क़ब्रिस्तान न फन जाए ----------------------भानवीम सॊवेदनाओॊ का
भानव से ह्रास हो यहा है रट ू का ताॊडव
भजहफ का फवॊडय
दय-दय बटकती भानवता सन ु यहा हूॉ हय ददन की चीख ऩक ु ाय भदहरा को फोरता कोई ववक्षऺप्त ककन्तु
उससे अधधक तो जजसने फीच चौयाहे भें
भाये उसे डॊडे फर ु वामा अल्राह
जम श्री याभ जम हनभ ु ान
दवू षत भानससकता का ददमा ऩरयचम
खद ु ही है ववक्षऺप्त प्रेभी को ऩकड़ा
भजहफ के ठे केदायों ने उखाड़ सरए नाखून नोच डारे फार
कय ददमा ववक्षऺप्त
सास ने
जो खद ु
एक स्री है
फहु को भाया ससयु के साथ
पाड़ डारे कऩड़े कय ददमा नॊगा झकझोय डारा
उसके स्रीत्व को
फेयहभ दनु नमा नही भानव है
जो खद ु गण ु ों को बर ु ाकय
फन गमा फहशी तबी तो हय योज
जजॊदा भाॉस भें
नोची जाती हैं औयतें
घयू ा जाता है
छे ड़ा जाता है
भार भार कहकय ऩक ु ाया जाता है ।
हय ननगाहे तबी तो
बख ू े ससमाय की तयह ताकती है ।
सोचता हूॉ सददमों ऩयु ाना
सॊस्कृनत, सभ्मताओॊ का दे श
कहीॊ कब्रिस्तान न फन जाए ।
यफ्ताय तो सभर गई --------------------यफ्ताय तो सभर गई रेककन उजड़ गए
वषों ऩहरे रगाए गए
हये बये ऩेड़ ऩौधों का जखीया
राखों ऩेड़ो की दे दी गमी आहुनत ववकास के याहों भें ववनाश को ही फोमा यफ्ताय तो सभर गमी
रेककन शीतर छामा से दयू हो बग ू बभ से उगरते अॊगायो के
थऩेड़ो को सहन कयते हय योज फॊद ु े री धयनन ऩहरे से अधधक जर उठी है -----------------------
प्रनतयोध ------------------------सददमों से तभ ु ने तोड़ा हभने जोड़ना ससखामा
सहायनऩयु भें तुभने ऩोत दी कासरख
यववदास, अम्फेडकय ,शाहू , पुरे के भख ु ऩय औय तुभ कयोगे बी क्मा कासरख ऩोतने के अरावा रेककन शामद ऩता नही
भनू तभ से अधधक उनके ववचायों को भानते हैं
कपय बी तुभ सददमों मॉू ही जख्भ दे ते आमे हो हय जख्भ को हभ बयते आए हैं
ऩय अफ औय जख्भ नही सहें गे मे सॊदेश हभने बी ददमा है
शासन प्रशासन ने तम् ु हायी ऩयू ी भदद की कपय बी हभ डये नही झक ु े नही
अन्माम के खखराप न्माम ने प्रनतयोध ककमा औय मह प्रनतयोध जायी यहे गा
जफ तक तुभ सभान व्मवहाय नही कयोगे ।
फुकनू आज नही ऩता दक ु ानदाय को फक ु नू क्मा है ?
कबी जाते थे खेतो ऩय
बाजी खाने फक ु नू के साथ
सौंधी-सौंधी खुशफू से ददर भचर जाता था कबी जॊगर भे जाकय कैथा तोड़ते खाते चाव से फक ु नू के साथ फक ु नू खाने से अकसय
ऩेट की फीभारयमाॊ दयू होती है ।
रेककन सभम के साथ नाभ फदर गमा तबी तो दक ु ानदाय को नही ऩता आखखय फक ु नू क्मा है ?
आधुननक याभयाज्म के भामने याभयाज्म भें सदै व ही
दसरतों का सॊहाय सनु नजचचत है । नही भारभ ू तो इनतहास ऩढ़ो जजसभें तुम्हें वषों ऩहरे
याऺस, ननशाचय, शद्र ु आदद ऩक ु ाया कयते थे ।
तुभ आज वही दसरत तो हो कपय कैसे फख्शेंगे तम् ु हें
याभयाज्म के यखवारे । क्मोंकक तभ ु उसकी
वणभव्मवस्था को ररकाय यहे हो अम्फेडकयी ववचायधाया से
उसके द्वाया गढ़े ऩाखण्ड को उजाड़ यहे हो तुम्हायी सभता की फात उसे जभती नही इससरए
वह याभयाज्म तम् ु हें तन से भन से
औय धन से
कभजोय कये गा
अफ तू सोच रे ववचाय रे
आखखय तुझे भॊजूय क्मा है ।
अॉधेयी यात भें फैठा अकेरे आकाश को ननहाया था
तायों की योशनी थी भद्ददमभ उन्होंने ककसी को ऩुकाया था
दग्ु धावर स्वेद ककयणों को बयकय शीतरता को सभेटकय उसे ददमा इशाया था
भानो फादर अद््धयात्रि भें अटखेलरमाॊ कयते हुए
तायाओॊ कक शीतर ककयणों का
स्ऩश् कयना चाहता था
रेककन तायाओॊ को तो केवर एक चाॉद ही प्माया था वे सम ू ा्स्त होते ही
लभरन कक आस भें फैठ गमे थे अऩनी
चाॊदनी चद्दय पैराकय
वे ह्रदम भें आकुरता को बये हुए त्रफरत्रफरा यहे थे लभरन के लरए रेककन उनकी आस अधयू ी थी
औय यहे गी बी आज सम्ऩण ू ् ननशा क्मोंकक आज
अभावस की यात थी
यव ु ा उदास क्यों है ? क्मा कायण है ?
जो मुवा आज हताश है
खद ु की ज़ ॊदगी के ननण्म के लरए फेवश औय राचाय है
हय ओय फेयोजगायी की ही
क्मों रगी चीख ऩक ु ाय है ? नौकयी का ही
आज क्मों सम्भान है ?
क्मा मोग्मता के कोई भामने नहीॊ है ? क्मा उच्चलशक्षऺत होना गुनाह है ? मा तॊि भ्रष्ट कहकय
ददर को शाॊत कय रॉ ू
सभाज की सोच भें आखखय
इतना ऩरयवत्न क्मों आमा ?
उसके भन भे सयकायी नौकयी का ही क्मों खमार है ? ज़जधय नजय उठाओ
उधय मव ु ा ही क्मों उदास है ?
सयकायी नौकयी का मे क्रेज क्मों कय ददमा ?
भेहनत कश मुवा को भजदयू सभ क्मों कय ददमा ? लशऺा को दोष है मा लशऺा भाकपमाओॊ का
बये फाजाय भे डडग्रिमों का भोर क्मों कय ददमा ? ननजीकयण ने आखखय मह खेर कय ददमा
योजगाय यदहत औय डडिी सदहत कय ददमा ।
प्रदीऩ कुभाय गौतभ प्रदीऩ गौतम बन् ु दे ऱखण्ड ववश्वववद्याऱय झाॉसी के शोधाथी है वततमान में मथरु ा प्रसाद महाववघाऱय कोंच में हहन्दी प्रवक्ता के रूऩ में कायतरत है । आऩके द्वारा कई शोध-ऩत्र भी लऱखे जा चक ु े है जजनका वाचन ववलभन्न सॊगोष्ठी में ककया गया। कई ऩत्र-ऩत्रत्रकाओॊ में भी आऩकी रचनायें प्रकालशत होती हैं। आऩ जनऩद जाऱौन
के उरई के ननवासी है । आऩकी इस ई-बुक का प्रकाशन तेजस्वनी प्रकाशन द्वारा ‘‘नारायणदास अग्रवाऱ यव ु ा प्रोत्साहन योजना’’ के अन्तगतत प्रकालशत की जा रही है ।