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जीएसटी में गिरफ्तारी के प्रावधान - सुधीर हालाखंडी

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जीएसटी के तहत गिरफ्तारी के प्रावधान धारा 69 - सध ु ीर हालाखंडी किस किसिो किया जा सिता है गिरफ्तार और िब !!!!!!!!! जीएसटी विभाि ने हाल ही में एि ररफंड िे मामले में िुरुग्राम िे दो सी.ए. प्रोफेशनल्स िो गिरफ्तार किया है जो इस समय प्रोफेशनल

सकि​िल्स में चचाि और वि​िाद िा एि बहुत बड़ा मद् ु दा बना हुआ है और इस तरह से इस समय जीएसटी िानून िे तहत गिरफ्तारी िे प्रािधान एि बहुत ही अगधि चचाि िा विषय बन चि ु े हैं और विशेष तौर पर इस समय जो प्रोफेशनल्स िी गिरफ्तारी हुई है और जजसिा परू े भारत में प्रोफेशनल्स द्िारा लिातारि विरोध किया जा रहा है

इससे जीएसटी में गिरफ्तारी िे प्रािधान कफर से एि बार बहुत ही बड़ा और संिेदनशील मुद्दा बन िया है . लेकिन यह विषय इतनी अगधि चचाि में आ जाएिा यह िोई आश्चयि िी बात नहीं हैं और

यह पहली बार भी नहीं हुआ है जब कि इस प्रािधान िो ही शंिा िी नजर से दे खा िया हो . जजस समय जीएसटी भारत में लिाया िया था उस समय भी एि सिाल सबसे अगधि चचाि िा विषय था िह था क्या जीएसटी में किसी व्यजक्त गिरफ्तारी भी हो सिती है और क्या जजस 1


व्यजक्त ने िर िी चोरी िी है या िलत इनपुट ललया है या िलत

इनपुट िे िारण ररफंड ललया है उस व्यजक्त िे अलािा भी िोई इस प्रािधान िे तहत गिरफ्तार हो सिता है !!!!!!!!

क्या जीएसटी िानून बंनने िे बाद गिरफ्तारी िे इस प्रािधान िे दायरे

िो क्या और भी बढाया िया है जजससे यह प्रािधान और भी वि​िाददत हो िया है .

यहा​ाँ हम िुछ सिाल प्रािधान िो लेिर इस लेख से उठें िे जजनिा जिाब भी भविष्य िे िभि में छुपा है .

इसिे अलािा एि बड़ा सिाल यह भी है कि जीएसटी िानून अपने आप में ही एि उलझा हुआ िानून है और इसिे प्रािधान जो स्ियं ही स्पष्ट नहीं है उसमें क्या किसी राजस्ि अगधिारी िो किसी डीलर , प्रोफेशनल या किसी भी व्यजक्त िो गिरफ्तार किये जाने से अगधिार ददए जा सिते हैं !!!!!!!!!!

आइये इस प्रािधान िा एि विस्तत ृ अध्ययन िरें ............

सध ु ीर हालाखंडी Sudhirhalakhandi@gmail.com

आइये दे खें कि क्या जीएसटी िानन ू िे तहत जीएसटी अगधिाररयों िो किसी व्यजक्त िो गिरफ्तार िरने िे अगधिार भी है ? यदद हा​ाँ तो किन पररजस्तगथयों

में किसी एि व्यजक्त िो जीएसटी अगधिाररयों द्िारा गिरफ्तार किया जा सिता है और क्या जीएसटी िानन ू िी किसी भी प्रकिया िा पालन नहीं किये जाने पर 2


ही किसी डीलर अथिा व्यजक्त िो जीएसटी अगधिारी गिरफ्तार िर सिते हैं या िेिल िर िी चोरी िरने पर ही गिरफ्तारी हो सिती है ... यहा​ाँ आप मान िर चले कि िर िी चोरी िे दायरे में िलत तरीिे से इनपुट लेना और इसिे आधार पर ररफंड लेना भी शालमल है और यदद िर िी चोरी िे आरोप पर भी गिरफ्तारी हो सिती है तो कफर उस रालश िी सीमा क्या होिी जजस रालश िी चोरी िे आरोप में किसी व्यजक्त िो गिरफ्तार किया जा सिेिा ? इसिे अततररक्त क्या िर िी चोरी िरने िाले िे अततररक्त भी किसी अन्य व्यजक्त िो भी इन प्रािधानों िे तहत गिरफ्तार किया जा सिता है ? क्या किसी व्यजक्त िी िोई लापरिाही या िलती भी इतनी महत्िपूणि हो सिती है कि उसे इस प्रािधान िे तहत गिरफ्तार किया जा सिता है .. आइये सबसे पहले एि चचाि िरें कि क्या इन प्रािधानों िे तहत उस व्यजक्त जजसने यह अपराध किया है या जजस पर ऐसा आरोप है िे अततररक्त भी किसी और व्यजक्त िो भी इन प्रािधानों िे तहत गिरफ्तार किया जा सिता है क्यों इस समय यही सबसे बड़े वि​िाद और चचाि िा विषय यही है . मल ू िानन ू में गिरफ्तारी िा अगधिार लसफि डीलर या उस व्यजक्त िे ललए ही था जजस पर िर िी चोरी आरोप है लेकिन बाद में वित्त विधेयि 2020 द्िारा 01-01-2021 इसिा दायरा बढ़ा ददया िया आइये दे खें ये मसला क्या है और किस तरह िानन ू में संशोधन किया िया है :3


प्रारम्भ में

धारा 132 (1) िे प्रारजम्भि शब्द तनम्नप्रिार से थे :-

“Whoever commits any of the following offences” अथाित इस समय ति यह धारा िेिल उस व्यजक्त ति ही सीलमत थी जो इस तरह िे अपराध िरता है लेकिन बाद में वित्त विधेयि 2020 िे जररये ददनांि 1-1-2021 से इसे तनम्नप्रिार से िर ददया है :“Whoever commits,

or causes to commit and retain

the

benefits arising out of , any of the following offences namely” अब जो इस पररितिन िे द्िारा जो दायरा बढाया िया है िही बढ़ा हुआ दायरा इस प्रािधान िो और भी अगधि वि​िाददत भी बनाता है क्यों “िोई अपराध िरिाए और उससे होने िाले फायदों िो रखेिा” क्यों कि “अपराध िरिाये ” में क्या – क्या िायि आयेंिे और उसिे फायदे कितने और किस तरह अपने पास रखेिा तब उसे गिरफ्तार किया जा सिेिा इसी सीमा िो किस तरह से तय किया जाएिा और ऐसा िरने में जजस वि​िेि िा इस्तेमाल किया जाएिा उसमें िोई िलती हो िई तो कफर होने िाली घटनाएं ना लसफि दभ ु ािग्यपूणि होिीं बजल्ि परे शानी िा िारण भी बन सिती है . आइये भारत सरिार िे बजट सादहत्य से इस प्रािधान में जो पररितिन हुए हैं उनिा दहन्दी अनुिाद इस प्रिार है :4


“िोई तनम्नललखखत अपराधों में से किसी अपराध िो िरे िा या अपराध िरिाएिा और उससे उद्भूत फायदों िा प्रततधारण िरे िा” यहा​ाँ नए शब्द जो जोड़े िए है िे हैं “ अपराध िरिाये

और उससे उद्भत ू

फायदों िा प्रततधारण िरे िा” इसिी यदद हम अंिरे जी दे खें तो है Causes to commit and retain

the benefits arising out of.....

इस प्रिार इस संशोधन से गिरफ्तारी िे दायरे में आने िाले व्यजक्तयों िी श्रेणी एिं दायरा

और भी बढ़ िई है और अब इस तरह िे अपराध िरने

िे जो व्यजक्त “िारण बनते हैं” अथाित अपराध िरिाते है और उससे उत्पन्न होने िाले फायदों िो रखते है उन्हें भी गिरफ्तार किया जा सिता है . अब इस बढे हुए दायरे िे तहत किन व्यजक्तयों िो ललया जा सिता है या इस दायरे िो िहा​ाँ ति बढ़ाया जा सिता है अथाित उन िारणों िी सीमा क्या है

ये इस वि​िाददत िानन ू में और भी वि​िाद उत्पन्न िरता क्यों कि यहा​ाँ

गिरफ्तारी िे आदे श दे ने िाले अगधिारी िो अपना वि​िेि इस्तेमाल िरना है

और यदद इन िानूनों िा प्रयोि समझदारी से नहीं किया िया तो ये

वि​िाद और भी िंभीर हो जायेंिे . आइये इसे एि एि स्पष्ट उदाहरण िे जररये समझने िा प्रयास िरें :किसी प्रोफेशनल ने किसी क्लाइंट िो यदद फीस लेिर िोई सदटि कफिेट ददया है और उस डीलर पर टै क्स चोरी या िलत ररफंड लेने िा आरोप है 5


तो क्या यह िहा जा सिेिा कि प्रोफेशनल ने उस डीलर से यह अपराध िरिाया और उससे होने िाले फायदे िो अपनी फीस िे रूप में रखा है ? “िानून िी भािना िो दे खें तो ऐसा होना तो नहीं चादहए” लेकिन यह लसफि एि सिाल और उदाहरण है और आपिे ललए एि सोचने िा मद् ु दा भी है कि यदद ऐसा हो जाए या हो िया हो तो ........ यह एि बहुत ही

महत्िपण ू ि और संिेदनशील प्रश्न है

जजसिा जिाब ना

लसफि भविष्य िी घटनाओं में छुपा है बजल्ि आने िाले न्यायालयों िे फैसलों में भी इस सम्बन्ध में माि​िदशिन लमलेिा .

क्या गिरफ्तारी अपराध िा अंततम प्रमाण है !!! गिरफ्तारी किसी अपराध िा अंततम प्रमाण नहीं है यह अपराध साबबत िरने िी राह में मात्र एि प्रकिया है

लेकिन हमारा सामाजजि ढांचा ही

इस तरह िा है कि किसी व्यजक्त िे गिरफ्तार होते ही उसिी इतनी बदमानी और दष्ु प्रचार हो चि ु ा होता है कि यदद बाद में िो आरोप से बरी भी हो जाए तो भी उसिी भरपाई नहीं हो सिती है इसललए यदद ये

प्रािधान िानून में हैं भी तो इनिा प्रयोि बहुत ही सािधानी से किया जाना चादहए कि अभी इनिे दरू ु पयोि िा आरोप ही नहीं लिे.

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भारत िा उध्योि एिं व्यापार प्रारम्भ से ही इन प्रािधानों िा िानन ू िा दहस्सा बनाने पर ही सशंकित था और अब प्रोफेशनल्स भी इन प्रािधानों से अब असंतष्ु ट ही नजर आ रहें है . व्यापार और उद्योि

प्रारम्भ से ही

इन प्रािधानों िे दरू ु पयोि िी शिाओं िो लेिर इसिा विरोध िरते रहें हैं लेकिन कफर भी ये िानन ू िा दहस्सा है तो इनिा अध्धयन होना ही चादहए . आइये दे खें कि क्या है जीएसटी िानून में गिरफ्तारी िी प्रािधान और आम आदमी , डीलर एिं प्रोफेशनल इनसे लिभि किस तरह प्रभावित हो सिते हैं .

िब लािू होंिे जीएसटी में गिरफ्तारी िे प्रािधान जीएसटी में गिरफ्तारी िे प्रािधान जीएसटी िानून िी धारा 69 में ददए िए हैं जजसे हम धारा 132 िे साथ पढें िे तो यह पायेंिे कि यह प्रािधान िेिल विशेष प्रिार िी िर िी चोरी पर ही लािु है और तभी लािू होंिे जब कि िर िी चोरी िी रिम 2 िरोड़ रुपये से अगधि हो तो आप यह मान िर चललए आम िरदाता िा इस प्रािधान से सामान्य तौर पर िोई सम्बन्ध नहीं है क्यों कि 2 िरोड़ िर िी रिम िोई िम रिम नहीं होती है . 7


एि और बात जो इस प्रािधान िे साथ जड ु ी है िह अहम है कि स्थानीय जीएसटी अगधिारीयों िो िरफ्तारी िा अगधिार प्राप्त नहीं है और यह गिरफ्तारी जरूरी है या नहीं है इसिा फैसला लेने िा अगधिार लसफि जीएसटी आयुक्त िो ही है “जजनिे पास किसी िे भी बारे में अपनी राय बनाने िे पयािप्त िारण होने चादहए कि उस व्यजक्त ने िांतछत

अपराध किया है ” और ऐसा फैसला लेने िे

बाद आयुक्त ही किसी अगधिरी िो इस गिरफ्तारी िे ललए अगधिृत िरें िे. आइये इन प्रािधानों िा अध्ययन िरें जो कि जीएसटी िानन ू िी धारा 69 में ददये िये हैं :जो मामले धारा 69 में गिरफ्तारी िे ललए बताये िए हैं िे धारा 132(1) िी उपधारा (a) , (b) , (c) और (d) में उल्लेखखत हुए िर चोरी , िलत इनपुट और ररफंड िे मामले हैं आइये दे खें कि ये क्या मामले हैं जजनमें यदद जीएसटी आयुक्त, यदद उनिे पास ऐसा विश्िास िरने िे िारण है कि व्यजक्त ने तनम्नललखखत अपराध किये हैं या जो इस तरह िे अपराध िा िारण अथाित जजसमे अपने

“इस तरह िा अपराध िरिाया है

भी है

और इससे होने िाले फायदे

पास रखेिा और इनमें िर चोरी/िलत इनपुट िेडडट

िी रिम एि

तनजश्चत सीमा से अगधि है तो िे तो उस व्यजक्त या उस व्यजक्त िो जो इस अपराध िो िरिाता है और इसिे बाद इसिे होने फायदों िो अपने पास रखता है 8

िी गिरफ्तारी िी आदे श दे सिते हैं . सीधे -सीधे जजस व्यजक्त पर


यह आरोप लिे है उसिे साथ इस प्रकिया में सहयोि दे ने िाले पर भी गिरफ्तारी िे प्रािधान लािू होते हैं और यह इस प्रािधान िो और भी वि​िाददत बनाता है . आइये दे खें कि धारा 132 (1) में उल्लेखखत िे अपराध िौनसे है :-

धारा 132 के वे मामले जिनमें िीएसटी आयुक्त धारा 69 के तहत जिरफ्तारी के आदे श दे सकते हैं धारा 132

अपराध िा वि​िरण

िी उपधारा (a).

िर चोरी िे उद्दे श्य से िोई भी व्यजक्त जीएसटी िानूनों िा उल्लंघन िरते हुए बबना बबल जारी किये

किसी भी माल या सेिा िी सप्लाई िरता है . (b)

िोई भी व्यजक्त जीएसटी प्रािधानों िा उल्लंघन िरते

हुए किसी माल या सेिा अथिा दोनों िी सप्लाई किये बबना ही बबल जारी िरता है जजससे िोई िलत इनपट ु ली िई हो या किसी प्रिार िा ररफंड ललया िया हो. 9


(c)

िोई भी बबना माल या सेिा अथिा दोनों िी सप्लाई हुए बबना जारी किये िए ऐसे बबल जजनिा उल्लेख ऊपर (b) में किया िया है िे आधार या िपटपूणि तरीिे से बबना किसी बबल या इनिॉइस िे इनपट ु िेडडट लेता

है . (d)

िोई भी व्यजक्त यदद जीएसटी िर अपने ग्राहि से एित्र िरता है और उसिे जमा िर ने िी तनयत ततथी से तीन महीने ति उसे जमा नहीं िराता है .

उस व्यजक्त जजस पर इस तरह िे आरोप है िे साथ इसमें िे व्यजक्त भी शालमल है जो इस अपराध िे िारण है अथाित “जजन्होंने यह अपराध िरिाया है और उससे होने िाले फायदे िो रखा है ” . अब इस

सहयोि िा प्रिार , मात्र तय नहीं है और उससे लमलने िाले फायदे

िी सीमा तय नहीं है

तो यह इस प्रािधान िे साथ बड़े वि​िाद िा िारण बन

सिता है यदद बहुत ही वि​िेिपूणि तरीिे से इस प्रािधान िा उपयोि नहीं किया जाता है . अब से हम जब व्यजक्त िा जजि िरें िे तो उसमें इस तरह से सहयोि दे ने िाले व्यजक्त िो भी आप शालमल समझ लें .

इन 4 प्रिार िे अपराधों पर जीएसटी आयक् ु त किसी व्यजक्त िी गिरफ्तारी िा फैसला ले सिते हैं यदद िे जरुरी समझे तो लेकिन यह फैसला लेने िे पहले यह भी दे खना होिा कि यह अपराध धारा 132(1) िी उपधारा (i) अथिा (ii) िे तहत 10


दं डनीय हैं और यदद ऐसा नहीं है तो कफर गिरफ्तारी िे आदे श नहीं ददए जा सिते हैं. आइये इस प्रािधान िा आिे और अध्ययन िरते हैं :132(1) िी उपधारा (i) या (ii) िा अध्ययन िरने पर ये पता लिता है कि उपधारा (i) तो 5 िरोड़ से ऊपर िी िर चोरी िो संबोगधत िरती है और उपधारा (ii) 2 िरोड़ से 5 िरोड़ िी िर चोरी िे ललए है यहा​ाँ आप ध्यान रखे कि हम यहा​ाँ गिरफ्तारी िे प्रािधान जो कि धारा 69 में ददए हैं उनिा अध्ययन िर रहें हैं ना कि इन अपराधों पर सजा िे प्रािधानों िा. 2 िरोड से ऊपर िी चोरी पर गिरफ्तारी िा प्रािधान तो है ही लेकिन इससे नीचे िे अपराध भी तय हो जाने पर भी सजा िा प्रािधान तो है ही लेकिन इनमें धारा 69 में ददए िए प्रािधानों िे अनुसार गिरफ्तारी िे आदे श नहीं ददये जा सिते है . इस प्रिार से यह स्पष्ट है कि किन अपराधों िे ललए गिरफ्तारी िे आदे श दे ने िे अगधिारों िा प्रयोि किया जा सिता है लेकिन यह भी ध्यान रखें इन प्रिरणों में टै क्स िी चोरी िी रिम 2 िरोड़ से अगधि होनी चादहए . आइये इस सम्बन्ध में धारा 69 जो कि जीएसटी आयुक्त िे गिरफ्तारी िे अगधिारों िे सम्बन्ध में है िे अन्य प्रािधानों िा अध्ययन िरें :क्र. संख्या 11

प्रावधान


1.

यदद जीएसटी आयक्त िे पास ऐसे िारण है जजनसे उन्हें यह विश्िास होता ही कि एि व्यजक्त

ने धारा 132 िी

उपधारा (a) , (b) , (c) और (d) में उल्लेखखत िर चोरी िा अपराध किया है या िह उसिा एि िारण है अथाित “उसने अपराध िरिाया है और उससे होने िाला फायदा अपने पास रखा है ”

तो जीएसटी आयुक्त ऐसे विलशष्ट मामलों में

जहां िर चोरी िी रिम 2 िरोड़ रूपये से अगधि हो गिफ्तारी िे आदे श दे सिते हैं . अब इस दायरे में ऐसे डीलर िी मदद िरने िाले व्यजक्त जो इस तरह िी चोरी िा िारण बनते हैं उन्हें भी ले ललए िया है . इसी तरह िा अपराध यदद एि बार सजा पाने िे बाद दस ू री बार किये जाते हैं और जजनमें धारा 132 िे तहत “कफर से

सजा हो सिती है ” तो आयक् ु त 2 िरोड़ िी िर चोरी िी

सीमा िो ध्यान में रखे बबना गिरफ्तारी िा आदे श दे सिते हैं. आयुक्त ऐसे हर मामले में गिरफ्तारी िी आदे श दें िे ही ऐसा भी िानन ू में नहीं ललखा है िे गिरफ्तारी िे आदे श दे सिते

हैं और यह जीएसटी आयुक्त िे वि​िेि पर छोड़ा िया है कि िे इस बारे में क्या ऐसा आदे श दे ना चाहते हैं . 2.

यदद जीएसटी आयक् ु त गिरफ्तारी िा आदे श दे ते हैं तो िे

इसिे ललए अगधिारी िो अगधिृत िरे िे. यहा​ाँ ध्यान रखे 12


गिफ्तारी तो अगधिृत अगधिारी िरे िा लेकिन उसे गिरफ्तारी िा फैसला लेने िा अगधिार नहीं है . 3.

गिरफ्तारी िे ललए दो तरह िे मामले होंिे . एि तो िह जजनमें जमानत लमल सिती है और दस ू रे िे जजनमें िैर –

जमानती होंिे . इन दोनों िा वि​िरण इस लेख में आिे ददया जा रहा है . 4.

जजस भी व्यजक्त िो इस िानन ू िे तहत गिरफ्तार किया जाता है उसिे अगधिारों िी रक्षा िा भी प्रबंध इस िानून में है . जजस व्यजक्त िो इस धारा िे तहत गिरफ्तार किया जाता है जहा​ाँ उल्लेखखत अपराध िी श्रेणी िैर जमानती है तो उस डीलर िो गिरफ्तारी िे िारण बताने होंिे और और गिरफ्तारी िे 24 घंटे िे अन्दर मजजस्रे ट िे सामने प्रस्तत ु िरना होिा.

िैर जमानती अपराध िे होंिे जजनमें िर चोरी िा आरोप 5

िरोड़ से अगधि है. 4.

जहां उल्लेखखत अपराध जजसिे ललए गिरफ्तारी िी िई है जमानती है अथाित िर चोरी िी आरोवपत रिम 5 िरोड़ रूपये से िम है िहां डीलर िो जमानत दे दी जाएिी और यदद जमानत में िोई व्यिधान आता हैं तो उसे मजजस्रे ट िो सुपुदि िरना होिा.

13


5.

जमानती मामलों िे संम्बंध में गिरफ्तार व्यजक्त िो जमानत पर या किसी अन्य तरीिे से छोड़ने िे जीएसटी िे सहायि आयुक्त एिं उपायुक्त िो िही अगधिार प्राप्त हैं जो कि एि पलु लस स्टे शन िे इंचाजि िो इस सम्बन्ध में प्राप्त है .

यहा​ाँ यह ध्यान रखें कि गिरफ्तारी िा आदे श दे ने िे पहले जीएसटी आयुक्त िो यह सतु नजश्चत िरना होिा कि उनिे पास यह विश्िास िरने िे िारण हैं कि उस व्यजक्त ने , ये अपराध जो ऊपर उल्लेखखत हैं, किये हैं जजनिा जजि धारा 132 (1)

(a) , (b), (c) और (d) में है और िर चोरी िी रिम 2 िरोड़ रूपये से अगधि है . डीलर या किसी भी व्यजक्त जजसमें प्रोफेशनल भी शालमल है िी गिरफ्तारी एि बहुत ही संिेदनशील विषय है और इसललए िानून में इस प्रािधान िो बहुत ही सािधानी िे साथ बनाया िया है . यहा​ाँ यह ध्यान रखे कि 5 िरोड़ से ऊपर िी िर चोरी िे अपराध िैर जमानती है और इससे नीचे िे अपराध में जमानत उसी समय लमल सिती है .

जिरफ्तारी कब की िानी चाजहए

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आइये अब यह दे खें कि गिरफ्तारी व्यिहाररि रूप से िब होनी चादहए तो यहा​ाँ यह

विशद् ु ध रूप से आयक् ु त िे वि​िेिाधीन तनणिय पर आधाररत है लेकिन जैसा कि मैंने पहले भी ललखा है गिरफ्तारी और िह भी एि िर िानून िे तहत यह एि बहुत ही संिेदनशील मामला है अत: इन अगधिारों िा प्रयोि बहुत ही सािधानी से किया जाना चादहए । तनणिय लेने िे दौरान सामान्य

रूप से तनम्नललखखत

िारिों िो ध्यान में लेने िे बाद ही शजक्त िा उपयोि किया जाना चादहए: 1. अपराध िी उगचत जांच। 2. फरार होने से व्यजक्त िो रोिने िे ललए 3. सबूतों िे साथ छे डछाड होने िी संभािना िो रोिने िे ललए।

4. ि​िाह या ि​िाहों िो डरा दे ने या प्रभावित िरने से रोिने िे ललए।

पहले ही जैसा कि ललखा िया है कि गिरफ्तारी एि बहुत ही संिेदनशील विषय है

और दस ू रा इसे किसी अगधिारी िे वि​िेि पर छोड़ा िया है , तो

कफर जरुरत यह है िह कितना भी बड़ा अगधिारी क्यों ना हो इस वि​िेिागधिार िा इस्तेमाल िरते हुए यदद सािधानी नहीं बरती िई तो जीएसटी में इससे बड़ा वि​िाद हो ही नहीं सिता . दे खखये किसी अपराध िो िरना या किसी व्यजक्त पर ऐसे अपराध िा आरोप लिना तो एि प्रकिया िा अंि हो सिता है लेकिन िोई व्यजक्त किसी अपराध िा िारण हो या “उसने अपराध िरिाया हो और उसिा फायदा 15


अपने पास रखा हो” यह एि ऐसा प्रश्न है जजसे व्यिहार में लािू िरना बहुत ही मजु श्िल है कि इस सहयोि िी मात्रा कितनी हो , उठाये जाने िाले फायदे िी मात्रा कितनी है जजसिे ललए उस गिरफ्तार भी किया जा सिता है इसिी सीमाएं तय होना भी जरुरी है . क्या किसी व्यजक्त िे एि िायि िो जो पूरी िर चोरी िा पूरा आधार नहीं है या आधार हो ही नहीं सिता तब भी उसे गिरफ्तार किया जा सिता है !!!!!! क्या िर चोरी िरने िाले व्यजक्त िो पिड़ने िे ललए भी ऐसे व्यजक्त िो गिरफ्तार किया जा सिता है इन सभी प्रश्नों िे जिाब हमें तब लमलेंिे जब यह वि​िाद आिे माननीय न्यायालयों िे समक्ष जाएिा . ये िई विचारणीय प्रश्न हैं जो इस वि​िाद से जड़ ु े हैं . आशा है आपिो जीएसटी िे तहत गिरफ्तारी िे प्रािधान जजन्हें यहा​ाँ विस्तार से समझाया िया है समझ आ िए होंिे . जीएसटी िे इस गिरफ्तारी िी प्रािधान िे साथ और इसमें बाद में किये िए संशोधन िी अभी और भी व्याख्या होना जरुरी है और इसमें स्पष्टीिरण िे ललए सरिार िो भी पहल िरनी चादहए . जीएसटी िानून िो समझने िे हमारे प्रयास जारी रहें िे .... - सुधीर हालाखंडी 16


Sudhirhalakhandi@gmail.com *

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जीएसटी में गिरफ्तारी के प्रावधान - सुधीर हालाखंडी by CA Sudhir Halakhandi - Issuu