जीएसटी
सध ु ीर हालाखंडी की कलम से इस माह
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जीएसटी को भारत में लगे इस समय 5 वर्ष होने को आये हैं तो आइये यह एक समय है कक दे खें कक इस अवधि में जीएसटी उन लक्ष्यों को प्राप्त कर सका जजनकी उम्मीद सभी पक्षों ने उस वक्त की थी जजस समय जीएसटी भारत में लागू ककया गया था . इन पक्षों में सरकार , व्यापार
एवं उद्योग एवं जीएसटी से जुड़े
प्रोफेशनल्स सभी सजम्मललत हैं.
आइये दे खें कहााँ तक ये लक्ष्य प्राप्त हुए हैं और यदद कमी
रही तो कफर कहााँ कमी रही और अब क्या उपाय हो सकते हैं कक जीएसटी के वे सभी लक्ष्य प्राप्त हो सके जजसके ललए यह कर भारत वर्ष में लागू ककया गया था.
जीएसटी के जो घोषर्त लक्ष्य
थे उनमें राजस्व में वजृ दद ,
करों का सरलीकरण , इनपट ु क्रेडिट की ननबाषि गनत और कर के आिार को बढ़ाना मुख्य थे . इसमें से कर के आिार को बढ़ाना और कर के राजस्व में वद् ृ धि ये दो ऐसे लक्ष है जजनसे सरकार संतुष्ट हो या नहीं लेककन ननरं तर इनमें वद् ृ धि तो हो ही रही है और यह लक्ष्य प्राजप्त की और एक सकारात्मक कदम तो है ही.
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इसके अनतररक्त जो दो और लक्ष्य थे जजनका जजक्र मैंने ऊपर ककया है
उनमें प्रमुख है करों का सरलीकरण तो आप मान
कर चललए कक इस मद् ु दे पर सरकार के प्रारजम्भक प्रयास सफल नहीं हुए पर तब भी प्रयास तो हो ही रहे थी
तो
लेककन इस
समय लगता है कक अब सरलीकरण के प्रयास ही बंद कर ददए गए है और जीएसटी एक मुजककल से मुजककल कर बनता जा रहा है . स्वचाललत कर प्रणाली जजसमें सभी कुछ ऑनलाइन होना था और अधिकांश कर ननिाषरण स्वत: कर ननिाषरण प्राणाली के तहत होने थे वहां जजस संख्या में नोदटस जारी हुए हैं उनसे तो यह लगता है
इस कर प्रणाली के संचलान में प्रारम्भ में जो गलनतयां इसके तंत्र द्वारा की गई थी उसकी खालमयाजा भी अब कर दाताओं को ही भुगतना पड़ रहा है .
यदद हमारे नीनत ननमाषताओं को यह समझा ददया है तो कक करों की प्रकक्रया को सख्त बनाने से राजस्व में वद् ृ धि होती है तो यह सलाह थोड़े समय तो काम करे गी लेककन दीघष काल में यह कोई अच्छी सलाह नहीं है . सरकार ने कोषवि के दौरान एक ननजकचत अवधि का ब्याज माफ़ कर ददया था लेककन इस समय उस अवधि के ब्याज के भुगतान के नोदटस भी आ रहें हैं जजनके जवाब में िीलसष को यह ललखना है कक यह ब्याज सरकार द्वारा माफ़ कर ददया गया था . अब अगर ऐसा हो रहा है तो कफर आप मान लीजजये कक जीएसटी ककस तरफ जा रहा है ? जीएसटी में मख् ु य ररटनष GSTR-3B में गलती होने 2
पर संशोिन का कोई प्राविान नहीं था इसललए फकष तो आना ही था लेककन यह समस्या तो सरकारी तंत्र द्वारा ही खिी की गई है . जीएसटी में जारी नोदटस एक बड़ी संख्या में आ रहें हैं तो कफर हमें मान लेना चादहए कक इस पूरे लसस्टम में एक बड़े पररवतषन की जरुरत है अन्यथा व्यापार कम होगा और बहुत बड़ा समय जीएसटी नोदटस के जवाब और प्रकक्रयाओं के पालन में ननकल जाएगा .
इनपुट क्रेडिट जीएसटी में ननबाषि नहीं है और िीरे – िीरे यह स्पष्ट होता जा रहा है कक इसे लेकर प्राविान सख्त से सख्त होते जा रहें है और इस तरह से आप स्वयं यां मान लेंगे कक यह जीएसटी का कभी उद्दे कय था ही नहीं कक जीएसटी इनपट ु को ननबाषि बनाना है . षवक्रेता के सभी दोर्ों के ललए क्रेता को जजम्मेदार ठहरा कर उसकी इनपट ु क्रेडिट रोक लेना ही अब इस प्रकक्रया का पूरा उद्दे कय लगता है लेककन यह सब जीएसटी को लम्बे समय तक सफल होने में सबसे बड़ी बािा बनेगा. इनपट ु क्रेडिट को राकने की जगह ककस तरह षवक्रेता को अपने जमा कराने और ररटनष भरने के ललए मजबरू ककया जाए सरकार को इसके उपाय करने होंगे.
जीएसटी का नेटवकष प्रारम्भ से ही एक परे शानी का कारण था लेककन बीच – बीच में यह अच्छे काम का संकेत दे ता है लेककन कफर जस्तधथ बबगड़ने लगती है . षपछले माह ही कफर यह नेटवकष
GSTR-2B समय पर जेनरे ट नहीं कर पाया और कफर स्वयं ही घोर्णा कर दी कक इस माह करदाता GSTR-2A से काम चला कर 3
ररटनष भर सकते हैं . क्या ककसी कानूनी प्राविान की इस तरह व्याख्या करने का अधिकार इस नेटवकष को है ? यहााँ आप मान कर चललए कक गलनतयां तो होंगी ही लेककन जजसतरह जीएसटी तंत्र की मजबूररयां है उसी तरह करदाता की भी तो अपनी मजबूररयां हो सकती है तो कफर करदाताओं पर इतनी सख्ती क्यों ? इनपुट क्रेडिट के लमस्मेच को दरू करने के ललए क्रेता को समय ददया जाना चादहए और इसके ललए तुरन्त क्रेता की इनपुट क्रेडिट को रोक लेना दीघषकाल में एक गलत कदम ही साबबत होगा.
इसके पहले जब सरकार ने ईंटो पर एक वैकजल्पक कर 3 प्रनतशत लागु ककया था तब भी जीएसटी नेटवकष कई ददनों पूवष सच ू ना होने पर भी GSTR-1 में इसकी व्यवस्था नहीं कर पाया और अंत में एक जग ु ाड़ के जररये इन करदाताओं को GSTR-1 भरने की सलाह दी गई . जीएसटी नेटवकष के प्रयासों में प्रांरम्भ से ही गंभीरता का अभाव रहा है जो कर दाताओं के ललए परे शानी का कारण भी है .
इस माह और भी घटनाएं हुई है जजनमें जीएसटी ररफंि को
लेकर प्रोफेशनल्स की धगरफ्तारी का मद् ु दा भी बहुत ही षववादास्पद
रहा और परू े दे श में प्रोफेशनल्स ने इसका षवरोि ककया . जीएसटी में धगरफ्तारी के प्राविान बहुत ही संवेदनशील प्राविान है और साथ
ही बाद के पररवतषन जजनके अनस ु ार कर की चोरी करने वाले व्यजक्त के अनतररक्त व्यजक्त को धगरफ्तार ककया जा सकता है ने इस 4
प्राविान को और भी षववादास्पद बना ददया है . इस प्राविान की एक बार कफर से व्याख्या करने की जरुरत है क्यों कक यदद इस प्राविान का प्रयोग करते समय षववेक का इस्तेमाल करना होता है और इसमें कहीं भी कोई भी त्रुटी हो तो पररणाम दभ ु ाषग्यपूणष हो सकते हैं . माह मई 2022 का राजस्व एक बार कफर से 1 लाख करोड़ रूपये को पार कर गया है लेककन अप्रैल 2022 के राजस्व से यह कम है लेककन यह कोई हतोत्सादहत होने का कारण नहीं है क्यों कक षपछले अप्रैल 2021 से यह राजस्व बढ़ा हुआ है . अप्रैल 2022 का जीएसटी राजस्व 1.67 लाख करोड़ रूपये था जब कक मई 2022 में यह 1.41 लाख करोड़ रूपये रहा है . मई
2021 का जीएसटी
राजस्व 1.03 लाख करोड़ रूपये था . इस प्रकार से मई 2022 में षपछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले 0.38 लाख करोड़ का राजस्व अधिक प्राप्त हुआ है जो कक उत्साहविषक पररणाम ही लगता है . सरकार
का राजस्व बढ़ रहा है तो कफर सरकार को जीएसटी
सरलीकरण और इनपुट क्रेडिट के ननबाषि होने के भी सकारात्मक प्रयास प्रारम्भ कर दे ने चादहए . जीएसटी तो भारत में रहे गा ही लेककन इसे यदद लम्बे समय तक उपयोगी बनाना है तो कानून ननमाषताओं को कुछ और सकारात्मक कदम तो उठाने ही होंगे. - सुिीर हालाखंिी 5
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