आज जब मैं रस्ते से जा रही थी। तभी किसी ने आवाज़ दी शायद िोई गरीब था वो।। जो बोल रहा था साहब रोज़ डे ! प्रोपोज़ डे तो रोज़ मनाते हो िभी िपड़ा डे या िम्बल डे भी मना लो।। तभी जै से िुछ टू टने िी आवाज़ आयी। जै से िुछ रूठने िी आवाज़ आयी।। साहब! जो टू टा वो कदल था मेरा। जो रूठा वो ज़मीर था।। जो चीख िर कसर्फ यही बोल रहा था। िोई तो सुन लो इस गरीब िी पुिार।। राजनेता िो उसने यही जान िर मत कदया िी शायद वो उसिी किस्मत बदले गा। पर किस्मत तो दे खो उस गरीब िी साहब! आज भी वो र्ुटपाथोों पर सो रहा है ।। भीख माों गिर गुज़ारा िर रहा है ।। आज भी वो गरीब चीख िर यही िहता है जनाब िुछ न सही एि घर ही बना दो!! आज अमीर और अमीर और गरीब और गरीब हो रहा है ।। साहब पर इस गरीब पर भी नज़र डाल लो।। थोड़ी तो रहम िर दो साहब।। िभी तो िम्बल डे और िपड़ा डे मना लो साहब।। िभी तो हमारी झोली भी भर दो साहब।। --------------------------------------------------------------------------------
वो दे खो आसमााँ िी िोख़ में मेरा कतरों गा लहरा रहा है । वो दे खो मेरी भारत मााँ भी झूम रही है।। शायद आज िोई फ़तह हाकसल हुई है। दे श िे पूत आज कर्र दे श िा सर ऊाँचा िर आये हैं ।। पर वही किसी िी िोख़ किसी िी माों ग किसी िे सर से उसिे कपता िा साया उठ गया होगा। किसी िी रूह ति आज बहुत रोई होगी।। क्ोों इन सीमा िी जों जीरोों में हमारे हाथ बोंधे हैं ? क्ोों हम दो मुल्ोों में बोंटे हैं ? पहले ये एि दे श एि ताक़त हुआ िरता था। आज ये अलग अलग दो दे श आपस में कमलने िो तड़प रहे हैं।। क्ोों इन हाथोों में पड़ी जोंजीरोों िो हम तोड़ नहीों सिते ? क्ोों जात पात धमफ िी राह से कनिल नहीों सिते ?? सब बोला िरते हैं हमें इन जात पात धमफ से आज़ादी दो। क्ोों िोई इस शाों त लौ िो हवा दे बढ़ा दे ता है ? इन सवालोों िे जवाब पाना शायद मुमकिन नहीों। कर्र भी दे खो मेरा दे श चमि रहा है।। कहों दू िेसररया तो मुस्लिम हरे िे कलए लड़ रहा है । वही इन दोनोों िो अपने अोंदर समेटे मेरा कतरों गा शान से लहरा रहा है ।।
धन्य हो तु म वीर जवानोों । धन्य हो वो िोख़ कजसने तु म्हे जनम कदया।। कजसने तु म्हे जनम कदया।।
मााँ आज कर्र तेरी याद आ गयी। आज कदल कर्र तेरे कलए रो उठा।। याद है मााँ जब तूने मुझे चलना कसखाया था। मैं तो कगर ही पड़ी थी अपने िदमो से लड़िर। कर्र तूने मेरी उों गकलया पिड़ िर मुझे आगे बढ़ना कसखाया। पढ़ना कलखना। बोलना कसखाया।। और जैसे ही मैं बड़ी हो गयी तूने मुझे खुद से दू र िर कदया। शायद मेरे सुनहरे भकवष्य िे वास्ते।। पर क्ा तुझे मेरी याद नहीों आती? तेरा मन नहीों िरता मुझसे कमलने िो? मााँ तेरे कबना यहााँ अच्छा नहीों लगता। सब सब सूना सूना लगता है ।। जी िरता है सब छोड़ िर आ जाऊाँ तेरे पास।
कर्र तेरे और बाबा िे सपने याद आ जाते हैं और ये िदम वहीों ठहर जाते हैं ।। मााँ पता है रोज़ रातोों िो तेरी थपिी याद आती है जो तू मुझे सुलाने िे वक़्त कदया िरती है ।। मााँ आज कदल िर रहा है तेरे गोद मे कसर रख िर सो जाऊाँ और तेरे वो िोमल हाथ मेरे माथे िो सहला दे ।। पर इस भीड़ मे इतनी दू र आ गयी हों शायद मैं। िी वाकपस तेरे पास लौट िे जाने में भी समय लग जाये।। पर मााँ मेरा वादा है तुझसे तेरे आाँ खोों मे िभी मेरी वजह से आों सू आये न तो वो ख़ुशी िे होोंगे मााँ । वो ख़ुशी िे होोंगे।।
सदिय ों से ल ग बस िु सर की तरह बनने की क दिि करते हैं ।
ल ग कहते है इनकी तरह बन इनकी तरह बन । आखिर क ई ये क् ों नही ों कहता अपनी तरह बन ।। हम सब में एक हुनर ह ता है । ज हम िु दनया से दिपा कर रिते हैं ।। दकसी क बताने से डरते हैं । की िायि कही ों ये हुनर मेरा मज़ाक न बना िे ।। पर इतना आसान नही ों ह ता है िुि के हुनर क िु पाना। कभी न कभी व सामने आ ही जाता है ।। हम इस िु दनया से नही ों िुि से डरते हैं । डरते हैं कही ों हमारा हुनर हमे दगरा न िे ।। पर ये भूल जाते है दक दगर कर सँभालने वाल की ही जीत ह ती है ।। कभी कभी ऐसा लगता है दक हम िु दनया की भीड़ में िुि क ही ि चुके हैं ।। िु सर की तरह बनने की दिराक में िुि का ही गला घ ट ों चुके हैं ।। िु दनया की भीड़ में िुि क सादबत करते करते अपनी ही पहचान ि चुके हैं ।। अपनी ि ई पहचान क वादपस पाने के दलए हुनर बाहर लाओ। िु दनया क िक्र से अपना हुनर दििाओ।। िायि तब इस िु दनया क तु मपर नाज़ ह गा। िायि तु म्हें िुि पर िक्र ह गा।।
एि कदया उन शहीदोों िे नाम भी जला लेना कजन्ोोंने हमारे खाकतर अपनी जान गवाों दी है ।।
एि कदया उनिे खाकतर भी जला लेना कजन्ोोंने अपने कदल पर पत्थर रख िर अपने बेटे िी कचता िो अकि दी है ।। एि कदया उन बच्चो िे नाम जला लेना कजन्ोोंने अपना कपता हमारे खाकतर खोया है ।। यहााँ हम दे श में बैठे सैकनिोों िो िोसा िरते हैं । पर शायद उन्ोोंने जान गवाों िर अपनी सच्चाई िा प्रमाण कदया है ।। शायद अब उनिो चैन िी नीोंद आयी होगी कजनिी वजह से यह सोंभव हुआ है ।। एि कदया खुद िे कलए जला लेना और सोचना िी अपने अोंदर िी बुराई ख़त्म िर लेना है ।। एि कदया शहीदोों िी आत्मा िी शास्लि िे कलए जला लेना।। एि कदया खुद िे कलए जला लेना।। एि कदया खुद िे कलए जला लेना।