कई लड़ाईयािं लड़ी है और िान पर भी खेलें है . ज़माने की हवा अभी भी हमें तो नहीिं बदल पाई लेर्कन हमारी सोच तो शायद अब इससे नहीिं बच सकी है . यार याद करो हाई वे मिटर केस लिसमें

सेठ इलाचिंद के खखलाि सबूत एकत्र करने में तम्हें थोड़ी सी दे री क्या

हई ....तम्हारी तरि उिं गललयाुँ उठने लगी थी तब मैंने ही तम्हारी ईमानदारी की िमानत ली थी . यार माफ़ कर दो इस बच्चे की परे शानी ने मेरा ददमाग भी खराब कर ददया है करना है .

. अब तम बोलो क्या

यादव ने भी धीरे से केप्टन कवपल का हाथ दबा ददया और हिंस ददया और बोला दे खो कल ररमािंि तो हम मािंग ही लेंगे और आसानी से

लमल भी िाएगा. मेरा 12 बिे तक का समय तो इसमें ननकल ही िायगा . आप एक बिे उस बबल्ि​िंग पर पहुँच िाओ . मैं आपको वही​ीँ लमलुँ ग ू ा. आप उस फ्लैट का एक बार मआयना कर लेना . मैं आप के

साथ ही होउिं गा और उस समय मेरे साथ कोई नहीिं होगा तो

आपको कोई ददक्कत भी नहीिं होगी. फ्लैट हमने सील कर ददया है . 13


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अच्छा अब आपको ववकास से तो कछ और नहीिं पछ ू ना है . केप्टन

कवपल ने कहा – नहीिं , उसके पास बताने को कछ ख़ास अब है भी नहीिं . कल मौक़ा दे खने पर ही कछ लमल सकता है . **

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इिंस्पेक्टर यादव के िोन की घिंटी बिी , उसने िोन उठाया तो लाइन पर सब इिंस्पेक्टर रावल था . यादव ने पूछा – हाुँ रावल ! कोई खबर . रावल ने कहा – िी सर ! पोस्टमाटट म की ररपोटट आ चकी है . मौत चाकू लगने से हई है और चाकू ऐसा लगता है पूरी उत्तेिना और तेिी के साथ मारा गया तो अन्दर भी कािी चला गया और इसके अलावा कोई ख़ास बात नहीिं है . यादव- चाक़ू कैसा था. रावल ने कहा – सर , कोई पेशेवर हत्यारों द्वारा इस्तेमाल र्कये िाने वाला चाकू नहीिं थे बल्क यह एक घर में इस्तेमाल होने वाली लम्बी छरी थी . शायद यह नाररयल वगैरहा काटने के काम आने वाली लम्बी छरी थी और मेरे ख्याल से यह मत ृ क के घर की ही थे क्यों र्क िाइननिंग टे बल पर उसी रोि का पीया हआ नाररयल रखा है िो लगता है इसी छरी से काटा गया था. यादव ने पूछा – अुँगललयों के ननशान ? रावल ने बताया -उुँ गललयों के ननशान िो स्पष्ट है वे तो लड़के के हैं ही है . बाकी साफ़ नहीिं है मैं दे ख रहा हूुँ. यादव – और कछ ? रावल ने कहा – हाुँ , चोकीदार और बाकी लोगों के बयान भी ले ललए और र्कसी ने उस लड़के के अलावा सातवीिं मिंलिल पर िाते नहीिं दे खा . सीसीटीवी भी यही बता रहें हैं लेर्कन मत ृ क शमाट िी के फ्लैट के 15


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बाहर कोई कैमरा नहीिं है . यादव – मत ृ क का क्या नाम था ? रावल – वववेक नारायण शमाट . ररटायिट बैंक मैनेिर थे . उनके बेटे आ गए हैं . उनका एक पश्तैनी मकान भी पराने शहर में हैं. फ्लैट तो अब हमारे कब्िे में है इसललए वे वहीिं है . मैंने उनसे बात की लेर्कन वे भी कछ ख़ास नहीिं बता पाए . कल सबह उन्हें लाश लमल िायेगी और दाह सिंस्कार भी कल होगा. ओपन एिंि शट केस है सर. वैसे वो उस लड़के ने कछ उगला . इिंस्पेक्टर यादव ने कहा – वो तो वही कह रहा र्क वो ननदोष है . रावल मामला इतना आसान नहीिं है और अब केप्टन कवपल भी इस केस को दे ख रहें है . चलो कल तो लड़के का ररमािंि लेते हैं और ददन में केप्टन साब के साथ मौक़ा – मआयना करना है . वैसे अभी तो लड़का बरी तरह से ि​िंसा हआ है . चलो गि नाईट . रावल ने कहा – गि नाईट सर. ***

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अगले

ददन केप्टन कवपल सबह की सैर से लौट कर अपने घर के

लॉन में वलिटश कर रहे थे तभी उसे दरवािे से आते हए सशािंत निर आया . वह रात को ववकास के घर ही सोया था .वह घर के सामने का चक्कर काट कर लॉन में आ गया. केप्टन कवपल ने वलिटश रोक दी

और सशािंत से बोले – बेटा आ गए . कैसे हैं वो लोग. सशािंत ने

बताया – अिंकल दखी तो है लेर्कन सिंयत है लेर्कन आिंटी का बहत बरा हाल है पापा . केप्टन कवपल बोले- हूुँ ..... ये तो स्वाभाववक है

पर बेटा उन्हें अब धैयट रखना होगा . मसीबत है और बड़ी है तो टलने में समय तो लेगी ही. बहत बड़ा मकान था उनका और लॉन भी उसी दहसाब से बड़ा था . उसमें घास पर ही एक

राउिं ि टे बल और 4 चेयर रखी थी. केप्टन

कवपल ने एक चेयर पर बैठते हए सशािंत से कहा – िा बेटा , अन्दर मम्मी ने चाय बना दी होगी

. चाय भी ले आ और उन्हें भी बला

ला. सशािंत चाय ले आया . पास ही में उनका पालतू कता ड्रेगन बैठा था. ववकास की मम्मी शाललनी दे वी

भी चेयर पर आ बैठी और

उन्होंने अखबार उठा ललया . सबने अपनी -अपनी चाय ले ली. अखबार के मखपष्ृ ठ पर ववकास की िोटो के साथ ह्तत्या की खबर थी और साथ ही मत ृ क

का िोटो भी था . अखबार ववकास को दोषी

ठहरा रहे थे और साथ ही मत ृ क के बेटे का इिंटरव्यू भी था लिसने 17


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हत्यारे को सख्त से सख्त सिा दे ने की बात कही गई थी . मत ृ क लिस इलाके में रहता था उस इलाके के लोंगों ने भी अकेले रह रहे लोगों की सरक्षा पर धचिंता व्यक्त की थी. इसके साथ ही एक मनोवैज्ञाननक का इिंटरव्यू भी था िो यवा पीढ़ी को छोटी -छोटी बातों पर गस्सा आ िाने को इस प्रकार की घटनाओिं के ललए लिम्मेदार ठहरा रहे थे. इसके अलावा अखबार में एक रे खाधचत्र के िररये परू ी वारदात को समझाया गया था . उसमें से एक रे खा धचत्र में डिलीवरी बॉय को पार्कटग में मोटर साइर्कल रखते और दस ू रे में उसे ललफ्ट में िाते ददखाया था

गया. तीसरे रे खा धचत्र में वह फ्लैट की घिंटी के पास खिा

और चौथे रे खा धचत्र

में उसे फ्लैट में मत ृ क से वववाद करते

और अगले रे खा धचत्र में चाक़ू मारते ददखाया गया और उसके बाद वाले रे खा धचत्र में उसे सोिे के पास एक चेयर पर बैठे पाया गया और यह बताया गया र्क र्कसी ने यह सब दे ख ललया और बाहर से दरवािा बिंद कर ददया और उसी ने पास के पलब्लक बूथ से पोललस को िोन र्कया लेर्कन अब वो पोललस के झिंझिंट में नहीिं पड़ना चाहता इसललए सामने नहीिं आ रहा है . सारे रे खाधचत्र अखबार के एक दक्ष आदटट स्ट के बनाये गए थे िो क्पना आधाररत थे लेर्कन यह घटना का एकदम सिीव धचत्रण करने की एक भरपरू कोलशश थी . इसके साथ शहर के िाने -माने र्िलमनल लॉयर का बयान

भी था

लिसमें ववकास पर अब क्या धाराएिं लगें गी और उसके अब िािंसी से बचने के कोई इमकान नहीिं है ऐसा भी बताया गया था.

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सशािंत की मम्मी शाललनी दे वी चाय का कप टे बल पर रखते हए बोली केप्टन साब , लड़के का केस तो बहत ही कमिोर है मझे तो आपका कोई रोल निर नहीिं आता इसमें . केप्टन कवपल और सशािंत ने भी बारी -बारी अखबार को पढ़ा. सशािंत भी मम्मी की तरह ही धचिंनतत निर आया वो बोला – पापा ... आगे उसकी आवाि ही नहीिं ननकली और गला भराट गया और उसकी आुँखें अब बरसी .... र्क तब बरसी . केप्टन कवपल ने केटल से एक कप चाय और ली और अपने पत्र ववकास और अपनी पत्नी शाललनी दे वी

की और दे खते हए बोले-

तम्हारी निर में अब कोई चािंस नहीिं है और मैं शायद कछ भी नहीिं कर पाऊिं इस बारे में. दोनों की आुँखों में धचिंता थी पर वे बोले कछ नहीिं .. केप्टन कवपल ने कहा – बेटा सशािंत ! तमने कभी मीडिया ट्रायल के बारे में सना हैं ? यह वही है . अखबारों का अपना कयास होता है िो वे हर मामलें में अपनी िानकारी , सूत्र और सिंभावनाओिं के िररये व्यक्त करते हैं. यह कभी सही होता है और कभी आधा सही आधा गलत होता है और कभी बबलकल गलत . उनका ऐसा

करना कछ गलत नहीिं है ये उनके

काम का दहस्सा है . इस वक्त हमें या पललस को ही कौनसा सच पता है और लिस तरह से तम्हारा दोस्त पकड़ा गया है तो यदद वो तम्हारा दोस्त नहीिं होता तो तम भी ऐसा ही सोचते िैसा ये अखबार बता रहा है

हैं. तम शि मनाओ र्क उन्होंने एक और रे खा धचत्र में

भववष्य की क्पना करते हए तम्हारे दोस्त का िािंसी पर झल ू ता नहीिं ददखाया..... सशािंत बोला – पापा , इस सबसे केस पर भी तो िकट पड़ता होगा. केप्टन कवपल ने अपनी चाय ख़त्म की और बोले – बेटा इससे 19


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पलब्लक ओवपननयन बन सकती है लेर्कन केस का अिंनतम िैसला तो सबूतों

के आधार पर होता है . मझे मामला पूरी तरह समझने दो ,

आि मैं मौक़ा-ए-वारदात पर िाउिं गा . मत ृ क के घर का ननररक्षण करिंगा . दे खें क्या होता है . इसके बाद केप्टन कवपल बोले वैसे सशािंत ये मीडिया ट्रायल भी ठीक है . यदद ववकास असली हत्यारा नहीिं है तो र्िर लिसने क़त्ल र्कया ही वो भी तम दोनों की तरह ही इस खबर से अपने आपको आश्वश्त कर लेगा और अब िरुर कोई ना कोई गलती करे गा. दे खें क्या होता है . तमने सना तो होगा ही र्क िैसे ही कोई अपराधी ननलश्चन्त होता है वह कोई आ कोई गलती िरुर करता है . सशािंत ने कहा – पापा , वैसे मैंने यह भी सना है र्क हत्यारा एक ना एक बार मौक़ा -ए- वारदात पर भी वावपस आता है .. र्कसी ना र्कसी समय .. केप्टन कवपल ने मस्कराते हए कहा – बेटा िासस ू ी नावेल थोड़े कम पढ़ा करो. तमने यह भी उन्ही में पढ़ा है . सशािंत झेंप गया . सशािंत और शाललनी दे वी की आुँखों में केप्टन कवपल की बातों पर कोई बड़ा ववश्वास तो

पैदा नहीिं हआ लेर्कन सशािंत को अपने दोस्त

और अपने पापा भरोसा था इसललए वो थोड़ा सामान्य हो गया . केप्टन कवपल को इस तरह की बातों की आदत थी वो उठ कर नहाने चल ददए. ****

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ठीक 12 बिे का समय था . केप्टन कवपल उस बबल्ि​िंग पर पिंहच गए. उन्होंने पार्किंग में अपनी कार पाकट की और ललफ्ट की और बढ़ गए. इस बीच उनकी चोकन्नी ननगाहें इस पूरी बबल्ि​िंग , पार्किंग और ललफ्ट तक िाने वाले रास्ते का ननरीक्षण कर रही थी. वो सातवीिं मिंलिल पर पहचे और र्िर फ्लैट नम्बर 703 के पास . फ्लैट के बाहर एक हवलदार खिा था िो शायद उनका ही इन्तिार कर रहा था. केप्टन कवपल को वो भी िानता था . दे खते ही वो बोला – इिंस्पेक्टर साब अन्दर है . आप िाइए. केप्टन कवपल ने अन्दर कदम रखा और उसने यादव को एक अलमारी के पास खिा पाया . यादव उसे दे खते ही बोला – आइये केप्टन साब ! पोस्टमाटट म की ररपोटट आ गई है और क़त्ल के हधथयार पर भी लड़के की उुँ गललयों के ननशान है और उसके बाद उसने केप्टन कवपल को वो सब बता ददया िो सब इिंस्पेक्टर रावल ने उसे बताया था . यादव बोला – कोई भी बात लड़के के पक्ष की निर नहीिं आ रही है . आइये अब आप इस फ्लैट को भी दे ख लीलिये.

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वह एक छोटा सा फ्लैट था. दरवािा खलते ही एक खाली िगह थी उसके बाद ड्राइिंग रम था लिसमें सोिे लगे थे , एक अलमारी थी और एक सेंटर टे बल थी. खाली िगह पर िूते – चप्पल रखने की िगह थी. इसके अलावा दो रम और र्कचन था . एक रम में बेि लगा था िो शायद मत ृ क का कमरा था और एक दसरे कमरे में एक िबल बेि था . शायद यह कमरा गेस्ट रम था . दोनों कमरों में अटे च लेट-बाथ थे. केप्टन कवपल ने मत ृ क के कमरे का बारीकी से ननररक्षण र्कया. उसमें उनके कपिे और रोि काम में आने वाला सामान था.

यादव उनके साथ था और उसके बाद वो गेस्ट रम में

गए और वहािं भी सारे कमरे को दे खा. इन दोनों कमरों के ननररक्षण में केप्टन कवपल और यादव को लगभग 1 घिंटा लगा. इसके बाद उन्होंने ड्राइिंग रम को दे खा. सोिे पर अभी भी खन ू के सख ू े ननशान स्पष्ट थे लेर्कन इसके अलावा कछ ख़ास नहीिं था. अचानक केप्टन कवपल का ध्यान उस अलमारी की और गया उसने यादव को पछ ू ा- ये अलमारी कैसे दे ख सकते हैं हम . यादव ने कहा – दे ख लो. इसमें कोई ताला नहीिं लगा है . मेरे आदमी इसके हें िल से और और भी िगह से िहाुँ भी थे अुँगललयों के ननशान ले चके हैं . मत ृ क के अलावा भी ननशान है िो हो सकते हैं उस मदहला के हो िो यहाुँ सिाई करने और खाना बनाने आती है . केप्टन कवपल ने कहा अच्छा उसके अुँगललयों के ननशान लमलान हो गए. यादव बोला – नहीिं यह काम चल रहा है वैसे वो मदहला ह्तत्या वाले ददन छट्टी पर थी इसीललये शमाटिी ने खाना बाहर से मिंगवाया था . वैसे उस मदहला से बात हो गई है उसके अनसार उसने कभी भी इस अलमारी पर हाथ 22


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नहीिं लगाया था . केप्टन कवपल ने कहा – चलो , दे खते हैं . आप इसे खोललए. उस अलमारी में कोई ज्यादा सामान नहीिं था. चार रे क की वह लोहे की अलमारी थी लिसके तीन रे क में कछ र्कताबे और अखबार रखे थे. लिनको टटोलने के बाद केप्टन कवपल ने सबसे ऊपर की रे क पर दे खा . वहािं चमड़े के िो्िर में िायरी, बैंक की पास बक और एक चेक बक रखी थी . केप्टन कवपल ने उन्हें बाहर ननकाला और साइि सोिे पर उन्हें लेकर दे खने लगा. वो शमाटिी की रोि की िायरी थी लिसकी शरुआत 1 िनवरी से हई थी और केप्टन कवपल ने उसके पहले कछ पेि पढ़े ... हर रोि यानन हर तारीख पर कछ ना कछ ललखा था . िैसे उस ददन की शरुआत कैसे हई , उन्होंने सबह क्या र्कया , कब अपने बड़े बेटे से बात की और कब छोटे बेटे से. कोई ज्यादा काम की िायरी उसे लग नहीिं रही थी. बिगट थे और ररटायिट बैंक अधधकारी तो ललखते भी हर बात

ववस्तार से थे. वो थोड़ा और

आगे बढे तो पाया कई िगह उन्होंने अपना दहसाब , बैंक से ननकलवाए पैसे, पेंशन का दहसाब , काम करने वाली मदहला का वेतन , फ्लैट का मेंटीनेन्स, िोन का ररचािट, दोस्तों से हई बातें

इत्यादद –

इत्यादद ललख रखा था. इिंस्पेक्टर यादव भी केप्टन कवपल के साथ िायरी बड़े ही गौर से दे ख रहा था वो बोला- केप्टन साब , ये तो सामान्य दहसाब र्कताब की िायरी है . क्या लमलेगा इसमें ? तभी एक पेि पलटते हए कवपल के होंठ गोल हो गए और और उसने यादव को चप रहने का इशारा र्कया ....... 13 िरवरी वाले पेि पर वक छोटा सा लाल ननशान था िो तािा िैसा ही लग रहा था उसने उस ननशान को गौर से दे खा .. 23


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और आगे-पीछे के पेि दे खने लगा तो पाया र्क 12 िरवरी का पे ि गायब था वहािं से ननकाला हआ था

...... इिंस्पेक्टर यादव इशारा

समझ गया उसने पूरा िो्िर लिसमें िायरी , पास बक और चेक बक थी अपने कब्िे में ले ललए और प्रशिंसात्मक निरों से केप्टन कवपल की और दे खने लगा . उसके बाद दोनों ने फ्लैट को एक बार र्िर से दे खा और र्िर बाहर आकर हवलदार को कछ ननदे श ददए और ललफ्ट की और बढ़ गए. *****

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शाम हो चकी थी केप्टन कवपल अपने ऑर्िस में ररवोल्विंग चेयर पर बैठा था और किंप्यूटर पर कोई िाइल दे ख रहा था. सामने 6-7 और कलसटयािं लगी हई थी . केप्टन कवपल का ऑर्िस शहर के मख्य माकेट के एक टावर में था और उसके केबबन के अलावा एक ररसेप्शन रम था लिसमें एक ररसेप्शन काउिं टर था और ववलिटसट के ललए सौिे और सेंटर टे बल लगी थी और उसके साथ ही एक छोटा सा र्कचन था. इसके बाद एक अलसस्टें ट ऑर्िस था लिसमें 5 कम्पटर लगे थे और इस समय दो लड़के और दो लिर्कयािं काम कर रहे थे. एक लेन से सभी कम्पटर एक दसरे से िड़े हए थे और पािंचवािं कम्पटर सवटर था और इन सभी से केप्टन कवपल की टे बल पर लगा िेस्क टॉप ि​िा

हआ था . वीडिओ ग्रािी की भी उम्दा व्यवस्था थी

और साथ ही एक छोटा सा कािंफ्रेंस रम था .

केप्टन कवपल का

लैपटॉप वाई- िाई के िररये इन सभी से ि​िा था और इस समय वे ऑनलाइन ठगी के एक बहत बड़े केस पर काम कर रहे थे लिसके 25


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ललए उन्हें दे श के सबसे बड़े राष्ट्रीयकृत बैंक ने अनबिंधधत र्कया था लिसकी साख ऑनलाइन ठगी के लगातार बढ़ते मामलों के कारण धगरती िा रही थी . केप्टन कवपल ने बहत भारी सिंख्या में िी्ि स्टाि इस मामले पर लगा रखा था. केप्टन कवपल ने दीवार पर लगी घिी पर एक निर िाली 7 बिने को थी उसने अपना लैपटॉप बिंद कर ददया क्यों र्क आि की मीदटिंग के ललए यादव ने उसे 7 बिे का समय ददया था और यह मीदटिंग इिंस्पेक्टर यादव की सलाह पर ही उसके ऑर्िस में रखी गई थी. केप्टन कवपल अपने सामने रखी ललस्ट पर एक निर िाली – इिंस्पेक्टर यादव, सब इिंस्पेक्टर रावल , मत ृ क शमाट िी के दोनों पत्र अलमत और अननल , मत ृ क के लमत्र और बिगट पिौसी राधेशाम िी . केप्टन कवपल ललस्ट से आश्वस्त हो गया तभी उसका इण्टरकॉम बि उठा. ररसेप्शन से िोन था – सर ! इिंस्पेक्टर साब आ गए हैं. केप्टन ने पूछा – बाकी सब . ररसेप्शन से िवाब लमला- सर ! वे पहले ही आ चके हैं. कवपल ने कहा – ठीक है उन्हें भेि दो और हाुँ ऑर्िस बॉय के साथ पानी और र्िर चाय भेि दे ना . िवाब आया -िी सर . इिंस्पेक्टर यादव ने केप्टन कवपल के केबबन में प्रवेश र्कया और उसके बाद एक-एक कर सभी ने प्रवेश र्कया. केप्टन कवपल ने सभी का अलभवादन र्कया . सब इिंस्पेक्टर ननतेश रावल ने सभी का पररचय करवाया . मत ृ क शमाट िी के बेटे कािी ग़मगीन लग रहे थे और थके हए भी . केप्टन कवपल ने कहा – आपके वपतािी की दखद मत्ृ य का बहत अफ़सोस है और आपको आि कष्ट ददया इसके ललए माफ़ कीलिये . यह िरुरी था इसललए आपको बलाना पिा . शमाट िी के बड़े पत्र अलमत ने कहा- रावल साब ने आपके और यादव साब के बारे 26


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में सब बताया और क्या-क्या हआ यह भी बताया . लड़का पकड़ा गया है और रावल साब भी कह रहें है यह ओपन एिंि शट केस है और आि के अखबार में भी यही आया है सब इिंस्पेक्टर

. क्यों रावल साब ?

रावल ने अपने सीननयर यादव की और दे खा और

इशारा पाकर बोला – हाुँ , मेरे दहसाब से तो है लेर्कन मेरे सीननयर और केप्टन साब को कछ असमिंिस है . इिंस्पेक्टर यादव ने बोलना शर र्कया – आप केप्टन कवपल को तो िानते होंगें ? अलमत ने कहा -इन्हें कौन नहीिं िानता ? लेर्कन मेरी एक ही ररक्वेस्ट है सर ! मझे और अननल को ि्दी फ्री कर दें क्यों र्क घर पर भी लोग कािी लमलने आते हैं और आप तो िानते है र्क हमारे में से र्कसी एक का रहना हमेशा िरुरी है .

इिंस्पेक्टर यादव ने कहा – हाुँ मैं समझता हूुँ

. लेर्कन आप भी चाहते होगें र्क आपके वपतािी के कानतल को सिा लमले और अगर यह लड़का ननदोष है तो र्िर असली कानतल को

पकड़ना िरुरी है . अननल ने बोला – इिंस्पेक्टर साहब ! वैसे तो लड़का र्कसी भी एिंगल से ननदोष लगता नहीिं है और िहािं तक मैं समझता हूुँ

बार-बार घिंटी बिाने पर पापा ने कछ कहा होगा और कहा सनी ज्यादा हो गई होगी और उसी में ..आिकल गस्से पर ननयिंत्रण कहाुँ है इस उम्र के लोगों में. आिकल रोि तो ऐसे र्कस्से होतें है . वैसे पाप का गस्सा भी कािी तेि था ... अलमत ने बात का लसरा पकड़ते हए कहा – दे खखये हमने भी पापा को कई बार कहा था र्क अकेले मत रदहये लेर्कन अब होनी को कौन रोक सकता है ? दे खखये हम भी पढ़े ललखे लोग हैं. मैं बैंगलोर में एक किंपनी में अधधकारी हूुँ और उसकी सारी बागिौर मेरे ही हाथ में है

और अननल इिंडियन एयर लाइिंस में हैं और ये भी वहािं बहत बड़ा 27


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अधधकारी है ववत्त ववभाग में . इसललए हमें समय नहीिं लमलता था लेर्कन व्यस्त रहने की बहत बड़ी कीमत हमें चकानी पड़ेगी ये कभी सोचा नहीिं था . आपको यदद कोई शक है तो हम पूरा सहयोग दें गे. इस बीच ऑर्िस बॉय एक ट्रे में पानी और चाय रख गया . इस बीच मत ृ क शमाट िी के पिौसी राधेश्याम िी भी परू ी बात ध्यान से सन रहे थे लेर्कन वो समझ नहीिं पाए र्क उन्हें इस मीदटिंग में क्यों बलाया गया है . मत ृ क उनके दोस्त थे सबह साथ घूमने िाते थे. ददन में भी कई बार मलाकात होती थी क्यों र्क दोनों ररटायिट थे और दोनों को र्िकेट का पराना शौक था . शमाट िी अकेले रहते थे तो उनके फ्लैट में मैच आराम से दे ख सकते थे . लेर्कन उनकी ह्तत्या की िािंच में उनका क्या रोल हो सकता था ? वे इस बारे में पूछने ही वाले थे र्क केप्टन कवपल ने अपने सामने रखे कछ कागिातों पर निर िालते हए बोलना शर र्कया . ये कागज़ अभी सब इिंस्पेक्टर ननतेश रावल ने उसके सामने रखे थे. राधेश्याम िी की बात उनके अन्दर ही रह गई और सब केप्टन कवपल को सनने लगे . केप्टन कवपल कहा – दे खखये , ऊपर -ऊपर से तो यह लगता है र्क यह ओपन एिंि शट केस है लेर्कन हमें िो िानकारी लमली है उसे हम आपसे शेयर कर लें तार्क आप इन्वेस्टीगेशन में सहयोग कर सकें. दे खखये हमें शमाटिी की एक िायरी लमली है उनकी ड्राइिंग रम वाली अलमारी से . क्या वे ननयलमत रप से िायरी ललखते थे ? अलमत ने कहा – हाुँ पापा का यह पराना शौक था लेर्कन अभी हाल ही तक तो वे रोि का दहसाब ही ललखते थे लेर्कन इस साल की िो नयी िायरी मैंने उन्हें भेिी थी उसमें कछ ववस्तार से ललखने लगे थे. अभी मैं वपछले महीने आया था तब वे बता रहे थे . मैंने उन्हें ऐसे ही िायरी 28


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ददखाने को कहा र्क पाप आप क्या ललखते हैं पर उसी वक्त मेरा कोई िोन आ गया और बात आई – गई हो गई . वैसे क्या है उस िायरी में लिसका सम्बन्ध उनकी ह्तत्या से है ? उस िायरी में 13 िरवरी का एक पेि है लिस पर खन ू का तािा ननशान है और अभी सब इिंस्पेक्टर रावल ने िो मझे ररपोटट दी है उसके अनसार यह शमाटिी के खून का ननशान है .

अननल ने कहा –

अच्छा ! यानन पापा की ह्तत्या के बाद उस लड़के ने उनकी िायरी भी छे िी थी ? ये िायरी तो उनकी अलमारी में रहती थी . ये लड़का र्कस र्िराक में था . केप्टन कवपल ने कहा इसके अलावा एक और महत्वपूणट बात है और वह है र्क िायरी का 12 िरवरी का पेि गायब है ? अब मेरा एक सवाल

आप तीनों से है – ये 12 िरवरी

की तारीख को शमाट िी की लि​िंदगी में क्या महत्वपण ू ट वाकया हआ था . उसके पहले एक बात और सन लीलिये र्क शमाटिी ने इसी 12 िरवरी को बैंक से अपने बहत से एि​िीआर अवधध समाप्त होने से पहले भनवा ललए थे और उन एि​िीआर का 25 लाख रुपया केश में बैंक से ननकलवाया था . हाुँ तो अलमत िी और अननल िी आपमें से र्कसी को पता है र्क 12 िरवरी को ववशेष क्या हआ था ? और हाुँ राधेश्याम िी आप तो उनसे रोि लमलते थे क्या आप बता सकते हैं र्क शमाट िी की लि​िंदगी में इस 12 िरवरी को क्या हआ था ? क्यों र्क हत्यारा इस 12 िरवरी के पेि और उसमें िो

दहसाब ललखा था

को इस िायरी में से ननकाल ले गया ? अलमत और अननल ने पहले एक दस ू रे की और दे खा और र्िर अलमत बोला – मझे तो ऐसा कछ पता नहीिं है . हाुँ मैं वपछली बार उनसे 29


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लमला तो वो कछ अनमने तो थे लेर्कन कोई ववशेष बात नहीिं हई . इस 12 िरवरी को कोई ख़ास कछ हआ था ये मझे तो नहीिं पता. हाुँ उनके पास एि​िीआर थे ये मझे िरुर पता है लेर्कन उन्होंने इस तारीख को 25 लाख रपये ननकाले ये तो मझे पता नहीिं और अननल तो वपछले 6 महीने से यहाुँ आया ही नहीिं. अननल ने कहा हाुँ मैं तो कम्पनी के टे कओवर और नए मैनेिमेंट के कारण बहत ददनों से पापा से लमल ही नहीिं पाया ... ये अफ़सोस तो मझे लि​िंदगी भर रहेगा. लेर्कन ये पापा के पैसे का दहसाब तो कभी हमें लेने की िरुरत ही महसस ू नहीिं हई लेर्कन आश्चयट है र्क उन्होंने एक ददन में एक साथ इतने पैसे का क्या र्कया होगा. केप्टन कवपल ने अब राधेशयाम िी की तरि निर घमा कर दे खा और पछ ू ा – आपके तो वे दोस्त थे . कछ पता है आपको इस राि के बारे में . राधेश्याम िी ने कहा – शमाट िी हर छोटी – बड़ी बात मझे बताते थे लेर्कन इतनी बड़ी रकम का लि​ि तो मझसे कभी नहीिं र्कया. केप्टन कवपल बोला- दे खखये आप तीनों आि रात एक बार अच्छी तरह से याद कर लें . शायद कछ याद आ िाए. हाुँ राधेश्याम िी ! ख़ास तौर पर आप . अपनी याददाशत पर िोर िाललए आि रात . कोई भी छोटी बात इस सम्बन्ध में आये तो बताएिं. इिंस्पेक्टर यादव ने कहा दे खखये ये क़त्ल का सीधा – सीधा सम्बन्ध इस 25 लाख रपये और 12 िरवरी से है तभी तो कानतल 12 िरवरी का वह पेि अपने साथ ले गया और दस ू रा कानतल शमाट िी का िानकार है तभी उसे इस िायरी के बारे में मालूम था. शमाट िी के बेटे अलमत ने कहा – आप उस लड़के से सख्त पूछताछ कीलिये . उसे सब मालम होगा. यह सब उसी का गेम लगता है . 30


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इिंस्पेक्टर यादव ने कहा – वो तो हम कर रहें है . लड़के का बैकग्राउिं ि भी चेक कर रहे हैं . उसकी स्कल , कॉलेि और उसके दोस्त सब हमारी पूछताछ के दायरे में हैं लेर्कन आप तीनों को कछ याद आये या इससे ि​िती हई कोई बात ? अलमत ने कहा – इिंस्पेक्टर साब ! मेरा शक तो इस लड़के पर ही है और ये ही कोई गेम खेल गया है यह तो दरवािा र्कसी ने बिंद कर ददया इसललए पकड़ा गया है . आप सख्ती कररए. हम भी याद करने की कोलशश करते हैं. केप्टन कवपल

कवपल ने कहा – बस आि की मीदटिंग इतनी ही थी.

आपको तकलीि दी. आप याद करने की कोलशश िरुर करें ख़ास तौर पर आप राधेश्याम िी. राधेश्याम िी ने कहा िरुर . वैसे केप्टन साब ! बार -बार मझे याद करने को कह कर कहीिं आप इस क़त्ल में मेरा कोई रोल तो नहीिं तलाश रहें है . केप्टन कवपल ने कहा – अरे नहीिं बिगटवार ! लेर्कन कानतल कोई भी हो उसका बचना अब मलश्कल है . राधेश्याम िी ने कहा- केप्टन कवपल ! आपकी होलशयारी के कई र्कस्से मैंने पढ़े और सने हैं और मझे भी ववशवास है र्क कानतल छूट तो नहीिं पायेगा.. हाुँ मैं आपको एक बात बता दुँ ू कछ महीनो पहले मैं दो माह के ललए अपनी बेटी के पास कनािा गया था और िब वहािं से लौटा तो मैंने एक बात नोट की . आप कहें तो बताऊुँ .. पता नहीिं इस क़त्ल से उसका कोई लेना दे ना भी है या नहीिं. इिंस्पेक्टर यादव ने कहा – राधेश्याम िी ! आप बेखझझक बताएिं . वैसे भी इस केस के बारे में पहला सवाल मैंने फ्लैट से ननकलते ही आपसे र्कया था. आप बताएिं तय हम करें गे र्क इस बात का केस से ता्लक भी है या नहीिं .

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राधेश्याम िी ने सामने पड़ी ग्लास से पानी पीया और र्िर बोले र्क शमाट िी वपछले कछ महीनों में शेयर बािार से होने वाली कमाई के बारे में और इस बाज़ार में कैसे धन कमाया िा सकता है के बारे में बहत बातें करने लगे थे.... एक शब्द वे बहत बार बोलते थे ... अकूत धन .. अलमत और अननल दोनों एक साथ बोले – पापा और शेयर माकेट !!!!!! केप्टन कवपल ने कछ नोट र्कया .. और बोला चललए आप सभी का शर्िया . अब आि की मीदटिंग बखाटस्त करते हैं और आप सभी से इसी प्रकार सहयोग की अपेक्षा रहे गी. *******

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मीदटिंग ख़त्म होते ही केप्टन कवपल ने बेल बिाई . ऑर्िस बॉय अब ठीक उसके सामने खड़ा था . केप्टन कवपल ने कहा- रॉबटट को भेिो और वह खद अपने

लैपटॉप बेग में सामान

िमाने लगा क्यों र्क

अब वह घर िाने वाला था. आि उसको ववकास के घर िाना था अपने पत्र सशािंत के साथ . सशािंत ने अपने पापा केप्टन कवपल से वादा ललया था र्क आि उसे ववकास के घर चल कर ववकास के मम्मी – पापा से लमलना था तार्क वे थोड़ा आश्वस्त हो सके. रॉबटट उसका ववश्वसनीय और पराना अलसस्टें ट था और वह एक तिंदरुस्त और स्माटट आदमी था . फ़टबाल उसका वप्रय शौक था और एक सप्ताह में कम से कम 1 या दो ददन वह अपना यह शौक पूरा करता था. फ़टबाल के इस शौक ने उसे और भी स्माटट और ितीला बना ददया था. कई मामलों में िो केप्टन कवपल की एिेंसी को लमलते थे उन्हें सलझाने में रॉबटट का ववशेष योगदान रहता था. रॉबटट मतलब इस डिटे लक्टव एिेंसी का नम्बर-2 . 33


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अपने नोट पैि के साथ केप्टन कवपल के सामने बैठा था . केप्टन कवपल ने कहा रॉबटट इस केस से ि​िे कछ काम नोट कर लो. पहले तो आि की मीदटिंग की वीडिओ ग्रािी चेक कर लो और सबके चेहरों के एक्सप्रेशन भे दे ख लो . कछ ख़ास हो तो नोट करना. इसके अलावा मत ृ क का िो फ्लैट है उसमें रहने वाली सभी लोगों की एक ललस्ट बना लो और वो क्या काम करते हैं ये भी दे ख लो. कछ भी ख़ास या सिंददग्ध लगे तो नोट कर लेना. ख़ास तौर पर छठी और सातवीिं मिंलिल पर रहने वाले लोगों को. दे खो हर मिंलिल पर 4 फ्लैट है यानी तम्हारा ध्यान इन 8 पररवारों पर होना चादहए. रॉबटट ने कहा – सर , एक तो शमाटिी ही थे तो केवल 7 ही बचे. केप्टन कवपल बोला – रॉबटट , शमाटिी के बारे में भी मालम करना है र्क वे र्कससे लमलते थे और कौन लगातार उनके सिंपकट में था. एक बात खास तौर पर नोट कर लेना र्क िब राधेश्यामिी अपनी बेटी से लमलने कनािा गए थे तब शमाटिी के नए िानकार कौन थे . एक बात और ध्यान रखना शमाट िी को शेयर माकेट के बारे में नई रधच पैदा हई थी इसको भी ध्यान रखना .... रॉबटट बोला -सर, मैंने आप लोगों की सारी बातें सनी . अभी की मीदटिंग भी मैं अपने मॉननटर पर दे ख – सन रहा था . आप मझे एक दो बातें बताइए . क्या ववकास खूनी नहीिं हो सकता ? एक और बात क्या आपको राधेश्याम िी पर शक है ? रहे शमाट िी के दोनों बेटे तो उनका तो कोई रोल तो हो ही नहीिं सकता . आपके दहसाब से खन ू ी इनमें से कोई है या कोई और ही है ?

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केप्टन कवपल के होठों पर मस्कराहट आ गई. उसने रॉबटट को अपने पास वाली कसी पर बैठने को कहा. रॉबटट आगे को आया तो केप्टन कवपल ने कहा – यार राबटट तम कब सधरोगे. र्कतनी ि्दी रहती है तमको . ये सब तो तब पता लगेगा िब तम्हारा इन्वेस्टीगेशन परू ा हो िाएगा . अभी तो तम्हारा काम शर ही नहीिं हआ है लमस्टर ि्दबाि !!!!!! रोबटट झेंप गया और बोला – ओके मास्टर ! केप्टन कवपल ने कहा – रॉबटट ! तम एक बात ध्यान रखो र्क हम कोलशश कर सकते हैं लेर्कन हर केस हम हल कर सकते हैं इस बारे में कोई गलतिहमी हो तो दरू कर लो वनाट ऐसी ही हरकतें करते रहोगे. केप्टन कवपल ने कहा – सनों रॉबटट ! तम ये सब शर होने के पहले इिंस्पेक्टर यादब और सब इिंस्पेक्टर रावल से लमल लेना और उन्हें बता दे ना र्क मैंने तन्हें क्या टास्क ददया है तार्क तम्हें कोई मदद की िरुरत हो तो वे तम्हारी मदद कर दें गे. इसके अलावा बबल्ि​िंग में सबसे पहले राधेश्याम िी लमल लेना वो तम्हें उस बबल्ि​िंग और उसमें रहने वाले सब लोगों के बारे में ठीक -ठाक बता सकते हैं . बिगटवार के पास िानकारी ठीक है और वो सहयोग

ही करते हैं. हाुँ इस

बबल्ि​िंग की छत पर आने िाने का रास्ता और छत भी दे ख लेना. रोबटट ने बोला – मास्टर ! िरुरत पड़े साथ र्कसको ले िाऊिं . केप्टन कवपल ने कहायार तू कब सधरे गा ? तझे लिसको भी तो कहे गा वो तझे मना करे गा और आि तक तू मझे पछ ू कर ही सभी को साथ ले गया है . तू ऐसा कर मेरी टे बल पर बैठ िा और इन्वेस्टीगेशन मैं कर लेता हूुँ.

रॉबटट खिा होते हए बोला – सॉरी मास्टर ! बस कल सबह से आपका काम शर... 35


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राधेश्याम िी घर की और बढ़ते हए आि की मीदटिंग के बारे में सोच रहे थे. उन्हें लग रहा था अब यह िब तक इन्वेलस्टगेशन चलेगा उन्हें भी इधर उधर आना िाना पिेगा और अभी उन्हें अपना बाहर िाना भी स्थधगत करना पड़ेगा. चलो ठीक है !!! िो भी है . उन्होंने अपने फ्लैट की बेल बिाई और इन्तिार करने लगे. उनकी पत्नी ने दरवािा खोला और खोलते ही धचिंनतत स्वर में पूछा – क्या रहा

आि

की मीदटिंग में ? राधेश्याम िी का फ्लैट शमाट िी के बबलकल सामने ही था और दोनों के दरवािे बबलकल आमने -सामने थे . उनकी पत्नी इस हत्याकािंि से सहम सी गई थी और हमेशा धचिंनतत रहती थी िो र्क स्वाभावव कही था. उन्होंने अपनी पत्नी से पूछा – रोहन कहाुँ है ? उन्होंने कहा – रोहन तो खाना खाकर बाहर गया है . राधेश्याम िी ने अपनी पत्नी को ड्राइिंग रम में बबठाते हए कहा – घर में और कोई है ? राधेश्याम िी की पत्नी ने कहा नहीिं कोई नहीिं है . रोहन की पत्नी रिनी अभी ऑर्िस से नहीिं आई है . उसके यहाुँ अभी कोई नया प्रोिेक्ट चल रहा है . उसका िोन आया था रोहन ही रात को दस बिे उसे लेने िाएगा. राधेश्याम िी ने कहा – शािंती ! एक बात बातओ . ये तमने 15 ददन पहले मझे कहा था र्क रोहन और शमाट िी में कहा सनी हो गई थी . क्या हआ था ? शािंनत दे वी ने कहा – हाुँ , रोहन उनके घर गया था िो र्क सामने ही है इसललए अक्सर आता िाता रहता है , आखखर पिौसी है और तम्हारे दोस्त हैं . राधेश्याम िी- पर यह तो बाताओिं . हआ क्या था . शािंनत दे वी ने कहा- पता नहीिं पर रोहन को मैंने पूछा था तो वो बोला – बिगटवार बबना बात गमट हो रहें थे. हाुँ उस समय 36


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वह बहत गस्से में था

....

पर तम ये क्यों पछ ू रहे हो . राधेश्याम

िी थोड़ी तेि और उत्तेिना भरी आवाि में बोले – आखखर क्या झगिा था रोहन और शमाट िी के बीच ...... तभी राधेश्याम िी को लगा र्क पीछे कोई खिा है . उन्होंने पीछे मड़कर दे खा वहािं रोहन खिा था ... शायद शािंनत दे वी फ्लैट का दरवािा बिंद करना ही भूल गई थी क्यों र्क राधेश्याम िी ने आते ही सवाल -िवाब करने शर कर ददए थे. र्िर गस्से से

रोहन एक पल दठठका और

बोला ओह् ! पापा ये आप क्या सोच रहें है . अभी तो

मैं रिनी को लेने िा रहा हूुँ ि्दी है इस बारे में सबह बात करें गे. और वह कार की चाबी उठा कर तेिी से घर के बाहर ननकल गया. राधेश्याम िी के चेहरे पर धचिंता के धचन्ह निर आने लगे और उधर उनकी पत्नी को शायद कछ समझ नहीिं आया . *******

R

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सशािंत और केप्टन कवपल ने ववकास के घर में प्रवेश र्कया . दरवािा ववकास के पापा रमेश िी ने खोला . उन्हे ड्राइिंग रम में बैठाया र्िर वो खद अन्दर चले गए . वो वावपस लौटे तो साथ में उनकी मेि एक ट्रे में पानी ले आई थी. केप्टन कवपल ने पछ ू ा – रमेश िी भाभीिी कहाुँ है . रमेश ने धचिंनतत स्वर में कहा – उनकी तो तबबयत में कोई सधार नहीिं है . अब आप बताओ र्क आप उन्हें क्या आश्वासन दे ने िा रहे हो. केप्टन कवपल ने कहा – आइये उनके कमरे में चलते हैं . रमेश िी ने कहा चललए – अब वो आपके ही भरोसे है . ववकास की मम्मी अननता िी अपने कमरे में सो रही थी शायद उन्हें नीिंद की कोई दवा दी गई थी लेर्कन उनका चेहरा बबलकल पीला और ननस्तेि निर आ रहा था . केप्टन कवपल ने पूछा नीिंद में है . कोई दवा दी थी क्या . रमेश िी ने कहा – हाुँ , पर उसे ददए तो 4 घिंटे से ज्यादा हो गए. चललए मैं उठा दे ता हूुँ और वे उन्हें उठाने लगे . अननता ने आुँख खोली लेर्कन कमिोरी बहत थी . उन्होंने निर उठा कर दे खा तो केप्टन कवपल निर आये . उनकी आुँखों में एक हलकी 38


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सी चमक आ गई और वे धीरे से उठ बैठी और बहत ही महीन स्वर में बोली – भाई साब ! मेरा बेटा .... केप्टन कवपल ने कहा – भाभीिी िो हो गया वह हो गया और मान लीलिये यह एक दघटटना थी लेर्कन एक डिटे लक्टव के नाते मझे सभी सिंभावनाओिं पर ववचार करना पिेगा तभी कछ मदद कर पाउुँ गा और ये सब अब आप पर डिपेंि है लेर्कन आप इस समय तो मदद करने की लस्तधथ में लग नहीिं रही है . अननता िी ने कहा – भाई साब ! ऐसा नहीिं है मैं परू ी तरह से तैयार हूुँ. केप्टन कवपल ने कहा तो र्िर आप अपना मन मिबूत करें . आपको कोई बीमारी नहीिं है केवल आपका मन परे शान है और आप

इसपर काबू रखखये वरना रमेश िी वैसे ही परे शान है . ववकास पर सिंकट है और ऐसा र्कसी के भी साथ हो सकता है आप इसे दघटटना मान कर चललए . लि​िंदगी में कोई परे शानी ऐसी नहीिं है लिसका कोई हल कभी ना ननकले और यदद ववकास ने कोई अपराध नहीिं र्कया है तो र्िर आि नहीिं तो कल वो बाहर आ ही िाएगा और यदद कोई अपराध उससे हआ है चाहे अनिाने में ही उसे कोई नहीिं बचा सकेगा और यही िीवन की सच्चाई है और आप इसे स्वीकार करें . इसका आपके स्वास्थ से क्या सम्बन्ध है . इसके आगे केप्टन कवपल बोला- इस तरह से तो आप हमारी कोई मदद करने की िगह खद ही परे शानी बनती िा रही है . क्या आपकी परे शानी ववकास िो झेल रहा है उससे भी बड़ी है ? आपकी हालत तो यह है र्क “मैं परे शान तो िग बैरी” ... सिंभाललये अपने आपको . कछ खाइए – दवा लीलिये

और अपने आप में

ताकत तो बना कर रखखये

तार्क पररवार पर आये इस सिंकट को आप सब झेल सकें. 39

.


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रमेश िी केप्टन कवपल के इस कठोर और रखे व्यवहार

से परे शान

निर आये ... लेर्कन अननता िी का चेहरा थोड़ा कठोर होता िा रहा था ऐसा लगता था र्क िैसे वे कछ सोच रही है ........ वो धीरे – धीरे अपने बेि से उठी और बोली – भाई साब ! आप लोग ड्राइिंग रम में बैदठये और बात कररए . मझे बस 15 लमननट दीलिये मैं... मैं..... ठीक -ठाक होकर मैं आती हूुँ.

रमेश िी की आुँखों में थोड़ा आश्चयट झलक रहा था और वो और केप्टन कवपल ड्राइिंग रम की और बढ़ गए. ड्राइिंग रम में अननता िी आधे घिंटे बाद आई और उनके हाथ में चाय की ट्रे थी

. उन्होंने

अपना मिंह धो ललया था और बाल भी ठीक -ठाक कर ललए थे . कपिे भी बदल ललए थे. अब उन्होंने पूछा – पूनछये आप क्या पछ ू ना चाहते हैं . अब मेरा वादा है आप लोगों को मेरे कारण कोई परे शानी नहीिं होगी . असल में उन्होंने ये बाते रमेश िी से कही थी. सशािंत और केप्टन कवपल मस्करा रहे थे. केप्टन कवपल ने कहा – मझे कछ नहीिं पूछना था बस आपको ठीक करना था बस और कछ नहीिं .. तार्क रमेश िी भाई साब और ववकास की

तकलीि और नहीिं बढे .... और

केप्टन कवपल उठ गया . ********

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अभी वह ववकास के घर के बाहरी गेट तक पहिं चा ही था र्क उसका िोन बिा ... लाइन पर इिंस्पेक्टर यादव था और उसकी आवाि में थोड़ी धचता थी .. वो बोला – केप्टन साब ! कहाुँ हो ? केप्टन कवपल ने कहा – क्या हो गया एकदम ? धचिंनतत निर आ रहे हो यादव साब . यादव बोला – आप अभी लसटी हॉलस्पटल पहचों . ववकास की र्कसी ने ह्तत्या करने की कोलशश की है . केप्टन कवपल ने कहा – क्या बात कर रहे हो इिंस्पेक्टर यादव ! लॉकअप में ह्तत्या की कोलशश !!!!!!! यादव ने कहा – अरे केप्टन साब ! अभी आप सब छोिो . पहले यहाुँ आ िाओ . मैं ववकास के पापा को भी िोन कर रहा हूुँ. केप्टन

कवपल ने कहा- आप वही​ीँ रुको . मैं आता हूुँ . रमेश िी मेरे साथ ही है . मैं आ रहा हूुँ .... और केप्टन कवपल र्िर से ववकास के घर के अन्दर की और चल ददया .

केप्टन कवपल और रमेश िी लसटी हॉलस्पटल के मख्य द्वार से अन्दर की और आ रहे थे तभी उन्हें इिंस्पेक्टर यादव ि​िर आये वो अस्पताल के ररसेप्शन पर खड़े थे और उनके साथ सब इिंस्पेक्टर रावल भी था .... 41


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रमेश िी और केप्टन कवपल लसटी हॉलस्पटल के ररसेप्शन पर पहचें वहािं इिंस्पेक्टर यादव और सब-इिंस्पेक्टर रावल खड़े थे . रमेश िी ने इिंस्पेक्टर यादव से बहत ही उत्तेलित होकर पूछा – इिंस्पेक्टर साब ! कैसा है ववकास ? क्या हआ है उसे और आपके थाने में था वो तो र्िर वहािं कैसे ये सब हो गया ? इस समय ववकास कहाुँ है ? इन्स्पेक्टर यादव ने कहा- केप्टन साब ! उसे ऑपरे शन धथयेटर में ले गए हैं . केप्टन कवपल ने कहा – आप मझे वही​ीँ ले चललए और रावल तम रमेश िी का ख्याल रखना . इसके बाद केप्टन कवपल ने अपने मोबाइल िोन से कई िगह िोन लगाए लिसमें उस हॉलस्पटल के अधीक्षक और पललस कमीश्नर के नम्बर भी थे. बहत थोड़े में केप्टन कवपल ने िोन पर अपनी बात ख़त्म की लेर्कन लिस अिंदाि और आत्मववश्वास से उनकी गिंभीर आवाि सब-इिंस्पेक्टर रावल और इिंस्पेक्टर यादव तक पहच रही थी उनके आुँखों में आश्चयट के भाव आते िा रहे थे. उसके बाद उसने अपने नम्बर -2

रॉबटट को िोन

लगाया ... इिंस्पेक्टर यादव को अब परू ी तरह से समझ आ गया था र्क ववकास की केप्टन कवपल से निदीर्कयािं क्या है और दस ू ू रा ये सरक्षा चक उस पर भारी पड़ने वाली है और धचिंता की रे खाएिं उसके चेहरे पर स्पष्ट थी. वो बोला केप्टन कवपल साहब चललए ऊपर चललए. केप्टन कवपल ने इिंस्पेक्टर यादव से कहा- यादव ! तम अभी मेरे साथ ऊपर चलो

लेर्कन लसिट 15 लमननट बाद आपको अपने थाने िाना है .

यहाुँ की लिम्मेदारी अब मेरे ऊपर है अभी थोड़ी दे में मेरी टीम यहाुँ आ िाएगी. आप िाकर मालम कीलिये र्क आखखर तम्हारे थाने में ववकास की ह्तत्या की कोलशश हई कैसे ? मव ू फ़ास्ट यादव ! तम्हारे 42


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पास समय बहत कम है . यादव केप्टन कवपल की और आश्चयट से दे ख रहा था .... केप्टन कवपल ने कहा यादव घबराओिं मत ! अभी कमीश्नर का िोन आ िाएगा र्क अब तम्हें वही करना है िो मैं कह रहा हूुँ .

इिंस्पेक्टर यादव के ललए केप्टन कवपल का यह रप एकदम नया था ... वो तो उसे केवल एक होलशयार प्राइवेट डिटे लक्टव ही समझता था लेर्कन ...अब वो समझ रहा था र्क केप्टन कवपल कछ और भी है शायद अिंिर कवर पललस ...... यादव और केप्टन कवपल पहले मिंलिल पर बने ऑपरे शन धथयेटर की और बढ़ गए . ववकास को अब अन्दर ले ललया गया था . अभी 5 लमननट ही हए थे र्क हॉलस्पटल के अधीक्षक िॉक्टर माथर तीन और िॉक्टसट के साथ वहािं पहचे . िॉक्टर माथर ने तीनों िॉक्टसट को अन्दर िाने का इशारा र्कया और वे स्वयिं केप्टन कवपल के साथ एक और चले गए. वे दोनों गहन चचाट में व्यस्त हो गए. 10 लमननट बाद एक िॉक्टर ऑपरे शन धथयेटर से बाहर आया. केप्टन कवपल और िॉक्टर माथर के पास िाकर वह बोला- सर ! यह िहर दे ने का केस है . पेशेंट की हालत बहत र्िदटकल है . माथर साब ! आप अन्दर दे ख लीलिये . हमने अपनी कोलशश शर कर दी है लेर्कन ....िॉक्टर माथर ने कहा –

आप अपने प्रयास िारी रखखये . मैं एक और एक्सपटट

िॉक्टर सय ट िंशी को भेि रहा हूुँ. तब तक आप उसे बचाए रखखये और ू व वो एक िोन करने लगे. इधर इिंस्पेक्टर यादव का िोन घनघनाया ....

लाईन पर पललस कमीशनर थे . यादव बात करते -करते पसीने से नहा गया था और केवल उसके महिं से केवल िी ! िी सर ! ही ननकल रहा था . 43


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तभी दो सीननयर ऑर्िससट और 4 हवालदार भी आ चके थे िो अब हॉलस्पटल में ववकास की लसक्यूररटी का चािट ले रहे थे . इसके साथ ही कछ लमननट बाद ही केप्टन कवपल का नम्बर -2

रॉबटट भी आ

चका था और उसके साथ थी केप्टन कवपल की टीम के चार सदस्य थे लिनमें दो लड़के और दो लिर्कयािं थी. पललस और केप्टन कवपल की यह लमलीिली टीम अब ववकास की लसक्यूररटी का दानयत्व लेने वाली थी. केप्टन कवपल इिंस्पेक्टर यादव की और बढ़ा िो अब मायस ू और परे शान एक और खिा था . केप्टन कवपल ने उसके किंधे पर हाथ रखा और कहा – यादव ! दआ करो र्क ववकास बच िाए और अगर वो बच गया तो तम्हारे डिपाटटमेंट को तो मैं सम्हाल लूिंगा .. लेर्कन यादव प्रेस का क्या करोगे. इिंस्पेक्टर यादव के चेहरे पर धचिंता के भाव गहरे होते िा रहे थे िो केस अभी तक एक साधारण ह्तत्या का केस था वो अब उसकी एक सरक्षा चूक से हाई -प्रोिाइल केस बनने िा रहा था. केप्टन कवपल ने यादव मव ू िास्ट ! अब तम थाने िाओ .. धचता करने की बिाय काम शर करो. इिंस्पेक्टर तेिी से सीदढ़यों की तरि बढ़ गया . केप्टन कवपल ऑपरे शन धथयेटर की और बढ़ा और वो उसके अन्दर चला गया . िैसे ही केप्टन कवपल ऑपरे शन धथयेटर के अन्दर की तरि गया लसक्यरू रटी ऑर्िसर एक तरि हट गया. एक और एक्सपटट िॉक्टर सय ट िंशी भी तब तक आ चके थे. ू व अन्दर केप्टन कवपल ने दे खा र्क ववकास का के अन्दर कई नाललयािं िाली गई थी लिससे िहर ननकालने की कोलशश की िा रही था लेर्कन उसकी साुँसे िूबती िा रही थी. िॉक्टसट के चेहरे पर मायस ू ी 44


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साि झलक रही थी. िॉक्टर सय ट िंशी ने सामने मोननटसट पर अलग ू व अलग ररपोटट आ रही थी . ववकास की िूबती सािंसे दे ख उन्होंने कहा इसे अब वेंटीलेटर पर ले लो और मझे दे खने दो . आप लोग थोड़े साइि में हो िाए और िैसा मैं कहूुँ मझे अलसस्ट करें . दे खखये थोड़ा होलशयारी से .

केप्टन कवपल ने दे खा िॉक्टर सूयव ट िंशी अब ववकास के शरीर पर झके हए थे और लगातार अपने िनू नयर िॉक्टसट ननदे श दे रहे थे और वे लगातार उनको इन्िेशन तैयार कर दे ते िा रहे थे. कछ इिंिेक्शन डड्रप में भी ददए िा रहे थे .

िॉक्टर सूयव ट िंशी बार-बार सामने मोननटसट पर

ऊपर -नीचे होती रे खाएिं दे ख रहे थी लेर्कन उनके चेहरे पर धचिंता की रे खाएिं बढ़ती िा रही थी. इसी तरह लगभग 30 लमननट हो गए. िॉक्टर सूयव ट िंशी ने मोननटसट की और दे खा ... . केप्टन कवपल धचिंनतत मद्रा में लगातार िॉक्टर सूयव ट िंशी के चेहरे की और दे ख रहा था और िब भी वे ववकास से थोड़े दरू होते तो केप्टन कवपल उनके चेहरे पर आई तनाव की रे खाएिं दे ख धचिंनतिंत हो उठता. लेर्कन इस बार उसने दे खा र्क िॉक्टर सूयव ट िंशी के चेहरे पर तनाव की िगह एक मस्कान थी .... वो समझ गया अब ववकास खतरे से बाहर है और वो ऑपरे शन धथयेटर से ननकल गया. केप्टन कवपल ने बाहर िाकर रॉबटट को कछ ननदे श ददए और र्िर उसने पललस ड्यूटी ऑर्िसर को रॉबटट से बात करने का कहकर सीदढ़यों की और बढ़ गया ..... नीचे रमेश िी और सब -इिंस्पेक्टर रावल ररसेप्शन के पास लगी कलसटयों पर बैठे थी . ववकास की मम्मी अननता िी और उसका दोस्त सशािंत भी आ चका था. केप्टन कवपल 45


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उनके पास पिंहचे और बोला – अब ववकास खतरे से बाहर है . उसके बाद उसने सब – इिंस्पेक्टर रावल के किंधे पर हाथ रखा और भावक होकर बोला – रावल ! तम सही समय पर ववकास को हॉलस्पटल ले आये इसीललये वो बच गया . अब तम सीधे अपने थाने िाओ . इिंस्पेक्टर यादव को तम्हारी िरुरत है . मै बस थोिी दे र में वही​ीँ आ रहा हूुँ . ********

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थाने में इिंस्पेक्टर यादव और सब इिंस्पेक्टर रावल एक कमरे में बैठे थे . रावल सीसीटीवी बार – बार दे ख रहा था. उसे कछ सिंददग्ध निर नहीिं आ रहा था. लेर्कन तभी उसकी निर एक 16-17 साल के लड़के पर पड़ी िो चाय की एक ग्लास लेकर अन्दर की रहा था . यह सामान्य सी बात थी

तरि बढ़

वो चाय वाले का लड़का छोटू था

िो हमेशा थाने में चाय लाता था . सबइिंस्पेक्टर रावल ने दो तीन बार दे खा और हवलदार को कहा िाओ चाय वाले के यहाुँ से छोटू को पकड़ लाओ. हवलदार थोड़ी दे र बाद लौटा लेर्कन छोटू उसके साथ नहीिं था ... उसके साथ था चाय वाला सरें दर . आते ही वो बोला क्या हो गया साब. छोटू की क्या िरुरत पड़ गयी वो तो आि सबह से ही नहीिं आया है . बखार था उसका भाई बोल कर गया है . इिंस्पेक्टर रावल ने सीसीटीवी की और इशारा करते हए कहा – ये दे खो क्या है ?

चाय वाले सरें दर ने दो तीन बार दे खा और बोला सर ! ये

छोटू नहीिं है ! एक तो आपका कैमरा साफ़ नहीिं है . आप अच्छी तरह 47


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से दे खखये ये छोटू नहीिं है . हमारे यहाुँ से इस तरह हाथ में चाय का ग्लास नहीिं लाया िाता और र्िर केवल एक ग्लास .... छोटू को तो आप रोि दे खते ही हैं ...इिंस्पेक्टर यादव ने गौर से दे खा ... और बोला ये कोई और है .. तो र्िर पक्का है इसी ने चाय में ववकास को िहर ददया है ..... क्यों र्क और तो कोई आया नहीिं . र्िर ये बेवक्त की चाय ? कौन है ये. दे खो सरे न्द्र तम तो ददन भर बाहर ही रहते हो और इस इलाके में सबको िानते हो .. ध्यान से दे खो क्यों र्क चाय लेकर तो ज्यादा दरू से कोई आ नहीिं सकता शायद तम्हे पहचान की कोई झलक लमल िाए. चायवाला सरे न्द्र एक रोबदार पललस ऑर्िसर के नाम से ववख्यात इस्पेक्टर यादव की ववनम्र आवाि सन है रान था . वो दस साल से थाने के पास ही चाय बेच रहा था इसललए सबको अच्छी तरह से िानता था . सरे न्द्र बोला – साब ! छोकरा है तो इसी इलाके का . आप मझे थोिा समय दो . केप्टन कवपल ने थाने में प्रवेश र्कया . वो अपनी िीप थाने के अहाते तक ले आये थे . उनके साथ उनका एक अलस्सस्टें ट अ्पेश था िो एक बड़ा बेग साथ ललए था. केप्टन कवपल ने इिंस्पेक्टर यादव के किंधे पर हाथ रखते हए कहा – यादव साब ! भधाई हो . लड़का अब खतरे के बाहर है . चालो अब आप पर आया ख़तरा हटाते है . अभी तक क्या -क्या हआ है ? वैसे यादव तम्हे धचिंता ज्यादा नहीिं करनी चादहए क्यों र्क ऐसे पल सबके केररयर में आते ही हैं. तम्हारे पास तो

रावल िैसे काबबल और होलशयार ऑर्िसर है . रावल अपनी

प्रशिंसा सन थोड़ा शमाट गया और केप्टन कवपल के सामने हाथ िोड़ ददए. केप्टन कवपल ने कहा – रावल , तम अ्पेश के साथ िाओ

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और इसे लॉक आप में ले िाओ तार्क यह अपनी िािंच कर सके. माहौल अब थोड़ा ह्का निर आ रहा था . इिंस्पेक्टर यादव ने अब तक क्या हआ ये सब केप्टन कवपल को बता ददया और यह भी बता ददया र्क िहर चाय में ददया गया है . उस लड़के के बारे में भी बताया िो चाय लेकर आया था .... इिंस्पेक्टर यादव ने अभी अपनी बात ख़त्म ही की थी र्क चाय वाला सरें दर एक लड़के के साथ आ गया और बोला – यादव साब ! मैंने बाहर एक दो लोगों को पछ ू ा और बस हो गया काम . ये पास में िगतार

भाई के

मोटर गेरेि पर काम सीख रहा है और इसने खद ही बता ददया र्क चाय लेकर यही अन्दर आया था. लो आप सम्हालो इसको . इिंस्पेक्टर यादव ने लड़के को गौर से दे खा ,,, और कड़क आवाि में पूछा बता ! तन ू े िहर क्यों ददया ववकास को ? र्कसके कहने पर यह िलील हरकत की ..... लड़का एकदम सहम गया और बोला – साब ! मैंने िहर ददया ,,, मैंने तो लसिट उन भैया को चाय दी थी वो भी उनके पापा के कहने पर िो एक थरमस में चाय लाये थे और बोले र्क मेरा बेटा अन्दर है उसको िाओ चाय दे आओ कहना तम्हारी मम्मी ने भेिी है .... बस मैंने तो चाय दी थी . मै कई बार छोटू के साथ अन्दर आ चका हूुँ वो मेरा दोस्त है इसललए मझे पता था र्क चाय कहाुँ दे नी है .. बस साब मैंने यही र्कया है और वो रोने लगा..... केप्टन कवपल

गौर से उस लड़के की बात सन रहे थे और वो बोले – अब हत्यारा बेकरार हो चका है और वो ववकास को अपने रास्ते से हटा कर इस केस को बिंद करवाना चाहता है लेर्कन अब उसकी इस हरकत ने हमारा काम अब आसान कर ददया है .

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तब तक सब इिंस्पेक्टर रावल आ चका था और वो अ्पेश को लॉकअप में छोड़ आया था . केप्टन कवपल ने कहा – रावल ! इस लड़के को ले िाओ और हे ि ऑर्िस से स्टाि आदटट स्ट को बला लो और इसके बताये अनसार स्केच बनवा लो और हाुँ ध्यान रखना ज्यादा दे र हो तो इसके खाने का इिंतिाम कर दे ना और काम होने के बाद इसको िाने दे ना . हत्यारा इसको बेवकूि बना गया है साथ ही तम्हारे सारे स्टाि को भी .

बस ! इससे ज्यादा इससे कोई मदद

नहीिं लमल पाएगी. लड़के को कोई परे शानी नहीिं हो ध्यान रखना . केप्टन कवपल ने रावल से पूछा र्क अ्पेश को दे खो र्कतना समय और लगेगा लेर्कन तब तक अ्पेश भी आ गया और बोला – सर हो गया . केप्टन कवपल उठ गया और बाहर की तरि ननकल गया . *********

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इिंस्पेक्टर चेतन प्रकाश यादव आि सबह 5 बिे ही उठ गया था . वैसे तो उसे रात में नीिंद ही नहीिं आ पाई थी . उसकी आुँख शायद रात को 2 बिे के करीब लगी. पास में उसकी पत्नी और 7 साल का बच्चा सो रहा था . वो उठकर बाथरम में चला गया. आि उसके ललए बहत मलश्कल ददन होने वाला था . एक तो सबह के अखबार और दस ू रा कमीश्नर ऑर्िसर में उसकी पेशी. वो सबह सबह ही नहा धोकर तैयार होना चाहता था क्यों र्क कमीश्नर ऑर्िस से उसे बताया िाना था र्क उसे र्कतनी बिे आना है . शहर के तीन बड़े अखबार इिंस्पेक्टर यादव के सामने थे . वो एक एक कर तीनो की हे ि लाइन और खबर दे ख रहा था . पहले अखबार में ववकास के िोटो के साथ उस पर हए हमले की पूरी कहानी थी र्क र्कस तरह पललस थाने में उसकी ह्तत्या का प्रयास र्कया गया . इस खबर में पूरी तरह से शहर की कमिोर कानून और व्यवस्था पर ही उिं गली उठाई गई थी . इस अखबार ने ललखा था अब तक तो पललस की नाक के नीचे अपराध होते थे लेर्कन अब तो पललस थाने में ही अपराध हो रहे हैं . बहत लम्बी खबर थी और इसके साथ एक 51


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स्थानीय नेता का बयान था र्क इस थाने के सारे स्टाि को सस्पेंि कर एक हाई लेवल िािंच की िानी चादहए . एक दस ू रे अखबार ने तो इस घटना में पललस की लमलीभगत की सिंभावना व्यक्त की थी और एक तीसरे अखबार ने तो इसे पललस महकमें में व्याप्त भ्रष्टाचार को इसके ललए लिम्मेदार ठहराया था . हर उिं गली अब इिंस्पेक्टर चेतन प्रकाश यादव की और उठ रही थी , उसे केप्टन कवपल की कही बात याद आ गई ........ इिंस्पेक्टर यादव ! अगर ववकास बच गया तो तम्हारे डिपाटट मेंट को तो मैं सम्हाल लिंग ू ा लेर्कन प्रेस का क्या करोगे. अब उसे लग रहा था र्क इन प्रेस ररपोट्टस के बाद तो डिपाटट मेंट भी उसे नहीिं छोड़ेगा. अभी वो अखबार पढ़ ही रहा था र्क उसका मोबाइल घनघना उठा उसे पता था र्क िोन डिपाटट मेंट से ही होगा लेर्कन िोन पर नाम दे ख कर वो चौक गया िोन उसके वपता का था िो इस समय उसके पैतक ृ गाुँव में रहते थे . उसके वपता पललस में एक कािंस्टे बल के पद पर भती हए थे और ररटायिट हए थे एक सम्मानीय अधधकारी के रप में. इस समय वे अपने गाुँव में अपने छोटे बेटे और उसके पररवार के साथ रहते थे और अब खेती उनका मख्य पेशा था. िब वे सववटस में थे तब एक दबिंग और ईमानदार अिसर के रप में मशहूर थे और इिंस्पेक्टर चेतन प्रकाश यादव भी उन्ही की प्रेरणा से पललस ववभाग में आया था . इिंस्पेक्टर यादव ने िोन उठाया और बहत ही मायस ू आवाि में बोलाप्रणाम पापा . उधर से एक रौबदार आवाि आई- चेतन ! बहत दखी हो बेटा . यादव ने कहा – िी पापा . बड़े यादव साब ने कहा- बेटा दखी हो यह तो ठीक है . मैंने ऑनलाइन आि तम्हारे शहर के 52


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अखबार दे खें हैं . तम इस घटना से दखी तो हो सकते हो लेर्कन तम्हे घबराना या धचिंनतत नही होना है

और होसला नहीिं खोना है .

पललस की नौकरी में ऐसा होता रहता है . अखबारों में भी ख़बरें आती ही है . अब तम्हारा काम है इस केस को हल करना और अपने डिपाटट मेंट को दहम्मत से िेस करना . सब ठीक होगा बस तम होसला मत छोड़ना . इिंस्पेक्टर यादव ने कहा – पापा , पललस वाले भी इिंसान होते हैं और गलती और अपराध में तो िकट करना चादहए. बड़े यादव सब ने कहा – अरे ! चेतन , सब अपना -अपना काम करते हैं . शि करो वो बच्चा बच गया इसललए तम्हारी मलश्कल कछ कम हो गई है . इिंस्पेक्टर ने कहा- पापा , वो डिपाटट मेंट ? बड़े यादव साब ने कहा – बेटा ! कमीश्नर तक पहचने वाला आदमी बहत समझदार होता है . तम बेधिक िाओ और िो भी हो दहम्मत के साथ िेस करो. इिंस्पेक्टर यादव ने कहा – िी ! पापा प्रणाम . उसकी पत्नी भी उठ चकी थी और वो अब चाय ले आई . उनका बच्चा अभी सो रहा था. तभी उसका मोबाइल बि उठा. लाइन पर कमीश्नर ऑर्िस से िोन था . लाइन पर उसका अपना दोस्त और बेचमेट इिंस्पेक्टर अववनाश कपरू था . कपरू बोला – यादव ! 9 बिे है तम्हारी पेशी . सब इिंस्पेक्टर रावल को भी लाना है . 8 बिे यहाुँ एक उच्चस्तरीय मीदटिंग है और 9 बिे कमीश्नर साहब ने तम्हे बलाया है . यादव ने पछ ू ा – 8 बिे वाली मीदटिंग में कौन – कौन है . कपरू ने कहा – ललस्ट दे खकर बताता हूुँ और र्िर बोला – दे खो ! कमीश्नर साहब तो ही है . एडिशनल कमीश्नर , इस शहर के दोनों ववधायक ,

सािंसद के एक प्रनतननधध और गह ृ ववभाग के एक बड़े अधधकारी. यादव ने पछ ू ा – और कौन ? कपरू ने कहा- और शहर के तीनों बड़े अखबारों 53


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के सिंपादक और ... यादव ने पछ ू ा – और कौन ? क्या इतने कािी नहीिं है ... कपरू ने कहािं – कूल यादव कूल .. और है तम्हारा लमत्र केप्टन कवपल और मैं . यादव, बरा समय है यार , दहम्मत से िेस करो. बेस्ट ऑफ़ लक .. यादव ने बड़ी मलश्कल से कहा- थैंक यू भाई. दे खो क्या होता है . इिंस्पेक्टर चेतन प्रकाश यादव ने घिी दे खी .. अभी थोिा वक्त था लेर्कन वो तैयार होने लगा. उसने रावल को भी िोन कर ददया . इिंस्पेक्टर यादव की पत्नी रिनी उसे बड़े गौर से दे ख रही थी और वो भी धचिंनतत थी . रिनी एक प्राइवेट स्कल में टीचर थी . आि के अखबार उसने भी पढ़ ललए थे और वो भी धचिंनतत थी ... आि उसने छट्टी ले ली थी . उसे पता था नौकरी और पैसे िो वेतन से लमलते थे उससे वे सिंतष्ट था और साथ ही उसे और उसके पनत को ऐसे हालात में नौकरी और वेतन की तो कोई धचिंता नहीिं थी

लेर्कन वो ये बदनामी कैसे झेल पायेगा. उसने यादव के

किंधे पर हाथ रखा और बोली- आप बस शालन्त रखे . बरा वक्त है ननकल िाएगा और इसी वक्त यादव को महसूस हआ र्क वो अकेला नहीिं है उस पर अपनी पत्नी और बेटे की भी लिम्मेदारी है . गाुँव में पापा है मम्मी है . छोटा भाई है और उसका पररवार है ये सब उसकी लिम्मेदारी है और वो इस तरह मायूस होकर तो अपनी लिम्मेदारी नहीिं ननभा पायेगा. वो मस्कराते हआ बोला- रिनी िो होगा वह दे खा िाएगा . चलो तम नाश्ता बनाओ मझे कमीशनर ऑर्िस िाना है अभी . **********

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इिंस्पेक्टर यादव और सब इिंस्पेक्टर रावल ने ठीक 8.30 बिे कमीश्नर ऑर्िस में प्रवेश र्कया और इन्हें दे खते ही एक हवलदार दौड़ता हआ आया और बोला – यादव साब , आप यहाुँ रुर्कए मत . आपको इिंस्पेक्टर कपूर के ऑर्िस में बैठना है . वो मझे बोल कर गए हैं. यादव और रावल दोनों ने पीछे की और बने इिंस्पेक्टर कपूर के कमरे में प्रवेश र्कया. वहािं उन्होंने दे खा र्क कपरू की कसी पर इिंस्पेक्टर राठोि बैठा था . यादव उसे िानता था और वो कमीश्नर ऑर्िस के पलब्लक ररलेशन डिपाटट मेंट में था और मीदटिंग्स में वो यादव से लमलता रहता था. राठोि ने बेल बिाई और चाय लाने को कहा. तीनों ने चाय आने पर चाय पीना शर र्कया और राठोि ने यादव से आम बाते शर कर दी . वो बोला- और यादव क्या हाल है ... पररवार में सब ठीक है . यार तम्हे पता है मेरे पापा ने भी तम्हारे पापा के साथ बरसों तक काम र्कया है . कैसे है बड़े यादव साब. इिं स्पेक्टर यादव सोच से बाहर ननकलते हए कहा – अरे ! हाुँ राठोि सब ठीक है यार . पापा भी ठीक है . इिंस्पेक्टर यादव और राठोि ने महसूस र्कया र्क

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राठोि कल की घटना के बारे में कोई बात नहीिं कर रहा है और इस बात से उन्हें थोड़ी मानलसक राहत महसूस हई. तभी एक हवलदार अिंदर आया और बोला – यादव साब ! आपको और रावल साब को कमीश्नर साब बला रहे हैं . इिंस्पेक्टर यादव और सब इिंस्पेक्टर रावल खड़े हो गए और साथ में इिंस्पेक्टर राठोि भी .... राठोि ने कहा – बेस्ट ऑफ़ लक यादव ... और दोनों को उसने कमीश्नर ऑर्िस की और ववदा र्कया .. यादव और रावल ने कमीश्नर ऑर्िस में प्रवेश र्कया और अलभवादन करते हए एक और खड़े हो गए. कमीश्नर वी .के. चौहान ने उन्हें गौर से दे खा और र्िर गिंभीर स्वर में बोले – बैठो . खड़े क्यों हो. यादव और रावल दोनों सामने रखी कलसटयों पर बैठ गए. कमीश्नर चोहान ने कहा – ऑर्िससट ! तमने आि मझे सिंकट में िाल ददया .. बड़ी मलश्कल मीदटिंग रही मेरे ललए. आरोप ! आरोप और आरोप !!!! तीस लमननट की मीदटिंग में 28 लमननट यही सब चला ... अब तम बताओ तम दोनों का क्या र्कया िाये ? घटना भी बड़ी है और गलती भी बड़ी है और मझ पर दबाव भी है . दोनों ऑर्िससट खामोश ही रहे और कहने को कछ भी नहीिं था उनके पास . ख़ामोशी ही इस वक्त उन्हें सबसे ठीक िवाब लगा. वैसे उनकी हालत यह थी र्क अब उन्हें बस लटकाया िाने वाला ही

है ...

सामने पानी के ग्लास रखे थे पर उनकी दहम्मत नहीिं थी र्क पानी पी ले पर गले तो सख ू ही रहे थे. कमीश्नर चोहान ने बोला- चलो पानी पी लो र्िर मेरी बात ध्यान से सनो. इिंस्पेक्टर यादव और सब इिंस्पेक्टर रावल ने पानी की ग्लास हाथ में और एक बार में सारा

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पानी ख़त्म कर ददया ... और वो इन्तिार कर रहे थे कमीश्नर के िरमान का . कमीश्नर ने बेल बिाई और आिटर ददया तीन चाय ले आओ और यादव की तरि दे खते हए बोला – अभी भी तम उम्मीद कर रहे हो र्क पललस उसी तरह से काम करे गी िैसे पहले दबाव में करती थी तो तम दोनों गलत हो . मैंने अभी तम्हे केवल 28 लमननट की मीदटिंग की कहानी सनाई है अपर मीदटिंग तो 30 लमननट चली थी और इन दो लमननट में भी िवाब मझे दे ने का मौक़ा ही नहीिं लमला . केप्टन कवपल ने िवाब ददया था र्क गलनतयािं र्कसी से भी हो सकती है लेर्कन हमारे ऑर्िससट ने ना तो कोई बेईमानी की और ना ही कोई अपराध . उन्होंने ना ही कछ नछपाने की कोलशश की बल्क लड़का बचा ही इसललए र्क वे समय से उसके हॉलस्पटल लेकर पहुँच गए वरना तो इसे आत्महत्या का केस ् बनाने में क्या समस्या थी , अब वे उस लड़के को भी पकड़ चके हैं और आि शाम तक उस लड़के से वो स्केच भी बनवा ललया िाएगा तार्क असली हत्यारे को पकड़ा िा सके. सब बातें अखबारों को तो बताई नहीिं िा सकती . आप पललस को अपना काम करने दें . ... इसके बाद सब बातें साफ़ हो गई और तनाव भी ख़त्म हो गया . लेर्कन समय बहत मलश्कल था... यादव ने बड़ी मलश्कल से कहा – अब हमारे ललए क्या आदे श है . तब तक चाय आ चकी थी और कमीश्नर चौहान ने कहा – तम क्या चाहते हो र्क मैं तम दोनों का क्या करुँ .. यादव ने कहा – सर ! अब हमारे कहने से क्या होगा . सर ! करना तो आपको है . कमीश्नर चौहान ने कहा – तम ईमानदारी से काम करते रहो. तम्हे सिा दे कर मैं अपनी फ़ोसट का मोरल िाउन नहीिं कर सकता और यही राय बनी 57


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है उस मीदटिंग में उपलस्थत हर सदस्य की केप्टन कवपल की बात से सहमत होते हए यही राय थी. कल के तीनों अखबार भी अपनी यही राय िनता के सामने रख्नेगे. दोनों ऑर्िससट खड़े हए और कमीश्नर को एक िोरदार से्यट ू र्कया और अबाउट टनट लेकर बाहर की और ननकल गए लेर्कन अब उन दोनों के पास एक बहत बड़ी लिम्मेदारी थी और वो थी इस केस को सॉ्व करने की. ***********

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केप्टन कवपल अपने ऑर्िस में बैठा था और मोननटर पर एक केस की िाइनल ररपोटट दे ख रहा था िो उसके स्टाि ने उसे भेिी थी. अब वे भारत के सबसे बड़े बैंक में लगातर होने वाली ऑनलाइन ठगी का केस हल कर चके थे और कल सबह उसकी बैंक के मख्य अधधकाररयों के साथ मीदटिंग थी. तभी इिं स्पेक्टर रावल का िोन आया और वो बोला – केप्टन साब ! नमस्कार ! वो चाय वाले लड़के की मदद से स्टाि आदटट स्ट ने स्केच बना ललया है .. केप्टन ने बोलाकछ पता लगता है .. रावल ने कहा – सर ! ऐसे तो कछ ख़ास पता नहीिं लगता है . कोई िरायम पेशा तो नहीिं लग रहा है ये तो मैंने परू ा हमारे कम्पटर िाटा से चेक कर ललया है . केप्टन कवपल ने कहा- ठीक है . िरुरी नहीिं है र्क यही आदमी कानतल है लेर्कन इसे पकड़ना इसललए िरुरी है र्क यही हमें असली हत्यारे तक ले िाएगा.

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चलो तम तम्हारी इन्क्वारी िारी रखो ...... मैं कल ददन में तम्हे बताऊिंगा र्क क्या करना है .... कल 12 बिे .... अगले

ददन 12 बिे के करीब केप्टन कवपल इिंस्पेक्टर यादव के थाने

था . इिंस्पेक्टर यादव और सब इिंस्पेक्टर रावल भी सामने बैठे थे . केप्टन कवपल का अलसस्टें ट रॉबटट भी एक फ़ाइल के साथ वही​ीँ था. रॉबटट ने केप्टन कवपल के सामने एक फ़ाइल रख दी और बोला – मास्टर ! इसमें मत ृ क शमाट िी लिस बबल्ि​िंग में रहते थे उसमें रहने वाले सभी लोगों की ललस्ट और डिटे ्स है . इनमें से िो लोग शेयर माकेट में थोिा भी िील करता है उनकी ललस्ट अलग से है . केप्टन कवपल ने कहा – आिकल लगभग सभी शेयर बािार में इन्वेस्ट करते ही है . चलो दे खते हैं. वैसे यह िरुरी नहीिं र्क इसका ललिंक र्कसी शेयर िीललिंग से हो ही. र्िर वह आगे बोला - हाुँ रावल वो तम्हारे स्केच का क्या हआ . कोई ललिंक लमला उससे ? सब इिंस्पेक्टर रावल ने कहा – कवपल सर, मैंने इन्क्वायरी की है . कल भी मैंने आपको यह

बताया

था र्क यह कोई िरायम पेशा आदमी नहीिं है क्यों र्क यह स्केच हमारे मास्टर ररकॉिट से तो कहीिं नहीिं लमलता है . केप्टन कवपल ने पूछा – मास्टर ररकॉिट मतलब तम्हारे थाने का ररकॉिट .. रावल बोला नहीिं सर ! मैंने कमीशनर ऑर्िस के मास्टर ररकाड्टस से लमलाया है िहाुँ परू े शहर का िाटा है . आप कहें तो शहर में इसके पोस्टर लगवा दुँ ू सर ? केप्टन कवपल ने कहा- अरे नहीिं ! इससे तो ये आदमी सतकट हो िाएगा. हाुँ रॉबटट तम भी तो बबल्ि​िंग के सारे लोगों से लमले हो . तम दे खो ये स्केच ...... शायद कोई क्लू लमले. रॉबटट ने स्केच ठीक से दे खा और बोला – सर ! ये स्केच एक ऐसे लड़के के कहने पर 60


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बनाया गया है लिसने इस आदमी को बहत दे र तक दे खा नहीिं था... वह तो बस उसकी बातों में और भावना मैं बहकर चाय का ग्लास ववकास तक ले गया था लिसमें िहर था.... ये स्केच कोई ज्यादा नहीिं बता रहा है ... उनमें से लिनसे मैं लमला उनमें से तो स्पष्ट रप से मझे नहीिं लगता र्क कोई हो...... केप्टन कवपल ने कहा – स्केच परू ी तरह से स्पष्ट हो ऐसा तो तभी हो सकता है िब र्क आप उस आदमी से कई बार लमले हो . यदद एक बार और कछ सेकिंड्स के ललए लमले हों तो स्केच ऐसा ही बनता है और इसी से हमें काम चलाना होता है और अगर स्केच बनवाने वाला उस आदमी से कई बार लमल चका हो तो र्िर स्केच की क्या िरुरत वो उसके बारे में वैसे ही बता दे गा र्क वो कौन है ... दे खो हम इसी से कैसे काम चलाते हैं . केप्टन कवपल स्केच को ध्यान से दे ख रहा था ... चेहरे पर हलकी ढाढ़ी थी और उसने एक काला चश्मा लगा रखा था और चहरे पर ह्का सा एक मस्सा था काले रिं ग का...... कवपल ने रावल से कहा – तम्हारे स्टाि आदटटस्ट को बलावा लो . मझे कछ बात करनी है उससे. इिंस्पेक्टर यादव ने कहा - केप्टन साब ! उस लड़के को भी बला लें .. केप्टन कवपल ने कहा – नहीिं उसका अब कोई काम नहीिं है . वो िो बताना था बता चका . सब इिंस्पेक्टर रावल अपने िोन पर स्केच बनाने वाले आदटट स्ट से बात कर रहा था .. इस बीच रॉबटट से केप्टन कवपल ने कहा – यह स्केच , उस बबल्ि​िंग में रहने वाले लोगों की दहस्ट्री और अस्पताल में होश में आने के बाद ववकास के ददए गए बयान की कॉपी तम अपने ऑर्िस ले चलो. 61


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इिंस्पेक्टर यादव ने हवलदार को इशारा र्कया और चाय वाला लड़का चाय और बबलस्कट की ट्रे ले आया और सबने अपने – अपने चाय के ग्लास उठा ललए. वो लड़का अब तक, अपने उस दोस्त से लिसके िररये ववकास को चाय में िहर ददया गया था, सारी कहानी सन चका था और बहत सहमा हआ सा लग रहा था. केप्टन कवपल ने उसकी मायूस शक्ल दे खी तो उस लड़के को अपने पास बलाया और अपने पसट से 500 रपये का नोट ननकाला और बड़े प्यार से उस लड़के दे ते हए बोला – बेटा ! मेरा एक काम करोगे ... वो लड़का सहमते हए बोला- िी सर ! केप्टन कवपल ने कहा – ये 500 रपये लो और अपने उस दोस्त को ले िाकर आि शाम कछ अच्छा सा खखला दे ना .. और उससे कहो – ऐसा र्कसी के भी साथ हो सकता है और तम भी अपने चेहरे से यह धचिंता के भाव हटाओ. उस लड़के ने 500 रपये का नोट केप्टन कवपल कवपल को लौटते हए बोलाधन्यवाद सर ! मैं उसके समझा दिं ग ू ा मेरा बहत अच्छा दोस्त है .. केप्टन कवपल ने वह नोट उसकी िब में िालते हए कहा बेटा ! इसके बबना नहीिं ... वो लड़का मस्करा ददया ... पहली बार उसके चहरे से तनाव अब हटता िा रहा था .. केप्टन कवपल ने कहा – तम और तम्हारे दोस्त को कभी भी कोई िरुरत हो तो मेरा नम्बर इिंस्पेक्टर साब से ले लेना ...

चलो अब हिं स दो ... और लड़का हुँसते हए बाहर

ननकल गया. इिंस्पेक्टर यादव आश्चयट से दे ख रहा था .. उसने पछ ू ा केप्टन साब ! ये क्या था ? केप्टन कवपल ने कहा – यादव ! ये लोग मज़बूरी में काम करते हैं . मैं और तम तो इस उम्र में काम नहीिं करते थे .. खाली पढ़ाई और मस्ती .. ये भी पढ़ाई करते होगें .. मालम करना 62


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नहीिं तो इसकी भी व्यवस्था करें गे कछ ना कछ ... लेर्कन र्िर भी इनकी लिन्दगी में मस्ती कहाुँ है .. पहले तो ये काम करते हैं और र्िर इस तरह की मसीबते आ िाएुँ तो र्िर तो ये बेचारे टूट ही िायेंगे . दे खा नहीिं इस लड़के का चेहरा .... िब इसकी ये हालत है तो र्िर उस लड़के की क्या हालत होगी लिसकी मदद से िहर ददया गया था .. हमें इनकी मदद करनी होगी तार्क ये नामटल हो सके. तम भी यार ध्यान रखो र्क ये बराबर अपने काम पर आ रहें हैं .. या नहीिं .थोड़े ददन में ये नामटल होकर सब भल ू िायेंगे..... ये समय थोड़ा इनके ललए मलश्कल है .... तब तक रावल ने आकर बताया र्क स्टाि स्केच आदटट स्ट आ चका है . स्टाि आदटट स्ट एक ढाढ़ी वाला नौिवान था िो िीिंस और कताट पहने हए था और शक्ल से ही वो बाकायदा आदटट स्ट ही लग रहा था .. कवपल ने उसे वो स्केच ददखाया और वोला – तम्हे अब कछ और स्केच बनाने हैं . नोट करो . आदटट स्ट एक नोट पेि ननकाल कर नोट करने लगा .. केप्टन कवपल ने बोला – पहले तो एक स्केच इसकी ढाढ़ी हटा कर बनाओ. दस ू रे में यह काला चश्मा हटो दो और तीसरे में यह काला मस्सा हटा दो और इसकी तरह से ही कछ और कॉलम्बनेशन बना दो .यह काम तम कब तक कर सकोगे. आदटट स्ट बोला – सर! अधधक से अधधक तीन घिंटे. केप्टन कवपल ने बोला – ठीक है ! रावल तम ठीक 5 बिे ये सारे स्केच लेकर मेरे ऑर्िस आ िाना . रावल ने कहा – ठीक है सर . केप्टन कवपल ने इिंस्पेक्टर यादव की और दे खता हआ बोला – दे खो यादव ! आि शाम 5 बिे तम भी मेरे ऑर्िस आ िाना .. वही​ीँ से मैं अगले ननदे श दिं ग ू ा. हाुँ इस मीदटिंग में मत ृ क शमाट िी के दोनों बेटे 63


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अलमत और अननल

और ख़ास तौर पर उनके पिौसी राधेश्याम िी

को बला लेना. यह िरुरी है . केप्टन कवपल ने रावल को बोला- हाुँ रावल तम स्केच लेकर थोिा पहले आ िाना तार्क मेरे ऑर्िस में स्केच दे खकर कछ व्यवस्था हो सके. ************

64


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शाम 4.30 तक केप्टन कवपल के ऑर्िस में कािंफ्रेंस रम में सारी व्यवस्था हो चकी थी. सब इिंस्पेक्टर

रावल एक बार परू ी तरह से

ननरीक्षण कर चका था . कािंफ्रेंस रम में हर टे बल पर एक कम्पटर पहले से ही र्िक्स्ि थे और ये सभी कम्पटर चल रहे थे

और हरे क

के मॉननटर पर स्केच आदटट स्ट की बनाई गई मूल तस्वीर लस्थर थी..... िो र्क एक प्रोढ़ आदमी की लग रही थी . ये सभी कम्पटर एक सवटर से िड़े थे और इस सवटर पर एक किंप्यट ू र ऑपरे टर

लिकी

बैठी थी लिसे यह पूरा लसस्टम ऑपरे ट करना था. रावल अभी तक उसके सवटर को दो तीन बार चेक कर चका था और उस किंप्यूटर ऑपरे टर को भी अच्छी तरह ननदे श दे चका था. अब वह सब कछ तैयार है इसकी सचना दे ना केप्टन कवपल के ऑर्िस िा रहा था. कछ दे र बाद इिंस्पेक्टर यादव भी आ चका था .. उसके साथ ही मत ृ क शमाटिी के दोनों पत्र अलमत और अननल भी थे .... लेर्कन राधेशयाम िी अभी नहीिं आये थे बस उन्ही का इन्तिार था . 5.15 का समय हो चका था लेर्कन राधेश्याम अभी नहीिं आये थे. केप्टन कवपल कछ करने का सोच ही रहे थे र्क उनका इण्टरकॉम घनघनाया .... उसने िोन उठाते हए सीसीटीवी के मॉननटर पर दे खा र्क राधेश्यामिी 65


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ररसेप्शन के पास खड़े थे . केप्टन कवपल ने ररसेप्शन को िोन पर बोला – इन्हें अन्दर भेि दो. राधेशयाम िी भी अन्दर आ चके थे. केप्टन कवपल ने रॉबटट को इशारा र्कया और वो सबको कािंफ्रेंस रम की और ले गया . थोड़ी दे र

केप्टन कवपल भी कािंफ्रेंस रम की और

बढ़ गया िहाुँ पहले से ही इिंस्पेक्टर यादव , सब इिंस्पेक्टर रावल , मत ृ क शमाट िी के पत्र अलमल और अननल तथा

शमाट िी के पिौसी

राधेशयाम िी बैठे थे. उनके बाद रॉबटट और उसके साथ किंप्यूटर ऑपरे टर लिकी िो सवटर पर बैठी थे. कैप्टन कवपल ने आकर अपनी सीट सम्हाली और बोला- अब तक इस मामले में िो कछ हआ है वो सब आपको मालम है ही . अब इस मामले में हमें अिंनतम हल ननकालने की शरुआत करते हैं और इसमें अहम ् भूलमका होगी अलमत िी आपकी और अननल िी की और इसके साथ ही राधेश्याम िी की... अलमत और अननल अपनी सीट पर सीधे होकर बैठ गए लेर्कन राधेश्याम िी के चेहरे पर धचिंता की लकीरें बढ़ गई. केप्टन कवपल बोला- आप अपने सामने लगे मोननटर पर अब ध्यान से दे खें . सब इिंस्पेक्टर

रावल आपको कछ िोटोि के बारे में

बताएगा और आप दे खकर बताइयेगा र्क आप इस आदमी को दे खा है ? कभी भी कहीिं भी .... या इससे लमलते िलते आदमी को .... केप्टन कवपल ने रावल को इशारा र्कया और रावल कम्पटर ऑपरे टर की पास वाली सीट पर कर उसे ननदे श दे ने लगा. अब उसके किंप्यट ू र पर आदटट स्ट द्वारा बनाई मल ू तस्वीर थी. केप्टन कवपल बड़े ध्यान से उन तीनों के चेहरे पर आये भाव दे ख रहा था .. पहली तस्वीर पर उनकी कोई प्रनतिया नहीिं आई ... तो केप्टन कवपल ने इशारा र्कया और उसने दस ू री तस्वीर लगवा दी .. इसमें उस तस्वीर की ढाढ़ी हटा 66


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दी गई थी ... अलमत ने बोला

ने यह तो लगभग वही तस्वीर है ...

तस्वीरें आगे बढ़ती गई ........और वे तस्वीरें दे खते रहे . राधेश्याम िी भी तस्वीरें दे ख रहे थे और चेहरे पर अब धचिंता के भाव कम होते िा रहे थे. वैसे भी वे बिगट थे और ऐसा लगता था र्क धचिंता करना उनकी आदत सी हो गई थी िब र्क उनका बेटा रोहन उन्हें अच्छी तरह से समझा चका था र्क उसका मत ृ क शमाटिी से बड़ा झगिा नहीिं था और उन्हें यह भी बता चका था उसके बाद तो वह एक बार पेंशन िे पर शमाट िी को बैंक लेकर भी गया था और शमाट िी को उसी ददन वह अपने घर लाकर चाय भी वपला चका था. उसकी मम्मी ने भी यही तस्दीक र्कया था पर वे अभी भी आशिंर्कत थे लेर्कन यह तस्वीर तो कहीिं भी उनके बेटे के आस पास भी नहीिं थी . उन्होंने अपनी िेब से रुमाल ननकाला और माथे पर आया पसीना पौंछ ललया. सबके कम्पटर स्िीन पर तस्वीरें आगे बढ़ती िा रही थी और एक तस्वीर आते ही मत ृ क शमाट िी के बड़े पत्र अलमत ने अननल की और दे खा और वही केप्टन कवपल ने कहा बस ! अब रोक दो रावल. रावल आश्चयटचर्कत होकर अपनी सीट पर आ गया उसने दे खा मॉननटर पर दे खा र्क िोटे में एक नोिवान बबना ढाढ़ी के था उसके गाल पर मस्सा भी नहीिं था और उसने कोई चश्मा भी नहीिं लगा रखा था . केप्टन कवपल ने कहा हाुँ अलमत िी ! कछ बोललए . इसके पहले ही राधेश्याम िी बोले – अरे ! यह तो उमेश लगता है . शमाट िी का भतीिा िो कई बार उनके पास आता रहता था

....... अलमत ने

भी

कहा – लग तो उमेश िैसा ही है लेर्कन वो तो मिंबई है और अभी पापा की मौत पर लमलने आि आने वाला है .. आि सबह ही मेरी बात इससे हई है . केप्टन कवपल ने कहा – अच्छा ! आि ये कब 67


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आयेगा ? अलमत ने घिी दे खते हए कहा – शायद अब तक घर पहच चका होगा .. अरे ! आि छोटे चाचा भी कह रहे थे र्क .... उसकी बात पूरी हई नहीिं उसके पहले ही केप्टन कवपल ने इिंस्पेक्टर यादव और रावल को इशारा र्कया और वे अलमत से घर का पता लेकर तेिी से बाहर की और बढ़ गया ... तम उसे थाने लेकर ही आना मैं थोड़ी दे र बाद वही​ीँ आ रहा हूुँ .

केप्टन कवपल ने अलमत से कहा – मझे पता है तम्हारे छोटे चाचा क्या कह रहे थे . अलमत ने कहा – क्या सर ! केप्टन कवपल ने कहा – यही र्क उन्होंने एक बहत बड़ी रकम उमेश को उधार दी है और अब वह लौटा नहीिं रहा है . तम्हारे चाचा भी ररटायिट है क्या ? अलमत ने कहा – हाुँ सर ! उनके बेटे भी बाहर रहते हैं. केप्टन कवपल ने कहा – बस ! तम्हारा यह भाई शेयर बाज़ार में इन्वेस्ट करता है ? अननल ने कहा – हाुँ सर ! ये कहता है इसने शेयर माकेट में बड़ा पैसा कमाया है और शायद चाचा का पैसा भी इसने ही माकेट में लगाया है . केप्टन कवपल ने कहा – और तम्हारे पापा का भी . अभी मिंबई से इसकी किं िली ननकलवा लेते हैं . िरा इसका नाम पता एक कागि पर ललखकर दो और हाुँ इसकी कोई िोटो तम्हारे मोबाइल में हो तो दे खो. इसके बाद केप्टन कवपल ने रोबटट को बोला- दे खो ! तम मिंबई लिम्मी को इनकी दी हई डिटे ्स व्हाटस एप्प करो और दे खो िोटो हो तो िोटो भी भेि दो और र्िर मेरी बात कराओ. केप्टन कवपल अब सामने बैठे अलमत और अननल के साथ चाय पी रहा था और रॉबटट अपने मोबाइल पर लगातार स्कैन कर कछ डिटे ्स भेि रहा था . अलमत ने उसको िोटो दे दी थी . रॉबटट ने अपना िोन वहािं रखे एक फ्रेश सिेद नेपकीन से साफ़ करते हए केप्टन 68


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कवपल की और बढ़ाते हए कहा - मास्टर ! लिम्मी है लाइन पर . केप्टन कवपल िोन लेते हए बोला – हे ्लो लिम्मी ! तम्हारे पास 30 लमननट है लसिट ! रॉबटट ने तम्हे डिटे ्स भेिी है इस आदमी के बारे िानकारी ननकलवानी है . मव ू फ़ास्ट ! मेरे पास बबलकल टाइम नहीिं है . लिम्मी ने बोला – ओके बौस . हो िाएगा. डिटे ्स आपके मोबाइल पर आएगी. केप्टन कवपल ने कहा – तम्हारे और मेरे सोसट काम में ले लेना. अलमत और अननल आश्चयट से केप्टन कवपल की और दे ख रहे थे और थोड़ा बहत तो वे समझ चके थे. लेर्कन खन ू ... पैसा तो उमेश खा सकता है या उसके पास ही होगा लेर्कन खून ..... असिंभव !!!!!!! *************

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अगले एक घिंटे में वे सभी इिंस्पेक्टर यादव के थाने में थे . अलमत, अननल, सब इिंस्पेक्टर रावल , रॉबटट और केप्टन कवपल और साथ ही बाहर बैठे थे चाय वाला लड़का और उसका दोस्त .. और वे दोनों आइसिीम खाते हए बातें कर रहे थे. इिंस्पेक्टर यादव ने उन्हें बलाने से पहले ही हवलदार को उनका ध्यान रखने और खखलाने वपलाने को कहा था. इिंस्पेक्टर यादव उमेश के साथ लॉकअप में था .. केप्टन कवपल ने रावल को कहा – इिंस्पेक्टर यादव को बलाओ तो ..उमेश को भी साथ ले आना . इिंस्पेक्टर यादव उमेश के साथ आ गया .. उमेश आते ही अलमत से ललपट गया और रोने लगा बोला – भैया , मैंने कछ नहीिं र्कया! मैं तो अभी आि ही

फ्लाइट से मिंबई से आया हूुँ. ये तो आपको भी पता है

. केप्टन कवपल ने उमेश को अपने पास बबठाया . उसने दे खा इिंस्पेक्टर यादव उसकी अच्छी धलाई कर चका था. लेर्कन यादव मायस ू निर आ रहा था बोला- केप्टन साब ! इसके मोबाइल में आि का फ्लाइट दटर्कट है और कल और परसों

यह अपनी कम्पनी के

ऑर्िस में मीदटिंग में था इसके लमननट्स भी इसने अभी व्हाट्स एप 70


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पर मिंगवा कर ददखाए है . कहीिं हमसे एक और गलती तो नहीिं हो रही है ... केप्टन कवपल ने कहा – यादव ! ये कोई िरायम पेशा मिररम नहीिं है लेर्कन वक्त का मारा है और अब ये ददवाललया हो चका है और परले दिे का बेवकूि है इसललए ये सारी परानी दट्रक्स काम में ले रहा है . अिंिरव्िट से इसने बहत पैसा उठा रखा है .. और तम्हे लिस ऑर्िस में मीदटिंग का यह लि​ि कर रहा है वह ऑर्िस तो वपछले 3 महीने से बिंद है इसके किटदारों ने ताले लगा ददए हैं.अभी मिंबई एअरपोटट पर चेक करवा लो इसके पास लसिट दटर्कट है इसने बोिट ही नहीिं र्कया होगा . ये बहत परानी स्कीमें है और कोई भी पकड़ सकता है . अपने किटदारों के िर से अपने ररश्तेदारों के पैसे लट ू कर काम चला रहा था और उसी में शमाटिी के पैसे भी थे. ये अलमत के एक और चाचा यानी शमाटिी के छोटे भाई से पैसे भी ले चका है . इसने अपनी कमाई की बड़ी ही खबसूरत वपक्चर खीच रखी थी अभी तो और भी लोगों के नाम आयेंगे लिनके पैसे इसने दठकाने लगाये है . इिं स्पेक्टर यादव ने बड़े ही आश्चयट से केप्टन कवपल की और दे खते हए कहा केप्टन साब ! आपको यह सब कैसे मालम ? केप्टन कवपल ने अपना मोबाइल इिंस्पेक्टर यादव के सामने कर ददया . यादव मेरी टीम इसकी परू ी किं िली मिंबई से ननकाल कर मझे भेि चकी है तभी उमेश अपनी सीट से उठा और दरवािे की और भागने लगा .. रोबटट ने उसके पािंव में पािंव

ि​िंसाया र्क वह भागते हए धगरने को हआ र्क इिंस्पेक्टर

यादव ने पता नहीिं उसके पाुँव में क्या र्कया र्क उमेश कराहता

हआ

िमीन पर ही लेट गया ... केप्टन कवपल ने कहा इसे उठाओ और 71


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कसी बैठाओ . इिंस्पेक्टर यादव ने कहा – केप्टन साहब ! अब ये कसी पर बहत ददन बैठ नही पायेगा इसे िमीन पर ही पिा रहने दो. तभी एक रावल आदमी को लेकर अन्दर आया लिसके पास एक बड़ा बेग था और रावल ने उसे आदटट स्ट की बनाई पहली तस्वीर दे दी और वह आदमी अपना बेग खोल कर िमीन पर उमेश के पास बैठ गया और थोड़ी दे र में ही उसने उमेश को ढाढ़ी , मस्सा और काला चश्मा लगा ददया और तब तक रावल छोटू और उसके दोस्त को ले आया और आते ही छोटू के दोस्त ने अपने पैर से चप्पल ननकाली और उमेश के चेहरे के पास ले िाते हए दो चप्पल िमाते हए धच्लाया – यही है वो कमीना साब

! इसको छोड़ना मत साब

! इसके चक्कर

में मैं दो रात तक सो नहीिं पाया ... यही हत्यारा है लिसने ववकास भैया को िहर भरी चाय दे ने के ललए मझे दी थी. केप्टन कवपल ने रावल को इशारा र्कया और वो उन दोनों को बाहर ले गया . वो लड़का बाहर िाते -िाते बोला ये कमीना मझे बोला र्क ये उन भैया का पापा है . साला चोर , हत्यारा .....कमीना ....इसे छोड़ना नहीिं साब !!!! अब केप्टन कवपल बोला – उमेश ! अब तम ि्दी -ि्दी सब उगल दो . इिंस्पेक्टर यादव तो वदी से बिंधे हैं लेर्कन मैं नहीिं .. अब यदद तम 5 लमननट में शर नहीिं हए तो मैं अपना काम शर कर दिं ग ू ा.... रोबटट इसको एक ट्रे लर ददखा दो .... रोबटट का एक घिंस ू ा लहराया और उमेश के मिंह ू से टकराया ...... उमेश ने अपना हाथ मुँह ू के पास लगाया तो उसके दो टूटे हए दािंत उसके हाथ में आ गए ... और खून लगातार मूुँह से ननकल रहा था.. केप्टन कवपल ने कहा- दे खो अभी

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तो ये शर हआ है अब यदद 5 लमननट बीत गए तो र्िर तम सोच लो और मेरा रोल तो 10 लमननट बाद शर होगा ... सोच लो.. उमेश अपनी हालत दे ख बरी तरह काुँप गया. वो बोला – मैंने िानबूझ कर खन ू नहीिं र्कया ... मैं तो ताऊिी से से कछ पैसे और लेने आया था लेर्कन पता नहीिं क्यों वे अपने पैसे वावपस दे ने के पीछे पि गए ... ताऊिी वैसे भी गस्से वाले इिंसान थे और एक बार बेकाबू होने पर उन्हें समझाना मलश्कल होता था ... और यहाुँ तो पैसे का मामला था ... वे ररटायिट थे और मैंने एक बार उसने िण्ि पर लमलने वाले बैंक ब्याि और शेयर माकेट की कमाई के अिंतर की एक बहत बड़ी वपक्चर खीिंच चका था ... और यह भी समझा चका था र्क पैसे चुँर्ू क मेरे नाम से इन्वेस्ट होंगें तभी ज्यादा िायदा होगा और मैं भी अलग –अलग अकाउिं ट से इन्वेस्ट करिंगा इसललए केश ही चादहए .. बैंक में नोकरी करके ररटायर होते हए भी वे इस लालच में आ गए मैंने कोई रसीद भी उनको नहीिं दी और उन्होंने भी कोई रसीद नहीिं मािंगी. ररश्तेदारी में कौनसी रसीद !!!

लेर्कन उन्होंने अपनी िायरी में उस

ददन ये सब ललख ददया था . ददन था 12 िरवरी ... बाकी तो आप इन्वेसटीगेट आप कर ही चके होगें . ..... केप्टन कवपल ने कहा – तम्हारा इिंतिाम तो पक्का है .. उसी िायरी के 13 िरवरी वाले पेि पर तम्हारी उुँ गललयों के ननशान है .. यादव चेक करवा लेना. इसको पता नहीिं लगा र्क 12 िरवरी का पेि ननकलते हए 13 फ़रवरी वाले पेि पर इसके अुँगललयों के ननशान लग गए हैं वरना ये 13 िरवरी वाला पेि भी ले िाता ... अलमत की आुँखों में आिंसू थे और उसने भराटए गले से कहा – उमेश 25 लाख कोई बड़ी रकम नहीिं थी . यार, तम मझसे ले लेते ... पापा 73


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मझे बताते तो ... तमने उन्हें मार क्यों ददया ... बचपन में तो तम कई साल उनके पास रहे हो .. और वो तो हमेशा तम्हारी सिलता की कहानी हम सबको सनाते थे...... उमेश सबकने लगा और बोला- भैया ! मैं कौनसा उन्हें मारना चाहता था ... पर ताऊिी तो मझपर ही चढ़ दौड़े ... और उनका गस्सा .... िैसा मैंने बचपन में दे खा था वैसा ही था उस समय

.. ररटायिट

आदमी का िण्ि चला िाए तो उस पर क्या बीतती है यह मझे उसी वक्त समाझ आया

... और उनको मेरी बातों से शक हो गया था

र्क उनके पैसे पर कमाई दे ने की बात तो और मैं तो उनके मल ू पैसे ही नहीिं लौटा पाऊिंगा. बस ! वही​ीँ नाररयल काटने का चाक़ू रखा था ... उन्होंने मझे िराने के ललए उठाया पर पता नहीिं कब चाक़ू मेरे हाथ आ गया और

मैंने वह चाक़ू उनके सीने में उतार ददया ...

केप्टन कवपल ने चेक र्कया – रॉबटट उसका सारा बयान ररकॉिट कर रहा था और यही काम रावल भी कर रहा था. केप्टन के कहा – भाई तम में से कोई एक ही ररकॉिट कर लो... र्कतने उत्साही लोग हो तम यार ! तो दोनों झेंप गए . केप्टन कवपल ने कहा – हाुँ अब आगे उमेश. उमेश िमीन पर सीधा होकर बैठने की कोलशश करने लगा तो इिंस्पेक्टर यादव ने कहा उमेश यह कोलशश मत करो .. अब बहत ददन तक तम नहीिं बैठ पाओगे. चलो आगे शरु हो िाओ .... तम्हे मेरी ताकत का अिंदािा होता तो तम मेरे थाने में यह हरकत नहीिं करते ... निरत उसकी आखों से टपक रही थी ... उमेश ने कहा- सर ! पानी . रावल ने हवलदार को आवाि दी लेर्कन इिंस्पेक्टर यादव ने हवलदार को रोकते हए कहा – उमेश ! ि्दी से ि्दी बताओ आगे क्या हआ 74


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. पानी बाद में ... इिंस्पेक्टर यादव इस केस में अपनी िो छीछालेदर हई थी वो भूला नहीिं था बोला – एक दो घिंटे पानी नहीिं पीओगे तो मर नहीिं िाओगे ..... तमने र्कसी को मारा ही नहीिं उसके बाद ववकास को भी मारने की कोलशश की है वो भी मेरे थाने में .. बहत बदनामी हई है मेरी और डिपाटट मेंट की...चलो वरना मैं शर हो िाता हूुँ ..

उमेश बोला – सर ! मझे पता था र्क ताऊिी अब मर चके थे...मैंने उसके बाद उनकी अलमारी से िायरी ननकाली और मझे पैसे दे ने का एकमात्र सबत ू उस िायरी का 12 िरवरी का पेि ननकाल ललया और िैसे ही मैं बाहर िाने के ललए दरवािे तक आया र्क िोर बेल

बि

गई और मैंने दे खा दरवािा तो बिंद था ही नहीिं इसललए मैं िैसे ही दरवािा खला मैं दरवािे के पीछे छप गया और िैसे ही वह अभागा लड़का अन्दर आया मैं बाहर ननकल गया और कछ पल रुका और र्िर मेरे ददमाग में एक शैतानी आईडिया आया. अपना अपराध र्कसी और के सर पर थोपने का

और मैंने बाहर से गेट बिंद कर ददया...

और वो लड़का अन्दर ि​िंस गया . इिंस्पेक्टर यादव ने कहा- लेर्कन र्िर तम ननकले कैसे ? सीसीटीवी कैमरे में तो तम आये ही नहीिं. उमेश ने कहा – ये सब सिंयोग है . मैं एक ददन पहले आया था और उसददन ताऊिी भी सबह घमने नहीिं गए थे क्यों र्क मैं आते ही उन्हें और पैसे दे ने के ललए पटा रहा था और वे अपने पैसे वावपस मािंग रहे थे और ये बहस रात दे र तक और सबह दोनों समय होती रही .... उस ददन उनकी काम वाली नहीिं आई थी इसललए उन्होंने खाना भी बाहर से आिटर र्कया था .. तो मैं उस

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A Murder Mystery by Sudhir Halakhandi

ददन तो आया ही नहीिं था इसललए उस ददन के कैमरे में तो कैसे आता . केप्टन कवपल ने पूछा – र्िर तम ननकले कैसे ? उमेश ने कहा – मैं कािी बार ताऊिी के पास आता रहा हूुँ इसललए मैं उस ददन उस लड़के को फ्लैट में बिंद कर सीदढ़यों से छत पर चला गया था और

उससे ि​िती हई दस ू री बबल्ि​िंग की छत पर िाकर बाहर ननकल गया. छत पर तो कैमरा है भी नहीिं और ताऊिी के फ्लैट के बाहर भी कोई कैमरा नहीिं है . अब इिंस्पेक्टर यादव ने कहा- ववकास के मिटर की कोलशश !!!!!!!!! उमेश ने कहा – मझे धीरे -धीरे यह ववशवास हो गया र्क बाहर से गेट बिंद करना मेरी एक भूल थी क्यों र्क इस लड़के के पक्ष में यह बात इस तरह िा सकती है र्क वह अन्दर गया और दरवािा हत्यारे ने बिंद र्कया हो ... इस कारण से पललस इन्क्वायरी दस ू री और भी िा सकती है और र्िर कभी तो मैं पकड़ा ही िाऊुँगा तो मेरे ललए सबसे अच्छा यह था

र्क यदद वह लड़का मर िाए तो केस ही बिंद

हो िाएगा और इसे इसकी आत्महत्या मान ललया िाएगा लेर्कन अब..... अलमत ने कहा – अब क्या ? कछ नहीिं अब तझे िािंसी होगी और इसमें कोई कमी रही तो भी मैं तझे बचने नहीिं दिं ग ू ा चाहे मझे र्कतना भी खचट क्यों नहीिं करना पड़े.. कमीने तन ू े हमें अनाथ कर ददया. केप्टन कवपल अब थाने से बाहर की और िा रहे थे .... और इिंस्पेक्टर यादव और सब इिंस्पेक्टर रावल उसे एक िोरदार से्यूट र्कया . अलमत और अननल ने कहा – धन्यवाद कवपल सर. हम लमलते हैं आपसे . इस हत्यारे को अब िािंसी से कम नहीिं हो यही 76


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हमारे पापा को सच्ची श्रध्दान्िली होगी और ये काम अब आपको करना है और उन्होंने बड़े ही भावक अिंदाि में हाथ िोड़ ददए. **************

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अगले ददन केप्टन कवपल अपने गािेन में बैठे था उसका मोननिंग वॉक और वलिटश का कायटिम सिंपन्न हो चका था और थोड़ा ररलैक्स था . इस समय उसके साथ में सशािंत और उसकी मम्मी शाललनी भी बैठे थे . वे सब चाय पीते हए अलग-अलग

अखबार पढ़ रहे थे लिसमें

पूरी घटना का वववरण था और पललस अधधकारीयों की भरपरू तारीफ़ की गई थी . केप्टन कवपल का कत्ता ड्रेगन वहीिं इधर से उधर भाग रहा था तभी वह दरवािे की और दे खकर भौकने लगा ... सबने दे खा दरवािे पर ववकास था अपने मम्मी पापा के साथ अन्दर आ रहा था और वह कािी कमिोर लग रहा था

. सशािंत भागते हए गया और

ववकास को गले लगा ललया . वे सभी वहािं लगी कलसटयों पर बैठ गए . ववकास की मम्मी अननतािी कछ बोलना चाहती थी लेर्कन उनकी आवाि भराट गई.. शाललनीिी उन्हें गले लगाया और अन्दर की और ले गई . सशािंत ववकास के साथ अपने कमरे में चला गया . अब रह गए ववकास के पापा रमेश िी और केप्टन कवपल !!!!!

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रमेश िी ने िब में हाथ िाला और एक ललिािा केप्टन कवपल की और बढ़ाया .. केप्टन कवपल ने खोल कर दे खा तो एक चेक था ... रकम 6 अिंकों में थी और नीचे रमेश िी के दस्तखत थे. रमेश िी कछ कहने की कोलशश की लेर्कन उनकी आुँखों में आसिंू आ गए ... वो बड़ी मलश्कल से बोले – ववकास मेरा इकलौता लड़का है ..... केप्टन कवपल ने रमेश िी के किंधे पर हाथ रखकर कहा – ववकास मेरा भी इकलौता भतीिा है भाई साब

.. मेरे इकलौते बेटे का एकमात्र

दोस्त... मेरा भी कोई हक़ है उसपर .. कहते हए उसने रमेश िी के किंधे पर हाथ हटाया और वह ललिािा रमेश िी की िेब में वावपस रख ददया .. तब तक शाललनी िी उन दोनों के ललए चाय ले आई थी. रमेश िी ने कहा – केप्टन साब ! आपका बड़प्पन है ये तो....... वैसे आपकी दया से मेरे ललए यह रकम कोई बोझ नहीिं होगी ... आपका इतना बड़ा सेट अप है .. इतने खचे हैं और इस केस में आपने इतनी मेहनत की है .. र्िर कैसे काम चलेगा. केप्टन कवपल हिं स ददया और अपनी टे बल पर पिा एक ललिािा रमेश िी की और बढ़ा ददया और बोला अभी सबह -सबह कोई दे कर गया है . रमेश िी ने ललिािा खोल कर दे खा ... उसमें 10-10 लाख के दो चेक थे लिन पर मत ृ क शमाट िी के पत्र अलमत

और अननल के

दस्तखत थे ... और एक धन्यवाद पत्र था. रमेश िी आश्चयट से मस्करा ददए और उन्होंने चाय का कप उठाते हए कहा अनमोल है आपका काम ... इसका कोई मोल नहीिं है केप्टन साब ! तभी दरवािे पर इिंस्पेक्टर यादव और एक गठीले बदन वाले बिगट निर आये .... केप्टन कवपल ि्दी से उठा और लगभग दौड़ते हए दरवािे की और गया ... और वो उन बिगट के चरणों में झक गया 79


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और तब तक झका रहा िब तक र्क उन बिगट ने उसे उठा कर गले नहीिं लगा ललया ... वो बड़े यादव साब थे.... दे व प्रकाश यादव ..इिंस्पेक्टर यादव के वपतािी .. रमेश िी और इिंस्पेक्टर यादव आश्चयट से दोनों र्क और दे ख रहे थे..... केप्टन कवपल उन सभी को गािेन की और ले िा रहा था. गािेन में कसी पर बैठते हए केप्टन कवपल ने कहा – सर ! आप क्यों आये .. मझे कहला दे ते मैं खद हालिर हो िाता .. बहत किट है आपका मझपर.. कभी तो थोड़ा बहत उतारने का मौक़ा दें . बड़े यादव साब ने कहा – बेटा , इस बार तो तमने सारा किट उतार ददया और अब मैं तम्हारा किटदार हो गया हूुँ ........ समाप्त

आशा है आपको यह Murder Mystery पसंद आई होगी. आगे फिर कभी हम दे खेंगे फक क्या ररश्ता था केप्टन कपपल का इंस्पेक्टर यादव के पपता

से ... केप्टन कपपल सीररज के एक और नावेल में ... शीघ्र ही .... One More Murder Mystery by Sudhir Halakhandi... इससे पहले कल

आपको ममलेगी इस नावेल की एक पूरी कॉपी एक साथ ताफक आप फिर

से पूरा पढ़ सकें .... और उसके बाद एक सप्ताह में इसका English version ... इन्तजार कीजजये और कैसा लगा आपको यह सब पढ़कर

अपनी प्रततफिया भेजे Sudhirhalakhandi@gmail.com पर .. बस अभी के मलए पवदा ... इस नोवेल को पढ़ें .. अच्छा लगे तो अपने दोस्तों को िॉरवडड करें और अपने ग्रुप्स पर लगाएं .... और अपनी राय भेजें .

सधीर हालाखिंिी

Sudhirhalakhandi@gmail.com

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