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Shukrawaar 1 15 january 2016 medium quality

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वर्ष9 अंक 1 n 1-15 जनवरी 2016 n ~ 20

मंदिर मुद्ा दिर स े


www.shukrawaar.com

वर्ष9 अंक 1 n 1 से 15 जनवरी 2016 स्वत्वािधकारी, मुद्क एवं प्​्काशक क्​्मता सिंह िंपादक अंबरीश कुमार िंपादकीय िलाहकार मंगलेश डबराल राजनीसतक िंपादक वववेक सक्सेना फोटो िंपादक पवन कुमार िंपादकीय िहयोगी

सववता वम्ा​ा अंजना वसंह सुनीता शाही (लखनऊ) अिनल चौबे (रायपुर) पूजा िसंह (भोपाल) अिवनाश िसंह (िदल्ली) अिनल अंशुमन (रांची) कुमार प्​्तीक अजय कुमार पांडे

कला

प्​्वीण अिभषेक

महाप्​्बंधक

एस के वसंह +91.8004903209 +91.9793677793 gm.shukrawaar@gmail.com

आवरण कथा

6 | संघ और सरकार: मंददर पर तकरार

एक बार सफर अयोध्या मे्राम मंिदर का मुद्ा गम्ाष गया है और भाजपा की िरकार और िंघ के कट्​्र िंगठनो्के िमीकरण बदि रहे है्. क्या मोदी िरकार सवकाि की राह पर चिेगी या इन कट्​्र ताकतो्के िामने आत्मिमप्षण कर देगी ?

16 | घोटाले का मैदान

सदल्िी िरकार के प्​्मुख िसचव की जांच करने आयी िीबीआई की कार्षवाई का नतीजा उिट हो गया और सदल्िी स्​्िकेट एिोसिएशन के घोटािे उजागर हो गये.

18 | सफ्र मंे नवाज्का दर

िबजनेि हेड

नरे्द्मोदी और नवाज शरीफ की मुिाकात की पोशीदा योजना बनी तासक जाना भी हो जाये और िीधी सगनती मे्भी न आये. इिे कूटनीसत कहते है्.

शरद कुमार शुकल ्ा +91. 9651882222

ब्​्ांिडंग

कॉमडेज कम्युिनकेशन प्​्ा़ िल़

प्​्िार प्​्बंधक

यती्द्कुमार ितवारी +91. 9984269611, 9425940024 yatendra.3984@gmail.com

सिसध िलाहकार शुभांशु वसंह

shubhanshusingh@gmail.com

+91. 9971286429 सुयश मंजुल

िंपादकीय काय्ा​ालय

एमडी-4/304, सहारा ग्​्ेस, जानकीपुरम लखनऊ, उत्​्र प्​्देश-226021 टेलीफैक्स : +91.522.2735504 ईमेल : shukrawaardelhi@gmail.com www.shukrawaar.com DELHIN/2008/24781 स्वत्वािधकारी, प्क ् ाशक और मुदक ् क्म् ता सिंह के सिए अमर उजािा पब्लिकेशि ं सिसमटेड, िी-21, 22, िेकट् र-59, नोएडा, उत्र् प्द् श े िे मुस्दत एवं दूिरी मंसजि, ल्ाी-146, हसरनगर आश्म् , नयी सदल्िी-110014 िे प्क ् ासशत. िंपादक : अंबरीश कुमार (पीआरल्ाी अिधसनयम के तहत िमाचारो्के चयन के ि​िए िजम्मेदार) िभी कानूनी िववादो्के ि​िए न्याय क्​्ेत्िदल्िी होगा.

28 | उम्​्से ज़्यादा उम्​्दार शहर्

30 | रेवड्ी बांटते मामा

44 | जंगल को बांटती नदी

48 | एक मुद्िकल दकरदार

सटहरी बांध के सवस्थासपतो्के सिए बिाया गया नयी सटहरी अपनी बिावट के दि िािो्मे्ही यह िैिासनयो्की पिंदीदा जगह के तौर पर भी उभर आया है.

भारत-नेपाि िीमा पर कतस्नषया घाट अभयारण्य को गेर्आ नदी सवभासजत करती है जो िरयू और घाघरा की धाराओ्मे्बदि जाती है.

मध्य प्​्देश के जनिंपक्कसवभाग ने सवसभन्न वेबिाइटो्को करोड्ो्र्पये के सवज्​्ापन जारी सकये है्. इनमे् तमाम ऐिी वेबिाइट शासमि है्जो वर्​्ो्िे अपडेट तक नही्की गयी्.

दीसपका पादुकोण ने इि िाि ‘पीकू’, ‘तमाशा’ और ‘बाजीराव मस्​्ानी’ जैिी िफि सफल्मे् दी है्और अब वे शीर्षअसभनेत्ी बन गयी है्. शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

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आपकी मास्ट हेडाक ड

सीख दे गया साल

याद आये राम

पस्​्तका के बीते अंक मे् अर्ण स्​्तपाठी के सिए जयशंकर पांडेय का िाक्​्ात्कार पढ्ा. याद राम की आने के कई कारण है. अक्िर भाजपा राम के बहाने राजनीसत करते रही है. राम राजनीसत के स्​्ोत बन गये है्. ऐिे मे् राम का याद आना स्वभासवक ही है. राम के जसरये ही भाजपा यूपी मे्ित्​्ा मे्आयी िेसकन राम मंसदर नही्बना. आज भाजपा सफर के्द्की ित्​्ा मे्है. पर राम मंसदर पर कोई बड्ा फैि​िा होता नही् सदखता. पर यूपी के चुनाव नजदीक आने के िाथ ही कई पसरवत्षन देखने को समिे्गे. अर्ण कुमार स्​्तपाठी िाक्​्ात्कार कई तरह की परते् खोिता सदखा. शनहाशरका हजाशरका, मधुबनी (शबहार)

पेदरस मंे जुटान

जिवायु पसरवत्षन पर आसखरी पन्ना के िेख मे् कुमार प्​्शांत की दिीिे् अच्छी िगी्. पेसरि मे् हवा पानी के मुद्े पर हुई बहि सकतनी िाथ्षक रहेगी यह तो िमय ही बतायेगा. पर क्या सवकािशीि देश अपने को सवकाि िे सकनारे कर िके्गे. दूिरा िवाि यह भी है सक क्या सवकसित देश अपनी आदते्िुधार िके्गे. ऐिे मे् यह मुद्ा उि​िा हुआ सदखाई देता है. बेहतर हो सवकसित देश िही मायने मे् िाथ्षक प्​्याि करे्, सजि​िे कोई िाथ्षक हि सनकिे. नीरज सक़सेना, रायपुर ( छत़​़ीसगढ़)

मदहलाएं और शौचालय

शुि्वार पस्​्तका के बीते अंक मे् प्​्कसशत उपािना बेहरा की रपट मे् शौचािय िे जुडा मुद्ा उठाया गया है. वास्​्व मे् इिकी आज िख्त जर्रत है. िेख के आंकडे के मुतासबक देश मे् तकरीबन 10 करोड िोगो् 4

शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

शुि्वार का सदिंबर 2015 का आसखरी अंक िंग्हणीय रहा. गुजरा िाि कई मायनो्मे् िीख देता रहा. जहां मोदी िरकार िाि भर पूरा करने के बाद अपने को आंकती रही तो नीतीश की जीत िब पर भारी रही. गाय और गोमांि चच्ाष मे् रहा तो अिसहष्णुता जैिा कसठन शल्द जुबान पर चढ्ा. अरसवंद केजरीवाि िे पटकनी खाने के बाद िाि के अंत मे्मोदी नीतीश िे भी हारे. सवकाि िे दूर होती जा रही मोदी िरकार के सिए यह िबक था. यह िाि सिखा गया सक बेहतर शािन के सिए िब जगह मोदी या

भाजपा िरकार जर्री नही् है. अखिाक की मौत ने िबको सि​िोरा. दाि के दाम भी चढ्ेतो योग का सवश्​् सदवि भी मनाया गया. स्माट्ष सिटी का िपना भी िोगो् की आंखो् ने देखा. िासहत्य मे् िम्मान वापिी का दौर भी चिा. हास्दषक का दम भी सदखा. पेसरि हमिे िे िोगो् का आतंकवाद ने सदि भी दहिाया. कुि समिाकर बीता िाि बता गया वक्त गुजर जाता है िेसकन उि गुजरे वक्त की यादे् सिखाती रहती है्.

के घर मे् शौचािय नही् है. जो वाकई एक चुनौती की तरह है. शौचािय के न होने िे िबिे ज्यादा सदक्​्त आधी आबादी यानी मसहिाओ्को होती है. सजन्हे्खुिे मे्शौचािय जाने मे् िबिे ज्यादा सदक्​्तो् का िामना करना पडता है. ये िमस्या ज्यादातर ग्​्ामीण इिाको्मे्जहां िोग आज भी खुिे मे्जाने को मजबूर है्. सबना शौचािय के देश का सवकाि अधूरा माना जायेगा. शौचािय खािकर मसहिाओ्की िमस्या िे जुडा हुआ मामिा है. ये बहुत जर्री भी है.

करवा चुके है्, तो उसचत और अपने फायदे के सहिाब िे उिे वापि करके अिसहष्णुता का हवािा दे िकते है्.

कशिता शसंह, रांची (झारखंड)

गरीबी पर भारी असदहष्णुता

इि िाि का िबिे ज्यादा बोिा जाने वािा शल्द है. अिसहष्णुता सजिके बोिते वक्त हमारे जीभ को ज्यादा ही किरत करनी पडती है. िेसकन अब सवरोध करना है, तो इतना मेहनत तो करना ही है. बीते सदिंबर अंक मे् स्​्पयदश्षन ने हमारे आिपाि बन रहे िामासजक ताने-बाने का सजि्​् सकया है. जो वाकई कासबिे-गौर है. िेसकन आज के िमय मे् मामिा ये बनता सदख रहा है सक गरीबी पर अमीरो्की अिसहष्णुता हावी रही है. गरीब खाने के सिए िंघर्ष कर रहा है. तो देश का ऊपरी तबका अपनी आज़ादी के सिए िसहष्णुता की कमी को बद्ाषश्त नही्कर पा रहा है. सजि​िे गरीबी और िामासजक असधकार कोिो् दूर हो गये. सकिान आत्महत्या कर रहा है, गाय का दूध सनकािकर िोग उिे छुट्ा छोड रहे है्. िेसकन दादरी मे्शक के आधार पर िोग एक गरीब तबके के व्यब्कत की हत्या कर दे रहे है्. ऐिे मे् िवाि ये उठता है सक देश मे् अिसहष्णतु ा के भी कई मायने है.् आप बुदज ् ीवी है् और कोई देश का िम्मान अपने नाम दज्ष

आशिमा खानम, अलीगढ़ (उत़​़र प़​़देि)

पिन शसंह, बशिंडा(पंजाब)

ददलवाले अब ददलो्मंे

आज भी िभी के मन मे्शाहर्ख और काजोि की जोड्ी की एक खाि जगह बनी हुई है. ये जब भी िाथ होते है् सफल्म परवान चढ्ती है. आज भी सदि वािे दुल्हसनया िे जाये्गे की बात होते ही अमरीश पुरी का वो डायिॅाग याद आता है ‘जा सिमरन जा, जी िे अपनी सजंदगी’. सफर यह िुनकर सिमरन का भागना और ट्​्ेन पर चढ्ना. युवाओ् के सदि मे् रोमांच भर देता है. सपछिे अंक जब शाहर्ख् का इंटरव्यू पढा़ तो िगा सक जैिे खुद ही उनिे समि रहा हूं. यह अनुभव खाि था. उम्मीद करता हूं सक आगे भी आप ऐिे ही सफल्माकारो् िे हमे् र्बर् कराते रहे्गे. महे़द़ शसंह, भोपाल (मध़य प़​़देि)

पाठको्से दनवेदन

शुि्वार मे्प्​्कािशत सरपोट्​्ो्और रचनाओ्पर पाठको्की प्​्सतसि्​्या का स्वागत है़ आप अपने पत्​्नीचे िदए गए पते पर या ई-मेि िे भेज िकते है् एमडी-4/304, िहारा ग्​्ेि, जानकीपुरम, िखनऊ उत्​्र प्​्देश-226021 टेिीफैक्ि : +91.522.2735504 ईमेि : shukrawaardelhi@gmail.com


संमास् पादकीय ट हेड

चाल, चेहरा और चदरत्​् भा

अंबरीश कुमार

कांग्ेस का कोई नेता चुनाव मे्पैसे के लेनदेन की बात करे तो ककसी को कोई हैरानी नही्होती, पर भाजपा तो शुकचता और पारदक्शषता की बात करती रही है.

रतीय जनता पाट्​्ी राजनीसत मे् शुसचता की बात करती रही है. बहुत हुआ भ्ष ् ्ाचार, अबकी बार मोदी िरकार का नारा भी इिी पाट्​्ी का था. पर दुभ्ाषग्य िे इिके तीन राज्यो् के मुख्यमंत्ी और के्द्ीय मंत्ी तक भ्​्ष्ाचार के मामिे को िेकर सवपक्​्के सनशाने पर आ चुके है्. ताजा मामिा छत्​्ीिगढ के मुखय् मंत्ी रमन सिंह का है सजन्हो्ने अंतागढ उप चुनाव जीतने के सिए कांग्ेि के नेता अजीत जोगी िे हाथ समिाया और िेन-देन के जसरये यह चुनाव जीत सिया था. सपछिे िाि 13 सितंबर को बस्​्र के अंतागढ्सवधानिभा िीट के सिए उपचुनाव हुआ था. इि उप चुनाव मे् कुि 13 उम्मीदवार मैदान मे्थे. िेसकन चुनाव िे ठीक पहिे कांग्ेि उम्मीदवार मंतूराम पवार ने अपना नामांकन वापि िे सिया था. यह अप्​्त्यासशत कदम था. बाद मे्तो यह ब्सथसत आ गयी सक नामांकन वापिी के अंसतम सदन एकएक कर 10 उम्मीदवार चुनाव मैदान िे हट गये. हािांसक सनस्वषरोध चुनाव की कोसशश मे् भाजपा कामयाब नही्हुई क्यो्सक अंबेडकराइट पाट्​्ी ऑफ्इंसडया के र्पधर पुड्ो ही मैदान मे् थे. चुनाव मे्पुड्ो मैदान मे्थे और जब चुनाव हुआ तो भाजपा के भोजराज नाग 50 हज़्ार िे भी असधक मतो् िे जीते थे. पर यह चुनाव समिीभगत और पैिे के प्ि ् ोभन का चुनाव माना गया. प्​्देश कांग्ेि अध्यक्​् भूपेश बघेि ने तो शुि्वार िे बात करते हुये िाफ आरोप िगाया सक इि मामिे मे्मुख्यमंत्ी रमन सिंह और पूव्ष मुख्यमंत्ी अजीत जोगी की समिीभगत थी. कांगि ्े का कोई नेता चुनाव मे्पैिे के िेनदेन की बात करे तो सकिी को कोई हैरानी नही् होती क्यो्सक पाट्​्ी का सपछिे कई दशक िे यही तौर तरीका रहा है और वे शुसचता आसद का पाखंड भी नही् करते. पर भाजपा तो शुसचता और पारदस्शषता की बात करती रही है. रमन सिंह िरकार पर इि​िे पहिे अनाज घोटािे का आरोप इिी कांग्ेि ने िगाया था. मध्य प्​्देश की सशवराज सिंह िरकार व्यापम घोटािे मे् फंिी हुई है तो राजस्थान की मुख्यमंत्ी विुंधरा राजे कुछ सदन पहिे ही िसित मोदी िे जुडे सववाद मे् सघर चुकी है्. के्द् की बात करे तो पहिे िुरमा स्वराज और सफर अब अर्ण जेटिी खुद डीडीिीए सववाद मे्फंिे हुए है्. ऐिे मे्छत्​्ीिगढ के मुखय् मंत्ी का सकिी नये सववाद मे्फंिना पाट्​्ी की छसव के सिए शुभ िंकेत तो नही् है. छत्​्ीिगढ मे् रमन सिंह एक दशक िे

भी ज्यादा िमय िे िगातार ित्​्ा मे्है्. छत्​्ीिगढ मे् दो दिीय राजनीसत रही है और सवधानिभा चुनाव मे् तो बहुत कांटे की टक्​्र होती रही, सजिमे् रमन सिंह को अपनी छसव का फायदा भी समिता रहा है. एक िमय मे् उन्हो्ने कई िोकस्​्पय योजनाएं शुर् की थी सजिका िाभ िोगो् तक पहुंचा भी. यही वजह है वे चाऊर वािे बाबा के नाम िे मशहूर भी हुए. पर सपछिे कुछ िमय िे यह समथक टूटा और भ्​्ष्ाचार के आरोप िरकार पर िगने िगे. इि​िे पहिे अजीत जोगी मुखय् मंत्ी थे जो सपछडे दसित और आसदवासियो् मे् बहुत िोकस्​्पय भी रहे. पर मुख्यमंत्ी बनने के बाद उनका स्वभाव बदिा और वे अहंकारी हो गये. रही िही किर छत्​्ीिगढ के कुछ अफिरो् ने पूरी कर दी. वे ित्​्ा िे ऐिे गये सक आज तक सवपक्​्मे्है. पर ताजा सववाद मे्वे सफर फंि गये है्. गौरतिब है सक दरभा घाटी की माओवादी सहंिा मे्प्द् श े कांगि ्े के ज्यादातर क्त् प् मारे जा चुके है. ऐिे मे् कांग्ेि का कोई नेता अगर भाजपा के िाथ समिकर सनजी सहत िाधने िगे तो पाट्​्ी की ब्सथसत और खराब होनी तय है. जोगी सवरोधी खेमा भी इि बार आर-पार िडाई के मूड मे्है भाजपा के सिए भी मुब्शकि खडी हो चुकी है. भाजपा के के्द्ीय नेतृत्व के सिए भ्​्ष्ाचार के इन आरोपो् िे सनपटना बहुत आिान तो नही्है. पाट्​्ी मे्वैिे भी शीर्षस्र् पर टकराव तेज हो चुका है. खािकर सबहार चुनाव के नतीजो् के बाद. िाि कृष्ण आडवाणी, मुरिी मनोहर जोशी, शांता कुमार और यशवंत सिन्हा सबहार चुनाव के बाद दो बार िाव्षजसनक र्प िे समि चुके है. पहिे असमत शाह की कामकाज की शैिी को िेकर सवरोध जताया तो बाद मे्कीस्तष आजाद के मुद्े पर पाट्​्ी के फैि​िे को भी इन बुजुग्षनेताओ्ने उसचत नही्माना. दरअि​ि यह टकराहट मोदी को िेकर ही है जो धीरे-धीरे और मुखर हो रही है. सफिहाि िबकी नजर पाट्​्ी के नये अध्यक्​्को िेकर भी है. ऐिे मे्पाट्​्ी के िामने भ्​्ष्ाचार के इि तरह के मामिे आ जाने िे नेतृत्व की मुिीबत और बढ िकती है. खािकर उि िमय जब एक तरफ िीबीआई सदल्िी िरकार के मुख्यमंत्ी के दफ्तर पर छापा मारती है और दूिरी तरफ भ्​्ष्ाचार के बडे मामिो्मे्ठंडा र्ख अपनाती है. इि​िे िरकार और पाट्​्ी दोनो् की िाख पर n अिर पड रहा है. ambrish2000kumar@gmail.com शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

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अावरण मास्ट हेकथा ड शरद गुप्ता

अ

चानक बीते बीि सदिंबर की कोहरे भरी िद्ष िुबह मे् देश की राजनीसत गम्ष हो गयी. वजह थे वे दो ट्​्क पत्थर जो अयोध्या मे् राम मंसदर सनम्ाषण के सिए उतारे गये. अचानक पूव्षिांिद राम सविाि वेदांती िे िेकर के्द्ीय पय्षटन राज्य मंत्ी महेश शम्ाष तक िभी राम जन्मभूसम मंसदर सनम्ाषण के पक्​् मे् बयान देने िगे. जब अयोध्या के कारिेवकपुरम मे् पहिे िे ही िैकड्ो् ट्​्क पत्थर सपछिे 22 िािो् िे पड्ेहै्, बाक्ायदा मंसदर के सिए तराशे हुए इतने सक सजनिे मंसदर की नी्व ही नही्पूरा भूति बन कर खड्ा हो जाये. महज एक िाि िे भी कम िमय मे् क्यो्सक तराशे हुए पत्थर िे्न िे एक दूिरे के ऊपर सडज़्ाइन के अनुिार रखे जाने है.् उनमे् सकिी अन्य सनम्ाषण िामग्​्ी की ज़्र्रत नही्पड्गे ी. िवाि उठता है सक जब इतने पत्थर पहिे िे ही वहां रखे है्तो नये पत्थरो्को िाने की ज़्र्रत क्या थी? और अभी क्यो्? क्या मंसदर का सनम्ाषण शुर् हो िकता है जबसक मामिा िुप्ीम कोट्ष के िामने िंसबत है? या सफर यह भाजपा नेताओ् के देश के िामने मुंहबाए खड्े महंगाई, भुखमरी, बेरोजगारी, सबगड्ती अथ्वष य् वस्था जैिे ज्विंत मुद्ो िे िोगो् का ध्यान बंटाने के सिए की चि रही सिफ्क राजनीसतक बयानबाज़्ी है? इन िवािो् के जवाब मे् सछपे है भाजपा और राष्​्ीय स्वयंिेवक िंघ के सरश्तो् के बदिते िमीकरण. आज की घटनाओ् का महत्व िमिने के सिए हमे्भाजपा के इसतहाि और भूगोि को िमिना होगा. िंघ के अनुरांसगक यानी िहयोगी िंगठनो्मे्िे एक है भाजपा. वैिे ही जैिे सवश्​्सहंदू पसररद, भारतीय मज़्दूर िंघ, भारतीय सकिान िंघ, असखि भारतीय सवद्​्ाथ्​्ी पसररद, स्वदेशी जागरण मंच, बजरंग दि या दुगा्ष वासहनी. इनमे्और भाजपा मे्फक्कसिफ्कइतना है सक जहां बाकी िंगठनो्मे् केवि िंघ के असधकारी और काय्षकत्ाष ही शासमि हो िकते है्, भाजपा मे् िंघ काय्षकत्ाषओ्के अिावा बाहरी भी शासमि होते है्. हािांसक यह बदिाव भी भाजपा और उिके पुराने अवतार जनिंघ के दशको् तक राजनीसतक अछूत रहने के बाद आया है. अब बात आती है िंघ और भाजपा के सरश्तो् की. जनिंघ के ज़्माने तक िंघ का इिमे्पूरा दख्ि था. कौन नेता क्या काम करेगा, क्या नीसत होगी, िभी कुछ िंघ के परामश्षिे ही होती था. यही् नही्िंघ के असधकार भाजपा के के्द्ीय नेतृत्व िे िेकर स्ज़िा स्​्र कर िंगठन िसचव होने के नाते पाट्​्ी पर पूरी पकड्रखते थे. यहां तक सक चुनाव के दौरान सटकट बांटने मे्भी जमीनी स्र् के नेताओ् की राय िबिे ज्यादा महत्व रखती 6

शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

अयोध़या मे़ पत़थरो़ पर नक़​़ािी: मंशदर की तैयारी?

संघ और सरकार मंशदर पर तकरार थी. िाि 1980 मे् भाजपा बनने के बाद 1516 िाि तक यही ि्​्म चिा. जनता दि के मंडि काड्ष के जवाब मे् राम मंसदर मुद्ा उछािना भी िंघ की रणनीसत का सहस्िा था. जबसक तब भाजपा के शीर्ष नेता अटि सबहारी वाजपेयी राम मंसदर को आि्​्ामक सहंदुत्व के प्त् ीक के तौर पर इस्म्े ाि करने के पक्​्मे्नही् थे. सफर भी राम मंसदर को अगर सहंदू अब्समता िे जोड्ा क्यो्तो इिका जवाब होगा सक यह िंघ के दबाव मे्ही हुआ. िाि 1998-99 तक िंघ ने भाजपा को मज़्बूत बनाने मे् पूरी ताक्त

िगायी. कल्याण सिंह जैिे सपछड्े वग्ष के नेता को 1991 मे् उत्​्र प्​्देश का मुख्यमंत्ी बनाना भी ब्​्ाह्मणवादी िंघ की नयी िामासजक िमरितावादी नीसत का एक सहस्िा था. िेसकन 1992 मे्बाबरी मब्सजद को जब सवसहप, बजरंग दि और सशविेना ने समिकर ढहा सदया तो कल्याण सिंह ने इिे िंघ की ब्​्ाह्मणवादी सवचारधारा का प्​्तीक बताया. भाजपा और िंघ के बीच तकरार 1999 मे्एनडीए गठबंधन की िरकार बनने के बाद हुई. प्​्धानमंत्ी वाजपेयी उदारवादी छसव बरक्रार रखना चाहते थे तो


फोटो: पिन कुमार

तािमेि का काम िुरेश िोनी को िौ्पा जो भाजपा की इि सतकड्ी िे बहुत जूसनयर थे. उि दौन िंघ की भाजपा पर पकड् ढीिी पड् गयी.िंघ और भाजपा मे् दूरी बढ् रही थी. िंघ की िरकार मे् िुनी ही नही् जा रही थी. सकिी भी बात पर िंघ तो दूर पाट्​्ी िे भी बात नही्की जा रही थी. 3 जनवरी 1999 को बे्गिुर् मे् आयोसजत राष्​्ीय काय्षकासरणी मे् वाजपेयी ने दो टूक कह सदया सक पाट्​्ी िे परामश्षतो ठीक है िेसकन िरकारी कामकाज मे्प्​्धानमंत्ी का फैि​िा ही िव्​्ोच्​्होगा. यानी िंघ न तो दख्ि दे और न ही िरकार की आिोचना. नाराज़्िंघ ने स्वदेशी जागरण मंच, सवसहप और मज़्दरू िंघ को अपने काय्षि्म आयोसजत करने की छूट दे दी. नतीजा यह हुआ सक सवश्​् व्यापार िंगठन (डल्िूटीओ) वात्ाष का जमकर सवरोध सकया गया. राव मंसदर सनम्ाषण को िेकर सफर िे आंदोिन शुर्करने के प्य् ाि हुए. हािात इतने सबगड्ेसक जो आडवाणी 1992 मे्महंत रामचंद् परमहंि के िाथ एक ही मंच पर खड्े होकर बाबरी मब्सजद की जगह राम मंसदर सनम्ाषण का आंदोिन चिा रहे थे, 2002 मे्के्द्ीय गृहमंत्ी की हैसियत िे उन्ही् आडवाणी ने परमहंि के राम सशिा पूजन काय्षि्म को खत्म करने िे सिए अयोध्या मे् सगरफ्​्तार कराया. उिी दौरान भाजपा के राष्​्ीय अध्यक्​्के र्प मे्कुशाभाऊ ठाकरे, बंगार्िक्म् ण और जना कृषण ् मूसत् ष जैिे कमज़्ोर नेताओ्को सबठाया गया. िंघ की पाट्​्ी के कामकाज और फै्ि​िो् पर िगाम िगाने रामलला की ित़तमान जगह: अब तक जारी शि​िाद

वािे िंगठन मंत्ी का पद कुछ िमय के सिए खत्म कर सदया गया. िंघ के क्रीबी माने जाने वािे गोसवंदाचाय्ष जैिे िोगो् को पहिे सकनारे िगाया गया और सफर बाहर का रास्​्ा सदखा सदया गया. उन पर न तो पाट्​्ी सवरोधी गसतसवसधयो्का आरोप था और न ही भ्​्ष्ाचार का. िंघ और भाजपा के िंबंध इतने सबगड्ेसक िाि 2004 के िोकिभा चुनाव मे् िंघ ने भाजपा िे सकनारा कर सिया. नतीजतन भाजपा चुनाव हार गयी. सरश्ते इि क्दर ख्राब हुए सक एक बार तो िंघ ने सचत्​्कूट मे्आयोसजत अपनी राष्​्ीय पसररद मे् भाजपा िे नाता तोड् कर या राजनीसतक दि बनाने की िंभावना तक पर सवचार सकया. िेसकन सफर एक धड्ेके इि तक्क को िभी ने माना सक एक पाट्​्ी को बनाकर ित्​्ा मे्िाने तक िगभग िाठ िाि िग गये. ऐिे मे् दूिरी पाट्​्ी बनाकर उि पर इतना िमय िगा पाना न उसचत होगा, न िंभव. इि दौरान भाजपा भी ऐिे पतन के गत्ष मे् सगरी सक अगिे दि िाि तक के्द् मे् ित्​्ा िे बाहर बैठी रही. वाजपेयी के बीमारी की वजह िे राजनीसत िे दूर होने और प्​्मोद महाजन की हत्या होने िे आडवाणी और जोशी भी प्​्भावहीन नज़्र आने िगे. िाि 2009 की हार के बाद भाजपा पुन: िंघ के िामने नतमस्​्क हो गयी. यह वह िमय था जब िंघ ने भाजपा की िज्षरी करने का फैि​िा सकया. पहिा फैि​िा तीिरी पीढ्ी के नेता सनसतन गडकरी को भाजपा अध्यक्​्की कुि्ी पर बैठाना था. उि​िे

एक बार किर अयोध्या मे्राम मंिदर का मुद्ा गम्ाष गया है और भाजपा की सरकार और संघ के कट्​्र संगठनो्के समीकरण बदल रहे है्. क्या मोदी सरकार कवकास की राह पर चलेगी या इन कट्​्र ताकतो्के सामने आत्मसमप्षण कर देगी ? िंघ की नीयत अपना स्वदेशी और सहंदुत्व का एजंडा पूरा करने की थी. वाजपेयी बार-बार िहयोगी दिो् के दबाव का हवािा देकर िंघ के एजंडे िे दूर ही रहे. इि बीच एक बड्ा बदिाव िंघ नेताओ्की उम्​्का भी आया. तब के िरिंघचािक (िंघ प्​्मुख) प्​्ोफे्िर राजे्द् सिंह उफक् रज्​्ू भैया उम्​् मे् वाजपेयी, िाि कृषण ् आडवाणी और मुरिी मनोहर जोशी आसद िे बड्े थे. इिीसिए उनका आदर ज्यादा था. िेसकन 1999 मे् रज्​्ू भैया की जगह केिी िुदश्षन िंघ प्​्मुख बने. उन्हो्ने भाजपा िे शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

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अावरण मास्ट हेकथा ड

हर हाल मेंराम मंदिर

राम जन्मभूकम न्यास के अध्यक्​्मंहत नृत्यगोपाल दास से क्​्ियुग नारायण कतवारी की बातचीत.

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म जन्मभूमम न्यास के अध्यक्​् महंत नृत्यगोपाल दास का कहना है मक अयोध्या मे्राम मंमदर मनम्ा​ाण के मलए वर्ा1990 मे्राजस्थान से पत्थर लाकर काय्ाशाला मे् तराशने का काम चल रहा है. पत्थरो् की अनुपलब्धता के चलते कुछ साल यह काम र्क गया था, जो मक मिर शुर् हो चुका है इसमे्कुछ नया नही्है. कुछ लोग जान बूझकर अपने वोट बै्क के मलए शोर शराबा कर रहे है्. इसमे्मीमिया का एक वग्ाशुर्से ही मवरोध करता रहा है और वह वग्ाकुछ राजनीमतज्​्ो्के इशारे पर मिर मवरोध कर रहा है इनका अपना उद्​्ेश्य है और हमारा उद्​्ेश्य मंमदर मनम्ा​ाण को पूरा करना है. बातचीत के अंश: अचानक कई साल बाद यह पत्थर क्यो्मंगाये गये है ? पत्थर आने का मतलब ही यह है मक अब अयोध्या मे्भगवान्ा श्​्ीराम का भव्य मंमदर बनेगा .इसमे्मकसी को कोई शक नही्होना चामहए. मंमदर मनम्ा​ाण के बाबत भावी योजनाएं क्या है्? रामजी के मंमदर का मनम्ाण ा हमारी आस्था है. पूजा अच्न ा ा तो हो रही है भव्य और मदव्य स्वर्प मदया जाना बाकी है मजसके मलए हम प्य ् त्नशील है. पत्थर तराशने का काम चल रहा है. अप्ल ्ै माह मे्होने वाले कुभ ं के अवसर पर साधु संत वहां एकत्​्हो्गे बैठक होगी और अगले काय्क ा म ् ो्पर योजना तय होगी. राम मंमदर मनम्ाण ा के मलए मवमहप के संरक्क ् अशोक मसंहल जी मुखय ् स्भ ्ं थे. उनके मनधन से आंदोलन की क्म्त हुई है. शीघ्​्ही प्य ् ाग मे् बैठक होगी मजसमे्सभी पहलुओ्पर मवचार मकया जायेगा. राम मंमदर का मववाद उच्​्तम न्यायालय मे्है मिर कैसे मंमदर मनम्ा​ाण शुर् हो सकता है?

अयोध्या को लेकर बाहर अिवाहे्है्? अयोध्या मे्पूरी तरह अमन चैन है, कानून व्यवस्था ठीक है. अभी कुछ मदन पहले कुछ गुमराह लड्को्ने बाबरी मस्सजद का मॅािल बना कर रख मदया था. मजस पर प्​्शासन ने अपना काम मकया और ऐसे लड्को् के मखलाि एिआईआर दज्ाकरायी है. कुछ मुस्सलम नेताओ्ने पत्थर मंगाने की बात कही है?

राम मंमदर मववाद माननीय सुप्ीम कोट्ा मे् है जब तक अदालत का िैसला नही् होता है तब तक हम मनम्ा​ाण कहां करने जा रहे है्. कोट्ा मे् सुनवाई जल्दी हो या संसद मे्कानून बनाकर मनम्ा​ाण काय्ाशुर्कराने मे् आ रही बाधाओ्को दूर करने के मलए रणनीमत बनाये्गे.

ठीक है. पत्थर मंगाये्, वह भी मंमदर मनम्ा​ाण के प्​्योग मे्आ जायेगी. क्यो्मक कोट्ा ने माना है मक मववामदत स्थान ही भगवान श्​्ीराम जी की जन्मस्थली है.

प्​्धानमंत्ी नरे्द्मोदी से क्या अपेक्ा है?

आपके कांग्ेस प्​्देश अध्यक्​्िॅा मनम्ाल खत्​्ी से अच्छे संबंध है्?

प्​्धानमंत्ी नरे्द् मोदी से हमे् पूरी आशा है मंमदर मनम्ा​ाण मे् आ रही बाधाएं दूर होगी्और उनके काय्ाकाल मे्ही मनम्ा​ाण काय्ाशुर्हो जायेगा.

इससे राम मंमदर मनम्ाण ा मे्बाधा कहां है खत्​्ी जी अच्छे व्यस्कत है. राम और रामायण मे्उनकी पूरी आस्था है.

आप मोदी जी से ममले या ममलने वाले है?

अयोध्या के मवकास को जो गमत ममलनी थी वह नही्ममली?

हम मोदी जी से ममले नही्है. हम लोगो्को प्​्भु राम मे्पूरी आस्था है और उन्ही्के मनद्​्ेश पर हम काम करते है्. मोदी जी अच्छा काम कर रहे है कुछ लोग मंमदर के बावत मतल का ताड्बनाकर उन्हे्अस्सथर करना चाहते

हां यह ठीक बात है प्ध ् ानमंत्ी मोदी जी का नारा है ‘सबका साथ सबका मवकास’ इसी के अंतग्ता अयोध्या के मवकास की कई योजनाएं मवचाराधीन है. अवसर आने पर मवकास पर जर्र चच्ा​ा कर्ंगा.

पहिे गडकरी केवि महाराष्​्के नेता थे और उि​िे बाहर उन्हे्कम ही िोग जानते थे. दूिरा काम िंगठन महािसचव का पद बहाि कर अपने पूण्षकासिक काय्षकत्ाष रामिाि को उि पर बैठाना था. अब िभी फै्ि​िे रामिाि की िहमसत िे ही सिए जाने िगे. भाजपा पर िंघ की पकड् सफर पहिे सजतनी मज़्बूत हो गयी. गडकरी की जगह अध्यक्​्बने राजनाथ सिंह ने भी िारे फैि​िे िंघ िे पूछ कर ही सिये. िंघ की ि​िाह पर ही राजनाथ ने िुरमा स्वराज, जोशी और आडवाणी की नाराज़्गी 8

नृत़यगोपाल दास: आस़था का सिाल

फोटो: पिन कुमार

है्. ऐसा संत होने नही्दे्गे.

शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

मोि िेते हुए नरे्द्मोदी को पहिे िाि 2014 के िोकिभा चुनाव के सिए प्​्चार असभयान िसमसत का अध्यक्​् सनयुक्त कराया. सफर प्​्धानमंत्ी पद का उम्मीदवार भी घोसरत सकया. िंघ ने भी इन चुनावो्मे्अपनी पूरी ताक्त िो्क दी. हर पोसिंग बूथ पर भाजपा के अिावा िंघ के काय्क ष त्ाष भी तैनात थे. हर चुनाव क्त्े ्मे्िंघ काय्क ष त्ाष भाजपा के िोगो्के िाथ कंधे िे कंधा समिाकर काम कर रहे थे. नतीजा िामने आया भाजपा की अप्​्त्यासशत जीत के र्प मे्. उत्​्र प्​्देश की 80 मे् िे 73, सदल्िी, राजस्थान,

गुजरात, मध्य प्द् श े , सहमाचि, उत्र् ाखंड आसद राज्यो् की िगभग शत प्​्सतशत िीटे् जीतना भाजपा ने कभी िपने मे् भी नही् िोचा था. िोकिभा मे् अकेिे दम पर 282 िीटो् तो वाजपेयी-आडवाणी के ज़्माने मे्भी नही्आयी थी्. िरकार बनने के बाद मोदी ने िंघ के िोगो् को िरकार मे् िमायोसजत सकया. हर मंत्ी के िाथ सनजी िहायक के र्प मे्िंघ के काय्क ष त्ाष िगे. िेसकन वाजपेयी की तज़ष् पर ही िरकारी कामकाज मे्िंघ की दख्िदं ाज़्ी को मोदी ने भी बद्ाषश्त करने िे इंकार कर सदया. उन्हो्ने अपने


करीबी असमत शाह को राजनाथ सिंह की जगह अध्यक्​् की कुि्ी पर आिीन करा सदया. िाथ ही राम माधव और मुरिीधर राव जैिे िंघ के िोगो् को महािसचव बनाकर रामिाि को हटाने का प्य् ाि सकया. िेसकन िंघ के रामिाि के पक्​्मे्खड्ेहो जाने िे उनकी कोसशश बेकार हो गयी. मोदी भाजपा के इसतहाि के िबिे क्द्ावर नेता बन कर तो उभरे िेसकन िबिे िोकस्​्पय नही्. पाट्​्ी और िंघ के िोग उनको पिंद करने के बजाय उनिे डरते है्. इि बीच भाजपा 2014 मे् आयोसजत हसरयाणा, िारखंड और महाराष्​्मे्सवधानिभा चुनाव जीती. हसरयाणा छोड् बाकी दोनो् राज्यो् मे्भाजपा बमुब्शकि बहुमत जुटा पाई. महाराष्​् मे् िंघ की इच्छा के सखिाफ जाकर भाजपा ने सशविेना िे पचीि िाि पुराना गठबंधन तोड् सदया. अकेिी िड्ी भाजपा िबिे बड्ी पाट्​्ी तो बनी िेसकन बहुमत िे दूर रह गयी. सशव िेना के िमथ्षन िे उिने िरकार बनायी. िेसकन 2015 मे्हुए पहिे सदल्िी और सफर सबहार के सवधानिभा चुनाव मे्भाजपा की करारी हार हुई. सदल्िी की 70 मे् िे वह केवि तीन जीती जबसक मोदी ने प्​्चार मे्अपनी आत्मा का बि फूंक सदया था. वही् सबहार के चुनाव को मोदी बनाम नीतीश कुमार बनाने के बावजूद भाजपा 243 मे् िे महज 53 िीटे् जीती. यानी मोदी और पाट्​्ी अध्यक्​्असमत शाह के नेतृत्व मे्हुए चुनावो् मे् भाजपा की जीत तो बहुत कम अंतर िे हुई िेसकन हार बहुत बड्ेअंतर िे हुई. ऐिे मे् एक बार सफर वाजपेयी के िरकार जैिे हािात बन रहे है्. िंघ िरकार को अपने सहिाब िे चिाना चाहता है जबसक मोदी सकिी तरह की दख्िंदाज़्ी बद्ाषश्त करने को तैयार नही् है. इि रस्िाकशी का पहिा इब्मतहान जनवरी के आस्खर मे्भाजपा के राष्​्ीय अध्यक्​् का चुनाव होगा. मोदी चाहते है्सक असमत शाह ही दोबारा अध्यक्​्बने्तासक िरकार और पाट्​्ी िंगठन दोनो्पर उनका क्ल्ज़्ा बना रहे. जबसक िंघ यह सकिी हाित मे् मानने को तैयार नही् है. उिका तक्कहै प्​्धानमंत्ी और पाट्​्ी अध्यक्​् एक राज्य िे नही् होने चासहए. असमत शाह अपने काम करने की शैिी को िेकर पाट्​्ी मे्ही नही् िहयोगी दिो् मे् भी बहुत तेज़्ी िे अिोकस्​्पय हुए है्. चूंसक सबहार और सदल्िी के ख्राब नतीजो् के बाद मोदी और शाह कमज़्ोर हुए है्, ऐिे मे् बहुत मुब्शकि िग रहा है सक मोदी असमत शाह की कुि्ी बचा पाये्गे. ऐिे मे् कोई न कोई बीच का रास्​्ा सनकािा जायेगा. पहिा सवकल्प है सक गुजरात मे्हास्दक ष पटेि के नेततृ व् मे्चिे पटेि आंदोिन पर काबू पाने मे्सवफि रहने की वजह िे गुजरात की मुख्यमंत्ी आनंदीबेन पटेि को के्द्ीय मंस्तमंडि मे्

फोटो: पिन कुमार

हाशिम अंसारी: फैसले का इंतजार

कोई संदिधान से ऊपर नहीं मस्जजद कववाद के प्​्मुख पक्​्कार हाकशम अंसारी की राय.

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एचपी के पत्थरो् की राजनीसत पर नाराज मंसदर मब्सजद मुकदमे के प्​्मुख मुद्ई मो हासशम अंिारी ने कहा सक हमे कोट्षपर पूरा भरोिा है जो फैि​िा आयेगा हम उिे मानेगे. िारा खेि िंघ प्​्मुख मोहन भागवत का है जो मंसदर के नाम पर देश का माहौि सफर खराब करना चाहते है्. अगर भागवत मे्सहम्मत हो तो कोट्षमे्मजबूती िे िड्कर अपनी ताकत सदखाये. पीएम मोदी की तारीफ करते हुए अंिारी ने कहा सक मोदी अच्छे इंिान है और देश को आगे िे जाना चाहते है्. पर आरएिएि अपने सहंदुत्व के एजंडे के चिते उनके काम मे्र्कावटे डाि रहा है. हम चाहते है्सक देश मे अमन चैन कायम रहे . अंिारी ने कहा सक राम ि​िा कब तक टाट मे रहे्गे? मंसदर मब्सजद सववाद का फैि​िा जल्द होना चासहए सजि​िे इि पर राजनीसतक रोसटयां िे्कने का हमेशा के सिए बंद हो जाये. अंिारी ने कहा सक वह पीएम मोदी िे समिना चाहते है्और इि मि​िे पर गुप्त वात्ाष करने के सिए भी इच्छुक है्. यह पूछने पर सक वह पीएम िे कब समिे्गे? हासशम का जबाब था जब वे बुिाये्गे. यह पूछने पर सक क्या बाबरी मब्सजद के सनम्ाषण के पत्थर मंगाने की योजना है? बाबरी मब्सजद वाद के एक पक्​्कार हाजी महबूब ने ऐिा बयान सदया है. हासशम ने कहा सक यह राजनीसतक स्टंट है. बाबरी मब्सजद एक्शन कमेटी मे् ऐिी सकिी योजना पर चच्ाष तक नही् हुई है. हम केवि कोट्ष के फैि​िे का ही इंतजार करे्गे. इि सववाद का हि केवि कोट्ष िे ही सनकिेगा. उिे िब को मानना होगा. िंघ प्​्मुख मोहन भागवत भी देश के िंसवधान िे ऊपर नही्हो िकते. - वीएन दास शासमि कर उनकी जगह असमत शाह को मुख्यमंत्ी बनाकर गुजरात भेज सदया जाये. दूिरा सवकल्प है सक शाह को के्द्ीय मंस्तमंडि मे् शासमि सकया जाये और उनकी जगह नया अध्यक्​् बने.तीिरा सवकल्प है यह मोदी शाह की कुि्ी बचाने मे् कामयाब हो जाये्. िेसकन इिकी क्ीमत वे िंघ को कही् और चुकाएं. अगर पहिे दो सवकल्पो् मे् िे सकिी एक पर िहमसत बनती है तो नये अध्यक्​् के र्प मे् िंघ की पिंद राजनाथ सिंह या सनसतन गडकरी है् क्यो्सक वे मज़्बूत नेता माने जाते है्. ऐिे जो मोदी के दबाव मे् न आये. वही् मोदी राम माधव या एम वे्कैया नायडू मै् िे सकिी को अध्यक्​् बनवाना चाहे्गे क्यो्सक दोनो् उनके

जबरदस्​् िमथ्षक है्. िमिौता उम्मीदवार के्द्ीय स्वास्थ्य मंत्ी जेपी नड्​्ा बन कर उभर िकते है्. िेसकन अगर िंघ और मोदी मे् िहमसत नही्बन पाती और मोदी असमत शाह के नाम पर अड्जाये्, तो दोनो्के सरश्ते उिी सदशा मे् बढ् जाये्गे. सजि सदशा मे् वाजपेयी के काय्षकाि मे्गये थे. अयोध्या मे् उतरी सशिाएं िंघ का वही बार्द है् सजिे ऐिे िमय मे् उपयोग के सिए िुखाया जा रहा है. अगर िमिौते की कोसशशे्नाकाम रहती है्तो सशिापूजन की तरह का कोई काय्षि्म सफर शुर्सकया जा िकता है सजिे क्ाबू करने मे्मोदी िरकार की पूरी ऊज्ाष n िग जायेगी. शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

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आवरण मास्ट हेकथा ड

राम मंशदर का मॉडल: िास़​़शिकता से दूर

फोटो: पिन कुमार

मंदिर से बड़ा है मुद़ा

अगले साल होने वाले पांच कवधानसभा चुनावो्के मद्​्ेनजर भाजपा अयोध्या मे् मंकदर के मुद्े को गरमाये रखना चाहती है ताकक मंकदर बने या न बने, वोटो्का ध्​्ुवीकरण शुर्हो जाये. वि​िेक सक्सेना

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पको तो पता है सक कानून और व्यवस्था राज्य का सवरय है. हम इिमे् सकिी तरह का कोई दखि दे ही नही्िकते है्. अयोध्या मे्जो कुछ हो रहा है उि​िे सनपटने की सजम्मेदारी उत्​्र प्​्देश िरकार की है. मंसदर सनम्ाषण के सिए जगह का फैि​िा िुप्ीम कोट्ष को करना है. हमारा इि पूरे मामिे िे कुछ िेना देना ही नही् है इिसिए हम िोग खामोश है.’ यह सवचार गृह मंत्ािय के एक आिा अफिर के है्जो सक उन्हो्ने अयोध्या के घटनाि्​्म पर प्​्सतस्​्िया पूछे जाने पर मुस्कुराते हुए सदया. यह िच भी है. यह जानते हुए भी सक उत्​्रप्​्देश मे् मंसदर सनम्ाषण को िेकर जो कुछ शुर् हुआ है उिकी चुनावी फि​ि 2017 मे् काटी जायेगी. के्द्की भाजपा िरकार ने मंसदर 10 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

सनम्ाषण के मुद्े पर जहां चुप्पी िाध िी है. वही् यह ित्य सकिी िे सछपा नही्है सक अपने चुनाव घोरणा पत्​् मे् इिके सनम्ाषण का वादा करने िे िेकर मोदी िरकार के मंत्ी जब तब इिके सनम्ाषण की बात करते आये है्. पहिे सनसतन गडकरी ने फैजाबाद मे् कहा था सक अगर राम का मंसदर अयोध्या मे्नही्बनेगा तो कहां बनेगा और सफर हाि ही मे्डॉ महेश शम्ाष ने कहा सक देश के िेागो्की इच्छा है सक अयोध्या मे्मंसदर का सनम्ाषण हो. इि मामिे मे्के्द्िरकार बहुत फूंक-फूंककर चािाकी भरे कदम रख रही है. यह िच है सक िुप्ीम कोट्षका फैि​िा आने तक मंसदर का सनम्ाषण नही् सकया जा िकता है पर उिका िक्य् मंसदर सनम्ाण ष करने का नही्बब्लक इि मुद्े को गरम रखने का है. िरकार के भरोिमंद िूत्ो् के मुतासबक कारिेवकपुरम मे् पत्थरो् के मंगाए जाने के िाथ ही यह मामिा गरमाना शुर् हो गया है. अगर राज्य की

असखिेश िरकार यह पत्थर िाये जाने या तराशे जाने पर सकिी तरह का कोई प्​्सतबंध िगाती है तो इि​िे टकराव के हािात पैदा हो्गे. मामिा कोट्षकचहरी मे्जायेगा. कारिेवको्का पुसि​ि िे टकराव होगा और यह मुद्ा गरमाने िगेगा. ध्यान रहे सक 2017 मे् उत्​्रप्​्देश मे् सवधानिभा के चुनाव है. के्द्िरकार ने अपनी तरफ िे बहुत िोच िमि कर इिकी रणनीसत तैयार की सजि पर नरे्द् मोदी के ित्​्ा िंभािते ही काम शुर् हो गया था. िुप्ीम कोट्षका फैि​िा आने तक मंसदर सनम्ाण ष का काम शुर्नही्हो िकता है पर कुछ और सनम्ाण ष सकये जाने पर कोई प्स्तबंध नही्है. िूत् बताते है् सक के्द् िरकार के िंस्कृसत मंत्ािय की ओर िे उत्​्र प्​्देश की असखिेश यादव िरकार को करीब छह माह पहिे एक पत्​् भेजा गया सजिमे् उनिे कहा गया था सक के्द्राम और रामायण िे जुड्ेतमाम महत्वपूण्ष


स्थानो्को पय्टष न के सिहाज िे सवकसित करना चाहता है. इिके सिए ‘रामायण िस्ककट’ तैयार सकया जाना है. इिके तहत अयोध्या, सचत्​्कूट, मखौदा (बस्​्ी), जानकी कुडं (उन्नाव) आसद को शासमि सकया जायेगा. के्द् चाहता है सक राम और रामायण िे जुड्ी घटनाओ्, वस्​्ुओ् आसद को प्​्दस्शषत करने के सिए राम म्यूसजयम बनाया जाये. इिमे् सदल्िी के स्वामी नारायण (अक्​्रधाम) मंसदर की तरह िाउंड एंड िाइट शो, बोसटंग आसद का प्​्बंध भी सकया जायेगा. यह काम ‘प्​्िाद’ योजना (सपिस्​्गमेज सरजुसवनेशन एंड स्स्पटयूएिटी आग्षमे्टेशन ड्​्ाइव) के तहत सकया जाना है. इिके तहत उत्​्र प्​्देश िमेत देश के सवसभन्न राज्यो् और सवदेशो्मे्‘राम उत्िव’ आयोसजत सकये जाये्गे तासक राम की मसहमा का प्​्चार हो िके. उत्​्र प्​्देश िरकार िे इि बारे मे्प्​्स्ाव मांगते हुए कहा गया सक वह इि योजना के सिए पैिे की सचंता न करे्उिकी कोई कमी नही्की जायेगी. िीधा मतिब यह है सक िमाजवादी पाट्​्ी की िरकार अब भाजपा के सिए राम का प्​्चार करे सजिका खच्षमोदी िरकार अदा करेगी. यह िब बहुत िोच िमि कर सकया जा रहा है. जनवरी माह मे् ही िुब्मण्यम स्वामी और सवश्​् सहंदू पसररद समिकर राजधानी सदल्िी मे्दो सदविीय िम्मि े न आयोसजत करने जा रहे है्, सजिमे् राम मंसदर सनम्ाषण पर चच्ाष होगी. यह िम्मेिन 9 और 10 जनवरी को आयोसजत सकये जाने है्सजिमे्मंसदर सनम्ाण ष का ल्िू स्​्पटं जारी सकया जायेगा. सदल्िी मे्कोई और अहम गसतसवसध न होने की वजह िे खबसरया

चैनिो्को भी 24 घंटे तक अपना प्​्िारण जारी रखने के सिए बसढ्या मिािा समि जायेगा. मोदी िरकार इिमे् िफि होती भी नजर आ रही है क्यो्सक िंिद के शीतकािीन ित्​् के अंसतम सदन इि मुद्े पर राज्यिभा मे् जबद्षस् हंगामा हुआ. जहां जदयू महािसचव के िी त्यागी ने उत्​्रप्​्देश मे् पहिे जैिे हािात पैदा सकये जाने का मुद्ा उठाया तो बिपा िुप्ीमो मायावती ने आरोप िगाया सक भाजपा राजनीसतक िाभ उठाने के सिए सफर िे मंसदर मुद्े को गरमाने पर आमादा है. इि िंबंध मे् िरकार की िफाई कासबि गौर है. उिके ि​िंदीय काय्ष मंत्ी मुख्तार अल्बाि नकवी दिीि देते है्जहां पत्थर तराशे जा रहे है् वह स्थान सववासदत स्थि िे आधा सकिोमीटर दूर है. इिके तराशने का काम तो 1990 िे ही चि रहा था जो सक राजस्थान िे अदािती आदेश के कारण पत्थर न आ पाने के कारण र्क गया था. अदाित ने पत्थर तराशने पर सकिी तरह का प्​्सतबंध नही्िगाया हुआ है. के्द्ीय िंस्कृसत राज्य मंत्ी डॉ महेश शम्ाष का कहना है सक अयोध्या मे्मंसदर सनम्ाण ष िोगो् का बहुत पुराना िपना है. भाजपा भी यही चाहती है सक अयोध्या मे्राम मंसदर बने हािांसक इिका सनम्ाण ष अदािती फैि​िे के बाद हो या िभी पक्​्ो् के आपि मे् बैठकर आम िहमसत बनाने के बाद ही सकया जा िकता है. जहां तक वहां पत्थर मे्िे जाने की बात है, उि बारे मे्सवसहप िे ही पूछा जाना चासहए. हमारा इि िे क्या िेना देना. राम म्यूसजयम बनाये जाने के सिए रासश के आवंटन के बारे मे् उनका कहना है सक इिमे्

नया क्या है. बुद्पय्टष न िस्कटक की तरह ही राम पय्षटन िस्ककट सवकसित करने के सिए भी पैिा आवंसटत सकया गया है. भाजपा की एक पुरानी परंपरा रही है सक वह गुिगुिे तो खाती है पर गुड्िे परहेज करती है. िब जानते है्सक उिके िंघ के िाथ सिव इन सरिेशनसशप है. इिके बावजूद उिके नेता ताि ठोककर कहते है् सक हम न तो िंघ के राजनीसतक पक्​् है और न ही िंघ हमारा िांस्कृसतक िंगठन है. इिके बाद भी घुटन्ना पहनकर गुरद् स्​्कणा देने पहुच ं जाते है.् इिी तरह भाजपा के मंत्ी मंसदर सनम्ाषण की गसतसवसधयो्िे सकनारा कर रहे है्. पाट्​्ी ने अपने 2014 के चुनाव घोरणा पत्​् मे् मंसदर सनम्ाषण का वादा सकया था. िंघ प्​्मुख मोहन भागवत बार-बार मंसदर सनम्ाषण की मांग करते आये है्. िहयोगी पाट्​्ी सशव िेना यह मांग कर चुकी है सक नरे्द् मोदी ‘मन की बात’ मे्मंसदर सनम्ाषण शुर्करने की तारीख का ऐिान करे्. गृहमंत्ी राजनाथ सिंह यह कह कर बचाव करते सक हमारे पाि राज्यिभा मे् बहुमत नही् है. इिसिए मंसदर सनम्ाषण का प्​्स्ाव िाकर कानून नही् बना िकते. िरकार को अब यह महिूि होने िगा है सक भ्​्ष्ाचार मुब्कत, सवकाि िरीखे, उिके वादो्और दावो्की हवा सनकि चुकी है. सदल्िी और सबहार सवधानिभा चुनाव के नतीजे िामने है्. उिे 2016 मे् पांच राज्यो् मे् चुनाव का िामना करना है. अगिे िाि उत्​्रप्​्देश का चुनाव है. इिसिए िरकार भाजपा के माकूि माहौि बनवाने के सिए मंसदर मुद्े को गरमाने की पूरी कोसशश करेगी. n

शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 11


आवरण मास्ट हेकथा ड शंभूनाथ शुक्ल

ये कशलाएं कसयासत की

चुनाव आने से पहले हर बार मंकदर का राग अलापने के पीछे कनकहत इरादो्को भांपना जर्री है.

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न सिया सक अयोध्या मे्राम जी पैदा हुए हो्गे और हो िकता है सक उिी जगह पैदा हुए हो्जहां पर आज रामि​िा सवराजमान है्. पर इिका क्या िबूत है सक रामि​िा नाम का कोई बािक रहा था और जहां वह पैदा हुआ था वहां पर उिका कोई मंसदर बनाया गया था, सजिे मीर बाकी ने तोड्ा था. और अगर तोड्ा भी रहा होगा तो अब यह तो िंभव नही् है सक वहां पर सफर िे मंसदर बनाया जाये क्यो्सक आज देश मे्जनतांस्तक गणतंत्है. वह सकिी धम्षकी भावनाओ्िे प्​्भासवत नही्होता है इिसिए आज वहां मंसदर बनाने की बात करना बेमानी है. कानून के अनुिार ऐिी मांग को खासरज कर देना चासहए. जो िोग ऐिी हरकते्कर रहे है्उनको कानून के अनुिार दंसडत करना चासहए. िेसकन यूपी की असखिेश यादव िरकार ऐिे तत्वो्िे कानून के मुतासबक सनपटने की बजाय उनकी हरकतो् पर चुप है. सपछिे सदनो्अयोध्या मे्राम मंसदर बनाने के सिए सशिाएं भेजी गयी. इिके बाद मब्सजद बनाने के सिए पत्थर आया. दोनो् िमुदायो् के िोग बयानबाजी कर आपि मे्तनाव पैदा कर रहे है्. जबसक ित्य तो यह है सक न कोई मंसदर बनाना चाहता है न कोई मब्सजद. इनकी यह िारी बयानबाजी 2017 मे्होने वािे यूपी सवधानिभा चुनाव के मद्​्ेनजर है. यूपी एक ऐिी प्​्योगशािा है सजिमे्िारे असतवादी दि भावनाओ्के दोहन का अपना प्क ्े ण ् अक्िर सकया ही करते है.् िाि 2014 के िोकिभा चुनाव के ठीक पहिे उत्​्र प्​्देश मे् शामिी और मुजफ्फरनगर मे् िुसनयोसजत दंगे कराये गये. इिके बाद अब सबहार सवधानिभा चुनाव के पहिे यूपी मे् गाय को सहंदू प्​्तीक बताकर गोमांि के सवरोध मे् सहंिा हुई और ऐन सदल्िी के पड्ोि मे् बिे गौतमबुद् नगर (नोएडा) सजिे के कस्बे दादरी के िमीप एक गांव मे् अखिाक नामक ग्​्ामीण के घर िे बीफ बरामद होने का हल्िा मचाकर उिकी हत्या कर दी गयी. अब यूपी के अपने सवधानिभा चुनाव को एक िाि िे कुछ ही ज्यादा वक्त बचा है इिसिए अब राममंसदर का मुद्ा उछािा जा रहा है. पर दुख तो यह है सक यूपी की िपा िरकार इि बार भी ऐिे अराजक तत्वो्िे सनपट पाने मे्बौनी िासबत हो रही है. िवाि यह उठता है सक जो यूपी की जो असखिेश िरकार इि बार हर मोच्​्े पर बाजी मारती सदखती है वह अचानक के्द् और भाजपा के सखिाफ खड्ेहोने मे्खुद को िाचार क्यो्पाती है. इि​िे असखिेश िरकार अपनी िारी िफिता पर पानी फेक देती है. पहिे की िपा िरकारो् िे सवपरीत 2012 मे् जो िपा िरकार बनी उिके मुख्यमंत्ी बने असखिेश यादव, युवा और िंभावनाओ्िे िबािब. सजनके पाि अपना एक सवजन था और यूपी को सवकाि की तरफ दौड्ाने का िक्​्य. पर जब भी िांप्दासयकता के सवर्द्मोच्ाष िेने का िवाि आया पता नही्क्यो्असखिेश िरकार िाचार रही. सपछिी िरकारो्के सवर्द् यह यूपी की पहिी िरकार रही सजिने भ्​्ष्ाचार पर अंकुश िगाया और जासतवाद िे ऊपर उठकर फैि​िे सकये. आज यूपी की िड्के्अन्य राज्यो् की तुिना मे्बेहतर है्, भ्​्ष्ाचार अपेक्ाकृत कम है और सवकाि की दौड् 12 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

मे् यूपी टाप टेन िूबो् मे् िे है. यही कारण है सक सपछिे सदनो् स्वयं रतन टाटा ने िखनऊ जाकर यूपी की असखिेश यादव िरकार की िराहना की. पर जब भी िांप्दासयकता के सखिाफ स्टै्ड िेने का प्​्श्न आया यूपी सफर सफिड्​्ी िासबत होता जा रहा है. ऐिा नही् सक सिफ्क सहंदू सफरकापरस्​् ताकतो् के आगे यूपी की िरकार ढीिी पड् जाती है वरन मुब्सिम असतवासदयो्के िमक्​्भी यह िरकार घुटने टेक देती है. यही कारण है सक सपछिे सदनो्सशिापूजन के बहाने सजि तरह यूपी मे्सहंदू भावनाएं उभारने की कोसशश की गयी् उि पर असखिेश िरकार मौन रही. दूिरी तरफ मुब्सिम िंगठनो्ने मब्सजद के सनम्ाषण के सिए दो ट्​्क पत्थर मंगाये और उि पर भी यूपी िरकार शांत रही. यह अिग बात है सक यूपी के गृह िसचव देवाशीर पांडा बार-बार कह रहे है्सक िरकार अयोध्या पर सनगाह रखे है और वहां पर अिंतोर को पनपाने नही्सदया जायेगा. तब िवाि उठता है सक िरकार कब हरकत मे्आयेगी जब पानी सिर िे ऊपर गुजर जायेगा. जो िोग अयोध्या मे्राम ि​िा का मंसदर बनाने की बात करते है्उन्हे् यह अच्छी तरह पता है सक राममंसदर सववाद िुप्ीम कोट्ष मे् है और जब तक कोट्ष का फैि​िा नही् आता वे सववासदत पसरिर मे् कुछ नही् कर िकते. पर इिके बावजूद हर बार चुनाव आने पर वे मंसदर बनाने का राग अिापने िगते है्. उनकी इन हरकतो् िे ऐिा िगता है सक मंसदर बनाना उनका िक्​्य है ही नही्वे इि बहाने राम बनाम बाबर का िवाि उठाकर अपना वोट बै्क पक्​्ा कर िेना चाहते है्. हािांसक अब इि मामिे पर इतना पानी बह चुका है सक यह तय करना मुबश् कि है सक वाकई राम मंसदर बनाने का दांव चिकर वे अपना वोट बढ्ा पाते है्या कम कर िेते है.् िेसकन यह एक समथ चिा आ रहा है और उन िोगो्को िगता है सक वोट पके्हुए. इिसिए बेहतर यही होगा सक उत्​्र प्​्देश के मुख्यमंत्ी असखिेश यादव इि मामिे मे् र्सच िे्. हर चुनाव मे् ऐिी हरकते् करने वािे असतवादी तत्वो्के प्​्सत िख्त हो्. इि तरह की हरकते् कर ये तत्व उत्​्र प्​्देश को बीि िाि पीछे कर देते है्.मुख्यमंत्ी को िमिना चासहए सक यूपी की जनता अब ऐिे तत्वो् को िमि चुकी है और इनिे दो-दो हाथ करना भी चाहती है. पर इिके सिए पहि यूपी िरकार को ही करनी होगी. अगर वाकई राममंसदर मुद्े मे् दम होता तो 2002 के बाद िे यूपी मे् भाजपा सजि बुरी गत को जा रही है उिमे् कुछ तो िुधार होता. सपछिे तीन सवधानिभा चुनाव िे हम देख रहे है् सक मंसदर मुद्े के बने रहने के बावजूद यूपी मे्भाजपा के वोट बैक ् मे्कतई बढ्ोतरी नही्हुई. मुख्यमंत्ी यह बात िमिे्सक यूपी मे्अब राम मंसदर बनाम मब्सजद मुददा िुप्तप्​्ाय है बि मुख्यमंत्ी को थोड्ा िख्ती बरतनी होगी. यह यूपी के सहत मे्होगा. उत्​्र प्​्देश की जनता सवकाि चाहती है. उिकी मंशा है सक यूपी मे्वही िच हो जो हाि मे्रतन टाटा ने कहा सक यूपी िगातार सवकाि की n दौड्मे्है. ( िेखक दैसनक ‘अमर उजािा’ के पूव्षिंपादक है्.)


आवरण मास्ट हेकथा ड

अयोध्यावासी और अयोध्यावादी मे्िक्ककरना जर्री है. अयोध्यावासी भजन-पूजन करते हुए शांकत से रहना चाहते है्, लेककन अयोध्यावादी धम्षके आधार पर राजनीकत करना चाहते है्. अर्ण कुमार व्​्िपाठी

शु

ि्​्वार’ के बीते अंक मे् फैजाबाद के िमाजवादी नेता जयशंकर पांडे ने एक इंटरव्यू मे्कहा था सक भाजपा ने सपछिा चुनाव मोदी और सवकाि के नाम पर िड्ा था. िेसकन अगिा चुनाव वह सफर राम के नाम पर िड्ेगी. क्यो्सक वह जब ित्​्ा मे्होती है तो उिे मनीराम याद आते है्और जब बाहर होने वािी होती है. तो उिे राम याद आते है्. इिी बात को थोड्ा अिग ढंग िे अयोध्या मुकदमे के िबिे पुराने वादी हासशम अंिारी (96) भी रखते है्. जब उनिे पूछा गया सक पत्थर आ रहे है्. क्या होने वािा है? तब उनका कहना था सक चुनाव होने

वािा है. अब अयोध्या आने वािे पय्षटको् को सवसभन्न भाराओ् मे् सिखा गया अयोध्या आंदोिन का िंपण ू ष्इसतहाि उपिल्ध कराया जा रहा है. वे पूछने भी िगे है्सक पत्थर कहां रखे है्. कारिेवकपुरम की सशिाएं अब सफर िे आकर्षण का के्द् बन रही है् और चैनिो् की ओबी वैन उधर र्ख करने िगी है्. यह सि​िसि​िा सवश्​् सहंदू पसररद के सशखर पुर्र अशोक सिंघि के सनधन के िाथ और िंघ प्​्मुख मोहन भागवत के बयान के बाद तेज भी हुआ है. 2015 के छह सदिंबर को अयोध्या और फैजाबाद मे्अिग माहौि बनाने का प्​्याि भी हुआ था. इन हिचिो्िे िवाि उठता है सक देश को स्माट्षशहरो्का तोहफा देने का वादा करने वािे प्ध ् ानमंत्ी नरेद् ्मोदी और प्द् श े को सवकाि की नयी ऊंचाई का िपना सदखाने मे्िगे मुख्यमंत्ी असखिेश यादव क्या अयोध्या और फैजाबाद का सवकाि करे्गे या सफर वहां सववाद का नया बवंडर खड्ा होने दे्गे. अयोध्या के िोग तो भयभीत है् ही और भयभीत है देश का वह िामासजक िद्​्भाव भी सजिे स्वयं नरे्द्मोदी ने िाि 2014 के चुनाव के िमय िबका िाथ और िबका सवकाि का नारा देकर आश्​्स् सकया था. दरअि​ि इि देश मे्दो तरह के िोग अयोध़या मे़ साधु : अिांशत के समाचार

न जीते़

है्. एक है् अयोध्यावािी और दूिरे है् अयोध्यावादी. अयोध्यावािी वे िभी िोग है्जो धास्मषक है् और अपने-अपने शहर मे् अपने इष्​्देव का पूजन और भजन करते हुए शांसत िे रहना चाहते है् और देश के सवकाि मे् अपना योगदान देना चाहते है्. अयोध्यावादी वे है् जो धम्षके आधार पर राजनीसत करना चाहते है्और धास्मक ष और समथकीय प्त् ीको्का प्य् ोग सववाद की राजनीसत के सिए करना चाहते है्. वे एक पुराने और िुसवधाओ्िे रसहत धास्मषक शहर को कुछ देने और उिका सवकाि करने के बजाय उिके माध्यम िे अपना राजनीसतक सवकाि करना चाहते है्. इि​िे वह राजनीसतक ित्​्ा हासि​ि करना चाहते है.् अयोध्या का अथ्षहै वह नगर सजिे युद् मे् जीता ना जा िके. हर कोई चाहता है सक उिका गांव, उिका शहर (जो अपने मे्उिकी जन्मभूसम और उिकी अयोध्या है) सकिी और िे जीता न जा िके. उिका सनवािी चाहता है सक बाहर िे िोग वहां आये्. घूमे् टहिे् और अच्छा िगे तो बिे् भी. उिकी िंसक ् सृ त मे्अपना योगदान भी दे.् िेसकन उिकी शांसत को भंग न करे्. ऐिी भावना अयोध्या,

14 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016


सरयू तट पर अयोध़या: तूफान से पहले की िांशत?

इस अयोध़या को मथुरा और काशी िभी शहरो्के सनवासियो्की है. िेसकन धम्ष और प्​्तीको् की काल्पसनक राजनीसत करने वािे उि शहर और गांव िे खेिते है्. जो उिे कुछ देने के बजाय उिका िद्​्ाव छीन कर चिे जाते है्. सजि मय्ाषदा पुर्रोत्​्म भगवान राम के मंसदर बनाने के नाम पर अयोध्या मे्सववाद पैदा सकया जाता रहा है. उन्हो्ने स्वयं अपने राज्यसभरेक पर उठते सववाद को टािने के सिए वनवाि का रास्​्ा अपनाया था. वे नही् चाहते थे सक राजकाज के सिए भाई-भाई मे्िड्ाई हो और बाहर के िोग तमाशा देख.े् हािांसक उन्हो्ने अन्याय के सवर्द्प्​्सतकार बंद नही्सकया और इिीसिए उन्हे् िमाज के वंसचतो् को इकट्​्ा करके रावण के अन्यायी राज्य िे टकराना पड्ा. सनस्​्ित तौर पर राम मय्ाषदा पुर्र थे और उनका रामराज्य अपनी तमाम नीसतयो्के सिए याद सकया जाता है. भिे ही वह एक उटोसपया हो. इिके बावजूद रामराज्य पूण्ष नही् था. राम के राज्य मे् भी िीता को वनवाि समिा और शंबूक का वध सकया गया. वनवासियो् और वानर भािुओ्की िेना बनाने वािे राम का यह

आचरण शूद् और स्​्ी अब्समता के सवर्द् था. बब्लक उनिे कुछ मामिो् मे् बेहतर शािन तो भरत का था जो महज राम की खड्ाऊं रखकर राज कर रहे थे. शायद भरत को राज्य का मोह नही् था. वे राम के आदश्​्ो् को सिंहािन पर रखकर नगर िे दूर बैठकर राज कर रहे थे. इिीसिए भरत को महात्मा कहा गया. महात्मा गांधी अगर रामराज्य की बात करते थे तो वे इसतहाि को पीछे नही् िे जाना चाहते थे. वे राम िे प्​्ेरणा िेकर मय्ाषदा और नैसतक मूल्यो् पर आधासरत एक िोकतांस्तक राज्य की स्थापना करना चाहते थे. िेसकन वे धम्ष आधासरत राज्य नही् बनाना चाहते थे. वे धम्ष के नैसतक मूल्यो् को आधुसनक राज्य मे् प्​्सतस्​्ित करना चाहते थे. इिीसिए उनका कहना था सक मै्िमस्​्सहंदू धम्षग्थ ्ं ो्मे्यकीन करता हूं. िेसकन अपने सववेक के मुतासबक उिमे् पसरवत्षन (िंशोधन) की छूट िेता हूं. कुछ िोग इिे गांधी की चािाकी कहते है् िेसकन ध्यान िे देखे् तो यह गांधी का राजनीसतक सववेक था. जो असहंिक भी था, नैसतक भी था, धम्षिे अनुप्ासणत भी था. िेसकन

धम्षआधासरत राज्य का सिद्​्ांत नही्था बब्लक िेक्यूिर था. यहां िेक्यूिर का अथ्षयही है सक राज्य का कोई धम्ष (सरिीजन) नही् है. वह िभी धम्​्ो्के िाथ िमान र्प िे व्यवहार करेगा और सकिी के िाथ पक्​्पात नही्करेगा. राम मंसदर का सववाद उठने िे न सिफ्कउत्र् प्​्देश की राजनीसत और देश की राजनीसत नये प्​्कार के धम्षिंकट मे् फंिेगी बब्लक प्​्देश मे् सवकाि का िपना बो रहे असखिेश यादव और देश मे् सवकाि और अच्छे सदन का स्वप्न सदखा रहे प्​्धानमंत्ी नरे्द् मोदी नये सकस्म के िंकट मे् सघरे्गे. हािांसक असखिेश यादव और नरे्द्मोदी की राजनीसत और काय्षशैिी मे् काफी अंतर है. िेसकन उनमे् एक िमानता है सक जहां असखिेश मुिायम पसरवार (यादव पसरवार) के िगड्ेमे्फंिे हुए है.् वही्मोदी िंघ पसरवार के िगड्े मे् उि​िते सदखायी दे रहे है्. इि िगड्ेमे्एक हद तक तटस्थ सदखने िे दोनो् का फायदा है. िेसकन इिमे्उि​िते जाने और इिके हावी होने िे दोनो् का नुकिान है. अयोध्या सववाद के चिते िांपद् ासयक ध्व्ु ीकरण और िेक्यूिर गोिबंदी का फाम्षूिा पुराना हो चिा है. िमाजवादी पाट्​्ी मुजफ्फरनगर मे्देख चुकी है सक दंगो् िे उिे भारी नुकिान हुआ. िेसकन भाजपा को भी यह मानना होगा सक राम मंसदर की हांडी सफर चढ्ाने पर उिकी और सवशेर तौर पर मोदी की सवकाि की राजनीसत को बसि देनी होगी. कुछ सदनो्िे मोदी अपने बदिने का िंकते दे रहे है्. जब िोग उनिे खुन्नि नही्खाते है्, तब उनिे उम्मीद बनती है, जब वे िोसनया गांधी और डॉ मनमोहन सिंह जैिे कांग्ेि के शीर्ष नेताओ्को अपने घर चाय सपिाने बुिाते है्और काबुि िे िौटते िमय अचानक िाहौर मे्उतर कर पाक प्​्धानमंत्ी नवाज शरीफ की पोती की शादी मे्शासमि होते है.् अपने बारे मे्बने बनाये िांचे को तोड्ने की मोदी की यह कोसशश घरेिू मोच्​्े यानी िंघ पसरवार के स्​्र पर भी सदखनी चासहए. या तो वे सवसहप जैिे िंगठनो्पर अंकश ु िगाये् या सफर पूव्ष प्​्धानमंत्ी चंद्शेखर की तरह तमाम िंगठनो् को सबठाकर उनके बीच िमिौता कराये.् इि काम मे्उन्हे्मुिायम सिंह का भी िहयोग समिना चासहए और दूिरी पास्टियो्का भी. मोदी उत्​्र प्​्देश ही नही्भारत की िांस्कृसतक राजधानी बनारि का भी प्​्सतसनसधत्व करते है्और असखिेश यादव एक ऐिे सवशाि प्​्देश के मुख्यमंत्ी है्. सजिकी आबादी फ्​्ाि ं और स्​्बटेन जैिे यूरोप के कई देशो् िे बड्ी है. िंयोग िे इन दोनो् नेताओ् के प्​्सत देश के उद्​्ोगपसतयो्मे्भी आकर्षण है. वे प्​्देश को उिका वह प्​्ाप्य दे िकते है्जो जासत और धम्ष की राजनीसत के कारण उिे िंबे िमय िे n नही्समिा. शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 15


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घोटाले का मैदान

कदल्ली सरकार के प्​्मुख सकचव की जांच करने आयी सीबीआई की कार्षवाई का नतीजा उलट हो गया और कदल्ली क्​्िकेट एसोकसएशन के घोटाले उजागर हो गये. कजसकी आंच अर्ण जेटली तक पहुंची. शरद गुप्ता

क

भी-कभी छोटी-छोटी घटनाएं इसतहाि बदि देती है्. प्​्ेम सिंह और राज सिंह के नाम सकतने िोग जानते है्. दो माच्ष 1991 को हसरयाणा पुसि​ि के इन दो कांस्टेबिो्ने राजीव गांधी के बंगिे की सनगरानी करने की वजह िे चंद सदनो्बाद चंद्शेखर िरकार सगर गयी थी. इि िाि 15 सदिंबर को सदल्िी िरकार मे् प्​्मुख िसचव राजे्द् कुमार के दफ्​्तर पर िीबीआई का छापा भी ऐिी ही ऐसतहासिक घटना िासबत हो िकती है. प्​्ेम और राज सिंह की तरह चेतन िांघी और पुण्य श्​्ीवास्​्व भी ऐिे गुमनाम अफ्िर है्. सजनके कारण देश की राजनीसतक धारा बदि िकती है. अगर ठीक तरह िे कार्वष ाई की गयी तो कम िे कम स्​्िकेट के प्​्शािन मे् भी आमूिचूि पसरवत्षन आ िकता है. सदल्िी िरकार के िसचवािय मे् पहाड् खोदने गयी िीबीआई को समिी तो चूहे की पूंछ भी नही्िेसकन जब राजे्द्कुमार के बॉि यानी 16 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

सदल्िी के मुख्यमंत्ी अरसवंद केजरीवाि ने आिमान ही िर पर उठा सिया तो सपंजरे मे्देश के सवत्​् मंत्ी अर्ण जेटिी फंिे पाये गये. केजरीवाि का कहना था सक देश मे पहिी बार सकिी मुख्यमंत्ी के दफ्तर मे्िीबीआई की रेड हुई और मुख्यमंत्ी को उिके दफ्तर मे्जाने िे रोका गया. केजरीवाि का आरोप था सक राजे्द्कुमार पर भ्​्ष्ाचार के आरोपो् की जांच के बहाने िीबीआई जेटिी के इशारे पर सदल्िी िरकार के सदल्िी एंड सडस्स्टक स्​्िकेट एिोसिएशन (डीडीिीए) मे्भ्​्ष्ाचार की जांच की पड्ताि करने आयी थी. 1999 िे िेकर 2014 तक डीडीिीए के अध्यक्​् अर्ण जेटिी थे और जेटिी पर उनकी ही पाट्​्ी के िांिद कीस्तष आज़्ाद और पूव्ष स्​्िकेट कप्तान सबशन सिंह बेदी ने उनके ऊपर भ्​्ष्ाचार के आरोप िगाये थे. सजिके बाद सदल्िी िरकार ने अपने दो िसचवो् चेतन िांघी और पुण्य श्​्ीवास्​्व की कमेटी िे जांच करायी थी. केजरीवाि ने कहा सक िीबीआई इिी जांच के नतीजो् का पता िगाने आयी थी. इिीसिए उिने केजरीवाि के ऑस्फि मे्रखी इि जांच सरपोट्षकी जांच पर ही िारा ध्यान िगाया. क्यो्सक राजे्द् कुमार के पाि तो केवि 27 िाख र्पये की एफडी, दो िाख र्पये नक्द और 11 बोति सवदेशी शराब समिी. दो िाख र्पये महीना वेतन पाने वािे आईएएि अफ्िर के पाि समिी िंपस्​्त आय के स्​्ोत के मुतासबक ही थी. नवंबर 2015 मे् तीन सदनो् के अंदर ही तैयार िांघी और श्​्ीवास्​्व की सरपोट्ष मे् ऐिा

शदल़ली मे़ श़​़िकेट मैच: खुलती पोल क्या था सक के्द् िरकार को सदल्िी के मुख्यमंत्ी के दफ्​्तर पर ही िीबीआई की रेड डिवानी पड्ी. दरअि​ि यह सरपोट्षकई पुरानी सरपोट्​्ो् का िंग्ह मात्​् है. इिमे् सदल्िी के दो जजो् की कमेटी की डीडीिीए के चुनाव की जांच, सदल्िी पुसि​ि की कई एफआईआर की जांचे, िीसरयि फ्​्ॉड इंवेब्सटगेशन ल्यूरो की सरपोट्षके अिावा डीडीिीए की अपनी अंदर्नी जांच कमेटी सरपोट्ष शासमि है. िाथ ही इिकी सिफ्ासरशे् है् सजनमे् िबिे प्​्मुख है, डीडीिीए मे्गड्बस्डयो्की सवस्त्ृ जांच के सिए कमीशन ऑफ्इंक्वायरी सबठाना. केजरीवाि ने गरम िोहे पर चोट की और फौरन पूव्ष िोसि​िीटर जनरि गोपाि िुब्मण्यम का इंक्वायरी कमीशन गसठत कर सदया. केरि के स्​्तवे्द्म ब्सथत पद्​्नाभ स्वामी मंसदर के ख्ज़्ाने के जांच असधकारी रहे िुब्मण्यम को िुप्ीम कोट्ष ने गुजरात के िोहराबुद्ीन शेख् फ्ज़्ी एनकाउंटर मामिे मे् अदाित की िहायता के सिए अमीकि क्यूरी सनयुक्त सकया था. ज्​्ात हो सक इि मामिे मे् मौजूदा भाजपा अध्यक्​् असमत शाह भी आरोपी थे. सजन्हे् सपछिे िाि सदिंबर मे् मुंबई की िीबीआई अदाित ने दोरमुक्त घोसरत सकया और इि फै्ि​िे के सखिाफ िीबीआई ने हाई कोट्षमे्अपीि भी नही्की. डीडीिीए की अपनी जांच मे् गंभीर असनयसमतताएं पायी गयी्. मि​िन 2013-14 मे् इनकम टैक्ि और कंपनी मामिो् के 16 वकीिो्को कुि समिाकर 1.36 करोड्र्पया अदा सकया गया. िेसकन सफर भी टीडीएि के


कई मामिो्मे्डीडीिीए ने सडफ्ॉल्ट सकया. इिी तरह चार वकीिो् को कुि समिाकर 2.15 करोड् र्पये सदया गया सजिमे् िे 1.6 करोड् र्पये तो एक ही वक्ीि असमताभ बख्शी को सदये गये सजनके सपता जेएि बख्​्शी खुद डीडीिीए के िदस्य है्. यही नही्, तीन कंपसनयो् को सबना सकिी काम के ही सवधान इंफ्रास्ट्क्चर सिसमटेड को 52.10 िाख, श्​्ीराम ट्​्ेडकॉम को 53.5 िाख और मैपि इंफ्ासरयल्टी को 49.90 िाख र्पये एक ही सदन सदये गये. िेसकन डीडीिीए की आंतसरक जांच कमेटी की आपस्​्त पर तीनो्ने ये पैिे वापि कर सदये. डीडीिीए के वत्षमान अध्यक्​् एिपी बंि​ि का कहना था सक ये पैिे इन कंपसनयो्को बतौर क्ज़ष्सदये गये थे िेसकन िेिे्टरी असनि खन्ना ने कमेटी को बताया सक ये पैिे काम करने का पेम् टे् था. िेसकन कौन िा काम सकया और अगर पे्मे्ट था तो पैिे वापि क्यो्सकये गये, इन िवािो्का उनके पाि कोई जवाब नही्था. कमेटी ने यह भी पाया सक एक ही काम करने के बदिे कई-कई कंपसनयो्को भुगतान सकया गया. कई मामिो् मे् काम शुर् होने िे पहिे ही एडवांि पेम् े्ट कर सदया गया तो कई मामिो्मे्खत्म होने िे पहिे. स्फरोज़्शाह कोटिा स्टेसडयम बनाने मे्तो जबरदस्​्घपिे हुए. शुर्आती 24 करोड्र्पये के बजट को बढ्ा कर 114 करोड् कर सदया गया. सरनोवेशन के सिए 57 करोड् एक िरकारी कंपनी इंजीसनयसरंग प्​्ोजेक्ट्ि इंसडया सिसमटेड (इसपि) को सदये, बाकी के 57 करोड् ऐिी 11 कंपसनयो् मे बांट सदये गये सजनका कोई अस्​्सत्व ही नही् है. उन िभी के सनदेशक, पते, फ्ोन, ईमेि एक जैिे है् और असधकतर फ्ज़्ी है्. इनमे्िे तीन कंपसनयां घो्डा गांव के सजि पते पर सदखायी गयी है्. वह नरेश शम्ाष नाम के उि व्यब्कत का है जो घर-घर फेरी िगा कर अगरबस्​्तयां बेचता है. उिकी कंपसनयो्को 25 िाख िे ज्यादा पे्मे्ट सकया गया है. इिी तरह 35 करोड् मे् कॉरपोरेट बॉक्ि बेचने के सिए सजि 21 िे्चुरी मीसडया नाम की कंपनी को तकरीबन 4 करोड्र्पये कमीशन के सदये गये. वह िोकेश शम्ाष की है, जो जेटिी के सनजी समत्​्है्. इि दौरान बीि हज़्ार की क्ीमत वािे िैपटॉप 16 हज़्ार रोज़्ाना के सकराये पर सिये गये और पांच हज़्ार की क्ीमत वािे स्​्पंटर का सकराया िाढ्ेतीन हज़्ार प्स्तसदन की दर िे सदया गया. इि पर िोशि मीसडया पर ढेरो्मजासकयां सटप्पणी भी चि पड्ी है्. िंिद मे्अपना बचाव करते हुए जेटिी ने कहा सक मै्ने कोटिा को नया बनवाने मे्केवि 114 करोड् खच्ष सकये है्. जबसक कांग्ेि के िुरेश किमाड्ी ने कॉमनवेल्थ खेिो् के सिए

ऊपर से नीचे: अऱण जेटली, अरशिंद केजरीिाल और कीश़तत आजाद: शि​िाद दर शि​िाद

इंद्प्स्थ स्टेसडयम को ठीक कराने मे 900 करोड्िगाये थे. भाजपा िांिद और पूवष्स्​्िकेट सखिाड्ी कीस्तष आज़्ाद ने तुरंत जोड्ा - हम िब जानते है्सक उिके बाद किमाड्ी का क्या हाि हुआ. शायद यही वजह है सक िोशि मीसडया मे अर्ण जेटिी को भाजपा का किमाड्ी कहा जा रहा है. बीते पांच िाि िे डीडीिीए के भ्​्ष्ाचार को िामने िाने मे् जुटे आज़्ाद को भाजपा ने सनिंसबत कर सदया. हािांसक पाट्​्ी का एक सहस्िा इिे उसचत नही् मान रहा है. कीस्तष का कहना है सक वे जेटिी के नही् बब्लक भ्​्ष्ाचार के सखिाफ है्. वैिे ही जैिे प्​्धानमंत्ी नरे्द् मोदी. िेसकन सवपक्​् को मौक्ा समि गया है. आम आदमी पाट्​्ी नेता आशुतोर कहते है्सक प्​्धानमंत्ी नरे्द् मोदी ने िगता है सक अपना नारा ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ बदिकर ‘सकिी सवपक्​्ी को खाने नही्दूंगा, िेसकन मेरी पाट्​्ी का कोई खायेगा तो उिे बचाऊंगा जर्र.’ जेटिी अपने बचाव मे्िगातार कह रहे है् सक मै्ने कोटिा के पुनस्नषम्ाषण मे्एक पैिा नही् सिया है. उनके िमथ्षक कह रहे है् सक जेटिी को कोई भ्​्ष्ाचार करने की ज़्र्रत नही्है. वे एक नामी वक्ीि है् सजनकी िािाना कमाई करोड्ो्मे्है. िेसकन कांग्ेि के नेता इिी उत्​्र को एक प्​्श्न बना रहे है्. क्या मनमोहन सिंह जी ने कोयिा मामिे मे् या 2जी मे् एक पैिा सिया था? सफर जेटिी उनिे क्यो् इस्​्ीफ्ा मांगते थे. िंिद क्यो् ठप करते थे? िंिद का पूरा शीत ित्​्ऐिे मामिो्की भेट् चढ्गया. देश की अथ्षव्यवस्था के सिए जर्री माना जाने वािा जीएिटी िसहत कई दूिरे अहम कानून पासरत नही् हो पाये. िेसकन क्या देश के मनोरंजन के एक जर्री सहस्िे स्​्िकेट को भ्​्ष्ाचार, भाई-भतीजावाद और प्​्शािसनक अक्​्मताओ्िे आजाद करने के सिए िभी दि एक हो पाये्गे? कीस्तष आजाद को भाजपा िे सनिंसबत सकये जाने िे पाट्​्ी पर आया तूफ्ान अभी शांत नही् होगा. बब्लक अभी यह और तेज़् होने वािा है. भाजपा के बुज़्ुग्षनेता माग्षदश्षक मंडि ही नही् बब्लक राष्​्ीय स्वयंिेवक िंघ भी भाजपा मे्हो रही घटनाओ् िे ख्ुश नही् है. ख्ाितौर पर भ्​्ष्ाचार के आरोपो् की जांच के बजाये कीस्तष पर कार्षवाई िे, िंघ के अंदर्नी िूत्ो् के मुतासबक इि​िे यह िंदश े गया है सक भाजपा को भ्ष ् ्ाचार िे परहेज़्नही्है. यह भी सक पाट्​्ी और िरकार केवि मोदी, असमत शाह और अर्ण जेटिी अपनी मनमज़्​्ी के मुतासबक्चिा रहे है्. जबसक सदल्िी के बाद सबहार मे्पाट्​्ी की हार िे मोदी-शाह का कसरश्मा खत्म हो गया िगता है. यही वजह है सक िंघ चाहता है सक असमत शाह की जगह पाट्​्ी अध्यक्​् के पद पर कोई नया n व्यब्कत चुना जाये. शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 17


मास् देशकाल ट हेड

लाहौर मे़ मोदी और निाज िरीफ: अचानक या िुशनयोशजत?

मोदी का सफ़र नवाज़ का दर नरे्द्मोदी और नवाज शरीि की मुलाकात की पोशीदा योजना बनी ताकक जाना भी हो जाये और सीधी कगनती मे्भी न आये! इसे कूटनीकत कहते है्और इससे कहंदुत्व और इज्लाम वालो् को कोई परहेज नही्है.

18 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

कुमार प्​्शांत

ह

मे्कोई यह बताने या िमिाने की कोसशश न करे सक अफगासनस्​्ान िे उड्ा सवमान जब िाहौर के ऊपर पहुंचा तो अचानक ही प्​्धानमंत्ी नरे्द्मोदी ने अपने पायिट को बुिा कर कहा सक उतारो, उतारो भाई, सवमान को यही्उतारो! मुिे शरीफ िाहब को जन्मसदन की बधाई देनी है. उनकी माताजी के चरण-स्पश्ष करने है्, और पासकस्​्ान वासियो्को स्​्ि​िमि

की मुबारकबाद देनी है! सवचार आते ही सवमान अचानक िाहौर की धरती पर था, और शरीफ िाहब जो सक हवाई अड्​्े पर िुबह की तफरीह को सनकिे थे. उन्हो्ने अपने सिक्युसरटी वािे िे पूछा अरे, यह कौन आया है? तो जवाब समिा सक िगता तो है िर सक ये भारत के प्​्धानमंत्ी मोदी जी है.् तो शरीफ िाहब चौ्के और नजदीक जा कर पहचान करने का मन बनाया. सफर सजज्​्ािा के िाथ सवमान की िीस्ढयो्तक पहुंचे गये तो औचक पहचान गये सक अरे, यह तो पेसरि वािे मोदी िाहब है्! अरे, मोदी जी!... आप, अचानक यहां? सफर गिे समिे और अपनी गाड्ी मे्सबठा कर घर िे गये. ऐिा नही् हुआ है, और यह देश के सिए राहत की बात है. हुआ यह सक कई स्​्रो् पर, सपछिी कई मुिाकातो् मे् बफ्क सपघिाने जैिी बाते् चिती और आकार िेती रही्. सवदेश मंत्ी िुरमा स्वराज की पासकस्​्ान यात्​्ा इि बात की खुिी घोरणा ही थी, सक सखचड्ी काफी पक चुकी है. बि परोिने की तैयारी चि रही है. शायद यह भी सजद रही सक मोदी पहिे पासकस्​्ान जाये्, सक नवाज शरीफ पहिे सहंदुस्ान आये्? हािात दोनो् जगह एक जैिे ही है.् चाहत िबकी है सक सरश्ते िुधरे्और रास्​्े खुिे्िेसकन पहि कौन करे. यह िवाि खािा अहम बन जाता है, क्यो्सक इिे ही जीत या हार का आधार बना सिया जाता है. इि मुिाकात की पोशीदा योजना बनी तासक जाना भी हो जाये और िीधी सगनती मे्भी न आये! इिे कूटनीसत कहते है् और इि​िे सहंदुत्व और इस्िाम वािो् को कोई परहेज नही्है. सफर भी हम देख िकते है्सक सहंदुस्ान इिे खोखिी नाटकबाजी बताने वािो्की कमी नही्है. टीवी मे्जो हम रोज देख रहे है,् उिे आधार माने्तो पासकस्​्ान मे् नवाज शरीफ की ऐिीतैिी मची हुई है. िेसकन यह भी िच है सक बात सजि मुकाम पर, सजि तरह पहुंचाई गयी है उि​िे पीछे हटना दोनो् मुल्को् के नेतृत्व की सकरसकरी करवायेगा. बब्लक आगे भी सकिी पहि को मुब्शकि बना देगा. प्​्धानमंत्ी नरे्द् मोदी सजि तरह की राजनीसत करते है्. ऐिी कूटनीसतक पहिो् को हमने अब तक देखा है. उनमे् अपना कसरश्मा सदखिाने और अपनी छसव चमकाने का पिड्ा ज्यादा भारी होता है. इि कसरश्मे वािी राजनीसतक शैिी मे् सकिी राष्​्ीय नीसत को आकार देना, उिके सिए िारे देश मे् स्वीकृसत का माहौि बनाना,सवपक्​् को सवश्​्ाि मे्िेना और हर उतार-चढ्ाव को दज्ष करना िंभव नही् होता है. यह मय्ाषदा है नरे्द् मोदी माक्ाष राजनीसत की. भारत का सवभाजन सजि तरह हुआ. उिने दोनो् देशो् के मन मे् कटुता का बीज बो सदया. सजि​िे नुकिान दोनो्मुल्को्को हुआ है. सिफ्क


आस्थषक ही नही्, िामासजक और राजनीसतक पर िवार कर िाहौर पहुंचाते है्. यहां नवाज़् भी. इि कटुता को खत्म करने की पहि शरीफ के िाथ िाहौर घोरणा होती है और कही् सवभाजन के बाद िे सवसभन्न स्​्रो् पर चिती िे यह उम्मीद िर उठाती है सक सरश्ते बदिे्गे. रही है. पहिी पहि महात्मा गांधी की थी. वे िेसकन फौजी बगावत नवाज़्शरीफ को ित्​्ा िे बगैर पािपोट्ष और वीिा के पासकस्​्ान जाने बाहर ही नही् करती है बब्लक उन्हे् देश िे भी और सवभाजन की वैधता को ध्वस्​् करने की बाहर होने पर सववश करती है. िाहौर पहुंची योजना पर ही काम कर रहे थे. िेसकन उन्हे् बि हमे्िीधे कारसगि के युद्मे्पहुंचा देती है. गोिी मार दी गयी. उिके बाद 25 िे 26 जुिाई परवेज़् मुशर्षफ का यह पूरा दौर छि-छद्​्ो् िे 1953 को प्​्धानमंत्ी जवाहरिाि नेहर् भरा रहा. सजिमे् आगरा की वात्ाष भी शासमि पहिी पासकस्​्ान यात्​्ा पर गये. वहां कश्मीर होती है. हमारे हाथ खािी रह जाते है्. आर-पार िसहत कई मुद्ो्पर बातचीत की. जाने िे पहिे की वह िड्ाई भी नही् हो पाती है सजिकी भी और आने के बाद भी भारतीय िंिद को घोरणा िंिद पर आतंकी हमिे के बाद इिकी पूरी जानकारी दी गयी. सफर जवाहरिाि वाजपेयी जी ने की थी. 2004 की 4-6 जनवरी 19 िे 23 सितंबर 1960 को पासकस्​्ान गये को हम वाजपेयी जी को सफर इस्िामाबाद मे् जब सिंधु जि िमिौता हुआ. इिके बाद 28 पाते है्. जहां 12वां िाक्किम्मेिन हो रहा होता िािो् का िंबा अंतराि रहा. आगे की कड्ी है. इिके बाद मनमोहन सिंह का दौर आता है जुड्ती है जब 29 सदिंबर 1988 को राजीव जहां सवदेशी धरती पर पासकस्​्ान के िाथ गांधी चौथे िाक्क िम्मेिन मे् भाग िेने बातचीत िगातार होती रहती है िेसकन आतंकी इस्िामाबाद पहुंचते है्और भारत-पाक के बीच वारदातो्की जहरीिी हवा वात्ाष को कभी शक्ि कई िमिौतो्पर दस्​्खत होते है्. सजनमे्एक- िेने नही्देती है. इि पृिभ् सू म मे्हम नरेद् ्मोदी की कोसशशो् दूिरे के परमाणु सठकानो्पर हमिा न करना भी को देखे्. प्​्धानमंत्ी बनने की सजद के दौर मे् शासमि था. राजीव गांधी सफर 16-17 जुिाई 1989 मे् नरे्द् मोदी ने पासकस्​्ान के प्​्सत जैिे तेवर पासकस्​्ान गये. जहां बेनजीर भुट्ो के िाथ अपनाये थे और उनकी शह पर िंघ पसरवार ने उनकी मुिाकात होती है. दोनो्प्​्धानमंस्तयो्मे् जैिा वातावरण रचा था. उिमे् तो कभी, कही् अच्छी िमिदारी बनी थी और उम्मीद थी सक िे ऐिी िंभावना नही्िगती थी सक भारत-पाक कुछ नयी जमीन तोड्ी जा िकेगी. िेसकन यह वात्ाष भी कभी िंभव हो िकती है. िेसकन सजि दौरा खािी ही गया. क्यो्सक दोनो् ही अपने- सदन नरे्द्मोदी की सजद पूरी हो गयी. उिी सदन अपने यहां तीव्​् राजनीसतक प्​्सतकूिताओ् िे उन्हो्ने अपने शपथ-ग्​्हण िमारोह मे् नवाज़् सघरे थे. दोनो्का अंत सहंिक हमिो्मे्हुआ. यह शरीफ को आमंस्तत कर सहंदुस्ान और तो एक अिग ही कहानी है. इिके बाद हम िीधे पासकस्​्ान दोनो्को अचंसभत कर डािा. तभी िे अटि सबहारी वाजपेयी जी के काि मे् पहुंचते हम देख रहे है् सक नरे्द् मोदी के शल्दो् और है्जहां हम उन्हे्19-20 फरवरी 1999 मे्बि कदमो्मे्बड्ी खाई रहती है. िेसकन उनमे्यह निाज िरीफ और अटल शबहारी िाजपेयी: लाहौर घोषणा की घड़ी

िाहि है सक वे अपनी छसव सनखारने और देश का सहत िाधने की सदशा मे्मुब्शकि कदम उठा िकते है्. हम उनकी राजनीसत के इि पहिू को स्वीकार कर चिे् तो उनका अचानक पासकस्​्ान पहुच ं जाना, हमारी िमि मे्आयेगा. यह अच्छा है सक दूिरे राष्​्ाध्यक्​्ो् के िाथ अनौपचासरक िंबंध बनाने की नरे्द्मोदी मे् सिफत है. ऐिे िंबंध मे् अंतरराष्​्ीय राजनासयक मे् कोई सनण्ाषयक भूसमका तो अदा नही्करते है्, िेसकन गसतरोध टािने मे्इनका िाभ समिता है. हमे् यह िमि िेना चासहए सक अब नरे्द् मोदी िे बड्ा िंकट नवाज़् शरीफ के सिए है. भारत-घृणा की सजि बुसनयाद पर अब तक पासकस्​्ान की राजनीसत चिी है. उि​िे कैिी भी छेड्-छाड् सकिी भी नवाज़् शरीफ का िर किम करवा िकती है. इिसिए भी घरेिू िमारोह मे्मोदी के आने की यह आड्बुरी नही् है. पासकस्​्ान मे् इिका ऐिा प्​्चार सकया जा रहा है सक आसखर हमे्नही्, भारत को ही हमारे दरवाजे आना पड्ा. तो हमे्उिे हजम कर िेना चासहए. अब आगे क्या? दूिरा कोई सवकल्प है नही्, बि एक ही रास्​्ा खुिता है सक हर स्​्र पर बातचीत की गसत और उिका दायरा तेज सकया जाये! िंबध ं ो्को िामान्य बनाने का काम इतनी तेजी िे हो सक िंबंधो्को सबगाड्ने वािी ताकतो् के दम फूि जाये्. अब र्कने और सठठकने का मौका नही्है. नवाज़् शरीफ को हमारा खुिा और पूरा िमथ्षन समिना चासहए तासक वे अपने देश की प्​्सतगामी ताकतो् का मुकाबिा कर िके्. नवाज़् शरीफ को अपनी धरती िे होने वािी भारत सवरोधी हर हरकत की जड्काटनी होगी. इिकी शुर्आत अभी और आज िे ही होती सदखाई देनी चासहए. यह बहुत अच्छा हुआ है सक पासकस्​्ान का फौजी नेतृत्व भी सकिी हद तक िहमत हुआ है सक राजनीसतक प्​्स्िया के बीच वह नही्आयेगा. इि िहमसत को िगातार बढ्ाने और मजबूत करते जाने की जर्रत है. इिसिए िीमा पर फौजी तािमेि की हर िंभावना को अमि मे् िाना चासहए. हमे् यह मान कर ही चिना चासहए सक भारत सवरोधी और आतंकवादी तत्व अपनी तरफ िे यहां और वहां उत्पात मचाने की हर िंभव कोसशश करे्गे. सजिका मुकाबिा करते हुए हमे् आगे बढ्ना होगा. आसखर आज भी हम दोनो् उनके सनशाने पर तो है् ही और उिे भुगत भी रहे है्. अब ब्सथसत मे्गुणात्मक पसरवत्षन यह होगा सक हम उनका मुकाबिा भी करे्गे और उनकी जड् भी काटे्गे. नये िाि मे् हम िबको नरे्द् मोदी का िमथ्षन करना चासहए. सजन्हो्ने पासकस्​्ान मे् सहंदुस्ान को खड्ा कर एक नयी िंभावना का द्​्ार खोिा है. n शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 19


मास् बातचीत ट हेड

दकसानो्का दुख अमरावती

आंध् और तेलंगाना मे् किसानो् िी हालत पर जनिकि और सामाकजि िार्यित्ाय िरिर राि से अकिषेि रंजन कसंह िी बातचीत

आं

ध्​्प्​्देश और तेलंगाना भले ही दो अलग राज्य बन गये हो्, लेमकन जन समस्याएं आज भी बरकरार है्. मकसान आत्महत्या इन दोनो् सूबे मे्कम होने की बजाए बढ्ती जा रही है्. दोनो्प्​्देश के मुख्यमंत्ी इन मदनो्अंधमवश्​्ास के दुष्चक्​्मे्िंसे हुए है्. लंबे संघर्ाके बाद मजस मकसद के साथ तेलंगाना बना, क्या वह लक्​्य पूरा होता मदख रहा है?

मबल्कुल नही्, क्यो्मक तेलंगाना की जनता आज स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रही है. सूबे मे् मकसान आत्महत्या की घटनाओ् मे् तीन गुना बढ्ोत्​्री हो गयी है. मेिक जो खुद मुख्यमंत्ी के चंद्शेखर राव का क्​्ेत्है, वहां हर मदन मकसान खुदकशी कर रहे है्. महबूबनगर, वारंगल, करीमनगर, नलगो्िा और आमदलाबाद मे् भी कमोबेश यही स्सथमत है. अलग तेलंगाना बनने के बाद भी मकसानो्, मजदूरो्और गरीब आदमी की मजंदगी मे्कोई बदलाव नही्आया है.

िरिर राि: उत़पीश़डतो़ के हक मे़

लेमकन तेलंगाना सरकार ने तो आत्महत्या करने वाले मकसान पमरवारो्को कई गुना मुआवजा देने का ऐलान मकया है?

मुख्यमंत्ी चंद्बाबू नायिू अमरावती को दुमनया की सांस्कृमतक राजधानी बनाना चाहते है्, उनके इस मवचारो्से आप मकतना सहमत है्?

संयुक्त आंध्प्​्देश मे्आत्महत्या करने वाले मकसानो्के पमरजनो्को पहले िेढ्लाख र्पये ममलते थे, तेलग ं ाना सरकार ने उसे बढ्ाकर छह लाख कर मदया. लेमकन मकतने मकसानो् को आज यह मुआवजा ममल रहा है? मकसानो्के जान की कीमत र्पये मे्तय नही्मकया जा सकता. मेरा मानना है मक इस देश मे्मुआवजा नीमत बंद होनी चामहए और मकसानो्को उनका वामजब हक ममलना चामहए. तेलंगाना मे् मकसानो् के समक्​् सबसे बड्ी समस्या मसंचाई की है. सरकार हर खेतो् मे् पानी पहुंचाने का काम सिलतापूव्ाक क्यो्नही्करती.

चंद्बाबू नायिू पूंजीवादी सोच के व्यस्कत है्. वह अमरावती को मवश्​्के पटल पर लाने का दंभ भरते है,् लेमकन हकीकत मे्यह मसंगापुर और जापान की अमरावती है. यह मकसानो् के आंसू और दुख से भरी राजधानी होगी. यहां न तो बौद्​्संस्कमत होगा और न ही बौद्​्कला और मशल्प. सच पूमछये तो नयी राजधानी अमरावती बौद्​् दश्ान से इतर महंसा और दमन की बुमनयाद पर बना एक शहर होगा. आंध्प्​्देश की जनता राज्य सरकार की नीमतयो् से कािी नाराज है, क्यो्मक राज्य सरकार भेदभाव की राजनीमत कर रही है. सूबे के उत्​्री महस्से मे् शाममल श्​्ीकाकुलम, मवशाखापत्​्नम और मवजयनगरम के मवकास के मलए चंद्बाबू नायिू के पास कोई योजना नही्है. चंद्बाबू नायिू के मलए मवकास का एक ही मतलब है मनजीकरण, जो सही नही्है. नाथ्ाआंध्प्​्देश के मवशाखापत्​्नम मे्मचंतापल्ली जंगल है. यहां 2000 एकड्मे्िैले बॉक्साइट की पहाम्डयो्पर माइमनंग करने की अनुममत राज्य ने एक मनजी कंपनी को दी है. हालांमक, स्थानीय आमदवासी इसका तीव्​् मवरोध कर रहे है्.

नयी राजधानी के बाबत राज्य सरकार ने लै्ि पूमलंग के जमरये मकसानो्से हजारो्एकड्बहुिसली जमीने्ली है्. आपकी क्या प्​्मतम्​्कया है? मुख्यमंत्ी एन चंद्बाबू नायिू खुद को सीईओ ऑि वल्ि्ा बै्क मानते है्. रीयल इस्टेट के धंधे मे् शाममल लोगो् को चंद्बाबू नायिू से सीखना चामहए, क्यो्मक इस मामले मे्वह कािी हुनरमंद है्. अमरावती जैसे अत्यंत उपजाऊ कृषण ् ा के िेलट् ा क्त ्े ्मे्नयी राजधानी बनाने का कोई औमचत्य नही् था. सरकार को नयी राजधानी के मलए पहले से मवकमसत मवजयवाड्ा, गुटं रू , मवशाखापत्न ् म जैसे शहरो्का चयन करना चामहए था. दरअसल, अमरावती के नाम पर यहां कािी बड्ा खेल हो रहा है. तेलगूदेशम पाट्​्ी से जुड्ेलोगो् के मलए अमरावती का नया राजधानी बनना कािी िायदेमंद सामबत होगा. मकसानो्को िायदे का झांसा देकर सरकार उनकी जमीने्ले रही है. टीिीपी नेताओ्के साथ साठ-गांठ करके प्​्ॉपट्​्ी िीलर और अमधकारी मुनािा काट रहे है्. आमखर अमरावती के मकसान लै्ि पूमलंग का मवरोध क्यो्नही्कर रहे है्? मवरोध हो रहा है, लेमकन सरकार और मीमिया इसे दबा रही है. लेमकन लंबे समय तक वे इसमे् कामयाब नही् हो्गे. राजधानी क्​्ेत् मे् आने वाले तािेपल्ली गांव के मकसानो्मे्लै्ि पूमलंग का मवरोध मकया जा रहा है. यहां के मकसानो् ने सरकार को अपनी जमीन देने से साि मना कर मदया है. शासन और प्​्शासन ने यहां के मकसानो् की एकता तोड्ने के मलए कािी प्​्यास मकया कर रहे है्, लेमकन वे इसमे् सिल नही् हो्गे. यह कहना जल्दबाजी होगी मक अमरावती मे्कोई मवरोध नही्हो रहा है. 20 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

के्द्मे्भाजपा नीत सरकार की नीमतयो्से आप मकतना सहमत है्? नरे्द् मोदी सरकार से सहमत होने का कोई सवाल ही नही् है. यह पूंजीपमतयो् की सरकार है. मौजूदा के्द् सरकार मनजीकरण की पक्​्धर है. इसमलए जनता के महत के मवरय मे् सोचना ही बेमानी है. के्द् मे् जब से भाजपा की सरकार बनी है, वह अपने महंदुत्व के एजंिे को लागू करने की मदशा मे्काम कर रही है. आज पूरे देश मे्असुरक्​्ा का माहौल पैदा हो गया है, लेमकन सरकार को इसकी कोई परवाह नही्है. के्द् मे् भाजपा की सरकार बनने के बाद एनजीओ पर कई तरह की पाबंमदयां लगा दी गयी है्, आमखर इसके पीछे क्या कारण है? मोदी सरकार मनरंकुश हो गयी है, इसमलए वह इस तरह की हरकतो् को अंजाम दे रही है. एनजीओ पर पाबंमदयां ठीक नही्है. हालांमक, मेरा यह भी मानना है मक अमधकांश एनजीओ समाज की भलाई करने की बजाय, जनता को गुमराह कर रहे है्. अिसोस के साथ कहना पड् रहा है मक अमेमरकी और यूरोपीय देशो्के पैसे से चलने वाले एनजीओ मे्कम्युमनस्ट एक्टमवस्टो्की मदलचस्पी बढ्ती जा रही है. जो सही नही्है. n


मास् देशकाल ट हेड

नाबाशलग़ अपराध भटकी हुई बहस

नाबाकलगो्के अपराधो्के संबंकधत कवधेयक राज्य सभा मे् भी पाकरत हो गया है, लेककन उससे जुड्ेहुए सवाल अब भी अनुत्करत है्. इस पर बहस के दौरान संसद की मय्ाषदाओ्का भी उल्लंघन हुआ. आशा व्​्िपाठी

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िद मे्23 सदिंबर को जुवेनाइि सबि पर हुई बहि के दौरान एक िांिद बार-बार िीमा िांघते सदखे. जघन्य अपराध की ब्सथसत मे् नाबासिग को भी बासिग की श्​्ेणी पर रखे जाने की बहि के दौरान यह नजारा देखने को समिा. महाराष्​् िे बीजेपी के िहयोगी रामदाि अठाविे ने बहि के दौरान कुछ ऐिी बाते्कही्, सजिको िेकर कई िांिदो् ने आपस्​्त दज्ष करायी. अठाविे ने कहा सक सजनकी िेक्ि िंबंधी जर्रते् है्, उन्हे् िबक सिखाया जाना चासहए. इि तरह की बातो्का औसचत्य नही्था, जो उन्हो्ने िंिद मे् कहा. अब बेहतर तो यह होता सक जुवने ाइि सबि पर अमि सकया जाता, चच्ाष नही्. गौरतिब है सक अठाविे कानून मे् सकए जा रहे बदिाव के पक्​् मे् बोि रहे थे. तासक दुषक ् म्षऔर हत्या जैिे जघन्य अपराध की ब्सथसत मे् 16 िाि या इि​िे असधक के नाबासिग को भी बासिग की ही तरह िजा दी जा िके. इि दौरान अठाविे ने एक ऐिे शल्द का भी इस्म्े ाि सकया सजिे काय्वष ाही िे सनकािना पड्ा. बाद मे्जुवेनाइि सबि को उच्​्िदन ने पासरत कर सदया. वैिे अठाविे ने भारण की शुर्आत तो ठीक िे की, िेसकन बाद मे्भटक गये. उन्हो्ने कहा सक कानून ऐिा है सक यसद 18 िाि िे कम उम्​्का कोई भी अपराध करता है तो हम उिके सखिाफ कुछ नही् कर िकते. उन्हो्ने कहा सक सशवाजी महाराज के िमय कोई भी इि तरह के अपराध नही् कर िकता था. उिके हाथ-पैर तोड्सदये जाते थे. कानून मे्इि तरह का प्​्ावधान होना चासहए सक हम बिात्कारी के हाथ-पैर तोड्िके्. 55 िाि के अठाविे सरपब्लिकन पाट्​्ी ऑफ इंसडया के अध्यक्​्है्. िोकिभा मे् काफ्ी पहिे पासरत हो चुका जुवेनाइि जब्सटि सबि 22 सदिंबर को आस्खरकार राज्यिभा मे् ध्वसनमत िे पाि हो गया. अब यह सबि राष्​्पसत के पाि मंज़ूर् ी के सिए भेजा जायेगा. इि सबि मे्जघन्य अपराध के मामिे मे् 16 िे 18 िाि की उम्​् के 22 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016


नाबासिग को वयस्क माना जायेगा. मौजूदा कानून के तहत 18 िाि के कम उम्​् के अपराधी को नाबासिग माना जाता है. नये सबि मे्कहा गया है सक रेप, मड्षर और एसिड अटैक जैिे खतरनाक अपराधो् मे् शासमि नाबासिगो् को बासिग माना जायेगा. गंभीर अपराध करने वािे नाबासिगो्पर केि आम अदाितो्मे्और बासिगो्के सिए कानून के मुतासबक ही चिेगा. दरअि​ि, बीते सदनो् नाबासिग दोरी की सरहाई के सखिाफ प्​्दश्षन की अगुवाई कर रहे सनभ्षया के माता-सपता 21 सदिंबर को कांग्ेि नेता गुिाम नबी आजाद िे समिे थे. सजन्हो्ने उन्हे् भरोिा सदया सक उनकी पाट्​्ी इि सबि का िमथ्षन करेगी. नये प्​्ावधानो् के मुतासबक िंगीन अपराध मे्शासमि नाबासिगो्को बासिग माना जायेगा. िोकिभा मे्यह सबि मई 2015 मे्पाि कर सदया गया था. िेसकन राज्यिभा मे् हंगामे की वजह िे इिे पेश नही्सकया जा िका. हािांसक सबि पाि होने का अिर सनभ्षया केि पर नही् पड्ेगा. आने वािे िमय मे् ऐिे दूिरे अपराधी आिानी िे नही् छूट िके्गे. मौजूदा कानून के मुतासबक अगर कोई नाबासिग िंगीन अपराध मे्दोरी होता है. तो उिे तीन िाि तक बाि िुधार गृह मे्रखने के बाद सरहा कर सदया जाता है. जुवेनाइि जब्सटि सबि मे्कई अहम िंशोधन सकये गये है्. नये सबि के मुतासबक अगर जुम्ष जघन्य हो यानी की आईपीिी की धारा मे्उिकी िजा िात िाि या उि​िे ज्यादा हो तो 16 िे 18 िाि की उम्​्के नाबासिग को भी वयस्क माना जायेगा. इिके अिावा नाबासिग् को अदाित मे् पेश करने के एक महीने के अंदर ‘जुवेनाइि जस्टीि बोड्ष’ को ये जांच करना होगा सक उिे ‘बच्​्ा’ माना जाये या ‘वयस्क’. वयस्क माने जाने पर सकशोर को मुक्दमे के दौरान भी िामान्य जेि मे्रखा जायेगा. िजा असधकतम 10 िाि तक

ज़योशत उफ़फ शनभ़तया के माता-शपता: शबल पाशरत होने से पहले हो िकती है. िुधारगृह भेजने या सवशेर सशक्​्ा सदिाने की देश के बहुचस्चषत सदल्िी रेपकांड का व्यवस्था है. नाबासिग दोरी 20 सदिंबर को सरहा हो गया. फ्​्ांि के जुवेनाइि कानून मे् 13 िे 18 सजि​िे देश मे् मौजूद नाबासिग न्याय कानून िाि के सकशोर अपरासधयो् को अपराध की यानी जेजे एक्ट को िेकर िवाि खड्ा हुआ. गंभीरता के सहिाब िे िजा देने का प्​्ावधान है. नाबासिग की सरहाई का सवरोध कर रहे िोगो्का सबट्​्ेन मे्नाबासिग अपरासधयो्की उम्​्की बात तक्कथा सक जब कोई नाबासिग इतनी वीभत्िता करे्तो यहां 1998 तक 10 िे 13 िाि तक के िे अपराध को अंजाम दे िकता है. तो उिे बच्​्ो्को ही बाि अपराधी माना जाता था और सनद्​्ोर कैिे माना जाये? उिे िजा क्यो्नही्दी उन्हे् सकिी प्​्कार की िजा नही् दी जाती थी. जा िकती? खाि बात यह भी है सक िेसकन बाद मे् यहां 10 िे 17 िाि तक के सनभ्षयाकांड के बाद जेजे एक्ट मे् मौजूद सकशोर को नाबासिग अपराधी माना गया. स्​्बटेन नाबासिग अपरासधयो्की उम्​्को िेकर सववाद मे् 10 िे 17 िाि के अपरासधयो् को गंभीर खड्ा हुआ. तो उि वक्त की िरकार ने जब्सटि अपराध करने पर कुछ िमय के सिए िुधारगृह वम्ाष िसमसत का गठन सकया सजिने जेजे एक्ट भेजने या काउंसिसिंग का प्​्ावधान है. जबसक मे् िंशोधन को िेकर महत्वपूण्ष िुिाव सदये. 17 िाि िे असधक उम्​् के अपरासधयो् को जब्सटि वम्ाष के िुिावो्के आधार पर नाबासिग सकिी भी प्क ् ार का अपराध करने मे्कोई सरहाई अपराधी की उम्​्दो िाि घटाकर 16 करने के नही्है. चीन मे्14 िे 18 िाि तक के सकशोरो् िाथ नये जुवेनाइि कानून का मिौदा बना था. को नाबासिग अपराधी के तौर पर माना गया है. इि कानून को वत्षमान िरकार ने मई 2015 मे् िेसकन गंभीर अपराध करने पर नाबासिग िोकिभा मे् पाि कराने के बाद अब 23 अपराधी को भी आजीवन करावाि का प्​्ावधान सदिंबर को राज्यिभा मे्पाि करा सदया. भारत है. 2012 मे् हुए यहां के जुवेनाइि कानून मे् का यह नया कानून दुसनया के कुछ प्​्मुख देशो् िुधार के बाद 14 िाि िे कम उम्​्के बच्​्ेको मे् मौजूद िख्त कानूनो् मे् िे एक होगा. अपराधी नही् माने जाने की व्यवस्था की गयी जानकारो् का कहना है सक िंयुक्त राज्य है. र्ि मे् भी नाबासिग अपरासधयो् की अमेसरका मे्सकशोर या बाि अपरासधयो्के सिए आयुिीमा और िजा भारत की अपेक्ा िख्त है. कोई एक कानून नही्बब्लक यहां अिग-अिग यहां गंभीर अपराध करने वािे 14 िाि तक के राज्यो्मे्अिग-अिग कानून है्. कुछ राज्यो्मे् बच्​्े को नाबासिग अपराधी माना जाता है. 6 िे 10 िाि के बच्​्ो् को ही बाि अपराधी जबसक 14 िे 16 तक की उम्​् मे् िाधारण माना जाता है सजन्हे्सकिी प्​्कार की िजा नही् अपराध करने पर िुधारगृह भेजने का प्​्ावधान होती. बच्​्ो्, सकशोरो् के सिए फ्​्ांि मे् भी एक है. यहां अगर अपराध करने वािे की उम्​् 14 कानून है. यहां िात-आठ िाि के बच्​्े को िे 16 के बीच है और उिने गंभीर अपराध सकया सकिी प्​्कार का अपराधी नही् माना जाता. है. तो उिे वयस्क अपरासधयो्की भांसत ही िजा क्यो्सक वे बुरे भिे के बारे मे्नही्िोच िकता. दी जाने की व्यवस्था है. बहरहाि, अब तो जो यहां आठ िाि िे 13 िाि के बाि अपराधी होना था, हो गया. बेहतर यह होता सक इि पर ष ्के दौरान कम िे कम को सकशोर अपराधी के तौर पर माना जाता है. चच्ाष न होती और चच्ाओ n सजिे िजा के तौर पर कुछ सदन के सिए मय्ाषदाओ्की िीमा न िांघी जाती. शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 23


मास् देशकाल ट हेड

बीमार और कुपोषित

कुपोशषत मां और बच़​़ा:क़या करेगा शि​िु आहार

हाल ही मे्भारत मे्कुपोरण पर दो करपोट्षजारी हुई्है्, जो बच्​्ो्की दद्षनाक हालत का बयान करती है्. लगभग दो वर्षतक सरकार ने इन करपोट्​्ो्को जारी न होने देने की कोकशश भी की. सविन कुमार जैन

दु

ल्हसनयापुर की रेखा नट (काल्पसनक नाम) के पांच बच्​्ो् मे् रेहान 3 महीने का है. जन्म के िमय उिका वज़न 2.8 सकिो था. सफिहाि रेहान असत गंभीर र्प िे कुपोसरत है. रेखा के ि​िुर अजीम भाई कहते है् सक वे बच्चो् के सिए हर हफ्ते केसमस्ट िे 385 र्पये का सशशु आहार खरीदते है्. यह कहानी सिफ्क रेहान ही नही्बहुत िारे बच्​्ेकुपोरण के हवािे है्. कुपोरण देश के भसवष्य बच्​्ो् को सनगिता जा रहा है. मध्यप्​्देश और उत्​्रप्​्देश मे् अध्ययन (सवकाि िंवाद: 2013-2015) मे्पाया गया सक अब 93 फीिद गांवो्के सकराना दुकानो्पर तकरीबन 19 तरह के पैकटे बंद खाने के िामान (पफ, मटर, कुरकुरे आसद) सबक रहे है्. एक िे पांच र्पये की कीमत के इि तरह के 11 िे 19 हज़ार पैकेट 250 घरो् वािे एक गांव मे् 24 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

िािाना सबकते है्. इनके सविे्ता मोहम्मद इदरीि ने कहा सक इि पकाना नही्पडता. बच्​्े परेशान नही्करते. एक बार इिका स्वाद जुबान पर चढ गया, तो उतरता नही् है. बच्​्े इिके आदी हो जाते है्. िेसकन इि खाद्​् िामग्​्ी िे बच्​्ो्की पोरण िंबंधी जर्रते्पूरी नही्होती्. शुभम पसरवार मे् िातंवा बच्​्ा है. उत्​्र प्​्देश के कौशांबी सजिे के दुल्हसनयापुर गांव मे् शुभम रहता है. इिकी शुर्आती देखरेख अच्छे िे नही् हो पायी. इिे 6 माह की उम्​् िे ऊपरी पोरण समिना चासहए था, िेसकन दो िाि तक वह केवि मां के दूध पर ही सनभ्षर रहा. सफिहाि शुभम असत गंभीर र्प िे कुपोसरत है. दुल्हसनयापुर मे् आज भी प्​्िव के बाद मां के पहिे दूध यानी कोिेस्ट्​्म को अशुद् मानकर नही्सपिाया जाता है. इि वजह िे गांव की 10 मे् िे 9 िडसकयो् मे् खून की कमी है. परजीसवयो् के िंि्मण िे बच्​्ो् का पेट फूि गया है. इनमे् हेपैटोसमगेिी यानी िीवर की

िूजन के िंकेत भी समिते है्. आंगनवाडी के्द् खुिता नही्है. वृस्द सनगरानी चाट्षधूि खा रहा है. एक्िपायर हो चुकी दवाएं और यहां-वहां सबखरे पोरण आहार के गंदे बोरे िारी अिसियत बयां कर देते है्. मध्यप्​्देश के िहसरया बहुि श्योपुर सजिे के ऊपरी खोरी गांव की हाित भी यही है. यहां 5 मे् िे 3 बच्​्े कुपोसरत है्. गांव का हर चौथा बच्​्ा असत गंभीर कुपोसरत है. इनमे् िे एक ितनाम पोरण पुनव्ाषि के्द् तक पहुंचने मे्नाकाम होने िे मर गया. यही हाि सटकटोिी गांव की चार िाि की िरोज का हुआ. असत गंभीर कुपोसरत िरोज को भी पोरण पुनव्ाषि के्द्नही्पहुंचाया जा िका और उिकी भी मौत हो गयी. सटकटोिी मे् िाि भर िे आंगनवाड्ी के्द्बंद है. यह कुपोरण की बहि हर बार आंगनवाडी के्द् पर आकर र्क जाती् है्. दरअि​ि इि चुनौती िे सनपटने के सिए खाद्​् िुरक्​्ा को


िुचार् बनाना होगा. शुर्आती देखभाि के अभाव को दूर करने और मसहिाओ् की िामासजक-आस्थषक-राजनीसतक स्वायत्​्ा को बहाि करने की जर्रत है. इिे केवि एक सवभाग या एक योजना के दायरे मे्िीसमत नही् सकया जा िकता. कई सवभागो् मे् िस्​्िय िामंजस्य और जवाबदेही भी जर्री है. यूसनिेफ (मध्यप्​्देश) की पोरण सवशेरज्​् दीसपका शम्ाष कहती है्सक वृस्द बासधत कुपोरण का बच्​्ो् के कमज़ोर सवकाि िे बहुत गहरा िंबधं है. दो िाि के उम्​्मे्जडे्जमा िेने वािी इि ब्सथसत के कारण बच्​्ो्का बौसधक सवकाि िही िे नही् हो पाता है. ऐिे बच्​्े सशक्​्ा मे् सपछड जाते है्. बहरहाि ज्यादातर मामिो् मे् बच्​्ो्की वृस्द के बासधत होने यानी िंबाई और वज़न कम रहने की शुर्आत गभ्षमे्रहते ही हो जाती है. िबिे बडी चुनौती यह है सक जीवन के शुरआती दो िािो्मे्पनपने वािे इि कुपोरण िे होने वािे नुकिान की भरपाई कभी नही्की जा िकती है. ऐिे मे्गभ्ाषवस्था के नौ महीने के बाद दो िािो् तक बच्​्े और मसहिा की देखभाि बहुत जर्री है. इिे ही हजार सदन (2 िाि 9 महीने) का पोरण-स्वास्थ्य-िम्मान नीसत भी कहते है्. हाि ही मे् भारत मे् कुपोरण की ताज़ा हाि बयां करती दो सरपोट्ि्ष जारी हुई् है्. यूसनिेफ के िहयोग िे मसहिा और बाि सवकाि मंत्ािय ने रैसपड िव्​्े आन सचल्ड्न 2013-14 के आंकडे जारी सकये है्. इि सरपोट्ष को तकरीबन एक िाि तक जारी न करने की कोसशशे् हुई्. इि सरपोट्ष के मुतासबक भारत मे्कम वजन के बच्​्ो्की िंख्या 40.4 फीिदी िे घट कर 29.4 फीिद रह गयी है. सठगने रह जाने वािे बच्​्ो्की िंख्या 38.7 फीिद है,

जो भारत मे्व्यापक खाद्​्और पोरण अिुरक्​्ा का िंकेत देता है. अभी दुबिे रह जाने वािे बच्​्ो् की िंख्या 15.1 फीिद है. शहरीकरण बच्​्ो् की ब्सथसत नही् िुधरने दे रहा है. अभी शहर मे् 31.6 फीिद बच्​्े कम वज़न के है्. यहां कम वज़न के बच्​्ो् मे् दि िाि मे् 1.4 फीिद की ही कमी आयी है. भारत मे् कम वज़न के बच्​्ो् की िंख्या 29.4फीिद है, जबसक चीन मे् 3.4 फीिद, ब्​्ाजीि मे्2.2 फीिद, दस्​्कण अफ्​्ीका मे्8.7 फीिद और नेपाि मे्29.1 फीिद बच्​्े कम वज़न के है्. यसद कुपोरण आधार पर सवकाि को मापा जाये तो भारत अभी एक ‘असवकसित’ देश है. देश के नौ सपछडे राज्यो् मे् आधे िे ज्यादा बच्​्े उम्​् के सहिाब िे छोटे कद यानी सठगने है्. जन्म िे 6 माह तक पय्ाषप्त मात्​्ा मे् मां का दूध न समिने और बाद मे् उसचत देखभाि और स्वास्थय् िेवाओ्की वजह िे ऐिे हािात पैदा होते है्. नेशनि िै्पि िव्​्े आग्षनाइजेशन के आंकड्ेदेश मे्प्​्ोटीन के कम खपत का इशारा करते है्. ग्​्ामीण क्​्ेत्ो् मे् राज्यवार प्​्सत व्यक्सत प्स्तमाह के इस्म्े ाि को पैमाना माने्तो राष्ट्​्ीय स्तर पर 783 ग्​्ाम के मुकाबिे मध्यप्​्देश मे् 850 ग्​्ाम, सबहार मे् 740 ग्​्ाम, िारखंड मे् 577 ग्​्ाम, उत्​्रप्​्देश मे्860 ग्​्ाम, राजस्थान मे् 570 ग्​्ाम दाि भोजन मे् आती है. कुपोरण रोकने के सिए तेि और विा जर्री है. ग्​्ामीण मध्यप्​्देश मे् एक व्यब्कत महीने भर मे् 640 ग्​्ाम, उत्​्रप्​्देश मे् 840 ग्​्ाम, राजस्थान मे् 650 ग्​्ाम, सबहार मे् 580 ग्​्ाम, छत्​्ीिगढ मे् 600 ग्​्ाम और असखि भारतीय स्​्र पर 674 ग्​्ाम तेि या विा इस्म्े ाि करता है. अनाज की गांि मे़ पैकेटबंद खाद़​़ : स़िास़थ़य से शखलिाड़

प्​्सत व्यक्सत प्​्सतमाह खपत देश मे् औितन 11.800 सकिो (333 ग्​्ाम रोजाना) है, जो मानको्के अनुर्प नही्है. कुपोरण की ही तरह खून की कमी यानी एनीसमया भयावह स्​्र तक पंहुच चुका है. िेसकन देश की वृस्द दर को िामने रखते िमय इि िूचक को सछपा सिया जाता है. उत्​्राखंड मे् 5 िाि िे कम उम्​् के 94.4 फीिदी उत्​्र प्द् श े मे्86.8 फीिदी, सबहार मे्80.7 फीिदी, आिाम मे् 78.9 फीिदी, िारखंड मे् 78.4 फीिदी बच्​्ेखून की कमी के सशकार है.् इिका अिर यह होता है सक बच्​्ो्का सवकाि बासधत होता है. वे जल्दी थक जाते है् और उनमे् एकाग्​्ता की कमी हो जाती है. कुपोरण तभी खत्म होगा जब बासिकाओ् के िाथ िम्मानजनक और बराबरी का व्यवहार होगा. रैसपड िव्​्े ऑन सचल्ड्न के मुतासबक भारत मे् केवि 44.6 फीिद बच्​्ो् (0-23 माह) को ही जन्म के शुर्आती एक घंटे मे्मां का दूध समि पाया. जबसक 6 िे 8 माह की उम्​् मे्आधे यानी 50.5 फीिद बच्​्ो्को ही ऊपरी आहार समि पाया. इिका मतिब यह है सक बच्​्ेभूखे रखे जाते है्. ऐिे मे्वह कुपोरण और गरीबी के चि्​्मे्फंिते जा रहे है्. दुखद बात यह है सक भारत मे्कुपोरण िे सनपटने के सिए तकनीक काय्षशैिी को खाि माना गया है. आंगनवाडी के जसरये पोरण आहार दे कुपोरण िे सनपटने की कोसशश हो रही है. जब बच्​्े मृत्यु के कगार पर पहुंच जाते है्, तो स्वास्थ्य सवभाग चौकन्ना होता सदखायी देता है. इिके पहिे नही्. जर्रत इि बात की है सक बच्​्ो् और मसहिाओ् के पोरण को इन िभी सवभागो्के काम का सहस्िा बनाया जाये. सकशोरी बासिकाओ् को अपने ही पसरवार मे् उनके शरीर मे् हो रहे बदिावो् और भावनात्मक दुसवधाओ्के बारे मे्बात करने पर िामासजक प्​्सतबंध रहता है. उन्हे् सशक्​्ा िे वंसचत रखा जाता है. कैब-2014 के मुतासबक उत्​्राखंड मे्10 िे 17 िाि की उम्​्की 92.9 फीिद, उत्​्र प्​्देश की 92.3 फीिद, आिाम की 89.2 फीिद, सबहार की 88.1 फीिद, मध्यप्​्देश की 82.4 फीिद िडसकयां खून की कमी की सशकार है्. मध्यप्​्देश मे्15.5 फीिद, उत्​्राखंड मे्14.8 फीिद और सबहार मे्14.1 फीिद िडसकयां गंभीर एनीसमया की सशकार है्. इिका िीधा िंबंध मातृ मृत्यु, जन्म के िमय कम वज़न, नवजात सशशु मृत्यु और गंभीर बीमासरयो् की आशंका िे होता है. रैसपड िव्​्े ऑन सचल्ड्न, (मसहिा और बाि सवकाि मंत्ािय; 2013-14) के मुतासबक 44.7 फीिद सकशोरी बासिकाएं कमज़ोर और कुपोसरत है्. इतना ही नही् देश के कई इिाको् मे्अब भी बाि सववाह जारी है. n शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 25


उत् मास्​्रटाखंहेड

कवज्थाकपतो्के कलए बसाया गया नयी कटहरी इक्​्ीसवी्सदी मे् देश के नक्शे मे्शाकमल होने वाला पहला शहर है. अपनी बसावट के दस सालो्मे्ही यह सैलाकनयो्की पसंदीदा जगह के तौर पर भी उभर आया है. रीता वतिारी

द

ि िाि की उम्​्यूं तो कोई ज्यादा नही्होती है. िेसकन उत्र् ाखंड की गढ्वाि पहास्डयो् मे् दि िाि पुराना यह शहर अपनी उम्​् के मुकाबिे ज्यादा प्​्ौढ् नजर आता है. जी हां, पहास्डयो्की गोद मे्बिे नयी सटहरी की उम्​्तो महज दि िाि ही है, िेसकन इि एक दशक मे् ही इि शहर और यहां के वासशंदो्ने अपने पैरो् पर खड्ेहोकर चिना िीख सिया है. यहां रहने वािी करीब 40 हजार की आबादी के जेहन मे् पनसबजिी पसरयोजना के सिए बने सटहरी बांध के सखिाफ एक दशक पुराने आंदोिन की यादे् तो अब भी ताजा है्. िेसकन अपने पुरखो् की जमीन छोड्कर यहां बिे िोगो्ने अब इिे ही अपना घर मान सिया है. सटहरी का सजि्​्होते ही जेहन मे्कोई एक दशक पहिे िुंदर िाि बहुगुणा की अगुवाई मे् िंबे अरिे तक चिे बांध-सवरोधी आंदोिन का ख्याि आता है. देश-सवदेश मे्िुस्खषयां बटोरने वािे इि आंदोिन के बावजूद पुरानी सटहरी और उिके आिपाि बिे कई गांव बांध की वजह िे बनी िीि मे् िमा गये. अब वहां मोटरबोट के जसरये िैिासनयो्को िीि की िैर करायी जाती है. उत्​्राखंड की राजधानी देहरादून िे करीब िौ सकिोमीटर की दूरी पर गढ्वाि की पहास्डयो् पर बिा सटहरी देश ही नही् बब्लक दुसनया का पहिा ऐिा शहर है. सजिे िमुद्ति िे 1600 िे 1950 मीटर की ऊंचाई तक योजनाबद्​्तरीके िे बिाया गया है. सटहरी बांध िे इिकी दूरी करीब 12 सकमी है. देहरादून िे यहां तक पहुंचने के दो रास्​्े है्. पहिा रास्​्ा मिूरी और धनौल्टी होकर जाता है तो दूिरा ऋसरकेर और नरेद् ्नगर होकर. िेसकन धनौल्टी वािा रास्​्ा बेहद नयनासभराम और प्​्ाकृसतक दृश्यो् िे भरपूर है. रास्​्े मे् जगह-जगह पहाड् की बफ्​्ीिी चोसटयां बरबि ही अपनी ओर खी्चती है.् िेसकन चाहे सजि रास्​्ेको चुन,े् वह जाता है चंबा होकर. चंबा इि इिाके मे् एक बड्ा शहर है. वही् िे उत्​्रकाशी, गंगोत्​्ी और 28 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

नया शटहरी: ढलानो़ पर व़यिस़सथत बसािट

उमं​ंसे जं़यािा उमं​ंिार शहर

यमुनोत्​्ी के सिए िड्क सनकिती है. मिूरी िे चि कर हम जब धनौल्टी के रास्​्ेसटहरी िीि तक पहुंचे तो शाम के करीब तीन बजे थे. बीच मे् चंबा मे् कुछ ठहर कर चाय पीने के िाथ कमर िीधी की थी. सटहरी िीि के सकनारे कार र्कते ही तीन-चार िोग हमारी ओर िपके. िीि मे्बोसटंग के प्​्स्ाव के िाथ. िेसकन हमे् बोसटंग करनी नही् थी. िो, हमने नीचे तक जाकर िीि को देखने का फैि​िा सकया. एक दशक पहिे सजि आंदोिन के बारे मे् रोजाना अखबारो् मे् पढ्ती और टीवी पर देखती आयी थी, हम ठीक उिी जगह पर खड्े है्, यह िोचकर ही रोमांच हो आया था. बोसटंग के सिए िीि के सकनारे एक तैरता हुआ प्िेटफाम्ष बनाया गया है. ऊपर कुछ चाय-नाश्ते की दुकाने्भी खुि गयी्है्. ऐिी एक दुकान चिाने वािे धम्द्े ्नेगी बताते है,् ‘अभी िैिानी कम है.् िेसकन िीजन मे् काफी िोग यहां आते है्.’

िीि के सकनारे िे ही दूर 260 सकमी की ऊंचाई पर बने सटहरी बांध की ि​िक समिती है. कुछ देर िीि के सकनारे ठहरने के बाद हम नयी सटहरी की ओर रवाना होते है्. मन मे् इि बात की उत्िुकता थी सक आसखर अपनी जड्ो् िे उखड्ने वािे हजारो्िोग अपने नये घरो्मे्अब तक पूरी तरह बि गये है्या नही्. पुराना सटहरी शहर भागीरथी और भीिंगना नसदयो् के िंगम पर बिा था. तब नदी पार के गांवो्तक जाने के सिए वहां एक स्​्बज भी हुआ करता था. सहंदू धम्ष मे् मान्यता है सक राजा भागीरथ ही गंगा को धरती पर िाये थे. उनके नाम के आधार पर ही इि नदी का नाम भागीरथी पड्ा था. सटहरी बांध-सवरोधी आंदोिन मे् पय्ाषवरण को होने वािा नुकिान तो एक वजह थी ही, इि धास्मषक भावना की भी उिमे् अहम भूसमका रही थी. बांध के दूिरी ओर भागीरथी की धारा बेहद पतिी हो गयी है. वह


शटहरी झील मे़ नौकायन की सुशिधा: पनपता पय़तटन

सभी फोटो : रीता शतिारी इि सवशािकाय बांध िे िहमी-िी नजर आती है. नयी सटहरी जाते हुए शहर िे कुछ पहिे ही एक जगह िड्क के सकनारे िे इि बांध का सवहंगम दृश्य नजर आता है. बांध के दूिरी ओर उि पार जाने के सिए िड्को् पर हेयरसपन बै्ड्ि बने है्. जो ऊंचाई िे बेहद िुभावने िगते है्. उिी रास्​्े यहां िे एक िड्क श्​्ीनगर और र्द्प्याग की ओर सनकिती है. वही रास्​्ा आगे बदरीनाथ और केदारनाथ तक जाता है. यह बांध देश का िबिे ऊंचा और दुसनया का तीिरा िबिे ऊंचा राक-सफि बांध है. नयी सटहरी का िौ्दय्ष मन को मोहता है. ढिावदार पहास्डयो् पर बिे इि शहर की ऊंचाइयो् िे देखने पर महिूि होता है. मानो सटहरी िीि इिी की तिहटी िे सनकिी है. यहां के ज्यादातर वासशंदे पुरानी सटहरी के अिावा भागरथी और भीिंगना घाटी के उन 40 गावो्िे आये है्. जो सटहरी िीि मे्जि​िमासध िे चुके

शटहरी बांध: नीचे डूबा है पुराना िहर है्. दो नसदयो् के िंगम पर बिा सटहरी शहर कभी इि इिाके का प्​्मुख व्यापासरक के्द्था. इन िब िोगो् ने अपने घर और पुरखो् की जमीन को सति-सति कर अपनी आंखो् के िामने िीि मे् डूबते देखा है. यहां रहने वािे मनीश रावत को अब भी वह मंजर इिी तरह याद है, जैिे वह कि की बात हो. वे कहते है्, ‘अपने पुरखो् की जमीन िे उजड्ने का दुख तो बहुत हुआ था. िेसकन अब हमने इि नये शहर को ही अपना घर मान सिया है.’ इि नये शहर मे्िैकड्ो्बच्​्ेऐिे भी है्. सजनको पुरानी सटहरी के बारे मे् इसतहाि िे ही पता चिा है. उनका जन्म यही् हुआ है. उनके सिए तो यही पुरखो्की जमीन है. सवस्थासपतो्के सिए बिाया गया नयी सटहरी इक्​्ीिवी्िदी मे्देश के नक्शे मे्शासमि होने वािा पहिा शहर है. अपनी बिावट के दि िािो्मे्ही यह आधुसनक और व्यवब्सथत शहर

िैिासनयो्की पिंदीदा जगह के तौर पर भी उभर आया है. एक जैिे मकान और कािोसनयो् को ऊंचाई िे देखने पर िगता है सक यह हकीकत नही्, बब्लक कोई तस्वीर है सजिे कही् िे उठा कर इन हरी-भरी पहास्डयो् पर सचपका सदया गया है. तमाम मकान और इमारते्एक जैिे रंग मे्रंगी है्. नई सटहरी के सनचिे इिाके िे सटहरी िीि की भव्यता िाफ नजर आती है. यहां दोदो सवश्​्सवद्​्ािय भी खुि गये है्. इनमे्िे एक है हेमवंती नंदन बहुगुणा सवश्​्सवद्​्ािय और दूिरा उत्​्राखंड औद्​्ोसगकी और वासनकी सवश्स्वद्​्ािय. शहर मे्जगह-जगह मंसदर और गुरद् ्ारे है.् िड्को्की चौड्ाई और खूबिूरती भी देखने िायक है. शाम को डूबते िूरज की रोशनी मे्तो नयी सटहरी को सनहारना अपने-आप मे् एक अनूठा अनुभव है. यह कहना ज्यादा िही होगा सक नयी सटहरी प्क ् सृ त और आधुसनकता का अनूठा िंगम है. यहां के िोग अपने िाथ पुराने शहर की धरोहरो्, अपनी सवराित और यादो् को िहेज कर िाथ िे आये है्. िेसकन अब उन्हो्ने अपनी जमीन िे सवस्थापन के बावजूद नयी सटहरी को अपना घर मान सिया है. मखमिी-अनछुयी हसरयािी के बीच घुमावदार िाफ-िुथरी िड्के्, जगह-जगह बने िीढ्ीनुमा रास्​्े, दूरदूर तक पिरी पहास्डयां और हरे-भरे जंगि बरबि ही यहां आने वािे िैिासनयो् का मन मोह िेते है्. यहां पूरे िाि मौिम बेहद खुशगवार रहता है. एकांत की तिाश मे् यहां पहुंचने वािे िैिासनयो् के सिए िबिे ऊंची पहाड्ी पर बना सपकसनक स्पाट िबिे मुफीद जगह है. यहां बैठकर घंटो् पहास्डयो् की खूबिूरती को सनहारा जा िकता है. उिके ठीक िामने एक पहाड्ी पर एक बेहद भव्य मंसदर भी बना है. इिी के पाि एक छोटा िेसकन खूबिूरत स्टेसडयम बनाया गया है. यहां िे सटहरी बांध जाने वािे रास्​्े पर ही भागरथीपुरम बिा है. सटहरी पनसबजिी पसरयोजना की भव्य इमारत शहर मे् घुिते ही िैिासनयो् का स्वागत करती है. वही् बने उिके गेस्ट हाउि के कमरे की सखड्की िे इि शहर की आधुसनकता, प्​्ाकृसतक खूबिूरती और सटहरी िीि के िौ्दय्षको सनहार िकते है्. दूरदराज िे आने वािे िैिासनयो् के सिए ठहरने की कोई िमस्या नही् है. गढ्वाि मंडि सवकाि सनगम के होटि के अिावा कई नये होटि और गेस्टहाउि भी यहां खुि गये है्. हम जब नयी सटहरी पहुंचे तो शाम का अंधेरा फैिने ही वािा था. पहिे हमने डूबते िूरज की रोशनी मे् इि शहर के िौ्दय्ष को सनहारा और कुछ देर बाद जब शहर के मकानो् और िड्को् के सकनारे िगी सबजिी की बस्​्तयां जि उठी्तो इिका एक नया n ही र्प देखने को समिा. शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 29


मध् मास्यटप्हे्दडेश

रेवड़ी बांटते मामा

शि​िराज शसंह चौहान: एक घोटाला और

मध्य प्​्देश के जनसंपक्ककवभाग ने कपछले तीन साल मे्कवकभन्न वेबसाइटो्को करोड्ो्र्पये के कवज्​्ापन जारी ककये है्. इनमे्तमाम ऐसी वेबसाइट शाकमल है्जो सालो्से अपडेट तक नही्की गयी्. पूजा वसंह

कां

ग्​्ेि सवधायक बािा बच्​्न द्​्ारा प्​्देश सवधानिभा मे् पूछे गये एक प्​्श्न के उत्​्र ने प्​्देश के जनिंपक्क सवभाग और पत्​्कासरता जगत के नामो् को िुस्खषयो् मे् िा सदया है. बािा बच्​्न ने जनिंपक्क मंत्ी राजे्द् शुक्िा िे पूछा था सक एक जनवरी 2012 िे प्श् न् पूछे जाने तक सवसभन्न वेब पोट्ि ष और इिेक्ट्ॉसनक मीसडया घरानो् को सकतनी रासश के सवज्​्ापन सदये गये आैर इिके सिए स्पष्​्नीसत क्या है? इि प्​्श्न का उत्​्र चसकत करने वािा है. करीब तीन िाि की इि अवसध मे् 200 िे असधक वेब पोट्षि और िमाचार चैनिो् को 30 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

िै्कड्ो् करोड् र्पये की रासश बतौर सवज्​्ापन भुगतान की गयी. केवि पांच चैनिो् को इि अवसध मे् 60 करोड् र्पये िे असधक का भुगतान सकया गया. इनमे्एक क्​्ेत्ीय चैनि को सकया गया 11 करोड् र्पये िे असधक का भुगतान शासमि है. इतना ही नही् करीब 100 िे असधक वेब पोट्ि ष को पांच िाख र्पये िे 20 िाख र्पये की बीच की रासश का सवज्​्ापन भुगतान सकया गया और बहुत बड्ी िंखय् ा मे्ऐिे वेब पोट्षि भी है् सजनकी रासश चार-िाढ्े चार िाख र्पये के आिपाि है. इन वेब पोट्षि मे्िे अनेक की िंचािक मसहिाएं है्. बतौर पत्​्कार इन मसहिाओ् को शहर मे् शायद ही कोई पहचानता हो. दरअि​ि इन मसहिाओ्के नाम पर चिने वािे ये पोट्षि इन मसहिाओ्के उन

पसरजनो्के जसरये चिाये जाते है्जो पत्​्कासरता जगत मे् िस्​्िय है् या कही् नौकरीशुदा है् और अपने नाम िे वेब पोट्षि का िंचािन नही् कर िकते. मध्य प्​्देश पत्​्कार/ गैर पत्​्कार िंगठन के प्​्देश अध्यक्​् िुचे्द् समश्​् कहते है्, 'िूची को गौर िे देखने पर पता चिता है सक कई वेबिाइट िरकारी पतो् िे िंचासित है्. दूिरा एक ही पते िे एक िे असधक वेबिाइट चिायी जा रही है् जबसक सनयमत: एक पते िे एक िे असधक व्याविासयक प्​्सति्​्ान नही् चिाये जा िकते. ये िरकारी पते दरअि​ि उन पत्​्कारो्के है्जो िरकारी आवाि मे्रहने का िाभ तो िे ही रहे है्, अपनी पत्नी या अन्य पसरजन की मदद िे वेबिाइट चिाकर


जनिंपक्क सवभाग िे अच्छी खािी धनरासश भी जुटा रहे है्.' िूचना के असधकार के सिए काम करने वािे काय्क ष त्ाष सववेक कुमार कहते है,् 'व्यापम जैिा बड्ा घोटािा प्​्देश मे् हो गया िेसकन राष्​्ीय स्​्र पर िुस्खषयो् मे् आने के पहिे उिे िेकर स्थानीय मीसडया ने कोई खाि र्सच शायद ही सदखायी. जासहर िी बात है जनिंपक्क सवभाग के जसरये वेब पोट्षिो्को उपकृत करना मीसडया मैनेजमे्ट का ही एक तरीका है. अगर आप िूची को गहरायी िे खंगािे्गे तो आपको उिमे्प्​्देश के कई आिा पत्​्कारो्के पते और उनकी पसरजन के नाम समिे्गे. उिके बाद आपको यह िमिने मे्आिानी होगी सक उनकी किम की धार अचानक कुंद क्यो्हो गयी.' वही् जनिंपक्क सवभाग के िूत् एक अिग ही कहानी बयां करते है्. दरअि​ि वेबिाइटो् को सवज्​्ापन देने की दर सनध्ाषसरत करने के सिए अिग िे कोई सदशासनद्​्ेश सनध्ाषसरत नही्है्. हां, इन्हे् डीएवीपी की दर पर हर माह 25 िे 50 हजार र्पये तक के सवज्​्ापन सदये जा िकते है्. िमाचार पत्​्ो् के िक्कुिेशन की तरह वेब सवज्​्ापनो्के सिए पेज व्यू जैिा कोई मानक तय नही्सकया गया है. यही वजह है सक जो व्यब्कत सजतना असधक प्​्भावशािी होता है उिे उतनी ही असधक रासश के सवज्​्ापन समिते है्. कोई वेबिाइट 20 िाख के सवज्​्ापन पाती है तो सकिी अन्य को 50 हजार र्पये के सवज्​्ापनो्िे ही िंतोर करना पड्ा है. िुचे्द् समश्​् आगे कहते है्, 'इन वेबिाइटो् मे् िे कई का िंचािन जनिंपक्क सवभाग के वत्षमान या िेवासनवृत्असधकासरयो्के पसरजन द्​्ारा सकया जाता है. िाखो् र्पये के सवज्​्ापन पाने वािी कई वेबिाइट ऐिी भी है् सजनको सपछिे कई िािो् िे अपडेट तक नही् सकया गया है. ऐिे मे्इि आशंका िे भी इनकार नही् राजे़द़ िुक़ला: जनसंपक़फ की जांच

सकया जा िकता है सक सवज्​्ापन के र्प मे् स्वीकृत रासश का एक बड्ा सहस्िा जेबे् गम्ष करने मे्खच्षहो जाता हो और िाइट िंचािक को बहुत कम रासश समिती हो. ऐिे मे् यह भी देखा जाना चासहए सक 20-20 िाख र्पये के सवज्​्ापन पाने वािे िोगो् ने िंबंसधत वर्​्ो् मे् सकतना आयकर जमा सकया है.' िुचे्द् इि प्​्करण पर न्यायािय का र्ख करने जा रहे है्. जनिंपक्कसवभाग के आयुकत् अनुपम राजन ने इि सवरय मे् शुि्वार िे कहा, 'अब तक वेबिाइटो् को डीएवीपी की दरो् के अनुिार सवज्​्ापन जारी सकये जाते थे िेसकन अब इिके सिए एक नयी नीसत तैयार की जा रही है जो जल्द ही िामने आयेगी. अन्य प्​्चार-प्​्िार माध्यमो् की तरह ही वेबिाइटे् भी एक प्​्िार माध्यम है् और हम उनको सवज्​्ापन देने के सखिाफ नही् है्. हां, इिे थोड्ा िुव्यवब्सथत करने की आवश्यकता है तो नयी नीसत बनने के बाद यह काम भी हो जायेगा.' यह पूछे जाने पर सक कई वेबिाइटे्वर्​्ो्िे अपडेट नही्है्और कई तो एक ही पते िे चि रही है्, राजन ने कहा सक उन्हो्ने मामिे पर इतनी गहरी पड्ताि नही्की गयी है. सवधानिभा मे् िंबंसधत प्​्श्न उठाने वािे सवधायक बािा बच्न् का कहना है सक िरकारी सवज्​्ापन िेने वािे बोगि पत्​्कारो् के नाम िाव्षजसनक करना बहुत िमय िे उनके सवचार मे् था, अब इिका वक्त आ गया है. वह और गहरायी िे िूची की छानबीन कर रहे है्. उधर, जनिंपक्क मंत्ी राजे्द् शुक्िा कह चुके है्सक कोई सवज्​्ापन सनयमसवर्द्जारी ही नही्सकया गया ऐिे मे्सकिी तरह की जांच का कोई आधार ही नही् बनता है. जासहर है ये सवज्​्ापन सनयमो् मे् मौजूद खासमयो् का फायदा उठाते हुए जारी सकये गये है्, ऐिे मे्सकिी तरह की जांच िे कोई फायदा वैिे भी नही्होना है. राज्य शािन गत वर्ष राज्य स्​्रीय असधमान्यता प्​्ाप्त पत्क ् ारो्को िैपटॉप सवतसरत

एक नज़र मे़

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एक ही पते पर एक से अधिक वेबसाइट पंजीकृत वर्​्ो् से अपडेट न होने वाली वेबसाइटो् को लाखो् र्पये के धवज्​्ापन. वेबसाइटो् के पंजीकृत पते के र्प मे् सरकारी आवास का पता. अनेक वेबसाइट उन मधहलाओ् के नाम पंजीकृत धजनके पधरजन पत्​्कार है्. 100 से अधिक वेबसाइटो् को 5 लाख से अधिक की राधि का भुगतान. प्​्देि मे् करीब 3000 अधिमान्य पत्​्कार है्.

करने की योजना िेकर भी आया था सजि पर भी कयािो्का दौर चिा था. हािांसक उि वक्त भी कई पत्​्कारो्ने िैपटॉप सिये थे. प्​्देश मे्मान्यता प्​्ाप्त पत्​्कारो्को दी जाने वािी असधमान्यता एक अिग अध्ययन का सवरय है. यहां सजिा स्​्र पर करीब 1400 पत्​्कारो् को सजिास्​्रीय असधमान्यता हासि​ि है जबसक राज्य स्​्र पर असधमान्य पत्​्कारो्की िंख्या 1000 िे असधक है. जानकारो् का मानना है सक इनमे्बड्ा आंकड्ा ऐिे िोगो्का है जो केवि रिूख कायम करने या अन्य िाभ िेने के सिए असधमान्यता िेकर बैठे है्. ऐिे िोग भी बड्ी िंख्या मे्जो जनिंपक्कसवभाग िे िेवासनवृत्होने के बाद बतौर असधमान्य पत्क ् ार काम कर रहे है् जबसक अनेक पत्​्कार ऐिे भी है् जो एक अरिे िे िगातार काम कर रहे है् िेसकन उनको अब तक असधमान्यता नही्समि िकी है. जनिंपक्कसवभाग की वेबिाइट पर हाि ही मे् पहिी बार असधमान्य पत्​्कारो् की िूची िाव्षजसनक सकये जाने के बाद यह रोचक वाकया िामने आया है. इि िूची मे् कही् एक ही अखबार अनेक पत्​्कारो्की असधमान्यता है तो कई अखबारो्के नाम ऐिे है्सजनके बारे मे् िोचने तक के सिए कमाि की कल्पना शब्कत का प्​्योग करना पड्िकता है. प्द् श े के एक वसरि्​्पत्क ् ार नाम न जासहर करने की शत्ष पर कहते है् सक दरअि​ि असधमान्यता देने िंबध ं ी सनयमो्मे्इतनी असधक ढीिढाि है सक शायद ही कोई इिकी जद मे् आयेगा. अब असधमान्यता के सनयमो्को बदिने का वक्त आ गया है, अखबारो् िे कहा जाना चासहए सक वे हर िाि अपना आरएनआई सरटन्ष जनिंपक्क सवभाग को िौ्पे्. यही बात सवज्​्ापनो् पर भी िागू होनी चासहए. कई ऐिे िमाचार पत्​्ो् को भी जमकर सवज्​्ापन रासश बांटी जाती है जो केवि फाइि कॉपी छापते है्. ऐिे सशसथि सनयमो् को िमाप्त सकया जाना चासहए सजनका िाभ इि तरह उठाया जा रहा है क्यो्सक इिका खसमयाजा कई बार वास्​्सवक अपेक्ास्थषयो् को उठाना पड्ता है. िूत्ो्के मुतासबक कई ऐिे पत्​्कारो्को भी असधमान्यता हासि​ि है जो केवि कागजो्पर ही अस्​्सत्​्व मे् है्. इन पत्​्कारो् की पेशेगत सवसवधता चौ्काने वािी है. कोई पेशे िे सचसकत्िक है तो कोई अन्य स्कूि चिा रहा है. िेसकन इन िभी के पाि राज्य शािन का असधमान्यता काड्षमौजूद है. बहरहाि इि हो हल्िे के बाद िंभव है कागजी कार्षवाई मे् कुछ िख्ती बरती जाये. जनिंपक्क आयुक्त ने वेबिाइट के सिए नयी नीसत बनाने की बात कही ही है, देखने वािी बात यह होगी सक क्या वाकयी जमीनी स्​्र पर भी कोई बदिाव आता है या नही्. n शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 31


छत् मास्​्ीटसगढ् हेड

जहां हवा मे़ ज़हर है अवनल िौबे

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िाके की हवा जहरीिी हो चुकी है. इिमे् स्टीि और पावर प्िांटो् िे सनकिा धुआं जहर घोि रहा है. कच्​्े कोयिे के इस्​्ेमाि और इिमे्समिावट के वजह िे इिाके के ऊपर कोयिे की एक परत बनती जा रही है. इि​िे रायगढ्एक धुएं की चादर मे्सिपटा जा रहा है. इिका अिर िोगो्के स्वास्थ्य पर भी पड्रहा है. दवा की दुकानो् िे खांिी के सिरप की खरीदारी बढ्ती जा रही है. कोयिे मे् समिावट और मानको्की अनदेखी िे अब िोगो्का दम घुटने िगा है. पर िरकारी और गैर िरकारी प्िांट इिकी तय मानको्के िाथ सखिवाड्मे्

32 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

ही िगे है्. ऐिे मे्हवा जहर बनती जा रही है. प्ध ् ानमंत्ी मोदी जहां पूरे सवश्​्मे्पय्ावष रण को िेकर तरह-तरह के दावे और वादे कर रहे है्. वही् पय्ाषवरण को िबिे असधक नुकिान पंहुचा रहे पावर और स्टीि प्िांटो् को वाश कोि का इस्​्ेमाि करने के सिए भी िरकार बाध्य नही्कर िकी है. मोदी िरकार अभी तक वाश कोि के इस्​्ेमाि के सिए सकिी भी तरह की योजना नही्बना पायी है. आज भी पूरे देश के पावर प्िांट हो् या स्टीि प्िांट खदान िे सनकिा कच्​्ा कोयिा ही इस्​्ेमाि कर रहे है्. जो पय्ाषवरण को भारी नुकिान पंहुचा रहा है. इन प्िांटो्िे सनकने वािा जहरीिे धुएं िे भारी वायु प्​्दूरण हो रहा है. एक मेगा वाट सबजिी

रायगढ्मे्इज्पात और कबजली संयंि्ो्से कनकलने वाले धुएं के कारण हवा जहरीली हो गयी है. राज्य मे्बीस ऐसे प्लांट है जो कच्​्ेकोयले का इस्​्ेमाल करके पय्ाषवरण के कलए बड्ा खतरा बन चुके है्. बनाने मे् पचाि टन कोयिा जिाना पडता है. इि पचाि टन कोयिे के जिने िे भारी मात्​्ा मे् काब्षन डाई ऑक्िाइड सनकिकर हवा मे् घुि रही है. यह प्​्स्िया सबना र्के सनरंतर जारी है. िरकार की नाक के नीचे प्​्दूसरत सदल्िी मे् दादरी पावर प्िांट को बंद करने की नौबत तक आ गयी है. सफर भी िरकार ने वाश कोि के इस्​्ेमाि के सिए कोई ठोि नीसत नही् बनायी है. पूरे भारत मे्रोज दि िाख टन कोयिा इन प्िांटो्मे्जि रहा है. जहां-जहां ये प्िांट है,् उन स्थानो्का इतना बुरा हि है सक िोगो्के घरो्मे् कोयिे की परते्जम जा रही है्. बच्​्ेऔर बूढ्े दमा के सशकार हो रहे है्. उन्हे्िांि िेने मे्भारी तकिीफ हो रही है. छत्​्ीिगढ मे् कोरबा और रायगढ़ संयंत़: धुएं को झेलता आसमान


रायगढ देश के पावर हब माने जाते है्. इन इिाको्मे्देश का 25 फीिद कोयिा है. िबिे असधक कोयिा ल्िाको् की नीिामी भी इिी इिाके मे्हुई है. इि इिाके मे् िरकारी और गैर िरकारी िुपर थम्षि प्िांट है्जो हर रोज 24 िौ हजार मेगावाट िे िेकर चार हजार मेगावाट तक की सबजिी का उत्पादन कर रहे है्. छत्​्ीिगढ मे् इि क्​्मता के ऐिे 20 िे ज्यादा प्िांट है्, जो कच्​्ा कोयिा का इस्​्ेमाि कर हवा मे् जहर घोि रहे है.् ग्​्ीन स्​्टल्यनू ि ने िरकार को चेताया भी था सक पावर और स्टीि प्िांट वाश कोि का उपयोग करे्. पर िरकार की दिीि थी सक इतना वाश कोि अभी मौजूद नही् है. यह गैर सजम्मेदाराना बयान था. िरकार पावर और स्टीि प्िांटो् को सनद्​्ेसशत कर िकती थी सक चरणबद्​्तरीके िे कच्​्ा कोयिे की खपत कम करे्. कुि खपत मे्िे कम िे कम बीि फीिद वाश कोि का इस्म्े ाि सकया जाये. पर िरकार ने ऐिा कुछ नही् सकया. इि​िे िाफ है सक िरकार पय्ावष रण के मामिे मे्सकतनी गंभीर है. िरकार ने वाश कोि की कमी बता कर इि गंभीर मुद्े िे पल्िा िाड्सिया है. कच्​्ा कोयिा िीधे खदान िे सनकािकर पावर प्िांट की भट्​्ी मे्िो्क सदया जाता है. यह खेि एक बड्ी िासजश के तहत चि रहा है. सजयोिॉसजकि िव्​्े की सरपोट्ष के मुतासबक छत्​्ीिगढ मे् कुछ ही ल्िाक है् सजनिे कोयिा सनकिा जा िकता है. िेसकन िरकार ने सबजिी आपूसत् ष की आड मे्उन ल्िाको्मे्भी खनन शुर् करा सदया है जो कोयिे की तो है, पर इनके जिने मे्ज्यादा उज्ाष नही्समिती सजतनी पावर प्िांट को चासहए. मतिब िाफ है सक वह अभी कच्​्ा कोयिा है. इिके जिने मे्भारी मात्​्ा मे् धुआं सनकि रहा है जो िीधे वातावरण मे्जहर घोि रहा है. कच्​्ा कोयिा वैिे भी जहरीिा होता है, इिके बाद उिे वाश भी नही्सकया गया िीधा भट्​्ी मे्िो्क सदया जा रहा है. रायगढ और कोरबा मे् सनजी पावर प्िांटो् के पय्ाषवरण िे छेडछाड का मामिा यही्खत्म नही् हुआ होता. आगे यह मामिा और खतरनाक बन जाता है. जब इन खदानो् के कोयिे िे अच्छी उज्ाष नही्समिी तो इन पावर प्िांटो् के मासिको् ने गुपचुप तरीके िे इि कोयिे मे् पेट कोक समिाना शुर् कर सदया. पेट कोक एक तरह का पेट्ोसियम पदाथ्षहै जो ऑयि सरफाइनरी का अपसशष्​् है.इिमे ि​िफर की मात्​्ा अत्यासधक होने िे स्वस्थ के सिए भारी हासनकारक है इिके इि तरह िे जिाने पर पाबंदी है. कारण िाफ है इिमे् 99 फीिद काब्षन डाई ऑक्िाइड ओर िल्फर की मात्​्ा होती है. जो जहर के िमान है. इिे इि तरह नही् जिाया जा िकता सजि तरह िे

रायगढ, कोरबा और रायपुर के पावर प्िांट पेट कोक को समिाकर जिा रहे है्. यह बहुत ही खतरनाक है. ऐिे मे् प्िांट तो उज्ाष पूरा करने के सिए हवा मे् जहर घोिने का काम कर रहे है्. इि समिावटी तकनीक का इस्​्ेमाि िबिे पहिे चीन ने सकया था. चीन ने मनचाही सबजिी तो पैदा कर िी. पर वहां का वातावरण बुरी तरह दूसरत कर सदया. इिे िेकर पूरे सवश्​् मे् चीन की भारी फजीहत भी हुई. आज वहां इिके इस्​्ेमाि की मनाही है. इिके इस्​्ेमाि पर वहां अब उम्​्कैद की िजा का प्​्ावधान है. अपने देश मे्यह समिावटी खेि अब जोरो् पर है. रायगढ, कोरबा, और रायपुर मे्इि सपट कोक का भारी बाजार है. यह कोयिे िे िस्​्ा और असधक उज्ाष देने वािा पेट्ोसियम पदाथ्ष है. इिकी उज्ाष क्​्मता 12 हजार कैिोरी िे िेकर 18 हजार कैिोरी तक होती है. प्िांट मासिक खदान िे सनकिे कच्​्े कोयिे मे् इिे समिाकर मनचाही उज्ाष िे सबजिी का उत्पादन कर रहे है.् आज सजि तकनीकी के ल्वॉयिर इन पावर प्िांटो् मे् िगे है् उन्हे् 3400 िे िेकर 4200 कैिोरी जेिीबी उज्ाष की जर्रत होती है. देश मे् छत्​्ीिगढ िमेत जो भी कोयिा खदानो् िे सनकि रहा है इिकी उज्ाष क्​्मता 1500 िे 2200 कैिोरी ही है. यह िरकार भी ठीक िे जानती है. इिसिए िरकार ने पावर कंपसनयो्को सवदेश िे उच्​्कैिोरी क्म् ता वािे

कच़​़े कोयले की काशलख: खतरे मे़ लोग कोयिा को आयात करने की अनुमसत दे रखी है. आयात करने वािी कंपसनयो्को कस्टम के मामिे मे्भी रहत दी है. पर आज सवदेशी मुद्ा के िामने र्पये का अवमूल्यन होने िे सवदेशी कोयिा भी महंगा हो गया है. इिके चिते कंपसनयो्ने इि समिावट को अपना तो सिया है. पर इिके दुषप् भ् ाव अब िामने आने िगे है.् ताजे आंकडे बताते है्सक रायगढ मे्कफ सिरप की खपत िबिे असधक है. रात मे्सबना कफ सिरप सिये िोना मुब्शकि है. खांिी और िांि िे परेशान िोग िांि िेने के मामिे मे्डॉक्टर के पाि भी नही्जा रहे है्. िीधे दवा दुकानदार िे कफ सिरप िेकर राहत की िांि िे रहे है्. ऐिे मे्रायगढ्कफ सिरप पर जी रहा है. रायगढ और कोरबा के पय्ाषवरण मंडि असधकासरयो् की कमाई का आंकडा देखे् तो ताज्​्ुब होता है. हर एक पावर प्िांट उन्हे्बीि िे पच्​्ीि िाख र्पये दे रहा है, तब जाकर वह सपट कोक को कोयिे मे् समिाकर प्िांट चिा पा रहा है. आज कोरबा और रायगढ मे्जमीनो् की उपज क्​्मता िमाप्त हो गयी है. खेतो् मे् फि​िो् के ऊपर कािी परत जमा हो जाती है. िामान्य िे चार गुना रािायसनक खाद का उपयोग करने पर ही धान की पैदावार हो पा रही है. खेत बंजर होते जा रहे है्. सकिान आंदोिन करते है्तो उन्हे्फि​ि के नुकिान के एवज मे् कंपनी मुआवजा दे कर मुह बंद कर देती है. n शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 33


साहहत्मास् य/मु ट लहेडाक्ात

कृष़णा सोबती के साथ लेशखका

होना अपन े आप मे्

कृष्णा सोबती से कमलना एक लंबे युग के कजंदगीनामा से साक्​्ात्कार करना है. शरीर से वृद्होने के बावजूद वे कवचार के स्​्र पर अब भी युवा है्और भावुकता, बौक्​्दकता और कजंदाकदली से भरपूर है्. गवरमा श्​्ीिास्​्ि

अ

पने िघु उपन्याि ‘ऐ िडकी’ मे् कृष्णा जी की पात्​् अम्मू कहती है, ‘अपने आप मे् आप होना परम है.’ खुद पाये हुए अनुभव श्​्ेि् है् सजनका सवकल्प और कोई अनुभव हो ही नही् िकता. कृष्णा जी सिखती है्,‘मै्सकिी को नही्पुकारती. जो मुिे आवाज़ देगा, मै् उिे जवाब दूंगी’. मेरी पुकार का ऐिा ही जवाब सदया था एक िुदीघ्ष रचनात्मक जीवन जीने वािी और आज भी खूब िकारात्मक ऊज्ाष िे भरी हुई कृष्णा जी ने. शरीर िे भिे वृद्हो्िेसकन सवचार के स्​्र पर युवा है्, खूब जमकर िगातार सिख रही है्. भावुकता, उदारता और बौस्​्दकता का अद्​्त िंगम, बात-बात पर ज़ोर का कहकहा, ज़ुबान िे धाराप्​्वाह सफि​िती फारिी, पंजाबी और अंग्ेजी. सज़ंदगी और सजंदासदिी, अद्​्त सजजीसवरा. हंिकर कह पडी् मुि​िे, ‘मै्ने तो इिे (िहासयका) को फोन नंबर सिखकर दे रखे है् सक सकिी िुबह आवाज़ देने पर मै् उि पुकार िे परे जा सनकिूं तब’ ...हां और िुसनए गसरमा, जी चाहता है वहां ऊपर अल्िा समयां िे 34 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

कहकर वनर्म फ्िैट आरस्​्कत करवा िूं.’ मै् हतप्​्भ हूं और वे है् सक हि रही है्. नौ दशको् का िफर सवश्​्ांत हो रहा है, इिे िमिकर भी मन चाहता है सक यसद कोई ऊपर हो और मेरी बात िुने तो उि​िे अज़्ष करं् सक इि िोहबत को भरपूर स्वास्थ्य दे्सक और कुछ िाि वे सिख िके्. ऐिा कुछ, सजि​िे हम ऐिे पाठको्मे्शुमार हो्सजन्हो्ने सज़ंदगी को अपनी शत्​्ो्पर जीने की तमीज़ िीखी है उन्हे्पढकर. वे इन सदनो्गुजरात पर सिख रही है्. सबना र्के ,अपनी तकिीफो्के पुसिंदो्को सछपाये हंिकर समिजुि रही है्. कहती है्, ‘सदल्िी मे् िोग आपि मे् समिने – जुिने का सरवाज़ कम ही रखते है्.’ कैिे कहूं उन्हे् सक अपसरचय और कृस्तमता ही आज सकिी भी शहर की रवायत बन चुके है्. गांवो् मे् भी धीरे–धीरे यह बीमारी पंहुच गयी है. कण्ष–गुहा मे् मोबाइि का प्िग फंिाये हम दूिरी दुसनया के सनवािी है्, जहां दूिरे के दुख-िुख, हंिी– कराह की ध्वसनयां वस्जषत है्, अजनसबयत भी आत्मरक्​्ा का एक हसथयार है. िेसकन सफर हम सवराित पाये्गे सकि​िे? जीवन को िमिने की अनुभव िंपन्न दृस्ष दे िकने वािे िोग अपनी–अपनी

यात्​्ाओ् पर चिे जाये्गे, और हम िभाएं कर उन्हे्स्मरण कर कत्षव्य कर सिया करे्गे. सदन के चार –पांच घंटे एक अरिे के बाद उनके िाथ गुज़ारे. या यो्कहूं सजये. िन 1994 मे् एमसफि की उपासध के सिए उनकी सकताब ‘ऐ िडकी’ के चुनाव का िुिाव प्​्ो सनत्यानंद सतवारी ने सदया था. िंकोच और कम उम्​् के तकाज़े ने कृष्णा जी िे एक सनस्​्ित दूरी बनाये रखी. इि बार सदल्िी आने पर जब उनका फोन आया सक ज्वाइन कर सिया हो तो समिने आ जाओ. हैदराबाद के्द्ीय सवश्​्सवद्​्ािय ने उन्हे् जब डी-सिट की मानद उपासध दी तो सवश्​्सवद्​्ािय स्वयं िम्मासनत हुआ. शायद सहंदी पट्​्ी के सवश्​्सवद्​्ाियो् मे् भी सहंदी की इतनी बडी रचनाकार को मानद उपासध सदिवा देना इतना िहज भी नही्होता. हमारे सवभाग मे् तत्कािीन सवभागाध्यक्​् प्​्ो रसव रंजन और िहयोसगयो् ने इि प्​्स्ाव का ज़ोरदार िमथ्षन सकया. अंततः कई स्​्रो्िे गुजरने और शैस्कक पसररद की हंगामेदार बहि के बाद स्वीकृसत समि ही गयी. सवभाग मे्िब एकमत थे सक दूिरे के िम्मान िे हम खुद िम्मासनत होते है्. िाि 2012 के दीक्​्ातं िमारोह मे्कृषण ् ा जी का स्वयं


आकर िम्मान िेना स्वास्थय् िंबधं ी सदक्त् ो्के कारण हो नही् पाया. उनकी जगह अशोक वाजपेयी ने सजन्हे् हैदराबाद के्द्ीय सवश्​्सवद्​्ािय ने िम्मासनत सकया था, िम्मान उन तक पहुंचाया ,िेसकन हम हमेशा फोन पर िंबी चच्ाषएं करते रहे. जेएनयू के भारतीय भारा के्द् के िहयोसगयो् िे मै्ने कृष्णा िोबती िे अपनी भावी मुिाकात का सज़ि्​्सकया था सदन मे्और रात को अराविी के कमरे मे्, जहां हर घंटे यो सगना करती सक िो अब बोइंग सवमान उडान के पहिे रनवे पर बीि समनट सघिटा, अब दो-चािीि हुए और सवशाि भारी पंखो्, जगमगाती बस्​्तयो् वािे सवमान को जेएनयू पर मंडराने के अिावा कुछ िूि ही नही् रहा, िाइन ब्कियर नही् है, जाग पडी रहती हैअसनद्​्ा और सनद्​्ा के बीच िपने मे्यो्िगा ज्यो् वे व्हीि चेयर पर बैठी हो्, बडे फे्म का चश्मा पहने, कािे दुपट्​्े िे सिर और गिे को िपेटे, बीच मे् गौरवण्ष तेजस्वी मुख दीप्त हो और मै् उन्हे् सदखा रही होऊं जेएनयू के पेड– पौधे,मानुर ,नया इंसडया काफी हॉउि,गंगा ढाबा ,पाथ्षिारथी रॉक, खूब पढाकू छात्​्ो् िे भरी िाइब्​्ेरी, हवाई चप्पि पहने तेजोद्​्ीप्त आवेगमय सवद्​्ास्थषयो्का िुंड, अपने मे्ही गुम िर िुकाये जाता कोई अध्यापक, नीिगायो्के िुड ं , मोरो्के रंगीन पंख और देर रात नाच-गान करते कई छात्​्. वे देखती हो् हर चीज़ को कौतुक िे, मेरे उत्िाह िे उत्िासहत िी, ज्यो् पहिी बार स्वच्छ आकाश मे् पेडो् के बीच िे िांकते तारो्की बोिी –बानी िुनती हो्. कृष्णा जी उन िोगो्मे्शुमार है्जो मनुष्य को जासत, वग्ष और जे्डर के कठघरे मे् बांटने िे पहिे उिके आत्यंसतक ित्य को महत्व देती है-् शबारी उपरे मानुर ित्य ...जेएनयू मे्ज्वाइन करने के बाद मै्ने उनिे कहा सक िस्दषयो् की छुस्टयो् के बाद आपको समिती हूं, िेसकन उनका आग्​्ह था अभी समिो न. इि अभी समि िेने मे्कुछ था जो कहा नही्गया पर महिूिा गया, वह था- कि सकिने देखा है? मुि​िे हाथ समिाकर बोिती है्. ‘आप तो तीिरी पीढी की है्, पैदाइशी महानगरीय होना और छोटी जगह िे आकर यहां बि जाने के फक्क को देर तक िमिाती है्. मै्ने हौिे िे उनके िुस्रषयो्भरे गोरे हाथ को छू सिया है ,दो उंगसियो् मे् हीरे की अंगूसठयां है्, किाई मे् िोने का एक िादा-िा कडा, त्वचा िूि गयी है, नीिी-हरी निे्हस्​्डयो् को मजबूती िे थामे हुए है्. उंगसियां किात्मक है्. मेरी उंगसियां देख रही है्वे भी गौर िे. चश्मे के भीतर एक जोडी चुस् और चौकन्नी आंखे् है.् िुनने-बोिने मे्कही्कोई सदक्त् नही्, बि कहती है्सक अब थक जाया करती हूं. देर रात तक जाग कर काम करना उन्हे् पहिे िे ही िुहाता है, इिसिए िुबह देर िे िोकर उठती है.्

कृष़णा सोबती की कुछ पुस़के़

‘आपको ग्यारह बजे आना था इिसिए आज जल्दी उठ गयी’ और बच्​्ो्की तरह सखिसखिा उठती है्. िर को उन्हो्ने कािे ऊनी टोपे िे ढक रखा है. मै्ने थोडा इठिाकर कहा है सक उनके िन िे केश देखना चाहती हूं, वे सबल्कुि आत्मीय पुरसनया की तरह टोपी उतार देती है्. रबी्द्नाथ ठाकुर की श्​्ेत केश रासश याद आ रही है. अब वे कुछ ज्यादा ही कमजोर हो गयी है्. िािो् पहिे की कृष्णा िोबती, सजनकी सवस्​्ृत आडंबरपूण्ष ‘हाई-टी’ का िुत्फ बहुत िे िासहत्यकार, असतसथ,पसरसचत उठाया करते थे. उिकी रौनक मंद भिे हो गयी हो, बुिी नही्है. िहासयका ने इशारा िमिकर चाय का एक िंबा िरंजाम रख सदया है. मै्ने नोसटि सकया है सक वे बहुत कम खा रही है्. न के बराबर, िेसकन सनरंतर इि बात का ख्ायाि रख रही है् सक मेहमाननवाज़ी मे्कुछ कमी न रह जाये. यह वो पीढी है सजिकी जडे् भारतीय िभ्यता और िंस्कार मे् गहरे तक जमी है् और पाि्​्ात्य िंस्कृसत िे पुब्षपत–पल्िसवत हुई है्. कृष्णा जी अपने बचपन के सदनो्को याद कर रही है्. शरीर यही् िोफे पर मेरे िाथ बैठा रह गया है. आंखो् की पुतसियां थोडी सिकुड गयी है्, दृस्ष ब्सथर हो पहुंची है अतीत के िुदूर कोने –अंतरो् को देखने. ‘हमारे सपता रात को रौशनी बुि जाने पर घर के बीचो्-बीच बैठकर िािटेन की मंद रोशनी मे् कोई िासहब्तयक टुकडा पढा करते. हम िब अपने-अपने सबस्र् ो् पर िेटे घर मे्गूज ं ती उि गुर्गंभीर मंद्आवाज़ को िुना करते. भारा की ध्वसनयां और उिका शल्द भंडार अजीब रहस्यमय ढंग िे हमारे कानो् के जसरये िीधे सदि मे्उतर जाया करता. भारा के िंस्कार हमने अपने माता–सपता िे पाये, और अनुशािन भी.’ मै्ने उन्हे् कुरेदने की कोसशश की है, ‘आपकी पहिी रचना?’ वे बोि उठी्, ‘चन्ना’ शीर्षक मै्ने पहिा उपन्याि सिखा था, सजिे छपाया नही् क्यो्सक इिाहाबाद के सकन्ही् िल्िूिाि जी ने कंपोसजंग मे् ही पंजाबी के िोक शल्दो्को अपनी तरफ िे िुधारकर शुद् सहंदी के शल्द भंडार मे्शासमि करने योग्य बना सिया था. मि​िन, शाहनी को उन्हो्ने िुधारकर शाह-पत्नी कर सदया, अपने बचपन की बोिी– बानी, रवानीदार पंजाबी मुहावरो्को खड्ी बोिी का चुस्पहनावा पहनाना मुिे अिह्​्हो गया और उिे प्​्कासशत करवाने का सवचार त्याग सदया, मै्ने उनिे कहा है सक मुिे ‘सज़ंदगीनामा’ के अगिे खंड की प्​्तीक्​्ा है. वे मुस्कुराती है् और मेरी आंखो् के िामने बडे शाहजी के सिरहाने िबद उचारती राल्यां की चुनरी की कोर सि​िसमिा गयी है्. क्या आप ही है् राल्यां? आप कब कहां समिी् राल्यां िे. शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 35


साहहत्य/मुलाक्ात

सजिकी आवाज का दद्ष, दीनो–जहान मे् मुहल्बत का दद्षहर उि पाठक के सदि मे्टीि िा सजंदा है, जो पैडे मारती राल्यां को शाहजी के पीछे-पीछे दसरया मे्उतरता देख चुका है, जासतसबरादरी, उम्,् शरीर के परे शाहजी की राल्यां के सिए दीवानगी देख चुका है, ताक पर रखे दीये की िौ-िी सि​िसमिा रही है्. कृष्णा जी की आंखे् ही न राल्यां की आंखे्. सजि सदन वह िािी शाह की पुकार को अनिुना करके दसरया मे्उतर गयी थी. बेआवाज़, हौिे. चुपचाप. िारी हवेिी की दौित को पीछे छोडकर चिी गयी थी उिी दसरया मे्, जहां शाहजी गये थे. तबिे ढूंढ् रही हूं मै् उि राल्यां को. समिी नही् कभी समिेगी भी नही्. ‘सिक्​्ा बदि गया’ की शाहनी ट्​्क पर चढा दी गयी है, खेत, दौित, िंबंध, नाते, शाहजी की स्मृसतयां िब कुछ पीछे छूट रहा है, ट्​्क की गसत उि शाहनी को दूर िे जा रही है मुि​िे. क्या आप ही है्शाहनी. राल्यां. कृष्णा जी की आंखे्सि​िसमिा रही है्या मेरी आंखो्का पानी ही धुंधिा कर रहा है मेरी नज़र को. जी कह रहा है कहूं, ‘मत जाओ राल्यां, कही् मत जाओ, यही् िबद उचारो. तुम्हारे शाहजी नही्, िेसकन अब वक्त बदिा है तुम्हारी ज़र्रत है बहुतो्को. मत जाओ शाहनी अपने खेत–खसिहानो् को छोडकर. ये नन्हेमुन्ने िरिो् के पौधे िद्ष हवा मे् बाहे् फैिाकर तुम्हे् बुिाते है्. र्क तो जाओ. यो् भी जाता है कोई. र्को न अम्मू! तुमने कहा था, िडकी! परिोक होता है दूिरो् का िोक. परायो् का .वहां का रास्​्ा क्यो् देखना. मुि जैिी कई िडसकयां हो्गी सजन्हे् ज़र्रत होगी तुम्हारे अनुभवो्िे बहुत कुछ िीखने की ,अभी अपनी तैयारी स्थसगत रखो शाहनी..... सजन्हो्ने कभी सकिी को आवाज़ नही् दी, बि पुकार का उत्​्र भर सदया, वे जीवन भर स्वासभमान िे कभी िमिौते न करने 36 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

कृष़णा सोबती : जीने और रचने का एक युग वािी रचनाकार के र्प मे् जानी जाती रही्. सजि शहर की आबोहवा मे् हर दूिरा रचनाकार पुरस्कृत हो या होने के सिए िािासयत हो, उिी शहर मे् आपने बडे-बडे पुरस्कारो् को दरवाजे िे िौटा सदया. इिका कोई अफिोि नही् है मुिे. स्वासभमान और अपनी शत्​्ो् पर जीने के सिए कही् हाथ नही् फैिाया, 26 िाि की कानूनी िडाई िडी और उिी मे् घर सबक गया. ये बताते हुए चेहरे की मुस्कान धूसमि! नही्...नही् कहां. दुख या अफिोि के बादि का कोई नन्हा टुकडा भी नही्, सनरभ्​्अपसरसमत सवस्​्ार. छोटे सशमिा की यादे् ,सवभाजन की यादे्. जो मन मे् आये कर डािना चासहए, न कोई दोस्​्न कोई दुश्मन. मै् अपना सदि खुद ही िगाती हूं. िोग कहते है् आप अपने सनज के बारे मे् कुछ नही् बताती् .कभी सकिी ने मुि​िे पूछा सक िुना था कभी आपका एक प्​्ेम प्​्िंग था तो मै्ने जवाब सदया, िुसनए ‘मेरी इतनी बुरी हाित कभी नही् थी, जहां सिफ्कएक ही प्म्े –प्ि ् गं होता’ इिके िाथ ही हमारी िमवेत हंिी उम्​्की दीवारो्को ढहाते हुए किकि नदी िी बह उठती है सजिकी छिछिाहट बहुत सदनो् तक स्मृसत का मंद ब्समत सबखेरती रहेगी. इन सदनो्‘सदिोदासनश’ का पाठ हो रहा है जासमया समब्लिया मे्. शाम को कृष्णा जी को वही् जाना है. मेरे पाि िमय नही् सक अपनी स्​्पय रचनाकार के इि उपन्याि–पाठ मे् शासमि हो िकूं. िौटने का वक्त हो चिा है, ‘सिक्​्ा बदि गया’ की शाहनी ने अपने गहनेज़ेवर कुछ नही् िाथ रखे थे, चि दी थी शरणाथ्​्ी कै्प मे् दूिरो् के िाथ कभी न िौटने के सिए, िंग कुछ िे गयी ही नही्. कौन िे जा पाता है इि दुसनया िे चीज़–बस्​्, अपनी िांि जब तक िाथ दे तब तक ही है मै्, मेरा, अपना, हमारा ज्यो्ही औचक बुिावा आया. उिी िमय

राल्यां चुपचाप दसरया की िहरो्मे्गुम. बादिो् के घेरो्ने घेर सिया है. चुपचाप अपने रस्​्ेचि देना है. सकिी िे सगिा–सशकवा क्यो्. जीवन सजतना समिा ,जैिा समिा ,भरपूर सजया, ज्यो्की त्यो् धर दीनी चदसरया..हां जब तक रहे िुकून िे रहे, अच्छा खाया, अच्छा पहना. गरारे िे िेकर शरारे तक. अपनी धज िबिे अिग रखी. सकिी को र्चे तो ठीक ,न र्चे तो राम...राम. मुिे सवदाई जैिा कुछ दे रही है् वे ..एक िुंदर कािा कुरता, सजि पर चांदनी के मोर बने हुए है.् मानो्कहती हो्, पहनना तो याद करना मुिे. सि​िसमिी आंखो् मे् बािबंगरा के दािान मे् सिर पर हाथ रखे छोटे गोि मुख वािी नानी की तस्वीर है, जो सदल्िी िौटने के सदन कहती थी, ‘फेर िौट के अइह, गम्​्ी के छुट्ी मे्’. सवदा िेते किेजा मुंह को आता था, िोचा था नौकरी करं्गी तो नानी की देखभाि करं्गी. नानी उि​िे पहिे चिी गयी. सफर नसनहाि के नाम पर िब कुछ बचा रहा नानी के सिवाय. कृष्णा जी मुिे सवदा दे रही है्. उन्ही् की सिखी पंब्कतयां याद आ रही है्, सजन्हे् दोहराने की इज़ाज़त बडे िंकोच िे मै्ने मांग िी है, ‘िडकी, प्यािा बना ही इिसिए सक उठाओ और पी जाओ. जब तक पी िकते हो पीते रहो’. जीवन सहरण है सहरण. कस्​्ूरी मृग. इि क्​्णभंगुर जगत मे् अपनी महक फैिा यह जा और वह जा. िुनते ही वे आनंद िे तािी बजा कर हंिने िगी है,् ‘तुमको याद है इतना िब ?’ मेरा जवाब है, ‘मुिे तो आपका पूरा उपन्याि याद है.’ कृष्णा जी ने बाये्पािंग पर रखी एक छोटी सकताब िे एक टुकडा सनकािा है और कहती है्, ‘इिे बोि कर पसढए’ मुिे मािूम है सक ये टुकडा कौन िा है, वे मेरा उच्​्ारण िुनना चाहती है्. नफीि उद्षू की नज्म मन को ताज़ा कर गयी है... ठंड बढने िे पहिे जेएनयू पहुंचना है. दीवार पर सशवनाथ जी की मंद मुस्कान टंगी है, कोई मािा नही्. जो िाथी यही्है्पुराने कांच के सगिािो्मे्,बुद्की धूिभरी प्​्सतमा मे्, सववण्ष हो चुके गाढ्ेरंग के िोफे कवरो्मे्, िीिे–िीिे िे रेशमी पद्​्ो् मे्, रंग और पुताई की फसरयाद करती दीवारो् और छतो् मे्, कभी रोशन करते कांच के िाड-फानूिो् मे्, उिकी तस्वीर पर मािा क्यो्? उिकी उपब्सथसत तो उत्कीण्ष है पांचवी्मंसजि के फ्िटै के दरवाज़े पर स्टीि की प्िेट पर: जेहिम और चनाब/बहते रहे्गे इिी धरती पर./िहराते रहे्गे/ख्ुिी-डुिी हवाओ् के िो्क/े इिी धरती पर/इिी तरह./हर र्त-मौिम मे/् इिी तरह/सबल्कि ु इिी तरह/सिफक/् हम यहां नही्हो्ग.े /नही्हो्ग,े /सफर कभी नही्हो्ग,े /नही्. n (सजंदगीनामा)


सािहत्य/स्ामीक्​्ा

गुम होता आदमी

संजय कुंदन पाि्​्ो्की बहुत गहराई से पडताल करते है्. उन्हो्ने बाजार के मकड्जाल और कदखावे मे्उलझ चुके आज के आदमी के हालात को बहुत अच्छी तरह समझा और कलखा है. अनीता वमश्​्ा

िेसकन इनके नये स्वासमयो् के सिए यह एक सवशुद् व्यविाय है. अब मीसडया का चसरत्​्और कामकाज व्याविासयक फायदे के सहिाब िे ् ार तािमेि नही् जय कुंदन इक्​्ीिवी् िदी के कहानीकार है् और उनकी कहासनयो् बदि सदया गया है. इि बदिाव िे पुराने आदश्वष ादी पत्क के के्द्मे्इि िदी के आदमी का जीवन है, जो सक बाजारवाद और सबठा पा रहे और िगभग सवस्​्कप्तता की हाित मे्पहुंच गये है्. ‘रैिी’ के भूमंडिीकरण िे त्​्स्है. यह बाजारवाद आदमी को अपने रंग मे्रंगना, नायक पत्​्कार नरे्द्की यही हाित हो गयी है. वह अपने को िंवेदनहीन अपने िांचे मे्ढािना चाहता है. इि रंगने और ढिने मे्आदमी का जीवन महिूि करता है. ‘महानगर के सकस्िे’ मे् पांच छोटी कहासनयां है जो महानगरीय सकतना बदरंग हुआ है,सकतना दरका और टूटा है, िंजय कुंदन के नये कहानी िंग्ह ‘श्यामिाि का अकेिापन’ मे्इिका पता िहजता िे चि जीवन की तल्ख िच्​्ाइयो् को उजागर करती है्. सकताब िे कट गये जाता है. िंग्ह की पहिी कहानी ‘हीरो’ एक ऐिे ऑटोसरक्शा चािक चंदर आदमी के जीवन की त्​्ािदी को ‘सकताब’ कहानी बखूबी बयान करती है. की कहानी है जो चिाता तो ऑटो है, पर िपना हीरो बनने का देखता है. ‘िचमुच का आदमी’ मे् जीसवका कमाने के सिए इंिान िे बुत बन गये वह अपनी िवासरयो्िे सफल्मी नायको्की समसमि्​्ी के अंदाज़ मे्बात करता आदमी की मास्मषक दस्​्ान है. ’उि दिाि का एक सदन’ कहानी दिािी के धंधे मे् जीवन के खािीपन की कहानी है और है, िेसकन एक घटना द्​्ारा जब वह एक हीरो वािा ‘िपने’ पाश की इि कसवता ‘बहुत खतरनाक होता है काम कर गुजरता है और अखबार और टीवी वािे िपनो का मर जाना’ को जीवंत करती हुई कहानी है उिका इंटरव्यू िेते है्िेसकन वह कही्भी नही्छपता ‘टैगोर वासटका‘ पुर्र की दोहरी िोच और अपने या सदखाया जाता, तब उिका इि दुसनया की िू्र और स्​्ी के सिए अिग मानदंड गढने की कहानी है िचाई िे िामना होता है. चंदर िमि जाता है सक पढा-सिखा, स्​्ी सवमश्ष की बाते् करने वािा पुर्र भी व्यवस्था बदिने वािे हीरो सिफ्क सफल्मो् मे् होते है्, स्​्ी के सिए एक खाि कंडीशसनंग के सहिाब िे ही वास्​्सवक दुसनया मे् सजनके ऊपर दासयत्व है, इिे मानसिकता बना िेता है. इि कहानी की मुख्य बदिने का, वही इिे बब्ाषद कर रहे है्. पात्​्शांता और उिकी बेटी अच्षना के रहन -िहन की ‘अगिा जनम’ िंग्ह की िशक्त कहानी है जो वजह िे उन िोगो् के चसरत्​् पर िोग शक करते बताती है सक बाजारवाद के आतंक मे् व्यब्कत अपना है्. िेसकन वह मजबूत व्यब्कतत्व की स्​्सयां है् सबना िहज स्वाभासवक जीवन नही्जी पाता. इि कुचि्​्िे सकिी िहारे के और परवाह सकये अपने सहिाब िे मुक्त होकर ही कहानी के नायक वम्ाष जी को िगता है जीवन जीती है्. इि कहानी का एक रोचक पहिू है स्​्ी सक अि​िी जीवन यही है. इिी तरह ‘हेिीकाप्टर वािे श़ य ामलाल का अके ल ापन का भी स्​्ी के सिए एक पुर्र की तरह िे ही िोचना. भइया’ वत्षमान राजनीसत के दिदि मे्फिकर अपनी सं ज य कु द ं न स् स ् यो्की इि तरह की मानसिकता को िेखक ने बहुत जान गंवा चुके एक िीधे िरि गंवई आदमी बैजू भइया शकताबघर प़ क ़ ािन, 4855-56/24, अं स ारी अच् छ ी तरह िे उकेरा है. उफ्कबैजनाथ की कहानी है. रोड, दशरयागं ज , नयी शदल़ ल ी-110002 बाजार ने आदमी को इि तरह अपनी मुट्ी मे् कर गाँव की एक बडी जोत के सकिान पसरवार के मू ल य ़ : 300 ऱ प ये सिया है सक उिके दुख-दद्ष ,परेशानी िब पृि्भूसम मे् बेटे फूिन सिंह को उनका एक दिाि समत्​् शहर मे् सनवेशक बनने का िपना सदखा कर उनकी चिे गये है्और आदमी का रहन-िहन, उठाना बैठना, आपि मे्समिनाजमीन सबकवा देता है और उनके पैिे सकि तरह धीरे –धीरे सनवेश जुिना और यहां तक सक पूरा जीवन ही अपनी िंपन्नता और बाजार की योजनाओ्मे्खच्षकरवा कर उन्हे्कंगाि कर देता है ‘सनवेशक’ कहानी जानकासरयो् का प्​्दश्षन मात्​् होकर रह गया है. ऐिे माहौि मे् िाधारण बहुत रोचक तरीके िे इिे बताती है. इि कहानी का एक पहिू और िरि आदमी कैिी घुटन महिूि करता है, सकतना सनस्िंग और आस्थषक द्​्ंद्ं के िाथ जासतवाद भी है. अपनी िवण्षमानसिकता के कारण एकाकी हो जाता है, कहानी’ श्यामिाि का अकेिापन’ इि त्​्ािदी को फूिन सिंह छोटे काम करने मे्अपनी हेठी िमिते है.् उनका दोस्​्उिकी बडी सशद्​्त िे हमारे िामने िाती है. िंजय कुंदन एक िंवेदनशीि पत्​्कार है्. उनकी दृस्ष पत्​्कारो् इि मानसिकता का फायदा भी उठाता है . इि कहानी का अंत िकारात्मक है. फूिन सिंह और उिका पसरवार उि तथाकसथत समत्​्के मकडजाि को वािी है और वे पात्​्ो् की बहुत गहराई िे पडताि करते है्. उन्हो्ने िमि िेता है और उिमे् और न फिने का फैि​िा कर िेता है. फूिन बाजार के मकडजाि और सदखावे मे् उि​ि चुके आज के आदमी सिंह एक िाधारण नौकरी के सिए तैयार हो जाते है्. सनजीकरण और के हािात को बहुत अच्छी तरह िमिा और सिखा है. महानगरो् मे् उदारीकरण ने सकि तरह ग्ा्मीण अथ्षतंत् को तबाह कर शहरो् पर बोि रह रहे आदमी के िपने कुछ और होते है् और वो सजंदगी कुछ और जीता है. इि दुसवधा मे् उि​िे जीवन की िहजता छूट जाती है. िंग्ह बढ्ाया है, इि प्​्स्िया को भी यह कहानी रोचक तरीके िे दश्ाषती है. कहने को तो देश मे्िोकतंत्है, िेसकन राजनीसतक तंत्पर पूंजी का की िारी कहासनयां इिी मकड्जाि मे् उि​िे आम आदमी की दबदबा है. राजनीसतक नेतृत्व पूंजी के आगे नतमस्​्क है. इिका अिर कहासनयां है्. िंजय कुंदन की भारा मे् िादगी है, हािांसक कभीमीसडया पर भी पड्ा है. एक िमय मीसडया के मासिक उिकी स्वतंत्और कभी वह पत्​्कारीय भी हो जाती है. कहासनयो् मे् स्​्ी की कम n स्वायत्​्भूसमका का आदर करते थे और उिके काम मे्दखि नही्देते थे. उपब्सथसत खिती है.

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शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 37


मास् साहहत् ट हेयड मंगलेश डबराल

चस्चषत होते थे. जब तत्कािीन प्​्धानमंत्ी इंसदरा गांधी का शािन तानाशाही की ओर बढने हिे वीरेन डंगवाि, सफर िगा तो जेएनयू प्​्सतरोध के एक रमाशंकर सवद्​्ोही और िन प् म ् ख ु के द् ्के र्प मे्उभरा. और 2015 के जाते-जाते पंकज सिंह. सफर जब इमरजे्िी िागू हुई तो सहंदी की प्स्तबद्​्और जन-पक्ध ्र दमनकारी ित्​्ा के सनशाने पर कसवता के सिए बीता हुआ वर्ष आनेवािा पहिा सशक्​्ा िंस्थान दुखद िासबत हुआ. ये तीनो् कसव यही था. हमारी पीढी के कई उि पीढी के थे सजिने आज़ादी की कसवयो्और रघुवीर िहाय और हवा मे्अपनी पहिी िांिे्िी थी्, सवष्णु खरे िरीखे सपछिी पीढ्ी सजिे एक नये, िमतामूिक और के कसवयो्ने इमरजे्िी िे पहिे अन्याय िे रसहत िमाज का स्वप्न ही िमाज और राजनीसत मे् सवराित मे् समिा था, िेसकन मंडराते खतरो्को कसवता मे्दज्ष सजिने युवा होते ही इि स्वप्न का सकया था. पंकज सिंह की एक टूट कर सबखरना देखा. यह कसवता ‘िम्​्ाज्​्ी आ रही है्’ ऐिी गौरतिब है सक इि पीढी ने उि ही रचना थी सजिमे् ये आहटे् स्वप्न को और उिे चसरताथ्षकरने िाफ िुनी जा िकती है्: के िंघर्​्ो्को अपनी काव्य भारा मे् पं क ज शसं ह : अं त तक स़ ि प़ न ‘िम् ा ् ज् ्ी का रथ तुम्हारी बचाये रखने की कोसशश की. अं त स् ड यो् िे गुज़र् गे ा/रथ गुज़र् गे ा पंकज सिंह (जन्म: 22 तुम्हारी आत्मा की कराह और सदिंबर 1948 - सनधन: 25 शोक िे/तुम्हारे िपनो् की सदिंबर 2015) भी नेहर्युगीन हसरयासियां रौ्दता हुआ/रथ मोहभंग और नक्ि​िबाडी उभार की ‘विंत गज्षना’ के बीच िस्​्िय पंकज कसंह उस पीढी के ककव थे कजसे एक समतामूलक गुज़्रेगा रंगीन िरनो् और पताकाओ् की ऊब-डूब मे्.../ पीढी के एक िस्​्िय िदस्य थे. वह बांग्िा मे् भूखी पीढ्ी, तेिुगु मे् समाज का ज्वप्न कवरासत मे् कमला था, लेककन कजसने स्वतंत्ता की इि दोगिी बहार मे्/िुक जाओ भद्​् भाइयो/ सदगंबर रचसयतािु िंघम और सहंदी युवा होते ही इस ज्वप्न का टूट कर कबखरना देखा. िम्​्ाज्​्ी आ रही है्.’ िन 1947 मे्अकसवता के व्यब्कतवादी सवद्​्ोह मे् सिखी गयी यह कसवता का दौर भी था, सजि पर अमेसरकी इमरजे ि ् ी के पू व ा ् भ ष ाि के कारण काफी चस् च तष हुई और पंकज सिंह जनवादी बीट कसवता और सगंिबग्ष जैिे अराजकतावादी कसवयो् का प्​्भाव था. कसवता की एक मज़बू त आवाज़ बने . इि कसवता के कई अंशो्मे्उि िमय िेसकन जल्दी ही इन आंदोिनो्के कई कसव नक्ि​िबाडी की मुब्कतकामी के दमनकारी पसरदृ श ् य को सवचसित करने वािे ढंग िे देखा गया: ‘इि चेतना के प्​्भाव मे् आये और बांग्िा, तेिुगु और पंजाबी के िाथ सहंदी औ् ध े नगर मे ् हु ई हत् य ाओ् की िू च नाएं िभािद दे ्गे उन्हे्/सक ख्तरनाक कसवता मे्भी एक ऐिी राजनीसतक चेतना आयी जो नयी कसवता और िन िाठ के बाद की कसवता जैिे सपछिे आंदोिनो् को दरसकनार कर बंदी मारे गये कारागार िांघते हुए/सक कुछ अिभ्य िोग मारे गये कुिीन प्​्गसतशीि आंदोिन का एक ज्यादा प्​्खर सवस्​्ार िगती थी. उन सदनो् नागसरक आवािो्के आिपाि.’ पंकज सिंह इि बीच पत्क ् ासरता की ओर मुड,े कुछ िमय पेसरि प्व् ाि ‘धम्षयुग’ मे्प्​्कासशत पंकज सिंह की एक कसवता ‘ऋ तुएं गुनती है्’ चच्ाष मे्थी, सजिमे्अपने िमय की कठोरताओ्के बीच प्​्ेम की सवडंबनाओ्की भी सकया और तीन वर्ष बीबीिी की सहंदी िेवा मे् उद्घोरक रहे.’आहटे् पडताि की गयी थी: ‘िंबी चुब्पपयो्के तनाव भरे तंतुजाि/ बुनते है्हमारे आिपाि’ उनका पहिा कसवता िंग्ह था. भारत िौटने पर दूिरा िंग्ह ् ासशत हुआ और कुछ ही वर्षपहिे तीिरा िंगह् आया िंबंध/ और मेरे अब्गन भरे शल्द मुिमे्सपघिे हुए िावे िे दौड्ते है्/ मेरी ‘जैिे पवन पानी’ प्क युवा चीख्ो् के पार तुम्हारा उदाि प्यार/मेरी दरकती मांिपेसशयो् िे सजिका शीर्षक था : ‘नही्’. वे गाते बहुत अछा थे और उन्हे्किा की भी दूर...दूर...दूर.’ उि दौर मे् कई कसवयो् पर राजकमि चौधरी का प्​्भाव गहरी िमि थी. ‘जनित्​्ा’ मे् उन्हो्ने कुछ िमय किा िमीक्​्ाएं सिखी् भी था,जो वैयब्कतक सवक्​्ोभ को एक नये मुहावरे और चमकदार भारा मे् और िंदन मे्की गयी मकबूि सफदा हुिैन िे उनकी एक िंबी बातचीत भी ‘जनित्​्ा’ मे्प्​्कासशत हुई जो एक महत्वपूण्षकिा-दस्​्ावेज़ िे कम व्यक्त कर रहे थे. अपने शहर मुजफ्फरपुर िे सदल्िी आने और सफर जवाहर िाि नेहर् नही्थी. जनवादी िासहत्य को िमस्पषत एक पस्​्तका ‘िोच’ का भी उन्हो्ने सवश्​्सवद्​्ािय (जेएनयू) मे् शोध छात्​् के तौर पर प्​्वेश िेने के बाद िंपादन सकया, िेसकन उिका एक ही अंक सनकि पाया. वे देश मे् पंकज सिंह के सवचारो्और कसवता मे्पसरवत्षन आया और वे उन बौस्​्दक- फािीवादी, िांप्दासयक और सहंदुत्ववादी ताकतो्के उपद्​्वो्के प्​्सतरोध मे् राजनीसतक हिचिो् िे जुडे जो उन सदनो् के िांस्कृसतक पसरदृश्य को भी िस्​्िय थे और बढती अिसहष्णुता के सवरोध मे् िेखको्-सफल्मकारो् आंदोसित सकये हुए थी्: ‘वह इच्छा है/ अिुमसु नयम के फूटे कटोरो्का कोई द्​्ारा अपने पुरस्कारो्की वापिी की मुसहम मे्शासमि थे. शोसरत-उत्पीसडत िपना ज्यो्/ उजिे भात का/ वह इच्छा है सजिे सिख रहे है्/खेत-मज़्दूर, जन की शब्कत पर उनका सवश्​्ाि कभी सडगा नही् और उनकी कसवता छापामार और कसव एक िाथ/ वह इच्छा है हमारी/ जो िुबह के राग मे् नाउम्मीदी के बीच हमेशा उम्मीद िे भरी रही. एक कसवता ‘सनशासनयां’ मे् बज रही है.’ जेएनयू छात्​् आंदोिन का गढ था जहां िभी रंगतो् के वे कहते है्: ‘पतिड के पत्​्ो्िे उठेग्ाष ि​िेटी किा धुंआ/धीमे-धीमे सफर वामपंथी िंगठन िस्​्िय थे. पंकज सिंह छात्​्ो्के ज्यादातर िंघर्​्ो्मे्शरीक िुिगेगी आग/सदखे्गी अंधेरे को चीरती् िुनहरी रक्ताभ िपटे्/सदखी्नही् n रहते थे और इि सि​िसि​िे मे् कभी-कभी उनके दबंगपन के प्​्िंग भी जो अरिे िे हमारे होने की सनशासनयां.’

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होने की दनशादनयां

38 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016


पंकज सिंह की कसिताएं सम्​्ाज्​्ी आ रही है्

नागसरको उत्िव मनाओ सक िम्​्ाज्​्ी के दश्षन तुम्हे्करने है् भीतभाव िे प्​्णाम िंभािते हुए अपने दुखो्के कीचड्मे् र्ंधे गिे िे ही स्वागत गीत गाते हुए उत्िव मनाओ िम्​्ाज्​्ी का रथ तुम्हारी अंतस्डयो्िे गुज़्रेगा रथ गुज़्रेगा तुम्हारी आत्मा की कराह और शोक िे तुम्हारे िपनो्की हसरयासियां रौ्दता हुआ रथ गुज़्रेगा रंगीन िरनो्और पताकाओ्की ऊब-डूब मे् िंभिकर, अपनी मुद्षनी और आि्​्ामक मुद्ा को मीठी रहिीिी स्वागत भंसगमाओ्मे्सछपाते हुए स्वतंत्ता की इि दोगिी बहार मे् िुक जाओ भद्​्भाइयो िम्​्ाज्​्ी आ रही है् िम्​्ाज्​्ी तुम्हारी िामूसहक नी्द पर िुकी हुई् आवाज़्ो्के पुि िे धीरे-धीरे नीचे की ओर उतरती हुई् िम्​्ाज्​्ी तुम्हारी आंखो्को कृतज्​्ता और आभार के जि िे भरती हुई्आने वािी है् िड्को्के सकनारे बच्​्ेखड्ेहोने चासहएं, अधनंगे मुस्कराते बचपन के उदािीन खंडहरो्मे्पड्ेफटे हुए सचत्​्ो्िे हाथो्मे्फूि सिए बच्​्े... स्​्सयां तुम्हारी सखड्सकयो्िे िांकती, हाथ सहिाती खड्ी होनी चासहएं ॠतुओ्के कामनाहीन िूनेपन मे् ख्ुसशयो्की आहटे्अगोरती स्​्सयां... पेड्होने चासहएं तुम्हारी ठूंठ इच्छाओ्की तरह िन्नद्​्सवसवधवण्​्ी और हर तरफ्िसदयो्की मुद्षनी भरी ऊिर आंखे् सबछी होनी चासहएं आती-जाती हवाओ्के रेशे-रेशे मे् सक चौकन्ने िभािद हर कही्मौज़्ूद हो्गे सक चौकन्ने िभािद वायदो्और िपनो्की गुनगुनाहट मे् हर कही्मौज़्ूद हो्गे तुम्हारे तेवर खंगािते भसवष्य और उत्िव के फूिो्के आिपाि िम्​्ाज्​्ी आ रही है् इि औ्धे नगर मे्हुई हत्याओ्की िूचनाएं िभािद दे्गे उन्हे् सक ख्तरनाक बंदी मारे गये कारागार िांघते हुए सक कुछ अिभ्य िोग मारे गये कुिीन नागसरक आवािो्के आिपाि अपने अंधेरो्िे िंतुष्और शािीन अमात्यो्का सरश्ता ढूंढ्ते हुए और िस्​्जत भाव िे तुम िब सिर सहिाओगे सक तुमने व्यथ्षका िाहि ख्च्षसकया, व्यथ्षका मूख्षतापूण्षसवरोध सक राजकीय सहंिा की िारी घटनाएं जन्म-जन्मांतरो्के सनयम है् दुस्िाहसिक प्​्जाओ्के सिए... घोड्ो्, मनुष्यो्और शस्​्ास्​्ो्की भीरण चकाचौ्ध मे् तुम्हारी टांगो्की िगातार थरथराहट िम्​्ाज्​्ी को सदख न जाये ध्यान रखना, स्नायुओ्की सिहरन शांत रखना

िम्​्ाज्​्ी आने वािी है्तुम्हारे नगर को आगामी वर्​्ो्के सिए गम्षऔर िुखद स्मृसतयो्और आश्​्ािनो्िे भरने इि​िे पहिे सक रथ के घोड्ो्की पहिी टाप िुनाई दे और धूि के पहिे बादि िीमांत पर उठते हुए नगर की ओर आये् तुम एक पहचानहीन हिचि हो जाओ सजिका कोई भी उपयोग िम्​्ाज्​्ी के िैसनक और िभािद करे् तैरते है्ज़्हरीिे बादि तुम्हारी आकांक्ाओ्के आकाश मे् िभागारो्मे्उमड्ते आते है्िूठ के हज़्ारो्रंग िम्​्ाज्​्ी की प्​्जावत्ि​िता िे गदगद अपने ज़्ंग िगे चेहरे मांज आओ स्​्पय नगरवासियो िम्​्ाज्​्ी आ रही है्.

जिस जिन मै् घर से चला था

सजि सदन मै्घर िे चिा था िुबह-िुबह ओि िे भीगा एक घो्ि​िा ज़्मीन पर सगरा था प्िेटफ्ाम्षकी भीड्मे्सछि गयी थी मेरी मुस्कुराहट मै्ने कहने की कोसशश की थी-- 'सवदा' 'स्फिहाि...सवदा' मगर इिके पहिे सक वे शल्द तुम तक जाते या ख्ुद मेरे कानो्तक भी उन्हे्िपक कर उड्ा िे गयी धूि भरी हवा किाइयो्के मुहल्िे की तरफ् क्यो्सक बचपन के ताज़्ा ख्ून िे भरे शल्दो्की मांग िगातार बढ्रही थी उि शहर मे् धुएं िे भरी एक पुरानी िािटेन और कई िाि फटी रजाइयो्मे्सिपटी िस्दषयां और कई िाि खपरैि-छप्परो्की एक फीकी उदाि दुसनया और कई िाि शाम के आिमान मे्टंगी एक फूटी स्िेट और कई िाि सकश्तो्मे्रे्गती मौत और कई िाि िाि दर िाि पैबंद िगे िाि दर िाि खांिते िाि दर िाि िूखे पत्​्ो्भरे उतर आये थे सवदा मे्उठे ना मािूम सिहरन मे्सहिते उि हाथ के करीब जो तुम्हारा था सवदा मे्उठे उि हाथ के सिए थे वे कुछ शल्द उन्हे्उन हाथो्ने नही िुना और वे किाईख्ाने की ओर िे जाये गये आज तक घूमता है मेरी स्मृसत के कोटरो्मे् प्िेटफ्ाम्षकी भीड्मे्धुंधिा होता तुम्हारा थका सहिता हाथ जब नी्द िे जागते है्िाि दर िाि जब िाखो्िाि की दंतकथाएं वापि िौटती है्नी्द के प्​्सत िंिार मे् जब जीसवत होते है्तमाम पत्थर सकिो्, पाक्​्ो्, मंसदरो्और ड्​्ाइंग र्मो्मे्अतीत उगिते भटकता है वह हाथ तुम्हारा जो सवदा मे्उठा था और इसतहाि मे्सजिका कोई स्ज़ि्​्कभी नही्होना है.

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शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 39


मास्नृटत्यहेड

कथक को नये प्​्योगो्से समृद्करने वाले नृत्यकारो्मे् कुमुकदनी लाकखया का नाम अहम है. उनके संज्था द्​्ारा आयोकजत समारोह मे्यह भी कदखा कक उन्हो्ने ककतने योग्य कशष्यो्को तैयार ककया है. रिी्द् वमश्​्

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त्​्र भारत के िव्ाषसधक िोकस्​्पय और सवकसित कथक नृत्य का इसतहाि चारपांच िौ िाि का है. इि नृत्य की किाजयी यात्​्ा मे्कई रोमांसचत करने वािे पड्ाव भी है. पर आधुसनक कथक नृत्य किा अपने असभनव और प्​्योगशीि नृत्य िंरचनाओ् के सिए सजन किाकारो् की ऋ णी है, उनमे् एक बड्ा नाम सवदुरी कुमुसदनी िासखया का है. कुमुसदनी बेन ने अतीत की पुरकथाओ्को आधुसनक िंदभ्​्ो मे् प्​्स्ुत करने के िाथ िमकािीन काव्य रचनाओ् को भी अपनी नृत्य िंरचनाओ् मे् सपरोया. उन्हो्ने नये प्​्योगो् मे् उि िमग्​् िांस्कृसतक बोध को जर्री िमिा जो हमारे सनजी या िामासजक जीवन को अथ्षऔर गसरमा देता है. आज के गसतशीि जीवन और प्​्ोयोसजत िंस्कृसत के दबाव मे्िृजनशीि और रचनात्मक काय्ष िे परंपरागत किाओ् को सवकसित करना कसठन हो गया है. िेसकन तमाम अवरोधो् और सविंगसत पसरब्सथसतयो् मे् िसदयो्पुरानी कथक के धरोहर को िजगता िे िंरस्​्कत रखने उिके गौरव और मय्ाषदा को बनाये रखने के िाथ इि किा को िंपन्न परंपरा को अगिी पीढ्ी तक पहुंचाने मे् जो उल्िेखनीय योगदान कुमुसदनी िासखया का है. वह किा जगत के सिए बड्ी देन है. उन्हो्ने शायद नये प्य् ोगो्मे्उि िमग्​्िांसक ् सृ तक बोध को जर्री िमिा जो हमारे सनजी या िामासजक जीवन को अथ्षऔर गसरमा देता है. कुमदु जी ने कथक परंपरा को िमिने और परखने के सिए गहरा अध्ययन और शोध सकया. इिके आधार पर उन्हो्ने िासबत सकया सक कथक भारतीय परंपरा के अटूट का ठोि प्म् ाण है. कथक तो िंतुिन और िय पर सटका है. कथक के सटके रहने की एक वजह है सक उिने असतसरक्त शुद्ता पर जोर नही् सदया. उिने पसरवत्नष के सिए अपने को तैयार सकया. िेसकन ये पसरवत्नष इतने बड्ेनही्सक कथक की आत्मा ही खो जाये. िारे बदिावो्के बावजूद कथक, कथक ही बना रहा. अन्य नृतय् ो्की तरह कथक िगातार अपना पसरष्कार करता रहा. वह िोक 40 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

कथक से रचता शबरजू महाराज और कुमुशदनी लाशखया: उम़​़ के बािजूद

प्​्चिन के शास्​्बनाता रहा, उिका व्याकरण तैयार करता रहा और आवश्यकता पड्ने पर र्स्ढवादी परंपरा को तोड्कर आगे बढ्ने के सिए अपने को तैयार करता रहा. इिसिए कथक की शास्​्ीय परंपरा िोक और शास्​्के बीच आवाज का ही प्​्माण और पसरणाम दोनो् ही है. उि​िे यह प्​्तीत होता है सक सजिे हम भारतीय िंस्कृसत कहते है्. कथक उिकी सनरंतरता का महाराि है. कथक एक ऐिी िचीिी शैिी है जो िमय के बदिाव के िाथ अपने को बदिती रही. आधुसनक कथक मे् कोसरयोग्​्ाफी का सि​िसि​िा जोर-शोर िे शुर् हुआ है. इि क्​्ेत् मे् कुमुदनी िासखया के िृजनशीि काय्ष को देखा जा िकता है. उन्हो्ने एक नये अंदाज मे् नृत्य को िजाने-िंवराने के िाथ नृत्य िंरचनाओ्को एक नये पायदान पर खड्ा सकया है. उन्हो्ने कथक मे्वेशभूरा, मंच िज्​्ा और रंग सबरंगी प्​्काश छाया िे नृत्य प्​्स्ुसत का एक नया रंग सदया. इिसिए उनकी नृत्य िंरचनाओ् के िौ्दय्षबोध असधक है. आब्तमक धराति पर कथक को नया िंस्कार र्प देने के सिए उन्हो्ने 1965 मे् िांस्कृसतक िंस्था ‘कदंब’ की स्थापना

अमदाबाद मे् की. कदंब की पचाि िाि की यात्​्ा मे्प्य् ोगशीिता के धराति पर जो िाथ्क ष काय्षहुआ उि​िे कथक को नवोन्मरे समिा और नृत्य के प्​्सत चेतना व्यापक हुई. हाि ही कदंब की स्वण्ष जयंती पर स्वण्ष पव्ष के र्प मे् तीन सदन का एक भव्य िमारोह अमदाबाद के टैगोर िभागार मे् आयोसजत हुआ. यह देखकर आि्​्य्ष हुआ सक इि िमय देश–सवदेश के अनसगनत किाकारो् िे भरा कदंब एक ऐिे कुटुंब के र्प मे् उभरा है जहां गुर्ओ् और सशष्यो् का आत्मीय समिन बार-बार होता है. नृत्य जगत मे् वसरि्​् और प्​्सतस्​्ित नृत्यांगना के र्प मे्स्थासपत कुमुसदनी िासखया देश और सवदेश के मंचो् पर नृत्य और प्​्योगात्मक नृत्य िरंचनाओ्की प्स ् स्ुतयो्िे िगातार रसिको्की िराहना अस्जतष करती आ रही है.् उन्हे्प्​्ाप्त हुए राष्​्ीय और अंतरराष्​्ीय िम्मानो्की तासिका अपने मे्काफी है्. िेसकन कुमुदबेन की प्​्सतभा नृत्य के क्​्ेत् तक की िीसमत नही् है. उन्हो्ने भारतीय िासहत्य का गहन अध्ययन सकया. िारगस्भतष िेखन िे अपनी पहचान बनायी. नृतय् के क्​्ेत्मे्परंपरावादी होते हुए वे र्स्ढवादी नही् है्. कथक िे उनका गहरा िगाव था. उन्हो्ने कथक िखनऊ घराने की महान हस्​्सयां पंसडत


इततहास

अच्छन महाराज और पंसडत शंभू महाराज िे नृत्य िीखकर इि सवद्​्ा मे् अिग अपनी मौसिक जगह बनायी. चािीि-पचाि के दशक मे् उन्हो्ने िृजनशीि आधुसनक िरंचनाकार रामगोपाि के िाथ यादगार प्​्स्ुसतयां दी. शुर् मे् िंगीतकार अतुि देिाई के िाथ नृत्य िंरचनाओ् मे् जो एक नया प्​्याि कुमुदजी ने सकया वह बहुत कारगर िासबत हुआ. मंगिाचरण के र्प मे्िमारोह का शुभारंभ कदंब के छात्​्ो् के चैतन्य की प्​्स्ुसत िे हुआ. कुमसु दनी िसखया की नृतय् िरंचना पर आधासरत चैतन्य मे्नाद बृह्म का आवाह्न था. एकाकार िमूह नृत्य मे् नृत्य के आकार अंग िंचािन, हस्​् मुद्ाएं, पद िंचािन, वस्​् िज्​्ा आसद बहुत रोमांचक और दश्षनीय थी. कुमुसदनी िासखया के वसरि्​् सशष्य प्​्शांत शाह ने एक उत्कृष्नृत्यकार और िंरचनाकार के र्प मे् अपना नाम किा जगत मे् दज्ष करवाया है. इि िामारोह मे् उनकी नृत्य िंरचना ‘एंड वी जस्ट डांि’ एक नयी पसरकल्पना मे्िाकार हुई. देश को गौरव प्​्दान करने वािी किा सवधाओ्के प्​्सत आम आदमी सकतना उदािीन है उिका एक मम्षस्पश्​्ी िंकेत इि प्​्स्ुसत मे्था िही मायने मे्िंपन्न किाओ्

कदंब की कथक प़​़स़ुशत: िानदार परंपरा के कारण भारत की पहचान दुसनया भर मे् है िेसकन यह सवडंबना है सक देश की आजादी के बाद किा िंस्कृसत के प्​्सत जागर्कता िाने और चेतना जगाने मे् कोई िाथ्षक प्​्याि स्​्र नही् हुआ. उिी का अहिाि इि प्​्स्ुसत के जसरए करवाया गया. िंकल्पना मे्व्यब्कत नृत्य किाकार िे पूछता है सक तुम नृत्य के अिावा दूिरा काम क्या करते हो सजि​िे तुम्हारे जीवन का सनव्ाषह होता है. व्यब्कत का यह िवाि दश्ातष ा है सक उिमे्किा की गसरमा को िमिने और पहचानने के प्​्सत सकतना अछूतापन है. कथक नृत्य शैिी मे्प्​्स्ुसत को जीवंतता प्​्दान करने मे् प्​्शांत और उनके तीन िहयोगी किाकारो् ने एकि और िमूह नृत्य मे् इि प्ि ् गं को बड्ी िंवदे नशीिता िे दश्ायष ा. प्स ् स्ुत मे् कथक के प्​्कार, व्यात्मक गसतयां, पैरो् का काम आसद बहुत आकर्षक था. प्​्स्ुसत को रिपूण्षता िे गसरमा प्​्दान करने मे् सव्ि्म घोर की िंगीत रचना प्​्भावी थी. नृत्य मे् प्​्शांत क िाथ रोसहत पसरहार, शौसवक चि्​्वत्​्ी, मुकेश गंगानी और किरव दवे ने प्​्दश्षन मे् अपने कौशि का भरपूर पसरचय सदया. िंदन मे् बिे कुमुदबेन के सशष्य करन पांगिी और िंयुक्ता सिन्हा के युगि नृत्य मे् एक िुंदर ियात्मक गसत सदखी. िाि 1978 मे् अतुि देिाई की िंगीत रचना इिकी िंरचना कुमुद जी ने की थी. व्याकरणबद्​् नृत्य के सवसवध प्​्कार उठान थाट, तोड्े टुकड्े गत िे िेकर ियकारी मे्यह प्​्स्ुसत एक नये रंग र्प

मे् िामने आयी. अभूत्ष र्प िे नत्षक के चारो् ओर एक बड्े आकार मे् घूमती नत्षकी की पसरकल्पना उन्मुक्ता िे िाकार हुई. कुमसु दनी जी की सशष्याओ्मे्आसदसत मंगि दाि ने िजृनशीि िंरचनाओ्मे्िाथ्षक प्​्योग करने का िराहनीय प्​्याि सकया है.उिकी एक मनोहर ि​िक उनके नृत्य िंरचना ‘अनचेटंड िी’ की प्​्स्ुसत मे् सदखी. िंरचनाकार की कल्पना मे्िीसमत क्​्ेत्को एक िीमा तक देख िकते है्िेसकन वह क्​्ेत्जो अनंत और अपूव्ष है शायद वही ईश्​्र, ित्य, िौ्दय्ष, प्​्ेम को पसरिस्​्कत करता है. इि प्स ् स्ुत का िार भी यही है सजिे िमूह और असदसत के एकि नृत्य के जसरये सदया गया. शुभा मुदगि और िंगीत रचना पर आधासरत इिे कथक शैिी मे् अमूत्षिय की गसत, और स्पेि मे् एक िूि िे दश्ाषया गया. असदसत ने परंपरागत कथक मे् तोड्-टुकड्े बोिचंद आसद की प्​्स्ुसत मे् नृत्य और भाव िंजसदगी िे उभारा. कदंब की गुर् वैशािी स्​्तवेदी की नृत्य िरंचना ‘हाफ िस्ककि’ एक नये रंग र्प मे् िामने आयी. उनके आठ सशष्य किाकारो् ने भाव भरे कथक नृत्य के चिन, कई र्पो् नृत्य िे उपजते सबंब, एक जड् िे उठते कथक की यात्​्ा, उिकी तकनीक, नृत्य की चािो की उपज िृजनशीिता आसद को भावनात्मक स्​्र पर दश्ाषने मे्यह प्​्स्ुसत बहुत आकर्षणपूण्षदी. बंगिूर् के नृत्य किाकार सनर्पमा और राजेद् ्ने कुमदु नी बेन की नृतय् िंरचना मुष्ी की प्​्स्ुसत प्​्भावी दी. नत्षक-नत्षकी के दो अिग सदशाओ् मे् शब्कत का आवाह्न नृत्य मे् किात्मकता िे प्​्दस्शषत हुआ. काय्षि्म का िमापन कथक के सशखर पुर्र पंसडत सबरजू महाराज के नृतय् िे हुआ. वैिे तो कथक के क्त्े ् मे्कई बड्ी हस्​्सयां हुई सजन्हो्ने अपने कौशि िे इि नृत्य शैिी का नया र्प रंग और सवस्​्ार देने मे् बड्ा योगदान सदया. पर पंसडत सबरजू महाराज कथक मे् एक ऐिी हस्​्ी है् सजन्हो्ने अपने गहरे सचतंन और कल्पना िे नृत्य मे्सबंब और मुहावरे सदये. महाराज जी के पचहत्​्र बिंत उनकी उपिब्लधयो् िे भरे है्. एक नये धराति पर नृत्य को सवस्​्ार देने मे्उन्हो्ने जो िाथ्षक प्​्योग सकये उि​िे कथक की धारा को एक नया प्​्वाह समिा. इि बार भी उनकी रची सगनती की सतहाइयां टुकड्े, गते, परण और ठुमरी पर असभनय भाव चुबंकीय था. िमारोह मे् पार्ि शाह की नृत्य िंरचना ‘आि दैट इन सबटवीन’ उज्ाष देिाई ठकोर का ‘सवद इन’ मे् मस्​्सष्क और ह्दय के बीच द्​्ंद् की पसरकल्पना परंपरागत कथक मे् एक नयी n िूि मे्िाकार हुई. (िेखक जाने-माने िंगीत और नृत्य िमीक्​्क है्.)

शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 41


मास् अस्सटमता हेड िव्तिका नंदा

किताबों िे मेले साल की शुरआ ् त का पहला महीना ककताबो्के नाम रहेगा. कवश्​्पुसक ् मेला भी इकतालीस साल के अपने इकतहास मे्िरवरी से कखसक कर इस साल से जनवरी मे्आ गया है.

सद

न, घंटे और िेके्ड की सगनती बताती सदल्िी के सवश्​्पुस्क मेिे की िाइट अपने तारीख के नजदीक आने का पैगाम दे रही है. ठीक यही, जयपुर सिटरेचर फेब्सटवि की िाइट भी कर रही है. इन िाइटो्पर िगी घड्ी की भागती िुइयां सकिी बड्े उत्िव के आमद की घोरणा कर रही है.् सकताबो्और िासहत्य के मेिे के ऐिे सवश्व् य् ापी इंतजार िे भारतीय पाठक कुछ िाि पहिे तक वासकफ नही्था. िाि की शुरआ ् त का पहिा महीना सकताबो् के नाम रहेगा. सदल्िी पुस्क मेिा भी 41 िाि के अपने इसतहाि मे्फरवरी िे सखिक कर इि िाि िे जनवरी मे्आ गया है तासक दुसनया भर िे आने वािे पाठक दोनो् मेिो्को एक ही दौरे मे्देख िके्. न सदल्िी छूटे और न जयपुर. यानी सकताबे्खबर मे्है्. सकताबे्खबर बन रही है्. पर यह बात पूरी तरह िे िही नही्है. सकताबो्िे ज्यादा खबर मे्है्, िेखक. िभी भाराओ् के िेखको्को इन मेिो्ने एक बड्ी सकटी पाट्​्ी का कैनवाि जैिा दे सदया है. ऐिा नही्है सक िभी मेिो्मे्बुिाये जा रहे िभी िेखक वाकई अव्वि दज्​्ेके है्. कुछ का स्​्र शायद वाकई अंतरराष्​्ीय न हो िेसकन वे भी पूरे तामिाम के िाथ मेिे मे्सदख िकते है्और सदखे्गे. एक अनुमान िे देश मे् हर िाि करीब 60 सिटरेचर फेब्सटवि आयोसजत सकये जा रहे है्. यह एक बड्ी िंख्या है. िेसकन इि िंख्या ने सकताबो्की सबि्​्ी भी बढ्ाई हो, ऐिा नही्है. हां, यह जर्र है सक इन मेिो् ने आसखरी पेज पर सिमट आयी सकताबो् को पेज थ्​्ी का आइटम जर्र बना सदया है. हर बड्े फेब्सटवि के सिए फेहसरस्​् तीन महीने पहिे पूरी कर दी जाती है. िेखको् के प्​्ोफाइि शादी डॉट कॉम िे भी कही् ज्यादा हॉट तरीके िे परोिे जाते है्. इन मेिो्के सहिाब िे ही कई बार िेखको्की िोकस्​्पयता का अंदाजा िगाने का टेढ्ा तराजू िगा सदया जाता है. सकताबो् के इन मेिो् के बहाने सकताबो् पर भी बात हो जाती है और बदिते तौर-तरीको् पर भी िेसकन ऐिा नही् है सक इनकी वजह िे प्​्काशको् और िेखको् के आपिी िंबंधो् मे् कोई असतसरक्त समठाि आ

42 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

गयी हो. िेखक, खाि तौर िे सहंदी का िेखक, आज भी खुद को उतना ही ठगा महिूि करता है सजतना पहिे करता था. रॉयल्टी या तो आती नही् या सफर कभी ईमानदारी िे िही समिती नही्. प्​्काशक के पाि िेखक के सिए िमय नही्. िेखक के पाि प्​्काशक को िेकर भरोिा नही्. िेखक के भरोिे दुकान चिाने वािे प्क ् ाशक को िेखक आज भी सिफ्कएक अदद जर्रतमंद टाइप का जंतु ही सदखता है. हां, उिके कंधे का थैिा जर्र कुछ िरक गया है. िेखक अब िमय िे िीधे िंवाद करने िगा है और िोशि मीसडया के फिक ने उिके सिए आिमान भर की िूचनाएं खोि दी है्. इन मेिो् ने कई नये प्​्काशको् की खाप तैयार कर दी है. ये नये प्​्काशक बरिो्िे प्​्काशन कर रहे मासिको्के दीमक िगते व्यविाय िे कुछ िबक बटोर कर आगे सनकि जाने की होड् मे् है्. बि, कुछ िािो् की देर भर है. कुछ ही िमय मे्कई िेखक खुद प्​्काशक बनने िगे्, तो हैरानी न होगी. इन मेिो् मे् दरअि​ि जो सदखता है और जो छपता है, उि​िे कही् ज्यादा घसटत होता है. इन मेिो्ने पाठक को िेखक के एकदम करीब िा सदया है. वे दोनो्समि कर बाजार को नये सिरे िे पसरभासरत करने िगे है् और गैर-जर्री बातो्को खासरज. पाठक सकताबो्को थैिे मे्भरकर भिे ही न खरीदे िेसकन ऑनिाइन बाजार ने उिे इतना िक्​्म तो बना ही सदया है सक मज्​्ी मुतासबक सकताबो्को घर के आंगन मे्मंगवा िे. िाि की शुर्आत सकताबो् िे होना भिा है. अक्​्र िूम रहे है्. िेखक अपनी अब्समता के िवािो् िे भिे ही अब भी जूि रहा हो िेसकन अब सवकल्पो् की कोई कमी नही्. दुसनयाभर के प्​्काशक जब भारत मे् आकर जमा होते है् तो वे अपने अनुभवो् की पोटिी को भी यहां रख जाते है्. भारतीय िेखक अब अपने माद्​्े को पहचानने िगा है. मेिो् के बहाने उठ आये सवकल्पो् की यह भरमार पुराने प्​्काशको् के सिए खतरनाक हो िकती है, पाठक के सिए उत्िाहवध्षक और िेखक के सिए आजादी का उत्िव. n


बतकही िंिल

पैसा फे्िो तमाशा देखो

यह सरकार ही नाबाकलगो्की फ़ौज लगती है. कजसने तोप का मुंह अपनी तरि कर रखा है और कह रहे है्कक दुश्मनो्को सिा करके ही दम ले्गे.

इ

भाई सबहार तो कमाि की जगह है, पता नही् यहां के पानी मे् का सिफत है सक जहां भी हाथ डािेगा, कुछ न कुछ डैमेज करके ही छोडेगा. ...कीन अभी शुर्ही हुए थे सक उमर दरजी ने टोक सदया - क्या डैमज े हुआ, उपाध्याय जी? कीन पिटे, मन ही मन बुदबुदाये. कीन जानते है्सक, उमर जब भी बेवजह असतसरक्त इज्​्त देता है, तो इिका मतिब उिमे्कुछ बदमाशी जर्र है. ऐिे मे्जब िे कीन परधानी हारे है्, उमर चोट करने िे बाज नही् आता. सजि सदन नतीजा घोसरत हुआ, िब को मािूम हो गया सक कौन जीता है, कौन हारा है? िेसकन दूिरे सदन िुबह िाि​िाहेब की दूकान पर जहां परधानी के िारे उम्मीदवार एक जगह एक िाथ बैठे समिे. वहां भी उमर दरजी का मुह्षप्पन कम नही् हुआ. नतीजा जानते हुए सक कीन उपाध्याय चुनाव हार गये है्, उमर ने तपाक िे कीन को गिे िगाया और काफी देर तक सचपका खडा रहा - गुर्बधाई! हम मािा फूि िाना भूि ही गये, इि नतीजे ने तो पूरे गांव को बचा सिया... वरना कोइ ताकत नही्सक इि गांव को डूबने िे कोइ रोक पाता.... बहुत अच्छा हुआ .. जो होता है ,अच्छा ही होता है. शपथ कब होगा भाई उपाध्याय जी? कीन को मानो करंट िगा. वह िमि गये सक उमर कहां चोट कर रहा है. तुरंत अपने को अिग सकये, गमछे िे मुंह पोछे, और िो्गो् के मुस्कुराते चेहरे को देखे और चुपचाप बैठ गये. ये कहते हुए सक - हम िब जानते है् उमर, वो नही् है्. िाि िाहेब ने चुटकी काटा . ये सकिने कहा सक आप नही्है?् आप ओ न होते तो चुनाव कैिे िडते. ई का हो रहा बा भाई! इहां कीन हार गये, सडल्िी मे्हारे, सबहार ने पतिी गिी िे सनकि जाने का रास्​्ा सदखा ही सदया. िुना है गुजरात मे् िोकि बाडी के चुनाव मे् भी मुंह के बि पटखनी खा चुके है्, यह हाि है गुजरात मॅाडि का? अब िुना है कोइ कीस्तष आजाद है्, उन्हो्ने बता सदया सक सडल्िी स्​्िकेट बोड्ष मे् बहुत िंबा घपिा हुआ है. कई िौ करोड डकारे गये है्? सभखई मास्टर जो अबतक अखबार देख रहे थे, उिे िामने वािे को देते हुए बोिे - आज अखबार मे्है उन्हे् पाट्​्ी िे सनष्कासरत कर सदया गया है. सनकाि सदया? िखन कहार ने खैनी मिते हुए, मुस्कुराये - का का बताये भाई? बहुत कुछ बताये, अब बारी मद्​् पत्​्कार की थी. ठेका सदया गया , सनम्ाषण काय्ष का. सजतने मे् सदया गया उि​िे दुगना बढा सदया गया, खरीद फरोख्त मे् घपिा और तो और

बीि हजार मे् समिने वािे कंप्यूटर को िोिह हजार र्पये प्​्सतसदन के सहिाब िे सकराये पर सिया गया. इिी को कीस्तष आजाद ने िबके िामने बोि सदया. तो इिके सिए पाट्​्ी क्यो् बौखिा गयी? उन्हो्ने ये तो कहा नही् सक पाट्​्ी ने चोरी की है, तो पाट्​्ी िे क्यो् सनकािा? कोिाई डूबे का वासजब िवाि रहा. सचखुरी मुस्कुराये. हुआ यूं है सक सजि िमय ये घपिे हुए उिके िव्​्ेिव्ाष अपने अर्ण जेटिी रहे, चोट िीधे अर्ण जेटिी को िगी. अर्ण जेटिी के पाि कोइ जवाब तो रहा नही्, चुनांचे एक ही रास्​्ा बचा रहा सक उन्हे् पाट्​्ी िे सनकाि सदया जाये. उमर दरजी मुस्कुराये. तो एक सवकेट और सगरा? अभी देखते जाओ सकतने और छटकेगे्. ये िरकार ही नाबासिगो्की फौज िगती है. सजिने तोप का मुंह अपनी तरफ कर रखा है और कह रहे है्. दुश्मनो्को िफा करके ही दम िे्गे. कीन िे नही् रहा गया, अपनी हार भूि गये, िगे अपने िरकार की तरफ िे बोिने - यह िब कांग्ेि का खेि है. आप कीस्तष आजाद को नही् जानते? िेसकन उमर िे नही्रहा गया - कीन! ऐिा बोि रहे हो जैिे कीत्​्ी आजाद नही्भये, िनिाइट िाबुन हो गये है? मजाक नही्, िुनो जो बोि रहा हूं, कीस्तष आजाद कांग्ेि के रहे भागवत आजाद उनके िडके है्, वह खून का अिर तो जायेगा नही् और सफर सबहारी. कोिाई डूबे ने टोका - इिमे् सबहारी का मतिब? कीन िंजीदा हो गये. सबहार ने कम सकया है, देश दुसनया मे् भाजपा की ऐिी की तैिी करके रख दी. पहिे यशवंत सिन्हा सफर शत्​्ुघ्न सिन्हा, अब कीस्तष आजाद. एक एक करके िब पैतरा बदि रहे है्. यह िब कांग्ेि के इशारे पर हो रहा है. सचखुरी जोर का ठहाका िगाये. िुन कीन ये िही है ये तीनो ही िंघी नही् है्. मूितः ये सदि और सदमाग िे बडे िोग है्. िंघ की मजबूरी थी सक िमाज मे् चेहरा सदखाने के सिए कुछ ऐिे चमकदार और िमिदार िोगो्को भाजपा मे्िाया जाय. यशवंत सिन्हा चंद्शेखर के िाथी है्. शत्​्ुघ्न, जेपी िे प्​्भासवत रहे है्, कीस्तष आजाद का िुन ही रहे हो. तुम्हारे पाि जो अपने िोग है्. उनके बारे मे् मुंह मत खुिवाओ. कोइ सकिी िे कम नही्. इत्​्ेमे् नवि उपाध्याय नयी खबर िेकर नमूदार हुए. कुछ िुना पंचो! देश के खनन मंत्ी ने क्या खोदा? एक गाडी होती है फाच्षूनर. बीि िाख के ऊपर की है. वह खरीदी गयी थी उडीिा के जंगिो्को देखने के सिए, उिे मंत्ी जी िेकर घूम रहे है्सदल्िी मे्गोिमाि .. गोिमाि है िब गोिमाि है ... n र्के नही्, गाते हुए आगे बढ गये .... शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 43


मास् यायावरी ट हेड

जंगल को बांटती एक नदी

भारत-नेपाल सीमा पर कतक्नषया घाट अभयारण्य को गेर्आ नदी कवभाकजत करती है जो आगे चलकर सरयू और घाघरा की धाराओ्मे्बदल जाती है. यह घक्डयालो्का प्​्ाकृकतक आवास भी है. अंबरीश कुमार

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पेड़ पर कमरा: गेऱआ नदी के तट पर 44 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

मेर ने अचानक नदी के हरे और पारदश्​्ी पानी मे्एक िोटा डािा और भरकर पीने िगा. हम उिे हैरानी िे देख रहे थे. पानी पीने के बाद उिने एक िंबी िांि िी और हमे्अपनी तरफ घूरता पाया. सफर खुद ही बोिा, िाहब यह गेर्आ नदी का पानी है जो पेट के सिए बहुत फायदेमंद है. हम एक बंद मोटर बोट पर िवार थे जो हमे् िामने के जंगि के बीच बैक वाटर की तरफ िे जा रही थी. अचानक सकनारे आराम करता एक मगरमच्छ सदख गया तो मोटर बोट उिके कुछ पाि तक िे जायी गयी तासक हम उिके दश्षन कर िके्. हािांसक इि​िे पहिे इि नदी के बीच कई टापू ऐिे समिे थे सजिपर बडी िंख्या मे् घसडयाि आराम कर रहे थे. वर्ष 20 15 का यह अंसतम हफ्ता था सजिमे कडाके की ठंड पड रही थी. हम कतस्नषयाघाट वन्य जीव अभ्यारण्य के बीच िे गुजरने वािी गेर्आ नदी मे् जंगिात सवभाग के एक मोटर बोट पर िवार थे. गेर्आ नदी सजिे िरकारी सहंदी मे्सगरवा सिखा जाता है उिका पानी हरा और पारदश्​्ी नजर आ रहा था. यह पहिी नदी देखी सजिका पानी कोई िीधे पी रहा था. नेपाि िे आने वािी यही नदी आगे बढ कर कौसडयािा नदी िे समिकर दो प्म् ख ु नसदयो् को जन्म देती है. इि जंगि िे ही दो धारा बंट जाती है सजिमे्एक िरयू कहिाती है तो दूिरी घाघरा. िरयू को तो अपने गांव मे् बचपन िे देखता रहा हूं जो हर िाि सकिी एक तरफ की जमीन डूबोती है तो दूिरी तरफ ऊपजाऊ जमीन तैयार कर देती है. हम जा रहे थे बे्त के जंगि के बीच जहां िुख्ाषब िे िेकर कई पसरंदे मंडरा रहे थे. नदी के िामने भी जंगि तो नदी के पीछे भी जंगि. इि जंगि को यह गेर्आ नदी बांट देती है. पर जानवरो् को नही् बांट पाती. जंगिी हासथयो् का िुंड भी तैरकर उिपार िे इि पार आ जाता है तो बाघ भी तैर कर इिे पार करते रहते है. घसडयाि और मगरमच्छ तो दोनो् सकनारो्को जोडते ही रहते है्. इि नदी पर कोई पुि नही्है इिसिए गांव के िोग नाव और मोटर बोट िे इिे पार करते है. पीपे वािा पुि भी बीच


सभ़ाी फोटो: अंबरीि कुमार बीच मे्िगाया जाता है. पर बरिात िे पहिे ही वह नाकाम हो जाता है. यह भारत नेपाि िीमा का वह इिाका है जहां दोनो् देशो् के नागसरक और जानवर बेरोक टोक आते जाते है्. नदी पार कुछ दूर तक भारत की िीमा है तो उिके बाद नेपाि का बस्दषया सजिा िग जाता है. यह नेपाि िे आने वािे जंगिी हासथयो्और गैड ् ो्का जंगि का प्​्ाकृसतक गसियारा भी है जो आगे दुधवा तक चिा जाता है. िाथ चि रहे जंगिात सवभाग के

गाड्ष ने बताया सक जंगिी हासथयो् का िुंड उि पार ज्यादा रहता है. बीच-बीच मे् वह एक दो सदन के सिए इधर आता है पर सफर उत्पात मचाकर िौट जाता है. यह देश के उन जंगिो्मे् िे एक है जहां बीते तीन चार िाि मे् बाघ की िंख्या करीब दोगुनी हो गयी है. इन्ही बाघो्मे्िे करीब दज्षन भर बाघो्ने दूिरे सकनारे को अपना सठकाना बना रखा है सजि तरफ हम जा रहे थे. बे्त के हरे भरे जंगि बहुत खूबिूरत िग रहे थे. सैलाशनयो़ के शलए बने काॅटेज: घर से दूर घर

कतश़नतयाघाट अभ़ायारण़य : बे़त के जंगल मे़ जाती नदी अचानक कुछ जि मुगा्बष ी सदखी जो डुबकी िगा रही थी. सकनारे पर जब एक मगरमच्छ सदखाया तो िगा कोई िकडी का टुकडा पडा है, जो ध्यान िे देखने पर मगरमच्छ मे् बदिा. ये सकनारे पर सशकार की तिाश मे् पडे रहते है खािकर सहरण और जंगिी िूअर के इंतजार मे् जो इधर पानी के सिए आते है. जबसक नदी के बीच कई टापुओ् पर पडे घसडयाि मछिी के भरोिे रहते है. मोटर बोट का ड्​्ाइवर जंगिात सवभाग का बहुत पुराना कम्षचारी था सजिने बताया सक ित्​्र के दशक के अंसतम दौर मे् घसडयाि के करीब अस्िी अंडे जंगिात सवभाग के एक रे्जर के नेतृत्व मे् गयी टीम नेपाि की तरफ िे एक बक्िे मे्िे आयी थी. उि टीम मे् यह ड्​्ाइवर भी था. आज इि नदी मे्िैकडो्की

नदी पार कुछ दूर तक भारत की सीमा है. षिर नेपाल का बष्दिया षिला लग िाता है. यह नेपाल से आने वाले िंगली हाषियो् का प्​्ाकृषतक गषलयारा है. िंख्या मे् जो घसडयाि है वह उन्ही अंडो् के वंशज है. इि नदी का पानी इतना िाफ है सक आिपाि गांव के िोग इिे िीधे पीते है. यही्पर िुख्ाषब के िुंड भी नजर आते है तो डाब्लफन भी. अन्य पसरंदे तो है ही. िाफ है सक यह अभी एक शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 45


मास् यायावरी ट हेड

सजंदा नदी है. इिमे्मछिी मारने पर प्​्सतबंध भी है. कही कोई नािा इि नदी मे्नही्सगरता और न ही सकिी तरह का कचरा बहाया जाता है. जंगि के बीच बहती यह नदी आज भी जीवन देती है. नीचे मे्देखने पर जमीन तक सदख जाती है और मछसियां भी. करीब घंटे भर मे् कई जिचर और नभचर यहां सदख गये. िुबह जब जंगि के पाि बने असतसथ गृह िे चिे तो नहर के सकनारे भारी धुंध के चिते एक नही्कई बार रास्​्ा भटक गये. अचानक एक िकडबग्घा सदखा जो कैमरा देखते ही गाड्ी के पीछे छुप गया. पर तब तक एक फोटो िे िी थी. जंगि मे्दूिरे सदन की शुर्आत धुंध िे हुई. पहिे सदन खुिी धूप के चिते बहुत कुछ देख सिया गया था. तब सदन मे्भी कई जानवर सदखे तो शाम के अंधेरे मे् िडक पार करते जंगिी मुग्े िगता था सक गाडी के नीचे न आ जाये्. औरय्या ताि पर पनडुल्बी

जि मुग्ाषबी िमेत कई तरह के पसरंदे नजर आये तो आगे बढने पर सहरण के िुंड और बया के घोि​िे देखने वािे थे. कतस्नषयाघाट वन्य जीव अभ्यारण्य अब बहुत बदि गया है. उत्​्र प्​्देश मे् पय्षटन को िेकर कई बडी और नयी पहि हुई है. इि जंगि मे् भी सजिे पय्ाषवरण के सिहाज िे एक अच्छे िैरगाह के र्प मे् सवकसित कर सदया गया है. इि तरह की व्यवस्था पहिे राजस्थान और गुजरात मे् सदखती थी. आप वेबिाइट पर जाकर जंगि मे् घूमने का पैकेज िे िकते है. जबसक पहिे यह जगह सिफ्क नेताओ् अफिरो् आसद के सिए थी जो जंगिात सवभाग के डाक बंगिे मे्अपने रहने और खानपान की व्यवस्था कर िेते थे. अब आम िोगो् के सिए भी यह उपिल्ध है. उत्​्र प्​्देश िरकार ने बहुत कुछ बदि सदया है. गेरआ ् नदी के सकनारे पेड पर बना

गेऱआ नदी मे़ घशडयाल: प़​़ाकृशतक आिास काटेज अद्​्त है सजिपर र्क कर आप जंगिी जानवरो् को आिानी िे देख िकते है. इि प्​्कार के ट्​्ी हट आंध प्​्देश िे िेकर सहमाचि और मध्य प्​्देश के कुछ जगहो् पर नजर आते है. अब इि जंगि के शुर् मे् ही ककरहा रे्ज मे् िैिासनयो् के सिए अच्छी व्यवस्था की गयी है. इिी िे करीब बारह सकिोमीटर दूर जंगि मे् सनशानगाडा का वह मशहूर सशकारगाह है सजिे मुगि दौर मे् बनाया गया. इि सशकारगाह मे्र्कना भी अद्​्त अनुभव देने वािा है. यह बाघ का इिाका है सजिे िेकर चौकीदार ने पहिे ही आगाह कर सदया था. दो मंसजिा इि भवन मे् हम उपरी मंसजि पर र्के और रात मे्कई बार जानवरो्की आवाज िुनाई पडी. िुबह करीब चार बजे िे तरह तरह के पसरंदो् की आवाज ने िोने नही् सदया. यह वाकई जंगि है. n

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www.shukrawaar.com 46 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016


खानपान मास् ट हेड अर्ण कुमार ‘पानीबाबा’ िेखक िंस्कार िे राजनीितक व्यब्कत और पानी,भोजन और पोराहार के िवशेरज्​्है्. हिवाई होने का दावा भी करते है्. e-mail.: akpanibaba@gmail.com

िर्​्ी मे् स्िासरष्​् और िुखर

देश भर मे्कम से कम सौ ककज्म के पराठो्का चलन तो अवश्य सूचीबद्​्ककया जा सकता है.

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घ और पौर (िगभग सदिंबर जनवरी) की ठंड मे्शाम के भोजन मे्कुछ न कुछ तिा भोजन असनवाय्षबताया गया है. ऐिा माना जाता है सक तिा खाने िे पानी पीने की इच्छा जागृत हो जाती है. पसरणामस्वर्प थोड्ा पानी पीना असनवाय्षजैिा हो जाता है. हमारी ि​िाह है: तिा खाये्न खाये्यह तो सनज र्सच िे सनण्षय करे्, सकंतु पानी पीने मे्कोताही न करे्. पानी को उपयोग िे पहिे शीत सतबाया कर िे्गे तो इि मौिम मे् पानी पीने मे्अच्छा िगेगा और िेहत के सिए उपयोगी सिद्​्होगा. उत्​्र भारत मे् िे पंजाब को अिग अंचि मान िे् तो शेर इिाके (पस्​्िमी उत्​्र प्​्देश, राजस्थान बुंदेिखंड वगैरा) मे् शाम के भोजन मे् पराठा खाने की परंपरा रही है. राजस्थान के कुछ इिाको्मे्इि पराठे को सटकड्ा भी कहा जाता है. ऐिा सटकड्ा मोठ या चने का आटा समिा कर बनाया जाता है. हाि मे्गुजरे वक्तो्तक सदल्िी शहरी िमाज के पसरवारो्मे्शाम के भोजन मे्पांच छह सकस्म के पराठे िगभग असनवाय्षजैिे ही हुआ करते थे. गेहूं के िादे और गेहू, चना के समस्िे या बेिड्(गेहूं+जौ्+चना) के पराठे तो िाि भर सनयसमत र्प िे खाये जाते थे बाकी िमय मौिम के अनुिार जैिे िस्दषयो् मे् मक्​्ा, बाजरी के पराठे और मेथी. बथवे के शाक युक्त पराठो का चिन था. कुि समिाकर सहिाब िगाये्तो देश भर मे्कम िे कम िौ सकस्म के पराठो् का चिन तो अवश्य िूचीबद्​् सकया जा िकता है. अपनी अनेक महत्वांक्ाओ्मे्एक इच्छा यह हुआ करती थी सक िमाजवादी आंदोिन के सवत्​्ीय िहयोग के सिए किकत्​्ा, बंबई जैिे बड्ेशहरो्मे् पराठा-शतक नाम की दुकाने्या ढाबे खुिवा दे्गे. हम इि कल्पना को िाकार करते उिके पहिे ही िमाजवादी आंदोिन न जाने कब गंगा की बाढ्मे्बह गया. दो एक बरि पुरानी बात है सदल्िी की जामा मब्सजद की तरफ जाना हुआ था. वहां देखा की सदल्िी के बावच्​्ी अंडे का भरवां पराठा बनाने की सवसध ही भूि गये है. जहां तक हमे् याद है, 1960 के दशक तक दरीबे्िे सचत्​्िी कब्​्तक आठ दि बावच्​्ी तो अवश्य सदखाई देते थे जो दुहरी तह के पराठे का मुंह सचमटे और चाकू की मदद िे खोि कर अंडेप्याज, हसर समच्ष का घोि पराठे मे् भर देते और खस्​्ा पराठा िे्का करते थे. िब प्​्कृसत की माया है अब तो न कद्​्दान बचे है और न ही बनाने वािे. सजि िंि्ासत िे गुजर रहे है् उिमे् कहना मुब्शकि है सक िेहत और स्वाद के पुराने सरश्तो्का क्या होगा. आज, ऋतुचय्ाष के अनुर्प एक नुस्खा पौर के मंगोड्ो का सिख रहे है्. िंभव हो जाये तो अवश्य प्​्योग करे्. इि तथ्य को परखने का प्य् ाि भी करे्सक मंगोड्ो के प्य् ोग िे प्याि प्ख ् र होती है या नही्, और पानी के बढ्े हुए उपयोग िे िेहत पर क्या प्​्भाव पड्ता है? हमे्आपकी प्​्सतस्​्िया का इंतजार रहेगा. एक वायदा यह भी है सक यसद िौ पाठक आश्​्स्कर दे्गे सक वह ‘पराठा शतक’ नाम की पुस्क खरीद

कर पढ्े्गे तो हम एक ऐिा गुटका अवश्य प्​्कासशत करवा दे्गे. पौर मंगोड्ो् का नुस्खा: मंगोड्ा नाम िे इतना तो स्पष्​् ही है सक इि सवसशष्​् पकौड्ी मे् प्​्मुख दाि मूंग की होनी चासहए. मूंग के असतसरक्त थोड्ी-थोड्ी दाि मोठ, मिूर, अरहर, उड्द समिा कर सभगोनी चासहए. आधुसनक भोजन सवज्​्ान की मान्यता है सक समस्​्शत दािो् के रिायन िे प्​्ोटीन की गुणवत्​्ा और पाचकता मे्कई गुना की वृस्द हो जाती है. दाि सभगोते िमय उिमे्थोड्ेिे दाने मेथी के अवश्य सभगो दे्यासन कुि दाि की मात्​्ा एक िामान्य कटोरी है तो ऐिा िमिे्सक चौथाई चाय की चम्मच मेथी पय्ाषप्त होगी. दाि करीब एक घंटा भीगानी चासहए, न उि​िे ज्यादा, न कम. सजतना सछिका िहज भाव िे उतर जाये उतना उतार दे्बाकी रहने दे्. चाहे समक्िी मे्पीिे और चाहे पत्थर की कुंडी या सि​ि पर सपट्​्ी बहुत गाढ्ी रखे्. बेशक सबल्कुि महीन बनाना आवश्यक नही्है. सपठ्​्ी बनाते िमय ही उिमे्थोड्ा अदरक (या िौ्ठ) और थोड्ी बीज िड्ी हरी समच्षका प्​्योग अवश्य करे्. इि सपठ्​्ी को थािी या परात मे् अच्छी तरह फै्ट िे्. मोटे बेिन के उपयोग िे थोड्ा िख्त कर िे.् थोड्ी मात्​्ा मे्उबिा आिू हसर बारीक कटी मेथी (िूखी मेथी का उपयोग भी कर िकते है्) समश्​्ण सजतना कम गीिा होगा मंगोड्ेउतने ही करारे कुरकुरे बनेग् .े जहां तक िंभव हो सति का ताजा तेि ही उपयोग मे्िे.् सदवािी िे होिी तक सति और सति के तेि ही प्य् ोग करे्, असद सति का तेि उपिल्ध ही न हो तो थोड्ा पुराना िरिो्का तेि खा िकते है्. मंगोड्ो आसद पर ऊपर िे सछड्कने के सिए मिािा बनाने की सवसध भी नोट कर िे्. तवे पर थोड्ी िी मात्​्ा मे् िाबूत धसनया भूने, उिकी खुशबू उठने िगे तो उिमे् जीरा समिा दे्. थोड्ी कािी समच्ष, छोटी-बड्ी पीपि, एकाध टुकड्ा दािचीनी और स्वादानुिार बीज िड्ी िाि समच्ष भी हल्की िी भून िे्. इि िमस्​् समश्​्ण को खरि या सि​ि पर महीन रगड् िे और स्वादानुिार िे्धा नमक भी समिाकर पीि िे्. इि मिािे मे् हल्का खटाि जगाना चाहे तो समश्​्ण मे् थोड्ी टाटरी (नी्बू का ित) का प्​्योग कर िकते है्. उपयोग िे पहिे, तिने के तुरंत बाद इि चटपटे मिािे को मंगोड्ो पर सछड्क िे्. ऐिे मिािे का उपयोग करे्गे तो चटनी अिग िे बनाने की आवश्यकता ही नही् होगी. पूरी, कचौड्ी और पराठो् िाथ ही इि चूण्ष चटनी का प्​्योग कर िकते है्. भोजन के बहाने हमारा मूि प्​्स्ाव यह है सक जीवन के िभी सवभागो् मे् परंपरा यानी पुरानी रीत को िहज भाव िे न नकारे, बब्लक परंपरा के िमस्​्पक्​्ो्का सवस्​्ृत सवश्िेरण करे्, अत्यंत गंभीरता िे सवचार करे्सक पूव्षजो्ने जो भी रीत बनायी, वह क्या िोच कर बनायी और उिमे्सवशेर n र्प िे स्थानीयता का क्या महत्व िोचा गया था. शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 47


मास् हिल् ट महेड

दीकपका पादुकोण ने इस साल ‘पीकू’, ‘तमाशा’ और ‘बाजीराव मस्​्ानी’ जैसी सिल किल्मे्दी है्. उनका अकभनय बताता है कक कवकवध ककरदारो्को परदे पर कशद्​्त और प्​्ामाकणकता से जी लेने की उनमे्भरपूर सामर्य्षहै. दीकपका से कवशेर बातचीत. हवर मृदुल

दी

मपका पादुकोण टॉप पर पहुंच चुकी है्. इस साल उन्हो्ने ‘पीकू’, ‘तमाशा’ और ‘बाजीराव मस्​्ानी’ जैसी सिल मिल्मे् दी है्. इन मिल्मो् मे् उनका अमभनय बताता है मक मवमवध मकरदारो्को परदे पर प्​्ामामणकता से जी लेने की उनमे्भरपूर सामर्या्है. हामलया मरलीज मिल्म ‘बाजीराव मस्​्ानी’ मे् मनभाया मस्​्ानी का मकरदार उन्हो्ने मजस मशद्​्त से मजया है, वह कामबलेतारीि है. अब तक ‘हंड्ेि करोड्क्लब’ मे् एंट्ी कर चुकी इस मिल्म मे् दीमपका की मौजूदगी मनम्​्ित र्प से चार चांद लगाती है. लगातार महट मिल्मे् देकर आप टॉप पर पहुंच चुकी है्. इस सिलता को आप मकस तरह ले रही है्? मै्ने बड्ी मेहनत से यह सिलता पाई है. मै् जब नयी थी, तो मुझे मिल्म इंिस्ट्ी के बारे मे् कुछ भी पता नही्था. चूंमक मै्बॉलीवुि के बाहर की हूं, इसमलए शुर् मे् मुझे थोड्ी परेशानी भी हुई. हर इंिस्ट्ी की तरह बॉलीवुि के भी कुछ अमलमखत कायदे कानून है,् इन्हे्समझने मे्मुझे वक्त लगा. मेरा कमरयर बहुत लंबा नही् है, लेमकन इस दरममयान मै्कई िेज से गुजरी हूं. मिल्मे् महट होने के बाद मुझे बड्ी खुशी हुई, तो फ्लॉप होने के बाद अवसाद मे् भी जा पहुंची. लेमकन मै्ने मेहनत का दामन कभी नही् छोड्ा. आज मेरी मिल्मे् सिल है् और इसकी मुझे बहुत खुशी भी है, परंतु मेरे पांव जमीन पर ही है्. मेरे माता-मपता मुझे अब भी यही सीख देते रहते है् मक कभी उिऩा मत. मवनम्​् बने रहना. महम्मत कभी मत हारना. मुझे लगता है मक माता-मपता की इसी सीख ने मेरी सिलता की राह बनायी है. आपको क्या लगता है मक टॉप पर बने रहने के मलए आपको अब मकतनी जद्​्ोजहद करनी पड् सकती है? मै् टॉप या बॉटम जैसे शब्दो् से अपने आपको नही् आंकती. इस तरह का आकलन मीमिया करता है, मजससे मुझे कोई एतराज भी 48 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

नही् है. मुझे पता है मक हर हीरो या हीरोइन का एक िेज होता है. एक मदन हर मकसी का वक्त बदलता है. मशखर पर पहुंचना मशखर पर बने रहने की तुलना मे् आसान होता है. मेरी हरदम कोमशश रहती है मक मै् अच्छी म्सक्​्प्ट साइन करं्. इधर मै्ने कािी समय से नयी मिल्मे् साइन नही् की है्. मै्ने कई स्सक्​्प्ट पढ्ी है्. उनमे् से ही कुछ मिल्मो् मे् काम करने के मलए हांमी भरं्गी. ‘बाजीराव मस्​्ानी’ मे् मस्​्ानी का मकरदार कािी प्​्शंसा पा रहा है. दश्क ा ो्ने इस ऐमतहामसक रोल मे् आपको पसंद मकया है. लेमकन खुद आपके मलए यह भूममका मकतनी चुनौतीपूणा्रही? मस्​्ानी की भूममका मेरे मलए कई मायनो् मे् कमठन थी. मेरी पूरी कोमशश रही थी मक इस मकरदार को मै्मानमसक स्र् पर भी मजऊं. मुझे लगता है मक मै्ने इस काम मे् कािी हद तक कामयाबी पाई. असल मे् जब मै् मस्​्ानी का रोल कर रही थी, उसी दौरान दो अन्य मिल्मो् की भी शूमटंग कर रही थी. मेरे हाथ मे् तीन मिल्मे्थी्. तीनो्की शूमटंग एक साथ ही चल रही थी. यह सच है मक मस्​्ानी के मकरदार के मलए मुझे बहुत मेहनत करनी पड्ी. इस रोल ने मुझे मिमजकल चेले्ज भी मदया और मानमसक स्​्र पर भी उद्​्ेमलत मकये रखा. मस्​्ानी को जानने के मलए मै्ने मकताबे् पढ्ी्. घुड्सवारी सीखी. तलवार चलाने का अभ्यास मकया. कथक सीखा.

चूंमक मै्ने स्कूल के मदनो्मे्भरतनाट्​्म सीखा है, इसमलए कथक का अभ्यास करने मे् मुझे कोई मदक्​्त नही्आयी. इस तरह की मिल्मे्मेनस्ट्ीम हीरोइन के मलए तलवार की धार जैसी होती है्. क्या पीमरयि मिल्मे्आपको आकम्रात करती रही है्? मकसी भी हीरोइन के कमरयर मे्ऐसे मौके कम आते है् मक उसे अच्छी पीमरयि मिल्म ऑिर हो. ‘बाजीराव मस्​्ानी’ जैसी स्सक्​्प्ट बहुत कम मलखी जाती है. संजय लीला भंसाली जैसा मिल्मकार उसे बना रहा हो, तो आकम्रात होना स्वाभामवक है. पीमरयि मिल्मो् के मलए बैनर और मनद्​्ेशक की ओर देखना बहुत जर्री होता है. ये मिल्मे् हर मलहाज से कमठन होती है्. आज के दौर मे् मकसी पीमरयि मिल्म मे् काम करना मनम्​्ित र्प से जोमखम भरा काम है. जरा भी संतुलन मबगड्ा नही् मक गये काम से. भंसाली जैसे कल्पनाशील मनद्​्ेशक ही ऐसे मवरयो्के साथ न्याय कर सकते है्. हालांमक मै्ने पहली बार पीमरयि मिल्म मे् काम नही् मकया है. मैन ् े आशुतोर गोवारीकर के मनद्श ्े न मे् बनी मिल्म ‘खेले हम जी जान से’ की थी. यह मिल्म चल नही् पायी थी, लेमकन इसकी मवरय वस्​्ुभी बेहतरीन थी. इस साल आपकी ‘पीकू’, ‘तमाशा’ और ‘बाजीराव मस्​्ानी’ जैसी तीन अगर अंदाज की


मस्​्ानी एक मुज्िकल जकरिार दीशपका पादुकोण: मस़​़ानी का मुस़शकल शकरदार मिल्मे्मरलीज हुई है्. तीनो् ही मिल्मो् मे्आपने मवश्​्सनीय अमभनय मकया है. आप अपनी मिल्मो्का चयन मकस आधार पर करती है्? मेरी कोमशश होती है मक एक जैसी मवरय वस्​्ुकी मिल्म से बचू.ं मै्नये मकरदार करने को वरीयता देती हूं. मै्ने ‘िाइंमिंग िेनी’ जैसी मिल्म की, तो ‘पीकू’ भी की. ‘ये जवानी है दीवानी’ और ‘तमाशा’ भी की. ‘बाजीराव मस्​्ानी’ ने जर्र मेरे कमरयर को एक नया आयाम दे मदया है. इस मकरदार के मलए मुझे बहुत तारीि ममल रही है. यह भूममका मेरे मलए कािी कमठन भी थी. कह सकते है्मक मस्​्ानी ने कई तरह से मेरी परीक्​्ा ली. अभी तक के अमभनय कैमरयर मे् आपके मदल के करीब मकरदार कौन सा है ? मै् मिल्म ‘ये जवानी है दीवानी’ मे् नैना के मकरदार को अपने मदल के कािी करीब मानती हूं. नैना एक ऐसी लड्की है, जो खुद को खोजती है और इस काम मे् कामयाबी पाती है. यह एकदम अलग तरह का रोल है. मै्अपने आपको इस रोल से बहुत ज्यादा मरलेट करती हूं. मै् कािी हद तक नैना जैसी ही हूं.

के आगे जाते ही सतक्क हो जाता करती थी. मै् रटकर अपने िायलॉग बोलती थी. जल्दी नव्ास हो जाती थी. लेमकन अब काम करते हुए मै्ने कािी कुछ सीखा है. मेरे भीतर आत्ममवश्​्ास आ चुका है. अब मै् अपनी भूममका को एक लयात्मक तरीके से अमभनीत कर लेती हूं. आपकी दोस्​्ी रणबीर कपूर से भी है और रणवीर मसंह से भी. आपके मकसके नजदीक ज्यादा है्? दोनो्ही मेरे पके्दोस्​्है्. दोनो्का ममजाज एकदम अलग है, लेमकन दोनो् ही बनावटी नही् है्. रणबीर कपूर थोड्े गंभीर मकस्म के है्, तो रणवीर मसंह कािी खुले मदल के है्. दोनो्मे्एक कॉमन बात यह है मक वे शानदार एक्टर है्. घर मे् आपका सबसे बड्ा म्​्कमटक कौन है? मम्मी या िैि?

एक अमभनेत्ी के र्प मे्आपने अब तक अपना मकतना मवकास मकया है?

मेरी सबसे बड्ी म्​्कमटक मेरी बहन है. वह मबना मकसी मझझक के मेरी खाममयां मगना देती है. वह इस मामले मे्कोई मलहाज नही्करती है. वह मेरी हर मिल्म देखती है. बहन की तुलना मे् मां जर्र थोड्ी सॉफ्ट है्. लेमकन मेरी आलोचना मे् वे भी सख्ती मदखाती है्. िैि जर्र मेरे साथ खड्े नजर आते है्. उन्हे् मेरी की हुई हर चीज अच्छी लगती है.

पहले मेरी दोस्​्ी कैमरे से नही्थी. मै्कैमरे

कभी िुस्ात ममले, तो आप क्या सीखना

‘तमािा’ मे़ रणिीर कपूर और दीशपका: शिशिध भूशमकाएं चाहती है्?

मुझे म्यूमजक से बहुत लगाव है. खास तौर पर मै् मगटार और मपयानो सीखना चाहती हूं. मुझे लगता है मक तनाव दूर करने का इससे बड्ा साधन कोई दूसरा नही्. लेमकन मेरी समझ मे् नही् आ रहा है मक मेरे पास इतना वक्त कब होगा मक मै्मगटार या मपयानो का अभ्यास कर पाऊंगी. अब आपके हाथ मे् एक भी नयी मिल्म नही् है. आगे मकस मिल्मकार के साथ काम करने जा रही है्? इस संबंध मे् जल्द ही मनण्ाय ले लूंगी. मै् जल्दबाजी मे् मकसी एक मिल्मकार का नाम नही्बता सकती. इधर खबर है मक आप अब हॉलीवुि मे् भी सम्​्कय होने जा रही है्. आपने एक अंग्ेजी मिल्म मे्काम करने का मन बना मलया है? मै्ने कोई हॉलीवुि मिल्म साइन नही्की है. पता नही्, मकसने यह खबर उड्ाई है. मै्हॉलीवुि की ऐसी मकसी मिल्म मे् काम नही् करं्गी, मजसमे् मक मेरा नाम मात्​् का रोल हो. मुझे हॉलीवुि का ठप्पा लगवाने का कोई शौक नही्है. बेहतरीन स्सक्​्प्ट ममलेगी, तो जर्र मवचार करं्गी. वरना मै् महंदी मिल्मो् मे् काम कर कािी खुश हूं. n शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016 49


अंितम पन्ना िाईपी वसंह

नशा-मुक्त नया वर्ष?

नये साल मे्हमे्एक सामाकजक संकल्प लेना चाकहए कक हम खुद को और अपने आस-पड्ोस को नशामुक्त जीवन दे्.

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ि नये िाि मे्हमे्एक िामासजक िंकल्प िेना चासहए. वह िंकल्प हो सक हम अपने िामासजक रोग पर काबू पाये्गे. इि सदशा मे्पहिा कदम होगा सक हम खुद को और अपने आि-पड्ोि को नशामुक्त जीवन दे्. दरअि​ि, नशा एक िामासजक रोग है. इिका पहिा आि्​्मण भिे ही सकिी व्यब्कत पर होता है, पर यह पूरे पसरवार और अंततः पूरे िमाज को प्​्त्यक्​्या परोक्​्र्प िे जकड्िेता है. एक िीमा के बाद यह िमाज िे ऊपर गांव या शहर और सफर राज्य का दुश्मन बन जाता है. दुसनया भर मे् ऐिे उदाहरण भी समिते है्, जब यह रोग और इिकी अथ्षव्यवस्था ने देश को तबाह सकया हो. कई अफ्​्ीकी देश मे्यह हुआ है. आज मेब्किको इि​िे त्स ् ्है. जब हम अफगासनस्​्ान को आतंक िे त्स ् ्बताते है,् तो हम शायद इि बात की अनदेखी कर देते है् सक यह देश नशीिे पदाथ्​्ो् का बड्ा उत्पादक है. तासिबान-युग मे्यह बुरी तरह नशीिे पदाथ्​्ो्की सगरफ्त मे् था. इिी तरह, आज पासकस्​्ान आतंकवाद और नशे की सगरफ्त मे्है. नशे के दो र्प है्. पहिा, शराबखोरी है और दूिरा मादक पदाथ्​्ो्या नशीिी दवाओ् का िेवन है यानी ड्​्ग्ि. भारत मे् यह दोनो् र्प बड्ी िमस्या है. िेसकन जहां पहिे का प्​्भाव दूिरे के अपेक्ाकृत कम है, वही् दूिरा र्प अन्य गैर-कानूनी तत्वो् और धंधो् को अपने यहां आने और कारोबार फैिाने की इजाजत देता है. यह कारोबार सकिी भी तरह का हो िकता है, यहां तक सक आतंकवाद का. ताजा उदाहरण पंजाब का है. ऐिे अध्ययन िामने आ रहे है् सक पंजाब की िरहद जानिेवा और गैर-कानूनी ड्ग् ि ् की आपूसत् ष की राह बनती जा रही है. यह नारकोसटक्ि कंट्ोि ल्यूरो के िव्​्े िे उजागर हुआ है, सजिमे् पंजाब के आठ शहरो् का िव्​्े सकया गया है. इिी तरह, एक और अध्ययन बताता है सक इि राज्य मे् हर दि मे् िे चार िोग ड्​्ग्ि का िेवन करते है्. इिमे्हर चार मे्दो िोग जवान और सकिान है्. यह ब्सथसत बताती है सक कैिे ड्​्ग्ि के धंधे ने पंजाब की उि अथ्षव्यवस्था को िगभग ध्वस्​्करके रख सदया है, जो सकिानो् और जवानो् के दम पर देश को सवकाि प्​्दान करती थी. यहां यह देखा गया है सक हेरोइन सिफ्क िात फीिद उपभोक्ताओ् तक पहुंचता है. और 15 फीिद उपभोक्ताओ् के पाि भुक्ी पहुंचता है, जो दरअि​ि अफीम की भूिी है और 20 प्​्सतशत के पाि सिंथेसटक ड्​्ग्ि आते है्, जो सहमाचि प्​्देश के कुछ फम्ाषस्युसटक यूसनट्ि मे् बनते है्, यह भी िीमावत्​्ी राज्य है. ऐ्टी-नारकोसटक एजंसियां बताती है्सक पंजाब मे्नशे की ित के पीछे के मुखय् कारण है सकिानो्के अफीमो्का पारंपसरक इस्म्े ाि, अल्कोहि के बढ्ते दाम, सहमाचि प्​्देश िे नारकोसटक्ि की िरि उपिल्धता और 50 शुक्वार | 1 िे 15 जनवरी 2016

तस्कर-पुसि​ि-नेताओ्के बीच का नापाक गठजोड्. िवाि उठता है सक अफीमो्का पारंपसरक इस्म्े ाि, यानी इिे नशे के तौर पर इस्म्े ाि करना कैिे िंभव हो पा रहा है? क्या पंजाब या भारत मे्अफीम की खेती बढ्ी है, सजि पर कानून-व्यवस्था की नजर नही्पहुच ं ी है? महाराष्​्मे्अपनी िेवा के दौरान मैन् े यह पाया सक स्थानीय स्र् को सजतना भी बड्ा कारण बताया जाए, सकंतु सबना िीमा-पार करतूत के इि कारोबार को नही् बढ्ाया जा िकता, क्यो्सक भारत मे्इि िंबध ं मे्कानून बड्ेकड्ेहै.् एनडीपीएि एक्ट के तहत सकिी भी नारकोसटक ड्​्ग या िाइकोट्​्ॉसपक तत्व का उत्पादन या सनम्ाषण करना या सफर उिकी खेती करना, उिको रखना, बेचना और उिका भंडारण करना या प्य् ोग करना पूरी तरह अवैधासनक है. दो-दो बार इि कानून मे्िुधार हो चुका है- 1998 मे्और 2001 मे्. ऐिा नही्सक यह कानून सकिी राज्य सवशेर के सिए है, बब्लक यह पूरे भारत पर िागू है. दोसरयो्के सखिाफ िख्त िजा और जुम्ाषने का भी प्​्ावधान है. ऐिी ब्सथसत मे्, स्थानीय तत्व बेहद अहम नही् रह जाते. ऐिे मे्, अफीम का जो पारंपसरक प्​्योग बढ्ा है, वह िीधा इि ओर इशारा करता है सक िीमा-पार िे इिकी खेप आ रही है. यह भी ध्यान देने वािी बात है सक तासिबान की पूरी अथ्षव्यवस्था अफीम की खेती पर आधासरत है, जो पासकस्​्ान और अफगासनस्​्ान मे्िस्​्िय है्, खाि तौर पर अफ-पाक िीमा पर और ये घुिपैसठयो्के जसरये या अवैध तरीके िे भारत मे् अफीम पहुंचाते है्, सजि​िे हमारे िीमावत्​्ी राज्य प्​्भासवत हो रहे है्. अफगासनस्​्ान मे्हेरोइन का उत्पादन सरकॉड्षस्​्र पर यानी 550-600 टन तक पहुच ं गया है. शुद्हेरोइन की कीमत पासकस्​्ान मे् एक-दो िाख र्पये प्​्सत सकिोग्​्ाम है. गैर-कानूनी तरीके िे िीमा-पार कराने के एवज मे्इिकी कीमत बढ्जाती है और महानगरो्तक आते-आते यह 10 िे 20 िाख र्पये प्स्त सकिोग्​्ाम हो जाता है. भारत मे् नशीिे पदाथ्​्ो् की खेप बढ्ाने मे् िीमा-पार तस्करो् की भूसमका इि​िे पुष् होती है सक बीते जून महीने मे्पंजाब पुसि​ि ने 27 सकिोग्​्ाम हेरोइन जल्त की थी. बताया गया सक यह खेप पासकस्​्ान के जसरये भारत आयी थी. आतंकवाद और दूिरे अपराधो्, जैिे सक ड्​्ग तस्करी के बीच तार जुड्ते है्, इिे िंयुक्त राष्​्िुरक्​्ा पसररद भी मानता है. हािांसक, दुसनया भर के देश इिे रोकने और खत्म करने को िेकर कोई स्पष्​्रणनीसत नही् बना पाए है्. वही्भारत मे्नारकोसटक कंट्ोि ल्यूरो के सवशेरज्​्भी मानते है्सक देश मे्नेशनि एंटी-नारकोसटक टास्क फोि्षका गठन होना चासहए, n तासक सवस्​्ृत स्​्र पर इिके सखिाफ िड्ाई छेड्ी जाए. (िेखक पूव्षवसरि्​्पुसि​ि असधकारी, वकीि और िामासजक काय्षकत्ाष है्. आिेख श्​्ुसत समत्​्ि िे बातचीत पर आधािरत)


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Shukrawaar 1 15 january 2016 medium quality by ambrish kumar - Issuu