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Shukrawaar 1 15 january 2017 medium resolution

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वर्ष 10 अंक 1 n 1-15 जनवरी 2017 n ~ 20

नोटबंदी स े मची तबाही


www.shukrawaar.com

वर्ष10 अंक 1 n 1 से 15 जनवरी 2017 स्वत्वािधकारी, मुद्क एवं प्​्काशक क्​्मता सिंह प्​्बंध िंपादक आशुतोष सिंह िंपादक अंबरीश कुमार िंपादकीय िलाहकार मंगलेश डबराल राजनीसतक िंपादक सववेक िक्िेना फोटो िंपादक पवन कुमार िंपादकीय िहयोगी

िसवता वम्ा​ा अंजना सिंह फजल इमाम मल्ललक (सिल्ली) िुनीता शाही (लखनऊ) अिनल चौबे (रायपुर) पूजा ि​िंह (भोपाल) िंजीत स्​्िपाठी (रायपुर) अिवनाश ि​िंह (ि​िल्ली) अिनल अंशुमन (रांची)

आवरण कथा

6 | नोटबंदी का नतीजा क्या

देश मे्नोटबंदी के िैसले से आम लोगो्का पूरा रीवन अस्-् व्यस्​्हो गया है. सरकार की बताई हुई समय-सीमा पूरी होने काे है, लेवकन हालात मे्वबगाड्ही हुआ है और लगभग रोर बदलने वाले वनयमो्के कारण भारतीय मुद्ा से लोगो्का भरोसा उठ रहा है.

22 | एक नये िोर्​्े पर दीदी

नोटबंदी के बाद ममता बनर्​्ी के नेततृ व् मे्पहली बार पूरा ववपक्​् एकरुट नरर आया है. केद् ्मे्भारपा सरकार बनने के बाद यह अपनी तरह का पहला मौका है.

कला

प्​्वीण अिभषेक

महाप्​्बंधक

एि के सिंह +91.8004903209 +91.9793677793 gm.shukrawaar@gmail.com

िबजनेि हेड

शरि कुमार शुकल ्ा +91. 9651882222

ब्​्ांिडंग

कॉमडेज कम्युिनकेशन प्​्ा़ िल़

प्​्िार प्​्बंधक

यती्द्कुमार ितवारी +91. 9984269611, 9425940024 yatendra.3984@gmail.com

सिज्​्ापन प्​्बंधक सजते्द्समश्​्

सिसध िलाहकार शुभांशु सिंह

shubhanshusingh@gmail.com

+91. 9971286429 सुयश मंजुल

िंपादकीय काय्ा​ालय

एमडी-10/503, िहारा ग्​्ेि, जानकीपुरम लखनऊ, उत्​्र प्​्िेश-226021 टेलीफैक्ि : +91.522.2735504 ईमेल : shukrawaardelhi@gmail.com www.shukrawaar.com DELHIN/2008/24781 स्वत्वािधकारी, प्क ् ाशक और मुदक ् क्म् ता वसंह के वलए अमर उराला पब्ललकेशस ं वलवमटेड, सी-21, 22, सेकट् र-59, नोएडा, उत्र् प्द् श े से मुव्दत एवं दूसरी मंवरल, ल्ाी-146, हवरनगर आश्म् , नयी वदल्ली-110014 से प्क ् ावशत. संपादक : अंबरीश कुमार (पीआरल्ाी अिधवनयम के तहत समाचारो्के चयन के िलए िरम्मेदार) सभी कानूनी िववादो्के िलए न्याय क्​्ेत्िदल्ली होगा.

24 | जब विले सुर िेरा-तुमह् ारा

उत्र् प्द् श े मे्सपा-कांगस ्े गठबंधन की रमीन तैयार होती वदख रही है. अगर यह गठबंधन परवान चढ्ता है तो आगामी ववधान सभा चुनाव की तस्वीर बदल सकती है.

26 | ववरोध करो गोली खाओ

29 | ओज्ोन परत की तरह

46 | कवव गुर् और ववदेविनी

48 | पहलवानी और वसनेिा

झारखंड मे्एनटीपीसी की एक पवरयोरना सवालो्के घेरे मे्है. गोलीबारी ने रहां चार लोगो्की रान ले ली वही्इसमे्अवनयवमतता की खबरे्रोरो्पर है्.

रवी्दन् ाथ ठाकुर और ववक्तोवरया आेकांपो की वमत्त् ा की कहानी वववचत्​्और माव्मक ा है. इस अनछुये ववषय पर बन रही विल्म रल्दी ही उपलल्ध होगी.

अनुपम वमश्​्की मौरूदगी से सामावरक पय्ा​ावरण मे्ऑक्सीरन वमलती थी और यह भरोसा भी वक तापमान कभी इतना नही्बढ्ेगा वक दुवनया रीने लायक न रह राये.

आवमर खान की विल्म 'दंगल' होने से पहले ही चच्ा​ा मे् है. विल्म की कामयाबी को लेकर आश्​्स्इस अवभनेता से बातचीत के कुछ अंश. शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

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आपकी डाक

नोटबंदी की देशबंदी

महिलाओं की मुसीबत

भारतीय पवरवारो्मे्व्​्ियां लंबे समय से अपनी छोटी मोटी बचत को गाढ्ेसमय के वलए एकव्​्तत करती आयी है.् हम सभी रानते है्वक 2008 मे् देश को आव्थक ा मंदी से बचाने मे्ग्​्ामीण आय और इसी घरेलू बचत ने सहायता की थी. लेवकन मोदी सरकार की इस घोषणा के बाद देश की लाखो् मवहलाओ् ने अचानक पाया वक उनके पास बचत करके रखी गयी 500 और 1000 र्पये की नकदी अब गैरकानूनी हो गयी है. यह बात बहुत हताश करने वाली थी क्यो्वक उन्हो्ने अपने पवतयो्, वपताओ्आवद को भी इसके बारे मे्नही्बताया था. उन्हे्मरबूरी मे्इस रावश को सामने लाना पड्ा. इस पर उनका मराक उड्ाया गया, उनको ताने वदये गये. मवहलाओ् की पूरी बचत बैक ् ो्के हवाले हो गयी. अथ्श ा ाि्​्ी कह रहे है्वक अगर भववष्य मे्कोई बड्ा ववत्​्ीय संकट आया तो उससे रक्​्ा के वलए हमारे पास कोई घरेलू बचत नही्होगी.

टंपं का उदय

राजेशर् ी पटेल, इलाहाबाद

अमेवरका मे्राष्प् वत पद के वलए हुए चुनाव मे् डोनाल्ड ट्प्ं की रीत ने पूरी दुवनया के वलए एक

हि​िेकिीन सरकार

नोटबंदी के अवववेकी िैसले ने मोदी सरकार से आम रनता के मोहभंग की भी शुर्आत कर दी है. सरकार अगर इसका ठीक तरह से प्​्बंधन नही् कर पायी, रो नरर भी आ रहा है तो आगामी उत्र् प्द् श े ववधानसभा चुनाव मे्उसके वलए कािी मुब्ककल खड्ी हो सकती है. राजेश भसंह

शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

से देश की अथ्वा य् वस्था मे्मंदी आ सकती है. इस िैसले के पहले पूरा होमवक्कनही्वकया गया था वरसके चलते देश मे् अचानक नकदी की भारी वकल्लत उत्पन्न हो गयी. ग्​्ामीण भारत मे् हालत और अवधक खराब हो गयी क्यो्वक सहकारी बैक ् ो्और ग्​्ामीण बैक ् ो्को उतना पैसा नही् वमल रहा था वरतना वक देश के शहरी इलाको् के बै्को् को इस सरकार को शायद अपने गलत कदम भी वापस लेने मे्शव्मदि् गी का अनुभव होता है इसवलए उसने लोगो्को परेशान होने वदया. पारस सक्सन े ा, भोपाल

नये वकस्म का संकट उत्पन्न कर वदया है. ट्प्ं वरस तरह के चुनाव प्च ् ार और वादो् के साथ चुनाव मैदान मे् थे, अगर वह उनको पूरी तरह लागू करने के प्य् ास मे्लग गये तो पहले से ही संकटग्स ् ् दुवनया के सामने कवठनाई और बढ् रायेगी. ट्​्ंप के ि्​्ी ववरोधी, मुब्सलम ववरोधी और संरक्​्णवाद को बढ्ावा देने वाले ववचार अगर राष्प् वत बनने के बाद उनकी नीवतयो् मे् झलकते है् तो यह बहुत असहर करने वाली बात होगी. लेवकन ट्प्ं की रीत ने मीवडया की कलई भी खोल दी है. गौरतलब है वक समूचा अमेवरकी मीवडया एकतरिा अंदार मे्वहलेरी ब्कलंटन को अमेवरका राष्प् वत बना रहा था लेवकन ट्प्ं की रीत ने यह सावबत कर वदया वक रनमानस मीवडया द्​्ारा बनायी गयी धारणा से एकदम इतर था. अभभनीत भसंह, नयी भदल्ली

घास-िूस, कांटे, िूल, वततवलयां और पहाड् आवद सभी हमारे बचपन मे्वकसी न वकसी र्प मे्शावमल रहे है.् दैवनक रीवन की आपाधापी मे् हम इन्हे् भूल राते है् या कहे् हमको मरबूरन इनको भुलाना पड्ता है. मेरे वलए यह वनरी उपलब्लध है वक शेखर रोशी को पढऩे के बाद मै्ने वनश्​्य वकया है वक अपने बचपन की स्मृवतयो् को दर्ा करू्गा. इससे मेरे भीतर का बच्​्ा एक बार विर रागेगा और मुझे थोड्ा और मनुषय् बनाने मे्मदद करेगा.

संमहृ तयों का आंगन

शेखर रोशी का आत्मवृत्एक दुलभा् लेखन है. यह हमे्, हम सभी को बचपन की उन कोमल स्मवृ तयो्मे्ले राता है वरन्हे्वकसी न वकसी र्प मे्हम सभी पीछे छोड्आये है.् प्क ् वृ त का साथ,

बहिय़ा हिषय

सोशल मीडिया

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के्द् सरकार के वबना सोचे समझे वलए गये नोटबंदी के वनण्या ने पूरे देश को कतार मे्खड्ा कर वदया. देश की 86 िीसदी मुद्ा एक झटके मे्चलन से बाहर हो गयी. सरकार ने बार-बार इसे लेकर अपने आदेश बदले वरससे कािी भ्म् की ब्सथवत वनव्मता हो गयी. देश भर मे्लगी लंबी कतारे्देखकर ही यह समझ मे्आ गया था वक इसका देश की उत्पादकता पर बुरा असर पडऩे रा रहा है. अब रबवक नोटबंदी के वनण्ाय को अच्छा खासा वक्त बीत चुका है तो अथ्श ा ाव्​्ियो् ने भी कहना शुर्कर वदया है वक इसकी वरह

एक मौरूं ववषय पर बहुत अच्छा अंक बन पड्ा है. मुख्यधारा की पव्​्तकाओ् मे् इस ववषय पर वलखने वाली शुर्आती पव्​्तका होने के नाते शुक्वार की पूरी टीम को ढेर सारी बधाई.

शिर पर नजंर

संतोष कुमार

शुक्वार मे् रवसंता केरकेट्ा का यात्​्ा वृतांत पढऩा रोचक रहा. हमे् एक कवव की दृव्ि से कई छोटे-बड्े शहरो् को देखने का अवसर वमला. यह एक आम पय्ाटक की नरर से तो

राजशेखर, पटना

पाठको् से वनवेदन

शुक्वार मे्प्​्कािशत वरपोट्​्ो्और रचनाओ् पर पाठको्की प्​्वतवक्​्या का स्वागत है़ आप अपने पत्​्नीचे िदए गए पते पर या ईमेल से भेर सकते है् एमडी-10/503, सहारा ग्​्ेस, रानकीपुरम, लखनऊ, उत्​्र प्​्देश-226021 टेलीिैक्स : +91.522.2735504 ईमेल :shukrawaardelhi@gmail.com

अलग ही था. सावहत्यकारो्के यात्​्ा वृतांत देते रहे.् इससे वकसी शहर को देखने की एक अलग दृव्ि ववकवसत करने मे्सहायता वमलती है.

पनंने बढंायें

कोमल भमश्​्ा

काले धन और नोट बंदी पर रानकारी बवढया है. एक सलाह है वरस पर आप लोग अमल करे् तो बहुत बेहतर होगा. रैसे ही ज्यादातर स्टोरी अपने लय मे् आती है, स्टोरी समाप्त हो राती है. संपादक से वनवेदन है वक ववषय के अनुर्प स्टोरी पेर कुछ बढाएं. अजय भसंह


संपादकीय

नुक़सान के सबक़ स

अंबरीश कुमार

डिडजटल इंडिया का नारा उछालने वालो्को एक बार देश का दौरा कर देखना चाडिए डक क्या िम कुछ मिीनो्या वर्​्ो्मे् डिडजटल युग मे्जाने लायक िै्भी या निी्. अस्सी फीसद गांवो्मे् डबजली निी्िै. लोग कंप्यूटर के बारे मे्ठीक से निी्जानते.

रकारी नोटबंदी से सबसे पहले और सबसे ज्यादा प्​्भाववत मरदूर और वकसान हुआ है. नोटबंदी का एलान होने के पंद्ह वदन के भीतर ही छोटे और मझोले उद्​्ोगो् मे् काम करने वाले करीब पचास िीसदी मरदूरो्को काम से हटा वदया गया. यह वरपोट्ा एक दो नही् दर्ानो् शहरो् से वमली. ज्यादातर मरदूर रो वदहाडी पर थे वे गांव लौट गये वह भी बहुत ही परेशानी के साथ. बहुत से मरदूरो् के पास लौटने तक का पैसा नही् था. इन मरदूरो् का कोई बै्क खाता नही् होता है तो एटीएम का ये क्या इस्​्ेमाल करे्गे. वडवरटल इंवडया का नारा उछालने वालो् को एक बार अपने समूचे देश का दौरा कर यह भी देखना चावहये वक क्या हम कुछ महीनो्या वष्​्ो्मे्वडवरटल युग मे्राने लायक है्भी या नही्. अस्सी िीसद गांवो् मे् वबरली नही् है. लोग कूप्यूटर के बारे मे् ठीक से नही् रानते, बै्क खाता नही् रखते और न ही डेवबट या के्वडट काड्ारखते है्. ये हाल देश के ज्यादातर गरीब लोगो्का है. ये दो रून की रोटी के वलये रोर खटते है्. इनका रीवन दूभर हो गया है नोटबंदी से. इसके बाद छोटे वकसान और दूकानदार का नंबर आता है. रो वकसान और बागवान मौसमी सब्लरयो् और िलो् का काम करते थे उन्हे्कािी नुकसान उठाना पड रहा है. आलू, टमाटर, मूली या शाक सल्री की लागत तक नही् वनकल पा रही है रो वकसान रबी की िसल की तैयारी मे्थे वे इस नोटबंदी से हैरान रह गये. खाद बीर के वलये रो पैसा रखा था वह हरार और पांच सौ के नोट की शक्ल मे् था. अब खाद बीर उन्हे् कोई इन पुराने नोटो् के बदले देने को तैयार नही्. एक औसत वकसान को एक बीघा खेत के वलए दस हरार र्पये खच्ाकरने पडते है्. इसमे्खाद पानी से लेकर मरदूरी तक शावमल है. नोटबंदी के इस संकट मे्रब बै्क वकसान को पांच हरार र्पये भी आसानी से न दे रहा हो तो वह अपने खेत का क्या करेगा. रब एक बीघा खेत रखने वाला वकसान बदहाल है तो पांच दस बीघा खेत का काक्तकार वकस हाल मे्होगा. वदक्​्त यह है वक इस समय कर्ाभी नही्वमल रहा है ऐसे मे्बहुत से वकसानो ने रबी की िसल के वलये रो तैयारी की थी वह धरी रह गयी.

कई वकसान तो खेत मे्रुताई के बाद पानी तक लगा चुके थे वे भी हतप्​्भ रह गये. वरन खेवतहर मरदूरो् को इन खेतो् मे् काम करना था वे भी बेकार हो गये. दूसरी तरि शहरो् से रो मरदूर गांव लौट आये वे भी खाली बैठ गये है्. इन वकसान मरदूर की आवार बै्क मे् लाइन मे्लगे लोगो्के आगे दब गयी है. यह ठीक है बै्क की लाइन मे् लगे बहुत से लोगो् को यह लग रहा है वक इस कदम से से काला धन खत्म हो रायेगा और भ्​्ि्ाचार खत्म हो रायेगा. हालांवक आव्थाक ववशेषज्​् ऐसा नही् मानते. कुछ लोगो् को अभी भी लग रहा है वक मोदी सरकार कोई चमत्कार करने रा रही है तो उनके ववश्​्ास का सम्मान करना चावहए. पर वास्​्ववकता यह है वक हालात और खराब होते रा रहे है्. वकसान मरदूर के साथ छोटे-छोटे कारोबार करने वाले भी इसके चपेट मे्आ चुके है्. वकराने की ज्यादातर दुकानो्पर लोग अब उतना ही सामान खरीद रहे है् रो बहुत रर्री है. इनकी वबक्​्ी मे्50-60 िीसद की वगरावट आ चुकी है. रबवक रबी की िसल मे् भी 20-25 िीसद की वगरावट आने की आशंका रताई रा रही है. अब बडे उद्​्ोग की तरि भी नरर डाल ले्. बडे वाहनो्की वबक्​्ी आधी रह गयी है. व्​्पंट मीवडया यावन अख़बारो्का ववज्​्ापन 30 से 40 िीसदी तक वगर चुका है. ये आंकडे बडे अख़बारो् के है् वरनके कारपोरेट ववज्​्ापनो् मे् एक वतहाई से ज्यादा की वगरावट आ चुकी है. ऐसे मे्आने वाले कुछ महीने बहुत ही परेशानी के हो्गे यह तय है. उद्​्ोग क्​्ेत्को रो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई साल भर मे् भी होनी मुब्ककल है. ऐसे मे् सरकार छोटे वकसानो् मरदूरो्के वलये कोई पैकेर का एलान करे तो राहत वमल सकती है. नोटबंदी के 50 वदन पूरे होने रा रहे है्. उम्मीद थी वक इतने समय मे् हालात सामान्य हो राये्गे पर ऐसा होता नरर नही् आ रहा है. इसवलए सरकार को इन वकसान मरदूरो् के वलए कोई कदम उठाना चावहए. नौकरी करने वाली रमात को कुछ परेशानी हो रही है पर उसकी आमदनी तो सुरव्​्कत है भले हाथ मे् न हो. ऐसे मे् उन लोगो् के बारे मे् सोचा राना चावहए वरन्हे् कािी नुकसान हो चुका है और n वे अब भुखमरी की तरि बढ रहे है्. ambrish2000kumar@gmail.com शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

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आवरण मास्ट हेकथा ड

नोदबंदी के बाद: मुभ्िकल से भमले कुछ नये नोट

नोटबंदी का नतीजा क्या देश मे्नोटबंदी के फैसले से ‘शुकंिार’ हदलंली बंयूरो आम लोगो्का पूरा जीवन न्नीस वदसंबर को नोटबंदी के मामले मे्41 अस्​्-व्यस्​्िो गया िै. सरकार वदन के भीतर 59वां आदेश रारी हुआ. की बताई िुई समय-सीमा पूरी ववत्​्मंत्ालय और वररव्ाबै्क की तरि से रारी इस साझा आदेश मे्कहा गया वक रद्​्वकये गये िोने काे िै, लेडकन िालात मे् 500 और 1000 के नोट मे् 5000 र्पये से सुधार की बजाय डबगाड्िी िुआ ऊपर की रावश अब 30 वदसंबर तक केवल एक िै और लगभग रोज बदलने बार ही रमा की रा सकती है. इस आदेश मे् यह भी कहा गया वक पांच हरार से ऊपर की वाले डनयमो्के कारण भारतीय रावश रमा करने का आम रनता को एक बार मुद्ा और डरजव्षबै्क पर से के वलए रो मौका वदया रा रहा है, उसमे् भी करने के पहले बै्क के ‘दो अवधकारी’ लोगो्का भरोसा उठ रिा िै. रमा आप से पूछताछ करे्गे और उनके संतुि् हो

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शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

राने के बाद ही यह पैसा रमा वकया रा सकता है, लेवकन इसके दो वदन बाद ही ववत्​् मंत्ी अर्ण रेतली ने इस आदेश को वापस ले वलया. इस तरह की अवनव्​्शतता ने के्द्सरकार, भारतीय करे्सी, वररव्ाबै्क, बै्वकूग प्​्णाली पर रनता का रो बचा खुचा भरोसा था उसे भी खत्म कर वदया. पढे-वलखे लोगो् के वलए यह समझना मुब्ककल हो गया वक वे ववश्​्के सबसे बडे लोकतंत् के भीतर एक सुगवठत ‘संवैधावनक कानूनी प्​्णाली के तहत रह रहे है् या विर यूगांडा, इराक, रैसे उन देशो् मे् रहां ईदी अमीन, सद्​्ाम हुसैन रैसे शासको् का तानाशाही रार था. सबसे बडी बात यह है वक रो लोग प्​्धानमंत्ी नरे्द्मोदी का नोटबंदी को


लेकर तमाम आलोचनाओ्के बावरूद समथ्ान कर रहे थे, वे भी अवाक रह गये. रवाब देने के वलए उनके पास कुछ नही् रह गया. क्यो्वक आठ नवंबर 2016 को रात आठ बरे प्​्धानमंत्ी नरे्द् मोदी ने देश के नाम संबोधन मे्देश की रनता से रो बात कही थी उन वादो्, उन वनयमो् को डेढ महीने के भीतर उनकी ही सरकार ने खंड-खंड कर पूरी तरह पलट वदया. लोगो्को ववश्​्ास करना मुबक् कल हो गया है वक देश के सव्​्ोच्​् मुवखया इस तरह कैसे साव्ारवनक तौर पर कही गयी अपनी ही बातो् से महर डेढ महीने के भीतर के इतनी बार कैसे पलट रहे है्. भारपा के नेता भी अवाक है्. संसद के पूरे सत्​्के दौरान हल्ले हंगामे के साथ उन्हो्ने वदल पर पत्थर रखकर वकसी तरह प्​्धानमंत्ी के नोटबंदी के समथ्ान मे् हो हल्ला हंगामा कर ववपक्​् को बोलने से रोका था. ववपक्​्ी दलो् के आरोपो् को दरवकनार कर. हालांवक सत्​् के अंवतम वदनो् मे् लोगो् को यह समझ मे् आने

के बाद भारपा के एक नेता ने महत्वपूण्ा वटप्पणी की. उन्हो्ने कहा वक रैसे एक गलती को वछपाने के वलए कोई व्यब्कत गलती दर गलती करता राता है, वैसा ही इस समय सरकार कर रही है. उनके मुतावबक सरकार यह कुछ ही वदनो् मे् समझ गयी थी ‘नोटबंदी’ का िैसला एक गलत िैसला था, करोडो्लोग नोटबंदी के इस िैसले की वरह से िूसते गये. पर चूंवक यह प्​्धानमंत्ी का िैसला है इसवलए भारपा के काडर यह मानते हुए भी वक गलती हो गयी, रनता के बीच समथ्ान करते नरर आये. अब वे भी पीछे हट गये है्. उधर सरकार को इस गलती की वरह से रब समस्याये्पेश आने लगी्तो वह उन समस्याओ्के वहसाब से वनत नये वनयम बनाने लगेगी. बगैर यह समझे वक इससे पाट्​्ी का वकतना रारनीवतक नुकसान हो रहा है. बडी बात तो यह है वक केवल वनयम ही नही्प्​्धानमंत्ी की भाषा भी बदलने लगी. आठ नवंबर को प्​्धानमंत्ी ने रनता से कहा वक केवल 50 वदन कि्​्झेल लीवरये. 50 वदन के साथ ‘सुनहरे भववष्य’ का दावा भी उन्हो्ने पेश वकया. पर दो वदन पहले वही प्​्धानमंत्ी अपने भाषणो् मे् यह कहते सुनाई वदये वक ‘मै् वादा करता हूं 50 वदनो् बाद यह कि्​् उतना बडा कि्​् नही् रहेगा.’ यावन प्​्धानमंत्ी अब खुद यह मान रहे है् वक कि्​् रहेगा. अब वह आम रनता को यह समझा रहे है्वक कि्​्तो आगे भी रहेगा. पर क्या लोग 20 वदन पहले की तरह अब भी वही समझ रहे है् रो प्​्धानमंत्ी समझा रहे है्. प्​्धानमंत्ी और सरकार यह समझ नही् पा रही है वक ववश्​्ास रब टूटता है तो विर व्यब्कत के समझने का नरे्द् मोदी: भबना िवचारे बड्ा कदम लगा था वक सरकार नोटबंदी पर सदन मे्चच्ा​ा नरवरया भी बदल राता है. यही नही्19 वदसंबर को पांच हरार र्पये कराने से बचना चाहती है. संसद के इवतहास मे् तक की रावश एक बार रमा करने, उनकी बै्क शायद ही कभी ऐसा हुआ रब वकसी मुद्े पर अवधकावरयो् द्​्ारा पूछताछ करने के ववत्​् ववपक्​् से ज्यादा सत्​्ा पक्​् को यहां तक वक मं त ् ा लय के आदे श आने के बाद दूसरे वदन ववत्​् के्द्ीय मंव्तयो्को खडा हो हल्ला हंगामा करते मं त ् ी अर् ण रे ट ली ने इस आदेश को संशोवधत देखा गया. यहां तक वक भारपा के पूव्ाअध्यक्​् करते हु ए यह सिाई दी वक पांच हरार र्पये और संसद के ववरष्​्तम सदस्यो् मे् से एक के ऊपर की रावश बै्क लालकृष्ण आडवाणी के खातो् मे् अब 30 सरकारेंतो आती-जाती रहती ने साव्ारवनक तौर पर वदसंबर तक रमा तो है, लेककन सबसे बड़ा नुकसान दो बार सरकार के एक बार ही होगा पर रवैये पर आक्​्ोश यह हुआ कक लोगोंका करेस ं ी, पहली बार ऐसा करते रताया. आडवाणी ने बैक ं पंण ं ाली से किशं​ंास खतंम है ्तो कोई पूछताछ नही् इस मामले मे् होता जा रहा है . होगी. यह पूछताछ लोकसभा अध्यक्​् की दू स री बार पुराने नोट भूवमका पर भी वटप्पणी की. दूसरे वदन उन्हो्ने रमा करने के दौरान होगी. लोकसभा अध्यक्​् से वमलकर अपने आक्​्ोश प्​्धानमंत्ी, ववत्​् मंत्ी, वररव्ा बै्क के पर स्पि्​्ीकरण वदया. पर आडवाणी के इस बदलते र्ख से रनता अपने को ठगा महसूस आक्​्ोश से रो रनता और भारपा के काडर मे् कर रही है. सरकार तो आती-राती रहती है, संकेत राना था, वह चला गया. सबसे बडा नुकसान यह हुआ वक लोगो् का सोमवार को वररव्ा बै्क द्​्ारा रारी आदेश करे्सी, बै्क प्​्णाली से ववश्​्ास खत्म होता रा शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

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आवरण कथा

रहा है. राने-माने अथ्ाशाि्​्ी और पूव्ा प्​्धानमंत्ी मनमोहन वसंह ने करीब एक महीने राज्यसभा मे्नोटबंदी पर बोलते हुए नोटबंदी के िैसले को लेकर कोई वटप्पणी नही्की थी. पर वरस तरह वनयमो् मे् बदलाव वकये रा रहे थे उन्हे् उन्हो्ने गंभीर बताया था और ठीक यही चेतावनी दी थी वक इससे बै्वकूग प्​्णाली और करे्सी की ववश्​्सनीयता पर रो असर पडेगा वह अथ्ाव्यवस्था के वलए खतरनाक होगा. पर सरकार पर पूव्ा प्​्धानमंत्ी और देश मे् ‘नयी अथ्ाव्यवस्था’ के रनक डॉ. मनमोहन वसंह की इस चेतावनी का कोई असर नही् पडा. डॉ. मनमोहन वसंह की इस चेतावनी के बाद वनयमो् मे्कम से कम दो-तीन दर्ान बदलाव हुए. याद कीवरये प्​्धानमंत्ी ने नोटबंदी का िैसला सुनाते हुए देश की रनता से सीधे र्बर् होते क्या व्यवस्था बताई थी. उन्हो्ने आठ नवंबर को यह कहा वक आर रात 12 बरे के बाद 500 और 1000 के नोट ‘कागर के टुकडे’ हो राये्गे. देश की करे्सी को इस तरह ‘कागर का टुकडा’ कहना कई अथ्ाशाव्​्ियो् और राष्​्वावदयो् को नागवार गुररा था. बहरहाल उन्हो्ने रो ववकल्प बताया था उसमे् उन्हो्ने कहा था वक 10 नवंबर से 24 नवंबर तक अपना पहचान पत्​् वदखा कर आप वकसी बैक ् या डाकघर से 4 हरार र्पये तक के अपने पुराने 500 और 1000 के नोट बदल सकते है्. दूसरे बै्क खाते से एक वदन मे् अवधकतम 10 हरार और एक हफ्ते मे् 20 हरार र्पये तक वनकाल सकते है्. तीसरे, पहले कुछ वदनो्तक एटीएम से रोराना दो हरार र्पये वनकाले रा सकते है्. बाद मे् यह सीमा चार हरार र्पये तक बढ सकती है. इस चार हरार की सीमा को भी बढाने का वादा प्​्धानमंत्ी ने आठ नवंबर के अपने भाषण मे्वकया था. अपने भाषण मे् उन्हो्ने कहा था 8

शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

मनरेगा मजदूर: भदन भर की कमाई पांच र्पये अिरातिरी की रर्रत नही्है. वरन लोगो्के पास 500 और हरार र्पये के नोट है्उन्हे्उसे बदलने का पूरा मौका वदया रायेगा. 10 नवंबर से 30 वदसंबर तक पुराने नोटो् को बै्को और डाकघरो् मे् रमा कर सकते है्. प्​्धानमंत्ी के भाषण और ववत्​्मंत्ालय की घोषणा मे्वकतने नोट एक साथ रमा वकये रा सकते है्, इस पर कोई पाबंदी नही्थी. चूंवक यह पूरी नीवत और प्​्धानमंत्ी का यह एलान देश के हर तबके से रुडा हुआ है, इसवलए वपछले 42 वदनो् मे् पैसे के वनकासी, नोटो् के पवरवत्ान, वकसी भी मद मे् सरकार वकतनी सिल रही या असिल रही, इसका ल्यौरा देने की कोई रर्रत नही्. इस िैसले से देश के मरदूर, वकसान, छोटे उद्​्ोग, आव्थाक ववकास को वकतना नुकसान हुआ, वकतना नुकसान पहुंचेगा, इस पर कािी कुछ ववपक्​्ी दल और अथ्ाशाि्​्ी बोल चुके है्, वलख चुके है्. सरकार की तरि से इन सबके रवाब मे् राहुल गांधी: आया नही् भूचाल

अभी भी कहा रा रहा है वक इस समय भले कि्​्है, पर भववष्य उज्​्वल है. इस कदम का दीघ्ाकावलक िायदा होगा. यह कोई नही् बता रहा है वक यह िायदा क्या होगा? दीघ्ाकावलक उपलब्लधयो् मे् इस दीघ्ाकाल की समय सीमा क्या है? 6 महीने, साल भर, पांच साल या विर एक दो पीढी के बाद. कुछ वदनो् के बाद रो ववज्​्ापन सरकार की तरि से टीवी, रेवडयो पर वदया रा रहा है उसे सुनकर या देखकर यवद कोई भावी उपलब्लधयो् का अंदारा लगा भी ले तो उसे ‘कािी समझदार’ मान सकते है्. क्यो्वक इन ववज्​्ापन मे् पहला िायदा बताया रा रहा है सरकार के पास कािी पैसा आ गया है. ऐसा लग रहा है रैसे सरकार ने औद्ो्वगक नीवतयो्, वनम्ा​ाता या वकसी आव्थाक उपायो् से लाभ उठा कर यह पैसा कमाया है. आम रनता का पैसा रबरन बै्को्मे्रमा कर, इसे सरकारी पैसा बता कर वरस तरह ववज्​्ापन मे् पीठ थपथपायी गयी है वह आश्​्य्ारनक है. दूसरी उपलब्लध बताई गयी है वक इस पैसे से बुवनयादी ढांचा तैयार होगा. विर सरकार को यह बताना चावहये वक इनकम टैक्स, सव्वास टैक्स, संपव्​्त टैक्स, टोल टैक्स, आबकारी, कस्टम, वैट रैसी उगावहयो् के रवरये रो पैसा सरकार को वमलता है, वह कम पडने लगा तब सरकार ने रनता के सारे पैसो्पर झाडू लगाकर अपना खराना भरने का यह दांव खेला. वररव्ा बै्क का यह मानना है वक 500 और 1000 र्पये के नोट देश के बारार या आव्थाक गवतवववधयो् मे् लगे कुल पैसे के 86 िीसदी मूल्य के बराबर है्. ववत्​् राज्य मंत्ी ने तो अरीबो गरीब तक्कवदया. उन्हो्ने एक सवाल पर रनता का ढाढस देते कहा सरकार के पास पैसे आ गये है् तो आपको कम ल्यार दर पर कर्ा वमलने लगेगा. अब आप चाहो तो बडी गाडी पर घूम सकते हो, बडा मकान ले सकते हो. हालांवक उन्हो्ने आम रनता को रो यह झांसा वदया उसे लेकर ववपक्​्ी दल वपछले एक महीने से आरोप लगा रहे है्. ववपक्​्ी दलो् का यह आरोप है वक रनता से पैसे लेकर बै्को्को रो भरा रा रहा है वह बडे उद्​्ोगपवतयो्के वलए है, बै्को के पास इन उद्​्ोगपवतयो्को कर्ादेने के वलए पैसा नही् था, इसवलए सरकार ने आम रनता के पैसो्से बै्को्की वतरोरी भरी है. प्​्धानमंत्ी ने रो आठ नवंबर को कहा था, उसमे् वे उन मुद्ो् पर भी पाला बदलते नरर आये वरनको सामने रखकर उन्हो्ने यह िैसला वलया था. नोटबंदी के िैसले के एलान के समय रनता को मुख्यतः तीन ‘राक्​्स’ वदखाये गये थे. काला धन, राली नोट और तीसरा आतंकवाद, एक महीने मे् रो भी खबर आयी, वरस तरह करोडो् के नये नोट के मामले सामने, नये नोटो् के नकली नोट पकडे गये,


ख़ुशफ़हमियो़ के फेरीवाले

कुछ आंकड्ेबाज अर्षशास्​्ी नोटबंदी से ग्रीब लोगो्की ड्िंदगी मे्मची तबािी को िंस के उड्ा रिे िै्.

अरुण माहेशुरी छ आंकड्ेबार अथ्ाशाि्​्ी नोटबंदी से ग्रीब लोगो् की व्िंदगी मे् मची हुई तबाही को यह कह कर हंस के उड्ा रहे है् वक इससे दूरगामी पवरणाम अच्छे वमले्गे. वे बताते है् इससे बै्को् के पास कािी र्पया इकट्​्ा हो रायेगा. बै्क व्यार की दरो् को कम कर पायेगी. होम लोन लेने वालो्को सहूवलयत वमलेगी. रीयल स्टेट मे्भारी तेि्ी आयेगी. और सामवयक तौर पर अथ्ा-व्यवस्था को धक्​्ा लगने पर भी वह तेि्ी के साथ विर से पटरी पर लौट कर भागने लगेगी. भारी उत्साह से बयान की रा रही अपनी इस पूरी कहानी मे् बड्ी चालाकी से वे इस प्​्मुख बात को वछपा लेते है्वक अथ्ा-व्यवस्था मे्वकये रा रहे इन तमाम प्​्योगो् का सारा बोझ देश के ग्रीब मि्दूरो्, वकसानो् और वरन्हे्अथ्ा-व्यवस्था के अनौपचावरक वहस्से से रुड्ेलोग कहा राता है, उनके वसर पर लाद वदया रा रहा है. पहले से ही उनकी परेशावनयो्से भरी व्िंदगी को पूरी तरह से तबाह करके उन्हे्भुखमरी की वदशा मे्ठेल वदया रा रहा है. दूसरी इस बड्ी बात को भी वछपाया रा रहा है वक उनके बताये लाभो् मे्देश के वकसान-मि्दूरो्का कोई स्थान नही्है. आर सारी दुवनया मे्

कु

अवधक से अवधक ऑटोमेशन पर वटके ववकास को रोरगारववहीन ववकास के र्प मे्वचब्नहत वकया रा रहा है. क्या इन महोदयो्के 'दूरगामी' लाभ का तात्पय्ायही है वक इससे एक झटके मे्बहुत बड्ी संख्या मे्रोि्गारो् को ख़्त्म करके ऑटोमेशन के रास्​्ेको सुगम बनाया गया है? तीसरी वरस प्​्मुख बात पर चच्ा​ा करने से वे क्तरा रहे है्, वह है वकसानो्की बात. नोटबंदी ने कृवष अथ्/ा व्यवस्था को सबसे बड्ा नुकस ् ान पहुँचाया है. क्या वे इस बात की गारंटी करे्गे वक भारत की बै्वकूग प्​्णाली रो अब तक कृवष क्त्े ्से धन की वनकासी का औपवनवेवशक ढंग का काम करती रही है, वह अब कृवष क्​्ेत् मे् वनवेश का काम करने लगेगी ? वे सहकारी बै्को्के बारे मे्भी चुप्पी साधे हुए है्रो सीधे तौर पर वकसानो् के वहतो् को साधते रहे है्. इस नोटबंदी के साथ ही इन कृवष क्​्ेत् के सहकारी बै्को्को क्यो्पंगु बना वदया गया? राज्य सभा टीवी पर राज्य सभा के मनोनीत सदस्य डा. नरे्द्राधव नोटबंदी के बारे मे्झूठी खुशिहवमयो्को िैलाते हुए साक्​्ात्कार के वक्​्त बहुत वखलवखला रहे थे और आंकड्ो्से रुड्ी संवेदनहीनता को मूत्ाकर रहे थे . n (लेखक सावहत्यकार और आव्थाक मामलो्के रानकार है्.)

सीमा पार आतंकवाद का मामला हो या नक्सल ‘प्लाब्सटक मनी’ को िायदा पहुच ं ाने के वलए की आतंक का, इनके हमलो्मे्वपछले एक महीने गयी सरकार की पहल का नारा देना शुर्वकया. से वरस तरह तेरी आयी उसने सरकार का मुंह इससे रनता और भ्व्मत हो गयी. यहां तक वक बंद कर वदया और ववपक्​्को बोलने का मौका पढे वलखे लोगो् ने अपना माथा पकड कर हार वदया. वलहारा 15 वदन के भीतर सरकार ने मान ली. यह क्या है, क्यो्है? वकसवलए है? इन पलटा खाया. ‘वडवरटल इकोनोमी’ का नारा सबका रवाब ढूंढना उनके वलए मुब्ककल हो सामने आया. यावन आठ नंवबर की घोषणा के गया. रब आम रनता को वदनभर कतार लगा बाद नोटबंदी का उद्​्ेक्य कालाधन, राली नोट, कर ‘एक नया नोट’ वमल रहा है तो कई लोगो् आतंकवाद के खात्मे से बदल कर देश मे् को करोडो् के नये नोट कैसे वमल गये? रब वडवरटल अथ्ाव्यवस्था को प्​्वतस्थावपत करना वदनभर दफ्तर और काम छोडकर बै्क के बन गया. हफ्ते भर के वदनभर चक्​्र लगाने भीतर के्द्ीय मंत्ी, पंध ं ानमंतंी ने जो आठ निंबर को के बाद भी खाली हाथ सांसद, अवधकारी व कहा था, उसमेंिे उन मुदंोंपर भी लोगो् को वापस आना रनता को वडवरटल रहा है, वैसे मे्नये पाला बदलते नजर आये कजनको पड अथ्ाव्यवस्था का नोटो् की लाखो् र्पये सामने रखकर उनंहोंने यह प्​्वशक्​्ण देते वदखायी भी रकम वरश्​्त मे् फैसला कलया था. देने लगे. वडवरटल कैसे लोगो् को वमलने अथ्ाव्यवस्था पर लगी? संगोष्​्ी होने लगी. वपछले दस वदनो् से वरन लोगो् के घरो्, नारा विर बदला, कैशलेस व्यवस्था की दफ्तरो् छापे मार कर लाखो् करोडो् की रकम, बात की राने लगी. देश की रनता अकबक कई वकलो सोने वमल रहे है्क्या यह वही है रो होकर कभी दाएं तो कभी बाएं देख रही है. देश मे्काले धन, हवाला, भ्ि ् ्ाचार के मुवखया नोटबंदी के दूसरे वदन पेटीएम ने वरस तरह रहे है?् क्या इनमे्एक भी वह व्यब्कत है वरसका प्म् ख ु अखबारो्मे्दो-दो पेर का ववज्​्ापन वदया ववदेशी बै्को् मे् कालाधन वछपाया है, और था, हफ्तभे र मे्करोडो्-अरबो्के उसके मुनािे वरनके नाम सरकार के पास है?् क्या इनमे् से की खबर उडने लगी. मोदी ववरोवधयो् ने एक के घर पर भी छापा पडा? वरतने भी

उद्​्ोगपवत, बडे व्यवसायी या बडे नेता, बडे अिसर है् क्या उनकी कभी काले धन पर आस्था नही् रही? वे इतने पैसे वाले नंबर एक की कमाई से ही बने है?् ये सारे सवाल लोगो्के मन मे्घुमडने शुर्हो गये है.् लाखो्-करोडो्के नये नोट की बरामदगी की खबर पढते हुए एक चाय की दुकान पर वकसी ने एक महत्वपूण्ा वटप्पणी की, ‘देश मे् चोरी, डकैती, बलात्कार उतने ही नही् होते वरतने अखबारो् मे् खबरे् आती है्. वरतनी खबरे् नही् आती, इसका मतलब यह नही्वक वहां बलात्कार नही्हुआ है. लोगो् के भ्​्म को बढाने मे् कांग्ेस के उपाध्यक्​् राहुल गांधी ने भी बडी भूवमका वनभायी है. संसद का सत्​् खत्म होने के पहले दावा वकया वक ‘प्​्धानमंत्ी के व्यब्कतगत भ्​्ि्ाचार’ के वखलाि उनके पास रानकारी है, वह सामने लाये्गे तो भूचाल आ रायेगा.’ सत्​् खत्म हो गया. राहुल सदन मे् बोल नही् पाये. रानकारी सामने आ नही् पायी. भ्​्म बना हुआ है. क्या राहुल गांधी के पास वाकई कोई रानकारी है? वबडला, सहारा वाली तो नही्है वरसे केररीवाल ने वदल्ली ववधान सभा मे्बोला था? नोटबंदी के िैसले से संबवं धत है? यवद है तो देश के सामने क्यो्नही्लाते? क्या अगले सत्​् मे् बोले्गे? है भी या यो् ही पटाखा n छोडा है? शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

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आवरण कथा/उत्​्राखंड

मंदी और मंडी नोटबंदी ने उत्​्राखंि जैसे छोटे राज्य के उद्​्ोग-व्यापार और मंडियो्के कारोबार पर काफी बुरा असर िाला िै. फंजंल इमाम मलंललक

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रकार भले लाख दावे करे लेवकन लोगो्की परेशानी विलहाल कम होती तो वदखाई नही्दे रही है. उत्र् ाखंड मे्भी नोटबंदी का असर उद्​्ोग धंधो्पर भी पड्ा है और कारोबार पर भी. धंधे चौपट हो गए है्. मरदूरो्-कामगारो् की नौकरी चली गयी है और वरंसो् का कारोबार करने वाले विलहाल उधारी पर धंधा कर रहे है.् लोगो्का ज्यादा वक्त कतारो्मे्बीत रहा है. पैसा नही् वमल रहा है और स्टेट इंडस्व्टयल डेवलपमेट् कारपोश्ना आि उत्र् ाखंड वलवमटेड (वसडकुल) के कारखाने बंद हो गये है्या बंद होने के कगार पर है.् काशीपुर मे् वसडकुल के कारखाने नोटबंदी की मार झेल रहे है.् उधम वसंह नगर वरले के काशीपुर मे् देश की कई मशहूर कूपवनयो्के कारखाने है्रहां हर वदन हरारो्मरदूर काम कर अपनी रोरी-रोटी चलाते थे. इन कारखानो्मे्मरदूरो्के गीत भी गूर ं ते थे और हंसी वठठोली की आवारे्भी सुनाई पड्ती थी्लेवकन आठ वदसंबर को पांच सौ और 10 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

एक हरार के नोटो् का चलन बंद होते ही काशीपुर के इन कारखानो् मे् गूंरते गीत थम गये, हंसी वठठोली गुम हो गयी और रौनक िीकी पड्गयी. पैसे की तंगी ने मरदूरो्को भी परेशान कर रखा है और कारखाना मावलको् को भी. वदक्त् यह है वक कारखाने मे्उत्पादन नही्हो रहा है और मरदूरो् के सामने काम का टोटा आन पड्ा है. नतीरा सामने है. काम नही् होने की वरह से प्​्बंधन अब मरदूरो् को बोझ समझने लगा है और छंटनी शुर्हो गयी है. कई वमल के मावलको्ने तो अपने कारखाने बंद कर अपने मरदूरो्को छुट्ी दे दी है. वमल मावलको्ने कहा वक मरदूरो् से कहा गया है वक हालत मे् सुधार आते ही वे विर से काम पर आ सकते है.् काशीपुर मे् कल-कारखानो् के बंद होने से व्यापार पर भी असर पड्ा है. गढ्वाल-कुमाऊू उद्​्ोग सवमवत के अध्यक्​् ववकास वरंदल मानते है् वक के्द् सरकार के िैसले से वमलो् व कारखानो् के सामने संकट पैदा हुआ है. इसे लेकर चुनौवतयां भी है.् वरंदल के मुतावबक रल्द उद्​्ोगो्के वलए रणनीवत नही् बनाई गयी तो हालात और बदतर हो्गे और बेकारो्की तादाद मे्इरािा होगा. उत्पादन और माल बेचने के वलए पैसे नही्है इससे मरदूरो्व कम्ाचावरयो् को देने के वलए तनख्वाह के पैसे नही्है्और विर दूसरे खच्ाके वलए भी पैसे नही् होने से हालात बदतर है.् अगर ऐसा ज्यादा वदनो् तक चला तो इसका असर देर तक कायम रहेगा. कल-कारखानो्पर ही नोट बंदी का असर

उत्​्राखंड मे् ‘आप’ का प्​्दश्शन: बढ्ती अलोकभ्​्पयता हुआ है ऐसा नही्है. देहरादून की थोक मंडी पर भी नोटबंदी की मार पड्ी है. कारोबार घट कर आधा हो गया है और ऐसा कब तक चलेगा कोई नही् बता पा रहा है. हालांवक नये नोट आने के बाद कारोबार ने थोड्ी रफ्तार रर्र पकड्ी है लेवकन अभी बारार की रौनक लौटने मे्महीनो् लग सकते है.् आंकडो्के मुतावबक नोटबंदी से पहले शहर मे् दस करोड र्पये का कारोबार होता रहा है. वत्ामान मे् इसमे् 30 िीसद की वगरावट आयी है. दून मे्लगभग 1200 ब्कवंटल आटे की सप्लाई होती थी रो वत्ामान मे् 800 ब्कवंटल के करीब रह गयी है. ऐसी ही ब्सथवत दालो् को लेकर भी है. रोराना 400 ब्कवंटल दाल का आंकडा अब 250 ब्कवंटल पर अटक गया है. रो व्यापार हो भी रहा है, वह उधार पर ही हो रहा है. आढ्त बारार होलसेल डीलस्ाएसोवसएशन के महासवचव ववनोद गोयल का कहना है वक नोट बंदी के कारण कारोबार 70 िीसद रह गया है. कारोबार चलता रहे, इसवलए वनयवमत ग्​्ाहको् से चेक से भी पेमटे् वलया रा रहा है. नयी करेस ्ी का चलन बढ्ेगा तो बारार मे् रान आयेगी. दूसरी तरि राज्य के वकसान भी इससे प्भ् ाववत हुए है.् वकसानो्की आय पर 40 से 42 िीसद का िक्क पडा है. उन्हे् सल्री का उवचत मूल्य तक नही्वमल पा रहा है उत्​्राखंड के मुख्यमंत्ी हरीश रावत का कहना है वक 500-1000 र्पये के नोट अचानक बंद कर वदये राने से उत्र् ाखंड रैसे छोटे राज्य के रारस्व पर नकारात्मक असर पड्ा है. चौदहवे् ववत्​् आयोग की वसिावरश की वरह से प्​्देश पहले ही घाटे से रूझ रहा था, इस बीच नोटबंदी ने उसे बुरी तरह n प्भ् ाववत वकया है.


आवरण कथा/झारखंड

कितने इंद्देव और

झारखंि मे्एक तबका जिां नोटबंदी से एकदम अप्​्भाडवत िै विी् दूसरा तबका नकदी की कमी के चलते अपनी जान गंवा रिा िै. अहनल अंशम ु न

वमल सका था. आवखरकार वह कूगाली और भूख के सामने हार गया. पवररन बताते है् वक 10 रारीबाग वरले का रहने वाला वदहाड्ी वदसंबर को भी काम करने के बाद वह खाली हाथ मरदूर इंदद् वे माली नोटबंदी की मार नही् ही लौटा और भूखा सो गया. देर रात वह पेशाब झेल सका. गत 11 वदसंबर को उसने भूख के करने के वलए घर से बाहर वनकला तो विर वरंदा सामने घुटने टेक वदये. हर रोर मरदूरी करके वापस नही्आया. मुखय् मंत्ी रघुवर दास को न तो इस घटना से अपने पांच सदस्यो्वाले पवरवार का पेट पालने कोई िक्कपड्ा न ही उन्हो्ने ऐसी कोई पड्ताल ही वाला माली वपछले कई वदनो्से काम नही्वमलने की वक आवखर उसे वपछले दो महीनो्से सरकारी से परेशान था. बीते तीन वदनो्से उसे काम वमल अनार क्यो् नही् वमल पा रहा था. स्थानीय भी राता तो नये नोट मे्भुगतान नही्हो पा रहा प् श ् ासन अवक्य सव्​्कय हुआ और उसने मामले था. सरकार की ग्​्ामीण योरना के तहत वमलने वाला अनार भी वपछले दो महीनो् से उसे नही् को रिादिा करने के वलए तत्काल उसके घर मांदल पर भलखी इबारत: नोटबंदी के िवरोध मे् आभदवासी

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अनार और कुछ रावश पहुचं वायी. इंदद् वे की मौत को पवरब्सथवतरन्य और लापरवाही के चलते होना बताया गया. कहा गया वक डीलर ने समय पर अनार नही्वदया. इंदद् वे माली सरकार द्​्ारा गरीबो्को अनार देने के वलए चलाई रा रही योरना के तहत वह बीपीएल काड्ाका लाभाथ्​्ी था. वरसे बाद मे्हेलथ् काड्ामे्तल्दील कर वदया गया था . वरसके तहत घर के प्त्य् क े सदस्य को पांच-पांच वकलो अनार का प्​्ावधान था. लेवकन वपछले दो माह से स्थानीय डीलर उसे अनार नही्दे रहा था. उसकी मौत का कारण सामान्य बीमारी बताये राने से उसके पवररन समेत गांव के सारे लोग आक्​्ोवशत है.् भूख से हुई उसकी मौत पर विला प्श ् ासन पवररनो्और ग्​्ामीणो्के पक्​्से सहमत नही्है. इंदद् वे की मौत के बाद आनन-िानन मे्विला प्श ् ासन द्​्ारा मुहयै ा कराये गये अनार और मुवखया की तत्काल आव्थक ा मदद से उसके घर का चूलह् ा तो रल गया लेवकन कई इंदद् वे आर भी सरकारी राशन की बात रोह रहे्है.् अभी तक पूरे राज्य मे्कही्से काला धन या नकली नोट पकडऩे की कोई बडी घटना सामने नही्आयी है. और रैसा प्ध् ान मंत्ी के साथ साथ प्द् श े के मुखय् मंत्ी री ने भी दावा वकया था वक इससे राज्य के माओवावदयो्व अन्य उग्व् ावदयो् की काली कमाई पकड मे्आ रायेगी, वैसा कुछ भी नही्हुआ. देश भर के लोग वरस तरह परेशान है्वही हाल प्द् श े की रनता का भी है. ऐन खेतीबाडी के समय मे्हुई इस नोटबंदी के कारण उन्हे् सारा काम छोड खाद और बीर खरीदने के वलए कई-कई वदन बैक ् और एटीएम का चक्र् लगाने पड रहे्है.् धान की कटनी तो प्भ् ाववत हुई ही रबी की तैयारी भी ठप्प सी पड गयी है. दूसरे, इनकी खरीदारी स्थानीय साप्तावहक हाटो्से ही होती है. यहां से बड्ी तादाद मे् लोग हर वदन मरदूरी कमाने पास के शहरो्मे्राते है.् गोला प्ख ् डं के हप्पू गांव के रारदीप रववदास अपने बेटे व बहू के साथ वही् वनम्ाण ा ाधीन मवहला इंरीवनयवरंग कॉलेर मे्मरदूरी कर रहे्है,् पहले पंदह् वदनो्मे् मिदूरी वमल राती थी इस बार अबतक नही् वमली. स्थानीय राशन दुकानदारो्के यहां लोगो् की इतनी उधारी बढ गयी है वक अब वे भी हाथ खडे कर रहे्है.् भले ही रघुवरदास ने नगड्ी कसबे को राज्य का पहला कैशलेस इलाका घोवषत करवाकर आलाकमान से पीठ ठुकवा ली मगर असली सच यही है की आर भी कई इलाको्मे्लोग वढबरी और लालटेन से ही काम चलाते है.् एटीएम तो कइयो्ने कभी देखा नही्और पेटीएम तो रानते भी नही्. अवैध खनन और खवनर लूट वदन के उराले मे् बदस्र्ू रारी है. क्यो्वक ये सब खुद सरकार के संरक्ण ् मे्होता है और उद्​्ोगपवतयो् को लूट की खुली छूट है. n शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 11


आवरण मास्कथा/बिहार ट हेड

डबिार का मैनचेस्टर किे जाने वाली मानपुर की पटवा टोली मे्नोटबंदी के बाद सब कुछ सामान्य निी्िै. बुनकरो् से लेकर पावरलूम माडलको् तक को कडठन दौर से गुजरना पड्रिा िै.

उमेश कुमार राय

ग

या वरले मे् िल्गू नदी के वकनारे बसा है मानपुर. मानपुर के पटवा टोली के कमोबेश हर घर मे् पावरलूम और है्डलूम चलता है वरसमे्गमछा, लुंगी से लेकर रराई, गद्​्ेऔर तवकये के खोल बनते है्. मानपुर को वमनी कानपुर भी कहा राता है. यही् एक पावरलूम मे् काम करने वाले 50 वष्​्ीय चमारी प्​्साद कहते है्, ‘नोटबंदी के बाद से बड्ी परेशानी उठानी पड्ी है. मावलक ने 500 के पुराने नोट वदये थे वरसे पहले तो लाइन लगाकर खाते मे्डाला और बाद मे्विर लाइन लगाकर र्पये वनकालने पड्े. पुराने नोट नही् लेता तो मुझे देर से मरदूरी वमलती, इसवलये पुराने नोट लेना मेरी मरबूरी थी.’ चमारी प्​्साद वपछले 30 वष्​्ो्मे्यह काम कर रहे है.् नोटबंदी का एक महीना गुरर गया है लेवकन मुब्ककले् कम नही् हो रही है्. चूंवक छोटे नोटो् की वकल्लत है इसवलए 2000 के नोट वदये रा रहे है.् इतने बड्ेनोट को भुनाना भी उनके वलए टेढ्ी खीर है. पावरलूम मे् लाल धागा वपरोते हुए चमारी प्​्साद कहते है्, ‘दो हरार के नोट मे्भी वदक्​्त है लेवकन क्या करू्, और कोई उपाय भी तो नही् है.’ चमारी प्​्साद ने कहा वक नोटबंदी के बाद कुछ वदन तक पावरलूम बंद था क्यो्वक सूते की सप्लाई नही्हुई थी. पावरलूम चलाते हुए धागे से वनकलने वाला रोआं चमारी प्​्साद के शरीर मे्घुस राता है वरससे कई बार बीमार भी पड् राते है्. उन्हो्ने कहा, ‘काम खत्म करने के बाद गुड् खाते है् लेवकन ठंड मे् बड्ी वदक्​्त होती है. कई बार बीमार पड् राता हूं तो डॉक्टर से वदखाना पड्ता है लेवकन रोरी-रोटी तो यही्से वमलेगा इसवलए नौकरी करना मरबूरी है.’ पटवा टोली के एक पावरलूम मे्बने कपड्े को तह करने वाले 32 वष्​्ीय श्​्वमक हल्धरी प्​्साद कहते है्, ‘हमे्भी पुराने नोट ही वदये गये थे वरन्हे् अकाउंट मे् रखना पड्ा और विर 12 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

पटवा टोली मे् पावरलूम:बंद करघे की पीड्ा

टूट रहे पटवा के

लाइन लगाकर वनकालना पड्ा. वदक्त् अब भी है लेवकन कोई समाधान भी तो नही्.’ एक पावरलूम मे्एक घंटे मे्90 इंच लंबा और 76 इंच चौड्ा कपड्ा बनता है. एक कपड्े को तह करने के एवर मे्हल्धरी प्​्साद को 75 पैसे वमलते है्. मानपुर मे् तीन पीव्ढयो् से है्डलूम चल रहे है्. पहले ज्यादातर है्डलूम थे लेवकन अब उनकी रगह पावरलूम ने ली है. वष्ा 1957 के बाद पावरलूम का चलन बढ्ा. संप्वत यहां लगभग 7500 लूम (करघा) चलते है्वरसमे्20 हरार कारीगर काम करते है्. 7500 मे् से महर 20 से 25 हाथकरघा हो्गे. बताया राता है वक पावरलूम, है्डलूम से 10 गुना रफ्तार से चलता है वरस कारण उत्पादन अवधक होता है, यही वरह है वक लोग है्डलूम की रगह पावरलूम को तररीह देने लगे. वबहार मे् सबसे ज्यादा करघा यही् चलते है्. मानपुर के अलावा भागलपुर, वबहारशरीि, सीवान और पटना मे् भी पावरलूम चलते है्. मानपुर की वि्​् उद्​्ोग बुनकर सवमवत के

सवचव रीतेश कुमार पटवा कहते है्, ‘नोटबंदी के कारण कारीगरो्को तो र्पये देने मे्वदक्​्ते् आ ही रही है्साथ इस कारोबार को भी मंदी की मार झेलनी पड् रही है. र्पये वनकालने और रमा करने की सीमा वनध्ा​ावरत कर वदये राने व बारार मे्नोटो्की कमी के कारण धंधे पर बुरा असर पड्ा है.’ यहां उत्पावदत माल का 70 से 75 प्​्वतशत वहस्सा पव्​्शम बंगाल मे् राता है. रीतेश पटवा बताते है्, ‘बंगाल के कारोबारी नोटो्की वकल्लत का हवाला देकर माल खरीद नही्रहे है्वरस कारण कई पावरलूम बंदी की कगार पर पहुंच गये है्. पव्​्शम बंगाल के अलावा असम, ओवडशा और झारखंड मे् भी माल की सप्लाई की राती है लेवकन इन राज्यो् मे्बहुत कम मांग है.’ उन्हो्ने कहा, ‘पहले रो व्यापारी हमसे माल खरीदते थे वे अब कह रहे है्बारार ठंडा पड्गया है वरस कारण वे माल खरीद नही्पा रहे है्.’ मानपुर पटवा टोली मे् काम करनेवाले कारीगरो्ने कहा वक नोटबंदी के बाद कई वदनो् तक पावरश्​्वमक के तौर पर पुराने नोट ही वदये


धागे

राते थे. चूंवक दैवनक मरदूरी पर ही इनका घर चलता था इसवलए पुराने नोट लेना इनकी मरबूरी थी. मानपुर का वि्​् उद्​्ोग तो पहले से ही संकट से गुरर रहा था, इस पर नोटबंदी एक अलग सकट है. यहां पावरलूम चलाने वालो् का कहना है वक भारत के दूसरे वहस्से मे् रो पावरलूम चलते है्वे अत्याधुवनक तकनीको्से लैस है्वरस कारण वे िूल-िल रहे है्लेवकन मानपुर पटवा टोली मे् आधुवनकता की बयार नही् चली है. रीतेश कुमार पटवा ने कहा, ‘रारस्थान के टीकमगढ्, उत्​्र प्​्देश के आंबेडकर नगर और दव्​्कण भारतीय राज्यो् मे् चल रहे पावरलूम अत्याधुवनक तकनीक से लैस है लेवकन हमारे यहां ऐसा नही् है.’ यहां बनने वाला लाल रंग का गमछा आवदवावसयो् मे्कािी लोकव्​्पय है इसवलए बंगाल, ओवडशा और असम के आवदवावसयो्मे्इसकी खूब मांग रहती है. पावरलूम मावलको् की माने् तो ऐसा गमछा दूसरी रगहो्पर नही्बनता है. गौरतलब है वक पावरलूम के वलए कच्​्ा

बंद पड्ी एक पावरलूम: नोटबंदी का नतीजा

माल यानी रंग-वबरंगे मोटे धागे पव्​्शम बंगाल, पंराब और दव्​्कण भारतीय राज्यो् से आते है्. पहले रोर 2-3 ट्​्क कच्​्ा माल मानपुर मे् उतरता था लेवकन अब इसमे्कमी आ गयी है. नोटबंदी का एक असर यह भी हुआ है वक इन वदनो् कारीगरो् की संख्या यहां बढ् गयी है. असल मे्नोटबंदी के कारण पंराब, मेरठ आवद मंवडयो् मे् भी मंदी है वरस कारण यहां से गये बुनकर वापस लौट आये है्. पूरे भारत मे् बुनकरो की संख्या की बात करे् तो लगभग 9 करोड् लोगो् का दानापानी इस पर वनभ्ार है. यहां के हथकरघे से बने सामान का वनय्ा​ात अमेवरका तक मे् होता है. एक अनुमान के मुतावबक, अमेवरका मे् हर साल 13.5 वबवलयन डॉलर का सामान वनय्ा​ात वकया राता है. अनुमान यह भी है वक वि्​् उद्​्ोग अकेला उद्​्ोग है वरससे सबसे अवधक ववदेशी मुद्ा वमलता है. इन सबके बावरूद राष्​्ीय स्​्र पर बुनकर बदहाल है्. दो वष्ा पहले नरे्द् मोदी रब बनारस चुनाव प्​्चार करने गये थे तो उन्हो्ने बुनकरो् की ब्सथवत मे् सुधार लाने का वादा वकया था लेवकन अब तक उनकी ब्सथवत रस की तस बनी हुई है. नोटबंदी के चलते उपरे संकट से पार पाने के वलए के्द् सरकार की ओर से कई तरह के कदम उठाये गये. शादी-व्याह करने वालो् के

वलए कई तरह की वरयायते्दी गयी्. वकसानो्के वलए भी कई घोषणाएँ हुई् लेवकन पावरलूम सेकट् र के वलए वकसी तरह की कोई घोषणा नही् की गयी. वबहार के मुख्यमंत्ी नीतीश कुमार ने भी नोटबंदी को रायरा ठहराया लेवकन इससे बुनकरो्को उनके हाल पर छोड्वदया. रीतेश कुमार पटवा ने कहा, ‘सरकार की तरि से हमे् वकसी तरह का कोई सहयोग नही् वमला है. हमने बुनकरो् की समस्याओ् को कई बार उठाया लेवकन कही्से कोई मदद नही्वमली.’ यहां यह भी बता दे् वक मानपुर पटवा टोली की पहचान केवल पावरलूम के चलते नही् है. आईआईटी और ऐवतहावसकता के वलए भी मानपुर राना राता है. मानपुर पटवा टोली भारत का एकमात्​् क्​्ेत् है रहां से एकमुक्त सबसे अवधक आईआईटीयंस वनकलते है्. वष्ा 1996 से 2011 तक मानपुर पटवा टोली ने 58 आईआईटीयंस वदये. बताया राता है वक यहां के लगभग 200 घरो् मे् कम से कम एक इंरीवनयर है. इन सबके बावरूद यह सच है वक बुनकरो् की हालत आर बेहद खराब है वरस पर सरकार को ध्यान देने की रर्रत है. वरना वह वदन दूर नही् रब बच्​्े इवतहास मे्ही पढ्ा करे्गे वक भारत मे्हथकरघे n भी कभी चला करते थे. शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 13


आवरण कथा/मध्य प्​्देश

नक़दी को तरसता नोट प़​़ेस युद्स्​्र पर नोट छाप रिे देवास के बै्क नोट प्​्ेस के एटीएम मे्खुद सूखा पड्ा िुआ िै. नोटबंदी ने प्​्देश के उद्​्ोग-धंधो्की कमर तोड्नी शुर्कर दी िै. माना जा रिा िै डक आने वाले डदनो्मे्िालात और डबगड्े्गे. पूजा हसंि

र

ल बीच मीन प्यासी. कुछ ऐसी ही ब्सथवत है इन वदनो् देवास के बैक ् नोट प्स ्े (बीएनपी) मे्ब्सथत एटीएम की. देश भर के लोगो् के वलए वदन रात नोट छापने के काम मे् लगी देवास बैक ् नोट प्स ्े पवरसर मे्ब्सथत एटीएम के बाहर एक तख्ती लटकी है वरस पर वलखा है नो कैश यानी नकदी नही्है. बीएनपी देश की उन चार प्स ्े मे्से एक है वरनके वरम्मे नकदी छापने का काम है. इन सभी प्स ्े मे्इन वदनो्युद्स्र् पर काम चल रहा है क्यो्वक अगले चंद महीनो् मे् इन्हे् 2000 और

500 र्पये मूलय् के उतने ही नोट छापने है्वरतने 500 और 1000 के नोट ये प्स ्े पूरे एक वष्ामे् छापती आयी है.् मैसरू , सालबोनी, देवास और नावसक की इन नोट छापने वाली प्स ्े मे् इतनी ज्यादा सख्ती बरती रा रही है वक कोई छोटा या बड्ा अवधकारी कागर का टुकड्ा लेकर भी भीतर प्व् श े नही्कर सकता. पवरसर मे्प्व् श े करते और वहां से बाहर वनकलते समय रेब खाली रखना रर्री है. रो कम्चा ारी सीधे तौर पर नकदी छापने के काम मे्लगे है्उनकी और सख्त वनगरानी की रा रही है. बीएनपी देवास के एक अवधकारी ने नाम रावहर न करने की शत्ापर बताया वक देवास मे् प्​्ेस मे् छपते नोट: पानी भबच मीन भपयासी

14 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

वपछले वष्ाही नयी मशीन आयी है लेवकन इसके बावरूद यहां अस्वीकरण योग्य (खराब) नोट बहुत ज्यादा वनकलती है.् मैसरू और सालबोनी प्स ्े मे् रहां बमुबक् कल एक िीसदी खराब नोट छपती है्वही्एक अनुमान के मुतावबक देवास मे् यह आंकड्ा 15 िीसदी तक है. इस समय सरकार तेरी से नये नोट छापने को लेकर वरस दबाव से दो-चार है उसे देखते हुए यह अंतर बहुत मायने रखता है. देवास मे् बैक ् नोट प्स ्े की स्थापना सन 1975 मे्की गयी थी. विलहाल यहां काम का दबाव इतना ज्यादा है वक विलहाल यहां सेवावनवृत्कम्च ा ावरयो्की मदद लेने के बारे मे् भी ववचार वकया रा रहा है. एक अवधकारी ने नाम न रावहर करने की शत्ा पर कहा वक बैक ् नोट छापने का काम बहुत अवधक ववशेषज्त् ा की मांग करता है. ऐसे मे् ज्यादा काम करने के वलए अप्व्शव्​्कत कम्च ा ावरयो् से काम लेने या नये कम्च ा ावरयो्को भत्​्ी करने के बराय सेवावनवृत् कम्च ा ावरयो को दोबारा बुलाना कही् अवधक उपयोगी सावबत हो सकता है. हालांवक यह सच है वक प्द् श े की रारधानी भोपाल और वावणब्जयक शहर इंदौर मे्नोटबंदी के कारण आम रनता को बहुत अवधक वदक्त् होते नही् वदख रही है. लेवकन खुद देवास मे् नकदी की भारी वकल्लत वदख रही है. देवास मे् बीएनपी पवरसर मे् लगे एटीएम तक मे् नकदी अक्सर नदारद रह रही है। स्थानीय उद्​्ोग संगठन के लोग वशकायती लहरे मे् कहते है् वक वरस शहर मे् बैक ् नोट प्स ्े है कम से कम वहां तो पय्ापा त् नकदी सुवनव्​्शत की रानी चावहए. इंदौर के ववरष्​्पत्क ् ार सुचदे् ्वमश्​्कहते है् वक नोटबंदी का असर शहरो्के बराय गांवो्मे्


ज्यादा देखने को वमल रहा है. इसकी वरह यह है वक गांवो् की अथ्वा य् वस्था पूरी तरह नकदी पर वटकी हुई है. वकसानो्और ग्​्ामीणो्का पूरा काम नकद लेनदेन से चलता है. वह कहते है् वक सरकार को नोटबंदी लागू करने के पहले कम से कम ग्​्ामीण इलाको्के वलए पूरी तैयारी कर लेनी चावहये थी. उधर, बीएनपी देवास मे् तीन पावरयो् मे् लगातार वदन रात नोट छापने का काम चल रहा है. बीएनपी के महाप्ब् धं क एम सी वेलप्पा मौरूदा नकदी संकट और देवास मे्छप रही मुद्ा के बारे मे्वकसी सवाल का रवाब देने से इनकार करते है.् भारतीय मरदूर संघ के पदावधकारी एल एन मार् कहते है् वक देवास और उसके आसपास बीएनपी के कई सेवावनवृत् कम्च ा ारी रहते है.् उनसे दोबारा काम वलया रा सकता है तावक नोटबंदी के प्भ् ाव को तेरी से कम वकया रा सके. खास बात यह है वक इन वदनो्प्ब् धं न और कम्च ा ारी रबरदस्​्तालमेल के साथ काम कर रहे है्तावक देश को इस संकट से उबारने मे्मदद वमल सके. इन कम्च ा ावरयो्को बेहतर काम करने के वलए प्​्ोत्सावहत करने की खावतर अवतवरक्त भत्​्ा भी मुहयै ा कराया रा रहा है. सूत्ो्का कहना है वक बीएनपी मे्इस समय वकसी भी कम्च ा ारी का वेतन 40,000 र्पये प्व्त माह से कम नही् है. सबको पता है वक देश गंभीर नकदी संकट से गुरर रहा है. ऐसे मे्कोवशश यही है वक रोरक कम से कम 1.5 करोड्नोट छापे रा सके.् यहां छप रहे नोटो्को वायुसने ा के ववमानो्की मदद से इंदौर से देश भर मे्मौरूद 4000 से अवधक करेस ् ी चेसट् मे्पहुच ं ाया रा रहा है. वष्ा 2008 मे् बीएनपी मे् स्वबै च् छक सेवावनवृत् की योरना पेश की गयी थी. इस

योरना का लाभ उठाते हुए करीब 400 कुशल कम्च ा ावरयो्ने सेवावनवृव्त ली थी. यही वरह है वक नोटबंदी के इस दौर मे्यहां अचानक योग्य कम्च ा ावरयो्की कमी महसूस की राने लगी है. उधर नोटबंदी के तकरीबन डेढ्महीने बाद भी प्द् श े के उद्​्ोग धंधे इस झटके से उबर नही् पाये है.् नकदी की वकल्लत ने न केवल मांग को प्भ् ाववत वकया है बब्लक इसके चलते उत्पादन मे् कमी आयी है. एक अनुमान के मुतावबक वपछले डेढ्महीने मे्प्द् श े मे्एक लाख से अवधक लोगो् को अपने रोरगार गंवाने पड्ेहै.् कई उद्​्ोग बंद हो गये, कई रगह काम के घंटे कम कर वदये गये और तमाम कामगार अपने घरो्गांवो्को लौटने पर मरबूर हो गये. रारधानी भोपाल करीब ब्सथत औद्​्ोवगक क्त्े ्मंडीदीप मे्रहां 500 से अवधक छोटी और बड्ी इकाइयां है्वहां भी छोटे उद्​्ोग नोटबंदी से बहुत बुरी तरह प्भ् ाववत हुए है.् मरदूर संगठनो् के मुतावबक नोटबंदी से मंडीदीप मे् 3000 से अवधक कामगारो् की छंटनी की रा चुकी है रबवक हरारो्अन्य पर तलवार लटकी हुई है. पीथमपुर औद्​्ोवगक संगठन के अध्यक्​् गौतम कोठारी कहते है्वक नोटबंदी के वनण्या ने उद्​्ोग रगत के वलए खासी वदक्त् पैदा की है. उनका कहना है वक अकेले संगवठत क्त्े ्के ही करीब एक लाख श्व्मक इस वनण्या से प्भ् ाववत हुए है.् ऐसे मे्असंगवठत क्त्े ्का क्या हश्​्हुआ होगा इसका सहर ही अंदारा लगाया रा सकता है. रानकारो् के मुतावबक सबसे अवधक असर मुग्ीपालन, कबाड्, वववनम्ाण ा और कृवष आवद से रुड्ेउन कारोबारो्पर हुआ है रो छोटे पैमाने पर होते है्और वरनमे्छोटी नकदी बहुत बड्ेपैमाने पर शावमल है. ठेकदे ार भी अपने अधीन काम

देवास मे् बै्क नोट प्​्ेस: मांग ज्यादा आपूभ्तश कम करने वाले कम्च ा ावरयो्को वापस उनके घरो्को भेर रहे है्क्यो्वक काम वमलने पर असर पड्ा है. प्द् श े के कई शहरो्मे्ऐसे अनुबवं धत श्व्मको्की बड्ेपैमाने पर छंटनी कर दी गयी है. मालवा क्त्े ्मे्सोयाबीन वकसान नोटबंदी से बेहद परेशान है.् उनके पास अपनी िसल मंडी मे्छोडऩे के अलावा कोई ववकल्प नही्है क्यो्वक भुगतान के वलए नकदी की लगातार कमी बनी हुई है. व्यापारी वकसानो्की िसल खरीद कर नकद के बदले उनको चेक से भुगतान कर रहे है.् चेक से भुगतान लेना आर भी टेढ्ी खीर बनी हुई है. इतना ही नही्नकदी न होने के चलते वकसानो्को िसल की समुवचत कीमत भी नही्वमल पा रही है. सोयाबीन वकसान मांगीलाल ने वपछले वदनो् अपनी िसल मंडी मे्बेच तो दी लेवकन व्यापारी ने उनके सामने दो शत्ारखी्। या तो वे 500 और 1000 र्पये के पुराने नोट भुगतान के र्प मे् स्वीकार कर ले् या विर आगे की तारीख का भुगतान चेक से स्वीकार करे।् रावहर है दोनो्ही पवरब्सथवतयां वकसान के वलए अच्छी नही्है।् आठ नवंबर की रात हुई नोटबंदी के बाद तमाम ऐसे संसथ ् ान भी थे वरन्हो्ने अपने कम्च ा ावरयो्को भुगतान नही्वकया था। भोपाल और उसके आसपास ऐसे कई उद्व्मयो्ने अपने कम्च ा ावरयो् को रबरन पुराने नोट मे् भुगतान वकया. इसमे् सुरक्​्ा गाड्ा मुहयै ा कराने वाली एरेव्सयां प्म् ख ु रही्. प्ध् ानमंत्ी नरेद् ्मोदी ने कहा था वक नोटबंदी का असर 50 वदन मे्कािी हद तक समाप्त हो रायेगा लेवकन विलहाल ऐसे कोई संकते नरर नही् आ रहे है.् कम से कम मध्य प्द् श े मे् तो नोटबंदी के डेढ् महीने बाद हालात सुधरने के बराय धीरे-धीरे वबगड्ते ही चले रा n रहे है.् शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 15


आवरणमास् कथा/छत् ट हेड ्ीसगढ्

छत्​्ीसगढ्के अडधकांश ग्​्ामीणो् के बै्क खाते सिकारी बै्को्मे्िी िै्. इन बै्को्मे्पुराने नोट जमा करने या बदलने पर रोक लगने और विां पैसा न िोने की बड्ी कीमत डकसान चुका रिे िै्.

संजीत हं​ंिपाठी

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त्​्ीसगढ के भारपा सांसद रमेश बैस के रायपुर शहर से सटे मूल गांव गोढी के तहत आने वाले ग्​्ाम तोडगांव वनवासी युवा कृषक अवभषेक वमश्​्ा अभी तक 70 ब्कवंटल धान सरकार को बेच चुके है.् इसकी कीमत होती है एक लाख दस हरार र्पये. रब वे भुगतान लेने मंवदर हसौद ब्सथत सहकारी बै्क की शाखा मे् पहुच ं े तो उन्हे्कहा गया वक अभी महर दो हरार र्पये ले राये.् इस तक्कके साथ वक अभी रकम ही उपलल्ध नही्है. नोटबंदी के बाद यह ब्सथवत सूबे के सभी सहकारी बैक ् ो् की है. आठ नवंबर को नोटबंदी हुई और 15 नवंबर से छत्​्ीसगढ सरकार का धान खरीदी उत्सव शुर् हो गया. इसके तहत राज्य के वकसानो् का धान समथ्ना मूल्य पर सरकार खरीदती है और उन्हे् उसका भुगतान वकया राता है. इस वष्ायह धान खरीदी 31 रनवरी तक चलनी है. इस दौरान 70 लाख टन धान खरीदने का लक्य् रखा गया है. लेवकन नोटबंदी ने वकसानो् की खुवशयो् पर ग्ह् ण लगा वदया है. वे अपना धान बेच तो रहे है्, लेवकन भुगतान के वलए सहकारी बैक ् ो् के चक्र् काट रहे है.् दरअसल सहकारी बैक ् को वररव्ा बैक ् से पय्ापा त् मात्​्ा मे्रकम नही्वमल रही. 30 नवंबर की ब्सथवत मे्सहकारी बैक ् ो्को लेनदेन के वलए वररव्ा बै्क ने अपेक्स बै्क के माध्यम से 220 करोड र्पये वदये है्, रबवक 31 रनवरी तक चलने वाली धान खरीदी के भुगतान के वलए िरवरी तक कुल 6000 करोड र्पये की आवक्यकता होगी. यहां यह बताना लावरमी है वक सूबे के ज्यादातर वकसानो् के खाते वरला सहकारी बै्को् मे् ही है्. आर की ब्सथवत मे् सहकारी बैक ् ो्को रोराना 11 से 12 करोड र्पये की रर्रत पड रही है और रोराना उन्हे् इतनी रकम उपलल्ध नही्हो पा रही है. भुगतना पड रहा है अपना धान बेचने वाले वकसान को. इधर इस मामले मे्राज्य के सहकावरता मंत्ी का कहना है वक राज्य की सहकारी सवमवतयो्मे् 16 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

भबलासपुर मे् सहकारी बै्क: पैसा खत्म लाचार लोग

सहकार की गहरी

धान खरीदी के दौरान वकसानो्को भुगतान उसी वदन कर वदया रायेगा. उनके मुतावबक प्व्तवदन खरीदे गये धान की रावश का भुगतान शाम तक वकसानो् के खाते मे् कर देने के वनद्श ्े वदये गये है.् वही् अपेकस ् बैक ् के अध्यक्​् अशोक बरार कहते है्वक सहकारी बैक ् ो्मे्वररव्ाबैक ् से रावश वमलनी शुर्हो गयी है, धीरे-धीरे ब्सथवत सामान्य होती रा रही है और सभी वकसानो्को समय पर रावश का भुगतान करने का प्य् ास वकया रा रहा है. रब रारधानी रायपुर के समीप वतल्दा ववकासखंड के ही आंकडो् पर नरर डालते है,् तब रमीनी हालात सरकारी दावो्के ठीक उलट नरर आते है. वरला सहकारी बै्क, वतल्दा के अंतग्ता 17 खरीदी केद् ्है.् समथ्ना मूलय् पर 15 नवंबर को धान खरीदी प्​्ारंभ हुई. तब से लेकर अब तक 1700 से भी अवधक वकसान 21 लाख 62 हरार 442 ब्कवंटल धान बेच चुके है.् इन्हे्

सहकारी सवमवतयो्से तत्काल चेक भी वमल चुके है,् लेवकन वरला सहकारी बैक ् मे्पैसे नही्है. इस कारण भुगतान नही्हो पा रहा है. वरन वकसानो् ने खरीदी के पहले वदन धान बेचा है, उनमे्से भी कई को भी भुगतान नही्वमल सका है. अभी तक 1700 वकसानो्को 22 करोड्र्पये से भी ज्यादा के चेक वदये रा चुके है.् भुगतान नही्होने का मुखय् कारण नोटबंदी है. वही्बैव्कूग के नये साफ्टवेयर को भी इसका प्म् ख ु कारण माना रा रहा है. उनकी ऑपरेवटंग का प्व्शक्ण ् बैक ् कव्मया ो् को नही् वदया गया है. भुगतान के आंकड्े एनआईसी और टीसीएस मे् अपलोड वकया राना है. इसे भी भुगतान नही्होने का कारण बताया रा रहा है. रब राज्य की रारधानी से सटे इलाको्मे्यह ब्सथवत है तो सुदरू बस्​्र, सरगुरा या गवरयाबंद के इलाको् मे् वकसानो्को वकस परेशानी का सामना करना पड रहा होगा, यह समझा रा सकता है.


मार

छत्​्ीसगढ मे् मुखय् ववपक्​्ी दल कांगस ्े के प्द् श े अध्यक्​्भूपश े बघेल इस मामले मे्कहते है् वक धान खरीदी सैकडो्करोड र्पये की हो चुकी है, रबवक भुगतान बहुत ही न्यनू तम हुआ है. धान खरीदी दो हरार करोड र्पये की हो चुकी है और 50 हरार र्पये के आसपास भुगतान वकया गया है. उनका कहना है वक यह समय वकसान के वलये बेहद ही संकम् ण काल होता है. इस समय धान कटाई, वमंराई, सोसायटी मे् पहुच ं ाना और इसके साथ-साथ दूसरी िसल की तैयारी करना, ऐसे मे्उन्हे्नगद रावश की बहुत रर्रत होती है और सरकार द्​्ारा रावश उपलल्ध नही् कराया राना, वचंता का ववषय है. धान खरीदी से इतर वकसानो् पर नोटबंदी की बात करे् तो नोटबंदी के बाद 14 नवंबर को वररव्ाबैक ् की ओर से रारी सक्ल कु र मे्कहा गया है सहकारी बैक ् ो्मे्न तो पुराने नोटो्की अदलाबदली होगी और न ही पुराने नोट रमा वकये रा

सकेग् .े इस आदेश के चलते दूरदरार के इलाको् के ग्​्ामीण और वकसानो् को ही सबसे ज्यादा परेशावनयां हुई.् वरह यही वक एक सहकारी बैक ् ही है वरसकी शाखाये् गांव-गांव तक है रबवक राष्​्ीयकृत या वनरी बै्को् की शाखा दूरस्थ ग्​्ामीण इलाको्मे्उतनी नही्है.् नोटबंदी के बाद स्थानीय समाचार पत्​्ो्मे्रो खबरे्आयी, उससे इन इलाको्मे्रहने वाले वकसानो्की समस्याओ् का महर अनुमान ही लगाया रा सकता है. खबरो्के मुतावबक बस्र् के भोपालपटनम से 70 वकमी दूर एडापल्ली गांव के वकसान वंराराम वखे के पास न तो नोटो्की गव्​्ियां थी्, न ही ऐसा कुछ वरसे वह वछपाए. सरल स्वभाव का यह वकसान इतनी दूर से बैलगाडी से अपने पवरवार के साथ भोपालपट्नम केवल इसवलए आया वक उसका पांच सौ र्पये का एक नोट रमा हो राये. उसे डर था वक उसका वह इकलौता नोट बेकार न हो राये. शहर पहुंचने के दौरान वंराराम पवरवार के साथ रात यहां से वकमी दूर उल्लरू मे् र्का था. सुबह भोपालपट्नम अपने पवरवचत के घर आया. पत्नी ने सुबह भोरन बनाया. दो वदन पहले वह एडापल्ली से राशन, बत्ान लेकर वनकला था. उसने गांव मे्खबर सुनी वक पांच सौ का नोट बंद हो गया है, तब से परेशान था. इसी तरह एडापल्ली गांव का ही चंद्ैया येलादी भी बच्​्ो्को लेकर बैलगाडी से भोपालपट्नम पहुच ं ा. उसके पास पांच सौ के एक व एक हरार र्पये के नोट है.् वह भी दो वदन मे्शहर पहुच ं ा. भारतीय स्टेट बै्क मे् उसका खाता है. 90 वकमी दूर आरेपल्ली गांव से आये वंरा मेए व सम्मा मेए तीन वदन पैदल चलकर स्टटे बैक ् पहुच ं .े वंरा के पास 13 तो सम्मा के पास चार हरार र्पये है्. मुग्ी, गाय-बैल व बकरी बेचकर और तेद् पू त्​्ा का संगह् ण कर इन्हो्ने रकम रुटाई है. ये लोग अपने गांव से पैदल वनकले और पहाडी रास्​्ेऔर नदीभूपेश बघेल: भकसानो् की भिक्​्

नालो्को पार कर रास्​्ेमे्एक गांव वचलापाका मे्र्क.े अपने साथ बत्ना और चावल-दाल लेकर वनकले थे. वहंसक पशुओ् और सांप-वबच्छू का डर था, लेवकन मरबूरी थी. कारण यही वक सरकार या वररव्ाबैक ् ने नोट बदलने के िरमान से सहकारी बैक ् ो् को अलग रखा. इनमे् से कई ग्​्ामीणो् के पास न तो आधार काड्ा था, न ही वोटर काड्.ा इन सब समस्याओ्के बीच नोटबंदी के बाद से प्​्देश के सहकारी बै्को् मे् हुए लेन-देन की आयकर ववभाग ने पूरा वहसाब मांगा है. इन बै्को की शहरी शाखाओ्मे्बड्ी रावश रमा वकए राने की खबर के बाद आयकर ने यह कदम उठाया है. बताते है् आठ नवंबर की रात नोट बंदी के ऐलान के बाद अगले तीन वदनो्मे्सहकारी बै्को् मे्एक बड्ी रकम को रमाकर वनकालने का का खेल हुआ. इन बैक ् ो्मे्बड्ेव्यापावरयो्के अलावे कई बड्ेनेताओ्और उनके पवररनो्के खाते है्. कुछक े बैक ् ो्के संचालक मंडल मे्भी नेताओ्के पवररन शावमल है्. ये सभी बै्क रायपुर, दुग्ा, रारनांदगांव के शहरी इलाको् मे् संचावलत है्. इनमे् 8-9-10 नवंबर के दरम्यान 300 करोड् से अवधक की रावश रमा कराई गयी. इसकी रानकारी के बाद आयकर ववभाग ने इन बैक ् ो पर वशकूरा कसा. आयकर ववभाग ने आरबीआई के रायपुर काय्ाल ा य के अलावा राज्य के सहकावरता ववभाग, अपेक्स बै्क प्​्बंधन से भी वबरनेस का पूरा लेखा-रोखा मांगा है. यह रानकारी 30 नवंबर तक देने को कहा गया था. तारा रानकारी के अनुसार रायपुर वरला सहकारी बैक ् ने यह रानकारी भेर भी दी है. वररव्ाबैक ् रायपुर इन बै्को्पर बीते साल भर से नरर रखे हुए है्. एक साल पहले िर्​्ी खातो् के रवरए 500 करोड् र्पये का लेनदेन का खुलासा वकया था. इस मामले मे् आधा दर्ान बै्क कम्​्ी वनलंवबत वकए रा चुके है्. वररव्ा बै्क और सहकावरता ववभाग अभी भी इन मामलो्की रांच कर रहे है्. नौ नवंबर को एक व्यवसायी इनमे् से एक बै्क मे् 40 लाख रमा करने पहुंचने से पहले की पुवलस और आयकर के हत्थे चढ्ा था. इस मामले की रांच के दौरान ही इन सहकारी शाखाओ् मे् बड्ी रावश अदल-बदल करने का खुलासा हुआ था. मूल प्क् न् यह उठता है वक नोटबंदी से अगर सहकारी बैक ् ो्को अलग ही रखना था, तो इसकी कोई न कोई वैकब्लपक व्यवस्था की रानी चावहये थी, तावक कम से कम ग्​्ामीण और वकसान तो परेशान न होते रो अपनी पसीने की कमाई को इन सहकारी बै्को् मे् ही रमा करते आये है्या धान खरीदी के दौरान ही भुगतान के वलए कोई वैकब्लपक व्यवस्था करनी चावहये थी, वरससे वकसानो्को यह वदक्त् न होती रो अभी हो रही है. n शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 17


आवरणमास् कथा/कर् ट हेड ा​ाटक

कन्ाषटक की अडधकांश नक्दी आधाडरत कारोबारी गडतडवडधयां नोटबंदी की चोट तले कराि रिी िै्, इनमे्दूध, काॅफी, सब्जी, रेशम और फूलो्के डकसान सबसे अडधक प्​्भाडवत िै्. मनोरमा

क

न्ा​ाटक के पूव्ा मुख्यमंत्ी और मौरूदा केद् ्ीय मंत्ी डी वी सदानंद गौड्ा वपछले वदनो्मंगलूर्के केएमसी अस्पताल मे्दुववधा मे् पड् गये. दरअसल उनके भाई का लंबी बीमारी के बाद वनधन हो गया था. पवरवार ने इलार मे् खच्ाहुए 13 लाख र्पये मे्से 48 हरार की रकम 500 और 1000 के नोट मे् देना चाहा तो

अस्पताल ने लेने से मना कर वदया और पाव्थवा शरीर पवरवार को तभी सौ्पा गया गया रब बकाया भुगतान चेक से वकया गया. अस्पताल ने इसकी वरह वलवखत मे् सरकारी वनद्श ्े ो्का पालन बताया, हालांवक बाद मे्सदानंद गौड्ा के मीवडया सवचव ने यह दावा वकया वक ऐसा कुछ नही् हुआ था. दरअसल नोटबंदी का प्भ् ाव ही कुछ ऐसा है वक इसे लागू करने वाली सरकार के लोगो्को भी ना कहते बन रहा है ना सहते बन रहा है. रब मंत्ी रैसे लोगो् को ऐसी परेशानी झेलनी पड्ी तो आम लोगो्की रोरमर्ा​ा की तकलीिो्का अंदारा सहर लगाया रा सकता है लेवकन यह भी सच है वक प्भ् ाववत होने वाले ज्यादातर वकसान, मरदूर तकलीि होने के बावरूद इसे राष्​्वाद की नैवतकता से रुड्ा ववषय मानते हुए नोटबंदी का समथ्ना करने को तैयार है.् नोटबंदी की घोषणा हुए एक महीने से ज्यादा वक्त बीत चुके है् और ऐसा कोई क्​्ेत् नही् है वरसपर इसकी मार नही् पड्ी है. नकदी की

वकल्लत के चलते नकद पर रोर कारोबार करने वाले वकसानो्, छोटे दुकानदारो्, ठेले खोमचे वाले, िुटपाथ पर सामान बेचने वाले तमाम लोगो्का करोबार ठप्प या मंदा है. देश की सूचना क्​्ांवत रारधानी होने के बावरूद बंगलूर्मे्भी बैक ् ो्मे्वैसी ही कतारे्है,् एटीएम वैसे ही बंद है् और आईटी कूपवनयो् व अच्छी सरकारी व वनरी क्त्े ्की नौकवरयो्वालो् को छोड्दे्तो अभी भी यहां की बहुसखं य् आबादी नकद के कारोबार से ही अपना गुरारा करती है. नोटबंदी की चपेट मे् राज्य के रेशम, कॉिी, सब्लरयो्, िलो्-िूलो् और डेयरी वकसान सभी है्. देश मे् िूलो् के व्यापार मे् बे्गलुर् की वहस्सदे ारी 75 िीसदी है लेवकन नोटबंदी के बाद से िूलो् के कारोबार मे् 50 िीसदी की कमी आयी है. यही हाल दव्​्कण भारत के सबसे बड्े थोक बारार वचकपेट का भी है, यहां कारोबार मे् 80 िीसद की कमी आयी है, कूपय् टू र हाड्वा ये र के बारार एसपी रोड मे्भी सन्नाटा पसरा है. दुगध् उत्पादन मे्कन्ाटा क मे्आगे रहने वाले मांड्ा,

बुभनयादी चीज्ो् पर चोट

एटीएम पर लोगो् की कतार: अभी कोई राहत नही्

18 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017


कोलार और अन्य कई वरलो् के लाखो् डेयरी वकसानो्की आमदनी नोटबंदी से मार खा रही है. कोलार मे्ही टमाटर की खेती करने वाले वकसान नोटबंदी से बरबाद होकर अपनी िसल मवेवशयो् को वखला रहे है.् सरकार के आंकड्ो्के मुतावबक ववमुद्ीकरण से मौरूदा ववत्​्ीय वष्ामे्राज्य को पांच से 15 हरार करोड्तक का नुकसान होने का अनुमान है क्यो्वक खेती-वकसानी से लेकर, वरयल स्टटे , वाहनो् और शराब सभी की व्​्िकी प्भ् ाववत हुई है. राज्य ववत्​्ीय ववभाग के अवतवरक्त मुख्य सवचव आईएसएन प्​्साद के अनुसार व्यवसावयक कर,वबक्​्ी कर और अन्य सभी रारस्व करो्मे्कािी वगरावट आयी है. कन्ाटा क लगातार तीसरे साल सूखे की चपेट मे्है, एसोचैम के आंकड्ो्के मुतावबक हाल ही मे् कावेरी के पानी के बंटवारे के मसले पर भी राज्य को 25 हरार करोड् र्पये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है, बाकी कसर नोटबंदी से पूरी हो रही है. कन्ा​ाटक वपछले चालीस सालो् मे् सबसे भीषण सूखे का सामना कर रहा है. खरीि, रबी, गन्ना सभी वकसानो्की हालत खराब चल रही है. वष्ा2015 मे्1200 वकसानो्ने इस वरह से आत्महत्या की है और इस साल अप्​्ैल से अक्टूबर तक मे् 457 वकसान आत्महत्या कर चुके है.् शहरी बंगलुर्से सटे ग्​्ामीण बंगलुर्के सब्लरयो् के वकसान अपनी उपर ग्​्ाहको् को प्त्य् क्​्बेचा करते है्चाहे होसूर हो या हेलब् ाल या कनकपूरा, नोटबंदी के कारण 500 र्पये के नोट लेकर खरीदारी करने वाले ग्​्ाहक सौ र्पये मे् ही अपना काम चलाने की कोवशश कर रहे है.् बेग् लूर्से सटे रामनगर के रेशम के वकसान भी हताशा मे् है्. क्यो्वक नोटबंदी का पहला असर रेशम की कीमतो् पर हुआ है रो 450 र्पये प्व्तवकलो से घटकर 200 र्पए तक आ गयी है. रेशम उत्पादन मे् मरदूरो् की रर्रत होती है नोटबंदी से मरदूरो्को काम पर रखना मुब्ककल हो रहा है क्यो्वक वकसानो् के पास उनकी मरदूरी के पैसे नही्है.् बंगलूर्के पास होने पर भी रेशम उत्पादन करने वाले इस गांव मे् बैक ् और एटीएम नही् है,् वकसानो् को शहर राना पड्ता है और सुबह से शाम कतार मे्लगने के बाद भी पैसे वमलने की कोई गारंटी नही्होती. ऐसी ही कहानी दुध या डेयरी के काम मे् लगे मैसरू , मांड्ा और कोलार के वकसानो्की भी है, दुगध् उत्पादक सहकावरता सवमवत अपने सदस्य वकसानो्को हर हफ्ते या दस वदन मे्नकद पैसो् का भुगतान करती है, इन्ही्पैसो्से वकसान अपने पशुओ्का ध्यान भी रखते है्लेवकन भुगतान नही् होने से उन्हे्मुबक् कल होती रा रही है. प्त्य् क े दूध सोसायटी को वकसानो्को भुगतान करने के वलए

ववपदा के टिाटर क

न्ाटा क का कोलार वरला सोने की खान के वलए प्व्सद्​् है लेवकन यह नावसक के बाद एवशया का दूसरा सबसे बड्ा टमाटर मंडी भी है और चीन के बाद भारत दुवनया का सबसे बड्ा टमाटर उत्पादक है. यहां सालाना डेढ् लाख टन टमाटर पैदा वकया राता है और बंगाल, उड्ीसा, वबहार,झारखंड, पंराब मध्यप्द् श े , आन्धप् द् श े , तवमलनाडु, पंराब समेत पावकस्​्ान, बांगल ् ादेश और दुबई तक यहां के टमाटर भेरे राते है.् साथ ही काेलार मे् टमाटर: खरीदार का इंतजार बंगलुर्रैसे बड्ेशहर से सटे होने के कारण वकसानो्को बड्ा स्थानीय बारार भी उपलल्ध है और मंडी के अलावा उनके पास ग्​्ाहको्प्त्य् क्​् बेचने का ववकल्प भी है. यही कारण है वक अब तक इनका सारा कारोबार नकद मे्होता रहा है और कोई आश्य् ा्नही्वक बंगलूर्से 70 वकलोमीटर पर ब्सथत होने के बावरूद कोलार के टमाटर मंडी मे्अभी तक ना वकसी बैक ् की शाखा है और ना ही एटीएम. लेवकन इस बार नोटबंदी ने उनकी कमर ही तोड्दी है कभी बैक ् नही्गए वकसानो्को रर्रत के पैसो्के वलए एटीम की लाईन मे्घंटो्खड्ा रहना पड्रहा है और नकद पैसे नही्होने के कारण टमाटर बारार या मंडी तक पहुच ं ाना मुबक् कल हो रहा है. मंडी मे्ले राने पर उन्हे्खुद नकद मे्भुगतान नही् वमल रहा, या तो चेक या विर मंडी मे्टमाटर वलया ही नही्रा रहा क्यो्वक नोटबंदी के कारण इन्हे्ढ्ोने वाले ट्क ् भी खड्ेहो गए है.् वैसे ही सूखे की मार के कारण लागत के मुकाबले इस बार टमाटर का उत्पादन कम हुआ था, छह र्पये प्व्त वकलो की लागत वाले टमाटरो्को मंडी मे्तीन र्पये प्व्त वकलो की दर से भी ग्​्ाहक नही्वमल रहे है.् मरबूर होकर वकसान टमाटरो्को सड्ने देने के बराए मवेवशयो् को वखला रहे है्वैसे भी ज्यादातर वकसानो्के पास माल बारार तक पहुच ं ाने के वलए भाड्ेऔर मरदूरो् के वलए भी नकदी नही्है. भारत मे्नावसक के बाद कन्ाटा क और तवमलनाडु टमाटर के बड्ेउत्पादक है् लेवकन नोटबंदी के असर से वकसानो्को रल्दी उबारा नही्गया तो आनेवाले वदनो्मे्टमाटर उत्पादन और आपूवत् ा की समस्या पैदा होना तय है. यूवनयन से प्​्वत सप्ताह एक लाख र्पये वदये राते है् लेवकन 24 हरार नकद वनकासी की सीमा के कारण वकसानो्को कैश भुगतान करना संभव नही्है. वैसे कन्ा​ाटक के वकसान और आम लोग नोटबंदी से परेशान होने के साथ उसके वैकब्लपक उपाय भी अमल मे्ला रहे है.् मसलन, बेलागवी के गांव हीरेनबाघेवाडी का उदाहरण वदया रा सकता है, वबहार के सोनपूर मेले की तरह ही यहां भी हर साल रानवरो् का मेला लगता है रहां वकसान अपने पशु बेचते है् या खरीदते है् और लाखो् का कारोबार होता है लेवकन इस बार नोटबंदी के कारण मेले का रंग िीका रहा, वकसानो्के पास इतने पैसे ही नही्थे वक वो पशु खरीद सके.् इस बार वकसानो्ने भरोसे से काम चलाया, रो भी व्यापार हुआ वो इसी

भरोसे पर वक नये नोट आने पर पैसा दे वदया रायेगा, लेवकन ये सुववधा उन्ही्खरीदारो्के वलए थी रो आसपास के थे और वरनसे आपसी पहचान थी. दूरदरार से आये वकसानो् को वनराश होना पड्ा. हर वदन यहां 50 से 100 पशुओ्की खरीद वबक्​्ी होती थी लेवकन इस बार रोराना 20 से भी कम पशुओ्की वबक्​्ी हुई. यहां तक वक वकसानो् ने अपने पशुओ् की कीमत आधी कर दी विर भी उन्हे् खरीदार नही् वमले, क्यो्वक मेले मे् आनेवाले वकसानो् के पास नोट ही नही् थे. नोटबंदी का इस मेले पर असर कन्ाटा क के पशुपालन मंत्ी के इन आंकड्ो्से भी लगाया रा सकता है वक मेले मे् पहले दो वदन रहां 56 लाख र्पये का करोबार हुआ वही् नोटबंदी की घोषणा के बाद पूरे हफ्ते केवल 25 लाख र्पये का. n शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 19


आवरण मास्ट हेकथा ड शेखर गुपंता

अर्थतंत् पर आफ्त

अगर यिी िाडसल करना रा तो पूरी अर्षव्यवस्रा को 1100 वोल्ट का झटका देने की क्या जर्रत री?

न

रेद् ्मोदी सरकार के भीतर रारी असमंरस हमे्स्वतंत्भारत के एक और कालखंड से रुड्ी एक कहानी की याद वदला रहा है. संता और बंता के वरूद मे्आने के पहले भारत मे्सरदार बलदेव वसंह नाम के एक शख्स थे. वत्मा ान के पवरहास-शूनय् दौर मे्आपको यह कहानी थोड्ी घबराहट के साथ बतानी होगी और मेरे पास तो खुशवंत वसंह की तरह संता-बंता के वकस्से सुनाने का लाइसेस ् भी नही् है. खुशवंत वसंह 1960 के दशक मे् सरदार बलदेव वसंह और पंवडत रवाहरलाल नेहर्को संता-बंता के तौर पर पेश करते थे. राने-माने स्वतंतत् ा सेनानी बलदेव वसंह (1902-61) स्वतंत्भारत के पहले रक्​्ा मंत्ी बनाए गये थे. उन्हे् ववभारन के दौरान िैली अरारकता संभालने और बड्ेपैमाने पर हो रही लोगो्की आवाराही को संभालने के साथ ही कक्मीर मे्वछड्ेयुद्को भी संभालना पड्ा था. इसके बाद भी खुशवंत वसंह उनसे रुड्ा एक वदलचस्प वाकया सुनाया करते थे. खुशवंत वसंह के मुतावबक, रक्​्ा मंती् बनने के कई महीनो्बाद रब सरदार बलदेव वसंह रोपड् (अब र्पनगर) मे्रहने वाली अपनी मां से वमलने गये तो उन्हो्ने कहा वक मेरे इतना बड्ा मंती् बनने का क्या िायदा है? इस पर उनकी मां ने कहा, ‘अंगर ्े ो्के देश छोड्कर राने के बाद वसक्​्ो्की कमी हो गयी है वरससे हर कोई परेशान है. क्या मेरा मंत्ी बेटा इस बारे मे्कुछ कर सकता है?’ वदल्ली लौटते ही रक्​्ा मंत्ी छोटे वसक्​्ो् की कमी की समस्या का समाधान ढूढं ने मे्लग गये. विर तो वह अपने पूरे वेतन और भत्​्ो्को वसक्​्ो् की शक्ल मे्लेने लगे और अवधक से अवधक पैसे बचाने की कोवशश करते. खुशवंत वसंह अब हमारे बीच नही्है्लेवकन अगर वह वरंदा होते तो देश के पहले रक्​्ा मंत्ी की वसक्​्ो्को लेकर की गयी रुगत की तुलना मोदी सरकार के काले धन पर उठाए गये िैसलो्से करते हुए सुनना कािी वदलचस्प होता. बंद हो चुके बड्ेनोटो् का कुछ उसी तरह से भंडार लगा है रैसा बलदेव वसंह के बक्से मे्रमा वसक्​्ो्का था. एक संपभ् ु देश की कुल मुद्ा के 86 िीसदी वहस्से को अवैध घोवषत करने रैसा कदम इसके पहले वकसी भी लोकतांव्तक देश मे्नही्उठाया गया था. नोटबंदी की पूरी मुवहम की वदशा अचानक ही वरस तरह काले धन से बदलकर कैशलेस की तरि हो गयी है, उसका श्य्े प्ध् ानमंत्ी नरेद् ्मोदी की लोगो्को अपनी मुरीद बना लेने वाली शानदार वाकक्म् ता और रनमत पर उनके रबद्स ा ् वनयंतण ् को वदया रा सकता है. इससे दो अहम सवाल खड्ेहोते है.् पहला, वडवरटल भुगतान बहुत अच्छा कदम है लेवकन अगर आप को यही हावसल करना था तो पूरी अथ्वा य् वस्था को 1100 वोल्ट का झटका देने की क्या रर्रत थी? आप तो वडवरटल भुगतान पर वरयायतो् और सहूवलयतो्के रवरये भी इसे हावसल कर सकते थे. वडवरटल तरीके से वकये गये भुगतान से हुई आय पर लगने वाले कर मे्थोड्ी छूट भी दी रा सकती थी. दूसरा सवाल नैवतक खतरे से रुड्ा हुआ है. इस समय हमारी कुल आबादी का केवल 2.5-3 िीसदी सव्​्कय वहस्सा ही डेवबट या केव्डट काड्ा का इस्म्े ाल करता है. हो सकता है वक आबादी का कुछ वहस्सा वडवरटल 20 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

वॉलेट का भी इस्म्े ाल करता हो. विर भी देश की 130 करोड्रनसंखय् ा मे् से केवल 4-6 करोड्लोग ही आव्थक ा ढांचे के वशखर पर नरर आएंग.े इस तरह तो सरकार देश के ववशाल गरीब तबके को प्लाब्सटक मनी पर आधावरत अथ्वा य् वस्था के वलए अपना वहस्सा पहले से ही तमाम लाभ उठा रहे खास तबके के वलए छोड्ने को कह रही है. इस िैसले के बारे मे्अवधक दूरदव्शता ा वदखाने के वलए थोड्ी तक्स क गं त सोच की रर्रत होती लेवकन मौरूदा दौर मे् तक्स क गं त तरीके से सोच पाना खासा मुबक् कल है. आईएनएस बेतवा के हादसाग्स ् ्होने के वदन ही रक्​्ा मंत्ालय ने ऐलान वकया था वक रक्​्ा मंत्वडवरटल अथ्वा य् वस्था को लेकर सेना प्म् ख ु ो्के साथ एक काय्श ा ाला मे्चच्ा​ा करेग् .े वनरी तौर पर मेरे वलए तो सबसे यादगार पल वह रहा रब तेलगं ाना के दौरे पर गये सूचना प्स ् ारण मंत्ी ने पंचर की दुकान पर पेटीएम से भुगतान लेने का बोड्ालगा होने के बारे मे्सारी दुवनया को बताया था. कम-से-कम दो वतमावहयो्का ववकास इस िैसले की भेट् चढ् चुका है. करोड्ो्लोगो्को इसके चलते बहुत परेशावनयो्का भी सामना करना पड्रहा है. भारतीय वररव्ाबैक ् रैसी महान संसथ् ा की महत्​्ा कम करने वाले इस ववचार से हम नादान भारतीयो्को केवल यह समझाने की कोवशश की गयी है रो बाब्​्ी गल्ालंबे समय से कहती आ रही है लेवकन हमने कभी भी उसे तवज्​्ो नही्दी: प्लाब्सटक की वरंदगी, है बहुत िैनट् बे स् टक. केवल बाब्​्ी की दुवनया मे्ही नही्, असली दुवनया मे्भी यह बात लागू हो रही है. प्ध् ानमंत्ी ने वरस शाम को इस िैसले का ऐलान वकया तो हम सभी इसे लेकर कािी उत्सावहत थे. हमे्लगा वक प्ध् ानमंत्ी ने िैसला करने के वलए सभी रमीनी तैयावरयां कर ली हो्गी, नकद मे्रखे गये काले धन की मात्​्ा के बारे मे्उनके पास पुखत् ा आंकड्ेभी हो्गे और पय्ापा त् मात्​्ा मे्नए नोट भी छाप वलए गये हो्ग.े हमारा यह भी आकलन था वक खुविया एरेव्सयो् और मौव्​्दक ववशेषज्​्ो् ने रालसारी करने वाले तत्वो् के बारे मे् सबूत भी रुटा वलए हो्ग.े सव्रक ा ल स्ट्ाइक का ववचार कािी िैशनेबल है और तात्कावलक तौर पर हममे्से कई लोग गलती कर गये. अब यह साि हो चुका है वक हमसे गलती हो गयी (इनमे्यह स्भ्ं कार भी शावमल है). गोपनीय खबरो्के भी छनकर बाहर आ राने वाली लुवटयन की वदल्ली मे्इतने बड्ेिैसले को गुपत् रखे राने से हम सभी अचंवभत थे. वो तो अब हमे्पता चला है वक खुद सरकार भी अंधरे े मे् थी. अगर आप कैवबनेट या इसकी सवमवतयो्मे्चच्ा​ा के वलए कोई मुद्ा नही्ले आते है्और घोषणा के चंद वमनटो्के पहले ही अपने सावथयो् को इसकी रानकारी देते है्तो आप काले धन के कुबरे ो्के साथ ही खुद को भी खतरे मे्डाल रहे है.् यह मानना वक कैवबनेट मंव्तयो्से इस िैसले के बारे रानकारी लीक होने का खतरा था तो विर मंव्तयो्को पद और गोपनीयता की शपथ वदलाने के क्या मायने है?् अगर आपका अपने ही चुने हुए 10 मंव्तयो्पर भरोसा नही्है तो विर आप युद्के बारे मे्कोई िैसला करने के n पहले वकससे सलाह-मशववरा करेग् ?े (लेखक द इंवडयन एक्सप्स्े के पूवा्संपादक है.् साभार : वबरनेस स्टडै् ड्.ा )


देशकाल कुमार पं​ंशांत

कितने दाग्ी है् त्यागी

फौजी िोने का मतलब तमाम इंसानी कमजोडरयो्-चूको्से ऊपर उठ जाना निी्िोता िै.

मु

झे लग रहा है वक वायुसवे ा के पूवा्प्म् ख ु एस.पी. त्यागी को वरस बात श्य्े वदया राना चावहये, वह नही्वदया रा रहा है और इसवलए मैन् े उनके वलए यह वलखने की रर्रत महसूस की. आप इस खबर को पढ्े्और विर मुझे बताये्वक आपको कैसा लगता है: वायुसने ा के पूवा्प्म् ख ु एस.पी.त्यागी को 30 वदसंबर तक न्यावयक वहरासत मे्भेर वदया गया! अगर इस मामले से कोई पूवा्पवरवचत न हो तो वह दोबारा-वतबारा इस सुख्ी को पढ्गे ा क्यो्वक यह सुख्ी मात्​्नही्है, यह अपने भीतर बहुत बड्ी दुवनया दबाये बैठी है. वायुसने ा के पूवा्प्म् ख ु एस.पी.त्यागी हमारे बड्ेसंरीदा सेनावधकावरयो् मे्वगने राते थे- ईमानदार, साधुवत! वरन सेनावधकावरयो्के काय्क ा ाल मे् कुछ खास युद्आवद न हुए हो्, वे सामान्य तौर पर अचव्चता ही रह राते है.् एस.पी.त्यागी वैसे ही थे : काम-से-काम, बाकी हवरनाम ! अपनी उम्​्घटानेबढ्ाने रैसे चक्र् ो्मे्भी वे कभी नही् पड्ेऔर इसवलए रारनीवतक चक्र् ो् मे्भी नही्आये. मंत्ी वगैरह बनने की लालसा भी नही्पाली. बस, देश-सेवा और देश-रक्​्ा ही उनका िौर-व्त् रहा. विर तत्कालीन प्ध ् ानमंत्ी मनमोहन वसंह का घोटाला-काल सामने आया और हमने राना वक अगस्ा्वेसट् लैड् हेवलकॉप्टरो्की खरीद का भी एक बड्ा घोटाला है. और विर यह बात भी सामने आयी वक इस घोटाले के घोटालेबारो्मे् वायुसने ा के बड्ेअवधकारी भी शावमल है.् बड्ेअवधकावरयो्की दुम पकड्ने के वलए खोर आगे चली तो त्यागी का नाम सामने आया! सभी हैरान,एस.पी.त्यागी भी हैरान! उन्हे्भी इस खबर पर ववश्​्ास नही् हो रहा था. रांच शुर्हुई और त्यागी ने उसमे्पूरा सहयोग भी वदया. लेवकन वह कहते है्न वक रंगल मे्कही्दलदल मे्रा वगरे तो वनकलने की हड्बड्ी मे्वरतने हाथ-पांव मारोगे, उतने ही गहरे धंसोगे. एस.पी. त्यागी के साथ भी वैसा ही हुआ! वे रांच मे्सहयोग देते हुए वरतना कहते थे, उससे ज्यादा वछपाते थे और एक-दूसरे को काटने वाली बाते्कह कर अपनी वनव्लपा त् ता का दावा करते थे. इस तरह वे दलदल मे्धंसने लगे. विर तो उनका पवरवार भी उसी दलदल मे्कही्धंसा वमला. आवखरकार उन्हे्भी और पवरवार के सदस्यो्को भी वगरफ्तार करना पड्ा. अब बाकी कहानी रब वलखी रायेगी तब हम सब देखगे् े लेवकन अभी तो यह देवखये वक मामला िौर का है वरसे आर की सरकार देशभब्कत की आवखरी मंवरल बताते नही्थकती! िौर को कुछ मत कहो... िौर की तरि कभी मत देखो... िौर की वकसी बात के बारे मे्कुछ बात न पूछो; तुमने ऐसा कुछ वकया तो तुरतं तुमह् ारी देशभब्कत संवदग्ध मान ली रायेगी... सवाल मत खड्ेकरो और शक मत करो!’ आर की सरकार हो वक दूसरी कोई सरकार, ऐसा कह कर और ऐसा तेवर वदखा कर दरअसल वह खुद को बचाना चाहती है. सरकारे्रानती है्वक ज्यादा पूछताछ उसके वलए भी कभी भी खतरा बन सकती है. इसवलए वह लोगो्को रानने-पूछने-देखने से रोकती है.

िौर भी एक पेशा है वरसमे्लोग नौकरी करने राते है;् िौर मे्नौकरी करना एक परंपरा है वरसका पीढ्ी-दर-पीढ्ी गव्ासे पालन वकया राता है. भारत सरकार भी िौरो्मे्नौकरी के वलए लुभावने ववज्​्ापन वनकालती है और कहती है वक यह पेशा बहुत शानदार है! हम सब भी िौर की बहुत इज्त् करते है,् हम सब भी उससे बहुत भावात्मक लगाव रखते है. ‘हकीकत’ और ‘बॉड्रा ’ रैसी विल्मे्बनाते भी है्और उसे देख-देख कर आंसू भी बहाते है.् ऐसा वसि्कइसवलए नही्वक ये हमारे देश के रक्क ् है्बब्लक इसवलए भी वक ये हमारे ही है-् हमारे घर के! यह भी तो उतना ही सच है वक यह एक पेशा है वरसमे्सभी वकस्म के लोग आते है,् अलग-अलग पृषभ् वू मयो्के लोग आते है,् अलग-अलग मंशा से लोग आते है.् िौर की परंपरा, उसका प्व्शक्ण ् और उसका सख्त अनुशासन वघस-वघस कर हर नौरवान को िौरी बना देता है लेवकन वह हर िौरी को देशभक्त भी बना दे, यह वैसे ही संभव नही्है वक रैसे हर नागवरक को ईमानदार बना देना या हर रारनीवतज्​्को नैवतक बना देना संभव नही्है. हम कैसे भूल सकते है्वक सामान्य िौरी से ले कर िौर के वकतने ही उच्​्ावधकावरयो् तक को देशद्​्ोह के मामलो्मे,् रासूसी के आरोपो् मे् पकड्ा गया है. देश की गुपत् रानकावरयां ‘दुकम् नो्’ को बेचते वकतने ही िौरी पकड्ेगये है.् यह भी गौर करने की बात है वक इन एसपी त्यागी: उलझी हुई कहानी वारदातो् मे् साधारण वसपाही कम, अवधकारी ज्यादा पकड्ेगये है.् इसका मतलब यह नही्वक हमारी िौर की नैवतक वभत्​्ी खोखली है लेवकन इसका यह मतलब भी नही्वक िौरी होने का मतलब तमाम इंसानी कमरोवरयो्-चूको् से ऊपर उठ राना होता है. इसवलए रैसी सबकी होती है वैसी ही िौवरयो्की भी लोकतांव्तक रांचपड्ताल होती ही रहनी चावहये. इसमे्चूक होती है या इसकी अनदेखी होती है तो रारनीवतक और नौकरशाह लोग तानाशाही की तरि राते है् यावक घोटालो्के दलदल मे्डूबते राते है;् कॉरपोरेट रगत मुनािाखोरी मे्अंधा हो कर देश-समार का सौदा करने लगता है और िौर देशरक्​्ा के आवरण मे् देशद्​्ोही करतबो्मे्लग राती है. आवखर हम ही तो है्वक रो िौर मे्रा कर िौरी, रारनीवत मे्रा कर देश के सेवक और काम-धंधे मे्रा कर कॉरपोरेट बन राते है.् हम रब कही्राते हे्तो अपनी कवमयो्-कमरोवरयो्को ले कर ही राते है.् इसवलए िौर की भी; िौवरयो्की भी, सरकारी तंत्की भी और इस पूरी श्ख ्ृं ला की भी लोकतांव्तक रांच-पड्ताल हमेशा चलती रहनी चावहये और उसका दवाब सब पर होना ही चावहये. िौर को लोक से या लोकतंत्से बड्ा बना कर पेश के पीछे कही्खुद को आड्मे्ले राने की कोवशश तो नही्है? यह भी और वह भी, दोनो्ही लोकतंत्को समान र्प से कमरोर करते है.् लोकतंत्को कमरोर करने से n बड्ा भी देशद्​्ोह भी कुछ होता है क्या? (लेखक गांधी शांवत प्व्तष्​्ान के अध्यक्​्है.्) शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 21


मास् देशकाल ट हेड

ममता बनज्​्ी: शुर् से ही भवरोध

एक नये मोऱ​़े पर दीदी

नोटबंदी के बाद ममता बनज्​्ी के नेततृ व् मे्पिली बार पूरा डवपक्​् एकजुट नजर आया िै. केद् ्मे् भाजपा सरकार बनने के बाद यि अपनी तरि का पिला मौका िै, जो अगली संभावनाओ्के द्​्ार भी खोलता िै. पंदं ीप शं​ंीिासंिं

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व्​्शम बंगाल की मुख्यमंत्ी ममता बनर्​्ी रारनीवतक क्​्ेत् मे् अपनी रुझार् प्​्वृवत, नेतृत्व क्​्मता और रारनीवतक दूरदव्शाता की समझ को एक बार विर से स्थावपत करने मे् सिल हुई है.् अंतर यह है वक पहली बार उन्हो्ने पव्​्शम बंगाल की प्​्ातं ीय रारनीवत मे्दशको्से 22 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

सत्​्ा पर स्थावपत वामपंथी दलो् के वखलाि ‘एकला’संघष्ाकी राह पर चल कर, उन्हे्सत्​्ा से हटाकर अपना लोहा मनवाया था. उस समय भी वकसी ने यह नही्सोचा था वक वे अपने इस संघष्ा मे् कामयाब हो्गी. ज्योवत बसु,सोमनाथ चटर्​्ी, इंद्रीत गुप्त, बुद्देव भट्​्ाचाय्ा रैसे वदग्गर वामपंथी नेताओ् को वशकस्​् देने मे् सिल हो्गी. इस बार उन्हो्ने केद् ्मे्बैठी भारपा सरकार और अपनेदम पर ढाई साल पहले लोकव्​्पयता की ऊूचाई पर बैठे प्ध् ानमंत्ी नरेद् ् मोदी की नीवतयो्और िैसलो्के वखलाि खुली लडाई का एलान वकया है. बीते वदनो्ममता बनर्​्ी के हवाई रहार को कोलकाता एयरपोट्ा पर लै्वडंग की इरारत मे् देरी और पव्​्शम बंगाल मे् राज्य सरकार की अनुमवत के वबना सेना की तैनाती के मामले को लेकर संसद के दोनो्सदनो्मे्कांगस ्े सवहत सभी ववपक्​्ी दलो् ने वरस तरह हंगामा खडा वकया, वह वनव्​्शत र्प से ववपक्​्की रारनीवत मे्ममता के बढते कद और उनकी पाट्​्ी के महत्व का

संकते देती है. आठ नवंबर को प्ध् ानमंत्ी मोदी के नोटबंदी के एलान के वदन ही ममता बनर्​्ी और उनकी पाट्​्ी तृणमूल कांगस ्े ने इस िैसले के वखलाि अपना नरवरया रावहर कर वदया था. प्​्धानमंत्ी के इस एलान के बाद रहां के्द् मे् मुख्य ववपक्​्ी दल कांग्ेस और भाकपा, रनता दल (यू), राकांपा, रारद रैसी पाव्टयि ां एक हफ्ते तक ऊहापोह मे्थी, तृणमूल कांगस ्े ने नोटबंदी के वखलाि आंदोलन का रास्​्ा अपना वलया था. कांग्ेस के एक ववरष्​् नेता मानते है् वक ममता बनर्​्ी ने वाकई यह सावबत वकया है वक वे एक रुझार्नेता है्और रो बात उनकी समझ मे् आ गयी उससे वह पीछे नही् हटती.उनके मुतावबक ममता बनर्​्ी और उनकी पाट्​्ी ने अभी तक लगातार रो आक्​्मक र्ख बनाये रखा उसकी वरह यही है वक ममता बनर्​्ी पहले वदन ही इस नतीरे पर पहुच ं गयी थी वक नोटबंदी का यह िैसला गरीबो्, कामगारो्, छोटे उद्​्ोगो्, वकसानो् के वलए नुकसानदायक और अथ्वा य् वस्था के वलए घातक होगा.


नोटबंदी के वखलाि ववपक्​्के आंदोलन का वाले पवरणाम को पहले ही समझ वलया. दस वदन अंवतम नतीरा क्या होगा, इस बारे मे्अभी कुछ बाद बाकी ववपक्​्ी पाव्टियो् ने रब देशभर मे् कहना मुबक् कल है, पर दो नतीरो्पर आसानी से नोटबंदी के बाद वकसान और मरदूरो् की पहुच ं ा रा सकता है. एक, केद् ्मे्नरेद् ्मोदी और तकलीिो् को देखा समझा तो उन्हो्ने अपनी भारपा की सरकार के वखलाि ववपक्​्एकरुट हो रारनीवतक लाईन बदली और तृणमूल कांग्ेस गया है. 1996 के बाद राष्​्ीय रारनीवत मे्ववपक्​्ी का रास्​्ा अपनाया. ममता ने शुर्से ही नोटबंदी ्े और माकपा एकरुटता वरस तरह वदखाई दे रही है, उसका के िैसले का ववरोध वकया. कांगस श्​्ेय ममता बनर्​्ी और उनकी पाट्​्ी के सुदीप रैसी पाव्टयि ां रारनीवतक दूरदव्शता ा के मामले मे् बंद्ोपाध्याय, डेरक े ओ ि्​्ायन, सुखदे् ् राय रैसे तृणमल से पीछे रही. वे नोटबंदी के नतीरो्, नेताओ् का है, वरन्हो्ने स्थानीय स्​्र पर घोर उनकी संभावनाओ् काउस तरह नही् देख पाई ्े ने शुर् से देख वलया था. रारनीवतक प्व्तद्द्ं ्ी रहे माकपा, भाकपा नेताओ् रैसे तृणमूल कांगस से बातचीत करने मे्कोई परहेर नही्वकया और रद (यू) अध्यक्​् और वबहार के मुख्यमंत्ी वरनकी वरह से इसी तरह प्​्ातं ीय रारनीवत मे् नीतीश कुमार तो अभी तक ऊहापोह की ब्सथवत परस्पर एक-दूसरे से छत्​्ीस का आंकडा बनाए मे्है. ममता बनर्​्ी रब नोटबंदी के िैसले की रखने वाले द्म् क ु -अन्नाद्म् क ु , सपा, बसपा रैसी पाव्टयि ो्के नेताओ्को एक मंच पर लाने मे्अथक मुखालित करने प्ध् ानमंत्ी के राष्​्संबोधन के हफ्तभे र बाद वदल्ली आई थी तो कांगस ्े , वामपंथी प्य् ास के बाद कामयाबी हावसल की. दूसरा नतीरा भी इसी तरह महत्वपूण्ा है. दल, सपा वगैरह वकसी ने उनके काय्ाक्म मे् 1991 के बाद आव्थाक उदारवाद के दौर मे् साथ नही्वदया. संसद से राष्प् वत भवन के माच्ा रारनीवतक दलो् के वलए गरीबी उन्मूलन या मे् तृणमूल कांग्ेस के साथ नेशनल कांफे्स, ा पटेल का संगठन रैसो्ने ही उनका गरीबो् की समस्या थोडे बहुत नारे तक सीवमत आप, हाव्दक हो गयी थी. ववकास के नाम पर ववदेशी पूंरी साथ वदया. रारग के घटक दल वशवसेना ने ् ाया. पर इसके वनवेश, संचार व्यवस्था, रीडीपी, सेसके् स ् रैसे ममता का समथ्ना कर सबको चैक मुद्ो्की बात होने लगी. घोटालो्, सांपद् ावयकता बावरूद ममता ने यह उसी समय यह साि कर रैसे मुद्ो्पर चुनाव लडे गए और इस बदलाव वदया वक इस मुद्ेपर उनका कोई साथ दे्या न मे् समारवादी, वामपंथी रैसे आंदोलनो् ने भी दे,् वे वकसी भी पाट्​्ी का साथ देने को तैयार है. ्े कांफस ्े मे्उन्हो्ने यहां तक कहा वक अपना मुद्ा छोडा और खत्म हो गए. ऐसे मे् अपनी प्स े रारनीवत मे्वे माकपा के वखलाि है,् पर ‘काले धन’ के नारे के भुलावे मे् ज्यादातर प्द् श ववपक्​्ी पाव्टयि ां देर तक उलझी रही.यह सोच कर इस मुद्े पर वे उन्हे् माकपा के साथ से भी ्े के इस र्ख वक उनपर आरोप न लगे वक वे्‘कालेधन’ को कोईएतरार नही्है. तृणमूल कांगस खत्म करने के ववरोध मे्है. ममता बनर्​्ी ने इस की वरह से लोकसभा मे्सुदीप बंद्ोपाध्याय हो े ओ ि्​्ायन, दोनो्ही नेता बात की परवाह वकए बगैर वदहाडी मरदूरो्, या राज्यसभा मे्डेरक ्े और अन्य ववपक्​्ी दलो्के लगातार संपक्क सल्री, िल ववके्ता, रेहडीवाले, चाय बगान कांगस रैसे उद्​्ोगो् के मरदूरो् पर नोटबंदी के पडने मे् रहे. संसद के भीतर और संसद के बाहर की काेलकाता मे् एक बै्क के बाहर: मुभ्िकल से भमली रकम

साझा ववपक्​्ी रणनीवत बनाने मे् अथक प्​्यास वकया. इस िैसले मे् तृणमूल कांगस ्े की भी बडी भूवमका थी. वरस वदन यह ववरोध प्द् श्ना हुआ, ममता बनर्​्ी वदल्ली आ गई् थी. पर चूवं क यह सांसदो् का ववरोध प्​्दश्ान था, इसवलए इसमे् उन्हो्ने वहस्सा नही्वलया, पर तृणमूल कांगस ्े के सारे सांसद ममता के साथ न रहकर संसद मे् सुबह इस काय्ाक्म मे् शावमल हुए. इनमे् से कईयो्के हाथ मे्नारे वलखी तब्खतयां थी. डेरक े भी करीब 200 सांसदो् की कतार बनवाने मे् व्यस्​्रहे. सुदीप बंद्ोपाध्याय, राहुल गांधी और सीताराम येचरू ी के बगल मे् खडे थे. राहुल देर तक सुदीप से बातकरते रहे. दो घंटे बाद ममता बनर्​्ी रंतर-मंतर पर धरना देने पहुच ं ी तो चार घंटे के इस काय्क ा म् मे्शरद यादव सवहत कुछ अन्य ववपक्​्ी दलो्के नेताओ्ने भी मंच से भाषण वदया. ममता बनर्​्ी और तृणमूल कांगस ्े की इस रारनीवतक प्व्तबद्त् ा का ही असर है वक ववपक्​्ी दल शुरआ ् ती ववखराव के बाद अब एकरुट है. इसमे्कोई संदहे नही्वक इस एकरुटता की धुरी ममता बनर्​्ी है. ममता ने 29 नवंबर को लखनऊ और दूसरे वदन पटना मे्रैली करके भी यही संदेश वदया वक नोटबंदी के मुद्े पर वे देशव्यापी आंदोलन औरसभी को साथ लेकर चलने के पक्​्मे्है. लखनऊ मे्यूपी के मुखय् मंत्ी अवखलेश यादव ने और पटना मे्रारद अध्यक्​् लालू प्​्साद ने उनका स्वागत वकया. नीतीश कुमार कोउनके चुनाव मे्ममता बनर्​्ी ने अपना पूरा समथ्ना वदया था. पर नीतीश कुमार ने इस पूरे मामले मे् यही सावबत वकया वक नेततृ व् की क्​्मता और िैसले लेने का अभाव उनमे् है.वे ववपक्​्ी खेमे मे्अलग-थलग पड गए है.् यहां संसद मे् कांगस ्े और ववपक्​्ी दलो् के नेता वनरी बातचीत मे् अब यह मानते है् वक संसद के दोनो् सदनो् मे् और संसद के बाहर भारपा की नीवतयो्के वखलाि रो माहौल बनाहै, ववपक्​्ी एकरुटता वदखाई दे रही है उसमे्ममता बनर्​्ी और तृणमूल कांगस ्े की बडी भूवमका है. तृणमूल कांगस ्े की दोनो्सदनो्मे्संखय् ा बल का इस्म्े ाल पाट्​्ी अध्यक्​्ममता बनर्​्ी सही तरीके से कर रही है. यही वरह है वक तीन वदन पहले ममता बनर्​्ी के पटना से कोलकोता तक हवाई उडान मे् उनके हवाई रहार को वरस तरह आधे घंटे तक एटीसी ने कोलकोता एयरपोट्ा के ऊपर उडाया और लैव्डग मे्देर की उसे लेकर संसद के दोनो् सदनो् मे् तृणमूल के ववरोध का साथ सभी ववपक्​्ी दलो् ने वदया. इसी तरह पव्​्शम बंगाल मे्राज्य सरकार की वबना अनुमवत के सेना तैनाती के मामले को लेकर संसद के दोनो्सदनो् मे्रबरदस्​्हंगामा हुआ. n शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 23


उत् मास्​्रटप्​्दहेडेश

मुलायम भसंह और अभखलेश यादव: ऊहापोह जारी

वकशोर की समारवादी पाट्​्ी के मुवखया मुलायम वसंह यादव और बाद मे् मुख्यमंत्ी अवखलेश यादव से भेट् ही अब तक दोनो्दलो्के बीच इस वसलवसले मे् हुई बातचीत की अकेली साव्ारवनक कड्ी है. हालांवक उसके बाद मुलायम वसंह यादव यह कह चुके है्वक उनकी पाट्​्ी वकसी से गठबंधन कर चुनाव नही्लड्गे ी और वरसे सपा का साथ चावहये वह अपने दल का ववलय करे. ऐसे मे्अवखलेश यादव का यह कहना वक कांग्ेस उनकी पाट्​्ी के साथ वमल कर चुनाव लड्ेतो 300 से ज्यादा सीटे्वमलेग् ी इस मायने मे् अहम है वक उनका बयान मुलायम वसंह यादव की वटप्पणी के बाद आया है. वरसमे् उन्हो्ने वकसी दल से गठबंधन की संभावना से इनकार वकया था. वलहारा रारनीवतक हलको्मे् यह अनुमान लगाया राने लगा वक है वक क्या समारवादी पाट्​्ी और कांगस ्े मे्अंदरखाने कोई वखचड्ी पक रही है? गठरोड्कर चुनाव लड्ने के मुद्ेपर दोनो्दलो्के बीच अंवतम र्प से कोई बात बन पाती है या नही्यह अगले कुछ वदनो्मे् साि हो राएगा लेवकन दोनो् पाव्टयि ां वमल कर चुनाव लड्ी्तो कैसी तस्वीर बनेगी? वपछले कुछ चुनावो्के नतीरो्का ववक्लषे ण और उत्र् प्द् श े की रारनीवत के मौरूदा रातीय-धाव्माक समीकरण इंवगत करते है् वक यह गठरोड् मरबूत सावबत हो सकता है. समारवादी पाट्​्ी और कांग्ेस, दोनो् ने ही उत्र् प्द् श े मे्चुनाव पूवा्गठरोड्के बहुत ज्यादा प्​्योग नही् वकये. अव्वल तो ये दोनो् पाव्टियां

जब भमले सुर मेरा-तुम्हारा

उत्​्र प्​्देश मे्सपा-कांग्ेस गठबंधन की जमीन तैयार िोती डदख रिी िै. अगर यि गठबंधन परवान चढ्ता िै तो आगामी डवधान सभा चुनाव की तस्वीर बदल सकती िै . रंजीि

उ

त्र् प्द् श े के मुखय् मंत्ी अवखलेश यादव ने हाल मे्एक काय्क ा म् मे्सवालो्के रवाब मे्कहा वक अगर समारवादी पाट्​्ी और कांगस ्े वमल कर उत्र् प्द् श े मे्2017 का ववधानसभा चुनाव लड्े् तो 300 से ज्यादा सीटो् पर रीत वमलेगी. गत एक महीने के दौरान अवखलेश यादव ने दूसरी बार यह बात कही. वलहारा यह माना रा सकता है वक यह महर वसयासी सनसनी मचाने के वलए वदया गया बयान नही्है बब्लक ठोस गुणा-भाग के रवरये ही वे इस

24 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

वनष्कष्ापर पहुच ं े हो्ग.े हालांवक दो दलो्के बीच चुनाव पूव्ा गठबंधन होना आसान नही् होता. खास तौर पर अगर इनमे् से एक पाट्​्ी सूबे का सत्​्ार्ढ् दल हो और दूसरा राष्​्ीय स्​्र पर सत्​्ार्ढ्भारतीय रनता पाट्​्ी का मुखय् ववरोधी. ऐसे मे्कौन वकतनी सीटो्पर लड्ेइस पर अहं का टकराव,भारी तोल-मोल और सम्मानअसम्मान बरकरार रहने रैसे मुद्े बड्ी भूवमका वनभाते है.् समारवादी पाट्​्ी और कांगस ्े के बीच वमल कर चुनाव लड्ने पर कोई ठोस बातचीत अभी तक शुर्नही्है. कांगस ्े के रणनीवतकार प्श ् ांत

कभी वमल कर चुनाव नही्लड्ी.् साल 2003 मे् बहुरन समार पाट्​्ी और भारतीय रनता पाट्​्ी की गठरोड् वाली सरकार वगरने के बाद रब मुलायम वसंह यादव के नेतृत्व मे् समारवादी पाट्​्ी ने बाकी दलो् के साथ वमल कर सरकार बनाई थी तो उसे कांगस ्े ने समथ्ना रर्र वदया था. नल्बे के दशक से उत्र् प्द् श े की रारनीवत मे् कांगस ्े के पराभव और समारवादी पाट्​्ी के उदय के गये पच्​्ीस साल मे्सूबे मे्दोनो्दलो् का वही पहला और आवखरी साथ था. चुनाव पूव्ा गठबंधन कर कांग्ेस तीन बार उत्र् प्द् श े के चुनावी मैदान मे्उतरी है. पहली


बार 1996 मे्तब रब उत्र् प्द् श े का ववभारन होकर अलग उत्र् ाखंड राज्य नही्बना था. तब उसने बहुरन समार पाट्​्ी के साथ सीटो् का तालमेल कर चुनाव लड्ा था. उसके बाद2012 का ववधानसभा चुनाव वरसमे्कांगस ्े ने राष्​्ीय लोकदल के साथ सीटो् का बंटवारा वकया था. विर 2014 का लोकसभा चुनाव भी कांगस ्े और राष्​्ीय लोकदल वमल कर लड्.े सन 1996 के चुनाव मे्कांगस ्े को बहुरन समार पाट्​्ी की रूवनयर पाट्ी् बन कर बंटवारे मे् कम सीटो् पर ही संतोष कर चुनाव मे् उतरना पड्ा था. संभवतः दोनो्दलो्को उम्मीद थी वक एक-दूसरे के वोट सभी सीटो् पर ट्​्ांसिर हो सके्गे और गठरोड् बड्ी कामयाबी हावसल करेगा. ऐसा हुआ नही्. 425 सीटो् की ववधानसभा मे् दोनो् पाव्टयि ां वमल कर भी 100 काआंकड्ा पार नही्कर सकी्थी्. नतीरो् के ववक्लेषण से भी वनकला वक बसपा के वोट तो कांगस ्े के प्त्य् ावशयो्के वलए ज्यादातर रगहो् पर ट्​्ांसिर हुए लेवकन रहां बसपा प्​्त्याशी लड्े वहां वैसा न हो सका. वलहारा उसके बाद बसपा ने चुनाव पूवा्गठरोड् करने से तौबा ही कर ली. कांग्ेस ने 2012मे् राष्​्ीय लोकदल के साथ वमलकर रब ववधानसभा का चुनाव लड्ा तब भी कोई चमत्कार न हो सका. कांग्ेस उपाध्यक्​् राहुल गांधी के ताबड्तोड् प्च ् ार के बावरूद कांगस ्े रालोद गठबंधन समारवादी पाट्​्ी की लहर के आगे नही् वटक पाया. यही ब्सथवत 2014 के लोकसभा चुनाव मे्भी हुई रब भारतीय रनता पाट्​्ी ने सभी दलो्को कािी पीछे छोड्वदया. वही् समारवादी पाट्ी् के चुनाव पूव्ा गठबंधन अपेक्ाकृत ज्यादा कामयाब रहे. 1993 मे्उसने बहुरन समार पाट्ी् के साथ गठबंधन कर चुनाव लड्ा था और सूबे मे्सरकार बनाई थी. हालांवक उस गठबंधन के बाद दोनो्दलो्के वरक्तो्मे्ऐसी खटास आयी रो आर भी कायम है. समारवादी पाट्​्ी ने उसके बाद 2004 का लोकसभा चुनाव राष्​्ीय लोकदल के साथ वमलकर लड्ा था और अब तक का सव्ाश्ेष् प्द् श्ना करते हुए 35 सीटो्पर कामयाबी पाईथी. रबवक राष्​्ीय लोकदल को तीन सीटे्वमली्थी्. अगर समारवादी पाट्​्ी और कांग्ेस वमल कर 2017 का ववधानसभा का चुनाव लड्े् तो कैसी तस्वीर उभर सकती है और कौन-कौन से समीकरण सध सकते है्? राज्य ववभारन के बाद यानी साल 2000 के बाद प्द् श े मे्अब तक ववधानसभा के तीन और लोकसभा के भी तीन चुनाव हो चुके है.् इन चुनावो्मे्समारवादी पाट्​्ी और कांगस ्े को वमला वोट प्व्तशत क्या कहता है? 2002 के ववधानसभा चुनाव मे्समारवादी पाट्​्ी को 25.43 और कांगस ्े को 9 िीसदी वोट वमला था. 2004 के लोकसभा चुनाव मे्

समारवादी पाट्​्ी को 26.74 और कांग्ेस को 12.04िीसदी वोट वमला. 2007 के ववधानसभा चुनाव मे् सपा को 25.45 और कांग्ेस को 8.56िीसदी वोट वमला. 2009 के लोकसभा चुनाव मे् सपा को 23.26 और कांग्ेस को 18.25िीसदी वोट वमले. 2012 के ववधानसभा चुनाव मे्समारवादी पाट्​्ी को 29.13 और कांगस ्े को 11.65 िीसदी वोट वमले रबवक 2014 मे्नरेनद् ्मोदी की लहर से प्भ् ाववत लोकसभा चुनाव मे्समारवादी पाट्​्ी को 22.2 और कांग्ेस को 7.5 िीसदी वोट वमले. यानी गये डेढ्दशक मे्वरतने भी चुनाव हुए उनमे्दोनो्दलो्का संयकु त् मत प्व्तशत 30 िीसदी से ऊपर ही रहा वरसे उत्​्र प्​्देश मे् सरकार बनाने की दौड् मे् प्​्मुखता से शावमल होने के वलए आरमाया हुआ आंकड्ा माना राता है और संभवतः यही वरह है वक मुख्यमंत्ी अवखलेश यादव दोनो्दलो्के वमल कर चुनाव लड्ने की ब्सथवत मे्300 सीटो्का आंकड्ा पार कर राने की बात कह रहे है.्

प्​्शांत भकशोर: गठबंधन बड्ा सवाल

दरअसल वसयासी प्​्ेक्को् का अनुमान है वक यह गठबंधन हुआ तो सबसे बड्ा संदेश मुब्सलम वोटरो् को रायेगा और यह तबका गठरोड् को भारतीय रनता पाट्​्ी के वखलाि अपनी स्वाभाववक पसंद मान कर वोट करेगा. यह खास तौर पर समारवादी पाट्​्ी के वलए िायदे का सौदा इसवलए सावबत हो सकेगा क्यो्वक गठरोड्की ब्सथवत मे्स्वाभाववक र्प से वह ज्यादा सीटो् पर लड्ेगी और मुब्सलम वोट

हावसल करने का उसका स्ट्ाइक रेट बढ्सकेगा. यह बहुरन समार पाट्​्ी की मुवखया मायावती की उन कोवशशो्मे्भी अड्गं ा डालेगा वरसमे्वे मुबस् लम वोटरो्को समारवादी कुनबे की आपसी रार का हवाला देकर बसपा के वलए वोट देने को कह रही है्. समारवादी पाट्​्ी मे् कांग्ेस से गठबंधन के पैरोकारो्का एक तक्कयह भी है वक इससे सीटवार एक-दूसरे का वोट अगले को ट्​्ांसिर होने की संभावना भी ज्यादा रहेगी क्यो्वक अतीत मे्सपा अपने चुनावी पाट्ना र संग ऐसा करने मे्कामयाब रही है. हालांवक आंकड्ेऔर वसयासी रर्रत दोनो् दलो्के वमल कर चुनाव लड्ने की तस्वीर रर्र पेश कर रहे है् लेवकन व्यवहार मे् यह बहुत आसान नही् होगा. अव्वल तो इसवलए नही् क्यो्वक समारवादी आंदोलन की नी्व ही गैर कांग्ेसवाद पर खड्ी है. इतना ही नही् गये 25साल मे् उत्र् प्द् श े मे् मरबूत होकर उभरी समारवादी पाट्​्ी इस मुकाम तक कांगस ्े के वोट बैक ् के एक बड्ेवहस्से को हावसल कर ही पहुच ं ी. गठबंधन से पहले कांगस ्े इन सवालो्मे्उलझेगी वक 2019 के लोकसभा चुनावो् से पहले उत्र् प्​्देश रैसे बड्े राज्य मे् एक क्​्ेत्ीय पाट्​्ी का रूवनयर बन कर चुनाव मे् उतरना कही् नकारात्मक संदश े तो नही्देगा ? इन सवालो् के ऊपर सबसे बड्ा मुद्ा यह वक दोनो्पक्​्ो्को मंररू सीटो्की संखय् ा पर क्या सहमवत बन पायेगी ? कहा रा रहा है वक कांग्ेस की तरि से रो प्​्स्ाव वदया गया है, उसमे् वपछले ववधानसभा चुनाव मे् रीती 28 सीटो्के साथ ही ऐसी सीटे्शावमल की गयी है,् रहां से कांग्ेस प्​्त्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे. इसके अलावा 2014 के लोकसभा चुनावो् के दौरान ऐसी ववधानसभा रहां कांग्ेस नंबर एक की पोरीशन पर रही थी, इन्हे्भी शावमल वकया गया है. इन सभी को वमलाकर करीब 85 सीटे् कांग्ेस की बन रही है्. कांग्ेस कुल 100 सीट मांग रही है. उधर सपा करीब 85 सीटे्देने को रारी बताई रा रही है. कांगस ्े सूत्ो्के अनुसार वपछले वदनो्गुलाम नबी आराद से हुई चच्ा​ा मे् सपा को कांगस ्े की मांग से अवगत करा वदया गया है. अब इस पर सपा नेततृ व् को िैसला लेना है. सवाल कई है्लेवकन दोनो्दलो्का नेततृ व् यह भी रानता है वक अगर 2017 मे्उत्र् प्द् श े के चुनाव मे्भारतीय रनता पाट्​्ी को हराने मे्वे कामयाब रहे तो लोकसभा के अगले चुनाव से पहले देश की रारनीवत मे् उसकी गूर ं दूर तक राएगी वरसमे् दोनो् दलो् को अपने िायदे की प्व्तध्ववन भी सुनाई पड्गे ी. ऐसे मे् शायद उत्र् प्द् श े मे् दोनो् दलो् का साथ इसकी विर पुव्ि करे वक रारनीवत मे्असंभव कुछ भी नही्और n स्थायी दोस्​्या दुकम् न भी कोई नही! शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 25


झारखंड

एनटीपीसी के भवरोध मे् प्​्दश्शन: दमन का भसलभसला

भमभिलेश दांगी: आज्ादी की लड्ाई

विरोध करो गोली खाओ झारखंि मे्एनटीपीसी की एक पडरयोजना सवालो्के घेरे मे्िै. बड्कागांव स्सरत इस पडरयोजना को लेकर िुई गोलीबारी ने जिां चार लोगो्की जान ले ली विी् इसमे्अडनयडमतता की खबरे् जोरो्पर िै्.

अहिषेक रंजन हसंि

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ि्ारीबाग व्िले के बड्कागांव प्ख ् डं मे्भूवम अवधग्​्हण के व्ख़लाफ् स्थानीय कांग्ेस ववधायक वनम्ाला देवी की अगुवाई मे् ‘क्िन सत्याग्ह् ’ कर रहे ग्​्ामीणो्पर बीती एक अक्टबू र की सुबह पुवलस ने वनम्मा ता से गोवलयां बरसायी्. वह घटना रावलयांवाला बाग हत्याकांड की याद वदलाती है. इस गोलीकांड मे् चार युवको् सोनबरसा गांव वनवासी अवभषेक राय, पवन साव वसंदुआरी वनवासी रंरन कुमार और चेपाखुद्ा वनवासी मेहताब अंसारी की मौत हो गयी. अवभषेक राय, पवन साव और रंरन कुमार छात्​् थे, वही् मेहताब अंसारी दैवनक मि्दरू था, रो शौच करने रा रहा था. इनमे् से कोई भी आंदोलन मे्शावमल नही्था. ये सभी उस रास्​्े 26 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

से गुरर रहे थे रहां पुवलस वनहत्थो्पर गोलीबारी कर रही थी. वदल्ली मे् मरदूरी करने वाला मेहताब ईद पर गांव आया था. अब यही्रहकर काम करना चाहता था. सन 2004 मे् मेहताब अंसारी की शादी हुई थी. उसके तीन छोटे-छोटे बच्​्ेहै्और इस घटना के बाद उसकी पत्नी सकीला ख़्ातून गहरे सदमे मे् है. मेहताब के बूढ्े वपता मुरीब अंसारी बताते है,् ‘ हमारे पास वसफक्आधा बीघा ि्मीन है. इतनी कम ि्मीन मे् मेहताब की ववधवा और उसके बच्​्ो् का भरण-पोषण मुबक् कल है. प्​्त्यक्​्दश्​्ी मोहम्मद मोईन के मुतावबक्, एनटीपीसी के वलए भूवम अवधग्ह् ण के वखलाि वपछले कुछ वदनो्से ववधायक वनम्ल ा ा देवी एवं उनके पवत पूव्ा ववधायक योगे्द् साव सैकड्ो् ग्​्ामीणो् के साथ किन सत्याग्​्ह पर बैठे थे. हि्ारीबाग व्िला प्​्शासन ने सत्याग्​्ह ख़्त्म कराने के वलए पहले यहां धारा 144 लागू की और बाद मे्बग्रै वकसी वारंट के ववधायक को वगरफ्तार कर वलया. नाराि् ग्​्ामीणो् का गुस्सा िूट पड्ा और उन्हो्ने पुवलस के वहरासत से ववधायक वनम्ाला देवी को मुक्त करा वलया. इससे गुसस ् ाई पुवलस ने पहले लोगो्पर लाठीचार्ा वकया और बाद अंधाधुधं िायवरंग शुर्कर दी. प्श ् ासवनक लापरवाही का अंदाि्ा इस बात से लगाया रा सकता है वक ऐसी तनावपूणा्ब्सथवत मे्मौक्ा-ए-वारदात पर उस वदन न तो व्िले के एसपी मौरूद थे और न ही पुवलस उपायुकत् .

अवधवक्ता एवं सामावरक काय्ाकत्ा​ा अवनर्द्कुमार कहते है्वक प्​्ाकृवतक संसाधनो् पर रनता का अवधकार होना चावहये. ऐसा भारतीय संववधान की धारा 39 बी मे्वनवहत है. इसके तहत रो रमीन की उपरी सतह का मावलक है, वही वनचली सतह का भी मावलक है. अफ्सोस संसाधन वकसी है और उसे बेच कोई और रहा है. सरकार प्​्ाकृवतक संसाधनो् पर रनता का अवधकार नही्मानती, बब्लक दुवनया का अवधकार मानती है. सवाल वसफक्मुआवि्ा और चंद नौकवरयो् का नही् है. झारखंड समेत देश भर मे् वकसानो् से उनकी मि्​्ी के बग्ैर ि्मीने् ली रा रही है्. वही् माननीय उच्​्तम न्यायालय का कहना है वक भू-स्वामी ही खवनर का मावलक है. धारा 39 बी के मुतावबक समुदाय ही खवनर का मावलक होगा और ग्​्ाम सभा तय करेगी वक खवनर वनकालने की ि्रर् त है या नही्. सरकार एक तरफ् कहती है वक उसके पास 5000 मेगावाट अवतवरक्त वबरली है, लेवकन विर भी गांवो् को वबरली नही् दी रा रही है. गांवो् के वहस्से की वबरली आर मॉल्स और मल्टीप्लके स ् को वदये रा रहे है.् अवनर्द्कुमार कहते है्वक अगर वकसी कूपनी को कैबप्टव वदया राता है, तो उसके 50 वकलोमीटर के दायरे मे् ही प्लांट लगाना आवक्यक है. टंडवा रहां एनटीपीसी का प्लांट बनने वाला है, वह चतरा वरले मे्आता है और यह कैबप्टव कोल ल्लॉक से 50 वकलोमीटर से अवधक दूर है.


पकड्ी-बरवाडीह एनटीपीसी को कोल ल्लॉक देने मे्भी वनयमो्को ताक पर रखा गया है. वनयमतः उस कूपनी को कोल ल्लॉक आवंवटत वकये राते है,् वरनके पास खनन का कम से कम तीन साल का अनुभव हो. एनटीपीसी को कोल ल्लॉक आवंवटत वकया गया, रबवक वह उन शत्​्ो् को पूरा नही्करती. इतना ही नही्, कोल ल्लॉक आवंटन के 42 महीनो् बाद खनन करना अवनवाय्ाहै. रबवक एनटीपीसी को 11 अक्टबू र 2004 मे् कोल ल्लॉक वमला. इस तरह वकतने साल गुरर गये, लेवकन खनन शुर्नही्हो पाया. बड्कागांव मे् 23,000 करोड् र्पये की लागत से प्​्स्ाववत एनटीपीसी की 12,000 मेगावाट की पवरयोरना के वलए स्थानीय 32 रारस्व गांवो्मे्17,000 एकड्भूवम अवधग्ह् ीत करने का लक्य् रखा गया है. इनमे्8000 एकड् भूवम वनरी रैयतो् यानी वकसानो् की है, रबवक शेष भूवम वन ववभाग की है. इनमे् से ज्यादातर भूवम वसंवचत और बहुफस ् ली है.् वष्ा 2004 मे् तत्कालीन प्ध ् ानमंत्ी अटल वबहारी वारपेयी ने हि्ारीबाग मे्एनटीपीसी की इस पवरयोरना की आधारवशला रखी थी. ग्​्ामीणो्का कहना है वक उनकी ि्मीन बहुिसली है और वे इस पर पीव्ढयो्से खेती करते आ रहे है.् इस संघष्ा की अगुवाई कर रहे ‘आि्ादी बचाओ आंदोलन’ के प्द् श े संयोरक वमवथलेश दांगी के अनुसार बड्कागांव एनटीपीसी थम्ाल पॉवर प्​्ोरेक्ट वनयमो् को ताक पर रखकर बनाया रा रहा है. उनके मुतावबक, बड्कागांव मे्कुल सात कैबप्टव कोल ल्लॉक है.् वनयमो्के मुतावबक, वकसी भी कैब्पटव कोल ल्लॉक और प्लांट की दूरी 100 वकलोमीटर से अवधक नही् होनी चावहये. लेवकन, हैरानी की बात यह है वक बड्कागांव कोल ल्लॉक का कोयला यहां बनने वाले एनटीपीसी को नही् वमलेगा, बब्लक आंध् प्​्देश के तालापल्ली और मध्यप्​्देश के लारा

थम्ल ा पॉवर प्लांट को वमलेगा. यह कैबप्टव कोल ल्लॉक की शत्​्ो्का उल्लघं न है. एनटीपीसी को वन एवं पय्ावा रण मंत्ालय ने 1,026 हेक्टेयर वन भूवम का आवंटन 17 वसतंबर, 2010 मे्वकया गया था. वन अवधकार क्ानून- 1880 के तहत साफ्उल्लख े है वक ऐसी भूवम का आवंटन ग्​्ाम सभा के ि्वरये होना चावहये. लेवकन एनटीपीसी को वन भूवम देने के वलए तत्कालीन हि्ारीबाग उपायुक्त और एसडीएम ने फ्र्ी ग्​्ाम सभा की बैठक आयोवरत कर वनयमो् की धव्​्जयां उड्ाई्. अमूमन ग्​्ाम सभा मे् कम से कम 50 फ्ीसद ग्​्ामीणो् की सहमवत ि्र्री है, लेवकन इसका कोई ध्यान नही् रखा गया. एक आरटीआई मे् हि्ारीबाग वन ववभाग से पूछा गया वक एनटीपीसी को वरन वन भूवम दी गयी है, उनमे् वकतने प्​्कार के वन्यरीव है?् रवाब मे्वन ववभाग ने कहा वक यहां केवल चार प्क ् ार के रीव- खरगोश, सांप, पुभलस की गोली से घायल नौजवान

पुभलस की गोली से मारे गये मेहताब अंसारी के भपता, पत्नी, भाई और छोटे बच्​्े

तीतर और वसयार पाये राते है,् रबवक यहां के रंगलो्मे्200 अवधक वन्य रीव पाए राते है.् वन अवधकार क्ानून के तहत वन भूवम आवंवटत करने का अवधकार व्िला कल्याण पदावधकारी को होता है, लेवकन उनसे सहमवत वलए बग्ैर हरारीबाग के उपायुक्त ने चट्​्ी बवरयातू कोल ल्लॉक के वलए वन भूवम एनटीपीसी को दे दी. कोल ल्लॉक आवंटन के समय एनटीपीसी ने एक हलफ्नामा वदया था वक उसके लीर मे् कोई दूसरी कूपनी शावमल नही्होगी. खनन का पूरा काम वह स्वयं करेगी, लेवकन बाद मे्एक ऑस्ट्ेवलयाई कूपनी टीस माइंस को कोयला खनन की सब लीर दे दी गयी. यह मामला बाद मे्उच्त् म न्यायालय पहुच ं ा और सब लीर रद्​् हुई. सुप्ीम कोट्ाके आदेश के बाद भी एनटीपीसी ने ग्लत तरीके् से खनन का ठेका व्​्तवेणी अथ्मा वू र और व्​्तवेणी सैवनक माइवनंग नामक की दो कूपवनयो् को दे वदया. ज्​्ात हो वक यह वही व्​्तवेणी कूपनी है, वरस पर शाह आयोग की वरपोट्ा मे् ओवडशा मे् अवैध खनन का आरोप लगाया गया है. ‘रन्मभूवम रक्​्ा सवमवत’ के अध्यक्​् वदलेशर् महतो के मुतावबक्, ‘ लोग समझते है् वक भूवम अवधग्​्हण के व्ख़लाफ् यह लड्ाई मुआवि्ेके वलए लड्ी रा रही है! दरअसल यह लड्ाई वकसानो् के मावलकाना हक् की है. अफ्सोस ज्यादातर नेता इसे मुआवि्ेकी लड्ाई समझ रहे है्. वपछले वदनो् भाकपा-माले के राष्​्ीय महासवचव दीपांकर भट्​्ाचाय्ाभी आये थे, उन्हो्ने कहा वक वकसानो् को एनटीपीसी उवचत मुआवि्ा नही् दे रही है, इसवलए स्थानीय वकसान आंदोलन कर रहे है्. वकसानो् की इस लड्ाई को मुआवि्े की लड्ाई क्रार देकर रारनीवतक दल वष्​्ो् पुराने इस आंदोलन को कमि्ोर कर रहे है.् एनटीपीसी को वन ववभाग की ि्मीन के अलावा रैयती ि्मीन नही् वमली है, रबवक उसे 8000 एकड् रैयती ि्मीन चावहये. व्फलहाल एनटीपीसी ने 435 एकड् रैयती ि्मीन का अवधग्ह् ीत की है. राष्​्ीय रनता दल के प्​्देश अध्यक्​्गौतम सागर राणा बड्कागांव गोलीकांड को दुभ्ा​ाग्यपूण्ामानते हुए एनटीपीसी पवरयोरना को रद्​्करने की मांग करते है्. बकौल राणा वपछले वदनो् के्द्ीय कोयला सवचव ने एक बयान मे् कहा था वक देश मे्पय्ा​ाप्त वबरली है, इसवलए ि्मीन के भीतर दबे कोयले को वनकालने की कोई ि्र्रत नही् है. बड्कागांव गोलीकांड के ववरोध मे् झारखंड के पूव्ा मुख्यमंत्ी एवं झारखंड ववकास मोच्ा​ा के राष्​्ीय अध्यक्​् बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व मे् प्​्देश की सभी ववपक्​्ी पाव्टायो् ने एक फू्ट बनाया है केवल झामुमो ही इससे दूर है. n शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 27


अरुपम-स्मृबि

ओज्ोन परत िी तरह

अनुपम डमश्​्की मौजूदगी से सामाडजक पय्ाषवरण मे्ऑक्सीजन डमलती री और यि भरोसा भी डक तापमान कभी इतना निी्बढ्ेगा डक दुडनया जीने लायक न रि जाये. हं​ंपयदशंशन

कु

छ धूल और राख़्से भरे उस माहौल मे्अपने सैकड्ो्व्​्पयरनो्और पवररनो् के बीच अनुपम री शांत लेटे हुए थे. विर उन्हे् ववद्​्ुत शवदाह के वलए बने यंत्के भीतर उतारा गया. एक ि्ोरदार धड्ाके की सी आवाि्आयी और 68 साल की भुरभुरी, कै्सरक्लांत देह ख़्ाक हो गयी. मै्ने पल भर के वलए आंखे्मूंद ली्. बरसो्से रो शख्​्स एक पारदश्​्ी रोशनी की तरह वदखता रहा, वह पलक झपकते राख हो चुका था. मगर वहां मौरूद हर वकसी के भीतर कर्णा का वह रल उमडा आ रहा था वरसे अनुपम री ताउम्​्संवचत करते और बांटते रहे. अनुपम वमश्​् पानी की तरह सहर थे और पय्ा​ावरण की तरह खुले हुए. वे अपनी रड्ो्को रानते थे और अपने स्​्ोतो्को पहचानते थे. परंपरा से उनका वही वरक्ता था रो हवा और पानी से था. उनकी सारी समझ इसी के बीच बनी थी. इसीवलए वह यह देख पाते थे वक रो इंति्ाम पहले समार के हाथ मे्थे, वे सरकार के पास राकर बरबाद हो गये. पानी उनके वलए उपभोग का सामान नही्था. पानी रीवन था वरसे नि्​्होने से बचाया राना था. कुएं, झील, पोखर, नवदयां, उनकी चेतना के सहर ववस्​्ार थे. बाढ् उनके वलए रीवन का वहस्सा थी. वे मानते थे वक समार को बाढ्के साथ रीने की रो कला आती थी, वह इस आधुवनक समय मे् खो गयी है. वे रानते थे वक इस देश मे्वरतने ज्​्यादा बांध बन रहे है्. उतनी ही बाढ्आ रही है और उतनी ही तबाही ला रही है क्यो्वक अब वह अपने राने-पहचाने रास्​्ो् को छोड् वबल्कुल अनराने इलाको् को रौ्दती-बहाती आती है. नवदयो् को रोड्ने या साफ् करने की अरबो्-खरबो् की पवरयोरना को वे वसि्क बरबादी मानते थे. उनका कहना था वक सैकड्ो् ट्​्क लगाकर भी नवदयो् की गाद साफ् नही् की रा सकती. यह काम वसफक् नवदयां अपनी ताकत से कर सकती है्- ि्र्रत उन्हे्बहने की आि्ादी देने की है्, बीच की र्कावटे्हटाने की है. यह भ्​्म न हो वक अनुपम वमश्​् रड् परंपरावादी या घोर आधुवनकताववरोधी थे. वे पूरी तरह गांधीवादी थे- अपनी सादगी मे् भी, और परंपरा और आधुवनकता के प्​्वत अपनी आलोचक दृव्ि मे्भी. 'आर भी खरे है् तालाब', 'रारस्थान की ररत बूंदे्', ‘हमारा पय्ा​ावरण’, ‘महासागर से वमलने की वशक्​्ा’ रैसी उनकी वकताबे् दरअसल पानी बचाने, तालाब बनाने या बादलो्के अलग-अलग शल्दो्को पहचानने के सीवमत लक्​्य को लेकर वलखी गयी वकताबे् नही् है्, वह अपनी तरह की भारतीयता और सामावरकता का संधान करने की कोवशश है. वपछले कुछ वष्​्ो्से वे छोटी सी पव्​्तका 'गांधी माग्ा' का संपादन कर रहे थे. गांधी माग्ा

अनुपम भमश्​्: 1948-19 भदसंबर 2016

के अंक देखकर समझ मे् आता था वक सादगी और सुर्वच का संगम वकतना सुकर और सुखद हो सकता है. अनुपम वमश्​् यह काम इसवलए कर पाये वक उन्हो्ने अपने पय्ा​ावरण को वछछली आधुवनकता के बहुत सारे प्​्दूषणो्से बचाये रखा था. उनकी सहर वहंदी भी इसी पय्ा​ावरण से वनकली थी. वे वहदी का भी एक साि-सुथरा तालाब थे. उनको पढ्ना अपनी भाषा की वमठास और उसके सो्धेपन को कुछ अचरर और उल्लास से पहचानने रैसा हुआ करता था- रैसे यह गव्मायो् मे् वकसी मीठे कुएं का पानी हो. भाषा का प्​्दूषण और अथ्​्ो्का क्​्रण भी उनको आहत करता था. उनका मानना था वक 'ववकास' शल्द ने समार का बुरा वकया है. वरसे हम ववकास समझने लगे है्, वह दरअसल ववनाश है. इसी तरह ‘उदारीकरण” शल्द से उन्हे् सख्​्त परहेर था. उनकी राय मे्वरस व्यवस्था को हम उदारीकरण कहते है्, वह दरअसल पूरी तरह अनुदार है. ‘ि्मीन’ से ‘ि्मीने्’ बनाना उन्हे् कभी गवारा नही्हुआ, क्यो्वक वे मानते थे वक ि्मीन के टुकड्ेनही्वकये रा सकते. वकसी वखलाड्ी के खेल छोड्ने के वलए ‘संन्यास’ शल्द का इस्​्ेमाल भी उन्हे्हास्यास्पद लगता था. उनके व्यब्कतत्व मे्ववनम्​्ता और सहरता का रो मेल था वह सबको अपने साथ बांध लेता था. स्माट्ािोन और इंटरनेट के इस दौर मे्वे वचट्​्ीपत्​्ी और पुराने टेलीिोन के आदमी थे. लेवकन वे ठहरे या पीछे छूटे हुए नही् थे. रब भी उनका िोन आता, मुझे लगता वक मै् अपने वकसी अवभभावक से बात कर रहा हूं वरसे इस बात की सिाई देना रर्री है वक मै्ने वक्त रहते यह काम या वह काम क्यो्नही्वकया है. वतस पर उनकी सहरता और ववनम्​्ता वबल्कुल कलेरा वनकाल लेती. उनको देखकर समझ मे्आता था वक कमी वक्त की नही्हमारी है रो हम बहे रा रहे है्. वे मौरूदा सामावरक पय्ा​ावरण मे् ओरोन परत रैसे थे. उनसे ऑक्सीरन वमलती थी, यह भरोसा वमलता था वक तापमान कभी इतना नही् बढ्ेगा वक दुवनया रीने लायक न रह राये. 20 वदसंबर को वनगमबोध घाट के ववद्​्ुत शवदाहगृह मे्उनको अंवतम ववदाई देते हुए यह खयाल भी आया वक धीरे-धीरे वे सारे लोग हमसे ववदा हो रहे है् वरनकी सांस्कृवतक और n बौव्​्दक छाया मे्हमारी तरह के लोग पले-बढ्े. (आगे के पन्नो्पर कुछ और ववशेष सामग्​्ी) शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 29


अरुमास् पम-स् ट हेमड ृबि

पर्ा​ावरण का अनुपम पानी के पिर्ए अनुपम डमश्​्के बारे मे्प्​्भार जोशी ने यि लेख सन 2006 मे्डलखा रा जब वे जीडवत रे. अनुपम की स्मृडत मे्यि लेख डफर से प्​्काडशत डकया जा रिा िै. - संपादक पंि ं ाष जोशी

य

ह कागद मै्उन्ही्अनुपम वमश्​्और उनके काम पर काले कर रहा हू,ं वरनका व्िक्​्आपने कई बार देखा और पढ्ा होगा. यह रीने का वह रवैया है वरसे पहले समझे वबना अनुपम वमश्​्के काम और उसे करने के तरीके को समझना मुबक् कल है. रो बहुत सीधा-सपाट और समव्पता वदखता है वह वैसा ही होता तो व्िन्दगी रेवगस्​्ान की सीधी और समतल सड्क की तरह उबाऊ होती. आप, हम सब एक पहलू के लोग होते और दुवनया लम्बाई चौड्ाई और गहराई के तीन पहलुओ्वाली बहुरप् ी और अनंत संभावनाओ् से भरी नही्होती. ववराट पुरष् की कृपा है वक रीवन-संसार अनंत और अगम्य है. वकतना अच्छा है वक अपने हाथो्की पकड, आंखो्की पहुच ं और मन की समझ से परे इतना कुछ है वक अपनी पकड, पहुच ं और समझ मे्कभी आ ही नही्सकता. ऐसा है इसीवलए तो राना, करना और खोरना है. ऐसा न हो तो रीने और संसार मे्रह क्या रायेगा? मन मे्कही्बैठा था वक अनुपम से मुठभेड सन इकहत्र् मे्हुई. लेवकन यह गलत है. गांधी शताल्दी सवमवत

30 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

अनुपम भमश्:् पानी के अतीत का आभवष्कार

की प्क ् ाशन सलाहकार सवमवत का काम संभालने के बाद देवदे् ्भाई यानी राष्​्ीय सवमवत के संगठन मंत्ी ने कहा वक भवानी भाई ने गांधी री पर बहुतसी कववताये्वलखी है.् वे उनसे लो और प्क ् ावशत करो. उन्हे्लेने के रुगाड मे्ही भवानी प्स ् ाद वमश्​्के घर राना हुआ और वही्उनके तीसरे बेटे यानी माननीय अनुपम प्स् ाद वमश्,् अनुपम वमश्​्या पमपम से वमलना हुआ. भवानी भाई की ये कववताये्‘गांधी पंचशती' के नाम छपी्, इसमे्पांच सौ से ज्यादा कववताये्है.् सेवक की ववनमु​ु भूवमका गांधी शताल्दी समाप्त होते-होते एक वदन देवदे् ्भाई ने कहा वक अनुपम आने वाले है,् उनका हमे्गांधी माग्ाऔर दूसरे प्क ् ाशनो्मे्उपभोग करना है. विर राधाकृषण ् री ने कहा वक वकसी को भेर रहा हू,ं ररा देख लेना. अनुपम को देखा हुआ था. लेवकन वकसी के भी भेरे हुए को अपन दूर ही रखते है.् रब तक कोई भेरा हुआ आया हुआ नही्हो राता तब तक वह अपनी आंखो मे् नही्चढ्ता. बहरहाल, अनुपम ने काम शुर्वकया - सेवक की ववनम्​्भूवमका मे.् सव्​्ोदय मे्सेवको्और उनकी ववनम्​्भूवमकाओ्का तब बडा महत्व होता था. सीखी या ओढ्ी हुई ववनम्त् ा और सेवकाई को मै्व्यगं य् से ही वव्णता कर सकता हू.ं ववनम्​्और सेवक होते हुए भी अनुपम सेवा को काम की तरह कर सकता था. सेवा का पुणय् की तरह ही बड्ा पसारा होता है. ववनम्​्सेवक का अहम कई बार तानाशाह के अहम से भी बड्ा होता है. तानाशाह तो विर भी झुकता है और समझौता करता है, क्यो्वक वह रानता है वक ज्यादती कर रहा है. लेवकन ववनम्​्सेवक को लगता है वक वह गलत कुछ कर ही नही्सकता, क्यो्वक अपने वलए तो वह कुछ करता ही नही्है ना. अनुपम मे्अपने को सेवा का यह आत्म औवचत्य नही्वदखा हालांवक


काम वह दूसरो्से ज्यादा ही करता था. लादने वाले को ना नही्करता था वचपको आंदोलन को बीस से ज्यादा साल हो गये है,् लेवकन अनुपम का और यह वदखाये वबना वक शहीद कर वदया गया है - लदान उठाये रहता. तब उत्र् ाखंड से संबधं अब भी उतना ही आत्मीय है. उसकी उम्​् रही होगी 21 या 22 की. संसक ् तृ मे् एम ए वकया था और वरसे आर हम पय्ावा रण के नाम से रानते है,् उसके संरक्ण ् का पहला समारवादी युवरन सभा का सव्​्कय सदस्य रह चुका था. संसक ् तृ पढ्ने वाले आंदोलन वचपको ही था और वह वकसी पव्​्शमी प्र्े णा से शुर्नही्हुआ. का पो्गापन और युवरन सभा वाले की बडबोली क्​्ाब्नतकावरता-माननीय पेड्ो्को कटने से रोकने के वलए शुर्हुए इस आंदोलन और इससे आयी अनुपम वमश्​्मे्नही्थी. पय्ावा रणीय चेतना पर कोई वलख सकता है तो अनुपम वमश्.् लेवकन कोई भवानी प्स ् ाद वमश्​्के पुत्होने और चमचमाती दुवनया छोड कर गांधी कहे वक वही वलखने के अवधकारी है्तो अनुपम वमश्​्हाथ रोड लेग् .े अपना संसथ् ा करने का एहसान भी वह दूसरो्पर नही्करता था. ऐसे रहता, रैसे क्या है री, अपन रानते ही क्या है!् रहने की क्म् ा मांग रहा हो. आपको लराने या आत्मदया मे्नही्, सहर ही. 'एकुसपुस ुे ' के वदन रैसे उसका होना आप पर अवतक्म् ण हो और इसवलए चाहता हो वक आप लेवकन इसके पहले वक अनुपम वमश्​्पूरी तरह पय्ावा रण के काम मे् उसे माि कर दे.् रैसे वकसी पर उसका कोई अवधकार ही न हो और उसे रो पड्त,े वबहार आंदोलन वछड गया. हम लोग गांधी शांवत प्व्तष्​्ान से वमला है या वमल रहा है वह देने वाले की कृपा हो. 'एवरीमैनस ् ' होते हुए 'एक्सप्स ्े ' पहुच ं गये और 'प्र ् ानीवत' वनकालने लगे. मई 1972 मे् छतरपुर मे् डाकुओ् के समप्ण ा के बाद लौटने के वलए तब भी वदल्ली के एक्सप्स ्े दफ्तर मे्कोई ववनम्​्सेवक पत्क ् ार था तो अनुपम चंबल घाटी शांवत वमशन ने हमे्एक रीप दे दी. हम चले तो अनुपम चवकत. वमश्.् सबकी कॉपी ठीक करना, प्ि ्ू पढ्ना, पेर बनवाना, तंबाकू के पान के उसे भरोसा ही न हो वक अपने को एक पूरी रीप वमल सकती है. सच, इस रवरये प्स ्े को प्स ् न्न रखना और झोला लटका कर पैदल दफ्तर आना और रीप मे्अपन ही है्और अपने कहने पर ही यह चलेगी. ऐसे ववनम्​्सेवक का रब भी काम पूरा हो पैदल ही घर राना. आप क्या कर लेग् ?े समझ न आये तो अचार भी डाल कर नही्रख सकते. प्​्ोिेशनल रन्वा लस्टो् के बीच अनुपम वमश्​् ववनम्​् सेवक वमशनरी अनुपम वमश्​्से बरतना आसान नही्था. अब भी नही्है. पत्क ् ार रहे. इमररेस ् ी लगी, ‘प्र ् ानीवत’ और विर 'आसपास' बंद हुआ तो बहरहाल, गांधी शताल्दी आयी-गयी हो गयी और गांधी संसथ ् ाओ् ने अनुपम को इस मुबक् कल भूवमका से मुबक् त वमली. 'रनसत्​्ा' वनकला तो उपसंहार की तरह गांधी री का काम विर शुर्वकया. ववनोबा क्त्े ्सन्यास रामनाथ री गोयनका की बहुत इच्छा थी वक अनुपम उसमे्आ राये.् अपन लेकर पवार के परमधाम मे्बैठे और बी से बाबा और बी से बोगस कह कर ने भी उसे समझाने-पटाने की बहुत कोवशश की, लेवकन अनुपम बंदा लौट ग्​्ाम स्वरार कायम करने की वनरी वरम्मदे ारी से मुकत् हो गये. कर पत्क ् ार नही्हुआ. सबको लगता था वक अब यह काम रेपी का है. और रेपी को लगने प्​्ोिेशनल पत्क ् ार हो सकने की तबीयत अनुपम वमश्​्की नही्है. क्यो् लगा वक ग्​्ाम स्वरार सव्षे् ाम् अववरोधेन नही् आयेगा. संघष्ा के वबना नही्है? यह आगे समझ मे्आयेगा. इमररेस ् ी मे्‘एक्सप्स ्े ’ से भी बुरा हाल आंदोलन मे्गवत और शब्कत नही्आयेगी और अन्याय से तो लडना ही होगा. गांधी शांवत प्व्तष्​्ान का था. बाबूलाल शम्ा​ा की सेवाये्अब भी वही्थी, वे बाबा के रास्​्ेसे रेपी कुछ करना चाहते थे, लेवकन लक्य् वहां चले गये. मै् भी वकसी तरह वही् लौटा. लेवकन अनुपम भमश्​् की दो चभ्चशत पुस्के् उनका भी ग्​्ाम स्वरार ही था. मुसहरी मे् रेपी ने अनुपम वमश्​्फ्​्ीलांसर हो गये. नक्सलवादी वहंसा का सामना करने का एलान वकया. विर आपने बहुतरे े फ्​्ीलांसर देखे हो्ग.े अनुपम उनकी बांगल ् ादेश के संघष्ाऔर चंबल के डाकुओ्के समप्ण ा मे् छवव मे्कभी विट नही्हो सकता. लेवकन इमररेस ् ी के लग गये. उन वदनो्मे्रो भी करने को वमल राये और अच्छा और पुणय ु कमुम कािी था. अनुपम और उदयन शम्ा​ा इधर-उधर वलख कर अनुपम ने तालाब को भारतीय समार मे् रख कर थोड्ा-बहुत कमा लेत.े अनुपम िोटोग्​्ािी भी कर सकता देखा है. समझा है. अद्त् रानकारी इकट्​्ी की है और उसे है. लेवकन िोटो- पत्क ् ावरता से कोई आमदनी नही्होती. मोवतयो्की तरह ही वपरोया है. कोई भारतीय ही तालाब इमररेस ् ी उठी और चुनाव मे्रनता पाट्​्ी की हवा के बारे मे्ऐसी वकताब वलख सकता था. लेवकन भारतीय बहने लगी तो कई लोग कहते वक अब हम लोगो्के वारेइंरीवनयर नही्, पय्ावा रणववद नही्, शोधक ववद्​्ान नही्, न्यारे हो रायेग् .े वकसी को यह भी लगता वक प्भ् ाष रोशी भारत के समार और तालाब से उसके संबधं को सम्मान तो चुनाव लड के लोकसभा पहुच ं रायेगा. रेपी से से समझने वाला ववनम्​्भारतीय. ऐसी सामग्​्ी वहंदी मे्ही वनकटता को भला कौन नही् भुनायेगा. लेवकन अपन नही् अंगर ्े ी और वकसी भी भारतीय भाषा मे् आप को 'एक्सप्स ्े ' मे्चुनाव सेल चलाने मे्लगे और अनुपम वहां तालाब पर नही्वमलेगी. भी मदद करने लगा. रनता पाट्​्ी रीती तो गांधी शांवत तालाब पानी का इंतराम करने का पुणय् कम्ाहै रो प्व्तष्​्ान से सरकारी दमन का साया हटा. अनुपम आवखर इस देश के सभी लोगो्ने वकया है. सव्​्ोदयी गवतवववधयो् प्व्तष्​्ान मे्काम करने लगा. अपना एक पांव 'एक्सप्स ्े ' का वदल्ली मे् केद् ् 'गांधी शांवत प्व्तष्​्ान' हो गया और मे्और दूसरा शांवत प्व्तष्​्ान मे.् अनुपम और मै् आंदोलन के बारे मे् वलखने, पव्​्तकाये् देश का काम ववदेशी रुपयोु से? वनकालने और सव्​्ोदय प्स ्े सव्वस ा चलाने मे्लग गये. उन्ही्वदनो्नैरोबी से राष्स ् घं के पय्ावा रण काय्क ा म् उसी वसलवसले मे् अनुपम का उत्र् ाखंड आना-राना का पत्​् वमला वक क्या गांधी शांवत प्व्तष्​्ान भारत की होता. भवानी बाबू गांधी वनवध मे् ही रहने आ गये थे, स्वयंसवे ी संसथ् ाओ्का एक सव्​्ेकरके दे सकता है? हम इसवलए कामकार वदन-रात हो सकता था. इतने डॉलर सव्​्ेके वलए दे सकेग् .े यह भी ख्याल रवखये विर चमोली मे् चंडी प्स ् ाद भट्​् और गौरा देवी ने वक क्या ये संसथ् ाये्पय्ावा रण का काम करने मे्र्वच ले 'वचपको' कर वदया. वचपको आंदोलन पर पहली रपट सकती है.् राधाकृषण ् री और मुझे लगा वक यह सव्​्ेतो अनुपम ही सबसे अच्छा कर सकता है. अनुपम वमश्​्ने ही वलखी. चूवं क सव्​्ोदयी पव्​्तकाओ्की काम उसे वदया गया और वनव्​्शत समय मे्न वसि्क पहुच ं सीवमत थी इसवलए वह रपट हमने रघुवीर सहाय पूरा हुआ बब्लक वरतना खच्ावमला था उसका एक वतहाई को दी और 'वदनमान' मे्उन्हो्ने उसे अच्छी तरह छापा. शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 31


अरुपम-स्मृबि भी खच्ानही्हुआ. उस सव्​्ेसे अनुपम का देश की स्वयंसवे ी संसथ् ाओ्और डॉक्टर खलीलुलल ् ाह को वदखाया. उन्हो्ने गोली दी और कहा वक पेस मेकर पय्ावा रण के काम मे्लगी ववदेशी संसथ् ाओ्से रो सम्पक्कहुआ वह न वसि्क लगवा लो. मन्ना यानी भवानी बाबू को लगा ही था. कायम है बब्लक रीवंत चल रहा है. लेवकन अनुपम ने न गोली ली न पेस मेकर लगवाना मंररू वकया. लेवकन एक बार राधाकृषण ् री ने अनुपम से कहा वक िलां-िलां ववदेशी वनमोवनया कभी भी हो राये. मुझे और बनवारी (रो वक अनुपम के कॉलेर संसथ् ा से इतना पैसा इस प्​्ोरेकट् के वलए वमला है और हमारी इच्छा है वक के दोस्​्है)् को लगे वक अनुपम मे्शहीद होने की इच्छा है. लेवकन अनुपम इसमे्से तुम पांच-छ: हि्ार र्पया महीना ले लो. तब अनुपम के वमत्​्इससे अपनी बीमारी से पय्ावा रण काम करते हुए और वकताबे वनकालते हुए लड ज्यादा वेतन सहर ही पाते थे और प्​्ोरेकट् करने वाले को तो वे पैसे वमलने रहा है. ही थे. लेवकन अनुपम घबराया-सा मेरे पास आया. वह प्व्तष्​्ान की सात सौ विटु​ुी विखकर वकताब बेिी र्पट्​्ी के अलावा कही्से भी एक पैसा लेने को तैयार नही्था. ववदेशी पैसा 'देश का पय्ावा रण' उसने कोई नौ-दस साल पहले वनकाली. संपावदत है, मै्रानता हूं इिरात मे्वमलता है. इसे लेने वालो्का पतन भी मैन् े देखा है. लेवकन क्या तो रानकारी, क्या भाषा, क्या सज्​्ा और क्या सिाई! वरस है. अपने देश का काम हम दूसरो्के पैसे से क्यो्करे?् वदलीप वचंचालकर ने ‘रनसत्​्ा’ का मास्टहेड बनाया, अखबार वडराइन अगर आप अनुपम को रानते हो्तो उसका संकोच एकदम समझ मे् वकया उसी वदलीप ने इस वकताब का ले आऊट, स्कवे चंग और सज्​्ा की है. आ रायेगा. नही्तो उसके मुहं पर तारीि और पीठ पीछे बुद्कहने वालो्मे् वहंदी मे्ही नही्, इस देश मे्अंगर ्े ी मे्भी ऐसी वकताब वनकली हो तो बताना! आप भी शावमल हो सकते है.् वपछले तीन साल से होशंगाबाद मे्नम्दा ा के लेवकन अनुपम ने वकताब वनकालने मे्भी शांवत प्व्तष्​्ान का पैसा नही् वकनारे उसके वलए पय्ावा रण की कोई संसथ ् ा खड्ी करने के रुगाड मे् हू.ं लगाया. िोल्डर छपाया. संसथ् ाओ्और पय्ावा रण मे्र्वच रखने वाले लोगो् इसवलए भी वक देश के पय्ावा रण के वलए नम्दा ा योरना आर-पार की सावबत से अव्​्गम कीमत मंगवायी. उसी से कागि्खरीदा, छपाई करवायी. विर खुद हो सकती है. ही वचट्​्ी वलख-वलख कर वकताब बेची. दो हरार छपाई थी, आठ हरार लागत लेवकन अनुपम को सरकारी रमीन और पैसा नही्चावहये. ववदेशी पैसे लगी. दो लाख कमाकर अनुपम ने प्व्तष्​्ान मे्रमा कराया. को वह हाथ नही् लगायेगा, और तो और, गांधी शांवत प्व्तष्​्ान छोड्कर चार साल बाद ‘हमारा पय्ावा रण’ वनकाली. ‘देश के पय्ावा रण’ से भी अपना बनाया गांधी शांवत केद् ्चला रहे, राधाकृषण ् री से भी वह संसथ् ा खड्ी बेहतर इसका भी िोल्डर छपवाकर अव्​्गम कीमत इकट्​्ी की. इस बार खच्ा करने के वलए एकमुकत् पैसा नही्लेगा. कुछ उद्​्ोगपवतयो्से पैसा ला सकता डेढ्लाख के आस-पास हुआ. पुसक ् छपी 6 हरार. विर वचव्​्टयां वलखकर हू,ं लेवकन मुझे मालूम है वक वे पैसा क्यो्और कैसे देते है.् और वह लाना बेची. शांवत प्व्तष्​्ान मे्रमा कराये (कमा कर) नौ लाख र्पये. आर ये अनुपम के साथ छल करना होगा. दोनो्वकताबे्दुलभा् है्और मरा यह है वक पय्ावा रण मंत्ालय ने इन पुसक ् ो् पॉवर ववदाउट परपजु को नही्खरीदा. पय्ावा रण का काम आरकल ववदेश यात्​्ा का सबसे सुलभ माग्ा है. वहंदी के वकसी भी राज्य ने वकताबो्की सरकारी खरीद मे्इसे नही्खरीदा. अनुपम एक-आध बार तो नैरोबी गया, क्यो्वक पय्ावा रण संपक्ककेद् ्के बोड्ा वकसी प्क ् ाशक ने ववतरण और वबक्​्ी मे्कोई मदद नही्की. वपछले दस साल मे्वनदेशक बना वदया गया था. कुछ और यात्​्ाये्भी वैसे के देश के पय्ावा रण पर वहंदी मे्ऐसी वकताबे्नही्वनकली्. ही की्रैसे आप-हम मेरठ, अलवर या चंडीगढ्हो आते अनुपम ने न वसि्कवलखी और छापी, बेची भी और कोई है.् झोला टांगा और हो आये. मै् नही् रानता वक बाहर 10 लाख र्पये कमाकर संसथ् ा को वदया. बैठक मे् अंगर ्े ी कैसे बोलता होगा? बोलना ही नही् और अनुपम वमश्​् ने ‘आर भी खरे है् तालाब’ चाहता. मुहं टेढ्ा करके अमेवरकी स्लगै् मे्अंगर ्े ी बोलना वनकाली है यह संपावदत नही्है अनुपम ने खुद वलखी है. तो अनुपम के वलए पाप-कम्ाहोगा. धीरे-धीरे उसने बहुत नाम कही् अंदर है छोटा सा, लेवकन वहंदी के चोटी के रर्री ववदेश यात्​्ाये्भी बंद कर दी्. ववद्​्ान ऐसी सीधी, सरल, आत्मीय और हरवाक्य मे्एक वपछले साल वरयो मे्हुए ववश्​्सम्मल े न का काय्क ा म् बात कहने वाली वहंदी तो ररा वलखकर बताये!् रानकारी तय करने के वलए फ्​्ास ं सरकार की मदद से पय्ावा रण की तो बात कर ही नही् रहा हू.ं अनुपम ने तालाब को संपक्ककेद् ्ने पेवरस मे्सम्मल े न वकया था. अनुपम को ही भारतीय समार मे् रख कर देखा है. समझा है. अद्त् लोग भेरते थे. उसने भेरे पर खुद ऐन मौके पर ना कर रानकारी इकट्​्ी की है और उसे मोवतयो् की तरह की गया. वरयो भी नही्गया. वपरोया है. भारत सरकार या राज्य सरकारो्को पय्ावा रण पर कोई भारतीय ही तालाब के बारे मे्ऐसी वकताब वलख सलाह वह नही्देता. कमेवटयो्और प्व्तवनवधमंडलो्मे् सकता था. लेवकन भारतीय इंरीवनयर नही्, पय्ावा रणववद शावमल नही्होता. गांधी शांवत प्व्तष्​्ान मे्चुपचाप वसर नही्, शोधक ववद्​्ान नही्, भारत के समार और तालाब से गड्ाये मनोयोग से काम करता रहता है. उसकी पुरानी उसके संबधं को सम्मान से समझने वाला ववनम्​्भारतीय. कुस्ी के पीछे एक ब्सटकर वचपका है - पॉवर ववदाउट ऐसी सामग्​्ी वहंदी मे्ही नही्अंगर ्े ी और वकसी भी भारतीय परपर - सत्​्ा वबना प्य् ोरन के. अनुपम के पास प्य् ोरन भाषा मे्आप को तलाब पर नही्वमलेगी. तालाब पानी का ही नही्सत्​्ा का स्पश्ाभी नही्है. आर तक वैसे ही तंगी इंतराम करने का पुणय् कम्ाहै रो इस देश के सभी लोगो् मे्यात्​्ा करता है रैसे हम रेपी आंदोलन के समय झोला ने वकया है. उनको उनके ज्​्ान को और उनके समप्ण ा को लटकाये वकया करते थे. और ज्यादातर यात्​्ाये् बीहड, बता सकने वाली एक यही वकताब है. सुनसान, रेवगस्​्ान या रंगलो्से. आप चाहे्तो कोलकाता का राष्​्ीय सभागार देख ले.् अनुपम को लडकपन मे्वगलटी की टीबी हुई थी. यह वकताब भी दूसरी वकताबो्की तरह ही वनकली है. ‘वृक् इस बीच उसके वदल ने भवानी बाबू वाला रास्​्ा पकड वमत्​्पुरस्कार’ वरस साल चला अनुपम को वदया गया था. पय्ावा रण का अनुपम, अनुपम वमश्​्है. उसके रैसे व्यब्कत वलया था. नारी कभी पचास हो राये और कभी एक सौ की पुणय् ाई पर हमारे रैसे लोग री रहे है.् यह उसका और पचास. वदल का चलना इतना अवनयवमत हो गया वक सब n परेशान, कौन राने कब क्या हो राये! लड-झगड कर अनुपम की कुछ अनूभदत कृभतयां हमारा- दोनो्का सौभाग्य है. 32 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017


अंवतम आिेख

बीहड़ पर चुप्पी क्यो् अनुपम डमश्​्का अंितम आलेख जो उन्िो्ने 26 अगस्​्2016 को डलखा रा.

म

ध्यप्​्देश, उत्​्र प्​्देश और रारस्थान का कुछ भाग सचमुच सवदयो् से उपराऊ वमट्​्ी के क्​्रण का वशकार बनता रा रहा है. देश के अन्य वहस्सो् मे् भी उपराऊ वमट्​्ी के बह राने से यह समस्या सामने आयी है लेवकन इसका चंबल के बीहडो्रैसा भयानक र्प और कही्नही्वमलता. दुखद बात यह है वक इन तीनो् राज्यो् की सरकारे्ववकास के नये नारो्मे्इस समस्या को वबलकुल भुला चुकी है्. हमे् इस बात का पता भी नही् चल पा रहा वक हमारे पैर के नीचे से रमीन वकस तेरी से विसल रही है. वपछले करीब 30 वष्ासे बीहड के बारे मे् भयानक चुप्पी छाई है. शायद अंवतम बार ‘से्टर िॉर साइंस एंड एन्वाय्ानमे्ट’ और ‘गांधी शांवत प्​्वतष्​्ान’ से छपी पुस्क ‘हमारा पय्ा​ावरण’ मे् इस समस्या के बारे मे् कुछ रानकारी दी गयी थी. इसके बाद से ठीक कहा नही् रा सकता वक इस ववराट भौगोवलक, सामावरक समस्या की तरि वकसी भी संस्था, वशक्​्ण संस्थान, भूवैज्ावनको् आवद का ध्यान गया हो. बीहड से रुडे तीनो् राज्यो् के बीच आर आधुवनक अध्ययन संस्थाओ्, ववश्​्ववद्​्ालयो् और सामावरक संस्थाओ् की अच्छी उपब्सथवत है. कोई कुशल संयोरक यवद वहम्मत के साथ आगे आता है तो इन सब संस्थाओ् की सामुवहक शब्कत पहले समस्या को समझने मे् और विर उसके ववस्​्ार को रोकने मे्रुटायी रा सकती है. हल तो अभी दूर की बात है. कुछ हरार साल का इवतहास है बीहडो् के बनने का और उन्हे् वकसी तरह सुधारने का काम भी कुछ सैकडो्बरस से कम नही्लेगा, लेवकन कही्तो वकसी को शुर्आत करनी पडेगी.

आरादी से पहले ग्वावलयर वरयासत ने बीहड का अध्ययन करने के वलए एक आयोग बनाया था. आयोग ने बीहड रोकने के वलए वन संवध्ान और भू संरक्​्ण की अनेक वसिावरशे् की थी्. पुराने बंदोबस्​्बताते है्वक सन 1912 और सन 1940 के बीच मात्​् 28 साल मे् बीहड का इलाका दुगना हो गया था और मुरैना तहसील का लगभग 20 प्​्वतशत इसकी चपेट मे् था. इसी तरह वभन्न क्​्ेत् के बंदोबस्​् के आंकडे बताते है्वक सन 1900 और 1915 के बीच लगभग 50 प्​्वतशत बीहड बढा था. इस आयोग की वसिावरशो् के आधार पर मुरैना और वभंड मे् पानी के कारण रमीन के कटाव को रोकने के वलए लगभग 1000 बांध बनाये गये और कोई 4000 एकड बीहड सुधारा गया. इसी दौरान एक स्वतंत् बीहड ववभाग भी बनाया गया लेवकन पैसे और कुशल नेतृत्व के अभाव मे् यह काम आगे नही् बढ पाया. सन 1945 मे् एक अमेवरकी ववशेषज्​् को भी बुलाये राने का उल्लेख वमलता है. उनके सुझाव मे्खेतो्की मेडबंदी पर बहुत रोर वदया गया था. ग्वावलयर वरयासत का मध्य भारत मे् ववलय होने के बाद विर एक ववशेषज्​् दल बनाया गया था. शायद इसी की वसिावरशो् के बाद मध्य भारत सरकार ने सन 1954 मे् बीहडो् के सव्​्ेक्ण और उनके सुधार की एक बडी योरना मंरूर की. सुझावो्का अंबार लग गया, लेवकन काम की गवत रे्गने से ज्यादा नही् हो पायी. आने वाले 25 साल मे् लगभग 18 बडी पवरयोरनाओ्ने वमलकर कोई 3,100 हेक्टेयर को सुधारा रो उस अववध मे् नये बने बीहडो् के मुकाबले नगण्य ही था. सन 71 मे्राज्य सरकार की योरनाओ्के

बुंदेलखंड के बीहड्: अनुपम भमश्​् का एक सरोकार अलावा के्द् सरकार ने भी एक बडी योरना बनायी. लेवकन रानकर अचरर होगा वक यह योरना भू संरक्​्ण ववभाग या कृवष मंत्ालय की नही् थी, इसे तो गृह मंत्ालय ने आगे बढाया था. गृह मंत्ालय की नरर मे् बीहड पय्ा​ावरण की नही्डाकुओ्की समस्या है और इसमे्तीनो् राज्यो् की पुवलस को धता बताकर यहां वछपे अनेक डाकुओ् के दल लगभग समानांतर सरकार चला रहे थे. संभवतः यह 25 वष्​्ीय योरना थी और इस पर कोई 1200 करोड र्पए खच्ाहोने वाले थे, लेवकन यह रानकर एक बार विर अचरर हो सकता है वक यह योरना लागू ही नही् हो पायी. क्यो्? सन 1972 मे् श्​्ी रयप्​्काश नारायण के संवेदनशील हस्​्क्ेप और कुशल नेतृत्व के कारण बीहड के करीब पांच सौ डाकुओ् ने रौरा नामक गांव मे् गांधीरी के एक बडे वचत्​् के नीचे अपने हवथयार रखकर ऐवतहावसक आत्मसमप्ाण वकया था. गृह मंत्ालय ने सोचा होगा वक डाकुओ् से मुब्कत वमली अब बीहड को सुधारने की क्या रर्रत. कोई 10 साल बाद इस इलाके मे् हवाई रहारो् से बीर वछडक कर रंगल उगाने की एक हवाई योरना भी सामने आयी थी. इस तरह हर साल कोई 12000 हेक्टेयर सुधारने की बात थी. बीहडो्के ऊपर छोटे रहार रर्र उडे लेवकन भूवम कटाव को रोकने के वलए रंगल पनपे या नही् इसकी कोई पुव्ि नही् हो पायी. बाद के दौर मे्ववश्​्बै्क ने भी भारी मात्​्ा मे्अनेक भीमकाय मशीनो्को बीहड मे्उतारा लेवकन वे वहां से बाहर भी नही् वनकल पायी्. लोग बताते है्वक अभी भी कई रगह रंग लगी बडी.बडी मशीने् बीहड के पीले रंग मे् n वमलरुल गयी है्. शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 33


साबहत् मास्यट/कहारी हेड

धुरी उपनंयास अंश मिािीर रिांलंटा

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र पुषप् ा के एक सवाल ने सदा ही संयत रहने वाली वनम्ाला को एकाएक ववचवलत कर वदया था. क्यो्न ववचवलत होती, सवाल ही ऐसा था रैसे वकसी ने खौलता हुआ पानी उसके शरीर पर उंड्ेल वदया हो. ‘बताओ न.’ पुष्पा की वरद अब भी रारी थी और उसके पास वसवा चुप्पी ओढ्ने के दूसरा और कोई चारा नही् था, उत्​्र तो दूर की बात थी. पुष्पा उसके चाचा के छोटे बेटे यानी उसके छोटे भाई की पत्नी है. उसका ल्याह हुए अभी साल भर ही हुआ है और इस बीच उसने अपने गुण और आचरण से पूरे घर का वदल रीत वलया है, पर सास उसे बहुत ज्यादा नही्सुहाती. ऐसा नही् वक सास-बहू के बीच कटुता है, लेवकन सास तो सा ही ठहरी. उसमे्मां खोरने मे्देर तो होती ही है. सास भी एक मां की तरह उस स्नेह बरसाती है. उसे दुलारती, पुचकारती और संवारती है. चाचा के घर मेले-त्योहार रैसे मौके पर पुष्पा से उसकी वनकटता बढ्ी है. पहले उसके पवत के ताऊ की बेटी यानी उसकी दीदी होने के कारण उसे वरक्ते मे् बड्े का सम्मान पुष्पा देती थी, लेवकन विर वह उसके गुण से इस कदर प्​्भाववत हुई वक वह ससुराल मे् उसकी पहली पसंद हो गयी. रब भी उसका चाचा के घर राना होता पुष्पा चहक उठती और विर ‘रेठऊ’ के इद्ा-वगद्ा ही चहकती-महकती रहती. कभीकभार उसकी यह अदा उसकी सास और रेठानी को नागवर गुररती अैर घुमा विराकर वे इस पर छी्टाकशी भी करती्वक घर वरक्तदे ारी मे् वनम्ाला के वसवा और भी बहुत सारे लोग है रैसे वक रेठ खुशहाल रो बै्क कीनौकरी मे्है्. महेश रो ठेकेदारी करता है. उसका पवत उसके वववाह से सालभर पहले ही िौर मे् गया है. बड्ी बेटी देवकी उसके बाद सुलक्​्ण विर दव्​्कण यावन उसके सास ससुर के तीन बेटे हुए और तीन बेवटयां. घर के एक कमरे मे् वह अपने पलंग पर वनम्ाला के साथ बैठी थी. ‘कठबाड्’ कर बनाये 34 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

गये इस छोटे से कमरे मे् उसी के दहेर का सामान रहा है– पलंग, ढीची, आलमारी, सोिा, ड्​्ेवसंग टेबुल, बक्सा. यही उसका शयन, आराम व श्ग्ृं ार कक्​्सभी कुछ है यावन यही वह रगह है रहां काम व रसोई के बाद उसका अवधकांश समय गुररता है. वैसे सास के रहते उसे न रसोई की वचंता रहती है और न ही घर खेती की. वे ही सारी र्प रेखा बनाने के बाद बहुओ्के बीच काम का बंटवारा करती है्और लगभग कवठन काम अपने पास रख लेती है्. बरांडे के एक ओर बने इस कमरे से बाहर का नरारा देखा रा सकता है. सामनेका खुला आकाश, उससे सटी छोटी-बड्ी पहाव्डयां और पहाव्डयो्के वनचले समतल वहस्से मे्घने चीड् का बांर, बुरांश के छुटपुट पेड्. रंगल के नीचे

की ओर उतरते ही सीढ्ीनुमा खेत वदखते है रो अपने मौसम की िसलो् व घास से वघरे भरे रहते है्. दूसरी ओर ‘क्यारी’ रमीन है वरसमे् धान की रोपाई कर ‘चरधान’ की खासी उपर होती है. दूसरी ऋतु मे् गेहूं की लेवकन पुष्पा के कमरे से यह दृक्य नही्वदखता. ‘कल रात तुम्हारे भैया और हम सब बहुत देर तक बैठे गपशप करते रहे’. वनम्ाला ने उसका ध्यान बांटने की गरर से बताया था. ‘हां, तुम बता तो रही थी्, विर तो रात भर चाय का दौर चला होगा?’ ‘हां’ ‘हम भी बड्ी देर तक बैठे रहे. देवकी रेठऊ आयी थी साथ मे् भाई री भी थे. सवेरे मुंह अंधेरे चली गयी’ पुष्पा बताने लगी.


‘क्यो्?’ वनम्ाला की उत्सुकता रागी. ‘पता नही् पर कह रही थी वक ‘बूबा’ को देखने का मन था इसवलए चली आयी. वैसे इन वदनो् ससुर री की तबीयत भी कुछ ठीक नही् रहती. वक्त-वेवक्त खांसी के दौर पड्ते रहते है् और विर खांसते-खांसते ऐसे बेदम हो राते है वक अब मरे वक तब मरे’ पुष्पा कीघर कीरारी खुशी से रुड्ी वचंता उरागर हुई थी. ‘बुढ्ापे मे् यह सब तो होता ही है’ वनम्ाला ने उसे रैसे ढाढस देना चाहा या विर उम्​् का अनुभव वक रीवन मे्तो वह सब लारमी है. इसे देख, स्वीकार कर ही आगे बढ्ा रा सकता है. ‘हां रेठऊ बताओ न.’ पुष्पा एक बार विर पूछने लगी तब वनम्ाला चौ्की. अरीब लड्की है यह भी. तालाब मे्रल की लहरे्शांत नही्होती तब एक दूसरा ढेला िे्क देती है. ‘क्या बताऊ?’ बनावटी झुझ ं लाहट के साथ बोल पड्ी थी वनम्ाला. ‘वही रो मै्पूछ रही हू’ं उसके पूछने मे्अब भी वकसीवरद्​्ी व हठी लड्की का सा भाव बना हुआ था. वबना रवाब वमले उसका शांत होना संभव न था पर रवाब वह साधारण बात न थी वह तो... वह तो पूरे रीवन का ववस्​्ार है उसकी चाची का. उसका चवरत्​्, चाह, इच्छा-अवनच्छा व ि्​्ी सुलभ आकांक्ा की एक बंद वकताब है वरसे खोलना इतना आसान नही् वरतना वक पुष्पा का सवाल पूछना वक... वह अपने आप मे् ही बुरी तरह हुलस पड्ी थी. वदल पर असहय बोझ था. एक ओर पुष्पा का सवाल दूसरी ओर चाची... चाचा... उनका हरा भरा संसार. वही संसार वरसका एक वहस्सा अब पुष्पा भी बन चुकी है पर पुष्पा... वह यह पूछकर क्या करेगी? उसके मन मे् यह बात कैसे आयी? अपनी ही सास के रीवन के अतीत मे्राने का उसका क्या प्​्योरन? क्या हावसल होगा उसे यह रानकर वक... एक बार पूरी तरह आंखे्मूंद गयी थी वनम्ाला की ओर उसने लेटने की चेि्ा की थी तब पुष्पा ने उसके वसरहाने तवकया रख वदया था. उसके तवकए पर अपना वसर वटका वदया था लेवकन मन... वह तो... वहां उथलपुथल मची हुई थी. उसका वववाह हुए करीब बीस बहस हो गये है्और करीब बीस बरस वह

अपने मायके मे्रही, पली पढ्ी. बोई.’ कहती हुई वह उठी और रसोई की ओर अब तीन बच्​्ो्की मां वनम्ाला अपने मे्भी बढ्ी. टोकरी मे् रखे आलू–बैगन काटकर कािी पवरवत्ान महसूस करने लगी है. पहले उसकी सल्री चढ्ाई और विर आटा गूंदने लगी. कीतरह शरीर साथ नही् देता. हर चौथे पांचवे् कुछ देर बाद खाना तैयार था. उमेश आ वदन री वमचलाना, चक्​्र आना आम बात है. चुका था. आते ही उसने वकताबे्एक ओर िे्की नी्द कुछ वदन ठीक आती है तो कभी कई-कई और खुद रसोई की ओर बढ्ता हुआ बोला, ‘मां, वदनो् के वलए उससे रैसे वकनारा कर लेती है. कुछ है?’ वह समझती है भूखे पेट खाना मांग तब वह वकताबो् और टीवी का सहारा लेकर रहा है. समय को काटने का यत्न रारी रखती है लेवकन ‘आर तेरी पसंद का आलू-बैगन बना है’ यह भी तभी तक है रब शरीर स्वस्थ्य हो. वही मां ने कहा तब सुनकर उसके चेहरे पर खुशी साथ नही् तो सबकुछ गड्बड्ाने लगता है. चमकी. मुंह मे्पानी आने लगा. डॉक्टरी रांच मे्बताते है्वक ‘लो ल्लड प्​्ेशर’ ‘ला रल्दी दे मां’ उसके कहते ही सल्री है, कुछ खाओ-वपओ. कुछ खाती-पाती है तो रोटी उसके सामने थी. पेट गड्बड्ाने लगता है. अब करे भी तो क्या ‘भाई री?’ खाते हुए उसे ध्यान आया. करे. बच्​्े कभी उसका साथ दे देते है् तो कभी ‘अपनी चाची के घर खा रहा होगा. उसे उसकी हंसी उड्ाने लगते है.् ‘मम्मी यह भी कोई भूख लगी थी और तब तक मै्खाना नही्पका बात हुई, हर हफ्ते तुम्हे् सकी थी. अब पूछा,’ उसकी नजर उस पगडंडी की कोई न कोई बीमारी मां ने बात्सलय से पकड् लेती है और ओर गयी जो शहर को जाती है. उसके वसर पर हाथ हम...’ चेहरे पर मायुसी िेरते हुए कहा. इसी से उसकी पकत का आना वलए अवखल एक वदन ‘एकदम पेटू है’ जाना है . महीने मे ं एक-दो बार कॉलेर से आकर खाने उमेश कहता हुआ रोटी उनका घर आना-जाना रहता है. के बीच सल्री रखकर के वलए कुछ न वमलने पर झुंझला उठा था. खाने लगा. इसी बीच ‘तुझे भूख लगी होगी’ उसकी ब्सथवत रान अवखल भी आ गया था. वह भी रसोई मे् घुसा वनम्ाला तुरंत बोल पड्ी थी. ‘अभी परांठे सेक और उमेश को खाते देख मां से बोला, ‘मां मुझे देती हूं’ और वह वबस्​्र से उठने का प्​्यत्न भी दे.’ करने लगी थी. ‘पर तू तो चाची के यहां...’ ‘रहने दो मम्मी, मै्चाची के यहां खा लूंगा, ‘भात था एकदम ठंडा और सल्री भी तुमने दवा ले ली वक नही्?’ मां की दशा देख ‘चरकाखड्े’ की...’ वकसी सुलझे् बुरुग्ा की तरह अवखल उससे ‘वह तो तुझे अच्छी नही्लगती.’ कहते हुए बोला था. सुनकर से कुछ संतोष हुआ था वक मां ने उसके वलए रोटी-सल्री परोसी और िथ्​् बच्​्े भी मां-बाप की वबवशता को आसानी से वे दोनो्खाकर खेलने चले गये. समझ राते है्और उनके दुख दद्ाके साझीदार मन मारकर एक रोटी के ऊपर रखकर खा भी बनना चाहते है. आर सुबह से ही सका बदन ही वलया था उसने भी और विर बरांडे मे्बैठकर दुख रहा था. बच्​्ेसुबह घर से वनकले थे तो रात आसपास के दृक्य देखने लगी. वहां से उसकी की बची रोटी व सल्री खाकर गये थे. उसकी नरर उस पगडंडी की ओर गयी रो शहर को देवरानी सुनीता ने उसे एक कप चाय बनाकर राती है. इसी पगडंडी से उसकी पवत का आना वदया था विर ऐसी बेचैनी रही वक वह चाहते हुए राना है. वे इंटर कॉलेर मे्प्व् क्ता है और महीने भी वबस्​्र नही्छोड्सकी. अबउमेश भी आता मे्एक-दो बार उनका घर आना राना रहता है. ही होगा. भूख उस पर सवार होगी तो वह वकसी इस बीच वे घर की सारी व्यवस्था व सुख की नही्सुनता. मां उसकी आदत रानती है. ‘ए सुववधाओ्का भी पूरा रायरा ले लेते है और घर की’ एकतरह से सुचार्व्यवस्था हो राती है. ‘तुम कहां खो गयी?’ उसे वहलाते हुए सुपरवचत कहानीकार और नाटककार. मामू ल ी से बनावटी गुस्से के साथ पुष्पा बोली प्क ् ावशत कृवतयां: अवरोहण, सच के आरथी. गोरा रंग, सुतवा नाक, बड्ी आंखे्, बीच की पार, पगडंवडयो्के सहारे, आप घर या बाप कद काठी यही हुवलया है पुष्पा का. घर की घर, मौरसदार लड्ता है, उसके ना होने का बहुओ्पर उन्नीस नही्बीस पड्ती है पुष्पा. ‘हां दद्ाआवद. बच्​्ो्के वलए कहावनयां और तो बताओ न रेठऊ’ इस बार विर पुष्पा ने रोर नाटक भी वलखे है.् रंगकम्ामे्भी वदलचस्पी. देकर पूछा तब उसे पूरा यकीन हो गया था वक ईमेल : अब वह उससे पीछा नही्छुड्ा सकती. देवी मुझे माि करे, उसने मन ही मन उच्​्ारा. ranwaltamahabeer@gmail.com ‘हां बोलो तुम क्या पूछ रही थी?’ उसने शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 35


साबहत् मास्यट/कहारी हेड अनरान सा बनकर उससे पूछा था. ‘यही वक देवकी रेठऊ वकसकी तरह लगती है?’ पूछते हुए उसकी आंखे्वनम्ाला के चेहरे पर वटक गयी थी. ‘देवकी... वह वबलकुल अपनी दादी घर गयी है’ उसने बताया था. ‘वबलकुल झूठ. वह अपनी दादी पर नही् रमनू पर गयी है.’ वह वकसी मुहं िट वरद्​्ी बच्​्ी की तरह बोली थी. सुनकर एक पल तो वनम्ाला का चेहरा उतर गया था. उसे ववश्​्ास नही् था वक कभी पुष्पा के मुंह से उसे ऐसा सुनने को वमलेगा. ‘चु...प्प...’ उसने अपने मुंह पर अंगुली रखते हुए रैसे पुष्पा को टोका था. तुम्हे्यह सब वकसने बताया?’ ‘बताया वकसी ने...’ वह आगे कुछ कहती तभी वनम्ाला बोल पड्ी थी, दूसरे के कहे पर तुमने यकीन कैसे कर वलया? ‘उसने यूं ही झुठलाने के वलहार से अपना आवखरी राल िे्का था.’ ‘तुम्हे्नही्लगता वक रेठऊ हू ब हू रमनू पर गयी है. वही शक्लसूरत, वैसी ही कद काठी. यहां तक वक हाव भाव भी उसके रैसे ही... वछ... सासू री को भी एक वही वमला था...’ ववतृष्णा से उसने मुंह वबचकाया था. ‘सच कहा तुमने, पर यह हम तुम सोचती है उनकी वववशता.’ ‘क्या वववशता हो सकती है? कौन सी पवरब्सथवत रही वक...’ पुष्पा सुनने के वलए उतावली सी रान पड्ती थी और वनम्ाला थी वक रैसे वकसी अब्गनपरीक्​्ा से गुरर रही हो. ‘तुम सुनना चाहती हो तो सुनो...’ वनम्ाला की रुबान पर ठहरा हुआ अतीत वकसी बेगबती नदी की तरह उिनता हुआ बाहर वनकल पड्ा था. वववाह के कई वष्ाबाद भी घर मे्बच्​्ो्की वकलकारी न गूंरती देख उसके चाचा यावन कुूवर वसंह की पत्नी वबमला ने ही उन्हे् सलाह दी थी वक वे अपने वलए कोई दूसरी औरत तलाश ले्. पहले पत्नी की बात पर वे ‘हां-हूं’ करते रहे, कर कुछ नही्पाये. ऐसे मे्एक वदन वबमला ने ही प्​्स्ाव रखा था वक वे रारी है तो क्यो्न वह अपनी छोटी बहन का ही हाथ मांग ले. कुूवर वसंह को भला क्या आपव्​्त हो सकती थी. वैसे भी अंधे को क्या चावहए थी वसि्क दो आंखे्. ऐसे मे्मधुली का वववाह अधेड्उम्​्के कुूवर वसंह के साथ उस समय हुआ रब वे वनराशा के धुंध मे्वघरे हुए थे. वबमला ने अपनी छोटी सी उम्​् की बहन मधुली का वववाह अपने पवत के साथ कर अपने त्याग का पवरचय तो वदया ही कुल का एक वावरस देने का बंदोबस्​् भी कर वलया था. लेवकन उनके चेहरे तब मुरझाने लगे रब पांच 36 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

सुनकर पुषंपा की आंखेंएकदम भीग गयी थीं. अपने पकत और खानदान की खुकशयोंके कलए उसने अपनी ही आतंमा को मार डाला. साल बाद भी सूने घर मे्विर वही सन्नाटा पसरा रहा. देवी देवताओ्की शरण मे्राना हुआ और तभी... एक बार देवता ने प्​्सन्न होकर उन्हे् ‘ज्यूदल’ वदये वक उनकी खाली झोली भर रायेगी. इसी बीच रंगल आते-राते, घास, लकड्ी लाते हुए मधुली की रमनू से ऐसी वनकटता हुई वक वह... कुछ महीने बाद उसके पेट का आकार बढ्ने लगा तब वबमला व कुूवर वसंह के मुरझाए चेहरे वखलने लगे. मधुली उन्हे् पहले से कही्ज्यादा प्यारी व सुंदर लगने लगी. मधुली ने पहली बार वरस कन्या को रन्म वदया उसका नाम रखा गया देवकी. उसके रन्म पर घर मे्खूब खुशी मनायी गयी. सूने घर मे्देवकी की वकलकारी क्या गूंरी वक खुवशयो्की बाहर ही आ गयी. ‘रमनू.’ अपनी रुबान पर उसका नाम आते ही ववतृषण ् ा से भर उठा था वनम्ल ा ा का मन. चाची को भी एक यही वमला था अपना ईमान डुबाने के वलए. वछ: एक छोटी रात के आदमी के साथ... यह सब कैसे कर वलया चाची ने? सोचते हुए उसके शरीर पर असंखय् चीवटयां एक साथ रेगने लगी... विर रचपाल, वह भी उनकी झोली मे्एक बेटा डाल गया.’ ये चाची भी उि.’ गहरी सांस लेने लगी थी वनम्ाला. ‘चाची ने रो कुछ वकया अपने घर के भले

के वलए ही वकया. तुम उसकी ब्सथवत समझ सकती हो’ लंबी उच्छवास भरते हुए वनम्ाला ने पुषप् ा के सामने कहा तब वह भी एकदम खामोश हो गयी थी. चेहरे पर एक तरह की उदासी वघर आयी थी’...अब तुमह् ी्बताओ पुषप् ा, अगर चाची ने ऐसा न वकया होता तो घर का सूनापन इन सभी को खा राता. उसकी सूनी कोख... उसे ही कोसती रहती रीवन भर. ि्​्ी के मन को आर तक भला कौन समझ सका है’ वनम्ाला उठकर पलंग पर भीत का सहारा लेकर बैठ गयी थी. ‘उसने अपनी बंशबेल बढ्ाने के वलए घर से बाहर कदम रखा और वह सबकुछ पा भी वलया वरसकी उन्हे्चाहना थी. तुम्ही्कहो अगर चाचा को वह इतना खुशहाल पवरवार न देती तो क्या उसे घर मे् वही सम्मान वमलता रो आर वमल रहा है? बड्ी चाची को नही्देखती उपेक्ा का दंश वष्​्ो्से झेलती आ रही है पर घर संवरण व हम सबकी खुशहाली के वलए वह अपने सारे दुख दद्ाभूल राती है. यह मोह माया है ही इतनी भ्​्मक वक इसमे्इंसान उलझता ही राता है और वरंदगीभर वकसी भ्​्म का सा रीवन रीता राता है- आत्ममुग्धता से सराबोर. उसने रीवन मे् वह सबकुछ पा वलया वरससे उसकी वैतरणी पार हो रायेगी... पत्नी... बेटा... घर... संपवत और माया के इसी वतवलस्म मे्वह भटकता ही रहता है’ वह अवबरल बोलती रा रही थी. ‘सच कहा रेठऊ.’ ‘चाची ने बहुत नीचे वगरकर बहुत उमर की बात सोची. वही चाचा व सारे घर की खुवशयो् की नी्व है. वह एक ऐसा खेत हो गयी वरसमे् बीर वकसी और का पड्ा और िसल वकसी और की हुई.’ सुनकर पुष्पा की आंखे् एकदम भीग गयी थी. वह व्यथ्ाकी सास के बारे मे्सोच व आक्​्ेप के राले बुन रही थी. अपने पवत व खानदान की खुवशयो्के वलए उसने अपनी ही आत्मा को मार डाला. इतने नीचे वगर गयी वक... पर वह भी खुशहाल रीवन री रही है. कोई संतोष अथवा पछतावा उसके चेहरे पर नरर नही् आता है. नरर आता है तो वसि्करीवन मे्सबकुछ पा लेने का गहरा संतोष... पवरवार की खुशहाली की चमक... उसकी बाते्सुनकर अब कहने सुनने के वलए कुछ और उसके पास नही्रह रहा था. ‘पुष्पा...’ भीतर से सास का स्वर था. ‘री’ ‘तब से बैठी हो, उठो मै्ने तुम्हारे पसंद के’ सीड्ेबनाये है्. वनम्ाला को ही बुला लो, उसे भी वखलाओ.’ वे दोनो् उठकर रसोई की ओर बढ्ी रहां सास उनका बेसि्​्ी से इंतरार कर रही थी. थावलयो् मे् सीड्ो् के साथ परोसे थी वक गंध उनके नथुनो्मे्घुसकर उन्हे्बेचनै वकये रा n रही थी.


साबहत्य/कबविा

प्​्ेि रंजन अवनिेर की कववताएं सुपरवचत कवव और अनुवादक. प्​्कावशत कृवतयां: ‘वमट्​्ी के िल’, ‘कोई नया समाचार’, ‘संगत’, ‘अंधेरे मे्अंताक्​्री’ और ‘वबना मुंडेर की छत’. कववता के वलए भारतभूषण अग्​्वाल पुरस्कार. कहावनयां और बच्​्ो्के वलए कववताएं भी वलखी है्.

वरक्िे पर हंसी तीन लडवकयां वरक्शे पर बैठी रोर-रोर से हंस रही् हंस रही्वक वरक्शे पर वे तीनो्है्और वही तीन शायद पहले कभीे वरक्शे पर नही्बैठी्इस तरह शायद बगल की भीड शोर-शराबे और तमाशे पर हंस रही् या उस दुवनया पर वरसमे्वदन-वदन वगनती उनकी कम हो रही रबवक इस वरक्शे पर वही हेै्और हंसी ऐसी वक आगे की सीट पर बैठा चालक मानो इत्​्-सा उडा रा रहा हंसते हुए वे वहल रही्वहलवमल कर हंस रही्लहरा रही् हंस रही है्वक आसमान मे्इस समय आंवधयो्का रंग है इस बात पर भी वक घर से बता कर नही्वनकली्और अब यहां है्भरी सडक पर हंस-हंस कर अपने होने का ऐलान करती् उन बेचारे कमरोर कृशकाय लडको्के भौचकपन पर हंसती् रो अगर वे चुपचाप होती्या अकेली तो िब्लतयां कसते सीटी बराते हंसती है्वक तय नही्वकया वरक्शे पर वकधर राना र्कना कहां या वक वरक्शे वाले को देने के वलए अभी उनके पास खुला नही्कुछ इस हंसी के वसवा और रो है ऐसा वक चला नही्सकती्भंरा नही्सकती्इस बारार मे् हंसे रा रही्ंवक इस तरह कभी नही्हंसी्ं इस बात पर वक वे एक-दूसरे से सटी्और विर भी वकस खूबसूरती से अटी है्रैसे वकसी खूबसूरत तसवीर मे् वकसी तसवीर के चैखटे मे्कैद नही्होना चाहती् इसवलए डावलयो्की तरह हाथ वहला वहलाकर पत्​्ो्की तरह हंसी वबखेरती् यह हरी हंसी है हारी हुई नही् शायद वे एक दूसरे के प्​्ेम के बारे मे्पूछ कर लगा रही्ठहाके प्​्ेम को वनरीह बोल कर अदना बता कर छौना बुला कर वकलकती्वक आर तक प्यार को इतना प्यारा नाम वकसी ने नही्वदया वखलवखलाती्इस बात पर वक कोई बात नही्और यह वक बात का होना क्या रर्री उनके होने या हंसने के वलए मुमवकन है हंस रही्ंसरकार की इस घोषणा पर वक वरक्शे अब और नही्चले्गे इस शहर मे् क्यो्वक आदमी का आदमी को खी्चना आदमीयत नही् शायद वे हंस रही है्दुवनया के इस वचत्​्पर वरसमे्उन्मत्​्आदवमयो्से लदी-िूदी

यह हाथगाडी बाल खोले कुछ औरते्वमलकर खी्च रही् वे हंस रही्वक मालूम नही्क्यो् और कोई कवव वलखे रा रहा कुछ राने-समझे वबना...

वि​िक दरवारे के पीछे रो वछपा दुबका घर-घर घूम कर रंग डालने लगता एक बार भीगने पर बारार से ला नही्सकता था रो एक सौदा संभालता है अब सारा घर-संसार हर कुछ चूम सकता पहले चुंबन के बाद लगता है नारुक लडके को आंख नही्वमला पाता था हकलाता था वह नौरवान अब रुलूस मे्राता नारे लगाता एक छोटा बहाना नही्बन पाता था वरससे बचपन मे् बोलता बडे-बडे झूठ बडो्-बडो्के आगे अकेले कौर नही्उतरता था वरसके गले खाता चबा-चबा सबके आगे मुंह बरा भूल से वमले िावरल पैसे िेर आने वाला बेधडक गांठ खोल कर लेता वरश्​्त एक बार रो मरता और मरता राता सौ खून की भी वही सरा है करता राता... खुलती भटक धीरे-धीरे विर खुल राती वझझक एक वदन झटके से खुलने वाले चाकू की तरह यह शीशा वरसे एक तरि से तोडना होता दूसरी ओर बचा कर !

इच्छा वृक्की तरह हो मेरा शव हरी पव्​्तयां बने्बकवरयो्के थन मे्दूध टहवनयां रलावन गरीब मरूरो्का तन यह तना बदल राये तख्त वखडवकयो्दरवारो्मे् अंवतम िल वमले्बच्​्ो्को पंवछयो्को पंवथयो्को झुकू तो मेरे कारण कोई न झुके वगरने से मेरे रास्​्ा वकसी का न र्के शेष होकर भी हो सकू​ू एक सादा पन्ना मेरी राख से झलके वकसी की आत्मा...

n शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 37


साबहत् मास्यट/कहारी हेड

मे

री पैदाइश सन 1932 की है. पहाड्के गांवो्मे् वचवकत्सा की ब्सथवत मे् आर भी सुधार नही् हुआ है, तब तो ब्सथवत और भी बदतर थी. लोगो्का रीवन राम भरोसे चलता था और हारी-बीमारी मे् घरेलू उपाय और झाड्-िूक ू की राती थी. एक वरवार यह था वक भगवान के वसंहासन मे्कुछ पैस,े 'उचैण’ रख वदया राता था-हे भगवान, इस बच्​्ेको ठीक कर दो. बाद मे्वह पैसे वकसी को दे वदए राते थे. दूसरा तरीका यह था वक भभूत लगाई राती-अरे, आर इसे 'छल’ लग गया है! भभूत लगा देग् ,े ठीक हो रायेगा. उसके वलए कोई-कोई वसद्​्पुरष् समझा राता था. इलार के वलए पारंपवरक रड्ी-बूवटयो्का भी प्य् ोग होता था. हमे्भी कुछ रड्ीबूवटयो्का ज्​्ान हो गया था. रैस-े पेट दद्ाहोने पर रो रड्ी वघसकर वपलाई राती थी, उसे रोका रड्ी कहते थे. रोक का मतलब पेट दद्ाथा और रड्ी हुई दवा. बाद मे्पता चला वक उस रड्ी का वैज्ावनक नाम ममीरा है. इसका सुरमा भी बनता है. आयुवद्े की कई वनस्पवतयां पहाड्ो्मे्होती है.् उनका ज्​्ान न होने की वरह से लोग उनका उपयोग नही्कर पाते. बहराहल, डॉक्टर के नाम पर ले-देकर एक वैद्हवरकृषण ् पांडे थे. वह भी रारनीवतक आदमी थे. उन वदनो् कांगव्ेसयो् का कािी दमन होता था. वैदर ् ी कई बार रेल रहते थे, तो कई बार भूवमगत रहते थे. हमारे बाबू का उनसे बहुत अच्छा संबध ं था. पवरवार मे् वकसी को हारी-वबमारी होने पर उनको इलार के वलए बुलाया राता. उनका एकाध चेला भी उनके साथ मे् चलता था. वैदर ् ी कहते-'हां बालक, क्या हो रहा है? ऐसी कोई बात नही्है. ठीक हो रायेगा.’ पूछते-'बच्​्ेको खाने मे्क्या दे रहे हो?’विर सलाह देत-े खाने मे्यह दो, यह मत दो. यह पथ्य देना. यह करना, वह करना. वह कुछ दवाइयां अपने साथ लाये होते थे. उनमे्से कुछ पुवडय़ा देते थे. उसके बाद बड्ा मरेदार वकस्सा होता था. बाबू छोटी-सी तस्र् ी मे्रोली लेकर आते और उनको टीका लगाते. विर चांदी का एक र्पया उनके हाथ पर रख देते थे. वह कहते-'नही्-नही्दामोदर, यह क्या कर रहो हो?’ बाबू कहते-'यह तो आपको लेना ही होगा. वरना दवाइयां असर नही्करेग् ी.’ तो, चांदी का एक र्पया उनको वदया राता था और दुवन्नी या चवन्नी उनके चेले को दी राती थी. वैस,े वैदर ् ी को बुलाने की नौबत बहुत कम आती थी. सामान्यत: बच्​्ा घरेलू उपाय से ही ठीक हो राता था. हर घर मे्एक औरार होता था, वरसमे्लकड्ी का एक छोटा-सा हत्था होता था और उसके आगे लोहे की डंडी होती थी. उस लोहे की डंडी के आवखर मे्रैसे सांप के दो िन होते है,् वैसा होता था. इसका कई बीमावरयो् मे्इलार के वलए उपयोग होता था. रैस-े वकसी का पेट अिर रहा है या घुटनो् मे्दद्ाहो रहा है, तो कहेग् े वक उसको 'डाम’ लगा दो. दद्ावाली रगह पर राख मल कर और उस यंत्को लाल गरम करके ठक-ठक-ठक कर वदया राता था. लोगो्मे,् खासतौर से औरतो्मे्'डाम’ लगने के कारण झुलसे हुए मांस के वनशान वदख राते थे. घुटना दद्ाकर रहा है, तो कोई तेल मलकर या राख लगा कर उस यंत्को लाल गरम कर वहां पर तीन-चार बार छुआ देता था. वववभन्न बीमावरयो् मे् इलार के वलए लोग पारंपवरक तौर-तरीको् का इस्म्े ाल करते थे. यह ज्​्ान लोगो्ने अपने अनुभव से अव्रता वकया था. इनमे् 'डाम’ लगाना बहुत आम था. वचवकत्सको्का अभाव था और इलार लोगबाग अपने तरीके से करते थे. हमारे बचपन के वदनो्मे्नवरात वशशुओ्ओर प्स ् वू त रवनत रोगो्के कारण मवहलाओ्की मृतय् ु दर बहुत अवधक होती थी. वकसी तरह की डॉक्टरी सुववधा नही्थी और ऊपर से छुआछूत का आचार-ववचार ऐसा दवकयानूसी था वक रच्​्ा-बच्​्ा को स्वच्छ हवा और पहनने, ओढऩे, वबछाने को यथेि् सामान नही्वदया राता था. एक वदन हम अपने खानदान का वहसाब लगा रहे थे, तो पुराने लोगो्मे्से बहुत से लोगो्की तीन-तीन शावदयां हुई.् उन्हो्ने ये शावदयां अय्याशी के वलए नही्, बब्लक मरबूरी मे्की थी्. एक मरी, विर दूसरी मरी, खानदान तो चलना है, तो तीसरी शादी कर ली. वकतने ही ऐसे लोग थे, 38 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

भगवान भरोसे जीवन आतंमिृतं

शेखर जोशी

रो तीन-तीन शादी वाले थे. हम लोग कहते थे वक रब ईरा की मौत हुई, बाबू की उम्​्42 साल थी. उन्हो्ने शादी कर ली होती, तो हमारी नई ईरा आती्. वह घर की देखभाल करती्. हमारे और भाई-बहन होते. घर राने लायक होता लेवकन बाबू ने हम बच्​्ो्की वरह से ही दूसरी शादी नही्की. मुझे एक बुरगु ा्का स्मरण हो आता है, रो प्व्तवष्ाया डेढ-् दो वष्ाबाद कूधे मे्वमट्​्ी खोदने का बड्ा कुटला रखकर दोनो्हाथो्मे्सिेद कपड्ेमे् वलपटे नवरात वशशु की लाश लेकर गांव के सीमांत की ओर राते वदखाई देते थे. आर शायद डॉक्टरी वनदान मे्उन दंपती के रक्त मे्आर.एच. िैकट् र की समस्या वनकलती और उपचार हो राता. तब यह सब रानने-समझने का कोई साधन नही्था. एक बार शाम के झुटपुटे मे्मै्और बसदा उस माग्ासे आ रहे थे, रहां मृत वशशु दिनाये राते थे. बसदा ने मुझसे धीमे स्वर मे्कहा था, 'ज्यादा ऊूचे स्वर मे्मत बोलो. यहां अमुकरी के बच्​्ेसोये है.् कही्राग कर रोने न लगे.्’ मेरी अपनी मां की मृतय् ु प्स ् व काल मे्उवचत डॉक्टरी सुववधा न वमलने के कारण हुई थी. अन्त समय उन्हे्वरन दार्ण पवरब्सथवतयो्मे्चारपाई पर वलटाकर गांव से अल्मोड्ा अस्पताल ले राया गया था, वह बहुत ह्दय ववदारक दृकय् था. अपने दुख-कि्​्ो्के वनवारण के वलए पहाड्की गरीब रनता के पास एक दैवीय उपाय भी था. हर ओर से वनराश होकर लोग इसका सहारा लेत.े 'रागर’ की इस व्​्कया मे्ऐसे लोगो्को बुलाया राता, वरन्हे्डंगवरया कहा राता और वववधवत कांसे की थाली और नगाड्ा बराकर उनके शरीर मे्देवता


का अवतार वबठाया राता. वाद्​्की ध्ववन से उत्व्ेरत होकर डंगवरया का शरीर धीरे-धीरे कूपायमान होता, और विर वह नाचकर, कूद-िांदकर पीवड्त व्यब्कत के प्क् न् ो्का समाधान करने लगता. रागर की प्थ् ा पहाड्ो्मे्बहुत प्च ् वलत थी. अवतवरत होने वाले देवताओ्मे्सैम, भोलेनाथ, एड्ी इत्यावद होते थे. हमारे गांव मे्एक घर मे्तीन-चार वदन तक रागर लगा. हम लोग रात मे्भब्कत भाव से बैठकर रागर देखते थे. एक बार वदन के समय रगदीश दा, रो हम लोगो्से कािी बड्ेथे, रागर का स्वांग कर हमारा मनोरंरन करने लगे. खेलकूद मे्वदन बीत गया. रात मे्हम बच्​्ेभी भब्कत भाव से रागर वाले कमरे मे्बैठे थे वक तभी उस देवता ने, वरसकी नकल रगदीश दा ने वदन मे् की थी, डंगवरया के शरीर मे्प्व् श े वकया और वह एक टांग पर उछलताकूदता रगदीश दा के वनकट पहुच ं ा और उनकी चोटी पकड्कर उन्हे्धमकाने लगा, 'क्यो्...क्यो्... विर नकल करेगा... विर नकल करेगा.’ रगदीश दा के

होश उड्गये उस वदन से उन्हो्ने यह स्वांग लगाना बंद कर वदया. गांव मे्वकसी के पास भी रेवडयो नही्था. अखबार के नाम पर लीलाधर ताऊरी के पास डाक से अल्मोड्ा का 'शब्कत’ साप्तावहक आता था. उसी की खबरो्को अपनी तरह से समझकर लोग देश-दुवनया का हाल रान लेते थे. गांव मे्खून-खराबा, मारपीट, लड्ाई-झगड्ा होते मैन् े कभी नही्देखा. वकसी बात पर मतभेद हो भी राये, तो चार सयाने लोग उसका समाधान कर देते थे. हां, दो-चार वदन, हफ्त-े दो-हफ्ते अनबन रहती, एक-दूसरे के घर का रास्​्ा छोड्वदया राता और विर सब सामान्य हो राता. ऐसा नही्वक गांव का सामावरक रीवन सदैव तनावहीन रहता हो. मानव स्वभाव मे्वनवहत ईष्य् ा या, द्षे् , वासना के कारण कभी अशाब्नत, मनमुटाव और ववषाद का होना भी स्वाभाववक था, लेवकन यह स्थायी भाव नही्था. परस्पर समझदारी ऐसी थी वक शीघ्​्ही ब्सथवतयां विर सामान्य हो राती्. युवावस्था मे्ही वैधव्य का दंश और वकसी वनकट सम्बन्धी द्​्ारा छले राने की पवरब्सथवत तथा भगोड्ेपवत द्​्ारा बेसहारा छोड्ी गई वचन्ताग्स ् ्भोली पत्नी के वकसी सम्बधं ी द्​्ारा दैवहक शोषण ने हमारे ग्​्ाम समार मे्भी एक-दो बार ऐसी ब्सथवतयां बना दी थी्. लेवकन क्म् ाशील समार ने उनके दु:स्वप्न को भुलाकर उन्हे्सामान्य रीवन रीने मे्सहायता ही नही्की, बब्लक इस ववचलन के दुषप् वरणामो्का वकस प्क ् ार वनवारण वकया, इसका एक उदाहरण उन सयाने लोगो्की समझदारी को दश्ाता ा है. वष्​्ो्पूवा्उठे एक प्व् ाद का केनद् ्बनी एक ववधवा ने रब अपनी एकमात्​् वैध सन्तान के वववाह योग्य हो राने पर एक सद्:्ववधुर से उसका वववाह

तय कर वलया था, तो वकसी कनिुक ू वा ने भावी रामाता से उस भूल-े वबसरे प्स ् गं की चच्ा​ा कर दी. अब ववधुर द्​्ारा वववाह के वलए असहमत होने के कारण हताश यह दुवखयारी वबरादरी के एक बुरगु ा्की शरण मे्गयी और रोधोकर वकसी समाधान की याचना करने लगी. सह्दय बुरगु ा्ने धैया्रखने की सलाह दी और बीस-बाइस वकलोमीटर पैदल चलकर भावी रामाता के वठकाने रा पहुच ं .े वह हठी वकसी प्क ् ार वववाह के वलए सहमत नही्हुआ, तो बुरगु ा्ने समझाया, 'देखो, मै्तुमह् ारे वहत की बात कर रहा हू.ं मान लो, रो तुमने बात सुनी वह सही भी हो, तो उसमे्इस अबोध कन्या का क्या दोष है? मै्कह रहा हू,ं लड्की सोना है, खरा सोना. वह तुमह् ारी गृहस्थी को संभाल लेगी. इन अभागे वशशुओ्को मां का प्यार देगी. तुमह् ारी वरंदगी विर पटरी पर आ रायेगी. तुम बताओ, यह रो सोने की अंगठू ी तुमने पहन रखी है, यह अगर गलती से गू मे्पड्राये तो क्या तुम इसे िेक ् दोगे. नही्, धो-मांरकर विर अंगल ु ी मे्पहन लोगो. मैन् े तुमसे ज्यादा दुवनया देखी है. मेरी बात मानो, वकसी वक बहकावे मे्न आओ, इन बच्​्ो्का ख्याल करो. सब शुभ होगा.’ कहना न होगा वक अंतत: वह वववाह संपन्न हुआ और रामाता का रीवन सुखी हो गया. सोचने की बात है वक वंश चलाने के नाम पर या अपनी कामेचछ ् ा से यवद पुरष् दूसरी-तीसरी शादी कर सकता है, तो युवा ववधवाये्क्यो्नये वसरे से अपनी वरन्दगी शुर्करने से वंवचत रहे!् पुरष् ो्के प्व्त समार वकतना उदार हुआ करता था, इसकी वमसाल वह सज्न् थे, रो एक लाभप्द् सामान्य-सी नौकरी पाकर धनी हो गये थे. उनकी रईसी का यह आलम था वक शहर मे्अपने भव्य भवन की बैठक मे्वे एक नगरवधू का मुररा सुनते थे,रबवक बीमार पत्नी घर के भीतरी प्क ् ोष्​्मे् उपेव्कत पड्ी होती. यूं वह बहुत धाव्मक ा और देवी के भत थे. नवरात्​्मे्लाल रेशमी धोती पवहन, रामनामी चादर ओढ्कर गम्भीर स्वर मे्दुगा्ा सप्तशती का पाठ करते थे और सम्माननीय थे. बात रागात्मक सम्बन्धो्की चली तो बहुत ही सुदश्ना , हमेशा थ्​्ी पीस सूट पहनकर कचहरी राने वाले वकील चाचा को भुला पाना कवठन है. नगर के ईमानदार और प्व्तव्​्षत वकीलो्मे्वगने-राने वाले चाचा गहरे मातृभक्त थे. घर मे्दो ही प्​्ाणी थे-दादी और चाचा. सुनते है्वक वह वकसी व्​्कस्​्ान मवहला के प्व्त अनुरक्त थे. बाबू रब शहर राते तो दादी उनसे आग्ह् करती् वक वह चाचा को मनाएं वक उसी कन्या को ल्याह कर ले आएँ, उन्हे्कोई आपव्​्त नही्होगी. लेवकन चाचा दादी के वलए ववधम्​्ी बहू लाने का साहस नही्रुटा पाए और आरन्म अवववावहत रहे. उनकी कम उम्​्मे्ह्दयाघात से मृतय् ु हो गयी थी. चाचा बहुत हंसमुख और ववनोदी भी थे. एक बार वह गांव आये. चाचा अपने साथ मुझे भी कत्यरू वाले गांव ले गये थे. साथ मे्लीलाधर ताऊरी के ज्यष े ्पुत्वववपनदा भी गये थे. बण्ड गांव मे् हमारा एक आसामी एक सी्क मे् गूथ ं कर बहुत-सी मछवलयां नदी से पकड्कर लाया था. वववपनदा रसोइया बने. रब थावलयो्मे् शोरबे वाली मछली और भात परोसा गया, तो चाचा ने अपने हम उम्​् वववपनदा से पूछा था, 'यार वववपन, वसर-वसर मेरी थाली मे्और पूछ ं वाले वहस्से चना की थाली मे्वदखाई दे रहे है,् बीच के वहस्से कहां गये?’’ रब हम गांव से लौटने लगे तो एक लोहार ने चाचा को एक छोटी-सी खुकरी बैग् नी रंग के सनील मढ्ेखोल मे्रखकर उपहार मे्दी थी. यह मुझे आर भी याद है. एक आंख के धनी, नाटे, खल्वाट, क्​्ोधी, पंचायती ग्वाले मोहन वसंह के रीवन मे्भी एक बार बसन्ती बयार का झो्का आया, रब उनकी वबरादरी की पड्ोसी गांव की एक बुवढय़ा अपनी कद्​्ावर ववधवा बेटी के साथ गांव की एक गोशाला मे्बंधी अपनी भैस ् को दुहने और दूध बेचने आती थी. वह मां-बेटी अंधरे ा होने पर अपने गांव लौट राती्. मोहनदा उनके आस-पास मंडराते रहते. उन वदनो्गांव की दुकान मे्नावरयल के गोले और गुड्की वबक्​्ी बढ् ( क्म् श:) गयी थी! n शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 39


साबहत् मास्यट/समीक् हेड ्ा

सफ्र िंे वज्ंदगी की खोज

उड्मषलेश िर यात्​्ा मे्शिर के भीतर एक दूसरे शिर या देश के भीतर दूसरे देश की तलाश करते डदखते िै्. शैलश े

प्च ् ावरत करने वाले मुलक ् मे् लोकतंत् पर सवार सव्स ा त्​्ावादी रारशाही वदखाई देती है, रो आर भी देश की ज्यादातर संपव्​्त का मावलक है. बव्मघि् म ्े ो्का एक उदार और सव्ावा धक समभाव का चेहरा वदखाई देता ल्पना कीवरए एक ऐसी बस्​्ी की रहां कोई पुवलस नही्, कोई सरकारी मे्उन्हे्अंगर ं े लोकव्​्पय भवन-वनम्ाण ा ववशेषज्​्लॉरी बेकर का सेवा अनुशासन नही्. विर भी बस्​्ी के लोग स्वच्छदं रीवन री रहे है.् वकसी है- वही्से केरल पहुच तरह की कोई बड्ी समस्या नही्है वहां. कई तरह की सीमाओ्के बावरूद भाव. वहंदी मे्यात्​्ा वृत्ातं कािी वलखे गये है.् राने-माने सावहत्यकार वनम्ल ा लोगो्का रीवन सहर और सव्​्कय है. ववरष्​्पत्क ् ार उव्मल ा श े ने डेनमाक्क की रारधानी कोपेनहेगन के पास व्​्कस्टवे नया के र्प मे्एक ऐसी ही बस्​्ी वम्ा​ा ने अपने कई संसम् रणो्मे्स्थानीय रीवन और उसकी वववशि्त् ा का ा श े ने ववदेश-यात्​्ा के अपने संसम् रणो् को भारत की को खोर वनकाला. इस यात्​्ा वृत्ातं ‘व्​्कस्टवे नया मेरी रान’ मे्यायावर पत्क ् ार वचत्​्खी्चा है. उव्मल दुवनया के अलग-अलग वहस्सो्मे्रीवन के नये मूलय् ो्की तलाश करता वस्ब्ुस् थवत से रोड्कर उसे और भी वदलचस्प बना वदया है. ऑस्टव्ेलया के वदखाई देता है. अपने पांच महादेशो्के सिर का अनुभव साझा करते हुए रोत्​्ानेसट् द्​्ीप की उनकी यात्​्ा एक सैलानी का अनुभव भर नही है बब्लक ्े ो के दमन चक्​्और स्थानीय लोगो्के खात्मे की कहानी उव्मल ा श े वहां के अलग-अलग ढंग के समारो्के हर स्र् , हर श्ण ्े ी तक ऑस्टव्ेलया मे्अंगर ्े ो्की बब्रा ता की यह कहानी भारत मे्अंगर ्े ो्के आत्याचार की याद पहुच ं ने की कोवशश करते है. लेवकन यह कोई ऐसा यात्​्ा वृत्ातं नही्है वरसमे् है. अंगर वदलाती है . ऐसी बब् र ा ता का उदाहरण है पव् श ् म आॅसट् व्ेलया का रोत्न् से ट् लेखक महर शहर के भूगोल और आंखो को लुभाने वाले दृकय् ो्तक सीवमत द् ी ् प. सोलहवी् शताल् द ी मे ् यहां सबसे पहले डच पहुच ं े थे. रहे. दरअसल उव्मल ा श े अपनी हर यात्​्ा मे्शहर के भीतर विर यू र ोप के कु छ अन् य दे श ो् के लोग गये . रोत् न ् स े ट् के एक दूसरे शहर या देश के अंदर दूसरे देश की तलाश करते मू ल वनवासी नू ग ं र लोगो् पर उन् ह ो् न े भारी रु ल म ् वकया. उन्हे् वदखते है.् बेरहमी से यातना दे-देकर खत्म वकया गया. वरन रेलो् ‘व्​्कस्टवे नया’ मे्उन्हे्अपने देश के वकसी भी बड्ेशहर और काल कोठवरयो्मे्उन्हे्कैद करके रखा गया, वे उस मे्अवैध बव्​्सयो्के बसने का तारतम्य नरर आता है, गांव भयानक अत्याचार की गवाह के र्प मे्आर भी वहां खड्ी मे्राम प्स ् ाद तेली की दुकान की याद आती है तो न्ययू ॉक्क है.् उव्मल ा श े ने अपने इन संसम् रणो्मे्यूरोप-अमेवरका की पहुच ं कर भारत के वहंदी अखबारो्के संपादकीय ववभाग आर की चमक-दमक के पीछे छुपे उनके पुराने गुनाहो्को की अंदर्नी रारनीवत. यही बात उव्मल ा श े के संसम् रण को बहुत प्​्ामावणक ढंग से रखने की कोवशश की है. इन मुलक ् ो् दूसरे यात्​्ा वृत्ा​ांतो्से अलग करती है. सुदरू बसे देशो्की की चमक-दमक के पीछे एक डरावना और दागदार यात्​्ा नही्करने वाले पाठक भी इससे अपने को आसानी इवतहास भी है. आमतौर पर इन ववकवसत देशो्मे्भ्म् ण पर से रोड्पाते है,् क्यो्वक वहां उन्हे्अपने देश रैसा कुछ न आये एवशयाई लोग इनकी प्ग् वत की चमक-दमक और कुछ वदखाई दे राता है. हालांवक न्ययू ॉक्कयात्​्ा प्क ् रण मे् आधुवनक स्वर्प देखकर अचंवभत होते है्पर उव्मल ा श े ने अखबारी दफ्तर की अंदर्नी पॉवलवटक्स कुछ ज्यादा ही इस ववकास के पीछे के उपवनवे श वादी चवरत् ् और दमनहावी वदखाई देती है. भ्​्कस्टभे नया मेरी जान: उभ्मल श शे ; आधार शोषण के वसलवसले को भी तलाशने की कोवशश की है. डेनमाक्कऔर न्ययू ाॅकक्के अलावे वॉवशंगटन, बव्मघि् म, प्क् ाशन, एसीएि-267, सेकट् र 16, व्​्िटेन के अपने य़ात्​्ा वृत्ातं मे्उव्मल ा श े अपने पाठको् लेसट् र, रोहान्सबग्ा(साउथ अफ्​्ीका), आस्टव्ेलया और पंचकूला, हभरयाणा; 200 र्पये. को लंदन, लेसट् र और बव्मघि् म सवहत वहां के कई शहरो्मे् हमारे वबल्कल ु पड्ोसी भूटान को एक नये नि्वरये से देखने की कोवशश की गयी है. रंगभेद और नस्लभेद के वखलाि आंदोलन के दौरान ले राते है.् वहां वे रनतंत्का रमीनी आधार वदखाते है.् वववभन्न धम्ो्​्और साउथ अफ्​्ीका का कस्बा सौवेटो मूल दव्​्कण अफ्​्ीकी वनवावसयो्के संघष्ा समुदायो्के लोगो्मे्सहकार और सद्​्ाव के आधार की भी वशनाख्त करते के सबसे बड्ेकेद् ्ो मे्से एक था. यहां गोरी पुवलस की गोवलयो्से अनेक काले है.् बव्मघि् म की सोहो रोड पर उन्हे्एक भरा-पूरा लघु-भारत वदखाई देता है. व्​्िटेन मे्पंडावगरी और पुरोवहती का इस तरह का वण्ना संभवतः पहली बार दव्​्कण अफ्​्ीकी मारे गये थे. रंगभेदी शासन के खत्म होने के बाद उव्मल ा श े यहां व्िन्दगी की नयी आहट और सामावरक सम्बन्धो्की नयी संभावनाओ् वकसी लेखक ने अपने वृत्ातं मे्वकया है. व्​्िटेन की वहंद-ू आबादी मे्पंडावगरीकी तलाश करते है् लेवकन वनराशा ही हाथ लगती है. अब यहां एक नये पुरोवहती का धंधा वैसे ही िल-िूल रहा है रैसे भारत मे.् उव्मल ा श े की ये यात्​्ाएं महर भूगोल नापने से कुछ अवधक है.् नयनसुख आतंक का रार है. यह गरीबी से भले ही उपरा हो, लेवकन इसका रंग काला के वलए सुदं रता वनहारने से ज्यादा है.् दरअसल, ये यात्​्ाएं हमे्मनुषय् और ही है. इन यात्​्ा वृता्तं ो् मे् वरंदगी का एक प्व् ाह है. वैसे ही रैसे पानी से समार की ववकास-यात्​्ा के ववववध आयामो्से र्-ब-र्कराती है.् इन सभी लबालब कोई नदी शांत होकर बहती रा रही है. सहर भाषा, शल्दो्से वचत्​् यात्​्ाओ्मे्एक चीर रो समान है, वह है-अलग-अलग रगहो्मे्वरन्दगी ् ावरता के वववशि्​्प्य् ोरन उकेरने की दक्त् ा और रहां संभव हो अपने देश से तुलना इस वकताब को की तलाश. ये यात्​्ाएं बहुत सीवमत समय और पत्क के वलए हु ए दौरो् के दरम् य ान की है , ् इसवलए वे अपने वृत्ा​ांतो मे्कई रगह वदलचस्प बनाते है.् स्थानो्और समारो्के वण्ना के मामले मे्उव्मल ा श े बेहद मौवलक और सृरनात्मक है.् व्​्कस्टवे नया मे् अगर यूरोप के अंदर यूरोप से लगभग भागते हुए महसूस होते है.् पर यह वकताब की कमरोरी नही्लगती. अलग दुवनया वदखती है तो भूटान मे्तस्वीर का दूसरा पहलू वदखाई देता है. एक तरह से यह भागमभाग इस वकताब की ववशेषता बन राती है और उसे n अपनी वववशि्त् ा दर्ा कराने के वलए ‘सकल खुशहाली सूचकांक’ को बोवझल होने से बचाती है.

क

40 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017


मास् ि​िकही ट हेड चंचल

फ़कीर की बात तो सुनो हो यि दरवेशो्का देश िै. सच क्या िै, झूठ क्या िै, इसका फैसला समझने वाले करे्.

य

ह वकस्सा दरवेशो् के देश का है. सच क्या है, झूठ क्या है इसका िैसला समझने वाले करे्. हम तो बस संक्ेप मे्उस वाकये को पेश कर रहे है् वरसे आंखन देखी कहते है्. रैसा वक कुदरती वनराम मे् होता है- चवरंदे, पवरंदे, पेड्, र्ख, नदी-तालाब, समतल-पहाड्, रंगल आवद के बीच इंसान री रहा था. हर कोई आराद था. दूसरे की आरादी को बरकरार रखते हुए. इंसान ने अपने वलए रो वनराम तैयार वकया था वह खुदमुखत् ारी का रहा. लोग अपने नुमाइंदे सोच समझकर तय करते थे. लोग रहबर और रहरन की पहचान करने की कुव्वत रखते थे. गरर यह वक रहरन अवाम की इस हरकत से आवरर आ चुके थे पर उनकी कोवशश चलती रहती थी. अबकी बार कुछ ऐसा हादसा पेश आया वक रहरन ने लंबा िरेब वकया और रहबरी करने के वलए पूरे सार व सामान का बंदोबस्​् कर मैदान मे् कूद गया. इन रहरनो् ने सबसे पहले चंद लुटेरो् से यह समझौता वकया की तुम हमे् मुल्क की रहबरी वदलाने मे् मदद करो हम तुमको लूटने का भरपूर मौक्ा दे्गे. वसयाह रात के इस अंधेरे मे्इकरारनामे पर दस्ख ् त हुए. रहरन वनकल पडा मैदान मे्. ऊूचे-ऊूचे दरख्तो्की कटी हुई डावलयो् पर वह उछल कर बैठता और अरीबो गरीब गलीर रुबान मे् ऊटपटांग बोलता रनता रो अब तक इस रुबान से दूर रही, उसे यह पसंद आने लगा. उसकी उछलकूद पर रनता तावलयां पीटती. उसे रनता के मन को पसंद आने वाली सारी बाते्पता थी्. इसवलए उसने उसे भुनाने मे् कोई कसर नही् छोड्ी. एक वदन पता चला वक मुल्क का मुस्कवबल अब उसके हाथ मे्है. लेवकन आटे दाल का भाव आसमान रा चढ्ा था. रनता बोलती वक उसको भूख लगी है. वनराम समझाता वक देशप्​्ेम सीखो. बात वावरब थी, भूख की औकात देशप्​्ेम से बड्ी तो होती नही्. बस रनता काम पर लग गयी. वनराम ने कहा वक पहले धम्ाबचाओ. इस धम्ामे्यह पाया गया वक इंसान की रान की कीमत रानवर के सामने

कुछ नही्है क्यो्वक वह माता है. गाय एक पाक और मुकद्स ् धम्ाहै. उसके गोबर, मूत और दूध अलग से कीमती हो गये. लेवकन इंसान के साथ ऐसा नही् था सो इंसान मारे राने लगे. इस बीच वनराम के आंकड्े खुलकर बताने लगे वक रब से वनराम बदला है गोमांस के वनय्ा​ात मे् डेढ् गुना इरािा हुआ है. रब यह सवाल रेरे बहस हुआ तो मुनादी हो गयी सरहद पर तनाव है, वनराम हरकत मे्आया. दुवनया का एक पुराना हथकूडा वनकाला गया वरसे वहटलर, मुसोलनी, ईदी अमीन, और याहया खान आरमाते रहे है.् वह है देश प्म्े . इसी के हवाले से बहुत सारे रर्री रर्वरयात के मसले मलबे मे्दबा वदये गये. वनराम की अपनी सनक होती है, वदन की रात वसयाह चादर मे् वलपट गयी. सुबह रब लोग सोकर उठे तो उनके वसरहाने वनराम का र्क्ा पडा वमला. आपके पास रो 1000 और 500 र्पये के नोट है्, उनका चलन बंद वकया राता है. अब यह वकसी काम की नही् रही्. चुनांचे भागो बै्क और नोट कोरमा करो. नये नोट लो. वकस्सा कोताह यह वक इस अिरातिरी मे्सब िूसे पड्ेहै् तो उसका वरक्​्ही क्या करना. रनता ववचवलत होने लगी तो कहा गया वक काला धन वनकाला रा रहा है. कुल तीन वदन बरदाक्त करो. वमयाद बढ्ती गयी और बढ्ती ही रा रही है. काला धन वनराम के पीछे खवपच की मावनंद चुभ गया है. वरतना वनकालने की कोवशश की राती है उतना ही चुभती राती है. मुल्क चारो् खाने वचत वगरा हुआ है. अब वनराम नये अंदार मे्उतरा है. अब वह रो रहा है. हमने त्याग वकया है... चाय की केतली छोड्कर आये थे, कारू का आटा खा रहे हो. दुवनया की सबसे महंगी गाड्ी मे् घूम रहे हो. कहां तक बताया राये? वनराम कह रहा है वक झोला लेकर आये थे, िकीर है्, िकीर की तरह चले राये्गे. सवाल यह नही्है. काठ की हांडी एक बार ही चढ्ती है. राना n तो है ही लेवकन मुल्क को क्या बनाकर रा रहे हो? शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 41


मास् यायावरी ट हेड अंबरीश कुमार

बा

रह नवंबर की सुबह रायपुर के सव्ककट हाउस मे् नाक्ता कर ही रहा था वक अवनल चौबे आ गये. सव्ककट हाउस की कैटवरंग इंवडयन कािी हाउस संभालता है इसवलये खानपान पर दव्​्कण भारतीय असर ज्यादा रहता है. इडली डोसा का भारी नाक्ता वकया क्यो्वक वदन भर रंगल मे् रहना था. बारनवापारा वन्य रीव अभ्यारण्य के बीच रंगलात ववभाग के उस डाक बंगले की िोटो लेनी थी रो करीब डेढ सौ साल पुराना है. उसी वरह से यह यात्​्ा कर रहा था. उसके बाद उदंती वन्य रीव अभ्यारण्य के तौरंगा डाक बंगले की तरि राना था. दरअसल उन डाक बंगलो् पर एक कािी टेबल बुक का मन बना है रो सौ साल से ज्यादा पुराने है् और रहां मै् र्क चुका हूं. पुराने सहयोगी पत्​्कार रारकुमार सोनी से पहले ही कहा था वक इन दोनो्रगहो्पर राना है इसवलए वे न वसि्क साथ चले्गे बब्लक इन रगहो् पर

ठहरने की व्यवस्था भी करा कर रखे्गे. यह इसवलए क्यो्वक बरसात के बाद वन्य रीव अभ्यारण्य नवंबर के पहले हफ्ते मे्ही खुलते है् और सैलावनयो्की भीड भी होती है. अगर पहले से बुवकूग न हो तो रात मे् र्कने मे् वदक्​्त हो सकती है. हालांवक रायपुर मे्बारह तारीख को ही वदन मे्मुख्यमंत्ी रमन वसंह से मुलाकात का समय तय था पर देर रात ही अवनल चौबे ने उसे आगे बढा देने के वलए कह वदया था. खैर नोटबंदी के बाद का यह तीसरा वदन था और रायपुर एयरपोट्ापर खुद अल्लू चौबे गाडी लेकर आ गये थे इसवलए वदक्​्त नही् हुई. दो हरार के कुछ नोट थे वरन्हे् बचा कर रखे हुए था. कािी हाउस का वबल भी स्वाइप मशीन से चुकता वकया. अब रंगल मे्तो यह सब चलने वाला नही्था. सोनी को घर से लेकर महासमुंद की तरि बढे तो सडक बदली हुई नरर आयी. नवंबर के दूसरे हफ्ते मे् हलकी ठंड तो थी पर चढते सूरर के साथ ठंड कम होती रा रही थी. शहर से वनकलते ही मुझे लखौली मे् वसंचाई

इक बंगला बना िा न्यारा

ववभाग का वह डाक बंगला ध्यान आया वरसमे् हर रवववार अपनी मंडली रुटती थी. ग्यारह की शाम रायपुर प्​्ेस क्लब ने खुद ही मेरी यात्​्ा संस्मरण पर आधावरत पुस्क ‘घाट घाट का पानी’ का ववमोचन काय्ाक्म रखा था. इस काय्ाक्म मे् रारकुमार सोनी ने भी इस डाक बंगले मे् उन दावतो् का वरक्​् वकया रो मै् रायपुर मे् रनसत्​्ा का छतीसगढ संस्करण वनकालने के बाद वदया करता था. उस मंडली मे् अपने बंगाली साथी प्​्दीप मैत् रो उन वदनो् वहंदुस्ान टाइम्स के ल्यूरो चीि हुआ करते थे वे तो रहते ही साथ ही ओवडशा के रहने वाले पीटीआई के प्​्काश होता भी रर्र होते. इनके अलावा कई और वमत्​्भी. छतीसगढ मे्ताल तालाब बहुत है्और रोहू कािी होती है इसवलए हम सब भी इसके मुरीद थे. पर अल्लू चौबे ने बताया वक वह वनकल चुका है. तभी िल बेचती एक मवहला वदखी तो गाडी र्कवा ली. तारे अमर्द और सेब ले वलए. दोनो्एक ही भाव थे सौ र्पये वकलो. दोपहर मे्

इस िाक बंगले का दो साल पिले कायाकल्प डकया गया िै. अब यि कई सुडवधाओ्से लैस िै. यिां करीब सौ साल पिले के उन अंग्ेज अफसरो्के फोटो भी िै्जो इस अंचल मे्तैनात रिे.

बारनवापारा का प्​्वेश द्​्ार: प्​्कृभत से भरपूर संसार 42 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017


जंगलात का डाक बंगला: डेढ् सौ साल का इभतहास

कुछ न वमले तो इससे काम चल रायेगा यह सोच कर ले वलया था. गाडी से बाहर वनकले तो हल्की ठंड का अहसास हुआ. यह नयी बनी चार लेन की सडक मुबं ई कोलकाता रारमाग्ासंखय् ा छह थी रो ओवडशा के संबलपुर भुवनेश्र होते हुए कोलकाता की तरि राती है. रायपुर से करीब सौ वकलोमीटर दूर वपथौरा से हमे्मुडना था. सडक के दोनो् और नये लगे पेड अब रंगल रैसे लगने लगे थे. वपछली बार रब इस वन्य रीव अभ्यारण्य मे्आया था तो बहुत कम पेड थे. रावहर है वक ये बाद मे्लगाये गये थे. दूर तक राते ये रंगल अच्छे लगते है्. वपथौरा आया तो मुख्य सडक से बारनवापारा अभ्यारण्य के वलये मुडे ही थे वक गायो्का झुंड सामने आ गया. कुछ देर बाद ही आगे बढ पाये. इस बीच सोनी से पूछा वक बारनवापारा के डाक बंगले मे् र्कने के वलए बुवकूग करा ली है तो बात कर उन्हे् सूवचत कर दे् वक हम लोग घंटे भर मे्पहुच ं रायेग् .े इसके आगे मोबाइल वमलना मुब्ककल होगा. सोनी ने रंगलात ववभाग के वकसी अिसर से बात कर बताया वक वहां सूचना रा चुकी है. करीब आधे घंटे बाद हम बारनवापारा अभ्यारण्य के तेद् आ ु द्​्ार तक पहुच ं चुके थे. यहां से प्​्वेश का परवमट वमलता. गेट पर पता चला वक उनके पास कोई संदेश भीतर के अवतवथ गृह से नही्आया है इसवलये परवमट नही् वमलेगा. दूसरे यहां मोबाइल काम नही् करता इसवलये रायपुर से वकसी संपक्क भी नही् हो सकता. गेट पर बैठे गाड्ा को बताया गया वक हम लोगो् की बुवकूग है पर वह सुनने को तैयार ही नही्. खैर कुछ देर की रद्​्ोरहद के बाद प्​्वेश

वमला तो वहां नकद देना था और कोई स्वाइप मशीन भी नही्. मेरे पास कुछ छुट्ा था इसवलए वदक्​्त नही्आयी. भीतर प्​्वेश करते ही दोनो् तरि घने रंगल और बीच से सीधी गुररती कच्​्ी सडक थी. साल,सागौन, सरई, सारा, महुआ से लेकर हर्ाबहेडा तक. यह घना रंगल था. हर कुछ दूरी पर बार अभ्यारण्य की दूरी वदखाते साइन बोड्ा लगे थे वरसपर वहरन, सांभर,चीतल से लेकर बाघ तक की िोटो लगी हुई थी. कुछ देर बाद ही हम बारनवापारा पय्ाटक ग्​्ाम के चीतल रेस्रां पहुंच चुके थे. यह रंगल के बीच सैलावनयो् के ठहरने के वलए रंगलात ववभाग का वरसाट्ाथा वरसे कुछ साल पहले ही बनाया गया था. इसमे्कािी पय्टा क र्क सकते है् और रेस्रां मे् खाने का अच्छा इंतराम है. कुछ देर मे् ही रंगलात ववभाग के स्थानीय प्​्भारी संरू वनहलानी आ गये और उन्हो्ने बताया वक हम लोगो्के र्कने की व्यवस्था का संदेश वमल चुका था पर संचार व्यवस्था गडबडा राने की वरह से गेट पर रानकारी नही् दी रा सकी थी वरसके वलये खेद भी रताया. यह वरसाट्ावनहलानी के वदमाग की ही उपर थी वरसे शुर्हुये तीन साल हुआ है. इस साल यह करीब चौहत्​्र लाख र्पये की कमाई करने रा रहा है. इस पवरयोरना पर राज्य सरकार ने करीब पांच करोड खच्ा वकये थे वरसकी भरपाई इस साल ही हो राने की उम्मीद है. यहां रौशनी की व्यवस्था सौर उर्ा​ा से की गयी है इसवलए वबरली आने राने की कोई समस्या नही् है. काटेर कािी भव्य बनाये गये है् और उनके

चारो् तरि सरावटी पेड पौधे और िूल भी लगाये गये है.् शाम होते ही पव्​्कयो्और रानवरो् की आवार सुनाई पडने लगती है्. पय्ाटक ग्​्ाम से हम खाना खाकर वनकले तो िारेस्ट ववभाग के डाक बंगले मे्पहुंच गये. इस डाक बंगले का दो साल पहले कायाकल्प वकया गया है वरसके बाद यह अत्याधुवनक सुववधाओ् से लैस हो चुका है. इस डाक बंगले मे्करीब सौ साल पहले के उन अंग्ेर अिसरो् का िोटो भी लगाया गया है रो मध्य प्​्देश के इस अंचल मे् तैनात थे. उनका ल्यौरा भी वदया गया है. इस डाक बंगले मे् करीब डेढ दशक पहले र्का था. दीपावली के ठीक बाद की बात है. चारो् तरि साल के सूखे पत्​्ो् से वघरे इस डाक बंगले मे्डेकन् हेरल्ड के साथी अवमताभ के और अपने पवरवार के साथ देर शाम पहुंचा था क्यो्वक रंगल के बीच से गुररने वाली कच्​्ी सडक बहुत ख़राब थी. तब आसपास कोई घर भी नही्था. इस डाक बंगले मे्पहुंच कर बैठे ही थे वक एक बुरुग्ा खानसामा चाय लेकर हावरर हो गया. उसने रात के खाने के बारे मे्पूछा तो उसे बता वदया गया. तीन बच्​्े और चार वयस्क थे वरनमे् ज्यादातर शुद् शाकाहारी. मुझे और अवमताभ को छोडकर. तब यह डाक बंगला वकसी पुरानी रहस्य रोमांच वाली विल्म के सेट रैसा लग रहा था. डाक बंगला का वास्​्ुवशल्प भी देश भर मे् एक रैसा ही होता है. सामने बरामदा. भीतर राते ही भोरन कक्​् वरसमे् बैठने के वलए बडे सोिे भी होते है् और िायर प्लेस यह बताता है वक राडो् मे् इस रंगल मे् वबना आग तापे रहना मुब्ककल होता है. इसी शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 43


मास् यायावरी ट हेड

भोरन कक्​्से दो सूट अगल बगल रुडे रहते है.् रसोई करीब पचास िुट पीछे की तरि होती है. सभी डाक बंगलो्का वास्​्ुवशल्प ऐसा ही होता है चाहे उतराखंड का चकराता हो या विर मध्य प्​्देश का बैतूल. उस दौर मे्इस डाक बंगले मे् लालटेन की रौशनी मे्बैठना पडा. पुराने ढंग का िन्​्ीचर और पलंग था. वखडकी के एक दो शीशे टूटे हुए थे वरनपर दफ्ती लगा कर रखा गया था. चौकीदार ने बता वदया था वक सावधानी बरतनी चावहये क्यो्वक रंगली रानवर के साथ सांप भी वनकल आते है्. कुछ समय पहले बरसात भी हो चुकी थी इसवलए सावधानी रर्री थी. घने रंगल के बीच इस पुराने डाक बंगले मे्रानवरो्की आवार सुनाई पड रही थी. कुछ देर बाद हम सभी समय काटने के वलए पीछे बने रसोई घर मे्चले गये रहां खाना तैयार हो रहा था. लकडी से रलने वाले चार चूल्हो्पर खाना बन रहा था. इस बीच एक आवदवासी महुआ की पहली धार वाली मवदरा ले आया वरसकी मांग अवमताभ ने की थी. उनका दावा था यह वकसी भी स्काच से बेहतर होती है और आवदवासी इसी का वनयवमत सेवन करते है्. मै् उस बुरुग्ा

44 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

प्​्कृभत के आंगन मे् मचान: जंगल मे् मंगल खानसामा दशरथ से बात करने लगा रो खडे मसाले भून रहा था. भूनने के बाद उसे वसलबट्​्े पर पीसना था. वह बताने लगा वक इस डाक बंगले से उसका संबंध साठ साल से ज्यादा का है. उसके वपता भी यही्पर खानसामा थे. उस दौर मे्इस डाक बंगले की कई कहावनयां सुनाई राती थी्. अंग्ेरो के दौर मे् यह अिसरो् का पसंदीदा वशकारगाह हुआ करता था. वे अिसर तीन चार वदन तक रहते और वशकार होता. तीतर बटेर, रंगली मुग्े, वहरन से लेकर रंगली सूअर तक बनता. आरादी के बाद भी कई सालो् तक वशकार होता रहा. यहां आना मुब्ककल होता था इसवलए बहुत कम अिसर आते थे. अपने सारो सामान के साथ. इस रंगल मे्बहुत से पक्​्ी है्. रंगली मुग्ा​ा, पटकी, रगार, काला बगुला, वकलवकला, ि्​्ाह्मणी चील, लालमुवनया, हरेबा, वगद्​्, वसल्ही, अंधा बगुला, तीतर, बटेर, कठिोड्वा, वकूगविशर आवद. पर ज्यादातर रंगली मुग्ा​ा ही इनके हत्थे चढता. खैर अब न वशकारी रहे न वशकार की परम्परा. पर ववकल्प मे् आसपास खासकर बिर रोन के गांवो् से

देसी मुग्े आ राते है. कान्हा वन्य रीव अभ्यारण्य मे्भी देसी मुग्ो्का ज्यादा प्​्चलन है और हर होटल या वरसाट्ामे्आसानी से उपलल्ध हो राता है. अल्लू चौबे ने यहां भी उसका इंतराम कर रखा था. पर रात मे्खाना खाने वनकले तो एक बडा वबच्छू अवनल चौबे के पैर के नीचे आ गया. चप्पल पहने थे इसवलए बच गये. पर दहशत ऐसी की रसोई तक राकर लौट आये. खाना कमरे पर ही देने को कह वदया. इससे पहले तीसरे पहर रंगल मे्वनकले तो वरप्सी से इतने वहचकोले लगे वक बैठना मुब्ककल हो गया. यह रंगल भी रंगल रैसा है. हर चार कदम पर वरप्सी के आसपास बडी मकडी का कोई न कोई राला आ राता. सूरर उतर रहा था. कही धूप कही छाया थी. रंगल के सामने के एक वहस्से मे्तालाब पर सूरर की रौशनी चमक रही थी. तालाब के एक तरि घोस्ट ट्​्ी यानी भुतहा पेड था. इस पेड की सुनहरी शाखाये् पव्​्तयां वगरने के बाद भुतही नरर आती है्, ऐसा साथ चल रहे िारेस्ट गाड्ाने बताया. सामने एक गोल पत्थर पर बैठी वकूगविशर की िोटो लेने के वलए कैमरा वनकाला तो दोनो् साथी िोटो वखंचने की मुद्ा मे्आ चुके थे. यह रंगल रानवरो्से भरा हुआ है. इस तालाब पर शाम होते होते कई रानवर पानी पीने आते है्. पर उस वदन कुछ पवरंदो्के अलावा कोई नरर नही्आया. ये उनका सौभाग्य भले हो अपना तो दुभ्ा​ाग्य था. पर रंगल ने वनराश नही् वकया. वहरन, चीतल और सांभर तो आसानी से वदखे पर रोमांचक रहा रंगली भालू और बायसन यानी रंगली भै्सा का दश्ान. रंगल से लौटते समय दो रंगली भालू वदखे रो दीमक खाने मे् इतने मशगूल थे वक वसर ऊपर ही नही्कर रहे थे. वरप्सी को ज्यादा पास ले राना ठीक नही् था. िारेस्ट गाड्ाने चेतावनी दी वक इनके खाने मे् ववघ्न डाला तो ये हमला कर सकते है्. तबतक रंगल धुंध मे्डूबने लगा था. हम डाक बंगले मे्लौटे तो वह धुंध से वघरा हुआ था..n


मास् खारपार ट हेड अरंण कुमार ‘पानीबाबा’ (पानी बाबा नही्रहे. पानी बाबा अमर रहे्. समार के वलए रीने वाला लेखक और काय्ाकत्ा​ा कभी मरता नही्. अर्ण कुमार पानीबाबा ने मौसम के अनूकूल बनने वाले भारतीय व्यंरनो्पर वलखकर स्वाद और सेहत संबंधी समार की समझ को वरंदा रखा है. उनके कालम को बंद करना संवाद के अववरल प्​्वाह को बंद करना है. इसवलए शुक्वार के सुधी पाठक बाबा की रसोई मे्वकवसम-वकवसम के स्वाद आगे भी पाते रहे्गे.)

व्यंजनो् से भरपूर सर्​्ी

मध्य फरवरी यानी वसंत के आगमन तक यि ध्यान जर्री िै डक जो कुछ खाये्वि कफनाशक िो.

ऋ

तुचय्ा​ा के अनुसार वशवशर को हेमंत का ववस्​्ार माना गया है. ठेठ सद्​्ी के दो महीनो्मे्शरीर की वैसी किकारक प्​्वृव्त बनी रहती है रैसी वक वदवाली के बाद नरला, खांसी होने लगती है. मध्य िरवरी यानी वसंत के आगमन तक यह ध्यान रर्री है वक रो कुछ खाएं वह किनाशक हो, गरमाई देने वाला हो, भूख-प्यास यानी रठराब्गन को सुरव्​्कत बनाये रखने वाला हो- वन्ा​ा वसंत और गम्​्ी के दौरान संवचत कि नये-नये रोग ववकार गले लगा लेगा. इस मौसम मे्शाम की दावत मे्बहुत एहवतयात रर्री है. नवंबर से िरवरी अंत तक यवद शाम की दावत चार-पांच बरे से शुर् नही्है और स्वागत सत्कार शाम आठ बरे ही शुर्होना है तो तमाम चटरपटर व्यंरनो्, वरन्हे्आरकल ‘स्नैक्स’ वगैरह कहते है्, को वसरे से नकार दीवरये. मेहमान का आते ही गम्ा​ा-गरम सूप या रसम-पपड्म से स्वागत कीवरये और पहला स्टॉल तत्​्े हलवे का लगाइये. चाहे रो हलवा हो गारर, मूंग दाल, शकरकूदी, बादाम या आटा-बेसन का, ढाक के हरे पत्​्े पर ही परोवसए, तावक पत्​्ा हथेली पर रखते ही हथेली से ह्दय तक गरमाई का अहसास हो राये. प्म् ख ु आकष्ण ा और लगभग नया सुझाव है - कच्​्ी हल्दी की वववशि्​् सल्री और सरल सादा मारवाड्ी िुल्का. इसमे् आधे िाल्गुन तक (होली से पंद्ह वदन पहले तक) पंद्ह वदन वसंत के भी रोड् लीवरए. इन ढाई महीनो्मे्पौष से लेकर मध्य िाल्गुन तक शुद् गौघृत मे् बनी हल्दी-लहसुन या हल्दी-खबखस मे् बनी सल्री से बेहतर न कोई व्यंरन/पकवान है, न सद्​्ी से बचने की औषवध, न वसद्​् वारीकरण रसायन और न अन्य कोई शाही दावत. नुस्खे से पहले यह स्पि्​् कर दे् वक मारवाड्ी िुल्का उसी को कहते है् रो आकार मे् बड्ा, वरन मे् िूल से हल्का, दोनो् परत इकसार, वबलकुल वबना काली वचत्ी्, लेवकन तोड्ने-चबाने मे् कुरकुरा हो. ऐसे िुल्के बनाने का ववस्​्ृत उल्लेख इस संकलन मे्उपलल्ध है. हल्दी की सल्री बनाना रान लीवरए और िरवरी तक न्यूनतम चार बार अवधकतम आठ बार इसका प्​्योग कर लीवरए- बुरुग्ो् को सदी से राहत वमल रायेगी, बच्​्ो्और युवरन के अंगो्मे्तेल पानी लग रायेगारोड्खुल राये्गे, ठंडी हवा का झो्का अच्छा लगने लगेगा. नुस्खा एक सेर कच्​्ी हल्दी के अनुपात मे्वलख रहे है्. आप री चाहे वकलो मे्- चाहे पौ्ड मे्और छंटाक मे् िैला सकते है्. सामग्​्ी- (1) सवा सेर गौघृत, (2) सवा सेर पंच मेवा (पाव भर वकशवमश, बादाम, कारू, मखाना और छुआरा) (3) ढाई सेर गाय के

दूध का घर रमाया दही,(4) पाव भर बीर झड्ी सूखी सुख्ा लाल वमच्ा, (5) पाव भर सूखा साबूत धवनया, (6) आधा पाव सेध ् ा नामक, (7)सेर भर कच्​्ी हल्दी,(8) सेर भर लहसुन (रो लहसुन से परहेर करते हो् वह पाव खसखस, पाव मगर, पाव बादाम का मसाला बना ले्). तैयारी- बादाम िभगो कर छील ले् (उबाल कर नही्), हल्दी अच्छी तरह धोकर छीले्, लहसुन छील कर धो ले्, वमच्ा और धवनया धोकर वभगो दे्- यह पांचो् चीर वसल पर महीन पीसनी चावहए या दव्​्कणी गोल पत्थर मे्. नई तरह के दो-तीन पत्थर वाले ग्​्ाइंडर मे् भी वपसाई ठीक हो राती है. छुआरो्की धो वभगोकर कतरन कटे्गी. मखाने पोछ सुखाकर दो टुकड्ो्मे्काटने चावहए. वकशवमश, कारू धोकर िरहरे कर ले्. एक सेर हल्दी की सल्री के वलए दस-बारह सेर अंदार की कड्ाही या भारी भगोना होना चावहए. बत्ान या तो कच्​्ेया पके्लोहे के, या भरत के या पीतल के कलईदार- यह रो आरकल प्​्ेशर कुकर वाला सिेद मेटल चल पड्ा है - इसके वबलकुल नही्. वववध- कड्ाही चढ्ाकर उसमे्आधा सेर घी चढ्ाएं- पहले लहसुन या खसखस-मगर की चटनी भूने. गुलाबी हो राये् तो उसमे् वमच्ा का घोल डाले्, वमच्ा घी छोड् दे् तब धवनया, वह भी भुन राये तब दही डालकर भुनाई करे्. राला पड् राये तो हल्दी और बादाम की वपट्​्ी डाल दे्. बीच-बीच मे् रर्रत के वहसाब से घी की मात्​्ा बढ्ाते रहे्. लेवकन पाव भर घी मेवा छौ्कने के वलए अवक्य बचा ले्. रब हल्दी और बादाम की वपट्​्ी भी वसंक राये्तो अंदार से सेर-सवा सेर पानी लगाकर (छुआरो् की कतरने् डाल कर ढंक दे्- मंदी आंच पर कम-से-कम घंटा भर धीमा-धीमा खदबदाने दे्. सल्री तैयार है- बस बचे पाव घी को छोटे भगोने मे् पकाएं उसमे् कारू और मखानो्को हल्का गुलाबी भूनकर वकशवमश भी िुला ले्. यह तड्का लगाते ही सल्री परोसने के वलए तैयार है. तैयार माल लगभग आठ सेर बैठेगा रो अस्सी से सौ खाने वालो्के वलए पय्ा​ाप्त होगा. आधुवनक स्वास्थ्य ववज्​्ान अभी हारमोनल थेरैपी के ववकास मे् प्य् ासरत है. ऐसी वकसी औषवध का हाल विलहाल आववष्कार ही नही्हुआ है रो शरीर मे्ब्सथत हारमोनल व्यवस्था-इंडोक्​्ाइन वसस्टम को प्​्भाववत कर सके. हरारो् बरस पुरातन आयुव्ेद के वनघंटु मे् इस सल्री का वरक्​् उपलल्ध है. धन्वंतरी और सुश्ुत पर ववश्​्ास न हो तो स्वयं मात्​् आधा पाव सल्री मे्दो िुल्के चूर कर आरमा लीवरए- वदल, वदमाग और आत्मा तक तरावट-तारगी गरमाहट का अहसास हो राये्तो बंधु-बांधवो्के संग n इस वववशि्​्व्यंरन का प्​्योग शुर्कर दे्. शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 45


मास् बि्टल्महेड

रवी्द्नार ठाकुर और डवक्तोडरया आेकांपो की डमत्​्ता की किानी डवडचत्​्िै. इस संबंध को पडरभारा मे्बांधना मुड्िकल िै, लेडकन उसकी माड्मषकता असंडदग्ध िै. इस किानी पर बन रिी डफल्म जल्दी िी उपलब्ध िोगी.

कवि गुरु और विदेविनी

रवी्द्नाि ठाकुर और भवक्तोभरया आेकांपो: दो संस्कृभतयो् की दोस्​्ी

सतीश हसंि

भा

रत के एक महान कवव और अर्ट्े ीना की एक बड्ी सावहब्तयक हस्​्ी. रवी्दन् ाथ ठाकुर और ववक्तोवरया आेकांपो की वमत्त् ा की कहानी वववचत्​् है, वरसमे् दोनो् एक-दूसरे को प्भ् ाववत करते चलते है.् दोनो् के इस संबध ं को पवरभाषा मे् बांधना मुव्ककल है, लेवकन उसकी माव्मक ा ता असंवदग्ध है. विल्म वनद्श ्े क पाल्लो सीरर और भारतीय विल्म वनद्श ्े क सूरर कुमार की नई िीचर विल्म ‘वथंवकूग ऑि वहम’ के केद् ् मे् यही कथा है. अंगर ्े ी सब टाइटल के साथ बांगला, अंगर ्े ी, िेच ् एवं स्पने ीश मे्अगले साल अप्ल ्ै महीने मे्वरलीर होने वाली इस विल्म मे् ववक्टर बनर्​्ी ने रवी्दन् ाथ टैगोर की और अर्ट्े ीना की अवभनेत्ी एवलयोनोरा वेकस ् लर ने ववक्तोवरया ओकेप् ो की भूवमका वनभाई है. राईमा सेन 46 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

ववश्भ् ारती की एक छात्​्ा कमली की भूवमका मे् है् तो अर्ट्े ीना के वथयेटर एवं विल्म अवभनेता हेकट् र बोड्​्ोनी ववश्​् भारती के एक वशक्क ् िेवलक्स की भूवमका मे.् अर्ट्े ीना के विल्म वनद्श ्े क पाल्लो सीरर के मुतावबक इस विल्म को बनाने का आइवडया भारत के अर्ट्े ीना मे् पदस्थावपत रारदूत श्​्ी रंगरार ववश्न् ाथन ने वदया था. विल्म पर वष्ा 2008 मे् काम शुर् हुआ, लेवकन अथ्ाभा ाव एवं टैगोर व ववक्तोवरया के बीच के संबधं ो्के बारे मे्पय्ापा त् अनुसधं ान नही्हो पाने के कारण टैगोर की 150 वी्वष्गा ांठ पर विल्म को पद्​्ेपर नही्उतारा रा सका. विल्म के समांतर मे्दो प्म्े कथाएं चलती है.् पहली रवी्दन् ाथ टैगोर और ववक्तोवरया ओकेप् ो की बीच और दूसरी िेवलक्स और कमली की. दोनो् प्म्े कथाओ् मे् प्म्े के अंतस मे् दैवहक आकष्ण ा नही्है. उनके संबधं ो्मे्ववरह की अकुलाहट भी

‘भिंभकंग ऑि भहम’: भवक्टर बनज्​्ी और राइमा सेन नही्है. इस प्म्े मे्समप्ण ा का भाव है. एक-दूसरे के वलए कुछ करने की बेचनै ी है. उनके वरक्ते नदी और मछली के समान है.् एक दूसरे से रुडे हुए भी और अलग भी, लेवकन एक-दूसरे के पूरक. उनके संबधं ो्मे्भौवतकवाद की ववसंगवतयां नही्है.् बस, एक-दूसरे के प्व्त अपार स्नहे उनके प्म्े का मम्ा है. कहानी रवी्दन् ाथ टैगोर और उनके समांतर कालखंड की एक अर्ट्े वे नई लेवखका ववक्तोवरया ओकेप् ो, रो अर्ट्े ीना मे्ही एक सावहब्तयक पव्​्तका की संपादक थी्, के इद्-ा वगद्ाघूमती है. ववक्तोवरया ओकेप् ो सावहब्तयक एवं सांसक ् वृ तक सरोकारो् के प्व्त समव्पता मवहला थी्. ‘वथंवकूग ऑि वहम’ की शूवटंग भारत और अर्ट्े ीना मे् की गयी है. भारत मे् इसकी शूवटंग शांवतवनकेतन एवं कोलकत्​्ा के रोड्ासांको्मे्की गयी और अर्ट्े ीना मे्सैन इसीदरो मे,् रो ल्यनू स आयस्ासे 35 वकलोमीटर की दूरी पर ब्सथत है. यह


वह स्थान है, रहां रवी्दन् ाथ टैगोर 1924 मे् ववक्तोवरया ओकेप् ो से वमले थे. ववक्तोवरया को रब पता चलता है वक टैगोर थोडे समय के वलए शहर मे्है्तो वह तुरतं उनके सवचव से वमलने का समय लेती है, हालांवक टैगोर के थके होने के कारण उनकी संव्कप्त मुलाकात हो पाती है. बाद मे्ववक्तोवरया अपने करन के घर मे,् रो नदी के वकनारे था टैगोर के रहने की व्यवस्था करती है. आर नदी का र्ख बदल चुका है. इसवलए, टैगोर वरस घर मे्र्के थे, शूवटंग उस घर की बराय 1895 मे्बने उससे वमलते-रुलते घर मे्की गयी है. ववक्तोवरया के रीवन पर रवी्दन् ाथ टैगोर का रबद्स ा ्प्भ् ाव रहा था. ववक्तोवरया सबसे पहले गीतांरवल के फेच ् अनुवाद को पढकर टैगोर से प्भ् ाववत हुई थी्. बाद मे् ववक्टोवरया ने टैगोर की दूसरी रचनाओ्को भी पढा, वरससे ववक्टोवरया का टैगोर के प्व्त आकष्ण ा बढता गया. ववक्तोवरया का व्यब्कतत्व और कृवतत्व भी कािी प्भ् ावशाली था. यही वरह है वक ववक्तोवरया से वमलकर टैगोर भी उनसे प्भ् ाववत हुए वबना नही्रह सके. कहा राता है वक ववक्तोवरया के संपक्क मे् आने के बाद ही टैगोर का र्झान पेव्टंग की तरि हुआ था. ववक्तोवरया के प्य् ासो् से ही 1930 मे् टैगोर की वचत्क ् ला प्द् श्ना ी का आयोरन पेवरस मे्वकया रा सका था. रवी्दन् ाथ टैगोर, ववक्तोवरया ओकेप् ो, िेवलक्स और कमली के वकरदारो्के रवरये भारत और अर्ट्े ीना के सावहत्य, सभ्यता, संसक ् वृ त और परंपरा का वमलन होता है. टैगोर और ववक्टोवरया के संबध ं ो् के बारे मे् ववक्टर बनर्​्ी कहते है् वक दोनो्के बीच मन का वमलन हुआ था. ववक्तोवरया को टैगोर की सृरनशीलता, बौव्​्दकता और सामावरक सरोकार पसंद थे तो टैगोर को ववक्टोवरया की सरलता, सावहत्य के प्व्त प्व्तबद्त् ा और कम्ठा ता पसंद थी. टैगोर ने अपनी कववताओ्, पेव्टंग और गीतो् मे् ववक्तोवरया को सराहा है तो ववक्तोवरया स्वयं को मायाराल से बाहर वनकालने का श्य्े टैगोर को देती है. िेवलक्स ववश्भ् ारती मे् वशक्क ् है् और कमली उनकी छात्​्ा. िेवलक्स अर्ट्े ीना मे् रेल के कैवदयो् को पढाते थे. उन्हे् कुछ मनोवैज्ावनक समस्याएं है,् वरनसे उबरने मे् शांवतवनकेतन प्व् ास के दौरान कमली उनकी मदद करती है. इस अववध मे् दोनो् के बीच एक ऐसा संबधं ववकवसत होता है, वरसमे्वसि्कसमप्ण ा का भाव है. शायद इसी वरह से शांवतवनकेतन से ववदा होने के दौरान िेवलक्स अपने सभी छात्​्ो् से भावहीन होकर वमलते है,् लेवकन कमली की बारी आने पर भावुक हो राते है.् टैगोर ने अपनी कववता ‘पूरबी’ ववक्तोवरया को समव्पता की थी. वे ववक्तोवरया को एक दूसरा नाम ववरया भी देते है.् टैगोर वलखते है,् ‘आमी चीनी गो चीनी तोमारे, ओगो ववदेवशनी...तुमी

थाको वसंधु पारे, अगो ववदेवशनी’ अथ्ाता ‘मै्तुमह् े् रानता हू,ं रानता हू,ं ओह ववदेशी मवहला, तुम रहती हो ओ ववदेवशनी...’ इसतरह धीरे-धीरे ववक्तोवरया का टैगोर के प्व्त आकष्ण ा बढता चला राता है, वरसके कारण ववक्तोवरया का अपने पवत से संबधं कडवाहटपूणा्हो राता है. विल्म के पटकथाकार रेरोनीमो टूबस े के मुतावबक, टैगोर और ववक्तोवरया के बीच हुए पत्​्ाचार को देखने से साि हो राता है वक दोनो्के बीच प्म्े संबधं था, लेवकन भारत मे्टैगोर की रो छवव है, उसे देखते हुए इस विल्म के केद् ्मे्दोनो् के बीच के मधुर वरक्तो् के ववववध आयामो् को आध्याब्तमक दृव्िकोण से वचव्​्तत वकया गया है.् भवक्तोभरया ओकांपो: एक छभव और

सूरज कुमार:संस्कृभतयो् का संगम

विल्म मे्टैगोर का वकरदार वनभाने वाले ववक्टर बनर्​्ी कहते है्वक ‘वथंवकूग ऑि वहम’ की कहानी पढने के बाद ही वे टैगोर के रीवन रंगो्के अनछुए गुलाबी पहलूओ्से र्बर्हुए. टैगोर और ववक्तोवरया की मुलाकात दो बार ही हुई थी, लेवकन दोनो्के बीच संबधं 1924 से 1941 तक बना रहा. टैगोर के रीवन के अंवतम 10 साल तक दोनो्के बीच कोई मुलाकात नही् हुई, विर भी दोनो्एक दूसरे से रुडे रहे. टैगोर की मृतय् ु के बाद ववक्तोवरया उनके बेटे रतीन्दन्​् ाथ को संबोवधत पत्​्मे्एक लाइन ‘वथंवकूग ऑि वहम’ वलखती है. विल्म का नाम पत्​्मे्वव्णता इसी पंबक् त से वलया गया है. टैगोर के प्व्त ववक्तोवरया के समप्ण ा को दृव्िगत करके ही 1979 मे्ववक्तोवरया की मृतय् ु के बाद उनके घर को ‘रवीन्दन् ाथ टैगोर मेमोवरयल’ मे्तल्दील कर वदया गया. टैगोर मूलतः कवव, लेखक, वचत्क ् ार, गायक, संगीतकार, समार सुधारक, ववचारक एवं दाश्वा नक थे. उनका मकसद सावहत्य एवं संसक ् वृ त को समृद् करने के अलावा समार के आव्थक ा और सामावरक र्प से कमरोर तबके का उत्थान करना भी था. वलहारा, टैगोर और ववक्तोवरया के बीच के मधुर संबधं ो्के अलावा टैगोर के रीवन और समार के प्व्त उनके दृव्िकोण को समझने और लोगो् तक उसे पहुच ं ाने के वलए विल्म मे् वशक्​्ा, ग्​्ामीण पुनव्नमा ा्ण ा , मानवता आवद ववषयो् के संदभ्ामे्टैगोर के ववचारो्और सरोकारो्को भी समावहत वकया गया है. ‘वथंवकूग ऑि वहम’ के भारतीय वनद्श ्े क सूरर कुमार राने-माने टीवी सीवरयल एवं ववज्​्ापन विल्मो् के वनम्ाता ा है.् सूरर वबहार के नालंदा वरला के पैशोर गांव के रहने वाले है.् वष्ा 1994 मे्सूरर ने भारतीय रनसंचार संसथ् ान मे् दावखला वलया. वहां से ववज्​्ापन मे् स्नातकोत्र् वडप्लोमा करने के बाद वे सीवरयल और विल्मो् का वनद्श ्े न और वनम्ाण ा कर रहे है.् अपने कवरयर के शुरआ ् ती वदनो्मे्ही दूरदश्ना के वलए विल्म पर आधावरत सीवरयल ‘विल्म इंवडया’ का 1100 एवपसोड बनाकर सूरर ने एक नया कीव्तमा ान स्थावपत वकया था. दूरदश्ना के वलए ही सूरर ने ‘एक प्यार का नगमा’ नामक सीवरयल का 800 एवपसोड बनाया था. विल्म के दूसरे वनद्श ्े क पाल्लो सीरर, अर्ट्े वे नई विल्मी दुवनया के रानीमानी हस्​्ी है.् उनकी रचनाओ्मे्सेकड्े फैवमली (1988), ग्​्े िायर (1994) आवद बेहद ही चव्चता रहे है.् पाल्लो सीरर का भारत से पुराना संबधं रहा है. वे एक लंबे अरसे से भारत आते रहे है.् सीरर ने 1996 मे्रारस्थान के रोधपुर और रैसल े मेर मे्‘यूवनकाव्नया ो-गाड्न्े ऑि फूइ् ट्स’ नामक विल्म का वनम्ाण ा एक भारतीय विल्म वनद्श ्े क के साथ संयकु त् र्प से वकया था. गोवा मे्2007 मे्हुए अंतर्ाष ा ्ीय विल्म िेबस् टवल मे्भी पाल्लो सीरर रूरी के एक सदस्य थे. n शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 47


मास् बिल्ट महेड

पहलवानी और भसनेमा के बीच आडमर खान की डफल्म 'दंगल' िोने से पिले िी चच्ाष मे्िै. इसके डलए उन्िो्ने अपना वजन भी काफी बढ्ाया. डफल्म की कामयाबी को लेकर आश्​्स् इस अडभनेता से बातचीत के कुछ अंश. िहर मृदल ु

आ

वमर खान की बहुचव्चता विल्म 'दंगल' की वरलीर मे् कािी कम वदन रह गये है.् उन्हो्ने अपनी वववशि्​्शैली मे्इसका प्म् ोशन भी शुर्कर वदया है. वपछले वदनो्एक वीवडयो रारी कर उन्हो्ने वदखाया वक कैसे उन्हो्ने पहले वरन बढ्ाया, विर उसे कम वकया. आवमर खान से बातचीत के कुछ अंश: अब आपका शरीर पुरानी शेप मेु आ िुका है, िेवकन इसके विए आपको बहुत जुयादा मशकुतु करनी पडुी. कुया 'दंगि’ मेु महावीर फोगट के वकरदार ने आपको अवभनय कवरयर की सबसे बडुी िुनौती पेश की? एकदम से ऐसा नही्कह सकता क्यो्वक मै् 48 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

अपने हर वकरदार को बेहद चुनौतीपूण्ा मानता आया हू.ं हां इस वकरदार के वलए शारीवरक श्म् बहुत करना पड्ा यह मै्मानता हू.ं यहां तक वक अपनी रान भी रोवखम मे्डालनी पड्ी. डॉक्टरो् ने साि कर वदया था वक इस उम्​्मे्ऐसा प्य् ोग शरीर के साथ नही् वकया राना चावहये. वरन बढऩे पर कोलेसट् ्ॉल, ल्लड प्श ्े र, शुगर सब बढ् राते है.् वदल की समस्या हो सकती है. 50 की उम्​्के बाद वैसे भी कई तरह की वदक्त् े्होती है्. ररा सी असावधानी भारी पड् सकती है. वनद्​्ेशक वनतेश वतवारी ने सुझाव वदया था वक शरीर को मोटा वदखाने के वलए कृव्तम तरीके अपनाये रा सकते है् लेवकन मै् खुद को धोखा नही्दे सकता था. वकसी वकरदार को वनभाने मेु आपके विए सबसे जुयादा अहवमयत वकस िीज की होती है? कहां से पुरुे णा िेते है?ु मेरे वलए वस्कप्ट् ही सबसे ज्यादा महत्वपूणा् होती है. मै्अपनी वस्कप्ट् कई बार पढ्ता हूं और अपने वकरदार की काया मे् प्​्वेश करने की कोवशश करता हू.ं रीवडंग के बाद ही समझ मे्आ राता है वकरदार की रेर ् क्या होगी और मै्उसे वकतने यकीन से वनभा पाऊूगा. मुझे उस वकरदार को अपनाने के वलए क्या-क्या करना होगा? वजन बढुाने के विए आपने वही सब काम वकये वजनके विए डॉकुटर मना करते हैु. आपने समोसा, बडुा पाव, जिेबी, िीज

आभमर खान: जोभखम लेने को तैयार बगुमर आवद खाये. अब आपका जी नहीु ि​ि​िाता इन िीजोु को देखकर? ललचाता है. बहुत मुबक् कल है अपने आपको काबू करना. खायी हुई चीर का स्वाद देखते ही रुबान पर आ राता है. मन को मारना पड्ता है. लगता है वक थोड्ा स्वाद तो वलया रा सकता है. यह सच है वक मैन् े छह महीने तक आम आदमी की तरह भरपूर वरंदगी री. तमाम चीरो्का खूब लुति ् वलया. इसकी एक वरह यह थी वक मुझे अपने न्यूट्ीवनस्ट डॉ. वनवखल धुरंधर पर पूरा भरोसा था. उनकी मदद से मै् अपने शरीर को दोबारा पुराने शेप मे्लाने मे्कामयाब रहा. इस काम मे्बॉडी ट्न्े रो्की भी बहुत भूवमका रही. आपकी मां और पतुनी दोनोु ही बहुत विंवतत थे वक वकरदार को वनभाने के िकु​ुर मेु आपने अपनी जान जोवखम मेु डाि दी है? सभी बहुत खुश है्वक मै्पहले की तरह ही चुस-् दुरस ् ्हो चुका हू.ं मेरा बेटा आराद बहुत खुश है. पहले रब वह लाड् मे् आकर मुझसे वलपटता था, तो बेचारा मायूस हो राता था. मेरा पेट इतना आगे आ चुका था वक उसकी बाहो्का घेरा कािी कम पड्राता था. लेवकन अब वह ऐसा कर सकता है. शूवटंग के अनुभव शेयर कीवजए. यह एक सच्​्ी भारतीय विल्म है, इसकी शूवटंग तमाम देसी लोकेशन पर हुई है. इस विल्म से गांव कस्बो्के लोग तो रुडग्े े ही शहरो्के लोग


भी इसको देखना पसंद करे्गे. हालांवक रब मै् इसकी शूवटंग कर रहा था तब लोगो्की प्व्तव्​्कया एकदम ववपरीत थी. लोगो् ने गुपचुप अंदार मे् यह तक कह डाला वक यह मेरी आवखरी विल्म हो सकती है क्यो्वक अब मै्शायद अपने वरन पर दोबारा काबू नही्पा सकू.ू बढ्ेहुए वरन पर वनयंत्ण करना मेरे वलए वास्​्व मे् बहुत बड्ी चुनौती थी. यही वरह थी वक रब वनतेश वतवारी ने युवावस्था के महावीर िोगाट से शूवटंग की शुरआ ् त करने को कहा तो मैन् े उनको सलाह दी वक वे बाद वाले वहस्से की शूवटंग पहले करे्.म्चूंवक अगर मै्ने युवावस्था वाली शूवटंग पहले कर दी तो मेरे पास बढ्े हुए वरन को दोबारा कम करने की कोई वरह नही्होगी. तब शायद मै्वरन कम न कर पाऊू. 'दंगि' की शूवटंग कई तरह से मुशकु कि रही. आपको िोटेु भी काफी िगीु? हां, इस विल्म की शूवटंग के दौरान मै्बीचबीच मे् चोवटल होता रहा. मेरी पीठ, कूधे और कोहनी मे्चोट आयी. मै्कम से कम सात बार घायल हुआ. एक बार तो डॉक्टरो् ने कह वदया वक कम से कम दो महीने तक वबस्​्र पर ही रहना होगा. लेवकन मैन् े दो सप्ताह मे्ही सुधार कर वलया. अगर आपको दोबारा कोई ऐसी विुकुपुट वमिी वजसमेु पहिे से वजन बढुाना पडुे तो आप उसमेु काम करेगु ?े अगर वस्कप्ट् पसंद आ गयी तो वरन बढ्ाने घटाने का काम मै्दोबारा कर सकता हूं लेवकन वकसी पहलवान का वकरदार इतनी रल्दी नही् दोहराऊूगा. गु​ुामीण इिाकोु मेु एक पुरानी कहावत है वक पहिवानोु की बुवुि उनके घुटनोु मेु होती है. आपकी कुया राय है? सुना तो मैन् े भी यही था वक पहलवानो्की

दंगल का एक दृि्य: नयी प्​्भतभाओ् का आगाज

बुव्द तुलनात्मक र्प से कम होती है लेवकन यह सोच सही नही्. शायद शरीर और डीलडौल को देखकर यह कहावत बनी होगी. मैन् े तो यही पाया है वक अगर आप तीक्ण ् नही्है्तो आप पहलवानी कर ही नही्सकते. सचाई यह है वक पहलवान कभी मंदबुव्द नही्हो सकता. सिल पहलवान हमेशा बुव्दमान होगा. खेिोु पर आधावरत जुयादातर वफलुमेु बॉकुस ऑवफस पर नाकाम कुयोु हो जाती है?ु इसवलए क्यो्वक विल्मकार अक्सर खेलो् की लोकव्​्पयता को भुनाने के चक्र् मे्रहता है. वह स्क्ीन प्ले पर ध्यान ही नही् दे पाता. हर कहानी की एक आत्मा होती है उसे नररअंदार नही्वकया रा सकता है. ज्यादातर खेल विल्मो् ‘पीके’ मे् आभमर और अनुष्का शम्ाश: यादगार अभभनय

मे्आत्मा गायब रहती थी और अवतवरक्त चमकदमक को तवज्​्ो दी राती थी. लेवकन अब यह वमथ टूट रहा है. हाल मे्वरलीर विल्म ‘सुलत् ान’ भी सुपरवहट रही और ‘धोनी’ भी. दोनो् ही कहावनयो् मे् आत्मा है और वे अवतवरक्त चमकदमक से दूर है.् 15 साल पहले मेरी विल्म ‘लगान’ ने भी वस्कप्ट् के चलते ही ऐवतहावसक सिलता पायी थी. आपको िगता है वक ‘दंगि’ के बाद बेवटयोु के पुवु त समाज की सोि बदिेगी? मुझे ववश्​्ास है वक इस विल्म के बाद लोग बेवटयो्पर गव्ाकरेग् .े गीता और बबीता ने वरस तरह देश और अपने माता-वपता का नाम रोशन वकया है, वह प्र्े णादायक है. मुझे लगता है वक इस विल्म के बाद माता-वपता और बेवटयो् के भीतर एक नया आत्मववश्​्ास पैदा होगा और वे अपने रीवन मे्कुछ बड्ा काम करने की सोचेग् ी. पहिवान भी उमुमीद िगाये हैु वक 'दंगि' के बाद उनकी भी दशा सुधरेगी. उनुहेु गुिैमर वमिेगा और जीवन सु​ुर मेु बदिाव आयेगा? मै् भी उम्मीद करता हूं वक ऐसा होगा. यह सही है वक हमारे देश मे्कभी पहलवानो्का बड्ा सम्मान था. लोग दारा वसंह या गामा पहलवान बनने के सपने देखते थे. कस्बो्और गांवो्मे्तो रोर शाम युवको् को पहलवानी वसखाई राती थी. शरीर को मरबूत बनाने का पाठ पढ्ाया राता था. लेवकन धीरे-धीरे यह संसक ् वृ त वमटने लगी. पहलवानो्की उपेक्ा होने लगी. 'दंगल' के बाद गांव और कस्बो्मे्विर से रागर्कता पैदा होगी और युवको्का ध्यान पहलवानी की ओर आकव्षता होगा. n शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017 49


अंितम पन्ना सुधीरेंदं शमंाश

काग्ज्ी मुद्ा के मुद्े

अगर कागजी मुद्ा का खात्मा िी डवकल्प िै तो डवकडसत देशो्मे्इसका काफी पिले अंत िो जाना चाडिए रा.

इ

समे् दो राय नही् वक ववमुद्ीकरण के वनण्ाय के बाद नकदी लोगो् के वलए अवभशाप बन गयी है. कम से कम उन लोगो्के वलए तो अवक्य रो बै्को्के बाहर पंब्कतबद्​्खड्ेअपनी बारी की प्​्तीक्​्ा कर रहे है्. नकदी की इस अप्​्त्यावशत तंगी ने कई लोगो्को चवकत कर वदया है और वे सोच रहे है्वक क्या वाकई नकदी रवहत या कैशलेस होना ही भववष्य की तकदीर है? यह संभव है लेवकन यह भी सच है वक दुवनया भर मे्वैकब्लपक भुगतान माध्यमो्मसलन प्लाब्सटक करे्सी और इलेक्ट्ॉवनक नकदी हस्​्ांतरण की सुववधा के बावरूद कागरी मुद्ा का चलन खत्म नही्हुआ है. अवधकांश लोग नकदी पसंद करते है्. दोस्​्ोयेव्स्की के उपन्यास ‘द हाउस ऑि द डेड एक्सप्​्ेशंस’ से शल्द उधार ले्तो मनी इर कॉइंड वलबट्​्ी यानी मुद्ा एक तरह की स्वतंत्ता है. अगर कागरी मुद्ा का खात्मा ही श्ष ्े त् म ववकल्प है तो ववकवसत देशो् मे् इसका बहुत पहले अंत हो राना चावहये था. लेवकन इसके बराय ववकवसत देशो्मे्प्व्त व्यब्कत नकदी की मात्​्ा भारत रैसे ववकासशील देशो् की तुलना मे् बहुत अवधक है. अमेवरका मे् प्​्वतव्यब्कत औसत मुद्ा रहा 4200 डॉलर है वही् भारत मे् प्​्वत व्यब्कत नकदी बमुब्ककल 171 डॉलर है. प्​्माण बताते है्वक इस नकदी का आधा से अवधक वहस्सा बेनामी रहता है. यानी कर प्​्शासन की नररो् से दूर. आश्​्य्ा नही् वक अमेवरका मे् ववकवसत कर व्यवस्था के बावरूद सालाना करीब 500 अरब डॉलर की कर वंचना होती है. भूवमगत अथ्ावय् वस्था के बारे मे् पय्ा​ाप्त रानकारी नही् है. अनुमानो् के मुतावबक उभरती अथ्ाव्यवस्थाओ्मे्भी इस बारे मे्पूरी रानकारी नही्रुटायी रा सकी है. यही वरह है वक अमेवरका के रीडीपी मे्इसका योगदान 7.1 प्​्वतशत और बेब्लरयम की अथ्ाव्यवस्था मे् 17.9 प्​्वतशत है. औसतन देखा राये तो दुवनया भर के रीडीपी मे् भूवमगत अथ्ाव्यवस्था की वहस्सेदारी करीब 14 प्​्वतशत है. स्वीडन रैसे देशो् मे् रहां हाल के वष्​्ो्मे्नकदी के इस्​्ेमाल नाटकीय कमी आयी है वहां भी भूवमगत अथ्ाव्यवस्था का स्​्र 15 िीसदी के करीब है. हमारे देश मे्इसके 24 से 30 िीसदी रहने का अनुमान लगाया राता रहा है. यह अवधारणा दुवनया भर मे् पहेली बनी रही है. इसके वलए तमाम अवैध गवतवववधयां भी रवाबदेह है्. हालांवक भूवमगत अथ्ाव्यवस्था मे् वकसान, दैवनक श्​्वमक और छोटे कारोबारी भी आते है्. यही वरह है वक ववमुद्ीकरण के रवरये काला धन खत्म करने की कोवशश के अपने रोवखम है्. हमारे देश मे्असर अवधक व्यापक है क्यो्वक करीब 40 िीसदी गवतवववधयां असंगवठत क्​्ेत् से रुड्ी है्. यही वरह है वक ववमुद्ीकरण ने समार के एक बड्ेऔर संवेदनशील तबके की आरीववका को प्​्भाववत वकया है. सामान्य बै्वकूग गवतवववधयो्को बहाल होने मे्कई महीने का समय लग सकता है. ऐसे मे्सरकार को अपने ववमुद्ीकरण के 50 शुक्वार | 1 से 15 रनवरी 2017

कदम और आतंकवाद को सीवमत करने तथा अन्य लाभो्को सही सावबत करने मे्कड्ी मशक्​्त करनी होगी. देश मे्ं करवंचना का स्​्र अवक्य वचंता का ववषय रहा है. इसने सरकार को प्​्ेवरत वकया वक वह ववमुद्ीकरण करे. लेवकन इस दौरान सरकार ने पूरी तैयारी नही् की और नयी मुद्ा अपय्ा​ाप्त होने के कारण िायदे की रगह नुकसान सामने आया. अनुभव बताता है वक रम्ानी और यूरोप समेत कई यूरोपी देश वरन्हो्ने कर व्यवस्था सुधारने के वलए खुदरा नकद भुगतान को सीवमत वकया, उन्हे् यही पता चला वक यह मुद्ा कही् अवधक व्यापक है. कई अध्ययन बताते है् वक औसत 25 िीसदी या अवधक नकदी कभी प्​्चलन मे्नही्आती. गहरायी से देखा राये तो यह स्पि्​् है वक कर वंचाना दुवनया भर मे् खूब होती है. अमेवरका मे्यह रीडीपी का तीन िीसदी रबवक भारत मे्10 िीसदी है. कोई कर नही् चुकाना चाहता क्यो्वक लोगो् को लगता है वक कही्अवधक धनी लोग कर चोरी करते है्. यही वरह है वक मौका वमलने पर अक्सर कानून का पालन करने वाले लोग भी कर वंचना का मौका नही् चूकते. कोई भी ऐसी रगह नही् रहना चाहता रहां कानून मरबूती से प्व् व्तता होते हो्. सामावरक और मनोवैज्ावनक स्र् पर कर व्यवस्था लोगो् की भावनाओ् को ध्यान मे् रखकर नही् बनायी राती. इसवलए राज्य के समक्​्यह अहम चुनौती रहती है वक वह वनरता के अवधकार और समार मे्कानून प्​्वत्ान की रर्रत के बीच संतुलन कायम करे. इसका यह अथ्ा नही् वक सरकार को कानून लागू ही नही् करना चावहये. परंतु कड्े रारकोषीय उपाय अपनाकर संकीण्ारारनीवतक वहतो्का पालन करने से लोगो् मे्भरोसा नही्पैदा होता. लॉकर मे्छुपाकर रखे गये काले धन को सामने लाने की इस कोवशश से भ्​्ि्ाचार खत्म करने की लोकलुभावन धारणा की पुव्ि हो सकती है लेवकन हकीकत यही है वक भ्​्ि्ाचार नकदी तक सीवमत नही्है और वह अरसे तक चलेगा. हालांवक ववमुद्ीकरण से आपरावधक गवतवववधयो् को अस्थायी र्प से रोका रा सकता है लेवकन आतंकी संगठन लेनदेन की रो प्​्व्कया अपनाते है्वह कानूनी अथ्ाव्यवस्था से परे है. इस बात से भी इनकार नही् वकया रा सकता है वक इतनी बड्ी मात्​्ा मे्बेनामी और ववमुव्दत नकदी रन नीवत के वलए भी समस्या है. लेवकन उच्​्मूल्य वग्ाके नये नोट रारी करने के पीछे क्या उद्​्ेक्य है यह भी स्पि्​् नही्. हर बीतते वदन के साथ यह स्पि्​् होता रा रहा है वक सरकार ने इस वनण्ाय मे्रल्दबारी की. सरकार को अपने इस वनण्ाय को सही सावबत करने की कोवशश मे्ऐसे और कदम उठाने से भी बार आना चावहये. लोगो्का भरोसा और वनवेशको्का ववश्​्ास तोडना उसे आगे चलकर महंगा पड्सकता है. इतना बड्ा रोवखम उठाना ठीक n (लेखक राने-माने सामावरक काय्ाकत्ा​ा है्.) नही्.


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