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Shukrawaar 16 31 january 2016 medium resolution

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वर्ष 9 अंक 2 n 16-31 जनवरी 2016 n ~ 20

कितन े सुरक्​्ित है् हम


www.shukrawaar.com

वर्ष9 अंक 2 n 16 से 31 जनवरी 2016 स्वत्वािधकारी, मुद्क एवं प्​्काशक क्​्मता सिंह िंपादक अंबरीश कुमार िंपादकीय िलाहकार मंगलेश डबराल राजनीसतक िंपादक वववेक सक्सेना फोटो िंपादक पवन कुमार िंपादकीय िहयोगी

सववता वम्ा​ा अंजना वसंह सुनीता शाही (लखनऊ) अिनल चौबे (रायपुर) पूजा िसंह (भोपाल) अिवनाश िसंह (िदल्ली) अिनल अंशुमन (रांची) कुमार प्​्तीक मनोज वतवारी

कला

प्​्वीण अिभषेक

महाप्​्बंधक

एस के वसंह +91.8004903209 +91.9793677793 gm.shukrawaar@gmail.com

आवरण कथा

6 | सुरक्​्ा सवालो् का पठानकोट

पिानकोट जैिे रणनीसत र्प िे अहम वायुिेना के स्टेशन पर हुआ आतंकी हमिा कई प्​्श्न छोि्गया है. िुरक्​्ा मे्हुई इि भारी चूक के जवाब तिाश सकये सबना राष्​्ीय सहतो्और िीमाओ्की िुरक्​्ा की बात करना बेमानी होगा.

16 | कायर और ि​िादुर

कायरता और बहादुरी के बीच चुनाव की घि्ी किाकारो्के जीवन मे्भी तो आती है. हां, कौन अपना नाम कहां दज्मकराना चाहता है. इिकी आजादी होनी चासहए.

18 | संतदग्ध किानी

िबजनेि हेड

पुसि​ि ने अि कायदा के भारतीय उपमहाद्​्ीप के मॉड्​्ूि की कहानी तो बना दी गयी है, िेसकन उिमे्इतने झोि है्सक यकीन करना कसिन है.

शरद कुमार शुकल ्ा +91. 9651882222

ब्​्ांिडंग

कॉमडेज कम्युिनकेशन प्​्ा़ िल़

प्​्िार प्​्बंधक

यती्द्कुमार ितवारी +91. 9984269611, 9425940024 yatendra.3984@gmail.com

सिसध िलाहकार शुभांशु वसंह

shubhanshusingh@gmail.com

+91. 9971286429 सुयश मंजुल

िंपादकीय काय्ा​ालय

एमडी-4/304, सहारा ग्​्ेस, जानकीपुरम लखनऊ, उत्​्र प्​्देश-226021 टेलीफैक्स : +91.522.2735504 ईमेल : shukrawaardelhi@gmail.com www.shukrawaar.com DELHIN/2008/24781 स्वत्वािधकारी, प्क ् ाशक और मुदक ् क्म् ता सिंह के सिए अमर उजािा पब्लिकेशि ं सिसमटेड, िी-21, 22, िेकट् र-59, नोएडा, उत्र् प्द् श े िे मुस्दत एवं दूिरी मंसजि, ल्ाी-146, हसरनगर आश्म् , नयी सदल्िी-110014 िे प्क ् ासशत. िंपादक : अंबरीश कुमार (पीआरल्ाी अिधसनयम के तहत िमाचारो्के चयन के ि​िए िजम्मेदार) िभी कानूनी िववादो्के ि​िए न्याय क्​्ेत्िदल्िी होगा.

24 | एक उदास दीवार

30 | तिसरिा तिमायि नगर

44 | संस्कृतियो् का संगम

48 | तिर िूिड्िा का पद्ाष

सतनका सतनका डािना एक ऐिी पहि है सजिने जेि की उदाि और िादा सजंदगी मे्रंगो् के जसरये उम्मीद और िंभावना के नये द्​्ार खोिे है्.

दीव का इसतहाि सजतना पुराना है, उतनी ही िमृद्है उिकी िंस्कृसत. घरो् के िामने रखे हुए िूि, सकिा और िमुद्पय्मटको्को आकस्षमत करते है्.

सहमायत नगर एक एेसतहासिक जगह है जहां एक जमाने मे्िोशसिस्ट पाट्​्ी का के्द्ीय दफ्तर था और पस्​्तकाएं छपती थी्. आज िमाजवादी िोग भी इि जगह को भूि चुके है्.

मुंबइया सिल्मकारो् ने एक नया िाॅम्मूिा खोज सनकािा हैिेक्ि कॉमेडी का. ऐिी सिल्मो्की कामयाबी ने एक नयी भेस्ियाधिान शुर्कर दी है. शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

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आपकी डाक

राम के नाम पर राजनीति

रेवडी वाले मामा

मध्यप्द् श े के मुखय् मंत्ी सशवराज सिंह चौहान ने सजि ि​िाई िे जनिंपक्क सवभाग की तरि िे ऑनिाइन खबरो्की वेबिाइटो्को पैिे बांटे है.् उि​िे शुक्वार के अंक मे् छपी खबर रेविी बांटते मामा कहना बिा ही िही िगा. ये एक तरह िे बहुत बिा घोटािा है. इि​िे एक तरह िे िरकार अपने िेवर मर मीसडया को करने की कोसशश कर रही है. कोई भी वेबिाइट हो उिको मध्यप्​्देश िरकार की तरि िे िहयता हासि​ि है. उन्हे्इि बात की कोई सिक्​्नही्है सक वेबिाइट अपडेट होती है् या नही्. इि​िे कोई न्यायपूण्मपत्​्कासरता की उम्मीद कैिे करे, जब िरकार ही उिकी सवत्​्ीय िहायक है. ये िारी वेबिाइटे बेहद ही नयी है्. ददनेश दिंह, रायपुर (छत्​्ीिगढ़)

नशे के गि्ष मंे युवा

बीते अंक मे् प्​्कासशत िेख नशा-मुक्त नया िाि कािी कुछ हमे्िीख देता है. िेसकन नये िाि की शुर्आत ही नशे िे होती है. भारत की युवा पीढ़ी नशे की आदी नही्बब्लक नशा उिके आदत मे् शुमार हो गया है. पाट्​्ी एक ट्​्ेड िी चि पिी है. सजिमे्शराब न हो तो वह बेकार मानी जाती है. िाथ अगर उनका कोई दोस्​्या िाथी शराब नही् पीता है. तो पीने वािा उिे ताना मारता है. मतिब पूरा िामासजक ताना बाना ही बदिता जा रहा है. िेसकन िेखक वाईपी सिंह इि बात की ओर ध्यान देते है्. इि वक्त देश का िबिे मशहूर प्​्देश पंजाब नशे मे् बुरी तरह िंि गया है. सजिे एक वक्त िोग उिकी बेहतरीन सकिानी के सिए जानते थे. िेसकन आज के िमय मे् पंजाब नशेिी िोगो् का गढ़ बनता जा रहा है. यहां के युवा नशे मे् इि तरह धुत हो गये है्, सजि​िे वह काम पर 4

शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

अयोध्या की रामजन्मभूसम पर मंसदर बनाये जाने की बात एक बार सिर िुस्ख़मयो्मे्है. शुक्वार ने इिकी बहुत ही अच्छी व्याख्या पेश की. राम के नाम पर राजनीसत बिी पुरानी है, िोग इिके बहाने वोट की ि​ि​ि काटते रहे है्. अक्िर राम के नाम पर वोट का मजा बीजेपी उिाती रही है. उिने भक्तो्िे मंसदर बनाने का वादा सकया और वोट िे सिया. िेसकन िरकार बना िेने के बाद बीजेपी ने भक्तो् को धोखा सदया और मंसदर बनाना भूि गयी. सजि​िे जब अगिा चुनाव आया तो भक्तो्ने उन्हे्िे्गा सदखा सदया. िेसकन

उत्र् प्द् श े की राजनीसत िे दशको्िे बाहर चि रही बीजेपी को एक बार सिर राम याद आ रहे है्. इि बार अपने छद्​् िंगिनो् की मदद िे बीजेपी ने पत्थर भी दो चार ट्​्क मंगवा सिए है्. सजि​िे भक्तो्को ये सवश्​्ाि हो सक इि बार वह मंसदर बनवाकर ही दम िे्गे. गाय का मुद्ा गया तो मंसदर का मुद्ा िे आये. उन्हे्मुद्ा ही तो िाना है. िेसकन मामिा िुप्ीम कोट्म मे् है, ऐिे मे् बीजेपी को झूि मूि की बात नही्करनी चासहए. िाथ ही धम्म के नाम पर ऐिे नाटक अब बंद होने चासहए. अजय पाल, बहराइच (उत्​्र प्​्देश)

कम ध्यान देते है.् इिसिए आज यहां िोग गरीब होते जा रहे है्. ऐिे मे् इि प्​्देश को नशामुक्त बनाये जाने की जर्रत है.

ब्सथसत होती नजर आ रही है. राजनेता अब ित्​्ा के सिए क्या िे क्या नही् कर जाते है्. उनके विूि और इमान ऐिे सबकते है्. मानो िेिे पर आिू सबक रहा हो. शुक्वार के बीते अंक की िंपादकीय मे् इि बात को बहुत ही अच्छे िे िमझाने की कोसशश की गयी. सकि नेता की चाि, चसरत्​् और चेहरा पर अब जनता कैिे भरोिा करे.

िुशोदित राय, कटक (ओदिशा)

लािौर का िािसल क्या

मास्को मे् पुसतन िे गिबसहयां करने के बाद मोदी जी िीधे अिगासनस्​्ान पहुंचे और वहां भारत के मदद िे तैयार िंिद का उद्घाटन वािा िीता काटा. उिके बाद उिते हुए मोदी जी अचानक पासकस्​्ान पहुंच गये. ये यात्​्ा अचानक िी िगी न देश मे् न सवदेश मे् सकिी को इि बारे पहिे पता चि पाया सक मोदी जी अचानक पासकस्​्ान नवाज को हैप्पी बथ्मडे कहने जा पहुंचे्गे. खािकर चौथे खंभे मीसडया को भी इिकी भनक तक नही्िगी थी. भिे ही ये दौरा मीसडया के सिए योजनाबद्​् न रहा हो. िेसकन भारत का प्​्धानमंत्ी देश मे् कही् जाता है. तो 15 सदन पहिे िे िुरक्​्ा इंतजाम शुर्हो जाते है्. ये तो मोदी की पासकस्​्ान यात्​्ा है. तो अगर कोई कहे सक मोदी की पासकस्​्ान यात्​्ा अचानक यूं ही बन गयी. तो ये बात एक कोरी कल्पना और नािमझी मानी जायेगी है. अब बात आती है, इि दौरे िे समिा क्या? तो हर बार की तरह ये कहा जा िकता है सक एक और आतंकवादी घटना. इि बार जगह पिानकोट एयरबेि थी. कांग्ेि ने एक सवपक्​्ी के तौर इिे पासकस्​्ान िे समिा एक और धोखा बताया. बीते अंक मे् कुमार प्​्शांत के िेख ने इिकी बिी कायदे िे व्याख्या की थी. अफरोज आलम, रीवा (मध्य प्​्देश)

तगरिी मय्ाषदा

बीते दशक मे्राजनीसत का जो तमाशा देखने को समिा है. उि​िे आने वािे िमय मे् भयावह

दवकाि उप्​्ेती, जादूगोड़ा (झारखंि)

तकिाि से दूर िोिे िम

बीते अंक मे्छपा वस्तमका नंदा का िेख सकताबो् के मेिे ने हमे्पुस्क मेिे की महत्​्ा अच्छे िे बतायी. िेसकन ऐिा िगता है सक सकताबो् के प्​्सत िोगो् का र्ख िचीिा होता जा रहा है. आज िोग मोबाइि पर इंटरनेट के माध्यम िे पूरे सदन जुिे रहते है्. ऐिे मे्उन्हे्सकताबे्पढ़ने का वक्त नही्समिता है. इिका एक कारण और भी िोनो्ने अब पढ़ना बंद कर सदया है. श्​्ीराम िोनी, पटना (दबहार)

पाठको् से तनवेदन

शुक्वार मे्प्​्कािशत सरपोट्​्ो्और रचनाओ्पर पािको्की प्​्सतसक्​्या का स्वागत है़ आप अपने पत्​्नीचे िदए गए पते पर या ई-मेि िे भेज िकते है् एमडी-4/304, िहारा ग्​्ेि, जानकीपुरम, िखनऊ उत्​्र प्​्देश-226021 टेिीिैक्ि : +91.522.2735504 ईमेि : shukrawaardelhi@gmail.com


संपादकीय

फ्सल िीमा की नयी पिल ि

अंबरीश कुमार

जो ककसान कज्षका भुगतान नही्कर पाता है. उसे ककसानो्से संबंकित कई योजनाओ् का फायदा नही्किल पाता है. इसी वजह से फसल बीिा योजना को लेकर सवाल भी उठ रहे है्.

रकार ने सकिानो् के सिये कम दाम मे् ि​ि​ि का ज्यादा बीमा योजना को हरी झंडी देकर एक िकारात्मक कदम उिाया है. पर इिे िेकर अभी भी सकिानो् के मन मे् कई तरह की आशंका है. खेती की अथ्मव्यवस्था आम तौर पर कज्मपर सनभ्रम होती है. जो सकिान कज्म का भुगतान नही् कर पाता है. तो उिे सकिानो्िे िंबंसधत कई योजनाओ्का िायदा नही् समि पाता है. इिी वजह िे ि​ि​ि बीमा योजना को िेकर िवाि भी उि रहे है्. दूिरे इिके दायरे मे्आग और जानवरो्िे होने वािे नुकिान को शासमि नही्सकया गया है. देश मे् खेती और बागवानी मे् जानवरो् िे होने वािा नुकिान बढ़ता जा रहा है. मैदानी िे पहािी इिाको् मे् नीिगाय िे िेकर अन्य जंगिी जानवर खिी ि​ि​ि के सिये खतरा बनते जा रहे है्. बागवानो् की नयी मुिीबत िंगूर और बंदर है्. जो बिे पैमाने पर ि​िो् को नुकिान पहुच ं ाते है.् उतराखंड के कुमायूं अंचि की ि​ि पट्​्ी मे्करोिो्की कीमत के ि​ि बंदर हर िाि बब्ामद कर देते है्. शहरी इिाको् िे बंदरो् को िाकर ि​ि पट्​्ी मे्छोि सदया जाता है. सजि​िे सकिान और बागवान बब्ामद हो जाता है. दूिरी बिी िमस्या आगजनी की है. सजिे बीमा के दायरे िे बाहर रखा गया है. पहाि पर हर िाि गम्​्ी के सदनो् मे् आग िगती है, जो बढ़ते हुए आबादी तक पहुंचती है. इिकी वजह िे बगीचे भी आग का सशकार होते है्. ऐिे मे् बीमा के दायरे िे इन्हे् बाहर रखना िीक नही् था. बहरहाि जो भी पहि हुई है, उिका स्वागत सकया जाना चासहए. जिवायु बदिाव के इि दौर मे् िबिे ज्यादा िंकट सकिानो् को ही झेिना पिता है. िूखा िे िेकर बेमौिम बरिात तक. बाढ़ हो या सिर पािा पि जाये इिका खासमयाजा सकिान को ही उिाना पिता है. ि​ि​ि जबतक घर मे् न आ जाये सकिान आशंसकत रहता है. अचानक बरिात िे तबाही हो या िूखा पि जाये. तो िदमे िे सकिान ख़ुदकुशी कर िेता है. ऐिे मे् बीमा योजना िे कुछ तो राहत समिेगी. ि​ि​ि बीमा योजना अभी तक इिसिये भी कारगर नही् हो पाती थी. क्यो्सक इिका प्​्ीसमयम ज्यादा होता था. सजि​िे छोटे सकिान इि योजना का िाभ िेने के बारे मे्िोच भी नही् पाते थे. हो िकता है िरकार की इि नयी पहि िे सकिानो्को िायदा हो. पर िरकार को खेती सकिानी को िेकर िोि पहि करनी होगी. तभी

खेती बचेगी और सकिान भी बचेगा. देश मे्हर राजनैसतक दि सकिान की बात करता है. पर ित्​्ा मे्आने के बाद वह सकिान को भूि जाता है. कपाि सकिानो् के िंकट का उदाहरण िामने है. अमेसरका अपने देश के कपाि सकिानो्को सवसभन्न तरीके िे पचाि िीिद िे ज्यादा की िब्लिडी देता है. पर अपने यहां िरकार इि बारे मे्कोई बात नही्करती. िरकार की उदारीकरण की नीसत के बाद सकिान के परंपरागत बीज ख़त्म हो गये और आज वह पूरी तरह बहुराष्​्ीय कंपसनयो् के िहारे है्. इनका बीज िेने िे ही काम नही् चिता. इन बीजो् िे होने वािी ि​ि​ि को बचाने के सिये इन्ही् की सबरादरी की कंपसनयो् का कीटनाशक और उव्मरक भी चासहए. इिके िाथ पय्ामप्त पानी भी. यही वजह है सक इन बहुराष्​्ीय कंपसनयो्का बीज हर िाि सकिान को िेना पिता है. क्यो्सक ये बीज एक ही बार काम आता है. जबसक परंपरागत बीजो् िे सकिान आगे की ि​ि​ि के सिये बीज भी सनकाि िेता था. अब सकिान पूरी तरह बहुराष्​्ीय कंपसनयो् के हाथ मे् है. ऐिे मे् िरकार को कृसष क्​्ेत् के िुधार के सिये एक नही्कई कदम उिाने पिे्गे्. वन्ाम देश मे्जगह जगह सवदभ्मजैिे हािात पैदा हो जाये्गे. वैिे भी हसरत क्​्ांसत वािे पंजाब मे्सकिान ख़ुदकुशी करने िगा है. तो अंधाधुंध उव्मरक और कीटनाशक के इस्​्ेमाि िे कई तरह की गंभीर बीमासरयां बढ़ती जा रही है्. यह अब देश के कई प्​्देशो् मे् बढ़ता जा रहा है. आंध प्​्देश िे िेकर तसमिनाडु, कन्ामटक तक मे् सकिान ख़ुदकुशी कर रहे है.् तो मध्य प्द् श े , उत्र् प्द् श े और छतीिगढ़ मे्भी सकिान ख़ुदकुशी कर रहा है. सवदभ्म मे् तो अब खेती सकिानी के सिये महाजनो् ने सकिानो् को कज्म देना भी बंद कर सदया है. ऐिे मे्बै्क िे जो सकिान कज्मिेता है. वह भी चुका नही्पाता तो उिे ि​ि​ि बीमा का िाभ कैिे समिेगा यह िोचना होगा. क्या उन सकिानो् को भी ि​ि​ि बीमा का िाभ समि पायेगा. दूिरे अभी जो मुआवजे की व्यवस्था है उिमे्देश के कई सहस्िो्मे्पचाि िे िेकर डेढ़ िौ र्पये के चेक सदये जाने की घटनाये्िामने आ चुकी है. कही् इिी तरह ि​ि​ि बीमा का मुआवजा तो नही्समिेगा. इिसिये ि​ि​ि बीमा के िाथ िमूचे कृसष क्​्ेत्को िेकर नये नजसरये n िे देखने की जर्रत है. ambrish2000kumar@gmail.com शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

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आवरण कथा

सुरक्​्ा सवालो् का पठानकोट शरद गुप्िा

प

पठानकोट जैसे रणनीकत र्प से अहि वायुसेना के स्टेशन पर हुआ आतंकी हिला कई प्​्श्न छोड्गया है. जो पूरे घटनाक्​्ि की बारीक पड्ताल की िांग करते है्. सुरक्​्ा िे् हुई इस भारी चूक के जवाब तलाश ककये कबना राष्​्ीय कहतो् और सीिाओ्की सुरक्​्ा की बात करना बेिानी होगा. 6

शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

िानकोट एयर बेि पर आतंकी हमिे की कहानी मे् छेद ही छेद है्. सचंसतत करने वािी बात यह है सक ये देश की िुरक्​्ा िे जुि्ी है जबसक दुख की बात यह है सक इि कहानी को िच माना जा रहा है. यानी देश की िुरक्​्ा चाकचौबंद नही्है और अगर हम पिानकोट को गिती मानते ही नही्है्तो उिे दुर्स्करने के सिये भी कोई कदम नही्उिाया जायेगा. आतंसकयो् की िंख्या अब तक अस्पष्​् है क्यो्सक उनकी िंख्या छह बतायी जा रही थी जबसक शव केवि चार आतंसकयो् के समिे है्. िेसकन गोिीबारी इन चार के मरने के 24 घंटे बाद तक चिी तो बाकी के दो शव कहां है्? क्या वे चार-चार िुरक्​्ा एजे्सियो् का घेरा तोि्कर िरार हो गये? आसखर आतंकी देश मे् दासखि कैिे हुए? िरकार का कहना है सक वे रावी नदी पार कर 31 सदिंबर की रात सहंदस ु ्ान आये. िेसकन िाढ़्ेनौ बजे जब वे गुरदािपुर के

एिपी ि​िसवंदर सिंह को समिे तो उनके कपि्े गीिे नही्थे तो क्या उन्हो्ने कपि्ेबदिे? अगर हां तो गीिे कपि्े कहां है्? क्या कोई स्थानीय व्यब्कत उनकी मदद कर रहा था? या उनकी घुिपैि का रास्​्ा अिग था. एिपी िे उनकी मुिभेि् रात िाढ़्े नौ बजे हुई जब वह पासकस्​्ान िीमा पर बनी एक मज्ार िे िौट रहे थे. िेसकन उन्हो्ने स्थानीय िोगो् िे मदद की गुहार रात डेढ़् बजे िगायी. तो क्या वह िाढ़्ेचार घंटे आतंसकयो्की सगरफ्त मे् रहा? उि दौरान क्या हुआ? इन िब बातो् पर उिने चुपप् ी क्यो्िाध रखी है? उि अनजान िी मज्ार पर वह इि​िे पहिे कभी नही् गया था. तो पहिी बार जाने के सिये उिने रात के नौ बजे का िमय ही क्यो् चुना? उि​िे िीक बारह घंटे पहिे यानी उिी सदन िुबह नौ बजे एिपी का दोस्​्ज्ौहरी राजेश वम्ाम और एिपी का ख़्ानिामा मदन गोपाि उि मज्ार पर क्या करने गये थे? जबसक मज्ार खुिने का वक्त िुबह 11 बजे है? सिर रात नौ बजे दोनो्


आतंकी हमले के बाद िद्​्िय िैदनक: अनिुलझे िवाल

ि​िसवंदर के िाथ उिी मज्ार पर सिर क्यो्गये थे? वही्िे िौटते वक्त आतंसकयो्ने दोनो्को अगवा सकया था. पासकस्ा्न िीमा पर जाते िमय एिपी अपने िाथ दो-दो मोबाइि िे गये िेसकन हसथयार या िुरक्​्ाकम्​्ी िे जाना कैिे भूि गये? मजार िे िौटते वक्त एिपी ने दूिरा और पहिे िे िंबा रास्​्ा क्यो् चुना? वे रास्​्ा भूि गये थे या कोई और बात थी? आतंसकयो् ने एिपी की गाि्ी अगवा करने िे पहिे एक इनोवा अगवा की थी. उिके चािक की तो नृशंि हत्या कर दी गयी थी. उिके हाथ बांधकर गिा घो्ट सदया गया था, इिके बाद पेट मे् दो बार छूरा घो्पकर अंग काट सदये गये थे. इिके बाद उन्हो्ने अगर नीिी बत्​्ी के िािच मे्इनोवा छोि्कर एिपी की गाि्ी अगवा की तो उन्हे् और उनके खानिामे को सजंदा क्यो् छोि् सदया? क्या सि​ि्क इिसिये सक वे िरकारी एजे्सियो्को िंभासवत आतंकी हमिे के बारे मे् बता िके्? उन्हो्ने जौहरी को ही क्यो्मारा?

आतंसकयो् की एिपी िे मुिभेि् रात िाढ़्े सपछिी दीवार पर िगी कांटदे ार बाि्काटी गयी नौ बजे हुई. एिपी को डेढ़् बजे छोि्ा और थी और वहां की चार फ्िड िाइटो्का र्ख़्भी ज्ौहरी को िाढ़्े तीन बजे. ज्ौहरी के मोबाइि दीवार िे हटाकर आिमान की ओर कर सदया पर उन्हो्ने पासकस्​्ान मे्बैिे अपने आकाओ्िे गया था. यानी घुिपैि करने वािो पर सकिी की जो बात की उि​िे िाि् है सक तब तक उनके नजऱ न पि्े. िेसकन हैरत की बात है सक एक दो िाथी एयर बेि के अंदर पहुंच चुके थे. जनवरी को हमिे की पूव्मिूचना समिने के बाद िेसकन हमिा शुर् हुआ उिके 24 घंटे बाद भी ये चूक कैिे जारी रही? पिानकोट एयरबेि पर हमिा करने वािे यानी अगिी रात को िाढ़्ेतीन बजे. इि दौरान ये चारो्कहां रहे, क्या कर रहे थे? बेि के अंदर छहो् आतंसकयो् के मारे जाने के बाद भी वहां पहुंच चुके उनके दो िाथी 24 घंटे कहां रहे? करीब 45 धमाके हुए. बुिेट्ि की 27 मैगजीन क्या करते रहे? क्या बेि के अंदर िे उन्हे्कोई भी बरामद हुई्. आसखर छह आतंकी इतने मदद कर रहा था? एिपी की गाि्ी दोपहर मे् हसथयार िेकर घुिे कैिे? कही् उन्हे् एयरबेि एयरबेि िे महज डेढ़् ि​ि्ा​ा्ग दूर खि्ी पायी के अंदर िे कोई मदद तो नही्समिी? समिी तो गयी. पंजाब पुसि​ि, वायु िेना के गर्ि्कमांडो, क्यो्? पैिो्के िािच मे्या सिर सवचारधारा की िेना के जवान और डीएि​िी जवान िभी को वजह िे? पिानकोट मे्कम िे कम पांच-छह आतंसकयो् की खोज मे् िगाया गया. िेसकन ि्ोि्मएक िाथ ि​ि्रही थी्िेसकन सबना सकिी सकिी को न तो कही् आतंकी सदखे और न ही तािमेि के. पंजाब पुसि​ि, सडिे्ंि सिक्योसरटी िुरक्​्ा मे् कही् कोई कमी. तब तक खुसिया कोर, राष्​्ीय िुरक्​्ा गाड्म (एनएिजी), एजे्सियो् ने ज्ौहरी के ि्ोन िे आतंसकयो् के बीएिएि्, एयर ि्ोि्म और िेना के जवान. पासकस्​्ान मे् बैिे अपने आकाओ् को सकये िुरक्​्ा सवशेषज्​्ो् का मानना है सक सकिी भी कॉि के सडटेल्ि सनकाि सिये. पाया सक वे ऑपरेशन मे्एक स्पष्​्चेन ऑि् कमांड होनी एयरबेि पर हमिे की सिराक मे्है्. उनमे्िे दो चासहए. िभी को मािूम होना चासहए सक तो उि िमय तक एयरबेि मे् दासखि भी हो कमांडर कौन है और उिी की बात माननी होगी. चुके थे. िाि घंटो् तक चिे ऑपरेशन के बाद ऑपरेशन की ि​ि​िता या सवि​िता के सिये ि्ौज को हर आतंकी के शव के पाि िे 70-80 उिी की सजम्मेदारी होगी. िेसकन पिानकोट मे् कम िे कम चार सकिो तक गोिा-बार्द और अन्य िामान समिा. इतना वजऩ िेकर उन्हो्ने नदी कैिे पार कमांडर अपनीअपनी टुकसडय़ो् को िंभाि रहे की होगी? या चौदह सिट ऊंची बेि की थे िेसकन सकिी को मािूम ही न था सक दूिरा चहारदीवारी कैिे कूदी होगी? इि िामान मे् क्या कर रहा है. यही वजह है सक छह खाने-पीने की चीजो्के अिावा दवाइयां भी क्यो् आतंकवादी िात जवानो् को मार सगराने मे् थी्? इतना भार वे पासकस्​्ान िे बैकपैक मे्िा ि​ि​ि रहे. जबसक िुरक्​्ा बिो् ने तीन सदन िे नही् िकते था तो क्या कोई स्थानीय मददगार ज्यादा िमय तक चिे असभयान मे् चार था सजिने ये हसथयार पहिे ही बेि मे् िाकर आतंकवादी मारे. एक आतंकवादी को तो एयरि्ोि्म बेि के एक रिोइये ने उिी की जमा कर सिये थे? बाद मे् मािूम चिा सक एयरबेि की रायि्ि छीन कर मार सगराया. यह इिके पठानकोट मे् िेनाध्यक्​्ो् के िाथ नरे्द् मोदी: लकीर पीटने की कवायद

शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

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आवरण कथा

बावजूद सक हमिे िे बारह घंटे पहिे एनएिजी के 168 जवान सवशेष तौर पर एयर बेि की िुरक्​्ा के सिए पिानकोट मे् तैनात सकये जा चुके थे. उनकी कमान उनके आईडी (ऑपरेशि ं ) के हाथ मे्थी. उनिे पहिे ही एक स्​्िगेसडयर के नेततृ व् मे्दो कॉिम यानी 50 िेना के जवान वहां तैनात सकए गये थे. हमिा शुर् होने के बाद एयर ि्ोि्मकी पस्​्िमी कमांड के कमांडर भी पिानकोट भेज सदए गये. उनका रैक ् एयर माश्मि का था. एनएिजी का आईडी िेना मे्मेजर जनरि रै्क का होता है यानी स्​्िगेसडयर िे िीसनयर. जबसक एयर माश्मि मेजर जनरि िे कही् ज्यादा िीसनयर होता है. िेसकन पूरे असभयान की कमान एनएिजी के पाि थी इिसिए एयर माश्मि और स्​्िगेसडयर दोनो्थोि्ा पीछे हट गये थे. िीसनयर-जूसनयर की इि जंग मे् नुकिान तािमेि का हुआ. िेसकन बेि के बाहर का मोच्ाम पंजाब पुसि​ि के हाथ था. छह महीने पहिे पि्ोि के गुरदािपुर सजिे के दीनानगर पुसि​ि स्टश े न पर हुए हमिे के दौरान भी पुसि​ि ने िेना की जांच मे्िहयोग नही्सकया था. इिी तरह इि बार भी पुसि​ि ने अपने ही एिपी ि​िसवंदर के बयान की जांच मे् इतनी देर कर दी सक मामिा हाथ िे सनकि गया. आतंसकयो् ने 31 सदिंबर की रात िाढ़्े नौ ि​िसवंदर की कार पर क्ल्ज्ा सकया था. उिने दो बजे कंट्ोि र्म को बताया िेसकन सकिी िीसनयर को नही्. डीआईजी और आईजी ने उिके बयान पर सवश्​्ाि नही्सकया. इि बीच उिके दोस्​् के घायि अवस्था मे् समिने पर ि​िसवंदर के बयान पर उन्हे् भरोिा हुआ. तब मामिा राष्​्ीय िुरक्​्ा ि​िाहकार असजत डोभाि तक िे जाया गया. उन्हो्ने तुरंत एनएिजी को पिानकोट भेजने का आदेश सदया. एनएिजी को वहां पहुंचने मे् देर रात हुई और जब तक उनकी तैनाती हुई तब तक हमिा हो 8

शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

िलदवंदर दिंह: शक का दायरा चुका था. एयरबेि मे्आतंकी 1 जनवरी की रात पहुंचे. जबसक दो जनवरी की िुबह एनएिजी एयरबेि मे् घुिी. तब तक पंजाब पुसि​ि और डीएि​िी के जवान मोच्ाम िंभािे हुए थे. डीएि​िी के जवान दरअि​ि सरटायर िैसनक होते है्. उनिे ऐिे महत्वपूण्म िैन्य स्थि की िुरक्​्ा कर पाने की सजम्मेदारी डािना उसचत नही् था. इिी तरह पंजाब पुसि​ि के जवान भी आतंकवाद िे ि​ि्ने के सिए उि तरह िे प्​्सशस्​्कत नही्होते जैिे िेना और एनएिजी के जवान. बीते कुछ िमय िे पासकस्​्ान के ड्​्ग स्मगसिंग सिंडीकेट के िाथ पंजाब पुसि​ि की िांिगांि के मामिे भी िामने आये है्. ऐिे मे् आतंसकयो् िे मुकाबिे की सजम्मेदारी िेना पर होनी चासहये थी. कमांड भी उिी के हाथो्होनी चासहये थी. ख़्ाितौर पर इिसिये क्यो्सक बीते ित्​्र िािो् िे कश्मीर मे् आतंसकयो् िे िोहा एनएिजी नही् बब्लक िेना िे रही है. और इिसिए भी क्यो्सक जैिे एयर ि्ोि्महवा मे्और नेवी िमुद्मे्िडऩे के सिए प्​्सशस्​्कत है वैिे ही आम्​्ी की महारथ ज्मीन पर िडऩे मे्है. िेना की उत्​्री कमांड के कमांडर रहे पूव्म िेब्फटने्ट जनरि एच एि पनाग का कहना है सक इि आतंकी हमिे के पीछे बि्ी रणनीसतक चूक हुई. एिपी के अपहरण के बाद िे ही यह िूचना थी सक आतंकी वायुिेना सिकाने को सनशाना बना िकते है्. इिके बावजूद 24 घंटो् मे् इन आतंसकयो् को पकि्ा नही् जा िका, न ही वायुिेना के सिकाने की िुरक्​्ा इतनी पुख्ता की गयी, सजि​िे पंछी भी पर नही्मार िके. वे पूछते है् सक ऑपरेशन की रणनीसत सदल्िी मे् क्यो्बनी? पिानकोट मे्मौजूद िेना की 29वी् सडसवजन के जीओिी को क्यो् नही् ऑपरेशन की कमान िौ्पी गयी. स्थानीय िोगो्की मदद क्यो् नही् िी गयी, जो िंसदग्धो् की िटीक जानकारी दे िकते थे. पनाग ने कहा, अगर आतंसकयो् के होने की िूचना समिने के बाद

एयरबेि मे्गश्त बढ़्ायी जाती, तो यह नौबत ही नही् आती. िुरक्​्ा ि​िाहकार असजत डोभाि इि हमिे को रोक िकते थे. िुरक्​्ा एजे्सियो् की िूचना के बावजूद असजत डोभाि ने सदल्िी िे मंगायी गयी टीम पर ज्यादा भरोिा सकया. जबसक पिानकोट मे् िेना की टुकसियां मौजूद थी िेसकन उनका इस्​्ेमाि नही्सकया गया. पिानकोट मामिे मे् डोभाि की भूसमका िबिे ज्यादा सववासदत रही है. उन्हो्ने ही िेना का एयर बेि बचाने के सिए एनएिजी भेजी. इि​िे िोशि मीसडया पर ट्​्ेड चि गया - देश की िुरक्​्ा िेना के हाथो्मे्और िेना की िुरक्​्ा डोभाि के हाथो् मे्. डोभाि तो इतने शब्कतशािी है् सक 2 जनवरी को हमिे की िूचना आने के बाद के्द्ीय गृहमंत्ी िसहत कई महत्वपूण्म िोग उन्हे् ि्ोन कर पिानकोट की ताज्ा जानकारी िेने की कोसशश करते रहे. िेसकन डोभाि ने सकिी का ि्ोन सरिीव ही नही् सकया. नतीजा यह हुआ सक अधकचरी जानकारी के आधार पर पहिे सदन शाम को ही आतंकी हमिे को खत्म घोसषत तर सदया गया. गृहमंत्ी राजनाथ सिंह ने रात आि बजे ट्वीट के ज्सरए िैन्य बिो् को बधाई दे दी. रक्​्ामंत्ी मनोहर पस्रमकर ने रात नौ बजे और खुद प्​्धानमंत्ी ने रात दि बजे ट्वीट सकया. िेसकन अगिे सदन िुबह सिर ि्ायसरंग शुर् होने िे मािूम चिा सक हमिा अभी जारी है. िभी ने अपने ट्वीट सडिीट सकये. इि तरह के सववादो्और िवािो्की वजह िे प्​्धानमंत्ी नरे्द् मोदी ने खुद पिानकोट जाकर मौके् का सनरीक्​्ण करने का िैि​िा सकया. िेसकन बाहर सनकि कर उन्हो्ने िभी को क्िीन सचट दे दी. यानी कही्कोई चूक नही्हुई और आतंसकयो्पर िही और िमय पर कार्​्ावाई की गयी. िेसकन यह कह कर उन्हो्ने िीडरसशप के उि सनयम की धस्​्ियां उि्ा दी्जो कहता है सक िीडर को पहिी ग्िती खुद माननी चासहये. िेसकन प्​्धानमंत्ी तो अभी भी पासकस्​्ान िे बातचीत रखने के पक्​्मे्है.् जबसक दि िाि की यूपीए िरकार के दौरान हर आतंकी हमिे के बाद उनका कहना होता था सक पाक एक शत्​्ु देश है. सजिे िव िेटर सिखने के बजाय उिके अंदर घुिकर उिे उिी की भाषा मे्जवाब देना चासहये. वे िगातार यूपीए िरकार को कायर, कमज्ोर, डरपोक जैिे सवशेषणो्िे नवाजते रहे. 26/11 के मुंबई हमिे जारी ही थे सक मोदी अपने िरकारी जहाज िे मुंबई आये और प्​्ेि कांफे्ि की. उन्हो्ने मारे गये हर जवान के सिए एक करोि् की िहायता गुजरात िरकार की ओर िे घोसषत की. यही नही्, भाजपा ने िारे आखबारो्मे्िुि ् पेज सवज्​्ापन देकर कांगि े् की नाकामी की आिोचना की. तब तक आतंकी n हमिा खत्म नही्हुए थे.


अजय साहनी

क़ाहिली के बाद मुस़ैदी

सबसे अहि सवाल है कक आतंकी वायुसेना की िुस्ैद व्यवस्था िे्से्ि लगाने िे्कैसे काियाब हुए.

आ

तंकी घटनाओ् के इसतहाि मे् पिानकोट हमिा अपने आपमे् अिग है. एक तो देश के िबिे बहुमूल्य और िबिे िंवेदनशीि सिकाने पर आतंकी हमिा सकया गया. िबिे िुरस्​्कत होने का दावा करने वािी भारतीय वायुिेना के बेि कै्प पर हमिा हुआ, जबसक पासकस्​्ान के िाथ सकिी भी िंभासवत युद् मे् इि पिानकोट हवाई पट्​्ी का योगदान महत्वपूणम्माना जा िकता है. दूिरी बात, ऑपरेशन शुर् होने िे कािी िमय पहिे िे दहशतगद्​्ो् ने अपने जाि सबछा सिये थे. इि तरह के आतंकी हमिे हो िकते है्, इिकी भनक खुसिया िूत्ो्को िग जानी चासहए थी. वैिे भी खाि खुसिया जानकारी तो होती ही है सक देश के िंवेदनशीि सिकाने आतंसकयो् के सनशाने पर है्. सिर भी हमिा हुआ. बेहतरीन खुसिया तंत् और व्यवब्सथत त्वसरत कार्मवाई के दावो् के बावजूद आतंकी वायुिेना की मुस्ैद व्यवस्था मे्िे्ध िगाने मे्कामयाब हुए उनकी कामयाबी का पैमाना इिी िे मापा जा िकता है सक वे बि्ा नुकिान पहुंचा गये, सजिमे्िात सजंदसगयो्की हासन भी है. हािांसक हमारे सिए राहत की बात यह रही सक वे ‘तकनीकी क्त्े ’् मे्दासखि नही्हो पाये, जहां िामसरक तंत् था, हवाई हमिो् के दौरान इस्​्ेमाि मे् आने वािे हसथयार थे. ि​ि्ाकू सवमानो् को भी नुकिान पहुंच िकता था. जो भी ऑपरेशनि कार्मवाई हुई, उनमे्मौजूद कसमयो्के बारे मे्कािी कुछ कहा-िुना जा चुका है. यहां तक सक राज्य एजे्सियो् के तौर-तरीको् पर भी िवाि उिे है् और ये एजे्सियां भी ऑपरेशनि कार्मवाई की पूरी तरह िे जांच कर रही है्. िेसकन अगर िुरक्​्ा हमारी और हमारे देश की िव्​्ोपसर प्​्ाथसमकता है, तो जो कुछ हुआ, उिमे्मुस्ैदी और कासहिी के िक्क का अंदाजा िग जाता है. हर बि्ेआतंकी हमिे के बाद चीखचीखकर यह िवाि उिाया जाता है सक यह कैिे हुआ, देश का भावनात्मक ज्वार चरम पर पहुंच जाता है. िोग विादारी की किमे् खाते है्, राष्​्वाद का डंका बजता है, ‘जैिे को तैिा’ की बात कही जाती है. बावजूद इन िबके, हकीकत यह है सक भारतीय जमीन पर सपछिे तीन दशक िे असधक िमय िे पासकस्​्ान आतंकवाद को प्​्ायोसजत कर रहा है. आतंकवाद का खतरा उन स्थानो्पर भी है, जो िबिे असधक िुरस्​्कत और िंवेदनशीि है्. सिर भी हम खुशसकस्मत है् सक आतंसकयो् ने यहां वैिे सवध्वंिक तौर-तरीके नही् अपनाये है्, जैिा वे अन्य देशो् मे् अपना रहे है्. भारत मे् आतंकी घटनाओ् का तौर-तरीका अपेक्ाकृत पारंपसरक ही है और हमारी िुरक्​्ा एजे्सियां इि​िे कुि जमा वासकि है्. इिके बावजूद जब हम आसखरी आतंकी हमिे पर नजर डािते है् और वहां सकिी भी तरह का नया पैटन्मसदखता है, तो हम यह भी पाते है् सक खुसिया और िुरक्​्ा एजेस्ियो्के सिए यह अबूझ पहेिी जैिा हो गया है. ऐिे मे्रािायसनक, जैसवक, रेसडयोधम्​्ी और परमाणु आतंकवाद िे जुि्ी

सचंताओ्मे्हम अपने आपको अिहाय ही पा िकते है्. िच कहा जाये, तो हम अभी यह बताने की भी ब्सथसत मे् नही् है् सक ऐिे हमिो् मे् हम क्या करेग् .े बचाव, प्स्तस्​्कया और प्स्तशोधात्मक कार्वम ाई िभी स्र् ो्पर हमारी यही ब्सथसत है क्यो्सक हर आतंकी घटना के बाद आम तौर पर बदतर रणनीसतक सवश्िेषण होता है, आरोप-प्​्त्यारोप का दौर चिने िगता है और जल्द ही पूरे मामिे को रिा-दिा कर भुिा सदया जाता है. अि​ि िमस्या यह है सक भारत मे्सजंदगी का कोई मोि नही्बचा है. हम शहादत को जल्द ही भूि जाते है्और सजंदगी सिर िे पुराने ढर्​्ेपर िौट आती है. यही बुसनयादी वजह है सक हमारी िांस्थासनक क्​्मताएं सशसथि पि्ी हुई है् या दशको्िे अपनी जर्रतो्और खच्​्ो्के अंतस्वमरोध का िामना कर रही है. पुसि​ि, खुसिया एजे्िी और िुरक्​्ा बिो्की क्​्मताएं और कासबसियत, दोनो् िवािो् के घेरे मे् है. ऊपर िे राजनीसतक हस्​्क्ेप, तक्कहीन स्​्कयान्वयन और सवत्​्ीय र्कावट के कारण आतंरसक िुरक्​्ा िे जुि्ी कई पसरयोजनाएं िंबे िमय िे अटकी पि्ी है्. यह िब इिसिए भी है सक देश मे्एक सियािी िमझ बनी हुई है सक हर िमस्या को सियािी तरकीबो्िे ही िुिझाया जा िकता है. हर कोई इि मामिे मे् खुद को चाणक्य िमझता है. वैिे भी इि आतंकी घटना के बाद राजनीसतक बयानबाजी तेज हो चुकी है और मौजूदा राजनीसतक सवश्िषे ण मे्इि पर जोर है सक पासकस्​्ान के िाथ बातचीत चिती रहे और पासकस्​्ान के िामने िुबूत पेश करने के सिए पिानकोट हमिे को एक अविर के तौर पर सिया जाना चासहए. हकीकत यह है सक पासकस्​्ान िमस्थमत आतंकवाद के िंदभ्म मे् हम पासकस्​्ान और बाकी दुसनया को कािी िुबूत दे चुके है्. सिर भी अंतरराष्​्ीय िमुदाय मौन है, तो वह दरअि​ि इि मामिे की अनदेखी कर रहा है. जैिे, अमेसरका पहिे ही दो व्यब्कत डेसवड हेडिी और तहव्वरु राना को 26/11 मुबं ई हमिे मे्दोषी पा चुका है और उिके पाि इि हमिे मे्पासकस्​्ानी हाथ होने के पय्ापम त् िुबतू है.् इिी तरह, अमेसरका ने िश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा के मुसखया हासिज मोहम्मद िईद के सखिाि 10 समसियन डॉिर का इनाम रखा है. इि िंगिन का के्द् पासकस्​्ान ही है. िेसकन अमेसरका का नजसरया अिग है. अिगासनस्​्ान मे् पासकस्​्ान िमस्थमत तासिबानी हमिे मे् उिके हजारो् िैसनको् की जान गयी, िेसकन तब भी पासकस्​्ान को अमेसरकी मददइमदाद जारी है. इिसिए अंतरराष्​्ीय िमुदाय के िामने नये िुबतू पेशकर यह उम्मीद िगाना सक वे हमारी ि​ि्ाई ि​ि्े्गे, वास्​्व मे् अपना वक्त खराब करना ही है. पासकस्​्ान िे बातचीत चिती रहे या बात बंद हो, इि​िे आतंसकयो् को िबक नही् सिखाया जा िकता, बब्लक जर्री यह है सक आतंकवाद के सखिाि सनण्मयात्मक कार्मवाई का िबक हम िीखे्. n (िेखक इंब्सटट्​्ूट िॉर काॅनब्फिक्ट मैनेजमे्ट के सनदेशक और िुरक्​्ा सवशेषज्​्है्. आिेख श्​्ुसत समत्​्ि िे बातचीत पर आधािरत) शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

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आवरण कथा

नरे्द् मोदी के िाथ अदजत िोवाल: कहां हुई चूक

तालमेल मेंे घालमेल

पठानकोट िे्हुए आतंकी हिले से कनपटने िे्सरकारी स्​्र पर तालिेल की सख्त किी कदखाई दी. सुरक्​्ा िे्यह कवफलता बतलाती है कक कपछली घटनाओ् से कोई सबक नही्सीखा गया. ति​िेक सक्सेना

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त्​्ा के गसियारो्मे्यह चच्ाम शुर्हो गयी है सक पिानकोट मे् 60 घंटो् तक चिे ऑपरेशन मे्िात िोगो्की जान गंवाकर हमने जो हासि​ि सकया क्या उिे उपिब्लध माना जा िकता है? अपह्त पुसि​ि अधीक्​्क ि​िसवंदर सिंह िे यह जानकारी समिने के बाद भी सक आतंकवादी वहां पहुंच चुके है्, हम उन्हे् एयरिोि्म बेि मे् घुिने िे नही् रोक पाये और िात अनमोि जाने्गंवानी पि्ी्. पहिी चूक तब हुई जब भारत-पाक िीमा पर तैनात िीमा िुरक्​्ा बि भारी हसथयारो्और

10 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

गोिाबार्द िे िैि आतंसकयो् को िीमा मे् प्​्वेश करने िे रोकने मे्अक्​्म रहा. बाद मे्भी पंजाब पुसि​ि ने उन्हे् आतंकवादी के बजाय डाकू मानना बेहतर िमझा. गृह मंत्ािय का मानना है सक इि बार भी वही गिती दोहरायी गयी जो सक 2008 मे् मुंबई मे् ताज होटि पर हमिे के मामिे मे्की गयी थी. तब भी खुसिया एजे्सियो् ने हमिे िे पहिे आतंकवासदयो् व उनके आकाओ के बीच हो रही जो बातचीत िुनी थी उिमे् बार-बार ताज होटि का सजक्​् सकया गया था. इिके बावजूद मुंबई पुसि​ि को ितक्क नही् सकया गया न ही वहां की िुरक्​्ा व्यवस्था पुख्ता की गयी. माना सक एिपी ि​िसवंदर सिंह रंगीन समजाज आदमी है्िेसकन उनकी दी गयी िूचना तक की पंजाब पुसि​ि व उिके आिा अि​िरो् ने परवाह नही् की. उन्हे् िगा सक वह नशे मे् ऐिी बाते्कह रहे है्. िच्​्ाई का पता िगने के बाद भी हमारी एजे्सियां यह पता िगाने मे् नाकाम रही्सक घुिपैसियो्की िंखय् ा सकतनी है, उनका सनशाना क्या है और वे सकि तरह के गोिाबार्द िे िैि हो िकते है्?

यह ब्सथसत तो तब थी जब एक जनवरी की िुबह ड्​्ाइवर इकनार सिंह की िाश समि चुकी थी और एिपी की गाि्ी एयर िोि्म बेि के करीब समि चुकी थी. उनके िाथी राजेश वम्ाम को अस्पताि मे्भत्​्ी करवाया जा चुका था और उिने इन हमिावरो्के बारे मे्खािी जानकारी दे दी गयी थी. पंजाब के मुख्यमंत्ी िुखबीर बादि के मुतासबक उन्हो्ने 1 जनवरी की िुबह िात बजे ही के्द् िरकार को इि घुिपैि की जानकारी दे दी थी. इिके िाथ ही सदल्िी कमान, पस्​्िमी कमान, पंजाब पुसि​ि, प्​्धानमंत्ी कायाि्मय, मानेिर ब्सथत नेशनि सिक्योरटी गाड्म, िब िस्​्कय थे. आतंकवासदयो् ने भी िैि िोन छीनकर बि्ी गिती कर दी थी. इनके जसरये पासकस्​्ान मे् होने वािी बातचीत को िुना जा रहा था. एजे्सियो् ने एक आतंकवादी की मां के उिे मरने के पहिे खाना खा िेने और पासकस्​्ानी आका के एिपी को सजंदा छोि् देने के सिए िताि्े जाते भी िुना. ब्कवक सरएक्शन टीम को िस्​्कय होने के आदेश सदये जा चुके थे. पर उि​िे पहिे आतंकवादी िस्​्कय हो चुके थे. जब यह टीमे् यह िोचकर


मुख्य द्​्ारो् पर उनकी प्​्तीक्​्ा कर रही थी सक शायद वे िोग वहां िे प्​्वेश करे्गे, उि िमय तक तो वे दीवार िांद कर घुि चुके थे. वे बीएिएि, पंजाब पुसि​ि ही नही् गर्ि् आैर सडिेि ् िस्वि म कोर की भी नजरो्मे्धूि झो्कने मे् कामयाब रहे. हमारी िुरक्​्ा मे् सकतनी खासमयां थी इिका अंदाजा तो इि​िे ही िगाया जा िकता है सक इि एयरबेि की चार दीवारी के बाहर पेट्ोसिंग ही नही्होती है. उि रात एक सहस्िे की भी फ्िड िाइट खराब थी. यह आतंकवादी पंजाब मे्उि जगह िे दासखि हुए जहां नदी बहती है और कोई बाि्नही्है. वहां िगे थम्ि म कैमरे काम ही नही्कर रहे थे. इि​िे पहिे भी दीनानगर कांड की जांच िे पता चिा था सक आतंकवासदयो्ने यही्िे प्व् श े सकया था पर कोई िुधारात्मक कदम नही् उिाए गये. िुरक्​्ा एजेसियो्को खबर थी सक ऐिा हमिा हो िकता है िेसकन इिके बावजूद न केवि वे आिानी िे प्व् श े कर गये बब्लक उन्हो्ने दो कारो् पर कल्जा सकया. वे 35 सकिोमीटर का ि​िर तय करके एयरिोि्मबेि तक पहुच ं .े वे 24 घंटे तक हसथयारो्िे िैि होकर आराम िे घूमते रहे पर सकिी ने उन्हे् नही् रोका. पंजाब पुसि​ि के मुतासबक उन्हे्जो आईबी िे जानकारी समिी थी वह सबना सकिी िोि िबूत या जानकारी वािी थी. उिमे् यह नही् बताया गया था सक यह आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद के है्और उनका सनशाना पिानकोट ब्सथत वायुिने ा का सिकाना

मनोहर पार्​्ीकर: दजम्मेदारी दकि पर है. आईबी ने तो िश्कर-ए-तोएबा का नाम सिया था. इि इिाके की िुरक्​्ा मे्सकतनी खासमयां थी् सक वे नायिान की रब्सियो्के िहारे दीवार पार कर घुिने मे्कामयाब हो गये! पिानकोट का एयरबेि 25 सकमी इिाके मे् िैिा हुआ है. वहां वायुिैसनको् के 10 हजार पसरवार रहते है्. इि िमय अिगासनस्​्ान, बांग्िादेश, म्यामांर और नाइजीसरया की वायुिने ा के 23 अि​िर भी वहां प्स्शक्ण ् िे रहे है.् खतरा इि बात का था सक कही्इन िोगो्को बंधक न बना सिया जाये. इिके अिावा वहां समग और एमआई हैिीकाप्टरो्को भी नुकिान पहुच ं ने का खतरा था. हमिावर आतंकवादी 50 सकग्​्ा अि​िहा, 30 सकग्​्ा हथगोिे और बि्ी तादाद मे्आग िगाने वािे जैि िे िैि थे. जब 2 जनवरी को तीन आतंकवादी मार सगराये गये तो पिानकोट और सदल्िी मे्इि पर नजर रख रहे िोग इि ित्य िे अनसभज्​्थे सक अभी वहां और भी आतंकवादी हो िकते है.् एयर ट्स्ैिक कंट्ोि मे्इि खुशी पर जाम टकराये जाने िगे तो सदल्िी मे् गृहमंत्ी ने ट्वीट करते हुए आपरेशन की ि​ि​ि िमाब्पत पर बधाई दे डािी. इि िंकट िे सनपटने मे् राष्​्ीय िुरक्​्ा ि​िाहकार अजीत डोभाि की भूसमका पर भी िवासिया सनशान िग गये है.् पूरे मामिे मे्रक्​्ा मंत्ी मनोहर पस्रमकर, गृहमंत्ी राजनाथ सिंह की बहुत िीसमत भूसमका रही. िब कुछ अजीत डोभाि ने िंभािा हुआ था.वह िीधे प्​्धानमंत्ी

नरे्द् मोदी को ि्​्ीि कर रहे थे. िबिे बि्ी आिोचना इि बात की हो रही है सक पिानकोट मे्िेना की उपिल्धता होने के बावजूद उिकी मदद क्यो्नही्िी गयी. पिानकोट के अिावा पाि के नगरौटा, जम्मू, अमृतिर, जािंधर, अंबािा, मोि (सशमिा) भारी तादाद मे् िेना तैयार होने के बावजूद एनएिजी की मदद िी गयी. कैसबनेट िसचव तो मूक दश्क म बन कर रह गया. देश के िव्​्ोच्​् प्​्शािसनक असधकारी हो यह पता ही नही्था सक इि िंकट िे कैिे सनपटा जा रहा है. गृह मंत्ािय के िूत्बताते है्सक 1 जनवरी की दोपहर तक एयर बेि मे्िुरक्​्ा प्​्बंध सकये जा चुके थे क्यो्सक यह आशंका थी उिे या मैमनू कैट् को सनशाना बनाया जा िकता है जहां 29 इनिै्टरी सडवीजन तैनात है. िारी रणनीसत राष्​्ीय िुरक्​्ा ि​िाहकार अजीत डोभाि की देखरेख मे् बनी. उन्हो्ने थि​िेना, वायुिेना प्​्मुखो् और इंटेिीजे्ि ल्यूरो के सनदेशको् की बैिक बुिायी सजिमे् हािात िे सनपटने पर सवचार सवमश्महुआ. यह तय सकया गया सक िेना वहां िुरक्​्ा का काम देखेगी जबसक एनएिजी, आतंकवासदयो् की तिाश कर उनिे सनपटेगी. पंजाब पुसि​ि ने वहां छानबीन शुर् कर दी पर वहां रहने वािो्को सवश्​्ाि मे्नही्सिया गया. यह भी तय नही् हुआ सक पूरे आपरेशन का कमांडर कौन होगा. िारा सनयंतण ् सकि के हाथ मे् रहेगा. आि्​्य्म की बात तो यह है सक इतने आिा अि​िरो् ने भी यह िवाि नही् सकया. पिानकोट ब्सथत 29 इनिै्टरी सडवीजन के वसरष्​्तम अि​िर जनरि आसि​िर कमांसडग को कंमाड और कंट्ोि के सिये कोई सजम्मेदारी ही नही् िौपी गयी. वहां वायुिेना, िेना, एनएिजी, पंजाब पुसि​ि और बीएिएि मौजूद थी पर कमान सकि के हाथ मे् थी यह पता ही नही् था. तमाम िेनाये् मौजूद थी् पर िेनापसत का पता ही नही्था. इतनी अक्िमंदी जर्र की गयी सक सनगरानी और हमिा करने के सिए दो हैिीकाप्टरो्को छोि्कर बाकी के िारे सवमानो् और हैसिकाप्टरो् को वहां िे उि्ाकर दूिरी जगह िे जाया गया. कमांड और कंट्ोि न होने के कारण इन एजे्सियो् के बीच टकराव उभर कर िामने आया. एनएिजी के आईजी और आम्​्ी की स्पेशि िोि्म के कमांडर एएि बेिती के बीच कुछ कहा िुनी हो गयी. मामिा सदल्िी तक पहुंचा तो राष्​्ीय िुरक्​्ा ि​िाहकार ने यह तय सकया सक एनएिजी के आईजी ही िारा िमन्वय करे्गे. पर उनके पाि न योग्य स्टाि था और न ही िंचार व्यवस्था थी. नतीजा यह हुआ सक मुिभेि्इतनी िंबी चिी. आतंकवासदयो्ने वहां पस्​्िमी सकनारे िे घुिपैि की थी. पर वहां िुरक्​्ा मजबूत करने के कोई उपाय नही्सकया शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 11


आवरण कथा

लाहौर मे् नवाज शरीफ और नरे्द् मोदी: नीदत के अंतद्विरोध गया. वहां कम िे कम एक इनिैट् री बटासियन की िंसिप्तता के कारण आतंकवाद िंबंधी तैनात की जा िकती थी. वहां छुपे मामिो्िे सनपटने मे्होने वािी देरी िे सनपटना आतंकवासदयो्ने 2 जनवरी की ति्के 3.30 पर था. इि एजे्िी को राज्य पुसि​ि को बताये सबना डीएि​िी मेि पर हमिा सकया जहां सन:शस्​् ही तिाशी िेने और सगरफ्तारी करने का जवान अपना नाश्ता तैयार कर रहे थे. इिमे् असधकार सदये जाने का प्​्ावधान था. इिका पांच िोग मारे गये. गर्ि्का एक एयरमैन भी गुजरात िमेत तमाम भाजपा शासित राज्यो् ने शहीद हुआ. वहां एनएिजी पहुंची, िेना भी आ सवरोध सकया. उन्हो्ने इिे के्द् का राज्य के गयी. शाम तक चार आतंकवादी मारे जा चुके मामिो्मे्हस्​्क्ेप माना क्यो्सक उनकी राय मे् थे. पूरे इिाके की तिाशी सिये सबना ही गृहमंत्ी कानून और व्यवस्था तो राज्य का सवषय था. ने यह ऐिान कर सदया गया सक आपरेशन उन्हो्ने इि पर सवचार करने के सिए ि​ि​ि रहा. यह िचर कमान और कंट्ोि अंत्मरराि्​्ीय पसरषद की बैिक बुिाये जाने की व्यवस्था का ही नतीजा था. रॉ के एक आिा मांग की. इि बीच सचदंबरम को गृह मंत्ािय िे अि​िर के मुतासबक देश की िबिे बि्ी सवत्​् मंत्ािय मे् भेज सदया गया और िारा िमस्या यह है सक जब के्द्और राज्य के बीच मामिा िप्प हो गया. बाद मे्मल्टी एजे्िी िे्टर का कोई मामिा आता है तो हम आपि मे्भारत गसित सकया गया. यूपीए के शािनकाि मे्भी तय सकया गया और पासकस्​्ान की तरह बत्ामव करते है्. इि घटना ने यह िासबत कर सदया है सक आज भी था सक एनिीटीिी, इंटिीजे्ि ल्यूरो के तहत गुप्तचर िूचना के िमन्वय मे्सकतनी खासमयां काम करेगा. उि िमय इिका यह कह कर भी है.् पी सचदंबरम ने गृहमंत्ी रहते हुए राष्​्ीय स्र् सवरोध सकया गया सक ऐिी हाित मे् तो के्द् पर आतंकवाद िे सनपटने के सिए नेशनि िरकार आईबी के जसरये इि एजे्िी का काउंटर टैरसरज्म िेट् र (एनिीटीिी) बनाने की दुर्पयोग करे्गी. राज्यो् का िबिे बि्ा सवरोध कोसशश की थी. इिका उद्श्े य् सवसभन्न एजेस्ियो् इिे तिाशी और सगरफ्तार करने का असधकार

12 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

सदये जाने को िेकर था. इि कांड ने यह िासबत कर सदया है सक कंधार सवमान अपहरण कांड िे िेकर आज तक हमने िुरक्​्ा मे्हुई चूक िे कोई िबक नही् िीखा है. ऐिी आपात ब्सथसतयो् िे सनपटने के सिए के्द् मे्एक आपदा प्​्बंधन िमूह होता है. कैसबनेट िसचव इिका मुसखया होता है और इिके िदस्यो् मे् आईबी, रॉ, िेना के तीनो् बिो्, गृह िसचव, रक्​्ा िसचव आसद शासमि होते है्. इिके गिन का उद्​्ेश्य आपात ब्सथसत मे् उि​िे सनपटने के सिये सजम्मेदार तमाम पक्​्ो्के िाथ बैिकर उनके अनुभव, बुस्द और क्​्मताओ्का इस्​्ेमाि करते हुए उि​िे सनपटने की रणनीसत तैयार करना होता है. जब तक िंकट चिता है यह िमूह सनयसमत र्प िे समिकर हािात की िमीक्​्ा करता है और अपनी रणनीसत तैयार करता रहता है. राज्यो्िे भी अपेक्ा की जाती है सक वे मुख्य िसचव की अध्यक्​्ता मे् ऐिे ही िमूह गसित करे्. जब 1999 मे् कांधार कांड हुआ था तब इिकी बैिके् हुई थी्. भिे ही उि िमय अमृतिर िे सवमान उतरने के बावजूद उिे पुन: उि्ान भर िेने देने रणीनसतकारो् की बि्ी गिती रही हो पर उि िमय यह िस्​्कय था. हािांसक 26/11 के मुंबई हमिे और इि बार पिानकोट के हमिे के दौरान इिकी एक भी बैिक नही्हुई. बहरहाि, अगिे सदन 3 तारीख को दोपहर मे् आतंकवासदयो् ने पुन: िायसरंग शुर् कर दी और अंतत: 5 जनवरी को 6 आतंकवासदयो्के मारे जाने के िाथ ही यह आपरेशन िमाप्त हुआ. िुरक्​्ा जानकारो् का मानना है सक एयरबेि की िुरक्​्ा की सजम्मेदारी जीओिी-29 इंिैटरी सडवीजन को होनी चासहये थी. सजिके तहत 20 हजार जवान और दो स्पश े ि िोि्मकी टुकसडय़ां होती है.् िेना को एनएिजी, पुसि​ि या बीएिएि के अधीन रखने पर उनका मनोबि प्​्भासवत होता है. खाितौर िे राष्​्ीय िुरक्​्ा ि​िाहकार को िेना िे जुि्े आपरेशन िे खुद को अिग रखना चासहये. n


आवरण कथा

पठानकोट मे् वायुिेना का स्टेशन: दवफल हुई िुरक्​्ा

टकराव में उलझी सुरकं​ंा

आईबी के बाद राॅ और कफर रक्​्ा जासूसी की एजे्सी के गठन से देश की राष्​्ीय सुरक्​्ा के िुद्े हल होने की बजाय उलझते गये है्, कजसका िुख्य कारण इन संस्थाओ्िे्अहि का टकराव रहा है. तिभूति नारायण राय

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हुत िमय नही् हुआ जब राष्​्ीय िुरक्​्ा का मतिब िीमाओ् की रक्​्ा तक िीसमत था. दूिरे सवश्​्युद् के बाद और ख़ाि तौर िे शीतयुद् के दौरान इि अवधारणा मे्आमूिचूि पसरवत्नम हुए और अब तो इिकी पसरसध मे् देश की अंदर्नी शांसत, अथ्मव्यवस्था, राजनय, प्​्विन और इन जैिे तमाम मि​िे आ गये है्. जो सकिी न सकिी र्प मे् देश की िुरक्​्ा को प्​्भासवत करते है्. सकिी देश को नष्​् करने के सिये जर्री नही् है सक उिकी िौज को परास्​्सकया जाय, उिकी अथ्म व्यवस्था मे्नकिी मुद्ा का अंबार िगा कर या 14 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

नौजवानो् को ड्​्ग्ि का आदी बनाकर भी उिे बब्ामद सकया जा िकता है. आजादी समिने के िौरन बाद िे ही भारत को िुरक्​्ा िंबंधी मुद्ो्िे जूझना पिा है, ख़ाि तौर िे काश्मीर और उत्​्र पूव्म मे्. परंतु इिके बावजूद वष्​्ो्तक राष्​्ीय िुरक्​्ा तदथ्मिंसथ ् ाओ् और तदथ्मनीसतयो्के हवािे रही है. शुर्आती वष्​्ो् मे् इंटेसिजे्ि ल्यूरो या आईबीही िुरक्​्ा मामिो् मे् भारतीय गणराज्य के मुख्य काय्मपािक असधकारी िीईओ प्​्धानमंत्ी के सिये आंख कान का काम करती रही है. बी. एन मसिक पहिे प्ध् ानमंत्ी जवाहरिाि नेहर् के डायरेक्टर आईबी थे. कहा जाता है सक भारत – चीन िीमा सववाद को िेकर अपनायी गयी िारवड्म पासि​िी उन्ही की देन थी. इिी के चिते भारत 1962 के युद् मे् िंिा और बुरी तरह हार कर अपमासनत हुआ . आजादी के बाद िे ही आईबी का दुर्पयोग

राजनैसतक सवरोसधयो्के सवर्द्जािूिी के सिए होने िगा था. िेखक-वकीि ए जी नूरानी और आईबी के पूव्म असधकारी मिय कुमार धर ने सवस्​्ार िे ऐिे प्​्करणो् का हवािा अपनी सकताबो्मे्सदया है सजनमे्इि िंसथ ् ा का उपयोग राष्​्पसत, राज्यपािो्, मुख्यमंस्तयो्, जजो्, सवपक्​्या अपनी ही पाट्​्ी के नेताओ्की जािूिी करने और उन्हे् प्​्भासवत करने के सिए सकया गया . स्वाभासवक था सक अपनी क्​्मता का बिा भाग ित्​्ाधारी पाट्​्ी के सवरोसधयो्पर खच्मकरने के कारण आईबी की राष्​्ीय िुरक्​्ा िम्बन्धी गसतसवसधयां प्​्भासवत हुई्. आईबी के असतसरक्त िेना के तीनो्अंगो्के खुसिया िंगिन भी अपनी क्​्मता और िीसमत भूसमका के तहत राष्​्ीय िुरक्​्ा के मि​िो् पर अपने इनपुट देते रहे है् . इि पूरे तंत् मे् पहिा बिा िक्क1968 मे्आया जब प्​्धानमंत्ी इंसदरा गांधी ने्सरिच्मएंड एनासिसि​ि सवंग, सजिे आम


तौर िे रा कहा जाता है, की स्थापना की. इंसदरा गांधी ने् 1962 के भारत चीन और 1965 के भारत पाक युद्ो् मे् हासि​ि अनुभवो् िे िबक िेते हुए एक ऐिी खुसिया एजे्िी बनाने का िैि​िा सिया जो सवदेशो् मे् भारतीय सहतो् की रक्​्ा कर िके. इिमे् उनके मुख्य ि​िाहकार बने आईबी अि​िर रामेश्र नाथ काव जो कश्मीरी पंसडत होने और इिाहाबाद िे िंबंध के कारण जवाहरिाि नेहर्और इंसदरा गांधी के करीबी थे. उनके पाि आईबीमे् काम करने का कई दशको्का अनुभव था. काव के नेतृत्व मे्जल्दी ही रा एक पेशेवर और िंिाधन युकत् ख़ुसिया एजेि ् ी बन गयी और जन्म के तीन वष्​्ो् के अंदर ही उिने ऐिा कारनामा कर सदखाया जो उिके चसरत्​्वािी सकिी भी िंस्था के सिए ईर्य्ाम का सवषय हो िकता है. 1971 मे् सवश्​् मानसचत्​् पर बांग्िादेश नामक नया देश उभरा और इिके पीछे रा की जो भूसमका थी उि पर बहुत कुछ सिखा जा चुका है. सिस्​्िम का भारत मे्सविय भी इिकी ि​ि​िता की गाथा है. इिी तरह बीसजंग मे् प्​्वाि कर रहे तत्कािीन पासकस्​्ानी िेनाध्यक्​् जनरि परवेज मुशर्मि और राविसपंडी मे्बैिे उनके स्टाि अि​िर के बीच की टेिीिोन वात्ाम को बीच ही मे् पकि् कर उिने पासकस्​्ानी िेना के इि झूि का पद्ामिाश करने मे् िरकार की मदद की सक कारसगि की घुिपैि मे्उि का कोई हाथ नही् है. इनके सवपरीत 1999 मे् कारसगि या 26/11/2008 को मुमब् ई पर हुए हमिे की कोई पूव्म भनक तक रा को नही् िगी. इन्हे् उिकी अि​ि​िता के बिे उदाहरणो् के र्प मे् पेश सकया जा िकता है. कारसगि युद् (1999) के बाद खुसिया तन्त् को एक नयी खुसिया एजे्िी समिी. युद् के बाद इिके कारणो्और पसरणामो्की पिताि के सिये बनी िुि्मसणयम कमेटी की सि​ि्ासरशो् मे्िे एक को मानते हुए िरकार ने्डीआईए या सडिे्ि इंटेसिजे्ि एजे्िी का गिन सकया था. यह एजे्िी तीनो् िेनाओ् की अिग अिग काय्मरत ख़ुसिया एजे्सियो् के बीच िमन्वय स्थासपत करने वािी थी. इिी तरह की एक अन्य सि​िासरश के तहत चीि आि सडिेन्ि स्टाि के पद का िृजन सिद्​्ांतत: स्वीकृत कर सिया गया. चीि आि सडिेन्ि स्टाि के पाि तीनो् िेनाओ् की आपरेशनि कमांड होती और वह केन्द्ीय मंस्तपसरषद का मुख्य िुरक्​्ा ि​िाहकार होता . 1965 और 1971 के युद्ो्और कारसगि असभयान के दौरान िेना के तीनो्अंगो्के बीच िमन्वय की कमी बिी सशद्​्त के िाथ महिूि की गयी थी. ये दोनो् सि​ि्ासरशे् आज तक पूरी तरह िे िागू नही् हो िकी है्. क्यो् ? अगर हम इिे िमझ िके्तो शायद उन कारणो्की सशनाख्त

कर पाना हमारे सिए आिान होगा जो भारत को एक िुसचंसतत , दीघ्ामवसध आधासरत राष्​्ीय सहतो् को िुरस्​्कत रखने वािी और पेशेवर राष्​्ीय िुरक्​्ा नीसत बनाने िे रोकती है. िंभवतः यह अन्य नागसरकताओ् के सिए भी कमोबेश िागू होता है पर भारत मे् तो एक व्यब्कतत्व की सनस्ममसत मे् अहम का बिा रोि होता है. आपको सबरिे ऐिे व्यब्कतत्व समिे्गे जो अपने अहम, अना या ईगो िे परे हट कर वृहत्​्र राष्​्ीय सहतो्को ध्यान मे्रखकर िैि​िे करते है्. राष्​्ीय िुरक्​्ा नीसत बनाने वािे चार महत्वपूण्म पात्​् इिी अहम के मारे है्. ये चार पात्​् है् – राजनेता, आईएएि, आईपीएि और िौज. इनकी आपिी प्​्सतस्पध्ाम, महत्वाकांक्ा और अहम िुरक्​्ा नीसत बनाने मे् सनण्ामयक भूसमका सनभाती है. अपनी स्थापना के िाथ ही रा आईबीके

आर एन काव: आईबी िे होड़्

प्​्सतद्​्ंदी के र्प मे् उभरी. आई.बी के सिए यह पचा पाना मुब्शकि था सक उिके काय्मक्​्ेत्का एक बिा सहस्िा उि​िे सछन गया है, ख़ाि तौर िे यह सक अब सवदेशो् मे् वह नही् कोई दूिरी िंस्था काम करेगी. इिका िीधा मतिब था सक बाहर के भारतीय दूतावािो् मे् उिके अि​िरो् को तैनाती नही्समिेगी. रा और आईबी के काम बंटे हुए है् और अगर वे िहयोग और िमन्वय िे अपने अपने क्​्ेत्ो् मे् काम करते रहते तो िरकार को अपनी नीसतयाँ बनाने मे् मदद समिती. दुभ्ामग्य िे असधकतर मामिो् मे् ऐिा नही् होता और एक दूिरे को नीचा सदखाने या प्​्धानमंत्ी की नज्रो् मे् चढ़ने की होि चिती रहती है. िुि्मसणयम कमेटी ने अपनी आख्या मे्एक महत्व पूण्मसरपोट्मका सजक्​्सकया है जो 2 जून 1998 को डायरेक्टर आईबी के

हस्​्ाक्​्रो्िे प्​्धानमंत्ी और गृहमंत्ी िमेत कई महत्वपूणम्िोगो्को भेजा गया था पर इि िूचना को रा और डीजीएमआई के िाथ िाझा नही सकया गया जब सक ये दोनो् एजे्सियां इि पर और िूचनाये् एकस्​्तत कर िरकार को िचेत कर िकती थी्. चीि आि सडिे्ि स्टाि की सनयुब्कत भी इिी अहम की ि​िाई के चिते नही् हो पायी. तीनो्िेनाओ्के मुसखया इि बात के सिए तैयार नही् हो पाए सक उनकी आपरेशनि कमांड सकिी दूिरे के पाि चिी जाये और कई कोसशशो् के बावजूद कोई िरकार इिे िागू नही् कर पायी. पिानकोट जैिे हर िंकट के बाद िौज के अवकाश प्​्ाप्त या िेवारत असधकासरयो्ने एक कमान की बात की जाती है पर इिका मतिब उनके अधीन पुसि​ि या अध्मिैसनक बिो् को िाने िे होता है जबसक अिग अिग पसरब्सथसतयां अिग सकस्म के कमान की अपेक्ा करती है्. एक दीघ्म कािीन राष्​्ीय िुरक्​्ा नीसत केवि िरकारी एजे्सियो् द्​्ारा एकस्​्तत जानकासरयो्के बि पर नही बनायी जा िकती. िरकारी खुसिया एजे्सियां िूचनाओ्के िंग्ह, समिान और प्​्िार के िौरी काय्मवाही के सिए िरकार को तैयार कर िकती है्पर िम्बे िमय के सिए सकिी नीसत को बनाने के सिए बहुत िारे अकादसमक इनपुट की जर्रत होती सजनके सिये न तो ये एजे्सियां बौस्​्दक र्प िे िुि​ि्​् है् और न ही इनके पाि इिके सिये जर्री िमय होता है . अमेसरका और यूरोप के सवकसित देश यह दासयत्व सवश्​्सवद्​्ाियो्, पत्​्कासरता जैिे क्​्ेत्ो्या उन िंगिनो्की मदद िे करते है् सजनके िरकारो् िे िम्बंध बहुत जासहर नही् होते . अपनी सदिचस्पी वािे क्​्ेत्ो् की अथ्मव्यवस्था, िामसरक िंभावनाओ्, प्​्विन, राष्​्ीयताओ् के अंतस्वमरोधो् या राजनैसतक उतार चढाव के बारे मे्सजि तरह के इनपुट की जर्रत सकिी दीघ्म कािीन िुरक्​्ा नीसत के सिए जर्री होती है वह इन्ही की मदद िे हासि​ि सकया जा िकता है. दुभ्ामग्य िे भारत की नौकरशाही और राजनैसतक नेतृत्व इिके सिए तैयार नही्है. िाि 1998 मे् राष्​्ीय िुरक्​्ा ि​िाहकार का पद िृसजत होने के बाद िे यह तो हुआ है सक अब सकिी एक पेशेवर और पूण्मकासिक व्यब्कत के पाि िारी जानकासरयां पहुंचती है् जहाँ िे उनका समिान और प्​्िार िम्बंसधत तक सकया जा िकता है पर इि पद को िेकर भी सवसभन्न िेवाओ् के बीच सजि तरह की ईर्य्ाम और प्​्सतस्पध्ाम की ख़्बरे् आती रहती है् वे बहुत n आश्​्स्करने वािी नही्है्. (िेखक पूव्म पुसि​ि असधकारी और सहंदी िासहत्यकार है्.)

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देशकाल

अतुल्य िारत का दवज्​्ापन और आदमर खान: टूटा दरश्ता

िायर और बहादुर

कायरता और बहादुरी के बीच चुनाव की घड्ी कलाकारो्के जीवन िे्भी तो आती है. हां, कौन अपना नाि कहां दज्षकराना चाहता है. इसका फैसला करने की आजादी होनी चाकहए. कुमार प्​्शांि

इ

ि िेख का जैिा शीष्मक है, वैिा शीष्मक कभी हम बचपन मे् जातक कथाओ् मे् पढ़्ते थे. मुझे अब ऐिे ही शीष्मक याद आते है्. क्यो्सक िगता है, अब वैिे ही सदन िौट रहे है्. जब हमे् ककहरे िे िामासजक जीवन की बारहखि्ी रटनी होगी. हमारा िमाज सिसिपुसटयनो्का िमाज बनता जा रहा है. पिानकोट जैिी घटनाओ् के बीच यह खबर दब ही गयी सक आसमर खान को ‘अतुल्य भारत’ सवज्​्ापन के असभयान िे हटा सदया गया है. आज की भाषा मे् कहूं तो अब आसमर ‘अतुल्य भारत’ के ि्​्ांड एंबेस्डर नही् रहे. इिमे् कोई खाि बात नही् है. जब आसमर इि सवज्​्ापन के िाथ जुि्े थे. तब कौन हमिे बता कर जुि्ेथे सक हटाने पर हमे्सिक्​्हो! यह भी िही है सक प्​्चार, सवज्​्ापन आसद की दुसनया मे् नाम और नामा सजि तरह बरिता है. उिमे्यह भी जर्री होता है सक चेहरे बदिते रहे्! जो चेहरा सबकता है. वह चिता है और जो बेच 16 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

िकता है. वह िाया जाता है. इि तरह अगर िमझा जाये तो आसमर को सवज्​्ापन िे हटाने की खबर कोई खबर ही नही्है. सजि पर हम अपना या आपका िमय खराब करे्. िेसकन इि खबर ने मुझे इि कदर सवचसित सकया सक मै्इिे िे कर सिख रहा हूं. िरकार ने इि मामिे मे् दो ि​िाई दी है. एक सक आसमर हो हटाया नही्गया है. बब्लक सवज्​्ापन एजेि ् ी िे उनका करार खत्म हो गया है. दूिरा यह सक िरकार का इि मामिे िे कोई वास्​्ा नही्है. मतिब यह सक िरकार न यह जानती है सक आसमर खान कौन है.् न यह जानती है सक इन सदनो् मे् उिका उनिे कोई सववाद भी हुआ था! इतनी सनरापद बात होती या सक िरकार इतनी मािूम होती. तब तो मुझे भी यह सिखने की जर्रत नही् थी. िेसकन इन बातो्की एक गहरी और खतरनाक पृष्भूसम है. अभी-अभी तो अिसहर्णुता के मुद्े पर आसमर खान ने िरकारी शुतुम्मुग्ी रवैये िे अिहमसत प्​्कट की थी. उन्हो्ने कहा था सक देश मे्एक सकस्म का अिसहर्णु रवैया पनप रहा है. जो भय पैदा करता है. यह भय कहां तक पहुंचा है इिे िमझाते हुए उन्हो्ने अपनी सिल्मकार पत्नी का सजक्​् भी सकया था. सजन्हो्ने सकिी खाि िम्हे मे्यह तक पूछ सिया

था सक क्या हमे्देश ही नही्छोि्देना चासहए? यह इतनी ईमानदार और गहरी असभव्यब्कत थी सक सजिके बाद िरकार को गहरी िंवेदना के िाथ पसरब्सथसत को िंभािने मे्जुट जाना चासहए था. उिकी कोसशशे् आसमर खान को िमझा देती्सक हािात सबगि्ते है.् तो उन्हे्िुधारा जाता है, न सक देश छोि्ा जाता है! िेसकन ऐिा नही् हुआ. िरकारी बजरंसगयो् ने मुद्ामबाद के नारे िगाये, आसमर खान के पोस्टर-िोटो जिाये, उनके घर पर प्​्दश्मन हुए और उन्हे् सकतने ही सवभूषणो्िे सवभूसषत सकया गया. मुझे याद नही् आता है सक आसमर खान ने इि बारे मे्सिर कोई बात की. िेसकन उनकी वह एक ही बात इतनी तीखी और िच्​्ी थी सक काटे नही्कट रही थी. सिर तो शाहर्ख खान भी और दूिरे भी कई इि जद मे् आये! हर वह जो िरकारी रवैये िे अिग या सवपरीत राय रखता है. देशद्ो्ही है और उिका एक ही देश है. जहां उिे भेज सदया जाना चासहए, ऐिे जहरीिे नारे ि​ि्को् िे उिे और िरकार िे िहमसत पाये तो मानना चासहए सक िरकार ही है जो ऐिे नारे िगा रही है. इि पृष्भूसम मे् हमे् आसमर को ‘अतुल्य भारत‘ सवज्​्ापन श्​्ृंखिा िे हटाने को देखना चासहए. अगर यह िच है सक आसमर का इि


सवज्​्ापन के सिए हुआ अनुबंध खत्म हो गया है. तो कोई भी िंवेदनशीि िरकार इि मौके पर उिे आगे बढ़्ा या बढ़्वा देती. तासक आसमर और उनकी पत्नी को जो ‘ भूत‘ सदखाई दे रहा है, वह वही् मारा जाता! आसखर सकि मौके पर आप क्या कहते और करते है.् इिका कोई मतिब तो होता है! मतिब होता है. तभी तो आपने इिी वक्त यह िब होने सदया. तासक िबको यह िंदेश समि जाये सक िरकार अिहमसत बद्ामश्त करने को तैयार नही् है. अखबारो् की खबर है सक पय्टम न मंत्ािय िे जुि्ी िंिदीय िसमसत की बैिक मे् जब इि मामिे पर बात चिी. तो भाजपा िांिद और भोजपुरी गायक मनोज सतवारी ने कहा सक आसमर खान देशद्​्ोही है्. उन्हे् सनकाि बाहर करना चासहए! एक किाकार के र्प मे् मनोज सतवारी का क्या मुकाम है. यह तो वे ही जाने् िेसकन वे अगर ित्​्ा पक्​् के िांिद नही् होते. तो आसमर खान के िामने खि्ेहोने की उनकी औकात नही् है. यह वे भी और हम भी जानते है्. एक सजम्मेवार सहंदुस्ानी के र्प मे्भी और एक किाकार के र्प मे्भी आसमर खान की उपिब्लधयो्को छूने मे् मनोज सतवारी को कई जन्म िगे्गे. मनोज सतवारी दरबारी आदमी है्, िेसकन िोकतंत्इि समजाज िे चिता नही्है. दूिरी खबर यह है सक आसमर को जहां िे हटाया गया है, वहां असमताभ बच्​्न को िाया जा रहा है. यह खबर सकतनी िच्​्ी है, पता नही् िेसकन खबर है सक असमताभ बच्​्न ने कहा है सक उन्हे् ऐिा कोई प्​्स्ाव समिे तो वे तैयार हो्गे. असमताभ का िामासजक-राजनीसतक

रवैया हमेशा िे ऐिा ही ढुिमुि रहा है. कभी वे इंसदरा गांधी के खािे नजदीकी हुआ करते थे. राजीव गांधी की सनकटता के कारण िांिद भी बने थे. एक दौर मे्उनका भी राजनीसतक र्ि्ा चिा था. वहां िे सछटके तो सिर अमर सिंह और मुिायम सिंह िे सचपके और सिर मोदी शरणागत हुये! इन िबके पीछे क्या हुआ, नही् हुआ, न हम जानते है्. न ही जानने मे् हमारी सदिचस्पी है. िेसकन असमताभ बच्​्न एक बि्े किाकार है्. किा की ईमानदारी का तकाजा है सक वे आसमर के िाथ खि्ेहो्. सकिी किाकार को उिके राजनीसतक-िामासजक सवचारो् के आधार पर प्​्तास्ित सकया जाये. यह किाकार

गुजरात का प्​्चार करते अदमताि: ित्​्ा िे िाठगांठ िे कही् ज्यादा किा का अपमान है, किा को िौदे मे् बदिना है. असमताभ को यसद इि सवज्​्ापन मे्आसमर की जगह दी जाती है. तो उन्हे् सवनम्​्ता िे इिे अस्वीकार कर देना चासहए. िाथ ही उन्हे् कहना चासहए सक सजि पृष्भूसम मे् यह पसरवत्मन हो रहा है. उि​िे इि सवज्​्ापन श्​्ृंखिा की गसरमा खत्म हो गयी है. कायरता और बहादुरी के बीच चुनाव की घि्ी किाकारो्के जीवन मे्भी तो आती है. हां, कौन अपना नाम कहां दज्म कराना चाहता है. इिका िैि​िा करने की आजादी होनी चासहए. आसमर ने अपना नाम दज्म करवा सिया है, असमताभ को भी करवाना चासहए. n

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देशकाल

पुदलि द्​्ारा पकड़्ा गया मोहम्मद आदिफ (बीच मे्): दकतना िच दकतना झूठ

बेजान किरदार संकदग्ध िहानी अतभषेक श्​्ीिास्​्ि

ए

क कहानी सदल्िी पुसि​ि के िोधी रोड ब्सथत स्पेशि िेि के मुख्यािय मे्तेजी िे आकार िे रही है. इि कहानी मे् तीन जगहो् और चार सकरदारो् को आपि मे् जोिना है. कहना न होगा सक जर्रत पडऩे पर जगह और सकरदार बढ़्ाये जा िकते है्िेसकन इि कहानी का पहिा सहस्िा 8 जनवरी को आसधकासरक र्प िे जारी कर सदया गया.सजिके मुतासबक अि कायदा की भारतीय उपमहाद्​्ीप शाखा एक्यूआइएि (अि कायदा इन इंसडयन िबकॉब्नटने्ट) की सहटसिस्ट मे् भाजपा के आिा नेता शासमि है्. सदल्िी पुसि​ि को यह जानकारी 6 जनवरी को बंगिुर्िे पकि्ेगये मौिाना अंजर शाह कािमी िे कसथत तौर पर हासि​ि हुई है. कािमी को एक्यूआइएि की स्िीपर िेि का मुसखया बताया जा रहा है. बीते सदिंबर के दूिरे हफ्ते िेकर जनवरी 2016 के पहिे हफ्ते के बीच सदल्िी पुसि​ि की स्पेशि िेि ने एक्यूआइएि के नाम पर चार सगरफ्तासरयां की है्. इिके आधार पर उिका दावा है सक उिने अि कायदा के भारतीय 18 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

मॉड्ि ्ू को ध्वस्​्कर सदया है. सदिचस्प है सक इन चार मे् िे दो िोग पस्​्िमी उत्​्र प्​्देश के िंभि सजिे िे पकि्ेगये है्जहां के िोग खुद यह दावा कर रहे है् सक यसद अि कायदा के िरगना ऐिे होते है्तो इि िंगिन िे सकिी को खतरा नही्होना चासहये. इि कहानी का िबिे अहम सकरदार है िंभि का मोहम्मद आसि​ि सजिे एक्यूआइएि का िरगना बताया जा रहा है. यह कसथत िरगना िंभि के एक मोहल्िे मे्एक कमरे के सकराये के घर मे् पत्नी और दो बच्​्ो् के िाथ रहता है. िंपस्​्त के नाम पर एक चौकी, एक स्​्फज, कुछ बरतन और प्िाब्सटक की कुस्िमयां नजर आती है.् पैिे की कमी के चिते 11 वष्​्ीय बेटे हिीब का नाम स्कि ू िे कट चुका है जबसक 8 िािे की बेटी अभी स्कूि जा रही है. घर चिाने के सिये जून 2013 मे्िऊदी जाने वािा आसि​ि एजेट् ो्िे परेशान होकर अक्टबू र 2014 मे् वापि भी आ गया. तब िे वह हर इतवार सदल्िी िे कपि्े और इिेक्ट्ॉसनक िामान िाकर यहां बेचता था. तेरह सदिंबर को वही इिी काम िे सदल्िी गया और गायब हो गया. सदल्िी पुसि​ि की स्पेशि िेि ने 14

संभल और बंगलुर्के तार जोड्कर पुकलस ने अल कायदा के भारतीय उपिहाद्​्ीप के िॉड्​्ूल की कहानी तो बना दी गयी है, लेककन उसिे्इतने झोल है्कक यकीन करना ककठन है. सदिंबर को िीिमपुर िे उिकी सगरफ्तारी सदखायी. पसरवार को इि कहानी पर शक है. 24 सदिंबर को ईद समिाद के मुबारक मौके पर जब हम िंभि पहुंचे तो उिकी बीवी आसिया बेगम बेहाेश थी और उिे स्​्डप चढ़्ायी जा रही थी. बमुब्शकि ताकत बटोरकर वह दूिरी औरतो्के िाथ बाहर आयी और उिने पूरा सकस्िा बताया. आसिया के मुतासबक हर बार आसि​ि रसववार को खरीदारी कर शाम तक वापि आ जाता था. उि रसववार उिका िोन आया और उिने कहा सक वह नही्आ पायेगा उिके बजाय कोई और घर आयेगा. उिने कहा सक घर पर जो टूटी स्क्ीन वािा स्माट्मिोन रखा है वह उि व्यब्कत को दे दे. वह शख्ि आया. आसिया रिोई मे्थी, उिने बेटी के हाथ स्माट्म िोन सभजवा सदया, उिके बाद िे आसि​ि का िोन बंद आने िगा. पेशे िे िेडीज टेिर आसि​ि के छोटे भाई िासदक कहते है्, 'हमे्िगता है पुसि​ि ने उन्हे् पहिे ही उिा सिया था. पुसि​ि ने ही शाम को भाई िे िोन करवाया और पुसि​ि के िोग ही मोबाइि िोन िेने घर पर आये.' आसि​ि् की बि्ी बहन िबीहा बताती है् सक शसनवार 12 सदिंबर की शाम वह उनिे 1000 र्पये उधार


मांगकर िे गया था. पत्नी आसिया रोते हुये इशरत बच्​्ो् के िाथ बगि वािे मोहल्िे मे् पूछती है, 'जो बंदा अपने घर के सिए एक वक्त अपने मायके मे्थी. एक तंग गिी मे्मौजूद इि की रोटी नही्जुटा पाता, वह अि कायदा जैिे छोटे िे घर के आंगन मे्कुि्ी पर बैिी र्हीना िंगिन का िरगना कैिे हो िकता है? िासदक के आंिू नही् थम रहे थे. उिने बताया सक वे कहते है्, 'आप मुि​िमानो् को छोि्ो, जाकर िोग मुरादाबाद मे् एक शादी मे् गये जहां िे मेन्था माक्​्ेट मे् सहंदुओ् िे उिका समजाज पता िौटते वक्त िादे कपि्े मे् कुछ िोग आये कर िो सजनके यहां उिने बरिो्मुनीमसगरी की उिके पसत को गाि्ी मे्बैिाकर िे गये. र्हीना है.' इिाके के सहंदू भी उिकी बराबर तारीि् कहती है्, 'हमारी शादी को छह िाि हो गये करते है्. पुसि​ि के मुतासबक आसि​ि िे और खुदा किम इि दौरान वे एक पि भी मुझे पूछताछ के आधार पर ही बंगिुर् िे मौिाना छोि्कर दूर नही्गये.' मिूद का डर वासजब था क्यो्सक 2001 मे् अंजर शाह को सगरफ्तार सकया गया, सजि​िे उिकी कसथत मुिाकात बंगिुर् के सकिी एक आतंकी मामिे मे् दो अन्य िोगो् के िाथ धास्ममक जि​िे मे् हुई थी. िासदक बताते है् सक उिका भी नाम उछिा था. पेशे िे डॉक्टर मिूद िउदी अरब के अिावा आसि​ि केवि एक बार के एक समत्​्बताते है,् 'उनका नाम एिआइआर मुबं ई गया था, बंगिुर्तो वह कभी गया ही नही्. मे्नही्था. जैिे इि बार हो रहा है, वैिे ही तब िबिे सदिचस्प बात यह है सक अंजर शाह, भी मीसडया ने उनका नाम उछाि सदया था.' तब ् र का एक आवेदन सकया और सजिे एक्यूआइएि की स्िीपर िेि का मुसखया मिूद ने खुद िरेड बताया जा रहा है, उिे खुद बंगिुर्पुसि​ि की सदल्िी की अदाित ने उन्हे्इि मामिे मे्क्िीन क्िीन सचट हासि​ि है. एजे्सियो् िे 9 जनवरी सचट दे दी. सदल्िी की मुख्य मेट्ोपोसिटन को जारी एक खबर मे् बंगिुर् के पुसि​ि मसजस्ट्ेट कावेरी बावेजा की अदाित मे् जिर आयुक्त एन.एि. मेघासरक का बयान है, 'हमारे मिूद और िंभि के ही मोहम्मद उस्मान का पाि कोई िाक्​्य नही् है सक वह आतंकवाद मे् आत्मिमप्मण का आवेदन िगा था. मामिा सिप्त था. 'आयुक्त ने हािांसक सदल्िी पुसि​ि सदल्िी पुसि​ि की स्पेशि िेि का था सजिमे् की कारवाई को यह कहते हुए िही िहराया सक एिआइआर िंख्या 193/01 थी और थाना न्यू सदल्िी पुसि​ि ने िबूत के आधार पर ही उिे फे्ड्ि कॉिोनी था. सदल्िी पुसि​ि स्पेशि िेि सगरफ्तार सकया होगा. सदिचस्प यह है सक सजि के इंस्पेक्टर ितेन्दर िांगवान द्​्ारा अदाित मे् सदन मौिाना को उिाया गया, उिके अगिे ही 08.04.2009 को दासखि जवाब मे्कहा गया सदन उिके सखिाि भि्काऊ भाषण िे जुि्े है, 'उपय्कमु त् मुकदमा 12.09.01 को दज्मसकया एक पुराने मुकदमे की िाइि बंद होने वािी थी. गया और स्पेशि िेि द्​्ारा इिकी जांच की चूंसक सगरफ्तासरयो् और िबूत का सजम्मा गयी. इि मामिे मे् चार दोसषयो् को सगरफ्तार सदल्िी पुसि​ि की स्पेशि िेि के कंधे पर है, सकया गया था और चाज्मशीट दासखि की गयी इिसिए िंभि िे उिाये एक और शख्ि जिऱ थी. इि मामिे मे्जिर मिूद और मो. उस्मान मिूद का सज्क्यहां अहम हो जाता है. मिूद का पी.ओ. नही् है् इिसिये उनकी आवश्यकता घर आसि​ि् के घर िे बमुब्शकि आधा नही् है.' इिी तारीख को िीएमएम कावेरी सकिोमीटर दूर है. सजि सदन पूरा शहर ईद बावेजा का आदेश आया, 'िरे्डर के आवेदन समिाद के जश्न मे् डूबा था, मिूद का घर के िंबंध मे् जांच असधकारी इंस्पेक्टर ितेन्दर वीरान पि्ा हुआ था. उिकी पत्नी र्हीना िांगवान का जवाब प्​्ाप्त हुआ है.बताया गया है िंिल मे् तथ्यो् की जांच करने वाली िदमदत के िदस्य: कई अनिुलझे िवाल

सक दोनो् आवेदको् की इि मामिे मे् कोई आवश्यकता नही् है अत: आवेदक को बरी सकया जाता है.' पुसि​ि की कहानी मे्बताया गया है सक मो. आसि​ि को बाहर भेजने का सवत्​्ीय व अन्य इंतज्ाम जिर मिूद ने सकया. सदिचस्प है सक जिर मिूद को खुद सदल्िी पुसि​ि स्पश े ि िेि की क्िीन सचट 2009 मे् प्​्ाप्त है. मिूद की पत्नी का एचडीएि​िी बै्क मे्खाता देखने वािे उनके एक बै्ककम्​्ी समत्​्बताते है्सक इि खाते मे् बमुब्शकि पांच हज्ार र्पये है् और र्हीना बि्ी मुब्शकि िे सि​िाई का काम कर के घर चिाती है.् मिूद अपने पाट्नम र िुरकान के िाथ ट्​्क चिवाते थे सजि​िे पसरवार का गुज्ारा होता था. कहानी का चौथा सकरदार ओसडशा के कटक िे पकि्ा गया अल्दुि रहमान है सजिके भाई तासहर अिी को 2002 मे् कोिकाता मे् भारतीय वासणज्य दूतावाि पर हमिे के सि​िसि​िे मे् पकि्ा जा चुका है. उिे 90 सदन की कैद के बाद छोि् सदया गया था. खबरो् के मुतासबक वह बीजू जनता दि का काय्क म त्ाम था. िेसकन ज्यादा सचंताजनक बात है मो. आसि​ि और जिर मिूद की सगरफ्तारी के बाद िंभि को किंसकत करने वािा मीसडया का असभयान. बरेिी मे् इंटेसिजे्ि ल्यूरो (आइबी) का जोनि दफ्तर होने के बावजूद िंभि मे् आइबी अब एक और दफ्तर खोिने जा रही है. िंभि सनवािी सजि िापता शख्ि िनाउि हक के िाथ इनके तार जुि्ेबताये जा रहे है्, चैनिो् ने उिके मकान के नाम पर एक एमबीबीएि डॉक्टर की हवेिी को सदखाकर खूब प्​्चासरत सकया है. पुसि​ि के मुतासबक मिूद के पाि चार पािपोट्मथे जबसक पसरजनो्की माने्तो एक बार उिका पािपोट्म गुम हो गया था और दो बार उिका नवीनीकरण हुआ सजिके चिते उिके पाि वैधासनक तौर पर चार पािपोट्मह्​्ैयह तथ्य मीसडया की खबरो्मे्गायब है. िंभि के 36 िरायो्मे्िे सजि मोहल्िे िे ये सगरफ्तासरयां ताल्िुक रखती है्, वह कािी िंपन्न और उच्​्मध्यवग्​्ीय मोहल्िा है. इि इिाके िे 24 एमबीबीएि डॉक्टर, 250 िे ज्यादा इंजीसनयर, देश के बि्े सवश्​्सवद्​्ाियो् मे्पढऩे वािे शोधाथ्​्ी, सदल्िी की अदाितो्के दज्नम ो्नामी वकीि और असधकारी आते है.् यहां एक भी मदरिा नही् है. एक स्थानीय डॉक्टर बताते है्, 'हम िोग बरिो् िे दीनी तािीम की जगह मॉडन्म तािीम मे् भरोिा करते है्. हमारे यहां का कोई भी बच्​्ा मदरिे मे् नही् पढ़्ता. एक स्थानीय व्यापारी कहते है्सक िरकार नही् चाहती मुि​िमान तरि्​्ी करे्. इिसिये सजि जगह का मुि​िमान बाहर सनकिकर सकस्मत आज्माता है, उि इिाके को आतंकवाद िे जोि्सदया जाता है.' n शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 19


बातचीत

जारी रिेगा यि संघर्ष

प़​़हिद़​़ पऱा​ावरणहवद िंदीप पांडेर िे हरतेश जारिवाल की बातचीत.

जा

नेमाने सामाजजक कार्यकर्ाय और रमन मैगसारसार सम्मान जिजेरा डॉ. संदीप पांडेर को आईआईटी बीएचरू ने रर अिजि के पूि्य ही अजरजि प्​्ोफेसर के पद से हटा जदरा. इरना ही नही् उन पर देशद्​्ोह और नक्सजिरो् का समि्यन करने का आरोप िगारा गरा, इस घटना मे् बुज्िजीिी और समाजकम्​्ी काफी उद्​्ेजिर है: बारचीर के अंश: आपको बीएचरू मे् पढ्ाने से रोकने का कोई जिजिर आदेश जदरा गरा है? नही्, कोई जिजिर आदेश रो नही् जदरा गरा है. मै् िहां रसारन जिज्​्ा​ान जिषर का अजरजि प्​्ोफेसर िा. सूचना जमिी जक संचािक मंडि ने मुझे हटा जदरा है. बीएचरू के कुिपजर जगरीश चंद् ज्​्िपाठी और डीन िनंजर पांडेर आरएसएस की मानजसकरा रिरे है् और िे दुरा् िय ना से काम कररे है.् करी अि्यशास्​् की कक्​्ा न िेने िािे प्​्ोफेसर ज्​्िपाठी को जिश्​्जिद्​्ािर का कुिपजर बना जदरा गरा है. बीएचरू आईआईटी अब स्िारत्​् हो चुका है, इसजिए उसके संचािक मंडि का प्​्मुि कुिपजर नही् हो सकरा. आपको नक्सिी कहा गरा है. इस बारे मे् आपका क्रा कहना है? अगर मै् नक्सिी रा देशद्​्ोही हूं रो मुझ पर मामिा क्रो् नही् दज्य जकरा गरा? मै् गांिीिादी जिचारिारा का व्रक्कर हूं, न जक नक्सिी. हां, जजस िजह से िोग नक्सिी बनरे है्, उससे मै् अिश्र सहमर हूं. गरीबी और गैरबराबरी जैसे मुद्ो् को ित्म करने के जिए इन पर गहन काम की आिश्रकरा है. िेजकन मै् नक्सजिरो् के जहंसक रौर-ररीको् का जिरोि कररा हूं. आप समाजिादी आंदोिन से जुड्े है्. क्रा जकसी जशक्​्क की राजनीजरक जिचारिारा उसके पेशेिर ज्​्िराकिाप को प्​्राजिर कररी है? जनज्​्िर रौर पर ऐसा होरा है.अगर प्​्ोफेसर समाज से जुड्ा होगा रो िह छाि्​्ो् को जशक्​्ा के अिािा समाज से री रो जोड्ेगा. मेरा मानना है जक रजद ऐसा नही् हुआ रो सरी मे् आरएसएस की जिचारिारा घर करेगी जो देश के जिए घारक है. जहां रक पेशेिर होने की बार है् रो अब रो मै् और िुिकर अपनी िड्ाई िड् सकूग ं ा. बरौर जशक्क ् , मै् िहां डर रहा िा, िेजकन कुछ बंजदशो् मे् िा. इसकी आप क्रा िजह देिरे है्? मै् समाजिादी व्रक्कर हूं और समाज के जिए ही काम कररा हूं. बच्​्ो् की पढ्ाई चि रही है और रही िजह िी जक मै् ढाई साि रक िहां पढ्ारा रहा. अन्रिा मै् ऐसे माहौि मे् करई काम नही् कर सकरा हूं जहां आरएसएस के सोच के िोगो् का जमािड्ा हो. मै्ने हमेशा समाज मे् कुछ री गिर होने पर उसका जिरोि जकरा है. आगे री मै् ऐसे िोगो् के जि​िाफ िड्रा रहूंगा. जशक्​्ा के क्​्ेि् से जुड्े व्रक्कर के साि ऐसा व्रिहार समाज पर क्रा असर डािेगा? अब समाज बदि रहा है. कोई री गिर बार िोगो् के रीरर आि्​्ोश पैदा कररी है. ऐसा व्रिहार िोगो् को एकजुट करेगा और साि िारेगा. रह समर ऐसा है जक िोगो् मे् सही जिचारिारा का होना जर्री है. जकसी प्​्ोफेसर को केि​ि सराओ् मे् शाजमि होने रा जिरोि करने पर जनकाि जदरा जाना गिर है. बीएचरू के रमाम जशक्​्क और बच्​्े मेरे साि जुड्ेगे क्रो्जक मै् पूि्य कुिपजर नरे्द् देि के साि एक फोरम से जुड्ा हुआ िा. िह बौद्घ दश्यन के जिद्​्ान िे. उन्ही् के साि एक जफल्म जदिाकर बच्​्ो् से चच्ाय की जारी िी. मै् िुद री िहां करीब 150 बच्​्ो् को अपनी एक अिग कक्​्ा मे् पढ्ारा कररा िा. िही बच्​्े आगे चिकर मेरे आशा ट्​्स्ट की मदद से समाज मे् िोगो् की

20 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

सहाररा कररे िे.

िंदीप पांिेय: एक नया मोच्ाि

क्रा रह के्द् सरकार के जकसी एजे्डे का जहस्सा िगरा है आपको? हां, इसमे् काफी हद रक के्द् की जहस्सेदारी है. मानि संसािन जिकास मंि्ािर ने आईआईटी बीएचरू के संचािक मंडि के अध्रक्​् के रौर पर प्​्ोफेसर जगरीश चंद् ज्​्िपाठी को जनरुक्र कर जदरा जजन्हो्ने बरौर अि्यशास्​् के प्​्ाध्रापक एक कक्​्ा रक नही् िी. उसके पि्​्ार उन्हो्ने जनदेश्ाक राजीि संगि पर दबाि डािा जक संचािक मंडि की बैठक मे् मेरा कार्यकाि नही् बढ्ारा जारे. आप जकन संस्िाओ् मे् पढ्ारे रहे है्? इससे पूि्य मै् बरौर अजरजि प्​्ोफेसर आईआईटी कानपुर मे् पढ्ारा िा. उसके बाद रहां बीएचरू मे् आरा. क्रा अरीर मे् री ऐसा कोई अनुरि आपको हुआ है? हां, आईआईटी कानपुर मे् री मेरे साि ऐसा हो चुका है. दरअसि िहां मजदूरो् का एक संघ िा जो ठेकेदारी प्​्िा का जिरोि कर रहा िा. मै् उनके साि िड्ा हुआ रो िहां री मेरा अनुरि कमोबेश ऐसा ही रहा. राजनैजरक गजरजिजिरो् का अध्रापन पर क्रा असर पड्रा है? देजिए, अगर आप दोनो् मे् रािमेि बना पाने मे् कामराब है् रो कोई फक्क नही् पड्रा. िैसे री मै् इन कार्​्ो् मे् ररी शाजमि होरा िा जब मेरे पास िािी समर होरा िा. क्रो्जक आप जशक्​्क होने के नारे अपने छाि्​्ो् के रजिष्र के साि जि​ि​िाड् नही् कर सकरे. n


मै् वफ्ादार तसपािी िूं

राजस़थान के राज़रपाल और पूव़ा भाजपा नेता कल़राण हिंि िे हववेक ह़​़िपाठी की बातचीत.

उ

त्र् प्द् श े के पूिय् मुखर ् मंि्ी और राजस्िान के राज्रपाि कल्राण जसंह ने अपना जन्मजदन ि​िनऊ मे् एक रव्र समारोह मे् मनारा. रमाम बड्े नेराओ् के साि राजपा के सांसद और जि​िारक री उसमे् शाजमि हुए. राजनीजरक गजिरारो् मे् इसके मारने रिाशे जाने शुर् हो गरे है्. िजह साफ है. िह दो बार प्​्देश के मुख्रमंि्ी रह चुके है्. राजपा जमशन 2017 की रैरारी मे् जुटी है. अगर िह कानून व्रिस्िा को मुद्ा बनाकर चुनाि िड्री है रो कल्राण जसंह पाट्​्ी का चेहरा हो सकरे है् क्रो्जक उनके कार्यकाि के चच्​्े आज री है्. उत्​्र प्​्देश मे् राजपा की क्रा संरािनारे् देिरे है् ? उत्​्र प्​्देश मे् राजपा का कैडर मौजूद है. के्द्ीर नेरृत्ि को प्​्देश पर जिशेष जनगाह डािने की आिश्रकरा है. िह इसकी जचंरा कर री रहा है. सरी समझ चुके है् जक प्​्देश राजपा का रजिष्र रर होने िािा है. मै् जपछिे चार जदनो् से रही् हूं. इरने ही जदनो् मे् िोगो् ने ढेर सारा प्रार दे जदरा है. अब रो रही् र्कने का मन कर रहा है. राजस्िान मे् री उत्​्र प्​्देश के 20-25 िोग हर रोज जमिने आ जारे है्. िेजकन रहां रहने की बार ही कुछ और है. आपका जन्मजदन जसरासी गजिरारो् मे् चच्ाय का सबब बना हुआ है. कोई िास िजह? मै् कही् री रहूं और जकसी री हाि मे् रहूं िेजकन अपना जन्मजदन मनाने का जो मजा ि​िनऊ मे् है िह और कहां? इस बार री जन्मजदन मे् रमाम पुराने संगी सािी आरे. जमिकर िुजशरां बांटी्. पुराने जमि्​् और समि्यक रो िष्​्ो् से आरे ही रहे है्. रह एक मौका है जब सबसे एक साि मुिाकार हो जारी है. और कोई िजह रो मुझे नही् नजर आरी. सुना है जक प्​्देश के मुख्रमंि्ी पद की दौड् मे् आप री शाजमि है्? मुझे मुख्रमंि्ी बनने का कोई शौक नही् है. राजपा के पास ढेर सारे चेहरे है्. कोई कमी नही् है. पाट्​्ी ने मुझे जर्रर से ज्रादा जदरा है. मै् बस पाट्​्ी का िफादार जसपाही हूं. जो आदेश जदरा जारा है उसका पािन कररा हूं. रह रो कार्यकर्ायओ् का बड्प्पन है जक िे मुझे इरना स्नेह कररे है्. प्​्देश के सरी जजिो् से आने िािे कार्यकर्ायओ् ने जन्मजदन की बिाई दी है. मुझे अहसास हुआ जक कार्यकर्ाय मुझे जकरना चाहरे है्. मै् केि​ि रही कहना चाहूंगा जक पाट्​्ी की पसंद ही मेरी री पसंद है. प्​्देश मे् चुनािी रणनीजर जकस ररह की होनी चाजहरे? प्​्देश मे् राररीर जनरा पाट्​्ी के जिए एकदम उजचर माहौि है. जमीन रैरार है इसका फारदा आसानी से उठारा जा सकरा है. केद् ्ीर नेरतृ ि् इसमे् सक्​्म री है. िहां अनुरिी नेराओ् की कमी नही्. क्रा राजपा का आंरजरक असंरोष इस राह मे् बािा बन सकरा है? जकसी की नाराजगी की परिाह नही् की जानी चाजहरे. संरािनाओ् के द्​्ार िुिे हुए है.् िष्य 2017 के जि​िानसरा चुनाि राजपा का रजिष्र रर करेग ् .े जीरना जर्री है और इसके जिरे मेहनर री करनी होगी. कानून व्रिस्िा को ठीक करने के जिरे क्रा करना चाजहरे ? नौकरशाही पर ररोसा जकरा जाना चाजहरे. व्रिस्िा ठीक हो जारेगी. नौकरशाही एक प्​्जशज्​्कर अश्​् है जो सिार की क्​्मराओ् से िाजकफ होरा है. उसे दो-रीन महीने मे् समझ मे् आ जारा है जक पीठ पर बैठा व्रक्कर जकरना राकरिर है. नौकरशाही का उजचर उपरोग आिश्रक है कामकाज मे् पारदज्शरय ा रिे् और सरकार को अपनी गजर से चिने दे.् हािार िुदबिुद

फोटो: िुदमत

कल्याण दिंह: वापिी की चाहत

ठीक हो जारे्गे. क्रा आपके समर मे् कानून व्रिस्िा को जनरंज्िर रिने के जिरे रही मंि् प्​्रोग मे् आरा? मेरी सरकार चुनकर बनी हुई सरकार िी. 22 सािो् से अजारदारी का जुिूस नही् जनकि सका िा. रह सरकार की साि के जिरे एक बहुर बड्ी चुनौरी िी. मै्ने जशरा और सुन्नी नेराओ् से अिग-अिग बार की. जुिूस िािे जदन मै् िुद फोन िेकर बैठ गरा. अजिकाजररो् की अिग-अिग ड्ट्ू ी िगारी गरी. इस बार का पुख्रा इंरजाम जकरा गरा िा जक हर पांच जमनट पर स्पष्​् सूचनारे् जमिरी रहे्. जुिूस शांजरपूण्य ढंग से जनपट गरा. व्रिस्िा रो िही िी, फक्क आरा नौकरशाही मे् रोग्र अजिकाजररो् के चरन से. उत्​्र प्​्देश की जशक्​्ा व्रिस्िा कैसे पटरी पर िारा जा सकरा है? जशक्​्ा से जिकास का रास्​्ा साफ होरा है. मै्ने राजस्िान मे् जशक्​्ा मे् सुिार के जिरे संजीदा प्​्रास जकरा है. नकि की परंपरा को पूरी ररह समाप्र करना होगा क्रो्जक रह रािी पीढ्ी के रजिष्र के साि साफ जि​ि​िाड् है. सरकारी सेिाओ् मे् साक्​्ात्कार व्रिस्िा को जकरना प्​्रािी बनारा जाना चाजहरे? नौकाजररो् के जिरे होने िािे साक्​्ात्कार के अंको् की गणना न के बराबर होनी चाजहरे. रह व्रिस्िा भ्​्ष्ाचार की जननी है. इससे जनजार पाने के जिरे स्िच्छ छजि आिश्रक है. एक अहम सिाि...राम मंजदर आपके एजंडे मे् िा िेजकन िह अब री अिूरा है. कैसे बनेगा ? बेहरर रो रही होगा जक राम मंजदर आपसी सहमजर से बने. इससे आपसी सद्​्ाि री बना रहेगा. हािांजक मामिा न्रारािर मे् है और उसका जनण्यर सरी को मान्र होगा. मंजदर मुद्े पर जो री बोिना िा, बोि चुका हूं अब ज्रादा न कुरेदे्. आजिरी सिाि, आपका ध्रेर क्रा है? मेरे मन पर उम्​् का कोई प्​्राि नही् है. मै् काम करने मे् जिशेष र्जच रिने िािा व्रक्कर हूं. मै् 84 साि का जिान हूं. n शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 21


तिज्​्ापन

ख़ुशबू की रिवायते़

अनुलिा राज नायर

श

म महके तेरे तिव्वुर िे, शाम के बाद सिर ा िहर महके. अि​िम गुनगुनाता जा रहा था और अपनी इत्​्की दुकान मे्छोटी-छोटी कांच की शीसशयो् को करीने िे जमाता जा रहा था. सकिी शीशी मे् गुिाब का इत्​् था तो सकिी मे् चंदन का. कही् मेहंदी का अक्क था तो सकिी मे् केवि्े का. हर इत्​्अपने आप मे्अनूिी और नायाब महक सिए हुए था. और इन्ही् समिी-जुिी ख़्ुशबुओ् िे पूरा इिाका महका हुआ था. ये है उत्​्र प्​्देश का कन्नौज शहर, जो महमूद गजनवी, मोहम्मद गौरी, जयचंद् और इल्ततु समश जैिे सवराट शािको्की कम्भम सू म रहा है. गंगा सकनारे बिे इि शहर ने िसदयो्िे बांटी है्भीनी भीनी खुशबुएं. अि​िम के पसरवार मे्भी न जाने सकतनी पुशत् ो्िे ‘अतर’ यासन ‘इत्’् का कारोबार चिता आया है. बरिो् पहिे उिके दादा परदादा सरि्​्श ् ो् मे् या सिर गिे मे् पेसटयां िटका कर गसियो्मे्घूम-घूम कर इत्​्बेचा करते थे. बि्ी 22 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

निाित िे छोटी िी कांच की बोति को खोि कर र्ई के िाहे िे सिपटी तीसियो् को इत्​् मे् डुबो कर ग्​्ाहक की हथेसियो् के सपछिे सहस्िे मे् छू भर सदया जाता था और िारा आिम यूं महक जाता था जैिे अचानक कोई खुशखबर िैि गयी हो. इत्​् का कारोबार महज एक कारोबार नही् था, बब्लक एक नशा था, जो व्यापासरयो्और कद्द् ानो्के िर चढ़्कर बोिता था. िखनऊ िे 115 सकिोमीटर दूर ि इि शहर ने िूिो्िे खुशबुएं की किा िारसियो्िे िीखी थी. िसदयो्िे आिवन यासन सडस्टिेशन िे इत्​् बनाने वािे पसरवार ही तो कन्नौज की पहचान रहे है्. अि​िम अपने सपता की दुकान िंभािने िगा था. बचपन िे इत्​्के कारोबार िे जुि्ेहोने के कारण उिे भी खुशबुओ्िे मोहल्बत हो चिी थी, हािांसक बीते सदनो् मे् इि व्यविाय की सबगि्ती हाित देख कर उिके अल्बा ने उि​िे कोई और काम कर िेने को कहा भी मगर परंपराओ्िे जुि्ा अि​िम कहां मानने वािा था और आसखर उिने अपने अल्बा की जगह िे ही िी. कही्न कही्उिके भीतर यकीन था सक वो तो इि कारोबार को करके खुसशयां ही पायेगा.

दुकान पर बैिे हुए अि​िम ने एक रोज हरी चूस्ियो् िे भरी एक नाजुक किाई के भीतरी सहस्िे मे्एक बूदं इत्​्िगाया था. वो इत्​्का नशा था या इश्क का, कौन जाने, मगर उि रोज के बाद िे वो नाजुक किाई वािी ि​ि्की िबीहा अक्िर उिकी दुकान पर आने िगी थी. वो कभी वाकई इत्​् खरीदती तो कभी खरीदने के बहाने िे यूं ही बसतयाती रहती. अि​िम का इत्​्बेचने का धंधा बेशक मंदा पि् गया हो मगर िबीहा िे उिकी मोहल्बत परवान चढ़्रही थी. बहुत ही िमझदार और पढ़्ी-सिखी ि​ि्की थी िबीहा और उिका पसरवार अि​िम के पसरवार िे कही्ज्यादा िंपन्न और आधुसनक था. यासन िमाज के आम मापदंडो् के सहिाब िके देखा जाय तो दोनो् के बीच बहुत िाि​िे थे. खैर इश्क मोहल्बत मे् ऐिे िाि​िो् का सहिाब कौन रखता है. और अनवर और िबीहा को वक्त ही कहां था मोहल्बत के सिवा कुछ िोचने िमझने का. बि जब अि​िम महीने भर की अपनी कमाई सगनाने बैिता तो कभी कभी उिका मन भी बैिने िगता. सपछिे कई िािो् मे् इन देिी


खुशबुओ्के कारोबार को सवदेशी कोिोन और डीओडरे्ट्ि ने बैिा सदया था. कभी-कभी वो सिक्​्मंद होकर िबीहा िे कहा, ‘िबीहा तुम्हारे अल्बा हमारे सरश्ते को कबूि करे्गे क्या? तुम िहरी्पैिे वािी्और मै् इक अदना िा इत्​्बेचने वािा, सजिका धंधा यूं भी मंदा पि्ा हुआ है.' िबीहा हंि कर उिकी बात टाि जाती. जैिे आने वािी मुब्शकिो् के बारे मे् वो िुनना या िोचना ही नही्चाहती हो. वो शायराना अंदाज मे् कहती, ‘पैिा ही िब कुछ होता है क्या? महकते हुए सदि की कोई कीमत नही्होती?’ ‘तुम हमेशा उल्टा क्यूं िोचते हो?’ वो उिाहना देती. ‘गरीबो्को चांद भी रोटी िा सदखाई देता है िमझी् मोहतरमा.’ कहते हुए अि​िम उिकी र्मासनयत की गम्ामहट पर अिसियत के िंडे छी्टे मार देता. सिर दोनो्बैि कर अपनी आने वािी सजंदगी के दांव पे्चो् मे् उिझ जाते. ऐिे ही र्िते मनाते, ख्वाबो्की चादर बुनते उनके सदन गुजर रहे थे. उि रोज िबीहा अि​िम की दुकान पर आयी तो उिका चेहरा मुरझाये िूि की तरह िग रहा था. ‘क्या हुआ? बात बेबात पर चकहने और महकने वािी इि जूही की किी को सकिकी नजर िग गयी?’ अि​िम ने अपनी महबूबा को छेि्ते हुए कहा. िबीहा एकदम िंजीदा थी. ‘आज मैन् े अल्बा िे तुमह् ारे बारे मे्बात की. उन्हो्ने िाि इनकार कर सदया अि​िम.’ कहते हुए वो िूट-िूट कर रोने िगी. ‘मै्ने बहुत िमझाया उन्हे्, मगर वे कुछ िुनने िमझने को तैयार ही नही्थे.’ क्या कहता अि​िम. वो जानता था सक कोई भी बाप ऐिे ि​ि्के िे अपनी बेटी क्यूं ल्याहेगा सजिकी कमाई का ग्​्हण िगा हो. िबीहा बचपन िे ऐशोआराम की सजंदगी गुजारती आयी है, तो अब शादी के बाद उिके

िुखो् मे् कमी आये ये उिके अल्बा को क्यो् मंजूर होगा. वो ता यही चाहे्गे सक उनकी बेटी का ल्याह ज्यादा न िही पर उनके जैिे खातेपीते पसरवार मे्ही हो. अि​िम की िमस्या वाकई गंभीर थी. इत्​् का कारोबार अब मुनािा नही् देता था, प्​्योगशािा मे्बनी यासन सिंथेसटक खुशबुएं थी् और उन्हे् बनाना भी आिान था. जबसक इत्​् बनाने की प्​्स्कया बहुत जसटि और िंबी थी. इिके सिए िूिाे् को चुनना, आिवन करके उनका अक्कसनकिना, तेि और पानी की सनयत मात्​्ा तय करना. ऐिे बहुत िे चरणो् मे् एक नन्ही् िी बोति भर इत्​् तैयार होता. और मुस्शकिे् इतनी ही नही् थी्, इत्​् बनाने के बाद सिर उिके सिए बाजार खोजना और भी मुस्शकि काम था. क्यो्सक टीवी और पत्​्पस्​्तकाओ्मे्आने वािे रंगसबरंगे और आकष्मक सवज्​्ापनो् के बाद ग्​्ाहक भी िैक्ट्ी मे् बने िरफ्यूम अैर डीओडरे्ट ही खरीदना चाहता है. िबीहा के अल्बा के िैि​िे को जान िेने के बाद िे अि​िम की आंखो् िे नी्द उि्गयी थी. उिको अपना भसवर्य बेनूर, बेरंग और सबना शुशबू के सदखाई दे रहा था. वो नही्जानता था सक वो सकि तरह अपनी सजंदगी को बेहतर बना िकेगा. सकि तरह वो इि िायक बन पायेगा सक पूरे हक िे िबीहा के अल्बा िे उिका हाथ मांग िके. व्यविाय मे्तंगी का ये हाि सि​ि्कअि​िम का नही् था. इत्​् के िभी सन म्ामता ऐिी ही मुस्शकिो् िे जूझ रहे थे और धीरे-धीरे इि व्यविाय िे पिायन कर रहे थे. मगर अि​िम का इत्​्िे मोह छूटता न था क्याे्सक इक तो ये उिका पुश्तैनी काम था और सिर इिी इत्​्ने तो उिे उिकी मोहल्बत िबीहा िे समिाया था. इिसिए उिे अपने इि काम िे भी मोहल्बत थी. मगर सपछिे कई सदनो्िे उिे िग रहा था सक यही इत्​्शायद िबीहा को उि​िे दूर भी कर देगा. इन सदनो्अल्बा को िगी रोक की वजह िे वो अि​िम की दुकान पर भी नही्आती थी युं

हर रोज आकर उिकी सजंदगी को महका जाने वािी िबीहा न जाने सकतने सदनो्िे उिे सदखाई तक नही्पि्ी थी. िबीहा की गैरमौजूदगी ने अि​िम को बेनरू कर सदया था. बेमन िे अखबार के पन्ने पिटते हुए अि​िम की नजर इक खबर पर अटक गयी. िरकार फ्​्ांि के बेहत उन्नत इत्​् के व्यापासरयो् िे बातचीत करके कन्नौज के इत्​् व्यापासरयो् के सिए नयी राह खोिने वािी है. और एक आधुसनक इत्​् का कारखाना भी कन्नौज मे् डािने वािा है और तो और बि्े पैमाने पर चंदन के पेि् भी िगाने का िैि​िा िरकार ने सकया है. अि​िम खुशी िे उछि पि्ा. उिे सनराशा के बादि छंटते सदखाई पि् रहे थे. खबर िबीहा ने भी पढ़्ी और िी शाम रंगसबरंगी चूस्ियो् िे िजी उिकी किाई सिर अि​िम के िामने थी. अि​िम उिकी किाई मे्इत्​्िगाने िगा तो देखा एक कागज मुट्ी मे् दबा है. उिकी नजर पि्ते ही िबीहा ने अपनी मुट्ी झट िे पीछे कर िी. अि​िम ने और करीब जाकर उिकी किाइयां पकि् िी् और हैरानी िे पूछा, ‘ये क्या है?’ ‘ये अल्बा ने भेजा है तुम्हारे सिए. चाहो तो इिे खुसशयो्का सपटारा िमझ िो.’ वो शरारती मुस्कान के िाथ बोिी और िारे कागज अि​िम के िुपुद्मकर सदए. वो ‘िुगंध और िुरि सवकाि के्द्’ का िॉम्मथा, सजिमे्कई सकस्म की ट्​्ेसनंग के कोि्म थे और तो और इन कोि्​्ेि को करना जरा भी मुस्शकि नही् था. न ज्यादा खच्म न ही बहुत ज्यादा मेहनत. बि जरा िी मोहल्बत इत्​् के सिए हो इतना ही कािी था. यानी नए बदिावो्के िाथ कन्नौज का इत्​् व्यविाय वापि अपने ट्​्ैक पर आने की तैयारी मे् था और िाथ ही अि​िम और िबीहा की मोहल्बत की रेि को भी हरी झंडी समि गयी थी. ‘अल्बा ने ि​िाह सभजवाई है सक तुम अपने इत्​्िे िुगंसधत मोमबस्​्तयां, र्म फे्शनर और पॉटरी बनाना. आसखर जमाने के िाथ आगे भी तो बढ़्ना है.’ िबीहा उत्िासहत होकर झूमते हुए बोि रही थी. उिका चेहरा सखि गया था, आंखे् सहरनी जैिी चंचि हो गयी थी. कुछ सदन पहिे तक बादिो् मे् सछपा चांद जैिे बाहर सनकि आया हो. खुश-खुश िी िबीहा और उिके िाथ आयी खुश खबर ने अि​िम के भीतर का तनाव भी छूमंतर कर सदया. अपनी िबीहा की आंखो् मे्झांकते हुए वो गुनगुनाने िगा. ‘तेरे आने की जब खबर महके, तेरी खुशबू िे िारा घर महके.’ शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 23


उत् मास्​्रटप्​्दहेडेश

चा

र युवक, सववेक स्वामी, सकशन, िंजय और दीपक. चारो्की उम्​्25 िे 35 के बीच. चारो् मे् चार बातो् की िमानता- िभी सचत्​्कार है्, हत्या के आरोपी है्, सवचाराधीन कैदी है् और डािना जेि मे् बंद है्. शायद ये दुसनया के पहिे ऐिे कैदी हो्गे सजन्हे् सरहाई के वक्त जेि का मोह पीछे मुि्कर देखने को मजबूर करेगा. यह मजबूरी मीिी है, इिने इनकी सजंदगी मे् उम्मीदो् का रि घोिा है. इि मजबूरी का नाम है सतनका-सतनका डािना. इि इन्हो्ने मेरे कहने पर जेि की मुख्य दीवार पर रचा​ा. पांच महीने की अथक मेहनत के बाद जो िामने आया वह एक अजूबा था. सदल्िी की सतहाि्जेि िे करीब 60 सकमी दूर ब्सथत है गासजयाबाद की डािना जेि. यह

कतनका कतनका डासना एक ऐसी पहल है कजसने जेल की उदास और सादा कजंदगी िे्रंगो्के जकरये उम्िीद और संभावना के नये द्​्ार खोले है्.

कािी चस्चमत रही है क्यो्सक आर्सष हत्याकांड सरिीज सकया जायेगा. बहरहाि, इि कैिे्डर मामिे मे् उिके मातासपता राजेश और नूपुर का के्द् वह दीवार हैसजिे इन चारो् बंसदयो् ने तिवार तथा सनिारी कांड का आरोपी िुसरंदर समिकर बनाया है. जेि की दीवारे्िीकी होती है्और उन पर कोिी यहां कैद है्. सतनका-सतनका सतहाि् योजना के बाद प्​्वचन उकेरे जाते है्. शायद बंसदयो्को प्​्वचन सतनका-सतनका की दूिरी कि्ी मे् मै्ने डािना देना िबिे आिान काम है. िेसकन दीवारे्और को चुना. इि श्ंखिा मे्हर बार देश की सकिी भी बहुत कुछ कर िकती है्. िंभावना की इिी नयी जेि पर काम सकया जायेगा. इि कि्ी मे् तिाश मे्डािना मे्उि दीवार का चुनाव सकया दीवार, सकताब, कैिे्डर, गाने िे िेकर कसवता गया जो डािना के के्द् मे् थी. पीिी, खािी, तक, जेि के कैसदयो् की िृजनात्मकता को बेदम और बेरंग दीवार. उि दीवार पर रंग और खुशी भरकर उिे िामने िाने का प्​्याि सकया जाता है. पहिी कि्ी है कैिे्डर. सतनका अंदर और बाहर की दुसनया के बीच एक पुि सतनका डािना के 6 पन्नो् के कैिे्डर मे् बनाना था. काम मुब्शकि था क्यो्सक दीवार उत्​्र प्​्देश, खाि तौर िे डािना जेि, के जेि के अंदर थी और वह रोज मजबूसरयां रचनात्मक प्​्योगो्को के्द्मे्रखा गया है. इि िोखती थी जबसक उि पर सरश्ते और रौशनी कैिड े् र मे्जेि मे्हाि के सदनो्मे्सकये गये नये भरनी थी. िेसकन आसखरकार काम शुर् हुआ प्य् ोगो्की झिक है. इिमे्वह गाना भी प्म् ख ु ता और मुकम्मि भी. िीढ़्ी आयी, रंग आये, ि्​्श िे रखा गया है जो मै्ने् कैसदयो् के सिए सिखा आये और अंधेरे िे उजािे की ओर यह ि​िर और अब यह गाना जेि का आधार गीत है. टूटे आरंभ हुआ. िपने िाकार होने के इिी ि​िर सिर भी आि ना, ये है इनका डािना. इन का नाम है सतनका-सतनका डािना. इि दीवार को सवशाखापत्​्नम के रहने पंब्कतयो् के िाथ जेि मे् उम्मीद भरने की कोसशश की गयी है. यह गाना भी जल्द ही वािे सववेक स्वामी ने बनाया हैप्त सजि सदन िािना कारागार मे् एक कैले्िर का लोकाप्िण: कैददयो् की रचना

एक उदास दीवार

24 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016


दीवार बन कर तैयार हुई, उिी सदन वह सरहा भी हुआ. अजीब है न सक बाहर जाने की खुशी मे् भी दीवार के छूट जाने का गम उिके िाथ रहा. यह दीवार आने वािे िमय मे्उिके सिये कई राहे् खोिेगी. वह 3डी पे्सटंग मे् मासहर है. रंगो् को िेकर उिकी िमझ िाजवाब है. मेरे द्​्ारा सदये गये आइसडया को उिने सजतने शानदार अंदाज मे्दीवार पर उतारा वह िाजवाब था. यह पे्सटंग करीब 10 िाि तक इि दीवार पर बनी रहेगी. इिका एक सिरा अंधरे े मे्है जहां चांद और तारे सदन मे् जगमगाते हुए सदखायी दे्गे. दूिरे सिरे मे्उि गाने का अंश है सजिे मै्ने सिखा है और बंसदयो् ने गाया है. इिके िीक ऊपर चमकता हुआ िूरज है. बीच मे् 10 नाम है्. ये वे नाम है् जो इन बंसदयो् की याद मे् शासमि है्. इनमे् एक नाम आर्सष तिवार का भी है. 10 नामो्को 10 प्​्तीको्मे्घोिकर रचा गया है.एक नीिी आंख, एक सदया, एक पत्​्ा, एक चाबी, एक तािा, एक मािा, एक घि्ी, एक िोटो फे्म और एक सखि्की. ये वे ङ्​्ष् बब है्जो जेि की सजंदगी िे जुिे्है्. ये िभी ङ्​्ष् बब अिग-अिग स्​्ंभो्पर सटके है्. पे्सटंग के एक सिरे मे्घने अंधेरे मे्चमकते चांद और सितारे और दूिरे सिरे मे् पूरी ऊज्ाम िे दमकता िूरज कैसदयो्के सिये सझिसमिाती उम्मीद की िािटेन िा नजर आता है. यहां सदन मे्भी चांद तारो्की अपनी बारात के िाथ मौजूद रहेगा. जबसक रात मे् िूरज अपनी पूरी ताकत के िाथ चमक सबखेरेगा. हमारी आकांक्ा यही थी सक यह दीवार इि जेि के सिये और यहां आने वािो् के सिये शब्कतपुंज बन जाये. इिकी पसरकल्पना मे् यही िोच शासमि थी सक बंसदयो् को चौबीि घंटे सकिी भरोिे के िाथ जोि्ेरखना िंभव होगा. शायद हम इि कोसशश मे्कािी हद तक कामयाब हुए है्. यही तो है सतनका-सतनका डािना. िेसकन िपनो्के धागे का यह ि​िर एक सिरे िे दूिरे सिरे तक केवि इिसिये कामयाब हो िका क्यो्सक जेि के असधकासरयो् का इिमे् पूरा िहयोग था. िबकुछ आपिी भरोिे पर सनभ्मर था. हािांसक मामिा नाजुक था िेसकन यह भरोिा सकिी भी मोि् पर टूटा नही्. यह कि्ी देश की बहुत िारी और जेिो्के सिये प्र्े णा की वजह भी बन िकती है. इिी दीवार पर काम क्यो्हुआ? यह अपने आप मे्एक बि्ी कहानी है. खैर, उि पर चच्ाम बाद मे्. अभी तो यही सक सतनका-सतनका डािना और सतनका-सतनका उत्र् प्द् श े का एक खाि कैिे्डर भी जारी सकया जा चुका है. जेि के अधीक्क ् सशव प्क ् ाश यादव इि कैिड े् र को िेकर अत्यंत उत्िासहत है्. उनका मानना है सक इि कैिे्डर ने जेि मे् जीवन मे् उम्मीद भरने का अनूिा सि​िसि​िा चािू सकया है. इि

कैिे्डर के िभी पन्नो्मे्उत्​्र प्​्देश, खाि तौर िे डािना जेि, के रचनात्मक प्​्योगो् को ही के्द् मे् रखा गया है. दीवार के अिावा इि कैिड े् र मे्जेि मे्हाि के सदनो्मे्सकये गये नये प्​्योगो् की भी झिक है. वैिे यही दीवार जल्द प्क ् सशत होने वािी मेरी सकताब 'सतनका सतनका डािना' मे्प्​्मुखता िे सदखेगी तासक दुसनया भर के बंदी इिे देख कर प्​्ोत्िासहत महिूि कर िके्. मेरा मकिद इन बंसदयो् के सिये कि्ी ि​िाखो् के बीच उम्मीद के सचराग रोशन करना ही है तासक िज्ा के बीच कही्रौशनी भी रहे, िृजन भी और मानवीयता भी. जेिो् को िुधार गृह कहा जाता है. मेरी कोसशश सि​ि्क इतनी है सक िुधार के इि काम को िृजन िे भी जोि्ा जाये. सववेक स्वामी इि कॉिम को सिखे जाने िे कुछ घंटे पहिे सरहा हो चुका है. वह अब अपना एक स्टूसडयो खोिने का इरादा रखता है. बाकी बंदी भी छूटने के बाद उिके िाथ समिकर काम करना चाहते है्. सववेक जब सरहा होकर जा रहा था तो बंदी उिे िर कहकर िंबोसधत कर रहे थे. वे उि​िे आग्​्ह कर रहे थे सक वह अपना नया मोबाइि नंबर जर्र उन तक पहुंचा दे तासक वे िब बाद मे्उि​िे िंपक्क कर िके.् सववेक जेि िे बाहर जाते िमय अपने

िािना : चद्चित कारागार सिये िम्मान और िंभावनओ् का अनंत आकाश िेकर गया है. उिका कहना है सक उिका गुस्िा शांत हुआ है और उिके मन मे् रंग भर गये है्. नीरि और बंसदशो् िे भरी जेि ने उिकी सजंदगी को बदिा है. जाते िमय सववेक डािना की उि खाि दीवार के िाथ तस्वीरे्सखंचवा कर उन्हे्अपने िाथ िे गया है. डािना जेि के असधकासरयो् का िहयोग ऐिा रहा सक उिे यह िगा ही नही्सक यह वही जेि है सजिे सिल्मो् मे् कू्रता िे िबरेज सदखाया जाता है. वह कभी भूि नही् िकता सक कैिे जेि मे् आने पर पहिे ही सदन सडप्टी जेिर सशवाजी यादव ने सववेक की किा को िमझ सिया और उिे जेि मे् रंग मुहैया कराने का वादा सकया. उन्हो्ने इि वादे को बखूबी सनभाया. जो स्टसू डयो जेि के बाहर नही्बन िका था वह जेि मे्बना और खूब चिा. सववेक अब जेि िे सरहा हो चुका है और शायद ही कभी यहां िौटे. िेसकन यह दीवार यही्रहेगी. आने वािे 10 िािो्तक ये रंग यहां रौशन रहे्गे और हर बंदी को िंभावनाओ् के आकाश िे जोि्ेरखेग् .े सतनके अगर िाथ जुित् े जाये् और िबिता पा िे् तो उनका िृजन इसतहाि भी रच िकता है. डािना जेि मे्एक n इसतहाि रचा जा चुका है. शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 25


उत्​्राखंड

घसियारी का िमय उत्​्राखंड की घकसयारी प्​्कतयोकगता न केवल ग्​्ािीण क्​्ियो्की दक्​्ता का सम्िान करती है बल्कक उनके औरकि ज्​्ान का भी परीक्​्ण करती है. तशिप्​्साद जोशी

आ

ि जनवरी 2016 की दोपहर सटहरी की सभिंगना घाटी मे्दूर-दराज के गांवो्िे आयी पहाि्ी स्​्सयो् का उत्िाह छिक रहा है, 'दीदी पैिी बार कैन घसियासरयो्की िुध िीनी.' 'दीदी हैकी बत क हम बी नौ सिखौिा.' 'ऐ भुिी देख त कनी तेजी छ ती्का हाथो् मा.' ये िभी मसहिाये् यहां घसियारी प्​्सतयोसगता के सिये जुटी है्. प्​्सतभासगयो् के अिावा कुछ दश्मक भी है्. दश्मको्को केवि यह उत्िुकता खी्च िायी है सक क्या घाि काटने की भी कोई प्​्सतयोसगता हो िकती है? िरिरी तौर पर भिे ही इिका स्वर्प सकिी िौ्दय्मप्​्सतयोसगता के तज्मपर नजर आये मगर यह दक्​्ता की प्​्सतयोसगता है. प्​्सतभासगयो् को दो समनट मे्असधक िे असधक घाि काटकर अपनी दक्त् ा का प्द् श्नम करना है. यह कुशिता केवि घाि काटने मे्नही्सदखानी है बब्लक कई अन्य दौर भी होने है्. उदाहरण के सिये मसहिाओ्िे घाि की गुणवत्​्ा, उनके औषधीय गुण और जि्ी-बूटी के बारे मे् भी िवाि सकये गये. इि बात का खाि ख्याि रखा गया सक केवि घाि ही कटे िाथ मे्कोई अन्य पौधा न कट जाये. मसहिाओ् िे यह भी पूछा गया सक मसहिाओ्को सकतनी तरह की घाि और उनके उपयोग की जानकारी है. उन्हो्ने सकतने जानवर पािे है्और पाितू पशुओ्को होने वािी बीमारी और उनके घरेिू उपचार क्या है्? हर दौर के सिये अिग-अिग अंक सनध्ामसरत थे. राजधानी देहरादून िे करीब 170 सकमी दूर सटहरी के सभिंगना ल्िॉक मे्इि घसियारी प्स्तयोगका का आयोजन चेतना आंदोिन के िंस्थापक त्​्ेपन सिंह चौहान ने सकया है. वह कहते है्, 'इि प्​्सतयोसगता का उद्​्ेश्य सहमािय की पासरब्सथसतकी के िंरक्​्ण मे् पहाि्ी मसहिाओ् 26 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

उत्​्राखंि मे् घदियारी मदहलाएं: एक बुदनयादी िूदमका

के योगदान को आभामंसडत करना है. मसहिाओ् का श्​्म ही पहाि्की अथ्मव्यवस्था की धुरी रहा है जबसक हमेशा िे इिकी अनदेखी होती आयी है. आज िरकार और एनजीओ का गिजोि्भी उन्हे् जंगिो् िे बेदखि कर रहा है. इिसिये मसहिाओ् के श्​्म को प्​्ोत्िासहत करना बहुत जर्री हो गया है.' स्वयं पहाि्की मसहिाये्इि आयोजन िे बहुत प्भ् ासवत है.् जाख गांव की मंजू देवी कहती है् सक घाि काटना, पानी िाना पहाि् की मसहिाओ् का बुसनयादी काम रहा है िेसकन मसहिाओ्के इि काम को कभी भी िराहा नही् जाता था. इि तरह की प्​्सतयोसगता होने िे उनका आत्मसवश्​्ाि बढ़्ेगा. इिी तरह िे िरस्वती िेमवाि कहती है्, 'मुझे यहां आकर बहुत अच्छा िग रहा है. हर घसियासरन को उिका हक समिना चासहये. ' बारह गांवो्मे्ये प्स्तयोसगता कई सदन पहिे शुर्हो गयी थी. कुि 600 मसहिाओ्ने इिमे् सहस्िा सिया और तमाम शुरआ ् ती राउंड के बाद अंतत: 30 मसहिाओ्को िाइनि के सिये चुना गया. प्​्सतयोसगता मे्सवजयी हुई्अमरिार बिर गांव की रैजा देवी. उन्हे् एक िाख र्पये का पुरस्कार देने के अिावा चांदी का मुकुट पहनाया गया. रैजा देवी की आंखो् मे् आंिू छिछिा गये. उन्हो्ने दो समनट मे्िबिे ज्यादा घाि काटी और उनका स्थानीय औषसध ज्​्ान िबिे असधक माना गया और 100 मे् िे कुि 81 अंक समिे. वो कहती है्, 'ये पुरस्कार उनके अकेिे का नही्बब्लक पहाि्की हर घसियासरन का िम्मान है.' दूिरा पुरस्कार 51 हजार र्पये और तीिरा 21 हजार र्पये रखा गया था. आयोजको् का दावा है सक इिके सिये स्थानीय स्​्र पर ही चंदा जमा सकया गया और सकिी भी बाहरी एजे्िी िे कोई मदद नही् िी गई. काय्क म म् के मुखय् असतसथ और िोकगायक

नरे्द् सिंह नेगी कहते है्, 'घसियासरयो् और पहाि्की मसहिाओ्को इि तरह िे प्​्ोत्िासहत करने िे पहाि्ो् िे हो रहे पिायन पर रोक िगेगी.' ये प्​्सतयोसगता बहुराष्​्ीय कंपसनयो् द्​्ारा प्​्ायोसजत मसहिा िौ्दय्मप्​्सतयोसगता के िमांतर मसहिा के श्​्म की, पहाि्की माटी और पहाि् के पेि्ो् िे जुि्े परंपरागत ज्​्ान की प्​्सतयोसगता थी. क्या इि तरह की प्​्सतयोसगता के सनयसमत आयोजन के जसरये पहाि् की मसहिाओ् का िम्मान बढ़्ाया जा िकता है. यसद इिे केवि प्​्तीक मान सिया जाये तो भी प्​्तीक ही िही िेसकन जब पहाि्को बि्ी कंपसनयो्, सनवेशको् और िेकेदारो्के हवािे कर रही िरकारे्पहाि् के गांव के सिये कुछ नही्कर पा रही है्तो सिर ऐिे स्थानीय प्य् ाि ही शायद पहाि्के िोगो्के स्वासभमान और परंपरागत ज्​्ान को बचाने के सिये उम्मीद की सकरण बन िकते है्. उत्​्राखंड आंदोिन के अग्​्णी नेता रहे वसरष्​् पत्​्कार राजीव िोचन शाह ने िेिबुक पर सिखा, 'काश, इि उत्िाह को हम पूरे प्​्देश मे् िैिा देते, जनता द्​्ारा अपने प्​्यािो् िे बािगंगा घाटी मे्सकया गया ऐिा आयोजन हर जगह हो पाता तो नवजागरण की एक िहर पूरे प्​्देश मे् पिर जाती. एक जनांदोिन की पृष्भूसम स्वत: तैयार हो जाती.’ उत्​्राखंड मे् ग्​्ामीण िमाज के बीच इि तरह का ये प्​्योग पहिे कभी नही् हुआ था. िेसकन इि​िे जुि्ेकुछ िवाि और सचंताये्भी है्. घाि काटने वािी मसहिाओ् का िम्मान करने के अिावा एक दीघ्मकािीन िंघष्म पिायन रोकने और पहाि्ी जमीन को बचाये रखने का भी चिते रहना चासहये. पहाि्ी जमीन को न सि​ि्कमुनािाखोर एजे्सियां और सनवेशक सनगिना चाहते है्बब्लक कुदरती आिते्भी उिे n सनगि रही है्.


झारखंड

रघुवर दाि: अपनो् िे फजीहत

पक्​् के िीतर दवपक्​्

झारखंड िे्कवपक्​्ी दलो्की हालत बुरी है, लेककन सत्​्ािारी भाजपा के कई नेता अपने तेवरो्के कारण कवपक्​्ी की भूकिका कनभा रहे है् कति कुमार

झा

रखंड मे्सवपक्​्आईिीयू मे्है. उिे जो भी रही िही िांिे्समि रही है्वह ित्​्ा पक्​् की कृपा िे ही है्. रघुवर दाि के नेतृत्व वािी राज्य िरकार का सवरोध करने के सिये सवपक्​् के पाि कोई मुद्ा ही नही् है. सवपक्​् के बि्ेनेता छोटेमोटे मुद्ेउिाकर अपनी भद्​्सपटवा रहे है.् वही्िरकार के मंत्ी और भारतीय जनता पाट्​्ी के कुछ बि्ेनेता िरकार के कामकाज की आिोचना कर सवपक्​्की भूसमका अदा कर रहे है्. झारखंड के िंिदीय काय्मएवं खाद्​्आपूसत् म मंत्ी िरयू राय कहते है्सक एक िाि बीतने के बाद भी िरकार का काम सदखायी नही्देता है. राज्य के िोग घोषणाये्िुनने के बदिे मे्काम देखना चाहते है्. उन्हो्ने खुद स्वीकार सकया सक उनके सवभाग मे् भी काम न के बराबर हुआ. उन्हो्ने कहा सक सबना जन िहयोग के उनका सवभाग िंभि नही् िकता. राय कई बार जमशेदपुर के पुसि​ि प्​्शािन को िापरवाह, सनकम्मा और बेिगाम बता चुके है्. राय के इि मुद्े को सवपक्​्ी नेता, झारखंड सवकाि मोच्ाम के अध्यक्​्बाबूिाि मरांडी ने िपक सिया है. वह िरकार को हर मोच्​्े पर नाकाम करार देते है्. िरकार के मंत्ी िे िेकर मुख्यमंत्ी तक अपना

एक भी काम नही्सगना पा रहे है्. िरकार सि​ि्क घोषणाओ् के बि पर चि रही है. कांग्ेि के प्​्देश अध्यक्​्एवं िांिद िुखदेव भगत कहते है् सक िरकार सि​ि्क प्​्चार और तामझाम के बि पर चि रही है. बुसनयादी चीजो्पर िरकार का ध्यान नही्है. राज्य के गरीब आसदवािी, दसित और सपछि्ेिरकार के एजे्डा मे्नही्है्. राज्य के मुख्य सवपक्​्ी दि झारखंड मुब्कत मोच्ाम के केन्द्ीय अध्यक्​्सशबु िोरेन का भी यही कहना है सक रघुवर िरकार सि​ि्ककागजो्मे्ही सदखाई देती है. वह जोर देते है् सक यह िरकार मूिवासियो्की नही्व्यापासरयो्की है. िाि नजर आता है सक िरकार के सखिाि बोिने मे् सवपक्​् िे ज्यादा र्सच ित्​्ा पक्​् के िांिदो् की है.भाजपा के िांिद व पूव्म केन्द्ीय मंत्ी कसरया मुंडा ने अपने पत्​्ेखोिने शुर्कर सदये है्. उनका भी यही कहना है सक रघुवर िरकार का काम िंतोषजनक नही्है. घोषणाये् तो बहुत हुई्, परंतु घोषणाओ्पर सकतना अमि हुआ इिकी िमीक्​्ा की जानी चासहए. मुंडा ने कहा सक जनता घोषणाओ् के सिए वोट नही् देती. कम बरिात के कारण राज्य मे्ि​ि​ि को नुकिान हुआ तो मुख्यमंत्ी िे बात करने के बदिे जमशेदपुर के भाजपाई िांिद सवद्त्ु वरण महतो ने मामिा िंिद मे् उिा सदया. उन्हो्ने िंिद मे्मांग की सक राज्य िरकार िे राज्य को

िूखाग्​्स् घोसषत करने को कहा जाये. इिके कुछ सदनो् बाद ही िव्​्ेक्ण पूरा हो जाने पर रघुवर दाि ने राज्य को िूखाग्​्स् घोसषत कर सदया. राज्य की राजनीसत पर नजर रखने वािे सवशेषज्​् इि बात की तरि इशारा करते है् सक िांिद सवद्​्ुत वरण महतो इि िंबंध मे् िीधे मुख्यमंत्ी िे बात कर िकते थे. राज्य की िजीहत िंिद मे्कराने की क्या जर्रत थी. राज्य िरकार द्​्ारा आयोसजत ‘योजना बनाओ असभयान 2015-2016’ के दौरान सवपक्​्ी दि झामुमो के सवधायक कुणाि षाि्ंगी ने िरकार के ही प्​्चारतंत्की पोि खोिते हुए कहा सक ग्​्ामीणो् को िरकारी कल्याणकारी योजनाओ् की जानकारी तक नही् है. सजि​िे जनता सवकाि का िायदा नही् उिा पाती. नतीजतन सबचैसियो्की बन आती है. इिी िभा मे् िांिद सवद्​्ुत वरण महतो ने कह सदया सक ग्​्ामीण तो दूर उन्हे्तक िरकारी कल्याणकारी योजनाओ् की जानकारी नही् है. िांिद सवद्​्ुत वरण महतो पूव्म मुख्यमंत्ी अज्मुन मुंडा के गुट के बताए जाते है्. मुख्यमंत्ी रघुवर दाि ने कई बार कहा है सक जमशेदपुर की 86 बस्​्सयो्को जमीन का असधकार देना उनका एक ड्​्ीम प्​्ोजेक्ट है. ये बस्​्सयां उनके सवधानिभा क्​्ेत्मे् है्. रघुवर दाि यहां के सनवासियो् को टाटा स्टीि िे िीज मे् जमीन सदिाना चाहते है्. उनका यह प्​्याि चरम िीमा पर पहुंच गया है. सवपक्​्जानता है सक अगर रघुवर दाि ऐिा करा िे्गे तो वे अजेय हो जाएंगे. तब उन्हे्उनके क्​्ेत्मे्हराना नामुमसकन होगा. इिसिए सवपक्​् एकजुट होकर बस्​्ी वासियो्को तरह-तरह िे भ्स्मत कर रहा है. इि गंभीर मौके पर भाजपा के प्​्देश अध्यक्​्रवीन्द्राय ने बयान दे डािा सक 86 बस्​्सयो्का मामिा भाजपा का मुद्ा नही्है. जबसक सवधान िभा चुनाव मे्रघुवर दाि ने इिे मुद्ा बनाया था तो सकिी को आपस्​्त नही् थी. िरयू राय कहते है् सक अब यह सि​ि्क 86 बस्​्सयो्का मामिा नही्बब्लक 200 िे ज्यादा बस्​्सयो् का मामिा है. जो उनके सवधानिभा क्​्ेत्मे्भी है्. वे कहते है्सक जमीन के मामिे मे् अिग-अिग जगह के सिए अिग-अिग कानून नही् बनाए जा िकते. जबसक यह बात िब जानते है्सक 86 बस्​्सयो्की जमीन सटस्को की िीज मे्होने के चिते अिग मामिा है. कद्​्ावर भाजपाइयो् के तेवर के कारण सवपक्​् के नेताओ् को बि समिा और उन्हो्ने बस्​्सयो् मे् घुि कर रघुवर दाि के सखिाि भ्​्म िैिाने के िाथ उनके पुतिे भी जिाने शुर् कर सदए. इि बारे मे् पूछने पर रघुवर दाि िरिता िे कहते है् सक मंत्ी कहते है् तो िही ही कहते हो्गे, जो काम पूरा नही् हुआ है वह िबके िामने है. इि िाि उन्हे् पूरा कर n सिया जाएगा. शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 27


मास् गुजटरात हेड

वरदान बना िूकंप

वत्िमान िुज शहर: िूकंप के बाद पुनद्निमाण

पंद्ह साल पहले आये भूकंप ने भुज शहर को तबाह कर कदया था, लेककन अब उसकी जगह एक आिुकनक शहर बसा कदया गया है जहां कच्छ का रन देखने के इच्छुक पय्षटक बड्ी संख्या िे्आते है्. रीिा ति​िारी

य

ह बात िुनने मे्कुछ अटपटी िग िकती है, िेसकन िच यह है सक िाि 2001 मे् आने वािे भूकंप इि पूरे इिाके के सिए वरदान बन कर आया था. गुजरात के भुज शहर मे् सवमि शाह की कही इि बात मे् दम है. शाह बीते दि िािो्िे एक ट्​्ेवि एजंिी चिाते है्. पूरे शहर मे् घूमने के बाद उनकी बात िही िगती है. करीब 15 िाि पहिे 26 जनवरी की िद्मिुबह आए उि भूकंप ने भुज िमेत इिाके के अंजार और आिपाि के दूिरे शहरो्को पूरी तरह मसटयामेट कर सदया था. पूरा इिाका िगभग जमी्दोज हो गया था और हजारो् जाने् गई थी्. िेसकन अब भुज का चेहरा पूरी तरह बदि गया है. भूकंप के बाद बि्ेपैमाने पर होने वािे पुनस्नमम्ामण ने इिे गुजरात के िबिे ज्यादा सवकसित शहरो्की कतार मे्खि्ा कर सदया है. शहर मे्भूकपं की सनशासनयां अब भी नजर आती 28 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

है्. मि​िन ऐसतहासिक प्​्ाग महि के क्िाक टावर की दरार अब भी िाि नजर आती है. कई दूिरी इमारते्भी दरारो्के िाथ खि्ी है.् िेसकन बाकी शहर बदि गया है. िरकार ने इिाके मे्पय्टम न गसतसवसधयो्को भी पूरा बढ़्ावा सदया है. इिके सिए असमताभ बच्​्न को ि्​्ांड अंबेिडर बना कर बि्े पैमाने पर प्च ् ार सकया गया है.यही वजह है सक अब हर िाि सदिंबर मे् होने वािे रन उत्िव मे् देशसवदेश िे िाखो्िोग कच्छ के ि​िेद रेसगस्​्ान मे्जुटते है्. अब कच्छ इिाका देश के तेजी िे सवकसित होते दो बंदरगाहो्- मुंदरा और कांडिा का घर है. इिाके मे् भूकंप के बाद तेजी िे सवकसित आधारभूत ढांचे की वजह िे यहां सनवेश बढ़्ा है. भुज सवकाि प्​्ासधकरण के एक असधकारी बताते है् सक बीते 10 िािो्के दौरान इिाके मे्सवसभन्न पसरयोजनाओ् मे् कोई 35 हजार करोि् का सनवेश हो चुका है.

दरअि​ि पासकस्​्ान की िीमा िे िटा गुजरात का यह रेसगस्​्ानी इिाका िीब्जमक ज्ोन-5 मे् है. यानी भूकंप के सिहाज् िे बेहद िंवेदनशीि. यहां की धरती ने वष्म1956 और सिर 2001 मे् दो बि्े भूंकप झेिे. जहां 1956 मे्डेढ़्िौ िोगो्की मौत हुयी थी, वही्2001 मे् मरने वािो् की तादाद 30 हजार तक पहुंच गयी. इिकी वजह घनी आबादी और बहुमसं ्जिी इमारते्थी्. िाि 2001 िे पहिे कोई िख्ती नही्थी. नतीजतन 3 मंसजिो् का िाइिे्ि िेकर कुछ िोगो् ने 6 -7 मंसजिो् तक के अपाट्ममे्ट खि्े कर सिये थे. िेसकन इिी िािच की कीमत हजा़रो् को जान देकर चुकानी पि्ी. 2001 के भूकपं ने िबिे पहिे इन इमारतो्को ही सनशाना बनाया और उनको ताश के पत्​्ो्की तरह धरती पर सबखेर सदया. आगे ऐिे नुकिान न हो्, इिके सिए िाि 2001 के बाद शहर की नए सिरे िे प्िासनंग की गयी और इिका स्जम्मा भुज एसरया डेविेपमे्ट अथ्​्ोसरटी यानी बाडा को िौ्पा


गया. िंशोसधत सनयमो् के मुतासबक, शहर मे् कोई भी इमारत दो मंस्जि िे ऊंची नही् बनायी जा िकती और उिका नक्शा भी भूकंपरोधी तकनीको् को ध्यान मे् रखते हुये बनाया जाना चासहये. शहर मे् जब पहिा 7 मंस्जिा गोकुि अपाट्ममे्ट बना था तो पूरे भुज िे िोग इिे देखने आते थे. वजह यह शहर की पहिी इमारत थी, सजिमे् सिफ्ट िगी थी. िेसकन 26 जनवरी के उि भूकंप मे् देखते ही देखते वो खूबिूरत इमारत ताश के पत्​्ो्की तरह ढह गयी और कम िे कम 100 िोग यही् मिबे मे् दिन हो गये थे. गोकुि अपाट्ममे्ट के अिावा ऐिी कई इमारते् है् सजनकी दरारे् अब तक तबाही की दास्​्ां िुना रही है्. भुज की सवराित कहे जाने वािे प्​्ाग महि और आईना महि भी भूकंप िे अछूते नही्रहे थे. भुज मे् भयावह भूकंप के बाद उिे देशसवदश िे बि्ेपैमाने पर आस्थक म िहायता समिी. और उि िहायता को बेहतर तरीके िे काम पर भी िगाया गया. यही वजह है सक आज यह शहर पुनस्नमम्ामण की समिाि बन गया है. यह जर्र है सक इि शहर को नए सिरे िे बिाने की योजनाओ् को बनाने और उको िागू करने मे् कई िाि िग गये. िेसकन अब भुज का पुनज्मन्म हो चुका है. शहर के चारो्और दो नए सरंग रोड बने है्और एअरपोट्मका भी कायाकल्प हो गया है. इि पुनस्नमम्ामण मे् अहम सभमका सनभाने वािे िरकारी असधकारी प्​्दीप शम्ाम कहते है् सक आप एक नया भुज देख रहे है्. हमने ि​ि्के्चौि्ी कर दी है्. पानी की िप्िाई की व्यवस्था और भूसमगत ड्​्ेनेज प्​्णािी सवकसित की है. भुज के पुनस्नममाण्म मे् िै्ड री-एडजस्टमे्ट तकनीक का भी भरपूर इस्म्े ाि सकया गया. इि शहर को नए सिरे िे बनाने-बिाने मे् अहम भूसमका सनभाने वािी आस्ककटक्ट व अब्मन

प्िानर सशरिी बेिानी कहती है् सक भुज िैड री-एडज्िटमे्ट तकनीक िे सिर उिाने वािा इिाके का पहिा शहर है. के्द् िरकार ने भी इिाके के सवकाि मे् अहम भूसमका सनभायी थी. कई इिाको् को टैक्ि-फ्​्ी जोन का दज्ाम सदया गया. नतीजतन तेजी िे सनवेश आये. सि​िहाि कच्छ इिाके मे् तीन िौ िे ज्यादा कंपसनयां काम कर रही है्. भूकपं िे पहिे एक छोटे-िे बंदरगाह के तौर पर जाना जाने वािा मुंदरा अब औद्​्ोसगक के्द्बन गया है जो रोजाना िैकि्ो्टन माि का िंचािन करता है. अदानी िमूह का यह बंदरगाह सजि तेजी िे सवकसित हो रहा है उि​िे इिके कुछ िाि मे् मुंबई बंदरगाह िे भी बि्ा हो जाने की उम्मीद है. भुज दरअि​ि भूकंप िे ध्वस्​् शहरो् को दोबारा बिाने के मामिे मे् एक माडि बन चुका है. यहां इि बात का सजक्​् जर्री है सक भुज के पुनस्नमम्ामण के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्ी रहे नरे्द् मोदी ने भी अहम भूसमका िुज: पय्िटको् का स्वागत

एेदतहादिक प्​्ाग महल: दरारो् के बावजूद सनभाई थी. भुज के पुनस्नमम्ामण के सिए गसित भुज क्​्ेत् सवकाि प्​्ासधकरण बाडा के एक असधकारी डी.िी.जोशी कहते है् सक अब हम नए सनम्ामण के मामिे मे् बेहद िख्त है्. िाढ़्े िात मीटर िे ऊंचे भवनो् के सनम्ामण की अनुसमत नही्दी जा रही है. भूकंप के बाद सवकसित भुज का क्​्ेत्ि​ि बढ़्कर 56 वग्सम किोमीटर हो चुका है जो भूकपं िे पहिे के भुज के मुकाबिे चार गुना है. शहर मे्अब ऊंची इमारतो्के नाम पर भूकंप मे्बची िगभग 75 इमारते् ही नजर आती है्. इिके अिावा जी.के.जनरि अस्पताि तीन मंसजिा है. इि अस्पताि को भूकंपरोधी तकनीक के इस्​्ेमाि िे बनाया गया है. कच्छ सवश्​्सवद्​्ािय के भूकंप वैज्ासनक एम. जी. ि​ि्​्र कहते है् सक अस्पताि का यह ढांचा सरक्टर स्केि पर नौ तक आने वािे भूकंप को िहने मे् िक्​्म है. सवशेषज्​्ो् का कहना है सक आवािीय और व्याविासयक पसरिरो् के सनम्ामण मे् इि तकनीक का इस्​्ेमाि मुब्शकि था क्यो्सक इि​िे िागत कम िे कम चार गुनी बढ़्जाती. वष्म 2001 मे् भुज की ि​ि्को् की चौडाई जहां असधकतम ढाई मीटर थी वही् अब यह न्यूनतम िात िे िाढ़्े मीटर चौि्ी है्. इिके अिावा हर इिाके मे् कम िे कम नौ मीटर चौि्ी मुख्य ि​ि्क बनाई गई है. िंकरी ि​ि्को् की वजह िे भूकपं के बाद राहत व बचाव काय्​्ो् मे् भारी सदि्​्तो् का िामना करना पि्ा था. भूकंप के बाद स्वामी नारायण िंप्दाय ने भुज मे् डेढ़् िौ करोि् की िागत िे एक भव्य मंसदर बनवाया है. सवशेषज्​्ो्का कहना है सक भूकंप के प्​्सत िंवेदनशीि इिाके मे् होने की वजह िे यहां ऐिी इमारतो् का सनम्ामण जर्री है जो सरक्टर स्केि पर िात तक के झटको् को झेि िके्. n शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 29


आंध् प्​्देश

भूलता-बिसरता बिमायत नगर अतभषेक रंजन तसंह

है

दराबाद के मशहूर हुिैन िागर तािाब के िामने है सहमायतनगर. करीब 40-50 िाि पहिे यहां इतनी घनी आबादी नही् थी. उि िमय यहां छोटे-बि्े स्​्पंसटग प्​्ेि के अिावा अंग्ेजी, तेिुगू और उद्मू मे् प्​्कासशत होने वािे कुछ अखबारो्के दफ्तर थे. हािांसक, सहमायतनगर अब कािी बदि चुका है. पुरानी इमारते् तो महज सगनती भर बची हुई है्. उनके स्थान पर मल्टी स्टोरेज सबब्लडंग और शॉसपि मॉल्ि खुि गये है्. इि तरह सहमायतनगर आज एक सरहायशी इिाके मे् तल्दीि हो चुका है.

30 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

यह िवाि उिना स्वाभासवक है सक आसखर इि जगह िे जुि्ी ऐिी कौन िी बाते्है,् सजिकी चच्ाम हो रही है? दरअि​ि, पचाि के दशक मे् िोशसिस्ट पाट्​्ी का के्द्ीय काय्ामिय सहमायतनगर के इिी प्िॉट िंख्या 3/6/19 मे् हुआ करता था. िमाजवादी सचंतक और राजनेता डॉ राममनोहर िोसहया और उनके िमकािीन नेताओ्का यहां िे पुराना सरश्ता रहा है. न सि​ि्किोशसिस्ट पाट्​्ी का िंचािन, बब्लक उि िमय की मशहूर पस्​्तका ‘चौखंभा’ का प्​्काशन भी यही्िे होता था. कािी सदनो् िे मै् सहमायतनगर आने की िोच रहा था, िेसकन यात्​्ा का िंयोग बीते महीने समिा. सहमायतनगर के अतीत के बारे मे्

कहिायत नगर एक एेकतहाकसक जगह है जहां एक जिाने िे् सोशकलस्ट पाट्​्ी का के्द्ीय दफ्तर था और पक्​्िकाएं छपती थी्. आज सिाजवादी लोग भी इस जगह को भूल चुके है्. मै् सजतना जानता हूं, उिका श्​्ेय मेरे दादा राशनारायण सिंह को जाता है. वह स्वयं िोशसिस्ट पाट्​्ी और डॉ. राममनोहर िोसहया िे जुिे हुए थे. डॉ िोसहया को मै्ने सजतना सकताबो् िे जाना, उि​िे कही् ज्यादा अपने दादाजी के िंस्मरणो्के जसरये जाना. सबहार ब्सथत मेरे घर पर िोशसिस्ट पाट्​्ी के सहमायतनगर ब्सथत दफ्तर िे कई सचस्​्टयां और पस्​्तकाये्आती थी्. िाि 1958 का एक पोस्टकाड्मजो मेरे दादा के नाम िे है. यह पोस्टकाड्म‘चौखंभा’ पस्​्तका की ओर िे भेजा गया था. डॉ िोसहया और िोशसिस्ट पाट्​्ी िे जुिे ऐिे कई महत्वपूण्म ऐसतहासिक दस्​्ावेजो्ने मुझे सहमायतनगर आने को प्​्ेसरत सकया. दहमायत नगर: बदला हुआ नक्शा


ददल्ली मे् िॉ. लोदहया का पूव्ि आवाि: दकिी को िुध नही् यहां आने िे पूव्म मुझे यकीन था सक को इंटरनेट पर उपिल्ध कराया है. ‘िोशसिस्ट पाट्​्ी’ और डॉ िोसहया िे जुि्ी पूव्मन्यायाधीश िाकुर गोपाि सिंह, जो डॉ सनशासनयां जर्र महिूज हो्गी. उिी पुराने िोसहया के सवचारो् िे कािी प्​्भासवत रहे है्. पोस्टकाड्म की तरह, िेसकन सहमायतनगर मे् उनके िाथ मै् सहमायतनगर पहुंचा. यहां मेरी ऐिा कुछ भी नही् था. उस्मासनया यूसनवस्िमटी आंखे्3/6/19 वािे प्िॉट को तिाश रही थी. के सरटायड्म प्​्ोिेिर केशवराव जाधव डॉ बेहद पॉश कॉिोनी मे् तल्दीि हो चुके है्. राममनोहर िोसहया के अत्यंत करीबी िोगो् सहमायतनगर मे्पचाि िाि पुराने सकिी पते को मे् िे एक है्. प्​्ोिेिर जाधव उन सदनो् अंग्ेजी ढूंढना बेहद मुब्शकि था. वहां मौजूद कई िोगो् दहमायत नगर िे लोदहया की एक दचट्​्ी मे्प्​्कासशत ‘मैनकाइंड’ पस्​्तका के िंपादकीय मंडि मे् रहे है्. सहमायतनगर ब्सथत िोशसिस्ट पाट्​्ी के सदनो् को याद करते हुए वे बताते है्, ‘हैदराबाद आने पर डॉ िोसहया यहां जर्र आते थे. ‘मैनकाइंड’ उनके िंपादकत्व मे् प्​्कासशत होता था. पाट्​्ी काय्मकत्ामओ् और नेताओ् की भीि् यहां हमेशा िगी रहती थी. हािांसक, अब उि जगह पर नयी इमारत बन चुकी है. डॉ िाहब की मौत के बाद सकिी ने भी सहमायतनगर ऑसि​ि की िुध नही् िी. सकराये के मकान पर पाट्​्ी ऑसि​ि चि रहा था. अगर िोशसिस्ट पाट्​्ी िे जुिे िोग चाहते तो उि जमीन को खरीद िकते थे, िेसकन सकिी ने अपनी सदिचस्पी नही्सदखायी. जब तक बदरीसवशाि सपत्​्ी थे, वे हर मौके पर िोसहया जी के िाथ खि्े थे. उनकी म़त्यु के बाद उनके कारोबारी पुत्शरद सवशाि सपत्​्ी ने ‘िोसहया वाणी’ वेबिाइट पर डॉ राममनोहर िोसहया के भाषण, तस्वीरे्और उनकी रचनाओ्

िे मै्ने िोशसिस्ट पाट्​्ी के उि दफ्तर का पता पूछा, िेसकन वे िही पता बताने मे्अिमथ्मरहे. तकरीबन सनराश हो चुका मै्ने वहां मौजूद एक बुजुग्म ि​ि सवके्ता अि​िम िे पूछा. उन्हो्ने िामने की गिी मे् जाने का इशारा करते हुए कहा सक यहां पता कीसजये. गिी मे् थोि्ी दूर आगे बढ़्ने पर 3/6/19 वािा प्िॉट सदखायी सदया. जो अब एक बहुमंसजिी इमारत बन गया है. वहां मौजूद एक सनजी िुरक्​्ाकम्​्ी ने बताया सक यहां बने फ्िैट दि िे पंद्ह िाि पुराने है्. पहिे यह जमीन सकिकी थी और उिमे् क्या यह तो नही्पता, िेसकन दो पाट्ममे्बने ये िभी फ्िैट हैदराबाद की एक रीयि इस्टेट कंपनी ने बनाये है्. इि तरह सहमायत मे् मै्ने करीब पांच घंटे सबताये, िेसकन डॉ राममनोहर िोसहया और उनकी िोशसिस्ट पाट्​्ी की कोई सनशानी मुझे नही्समिी. हैदराबाद मे्डॉ राममनोहर िोसहया के एक और करीबी रावेिा िौमेयय् ा के घर गया. सहमायतनगर मे् िोशसिस्ट पाट्​्ी का िे्ट्ि ऑसि​ि बनाने के पीछे डॉ िोसहया की िोच के बारे मे्उन्हो्ने बताया सक डॉ िोसहया चाहते तो नयी सदल्िी मे् भी िोशसिस्ट पाट्​्ी का दफ्तर बना िकते थे. िेसकन हैदराबाद को वह भारत के मध्य मे् बिा एक शहर मानते थे. उनका मानना था सक हैदराबाद िे िोशसिस्ट पाट्​्ी का िंचािन कािी आिान होगा. मौजूदा िमाजवादी नेताओ् के रवैये िे सनराश रावेिा िौमेय्या के मुतासबक, राजनीसत और ित्​्ा के सिए सजन िोगो्ने डॉ िोसहया के नाम का इस्​्ेमाि सकया. वैिे राजनेताओ्ने डॉ िाहब िे जुि्ी सनशासनयो्को िहेजने की कभी कोसशश नही् की. कुछ इिी तरह का सकस्िा नयी सदल्िी ब्सथत 7 गुरद् ्ारा रकाबगंज रोड का है. बतौर िांिद डॉ िोसहया इिी िरकारी आवाि मे्रहते थे. उनकी म़त्यु के बाद कम िे कम इि स्थान को एक स्मारक मे्तल्दीि सकया जा िकता था. िेसकन उनके राजनीसतक उत्​्रासधकासरयो् ने इिमे् भी कोई र्सच नही् सदखायी. मुिायम सिंह यादव और िािू प्​्िाद िरीखे िमाजवादी नेताओ् ने उत्​्र प्​्देश और सबहार मे् कई जगहो् पर डॉ. िोसहया की प्​्सतमाये्िगायी्, िेसकन 7 गुर्द्ारा रकाबगंज रोड आवाि िोसहया स्मारक घोसषत सकया जाये, इिे िेकर इन्हो्ने कभी कोई प्​्याि नही् सकया. वारंगि िे िंयुक्त िोशसिस्ट पाट्​्ी के सवधायक रहे पी जनाद्मन रेड्ी कहते है् सक जॉज्म िन्ा​ा्डीि को छोि्कर कोई िमाजवादी नही् बचा है. जॉज्म िाहब कई िािो्िे बीमार है्. िेसकन नीतीश कुमार, िािू प्​्िाद और मुिायम सिंह यादव ने उन्हे् जीते n जी भुिा सदया. शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 31


जम्मू-कश्मीर

शरई अदालत के मुफ्ती नादिर उल इस्लाम: बढ़्ते मुकदमे

नशे िे कि्लाफ् तलाक्

कश्िीर िे्बढ्ती नशाखोरी कचंता का सबब है, लेककन िकहलाओ्के नशे के लती पकतयो्को तलाक देने की बढ्ती घटनाएं एक नयी ककस्ि की जागर्कता का पकरचय दे रही है्. मातजद जहांगीर

क

श्मीर घाटी मे् सपछिे दो महीनो् मे् 40 मसहिाओ् ने अपने नशेि्ी पसतयो् को तिाक दे सदया है. िारे तिाक इस्िामी शरई अदाित के जसरये हुए है् जबसक कई और मामिे िंसबत है्. कश्मीर मे्यह नये सकस्म का बदिाव है सजिमे् मसहिाओ् ने परंपरा को नकारते हुए अपने सिये नये रास्​्ो् और नयी मंसजिो् की तिाश शुर् की है. इन औरतो् का मानना है सक वह इन िामासजक बुराइयो्िे ि​ि् पा रही है्क्यो्सक इस्िाम ने उनको ऐिे िैि​िे िेने का असधकार सदया है. श्​्ीनगर सनवािी 25 वष्​्ीया महजबीन (बदिा हुआ नाम) ने कुछ सदन पहिे अपने पसत को तिाक दे सदया. उिका इल्जाम है सक उिका पसत नशीिी दवाओ् का आदी था और नशा करके उिके िाथ गािी गिौज और मारपीट सकया करता था. आसखरकार तीन िाि बरदाश्त करने के बाद महजबीन ने अपने सिये नयी राह तिाश करने का िैि​िा कर सिया. महजबीन बताती है,् 'शादी िे पहिे मुझे मािूम नही् था सक मेरे पसत नशीिी दवाओ् का इतना असधक इस्​्ेमाि करते है्. यह िबकुछ मुझे बाद मे् पता चिा.मै्ने अपनी ओर िे पूरी कोसशश की सक उनकी यह आदत छूट जाये िेसकन यह नही्हो िका. आसखरकार तंग आने के बाद मै्ने अपने सपता िे इि बारे मे्बात की. 32 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

उन्हो्ने भी यही मशसवरा सदया. इिके बाद एक बा पुन: मै्ने अपने पसत िे बात की. उन्हो्ने वादा सकया िेसकन वह नशा नही्छोि्पाये.' महजबीन अपने पसत की आदत छुिव् ाने के सिये उिे तमाम नशामुब्कत के्द्ो्पर भी िे गयी िेसकन उिने अपनी आदत नही्बदिी. तिाक को िेकर महजबीन का नजसरया एकदम स्पष्ï् है. वह कहती है्, 'अक्िर यह माना जाता है सक केवि मद्म ही तिाक दे िकते है्.जबसक ऐिा नही्है मसहिाये्भी तिाक दे िकती है्.' ित्​्ाइि िाि की कुरत भी सपछिे कई िािो् िे ऐिे ही हािात िे दो चार थी. जब उिका पसत सकिी भी तरह नशे की ित नही् छोि्िका तो उिने अपनी सजंदगी को नशाखोर पसत िे दूर िे जाने का िाना. कुरत ने इस्िामी अदाित का दरवाजा खटखटाया और अपने पसत को तिाक दे सदया. कुरत कहती है, 'एक औरत को िमाज का डर रहता है सक अगर मै्ने ऐिा कदम उिाया तो िोग जाने क्या कहे्गे? िेसकन मै्ने इि बात की परवाह नही् की सक कौन क्या कह रहा है? मुझे भी तो अपनी सजंदगी देखनी है. मै्ऐिे शख्ि के िाथ कैिे पूरी सजंदगी सबता िकती थी जो नशे की ित मे् डूबा हुआ हो. कुछ सदन पहिे मैन् े भी शरई अदाित मे्उिे तिाक दे सदया.' कश्मीर की इस्िामी शरई अदाित के मुफ्ती नासिर उि इस्िाम के मुतासबक सपछिे डेढ़् महीने मे् उन के पाि 40 िे असधक

मसहिाओ् के ऐिे मामिे आये सजन्हो्ने अपने पसतयो् की नशे की ित िे तंग आकर उनको तिाक दे सदया. इस्िाम कहते है्, 'हमारी अदाित मे्सपछिे डेढ़्महीने मे्40 ऐिे मामिे सनपटाये गये सजनमे् मसहिाओ् ने आगे बढ़्कर तिाक सदया. हमने ऐिे िभ्ी मामिो् मे् नतीजे के पहिे सचसकत्िीय जांच करवायी. अभी भी कुछ मामिे िंसबत है्.' वह कहते है् सक इि​िे िाि अंदाजा िगाया जा िकता है सक कश्मीरी िमाज सकन अंधेरो् मे् भटक रहा है. उनका मानना है सक कश्मीर को इि हाित िे उबारने के सिये िबको िामने आना चासहये. इि काम मे्िबिे बि्ी सजम्मेदारी धास्ममक उपदेशको्की बनती है. िेसकन वह अि​िोि जताते है् सक कोई भी िामने आने के सिये तैयार नही्है. एक और पीसि्त िै्िी जान(बदिा हुआ नाम) के सपता बशीर अहमद खान (बदिा हुआ नाम) ने शुक्वार को बताया, 'िबिे बि्ा दुख तो इि बात का है सक हमे्शादी के बाद पता चिा सक हमारा दामाद नशीिी दवाओ्की ित का सशकार है. वह हर रोज मेरी बेटी को पीटता था आसखरकार हमने शरई अदाित का र्ख सकया और उि​िे इि सजल्ित की सजंदगी िे सनजात सदिायी.' इि घटना का एक पहिू और है. तमाम िोग इिे कश्मीरी मसहिाओ् मे् बढ़्ती जागर्कता के िकारात्मक िंकेत के तौर पर िेते है्. कश्मीर के वसरष्​्ï पत्​्कार और िंपादक कासिम िजाद बताते है्, 'पहिे कश्मीर मे्ऐिा नही्होता था. घटनाये्होती थी् िेसकन िामने नही् आती थी्. आज की औरत िाहि के िाथ िैि​िा िे पा रही है सक उिके सिये क्या िही है और क्या गित?यही वजह है सक औरते् अब ऐिी बातो् को बरदाश्त नही् करती्. अपनी और अपने बच्​्ो् की सजंदगी को देखते हुए वे िामने आ रही है्. वे घुटघुटकर मरना नही्चाहती्बब्लक इि्त् िे जीना चाहती है्.' उल्िख े नीय है सक बीते िािो्मे्कश्मीर के युवाओ् मे् नशीिी दवाओ् का चिन बढ़्ा है. कश्मीर मे् नशामुब्कत के्द्ो् मे् 85 िीिदी िे असधक मरीज ऐिे है् सजनकी उम्​् 35 िाि िे कम है. हािांसक कश्मीर पुसि​ि आये सदन नशे के कारोबासरयो् को पकडऩे का दावा करती है िेसकन इि धंधे पर कोई खाि अिर नही्सदख रहा. यही वजह है सक िोग पुसि​ि पर भी िवाि उिाने िे नही् चूकते. नासिर उि इस्िाम नशे के तस्करो् के सखिाि पुसिसिया कार्मवाई िे िंतुर्ल्ट नही् है्. उरनका कहना है सक नशे के सखिाि काम करने वािी एजे्सियां पूरी तरह िस्​्कय नही्है्. अगर सकिी को सगरफ्तार सकया भी जाता है तो उिको दो सदन बाद जमानत पर n सरहा कर सदया जाता है.


असम

जदटंगा: अब िी रहस्य

घटती हुई रिऱियां

जकटंगा िे्आने वाले पक्​्कयो्की तादाद िे्बीते कुछ सालो्से किी आयी है. ग्​्ािीणो्द्​्ारा पक्​्कयो्को िारने की घटनाएं भी कि हुई है्. रीिा ति​िारी

पू

व्​्ोत्​्र का प्​्वेश द्​्ार कहे जाने वािे अिम के जसटंगा मे् आत्महत्या करने के सिए पहुंचने वािे पस्​्कयो्की तादाद िगातार कम हो रही है. जाने-माने पक्​्ी सवशेषज्​् अनवर्द्ीन चौधरी कहते है् सक जसटंगा मे् आत्महत्या के सिए आने वािे पस्​्कयो्की तादाद मे्बीते कुछ िािो्िे िगातार कमी आयी है. इिके िाथ ही ग्​्ामीणो् की ओर िे पस्​्कयो् को मारने की घटनाएं भी कम हुई है्. अिम के बड्ममैन यानी पक्​्ी मनुरय् के तौर पर अनवर्द्ीन चौधरी मशहूर है्. चौधरी ने हाि​िांग के पाि उत्​्री कछार सहल्ि की इन पहास्ियो् मे् आकर आत्महत्या करने वािे पस्​्कयो्पर गहरा अध्ययन सकया है. सडमा हािो के असतसरक्त प्​्मुख वन िंरक्​्क सवकाि ि्​्ह्म भी चौधरी की बातो्पर मुहर िगाते है्. वे कहते है्सक बीते कुछ िािो्िे यहां आने वािे पस्​्कयो् की तादाद मे्िगातार सगरावट आयी है. उनका कहना है सक इिाके मे् वन सवभाग की ओर िे चिाये गये जागर्कता असभयान के बाद ऐिी घटनाएं कािी कम हो गयी है्. हर िाि अगस्​्िे नवंबर तक हजारो्की िंख्या मे् पक्​्ी यहां आमहत्या करते रहे है्. छोटे-िे इि पहाि्ी गांव मे्हर िाि तीन िे चार

महीनो् के दौरान यह सवसचत्​् और रहस्यमयी घटना घटती है, सजिने पूरी दुसनया के वैज्ासनको् को भी चसकत कर रखा है. वैिे तो चारो् तरि हसरयािी िे सघरे इि सहि स्टेशन पर पय्मटक खुद खी्चे चिे आते है्. पहास्ियां और पहाि्ो् पर बहते झरनो् के प्​्ाकृसतक दृश्य इिे छुस्टयां सबताने के सिए एक आदश्मस्थान बनाते है्. कुछ सवशेष पसरब्सथसतयो् मे् जसटंगा मे् रात मे्जिाये गये सकिी भी रोशनी की ओर बीसियो् पक्​्ी आकस्षतम होकर आते है,् कुछ-कुछ वैिे ही जैिे दूिरे स्थानो् पर सदये की ओर पतंगे आकस्षमत होते है्. पस्​्कयो् के आकस्षमत होने के सिए सनम्नसिसखत पसरब्सथसतयो्का होना जर्री हैः- अमावाि की रात हो, हल्की बासरश हो रही रही हो, धुंध छाया हुआ हो और हवा का बहाव दस्​्कण िे पस्​्िम की ओर हो. पस्​्कयो् का यह अनोखा व्यवहार सि​ि्कजसटंगा मे्देखा जाता है, आिपाि के अन्य गांवो्मे्नही्. रात को िैकि्ो् पक्​्ी इमारतो्और पेि्ो्की ओर उि्ते हुए जाते है्और उनिे टकराकर मर जाते है्. ऐिा जसटंगा के डेढ़्सकिोमीटर क्​्ेत्मे्ही होता है. यह क्यो् होता है, इि बारे मे् अब तक कोई वैज्ासनक तथ्य िामने नही्आया है. हैरत की बात तो यह है सक ऐिा केवि अगस्​् िे नवंबर महीने के बीच ही होता है. बावजूद इिके जसटंगा अिम के िबिे िोकस्​्पय सहि स्टेशनो्मे्िे एक है.

जसटंगा माइग्ट्े री बड्िम्की पिंदीदा िैरगाह है. यहां िाि भर प्​्वािी पस्​्कयो् का जमावि्ा िगा रहता है. वैज्ासनक पस्​्कयो् के सदशाभ्​्समत होने की वजह इिेक्ट्ो मैग्नेसटक कारको् को मानते है्, िेसकन आजतक इिका कोई पुख्ता िबूत नही्समि िका है. दरअि​ि इिके अन्य कारण भी है्. जो प्​्जासत यहां शरण िेती है उिकी कमजोरी यह है सक वह रात मे्उि्नही् िकती. िेसकन कई वष्​्ो्िे यह सि​िसि​िा यूं ही चि रहा है. ये पक्​्ी आधी रात के िमय अपने सिकानो् िे बाहर सनकिते है् और उि्ते हुए अपनी जान गंवा बैिते है्. करीब 45 जासतयो्के पक्​्ी रोशनी की ओर आकष्मण महिूि करते है्. इनमे् िे असधकांश जिपक्​्ी है्. यह अपना घो्ि​िा जमीन पर या सछछिे पानी मे्बनाते है्. इतने िारे पक्​्ी जसटंगा की रोशसनयो् की ओर सखंचाव क्यो् महिूि करते है् और सि​ि्क जसटंगा की रोशसनयो् की ओर ही क्यो्? इिका उत्​्र अब भी िीक-िीक मािूम नही्चि िका है, िेसकन इिमे्जसटंगा की भौगोसिक व मौिमी सवशेषताओ्और पस्​्कयो्की नीिन और प्​्विन गसतसवसधयो् का महत्वपूण्म योगदान हो िकता है. जसटंगा एक पिार पर है. अिम के उत्​्र कछार पहािी सजिे का यह पिार बोराइि पव्तम मािा िे दस्​्कण-पस्​्िम सदशा मे्सनकिा हुआ है. िारा क्​्ेत् घने वनो् िे आच्छासदत है और नदी-नािो्और ऊबि-खाबि प्द् श े ो्िे भरा है. अगस्​्िे अक्तबू र के दौरान इि इिाके मे्भारी मानिूनी वष्ाम होती है, सजिकी शुर्आत अप्​्ैि िे ही हो जाती है. अगस्​्और सितंबर महीनो्मे् तो जसटंगा मे्असधकांश िमय बासरश होती रहती है. यहां आद्म्ता 85-90 प्​्सतशत रहती है. इि दौरान िगातार तेज हवाएं चिती रहती है्और जसटंगा गहरे धुंध मे्डूबा रहता है. पक्​्ी नसदयो्, घासटयो् और नािो् के ऊपर उि आते है.् िंभवतः यही िबिे िुगम राह होती है. धुंध और बासरश िे वे शायद सदग्भ्समत हो जाते हो्गे और अंधेरी रात मे्सदखाई पिने वािी सकिी भी रोशनी की ओर बढ़ चिते हो्गे. जसटंगा कुछ ऊंचाई पर ब्सथत है. इिसिए वह पस्​्कयो्के उिान माग्ममे्अवरोध बनकर आता होगा. खराब मौिम िे परेशान पक्​्ी जसटंगा मे् पिाव डािने के सिए मजबूर हो जाते हो्गे. रोशनी की ओर पस्​्कयो् का आकष्मण सवश्​्के अन्य भागो्मे्भी देखा गया है. समिाि के तौर पर कई तटीय इिाको् मे् प्​्वािी पक्​्ी दीपस्​्ंभो् की प्​्बि रोशनी िे आकस्षमत होकर उनिे टकरा जाते है्. िुप्सिद्​् पक्​्ीसवद् डा ि​िीम अिी ने अपनी आत्मकथा ‘द िॉि ऑि ए स्पैरो’ मे् जम्मनी के हेसिगोिोड स्थान का सजक्​् सकया है जहां अक्िर ऐिे हादिे होते है्. िंभवतः जसटंगा का प्​्िंग भी n ऐिा ही है. शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 33


तिज्​्ापन

वतन

शबनम खान

अ

पने फ्िैट की बािकनी पर खि्ा पारि दूर तक िैिी आिमान छूती इमारतो्को एकटक देख रहा था. दोपहर का वक्त था और िंडे भी, िो पूरा बै्गिोर शहर ऊंघ रहा था. िेसकन पारि के सिए अब जैिे हर सदन िंडे जैिा ही हो चुका था. िंबे वक्त िे उिका सबजनेि नुकिान मे्जो जा रहा था. चार महीने िे उिकी कंप्यूटर हाड्मवेयर की दुकान बंद थी. दरअि​ि सजि इिाके मे् पारि की दुकान थी, वहां अब कई और कंप्यूटर हाड्मवेयर की दुकाने्खुि चुकी थी्. पहिे सडमांड ज्यादा और िप्िाई कम वािा मामिा था, तो उिकी खूब चिती थी. िेसकन अब जब कई और दुकाने् मैदान मे्उतर आई थी्, तो उिका नुकिान होने िगा था. पहिे सबजनेि कम हुआ और अब सबल्कुि िप्प पि्गया. इि नए शहर मे्आने पर, उिने जो नएनए दोस्​् बनाऐ थे वो िब धीरे-धीरे उि​िे सकनारा करने िगे. और रही बात पसरवार, सरश्तेदार और अपने वतन यूपी की, तो उन िबको तो वो कई िािो्पहिे ही इि सबजनेि के सिए छोि् आया था. आज भी जब पारि अकेिा और हारा हुआ बैिा होता है तो उिे बाबूजी की निीहते्याद आती है्. सकतना कहा था उन्हो्ने, ‘यही्रहकर सबजनेि कर िो बेटा, अपने शहर अमरोहा मे्. अपने िाेगो् के बीच कम मुनािा भी हुआ तो भी अपनापन तो समिेगा. वक्त -मुिीबत मे् मदद के सिए िब होगे तो. क्यो् परदेि जा रहे हो. वहां न कोई जान-पहचान, न अपने िोग.’ िेसकन उि वक्त पारि की आंखो्मे्बि्ेशहर के बि्-े बि्ेख्वाब बिे हुए थे. ऐिे मे् कहां िमझ आनी थी बाबूजी को काेई बात. वही् बािकनी पर खि्े-खि्े िोचते हुए उिकी आंखो् मे् आंिू उतर आए. वो आंखे् सजनमे्कभी बि्ेशहर के ख्वाब िझिसमिाते थे, आज आंिओ ु ्िे भरी हुई थी्. पीछे िे उिके कंधे पर सकिी ने तिल्िी भरा हाथ रखा. वो शोभा थी, उिकी पत्नी. ‘क्यो् यहां खि्े-खि्े परेशान हो रहे हो? अरे, तुम रो रहे हो पारि?’ वो अचानक परेशान हो गई. पारि ने अपने आपको नॉम्मि करने की कोसशश की तो पत्नी ने उिकी हथेिी 34 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

पर अपने हाथ मे्िे िी और कहा, ‘कि तय सकया था न हमने, बाबूजी िे मदद िे िे्गे. तुम देखना, िब कुछ अच्छा हो जाएगा. तुम सिर िे सबजनेि शुर्करना नये सिरे िे. अबकी बार हम दूिरी माक्​्ेट मे्तुम्हारी शॉप खोिे्गे. मुझे यकीन है बाबूजी तुमको ऐिे परेशान नही् देख पाएंगे.’ पारि ने थाेि्ा मुस्कुराने की कोसशश की. मोबाइि मे् िेव बाबूजी का नंबर समिाया और उन्हे्अपने आने की खबर दी. तीन सदन बाद बै्गिोर िे अमरोहा की तकरीबन 2000 सकमी की दूरी तय करके वो अपने घर पहुंच गया. इतनी दूरी की वजह िे ही वो बाबूजी के जाने सकतने बुिाने के बाद भी बहुत कम ही आया करता था. और आज, ऐिी मुिीबत हुई है सक उिे बै्गिोर िे वापि अमरोहा आना पि्ा है, वो भी सबना बुिावे के. वैिे उिने महिूि सकया था सक इि बार बै्गिोर िे अमरोहा आना उतना मुस्शकि नही् था, सजतना हर बार िगता था. वो तो पुराने सदनो्के बारे मे्िोचकर आया था, िेसकन यहां अब तस्वीर बदि चुकी थी. इि बार वाया िखनऊ आते हुए उिे पहिे जैिे सदि्​्त नही् हुई थी. ि​ि्के और बि िस्वमि दोनो् ही पहिे िे बहुत िुधर गए थे. पहिे की तरह अब

उिे अमरोहा वािे अपने घर मे् घुिते ही ये सशकायते्नही्करनी हो्गी सक कमर मे्झटका आ गया, गद्मन मे् झटका आ गया, आइंदा आऊंा नही्, पता नही् िाेग यहां रहते कैिे है्, वगैरह-वगैरह. पारि ने घर का दरवाजा खटखटाया, तो खुद बाबूजी उिे खोिने आए. सजि सदन पारि ने उन्हे् अपने आने की खबर दी थी, उनकी नजरे्तो उिी सदन िे इि दरवाजे पर सटकी थी्. उन्हो्ने तो कभी िोचा भी नही् था, अपनी औिाद को देखने के सिए उनकी आंखे् ऐिी तरिा करे्गी. खैर, अब तो वो िमाने था. पारि उनके पैर छूने को झुका तो उन्हो्ने िौरन उिे िीने िे िगा सिया. दो िाि बाद आज वो दोनो्सिर एक िाथ खाना खा रहे थे. बाबूजी बहुत खुश थे िेसकन िाथ मे्, कुछ नाराज भी. दोनो्के कारण भी थे. नाराजगी इतने सदन की दूरी की और खुशी, आज वो दूरी खत्म हो जाने की. भिे ही कुछ वक्त के सिए. पारि के खाने की मेज पर उनिे कहा, ‘ि​ि्े्अच्छी बन गई है्यहां की. वो मेन रोड भी पहिे िे कािी चौि्ी हो गई है न?’ ‘हां, सपछिे िाि ही नई ि​ि्क सबछी है्. तुम आए नही् न तबिे, इिसिए नही् मािूम.’


बाबूजी न चाहते हुए भी पारि को जता गए सक वो सकतने सदन बाद आया है. हािांसक नाराजगी के िाथ-िाथ वो प्यार भी खूब जता रहे थे. हर बार जब भी पारि आता था, उिके बाबूजी उिे भरे शाह की दरगाह पर चादर चढ़्ाने जर्र िे जाते थे. वो कहते थे सक पारि उन्ही् िे मांगी मन्नत के बाद पैदा हुआ था. शाम को दोनो् दरगाह गए. वापिी मे् बाजार वािे रास्​्े िे आए. वहां पारि को कई िारी नई दुकाने् सदखी्, जो पहिे नही् थी. कुछ दुकाने् तो ऐिी

जो इि​िे पहिे उिने सि​ि्कबि्ेशहरो्मे्देखी थी. ‘ये कंप्यूटर कोि्म इंस्टीटयूट कब खुिा यहां?’ ‘ये कंप्यूटर पाट्ि्मकी ही दुकान है न?’ ‘ अरे, यहां िे वो पुरानी चि्​्ी कहां गई? और अबये िुपर माक्​्ेट बन रही है न?’ और सिर एक शोर्म के आगे उिके कदम र्क गये. ‘इि ि्​्ांड का शोर्म भी है्यहां, कब खुिा?’ बाजार और शहर की बदिी-बदिी तस्वीर देखकर उिका भीतर ही भीतर मन खुश हो गया था. अपने शहर की तरि्​्ी भिा सकिे अच्छी नही्िगती? वापिी मे् मोहल्िे के मुंहाने पर बने नए मकान को देखकर पारि ि​ि​िका. ‘ यहां तो पांडे काका का मकान था न, नया बनवा सिया उन्हांेने?’ उिका िवाि िुनकर बाबूजी ने गहरी िांि िी, जैिे न जाने सकतना मुस्शकि िवाि उनके िामने आ गया हो. उन्हो्ने अपनी आंखो् की नमी सछपाते हुए सकिी तरह कहा, ‘बेच सदया घर. उनका बेटा था न यूएि वािा, आया था सपछिे िाि. घर सबकवा सिया. बहुत रो रहे थे बेचारे, बताओ, बाप दादा का घर भी बेचा जाता है?’ पारि को अचानक अपना शरीर बेजान महिूि होने िगा. वो भी तो इिीसिए यहां आया था, घर सबकवाने और पैिा िेने. उि रात देर पारि की आंखो् मे् नी्द नही् थी. ऐिे मे्बगि मे्पि्ेिोन की िाइट चमकी. उिकी पत्नी शोभा का मैिेज था, ‘बाबूजी िे बात हुई?’ उि एक मैिेज िे रात, कुछ और मुस्शकि हो गई थी. ये बात उिकी आत्मा पर चोट कर रही थी. अगिे सदन बाबूजी कुछ बीमार िे थे. पारि ने उनके बचपन के दोस्​्और िैसमिी डाॅक्टर को बुिाया. उन्हो्ने चेकअप सकया और सिर बोिे, ‘कुछ नही्, बि बीपी हाई है. इि उम्​्मे् शरीर देखभाि मांगता है. अच्छा ये दवाएं इनकी बदिी है्, सखिा देना.’ वो दवा का पच्ाम पकि्ाते हुए बोिे. पारि ने एक नजर बाबूजी का चेहरा देखा.

वो कािी कमजोर सदख रहे थे, िेसकन उिे देखकर मुस्कुराने की कोसशश कर रहे थे. जैिे कोई तकिीि ही न हो. उिे अपने अंदर एक आवाज िी िुनाई दी, ‘इिसिए मन्नत मांगमांग के तुझे इि दुसनया मे्िाए थे बाबूजी?’ डॉ अंकि जाने िगे तो पारि उन्हे् बाहर तक छोि्ने गया. यूं ही उनके बेटे के बारे मे्पूछ सिया जो बचपन मे्उिी के िाथ पढ़्ा करता था. अंकि बोिे ‘राकेश? अरे वो तो यही्रहता है. पढ़्ाई तो सदल्िी िे की थी उिने िेसकन सिर यही्सबजनेि शुर्सकया है.’ पारि थोि्ा हैरान हुआ, ‘सबजनेि? यहां अमरोहा मे्? यहां क्या सबजनेि हो िकता है?’ डाॅ अंकि ने हंिते हुए उिके कंधे पर हाथ रखा और कहा, ‘ये वो शहर नही् है सजिे तुम िािो्पहिे छोि्कर बि्ेशहर चिे गए थे बेटा. यहां अब िब हो रहा है, सबजनेि क्या चीज है. बै्गिोर िे िुि्मत समिे, तो कभी अपने शहर को सिर िे िमझना.’ डॉ अंकि जा चुके थे. िेसकन उनकी बाते् पारि के कानो्मे्गूज ं रही थी्. वो कुछ पि वहां खि्ा िोचता रहा. कही्वही तो गिती नही्है? क्या रोजगार और भसवर्य की खासतर उिने अपने बाबूजी, अपने घर और अपने शहर को छोि्कर िही सकया? तभी बाबूजी की आवाज आई. वो दौि्कर अंदर गया. बाबूजी ने तसकये के नीचे िे कुछ कागजात सनकािे और उिके आगे करके बोिे, ‘मेरी तबीयत का कुछ पता नही् रहता, इिसिए इि बार तुम्हारे आने की खबर समिते ही ये घर के कागज तैयार करवा सिए थे. अब तुम िंभािो ये पुरखो्का घर, तुम्हारे नाम कर सदया है.’ पारि ने हाथ मे् घर के कागज पकि्े. ये वही कागज थे सजन्हे्हाि​ि​ि करने वो इि बार आया था. िेसकन आज जब हाथ मे् घर के कागज आए है्, उिे अहिाि हुआ है सक वो कहां गित था. उिके आंखो् िे िुढ़्कते आंिू घर के कागजो् पर सगरने िगे, और उिी पि िोज बजा. शोभा थी. ‘पारि, कब आ रहे हो? बात तो गई होगी न?’ पारि आंिू पोछता हुआ बोिा, ‘हम्म, हुई. और अब मै्नही्, तुम आ रही हो. यहां अमरोहा.’ शोभा हि्बि्ाई, ‘हम, वहां? िेसकन तुम्हारा सबजनेि’ पारि मुस्कुराया और बोिा, ‘सबजनेि तो यहां भी शुर् हो िकता है, अपने श्ाहर मे्. अपने िोगो्के बीच. मै्िमझ गया हूं शोभा, यही अपना अि​िी घर है. यही है हमारा वतन. अब हमे्िौट आना चासहए.’ सिर बाबूजी के सिरहाने बैिकर उनके माथे को िहिाता हुआ बोिा, ‘बाबूजी को मेरी जर्रत है, हमारी जर्रत है. तुम तैयारी कर िो, हम यही्सशफ्ट हो रहे है.्’ पारि के िाथ-िाथ, अब बाबूजी की आंखो्िे भी अांिू बह सनकिे थे. शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 35


साहहत्य/कथा हरपोत्ा​ाज

वह एक समय था मनोज कुमार झा युवा कसव और अनुवादक. भारत भूषण अग्​्वाि पुरस्कार िे

िम्मासनत. चॉम्स्की, जेमिन, ईगिटन, िूको, सजजेक इत्यासद बौस्​्दको्के िेखो्का अनुवाद प्​्कासशत. एजाज अहमद की सकताब ‘सरफ्िेक्शन ऑन ऑवर टाइम्ि’ का सहंदी अनुवाद प्​्कासशत. िराय/िी. एि. डी. एि. के सिए ‘सवस्​्कप्तो्की सदखन’ पर शोध.

त

ब िोग उदासियो्का िम्मान करना जानते थे. पढ़्ने के सिए शहर मे् आने के बाद रोज कुछ ऐिे पथरीिे शल्द िुनने को समि ही जाते थे, जो कई सदनो्तक सहया की हंडी मे्हि्-हि्करते रहते थे. सकंतु सजि शल्द ने िबिे ज्यादा हैरान सकया, वह था ‘िेट् ी’ मारना. हम िोगो्के एक दोस्​् की मां मर गयी थी और वह कुछ सदनो्के सिए गांव मे्जाकर ही सचत्​्को सथर करना चाहता था. इिके सिए वह दोस्​्ो्िे सकताबे्और नोट्ि मांगकर िे जाना चाहता था. उिे चीजे् समिी् पर मुझे िदमा तब िगा, जब एक खुशसमजाज तेज तर्ामर दोस्​् ने सिकरा किा सक िािा बहुत ‘िे्टी’ मार रहा था. यह शल्द मेरे सिए नया था, पर उच्​्ारण के ढंग िे िगा, जैिे कंि के पाि मछिी का कांटा िंि गया. ‘मारने’ स्​्कया को सकिी भी शल्द के िाथ जोि्कर प्​्योग करना मुझे बचपन िे अब तक डराता रहा है, सजिमे् मजा मारने िे िेकर हाि मे्शासमि हुए समस्डकॉि मारना तक शासमि है. िेसकन ‘िे्टी’ मारने जैिा सकिी के दुख का उपहाि करने के सिए प्​्युक्त शल्द ने कई सदनो्तक माथे को सबच्छुओ्िे भर सदया था. अिबत्​्ा बाद मे् जाना सक ‘िे्टीमे्टि’ शल्द िे इिका सरश्ता है, जो सक िगभग ऋ णात्मक िक्​्ण के र्प मे्एक िमूह मे्स्वीकृत हो चुका है. जबसक मै् सजि गांव िे आया था, वहां जब मां सकिी िे बसतया के आती थी तो कहती थी सक दुखनामा िुन-िुना रही थी. ‘दुखनामा’ वह शल्द-तर् वृक् था, सजिकी छांव मे्कम िे कम उपहाि तो नही्ही पनप िकता था. हािांसक बहुरगं ी छटाओ्वािी हास्य-िताये्उिके नीचे ि​िती-िूिती थी्, सजिकी जि्को कर्ण कथा-केसशकाएं िी्चती थी्. क्या यह अंतर गांव और शहर का था? कभी-कभी िगता है सक हां, कंक्ीट के जंगि और आम के बगीचे के बीच का िक्क था शायद. नही् कंक्ीट का जंगि कहने िे भी िमाजशास्​्ी डेिमंड मॉसरि गुरेज करते है्. वे कहते है् सक जंगि मे् तो जानवर प्​्ाकृसतक और िहज पशु-िुिभ आचरण करते है्. शहर को उन्हो्ने अपनी इिी नाम की सकताब मे् ‘द ह्​्ूमन जू’ कहा है, जहां प्​्ाणी सनज-िमूह-सवर्द्आचरण करते है्. महानगरो्पर ऐसतहासिक महत्व का काम करने वािे जाज्मसिमेि ने शहरो्मे्सदमाग के उपर िगातार हो रही सचह्नो की बमबारी िे मनुर्य मे्दुख-सनरपेक्ता पैदा हो जाने की बात कही है. िेसकन यह दुख-सनरपेकत् ा तो गांव मे्भी है. अभी-अभी एक नया शल्द चिन मे्आया है ‘क्​्ाइमर’. यह डॉक्टर, इंजीसनयर की तज्मपर स्​्कसमनि के पेशे को एक ऐिी जगह पहुंचा देता है, जहां स्​्कसमनि के सकये गये शोककारी काय्​्ो्के सिए कोई अि​िोि नही्बचता. अब तो गांव-मिान 36 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

मे्भी शराब पी जाने िगी है. कई तो पहिे िे शोकाकुि पसरवार िे शराब का प्​्बंध करने की गांरटी मांगते है्. िवाि शराब के टैबू का नही्है. कई पंथो्के िोग अपने कम्क म ांडीय स्​्कयाकिापो्मे,् मिान मे्शराब का प्य् ोग करते ही थे. पर िवाि मृत्युशोक के क्​्णो्मे्दो घंटे की बैिकी भी सबना मौज-मस्​्ी के नही् गुजार िकने का है. िवाि मजाखोर जमात का है. याद आता है सक बचपन मे्जब परदेिी पसतयो्की पब्तनयां शाम मे्श्​्ृंगार करती थी्(सजिे वह ‘मुहं पोछना’ कहती थी) तो मंद-मधुर वाणी मे्उनके बीच की बाते्गुिाबी र्ई के िाहो्की तरह सतरती थी्. वही्जब ‘छोि्के अपने ि​िीम की गिी अनारकिी सडस्को चिी’ जैिे प्​्ेम और सवषाद का उपहाि करने वािे गानो् पर कोई नाचती है तो िगता है सवश्​्-व्यापी सवयाग्​्ा-व्यग्​् काम-पुर्ष ने िमूचे िंिार को त्वचा-त्वचामय करने के सिए सविाि-बुभुक्ु रोबोसटक-ऐरोसटक पुतसियां छोि्रखी है्. मामिा िुख का भी नही्है. िुख उि दुख मे्भी समिता है, सजिे गांव मे्‘राजा दुखी, प्​्जा दुखी, जोगी के दुख दूना’ के जसरये बांधा गया है. िुख सवषादपूणम्भरथरी के गीतो्मे्भी है. नवसववासहता को ि​िुराि के सवदा कर रही िाथ-िाथ रो रही स्​्सयो्की कर्ण अश्​्ुवृस्ष मे्भी. िगातार िहाके मारने िे िुख नही्समिता. प्स्िद्​्िामासजक मनोवैज्ासनक जोनाथन हाइट ने अपनी सकताब ‘हैसपनेि हाइपोथीसि​ि’ मे्एक सदिचस्प प्य् ोग का सजक्​् सकया है, सजिमे्स्​्नपान करानेवािी पै्तािीि मसहिाओ्पर एक प्​्योग सकया गया, सजिके तहत िोगो्की मदद करने वािे वीसडयो और िॉफ्टर वीसडयोज सदखाये गये. मदद करने वािे वीसडयो देखने के बाद मसहिाओ् मे्दुग्ध-स्​्ाव बढ़्ा पाया गया, जो सक उनकी आंतसरक पसरतृब्पत का िूचक था. िुख कही्है तो उदािी का िम्मान करने मे्है. मां के दुखनामा का


िम्मान करने मे् है. कबीर के रोने के िम्मान करने मे् है. महानगरो् मे् शहद की गाढ़्ी झीि जैिा अंधकार देखने की हूक उिती है, गांव मे्सबजिी के अभाव मे् सदन काटने होते है्. अपूण्मता हर जगह है, शहर चाहे गांव. यही अपूण्मता इि जीवन का र्पक है और उदािी भी अपूण्मता का र्पक. तो क्यो्न हम थोि्ी िी उदािी का िम्मान करे्.

किंसंसाखंोरों के धुंधले किन

पु

राने सकस्िाखोरो्के धुंधिे सदन है्. ये दो सकस्िो्वािी राते्थी्. जाि्े मे्पुआि बन जाते थे सकस्िे, सजि पर हम सबछ जाते थे और गम्​्ी मे् यह शीति पवन बन जाते थे, जो एक घेरा बना डािता था, सजिमे् हम सकस्िाखोर सकिकारी मारते थे. मौिम की काट थे ये सकस्िे. कैिी भी र्त हो, सकस्िो्की एक िुंदर िी पण्मकुटीर बन जाती, सजिमंे हम िोग बैिकर इि दुसनया को छका देते थे. हमारे सगद्मतरह- तरह के सकस्िागो थे. एक मामाजी आते थे. वे सरश्ते मे् दूर के मामा िगते थे, मगर सकस्िो् के धागो् ने उन्हे् खी्चकर हमारा िबिे नजदीकी मामा बना डािा था. वे खाते वक्त बोिते नही्थे. इशारो् िे काम चिाते थे. हम िोग उनका रात का खाना खत्म होने का इंतजार करते. सिर वे खसटया पर िेट जाते थे. हम िोग नीचे बैि जाते. हम िोग यानी मै्, मेरे चचेरे भाई, पि्ोि के दोस्​्. घर की स्​्सयां भी सकवाि्िे िट कर बैि जाती्. वैिे ही ये स्​्सयां तब सकबाि्िे िग जाती्, जब कोई िकीर, कोई िाधु गीत गाते रास्​्ेिे गुजरते. ये िकीर-िाधु आंगन भी आते. तब

ये स्​्सयां इनिे खूब गसपयाती्. पुर्ष उतना नही्गसपयाते. स्​्सयां कदासचत दुसखयारो्के असधक सनकटस्थ होती है.् कुछ ऐिे भी मंगता होते, जो कहानी भी िुनाते. स्​्सयां गौर िे िुनती्, रोती्. हम बच्​्े भी रोेते. सजन चीजो् के छूटने का दुख है, उिमे्कदासचत िबिे ऊपर खुिकर रोना है. तो मामा खसटया पर िेट जाते और हम िोग नीचे बैिकर कहानी िुनते. कहानी िुनते हुए हम कभी सिहरते, कभी सि​िकते, कभी िहाके िगाते. मामा की कहानी मे् राक्​्ि दुष् रहता तो उिका कोइ भाई, कोई बहन कोमि स्वभाव की. ये राक्​्ि भी उतने दुष्नही्होते, सजतने पंसडत जी द्​्ारा बांचे गये कथा-पुराणो्के राक्​्ि. कहासनयां देर तक चिती्, बीच मे्मामाजी पानी पीते, खैनी चबाते. पि्ोि के बच्​्ो्के असभभावक बुिाने आते, मगर वे भी सकस्िा िुनने बैि जाते. कोई आधा सकस्िा िुनकर चिा जायेगा तो वह मेिे मे्गुम हो जायेगा, हम िोग सदि िे मानते थे. शायद हम िब आधे सकस्िे िुने हुए िोग है्, जो चमक-दमक वािे मेिे मे्खो गये है्. बीच- बीच मे्कथावाचक भी आते थे, जो धास्मक म कथाएं िुनाते. मगर हम बच्​्ो्को उनमे्‘रि’ नही्समिता था. इन कथाओ्का प्​्बंधन पुर्षो् के हाथ मे् रहता था, मगर िुनने जाती स्​्सयां बि्ी िंख्या मे्. वे जो हम िोगो्के सकस्िा वािे मामाजी थे, उन्हे्भी धास्ममक सकस्िे याद थे, मगर वे राजा-रानी, राक्​्ि-राजकुमार आसद की कहासनयां ही िुनाते थे. उनकी कहासनयो्मे्जादू था. बाकी बाते्वे िीक िे कर भी नही्पाते. अपनी बात रखने का उनमे्हुनर नही्था, मगर जब सकस्िा कहते, तो रोशनी छा जाती. िगता उनके भीतर िे कोई दूिरा महामानव सनकि आता. सकस्िो्के बीच मे्कही्भी र्कते नही्थे. सकस्िो्के भीतर एक िय होती थी. जब वे िामान्य बातचीत िोगो्िे करते तो वह िय उनका िाथ छोि्देती और वे बहुत कमजोर वक्ता िासबत होते. तो आसखर ये सकस्िे वे कैिे शानदार ढ़्ंग िे कह िेते थे ? और वह कौन िी बात थी, जो उन्हे् सकस्िे कहने को उत्िुक बना देती थी. हम िोग शायद कभी नही् जान पाये्गे. गांव मे् रामिीिा भी आया करती. यह महात्माओ् द्​्ारा बांचे जाने वािी रामकथा िे ज्यादा मनिग्गू होती थी. पुरष् अपनी टोिी बना के जाते और स्​्सयां अिग टोिी मे्. बच्​्ो् की टोिी स्​्सयां के िाथ जाती्. कुछ पुर्ष, स्​्सयो के रामिीिा देखने जाने के सखिाि थे. ऐिी स्​्सयां भी कोई न कोई उपाय करके चिी ही जाती्. रामिीिा मे् शुर् मे् वाचन होता. नेटुआ नाचता. पुर्ष ही िाि्ी बांधकर नाच करते. हमे्इनकी सजंदगी बि्ी उल्िाि भरी िगती. जानने मे्वक्त िगा सक वे कसिन जीवन जीते है.् नाच के बाद ‘खेिा’ को बि्े गौर िे देखते. और अगिे सदन मां-चासचयो् िे समिान करता सक उिने क्या देखा, हमने क्या देखा. एक ही खेिा का हमारा मन अिग-अिग ढ़्ंग िे िंपादन करता. अब रामिीिा की टीम नही्आती. गांव मे्इिके बदिे ि​ि्सकयो्के नाच आ गये है,् जो न बच्​्ो्के सिए रोचक है्और न स्​्सयो्के सिए. बच्​्ो् को टीवी की गोद मे् सिमटना पि् रहा है. पर सबजिी की सकल्ित वािे इिाके मे् टीवी का क्या मोि! टीवी के प्​्भावो् पर अध्ययन करते वक्त हमे्ध्यान रखना होगा सक 24 घंटे सबजिी वािे और दो घंटे सबजिी वािे इिाको्की टीवी कथा एक नही्होती. और सिर सकस्िे मवेसशयो्को चराते वक्त भी िुने जा िकते है्, मगर टीवी देखने के सिए सवज्​्ापनमुख ‘दश्मक’ बनना पि्ता है. ग्​्ामीण मनोरंजन मे्स्​्सयो्के सिए स्पेि घटा है. गांव मे् नाचने वासियो्की टीम आती है्, सजन्हे्स्थानीय िोग आक्​्ेस्ट्ा कहते है्. मनोरंजन के िाधनो्मे्सकस्िो्का तत्व कम हुआ है. सपछिे 10-15 िाि मे्मनोरंजन के ग्​्ामीण िाधन दुखद र्प िे पुर्षोन्मुख और वयस्कोन्मुख हुए है्और सकस्िो्के तत्व कम हुए है्. गांव मे् जो कहासनयां बची हुई है्, वे स्​्ीकंि मे् बची हुई है्. ये व्​्तो् और सववाह आसद की सवसभन्न रस्मो्के अविर पर कथा कहती है्. कहने n वािे पुर्ष पता नही्कहां गायब हो गये. शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 37


मास् साहहत् ट हेयड

एक साल और कुछ पुस्के् साल 2015 कहानी और ककवता के कलए बहुत आशाजनक नही्रहा, लेककन उपन्यास और कथेतर गद्​्के क्​्ेि्िे्कुछ उक्लेखनीय कृकतयां सािने आयी्. कुछ रचनाकारो्के साल का साकहल्ययक लेखाजोखा. प्​्स्ुति: अंजुम शम्ा​ा पल्लव करगंज के िैयद (कथेतर गद्​्): अिगर वजाहत की यह सकताब गल्प और इसतहाि का ऐिा िब्ममश्​्ण है जो गद्​् मे् एक प्​्ाणवान कृसत की रचना करने मे्िमथ्महै. बाकरगंज उत्​्र प्​्देश के ितहपुर सजिे का एक गांव है सजिे सजिा गजेसटयर के अनुिार, सकन्ही्िैयद इकरामुद्ीन अहमद ने बिाया था. इकरामुद्ीन अहमद की खोज वजाहत को 'बाकरगंज के िैयद' सिखने को प्​्ेसरत करती है. वे सनव्ामसित भारतीय िम्​्ाट हुमायूं िे अपना ि​िर शुर् करते है् जो शेरशाह िूरी, हेमू, अकबर, नवाब सिराजुद्ौिा, ईस्ट इंसडया कम्पनी, 1857 की क्​्ांसत िे होता बाकरगंज की खोज की अंसतम किी बड्न् समयां तक पहुच ं ता है. वजाहत सिखते है,् 'वैिे भी िौटता कौन है? िोग िौटकर वापि नही्आते तो एक नया आख्यान शुर्होता है.' पचरंग चोिा पहन िखी री (शोध आिोचना): भारतीय मध्यकाि पर यूरोपीय दृस्ष का ऐिा अिर और दबाव है सक उि िमय की िही व्याख्या करने का काम अभी बचा हुआ है. मीरां मध्ययुग का ऐिा ही

बा

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चमकदार नाम है सजिमे्भारतीय और यूरोपीय िमाज की भरपूर सदिचस्पी रही. भारत मे्उन्हे्अनूिे कृरण ् -भक्त के र्प मे्तो यूरोप मे्रहस्य िे भरपूर राजरानी की छसव मे् देखा िमझा गया. माधव हािा की सकताब 'पचरंग चोिा पहन िखी री' मीरां के जीवन की प्​्ामासणक खोज है. शोध और गहन अध्ययन िे बनी इि सकताब ने मीरां के जीवन पर पिे पद्​्ो्को हटाया है और उनकी गढ़ दी गयी छसवयो्के पार झांकने की कोसशश की है. छोटू उस्​्ाद (कहानी): अरिे बाद स्वयं प्क ् ाश का नया कहानी िंगह् ‘छोटू उस्​्ाद’ आया और नये समजाज की कहासनयो्के िाथ. वे िघुकथा नही्सिखते. ये िामान्य कहासनयो्िे छोटी और िघु कथाओ्के रेटोसरक िे सभन्न कहासनयां है्. 'सबछुिने िे पहिे' मे्पगडंडी ि​िक िे कहती है, 'सदि की कौन पूछता है समतवा? सवकाि तो होके रहेगा.' हमारे िमय की सवडंबनाओ्और सवपदाओ्को देखने-िमझने का कहानी मे्नये ढंग के ये प्​्योग सवधा को ऊज्ाम देने वािे है्. आशा बिवती है राजन! (कसवता): कसव नंद चतुव्ेदी की मृत्यु के िगभग एक वष्मबाद आया कसवता िंग्ह उनके कसव कम्मका सनचोि है. इि िंग्ह मे् कसव घनघोर सनराशा के बावजूद जीवन मे् सजि आशा की तिाश कर रहा है, वह इन कसवताओ् को ऊंचाई देती है. शीष्मक कसवता


के असतसरक्त िंग्ह मे् कोई डेढ़ दज्मन कसवताएं है् जो बार बार जीवन मे् धंिने का आवाहन करती है.् ' ऐिे ही अकाि मेघ’, ‘िूख गयी है झीि रिवंती’, ‘अपना अगर पूछते’, ‘महाराज’, ‘महारानी’, ‘अच्छ-े बुरे सदन,’ ‘सनडर होने के सिए’ जैिी कसवताएं नंद बाबू के कसव कम्मकी व्यापकता और गहराई की गवाही देती है्. दसित िासहत्य : एक अंतय्ामत्ा (आिोचना): आिोचक और शोधकत्ाम बजरंग सबहारी की इि पहिी आिोचना कृसत को दसित िासहत्य मे्सहंदी आिोचना की सदिचस्पी और सजम्मेदारी के र्प मे्देखना िबिे उसचत होगा. ऐिा नही् है सक दसित िेखन पर पुस्के नही् है्, िेसकन व्यापक सहंदी आिोचना क्​्ेत् मे् इि सकताब के आने के बिे आशय है्. बजरंग सबहारी यहां दसित िेखन के इसतहाि और दसित िेखन के प्​्ेरणा स्थिो् की िही पहचान करने के िाथ दसित िेखन िे आयी कसवता, कसवता और आत्मकथन को सवसभन्न अध्यायो्मे्मूलय् ांसकत करते है.् ध्यान देने की बात यह है सक भब्कतकाि पर शोध करने के बाद एक आिोचक अपने जीवन के िगभग बीि िाि िगाने पर इि सकताब की रचना कर रहा है और उिकी दृस्ष सकिी िंडी तटस्थता िे नही्बन रही. इनके असतसरक्त सनम्ि म ा जैन की आत्मकथा ‘जमाने मे्हम’ और युवा आिोचक पंकज पाराशर की पुस्क ‘रचना का िामासजक पाि’ भी इि वष्मकी उल्िेखनीय कृसतयां है्. अनामिका फ्िड ऑि िायर: िन्ा 1839 के िगभग घटा सवश्​्ायन का पहिा चरण- चीन ने अिीम का सनय्ामत रोकने की कोसशश की. उिकी िजा औपसनवेसशक ताकतो् ने क्या िुनायी? हांगकांग के नवसवकसित व्यापर के्द् मे् भारत के अिग-अिग सहस्िो्, सवशेषकर महाराष्​्, सबहार और बंगाि िे आये सवस्थासपतो् का अंग्ेज िाहबो् िे प्​्ीसतमूिक घृणा का जो िंबश् िष्​्नाता बना, उिकी गहन सववेचना, एसतहासिक िंघष्​्ो्के व्याकरण की गहरी िमझ और प्​्ायः हर वग्म के प्​्ाणवान चसरत्​्ो् की मास्ममक आपिदारी व्यक्त करते िंवाद इि कृसत को पिनीय बनाते है्. अ स्ट्ेजनेि इन माई माइंड: तुक्ी के नैसतक भूगोि और उिकी ऐसतहासिक उथि-पुथि के आिोक मे् देशी शराब (बोजा) और दही बेचने वािे एक िंवदे नशीि सकशोर की जीवन िंघष्मकी कहानी. हर तरह के घर मे् उिका प्​्वेश है और वह प्​्गसतशीि और प्​्सतगामी दोनो् तरह की राजनीसत की सवडंबनाएं िहज दाश्मसनकता िे उजागर करता है, वह तुक्ी की रब्कतम, िंघष्मसिद्​्समट्​्ी की अिग गंध है. द वे सथंग्ि वेर : आपातकाि, सिख दमन, बाबरी ध्वंि िे िेकर भूमंडिीकरण तक की सदल्िी के नैसतक उहापोह का इसतहाि; जनांदोिन और राजनीसतक दमन चक्​्ो्के दौरान वैयब्कतक जीवन कैिे प्भ् ासवत होता है और नवधनाठ्​् वग्म आततासययो् िे कैिे राजनीसतक और आस्थमक िमीकरण सबिाता है, इिका महीन ग्​्ािांकन इिे पिनीय बनाता है. अपना ही देश: परकाया प्​्वेश के अनेक रंग. खूंखार िमय मे् बिी होती हुई बेटी, सनरािा की िरोज, टैगोर की समनी, स्​्तिोचन की चंपा, नागाज्मुन की गुिाबी चूसियो् वािी बेटी, िैज की मुनीजा, मुब्कतबोध की मुसनया िे सकतनी अिग है- इिके महीन रेशो् की अंतरंग पहचान जो िंवेसदत सपतृत्व का एक नया पक्​्उदघासटत करती है. आसदवासियो्के पक्​् िे सिखी गयी मदन कश्यप की कसवताओ् मे् उनके ही तुकीिे तीरो् की उिान. सनिारी आसद कांडो्को सनवेसदत कसवताओ्मे्तक्क, रेटॉसरक और घनीभूत चुप्पी का प्​्खर िमतोि. मध्यकाि: एक पुनराविोकन: मध्यकाि की कािजयी कृसतयो्की केनद् ्ीय गुबत्थयां खोिती प्ख ् र आधुसनक दृस्ष. रत्निेन के मन मे्पद्​्ावती के सिए पूव्मराग जगाने का जो महत्वपूण्मकाम सहरामन तोते ने सकया था, नयी पीढ़ी के मन मे्मध्यकािीन कृसतयो्के सिए पूव्मराग जगाने का वही काम सनत्यानंद सतवारी करते है्. प्​्ांजि भाषा, मम्मभेदी दृस्ष. के्द्ीय स्थापना यह सक मध्यकािीन कसवयो्ने जो प्​्श्न उिाये, उनके उत्​्र आने

वािी पीसढ़्यां अपने ढंग िे ढूंढ़्रही है​ै. मदन कश्यप सहंदी आिोचना मे् अवधारणा के स्​्र पर तीन सकताबो् ने प्​्भासवत सकया सजिमे्मैनज े र पांडे की ‘िासहत्य और दसित दृस्ष’, सनत्यानंद सतवारी की ‘मध्यकाि: एक पुनराविोकन’ और डॉ गौतम िान्याि की पुस्क ‘आख्यानशास्​्’ है्. ये पुस्के केवि आिोचना नही् है, बब्लक नयी अवधारणाएं िामने िाती है्. कथेतर गद्​्मे्सवश्​्नाथ स्​्तपािी की एक बहुत ही महत्वपूण्मसकताब िंस्मरणो्की इि वष्मआयी- ‘गुर्जी की खेती-बारी’. यह सकताब अपने सवषय मे् इिसिए अनूिी है सक इिमे् स्​्तपािी जी ने अपने सशर्यो् के िंस्मरण सिखे है. इिके असतसरक्त दो डायसरयां- िीिाधर मंडिोई की ‘सदनन सदनन के िेर’ और सनदा नवाज की ‘सि​िसकयां िेता स्वग्म’ बहुत महत्वपूण्म है्. जहां मंडिोई के िरोकार बहुत गहरे है् और काव्यात्मक भाषा मे् िमाज के सनचिे तबके के जीवन को, प्​्कृसत को दज्म करते है्, वही्सनदा नवाज ने कश्मीर के आतंक को बहुत ही बेबाकी, सनर्पक्​्ता और वस्स्ुनष्त् ा के िाथ अपनी डायसरयो्मे्दज्मसकया है. कथेतर गद्​्मे्प्भ् ात रंजन की ‘कोिागोई’ और सवनय कुमार की ‘एक मनोसचसकत्िक की डायरी’ भी अिग तरह की पुस्के्इि वष्मिामने आयी्. कहानी मे् वसरष्​् िेखक दूधनाथ सिंह का िंग्ह ‘जिमुस्गमयो् का सशकार’ पढ़ते हुए बहुत िुखद आि्​्य्म हुआ सक नये िमय का यथाथ्म पकिने की क्​्मता उनकी बची हुई है. कसवता मे् अनासमका के िंग्ह ‘टोकरी मे्सदगंत’ का नाम िेना यहां इिसिए जर्री है सक स्​्ी सवमश्मके एक प्ि ् गं मे्थेरी गाथाओ्को देखने और पुनःिृसजत करने का उन्हो्ने बेहद उल्िेखनीय प्​्यत्न सकया है. इिके असतसरक्त इि वष्म एक बहुत ही महत्वपूण्म काम नरे्द् दाभोिकर की पुस्को्(अंधसवश्​्ाि उन्मूिन श्​्ृंखिा) के अनुवाद के र्प मे्हुआ है. कुमार अनुपम िारे िपने बागी है्: माधव कौसशक के इि गजि िंग्ह को पढ़ते हुए यह भरोिा हुआ सक ईमानादर व्यब्कत के हौि​िे और िंघष्मका स्वर अभी िुरस्​्कत है. गजिो्का पसरक्​्ेत्गांव िे सवश्​्तक है, सजिमे्दुखो्, रागसवराग, िंकटो् और अनेक जीवन प्​्िंगो् को आज की गजिो् मे् बहुत अथ्मवत्​्ा और भाव प्​्वणता के िाथ दज्मसकया जा रहा है. सवज्​्ब्पत भर बासरश: ओम नागर का यह कसवता िंग्ह हाि ही हाथ िगा. ओम की कसवता ‘सपता का अंकगसणत’ ने कसव के प्​्सत बेहद आशाब्नवत कर सदया था. इत्​्ेिाक िे इि िंग्ह की पहिी कसवता यही है. सकिानी की बारहखिी ने सपता को जो शल्द-बीज िौ्पे है्वे सकताबी ज्​्ान िे असधक ल्याव्हासरक है्. इि िंग्ह मे्ओम नागर ने नल्बे के बाद के िमय और उिके प्​्भाव, चुनौसतयो्और िमस्याओ्को कसवता मे्दज्मसकया है. िेिार वाय्येखो: चयसनत रचनाएं (स्पानी, सहंदी, बांग्िा का स्​्तभाषी िंकिन): पेर्मे्बीिवी्शताल्दी की शुर्आत मे्एक िोि राष्​्ीय और आधुसनक िासहत्य का आगमन हुआ. उिी एक िृजनात्मक िमूह मे् िे िेिार अि्​्ाहम वाय्येखो जैिे महान रचनाकार आते है्. िासहत्य अकादेमी िे प्​्कसशत ‘िेिार वाय्येखो:चयसनत रचनाएं’ िंकिन पढ़कर िगा सक िेिार की रचनाएं सनस्िंदेह बेहद महत्वपूण्मऔर िाव्मभौम है्. विश्​्नाथ व्​्िपाठी सनिय उपाध्याय का उपन्याि ‘पहाि’, मदन कश्यप का काव्य िंगह् ‘अपना ही देश’, िीिाधर मंडिोई की डायरी ‘सदनन सदनन के िेर’, सनदा नवाज की डायरी ‘सि​िसकयां िेता स्वग्म’, दाभोिकर के सनबंधो् का अनुवाद और भािचंद्नेमाडे की पुस्क ‘सहंदू’ का अनुवाद. मैि्ेयी पुष्पा इि वष्म असखिेश का उपन्याि ‘सनव्ामिन’, िंजीव का उपन्याि ‘िांि’ और सववेक समश्​् का उपन्याि ‘डॉमसनक की वापिी’ n श्​्ेष्िगे. शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 39


साहहत्य समीक्​्ा

आंिू बिाता स़वऱा

कनदा नवाज की डायरी िे्अनेक ऐसे हवाले है्जो बतलाते है्कक आतंकवाद आतंककयो्के र्प िे् भी है और ख्ाकी वद्​्ी वालो्के तिगे और कुस्ी चाहने वाली रड्​्ंि्कारी बुक्ि के नकाब िे्भी है. डाॅ रजनी बाला

शाबािी बटोरने का मोह. कही्डर तो कही्अव्यवस्था िे जन्मी उकताहट और मोहभंग के कारण युवा वग्मआतंकवासदयो्को नायक मानने िगा है. ि 1991 िे 2015 तक के इसतहाि को िमेटती डायरी ‘सि​िसकयां ग्रीबी िे सनजात पाने की सि्राक मे्मुिसि​िी के सशकार युवाओ्को िीमा िेता स्वग्म’ मे् सनदा नवाज् ने 26 कसि्यो् मे् कश्मीर के दद्म का पार आतंकी ट्​्ेसनंग के सिए भेजा जा रहा है. इि तरह धास्ममक सशष्​्ाचार के सि​िसि​िा सपरोया है. डायरी मे् िभी शीष्मक कश्मीर और एक आम पाबंद, ज्ुबान मे्दुसनया भर की सचकनाई िपेटे इन शासतर सदमागो्मे्भरी कश्मीरी के दद्मको र्पासयत करने वािे है्. जब बात सि​िसकयां िेते स्वग्म बार्द की भे्ट हज्ारो् जवान चढ़्ते है् जबसक वे खुद जेहाद के नाम पर की हो तो ज्ासहर है उिे सकिी कश्मीरी सहंदू या कश्मीरी मुि​िमान की दूिरे देशो्की दौित िे अपनी सतजोरी भरते है्. डायरी मे्अनेक ऐिे हवािे है्जो िाि करते है्सक आतंकवाद प्त्य् क्​् नल्ज् मे् ही नही् टटोिा जा रहा, बब्लक उिका ग्वाह सचनार भी है, आतंसकयो्के र्प मे्भी है और ख़्ाकी वद्​्ी वािो्के िैिासनयो् िे भरी डि भी, सहम श्​्ंृग भी है और तमगे और राजनेताओ् की कुि्ी चाहने वािी अिमान िे होि्िेते देवदार भी. धरती का स्वग्मकहे षड् ं ् त ् क ारी बुस्द के नकाब मे् भी है. िैसनक जाने वािे इि ितीिर प्​्देश की सि​िसकयां न केवि ड्​्ामेबासजयो्मे्हर रोज्इतने बेगुनाहो्के गिे मे्एके सनदा नवाज्ने िुनी है्, बब्लक वे स्वयं भी इनके िाथ 47 क्िासरनकोि डाि िच के नाम पर झूि बदस्​्ूर सि​िका है. िच कहने की सहमाक्त करता उगिवाने की कोसशश मे् िात, घूिो्-गासियो्, यह िेखक सिर पर कि्न बांध और सिर हथेिी पर िासियो्, यहां तक सक एनकाउंटर की आज्माइश िेकर चिता है. चिे भी क्यो् न - सजिने मौत का होती है सक समसिटेट् और समसिटरी मे्कोई अंतर नही् तांडव कई बार देखा हो, महज्दाढ़्ी रखने के कारण रहता. डायरी मे्ऐिे िंदभ्​्ो्िे िवाि उिाया गया है जो दो बार िौसजयो् द्​्ारा पीटा गया हो, इस्िाम का सक क्या यह दृश्य िोकतांस्तक देश िगता है जहां दुश्मन िमझे जाने और सवद्​्ोही तेवर के कारण िौजी समसिटे्ट का और समसिटे्ट मुखसबर का िप्पा सजिका तीन बार आतंसकयो् ने अपहरण सकया हो, िगाकर मारते है् क्यो्सक पहिे को तरि्​्ी और जब हथगोिे िटे तो उन्हो्ने नही् देखा सक वह सहंदू तमगा और दूिरे को आतंक का िैिाव चासहए. के सिए जानिेवा होगा या सनदा के सिए नािूर बनने आतं क वाद के जो पैर िैिते जा रहे है् उिका एक वािे पांच घाव देगा, सजिकी सहम्मत देख यमराज भी मनोवै ज ् ा सनक कारण डायरीकार ने एक स्थि पर भाग खि्ा हो, जो जीने की ि​िक मे्हर पि मौत के चद्चति िायरी: दि​िदकयाँ लेता स्वग्ि (दनदा नवाज्), स् प ष् ् सकया है , ‘क् या इि तरह िे नौजवानो्के वग्मको मुहाने तक पहुंच जाये, उिे आसख़्र िच कहने, अंदतका प्​्काशन, ददल्ली, िंस्करण 2015, भावनात्मक और मानसिक तौर पर उत्स्ेजत नही्सकया िमाज और राजनीसत का वीभत्ि आवरण उतारने िे पृ. 112, मूल्य 235 र्पये जा रहा है सजिका िाभ कुछ कट्​्रवादी और देशद्​्ोही कौन रोक िकता है? इिीसिए कबीर की तरह उिका रवैया आक्​्ामक और तेवर व्यंग्यात्मक है. उिका सवरोध हर तरह के तत्व उिा रहे है्.’ अपने ही बागो्की िोटो खी्चने की िज्ा जहां पूछताछ िे िेकर जेि और जमानत तक मुकर्मर हो जाये, जहां 23 िरवरी 1991 कट्​्रतावाद िे है. ‘सि​िसकयां िेता स्वग्म’ का पूरा कैनवाि आतंक के िाये मे् स्​्ल्ध की रात भर आि िे अस्िी िाि तक की िगभग िौ औरतो्का बिात्कार कश्मीर घाटी की छसव को उकेरता है. कश्मीरी पंसडतो्और कश्मीरी आतंक 68 स्​्िगेसडयर राजपूताना राइिल्ि की टुकि्ी द्​्ारा सकया गया हो; वहां ऐिे की जो कटी-िटी, आधी-अधूरी तस्वीर राष्​्ीय-अंतरराष्​्ीय धराति पर अपमानजनक हादिे क्या आतंकी बनाने के सिए कािी नही्है? आिम सदखाई जाती रही है उिकी हकीक्त, रग-रेशे िे सनदा नवाज् की पुरानी यह है सक िैकि्ो्िौजी कै्पो्के िाथ िैकि्ो्कस्​्िस्​्ान है्सजिकी एकऔर स्वानुभूत पहचान है. इिी कारण आज के अंधेरे दौर की एक-एक एक कि्​् मे् दज्मनो् िापता िोगो् के कंकाि है्. इंिानो् को कंकािो् मे् कि्वी स्मृसत और नग्न यथाथ्म को िहेजने की कोसशश मे् कश्मीर की तल्दीि करने का काम इन िौसजयो्ने ही सकया है. इि डायरी की हर कि्ी एक िवाि के िाथ खत्म होती है: क्या असभव्यब्कत इि डायरी के र्प मे्हुई है. जब मीसडया कश्मीरी हािात को हम आज्ाद है् या उि आज्ाद देश के गुिाम है् सजिके शािक ‘राष्​्ीय सहत’ की छिनी मे् छान आतंसकयो् द्​्ारा मानवीय उल्िंघन को आतं क ी, धास्ममक किमुल्िा और रक्​्क की शक्ि मे् भक्​्क िेना बढ़्ा-चढ़्ा कर सदखाता है और िज्​्ी झि्पो्, आतंक सवरोधी एजे्सियो्और के असधकारी है्? कश्मीरी भाग्य-चक्​् इन्ही् के हाथो् मे् है. स्वग्म िौसजयो् की ड्​्ामेबाजी, पुसि​ि की ज्​्यादसतयो् को नज्रअंदाज करता है, सनदा नवाज् ने इिी पहिू पर असधक नज्र रखी है. मीसडया ने अपनी की सि​िसकयो् के कारणो् की पहचान करते हुए डायरी-िेखक ने टीआरपी बढ़्ाने के सिए ‘ि्​्ेसकंग-न्यूज’ के तौर पर कश्मीर पर सिखी इनके चेहरो् िे नक्ाब उतार उनके पीछे सछपे आतंकवासदयो् और पुसक ् ो्की माक्स्ेटंग बढ़्ाने के सिए आम कश्मीरी की भावनाओ्का शोषण आतंकी िंगिनो् को उजागर करते हुए कश्मीर मे् आतंक और उग्​्वाद के न थमने वािे सि​िसि​िे के पीछे स्​्कयाशीि मंशा की भी स्​्डसिंग की सकया है. डायरी मे्आतंकवाद की प्​्ेरणा के कुछ स्थूि और प्​्त्यक्​्कारणो्के है. आज के दौर मे्ऐिा करना सकिी दुस्िाहि िे कम नही्. सनदा नवाज् भी हवािे है्. मि​िन, जेहाद का नाम देकर इस्िाम का अपमान करने के इि दुस्िाहि को आतंकवाद के सखिाि ज्र्री कार्मवाई के तौर पर n वािी कट्​्रतावादी, इस्िामी शािन और िीमा पार के अपने आक्ाओ्की देखा जा िकता है.

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40 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016


साहहत्य/कहवता राजेश सकलानी िुपसरसचत कसव. प्​्कासशत कृसतयां: ‘पानी के बहने की आवाज’और ‘पुश्तो्का बयान’. सवसभन्न पत्​्-पस्​्तकाओ्मे् िेख और सटप्पसणयां प्​्कािशत.

िॉर्षर की िदे् बॉड्मर के दोनो्ओर की बिाकते्समि कर एक और मुल्क बनाती है् उनकी अपनी हवाएं और पानी है सचस्ियाएं मजे िे घूमती है् वहां हसथयार िे जाना गैरकानूनी है शल्द उच्​्ारण की ितह िे बि थोि्ा नीचे पंखुि्ी सजतनी गदगदी नमी है सजिके खयाि िे सदिो्मे् मीिी धि्कने्आती है् माशूक सदि ि​िचाते हुए जमीन पर िरकता जाता है पेशावर कराची और सहंदूकुश और कही्और दूर अपनी इि वािना को आता ही नही्िहरना हर वक्त िोग सकिी कशमकश िे गुजरते कैिी कैिी िांि िेते हुए पता िगते है् एक अंदर्नी आदसमयत जो रहती है बुसनयादी तौर पर यकीनन हम िब मे् जर्र सजरह कर पायेगी आज की मान्यताओ् को तय कर सजिे कोई शुबहा नही्है मोहल्बतो्की तहरीर पर भिा सकिे पता नही्दुश्मसनयो्की सजदो्के पांव उल्टे होते है् बंदूके्बंदो्के सिर घुमा देती है् िेसकन खूंखारो्मे्भी जर्र सछपी रहती है थोि्ी मािूसमयत वे भी बरगिाये हुए बासशंदे है्और वे भी इंिाि का सजक्​्करते है् इि दूिरी आवाज को िुनो उनकी स्वायत्​्ता को ि​िाम करो उनकी भी खुशी मे्िहकने का मौका दो उनके कान मे्िुि​िुिाओ सक यह भी इबादत है आत्मीयता की तिाश करना रंसजशो्को मना कर देना हमेशा के सिए यह मुमसकन है हां यह कतई मुमसकन है करीब आने िे यह मुमसकन है नजदीसकयो्के जो सखिाि है् उनके कान मे्मोहल्बत का एक िफ्ज छोि्

सदया जाना दूसरयां बनाने की कोसशशो्को बेकार कर सदया जाना.

िै्र िा़जार अपने पुराने तंग इिाके मे्है बै्ड बाजार यहां की धुने्मुब्शकिो्की परवाह नही्करती् और गुमनाम िोक किाकार अपने सनज्​्ीव पसरचयो्को शानदार पोशाको्और सदिकश िंगीत मे् सछपा िेने मे्िरिता महिूि करते है् किा और िोगो्की खुशी के बीच खो जाने की रवायत मे् आधी रात पैदि वापि िौटते जब उनके सिकुि्ेचेहरे सदखने को होते है् थके वाद्​्यंत्और गव्​्ीिी टोसपयां हाथो्मे् झूिती्सनढाि दश्मक शासदयो्मे्छककर मोटरो्िे सनकि भागने को सिर िे होते बेिुध.

तिसिड्ा 2015 कही्िे आये चांद अपने शबाब पर आये जमीन सनकि कर खौि की रात िे खत्म हो जाये्चीखे् भयातुर दूर जाये्दु:स्वप्न ति्ति्ाहटे्सदमाग मे् आये नी्द आये एक िीक िी नी्द अखिाक की आंखो्मे् घर की औरतो्को आये बच्​्ो्को आये सबिहि्ा मे्बहे बयार पत्​्ो्िे खेिती भागी जाती रहे िुकून बना हुआ यह शस्मा्दगी जैिे हो नही् हो सजिमे्खंजर रहे आंिुओ्िे भरा हुआ हरेक सनवािे पर हो हमारी दुआ.

पूव्ष-तवध्वंस एक अस्​्दतीय चेहरा हूं एक िे एक चेहरो्मे् कोई राह जर्र समि जाती है मुब्शकिो्मे् कोई जगह बना देता है कोई चुल्िू मे्पानी डाि देता है ि​िीके िे

भीि्के िामूसहक गुनगुनेपन िे सनकिते जानिेवा सवस्िोटक रख कर सछप जाऊं तो सभनसभनाती मब्कखयां मुझे शस्मा्दा करे्गी जुबान का िज्ममुझे सकिी िायक नही् छोि्ेगा सजंदगी की रोसटयां और नमक और रक्त मे्घुिे िोगो्के तमाम स्पश्म मुझे मार डािे्गे खामोशी िे आदमी के कंधे सहिते ही वह मेरे जानने मे् आ जाता है, यह जानते हुए मै्पानी मे् डुबसकयां मारता हूं और िाि और हल्का हो कर हांिने िगता हूं खुशी मे्.

छूटने का दद्ष जबिे पैदा हुआ सकराये के मकानो्मे्रहा पहिे सपता के िाथ सिर सजंदगी भर नौकरी के िाथ हर बार मकान छोि्ता तो कुछ दद्महोता छूटने का दद्म जो इि बार भी हो रहा है देह की देहरी पर.

सि कुछ क्या िुबह है जैिे पृथ्वी पैदा हो रही हो यह वही िमय है जब कि बाग मे्ऊपर देखते हुए मै्अपने को भूि गया था जैिे िब कुछ भीतर रच गया हो इिी क्​्ण रिोई मे्बत्मन गूंजे जहां बांग्िादेशी रेहाना जूिे बत्मन मांज रही है सि​िकते हुए बत्मनो्िे रोने की आवाज आ रही है.

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शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 41


मास् साहहत् ट हेयड

अलग पहिान के कारलया रवी्द्काकलया ने कहानी की प्​्चकलत कवरय-वस्​्ु िे्बदलाव ककया और कई साकहल्ययक पक्​्िकाओ् का संपादन करते हुए नयी पीढी को िंच कदया. रवी्द् कादलया: िफल िंपादन

मंगलेश डबराल

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वी्द् कासिया के सनधन के िाथ सहंदी कहानी ने एक ऐिा रचनाकार खो सदया है, सजिने कहानी की प्​्चसित सवषय-वस्​्ु और सशल्प मे् बदिाव सकया, कई िासहब्तयक पस्​्तकाओ् का ि​ि​ि िंपादन करते हुए नयी पीढ़ी को मंच सदया और व्यब्कतगत स्​्र पर बेसिक्​्ी का जीवन सजया. सपछिी िदी के िाि के दशक के अंसतम वष्​्ो्मे्सहंदी कहानी मे्एक नयी पीढ़ी उभर कर आयी थी सजिकी कुछ ही रचनाओ् ने तत्कािीन कथापसरदृशय् बदि सदया और नयी कहानी आंदोिन की पृषभ् सू म मे्डाि सदया. उन युवाओ् की कहानी को ‘िन िाि के बाद की कहानी’ के र्प मे् पसरभासषत सकया गया. कथाकार और आिोचक सवजय मोहन सिंह द्​्ारा िंपासदत इिी शीष्मक के िंकिन की कहासनयां एक प्​्स्थान -सबंदु के र्प मे्प्​्सतस्​्षत हुई्. आज सहंदी कहानी सजन कथाकारो्के माध्यम िे सहंदी कहानी अपने सवकाि के नये मुकाम तक पंहुची है, उनमे् िे ज्यादातर इिी िािोत्​्री पीढ़ी के कृती िेखक है्. ज्​्ानरंजन, दूधनाथ सिंह, काशीनाथ सिंह की त्​्यी तो प्स्िद्​्ही है, रामनारायण शुकि ् , सवजय मोहन सिंह, अशोक िक्िसे रया (जो गुणे्द्सिंह कंपानी के नाम िे सिखते थे), महे्द्भल्िा, गंगा प्​्िाद सवमि, प्​्बोध कुमार, सवजय चौहान आसद की कहासनयो् ने अपने नये कथ्य, नेहर्युगीन स्वप्न िे मोहभंग और अस्​्सत्ववादी चेतना और र्ढ़ीहीन सशल्प िे कहानी को एक नया व्यब्कतत्व सदया. रवी्द्कासिया ( जन्म: 11 नवंबर 1938 ; सनधन: 9 जनवरी 2016) इि िािोत्​्री पीढ़ी के प्​्मुख रचनाकार थे, सजनकी कहानी ‘ नौ िाि छोटी पत्नी’ नयी िंवेदना की उल्िेखनीय कृसत के र्प मे्आज भी याद की जाती है. रवी्द् कासिया का जन्म जािंधर मे् हुआ था और अपने जन्मस्थि की पंजाबी मस्​्ी उनके व्यब्कतत्व मे्अंत तक मौजूद रही. उनकी ‘गरीबी हटाओ’, ‘बांकेिाि,’ ‘चकैया नीम’ और ‘कािा रसजस्टर’ जैिी बाद की चस्चतम कहासनयो्मे्भी एक सखिंदि्ापन मौजूद रहा. मुबं ई मे्उन्हो्ने कािी िमय ‘धम्मयुग’ जैिी तत्कािीन चस्चमत पस्​्तका मे् काम सकया. उिके िंपादक धम्मवीर भारती थे जो कािी िख्त माने जाते थे, िेसकन उन्हो्ने ‘धम्मयुग’ को अपने िमय की िबिे असधक प्​्िार िंख्या वािी पस्​्तका बनाये रखा. कासिया की पत्क ् ारीय ट्स्ेनंग ‘धम्यम गु ’ मे्ही हुई हािांसक वहां िंपादक के वच्मस्ववादी माहौि मे्वे िहज नही्रहे. उनकी चस्चमत कहानी 42 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

‘कािा रसजस्टर’ इन्ही्अनुभवो्की दास्​्ान है. कुछ िमय बाद वे नौकरी छोिकर इिाहाबाद आये, नये सिरे िे िंघष्मसकया, अपना प्​्ेि खोिा और सिर उिे भी बंद करके कोिकाता िे भारतीय भाषा पसरषद्की पस्​्तका ‘वागथ्म’ का िंपादन करने िगे. कुछ वष्म बाद उन्हो्ने भारतीय ज्​्ानपीि के सनदेशक का पद िंभािा और ‘नया ज्​्ानोदय’ का िंपादन करते हुए युवा कहानीकारो् के एक पीढ़ी को प्​्ोत्िासहत सकया. इन दोनो् पस्​्तकाओ् के िंपादक के तौर पर उनका काय्मकाि बहुत ि​ि​ि माना जाता है. आज सहंदी कहानी के पसरदृश्य मे् जो रचनाकार नजर आते है्, उनमे्िे कई कासिया द्​्ारा िंपासदत ‘वागथ्म’ और ‘नया ज्​्ानोदय’ के माध्यम िे ही िामने आये और इन पस्​्तकाओ्की प्​्िार िंख्या भी बढ़ी. इि बीच उनके िंस्मरणो्की सकताब ‘गासिब छुटी शराब’ की बहुत चच्ाम हुई सजिमे्इिाहाबाद के सदनो्के अनुभव दज्मथे. ऐिा भी कम ही होता है सक सकिी महत्वपूण्म िेखक की पत्नी उतनी ही महत्वपूण्म बन िके, िेसकन रवी्द् कासिया की पत्नी ममता कासिया भी उनके सजतनी, या कई िोगो्की दृस्ष मे्उनिे भी बेहतर, िेसखका के र्प मे्प्​्सतस्​्षत हुई्. सहंदी मे्यह जोिी ‘कासिया दंपती’ के नाम िे प्​्सिद्​्थी. एक बार वे िंजय गांधी के करीब भी आये और इिके सिए आिोचना के पात्​् बने, िेसकन उनके िेखकीय स्वासभमान के कारण यह सनकटता अल्पकासिक ही रही. रवी्द् कासिया की िंवेदना सनस्ममत करने मे् पंजाब के अिावा मुंबई जैिे महानगर और सहंदी क्​्ेत् की िासहब्तयक राजधानी कहे जाने वािे इिाहाबाद का बहुत योगदान रहा. मुंबई के अनुभवो्पर आधासरत उनका उपन्याि ‘ 7 रानडे रोड’ कुछ वष्मपहिे प्क ् ासशत हुआ. िंपादन की किा उन्हो्ने धम्मवीर भारती िे िीखी और इिाहाबाद मे्ज्​्ानरंजन और दूधनाथ सिंह जैिे िमकािीनो् की िोहबत मे् उनकी कहानी पसरपक्व हुई. इिाहाबाद मे्उनका प्​्ेि नये-पुराने िेखको् का अड्​्ा हुआ करता था और उि दौर की कई िासहब्तयक पस्​्तकाएं और सकताबे्भी उनके प्​्ेि िे मुस्दत होती थी्. रवी्द् कासिया तबीयत िे खुश और यारबाश थे और बहुत जल्दी दोस्​्बन जाते थे और उिके धागो्को टूटने नही्देते थे. यह जज्बा उनकी ख़ाि पहचान था और नये रचनाकारो् को बढ़ावा देने और उनिे बराबरी के स्​्र पर समिने मे्तो उनका कोई िानी नही्था. यह अकारण नही्है सक उनके सनधन िे सहंदी की युवा पीढी को शायद िबिे ज्यादा दुख n हुआ है.


बतकही चंचल

एक थे लोकबंधु राजनारारण

यह ित पूकछएगा कक हिारे साथ नेता राजनारायण जी ने ककतना बवाल ककया था, जब हिने उनके कलये िंगाये गये िुग्े को खा कलया था. लेककन अंत िे्जो प्यार नेता ने कदया, वह िरोहर है.

ह

स्बे जैि अज्म कर दूं सक उनिे जो पहिी मुिाकात हुई. वह पंद्ह समनट अगर स्थायी हो गयी होती, तो यकीनन हम उनिे ताउम्​्निरत करते. िबे ि​िक गसरयाते और इिी के िाथ िमाजवाद के दायरे िे बाहर हो गये होते. िेसकन वह पंद्ह समनट का अंत इतना िुखदायी रहा सक हम आजीवन उनके मुरीद हो गये. िाथ ही िमाजवाद ऐिा सचपका सक जहां भी जाता हूं. िमाजवाद हमिे पहिे हमारी परछायी की तरह हमारे िाथ, हमिे िटा खिा रहता है. िमाजवादी आंदोिन के सबखराव के बाद, हम कांगि ्े मे्है.् हमारा पहिा पसरचय सदया जा रहा था - आप है्ि​िाने, खांटी िमाजवादी. कहकर भाई ि​िमान खुश्ीद अपनी कुि्ी पर बैि गये और हम कांग्ेिी हो गये. अब बारी थी, चौथे स्​्ंभ की सजिे अंग्ेजी मे्मीसडया और मादरी जुबान मे् खबरची कहते है्. उनके िवाि पर आऊं, उिके पहिे इि खंभे के बारे मे्बताता चिूं. इि मुल्क मे्हर जि और चेतन दो सहस्िे मे् बंटे है्. ' ई ' और 'ऊ'. यह सवभाजन स्वग्​्ीय जनेश्र समश्​्ा ने अपने जीते जी कर सदया था. हमारे जैिे उनके पुराने िोग उनिे समिते थे. तो वे इंतजार करते थे सक 'ई' िो्गो्को समि कर सनकि जाने दो. ई मतिब जो जासत, िोभ, और ित्​्ा की हनक िे पाट्​्ी के विादार तो हो गये है्. िेसकन समजाज और मन िे न तो िमाजवादी है्, न ही िमजवाद इन्हे् पचता है. ‘ऊ’ िोग वे है्सजन्हो्ने िमाजवादी आंदोिन के सिए कम िे कम अपनी जवानी तो दे ही दी. आज ओ कही्भी रहे्िेसकन उनका मन िमाजवाद मे्ही अटका रहेगा. इिसिए जब ि​िमान भाई ने िमाजवादी कहकर समिवाया तो पत्​्कारो्का ' ई' वािा सहस्िा जोर िे िपका. पहिा िवािआपने कांग्ेि क्यो् ज्वाइन सकया? क्यो् सक यहां इि मुल्क मे् हूि की कोई िंभावना नही्है. यह हूि क्या होता है? यह झारखंड मे्पाया जाता है, आप िीधे जवाब नही्दे रहे है्, आप िीधी बात िमझना बंद कर चुके है्. कांग्ेि हमारा घर है, हमारे पुरखो् का घर है. डॉ िोसहया, जेपी, आचाय्म नरे्द् देव, मीनू मिानी, अर्णा आसि​ि अिी, डॉ िंपूण्ामनंद, कमिापसत स्​्तपािी और तो और पंसडत जवाहर

िाि नेहर्िमाजवासदयो्के नेता रहे है्. हम हडबिी मे्थे सक क्​्ांसत करे्गे घर छोि कर चिे गये. क्​्ांसत नही्हुई हम सबखर गये तो एक एक करके अपने घर वापि आ रहे है्. बि इतनी िी बात है. िेसकन आपके नेता डॉ िोसहया ने गैर कांग्ेिवाद का नारा सदया और 67 मे्िात प्​्ांतो्िे कांग्ेि को ित्​्ा िे बाहर कर सदया? घर का मुसखया अगर मनमानी करने िगे तो आप क्या करे्गे? जो आप करे्गे डॉ िोसहया ने वही सकया था. कांग्ेि एकासधकार की तरि बढ़ रही थी सक उिे ित्​्ा िे कोई बाहर नही्कर िकता. डॉ िोसहया ने कांग्ेि का कान पकि कर सदखा सदया सक इि तरह बाहर जा िकते हो. िमाजवाद की मंशा कभी भी यह नही् रही सक कांग्ेि िमाप्त हो जाये. िमाजवादी आंदोिन कांग्ेि का पसरमाज्मन करती रही है. गैर कांग्ेिवाद का नतीजा था दो िाि बाद 69 मे्नेकीराम नगर कांग्ेि मे्िमाजवाद का प्​्स्ाव आया 54 मे्जेपी ने कांग्ेि िे जो मांग की थी सक इिे मान िो हम कांग्ेि मे्वापि आ जायंगे. उिे इंसदरा गांधी ने जि का ति मान सिया. नतीजा? गांधी को कांग्ेि िे बाहर कर सदया गया. जो िाथ मे्सनकािे गये और सजन्हे् युवा तुक्क कहा गया िब िमाजवादी थे, यह है पसरमाज्मन. कािांतर मे्एक बार सिर कांग्ेि एकासधकार की तरि बढ़ी जेपी ने रोका. कथा आपको मािूम है. िेसकन उिका वह सहस्िा िुन िीसजये जो पसरमाज्मन की पुस्ष करता है. आपातकाि के बाद हुए चुनाव मे्कांग्ेि को करारी हार समिी थी. उधर जनता पाट्​्ी की िरकार शपथ िे रही थी. इधर जेपी इंसदरा गांधी के घर पर थे, दोनो्एक दूिरे समिे. इंसदरा गांधी ने जेपी के कंधे पर िर रख कर रो सदया. जेपी अपने को नही् रोक पाये. रोने िगे और इतना ही कहा था धैय्म रखो इंदु. िब िीक होगा और दो िाि मे् िब िीक हो गया. वही इंसदरा गांधी दो सतहाई बहुमत िे ित्​्ा मे्आयी्. उि जनता पाट्​्ी की िरकार को तोिने मे् सकिकी भूसमका रही ? खोसजये तब तक हम पान खा िे्. अब यह मत पूसछयेगा सक हमारे िाथ नेता राजनारायण जी ने सकतना बवाि सकया था, जब हमने उनके सिये मंगाये गये मुग्े को खा सिया था. िेसकन अंत मे् जो प्यार नेता ने सदया वह n धरोहर है. शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 43


मास् यायावरी ट हेड

दीव का इकतहास कजतना पुराना है, उतनी ही सिृि्है उसकी संस्कृकत. यहां ज्यादातर घरो्के सािने रखे हुए फूल, ककला और सिुद् पय्षटको्को खास तौर से आकक्रषत करते है्. रीिा ति​िारी

संसक ् तृ ियो् का संगम है दीव

दी

व यानी देश के पस्​्िमी छोर पर अरब िागर के सकनारे बिा एक नन्हा-िा द्​्ीप. िेसकन यह नन्हा-िा खूबिूरत िमुदत् टीय शहर अपने-आप मे्सकतनी सवसवधता और खूबिूरती िमेटे है, इिका अंदाजा यहां आये सबना िगाना बहुत मुब्शकि है. एक वाक्य मे् कहे् तो िागर सकनारे बिी यह जगह खुद गागर मे् िागर है. इिका इसतहाि सजतना पुराना है िंस्कृसत उतनी ही िमृद्. गुजरात दौरे का काय्मक्म बना तो नक्शे पर देखा सक यह जगह िोमनाथ िे कोई घंटे-डेढ़् घंटे की दूरी पर ही है. बि इिके सिए एक सदन और सनकाि सिये. िोमनाथ मंसदर मे् दश्मनपूजन और उिके बाद मंसदर िे िगे सजि िागर दश्मन असतसथ गृह मे्िहरे थे, वहां नाश्ता करने के बाद िुबह कोई दि बजे हम दीव के सिए सनकिे. ऊना होकर कोई िवा ग्यारह बजे हम दीव के प्​्वेश द्​्ार पर खि्े थे. जी हां, देश के बाकी सहस्िो्िे इि द्​्ीप को जोि्ने वािी ि​ि्क पर एक प्​्वेश द्​्ार बना है. वहां बाहरी गास्ियो् और पय्मटको्को टैक्ि भर कर ही दीव मे्घुिना होता है. गेट िे भीतर जाते ही िगता है सक हम सकिी केद् ्शासित प्द् श े नही्, बब्लक सकिी दूिरे देश मे्पहुच ं गये हो्. ि​ि्को्के सकनारे बने छोटेदीव मे् जहाज का एक मॉिल: इदतहाि की याद

44 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

छोटे िुंदर मकान. ि​ि्क के िाथ चिती नदी और इिमे् मछुआरो् की िैकि्ो् नावे् बेहद िम्मोहक नजारा पेश कर रही थी्. यह शहर गुजरात के कासियावाि् तटीय क्​्ेत् के पाि मुख्यभूसम िे थोि्ा हट कर है. इिका एक भाग उत्​्री गुजरात के जूनागढ़्और अमरेिी सजिो्िे िटा है जबसक बा़की तीन तऱ्ि िमुद् पिरा है. यह द्​्ीप दो पुिो् के जसरये मुख्यभूसम िे जुि्ा है. माना जाता है पौरासणक काि मे्यहां जािंधर नामक दैत्य का राज था, सजिका अंत भगवान सवर्णु ने सकया था. वनवाि के दौरान पांडव भी यहां कुछ सदन र्के थे. द्​्ासरका नगरी बिाये जाने के बाद यह क्​्ेत् भगवान कृरण ् के प्भ् ाव मे्भी रहा. ईिा िे 322320 वष्मपूव्मयह मौय्मवंश के आसधपत्य मे्था. बाद मे्यहां गुपत् और चािुकय् राजाओ्का प्भ् ाव रहा. दीव ने कई बाहरी आक्​्मण भी झेिे है्. पुत्मगािी यहां 16वी् शताल्दी मे् व्यापार के सिए आये थे. िेसकन धीरे-धीरे उन्हो्ने दीव को अपना उपसनवेश बना सिया. दीव िाि 1535 िे 1961 तक पुत्मगासियो्के कल्जे मे्रहा. िाि 1961 मे् भारत िरकार के आपरेशन सवजय के तहत गोवा और दमन के िाथ यह द्​्ीप भी भारत का सहस्िा बन गया. िगभग 425 वष्​्ो तक पुत्मगासियो्के कल्जे मे्रहने की वजह िे दीव के भवनो्, सकिो्,

भाषा, िंस्कृसत और जीवनशैिी पर पुत्मगािी िभ्यता का प्​्भाव िाि देखने को समिता है. यहां गुजराती, सहंदी, अंग्ेजी और पुत्मगािी भाषाएं बोिी और िमझी जाती है.् स्थानीय िोगो् को शायद िूिो्िे बेहद िगाव है. शहर मे्बने छोटे-बि्ेहर मकान मे्िूिो्के पौधे देखने को समिते है्. हमारे ड्​्ाइवर हीरािाि ने बताया सक गुजरात के सवसभन्न शहरो् के अिावा मुंबई के अमीर िोगो् ने भी इि शांत जगह पर चैन िे छुस्टयां सबताने के मकिद िे यहां मकान खरीद या बनवा सिये है्. उिकी बाते् िुनने के बाद तािाबंद मकानो्की हकीकत िमझ मे्आयी. एक िंबा-िा स्​्िज पार कर हम शहर मे् घुिे. हमारे एक पासरवासरक समत्​्ने रहने के सिए सजि रि​ि बीच सरिॉट्ममे्हमारी बुसकंग करायी थी वह नागोआ बीच पर था. दीव एअरपोट्म के िीक िामने. होटि के कमरे की बािकनी िे िामने हवाईपट्​्ी भी िाि नजर आ रही थी. यह जगह मुख्य शहर िे कोई दि सकिोमीटर दूर है. िेसकन यह कहने मे्कोई दुसवधा नही्है सक दीव मे् िहरने के सिये नागोआ बीच िे िुंदर कोई दूिरी जगह नही्है. इिका अहिाि हमे्शाम के िमय हुआ जब शहर के चि्​्र िगाने के बाद हम इि बीच पर आये. बै्काक की तज्मपर वाटर स्पोट्ि्म, वाटर स्की, बोट राइसडंग और वाटर


दीव का बंदरगाह: िमुद् मे् िभ्यता बाइक िे िेकर िबकुछ तो यहां मौजूद था. िगा िोग बेकार मोटी रकम खच्म कर इनका िुत्ि उिाने के सिए सवदेशो् का र्ख करते है्. इि अध्मचंद्ाकार बीच पर खाने-पीने के कई रेस्रां भी है्. इिके अिावा अगर खेिो् मे् आपकी सदिचस्पी नही्है तो आप सकनारे बैि कर चाय की चुस्की के िाथ दूिरो् को ऐिा करते देख िकते है्. दीव मे् िौराष्​् की जीवनशैिी की भी झिक देखने को समिती है. दरअि​ि पुत्मगासियो् के कल़्जे िे पहिे यह द्​्ीप गुजरात का ही सहस्िा था. िाि-िुथरी ि​ि्को्वािे छोटे िे दीव कस्बे मे् घूमने की जगहे् ज्यादा नही् है्, िेसकन यही बात इिे बाकी पय्मटन स्थिो् िे अिग करती है. िैिानी यहां सबना थके प्​्कृसत का िुत्ि उिा िकते है्. दीव सकिा यहां का िबिे बि्ा आकष्मण है. इिसिए हमारा भी पहिा पि्ाव वही था. अक्तूबर का महीना होने के बावजूद सिर पर िूरज आग उगि रहा था. यह िगभग 5.7 हेक्टेयर क्​्ेत्मे्बना हुआ है और िागर के भीतर िमाता िगता है. सकिे के बीच मे्पुतगम् ािी योद्​्ा 'डाम नूनो डी कुन्हा' की कांिे की मूस्तम भी बनी हुई है. यहां एक प्​्काश स्​्ंभ भी है जहां िे पूरे दीव का नजारा सदखता है. यह सकिा तीन

सदशाओ्मे्िमुद्िे सघरा है तो चौथी सदशा मे्एक छोटी-िी नहर इिकी िुरक्​्ा करती है. सकिे का गेट भी इधर ही है. इि सकिे का सनम्ामण गुजरात के िुलत् ान बहादुर शाह ने पुतगम् ासियो्िे िंसध के तहत मु़गि आक्​्मण िे बचाव के सिए 16वी् िदी मे्कराया था. उि दौर मे्सकिे की प्​्ाचीर पर तैनात की गयी कई तोपे् आज भी देखी जा िकती है्. हािांसक वक्त के थपेि्ो्िे धीरे-धीरे उनकी रंगत िीकी पि्ती जा रही है. दीव का जेि भी इिी सकिे के एक सहस्िे मे्बना है. सकिे के परकोटे िे िमुद् की खूबिूरती देखते ही बनती है. सकिे के िीक िामने िमुद् के बीचोबीच सकिे जैिी एक और छोटी िी इमारत है. इिे पानीकोटा कहते है्. पत्थर की सवशाि चट्​्ानो् िे बना यह दुग्म एक िमुद्ी जहाज के आकार का नजर आता है. वहां तक नाव या मोटरबोट िे ही पहुंचा जा िकता है. सकिे िे कुछ दूर ही जेट्ी है. वहां िे नाव मे् बैि कर खाि्ी की िैर की जा िकती है. शाम के िमय दीव मे्सबजिी की सझिसमिाती रोशनी मे् इि जेटी िे शहर को सनहारने का मजा ही अिग है. दीव मे्ज्यादातर आधुसनक मकान देखने को समिते है्. सकिे िे सनकिने के बाद हमारा अगिा पि्ाव था िे्ट पॉि चच्म. िाि 1610 मे् बने इि चच्म की इमारत आज भी भव्य है. यहां

पेड़्ो् िे िरपूर िड़्क: शांदत और िौ्दय्ि िे कुछ दूर पुराने िे्ट थॉमि चच्मकी इमारत को अब िंग्हािय बना सदया गया है. यहां सकिे के रास्​्ेपर ब्सथत अपना होटि के ओपन एअर रोस्​्रां मे् बैिकर िमुद्ी िहरो् का िुत्ि उिाते हुए दोपहर के भोजन मे्चावि के िाथ खायी झी्गा मछिी का स्वाद अब तक याद है. इिी तरह मुख्य बाजार मे्शाम के िमय खायी गयी पानी पूरी का स्वाद भुिाना भी मुब्शकि है. दोपहर के खाने के बाद िमुद् के सकनारे वािी ि​ि्क पर चिते हुए हम िबिे पहिे जािंधर बीच पहुंचे. इिके नजदीक की एक पहाि्ी पर जािंधर मंसदर और देवी चंस्दका मंसदर

बिले से िुछ दूर िी जेटी िै. शाम िे समय दीव में बिजली िी बिलबमलाती रोशनी में इस जेटी से शिर िो बनिारने िा मजा िी अलग िै. ब्सथत है्. जािंधर नामक दैत्य ने अंसतम िमय मे्भगवान िे यही्क्म् ाप्​्ाथ्नम ा की थी. आगे बढ़्ने पर नजर आता है बेहद शांत चक्​्तीथ्मबीच. जहां िहरो् के शोर के अिावा कोई दूिरी आवाज कानो्तक नही्पहुंचती. तट के पाि तेज हवा मे् शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 45


मास् यायावरी ट हेड

िहराते नासरयि के पेि्और कुछ दूरी पर छोटीछोटी पहासि्यां इिकी शोभा बढ़्ा रही थी्. इि तट की शांसत अनायाि ही कदमो् को बांध कर कुछ देर िहरने पर मजबूर कर देती है. पौरासणक मान्यता के मुतासबक जािंधर दैतय् का अंत करने के सिए भगवान सवर्णु ने यही् िे चक्​् चिाया था. इिीसिए इिका नाम चक्​्तीथ्म पि्ा. कुछ दूरी पर िनिेट प्वाइंट है जहां िे िूय्ामस् का नजारा देखा जा िकता है. इिी रास्​्े पर िमुद् के सकनारे भारतीय नौिेना के एक युदप् ोत ‘आईएनएि खुकरी’ का स्मारक है. यह 1971 के युद्मे्पासकस्​्ान की एक पनडुल्बी िे छोि्े गये टारपीडो िे नष्​् हो गया था. उिी की याद मे् एक छोटी पहाि्ी पर यह स्मारक बनाया गया. दीव के िुदम गांव मे्िमुद्के सकनारे एक झुकी हुई चट्​्ान के नीचे छोटी-िी गुिा है. मान्यता है सक वनवाि के दौरान भटकते हुए पांडव यहां भी कुछ देर िहरे थे. उन्हो्ने इि गुिा के भीतर पांच सशवसिंग स्थासपत सकए थे जो आज भी मौजूद है्. यह गंगेश्र महादेव मंसदर के नाम

िे मशहूर है. िमुद् का जिस्​्र बढ़्ने पर यह सशवसिंग अक्िर जिमग्न हो जाते है.् यह नजारा हमने भी देखा. िगा मानो िमुद् श्​्द्ापूव्मक भगवान सशव का असभषेक कर रहा हो. यह मंसदर स्थनीय िोगो्की आस्था का केद् ्है. िोमवार का सदन होने की वजह िे वहां पूजा-अच्मना करने वािो्की भीि्थी. नागाओ बीच तक का रास्​्ा नासरयि जैिे सदखने वािे पेि्ो्िे सघरा है. उनके ऊपरी सहस्िे मे्हरी-भरी नयी पस्​्तयां सदख रही थी्और नीचे िूखी पस्​्तयां िटकी थी्. हमारे ड्​्ाइवर ने बताया सक इनको ‘पॉम होका ट्​्ी’ कहते है.् नागोआ बीच की सगनती भारत के िुंदरतम िमुद् तटो् मे् की जाती है. घोि्े की नाि के आकार के इि बीच पर सबखरी िुनहरी रेत इिके िौ्दय्ममे्चार चांद िगाती है. यही कारण है सक वहां शाम के िमय अच्छी-खािी रौनक थी. यहां भारतीय और सवदेशी पय्टम को्के अिावा स्थानीय िोग भी खूब आते है्. यहां कई अच्छे होटि और सरिॉट्मभी है्. िमुद् मे् नहाने के सिहाज िे यह जगह कािी िुरस्​्कत है.

िमुद् की िैर: िैलादनयो् का आकर्िण दीव घूमने के सिए दीव िेब्सटवि का मौ़का िबिे बेहतर होता है. होटि के मैनेजर ने बताया सक दीव के मुब्कत सदवि के मौके पर होने वािे इि महोत्िव के दौरान देश-सवदेश िे भारी तादाद मे् िैिानी यहां पहुंचते है्. तब होटिो्मे्और बीच पर सति धरने तक की जगह नही् होती. इि महोत्िव के दौरान दीव की बहुजातीय िंस्कृसत की झांकी देखने को समिती है. गुजराती िंस्कृसत िे प्​्भासवत होने के कारण दीव के िोगो् का पिंदीदा िोकनृत्य गरबा है. इिके िाथ ही उि आयोजन मे् पुत्मगािी िोकनृत्य मांडो, वीरा आसद भी िैिासनयो् को आकस्षमत करते है्. िबिे बि्ी बात है सक दीव की खूबिूरती अनछुई-िी िगती है. यही चीज उिे दूिरे िमुद्ी पय्मटन के्द्ो् िे अिग और आकष्मक बनाती है. अगिे सदन भोर के उजािे मे् िूरज की पहिी सकरण के िाथ दीव को अिसवदा कहने का नजारा भी बेहद आकष्मक रहा. िूरज दूर तक हमारे िाथ चिता रहा. मानो हमे्सवदा कर रहा हो. n

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खानपान मास् ट हेड अर्ण कुमार ‘पानीबाबा’ िेखक िंस्कार िे राजनीितक व्यब्कत और पानी,भोजन और पोषाहार के िवशेषज्​्है्. हिवाई होने का दावा भी करते है्. e-mail.: akpanibaba@gmail.com

जाड़े मे़ जजजमकंद

कजकिकंद एक अय्यंत उपयोगी जड्है. स्वाद और उपयोकगता का कवस्​्ार भी बड्ा है. दीवाली से होली तक इस कंद के कवकवि उपयोग करने ही चाकहए.

शा

स्​्ीय मतानुिार सजसमकंद एक अत्यंत उपयोगी जि्है. स्वाद और उपयोसगता का सवस्​्ार भी बि्ा है. दीवािी िे होिी तक इि कंद के सवसवध उपयोग करने ही चासहए. केवि एक चेतावनी है. खाज, कोढ़् और एब्कजमा के रोसगयो्को इिके उपयोग िे सवशेष परहेज रखना चासहए. आजकि के मौिम मे् खि्े मिािे के सजसमकंद और मटर का रिा राेगन जोश का पयाय्महोना चासहए. हमारी ि​िाह के मुतासबक छोटा पसरवार भी आधा सकिो सजसमकंद और कम िे कम पाव भर कसचया मीिी मटर के दाने अवश्य रचाये. आधा सकिो सजसमकंद को सवसधवत छीि कर टुकि्े बनाने मे् न्यूनतम 70-80 ग्​्ाम कूि्ा तो अवश्य सनकि जायेगा. इक िार टुकि्े काटे्और इमिी या अमचूर के पानी मे्एक घंटा अवश्य सभगोकर रखे्वन्ाम उिकी खराश बची रह िकती है जो िल्जी के स्वाद को पूरी तरह िे नष्​् कर देगी.

हो गया है या नही्. एक चुटकी गम्ममिािो्का प्​्योग कर िकते है्. यह एक ऐिा िािन है सजिे चावि मे्िान कर भी प्​्योग कर िकते है और िादी रोटी के िाथ िगा कर भी. सजसमकंद के शाकाहारी कबाब भी शाही व्यंजन मे् सगने जाते है्. ऐिे कबाब सकिी भी शाही दावत की रौनक बि्ा िकते है्. सजसमकंद छीि कर टुकि्े बनाने और खटाई के पानी मे् खराश धोने तक सवसध िमान ही है. उिके बाद सजसमकंद के टुकि्ेउबाि कर छिनी मे् िूखने के सिए रख दे्. बाकी तैयारी मे् स्वादानुिार अदरक, हरी समच्म और िहिुन की चटनी बना िे्. इिे सजसमकंद की उबिी पीिी मे् अच्छी तरह समिा िे्. यसद आधा सकिो सजसमकंद है तो इिमे् करीब 150 ग्​्ाम चने का ित्​्ूसमिा िे और कम िे कम 50 ग्​्ाम िूखी मेथी या 150 ग्​्ाम हसर मेथी के बारीक कटे पत्.्े इि िब तैयारी के बाद स्वादनुिार नमक और अनारदाने का चूण्म अवश्य समिा िे्. बि अब गोि-गोि सटसकया बनाए

इि तरह खटाई मे् भीगे सजसमकंद को अच्छी तरह धोकर छिनी मे् सनचुि्ने के सिए रख दे्. अब छीि कर चार गांि िहिन की महीन चटनी तैयार करे्. उिी सि​ि पर दो मध्यम आकार के प्याज भी पीि िे्. हल्दी, धसनया आैर िाि समच्मभी सभगो कर पीि िे.् तेि हो जाये तो उिमे्िहिन की चटनी भूननी शुर्करे्तब िूकम् मात्​्ा मे्िाबुत गम्ममिािा (चार िौ्ग, 8 कािी समच्म, दो सछिका बि्ी इिायची, आधा इंच टुकि्ा दाि चीनी) िहिुन गुिाबी हो जाये तो उिमे् प्याज की चटनी डाि दे्. प्याज भी भुन जा तो समच्​्ी का घोि डाि कर भूने्. इिके बाद हल्दी, धसनया, अदरक की चटनी, सजसमकंद के टुकि्े, मटर के दाने, िब एक िाथ डाि कर अच्छी तरह भूने्. इि तरह िब माि जब तेि छोि्ने िगे ताे उिमे् आवश्यकतानुिार पानी िगा कर नमक डाि दे्. इि समश्​्ण को मंदी आंच पर 25 िे 30 समनट पकने दे्. आंच िे उतारने िे पहिे इतना अवश्य परख िे्सक सजसमकंद अच्छी तरह मुिायम

और तवे पर आिू की सटसकया की तरह पय्ामप्त तेि मे्ति िे्. इि​िे असतसरक्त सजसमकंद के तिे हुए टुकि्ेसबल्कुि आिू सिंगर की तरह मिािा िगा कर चाय के िाथ नोश िरमाये जा िकते है्. सजसमकंद का चोखा यानी भरता भी बना िकते है्. सकंतु िव्ामसधक उपयोगी एवं रोचक व्यंजन तो सजसमकंद की पानी या तेि वािी कांजी है. पानी की कांजी तो िबल्कुि िरि है. उबिे हुए टकुि्ो् को िाधारण राई के पानी मे्डािकर कांच के बत्मन को धूप मे्रख दे. तीन िे चार सदन मे्कांजी तैयार हो जायेगी. सजसमकंद का राई का अचार डािना हो तो टुकि्ो् को थोि्ा बारीक काटना चासहए. इन टुकि्ो्को तेि मे्िूखी िल्जी की तरह छौ्क दीसजए. िल्जी िंडी हो जाये तो उिमे्सपिी राई का चूण्मिमिा कर बन्​्ी मे्भर दे्. एक हफ्ते दि सदन मे्अचार तैयार हो जायेगा. यसद यह आचार तेि मे्डूबा n रहेगा तो छह महीने भी यथावत बना रहेगा. शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 47


मास् हिल् ट महेड

सिर िूहड़ता का पऱा​ा िुंबइया कफक्िकारो्ने एक नया फाॅि्षूला खोज कनकाला हैसेक्स कॉिेडी का. बीते कदनो्ऐसी कफक्िो्की काियाबी ने एक नयी भेक्डयािसान दौड्शुर्कर दी है. इस दौड्िे्एकता कपूर भी शाकिल है्. हतर मृदुल

अ

ब बॉिीवुड के सिल्मकारो्की नजर एक नये जॉनर पर पि् चुकी है. यह जॉनर एकदम नया तो नही् है, िेसकन हॉिीवुड की तरह अपनी इंडस्ट्ी मे्इि तरह की सिल्मो्की कोई बि्ी परंपरा भी नही् है. अब तक तो यही िीन था सक दो िे चार िाि मे् स्​्दअथ्​्ी िंवादो् वािी एकाध सिल्म आ जाती थी. जो दश्क म ो्की समस्​्शत प्स्तस्​्कया पाकर थोि्ी बहुत कमायी कर िेती थी. िेसकन ऐिी सिल्मो् िे बॉिीवुड के नामी सनम्ामता दूर ही रहते थे. िेसकन अब िमीकरण बदि चुके है्. अब ‘िेक्ि कॉमेडी’ जॉनर मे् ‘िौ करोि्’ वािी िंभावनाये् देखी जाने िगी है्. तीन िाि पहिे इंद् कुमार के सनद्श ्े न मे्बनी सिल्म ‘ग्ड ्ै मस्​्ी’ ने िौ करोि् का सबजनेि कर बॉिीवुड के तमाम सनम्ामताओ् की आंखे्चौ्सधया दी थी्. िाि 2013 मे्सरिीज हुई, इि सिल्म का शुमार उि िाि की िबिे ि​ि​ि सिल्मो् मे् हुआ था. इि ि​ि​िता िे उत्िासहत होकर ही अब इंद् कुमार ‘ग्​्ेट ग्​्ैड 48 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

मस्​्ी’ का सनम्ामण कर रहे है्. जो इिी िाि 25 माच्मको दश्क म ो्के िामने होगी. अिग िे बताने की जर्रत नही् है सक यह भी उनकी बीती सिल्म की तरह ही िेक्ि कॉमेडी ही है. पहिे िे ज्यादा स्​्दअथ्​्ी िंवादो् वािी और पहिे िे ज्यादा उन्मुक्त सकरदारो्वािी. इंद्कुमार को इि नये जॉनर मे्भिे ही अब तक की िबिे बि्ी ि​ि​िता समिी हो. िेसकन इि पर िबिे पहिे भरोिा एकता कपूर ने जताया था. िाि 2005 मे् ‘क्या कूि है् हम’ जैिी िेक्ि कॉमेडी ि​ि​ितापूव्मक सरिीज हुई थी. तब िे उनका प्​्सतस्​्षत बैनर ‘बािाजी सिल्म्ि’ इि तरह की सिल्मे्बेसझझक बना रहा एकता कपूर: िस्​्ेपन का िफर

मंदाना करीमी: िेक्ि कॉमेिी की नयी स्टार है. बॉक्ि ऑसि​ि के आंकि्ो्पर जाये्, तो तब यह सिल्म ि​ि​ि करार दी गयी थी. आिोचको् ने जर्र इिे िूहि् कहा था. िेसकन आम दश्मको्ने इिे सहट करवा कर ही दम सिया था. इि सिल्म के सहट हो जाने िे यह बात तो सचब्हनत हो ही गयी सक ऐिी सिल्मो्का भी एक बि्ा दश्मक वग्म है. खाितौर पर युवा वग्म को इि जॉनर की सिल्मो्मे्मनोरंजन समिने िगे, तो घाटा होने की िंभावना खत्म हो जाती है. ‘बािाजी सिल्म्ि’ बैनर ने 2012 मे् एक और िेक्ि कॉमेडी सिल्म ‘क्या िुपर कूि है् हम’ बनायी, इिे भी दश्मको्ने हाथो्हाथ सिया. यही कारण है सक अब एक बार सिर एकता कपूर ने ‘क्या कूि है्हम 3’ का सनम्ामण सकया है. ‘क्या कूि है् हम 3’ मे् तुषार कपूर, आिताब सशवदािानी और मंदना करीमी है्. इि सिल्म मे्युवा िेट् श े ी को बुना गया है. उमेश घाडगे के सनद्​्ेशन मे्बनी इि सिल्म के बारे मे् कहा जा रहा है सक यह ‘क्या कूि है्हम’ और ‘क्या िुपर कूि है्हम’ िे भी आगे की चीज है. इि सिल्म के डबि मीसनंग िंवाद रोजमर्ाम की सजंदगी िे ही उिाये गये है्. हाि ही मे् तुषार कपूर और आिताब सशवदािानी इि सिल्म के प्​्मोशन के सिए कई कॉिेजो् मे् गये, तो उन्हे् जबद्मस् सरस्पांि समिा. इि सिल्म का ट्​्ेिर िांच हो चुका है. अब तक इिे 20 िाख सहट्ि समि चुके है्. कुि समिाकर यही सक 22 जनवरी को सरिीज हो रही इि ‘एडल्ट सिल्म’ को देखने के सिए कािी युवा िािासयत है्. इि सिल्म के एक िप्ताह के बाद ही समिाप झवेरी सनद्​्ेसशत ‘मस्​्ीजादे’ सरिीज हो रही है. 29


जनवरी को सरिीज हो रही इि िेक्ि कॉमेडी सिल्म मे्मुख्य आकष्मण िनी सियोनी है. कभी पोन्म सिल्मो् की स्टार रही िनी का डबि रोि है. दोनो्ही सकरदारो्मे्वह कहर ढाने के सिए तैयार सदखायी दे रही है्. इि सिल्म मे्िनी के डबि रोि के िाथ तुषार कपूर और वीर दाि मुख्य भूसमकाओ् मे् है्. इिी तरह ‘ग्​्ेट ग्​्ैड मस्​्ी’ मे्सरतेश देशमुख, सववेक ओबराय और आिताब सशवदािानी की सतकि्ी है, जो उव्मशी रौतेिा को िेकर न जाने सकतनी ही कल्पनाये् करती नजर आयेगी. इंद् कुमार के सनद्​्ेशन मे् बन रही इि सिल्म को िेकर न केवि दश्मको् के मन मे्जबद्मस्सदिचस्पी सदखायी दे रही है, बब्लक बॉिीवुड भी बि्ी सजज्​्ािा प्क ् ट कर रहा है. िबके मन मे्एक ही िवाि है सक क्या इि ‘ग्​्ैि मस्​्ी’ मे् दकन्नत अरोड़्ा, दववेक ओबेराय और कदरश्मा तन्ना: मस्​्ी या फूहड़्ता? बार भी इंद्कुमार अपनी सिल्म को ‘िौ करोि् दश्मको् मे् आ रहे बदिाव को पहचानने मे् डायरेक्टर इंद्कुमार िे स्पष्​्कह सदया था सक क्िब’ मे्एंट्ी सदिा पाये्गे? वे इि सिल्म मे्काम नही्कर पायेग् .े सजि तरह कामयाब नही्हो िके. इि िवाि के जवाब मे् इंद् कुमार कहते इिमे् कोई शक नही् है सक नयी पीढ़्ी के की सवषय वस्​्ुहै और सजि तरह के डायिॉग है्, ‘बात सकिी खाि क्िब मे्एंट्ी की नही्है. दश्क म अब कािी खुिा सदमाग रखते है.् इंटरनेट है,् यह वल्गर सिल्म ही बनेगी. सववेक बताते है,् अि​ि मे्िेक्ि कॉमेडी सिल्मो्के प्​्सत दश्मको् के प्​्योग की वजह िे दुसनयाभर के सिनेमा िे ‘वाकई तब मुझे सबल्कुि अंदाजा नही् था सक का नजसरया एकदम बदि चुका है. अब िोग उनका पसरचय हो रहा है. अब उनके पाि एक इि सिल्म को इतना स्वीकारा जायेगा. इि हर तरह की सिल्मे् देखना चाहते है्. पसरर्कृत िे्ि ऑि ह्​्ूमर है. एडल्ट कंटे्ट िे सिल्म ने उि िमय ‘िौ करोि्’ का सबजनेि इंटरनेशनि माक्ट्े मे्िेकि ् कॉमेडी सिल्मो्की उन्हे् कोई सदि्​्त नही् है, क्यो्सक वे खुद भी सकया, जब सगनी चुनी सिल्मे् ही इि क्िब मे् अपनी जगह है, िेसकन बॉिीवुड मे् अभी कािी पसरपक्व है्. एकता कपूर कहती है्, ‘जब एंट्ी पाती थी्.’ शुर्आत ही हुई है. िेसकन देखते जाइये सक मै्ने ‘क्या कूि है्हम’ प्​्ोड्​्ूि की थी, तो िभी िेसकन इि तरह की सिल्मे् बनाना हमेशा कुछ ही िािो् मे् यहां भी बि्ी िंख्या मे् ऐिी ने कहा था सक मै्अपना नाम खराब कर रही हूं. तिवार की धार पर चिने जैिा ही होता है. सिल्मे्बननी शुर्हो जाये्गी. इिकी वजह यह िेसकन मेरी िोच थी सक वक्त बदि रहा है. एडल्ट कॉमेडी मे् सजतनी चुस् स्स्कप्ट और है सक अब हमारा दश्क म भी कािी खुि चुका है. दश्मको् को इंटरनेट की मदद िे दुसनयाभर की नॉटी सकस्म के िंवादो् की जर्रत होती है. उिके सिए कोई भी सवषय अछूत नही्है. िबिे सिल्मे्आिानी िे उपिल्ध हो जाती है्. तो सिर उतनी अन्य जॉनर की सिल्मो् मे् आवश्यकता बि्ी बात यह सक वह ढो्गी नही् है. वह सनजी सकिी जॉनर िे बचने का भिा कोई मतिब महिूि नही् होती है. अि​ि मे् कॉमेडी और जीवन मे् खुिकर िेक्ि पर बात करता है, तो है?’ एकता कपूर जैिी ही िोच सववेक ओबराय िूहि्ता मे् अंतर करना बहुत आवश्यक होता सिर परदे पर ऐिे सवषय िे कोई परहेज भिा की भी है. सववेक का कहना है सक अब दुसनया है. नग्नता और ग्िैमर के िक्क को जानना क्यो्रखे्! िच बात तो यह है सक मेरी सिल्म मे् तेजी िे बदि रही है. दश्क म ो्की कल्पनाशीिता जर्री होता है. सवशुद् सबजनेि की बात करे्, दश्मको् ने पय्ामप्त मनोरंजन पाया था. हां, यह सिल्मकारो् िे आगे जा चुकी है. हािांसक तो ऐिी सिल्मे् सि​ि्क बॉक्ि ऑसि​ि किेक्शन मनोरंजन परंपरागत नही्था, िेसकन इिे पिंद सदिचस्प बात यह है सक जब सववेक को ‘ग्​्ैड पर सनभ्मर रहती है्. िे्िर कारणो्िे ऐिी सिल्मो् सकया गया. आिोचको् ने ‘ग्​्ैड मस्​्ी’ की मस्​्ी’ ऑिर हुई थी, तो उनके माथे पर पिीना की िेटि े ाइट सबक्​्ी पर खािा नकारात्मक अिर धस्​्ियां उिायी्, िेसकन िच यह है सक वे आ गया था. पूरी ब्सक्​्प्ट िुनने के बाद उन्हो्ने पि्ता है. िेसकन अब सनम्ामता इि तरह के ‘मस्​्ीजादे’ मे्े तुरार कपूर और िनी दलयोनी: नया मशाला जोसखम उिाने के सिए तैयार सदखने िगे है्. युवा प्​्ोड्​्ूिर रंगीता नंदी का आकिन है, ‘आनेवािे वक्त मे् िेक्ि कॉमेडी सवषय की सिल्मे्दश्मको्के बीच कािी िोकस्​्पय हो्गी. ये न केवि बि्ी िंख्या मे्बने्गी. बब्लक िगातार बि्ी कमायी भी करके सदखाये्गी. वक्त बदि रहा है और िोग वज्मना मुक्त हो रहे है्.’ सनस्​्ित र्प िे इधर दज्मन भर सिल्मकार ‘िेक्ि कॉमेडी’ वािी सकिी न सकिी कहानी पर सिल्म बनाने की जुगत मे् है्. िेसकन वे पहिे ‘क्या कूि है् हम 3’, ‘मस्​्ीजादे’ और ‘ग्ट्े ग्ड ्ै मस्​्ी’ के बॉक्ि ऑसि​ि पसरणाम देख िेना चाहते है्. अगर इन सिल्मो्को दश्मको्की स्वीकृसत समिती है, तो सनस्​्ित र्प िे बि्ी िंख्या मे्नये प्​्ोड्​्ूिर बॉिीवुड मे्िस्​्कय हो िकते है्. n शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016 49


अंितम पन्ना सुभाष कश्यप

सुशासन और संतवधान

सुशासन को पाने का सबसे अच्छा जकरया संसदीय लोकतंि् ही है. लेककन दुखद यह है कक हिारी संसद अपने कािकाज से कही्अकिक ठप होने को लेकर बदनाि है.

रा

जनीसतक बहि-सवमश्म और शैक्सणक तक्​्ो् मे् बीते कुछ िमय िे िुशािन का मुद्ा महत्वपूणम्बना है. इि तरह के अध्ययन ने, सजिकी शुर्आत िबिे पहिे शैक्सणक िंस्थाओ्ने की, िोगो्के अंदर सदिचस्पी पैदा की है और इिका अिर देश-दुसनया मे्देखने को समि रहा है. इिसिए दुसनया के सवकसित और सवकािशीि देशो् मे् एक िराहनीय पसरवत्मन आया है सक वे सियाित और शािन के मुद्ो्िे ऊपर उिकर िुशािन और उिके प्​्भाव के बारे मे्बाते्कर रहे है्. देखा जाये, तो 1997 के बाद की सवश्​्सवकाि सरपोट्मने इिे रेखासकंत सकया सक प्​्भावी शािन का मतिब है सक वह िंवहनीय आस्थमक सवकाि की जर्रत को पूरा करता हो. प्स्िद्​्ि्ट्े न वुडि ् कांफि ्े और इंसट् ीट्श ्ू न ने थोि्ी देर मे्ही िही, पर यह महिूि सकया सक आस्थमक िुधार तब तक ि​ि​ि नही्है. जब तक सक स्वच्छ और गुणवत्​्ापूण्मशािन न समिे. बाद मे्, अंतरराष्​्ीय मुद्ा कोष ने भी यह िैि​िा सिया सक कज्म समिने की पहिी योग्यता बेहतर शािन हो. कई बार गव्मनमे्ट और गव्मने्ि, यानी सक िरकार और शािन का एक ही मतिब सनकािा जाता है. यहां तक सक िोग गव्नम ि े् को कानून-व्यवस्था की बहािी िे ऊपर उिकर नही्देखते है्. िेसकन सवश्​्बै्क ने जो इिके िूचकांक बनाये है्, वे जानने योग्य है्. उिने गव्मने्ि के तीन िूचकांक सदये है्- िोकतंत्, पारदस्शमता और जवाबदेही. यह कहा जा िकता है सक िुशािन के मूि मे् एक िहभागी तंत् है. जहां जनता की तरि िे जो िोग शािन चिा रहे है्, वे जनता को अपना श्​्ेष् देने के सिए प्​्सतबद्​् रहे्. अगर हम प्​्ाचीन भारतीय िोक-तंत्को देखे्, तो वहां शािन को धम्मिे जोि्ा गया था. इिके पीछे कारण यह रहा होगा सक जनता को िुशािन समिे. यहां तक सक राजशाही व्यवस्था मे्राजा को िव्ामसधकार नही्सदया गया. बब्लक राजधम्म को ही शािन की आचार-िंसहता बतायी गयी है. जातक कथाओ्, वाब्लमकी रामायण िे िेकर कौसटल्य के अथ्मशास्​्तक मे्इिी तरह िे िुशािन की व्यवस्था की गयी. प्​्ाचीन भारतीय िोकतंत्मे्जनता के असधकार को िव्​्ोपसर रखा गया और यह भी कहा गया है सक अगर शािक अपनी सजम्मेदासरयो्िे मुंह मोि्िेता है और दमनात्मक कार्मवाई करता है. तो िोगो्को सवद्​्ोह करने का असधकार है. िुशािन के िंदभ्म मे् यह बात भी आयी सक िभी शािन-तंत्ो् और अथ्मव्यवस्थाओ्का अंत िामासजक भिाई और इंिानी सजंदगी की बेहतरी 50 शुक्वार | 16 िे 31 जनवरी 2016

के सिए अच्छा है. दरअि​ि, इंिान को प्​्शािन या सवकाि का महज िंिाधन नही् िमझा जा िकता. बब्लक वे मानवता की भिाई के िबिे अच्छे िाधन है्. अशोक के काि मे् जन-भिाई की बाते् आती है्. इिी तरह, प्िेटो और अरस्​्ू ने भी कहा सक िभी राजनीसतक स्​्कयाकिाप इिसिए है्सक िोगो्को अच्छा शािन समिे, िोग िबिे अच्छा राजनीसतक तंत्और िामथ्य्मशािक पा िके्. िेसकन िमय के िाथ राजनीसत अपने िायदे के सिए ित्​्ा-िंघष्मबन गयी. एक तरह िे राजनीसत को मोटी कमाई वािा पेशा मान सिया गया और इिमे्ऐन-केन-प्​्कारेण ित्​्ा पाने का खेि ही बचा. ऐिे मे्िरकार जनता पर राज करने की मशीन भर बनकर रह गयी. जो शािक हुए, वे िोगो्पर राज करने का मजा चखने िगे. उनकी ज्यादसतयो्िे अब हािात इि मोि्पर आ चुके है्सक बुस्दजीवी वग्मअपनाये गये िोकतांस्तक मॉडि पर िवाि खि्ेकर रहे है्. ऐिे मे्, िवाि उिता है सक िुशािन के िभी र्पो् को कैिे पाया जाये? क्या िोकतांस्तक व्यवस्था मे् िुशािन, नागसरक-मैत्ीपूण्म प्​्शािन, आस्थमक सवकाि और राष्​्-सनम्ामण िंभव हो पायेगा? जर्री यह है सक हम जाने्सक कहां िे भटके और कैिे िही रास्​्ेपर िौटा जा िकता है. हमारे िंसवधान मे्िोक-कल्याणकारी तत्व मौजूद है्. इिने ित्​्ा के सवके्द्ीकरण का रास्​्ा बनाया है. अगर इिका अक्​्रशः पािन हो. तो िुशािन या स्वराज के िक्​्य को आिानी िे हासि​ि सकया जा िकता है और इि​िे भी आगे बढ़्कर पारदश्​्ी और गुणवत्​्ापूण्मिुशािन पाना मुमसकन होगा. दरअि​ि, िुशािन का पूरा सवचार देने, िेवा करने, दूिरो् की सजंदगी आिान और आनंदपूण्म बनाने पर आधासरत है. यह सवचार महात्मा गांधी के राजनीसतक सिद्​्ांतो् के कािी करीब है. उनका कहना था सक राजनीसत िेवा के सिए है, न सक िोगो् पर हुकूमत चिाने के सिए. इिसिए अगर हम राजनीसत के मूि को िमझे् और िंसवधान को अपने िही स्वर्प मे् अपनाये्, तो हमारे सिए िुशािन को पाना मुब्शकि नही्है. िाथ ही इिे पाना का िबिे अच्छा जसरया िंिदीय िोकतंत्ही है. िेसकन दुखद यह है सक िंिद अपने कामकाज िे कही्असधक िप होने को िेकर बदनाम है. इि​िे एक अथ्म मे् िंवैधासनक िंकट पैदा होता है और अन्य िंकटो् का जन्म भी होता है. इिसिए िंिद िुचार् र्प िे चिे, यह िांिदो् की n सजम्मेदारी है. वहां िे बनी नीसतयां ही िुशािन की नी्व रखे्गी. (िेखक िंसवधान सवशेषज्​्है्. आिेख श्​्ुसत समत्​्ि िे बातचीत पर आधािरत)


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Shukrawaar 16 31 january 2016 medium resolution by ambrish kumar - Issuu