अभिनेता को सही दिशा िे ने वाले मास्को आर्ट थियेर्र के संस्िापक िे स्ताननसलावस्की। प्रस्तुत आलेख में अभिनेता की प्रारम्भिक तैयारी के अभिनय भसद्ांत से सभबम्ध्त सूचना है । स्ताननसलावस्की नवीन प्रयोग की आज्ञा प्रिान करते हैं। मैनें गुरू सुरेधर शमाट जी के दवारा िारतेधि ु नाट्य अकािमी लखनऊ में प्रभशक्षण के िौरान बताए गए भसद्ांतों को सुवव्ानुसार वविाम्जत करके प्रस्तुत करने का प्रयास ककया है । अभिनेता के भलए प्रस्तुत प्रोजेक्र् में बबधिव ु ार चचाट के साि प्रमुख अभ्यास रखने की कोभशश की गई। यह आलेख स्ताननसलावस्की को सरल तरीके से समझने एवं समझाने का एक प्रयास है ।
आररफ़ शहडोली
विषय - सच ू ी (1)
स्वयं पर ध्यान
(2)
स्वीकार की िावना, जीववत रहना है
(3)
तनाव से मक् ु त रहो, पहला नेचर और िस ू रा नेचर
(4)
सहज रहो, सांस की प्रकिया, ध्यान रखना
(5)
स्वयं से साक्षात्कार, एक अभिनेता को बच्चे की तरह होना चादहए
(6)
अभिनय, अभिनय की उत्पवि, एक्शो, ड्रामा
(7)
एक्शन, फोिट वाल
(8)
अपने आपको पररम्स्िनतयों में ढाल िो, आपके साि जो होता है होने िो।
(9)
हठयोग अभिनेता में होना चादहए, सत्य को महसस ू करते हुए उस पर ववश्वास करो
(10) अपने दिमाग पर बोझ मत डालो, स्वयं से शरू ु आत, संवेिन शील होना (11) समय, म्स्िनत और स्िान (12) िी गई म्स्िनतयां नार्क को यनू नर् में बांर्ना (13) समधवय इमेम्जनेशन (14) आब्जवेशन (15) पशग ु ण से पररचय इमेम्जन करना, एसोभशयेशन (16) चाल, उजाट का स्तर (17) िावनात्मक स्मनृ त (18) मेम्जक इफ (19) ररिम एण्ड र्े भपो (20) ताल मेल
दी गई स्थितिय ाँ अभिनेता को नाट्य आलेख (म्स्िप्र्) प्राप्त होती है । उसे िूभमका िे िी जाती है । अभिनेता को नाट्य आलेख में िभू मका में िी गई म्स्िनतयों की खोजबीन करना है । अभिनेता को समय (र्ाइभमंग) तय करना है । चररत्र ककन म्स्िनतयों से गुजर रहा है , समय, म्स्िनत और स्िान के दहसाब से दृश्य को िे खना है ।
न टक को यूतनट में ब ट ां न अभिनेता को परू ी नाट्य आलेख को यनू नर् में वविाम्जत कर लेना चादहए। यनू नर् एवं सब यनू नर् में नार्क को वविाम्जत ककया जाता है । अभिनेता को अपने चररत्र को यनू नर् में बांर् लेना चादहए। नाट्य आलेख में पधरह म्स्िनतयााँ हैं तो पधरह यूननर् होगी। म्स्िनत बिलते ही सब यूननर् होती है । ककसी नवीन पात्र के आने से यनू नर् बिल जाती है । म्जस पात्र का आगमन होता है उसके भलए यह पहली यूननर् होती है । पहले से उपम्स्ित पात्र के भलए सब यूननर् हो जाती है । नवीन बात के शरू ु होने से यनू नर् बिल जाती है । अभिनेता को अपने चररत्र के अनुसार नाट्य आलेख को यूननर् में वविाम्जत कर लेना चादहए। नाट्य आलेख को यनू नर् में वविाम्जत कर लेने से कायट व्यवम्स्ित तरीके से सभपधन होता है । उिाहरण : - राम और मोहन बात कर रहे है । यह पहली यनू नर् है । श्याम प्रवेश करता है । श्याम का आना श्याम के भलए पहली यूननर् होगी। राम और मोहन के भलए सब यूननर् हो जाएगी।
समन्िय अभिनेता नाट्य आलेख के पीछे नछपे सत्य को जानकर कायट करे । मंच पर उपयोग ककए जाने वाला प्रकाश िी म्स्िनतयों मे आता है । अभिनेता को अभिनय करते समय प्रकाश के पड़ने वाले दहस्सों पर िी ध्यान िे ना होगा। इसे अपना बना लेना चादहए। े़ प्रत्येक संवाि में संगीत होता है । अभिनेता को सिी चीजे ववस्तार से समझना चादहए। अभिनेता को शुरू से अधत तक के नाट्य आलेख का ववस्तारपूवक ट अध्ययन करना चादहए। अपने करे क्र्र से तारतभय स्िावपत करना चादहए। कास्ट्यूम के साि अभ्यास करना चादहए। सहजता से ववश्वसनीयता आती है । रूप सज्जा के साि िी अभ्यास करना चादहए। नाट्य के समस्त वविागों से समधवय होना चादहए।
कल्पन इमेम्जनेशन से याि आती हैं पुरानी स्मनृ तयां। ककसी चररत्र के थचत्रण में िो तरह की बात होती है (1) आधतररक चररत्र थचत्रण (2) बाह्य चररत्र थचत्रण ककसी िी चररत्र के नेपथ्य में जाकर उसके बारे में ववस्तत ृ जानकारी प्राप्त करनी चादहए। अपने पीछे के इनतहास में जाकर ऐसे चररत्र की कल्पना कर सकते हैं।
अभिनेता को अपने जीवन से जुड़े लोगों की सूची बनानी चादहए। उिाहरण - भशक्षक, भमत्र, थचककत्सक, नाई, मोची, र्े लर मास्र्र आदि।
आब्जिेशन आबजवेशन ककए गए चररत्र को मेमोरी वाक्य रखना चादहए। ऐसे चररत्र को जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल करना चादहए। सेल्फ से आब्जवेशन होता है । अभिनेता को अपने अधिर के शेड का उपयोग करना है । ककसी िी चररत्र की अलग-अलग म्स्िनत में मनोववज्ञान िे खना होगा। अभिनेता को रूथचकर अपने चररत्र को बनाना चादहए। अभ्यास - चार वाक्य लेते हैं। इन चार वाक्यों को आ्ार बनाकर कहानी की रचना करते हैं। अपने आब्जवेशन का उपिोग करते हैं। इसका मंचन िस भमनर् की अवथ् में करते है । उिाहरण - हमारे पास ननभनभलखखत चार वाक्य हैं (1) मैं इसके भलए क्या कर सकता हूाँ यार (2) मुझे पता नहीं (3) र्मार्र कच्चे हैं (4) राजनीनत और ्मट िोनों अलग चीज़ है । इन वाक्यों को आ्ार मानकर कहानी की रचना करनी है । एक बार में एक संवाि के रूप में वाक्य का प्रयोग होगा। वाक्य को िोहराना मना है । समय, म्स्िनत और स्िार का शेड आना चादहए। पात्र का व्यम्क्तत्व दिखाई िे ना
चादहए। वाक्यों का िम आगे पीछे ककया जा सकता है । ध्वनन का उपयोग ककया जा सकता है । इसी तरह मात्र शब्ि चयन करने पश्चात कहानी रचते हैं और अभ्यास करते है । अभिनेता के भलए यह अभ्यास आवश्यक है । इससे आब्जवेशन एवं इमेम्जनेशन का सशक्त प्रयोग होता है । चररत्र को कफम्जकल रूप में िे खेंगे कक बैठता कैसे होगा? भलखता कैसे होगा? चलने में ऊजाट कैसी होगी? बाल कैसे होंगे? कपड़े कैसे पहनता है आदि चररत्र के सभबध् में उठे प्रश्नों का उिर तलाशना जरूरी है । इनर्नटल में उसके अधिर के उठने वाले िाव को समझेंगे। इनर्नटल िाव जागत ृ होने से एक्सर्नटल अभिनय में सौभ्यता आती है । अभ्यास - शव आसन लेर् जाओ। घर से या म्जस स्िान में लेर्े हो, वहााँ से ककसी स्िान की यात्रा पर जाओ। इसमें छोर्ी से छोर्ी चीज़ को महसूस करने एवं महसूस करने को दृश्य में पररवनतटत करते हुए जाना है । पलंग, फशट, फशट का ताप, कमरे की अलमारी, खखड़की, जूता, कपड़ा पहनना, िरवाजा खोलना, िरवाजा बधि करना, बाहर की सीढ़ी उतरना, सीदढ़या ककतनी है ? आदि दृश्यों के साि यात्रा पर जाना। इस अियास से मम्स्तष्क एकाग्रथचि होगा। आब्जवेशन एवं इमेम्जनेशन सशक्त होगा। अभिनेता को यह अभ्यास ननयभमत करना चादहए। इससे स्मरण शम्क्त का िी ववकास होता है । आस-पास के पररवेश का थचधतन हो जाता है । उिाहरण - कुिे एवं नछपकली आदि को िे खकर उधहीं के अनुसार अभिनय करने का अभ्यास अभिनेता को करना चादहए।
पशु गण ु से परिचय अभिनेता को अपनी पररकल्पना शम्क्त को ववकभसत करना चादहए। पशुओं के गुण से पररथचत होना चादहए। पशु के बारे में स्वयं को उस पशु के स्िान पर रखकर सोच सकते हैं। जानवर प्रकृनत के सबसे करीब होते हैं। पशुओं की चाल, सोना, बैठना आदि पर ध्यान िे ना चादहए।
इमेस्जन किन है अभिनेता अपने ररयल सेल्फ को पररवनतटत कर सकता है । इमेम्जन अभिनेता को करना है । आकार और िाव बिल जाएगा, जब अभिनेता उसे ररयल सेल्फ से मान लेगा। अभिनेता को सत्य को महसस ू करते हुए उस पर ववश्वास करना है । उिाहरण - चेरी का बगीचा नार्क में ननजी अलमारी से अभिनेत्री बातचीत करती है । सत्य को इस म्स्िनत तक ववश्वास करना है । अभिनेता को ववश्वास की उच्चतर सीमा तक जाना चादहए। मम्स्तष्क को सहज रखना चादहए।
सम्बन्ध अभिनेता का सभबध् अनेक लोगों से होता है । इन सभबध्ों की सूची बनानी चादहए। जरूरत पड़ने पर इनका उपयोग पात्र के रूप में करना चादहए। उिाहरण - नगर सेठ रा्ेष्याम के हाविाव, शराबी भशक्षक लर्ोररया की बातचीत करने का तरीका, लभबू िािा का रहन सहन आदि व्यम्क्त म्जनका ववशेष रहन-सहन रहा है इनसे
आप जुड़े हुए िे। इधहें सूचीबद् कररए अिवा स्मनृ त पर्ल पर अंककत रखखए। आवश्यकता पड़ने पर रं गमंच पर इस्तेमाल कीम्जए।
चल अभिनेता को हर व्यम्क्त की चाल को ध्यान से िे खना चादहए। हर व्यम्क्त के शरीर में तनाव बबधि ु होता है , इसी के कारण चाल पर प्रिाव पड़ता है । चाल के बिल जाने से चररत्र बिल जाता है । उिहारण - कुछ लोगों का सीना तनाव में रहता है । ककसी की गिट न, कमर, पंजा, एड़ी आदि में तनाव दिखाई िे ता है । अभिनेता को तनाव के बबधि ु का पता चाल िे ख कर लगाना चादहए।
उज ा क थिि व्यम्क्त का उजाट का स्तर किी कम, किी ज्यािा होता रहता है । उिाहरण - ऑकफस जाते समय एवं ऑकफस से आते समय उजाट के स्तर में अंतर आता है । अभिनेता बूढ़ा बनने की कोभशश न करे बम्ल्क उजाट के स्तर को कम कर िे । अभिनेता को पात्र के उजाट के स्तर को िी समझना चादहए।
अभिनेता का एक िाव से िस ू रा िाव तत्काल आना चादहए। अभिनेता का उजाट स्तर घोड़े के समान होना चादहए। घोड़ा किी रूकता नही चलता रहता है । अभिनेता की आाँख घोड़े की तरह सजग होनी चादहए। अभ्यास - अपनी दिनचयाट में उजाट का स्तर िे खखए। आप भशमला में बैंक में नौकरी करते है । गेस्र् हाउस में रहते हैं। ऑकफस से आए है । मााँ अस्पताल में िती है , इसका र्े लीग्राम आया है ।
भ िन त्मक थमतृ ि अभिनेता को िभू मका करते समय िावनात्मक स्मनृ त का सहारा लेना चादहए। यह तीन तरह की होती है (1) दृश्यात्मक स्मनृ त दृश्यात्मक स्मनृ त में उन दृश्यों को याि कर सकते हैं म्जसने आपको प्रिाववत ककया हो। उिाहरण - पहले प्रेम का पहला दृश्य। वपताजी दवारा वपर्ाई। िािी मााँ की मत्ृ यु। पहला सभमान भमला सिी िशटक ताली बजा रहे हैं। आपने सूखी रोर्ी चर्नी के साि खाई है । ववदयालय में घदर्त प्रमुख घर्नाओं के दृश्य आदि का सहारा लेकर िूभमकानुसार पात्र का उपयोग कर रकते हैं। (2)
ध्वनन स्मनृ त - ककसी ध्वनन को सुनते ही सामने वह घर्ना याि आ जाती है । उिाहरण - स्कूल की घण्र्ी की आवाज सुनते ही अपना बचपन याि आ जाता है ,
भशक्षक याि आ जाते हैं, सहपाठी याि आ जाते हैं। ्मटिास चपरासी याि आता है । बेर बेचती सरु इया याि आती है ।
रे ल के इंजन की आवाज से यात्रा की घर्नाएं याि आ जाती है । इसी तरह वाहनों की आवाज, चीख, रोना, हं सना, घड़ी की दर्कदर्क, कोई गाना सुनकर कई यािों के दृश्य मानस पर्ल पर चलने लगते हैं। इधहीं का इस्तेमाल अभिनेता को करना है । इधहीं से चररत्रों को नवजीवन मौभलकता के साि िे ना है । (3) सुगं् स्मनृ त, स्पशट स्मनृ त - ककसी िी सुगं् की अहसास होते ही कई घर्नाएं याि आ जाती है । उिाहरण - इत्र की महक से ईि का त्यौहार एवं उससे जुड़े लोग याि आ जाते हैं। गोबर की सग ु ं् से गॉव का खभलहान एवं यज्ञस्िली की स्मनृ त आने लगती हं । इसी तरह ववभिधन सुगं्ों से घर्नाएं याि आने लगती हैं। इन घर्नाओ ंंसे जुड़े लोग याि आने लगते हैं। अभिनेता को इन सिी मेमोरी का उपयोग अभिनय करते समय करना चादहए म्जससे अभिनय में जीवधतता आएगी। ककसी स्पशट से िी रोमांथचत हो उठते हैं। ककसी के स्पशट से कई घर्नाएं याि आने लगती हैं।
ज द ू यदद अभिनेता को मेम्जक इफ का सहारा लेना चादहए। स्वयं को उस म्स्िनत में मान लेना चादहए। जैसे - बीच िंवर में नाव फंस गई है । आप उसमें बैठे हैं। अपने आपको इस म्स्िनत में मान लो।
अभिनेता को म्स्िनत के अनुसार ढाल लेना चादहए। यह मानना चादहए कक यह सत्य है । इसका ववश्वास उसे होना चादहए।
रिदम औि टे म्पो अभिनेता को तैयारी करते समय सभिाषण के स्तर पर ररिम और र्े भपो का ध्यान रखना चादहए। ररिम से तात्पयट एक ही चीज की पन ु राववृ ि से है । र्े भपो से तात्पयट घर्ना-बढ़ना से है । आंचभलक िाषा में ररिम होती है । मानभसक म्स्िनत में ररिम और र्े भपों का ख्याल रख्ना है । इनका ख्याल म्स्ित के अनुसार रखते हैं। म्ज़धिगी में िी इसको समझना है । ररिम की तीव्रता ही र्े भपो है । ककसी चररत्र का ररिम और र्े भपो शरू ु आत के आ्ार पर ही बिल जाता है । प्रत्येक व्यवसाय से जड़ ु े व्यम्क्त का ररिम और र्े भपो अलग-अलग होगा। अभ्यास - आप घर ऑकफस से आए हैं। आपको पता चलता है कक मााँ की तबबयत खराब है । मााँ को डॉक्र्र के यहााँ लेकर गए हैं। आप डॉक्र्र के पास जाते हैं। इस समय िकावर् में जल्िी दिखाई िे गी। अभिनेता को उिम सभप्रेषण प्रत्येक चीज़ का िशटकों तक करना चादहए। इसके भलए ननरधतर अभ्यास करते रहना चादहए।
ि लमेल अभिनेता का सहायक पात्रों से अच्छा तालमेल होना चादहए। समह ू में एकता होनी चादहए। प्रत्येक चररत्र को पता होना चादहए कक नार्क क्या कहता है ? सिी पात्रों को म्स्िप्र् पढ़ना चादहए। इस पर चचाट करनी चादहए। नार्क की शैली को समझना चादहए। ककस तरह िशटकों तक पहुाँचाया जाए, इस पर ववस्तत ृ चचाट होनी चादहए। अभिनेता का ननिे शक से अच्छा तालमेल होना चादहए। नार्क के सिी वविागों से अभिनेता का अच्छा तालमेल होना आवश्यक है । कोई िी चररत्र छोर्ा नहीं है । सिी को गभिीर िाव से अपना चररत्र करना चादहए। एक अभिनेता से िस ू रे अभिनेता के बीच कोई िरू ी नहीं होनी चादहए। यहााँ से ही अभिनेता के अभिनय में रोचकता आएगी। अभ्यास - रमूह में इभप्रोवाइजेशन करना। एक िस ू रे से तालमेल बैठा कर कायट को करना। उिाहरण - एक कभपनी है । । उसका माभलक िा। । पागल हो गया। ठ वहााँ मैनेजर ननयुक्त हुआ है । ब ् वहााँ का चौकीिार है । क् क्लकट है । । एक दिन ऑकफस के रोशनिान से अधिर आ जाता है । सारी रात वहााँ पर रहता है । अभिनेता को इसी तरह के अधय इभप्रोवाइजेशन तालमेल बैइाने के भलए करने चादहए। सहज रहो
अभिनेता को सहज रहना चादहए। अभिनेता सहज नहीं होता है तो अपनी बात सही तरीके से नहीं कह पाता है । अतः अभिनेता को तनावमुक्त होकर सहज रहने की आित डालती चादहए।
स ांस की प्रक्रिय मसल्स को रहात िे ने के भलए सांस की सही प्रकिया होनी चादहए। सांस की प्रकिया से नवटस भसस्र्म पर प्रिाव पड़ता है । इसीभलए सांस की प्रकिया सुचारू रूप से चलनी आवश्यक है । ध्यान रखना अभिनेता को ननभनभलखखत बातें सिै व ध्यान में रखना चादहए (1)
अभिनेता को स्पष्र् होना चादहए। अस्पष्र् होना उसके भलए घातक हो सकता है ।
(2)
अभिनेता को हमेशा ररलेक्स (सहज) रहना चादहए।
(3)
अभिनेता को सामाधय अवस्िा में रहना चादहए।
(4)
एक चररत्र को स्वयं पर हावी नहीं होने िे ना चादहए।
उिाहरण - किी-किी जैसा काम वैसा व्यवहार हो जाता है । जैसे मिर र्े रेसा में ममतामयी मााँ का िाव दिखाई िे ता है । इनके काम के कारण इनका ऐसा व्यवहार दिखाई दिया। अभिनेता के िी िाव स्पष्र् एवं सामाधय म्स्िनत में होने के बाि दिखाई िे ते हैं। अतः अभिनेता को अपने आपकों ननयंबत्रत एवं सामाधय म्स्िनत में रखना है ।
थियां से स क्ष त्क ि अभिनेता को स्वयं से साक्षात्कार करना चादहए। ररयल सेल्फ का जागत ृ अवस्िा में रहना आवश्यक है । ररयल सेल्फ में सम्भमभलत होने से भशराएं जागत ृ होती हैं। हमारे ध्यान और सांस को ननयंबत्रत ररयल सेल्फ करता है । जीवन में ररयल सेल्फ को जानना आवश्यक है । जीवन की डोर म्जस क्षण िी पकड़ में आ जाए उसी क्षण पकड़ लो। ररयल सेल्फ कभमयों को जानता हैं। ररयल सेल्फ जीवन में आ जाएगा तो अभिनय िी आ जाएगा।
एक अभभनेि को बचे की ििह होन च दहए अभिनेता को बच्चे की तरह सीखने की इच्छा रखने वाला होना आवश्यक है । हमेशा बच्चे की तरह सरल हृिय का बनकर रहना चादहए। उिाहरण - बभलटन शहर की एक अभिनेत्री की िें र् संस्कृत के ववदवान से हुई। िोनों में अच्छी भमत्रता हो गई। अभिनेत्री ने संस्कृत जानने एवं सीखने की इच्छा जादहर की। संस्कृत के ववदवान ने अपनी सहमनत िे िी। अभिनेत्री ने कुछ दिन तो संस्कृत को सीखा बाि में यह िम र्ूर् गया। इसी बीच अभिनेत्री का लड़का संस्कृत में रूथच लेने लगा। लड़के ने संस्कृत के ववदवान से ववथ्वत ् संस्कृत को सीखा। बभलटन का यह लड़का नाट्य शास्त्र का ज्ञाता है । यह राष्ब्रीय नाट्य ववदयालय आए तो इधहोंने कहा - ’’पूरे ववश्व में दिल और दिमाग हैं लेककन मन नहीं है । मन भसफट िारत में भमलता है ।’’ मन ही ररयल सेल्फ है । स्वयं के पास आने पर बारीक अनि ु नू तयााँ आती हैं। बच्चे को िे खो - वह मााँ शब्ि को उच्चारण सबसे पहले सीखता है । अभिनेता ने बच्चे की तरह
उत्सुकता होनी चादहए। मेरे ररयल सेल्फ से बात कैसे पहुाँचे इस पर ध्यान िे ना चादहए। समस्त ज्ञान को जागत ृ अवस्िा में सीखना चादहए।
अभभनय जीवन से जड़ ु ी घर्ना म्जसमें िाव और ववचार हो, उसे वाणी और शरीर के माध्यम से, ऐसे प्रस्तुत करना जो वास्तववकता का भ्रम पैिा करे अभिनय है । म्जतना अच्छा भ्रम उत्पधन होगा अभिनय उतना अच्छा होगा।
अभभनय की उत्पवि पाषाण यग ु में मनष्ु य जानवर की तरह रहा होगा। इसीभलए मनष्ु य को सामाम्जक पशु की संज्ञा िी जाती है । ववकास के िम में अपने सत्य के साि उदिे श्य बड़ा हुआ होगा। समाज में एक िस ू रे ने म्ज़भमेिारी ली होगी। म्जभमेिारी के आते ही वववाह संस्िा का जधम हुआ। कृवष की योजना बनी। मौसम के कारण शरीर में पररवतटन आया। स्िान के बिलने से फीचर बिला। सामाम्जक मूल्य जैसे-जैसे बने मनष्ु य बं्ता गया। ड्रामा संकर् जीवन कैसे म्जया जाए इस सामाम्जक मूल्यों के कारण कुण्ठा का जधम हुआ। नीरस जीवन को रसमय बनाने के भलए प्रिशटन अभिनय का हुआ होगा। एम्धसयंर् ग्रीक का शब्ि है ड्रामा। म्जसका अिट िा कुछ करना। इसीभलए ड्रामा ककया जाता है । पहले से नन्ाटररत होता है कक वहााँ ड्रामा होता है । एक्शो लैदर्न का शब्ि िा एक्शो म्जसका अिट है कुछ होना। यहााँ से एक्शन शब्ि आया। यहीं से एक्शन से एम्क्र्ं ग शब्ि बना। एम्क्र्ं ग से एक्शन का सामंजस्य हुआ। यह करने से होने
तक की प्रकिया है । इसमें होने का भ्रम पैिा होने लगता हैं करने से होने तक की प्रकिया एक्शन है , करना ड्रामा है ।
थियां पि ध्य न अभिनेता को स्वय पर ध्यान िे ना चादहए। अभिनेता का ्मट प्रिशटन करना है , उसे िाव और ववचार को िशटकों तक पहुाँचाना पड़ता है । स्वयं पर ध्यान के साि अभिनेता ननभनभलखखत बातों का ध्यान अवश्य रखे (1) अभिनेता को अपने िाव और ववचार ऐसे सभप्रेवषत करने चादहए कक पहली पंम्क्त के िशटक को कणटवप्रय लगे और अम्धतम में बैठे िशटकों को स्पष्र् सुनाई िे । (2) अभिनेता को अपने अधिर ववश्वास पैिा करना चादहए। िस ू रों पर ववश्वास करना सीखना चादहए। (3) अभिनेता को बनावर्ी चररत्र से बचना चादहए। (4) िस ू रों के रहन सहन को गौर से िे खना चादहए। (5) बोलते समय पंचए ु शंस ;चनिबजनंजपविे द् का ध्यान रखना चादहए। (6) अभिनेता को सही प्रकिया से सांस लेनी चादहए। अभ्यास - सांस अधिर िरते हुए पेर् फुलाते है । सांस छोड़ते हुए पेर् वपचकाते है । यह सांस लेने की सही प्रकिया है । अथ्कांश लोग गलत प्रकिया के भशकार होते हैं। अभिनेता की प्रकिया सही दिशा वाली होना आवश्यक है ।
थिीक ि की भ िन अभिनेता में स्वीकार करने की िावना होनी चादहए। अस्वीकार शब्ि को जीवन से हर्ा िे ना चादहए। अभिनेता को चोर से िी भमलना चादहए। वेश्या के जीवन को िी समझना चादहए। अभिनेता को सत्य के ्रातल, बजद् पर इन चीज़ो को िे खना चादहए। अभिनेता को ककसी िी चीज को गौर से िे खना चादहए। प्रत्येक व्यम्क्त को ध्यान से सन ु ना चादहए। समाज की पररम्स्िनतयों को समझना चादहए। कोई व्यम्क्त वतटमान म्स्िनत में कैसे पहुाँचा कारण को तलाशना चादहए।
जीविि िहन है आम जीवन में होता है कक लोग जीते हुए िी जी नही रहे होते हैं। अभिनेता को हर समय जीववत अवस्िा में रहना है । उसे अपने अधिर जानने की उत्सुकता कौ पैिा करन है । अपनी दृम्ष्र् को जागत ृ अवस्िा मे ंंरखना है । उिाहरण - आप ज़मीन या कुसी में बैठते हैं तो उसके ताप, बनावर्, उसमे नछपे प्रत्येक तत्व को महसूस करना चादहए। इसी तरह जीवन से जुड़ी प्रत्येक चीज़ का अनुिव करना चादहए। अभिनेता को प्रत्येक समय सजग रहना है ।
िन ि से मक् ु ि िहो अभिनेता को तनाव मुक्त रहना चादहए। ककसी से िी बातचीत बबना तनाव के होनी चादहए।
उिाहरण - ककसी बड़े व्यम्क्त से बात करते समय हृिय की ्ड़कने तीव्र हो जाती है । ऐसे समय में तनाव मुक्त होकर बात करना चादहए। ककसी चीज़ को स्वीकार करना, िावो और ववचारों का प्रिशटन करना अभिनेता का ्मट है । अभिनेता को अभिनय करते समय व्यम्क्तगत िाव के खतरे से साव्ान रहना चादहए।
पहल नेचि औि दस ू ि नेचि पहला नेचर प्रकृनत प्रिि है । यह म्स्िनतयों से उत्पधन होता है । िस ू रे नेचर की तैयारी की जाती है । ककसी चीज़ को आत्मसात करने की िावना से यह नेचर ववकभसत करते हैं। पहले नेचर को ननयंबत्रत करता है िस ू रा नेचर। िस ू रे नेचर को ववकभसत करने के भलए सामाम्जक वगीकरण एवं भशक्षा की यात्रा िे खनी है । सिी लोगों के रहन-सहन का गहन अध्ययन करना है । उिहारण - उच्च से ननभन वगट की ओर आयेंगे तो बोलचाल मे खल ु ापन स्पष्र् दिखाई िे ने लगेगा। उच्च वगट के लोग सभ्यता का िस ू रा नेचर ओढ़ लेते हैं। यह हाँ सेंगे िी तो हलके से। आम आिमी खुलकर हाँ सता है । अभिनेता को समाज की समस्त ववकास यात्रा पर तीक्ष्ण दृम्ष्र् रखनी है । अभिनेता को ककसी नेचर को ओढ़ना नहीं है । उसे सहज रहना हैं। म्स्वच िबाते ही नार्क का पात्र और म्स्वच ऑफ करते ही अच्िा इंसान हो जाना है ।
एक्शन एम्क्र्ं ग में एक्शन नछपा रहता है । एक्शन िो तरह के होते हैं (1)
एक्सर्नटल एक्शन (बाह्य किया)
(2)
इनर्नटल एक्शन (आधतररक किया)
एक्सर्नटल एक्शन दिखाई िे ता है जैसे चेहरे पर गुस्सा, हाि-पैर की गनत, आाँखों का प्रेम, घण ृ ा। इनर्नटल एक्शन में अधिर से िाव की उत्पवि होत ंी। जैसे - स्तब्् होना, गहरा आघात लगना। स्रीम इमोशनल स्र्े ज में एक्सर्नटल एक्शन रूक जाता है । िोनों एक्शन से अभिनय में रोचकता आती है । इनर्नटल एक्शन के बबना एक्सर्नटल एक्शन अच्छा नहीं लगेगा। इनर एक्शन के बबना कफम्जकल एक्शल कधवें भसंग नही लगेगा। अभिनय में िाव और ववचार महत्वपूणट होते हैं। अभिनेता को आधतररक एवं बाह्य एक्शन को ध्यान मे ंंरखते हुए प्रिशटन करना चादहए। अभिनेता की ओर से को जम्स्र्कफकेशन (बचाव के पक्ष रखने का अवसर) नहीं होता है ।
चौिी दीि ि यिाटिवािी नार्कों से चौिी िीवार का भसद्ांत आया है । चौिी िीवार िशटकों को माना गया है । रं गमंच एक कमरा है इसकी चौिी िीवार िशटक हैं। अभिनेता कमरे के अधिर अभिनय कर रहा है ऐसा मानकर यिाटिवािी अभिनय करना चादहए।
थि न के स ि सम्बन्ध अतनि या है । अभ्यास - तुभहारी कल परीक्षा है । तुम कमरे में आए हो। अचानक बबजली चली गई। खखडकी से आं्ी की हवा आ रही है । तुम खखड़की बधि करते हो। इस अभ्यास को एक्शन के साि करना है । आत्म ववश्वास बनाकर रखना है । सहज होना है । कमरे में आने का उदिे श्य याि रखना है । अभिनेता को यह समझना चादहए कक शरू ु आत होने से होती है , बाि में हाने की म्स्िनत होती है । एक्शन के पूवट मंिन जरूरी है । अभिनेता को रं गमंच की वास्तववकता में सत्य का भ्रम पैिा करना पड़ता है । (इमोशन) िाव झूठे नहीं होंगे। अभिनेता को मंच पर अभिनय करते समय अपने सहायक अभिनेता को सुनना चादहए। समय से सुनना आवश्यक है । एक्शन में ररएक्शन समय के अनुसार होना चादहए। एकशन में ररएक्शन उतना ही होना चादहए म्जतना एक्शन प्रिावशाली हो। बबना ररएक्शन के कोई िी एक्शन पूरा नहीं होता है । ’’अपने आपको पररम्स्िनतयों में ढाल िो। आपके साि जो होता है होने िो।’’ अभिनेता को अपने आपको पररम्स्िनतयों में ढाल लेना चादहए तिा सहज होकर रं गमंच में अभिनय करना चादहए। अपने आप में आत्मववश्वासी होना चादहए। इनर एक्शन गभिीर होता है ।
हठ योग अभभनेि में होन च दहए हठ योग से तात्पयट दृढ़ ननश्चय से है । अभिनेता को दृढ़ ननश्चय वाला होना चादहए। स्वतः ने ठान भलया कक इसे पूरा करना है , तो कायट ननम्श्चत पूरा हो जाएगा। स्वतः से ही शरीर महसूस करता है । सत्य को महसूस करते हुए उस पर ववश्वास करो। ;थ्ममसपिह जीम जतनजी ंंिक इमसपमअमद् अभिनेता को सत्य महसूस करना है तिा पररम्स्िनतयों पर ववश्वास करना है । अभिनय करते हुए इस बात का ध्यान अवश्य रखना है । अभिनेता को अभिनय करते समय ननभनभलखखत बातों का ध्यान रखना चादहए (1)
एक्शन में मोदर्व (किया के उदिे श्य) का होना बहुत जरूरी है । मुख्य उदिे श्य पर
ध्यान िे ना चादहए। (2)
प्रत्येक म्स्िनत को अपने अनुकूल बनाना है ।
(3)
प्रत्येक एक्शन पूणट होना चादहए।
उिाहरण - केला खाते समय ककतनी िे र लगती है । इसका ज्ञान अभिनेता को होना चादहए। (4)
शब्िों के पीछे नछप बबजुअल (दृश्य) को महसूस करना चादहए।
उिाहरण- तुम परीक्षा की तैयारी कर रहे हो। इनतहास का कल पेपर है । तभ ु हें अपने सामने रखी ककताब को उठाकर उसमें इनतहास के भलखे शब्िों का (थचत्र) दृश्य बनाते हुए अभिनय करना है । इसी तरह वपता, मााँ, पत्नी और प्रेभमका के पत्र के शब्िों के दृश्य को महसूस करते हुए अभ्यास करना है ।
अपने ददम ग पि बोझ मि ड लो अभिनेता को अपने दिमाग पर बोझ नहीं डालना चादहए। इससे स्विाववक गनत पर व्यव्ान पड़ता है । दिमाग को सहज रखना है । म्अनेता को स्पेस (स्िान) तय करके अभिनय करना चादहए। अच्छे भ्रम के भलए घर्ना का ववस्तत ृ अध्ययन करना चादहए। अध्ययन के पश्चात स्वयं को पररम्स्िनतयों में ढाल लेना चादहए। ककसी िी कहानी को अभिनीत करते समय उसका प्रारम ्ंी, मध्य और अधय स्पष्र् िशटकों तक सभप्रेवषत होना चादहए।
थियां से शुरूआि ऑल्वेज़ आब्जवट सेल्फ - अभिनेता को स्वयं से आब्जवट करना चादहए। अभिनेता को स्वयं से शुरूआत होनी चादहए। (सेल्फ इधवाल्व) स्वयं के शाभमल होने से ही िाव की उत्पवि होगी। ररयल सेल्फ के अलावा कोई िस ू रा (की प्वाइंर्) नहीं है कक उिम िाव की उत्पवि हो।
सांिेदनशील होन अभिनेता को आस-पास की चीज़ों को लेकर संवेिनशील होना चादहए। समाज के बारे में सजग रहना चादहए। उसकी वतटमान के प्रत्येक घर्नािम से जुड़ी हुई म्स्िनत होनी चादहए। उसे समाज का कुशल ज्ञान होना चादहए। संवेिनशील होने पर ही अभिनेता में सहज िाव आते हैं। अभिनेता को आस-पास के लोगों से सामंजस्य बनाकर रखना चादहए। सुख-िख ु का सहिागी होना चादहए।
समय स्थिि औि थि न अभिनेता को समय, म्स्िनत और स्िान का ध्यान रखना चादहए। उिाहरण - पार्ी में आने के भलए तैयार हो रहे हो। यह पार्ी महाप्रबध्क के घर में है । इस अभिनय को करने के पूवट दृश्य को पूवट में दिमाग में बनाना चादहए। समय, म्स्िनत और स्िान को तय कर लेना चादहए। मुख्य उदिे श्य ध्यान में रखना चादहए। समय, म्स्ित और स्िान के अनुसार समस्त बबधि ु स्पष्र् होने चादहए। एक अभिनेता को इतना संवेिनशील एवं बद ु थ्मान होना चादहए कक वह ककसी िी वस्तु को वास्तववक रूप से प्रस्तुत कर सके एवं ववश्लेषण कर सके। अभिनेता लेखक के शब्िों को ननिे शक के माध्यम से िशटको तक सही तरीके से पहुाँचाता है । अतः अभिनेता को सहज एवं सजग रहना चादहए। अभिनेता को हर म्स्िनत को आब्जवट करना है । हर चीज़ को िे खना है , सुनना है और समझना है । एक्शन को आब्जवट करना है । उिाहरण - मोची का बैठा होना, भशक्षक का पढ़ाना, सधतो का रहन-सहन आदि को आब्जवट करना है । अभिनय का अवसर भमलने पर समय, म्स्िनत और स्िान के अनुसार सहज िाव से उपयोग करना चादहए।