Issuu on Google+

MY DREAM ``` By

VK the BOSS


काश के हम बच्चे होते िदिन वो िकतने अच्छे होते जल्दिी सोते, जल्दिी जागते नहा धोकर सब ु ह सबेरे यारो के संग स्कूल को जाते काश के हम बच्चे होते िदिन वो िकतने अच्छे होते ना िचंता, ना परवाह दििु नया की बस मस्ती ही मस्ती होती स्कूल को जाना स्कूल से आना चोरी से औरो की िटिफिफिन का खाना पकडे जाने पर बहाने बनाते काश की हम बच्चे होते िदिन वो िकतने अच्छे होते िकताबो मे अपनी दििु नया होती िहसाबो मे ही हम खोये रहते वो कागज िकस्ती, वो बािरश का पानी


जब नानी सुनती थी पिरयो की कहानी झूठ नहीं सब सच्चे लगते काश के हम बच्चे होते

ऐ अजनबी तू कौन है ......?? क्यो तेरे िलए िदिल बेचैन है .....??? यहाँ – वहाँ चाहे मै दिे खूँ जहाँ हर जगह मझ ु को तू आये नजर तेरे हुश्न का छाया इस कदिर है दििु नया की मै क्या कहूँ, मुझको ना खुदि की खबर है तेरा अहसास मझ् ु कोप दिे ता सक ु ू न है तेरे प्यार प्यार का मुझपर छाया जूनून है चाहत तेरी नशा बन गयी है दिदिर ही मेरी अब दिावा बन गयी है तुझसे है मेरा कोई पुराना िरश्ता क्या है वो, ये तू ही दिे बता जब भी तू नजर आ जाये कहीं थमने लगती है मेरी सांसे वहीँ तझ ु से िमलना और बाते करना चाहता हूँ


अपना तझ ु े बनाना चाहता हूँ तू कौन है क्या नाम तेरा मझ ु से नहीं अब जाता रहा दिे दिे मुझे तू अपना पता ऐ अजनबी तू कौन है ......?? क्यो तेरे िलए िदिल बेचैन है .....???

कैसे मै बतादिं ू कौन है वो.....?? जादि ू िजसने चलाया है नीली-नीली आँखो से िदिल को मेरे चुराया है अदिाओं की उसकी क्या बात कर रहना हर पल उसके साथ चाहूँ है वो लड़की एक अंजनी सी थोड़ी पगली, थोड़ी दिीवानी सी जुल्फि है की जैसे काले बदिल अम्बर के जैसा उसका आँचल िहरनी के जैसे उसकी मतवाली चल आँखे जय हो दिो चमकते िसतारे गल उसके जैसे हो कोई कोमल गुलाब बदिन हो के जसे संगमरमर की मरू त बड़ी प्यारी है उसकी सूरत सच कहता हू नहीं कोई उसका जवाब पलके जब वो झक ु ाती है िदिन ये तब ढल जाता है


सुबह की पहली िकरने करती है इंतजार लेगी अंगडाई वो मचल जाता हू यारो मै नजर आ जाती है जब वो है एक लड़की अंजनी सी थोड़ी पगली, थोड़ी दिीवानी सी

गीली गीली िमटिफटिफी की सोधी-सोधी खुशबू हो िरिझम-िरमिझम सावन की प्यारी-प्यारी बँदि ु े हो दिरू तलकतो तन्हाई और साथ मेरे बस तम ु हो होश ना हो हमे दििु नयां की बस एक दिज ू े मे हम गम हो गीली-गीली िमट्टी की सोधी-सोधी खुशबू हो िरमिझ-िरमिझम सावन की प्यारी-प्यारी बँदि ु े हो आज िफिर ये सावन है आया बूंदिो के बाण चलाया है िरमिझम-िरमिझम बष र के साथ तेरी यादिो का झोका लाया है आज भी है वो सन ु ी सड़के बस साथ नहीं है तेरा साया भींग रहा है तन मेरा और िदिलने आवाज लगाया है


गीली-गीली िमट्टी की सोधी-सोधी खुशबू हो िरमिझम-िरमिझम सावन की प्यारी-प्यारी बँदि ू े हो दिरू तलक हो तन्हाई और हांथो मे हाँथ तेरा हो

नींदि िकसे आती है और चैन कहाँ िमलता है जब प्यार िकसी से होता है आता नहीं िफिर कुछ और नजर हर पल िनगाहो मे चेहरा सनम का होता है नींदि िकसे आती है और चैन कहाँ िमलता है जब प्यार िकसी से होता है क्या करँ मै अगर िदिल मेरा बेचैन है हटिफता नहीं एक पल को तेरे रस्ते से ये नैन है नींदि िकसे आती है और चैन कहाँ िमलता है जब प्यार िकसी से होता है खोया रहता है िदिल यार की बातो मे करवटिफे बदिलता रहता हू तन्हा रातो मे तन ु े मझ ु पर ये कैसा जादि ू िकया खो गया है ना जाने कहाँ मेरा िजया आता नहीं नजर कुछ भी तेरे िशवा ओ मेरे सनम, कर मझ ु पे इतना करम लौटिफा दिे मेरा सुख-चैन नींदि िकसे आती है और चैन कहाँ िमलता है


जब प्यार िकसी से होता है हर पल िनगाहो मे चेहरा सनम का होता है

प्यार प्यार प्यार प्यार तम ु से हो गया प्यार प्यार प्यार प्यार तुम से हो गया प्यार हो गया, मेरा िदिल कहीं खो गया यार यार यार यार तुम सा िमल गया यार यार यार यार तुम सा िमल गया प्यार हो गया मझ ु े यार िमल गया प्यार हो गया गया जब से, मेरी िजंदिगी संवर गयी िजंदिगी संवर गयी, मझ ु े हर खश ु ी िमल गयी साथी िमला जो तम ु सा, मेरी िजंदिगी बदिल गयी आ वादिा करे िमल के ना होगे जुदिा कभी साथ िनभाएंगे हम हम साडी िजंदिगी चाहे खश ु ी हो या हो गम की घडी दिे खा जब से तझ ु को ये बेकरार हो गया प्यार प्यार प्यार प्यार तुम से हो गया यार यार यार यार तुम सा िमल गया हांथो मे हाँथ हो, तू मेरे साथ हो िफिर दििु नया की प्रवािह क्या...?? बांहो मे तेरी दििु नया है मेरी िदिल मे तेरे मेरा िठकाना रहे गे हम साथ चाहे कुछ भी करले जमाना


क्योिक................. प्यार प्यार प्यार प्यार तुम से हो गया यार यार यार यार तम ु सा िमल गया

यादिो के सफिर मे चलते है यादिो के सहारे जीते है आँखो से िनकले आंसओ ु ं को पानी समझ कर पीते है रहता हूँ भले ही मै कहीं तेरी यादिे ही साथ होती है तन्हाईओं अकसर आँखे मेरी रोतीं है तेरी यादिे ही तो मेरे जीवन की ज्योित है यादिे ........ यादिे ....... यादिे ....... ये यादिे ......!!! यादि आते है िदिन वो गुजरे थे साथ हमने जो िमलते थे हम िजस तरह िखलते फिूलो की तरह तेरी यादिे ही तो है मेरे जीने की वजह यादिो से तेरी िमलती है कभी खुशी तो गम कभी यादिो से आती है हं सी कभी तो होती है आँखे नम भी है कैसे बताये हम तझ ु े तेरे िबना कैसे जीते है आँखो से िनकले आंसुओं को


पानी समझ कर पीते है यादिो के सफिर मे चलते है यादिो के सहारे जीते है यादिे ........ यादिे ....... यादिे ....... ये यादिे ......!!! यादिो मे आते है िदिन वो जो सुहाने होते थे साथ मे जब हम हँसते थे कन्धो पर सर रख कर रोते थे यादि कर बीती बातो को साडी साडी जागते है आँखो से िनकले आंसुओं को पानी समझ कर पीते है यादिो के सफिर मे चलते है यादिो के सहारे जीते है यादिे ........ यादिे ....... यादिे ....... ये यादिे .......!!!

कमबख्त िदिल न जाने क्या कर बैठता है िजसे पाना हो मुिश्कल उसी पर मर िमटिफता है हस्ती भुला कर ये अपनी िकसी को दििु नया बना लेता है सपनो मे अपने उसी को सजा लेता है यादिो को उसकी अपनी पलको मे बसा लेता है आँखो को उसकी आइना बना लेता है


हाँथ बाधा कर ये चंदि को तोडना चाहता है जो हो नामुमिकन ये वही करना चाहता है ख्वाब दिे खता है जो परू ा ही ना हो कमबख्त िदिल ना जाने क्या कर बैठता है

िदिल की है ये आरजू की तझ ु को मै पा सकँू आत जो मेरे मन मे है , वो तझ ु को मै बता सकूँ रहूँ मै पास तेरे या तुझसे दिरू रहूँ बस हर पल मै तेरे यादिो के साथ रहूँ िजंदिगी है एक सफिर हं सके इसको काटिफ लँ ू चाहे सख ु -दिःु ख जो िमले तेरे संग मै बाँटिफ लँ ू तू जो साथ चले तो हर ठोकर को मै सहूँ तू जो साथ दिे तो हर मस ु ीबत से मै लडूं तेरे ही सहारे मै िजंदिगी गज ु र दिँ ू जीतन तम ु ने सोचा न हो कभी उतना मै तझ ु े प्यार दिँ ू तेरी एक मुस्कान पर मै अपनी हं सी वार दिँ ू तेरी खुिशयो ले खाितर अपना जीवन वार दिँ ू िदिल की है ये आरजू की तझ ु को मै पा सकूँ बात जो मेरे मन मे है वो तुझको मै बता सकूँ


िदिल की है ये आरजू की तझ ु को मै पा सकूँ

कैसे भल ू पाउँ गा उन बीते िदिनो को बीते िदिनो को उन गुजरे पलो को पल जो सह ु ाने थे, वो गुजरे ज़माने है जो कैसे भल ू पाउँ गा उन बीते िदिनो को बीते िदिनो को उन गुजरे पलो को िदिन वो भरे थे िजनमे मस्ती हर पल िजनमे िमलती थी बस खश ु ी िमलते थे जभी हू आप कभी िबखरती थी बस हं सी ही हं सी िफिर क्यो छाई है आज ये उदिासी कैसे लौटिफा पाउँ गा मै उन मस् ु कुराहटिफो को कैसे भल ू पाउँ गा उन बीते िदिनो को बीते िदिनो को उन गुजरे पलो को यादि आते है वो मस्ती भरे िदिन मस्ती भरे िदिन वो शरत भरी राते वो तेरी बाते , वो तेरी यादिे वो तेरा मस् ु कुराना, वो तेरा चलना वो हं स-हं स कर तेरा बाते करना वो रठ कर तेरा खदि ु मान जाना कैसे भल ू पाऊंगा तेरी आँखो के काितलाना अदिाओं को


कैसे भल ू पाउँ गा उन बीते िदिनो को बीते िदिनो को उन गुजरे पलो को

पागल हुआ दिीवाना, खुदि से हुआ बेगाना पागल हुआ दिीवाना, खदि ु स��� हुआ बेगाना खोया रहता है तेरी यादिो मे हर पल मेरे ही बस मे नहीं है मेरा िदिल इसको ढूंढूं मै कहाँ........ पागल हुआ दिीवान, खुदि से हुआ अंजना पागल हुआ दिीवान, खदि ु से हुआ अंजना ना कोई महिफ़िल, ना इसकी है कोई मंिजल भटिफकता रहता है हर पल ना कोई ठौर, ना इसका कोई िठकाना ये तो हो गया दिे खो कैसा बेगाना साडी-साडी रात ये जागे सपनो के पीछे ये भागे नींदि भी आती नहीं और चैन भी आता है कहाँ पागल हुआ दिीवाना, खुदि से हुआ बेगाना पागल हुआ दिीवाना, खदि ु से हुआ बेगाना खोया रहता है तेरी यादिो मे हर पल मेरे ही बस मे नहीं है मेरा िदिल इसको ढूंढूं मै कहाँ........


हर कोई है अकेला, हर कोई है तन्हा िफिर भी कहते है दििु नया है मेला मेले के जैसी है रं गीिनयाँ िफिर भी हर िदिल मे छाई क्यो है तन्हाइयां िजंदिगी से अपने है सभी खफिा िजसको दिे खो वही है परे शां यहाँ हर कोई है अकेला, हर कोई है तन्हा िफिर भी कहते है दििु नया है मेला िकसी को है यहाँ प्यार का तो छाया है िकसी पर दिौलत का नशा जीने को तो जी रहे सभी पर िजन्दिा है कोई कहाँ....... िकस पर करँ भरोसा कौन है अपना यहाँ साथ दिे हर कदिम पे सफिर मे साथी कोई अब ऐसा नहीं करके खून मेरे ऐतबार का मना रहे है खुिशयाँ, घर जला कर अपने ही यार का मतलबी हो गया हर कोई यहाँ िकसी से िकसी को अब लेना है क्या.....?? हर कोई है अकेला, हर कोई है तन्हा


िफिर भी कहते है दििु नया है मेला

यादि यादि यादि तेरी यादि आती है जान जान जान मेरी जान जाती है तेरी यादिो मे है ये कैसा जादि ू कर जाती है ये मझ ु को बेकाबू यादि तेरी मुझको बेकाबू यादि तेरी मझ ु को तडपाती है साथ मे िबताया एक-एक पल यादि िदिलाती है सूखे पड़े चाय की प्याली िदिलाती है यादि तेरे होठो की लाली आती है जब यादि आँखे तेरी काली-काली जान मेरी ले जाती है यादि यादि यादि तेरी यादि आती है जान जान जान मेरी जान जाती है जब से हम दिरू हुए कैसे बताये िकतने मजबूर हुए तेरे िमलने को हर पल तरसते है आँखो से मेरे आंसू बरसते है ऐ खदि ु ा कर रहम, तड़पे है बहुत हम ये दििू रयां िमटिफा दिे , मझ ु े मेरे यार से िमलादिे सूखे हुए फिूलो को िफिर से िखलादिे उजड़े चमन को िफिरसे बसा दिे सख ू े हुए फिूल िकसी को रास आती नहीं


यादि यादि यादि तेरी यादि आती है जान जान जान मेरी जान जाती है

माँ मुझको भी बन्दिक ु मंगा दिो मै भी लड़ने जाऊंगा दिे श की सेवा मे अपना तन-मन लटिफ ु ाऊंगा दिे श के दिश्ु मन गद्दारो को अत्याचार और भ्रस्ताचारो को चुन-चुन कर िमटिफाऊंगा जब तक है साँस इस तन मे मेरे दिे श की शरहदि को कोई छू नही सकता उठी जो नजर कोई बंदि सदिा के िलए हो जायेगा बढ़ी जो इस तरफि हाँथ कोई धर अलग कटिफ िगराऊंगा माँ मझ ु को भी बन्दिक ु मंगा दिो मै भी लड़ने जाऊंगा मै एक अकेला, दिश ु मन चाहे हो हजार सबको मर भगाउं गा बढूंगा मै केवल आगे बढूंगा पीछे कदिम न हटिफाऊंगा मात्रभूिम की रक्षा मे चाहे हो जाऊं मै कुबारन िफिर भी घटिफने न दिँ ग ू ा ितरं गे की मै शान माँ मुझको भी बन्दिक ु मंगा दिो


मै भी लड़ने जाऊंगा दिे श की सेवा मे अपना सवर-वस्त्र लुटिफाऊंगा

िलख रहा हूँ खत उसे अरमानो के कलम से कैसे मै बताऊँ हाल-ए-िदिल अपना उस पत्थर िदिल सनम से कोई मुझे बता दिे – २ उसे तो खबर ही ही नहीं है तड़प रहा हू चाहत मे उसके कब से, कोई उसे बता दिे िलख रहा हूँ खत उसे अरमानो के कलम से कैसे मै बताऊँ हाल-ए-िदिल अपना उस पत्थर िदिल सनम से दिे खा है मैने जब से, हो गया हूँ दिीवाना उसके खाितर है , ये मेरा जीवन सारा उसके िलए है छोड़ा, मैने ये जहाँ दिरू चली गयी वो मुझसे रुथ कर जाने कहाँ िफिरता हू खोज मे उसके मेरा मै यहाँ से वहाँ ढूढू अब मै उसको कैसे....?? कोई मुझसे बता दिे उसे तो खबर ही नहीं है तड़प रहा हू चाहत मे उसके मै कब से जीना हुआ है अब मुिश्कल, कोई उसे बता दिे िलखा रहा हूँ कहत उसे अरमानो के कलम से कैसे मै बताऊँ हाल-ए-िदिल अपना उस पत्थर िदिल सनम से कोई मुझे बता दिे ...............


Jindagi ek paheli hai Kabhi dushaman, kabhi saheli hai Kabhi hai mela to kabhi tanhai hai Kabhi hai dukho ki bharmar To hai kabhi khushiya apar Jindagi to ek imtehan hai Koi paas huaa to koi fail yaaro Jindagi to hai ek khel yaaro Kabhi hai haar to kabhi jeet yaaro Jindgi jaisa nahi koi meet yaaro Kabhi apno se dur kar deti hai Kabhi sapno ko chur kar deti hai Har kisi ko majbur kar deti hai Jindagi kabhi Milan to kabhi judai hai Jindagi kabhi apni to kabhi parayi hai Jindagi ek paheli hai Kabhi dushaman, kabhi saheli hai Ye to bewafa hai, iska kabhi tum aitbar na karna Is jindagi se kabhi tum pyar na karna Kabhi sawan hai to kabhi patjhad ka mausam Kabhi rasta to kabhi hai ye humdum har pal, har kshan leti rup badal jindagi kabhi hai gahra jakhm jindagi kabhi ban jaye khud marham jindagi kabhi haiye kasto ke kante to kabhi ban jaye MAA ka aanchal nahi jan saka isko koi nahi pahachan saka koi kya hai ye jindagi Jindagi ek paheli hai Kabhi dushaman, kabhi saheli hai


Thak jata hu din bhar kaam karte karte So lete kuch pal god men tere, paas tu mere hoti Bhook bhi ab lagti nahi, khud hanth jalate jalate Kahte apne hantho se tu do niwale khila de, paas jo tu mere hoti Ro padta hu hasne ki koshish karte karte Muskura lete shararat karke, paas jo tu mere hoti Kho na jau duniya ki bhid me, yu akele chalte chalte Tham ke haath tera kahte Maa mujhko tu raah dikha de Hu bahut dur tujhse , koi nahi apna yaha sab hai begane Lagta nahi ek pal dil yaha, Maa mujhko apne paas bulale Paas bulale mujhe seene se lagale Seene se lagale mujhe aanchal me chhupa le Maa mujhko apne paas bulale


तेरा प्यार िदिल से भुलाया न जायेगा,

िकसी और से िदिल लगाया न जायेगा, तुम तो बसे हो मेरे ख्यालो मे ऐसे,

धडकता है िदिल िसने मे जैसे.......... अपने धड़कन को कोई कैसे रोक पायेगा..........?????? तेरा प्यार िदिल से भल ु ाया न जायेगा,

िकसी और से िदिल लगाया न जायेगा, मेरी िजन्दिगी मे तम ु आये हो ऐसे,

बहारो ने किलयाँ िखलाया हो जैसे, िखलती किलयो को कोई कैसे तोड़ पायेगा.......?????? तेरा प्यार िदिल से भुलाया न जायेगा,

िकसी और से िदिल लगाया न जायेगा, आदित सी हो गयी है इन हाथो को अब तो तेरे हाथ का सहारा है मुझे अब तेरे साथ का,

तन्हा ये िजंदिगी अब िबताया न जायेगा, तेरा प्यार िदिल से भुलाया न जायेगा,

िकसी और से िदिल लगाया न जायेगा,


Mera Gaanw

yaad aata hai mera bachpan........ aad aate hai wo jiwan......... haryali hi haryali hoti thi charo tarf........... un kheto me hi basa hai abhi bi mera man..... jab kheto me hal chala karte the .................. hum pichhe piche daura karte the.................. MAA-BABA bij the bote............. hum mitti ke gharaunde naya karte the.......... jab se hum pardesh me aaye.............. sapna ban gaya wo manjar............... yaad aata hai mera bachpan............. bagho me jab bhi jaana.......... dusro ke bagh se aan churana........... khud ke bagh se kuchh na lana.......... kabhi bach ke nikal jate to......... kabhi pakde bhi hum jate the.......... rone ka jhutha bahana karna............. ye sab lagta hai an sapna................ kitana pyara tha tha gaw wo apna.........


My Dream