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Shukrawaar 1 15 october 2016 medium resolution

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वर्ष9 अंक 19 n 1-15 अक्तूबर 2016 n ~ 20

रा़फेल लड़ाकू विमान

सौद े के पीछे क्या ह ै


www.shukrawaar.com

वर्ष9 अंक 19 n 1 से 15 अक्तबू र 2016 स्वत्वािधकारी, मुद्क एवं प्​्काशक क्​्मता सिंह प्​्बंध िंपादक आशुतोष सिंह िंपादक अंबरीश कुमार िंपादकीय िलाहकार मंगलेश डबराल राजनीसतक िंपादक सववेक िक्िेना फोटो िंपादक पवन कुमार िंपादकीय िहयोगी

िसवता वम्ा​ा अंजना सिंह िुनीता शाही (लखनऊ) अिनल चौबे (रायपुर) पूजा ि​िंह (भोपाल) िंजीत स्​्िपाठी (रायपुर) अिवनाश ि​िंह (िदल्ली) अिनल अंशुमन (रांची) कुमार प्​्तीक

कला

प्​्वीण अिभषेक

महाप्​्बंधक

एि के सिंह +91.8004903209 +91.9793677793 gm.shukrawaar@gmail.com

आवरण कथा

6 | किस क़ीमत पर राफ़​़ल

फ्​्ास ं से रािेल नवमािो्की खरीद देश के इनतहास की सबसे बडी सैनय् खरीद है जो अभी करीब 59,000 करोड र्पये की है. लेनकि करार होते ही यह नववाद भी उठ खड्ा हुआ है नक आनखर इतिे महंगे रािेल ही क्यो्खरीदे जा रहे है.्

12 | सीमाएं और संयम

सैनिक कार्वर ाई के बाद कहा जा रहा है नक भारत िे रणिीनतक संयम की पनरपाटी छोड्दी है. अगर ऐसा है तो भी पानकस्​्ाि नवरोध के इस दौर मे् हमे्घरेलू संयम बरकरार रखिा होगा.

25 | अलग राह पर अखिलेश ?

दो िाड्की ओर बढ्ती समाजवादी पाट्​्ी मे्उत्र् प्द् श े के मुखय् मंत्ी अनखलेश यादव अभी एक और बाजी खेलिे जा रहे है्और निर वे िया रास्​्ा चुिगे् .े

िबजनेि हेड

शरद कुमार शुक्ला +91. 9651882222

ब्​्ांिडंग

कॉमडेज कम्युिनकेशन प्​्ा़ िल़

प्​्िार प्​्बंधक

यती्द्कुमार ितवारी +91. 9984269611, 9425940024 yatendra.3984@gmail.com

सिज्​्ापन प्​्बंधक सजते्द्समश्​्

सिसध िलाहकार शुभांशु सिंह

shubhanshusingh@gmail.com

+91. 9971286429 सुयश मंजुल

िंपादकीय काय्ा​ालय

एमडी-10/503, िहारा ग्​्ेि, जानकीपुरम लखनऊ, उत्​्र प्​्देश-226021 टेलीफैक्ि : +91.522.2735504 ईमेल : shukrawaardelhi@gmail.com www.shukrawaar.com DELHIN/2008/24781 स्वत्वािधकारी, प्क ् ाशक और मुदक ् क्म् ता नसंह के नलए अमर उजाला पब्ललकेशस ं नलनमटेड, सी-21, 22, सेकट् र-59, िोएडा, उत्र् प्द् श े से मुन्दत एवं दूसरी मंनजल, ल्ाी-146, हनरिगर आश्म् , ियी नदल्ली-110014 से प्क ् ानशत. संपादक : अंबरीश कुमार (पीआरल्ाी अिधनियम के तहत समाचारो्के चयि के िलए िजम्मेदार) सभी कािूिी िववादो्के िलए न्याय क्​्ेत्िदल्ली होगा.

30 | एक कावेरी कई भंवर

32 | दशहरे मंे दमकता शहर

44 | सम्मोहक शरण का अरण्य

48 | लीक से हटकर अखभनय

सव्​्ोच्​्न्यायालय के दरवाजे तक जािे के बावजूद कावेरी जल नववाद का कोई सव्रमान्य राजिीनतक हल निकट भनवष्य मे्िजर िही्आ रहा है.

दंडकारण्य के िाम से प्न्सद्​्यह अंचल कािी समय से अशांत क्त्े ्बि गया है, हालांनक उसका आकर्ण र अब भी लोगो्को बरबस अपिी ओर खी्चता है.्

मैसूर दशहरे मे्जंबो सवारी के बारह मेहमाि हाथी निर से प्​्मुख आकर्रण है्हांलानक कावेरी जल नववाद िे समारोह की रौिक कुछ कम कर दी है.

‘नमन्जरया’ मे्दोहरा नकरदार निभािे के बाद हर्रवध्रि कपूर अपिे िये िनजरये के कारण एक मंजे हुए अनभिेता के र्प मे् अपिी पहचाि बिा चुके है्. शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

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आपकी डाक

आगे आयें अखिलेश

मुलायम का घटता कंद

शुक्वार का िया अंक पठिीय है. समाजवादी पाट्​्ी के मौजूदा हालात पर नलखा गया संपादकीय बेहतरीि है. अगले साल उत्​्र पदेश मे् नवधािसभा चुिाव होिे वाले है्. चुिाव को ध्याि मे्रखते हुए इस समय जहां सभी पान्टियां खुद को मजबूत बिािे मे् लगी् है् वही् समाजवादी पाट्​्ी ऐसे पानरवानरक नववाद मे् उलझी है नजसका जल्दी हल होता िही्नदखता. मुलायम नसंह यादव िे पनरवार के चलते अपिे कद को कम नकया है. मुलायम िे भाई के प्​्ेम मे्पाट्​्ी की भद तो नपटवा ही दी है, साथ ही बेटे के भनवष्य पर भी दांव पर लगा नदया है. ववकास कुमार, भागलपुर

पलटेगी बाजंी?

उत्​्र प्​्देश मे् कांग्ेस के अनभयाि पर के्न्दत रपट 'नसयासी रब्ससयो्की खाट' अच्छी है. गत माह छह नसतंबर को उत्​्र प्​्देश के देवनरया नजले्मे्राहुल गांधी की सभा के बाद खाट चोरी की घटिा राष्​्ीय स्​्र पर मजाक का नवरय बिी थी लेनकि इस नरपोट्र िे बताया नक समझदार राजिीनतज्​्और रणिीनतकार हर मुद्े

सोशल मीडिया सपा की सौत

शुक्वार के िये अंक की कवर स्टोरी समाजवादी पाट्​्ी के कलह पर के्न्दत है. अमर नसंह उस सौति की तरह है्नजससे पूरा पनरवार त्​्स्है, ि​िरत करता है लेनकि िेता जी है्नक मािो्कह रहे है्नक रहूंगा तो इसी के साथ वि्ार जाि दे दूंगा. ध्​्ीम ठाकुर, फेसबुक

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शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

शुक्वार पन्​्तका का 16 से 30 नसतंबर 2016 का अंक पढ्ा. कवर स्टोरी 'नकसकी जीत, नकसकी हार' मे् वानजब सवाल उठाये गये है्. दरअसल हानलया घटिाक्​्म मे्अगर नकसी की हार है तो वह नसि्फसमाजवादी पाट्​्ी और उसके काय्रकत्ारओ्की है. पांच साल पहले नजस युवा िेता पर पाट्​्ी और पनरवार के अलावा जिता िे अपिा भरोसा नदखाया था वह अब उिसे दूर होते िजर आ रहे है्. यह एक तरह का मुलायम पनरवार का गृहयुद् ही है. आगामी चुिाव पर इसका क्या

असर होता है यह तो समय ही बतायेगा लेनकि यह अच्छा संकेत िही् है. मुलायम नसंह को अपिे पनरवार को इससे बचािा चानहये था, वह भी इस अहम मौके पर जब चुिाव करीब है. खैर, उिके नदमाग मे् क्या चल रहा है यह तो वही बेहतर बता सकते है्. हालांनक युवा समाजवादी अनखलेश के साथ है्. अनखलेश को पाट्​्ी की कमाि अपिे हाथ मे् लेिे की आवश्यकता है, िही् तो समाजवादी पाट्​्ी का जिाजा उठते देरी िही्लगेगी.

को अपिे पक्​्मे्बदल सकते है्. अपिी इस यात्​्ा के बाद राहुल िे इस मुद्े को खूब भुिाया. इसको उन्हो्िे गरीबी से जोड्कर खुद को और पाट्​्ी को राहत पहुंचािे का काम नकया. उत्​्र प्​्देश मे् लगभग सभी पान्टिया सन्​्कय है्. वजह साि है 2017 का नवधाि सभा चुिाव और 2019 लोकसभा चुिाव. रत्नेश पालीवाल, विल्ली

आप का पतन

ये खदल मांगे चाय

चाय पर नलखा आलेख 'एक चुटकी चाय का र्माि' पढ्कर बीते नदिो्मे्गुम हो गया. कैसे पहले चाय को मुफ्त मे् नपलायी जाती थी. लेखक िे अपिे अिुभव ही िही् बब्लक हमारे अिुभवो्को भी साझा नकया है. अब तो एक से बढ्कर एक चाय की नकस्मे् आिे लगी है्. नकसी के घर जािे पर तो अब मेजबाि पूछता है नक कौि सी चाय नपये्गे. खैर चाय तो वही् ज्यादा जंचती है नजसमे् चीिी, चायपत्​्ी, अदरक, दूध-शक्​्र का मेल हो. और साथ ही चाय तभी अच्छी लगती है जब वह दोस्​्ो्, यारो्या पनरवार के साथ पी जाए. कवपल नेगी, भोपाल

आजंमाया पैंतरा

समाजवादी पाट्​्ी मे् हुए मौजूदा नववाद िे अप्​्ासंनगक हो चुके मुलायम को एक बार निर के्द्मे्ला नदया है. इस तरह की गुटबाजी से ही लोग िेता बिते है्. ये पुरािा और आजमाया हुआ पै्तरा है. आलोक वम्ा​ा, फेसबुक

चाय पर बखिय़ा लेि

चाय पर नलखा लेख पढ्ा. अच्छा लगा. कश्मीर मे् तीि तरह की चाय का प्​्चलि है. पहली मौगल चाय, शीर चाय और तीसरी नलप्टि चाय. सुशील कौल, फेसबुक

रामस्वर्प शुक्ला, कानपुर

आम आदमी पाट्​्ी के भनवष्य के बारे मे् संपादकीय नटप्पणी अच्छी है. नजस प्​्कार आप िे राजिीनत को बदलिे का दावा नकया था उसे लेकर लोगो् की बहुत अनधक अपेक्ाये्जुड्गयी थी्. लेनकि अब पाट्​्ी के मुनखया अरनवंद केजरीवाल की बातो् और उिके कदमो् मे् नजस तरह का अहंकार और तािाशाही रवैया िजर आ रहा है वह निराश करिे वाला है. राजेश वसंह, नयी विल्ली

पाठको्से खनवेदन

शुक्वार मे्प्​्कािशत नरपोट्​्ो्और रचिाओ् पर पाठको्की प्​्नतनक्​्या का स्वागत है़ आप अपिे पत्​्िीचे िदए गए पते पर या ईमेल से भेज सकते है् एमडी-10/503, सहारा ग्​्ेस, जािकीपुरम, लखिऊ, उत्​्र प्​्देश-226021 टेलीिैक्स : +91.522.2735504 ईमेल :shukrawaardelhi@gmail.com

जीवन का मोल

सुभार तराण का संसम् रण जीवि का मोल बहुत सुंदर, अंतरात्मा को छूिे वाली रचिा पढ्ािे के नलये धन्यवाद. प्​्शांत जोशी, फेसबुक

समाजवादी चौधरी

राजे्द् चौधरी आन्थरक दृन्िकोण से एक ईमािदार व्यब्कत है्. उन्हो्िे समाजवादी जीवि नजया है इसमे्भी कोई शक िही्. मगर चौधरी साहब की कमी भी यह है नक उिको अच्छे लोगो्की पहचाि िही्है.

मनीष जगन अग्​्वाल, फेसबुक


संपादकीय

पाकिस्​्ान िो मािूल जवाब उ

अंबरीश कुमार

पूरे देश को सेना पर भरोसा है. उस भरोसे को कायम रखने की जिम्मेदारी के्द्सरकार और सत्​्ार्ढ्दल की ज्यादा है. सेना पर रािनीजत न हो, यह उसे ही सुजनज्​्ित करना होगा.

ड्ी मे् हुए आतंकी हमले के बाद भारत िे नियंत्ण रेखा (एलओसी) पर आतंकवानदयो्के कै्प पर सन्जरकल स्ट्ाइक के जनरये पानकस्​्ाि को माकूल जवाब नदया है. यह जर्री हो गया था क्यो्नक पनकस्​्ाि लगातार कश्मीर मे्दखल दे रहा है. पानकस्​्ाि उस पार से प्​्नशन्​्कत आतंकवानदयो्को कश्मीर मे्भेजता रहा है. साथ ही कश्मीर मे्अब्सथरता पैदा करिे की हरसंभव कोनशश करता रहा है. नपछले नदिो्जो कुछ कश्मीर घाटी मे्हुआ वह दुभ्ारग्यपूण्रथा और सरकार सव्रदलीय पहल के जनरये वहा शांनत बहाली का प्​्यास कर रही थी. ऐसे मे् उड्ी मे् सेिा के महत्वपूण्र नठकािे पर आतंकी हमला कर पनकस्​्ाि िे मौके का िायदा उठािे की कोनशश की थी. भारत अगर माकूल जवाब िही्देता तो देश के और सेिा के मिोबल पर भी असर पड्ता. इसनलये समूचे देश िे मोदी सरकार के इस िैसले का समथ्रि नकया और ख्ुशी जानहर की. दरअसल पनकस्​्ाि राजिैनतक अब्सथरता का नशकार है और अंदर्िी समस्याओ्से लोगो् का ध्याि हटािे के नलए कश्मीर मे्दखल देता रहा है. इसके नलए वह आतंकवादी संगठिो्को संरक्​्ण भी देता है और उन्ही्के जनरये कश्मीर मे्अघोनरत युद्भी लड्रहा है. वह अपिे देश की जिता को भी इसी बहािे गुमराह करता रहा है. भारत और पानकस्​्ाि एक साथ स्वतंत् होकर आगे बढ्े थे पर पनकस्​्ाि िे मजहबी कट्​्रपंथ का जो रास्​्ा चुिा उसका ितीजा अब सामिे आ चुका है. हर क्​्ेत् मे् नपछड्ा पानकस्​्ाि इस समय समूचे नवश्​् मे् आतंकवाद की िस्ररी मािा जा रहा है, नजसके चलते नवश्​् नबरादरी मे् उसका समथ्रि भी घटता चला जा रहा है. अगर आज चीि उसके साथ खड्ा है तो उसकी वजह चीि के व्यापानरक और सामनरक नहत है. इि हालात मे् पानकस्​्ाि की ब्सथनत और खराब हो सकती है. इसी वजह से पानकस्​्ाि सरकार कश्मीर मे् अब्सथरता पैदा करिे के सारे हथकंडे इस्​्ेमाल कर रही है. ऐसे मे् यह जर्री था नक के्द् सरकार पनकस्​्ाि को माकूल जवाब दे. सेिा के सन्जरकल स्ट्ाइक से पनकस्​्ाि को ठीक जवाब नदया गया है. पर पानकस्​्ाि से यह उम्मीद करिा नक वह आतंकी हमले बंद कर देगा, ठीक िही् है. इसनलए अब ज्यादा सतक्फ रहिा होगा सुरक्​्ा बलो्को और खुनिया एजे्सी

को भी. सन्जरकल स्ट्ाइक के मुद्े पर सारा देश और सारे राजिैनतक दल मोदी सरकार के साथ पूरी ताकत से खड्े िजर आये. अब मोदी सरकार और भारतीय जिता पाट्​्ी को भी चानहए नक वह देश के लोगो्की इस भाविा को समझे और इसका कोई राजिैनतक िायदा उठािे का प्​्यास ि करे. नजस तरह कुछ राज्यो्मे्चुिावी माहौल को गम्ारिे के नलए भाजपा के पोस्टरो्मे् सेिा के जवािो् का सहारा नलया गया है वह निंदिीय है. कई राज्यो्मे्चुिाव होिे जा रहे है्. ऐसे मे् अगर सत्​्ार्ढ् दल सेिा का राजिैनतक इस्​्ेमाल अपिे पोस्टरो् मे् करेगा तो उसकी प्​्नतन्​्कया भी होगी और जब राजिीनत नकसी मुद्े पर शुर्होती है तो वह कहां तक नकस र्प मे् जायेगी यह तय िही् होता. सेिा इस पूरे देश की है नकसी पाट्​्ी की िही्. यह बात सत्​्ार्ढ् दल को भी समझिी चानहए. पूव्र प्​्धािमंत्ी इंनदरा गांधी िे इसी पानकस्​्ाि से दो दो हाथ कर उसका भौगोनलक िक्शा बदल नदया था. उन्हो्िे नवश्​् के िक्शे पर बांग्लादेश िाम का िया राष्​्बिा कर समूचे नवश्​्को हैराि कर नदया था. पर इसका कोई राजिैनतक िायदा िही्नलया गया. इससे सत्​्ार्ढ्दल को सबक लेिा चानहए. सेिा देश की सुरक्​्ा मे्लगी है और उसकी कार्रवाई लगातार होती रहती है. सेिा के नकसी संवेदिशील ऑपरेशि का राजिैनतक लाभ लेिे का प्य् ास अगर शुर्हुआ तो सेिा भी नववाद मे्िंसगे ी जो ठीक िही्होगा. उड्ी हमले मे् चूक इधर की भी थी पर नकसी िे सवाल इसीनलए िही् उठाया क्यो्नक सेिा के मिोबल पर इसका असर ि पड्े. इस बात को समझिा चानहए. कुछ लोगो्िे सन्जक र ल स्ट्ाइक के सबूत मांगिे का भी प्​्यास नकया पर कांग्ेस िे साफ् नकया नक सेिा से कोई सबूत िही् मांगा जािा चानहए. वैसे भी इस तरह के ऑपरेशि कोई निंिोरा पीटिे वाले िही्होते. यह सब भरोसे पर होता है. पूरे देश को सेिा पर भरोसा है. उस भरोसे को कायम रखिे की नजम्मेदारी के्द् सरकार और सत्​्ार्ढ् दल की ज्यादा है. सेिा पर राजिीनत ि हो यह उसे ही सुनिन्​्ित करिा होगा. मोदी अब पूरे देश के प्​्धािमंत्ी है नकसी एक दल के िही. इसनलए पूरे देश को साथ लेकर चलिे की नजम्मेदारी भी उन्ही्पर है. n ambrish2000kumar@gmail.com शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

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आवरण कथा

भारत-फ्​्ांस कवमान सौदा

डिस क़ीमत पर राफ़​़ल

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शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

फ्​्ांस से राफेल जवमानो्की खरीद देश के इजतहास की सबसे बड़ी सैन्य खरीद है िो अभी करीब 59,000 करोड़ र्पये की है. लेजकन करार होते ही यह जववाद भी उठ खड़्ा हुआ है जक होड़्मे्दूसरी कंजपनयो् के होते हुए भी आजखर इतने महंगे राफेल ही क्यो्खरीदे िा रहे है्और इस सौदे के पद्​्ेके पीछे की असजलयत क्या है.


खववेक सकंसेना

प

ठािकोट मे् एयर बेस पर आतंकी हमले और निर उडी मे् सैनिक नशनवर पर हुए दुस्साहसी हमले के कारण भारत और पानकस्​्ाि के बीच तिाव बढिे के साथ ही युद्की आशंका बढिे लगी है. लेनकि सवाल यह है नक क्या देश युद् के नलए सचमुच तैयार है. नजस तरह से चुिे हुए आतंकी नठकािो् को ध्वस्​् करिे मे् सिलता हानसल की गयी है, क्या वह नसलनसला आगे भी जारी रहेगा? सन्जरकल हमलो् की रणिीनत के साथ ही युद्क नवमाि सुन्खरयो्मे्आ जाते है्. ऐसे मे् फ्​्ास ं से खरीदे जािे वाले रािेल लडाकू नवमाि पर चच्ार जर्री है, नजसकी पूरी खरीद ही नवमाि के देश मे् आिे के पहले ही नववादो् मे् नघर गयी है्. यह देश के इनतहास की सबसे बडी सैन्य खरीद है जो तकरीबि 59,000 करोड र्पये की है. वास्​्नवक खरीद नकतिे की होगी, इस संबंध मे् भारत और फ्​्ांस दोिो् ही सरकारो् िे कुछ भी स्पि्​् िही् नकया है. भारत दुनिया मे् अस्​्ो् शस्​्ो् की खरीदारी करिे वाला सबसे बडा देश है, इसनलए उसे अपिा साजो-सामाि बेचिे के नलए दुनिया भर की कंपनियां लालानयत रहती है. दशको् से भारत अपिे लडाकू नवमाि र्स से खरीदता आ रहा था. इिमे्से ज्यादातर नमग और सुखोई थे. नसतंबर माह मे्भारत िे फ्​्ांस से रािेल नवमाि खरीदिे का समझौता नकया. भारत जो 36 रािेल लडाकू नवमाि खरीदिे जा रहा है, उिमे् से हर नवमाि की कीमत करीब 700 करोड र्पये है. इिमे् उि शस्​्ो् और दूसरी आधुनिक प्​्णानलयो् की कीमत शानमल िही् है जो नक इि नवमािो् मे् लगायी जायेगी. ये नवमाि नकतिे मंहगे है्, इसका अिुमाि इस बात से लगाया जा सकता है नक देश मे् जो र्सी एसयू-30 एम के आई नवमाि वायुसेिा मे् इस्​्ेमाल नकये जा रहे है्, उिकी तुलिा मे् रािेल दुगिे मंहगे है्. इि नवमािो् मे् हवा से जमीि पर मार करिे वाली जो नमसाइले् लगे्गी, उस प्​्णाली की कीमत अलग से देिी होगी. इि नवमािो् की नडलीवरी अिुबंध पर हस्​्ाक्​्र नकये जािे के 66 माह बाद होगी. मतलब यह है नक ये नवमाि साढे पांच साल बाद भारत आये्गे. तब तक अगले आम चुिाव हुए भी िाई साल बीत चुके हो्गे. रािेल जब आयेगा तब आयेगा, पर इसकी खरीद की कहािी भी कम रोचक िही्है. भारत िे 126 मीनडयम मल्टी रोल क्​्ांम्बेट एयरक्​्ाफ्ट (बहुउपयोगी लडाकू नवमाि) एमएमआरसीए खरीदिे का िैसला 2001 मे् नकया था, हालांनक खरीद का प्​्स्ाव 2007 मे्

भारत और फ्​्ांस के बीच राफेल सौिा: वववािो्की उड्ान प्​्कानशत नकया गया नजसमे् इसका नवस्​्ृत डील करिे के नलए बेहद उत्सुक िजर आ रहा ल्यौरा था नक नवमाि मे्क्या-क्या खूनबयां होिी था. िरे्द्मोदी इस खरीद का सेहरा अपिे नसर चानहए. इसके नलए प्​्स्ानवत निम्ारताओ् से बांधिे के नलए इतिे ज्यादा उत्सुक थे नक जािकारी मंगवायी गयी. यह प्​्न्कया इतिी उन्हो्िे इस वर्रगणतंत्नदवस समारोह मे्फ्​्ांस लंबी थी नक प्​्स्ाव हानसल करिे मे्पांच साल के राष्​्पनत ओलांद को मुख्य अनतनथ बिा लग गये. जिवरी 2012 मे् अमेनरका एि-18 डाला. और एि-16, र्सी नमग-35, यूरोपीय अगले ही नदि भारतीय रक्​्ा मंत्ी मिोहर यूरोिाइटर, स्वीडि की साब न्​्गमेि सरीखी पन्ररकर और फ्​्ांस के रक्​्ा मंत्ी ली ब्​्ायि िे 36 कंपनियो् िे निनवदाएं भेजी्. इि तमाम रािेल नवमाि खरीद के समझौता मसौदे पर कंपनियो्मे्से फ्​्ास ं की दसॉ व उसकी भागीदार दसतखत कर नदये. कािी लंबे अरसे तक भारत कंपिी थेल्स एंड सैिराि को चुिा गया. यह और फ्​्ांस के बीच आॅिसैट क्लाॅज पर नववाद तय नकया गया नक इस कंपिी से भारतीय बिा रहा. आिसैट क्लाॅज के तहत भारत वायुसेिा 126 नवमाि खरीदेगी. इिमे् से 108 चाहता था नक नजतिा पैसा इस खरीद पर वह नवमाि भारत मे् नहंदुस्ाि एयरोिानटक्स के खच्र कर रहा है उसका एक बडा नहस्सा साथ संयुक्त उपक्​्म मे्बिाये जाये्गे और दसॉ फ्​्ांसीसी कंपनियां भारत मे्निवेश करे. अंततः कंपिी भारत को उिके निम्ाण र संबध ं ी तकिीकी यह तय हुआ नक कुल खरीद रानश का 60 जािकानरयां और प्​्ौद्​्ोनगकी उपलल्ध िीसद नहस्सा भारत मे् निवेश नकया जायेगा. करवायेगी. इसके तहत दसॉ िे नरलायंस के साथ समझौता भारत सरकार कर दसॉ नरलायंस दसॉ के लिए यह बहुत बड़ी बढ-चढकर कह रही एयरोस्पेस िामक उपिब् ध ि है क् य ो् ल क लिमान न लबक थी नक यह आधुनिक कंपिी गनठत की है. नवमाि देश मे्ही तैयार पाने के कारण यह कंपनी घाटे के हालांनक जब पेप्सी िे होगा, मगर खुद उसकी भारत मे् कदम रखिे दौर से गुजर रही थी और निम्ारता कंपिी िे ही की की थी तो तािाबंदी की नौबत आ गयी थी. उसिेपहल इसका खंडि कर भी यही ऐलाि नदया. दसॉ कंपिी िे ि केवल भारत को उिके नकया था नक हर एक डाॅलर के आयात के बदले निम्ारण की तकिीक देिे से इिकार कर नदया, हम भारत से पांच डाॅलर का सामाि निय्ारत बब्लक दो टूक शल्दो्मे्कह नदया नक एचएएल करे्गे. आज इसका उल्टा भी िही्हो रहा है. द्​्ारा बिाये जािे वाले नवमािो्की गुणवत्​्ा की दसॉ के नलए यह बहुत बडी उपलब्लध है वह गारंटी िही्लेगी. मामला यही्अटक गया. क्यो्नक नवमाि ि नबक पािे के कारण यह निर नपछले साल प्​्धािमंत्ी िरे्द् मोदी की कंपिी घाटे के दौर से गुजर रही थी और फ्​्ांस यात्​्ा के पहले एक भारतीय प्​्नतनिनध कम्रचानरयो्की कटौती और तालाबंदी तक की मंडल फ्​्ांस गया और उसिे कंपिी को भरोसा िौबत आ गयी थी. करीब सात साल पहले नदलाया नक हम 36 नवमािो्की जो पहली खेप नसतंबर 2009 मे्तत्कालीि फ्​्ांसीसी राष्​्पनत खरीदे्गे, वह फ्​्ांस मे् ही बिी होगी. भारत यह निकोलस सरकोजी िे यह एलाि नकया था नक शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

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आवरण कथा ब्​्ाजील के राष्​्पनत लूला द नसल्वा 36 रािेल नवमाि खरीदिे के नलए राजी हो गये है्. इसे फ्​्ांस के सबसे बडे अखबार ‘ल निगारो’ िे राष्​्पनत की बहुत बडी उपलब्लध बताया था. मालूम हो नक यह अखबार भी उसी कपंिी का है जो नक रािेल नवमाि तैयार करती है. उसके बाद दोिो्देशो्के राष्​्पनत कई बार एक दूसरे से नमले, पर यह डील िही्हो सकी. रािेल के बारे मे् र्स की राय भी जाि लेिी चानहए. जब यह खरीद होिे जा रही थी तो भारत मे् र्स के राजदूत एलेक्जे्डर कदानकि िे कहा नक उन्हे् यह खबर सुिकर बेहद आि्य् र्हुआ है. क्यो्नक अगर भारत पानकस्​्ाि या चीि से मुकाबला करिे के नलए रािेल खरीद रहा है तो युद् के मैदाि मे् यह उिके लडाकू नवमािो् के सामिे मच्छर सानबत हो्गे. उन्हे्मच्छरो्की तरह मार नदया जायेगा. सबसे अहम बात इस नवमाि की कीमत है. यह वास्​्व मे् नकतिे मे् खरीदा जा रहा है, इसके बारे मे्सरकार िे कुछ स्पि्​्िही्नकया है, नसवाय यह बतािे के नक यह दो सरकारो्के बीच का सौदा है नजसमे्भारत-फ्​्ांस से नवमाि खरीदेगा. इसका मतलब यह हुआ नक इस डील मे् कोई दलाल िही् है इसनलए नकसी को कमीशि या दलाली नदये जािे का सवाल ही पैदा िही् होता है. पर वही् इसमे् और इसकी

फ्​्ांस के राष्​्पवत ओलांि और नरे्द्मोिी: गणतंत्पर आगवानी कीमत पर प्​्श्िनचह्ि लग चुका है. सूत्ो् के मतलब यह है नक जो नवमाि 2007 मे् 626 मुतानबक, 2007 मे् रािेल 126 नवमािो् के करोड र्पये का नमल रहा था, वह नबिा नलए 10.5 अरब डाॅलर ले रहा था. जबनक आधुनिक यंत्ो्के नबिा 680 करोड का नमलेगा नसतंबर 2016 मे् हुई डील के मुतानबक वह और इसमे्राडार निद्​्ेनशत नमसाइल निट करिे मात्​् 36 नवमाि 7.87 अरब डाॅलर मे् बेचेगा. के बाद इसकी कीमत 1600 करोड र्पये तक

रा़फेल से करलायंस ति

के ाट्​्ी

अनील अंबानी: सौिे से खुश निल अंबािी की अगुआई वाले नरलायंस समूह और फ्​्ांसीसी कंपिी दसॉ िे एक साझा कंपिी बिायी है. साझे उपक्​्म वाली कंपिी का िाम दसॉ नरलायंस एयरोस्पेस है और यह भारत और फ्​्ांस के बीच 59,000 करोड् र्पये के रािेल नवमाि सौदे का ऑिसेट करार पूरा करेगी. इस करार के तहत भारत फ्​्ांस के 36 रािेल लड्ाकू नवमाि खरीद रहा है. ऑिसेट व्यवस्था के तहत उत्पाद बेचिे वाली कंपिी को सौदे की रानश का एक निन्​्ित नहस्सा खरीदार देश मे्लगािा पड्ता है. रािेल के

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है.्

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शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

नलए नकये गये सौदे मे्50 िीसद ऑिसेट की शत्रहै. जो अभी तक का सबसे बड्ा ऑिसेट अिुबंध है. दसॉ और नरलायंस के बीच प्​्स्ानवत रणिीनतक भागीदारी मे् आईडीडीएम (स्वदेश मे्ही नडजाइि, नवकास और नवनिम्ारण) काय्रक्म के तहत शोध एवं नवकास पनरयोजिाएं तैयार करिे पर ध्याि नदया जायेगा. आईडीडीएम काय्रक्म रक्​्ा मंत्ी मिोहर पान्ररकर की ियी पहल है. खबरो् के मुतानबक, नरलायंस नडिे्स िागपुर मे् अपिी ियी नवनिम्ारण इकाई मे् रािेल के नलए सहायक प्​्णानलयां और कलपुज्े बिायेगा और उन्हे्दसॉ को निय्ातर करेगी. कंपिी जनटल प्ण ् ानलयां भी बिायेगी और दसॉ एनवएशि तथा दुनिया मे् उसकी सहयोगी कंपनियो् को इिकी आपून्तर करेगी. दसॉ एनवएशि के अध्यक्​्और मुख्य काय्ारनधकारी इनरक ट्​्ेनपयर िे एक बयाि मे्कहा नक ‘यह संयकु त् उपक्म् भारत मे्खुद को स्थानपत करिे और भारत सरकार की मेक इि इंनडया िीनत के तहत रणिीनतक औद्​्ोनगक साझेदारी नवकनसत करिे की हमारी प्​्नतबद्​्ता को दश्ारता है.’ वही्नरलायंस समूह के अध्यक्​् अनिल अंबािी िे एक बयाि मे् कहा, ‘उड्​्यि के क्े्त् की अग्ण ् ी कंपिी दसॉ एनवएशि और इनरक जैसे स्वप्िदश्​्ी कारोबारी के साथ साझेदारी से हम खुश है्. यह भारतीय वैमानिकी क्​्ेत् और नरलायंस एयरोस्पेस के नलए एक िया अध्याय है.’ दसॉ एनवएशि नपछले करीब 60 साल मे् 90 से ज्यादा देशो् को 8,000 से अनधक लड्ाकू और असैन्य नवमािो् की आपून्तर कर चुकी है. कंपिी के नवमाि करीब 2.8 करोड् घंटे की उड्ाि भर चुके है्. फ्​्ांसीसी कंपिी को रािेल लड्ाकू नवमाि से लेकर अत्याधुनिक कारोबारी जेट िाल्कि सनहत सभी प्क ् ार के नवमािो्के नडजाइि, नवकास और नबक्​्ी का अिुभव है. साथ ही कंपिी सैन्य इस्​्ेमाल के नलए चालक-रनहत नवमाि भी बिाती है.


‘सौदा देशकित मे्निी्’ प

्धािमंत्ी िरे्द् मोदी के करीबी और राज्यसभा सदस्य सुब्मण्यम स् ् वामी रािेल डील के सबसे बडे नवरोधी रहे है्. इस संबंध मे्उिसे बातचीत के प्​्मुख अंश: आप राफेल विमान खरीद का क्यो् विरोध कर रहे है्? क्यो्नक यह देशनहत मे्िही्है. दुनिया के चंद देशो्िे ही इस नवमाि को खरीदा है. ब्सवट्जरलैड ् सरीखा देश एमओयू पर दस्ख् त् करिे के बाद भी मुकर गया. ऐसे मे्इिका खरीदा जािा गले िही्उतरता है. क्या राफेल विमानो् मे् कोई कमी है? असली समस्या यह है नक यह कंपिी घाटे मे्चल रही है. अगर भारत यह नवमाि ि खरीदता तो यह कंपिी बंद हो जायेगी. आपको याद होगा नक राजीव गांधी के शासि काल मे्भारत सरकार िे बंद होिे के कगार पर खडी वेस्टलै्ड कंपिी के हैलीकाॅप्टर खरीदे थे. उिका क्या हश्​् हुआ, नकसी से नछपा िही्है. मेरा माि​िा है नक अगर फ्​्ांस को खुश ही करिा है तो नवमाि की जगह यह कंपिी ही खरीद लेिी चानहए. आपके विरोध के बािजूद प्​्धानमंत्ी ने यह सौदा कर वलया. ऐसा क्यो्? वे बहुत भले और सीधे िेता है्. उन्हे्सरकारी बाबुओ्िे गुमराह नकया है. रक्​्ा मंत्ालय तक इस खरीद के पक्​्मे्िही्था. अब आप क्या करे्गे? देखते रनहए, मै्इसे निण्ारयक मोड तक ले जाऊंगा. इस खरीद के तार

पहुंच जायेगी. यह भी बतािा जर्री हो जाता है नक भारत सरकार के 600 पैरामीटस्र पर सिल उतरिे के बावजूद दुनिया के नसि्फ तीि देशो् की वायुसेिा मे् ही इसका इस्​्ेमाल नकया जा रहा है. वे है् फ्​्ांस, नमस्​् और कतर. जब यूपीए-2 सरकार के काय्रकाल के दौराि यह नवमाि खरीदिे पर लगभग आम राय बि चुकी थी तो भाजपा के राज्यसभा सदस्य और पूव्र के्द्ीय नवत्​् मंत्ी यशवंत नसन्हा और सांसद एम वी मैसूरा रेड्ी िे यह कह कर सबको चौ्का नदया

सुब्मण्यम स्वामी: ववरोध का स्वर कांग्ेस से जुडे हुए है्. सोनिया गांधी की बहि िे इस खरीद मे्शुर्मे्बहुत अहम भूनमका अदा की थी. वे काल्ार ब्​्ूिी की दोस्​्है्जो नक फ्​्ांस के पूव्र राष्​्पनत की पत्िी है्. सुना है वक आपका कोई वरश्तेदार भी वकसी और कंपनी की पैरिी कर रहा था. उसे यह ठेका न वमलने से आप नाराज है्? यह सब बकवास है.

था नक उिके पास जो जािकारी है, उसके मुतानबक राष्​्नहत मे् इसे खरीदिा ठीक िही् होगा. तत्कालीि रक्​्ा मंत्ी उिके इस बयाि के बाद इतिे आहत हुए नक उन्हो्िे खरीद का िैसला ही टाल नदया. वायुसेिा के एक वनरष्​् अनधकारी के मुतानबक यह नवमाि ‘वैनिला प्​्ाइस’पर खरीदा जा रहा है. इसका मतलब है नक आप जो आइसक्​्ीम खरीद रहे हो उसकी ब्सटक, रैपर या कोि के पैसे अलग से चुकािे हो्गे. यह तो उस घोडे के खरीदिे जैसा है नजसकी लगाम, काठी, बोफोस्ातोप: अनसुलझा रहस्य

व िाल आनद की कीमत अलग से वसूली जायेगी जो उस घोडे की कीमत से भी ज्यादा होगी. मजेदार बात यह है नक अगर यह नवमाि भारत मे्बिाया गया तो इसकी कीमत और भी बढ जायेगी क्यो्नक भारत मे् मजदूरी फ्​्ांस की तुलिा मे्तीि गुिा ज्यादा है. रक्​्ा नवशेरज्​्ो्का यह भी कहिा है नक जब हमे्126 नवमािो्की जर्रत है तो मात्​् 36 नवमाि खरीदिे से क्या िायदा. भारत को 42 नवमाि स्क्वैड्िो् की जर्रत है जबनक उसके पास मात्​् 30 ही है. मालूम हो नक एक स्क्वैड्ि मे्18 नवमाि होते है. मौजूदा स्क्वैड्िो्के मात्​्48 िीसद नवमाि ही तुरंत कार्रवाई करिे की ब्सथनत मे् है. यनद रािेल नवमाि आ जाता है्तो उस हालत मे्भी 75 िीसद नवमाि ही नकसी भी समय मे्युद्मे् नहस्सा लेिे की हालत मे्हो्गे. वैसे इस नवमाि की उपयोनगता को िकारा िही्जा सकता है. पानकस्​्ाि के पास जो एि16 अमेनरकी नवमाि है, उिके जनरये वहां की सीमाओ् से 50 नकलोमीटर दूर तक नमसाइल के जनरये निशािा बिाया जा सकता है. जबनक रािेल के जनरये आकाश से पृथ्वी पर 150 नकलोमीटर की दूरी तक नमसाइल से वार नकया जा सकता है. महत्वपूण्र बात यह है नक आज हम खतरे का सामिा कर रहे है् और नवमाि सालो् बाद हमे् नमलेगा. िरे्द् मोदी के खासमखास सुब्मण्यम स्वामी रािेल खरीदे जािे के सबसे नवरोधी रहे है्. उन्हो्िे इसकी शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

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आवरण कथा

होड्मे्कई जहाज:(ऊपर बाये्से) एफ-16, वमग-35, बोइंग और सुखोई

किसिी पीछे रिी उड्ान छ

ह बडी नवमाि निम्ारता कंपनियां भारत को अपिे नवमाि बेचिा चाहती थी्. इिमे् अमेनरका की बोइंग और लाकहीड मान्टि​ि कंपिी भी थी जो नक एि-16 नवमाि बेचिा चाहती थी. इिके अलावा स्वीडि की न्​्गपेि और यूरो िाइटर भी दौड मे्शानमल थी्. र्स अपिे नमग व सुखोई बेचिा चाहता था. लाकहीड कंपिी के नवमाि इसनलए प्​्नतस्पध्ार से बाहर हो गये क्यो्नक सैन्य नवशेरज्​्ो्का माि​िा था नक जो नवमाि पानकस्​्ाि की वायुसेिा मे्बहुत पहले से मौजूद हो उसे खरीदिा ठीक िही्होगा क्यो्नक हमसे ज्यादा पानकस्​्ाि को उसका अिुभव है. यह कंपिी अमेनरका की बहुत बडी कंपिी है. यह वहां नरलायंस उद्​्ोग जैसी हैनसयत रखती है. इसके प्​्चार का कामकाज जो मनहला देख रही थी, वह देश के एक बहुत बडे अंग्ेजी अखबार के उस नवशेर संवाददाता की बेटी थी जो नक नवमाि​ि मंत्ालय व रक्​्ा मंत्ालय की नरपोन्टि्ग नकया करती थी. इस कंपिी का एक आला अनधकारी पहले भारत मे्अमेनरकी राजदूत रह चुका था. उसे एंबस े डर कहकर बुलाया जाता था. जब वह अपिी कंपिी की पैरवी करिे के नलए भारत आया हुआ था तो उस दौराि बहुत अजीबोगरीब घटिा घटी. रक्​्ा मंत्ालय की इस खरीद से जुडी एक अत्यंत गोपिीय िाइल अमेनरका ब्सथत लाकहीड कंपिी के दफ्तर पहुच ं गयी. वहां िाइल देख रहे एक क्लक्फ को लगा नक यह गलती से वहां आ गयी है. खरीद की प्​्न्कया के दौराि को सरकार को ऐसा ि करिे के नलए आगाह नकया था. अब वे अपिे नवरोध को निण्ारयक मोड पर ले जािे की तैयारी मे्है. वैसे देश की नवडंबिा ही रही है नक देश आजाद होिे से लेकर आज तक हुई तमाम रक्​्ा खरीद पर सवानलया निशाि लगे और नजि प्​्धािमंन्तयो् के काय्रकाल मे् ये खरीदे् हुई् वे बदिाम हुए. देश की पहली रक्​्ा खरीद पुरािी जीपो् की खरीदारी थी. यह खरीद करिे मे् न्​्बटेि मे्नियुक्त तत्कालीि भारतीय उच्​्ायुक्त िे बहुत अहम भूनमका निभायी थी. आजाद भारत का सबसे पहला रक्​्ा घोटाला लंदि मे् 10 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

उसिे िाइल पर लाकहीड कंपिी की मोहर लगायी और उसे वापस रक्​्ा मंत्ालय भेज नदया. जब यह िाइल वहां पहुंची और अिसरो् िे उस पर लाकहीड कंपिी की मोहर देखी तो उिका माथा ठिका. उस एंबेसडर के संपक्फ इतिे जबरदस्​् थे नक उसे उसी समय इस मामले की खबर लग गयी और उसिे तुरतं अपिा सामाि समेटा और अगली उडाि से एम्सटड्मर भाग गया, निर कभी भारत लौटकर िही्आया. स्वीडि की न्​्गपेि कंपिी का नवमाि कािी अच्छा था. भारत से कुछ िाइटर पायलट वहां गये और उन्हो्िे उडाि के बाद इसके हक मे् राय जतायी. बाद मे्इस कंपिी के एक आला अिसर िे बताया नक ‘कुछ लोग इतिी ज्यादा रकम मांग रहे है्नक उसे दे पािा हमारे नलए संभव िही्है.’ अमेनरकी कंपनियो्को लग रहा था नक िरे्द्मोदी और बराक ओबामा के घनिष्​् संबंधो् को देखते हुए उिको यह ठेका नमल जायेगा, मगर तत्कालीि रक्​्ा सनचव िे एक कंपिी के प्​्नतनिनध को दो टूक शल्दो्मे्कह नदया था नक यह डील भले ही अमेनरका के दबाव मे्रद्​्कर दी जाये, पर उसके साथ अिुबंध िही् नकया जायेगा. उसकी बात बाद मे् सच सानबत हुई. यूरो िाइटर की पैरवी भाजपा के एक वनरष्​्िेता के दामाद कर रहे थे नजन्हो्िे उिकी पुत्ी के साथ प्​्ेम नववाह नकया है. वे मुसलमाि है. अंततः उिके हाथ भी निराशा ही लगी.

तत्कालीि भारतीय उच्​्ायुकत् वेग् ानलल कृषण ्ि कृष्णामून्तर िे नकया था नजन्हे् वीके कृष्णामून्तर के िाम से जािा जाता था. वे जवाहरलाल िेहर्के बेहद करीबी थे. उन्हो्िे सारे नियमकािूि ताक पर रखकर भारतीय सेिा के नलए 200 नवलीज जीप खरीदिे का सौदा नकया. इसके नलए 80 लाख र्पये का भुगताि कर नदया गया. बडी मुब्शकल से 200 की जगह 155 जीपे् मद्​्ास बंदरगाह पर पहुंची. सेिा िे उन्हे् लेिे से मिा कर नदया क्यो्नक वे न्​्दतीय नवश्​्युद्मे्इस्​्ेमाल की जा चुकी थी्. उिकी हालत बहुत खराब थी. उन्हे् रंग पोत करके, ओवरहाल करके बेचा गया था. तत्कालीि

प्​्धािमंत्ी जवाहरलाल िेहर्िे सेिा पर इन्ही् स्वीकारिे के नलए दबाव डाला. इस मामले को लेकर संसद मे्बहुत हंगामा हुआ. राजीव गांधी के प्​्धािमंन्तत्व काल मे् बोिोस्र तोपो् की खरीद पर हुए नववाद के कारण उन्हे् सत्​्ा गंवािी पडी. अटल नबहारी वाजपेयी की सरकार मे् रक्​्ा मंत्ी रहे जॉज्र िंि्ारनडस पर सैनिको् के कि​ि की खरीद मे् घोटाले के आरोप लगे तो मिमोहि नसंह सरकार हैलीकाप्टर खरीद सरीखे नववादो् मे् िंसी और अब जो नवमाि खरीदे जा रहे है,् उन्हे् लेकर तरह-तरह की अटकलो् और अिवाहो् n का बाजार गम्रहै.


खबरदार खववेक सकंसेना

राडार पर बाबू भाई

पहली बार अहमद पटेल को नरे्द्मोदी िैसे नेता के प्​्जत आक्​्ामक र्ख अपनाते देखा िा रहा है.

हा

ल ही मे्मेरे एक नमत्​्िे, जो प्व् त्िर निदेशालय के आला अिसर भी है्, एक अहम खबर दी. उन्हो्िे कहा नक ऊपर से इशारा है नक अहमद पटेल को निपटािा है. सरकार का माि​िा है नक जैसे राक्स ् की जाि तोते मे्थी वैसे ही सोनिया गांधी की जाि अहमद पटेल मे्बसती है. उन्हे् निपटािे के नलए उिके उस राजिीनतक सनचव को निपटािा बेहद जर्री है नजसिे कभी अपिे नकसी िेता के नखलाि मुहं िही्खोला. सुिकर लगा नक क्या समय आ गया है जो िरेद् ् मोदी कभी नदल्ली मे् नठकािा ि होिे पर उिके घर नखचडी खािे जाते थे, आज उिकी सरकार उन्हे्निपटािे जा रही है. अहमद पटेल से मेरा पनरचय करीब 25 साल पुरािा है. उन्हे्अहमद भाई के िाम से बुलाया जाता है. हर िेता की इच्छा होती है नक वह सत्​्ा मे् आये, मंत्ी बिे. उसे ल्लक ै कैट कमांडो की सुरक्​्ा नमले. उसकी राजिीनतक नवरासत िले-िूल.े अहमद पटेल शायद एकमात्​्ऐसे िेता हो्ग,े नजन्हो्िे राजीव गांधी, सोनिया गांधी के इतिा करीब होिे के बावजूद कभी सुरक्​्ा िही् ली. उिके घर पर नदल्ली पुनलस का जवाि तक िही् िजर आयेगा. मुखय् द्​्ार पर कुछ लोग जर्र रहते है्जो नक निहत्थे होते है्व उिका काम नकसी आंगतु क के आिे पर उसकी सूचिा अंदर देिे के साथ वहां से संकते नमलिे पर दरवाजा खोलिा होता है. अहमद पटेल िे पाट्​्ी के अलावा कभी कोई पद िही् नलया. राजीव गांधी िे जर्र उन्हे् अपिा संसदीय सनचव बिाया था पर वह कभी मंती् बि​िे के नलए तैयार िही्हुए. कुछ नदलजले कांगस ्े ी कहते है्नक उिकी भूनमका तो पाट्​्ी मे् श्​्ीकृष्ण जैसी रही नजिके इशारे पर सबकुछ होता आया है. उन्हे् खुद मंत्ी बि कर अपिी ताकत सीनमत करिे की जर्रत ही क्या थी? वह ऐसे िेता है नजससे आि द नरकाड्रतो क्या आि द नरकाड्रजािकारी भी िही्ली जा सकती है. अच्छे संबध ं होिे के बावजूद मुझे उिके यहां से कभी कोई खबर िही्नमली. आप अगर नकसी खबर की उिसे पुन्ि करवािा चाहे् तो वे मुसक ् रु ाते रहेग् े या निर बातचीत का नवरय ही बदल दे्गे पर अपिे नवरोनधयो् के नखलाि भी कभी नटप्पणी िही्करेग् .े कांगस ्े जैसी कोयले की खदाि मे्रहते हुए भी उिका दामि बेदाग रहा. अहमद पटेल लंबे अरसे तक पुरािी एस्टीम कार इस्म्े ाल करते रहे. निर उन्हो्िे नडजायर ले ली. अक्सर खुद ही उसे चलाते है.् बाहर होटलो्मे्खािा खािा पसंद िही्करते है.् सुबह िौ बजे से रात के चार बजे तक काम. दोपहर मे्घंटे दो घंटे के नलए झपकी लेिा उिकी आदत है.् ज्यादातर अहम मुलाकाते्रात को ही करते है.् अक्सर पनरनचतो्को भडूच से आयी मूगं िली नखलाते है.् टीवी बहुत कम देखते है् और अंग्ेजी की तुलिा मे् नहंदी के अखबारो् पर ज्यादा भरोसा करते है्. उिका माि​िा है नक नहंदी व क्त्े ्ीय भाराओ्के अखबार जिता की राय के असली बैरोमीटर होते है.् अहमद पटेल िे अपिी राजिीनत की शुरआ ् त गुजरात के भडूच क्त्े ्से

की थी. सहकानरता आंदोलि के समय संजय गांधी िे उन्हे् भडूच नजला युवा कांगस ्े का अध्यक्​्बिाया. उन्हो्िे इस पनरवार के सभी सदस्यो्, इंनदरा गांधी, राजीव गांधी व सोनिया गांधी का नवश्​्ास हानसल नकया. यही वजह थी नक सोनिया गांधी से नरश्ते सुधारिे की कोनशश मे्पीवी िरनसंहराव िे उन्हे्सीडल्लय् स ू ी का सदस्य बिाया तो सीताराम केसरी िे उन्हे्कांगस ्े के खजािे की चाभी सौ्प दी. िरेद् ्मोदी िे सत्​्ा मे्आिे के पहले दूरदश्िर पर नदये अपिे इंटरव्यू मे् कहा था नक मेरी अहमद पटेल से अच्छी दोस्​्ी थी. हम लोग उन्हे्अहमद भाई िही्बाबू भाई कह कर बुलाते थे. वे मुझे लंच करवाते थे. अब तो मेरा िोि िही्उठाते. हम अब उन्हे्सम्माि से नमयां भाई कहते है.् स्पि्​्था नक मोदी चाहते थे नक इस चुिाव मे्अहमद पटेल को िाम का इस्म्े ाल कर सांपद् ानयक रंग नदया जाये. इस बारे मे्अहमद भाई िे मुझे बताया नक यह सच है नक एक ही राज्य से होिे के कारण वे मोदी को जािते थे. उन्हे्पता था नक वह संघ प्च ् ारक है.् जब वे सांसद बि गये तो, एक बार मोदी मीिा बाग ब्सथत उिके घर आ टपके. उन्हो्िे औपचानरकतावश खािे को पूछा तो वे कहिे लगे, हां, खािा खाऊंगा. मेरे नलए नखचडी बिवा दो. अब अहमद पटेल धम्स र क ं ट मे्पड गये क्यो्नक प्ध ् ािमंत्ी राजीव गांधी िे कोई अहम बैठक बुलाई थी. उन्हो्िे राजीव गांधी को िोि करके कहा नक उिके कुछ मेहमाि आये हुए है्इसनलए उन्हे्आिे मे्देर हो जायेगी. राजीव गांधी िे कहा नक कोई बात िही्. वे मोदी को खािा नखलाकर नवदा करिे के बाद बैठक मे्पहुच ं े और राजीव गांधी को बताया नक एक संघ के पनरनचत प्च ् ारक उिके यहां आये थे. उन्हे् लंच करवािे के कारण देर हो गयी. राजीव गांधी िे कहा नक अच्छा नकया जो उन्हे् खािा नखलाकर भेजा क्यो्नक इि बेचारो्का तो खािे-पीिे का कुछ नठकािा िही्रहता है. मै्िे उिके घर पर देश के सबसे बडे उद्​्ोगपनतयो् से लेकर मंन्तयो्, मुख्यमंन्तयो्, राज्यपालो् को अपिी बारी का इंतजार करते देखा है. अब वहां लगिे वाली कतारे् कम हो गयी है. वह खुद भी ज्यादा लोगो्से िही्नमलते है्. बानकयो् को डर है नक अगर सत्​्ा के गनलयारो्तक यह खबर पहुच ं गयी नक वे उिसे नमलिे जाते है् तो उि लोगो् के नलए बडी नदक्त् हो जायेगी. वैसे यह समय का िेर ही कहा जायेगा नक चंद वर्र पहले भाजपा के िवनियुकत् राष्​्ीय अध्यक्​् िे अपिे बेटे की शादी के नरसेपश ् ि मे् उिकी उपब्सथनत तय करिे के नलए सारे घोडे खोल नदये थे. अब कांग्ेस के सत्​्ा से बाहर होिे व पाट्​्ी मे् िेतृत्व पनरवत्रि की अटकलो्के चलते तरह-तरह की अिवाहो्का बाजार गम्रहै. पहली बार अहमद पटेल को िरेद् ्मोदी जैसे िेता के प्न्त आक्​्ामक र्ख अपिाते देखा जा रहा है. जैसे लोहे को लोहा व हीरे को हीरा ही काट सकता है वैसे ही गुजराती िरे्द् मोदी व अनमत शाह की टीम को भडूच का यह बाबू भाई चुिौती देिे की कोनशश कर रहा है. देखते है,् क्या कमाल कर पाते है.् n शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 11


देशकाल

नरे्द्मोिी: मजबूत विखने की मजबूरी

सुलगती सीमाएं और हमारा संयम अरंण कुमार खं​ंिपाठी

भा

रत और पानकस्​्ाि के जनटल नरश्ते मे् हानलया सन्जरकल आपरेशि के बाद िया नवमश्र उभर आया है. भारत के कई रक्​्ा नवशेरज्​्ो् और स्ं्भकारो् िे दावा नकया है नक देश िे रणिीनतक संयम का नसद्​्ांत छोड्नदया है. यह उसे बहुत पहले करिा चानहए था. नवशेर तौर पर 26/11 के मुंबई हमले के बाद ही सरकार को ऐसी कार्रवाई करिी थी लेनकि सरकार िे राजिनयक दबाव बिािे और जांच पड्ताल के नलए दस्​्ावेजो् की अदला बदली मे् समय गंवा नदया. सवाल उठता है नक क्या इससे भयभीत पानकस्​्ाि अब भारत पर आतंकी हमले िही् करवायेगा? या वह पहले की तरह निर हमले करेगा? अगर निर हमले करेगा तो क्या हम निर सन्जरकल आपरेशि करे्गे? हर कोई यही सवाल पूछ रहा है लेनकि इस सवाल का नकसी के पास सीधा जवाब िही् 12 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

है. जो मािते है्नक भय नबिु होय ि प्​्ीनत वे तो यही संकेत दे रहे है् नक भारत सरकार िे अब रणिीनतक संयम का नसद्​्ांत छोड्नदया है और उसिे जवाबी कार्रवाई की िीनत अपिा ली है. सन्जरकल आपरेशि उसका एक काय्रक्म है और आगे इस तरह के अन्य काय्रक्म चलाये जा सकते है्. जो मािते है्नक प्​्ीनत से ही शत्​्ुता का िाश होता है और आनखरकार धैय्र जीतता है और धैय्र खोिे से वह सारी आन्थरक प्​्गनत धरी रह जायेगी जो हमिे नपछले 25 सालो् मे् हानसल की है. इसमे् दो राय िही् नक उड्ी हमले के बाद देश मे्एक प्​्कार की उत्पीन्डत होिे की भाविा मीनडया और राष्​्वादी राजिीनत के माध्यम से पैदा की गयी. सीमा पर समय समय पर होिे वाली झड्पो् या कश्मीर और देश के दूसरे नहस्सो्मे्आतंकी कार्रवाइयो्मे्मारे गये सैन्य पनरवारो् से बार-बार कहलवाया गया नक युद् होिा चानहए और पानकस्​्ाि पर हमला नकया जािा चानहए. इस काम मे्पूव्रसैन्य अनधकारी

नवाज शरीफ: क्या सच क्या झूठ

सैजनक कार्षवाई के बाद कहा िा रहा है जक भारत ने रणनीजतक संयम की पजरपाटी छोड़्दी है. अगर ऐसा है तो भी पाजकस्​्ान जवरोध के इस दौर मे्हमे्घरेलू संयम बरकरार रखना होगा. देश के जिमत निम्ारण मे् सन्​्कय योगदाि दे रहे है् और उिके भावुक आह्​्ाि के आगे स्​्ंभकारो् के संतुनलत सुझाव िक्​्ारखािे मे् तूती की आवाज बि कर रह गये है्. कई स्​्ंभकारो् िे िरे्द् मोदी को कायर बताते हुए नलखा नक बोया था मोदी निकला मिमोहि. इस बीच संघ पनरवार के जो पदानधकारी मोदी की िवाज शरीि के जन्मनदि पर की गयी लाहौर यात्​्ा पर भारत पाक महासंघ की रचिा कर रहे थे वे अचािक दांत के बदले जबड्ा उखाड्िे की भारा बोलिे लगे. प्​्धािमंत्ी िरे्द् मोदी िे पहले तो एलाि नकया था नक हम उड्ी मे्हुई अपिे सैनिको्की शहादत को बेकार िही् जािे दे्गे. बाद मे् उन्हो्िे केरल के कोझीकोड मे् हुई भाजपा की काय्रकानरणी मे् जो भारण नदया उससे एक अलग ही संदेश गया. लगा नक मोदी ि तो रणिीनतक संयम तोड्ेगे और ि ही नकसी प्​्कार की हमले की कार्रवाई करे्गे. उस भारण मे् उन्हो्िे कहा नक भारत और पानकस्​्ाि को


अगर एक दूसरे से होड् ही करिी है तो आइए गरीबी से होड्करे्और बेरोजगारी से होड्करे्. वह एक बेहद सकारात्मक बयाि था नजससे लगता था नक मोदी अपिे नवकास के एजे्डे पर कायम है्और वे नकसी उग्​्राष्​्वाद मे्उलझिे वाले िही् है्. लेनकि इस बीच नजस तरह से चैिल और अखबार देश के लोगो् की भाविाओ् को भड्का कर सरकार पर युद् के नलए दबाव डाल रहे थे उसे देखकर लगा नक यह सब सरकार की सहमनत के नबिा िही् हो सकता. बहुत कम अखबार और चैिल थे नजन्हो्िे प्​्धािमंत्ी िरे्द् मोदी के कोझीकोड वाले भारण को प्​्मुखता से प्​्स्ुत नकया. या तो सरकार िे उन्हे्कोई संकेत नदये थे या निर वे मोदी को नकसी भी तरह से िरम पड्िे िही् देिा चाहते थे. इंनडयि एक्सप्​्ेस की एक स्​्ंभकार िे तो रणिीनतक संयम टूटिे पर खुशी जताते हुए नलखा नक कोझीकोड के भारण के बाद तो लगिे लगा था नक सरकार रणिीनतक संयम के उस रास्​्े पर चलती रहेगी नजसिे भारत के नवचार को नविल नकया है. उन्हो्िे सन्जरकल आपरेशि पर बेहद प्​्सन्िता व्यक्त करते हुए कहा नक इसिे इस बात का संकेत दे नदया है नक भारत के रणिीनतक संयम की िीनत समाप्त हो चुकी है. पर सन्जरकल आपरेशि से पैदा हुई खुशी के तक्फयही्समाप्त िही्होते. वे इस उि लोगो् पर भी प्​्हार करते है् जो गोरक्​्को् की आक्​्ामकता पर जेहानदयो् के हमले से ज्यादा िाराज थे. यािी हमे्गोरक्​्को्को हमले करिे देिे चानहए और अपिा ध्याि आतंकी हमलो्

है और चाहेगा नक वैसा करिे वाले को दंड नदया जाये. इस मामले मे् भारतीय राष्​्-राज्य की कार्रवाई हर िागनरक के नदल को भायेगी. इसनलए िरे्द् मोदी िे उस भाविा को नजंदा रखिे और उससे समय समय पर राष्​्वाद की आग जलाए रखिे के नलए सन्जरकल आपरेशि की इजाजत दी. लेनकि मोदी िे नजस तरह कोझीकोड मे् शांनत की भारा बोली और मुसलमािो् को अपिे साथ जोड्िे की अपील की उससे यह भी लगता है नक वे नवकास के एजे्डे को मजबूती से पकड्ेरहिा चाहते है्. भारत का अगला कदम क्या होगा यह तो पानकस्​्ाि की प्​्नतन्​्कया पर निभ्रर करेगा. इस मामले मे् पानकस्​्ाि की प्​्नतन्​्कया कुछ खास िही् रही क्यो्नक वह माि ही िही् रहा है नक कोई सन्जरकल आपरेशि हुआ. उसका कहिा है नक भारत सरकार िे अपिी जिता को संतुि् करिे के नलए यह कहािी गढ्ी है. यह एक नवनचत्​् ब्सथनत है नक नजस पर हमला हुआ है वह माि​िे को ही िही् तैयार है नक उसे कुछ हुआ है. जबनक हमलावर का दावा है नक उसे भारत-पाक सरहि: मुस्ैिी से तैनात कािी िुकसाि हुआ है. यह तो मोदी सरकार के नलए बड्ी िायदे की ब्सथनत हुई नक राष्​्वाद पर के्न्दत करिा चानहए. दावा नकया जा रहा है नक 1965 के बाद की भाविा भी संतुि् हो गयी और पानकस्​्ाि भारत िे ऐसा पहली बार नकया है और अपिी की तरि से प्​्नतन्​्कया भी िही् हुई. लेनकि तरि के नकसी सैनिक के हताहत हुए नबिा घुसपैठ होिा और रणिीनतक संयम का टूटिा लक्​्य को पूरा नकया है. इस चच्ार मे् 1971 के ि तो भारत और पानकस्​्ाि के नलए लाभदायक उस युद् को छोड् नदया जा रहा है नजसमे् है्और ि ही उपमहाद्​्ीप के नलए. निलहाल दुनिया मे् संयम नसखािे वाले तत्कालीि प्​्धािमंत्ी इंनदरा गांधी के िेतृत्व मे् हमारे सैनिको्िे ि नसि्फपानकस्​्ाि को करारी िेताओ् की भी कमी होती जा रही है. क्यो्नक नशकस्​् दी थी बब्लक इस उपमहाद्​्ीप का बराक ओबामा की चला चली की बेला है और अमेनरका अगर डोिाल्ड ट्​्ंप के हाथो्मे्आया िक्शा ही बदल नदया था. तो उसका र्ख नवनचत्​् इस दौराि पाक के घु स पै ठ होना और रणनीलतक ही होगा. चीि तो खामोश रहिे के बाद पानकस्​्ाि का करीबी सं य म का टू ट ना न तो भारत पाक नवरोधी नवमश्रकी है इसनलए वह तोप की घरेलू मोच्​्ो्पर और पालकस्​्ान के लिए िीनत पर सन्​्कय हो गयी है. वह िाभदायक है्और न ही इस पूरे संचलेतुनगलत ा िही्. न्​्बटेि की निर घर के भीतर देश उपमहाद्​्ीप के लिए. प्​्धािमंत्ी टेरेसा मे भक्त और देशद्​्ोही इस ब्सथनत मे् िही् है् िूंि​िे का नसलनसला शुर् करिे वाली है. वही नवमश्रनिर उठ सकता है जो कन्हैया कुमार के नक वह अपिे राजिनयक ताकत का प्​्योग कर बहािे साल भर पहले उठा था. युद्ोन्मादी सके्. वे स्वयं ही ब्​्ेब्कजट मे् उलझी है्. फ्​्ांस बहसो् के बीच कही् भी सांप्दानयकता िूट और जम्रिी की भी इस नदशा मे् र्नच िही् है. सकती है. दूसरी तरि ऐसे लेखक बुन्दजीवी पुनति ही ऐसे िेता है् नजिका कुछ दबाव है् जो मोदी को अच्छे नदि के नलए समथ्रि चलेगा. निलहाल भारत िे पानकस्​्ाि एक करते थे और उिसे यही चाहते है् नक वे गाय, कड्ा र्ख नदखाते हुए झटका जर्र नदया है. गीता और गंगा के चक्​् मे् उलझिे के बजाय चाहे वह सन्जरकल आपरेशि के र्प मे्हो या नवकास के एजे्डे पर काम करे्और रणिीनतक साक्फ नशखर सम्मेलि के स्थगि या नसंधु िदी संयम को बार-बार ि तोड्े्. उि स्​्ंभकारो् िे के पािी पर िया र्ख अपिा कर. लेनकि भारत लगातार चेताविी दी है नक नजतिा हो गया है को देखिा है नक पानकस्​्ाि नवरोध की यह िीनत उसकी घरेलू एकता पर ि असर डाले. उतिा हो गया पर अब इसे बार-बार ि करे्. निन्​्ित तौर पर नकसी भी देश के 18 घरेलू स्​्र पर हमे् एक राष्​्ीय संयम की n सैनिक सोते हुए मारे जाते है्तो वह आहत होता जर्रत है. शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 13


देशकाल

पाक-अजधकृत कश्मीर मे् सज्िषकल स्ट्ाइक के िजरये मोदी सरकार िो संदेश देना चाहती थी, उसमे्वह नाकाम रही, भले ही घरेलू मोच्​्ेपर उसे कुछ फायदा जमला हो. खवभूखत नारायण राय

उ

ड्ी न्​्बगेड मुख्यालय पर 18 नसतंबर की रात हुए हमले के बाद भारत की प्​्नतन्​्कया से कुछ संदेश भेजिे के प्य् ास नकये गये? ये संदश े नकसे भेजे गये? पानकस्​्ाि को, नवश्​्समुदाय को या भारतीयो्, खासतौर पर उत्​्र प्​्देश और पंजाब के मतदाताओ्को जहां जल्दी चुिाव होिे वाले है.् यनद संदेश पानकस्​्ाि के नलए थे तो यकीि​ि इसमे् मोदी सरकार को सिलता िही् नमली. उम्मीद की जा रही थी घटिा की प्​्नतन्​्कया स्वर्प भारत की सन्जक र ल स्ट्ाइक से पानकस्​्ाि डर जायेगा और सीमा पार से आिे वाले आतंनकयो्पर रोक लगा देगा. लेनकि ऐसा हुआ िही्. 29 और 30 नसतंबर की दरनमयािी रात हुए बहुप्चानरत भारतीय हमले के दो नदि बाद ही उड्ी से सटे बारामुला मे्िौज और बीएसएि के साझा पनरसर मे्ठीक वैसा ही हमला हुआ. यह बात अलग है नक इस बार पहले से अनधक सतक्फ सैनिको्के कारण िुकसाि बहुत कम हुआ. उड्ी मे् वैसे भी आतंनकयो् की गोलाबारी से ज्यादा िुकसाि पेट्ोल और डीजल के भंडार मे् लगी आग से हुआ था. पानकस्​्ािी मीनडया मे्उड्ी के बाद चल रही बहस भी यही बताती है्नक वहां के राजिैनतक और सैनय् िेततृ व् िे वैसा कोई संदश े ग्ह् ण िही् नकया है जैसी नक मोदी सरकार की मंशा थी. इसनलए अगर मोदी सरकार सन्जक र ल स्ट्ाइक से पानकस्​्ाि की सरकार या सेिा को कोई संदश े देिा चाहती थी तो उसमे्वह बुरी तरह नविल रही. पहले हमे् समझिा होगा नक सन्जरकल स्ट्ाइक होती क्या है? आमतौर पर नवश्स ् िीय खुनिया सूचिा के साथ दुश्मि के असावधाि नठकािो् पर निन्​्ित मकसद से नकये गये तेज गनत के हमलो्को सन्जक र ल स्ट्ाइक कहा जाता है. प्​्ाय: इिमे् हेलीकॉप्टरो्, हवाई जहाजो् की मदद से पैरा ट्प् र भेजे जाते है.् दुनिया इस बार कािी हद तक हमारे साथ 14 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

सव्जाकल ऑपरेशन के बाि भारतीय सेना: बढ्ा हुआ हौसला

समाधान से उठते

है लेनकि इसके नलए सन्जरकल अटैक जैसा जोनखम उठािे की आवश्यकता ही िही्थी. ऐसी ब्सथनत के नलए नजसमे्पानकस्​्ाि अलग-थलग पड् गया है, खुद उसकी िीनतयां नजम्मेदार है्. साक्फ देशो् मे् नजतिा क्​्ोभ भारत के मि मे् है उससे कम अिगानिस्​्ाि और बांगल ् ादेश के मि मे्िही्है. भारत से ज्यादा पानकस्​्ाि के पालेपोसे नजहादी अिगानिस्​्ाि मे् तांडव कर रहे है्. अमेनरका के लाख प्य् ासो्के बावजूद पानकस्​्ाि अच्छे और बुरे तानलबाि के बीच िक्फकरिा िही् बंद कर रहा. उसके नलए आज भी अिगानिस्​्ाि मे् कहर िािे वाले हक्​्ािी िेटवक्फ और अलकायदा से जुड्े तानलबाि 'अच्छे' है् और पानकस्​्ाि मे् सन्​्कय तहरीके तानलबाि पानकस्​्ाि यािी टीटीपी के तानलबाि 'बुर'े . उसी तरह जैसे पाक मे् प्न्शन्​्कत आिे वाले आतंकी स्वतंत्ता सेिािी है्. उसके िीनत निध्ाररको् खासतौर पर सेिा के नलए ये ऐसे गैर सरकारी तत्व है्जो उिके राष्​्ीय नहत के नलए जर्री है.् यही वजह है नक दुनिया भर की आलोचिा झेलिे

के बाद भी वह इिके नखलाि कोई कार्वर ाई िही् करता. ऐसी सूरत मे्बांगल ् ादेश की अदालतो्द्​्ारा उि कट्​्ïरपंनथयो् को िांसी देि का भी पानकस्​्ाि खुलेआम नवरोध करता है नजन्हो्िे सि 1971 के मुब्कत संग्ाम के दौराि पूव्ी पानकस्​्ाि मे् बुब्घघजीनवयो्, अवामी लीग के काय्क र त्ाओ र ् और अल्पसंखय् को् का कत्लआ े म नकया था. हर िांसी के बाद साव्ज र निक र्प से उसिे बांगल ् ादेश की निंदा की और हर बार अपिी दूनरयां बढ्ाता गया. अपिी इि िीनतयो्के चलते वह साक्फमे् लगभग अलग-थलग पड् चुका है और भारत के नलए उसे घेरिा आसाि हो गया. साक्फसे बाहर भी दुनिया भर मे्गैर सरकारी तत्व् ो्के प्न्त नवतृषण ् ा बढ्ी ही है. दरअसल 9/11 के बाद पन्​्िमी यूरोप, मध्य एनशया यहां तक नक अरब मुल्को् िे भी िाि स्टेट ऐक्टस्र का तांडव झेला है और पूरी दुनिया मे्इिके नखलाि कार्रवाई पर आम सहमनत बिी है. ऐसे मे् पानकस्​्ाि संभवत: दुनिया का अकेला बड्ा राष्​् है जो अभी भी इिको पालता-पोसता रहता है.


सवाल

ऐसे मे् यह स्वाभानवक ही है नक दुनिया भर मे् नि:शस्​् िागनरको् के नखलाि जब भी कोई आतंकी घटिा होती है, उसके तार नकसी ि नकसी र्प मे् पानकस्​्ाि से जर्र जुड्ते है्. घटिा मे् नलप्त आतंकी या तो पानकस्​्ािी मूल के होते है्या उन्हे्प्न्शक्ण ् पानकस्​्ाि मे्नमला हुआ होता है अथवा नवचार और संसाधिो्के र्प मे्पानकस्​्ाि ब्सथत नजहादी केद् ्उन्हे्मदद करते नदखते है्. इसनलए अगर उड्ी हमलो् के बाद नवश्​्जिमत, नजसमे्अमेनरका समेत पन्​्िमी राष्​्ो् के अनतनरक्त र्स और सऊदी अरब या ईराि जैसे परस्पर नवरोधी मुबस् लम देश भी शरीक है,् पानकस्​्ाि के नवरोध और भारत के समथ्िर मे खड्ा नदख रहा है तो इसमे मोदी सरकार द्​्ारा भेजे गये संदश े का कोई हाथ िही है. उसिे नसि्फ आक्​्ामक राजिय से पनरब्सथनत का िायदा उठाया है. निर इस तथाकनथत सन्जरकल स्ट्ाइक से नकसे संदश े देिे का प्य् ास नकया गया? इस प्श् ि्

का उत्र् िूिं ऩे के पहले हमे एक बार उस माहौल जोर-शोर से घोनरत करिा शुर् नकया नक पूरा को समझिे का प्​्यास करिा होगा जो 30 घटिाक्​्म आतंकी हमलो् को लेकर की जािे नसतंबर को नदल्ली मे सत्​्ा के गनलयारो् मे् था. वाली भारतीय प्​्नतन्​्कया मे् होिे वाला एक नवदेश मंत्ालय के प्व् क्ता और डी.जी.एम.ओ. आमूलचूल पनरवत्िर है. मोदी सरकार आिे के ( सेिा मुख्यालय मे सैन्य संचालि के बाद सेिा िे इसके पहले म्यांमा मे्घुस कर कुछ महानिदेशक) को इसके पहले कारनगल युद्के िगा नवद्​्ोनहयो् को मारा था और उसे भी जोरदौराि ही एक साथ संवाददाता सम्मल े िो्मे देखा शोर से ही प्च ् ानरत नकया गया था. उस वक्त भी गया था. इसमे्भाग लेिे वालो्िे माहौल सूघं कर यह संदश े देिे की कोनशया की गयी थी नक अगर जाि नलया नक कोई बहुत महत्वपूणर् सूचिा दी पानकस्​्ाि बाज िही् आया तो उसे भी घर मे् जािे वाली है. खासतौर से उड्ी हमले के बाद घुसकर पीटा जायेगा. क्या 29/30 नसतंबर की नजस तरह की प्न्तन्​्कया प्ध् ािमंत्ी, रक्​्ा और गृह रात भारत की सन्जरकल स्ट्ाइक इसी श्​्ेणी मे् मंत्ी की तरि से आ रही थी या जैसा मुहं तोड् आती है? जवाब नवदेश मंत्ी सुरमा स्वराज िे सुरक्​्ा नदलचस्प बात यह थी नक भारत नियंत्ण पनररद मे् पानकस्​्ािी प्ध ् ािमंत्ी िवाज शरीि रेखा पार करिे की बात कह रहा था और को नदया था उन्हे्लेकर हर कोई आशंनकत था. पानकस्​्ाि इसका खंडि. होिा तो यह चानहए था क्या युद्की घोरणा होिे वाली है? डीजीएमओ नक पानकस्​्ाि नियंत्ण रेखा पार करिे का िे जो घोरणा की वह युद्तो िही्पर उसमे्उसी आरोप लगाता और भारत उसका खंडि करता. नदशा मे् बिऩे के संकेत जर्र नछपे थे. पानकस्​्ाि दो ऐसी जगहो् पर अपिे डीजीएमओ िे कहा नक भारत िे कई स्थािो्पर मीनडयाकन्मयर ो्को भी लेकर गया जहां भारतीय नियंतण ् रेखा या एलओसी पार कर पानकस्​्ाि सेिा िे सन्जक र ल स्ट्ाइक की बात की थी. वहां अनधकृत कश्मीर मे् के स्थािीय निवानसयो् मीलिया मे्देशप्म्े के ज्िार और िे नकसी भी हमले से आतंनकयो् के लांनचंग पैड्स या ऐसे नठकािो् नकया. कूटनीलतक र्प से अिग-थिग इिकार पर हमले नकये जहां अनधकतर नवदे शी पालकस्​्ान ने सरकार को अिसर भारतीय नठकािो् पर चैिल भी सन्जरकल लदया है लक िह अि्स ध त्य को बड़्े स्ट्ाइक से मिा कर रहे हमला करिे के पहले बदिाि के र्प मे्प्च ् ालरत करे. है्. उन्हे् रखा जाता है. डीजीएमओ के अिुसार इसके पहले संपग् इस सन्जक र ल स्ट्ाइक मे्दो पानकस्​्ािी सैनिको् सरकार के दौराि भी ऐसा होता रहा है नक के अलावा कई दज्िर आतंकी भी मारे गये. उसी भारतीय सेिा के नवशेर प्​्नशन्​्कत दस्​्े वक्त नदि प्​्धािमंत्ी िे स्वयं राष्​्पनत, उपराष्​्पनत जर्रत नियंत्ण रेखा पार कर पाक अनधकृत तथा पूवर् प्ध ् ािमंत्ी मिमोहि नसंह को ब्​्ीनिंग कश्मीर मे कुछ अंदर जा कर नठकािो्पर या की, नवदेश मंत्ी सुरमा स्वराज सोनिया गांधी से उसके पेट्ोल पर घात लगा कर हमले कर और नमलिे गयी्और एक सव्दर लीय बैठक मे्सरकार दुशम् ि को िुकसाि पहुचा कर तेजी से वापसी के वनरष्​् मंन्तयो् तथा अनधकानरयो् िे पूरे करते रहे है. इस बार िक्फ यह है नक पहले घटिाक्म् की जािकारी दी. स्वाभानवक था नक पानकस्​्ािी समकक्​् को िोि करके और निर देश की सुरक्​्ा के िाम पर सभी सरकार के साथ संवाददाता सम्मल े ि करके डीजीएमओ िे इसका नदखे. ऐलाि नकया. दो तीि नदि बाद जब धुधं छंटिी शुर्हुई मीनडया मे् उभरे देशप्​्ेम के ज्वार और तब स्वाभानवक र्प से कुछ ऐसे प्श् ि् खड्ेहुए कूटिीनतक र्प से अलग-थलग पानकस्​्ाि िे नजिका उत्​्र नमले नबिा पूरा घटिाक्​्म मोदी सरकार को अवसर नदया है नक वह इस अनवश्​्सिीय सा लगता है. यनद कई दज्रि अध्रसत्य को बड्े बदलाव के र्प मे् प्​्चानरत आतंकी मरे थे तो उिके शव कहां गये? क्या करे. कही यह संदश े उत्र् प्द् श े और पंजाब के संभव है नक सीमा से नसि्फ एक से तीि मतदाताओ्के नलए तो िही था जहां अगले कुछ नकलोमीटर की दूरी पर पानकस्​्ाि लांनचंग पैड महीिो् मे चुिाव होिे वाले है्? नजस तरह रखेगा? इतिी दूरी तक तो एमएमजी और छोटे 'देशभक्त' भारतीय चैिलो्और अखबारो्िे बढ् तोपखािो्से िुकसाि पहुच ं ाया जा सकता है और चढ् कर सरकारी दावो् को स्वीकार नकया है इि हनथयारो् का प्​्योग तो हर युद् नवराम उससे तो यही लगता है नक भाजपा पहला दौर उल्लंघि मे् होता ही रहता है. निर क्यो् भारत जीत गयी है पर देखिा है नक यह खुमार कब तक n हेलीकॉप्टरो् के इस्​्ेमाल का खतरा उठायेगा रहता है ? (लेखक पूवर्आईपीएस अनधकारी और नजिके सीमा पास उड्ते ही पानकस्​्ािी राडारो् उपन्यासकार है.् वह दो वर्​्ो्तक कश्मीर घाटी की पकड्मे्आिे का खतरा था. मे्तैिात रहे है)् घटिा के तत्काल भाजपा के समथ्रको् िे शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 15


देशकाल डॉ. सुधीरेदं ं शमंा​ा

ग

त 18 नसतंबर को उड्ी मे्ं हुए आतंकी हमले के पहले तक बहुत सारे लोगो्को पता भी िही् होगा नक भारत और पानकस्​्ाि के बीच कोई संनध भी है. दो पड्ोसी मुलक ् ो्से गुजरिे वाली िदी के पािी के बंटवारे को लेकर हुई संनध इस आतंकी हमले के बाद अचािक संकट मे्क्यो्पड्गयी जबनक यह सि 1965, 1971 और 1999 की कही्अनधक गंभीर लड्ाइयो्के दौराि चच्ार तक मे्िही्आयी थी? अतीत मे् खूि और पािी के साथ बहिे का नसलनसला चलता रहा है लेनकि नपछले नदिो् भारतीय प्ध् ािमंत्ी के एक वक्तव्य के बाद संदहे के बादल मंडरािे लगे. उन्हो्िे कहा, 'रक्त और पािी एक साथ िही्बह सकते.' पानकस्​्ाि के राजिैनतक िेततृ व् िे चेताविी

दी नक भारत अगर नसंधु जलसंनध के साथ कोई मिमािी छेडछ ् ाड्करता है तो इसे उकसावे की कार्रवाई मािा जायेगा. भारत िे अपिे कािूिी दायरे मे्रहते हुए जल प्व् ाह सीनमत करिे और इस प्​्कार पड्ोसी देश को सबक नसखािे की मंशा बिायी. भारत और पानकस्​्ाि के बीच इि जुबािी तीरो्के आदाि प्द् ाि के बीच िदी जल संनध को भंग करिे की धमकी उस समय नकिारे हो गयी जब भारत िे िवंबर मे् इस्लामाबाद मे् होिे वाली साक्फ नशखर बैठक से अपिा िाम वापस ले नलया. उसिे ऐसा सीमा पार आतंकवाद के मुद्ेपर जोर देिे के नलए नकया. अभी के नलए ठीक है लेनकि इसमे् दोराय िही् नक यह मुद्ा निर उछलेगा. सीमा पार की गनतनवनधयो्को देखते हुए कहा जा सकता है नक यह संनध कभी भी संकट मे्पड्सकती है. भनवष्य के गभ्रमे्चाहे जो भी हो लेनकि यह स्पि्ï् है नक यह संनध निचले स्​्र पर ब्सथत पानकस्​्ाि के नलए अनधक उपयोगी रही है और इसनलए यह ऊपर ब्सथत भारत के हाथ मे् एक मजबूत

कसंधु िा पानी कसयासत िी आग

16 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

हनथयार की तरह है। ऐसे मे् यह प्श् ि् उठता है नक क्या नसंधु िदी के पािी का बहाव रोकिे से सीमा पर बहती आग बुझगे ी या कही् यह युघघ् भड्किे का सबब तो िही्बिेगा? नसंधु जल संनध को दुनिया की सबसे नटकाऊ जल संनध मािा जाता है। दोिो्देशो्के बीच तीि बड्ी लड्ाइयो् से भी यह अप्​्भानवत रही। इस संनध पर 19 नसतंबर 1960 को पानकस्​्ािी राष्प् नत अयूब खाि और भारतीय प्ध् ािमंत्ी जवाहरलाल िेहर् िे हस्​्ाक्र् नकए थे. इसके तहत भारत को नसंधु की तीि पूव्ी सहायक िनदयो् रावी, व्यास और सतलज के प्य् ोग का अनधकार नदया गया और पन्​्िम मे् बहिे वाली नसंधु, झेलम और चेिाब का पािी बहकर पानकस्​्ाि जाता है. भारत मे्इिके तटीय इलाको्मे्रहिे वाले लोग इिके पािी का प्य् ोग कर सकते है.् यह अपिी तरह की अिूठी संनध है नजसमे् व्यापक बहाव वाली िनदयां दो देशो् मे् बंटी है् और दोिो् देशो् के नहस्से् तीि-तीि िनदयां है्.

जसंधु नदी िल समझौते पर संकट के बादल मंडरा रहे है्. इस मिबूत बुजनयाद वाले समझौते को कोई भी नुकसान जकसी एक पक्​्के जलए ही परेशानी नही्खड़्ी करेगा. वसंधु निी: सभ्यता का जल


लेह के पास जंस्कार और वचनाव का संगम: वसंधु समझौते की नवियां

सात वर्रकी चच्ार के दौराि सबसे व्यावहानरक हल यही निकला था नक उस वक्त के जल संकट को समाप्त करिे के नलए तीि-तीि िनदयां बांट ली जाये.् हालांनक पािी के बंटवारे के मामले मे् देखे् तो तस्वीर थोड्ी उलझी हुई है. करीब 80 िीसदी पािी पन्​्िमी बहाव वाली िनदयो् के जनरये पानकस्​्ाि चला जाता है जबनक पूवर्का 20 िीसदी पािी भारत की िनदयो्मे्बहता है. भारत हालांनक भौगोनलक दृन्िï से ऊपर है इसके बावजूद उसिे निचले पड्ोनसयो् के प्न्त उदारता ही नदखायी है. सि 1960 मे्पानकस्​्ाि के साथ नसंधु जल संनध और सि 1996 मे् बांगल ् ादेश के साथ गंगा संनध के जनरये उसिे ऐसा ही नकया. देश के भीतर राज्यो्के बीच िदी जल बंटवारे को लेकर हमारा नरकॉड्रहालांनक कािी खराब रहा है लेनकि उक्त दोिो् संनधयो् के मामले मे्हालात एकदम उलट है।् कि्ाटर क और तनमलिाडु के बीच कावेरी िदी जल नववाद देश के कई जल नववादो्मे्से एक प्म् ख ु है. इस पनरदृशय् मे्प्श् ि् उठता है नक क्या एक ऐसा िदी जल समझौता जो दशको्से सीमा पार बहिे वाली िनदयो्के जल बंटवारे मे्सहयोग का उदाहरण रहा है, उसे सैनय् उपाय के र्प मे्प्य् ोग नकया जािा चानहए? भारत अगर ऐसा करिा चाहता है तो उसे जम्मू और कश्मीर मे्पन्​्िमी बहाव वाली िनदयो्का पािी रोकिे के नलए बहुत भारी भरकम िांचा तैयार करिा होगा। उसका उपयोग पानकस्​्ाि जािे वाली िनदयो् का पािी रोकिे के नलए नकया जा सकता है। लगातार धि सुनिन्​्ित नकया जा सके तो भी पहाड्ी इलाके मे् ऐसे नवशालकाय बांध बिािे मे्करीब एक दशक का समय आराम से लगेगा. हालांनक इस दौराि तमाम समस्याये्भी आयेग् ी.

इस दृन्ि से देखा जाये तो संनध खत्म करिे की राजिीनत प्न्ेरत मांग मे्कोई दम िही्है. इसके नलए पहले पािी को एकन्​्तत करिे के नलए भारी भरकम बांध बिािे हो्ग.े इतिा ही िही्भारत द्​्ारा नसंधु िदी के बहाव मे् नकसी भी तरह की छेडछ ् ाड्के संकते भर से भारत नवरोधी भाविा भड्क सकती है और चरमपंथ को बल नमल सकता है. संनध को खत्म करिे के पनरणाम केवल सैन्य निनहताथ्र तक सीनमत िही् है. हालांनक अभी जम्मू और कश्मीर मे् बड्े बांध बिािे की कोई योजिा िही्है लेनकि बांध बिािे से होिे वाले नवस्थापि और पय्ारवरण संबंधी पहलुओ्का भी ध्याि रखिा होगा. खासतौर पर इसनलए क्यो्नक यह इलाका भूकंप के जोनखम वाला है. वर्र 2013 की उत्र् ाखंड त्​्ासदी और वर्र 2014 मे् कश्मीर मे् आयी बाढ् की याद अभी ताजा है. उससे अंदाजा लगाया जा सकता है नक अप्त्य् ानशत मौसमी घटिाये्नकस तरह नहमालय क्​्ेत् को और जोनखम भरा बिा रही है्. अब जबनक जलवायु पनरवत्िर के चलते मौसम की अप्​्त्यानशतता बढ्ती जा रही है तो जलवायु पनरवत्िर से निपटिा एक ियी चुिौती के र्प मे् हमारे सामिे है. सच तो यह है नक नसंधु िदी का बेनसि दोिो्देशो्के नलए अहम संसाधि है. ऐसे मे्मौजूदा घटिाओ्के बीच इि उभरती नचंताओ् से निपटिा भी जर्री है. इस संनध के नवरय पर पय्ारप्त समझदारी भरी बहस देखिे को िही्नमल सकी है. हालांनक इस मसले पर तटस्थता गंवािे और भ्न्मत होिे की कािी संभाविा है परंतु हकीकत मे्अिुपरू क प्​्ोटोकॉल की मदद से संनध की शत्​्े लगातार बदली गयी है् तानक तब से अब तक लगातार

बढ्ती आबादी की पािी और नबजली की जर्रतो् का ध्याि रखा जा सके. अगर नसंधु जल संनध के अिुच्छेद 7-8 को लागू नकया जाता तो भारत और पानकस्​्ाि दोिो्इस संनध के अधीि साझा पनरयोजिाओ्की शुरआ ् त कर सकते थे नजससे अिुमाित: 20,000 मेगावॉट नबजली उत्पन्ि की जा सकती थी. नसंधु समझौते का दोिो्ही देशो्मे्जबरदस्​् राजिीनतकरण हो चुका है, ऐसे मे्िदी बेनसि के नवकास का काम उम्मीद से बहुत धीमी गनत से चल रहा है. आि्य् र्िही्नक भारत को बगनलहार और नकशिगंगा जलनवद्​्ुत पनरयोजिाओ् के मामले मे् स्थायी मध्यस्थता पंचाट का सामिा करिा पड्ा. पंचाट िे भारत को आदेश नदया नक वह िदी मे्िौ घि मीटर प्न्त सेकडं का न्यिू तम बहाव सुनिन्​्ित रखे. भारत द्​्ारा इसका पालि संनघ के प्न्त उसकी प्न्तबघ्घता को जानहर करता है. सबिे यही कहा नक यह पानकस्​्ाि के नहत मे्है नक वह नसंधु िदी जल संनध को बचा कर रखे. ऐसे मे्उसका यह अनलनखत दानयत्व रहा है नक वह आतंक का निय्ारत करके अपिे ऊपरी पड्ोसी को िुकसाि ि पहुच ं ाये. वही्दूसरी ओर एक क्त्े ्ीय िेता होिे के िाते भारत को भी इस तथ्य से अवगत होिा आवश्यक है नक नसंधु िदी बेनसि चीि, भारत, पानकस्​्ाि और अिगानिस्​्ाि के बीच साझा है और वहां अन्य पनरयोजिाये्और संनधयां भी प्न्​्कयाधीि है.् अब एकतरिा िैसलो्का वक्त जा चुका है. अनधकांश सीमापार जल बंटवारा संबंधी चच्ाओ र ् मे् इस बात की अिदेखी कर दी जाती है नक िदी एक जीनवत संसथ ् ा है. उसके निारो् पर मािव सभ्यताएं नवकनसत हुई है्. पािी के अनधकानधक दोहि के क्​्म मे् िनदयो् अनधकारो्का हि​ि होता है. अक्सर राज्य और िौकरशाही उसके नहतो् की अिदेखी करते है्. िनदयो् के बहाव के साथ जमकर छेडछ ् ाड् की जाती है. अब जबनक नसंधु िदी का स्​्ोत यािी नहमालय के ग्लेनशयर नपघल रहे है्, तो यह जर्री है नक िदी को बचािे पर ही सबसे अनधक ध्याि नदया जाए. ियी जल कूटिीनत वक्त की जर्रत है और भारत निलहाल दन्​्कण एनशयाई क्त्े ् मे् इसका पूरा लाभ लेिे की ब्सथनत मे्है. दोिो्देशो्का यह िैनतक दानयत्व है नक वे नसंधु जल समझौते को बरकरार रखे.् इस समझौते का उद्श्े य् ही दोिो् देशो् के बीच शत्​्ुता और तिाव को नियंन्तत करिा था. यहां माक्फ ट्वैि की रोचक नटप्पणी याद आती है, 'शराब पीिे के नलए है और पािी झगडऩे के नलए.' n (लेखक जल मामलो्के नवशेरज्​्है.्) शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 17


देशकाल

आपको इतिहास देख रहा है इस समय भारत-पाजकस्​्ान के बीच कटुता चरम पर है. बहुत पहले महात्मा गांधी ने िो राह जदखा यी थी उसपर चलकर ही हम इन हालात से पार पा सकते है्. िो गांधी: भाईचारे का इवतहास

कुमार पंश ं ांत

आ

रएसएस प्म् ख ु मोहि भागवत िे सन्जक र ल ऑपरेशि के बाद चैि की सांस लेते हुए कहा, 'हम सभी को नजसका इंतजार था वह हो गया!' मैि् े खुद से पूछा, ' क्या हो गया और हमे्नकस बात का इंतजार था?' रात के अंधेरे मे् पाक अनधकृत कश्मीर की सीमा मे् घुस जािे का हमे् इंतजार था? इस उपमहाद्​्ीप सरीखे महाि देश को इंतजार था नक उधर के कुछ लोगो्को मार आये?् नजस सन्जक र ल ऑपरेशि की इतिी चच्ार चल रही है, उसमे् इससे अलग हमिे नकया क्या है? अगर वह 'दूसरा कश्मीर' हमारा है जैसा नक रक्​्ामंत्ी मिोहर पन्रक र र और कभी िौजी रहे मंत्ी राज्यवध्िर राठौर कह रहे है,् तो मेरे जैसा आम नहंदस ु ्ािी पूछता है नक अपिी िौज को, अपिी सरकार के आदेश से, अपिी सीमा मे्घुसिे के नलए रात के अंधरे े का सहारा लेिा पड्ा और सुबह नकरण िूटिे से पहले लौट भी आिा पड्ा तो क्यो् ? क्या यही क्​्ुद् लालसा थी हमारी जो सन्जरकल ऑपरेशि से पूरी हो गयी? भूले्िही्नक नवभाजि के बाद अपिे नजस नहस्से को हमिे पानकस्​्ाि माि कर छोड्नदया, उसकी सीमा मे्घुस कर हमिे एक िही्, तीि बड्-े बड्ेयुद्लड्ेही िही्है्बब्लक हर युद्मे्पानकस्​्ाि को निण्ायर क पराजय खािी पड्ी है. पानकस्​्ाि जािता है और सारी दुनिया मािती है नक भारत के पास पानकस्​्ाि से ज्यादा सामनरक बल है. लेनकि इनतहास नजस बल की परीक्​्ा लेता है और बार-बार लेता है, वह नसि्फसामनरक बल िही्है. मै्सामनरक बल के साथ खड्ेउस बल को ि कमतर आंकता हूं और ि नकसी हाल मे् देश को भूलिे देिा चाहता हूं नक हमारे सैनय् बल की असली ताकत यह है नक उसके पास िैनतक बल भी है. बंदक ू के पीछे, न्​्टगर पर अंगल ु ी दबाये बैठा जवाि सौ गुिा बलशाली होता है जब उसे पता होता है नक वह न्याय की, िैनतकता की और मािवीयता की लड्ाई लड्रहा है. झूठ और मक्​्ारी से भरी अिैनतक लड्ाई मे्झो्क नदया गया हर पानकस्​्ािी सैनिक भीतर से नकतिा खोखला होता है, इसका अिुमाि लगाया जा सकता है. अपिे देश की इस िैनतक टेक को, नजसकी बात करिा हम भूलते जा रहे है,् को कमजोर 18 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

करिा या पीछे डाल देिा बहुत बड्ा अपराध होगा. इसनलए मोहि भागवत को नजसका इंतजार था और सारे मुलक ् को नजसका इंतजार है, वे दोिो्दो अलग-अलग चीजे्है.् वह 26 नसतंबर 1947 की तारीख थी. नवभाजि का जहर हर कही्घुल रहा था. िवजात पानकस्​्ाि अपिी जन्मजात शैतानियो्मे्लगा था और हवा मे्युद्की सिसिी थी. बूढ्ेगांधी अपिे अन्​्सत्व का सारा बल लगा कर देश की उस िैनतक शब्कत का क्य् रोकिे मे्लगे थे नजसकी अिदेखी का साि खतरा सामिे था. उस रोज की अपिी प्​्ाथ्िर ा सभा मे्अपिी कमजोर लेनकि नि:संशय आवाज मे्वह बोले, 'मैि् े उिसे कह नदया है नक अगर आप इस पके् ितीजे पर पहुंच चुके है् नक पानकस्​्ाि सरकार की तरि से न्यायप्द् बात हो ही िही् सकती और वे नकसी हाल मे् अपिी गलती िही् मािेग् े तब हमारा अपिा मंन्तमंडल है नजसमे् जवाहरलाल, सरदार पटेल और दूसरे कई अच्छे लोग है.् अगर ये सभी इस ितीजे पर पहुच ं ते है्नक वे पानकस्​्ाि सरकार को बेजा हरकते् करिे से िही् रोक सकते तो अंनतम रास्​्ा यही बचता है नक युद्मे्उतरे्!' (महात्मा गांधी वांडम् य, खंड 96) यह वह गांधी है्नजिकी बात ि हम करते है,् ि समझते है.् देश मे्एक तबका ऐसा है जो इस कोनशश मे्लगा रहा है नक गांधी का यह स्वर्प ि देश देख सके और ि पहचाि सके. गांधी ि युद्से डरते है,् ि युद्से बचते है.् वह अपिी सरकार से कहते है्तो यही नक युद्से पहले सामिे वाले का नववेक जगािे के हर संभव रास्​्ेकी तलाश कर लेिा अनिवाय्रहै. मुलक ् युद्मे्उतरे, ऐसा कहते हुए वे नकतिे 'अगर' की लक्म् ण-रेखा खी्चते है,् यह हम क्ण ् भर को भी ि भूल.े् वह 'अगर' ही है जो देश का मेरद् डं है. हम युद् को चाहत की पहली और आनखरी मंनजल मािते है्, गांधी युद् को राजिीनतक िेततृ व् की नविलता से पैदा हुई अनिवाय्तर ा की तरह कबूलते है.् वे यहां अनहंसा की बात ही िही्कर रहे है्क्यो्नक वह प्स ् गं यहां है ही िही्. यहां तो वे उस सरकार से बात कर रहे है्जो िौज पर निभ्रर है और उसके सहारे पानकस्​्ाि को सबक नसखािा चाहती है. वे सरकार से पूछिा चाहते है्शायद नक अगर युद्ही एकमात्​्रास्​्ा है तो राजिीनत और कूटिीनत जैसे रास्​्ो्का मतलब ही क्या है? और लोगो्की चुिी हुई सरकार का क्या संदभ्र रह जाता है? युद्ही करिा है तो सैनय् िेततृ व् िागनरक िेततृ व् से कही्प्भ् ावी और पनरणामकारी होता है. कबाइनलयो्की आड्मे्पहले पानकस्​्ािी हमले


नरे्द्मोिी और नवाज शरीफ: हवाई िोस्​्ी का मुकाबला करिे जाती िौज को महात्मा गांधी िे इसी भाव से आशीव्ादर नदया था. युद्से भी ज्यादा खतरिाक होता है युद्ोन्माद. युद्बड्ी संजीदगी से लड्ा जाता है नजसमे्नदल और नदमाग का गजब का संतल ु ि जर्री होता है. युद्ोन्माद मे्भीड्बाजी और उन्माद का जैसा कॉकटेल बिाया जाता है वह नववेक को कही्दि​िा देता है. इसनलए हर 'िेता' युद्से ज्यादा युद्ोन्माद को पसंद करता है. आज युद्मे्उतरिे का िैसला कोई एक व्यब्कत या िेता या देश िही्लेता है. इसके नलए राष्​्ीय पनरब्सथनत, देश के भीतर राजिीनतक समथ्रि का आकलि, अपिी िौज की अपिी तैयारी व मि:ब्सथनत का ख्याल, नजस पर हमला करिा है उसके यहां की भी पनरब्सथनतयो्का और अंतरराष्​्ीय दबावो्का आकलि. ये सब नमलकर युद्के निण्यर तय करते है.् पानकस्​्ाि हर युद्मे्नपटा है तो इसनलए नक उसिे ऐसा आकलि कभी िही्नकया और उन्माद जगा कर युद्छेड्बैठा. हमारी संसद पर जब हमला हुआ, तब तत्कालीि प्ध् ािमंत्ी अटलनबहारी वाजपेयी की पहली प्न्तन्​्कया थी नक अगली सुबह आर-पार की लड्ाई मे्उतरिा है. लेनकि उन्हो्िे निर इि सारी बातो्का आकलि नकया और निर तब से आज तक नकतिी ही सुबहे्आयी्गयी्लेनकि लड्ाई आर-पार िही्हुई. हालात आज भी वही है.् हर रैली, चौक-चौराहे की सभा मे्गरज-गरज कर तत्कालीि सरकार को ललकारिे और पानकस्​्ाि को उसकी ही भारा मे्जवाब देिे का उन्माद जगािे वाले मौजूदा प्ध् ािमंत्ी को उि सारे मौको् पर गम खा कर रह जािा पड्ा जब पानकस्​्ाि िे हमला नकया. पठािकोट का हमला हुआ, निर उड्ी का हमला हुआ. इस बार 18 जवाि मारे गये. बात आपे से बाहर हो गयी. पाट्​्ी भीतर भी सवाल उठिे लगे नक अब भी जवाब िही्नदया तो कब दोगे? प्ध् ािमंत्ी प्क ् ट हुए केरल की सभा मे.् वे पूरी तैयारी से आये थे. उन्हो्िे वह सब कहा जो युद्ोन्माद जगािे के ज्​्ात सूत्है.् उन्माद से भरी, उिकी आवाज यही बता रही थी नक वे पानकस्​्ाि को रगडऩे का मौका खोज रहे है.् वे जो भावोद्क ्े जगा रहे थे, भीड् उसे पहचाि रही थी. युद-् युद-् युद्की मांग और उस आग मे्घी डालती िेता की मुद्ा. यह ि भूले्नक यह सब एक तरि चल रहा था तो दूसरी तरि इससे भी एक बड्ा 'युद'् चल रहा था और वह था पानकस्​्ाि को अंतरराष्​्ीय नबरादरी

मोहन भागवत: पूरी हुई मुराि मे्अलग-थलग करिे का युद.् बड्ी कुशलता से, एक-के-बाद एक गोनटयां प्ध् ािमंत्ी चल रहे थे और हर चाल के साथ पानकस्​्ाि नकिारे होता जा रहा था. बड्े वक्त बाद ऐसा हो रहा था नक पानकस्​्ाि की आवाज भी बंद थी और वह निर्पाय नदखाई दे रहा था. ब्सथनत ऐसी बि गयी थी नक चीि िे उसे समथ्िर नदया भी तो बड्ी बेजाि आवाज मे.् पानकस्​्ाि के हुकम् रािो्के चेहरे का रंग उड्ता जा रहा था. संयकु त् राष्स ् घं के अनधवेशि को संबोनधत करिे आये िवाज शरीि अपिी शारीनरक भंनगमा और आवाज दोिो्से ही नकसी अपराधी सरीखे नदखाई और सुिाई दे रहे थे. निर यह सन्जक र ल ऑपरेशि हुआ. िौजी जुबाि मे्कहे्तो यह घाव या िोड्ेका ऑपरेशि करिे जैसी कार्वर ाई है. बीमारी का इलाज िही्, बीमारी के कारण कही्िोड्ा बिा है तो उसकी चीर-िाड्. इससे बीमारी का कोई िाता िही्है. बीमारी का इलाज तो अलग से करिा ही होगा. िौज को इस बात का श्​्ेय है नक उसे जो ऑपरेशि करिे को कहा गया था उसे उसिे अच्छी तरह पूरा कर नदया. पानकस्​्ाि िे जब नशमला समझौता नकया था तब वह लाचारी का समझौता था, िेकिीयती का िही्. प्ध् ािमंत्ी की कुशल कूटिीनतक से आज पानकस्​्ाि निर वैसी ही लाचार ब्सथनत मे्है. इस दबाव को बढ्ाते हुए उसे बातचीत की मेज पर ला खड्ा करिा है. यह काम युद्ोन्माद से िही्होगा बब्लक नबगड्गे ा. इसनलए संयम और अिुशासि के साथ हम सरकार के साथ खड्ेरहे. महात्मा गांधी के कश्मीर जािे की योजिा कई बार बिी. 1915 मे,् निर 1932 मे,् निर 1946 मे् लेनकि नकसी ि नकसी वजह वे वहां िही् पहुच ं सके. वह पहुच ं े एक अगस्​्1947 मे्रावलनपंडी के रास्​्ेचकाला होते हुए. पूरा कश्मीर जेलखािा बिा हुआ था. महाराजा हनर नसंह का दमि चक्​्ओज पर था. महात्मा गांधी िे साि बात कही, 'राजतंत्से आजादी पािे के इस कश्मीरी संघर्रमे्मै्शेख अल्दलु ल ् ा के साथ हूं जो शांनतमय तरीको्से, नहंद-ू मुबस् लम एका को हर हाल मे् बिाये रखते हुए, कुछ बड्े आदश्​्ो् के नलए प्न्तबद्​्है.् राजतंत्तो नकसी भी सूरत मे्जािा ही चानहए.' आज निर ऐसी ही दृढ्, ईमािदार आवाज देश सुि​िा चाहता है. पनरब्सथनतयो् िे प्ध् ािमंत्ी को एक ऐनतहानसक मोड्पर ला खड्ा नकया है. n यहां से वे नकधर मुडत् े है,् यह देखिा है.

(लेखक गांधी शांनत प्न्तष्​्ाि के अध्यक्​्है.्)

शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 19


देशकाल

सड़क, संसद और लोहिया

डॉ लोजहया ने कहा था जक अगर सड़्क खामोश हो िाये तो संसद आवारा हो िाती है. उनका यह कथन आि के रािनैजतक हालात पर पूरी तरह लागू होता है. लोजहया की पचासवी्पुण्यजतजथ पर उनकी याद मे्एक आलेख. है. एक बार की बात है, डॉ. लोनहया हैदराबाद मे्बदरी नवशाल नपत्​्ी के यहां बैठे थे, जहां नचत्क ् ार मकबूल निदा हुसिै भी थे. उन्हो्िे हुसिै के नचत्​्ो्पर नटप्पणी करते हुए कहा, तुमह् ारी पेन्टंग तो अमीरो्के बैठक सजािे मे्काम राम मिोहर लोनहया की सांसक ् नृ तक दृन्ि का आधार भारत और आिे लायक है, नजसका आम जिता से कोई लेिा-देिा िही्है. उन्हो्िे हुसिै उसकी राष्​्ीयता थी. लेनकि उिकी सांसक ् नृ तक दृन्ि उिके को सलाह दी नक वे रामलीला पर पेन्टंग बिाये,् तानक वह देश के आम घरो् राजिीनतक नवचारो् से अलग िही् थी. लंबे समय तक यूरोपीय समाज मे् मे्जगह पा सके. हुसिै िे उिकी बात मािी और आज उिकी बिाई तस्वीरे् रहकर पठि-पाठि करिे के दौराि डॉ. लोनहया निजी तौर पर यूरोपीय समाज इनतहास की धरोहर है.् यह माि लेिा भ्​्ामक होगा नक रामलीला पर पेन्टंग बिािे का सुझाव देिे की िागनरक संनहताओ्और उस समाज के ऐनतहानसक नवकास क्म् मे्अन्जतर वाले डॉ. लोनहया का राम की राजिीनत से कोई लेिा-देिा था. डॉ. लोनहया लोकतांन्तक मूलय् ो्के प्न्त बहुत निष्​्ा रखते थे. यही वजह थी नक समाजवाद ् और नशव वे सांसक ् नृ तक िायक थे, जो इस देश की के नलए जर्री दो बुनियादी वग्​्ो् मजदूर और नकसाि के नहतो् को लेकर के नलए राम, कृषण उिकी राजिीनत आगे बढ्ती थी. इन्ही्निम्िवग्​्ीय तबको्की देशज संसक ् नृ त अनधसंखय् जिता के जीिे का सहारा थे. एक आधुनिक लोकतांन्तक समाज मे्भी उिका महत्व प्त् ीको्के र्प मे्मौजूद था. डॉ. लोनहया के नलए राम को वह राष्​्ीय संसक ् नृ त के तौर पर महत्व देते थे. ् का मतलब संहारक और नशव का मतलब एक केरल मे्संनवद सरकार के दौराि नकसािो्पर हुई पुनलस िायनरंग के का मतलब मय्ादर ा, कृषण मामले मे्डॉ. लोनहया िे नवरोध करते हुए अपिी ही सरकार से इस्​्ीिा मांग ऐसी शब्कत से था, जो सबकी कमजोनरयो्को अपिा बिा लेता है और जि नलया था. नजसे प्ज ् ा सोशनलस्ट पाट्​्ी के बड्ेिेताओ्िे यह कहते हुए मिा कल्याण के नलए िीलकंठ हो जाता है. भारतीय इनतहास मे् तमाम ऐसे महापुरर् रहे है,् नजिकी दृन्ि तो नकया नक सरकारो्मे्तो गोनलयां चलती रहती है.् यह घटिा इस बात का उदाहरण है नक डॉ. लोनहया की राजिीनतक व सांसक ् नृ तक दृन्ि राजसत्​्ा के अिुकरणीय थी, लेनकि नजिका निजी जीवि खुद उस दृन्ि पर खरा िही् उतरता था. इस नलहाज से देख,े् तो डॉ. लोनहया की वच्सर व् और तािाशाही की मुखालित से पैदा होती राममनोहर िोलहया ऐसे महापुरष् कथिी और करिी मे्कोई िांक िजर िही्आती. थी, भले ही उस राजसत्​्ा मे्उिकी भी नहस्सदे ारी थी. अपिी ही सरकार से इस्​्ीिे की मांग करिा के र्प मे्सामने आते है,् लजसकी वह मािते थे नक स्​्ी और पुरर् के बीच हर तरह के संबध ं जायज है,् नसवाय वादानखलािी के. डॉ. आजाद भारत मे्बुनियादी राजिीनतक ईमािदारी का उम्​्भारतीय समाज की लोनहया की सांसक ् नृ तक दृन्ि मे् न्​्सयो् का कािी एक बड्ा साक्य् है, जो मौजूदा समकालीि िेताओ् तत् क ािीन अिस् थ ा से कम से महत्वपूणर्स्थाि था. इस बात को उन्हो्िे अपिे निजी मे्िामुमनकि है. कम सौ साि आगे थी. जीवि मे् भी सानबत नकया. वह आजीवि यूरोप के पठि-पाठि से अन्जतर लोकतांन्तक अनववानहत रहे और एक ऐसे दौर मे्सहजीवि की मूलय् ो्का निव्ाहर डॉ. लोनहया के जीवि के सामान्य प्क ् रणो्मे्भी हमे्नदखाई देता है. उदाहरण के नलए, वह आदश्रस्​्ी सीता अवधारणा को उन्हो्िे साकार नकया, जब सती प्थ् ा, दहेज प्थ् ा, पद्ार प्थ् ा को िही्, बब्लक द्​्ोपदी को मािते थे. यूरोप मे्औद्​्ोनगक क्​्ानं त के बाद उभरे जैसी पुराति प्न्तगामी नवसंगनतयां इस समाज का आम नहस्सा थी्. आजादी िारीवादी आंदोलि का उन्हो्िे गहि अध्ययि नकया था और यत्​्िाय्स र ्ु के सत्र् वे्वर्रमे्आज जब सशक्त हो रही स्​्ी के नखलाि तानलबािी ितवे पुजय् तं े रमन्ते तत्​्देवता वाली र्ढ्भारतीय सोच के सख्त नखलाि थे. जहां जारी नकये जा रहे हो और गभ्रमे्न्​्सयो्को मार नदया जा रहा हो तो डॉ. स्​्ी को या तो शोरण की वस्​्ुसमझा जाता है अथवा देवी के र्प मे्प्न्तन्​्षत राममिोहर लोनहया हमारे समक्​्ऐसे महापुरर् के र्प मे्सामिे आते है,् कर नदया जाता है. वे स्​्ी को एक मिुषय् के तौर पर देखिे की बात कहते थे नजसकी उम्​्भारतीय समाज की तत्कालीि अवस्था से कम से कम सौ साल और उसके सशक्तीकरण के प्ब् ल समथ्क र थे. उिकी यही आधुनिक दृन्ि आगे थी. यह समाज सांसक ् नृ तक र्प से मौजूदा राजिीनतक संरक्ण ् की शह पर नचत्क ् ला जैसी जनटल और अमूतर्नवधा की समझ को भी आसाि बिा देती

अखभषेक रंजन खसंह

डॉ

20 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016


जैसा दनरद्​्बिाया जा रहा है, हमे्आज उसी लोनहया की जर्रत है. नजिका कहा वाक्य उदारवाद मे्पैदा हुई पीढ्ी की जुबाि पर भी बरबस सुि​िे को नमल जाता है- नजंदा कौमे पांच साल इंतजार िही्करती. डॉ, लोनहया के नवचारो्को नपछले नदिो्चली राष्व् ाद पर व्यापक बहस के संदभ्रमे्एक बार पलटकर देखा जािा जर्री है. इस साल के िरवरी मे् जवाहरलाल िेहर्नवश्न्वद्​्ालय के भीतर कुछ उत्साही छात्​्ो्द्​्ारा लगाये गये िारो्के बाद देशद्​्ोह व राष्व् ाद पर नजस तरह बहस चली है और समाज स्पि्त् ः दो खािो्मे्नवभानजत िजर आया है. ऐसे मे्बरबस यह ख्याल आता है नक डॉ. लोनहया अगर जीनवत होते, तो आज वे क्या करते? क्या वे मुट्ी भर भ्न्मत युवाओ्की धड्-पकड्के आधार पर राष्द् ्ोह की पनरभारा तय नकये जािे का समथ्िर करते या निर आंख बंद करके सत्​्ा नवरोध के िाम पर उि युवाओ्को सही ठहरािे लग जाते? डॉ. लोनहया िे ‘भारत माता धरती माता’ िामक जो नकताब नलखी थी, उसमे् भारत माता की औपनिवैनशक अवधारणा (मदर लैड् ) और सांसक ् नृ तक राष्व् ाद द्​्ारा पोनरत धान्मक र अवधारणा दोिो्का ही खंडि िजर आता है. उिके नलए भारत माता भारत को बांटिे वाली कोई आकृनत िही्है. भारत माता का मतलब उिके नलए वह धरती है, जहां का हम अन्ि खाते है,् जहां हम रहते है्और जहां का बिा हम वस्​्पहिते है.् इस मायिे मे्भारत माता का मतलब धरती माता है, जो हमे्जीिे के सारे संसाधि उपलल्ध कराती है और गांधी जी के शल्दो्मे् कहे्तो- नजसके पास सबका पेट भरिे के नलए तो पय्ापर त् है, लेनकि नकसी एक के लोभ को पूरा कर पािा उसके वश मे्िही्है. आज जब सांसक ् नृ तक राष्व् ाद के वाहक संगठि भारत माता का आह्​्ाि करते है,् तो उसका उद्श्े य् यह होता है नक इस देश को दो नहस्सो्मे्बांट नदया जाये- एक जो भारत माता की संताि है और दूसरी जो िही है.् निर वह कहते है्नक अगर संताि हो तो बोलो भारत माता की जय, जो यह िारा िही्लगाता है, उसे राष्द् ्ोही कहकर पानकस्​्ाि चले जािे को कहा जाता है. इस तरह नजन्हो्िे जेएियू मे्िारा लगाया वे नजतिे दोरी है,् उससे कही्ज्यादा बड्ेदोरी वे नदखाई पड्ते है,् जो इस िारे के नवरोध की आड्मे्अपिा एक िारा चलािा चाहते है,् जो वास्व् मे्देश को बांटिे वाला है. ऐसे मे्यनद डॉ. लोनहया होते तो वे िारो्की इस राजिीनत का बुनियादी तौर पर नवरोध करते और नकसी एक िारे के कंधे पर चढ्कर दूसरे िारे को शह देिे की राजिीनत की निंदा करते. उिकी भारत माता कोई जुमला िही्थी, बब्लक वह सवा अरब लोगो् का पेट भरिे वाली अन्िपूणा्र थी. नवडंबिा है नक नजस देश मे्नपछले 20 वर्​्ो् से िाई लाख अन्िदाता लगातार खुदकुशी कर चुके हो्, वहां भारत माता का राष्व् ाद की गंदी राजिीनत मे्यही हश्​्होिा था. नजन्हे्एक नकसाि के मरिे से िक्फिही्पड्ता, उन्हे्भारत माता से लेकर गोमाता तक नकसी के भी कि्​् से कोई सरोकार िही्है. गैर-कांगस ्े वाद की राजिीनत का इस पति के नबंदु तक पहुच ं जािा डॉ. लोनहया के नलए सदमे से कम िही्होता. लोवहया और मधुवलमये (सबसे िाये्): ववचार की ववरासत

जयप्​्काश नरायण के साथ लोवहया: वह एक िौर था डॉ. लोनहया की सांसक ् नृ तक और राजिीनतक दृन्ि के बारे मे्सबसे अहम बात थी उिके भीतर बसा नवद्​्ोही स्वभाव, नजसकी पुन्ि उिके इस मशहूर िारे मे्होती है- अगर सड्के्खामोश हो जाये,् तो संसद आवारा हो जायेगी. लोनहया नजस दौर के पैदाइश थे, उस दौर मे्लोकतंत्सड्को्पर पलता था और उसकी शक्ल और नदशा संसद मे्तय होती थी. सामानजक बदलाव की नदशा सड्क से संसद की ओर जाती थी. डॉ. लोनहया मािते थे नक जिता की बगावत ही संसद को अिुशासि मे्रख सकती है. जयप्क ् ाश आंदोलि के बाद करीब 30 वर्​्ो्तक इस देश की सड्को्िे जो चुपप् ी ओढ्ी, उसका सीधा असर संसद पर पड्ा और वह आवारा होती गयी. आपातकाल के बाद की राजिीनत बहुदलीय सत्​्ा का वाहक बिी, नजसमे्जोड्-तोड्और गठजोड् स्वीकाय्र हो गये, जबनक एक ऐसे मोड् पर जब जिता इस जोड्-तोड् से असंति ु ्हो रही थी, तो उसकी नजंदगी मे्अचािक निजी पूज ं ी, वैन्शकता, बाजार और उपभोक्तावाद का हमला हुआ. इसिे अगले 15 साल तक लोगो् को यह समझिे का मौका ही िही्नदया नक उिके साथ जो हो रहा है, उससे कैसा बत्ावर नकया जाये. एक ओर संसद मे्उद्​्ोगपनतयो्का प्व् श े बढ्ता चला गया तो दूसरी ओर इन्ही्उद्​्ोगपनतयो्िे संसद के बाहर सड्क पर जिता को अपिे आकर्क र माल का बंधआ ु बिा नलया. गैर-कांगस ्े वाद से शुर्हुई बदलाव की राजिीनत िे तीि दशक मे्उन्ही् आन्थक र िीनतयो् को अब्खतयार कर नलया, नजसिे जिता की चेतिा को सांसक ् नृ तक र्प से कुदं करिे का काम नकया था. आजादी के पांच दशक तक जिसंसक ् नृ त और लोकसंसक ् नृ त की दुशम् ि कांगस ्े बिी रही तो कांगस ्े का नवरोध करके आए दलो् िे भी कोई नवकल्प मुहयै ा िही् कराया. इस राजिीनतक नवमश्र मे् सबसे नदलचस्प नवडंबिा गैर-कांगस ्े वाद के उि झंडाबरदारो्िे पैदा की, जो पनरवारवाद का नवरोध करते-करते खुद अपिे खािदािो्का राजिीनतक जीवि बीमा करवािे मे्जुट गये. आज ब्सथनत यह है नक डॉ. लोनहया का सबसे ज्यादा िाम लेिे वाले उिके राजिीनतक नशष्यो् के पनरवार की चार पीन्ढयां सन्​्कय राजिीनत मे् अहम ओहदो् पर है् और राजिीनतक एवं वैचानरक समाजवाद का नवचार पानरवानरक समाजवाद के दुषच ् क्​्मे्िंसकर रह गया है. मात्​्70 साल मे्हालत यह है नक सड्क पर मनहलाओ्, दनलतो्, वंनचतो्और बेरोजगारो्की चाहे नकतिी भी आवाज क्यो् ि उठ रही हो्, लेनकि संसद के काि पर जूं तक िही्रेग् रही. ऐसा लगता है नक संसद का सड्क से नरश्ता ही टूट गया है. डॉ. राममिोहर लोनहया अगर आज नजंदा होते तो कहते- सड्के्आवारा हो जाये्तो संसद खामोश हो जाती है. n शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 21


देशकाल

गाय की वसयासत म़जिूर की आ़फत गोमांस की रािनीजत ने देश के चमड़्ा उद्​्ोग, श्​्जमको्और जवशेरकर दजलतो्की आिीजवका पर िबद्षस्हमला जकया है. इसके साथ-साथ इसका असर देश की अथ्षव्यवस्था पर भी पड़ना शुर्हो गया है. अजेय कुमार

गु

जरात के लोग आजकल तथाकनथत नवकास के गुजरात माॅडल को ‘‘मोदािी माॅडल’’ कहते है् क्यो्नक लाखो् एकड ज़मीि अडािी, अंबािी, टाटा और ऐसे ही दूसरे काप्​्ोरेट घरािो् को दे दी गई है जबनक अिुसूनचत जानतयां या दनलत भूनमहीिता, बेरोजगारी व भुखमरी के नशकार है्. िवसृजि ट्​्स्ट द्​्ारा नकए गए एक अध्ययि के मुतानबक गुजरात मे् करीब 55000 लोग आज भी मैला साि करते है्. ऊिा मे् 15 अगस्​् को ‘‘आजादी कूच’’ मे्हजारो्की संख्या मे्दनलत युवाओ्और मनहलाओ्िे नहस्सा नलया और मरे हुए पशुओ् को उठािे और हाथ से नकए जािे

22 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

वाले ‘‘गंदे काम’’ को छोडिे की शपथ ली. उिका लोकन्​्पय िारा था, ‘‘गाय की पूंछ तुम रखो, हमे्ज़मीि दो.’’ भूनम सुधार और जमीि की मांग पहली बार दनलत आंदोलि के इस चरण मे्उठी है जो नक स्वागत योग्य पहल है. यह ‘पहचाि’की राजिीनत और दनलत-सम्माि की मांग से बढकर एक आन्थरक मांग है नजसे वामपंथी ताकते् उठाती रही है्. भारत की जानतवादी व्यवस्था मे् मेहितकश लोग एक जगह से दूसरी जगह तो जा सकते है् परन्तु वे चातुव्रण्य व्यवस्थािुसार पेशे-धंधे से बंधे रहते है्. इसनलए जमीि की मांग करिा एक ऐनतहानसक कदम है. दनलत आज ठीक ही यह सवाल उठा रहे है् नक नजन्हे् गोरक्​्क अपिी माता कहते है्, उसका अंनतम संस्कार वे खुद सड्क पर भारतीय गाय: वसयासत से िूर

क्यो् िही् करते. यह काम वे ‘‘अपनवत्​्’’ दनलतो्के हाथो्क्यो्करवाते है्! ब्​्ाह्मणवादी व्यवस्था मे् उच्​् जानत का आदमी वो शख्स है जो अपिे दूध-घी और जूत-े चप्पल के नलए खुद कोई काम िही्करता. वह दूसरे निम्ि जानत के लोगो् से गाय-भै्स चरवाता है और तथाकनथत ‘अपनवत्​्’ लोगो्से मृत पशुओ् की चमडी को उतरवाता है तानक खूबसूरत जूते बि सके्और वे इसका उपभोग कर सके्. नहंदुत्ववादी ताकतो्मे्जो प्​्बुद्ज्​्ािी लोग है्, वे इस खेल को समझते है्. यह व्यवस्था कायम रहे, इसनलए यह जर्री हो जाता है नक ‘िज्​्ी’ गोरक्​्को् की साव्रजनिक निंदा की जाए. इसनलए केवल मोदी ही िही्, आर.एस.एस. िे भी उिकी निंदा की है. दनलतो् िे अगर खाल उतारिा बंद कर नदया तो क्या ब्​्ाह्मण यह काम करे्गे ? सारा मामला चैपट हो जाएगा. जो हमले पशु-व्यापानरयो् और खाल उतारिे वालो्पर नकए जा रहे है्, वे वास्​्व मे् भारत की अथ्रव्यवस्था पर हमले है्. अथ्रव्यवस्था के साथ-साथ ये उि गरीबो् के भोजि पर भी हमला है जो प्​्ोटीि के महंगे स्​्ोतो् जैसे दाले्, नचकि, मछली इत्यानद पर निभ्रर ि होकर मृत या बीमार गाय का मांस खाते है्. लखिऊ मे् एक प्लेट बीि कबाब 50 र्. मे् नमल जाती है जबनक बकरे के मांस के कबाब के नलए 100 र्. भी कम पड सकते है्. मध्यवग्​्ीय मुसलमाि बीि िही्, मटि खाते है.् राष्​्ीय िमूिा सव्​्ेक्ण संगठि के अिुमािो्के अिुसार देश मे् 5 करोड से अनधक लोग, नजिमे् मुख्यतः दनलत, आनदवासी और गरीब तबको्से है्, गाय/भै्स का मांस खाते है्.


चमड्ेके बैग: कारोबार पर असर

नकसाि, मुख्यतः नहन्दू, अपिे अिुत्पादक मवेनशयो्को ठेकदे ारो्को बेचते है.् पशु-वध पर पूण्रपाबंदी लगािे का मतलब है नक हर नकसाि को अपिा एक जािवर पालिे के नलए, वत्रमाि दरो्पर, लगभग 100 र्. प्​्नतनदि या 36,500 र्पये हर साल खच्र करिे पडे्गे. आज एक भीरण कृनर संकट के जाल मे्िंसा नकसाि क्या यह खच्रउठा सकता है? पशुओ्को पालिे के नलए क्या सरकार उन्हे्अिुदाि देगी? पशु जिगणिा के अिुसार, देश मे् इस समय 53 लाख अिुत्पादक व आवारा मवेशी है्. जैसी नक नहन्दुत्व न्​्बगेड द्​्ारा मांग की जा रही है, यनद इि सभी पशुओ् का ‘संरक्​्ण’ करिा है, तो हजारो्हैक्टेयर जमीि की जर्रत होगी तथा साथ ही, केन्द्सरकार को हर साल लगभग 20,000 करोड र्पये खच्रकरिे हो्गे. यह रानश आनदवासी उपयोजिा पर खच्रकी जा रही कुल रानश से अनधक है, आंगिवानडयो्के जनरये बच्​्ो् पर खच्र की जारी कुल रानश से अनधक है और बुजुग्र िागनरको् के नलए चलाई जा रही पे्शि योजिाओ् की कुल रानश से भी अनधक है. क्या संघ पनरवार यही चाहता है नक गरीबो्की जर्रतो्को पूरा करिे के नलए खच्र नकये जािे वाले संसाधिो् को अिुत्पादक पशुओ्के संरक्​्ण मे्लगाया जाए? एक साधारण आदमी ‘गो-माता बचाओ’ अनभयाि की हकीकत को समझता है, जब वह देखता है नक गाय-बैल भूख से मरते हुए जहरीला कचरा खाते है्. मवेशी बाजार के ध्वस्​् होिे के िलस्वर्प गौशालाओ् की ब्सथनत भी वहां जािवरो् की संख्या बढिे व उिको नखलािे पर होिे वाले खच्र मे् बढोतरी के कारण खराब होती जायेगी. नवनभन्ि

कल्याणकारी योजिाओ् के नलए सरकार पैसे की कमी की दुहाई देती है. चमडा उद्​्ोग गोरक्​्ा अनभयाि से बुरी तरह प्भ् ानवत हो रहा है. चमडा निय्ातर को्की पनररद के अिुसार, यह वह उद्​्ोग है, जहां वर्र 2006-2011 के बीच सकल वान्ररक वृन्द दर 8.2 प्​्नतशत रही, जबनक इसका वान्ररक टि्रओवर 7.5 अरब डालर है. हमारे देश मे् इस उद्​्ोग की प्​्गनत की मुख्य वजह यह है नक अच्छी गुणवत्​्ा के गाय-बैल ‘कच्​्े माल के र्प मे् प्​्चुर मात्​्ा मे्’ नमलते है्. पूरे नवश्​् के गाय-बैलो् व भै्सो् का 21 प्​्नतशत, भारत मे् नमलता है. संघ पनरवार, के अतान्कफक प्​्यासो् से अब यह उद्​्ोग लुप्तप्​्ायः होिे जा रहा है. जूते, बैग, सीट कवर, बैल्ट व कभी-कभी िै्सी नकस्म के ि​ि्​्ीचर भी चमडे के बिाए जाते है् और यूरोप को निय्ारत नकए जाते है्. इस निय्ारत मे्अभी 10 प्​्नतशत की कमी आ चुकी है, यह कमी बढ रही है और पूरा मैदाि चीि के नलए खाली छोड नदया गया है. इस उद्​्ोग से लगभग 25 लाख लोग नजिमे्अनधकांश अिुसूनचत जानत से है्, अपिे पनरवार का पेट पालते है्. जानहर है इसमे् मृत मवेनशयो् की खाल उतारिी पडती है जो काम दनलत करते है्, एक अिुमाि के अिुसार लगभग 8 लाख दनलत मृत मवेनशयो्की खाल उतारकर अपिे पनरवार का पेट पालते है्. परंतु नपछले कुछ महीिो् की नहंदुत्ववादी आक्​्ामक काय्रवानहयो् तथा अिवाहो् मे् बढोतरी से इि तबको्मे्दहशत है. उिसे पूछो तो वे बताते है् नक आजकल मृत गाय की खाल उतारिा शेर की खाल उतारिे के बराबर है. कािपुर मे् चमडा मंडी मे् कभी मवेनशयो् की खाल के

150 ट्​्क रोज आया करते थे परन्तु आजकल यह संख्या नसमट कर 4-5 रह गई है. नलहाजा हजारो्दनलत मजदूरो्की छंटिी हो चुकी है. घरेलू चमडा उद्​्ोगो् मे् काम करिे वाले लाखो्मजदूरो्िे जहां अपिी आजीनवका गंवाई है, वही् सरकार िे गाय/सांड के चमडो् के आयात को शून्य प्​्नतशत शुल्क के साथ अिुमनत दे दी है. बडे-बडे माॅलो्मे्अब नवदेशी जूते, बैग इत्यानद अनधक मात्​्ा मे् नबकिे लगे है्. ‘मेक इि इंनडया’ का आह्​्ाि कम से कम इस उद्​्ोग मे्केवल एक िारा बिकर रह गया है. संघ-पनरवार जाि-बूझकर भैस ् के मांस को गाय का मांस बताता है तथा उसके निय्ारत को गैरकािूिी बिािे की कोनशश करता है, जबनक यह पूरी तरह से वैध है. िरेन्द् मोदी के िेतृत्व मे् नजस तथाकनथत ‘गुलाबी क्​्ांनत’ का तक्फ नदया जाता है, उसमे् ‘गायो् की अनवचारपूण्र हत्या’ का वण्रि पूरी तरह से वानहयात और गलत है. वर्र 2012 की पशुधि की गणिा नदखाती है नक वर्र 2007 की पूव्र गणिा की अपेक्ा भारत मे्गायो्की संखय् ा मे्6.2 प्न्तशत की वृन्द हुई है, जबनक भेड, बकनरयो्व सुअरो् की संख्या मे् नगरावट आई है. ये आंकडे गायो् की अनवचारपूण्र हत्या के दुष्प्चार की कलई खोलते है्. वास्​्व मे्मुख्य खपत भै्स के मांस की है, नजसको कई राज्यो् मे् ‘बीि’ और अब गोमांस के र्प मे् प्​्स्ुत नकया जाता है. मुख्य र्प से भै्स के मांस का ही निय्ारत होता है. लेनकि ये तथ्य आरएसएस के उि उद्​्ेश्यो् के अिुकूल िही् है्, नजिका वे नवश्​्ास नदलािा चाहते है्और इसीनलए, इस सच्​्ाई को वे अपिे हमले का निशािा बिाते है्. गोमांस की राजिीनत िे श्​्नमको् और नवशेरकर दनलतो् की आजीनवका पर जबद्रस् हमला नकया है. उसके साथ-साथ इसका असर देश की अथ्वर य् वस्था पर भी पडिा शुर्हो गया है. जब भी बेरोजगारी बढती है तो उसका असर जिता की क्​्य-शब्कत पर पडता है नजससे उद्​्ोगो्द्​्ारा निन्मरत माल उिके शेल्फो्पर पडा रह जाता है. इस तरह आन्थरक मंदी का कुचक्​् शुर् हो जाता है नजसका प्​्भाव पूरे समाज पर पडता है. धम्र के िाम पर शुर् हुई इस नहंसा को रोकिा होगा. यह धान्मरक व जातीय धु्रवीकरण के साथ-साथ आन्थरक क्​्ेत् मे् भी अपिा िकारात्मक असर नदखा रही है. भाजपा को उसका गोरक्​्ा एजे्डा भारतीय समाज के और खासतौर पर उत्​्र प्​्देश मे् साम्प्दायीकरण की मुनहम के नलए बेशक उसे एक कारगर हनथयार लगे परन्तु बढती हुई दनलत चेतिा और इसके िलस्वर्प नवरोध कार्रवाइयां उसके मंसूबो् पर पािी िेर n सकती हंै. शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 23


उत्​्राखंड

बोतलबंि गंगाजल: वतजारत और िसयासत

किसिी गंगा ि​िसिा जल उत्​्राखंड सरकार के्द्की गंगा िल की जबक्​्ी को रािस्व का िजरया बनाने के जलए गंगा के पानी पर शुल्क लगाने िा रही है. जिससे के्द्और राज्य के बीच टकराव की आशंका है. फ़जल इमाम मलंललक

उ

त्र् ाखंड की हरीश रावत सरकार एक बार निर केद् ्के साथ टकराव का मि बिा चुकी है. प्द् श े मे्अगले साल चुिाव होिे है्और हरीश रावत केद् ् के नखलाि हमलावर होिे का कोई मौका छोडिा िही्चाहते. भारतीय जिता पाट्​्ी िे कांगस ्े के कुछ नवधायको् को तोड कर उिकी सरकर को नगरािे की कोनशश की थी. इस कोनशश मे् वह सरकार सिल भी हो गयी थी लेनकि अदालत िे हरीश रावत को ि नसि्फराहत दी और उिकी सरकार को निर से बहाल नकया बब्लक कांगस ्े से बगावत करिे वाले नवधायको् की नवधायकी भी खत्म कर डाली. जानहर है नक रावत इसे भूल िही्पाये है्और अब जबनक प्द् श े मे्अगले साल चुिाव होिे वाले है्तो रावत केद् ्सरकार से दो-दो हाथ करिे के मूड मे्है.् रावत सरकार अब केद् ्की बहुपच ् ानरत गंगा के पािी की नबक्​्ी पर चुगं ी वसूलिे की तैयारी कर रही है. रावत सरकार का माि​िा है नक पािी 24 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

उत्र् ाखंड का है और उसे केद् ्सरकार बेच रही है तो उसमे्उसका भी नहस्सा होिा चानहए. केद् ् सरकार िे कुछ महीिे पहले ही गंगा जल को बेचिे की योजिा पर अमल करिा शुर् नकया है. इसे देखते हुए उत्र् ाखंड सरकार एक ियी िीनत बिािे जा रही है नजसके मुतानबक गंगा जल के व्यावसानयक इस्म्े ाल पर वह रायल्टी वसूल करेगी. इस ियी िीनत का मसौदा अभी तैयार नकया जा रहा है. इसके मुतानबक भारतीय डाक नवभाग द्​्ारा गंगा जल के र्प मे्बेचे जािे या निर नबजली उत्पादि के नलए जलनवद्त्ु पनरयोजिाओ्मे्इस्म्े ाल होिे वाले गंगा के पािी पर राज्य का हक है और इस पािी का व्यावसानयक इस्म्े ाल होिे पर वह अपिे नहस्से की रायल्टी वसूल कर सकती है. रावत सरकार िे इसे लेकर सारा जोड-घटाव कर रखा है. सरकार का अिुमाि है नक पनवत्​् गंगा जल के हर लीटर पर वह अस्सी पैसे भी वसूलती है तो उसके खजािे मे् सालािा करीब दो सौ करोड र्पये की रकम आयेगी. गंगोत्​्ी और ऋ नरकेश से निकलिे वाली गंगा िदी के पािी को लेकर नकस तरह से रायल्टी ली जाए, इसे लकर माथापच्​्ी चल रही है. अनधकानरयो् के मुतानबक नबजली कंपनियो् के पािी के इस्म्े ाल के साथ-साथ केद् ्सरकार की गंगा जल नबक्​्ी की योजिा को ध्याि मे्रख कर ियी िीनत बिािे का काम चल रहा है. नवभागीय अनधकानरयो् को कहा गया है नक वे इसे लेकर एक मसौदा तैयार करे.् राज्य सरकार के एक वनरष्​् अनधकारी िे कहा नक गंगा के पािी से

नबजली बिािे वाली जल नवद्त्ु कंपनियो्से भी पैसे वसूले जायेग् े क्यो्नक उत्र् ी न्​्गड के जनरए यहां बिायी जािे वाली नबजली की बडी खपत दूसरे राज्यो्मे्की जाती है. केद् ्सरकार िे कुछ महीिे से देश भर के पोस्ट आनिसो् के जनरए उत्र् ाखंड के गंगा जल को बेचिे की शुरआ ् त की है. कहा जा रहा है नक इसे लेकर लोगो्मे्कािी उत्साह है. गंगा का जल नहंदू रीनत-नरवाजो् मे् इस्म्े ाल होता है और इसी वजह से इसकी मांग बढी है. सूत्ो् का कहिा है नक नजस िीनत पर उत्र् ाखंड सरकार काम कर रही है, उसे अंनतम र्प देिे का काम नसंचाई सनचव आिंद व्द ् िर् के नजम्मे है. सूत्ो् के मुतानबक राज्य शासि दूसरे राज्यो् मे् इस तरह वसूली जा रही ‘चुगं ी’ की समीक्​्ा भी कर रही है. भाजपा िेताओ् का माि​िा है नक सरकार ऐसा कर लोगो् की धान्मक र भाविाओ् से नखलवाड करिा चाह रही है. भाजपा इस तरह के नकसी भी रायल्टी का नवरोध करेगी. दूसरी तरि नवशेरज्​्भी इस मुद्ेपर बंटे हुए है.् जािकारो्का माि​िा है नक प्द् श े सरकार इस तरह का कोई कािूि िही्बिा सकती. भारतीय खि​ि ऐक्ट और माइनिंग व नमिरल ऐक्ट के मुतानबक रायल्टी नसि्फखनिज संपदा से वसूली जा सकती है्और पािी खनिज संपदा िही् है. जानहर है नक उत्र् ाखंड सरकार को अपिी योजिा लागू करिे के नलए कािी मशक्त् करिी पडेगी. भाजपा के जो तेवर है्वह उसे ज्यादा परेशािी मे्डाल सकते है्लेनकि रावत सरकार केद् ्और भाजपा से दोn दो हाथ करिे को मुसद्ै है.


उत्​्र प्​्देश

दो फाड़्की ओर बढ्ती समािवादी पाट्​्ी मे्अजखलेश यादव अभी एक और बािी खेलने िा रहे है्और जफर वे नया रास्​्ा चुनग े् .े सखवता वमंा​ा

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माजवादी पाट्​्ी अब दोिाड्की तरि बढ् रही है. आगामी िौ अक्टूबर को अनखलेश यादव िे युवा समाजवादी समागम बुलाया है जो जिेश्र नमश्​् ट्​्स्ट के दफ्तर सात बंदनरया बाग मे् होगा. यह अनखलेश यादव की राजिीनत का िया नठकािा है. यही् से अनखलेश यादव की राजिैनतक गनतनवनधयां शुर्हो्गी. शुर्आत समाजवादी युवा समागम से हो रही है नजसमे् उि िौजवाि िेताओ् का जमावड्ा होगा नजन्हे्समाजवादी पाट्​्ी िे बाहर का रास्​्ा नदखा नदया है. इससे पहले अनखलेश यादव मुलायम नसंह का घर छोड् अपिे नलए आवंनटत चार नवक्​्मानदत्य माग्र पर नशफ्ट करिे की तैयारी मे् है्. यह दोिो् कदम समाजवादी पाट्​्ी की भावी राजिीनत के नलहाज से निण्ारयक मािे जा रहे है्. जिेश्र नमश्​्ट्​्स्ट को अनखलेश यादव की राजिीनत का के्द् बिाया जा रहा है. इस ट्​्स्ट के अध्यक्​् खुद मुख्यमंत्ी अनखलेश यादव है. ट्​्स्ट के उपाध्यक्​् कैनबिेट मंत्ी और समाजवादी पाट्​्ी के प्​्वक्ता राजे्द् चौधरी इस ट्​्स्ट के मुख्य कत्ारधत्ार हो्गे. गौरतलब है नक राजे्द् चौधरी मुख्यमंत्ी अनखलेश यादव को पाट्​्ी के प्​्देश अध्यक्​्पद से हटाये जािे के बाद से ही समाजवादी पाट्​्ी मुख्यालय जािा बंद कर चुके है्. अब वे जिेश्र नमश्​्ट्​्स्ट के दफ्तर मे्नियनमत बैठे्गे. दरअसल यह दफ्तर अनखलेश यादव का चुिावी वार र्म होगा. यही्पर उिकी ब्​्ांनडंग से संबंनधत गनतनवनधयां संचानलत हो्गी. आनडयो, वीनडयो से लेकर बैिर पोस्टर तक यही्तय हो्गे. यह अनखलेश यादव की चुिावी राजिीनत के नलहाज से सबसे महत्वपूण्र के्द् बि​िे जा रहा है.इस बीच मुलायम नसंह िे बीचबचाव की कवायद शुर् कर दी है .वे प्​्यास कर रहे है नक दोिो् खेमो मे् तालमेल बि जाए . उि युवा िेताओ का निष्कासि भी रद्​्नकया जा सकता है जो नशवपाल के अध्यक्​् बिाये जािे के नखलाि है्. दरअसल अनखलेश यादव िे पाट्​्ी पर नशवपाल यादव और अमर नसंह के बढ्ते वच्रस्व को देखते हुए अलग राह पर चलिे का िैसला नकया है. नशवपाल यादव के हाल के

अवखलेश यािव: समाजवािी समागम की ओर

अलग राि पर अकिलेश ? कई िैसलो् से वे िाखुश है् पर उिसे उलझिे की बजाय और बड्ी लकीर खी्चिे का िैसला अनखलेश यादव िे नकया है. हाल ही मे् पूव्ा​ा्चल के बाहुबली अमरमनण न्​्तपाठी जो मधुनमता हत्याकांड की सजा काट रहे है्, उिके पुत् अमि मनण को दोबारा नटकट देिे का िैसला इसकी बािगी है. दोबारा पर सवाल इसनलए क्यो्नक अब अमिमनण पर अपिी बीबी की हत्या का आरोप है. नपछले पांच साल मे्जघन्य अपराध मे्शानमल लोगो्से पाट्​्ी के शीर्र िेतृत्व िे जो दूरी बिािे की रणिीनत बिायी थी उसे पाट्​्ी मे् हुए बदलाव के बाद ताक पर रख नदया गया है. मािा जा रहा है नक देर सबेर पूव्ा​ा्ंचल के दूसरे बाहुबली मुख्तार अंसारी भी समाजवादी पाट्​्ी से जुड्सकते है्. ऐसे मे् अनखलेश यादव पर समाजवादी पाट्​्ी के युवा काय्रकत्ारओ्का दबाव बढ्ता जा रहा है. इि िौजवाि काय्रकत्ारओ् का साफ् कहिा है नक दागी लोगो् के साथ राजिीनत करिे से बेहतर है अनखलेश यादव िया रास्​्ा बिाये्.लखिऊ के काय्रकत्ार सुिील नसंह िे कहा नक अनखलेश यादव िे नपछले करीब साढ्े चार साल मे्नवकास के काम का िया नरकाड्र बिाया है. मेट्ो से लेकर गांव-गांव मे् समाजवादी स्वास्थ्य सेवा जैसे कई उदाहरण

है्. पहली बार प्​्देश मे् हजारो् तालाब पािी से भर गये तो िनदयो् की सिाई का काम शुर् हुआ. यह सब उत्​्र प्​्देश की राजिीनत का िया आयाम है. वे दगे हुए कारतूसो् को छोड् िया दल बिाये्. कोई ताकत उन्हे् सत्​्ा मे् आिे से िही रोक सकती. इस नटपण्णी से पाट्​्ी के अंदर्िी हालात को समझा जा सकता है. दरअसल पाट्​्ी मे् एक बड्ा तबका ठेका पट्​्ी वाला है. तो दूसरी तरि सड्क के बड्े ठेको् को लेकर राष्​्ीय स्​्र पर खेमेबंदी चल रही है. इसमे्िौकरशाह से लेकर िेता तक शानमल है्. इसी नववाद के चलते अनखलेश यादव के पाट्​्ी गठि के अनधकार मे्कतरल्यो्त की गयी थी. पर पाट्​्ी का िौजवाि खेमा अनखलेश यादव के साथ खड्ा हो गया और दागी नकस्म के लोग दूसरे खेमे मे् चले गये. अब पाट्​्ी के बहुत से िैसलो् से आहत अनखलेश यादव अपिा िया रास्​्ा बिा रहे है्. पाट्​्ी मे् अपिे समथ्रको् के नटकट काटे जािे पर अनखलेश यादव िे कहा, 'जीतता तो वही है नजसके पास ज्यादा ट्​्ंप काड्रहो्.' साफ्है, अनखलेश यादव अभी एक बाजी और खेले्गे निर दूसरा रास्​्ा n तैयार होगा. शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 25


मध्य प्​्देश

िावो्से परे भूख की हक्ीक्त

पूजा खसंह

म

ध्य प्​्देश का श्योपुर नजला नितांत िकारात्मक वजहो्से सुन्खरयो्मे्है. बीते कुछ महीिो् के दौराि नजले मे् 20 से अनधक बच्​्ो्की कुपोरण से मौत की खबर मीनडया मे् आिे के बाद से हड्कंप मचा हुआ है. सरकार िे पहले तो मौतो् की वजह मौसमी बीमानरयो् को बताते हुए मामले को टालिे की कोनशश की लेनकि आनखरकार उसे यह स्वीकार करिा पड्ा नक ये मौत कुपोरण से संबंनधत है. सरकार िे इस नवरय पर श्​्ेत पत्​् लािे की घोरणा भी की है. मध्य प्​्देश नपछले चार सालो् से लगातार बेहतर कृनर उत्पादि के नलए कृनर कम्रण अवाड्र हानसल करता आया है. प्​्देश के मुख्यमंत्ी नशवराज नसंह चौहाि अक्सर अपिे

26 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

श्योपुर समेत कई जिलो्मे् कुपोरण से होने वाली मौते्इन जदनो्सुज्खषयो्मे्है्. राज्य सरकार ने ना-नुकुर के बाद मौतो्की पुज्ि तो कर दी है, लेजकन हालात ठीक करने मे् उसकी र्जच नही्है.

श्योपुर मे्कुपोषण से पीव्डत बच्​्ेऔर माएं: बचे रहे वकसी तरह भारणो् मे् कृनर को लाभ का धंधा बिािे और सरकार इि मौतो्को िकारिे की कोनशश 24 िीसदी से ऊपर की कृनर नवकास दर का कर रही है. सरकार िे आंकड्ेपेश करके कहा बखाि करते रहते है्. ऐसे मे् जब यह खबर नक मरिे वाले बच्​्ो् मे् कई की उम्​् एक दो आयी नक मध्य प्​्देश कुपोरण के मामले मे्भी नदि से लेकर छह माह तक थी. इि मौतो् को अन्य राज्यो् से आगे है तो हर कोई हैराि रह कुपोरण जनित िही् कहा जा सकता है. कहा गया. यह गया नक ये मौते् कुपोरण से िही् बब्लक सरकार की मािे् तो सरकारी गोदाम मौसमी बीमानरयो् की वजह से हुई है्. मीनडया खाद्​्ान्ि से अटे पड्े है् ऐसे मे् वह कौि सा मे्लगातार आ रही खबरो्के बीच आनखरकार कुप्बंधि है नजसके चलते कुपोरण से मौते्हो सरकार दबाव मे् आयी और उसिे मािा नक रही है्, सरकार के पास इस प्​्श्ि का कोई कुपोरण से अिेक मौत हुई है्. इस बीच जवाब िही् है. ताजा जािकारी के मुतानबक मािवानधकार आयोग िे इि मौतो्के मामले मे् बीते पांच महीिो्मे्116 बच्​्ेकुपोरण से जाि राज्य सरकार को िोनटस भेजकर चार सप्ताह गंवा चुके है्. इिमे् से 62 मौते्, बड्ोदा, 31 के भीतर उत्​्र देिे को कहा है. नवजयपुर और 23 करावल गांव मे्हुई्. आि​ि सरकार िे इस नवरय पर श्​्ेतपत्​्लािे की िाि​ि मे् तीि पोरण एवं पुिव्ारस के्द्ो् की घोरणा भी की है. सरकार का कहिा है नक इस स्थापिा की गयी. इि के्द्ो्पर इतिी भीड्लग श्​्ेतपत्​् मे् कुपोरण से जंग को लेकर प्​्भावी काय्रयोजिा नवस्​्ृत िंग से प्​्स्ुत की जायेगी. रही है नक उसे संभालिा मुब्शकल हो चला है.


स्वास्थ्य नवभाग की प्​्मुख सनचव गौरी नसंह का कहिा है नक कुपोरण पर नकसी एक वजह की जवाबदेही तय करिे से अनधक जर्री है नक बच्​्ो् की सेहत, उिकी आन्थरक ब्सथनत, स्वास्थ्य आनद का समग्​्अध्ययि नकया जाये. उधर सरकार की इस घोरणा पर कांग्ेस का कहिा है नक करोड्ो् र्पये खच्र करिे के बाद भी अगर सरकार बच्​्ो् को कुपोरण से िही् बचा पा रही है तो जानहर है यह धि भ्​्ि्ाचार की भे्ट चढ्रहा है. प्​्देश कांग्ेस अध्यक्​्अर्ण यादव का कहिा है नक सरकार हर वर्र 22 अरब र्पये की रानश खच्र करके भी बच्​्ो् को कुपोरण से मरिे से िही् बचा पा रही है. ऐसे मे्आनखर नकसे जवाबदेह मािा जाये? अकेले श्योपुर नजले के एक गांव गोलीपुरा मे् बीते छह माह मे् कुपोरण से 12 बच्​्ो् की मौत हुई है. राज्य के लोक स्वास्थ्य एवं पनरवार कल्याण मंत्ी र्स्म नसंह िे स्वीकार नकया नक माच्र से अगस्​् के बीच इस गांव मे् 12 बच्​्ो् की मौत हुई है. हालांनक उन्हो्िे यह भी कहा नक इि बच्​्ो्के पनरजि अगर समय पर इलाज कराते तो शायद उिकी जाि बच जाती. यूनिसेि िे हाल ही मे्सहस्​्ाल्दी नवकास लक्​्य के तहत मध्य प्​्देश की ब्सथनत का नवश्लेरण जारी नकया है. इस नरपोट्रके आंकड्े बहुत चौ्कािे वाले है्. नरपोट्रके मुतानबक प्​्देश मे्हर तीसरा बच्​्ा अल्प पोनरत है और लगभग 40 प्​्नतशत बच्​्ेअनतकुपोनरत है्. यह आंकड्ा देश की 29.4 िीसदी की औसत कुपोरण दर से बहुत ज्यादा है. अिुसूनचत जिजानत मे् तो यह आंकड्ा और भी ज्यादा है. उल्लेखिीय है नक देश मे्सबसे अनधक आनदवासी मध्य प्​्देश मे्ही है्. यह सवाल उठता है नक आनखर सरकार कुपोरण से निपटिे के लगातार दावे कर रही है निर भी जमीिी स्​्र पर तस्वीर इतिी बुरी क्यो्है? पोरणनवज्​्ािी डा. अनमता नसंह कहती है्, मध्य प्​्देश अपिे सोयाबीि उत्पादि के नलए देश भर मे् जािा जाता है. सोयाबीि मे् भरपूर प्​्ोटीि होता है. लेनकि इसके बावजूद यह लोगो् को कुपोरण से निजात क्यो् िही् नदला पा रहा है? दरअसल सोयाबीि की पूरी खेती तेल उत्पादि के नलहाज से की जा रही है. यही वजह है नक सोयाबीि हमारे भोजि का नहस्सा िही् बि पा रहा है. अगर उसे खािे मे् शानमल नकया जाये तो प्​्ोटीि की समस्या बहुत हद तक दूर की जा सकती है. नशशु मृत्यु दर भी लंबे समय से प्​्देश के नलए नचंता का नवरय बिा हुआ है. िेशिल सै्पल रनजस्ट्ेशि नसस्टम की ताजा नरपोट्र के मुतानबक मध्य प्​्देश की हालत नशशु मृत्युदर के मामले मे् देश मे् सबसे दयिीय है्. हमारे यहां प्​्नत एक हजार जन्म लेिे वाले बच्​्ो् मे्

से 52 की मौत हो जाती है. हालांनक यह आंकड्ा नपछले साल के 54 के स्​्र से कम है लेनकि निर भी मध्य प्​्देश इस मामले मे् अव्वल बिा हुआ है. मध्य प्​्देश मे् बढ्ते कृनर उत्पादि को अक्सर राज्य सरकार मेडल के तौर पर पेश करती है. हकीकत यह है नक वर्र 2005-06 से 2014-15 के बीच प्​्देश मे् खेती का कुल रकबा तकरीबि 20 हजार हेक्टेयर से बढ्कर 23.5 हजार हेक्टेयर हो गया. नसंनचत क्​्ेत् भी 5.8 हजार हेक्टेयर से बढ्कर 90 हजार हेक्टेयर हो गया. इस अवनध मे् खाद्​्ान्ि उत्पादि मे् भी जबरदस्​् इजािा हुआ. प्​्देश की कुल उपज 143 लाख टि से बढ्कर 276 लाख टि हो गयी यािी करीब दोगुिी. लेनकि कुपोषण से ग्​्स्एक बच्​्ा: सरकार से गुहार

वशवराज वसंह चौहान: मानने की मजबूरी

इस बीच नचंता की बात यह थी नक प्​्देश के ग्​्ामीण इलाको् मे् प्​्नत व्यब्कत कैलरी उपभोग करीब 2500 कैलरी प्​्नतनदि से घटकर 2100 कैलरी पर आ गया. इि तथ्यो् से समझा जा सकता है नक प्​्देश मे्कुपोरण की जमीि नकस तरह तैयार हुई. मध्य प्​्देश मे् कुपोरण की जमीि मनहलाओ् की गभ्ारवस्था मे् ही तैयार हो जाती है. उस दौराि मनहलाये्पय्ारप्त प्​्ोटीि, आयरि व अन्य पोरक तत्वो्से वंनचत रहती है्नजसका असर गभ्र मे् नशशु नवकास पर पड्ता है. बच्​्े सामान्य से कम वजि के साथ पैदा होते है्. उिकी असमय मृत्यु की आशंका भी ज्यादा रहती है. सबसे पहले 1992-93 के राष्​्ीय पनरवार स्वास्थ्य सव्​्ेक्ण से यह बात सामिे आयी नक मध्य प्​्देश मे्57 िीसदी बच्​्ेकम वजि और 22 िीसदी बच्​्े अत्यनधक कम वजि के है्. इसके बाद वाले सव्​्ेसे पता चला नक राज्य मे् कम वजि के बच्​्े 55 प्​्नतशत रह गये है्. तब तक उदारवाद का साया इतिा िही्गहराया था, इसनलए कम वजि के बच्​्ो् की संख्या कुछ घटी. लेनकि वर्र 2005-06 तक एक बार निर मध्यप्​्देश मे्कम वजि के बच्​्ो् की संख्या बढकर 60 प्​्नतशत हो गयी. इसके बाद सरकार कृनर उत्पादि के अवाड्र बटोरती रही जबनक कुपोरण की हालत नदिबनदि नबगड्ती गयी. कुपोरण वह नजन्ि है जो रह-रहकर बोलत से बाहर निकलता रहता है. कुपोरण के नलए बच्​्ो् को बेहतर पौन्​्िक भोजि ि नमल पािा नजम्मेदार है. नपछले वर्र जब राज्य की आंगिबान्डयो् मे् बच्​्ो् को अंडे नखलािे का प्​्स्ाव रखा गया था तो प्​्भावशाली जैि समुदाय के तीखे नवरोध के कारण सरकार को यह प्​्स्ाव वापस लेिा पड्ा था. शाकाहार पर सरकार का यह जोर बच्​्ो् पर बहुत भारी पड् रहा है. प्​्देश सरकार अक्टूबर माह के दूसरे पखवाड्ेमे्ग्लोबल इन्वेस्टस्रसनमट का पांचवा संस्करण आयोनजत करवािे जा रही है. इि सनमट मे् देश-नवदेश के बड्े उद्​्ोगपनतयो् को यहां उद्​्ोग धंधे जमािे के नलए सस्​्ी जमीि, आसाि कर व्यवस्था समेत तमाम प्​्लोभि नदये जाते है्. नकसािो् के नहत का दम भरिे वाली सरकार िे देश के मजदूर-नकसािो्, बच्​्ो्-मनहलाओ् को पोरणयुक्त भोजि मुहैया करािे के नलए कभी कोई प्​्नतबद्​्ता नदखायी हो तो यह याद िही्आता. साव्रजनिक नवतरण प्​्णाली की खानमयो्, बुंदेलखंड के पलायि के बीच प्​्देश मे् कुपोरण की भयावह खबरो् िे संवेदिशील तबको्को झकझोर कर रख नदया है. देखिा होगा नक राज्य सरकार अब भी n चेतती है या िही्. शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 27


पश्​्िम बंग

जसंगुर मामले मे्सव्​्ोच्​् न्यायालय ने िमीन लौटाने का जनण्षय भले ही दे जदया है, लेजकन इससे समस्या हल नही्हो गयी है. कंक्ीट मे्तब्दील िमीन को दोबारा खेती लायक बनाने का सवाल मुंह बाये खड़्ा है. उमेश कुमार राय

बा

त करीब 10 साल पुरािी है. पन्​्िम बंगाल मे् िये उद्​्ोग धंधे लगिे बंद हो गये थे. पुरािे कल-कारखािो् मे् श्​्नमक असंतोर चरम पर था. वाम मोच्ार सरकार के लंबे और निरंकुश शासि से जिता त्​्स् थी. ऐसे माहौल मे् पन्ि ् म बंगाल के तत्कालीि मुख्यमंत्ी बुघ्घदेव भट्​्ïाचाय्र िे औद्​्ोनगक नवकास को तवज्​्ो देिी शुर्की. वाममोच्ार के शासिकाल मे् बंगाल को हुए औद्​्ोनगक िुकसाि की भरपाई के नलए उन्हो्िे नसंगुर मे् खेती योग्य जमीि को टाटा की िैिो िैक्टरी के नलए चुिा. रति टाटा िे 18 मई 2006 को घोरणा की नक वह हुगली नजले के नसंगुर मे् 997 एकड्जमीि पर लखटनकया कार िैक्ट्ी बिाये्गे. जैसा नक होता है, कुछ नकसािो् िे इस पनरयोजिा का नवरोध नकया. कई नकसाि अपिी बहुिसली जमीि देिे को तैयार िही् थे. वाम मोच्ार िाई दशक से राज्य पर शासि कर रहा था. उसमे् गुर्र स्वाभानवक था. नकसािो् के नवरोध से सरकार की त्योनरयां चढ् गयी् और उसिे बल प्​्योग कर जमीि हनथया ली. टाटा समूह िे भी आि​ि-िाि​ि मे् सोिा उगलिे वाली जमीि पर कंक्ीट बो नदया. यही्से नसंगुर नसयासी मंच मे् तल्दील हो गया. इस मंच पर अवतनरत हुई्तृणमूल कांगस ्े की अध्यक्​्ममता बिज्​्ी जो उस वक्त नसयासी जमीि तलाश रही थी्. नसंगुर िे उिको वह मुहैया कराया. वे सरकार के से िाराज नकसािो्के साथ खड्ी हो गयी्. उन्हो्िे जमीि देिे के अनिच्छुक नकसािो् की 400 एकड्जमीि वापस करिे की मांग पर भूख हड्ताल शुर्कर दी. देश के तमाम बड्े सामानजक काय्रकत्ार उिके साथ आ जुटे. नकसाि तो उिके साथ पहले ही थे. देखते ही देखते इस आंदोलि िे बहुत बड्ा र्प ग्​्हण कर नलया. आनखरकार तंग आकार टाटा समूह िे अपिी िैिो िैक्टरी गुजरात के साणंद मे्स्थािांतनरत कर दी. करीब 997 एकड्जमीि पर कंक्ीट के िांचे रह गये. 28 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

वसंगूर मे्नैनो के वलए जमीन: वकसानो्को वापस

ज्मीनी सवालो्का

इस घटिा िे ममता बिज्​्ी का कद बढ्ा नदया. सव्रहारा उन्हे् मसीहा माि​िे लगा. पनरणामस्वर्प 2011 के नवधािसभा चुिाव मे् वाम का नकला पूरी तरह िह गया. तृणमूल कांग्ेस को सरकार बिािे मे्कामयाबी नमली. नसंगुर के नकसािो्की जमीि वापस नदलािे के वादे को पूरा करिे के नलए बिज्​्ी िे 22 जूि 2012 को लै्ड नरहैनबनलटेशि ऐ्ड डेवलपमे्ट एक्ट, 2011 पेश नकया. इसके तहत राज्य सरकार को यह अनधकार था नक वह 997 एकड्जमीि अपिे कल्जे मे्ले सके. टाटा समूह िे इसका नवरोध नकया. तृणमूल सरकार और टाटा समूह की रस्साकशी कलकत्​्ा हाईकोट्र पहुंची. वहां से यह मामला सुप्ीम कोट्रकी चौखट पर जा पहुंचा. सुप्ीम कोट्र िे 31 अगस्​् के अपिे िैसले मे् कहा, 'जमीि अनधग्​्हण अनधनियम, 1894 का उल्लंघि कर 997 एकड् जमीि नकसािो् से ली गयी थी.' सुप्ीम कोट्रिे 12 सप्ताह के भीतर नकसािो्की जमीि वापस करिे का आदेश नदया. इस आदेश मािते हुए नपछले नदिो् ममता बिज्​्ी िे नसंगुर मे् एक जिसभा आयोनजत कर सभी 9117 नकसािो्को उिकी जमीि के मानलकािे से जुड्े दस्​्ावेज

सौ्पे. तृणमूल सरकार नकसािो् को 10-10 हजार र्पये भी देगी तानक वे जमीि को दोबारा उपजाऊ बिा सके्. जिसभा मे् सबसे पहले 80 वरीज्​्य मुकुंदराम चक्​्वत्​्ी को जमीि के मानलकािे से जुड्े दस्​्ावेज और 78 हजार र्पये का चेक नदया गया. चक्​्वत्​्ी उि नकसािो्मे्थे नजन्हो्िे जमीि देिे से इिकार कर नदया था. दस्​्ावेज और चेक लेिे के बाद चक्व् त्​्ी िे कहा, 'जमीि तो नमल गयी लेनकि मेरा बेटा इस जमीि पर खेती करिे िही्आयेगा क्यो्नक वह रोजगार के नलये कािी पहले ही दूसरे राज्य मे्पलायि कर चुका है.' टाटा की िैिो िैक्टरी के नलए अपिी इच्छा से या मजबूर होकर जमीि देिे वाले कमोबेश सभी नकसािो्की हालत अभी चक्व् त्​्ी जैसी ही है. नजन्हो्िे अपिी इच्छा से जमीि दे दी थी, उन्हे् लगता था नक िैक्टरी बिेगी तो उिके बेटो्-बेनटयो् को िौकरी नमलेगी नजससे उिकी दनरद्​्ता दूर हो जायेगी. इस उम्मीद मे्मुआवजे की रकम उन्हो्िे दो वक्त दस्र् खाि नबछािे पर खच्रकर दी. अब उिके हाथ खाली है्. उिकी संतािे् दो जूि की रोटी के नलये देश की राजधािी नदल्ली और अन्य शहरो् मे् जा चुकी


वसंगुर

है्. सुप्ीम कोट्र के िैसले से उन्हे् जमीि तो वापस नमल जायेगी लेनकि कंक्ीट के जंगल से पटी जमीि पर वे क्या बोये्गे, यह बड्ा सवाल है उिके सामिे. वैसे कोट्र के िैसले से अनिच्छुक नकसािो् को राहत जर्र नमली है क्यो्नक वे शुर्से चाहते थे नक उिकी जमीि ि ममता बनज्​्ी: सवालो्की जमीन

ली जाये. मगर सवाल तो उिके सामिे भी यही है नक वे उस जमीि का क्या करे्गे. इि नकसािो् की आंखो् मे् अपिे भनवष्य को लेकर अनि​ि्​्यता साि देखी जा सकती है. नवशेरज्​्ो् का कहिा है नक नपछले 10 वर्​्ो्से उक्त जमीि पर कंक्ीट के जंगल उगे हुए है्. कंक्ीट के जंगल उखाड्कर जमीि को निर से उपजाऊ बिािा आसाि िही्है. नवधािचंद्कृनर नवश्न्वद्​्ालय के प्​्ोिेसर डॉ. एस. के. पॉल कहते है,् 'नजस जमीि पर 10 सालो् से कंक्ीट नबछा है, उस जमीि को निर से कृनर योग्य बिािे के नलये नमट्​्ी से ई्ट, बालू, सीमे्ट हटािा होगा, जो बहुत मुब्शकल काम होगा.' वह कहते है,् 'जमीि पर कृनर तभी संभव है जब वहां की नमट्​्ी हटाकर उस जगह दूसरी नमट्​्ी डाली जायेगी.' नसंगुर की उक्त जमीि पर उगिे वाली िसले्नमट्​्ी के छह इंच िीचे से भोजि लेती है्. प्​्ोिेसर डॉ. पॉल के मुतानबक अगर जमीि से कंक्ीट हटाकर उसपर उपजाऊ नमट्​्ी की छह इंच मोटी परत नबछा दी जाये तो नकसािी की जा सकती है लेनकि इस पूरी प्​्न्कया मे्मोटी रकम खच्र होगी और इसमे् बहुत वक्त लगेगा. यह व्यावहानरक भी िही्होगा. अलबत्​्ा नजस जमीि पर कोई निम्ारण िही् हुआ है लेनकि वह टाटा समूह के कल्जे मे्थी, उसमे्खेती जा सकती है लेनकि इसके नलए भी एक साल इंतजार करिा होगा. प्​्ो. पॉल की मािे्तो उस जमीि पर ऐसी झानडय़ां उग आयी हो्गी नजसिे नमट्​्ी की उव्ररा शब्कत छीि ली होगी. इि झानडय़ो् को निम्रूल करिे मे्कम से कम एक साल का वक्त लगेगा. नसंगरु मामले से तृणमूल कांगस ्े को िायदा हुआ है लेनकि राजिीनतक पय्रवेक्क मािते है् नक इसका दूरगामी पनरणाम िुकसािदेह होगा. राजिीनतक नवश्लेरक प्​्ो. अनिल कुमार जािा बुद्िेव भट्​्ाचाय्ा: कॉमरेड की चूक

बताते है्, 'तृणमूल कांग्ेस को तात्कानलक लाभ जर्र नमला है लेनकि इसका दीघ्रकानलक पनरणाम तृणमूल कांग्ेस के नखलाि जायेगा. इस पूरे मामले से राज्य मे् औद्​्ोनगकरण की प्​्न्कया और सुस् हो जायेगी नजससे राज्य को िुकसाि होगा.' प्​्ो. जािा कहते है्, 'नसंगुर मामले का सबसे बड्ा असर यह होगा नक अब राज्य की दूसरी जगहो्पर िैक्टनरयां बिािे की जो योजिाये् है् उिके नवरोध मे् आवाजे् तेज हो्गी नजस कारण कंपनियां निवेश करिे से पीछे हट जाये्गी.' इसके संकेत अभी से नदखिे लगे है्. नसंगुर पर सुप्ीम कोट्रका िैसला आते ही उत्र् चौबीस परगिा नजले के राजारहाट के नकसािो् िे पूववत्​्ी सरकार द्​्ारा अनधगृनहत जमीि वापस करिे की मांग की है. उन्हो्िे इसके नखलाि आंदोलि भी शुर्कर नदया है. राजारहाट जमीि बचाओ कमेटी के समन्वयक शेख निजामुद्ीि िे कहा, 'वर्र 1996 से वाममोच्ार सरकार िे जमीि अनधग्​्हण नकया था. कुल 2700 एकड् जमीि ली गयी थी नजसमे्से 20 प्न्तशत जमीि पर मकाि बिाये गये. बाकी भूनम यो्ही पड्ी हुई है. हम चाहते है्नक हमे्भी हमारी जमीि वापस कर दी जाये.' ममता बिज्​्ी जिसभाओ् मे् खुले तौर पर कहती है्नक सरकार के पास लै्ड बै्क है जहां से सरकार कल-कारखािो्के नलये जर्रत के अिुसार जमीि दे सकती है्लेनकि सच यह है नक ये जमीि उि जगहो् पर है् जहां बुनियादी िांचे का अभाव है. प्​्ो. जािा कहते है,् 'कंपनियां भला उि जगहो् पर उपक्​्म क्यो् लगाये्गी जो महािगर कोलकाता से बहुत दूर हो और जहां राजमाग्,र रेल संपक्फऔर िजदीक मे्हवाईअड्​्ा ि हो?' लंबे समय तक भारतीय कम्युनिस्ट पाटीज्​् (माक्​्सवादी) मे् रहे पन्​्िम बंगाल के कारोबारी नशनशर बाजोनरया कहते है्, 'वाममोच्ार सरकार का इरादा िेक था लेनकि बुद्देव बाबू िे थोड्ी जल्दबाजी कर दी.' बाजोनरया भी मािते है् नक नसंगुर प्​्करण से राज्य को िुकसाि होगा. नसंगुर मामले के हर पहलू को देखते हुए िोबेल पुरस्कार प्​्ाप्त अथ्श र ास्​्ी अमत्यर्सेि का वर्र 2008 का वक्तव्य याद आता है नजसमे् उन्हो्िे कहा था, 'अगर टाटा की िैिो िैक्टरी पन्​्िम बंगाल से बाहर चली जाती है तो कोई भी उद्​्ोगपनत यहां निवेश करिे िही् आयेगा. कृनर से ही समस्या का हल िही् होगा. हमे् उद्​्ोग की भी जर्रत है और मै् सरकार (तत्कालीि वाममोच्ार सरकार) का समथ्रि करता हूं.' पन्​्िम बंगाल के मौजूदा हुक्मराि को यह सब समझिे मे् देर लगेगी क्यो्नक वह अभी अपिी पीठ थपथपािे मे्व्यस्​्है. n शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 29


मास् कर्टा​ाटहेकड

एि िावेरी िई भंवर

सव्​्ोच्​्न्यायालय के दरवािे तक िाने के बाविूद कावेरी िल जववाद का कोई सव्षमान्य रािनीजतक हल जनकट भजवष्य मे्निर नही्आ रहा है. इसके जलए दोनो्राज्यो्का आपसी सहयोग और नीजतगत बदलाव आवश्यक है्. मनोरमा

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वेरी का उबाल महीिा भर बीत जािे के बाद भी शांत िही्हो रहा है. कि्ाटर क के मुखय् मंत्ी नसद्​्ारमैया इि नदिो् दोधारी तलवार पर चल रहे है्, एक ओर जिता, नकसािो् की भाविाओ्की अिदेखी िही्कर सकते तो दूसरी ओर सुप्ीम कोट्रके आदेश की अवहेलिा करिा अवमाि​िा का मामला बि जायेगा. सामान्य मॉिसूि वाले वर्​्ो्मे्कावेरी के पािी का बंटवारा कभी मुदृा िही् बिता, ऐसा तभी होता है जब मॉिसूि सामान्य से कम होता है. कावेरी बेनसि मे् चार जलाशय है्. कृष्णराजसागर, कानबिी, हेमावती और हेरांगी. नपछले साल इि सबको नमलाकर कुल 59.95 टीएमसीिीट पािी था लेनकि इस साल अभी तक केवल 31.58 टीएमसीिीट पािी ही जमा हो पाया है. साथ ही कावेरी के सबसे मुखय् जलसंगह् क्त्े ्कोदगू मे्इस साल सामान्य से 35 प्न्तशत कम बानरश हुई है. जबनक कुग,र् मैसरू , मांड्ा नजलो्मे्खेती के नलए कावेरी का पािी जर्री है और बंगलूर्समेत कई छोटे शहरो्के पेयजल का स्​्ोत भी कावेरी ही है. संकट को मुखय् मंत्ी के नपछले बयाि से भी समझा जा सकता है जब उन्हो्िे साि कर नदया था नक उिके पास केवल अगले एक से डेढ्महीिे तक का ही पािी है, निर आगे नसंचाई के अलावा बंगलूर् जैसी आबादी वाले शहर को पेय जल की आपून्तर कैसे हो पायेगी? कावेरी जलनववाद पर 30 नसतंबर को प्ध् ािमंत्ी िरेद् ्मोदी िे भी एक बैठक की लेनकि वो भी बेितीजा रही. इससे पहले केन्द्ीय जल संसाधि मंत्ी उमा भारती िे कि्ारटक के मुखय् मंत्ी और तनमलिाडु के पीडल्लय् ड ू ी मंत्ी 30 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

इदाप्पडी के पलािीस्वामी के साथ एक बैठक की थी वो भी असिल रही. इसमे् तनमलिाडु िे कि्ाटर क के इस प्स ् ्ाव को नसरे से खानरज कर नदया नक पािी की उपलल्धता जांचिे के नलए पहले एक नवशेरज्​्सनमनत कावेरी बेनसि मे्भेजा जािा चानहये. उमा भारती को भी कहिा पड्ा नक अदालत से बाहर इस मसले का कोई हल िही् निकल पाया है. लेनकि दोिो् राज्यो् मे् रोज— रोज के तिाव को देखते हुए उन्हो्िे उपाय के तौर पर ये चेताविी दी है नक अब मामला शांत िही् हुआ तो वो दोिो् राज्यो् की सीमा पर अनिन्​्ितकालीि भूख हड्ताल पर बैठ जायेग् ी. कि्ाटर क निलहाल इस बात पर अड्ा है नक उच्त् म न्यायालय के आदेश के मुतानबक पािी छोड्िे से पहले एक केनद् ्ीय नवशेरज्​्सनमनत को कावेरी बेनसि मे् पािी की मात्​्ा का मूल्यांकि करिे भेजा जािा चानहये, पािी जारी करिे से पहले हमारे पास पीिे और िसल के नलए नकतिा

पािी है, ये सामिे आिा चानहये. इसके बाद केद् ्ीय नवशेरज्​्सनमनत का जो िैसला होगा हम उसे माि​िे को तैयार है.् दूसरी ओर तनमलिाडु सरकार कावेरी जल प्ब् धं ि आयोग के गठि को लेकर अड्ी हुई है. गौरतलब है नक इस संदभ्रमे् तनमलिाडु की यानचका पर 11 अक्टूबर को सुिवाई है. तनमलिाडु का ये भी आरोप है नक कावेरी जल नववाद न्​्टल्यिू ल िे 2007 के अपिे अंनतम िैसले मे् कि्ारटक को तनमलिाडु को सालािा 192 टीएमसी िीट पािी जारी करिे का निद्श ्े नदया था लेनकि आदेश का पालि केवल तभी हुआ है जब कि्ाटर क के बांधो्से अनतनरक्त जल निकासी की िौबत आयी है. तनमलिाडु की मुख्यमंत्ी जयलनलता िे नलनखत अिुरोध नकया नक के्द् सरकार सुनिन्​्ित करे नक कि्ाटर क उच्त् म न्यायालय के निद्​्ेश के मुतानबक तनमलिाडु को पािी दे साथ ही नपछला बकाया 76.042 टीएमसी िीट कावेरी मुद्े पर बंगलुर्मे्प्​्िश्ान: पानी की वसयासत


भी जल्दी जारी करे. जानहर है नपछले साल 40 साल के बाद के सबसे भयंकर सूखे और इस बार निर सूखे की चपेट मे् आिे और राज्य के 22 नजलो् को सूखा प्​्भानवत घोनरत करिे के बाद तनमलिाडु की कोई भी शत्रकि्ाटर क को स्वीकार िही्होगी. नसतंबर की शुरआ ् त से ही कावेरी के पािी के मसले पर कि्ाटर क का जि-जीवि और काम-काज लगातार प्भ् ानवत रहा है, उम्मीद थी नक 30 नसतंबर के िैसले से कि्ाटर क को कुछ राहत नमलेगी लेनकि सुप्ीम कोट्रिे कावेरी जल नववाद पर सुिवाई के दौराि उल्टे कि्ारटक सरकार को 27 नसतंबर का आदेश िही् माि​िे पर आड्े हाथो् नलया और एक से छह अक्टबू र तक तनमलिाडु को रोज 6000 क्यस ू क े पािी देिे का आदेश नदया. सुप्ीम कोट्रिे केद् ्सरकार से चार अक्टबू र तक कावेरी जल प्ब् धं ि आयोग गनठत करिे को भी कहा है और छह अक्टूबर को होिे वाली अगली सुिवाई मे् आयोग को कावेरी िदी के पािी और जमीिी हालातो्जुड्ेआंकड्ो्व तथ्यो् को पेश करिे को कहा है. कावेरी निगरािी कनमटी िे 19 नसतंबर को कि्ाटर क से कहा था नक वह 21 नसतंबर से 30 नसतंबर तक हर नदि 3000 क्यस ू क े पािी छोड्ेलेनकि सुप्ीम कोट्रिे 21 नसतंबर से 27 नसतंबर तक कि्ारटक को तनमलिाडु के नलए 6000 क्यस ू क े पािी छोड्िे का आदेश दे नदया. इसके जवाब मे् मुख्यमंत्ी नसद्​्ारमैया द्​्ारा बुलाई गयी सव्रदलीय बैठक और मंन्तपनररद की बैठक दोिो्मे्साथ ही बाद मे्राज्य नवधािमंडल के नवशेर सत्​्मे्भी सुप्ीम कोट्र के निद्​्ेश का पालि करिे के नखलाि सहमनत बिी. कोई भी िेता इस मसले पर अलग राय व्यक्त करिे का जोनखम िही्ले सकता, जेडीएस

कावेरी पर कृष्णराजसागर बांध: वकसका पानी वकसके वलए के 83 वर्​्ीय वनरष्​्िेता और पूवपर् ध् ािमंत्ी एच हुआ. मांड्ा, मैसरू और बंगलूर्मे्उग्​्प्द् श्िर डी देवगौड्ा अब भूख हड्ताल पर बैठ गये है् होिे लगे, राज्यभर मे्बंद, झड्प, आगजिी और जबनक शुर्आत मे् उन्हो्िे कहा था नक राज्य साव्ज र निक संपन्​्त के िुकसाि का काम लगातार सरकार को सुप्ीम कोट्रके निद्श ्े का पालि कर जारी हो गया, एक व्यब्कत की मौत हो गई और पािी जारी करिा चानहये लेनकि मांड्ा मैसरू मे् बंगलूर्के 16 थािो्मे्धारा 144 लगािा पड्ा, पकड्रखिे वाले उिके बेटे कुमारस्वामी िे ही तनमलिाडु के पंजीकरण संख्या वाली 40 से सबसे पहले उिके बयाि का नवरोध नकया और ज्यादा बसो्को आग लगा दी गयी. एसोचैम के अगले ही नदि देवगौड्ा पलट गये. कि्ारटक मुतानबक इस दौराि राज्य को 25 हजार करोड् भाजपा अध्यक्​्व पूवर्मुखय् मंत्ी बी एस येदरु प्पा से ज्यादा का िुकसाि हुआ. भी सुप्ीम कोट्रके एक से छह अक्टबू र तक रोज दोिो् राज्यो् की राजिीनत िे कावेरी को 6000 क्यस ू क े पािी जारी करिे के आदेश को भौगोनलक और प्​्ाकृनतक दायरे मे्समझिे और दुभ्ारग्यपूण्र और कि्ारटक के लोगो् के नखलाि उसी मुतानबक उसके प्ब् धं ि के बजाय उसे राज्य कह रहे है.् लेनकि सुप्ीम कोट्रका आदेश िही् की पहचाि और अब्समतामूलक राजिीनत से माि​िे पर आनखर नवकल्प क्या है? इस मसले जोड्नदया है. इसनलए तनमलिाडु की राजिीनत पर कि्ाटर क सरकार के वकील िली एस िरीमि मे्मुफत् टीवी, न्​्फज, नमक्सर, ग्​्ाइंडर बांटिे का भी स्पि्​् कर चुके है् नक वो न्यायालय की बजट है लेनकि 1974 मे्प्स ् ्ानवत 1000 करोड् काय्पर ण ् ाली का नहस्सा रहे है् इसनलए जािते है् की उस योजिा के नलए िही्नजससे लगभग 50 सरकार इस आदेश की अवहेलिा िही् कर टीएमसीिीट पािी की बचत हो सकती है. न्​्डप सकती. नसंचाई तकिीक मे्अग्ण ् ी देश इजरायल का भी यह नववाद 125 साल पुरािा है,लेनकि ताजा सुझाव है नक तनमलिाडु इस पद्न्त से कावेरी नववाद पांच नसतंबर को आये उच्त् म न्यायालय बेनसि मे्पािी की पचास प्न्तशत खपत कम कर के आदेश के बाद शुर् हुआ. पांच नसतंबर के सकता है. लेनकि नपछले 30 साल मे्िा तो कम िैसले मे्सुप्ीम कोट्रिे कि्ाटर क को तनमलिाडु नसंचाई की वैकब्लपक कृनर पर ध्याि नदया गया को 10 नदि तक 15,000 क्यस ू क े पािी देिे का िा ही, कावेरी बेनसि मे्वर्ाज र ल संगह् या अन्य आदेश नदया था. कि्ाटर क सरकार िे अदालत के वैनकल्पक तकिीकी पर. आदेश के बाद तनमलिाडु को 15,000 क्यस ू क े बहरहाल, नरपोट्र नलखे जािे तक भी पािी जारी करिा शुर्कर नदया था लेनकि साथ कि्ारटक सरकार मे् असमंजस की ब्सथनत ही सुप्ीम कोट्रसे अपिे िैसले को वापस लेिे बिी हुई है. वैसे नसद्​्ारमैया और कांग्ेस दोिो् की अपील की थी. नजस पर सुिवाई करते हुए को मालूम है नक कावेरी का पािी दे देिे से वो 12 नसतंबर को सुप्ीम कोट्रिे कि्ाटर क सरकार केवल िुकसाि मे्ही रहिे वाले है्िही्देिे पर को थोड्ी राहत दी और अपिे नपछले िैसले मे् राज्य को आिे वाले जलसंकट से उबारिे के सुधार करते हुए 20 नसतंबर तक रोजािा 12 साथ साथ वो खुद अपिी छनव और अपिी पाट्​्ी हजार क्यस ू क े पािी तनमलिाडु को देिे के आदेश को कावेरी से लगे इलाको् मे् जर्र उबारिे मे् n नदया. बावजूद इसके लोगो्का गुसस ् ा शांत िही् कामयाब हो्ग.े शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 31


उत्सव

मैसूर िशहरा: हाथी पर शाही सवारी

शाही दशहरे मे़ दमकता शहर मनोरमा

इ

ि नदिो्मैसूर के डॉ. डीएि िागराज अपिे खास मेहमािो् की देखभाल मे् व्यस्​् है्. मेहमािो्के खािपाि से लेकर कसरत, स्वास्थय् की जांच और मेहमािो् के नमजाज का ध्याि रखिा सब उिके ही निद्​्ेश पर होता है. अगस्​् के आनखरी सप्ताह मे्कि्ारटक के नवनभन्ि कै्पो् से मैसरू लाये गये ये खास मेहमाि मैसरू दशहरा उत्सव मे्भाग लेिे वाले 12 हाथी है्. ये दशहरा उत्सव मे् जंबो सवारी का प्​्मुख आकर्रण है्. नपछले 17 सालो् से जंबो सवारी मे् भाग लेिे वाले हानथयो्के डॉ. पशु नचनकत्सक डा. डी एि िागराज एक-एक हाथी को अपिे घर के बच्​्ो् की तरह जाि​िे लगे है्, एक-एक हाथी की पसंद-िापसंद और मूड सबका अंदाजा उन्हे्है. लेनकि इस बार उन्हे्थोड्ी सी नचंता जंबो सवारी के मुख्य हाथी अज्रुि को लेकर है. अज्रुि 750 नकलोग्​्ाम के सोिे के हौदे मे्देवी की मूनत् र लेकर 32 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

जुलूस का िेतृत्व करिेवाला है. अज्रुि के न्​्पय महावत दोदा मास्​्ी की इस वर्रअगस्​्मे्मौत हो गयी. अज्रुि मास्​्ी से बहुत घुला-नमला था इसनलए एक साल पहले नरटायर होिे के बाद भी मास्​्ी को अज्रुि का महावत रहिे नदया गया था. िागराज बताते है्नक जुलूस के मुख्य हाथी के नवकल्प के तौर पर तीि-चार हानथयो् को तैयार नकया जाता है, उन्हे् भी मुख्य हाथी की तरह अभ्यास कराया जाता है, इसनलए ऐि वक्त पर कोई नदक्त् पेश िही्आती. लेनकि वह यह भी याद नदलाते है् नक सि 1997 मे् अज्रुि िे अपिे महावत को जाि से मार नदया था इसनलए इसके बाद के कुछ सालो् तक उस पर दशहरा मे्भाग लेिे पर प्​्नतबंध रहा. लेनकि 2012 से एक बार निर अज्रुि ही जंबो सवारी का मुख्य हाथी बिकर चल रहा है. वैसे 5000 नकलो वजि और 2.95 मीटर ऊंचाई वाला 56 साल का ये हाथी अब पहले से कािी िरम और

मैसरू दशहरा उत्सव एक बार जफर आ चुका है. िंबो सवारी के बारह मेहमान हाथी जफर से प्म् ख ु आकर्ण ष है्हांलाजक कावेरी िल जववाद ने समारोह की रौनक कुछ कम कर दी है. नियंन्तत हो चुका है. िागराज, िये महावत और मैसूर दशहरा आयोजि से जुड्े लोगो् को इससे जर्र राहत महसूस हो रही है. अज्रुि के अलावा, बलराम, अनभमन्यु, गजे्द्, नवजया, गोपालस्वामी, नवक्​्म, गोपी, दुग्ारपरमेश्री, कावेरी, हर्ार और प्श ् ांत जुलस ू मे्भाग लेिे वाले हाथी है.् िागराज के मतानबक अज्रुि के अलावा बलराम और गजे्द् भी अिुभवी और पनरपक्व व्यवहार वाले हाथी है्नजिकी उम्​्कमश: 58 और 61 साल है. दोिो्को जंबो सवारी जुलूस मे्भाग लेिे का क्​्मश: 19 और 17 साल का अिुभव है. वैसे नजला वि अनधकारी गणेश भट्​् िे मुख्य हाथी के तौर पर निलहाल अज्रुि का ही िाम तय नकया है, लेनकि इस संदभ्रमे्अंनतम िैसले की घोरणा नवजयदशमी के नदि की जायेगी. नपछले एक महीिे से कावेरी जल नववाद के कारण पूरे कि्ारटक मे्नवरोध, बंद और प्​्दश्रि का महौल है और मैसूर-मांड्ा सबसे ज्यादा


प्​्भानवत इलाके मे् से है. लेनकि दूसरी ओर उत्सव का रंग भी धीरे-धीरे चिऩे लगा है, खास आकर्रण हानथयो्के जुलूस नजसे 'जंबो सवारी' कहते है्को देखिे के नलए हर साल यहां देशनवदेश से हजारो्, लाखो्की संख्या मे्लोग आते है,् जो मैसरू पैलस े से शुर्होकर चामुड ं ी पहाड्ी ब्सथत चामुंडेश्री मंनदर पनरसर ब्सथत बन्िीमंडप मे् समाप्त होती है, लेनकि मैसूर पैलेस के डेपुटर डायरेक्टर टी एस सुब्ामण्या बताते है् नक नपछले नदिो् कावेरी नववाद के कारण महल आिे वाले पय्रटको् की संख्या मे् कािी नगरावट आयी है. इसके बावजूद कि्ारटक की सांस्कृनतक राजधािी मैसूर दशहरा उत्सव 2016 के नलए तैयार है. ये स्वभानवक भी है आनखर यह राज्य उत्सव या 'िदाहल्बा' है, कि्ारटक की पहचाि नजतिी कावेरी िदी, चंदि और कि्ारटक संगीत से है, उससे कही् ज्यादा मैसूर राजघरािे और

दशहरा उत्सव से है. मैसूर राजघरािे िे 1610 मे्इस उत्सव के आयोजि की शुर्आत मे्की थी. तब से लगातार इस परंपरा को जारी रखा गया है केवल 2014 मे् तत्कालीि महाराजा श्​्ीकांत दत्​्ा वानडयार के निधि के बाद शोकअवनध होिे के कारण उस साल िृत्यसंगीत और मिोरंजि के काय्रक्मो् का आयोजि िही्हुआ. मैसरू के राजघरािे के साथ राज्य सरकार भी इस उत्सव की आयोजक होती है, सरकार द्​्ारा गनठत मैसूर दशहरा सनमनत आयोजि के नवनभन्ि पक्​्ो् का काम देखती है, हर साल इसके नलए बजट आवंनटत होता है. इस साल सूखे और लगातार पािी के कारण बजट मे्20 िीसदी कटौती की गयी है्. बहरहाल, इस साल मैसूर दशहरा अपिे 406 वे्साल मे्है, िवरात्​्के पहले नदि मैसूर के वत्रमाि राजा-रािी चामुंडी पहाड्ी ब्सथत चामुंडेश्री देवी की नवशेर पूजा कर उत्सव की

अज्ाुन हाथी: उत्सव की जान

रोशनी मे्नहाया मैसूर का एक चौराहा: उत्सव का समय

शुर्आत करते है्. मुख्य आकर्रण जंबो सवारी जुलूस 11वे् नदि निकाली जाती है लेनकि इस नदि से पहले भी तैयानरयो् के तहत बगैर साजसज्​्ा के रोजािा अभ्यास जुलूस भी निकाला जाता है. 60 नदि पहले ही हानथयो्को मैसूर लाया जाता है तानक उन्हे् माहौल, भीड्, वाहिो्और अन्य शहरी आवाजो्की आदत हो जाये और उन्हे् प्​्नशन्​्कत नकया जा सके. जंबो सवारी के बाद ये 12 हाथी निर अपिे-अपिे कै्प को वापस लौट जाते है्, िागराज बताते है् नक जंगल मे् हानथयो् को चावल और एक िानरयल की खुराक दी जाती है, लेनकि जंबो सवारी के नलए उन्हे्तैयार करिे के नलए नवशेर खुराक दी जाती है. लगातार 60 नदि तक उन्हे् हरा, काला चिा, गे्हू, चावल इि सभी को एक साथ िमक और प्याज के साथ उबाल कर नदया जाता है, इसके अलावा, िानरयल, केला, गुड् भी नियनमत र्प से नदया जाता है, रोजािा प्​्त्येक हाथी की खुराक पर तीि से पांच हजार तक खच्रहोता है और हानथयो्को लाए जािे से पहले ही िमक तक की आपून्तर के नलए निनवदा मंगायी जाती है. इिकी खुराक के नलए 20 से 22 लाख र्पये तक का बजट होता है, तीि से पांच लाख उिके पनरवहि का और सात लाख उिके रहिे के आश्य् पर खच्रनकया जाता है. िागराज से ये पूछिे पर नक इतिी राजसी देखभाल के बाद जब इि हानथयो् को वापस जंगल भेजा जाता है और निर से केवल चावल और एक िानरयल की खुराक दी जाती है तो उन्हे्मुबश् कल िही्होती? इसके जवाब मे्वो हंसिे लगे और कहा, िही् नबल्कुल िही्, वो बहुत जल्दी िल जाते है. इस बार इि सभी 12 हानथयो्का बीमा भी कराया गया है नजसकी कुल लागत करीब 32 लाख र्पये है. साथ ही करीब 35 लाख मे् हानथयो्के महावत और कांवनडय़ो्का भी बीमा कराया गया है. साथ ही विमंत्ी रामिाथ राय की ओर से सभी कांवनडय़ो् और महावतो् को वद्​्ी की नकट भी मुहैया करायी गयी है. एक और बड्ा आकर्रण शाही दरबार होता है, इस बार िये राजा यदुवीर कृष्णादत्​्ा चामराज वानडयार यह दरबार लगाये्गे. जंबो सवारी के साथ रंगारंग कलाकारो् की टोली, िृत्य समूह,संगीत समूह, सशत्​् सेिा, लोक कलाकार और शाही खािदाि के प्म् ख ु लोग भी चलते है.् लेनकि ये भी सच है नक कावेरी नववाद के कारण इस बार मजा कुछ िीका-िीका ही रहिे वाला है, हालांनक तनमल कलाकारो् की टोनलयां तय काय्रक्मो् मे् नहस्सा ले्गी, लेनकि प्​्द्रशिी आनद मे्नहस्सा लेिे वाले तनमल लोगो् की संख्या नपछली बार के मुकाबले आधी या उससे भी कम रहिे वाली है. n शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 33


खेल

चेन्नई और कोलकाता के बीच आईपीएल: वववाि का मैिान

कोर्ासे उलझता बोड्ा

भारतीय ज्​्ककेट कंट्ोल बोड्षने एक बार जफर यह साजबत जकया है जक अपनी मनमानी के आगे वह देश की सबसे बड़्ी अदालत तक को भी तवज्​्ो नही्देता. फजल इमाम मलंललक

भा

रतीय न्​्ककेट कंट्ोल बोड्र(बीसीसीआई) िे एक बार निर सानबत नकया है नक उसे ि तो देश के कािूि से कोई मतलब है और ि ही अदालत की कोई परवाह. देश मे् न्​्ककेट के संचालि को तौर-तरीको् को लेकर बार-बार सवाल उठते रहे है.् सरकार िे कई बार इस बाबत कदम उठािे की बात भी कही लेनकि न्​्ककेट के संचालि को लेकर नसयासी दलो् मे् अभूतपूव्र एकता है. जबनक चुिी हुई सरकारे्यहां घुटिे टेक देती है.् यहां हर दल के िेता एक-दूसरे के साथ मजबूती के साथ खडे होकर अपिा खेल खेलते रहते है.् न्​्ककेट मे्सट्बे् ाजी के बाद भारतीय न्​्ककेट का जो चेहरा िजर आया, उस पर परदा डालिे 34 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

की कोनशश भी कम िही्हुई. न्​्ककेट के सारे गुट यहां तक नक बडे नखलाडी भी सट्ब्े ाजो्के साथसाथ अनधकानरयो्को बचािे के नलए खडे िजर आये. कुछ िे चुप रहिा मुिानसब समझा. आईपीएल मानलको्के सट्ब्े ाजी मे्शानमल होिे के बाद भी बोड्रके अनधकानरयो्िे एक-दूसरे के बचाव नकया. अदालत के दखल िे बोड्र की परेशािी बढ्ा दी. सुप्ीम कोट्रिे तीि सदस्यीय लोढा सनमनत का गठि नकया नजसिे बोड्र के कामकाज के तरीके मे् बडे बदलाव की नसिानरश की थी. सुप्ीम कोट्रिे इि नसिानरशो् को मंजूर करते हुए बीसीसीआई को इसे लागू करिे के नलए 30 नसतंबर की नमयाद दी थी. लेनकि लगता है बोड्र को सुप्ीम कोट्र की भी परवाह िही्है. उसिे मुबं ई मे्एक अक्टबू र को हुई बोड्रकी नवशेर आम बैठक मे्सुप्ीम कोट्रके कई सुझावो्को खानरज कर नदया. नदलचस्प है नक बोड्रकी दो राज्य इकाइयो् न्​्तपुरा और नवदभ्रिे लोढा सनमनत की नसिानरशो् को अपिे यहां लागू कर नदया है. लेनकि बोड्रिे सुप्ीम कोट्रके आदेश की पूरी तरह से अिदेखी करते हुए एक राज्य एक वोट, 70 वर्रकी आयु सीमा, काय्क र ाल के बीच मे्तीि साल का ब्क ्े जैसी लोढा सनमनत की अहम नसिानरशो् को खानरज कर नदया. अब देश की सबसे बडी अदालत के साथ उसका टकराव तय मािा जा

रहा है. बीसीसीआई की आम सभा की नवशेर बैठक मे्नसिानरशो्पर चच्ार की गयी और कुछ छोटी नसिानरशो् को स्वीकार करके अपिे र्ख पर कायम रहिे का िैसला नकया गया क्यो्नक अनधकांश सदस्यो् की राय एक है. बैठक मे् चयि पैिल से जुडी नसिानरश स्वीकार िही्की गयी जहां पांच की जगह तीि चयिकतार्ओ्को रखिे का निद्श ्े नदया गया है और उसमे्भी टेसट् अिुभव होिा जर्री है. बैठक मे् नजि अहम नसिानरशो्को सव्स र म्मनत से स्वीकार नकया गया उसमे् नियंतक ् और महालेखा परीक्क ् (कैग) के प्​्नतनिनध को एपेक्स काउंनसल के अलावा आईपीएल संचालि पनररद के सदस्य के र्प मे् शानमल करिा और निन्​्ित बदलावो् के साथ एपेकस ् काउंनसल का गठि शानमल है. लोढा सनमनत की नसिानरशो् मे् नवनभन्ि सनमनतयो् का नजक्​् है नजसमे् नवशेर र्प से सक्म् लोगो्के नलए नवशेर सनमनत और मनहला सनमनत शानमल है. अन्य नसिानरश मे् नखलाडी संघ का गठि और सनमनत मे्उिका प्न्तनिनधत्व शानमल है. एक नसिानरश के अिुसार एसजीएम िे सीईओ को अनधकार नदया नक वह लोढा सनमनत के प्स ् ्ाव के अिुसार संचालि सनमनत से संपक्फकरे और न्​्ककेट नखलाडी संघ के गठि की प्न्​्कया शुर्करे. बोड्रिे अगले आईपीएल के नलए नखलानडयो् और टीम अनधकानरयो् के


नलए आचार संनहता, डोनपंग रोधी संनहता, िस्ली आचरण रोधी संनहता, भ्ि ् ्ाचार रोधी संनहता और संचालि नियमो् को भी स्वीकार कर नलया है. सदस्यो्का ध्याि इस तथ्य की ओर नदलाया गया नक सनमनत की नसिानरश के अिुसार राष्​्ीय कैले्डर और आईपीएल के बीच 15 नदि का अंतर सुनिन्​्ित करिे का प्​्यास नकया गया लेनकि 2017 मे् यह संभव िही् होगा क्यो्नक इंगल ् डै् मे् इसी समय आईसीसी चैबम् पयंस ट्​्ॉिी होगी. नदलचस्प यह है नक बीसीसीआई अध्यक्​् अिुराग ठाकुर िे लोढा सनमनत की कुछ बडी नसिानरशो्को खानरज करिे का बचाव नकया है. उिका कहिा है नक नसिानरशो्को स्वीकार या खानरज करिा सदस्यो् पर निभ्रर करता है. इसनलए कई अहम नसिानरशे् स्वीकार कर ली गयी्लेनकि सदस्यो्को लगा नक नजि पर कािूिी चुिौती दी जा सकती है या नजन्हे्लागू करिे मे् नदक्त् होगी उन्हे्स्वीकार िही्नकया गया. लोढा सनमनत की नसिानरशो्को पूणर्र्प से लागू करिे के उच्त् म न्यायालय के निद्श ्े के बारे मे्पूछिे पर ठाकुर िे कहा, अगर आप संपण ू र्िांचे को देखे् तो बोड्रका गठि सदस्य करते है.् उन्हो्िे कहा नक सदस्यो्को लोढा सनमनत की नसिानरशो्को स्वीकार करिे के नलए आमंन्तत नकया गया था और सदस्यो्िे अपिा िजनरया रखा और बताया नक वे नसिानरशो्को लेकर क्या महसूस करते है. ठाकुर की दलील थोथी है. पूरा देश जािता है नक बोड्रमे्सदस्यो्की िही्नसि्फअध्यक्​्की ही चलती है. यह बात भी हैरत मे्डालिे वाली है नक न्​्ककेट को साि-सुथरा करिे की बात कहिे

न्यायमूित्ालोढ्ा: इंसाफ की बात वाले ठाकुर सुप्ीम कोट्रकी तहवील मे्रखे उि आठ नलिािो् का नजक्​् िही् करते और ि ही कोट्रसे नलिािो्को खोल कर उस नखलाडी का िाम साव्ज र निक करिे को कहते है,् नजसका िाम सट्ब्े ाजी मे्नलप्त पाया गया था. ठाकुर के सामिे सवाल तो कई है्लेनकि सवाल पूछे कौि क्यो्नक मुनं सि भी बोड्रहै और चोर भी. इस बीच लोढा पैिल िे तीि अक्टबू र को बीसीसीआई का खाता रखिे वाले बै्को् को निद्श ्े नदया नक वे न्​्ककेट बोड्र के 30 नसतंबर को नवशेर आम बैठक मे् नलए गये नवत्​्ीय िैसलो्के संबधं मे्नकसी भी रानश का भुगताि ि करे.् नसिानरशो्का उल्लघंि से िाराज सनमनत

अनुराग ठाकुर: ताकत बड्ी चीज

िे बैक ् ो्को नलखे पत्​्मे्कहा है नक सनमनत को पता चला है नक बीसीसीआई की 30 नसतंबर 2016 को हुई आपात काय्क र ारी बैठक मे् कुछ िैसले नलए गये है्नजसमे्नवनभन्ि सदस्य संघो् को कािी बडी रानश का नवतरण नकया गया है. बै्क खाता फ्​्ीज नकये जािे के बाद बोड्र सकते मे् है. बोड्रके एक अनधकारी का कहिा था नक इस कदम के बाद हम भारत दौरे पर आयी न्यज ू ीलैड् टीम का दौरा रद्​्करिे पर नवचार कर रहे है.् लोढा सनमनत के इस कदम के बाद हम पैसो्का भुगताि करिे मे्असमथ्र है.् हालांनक अब लोढ्ा सनमनत िे बैको्से कह नदया है नक वे बोड्रके खातो्को चालू रहिे दे.् n

शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 35


खवजं​ंापन जमशेद कंमर खसदं​ंीकंी

‘

दीदी, ओ दीदी क्या बात है आज बड्ी खुश लग रही हो?’ 9 साल के दीपू िे हरमीत कौर के मुसक ् रु ाते चेहरे को देखकर पूछा तो उसिे प्यार से दीपू के बालो्को छेड्ते हुए कहा, ‘हां, दीपू आज बहुत खुश हूं. ये सिेद नलिािा देख रहे हो िा, इसी मे्मेरी सारी खुनशयां.’ हरमीत कौर को नजंदगी िे यूं तो खुश होिे की वजहे्कम ही दी थी. चौदह साल पहले, जब हरमीत नसि्फ6 साल की थी उसके मम्मी डैडी इस दुनिया से र्ख्सत हो गये थे, उसे अकेला छोड्कर. जरा सी उम्​्मे्मां-बाप का साया सर से उठ जािा नकसी बच्​्े के नलए नकतिा दद्रिाक होता है इसका एहसास करिा मुन्शकल िही्है. बहरहाल, उसके बाद हरमीत के चाचा करतार नसंह उसे अपिे साथ सीतापुर ले आये थे. उन्हो्िे तय नकया था नक वो अपिी भतीजी हरमीत को अब से अपिे पास रखे्गे. लेनकि हरमीत को लािे की वजह िा तो हरमीत से हमदद्​्ी थी और िा ही निक्​्, वो तो इ सनलए ले आयेथे इसनलए क्यो्नक वो भी हमारे देश के तमाम, संकीण्रसोच वाले लोगो्की तरह मािते थे नक लड्नकयां ही ‘खािदाि की इज्त् ’ होती है्, और इसीनलए इज्​्त को नहिाजत के िाम पर, कैद करके रखिा चाहते थे. हरमीत के बचपि मे्हर कदम पर संघर्रथा और हर मोड् पर आंस.ू चाचा िे उसकी परनवश तमाम बंनदशो् मे् की. उिके पास हरमीत के हर सवाल का नसि्फ एक ही जवाब था, ‘हमारे घर की लड्नकयां ऐसा िही्करती.’ लड्नकयो्की प्​्नत चाचा की सोच ऐसी ही थी. नकतिी तो नमन्िते् करके उसिे ग्​्ेजुएशि करिे की परनमशि ली थी. वरिा चाचा तो दसवी्के बाद ही उसकी शादी कर देिा चाहते थे. हरमीत के ख्वाब कुछ और थे, वो कुछ कर नदखािा चाहती थी, अपिे पैरो् पर खड्ी होिा चाहती थी. ऐसा िही् है नक चाचा जी की ज्यादनतयां नसि्फ हरमीत के नलए थी, चाची भी कहां खुश थी्. आये नदि नकसी िा नकसी बात पर चाचा-चाची को खूब डांटते थे. अक्सर, घर आकर अपिे काम का गुस्सा भी चाची पर ही उतार देते थे. चाचा मे् मनहलाओ् के प्​्नत कोई खास इज्त् िही्थी. हरमीत की चाची भी यूं तो अपिे नजंदगी मे्घुटि महसूस करती थी, लेनकि लंबे वक्त तक यूं ही नजंदगी गुजारिेके बाद वो अपमाि जैसे उिकी नजंदगी का नहस्सा हो गया था. उन्हे्आदत हो गयी थी. खैर वो करती भी क्या, और चाची, बस कभी-कभी अपिा गुस्सा हरमीत पर उतार देती थी्.

36 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

बराबरी

लेनकि हरमीत के पास कोई िही् था, नजससे वो अपिा गम हल्का कर सके, नसवाये मम्मी-डैडी की उस ल्लैक एंड व्हाइट तस्वीर के, नजसे वो तनकया के िीचे रखकर सोती थी. लेनकि हां, इस तस्वीर के अलावा चाचा-चाची के बेटे दीपू को देखकर उसे बड्ा सुकूि आता था. वही तो उसका इकलौता दोस्​्था. नदि का ज्यादातर वक्त तो वे हरमीत के पास ही गुजारता था. ‘दीदी ये देखो मैि् े ड्​्ाइंग बिायी, दीदी देखो मुझे टीचर िे गुड नदया, दीदी मै् बड्ा होकर सनचि ते्दुलकर बिूंगा.’ जािे क्या-क्या बाते् नकया करता था नदिभर, उसके मासूनमयत भरे सवाल और छोटी-छोटी शै तानियां ही तो थी जो हरमीत को उस उदास घर मे् मुस्कुरािे की वजह देती थी्. दीपू था ही बहुत प्यारा, सबकी आंखो्का तारा. यहां तक नक सख्त नमजाज चाचा भी अपिे बेटे दीपू की शैतानियां देखकर मुस्कुरा ही देते थे. लेनकि आज तो हरमीत भी बहुत खुश थी, वो नलिािा हाथ मे्नलये, आिे वाले कल के खूबसूरत ख्वाब सजा रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे नक वो अपिी मंनजल से बस कुछ कदम दूर थी.

‘हरमीत िीचे आओ.’ चाचा की सख्त आवाज हरमीत को उसके ख्वाबो्से वापस असल दुनिया मे् खी्च लायी, कािो् मे् आवाज पड्ते ही हरमीत कांप गयी, उसिे िुत्ी से सर िका और तेज कदमो् से सीन्ढयां उतरते हुए िीचे आंगि मे् आ गयी. उसके चेहरे पर हल्का डर था. जािे क्यो्बुलाया था चाचा िे, ‘जी’ आंगि मे्पहुंचकर सर से दुपट्​्ा ओढ्े हरमीत, िजरे िीची करके खड्ी थी. ‘क्या कर रही थी?’ चाचा की आवाज खामोशी को तोड्ते हुए घर के कोिे-कोिे तक गूंज गयी. हरमीत िे लड्खड्ो हुए कहा, ‘मै्, मै्आ, मै्वो, मै्पढ्रही थी.’ ‘बस बहुत हो गया ये पढ्ाई-नलखा का तमाशा.’ इस बार चाचा की आवाज मे् जरा ज्यादा िाराजगी थी, ये वो अंदाज था जैसे अब कोई िैसला सुिािे जा रहे है्, ‘तुझे कौि सा कलेकट् र बि​िा है, तेरे नरश्ते की बात कर ली है, अगले हफ्ते आ रहे है्लड्के वाले.’ ‘लेनकि चाचा मै् तो.’ बस इतिा ही कह पायी थी वोनक चाची की आवाज गूंज गयी.


‘लेनकि वेनकि कुछ िही्, नजतिा कहा गया है उतिा सुिो.’ सैकड्ो्सपिे और हजारो्उम्मीदे् उसी आंगि मे्नबखर गयी थी. कहां तो हरमीत ख्वाब देख रही थी खुद के पैरो् पर खड्े होिे का. तभी तो तमाम प्न्तयोगी परीक्​्ाओ्मे्नहस्सा लेिा चाहती थी, तमाम सरकारी िौकनरयो्मे्तो आवेदि भी कर चुकी थी. नपछले हफ्ते ही तो

यूपी मे् लेखपाल भत्​्ी के नलये िाम्र भरा था उसिे, नवभाग से जवाब भी आ गया था. जवाब का वही सिेद नलिािा नलये तो वो सुबह से खुश थी. दो नदि बाद इंट्ेस टेस्ट था, लेनकि चाचा के िैसले िे उसके सब अरमािो्का गला घोट नदया था. शाम को अपिे नबस्​्र पर औ्धी पड्ी हरमीत जािती थी नक इस बार चाचा का िैसला िही् टाला जा सकता. उसिे तनकया के िीचे रखी मम्मी-पापा की तस्वीर निकाली और अपिे मुकद्​्र पर रोिे लगी. ‘क्या हुआ दीदी, क्याे्रो रही हो?’ दीपू की मासूम आवाज से कमरा गूंज गया. हरमीत िे अपिे आंसू पोछे और प्यार से दीपू के गाल छूते हुए कहा, ‘छोटू, तुम िही् समझेगो.’ ‘क्यो्िही्समझंूगा बताओ िा दीदी.’ दीपू िे नजद की तो हरमीत िे उसे समझाया नक दो नदि बाद उसे एक एग्जाम मे् शानमल होिा है, लेनकि चाचा जािे िही्देगे. दीपू कुछ देर सोचता रहा और निर उसिे आंख मारकर, चुटकी बजाते हुए कहा, ‘आईनडया.’ दीपू िे हरमीत को अपिा आइनडया बताया तो हरमीत िे खुशी से उसे गले लगाकर कहा, ‘यू आर जीनियस दीपू.’ दीपू का आइनडया हरमीत को बहुत पसंद आया था. हालांनक उसमे्नरस्क था लेनकि जब सवाल नजंदगी का हो तो नरस्क तो लेिा ही पड्ता है. बहरहाल, वो नदि भी आ ही गया, नजसका हरमीत को इंतजार था. आइनडया के मुतानबक उस सुबह हरमीत घर से चुपचाप निकल गयी. उसके जािे के बाद, दीपू िे मेिडोर लॉक कर नलया और कुछ देर बाद ‘दीदी बीमार है’ कहकर िाश्ता उसके कमरे मे् रख आया. चाचा-चाची को लगा हरमीत अपिे कमरे मे्ही है.

लेनकि हरमीत तो अपिे इग्जानमिेशि से्टर यािी लखिऊ आ गयी थी. उसिे खुशीखुशी पच्ार नलखा और पूरे तीि घंटे की मेहित के बाद उम्मीदो् का वो कागजी पुनलंदा जमा करके बाहर आ गयी. बहुत खुश थी वो, ऐसा लग रहा था जैसे मंनजल के करीब आ गयी हो. इमारत से बाहर आते ही उसकी िजर कॉलेज के ठीक सामिे लगे होन्डि्ग पर पड्ी तो उसकी खुशी दोगुिी हो गयी. दरअसल वहां नलखा था नक सरकार अल्पसंख्यको् को प्​्नतयोगी परीक्​्ाओ् की तैयारी के नलए मुफत् कोनचंग दे रही थी, सीतापुर समेत यूपी के कई इलाको्मे्मुफ्त कोनचंग का इंतजाम नकया गया था. हरमीत तो खुशी से उछल पड्ी, उसिे तय कर नलया नक लेखपाल परीक्​्ा का पनरणाम चाहे जो भी आये, वो दूसरी प्न्तयोगी परीक्​्ाओ्मे्बैठिे की भी तैयारी करेगी और अपिे पैरो्पर खड्ी होकर gही रहेगी. यूपी के लाखो् अल्पसंख्यक छात्​्ो् की तरह वो भी योजिा का िायदा उठायेगी. यही सोचते-सोचते वो सीतापुर के नलए रवािा हो गयी. कुछ ही घंटो् मे् आराम से घर के पास पहुंच गयी. जैसे ही उसिे दरवाजे को धक्​्ा नदया. सामिे चाची की आंखे् गुस्से से लाल थी. लेनकि तभी कुछ अजीब हुआ. चाची िे कुछ िही् कहा और वो आंगि से कमरे मे्चली गयी. हरमीत हैराि तो थी लेनकि वाे झट से ऊपर अपिे कमरे मे्चली गयी. माजरा कुछ समझ मे् िही् आ रहा था. लेनकि बात तब साि हुई जब थोड्ी देर बाद दीपू हरमीत के मरे मे्आया और उसिे बताया नक चाची का गुस्से की वजह दरअसल चाचाचाची का झगड्ा था. उस नदि दोिो्का जमकर झगड्ा हुआ था. यूं तो चाचा चाची को अक्सर डांटते थे लेनकि उस नदि बात जरा ज्यादा बढ् गयी थी. दीपू िे बताया, ‘पापा और मम्मी का बड्ा जोर का झगड्ा हुआ है, मम्मी बहुत िाराज है्, कह रही थी्घर छोड्कर चली जाये्गी.’ दीपू ये बाते हरमीत को बता ही रहा था नक तभी हरमीत के कमरे मे्एक आवाज गूंजी. हरमीत, कमरे मे् चाची की आहट से हरमीत घबरा गयी. लेनकि आज चाची की के चेहरे का रंग बदला हुआ था. उन्हो्िे हरमीत का हाथ पकड्ा और कहा बेटी, आज मै् जाि गयी नक औरत को बराबरी तभी नमल सकती है जब वो अपिे पैरो्पर खड्ी होिा सीखे. तुम सही हो बेटा, काश मै्िे भी तुम्हारी तरह कभी ऐसा सपिा देखा होता, पर कोई बात िही्, अब तुम्हे् नजतिे भी एगजाम देिे है्दो, मै्तुम्हारे साथ हूं. हरमीत िे चाची को गले लगा नलया. तनकया के एक कोिे से झांकते हुए मां भी मुस्कुरा रही थी. (सूचना एवं जनसमंपकंक खवभाग उतं​ंार पं​ंदेश दं​ंारा पं​ंकाखशत) शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 37


इशिहास

इंसानी आईने मे् एक बािशाह

औरंगिेब एक ऐसा चजरत्​्है जिसका सांप्दाजयक रािनीजत को आगे बढ्ाने के जलए इस्​्ेमाल हुआ है, लेजकन औरंगाबाद मे्कदम रखते ही एहसास होता है जक कहानी को नये जसरे से कहने की गुंिाइश है.

अखनल खसनंहा

भा

रतीय इनतहास मे्औरंगजेब एक ऐसा चनरत्​्है नजसका सांपद् ानयक राजिीनत को आगे बिािे के नलए जमकर इस्म्े ाल हुआ है. उसिे मुगल साम्​्ाज्य को सव्ानर धक क्त्े ्ीय नवस्​्ार नदया. वह भारत की सबसे बडी सल्तित का मानलक था. जंग मे्उसका कोई मुकाबला िही्था. अगर वह बहादुरी और दुशम् िो्के साथ कूर् ता मे्अव्वल था तो निजी नजंदगी मे्बेहद ईमािदार भी. इनतहास की नजि शब्खसयतो् को न्​्बनटश शासको् िे अपिी उपनिवेशवादी राजिीनत का मोहरा बिाया, उिमे्उसका िाम शायद सबसे ऊपर आयेगा. औरंगजेब की कहािी भी उन्हो्िे इसी अंदाज से रखी नक एक बहादुर और ईमािदार शहंशाह खलिायक मे्तल्दील हो गया. दक्ि् की पहानडयो्मे्बसे औरंगाबाद मे्कदम रखते ही यह एहसास हेा जाता है नक औरंगजेब की कहािी को िये नसरे से कहिे की गुज ं ाइश है. यह वही शहर है जहंा ंिहंदू सांपद् ानयकता का झंडा उठािे वाली नशव सेिा िे अस्सी के दशक मे्अपिे पैर जमा नलये थे और अब मुसनलम सांपद् ानयकता का प्त् ीक बिी ओबेदलु ल ् ा ओवैसी के िेततृ व् वाली मजनलस-ए-इत्ह्े ादुल मुसलमीि उसे वहां टक्र् दे रही है. यह शहर ईसा पूवर्से लेकर आज तक इस क्त्े ्मे्राजिीनतक, सांसक ् नृ तक और व्यावसानयक गनतनवनधयो्का प्म् ख ु केद् ्रहा है, लेनकि इसके गौरवशाली अतीत पर एक काली छाया डाल दी गयी है. लेनकि जहर भरे इस माहौल मे्भी शहर के कई लोग अतीत को तटस्थ होकर देखिे की कोनशश मे्जुटे है.् औरंगजेब को लेकर इस नदलचस्पी की वजह नसि्फयह िही्है नक उसका िाम औरंगाबाद से जुडा हुआ है, बब्लक यहां के मुसलमािो्को लगता है नक शहंशाह की इस छनव से पूरे मुसनलम समुदाय की छनव पर असर होता है और मुलक ् को बांटिे वाली बहस को आगे बढ्ािे मे्मदद करता है. उिका कहिा है नक औरंगजेब भी बाकी मुगल बादशाहो्की तरह था. बेशक सल्तित को बडा करिे की कोनशश मे्उसिे जो कदम उठाये उसमे्कई जि-नवरोधी थे और इससे देश के बडे समुदाय को िुकसाि पहुच ं ा. उिका माि​िा है नक औरंगजेब मजहबी जर्ा था, लेनकि सांपद् ानयक व्यब्कत िही्. औरंगजेब िे इस शहर को दक्ि् की राजधािी बिाया था और अपिी नजंदगी के बेहतरीि बर्रउसिे इस शहर या आसपास के इलाको्मे्नबताये थे. जानहर है औरंगजेब की नजंदगी के उि पहलुओ्का सही नवश्लरे ण िही्नकया गया. शहंशाह पर सबसे ज्यादा काम करिे वाले इनतहासकार सर जदुिाथ सरकार अंगज ्े ो्के समथ्क र थे और उि पर अंगज ्े ो्की तरि से दबाब था नक वह उसके चनरत्​्को इस तरीके से पेश करे्नक वह नहंदओ ु ्और मुसलमािो् के बीच मतभेद बढािे के काम आये.्’ औरंगजेब पर शोध करिे वाले रिात 38 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

कुरश ै ी कहते है.् कुरश ै ी का कहिा है नक औरंगजेब के साथ इनतहासकार िाइंसािी करते है.् वे इसे िजरअंदाज करते है्नक औरंगजेब की शब्खसयत नकस तरह बदलती गई और इस बदलाव के क्या कारण थे. उिकी नशकायत है नक उसे एक इंसाि के र्प मे्देखिे की कोनशश ही िही्हुई. ‘हम यह िही्देखते है्नक एक बाप के र्प मे्शाहंजहां िे नकस तरह का सलूक औरंगजेब के साथ नकया. उसिे औरंगजेब को खुद से दूर रखा और उि कनठि इलाको्मे्भेजा नजन्हे् काबू मे्रखिा कनठि था. औरंगजेब को दक्ि् का सूबदे ार भी इसी वजह से बिाया गया था. बडा भाई दारा नशकोह उसे नदल्ली से दूर रखिा चाहता था और इसमे्उसे हर बार कामयाबी नमली.’ औरंगजेब की शब्खसयत को गढिे मे्शाहजहंा की बेरख ् ी की बडी भूनमका है. इसे सानबत करिे के नलए वह बाप-बेटे के बीच पत्​्व्यवहार का हवाला देते है.् कुरश ै ी औरंगजेब की नजंदगी के िरम पहलुओ्की चच्ार करते है्और उसकी महबूबा हीराबाई जैिावादी का नजक्​्करते है्नजसिे उसकी नजंदगी को बेइतं हा प्भ् ानवत नकया. हीराबाई को उसिे बुरहािपुर मे्देखा था और यह


िजर नमलते ही इश्क होिे का मामला था. उसिे अपिी खाला, जो उसकी मालनकि थी, से उसे मांग नलया और उसे अपिी रखैल बिा नलया. औरंगाबाद मे्हीराबाई के नलए उसिे अलग से महल बिवाया था. लेनकि हीराबाई की बहुत कम उम्​्मे्मौत हो गयी. ‘हीराबाई की मौत िे औरंगजेब की नजंदगी को बदल नदया. नजंदगी को लेकर उसका र्ख पूरी तरह बदल गया . वह एक ओर मजहब की ओर झुक गया और दूसरी तरि अपिा सारा समय सल्तित के कामकाज मे्देिे लगा. इस बदलाव पर हमे्गौर करिा चानहए और उसकी नजंदगी को दो नहस्सो्मे्बांट कर देखिा चानहए.’ इस तरह कुरश ै ी एक कूर् और शानतर नदमाग बादशाह की एक रोमांनटक तस्वीर पेश करते है.् वे नवश्न्वद्​्ालय मे्पढािे वाले इनतहासकार िही्है.् इनतहास पर उिका काम शौनकया है. उिकी ंि हंदू पत्िी दुलारी कुरश ै ी एक जािी-मािी पुरातत्ववेत्ा है्और प्​्ोिेसर के पद से नरटायर हुई है.् अजंता, एलोरा और औरंगाबाद की गुिाओ्की मूनत् यर ो्पर उिका बडा काम है. मुगल बादशाह की रोमांनटक छनव सामिे लािे मे्वे अपिे पनत की मदद करती है.् वे बताती है्नक एलोरा की गुिाओ्के सौदय्रऔर बिावट से औरंगजेब बेहद प्भ् ानवत था और वहां घंटो् बैठा रहता था. उसकी तारीि करता था. ‘औरंगजेब इसे शैताि के द्​्ारा बिाया गया मािता था, लेनकि इसकी तारीि करता था’. बाबा साहेब आंबड े कर मराठवाड़ा नवश्न्वद्​्ालय के प्​्ोिेसर रमजाि खाि कहते है.् रिात कुरश ै ी बताते है्नक नकस तरह लोगो्के मि मे् औरंगजेब की ऐसी छनव बिी हुई है नक एलोरा की कुछ मूनत् यर ो्का नसर गायब होिे का दोर वे भी उसी पर मि देते है्नक मूनत् यर ां उसके शासि मे्तोडी गयी थी्. उिका कहिा है नक यह सच्​्ाई से बहुत दूर है. असल मे्तस्करो्िे इि मूनत् यर ो्को बाहर भेजिे के नलए यह अपराध नकया था. अंगज ् ो्के दस्​्ावेज मे् यह दज्र है. प्​्ोिेसर रमजाि का कहिा है नक मूनत् र तोडिेवाले एक मुसलमाि शासक की जो तस्वीर औरंगजेब के बारे मे्बिा दी गयी है, वह भी सच्​्ी िही्है. उसिे दक्ि् मे्नसि्फएक मंनदर को तोडिे का आदेश नदया था. यह औरंगाबाद के िजदीक सतारा गांव का का एक मंनदर था नजसमे् देवदासी प्थ ् ा चलती थी और औरंगजेब इस प्थ ् ा को गलत मािता था. ‘औरंगजेबो्िे मंनदरो्को जागीरे्दी्और उिके रख-रखाव के नलए आन्थक र सहायता भी. औरंगाबाद के िागेसर मंनदर को नदया गया दािपत्​्अब भी मंनदर के प्ब् धं को्के पास सुरन्​्कत है.’ रमजाि खाि कहते है.् औरंगजेब की छनव को मरम्मत करिे की कोनशश मे्लगे औरंगाबाद के औरंगाबाि मे्औरंगजेब का मकबरा:

बुन्दजीवी बताते है्नक शहर मे्बसी नहंदू बन्​्सयो्मे्कई मंनदर है्जो उसी के समय से है.् इि बन्​्सयो्के िाम भी उि सरदारो्के िाम पर है्नजिके साथ आये लोग वहां रहते थे. ऐसी बन्​्सयो् मे् जयनसंहपुरा और धौिीपुरा जैसी बन्​्सयां है.् जयनसंहपुरा मे्नमज्ार राजा जय नसंह के साथ आये राजपूत रहते थे और धौिीपुरा मे्धवि उपिाम वाले पंजाबी रहते थे. इि इलाको्के मंनदर आज भी सुरन्​्कत है. एक कूर् शासक की छनव के कारण औरंगजेब के व्यब्कतत्व के कई भावुक पक्​्गौण बि गये है.् नमसाल के तौर पर, उसकी बेगम नदलरस बािो के मकबरे के निम्ाण र की कहािी. बीबी के मकबरे के िाम से मशहूर इस मकबरे को बिािे की िरमाइश नदलरस िे की थी. वह इराि के शहंशाह के पनरवार से थी और कािी अमीर थी. वह शाहजहां की बेगम और औरंगजेब की मां मुमताज महल की भी करीबी नरश्तदे ार थी. ‘नदलरस की मजार को ताजमहल की तज्रपर बिािे के नलए औरंगजेब को शाहजहां से इजाजत लेिी पडी थी क्यो्नक नकसी बडी इमारत को बिािे का िैसला लेिे का हक सूबदे ार को िही्था. उसे अपिे वानलद से इसकी इजाजत भी ली नक राजस्थाि से संगमरमर पत्थर लाये जाये. संगमरमर की एक खेप आयी भी, लेनकि दूरी के कारण संगमरमर के पत्थरांे्को अनधक संखय् ा मे्िही्लाया जा सका.’ रमजाि खाि कहते है.् रमजाि खाि कहते है.् ‘दक्ि् के इनतहास को इस तरह पेश नकया जाता है नक ऐसा मालूम हो नक झगडा नसि्फऔरंगजेब और नशवाजी के बीच था. इसे मजहबी लडाई के र्प मे्पेश नकया जाता है. लेनकि सच्​्ाई यही है नक औरंगजेब िे दक्ि् के मुबस् लम सल्तितो्के नखलाि कई लडाइयां लडी्. सि 1683 मे्औरंगाबाद आिे के बाद नसि्फतीि महीिे ही वह यहां लगातार रह पाया. उसका ज्यादा वक्त युद्के नशनवरो्मे्गुजरा. वह दक्ि् मे्नसि्फ लडता रहा और यह लडाई सल्तित का नवरोध करिे वाले सभी लोगो्के नखलाि थी, नसि्फनहंदू राजाओ्के नखलाि िही्.’ वे यह भी कहते है्नक मुगनलया सल्तित को निरकापरस्​्बतािे और भारत के मुसलमािो्को आक्म् णकारी और इस्लाम को नहंदओ ु ्के नखलाि लडिे वाला मजहब नदखािे के नलए न्​्बनटश हुकमू त के संरक्ण ् मे्इनतहास को तोड-मरोड कर पेश नकया गया. ‘औरंगजेब की नजंदगी पर गौर करिे से यह साि हो जाता है नक मुगल बादशाहो्की खािदािी नवरासत के र्प मे् उसिे उसी तरह के नरश्ते नवरासत मे्पाये थे जैसे अकबर, जहांगीर और शाहजहां को नमले थे. अपिे नखलाि खडे नरश्तदे ारो्को मार डालिे या जेल मे्डालिे के कदम जहांगीर और शाहजहां िे भी उठाये थे. औरंगजेब िे वही नकया जो उसके वानलद और दादा िे नकया था. इसमे्िया कुछ िही्था. यह जर्र है नक गद्​्ी पािे के नलए उसे जहांगीर और शाहजहां के मुकाबले ज्यादा खूि-खराबा करिा पडा.’ प्​्ोिेसर खाि कहते है.् औरंगजेब की धम्नर िष्त् ा का सबसे बडा सबूत खुलताबाद मे् उसका मकबरा है. उसिे कुरआि नलखकर इसके नलए पैसे जुटाये. नमट्​्ी से बिी ऐसी कब्​् मुगनलया क्या नकसी भी सल्तित के बादशाह की िही् होगी. यह कब्​् इस्लामी मान्यताओ् मे् उसकी गहरी आस्था का पनरचय देता है और उसकी ईमािदारी का सबूत भी. अगर गौर से देखा जाये तो औरंगजेब और दारा नशकोह के बीच के झगडे को मुगल खािदाि मे्चल रहा वैचानरक संघर्र था. औरंगजेब निन्​्ित तौर पर कट्र् पंथ की ओर झुका था और इससे सल्तित कमजोर भी हुई. उसिे नहंदओ ु ् पर जनजया कर भले ही जंग के खच्र से खाली हुए खजािे को भरिे के नलए लगाया हो, इसिे नहंदू प्ज ् ा को तकलीि पहुच ं ायी. एक बादशाह की कामयाबी और िाकामयाबी को संाप्द् ानयक िजर से िही्देखा जािा चानहए. ‘लेनकि हम तो उसे नहंदू समथ्क र बादशह मािते है,्’ औरंगाबाद नवन्​्शद्​्ालय मे् अंगज ्े ी सानहत्य के प्​्ोिेसर रहे कृषण ् ा पांचगे ांवकर और औरंगाबाद के समाजकम्​्ी सुभार लोमटे कहते है.् वे इस पर बहस करिे की चुिौती देते है.् n (लेखक सुपरनचत पत्क ् ार है.्) शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 39


साशहत्य/कशविा

तुर्ी रविता: रुछ अनुिाद खटपंपणी और अनुवाद: सुरेश सखलल

संगीत आत्मा की खूराक है बहुत-बहुत हसरत से भरा हुआ मै्संगीत की.

हा

मै्कनवताएं नलखता हूं चीथड्ेऔर हन्​्डयां खरीदिे के नलए निर उन्हे्बेच देता हूं िग्मे और धुिे्खरीदिे के नलए.

ल मे् तुक्ी मे् तख्ता-पलट की जो िाकाम घटिा हुई, उसके बाद वहां सरकारी दमि और उत्पीड्ि का नसलनसला तेज हो गया है, नजसकी झलनकयां अखबारो् और दृश्य-अदृश्य माध्यमो् मे् प्​्कट रोज देखिे को नमलती रहती है. इस तख्ता-पलट का चनरत्​् बहुत स्पि्​् िही् है. इसे िौज के कुछ नहस्सो् और कुछ मजहबी गुटो् के गठजोड् की सानजश मािा गया है. लेनकि सरकारी मशीिरी द्​्ारा उस सानजश के िाकाम कर देिे के बाद तेज हुए दमि और उत्पीड्ि की जद मे् अिेक संस्कृनत और समाजकम्​्ी भी आये है्. ‘नद इकॉिॉनमस्ट’ की एक नटप्पणी के अिुसार, अस्सी साल के एक बूढ्े कनव को भी कई नदि हवालात मे् रखा गया और उन्हे्तरह तरह से उत्पीन्डत नकया गया. लेखको् और बुन्दजीनवयो् के दमि के मामले मे्, बीती सदी मे्, पन्​्िमी प्​्ेस की स्याही और कागज पूव्रसोनवयत संघ के नखलाि नजतिे जाया हुए, वह बेनमसाल है. मगर हकीकत यह भी है नक तुक्ी मे्कमाल पाशा अतातुक्फ के िेतृत्व मे् हुए िवजागरण और ‘सेकुलर राष्​्वादी’ राज्य-प्ण ् ाली की शुरआ ् त के साथ ही वहां प्ग् नतशील अंतरराष्​्ीयतावादी लेखको्-बुन्दजीनवयो्के दमि का नसलनसला शुर्हो गया था और उसमे् वहां की िौज को पूरी छूट नमली हुई थी. उस दमि का पहला निशािा महाि कनव िानजम नहकमत हुए थे. गौरतलब है नक िानजम अतातुक्फके नवर्द् िही् थे, वे राष्​्ीय स्वाधीिता की लड्ाई मे् अतात्रुक के कंधे से कंधा जोड् कर लड्े थे. अतातुक्फ जाती तौर पर िानजम और उिकी शब्खसयत से वानकि थे. बावजूद इस सबके, िानजम को अपिी आधी नजंदगी तुक्ी के कैदखािो् मे् नबतािी पड्ी. सि 1950-1951 मे्, नवश्​् जिमत के दबाव मे् उन्हे् नरहाई नमली, तब भी डेमोक्लीज की तलवार उिके नसर पर झूलती ही रही. आनखरकार खुनिया तौर पर उन्हे् देश से भागिा पड्ा और बाकी के 12-13 साल जलावविी मे् मॉस्को मे्गुजारिे पड्े. अतातुक्फ अपिे आनखरी नदिो् मे् खासे अलग-थलग पड् गये थे. उिका वजूद नसि्फ‘मेकद आि िेहि’ तक नसमट कर रह गया था. सवाल यह भी है नक उन्हो्िे नजस सेकुलर राष्​्वाद की शुर्आत तुक्ी मे् की थी, नपछली दो-तीि दहाइयो् के दरनमयाि क्या वह बरकरार रह पाया? कनवयो्और बुन्दजीनवयो्के दमि का नसलनसला भी कभी थमा हो, ऐसा िही्लगता. अताउल बहरामोग्लू, निहाद बहराम, िव जाद शेनलक आनद अिेक कनवयो्को अपिी नजंदगी का कुछ ि कुछ नहस्सा सीखचो्के पीछे गुजारिा पड्ा. यहां तुक्ी के नजि चार कनवयो् की कनवताएं दी जा रही है्, वे िानजम नहकमत की ठीक बाद की पीढ्ी के है्. ये चारो्आधुनिक तुक्ी कनवता की अजीम शब्खसयत है्, और िानजम के अदमी उसूलो्के अलमबरदार.

ओि्ा​ान वली

चीथड्ेऔर हख्​्ियो्का िरीदार मै्चीथड्ेऔर हन्​्डयां खरीदता हूं खरीदता हूं और नसतारो्मे्तल्दील कर देता हूं. 40 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

मगर... काश!... काश मै्एक मछली होता... शराब की बोतल मे्तैरती एक मछली होता.

तुम मुल्जिम हो (बूचड्की नबल्ली गली-मोहल्लो्मे्भटकती नबब्ललयो्से) तुम रट लगाये जा रही हो नक मै्भूखी हूं इससे जानहर होता है नक तुम कम्युनिस्ट हो इससे सानबत होता है नक तुम्ही्लोग थी्नजन्हो्िे सारे घरो्को जला कर खाक नकया इस्​्ंबूल मे्भी अंकारा मे्भी! नकतिी कमीिी और जंगली हो तुम सब!

ओक्ते करफत

आज्ादी के हाथ है् उन्हो्िे पेड्के सारे िल ले नलये बाजार मे्बेचे्गे ज्यादा से ज्यादा मुिािा बटोरिे को. मेहित की टूटी शाखे् जमीि पर पड्ी हुई्. आजादी के हाथ है्, आंखे्, पैर, बदजात पसीिा पोछिे को आिेवाले कसो्का जायजा लेिे को बराबरी की जानिब कदमताल करिे को. यह उम्मीद आजादी का दरवाजा है खुशहाल नदिो्की जानिब आधा खुला हुआ. यह खुशी खुशहाल नदिो्की रोशिी है आनहस्​्ा-आनहस्​्ा, थोड्ी नझझक के साथ इसकी नकरिे्हम तक आती है्. आओ मेरे हमवतिो, पेश करो खुद को कनलयो्से लदी-िंदी एक शाख की तरह आजादी के दर पर, और तुम्हारे पीछे नबरादरािा गम्रजोशी के साथ िीला आसमाि है.


मगर भुखमरी! क्या ये भी लाइलाज है्? यह बात मेरी समझ मे्िही्आती.

िैतून का िंगल गुलामो्के मानलक, नजन्हे्रोटी की निक्​्कभी िही्हुई, िल्सिे मे्नदलचस्पी रखिे के नलए आजाद थेगुलाम थे ि रोटी मुहैया कराि वास्​्े! गुलाम, जो रोटी को लेकर कभी परेशाि िही्हुए िल्सिे मे्कभी नदलचस्पी िही्उिकीमानलक थे ि रोटी की नजम्मेदारी उठािे वास्​्े! रोमि साम्​्ाज्य का एक सूबा, जो एनशया माइिर मे्था. इस तरह तबाही बप्ार हुई लीनसया मे्. िल्सिे से बेनिक्​्गुलाम रोनटयां ही बिाते रहेउन्हे्िल्सिा मुहैया करािे के नलए उिके मानलक थे, िल्सिे ईजाद करिे वालो्िे रोटी कभी िही्बिायी क्यो्नक उन्हे्गुलामो्की कभी तंगी िही्रही, क्यो्नक उिके पास गुलाम मुहैया करािे का िल्सिा था. इस तरह तबाही बप्ार हुई लीनसया मे्. नलहाजा िल्सिे को रोटी-बोटी की कोई निक्​्िही्, और रोटी भी िल्सिे से बेनिक्​्. िरामोश रोटी के िल्सिे की परवनरश हुई िरामोश िल्सिे की रोटी से और िल्सिे से बेनियाज रोटी की परवनरश रोटी से बेनियाज िल्सिे से हुई. इस तरह तबाही बप्ार हुई लीनसया मे्. मगर लीनसया अब भी जैतूि के एक सरसल्ज जंगल मे्मौजूद है!

जाकित िूलबी

पूरब

मेकलि जवदत अंदे

लाइलाि मुझे पता है नक मौत की, बदनकस्मती और हादसो्की कोई दवा िही् कोई इलाज िही्गंजेपि का. तुम्हारी ये सारी बाते्मुझे मंजूर, मगर बेरोजगारी!

सैकड्ो्हजारो्चीलड्रे्गते हुए पलंगपोशो्पर, कपड्ो्पर कुछ छोटे-छोटे, कुछ मोटे-मोटे- नसर से नसर जोड्े. यह है पूरब! चीलड्, कहत और सदमे! नजसे खुशी कहते है्वह रोटी का एक छोटा सा टुकड्ा, नजसे खुशी कहते है्वह मुट्ी-भर कोयला, बाकी बि्फ, कीचड्और उपले. रातो्के रास्​्ेएक नकस्म का काला गंदा खूि बहता है मौत भी बहती है और बेचरागी भी, मोर की रोशिी, कुत्ो्के भौ्किे की आवाजे्, मुग्े की बांग ऐसे उभरती है्जैसे खूि. यह है पूरब! यहां के लोग अपिी तरि नकसी मरी हुई भेड्की आंखो्से देखते है्, प्यार-मोहल्बत, अपिापि, शाइस्​्गी हजारो्साल पीछे छूट गयी् ये सारी चीजे्.

n शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 41


साशहत्य/समीक्​्ा

खवपदाओ्का स्​्ी-खवमश्ष

इस पुस्क मे्हम शहरी स्​्ी की उन तकलीफो से र्बर्होते है्जिन्हे्तक़लीफ नही्माना िाता है. अनुराधा खसंह

अपिे भीतर की सारी कुंठाओ्, सारे असंतोर को अपिी पत्िी या बच्​्ो् (यािी ऐसे लोग जो शारीनरक र्प से उससे कमज़ोर है)् के प्न्त आक्​्ामक क पुर्र पनत कुछ एक बरस साथ रहिे के बाद यह सूंघ लेता है नक होकर अपिे भीतर से बाहर निकालिे की कोनशश करता है. इसके पीछे वह नकस ‘जानत’ या ‘नकस्म’ की औरत के साथ है. वह जािता है नक मुख्य कारण उसकी पत्िी के मुखर प्​्नतवाद की अिुपब्सथनत है.’ उिकी अपिी पत्िी को सज़ा देिे का सबसे बेहतरीि तरीक़ा या िुस्खा क्या है. चन्चरत कहािी ‘अन्िपूण्ार मंडल की आनखरी नचट्​्ी’ महािगर के ठाट-बाट उसे नकतिे िुकीले या नकतिे भोथरे औजार नकस तरह से इस्​्ेमाल करिे की मृग मरीनचका मे् िंस कर वहां ल्याह दी गयी् छोटे कस्बो् की है्. वह जािता है नक अपिी पत्िी पर शारीनरक बल का इस्​्ेमाल कर या िवल्याहताओ्की शारीनरक-मािनसक दुग्रनत का अभूतपूव्रआख्याि है. दूसरा खंड ‘नजसके निशाि िही्दीखते’ एक बेहद उसे चांटा मारकर वह उतिी तकलीि िही् पहुंचा िामालूम और सूक्म नकस्म की मािनसक प्​्ताड्िा के सकता, नजतिी उसकी उपेक्ा या अवहेलिा कर.’ (एक नवरय मे् बात करता है और उि अदृश्य चोटो् का औरत की िोटबुक) हैरतअंगेज खुलासा करता है जो तब तक पूरी तरह सुधा अरोडा की वैचानरक लेखो् पर आधानरत िज़रअंदाज़ की गयी् जब तक नक िासूर िही् बि गयी्. नक़ताब ‘एक औरत की िोटबुक’ को पढते हुए पाठक यहां पुन्ि के नलए वनरष्​् लेनखका मन्िू भंडारी की एक शहरी मध्यवग्​्ीय स्​्ी के जीवि की उि नवपदाओ् आत् म कथा का एक अंश प्​्स्ुत नकया गया है नजसमे् वे से र्बर् होता है नजन्हे् ि केवल दुनिया बब्लक खुद कहती है् नक ‘इिके (राजे्द् यादव के) बहुत भीतरी उसका ‘हमसफर’ तक़लीि माि​िे से इिकार कर देता व् य ब् क तत् व का एक ऐसा भी नहस्सा है जो बहुत निम्रम, है. नवशुद्स्​्ी नवमश्रपर आधानरत इस पुसक ् मे्दो खंड कठोर और अमािवीयता को छूिे की हद तक कूर् भी रहा है्, पहला है ‘घरेलू नहंसा के नखलाफ’ और दूसरा खंड है है और इसकी मार झेली है उि लोगो्िे, जो बहुत अंतरंग ‘मािनसक प्​्ताडिा के नखलाि’, जो अपिी व्याख्याहोकर उिके प्यार की सीमा मे् होिे का भ्​्म पालते रहे. सामथ्य्र और ल्यौरो् के तरतीबवार नवश्लेरण की वास्व् मे्राजेद् ्के प्यार और अंतरंगता की सीमा मे्कोई अन्​्दतीयता के कारण चुंबकीय आकर्रण से खी्चता है. हो ही िही् सकता नसवाय खुद राजे्द् के, क्यो्नक नकसी यह निस्संदेह नवमश्र आधानरत पुस्क है, लेनकि कही् एक औरत की नोरबुक : सुधा अरोडा; को भी प्यार की सीमा मे् लेते ही अनधकार की बात आ भी अपिे उद्​्ेश्य मे् अनतरेकपूण्र िही् लगती क्यो्नक यह राजकमल प्क ् ाशन, िवरयागंज, नयी जाती है, जो राजे्द्नकसी को दे िही्सकते, समप्रण की महज़ जे्डर नडस्कोस्र िही् वरि स्​्ी पुर्र संबंधो् के विल्ली; पेपरबैक -150, हाड्क ा वर 300 र्. बात आ जाती है, जो राजे्द्कर िही्सकते.’ सामानजक, आन्थरक व मिोवैज्ानिक पक्​् का गहि पुस्क के पहले खंड यािी ‘घरेलू नहंसा के नखलाि’ की तुलिा मे् नवश्लेरण भी है. पुस्क मे् नहंसा की समस्या को नजस मुक़ाम और िज़नरये से देखा दूसरा खंड ‘मािनसक प्​्ताड्िा के नखलाि’ ि केवल नभन्ि लक्​्यके्न्दत गया है वही इसे सबसे अलग बिाती है. संकनलत कुल 13 रचिाओ्मे्से है, बब्लक आज की स्​्ी के सरोकारो्को ध्याि मे्रखते हुए उतिा ही ज़र्री पहला आलेख ही बडे साहस से स्वीकार करता है नक नहंसा नकसी भी र्प भी है. हमारा मध्यवग्र और उच्​्वग्र न्​्सयो् के प्​्नत बरती जािे वाली मे्निंदिीय है, चाहे वह पनत द्​्ारा पत्िी पर की गयी हो या मां द्​्ारा संताि मािनसक नहंसा के इस रोग का नशकार हमेशा से रहा है. यह वह गुप्त रोग पर, ‘नजस नदि वह बच्​्ा बडा होगा और शारीनरक र्प से प्​्नतकार के है नजसका केवल पृष्-प्​्भाव नदखता है. सनदयो्से न्​्सयां मािनसक नहंसा कानबल होगा, वह नबसूरते हुए अपिा गाल सहलािे की बजाय मां के उठे झेलती आ रही है, लेनकि यह इतिी स्पि्​्और िमूदार िही्होती जो गाली हुए हाथ को ि नसि्फपीछे धकेल देगा, बब्लक प्​्कारांतर से बचपि मे्नमले गलौज़ या चीख नचल्लाहट के र्प मे् सुिाई दे सके. यह नहंसा का बहुत सारे तमाचो् को मूल और ल्याज सनहत लौटा देगा.‘ यह कही् भी स्​्ी के बारीक और मारक स्वर्प है जो एक धीमे ज़हर की तरह धीरे-धीरे मारता स्​्ी होिे के मलाल को िही्कहती है, बब्लक उस नपतृसत्​्ात्मक व्यवस्था है. सुधा अरोड्ा इसी वग्रकी स्​्ी का प्​्नतनिनधत्व करती है्सो धीमे ज़हर के नखलाि एक शालीि प्​्नतरोध है जहां स्​्ी को अभी तक एक सामान्य के प्​्भाव को उिसे ज्यादा और कोई िही् समझता. इस दूसरे खंड मे् मािनसक नहंसा का एक िृशंस र्प पुर्र के सोचे-समझे मौि के र्प मे् इंसाि तक ि माि​िे की नज़द ज़ारी है. इसी खंड मे् उिकी एक कहािी ‘तीसरी बेटी के िाम’ मे् आनखरी प्​्स्ुत नकया गया है. इसी खंड मे् एक कहािी है ‘िमक’. मेज पर रखे जािे वाले िमक पैराग्​्ाि कहता है: ‘पर सुि मेरी बच्​्ी! अपिी कटी हुई हथेनलयां ि की एक छोटी सी नडनबया के जनरये एक औरत के पूरे अन्​्सत्व की क्​्नत, िैलािा उस बिािे वाले के सामिे नक नपछली बार तुझे बिाते समय जो अपिे घर मे्आत्मसम्माि के साथ जीिे के अनधकार और जीवि भर अपूणर् भूल की थी, उसे सुधार ले! िही्तुझे तो निर निर वही बि​िा है! निर निर और इं प रिे क्ट कहे जािे, त्याग नदये जािे की असुरक्​्ा को इतिे औरत! सौ जिमो् तक औरत! तब तक औरत, जब तक तेरे नहस्से का प् त ् ीकात् म क िं ग से प्स ् त्ु नकया गया है नक हमे्सुधा अरोड्ा के भीतर नछपा असमाि, तेरे और नसि्फ तेरे िाम ि कर नदया जाये!’ एक और कहािी ‘बडी हत्या, छोटी हत्या’ कन्या भ्​्ूण हत्या के निम्रम सच को खुले मे्खडा कनव अिायास नदखाई दे जाता है. भारा का सौ्दय्र, अनभव्यब्कत, छनवयां कर देती है. ‘ताराबाई चाल : कमरा िंबर एक सौ पै्तीस’ के नवरय मे् और नबंब सुधा अरोड्ा की लेखि भारा के कौशल और प्​्भावपूण्रता को n लेनखका खुद कहती्है,् ‘ नहंसा एक िकारात्मक भाव है और नहंसक व्यब्कत पूरी तरह प्​्नतनबंनबत करते है्.

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42 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016


खज्ंदगी से शायरी तक

पुस्क मे्साजहर समग्​्र्प मे्मौिूद है्. जफल्मो्से इतर उनका िो काम है, वह भी यहां दर्षहुआ है. मुकेश नौखटयाल

गीत नलखिे वे मुबं ई रवािा हुए. नहंदी के कई सानहत्यकार मुबं ई गए, लेनकि निल्मो्का मायावी संसार उिको रास िही्आया और वे वापस लौट गये. नहत्य मे्नसिेमा पर नलखिे का नरवाज नहंदी िाममात्​्के नलए रहा है. यही बात उद्रूवालो्के साथ भी हुई . लेनकि सानहर िे इस रंगीले संसार को व्यावसानयक नसिेमा को तो मुखय् धारा का सानहत्य हंसी-ठट्​्े का भरपूर नजया. मुबं ई मे् रहकर उन्हो्िे नहन्दी के नसिेमा-जगत को अपिे नवरय समझता रहा है. निल्म जगत के कुछ ख्यानतप्​्ाप्त अनभिेता-अनभिेन्तयो् कालजयी गीतो्के माि्तफ सानहत्य की गहरी संवदे िा से पनरनचत कराया. वर्र पर नलखी्नकताबे्हो्, या चलनचत्​्के इनतहास का तफ्सरा - नहंदी सानहत्य 1951 से 1980 तक, तीि दशको्का दौर तो जैसे सानहर के िाम रहा. गुलज़ार और प्स ् िू जोशी जैसे गीतकारो्की मौजूदगी के बावजूद नहन्दी जगत िे इिको अपेन्कत मान्यता िही्दी. ऐसा क्यो्होता है- यह बहस का निल्मी-संसार जब खनटया सरकाकर जाडा भगािे की नवरय है, लेनकि मोटे तौर पर कहा जा सकता है नक नसिेमा जुगत कर रहा है और नबंदास प्म्े ातुर िानयका नचकिी और सानहत्य के बीच की संवादहीिता इसकी एक बडी चमेली बि पव्वा चढाकर आ रही है, तब सानहर के रचे वजह है. गीत लंपट होते रंग-लोक को सीमाओ्के प्न्त सचेत करते इस संदभ्र मे् सुिील भट्​् की नकताब ‘सानहर प्त् ीत होते है.् जाएं तो जाएं कहां, दुखी मि मेरे सुि मेरा लुनधयािवी: मेरे गीत तुमह् ारे’ एक अच्छी पहल कही कहिा, उडे जब-जब ज़ुलि ् े्तेरी, वो सुबह कभी तो आएगी, जायेगी. यह नकताब सानहर के गीतो् की गहरी मीमांसा औरत िे जन् म नदया मद् ो ् ् को, तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये करती है. यहां सानहर का जीवि है, उिका रचिाकम्रहै हक़ है तु म को, लागा चु ि री मे ्दाग छुपाऊं कैस,े जो वादा और कुल कृनतत्व पर गहरी पडताल भी है. ग्यारह अध्याय नकया वो निभािा पडे ग ा, ऐ मे री ज़ोहरे-ज़बी्, बाबुल की और तीि पनरनशि्​्ो् मे् समानहत यह नकताब सानहर के दुआएं लेती जा, नकसी पत्थर की मूरत से, कभी कभी मेरे व्यब्कतगत और साव्ज र निक जीवि के तमाम शेडस ् से नदल मे्खयाल आता है, जैसे दज्िर ो्गीत आज भी अंतस पाठको्को पनरनचत कराती है. को तर करिे की कुवव् त रखते है.् िया दौर निल्म के नलए मान्यताप्​्ाप्त प्न्तभाओ्के बारे मे्नलखते हुए लेखको् सानहर के नलखे गीत ‘साथी हाथ बढािा साथी रे’, ‘तथा ये द्​्ारा संबब्नधत प्न्तभाओ्के चनरत्​्ो्के मायावी पक्​्को ज़ोरदेश है वीर जवािो्का’, आज भी आजादी का जश्ि मिाते शोर से उकेरिे की अघोनरत परंपरा िे उिको नवनशि्​्भले सावहर लुवधयानवी मेरे गीत तुमह् ारे: हुये अनिवाय्रर्प से बजाए जाते है.् ही बिाया हो, पर इसका एक बडा िुकसाि यह हुआ नक सुनील भट्;् स्रार पब्ललकेशसं , आसफ पुसक ् मे्सानहर समग्​्र्प मे्मौजूद है.् निल्मो्से दैिब्नदि संघर्​्ो्के नलए अनभशप्त आम पाठक ऐसे मायावी अली रोड, नयी विल्ली; 195 र्पये इतर उिका जो काम है, वह भी इस नकताब मे्दज़्रहुआ है. चनरत्​्ो्से स्वयं को कभी िही्जोड पाया. िलस्वर्प ऐसी बायोग्​्ानिक नकताबे्पुसक ् ालयो्मे्बेशक सजाई्गई्, लेनकि पाठको्के सानहर की इि दीगर िज्मो्, गज़लो्और गीतो्को पढकर लगता है, नक अपिे समय के इस स्वप्िदृि्ा शायर को केवल निल्मी गीतो् के आधार पर अंतस मे्िही्उतर सकी्. सुिील भट्​्िे एक ियी ज़मीि तोडी है. आठ माच्र1921 को लुनधयािा के जमी्दार चौधरी िज़ल मुहम्मद के आंककर हमिे पूवर्मे्एक तरह की िाइंसािी की है. निल्मी गीतो्से आगे घर जन्मे अल्दल ु हई की सानहर लुनधयािवी बि​िे तक की यात्​्ा नदलचस्प ही सानहर का सफर खासा लंबा है. यह नकताब इस सफर पर ईमािदार तफ्सरा ् त्ु करती है. अच्छा होता, पुसक ् िही्, प्र्े णादायक भी है. सानहर की असल यात्​्ा वर्र1937 से शुर्होती है, करती है और प्म् ाण-स्वर्प साक्य् भी प्स जब उन्हो्िे ए.एच. सानहर िाम से िज्म नलखिी शुर्की. वर्र1946 मे्उिके मे् सानहर के सहयान्​्तयो् के संसम् रण भी जोडे जाते. इससे नकताब की n जीवि मे्एक महत्वपूणर्मोड आया, जब निल्म ‘आजादी की राह मे’् के नलए पठिीयता बढ सकती थी.

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यायावरी

अंबरीश कुमार

कां

केर के आगे बढ्ते ही तेजी से नदि मे्ही अंधरे ा छा गया था. सामिे थी केशकाल घाटी नजसके घिे जंगलो् मे् जाकर सड्क खो जाती है. साल, आम, महुआ और इमली के बड्े दरख्त के बीच सुखर् पलाश के हरे पेड् हवा से लहराते िजर आते थे. जब तेज बानरश की वजह से पहाड्ी रास्​्ो्पर चलिा असंभव हो गया तो ऊपर बिे डाक बंगले मे्शरण लेिी पड्ी. कुछ समय पहले ही डाक बंगले का जीण्​्ोद्​्ार हुआ था इसनलए यह नकसी तीि नसतारा नरसाट्र का र्प धरे था. शाम से पहले बस्​्र पहुंचिा था इसनलए चाय पीकर बानरश कम होते ही पहाड् से िीचे चल पड्.े बस्र् के िक्सल प्भ् ानवत इलाको्मे् अब यह क्त्े ्भी शानमल हो चुका है और पीपुलस ् वार (अब माओवादी) के कुछ दल इधर भी सन्​्कय है.् केशकाल से आगे बिऩे पर सड्क के नकिारे आम के घिे पेड्ो्की कतार दूर तक साथ चलती है तो बानरश मे् िहाये साल के जंगल साथ-साथ चलते है.् जंगलो्की अवैध कटाई के चलते अब वे उतिे घिे िही्है्नजतिे कभी हुआ करते थे. को्डागांव पीछे छूट गया था और बस्​्र आिे वाला था. वह आज भी गांव है, एक छोटा सा गांव. नजला मुख्यालय जगदलपुर है जो ग्​्ामीण पनरवेश वाला आनदवासी शहर है. बस्र्

बस्​्र के रास्​्ेमे्पेड्: जंगल का ह्िय

सम्मोहक शरण का अरण्य

बस्​्र अपने आजदम सौ्दय्षके कारण रोमांचक और सम्मोहक लगता है. दंडकारण्य के नाम से प्​्जसद्​्यह अंचल काफी समय से अशांत क्​्ेत्बन गया है. हालांजक उसका आकर्षण अब भी लोगो्को बरबस अपनी ओर खी्चता है्.

44 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016


का पूरा क्त्े ्दस हजार साल का नजंदा इनतहास संजोये है. हम इनतहास की यात्​्ा पर बस्र् पहुच ं चुके थे. दस हजार साल पहले के भारत की कल्पिा नसि्फ अबूझमाड् पहुंच कर ही की जा सकती है. वहां के आनदवासी आज भी उसी युग मे्है.् बानरश से मौसम भीग चुका था. हस्न्शल्प के कुछ िायाब िमूिे देखिे के बाद हम गांव की ओर चले, कुछ दूर गये तो हरे पत्​्ो् के दोिे मे् सल्िी बेचती आनदवासी मनहलाये्नदखी्. बस्र् के हाट बाजर मे् मनदरा और सल्िी बेचिे का काम आमतौर पर मनहलाये्ही करती है.् सल्िी उत्र् भारत के ताड्ी जैसा होता है पर छत्​्ीसगढ् मे्इसे हब्ल र नबयर की मान्यता नमली हुई है. यह संपन्िता का भी प्​्तीक है सल्िी के पेड्ो् की संखय् ा देखकर नववाह भी तय होता है. बस्​्र क्​्ेत् को दंडकारण्य कहा जाता है. समता मूलक समाज की लड्ाई लडऩे वाले आधुनिक िक्सनलयो्तक िे अपिे इस जोि का िाम दंडकारण्य जोि रखा है नजसके कमांडर अलग होते है.् यह वही दंडकारण्य है जहां कभी भगवाि राम िे विवास काटा था. वाल्मीकी रामायण के अिुसार भगवाि राम िे विवास का ज्यादातर समय यही् गुजारा था. इस वि की खूबसूरती अद्​्त है. घिे जंगलो् मे् महुआकंदमूल, िलिूल और लकनडय़ां चुिती कमिीय आनदवासी बालाये् आज भी सल्िी पीकर मृदगं की ताल पर िृतय् करती िजर आ जाती है.् यही् पर घोटुल की मादक आवाजे् सुिाई पड्ती है्. असंख्य झरिे, इठलाती बलखाती

िनदयां, जंगल से लदे पहाड् और पहाड्ी से तक यहां के हुकम् रािो्िे शोरण नकया है इसी के उतरती िनदयां. कुटबुं सर की रहस्यमयी गुिाये् चलते दूरदराज के डाकबंगलो् के अिनगित ् नलत है.् इि बंगलो्के खािसामा भी और कभी सूरज का दश्िर ि करिे वाली अंधी नकस्से प्च कािी हुिरमंद है.् पहले तो नशकार होता था पर मछनलयां, यह इसी दंडकारण्य मे्है. शाम होते ही बस्र् से जगदलपुर पहुच ं चुके अब जंगलो्से लाए देसी बड्ेमुग्ो्को बाहर से थे क्यो्नक र्किा डाकबंगले मे् था. जगदलपुर आिे वाले ज्यादा पसंद करते है.् यह झाबुआ के की एक सीमा आंध् प्द् श े से जुड्ी है तो दूसरी मशहूर कड्किाथ मुग्ेके समकक्​्मािे जाते है.् सुबह तक बरसात जारी थी. पर जैसे ही उड्ीसा से. यही वजह है नक यहां इडली डोसा भी नमलता है तो उड्ीसा की आनदवासी मनहलाये् आसमाि खुला तो हम प्​्मुख जलप्​्पातो् की महुआ और सूखी मछनलयां बेचती भी िजर तरि चल पड्े. तीरथगढ् जलप्​्पात महुए के आती है.् जगदलपुर मे्एक िही्कई डाकबंगले पेड्ो् से नघरा है. सामिे ही पय्ारवरण अिुकूल पय्रटि का बोड्र भी है.् इिमे् वि नवभाग के लगा हुआ है. यहां पाल डाकबंगले के सामिे ही कुछ दूर हरे पत्​्ो्के दोने मे् और दोिे मे् भोजि आनदवासी मनहलाये् सल्फी बेचती आलदिासी जाता है तो पीिे मछली, मुग्ेऔर तरहमलहिाएं लदखी्. बस्​्र के हाट मे् केपरोसा नलए घड्े का ठंडा तरह की सब्लजयो् का सल्फी बेचने का काम आमतौर पािी है. जलप्​्पात को िेर लगाये िजर आती पर मलहिाएं ही करती है्. देखिे के नलए करीब है्. बानरश होते ही उन्हे् 100 िीट िीचे उतरिा पास के बिे शेड मे् शरण लेिी पड्ती है. हम आगे बढ्े और पड्ा पर सामिे िजर जाते ही हम हैराि रह गये. पहाड्से जैसे कोई िदी र्क कर उतर रही हो. जगदलपुर जेल के पास सन्कटफ हाउस पहुच ं .े इस सन्कफट हाउस मे् नसि्फ छत्​्ीसगढ् ही यह िजारा कोई भूल िही् सकता. कुछ समय िही् आंध् और उड्ीसा के िौकरशाहो् और पहले एक उत्साही अिसर िे इस जलप्प् ात की मंन्तयो्का आिा जािा भी लगा रहता है. कमरे माक्न्ेटंग के नलए मुबं ई की खूबसूरत माडलो्की मे्ठीक सामिे खूबसूरत बगीचा है और बगल मे् नबकिी मे्इस झरिे के िीचे िहाती निल्म बिा एक बोड्र लगा है नजसमे् नवशाखापट्िम से दी. आनदवासी लड्नकयो्के वक्​्पर नसि्फसाड्ी लेकर हैदराबाद तक की दूरी दशाय्​्ी गयी है. नलपटी होती है जो उिकी परंपरागत पहचाि है जगदलपुर अंगज ्े ो्के जमािे से लेकर आज तक उन्हे् देखकर नकसी को नझझक िही् हो सकती शासकवग्रके नलए मौज-मस्​्ी की भी पसंदीदा पर नबकिी की इि माडलो्को देखकर कोई भी जगह रही है. मासूम आनदवानसयो्का लंबे समय शरमा सकता है. जगदलपुर के पास दूसरा जलप्​्पात है वचत्​्कोर जल प्​्पात: पानी का सौ्िय्ा नचत्क ् ोट जलप्प् ात. इसे भारत का नमिी नियाग्​्ा कहा जाता है. बरसात मे् जब इंद्ावती िदी पूरे वेग मे्अध्रचंद्ाकार पहाड्ी से सैकड्ो्िुट िीचे नगरती है तो उसका नबहंगम दृशय् देखते ही बिता है. जब तेज बानरश हो तो नचत्क ् ोट जलप्प् ात का दृशय् कोई भूल िही्सकता. बरसात मे्इंद्ावती िदी का पािी पूरे शबाब पर होता है झरिे की िुहार पास बिे डाक बंगले के पनरसर को नभगो देती है. बरसात मे्बस्र् को लेकर कनव जल्बार िे नलखा है- वर्र के प्​्थम आगमि पर, साल विो् के जंगल मे्, उग आते है् अिनगित द्​्ीप, नजसे जोडऩे वाला पुल िही् पुनलया िही्, द्​्ीप नजसे जािे िाव िही्पतवार िही्. बरसात मे् बस्र् कई द्​्ीपो् मे बंट जाता है पर जोड्े रहता है अपिी संस्कृनत को, सभ्यता को और जीविशैली को. बस्र् मे्अफ्​्ीका जैसे घिे जंगल है्, दुल्रभ पहाड्ी मैिा है तो मशहूर जंगली भै्सा भी है्. कांगेर घाटी की कोटमसर गुिा आज भी रहस्यमयी िजर आती है. करीब 30 िुट संकरी सीढ्ी से उतरिे के बाद हम उि अंधी मछनलयो्की टोह लेिे पहुच ं े नजन्हो्िे कभी रोशिी िही्देखी थी. पर नदल्ली से साथ आयी शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 45


यायावरी

एक पत्​्कार की सांस िूलिे लगी और हमे् िौरि ऊपर आिा पड्ा बाद मे् पता चला उच्​् रक्तचाप और नदल के मरीजो् के अलावा सांस की समस्या नजि लोगो् मे् हो उन्हे् इस गुिा मे् िही्जािा चानहये क्यो्नक गुिा मे्आक्सीजि की कमी है. हम कांगरे घाटी के घिे जंगलो्मे्वापस लौट आये थे. दोपहर से बरसात शुर् हुई तो शाम तक र्किे का िाम िही्नलया. हमे्जािा था दंतवे ाड्ा मे्दंतश े र् ी देवी का मंनदर देखिे. छत्​्ीसगढ्की एक और नवशेरता है. यह देनवयो् की भूनम है. केरल को देवो का देश कहा जाता है तो छत्​्ीसगढ्के नलए यह उपमा उपयुकत् है क्यो्नक यही् पर बमलेश्री देवी, दंतेश्री देवी और महामाया देवी के ऐनतहानसक मंनदर है्. उधर जंगल, पहाड्और िनदयां है्तो यहां की जमीि के गभ्रमे्हीरा और यूरने ियम भी है. दंतवे ाड्ा जािे का काय्क र म् बानरश की जह से रद्​्करिा पड्ा और हम बस्र् के राजमहल पनरसर चले गये. बस्र् की महारािी एक घरेलू मनहला की तरह अपिा जीवि नबताती है.् उिका पुत्रायपुर मे्राजे-रजवाड्ो्के परंपरागत स्कल ू (राजकुमार कॉलेज) मे् पढ्ता है. बस्​्र के आनदवानसयो्मे्उस राजघरािे का बहुत महत्व है और ऐनतहानसक दशहरे मे् राजपनरवार ही समारोह का शुभारंभ करता है. इस राजघरािे मे् संघर्रका अलग इनतहास है जो आनदवानसयो्के नलए उसके पूवर्महाराज िे नकया था. दंतवे ाड्ा जािे के नलए दूसरे नदि सुबह का काय्रक्म तय नकया गया. रात मे् एक पत्​्कार नमत्​्िे पास के गांव मे्बिे एक डाक बंगले मे् भोजि पर बुलाया. हमारी उत्सुकता बस्​्र के बारे मे् ज्यादा जािकारी हानसल करिे की थी. साथ ही आनदवानसयो् से सीधे बातचीत कर उिके हालात का जायजा लेिा था. यह जगह डाक बंगले के पनरसर मे्कुछ अलग कटहल के पुरािे पेड्के िीचे थी. 46 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

जा चुके थे. साथी पत्क ् ार को पौड्ी की पहानडय़ां याद आ रही थी्. पर यहां ि तो चीड्था और ि देवदार के जंगल. यहां तो साल के जंगलो्के टापू थे. एक टापू जाता था तो दूसरा आ जाता था. बस्र् की पहली यात्​्ा कािी रोमांचक थी. ऐसे घिे जंगल हमिे पहले कभी िही् देखे थे. आनदवासी हाट बाजरो् मे् शोख चटख रंग मे् कपड्ेपहिे युवनतयां और बुजगु र्मनहलाएं सामाि बेचती िजर आती थी्. पहली बार हम नसि्फजािकारी के मकसद से बस्र् गये थे पर दूसरी बार पत्क ् ार के र्प मे.् इस बार जब नदिभर घूम कर खबर भेजिे के नलए इंटरिेट िूिं िा शुर् नकया तो आधा शहर खंगाल डाला पर कोई साइबर कैिे िही्नमला. सहयोगी पत्क ् ार का रक्तचाप बढ्रहा था और बस्​्र का डाकबंगला: बची हुई जगह उन्हे्लग रहा था नक खबर शायद जा ही ि पाये आनदवानसयो्के भोजि बिािे का परंपरागत और नपछले दो नदि की तरह आज भी कोई स्टोरी तरीका देखिा चाहता था. इसी जगह से हमिे छप पाये. खैर, एक साइबर कैिे नमला भी तो सन्कटफ हाउस छोड्गांव मे्बिे इस पुरािे डाक उसमे् उिका इमेल खुलिे का िाम ि ले. अंत बंगले मे् रात गुजरिे का िैसला नकया. अंगज ्े ो् मे् मेरे आईडी से बस्र् की खबर उन्हो्िे भेजी के समय से ही डाक बंगले का बावच्​्ीखािा कुछ और हजार बार नकस्मत को कोसा. खबर भेजिे दूरी पर और कािी बिाया जाता रहा है. लकड्ी के बाद हम मािनसक दबाव से मुक्त हुए और से जलिे वाले बड्े चूलह् े पर दो पतीलो् मे् एक जगदलपुर के हस्​्नशल्प को देखिे निकले. साथ भोजि तैयार होता है. साथ ही आनदवानसयो् आनदवानसयो्के बारे मे्कािी जिकारी ली और द्​्ारा तैयार महुआ की मनदरा सल्िी के बारे मे् नदि भर घूम कर हम निर दूसरे डाक बंगले मे् ् ार भी आ गये और निर देर रात जाि​िा चाहते थे. आनदवासी महुआ और चाल बैठ.े कुछ पत्क से तैयार मनदरा का ज्यादा इस्​्ेमाल करते है्. तक हम जगदलपुर की सड्को्पर टहलते रहे. इस बार तीरथगढ् साथ बैठे एक पत्क ् ार िे जलप् प् ात देखिे गये तो बताया नक पहली धार इस बार तीरथगढ्जिप्प् ात जमीि पर महुए के की महुआ की मनदरा देखने गये तो जमीन पर महुए के गुलाबी िूल नबखरे हुए नकसी महंगे स्काच से गुिाबी फूि लबखरे हुए थे. उनकी थे. उिकी मादक कम िही् होती है. दो मादक खुशबू से पूरा इिाका खुशबू से पूरा इलाका पत्​्ो् के दोिो् मे् सल्िी गमक रहा था. महुआ और महुआ की मनदरा गमक रहा था. का िूल देखा और यह पीते मै्िे पहली बार देखा. गांव का आनदवासी खािसामा पतीलो् मे् क्या होता है जाि​िे का प्य् ास नकया. साथ गयी दालचीिी, बड्ी इलायची, काली नमच्र, छोटी आरती महुए की दोिो् मे् नबकती मनदरा भी इलाइची, तेजपाि जैसे कई मामले सीधे भूि रहा चखिा चाहती्थी्पर वह दोिा हाइजनिक िही् था. मुझे हैरािी हुई नक यह नबिा तेल-घी के कैसे लगा इसनलए छोड् नदया. एक गांव पहुंचे तो खड्ेमसाले भूि रहा है तो उसका जब था यहां आनदवानसयो्के घोटूल के बारे मे्जािकारी ली. देसी मुगर्बिािे के नलए पहले सारे मसाले भूि घोटूल अब बहुत कम होता है. नववाह संबंध कर तैयार नकये जाते है्निर बाकी तैयारी होती बिािे के रीनत-नरवाज भी अजीबो गरीब है्. आनदवासी यु्वक को यनद युवती से प्यार हो जाये है. बानरश बंद हो चुकी थी इसनलए हम सब तो वह उसे कंघा भेट् करता है और यनद युवती नकचि से निकल कर बाहर पेड् के िीचे बैठ उसे बालो्मे्लगा ले तो निर यह मािा जाता है ् ्ाव मंजरू है. निर गये. जगदलपुर के पत्क ् ार नमत्​्ो्िे आनदवानसयो् नक युवती को युवक का प्स के रहि-सहि, नशकार और उिके नववाह के उसका नववाह उसी से होिा तय हो जाता है. तौर तरीको् के बारे मे् रोचक जािकानरयां दी. बस्​्र का पूरा इलाका देखिे के नलए कम से पहली बार बस्​्र आये पत्​्कार नमत्​् के नलए कम हफ्ते भर का समय चानहये. पर समय की समूचा माहौल सम्मोनहत करिे वाला था. दूर कमी की वजह से हमिे टुकड्ो्-टुकड्ो् मे् इस तक िैले जंगल के बीच इस तरह की रात आनदवासी अंचल को देखा लेनकि अधूरा. (राजकमल प्​्काशि से प्​्कानशत यात्​्ा निराली थी. n शाम होते-होते हम केशकाल घाटी से आगे वृतांत 'घाट घाट का पािी ' से )


खारपार अरंण कुमार ‘पानीबाबा’ (पािी बाबा िही्रहे. पािी बाबा अमर रहे्. समाज के नलए जीिे वाला लेखक और काय्रकत्ार कभी मरता िही्. अर्ण कुमार पािीबाबा िे मौसम के अिूकूल बि​िे वाले भारतीय व्यंजिो्पर नलखकर स्वाद और सेहत संबंधी समाज की समझ को नजंदा रखा है. उिके कालम को बंद करिा संवाद के अनवरल प्​्वाह को बंद करिा है. इसनलए शुक्वार के सुधी पाठक बाबा की रसोई मे्नकनसम-नकनसम के स्वाद आगे भी पाते रहे्गे.)

दशहरे के व्यंजन

दशहरे के जदन मूंग-चावल खाने का जिक्​्है. परंपरा से हट कर इस बार दशहरे पर दूध के मूंग बनाइए.

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न्​्शि अमावस्या को सभी नपतरो् का आह्​्ाि होिे के बाद ठीक अगली सुबह शारदीय िवरान्​्त की स्थापिा की जाती है. यािी िौ नदि की दुग्ार पूजा. दसवे्नदि दशहरा पूजते है्. दशहरा पूजिे के पांचवे्नदि होगी शरद पून्णरमा. शारदीय िवरात्​्की स्थापिा के नदि से लेकर कान्तरक अमावस्या को दीपावली, अन्न्कूट, भैया दूज तक लगभग हर नदि शरद उत्सव का पव्र है. यूं समझे् नक आन्​्शि एकम् से कान्तरक अमावस्या तक हर नदि पव्रहै. शरद, गम्​्ी के समाप्त होिे और ठंड के आगमि की सूचिा है. ऋतुओ् के प्​्मुख नवभाजि का संनध काल है इसनलए परंपरागत ऋतुचय्ार के अिुर्प शारदीय उत्सव की शुर्आत व्​्त-उपवास से ही होती है. अमावस्या श्​्ाद्​् भोज से निपटते ही अगले दो, तीि, चार नदि केवल जलाहार करिा चानहए, निर दो नदि रसाहार, एक-दो नदि िलाहार (कच्​्ेिल और सल्जी) और कन्या पूजि से एक नदि पहले प्​्ाकृनतक (जंगली) खाद्​्ान्ि जैसे कूट्, नसंघाड्ा, चौलाई (रामदािा) आनद साग भाजी के संग नमलाकर प्य् ोग नकया जा सकता है. दशमी को साधारणतया कच्​्ी रोटी व खीर की परंपरा है. राजस्थाि मे् साबुत मूंग-चावल का नरवाज है. अपिे दोआब मे् दशहरे के नदि गन्िा, नसंघाड्े, लोनबया, मूंग की िनलयां, मूली, कलश स्थापिा के नदि बोये गये जौ के जवारे गोबर के दशाशीश निन्मरत कर पूजिे की परंपरा है. उस नदि िये बही-खाते खुलते है् और तमाम नजंसो् सनहत सोिे-चांदी के भाव नलखे जाते है्. कलम दवात, अस्​्-शस्​्, कॉपी, पुस्क, घड्ी, छड्ी इत्यानद का पूजि होता है. लड्​्ओ्के बारे मे्हमारा आग्​्ह है नक लड्​्पूण्रतया रंग-नवहीि होिे चानहए. भोजि मे् नवशेर कर नमठाइयो् मे् रंग डालिे का नरवाज चालीस-पचास बरस से ज्यादा पुरािा िही् है. हमारे देखते-देखते पहले ग्​्ामीण इलाको्मे्और अब तो शहरी तुर्रम खां हलवाइयो् तक के यहां लड्​्-बालूशाही रंग डाल कर ही बिाये जा रहे है्. नमठाइयो् को उनचत/पय्ारप्त नसंकाई के नबिा तैयार करिा बड्ी खतरिाक बात है. इस दशहरे पर कम से कम प्​्बुद्जि को यह संकल्प अवश्य करिा चानहए नक रंग वाली नमठाइयो्का उपयोग िही् करे्गे. शुद्लड्​्ि उपलल्ध हो्तो नवजयदशमी पर सादे गुड्से मुंह मीठा कर ले्. दशहरे के नदि मूंग-चावल खािे का नजक्​् है. परंपरा से हट कर इस बार दशहरे पर दूध के मूंग बिाइए-पहली रात साबुत मूंग अच्छी तरह धोकर, उबाल कर ठंडा नकये दूध मे्नभगो दीनजये. सुबह निथार कर रोड्ी

अलग कर दे्, पय्ारप्त दूध मे्मूंग खीर की तरह पकाइए –मूंग अंदर तक सीझ जाये्और दूध रबड्ी जैसा नदखाई देिे लगे तो आंच से उतार कर जीरेबीजझड्ी साबुत लाल नमच्रका छौ्क लगा दीनजए. स्वादािुसार िमक डाल दीनजए. गम्र-गम्रसादे चावलो्पर घी के साथ परोनसये. िुस्खा शास्​्सम्मत तो िही्, लेनकि स्वाद मे्बेजोड्है. मामूली प्​्यास से पूरी दुनिया मे्उत्​्म कोनट के ‘िास्टिूड’ की तरह स्थानपत हो सकता है. दूध मे्पके मूंग सो्धे नमठास का पय्ारय है. काली साबुत और धुली उड्द भी इस नवनध से बिायी जा सकती है. ध्याि रखे् नक दूध के मूंग या अन्य व्यंजिो् मे् िमक पकिे के बाद ऊपर से ही डाला जाता है. पकते समय कदानप िही्. नसि्फसे्धा िमक का ही प्​्योग करे्. दशहरे के नदि से कच्​्ी मूली और उसकी भूजी खािा शुर् कर दे्. कच्​्ेलच्छे के सलाद मे्मूली के हरे पत्,्े हरी धनिया, बीज रनहत हरी नमच्,र लाल रचा अदरक भी अवश्य नमलाएं. यह अत्यतं स्वानदि्​्देसी सलाद है’सस्​्ेनमलिे लगे तो बारीक कटे टमाटर भी डाले जा सकते है्. छोटे बच्​्ो् को राई और नसरके की मूली का चस्का डलवा सके्गे तो अनत उत्​्म होगा. आंतो्के कीड्ेमर कर निकल जाये्गे और नजगर तंदुर्स्बिा रहेगा. अगला त्योहार शरद पून्णरमा का है. यािी चांदिी नमन्​्शत भोजि शुर् कर दे्. शरीर िे जेठ की लू से भादो् की उमस तक जो भी गम्​्ी सही है, उसे शीतल चांदिी से शांत कर दे्. खीर चाहे जो पकाए लेनकि िए चावल का (नचवड्ा, पोहे) गाढ्ेदूध मे् सेवि अवश्य करे्. दूध खौला लेनकि सारी या आधी रात तक चांदिी मे् ठंडा हो. िये चावल उपलल्ध ि हो् तो पुरािो् को ही धोकर िहरा कर ले्. दादी इस पव्र पर सिेद नमच्र का पाक बिाया करती थी. एक नहस्सा सिेद गोल नमच्रइमामदस्​्ेमे्कूट कर, चौगुिा नमश्​्ी का बूरा और उतिा ही हाथ बिा गौघृत नमलाकर शरद चांदिी मे् ठंनडया लेती थी. निर कािी नदिो् तक एक छोटी गोली सुबह शाम दूध के साथ देती रहती थी- पािीबाबा की आंखो्मे्जो ज्योनत है वह उसी की बदौलत है. आगे करवा चौथ व्त् भी है जो बहि बेटी सुबह सहरी/सरगी खािा चाहे् वह िलो्की चाट से काम चलाये्गी तो व्​्त सहजता से होगा. व्​्त तोड्िे के नलए नदल्ली-निकटवत्​्ी दोआबे मे् बेड्मी-पूड्ी का नरवाज है- िुस्खा दोहरािा आवश्यक िही्. नमठाई मे्मालपुआ उपयुक्त रहेगा. पहले गुिगुिे दूध मे्देसी बूरा घोल ले्, दनलए जैसा मोटा आटा, पके केले नमलाकर गाढ्ा घोल बिा ले्. छोटी कड्ाही मे् शुद् घी मे् तले्. राजस्थािी लपसी-दनलये n का मीठा हलुवा भी उपयुक्त व्यंजि है. शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 47


मास् शि्टल्महेड

लीक से हरकर अवभनय

‘जमज्िषया’ मे्दोहरा जकरदार जनभाने के बाद हर्षवध्षन कपूर एक मंिे हुए अजभनेता के र्प मे् अपनी पहचान बना चुके है्. जसनेमा के प्​्जत उनका निजरया काफी रचनात्मक है. हखर मृदुल

जा

हष्ावध्ान कपूर: व्यावसावयकता के बावजूि 48 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

िे-मािे अनभिेता अनिल कपूर के बेटे हर्रवध्रि कपूर िे निल्म 'नमन्जरया' से बॉलीवुड मे् दस्​्क दे दी है. निद्​्ेशक राकेश ओमप्क ् ाश मेहरा िे 'नमज्ार सानहबां' की दुखांत प्म्े कथा को बड्ेपरदे पर उतारिे के नलए एकदम अलग नशल्प का सहारा नलया है और हर्रवध्रि को नमज्ार तथा आनदल के दोहरे नकरदार सौ्पे है.् इि नकरदारो्को निभािा हर्वर ध्िर के नलए बेहद चुिौतीपूणर्रहा. बातचीत के अंश: आपने ऐसी वफल्म से एेक्किंग कवरयर शुर् वकया है, वजसमे् अवभनय के वलए पय्ा​ाप्त जगह वदखती है. मै्अनभिय की दुनिया मे्इसीनलए तो आया हूं नक कुछ रचिात्मक काम कर सकूं. मै् सीधे रास्​्े चलिेवालो् मे् से िही् हूं. निल्मो् के प्​्नत मेरी सोच कािी अलग है. मै्िही्मािता हूं नक यह नसि्फपैसे कमािे का माध्यम है. यह तो आज के दौर की सव्रश्ेष् कला है. इसे कलाओ् का संगम भी कह सकते है्. सचमुच मै् 'नमन्जरया' जैसी ही कोई निल्म चाहता था. यह मेरा सौभाग्य है नक मै्उस निल्म से जुड्ा हू,ं जो गुलजार साहब जैसे लीजेड ् की कलम से निकली है. जहां तक निद्श ्े क राकेश ओमप्क ् ाश मेहरा की बात है, तो उिकी निल्मे् कहािी कहिे की कला का श्ष ्े ् िमूिा लगती है.् ‘वमव्जय ा ा’ मे् आपने वमज्ा​ा के साथ आवदल का भी वकरदार वनभाया है. दोनो् वकरदार एक दूसरे से एकदम अलग है.् इि नकरदारो्िे मुझे बहुत ज्यादा चुिौती दी और रचिात्मक संतनु ्ि भी प्द् ाि की. ऐसा लग रहा था नक मै्दो निल्मो्की शूनटंग एक साथ कर रहा हूं. दरअसल इि दोिो् नकरदारो् मे् कोई किेक्शि िही् है. नमज्ार और आनदल की दो अलग दुनिया है.् मैि् े पहले आनदल वाले नहस्से की शूनटंग पूरी की थी. इसके बाद चार महीिे का ब्क ्े नमला. ब्क ्े के बाद नमज्ार वाला नहस्सा नकया. अनभिय करते हुए यही लगता रहा नक दो अलग निल्मे्ही बि रही है.् आपके वपता जानेमाने अवभनेता है्. एक प्​्वतव्​्ित प्​्ोडक्शन हाउस भी है आपके


पवरिार का. आपने वकसी विशुद् मनोरंजन वफल्म से शुरआ ् त क्यो् नही् की? अगर नवशुद्मिोरंजक निल्मे्बेनसरपैर की हो्गी, तो मै् उन्हे् कतई िही् करं्गा. मै् मिमानिक भूनमका ि नमलिे की ब्सथनत मे् दोएक साल घर भी बैठ सकता हू.ं लेनकि यह भी जर्री िही्है नक जो चीजे्मुझे अच्छी लगती है,् वे दूसरो् को भी अच्छी लगेग् ी. हर अनभिेता की अपिी प्​्ाथमनकताये,् अपिी सोच होती है. आपने अपने वपता को रात-वदन काम करते देखा है. आप बॉलीिुड मे् अपने वलए वकतना संघर्ा मानते है? ् सबसे पहली बात तो यह है नक मेरा कोई आन्थरक संकट िही् है. मै् नसि्फ पैसो् के नलए निल्मे्िही्करिा चाहता हू.ं मै्एक साल मे्एक ही निल्म करिे की सोचता हू.ं मै्बहुत शांनत से काम करिेवाला इंसाि हूं. ‘नमन्जरया’ मे् काम करिा इसनलए यादगार रहा है नक राकेश ओमप्क ् ाश मेहरा से मेरा स्वभाव कािी हद तक नमलता है. वे सुकूि से काम करते है्. गुलजार साहब भी ऐसे ही है.् संयोग ही है नक हम सभी एक ही जैसी सोच के लोग नमल गये थे. आपके पापा का कहना है वक मेरा लडक़ा मेरे हाथ से वनकल चुका है और मेरा कहना नही् मानता है. पापा िे यह प्यार से कहा है. लेनकि यह सच है नक जेिरेशि गैप की वजह से मै्उिकी बहुत सारी बातो्से सहमत िही्होता हूं और मै्यह सब जता भी देता हू.ं असल मे्हर नकसी का नदल और नदमाग अलग होता है. हर अनभिेता की अिुभनू त अलग होती है. मेरी दुनिया अलग है और पापा की दुनिया अलग. ‘वमव्जाया’ मे् काम करते हुए वमज्ा​ा और

आवदल मे् से वकस वकरदार को अपने करीब पाया? मै्आनदल के करीब हू.ं नमज्ार मुझे बहुत नजद्​्ी लगा है. असल मे् आनदल एक लडक़ा है और नमज्ार एक भरा-पूरा आदमी बि चुका है. इसके अलावा आनदल मेरा समकालीि है, जो राजस्थाि के एक अस्​्बल मे् काम करता है. िाइट सिारी या पोलो खेलिे वाले घोड्ो् की देखभाल करता है. आपने अवभनेता बनने की कब सोची? शुर्मे्मै्लेखक बि​िा चाहता था. बाद मे् मैि् े अनभिेता बि​िे की सोची. मैि् े लॉस एंनजनलस से राइनटंग का कोस्रभी नकया है. यही्एब्कटंग भी सीखी है. मुझे कहािी की कल्पिा करिा अच्छा लगता है. यह मेरी र्नच का काम है. शायद मै् आगे कभी इसका उपयोग कर पाऊं. आपका आदश्ा अवभनेता कौन है? कोई िही्. मेरे नपता भी िही्. मै्इस िजनरये से सोचता ही िही्हू.ं हां, मेरी पसंदीदा निल्मे्कई है.् मैि् े अिेक देसी-नवदेशी निल्म देखी है.् मुझे अपिे दौर को अनभव्यक्त करिे वाली निल्म अच्छी लगती है.् मै्इसी तरह की निल्मो्मे्काम करिा चाहता हू.ं आप जैसी वफल्मे् पसंद करते है,् िैसी वफल्मे् यहां कम बनती है्. आपको बॉलीिुड मे् वदक्त् आ सकती है. मुझे पता है नक मेरे नलए निल्म चुि​िे का काम कनठि होगा. हालांनक मै् नवक्​्मानदत्य मोटवािी के साथ एक निल्म कर रहा हूं नजसका िाम है 'भावेश जोशी'. इसकी आधी शूनटंग हो चुकी है. वफल्मो् के बारे मे् पापा से बात होती है? िही्, ज्यादा बातचीत िही्होती है. असल मे्

‘वमव्जाया’ का एक िृश्य : िो भूवमकाओ्से न्याय उिकी निल्मो् का दौर अलग था. उस समय निल्म बिािे का तरीका भी आज से अलग था. सभी अनभिेता एक साथ चार-पांच निल्मे्कर रहे होते थे. चार-चार नशफ्ट मे् काम करते थे. कई बार 18 घंटे की नशफ्ट हो जाती थी. तब निल्मे् सेट पर ही नलखी जाती थी्. अब सबकुछ अलग है. अपने वपता की सफलता को कैसे देखते है? ् सब जािते है्नक वे बहुत मेहिती अनभिेता है.् उिकी निल्मो् का चयि भी उल्लख े िीय है. उिके समकालीि अनभिेता जैकी श्​्ाि श्​्ॉि और सिी देओल भी महत्वपूणर्रहे है.् अक्सर लोग बड्े अवभनेता के बेिे की तुलना उसके वपता से कर देते है.् आपको यह खतरा नही लगता? िही्, मेरी अनभिय शैली एकदम अलग है. हां, यह जर्र है नक डैड िे नजस समप्ण र के साथ निल्मो् मे् काम नकया है और नजतिे मजे लेकर काम नकया है, शायद ही मै्वैसा कर पाऊं. लेनकि मेरी यह कोनशश जर्र होगी नक काम करते हुए आिंद भी उठाऊं. जहां तक पापा से मेरी तुलिा का सवाल है, तो यह बेकार की बात है. उिकी और मेरी तुलिा का तो कोई मतलब ही िही्है. बड्ी बहन सोनम कपूर बॉलीिुड मे् अपना मुकाम बना चुकी है.् क्या उनसे अवभनय के बारे मे् बात होती है? हां, कभी-कभी हम अनभिय से संबनं धत बात करते है.् दरअसल हमारे टेसट् एक जैसे है.् मुझे लगता है नक आगे जाकर वे मेरी सबसे बड्ी आलोचक सानबत हो्गी. लेनकि वे मेरे प्न्त कािी ज्यादा केयनरंग है.् कई बार वे नबि मांगे सलाह भी दे देती है.् जब मै्उिकी िही्सुिता हू,ं तो निर वे मुझे मेरे हाल पर छोड्देती है.् n शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016 49


अंितम पन्ना संदीप पांडेय

हमंे युद्नही्शांखत दो

युद्की मांग करने वाले क्या दोनो्देशो्के शहरो्को जहरोजशमा-नागासाकी मे्बदलते देखना चाहते है्?

उ

ड्ी हमले के बाद से देश मे्युद्ोन्माद का माहौल निन्मतर नकया जा रहा है. लगता है नक सरकार देश को युद्मे्झो्किे की तैयारी कर रही है. शासको्को युद्से िायदा हो सकता है, नकंतु कोई भी युद्आम जिता के नहत मे्िही्होता. भारत-पानकस्​्ाि युद्तो कतई िही्हो सकता क्यो्नक दोिो्देशो्के पास परमाणु शस्​्है.् जो लोग युद्की बात कर रहे है,् उिसे पूछा जािा चानहए नक क्या वे दोिो् देशो् मे् कई शहरो् को नहरोनशमािागासाकी मे्तल्दील होते देखिा चाहते है.् भारत-पानकस्​्ाि के बीच चार युद्हो चुके है.् उिसे समस्या का कोई समाधाि तो निकला िही्. ि ही कोई युद्ऐसा निण्ायर क ही रहा नक आगे युद्की जर्रत ि पडे. कश्मीर समस्या का हल निकालिे की जर्रत है तानक भनवष्य मे्ि तो कोई भारतीय सैनिक शहीद हो और ि ही कश्मीर का कोई िागनरक. सरकार की यह नजम्मदे ारी है नक वहां हालात सामान्य बिाये और पानकस्​्ाि के साथ वात्ार करे तानक कोई स्थायी समाधाि निकल सके, जो कश्मीर के लोगो्को मंजरू हो. यह ठीक है नक हमारे सैनिक बहुत बहादुर है् और वे देश के नलए हर वक्त कुबा्िर ी देिे को तैयार रहते है,् नकंतु उिकी जाि कीमती है, खासकर उिके पनरवार वालो्के नलए. हमे्उन्हे्यूं ही िही्मरिे देिा चानहए. सरकार की िीनतयां ही तय करती है् नक सैनिक नकतिे सुरन्​्कत रहेग् .े सरकारे्तो जब चाहे्दोस्​्ी कर लेती है्और जब चाहे् तो दुशम् िी का माहौल बिा देती है.् भारत व पानकस्​्ाि के आम िागनरक तो जब मौका नमलता है, वे बडे सद्​्ाव से नमलते है.् उिके बीच कोई दुशम् िी िही्. तब सरकारो् की दुशम् िी का खनमयाजा हमारे सैनिक क्यो् भुगते?् िरेद् ्मोदी की सरकार को आये अभी दो वर्रही हुए है्और भारत पर दो आतंकी हमले हो चुक.े जम्म-ू कश्मीर मे् भाजपा की गठबंधि सरकार है और आजादी के बाद से वहां सबसे खराब हालात है.् आनखर क्या बात है नक भाजपा की सरकार आिे के बाद से कश्मीर के अंदर और भारत की सीमा पर ब्सथनत ज्यादा तिावपूणर् हो गयी है? इसमे् कही् भारतीय जिता पाट्​्ी के िजनरये और उिके तरीके का दोर तो िही्? इस पर राष्​्ीय स्वयंसवे क संघ के लोगो्को आत्मनचंति करिे की जर्रत है. अभी तक भारत सरकार कश्मीर के मुद्ेका अंतरराष्​्ीयकरण करिे से बच रही थी. नकंतु बलूनचस्​्ाि का मुद्ा उठा कर भारत खुद ही इस मुद्ेका अंतरराष्​्ीयकरण कर रहा है. भारत को बलूनचस्​्ाि का मुद्ा उठािे का पूरा हक है, नकंतु हमारी प्​्ाथनमकता कश्मीर होिी चानहए. यनद कश्मीर मे्दो माह मे्80 के ऊपर लोग मर जाते है्तो यह दुनिया मे्कोई अच्छा संदश े िही्देता है. भारत सरकार कश्मीर मे्होिे वाली हरेक घटिा के नलए पानकस्​्ाि को

50 शुक्वार | 1 से 15 अक्तूबर 2016

दोरी ठहराती है. यह सच है नक पानकस्​्ाि कई कश्मीरी िौजवािो् को आतंकवादी प्न्शक्ण ् देता है, नकंतु जब कश्मीर के बच्​्ेऔर मनहलाएं भी सुरक्​्ा बलो्के सामिे पत्थर लेकर खडे हो जाते है्तो यह हमारी िीनतयो्का दोर है. नबिा अपिे घर को ठीक नकये बाहर वाले को दोर देिे से भारत की नवश्स ् िीयता िही्बिेगी. भारत पानकस्​्ाि को आतंकवादी राष्​् के र्प मे् नचब्हित करवािा चाहता है. नकंतु अमेनरका की भूनमका पर हम कोई सवाल िही्उठाते. मुबं ई हमले मे्एक अमरीकी डेनवड कोलमैि हैडली की भूनमका की बात क्यो्िही् की जाती? आनखर अमेनरका पानकस्​्ाि को आज भी क्यो्हनथयार मुहयै ा करा रहा है? हमे्अपिी सुरक्​्ा का पुखत् ा इंतजाम करिे की भी जर्रत है तानक देश मे् बार-बार घुसपैठ ि हो. यह अच्छा होगा नक हम आक्म् ण करिे वाले हनथयारो्पर पैसा खच्रकरिे की बजाय घुसपैठ से अपिी सुरक्​्ा के आधुनिक इंतजाम करे.् राष्व् ाद के िाम पर बडी-बडी बात करिे वाले िेताओ्से पूछा जािा चानहए नक यह कैसे होता है नक आतंकवादी अपिी मज्​्ी से भारत की सीमा मे्कािी अंदर तक चले आते है्और हमारी खुनिया एजेन्सयो् को खबर तक िही् लगती? जो लोग इि घुसपैठ के नलए नजम्मदे ार है् उिकी जवाबदेही तय होिी चानहये. यनद भारतीय जिता पाट्​्ी आन्थक र नवकास के मुद्े पर अपिी असिलता को िंकिे के नलए युद्के बहािे लोगो्का ध्याि बांटिा चाहती है तो इससे शम्िर ाक बात कोई िही्हो सकती. िरेद् ्मोदी के तमाम प्य् ासो् के बावजूद देश मे् कोई खास पूज ं ी निवेश िही्हुआ है, निजीकरण को तेजी से बढावा नदया जा रहा है नजसमे्उन्ही्के नमत्​्अंबािी और अडािी को ज्यादा लाभ नमल रहा है. युद्की बात करते हुए रेल बजट को अलग से पेश ि करिे का महत्वपूणर् निण्यर और घाटे मे्चलिे वाली 17 सरकारी कंपनियो्को बेचिे का निण्यर सवाल खडे करता है. युद्की आशंका की छाया मे्कही्सरकार की मंशा यह तो िही्नक नबिा बहस के ये बडे निण्यर देश पर थोप नदये जाये?् हमारी सरकार से अपेक्ा है नक वह युद्की बात करिा बंद कर कश्मीर की समस्या का स्थायी हल िूढं िे की नदशा मे्पहल करे. बकायदा घोनरत िीनत के तौर पर पानकस्​्ाि के साथ दोस्​्ी और शांनत स्थानपत करे. यह काम ठीक उसी तरह एक झटके मे् हो सकता है जैसे िरेद् ् मोदी अचािक पानकस्​्ाि पहुचं गये. यनद भारत-पानकस्​्ाि संबधं सामान्य होते है्तो कश्मीर n समस्या का हल निकालिा भी आसाि हो जायेगा. (लेखक मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित समाजकम्ी् है.्)


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Shukrawaar 1 15 october 2016 medium resolution by ambrish kumar - Issuu