जनता पररवार िकतनी धार?
एक और घरवापसी
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‘गाइड’ के पचास साल
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वर्ष8 अंक 9
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1-15 मई 2015
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~ 25
आिखर ज़मीन
िकसकी?
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वर्ष 8 अंक 9 n 1 से 15 मई 2015 स्वामी, मुद्क एवं प््काशक क््मता सिंह संपादक अंबरीश कुमार संपादकीय सलाहकार मंगलेश डबराल फोटो संपादक पवन कुमार संपादकीय सहयोगी िसवता वम्ाा अंजना सिंह अजय कुमार पांडे अंजू दुबे मयंक शुक्ल अिभनय आकाश वववि सलाहकार शुभांशु सिंह माक््ेवटंग एवं विज़नेस कॉमडेज कम्यूिनकेशन प््ा़ िल़ महाप््िंिक एि के सिंह
कला, प््िार एवं िवज््ापन
मीिडया गवन्ार डी-144/सी, थड्ड फ्लोर, मीिडया गवन्डर, हवरनगर, आश््म, िदल्ली-14
आवरण कथा
10 | ज्मीन, िकसान और कॉरपोरेट
सरकार िवकास और औद््ोगीकरण के नाम पर िकसान की ज्मीन हडपने और उसे हािशये पर फे्कने की योजना हर हाल मे्लागू करना चाहती है हालांिक इसका िवरोध भी ज्ोर-शोर से हो रहा है।
26 | जनता पगरवार नया अवतार
सत््ाधारी संघ पवरवार की चुनौितयो्का सामना करने के िलए छह राजनीितक दलो् का िवलय राजनीित मे्एक नयी िदशा का संकेत है।
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+91. 11. 30423000
28 | एक और घर वापसी
कला : राजीव भृगु
छुट्ी से लौटने के बाद राहुल गांधी पहली जनसभा मे्भूवम-अवधग््हण के मुद्े पर सरकार के वखलाफ आक््ामक तेवर मे्नजर आये।
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प््िार : अिभनेत ििंह +91. 7835002010
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िवज््ापन : रजत शम्ाा
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संपादकीय काय्ाडलय लखनऊ फोन नंिर
स्वत्वािधकारी, प््काशक और मुद्क क््मता वसंह द््ारा कलम मीवडया प््ााइवेट िलवमटेड के वलए अमर उजाला पब्ललकेशंस वलवमटेड, सी-21, 22, सेक्टर-59, नोएडा, उत््र प््देश से मुव्दत एवं दूसरी मंवजल,ल्ाी-146, हवरनगर आश््म, नयी वदल्ली-110014 से प््कावशत। संपादक : अंबरीश कुमार (पीआरल्ाी अिधवनयम के तहत समाचारो् के चयन के िलए िजम्म्ोदार) 3
शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
38 | चंदन से बहता ख्ून
40 | चम्मच भर नीलगिगर
48 | खेल के दो िशखर
59 | ‘जीने की तमन्ना’ अब तक
आंध्पुवलस द््ारा चंदन काटने वाले तवमलो् की हत्या मानवावधकारो्के हनन का एक गंभीर मुद्ा बन गयी है
वववादो्से जूझती हुई सािनया वमज्ाष वशखर पर पहुच गयी और सायना नेहवाल ने चीनी वकले मे्से्ध लगा दी।
हरी-भरी वावदयो्वाला नीलवगवर वहल स्टेशन तेजी से महानगरो्के वदग्गजो्की आरामगाह बनता जा रहा है।
िफल्म ‘गाइड’ ने पचास साल पूरे कर िलये है्। इसके बावजूद वह पुरानी नही्पड्ी है।
आपकी डाक
पंंकृदि से दखलवाडं
मौसम के वमजाज ने सबको हैरत मे्डाल वदया है। बावरश और ओलावृव्ि से वकसान तबाह हो गए। यह प्क ् वृ त से छेडछ ् ाड्का ही असर है। जाड्ा, गम््ी और बरसात सब वबना तय समय के हो रहे है।् पय्ावष रण मानको्की अनदेखी का नतीजा हम सब भुगत रहे है।् कारखानो्और मोटर गाव्डयो्से वनकल रहा धुआ ं बहुत सी बीमावरयां बांट रहा है। हमारे पानी के स््ोत भी उद््ोगो्की गंदगी का वशकार है।् ऐसे मे् पय्ावष रण को बचाए रखने की हम सबकी वजम्मदे ारी बनती है। तावक बदलते मौसम का कहर हम पर नही्टूट।े
बीमार बनािा पानी
वदया है। जानकारी के अभाव मे्कई लोग आज भी दूवरत पानी को प््योग करने को मजबूर है्। सरकार को इस ओर ध्यान देना चावहए। अफसरो्को भी प््भाववत इलाको्का वनरीक््ण कर पानी की जांच करानी चावहए। और पानी को सही तरीके से प््योग के बारे मे्लोगो्को जागर्क करना चावहए।
संवधा पांडेय, गंंेटर नोएडा
बचंंोंकी सुरकंंा का सवाल
बच््ेही देश का भववष्य है्, ये हम सभी जानते है्। इसवलए इनकी सुरक््ा भी हमारी वजम्मेदारी है। आए वदन हमारी नजर वरक्शो्मे्या वैन मे्स्कूल जंयोदि कुमारी, लखनऊ जाते बच््ो्पर पड्ती है। वकतनी बेरहमी से इन मासूमो्को वाहनो्मे्भरा जाता है। जरा सी चूक वकसी भी बच््ेकी जान ले सकती है। वसफ्फवाहन चालक ही नही्बब्लक इसकी वजम्मेदारी हम सबकी होनी चावहए। पवरवहन ववभाग से लेकर, ववद््ालय प््बंधन और पवरवारो्को भी इस ओर ध्यान देना होगा। वसफ्फयातायात सप्ताह मनाने या बैनर-पोस्टर लगाने से कुछ नही्होगा। आज की चूक कल वकसी दुघ्षटना का सबब बन सकती है।
िकसकी सरकार?
पानी की असल पवरभारा रंगहीन और स्वादहीन होने की है। लेवकन बढ्ते प््दूरण ने इसको पूरी तरह से बदल वदया है। आजकल पानी मे्स्वाद भी होता है और रंग भी। शहर के कई इलाको्का यही हाल है। आसपास की गंदगी ने पानी मे्जहर घोलना शुर्कर वदया है। जमीन से वनकलते पानी ने हर उम््के लोगो्को बीमावरयो्के घेरे मे्ला
ये कैसी मिि ? चुनावो्के समय जनता की मान-मनौवल करने वाले सरकारी नुमाइंदे हो्या प््शासवनक अवधकारी, शायद इनका आम जनता से सरोकार खत्म होता जा रहा है। आसमान से आयी आफत ने जब ग््ामीणो्खासकर वकसानो्को जीववका का मोहताज बना वदया, ऐसे समय भी मदद के नाम पर वसफ्फखानापूव्तष करना शासन-प््शासन की उदासीनता को साफ वदखाता है। हद तो तब हो गई जब कुछ वकसानो्को मदद के नाम पर वसफ्फ 6
शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
वो पल बहुत सुखद था जब अपने संसदीय क्त्े ्के उम्मीदवार अवखलेश यादव उत्र् प्द् श े के मुखय् मंत्ी के पद पर आसीन हुए थे। तब लगा था वक अब तो अपनी सरकार आ गई। अब कन्नौज मे् भी ववकास वक लहर आएगी। 15 माच्ष2015 को इस सरकार के काय्क ष ाल के 3 वर्षपूरे हो गए है, अब तक यहां योजनाओ्के नाम पर वसफ्फबोड्षही लगाये गए है। यहां के वतव्ाष क्त्े ्मे्एक मेवडकल कॉलेज खोला भी गया है तो उसकी हालत ऐसी है वक एक गरीब भी वहां मुफत् इलाज कराने से कतराता है। कोई स्टाफ नही है। आज भी यहां के लोगो को इलाज के वलए बाहर ही जाना पडता है। मृतय् ु दर लगातार बढ रही है। वकसानो की हालत भी वदन पर वदन बद्तर होती जा रही है। मुखय् मंत्ी जी वादे करना अच्छी बात है,पर उन्हे्अमल मे् लाना अहम होता है।
नहरोंका हो भला कृवर प््धान देश की छवव के बावजूद यहां खेती की हालत बद से बदतर होती जा रही है। खेतो्की वसंचाई के वलए आज भी ज्यादातर वकसान नहरो्पर ही वनभ्षर रहते है्। लेवकन नहरो्मे्भी दूवरत पानी और सूखे के अलावा साफ पानी वमलना कम ही नसीब होता है। इतना ही नही्टेनवरयो्और फैक्व्ियो्से वनकली गंदगी नहरो्से होते हुए खेतो्तक भी पहुंच ही जाती है। ये हालात न वसफ्फफसलो्के वलए बब्लक आसपास के जानवरो्के वलए भी खतरा सावबत हो रहे है्। फसलो्की गुणवत््ा मे्फक्फऔर बाजारो्मे् इनकी वदनो्वदन घटती कीमत से बात साफ जावहर होती है। नहरे्एक तरह से खेती की जीवन रेखा है्। इनकी देखरेख करने से ही कई वकसानो्और खेती का भला हो सकता है।
दिनेशपाल, कानपुर (उतंंर पंंिेश)
पाटंटटाइम पॉदलटीदशयन
राजनीवत मे्छुट्ी इतना बड्ा मुद्ा बन सकती है, शायद वकसी ने भी नही्सोचा था। राहुल गांधी की 56 वदनो्की छुट्ी ने उन्हे्कई ववशेरणो्से नवाजा है। कोई उन्हे्पाट्षटाइम पॉवलटीवशयन कह रहा है तो कोई उनकी वकंग एल्फे्ड से तुलना कर रहा है। सवंंेश िुबे (कनंनौज) उ.पंं. अब राहुल को ही तय करना होगा वक वो इस
750 और 1250 र्पए के चेक वमले। सरकारी कै्टीन का सस््ा खाना और सरकारी खच्षपर दुवनया भर की सैर करने वालो्को शायद ये एक बड्ी रकम लगती होगी। लेवकन खेतो्मे्खड्ी अपनी कमाई को खो चुके वकसानो्के वलए ये रकम उनके जख्मो्पर नमक की तरह है। दैवीय आपदा के बाद सही समय पर की गई मदद से कई वजंदवगयां बच सकती थी्। गरीबो्के वलए बड्ी-बड्ी योजनाओ्से बेहतर होगा वक सरकार उनकी बुवनयादी जर्रतो्को पहले पूरा करे।
संजीव कुमार, िुमका (झारखणंड)
पदरकंंमा
‘लोकरंग’ मेंमाटी की महक वापसी के बाद क्या कहलाना चाहते है्। अगर कांग्ेस की राजनीवतक ब्सथवत मजबूत होती तो शायद ये बात उतना तूल न पकड्ती। लेवकन पाट््ी के पोस्टर ल्वाय का ऐन मौके पर गायब होना कई सवाल खड्ेकरता है। क्या वो वसफ्फचुनावी मौको् पर ही नजर आने वाला चेहरा बन गए है्। क्या पाट््ी की वगरती हालत ने उनके अंदर के नेता को भी वचंवतत कर वदया है। कही्ये छुट्ी उनकी बढ्ती आलोचनाओ्और खुद उनकी पाट््ी मे्होने वाले ववरोध का साइड इफेक्ट तो नही्। ऐसे कई सवाल है्जो राजनीवत के गवलयारो्मे्खुसफुसाहट बढ्ा रहे है्। आने वाले समय मे्पाट््ी मे्राहुल की भूवमका सभी के सामने आने वाली है वक वो पाट््ी की नैया को पार लगाते है्या वफर खुद नैया के वलए बोझ बनते है्।
अवधेश दनगम, लखनऊ (उतंंर पंंिेश)
वो दिन कब आएगा?
कैसा समय आ गया है, अब धम्षके नाम पर लोगो् का नफा-नुकसान तय होने लगा है। वपछले वदनो् रामपुर के वाल्मीवक पवरवारो्का मामला उस वक्त सुव्खषयो्मे्आ गया जब अपना घर बचाने के वलए उन्हो्ने धम्षबदलने का सहारा लेना चाहा। ये गलतफहमी थी या मजबूरी लेवकन दोनो्ही सूरतो् मे्ये घातक सावबत हो सकती थी। खैर समय रहते उनका अनशन समाप्त हो गया पर वफर भी इसने समाज और राजनीवत के तथाकवथत ठेकेदारो्की सेक्युलर छवव पर दरार को गाढ्ा जर्र कर वदया है। ऐसी घटनाएं वकसी के वलए मुसीबत तो वकसी के वलए वसफ्फएक अच्छा मौका बनकर रह जाती है्। ये तो भगवान ही जाने वक वो आदश्षब्सथवत कब आएगी जब वकसी के नफा-नुकसान के वलए धम्षकी आड्लेने की जर्रत ही न पड्े। पुनीि कुिंाहा, भोपाल (मधंय पंंिेश)
सबका साथ सबका पंंयास
गंगा की रक््ा की हड्बड्ी इस समय हर तरफ वदखाई और सुनाई दे रही है। जनता से लेकर नेता तक हर कोई इस मुद्े पर काफी सोच-ववचार कर रहे है्। लेवकन पुरानी कहावत है वक अब पछताए होत का जब वचव्डया चुग गई खेत। अगर समय रहते ये जागर्कता आई होती तो आज गंगा के अव््सत्व पर इतना बड्ा संकट न आता। इतना हो हल्ला मचने के बाद आज भी कई जगहो्पर गंगा की दुद्षशा जस की तस बनी हुई है। शहर भर की गंदगी गंगा मे्बहाई जा रही है, आस्था के नाम पर मूव्तषयो्और अन्य सामव््गयो्का गंगा मे्ववसज्षन हो रहा है। जब इतने सालो्मे्ये संकट बढ्ा है तो वसफ्फकुछ वदनो्इसका वनवारण नही्हो सकता है। सतत प््यास और हर एक की भागीदारी से ही गंगा पर मंडरा रहा खतरा दूर वकया जा सकता है।
मंगेश दसंह, बनारस (उतंंर पंंिेश)
कुशीनगर वजले के जोवगया जनूबी पट््ी गांव मे्12 और 13 अप््ैल को ‘लोकरंग’ का संपन्न हो गया। इस बार आयोजन मे्असहयोग आंदोलन के दौरान अंग्ेजी हुकूमत वखलाफ बगावत करने वाले स्वतंत्ता सेनावनयो् को याद वकया गया। इनमे् हनुमान प््साद कुशवाहा, ब््ह्मदेव शम्ाष, मुंशी तप्तीलाल और मोती भगत के नाम प््मुख रहे। इसका प््माण 8 मई, 1921 मे्छपा स्वदेश अखबार से वमलता है। करीब 8 साल से हो रहे इस आयोजन का उद््ेश्य लोकरंग को सहेजना और अपनी ववरासत से जुड्ा रहना है। लोकरंग 2015 का शुभारंभ प्व्सद््कथाकार एवं समयांतर पव््तका के सम्पादक पंकज वबि्् ने ‘लोकरंग 2015’ पव््तका के लोकाप्ण ष से वकया। लोकरंग का आवाज गांव की मवहलाओ्के रोपनी गीत,‘सातो्ही भईया के एक बवहना र्नवा हो, ए रामा सातो् भईया करेले रोपवनया हो ना’...। से हुआ। हर वर्ष गांव की मवहलाएं ही काय्षक्म प्स ् त्ु कर इसकी शुरआ ् त करती है।् इप्टा की पटना टीम ने ‘सुपनवा का सपना’ नाटक की प्स ् व्ुत की। लोकरंग की दूसरी रात खव्डया आवदवासी समूह के पारंपवरक नृत्य और इप्टा पटना की टीम के मंवचत नाटक ‘ गबरवघचोरन के माई ’ के नाम रहा। इन दोनो्काय्क ष म् ो्के बीच भोजपुरी इलाके के कलाकारो् ने लुप्त हो रही लोक कला ‘हुड्का’, ‘बाकुम’, ‘लोवरकायन’ की छटा वबखेरी। गाजीपुर वजले से आए बंटी वम्ाष ने महेश्र के वलखे गीत ‘सृव्ि बीज का नाश न हो’ और नरे्द् श््ीवास्व के भोजपुरी गीत ‘सारी वजनगी गुलामी मे्वसरान वपया, कहां गए ववहान वपया ना’ गाकर लोगो्मे्माटी से जुड्ने का भाव पैदा वकया। वजले के लोक कलाकारो्ने वनग्षुन प््स्ुत वकया और इसके बाद पव््िम बंगाल के ब््द्षमान वजले से आए बर्न दास बाउल, अजय दास, नयन अंकुश आवद ने प्व्सद््बाउल गान प्स ् त्ु वकया। इस मौके पर कहानीकार ऋवरकेश सुलभ, लोक संसक ् वृ त के मम्षज्तैयब हुसैन, वचत््कार डॉ लाल रत्नाकर, ववरष््कथाकार मदन मोहन आवद कई जानी मानी हव््सयां मौजूद रही्।
‘खंंवाबोंका वीराना’ का दवमोचन मेरठ। युवा कवव संतोर व््तपाठी के कववता संग्ह ‘ख्वाबो् का वीराना’ का वजमखाना के अपार चै्बर मे् कवव हवरओम पवार ने ववमोचन वकया। इनकी कववताओ्मे्समाज की सच््ाई को उजागर वकया गया है। कई कववताएं बेहद माव्मषक और जमीनी गहराई को समेटे हुयी है्। समाज की परेशावनयो्को बहुत कायदे से वपरोया गया है। कई कववताएं वदल को छूने वाली है्। इस मौके पर कवव वेद प््काश बटुक और कई गण मान्य लोग मौजूद थे।
वैदंिक कला का संगम
कोलकाता के वबरला एकेडमी आफ आट्षएंड कल्चर मे्दो सप्ताह तक चली देशी-ववदेशी कलाकारो् की एक प्द् श्नष ी कलकत््ा आट्षबाइनाले-2015 का आयोजन हुआ। यह नई तरह की प्द् श्नष ी थी। इसमे् मकबूल वफदा हुसैन, एसएच रजा, नंदलाल बोस, रामानंद बनज््ी, जोगेन चौधरी, अलेकज ् डे् र टोकारेव, जान ववजर और वसीम कपूर समेत कई देशी-ववदेशी कलाकारो् की जानी-मानी कृवतयां रखी् गयी थी्। इसका आयोजन कोलकाता मे् रायमैन्स आट्ष स्टूवडयो के स्थानीय कलाकार मानस राय ने वकया। इसे यूरोवपयन आट्षसोसायटी के लाइसेस ् के तहत पहली बार यहां प्द् व्शतष वकया गया। इसमे् 64 कलाकारो्की कोई दो सौ कृवतयो्का प्द् श्नष वकया गया था। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
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कहा-सुना
वंयंगदचतंं: उियशंकर
भूषण पररवार की रजतनी उनकी चल-अंचल संपरत है, रजतने उनके धंधे है,ं सभी की जांच होगी। मैंउनको छोडंगंं ा नहीं...।'
बीजेपी को यह पता नहींरक वह रजस रवलय का मजाक उडंा रही है, वह उनके रलए रवनाशकारी सारबत होगा। वासंवं मेंउनके नेता मजाक नहींउडंा रहे, इससे उनका डर साफ तौर पर रदख रहा है। ’
-नीतीश कुमार, मुखयं मंतंी, िबहार
सबकी नजर रबहार पर है। रबहार से ही भाजपा को देश से उखाडंने का अरभयान जनता पररवार शुरं करेगा। हम रमलकर भाजपा की हवा रनकालेगं ।े ’ -लालू यादव, नेता समाजवादी जनता पारंंी
-आशीष खेतान, नेता आम आदमी पारंंी
पहले जब भी जनता पररवार के लोग एक साथ आए हैंसतंंा उनके हाथ आई है। इस बार भी सतंंा इस पररवार को ही हारसल होगी।’
-मुलायम िसंह यादव, नेता समाजवादी जनता पारंंी
शुरंमेंयह डर लग रहा था रक लोगोंसे रकए वादे पूरे होंगे रक नहीं, लेरकन अब यह लगता है रक चालीस-पचास फीसदी वादे तो जरंर पूरे होंग।े अगर पचास फीसदी वादे भी पूरे होते हैंतो भी बडंी बात होगी। जनता रजस तरह से पलकोंपर रबठाती है, पांच साल मेंरगरा भी देती है।' 8
-अररवंद केजरीवाल, मुखयं मंतंी, िदलंली सरकार
शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
ंकन रेखा
ेश : उम
संपािकीय
गवपदा मंे गकसान हा
अंबरीश कुमार
फरवरी से देशभर के कई जन संगठन और ककसान संगठन इस मुद्े पर कवरोध कर रहे है। पहले भी ककसानो की जमीन को लेकर नंदीग््ाम से लेकर दादरी जैसे आंदोलनो् ने बंगाल से लेकर उत््र प््देश की सत््ा बदल दी थी।
ल के वर््ो्मे्यह पहला मौका है जब देश भर का वकसान इतने गंभीर संकट के दौर से गुजरता नजर आ रहा है। भूवम अवधग्ह् ण अध्यादेश का खतरा तो मंडरा ही रहा था वक बेमौसम बरसात ने कई राज्यो्के लाखो् वकसान पवरवारो्को नए संकट मे्डाल वदया। वपछले एक महीने से वकसानो की ख़ुदकुशी के आंकडे बढते जा रहे है। उदारीकरण के दो दशक मे्सबसे ज्यादा बदहाल वकसान ही हुआ है। देश भर मे्वपछले दो दशक मे्दो लाख से ज्यादा वकसान ख़ुदकुशी कर चुके है। ववदभ्षमे्सबसे ज्यादा। अब तो उत्र् प्द् श े ,राजस्थान और वबहार जैसे राज्यो्से भी बडी संखय् ा मे्वकसानो की ख़ुदकुशी की खबरे्आ रही है। दरअसल ववकास की नई अवधारणा मे्न तो खेत खेती है और न ही वकसान। खेती की दो फसली तीन फसली जमीन लेकर उसे काॅरपोरेट घरानो्को सौ्पकर अत्याधुवनक सडक , माॅल और वरसाॅटष् बनाने की योजना देश की बडी आबादी के वलए घातक सावबत होगी। हम अपनी पुरानी और जज्रष सडको्को ठीक करने की बजाए आठ लेन की वसफ्फसडक ही नही्बनाते है बब्लक उसके दोनो्ओर नया शहर भी बसाना चाहते है। वह शहर जो समाज के दस फीसद आबादी के वलए होता है। इसमे्पांच वसतारा होटल , वरसाॅटष्और वजम आवद भी शावमल है। इसीके ववकास के वलए वकसानो्की उपजाऊ जमीन लेने का प्य् ास हो रहा है। पहले भी यह हुआ और नतीजा भी सामने आ चुका है। अब वफर केद् ्सरकार का भूवम अवधग्ह् ण अध्यादेश वफर आंदोलन का माहौल बना सकता है। फरवरी से देशभर के कई जन संगठन और वकसान संगठन इस मुद्ेपर ववरोध कर रहे है। पहले भी वकसानाे्की जमीन को लेकर नंदीग््ाम से लेकर दादरी जैसे आंदोलनो्ने बंगाल से लेकर उत्र् प्द् श े की सत््ा बदल दी थी। बंगाल मे् ममता बनज््ी तो उत्र् प्द् श े मे्पूवष्प्ध् ानमंत्ी ववश्न् ाथ प्त् ाप वसंह के नेततृ व् मे्जो आंदोलन चला वह नजीर बन गया। मुद्ा वकसानाे्की जमीन का था और आंदोलन ऐसा हुआ वक उन उद््ोग समूह को न वसफ्फमैदान छोडना पडा बब्लक सत््ार्ढ दल को इसकी कीमत भी चुकानी पडी। उत्र् प्द् श े मे्मुलायम वसंह यादव इसी दादरी आंदोलन से बने माहौल के चलते ववधान सभा चुनाव हार गए थे। इस मुद्ेको लेकर देश भर मे्वकसानो की जमीन अवधग्ह् ण
को लेकर जो बहस वछडी उससे कांगस्े के नेततृ व् वाली यूपीए सरकार ने अवधग्ह् ण से संबवं धत कानून मे्बदलाव वकया तो उसके पीछे जन आंदोलनो्का बडा दबाव भी था। इस मुद्ेको लेकर यूपीए के दौर मे्भी वदल्ली मे्कई बार धरना प्द् श्नष हुआ और वकसानो ने सरकार को बार-बार आगाह वकया। वजसके बाद नया भूवम अवधग्ह् ण कानून बना। अब केद् ्सरकार ने उसे वफर बदल वदया है। वकसान संगठन इस अध्यादेश को काॅरपोरेट को वकसानो की लूट की छूट देने वाला बता रहे है। इनका कहना है वक वकसानो्ने बडे आंदोलन और संघर्षके बाद अंगज ्े ो के बनाए हुए भूअवधग्ह् ण कानून को रद््कराने मे्सफलता पाई थी। ऐसे मे्संसद सत््के दौरान सरकार का भूअवधग्ह् ण कानून मे्बदलावो्को लेकर चच्ाष न कराया जाना संसदीय लोकतंत्को ठेग् ा वदखाने जैसा है। पीपीपी प््ोजेकट् के वलए 70 फीसद और वनजी कंपवनयो्के वलए 80 फीसद प्भ् ाववत लोगो् की सहमवत की अवनवाय्तष ा के प््ावधान को समाप्त वकया जाने से ववकास पवरयोजनाओ के नाम पर जमीन की लूट को क़ानूनी मान्यता वमल जाएगी वजससे देश भर मे्व्यापक असंतोर उभरेगा। सरकार को इस मुद्ेपर वफर ववचार करना चावहए। यह मुद्ा राजनैवतक र्प से भी सत््ार्ढ दल के वलए संकट पैदा कर सकता है। दरअसल भूवम अवधग्ण ् कानून को लेकर वकसानो्ने काफी लंबा संघर्षवकया था और भट््ा पारसौल से लेकर पव््िमी उत्र् प्द् श े के कई वहस्सो्मे्यह आंदोलन फैला था। यह मुद्ा वफर से उन्हे्एकजुट कर सकता है क्यो्वक यह उनके खेत से जुडा मुद्ा है। जानकारो्का मानना है वक भूवम अवधग्ह् ण अध्यादेश वकसानो्की बजाए काॅरपोरेट घरानो्की ज्यादा मदद करने वाला है और इससे वकसानो्का बडा नुकसान होगा। खेती वकसानी को लेकर वैसे भी मोदी सरकार की कई नीवतयो्को लेकर छत््ीसगढ से पंजाब तक वकसान आहत है। छत््ीसगढ मे्तो धान वकसान सडक पर आ चुके है्क्यो्वक चुनाव मे्भाजपा ने जो वायदे वकये थे उसे वनभाना तो दूर धान वकसानो्को वमलने वाला बोनस भी बंद कर वदया गया। साथ ही लेवी के धान की हदबंदी तय कर दी गई, एक एकड मे्दस ब्कवंटल तक। इसे लेकर पहले से ही वकसान परेशान था और अब यह अध्यादेश वकसानो्की जमीन पर नया खतरा बनकर आया है। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
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आवरण कथा
ज्मीन, िकसान और काॅरपोरेट
10 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
अरुण कुमार ितुुपाठी
र्पए की कोट्षफीस की नोवटस भी थमाई गयी। इन छत््ीस सालो्मे्मोरना गांव मे्खड्ज ं ा भी नही्लगा। टपाट और छीना झपटी/ चारो्तरफ बब्ादष ी लेवकन वजन मोरो् के नाम पर इस गांव का नाम है/ वजसकी लाठी भै्स उसी की काहे की मोरना पड्ा था वे सब गायब हो चले थे। वदलचस्प बात यह है वक यह सब अवधग््हण आजादी है/सुनता नही्है चीख कोई/ दुवनया चीखचीख के हारी है/ जेब भरन मे् लगे है्/ सब नेता 1894 के भूवम अवधग्ह् ण कानून की आपातकालीन कम्षचारी है्/ लाठी गोली चलती है यहां संतो् और धारा के तहत वकया गया। आपातकालीन ब्सथवत के वकसानो्पे/ वदखा के वपस््ौल आते गुड ं े रोज दुकानो् वलए बनी धारा-17 का प््ावधान संभवतः युद्और पे/ रोज नए घोटाले होते/ माल गया बेईमानो्पे/ नेता बाढ् जैसे खतरो् के समय खावतर िकया गया था। लेवकन सरकारो्ने इसका इस्म्े ाल पहले औद््ोवगक रोज करवाते दंग/े आफत पड्ी जवानो्पे। पंकज पराशर की डॉक्यमू िे् ्ी ‘क्श् ड ् ड््ीम’ का ववकास और बाद मे् वरहायशी इलाको्, वफर कभी यह थीम सांग दरअसल भूवम अवधग्ह् ण, दमन और सड्क तो कभी रेलवे लाइन, कभी वनजी अस्पतालो् ू ो्के वलए करना शुर्कर वदया है। उससे वनकलने वाले बुरे प््भावो् की पूरी गाथा है। और वनजी स्कल राजधानी वदल्ली के नजदीक नोएडा,ग््ेटर नोएडा अगर यूपीए सरकार ने पुराने कानून की धारा-17 मे् और भट््ा पारसौल की भूवम अवधग््हण की संशोधन करके सभी उद््ेश्यो् के वलए सहमवत की धांधली,वकसानो्का संघर्षऔर उनकी दार्ण गाथा जर्रत बना दी थी। वही्, अब एनडीए सरकार ने को यह वफल्म बखूबी वदखाती है। नोएडा के मोरना धारा-10 ए को शावमल कर कम से कम पांच तरह गांव के बाबा भूले वसंह आज भी साल 1976 मे् के उद््ोगो्के वलए सहमवत की जर्रत को ही खत्म नोएडा के वलए हुए भूवम अवधग््हण के वखलाफ कर वदया है। यह बहुत कुछ पहले की आपातकालीन मुकदमा लड्रहे है।् उनका कहना है वक उस समय धारा जैसी ब्सथवत बन रही है। आपातकालीन धारा का कैसे पहले की सरकारे् महज ढाई और तीन र्पए वग्षगज की दर से जमीन ली गई थी। इतने मे् तो कच्छी भी नही् वमलती थी दुर्पयोग करती रही है्, इसका प््त्यक्् उदाहरण बच््ो्की। इसके वखलाफ साल 1984 मे्हाई कोट्ष दादरी के पास बढ्परु ा गांव की जमीन का अवधग्ह् ण मे्अपील मंजरू हुई। जब छह र्पए गज के वहसाब है। वकसानो् की तरफ से संघर्षकर रहे सुरदे् ् भाटी से उनके गांव के खातेदारो् को दो लाख र्पए बताते है् वक 2005 मे् अंबुजा सीमे्ट के वलए इस मुआवजा देने का आदेश हुआ, तो साथ मे्दो लाख गांव की 550 बीघा जमीन का खामोशी से
लू
एक मौत एक प््तीक
सरकार िवकास और औद््ोगीकरण के नाम पर िकसान की ज्मीन हड्पने और उसे हािशये पर फे्कने की योजना हर हाल मे् लागू करना चाहती है हालांिक इसका िवरोध भी ज्ोर-शोर से हो रहा है। देखना यह है िक िकसान जीतता है या काॅरपोरेट।
वदल्ली के जंतर मंतर पर 21 अप््ैल बुधवार को वजस समय मुख्यमंत्ी अरववंद केजरीवाल का वकसानो्के पक््मे्भारण चल रहा था उसी समय(वदन के एक बजे) राजस्थान के दौसा वजले के वकसान गजे्द्वसंह राठौर का वही्पेड्पर फांसी लगाकर लटक जाना इस पूरी व्यवस्था मे् वकसानो्की वनयवत बयां करता है। दरअसल ववश््बै्क के वनद््ेशो्के मुतावबक दुवनया की सभी सरकारे्वकसानो्की संख्या कम करने पर लगी है्फक्फवसफ्फस्पीड का है। प््धानमंत्ी नरे्द् मोदी काॅरपोरेट लाबी के वलए भूवम अवधग््हण पर आमदा है्तो राहुल गांधी वकसानो्के वलए लड्कर अपनी राजनीवतक वापसी चाह रहे है्। वही्अरववंद केजरीवाल अपनी जनपक््धरता बनाए रखने और पाट््ी की टूट की भरपाई के वलए वकसान रैली करते है्। इसके बावजूद अगर देश के कोने के वकसी गांव मे्खामोशी से नही्बब्लक वदन के एक बजे भारतीय सत््ा के आंगन मे्कोई वकसान इस तरह से जान देता है आतंमहतंया से कुछ पहले गजेनंदंिसंह : कई सवाल तो यह हमारी सरकारो्, राजनीवतक दलो्और मीवडया सभी की कवथत संवेदनशीलता के पाखंड को उजागर कर देता है। वबल ब्कलंटन और अटल वबहारी वाजपेयी से लेकर राजनाथ वसंह के वसर पर राजस्थानी पगड्ी बांधने वाले गजे्द्ने राजनीवत के वसर पर कलंक की ऐसी पगड्ी बांधी है वक वह उसे लेकर चल भी नही्सकती और आसानी से उतार भी नही्सकती। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 11
आवरण कथा अवधग््हण हो गया। न वकसानो् से कुछ पूछा गया और न ही गांव मे्कोई मुनादी की गयी। न ही देश के बड्ेअखबारो्मे्अवधसूचना दी गयी। अचानक इलाके के एसडीएम ने वकसानो् से कहना शुर् वकया वक अपनी जमीनो् के पैसे उठा लो नही् तो ि््ेजरी मे् जमा करा वदए जाएंगे। वकसान हक््ाबक््ा। इस अवधग््हण से 250 वकसानो् के 425 पवरवार प््भाववत हो रहे थे। जीटी रोड के बगल की इस जमीन के रेट वदए जा रहे थे 85 र्पए 50 पैसे प््वत वग्ष गज। महंगाई, पुनव्ाषस, पुनब्षसावट और फसलो् आवद के दाम जोड् कर सब कुछ 245 र्पए का रेट तय वकया गया। वकसान लेने को तैयार नही्थे। उस समय प्द् श े मे्मुलायम वसंह की सरकार थी। प््देश के औद््ोवगक ववकास की वजम्मेदारी अमर वसंह के हाथो्मे्थी। यह पूरा सौदा उन्ही्की देख-रेख मे्हुआ था। वकसानो्ने धरना वदया। लाल कुआं पर बैवरकेड लगा दी गई। एक गांव के वकसान को दूसरे गांव मे्जाने नही्वदया गया। फसले्रौ्द दी गई्। लावठयां चली्। बाहर से 4500 फोस्षमंगा ली गई। सुरदे् ्भाटी बताते है्वक उनकी ताई प्क ् ाशी देवी इसी सदमे मे्चल बसी्। वह कहती थी्वक बेटा यह जमीन खाने को देती थी। अब अगर यह नही् रहेगी तो जीकर क्या करेग् ।े ‘मेरे ताऊ जगदीश भाटी सदमे मे्चल रहे थे। उनका कूलह् ा टूटा और वे खाट पर पड्-े पड्ेचल बसे।’ सुरे्द् भाटी बताते है् वक वकसानो् के प््वत मुलायम वसंह या मायावती की सरकार के रवैए मे् कोई फक्फ नही् है। मुलायम सरकार ने चुपके से अवधग््हण कर वलया, तो मायावती ने भी लाठी चलवाने और दमन करने मे्कोई कसर नही्छोड्ी। साल 2009 मे्आंदोलन हुआ और सुरदे् ्भाटी और दूसरे लोगो्के साथ 150 औरते्जेल गयी्। इसका सरकार पर कोई असर नही् पड्ा। ज्यादातर लोगो् ने जमीन का मुआवजा ले वलया। लेवकन अभी भी तीस लोगो् ने नही् वलया है। हाई कोट्ष मे् आपातकालीन धारा पर सुनवाई जारी है। इस जमीन का अवधग्ह् ण यूपीएसआईडीसी ने वकया था। इसे अंबुजा को दे वदया। समझ मे् नही् आता वक एक सीमेट् फैकि् ्ी लगाने के वलए ऐसी कौन सी आफत आई थी। जबवक इस कंपनी ने गांव के वकसी व्यब्कत को नौकरी भी नही्दी। सुरदे् ्भाटी को लड्त-े लड्ते बहुत सारे आंकड्े याद हो गए है्। वह अब इस लड्ाई मे् मेधा पाटकर और अन्ना हजारे से जुड् चुके है्। वह समझ चुके है् वक यह लड्ाई महज बढ्परु ा तक सीवमत नही्है। इसका दायरा पूरा देश है। इसमे् वकसान, वकील,सामावजक काय्षकत्ाष, वशक्क ् , अदालत,मीवडया की ताकत साथ नही्देगी तो इसे जीतना मुबश् कल है। बढ्पुरा गांव के सामावजक काय्षकत्ाष और ववरष्् पत््कार महर्द्ीन खान कहते है्,`सरकार और प््ावधकरण वकसानो् की जमीन से अत्याचार और बलात्कार कर रहे है्। इस समय गौतम बुद् नगर और आसपास के इलाको्मे्जमीन छीनने के वलए छह प््ावधकरण सव््कय है।् इसमे्नोएडा, ग्ट्े र 12 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
सरकार की िािागीरी गोिवंदाचारुय नया भूवम अवधग््हण वबल कुछ कारपोरेट घरानो्को खुश करने के वलए लाया जा रहा है। सरकार भू म वफ या ओ्, वब ल् ड रो् कारपोरेट घरानो् को खुश करने के वलए वकसानो्की बवल चढ्ा रही है। दस साल पहले साढे़ 12 करोड् हेकट् अर कृवर की जमीन थी वपछले दस वर््ो् मे् एक करोड् अस्सी लाख हेक्टअर कम हो गयी। इससे क्या हुआ। वकसानो्का कोई वहत तो हुआ। वत्षमान मे् कोई अपातकाल की ब्सथवत तो है नही् जो यह अध्यादेश लाया जाए। यह सरकार की दादावगरी और लोकतंत् की भावना को कुचलने का एक प््यास है। जमीनो् के मसले पर एक श््ेत पत्् जारी होना चावहए वक वपछले 20 वर्ष मे् अवधग््वहत 80 लाख हेक्टेअर जमीन का उपयोग हो पाया या नही्। इसकी जानकारी दी जानी चावहए। उन्होने बताया वक देश अब भी साढ्े चार करोड् हेक्टेअर जमीन बंजर है। उसमे् गोचर जमीन को छोड् वदया जाए तो वफर भी 250 करोड्हेक्टअर जमीन खाली पड्ी है। ऐसे मे्नये वबल की अवश्यकता क्यांे आई। वपछले 20 साल मे् वजतनी जमीन का अवधग््हण हुआ उसमे् से सात करोड् हेक्टेयर जमीन का कोई इस््ेमाल नही्हुआ। पहले उस जमीन का इस््ेमाल करो।” मुआवजे और आदलती काय्षवाई मे् भी सरकार द््ारा छल, कपट करने का प््यास वकया जा रहा है।’ नोएडा, यमुना एक्सप्स ्े -वे प््ावधकरण, गावजयाबाद ववकास प््ावधकरण, बुलंदशहर खुज्ाष ववकास प््ावधकरण और यूपीएसआईडीसी है।् जमीन छीने जाने पर वकसानो्को तो थोड्ा बहुत मुआवजा वमल भी जाता है। लेवकन उन भूवमहीन कारीगरो् और मजदूरो् को तो महज लाचारी और बेरोजगारी वमलती है। जो इन वकसानो् की खेती और जमीनो् पर वनभ्रष होते है।् सबसे ज्यादा असर सामुदावयक कारीगरो्पर होता है। बढ्ई, लोहार, कुमह् ार, नाई, चम्षकार और धोबी यह छह वकस्म के कम्युवनटी हेलप् र सीधे बेरोजगार हो गए।’ जमीन अवधग््हण की हकीकत पड्ोसी राज्य हवरयाणा मे् भी कड्वी है। हवरयाणा के ववरष्् पत््कार राजकुमार भारद््ाज अपनी वकताब
‘आत्महत्या की खेती’ मे्वलखते है,्`लाखो्वकसानो् की जमीनो् का अवधग््हण करके बनाया गया एनसीआर (राष््ीय राजधानी क््ेत् वदल्ली) का सबसे पॉश इलाका गुड्गांव भी गांव वालो् को खुशहाल नही् बना सका। हालांवक यहां उद््ोग भी लगे है।् यहां तमाम ऐसी कंपवनयां है् वजसमे् काम करने वालो् को लाखो् र्पए महीने का पैकेज वमलता है। लेवकन गरीबी रेखा से नीचे जीने वालो् संख्या करीब साढ्ेचार लाख है। वकसानो् पर 160.60 करोड्र्पए कज्षहै। पंचकुला, यहां शहरी ववकास के नाम पर बड्े पैमाने पर जमीन का अवधग्ह् ण हुआ। यहां भी वकसानो्पर साल 200203 तक 177.55 करोड् र्पए का कज्ष है। यहां गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालो् की संखय् ा लाखो्मे्है।’ ववकास का फलसफा समझाने वाले अक्सर कुछ पाने के वलए खोने की दुहाई देते है।् वनम्ाण ष के वलए ववध्वंस वकए जाने की बात दुहराते है्। कुछ लोग तो इसे अंधववश््ास के सीमा तक ले जाते है् और कहते है्वक अगर वकसी बड्ेपुल या बांध का वनम्ाण ष करना है तो वकसी न वकसी की बवल देनी ही पड्ती है। यहां बवल का र्पक बेहद प््तीकात्मक बन गया है। चाहे वह बवल धाव्मक ष र्प से दी जाए या न दी जाए। लेवकन राजनीवतक तौर पर जमीन हवथयाने के संघर्ष मे् गरीब वकसानो् और उन्ही् के पवरवार से वनकले वसपावहयो् की जाने् ही तो जाती है।् यह वसलवसला उड्ीसा के काशीपुर, वनयामवगवर, पव््िम बंगाल के वसंगरु , नंदीग््ाम ,उत्र् प्द् श े के भट््ा पारसौल, घोड्ी, बछेड्ा, दादरी, महाराष्् के रायगढ्, मध्यप््देश के बड्वानी, हवरयाणा के गोरखपुर, तवमलनाडु के कुडनकुलम तक जारी है। लेवकन सवाल यह है वक मोदी सरकार की योजनाओ्को लागू करने के वलए वजतने बड्ेपैमाने पर भूवम अवधग्ह् ण की जर्रत है। इसकी हकीकत को जाने-समझे वबना ववकास, इसके वलए होने वाले संघर्ष और इससे वनकलने वाली राजनीवत का अंदाजा नही् लगाया जा सकता। यही वजह है वक वजस भारतीय जनता पाट््ी ने एक साल पहले (2013 मे)् भूवम अवधग्ह् ण अवधवनयम 1894 मे् संशोधन का समथ्षन वकया। इस नए कानून को तैयार करने वाली संसदीय सवमवत की अध्यक््स्वयं लोकसभा की मौजूदा अध्यक््सुवमत््ा महाजन थी्। लेवकन सत््ा मे् आने के बाद वह उसी कानून मे् संशोधन के वलए सारी संसदीय नैवतकता को ताक पर रखे जा रही है। यह बात अब पूरी तरह से साफ है वक जब 2013 मे् भूवम अवधग्ह् ण,पुनव्ास ष और पुनब्स ष ावट मे्उवचत मुआवजा और पारदव्शतष ा का अवधकार संबंधी कानून पास होने के बाद सबसे ज्यादा वदक््त कॉरपोरेट घरानो् और बहुराष््ीय कंपवनयो् को हुयी। यह कानून वकसानो् के दबाव और संघर्षके बाद पास हुआ था। वकसान भरोसे मे् थे वक ‘अच्छे वदन’ का वादा कर रहे नरेद् ्मोदी जब प्ध ् ानमंत्ी बनेग् े तो वे कम से कम वकसानो्के पक्् मे् सवा सौ साल बाद बने एक कानून को पलटेग् े नही्। लेवकन हुआ उल्टा। प््धानमंत्ी नरे्द् मोदी
वकसानो्का ‘अच्छे वदन’ लाने के बजाए कॉरपोरेट घरानो्का ‘अच्छे वदन’ लाने मे्जुट गए। जावहर है उस कानून से कॉरपोरेट घराने यूपीए सरकार से नाराज थे। मोदी ने उनसे परोक््तौर पर वादा कर रखा था वक वे उनकी नाराजगी दूर करेग् ।े यही वजह है वक मोदी सरकार 2013 के भूवम अवधग््हण कानून मे् संशोधन करने के वलए जब संसद मे्कामयाबी वमलती नही्देखी, तो इसके वलए अध्यादेश का रास््ा चुना। हालांवक लोकसभा से वह संशोधन पावरत करवा चुकी है। लेवकन राज्यसभा मे् सरकार का बहुमत न होने के कारण वह अध्यादेश को पांच अप्ल ्ै से पहले वफर से लाने पर मजबूर हुई। सरकार का यह कदम सरासर संवैधावनक भावना के वखलाफ है। डीसी वाधवा बनाम वबहार सरकार के मुकदमे मे् सुप्ीम कोट्ष 1986 मे् इसमे् अपनी वटप्पणी दी। इसमे् एक संवधै ावनक संसथ् ा के परोक््तौर वह काम नही्करने की बात की गई वजसे वह प्त्य् क््तौर पर नही्कर सकती। यहां सवाल उससे भी बड्ा यह है वक सरकार वजस संशोधन को पावरत करवाने मे्जुटी है वह न वसफ्फवकसानो्को साल भर पहले वमले हक मे्छीन रही है, बब्लक इस संशोधन की आड्मे्देश की खेती और वकसानी को तबाह भी लगी है। इस कानून के पास होने के बाद धारा-10 ए के तहत वजन पांच वकस्म की पवरयोजनाओ्को ववशेर श्ण ्े ी मे्डाला गया है। इनके वलए सहमवत आवश्यक नही्बताई गयी है। वे देश की खेती की बड्ी जमीन हवथयाने जा रही्है।् अवखल भारतीय वकसान सभा के आंकड्ो्के मुतावबक सरकार चाहे जो दावा करे। लेवकन छह राज्यो् से गुजरने वाले वदल्ली-मुबं ई इंफ्ास्िक् च ् र कोवरडोर के तहत 14,41,726 वग्ष वकमी जमीन अवधग्ह् ण की जा सकती है।इसमे् करीब 500 फीसद जमीन खेती की है। भारतीय वकसान यूवनयन के राकेश वटकैत का कहना है वक सरकार कह रही है वक डीएमआइसी के वलए दोनो् तरफ महज एक वकलोमीटर जमीन का अवधग्ह् ण होगा। लेवकन यह भ््ामक है। इसके वलए जापान सरकार से 90 अरब डालर का समझौता हुआ है और इसके तहत दोनो्तरफ कम से कम डेढ्सौ वकमी जमीन अवधग्व्हत की जाएगी। ऐसा हुआ तो देश की खेती लायक 31 फीसद जमीन का इन पवरयोजनाओ् मे्जाने का खतरा है। इस समय भारत का कुल लैड् मास 32,87,590 वग्ष वकमी है। उसमे् से 5, 75,556 वग्षवकमी जमीन अवधग्ह् ण के वनशाने पर है। यह वहस्सा कुल लैड् मास का 17.5 फीसद बैठता है। लेवकन अगर यही आंकड्ा 17,99,000 वग्ष वकमी खेती लायक जमीन के वलहाज से देखा जाए तो इसका अनुपात 31.9 प्व्तशत बैठता है। (एनएपीएम के आंकड्ो् के अनुसार) जहां तक डेडीकेटडे फ््ाइट कॉवरडोर के जमीन वलए जाने का मामला है तो उसके वलए 10,667 हेकट् ये र जमीन चावहए और 8000 हेकट् ये र जमीन ली जा चुकी है। इनमे्महाराष््इंडस्व्ियल डेवलपमेट् कॉरपोरेशन दो लाख एकड्, आंध्प्द् श े 1.4 लाख एकड्, गुजरात एक लाख एकड्जमीन ले चुका है।
दरअसल, हमारी सरकार औद््ोवगकीकरण के बहाने उन्ही्हालात मे्जा रही है जहां सत्ह् वी्और अठारहवी्सदी मे्यूरोप के देश और बीसवी्सदी मे् उनके गुलाम देश थे। वह 1625 के उस इवमने्ट डोमेन(श्ष ्े त् म प्भ् तु व् ) के वसद््ातं का सहारा ले रही है। इसका आज के लोकतंत्मे्कोई जगह नही् होना चावहए। इस वसद््ातं को हालैड ् के वववधवेत्ा ह्ग्ू ो ग््ोटस ने वदया था। इस वसद््ातं के तहत राज्य या राष््ीय सरकार को यह अवधकार है वक वह साव्षजवनक इस््ेमाल के वलए वनजी संपव््त ले
जब 2013 मेंभूरम अरधगंहं ण, पुनवंास ा और पुनबंस ा ावर मेंउरचत मुआवजा और पारदरंशता ा का अरधकार संबध ं ी कानून पास होने के बाद जंयादा रदकंतं कॉरपोरेर घरानों और बहुराषंंीय कंपरनयोंको हुई।
वलए भौवतक संसाधनो्के ऐसे प्ब् धं न की बात करते है् वजससे सामूवहक वहत का सव््ोत््म तरीके से संवध्षन हो। इसी तरह 48 मे् कृवर व्यवस्था को आधुवनक और वैज्ावनक तरीके से ववकवसत करने की बात है। संसद के शीतकालीन सत्् मे् वदल्ली मे् भूवम अवधग्ह् ण अध्यादेश के ववरोध की बाढ्आ गई थी। कांगस ्े , भाकपा माले और समाजवादी संगठनो्का नया मंच एआईपीएफ , माकपा, भाकपा, समाजवादी संगठन ववरोध मे् शावमल रहे। अन्ना हजारे से लेकर मेधा पाटकर और पीवी राजगोपाल तक सभी धरना और प्द् श्नष कर रहे थे। भारतीय वकसान यूवनयन ने भी तीन वदनो्तक मोच्ाष संभाले रखा। भाकपा-माले के राष््ीय महासवचव दीपंकर भट््ाचाय्ष ने कहा वक सरकार का भूवम अध्यादेश वकसानो्की जमीन हड्पने वाला अध्यादेश है।इस मुद्े पर जनांदोलनो् की ताकतो् की जो व्यापक एकता बन रही है, उसके जवरए यह लड्ाई वनव््ित
िकसान के बुरे ििन : कहां जाई का करी
सकती है। वह न वसफ्फ स्वयं इस अवधकार का इस््ेमाल कर सकती है बब्लक इस अवधकार को नगर पावलका और दूसरे वनकायो्को भी स्थानांतवरत कर सकती है। अंगज ्े ो्ने इसी वसद््ातं के तहत भारत पर शासन वकया। इसी के तहत साल 1824 मे् पहली बार आधुवनक भारत मे् भूवम का अवधग्ह् ण वकया। उन्हो्ने इसे फोट्षवववलयम के आसपास भी लागू वकया। इसे 1850 मे् कोलकाता पर भी लागू वकया। समाजशास््ी और आम आदमी पाट््ी के नेता प््ोफेसर आनंद कुमार बताते है्वक इस संशोधन से हमारे संववधान के छह अनुचछ ् दे ो् 19,31,38,40 और 48 के प््ावधानो्की एक साथ अवहेलना होती है। अनुचछ ् दे 19 आजीववका और कारोबार का हक, 31 संपव््त के उवचत प््बंध मे् लोकवहत की शत्ष लगाता है। जबवक 38 और 39 लोक कल्याण के
तौर पर जीती जाएगी।अध्यादेश के प्व्त देश भर मे् नाराजगी की बात कहते हुए समाजवादी नेता और अन्ना हजारे के साथी डा सुनीलम कहते है्,`इस समय देश मे्कोई भी राज्य ऐसा नही्है जहां भूवम अवधग््हण अध्यादेश के वखलाफ प््दश्षन नही् हो रहा। भाकपा, माकपा समेत अन्य वामपंथी ही नही् पव््िम बंगाल मे् उनकी प््वतद््ंद्ी पाट््ी तृणमूल कांग्ेस भी इसके वखलाफ है। यूथ कांग्ेस ने भी ववरोध प्द् श्नष का रास््ा पकड्वलया है। यह मुद्ा जोर पकड्रहा है और गैर भाजपा संगठन एकजुट हो रहे है।् जन आंदोलनो्के राष््ीय समन्वय ने भी मोच्ाष खोल वदया है। साम्यवादी, समाजवादी और सव््ोदयी पहले से ही नारा लगाते रहे है्वक धन और धरती बंट कर रहेगी। आज उनकी बात नए वसरे से प््ासंवगक हो रही है। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 13
आवरण कथा
मौत पाता अन्नदाता
रबी की फसल बब्बदा होने से मैनपुरी मे्चबर ककसबनो्की जीवनलीलब समबप्त हो गयी। यह समबजवबदी पबर््ी के मुकियब मुलबयम कसंह कब इलबकब है, जहबं ककसबन कबलकुल हतबश है.। लेककन सरकबर ककसबनो् की मौत को सबमबन्य मौत ही मबनती है। शंभूनाथ शुकुल
ए
नएच-91 पर वदल्ली से वनकल, गावजयाबाद पार करते ही जब ऊंची-ऊंची मल्टी स्टोरी िबव्लडंग का वसलवसला खत्म होता है। तब शुर्होता है हरे-भरे खेतो्, तालाबो् और आम के बगीचो् का अंतहीन क््म। दादरी, वसकंद्ाबाद, बुलंदशहर और खुजा्ष पार करने के बाद, जैसे ही आप अलीगढ्शहर पार करते ही बुझे-बुझे चेहरो्वाले वकसान देखकर वनराशा होने लगती है। यही है वह अन्नदाता की सूरत वजसके बूते अपना देश कृवर प््धान देश कहा जाता है। खेतो् की हवरयाली सूखने लगती है और बगीचो्की जगह करील और बबूल के पेड्इस पूरे मैदान को बंजर, ऊसर की शक्ल देते है्। वसकंदर राऊ को एटा पहुंचते ही इस बात का अहसास होने लगता है वक वकसान इस देश की सबसे जड्हीन कौम है। जमीन जमी्दार की और पानी सरकार का। छोटी-छोटी जोते् और मवरयल-सी गोई् (बैलो् की जोड्ी) के बूते यही अन्नदाता न अपना पेट भर पाता 14 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
है न अपने पवरवार का तो यह देश का,पेट भला कैसे भरेगा। हर राजनीवतक दल और नेता इनके वहत को ही देश का वहत बताता है। लेवकन वसफ्फ बातो् के जवरए। राज्य सरकार राहत के नाम पर मजाक करती है। के्द् बाते् भले करे। लेवकन वकसान तक राहत कैसे पहुंचेगी, इसका कोई खाका उसके पास नही्है। एटा के बाद कुरावली और इसके बाद है भोगांव। अब जरा हाई-वे से उतर आइए और रोड के दायी्तरफ मुड्कर आप मैनपुरी की तरफ चले्। दन्नाहार क््ेत्के महटौली के वकसान सुशील दुबे के पास महज साढ्े तीन बीघा जमीन थी। यानी महज पौन एकड्। जो कुछ जोता-बोया था। सब दैव की भे्ट चढ्गया। मौसम चक््ऐसा वबगड्ा वक पूरी रबी की फसल पकने के बाद बावरश लील गई। अधेड् सुशील को लड्के की ऊंची पढ्ाई खावतर फीस का इंतजाम करना था। बहन की शादी करनी थी। बेटी को काॅलेज भेजना था। मुब्शकलो् का सामना करने
की वहम्मत वह नही्जुटा पाया। न ही अपनी फसल की बब्ाषदी का मातम कर पाया। बताते है् वक खेत पर ही उसने कोई जहर खा वलया। घर तक जब तक उसे लाया जाता, सुशील दम तोड्चुका था। वटंडौल के मजरे सीतापुर का राजे्द् यादव भी अपनी साढ्े चार बीघा जमीन पर उगी फसल की तबाही देखकर ऐसा सदमे् मे् आया वक उसे हाट्ष अटैक पड् गया। अस्पताल ले जाने के पूव्षही उसके प््ाण-पखेर्उड् गए। कुर्ाष ल्लाक के सहन गांव के वशवराम वसंह अपनी 18 बीघा जमीन पर लहलहाती गेहूं की फसल की बब्ाषदी को देखकर खड्े-खड्े वगरे और मर गए। वह साठ साल के थे। कोतवाली क््ेत् के नगला गुरबक्श के गोरेलाल को अपनी तीन बीघा रबी की फसल के चौपट हो जाने से सदमा लगा और अंत मे्एक वदन उन्हो्ने दम तोड्वदया। यह सब उस क््ेत् मे् हुआ जो सपा सुप्ीमो मुलायम वसंह यादव का गढ् है। उत््र प््देश की मौजूदा सरकार का हाड्षकोर इलाका। यानी वजला मैनपुरी के चार वकसानो् ने दम तोड्ा पर सरकारी
हल्के मे्वसफ्फइतना हुआ वक लेखपाल ने कानूनगो को बताया। उसने नायब तहसीलदार को और वफर तहसीलदार के जवरए एसडीएम और डीएम को मैसेज वकया। तब डीएम ने सीएम को खबर दी। लेवकन इसके अलावा कुछ नही्हुआ। मैनपुरी के इन चारो् वकसानो् की यह दुखद मौत 11अप््ैल को हुई। सरकार इन्हे् स्वाभाववक मौते्मान रही है। वह कतई नही्मान रही वक एक के बाद एक मौते् भले ही वे सदमे से हुई हो् या तकनीकी र्प से हाट्ष अटैक से है। लेवकन उपजी बब्ाषद फसल की हताशा से है्। लेवकन सरकार की शल्दावली और आंकड्े माहौल से ज्यादा वलवखत सबूत को मानते है्। इसवलए सरकार की नजर मे्ये सामान्य मौते् है्। चूंवक सरकार सामान्य मौत के वलए कुछ नही्कर सकती इसवलए वह चुप है। पर राजनीवत की नजर से देखे् तो यह सरकार की असफलता है। अगर सामान्य मौते् भी संख्या पार कर रही है्, तो कुछ बात दीगर है। मगर अब राजनीवतक दल भी आंख मूंदे है्। यह सरकार और राजनेताओ् की यथाब्सथवत का हामी बन जाने का संकेत है्। यानी वकसान आज की राजनीवत के हावशए पर आ गया है। कभी लै्ड एक्वीवजशन वबल तो कभी धारा चार और छह का डर उसे सताता है। तो कभी जमीन कुक्फकर वलए जाने की मुनादी। यह वकतने शम्ष की बात है वक सरकार ने अभी तक लगाना मुआफी और आबपाशी नही्लेने का वायदा तक नही्वकया है। इन चारो्वकसानो्मे्एक बात काॅमन थी वक ये सब छोटी जोत वाले वकसान थे। इनमे्से वकसी के भी पास दस एकड्तक जमीन नही्थी। जावहर है ये कैश क््ॉप्स नही्। बब्लक अपने जीवनयापन के वलए ही खेती कर रहे थे। राजनीवतक और सुधी संपादक अक्सर वकसानो् की आत्महत्या पर एक बड्ा ही थोथा तक्फ देते है् वक नगदी फसले् बोने वाले बड्े भूवमधर फाम्ष हाउस चलाने वाले ही आत्महत्या करते है्। मानो्वकसान कोई वनवेशक हो। पर इस बार तो ये सारे वकसान दो से पांच बीघे वाले है्। वजनके वलए वकसानी उनका रोजगार था और रोजीरोटी का जुगाड् भी। दरअसल गांव की हकीकत न
सरकार सामानंय मौत के रलए कुछ नहींकर सकती इसरलए वह चुप है। पर राजनीरत की नजर से देखेंतो यह सरकार का फेलयं ोर है। अगर सामानंय मौतेंभी संखयं ा पार कर रही है,ं तो कुछ बात दीगर है। जानने वाले ही ऐसे पोच तक्फदेते है्। उन्हे्नही्पता वक गांवो्मे्वसफ्फदस या पंद्ह फीसद लोग ही दस एकड् से अवधक वाले वकसान होते है्। बाकी मे् वकसी के एक बीघा और उससे भी कम की जोत होती है। और चूंवक वे वकसानी के अलावा और कोई काम नही्जानते इसवलए या तो वे खेवतहर मजदूरी करते है् या बटाई या वतहाई पर लेकर वकसानी करते है्। कुछ ऐसे भी होते है्जो कज्षलेकर वकसी बड्ेऔर गांवो् मे् न रहने वाले भूवमधर, वजन्हे् अल्सै्ि्ी लै्ड लाड्ष कहते है्, की जमीन वकराए यानी वक बनकट पर लेकर खेती करते है्। यह जमीन एक साल के वलए वकराए पर ली जाती है। अब उस जमीन का भूवमधर तो पैसा लेकर चला गया और वफर फसल नि्् हो जाए, जल जाए उस भूवमधर का कुछ नही् वबगड्ता जो कुछ बनता-वबगड्ता है इसी वकसान का। ऐसी हालत मे् वकसान सदमे का वशकार नही् हो तो क्या करे। इस साल के कृवर चक््मे्जुलाई-अगस््सूखे मे् वनकल गए थे। इस वजह से खरीफ की फसल वकसान बो नही् पाया था। माच्ष-अप््ैल मे् ऐसी बावरश, आंधी और ओला का प््कोप पड्ा है वक रबी की फसल मे् कुछ बचा नही्। दो-दो फसलो् की बब्ाषदी वकसी भी वकसान का दम उखाड् देगा। खासकर उनकी वजनके पास वसफ्फदो या तीन बीघे ही खेत है् और जो अपने जीवन-यापन के वलए वकसानी पर ही आधावरत है्। बनकट और बटाई लेकर वे जो भी उपजाते है्वह सब तो दैव ले गया। उनके पास बचा क्या। लेवकन सरकार ने कभी भी इन सीमांत वकसानो् के वलए कुछ नही् सोचा। सरकारे्जमीन लेने के वलए वजस तरह की बाग््ेिनंग करती है्उससे भी फायदा उसी वकसान को होता है
वजसके पास जमीन खूब है पर वे वकसान जो वकसानी के वलए दूसरो्की जमीन पर वनभ्षर है्। उन्हे् न तो मुआवजे का फायदा होता है न जमीन की वबक््ी का। मजाक देवखए वक अगर फसल बब्ाषदी का मुआवजा वदया गया तो भी भरपाई जमीन के असली मावलक की होगी। बटाई या बनकट लेकर खेती करने वाले की नही्। तब वकसान को क्या लाभ वमला? सरकार के तक्फदोमुंहे है्वक हम वकसान को भूखे नही्मरने दे्गे, क्यो्वक न तो राज्य सरकारो्ने न के्द्ीय सरकार ने ऐसा कोई रास््ा वनकाला है वजससे वकसान वाकई भूखो्न मरे। यूपी, हवरयाणा और पंजाब के वकसानो्पर रबी का कहर टूटा है। यही् पर वह वकसान है जो रबी की भरपूर फसल लेता है। रबी की फसल से ही उसके बाकी साल का खच्ष चलता है। बच््ो् की पढ्ाई, बेटी की शादी, मकान की मरम्मत आवद। लेवकन जब रबी ही धोखा दे गई। तो वह क्या करे। प््धानमंत्ी नरे्द्मोदी कौशल ववकास की बात बड्े जोर-शोर से करते है्। लेवकन कौशल ववकास की वशक््ा कभी गांवो् के इन सीमांत वकसानो् को क्यो् नही् दी जाती। वह कौन-सा रास््ा है वजस पर चलकर वकसान को इस बदलते मौसम चक्् की मार से छुटकारा वमलेगा। आज एग््ो फील्ड मे् कौशल ववकास की अवधक जर्रत है बजाए औद््ोवगक क््ेत्के। मौसम चक््इस तरह बदल रहा है वक अक्सर प््शांत महासागर की लहरे्कभी अल नीनो् तो कभी कैटरीना तो कभी रीटा का कहर बरपाती है्। पूरी दुवनया का मौसम चक््बदल देती है्। प््शांत महासागर का असर अंटािट्षका पर भी पड्ता है और उत््री व दव््कणी ध््ुव की बफ्फ वपघलती है। तब आती है् वेस्टन्ष वडस्टब््ेस की सद््ीली व बफ््ीली हवाएं। इनसे भारत और पावकस््ान का मानसून बदल जाता है। नतीजा यह होता है वक बावरश वसतंबर के बाद पड्ती है और गम््ी जून के दूसरे हफ्ते से। सद््ी वदसंबर से। सरकार अपने कौशल ववकास का लाभ कृवर क््ेत् को दे। तावक मरता हुआ वकसान जीवंत हो उठे। वसफ्फ यही एक रास््ा है वकसानो् को बब्ाषदी से बचाने का। तावक सुखी से रहे अन्नदाता।
जंमीन छीनने का जंदरया रोगेुदु रादव यह वबल वकसान की जमीन छीनने का बहुत बड्ा जवरया है। देश मे् वकसान आंदोलन वबखरा हुआ है, वकसान ववरोध करने मे्अकेले सक््म नही्है। जर्रत है वकसान आंदोलनो्जन आंदोलनो्तथा आवदवावसयो् को एक साथ वमलकर नई शब्कत के साथ खड्ा वकया जाए। मेरे खुद के जीवन मे्गांव, खेती, वकसानो्को सवाल उठाना और उस पर नई राजनीवत को खड्ा करना काफी अहम है। क्यो्वक आज गांव मे्खेत उजड्रहे है्। वकसान मजूदर बनने के कगार पर कोई वकसान अपने बच््ो्को वकसान नही्बनाना चाहता। वजस प््कार कम्षचावरयो्को हर नए आयोग का फायदा वमलता है। वकसानो्की आमदनी का तो कोई
आयोग भी नही्है। इस अन्याय का प््वतकार करने के वलए राजनीवत ही एक ववकल्प है। मै्पहले वदन से भूवम अवधग््हण वबल का ववरोध कर रहा हूं। हवरयाणा के हर वजले, ल्लाको्मे् काय्षकत्ाषओ्के साथ वमलकर सामूवहक ववरोध वकया है, गांव खेती, वकसानो्के बारे मे्सो्चने वाले हर व्यब्कत को इसका ववरोध करना चावहए। वैसे भी अब खेती घाटे का सौदा है। उपर से यह वबल वकसान की जमीन वछनने का बहुत बड्ा जवरया है। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 15
आवरण कथा
फ़ाक़ाकशी से ख़ुदकुशी तक ज्यबदबतर सूिे से पीिड्त रहने वबले बुदं ल े िंड क्त ्े ्मे्बेमौसम बरसबत ने फसलो्को तबबह कर िदयब है और िकसबनो्की मौत कब िसलकसलब शुर्हो गयब है। ऊपर से बैक ् और सबहूकबरो्के कज्ाने हबलबत बदतर बनब िदए है। अब इलबके के लोग केद् ्और रबज्य सरकबर से मदद की बबर जोह रहे है।् हरीश चंदु
क
ई घरो्मे्चूल्हो्की आग ठंडी पड्गई है। लेवकन पेट के चूल्हे जल रहे है्। इनमे्भट््ी जल रही है। लेवकन आनाज का वह दाना नही् है। जो पके और बुंदेलखंड खाए और सोए। फसल की बब्ाषदी से बुंदेलखंड मे्मातम पसर गया है। कुदरत का कहर बरपा तो फसल चली गई। साहूकारो्और बै्क के कज्षकी सोच ने जान दे देने पर मजबूर कर वदया। लेवकन क्या सरकारी मदद और अवधकावरयो् की लापरवाही का अंधेरा इसी तरह पसरा रहेगा? वकसानो् की आत्महत्या पर लीपापोती और हेरफेर जारी है। ऐसे मे्बुंदेलखंड सूबे की सरकार और के्द् की मदद की बाट जोह रहा है। बुंदेलखंड के महोबा मे्पांच अप््ैल को वफर हुई बावरश से वकसानो् की बची खुची फसल भी तबाह हो गई। सदमे से वकसानो् की मौत का वसलवसला 16 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
वफर शुर् हो गया। फसले् बब्ाषद होने की वजह से कबरई थाना क््ेत् के मकरबई गांव का वकसान खुशहाली (42) यह सदमा नही्झेल सका। सदमे से उसकी मौत हो गई। थाना महोबकंठ इलाके के बम्हौरी कुव्मषन के हीरालाल(70) की भी मौत की वजह भी यही बना। इन दोनो्पर बैक ् और साहूकारो् का कज्ष था। फसल की बब्ाषदी ने इनकी जान ले ली। इसी तरह श््ीनगर थाना इलाके के अतरार ग््ाम पंचायत के टपरन मौजा वनवासी गयादीन कुशवाहा (55) की दो एकड्जमीन की फसल बब्ादष हो गई। कुशवाहा के ऊपर इलाहाबाद बै्क का 90 हजार र्पए और दो लाख साहूकारो् का कज्ष था। खेत देखने गए गयादीन के होश उड् गए। इस सदमे से वह चल बसा। यह बानगी है बुंदेलखंड मे्बेमौसम बरसात से हुई तबाही की। इसकी वजह से वकसानो्की मौत का वसलवसला जारी है। महोबा मे्ही बसौठ गांव वनवासी
दशाराम साहू (45) के पुत्हल्के के पास तीन बीघा जमीन थी। साहू ने कुछ जमीन बटांई पर वलया था। इस बार चना, मटर, मसूर आवद की फसलो् की बुवाई्कराई्थी। दो साल पहले उसने बेटी की शादी के वलए कज्षवलया था। अभी हाल मे्उसने मां की तेरहवी्भी कराई थी। आव्थषक ब्सथवत ठीक नही्होने और फसले् बब्ाषद होने से दशाराम काफी वदनो् से परेशान रहने लगा था। दो अप््ैल को वह खेत गया और बब्ाषद फसल को देखकर सदमे से वगर पडा। पास के खेतो्मे्मौजूद लोगो्ने इसकी खबर उसके घर वालो्को दी। उसे अस्पताल ले जाया गया। जहां डाक्टरो्ने उसे मृत बता कर वदया। दशाराम का बेटा उमेश बताता है वक फसल बब्ाषद होने और कज्षसे आवजज आकर वह परेशान रहने लगे थे। इसी सोच ने उनकी जान ले ली। इन घटनाओ्से बुंदेलखंड मे् वकसानो की बदहाली और त््ासदी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्द् श े का ककसान इन कदनो्बेमौसम बरसात, अंधड्और ओलावृक्ि से परेशान है। उसकी फसलो्को भारी नुकसान हुआ है। मुखय् मंत्ी श््ी अकिलेश यादव इनके प्क्त संवदे नशील है्और वे ककसानो्को तुरन्त राहत कदए जाने के कलए हर संभव प्य् ास कर रहे है।् उत्र् प्द् श े मे्कपछले तीन वर््ो्मे्समाजवादी सरकार ने ककसान, गांव और िेती को ही प््ाथकमकता मे् रिा है। 2015-16 के बजट मे्कृकर क्त्े ्के कलए 75 प्क्तशत धनराकश रिी गई है। इस वर्षको ककसान वर्षभी घोकरत ककया गया। समाजवादी सरकार ने 7,57,000 ककसानो्का 1779 करोड्र्पए का कज्षमाफ ककया। ककसानो्को मुफत् कसंचाई सुकवधा देने के साथ उनकी बंधक जमीन की नीलामी पर भी रोक लगाई है। ककसानो्को कम ब्याज दर पर फसली ऋण उपलब्ध कराने के कलए 150 करोड् र्पए की व्यवस्था की गई। कजन ककसानो्की प््ाकृकतक आपदा से फसले्नि््हुई है्उनको तत्काल राहत के कलए अब तक 500 करोड्र्पए की धनराकश आवंकटत की गई है। इसके अलावा भी कजलाकधकाकरयो्से कहा गया है कक वे ककसानो्को मदद देने के काम मे्तेजी लाएं। धन की कमी उसमे्बाधक नही्होनी चाकहए। राजेदं ंचौधरी, पंदं श े पंवं कंता, सपा
बुंदेलखंड मे् करीब 16 लाख वकसान राष््ीयकृत और सहकारी बैको् के आंकड्ो मे् कज्दष ार है।् बुदं ल े खंड मे्साहूकारो्ने करीब 9000 करोड् र्पए की रावश कज्ष मे् दी है। दूसरी ओर वपछले दस वर््ो् से सूखा, अकाल, बावरश, ओलावृव्ि ने यहां के वकसानो् को तबाह कर रखा है। यहां के वावशदो् का पलायन मजबूरी बन गया है। जो यहां बचे है् वह कज्ष के मज्ष से मर रहे है्। वकसान आत्महत्या करने को मजबूर है।् बीते ग्यारह साल मे् 3861 वकसानो् ने आत्महत्या की है। हर साल बुंदेलखंड इलाके मे्तीन सौ से ज्यादा वकसान आत्महत्या कर लेते है्। वकसानो् पर अध्ययन कर रहे आशीर सागर ने भारतीय वकसान यूवनयन की राष््ीय पंचायत मे्इसकी पूरी जानकारी दी। सागर बताते है्वक सूखा, ओलावृव्ि, बेरोजगारी, बीमारी के अलावा दूसरे कई वजहे् है् वजससे वकसान बुंदेलखंड मे्बडी संख्या मे्खुदकुशी कर रहा है। वचत््कूट धाम मंडल के वचत््कूट, बांदा, महोबा और हमीरपुर मे्अप्ल ्ै 2003 से 2006 तक 1040 वकसानो्ने कज्षऔर सूखे के कारण ख़ुदकुशी की। इसमे्बैको्और साहूकारो्से तंग आकर 46 ने और
गरीबी, भूखमरी से आवजज आकर 182 वकसानो् यह राह चुनी्। जानकारी के मुतावबक 2001 से 2006 तक 1275 और 2007 से 2010 तक 1351 पोस्टमाट्षम हुए। साल 2011 मे्521 आत्महत्याओ् की पुव्ि हुई है। साल 2012 मे् 300 से अवधक वकसान इहलीला खत्म कर चुके है्। वकसान बताते है् इसकी वजह कुछ प््ाकृवतक कारण है् तो अवधकांश वकसानो् का बै्को् से वलया कज्ष उनकी जान ले लेता है। वकसान बैको्का कज्षलेकर जमा नही् करते। बाद मे् यह ज्यादा गंभीर हो जाता है। रकम बड्ी हो जाती है। अक्सर चुनावो् मे् सभी राजनैवतक दल वकसानो्के कज््ो्को माफ करने की घोरणाएं करते है्। लेवकन असल मे् यह केवल चुनावी जुमला बनकर रह जाता है। कज्ष न चुकाने का यही एक बड्ा कारण सव््ेक्ण मे्सामने आया है। अवशव््कत मजदूरो्और वकसानो्के कंधे पर इलाकाई नेता अपनी राजनीवत की रोवटयां से्कते है्। मुआवजा, कज्षमाफी, दूसरे लालच मे्वकसान तमाम तरह के धरने और प््दश्षन मे्भी शावमल होते है्। इन सब के बीच वह मजदूरी के वलए पलायन भी करते है्। सूदखोरो्और बै्क का कज्षजाल उनकी वजंदगी को डंसने के वलए तैयार रहता है। अंवतम ववकल्प के तौर पर वकसान आत्महत्या कर लेता है। फसल की बब्ाषदी का मंजर देख 20 माच्ष को रामौतार कुशवाहा नाम के वकसान ने आत्महत्या कर ली। कुशवाहा बांदा वजले के अनथुआ गांव के रहने वाले थे। फसल की वनराशा ने वजंदगी ले ली। कज्ष और बेटी की शादी की वचंता ने आत्महत्या को मजबूर कर वदया। यह वसलवसला थमता नही्नजर आ रहा। कनवारा गांव के रामप््साद वनराद ने भी खुदकुशी कर वलया। अब हालत है वक उसके तीन मासूमो् के तन पर कपड्े तक नही् है्। वनराद की पत्नी कुछ पूछने पर वसफ्फरोने लगती है। वडग्गी गांव के वकसान देशराज भी फसल के सदमे से उबर नही्
पाए। 30 माच्षको खेत देखने गए वकसान की हालत वही खराब हो गई। अब हालत यह है वक देशराज की बेवटयां रामगानी, वकसनी,गीता और मीना उसके व््कया-कम्ष के वलए चंदा जुटा रही है्। बुंदेलखंड इलाके के महोबा मे्17, बांदा मे्18, वचत््कूट मे्4, हमीरपुर मे् 13, उरई मे् 28, झांसी मे् 12 ने आत्महत्या की है। मवई खुद्ष के धम््ेद्,मल्लू अनुरागी हो या कबरई का बद््ी , भरवारा का हरदयाल इन सबने फसल बब्ाषदी का मंजर देखकर आत्महत्या का रास््ा चुन वलया। सरकार मदद के नाम पर आंकड्े जुटाने मे् लगी है। कागजो् की फाइले्तैयार हो रही है्। मध्य प्द् श े और उत्र् प्द् श े के बुदं ल े खंड इलाके मे् खेती के हालात बुरी तरह वबगड् चुके है्। गरीबी,कुपोरण से जूझते इस क्त्े ्मे्बैक ् और सूदखोर साहूकार अब इन्हे्कज्षदेने से भी अपने हाथ खी्चने लगे है।् वकसानो्की राजनीवत करने वाले नेता इलाके से गायब हो चुके है्। उप्् और मध्य प््देश का यह इलाका अपने बदहाली से जूझ रहा है। कबरई के बुजगु ष्वकसान रामचंद्कहते है्वकसान वपछले बारह सालो्से बे-मौसम बावरश,ओलावृव्ि, सूखा से जूझ रहा है। आज वकसानो्के घरो्मे्खाने के लाले पड् गए है।् लेवकन नेता गायब है। जनवरी 2015 से 6 अप्ल ्ै तक वकसानो्की फसले्चौपट हो जाने से 40 वकसान आत्महत्या कर चुके है।् इतना ही नही्इन आंकड्ो्पर लीपापोती जारी है। शासन-प््शासन मे् बैठे अवधकारी इन आत्महत्याओ्पर भी सच मानने को तैयार नही्है्। वह इसे कज्ष और फसल बब्ाषद होने के सदमे से हुई मौत मानने को तैयार नही्है। अवधकारी भी सच कहने मे्परहेज करते वदखाई दे रहे है्। वकसान नेता सड्को्पर प््दश्षन व हल्ला मचाकर संघर्षके नाम पर वसफ्फ ज््ापन देकर फोटो वखंचवाने मे् लगे है्। इन हालात मे् मुआवजा रावश की बात दूर ही वदख n रही है। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 17
आवरण कथा
सबसे आगे सबसे मुखर
भूिम अिधग्ह् ण कब िवरोध करने मे्पक्िचम बंगबल कब नबम सबसे ऊपर है। ममतब बनज््ी कब िसयबसी ग््बफ इसी के सहबरे ऊचबई तक पहुचं ब है। रीता ततवारी
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व््िम बंगाल के संदभ्षमे्केद् ्के प्स ् ्ाववत भूवम अवधग्ह् ण अवधवनयम का खास महत्व है। देश के जो राज्य इस कानून के वखलाफ सबसे ज्यादा मुखर है्उनमे्बंगाल का नाम सबसे ऊपर है। दरअसल, यहां इसकी वजह भी है। नए उद््ोगो्की स्थापना के मामले मे्भले यह राज्य वपछड्ा हो और ममता बनज््ी की अगुवाई वाली तृणमूल कांगस ्े की अवधग्ह् ण नीवत को लेकर सवाल उठ रहे हो्, यह बात वकसी से वछपी नही् है वक मुख्यमंत्ी ममता बनज््ी के राजनीवतक कैवरयर का पूरा ग््ाफ भूवम अवधग््हण के ववरोध के सहारे ही इस ऊंचाई तक पहुच ं ा है। नंदीग््ाम और वसंगुर मे् भूवम अवधग््हण के वखलाफ उनकी पाट््ी तृणमूल कांग्ेस के आंदोलन के चलते ही भारी वहंसा हुई थी और टाटा को अपनी लखटवकया कार पवरयोजना नैनो का बोवरया-वबस््र समेट कर गुजरात जाना पड्ा था। ममता के इस आंदोलन से बंगाल को औद््ोवगकीकरण और नए वनवेशो् के मामले मे् वकतना धक््ा लगा, यह अलग चच्ाष का ववरय है। लेवकन इन आंदोलनो् ने ममता को न वसफ्फ देश-ववदेश मे् लोकव््पयता वदलाई बब्लक वर्ष 2011 के ववधानसभा चुनावो्मे्उनको भारी बहुमत से राज्य की सत््ा भी वदलाई। ममता ने सत््ा मे्आते ही भूवम अवधग्ह् ण कानून मे्न वसफ्फसंशोधन वकया बब्लक यह भी साफ कर वदया वक वकसी भी पवरयोजना के वलए वकसानो्की जमीन का जबरन अवधग्ह् ण नही्वकया जा सकता। यही नही्, उन्हो्ने नए उद््ोगो्की स्थापना के मामले मे्जमीन के अवध ग्ह् ण से सरकार का पल्ला झाड्ते हुए कहा वक उद््ोगपवतयो्को खुद वकसानो्से जमीन खरीदनी होगी। उनके इस र्ख से राज्य मे्नए वनवेश को भारी झटका लगा है। लोग खुद जमीन अवधग्ह् ण करने से वहचवकचा रहे है।् वाममोच्ाष सरकार के जमाने मे् पव््िम बंगाल औद््ोवगक ववकास वनगम ही उद््ोगपवतयो् को नई पवरयोजनाएं लगाने के वलए जमीन का अवधग्ह् ण कर उनको लीज पर सौ्पता था। ममता ने इस परंपरा को खत्म कर वदया। नतीजतन नए वनवेश तो दूर, राज्य से उद््ोगो्का पलायन शुर्हो गया है। माकपा नेता ववमान बसु सवाल करते है,् अगर जमीन का अवधग्ह् ण नही्वकया जाएगा तो उद््ोग क्या आसमान पर लगेग् ।े ववपक््ी राजनीवतक दलो्का आरोप है वक पाट््ी मे्सव््कय दलाल वकस्म के नेताओ्की कमाई का रास््ा साफ करने के वलए ही सरकार ने उद््ोगपवतयो्को वकसानो्से सीधे जमीन खरीदने को कहा है। ममता के वसर पर लगा वसंगरु का कलंक अब तक नही्धुल सका है। ममता के आंदोलन के चलते ही टाटा ने अपनी लखटवकया कार पवरयोजना वसंगरु से हटा ली थी। ऐसे मे्वकसी भी बड्ेवनवेशक के वलए वसंगरु एक बड्ा सवाल है। यही वजह है वक जनवरी मे्हुए वैव्शक वनवेश सम्मल े न के दौरान वनम्ाण ष क्त्े ् मे् वकसी बड्े वनवेश का प््स्ाव नही् वमला। बावजूद इसके ममता जमीन के अवधग्ह् ण के बारे मे्अपने र्ख पर अड्ी है।् सीपीएम नेता सूयक ष् ांत वमश््कहते है,् ‘ममता ने वसंगरु से नैनो को भगाया है। अब जब तक ममता गद््ी से नही्हटती्, यहां कोई बड्ा वनवेश नही्आएगा।’ उद््ोग जगत का कहना है वक सरकार जब तक अपनी जमीन संबध ं ी नीवत नही्बदलेगी तब तक राज्य मे्कोई बड्ा वनवेश होना मुबश् कल है। सम्मल े न मे्वशरकत करने वाले एक उद््ोगपवत ने नाम नही् 18 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
कोलकािा मेंिवरोध पंंिशंटन करिींममिा बनजंंी : नीिि के सवाल
बताने की शत्षपर कहा, ‘दलालो्और सत््ाधारी पाट््ी के वबचौवलयो्की दादागीरी की वजह से वकसी वनवेशक के वलए सीधे जमीन खरीदना मुबश् कल है। लेवकन ममता सरकार ने इस मामले मे्हाथ खड्ेकर वलए है।् ’ उनका सवाल है वक ऐसे मे्कोई वनवेशक यहां आकर आवखर क्यो्वसरदद्षमोल लेगा ? बावजूद इसके ममता का र्ख जस का तस है। उन्हो्ने केद् ् के प्स ् ्ाववत कानून के ववरोध मे् अपनी कमर कस ली है। दरअसल, उनके पास ऐसा करने की अपनी वजहे्है।् उनकी पहली आपव््त तो इस मुद्े पर है वक कुछ खास पवरयोजनाओ् के वलए सरकार वकसी की भी जमीन का अवधग््हण कर सकती है। इसके अलावा खासकर मुआवजे संबध ं ी प्स ् ्ाव को लागू करने की हालत मे्सरकार के वलए भारी मुसीबत पैदा हो जाएगी। वमसाल के तौर पर बुदद् वे भट््ाचाय्षकी अगुवाई वाली तत्कालीन वाममोच्ाष ने वर्ष2006 मे्जब वसंगरु मे्जमीन का अवधग्ह् ण वकया था तब नौ से 12 लाख र्पए प्व्त एकड्की दर से उसका मुआवजा वदया गया था। नए प््ावधानो् के मुतावबक, अगर वहां के वकसानो् को मुआवजे देना पड्ा तो यह कम से कम एक करोड्र्पया प्व्त एकड्होगा. अब ममता का पूरा जोर केद् ्के प्स ् ्ाववत कानून का ववरोध करने पर है। इसके वलए वे और उनकी पाट््ी कोलकाता से वदल्ली तक रैवलयां आयोवजत कर चुकी है।् ममता कहती है्वक यह एक काला कानून है। हम अपने राज्य मे्इसे कभी लागू नही्करेग् ।े उनका कहना है वक राज्य मे्वकसानो्की जमीन का जबरन अवधग्ह् ण नही्वकया जा सकता और सरकार अपने इस र्ख पर कायम है। ममता राज्य मे् ववशेर आव्थक ष क्त्े ् यानी सेज के भी वखलाफ है।् उनके इस रवैए की वजह से राज्य मे् ववप््ो और इन्फोवसस समेत कई पवरयोजनाएं लंवबत पड्ी है।् जनवरी मे्यहां आयोवजत वनवेशक सम्मल े न मे्भी ममता ने उद््ोगपवतयो्से साफ कह वदया वक सरकार उद््ोगो्की स्थापना मे्हरसंभव सहयोग देगी, लेवकन इसके वलए उनको वकसानो्से सीधे जमीन खरीदनी होगी। उनका कहना था वक सरकार के लैड ् बैक ् मे्हजारो्एकड्जमीन है। वहां से वनवेशको्को जमीन आवंवटत की जा सकती है। लेवकन ववपक्् का कहना है वक हजारो् करोड् का वनवेश करने वाले को अपनी मज््ी से जगह चुनने का अवधकार है। आधारभूत ढांचे को ध्यान मे्रखे वबना कही्भी उद््ोग नही्लगाए जा सकते। लेवकन ममता का कहना है वक उद््ोगो् के वलए वकसानो् के वहतो् की बवल नही् चढ्ाई जा सकती। दो-तीन फसलो्वाली जमीन पर उद््ोग लगाना घाटे का सौदा है। ममता केद् ्सरकार के भूवम अध्यादेश को काला कानून करार देते हुए कहती है्वक इसके लागू होने पर सरकार बंदक ू की नो्क पर जमीन छीन लेगी। उन्हो्ने इस अध्यादेश को रद््करने और मरते दम तक इसका ववरोध करने की भी बात कही है। ऐसे मे्तमाम औद््ोवगक वपछड्पे न के बावजूद कम से कम बंगाल मे्तो n मोदी सरकार का यह कानून लागू होने से रहा।
सुनीलम
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रे्द्मोदी के प््धानमंत्ी पद के प््त्याशी होने की घोरणा के साथ ही देश भर मे् गौतम अडानी का नाम भी चच्ाष मे्आ गया था। कांग्ेस के प््धानमंत्ी पद के प््त्याशी राहुल गांधी ने चुनावी भारणो्मे्अडानी समूह को कौव्डयो्के भाव जमीन देने के मुद्े को बार-बार उठाया। राष््ीय स््र पर चच्ाष के चार साल पहले अडानी मध्य प््देश मे्तब चच्ाष मे्आए जब उन्हे्भाजपा सरकार ने 2010 मे् वकसानो् से मध्य प््देश ववद््ुत मंडल की ओर से पावर प््ोजेकट् लगाने के वलए जमीन वदलवायी। यहां वकसानो्से तीन से दस हजार प््वत एकड्की दर पर खरीदी गई जमीन को 13 लाख र्पए प््वत एकड्की दर पर अडानी के पावर प््ोजेकट् के वलए बे्च वदया। यह जमीन 24 साल पहले पांच गांवो्चौसरा, टेका चांवरी, डांगावानी, पवररीया तथा धनीरा के ग््ामवावसयो् के पवरवार के एक सदस्य को नौकरी देने के वादे के साथ अवधग््हीत की गई थी। प््भाववत वकसानो्को वनशुल्क वबजली और क््ेत्के वकसानो् को लागत मूल्य पर वबजली उपलल्ध कराने की भी बात कही गई थी। उस समय लागत मूल्य 50 पैसा प््वत यूवनट थी। सव््ोच्् न्यायालय से दादरी मे् वरलाएंस पावर प््ोजेकट् सवहत वववभन्न पवरयोजनाओ्मे्भू-अज्नष के उद्श्े य् बताने के चलते वकसानो्को जमीन वापस वदए जाने के फैसले वकए जा चुके है।् इस वजह से अडानी को वकया गया भूवम आवंटन गैर कानूनी है। 1986 मे् मध्य प््देश ववद््ुत मण्डल ने वबजली कारखाना स्थावपत करने और ववद्त्ु ग्ह् के कम्च ष ावरयो्के वलए कॉलोनी बनाने के उद्श्े य् से भूवम अवधग्ह् ीत की थी। अडानी पाॅवर प््ोजेकट् का वनम्ाण ष काय्षशुर्करने के वलए 52 एकड्के जंगल पर कल्जा कर चार मंवजला प्श ् ासवनक भवन का वनम्ाण ष कर वदया गया। शासन के समक््मामले की वशकायत की गई। इस पर मेधा पाटकर के साथ पय्ावष रण मंती् जयराम रमेश और जयंती नटराजन ने अवतक्म् ण और वनम्ाण ष को अवैध घोवरत कर वबना अनुमवत के कोई वनम्ाण ष न करने की बात कही। लेवकन आज तक अवतक्म् ण की भूवम पर खड्ी इमारत को नही्तोड्ा गया। अडानी प्ब् धं को्ने गांवो्के साव्ज ष वनक रास््ो,् कुओ ं ्यहां तक वक मरघट पर भी कल्जा कर वलया है। पावर प््ोजेक्ट के पय्ावष रण पर पड्ने वाले ववपरीत प्भ् ावो्के मुद्ेको लेकर वकसान संघर्षसवमवत के सदस्य नेशनल ग््ीन व््िल्यूनल मे् गए। यहां ववरष्् अवधवक्ता संजय पावरख ने भी यही बताया वक पेच ् अभ्यारण्य, पेच ् नदी और आस-पास की खेती की जमीन पर पवरयोजना का ववपरीत असर पड्ेगा। प््बंधको् ने वमयाद का सवाल उठाया वजसे व््िल्यूनल ने अस्वीकार कर वदया। प्ब् धं क उच्त् म न्यायालय गए। न्यायालय ने भी यह माना वक यावचका समय सीमा के अंदर प्स ् त्ु की है जो अभी ग््ीन व््िल्यनू ल मे्लंवबत है। प््ोजेक्ट से प््भाववत वकसानो् को रोजगार और वनशुल्क वबजली देना तो दूर उनके पुनव्ाषस की भी व्यवस्था नही् की गयी। मध्य प््देश शासन ने
अडानी की पदरयोजनाओंका िवरोध : जंमीनी मुदंे
लूट का नाम अडानी मध्य प्द् श े मे्अडबनी की कबजली पकरयोजनब ज़मीन, जंगल, रबस््ो,् कुओ्और मरघरो् तक पर क़ब्ज़ब कर चुकी है हबलबंिक ककसबनो्के कवरोध के कबरण कफलहबल पकरयोजनब पर कबम ठप है। अडानी के साथ समझौते मे्ये उल्लेख वकया है वक पुनव्ाषस की वजम्मेदारी प््बंधको्की नही्है। अडानी ने केवल जमीने् ही नही् बब्लक पे्च व्यवत्षन पवरयोजना के मांचागोरा ब्सथत बांध के पानी को भी खरीदने का समझौता जल संसाधन ववभाग से वकया है। पे्च व्यवत्षन पवरयोजना 1988 मे् वसंचाई के उद््ेश्य से शुर्की गई थी। इस पवरयोजना के वलए 31 गांवो् की जमीने् अवधग््हीत वकए जाने का वसलवसला 2004 से चल रहा है। इस पवरयोजना का 50 हजार प््भाववत वकसान पुरजोर ववरोध कर रहे है।् इसके चलते सरकार द््ारा पवरयोजना बंद कर पवरयोजना से जुड्े कम्षचावरयो् का तबादला बांणसागर पवरयोजना मे् वकया गया था। अडानी द््ारा सरकार पर पानी का समझौता लागू करने के वलए दबाव डालने पर सरकार ने मांचागोरा बांध का काम शुर् करने का फैसला वकया। पय्ाषवरण मंत्ालय ने 16 अक्टबू र 2012 को अपनी मंजरू ी दी। हालांवक अडानी ने प््भाववत वकसानो् को एक लाख र्पए प््वत एकड् की सांत्वना दी। लेवकन वकसानो्ने जमीन पर अभी तक अपना कल्जा नही् छोड्ा है। वकसानो् ने लंबे संघर्ष के बाद नए भूवम
अवधग््हण कानून के र्प मे् सफलता पायी। नए कानून की धारा 24 के मुतावबक कल्जाधारी वकसानो् को अपनी जमीन की मावलकी वफर से हावसल हो चुकी है। मोदी सरकार ने भले ही अध्यादेश लागू कर वदया हो लेवकन कानूनी तौर पर वकसानो्की मावलकी आज भी कायम है। वफलहाल अडानी पावर प््ोजेक्ट के प्लांट का काम बंद है। दो सप्ताह पहले मध्य प््देश के मंव्त मंडल ने अडानी को 70 एकड् भूवम आवंवटत की। हालांवक वपछले चार सालो्मे्अडानी पावर प््ोजेक्ट भूवम पर वसवाय फे्वसंग लगने के और कुछ भी नही् हुआ है। ग्ा्म वावसयो् के पूछने पर प््बंधक बताते है् वक बांध वनम्ाषण पूरा होने और पानी वमलने पर तथा 10 वकलोमीटर नावदया और बागला आवदवासी ग््ामो्की जमीन का कोल ल्लॉक आवंवटत हो जाने पर पावर प््ोजेक्ट का काम शुर् वकया जाएगा। वफलहाल पावर प््ोजेक्ट के वलए ववदेश से कोयला लाने की योजना है। उल्लख े नीय है वक स्टटे बैक ् ऑफ इंवडया ने ऑस्ि्ेवलया मे् कोयला खदाने् खरीदने के वलए अदानी समूह को छह हजार करोड् र्पए की मदद n दी है। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 19
आवरण कथा
झबरिंड के दलमब क्त ्े ्मे् कवकबस कब नबम सुनते ही लोग डर जबते है।् आकदवबकसयो्से पहले भी ज़मीने्ली गयी्और अब इको-जोन बनबने के कलए लबगू ककये जब रहे कनयमो्के कबरण नबरबजगी बढ़ रही है। अतनल अंशम ु न
झा
रखंड का दलमा पहाड्,झरनो्और जंगली पशु,पव््कयो् से रचा-बसा इलाका है। वसंहभूम वजले की यह ह्दयस्थली है। टाटा नगरी का औद््ोवगक संसार इसी इलाके के एक कोने मे्है। एक समय मीलो्दूर तक फैला यह जंगल अब वसकुडन् े लगा है। छोटे-बड्,े पहाड्ो,् नदी, झरनो्और बाघ, भालू, हाथी, वहरण, मोर, खरगोश और कई दूसरे तरह के पशु-पव््कयो् से भरा-पूरा था यह दलमा। इतना सघन जंगल वक वदन मे्भी अंधरे े का अभास होता था। आज यह वसमट कर महज 5 वकमी के दायरे मे्वसकुड्गया है। टाटा नगरी से वनकलने वाला धुआं और धूल अब इसकी हवाओ् मे् है। जंगल के पूव्ी वहस्से मे् बने वडमना लेक का पानी शहर को जीवन देता है। पहाव्डया, सबर, वबरहोर जैसी लुपत् हो रही आवदम जनजावतयो् के अलावा भूवमज, संताल,उरांव और कई दूसरी वपछड्ी जावतयो् की कई पीव्ढयो् का दलमा जंगल से पुराना वरश्ता है। दलमा की जमीनो् पर ववकास का बाजा तो बजा। लेवकन इसका फायदा केवल पूज ं ीपवतयो्तक वसकुड्कर रह गया। यहां के मूल लोगो् के जीवन मे् ववकास की बयार नही्आ सकी। आज भी रोजगार,वशक््ा और स्वास्थय् की दशा मे् कोई बदलाव नही् आया है। यहां के लोगो्का गुजर-बसर अब भी वर्ाष आधावरत खेती, वन-उपज की वबक््ी और फैिक्िय् ो्मे्मजदूरी से ही हो रहा है। दलमा के लोग बताते है् वक कभी इस जंगल मे् साखू के मोटे पेड् हुआ करते थे। जंगल छोटेबड्े जानवरो् और पशु-पव््कयो् के आवाजो् से गूंजता था। लेवकन वन ववभाग के बढ्ते वच्षस्व के साथ यह गायब होता गया। अब तो वसफ्फ छोटे पेड्-पौधे और झाव्डयां ही बची् है्। इसका असर यहां लोगो्के गुस्से से भी वदखता है। जो आए वदन बाहरी लोगो् को अपना वशकार बनाता है। इसका इस््ेमाल यहां के नेता चुनावो् मे् वोट बै्क की राजनीवत के वलए करते है्। मामले की सच््ाई जानने के वलए वन ववभाग के अवधकावरयो् से वमलकर जब दलमा के अंदर रहने वालो्से वमलने वचलगू पंचायत के कदमझोर 20 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
अभयारण़य स
िलमा के जंगल मेंजमीन बचाने के दलए पंंिशंटन करिे आदिवासी : िवनाशकारी िवकास
गांव के वकसानो् से बात करते हुए, उनकी तस्वीर लेनी चाही तो अचानक से उनका गुसस ् ा फूट गया। ‘फोटो खी्चेगा, हमलोगो् के बारे मे् उल्टा-पुल्टा वलखेगा, मारो इसको .......’ वकसी तरह से बीचबचाव के बाद मामला शांत हुआ। बाद मे् वह सामान्य हो गए। ववकास का नाम सुनकर वकसी को भय हो सकता है। शायद नही्। लेवकन सच है यहां लोग डरने लगते है।् झारखंड के आवदवासी इसका नाम सुनते ही घबराने लगते्है।् क्यो्वक अब तक ववकास के नाम पर उन्हो्ने पाया बहुत कम और गंवाया ज्यादा है। रोशनी की चकाचौ्ध से जमशेदपुर की टाटानगरी नहाती रहती है। लेवकन दलमा अंधरे े मे् डूबा है। सरकार के केद् ्ीय वन एवं पय्ावष रण ववभाग से दलमा वनक््ेत् को इको से्वसवटव जोन घोवरत वकए जाने ने इनका चैन छीन वलया है। इसके वखलाफ दलमा वन क्त्े ्के आवदवावसयो्, वकसानो् और स्थानीय गांव के लोगो्ने मोच्ाष खोल रखा है। इसके वखलाफ बीते वदसम्बर माह से ववरोध,रैली, प्द् श्नष कर गांव के लोग अपना ववरोध जता रहे है।्
वजलावधकारी से लेकर प्द् श े राज्यपाल, महामवहम राष््पवत तक लोग गुहार लगा चुके है्। लोग संववधान की पांचवी अनुसूची के तहत वमले अवधकारो्के तहत इस पवरयोजना पर रोक लगाने और उन्हे्ववस्थावपत होने से बचाने की मांग कर रहे है।् उन्हे्सरकार और वन ववभाग की इस पवरयोजना पर भरोसा नही् है। भारत सरकार के वन एवं पय्ावष रण ववभाग द््ारा घोवरत दलमा इको सेव्सवटव जोन 2012 की अवधसूचना के तहत पूव्ी वसंहभूम (जमशेदपुर) और सरायकेला- खरसावां वजलो्के कुल 136 गांव शावमल वकए गए है।् इससे दो लाख से भी अवधक की आबादी प्त्य् क््या परोक््तौर पर प्भ् ाववत होगी। कुछ साल पहले इस इलाके को हावथयो्के वलए संरव््कत वकया गया था। करोड्ो्की योजना बनी थी। लेवकन जमीनी हकीकत कुछ और रही। इसमे् भी लोगो्साथ वदया था। अभी बमुबश् कल 30-40 हाथी बचे हुए है्। अब इको से्वसवटव जोन बनाने का फरमान जारी हुआ है। इसके वलए तक्फगढ्ेजा रहे है् वक रैटल, जंगली कुत्ा, वहरण, वगलहरी,
से होता भय वछपकली,अजगर आवद दूसरे जंतओ ु ्को लुपत् होने से बचाना है। इसके वलए जर्री है वक दलमा अभयारण्य के संरव््कत क्त्े ्के आसपास के इलाके को पवरब्सथवतकीय और पय्ाषवरण की दृव्ि से सुरव््कत और संरव््कत वकया जाए। इसके तहत प्त्य् क््र्प से 85 गांव के 200.28 वग्षवकमी गैर वनक्त्े ् और वनक्त्े ् का 198.30 वग्ष वकमी और संभाववत 51 गांव के 80.45 वग्षवकमी गैर वनक्त्े ् और 43.45 वग्षवकमी वनक्त्े ्पर सरकार व ववभाग का वनयंत्ण रहेगा। साथ ही पूरे क््ेत् मे् वकसी भी प््कार का कंक्ीट भवन वनम्ाषण, ई्ट भट््ा, क््शर मशीन के अलावा फैकि् ्ी से गंदा पानी छोड्ने वाले उद््ोग (जो यहां है ही नही् ), जलावन लकड्ी व्यवसाय, जल ववद्त् पवरयोजना (जो पहले से लगी हुयी है), हवाई जहाजो् के उड्ान (जो यहां होती नही्), गम्ष हवा के गुल्बारे, कचड्ा फे्कने (जो पहले से ही स्वण्षरेख नदी मे् डाला जा रहा है) इत्यावद पर पूणष्पाबंदी रहेगी। ववरोध का कारण: इको जोन के वलए चुने गए सभी गांव संववधान की पांचवी अनुसूची क््ेत् मे्
शावमल है् और यहां पंचायत उपबंध अवधवनयम 1996 लागू है। यह आवदवासी बाहुलय् इलाका है। इसमे् लुप्त हो रही् आवदम जनजावतयां पहाव्डयां, वबरहोर, खव्डया, भूवमज, संथाल और उरांव आवद के लोग कई पीव्ढयो्से रह रहे है।् इनके अलावा कई वपछड्ी जावतयां भी है।् इन इलाको मे्संववधान प्द् त ववशेर अवधकारो् के तहत सामुदावयक ग््ाम सभा व्यवस्था को सबसे ऊंचा दज्ाष वमला है। इसकी इजाजत के बगैर कोई भी काम गैरकानूनी है। लेवकन इको जोन बनाने की खावतर इन ग््ाम सभाओ्से कोई अनुमवत नही् ली गयी। न ही कोई रायशुमारी की गयी। हालावकं वन ववभाग का दावा है वक उसे अनुमवत वमली है। जवाब मे् ग््ामसभा प्ध् ानो् और गांव वालो् का साफ कहना है वक वन ववभाग झूठ बोल रहा है। प्ध् ानो्व पंचायत प्व्तवनवधयो्को वन ववभाग के बड्ेअवधकावरयो्ने 2014 के नवंबर माह मे्भोज के वलए बुलाया था। साल 2009 मे्गांवगांव सोलर लै्प और दरी बांटकर लोगो् से इको ववकास सवमवत बनाने और फंड वदए जाने की बात कही गयी थी। इसके अलावा सरकार और ववभाग
द््ारा वकसी प्क ् ार की बातचीत नही्हुयी है। ग््ामसभा प्ध् ानो् और पंचायत प्व्तवनवधयो् का आरोप है वक वन ववभाग के पास सरकार द््ारा प्द् त््वन अवधकार अवधवनयम के तहत पट््े के वलए दी् गयी सैकड्ो अव्जयष ां फाइलो्मे्सड्रही है।् इस पवरयोजना क्त्े ्मे्कंक्ीट भवन वनम्ाण ष पर रोक को लेकर लोगो्मे्तीखा आक््ोश है। लोग पूछ रहे है् वक अब अपने बाल बच््ो् के वलए घर कैसे बनाएंग।े पहाड्पर रहने वाले आवदवावसयो्को यह डर सता रहा है वक कल को अगर वन ववभाग धुआं प्द् रू ण रोकने के नाम पर खाना पकाने से वनकलने वाले धुएं पर रोक लगाएगा तो वे कहा जांएगे। गांव के बुजुग्ष चंद्मोहन वसंह (भूवमज आवदवासी) ने नाराज होकर कहते है्वक जो कुछ भी हम बचे हुए है्। सरकार और वन ववभाग ववकास के नाम पर हमारी जमीन छीनने की चाल चल रहे है।् पहले भी हमारे जंगल, जमीन छीनकर टाटा को बसाया, हमको क्या वमला। अब तो जान दे दे्गे। लेवकन जमीन नही्। मामले पर पंचायत की मवहला मुवखया वनयवत वसंह सरदार ने साफ कहा वक हमसे कोई सहमवत नही्ली गयी है। जब हमसे नही्पूछा गया तो गांव वालो्का क्या कोई सुनगे ा। लोगो्मे्जमीन को लेकर गुस्सा है। को्कादासा गांव के मनोज कुमार वसंह सरदार ने कहा वक बगैर हमारी ग््ाम सभा की अनुमवत के हम यहां कुछ भी नही्होने देग् ।े बहुत बार जमीन दे चुके है,् अब नही्। पहाड्ी पर रह रहे 25 भूवमज पवरवार के लोग कहते है्वक देवखए यहां से टाटा नगर वकतना चमक रहा है। हम तो आज भी वबजली की आस मे् है्। वकसी तरह चास-बास (खेती) करके और जंगल का लकड्ी चुन और बेचकर हम जी रहे है।् इलाज के वलए भी 8 वकमी नीचे खाट पर लादकर मरीज को ले जाना पड्ता है। काठजोड्गांव के चंदन वसंह सरदार नाराज होकर कहते है्वक हमेशा हमलोगो् का वकस्मत वबगाड्ने का काम वदल्ली मे् बैठकर होता है। कुछ भी हो जाए यहां से कही्नही्जाएंग।े यहां के सभी साथी कही् नही् जाएंगे। सब हमारे अपने है्। जानवर हमारे दुश्मन नही् है्। इ.। वन ववभाग हमको वसखाएगा वक जानवर का सुरक््ा कैसे करते है।् आसनबनी पंचायत के युवा आवदवासी मुवखया गुरच ् रण वसंह सरदार का कहना है वक वन ववभाग ने धोखा वदया है। पहले गांव मे्आकर बोले वक इको सवमवत बनाइए हम मदद करेग् े कहकर रवजस्टर पर दस्ख ् त ले वलया। हमलोग कोई सहमवत नही्वदए है।् वन ववभाग झूठ बोल रहा है इसवलए हमारे गांव नही्आ रहा है। आंदोलन के नेता और दलमा क्त्े ् ग््ाम सभा सुरक््ा मंच के के्द्ीय सवचव सुखलाल पहाव्डया कहते है्वक संववधान की पांचवी्अनुसच ू ी का वनयम यहां लागू है। लेवकन हमारी ग््ाम सभा से कोई इजाजत और बातचीत वकए वबना वन ववभाग धोखा से इको जोन बना रहा है, जो हम नही् होने देग् ।े हमने राष्प् वत को ज््ापन देकर मांग वकया है वक हमको उजाड्ने वाला ववकास नही्चावहए। n शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 21
आवरण कथा
अलगवदा पंजाब मॉडल भूकम अकधग्ह् ण के 'पंजबब मॉडल' के तहत ककसबन मबलबमबल हुए थे .लेककन प्स ् ्बकवत अकधकनयम मे्ककये जब रहे बदलबवो्के कबरण ककसबन कवरोध कर रहे है.् मनोज ठाकुर
सहमवत और सामावजक समीक््ा जैसे उपखंड के जवरए वकसानो् से उनकी जीववका छीन सकते है।् इन हालात मे्वकसानो्से जमीन छीन जाने के बाद उनकी आय का स््ोत छीन जाएगा। प््भाववत होने वाले वकसानो् की एक कमेटी बनाई जाती है। यह कमेटी पहले वकसानो् से सहमवत लेती है। वफर जमीन का बाजार भाव तय करती है। प््शासन के साथ बातचीत कर रेट तय होता है। इसके बाद भूवम अवधग्ह् ण वकया जाता है। वकसानो् को पूरी तरजीह दी जाती है। बाजार भाव से ज्यादा दाम वमलते है।् जमीन खरीदने पर रवजस्ि्ी फीस मे्छूट वमलती है। यही वजह रही वक पंजाब मे्राजपुरा और तलवंडी के थम्ल ष प्लांटो्, मोहाली अंतरराष््ीय हवाई अड््ेजैसी बड्ी पवरयोजनाओ्के वलए सरकार ने अवधग्ह् ीत भूवम के एवज मे्बाजार भाव देने के साथ ही वकसानो्की सहमवत भी ली। इस वजह से यहां वकसी तरह का तनाव या वववाद
नही्करती तो जमीन वकसानो्को वापस करने का प््ावधान था। लेवकन अब इस क्लॉज को भी खत्म कर वदया गया है। हवरयाणा मे्कई जगह कंपवनयो् ने जमीन ली और वफर छोड दी। लंबे समय तक यहां प््ोजेक्ट ही नही् लगा। बाद मे् यहां आवासीय कॉलोनी बसा दी। यह एक तरह से वकसान व सरकार के साथ भी ववश््ासघात है। इसे तो कम से कम रोका ही जाना चावहए। भारतीय वकसान यूवनयन (पंजाब) के अध्यक्् अजमेर वसंह लाखोवाल के अनुसार नए भूवम अवधग्ह् ण मे्संशोधन वकसानो्के वहतो्के वखलाफ है। यह कानून तो अंगज ्े ो्के जमाने से भी गया गुजरा है। क्यो्वक इसमे्तो सरकार को मनमानी करने का पूरा मौका वमल जाएगा। बवठंडा के एक वकसान जगतार वसंह बराड् ने कहा वक वकसानो् को इस अध्यादेश की सभी बातो् की जानकारी नही् है। लेवकन वे इसके लागू होने से पैदा होने वाली मुबश् कलो्
अ
मूमन हर वकसान चाहता है वक उसकी जमीन पर कम से कम सरकार तो अवधग्ह् ण न करे। क्यो्वक भूवम अवधग्ह् ण से उसकी रोजी-रोटी का संकट पैदा हो जाता है। सवाल यह भी है वक जो पैसा वमलेगा उससे इतनी जमीन वमलेगी या नही्। वमलेगी भी तो कहां? ववस्थापन का दद्षऔर अपनी जड् से भी कटना होगा। भववष्य की अवनव््ितता। लेवकन पंजाब के वकसान के वलए भूवम अवधग्ह् ण का मतलब है समृव्द, पैसा, पय्ापष त् जमीन। यह जमीन अवधग्ह् ण का ‘पंजाब मॉडल’ है। पहले वकसानो्से पूछा जाता है वक क्या वे अपनी जमीन देना चाहते है्। वकसानो् की ‘हां’ के बाद जमीन का दाम बाजार भाव पर वदया जाता है। यह करोड्र्पए प्व्त एकड्तक हो जाता है। इसके बाद 30 फीसद ववस्थापन भत््ा अलग से। जमीन खरीदनी है तो रवजस्ि्ी मुफ्त मे्। एक-दो एकड् जमीन रखने वाला वकसान भी पंजाब मे् सरकारी अवधग्ह् ण से जमीन जाने पर मालामाल हो जाता है। वह वकसी दूसरी जगह पर जमीन खरीद लेता है। जो उसे 20 से 25 लाख र्पए प्व्त एकड्तक वमल जाती है। पंजाब के सीएम प्क ् ाश वसंह बादल चाहते है्वक यही मॉडल पूरे देश मे्लागू हो। लेवकन प्ध ् ानमंत्ी नरेद् ् मोदी ने उनकी बातो् पर की ओर ध्यान नही्वदया। प््धानमंत्ी का यह रवैया अब पंजाब के वकसानो्को परेशान कर रहा है। वकसान डरे-सहमे है्। उन्हे् डर सता रहा है वक भूवम अवधग््हण, पुनव्ास ष एवं पुनस्था्पष ना ववधेयक 2015 लागू हुआ, तो यह सब नही्वमलेगा जो अभी तक वमल रहा है। इस वनयम से वकसानो् की सहमवत का हक चला गया है। साथ ही वकसान ववरोध भी नही्कर सकते। पंजाब के वकसान की अब यही वचंता है। इसकी वजह है वक पंजाब मे् करीब 80 फीसद वकसान छोटे और मझोले श्ण ्े ी के है।् इनके पास 5 एकड् या इससे कम जमीन है। आव्थक ष र्प से वपछड्ेइन वकसानो्के वलए कृवर जीववका का एकमात््जवरया है। नए अध्यादेश मे्80 फीसद भूवम मावलको्की 22 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
पंजाब का एक िकसान : खुशहाली हवा हुई
नही् हुआ। एक भी वकसान कोट्ष मे् नही् गया। माजरी के वकसान हरभज वसंह बताते है्वक जमीन जाने की एवज मे्इतना पैसा वमल गया वक अब सब कुछ ठीक हो गया है। दो एकड्जमीन का वकसान हरभज वसंह आज 10 एकड्जमीन का मावलक है। कोठी है और एक बीएमडल्ल्यू कार। भूवम अवधग््हण वबल से 'वकसानो् की सहमवत' और 'सामावजक प्भ् ाव के आंकलन' की अवनवाय्तष ा को हटा वदया। इससे जमीन के जबरन अवधग्ह् ण का रास््ा साफ हो जाता है। यह रक््ा, राष््ीय सुरक््ा, ग््ामीण बुवनयादी संरचनाएं, सस््े घर, औद््ोवगक कॉवरडोर और अन्य आधारभूत संरचनाओ्के वलए अवधग््हण पर लागू कर वदया गया। वकसान कही् अपील भी नही् कर सकते। हालांवक मुआवजे को कम नही्वकया गया। लेवकन पंजाब मे्वदक्त् यह है वक जमीन का कलेकट् र रेट बाजार भाव से कम से कम पांच से दस गुना तक कम है। ऐसे मे्वकसानो् के मुआवजे पर इसका असर पडेगा। पहले अगर एक वनव््ित समय के अंदर कंपनी प््ोजेक्ट शुर्
को लेकर वचंवतत है।् अध्यादेश मे्जमीन लौटाने की अववध मे्भी ढील दी गई है। बराड्ने कहा वक मौजूदा कानून के तहत जमीन के वलए बाजार मूलय् का चार गुना मुआवजा देने का प््ावधान है। लेवकन अध्यादेश मे् मुआवजा प्व््कया मे् भी बदलाव वकया गया है। उन्हो्ने कहा वक इस अध्यादेश से देश की ग््ामीण आबादी पर खासा असर पड्गे ा। सीएम प््काश वसंह बादल ने कहा वक हमने पहले से ही केद् ्सरकार को बता वदया है वक वे भूवम अवधग््हण के ‘पंजाब मॉडल’ को लागू करे्। यह मॉडल समय की कसौटी पर खरा है। उन्हो्ने स्पि्् र्प से भारत सरकार से कहा है वक भूवम अवधग्ह् ण करने से पहले वकसान की सहमवत लेने के क्लॉज को जोड्ा जाना जर्री करे्। इसके अलावा 30 फीसद अवतवरक्त मुआवजा हज्ाषने के र्प मे् दे्। इसके साथ ही ववस्थावपत होने वाले वकसान के पुनव्ास ष के वलए उसकी आवासीय और वावणब्जयक संपव््त का आवंटन कुल ली गई जमीन मे्से करे,् n जैसा की पंजाब मे्वकया जा रहा है।
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आवरणकथा
भूिम निगलता माऩिया
असम जब आतंक के सबए मे्थब तो लोग ज़मीने्बेचकर जबने लगे थे, लेककन अब बदलते हबलबत मे् मबकफयब कौडी के भबव ज़मीन िरीदने मे्लगे है् और ककसबनो्कब असंतोष बढ़ रहब है। राजीव कुमार
अ
सम मे् जोरहाट का राजाबाड्ी इलाका। असम चाय वनगम का यह चाय बागान खस््ाहाल है। चाय बागान के श्व्मक यहां रहते है।् सरकार के वलए यह एक बोझ समान लग रहा था। सरकार को लगा वक श््वमको् को हटाकर जमीन का इस््ेमाल वकया जा सकता है। नेशनल इंस्टीट््ूट ऑफ वडजाइन के वलए यह जगह सही लगी। श््वमको् को हटाने का प्लान बना। 346 श््वमक पवरवारो्पर दर-बदर होने की गाज वगरी। संजय कृष्ण तांती इनमे्से एक है्। तांती कहते है्, ‘हमारी दशा बेहद खराब थी। ऐसे मे् जमीन और घर से बेदखल होने का दबाव अलग। मानो पहाड् ही टूट गया हो। केएमएसएस के चाय संगठन के बैनर तले हम एकजुट हुए और लड्ाई लड्ी। तब हम सभी पवरवारो्को जमीन आवंवटत की गई। अब हम शांवत से जीवन गुजर बसर कर सके्गे। यह घटना साल 2009 की है। ऐसे अनेक वाकये जो केएमएसएस के वकसान आंदोलन की कहानी कहते है्।’ पूव्ोत््र के प््वेश द््ार गुवाहाटी के आसपास गांवो्की जमीनो्के दाम वहां के हालात सुधरते ही 24 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
बढ्ने लगे। अपाट्षमे्ट का धंधा करने वालो्ने यहां के वकसानो् की जमीन औने-पौने दामो् पर कई तरह के आश््ासनो् के साथ खरीदना शुर् कर वदया। पलाशबाड्ी के बगंड्ा मे्कोलकाता के एक वबल्डर ने टाउनवशप वनम्ाषण के वलए जमीन वकसानो् से खरीदी। स्थानीय लोगो् को रोजगार मुहैया कराने के नाम पर सुरक््ाकम््ी की नौकवरयां बांटी गई्। इन्ही्मे्से एक सुरक््ाकम््ी वनम्षल बोड्ो की अपाट्मष टे् स ् मे्इस्म्े ाल वकए जा रहे रॉड लगने से मौत हो गई। अब वनम्षल की पत्नी प््वतमा दो मासूम बच््ो्के साथ बेसहारो्की वजंदगी गुजारने को मजबूर है। वबल्डर ने मदद से हाथ खी्च वलया। इतना ही नही्प््वतमा बताती है वकसी तरह की कोई मदद वबल्डर ने नही् की। आज प््वतमा अपने गुजर-बसर को लेकर परेशान है। आंतक के साए से वनकला असम आज भूमावफयाओ् के चंगुल मे्
संगठन का कहना है रक भूरमहीन रकसानोंके बीच जमीन बांरने के रलए भी सरमरत बनाई गयी है। इसे रकसानोंमेंबांरा जाएगा। बाकी जमीन सरकार रसरलंग सरपंलस के तौर पर खुद ले लेगी।
वदखाई देता है। राज्य की प््ाकृवतक संपदा को लेकर तमाम तरह की लूट शुर् से होती रही है। आतंक से बाहर आने के बाद भूमावफयाओ् की नजर यहां के खेवतहर जमीनो् पर गड्ी्। बस क्या था शुर्हो गई बंदरबांट। सत््ा के गवलयारो्मे्बैठे नेता और व्यवसावययो् की वमलीभगत ने यहां की जमीनो्पर कल्जा जमाने का खेल शुर्कर वदया। इसके तहत जमीनो् की कम दाम पर उद््ोग धंधा लगाने के नाम पर खरीदारी होने लगी और अवधग््हण वकया जाने लगा। राज्य आंतक के साए मे्था, तो देश के दूसरे इलाको् से आए लोग आतंक के चलते अपनी जमीने्बेचकर जाने लगे थे। पर अब माहौल बदला है। ब्सथवतयां सुधरने के साथ ही जमीन के दाम आसमान छूने लगे। फैक्व्ियां लगने लगी्। धड्ल्ले से अपाट्षमे्ट बनने लगे। इसवलए भूमावफयाओ्का दबदबा बढ्ा। लेवकन इन पर काफी हद तक अंकश ु लगाने का काम कृरक मुब्कत संग्ाम सवमवत (केएमएसएस) जैसे संगठनो् ने लगाया। केएमएसएस के आक््ामक तेवर के आगे सरकार व भूमावफया डरने लगे। भूमावफयाओ् को अपने पैसे डूबने के साथ ही हमले का डर सताने लगा। सवमवत के तत्कालीन अध्यक्् तथा वफलहाल
माॅनसून बाद संंघर्ष ककसबन नेतब , आररीआई कबय्क ा त्बा और अन्नब हजबरे के करीबी अकिल गोगोई (39) ने असम मे्अपने आंदोलन से हजबरो्लोगो् को सम्मबन से जीने कब अकधकबर कदलबयब है। शुकव् बर प्क्तकनकध रबजीव की भूकम अकधग्ह् ण कबल व अन्य मुद्ो्पर उनसे बबतचीत। आप अन्नब के बेहद करीबी है,् भूकम अकधग्ह् ण कबल पर आपकब आंदोलन कब होगब? अप्ल ्ै मे्पदयबत््ब और हजबर ककमी की मोरर यबत््ब कर 1 मई को कदल्ली के रबमलीलब मैदबन मे् आंदोलन के कलए जुरने कब इरबदब थब। पहले भबरत के सभी कजलो्व रबज्य मे्सभबएं करने की योजनब थी। इसमे्अन्नबजी भबषण देत।े रबज्यसभब मे्कबल के पेश होने के कदन जेल भरो आंदोलन होतब। पर अब सरकबर लोकसभब मे्कबल पेश करने के बबद अध्यबदेश ले आई है। छह महीने मबमलब आगे बढ़्गयब। इसकलए हमने भी प्लबन बदलब। अब मबनसून के बबद पदयबत््ब और मोरर यबत््ब कनकबलेग ् ।े जब सरकबर इसे कफर लोकसभब मे्पेश करेगी तब रबमलीलब मैदबन मे्जुरग े् ।े रबज्यसभब मे्कबल पेश करने के दौरबन देश भर मे्जेल भरो आंदोलन चलबएंग।े
जंमीन से बेिखल: अब भू-मािफया का कबंजा
सलाहकार व आरटीआई सव््कय कम््ी अवखल गोगोई कहते है्, शहरी इलाको् के अलावा राष््ीय राजमाग््ो् के वकनारे भू मावफयाओ् का दबदबा है। अकेले कामर्प (ग््ामीण) वजले मे्साल 2009 से 2012 तक 3494 बीघा जमीन भूमावफयाओ्ने ली। द असम वफक्सेसन आफ वसवलंग आफ लै्ड होब्लडंग एक्ट 1956 के तहत कोई भी व्यब्कत 50 बीघा से अवधक खेती की जमीन नही्रख सकता। पर असम मे् अवधकावरयो् व भूमावफयाओ् की वमलीभगत से इसका खूब उल्लघंन हुआ है। असम मे्खेती के वलए उपयुकत् जमीन 30.21 लाख हेकट् ये र है। मामले मे्जानकारी जुटाने पर पता चला वक असम के 27 वजलो्मे्से आठ वजलो्मे् साल 2011 से 2014 तक 4601 बीघा जमीन खेती से हटकर अन्य श्ण ्े ी मे्पवरवव्ततष कराई गयी। दरंग वजले मे्1016 बीघा, लखीमपुर मे्628,वशवसागर मे् 238, कामर्प मे् 204, ग्वालपाड्ा मे् 146, बरपेटा मे् 1777, हैलाकांदी मे् 29 और जोरहाट वजले मे् 563 बीघा कृवर जमीन अन्य श््ेणी मे् तल्दील की गई। केएमएसएस के आंदोलन और वशकायत के बाद असम सरकार ने कार्षवाई करते हुए कामर्प ग््ामीण वजले मे् 41 व्यब्कतयो् और संस्थान के वखलाफ मामला दायर वकया। इन व्यब्कतयो् ने जमीन का इस््ेमाल खेती मे् करने का हलफनामा वदया था। लेवकन इनका इस््ेमाल गैर खेती के काम मे् वकया। इन नामो् मे् पूव्ोत््र के बड्े उद््ोगपवत कैलाश लोवहया भी है।् इन लोगो्ने गुवाहाटी के पास उद््ोग और अपाट्मष टे् बनाने के वलए जमीन खरीदी। कैलाश लोवहया के भतीजे बजरंग लोवहया की गुवाहाटी के पास सोनापुर मे् 37 बीघा जमीन पर
असम मे्ककसबनो्की भूकम अकधग्ह् ण को लेकर जो स्थथकत है, उस पर क्यब कहेग ् े? कबल कब असर पूरे असम पर होगब। कृषक मुसक् त संग्बम सकमकत (केएमएसएस) सबल 2008 से जो आंदोलन कर रही है वह बेकबर हो जबएगब। असम की कृकष भूकम, गैर कृकष कबय््ो्के कलए नही्ली जबए। सरकबर से इसके कलए कई दौर की बबतचीत हुयी है। सरकबर ने कई अकधसूचनबएं कनकबली। 17 जून 2014 को सरकबर ने ऑकफस मेमोरेड् म से भूकम अकधग्ह् ण कबल को संशोकधत कर रबज्य मे्लबगू करने की कोकशश की। केएमएसएस के दस कदन के अनशन के बबद सरकबर ने इसे वबपस लेकर िेती की जमीन कब इस्म ्े बल गैर कृकष कबम मे्नही्करने देने कब भरोसब कदयब। यकद कभी लेनब भी पड्ब तो पूरे कनयमो्के तहत कलयब जबएगब। नयब कवधेयक पबस हुआ, तो वह रबज्य पर भी लबगू होगब। केएमएसएस ने असम मे्सफलतब के नए आयबम हबकसल कर कदिबए है्। हमबरे आंदोलन की वजह से कपछले दो सबलो्मे्सभी कजलो्मे्सरकबर ने अनेक अकधसूचनबएं जबरी कर भेजी। कजलब उपबयुकत् ो्ने अनुमडं ल अकधकबकरयो्को कनद्श ्े भेज।े जन आंदोलन यब कहे प्क्तरोधक आंदोलन सफल हुआ। अब असम मे्कृकष जमीन की कबक््ी बंद है। कबक््ी होती भी है तो एक बीघब से ज्यबदब नही्होती। भूमबकफयबओ्कब अपबर्म ा रे् के नबम पर िेती की जमीन लेनब अब बंद हो गयब है। वह कसफ्फडरे ही नही्है,् अब जमीन के दबम मे्कमी हुयी है। बैक ् ो्ने इस तरह की जमीन पर अब कज्ादेनब बंद ककयब है। n
केएमएसएस ने कल्जा कर वलया। संगठन का कहना है वक भूवमहीन वकसानो्के बीच जमीन बांटने के वलए भी सवमवत बनाई गयी है। इसे वकसानो् मे् बांटा जाएगा बाकी जमीन सरकार वसवलंग सरप्लस के तौर पर खुद ले लेगी। उत््र गुवाहाटी मे् मुख्यमंत्ी तर्ण गोगोई के करीबी व्यापारी सुरेश पृथानी ने 280 बीघा वसवलंग सरप्लस जमीन कौव्डयो् के भाव खरीदी। पंद्ह हजार र्पए प््वत बीघा की दर से खरीदी गई इस जमीन को बाद मे्3.75 लाख बीघा की दर से बेचा गया। मामले को लेकर केएमएसएस ने आंदोलन वकया। इसके बाद वफलहाल वकसानो्से ली गई 50 बीघा से अवधक खेती जमीन को वापस लेने की प्व््कया चल रही है। सवमवत की मांग है वक 12 बीघा खेती की जमीन भूवमहीन वकसानो् के बीच बांटी जाए। मामले को लेकर कैलाश लोवहया और सुरेश पृथानी से भी उनका पक््जानने की कोवशश की गई। लेवकन चुप्पी ही छाई रही। वकसानो् की खावतर संघर्ष करनेवाले युवा भास्को डी सैवकया का कहना है वक कामर्प वजले
के पासोवरया मे् वकसानो् से भूमावफयाओ् ने जमीन खरीदी। उद््ोग भी लगाए। आज वकसान अपनी ही जमीन पर बनी फैक्व्ियो्मे्मजदूरी कर रहे है्। केएमएसएस के आंदोलन के बाद सरकार और भूमावफया मुब्शकल मे् है्। अब मनमानी जमीन खरीदने पर पाबंदी लगी है। सरकार नई भूवम नीवत बना रही है। के्द् के भूवम अवधग््हण ववधेयक का राज्य की कांग्ेस सरकार वखलाफत कर रही है। मुख्यमंत्ी तर्ण गोगोई का कहना है वक बड्ेउद््ोग के वलए राज्य मे्जमीन नही्है। छोटे उद््ोगो्के वलए उद््मी वकसी से जमीन खरीदता है तो अलग बात है। पर सरकार इसे अपने से मुहयै ा नही्करा सकती है। मुखय् मंत्ी गोगोई एक तरफ यह बयान देते है,् तो दूसरी तरफ हाल ही मे्उद््ोग व वावणज्य ववभाग की एक समीक््ा बैठक मे्उन्हो्ने अवधकावरयो्को वनद्श ्े वदया वक वडब््ुगढ् के लेपेटकाटा मे् बनाएं जा रहे गैस के्कर से पैदा होने वाले कच््ेमाल और प्लाब्सटक उद््ोगो्को लगाने की खावतर गुवाहाटी के आसपास जमीन मुहैया कराएं। इससे साफ है वक n वकसानो्पर मार पड्ेगी। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 25
िेशकाल
एकीकरण के बाि पंंेस से मुख़ ााििब ं जनिा पदरवार के नेिा : िकिना कारगर िवकलंप
जिता पनिवाि िया अवताि अंबरीश कुमार
पं
द््ह अप््ैल को वजस समय मुलायम वसंह यादव जनता दल पवरवार के छह दलो् के ववलय का एलान कर रहे थे उसी समय उत्र् प्द् श े के चरखारी ववधान सभा के उप चुनाव का नतीजा आ रहा था। इस सीट पर समाजवादी पाट््ी ने भारतीय जनता पाट््ी के उम्मीदवार को पैतालीस हजार से ज्यादा मतो्से हराया। लोकसभा चुनाव के बाद से वजतने भी उप चुनाव हुए है उत््र प््देश मे् भारतीय जनता पाट््ी तेरह मे् से वसफ्फ दो उप चुनाव जीत पाई है। यह संदभ्ष इसवलए तावक देश के सबसे बडे सूबे की राजनीवत को समझा जा सके। इस सूबे मे् समाजवादी पाट््ी की सरकार है वजसके मुवखया मुलायम वसंह यादव है जो नए दल के अध्यक््भी बनाए गए है। उत््र भारत के दोनो् प्म् ख ु राज्यो्उत्र् प्द् श े और वबहार मे्इस नए दल मे् शावमल दलो् की सरकार चल रही है। दूसरी तरफ हवरयाणा और कन्ाषटक मे् भी इसका ठीक 26 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
सत््बधबरी संघ पकरवबर की चुनौितयो्कब सबमनब करने के िलए छह रबजनीितक दलो् कब िवलय रबजनीित मे्एक नई िदशब कब संकते है। समबजवबदी िवचबरो्के नेतबओ् कब िमलन इितहबस मे्फक्फपैदब करतब आयब है, लेिकन मौजूदब हबलबत मे्यह एकीकरण िकतनब कबरगर हो पबएगब ?
ठाक असर है। पर राजनैवतक युद् का असली मैदान वबहार और उत््र प््देश है जहां इस नए दल की परीक््ा होनी है। इसमे्वबहार का नंबर पहले है। पर वहां का राजनैवतक घटनाक््म इस नए दल के वलए भी एक चुनौती है, खासकर वजसतरह पूव्ष मुख्यमंत्ी मांझी को हटाया गया था । वबहार मे् जातीय गोलबंदी की मजबूत जमीन है इसवलए वपछडी जावतयो् के इन वदग्गज नेताओ् का रास््ा बहुत आसान नही् होगा। यह बात अलग है वक समाजवादी धारा की राजनीवत का दावा करने वाले ये दल जब भी वमले है बदलाव हुआ है भले ही बाद मे् वबखर गए हो। चाहे 77 हो या 89 का साल। वपछले साल हुए लोकसभा चुनाव मे् वजस तरह
उतंरं पंदं श े हो या हररयाणा या रफर कनंारा क, रकसी भी राजंय मेंइन घरक दलोंका कोई आपसी रकराव नहींहै। रबहार मेंनीतीश और लालू का रकराव जरंर रहा है।
भाजपा के नरे्द् मोदी ने सभी दलो् को रौ्द डाला था और ववपक्् को ववपक््ी दल का दज्ाष तक नही् वमल पाया ऐसे मे् यह नया दल चुनौती तो बन सकता है। इसके नेता भी उसी अंदाज मे्राजनीवत करते है् वजस अंदाज मे् मोदी करते है। मोदी राजनीवत के अत्याधुवनक औजारो् का इस््ेमाल करते है तो ये नेता आज भी गांव कस्बे की भारा मे् संवाद करके अपना कवरश्मा बनाए हुए है। इन्हे् वपछडी और अवत वपछडी जावतयो् के साथ अल्पसंख्यको्का समथ्षन हावसल है इसवलए वोट की राजनीवत मे् आने वाला मुकाबला भी काफी वदलचस्प होगा। खासकर वबहार मे्। वबहार मे् लोकसभा चुनाव मे् भाजपा, लोजपा और राष््ीय लोक समता पाट््ी को 40 मे् से 31 सीटे् वमली थी्। जबवक भाजपा के वहस्से 29.4 फीसदी वोट वमला तो लोक जन शब्कत पाट््ी को 6.4 और रालोसपा को तीन फीसदी वोट वमला था। भाजपा गंठबंधन को कुल 38.8 फीसदी वोट वमला तो जनता दल यू को 15.8 फीसदी और राष््ीय जनता दल को 20.01फीसदी वोट वमला
था। पर राजनीवत मे्गवणत की तरह जनाधार नही् जुडता है वजसे जोड कर जनता पवरवार वाले 35.81 फीसदी वोट की बात कह रहे है। राजनीवत बदलती है और वकतनी तेजी से बदलती है यह वदल्ली मे्देख चुके है। वबहार मे्भाजपा भी मजबूत है और चुनाव अवभयान पर बहुत कुछ वनभ्रष करेगा। पर जनता दल पवरवार को मनोवैज्ावनक लाभ तो वमलना तय है। जनता पवरवार के वबखराव से लेकर उनके नेता के अहंकार और भ्ि ् ्ाचार सभी पर चच्ाष हो रही है। इस सबके बावजूद इस दल को ख़ावरज करने की ब्सथवत मे् नही् है। मोदी सरकार के एक साल पूरे होने जा रहे है और वजतनी उम्मीद लोगो् ने लगाई थी वह पूरी होने वाली नही् है। वे अच्छे वदन के नारे पर आए थे पर लोगो्को इतने बुरे वदन की आशंका तो नही्थी। वजस तरह वकसान तबाह हुआ है और उत्र् भारत मे्ख़ुदकुशी का वसलवसला थम नही्रहा वह आने वाले वदनो्की राजनीवत को भी प््भाववत करेगा। चाहे वबहार हो या उत््र प््देश। खेती की जमीन को लेकर माहौल वबगडता जा रहा है। ऐसे मे् जनता दल पवरवार का नया प््योग मोदी सरकार को चुनौती दे सकता है। उत््र प््देश हो या हवरयाणा या वफर कन्ाषटक वकसी भी राज्य मे् इन घटक दलो् का कोई आपसी टकराव नही् है। वबहार मे्नीतीश और लालू का टकराव जर्र रहा है। कई लोग जो लालू ववरोधी थे वे नीतीश के साथ चले गए थे। वे वबदक भी सकते है। ऐसे मे्वबहार मे्इन दोनो्के ववलय पर कुछ नुकसान हो सकता है तो मोदी ववरोधी वोटो् का फायदा भी होगा। पर वबहार मे् नीतीश को सत््ा ववरोधी र्झान का भी सामना करना पडेगा। पर यह सब नए दल के राजनैवतक अवभयान पर वनभ्षर होगा। उत््र प््देश मे् समाजवादी पाट््ी का शीर्ष नेतृत्व इस ववलय से बहुत खुश नही्है क्यो्वक प््देश मे्जो भी ताकत है वह सपा की ही बनाई हुई है वजसमे्अब वहस्सा भी देना पड सकता है। समाजवादी पाट््ी के एक नेता ने नाम न देने की शत्षपर कहा, 'हमारा तो नुकसान ही है। राष््ीय काय्स ष वमवत से लेकर सभी इकाइयां भंग हो जाएगी। अब वे दल वजनका कोई जनाधार नही् रहा उनके नेताओ्को भी संगठन और सरकार मे्वहस्सा देना पडेगा। ववधान पवररद मे्सीट देनी पड सकती है। नेताजी यानी मुलायम वसंह राष््ीय अध्यक्् है तो क्या वबहार चुनाव मे् सौ दो-सौ करोड उनको अपनी पाट््ी से नही्देना पडेगा। 'इस प््वतव््कया से समाजवादी पाट््ी के नेताओ् काय्षकत्ाषओ् का मूड समझा जा सकता है। पर राष््ीय राजनीवत मे् इस ववलय का असर जर्र पड सकता है। जनता पवरवार का वहस्सा रह चुके वकसान नेता डा सुनीलम ने कहा , ' जब भी समाजवादी धारा के ये दल साथ आएं है देश की राजनीवत बदली है इसवलए लोग वखल्ली भले उडाएं जमीन पर n राजनीवत बदलेगी। '
िवकलंप के िलए िवलय जदयू नेतब शरद यबदव से शुकव् बर की िबस बबतचीत जनतब पकरवबर कब कवलय हो रहब है ,क्यब मोदी के भय से आपलोग एक जुर हो रहे्है्? मोदी कब प्ि् न ् नही्,प्ि् न ् नीकतयो्कब है। इस सरकबर मे्कजस तरह सबंपद् बकयकतब बढ़ रही है ,अल्पसंखय ् को्पर अत्यबचबर हो रही है्घर वबपसी लव कजहबद चच्ापर हमले हो रही है। सबंपद् बकयक ध्व्ु ीकरण ककयब जब रहब है ,इस तरह तो पहले कभी नही्हुआ थब ।इसकलए हमबरब कवलय इस नयी चुनौती कब सबमनब करने के कलए है। कबहबर मे्चुनबव के बबद नेततृ व् के प्ि् न ् पर कववबद तो िड्ब नही्होगब। मुखय ् मंत्ी कौन बनेगब ,नीतीश यब लबलू ? इस मुद्ेको सब कमलबैठ कर तय कर लेग ् ।े मुखय ् मंत्ी कौन होगब इसकब कनण्य ा तो अभी नही्ककयब जब सकतब। ये तो चुनबव के बबद की चीज़ है। क्यब इस कवलय से देश की चुनबवी रबजनीकत पर फक्फपडेगब ? जब जब जनतब पकरवबर एक जुर हुआ है ,कुछ न कुछ फक्फतो पडब ही है ।इसके कई उदहबरण आपके सबमने है.्लेककन कुछ लोग कवशेषकर भबजपब इस कवलय से घबरबये हुए है्और वे तरह तरह की अफवबहे्फैलब रहे है्कक कवलय नही्होगब । अख़बबरो्मे्इस तरह की ख़बरे्भी आपने देिी हो्गी। क्यब आपको लगतब है कक भूकम अकधग्ह् ण कब मुद्ब अब रबष््ीय मुद्ब बन गयब है और क्यब कबहबर के चुनबव मे्भी ये मुखय ् मुद्ब होगब ? कई सबरे मुद्ो्के बीच ये एक अहम मुद्ब हो सकतब है। लेककन ये सच है कक जमीन और ककसबनो्कब सवबल अब रबष््ीय सवबल है। कबहबर के चुनबव मे्ही नही्और भी रबज्यो्मे्हम इस सवबल को प्म ्ि ु तब से उठबएंग।े क्यब इसकब चुनबव पर असर पडेगब ? क्यब असर पडेगब और ककतनब असर पडेगब ये तो बबद मे्पतब चलेगब लेककन ककसबनो्को हकीकत कब पतब चलेगब कक मोदी सरकबर उनके सबथ ककतनब छल कर रही है। ये सरकबर तो केवल सपने कदिबने वबली सरकबर है। जेरली सबहब 20-30 करोड लोगो्को नौकरी देने की बबत कर रहे्है। ये एक नयब सपनब है। क्यब सत्र् प्क्तशत ककसबनो्की जमीन छीन कर उनकी आजीकवकब छीन कर ये नौकरी देग ् ?े मोदी सरकबर कब कहनब है कक कवपक््इस मुद्ेपर ककसबनो्को गुमरबह कर रहब है। अकमत शबह, वेक ् य ै ब नबयडू भी यह कह चुके है्। आपकब क्यब कहनब है? ककसबनो्को गुमरबह तो वे कर रहे है।् जो भूकम अकधग्ह् ण कबनून कबंगस ्े के कबय्क ा बल मे्बनब थब उसमे्संशोधन करके अध्यबदेश ले आए। इसमे्सोशल असेसमेर् कब प््बवधबन हरब कदयब। उस इलबके की सत्र् -अथ्सी प्क्तशत जनतब की रजबमंदी कब भी प््बवधबन हरब कदयब। इतनब ही नही्पबंच सबल तक अगर योजनब पूरी नही्हुई तो जमीन लौरबने के प््बवधबन को भी ख़त्म कर कदयब। इस तरह तो सरकबर लोगो्की जमीन छीनती रहेगी और पबंच सबल के बबद ककसबन अपनी जमीन भी वबपस ले नही्पबयेगब। सेज के नबम पर ककसबनो्की ककतनी ज़मीने्ली गयी्और आज तक उन सभी जमीनो्कब इस्म ्े बल भी नही्हुआ। क्यब आपको लगतब है कक मोदी सरकबर दरअसल कॉपोरेर को फबयदब पहुचं बने के कलए इस तरह कब अध्यबदेश लेकर आई है? कबल्कल ु , कॉपोरेरस े् को फबयदब पहुचं बने के कलए ही तो इस तरह ककसबनो्की जमीन हड्पी जब रही है। लेककन अर्ण जेरली तो कह रहे है्कक देश के कवकबस के कलए सरकबर ककसबनो्की जमीन ले रही है तबकक बुकनयबदी ढबंचब देश मे्कवककसत हो सके। क्यब आपको लगतब है कक कवपक््इस मुद्े पर हमेशब एक जुर रहेगब उसमे्कोई फूर तो नही्आयेगी? रबष्व् बदी कबंगस ्े पबर््ी, बीजू जनतब दल और बसपब जैसे दल ऐन मौके पर इस कवधेयक पर मोदी सरकबर कब रबज्यसभब मे्सबथ तो नही्दे देग ् ,े जैसे कक कपछले सत््मे्िबन और कोयलब कवधेयको् को पबकरत करने के कलए मोदी ने कवपक््ी एकतब मे्सेध ् लगब दी थी ? रबज्यसभब मे्ये कबल कभी पबकरत नही्होगब। सोकनयब गबंधी के नेततृ व् मे्संसद से रबष्प् कत भवन तक कवपक््कब जो मबच्ाहुआ थब, उसकब संयोजक मै्ही थब। इसकलए मुझे पतब है कक इस सवबल पर पूरब कवपक््एक जुर है। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 27
िेशकाल
एक औि घि-वापसी
लंबी और रहथ्यमय छुट्ी से लौरने के बबद रबहुल गबंधी अपनी पहली जनसभब मे् भूकम-अकधग्ह् ण के मुद्ेपर मोदी सरकबर के किलबफ आक््बमक तेवर मे्नज़र आये। क्यब उनके बदले हुए अंदबज़ से कबंगस ्े की भी घर-वबपसी संभव हो पबएगी ? पुुदीप शुुीवासुुव
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न्नीस अप््ैल को रामलीला मैदान मंे हुई कांग्ेस की वकसान रैली मे्पाट््ी के नेताओ् और काय्षकत्ाषओ् मे् रैली की सफलता के साथ एक बड्ी उत्सुकता 56 वदन के अवकाश के बाद वापस लौटे राहुल गांधी को लेकर भी थी। राहुल का भारण संव्कप्त रहा, पर सभी ने इस भारण के साथ राहुल मे् आए बदलाव को महसूस वकया। राहुल ने कई मुद्ो् को भारण मे् सही तरीके से लपेटा। यह भी साफ वकया िक वह जमीन और वकसानो् की लड्ाई से अभी पहली बार नही् जुड्े है्। यूपीए की सत््ा मे् भी वे भट््ा पारसोल मे् वकसानो्के वलए और ओड्ीसा मे्आवदवावसयो्की जमीन के हक की लड्ाई लड्चुके है्। प््धानमंत्ी नरे्द् मोदी और भाजपा पर उन्हो्ने सीधे हमले वकए। ऐसा करके उनमे्बौखलाहट लाने मे्सफल रहे वक चुनाव मे् मोदी ने कारपोरेट से जो कज्ष फोटो : रदव बतंंा
वदया है उसे लौटने के वलए वकसानो् की जमीन हवथयाने की सावजश रची गई है। इसके दूसरे ही वदन संसद मे् लोकसभा मे् ‘वकसानो्की ब्सथवत’ पर वनयम 193 पर रखी चच्ाष पर राहुल ने अपने भारण के जवरए, कांग्ेस और ववपक्् मे् एक तरह से उबाल ला वदया। यहां तक वक भाजपा के सदस्यो्ने बीच मे्टोका टाकी की तो राजद के जय प््काश यादव और राकंपा के तावरक अनवर भी राहुल का साथ देते वदखाई वदए। यह राहुल के भारण का ही असर था वक उनके भारण के ठीक बाद संसदीय काय्षमंत्ी वैक ् या नायडू खड्े हो गए और राहुल द््ारा उठाए गए मुद्ो् का ठीक उसी तरह जवाब देने लगे जैसा चच्ाष के बाद संबंवधत मंत्ालय का मंत्ी देता है। वै्कया करीब आधे घंटे तक बोलते रहे। संसद मे्ऐसा पहले ही कभी हुआ हो जब चच्ाष के बीच मे् ही कोई मंत्ी वकसी एक वक्ता के भारण का जवाब देने लगा हो। करीब डेढ् महीने की लंबी छुट्ी के बाद कांग्ेस
उपाध्यक््राहुल गांधी 16 अप््ैल को वापस वदल्ली आ गए थे। 19 अप््ैल को रामलीला मैदान पर बुलाई गई रैली को सफल बनाने के वलए अपनी पूरी ताकत झो्कने के साथ कांगस ्े ने रैली के पोस्टर सोवनया गांधी और राहुल गांधी की फोटो के साथ लगा दी थी।। पर यहां राजनीवतक गवलयारे मे्उस वदन साथ ही साथ यह भी अटकले्चल रही थी वक राहुल की नाराजगी दूर करने की कोवशश जारी है। सोवनया गांधी पाट््ी के काय्षकत््ताओ्के बीच राहुल के कद भावी भूवमका को रेखांवकत करने के वलए ही कल से लेकर उस वदन लगातार दो बार राहुल के यहां गई। इस पूरे मामले मे्व््पयंका गांधी शुर् से उनके साथ लगी है्। सूत्ो् के मुतावबक गुर्वार को सुबह राहुल हवाई अड््ेसे सीधे अपने वनवास पर गए और वहां पहले से मौजूद सोवनया गांधी और व््पयंका ने उनका स्वागत वकया। राहुल अपनी मां और अध्यक्् सोवनया गांधी के वनवास पर नही् गए।
रामलीला मैिान की रैली मेंसोिनया और मनमोहन िसंह के साथ राहुल : अंिाजे बयां कुछ और
सोवनया गांधी ही उनके वनवास 12 तुगलक रोड गई और करीब 3-4 घंटे व््पयंका के साथ वहां वबताए। इन तीनो् पवरवावरक सदस्यो् के अलावा कोई नही्था। इन तीनो्के बीच क्या बातचीत हुई, यह वफलहाल उन्ही्के बीच है। पर एक तरफ जहां कांग्ेस नेता यह समझा रहे है् वक 19 की वकसान रैली को लेकर सोवनया गांधी राहुल के साथ राय मशवरा कर रही थी, वही्कुछ कांग्ेसी नेताओ्का यह भी मानना है वक राहुल गांधी रैली मे्वशरकत करने के पहले पाट््ी मे् कुछ मुद्ो् को साफ कर लेना चाहते है् और इन्ही् सबको लेकर सोवनया गांधी उनके यहां गई थी। तक्फ यह भी है वक रैली के बारे मे्रायमशवरा करना होता तो सोवनया गांधी कांग्ेस के ववरष्् नेताओ् और रैली के आयोजनकत्ाषओ् के साथ पहुंचती, न वक व््पयंका के साथ। सोवनया पाट््ी मे्संदेश देने के साथ राहुल को भी यह साफ करना चाहती थी वक पाट््ी मंे उनकी आगे की भूवमका क्या है। इस मामले मे् वदब्गवजय वसंह के बयान को भी महत्वपूणष्माना जा रहा है वजसमे् उन्हो्ने आज अपने वरटायरमे्ट की बात कही है। राजनीवतक क््ेत्मे्यह सभी जानते है् वक राहुल गांधी वनजी या राजनीवतक मुद्ो्पर अपनी बहन व््पयंका की बात सुनते है।् इसकी एक वजह यह भी है वक व््पयंका ही उनके संसदीय क््ेत् की देखभाल करती है्और चुनाव के समय प््चार की कमान भी उन्ही्के हाथ होती है। कहा यह भी जा रहा है वक कल रात राहुल के वनवास पर सुमन दूबे जैसे राजीव गांधी के पुराने वमत्् और पवरवार से जुड्ेलोग भी गए थे। उनके इस तरह जाने, राहुल के यहां पहुच ं ने के भी यही अथ्षलगाए जा रहे है्वक कुछ ऐसी बात है वजन्हे्वह सुलझाने गए थे। अप््ैल का अंवतम पखवाडा भारतीय राजनीवत के वलए काफी महत्वपूण्ष बन गया था जब तीन
कांगस ्े ककसानो्की आड मे्अपने युवराज की री-लॉन्नचंग कर रही है। ताकक राहुल कफर से राजनीकत मे्इंट्ी मार सके।् कदल्ली के रामलीला मैदान मे्होने जा रही ककसानो्की इस रैली से ककसानो्को कुछ नही्कमलने वाला, अलबत््ा राहुल गांधी चच्ाष जर्र पा जाएंग।े अपनी कजंदगी मे्पहली बार ऐसा नेता देिा है, जो री-लॉन्नचंग की कोकशश कर रहा है, और बकल का बकरा मजदूर, ककसान बन रहे है।् सतीश उपाध्याय, अध्यक्,् कदल्ली भाजपा
अलग- अलग धाराओ्की राजनीवत नई करवट ले रही थी। समाजवादी धारा के राजनैवतक दल एक साथ आए तो माक्स्षवादी कम्युवनस्ट पाट््ी मे् सीताराम येचुरी के महासवचव चुने जाने के बाद नया दौर शुर् हुआ। इसी के साथ कांग्ेस की उन्नीस अप््ैल की वकसान मजदूर रैली से राहुल गांधी की राजनीवत मे् दूसरी पारी शुर् हो गई है। यह वसफ्फ राहुल गांधी ही नही्, कांग्ेस की भी वापसी का संकेत था। वह कांग्ेस जो वपछले लोकसभा चुनाव मे्न वसफ्फसत््ा से बेदखल हुई, बब्लक ववपक््के लायक भी नही्बची। इसके बाद वफर वदल्ली के चुनाव मे् पाट््ी एक सीट भी नही् जीत सकी। इसके बाद राहुल गांधी बाकायदा छुट्ी लेकर देश से बाहर चले गए थे। लेवकन लौटने के दो वदन बाद राहुल नए तेवर मे् वदखे। यह मौका था वकसान रैली का। राहुल गांधी पहले भी काफी आक््ामक तेवर मे्बोलते रहे है्। लेवकन इस बार उनका अंदाज सधा हुआ वदखा। बहुत सधे हुए शल्दो् से सीधा हमला। वनशाने पर मोदी सरकार की वकसान ववरोधी नीवतयां। इस मौके पर राहुल गांधी ने बहुत ही आसान तरीके से वकसानो् को समझाया । वजसका लल्बोलुआब था वक मोदी ने चुनाव अवभयान के वलए देश के जाने माने उद््ोगपवतयो् से जो पैसा वलया था उसकी भरपाई वकसानो्की जमीन से होगी। इसी से वे अपने इन दोस््ो् का कज्ष चुका पाएंगे। कांग्ेस उपाध्यक्् राहुल गांधी ने कहा वक देश का वकसान डरा हुआ है। वकसान के मन मे् यह बात बैठ गई है वक मौजूदा सरकार केवल पूजीपवतयो् के वलए काम करती है। यह एक बानगी है राहुल गांधी के भारण की । वह बोले और जमकर बोले। कांग्ेस के साथ एक बडी वदक््त आम लोगो्से संवाद बनाने की रही है। वजस कला मे् मोदी मावहर है् और बाकी कसर उनकी राजनैवतक माक््ेवटंग से पूरी हो जाती है। अब कांग्ेस पर गौर करे्। वपछले चुनाव मे् प््धानमंत्ी मनमोहन वसंह बहुत ही कमजोर आवाज मे्अपनी बात रखते थे, तो सोवनया गांधी की वहंदी भी अंग्ेजी जैसी है। राहुल गांधी मोदी की तरह सीधा वनशाना नही् साध पा रहे थे। दूसरे भ््ि्ाचार के आरोपो् के चलते कांग्ेस बचाव की मुद्ा मे्थी।तो भाजपा हमलावर । अब हालात बदले हुए है्। मोदी ने वजतने चुनावी वायदे वकए उसमे से ज्यादातर जल्द पूरे होने वाले नही्है।् इसके साथ ही समूचे देश मे्यह संदश े जा रहा है वक मोदी सरकार कॉरपोरेट की मदद करते हुए वकसानो्की जमीन छीनने की वफराक मे् है। कांगस ्े इसी मुद्े को लेकर बडा अवभयान छेड रही है। राहुल गांधी भट््ा पारसौल से लेकर ओिड्सा के वनयमवगरी तक वकसान आवदवावसयो् के बीच जाते रहे है्और यह तथ्य उनके समथ्नष मे्जा रहा है । वैसे भी वह उत््र प््देश के गांव मे् दवलत पवरवार के घर र्क कर उसकी थाली मे् खाना खाकर अपनी अलग राजनीवत का संदश े दे चुके है।् कई लोग उनकी राजनैवतक क्म् ता पर सवाल उठाते
राहुल गांधी : वापसी के फूल
है्। लेवकन उन्हे् यह नही् भूलना चावहए वक उत््र प्द् श े मे्वर्ष2009 के लोकसभा चुनाव मे्उन्हो्ने समाजवादी पाट््ी और बहुजन समाज पाट््ी को तगडा झटका वदया था और कांगस ्े वशखर पर पहुच ं गयी थी। करीब डेढ दशक बाद कांगस ्े को मुबस् लम वबरादरी का बडा समथ्नष वमला था। मुलायम वसंह तब कल्याण वसंह को लेकर वपछडो्का मजबूत वोट बैक ् बनाना चाहते थे। पर बाबरी ध्वंस मे् कल्याण की भूवमका से नाराज मुबस् लम वबदक गए और कांगस ्े को समथ्नष वमला। फैजाबाद से लेकर मुरादाबाद तक कांगस ्े ने अपना परचम लहरा वदया। तब भी उस कांग्ेस के युवा चेहरे राहुल गांधी ही थे।अब नया एजंडा वकसानो् की खेती की जमीन बचाने का है और कांगस ्े इसमे् बाजी मार सकती है। वकसान ववरोधी अवधग््हण कानून को बदलने का श्य्े राहुल गांधी को भी जाता है । मोदी सरकार ने इसे बदल कर नया अध्यादेश जारी वकया है वजसे वकसान संगठन से लेकर राजनैवतक दल कॉरपोरेट समथ्क ष बता रहे है। ऐसे मे्राहुल गांधी के वलए नया एजंडा तय हो चुका है और वनशाना भी साफ है। इससे न वसफ्फराहुल गांधी दोबारा नए तेवर के साथ राजनीवत मे्लौटते नजर आ रहे है बब्लक कांग्ेस को भी संजीवनी वमल n सकती है। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 29
िेशकाल
मबक्सवा् बदी कम्यकु नथ्र पबर््ी के नए महबसकचव सीतबरबम येचरु ी उदबर चेहरब मबने जबते है्और उनकी तबजपोशी से िबसकर पक्िचम बंग के उन कैडरो् मे्उत्सबह पैदब हुआ है जो मबकपब की दुगका्त के कलए कनवत्म ा बन महबसकचव प्क ् बश करबत की नीकतयो् को िज़्मम ् दे बर ठहरबते है।्
महादसचव चुने जाने के बाि सीिाराम येचुरी: भारी िजमंमेिारी फोटाे : पवन कुमार
अब आये येचुरी
अमलेुदु उपाधुरार
आ
वखरकार भारत की कम्युवनस्ट पाट््ी (माक्स्षवादी) ने भी अपना चेहरा बदल ही वलया। अब कॉमरेड सीताराम येचुरी माकपा के नए महासवचव हो्गे, वे प््काश करात का स्थान ले्गे। इसी के साथ प््काश करात ऐसे महासवचव के र्प मे् इवतहास मे् दज्ष हो गए, वजनके नेतृत्व मे् माकपा अपना 33 सालो् का मजबूत वकला प। बंगाल गंवा बैठी। पाट््ी की के्द्ीय सवमवत की बैठक मे् वनवत्षमान महासवचव प््काश करात ने सीताराम येचुरी के नाम का प््स्ाव रखा, वजसका अनुमोदन एस। रामचंद्न वपल्लई ने वकया वजसे सव्षसम्मवत से स्वीकार कर वलया गया। हालां वक कम्यु वनस्ट पाव्टि यो् मे् महासवचव बनना या हटना कोई खास मायने नही् रखता, क्यो्वक वाम दलो्मे्व्यब्कत से ज्यादा नीवतयो्को तरजीह दी जाती है , ले वकन प््काश कारत की 30 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
ववदाई और येचुरी की ताजपोशी वाम राजनीवत मे् भी बदलाव के खास संकेत दे रही है। समझा जा सकता है वक भारतीय राजनीवत मे् चेहरे के कवरश्मे की हकीकत अब माकपा को भी समझ आने लगी है । 62 वर््ीय ये चु री, 67 वर््ीय कारत के मुकाबले युवा है्, आपात्ाकाल मे् जेल जा चुके है्। भारत मे् मुख्य धारा के वामपंथी दलो् की अजब समस्या रही है। वे व्यब्कत के चेहरे को पाट््ी के ऊपर तरजीह नही्देते है्। एक सीमा तक उनकी यह नीवत ठीक है, लेवकन जनाधार वाले नेता के ववर्द्वामदल अवतवादी हो जाते है्और उन्हे्लगने लगता है वक जनाधार वाला नेता पाट््ी की नीवतयो् के ववर्द् जा रहा है। इसी अवतवादी सोच के चलते वामदलो् ने न केवल अपने कई बड्े नेताओ् का नुकसान वकया है बब्लक पाट््ी के वलए उनकी यह नीवत आत्मघाती सावबत हुई है। येचुरी को पाट््ी की कमान सौ्पकर उसने स्वयं को दुर्स्करने का प््यास वकया है। यह ठीक है
वक व्यब्कत को पाट््ी के ऊपर हावी नही्होने देना चावहए, लेवकन यह भी उतना ही कटु सत्य है वक संसदीय राजनीवत मे् एक जनता के चेहरे की भी आवश्यकता होती है। केवल संसदीय राजनीवत ही नही्, क््ांवतयां भी वकसी प््भावशाली चेहरे के नेतृत्व के वबना अभी तक तो संभव नही् हुई है्। र्स मे् लेवनन, चीन मे् माओ, क्यूबा मे् वफडेल कास््ो आवखर वहां की कम्युवनस्ट पाव्टियो् का चेहरा तो रहे ही है्, वफर संसदीय राजनीवत मे् वबना चेहरे के कोई भी दल कामयाब कैसे हो सकता है। पं। बंगाल मे् तीन दशक तक ज्योवत बसु पाट््ी का चेहरा रहे है्। असल मे् क््ांवत और संसदीय राजनीवत दो ववपरीत ध््ुव है्। क््ांवत मे् समझौते नही् होते और संसदीय राजनीवत मे् अक्सर समझौते करने होते है्। भारत की कम्युवनस्ट पाव्टियां वजतना जल्दी इसको समझे् बेहतर है। करातकी जगह येचुरी का महासवचव बनना इस बात का भी एक संकेत हो सकता है वक अब
पाट््ी के पास एक जनव््पय और कैडर मे्लोकव््पय चेहरा है। ऐसा इसवलए भी हो सकता है वक वजस तरह से संघ पवरवार ने नरे्द् मोदी के चेहरे की आड्बनाकर लोकसभा चुनाव मे्अपार सफलता पाई और कांग्ेस अपना लोकव््पय चेहरा न प््ोजेक्ट कर पाने के कारण बुरी तरह परावजत हुई, बाद मे् केजरीवाल के चेहरे पर वदल्ली मे् आप ने सफलता के झंडे गाड्े, उससे भी माकपा को अपनी गल्ाती का एहसास हुआ हो। और देखने मे् आया वक येचुरी का नाम महासवचव के वलए आगे बढ्ने की सूचना मात्् से कोलकाता नगर वनगम चुनाव मे् वाम कैडरो् मे् अभूतपूव्ष उत्साह का संचार हुआ। दरअसल पं। बंगाल ववधानसभा चुनाव मे् करारी हार के बाद ही माकपा मे् नेतृत्व पवरवत्षन के स्वर उठने शुर् हो गए थे, लेवकन लोकसभा चुनाव मे् पाट््ी के अब तक के सव्ाषवधक वनराशाजनक प््दश्षन के बाद पाट््ी की कतारो् मे् यह मांग जोर-शोर से उठनी शुर् हो गई थी। कोलकाता मे् माकपा की राज्य कमेटी की बैठक के दौरान कमेटी के सदस्यो्ने नेतृत्व पवरवत्षन की मांग की थी। इतना ही नही्, माकपा नेताओ् ने लोकसभा चुनाव मे्वमली करारी हार के वलए पाट््ी महासवचव प््काश करात के गलत राजनीवतक फैसलो् को वजम्मेदार बताया था। बताया जाता है वक इस बैठक मे् करात के साथ-साथ व््तपुरा के
मुख्यमंत्ी मावनक सरकार और तत्कालीन पोवलत ल्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी भी मौजूद थे। लोकसभा चुनाव के बाद माकपा मे् 35 वर््ो से ववधायक-मंत्ी रहे अल्दुर्षज्ाक मोल्ला ने कहा था वक पाट््ी मे् नेता व कैडर नही् है् बब्लक अब मैनेजर व कुछ कम्षचारी रह गये है्। उनका इशारा कारत की तरफ था। ...और जब येचुरी आज महासवचव चुने गए तो वामपंथी नेता व वचंतक अर्ण माहेश्री ने भी इन शल्दो्मे्उन्हे्बधाई दी‘सीपीआई(एम) के महासवचव पद पर सीताराम येचुरी को चुन वलया गया है। उम्मीद की जा सकती है वक आगे पाट््ी पर नौकरशाही जकड्न ढीली होगी। खुलापन आयेगा। संगठन चुस् दुर्स्हो्गे। वामपंथ को उसके वत्षमान पतन की दशा तक ले जाने वाले ‘सव््कयजनो्’ से पाट््ी को मुक्त कराने की कुछ कोवशश होगी। सीताराम येचुरी को बधाई।’ लोकसभा चुनाव मे्माकपा के वनराशाजनक प््दश्षन की पृष्भूवम मे् पाट््ी के पूव्ष वदग्गज नेता सोमनाथ चटज््ी ने सबसे पहले कहा था वक पाट््ी नेतृत्व मे्तत्काल बदलाव होना चावहए। सोमनाथ चटज््ी ने कहा था वक माकपा का मौजूदा नेतृत्व लम्बे समय से है और इसे तत्काल हट जाना चावहए। उन्हो्ने साफ-साफ कहा था वक पाट््ी वदग्गज वामपंथी नेता ज्योवत बसु की उस सलाह का अनुसरण करने मे् ववफल रही है, वजसमे् उन्हो्ने कहा था वक पाट््ी को हमेशा जनता के साथ सम्पक्फ मे् रहना चावहए। चटज््ी ने कहा था वक ज्योवत बसु अक्सर पाट््ी नेताओ्से कहा करते थे वक वे जनता के साथ वनरन्तर सम्पक्फ मे् रहे्, लेवकन माकपा नेतृत्व लोगो् से दूर हो गये और ज्वलनशील मुद्ो् पर कोई एक आंदोलन भी नही् खड्ा कर पाये। दरअसल प््काश करात माकपा की बंगाल लॉबी के सामने अपना वकला गंवा बैठे। बंगाल लॉबी करात को ज्योवत बसु के प््धानमंत्ी न बनने
येचरु ी के सामने चुनौती केवल बंगाल की ही नहींहै। केदं ंमेंमोदी सरकार बनने के बाद वाम दलोंके पास एक अवसर संवयं को सारे देश मेंपंरंतरोध की एक ताकत बना पाने का है। देने के वलए वजम्मेदार मानती रही है। यह काफी हद तक सही भी है। संयुक्त मोच्ाष की सरकार बनने पर जब कॉमरेड ज्योवतबसु को प््धानमंत्ी बनने का ऑफर वदया गया था तो पाट््ी पॉवलट ल्यूरो ने उन्हे्इसकी इजाजत नही्दी थी। हालांवक कहा जाता है वक तत्कालीन महासवचव हरवकशन वसंह सुरजीत बसु को प््धानमंत्ी बनाए जाने के पक््मे्थे, लेवकन करात के नेतृत्व मे्हाड्षलाइनर धड्ा उस समय हावी रहा। इसी तरह परमाणु करार के मसले पर मनमोहन सरकार के वखलाफ अववस्वास प््स्ाव के मसले पर सोमनाथ चटज््ी
को लोकसभा अध्यक््पद से इस््ीफा देने के वलए दबाव डालना और वफर उनका पाट््ी से वनष्कासन भी करात के वखलाफ कैडर मे्असंतोर का मुख्य कारण बना। नए महासवचव सीताराम येचुरी, माकपा का फोटोजेवनक-मीवडयाफे्डली चेहरा है्। प््काश कारत के मुकाबले वलबरल समझे जाते है् और सव्ाषवधक महत्वपूण्षबात यह है वक वे पाट््ी कैडर के बीच कैडर के ही आदमी समझे जाते रहे है्, जबवक प््काश करात हाड्षलाइनर, वरजव्ष नेचर और काय्षकत्ाषओ्से दूरी बनाकर रखने वाले नेता समझे जाते रहे है्। इसके बावजूद येचुरी के सामने चुनौवतयां बहुत कवठन है्। अगले साल पं। बंगाल मे् ववधानसभा चुनाव है्। वहां भगवा पाट््ी का उदय हो चुका है, तो माकपा कैडर इन तीन सालो् मे् वपट-वपट कर मायूस हो चुका है। कई बड्े जनाधार वाले नेताओ्को पाट््ी से बाहर का रास््ा वदखाया जा चुका है। ऐसे मे्येचुरी बंगाल माकपा मे्क्या नई जान फूंक पाते है्, यह देखना है। येचुरी के सामने चुनौती केवल बंगाल की ही नही् है। के्द् मे् मोदी सरकार बनने के बाद वाम दलो् के पास एक अवसर स्वयं को सारे देश मे् प््वतरोध की एक ताकत बना पाने का है। देखना है वक क्या येचुरी यह कवरश्मा कर पाते है्। हालांवक यह कोई कवठन काम भी नही् है। दो दशक पहले तक देश मे्सारे बड्ेजनांदोलन वाम दलो्की अगुवाई मे्ही हुए है्। ऐसे मे्बंगाल और केरल के माकपा कैडर मे्तो नई ऊज्ाष का संचार हुआ है, लेवकन क्या येचुरी पाट््ी को बंगाल-केरल और व््तपुरा की पवरवध से बाहर भी ले जा पाते है् वक नही्, प््श्न यह है। एक अहम बात यह है वक माकपा की नई 16 सदस्यीय पॉवलट ल्यूरो मे् एक भी सदस्य वहंदी प््देशो् का नही् है। माकपा और भाकपा पर वहंदी ववरोधी होने के आरोप लगते रहे है्, जो काफी हद तक सही भी है्। दोनो् ही कम्युवनस्ट पाव्टियो् मे् वहंदी पट््ी से आने वाले प््वतभाशाली नेतृत्व को वमट््ी मे् वमलाया जाता रहा है। हालांवक येचुरी वहंदी अच्छी बोलते है् लेवकन अगर वहंदी पट््ी का प््वतवनवधत्व पॉवलट ल्यूरो मे् नही् होगा तो येचुरी की लाख कोवशशो्के बावजूद पाट््ी बंगाल-केरल और व््तपुरा की पवरवध से बाहर नही् वनकल पाएगी। वैसे सुभावरनी अली पॉवलट ल्यूरो मे्है्, जो कानपुर से माकपा की सांसद रही है्, लेवकन वह प््वतवनवधत्व बंगाल का कर रही है् और वर््ो् से उनका कानपुर से कोई नाता भी नही्रहा है। और मजेदार बात यह है वक माकपा की वेबसाइट पर वहंदी सेक्शन 16 मई 2014 के बाद से आज तक अपडेट ही नही्हुआ है। बहरहाल येचुरी का नया माकपा महासवचव बनना माकपा के वलए तो शुभ संकेत है ही, देश मे्जनवादी-लोकतांव्तक धम्षवनरपेक्राजनीवत के वलए भी आशा की वकरण है। n
शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 31
मीिडया
सूखती संवेदनाएं
सुशील कुमार दसंह
मीकडयब के कलए गजेनद् ्कसंह की आत्महत्यब को दज्ाकरने से ज्यबदब ज़र्री कबम उसकी जबन बचबनब थब, लेककन अपनी संवदे नहीनतब के कबरण वह इसमे्चूक गयब.
जं
तर-मंतर पर आम आदमी पाट््ीकी रैली मे्मीवडया के कम से कम डेढ-् दो सौ लोग मौजूद थे। पाट््ीनेताओ्के साथ इन्हे्भी गजेद् ्वसंह के बारे मे्पता लग चुका था। कुछ काय्क ष त्ाओ ष ्ने पुवलस से गुजावरश भी की वक पीली पगड्ी वाले उस आदमी को उतावरये जो पेड्पर सबसे ऊपर जा चढ्ा है। गजेद् ्की फेक ् ी वचट््ी के बाद तो ब्सथवत और साफ हो गई थी। क्या इन हालात मे्खुद मीवडया के लोगो्को उसे बचाने की कोवशश नही् करनी चावहए थी? मेरे जानकार एक वरपोट्रष ने कहा- ‘हमने भी पुवलसवालो्से कहा था। पर उन्हो्ने कुछ वकया ही नही्।‘ क्या यह जवाब काफी है? पत्क ् ारो्को पुवलसवालो्की नाक मे्दम कर देना चावहए था। कम से कम वदल्ली मे,् यह संभव नही्है वक इतने पत्क ् ारो्के शोर मचाने पर भी पुवलस कुछ नही्करती। अरववंद केजरीवाल को भी यह धमकी दी जानी चावहए थी वक पहले उस आदमी को बचाओ, नही्तो हम रैली का कवरेज बंद कर देग् ।े वकसी को स्वयं अपनी जान लेते देखने पर आपके भीतर कुछ करवट न ले तो पत्क ् ारो्और नेताओ्मे्कोई फक्फनही्रह जाता। न उन्हो्ने कुछ वकया, न इन्हो्न।े वहां तैनात तमाम कैमरे गजेद् ् के खात्मे के बेहतर से बेहतर शॉट लेने मे्जुटे रहे। फांसी लगाने के बाद, जीववत या मृत, उसका शरीर नीचे वगरा और अस्पताल ले जाया गया। उसके बाद भी केजरीवाल का भारण चालीस वमनट चला वजसे सभी चैनलो् ने बाकायदा कवर वकया। गजेद् ्की मौत के बाद भारण का कोई महत्व नही्था। वफर भी कैमरे हटे नही्। क्या इसवलए वक बाद मे्ऐ्कर आम आदमी पाट््ी के लोगो्से सवाल कर सके्वक आपका भारण क्यो्जारी रहा? आप तो आम आदमी की बात करते है,् आप कैसे इतने संवदे नहीन हो गए? क्या इसे मीवडया की राजनीवत नही्कहना चावहए? आवखरकार केजरीवाल ने भारण जारी रखने के वलए माफी मांग ली है। क्या अब वहां उपब्सथत रहा कोई पत्क ् ार भी अपने आचरण के वलए माफी मांगने की बहादुरी वदखाएगा? कुछ साल पहले पंजाब मे्एक व्यापारी ने पेि्ोल वछड्क कर खुद को आग लगा ली थी। उस समय भी यह सवाल उठा था वक चारो्तरफ से कैमरे उसके शॉट लेने मे्क्यो्लगे रहे, वकसी ने उसे बचाया क्यो्नही्? गजेद् ्की कहावनयां अभी खत्म नही्हुई है।् कोवशश यह तक सावबत करने की हो रही है वक यह हत्या थी। कोई वलखता है वक वह इतना गरीब नही्था वक खुदकुशी पर उतरना पड्।े कोई पूछता है वक गजेद् ्के तीन बच््ो् का अब क्या होगा। हमारे ज्यादातर न्यजू ्चैनल और अखबार अलग-अलग कारणो्से वकसी न वकसी राजनीवतक पाट््ी के रंग मे्रंगे हुए है।् जो नही्रंगे उनमे्भी गजेद् ्को लेकर कराई गई बहसो्मे्ज्यादातर नेताओ्को ही बुलाया गया वजससे बहस मे्राजनीवत के अलावा कुछ नही्हुआ। इस राजनीवत मे् गजेद् ्के मरने का उद्श्े य् जीववत रह पाएगा, कोई नही्कह सकता। यह मीवडया की वजम्मदे ारी है वक वकसी भी तरह इस उद्श्े य् को वजंदा रखे। शायद इससे उसके उस पाप का वनपटारा हो सके जो उसने वपछले बीस सालो्से
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वकसानो्की दुदश ष ् ा को अनदेखा करके वकया है। देश मे्1995 से अब तक, तीन लाख से ज्यादा वकसान कज्षया बदहाली से घबरा कर आत्महत्या कर चुके है।् आज भी औसतन दो वकसान हर घंटे खुदकुशी कर रहे है।् यह भयावह ब्सथवत है। अगर सचमुच इंवडया वाइब्ट्े होता तो हमारी संसद सारे काम छोड्कर पहले वकसानो्के वलए कुछ करती और अपनी न्यायपावलका तमाम मुकदमो्को वकनारे करके सबसे पहले वकसानो्को न्याय वदलाती। और अगर हमारे मीवडया की संवदे नाएं सूख नही्गई होती्तो वकसान वपछले बीस सालो्से लगातार देश का सबसे बड्ा मुद्ा होता। वैसे खेती और वकसानो्से जुड्ेमुद्ेपूरी दुवनया मे्मीवडया की वदलचस्पी से बाहर हो चुके है।् ‘अल जज्ीरा’ की एक वरपोट्षकहती है वक दुवनया भर के मीवडया कवरेज मे्खेती का दखल मुबश् कल से एक प्व्तशत है। गांव, खेती, वकसान वगैरह उसके वलए ‘डाउन माक्ट्े ’ ववरय है।् मीवडया की दूसरी समस्या यह है वक खबरो्पर खच्षवकया जाना बंद हो गया है। सबको पता है वक जो असर खबर का हो सकता है वह वकसी लेख का नही्हो सकता है। इसी तरह कही्दूरदराज कैमरा भेज कर करवाई गई खबर वजतना प्भ् ाव डाल सकती है वह वकसी बहस से संभव नही्है। मीवडया संसथ् ान खबरो् पर खच्षनही्करना चाहते इसवलए पत्क ् ार चाह कर भी कुछ नही्कर सकते। अखबारो्, खास कर वहंदी अखबारो्ने वरपोट्रष ो्को दूर भेजना बंद कर वदया है। वैसे भी खबर खोज वनकालने की वजम्मदे ारी वहंदी अखबारो्ने अंगज्े ी अखबारो्पर छोड्दी है। इस बार फसलो्की बरबादी वदखाने के वलए जर्र वरपोट्रष बाहर भेजे गए। उत्र् प्द् श े और हवरयाणा के गांवो्मे्उन्हे्फसल की बात करते देखना सुखद अनुभवू त थी। वकसानो्को अपनी फसल के वावजब दाम वमले्और अगर फसल मारी जाए तो उसका सही मुआवजा वमले, यह मीवडया की भी वजम्मदे ारी होनी चावहए। फसलो्की बरबादी के अलावा दूसरा वववावदत मुद्ा भूवम अवधग्ह् ण का है। भूवम अवधग्ह् ण का वपछला कानून कोई बहुत अच्छा कानून नही्था, लेवकन मोदी सरकार वाला कानून वकस कदर खतरनाक है, यह बताने वाले लेख बहुत छपे है।् मगर भूवम अवधग्ह् ण की सच््ाई बताने वाली खबरे्कहां है?् वनयामवगवर मे्वकसने क्या वकया? भाखड्ा मे्पीव्ढयो्बाद भी मुआवजे का वववाद क्यो्लटका है? वकन-वकन राज्यो्मे्लोगो्को भूवम अवधग्ह् ण के चलते बार-बार ववस्थावपत होना पड्ा? वकसी ने यह खबर भी नही्की वक जमीन अवधग्ह् ण का मुआवजा और बदले मे्नौकरी पाने वाले पवरवारो्की दस या बीस साल बाद क्या ब्सथवत है? यह खबर तो हर राज्य से होनी चावहए थी। भूवम अवधग्ह् ण कानून के वखलाफ देश मे्बड्ी संखय् ा मे्छोटे-बड्ेआंदोलन खड्ेगए है।् इन आंदोलनो्की खबरे्न टीवी मे्है,् न अखबारो्मे।् इन खबरो्के वलए देश के कोने-कोने मे्जाना पड्गे ा। यह यात््ा इस पर वनभ्रष करेगी वक आप लड्ाई को कहां खत्म मान लेते है।् वनव््ितं रहे,् ये खबरे्जर्र पढ्ी जाएंगी। वपछले कुछ हफ्तो्मे्इतना तो सावबत हुआ ही है वक खेती और वकसानो्से संबवं धत खबरो्के भी पाठक और दश्क ष है।्
वाघा-पार
िवभूिि नारायण राय
सरकारी-गंैरसरकारी आतंक
मुबं ई हमलो्के सूतध ् बर लिवी की िरहबई पबिकस््बन के भीतरी हबलबत पर भी िरप्पणी है।
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6/11 के रचवयता जकी उर रहमान लखवी (55) की वरहाई से वकसी को आि्य् ष्नही्होना चावहए। आि्य् ष्इस बात पर हो सकता है वक वह इतने लंबे अरसे तक जेल मे्कैसे रहा? संभवत: यह अमरीकी दबाव था वजसने पावकस््ानी सरकारो् , एजेव्सयो् और अदालतो्को लगभग वववश कर रखा था वक वे लखवी को जेल मे्ही रखे।् हालांवक पावकस््ानी पंजाब सरकार ने उसे जमानत देने के लाहौर हाईकोट्षफैसले को सुप्ीम कोट्षमे्चुनौती दी है पर इस मामले मे्बहुत ज्यादा उम्मीद नही्की जानी चावहए। लखवी का जेल मे्रहना भी वसफ्फ मनोवैज्ावनक बाधा था क्यो्वक वहां उसे सेटल े ाईट फोन, कम्पय् टू र तथा टीवी जैसी सारी सुववधाएं उपलल्ध थी्वजनके माध्यम से उसका अपने काडर तथा आईएसआई मे्बैठे आकाओ्से सीधा संपक्फबना हुआ था। कई बार सीआईए के एजेट् ो्ने जेल के अंदर उसकी बातचीत वरकाड्षभी की और पावकस््ानी सरकार से समय-समय पर अपना ववरोध भी दज्ष कराया पर सब कुछ बेनतीजा रहा। लखवी को समझने के वलए हमे्राष्प् वत जरदारी के वक्तव्य को याद करना चावहए जो उन्हो्ने 26 नवंबर 2008 को बंबई पर आतंकी हमले के फ़ौरन बाद वदया था। कई वदनो्तक बंबई हमलो् मे् पावकस््ानी हाथ को वसरे से नकारने के बाद, जब जीओ टीवी जैसे पावकस््ानी चैनल ने ही, यह सावबत कर वदया वक हमलो्के दौरान पकडा गया अकेला वजन्दा आतंकी क़्सस् ाब पावकस््ान के फरीदकोट मे् पला बढा है और उसका पवरवार वही रहता है, जरदारी ने वह ऐवतहावसक बयान वदया वजसमे् कहा गया वक हमलो्मे् पावकस््ान के नॉन स्टटे ऐक्टस्षअथ्ातष गैर सरकारी तत्वो्का हाथ हो सकता है। पावकस््ान मे्स्टटे ऐक्टस्षऔर नॉन स्टटे ऐक्टस्ष की ववभाजक रेखा बहुत धुधं ली है। मसलन क्या सेना और उसकी खुवफया एजेस् ी राज्य से बाहर है? यह सवाल दुवनया के वकसी भी मुलक ् मे्पूछना हास्यास्पद समझा जा सकता है पर पावकस््ान मे् आप पूछ सकते है।् यह पावकस््ान मे्ही संभव है वक सुप्ीम कोट्षमे्चल रहे वकसी मुकदमे्मे्सरकार और सेना एक दूसरे के ववरोधी हलफ़्नामे लगाएं और रक््ा मंत्ालय अपने हलफ़्नामे मे् कहे वक सेना उसके वनयंतण ् मे्नही् है| ऐसा राजदूत हक््ानी प्क ् रण मे्हो चुका है। यह भी पावकस््ान मे्ही संभव है वक फ़ौज की आवधकावरक प्व् क्ता इंटर सव्वसष से पब्ललक वरलेशन अपने देश के प्ध् ानमंत्ी के कथन का साव्ज ष वनक र्प से खंडन करे। वफर हम पावकस््ानी फ़ौज को स्टटे एक्टर कहे्या नॉन स्टटे एक्टर? जावहर है वक कोई भी राज्य खुले आम यह स्वीकार नही्कर सकता वक उसकी सेना नॉन स्टटे एक्टर है अत: सबसे सरल उपाय है वक सेना कुछ नॉन स्टटे एक्टर वनव्मतष करे तथा अपने एजेड् े पर चलने के वलए उन्हे् जर्री प्व्शक्ण ् तथा संसाधन मुहयै ा कराए और वकसी अव््पय ब्सथवत मे् इस बात से इंकार कर दे वक उसका वववावदत संगठन से कोई संबधं है। अपनी पूव्ी सीमा पर भारत तथा पव््िमी सीमा पर अफगावनस््ान को
लेकर पावकस््ानी सेना ने कई संगठन खडे वकए है।् 1990 के दशक मे् वहजबुल मुजावहद््ीन ,हरकतुल अंसार , जैशे मोहम्मद तथा लश्करे तैयबा कुछ ऐसे ही संगठन है्वजन्हे्आईएसआई ने पाल पोस कर बडा वकया है। इनमे्लश्करे तैयबा सबसे ताकतवर और प्भ् ावशाली संगठन बन कर उभरा है। इसके वपतृ संगठन जमातुद्ावा का मुखय् ालय लाहौर से कुछ ही मील दूर मुरीदके मे्है और इसका मुवखया हाव्फ़ज्सईद अमेवरका द््ारा आतंकी घोवरत वकए जाने के बावजूद पावकस््ान के वववभन्न शहरो्मे् खुले आम आग उगलता घूमता है। हाल ही मे्जमातुद्ावा का एक बडा इज्तमा लाहौर मे्हुआ वजसमे्लाखो्लोगो्ने भाग वलया और सरकार ने उनके वलए स्पश े ल ि्न्े े चलाई। इसी जमातुद्ावा का आॅपरेशनल कमांडर है लखवी। लश्करे तायबा कश्मीर मे्पावकस््ानी फ़ौज की ववस््ावरत टुकडी की तरह काम करता है और शेर भारत मे्26/11 जैसी काय्वष ाही भी उसकी व्जम्मदे ावरयो्मे्है। क़्साब के बयान तथा हमलावरो्के बीच हुए वात्ाल ष ाप के इंटरसेपश ् न से यह वनव्ववष ाद र्प से सावबत हो गया वक वजन दस हमलावरो्ने 26 नवंबर 2008 को मुबं ई पर हमला वकया था उनका चयन हाव्फ़ज् सईद और लखवी ने ही वकया था तथा उनके वलए प्व्शक्ण ् और हवथयार लश्कर ने उपलल्ध कराए थे। बाद मे्अमेवरका मे्पकडे गए हेडली ने भी इस बात की पुव्ि की वक आईएसआई के कहने पर ही उसने मुबं ई के उन स्थानो्को वचब्हनत करने का काम वकया था जहां लखवी के चेलो्को कहर बरपाना था। मुमब् ई आॅपरेशन के दौरान लखवी हमलावर आतंवकयो्से लगातार बात करता रहा था और भारतीय खुवफया एजेव्सयो्ने उनके दरवमयान चलने वाला वात्ाल ष ाप वरकाड्षभी वकया था और इसी वरकाव्डगि् की वजह से अमेवरका जैसे मुलक ् घटना मे्पावकस््ानी हाथ मानने को मजबूर हुए थे। पर पावकस््ानी सरकार और अदालतो्के वलए इस अकाट््सबूत का भी कोई अथ्षनही्है , यहां तक वक बातचीत मे्लखवी की उपब्सथवत प्म् ावणत करने के वलए उसकी आवाज का नमूना भी भारतीय जांच एजेव्सयो्को नही्उपलल्ध कराया गया। सोलह वदसम्बर 2014 मे्पेशावर आम््ी पब्ललक स्कल ू के बच््ो् के नृशस ं हत्याकांड के बाद प्ध् ानमंत्ी शरीफ ने कहा था वक अब वे अच्छे या बुरे तावलबान का फक्फनही्करेग् े और यह आशा बंधी थी वक शायद हाफ़िज सईद या लखवी जैसो्पर कोई काय्वष ाही होगी पर जैसा होता आया है इस बार भी सेना ने उन्हे्कुछ नही्करने वदया| उलटे लखवी जेल से छूट गया| अब तो एक ही उम्मीद बची है वक अंकल सैम पावकस््ान का हाथ मरोडे और उसे काय्वष ाही करने के िलए मजबूर करे। आवखर 26/11 के मुमब् ई हमले मे्अमेवरकी नागवरक भी तो मारे गए थे और बीच बीच मे्वह लखवी को भारत या अमेवरकी अदालतो्मे् पेश करने की मांग भी करता रहा है। अंततः क्या होता है इसके वलए कुछ वदन और इंतजार करना पडेगा।
शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 33
राजंयनामा
दोस़़ी के बावजूद गुत़थी जनतब पकरवबर के िवलय और नीतीश कुमबर-लबलू यबदव के मैत्ी-युग के बबवजूद िबहबर की जंग आसबन नही्है क्यो्िक अब भबजपब के सबथ-सबथ जीतनरबम मंबझी कब वोर बै्क भी सकक््य है।
मकसद से नही्, बब्लक चुनाव पवरणामो्मे्वसकुडत् े अपने वोट को साथ करने के मकसद से है। दरअसल लोकसभा चुनाव के बाद हुए ववधानसभा की कुछ सीटो् के उपचुनाव मे् राजद को जद(यू) से ज्यादा सीटे्वमली्। यह बात लगभग साफ हो गयी
भूल सुधार के नए क््म मे् नीतीश कुमार अप्त्य् ावशत उठापटक के बाद मांझी को हटाकर वफर से मुखय् मंत्ी पद पर कावबज हो गए। लेवकन मांझी इसे दवलत समुदाय के अपमान का मुद्ा बनाकर अपनी मुवहम मे्जुट गए है।् समाजशास््ी प््ो। सची्द् नारायण कहते है,् ‘ मांझी को हटाए जाने का अच्छा संदेश नही् गया है। लालू और नीवतश को दवलत वोटो्से वंवचत होना पड्गे ा। उन्हे्अब मुबस् लम और कुम्ी, यादव वोटो्पर वनभ्रष रहना होगा’। 2010 के चुनाव मे् जद(यू) और भाजपा ने वमलकर चुनाव लड्ा था। इनमे्जद(यू) 115 और भाजपा को 91 सीटो् पर जीत हावसल हुई थी। इस तरह 243 मे्से 206 सीटे्इनके पाले मे्थी। लेवकन जद(यू) के भाजपा से नाता तोड्े जाने के बाद भाजपा ने जदयू के जनाधार मे् से्ध लगाने का अवभयान शुर्वकया। दूसरी ओर जद(यू) का वोट वबखरने लगा। राजद से दोस््ी की वजह से लालू ववरोधी अगड्ी जावतयो् का वोट तो जद(यू) से अलग हो ही चुका है। भाजपा यादवो् और अवत
तवपेुदु
ता
पमान की आंख वमचौली के साथ वबहार का राजनीवतक पारा तेज हो चला है। ववधानसभा चुनाव ज्यो्-ज्यो् पास आ रहा है, लोगो् की जुबान पर वसयासत का रंग चढ्ने लगा है। सवाल शुर्हो गया है अबकी बार कौन? इसी सवाल का जवाब देने के वलए जनता पवरवार ने ववलय की पहल की है। भाजपा नए सहयोवगयो् की तलाश मे् है। दोनो् खेमो् के जुड्ाव- घटाव का गवणत वबठा रहे राजनीवतक पंवडत कांटे के मुकाबले का दावा ठो्क रहे है्। लेवकन बाजी वकसकी होगी। इसकी भववष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी। लेवकन मौजूदा सत््ा का बने रहना आसान नही् होगा। लोकसभा चुनाव और बाद के हुए वबहार मे् ववधानसभा उपचुनाव पवरणामो्ने सत््ार्ढ्जद(यू) की बेचैनी बढ्ा दी थी। इसी बेचैनी से पहले नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्ी पद से इस््ीफा वदया और राजद के साथ गलबवहयां की। जनता पवरवार को एकजुट करने का वसलवसला शुर् हुआ। बीते 15 अप््ैल को छह पाव्टियो्के ववलय का एलान हो गया। लेवकन इसके नाम, झंडे और चुनाव वचन्ह के वलए अभी इंतजार है। इसमे् जनता दल (यू), समाजवादी पाट््ी, राष््ीय जनता दल, भारतीय राष््ीय लोकदल, जनता दल (सेक्यूलर), समाजवादी जनता पाट््ी शावमल है।् मुलायम वसंह यादव इसके अध्यक््बने। इसकी घोरणा शरद यादव ने कर दी। लेवकन इसका ववलय क्या वबहार की राजनीवत को नया मुकाम दे पाएगा। इसकी परीक््ा अभी बाकी है। वबहार की राजनीवत पर सामावजक काय्षकत्ाष रणजीव कहते है् वक यह पहल वकसी सकारात्मक 34 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
लालू और नीिीश : िोसंंी के समीकरण
थी वक जद(यू) का वोट वबखर चुका है। ववलय के बाद अब यह छह दल वबहार का चुनाव वमलकर लड्गे् ।े लेवकन इस बात के आसार नही् है् वक इन पाव्टियो् के साथ आने से इनका परंपरागत वोट भी साथ आएगा। वोटो्को लेकर कई तरह के समीकरण है।् वजनकी अनदेखी नही्की जा सकती। लोकसभा चुनाव मे्पाट््ी की हार की नैवतक वजम्मदे ारी लेते हुए नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस््ीफा वदया और जीतन राम मांझी को मुखय् मंत्ी बनाया गया। लेवकन उनका यह पासा उल्टा पड्ा और उन्हे्खुद स्वीकार करना पड्ा वक मांझी को कुस्ी देना उनकी बहुत बड्ी भूल थी।
वपछड्ी जावतयो्के एक बड्ेवहस्से को भी अपने साथ करने की जुगत मे्लगी हुई है। लोकसभा चुनाव के समय लालू के हनुमान रामकृपाल यादव वटकट नही् वमलने पर भाजपा के साथ हो गए और लालू की बेटी को हरा लोकसभा पहुच ं ।े इसके बाद कई और यादव नेता अब तक भाजपा मे्शावमल हो चुके है।् वपछले वदनो् राजद की बैठक मे् सांसद पप्पू यादव की फजीहत हुयी। अब इस बात की पूरी संभावना है वक पप्पू यादव इससे दूरी बनाए रखे्गे। सीमांचल के इलाके मे्वोटो्पर उनका प्भ् ाव है। यह इसी बात से प्म् ावणत हो जाता है वक लोकसभा के वपछले चुनाव मे् मोदी की लहर के बावजूद वे शरद यादव और
भाजपा के उम्मीदवार को हराकर चुनाव जीते थे। राजनीवतक ववश्लरे को्का कहना है वक लालू और नीवतश साथ हो लेते है् तो उनके वोट उतनी ही आसानी से साथ हो जाएंग।े इस बात की गारंटी नही् है। इस साथ को प्भ् ावी बनाने मे्कई अड्चने्हे।् इन्ही्अड्चनो्का नतीजा है वक मांझी को हटाने के बाद नीतीश कुमार वफर से मुखय् मंत्ी बने, तो शपथ के वदन तक चच्ाष थी वक राजद के कोटे से भी मंत्ी शपथ लेग् ।े लेवकन राजद का कोई मंत्ी नही्बना। अब मुखय् मंत्ी ने साफ कर वदया है वक चुनाव तक राजद का कोई मंत्ी नही् बनेगा। दूसरी सबसे बड्ी बाधा सीटो्के बंटवारे को लेकर है। जनता पवरवार के ववलय की घोरणा के बाद भी वबहार के समीकरण आसान नही्है।् राजद को लालू बार-बार जद(यू) से बड्ी पाट््ी बताते रहे है।् उसी अनुपात मे् वह सीट भी मांगगे् ।े कांगस ्े जमीन बनाने मे्जुटी है। वह भी गठबंधन मे्जगह के साथ सीट खोजेगी। तो उन्हे्भी सीट चावहए होगी। इस तरह सीटो्का बंटवारा आसान काम नही्रह जाएगा।
अछूत नही् भाजपा
कशवबनंद कतवबरी चुनबवी रबजनीकत से संनय ् बस ले चुके है,् लेककन उनके गुणब-गकणत कब कसलकसलब नही्र्कब है। उनसे बबतचीत।
कवधबनसभब चुनबव नजदीक है, क्यब लगतब है आपको? कवधबनसभब चुनबव दो ध्व्ु ीय होगब। जनतब पकरवबर के कवलय के बबद भी सत््बर्ढ़्िेमे को भबजपब के कड्ेमुकबबले कब सबमनब करनब होगब। इसे जनतब को कवलय कब औकचत्य बतबनब होगब। एक तरह से यह कवलय की अस्ननपरीक््ब होगी। जनतब कवलय को थ्वीकबर करती है यब नही्, यह चुनबव पकरणबम बतबएगब। दरअसल लोकसभब चुनबव पकरणबम और उसके बबद हुए कवधबनसभब उपचुनबवो्के पकरणबमो्से सबफ हो गयब थब कक नीतीश कुमबर के पबस कोई दमदबर वोर बैक ् नही्है। ऐसे मे्लबलू से हबथ कमलबनब उनकी मजबूरी थी। हबलबंकक कवलय के बबद भी बहुत आसबन नही्है। यह सही है कक लबलू के पबस यबदवो्कब वोर है, लेककन उसमे्दरबर पड्रहब है। रबमकृपबल जैसे कई यबदव भबजपब मे् जब चुके है।् पप्पू यबदव के सबथ रबजद की कपछली बैठक मे्जो कुछ हुआ, उससे इस संभबवनब को इनकबर नही्ककयब जब सकतब कक पप्पू यबदव पबलब बदल सकते है।् कवधबन सभब के कपछले आम चुनबव मे्अकत कपछड्ी जबकतयो्ने नीतीश के समथ्न ा मे्उत्सबह कदिबयब थब। लेककन बदले हबलबतो्मे्अब वह उत्सबह व समथ्न ा नही्रह गयब है। गैर सबंपद् बकयक दलो्की एकजुरतब से भबजपब कमजोर नही्होगी? कबहबर की भबजपब दूसरे रबज्यो्की तुलनब मे्थोड्ी अलग है। एकबध अपवबदो्को छोड्दे्तो प्द् श े भबजपब के शीष्ानेतबओ्मे्वैसी कट्र् तब यब धम्बध ा् तब नही्है, जो बबकी रबज्यो्मे्है। सुशील मोदी हो्यब नंदककशोर यबदव यब कफर रकवशंकर प्स ् बद इन सब मे्ककसी की छकव सबंपद् बकयक हवब देने वबली नही्है। इसकी मूल वजह है कक यह सभी नेतब 74 के आंदोलन की उपज है।् सबथ ही कबहबर मे्भबजपब कब चेहरब भी बदलब है। इसे उच््जबकतयो्कब संगठन मबनब जबतब थब। लेककन आज कपछड्ी जबकत के कई नेतब पबर््ी मे्अहम भूकमकब कनभबने की स्थथकत है।् कबंगस ्े कवरोध को लेकर भबजपब यब पहले के जनसंध की प््बसंकगकतब कबहबर मे्70 के दशक से बनी हुई है। 1967 मे्बनी पहली गैर कबंगस ्े ी सरकबर मे्समबजवबकदयो्और कम्यकु नथ्रो् के सबथ जनसंध भी शबकमल थी। कफर 1974 केआदं ोलन मे्भी जनसंघ थी। इसके कबरण कबहबर मे्भबजपब अछूत कभी नही्रही है। इन सबके सबथ नीतीश की कवफलतब और कजसे सबलो्तक गकरयबते रहे उसके सबथ हबथ कमलब कलयब। इसकब फबयदब तो भबजपब को कमलेगब। लबलू-नीतीश मे्कोई फक्फहै? बहुत फक्फहै। तमबम ककमयो्के बबवजूद लबलू नीतीश से बेहतर है।् उनकब आज भी जनबधबर है। लबलू ने अब तक दबे-कुचले और कपछड्ेकई लोगो्को नेतब बनबयब है। गरीब से गरीब आदमी लबलू के पबस पहुचं सकतब है। लबलू कोई बबत मन मे्नही्रिते, जबकक नीतीश मीठब बोलने के बबवजूद अपनी बबत और चबल पेर मे्रिे रिते है।् लेककन नीतीश ने तो कबय्क ा त्बओ ा ्कब रबजनीकतक ढबंचब ही ित्म कर कदयब। हैरत वबली बबत है कक जद(यू) अकत कपछड्ब प्क ् ोष््की बैठक होती है तो मंच पर अकत कपछड्ी जबकत कब कोई जबनब पहचबनब चेहरब नही्होतब है। आम आदमी की बबत कौन करे,् कवधबयक तक को उनसे कमलनब आसबन नही्। गलत लोगो्कब सबथ लेने यब उन्हे्संरक्ण ् देने के कलए लबलू बदनबम है,् लेककन नीतीश कहबं दूध के धुले है।् अनंत कसंह से लेकर उनके ईद कगद्ाके कई नेतबओ्को देि लीकजए, कजनकब चबल चकरत््दबगनुमब है। जीतन रबम मबंझी कोई फैकर् र है्क्यब? कनक््ित तौर पर मबंझी एक फैकर् र है,् जो चुनबव को प्भ ् बकवत करेग ् ।े आज दकलत समबज की हर जबकत मबंझी के सबथ है। उन्हे्कजस तरह मुखय ् मंत्ी से हरबयब गयब, उसे लेकर दकलत समबज अपमबकनत और आहत महसूस कर रहब है। उसके अंदर एक आग सुलग रहब है।
दूसरी ओर भाजपा का इरादा अवत वपछड्ी जावतयो्को अपने पक््मे्करने का है। वपछले वदनो् भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा भी वक अगला मुख्यमंत्ी कौन होगा, यह अवत वपछड्ी जावतयां तय करेगी। ववधान सभा के वपछले चुनाव मे् अवत वपछड्ी जावतयां बहुत उत्साह के साथ नीतीश के साथ आयी् थी्। लेवकन दुबारा सत््ा हावसल करने के बाद नीतीश ने इस समुदाय की वावजब मांगो् पर कोई खास ध्यान नही् वदया। हालात यहां तक है वक वशवानंद वतवारी कहते है्वक जदयू अवत वपछड्ा प्क ् ोष््की बैठक होती है तो इस समुदाय का कोई जाना माना चेहरा मंच पर नही्
वदखता। दवलत वोटो् को खी्चने के वलए भाजपा अध्यक््ने 14 अप्ल ्ै को पटना मे्अंबड े कर जयंती को रैली को संबोवधत िकया। उधर जीतन राम मांझी ने भी कहा है वक नीतीश को हटाने के वलए भाजपा के साथ सहयोग करने मे्उन्हे्कोई परहेज नही्है। भाजपा के साथ रामववलास पासवान पहले से है् और मांझी अगर साथ होते है,् तो वनव््ित ही दवलत वोटो्का बड्ा वहस्सा भाजपा के पाले मे्जाएगा। ववलय का जमीनी असर वबहार पर होता नही् वदखाई देता। लालू- नीवतश की दोस््ी को लोग पचा नही्पा रहे है।् अपने शासनकाल मे्नीतीश के कुछ खास कामकाज को लेकर पाट््ी के लोगो्के बीच मे्
वनराशा का माहौल था। इस वसलवसले मे्अवकाश प््ाप्त मुख्य अवभयंता उमेश्र प््साद कहते है् वक पटना मे् सैकड्ो् करोड् के खच्ष से बुद् पाक्फ या अंतरराष््ीय म्यवू जयम बनाने की क्या जर्रत थी? वबहार को तो सबसे पहले स्कूलो् पर ध्यान देना चावहए था। चुनाव के मौके पर राजनीवतक दलो्का जातीय खेल तो चल रहा है, लेवकन उमेशर् प्स ् ाद जैसे वनद्ल ष ीय बेजबु ान भी चुनाव की वफजा बदल सकते है्। ऐसे मे् वबहार की राजनीवत नए सत््ा समीकरणो् के वलए तैयार वदखाई देती है। लेवकन यह वकस करवट बैठगे ी। इसके वलए अभी इंतजार n करना होगा। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 35
छतंंीसगढं
नबगकरक आपूकत् ा कनगम मे् छबपे के दौरबन बरबमद की गयी करोडो्की धनरबकश से भ्ष ् ्बचबर-मुकत् होने कब दबवब करनेवबली छत््ीसगढ़ सरकबर की पोल िुल गयी है और जबंच के कनष्पक्् होने मे्भी संदहे व्यक्त ककयब जब रहब है।
नान घोटाले की जांच की मांग : िकिनी कारंटवाई
धाि मे़घोटाले का िाि अ
ब से कुछ माह पहले तक देश-दुवनया के जनप््वतवनवध,शोधकत्ाष छत््ीसगढ् आते थे, तो सरकार के नुमाइंदे साव्ज ष वनक ववतरण प्ण ् ाली का बखान करने से चूकते नही्थे। यह बताया जाता था वक प्द् श े की साव्ज ष वनक ववतरण प्ण ् ाली की सराहना सुप्ीम कोट्षतक ने की है। नुमाइंदे यह प्च ् ार भी करते थे वक छत््ीसगढ् सरकार वकसी भी गरीब को भूखा सोने नही्देती है। लेवकन अब ऐसा नही्है। चुनाव जीतने के बाद राशनकाड््ो्के वनरस्् होने से लोग राशन के वलए परेशान है।् ऐसे मे्लोग सरकार को कोस रहे है्। वही् दूसरी ओर नागवरक आपूव्तष वनगम (नान) मे् हुए घोटाले ने राज्य की कवथत सव्षश्ेष् साव्षजवनक ववतरण प््णाली की कलई खोल दी है। इसी साल 12 फरवरी को राज्य के भ््ि्ाचार वनरोधक शाखा (एसीबी) और आव्थषक अपराध अन्वरे ण ल्यरू ो (ईओडबल्य)ू ने एक अंगज ्े ी दैवनक के भवन से संचावलत नागवरक आपूव्तष वनगम के
हमे्मालूम है कक सरकार जांच के नाम पर क्या करने वाली है। इससे पहले इंकदरा क््पयदश्नष ी बैक ् घोटाले मे्भी एक आरोपी उमेश कसन्हा ने मुखय् मंत्ी सकहत कई मंक्तयो्को पैसा देने की बात स्वीकारी थी लेककन इस मामले मे्कुछ नही्हुआ। सरकार मामले को सीबीआई को सौ्पने से डर क्यो्रही है। भूपश े बघेल, प्द् श े कांगस ्े अध्यक्् 36 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
दफ्तर मे् छापा मारा। यहां से बरामद करीब चार करोड् र्पए की रकम ने सबको चौ्का वदया। यह मामला अब कई सवालो् के साथ रमन सरकार के गले की फांस बनता नजर आ रहा है। पूरी कार्वष ाई मुख्यमंत्ी के करीबी और प््शासवनक-राजनीवतक गवलयारो् मे् सुपर सीएम के तौर पर प््चावरत एक अफसर के इशारे पर की गई थी। कार्वष ाई के बाद यह प््चावरत वकया गया वक मुख्यमंत्ी अब जरा भी भ््ि्ाचार बद्ाषश्त करने के पक्् मे् नही् है्। वे जीरो टॉलरेस ् चाहते है।् लेवकन जल्द ही यह भ्म् की ब्सथवत भी साफ हो गयी। मामला जीरो टॉलरे्स से ज्यादा भ्ि ् ्तरीके से उगाहे गए पैसो्की बंदरबांट का था। राज्य के एक प्म् ख ु अवधकारी नाम न छापने की शत्ष पर कहते है,् 'सुपर सीएम का दखल हर जगह कायम है। वपछले कुछ समय से उनकी मुखय् सवचव से नही् पट रही थी। नागवरक आपूवत् ष वनगम मे्मुखय् सवचव के करीबी लोग बैठे थे, सो उन्हे् सबक वसखाने के वलहाज से छापा मारा गया था। लेवकन यहां दांव उल्टा ही पड्गया।’ छत््ीसगढ् मे् नागवरक आपूव्तष वनगम (नान) साव्षजवनक ववतरण प््णाली के तहत दाल,चना,शक्र् ,नमक,गेहूं और चावल की आपूवत् ष करता है। नागवरक आपूवत् ष वनगम इसके वलए ठेकदे ारो् से टेड् र मंगवाता है। लेवकन राज्य मे्धान को चावल बनाकर उसकी आपूवत् ष पंजीकृत राइस वमल ही करते है।् प्द् श े मे्लगभग 18 सौ सहकारी सवमवतयां है जो वकसानो्से धान एकव््तत करती है।् वफर सवमवतयो्के पास एकव््तत धान कृवर ववपणन संघ (माक्फ फ डे ) के पास जाता है। माक्फफेड धान को चावल बनाने के वलए राइस वमलो् को सौ्पते है।् इसके साथ ही इस काली कमाई का खेल शुर्हो जाता है। हालांवक जो वमल मावलक है्वे यह मानते है्वक राज्य मे्हर कदम पर सुववधा शुल्क देने की परंपरा अववभावजत
मध्यप्द् श े के समय से ही चली आ रही है। लेवकन इसमे्इजाफा तब हुआ जब साल 2003 मे्प्द् श े मे् भाजपा की सरकार आयी। वमल मावलको्का कहना है वक सबसे पहले तो वमल को पंजीयन कराने मे्ही चढ्ावा देना होता है। पंजीयन के बाद जब वमल मावलक धान से चावल बनाने का आदेश लेने के वलए ववपणन अवधकारी के पास जाता है तो वहां प््वत ब्कवंटल के वहसाब से भेट् देनी होती है। इसके बाद धान की गुणवत््ा जांचने के वलए क्वावलटी इंसप् के ट् र 20 से 25 र्पए प्व्त ब्कवंटल का चढ्ावा लेते है।् धान रखने के वलए स्टोरकीपर और गोदाम प्भ् ारी को भी खुश करना होता है। इसके बाद वमल मावलक को ‘नान’ के एमडी यानी प्ब् धं संचालक और अध्यक्् की भी सेवा करनी होती है। यह रावश कुल वकतनी होती है इस बारे मे्कोई ठीक-ठाक दावा नही्वकया जा सकता। लेवकन राइस वमलर एसोवसएशन के एक वजम्मदे ार पदावधकारी का कहना है वक सुववधा शुलक ् यानी चढ्ावे की यह रावश 125 से 130 करोड्र्पए
कांगस ्े लगातार झूठे आरोप लगा रही है। यकद हम भ्ि ् ्ाचार के किलाफ लड्ने की नही्सोचते तो कार्वष ाई का आदेश भी नही्देत।े हमने सोचा है कक पकरणाम चाहे जो हो भ्ि ् ्ाचार के किलाफ लड्गे् ।े एसीबी और ईओडब्लय् ू स्वतंत्ढंग से काम कर रही है।् मामले मे्जो भी दोरी होगा, उसे छोड्ा नही्जाएगा। रमन ससंह, मुखय् मंत्ी छत्ी्सगढ्
सालाना हो जाती है। यह रकम नागवरक आपूव्तष वनगम के वजलो् मे् पदस्थ प्ब् ध ं क जमा करते थे। उसमे् से अपना वहस्सा लेने के बाद बाकायदा उसे मुखय् ालय मे्जमा करते थे। मुखय् ालय से यह रावश मंत्ी, अफसर और दूसरे नेताओ्को बांटी जाती थी। वैसे तो एसीबी और ईओडल्लय् ू ने अपनी संयकु त् कार्षवाई मे् कुल 29 वठकानो् पर छापा मारा था। मामले मे्कुल 25 अवधकावरयो्और कम्च ष ावरयो्को आरोपी पाया गया। लेवकन 17 लोग ऐसे थे वजनके पास से उगाही की भारी रकम की जल्त की गयी। इन आरोवपयो् मे् से एक वशवशंकर भट्् के पास से सव्ावष धक करीब एक करोड्77 लाख र्पए बरामद वकए गए थे। इस प्म् ख ु आरोपी से जब एक अखबार के संवाददाता ने ब्सटंग के दौरान पूछताछ की तो कई चौ्काने वाले खुलासे हुए। भट््ने कहा वक आपूवत् ष वनगम नेताओ्, मंव्तयो्और अफसरो्और रसूखदार लोगो् की सेवा-सत्कार का प््मुख के्द् है। वनगम की सेवा की यह परंपरा सालो्से चली आ रही है। भट्् का कहना था वक नागवरक आपूव्तष वनगम के वजला प््बंधक वमलरो् और ठेकेदारो् से उगाही करते थे और उसे मुख्यालय भेजते थे। उगाही का यह पैसा बड्े नेताओ्, रसूखदार अफसरो् और कम्षचावरयो्मे्बंटता था। भट््ने पूरे मामले मे्एक डायरी का भी हवाला वदया और माना वक इसके तार सीएम हाउस से भी जुड्ेहै्। भट््का कहना है वक नागवरक आपूव्तष वनगम के र्पए का इस््ेमाल भाजपा ने चुनावो्मे्भी वकया था। इस पूरे मामले मे् एक दो नही् बव्लक सवालो् का पूरा पहाड् ही खड्ा नजर आता है। कुछ सवाल ऐसे है्जो सीधे तौर पर सरकार को कटघरे मे्खड्ा करते है्और उसकी भूवमका को संवदग्ध बनाते है्। बड्ा सवाल है वक मुखय् मंत्ी के अधीन होने से क्या ये एजे्वसयां उनके पवरवार के सदस्यो् की वनष्पक्् जांच कर पाएंगी ? कांग्ेस और अन्य राजनीवतक दल मामले की जांच सुप्ीम कोट्षके जज या सीबीआई से करने की मांग कर रहे है।् यवद रमन सरकार पाक-साफ है तो उसे वदक्त् क्यो्हो रही है? मुखय् आरोपी वशवशंकर भट््भ्ि ् ्ाचार से जमा रकम का एक बड्ा वहस्सा मुखय् मंत्ी की वरश्तदे ार अर्वणमा वसंह के पास रखते थे। पुवलस ने अब तक अर्वणमा वसंह से पूछताछ क्यो् नही् की ? ववधानसभा सत्् के दौरान प्द् श े कांगस ्े अध्यक्् ने कहा वक एसीबी और ईओडल्लय् ू कोई आयोग नही् है वजसके दस््ावेजो्को देखा नही्जा सकता। बघेल की वजस डायरी को एक पुवलसवाला देख सकता है उसे जनप््वतवनवध क्यो् नही् देख सकते। भूपश े ने अध्यक््के कमरे मे्डायरी व अन्य दस््ावेजो्को देखने की मांग की जो खावरज कर दी गयी। पूरे मामले के तार रायपुर के शंकर नगर ब्सथत एक वनजी अस्पताल से भी जुडे्है।् सूत्ो्का दावा है वक अस्पताल के संचालक हवाला के जवरए वदल्ली व अन्य जगहो्पर पैसा पहुच ं ाते थे। लेवकन एसीबी ने अस्पताल संचालक को छोड्रखा है। डायरी की सत्यता जांच का ववरय है। एसीबी ने इस जांच की n जर्रत नही्समझी।
सवाल-िर-सवाल कौन है्रसूिदबर लूट के इस पैसे मे्वकसकी-वकतनी वहस्सेदारी है। भट््के मुतावबक एसीबी और ईओडल्ल्यू ने छापे के दौरान जो रकम जल्त की गयी उसका सबसे बड्ा वहस्सा (एक करोड्र्पए) खाद्् ववभाग के प््मुख सवचव आलोक शुक्ला को वदया जाना था। शुक्ला ने वदल्ली मे्एक मकान खरीदा था। नान के एमडी अवनल टुटेजा के पीए वगरीश शम्ाष के पास से 20 लाख र्पए जल्त वकए गए थे। इस 20 लाख मे्से भी 10 लाख चेयरमैन यानी आलोक शुक्ला के वहस्से मे्और बाकी 10 लाख एमडी के खाते मे्रहता। भट््के मुतावबक उगाही की रकम मुख्यमंत्ी के खानसामे को भी दी गई थी। इसके अलावा मुख्यमंत्ी के कहने पर ववधानसभा चुनाव के दौरान खाद््मंत्ी पुन्नूलाल मोहले को मदद के तौर पर पचास लाख र्पए वदए गए थे।
डबयरी कब सच
एसीबी और ईओडल्ल्यू के चीफ ववरष््पुवलस अवधकारी मुकेश गुप्ता ने इस मामले मे्एक प््ेस कांफे्स मे्साफ-साफ कहा था वक उन्हो्ने कई दस््ावेजो्के साथ डायरी जल्त की है। इसवलए पूरी जांच दस््ावेजो्और डायरी के सहारे ही आगे बढ्ेगी। लेवकन जब डायरी के कुछ पन्ने राज्य की ववधानसभा और वदल्ली की प््ेस कांफे्स मे्उछले तो वे अपने बयान से पलट गए। मुख्य ववपक््ी दल कांग्ेस के हो-हल्ले और बढ्ते दबाव के चलते उन्हे्यह कहना पड्ा वक कांग्ेस वजस डायरी की बात कर रही है वह हमारी डायरी नही्है। उनका यह बयान भी यह बताने के वलए काफी था वक कोई एक ऐसी डायरी तो है जो जल्त की गई है। कांग्ेस के प््देश अध्यक््भूपेश बघेल डायरी होने की बात पर अवडग है्। बघेल ने दावा वकया वक यवद कांग्ेस की ओर से लहराए गए डायरी के पन्ने आपूििंटिनगम : घोटाले का िफंिर हकीकत न होते, तो सत््ापक््अब तक चढ्बैठता। बघेल यह भी कहते है्वक यवद कांग्ेस ने कोई नकली डायरी पेश की है तो सरकार को कांग्ेस नेताओ्के वखलाफ एफआईआर दज्षकरनी चावहए। डायरी मे्वजन-वजन लोगो्के नाम शावमल है्उनकी जांच होनी चावहए। सबसे बड्ी बात डायरी के पन्नो्की राइवटंग की भी पड्ताल होनी चावहए। लेवकन एसीबी के हाथ-पांव फूल गए है्। वह डायरी को नकली बताकर पल्ला झाड्रही है।
सीएम हबउस कब हवबलब
डायरी मे्कई जगहो्पर सीएम हाउस वलखा हुआ है। दो जगहो्पर रेड आग््ेनाइजेशन का उल्लेख है। इस पर कांग्ेस ने माओवादी संगठनो्को पैसा पहुंचाने का आरोप लगाया है। वैसे कांग्ेस के इन आरोपो्मे्थोड्ा-बहुत दम भी वदखता है। इसकी वजह भाजपा के कुछ नेताओ् पर इस घोटाले से पहले भी माओवावदयो्से सांठ-गांठ का आरोप लग चुका है। पूव्षसांसद सोहन पोटाई, सांसद ववक््म उसे्डी, पूव्षमवहला एवं बाल ववकास मंत्ी लता उसे्डी सवहत वजला- जनपद पंचायतो्के कई नेता इन आरोपो्की जद मे्रहे है्। डायरी मे्कुछ जगहो्पर एटी, एके, पीएलएम वलखा गया है। इसका वनवहताथ्षअवनल टुटेजा, आलोक शुक्ला और पुन्नूलाल मोहले ही माना गया है। डायरी मे्कई जगहो्पर नागपुर, सतना, लखनऊ भी वलखा हुआ है। कांग्ेस का आरोप है वक जहां-जहां मुख्यमंत्ी डा। रमन वसंह के वरश्तेदार रहते है्वहां भी पैसा पहुंचता रहा है। एक जगह पर संतरा वाले बाबा नागपुर उल्लेवखत है। इस वाक्य को भी राष््ीय स्वयंसेवक संघ के वकसी वजम्मेदार पदावधकारी से जोड्कर देखा जा रहा है। इधर भाजपा के पूव्षववधायक एवं राज्य ववत््आयोग के पूव्षअध्यक््वीरे्द्पांडेय वजन्हे्वर्ष2003 मे् कांग्ेस नेता अजीत जोगी, भाजपा सांसद बलीराम कश्यप और पीआर खुंटे की ब्सटंग मे्सहयोगी माना जाता है, ने ‘नान’ डायरी की छायाप््वत और संवाददाता की ब्सटंग की सीडी एसीबी को सौ्पी है। एसीबी ने उनकी दी गई छायाप््वतयो्को जांच के दायरे मे्लेने के बजाय उल्टा उनसे डायरी के ओवरजनल पन्नो्के बारे मे्सवाल पूंछा। पांडे का भी आरोप है वक एसीबी मामले की लीपा-पोती मे्जुट गयी है। उनका कहना है वक मामले के तार सीएम हाउस से जुड्ेहोने की n वजह से इसे ठंडे बस््ेमे्डालने की कवायद शुर्हो गई है। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 37
राजंयनामा
शेषबचलम के जंगलो्से महंगे रक्त चंदन की तथ्करी एक बडी समथ्यब है, लेककन आंध्प्द् श े की पुकलस द््बरब चंदन कबरने वबले तकमलो् की हत्यब मबनवबकधकबरो्के हनन कब एक गंभीर मुद्ब बन गयी है और तकमलनबडु मे्भबरी रोष फैलब है। शेिाचलम इलाके मेंपुिलस की गोिलयोंके िशकार : िसंकर या मजिूर?
चंदन से बहता ख्ून
िदनेश आकुला
व
ह बच सकता था। यवद वह सात अप््ैल को अपने दोस््की शादी मे्नही्गया होता। के पेर्मल नाम था उसका। दोस््की शादी तवमलनाडु के वतर्वन्नमलाई वजले मे् थी। आंध् प््देश के संयुक्त काय्षबल की सेराचलम के जंगलो् मे् हुई मुठभेड्मे्वह मारा गया। पेर्मल अपने बारह दोस््ो् के संग वेट्ावगरीपलम मे् वतर्वन्नमलाई के शादी समारोह मे्एजंेट से वमला था। एजंेट ने उससे सेराचलम के जंगलो् मे् लाल चंदन के काटने की बात की थी। इसके बदले उसने 700 से 1000 र्पए प््वत वकलो मेहनताना देने का प््स्ाव वदया था। पेर्मल के मारे जाने की खबर से उसकी मां का रोकर बुरा हाल है। पेर्मल की मां इल्लमा बताती है ‘उसने हमे् काम के बारे मे् नही् बताया और चला गया और 8 अप््ैल अगले वदन हमने उसके तस्कर होने की खबर सुनी, वजसे आंध्प््देश संयुक्त काय्षबल ने जंगल मे् मार वगराया।’ हादसे से पेर्मल की पत्नी सेल्वी और बेटी भी सदमे मे्है्। हालांवक गांव के लोग लाल चंदन के काटने और इसके खतरे से पूरी तरह वावकफ है्। लेवकन वह 38 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
तस्कर कहे जाने को गलत ठहराते है्। मुठभेड्मे्मारे गए एक दूसरे मुनसु व् ामी (36) की सास मुर्गमा कहती है्वक पुवलस झूठ बोल रही है वक इलाके मे् तलाशी अवभयान दल पर लकड्हारो्ने हमला वकया। वह सवाल करती है,‘ मुनुस्वामी एक मजदूर है। वह और दूसरे मजदूर पुवलस पर कैसे हमला कर सकते है्’। चंद्वगरी मंडल के एटागुंटा और वाच््ीनोडु बंडा गावो्मे्संयुक्त काय्षबल ने 7 अप््ैल को लाल चंदन तस्करो् के तलाशी अवभयान मे् 200 लोगो् को सेराचलम के घने जंगलो् मे् पाया। पुवलस ने मौके पर ही गोलीबारी मे्20 लोगो्को मार वगराया। आंध् प््देश सरकार इस पुवलस कार्षवाई को सही ठहरा रही है। सरकार इसे खुद की सुरक््ा मे् उठाया गया कदम बताती है। सरकार के मीवडया सलाहकार परकला प््भाकर का कहना है ‘इस घटना मे् पुवलस को अपनी सुरक््ा के वलए गोवलयां चलानी पड्ी्। क्यो्वक वे बहुत ज्यादा संख्या मे्थे’। वन मंत्ी बोजाला गोपाल कृष्ण रेड्ी ने मीवडया से कहा वक 10 से 15 लोगो्का तलाशी दल 200 तस्करो् से बुरी तरह से वघर गया था। इससे पहले भी पुवलस अवधकावरयो् पर कुल्हाड्ी और दूसरे हवथयारो् से हमले हुए है्। इसवलए खुद की सुरक््ा
मे्पुवलस को गोवलयां चलानी्पड्ी्। मामले को लेकर राज्य पुवलस प््मुख जस्टी वे्कट रामुडू ने हैदराबाद मे् कहा वक पुवलस उन्हे् वगरफ्तार करती यवद उसे इसका मौका वमला होता। वह इसका दावा करते है् वक यह तब होता जब पुवलस उन पर पहले हमला करती। यह एक जवाबी हमला था वजसमे्वचत््ूर वजले मे्20 लोग मारे गए। डीजीपी के इस बयान के चंद घंटो्बाद ही एक लकड्हारे शेखर का बयान आया। शेखर पोलूर तालुके से है जो वतर्वन्नमलाई मे् है। यह डीजीपी के बयान से एकदम उलटा था। आंध्प््देश पुवलस ने मुठभेड्से ठीक एक वदन पहले (सोमवार) एक बस को र्कवाया था। इसमे् से उन्हो्ने सात लोगो् को वगरफ्तार वकया। शेखर बताता है वक वह वकसी तरह से बचकर वनकला और अपने गांव इस खबर के साथ पहुंचा। सभी अस्थाई मजदूर थे। यह गांव से वचत््ूर बस से जा रहे थे। काय्षबल ने इस बस को मुठभेड्वाली जगह से 50 वकमी दूर नगरी के पास रोका। इस खबर के बाद गांव वाले जब तक पुवलस के पास पहुंच पाते, उन्हे् मुठभेड् की खबर वमल गई। इस मुठभेड् मे् अपने छोटे भाई को खो चुके कर्णाकरन बताते है वक कन्नमंगलम पुवलस मारे गए लोगो् के फोटो् की पहचान के वलए आई थी।
मारी गई है। कई के पेट, कंधो्और हाथो्पर जलने और चमड्ी के वछलने के घाव है्। पुवलस जले के वनशानो् की वजह गम््ी को बताती है। मुठभेड् के बाद जंगल मे् गए कुछ मीवडया कम््ी बताते है् वक पुवलस के मुठभेड्के दावो्के बाद भी कुछ शवो्से बदबू आ रही थी। लेवकन पुवलस गम््ी को इसका कारण मानती है। मोहम्मद कुट्ी जो एक मानवावधकार काय्षकत्ाष है।् पुवलस के इस ऑपरेशन के तरीके पर संदहे और सवाल उठाते है्। कुट्ी का कहना है वक शवो् के पास वमले लकड्ी के बोटे ताजे नही् लग रहे थे। पुराने लग रहे थे। यह बताता है वक यह बोटे पहले से जल्त वकए गए थे। वह मुठभेड् वाली जगह के आसपास लाल चंदन के पेड्नही्होने पर भी संदेह जताते है्। आंध् प््देश के कम्युवनस्ट पाट््ी के नेता भी पुवलस के बयानो्मे्ववसंगवत होने का इशारा करते है्। एक ववरष्् नेता सवाल उठाते है् ‘ यह कैसे वकसी सशस््मुठभेड्मे्हो सकता है, जो जंगल मे् हुई। काय्षबल ने उन्हे्वनशाने पर ले वलया। पीव्डत उन पर हमला कर रहे थे और उनके वसर पीछे की तरफ थे। जैसा वक टास्क फोस्षयह दावा कर रही है
इस घटना से पूरे तवमलनाडु मे् नाराजगी है। राज्य भर मे्प््दश्षन हुए है्। बहुत सी आंध्प््देश पवरवहन की बसो्मे्तोड्-फोड्हुयी है। मामले से तवमलनाडु मे् आंध् के लोगो् की सुरक््ा भी बढ्ाई गयी है। तवमलनाडु के मुख्यमंत्ी ओपी पन्नीरसेल्वम ने मामले को लेकर नायडू को एक त्ववरत और ववश््सनीय जांच के वलए पत्् वलखा है। साथ ही उन्हो्ने मानवावधकारो् के उल्लघंन और इसकी जवाबदेही भी तय करने की मांग की। मामले को लेकर मानव अवधकार समूहो् ने अपनी आवाज उठानी शुर् कर दी है। वह इसे वनष््ुर और बब्षरतापूण्ष करार दे रहे है। इसे लेकर कई नागवरक अवधकार समूहो्ने कोट्षका र्ख वकया है। राष््ीय मानवावधकार आयोग ने आंध् प््देश से मामले की ववस््ृत वरपोट्षकी मांग की है। आयोग के एक सदस्य न्यायमूव्तष डी मुर्गेशन ने इसे एक व्यब्कत के मानव अवधकारो्का गंभीर उल्लंघन का दोरी भी बताया है। आयोग का कहना है वक इसे आत्म रक््ा के नाम पर जायज नही् ठहराया जा सकता। मामले मे्पुवलस के बयानो्मे्और घटना मे्भी अंतर है। यह मुठभेड् तब हुई जब टास्क फोस्ष सेराचलम के जंगलो् मे् तलाशी अवभयान पर था। इस दौरान लकड्हारे लाल चंदन काट रहे थे। और उन्हो्ने पुवलस बल पर पत्थरो् और कुल्हाड्ी से हमला वकया। पुवलस अपनी कार्वष ाई को आत्म रक््ा के तहत उठाया गया कदम बता रही है। मामले मे्मुठभेड्स्थल की बारीकी से जांच भी कई जानकारी देती है। मुठभेड्की जगह से बरामद लाशो् मे् से नौ मे् से सात को वसर के पीछे गोली
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लबल चंदन आंध्प्द् श े के कचत्र्ू और कडप्पब कजलो्के सेषचलम जंगलो् और तकमलनबडु के कुछ इलबको्मे् पबए जबते है।् इस लकड्ी कब इस्म ्े बल फन््ीचर, संगीत वबद्य ्त ं ,् सौ्दय्ाप्स ् बधन सकहत कबमोत्ज ्े क बनबने मे्भी होतब है। इसकी कीमत दस लबि र्पए प्क्त रन से शुर्होकर चीन और जबपबन पहुचं ने के बबद एक करोड्प्क्त रन तक हो जबती है। जून 2014 से आंध्प्द् श े से 16,00 तथ्करो्मे्से एक हजबर तकमलनबडु से है।् हबल ही मे्आंध्प्द् श े सरकबर ने कवदेश व्यबपबर महबकनदेशक से 4160 रन लबल चंदन के लट््ो्के नीलबमी के जकरए कनय्बता की अनुमकत ली है। इससे रबज्य को करीब 1000 करोड् र्पए रबजथ्व कमलेगब।
वक उन्हो्ने आत्म रक््ा मे् कार्षवाई की, तो इनकी चोटे्कहां है्। केवल दो कम््ी ही घायल हुए है्। क्या दो लोगो् के घायल होने पर 20 को मार देना सही है।’ सेराचलम जंगल वतर्माला की तलहटी मे्है। आजकल यह आंध्प््देश सरकार और लाल चंदन के तस्करो्की लड्ाई का मैदान बन गया है। राज्य के मुख्यमंत्ी नारा चंद्ाबाबू नायडू लाल चंदन की नीलामी से राजस्व जुटाना चाहते है।् इसके वलए वह तस्करो्के सख्त वखलाफ है्। सात अप््ैल को जंगल इस खूनीखेल का गवाह बना। चंद्वगरी मंडल के इटागुंटा और वच््ीनोडू बांदा बव््सयो् मे् हुई लाल चंदन वगरोह के तलाशी अवभयान के दौरान काय्बष ल ने इस घटना को अंजाम वदया। पुवलस की गोलीबारी मे् वगरोह के 20 तस्कर मारे गए। बाद मे् इनकी पहचान लकड्हारो् के तौर पर हुयी। ये वचत््ूर से सटे तवमलनाडु के आवदवासी इलाको्से थे। चंद्ाबाबू नायडू के आंध् प््देश की सत््ा संभालने के बाद जून 2014 मे् राज्य पुवलस और वन ववभाग ने तस्करी के वखलाफ लड्ाई शुर्की। इसके अवैध व्यापार के मामले मे् करीब 1000 तवमलनाडु के लोग जेल मे्डाले गए है्। बहुमूल्य लाल चंदन का इस््ेमाल पारंपवरक दवाओ् मे् वकया जाता है। इससे बनी वस््ुओ् की भारी मांग चीन, म्यांमार, जापान और पूव्ी एवशया के देशो्मे्है। इसका इस््ेमाल नाव मे्और परमाणु वरएक्टरो्से वववकरण रोकने मे्भी होता है। अंतरराष््ीय बाजार मे् भारी मांग से इसकी कीमत बहुत ज्यादा है। इन्ही् वजहो् से सेराचलम के जंगलो् मे् लाल चंदन के तस्कर बड्ी तेजी से पांव पसार रहे है्। इसकी तस्करी मे्तवमलनाडु के लोग ज्यादा है्। वह इसके अवैध व्यापार को खूब बढ्ावा दे रहे है्। तस्कर इसे गरीब स्थानीय लोगो्से 500 र्पए प््वत वकलो् से खरीदते है् और दूसरो् को इसकी सौगुनी कीमत पर बेचते है्। दूर पूव्ी देशो्मे्इसके मुहमांगे दाम वमलने से लाल चंदन की तस्करी का धंधा तेज हो चला है। मामले की गंभीरता का पता इस बात से भी चलता है वक साल 2012 से करीब 6 से ज्यादा वन अवधकावरयो्को तस्करो्ने मार वदया। वदसंबर साल 2013 मे् दो वन अवधकावरयो् डेववड कर्ऩाकर और श््ीधर के मारे जाने और तीन के गंभीर र्प से घायल होने के बाद वपछले साल सरकार ने संयुक्त काय्षबल का गठन वकया। इसमे् वन और पुवलस ववभाग के अवधकारी है्। इसके बाद से तस्करो्और काय्षबल के बीच दज्षन भर ज्यादा वहंसा की वारदाते् हुयी है्। लाल चंदन तस्कर इस काम को तवमलनाडु के सैकड्ो्गरीब मजदूरो्के जवरए करते है्। वह इन मजदूरो् से सेराचलम मे् इन पेड्ो् को कटवाते है्। इन मजदूरो् को खास बसो् से लाने का इंतजाम करते है्। इस तरह से लाल चंदन की तस्करी तीन दशको्से चल रही है। और यह वपछले कुछ सालो् से तेजी से बढ्ी है। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 39
राजंयनामा
चम्मच भर नीलगिगर
हरीभरी वबकदयो्वबलब नीलकगकर कहल थ्रश े न महबनगरो्के कदन्गजो्कब आरबमगबह तेजी से बनतब जब रहब है। लेककन डर है कक इस दौड मे्चबय के बबगबन अपनी महक और शक्ल न िो दे।् वशप््ा शुक्ला
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वमलनाडु की झुलसती गम््ी मे्कोयंबटूर से करीब दो घंटे की ड््ाइव के बाद नीलवगवर पहािडयो् से आ रहे सद्ष हवा के झो्के और ताजा चाय की खुशबू मानो्शरीर मे्नई जान फूंक देती है। लेवकन नीलवगवर चाय का यह प्याला तेजी से वसकुडता जा रहा है। वपछले कुछ सालो् मे् चाय उगाने वाले क््ेत् मे् भारी कमी आई है। हरीभरी वावदयो्वाला नीलवगवर वहल स्टेशन महानगरो्के वदग्गजो्का आरामगाह तेजी से बनता जा रहा है। लेवकन डर है वक इस दौड मे् चाय के बागान अपनी महक और शक्ल न खो दे्। यूकवे लप्टस के पेड और चाय के बागान कभी नीलवगवर की पहचान होते थे। आज उनके बीच मे् जगह-जगह पर कुकरु मुत्ेकी तरह उग रहे छोटेबडे मकान इसकी खूबसूरती को वबगाड् रहे है्। तेजी से बढ्ता पय्टष न इस खूबसूरती को तोड्ने लगा है। दव््कण भारत मे्एक वक्त था जब नीलवगवर की महकती हुई चाय और ताजगी समानाथ््ी माने जाते नीलदगदर चाय के बागान : िसकुडिी जगह
थे। लेवकन अब इसकी खूबसूरती वबखरती वदख रही है। चाय बागानो् की खूबसूरती के वबगड्ने की बड्ी वजह चाय की कीमतो्मे्आई कमी है। चाय से जुडे लोग परेशान है्। इस मामले पर एक चाय बागान के मैनेजर का मानना है वक वपछले एक दशक से औसतन चाय के उत्पाद पर करीब 85 र्पए प््वतवकलो का खच्ष आता है। बीते सालो् मे् चाय की कीमतो् मे् राष््ीय और अंतरराष््ीय बाजार मे्वगरावट आती जा रही है। लेवकन मजदूरी दर और रखरखाव खच्ष बढ रहा है। टी-बोड्ष के आंकडो्के मुतावबक साल 2013 मे्दव््कण भारत की चाय की नीलामी मे् औसत भाव लगभग 98 र्पए प््वत वकलो था। जबवक साल 2014 मे् यह औसत भाव करीब 82 र्पए प््वत वकलो हो गया। दव््कण भारत की ज्यादातर चाय ल्ले्ड बनाकर एक्सपोट्ष मे् इस््ेमाल की जाती है। कुछ साल पहले तक हमारा देश चाय वनय्ाषत मे्पहले स्थान पर था। लेवकन अब कीवनया और श््ीलंका के बाद तीसरे स्थान पर आ गया है। इसकी वजह ववश््
चाय बाजार मे्बढ्ती प््वतस्पध्ाष है। दव््कण भारत मे् नीलवगवर के अलावा केरल मे् मुन्नार और मध्य त््ावणकोर, वायनाड आवद इलाको्मे्भी चाय के बागान है्, जो ज्यादातर टाटा या हैवरसन मलयालम जैसे बडे वदग्गजो् के हाथ मे्है्। ये चाय बाजार के बनते-वबगड्ते हालात को बद्ाषश्त कर लेते है्। दूसरी तरफ नीलवगवर मे् करीब 70 फीसद चाय का उत्पादन छोटे उत्पादक करते है्। यह करीब एक से डेढ हेक्टेयर के बागान मावलक है्। यह अपनी ही छोटी सी फैक्ि्ी मे्हरी पव््तयो्से चाय तैयार करते है्,या वफर पास वकसी चाय फैक्ि्ी को अपनी पव््तयां बेच देते है्। चाय बागान मे् काय्षरत वसल्वन का कहना है वक कई बडी कंपवनयां भी वनजी बागानो् की चाय की हरी पत््ी खरीद लेती है्। वजससे वक उनकी खपत पूरी हो सके। नीलवगवर वजले के ऊटी, कु नूर , कोटावगरी वहल स्टेशन देश भर के सैलावनयो्को लुभाते रहे है्। वपछले कुछ वर््ो्मे्नीलवगवर इलाके मे्बढते पय्षटन और चाय के धंधे मे्वगरावट होने से यहां
के चाय के छोटे उत्पादक अपने छोटे चाय बागानो् को होम स्टे मे् तल्दील कर रहे है। यह अपने जमीन के टु कड्ो् को बे्च भी रहे है्। नीलवगवर के पय्ाषवरण सु रक््ा मे् जु टी एक गैर सरकारी संस्था के अनुमान के अनुसार वपछले दशक मे् ऊटी, कु नूर कोटावगरी, कुंडा और आसपास के इलाको् मे् कुल करीब 2000 ‘होम स्टे ’ बनाए गए है्। हर साल करीब 25 लाख सैलानी नीलवगवर आते है्। पहले जहां पय्षटको्का आना वसफ्फ गव्मषयो् मे् ऊटी पर के्व्दत रहता था, अब पू रे साल नीलवगवर के कुनू र, कोटावगरी, दोड््ाबेटा आवद इलाको्मे्पय्षटको्की आवाजाही रहती है । बंग लु र्, मै सू र, चे न्नई, हैदराबाद के सै लानी बे हतर सडक सं पक्फ से नीलवगवर मे् वीके्ड गुजारने चले आते है्। ‘होम स्टे’ के बाद इस इलाके मे् ‘वीके्ड होम’ बनाकर रखने की मानो् होड शुर् हुयी है। इसमे् वदल्ली और मुंबई के लोग भी पीछे नही् है्। इलाके मे् कुछ साल पहले तक एक एकड् ज्मीन की कीमत दो से पांच लाख र्पए थी। यह बढ्कर अब 50 से 60 लाख र्पए तक हो गयी है। नतीजतन जो हाथ कभी चाय की कोमल पव््त यो् को तोड् अपना गुजारा करते थे। वे आज वकसी होटल या ‘होम स्टे’ की रसोई मे् चाय बना और परोस रहे है्। दीगर है वजस नीलवगरी बागानो्की हरीवतमा, ताजा हवा, हरी-भरी पहावड्यो् से वखचे सैलानी यहां आ रहे है्, यवद वह बागान ही नही् रहे्गे तो क्या पय्षटन रह पाएगा? प््ाकृवतक सौ्दय्ष के यह चाय बागान इलाके के लोगो्को रोजगार भी मुहैया कराते है्। इनसे छेड्छाड् और इनका स्वर्प बदलना क्या पय्ाषवरण की परेशावनयां नही् पैदा करेगा? पहले से ही भारी यातायात और वनम्ाषण की वजह से नीलगीवर मे् लै्डस्लाइड का डर पय्ाषवरणववदो् की वचंता का ववरय है। इस वचंता के पीछे चाय के बागानो्का कम होना है। चाय का पौधा जमीन को बांधे रखता है। पहाव्डयो् से यवद चाय के बागान गायब होते गए, तो लै्ड स्लावडंग का खतरा भी पैदा होगा। ‘सेव नीलवगवर कै्पेन’ के संयोजक श््ी धम्षवलंगम वेणुगोपाल का कहना है वक अंधाधुंध भवन वनम्ाषण नीलवगवर के र्प और इकोलॉजी दोनो् को खतरा पहुंचाएगा। इको पय्ाषवरण के नाम पर नीलवगवर मे्प्लॉब्सटक जर्र बावधत है। लेवकन ग््ीन वबब्लडंग बनाने, वेस्ट मैनेजमे्ट, नावलयां और ईको सफाई पर ध्यान देने की बहुत जर्रत है। वेणुगोपाल कहते है्, ‘चूंवक सरकार की ओर से कोई पय्ाषवरण अनुकूल मकान के कोई वनद््ेश नही् है्। इस वजह से लोग वबना रोक-टोक अपनी मज््ी और र्वच के वहसाब से इसे बना रहे है्। हालांवक चाय बोड्ष और सरकारी एजे्वसयां अंधाधुंध वनम्ाषण के वखलाफ बोलती आयी्है्। लेवकन वबना कडे कदम उठाए यह संभव नही्है। ऐसे मे्वह वदन दूर नही्जब अपनी नीली पहाडियो् और हरे बागानो् के वलए मशहूर नीलवगवर महज एक ई्ट पत्थरो् का कंक्ीट वहल स्टेशन बन जाए। ’
अमंमा कैंटीन मेंखाने का संवाि लेिी जयलदलिा : लेिकन आगे कंया होगा
खटाई मेंअमंमा की रसोई
आपूकत् ा िनगम द््बरब बबजबर भबव पर चबवल देने के फैसले से जयलकलतब की अम्मब कैर् ीन कब िबनब बहुत महंगब हो जबएगब।
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यलवलता की अम्मा कै्टीन को अब मुब्शकल का सामना करना पड् सकता है। तवमलनाडु आपूव्तष वनगम ने बाजार भाव पर चेनन् ई कॉप््ोरेशन को चावल की आपूवत् ष करने की बात कही है। इससे अम्मा कैट् ीन की 207 दुकानो् पर असर पड्सकता है। अम्मा कैट् ीनो्से हर वदन करीब दो लाख लोग अपना पेट भरते है।् यहां एक र्पए मे्इडली, तीन र्पए प्लटे चपाती, पांच र्पए मे् सांभर चावल, पो्गल, नी्बू चावल और दही चावल तीन र्पए मे्परोसी जाती है्। साथ ही कई दूसरी चीजे्भी होती है।् लेवकन तवमलनाडु आपूवत् ष वनगम को कै्टीन को दी जाने वाली वरयायत भारी पड् रही है। सबसे वनचले तबके को ध्यान मे् रखकर चलाई गयी यह योजना अब तक काफी सफल रही है। इसके तहत फरवरी 2013 से लेकर माच्ष2015 तक तवमलनाडु पूवत् ष वनगम की ओर से कै्टीन को 1 र्पए प््वत वकलो के वहसाब से चावल मुहैया कराया गया था। लेवकन मौजूदा समय मे्राज्य आपूव्तष वनगम ने 19.85 र्पए के बाजार भाव से चेन्नई कॉप््ोरेशन को चावल देने
की बात कही है। साथ ही उन्हो्ने वपछले दो सालो् मे् की गई आपूव्तष के वलए भी बाजार भाव की कीमत मांगी है। इससे आपूव्तष वनगम ने चेन्नई कॉप््ोरेशन को प््वत वकलो् के वहसाब से 18.85 र्पए भुगतान करने को कहा है। हालांवक ऐसा करने से इस योजना पर बुरा असर पड्ने की भी संभावना बढ्ती वदखाई दे रही है। कॉप््ोरेशन के सूत्ो् की माने् तो कै्टीन मे् हर महीने 500 टन चावल की खपत होती है। ऐसे मे् चावल के बाजार भाव की अदायगी से हर साल करीब 12 करोड् र्पए का खच्ष आएगा। इससे दूसरे नई कै्टीनो् के खुलने के रास््े मे् मुब्शकल आएगी। मामले पर एक ववरष्् कॉप््ोरेशन अवधकारी ने कहा वक सरकार की ओर से चावल का खरीद मूल्य र्पए प््वतवकलो ही तय वकया गया था। अवधकारी ने यह भी कहा वक इस तरह के मसलो् पर सवचव स््र की वात्ाष के ही फैसले वलए जा सकते है्। ऐसे मे् कै्टीनो् के सामने कम कीमत पर लोगो् को खाना मुहैया कराना आसान नही् होगा। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 41
राजंयनामा
पंयाले मेंिूफंान
कमजोरम इन कदनो् पीने और न पीने की बहस मे् उलझा है। प्भ् ावशाली चच्ष शराब पर पाबंदी बरक़रार रखना चाहता है जबकक सरकार राजस्व बढ्ाने की खाकतर पाबंदी हटाना चाहती है।
िमजोरम मेंशराब की िुकान : िपये या न िपये
रीता ततवारी
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त््र-पूव्ष भारत के खूबसूरत पव्षतीय शहर वमजोरम मे् वफलहाल शराब पर वववाद वछड्ा है। यहां लोग शराब पीकर मार-पीट या दंगे नही् कर रहे। यह वववाद इस मुद्े पर है वक वमजोरम मे् शराब वबकनी चावहए या नही्। वैसे, वपयक््ड्ो् की लगातार लंबी होती कतारे् ही इस सवाल का जवाब है, लेवकन राज्य का ताकतवर चच्ष है वक मानता नही्। लगातार बढ्ते इस वववाद के बीच शरावबयो्की चांदी है। दरअसल, 18 वर््ो् की शराबबंदी के बाद हाल ही मे् राज्य से शराब की पाबंदी हटाई गयी। चच्षके दबाव मे्साल 1997 मे्इसे ड््ाई घोवरत वकया गया था। वमजोरम तीन ओर से म्यांमार और बांग्लादेश से वघरा है। शराबबंदी से राजस्व को काफी नुकसान हो रहा था। इसके चलते सरकार ने अब यह पाबंदी हटा ली है। इसके वलए कानून मे् संशोधन करते हुए राजधानी आइजोल मे् शराब की पांच दुकाने्खोलने की इजाजत दी गई है। लेवकन चच्षके प््भाव और ववरोध की वजह से पहले वदन महज एक दुकान ही खुल सकी। हालांवक आबकारी मंत्ी आर लालवजरवलयाना का दावा है वक बाकी दुकाने्भी जल्दी ही खुल जाएंगी। सरकार ने शराब पीने वालो्के वलए परवमट प््णाली शुर्की है। यह परवमट हावसल करने के बाद लोग सरकारी दुकानो्से हर महीने छह बोतल ब्वहस्की/ब््ांडी/रम और 10 बोतल बीयर और वाइन खरीद सकते है्। रोजाना सैकड्ो् लोग परवमट के वलए आवेदन दे रहे है्। अब तक परवमट धारको् की तादाद करीब 75 हजार तक पहुंच गई है। परवमट हावसल करने को पहले वदन लगी लंबी लाइन से शहर की यातायात व्यवस्था ही चरमरा गयी। राज्य सरकार की दलील है वक राज्य मे्शराब बंदी के बावजूद लोगो्ने शराब का सेवन पूरी तरह बंद नही्वकया था। पड्ोसी असम से चोरी-वछपे शराब यहां पहुंचती थी। नतीजतन राजस्व का भारी नुकसान होता था। इसके अलावा लोग शराबंदी की वजह से चोरी-वछपे वमलावटी शराब पी लेते थे। इससे कई तरह की बीमावरयां हो रही्थी्। वमजोरम के आबकारी मंत्ी आर लालवजरवलयाना कहते है,् ‘दुवनया मे्कही् भी शराबबंदी उतनी प््भावी नही्रही है। शराबबंदी से बेहतर इसकी खपत को वनयंव्तत करना है।’ आबकारी ववभाग मे्उपायुक्त गुरचुंगनुंगा कहते है्, ‘राज्य मे्खुली सरकारी दुकानो्मे्शराब की कीमते्पड्ोसी असम के मुकाबले कम है् तावक इसकी तस्करी को खत्म वकया जा सके।’ सरकार की अब शहर मे्कुछ 42 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
बार लाइसे्स जारी करने की भी योजना है इसके तहत आवभजात्य आइजोल क्लब को पहला लाइसे्स वदया गया है। चच्ष शराबबंदी हटाने का ववरोध कर रहा है। शराबबंदी के कट्र् समथ्क ष फादर चुआथुआमा कहते है,् ‘नया कानून चच्षकी ओर से बनाए गए वनयमो्के वखलाफ है।’ वह दावा करते है् वक शराबबंदी लागू होने से पहले वमजोरम मे् शराब अवभशाप बन गई थी। इसकी वजह से सैकड्ो्पवरवार टूट गए और बब्ादष हुए। चच्षके एक अन्य फादर जावहवमनथांगा कहते है,् ‘हमारे मोहल्ले के लोगो् ने अपने इलाके मे्शराब की दुकान नही्खोलने देने का फैसला वकया है।’ राजधानी आइजोल मे्250 से ज्यादा चच्षहै्। यह अपने आप मे्एक ववश्् वरकॉड्षहै। राज्य के सामावजक और राजनीवतक हल्के मे्चच्षका इतना ज्यादा असर भारत तो क्या शायद दुवनया के वकसी भी देश मे्देखने को नही्वमलता। यहां चुनावी आचार संवहता भी चच्षके आदेश से तय होती है और शादी-ल्याह जैसे पारंपवरक उत्सवो्पर होने वाले खच्षभी। अब राजनीवत और सरकारी फैसलो्मे्चच्षके हस््क्ेप के वखलाफ आवाजे् उठने लगी्है्। राज्य के पूव्षमुख्य सवचव माइकल लमनजुआला चच्षऔर राज्य प््शासन को पूरी तरह अलग करने की वकालत करते है्। वे कहते है्, ‘चच्षको राज्य के मामलो्मे्हस््क्ेप का कोई अवधकार नही्है। वमजोरम हमेशा के्द्के टुकड्ो् पर वनभ्षर नही् रह सकता। हमे् अपना राजस्व बढ्ाना होगा।’ माइकल बताते है्वक पहले स्थानीय तौर पर चावल से बनी बीयर ‘जू’ वमजो संस्कृवत का वहस्सा थी और इसके सेवन मे् कुछ कायदे-कानून लागू थे। तावक लोग इसे पीकर बहक नही्सके्। उनका दावा है वक व््बवटश वमशनवरयो्ने जब से ‘जू’ का ववरोध करते हुए शराबबंदी की वकालत शुर्की, तभी से वमजो लोगो्के वलए अल्कोहल एक समस्या बन गयी। राज्य के ताकतवर मवहला वमजो संगठन वमजो मेछे इन्सुखान पाल (एमएचआईपी) की उपाध्यक््डॉ थानपुई कहती है,् ‘राज्य मे्शराबबंदी प्भ् ावी नही्हो सकी है।’ उनका कहना है वक वपछले साल संशोवधत कानून को सही तरीके से लागू करने पर यहां शराब और नशीली दवाओ् के सेवन से संबंवधत समस्याओ्पर अंकुश लगाया जा सकता है।’ लेवकन हो सकता है वक शरावबयो्की यह खुशी लंबे समय तक कायम नही् रह सके। पाचुंगा यूवनवव्सषटी कॉलेज मे्समाज ववज््ान के प््मुख लालुंगमुआना कहते है्, ‘वर्ष2018 मे्होने वाले ववधानसभा चुनावो्से पहले सरकार शराब पर पाबंदी शायद दोबारा लागू कर देगी।’ ववपक््ी राजनीवतक दल वमजो नेशनल फं्ट के नेता जोरामथांगा ने तो सत््ा मे्आने पर शराबबंदी दोबारा लागू करने का वादा वकया है। दूसरी ओर चच्ष ने चेतावनी दी है वक शराब का परवमट रखने वाले लोगो्को चच्षकी गवतवववधयो्मे्प््मुख पदो्पर रहने की अनुमवत नही्दी जाएगी। लेवकन परवमट के वलए आवेदन करने वाले लोगो् की रोजाना बढ्ती तादाद को देखते हुए चच्षकी यह धमकी बेअसर होती वदखती है। आइजोल मे् अपनी दुकान चलाने वाले लालथालमुआना कहते है्, ‘शराबबंदी लागू होने के बाद हमे्बोतल हावसल करने के वलए तस्करो्पर वनभ्षर रहना पड्ता था। वे इसकी कई गुनी ज्यादा कीमते्तो वसूलते ही थे, शराब मे् वमलावट का भी खतरा रहता था।’ चच्षऔर राज्य सरकार के बीच इस खी्चतान के बीच शरावबयो्की बल्ले-बल्ले है। यही वजह है वक आइजोल मे्शराब की दुकानो्पर खुलने से पहले ही वपयक््ड्ो्की लंबी कतार लग जाती है। दोपहर तक लोग पीकर टुन्न हो जाते है्और शाम ढलते ही कई घरो्मे्घीसू-माधव के चवरत््साकार हो उठते है्। देश के पूव्ी छोर पर बसे वमजोरम मे्सुबह चार बजे सूरज चमकने लगता है औ शाम के चार बजते ही दुकाने् और बाजार बंद हो n जाते है्।
उधार की साबरमती अहमिाबाि मेंसाबरमिी : काई का जमाव
सबबरमती की थ्वच्छतब कब िूब दबवब िकयब जबतब है , लेिकन नम्बदा ब के पबनी पर कनभ्रा इस नदी मे्सरकबरी िनगरबनी के बबवजूद प्द् षू ण भी कम नही्है। वेदसंजर
सा
बरमती के संत तूने कर वदया कमाल, दे दी हमे्आजादी वबना खड्ग वबना ढाल।’साल 1954 मे् आई ‘जागृवत’ नाम की इस वफल्म ने महात्मा गांधी को साबरमती का संत बना वदया था। गांधी थे भी। बाद मे्अहमदाबाद के कोचरब मे्बने गांधी के आश्म् को साबरमती के वकनारे बसा वदया गया। तब से इसे साबरमती आश्म् के नाम से जाना जाने लगा। आज साबरमती के संत के नाम पर केवल गांधी की स्मवृ तयां ही शेर है।् ठीक वैसे ही अब वसफ्फ साबरमती नदी की स्मवृ तयां ही बाकी है।् साबरमती आज अपना मूल स्वर्प गवां चुकी है। वह उधार के नम्दष ा के पानी पर वजंदा है। साबरमती आश्म् के शांत माहौल से नदी के ब्सथर पानी मे् देख,े् तो इसमे् आपको अपना अक्स नजर आने से पहले इसमे् जमी गहरी काई नजर आएगी। साबरमती नदी का यह हाल महज आश्म् तट पर नही्है, बब्लक अहमदाबाद शहर मे्नदी तट पर बने करीब 11 वकमी से ज्यादा लंबे वरवरफंट् पर भी है। इसे तब मुखय् मंत्ी रहे और आज के प्ध् ानमंत्ी नरेद् ् मोदी ने बनवाया। यह उनके ड््ीम पवरयोजनाओ् मे् शुमार रहा। इसकी तारीफो्के कसीदे देश-ववदेश मे्
पढ्ेगए। साबरमती पवरयोजना से मोदी का जुड्ाव इस बात से जावहर होता है वक चीनी राष्प् वत शी वजनवपंग की 2014 की तीन वदवसीय यात््ा का यह गवाह रहा। इसी वकनारे मोदी और सपत्नीक पधारे चीनी राष्प् वत वजनवपंग ने वडनर वडप्लोमेसी मे्भाग वलया। बहरहाल, मुद्ा यह नही्है वक यह ड््ीम प््ोजेकट् सफल है या नही्। इस पवरयोजना की तारीफ हर अहमदाबादी करता है। लेवकन असल मुद्ा इससे अलग है वह है साबरमती नदी का और प्द् वू रत हो जाना। दरअसल, सालो् पहले साबरमती सूखकर मरने लगी थी। कहा जाता है वक इस नदी का नाम 'साबर' और 'हाथमती' नाम की नवदयो्की धाराओ् के वमलने के वजह से साबरमती पड्ा। प््वसद्् वशक््श ा ास्््ी,् पत््कार और स्वतंत्ता संग््मा सेनानी काका कालेलकर 'गुजरष् -माता साबरमती' मे्वलखते है्वक हाथमती तो साबरमती से ही वमलने वाली नदी है। वहरन या साबर वजसके वकनारे बसते है,् लड्ते है् और आजादी से ववहार करते है,् वह है साबर-मती।' साबरमती गुजरात की सबसे बड्ी नदी है। इसका उद्म् राजस्थान के उदयपुर वजले मे्अरावली पव्तष श््ृंखला के धेबर झील से है। यह वहां से दव््कण पव््िम की वदशा मे्बहती हुई 371 वकलोमीटर की यात््ा के बाद अरब सागर के खंभात खाड्ी मे्वगरती
है। अहमदाबाद शहर के दस वकमी वरवरफं्ट पवरयोजना के तहत नदी मे् वदखाई देने वाला पानी नम्दष ा से लाया जाता है। इसे कुछ दूरी पर आगे बैराज बनाकर रोका गया है तावक नदी मे्पानी रहे। तावक वरवरफंट् पवरयोजना की गवतवववधयां और नौकायन आवद जारी रह सके। जानकारो् के मुतावबक इस पवरयोजना के वलए धोबीघाटो् को हटाया गया, तो बहुत से छोटे उद््ोगो्और अन्य अपवशि््का नदी मे् आना रोका गया। वजससे की पानी प्द् वू रत नही्हो। लेवकन जानकार बताते है्वक इसी दायरे मे्करीब 60 से ज्यादा प्वाइंनट् ऐसे है्जो अभी भी अपवशि््नदी मे् वमल रहे है।् इससे पानी प्द् वू रत हो रहा है। यह हाल तब है जब इस पूरी पवरयोजना पर सरकारी वनगरानी है। इससे बैराज के आगे के इलाको् व वहस्सो्मे्होने वाले प्द् रू ण की कल्पना आसानी से की जा सकती है। मामले पर बात करने पर स्थानीय प्द् रू ण वनयंतण ् बोड्ष के अवधकारी कतराते है।् यह हालात तब है्जब केद् ्ीय प्द् रू ण वनयंतण ् बोड्षबीते कई सालो् से साबरमती को सबसे ज्यादा प््दूवरत नवदयो्मे्शुमार करता आ रहा है। साबरमती आश्म् के सवचव अमृत मोदी कहते है्‘साबरमती तो वसफ्फ नाम की बची हुई है आधुवनक तरक््ी की ऐसी ही n कीमत अदा करनी पड्ती है।” शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 43
राजंयनामा रीता ततवारी
एजंेडा बन जाए, उसको कमतर नही् आंका जा सकता। इस वहल्सा वडप्लोमेसी ने पहले भी ् ादेश के साथ गंगा के जल के बंटवारे पर होने क मछली के पूरे तालाब को गंदा करने वाली बांगल कहावत तो बहुत पुरानी है। लेवकन एक वाले करार मे् अहम भूवमका वनभाई है और अब ् ्ाववत करार मे्भी इसकी वही मछली ऐसी भी है जो एक पूरी कौम के सामावजक वतस््ा के पानी पर प्स ढंग से ताने-बाने और संसक ् वृ त मे्काफी गहरे रची- भूवमका होने की संभावना है। यह वही मछली है बसी है, भले ही वह कौम दो देशो्की सीमाओ्मे्क्यो् वजसके बेवमसाल स्वाद के वलए तीन साल पहले ् ानमंत्ी मनमोहन वसंह शाकाहार छोड्ने तक को न बंटी हो। इस मछली को आम बोलचाल मे्वहल्सा प्ध और बांग्ला मे् इवलस कहा जाता है। यूं तो यह तैयार हो गए थे. मूल र्प से बंगावलयो् के वलए एक स्टेटस ओडीशा और आंध् प््देश मे् भी बड्े चाव से खाई जाती है, लेवकन पव््िम बंगाल, व््तपुरा और असम वसंबल का दज्ाष हावसल कर चुकी इस मछली का की बराक घाटी मे्बसे बंगावलयो्के वलए यह महज पव््िम बंगाल मे् सेवन देश की आजादी के बाद एक मछली नही्, बब्लक इस कौम की सामावजक- बढ्ा। इसकी वजह थे तत्कालीन पूव्ी बंगाल से यहां ं ने वाली बंगाली शरणाथ््ी। तीन साल पहले तक सांस्कृवतक अब्समता की पहचान है.यानी मछली पहुच वाली कहावत को अगर वहल्सा के संदभ्षमे्कहना हो तो सबकुछ ठीक-ठाक चला। लेवकन वर्ष2012 मे् ् ादेश ने जब से वहल्सा के वनय्ातष पर पाबंदी लगा तो कहना पड्गे ा वक एक मछली वसफ्फवदलो्ही नही्, बांगल अंतरराष््ीय सीमा की दूवरयो्को भी वमटा सकती है। दी तब से एक आम बंगाली की वदनचय्ाष और वैसे तो यह पड्ोसी बांगल ् देश की राष््ीय मछली है। खानपान की आदते्भी बदल गई है।् इसवलए इसमे् लेवकन इसके मूल मे् बंगाली ही है।् यानी वहल्सा से कोई अचरज नही्है वक वपछले वदनो्मुखय् मंत्ी ममता बंगावलयो्का वरश्ता जन्म-जन्मांतर का है। माछ-भात बनज््ी जब बांग्लादेश के दौरे पर गई् तो मछली यानी मछली-चावल का वजक््होते ही मन मे्बंगाल आयातको्ने उनसे यह मुद्ा उठाने की अपील की थी और ममता ने इसे उठाया भी। दरअसल, यह पाबंदी और बंगावलयो्की तस्वीर उभरती है। जो मछली वकसी भारतीय मुखय् मंत्ी के ववदेश भी ममता के र्ख की वजह से ही लगी थी। उन्हो्ने दौरे मे्शीर्षनेततृ व् से बातचीत के दौरान एक अहम वतस््ा के पानी पर प््स्ाववत समझौते पर नाराज
ए
होकर तत्कालीन प्ध् ानमंत्ी मनमोहन वसंह के साथ बांगल ् ादेश दौरे पर जाने से मना कर वदया था। इस पर पलटवार करते हुए बांगल ् ादेश ने वहल्सा के वनय्ातष पर पाबंदी लगा दी। इससे बंगाल के बाजारो् ही नही्, आम बंगावलयो्के जीवन मे्भी हाहाकार मच गया। वफलहाल बंगाल के मछली व्यापारी म्यांमार से वहल्सा का आयात करते है,् लेवकन इसकी क्वावलटी और स्वाद बांगल ् ादेशी वहल्सा के मुकाबले खराब है। वफश इम्पोटस्षएसोवसएशन के सवचव सईद अनवर मकसूद कहते है,् ‘म्यामांर से वहल्सा यहां तक पहुच ं ने मे्तकरीबन दो महीने लग जाते है।् इसके बाद हमे् कोल्ड स्टोरेज के वलए अवतवरक्त भुगतान करना पड्ता है और पैकवे जंग का खच्षभी ज्यादा होता है। इस वजह से बाजारो्मे्कीमते्बढ्जाती है.्’ अब इन व्यापावरयो् की उम्मीदे् बांग्लादेश पर वटकी है्। मकसूद कहते है् वक भारत और बांगल ् ादेश के बीच जब तक वतस््ा पर कोई समझौता नही् हो जाता, हमारी मुबश् कले्जस की तस रहेग् ी. वैसे तो वहल्सा का सेवन ओडीशा, व््तपुरा, असम, आंध् प््देश और वमजोरम मे् भी होता है, लेवकन जो बात बंगाल मे्है वह कही्और नही्है। शंकर छद्न् ाम से वलखने वाले बांगल ् ा उपन्यसाकार मवण शंकर मुखज््ी बताते है्वक पहले आम बंगाली पवरवार मे्वहल्सा खाना और घर आने वाले अवतवथयो्
स्वाद से िसयासत तक िहल्सा कहल्सब नबयबब थ्वबद वबली महंगी मछली है, लेिकन िसयबसत मे्भी उसकी अहम भूिमकब है। बबंनल ् बदेश के सबथ गंगब के जल के बंरवबरे पर हुआ करबर हो यब अब तीस््ब के पबनी पर प्स ् ्बकवत करबर, उसकी अहकमयत को नजरअंदबज नही्िकयब जब सकतब।
निी से बाजार की ओर िहलंसा : िुलंटभ होिा संवाि 44 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
को वखलाना शान की बात समझी जाती थी। लेवकन अब दूसरो् को वखलाना महंगा सौदा हो गया है। वे बताते है् वक डेढ् से दो वकलो वजन वाली वहल्सा सबसे अच्छी होती है। लेवकन इनकी कीमत एक हजार र्पए वकलो से भी ज्यादा होती है और आपको इसके वलए पहले से ववकेत् ाओ्को आड्रष देना होता है। सेवावनवृत् प््ोफेसर धीरेन सान्याल कहते है् वक पहले उनके घर रोजाना वहल्सा मछली खाई जाती थी। लेवकन अब बढ्ती कीमतो्के चलते वसफ्फदो वदन ही यह मछली घर मे्बनती है. बंगाली वहंदू पवरवारो्मे्वहल्सा के वबना कोई भी शुभ काम पूरा नही्होता। वह चाहे शादी-वववाह का मौका हो या वफर वकसी पूजा या त्योहार का। बंगाली पवरवार तो अपने बांगल ् ा नववर्षपोयला बैशाख की सुबह की शुरआ ् त ही वहल्सा और पांता भात यानी रात भर पानी मे्वभगो कर रखे गए भात के साथ शुर् करता है। शादी के मौके पर वर पक््की ओर से वधू पक््को इवलस का जोड्ा उपहार वदए वबना बात ही नही्बनती। हालांवक महंगाई की मार से अब इसकी जगह रोहू मछली ले रही है। वहल्सा की आवक और कीमतो् मे् उतार-चढ्ाव आम बंगाली पवरवारो् की रोजमर्ाष की बातचीत का अहम मुद्ा होता है। यह मुद्ा स्थानीय अखबारो् और टीवी चैनलो् पर भी अक्सर सुव्खषयां बटोरता रहता है। इससे बंगाली जनजीवन और समाज मे् वहल्सा की अहवमयत का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह कहना ज्यादा सही होगा वक बाजारो् मे् वहल्सा की कमी और कीमते् बंगाल की ‘राष््ीय समस्या’ बन जाती है। वहल्सा अगर ज्यादातर बंगावलयो्के वदलो्पर राज करती है तो इसकी कमी और बढ्ती कीमते्वदलो्को तोड्भी सकती है। शंकर को इस बात का मलाल है वक
बांग्ला सावहत्य मे् वहल्सा के प््वत बंगावलयो् के के्ज को वावजब जगह नही् वमल सकी है। लेवकन इसे लेकर कई कहावते् और लोकगाथाएं कहीसुनी जाती है्। इनमे् सबसे मशहूर कहावत यह है वक वर्ष 1899 मे् स्वामी वववेकानंद जब पद््ा नदी से गुजर रहे थे एक मछुआरे ने उनको एक र्पए मे् 16 बड्ी वहल्सा मछवलयां दी्। इसके साथ चार मछवलयां मुफत् भी दी्। वववेकानंद अब वकनारे आकर पुई साग की तलाश करने लगे तावक उसके साथ वहल्सा पकाई जा सके। एक स्थानीय व्यब्कत ने वववेकानंद को इस शत्ष पर यह साग देने की सहमवत दी वक बदले मे्वे उसे अपना वशष्य बना लेग् ।े वहल्सा के वलए वववेकानंद ने यह शत्षमंजरू कर ली। मुखज््ी कहते है्वक वहल्सा मछली मे्दस हजार कांटे होते है।् यही वजह है वक यह मछली प््ान या वचंगड ् ्ी की तरह पव््िमी मेनय् ू मे् अपनी जगह नही्बना सकी है. िहल्सा कम से कम भारत-बांगल ् ादेश संबधं ो्के मामले मे् वहंसा का राजनवयक महत्व भी है। वर्ष 1996 मे्गंगा नदी के पानी पर बंटवारे पर करार के मसले पर तब के मुखय् मंत्ी ज्योवत बसु का र्ख काफी कड्ा था। तब केद् ्सरकार ने तत्कालीन बांगल ् ादेशी प्ध् ानमंत्ी शेख हसीना को बसु को मनाने की सलाह दी थी। उस समय भी इसी वहल्सा ने उस असंभव काम को संभव कर वदखाया था। बसु भी मूल र्प से बांगल ् ादेश के ही रहने वाले थे। वदसंबर, 1996 मे्हुए इस करार के बाद मे्बसु को बांगल ् ादेश बुलाया गया और वहां उनका अभूतपूव्ष स्वागत हुआ। अब मुख्यमंत्ी ममता बनज््ी और शेख हसीना के बीच वतस््ा नदी के पानी पर करार के वलए एक बार वफर यही वहल्सा वडप्लोमेसी कमाल वदखा रही है। ममता ने हाल मे्अपने बांगल ् ादेश दौरे के दौरान शेख हसीना के साथ वहल्सा के वनय्ाषत पर पाबंदी का मामला उठाया था। ममता ने उनसे कहा वक बंगाल को बांगल ् ादेश से पय्ापष त् वहल्सा नही्वमल रही है। इस पर हसीना ने कहा, ‘अगर वतस््ा का पानी आता है तो मछवलयां अपने आप पानी मे्तैरगे् ी.’ वहल्सा वैसे तो बंगाल की खाड्ी मे्भी पाई जाती है। लेवकन समुद्ी वहल्सा उतनी स्वावदि््नही् होती वजतनी नदी वाली वहल्सा। यहां गंगा मे् भी वहल्सा वमलती है। लेवकन बांग्लादेश ब्सथत पद््ा नदी की वहल्सा का स्वाद सबसे बेजोड् होता है। वहल्सा की एक खावसयत यह भी है वक यह रहे भले समुद्के खारे पानी मे,् लेवकन अंडे नदी के मीठे पानी मे्ही देती है। अंडे देने के बाद अपने बच््ो्के साथ यह वफर समुद् की गहराइयो् मे् लौट जाती है। वहल्सा की कीमत उसके साइज से तय होती है। वजतनी बड्ी मछली, उतनी ही ज्यादा कीमत। बरसात का सीजन शुर्होते ही बाजारो्मे्वहल्सा की पय्ापष त् आवक नही्होने पर
हाहाकर मच जाता है औ र इ स की की म त आठ से पंदह् सौ र् प ए प् ् वत वकलो तक पहुंच जाती है। मानसून के सीजन मे् बंगाल के गली-नुक्ड्-चौराहो् से लेकर चाय की दुकानो्तक जहां देवखए, बस वहल्सा की ही चच्ाष नजर आती है. पाबंदी से पहले हर साल मानसून के दौरान बांगल ् ादेश से रोजाना 15 मी। टन वहल्सा वमलती थी। दुग्ाषपूजा और जमाई रष््ी जैसे उत्सवो्के मौके पर यहां उत््र 24-परगना वजले मे् भारत-बांग्लादेश सीमा पर ब्सथत पेि्ापोल पर रोजाना 50 से 60 मी। टन वहल्सा पहुंचती थी। लेवकन पाबंदी के बाद बंगावलयो्के भोजन की थाली से यह मछली गायब होने लगी है। स्थानीय या म्यामांर से आने वाली वहल्सा की एक तो कीमते्ज्यादा है्और दूसरी उनमे् वह स्वाद भी नही्है जो पद््ा की वहल्सा मे्होता है. वहल्सा एक तैलीय मछली है। इसमे् ओमेगा 3 फैटी एवसड भरपूर मात््ा मे्होता है। बंगाली लोग इस मछली को पचास से भी ज्यादा तरीको्से पका सकते है्और हर व्यज ं न का स्वाद एक से बढ्कर एक होता है। कोलकाता के वववभन्न होटलो् और रेस्रां मे् बांगल ् ा नववर्षऔर दुगा्पष ज ू ा के मौके पर आयोवजत वहल्सा महोत्सवो् मे् उमड्ने वाली भीड् से इसकी लोकव््पयता का अंदाजा वमलता है। शंकर बताते है् वक बचपन मे्उनके घर जोड्ा इवलस खरीद कर लाने के बाद पारंपवरक तरीके से दोनो् की शादी कराई जाती थी और उसके बाद उनको पकाया जाता था। पूरा पवरवार इसमे्ऐसे शावमल होता था मानो पवरवार के वकसी सदस्य की शादी हो रही हो। दूसरी मछवलयो् की तरह वहल्सा को काट कर नही् बेचा जाता। आप अपनी जर्रत के वहसाब से बड्ी मछली खरीद सकते है्या वफर छोटी। ईस्ट बंगाल क्लब के सवचव रहे कल्याण मजुमदार कहते है्, ‘बढ्ती कीमतो्ने वहल्सा को कुछ बेसव् ाद कर वदया है। आम बंगाली पवरवार अब मन मसोस कर दूसरी मछवलयो् से ही गुजारा कर रहा है। वकसी पव्-ष त्योहार पर ही वहल्सा घर मे् आती है.’अब पूरे बंगाली समाज की उम्मीदे् भारत और बांग्लादेश के बीच प््स्ाववत वतस््ा करार पर वटकी है।् जब वतस््ा का पानी सीमा पार करेगा तभी उधर से आने वाली वहल्सा आम बंगाली की भोजन की थाली तक पहुच ं गे ी। ममता के दौरे के बाद बंगाल मे्इस मानसून सीजन या कम से कम दुगा्पष ज ू ा तक पद््ा की वहल्सा की आवक दोबारा शुर् होने की उम्मीद बंधी है। उससे पहले तक तो उनको अतीत मे्खाई इस मछली के स्वाद की यादो् शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 45
आधी आबािी
जादू के बहाने
जुल़म
कबनून के बबवजूद जबदू-रोने की आड मे्औरतो्को कशकबर बनबने और उन पर अत्यबचबर की घरनबएं जबरी है.्छत््ीसगढ़ मे्कपछले एक दशक मे्दो सौ से अकधक गरीब मकहलबओ्को रोनही होने के आरोप मे्अपनी जबन गंवबनी पडी है. तदनेश अकुला
कु
छ- कुछ देर पर वबसावहन बाई थूंकती रहती है। वह बार-बार थूक कर अपना मुहं साफ रखना चाहती है। उसे जबरदस््ी पेशाब वपलाया गया। पेशाब का कड्वा स्वाद उसके जुबान से अभी भी उतरा नही् है। उसे पेशाब पीने को मजबूर वकया गया। दहशत और भय पैदा कर उसे इसके वलए मजबूर वकया गया। सरेआम गांव मे्नंगा घूमाया गया। और चौदह साल भी उसे जादू टोना के नाम पर सताया जाता रहा। गवरयाबंद वजले से छत््ीसगढ् की राजधानी रायपुर 90 वकमी दूर है। वबसावहन गवरयाबंद के लक्ख ् रे ा इलाके मे्रहती है। वह अपने माटी से बने घर मे् अपने से जुड्ी भयंकर यादो् को भुलाने की कोवशश कर रही है। करीब दशक भर से वह इसके वलए पूरी कोवशश मे् है। वबसावहन अपने अपमान और पीड्ा को भुलाना चाहती है। इस अपमान मे् उसके साथ दो और मवहलाएं भी रही्। इन्हे् भी वबसावहन की तरह उनके जुल्म का वशकार होना पड्ा। इन्हे् गांव वाले टोनही (जादू-टोना करने वाली मवहलाएं) कह कर बुलाते रहे। वबसावहन बाई के संग श्यामा और तीरथ बाई भी इंसाफ की बाट जोह रही है।् तीनो्को नंगा घुमाया गया। वसर मुड ं वा वदया गया। जबरदस््ी पेशाब वपलाया गया। इन पर जादू-टोना करने का आरोप लगाया गया। पूरा लक्ख ् रे ा इन्हे्टोहनी नाम से बुलाने लगा। टोनही मामले मे्बीस दोवरयो्मे्से 17 दोवरयो् को साल भर के कारावास की सजा वमली। लेवकन मामला हाई कोट्षमे्जाने के बाद वह वफर छोड्वदए गए। वनचली अदालत ने सभी दोवरयो् को पीव्डतो् को एक लाख र्पए देने के आदेश वदए। लेवकन अब 46 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
तक उन्हे् कोई रकम नही् वमली है। मामले मे् पीव्डतो् की चूव्डयां और दूसरे गहने भी अभी तक अदालती वनगरानी मे् है।् जादू -टोना जैसे मामलो् को लेकर छत््ीसगढ् मे् मवहलाओ् पर जुल्म और अत्याचार पहले भी होते रहे है।् वपछले एक दशक मे् राज्य करीब 1500 मामले सामने आए। इनमे् 210 मौते्भी हुई।् आप बीती को याद कर वबसावहन की आंखो्से आंसू बहने लगते है।् वबसावहन दूसरी पीव्डत तीरथ बाई का हाथ थामे बताती है वक कैसे गांव वाले उसे चुड्ैल और जादूगरनी के तौर पर प्च ् ार कर रहे थे। वबसाहन कहती है उन लोगो् ने मेरा सर मुंडवा वदया। मुझे गांव वालो् के सामने नंगा घुमाया। उस वदन को सोच मुझे बुखार चढ् जाता है। यह बताते हुए वबसावहन की आंखो् के आंसू कुछ देर थम जाते है्। अपनी हरी साड्ी के पल्लू से वबसावहन अपना चेहरा पोछते हुए कहती है इस घटना को चौदह साल हो गए। लेवकन अब भी वह इस घटना को याद कर अंदर से वहल जाती है। मामले की दूसरी भुकत् भोगी तीरथ बाई बताती है िक सुबह के दस बजे थे। कुछ लोगो् ने हमारे बाल घसीटते हुए हमे्घरो्से बाहर वनकाला। हम छटपटा रहे थे। वह हम तीनो्पर टोनही होने और गांव के एक आदमी को बीमार करने का आरोप लगा रहे थे। बकौल तीरथ लोगो्ने हमे्लातो्से मारा। हम वचल्लाते रहे। लेवकन हमारे वचल्लाने का उन पर कोई असर नही् था। गांव का कोई भी हमे् बचाने नही्आया। वह हम पर वबजली का तार पकड्ने को जोर दे रहे थे। उनका कहना था वक यवद तुम सब जादूगरनी( चुडल ्ै ) नही्होगी। तो तुमह् े्कुछ नही् होगा। मामले मे् तीसरी पीव्डत श्यामा बताती है उन लोगो्ने मेरे बाल बुरी तरह से खी्च।े हमने कपड्े
वनकालने से इनकार करने पर हमे्पूरे गांव मे्नंगा कर घुमाया गया। यह हमारे वलए लज््ाजनक हालात थे। लोग हम तीनो् को टोनही (चुड्ैल, जादूगरनी ) कह रहे थे। हमे्आग मे्कुदाया गया। हम प्यास से तड्प रहे थे। हमारा मुहं सूख रहा था। पीने को पानी मांगा तो उन्हो्ने हमारे मुहं मे्पेशाब कर वदया। हमारा खून बुरी तरह से बह रहा था। गांव के चौराहे पर बेहोशी की हालत मे् हमे् मरने के वलए छोड्वदया गया। वे हमारे ऊपर पानी फेक ् रहे थे। लोग हम तीनो्को जादूगरनी( चुडल ्ै ) बुला रहे थे। श्यामा आगे बताती है उन लोगो्ने हमे्छड्ी से मारा। हम तीनो् के बाल एक मे् बांधने की कोवशश भी की। हमारे वसर मुड ं वा वदए गए। तीरथ बताती है िक कैसे पानी मांगने पर एक आदमी ने उसके मुहं मे्पेशाब कर वदया। तीनो् मे् सबसे संकोची वबसावहन श्यामा को रोकते हुए कहती है उस दौरान मुझे मावसक था। बुरी तरह से खून बह रहा था। मै्गांव के लोगो्के सामने पूरी तरह से नंगी थी। उन लोगो्ने हमे्पूरा गांव घूमाया। बाद मे् मंवदर के पास मरे हालत मे् छोड्कर चले गए। यह बताते हुए वबसावहन कांप जाती है। वकसी तरह हम दूर के अस्पताल मे्गए। गांव के बूढ्ो् ने हमे् इनके वखलाफ वरपोट्ष नही् वलखाने दी। हम अस्पताल के बहाने पहले पुवलस
स्टेशन गए। वबसावहन आज 50 पार है। इनका जीवन अकेलपे न मे् गुजर गया। लेवकन आज वह ववश््ास और उत्साह से भरी है। खेतो्मे्काम करती है। लेवकन उसके मन मे्संदहे अब भी है वक क्या उस पर टोनही (जादूगरनी, चुड्ैल) होने का जो ठप्पा लगा है वह समाज से वमट पाएगा। जनजातीय इलाको् मे् जादू-टोना की बाते् आम है। यवद गांव, पवरवार मे् कोई काम सही से नही् हो रहा हो, कोई बीमार हो, वकसी की मौत, फसल ठीक नही् हो या कोई दुघ्षटना हो जाए तो अक्सर अनपढ् समुदाय के लोग अपने मे् से ही वकसी कमजोर को दोर देने लगते है। इसके वलए गांव वाले आसानी से एकजुट भी हो जाते है।् तीरथ कहती है हम भाग्यशाली रहे वक मारे नही् गए। कभी-कभी इस तरह के इल्जाम जान ले लेते है्। बीते साल पुवलस ने करीब 200 मामले जादू-टोने आवद को लेकर दज्ष वकए। इनमे् से अवधकांश मामले छत््ीसगढ् के जनजातीय इलाको् से है्। वबसावहन बाई की मां इस हादसे के बाद गुजर गई। वह यह अपमान बद्ाशष त् नही्कर सकी। वबसावहन का भाई इस मामले की वजह से आशाहीन हो गया है। उसे बहन की मदद नही्कर पाने का मलाल है। मामले की तीनो् पीव्डत वबसावहन, तीरथ और श्यामा वफर से अपना जीवन शुर् कर चुकी् है्। लेवकन इनके पीछे रायपुर से आए एक नेत् वचवकत्सक डॉ वदनेश वमश्् का साथ है। वमश्् काला जादू और अंध ववश््ास के वखलाफ जंग लड्
रहे है्। वमश्् ने वबसावहन बाई को आपरावधक मामला दज्ष करने के िलए प्व्ेरत वकया। इतना ही नही् वबसावहन गांव के वाड्षनंबर तेरह से पंचायत चुनाव भी लड्ी।् हालांवक जनवरी मे्हुए इन चुनावो् मे्वह हार गई। डॉक्टर वदनेश कहते है् मेरी यह कोवशश होगी वक इन मामलो्को फास्ट ि्क ्ै अदालतो्मे्चलाया जाए। इससे पीव्डतो् को इंसाफ वमल सके। छत््ीसगढ्राज्य मे्जादू-टोना वनरोधक अवधवनयम 2005 इसके वलए लाया गया था। लेवकन यह कानून इसे रोकने मे्सक्म् नही्हो सके। डॉ वमश्् का संसथ् ान अंधश्द ् ्ा वनम्ल षू सवमवत इसके वखलाफ साल 1995 से बगैर सरकारी मदद के काम कर रहा है। वमश््कहते है्हालांवक हमे कोई सरकारी मदद नही् वमलती। लेवकन वफर भी हमारा वमशन नही् र्कगे ा। डॉ वमश््बताते है्वक जादू टोने के मामले अवधकतर बीमावरयो्और रोग के वजह से पैदा हो जाते है्। लोग यवद इन बीमावरयो् की बारे मे् जागर्क हो जाएंगे तो वह अपने पड्ोवसयो् को इसका वजम्मेदार नही् माने्गे। इसके वलए मै् उन्हे् बैब्कटवरयां और वाइरस के वचत्् भी वदखाता हूं। वजससे वह बीमावरयो्की असल वजह जान सके।् टोनही जैसे मामले को कवर करने वाली पत््कार रब्शम बताती है् इस तरह के मामलो् मे् समुदाय के लोगो् को अपना ही कोई आदमी बहकाता है। इसवलए उसके वखलाफ सुबूत और गवाह जुटाना मु ब्शकल हो जाता है। इस तरह के मामलो् मे् िबसािहन, शंयामा और िीरथ : अपमान अौर अतंयाचार
पुवलस को प््वशव््कत करने की जर्रत है। रायपुर मे् प््ोफेसर और मामले की जानकार रावधका सक्सेना कहती है् ‘इस तरह की घटनाएं दुभा्गष य् वश भी हो सकती है।् लेवकन ऐसे बहुत सारे मामले भी सामने आएं है्जहां जादू-टोना को वनजी स्वाथ्षके वलए बढ्ावा वदया जा रहा है। घोर दवरद्त् ा और तनाव से जूझते इन समुदायो्मे्लोगो्को वकसी मवहला को वनशाना बनाकर उसके बारे मे् कानाफूसी शुर्करने मे्ज्य् ादा समय नही्लगता। चुडल ्ै का वशकार उनके वलए तनाव से मुबक् त पाने के वलये एक तरह की नुमाइश बन जाता है। वकसी औरत को पीटने, जान से मार देने भर से ही शायद उन्हे्तनाव से कुछ राहत वमलती है।’ वपछले छह महीनो्मे्छत््ीसगढ्मे्दो दज्नष से ज्यादा मामले मवहलाओ्पर इस तरह के अत्याचार के सामने आए। इसमे्आठ मवहलाओ्की जान भी चली गई। राज्य मवहला आयोग के आंकड्ो्पर गौर करे्तो रायपुर दस मामलो्के साथ बीते साल सबसे ऊपर रहा। बलरामपुर, राजनंदगांव, रायगढ्,जंजगीर-चंपा और कोवरया वजले इसके ताजा वशकार है्। हालांवक छत््ीसगढ् सरकार का इन मामलो् के वलए कड्े कानून होने का दावा करती है और मामला दज्षहोने के बाद बक्शे नही् जाने की बात करती है। राज्य की मवहला और बाल ववकास मंत्ी रामशील साहू भाजपा सरकार मे् मवहलाओ् के अवधक सुरक््ा का दावा करती है्। सरकार भी कानून और व्यवस्था को लागू करने को लेकर गंभीर है। लेवकन वह गांवो् मे् टोनही जैसे मामलो् को रोकने मे् असफल सावबत हो रही है। रायपुर के एक ववरष््पुवलस अवधकारी इसके पीछे कई वजहो् को वजम्मेदार मानते है्। इनमे् लै्वगक असमानता, जायदाद के झगड्ो् के वजह से उन्हे् चुडल ्ै बनाने की भूवमका ज्यादा होती है। एक औरत को चुडल ्ै ठहराने के पीछे जमीन हवथयाने, उसे दंवडत करने और अपने यौन वहत साधने जैसी वजहे् भी है।् इन हालात मे्पीव्डत मवहला की मदद कर पाना मुबश् कल हो जाता है। उसे अपना पवरवार,घर छोड्ने पर मजबूर वकया जाता है। उसे आत्महत्या के वलए मजबूर वकया जाता है या हत्या भी कर दी जाती है। गरीब, वनम्म जावत की मवहलाएं, ववधवा, बांझ,कुर्प या वफर बूढ्ी, बेसहारा और सामावजक र्प से बवहष्कृत मवहलाएं इन अंधववश््ासो् का आसान वशकार हो जाती है। मवहलाओ्के मुद्ो्को सामने वाले वुमेन न्यूज नेटवक्फ के मुतावबक जो मवहलाएं ताकतवर होकर उभरती है और पुर्र समाज के नेतृत्व को खतरा पैदा करती है्। वे भी इसका वशकार हो बनती है्। डल्ल्यूएनएन के मुतावबक इसमे् वहंदू धम्ष की रीवतयां भी वजम्मेदार है्। वजसमे्जादू टोने के सहारे कई मान्यताओ्की गलत व्याख्या की गई है। अत्याचार की वशकार यह मवहलाएं देश के आधुवनकता को मुंह वचढ्ाती नजर आती है। भले ही यह छत््ीसगढ्का ही कोई इलाका हो। लेवकन इन पर हुए जुल्म वसतम कही् न कही हमारे समाज व्यवस्था पर प््श्न वचन्ह लगा रहा है। n शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 47
कहानी दववेक दमशंं युवा कथाकार। दो कहानी संग्ह ‘हावनयां तथा अन्य कहावनयां’ एवं ‘पार उतरना धीरे से’ प््कावशत। साठ से अवधक वृत्वचत््ो्की संकल्पना एवं पटकथा लेखन। चव्चषत कहानी ‘थट््ी वमनट्स’ पर फीचर वफल्म वनम्ाषणाधीन।
जोकर
वफ
र मेि्ो आई, र्की और चली गई। समय से घर पहुच ं ने का एक मौका आया, र्का और आंखो्के सामने से सरकता चला गया। एक वदन, एक घंटा जल्दी जाने की मोहलत नही्वमल सकती। नौकरी है या गुलामी। न जाने भाबू का बुखार उतरा होगा वक नही्। वकतनी बार कहा है जशोदा से, 'थोडा अपने आप भी वनकला करो घर से, देख लो आस-पास की जगहे्वजससे बखत-जर्रत जा सको बाहर।' पर हमेशा एक ही बात, 'बाहर जाते डर लगता है, शहर है या समंदर। अकेले घर से वनकलने की बात सोचते ही जी कच््ा होने लगता है और वफर इस शैतान भाबू के साथ कभी नही्।' आज भाबू के वलए ही बाहर वनकलना है। डॉक्टर के पास जाना है पर नही्वनकल सकती। उसने कहा था जल्दी आऊगा। खाने-पीने वालो् के वलए होगी मौज-मस््ी की जगह, उसके वलए तो एक जेल है, ये रेसट् ोरेट् । जोकर के वलबास मे्सारे वदन का क़ैदी है। दुख न वदखे इसवलए रंगीन लैस ् लगे है् आंखो् मे्। उदासी छुपाने के वलए चेहरे पर लाल-पीले रंग से मुस्कान वचपका दी गई है। वह चाहे भी तो वनजात नही्पा सकता, इस मुसक ् ान से। तरहतरह से मुसक ् राना, हाथ वमलाना, लाल-पीले थैले मे् से वनकालकर बच््ो् को वखलौने बांटना, उनका हाथ पकडकर चलना। उनके रोने पर रोना, हंसने पर हंसना। उनकी फम्ाइष श पर नाचना, एडी पर घूमकर चकरी, या वफर लट्् बन जाना। रेसट् ोरेट् मे्जोकर का होना बच््ो्के वलए सबसे बडा कौतुक है। उनकी अपनी पसंद की आइसक््ीम या बग्रष से भी बडा। मां-बाप ख़ुश रहे्इसवलए बच््ो् का ख़ुश रहना जर्री है। मां-बाप के वहसाब से वे मासूम है्और उन्हे्खाते-पीते हुए जोकर के करतब देखना पसंद है। जोकर की नजर से सब बच््ेमासूम नही् वदखते। उनमे्से कुछ दुि्और वसरवफरे भी होते है।् वे वबना वजह कपडे खी्चते है,् धवकयाते है,् पर जोकर को हर हाल मे्उनकी कारगुजावरयो्से डरना है, सहम जाना है। वफर भी न माने तो मुसक ् राते हुए पलटी मारकर भाग जाना है। पर वकसी भी हाल मे्उन्हे्नाराज नही्करना है। अपनी ही मुसक ् ान इतनी असहय हो सकती है, यह उसने यहां, इस नौकरी मे्सुबह से लेकर देर रात तक मुसक ् राते हुए ही जाना। शायद कभी इस मुखौटे को उतार कर अपनी असली शक्लोसूरत मे्यहां आए तो उसे भी अच्छा लगे। अगर ऐसा हुआ तो भाबू और जशोदा को साथ लाएगा। अपने हाथ से बग्रष सेक ् कर वखलाएगा। नही्, टेबल पर बैठ कर ऑड्रष करेगा। वह गम्,ष ताजा, अपने पैसो्से खरीदा हुआ बग्रष होगा। ठंडा, बासी, बचा हुआ, खैरात मे् वमला नही्। पर तब जोकर नही्होगा। उसके करतब नही्होगे।् वकसी को हंसाने के वलए वकसी का जोकर बनना जर्री है। यही वनयम है। सोचा ‘मै् जोकर ही रहूंगा। भाबू और जशोदा टेबल पर बैठगे् ।े् भाबू भी बच््ा है, यहां आकर जर्र ख़ुश होगा। पर मुझे इस तरह जोकर बना देखे तो न जाने क्या सोचे? क्या सोचेगा? बाप हूं उसका। ये काम है मेरा। पर जोकर वकसी का कुछ नही्होता। वह वसफ्फजोकर होता है। उससे कोई भी, वकसी भी तरह पेश आ सकता है। भाबू और जशोदा भी।’ ‘क्लाउन, कम वहयर।’ आवाज गूज ं ी। पलटा तो सामने मैनज े र खडा था, ‘क्या प््ोबलेम है तुमह् ारी? इतने सुस्क्यो् हो? ये रेसट् ोरेनट् के वबजी ऑवस्षहै।् तुमह् े्वहां गेट पे, बब्लक गेट से बाहर होना चावहए। बाहर देखो वकतने लोग वेवटंग मे् है।् वकतने बच््ेहै,् उनके साथ। तुम 48 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
यहां खडे वखडकी से बाहर ताक रहे हो।’ ‘सर आज जल्दी वनकलना था।’ ‘मैन् े तुमह् े्वकतनी बार बोला, वीकेनड् पे जल्दी वनकलने की बात मत करना। वपछले तीन वदन से वबजनेस वकतना कम था। चलो गेट पे पहुच ं ो, अभी बात करने का टाइम नही्है और सुनो ऐसे मुहं मत लटकाए रहना।’ मैनज े र तेजी से वकवचन की तरफ़ बढ गया। वकवचन से मांस के भुनने की गंध आ रही थी। तभी दो-तीन बच््ो्ने आकर घेर वलया। वे कोने मे्लगे पंवचंग बैग के पास खी्च के ले गए। बच््े बैग को वहट करे्गे, बैग जोकर को लगेगा। जोकर वगर जाएगा। हर बार अलग अदा से। कभी सीधे, कभी उल्ट,े कभी समरसॉल्ट करते हुए। परसो्इसी खेल मे्घुटना स्टल ू से लग गया था। अभी तक दुख रहा है। बचने के वलए खंबे पर बंधी लाल रस्सी खोली और कूदता हुआ बाहर चला गया। चारो् ओर गुलब् ारे है,् घंवटयां है,् संगीत है, हर तरह का खाना-पीना है, कपडे है,् रंग है् और शरीर है।् और उन शरीरो्को वकसी चीज की कमी नही्है। सब कुछ इतना है वक छलछला के बाहर वगर रहा है, बह रहा है। कूदते हुए उसका मुहं सूख रहा है। लगता है, छाती मे् कुछ जम गया है। बीडी पीने की जबरदस््तलब लगी है। तभी घुटना ‘चट’ की आवाज के साथ चटका और ठीक हो गया। शरीर मे्दद्षकी गुज ं ाइश नही्है। हर दद्षकुछ देर रहकर ठीक हो जाता है। उसके वलए हर दद्षका जल्दी ठीक हो जाना जर्री है। सब ख़ुश है।् बगल की टेबल पर कोई चहक रहा है, ‘इट्स फ़न बीइंग हेयर एट वीकेनड् ’, दूसरी आवाज उसमे्वमल गई है, ‘या, इट्स सो हेपवनंग।’ इतने तेज बजते संगीत
के बीच भी ये आवाजे्चुभ रही है।् करो। आजकल नोएडा का बच््ेपकडने वाला गैग् घूमता है खोडा की गवलयो् तभी वकसी ने कंधे पर हाथ रखा। इमरान इस समय वकवचन से बाहर! ‘तेरी मे।् ये कोठी वाले लोग गरीब लोग के बच््ो् का कलेजा भून के खा जाता है।’ घरवाली का फोन है।’ वदल धक से रह गया। हाथ कांप गए फोन पकडते हुए। जशोदा ने उसे घूर के देखा और भाबू को गोद मे्उठा वलया। वह पांव पटकता दूसरी तरफ़ से जशोदा लगभग चीखते हुए बोल रही थी, ‘डॉक्टर की दुकान पर गली से बाहर वनकल गया। हू।ं भाबू का बुखार बढ्गया था। नीचेवाली भाभी के साथ यहां ले आई। पैसे इन्से आज सुबह से काम मे्मन नही्लग रहा है। हंसी-मसखरी हमेशा अच्छी लेके पूरे पड गए। तुम वचन्ता नई्करना, भली्। काट रई हू,ं ये डॉक्टर साब का नही्लगती। इतवार की वजह से आज वदन मे्ही रात जैसी भीड है। रंग-वबरंगी फोन है।’ कुछ और पू्छता वक वहां से फोन कट गया। पर यहां वीकेनड् काटे नही् गेद् े्हवा मे्उछालकर नचा रहा है। दो हाथ मे्होती है्तो दो हवा मे।् चाहे तो वबना कट रहा था। एक भी गेद् वगराए घंटो्नचा सकता है पर सुस्ाने के वलए जानके चूक जाता है। जाते-जाते भी बीवसयो् गुलब् ारे फुलवा के रख वलए कल के वलए। फेफ ् डे वफर भौ्दू सी शकल बना कर हो्ठो्मे्दबी लंबी पीपडी बजा देता है। पर पलक थक गए। सांस लेना भी मुबश् कल हो गया। बाहर वनकला तो हवा भी भारी लगने झपकते ही बच््ेगेद् े् उठाकर वफर ले आते है।् बच््ेउसे घेरे खडे है।् वह जहां लगी। कौन जाने हवा मे्धुआं ज्यादा था या फेफडो्मे्ऊब और घुटन। यहां से जाता है वे उसके पीछे आते है।् वे ख़ुश है।् उनके वलए कोई जगह वव्जतष नही्है। वनकल के घर की ओर बढना रोशनी की चकाचौ्ध से भरे टापू से अंधरे े कुएं मे् वे वजस चीज को देखते है्उनकी हो जाती है। उन्हे्वकसी चीज के वलए धाडे मार उतरने जैसा था। वदल्ली और गवज्याबाद के बाॅडरष् पर बसी खोडा कॉलोनी अंधरे े मारकर रोना नही्पडता। सोचा, ‘इन्हे्जोर जोर से रोता भाबू वकसी और दुवनया मे्डूबी धीरे-धीरे ऊंग रही थी। हाइवे से देखने पे लगता था वकसी ने शहर भर का का प््ाणी लगेगा।’ यहां आकर कई बार उसे भी भाबू की र्लाई बहुत धीमी, नेपथ्य कबाड लाके यही् उलट वदया है। गवलयां भीतर जाके संकरी होकर आपस मे् मे् चमक के बुझ जाने वाली वकसी रोशनी की तरह लगती है। पर कभी-कभी उलझकर अंधरे े मे्वबला गई थी्। इन्ही गवलयो्मे्कही्-कही्वखडवकयो्से झांकती आवाजे्सीमाएं लांघकर कानो्मे्घुसी आती है।् वह उन्हे्पीपडी की पुररष् र-पुररष् र हल्की सी रोशनी वटमवटमा रही थी। मे् दबा देता है। उसे नई धुन पर नाचना है। इसवलए हर दुख को झाडपो्छकर उसके कमरे मे्घुसते ही जशोदा ने फुसफुसाकर बताया, ‘भाबू दवा खाके कूडदे ान मे्डाल वदया गया है। यहां वकसी के रोने की आवाज के वलए कोई जगह एकदम से सो गया, पीते ही नी्द आ गई। अंगज ्े ी दवा मे्नशा होता है क्या?’ वफर नही् है। नए रंग की वफरवकवनयां और झंवडयां आई है।् वफरवकवनयो् को लेकर थोडा र्कके बोली, ‘तुम भी नशा वकए हो क्या?’ भागने से वे घूमती है,् झंवडयां लहराती है।् वह पंखे के सामने खडे होकर बच््ो् उससे बोला नही्गया। उसने अपना मुहं उसके पास ले जाकर फाड वदया को उन्हे्घुमाना वसखा रहा है। पंखे कम है,् वफरवकवनयां ज्यादा, पर हर वफरवकनी और जोर की सांस ली। जशोदा ने बक़ायदे मुहं सूघं ा। बास नही्आई। हाथ पकड को बच््ो्के मन मािफ़्क घूमना होगा। उसके वलए उसे फूक ं मारनी होगी। बच््ो् के बैठ गई। वफर हाथ सूघं ।े हाथो्से चॉकलेट की खुशबू आ रही थी। बुदबुदाती की वफरवकवनयां हाथ मे्लेकर दौडना होगा। सोचा, ‘कल भाबू का बुखार उतर हुई बोली, ‘भाबू को चॉकलेट बहुत पसंद है।’ जाने पर उसे कंधे पर वबठाकर ऐसे ही दौडेगा। वह अपने वलए कभी नही्दौडा। उसने थैले से एक वडल्बा वनकालकर जशोदा के हाथ मे्दे वदया। डल्बे मे् वह हमेशा दौडाया गया।’ एक बासी बग्रष था। कई बार रोटी का रोटी होना जर्री नही्होता। दोनो बीच मे् इमरान उसकी तरफ़ दौडा आ रहा है। सामने आते ही फोन देने से पहले ही रखकर रोटी की तरह तोड-तोड के खाने लगे। फोन पर हुई बात बोल दी, ‘तेरा बेटा खो गया है।’ फोन से कई आवाजे्आ रही सुबह भाबू उठा तो आंखे सूजी हुई लग रही थी्। माथा छूके देखा तो बुखार है।् वह उनमे्से जशोदा की आवाज वबलगा रहा है। जशोदा की आवाज गले मे् नही् था। उसे देखके वकलक उठा। कुछ देर तक गोद मे् वलए बैठा रहा। लगा, फंसके भर्ाष गई है, ‘दो वमनट के वलए नीचेवाली भाभी के पास वबठा के दवाई लेने आज न जाए काम पर। वफर पता नही्वकस ताक़त ने खी्च के खडा कर वदया। गई थी। बस इतने मे्पता नही्कहां चला गया। गली से लेके सडक तक, नहर से तैयार होकर वनकलने को हुआ वक भाबू धाडे मार-मार के रोने लगा। पैरो्से वलपट लेके नाले तक। पाक्फसे लेके कूडे के पहाड तक, सब जगह देख वलया, कही्नही् गया। लाड वकया। समझाया। नही्माना। रोना और तेज हो गया। साथ चलूगं ा की वमला।’ वजद पकड ली। समझाते-समझाते जशोदा र्आ ं सी हो गई। हार के बोली ‘हम खोडा की गवलयां सांप के गुचछ ् ो्की तरह आपस मे्वलपट रही है।् वे दो मुहं ी साथ चलते है।् इसे लेकर बाहर बैठी हो गई है।् वे ववर उगल रही है।् भाबू उन रहूगं ी, तुम अपना काम करते रहना। जहरीले सांपो्के बीच वबलख-वबलख के उससे बोला नही् गया। उसने जवाब मे्झुझ ं ला गया, ‘अरे ऐसे बाहर रो रहा है। आज अपने वलए दौडना है। वह नही्बैठने देग् ,े बहुत सफ़ाई रहती है, अपना मुंह उसके पास ले जाकर आज अपने वलए दौड रहा है। वह जोकर फाड़ वदया और ज़ोर की सांस ली। वहां पर।’ के कपडो् मे् ही पुल पर भाग रहा है। जशोदा जैसे छाती से आवाज जशोदा ने बक़ायदे मुंह सूंघा। बास आने-जाने वाले इसे जोकर का करतब नही् आई। हाथ पकड़ के बैठ गई। जुडा के बोली, ‘तो हम सबका कुकरु समझ रहे है।् पुवलसवाला सीटी बजा रहा। है्, सुअरी है्, जो गंदा जाएंगे, नहा वफर हाथ सूंघे। हाथो् से चॉकलेट लोग हंस रहे है।् जोकर जान छोड के दौड की खुशबू आ रही थी। बुदबुदाती धोके चलेग् ।े ’ रहा है। जोकर कही्र्क नही्रहा है। वह ‘अरे स्वीपर लोग के साफ़ करने हुई बोली, ‘भाबू को चॉकलेट बहुत नदी-नाले लांघ रहा है। जोकर भीड मे्खो के बाद, दबाई वछडक के जमीन, पसंद है।’ गया है। टेबल, कुस्ी सब साफ़ होता है, वहां भाबू दो गली पीछे एक दुकान पर पर। दस््ाना पवहन के खाना बनाते है,् बैठा, चॉकलेट खाता वमल गया है। इस बाबच््ी। हम लोग का ये कपडा बेसमेनट् मे्उतरवा वलया जाता है। हम भी बद््ी के बात को दो वदन हो गए है।् जशोदा और भाबू रेसट् ोरेट् मे् घुसने की कोवशश मे् वबना नही्जा सकते वहां, समझी्।’ हलकान हो रहे है।् उन्हे्भीतर नही्जाने वदया जा रहा है। भीतर एक नया जोकर जशोदा का गुसस ् ा कुछ कम हुआ, ‘बाप रे! एक जोकर की हंसी-मसखरी है जो बच््ो्को नए करतब वदखा रहा है। बच््ेख़ुश है।् इमरान जशोदा को समझा की ऐसी कवठन नौकरी? ऐसे मे्कौन हंसे और कौन हंसाए? रहने दे भाबू, हम रहा है। पर जशोदा यह मानने को तैयार नही्है वक वह वकसी गाडी से कुचल कर यही्रहेग् ।े जाने दे बाबा को।’ मर गया है। उसे वकसी रेसट् ोरेट् मे्नही्बब्लक वकसी सरकारी अस्पताल के शवगृह ‘रोओ मत चॉकलेट लाऊंगा’ कहते हुए भाबू को वबना देखे बाहर वनकल मे्ढूढं ा जा सकता है। पर जशोदा को ववश््ास है वह नही्मर सकता। जोकर नही्मर सकता। गया। भाबू पीछे-पीछे चला आया। खीज उठा, ‘पकडो इसे, ऐसे गली मे्मत छोडा शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 49
सािहतंय/ िकिाब
देिदार् जैसे लोग
शेिर जोशी कब कुमबऊं अंचल के जनजीवन, प्क ् कृ त और लोक परपंरबओ्, आचबर-कवचबर से गहरब लगबव सबफ कदिबई देतब है। संजर कुंदन
वलखकर भी क्या होगा, दस बारह वकलास पास लड्के भी आकर मेरे साथ पत्थर तोड्ते है्।’ अनेक अध्यायो् मे् लेखक ने उत््राखंड की लोक परंपराओ् और न वदनो्वहं दी मे्कथेतर गद््(चाहे्तो इसे अनौपचावरक गद््कहे)् खूब रीवत-वरवाजो् पर प््काश डाला है। एक अध्याय मे् तो उन्हो्ने वववाह की पूरी वलखा जा रहा है। हाल मे्कई महत्वपूणष्आत्मकथाएं आई्, संसम् रणो्की रस्म का ववस््ार से वचत्् खी्च वदया है और उस अवसर पर गाए जीने वाले वकताबे्छपी्। यात््ा वृत्ातं भी आए। अनेक ववरष््सावहत्यकार इस तरह के लेखन गीत मूल कुमाऊंनी और वहंदी मे्भी वदए है्। एक अध्याय लोकोब्कतयो्पर है। की ओर मुड्े है्। इसमे् जो अनौपचावरकता है, आत्मीयता है, ववरयो् का जो उन्हो्ने कुमाऊं क््ेत्मे्प््चवलत प््मुख लोकोब्कतयो्की चच्ाष की है और उनका वैववध्य है और खुलकर वलखने की जो स्वतंत्ता है, वह इसे एक अलग ही उत्स तलाशने की कोवशश की है। वदलचस्प है वक वहंदी की तमाम लोकोब्कतयां आस्वाद से भर देती है। और सच कहे्तो वहंदी कथा सावहत्य की र्ढ्होती भारा ही थोड्ेअलग र्प मे्कुमाऊं मे्प््चवलत है्। वे नदी-नालो्, पव््कयो्, फलो्का और ववरयगत जड्ता के बीच यह लेखन पाठको्को राहत दे रहा है। इस संदभ्ष उसी तरह स्नेहपूव्षक वचत््ण करते है्वजस तरह मनुष्य का। जावहर है, पहाड् मे् प््ख्यात कथाकार शेखर जोशी की मे् ये सब एक-दूसरे से अवभन्न है्। पुसक ् ‘एक पेड्की याद’ उल्लख े नीय इसका पता वहां की लोकोब्कतयो्से भी है। यह उनकी एक पुरानी पुस्क का चलता है। पवरवव्धषत र्प है। इसमे् कुछ पुराने ‘मै्ने देखा वगरदा का जादू’ मे् वे अध्याय हटा वदए गए है् और नए लोकगायक और कवव वगरीश वतवाड्ी शावमल वकए गए है्। यह शल्दवचत््ो्, उफ्फवगरदा से जुड्ेप्स ् गं ो्की चच्ाष करते संसम् रणात्मक वटप्पवणयो्और वरपोत्ाज ष है्। इस क््म मे्वगरदा की कुछ कववताएं का संग्ह है, वजनमे् पहाड्ी जीवन के और गीत पढ्ना वाकई एक रोचक भौगोवलक और सामावजक पवरवेश की अनुभव है। इस अध्याय मे् एक लोक एक झलक वमलती है। कवव की दृढत् ा और प्व्तबद्त् ा उभरकर शेखर जोशी का कुमाऊं अंचल के आती है। उनके बारे मे् कई सारी जनजीवन, प््कृवत और लोक जानकावरयां वमलती है्। परपंराओ्, आचार-ववचार से गहरा मकर संक्ावं त के मौके पर पकवानो् लगाव साफ वदखाई देता है, हालांवक की घुघुती माला बनाने की रोचक चच्ाष वह नॉस्टैब्लजया की तरह यहां नही् है। शेखरजी इस परंपरा की जड् की आया है। ‘एकाकी देवदार्’ मे् वे उस खोज मे् इवतहास मे् उतरते है्। उन्हे् एक पेडंकी याि : शेखर जोशी देवदार् को याद करते है् वजसके साये लगता है घुघुती के इस गीत मे् कही् न सादहतंय भंडार, 50 चाहचंि, इलाहाबाि-211003 मूलंय: 225 रंपये मे् एक पाठशाला चला करती थी, कही् मनुष्य मात्् को उसको अवधकार वजसमे् लेखक ने प््ारंवभक ज््ान प््ाप्त वदलाने और अन्याय से मुब्कत की वकया। वह लेखक के वलए महज एक पेड् नही् था, एक वमत््, अवभभावक, आकांक्ा वनवहत है: माग्षदश्षक या और भी बहुत कुछ था। उस देवदार्से ही बच््ो्की वदनचय्ाष तय कौव्वा! का ले ! का ले। होती थी। उस पर सूय्ष की रोशनी की अलग-अलग ब्सथवतयो् से समय का ले कौवा घुघुती अंदाजा वमलता था। वह लेखक की चेतना का वहस्सा था। लेवकन बहुत वदनो्के सबन के्दे बेगार है मुब्कत। बाद जब लेखक अपने गांव पहुंचता है, तो उस देवदार्को नही्पाता। इस तरह (ले कौव्वा घुघुती, सब को दे बेगार से मुब्कत ) एक पेड् का कटना स्मृवत का खत्म होना है। एक ववशेर जीवन-प््णाली और इस गीत को उद््ृत करने के बाद लेखक वलखता है: ‘हां, आज भी तो वह बोध का खत्म होना है। बेगार खत्म नही् हुई है, केवल उसका स्वर्प बदला है।’ वकताब के अंत मे् लेखक की आम आदमी के संघर्षमे्गहरी आस्था शल्दवचत््ो्मे्खासतौर पहाड्ी जीवन पर वलखे गए नवीन जोशी के उपन्यास ‘दावानल’ पर एक से वदखती है। लेखक ने ऐसे साधारण पात््ो्को चुना है जो ववपरीत पवरब्सथवतयो् वटप्पणी है। इसमे्उपन्यास ववधा पर शेखर जोशी के ववचारो्का भी पता चलता मे्भी धैयष्नही्खोते। दुख-तकलीफ सहते-सहते उनमे्एक अजीब सी तटस्थता है। कुमाऊं के जीवन के वचत्् खी्चते हुए जोशी जी वहां आ रहे बदलाव को आ गई है। नए अध्यायो्मे्एक ‘गोपुलीबुबु’ मे्एक गरीब लड्की की माव्मषक वचब्हनत करना नही् भूलते। वे लगातार संकेत करते चलते है् वक लोग अपने कथा है। बचपन मे्ही उसकी शादी करा दी जाती है, जब वह शादी के मायने रीवत-वरवाजो् को भूल रहे है्। बढ्ते शहरीकरण ने वहां की सामूवहकता नि्् भी नही्जानती। उसे बहुत वदन बाद पता चलता है वक उसका ल्याह एक पागल की है। लेवकन वह उस बदलाव को लेकर हाय-हाय नही् करते, छाती नही् से करा वदया गया है। उस बेचारी के तीन बच््ेहुए। लड्की चेचक से मर गई। पीटते। वे इसे एक अवनवाय्ष प््व्कया के र्प मे् देखते है्। वे कहते है्- ‘और बड्ा बेटा गंजेव्डयो्की संगत मे्पड्गया। दूसरा मजदूरी करता है। गोपुलीबुबु भी बहुत कुछ बदल गया है-पारंपवरक वाद््ो्का स्थान बै्ड पाव्टियो्ने ले वलया जैसी न जाने वकतनी लड्वकयां कुमाऊं मे् हो्गी। लेखक ने इस शल्दवचत्् के है, वसंगल, आलू के गुटके और हलवा का स्थान छोले-भटूरे और जलेबी ने ले जवरए राज्य की सामावजक-आव्थषक ववकास पर भी वटप्पणी की है। गोपुलीबुबु वलया है, गहनो् का र्पाकार पवरवव्तषत हो गया है। बदलना ही था! पवरवत्षन n के शल्दो्मे्, ‘ये छुटका हरीश सड्क पर पत्थर तोड्ने जाता है। कहता है- पढ्- ही जीवन का वनयम है।’
इ
50 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
सािहतंय/कदविा राजेश जोशी
जाने-माने कवव और गद््कार। प््मुख संग्ह : ‘ एक िदन बोले्गे पेड्’, ‘िमट््ी का चेहरा’, ‘दो पंब्कतयो्के बीच’,‘चांद की वत्षनी’ और ‘िकस्सा कोताह’
शहर भीिर शहर शहर भीिर जो एक शहर था वह शहर कहींगायब हो गया है। अब यहां सारी िूर वही शहर पसरा हुआ है दजसने एक दिन दसफंफअपनी गरिन छुपाने की जगह मांगी थी। उस शहर के गायब हो जाने के बाि भी इस शहर के माथे पर, कोई दशकन िक नहीं। गायब होिे होिे भी वह शहर अपने पांव के दनशान यहां वहां छोड गया है। इन दनशानोंके सहारे सहारे कभी-कभी हम जो उस खो गये शहर को एक असंंेसे जानिे थे , कहो दक शायि हम िो उसी को जानिे थे , अब अपनी संमृदियोंमेंकभी-कभी उसे ढूंढ लेिे हैंं। शायि हम उसी को ढूंढंिे रहिे हैंबरसोंसे हालांदक संमृदियोंमेंभी अब वह एक धुंधली िसंवीर भर ही बचा है। हम जो उसके चपंपे-चपंपे से वादकफ थे हर गली हर मोड को जानिे थे कभी भी कहींभी मुड जािे थे और जानिे थे दक दक हम वहींदनकल जायेंगे जहां हमेंजाना है
और रासंंा समझ ही नहींआिा कुछ िूर जािे हुए कुछ लोग दिखिे हैं दजनको हम अचंछी िरह जानिे हैं लेदकन अचानक आंख के आगे धुंध सी छा जािी है और वंो लोग जो अभी नजर आये थे गायब हो जािे हैं पास पहुंचने पर जो लोग दमलिे हैं उनके चेहरे मेंसे हमारे पहचान के चेहरे गायब हो गये हैं। हदथया टोल का वह दवशाल पतंथर दजसे बरसाि मेंखिरे का दनशान समझा जािा था अब भी िालाब के दकनारे रखा है दनरीह सा अब वहां िक पानी आ जाने पर भी शहर मेंकोई हलचल नहींहोिी। शहर खिरे के दनशान से ऊपर दनकल गया है !
सराय कायनाि का भदियारा इस सराय कायनाि में पूरब नाम का भदियारा मेरा अचंछा िोसंंहै
पिा नहींकंयोंलेदकन हर रोज ही शाम के बाि वह काली पोशाक पहन लेिा है जो मुझे दसरे से नापसंि है बंंहंम मुहूिंटमेंसुबह की चाय से भी पहले एक नवजाि बचंंेसा मुलायम सुरंटसूरज अपनी िशंिरी मेंसजाये हर रोज वह मेरे पास लािा है। मैंउस छोटेे से सूरज को बहुि होले से उिािा हूं और एक आलदपन से उसकी काली कमीज की पीि पर लगा िेिा हूं चकाचौंध मेंबिल जािे हैंसारे रंग और उसी एक पल में पूरब नाम का भदियारा कहींअिृशंय हो जािा है !
दमदमयाना
पहले एक बकरी के दमदमयाने की आवाज़ थी दफर एक रेवड कहींसे अचानक आ गया और सैंकडोंबकदरयां दमदमयाने लगीं मैंघाटी के बीच था यहां कुछ भी बोलो पंंदिधंवदनि होिा था पंंदिधंवदनि होकर दमदमयाना कई गुना हो गया लगा हमारा पूरा समय जैसे दमदमया रहा है !
अब अचानक दकसी गली मेंमुडिे हैं
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सािहतंय
नवधाओ़मे़तोड़फोड़
दंंपयिशंटन
लेखक कवि-कथाकार और पत््कार है
सोशल मीिडयब और ब्लबॅग बगैरह की मबफ्तफ आने वबलब लोकक््पय सबिहत्य कहबनी की धबरब को मोड रहब है और िब्क ् ी के कीक्तम ा बन भी थ्थबिपत कर रहब है।
लपंंेक का मुखपृषंऔर रवीश कुमार : िबंंकी का िरकाॅडंट
इ
न वदनो्वहं दी मे्लप्क ्े की धूम है। रवीश कुमार की वकताब ‘इश्क मे्शहर होना’ इस साल राजकमल प्क ् ाशन की सबसे ज्यादा वबकने वाली वकताब है। राजकमल प्क ् ाशन के संपादकीय वनदेशक सत्यानंद वनर्पम ने हाल ही मे् सोशल मीवडया पर यह जानकारी की इस वकताब की आठ हज्ार प्व्तयां वबक चुकी है।् रवीश एक संवदे नशील पत्क ् ार है्और दृशय् ो्को अपने ढंग से देखने, वृत्ातं ो्को अपने ढंग से रचने का कौशल उन्हे्आता है। उनकी कहावनयां वदल्ली की अपनी धुकधुकी बनाती है।् लप्क ्े उफ़फ् लघु प्म्े कथा की इस श्ख ं ला को राजकमल अपने उपक्म् ‘साथ्क ष ’ की माफ़फत् और आगे बढ्ा रहा है और उसने ववनीत कुमार और वगरी्द्नाथ झा की वकताबो्की घोरणा भी कर दी है। सोशल मीवडया पर ये दोनो् लेखक अपनी संवदे नशील लघु-कथा भारा के वलए जाने जाते है।् हालांवक वहंदी के कई पारंपवरक कथाकार इस बात से कुछ मायूस है् वक लप्क ्े ने लघुकथा आंदोलन की उनकी ववरासत को हड्प वलया है। वे याद वदला रहे है्वक एक दौर मे्उन्हो्ने लघुकथा आंदोलन को वबल्कल ु राष््ीय र्प वदया, लगातार उसके सम्मल े न वकए, उनकी वजह से सावहब्तयक पव््तकाओ्ने लघुकथा ववशेरांक वनकाले, लेवकन अचानक यह लप्क ्े आकर ऐवतहावसक होने का संवदग्ध और गलत दावा कर रहा है। मगर लघुकथा आंदोलन और इस लप्क ्े धारा का एक बड्ा फक्फयह है वक जहां लघु कथा आंदोलन सावहत्य की मुखय् धारा से जैसे जुड्ा रहा और उसकी मान्यता चाहता रहा, वही् यह लप््ेक कथा के पुराने अनुशासन से, सावहत्य की पुरानी भारा से लगभग वन््द्वद् ढंग से मुक्त है, इसे सावहत्य की मुखय् धारा की मान्यता पाने की वफक्् नही् है। लघुकथा आंदोलन वहंदी के पारंपवरक मध्यवग््ीय समाज के भीतर, गांव-देहात की कशमकश मे् अपनी कहावनयां खोजता था, जबवक लप्क ्े मूलतः महानगरीय अवभव्यब्कत है52 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
मेि्ो और बसो मे् दौड्त-े भागते जीवन के बीच वफसलते वबंबो् को पकड्ने की कोवशश। बेशक, इसमे्पुराने शहरो्की यादे्भी शावमल है्और जड्ो्से उखड्ने की कसक भी। लेवकन अंततः यह मेि्ो मे्बन रही नई चेतना की, इक््ीसवी्सदी के सोशल मीवडया से ववकवसत संवदे न संसार की कथा है वजसे छापने वालो्को इसके वटकाऊ से ज्य् ादा वबकाऊ होने की परवाह है- इसमे्शक नही्वक वह वबक रही है और हो सकता है, उसमे्कुछ वटक भी जाए। बहरहाल, मुद्ा लप्क ्े नही्है, बब्लक सोशल और नए मीवडया के ववस््ार के बाद, उसके दबाव मे्सावहत्य की ववधाओ्पर पड्रहा उसका असर है। कुछ साल पहले जयपुर के वलटफेसट् मे्‘कहानी 140’ के नाम से बाकायदा एक प्व्तयोवगता हुई थी वजसमे्कई युवा रचनाकारो्ने वहस्सा वलया था। प्भ् ात रंजन और सत्यानंद वनर्पम ने अपनी कई कहावनयां वहां रखी्। यह दबाव वसफ्फवहंदी मे्नही्, दूसरी भाराओ्मे्भी महसूस वकया जा रहा है। बाकायदा एक ब्टवटर हैव्डल टेलस ् ऑन ट्वीट के नाम से मौजूद है वजसे एक भारतीय मनोज पांडये ही चलाते है।् हाल मे् ‘द गाव्डयि न’ ने व््बवटश लेखको्को ब्टवटर वफक्शन वलखने का न्योता वदया। वहंदी मे्ब्टवटर-कहानी वलखने की चुनौती भले वकसी बड्ेलेखक ने नही्उठाई, लेवकन अंगज ्े ्ी मे्सलमान र्शद् ी तक ने इस ववधा मे्हाथ आजमाया। उनके इस ट्वीटवफक्शन पर भी उनकी अपनी छाप वदखाई पड्ती है- ‘वह मर गई। उसने उसका अंडरवल्डष्तक पीछा वकया। उसने हदीस को तरजीह दी, लौटने से इनकार कर वदया। वठकाने लगाए जाने से पहले लंबा सफ़्र तय वकया जाना था। टेलस ् ऑन ट्वीट पर जीत तायल की एक कहानी पड्ी हुई है- ‘तो इस तरह ये ख़्तम् होता है। तुम चांदनी रात मे्चीनी ढोलो्की आवाज्पर जागते होः तुमह् ारी आवाज्उसका नाम ले रही है, आह, कांग शा।‘ हालांवक पारंपवरक नज्वरए से देखे् तो इनको मुकब्ममल कहावनयो् का या
सावहत्य का नाम देना मुबश् कल है। ये बस प्व्तव््कयाएं या मन मे्उमड्ने वाली छायाएं है्वजनमे्एक तरह का लेखकीय कौशल ज्र्र झांकता है, मगर वह समग्त् ा नही्जो वकसी रचना को सावहत्य मे्बदलती है। बेशक, वकसी बहुत समथ्षलेखक मे्शायद इस ववधा के इस्म्े ाल का फन भी हो, और तब इसकी संभावनाएं ठीक से खुल,े् लेवकन इसमे्संदहे नही्वक सावहत्य की दुवनया इसके असर मे्बदल रही है।् वहंदी मे्चलने वाली बहसो्पर भी इसकी छाया है। कुछ अरसा पहले लखनऊ मे्हुए ‘कथाक्म् ’ के आयोजन के एक सत््मे् वदया गया ववरष््लेवखका नावसरा शम्ाष का एक वक्तव्य सोशल मीवडया के भीतर चच्ाष का ववरय बना रहा। इस आयोजन मे् सोशल मीवडया पर बात करते हुए नावसरा शम्ाष ने बड्ी सख्ती से कहा वक वे नई तकनीक के दबाव मे् ख़्दु को नही्बदलेग् ी। उनके वाक्य थे- 'नई दुवनया का ख़ौफ़ वदखाकर हमे्मत डराइए। आज भी वहंदी मे् एक लेखको्की ऐसी पीढी है जो क़लम से क़ाग़ज पर वलखती है, सम्मान से छपती है और उसके अपने पाठक है,् ये नए नख़वलस््ान आपको मुबारक। हमे् वहां जाने की जर्रत नही्, अगर आपका वदल करे तो बता देना अपनी उस दुवनया को वक हम वकस कव््बस््ान मे्गडे है'। जावहर है, सोशल मीवडया पर वदख रहा और उसके असर मे्बदल रहा सावहत्य पारंपवरक ढंग से हो रहे लेखन के सामने एक दुववधा, एक द््ंद् की ब्सथवत तो प््स्ुत कर रहा है। हालांवक इस द््ंद् को ठीक से समझने के वलए इसके सरलीकरणो्के पार जाकर यह समझना होगा वक दोनो् मे् नया क्या है, पुराना वकतना है, वकतना उपयोगी, बेमानी या वफर महान है। इस वलहाज से अगर ववचार करे्तो हम पाते है् वक दरअसल वजसे हम सावहत्य की दो दुवनयाओ् की तरह देखने की कोवशश कर रहे है,् वे एक-दूसरे से कटी या एक-दूसरे के ववर्द्खड्ी दुवनयाएं नही् है।् सावहत्य की वह पहली दुवनया- जो पत्-् पव््तकाओ् और पुसक ् ो्के पारंपवरक संसार से वनकली है- कई
अनु िसंह चौधरी आैर उनका कहानी संगंह : अिगंंम बुिकंग
बार बेहद आधुवनक, क््ावं तकारी और अंतद्वषृ ्ि से भरी वमलती है- बब्लक वह परंपरा से हावसल ज््ान से कही् ज्य् ादा समृद््है और अक्सर सोशल मीवडया पर वलख रहे युवा रचनाकार उसे उत्साह से उद्त्ृ करते या उसी तज्षपर कुछ और वलखने की कोवशश करते पाए जाते है्। सावहत्य की वह परंपरा इस वलहाज से इस नई परंपरा के वलए भी मशाल का काम कर रही है। इसी तरह सोशल मीवडया पर एक तकनीक-समृद्पीढ्ी जो कुछ वलख रही है, वह ज्रर् ी नही्वक हमेशा नया और अद्त् न हो, उसमे्पुराने की छाया ही नही्, कई बार कठमुलल ् पे न का भी समथ्नष ख़्बू वमलता है। बेशक पत््-पव््तकाओ् की दुवनया और सोशल मीवडया के संसार मे् एक बुवनयादी लगता फक्फ है। पत्-् पव््तकाओ्मे्एक संपादक होता है वजसके पास अच्छ-े बुरे के बीच चयन का ववशेरावधकार होता है। उसमे् यह संभावना होती है वक ख़्राब लेखन छांट वदया जाएगा और अच्छी रचनाएं सामने आएंगी। दूसरी तरफ़् सोशल मीवडया अगाध वनजी लोकतांव्तकता का माध्यम है। हर कोई अपनी बेवझझक अपनी असंपावदत रचना लगा सकता है और अपनी छोटी सी वमत््मंडली मे् खुश रह सकता है। इस सुववधा ने जहां कई नई और संभावनाशील कलमो् से हमारा पवरचय कराया है, वही् बहुत बड्े पैमाने पर सोशल मीवडया पर ऐसे सावहत्य को प््वतव््षत वकया है जो मूलतः कचरा है, पुराने की नकल है या उसका पुनर्तप् ाद है। लेवकन क्या पत्-् पव््तकाओ्की जो सुववचावरतसुसपं ावदत दुवनया है, वह ऐसे बेमानी सावहत्य को कुछ कम प्व्तष््ा देती है? वहंदी की औसत पव््तकाओ्को पढ्कर वनराशा होती है। लगभग हर जगह बड्ेपैमाने पर मामूली वकस्म की रचनाएं बहुत आत्मववश््ास के साथ छापी जाती है् और उन्हे् सावहत्य मे् भी बड्ा सावबत करने के आलोचकीय उद्म् वदखाई पड्ते है।् यह पत््-पव््तकाओ् का ही नही्, वकताबो् का भी मामला है। अगर आप बेशम््ी से अपनी समीक््ा वलखवा सकने वाले और संपादको् पर रोज्-रोज्
आग्ह् का दबाव बना कर छपवा सकने वाले लेखक है्तो आपकी वकताब चच्ाष मे्आ सकती है, लेवकन अगर आप संकोच कर जाते है,् अगर आप यह चाहते है् वक संपादक अपने वववेक से आपकी वकताब चुनकर आलोचक के पास भेजे तो आप एक बड्ी भूल करते है।् इस बात की संभावना नही्के बराबर है वक सावहत्य के मठाधीश आपकी चच्ाष करे।् कुल वमलाकर वदखता यही है वक परंपरा से जो लेखन चला आया है, वह अपने अच्छे और बुरे दोनो् र्पो्मे्सोशल मीवडया पर मौजूद है। वफर भी कुछ फ़्कफ्है्वजन्हे्रेखांवकत वकया जाना ज्रर् ी है। पत्-् पव््तकाओ्और वकताबो्की दुवनया अपने सारे वनजी पूवगष् ह् ो्के बावजूद अंततः एक सांसथ् ावनक दुवनया है। स्वाभाववक तौर पर इस दुवनया के अपने आग्ह् ो्दुराग्ह् ो्, अपने प्च् लनो्का कही्ज्य् ादा असर लेखन पर पड्ता है। दूसरी तरफ सोशल मीवडया की दुवनया वबल्कल ु वनजी प्य् त्नो्की दुवनया है- लेखन वहां कही् ज्य् ादा स्वच्छदं , ववधाओ्के अनुशासन से मुकत् और इसवलए नई ववधाएं गढ्सकने मे्सक्म् वदखता है। लप्क ्े इसी अनगढ्ता की पैदाइश है। लेवकन वह अनगढ्है, इसवलए कमतर नही्है। बब्लक वह बदलती हुई संवदे ना को शायद दूसरी ठहरी हुई ववधाओ् के मुक़्ाबले बेहतर ढंग से पकड्रहा है। फेसबुक और ब्टवटर पर और भी बहुत सारे लेखक है्जो ऐसी नई ववधाएं गढ्रहे है।् प्म् ोद वसंह का लेखन इस वलहाज से वववशि््और उल्लख े नीय है। जो गद््वह वलख रहे है्वह वनतांत पठनीय है और वकन्ही्ववधाओ् की पवरभारा मे् नही् आता। सच यह है वक सोशल मीवडया के संसार मे् वे शायद सबसे समृद् तोड्फोड्कार है।् इस तोड्फोड्के बीच आई उनकी वकताब ‘अजाने मेलो्मे’् कही्चव्चतष नही्हुई, लेवकन वह वहंदी की एक महत्व् पूणष्वकताब है। इसी सोशल मीवडया पर अवजत वाडनेरकर शल्दो् के सफ़्र पर वनकले और उन्हो्ने शल्दो्की ऐसी चीरफाड की वक हम अपनी भाराओ् को वफर से समझ पाए। प्त्य् क््ा या मनीरा पांडये जैसी लेवखकाएं मूलतः इसी सोशल
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सािहतंय सोशल मीिडया मेंसरंंिय अनु रसंह चौधरी के कहानी संगहं ‘नीला संकार्’ं की करीब 1500 पंरंतयां रहंदी युगमं पंक ं ाशन की नेर-माकंरंेरंग और लेरखका की अपनी नेर-पहचान के साझा संयोग से छपने से पहले ही रबक गईं। पांच-सात सौ रकताबें बेचने वाले रहंदी के पंक ं ाशन संसार के रलए यह खंबर थी।
(उपर से नीचे) पंंतंयकंंा और बाबुिा कोहली: सोशल मीिडया का सहारा
मीवडया की संताने्है जो अपना एक पाठक वग्षबना रही है।् प्त्य् क््ा के तो अब तीन कहानी संगह् आ चुके है।् दरअसल सोशल मीवडया और पारंपवरक कथा संसार के बीच एक अटूट वरश्ता भी है। हालांवक पारंपवरक लेखक शायद सोशल मीवडया की तरफ से आ रहे लेखन को कुछ अनुदार होकर देखते है-् जैसे वह लोकव््पय या बाज्ार् हो। वपछले वदनो् मूलतः सोशल मीवडया मे्सव््कय अनु वसंह चौधरी के कहानी
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संगह् ‘नीला स्काफ़फ’् की करीब 1500 प्व्तयां वहंदी युग्म प््काशन की नेट-माक््ेवटंग और लेवखका की अपनी नेट-पहचान के साझा संयोग से छपने से पहले ही वबक गई्। कायदे से पांच सौ और सात सौ वकताबे् बेचने वाले वहंदी के प्क ् ाशन संसार के वलए यह ख़्बर थी। लेवकन वकसी ने इसका नोवटस नही् वलया। 2015 के शुर्की तमाम पव््तकाओ्मे्बीते साल के सावहत्य का जायज्ा लेते हुए जो लेख छपे, उनमे्भी
इस संगह् का कही्व्जक््नही्आया। शायद अब तक सावहब्तयक पव््तका मे्इसकी समीक््ा भी नही्आई है। जावहर है, सबने मान वलया वक यह एक लोकव््पययानी चलताऊ-वकस्म का कहानी संगह् होगा। जबवक सच यह है वक अनु वसंह के संगह् की लगभग सारी कहावनयां 2014 मे्वहंदी की पव््तकाओ्मे्छपी 90 फ़्ीसदी कहावनयो्से बेहतर और सुगवठत है।् उनका एक सामावजक संदभ्षभी है वजसमे्नए-पुराने दौर का मेल वदखता है। शायद इसवलए इन कहावनयो् ने अपना एक नया पाठक वग्षभी बनाया है। यहां आकर यह बात वदखती है वक अपने समय की धुकधुकी को, ख़्ासकर इक््ीसवी् सदी के मध्यवग््ीय और नागर युवा मानस को-सोशल मीवडया पर नज्र आ रही अवभव्यब्कतयां कही्ज्य् ादा ईमानदारी, सघनता और संवेदनशीलता के साथ पकड्ती है।् ये अपने समय की लड्वकयो् के प्व्त, उनकी लैव्गक बराबरी के प्व्त बेहद संवदे नशील है् और न्याय और मानवावधकार के तकाज्ो्के प्व्त भी। बेशक, हावशए पर पड्े समाजो् को लेकर-अपनी दवलत और आवदवासी वबरादरी को लेकर उन्हे्काफी कुछ समझना बाकी है, लेवकन अगर ध्यान से देखे् तो आंघ्और तेलगं ाना की फ़्ज्ी मुठभेडो्का मामला हो, हावशमपुरा के इंसाफ़्का सवाल हो या बदायूं मे् मार कर पेड्से लटका दी गई दो बहनो्का मामला हो- सोशल मीवडया संचार और संवाद के अपने दूसरे सहोदरो् और अग््जो् से कही् ज््यादा स्पंवदत और संघर्श ष ील नज्र आता है। बेशक, इन दो दुवनयाओ्के बीच कई पुल भी है् और बन भी रहे है।् मूलतः ल्लॉवगंग और फेसबुक के ज्वरए पहचान बनाने वाली युवा कववयत््ी बाबुरा कोहली को भारतीय ज््ानपीठ जैसे संसथ् ान ने कववता के वलए युवा ज््ानपीठ पुरस्कार देकर इसी की पुव्ि की है। दरअसल वफर दुहराने की ज्रर् त है वक सावहत्य पारंपवरक असर मे् वलखा जाए, या सोशल मीवडया के दबाव मे,् वटकेगा तभी जब उसमे्अपनी तरह की संवदे नशीलता और संपर्े णीयता होगी। रचना के आकार-प्क ् ार से उसकी हैवसयत तय नही्होगी। बीते वदनो्‘टाइम्स ऑफ इंवडया’ मे्ब्टवटर कहावनयो् के बहाने एक लेख छपा वजसमे्दुवनया की सबसे छोटी कथा का व्जक््है। बताया गया वक वसफ्फछह शल्दो्की यह कहानी शायद अन्स्े ट् े हेवमंगव् े ने वलखी है। कहानी बस इतनी सी है- फॉर सेल। बेबी शूज। नेवर वोन्।ष (वबकाऊ है्बच््ेके जूत।े वबल्कल ु अछूते िकसी)। वजस सावहत्य मे्संवदे ना की यह तीव्त् ा और सघनता होगी, वह बचा रहेगा बाकी समय के साथ छूटता चला n जाएगा।
सािहतंय/ संमरण
पंंदिरोध के पुरोधा
न्यरुं र ग््बस और एदुआद््ो गबलेआनो हमबरे भीषण समय मे्िववेक और प्क्तरोध की िवश्स ् नीय आवबज थे। उनके लेिन के जबदू ने समबज पर गहरब असर डबलब है।
तशवपुस ु ाद जोशी
है, लेवकन ये सुनना इतना आसान नही्है। एदुआद््ो गालेआनो बीसवी् और इक््ीसवी् सदी मे् अब तक- पूंजीवाद, नवसाम््ाज्यवाद और दमनकारी वनरंकश ु सत््ाओ्के व्ख़लाफ़्बोलने वाली सबसे प्ख ् र आवाज्ो्मे्अग्ण ् ी थे। एक तरह से देखा जाए तो दुवनया भर के साव्ज ष वनक बुव्दजीववयो्मे्वो नॉम चॉस्की के साथ शीर्षपर थे और उन प्व्तरोध आंदोलनो् के वलए ऑक्सीजन का काम करते रहे थे जो अमेवरका से लेकर व्फ़लस््ीन और भारत के उत्पीव्डत इलाक़्ो्तक फैले हुए है।् प्ख् य् ात लेवखका अर्धं वत रॉय ने भी उनके जीवन और रचना से प्र्े णा हावसल की है्और गालेआनो के साथ उन्हो्ने अंतरराष््ीय प्व्तरोध मंचो्, आंदोलनो्मे्वशरकत की है। जैसे ‘द वटन ड्म् ’ ग््ास की एक महान रचना है, वैसे ही लावतन अमेवरकी इवतहास की वृहद छानबीन के जीवंत ल्यौरो् वाली वकताब- ‘ओपन वेस ् ऑफ़् लैवटन अमेवरका”- गालेआनो ं की एक अद्त् रचना है। 1971 मे्आई यह वकताब अपने समय की बेस्टसेलर वकताबो् की सूची मे् अव्वल रह चुकी है। लावतन अमेवरकी समाज की यातनाओ् और संघर््ो् का दस््ावेजी वृतांत पेश करती इस वकताब मे् आप लगता है इवतहास नही् पढ् रहे है् बब्लक कोई एक बहुत लंबी व्फ़ल्म देख रहे है।् ये वकताब उस दमनकारी और कपट भरी ऐवतहावसक यात््ाओ् का मक़्सद भी बताती है जो यूरोप के व्यवसाइयो् और चच््ो् और महलो् के प्व्तवनवधयो् ने संसाधनो् की लूट और लालच मे्इस महाद््ीप पर की थी्। सवदयो् की लूट से ज्ख्मी लावतन अमेवरका की खुली नसे् दुवनया को वदखाने का साहस करने वाले गालेआनो ही हो सकते थे। गालेआनो ने आधा सदी के अपने रचनाकाल मे्दज्नष भर वकताबे्वलखी्। इनमे्से कई वकताबे्दुवनया की 20 से गंयुंटर गंंास ज््यादा भाराओ्मे्अनूवदत हो चुकी है्। 1960 के दशक मे् लावतन अमेवरका के एक बड्े राजनैवतक और सांस्कृवतक साप्तावहक ‘माच्ाष” के संपादक के र्प मे्उन्हो्ने काम वकया। 1973 मे्सैन्य बगावत के बाद वो अज््ेटीना चले गए। वहां भी उनका दुस्साहसी लेखन जारी रहा और जब अज््ेटीना की सैन्य हुकूमत ने वामपंवथयो् के व्ख़लाफ़् दमनचक्् छेड्वदया तो गालेआनो को भागकर स्पेन मे्शरण लेनी पड्ी। गालेआनो खुद को स्मृवत का लेखक कहते थे। उनका कहना था वक स्मृवत की वहफ़्ाज्त उनका बुवनयादी नागवरक फ़्ज्ष है। अपने समाज और संसक ् वृ त के व्याख्याता और वचंतक तो वे थे ही, वे लावतन अमेवरकी वजजीववरा के भी झंडाबरदार थे और इसी वजजीववरा का एक प््माण है लावतन अमेवरका मे्सबसे पसंदीदा खेल- फुटबॉल वजसके अन्यतम दीवाने गालेआनो भी थे। ‘फुटबाल इन सन एंड शैडो” नाम की अपनी एक वकताब ने गालेआनो ने लावतन अमेवरकी फुटबॉल इवतहास की माव्मषक दास््ान वलखी है। खेल के प््वत उनकी वनष््ा, ज््ान और अटूट प््ेम को देखते हुए उन्हे् फुटबॉल लेखन का पेले भी कहा जाता था। 2013 मे् उनकी आवखरी वकताब आई थी ‘वचल्ड्न ऑफ़्द डेज्।’ उन्हो्ने वलखा वक वकस तरह सत््ा और संपव््त तेज्ी से चुवनंदा लोगो्के हाथो्मे्वसकुड्ती जा रही है। इसके वलए उन्हो्ने 15वी् सदी से लेकर वत्षमान दौर तक की वमसाले् पेश की्। गालेआनो के मुतावबक, ‘इवतहास कभी अलववदा नही्कहता है, इवतहास कहता n है, वफर वमले्गे।”
इ
स साल एक ही वदन यानी 13 अप्ल ्ै को कुछ घंटो्के अंतराल पर पर दो बड्ेसाव्ज ष वनक बुव्दजीववयो्ने दुवनया को अलववदा कहा। जम्नष लेखक ग्यटुं र ग््ास और उर्गव् े के लेखक-पत्क ् ार और एब्कटववस्ट एदुआद््ो गालेआनो का न रहना प्व्तरोध की आवाज्ो्के वलए एक गहरा सदमा है। संयोग है वक अपने अपने ढंग से और अपनी अपनी रचना पवरवधयो्और रचना भूगोलो्मे्इन लेखको् का बुवनयादी स्वर कमोबेश एक ही थाः युद,् वहंसा, समाज की ववसंगवतयो्और नाइंसाव्फ़यो् पर एक अद््त मेटाफ़्र का वनम्ाषण। उन्हो्ने अपने लोगो् को राजनैवतक होना वसखाया। वे अपने कथन मे्जादुई यथाथ्वष ाद से संचावलत थे। उनके वबंब, उनके व्क़रदार और उनकी अनुभवू तयां रचना के तल से अपना प्क ् ाश और अपनी ऊज्ाष लेकर वझलवमलाती और थरथराती रहती थी्। तीन साल पहले अप्ल ्ै के महीने मे ही ग्यटुं र ग््ास अंतरराष््ीय स्र् पर सुवख ् यष ो् मे् तब आए थे जब उन्हो्ने गज्ा पर इज्रायली दमन के व्ख़लाफ़् कववता वलखी थी: ‘जो कहना ही होगा।” संयोग ही है वक तीन साल बाद अप्ल ्ै मे्ही ग््ास का नाम सुवख ् यष ो्मे्तब है जब वो हमारे बीच नही् है।् ग््ास का वनधन उस खालीपन के आकार और आयाम को बढ्ाता ही है जो इधर ववश््सावहत्य के इन नायको्के न रहने से वनव्मतष हो गया था। ग््ास की रचनाएं हमे् बहुत दूर की उन आशंकाओ्का डर नही्वदखाती, वो हमारे बहुत पास के भय को वचब्नहत करती है। युद्की आशंका मे्घुलते रहने का डर, नफ़्रत और वहंसा के और फैलते जाने का डर, ववश्् भाईचारे के ख़्ात्मे का डर, अन्याय और बब्रष ता और आव्थक ष ववरमता के जाल मे्और उलझते जाने का डर। एिुआिंंो गालेआनो ग्युंटर ग््ास की रचना मे् राजनीवत एक ख़्ास वबंदु रहा है। द पेवरस वरव्यू को वदए अपने एक इंटरव्यू मे्उन्हो्ने कहा था, ‘मै्नही्मानता वक राजनीवत वसफ़फ्राजनैवतक दलो्पर छोड्देनी चावहए। यह ख़्तरनाक होगा। कई सेवमनार होते है्जहां ववरय यही होता है वक क्या सावहत्य दुवनया को बदल सकता है। मै्सोचता हूं उसमे्बदलाव को प्भ् ाववत करने की सामथ्यष्है। कला के साथ भी यही बात है। हमारा देखने का नज्वरया बदलता है। सावहत्य, अव््सत्व की हमारी समझ की जवटलता को प्भ् ाववत करता है। पाठक और वकताब के बीच अंतस्बष धं ख़्ामोश, शांवतपूणष्और अज््ात रहता है।” ग्युंटर ग््ास ने अपने लंबे कलकत््ा प््वास के दौरान स्थानीय जीवन की बीहड्ताओ्और गरीवबयो्पर ‘शो मी योर टंग” नाम से एक डायरी भी वलखी थी। जो वचत््कला, कववता और गद्् का बेवमसाल संगम मानी जाती है। ग््ास को वचत्क ् ला का बहुत शौक था। वो लेखन के अलावा ड््ॉइंग और मूवत् वष शल्प मे्भी काम करते रहे। उनके वलए ये ववधाएं एक दूसरे मे्अंतग्वषुं फत भी थी्और एक दूसरे से लोकतांव्तक तरीक़े् से स्वतंत् भी। ग््ास साव्षजवनक बुव्दजीवी भी थे। पहाड्ी इलाको् मे् जैसे ढोल सामावजक ववसंगवतयो् और ववरोधाभासो् का एक कर्ण सांगीवतक और सांसक ् वृ तक अवभव्यब्कत रही है, कमोबेश वही बात उनके ववश््प्वसद्् उपन्यास ‘द वटन ड््म” मे् देखी जा सकती है वजस पर जम्षन वफल्मकार ववक्टर श्योल्योनडॉफ्फने एक महान व्फ़ल्म भी बनाई थी। बड्ा होने से इंकार करने वाला नन्हा ऑस्कार अपने छोटे से ड्म् के ज्वरए समकालीन समय के तमाम ववद्प्ू ो्का जैसे मज्ाक उड्ाता है और सुनने वालो्को आगाह भी करता
शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 55
खेल
खेल के दो निखि त
माम वववादो् से जूझती हुई सावनया वमज्ाष वशखर पर पहुच ं गयी और सावनया नेहवाल ने बैडवमंटन मे् चीनी वकले मे् से्ध लगा दी। इन दो प््वतभाओ् ने भारत को खेल की दुवनया मे् एक अभूतपूवष्ऊंचाई तक पहुच ं ा वदया है। इन वदनो् खेल की दुवनया मे् भारत की दो मवहलाएं एक ही साथ अपने अपने खेलो् मे् वशखर पर है्। ऐसा कारनामा इससे पहले भारतीय खेल इवतहास मे्पहले कभी नही्वदखा। खास संयोग यह है वक इन दोनो् का वरश्ता भारत के एक ही शहर हैदराबाद से है। हम बात कर रहे है्सावनया वमज्ाष और सायना नेहवाल की। एक सावनया, वजसे टेवनस की सनसनी के तौर पर हम बीते दस साल से देखते, पसंद करते और खावरज करते आ रहे है् तो दूसरी ओर सायना नेहवाल, वजसने बैडवमंटन के दुवनया मे्भारत के वलए एक से बढ्कर एक कामयाबी हावसल की है। पहले बात सावनया वमज्ाष की। सावनया को अपने पूरे कवरयर मे्खेल के चलते और वववाद के चलते ज्यादा चच्ाष वमली। चाहे वो नाक मे्वरंग पहनने का मसला हो या वफर टीशट्षपर उल्टे सीधे संदश े या वफर छोटी स्कट्ष। सावनया इससे सुव्खषयां बटोरती रही्। सािनया ने जब पावकस््ान के व््ककेटर शोएब मवलक से वववाह का फैसला वलया तो उसपर भी कम वववाद नही्हुआ। शादी के बाद उनकी राष््ीयता पर सवाल उठे। इन संघर््ो्की दास््ां को सावनया जल्द ही अपनी 56 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
आत्मकथा के तौर पर दुवनया के सामने रखने वाली है्, वजसका शीर्षक उन्हो्ने रखा है, ‘ अगे्स्ट ऑल आड्स’। आत्मकथा शीर्षक से ही जावहर है वक सावनया वमज्ाष ने इन तमाम अवरोधो्के सामने खुद को टूटने नही् वदया। उल्टे उनका तल्ख तेवर और वबंदास अंदाज्कम नही्हुआ। लेवकन टेवनस का खेल भी साथ मे्चलता रहा। यही वजह है वक वह मवहला डबल्स मे् दुवनया मे् की शीर्ष टेवनस वखलाड्ी है्। उनसे पहले भारत की कोई मवहला वखलाड्ी यहां तक पहुंचने का केवल सपना देखा करती थी्, लेवकन सावनया ने उसे अपनी लगन और मेहनत से मुमवकन बना वदया। इस मुकाम तक पहुच ं ना सावनया के वलए कभी आसान नही् रहा। वह वजस खेल मे् अपना कवरयर बना रही् थी्, उसमे् उनसे पहले वकसी भारतीय मवहला की कोई दमदार पहचान नही् थी। लेवकन सावनया ने धीरे-धीरे ही सही अपने कदम जमाने शुर् वकए। 2003 मे् जूवनयर ववंबलडन के वखताब के साथ सावनया वमज्ाष का सफर शुर्हुआ, उसके बाद सावनया ने पीछे मुड्कर नही् देखा। वसंगल्स मे् वे पहले टॉप 50 वखलाव्डयो्मे्जगह बनाने मे्कामयाब हुई्, उसके बाद टॉप 30 तक पहुंचने वाली पहली भारतीय मवहला वखलाड्ी बन गयी्। एक समय वसंगल्स मे् सावनया वमज्ाष की कवरयर रैव्कंग 27 हो गई थी। यह बड्ी उपलब्लध थी, इसे समझने के वलए
ये देखना होगा वक वलएंडर पेस और महेश भूपवत जैसे भारतीय वदग्गज पुर्र वग्ष कभी इस रै्वकंग के आसपास नही्पहुच ं सके। सावनया की झोली मे्दो दज्नष डल्लय् टू ीए वखताब हो गए थे और वमक्स्ड डबल्स मे् 3 ग््ैड स्लैम का वखताब वो जीत चुकी थी्। लेवकन टेवनस खेलने की अपनी कीमत चुकानी होती है, यही सावनया के साथ हुआ। कलाई और दोनो्पैरो्की सज्रष ी के चलते वे टॉप 20 मे्शावमल नही्हो पाई्और उनके वसंगल्स कवरयर पर सवाल उठने लगे। साल 2012 के बाद सावनया ने अपने खेल मे्डबल्स टेवनस पर ध्यान देना शुर्वकया 2013 तक उन्हो्ने वसंगल्स को अलववदा कह वदया। इसका उन्हे्फायदा होना शुर्हुआ और महज दो साल के अंदर वे वल्डष्नंबर वन बन गई है।् इस दौरान उन्हो्ने अपने कई साझेदार बदले, लेवकन मौजूदा समय मे् उनकी जोड्ी ब्सवटजरलै्ड की माव्टनि ा वहंवगस के साथ खेल रही है। इस जोड्ी ने अब तक 3 टूना्मष टे् मे्वहस्सा वलया है और लगातार तीनो् टूना्मष टे् जीत वलए है।् इसका फायदा सावनया वमज्ाष को हुआ और वह वशखर पर पहुच ं गई्। इस उपलब्लध के बाद सावनया ने कहा, ‘वजस खेल को मै् इतना प्यार करती हूं, उसमे् नंबर वन बनना सचमुच मेरे वलए असाधारण है। उम्मीद है वक इससे सही संदेश जाएगा वक लड्वकयां जो करना चाहे,् उन्हे्करने वदया जाए। दूसरे उनपर भरोसा नही्
तमबम कववबदो्से जूझती हुई सबिनयब कमज्बा कशिर पर पहुचं गयी और सबयनब नेहवबल ने बैडकमंरन मे्चीनी ककले मे् सेध ् लगब दी। इन दो प्क्तभबओ् ने भबरत को िेल की दुकनयब मे्एक अभूतपूवा्ऊचबई तक पहुचं कदयब है।
सायना नेहवाल और सािनया िमजंाट : नयी बुलंदियोंपर
करे्तो माता-वपता को उनपर भरोसा करना चावहए।’ सावनया वमज्ाष ने वजस तरह से खेल की दुवनया मे् अपनी पहचान बनाई है, उसे देखते हुए वपछले साल नवंबर मे्संयकु त् राष््ने उन्हे्दव््कण एवशया के वलए मवहला गुडववल एंबेसडर चुना। जावहर है सावनया वमज्ाष का उदाहरण कई दूसरो् को आगे लाएगा। वे कहती है्, ‘भारत मे् मवहलाएं खेलो् मे् कवरयर तलाशने लगी है। लेवकन ज्य् ादातर लोग यही सोचते है् वक कई चीजे् लड्वकयो् के वलए नही् है। हमारी सभ्यता और संसक ् वृ त इसकी अनुमवत नही्देता। मुझे उम्मीद है वक मुझे देखकर और भी लड्वकयां सामने आएंगी।’ सावनया वमज्ाष ने ये उम्मीद जताई है वक इस साल उनकी और माव्टिना वहंवगस की जोड्ी ग््ैडस्लैम वखताब जीतने के वलए जोरदार दावेदारी पेश करेग् ी। कभी सावनया वमज्ाष की टीशट्षपर वलखे स्लोगनो्के वलए उनकी खूब आलोचना होती थी। उनमे् एक स्लोगन ये भी था वक, सभ्य और सुशील लड्वकयां इवतहास नही् वलख सकती्। जावहर सावनया ने इवतहास वलखने और बनाने का ववकल्प चुना। सावनया वमज्ाष के शहर की है्सायना नेहवाल। सायना नेहवाल ने बैडवमंटन की दुवनया मे् चीनी वखलाव्डयो्की बादशाहत मे्सेध् लगा दी है। मौजूदा वल्डष् बैडवमंटन रैव्कंग मे् सायना नेहवाल 80,191 अंको् के साथ पहले नंबर पर पहुंच गयी है्। दूसरे
स्थान पर स्पने की कैरोवलना मावरन है्79578 अंको् के साथ। चीन की ली जुएरेई 72964 अंको्के साथ तीसरे पायदान पर है।् सायना काे बैडवमंटन की दुवनया मे् पहली बार तब गंभीरता से वलया गया जब 2006 मे् उन्हो्ने अंडर-19 नेशनल चैव्पयनवशप का वखताब जीता। इसके बाद सायना नेहवाल ने पीछे मुडक ् र नही्देखा। बैडवमंटन कोच पी गोपीचंद की अगुवाई मे्सायना ने धीरे-धीरे भारत की नंबर एक टेवनस वखलाड्ी बन गयी्। 2012 के ओलंवपक मे्कांसय् पदक जीतने के साथ सायना नेहवाल ओलंवपक मे् मेडल हावसल करने वाली पहली भारतीय मवहला बैडवमंटन वखलाड्ी बनी्। सायना नेहवाल इस दौरान नंबर 2 की रैव्कंग तक भी पहुच ं ी्। लेवकन नंबर वन तक पहुच ं ना बाकी था। एक के बाद एक करते हुए साइना ने 16 कवरयर टाइवटल्स जीत वलए। लेवकन उन्हे्लगने लगा था वक अपने खेल के स्र् को वह बढ्ा नही्पा रही है।् ऐसे मे् उन्हो्ने सबको चौ्काते हुए वह फैसला वलया वजसकी उम्मीद कइयो् को नही् रही होगी। उन्हो्ने अपने कोच पी गोपीचंद का साथ छोड्ने का फैसला वलया। इस फैसले के पीछे मंशा यही थी वक कुछ अलग करना है तो वकसी अलग कोच के पास जाना होगा। उन्हो्ने बै्गलोर के ववमल कुमार को अपना कोच बनाया। इसका फायदा उन्हे्वदखाई देने लगा। वह इस साल ऑल इंग्लै्ड बैडवमंटन
चैव्पयनवशप के फ़्ाइनल तक पहुच ं ी्और उसके बाद इंवडया ओपन सुपर सीरीज का वखताब जीतकर नंबर एक पायदान तक पहुच ं गयी्। एक सप्ताह तक नंबर एक रहने के बाद वे वफर से नंबर दो पर पहुच ं गई्थी लेवकन वफर इसके बाद ही वह नंबर एक हो गयी्। उनका इरादा अब लंबे समय तक नंबर एक पायदान पर रहने का है। सायना नेहवाल ने कहा, ‘अगर सबकुछ ठीक रहा और मै् ठीक से ि््ेवनंग हावसल करती रही तो मुझे भरोसा है वक मै् लंबे समय तक नंबर वन बनी रह सकती हू।ं लेवकन ये एक मुबश् कल चुनौती है।’ सायना नेहवाल की कहानी भी एक आम पवरवार के लड्की के आसमान छूने की दास््ां है। सायना के वपता हरवीर वसंह वहसार के चौधरी चरण वसंह एग््ीकल्चर संसथ् ान मे्साइंवटस्ट थे। लेवकन बेटी के बैडवमंटन प््ेम को देखकर उन्हो्ने कै्पस स्कूल, वहसार के बैडवमंटन कोट्ष मे् ि््ेवनंग वदलाना शुर् वकया। इसके वलए 20 वकलोमीटर तक वे अपनी बेटी को स्कूटर पर वबठाकर ले जाते। बाद मे् सायना नेहवाल को अच्छी ि्व्ेनंग वमल सके इसके वलए पूरा पवरवार हैदराबाद चला गया। साल 1999 से शुर् हुए सफर ने एक दशक की मेहनत के बाद रंग वदखाना शुर् वकया। कामयाबी के बावजूद सायना नेहवाल के कदम लड्खड्ाए नही् और उन्हो्ने बैडवमंटन पर अपना ध्यान फोकस रखा। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 57
िफलंम
प्म ्े और अध्यबत्म की मबिम्क ा कहबनी थी ‘गबइड’। उसमे् िनद्श ्े न, संपबदन, गीत-संगीत और अिभनय की अपूवा् ऊंचबईयबं थी। इसीिलए पचबस सबल बबद भी वो पुरबनी नही्पड्ी है।
अब तक ‘जीिे की तमऩिा’
हतर मृदुल
गा
इड’ भारतीय वसनेमा की वह अनूठी वफल्म है, वजसने उपन्यासकार आर.के.नारायण, अवभनेता देव आनंद, अवभनेत्ी वहीदा रहमान, वनद््ेशक ववजय आनंद, संगीतकार एस.डी.बम्षन और गीतकार शैले्द् को समान र्प से एक नई लोकव््पयता प््दान की थी। वजस साल 'गाइड वरलीज हुई थी, उसी साल 'वक्त, 'जब जब फूल वखले , 'वहमालय की गोद मे्, 'जानवर, 'खानदान, 'काजल, 'गुमनाम और 'शहीद जैसी चव्चषत वफल्मे् भी दश्षको् के समक्् थी्। कहने की जर्रत नही् है वक भारतीय वसनेमा मे् जो जगह 'गाइड ने बनाई, वह इनमे् से कोई वफल्म नही् बना सकी। एक रोमांवटक ड््ामा वफल्म को जैसी आध्याब्तमक ऊंचाई वमली, उसकी कोई सानी नही्। आि््य्ष की बात है वक आज वजस 'गाइड की वगनती भारत की साव्षकावलक वफल्मो् मे् होती है, उसकी वरलीज के वक्त ऐसी सफलता की वकसी को उम्मीद नही् थी। ऐसा इसवलए था, क्यो्वक अंग्जी 'गाइड बुरी तरह फ्लॉप हो चुकी थी। दरअसल 'गाइड अंग्ेजी और वहंदी दोनो् ही भाराओ् मे् बनी थी। अंग्ेजी मे् इसका वनद््ेशन पोवलश मूल के अमेवरकी वफल्मकार टेड डेवनएलेस्की ने वकया था और वहंदी मे् ववजय 58 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
आनंद ने हुआ यह था वक नोबेल पुरस्कार ववनर अमेवरकी लेवखका पल्ष.एस.बक की एक लंबी मुलाकात देव साहब के साथ हुई थी। वफल्म 'हम दोनो् की वरलीज के दौरान देव साहब कई बार अमेवरका गए। इन्ही् वदनो् पल्ष ने उन्हे् एक इंडोअमेवरकन प््ोडक्शन हाउस के तहत वफल्म बनाने का सुझाव वदया था। यह भी राय दी थी वक वकसी भारतीय उपन्यास का ही वफल्मांकन वकया जाए। तब देव साहब को आर.के.नारायण के उपन्यास 'गाइड का स्मरण हो आया। इस उपन्यास के वफल्मांकन को लेकर पल्ष सहमत हो गई्, लेवकन उन्हो्ने अंग्ेजी 'गाइड के वलए अमेवरकन डायरे1टर लेने की सलाह दी और टेड डेवनएलेस्की का नाम सुझाया था। इसमे् कोई शक नही् है वक देव आनंद अपने बैनर को इंटरनेशनल बनाना चाहते थे, इसी महत्वाकांक्ा के तहत ही उन्हो्ने 'गाइड का वनम्ाषण वकया। देव साहब ने अंग्ेजी 'गाइड के वलए बहुत र्पए खच्षवकए थे, लेवकन वफल्म बुरी तरह फ्लॉप हो गई। उस जमाने मे् इस वफल्म पर तीस-पै्तीस लाख खच्ष हुए थे, जो वक एक बड्ी रकम थी। असल मे्देव आनंद ने हॉलीवुड यूवनट को वे सारी सुववधाएं प््दान की्, वजनकी मांग की गई। जहां तक वहंदी 'गाइड की बात है, उसमे् काफी सोच समझकर पैसा खच्षवकया गया था। बावजूद इसके
िफलंम ग ाइड मेंि ेव और व
हीिा : म मंटछ
ूिे पंसंग
इस वफल्म की भव्यता से कोई समझौता नही्वकया गया था। वनद््ेशक ववजय आनंद को इस बात का अहसास था वक बड्े भाई को काफी आव्थषक नुकसान उठाना पड् रहा है। ववजय आनंद ने अपनी एक टीम बनाई, वजसमे् एस.डी.बम्षन को बतौर संगीतकार साइन वकया और शैले्द् को गीत लेखन की वजम्मेदारी सौ्पी गई। इसके बाद ववजय आनंद ने रचनात्मकता की अपनी ही राह चुनी। जब अंग्ेजी 'गाइड की शूवटंग शुर्हो रही थी, तब यह वनण्षय वलया गया था वक हॉलीवुड डायरेक्टर को फॉलो वकया जाएगा। यानी जैसा शॉट टेड ले्गे, वैसा ही ववजय आनंद ले्गे। वसफ्फ संवादो्की भारा बदलेगी। लेवकन ववजय आनंद ने ऐसा करने से साफ इनकार कर वदया। बाद मे् ववजय आनंद ने इसके वनद््ेशन से ही वकनारा कर वलया। उनके इस वफल्म के वनद््ेशन से इनकार कर देने के बाद राज खोसला को लाया गया। राज खोसला भी हॉलीवुड डायरेक्टर की नकल करने के वलए राजी नही्हुए। उन्हो्ने भी हाथ खड्े कर वदए। बाद मे् देव साहब ने बड्े भाई चेतन आनंद को यह वजम्मेदारी सौ्पने की सोची, उन्हो्ने भी बात नही् मानी। थक-हार कर ववजय आनंद को ही वहंदी 'गाइड सौ्पनी पड्ी। ववजय आनंद ने इस शत्ष पर 'गाइड के वनद््ेशन की हामी भरी वक पटकथा और संवाद वे खुद ही वलखे्गे। इतना ही नही्, उन्हो्ने एक साहवसक
वनण्षय वलया वक यह वफल्म आर.के.नारायण के उपन्यास से अलग होगी। इस वफल्म को वे भारतीय जनमानस के अनुर्प बनाएंगे। वाकई ववजय आनंद अपनी सोच की वफल्म बना पाए। गौर करे्गे, तो पाएंगे वक 'गाइड उस समय के वसनेमाई मुहावरो् से एकदम अलग है। उसका स्वर्प वभन्न है। यह आर.के। नारायण की कृवत पर आधावरत वफल्म न होकर स्वतंत्सोच की वफल्म है। इसमे् जो भी आध्याब्तमक स्पश्ष वदखता है, उसका आर.के.नारायण की कथा कृवत से कोई वास््ा नही् है। इस आ ध्या ब्तम क
स्पश्ष की वजह से 'गाइड को बहुत बड्ी कामयाबी वमली। भारतीय जनमानस इस वफल्म की आध्याब्तमकता से बड्ा प््भाववत हुआ। यह सब ववजय आनंद का व््कएशन था। हॉलीवुड वनद््ेशक का अनुसरण न करने का ववजय आनंद का फैसला सही सावबत हुआ। उल्लेखनीय है वक उपन्यासकार आर.के.नारायण को अंग्ेजी 'गाइड नाराज कर गई, लेवकन वहंदी वफल्म से वे प््भाववत हुए वबना रह न सके। नारायण चवकत थे वक कैसे उपन्यास के सारे साउथ इंवडयन वकरदार उत््र भारतीय चवरत््ो् मे् तल्दील कर वदए गए थे। वकरदारो् के वत्षमान और अतीत की आवाजाही ने भी वफल्म को र्वचकर बना वदया था। राजू गाइड और रोजी के वकरदार इतने ववश््सनीय लगे वक दश्षको्ने इनमे् खुद को खोजना शुर्कर वदया था। इस वफल्म मे्जहां प््ेम की पराकाष््ा है, वही् अध्यात्म की ऊंचाइयां भी है्। रोजी के प््ेम मे्पडऩे के बाद जैसे राजू गाइड का कायांतर हो जाता है। काफी हद तक राजू का वकरदार एंटी हीरो है। राजू के भीतर एक द््ंद है। इस द््ंद की वजह से ही भावनाओ् की बारीवकयां सामने आ पाती है्। मानवीय संबंधो्का एक नया ववतान खड्ा हो जाता है। वफल्म मे् जहां परंपराओ् से टकराहट है, वही् नई चेतना भी है। प््ेम का इतना घनीभूत स्वर्प और समप्षण की ऐसी पराकाष््ा बहुत कम वफल्मो् मे् वदखाई पड्ती है। 'गाइड की पटकथा और
संवाद इतने चुस्-दुर्स् है् वक एक पल भी परदे से नजर वडगती नही्है। एक-एक गीत कहानी को आगे बढ्ाता है या कहे् वक कहानी का वहस्सा हो जाता है। 'आज वफर जीने की तमन्ना है..., 'वदन ढल जाए हाय..., 'गाता रहे मेरा वदल..., 'क्या से क्या हो गया..., 'वपया तोसे नैना लागे रे..., 'सैयां बेईमान..., 'तेरे मेरे सपने बस एक रंग है्..., 'वहां कौन है तेरा... और 'अल्ला मेघ दे पानी दे... जैसे गाने बेहतरीन संवाद लगते है्और 'वजंदगी भी एक नशा है दोस््। जब चढ्ता है, तो पूछो मत 1या आलम रहता है... या वफर 'हमेशा जाओ-जाओ कहती हो, आओ-आओ कहना भूल गई... जैसे संवादो् मे् एक वलवरकल प््भाव वदखाई देता है। अवभनय की बात करे्, तो इसे देव आनंद की सव्षश्ेष् वफ ल्म
कह सकते है्। राजू का वकरदार वे बड्े ही ववश््सनीय तरीके से वनभा ले गए है्। मानव जीवन की ववडंबनाएं और उतराव -चढ्ाव उनके अवभनय मे्सहजता से आ गया है। उनके अवभनय मे् एक लय है और एक राग है। इसे जीवन राग कहा जा सकता है। वहीदा रहमान रोजी की भूवमका मे् पुरअसर है्। वहीदा से बेहतर इस भूवमका को कोई भी अन्य हीरोइन नही्वनभा सकती थी। उनके नृत्यो् की भंवगमाएं और भाव वहंदी वसनेमा मे्दुल्षभ है्। गीतकार शैले्द्के गीतो्मे्जो दश्षन है, जैसा उनका शल्द चयन है, उसे मूत्षर्प प््दान वकया वहीदा ने। एस.डी.बम्षन की धुने् उन्हो्ने जैसे आत्मसात ही कर ली् और वफर एकएक सुर, लय और ताल पर अपने कदम वथरकाए। 'आज वफर जीने की तमन्ना है, आज वफर मरने का इरादा है... जैसे गीतो् मे् वे सचमुच सारे बंधन तोड्ती नजर आती है् और भारतीय जीवन दश्षन को सेल्युलाइड पर एक नई ऊंचाई प््दान करती है्। मुख्य चवरत््ो् के अलावा वकशोर साहू और लीला वचटवनस के वकरदार भी दश्षको् के वदलो् मे् आसानी से अपनी जगह बनाते चले जाते है्। माक््ो की भूवमका मे्वकशोर साहू हमेशा ही जीववत रहे्गे। और हां, फली वमस््ी के कल्पनाशील छायांकन
की चच्ाष के वबना 'गाइड की कोई भी बात पूरी नही् हो सकती। वनद््ेशन की बात करे्, तो ववजय आनंद का आत्मववश््ास देखने लायक है। यह आत्मववश्ा्स नही् होता, तो 'गाइड नही् बन सकती थी। उनके कई नजदीकी लोगो् का कहना है वक राजू गाइड असल मे् खुद ववजय आनंद ही है्। उन्हो्ने इस वकरदार मे् खुद का ही वचंतन पक्् दश्ाषया है। कह सकते है् वक देव आनंद ने अपनी भूवमका वजस अंदाज मे् वनभाई है, वह पूरी तरह ववजय आनंद की देन है। वफल्म की वपक्चराइजेशन मे् जैसी कल्पनाशीलता वदखाई गई है, उससे पता चल जाता है वक ववजय आनंद वकस पाए के डायरेक्टर है्। 'गाइड मे् ऐसी आध्याब्तमकता बुनी गई है, जो पूरी तरह हमारे जीवन से जुड्ी हुई है। यही आध्याब्तमकता वफल्म को एक नई ऊंचाई प््दान करती है। ववजय आनंद के वलए 'गाइड ने हमेशा ही नई चुनौवतयां पेश की्। इस वफल्म
की असाधारण सफलता ने उन्हे् एक दायरे मे् बांध कर रख वदया। उन्हो्ने अपने एक इंटरव्यू मे् कहा भी है, 'वकसी एक वफल्म की तारीफ मे् डूब जाना एक वसनेकार की मौत है। लोग आपको इस वफल्म से उबरने नही्दे्गे। लोग मुझ से यही कहते रहे वक मै् एक और 'गाइड क्यो् नही् बनाता? पर जब 'गाइड चल रही थी, तब वकसी ने मेरे काम की तारीफ नही् की। यही कहा वक मै् अपने भाई को बब्ाषद करने मे्लगा हुआ हूं...। अब जब 'गाइड को पचास साल हो रहे है्, इस वफल्म की चमक बढ्ती जा रही है। 'टाइम मैगजीन ने वहंदी वसनेमा का गहन ववश्लेरण करते हुए इस क्लावसक को चौथे नंबर पर रखा है। इधर बॉलीवुड मे् सावहब्तयक कृवतयो् पर लोकव््पय वफल्म बनाने का वसलवसला एक बार वफर शुर् हुआ है, ववजय आनंद पचास साल पहले इस काय्ष को सफलता पूव्षक अंजाम दे चुके थे। वनस्संकोच कह सकते है् वक वकसी सावहब्तयक कृवत पर बनी यह प््वतवनवध वफल्म है। ऐसी बहुआयामी सफलता वकसी और वफल्म को नसीब नही्हो पाई। शुक्वार | 1 से 15 मई 2015 59
चौपाटी
सा
कंगना की
मान्य सवालो्से भी घबरा जाने वाली कंगना के चेहरे पर एक अलग ही रंगत देखी गई, जब उनसे पूछा गया वक आवमर खान की तज्षपर क्या उन्हे्'वमस परफेकश ् वनस्ट कहा जाए? जवाब मे् कंगना थोड्ी शरमाई और वफर शालीनता से कहा 'मै्वकसी को फॉलो नही्कर रही हू,ं लेवकन यह सही है वक वजंदगी के प्व्त मेरा नजवरया बदल चुका है। अब मै्वही वफल्म करंग् ी, वजसके वलए भीतर से आवाज उठेगी वक यह सही च्वाइस है। आगामी वफल्म 'तनु वेडस ् मनु वरटन्स ् के ि्ल ्े र लांच के मौके पर दो नेशनल अवाड्षववनर इस हीरोइन की तुलना इसवलए आवमर खान से की जा रही थी, क्यो्वक वे भी अब एक बार मे्एक ही वफल्म मे् काम करने की बात कह रही है।् इसके अलावा कंगना ने आवमर की तरह ही तमाम अवाड्सष्समारोहो्मे्अपनी अर्वच वदखाई है। अब जब वक कंगना का कद बढ्चुका है, तो बॉलीवुड के नामी वनम्ातष ा उन्हे्साइन करना चाह रहे है।् लेवकन कंगना ने दो टूक कह वदया है वक 'जब तक अच्छी भूवमका नही् होगी, कोई वफल्म साइन नही्करंग् ी। सुपर स्टार के अपोवजट काम करने का मौका वमलने पर भी नही्।
िो टूक
मायूस हैंमिाम जी म
दाम व््पयंका चोपड्ा की समझ मे्नही्आ रहा है वक इन यादगार पलो्मे्क्या करे्? उन्हे्बॉलीवुड मे्पधारे हुए बारह साल हो चुके है्और वे पुरानी यादो्मे्खोई हुई है्। उनके पास सफलता का एक इवतहास है। लेवकन हाल ही मे्वमली एक नाकामी से काफी दुखी है्। दरअसल, दूसरे एक्टरो्की तरह ही उन्हो्ने भी प््ोड््ूसर बनने की ठानी थी और वहट वफल्मे्देने के सपने देखने शुर्कर वदए थे। लेवकन क्या करे्वक उनके प््ोड1शन की वफल्म 'मैडम जी शुर्होने से पहले ही ठंडे बस््ेमे्चली गई। पूरी प्लावनंग फेल हो गई। प््ोडक्शन संबंधी वकसी वनण्ाषयक ब्सथवत मे्न पहुंचते देख वफल्म का वनद््ेशन कर रहे मधुर भंडारकर ने उनसे वकनारा कर वलया। वे वकसी दूसरी वफल्म मे्व्यस््हो गए। यूं पीसी के पास वफल्मो्की तो कमी नही्है, परंतु खुद का प््ोडक्शन हाउस खड्ा कर देना अपने आपमे्बड्ी उपलव्लध होती। उनके बाद मे्आई हीरोइन अनुष्का शम्ाष सफलतापूव्षक 'एनएच 10 जैसी वफल्म प््ोड््ूस कर चुकी है्, तो व््पयंका मैडम ऐसा क्यो्नही्कर सकती थी्? मैडम जी को मायूसी छोडऩी पड्ेगी।
अ
ब अरशद वारसी ने हवथयार डाल वदए है्। वे चाह रहे थे वक कॉमेडी भूवमकाओ्के इतर भी काम करे्, लेवकन अब उनकी समझ मे्अच्छी तरह आ गया है वक 'मुन्नाभाई के 'सव्कफट के वकरदार ने उन्हे्वजतनी लोकव््पयता दी, उतना ही नुकसान भी कर वदया है। सच यही है वक बॉलीवुड के वनम्ाषता इस टैले्टेड एक्टर को अगर याद करते है्, तो वसफ्फकॉमेडी के वलए। कॉमेडी के अलावा वे कोई भी रोल अरशद को नही्देना चाहते। वासु भगनानी के प््ोडक्शन की आगामी वफल्म 'वेलकम टू कराची मे् एक बार वफर अरशद दश्षको्को हंसाते हुए वमले्गे। लेवकन वदक््त की बात यह है वक इस वफल्म मे्न राजकुमार वहरानी जैसा वनद््ेशन होगा और न ही अवभजात जोशी जैसी िस्क्प्ट! और तो और पूरी वफल्म उन्हे्ही अपने कंधो्पर वटकानी होगी। पहले जब इसमे् इरफान खान के साथ उनकी जोड्ी बनने जा रही थी, तब वे खुश थे वक कम से कम उनका जोड्ीदार तो मजबूत कंधो्वाला है। लेवकन अब इरफान की जगह जैकी भगनानी के आ जाने के बाद सीन एकदम बदल चुका है। जैकी अवभनय मे्जीरो है्, सो हंसाने की सारी वजम्मेदारी अरशद के नाजुक कंधो्पर आ पड्ी है। -हवर मृदुल
अरशि के
नाजु़क कंधे
60 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
अंितम पन्ना आशीष नंदी
असगहष्णुता की राजनीित
हमबरी रबजनीकतक संथक ् कृ त मे्नबरकीय र्प से कुछ गलत बदलबव आयब है। भबरत समुदबयो्कब देश है और यहबं की संथक ् कृ त मे्लोग एक दूसरे से घुलकमल कर रहते है।्
रा
जनीवत और समाज मे् वपछले वदनो् एक वववचत्-् सी बहस वछड गई थी वक अगर सरदार वल्लभभाई पटेल देश के पहले प्ध ् ानमंत्ी होते, तो क्या होता? एक नजर मे् तो यह प्श् न् गंभीर मालूम होता है और लगता है वक कोई सचमुच मे्देश के इवतहास का तटस्थ सहावलोकन करना चाहता है, लेवकन जब इसकी पृष्भूवम पर नजर जाती है, तो यह मुद्ा एक राजनीवतक संगठन द््ारा राजनीवतक ववरासत को पाने की होड अवधक लगता है। दरअसल, यह प््श्न अपने आप मे्वनरथ्क ष सा था, क्यो्वक यह तो सरदार वल्लभभाई पटेल को भी मालूम था वक वह देश के प्ध ् ानमंत्ी नही् बनने जा रहे है।् अगर इवतहास पर नजर डाले,् तो यह साफ हो जाता है वक नेतृत्वकत्ाष के र्प मे् पंवडत जवाहरलाल नेहर्, महात्मा गांधी की पहली पसंद थे और उनके नाम पर एक राजनीवतक सहमवत उस समय की राजनीवत मे्बन चुकी थी। इसवलए यह सवाल उस तरह की राजनीवतक अवसहष्णतु ा का ही एक वहस्सा है, वजस तरह की राजनीवतक असवहष्णुता का पवरचय देते हुए राजनेता कोई अनग्ल ष या अशोभनीय बयान देते है।् मेरा दावा इसवलए भी मजबूत है वक अगर यह सवाल वकसी भी संदभ्ष मे् प््ासंवगक है वक सरदार पटेल प््धानमंत्ी होते, तो क्या होता, तो इसका जवाब यही होगा वक कुछ ववशेर बदलाव नही्आता, यानी वक जैसा वक हमारा इवतहास है, वैसा ही होता। वनव््ित र्प से वैसे पवरवत्षन तो नही्ही वदखाई देते, जैसा आज का सत््ा वग्षसोचता है। दरअसल, कांग्ेस का गठन देश की स्वतंत्ता से काफी पहले हुआ था और वह पहले एक समाज-सुधारक पाट््ी के तौर पर थी, वफर बाद मे्वह व््बवटश नीवतयो्का नरम ववरोध करने लगी और अंत मे् स्वतंत्ता संग्ाम की पाट््ी बनी। जनता उसमे् कोई संगठन की छवव नही्देख रही थी, बब्लक उसमे्देश की आजादी देख रही थी। आजादी वमलने से काफी पहले यह साफ हो चुका था वक कांग्ेस के अंतग्षत ही सारे ढांचे खडे हो्गे। इसवलए यह सोच लेना वक वसफ्फप््धानमंत्ी बदल जाने से ब्सथवत बदल जाती या कुछ अलग होता, तो यह गलत है। अगर उस समय्ष िहंदस ु ्ानी धडो्का प्भ् ाव होता, तो कोई अलग आकलन कर भी सकता था, लेवकन तब ऐसा कुछ भी नही्था। अलबत््ा, आज भारतीय जनता पाट््ी अलग राय रख सकती है, लेवकन उसे यह एहसास होना चावहए वक खुद श्यामा प्स ् ाद मुखज््ी, वजन्हो्ने आगे चलकर भारतीय जनसंघ बनाया, साल 1950 तक पंवडत नेहर्के मंव्तमंडल मे्शावमल थे। यहां तक वक आज बाबा साहब अंबेडकर की ववरासत को हवथयाने को लेकर जो भी मुद्े मीवडया मे् उपलल्ध कराए जाएं,लेवकन इससे कोई इनकार नही्कर सकता वक दवलतो्और ववशेरकर जावत आंदोलन के मुद्ो् पर कांगस ्े से अलग ख्याल रखने वाले यह 62 शुक्वार | 1 से 15 मई 2015
नेता भी नेहर्मंव्तमंडल मे्अहम पद पर थे। अब इवतहास पर ठोस काम की जगह ऐसे मुद,्े जैसे अभी सुभारचंद्बोस को लेकर उछाले गए, उनको क्या कहेग् ?े यही न वक एक वकस्म की राजनीवतक असवहष्णतु ा के बीज बोए जा रहे है।् जहां घर वापसी या अवधक बच््े जनमने जैसे मसले प्भ् ाव न छोडे,् वहां नायकत्व की वैसी लडाई को खडा वकया जाए, जो वैचावरक न हो। अब सामावजक असवहष्णतु ा के बोए गए बीजो्की चच्ाष करते है।् यहां धम्ातव् रण, घर वापसी और अल्पसंखय् को्पर हमले जैसे मुद्ेहै,् जो बीते दस महीनो्मे्गहराए ही है।् बीते वदनो्वजस तरह से जुवलयो वरबेरो ने यह बयान वदया वक ‘एज ए व््कि्न् , सडेनली आई एम स्िज ्े र इन माई ऑन कंि्ी’ (एक ईसाई के र्प मे्अचानक ही मै्अपने ही देश मे् अजनबी हो गया हूं), मुझ जैसे लोगो् को खलता है। यह बयान बताता है वक एक प््शासवनक व्यब्कत बदलते सामावजक हालात मे् भयभीत है, और यह भाव उसकी पीडा की अवभव्यब्कत है। इसके अलावा, इस बयान से यह भी पता चलता है वक सचमुच हमारी राजनीवतक संसक ् वृ त मे् कुछ नाटकीय र्प से गलत बदलाव आया है। भारत समुदायो् का देश है और यहां हर वकसी को दूसरे समुदाय का आदर करना चावहए। यहां तक वक यहां की संसक ् वृ त मे् लोग एक दूसरे से घुलवमल कर रहते है।् मेरे घर मे् 25 साल तक काम करने वाली एक मवहला की बेटी की जब शादी हुई, तब हम यह जान पाए वक उनका पवरवार ईसाई था। जब हमे्लोग व््कसमस पर मुबारकबाद देने आते थे, तब भी उन्हो्ने यह नही् बताया वक हमारा पवरवार ईसाई है। मेरे कहने का मतलब यह है वक यहां के लोगो् मे् समुदाय या धम्ष को लेकर वैसा दुराग्ह् नही्है, जैसा राजनीवतक दल पेश करते है।् सेकय् ल ु र और नॉन सेकय् ल ु र इन राजनीवतक दलो् के गढे हुए शल्द है्। यहां तक सेक्युलवरज्म की उत्पव््त यूरोपीय चेतना से आती है। इवतहास मे्वजन शब्खसयतो्को सेकल ु र बताया गया, उन्हो्ने कभी इस शल्द को सुना भी नही्होगा। बब्लक अगर अकबर के साथ यह जोडा गया, तो इसवलए वक वह इस्लाम को मानते और वहां से उन्हो्ने अन्य धम््ो् के प्व्त सवहष्णतु ा के भाव को वलया था। यही बात अशोक पर भी लागू होती है। वह बौद््थे, इसवलए दूसरे धम््ो्का आदर करते थे। वफर यह कैसी सीख है वक आप वहंदू है,् तो वकसी और धम्ष को नही् माने् या मेरा वकसी पर आस्था नही्, इसवलए सेकल ु र हू?ं और इस आड मे्कैसा राजनीवतक और सामावजक माहौल खडा करने का प्य् ास हो रहा है? (लेखक जानेमाने सामािजक मनोशास््ी और साव्ज ष वनक बुव्दजीवी है,् इस स्भ्ं मे्हर बार प्व्तव्षठत लेखक, बुव्दजीवी और समाजकम््ी हमारे समय के सवालो्पर िवचार करेग् ।े )