मोहब्बत ........ एक तरफा प्यार.......अरे दोस्तों जरा गौर फरमाये मोहब्बत की बात है वो वी एक तरफा मोहब्बत की कहा गया है ''कक हद से ज्यादा कुछ अच्छा नही होता हद से ज्यादा खाना मोटा बना दे ता है , हद से ज्यादा सोना आलसी बना दे ता है , हद से कुछ वी करो नक ु सान होता है वैसे ही हद से ज्यादा मोहब्बत पागल बना दे ती है ।''
इसी प्रकार हद से ज्यादा मोहब्बत करने
बाली एक भोली सी लड़की की कहानी है हाजजर है आपके सामने .......
एक अनजान सी, भोली सी ,प्यार सी लड़की रश्मि अपनी दनु नया िें खुश थी न ककसी की
किक्र न ककसी का दवाव बिलकुल िस्त थी किर अचानक सि िदल गया । कहानी अि शुरू होती है एक ददन एक अजनिी स्कूल िें अजनिी लोगों के िीच गयी वहा उसकी अजनवी वी िोहब्ित
थी । जी हा वहा वो लड़का भी शशक्षा ग्रहण करता था उसका नाि रिन था रिन िहुत ही होशशयार अच्छा ,अच्छे पररवार से था िगर थोड़ा घिंडी था और उस लड़की की अपेक्षा ज्यादा खूिसूरत था । रश्मि भी अच्छे पररवार से और खश ु थी । ऐसे ही ऐसे कुछ वक्त ननकल गया और रश्मि उसे प्यार करने लगी उसकी िुराई िें अच्छी दे खने लगी पर अि तक उसे पता नही था कक वह
िोहब्ित के िंधन िें िंध गयी है । वक्त का पदहया धीरे धीरे आगे जाता रहा और ऐसे ही दो साल गुजर गए िदलते वक्त ने दोनों को अलग कर ददया वो दोनों अलग - अलग स्कूल िें पढने लगे । ति रश्मि को अहसास हुआ की वह रिन से प्यार करने लगी
उसे हर जगह रिन ही ददखता वह उसे ही याद करने लगी ,उसके िारे िें सोचने लगी, उससे
शिलने के शलए तड़पने लगी , और उसे ढूढ़ने लगी । वक्त गुजर रहा था कक एक ददन उसे रिन शिला एक कोचचंग िें जहााँ रिन पढ़ता था रश्मि भी यह सोचकर उसी जगह पढ़ने लगी कक
आखखर इंतजार के पल अि खत्ि होंगे । कुछ वक्त ऐसे ही गुजर गया लेककन आज तक रश्मि ने एक लफ्ज तक िात नही की । वो सोचने लगी की रिन को उसके ददल की िात कैसे ितायी जाये वो कहने से डरती थी । किर एक ददन उसकी िात िेसिुक के जररये हुई । रश्मि ने अपने ददल की िात रिन
से कह दी िगर ति तक दे र हो चुकी थी। रिन ककसी और को पसंद करने लगा था श्जस लड़की
को वो पसन्द करता था वो रश्मि की दोस्त थी । रिन ने कहा कक उस लड़की से िेरी दोस्ती करवा दो रिन ने रश्मि को प्यार का वास्ता दे ददया था किर क्या था रश्मि की आाँखों िें आंसू ऐसे चगरने
लगे जैसे िरसात होने लगी हो। अपने सपनों का गला घोंटकर रिन की श्जंदगी िसाने लगी रिन हिेशा खुश रहे रश्मि अि भी यह चाहती थी इसशलये रश्मि ने जाकर उस लड़की से कहा कक रिन
उसे पसंद करता है िगर उस लड़की की श्जंदगी िें भी कोई और था और ककसी कारण उसे कोचचंग छोड़ने पड़ी तो रिन ने उस लड़की को कोचचंग से जाने की वजह को रश्मि को िाना जो कक सरासर गलत था रश्मि उसे सिझाती उससे चगड़चगड़ाती िगर रिन को कोई िकक नही पड़ा । िश्कक रश्मि को िुरा भला कहता उसका िजाक िनाता उसे गाशलया दे ता उसको अपिाननत करता िगर रश्मि
अि भी उसे ही प्यार करती। रश्मि के चहरे से िुस्कराहट गायि हो गयी वो एक दि से अकेली हो गयी , न खाने पर ध्यान,न सोने पर, न पढ़ाई, पर पररवार पर ,परन्तु उसे दे खने वो रोज कोचचग जाती थी।
ऐसे ही ऐसे 2 साल गुजर गए और वो एक दस ू रे से िहुत दरू हो गए िगर रश्मि का
प्यार कि नही हुआ उसे वो िोन करती िगर रिन वैसे ही िाते करता उसे चोट दे ता िगर न तो रश्मि िदली और न रिन,
किर एक ददन रश्मि के िन िें ख्याल आया कक उसकी श्जंदगी िें कोई और लड़का आ जाये तो शायद वो रिन को भूल जाये । कुछ ददन िाद ऐसा ही हुआ पर रश्मि ककसी दस ू रे को नही अपना सकी । अि तो उसकी श्जंदगी ऐसी हो गयी जैसे कुएं िें पानी न हो जैसे बिना पदहये की गाड़ी ,
उसकी श्जंदगी लाश की तरह हो गयी, श्जन्दा तो है िगर जीने की वजह नही , न ककसी से िोलती, न ककसी के पास जाती ,िस खुद से ही कैद हो कर रही गयी और वहा रिन ककसी दस ू री लड़की के साथ खुश था ।
वक्त गुजरता गया सि िदल गया िगर उसका प्यार नही िदला । अि वो खुश रहने
लगी अपनों के शलए, झूठी िुस्कान तो ले आयी , ददखावे की श्जंदगी तो जीने लगी िगर आज तक भी वो खुश नही है
वो भल ू कर भी रिन को ना भल ु ा सकी । दोस्तों प्यार उससे करो जो आपको को करता हो और कभी हद से ज्यादा प्यार मत करना
नही तो आपकी भी रजमम जैसी हालत होगी, हो सके तो कभी रमन जैसे बेददद इंसान मत बनना कक कोई आपके ललए जान दे मगर आपको फकद न पड़े , आप लोग ऐसी गलती न करे .......।
......एक पापी पुत्र.......
दोस्तों जहा ककसी पत्र ु की िात आती है वहााँ िाता पपता भी जड़ ु े होते है इसी प्रकार एक पापी पुत्र की कहानी है ।
कहानी अि शरू ु होती है । एक सिय की िात है । एक पररवार था श्जसिे एक लकड़ा
रोदहत और उसके िाता पपता रहते थे। रोदहत 12 साल का था जि उसकी िाता इस दनु नया से चली गयी । अि उसके साथ उसका पपता और वो रहता था। रोदहत के पपता रोदहत को िहुत
ज्यादा प्यार करता थे क्योंकक क्योकक वो उसका एक लोता और बिना िााँ का था । उसके पपता
ने रोदहत के शलए िहुत कुछ ककया उसके हर इच्छा परू ी की। अि रोदहत 17 साल का हो गया तो उसके पपता जी ने सोचा की इसकी अच्छी पढ़ाई के शलए िाहर भेजना जरुरी है तो उसके पपता ने उसे ददकली भेज ददया पढ़ने के शलए और वो पड़ कर एक िैंक िें अच्छी पोस्ट पर नोकरी
करने लगा। अि रोदहत 8 साल िाद लौटा अपने पपता के पास । उसके पपता रोदहत को दे खकर
िहुत खुश हुए । कुछ ददन िाद रोदहत ने उसके पपता से कहा कक पपताजी आप ये घर और जिीन िेचकर िेरे साथ ददकली चले । तो उसके पपता राजी हो गए और उसके साथ ददकली चले
गए । कुछ ददनों िाद रोदहत कहने लगा पपता जी हिे कुछ काि से पवदे श जाना पड़ रहा है तो िें ये चाहता हु की आप कुछ ददनो के शलए वद् ृ धा आश्रि िें रह ली श्जये किर िें वहााँ से लौट कर अपने पास िुला लुगा । पपता इसके शलए िी िान गए और रोदहत उन्हें अहिदािाद के एक
ककसी िशु सलि के िद् ु र गए उसके ृ धा आश्रि िें छोड़ आया । और ऐसे ही ऐसे 20 साल गज
पपता उसका रास्ता दे खते दे खते थक गए किर एक ददन रोदहत के पास िद् ृ धा आश्रि से िोन आया की उसके पपता की िौत हो गयी तो आप अहिदािाद आ जाये । रोदहत कुछ घंटों िें
अहिदािाद पहुच गया । और उस िोन िाली औरत से शिला उस औरत का नाि हिीदा िानो था जो की एक िुश्स्लि थी और उस िद् ृ धा आश्रि की िाशलक की पत्नी थी। तो हिीदा जी ने
कहा कक आप अपने पपता का अपने ररवाजो से अश्न्ति संस्कार कर दो । रोदहत िोला नही हि ये नही कर सकते क्योंकक िैंने एक ईसाई धिक की लड़की से सादी कर ली है और ईसाई धिक अपना शलया । हलाकक उस वक्त िरसात का िौसि था । रोदहत के ये िोलने से बिजली
कड़कड़ाने लगी ऐसा लगा रहा था जैसा कोई गुस्से से चचकला रहा था , िरसात होने लगी उस
सिय ऐसा लग रहा था कक स्वयं भगिान रोने लगे जोर जोर से िाररश हो रही थी थोड़ी दे र िाद
िाररश िन्द हो गयी । रोदहत वहााँ से जाने लगा तो हिीदा जी िोली जरा रुको कुछ िात करनी है िगर इससे पहले अश्न्ति संस्कार इनके धिक से करना पड़ेगा । उस वक्त हिीदा जी के पनत
यानन वहााँ के िाशलक कुछ काि से शहर से िाहर गये हुए थे तो वहााँ हिीदा जी और उसका िेटा
था तो हिीदा जी अपने िेटे से रोदहत के पपता का दहन्द ू धिक के रीनत ररिाज से अपने िेटे से
उनका अश्न्ति संस्कार कराया । रोदहत वहााँ िैठा दे खता रहा । हिीदा जी रोदहत के पास आ
कर िैठी और कहने लगी हि अपना और यहााँ िौजद ू 60 लोगो का भपवष्य हिे नही पता िगर
तम् ु हरा भपवष्य जरूर िता सकती हूं रोदहत जोर जोर से हसने लगा और िोला अच्छा तो िताओ । हिीदा जी िोली तुम्हारे ककतनी संतान है । रोदहत हं स कर िोला आप तो िेरा भपवष्य जानती है तो आप ही िताओ तो हिीदा जी िड़े ही प्यार से उसका उत्तर ददया की हि तुम्हारा भपवष्य
जानते है तम् ु हारा वतकिान नही । रोदहत िोला एक िेटा है । हिीदा जी ने कहा कक िड़ा होकर वो अच्छी नोकरी करे गा रोदहत िोल उठा िो िेरे जैसा ही िनेगा । रोदहत ने एक छोटे से शब्दों िें
अपनी िदककस्िती का पररिाण दे ददया । हिीदा जी कहती है जि वो िड़ा होकर नोकरी करे गा
तो वो तुम्हे िद् ृ धा आश्रि िें नही िश्कक घर से धक्के िारकर िाहर ननकलेगया और तुि दर दर की ठाकोर खाओगे । रोदहत गुस्से से उढ़कर िोला ये क्या िक रही हो तो हिीदा जी िोली िक्क नही तुम्हारा भपवष्य िता रही हु और रोदहत ने अपने जेि से 2 लाख रुपय ननकले और हिीदा जी के पास िेके और िोला लो और अपना िुंह िंद करो । रोदहत वहााँ से जाने लगता है तो हिीदा जी कहती है आज जा रहे हो एक ददन िापपस आना है यहां।
ऐसे ही ऐसे वक्त गुजर गया और वो ददन आगया रोदहत के साथ वैसा ही हुआ
जैसे हिीदा जी ने कहा था । रोदहत के आाँखों से आंसू चगरने लगे और वो ददकली से अहिदािाद उसी िद् ू रा लड़का रोदहत के पास आता है और उसे ृ धा आश्रि िें जाता है तो हिीदा जी का दस
एक कलश और एक शलिािा दे ता है और कहता है कक अब्िू और अम्िी खुदा को प्यारे हो गए । रोदहत कहता की तुि हिे कैसे जानते हो तो वो लड़का जिाि दे ता है कक अम्िी ने कहा था एक इंसान आयेगा िटे कपडे पहने हुए होगा और िायस ू होगा उसके चेहरे पर िेिसी होगी तो उसे
दे देना । रोदहत ने कलश और शलिािा शलया और शलिािे को खोला तो उसे 2 लाख रूपए और एक पत्र था । उस पत्र िें शलखा था लो आ गए हिे यकीन था कक तुि जरूर आओगे और उसिें
शलखा था लो अपने पैसे इनकी जरूरत तुम्हे है, हिीदा जी ने शलखा की तम् ु हारे पापो का घड़ा भर गया और िूटने िाला है िगर तुम्हारे घड़े को थोड़ा सहारा ददया जा सकता है । जो कलश
तुम्हारे पास है उसिें तुम्हारे पपता की चचता की शिट्टी है तुम्हारे पपता चाहते थे की तुि उनका अश्न्ति संस्कार करो और उनकी शिट्टी को गंगा िें िहा दो िगर उनका अश्न्ति संस्कार का हक तो खो ददए िगर एक हक है तुम्हारे पास और उसकी एक इच्छा को पूरी कर दो और िेरे
िद् ृ धा आश्रि िें रह सकते हो इतने िें रोदहत रोने लगा बिलखने लगा और अपने आप को कोसने लगा । िगर अि कोसने से कुछ िायदा नही था।
दोस्तों कहा गया कक ''अपने िााँ िाप को जो तूने ननकाला घर से कर शलया है अपने िुकदर को काला तन ू "े । अपने िाता पपता को वो सि दो श्जन्हें उसकी जरूरत है क्योंकक िाता पपता को भगिान िाना गया िाता पपता का अपिान यानन भगिान का अपिान । दोस्तों इंसान की
ककस्ित वो खुद शलखता है इसशलये िाता पपता को कष्ट दे कर अपनी ककस्ित िें ददक न भरे । नही तो रोदहत से िी िरु ी दशा होगी आपकी ।
....िेरा सपना ही िेरी हकीकत है .... हर कहानी िें एक हकीकत छुपी होती है एक ज्ञान छुपा होता है । हर कहानी िें इंसान की सोच
होती है । इसशलए हि अपनी सोच से एक ऐसी कहानी शलख रहे है जो हर एक इंसान की श्जंदगी से जड ु ी है उसका सपना।
चलो इस कहानी का ककरदार हि ही यानन अपपकता पटे ल ही ननभाते है । हिअपने सपने
के ऊपर ही िात करती हूं । िेरा सपना एक लेखका िनाना है िगर घर िाले कहते है ssc कर लो
िैंक िें नोकरी करना , कुछ कहते है आध्यपपका िन जाओ ,परन्तु ककसी ने ये नही सोच की हिे क्या िनना है ,हिे ककस चीज िें ददलचस्पी है , इंसान कह दे ता है ये करो वो करो िगर कभी के
सोचा की वो क्या िनना चाहता है । ऐसे ही कुछ ददनों की िात है कक हि एक शादी िें गये हुए थे । तो वहााँ िेरे एक ररमतेदार का लड़का हिे शिला श्जसका नाि सुशांत था। सुशांत कक्षा 12 िें पड़ता था। हिने सश ु ांत से पछ ु ा की वो 12 के िाद क्या करे गा । सश ु ांत ने उत्तर ददया की पापा
चाहते है कक हि उनकी तरह इंजीननयर िने िगर िेरा सपना नेवी िें जाने का है । हिने सुशांत से पूछा की वो क्या चन े ा इंजीननयर या नेवी । सुशांत का उत्तर था जैसा पापा को पसंद है वैसा ु ग
ही करें गे तो हिने कहा तम् ु हारा सपना उसका क्या तो कहता है वो की पापा नही िानेगे । हिने
उससे कहा कक तुि कभी पापा के साथ होटल जाओगे तो पापा दाल ऑडर करे गे तो तुि पव दाल ही खाओगे तो कहता है की नही हिे पनीर ज्यादा पसंद है हि पनीर िगवायेगे । हिने कहा
पापा पनीर के शलए नही िाने तो उसने कहा कक क्यों नही िानेगे िेरी पसंद है हर कोई अपने िच्चे को उसकी पसन्द ददलाता है । तो किर हिने उसको कहा की वो नेवी के शलए क्यों नही िानेगे।थोड़ी दे र सोचने के िाद उसने कहा कक हिने कहने से डर लगता है । हिने कहा अभी अपने पापा के पास जाओ और उन्हें अपने सपने के िारे िें िताओ वो अपने पापा के पास
जाकर सि िोल दे ता है उसके पापा चोक उढते है उसके सपने की िात सन ु कर नही िश्कक ये िात उसने घर पर क्यों नही की यहााँ शादी िें क्यों ? पापा उससे सिाल करते है कक उसने ये
िात यहााँ क्यों की? सुशांत ने िेरी तरि इशारा करके सि िताया । सुशांत और उनके पापा िेरे
पास आते है और हिे धन्यवाद कहते है तो हि इसका कारण पछ ू ते है ।सश ु ांत के पापा कहते है
कक िेरे िच्चे को सही चीज िताने के शलए हिे इसके नेवी िें जाने से आपपत्त नही िश्कक ख़ुशी है ये उसका सपना है । हिने उनसे कहा कक ये चीजें आपको सिझानी चादहए , उससे पूछना
चादहए की वो ककस चीज िें खश ु है । उन्होंने कहा कक सही कहा ति ु ने गलती िेरी है जो िें उसे उसके सपने से दरू कर रहा था
इसी तरह हि कल के ददन कुछ और िन जाये तो िेरे पास सि होगा घर पैसा गाड़ी और
िहुत कुछ अगर कुछ नही होगा तो वो िेरा सकून िेरा सपना नही होगा । पेसो और दनु नया से ज्यादा हिे सुकून की जरूरत होती है अगर हिारे पास ये नही तो सिझ लो हि िहुत गरीि है । सुकून से ज्यादा इस दनु नया िें कोई िड़ी चीज हो ही नही सकती और वो सुंकुन हिें हिारी काियािी यानन अपने सपने से शिलती है ।
दोस्तों आप लोगो से कहना की सपने पर कायि रहे ककसी के दवाव िें न रहे और
अपने िाता पपता से अपने सपने िें कहे िो कभी आपको िना नही करें गे िश्कक आप का साथ
दें गे । श्जसका सपना साकार होता है वो इंसान सक ु ू न को पा लेता है िान कर चलते है कक आप
अपने सपने को छोड़कर कुछ और करने लगे तो शायद सि होगा आपके पास िगर ददल िें एक खटक सी रहे गी और कहे गे की काश िेरा सपना पूरा हो जाता इसशलए दोस्तों आप लोग अपने िन िें ये खटक न रहने दे और सुकून की श्जंदगी श्जए
प्यार पैसों से नहीं, नसीि से शिलता दोस्तों हर साल दीवाली आती है , होली आती है , रक्षािंधन आता है उसी तरह हर साल
वेलेंटाइन डे आता है । जैसे दीपावली दीपों का त्यौहार होता, होली रं गों का त्यौहार होता
रक्षािंधन भाई िहन के िीच प्रेि का त्यौहार होता। उसी तरह वेलेंटाइन डे प्रेिी- प्रेशिका और
पनत- पत्नी के िीच सम्िन्ध को िजित ू िनाता है । कहने का ितलि है एक दस ू रे के िीच प्यार िढ़ता है । वेलेंटाइन डे प्यार का त्यौहार होता है । दीपावली , होली , रक्षािंधन का त्यौहार कोई भी िना सकता है परं तु वेलेंटाइन डे का शसिक वही आंनद ले सकते है श्जसके ददल िें प्यार हो
,अपने साथी के शलए इज्जत हो । प्यार का ितलि शसिक िाते करना , घि ू ना और शारीररक सम्िन्ध िनाना ही प्यार नही होता ,प्यार तो वो अहसास है जो हर इंसान के नसीि िें नही
होता । प्यार तो वो है जो ककसी के पास न होते हुए भी उसके होने का अहसास ददलाता है । प्यार तो वो है श्जसके शलए इंसान सि छोड़ दे ता है । ककसी के शलए श्जन प्यार होता है । ककसी के िारे िें सोचते रहना प्यार होता । ककसी की किक्र करना प्यार होता । ककसी के सपनो िें डूिे रहना प्यार होता है । प्यार तो हर ककसी को हो जाता है िगर शिलता शसिक नसीि वालों को। श्जस
इंसान की श्जंदगी िें प्यार आ जाये उसकी श्जंदगी खशु शयों से भर जाती उसके चेहरे पर रोनक आ जाती, उसके होठों पर हिेशा िुस्कान होती है । िगर श्जसकी श्जंदगी िें प्यार तो आये
िगर उसे वो न शिल पाए तो ऐसा लगता है कक वो जी रहा है िगर जीने की इच्छा न हो । उसके चेहरे की रौनक गायि हो जाती । वो इंसान हाँसता है तो आाँखों िें आंसू आ जाते है ।
आज कल के लोग प्यार को खेल सा सिझते है आज इससे खेला कल उससे खेल शलया । प्यार का लोग सही ितलि तक नही जानते लेककन प्यार करने के शौकीन है ।अि तो प्यार सच्चे
ददल से नही िश्कक अच्छे चेहरों से होते है । श्जसके ददल िें प्रेि है वो भगवान का वरदान है ।
िगर कुछ लोग प्यार को टाइि पास कहते है । जाँहा तक हिारे ददल का िानना है कक श्जसकी श्जंदगी िें सच्चा प्यार है वो इस दनु नया का खुश नसीि इंसान है । आज कल के जिाने िें
यव ु ाओं को प्यार का भत ू चढ़ने लगा है श्जसे प्यार का अथक तक नही पता वो भी स्वयं को प्रेिी िता रहा। वेलेंटाइन डे को लोग प्यार कि तोहिे ज्यादा ददया करते है । श्जसके पास पैसे
तोहिा नही है वो प्यार नही कर सकता ऐसा लोग कहते है िगर वास्तपवकता यह है कक प्यार पैसे और तोहिों से कभी नही ख़रीदा जा सकता
दोस्तों प्यार कोई खेल नही जो खेल लो, प्यार कोई जाि नही जो पी लो । प्यार तो
हिारी श्जंदगी िें हजारों खुशशयां लाता है । जो इंसान आपसे प्यार करता है उसे सिझो, उसे
खुश रखो प्यार की पपवत्रता िनाये रखो यकीन िाननए आप सच्चे प्रेशियों िें अपना नाि आप भी शि ु ार करा लें गे।
िेरी और उसकी िोहब्ित िोहब्ित उन्हें भी और िोहब्ित हिें भी थी,
िगर हिे उनसे थी और उन्हें ककसी और से थी।
हिें िोहब्ित उनके ददल से थी और उन्हें हसीनाओं के चेहरों से थी,
हिें शसिक िोहब्ित उनसे ही थी और उन्हें िोहब्ित हजारों हसीनाओ से थी। हि उनकी िुस्कराहट दे ख कर ख़ुश थे,
और वो िेरे आाँसू दे खकर भी अनजान थे। हि उनकी िोहब्ित को तरसते थे ,
और वो हिारी िोहब्ित पर िरसते ( चचकलाते) थे। हिें पूरी दनु नया िें शसिक उनसे ही िोहब्ित थी, और उन्हें परू ी दनु नया िें शसिक हिसे नही थी।
हि उनके बिन जी नहीं सकते, और वो हिारे साथ जीना नही चाहते थे। ऐसी थी उनकी और िेरी िोहब्ित , वो हिारे थे नही और हि उनके होकर भी उनके नही हुए।
ये खद ु ा तू िस इतना िता ये खुदा तू िस इतना िता,
वो िेरा था ही नही उसे हिसे शिलाया ही क्यों ? ये खुदा तू िस इतना िता,
वो िेरा था ही नही तो उसे िेरे करीि लाया ही क्यों ? ये खद ु ा तू िस इतना िता,
वो िेरा था ही नही तो उसे िेरी िोहब्ित िनाई ही क्यों ? ये खुदा तू िस इतना िता ,
वो िेरा था ही नही तो उसे शलए हिे रोना आया क्यों? ये खुदा तू िस इतना िता,
वो िेरा था ही नही तो उसकी यादे दी ही क्यों? ये खद ु ा तू िस इतना िता ,
वो िेरे नसीि िें था ही नही तो उसके शलए हिसे दआ ु एं करवायी ही क्यों? हिे जिाि दे खुदा ऐसा िेरा साथ ककया ही क्यों क्यों क्यों ???
दीवाना िना दे
कहती है ये हवाएं िझ ु से क्यों िैठी हो उदास,
आ चल तुझे अपने झोंको िें उड़ा कर दनु नया की सैर कर द।ू कहती है ये नददयााँ िुझसे क्यों िैठी हो उदास , आ चाल तझ ु े अपने लहरो से ऊंचा उठा दे । कहते है घुाँगुरु िुझसे क्यों िैठी हो उदास,
आ चल तुझे किर से आाँगन िें नाचना सीखा दे । कहती है साईकल िझ ु से क्यों िैठी हो उदास ,
आ चल तुझे किर से सड़कों की नाप करना सीख दे ।
कहती है िेरी अलिारी िें रखी डायरी और पेन क्यों िैठी हों उदास , आ चल शलख दे अपने अकिाजो को और
दनु नया को अपना दीवाना िना दे दीवाना िना दे
parasmaniagrawala@gmail.com