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वर्ष-1 | अंक-47 | 06 - 12 नवंबर 2017

आरएनआई नंबर-DELHIN/2016/71597

sulabhswachhbharat.com

06 सम्मान

स्वच्छता का सुलभ धाम डॉ. पाठक ‘कर्मवीर’ पुरस्कार से सम्मानित

12 जेंडर

पिंक आर्मी

16 ज्ञानपीठ पुरस्कार

महिला स्वास्थ्य की देखभाल में जुटी हैं आशा सेविकाएं

सोबती को सम्मान

53वां ज्ञानपीठ पुरस्कार कृष्णा सोबती को देने की घोषणा

सबको शिक्षा अच्छी शिक्षा राष्ट्रीय शिक्षा दिवस (11 नवंबर) पर विशेष

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास के बूते ही नरेंद्र मोदी सरकार ‘न्यू इंडिया’ के सपने को साकार करना चाहती है, लिहाजा जिन क्षेत्रों में विकास और सुधार पर सबसे ज्यादा जोर है, उसमें तालीम का क्षेत्र अव्वल है

सं

एसएसबी ब्यूरो

सद में पहली बार प्रवेश से पहले उसकी देहरी पर अफना मत्था नवाने वाले नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की यह खासियत रही है कि वह अपने कार्य-प्रदर्शन में सुधार के लिए लगातार आत्ममंथन करती रहती है। यह आत्ममंथन मंत्रालयों से लेकर सरकारी महकमों के कामकाज को लेकर प्रधानमंत्री मोदी खुद करते हैं। ऐसा करते हुए प्रधानमंत्री का जिन कुछ

मुद्दों पर विशेष जोर रहा है, उसमें, स्वच्छता, कौशल विकास और कृषक अर्थव्यवस्था में सुधार के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मुद्दा शामिल रहा है। बात अकेले मानव संसाधन मंत्रालय की करें तो बीते तीन साल से ज्यादा के कार्यकाल में उसकी तरफ से कई अहम कदम उठाए गए हैं। जब मोदी सरकार सत्ता में आई तो इसी बात को ध्यान में रखकर ‘सबको शिक्षा,अच्छी शिक्षा’ के संकल्प को लेकर अपनी योजनाओं को कार्यरूप देना शुरू किया। इस दौरान लगातार मानव विकास की हर

नीतियों और योजनाओं में देश की आवश्यकताओं को देखते हुए संसाधन जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री इस बात को बखूबी समझते हैं कि एक राष्ट्र की पहचान वहां रहने वाले मानव शक्ति से होती है। लिहाजा अगर मानव शक्ति को गुणवान बनाया जाए तभी देश में वो बदलाव आ सकता है जिससे ‘न्यू इंडिया’ का सपना साकार हो सकता है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ‘सबको शिक्षा,अच्छी शिक्षा’ के संकल्प को पूरा करने के लिए तीन मूल मंत्र


02 आवरण कथा

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लेकर के अपनी योजनाओं को मूर्तरूप दे रहा हैजनमानस: 125 करोड़ मानव शक्ति देश के सबसे प्रमुख संसाधन हैं। उनके संपूर्ण विकास के लिए जितनी भी आवश्यकताएं हैं उनमें शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। नीतियां एवं योजनाएं: मोदी सरकार ने मानव संसाधन विकास के लिए जितनी भी नीतियां या योजनाएं तैयार की हैं वो सभी व्यक्ति और राष्ट्र के निर्माण पर केंद्रित है। सरकार मानती है कि ये तभी संभव है जब देश की शिक्षा-व्यवस्था बेहतर और सुदृढ़ हो। डिजिटल क्रांति: डिजिटल क्रांति के युग में दुनिया की चौहद्दी बहुत सिमट गई है। अगर हमने विश्व के बदलते परिवेश के साथ अपने आपको तैयार नहीं किया, तो हमारी वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों को बड़ी मार झेलनी पड़ेगी। ये तभी संभव है जब हमारी शिक्षा प्रणाली गुणवत्ता से भरी हो, वो प्रतियोगी विश्व का सामना करने में सक्षम हो। इसके लिए ये बहुत आवश्यक है कि हम डिजिटल तकनीक को आत्मसात कर लें, जिसकी आवश्यकता शिक्षा की शुरुआती स्तर से ही महसूस की जाने लगी है।

स्कूली शिक्षा का कायाकल्प

केंद्र सरकार स्कूलों, छात्रों, आध्यापकों और स्कूल प्रबंधन का डिजटलीकरण करके उनकी गुणवत्ता में सुधार लाने की ओर जोर-शोर से प्रयासत है। इस दिशा में जो बेहतरीन कार्य किए जा रहे हैं, वो इस प्रकार हैंआधार और ई-संपर्क: 30 नवंबर 2016 तक 5 से 18 वर्ष की उम्र के 24,49,20,190 बच्चों को आधार से जोड़ दिया गया था, जो उनकी कुल जनसंख्या का लगभग 70 प्रतिशत है। इसी तरह 50,077, 29 शिक्षकों से संबंधित आंकड़ो को ई-संपर्क पोर्टल से

एक नजर

2015-16 में 19.67 करोड़ बच्चे प्राइमरी स्कूलों में पढ़ रहे हैं

स्कूलों को ज्यॉग्राफिक इंफार्मेशन सिस्टम से जोड़ा गया है

50,077, 29 शिक्षकों से संबंधित आंकड़े ई-संपर्क पोर्टल पर उपलब्ध

जोड़ दिया गया है। जीआईएस मैपिंग: स्कूलों को ज्यॉग्राफिक इंफार्मेशन सिस्टम से जोड़ दिया गया है। इससे किसी भी बस्ती से एक उचित दूरी पर स्कूलों की कमी को पूरा करने में आसानी हुई है। इस प्रकार देश के सभी स्कूलों के आंकड़े और जानकारी अब उपलब्ध हैं। इससे जमीनी स्तर पर चल रही योजनाओं और उस पर होने वाले धन खर्च की जानकारी मिल सकती है। स्कूलों में शौचालय: प्रधानमंत्री ने लाल किले से अपने पहले संबोधन में 15 अगस्त 2014 को हर स्कूलों में बालक –बालिकाओं के लिए अलग से एक साल के अंदर शौचालय बनाने का वादा किया था। ये काम पूरा कर लिया गया है। ई- पाठशाला: दोषरहित अध्ययन सामाग्री को उपलब्ध कराने के लिए ई-पाठशाला शुरू की गई है, जहां सभी पुस्तकें और अन्य अध्ययन सामाग्री उपलब्ध हैं। शाला दर्पण: स्कूलों के कारगर प्रशासन व्यवस्था के लिए शाला दर्पण के तहत उन्हें स्कूल मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ा गया है। 5 जून 2015 को 1099 केंद्रीय विद्यालयों से इसकी शुरुआत हुई।

मिड डे मिल स्कीम

वर्ष

बजट अनुमान

2012-13 11,937 2013-14 13,215 2014-15 13,215 2015-16 9,236.40 2016-17 9,700 *सितंबर 2015 तक

निधि जारी

(रुपए करोड़ में)

लागत

30 नवंबर 2016 तक 5 से 18 वर्ष की उम्र के 24,49,20,190 बच्चों को आधार से जोड़ दिया गया था, जो उनकी कुल जनसंख्या का लगभग 70 प्रतिशत है शाला सिध्दि योजना: स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए 7 नवंबर 2015 से शाला सिध्दि योजना को शुरु की गई है। इस पोर्टल पर सभी स्कूल निर्धारित सात मापदंडों के आधार पर स्वंय का मूल्याकंन करते हैं, जो सभी के लिए उपलब्ध होता है। मिड डे मील: मोदी सरकार ने मिड डे मील में होने वाली गड़बड़ियों को ई पोर्टल और आधार नबंर की मदद से काफी हद तक कम कर दिया है। इसके लिए बजट से होने वाले धन आवंटन को वास्तविकता पर आधारित करने का प्रयास किया गया है। मानव संसाधन मंत्रालय के अनुसार आधार के चलते फर्जी नामों कमी आई है। शुरुआती आंकड़ो के अनुसार झारखंड और आंध्र प्रदेश से ऐसे 4 लाख फर्जी नाम हटा दिए गए हैं। इससे सरकारी खजाने का बोझ बहुत कम हुआ है। विज्ञान एवं अंकगणित: बदलते समय में विज्ञान और गणित की प्रमुख भूमिका को देखते हुए सरकार ने इसमें अपेक्षित बदलाव किया है। अब सभी राज्यों के बोर्ड में एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पर आधारित शिक्षा ही दी जायेगी। शगुन: केंद्र सरकार प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों और प्रगति से छात्रों और शिक्षकों को जोड़ने की कोशिशों में जुटी हुई है। इस को देखते हुए सर्व शिक्षा अभियान के लिए एक समर्पित वेब पोर्टल ‘शगुन’का शुभारंभ किया गया है।

2009-10 के 83.53 प्रतिशत से बढ़कर 2015-16 में 90.14 प्रतिशत हो गया है। यही नहीं, अब केंद्रीय विद्यालयों के लिए ऑनलाइन दाखिला फॉर्म की शुरुआत भी कर दी गई है। इस दौरान शिक्षक-छात्र का अनुपात भी बेहतर हुआ है। 2009-10 में 32 छात्रों पर एक शिक्षक थे, वह अनुपात 2015-16 में 24 छात्रों पर एक शिक्षक तक आ गया है। इसके अलावा रिक्त् पदों को भरने के लिए लगभग 6,000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

नई शिक्षा नीति

सरकार ने समय की आवश्यकता को देखते हुए शिक्षा नीति में बदलाव का फैसला किया है। इसके लिए बड़े पैमाने पर विशेषज्ञों, अध्यापकों, नीति निर्माताओं, सांसद और विधायकों से सुझाव मांगे गए हैं। आम नागरिकों से भी ऑनलाइन राय मांगी गई है। इन सभी सुझावों पर सरकार अंतिम रूप से विचार करने के बाद जल्द ही देश के सामने एक नई शिक्षा नीति लेकर आएगी।

राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की एक महत्वाकांक्षी योजना है- राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (आरयूएसए)। इसके तहत राज्यों के उच्चतर शिक्षण संस्थाओं की गुणवत्ता के स्तर को बढ़ाने की कोशिश हो रही है। आरयूएसए के मानदंडों को पूरा करने पर राज्य की शिक्षण संस्थाओं को विशेष वित्तीय सुविधा और योजनाऐं दी जाती हैं। इस अभियान की सभी जानकारियों को ऑनलाइन या ऐप के माध्यम से सभी स्तर पर निगरानी रखी जा रही है।

10,867.90 10,196.90 स्कूली छात्रों की संख्या बढ़ी केंद्र सकार के प्रभावी नीतियों के चलते 6-13 वर्ष 10,927.20 10,873.70 की उम्र के अधिक से अधिक बच्चे स्कूल जाने लगे 10,526.90 11,316.20 हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक इस वर्ग में 20.78 करोड़ बच्चे हैं। यू-डीआईएसई के अनुसार राष्ट्रीय समीक्षा 9,151.50 11,316.20* 2015-16 में 19.67 करोड़ बच्चे देश के 14.49 नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडेशन काउंसिल (नैक) 2,215 लाख प्राइमरी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। प्राइमरी से मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत ये सर्वोच्च स्रोतः मानव संसाधन मंत्रालय हाइयर प्राइमरी में प्रवेश लेने वाले बच्चों का औसत संस्था है, जो देश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों


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सुधरेगा विश्वविद्यालयाें का स्तर

आवरण कथा

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देश की उच्च शिक्षण संस्थाओं में गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए 2016 से नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया है

देश के दस प्राइवेट और दस पब्लिक यूनिवर्सिटी को वर्ल्ड क्लास बनाने के लिए सरकार नई योजना लाएगी

टना विश्वविद्यालय के शताब्दी दिवस समारोह में शिरकत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा एेलान किया। उन्होंने कहा कि पटना यूनिवर्सिटी को केद्रीय विश्वविद्यालय से भी आगे ले जाना है, इसे चुनिंदा 20 विश्वविद्यालयों में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के दस प्राइवेट और दस पब्लिक यूनिवर्सिटी को वर्ल्ड क्लास बनाने के लिए सरकार एक योजना लाएगी। इन विश्वविद्यालयों को सरकार के बंधन से मुक्ति दी जाएगी। इन विश्वविद्यालयों को अगले पांच सालों में दस हज़ार करोड़ रूपये आवंटित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री ने इस योजना का स्वरूप स्पष्ट करते हुए कहा कि इन विश्वविद्यालयों को चैलेंज के रूप में सामने आना होगा और अपना सामर्थ्य दिखाना होगा। इनका विभिन्न पैमानों पर चुनाव किया जाएगा। मोदी ने इसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी से भी आगे की सोच बताया।

शि

और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पीयू को इसमें आगे आना होगा। भाषण में मोदी ने बिहार और पटना यूनिवर्सिटी की जमकर तारीफ की । इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले की पीढ़ी सांप से खेलती थी, आज की नई पीढ़ी माउस से खेलती है। पीएम ने सबसे दिमाग को खाली करने और उसे खोलने की अपील करते हुए कहा कि आज इनोवेशन को बढ़ावा देने की जरूरत है आज भारत स्टार्टअप की दुनिया में चौथे पायदान पर है। हमारे देश में सपनों को पूरा करने की ताकत है। पीएम ने तकनीकी शिक्षा पर जोर देते हुए सभी विश्वविद्यालयों से आह्वान किया कि तकनीकी शिक्षा पर जोर दें, तकनीक के माध्यम से बड़ी समस्याएं भी सुलझाई जा सकती हैं। शिक्षा की गति धीमी है, इसे तेज करना जरूरी है। हमारा हिंदुस्तान जवान है। देश के सपने जवान हैं, इसे पूरा करने के लिए सबको आगे आने की जरूरत है।

शिक्षा का अधिकार कानून का दायरा बढ़ेगा

क्षा का अधिकार कानून के तहत सरकार की योजना पहली से आठवीं से बढ़ा कर दसवीं कक्षा तक करने की तैयारी है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर के मुताबिक शिक्षा का अधिकार कानून अब तक कारगर रहा है, लेकिन केंद्र सरकार इसके दायरे

को बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। अभी इस कानून के तहत आठवीं तक की शिक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सरकार पर है। पर अब सरकार इस बात के लिए तैयार है कि वह इस दायरे को कम से कम दसवीं कक्षा तक बढ़ाए।

का मूल्याकंन करती है। पहले मूल्याकंन के लिए नैक अपनी टीम भेजता था, जो मौके पर मानदंडों को परखते थे। इसमें भ्रष्टाचार का बोलबाल था। इसको खत्म करके मोदी सरकार ने आत्म मूल्यांकन की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है।

रैंकिंग सिस्टम

देश की उच्च शिक्षण संस्थाओं में गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए 2016 से नई रैंकिग सिस्टम के तौर नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया है। इस रैंकिंग सिस्टम में देश के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता के निर्धारित मानदंडों के आधार पर रैंकिग की जाती है। भारत रैंकिंग-2017 में कुल 2,995 संस्थानों ने भाग लिया। इसके अंतर्गत 232 विश्वविद्यालय, 1024 प्रौद्योगिकी संस्थान, 546 प्रबंधन संस्थान, 318 फार्मेसी संस्थान तथा 637 सामान्य स्नातक महाविद्यालय शामिल हैं।

उन्नत भारत अभियान

मानव संसाधन विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय ने मिलकर इस योजना की शुरुआत की है। इस योजना का शुभारंभ 12 जनवरी 2017 को हुआ। इसके अंतर्गत उच्चतर शिक्षण संस्थाएं चुने हुए नगर निकायों और गांवों के समूहों को विकास कार्यो की योजना बनाने और लागू करने में सहयोग देंगी। प्रथम चरण के लिए आईआईटी दिल्ली संयोजक संस्था के रूप में काम कर रहा है।

शोध एवं अनुसंधान

राष्ट्रीय स्तर के शोध एवं अनुसंधानकार्यक्रम में सभी आईआईटी एवं आईआईएस c जैसी संस्थाएं जुड़ी हैं। ये संस्थाएं देश के 10 प्रमुख क्षेत्रों में शोध कर रही हैं। ये क्षेत्र हैं – स्वास्थ्य सेवा एवं तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा एवं संरक्षण, ग्रामीण और शहरी भारत के लिए आवासीय डिजाइन, नैनो तकनीक, जल एवं नदी व्यवस्था, कंप्यूटर साइंस, एडवांस मेटेरियल्स,

उत्पादन तकनीक, उन्न सुरक्षा और पर्यावरण व ग्लोबल वार्मिंग शामिल हैं। इन क्षेत्रों की प्रमुख समस्याओं पर कुल 2600 प्रस्ताव आए जिनमें से 892 प्रस्तावों को प्रमुख वैज्ञानिकों की समिति ने स्वीकार कर लिया, इनमें से 259 प्रस्तावों के क्रियान्यवयन के लिए 559.89 करोड़ रुपए की धन राशि भी आवंटित की जा चुकी है।

स्मार्ट इंडिया हैकथॉन

1-2 अप्रैल 2017 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विश्व के सबसे बड़े 36 घंटों वाले हैकथॉन का आयोजन किया। इसके उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री ने युवाओं से बातचीत की। इसमें 42,000 युवा प्रतियोगियों ने भाग लिया और विभिन्न मंत्रालयों की ऐसी 598 समस्याओं का डिजिटल समाधान दिया, जिससे काम की गति के साथ-साथ गुणवत्ता में भी सुधार हो। इन सभी समाधानों के विकास का खर्च संबंधित मंत्रालयों को उठाना है।

उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय व्यवस्था

12 सितंबर 2016 को केंद्रीय कैबिनट ने हायर ऐजुकेशन फाइनेंसिंग एजेंसी (एचईएफए) की स्थापना को मंजूरी दी। यह एजेंसी उच्च शिक्षण संस्थाओं में अन्तराष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालाओं एवं अन्य साधनों को उपलब्ध कराने के लिए धन की व्यवस्था करेगी। केनरा बैंक को सरकार ने इसका प्रमोटर बनाया है। इसमें सरकार की 1000 करोड़ रुपए की हिस्सेदारी है। सभी उच्च शिक्षण संस्थान इससे लोन लेने के लिए योग्य होंगे। सरकार लोन के ब्याज का भार उठाएगी, जबकि शिक्षण संस्थाओं को केवल मूलधन चुकता करना होगा।

नए संस्थान

यही नहीं, केंद्र सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता के विस्तार के लिए 7 नए आईआईएम, 6 नए आईआईटी, एक नया केंद्रीय विश्वविद्यालय, एक नया आईआईटीटी, एक नया एनआईटी, 104 से भी अधिक केंद्रीय विद्यालय और 62 नए नवोदय विद्यालय खोले हैं।


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नई शिक्षा नीति की कवायद

इसी वर्ष सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक कस्तूरीरंगन के नेतृत्व में एक नई समिति के गठन की घोषणा की है

ई शिक्षा नीति लाने को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार प्रतिबद्ध है। पर सरकार इस बारे में फैसला लेने से पहले अध्ययन और सुझावों की कवायद को गंभीरता से लेना चाहती है ताकि देश को एक दूरगामी शिक्षा नीति मिले। अपनी इसी सोच के तहत सरकार ने कुछ माह पहले अंतरिक्ष वैज्ञानिक कस्तूरीरंगन के नेतृत्व में एक नई समिति के गठन की घोषणा की है। साफ है है कि पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमण्यम की अध्यक्षता वाली समिति ने इस नीति का जो मसौदा तैयार किया था, सरकार उसके आगे जाकर भी शिक्षा के नीतिगत पहलू पर विचार करना चाहती है। मोदी सरकार के लिए नई शिक्षा नीति लाने की चुनौती इसीलिए भी बड़ी है क्योंकि मौजूदा शिक्षा नीति अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पाई है। यह एक तथ्य है कि उद्योग-व्यापार जगत लगातार यह शिकायत कर रहा है कि स्कूलों और कालेजों से ऐसे युवा नहीं निकल पा रहे जो उसकी आवश्यकता पूरी कर सकें। देश में जैसे नैतिक आचार-व्यवहार का परिचय दिया जाना चाहिए उसके अभाव के लिए भी किसी न किसी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था ही दोषी है। यह वक्त की मांग है कि शिक्षा के जरिए भावी पीढ़ी को नैतिक मूल्यों के साथ हुनर और पेशेवर रुख से भी लैस किया जाए, ताकि वे आत्मनिर्भर होना सीख सकें और राष्ट्र की संपदा के रूप में निखर सकें। यह अच्छी बात है कि कस्तूरीरंगन के साथ अपने-अपने क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले प्रतिष्ठित लोगों के साथ कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कुछ कर दिखाया है, लेकिन इसमें दो राय नहीं कि उन सबके समक्ष एक बड़ी चुनौती है। उन्हें नई शिक्षा नीति के साथ ही नए भारत के निर्माण का आधार भी तैयार करना है। इससे पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नई शिक्षा नीति के मसौदे के प्रमुख बिंदुओं को सार्वजनिक किया था, जिसमें छात्रों को फेल न करने की नीति पांचवीं कक्षा तक के लिए सीमित करने, ज्ञान के नए क्षेत्रों की पहचान के लिए एक शिक्षा आयोग का गठन करने, शिक्षा के क्षेत्र में निवेश को बढ़ाकर जीडीपी के कम से कम छह फीसदी करने और शीर्ष विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में प्रवेश को बढ़ावा देने जैसे कदमों का जिक्र किया गया है। ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2016 के मसौदे के लिए कुछ इनपुट’ शीषर्क से अपनी वेबसाइट पर जारी किए गए दस्तावेज पर मंत्रालय ने प्रतिक्रियाएं मांगी हैं। इस दस्तावेज में ‘आर्थिक तौर पर कमजोर तबकों के प्रति व्यापक राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं’ के मद्देनजर

शिक्षा का अधिकार कानून की धारा 12-1-सी के सरकारी सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक (धार्मिक एवं भाषाई) संस्थाओं तक विस्तार के परीक्षण का भी सुझाव दिया गया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से पेश किए गए मसौदे में इस बात का जिक्र है कि छात्रों को फेल न करने की नीति के मौजूदा प्रावधानों में संशोधन किया जाएगा, क्योंकि इससे छात्रों का शैक्षणिक प्रदर्शन काफी प्रभावित हुआ है। मसौदा इनपुट दस्तावेज में कहा गया है कि फेल न करने की नीति पांचवीं कक्षा तक सीमित रहेगी और उच्च प्राथमिक स्तर पर फेल करने की व्यवस्था बहाल की जाएगी। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश यदि चाहें तो स्कूलों में पांचवीं कक्षा तक निर्देश के माध्यम (मीडियम ऑफ इंस्ट्रक्शन) के रूप में मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा का इस्तेमाल कर शिक्षा प्रदान कर सकते हैं। बहरहाल, दस्तावेज में यह भी कहा गया है

एवं माध्यमिक स्तरों पर तीसरी भाषा चुनने का अधिकार संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राज्यों और स्थानीय अधिकारियों के पास होगा। नीति के मसौदे से संबंधित इस दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि स्कूलों और विश्वविद्यालयों के स्तर पर संस्कृत पढ़ाने की सुविधाएं ज्यादा उदार होकर मुहैया कराई जाएंगी। उच्च शिक्षा के बाबत इस दस्तावेज में एक शिक्षा आयोग के गठन का जिक्र किया गया है जिसमें शैक्षणिक विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। यह आयोग हर पांच साल पर गठित होगा और इसका काम ज्ञान के नए क्षेत्रों की पहचान करने में मानव संसाधन विकास मंत्रालय की मदद करना होगा । मंत्रालय की ओर से जारी दस्तावेज में शिक्षा के क्षेत्र में खर्च को जीडीपी के कम से कम छह फीसदी करने और शीर्ष विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में आने को बढ़ावा देने जैसी बातें भी

जरूरत पड़ी तो उचित कानून बनाए जाएंगे या मौजूदा कानूनों में संशोधन किए जाएंगे। अन्य प्रमुख सिफारिशों में यह सुझाव दिया गया है कि विज्ञान, गणित और अंग्रेजी विषयों के लिए साझा राष्ट्रीय पाठ्यक्रम तैयार किए जाएं। अन्य विषयों के लिए, जैसे सामाजिक विज्ञानों, पाठ्यक्रम का एक हिस्सा पूरे देश में एक जैसा रहेगा और बाकी हिस्सा राज्य तय करेंगे। मसौदे में कहा गया कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रूपरेखा और दिशानिर्देश विकसित किए जाएंगे और उन्हें किसी स्कूल को मान्यता देने और उसके पंजीकरण के लिए अनिवार्य शर्त बनाया जाएगा। युवावस्था की ओर बढ़ते लड़कों-लड़कियों के सामने आने वाली समस्याओं पर अभिभावकों एवं शिक्षकों को गोपनीय तरीके से परामर्श देने के लिए स्कूलों को प्रशिक्षित काउंसेलरों की सेवा लेनी होगी। विशेषज्ञों का एक कार्य बल बनाने का भी सुझाव दिया गया है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थानों में भर्ती और तरक्की जैसी प्रक्रियाओं का अध्ययन करेगा और उच्च शिक्षा संस्थानों में बौद्धिक और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के उपाय सुझाएगा। युवा प्रतिभाओं को अध्यापन के पेशे की ओर आकर्षित करने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान शुरू करने का भी सुझाव दिया गया है। मंत्रालय की ओर से जारी मसौदे में एक सुझाव 10वीं कक्षा की परीक्षा में बड़ी संख्या में छात्रों के फेल होने से जुड़ा है। छात्र खासकर तीन विषयों - गणित, विज्ञान एवं अंग्रेजी - में खराब प्रदर्शन करते हैं। छात्रों की असफलता दर में कमी लाने के लिए गणित, विज्ञान और अंग्रेजी में 10वीं कक्षा की परीक्षा दो चरणों में लेने का सुझाव दिया गया है। इसमें पहला पार्ट उच्च स्तर पर और दूसरा पार्ट निम्न स्तर पर होगा। दस्तावेज में कहा गया है कि 10वीं कक्षा के बाद जिन पाठ्यक्रमों या कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए विज्ञान, गणित या अंग्रेजी जैसे विषयों की जरूरत नहीं होगी, उनमें शामिल होने के इच्छुक छात्र पार्ट-बी स्तर की परीक्षा का े क ों ्य ल ू म क ति ै न विकल्प चुन सकेंगे। रिए भावी पीढ़ी को ज े क षा क् र शि कि अभी केंद्रीय और राज्य शिक्षा बोर्ड त्मनिर्भ ै ह आ ताकि वे , ाए ज यह वक्त की मांग किया स ै ल ी 10वीं और 12वीं की परीक्षा संचालित र रुख से भ खर सकें नि ें म प रू े क साथ हुनर और पेशेव ा द करते हैं। दस्तावेज में कहा गया कि छात्रों प ं स राष्ट्र की र औ ें क स ीख स ा ोन ह का स्कूल जिस बोर्ड से संबद्ध होगा, उन्हें उस बोर्ड की 10वीं की परीक्षा में शामिल होना कही गई है। दस्तावेज में कहा गया है कि भारत अनिवार्य होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित कि यदि प्राथमिक स्तर तक निर्देश का माध्यम में न केवल विदेशी विश्वविद्यालयों को बढ़ावा मान्यता देने की प्रणालियों के अध्ययन के लिए मातृभाषा या स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा है तो दिया जाएगा, बल्कि भारतीय संस्थाएं भी विदेशों एक विशेषज्ञ समिति बनाने का भी सुझाव दिया दूसरी भाषा अंग्रेजी होगी और उच्च प्राथमिक में अपने कैंपस स्थापित कर सकेंगी और यदि गया है।


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पहल

स्कूलों के मामले में दमन बन रहा है एक उदाहरण

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दमन में बने अनोखे नंद घरों में बच्चे कृष्ण की तरह पल और पढ़ रहे हैं। य​ह पहल यहां बाल-शिक्षा को नया आयाम दे रही है

आनंद भारती

रकार चाहे जितनी योजनाएं बना ले, अगर उसमें जनभागीदारी नहीं हुई तो उसकी सफलता की संभावना न्यूनतम रह जाती है। जब भी सरकार या प्रशासन के कामों में समाज और सचेतन लोगों ने अपने हाथ लगाए हैं, उसकी कामयाबी शत-प्रतिशत रही है। कामयाबी का ऐसा ही लक्षण दिखाई दे रहा है गुजरात और महाराष्ट्र से सटे केंद्र शासित प्रदेश दमन में। अरब सागर का यह द्वीप पर्यटकों के लिए स्वर्ग की तरह है। पहले यह पुर्तगालियों के अधीन था। 1961 में जब गोवा को पुर्तगालियों से मुक्त कराया गया, उसी समय दमन भी भारत का हिस्सा बना, लेकिन यह केंद्र शासित प्रदेश बना 1987 में। दमन में अपनी कोई सरकार या विधान सभा नहीं है। प्रशासक यहां का काम काज देखते हैं। दमन और दीव, दोनों जिलों की आबादी लगभग ढाई लाख है। उसमें दमन का ही लगभग दो लाख है। साक्षरता लगभग 87 प्रतिशत है। इस साक्षरता को और भी बढ़ाने और असरकारी बनाने की कोशिश में प्रशासक प्रफुल्ल पटेल की पहल पर इंडस्ट्री एसोसिएशन ने खुलकर हाथ बढाया है। कह सकते हैं कि सरकार की योजना को कॉरपोरेट कंपनियों का सहयोग मिल रहा है। सीएसआर यानी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व का असर बढ़ने लगा है। एसोसिएशन के सदस्यों और प्रशासक के बीच हुई बातचीत आम सहमति में तब्दील हुई और यह तय किया गया कि न केवल आठवीं तक के स्कूलों को दुरुस्त किया जाए बल्कि आंगनबाड़ी को भी इस लायक बना दिया जाए कि छोटे-छोटे बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो जाए। मां-बाप भी अपनी जीविका ठीक से चला सकें। अबतक दमन के स्कूलों के परिसरों की हालत

बहुत दयनीय थी। भवन टूट-फूट के शिकार थे, वहां टॉयलेट का अभाव था, टॉयलेट थे भी तो उसमें पानी नहीं होता था। चहारदीवारी का नामो निशान नहीं था। छतें भी बरसात में टपकती रहती थीं। वह किसी भी तरह से स्कूल जैसा नहीं लगता था। इसीलिए बच्चों का रुझान भी कम हो गया था। मां-बाप की कोशिश होती थी की उनके बच्चे निजी स्कूलों में जाएं ताकि अच्छे से पढ़-लिखकर बढ़िया नौकरियां हासिल कर सकें, लेकिन निजी स्कूलों की भी अपनी सीमा है। उतने सारे बच्चों के एडमिशन में दिक्कतें ही दिक्कतें थीं। गरीब और सामान्य परिवारों के पास इतने पैसे भी नहीं होते हैं कि वे वहां प्रवेश दिला सकें। सरकारी स्कूलों में हालांकि प्रशिक्षित टीचर हैं, लेकिन उनके पास छात्र नहीं होते थे। जो भी थी वे मजबूरी में थे। स्कूलों की बदतर स्थिति के कारण पढ़ाई का माहौल नहीं बन पाता था। प्रशासन ने पहले भी कई बार कोशिश की कि इस स्थिति को बदला जाए, लेकिन किसी न किसी कारण से परिवर्तन में देरी हो रही थी। यही हाल आंगनबाड़ी का भी था। अब जब कुछ महीने पहले प्रशासक ने इंडस्ट्री एसोसिएशन के सामने अपने मन की बात कही तो सीएसआर के तहत इसकी जरुरत महसूस करते हुए तुरंत अपनी तैयारी शुरू कर दी। दमन की एक खास बात यह है कि यहां का सांस्कृतिक जीवन का चरित्र अलग-अलग रंगों में डूबा हुआ है। एक साथ उनमें आप यूरोपीय, भारतीय और परम्परागत आदिवासी तत्वों के दर्शन कर सकते

हैं। अंगरेजी, हिंदी, कोंकणी, गुजराती के साथसाथ पुर्तगाली भी सुन सकते हैं, लेकिन अब उत्तर भारतीय मजदूरों की संख्या में बढ़ोत्तरी के कारण उनकी बोलियां भी भरपूर बोली जा रही हैं। परंपरा और रिवाज पर गुजरात का प्रभाव है। यहां के मूल लोग मछलियों का व्यवसाय करते थे, लेकिन अब उद्योगों का जाल बिछ जाने के कारण लोग कारखानों की शरण में पहुंच चुके हैं। उनके लिए प्रशिक्षण के इंस्टीट्यूट भी खुल गए हैं। नौजवानों का भी रुझान बढ़ा है। वे नौजवान पहले ठीक से पढ़-लिख सकें उसके इंतजाम की बात सोची गई। कहा गया कि इसके लिए पहले स्कूल को मजबूत करने का काम किया जाए। उस दिशा में पहल शुरू हुई। यह काम दोहरे स्तर पर किया जा रहा है। एक तो आंगनबाड़ी को घर का रूप दिया जा रहा है। उसे प्रधानमंत्री ने ‘नंद घर’ का नाम दिया है। यानी हर बच्चे को कृष्ण के रूप में देखा जाए और उसे नंद जैसा अभिभावक मिले ताकि उसका पालन-पोषण सही तरह हो सके। कारखानों में काम करने वाले मजदूर या मछली का व्यवसाय करने वाले पति-पत्नी निश्चिन्त होकर अपने बच्चे को पालने-घर में छोड़ सकें। उन बच्चों के खाने आदि की सारी व्यवस्था को मजबूती दी जा रही है। उस पालने-घर या नंद-घर को इस तरह से सजाया-संवारा जा रहा है कि बच्चों को कोई परेशानी नहीं हो। उनके खेलने-कूदने और मन लगाए रखने के लिए सभी आवश्यक साधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यह घर नर्सरी स्कूल की

आंगनबाड़ी को घर का रूप दिया जा रहा है। उसे प्रधानमंत्री ने ‘नंद घर’ का नाम दिया है। यानी हर बच्चे को कृष्ण के रूप में देखा जाए और उसे नंद जैसा अभिभावक मिले ताकि उसका पालन-पोषण सही तरह हो सके

शक्ल में भी है, ताकि जब स्कूलों में एडमिशन हो तो पीछे न रह जाएं। इसमें दो से चार साल तक के बच्चे पलते हैं। यानी स्कूल जाने से पहले तक की बुनियादी जानकारियां उन्हें यहीं मिल जाएगी। प्रशासक पटेल के अनुसार, ‘प्रधानमंत्री ने इसे नंद घर का नाम दिया है इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि उसे उस अनुरूप बनाया जाए। हर मां-बाप समझें कि उनका बच्चा कृष्ण की तरह ही पल रहा है। मैंने यह बात इंडस्ट्री एसोसिएशन के सामने रखी। मुझे खुशी है कि उसने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए अपना हाथ बढ़ा दिया।’ उल्लेखनीय है कि दमन में प्राइमरी स्कूलों की संख्या 36 है, जहां दो शिफ्टों में पढ़ाई होती है। उन खस्ता-हाल स्कूलों में अधिकांश को को आधुनिक रूप दिया जा चुका है और बाकी को भी उसी तरह सुसज्जित किया जा रहा है। पंखे, बिजली, लाईट, टॉयलेट, साफ सफाई की हर व्यवस्था हो रही है। वे स्कूल अब पढ़ाई और सुविधा के मामले में निजी स्कूलों को पीछे छोड़ रहे हैं। यहां का आकर्षण भी बढ़ा है। खास बात यह हुई है कि कल तक जो बच्चे निजी स्कूलों के बच्चों के मुकाबले खुद को कमतर समझते थे वे आज सीना तानकर चल रहे हैं। इससे गरीब बच्चों में आत्मविश्वास भी बढ़ा है। उनमें पढ़ने की ललक भी पैदा हुई है। इंडस्ट्री की सहभागिता के कारण स्कूल और उसके आंतरिक ढांचे को सुधारने में मदद मिली है। यह एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि ऐसा ही प्रयोग दूसरे राज्यों में भी होगा। सरकार की तरफ देखने की प्रवृत्ति खत्म होगी और यह कहने-सोचने की आदत भी खत्म होगी कि ‘देश का कोई हिस्सा विकास की बाट जोह रहा है।’ हर सक्षम आदमी कायदे से समाज की समस्या का हल ढूंढने का प्रयास करेगा।


06 सम्मान

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स्वच्छता का सुलभ धाम

नागरिक स्वावलंबन एवं स्वाभिमान विकास परिषद द्वारा आयोजित समारोह में सुलभ प्रणेता डॉ. पाठक व डॉ. लारी आजाद को ‘कर्मवीर’ सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर काव्यग्रंथ ‘कर्मवीर’ का भी लोकार्पण किया गया

एक नजर

डॉ. शक्तिबोध ने सुलभ ग्राम को दी सुलभ धाम की संज्ञा डॉ. पाठक के साथ डॉ. लारी आजाद भी हुए सम्मानित

सबने की डॉ. पाठक के कार्यों की प्रशंसा

ना

गरिक स्वावलंबन एवं स्वाभिमान विकास परिषद द्वारा नई दिल्ली के डॉ. बीपी पाल सभागार में काव्यग्रंथ ‘कर्मवीर’ का लोकार्पण एवं ‘कर्मवीर’ सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में सुलभ स्वच्छता एवं सामाजिक सुधार आंदोलन के प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक और ऑल इंडिया पोयटेस कान्फ्रेंस के संस्थापक डॉ. लारी आजाद को कर्मवीर सम्मान से सम्मानित किया गया। इस सम्मान में श्रीफल, अंगवस्त्र, अभिनंदन पत्र, स्मृति चिन्ह और एक लाख रुपए का चेक प्रदान किया गया। वहीं मंच और सभागार में उपस्थित अन्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही डॉ. शक्तिबोध की कृति काव्यग्रंथ ‘कर्मवीर’ का भव्य लोकार्पण भी डॉ. पाठक और डॉ. लारी आजाद द्वारा किया गया। समारोह में प्रो. रामबदन सिंह कुलाधिपति, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इंफाल, डॉ. हीरानंद पांडेय, निदेशक, कृषि कस्तूरबा गांधी ट्रस्ट, इंदौर, डॉ. रामलखन मिश्र, पूर्व समन्वयक, अखिल भारतीय पुष्प-विज्ञान परियोजना और डॉ. हरिविलास चौधरी शक्तिबोध अध्यक्ष, नागरिक स्वावलंबन एवं स्वाभिमान विकास परिषद उपस्थित रहे।

सुलभ धाम है स्वच्छता का दीपकडॉ. शक्तिबोध

डॉ. शक्तिबोध ने कहा कि आज हम यहां बहुरंगी छवि देख रहे हैं। देश के विभिन्न क्षेत्रों से लोग आए हुए हैं, सुलभ प्रणेता डॉ. विंदेश्वर पाठक जी हैं। हम उनका हृदय से स्वागत एवं अभिनंदन करते हैं। डॉ. पाठक की सुबुद्धि और मानवसेवा हित की लालसा ने सुलभ अभियान को जन्म दिया है, जिसके माध्यम से समाज के अनगिनत जनों को सम्मानपूर्वक जीने का सुअवसर मिला है। टोंक की तिरस्कृत महिलाओं को उनके घृणित कार्यों से डॉ. पाठक ने ही उबारा है। इतना ही नहीं डॉ. पाठक ने काशी-वृंदावन की उपेक्षित विधवा माताओं को आदरणीय नवजीवन दिया है। डॉ. पाठक ने भारतवर्ष के प्राचीन आध्यात्मिक विचारधारा को आधुनिक मानवतावादी प्रवाह देकर

गरिमा प्रदान की है। डॉ. शक्तिबोध ने कहा कि जिस तरह आदिगुरु शंकराचार्य ने आध्यत्मिक उत्थान हेतु देश में चार धाम बद्रीनाथ धाम, द्वारकाधीश धाम, रामेश्वरम धाम और जगन्नाथपुरी धाम की स्थापना चारों दिशाओं में किया, उसी तरह डॉ. पाठक ने भारत के हृदय दिल्ली में सुलभ धाम को स्थापित किया है। स्वच्छता के निखार के लिए यह सुलभ धाम ईश्वर का घर है। इसके साथ ही सुलभ स्वच्छता का दीपक है, जिसने पूरे विश्व में स्वच्छता की अलख जगाई है। शुचिता के स्तंभ पुरुष के रूप में डॉ. पाठक की मंगलमयी सुलभ कीर्ति भारतवर्ष के उन महान विभूतियों के साथ अलंकृत करती है, जिन्होंने अपनी बहुआयामी प्रतिभाओं के साथ तन-मन से अपने जीवन को राष्ट्रहित में समर्पित कर दिया है। वहीं डॉ. लारी आजाद ने भी नारी जगत के

जिस तरह आदिगुरु शंकराचार्य ने आध्यत्मिक उत्थान हेतु देश में चार धाम बद्रीनाथ धाम, द्वारकाधीश धाम, रामेश्वरम धाम और जगन्नाथपुरी धाम की स्थापना चारों दिशाओं में किया, उसी तरह डॉ. पाठक ने भारत के हृदय दिल्ली में सुलभ धाम को स्थापित किया है। स्वच्छता के निखार लिए यह सुलभ धाम ईश्वर का घर है - डॉ. शक्तिबोध

बौद्धिक उत्थान के लिए सराहनीय कार्य किया है। उनके इस कार्य के लिए हम उनका भी स्वागत एवं अभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. लारी शिक्षण कार्य में व्यस्त रहते हुए भी सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। साल 2000 में महिलाओं के उत्थान के लिए वैश्विक संस्था एआईपीसी की शुरुआत की। इसके साथ ही आजाद ने भारतीय इतिहास पर कई पुस्तकें लिखीं हैं, जिनमें शोधग्रंथ ‘रिलीजन एंड पॉलिटिक्स इन इंडिया ड्यूरिंग द सेवेंटींथ सेंचुरी’ अंतराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित है। इसके साथ ही साहित्य की श्रीवृद्धि के लिए डॉ. आजाद अनेक शीर्ष स्तर की साहित्यसेवी संस्थाओं से संबद्ध हैं और उन संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किए जा चुके हैं। जिस तरह 1892 में शिकागो सर्वधर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद ने देश की कीर्ति पताका फहराई थी यह संयोग ही है कि उसी तरह 100 साल बाद महान भारतीय संस्कृति का संदेश लेकर पुनः दूसरे विवेकानंद के रूप में डॉ. लारी आजाद गए। आज इस शुभ अवसर पर नागरिक स्वावलंबन एवं स्वाभिमान विकास परिषद इन महान कर्मवीरों को सम्मानित कर गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

सुलभ को सुलभ धाम की संज्ञा सबसे बड़ा पुरस्कार- डॉ. पाठक

हमारे लिए बहुत ही गर्व और हर्ष का विषय है कि डॉ. शक्तिबोध ने आज हमें एक पुरस्कार के साथ एक ऐतिहासिक नाम दिया, जिसके बारे में हमने कभी सोचा नहीं था। हमारे लिए सुलभ ग्राम सबसे प्रिय है और डॉ. शक्तिबोध ने हमारे सुलभ ग्राम को शंकराचार्य के चार धामों के समक्ष एक धाम के रूप में जोड़ दिया, इसके लिए हम उनके बहुत आभारी हैं। हमारे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार सुलभ को ‘सुलभ धाम’ कहना है। इसके साथ ही डॉ. पाठक ने संस्था की तरफ से मिली एक लाख की पुरस्कार राशि को संस्था के विकास कार्यों के लिए समर्पित कर दी। डॉ. पाठक ने कहा कि डॉ. लारी की जिह्वा पर सरस्वती का वास है। मैं जब से इनसे मिला हूं,


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सम्मान

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समाज की समस्याओं का समाधान निकाल देना ही महत्वपूर्ण है। ज्यादातर लोग समस्याओं पर चर्चा तो करते हैं, लेकिन उसका समाधान सरकार निकालेगी कह कर छोड़ देते हैं, लेकिन हमने सामाजिक समस्याओं का समाधान स्वयं निकाला है

सिर्फ इन्हें सुनता ही रहता हूं। बहुत कम लोगों की जिह्वा पर सरस्वती का वास होता है। ईश्वर ने जब सृष्टि की रचना की तो उसे एक समान नहीं बनाया, बल्कि असमान बनाया। आप देखेंगे कि इस संसार में सुख-दुख, अमीर-गरीब, नदी-पहाड़, फूल-कांटे सभी तरह की चीजें बनाई हैं। सृष्टि का निर्माण ही षड्यंत्रों से हुआ है और हमें इन्हीं षड्यंत्रों के बीच कार्य करना है। उन्होंने कहा कि समाज में मां-बहन को पहला सम्मान मिलना चाहिए। इसके लिए हम डॉ. लारी की बात से सहमत हैं। समाज को बदल कर कार्य करना मुश्किल है, इसीलिए हमने समाज के साथ ही कार्य करना मुनासिब समझा। हम गांधी के अनुयायी हैं, लेकिन हम बुद्धि के साथ उनके अनुयायी है। हमने गांधी के भोजन व वस्त्र को अलग कर दिया और उनके सिद्धांतों को लेकर चले। जो भी व्यक्ति दूसरों की सेवा करना जानता है, वह गांधीवादी है। उन्होंने कहा कि यहां मंच और सभागार में उपस्थित सभी लोगों का अपना अपना योगदान है। डॉ. रामबदन ने भोजन की व्यवस्था की और हमने भोजन के बाद की व्यवस्था की। समाज की समस्याओं का समाधान निकाल देना ही महत्वपूर्ण है। ज्यादातर लोग समस्याओं पर चर्चा तो करते हैं, लेकिन उसका समाधान सरकार निकालेगी कह कर छोड़ देते हैं, लेकिन हमने सामाजिक समस्याओं का

समाधान स्वयं निकाला है। समाज को बदलने के लिए धैर्य रखना पड़ता है। समाज को अहंकार, क्रोध से नहीं बदला जा सकता है। डॉ. पाठक ने कहा कि जब आप दूसरों की सहायता करते हैं तो भगवान स्वयं आपकी सहायता करते हैं।

पुरुष समाज ने नारी शक्ति को नकाराडॉ. लारी आजाद

डॉ. लारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि मैं आज स्वयं को लघु महसूस कर रहा हूं, क्योंकि मैं जिनसे प्रभावित होकर इस पथ पर आगे बढ़ा आज उनके बगल में परिषद ने बैठा कर हमें धन्य कर दिया। इससे मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं, क्योंकि हमने गांधी को नहीं देखा है। गांधी की विचारधारा हमारी रगों में है, लेकिन हमने गांधी के रूप में डॉ. पाठक को देखा है। वही हमारे लिए गांधी है। मेरी जगह डॉ. पाठक के बगल में नहीं, बल्कि उनके चरणों में है। इसके साथ ही उन्होंने कर्मवीर पुरस्कार के लिए डॉ. शक्तिबोध का आभार व्यक्त किया और पुरस्कार स्वरुप मिली एक लाख की राशि को नागरिक स्वालंबन एवं स्वाभिमान विकास परिषद को उसके आगे के कार्यों को करने के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि मुझे जो सम्मान आज मिला है उसके लिए मैं परिषद और शक्तिबोध जी का

आभारी हूं। डॉ. लारी ने कहा कि गांधी, कबीर और बुद्ध को कभी कोई सम्मान या पुरस्कार नहीं मिला। उन्होंने अपना कर्तव्य किया, वैसे ही हम भी अपना कर्तव्य कर रहे हैं। हम किसी सम्मान के लिए कार्य नहीं कर रहे हैं, बल्कि यह हमारा देश व समाज के प्रति कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि हम जैसे पुरुष समाज ने नारी शक्तियों को नकारा है। हमने मीरा को याद रखा लेकिन विद्योतमा को भुला दिया, लेकिन का​िलदास को संस्कृत का विद्वान बनाने में विद्योतमा का अहम रोल रहा है। हमारे जैसे पुरुषों ने कभी नारी शक्ति को आगे बढ़ने ही नहीं दिया। हमारे साथ विदेशी लोगों ने हमेशा से षड्यंत्र किया है, उन्होंने हमारे द्वारा की गई खोजों को अपना बता दिया और हमें सिरे से नकार दिया। आज से 18 साल पहले हमने जब ‘ऑल इंडिया पोयटेस कांफ्रेंस’ की स्थापना के बारे में डॉ. पाठक को बताया तो उनका एक खत मेरे पास आया, जिसमें लिखा था डॉ. लारी यह एक उत्तम सोच है और मैं आपके साथ हूं। तब मुझे इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिल गया और हमने एआईपीसी की स्थापना की। इसके तहत महिलाओं को उनके प्रतिभा निखारने का मौका दिया जाता है। उन्होंने अंत में कहा कि आने वाली नस्लें आप सभी से रश्क करेंगी कि आप सबने डॉ. पाठक को देखा है और उन्हें सुना है। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में जब भी समाज सुधारक का नाम लिखा जाएगा तो उसमें डॉ. पाठक का नाम सबसे पहले लिखा जाएगा।

‘कर्मवीर’ सम्मान से सम्मानित हमारे कर्मवीर हैं देश के प्रेरणास्त्रोत- प्रो. रामबदन सिंह

समारोह के अंत में पद्म विभूषण प्रो. रामबदन सिंह

कुलाधिपति, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इंफाल ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि मैं नागरिक स्वावलंबन एवं स्वाभिमान विकास परिषद और डॉ. शक्तिबोध का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने हमें इस कर्मवीर सम्मान समारोह में आने का सुअवसर प्रदान किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत अपने सांस्कृतिक मूल्यों, मानव धर्म और मानवता के कारण ही पूरे विश्व में एक अग्रिम भूमिका निभाता आया है। यह प्रेरणास्त्रोत जनमानस में सर्वमुखी विकास की ओर आग्रसारित करता है। जैसे बहुजन समाज, बहुजन सुखाय- बहुजन हिताय, सबका साथ-सबका विकास आज की भाषा में हम सब इनको चर्चित करते हैं, यही हमारी धरोहर है। सौभाग्यवश जो हमने कर्मवीर का लोकार्पण किया उन 12 कर्मवीरों में से 2 कर्मवीर हमारे बीच मौजूद हैं। आप लोग भारतवर्ष के प्रेरणास्त्रोत हैं, हम शुभकामना करते हैं कि आप सदैव अपने कर्तव्य से भारत को विकासपूर्ण और आगे बढ़ाएं। आज हमें डॉ. पाठक के बगल में बैठने का जो सौभाग्य प्राप्त हुआ है, इसके लिए मैं आपका अभिनंदन करता हूं। पूरे विश्व में आपका सामाजिक कार्य और उद्यमी भाव मशहूर है। आपके सुलभ स्वच्छता एवं सामाजिक सुधार आंदोलन ने करोड़ो लोगों को दिशा दी है। आपने लोगों की मानसिकता को बदल करके जो देश में बढ़ोत्तरी लाने का कार्य किया है, उसके लिए हम आपको साधुवाद देते हैं। इसके साथ ही हम डॉ. लारी को उनके विश्व भर में नारी उत्थान के क्षेत्रों में किए गए कार्यों के लिए हृदय से शुभकामनाएं देते हैं। आपने भी देश के साथ-साथ पूरे विश्व को नारी उत्थान के क्षेत्र में विचार करने और सुधार करने के लिए प्रेरित किया है।


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1951 से लोकप्रिय दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी 1951 से लगातार राजधानी के पुस्तक प्रेमियों की सेवा कर रही है। इस दौरान इसने पुस्तक संस्कृति को एक बड़ा संस्थागत आधार दिया है

एक नजर

1995 से पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत है यह लाइब्रेरी यह लाइब्रेरी एक स्वायत्त संस्था के तौर पर कार्य करती है यहां 16 भाषाओं में विभिन्न विषयों की किताबें मौजूद हैं

सं

सत्यम

स्कृति मंत्रालय और दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड ने मिलकर दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी की स्थापना यूनेस्को के एक प्रोजेक्ट के तहत 1951 में की थी। यह राजधानी के पुस्तक प्रेमियों के लिए एक बड़ी सौगात की तरह है। पूरी तरह से स्वायत्त यह ऐसी संस्था है, जिसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के

हाथों पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने एक छोटे से हॉल में हुआ था। समय के साथ दायरा बढ़ता गया और आज दिल्ली की सबसे बेहतरीन और उम्दा पब्लिक लाइब्रेरी सिस्टम में दिल्ली पब्लिक

लाइब्रेरी शुमार है। इसमें व्याख्यान, विचार विमर्श, गोष्ठी और प्रदर्शनियों का आयोजन भी होता है। इसकी उल्लेखनीय गतिविधियों में दृष्टिहीनों और कैदियों को किताबें मुहैया कराने के अलावा आम

दिल्ली के एसपी मुखर्जी मार्ग पर 1951 में शुरू हुई इस लाइब्रेरी से लाखों पाठक जुड़े हुए हैं। इसके रजिस्टर्ड सदस्यों की संख्या हजारों में है

लोगों के लिए बसों में चलती-फिरती लाइब्रेरी सेवा पहुंचाना शामिल है। यह पूरे देश की ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की सबसे व्यस्त लाइब्रेरी है। यह पूरी तरह से भारत सरकार के खर्च पर चलती है। दिल्ली का ऐसा कोई कोना नहीं होगा, जहां दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी की शाखा नहीं होगी। 1995 से पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत इस लाइब्रेरी के सारे बहुमूल्य संदर्भ को यूनेस्को की तरफ से सीडी में संरक्षित किया गया है। इस लाइब्रेरी में हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू और दूसरी भाषाओं की लगभग 30 लाख से ज्यादा किताबें मौजूद हैं। यह लाइब्रेरी देश के पब्लिक लाइब्रेरी एक्ट 1954 के तहत चलाई जाती है। यह दिल्लीवासियों को मुफ्त किताबें देने के लिए प्रसिद्ध है। पुरानी दिल्ली में काफी छोटे स्तर पर शुरू हुई दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी आज देश की सबसे प्रमुख लाइब्रेरी हो गई है। यह पूरे शहर को कवर करती है। इसमें एक केंद्रीय लाइब्रेरी, एक क्षेत्रीय लाइब्रेरी, तीन शाखा लाइब्रेरी, 25 उप शाखा लाइब्रेरी, पांच सामुदायिक लाइब्रेरी, अनाधिकृत कॉलोनियों में स्थापित 14 लाइब्रेरी, एक ब्रेल लाइब्रेरी, 60 चलती फिरती लाइब्रेरी और 23 जमा केंद्र लाइब्रेरी शामिल हैं। इसका करोड़ों का बजट है जो केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा मुहैया कराया जाता है। एसपी मुखर्जी मार्ग पर 1951 में शुरू इस लाइब्रेरी से लाखों पाठक जुड़े हुए हैं। इसके रजिस्टर्ड सदस्यों की संख्या हजारों में है। इसमें संदर्भ के लिए किताबें, इनसाइक्लोपीडिया, डिक्शनरियां, अखबारें, पत्रिकाएं आदि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इसका इस्तेमाल शोधकर्ता, लेखक, छात्र, पत्रकार और स्कॉलर के साथ आम पाठक करते हैं। यहां पाठकों को फोटोकॉपी कराने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। इस लाइब्रेरी में करीब पांच सौ कर्मचारी काम करते हैं। यहां किताबें


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स्थापना दिवस समारोह में शा​िमल हुए डॉ. पाठक दि

पुस्तकें चिरस्थायी होती हैं और इसे व्यक्ति जब और जिस परिस्थिति में भी चाहे पढ़ सकता है- डॉ. पाठक

ल्ली पब्लिक लाइब्रेरी का स्थापना दिवस समारोह 30 अक्टूबर को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी मुख्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय हॉल में मनाया गया है। कार्यक्रम में पुस्तकालय सदस्यता अभियान का पोस्टर भी जारी किया गया। इसी पुस्तकालय से दिल्ली में घर-घर दस्तक, घर-घर पुस्तक कार्यक्रम चल रहा है। समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व लोकसभा सांसद विजय कुमार मल्होत्रा और विशिष्ठ अतिथि के रूप में सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक मौजूद थे। समारोह की अध्यक्षता पूर्व राज्य सभा सांसद डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने की। इस मौके पर दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. रामशरण गौड़ और लाइब्रेरी के महानिदेशक डॉ. लोकेश शर्मा सहित कई लोग मौजूद थे। इस मौके पर मल्होत्रा ने कहा कि पुस्तकालय का शहर और समाज के विकास में विशेष महत्व होता है। इस जिम्मेदारी को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी बखूबी निभा रही है। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि वे इस पुस्तकालय से 1958 से जुड़े हुए हैं। इस मौके पर उन्होंने पुस्तकालय सदस्यता अभियान का पोस्टर भी जारी किया। उन्होंने लाइब्रेरी द्वारा चलाए जा रहे कार्यों की सराहना की। इस अवसर पर अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्य करने वाले 22 कर्मचारियों को पुरस्कृत किया गया।

समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ. विन्देश्वर पाठक ने कहा कि समय बदलने के कारण ज्ञान के इंटरनेट और ई-बुक जैसे साधन भले बढ़ रहे हैं, लेकिन पुस्तकालयों की महत्ता सदैव बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि पुस्तकें चिरस्थायी होती हैं और इसे व्यक्ति जब और जिस परिस्थिति में भी चाहे पढ़ सकता है। इसीलिए पुस्तकालय में पुस्तकें सहेज कर रखना भी अपने आप में कठिन काम है। इस काम को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी बखूबी पूरा कर रही है तो उसकी सराहना निश्चित होनी चाहिए। इस मौके पर समारोह के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र चंद्र शर्मा ने पुस्तकालय और स्वाध्याय को ‘अप्प दीपो भव’ का मार्ग बताया। जबकि डॉ. रामशरण गौड़ ने लाइब्रेरी से समाज में पाठकों के लिए किए जा रहे सकारात्मक प्रयास के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हम ‘घर-घर दस्तक, घर-घर पुस्तक’ कार्यक्रम चला रहे हैं, जिसके द्वारा फोन पर पाठकों को पढ़ने के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। आखिर में पुस्तकालय के महानिदेशक डॉ. लोकेश शर्मा ने पुस्तकालय के क्रिया-कलापों में और अधिक बल देने का आह्वान किया। इस अवसर पर दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड के सदस्य और दिल्ली के पूर्व महापौर महेश शर्मा, डॉ. मालती, गौरीशंकर भारद्वाज और दिल्ली के गण्यमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

1994 में एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) को इस लाइब्रेरी ने डिपोजटरी लाइब्रेरी के रूप में नामित किया है। इस लाइब्रेरी पर सीएनएन-आईबीएन ने एक फिल्म भी बनाई है खरीदने के लिए बुक एडवाजरी कमेटी की अनुशंसा जरूरी है। उसी अनुशंसा पर विभिन्न प्रकार की और विभिन्न भाषाओं की किताबें खरीदी जाती हैं। सभी किताबें पाठकों को उपलब्ध कराई जाती हैं। इस लाइब्रेरी में 15 साल से छोटे नीचे के बच्चों के लिए विशेष तौर पर किताबें उपलब्ध हैं। इसकी जोनल शाखाओं में सरोजनी नगर में पहली लाइब्रेरी 1985 में शुरू की गई। पटेल नगर और एसपी मुखर्जी मार्ग पर भी बच्चों की शाखाएं मौजूद हैं। सरोजनी नगर लाइब्रेरी दक्षिणी दिल्ली में खासी लोकप्रिय है। यहां 16 भाषाओं में किताबें हैं, इनमें असमिया, बंगाली, गुजराती, कश्मीरी, पंजाबी, तमिल, तेलगू, उर्दू, मराठी, हिंदी और अंग्रेजी आदि भाषाएं शामिल हैं। इसका पाठक कक्ष बेहतरीन तरीके से बनाया गया है, जहां लोग दिन भर किताबें, पत्रिकाएं और अखबारों से जानकारी उपलब्ध कराने में व्यस्त

रहते हैं। संगीत, नृत्य, समाज अध्ययन, साहित्य, सामाजिक अध्ययन से संबंधित किताबों का यहां जखीरा है, जबकि नेचरोपेथी और होम्योपैथी चिकित्सा विधि के अध्ययन के लिए भी अलग से संदर्भागार बनाए गए हैं। यहां छात्रों के बीच साल में एक बार वाद-विवाद प्रतियोगिता का भी आयोजन होता है, जिसमें बच्चे, स्कूली छात्र और युवाओं के साथ ही शारीरिक रूप से अक्षम सदस्यों को तरजीह दी जाती है। यहां की एक खास विशेषता यह है कि किताबों को जमा कराने के लिए जमा संग्रह सोसाइटियों के साथ आरडब्लूए की मदद ली जाती है। इस तरह काफी किताबें लाइब्रेरी को मिल जाती हैं। 1994 में एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) को इस लाइब्रेरी ने डिपोजटरी लाइब्रेरी के रूप में नामित किया है। इस लाइब्रेरी पर सीएनएन-आईबीएन ने एक फिल्म भी बनाई है।


10 गुड न्यूज

06 - 12 नवंबर 2017

17वां अखिल भारतीय कवयित्री सम्मेलन चंडीगढ़ में अखिल भारतीय कवयित्री सम्मेलन में सुलभ द्वारा पुनर्वासित स्कैवेंजर कवयित्रियां भी करेंगी काव्य पाठ

मानसिक स्वास्थ्य के लिए समयबद्ध कार्यक्रम जरूरी

डॉ. लारी आजाद एवं पंजाब की प्रसिद्ध गीतकार सुमिरत सुमेरा एवं रमणप्रीत कौर के साथ आयोजन समिति के सदस्यगण

डॉ. प्रभा शर्मा

प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था अखिल देशभारतीयकी कवयित्री सम्मेलन का 17वां वार्षिक

महाधिवेशन पंजाब शाखा द्वारा चंडीगढ़ के सेक्टर-16 स्थित पंजाब आर्ट काउंसिल के रंधावा ऑडिटोरियम में 9-11 नवंबर, 2017 को आयोजित किया जा रहा है। इस अधिवेशन में देश-विदेश की लगभग 500 कवयित्रियों के भाग लेने का अनुमान है। इसमें देशभर की प्रायः सभी भाषाओं की कवयित्रियां होती हैं। सम्मेलन के संस्थापक डॉ. लारी आजाद ने बताया कि इस अधिवेशन में देश के अतिरिक्त विदेशों से भी कई कवयित्रियां शिरकत करेंगी। पंजाब की प्रसिद्ध गीतकार सिमरत सुमेरा, रमणप्रीत कौर एवं उनकी साथी कवयित्रियों ने कार्यक्रम की तैयारी पूरी कर ली है। इसमें देश के सुदूर सिक्किम से सुश्री पूजा शर्मा, दिल्ली से प्रभा शर्मा, सुनीता खोखा, बीकानेर से

डॉ. मेघना शर्मा, सुलभ इंटरनेशनल द्वारा पुनर्वासित स्कैवेंजर महिलाओं में कविता लिखने वाली टोंक, राजस्थान से पूजा चांगरा और अनु तमोली, गुड़गांव, हरियाणा से डॉ. प्रभा शर्मा, कांक्षा कौमुदी के साथसाथ कनाडा से सुरिन्दर गीत, सुरजीत कौर तथा सुखी बठ एवं श्रीकृष्ण भनोट, यूके से दलबीर कौर, ऑस्ट्रेलिया से कुलजीत गजल, हरकी विर्क क्राउन, यूएसए से दलेर आशना, सुदर्शन प्रियदर्शिनी एवं सुरिन्दर सीरत, मलेशिया से सुश्री गुरिन्दर गिल, जापान से परमिन्दर सोधी, पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से आभा अनुपमा, राधा मंडल, पूजा गुप्ता, रुक्मिणी पाग्ली, डॉ. श्वेता झा इत्यादि शिरकत कर अधिवेशन को यादगार बनाएंगी। इस अधिवेशन में सुलभ साहित्य अकादमी द्वारा कवयित्रियों को प्रतिवर्ष तीन-तीन हजार के नौ पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। पुरस्कार प्रदान करने के लिए अकादमी के सचिव डॉ. अशोक कुमार ज्योति समारोह में उपस्थित रहेंगे।

21वें वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ मेंटल हेल्थ के उद्घाटन के मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में जितनी जल्दी संभव हो, रोगों की पहचान और उसका उपचार के लिए समयबद्ध कार्यक्रम होना चाहिए

रा

ष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए समयबद्ध कार्यक्रम की आवश्यक बताई है। देश की राजधानी दिल्ली में 21वें वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ मेंटल हेल्थ के उद्घाटन के मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में जितनी जल्दी संभव हो रोगों की पहचान और उसका उपचार करने के लिए समयबद्ध कार्यक्रम होना चाहिए। इस मौके पर उन्होंने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2016 का जिक्र किया और कहा कि भारत की 14 फीसदी आबादी को सक्रिय मानसिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप की जरूरत है। तकरीबन दो फीसदी लोग गंभीर मानसिक विकार से पीड़ित हैं और देश में लगभग दो लाख हर साल खुदकुशी कर लेते हैं। अगर आत्महत्या के प्रयास के मामले को शामिल करें तो यह आंकड़ा काफी ज्यादा हो जाता है। राष्ट्रपति ने मानसिक स्वास्थ्य के आंकड़ो

को चिंताजनक बताया और कहा कि महानगरों में निवास करने वाले चाहे उत्पादक आयु समूह के लोग हों या फिर बच्चे व किशोर, सभी मानसिक रोगों के खतरे की जद में हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश में युवाओं की आबादी 65 फीसदी है जिसमें 35 वर्ष से कम उम्र के लोग शामिल हैं और हमारा समाज तेजी से शहरीकरण के प्रति उन्मुख है। यह हमें मानसिक स्वास्थ्य के एक महामारी का रूप लेने की संभावना का संकेत दे रहा है। राष्ट्रपति ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए ज्यादा से ज्यादा मानवीय संसाधनों की आवश्यकता बताई और कहा कि भारत की आबादी सवा अरब है लेकिन यहां डॉक्टर महज सात लाख हैं। राष्ट्रपति ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में डॉक्टरों की भारी कमी है। देश में सिर्फ 5,000 मनोचिकित्सक और 2,000 से भी कम नैदानिक मनोवैज्ञानिक हैं। (आईएएनएस)

मैक्स ने उठाया अनाथ बच्चों के स्वास्थ्य का जिम्मा

मैक्स हेल्थ केयर ने ग्रेस केयर के साथ मिल कर एक अनाथालय को गोद लिया। यहां के बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल अब मैक्स के जिम्मे होगा

मै

क्स हेल्थकेयर (मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल) ने अपने सी.एस.आर प्रोग्राम के तहत ग्रेस केयर एनजीओ के साथ गठजोड़ करते हुए एक अनाथालय को गोद लिया है। इस पहल के अंतर्गत इस अनाथालय के सभी अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को मैक्स हॉस्पिटल जोन 2 (पटपड़गंज, वैशाली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा) के अस्तपालों में पूर्ण रूप से मुफ्त

चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इस कार्यक्रम का आयोजन ग्रेस केयर, पुस्ता रोड, कनवनी गांव, इंदिरापुरम, गाजियाबाद में किया गया जिसमें लगभग 200 से अधिक बच्चों और समाज के गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर बच्चों के लिए चित्रकला, नृत्य-गायन जैसी प्रतियोगितायें भी आयोजित की गई। मैक्स हेल्थ केयर की इस पहल के बारे में नीरज

मिश्र ने कहा कि ग्रेस केयर और यहां के बच्चों के साथ जुड़कर हमें आज एक सुखद आनंद और संतुष्टि मिल रही है, हम हमेशा दे ही समाज के सभी स्तरों की समावेशी भागीदारी में विश्वास करते हैं। हमारे इस प्रयास से अब इन बच्चों को कभी भी इलाज कराने मे कोई परेशानी नहीं होगी, इन सब को स्वस्थ और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी अब हमारी है। ग्रेस केयर

के सुमित ने कहा कि हमें इस बात की बेहद खुशी है की मैक्स इन बच्चो को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है, हमारे पास बहुत सारे प्रतिभावान बच्चे हैं और उचित संसाधनों के आभाव के बाबजूद ये बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। अगर मैक्स हैल्थ केयर जैसी संस्था इन बच्चो को सहयोग देंगी तो ये और भी बेहतर कर सकते हैं। (एजेंसी)


ताजमहल के पास बहुस्तरीय कार पार्किंग

06 - 12 नवंबर 2017

ताजमहल के पास कार पार्किंग के लिए बनी आसपास की सरंचनाओं को ढहाने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश

आईएएनएस

र्वोच्च न्यायलय ने ताजमहल के आसपास बनी सरंचनाओं को ढहाने का आदेश दिया। ताजमहल के पास बहुस्तरीय कार पार्किंग बन रही है। न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और दीपक गुप्ता की खंडपीठ ने सरंचना को ढहाने का आदेश दिया है। पीठ

ने उत्तर प्रदेश सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें परियोजना पूरी करने के लिए 11 पेड़ों को गिराने का आग्रह किया गया था। बहुस्तरीय पार्किंग परियोजना ताज के पूर्वी दरवाजे से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस परियोजना का मकसद पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध न होने के कारण इलाके की सड़कों पर खड़े वाहनों की

वजह से लगने वाले जाम को निजात दिलाना था। परियोजना स्थल इस 17वीं सदी के स्मारक के पश्चिमी दरवाजे के समीप है। यहां पर 400 चार पहिया वाहनों को खड़ा करने का प्रस्ताव है। इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने याचिका दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने सरकार से हलफनामा दायर करने को कहा था। जब मामले की सुनवाई हुई तो राज्य सरकार का वकील अदालत में मौजूद नहीं था। इस पर अदालत ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज करते हुए संरचना जितनी बनी हुई है, उसे ढहाने का आदेश दिया। हालांकि अदालत ने वकील ऐश्वर्या भाटी को एक नई याचिका दाखिल करने की इजाजत दे दी है। भाटी ने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि अदालत के गलियारों में भीड़ ज्यादा होने के कारण राज्य सरकार का वकील अदालत में नहीं पहुंच सका, जिस कारण उन्होंने याचिका बहाल रखने का अनुरोध किया। उन्होंने बाद में कहा कि बहुस्तरीय पार्किंग की योजना को पर्यावरण, ताज ट्रैपीजियम प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और आगरा विकास प्राधिकरण के संदर्भ में अदालत द्वारा गठित समिति ने मंजूरी दी थी।

गुड न्यूज

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कैदियों की 2 माह की सजा माफ मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर लिया गया बंदियों की सजा माफी का फैसला

ध्य प्रदेश के स्थापना दिवस के मौके पर जेल विभाग ने अच्छे आचरण के मद्देनजर 11 हजार बंदियों की सजा में दो माह की माफी देने का फैसला किया। साथ ही 50 बंदी माफी पाकर रिहा हुए। प्रदेश की जेलों में स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। जेल विभाग ने दुष्कर्म, आतंकवादी और प्रतिबंधित धाराओं के बंदियों को छोड़ कर अच्छे आचरण के लगभग 11000 बंदियों को दो माह की सजा में माफी दी है। इस माफी का लाभ पाकर 50 बंदी रिहा हुए। जेल विभाग के अनुसार, जनप्रतिनिधियों के समक्ष जेल अधिकारियों ने बंदियों को अपराध त्यागने की शपथ दिलाई। इस अवसर पर केंद्रीय जेल उज्जैन में मंत्री पारस जैन, जिला जेल दमोह में वित्तमंत्री जयंत मलैया और केन्द्रीय जेल भोपाल में सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने बन्दियों को प्रदेश के स्थापना दिवस की बधाई दी। (एजेंसी) मैनिट और ईएसआईईई पेरिस द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के विद्वानों ने 220 शोधपत्र प्राप्त किए। (एजेंसी)

आधार है तो महीने में ले सकते हैं 12 टिकट

आईआरसीटीसी ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग में नई सुविधाएं दी हैं। आधार कार्ड के सहारे अब आप एक महीने में 12 रेल टिकट बुक करा सकेंगे

ब आधार कार्ड होने पर भारतीय रेल से यात्रा करना आसान हो जाएगा। आईआरसीटीसी ने रेलवे टिकट की बुकिंग के लिए आधार वेरिफिकेशन करने पर 1 महीने के अंदर 12 टिकट बुक कराने की आजादी दी है। खास बात यह है कि रेलवे की टिकट बुक कराने के लिए आधार को अनिवार्य नहीं किया गया है। आधार वेरिफिकेशन कराने पर ऑनलाइन टिकट बुकिंग में मौजूदा 6 टिकट की लिमिट को हर महीने के लिए 12 टिकट कर दिया गया है। आईआरसीटीसी ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग की अपनी गाइडलाइन बदल दी हैं और इस महीने से आईआरसीटीसी की पोर्टल पर आधार नंबर को अपलोड करने की सुविधा दी गई है। इसमें हरेक अकाउंट पर हर महीने के लिए आधार वेरिफिकेशन होने के बाद 6 टिकट की मौजूदा लिमिट को बढ़ाकर 12 टिकट कर दिया गया है। इस लिमिट में आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर किसी अकाउंट में बुक कराए गए टिकट के साथ-साथ रेल कनेक्ट

मोबाइल एप्लीकेशन ऐप के जरिए बुक कराए गए टिकट को भी शामिल किया गया है। रेलवे की आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक आधार कार्ड को ऑनलाइन टिकट के लिए अनिवार्य नहीं किया गया है। बिना आधार कार्ड की इंफॉर्मेशन दिए

ऑनलाइन टिकट बुकिंग में हर एक व्यक्ति एक महीने में छठ टिकट बुक करा सकता है। अगर एक महीने में 6 टिकट से ज्यादा टिकट आप बुक कराना चाह रहे हैं तो आपको पैसेंजर का आधार कार्ड वेरीफाई कराना पड़ेगा।

आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर कोई भी यात्री माय प्रोफाइल कैटेगरी में आधार केवाईसी पर क्लिक करके अपने आधार नंबर को अपडेट कर सकता है। इस वेरिफिकेशन के दौरान आधार से जुड़े हुए मोबाइल नंबर पर एक वन टाइम पासवर्ड भेजा जाता है। इस पासवर्ड को वेबसाइट पर डालने पर आधार कार्ड का वेरिफिकेशन हो जाता है। बता दें कि पिछले दिनों सीनियर सिटीजन कंसेशन में आधार कार्ड को अनिवार्य करने की कोशिश नाकाम रही थी। पिछले साल दिसंबर में रेलवे ने रेल टिकट पर सीनियर सिटीजन के लिए रियायत हासिल करने के वास्ते आधार कार्ड का रजिस्ट्रेशन जरूरी किए जाने का ऐलान किया था। लोगों के विरोध के बाद और तकनीकी खामियों के चलते इस को रोक दिया गया था. इन सबके बीच रेलवे के टिकटों की दलाली को रोकने के लिए रेलवे ने एक बार फिर से आधार का सहारा लिया है, लेकिन इस बार आधार को अनिवार्य नहीं बनाया गया है। (एजेंसी)


12 जेंडर

06 - 12 नवंबर 2017

वंचितों की सेहत संभालने में जुटी पिंक आर्मी गुलाबी साड़ी पहनकर आशा सेविकाएं देश के छह लाख गांवों में महिलाओं के स्वास्थ्य की देखभाल में जुटी हैं

एक नजर

देश में ‘आशा’ की शुरुआत 2005 में हुई थी तब भारत में शिशु मृत्यु दर प्रति हजार 50 थी

पूरे देश में आठ लाख 60 हजार आशा सेविकाएं हैं

जि

भावना अकेला

स देश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की सुविधा महज अमीर व प्रभावशाली लोगों को ही मिल रही हो, वहां गुलाबी साड़ियों में महिलाओं की एक फौज है, जो गरीबों व वंचितों की सेवा में लगातार निस्वार्थ भाव से जुटी हुई है। खासतौर से ये महिलाएं उभरती हुई भारतीय अर्थव्यवस्था में हाशिए पर जा चुके देश के ग्रामीण इलाके में लोगों को स्वास्थ्य सेवा मुहैया करा रही हैं। गुलाबी सेना यानी 'पिंक आर्मी' नाम से चर्चित महिलाओं का यह समूह आज भारत के प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ है, जिसके तहत तकरीबन छह लाख गांवों में लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल हो रही है। पिंक आर्मी में शामिल इन स्वास्थ्यकर्मियों को बमुश्किल से सोने का वक्त मिल पाता है, क्योंकि इनको दिन-रात लोंगों का बुलावा मिलता रहता है। पिंक आर्मी एक तरह से सामुदायिक व सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था के बीच सेतु का काम करती है। इसमें प्रशिक्षित सामुदायिक स्वास्थ्य सेवियों को ही शामिल किया जाता है और भारत सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन यानी एनआरएचएम के अंतर्गत इन्हें मान्यता प्राप्त सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मी यानी ‘आशा’ कहते हैं। आशा की शुरुआत 2005 में हुई थी। तब भारत में शिशु मृत्यु दर प्रति हजार 50 थी, जो कि 2016 में घटकर प्रति हजार 34 रह गई है। जाहिर है कि शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में इन महिलाओं की अहम भूमिका रही है, क्योंकि ये स्वास्थ्यकर्मी गांवों में लोगों को स्वास्थ्य, सफाई और पोषण की जानकारी देती हैं और शिशु-जन्म के पूर्व व बाद की स्वास्थ्य

जांच करवाती है। यही नहीं, महिलाओं को प्रसव के दौरान मदद करती हैं और पोलियो के टीके लगवाने के साथ-साथ स्वास्थ्य सर्वेक्षण में भी योगदान देती हैं। इनमें कई महिलाएं जो मां भी हैं, वे अक्सर अपने बच्चों को भी अपने साथ क्लिनिक ले जाती हैं, क्योंकि उनको असमय अपने काम पर जाना पड़ता है और वे अपने बच्चों को घर में छोड़ नहीं सकतीं। ट्रेडमार्क गुलाबी साड़ी पहनी 23 वर्षीय गोदावरी अनिल राठौर सबसे कम उम्र की आशा सेविकाओं में शामिल हैं। वह कर्नाटक के कलबुर्गी की रहनेवाली हैं। अपने बचपन की बातें याद करते हुए राठौर बताया कि वह छोटी बच्ची थीं, जब उनकी चाची की बच्ची जन्म के महज दो माह के भीतर चल बसी। बच्ची को जन्म के बाद ही मलेरिया हो गया था और मेरी चाची के लिए यह असहनीय अवस्था थी। जब आप अपने बच्चे को बचा नहीं पाते हैं तो आपको कैसा दर्द महसूस होता है, इसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। यही कारण है कि मैंने महिलाओं की मदद करने का निर्णय लिया। पिछले तीन साल में राठौर ने अपने जिले में एक सौ से ज्यादा महिलाओं की मदद की है, जिन्होंने स्वस्थ शिशु को जन्म दिया है। वह कहती हैं कि उसके लिए सबसे ज्यादा खुशी की बात यह है कि देश के दूरवर्ती इलाकों में निवास करने वाली महिलाओं की वह देखभाल करती हैं। उनके पास उतने पैसे नहीं होते हैं कि वे अपनी सेहत का ख्याल रखें और उनका

बच्चा भी स्वस्थ हो। आशा सेविका राठौर ने बताया, ‘हम औसतन 12 घंटे रोजाना काम करते हैं, जिसमें स्वास्थ्य सर्वेक्षण, पोलियो अभियान का काम और गर्भवती महिलाओं की मदद आदि कार्य शामिल हैं। मैं उनकी गर्मधारण से लेकर प्रसव के समय तक की मेडिकल जांच और फिर बच्चों को टीके लगवाने तक उनकी मदद करती हूं, लेकिन महीने के अंत में सिर्फ 1,500 रुपए मिलते हैं। जिस महिला के साथ मैं काम करती हूं वह मेरे लिए परिवार की सदस्य की तरह होती है और तीन बजे रात में भी उसे मेरी जरूरत होती है तो मैं वहां पहुंचती हूं।’ स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के 2014 के आंकड़ों मुताबिक पूरे देश में आठ लाख 60 हजार आशा सेविकाएं हैं। ये सेविकाएं भारत के उन गावों में जहां अस्पताल नहीं हैं, वहां हजारों लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए एक मात्र आशा की किरण होती हैं। पोलियो उन्मूलन और शिशुओं में कुपोषण दूर करने में इनका काफी योगदान रहा है। स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए ये महिलाएं रोज त्याग की भावना प्रदर्शित करती हैं, लेकिन इसके बदले इन्हें मामूली-सी मेहनताना मिलती है, जिससे बमुश्किल से इनका गुजारा हो पाता है। राठौर जैसी और भी कई आशा सेविकाएं हैं, जो दिन-रात अपनी सेवाएं देती हैं। उन्होंने बताया कि कई बार ऐसा होता है कि वह अपनी दो साल की बेटी लक्ष्मी को घर में नहीं छोड़ पाती हैं और उसे साथ ले जाना पड़ता है।

हम औसतन 12 घंटे रोजाना काम करते हैं, जिसमें स्वास्थ्य सर्वेक्षण, पोलियो अभियान का काम और गर्भवती महिलाओं की मदद आदि कार्य शामिल हैं - गोदावरी अनिल राठौर, आशा सेविका

आशा सेविकाओं को इस बात का गर्व है कि उनकी मदद से लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आई है। राठौर ने कहा कि लोग सफाई पर ध्यान देने लगे हैं और शौचालयों का निर्माण कर रहे हैं। पानी को शुद्ध करके पीते हैं। पहले वे इन सब चीजों की ज्यादा परवाह नहीं करते थे। उधर, बेलारी जिले की आशा सेविका 31 वर्षीय गीता नौ साल से अपनी सेवाएं दे रही हैं। गीता दो बेटों की मां होने की अपनी निजी जिम्मेदारी के साथ-साथ बेलारी के हरीजिनाडोन गांव में 1,500 से ज्यादा लोगों की सेवा करती हैं। वह कहती हैं कि उनका इरादा गांव को बेहतर बनाना है। उन्होंने अपने नौ साल के सेवा काल में कम से कम 300 महिलाओं को उनकी गर्भावस्था के दौरान मदद की है। अब वह गांव के स्कूल जाने वाले बच्चों की देखभाल करती हैं। गीता के मुताबिक, ‘किसी महिला के गर्भवती होने से उसके परिवार में खुशियां आती हैं। वह कहती हैं कि लोगों के सपनों को सच करने में उनकी मदद करने और भारत की भावी पीढ़ी को स्वस्थ बनाने के कार्य से उन्हें संतोष मिलता है।’ रायपुर की 35 वर्षीय नागोमी पांच बच्चों की मां हैं और वह पिछले 12 साल से अपने गांवों में आशा सेविकाओं के कार्य को देख रही हैं। उन्होंने बताया कि गांव में अगर बच्चों को कुछ होता है तो दोष महिलाओं पर होता है और महिलाओं को भी ऐसा लगता है कि उनकी ही गलतियों के कारण समय से पहले बच्चे का जन्म हुआ। लेकिन आशा सेविकाओं के नियमित आने से अब महिलाओं में ही नहीं, बल्कि पुरुषों में भी जागरूकता आई है और अब वे अपनी पत्नियों के स्वास्थ्य के बारे में जानने में रुचि रखते हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यानी यूएनडीपी की ओर से वर्ष 2016 में जारी रिपोर्ट के मुताबिक मानव विकास सूचकांक यानी एचडीआई में भारत 188 देशों की की सूची में 131वें स्थान पर है। गौरतलब है कि इस सूची में भारत, मिस्र (111वें), इंडोनेशिया (111वें), अफ्रीका (119वें) और इराक (121वें) समेत कई देशों से नीचे है। सरकार इस रेटिंग में सुधार लाने की दिशा में प्रयासरत है और देश में प्रमुख सामाजिक संकेतकों, जैसे शिशु मृत्यु दर, मातृत्व मृत्य दर और जीवन-प्रत्याशा को बेहतर बनाने के लिए राज्यों के बीच स्पर्धात्मक माहौल पैदा करने पर जोर दे रही है।


वनटांगिया को मिला वोटिंग का हक आजादी के बाद से वोट नहीं डाल सके वनवासी वनटांगियां परिवारों को मिला मताधिकार

06 - 12 नवंबर 2017

विशेष

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सस्ते घर का सपना होगा साकार

अगले तीन सालों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2019 तक दो करोड़ से ज्यादा घरों का निर्माण किया जाएगा

एक नजर

सं

श्रणव शुक्ला

विधान लागू होने के के साथ ही भले देश में हर नागरिक को बगैर किसी तरह के क्षेत्रीय, लैंगिक या सामाजिक विभेद के मताधिकार का अधिकार दिया गया हो, पर इस पर पूरी तरह अमल कुछ तकनीकी कारणों या लापरवाहियों के कारण नहीं हो सका। ऐसा ही एक गांव है गोरखपुर का तिकोनिया वनटांगिया। इस गांव के लोगों के नाम आज तक किसी मतदाता सूची में दर्ज नहीं हुए हैं, क्योंकि औपचारिक तौर पर इस गांव को सरकार की तरफ से राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिला था। पर इस गांव के लोगों के लिए संवैधानिक अधिकारों से दूर रहने का यह सिलसिला इस साल दिवाली के मौके पर टूट गया। देश की मुख्यधारा से वनटांगियां परिवारों को जोड़ने का श्रेय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को है। मुख्यमंत्री योगी ने हर बार की तरह इस साल भी गोरखपुर के वनटांगिया परिवारों के साथ दिवाली मनाई। पर इस बार एक मुख्यमंत्री के तौर पर योगी के आने से वनटंगिया परिवारों की जिंदगी में बहुत कुछ बदल गया। दरअसल, मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ जब पहली बार गोरखपुर पहुंचे तो पूरे वनटांगिया समुदाय ने उनका नंदानगर में भव्य स्वागत किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री ने भी वनटांगिया समुदाय को निराश नहीं किया और उन्हें

राजस्व गांव में जल्द से जल्द शामिल किए जाने का आश्वसन दिया। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शासन स्तर से वनटांगिया को राजस्व गांव में शामिल करने की तैयारियों में तेजी लाई गई। जिला स्तर से लेकर शासन स्तर तक सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं। खुशी की बात यह रही कि योगी जब इस बार वनटांगिया परिवारों के बीच पहुंचे तो उन्होंने अपने वादे को पूरा कर दिखाया और इस तरह वनटांगिया परिवारों का यह गांव राजस्व गांव बन गया। वनटांगिया परिवारों के लिए दीपावली के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी की तरफ से यह अनुपम भेंट थी। राजस्व गांव बनने के बाद अब इस गांव का पूरा नाम तिकोनिया वनटांगिया हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के कुसम्ही क्षेत्र के तिकोनिया वनटांगिया बस्ती में वनटांगिया लोगों के साथ इस बड़े तोहफे के साथ उल्लासपूर्ण माहौल में दीपावली मनाई। इस मौके पर उन्होंने वनटांगिया बच्चों को स्कूल बैग, ड्रेस, मिठाइयां व फुलझड़ियां बांटी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर गांव में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वनटांगिया गांव में जो लोग रहते हैं, वे अनुसूचित व पिछड़ी जाति के लोग हैं। फिर भी जातिवाद की राजनीति करने वाले लोगों ने आज तक वनटांगिया बस्ती की सुध नहीं ली। यहां तक कि 1920 से वन क्षेत्र में रह रहे इन लोगों को आज तक

मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी जब पहली बार गोरखपुर पहुंचे तो वनटांगिया समुदाय को राजस्व गांव में शामिल किए जाने का आश्वसन दिया था

मुख्यमंत्री योगी ने वनटांगिया को दिया राजस्व गांव का दर्जा दीपावली के मौके पर की मुख्यमंत्री ने यह बड़ी घोषणा

योगी 2007 से वनटांगिया परिवारों के बीच योगी मना रहे हैं दीपावली

न तो मतदान का हक मिला है और न ही बुनियादी सुविधाएं मिल पाईं। जिसकी वजह से शासन द्वारा मिलने वाली सुविधाओं से यह अभी तक वंचित रहे। योगी ने कलयुग में रामराज और रावण राज का मतलब बताते हुए कहा कि जिस राज्य में सभी मूलभूत सुविधाएं सभी नागरिकों को समान रूप से हासिल हों, वही रामराज है। इससे पूर्व योगी आदित्यनाथ सांसद के तौर पर लगातार वनटांगियों के बीच दिवाली मनाते रहे हैं। उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद योगी की यह पहली दिवाली थी। इस बार जब समय की व्यस्तता को लेकर वनटांगियों को जब मुख्यमंत्री को आने को लेकर संशय हुआ तो ग्रामवासियों ने सीएम के बिना दिवाली मनाने से इंकार कर दिया। ऐसे में जब इस बात की सूचना मुख्यमंत्री योगी को हुई तो उन्होने वनटांगियों के बीच दिवाली मनाने के लिये तुरंत हामी भर दी। योगी आदित्यनाथ पिछले 2007 से वनटांगियों के बीच दिवाली मनाते आ रहे है। यानी वनटांगियां परिवारों के साथ उनका रिश्ता नया नहीं, बल्कि एक दशक पुराना है। वे हर साल दिवाली के दिन वनटांगिया समुदाय के बीच पहुंचकर दीप प्रज्ज्वलित करते हैं। इस दौरान वे बच्चे, बुजुर्ग, युवा, महिलाओं सभी को मिठाई और खील वितरित करते हैं।

रकार की तरफ से कहा गया कि सार्वभौमिक किफायती आवास योजना से निर्माण उद्योग को काफी बढ़ावा मिलेगा और अगले तीन सालों में प्रधानमंत्री आवास योजना के शहरी घटक के तहत 1.2 करोड़ घरों का निर्माण किया जाएगा, जबकि इसके ग्रामीण घटक के तहत 1.02 करोड़ घरों का निर्माण 2019 के मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। वित्त सचिव अशोक लवासा ने कहा कि सार्वभौमिक किफायती आवास योजना से निर्माण उद्योग को तेज बढ़ावा मिलेगा। पीएमएवाई-शहरी के तहत 1. 2 करोड़ घर बनाए जाएंगे, जिस पर अगले तीन सालों में 1,85,069 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पीएमएवाई (ग्रामीण) के तहत 1.02 करोड़ घर बनाए जाएंगे, जिन पर केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर साल 2019 के मार्च तक 1,26,795 करोड़ रुपए खर्च करेंगी। लवासा ने कहा कि इनमें से 51 लाख घरों का निर्माण इसी साल पूरा होगा। सरकार ने किफायती आवास के लिए पिछले महीने नई पीपीपी (सार्वजनिक निजी भागीदारी) नीति की घोषणा की थी, जिसके तहत निजी बिल्डरों द्वारा निजी जमीन पर बनाए जानेवाले घरों के लिए प्रति घर 2.50 लाख रुपए की मदद केंद्र सरकार की तरफ से दी जाएगी। (एजेंसी)


14 स्वच्छता

06 - 12 नवंबर 2017

'शौचालय नहीं, तो दुल्हन नहीं'

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उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बिजवाड़ा गांव की सर्वसमाज पंचायत ने यह फैसला किया है कि जिस घर में शौचालय नहीं होगा, उस घर में शादी नहीं होगी

मैंने सीख लिया था कि शौचालय की जरुरत को कैसे घंटों तक रोके रखना है, क्योंकि बचपन से ही मुझे एक ही नियम सिखाया गया था - या तो मैं खुले में शौच के लिए तड़के जा सकती हूं, या रात हो जाने के बाद... लेकिन अब मेरा भाग्य बदल गया है... हाल ही में मेरे माता-पिता ने घर में शौचालय बनवा लिया है... अब मैं तय करती हूं कि मुझे शौच के लिए कब जाना है... मैं जब चाहूं, तब शौच के लिए जा सकती हूं... यह बहुत अच्छा लगता है... मैंने कभी नहीं सोचा था, घर में शौचालय बन जाने से जीवन कितना सरल हो

जाएगा... ' यह कहना है, 18-वर्षीय एक लड़की का, जो उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में रहती है, जहां की पंचायत ने हाल ही में एक आदेश पारित किया है - शौचालय नहीं, तो दुल्हन नहीं... हाल ही में रिलीज हुई अक्षय कुमार की फिल्म 'टॉयलेट - एक प्रेम कथा' की तर्ज पर आदेश में कहा गया है कि जिले का कोई भी निवासी अपनी बेटी की शादी ऐसे किसी घर में नहीं करेगा, जहां शौचालय नहीं होगा। यह फैसला बागपत के बिजवाड़ा गांव की सर्वसमाज पंचायत ने लिया है, और इस बैठक में आसपास

के 10 अन्य गांवों के पंचायत प्रमुख भी मौजूद थे। इसके अलावा यह भी तय किया गया कि इस फैसले के खिलाफ जाने वाले परिवार पर जुर्माना लगाया जाएगा और उस राशि का इस्तेमाल ऐसे घरों में शौचालय बनवाने के लिए किया जाएगा, जिनमें यह सुविधा मौजूद नहीं है। भारत में खुले में शौच की गलत परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसकी वजह से डायरिया, पीलिया और पोलियो जैसी बीमारियां

शौचालय न बनवाने पर घरों का बिजली-पानी बंद आं

शौचालय नहीं बनवाने पर आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले के कई घरों में बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई

ध्र प्रदेश खम्मम जिला प्रशासन ने के नेलाकोंडपल्ली मंडल के राजेश्वरपुरम गांव में कई घरों का बिजली-पानी बंद कर दिया है। क्योंकि इन घरों में अब तक शौचालय की सुविधा नहीं है। सरकार ने स्वच्छ ग्रामीण मिशन के तहत पूरे जिले को खुले में शौच से मुक्त करावाने के लिए 2,500 शौचालय बनाने की स्वीकृति दी थी। इसके लिए हर परिवार के लिए 12-12 हजार रुपए की राशि भी स्वीकृत की गई। शौचालय निर्माण का कार्य पूरा करने के लिए 14 नवंबर तक की समय सीमा तय की गई। लेकिन इस समय सीमा के नजदीक आ जाने के बावजूद अब तक कई गांवों में लोगों ने शौचालय नहीं बनवाए, समय सीमा समाप्त होने के पहले लक्ष्य को पूरा

करने के उद्देश्य से प्रशासन ने बिजली और पानी की सेवा बंद करने का फैसला किया। ख़बर के मुताबिक स्थानीय शासन ने राजेश्वरपुरम के 32 घरों में पानी और बिजली की आपूर्ति बंद कर दी गई है। इसी तरह कोमतलागुडम, बोप्परम के कई घरों में भी पानी की आपूर्ति बंद कर दी

गई है। जबकि तिम्मेनेनिपालेम गांव के लोगों को इसी तरह की कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी टी प्रभाकर राव के मुताबिक, ‘लोगों को तीन विकल्प दिए गए थे। पहला- वे खुद शौचालय बनवा लें और सरकार खर्च का भुगतान करे। दूसरा- लोग सिर्फ नींव और सैप्टिक टैंक आदि का काम करा लें और बाकी निर्माण सरकार करा दे और तीसरा- सरकार सामग्री की आपूर्ति कर दे और लोग निर्माण खुद करा लें। इस सिलसिले में जागरूकता अभियान भी चलाया गया, लेकिन इसके बाद भी कई लोग शौचालय निर्माण नहीं करा रहे हैं, इसीलिए यह सख्ती बरतनी पड़ रही है। (एजेंसी)

पैदा होती हैं। डायरिया के कारण तो हर साल 22 लाख लोगों की मौत हो जाती है। हालांकि अब तक बागपत खुले में शौच से मुक्त नहीं हो पाया है, लेकिन यहां के हालात राज्य के कई अन्य हिस्सों की तुलना में बेहतर हैं। व्यक्तिगत घरेलू शौचालय का जिले में प्रसार 86.49 फीसदी है, जिसे 100 फीसदी बनाने के लिए प्रशासन से लेकर नागरिकों तक सभी प्रयासों में जुटे हैं। (एजेंसी)

शौचालय के लिए छात्रों का अनूठा प्रयोग

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में शौचालय निर्माण के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए स्कूलों में अनोखा तरीका अपनाया जा रहा है

रों में व्यक्तिगत शौचालयों को बढ़ावा देने के लिए पाठशालाओं में छात्रों की उपस्थिति और अनुपस्थिति को लेकर अनोखा तरीका अपनाया जा रहा है। आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के नगरी स्थित सरकारी विद्यालयों में छात्रों को 'प्रेजेंट सर' या 'यस सर' कहने के बजाए 'शौचालय बनाया हूं' सर../ ' शौचालय नहीं बनाया हूं सर ' कहना अनिवार्य होगा। सरकार ने व्यक्तिगत शौचालय निर्माण को बढावा देने के उद्देश्य से यह नीति अपनाने का निर्णय लिया है। जिन छात्रों के घर में व्यक्तिगत शौचालय होगा वे अब ' बनाया हूं सर ' और जिन लोगों के घर में व्यक्तिगत शौचालय नही होगा उन्हे ' नहीं है सर ' कहना होगा। इस संबंध में स्कूल एजुकेशन प्रोसीडिंग नंबर 448 के अंतर्गत आदेश जारी किया गया है। सरकारी प्राथमिक और उच्च विधालयों के प्रधानाध्यापकों को यह आदेश जारी किया गया है। चित्तूर जिले के डीईओ पांडुरंगा स्वामी ने कहा कि इसे हर हाल में अनुसरण करना होगा। (एजेंसी)


वृंदावन व बरसाना के अधिसूचित क्षेत्र तीर्थस्थल घोषित

इन तीर्थस्थलों की पौराणिक महत्ता एवं पर्यटन की दृष्टि से इनके महत्व को देखते हुए इन्हें पवित्र तीर्थस्थल घोषित किया गया है

त्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जनपद मथुरा की पूर्ववर्ती नगर पालिका परिषद वृंदावन एवं नगर पंचायत बरसाना के अधिसूचित क्षेत्र को 'पवित्र' तीर्थस्थल घोषित किया है। इस संबंध में शासन के धर्मार्थ कार्य विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया, ‘मथुरा जिले का वृंदावन क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली एवं भगवान श्रीकृष्ण तथा उनके

ध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन विभाग ने ईएसआईईई पेरिस के साथ मिलकर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। रीसेंट इनोवेशन एंड इन्वेडिड सिस्टम (आरआईएसई) विषय पर चर्चा के लिए कई देशों के संचार विशेषज्ञ जुटे हैं। मैनिट के प्रोफेसर डॉ. एम.के. गुप्ता ने बताया कि इस तीन दिवसीय सम्मेलन में

ज्येष्ठ भ्राता बलराम की क्रीड़ास्थली के रूप में विश्व विख्यात है। साथ ही, बरसाना राधारानी की जन्मस्थली एवं क्रीड़ास्थली है। इन पवित्र स्थानों पर देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने एवं पुण्य लाभ के लिए आते हैं। इन तीर्थस्थलों की पौराणिक महत्ता एवं पर्यटन की की दृष्टि से इनके अत्यधिक महत्व को देखते हुए इन्हें पवित्र तीर्थस्थल घोषित किया गया है।’ (एजेंसी)

भारत के अलावा अल्जीरिया, आयरलैंड, जॉर्डन, पुर्तगाल, नाइजीरिया, अमेरिका, फ्रांस और जापान से लगभग 220 शोधपत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 114 शोधकर्ताओं ने अपने शोधपत्रों को 18 तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के चेयरमैन डॉ. अनिल डी. सहस्रबुद्धे और मैनिट की डॉ. गीता बाली की मौजूदगी में हुआ। कार्यक्रम

06 - 12 नवंबर 2017

राज्य

सुआ नृत्य में बनाया विश्व रिकॉर्ड

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की 15,000 महिलाओं ने दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक लगातार सुआ नृत्य करके बनाया कीर्तिमान

आईएएनएस/वीएनएस

त्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की महिलाओं ने एक नया कीर्तिमान रचा है। जिले की 15,000 महिलाओं ने एक साथ सुआ नृत्य करने का रिकॉर्ड बनाया। सुआ नृत्य छत्तीसगढ़ की संस्कृति में अहम स्थान रखता है। भिलाई के जयंती स्टेडियम में हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी मौजूद थे। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पांडेय भी पारंपरिक परिधान में सुआ नृत्य किया। उनके साथ अंतरराष्ट्रीय कलाकार तीजन बाई भी मौजूद थीं। इस मौके मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा, ‘दुर्ग अपनी हजारों साल की परंपरा को जीवित रखने का कार्य किया है। दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक लगातार 15 हजार बहनों ने सुआ नृत्य किया। सुआ नृत्य हमारी परंपरा है। धान के टोकरे में सुआ (मिट्ठू) को रखा जाता है। भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा की जाती है। शिव विवाह का आयोजन किया जाता है।’ मुख्यमंत्री ने महिलाओं की मांग पर स्टेडियम निर्माण की घोषणा भी की। छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपरा व लोक नृत्य को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक सुआ नृत्य का आयोजन किया गया। यह नृत्य प्रदेश की कलासंस्कृति, प्रकृति वर्णन, प्रेम के साथ ही देव वर्णन

को रेखांकित करता है। यह नृत्य समूह में किया जाने वाला नृत्य है, जो एकजुटता का परिचय देने के साथ ही एक राग व ताल में मांदर व झांझ की थाप में किया जाता है। नृत्य करते समय प्रकृति की सुंदरता

का बखान करने के साथ ही देवी-देवताओं की गाथा का वर्णन किया जाता है। सुआ नृत्य सामाजिक समरसता का एक अनुपम उदाहरण है, जो बिना किसी जाति, समुदाय के बंधन के साथ सहजतापूर्वक स्नेह के साथ किया जाता है। प्रदेश के इस गौरवशाली नृत्य को विश्व स्तर पर पहचान देने के उद्देश्य से प्रदेश में पहली बार पूर्व सांसद सरोज पांडेय के नेतृत्व में प्रदेश स्तरीय सुआ नृत्य का आयोजन हुआ। प्रदेश के विभिन्न अंचलों की महिलाएं भी नृत्य कार्यक्रम में शामिल हुईं। शहरी महिलाओं के साथ-साथ ग्रामीण महिलाएं भी इस कार्यक्रम में भागीदार बनीं।

भोपाल में जुटे संचार क्षेत्र के महारथी

मैनिट और ईएसआईईई पेरिस द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को विभिन्न देशों के विद्वानों से 220 शोधपत्र प्राप्त हुए

में सागर समूह के चेयरमैन इंजीनियर संजीव अग्रवाल, आईईएस ग्रुप के चेयरमैन बी.एस. यादव और एलएनसीटी ग्रुप के सचिव अनुपम चौकसे ने अतिथियों का स्वागत किया। इस कार्यक्रम में जापान की यूनिवर्सिटी अफ टोक्यो से आए प्रोफेसर फुजिता ने सुनामी की चेतावनी देने के लिए सिग्नल प्रोसेसिंग एवं मैथेमिटकल मडलिंग की व्याख्या की। इसी क्रम में आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र कुमार और

ईएसआईईई के प्रोफेसर डॉ. सिलवान ल्योवाक ने अपने विचार रखे। मैनिट के निदेशक डॉ. नरेंद्र सिंह रघुवंशी और आईईईई-मध्यप्रदेश सेक्शन के चेयरमैन डॉ. एनपी चावला ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आरके बघेल, विभाग के प्राध्यापक डॉ. आरएन यादव व डॉ. धीरज अग्रवाल ने भी समस्त सदस्यों और अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। (एजेंसी)


16 खुला मंच

06 - 12 नवंबर 2017

‘आप तब तक यह नहीं समझ पाते कि आपके लिए कौन महत्त्वपूर्ण है, जब तक आप उन्हें वास्तव में खो नहीं देते -महात्मा गांधी

अभिमत

अमिताभ कांत

लेखक नीति आयोग के सीईओ हैं

जल प​िरवहन की फेरी

अत्याधुनिक रो-रो परियोजना का उद्घाटन सौराष्ट्र के भावनगर जिले में घोगा से दक्षिण गुजरात में भरूच जिले के दहेज को जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय है

सोबती को सम्मान

53वां ज्ञानपीठ पुरस्कार हिंदी साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर कृष्णा सोबती को दिया जाएगा

सा

हित्य और संस्कृति की दृष्टि से इस हफ्ते दो अहम खबरें आईं। भारतीय शास्त्रीय और सुगम संगीत की शीर्ष गायिका गिरिजा देवी का निधन और हिंदी की वरिष्ठ कथाकार कृष्णा सोबती को ज्ञानपीठ सम्मान देने का निर्णय। अप्पा के नाम से मशहूर गिरिजा देवी ने खासतौर पर ठुमरी गायन की पूरबी शैली को पूरी दुिनया में मशहूर किया था। उनके शिष्यों की लंबी कतार है। अप्पा बनारस और कोलकाता की संस्कृति से जुड़ी थीं और यह जुड़ाव उनके गायन में भी झलकता था। इस दुखद खबर के बीच ही यह सुखद खबर आई कि 53वां ज्ञानपीठ पुरस्कार हिंदी साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर कृष्णा सोबती को दिया जाएगा। सोबती को उनके उपन्यास ‘जिंदगीनामा’ के लिए वर्ष 1980 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। उन्हें 1996 में अकादमी के उच्चतम सम्मान साहित्य अकादमी फेलोशिप से भी नवाजा गया था। इसके अलावा उन्हें पद्मभूषण, व्यास सम्मान, शलाका सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। उन्होंने अपने लेखन से हिंदी की कम से कम दो पीढ़ियों को रचनात्मक संवेदना से जोड़ा है। उनके कालजयी उपन्यासों में ‘सूरजमुखी अंधेरे के’, ‘दिलोदानिश’, ‘जिंदगीनामा’, ‘ऐ लड़की’, ‘समय सरगम’, ‘मित्रो मरजानी’, ‘जैनी मेहरबान सिंह’, ‘हम हशमत’, ‘बादलों के घेरे’ ने कथा साहित्य को अप्रतिम ताजगी और स्फूर्ति प्रदान की है। हाल में प्रकाशित ‘बुद्ध का कमंडल लद्दाख’ और ‘गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान’ भी उनके लेखन के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। 18 फरवरी 1924 को गुजरात (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मी सोबती साहसपूर्ण रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती हैं। उनके रचनाकर्म में निर्भिकता, खुलापन और भाषागत प्रयोगशीलता स्पष्ट परिलक्षित होती है। 1950 में कहानी ‘लामा’ से साहित्यिक सफर शुरू करने वाली सोबती स्त्री की आजादी और न्याय की पक्षधर हैं। उन्होंने समय और समाज को केंद्र में रखकर अपनी रचनाओं में एक युग को जिया है।

टॉवर

(उत्तर प्रदेश)

प्र

धानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी एवं अत्याधुनिक रो-रो परियोजना का उद्घाटन सौराष्ट्र के भावनगर जिले में घोगा से दक्षिण गुजरात में भरूच जिले के दहेज को जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। हजीरा परियोजना के दूसरे चरण की शुरूआत भारत के परिवहन क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव का सूचक है। इस जलमार्ग की पूरी क्षमता का दोहन करने से लोगों, वस्तुओं और वाहनों की आवाजाही को बड़ी रफ्तार मिलेगी। माल ढुलाई के लिए समय और लागत की बचत का भारत के विनिर्माण एवं निर्यात क्षेत्र पर लाभकारी असर पड़ेगा। अब तक सौराष्ट्र के घोगा से दक्षिण गुजरात के दहेज तक जाने के लिए 360 किलोमीटर की सड़क यात्रा करनी पड़ती थी। इसे तय करने में लगभग 8 घंटे का समय लगता था। लेकिन समुद्री मार्ग से यह दूरी अब मात्र 31 किलोमीटर रह गई है। भारत में लगभग 14,500 किलोमीटर नौगम्य अंतर्देशीय जलमार्ग और करीब 7,517 किलोमीटर समुद्र तट है, जिन्हें परिवहन को सुगम बनाने के उद्देश्य, से प्रभावी तौर पर विकसित किया जा रहा है। इससे सड़क एवं रेल नेटवर्क पर भीड़भार कम करने में मदद मिलेगी और क्षेत्रों के समग्र आर्थिक विकास को कई गुना बढ़ाया जा सकेगा। समुद्र तटीय नौवहन और अंतर्देशीय जल परिवहन के ईंधन कुशल,

पर्यावरण के अनुकूल एवं कम लागत वाले साधन हैं, विशेष रूप से थोक वस्तुओं के लिए। मालवाहक जहाजों से उत्सर्जन 32-36 ग्राम कार्बन ऑक्साइड प्रति टन-किलोमीटर तक होता है, जबकि सड़क परिवहन के भारी वाहनों के मामले में यह 51-91 ग्राम कार्बन ऑक्साइड प्रति टन-किलोमीटर के दायरे में होता है। इसके अलावा सड़क परिवहन की औसत लागत 1.5 रुपए प्रति टन-किलोमीटर और रेलवे के लिए यह 1.0 रुपए प्रति टन-किलोमीटर है, जबकि जलमार्ग के लिए यह महज 25 से 30 पैसे प्रति टन-किलोमीटर होगी। एक लीटर ईंधन से सड़क परिवहन के जरिए 24 टनकिलोमीटर और रेल परिवहन के जरिए 85 टन-किलोमीटर माल की ढुलाई हो सकती है, जबकि जलमार्ग के जरिए इससे अधिकतम 105 टन-किलोमीटर तक माल की ढुलाई की जा सकती है। इन आंकड़ो से इस बात को बल मिलता है कि भूतल परिवहन के मुकाबले जलमार्ग परिवहन का कहीं अधिक किफायती एवं पर्यावरण के अनुकूल माध्यम है। यदि लॉजिस्टिक्स लागत को जीडीपी के 14 प्रतिशत से घटाकर 9 प्रतिशत तक घटा दी गई तो देश को प्रति वर्ष 50 बिलियन डॉलर की बचत हो सकती है। माल ढुलाई की लागत कम होने पर उत्पादों के मूल्य में भी गिरावट आएगी। रोल-ऑन व रोल-ऑफ जलमार्ग परियोजनाओं में रो-रो जहाज/नौकाएं शामिल होती हैं, जिन्हेंे कारों, ट्रकों, सेमी-

भारत में लगभग 14,500 किलोमीटर नौगम्य अंतर्देशीय जलमार्ग और करीब 7,517 किलोमीटर समुद्र तट है, जिन्हें परिवहन को सुगम बनाने के उद्देश्य से प्रभावी तौर पर विकसित किया जा रहा है


06 - 12 नवंबर 2017 ट्रेलर ट्रकों, ट्रेलरों और रेल रोड कारों जैसे पहिए वाले कार्गो की ढुलाई के लिए डिजाइन किया जाता है, जिन्हें उनके पहियों पर चलाते हुए अथवा किसी प्लेटफॉर्म वाहन के जरिए जहाजों पर चढ़ाया अथवा उतारा जाता है। इसमें संबंधित पोर्ट टर्मिनल और संबंधित कनेक्टिविटी बुनियादी ढांचे के साथ जेट्टीज भी शामिल होते हैं। यात्री जेट्टीज का इस्तेमाल पूरी तरह से यात्रियों के नौकायन के लिए किया जाता है, लेकिन रो-रो जेट्टीज इस तरीके से निर्मित होते हैं ताकि बंदरगाह पर जहाजों में माल की लदान एवं उठाव कुशलता से किया जा सके। गुजरात में रो-रो परियोजना दो टर्मिनल के बीच 100 तक वाहनों (कार, बस और ट्रक) और 250 यात्रियों को ले जाने में समर्थ होगी। ऐतिहासिक तौर पर सीमित विकल्प उपलब्ध1 होने के कारण इस क्षेत्र में सड़क परिवहन में अक्सर काफी भीड़ और जाम का सामना करना पड़ता है। साथ ही रो-रो फेरी ऑपरेटर ने जो किराए का प्रस्ताव दिया है वह प्रचलित बस किराए के बराबर है। इसीलिए इस सुविधा से इस क्षेत्र के यात्रियों को बहुप्रतीक्षित राहत मिल जाएगी। भारत में असम, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और केरल में विभिन्नं रो-रो परियोजनाओं में भौगोलिक दृष्टि से प्रतिकूल भारत के आंतरिक इलाकों में आवाजाही के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्हें जलमार्ग से जोड़कर इस विषमता को व्यापक फायदे में बदला जा सकता है। भारत में इस प्रकार की अधिकतर रो-रो परियोजनाओं को राज्य सरकार द्वारा परिचालन एवं रखरखाव के साथ ईपीसी मोड द्वारा निर्माण और परिचालन एवं रख-रखाव के साथ सार्वजनिक निजी भागीदारी (डीबीएफओटी) मोड के तहत लागू की गई हैं। हाल में ऐसी एक परियोजना महाराष्ट्र में शुरू की गई है। वस्तुओं के मूल्य निर्धारण में वैश्विक प्रतिस्पर्धा और विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक एवं आर्थिक समृद्धि लाने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह जरूरी है कि सरकार कई स्तर वाली परिवहन की एकीकृत एवं कुशल व्यवस्था विकसित करे, जिनमें से प्रत्येक स्तर को जीवंत एवं कुशल तरीके से विकसित करने की आवश्यकता है। परिवहन का ऐसा ही एक स्तर जलमार्ग है। जल आधारित परिवहन में निवेश की एक प्रमुख विशेषता यह है कि कई भूमि आधारित परिवहन व्यवस्था, जिसमें जटिल भूमि अधिग्रहण, मार्ग के अधिकार, पुनर्वास एवं अन्य। मुद्दों से निपटने की आवश्यकता होती है, के विपतरीत जल आधारित परिवहन परियोजना प्रस्ताव अपेक्षाकृत सरल कदम है। यह कई कानूनी, नियामकीय, सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों से भी मुक्त है, जो आमतौर पर अन्य परिवहन परियोजनाओं को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा एक सार्वजनिक-निजी भागीदारीडीबीएफओटी मॉडल के तहत फेरी ऑपरेटरों से बर्थिंग शुल्क और टर्मिनल पर पार्किंग राजस्व भी प्राप्त होगा। भारत में बुनियादी ढांचे का अभाव और समग्र आबादी एवं आर्थिक विकास में कमी के कारण रो-रो परियोजना से 10% से अधिक की एक परियोजना आईआरआर सृजित होती हैं और इसीलिए यह एकल स्तर पर आर्थिक रूप से व्यवहार्य है।

ल​ीक से परे

प्रियंका तिवारी

खुला मंच

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लेखिका युवा पत्रकार हैं और देश-समाज से जुड़े मुद्दों पर प्रखरता से अपने विचार रखती हैं

उम्मीद जगाती है आस्था से भरी तरुणाई

एक सर्वे के मुताबिक करीब 79 फीसदी भारतीय युवा नियमित या अनियमित रूप से ईश्वर की प्रार्थना करते हैं

स्वा

मी विवेकानंद ने जिन दो बातों पर भारतवर्ष की श्रेष्ठता और महानता की कामना की थी, उसमें एक तो था वेदांत दर्शन। जबकि दूसरा आधार था देश के युवा। यह बात ज्यादा पुरानी नहीं है। वैसे भी विवेकानंद को आधुनिक संत माना जाता था। एक ऐसा संत जिसने युवकों को स्वस्थ रहने के लिए नियमित फुटबॉल खेलने की सलाह दी थी। भारत आज दुनिया का सबसे तरुण देश है। देश की 125 करोड़ की आबादी के 65 फीसदी हिस्से की उम्र 35 साल से कम है। इस युवा आबादी का करीब आधा भाग 25 साल या उससे कम उम्र का है। जाहिर है कि देश को इसका कुछ अंदाजा होना ही चाहिए कि युवा वर्ग विभिन्न विषयों पर क्या सोचता है। उसकी सोच काफी हद तक भारत के मन-मिजाज और स्वभाव का परिचय दे सकती है। यह अध्ययन या आकलन यह भी बता सकता है कि बदलती सामाजिक-राजनीतिक स्थिति का उस पर क्या असर पड़ता है। इसी की पड़ताल के लिए सेंटर फॉर द स्टडी इन डेवलपिंग सोसायटीज (सीएसडीएस) और जर्मन संस्था केएएस ने पिछले साल युवाओं के बीच एक सर्वे किया, जिसके नतीजे कुछ समय पहले सामने आए। दिलचस्प है कि इनकी तुलना सीएसडीएस के पिछले सर्वे के परिणामों से करने पर कई रोचक जानकारियां उभरकर आई हैं। नए अध्ययन से जो एक बात प्रमुखता से साफ हुई है, वह यह कि देश के युवा रहन-सहन में

आधुनिक चीजों को जितनी तेजी से अपना रहे हैं, वैसा लचीलापन उनमें विचार के स्तर पर नहीं देखा जा रहा है, बल्कि कुछ मामलों में वे पीछे की ओर गए हैं। उनके मन-मस्तिष्क में पुरातनपंथी विचारों ने भी जगह बनाई है। यहां जो एक बात समझने की है, वह यह कि यह अध्ययन इस नजरिए से निराश से ज्यादा आगाह करता है। बात करें युवाओं की मन:स्थिति की तो सर्वे का कहना है कि 18 से 25 साल के 78 फीसदी युवाओं की सबसे बड़ी समस्या नौकरी हासिल करना है, जबकि 15 से 17 साल के लगभग 83 प्रतिशत युवा अपनी शिक्षा को लेकर स्ट्रेस में हैं। गौर करने की बात है कि आर्थिक रूप से मजबूत और सबसे बेहतर शिक्षा पा रहे शहरी युवा कहीं ज्यादा तनाव में हैं। एक बात जो खासतौर पर अखरने वाली है, वह यह कि मीडिया और बाजार के प्रभाव ने युवाओं के अंदर पाई जाने वाली स्वाभाविक प्रगितशीलता को कहीं न कहीं प्रभावित किया है। इसी का नतीजा है

स्वच्छता की लौ

सुलभ स्वच्छ भारत वास्तव में स्वच्छता के प्रति लोगों में अलख जगा रहा है। स्वच्छता को लेकर जो ख़बरें मुख्यधारा की मीडिया में नहीं आ पाती हैं, उनको जन-जन तक ये अख़बार पहुंचा रहा है। इसके लिए सुलभ स्वच्छ भारत की पूरी टीम बधाई की पात्र है। सुलभ के प्रणेता डॉ. पाठक द्वारा समाज की भलाई के लिए किए जा रहे अनवरत कार्यों में अबकी बार विधवा विवाह करवाने की ख़बर सच में बहुत ही ह्रदयस्पर्शी लगी। उम्मीद करता हूं कि स्वच्छता के लिए जो लौ सुलभ ने जगाई है वो देश के हर घर को रोशन करे। सूरज कात्याल, देहरदून, उत्तराखंड

कि कुछ रूढ़ धारणाएं भी युवाओं के मन में घर करती जा रही हैं। मसलन, सर्वे में शामिल 51 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि पत्नियों को हमेशा अपने पति की सुननी चाहिए। गौर करें तो इस रूढ़ता ने कहीं न कहीं खतरे का निशान पार कर लिया है। पर अब भी देश के 49 फीसदी युवा अपनी प्रगितशीलता के साथ अपने-अपने क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। यह कम राहत की बात नहीं है। कोशिश तो यह होनी चाहिए कि ऐसी प्रगतिशील सोच वाले युवाओं को देश की मुख्यधारा में ज्यादा से ज्यादा स्पेस मिले तभी वे बाकी युवाओं के बीच रोल मॉडल बनकर उभरेंगे। सर्वे बताता है कि युवाओं में धार्मिकता तेजी से बढ़ी है। करीब 79 फीसदी युवा नियमित या अनियमित रूप से ईश्वर की प्रार्थना करते हैं, जबकि 2009 और 2014 में युवाओं के बीच हुए ऐसे ही सर्वेक्षणों में प्रार्थना करने वाले युवाओं का हिस्सा 73 फीसदी था। 65 फीसदी नौजवान नियमित रूप से उपासना स्थलों में जाते हैं, जबकि 2009 में 52 प्रतिशत और 2014 में 56 प्रतिशत उपासना स्थलों में नियमित जाते थे। युवाओं में बढ़ी इस आस्था को देश की ताकत मानना चाहिए। हमने स्वामी विवेकानंद की बात शुरू में की है। आस्था और निष्ठा से भरे ऐसे युवा अगर भावी भारतवर्ष का जुआ अपने कंधों पर उठा लें तो फिर भारत फिर से एक ऐसा देश बन सकता है, जिसके लिए कभी विश्वगुरु जैसे विशेषण इस्तमाल होते थे।

सुलभ समाज के प्रति जिम्मेदार

सुलभ स्वच्छ भारत सिर्फ एक अखबार नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का अहसास है। और मुझे यह कहने में बहुत ही खुशी है कि इस जिम्मेदारी को सुलभ स्वच्छ भारत पूरी तन्मयता से पूरा कर रहा है। समाज को जागरूक करने वाली छोटी-छोटी खबरों के साथ विश्व स्तर पर असर रखने वाली बड़ी खबरों को बेहद सरल शब्दों में लोगों तक पहुंचाने में एसएसबी का कोई मोल नहीं है। अबकी बार की प्रति में ‘डेनमार्क के जीरो कार्बन शहर’ आलेख मुझे बेहद पसंद आया और जानकार ख़ुशी हुई कि ये शहर किस तरह से पर्यावरण बचाने के लिए लड़ रहा है। ललित चतुर्वेदी, कोटा, राजस्थान


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पढ़ता भारत बढ़ता भारत 06 - 12 नवंबर 2017

भारत में छात्रों-छात्राअों की संख्या में काफी तेजी से इजाफा हो रहा है। यह संख्या स्कूली स्तर से लेकर विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च संस्थाअों में भी तेजी के साथ बढ़ती जा रही है। शिक्षा के समावेशी चरित्र को लेकर भारत सरकार नई शिक्षा नीति भी लाने जा रही है फोटो ःजयराम


06 - 12 नवंबर 2017

दुनिया के सबसे युवा देश में शिक्षा को लेकर स्वाभाविक तौर पर उत्साह बढ़ा है। 2001 से 2011 के दशक में छात्रों की संख्या 22 करोड़ 90 लाख से बढ़कर 31 करोड़ 50 लाख हो गई है। यानी करीब 38 फीसदी की बढ़ोत्तरी। गौरतलब है कि इस दौरान देश की कुल आबादी करीब 18 फीसदी बढ़ी

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06 - 12 नवंबर 2017

महिलाओं की बढ़े भागीदारी लैंगिक समानता के सूचकों की निगरानी करने के लिए देशों को किया जाएगा प्रोत्साहित

सं

आईएएनएस

युक्त राष्ट्र के एक शीर्ष अधिकारी ने सदस्य देशों, क्षेत्रीय संगठनों और नागरिक समाज से सभी स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए साझेदारी बढ़ाने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी मारिया लुईजा रिबेरो वियोट्टी ने कहा, ‘हम सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को लागू करने के लिए लैंगिक आंकड़े जुटाने और

उनकी समीक्षा को मजबूत करेंगे और सदस्य देशों को लैंगिक समानता के सूचकों की निगरानी करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।’ वियोट्टी संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की ओर से 'महिलाएं, शांति और सुरक्षा एजेंडा' विषय पर सुरक्षा परिषद को संबोधित कर रही थीं। वियोट्टी ने अपने संबोधन में सुरक्षा क्षेत्र में महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शांतिदूतों में

से केवल तीन प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने सुरक्षा परिषद को वर्दीधारी महिला कर्मियों की संख्या बढ़ाने में सैन्य और पुलिस में योगदान देने वाले देशों के साथ मिलकर महासचिव द्वारा किए जाने वाले प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी। वियोट्टी ने साथ ही कहा कि महिलाओं और शांति और सुरक्षा के मुद्दों पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 1325 पर स्वीकार किए जाने के 17 साल बाद भी सही ढंग से अमल नहीं किया जा रहा। लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र की इकाई की कार्यकारी निदेशक फुमजिल म्लाम्बो-नगुका ने बैठक में कहा कि हालांकि सशस्त्र संघर्ष में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ अत्याचार पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन बेहद जरूरी है कि इसके दोषियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाए और इससे बचे लोगों को सम्मानजनक दर्जा और समर्थन दिया जाए। गौरतलब है कि केवल 17 देशों में राष्ट्राध्यक्ष पद पर महिलाएं निर्वाचित हुई हैं और पिछले दो वर्षों में संकटग्रस्त और संकट से उबर चुके देशों में महिला सांसदों की संख्या 16 प्रतिशत पर ही रुकी हुई है। उन्होंने सोमालिया और माली का उदाहरण देते हुए कहा कि आरक्षण और विशेष अस्थायी उपायों से मदद मिलेगी। बैठक में शामिल अन्य वक्ताओं ने भी यौन और लैंगिक हिंसा से प्रभावशाली ढंग से निपटने की जरूरत पर बल दिया।

ब्रसेल्स में फहराया तिरंगा

एटोनियम पर भारतीय समुदाय के एक संगठन ने फहराया भारतीय ध्वज

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सेल्स में भारतीय समुदाय के संगठन 'आर्ट लाउंज 9' ने एटोनियम पर दिवाली समारोह का आयोजन किया। एटोनियम बेल्जियम की राजधानी और दुनिया के प्रतिष्ठित स्मारकों में से एक है। ब्रसेल्स शहर के प्रतिष्ठित स्मारक के ऊपर भारतीय तिरंगा फहराया गया। बेल्जियम, लक्जमबर्ग और यूरोपीय संघ के भारत के राजदूत गैत्री ईसर कुमार ने कहा कि भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में तेजी से प्रगति की है और परमाणु युग की उन्नति के स्मारक के ऊपर भारतीय ध्वज को फहराना भारत की उपलब्धियों का प्रतीक है। बेल्जियम के राजा और रानी भारत का दौरा करने वाले हैं। इस वर्ष भारत और बेल्जियम के बीच राजनयिक संबंधों के 70 साल भी पूरे हो रहे हैं। (एजेंसी)

15 लाख बच्चों पर भारी पड़ेगी सर्दी

सं

आईएएनएस

मध्य-पूर्व के देशों में संघर्ष से प्रभावित बच्चों के आने वाली जानलेवा साबित हो सकती है

युक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने चेतावनी दी है कि अगर तत्काल सहायता प्रदान नहीं की गई, तो मध्य-पूर्व के देशों में संघर्ष से प्रभावित बच्चों पर आने वाले सर्दियों में कठोर प्रभाव पड़ेगा। मध्यपूर्व और उत्तरी अफ्रीका के यूनिसेफ क्षेत्रीय निदेशक गीर्ट कैप्पेलेयर ने कहा, ‘कम तापमान, तूफान और भारी बर्फबारी से सैकड़ों पीड़ित परिवारों के दुख में बढ़ोत्तरी होगी।’ कैप्पेलेयर ने बताया, ‘सहायता के बिना सर्दियों में क्षेत्र के बच्चों पर कठोर प्रभाव पड़ेगा, जो पहले ही बहुत कुछ सह चुके हैं। पोषण में कमी, खराब स्वास्थ्य सेवा और विस्थापन के कारण बच्चों का स्वास्थ्य कमजोर है। हाइपोथर्मिया और श्वसन संक्रमण एक गंभीर खतरा है। अगर बच्चों का इलाज नहीं किया गया, तो वे मर जाएंगे।’

वर्षो से चल रहे संघर्ष, विस्थापन और बेराजगारी के कारण हजारों परिवार के संसाधन खत्म हो चुके हैं और वे गर्म कपड़े या ईंधन खरीदने में समर्थ नहीं हैं। इसके अलावा, अगर स्कूलों को गर्म नहीं रखा

गया, तो बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर में वृद्धि की उम्मीद है और इस कारण उनकी जल्दी शादी और उनके खिलाफ यौन हिंसा की घटनाएं बढ़ सकती हैं। संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारी ठंड आने से पहले गर्म कपड़े और कंबल प्रदान करने के लिए समय से अधिक काम कर रहे हैं, लेकिन उसने 7.3 करोड़ रुपयों की अपील की थी, जिसके मुकाबले वह 6 करोड़ रुपए में ही काम कर रहे हैं। संसाधनों की कमी के कारण इराक, सीरिया, फिलिस्तीन अधिकृत क्षेत्र और पड़ोसी शरणार्थी मेजबान देशों में 15 लाख बच्चों पर सर्दी का गहरा प्रभाव पड़ सकता है। पर्याप्त धन के साथ, यूनिसेफ का उद्देश्य पूरे इलाके में 800,000 से अधिक बच्चों को शीतकालीन कपड़ों का किट प्रदान करना है। इसमें उन परिवारों

एक नजर

सहायता के बिना सर्दियों में मध्य-पूर्व के बच्चों पर कठोर प्रभाव पड़ेगा कुपोषण व विस्थापन के कारण मध्यपूर्व के बच्चों का स्वास्थ्य कमजोर हाइपोथर्मिया और श्वसन के संक्रमण से जूझ रहे हैं इन देशों के बच्चे

को शामिल किया गया है, जिन्हें हाल ही में हुई लड़ाई के कारण अपना घर छोड़ना पड़ा। इसमें लगभग 240,000 बच्चों को गर्म कंबल, 105,000 बच्चों के लिए अनुकूल स्थान, स्कूलों में गर्म उपकरण और 320,000 से अधिक असुरक्षित बच्चों के परिवारों को नकद सहायता प्रदान की जाएगी।


21 महिलाओं को स्टेडियम में जाने की इजाजत 06 - 12 नवंबर 2017

अंतरराष्ट्रीय

सऊदी अरब में महिलाएं अब तीन बड़े शहरों रियाद, जेद्दा और दमाम के स्टेडियमों में जा सकेंगी

एक नजर

सऊदी में महिलाओं पर से हट रही हैं पाबंदियां पहले सऊदी महिलाओं के गाड़ी चलाने पर प्रतिबंध हटा

नई घोषणाओं के बावजूद महिलाओं पर कई प्रतिबंध जारी

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आईएएनएस

जकुमार मोहम्मद बिन सलमान के सऊदी समाज के आधुनिकीकरण और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के हिस्से के रूप में सऊदी अरब की महिलाओं को अगले वर्ष से स्टेडियम में खेल कार्यक्रमों में उपस्थित होने की अनुमति होगी। सऊदी

अरब में महिलाएं अब तीन बड़े शहरों रियाद, जेद्दा और दमाम के स्टेडियम में जा सकेंगी। यह सऊदी महिलाओं को अधिक स्वतंत्रता देने

की दिशा में एक और कदम है, जोकि सख्त लिंग विभेद के नियमों का सामना करती हैं। इससे पहले सऊदी अरब में महिलाओं के गाड़ी चलाने पर प्रतिबंध को हटाया गया था। सऊदी अरब के खेल प्राधिकरण ने कहा कि तीन स्टेडियमों में तैयारी शुरू हो जाएगी ताकि वे 2018 के प्रारंभ से महिलाओं के आने के लिए तैयार रहे। प्राधिकरण ने कहा कि परिवर्तनों के

सऊदी अरब में यह सुधार सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन लाने के लिए 32 वर्षीय राजकुमार मोहम्मद द्वारा घोषित ‘विजन 2030’ का हिस्सा है

हिस्से के रूप में स्टेडियम के अंदर रेस्तरां, कैफे और मॉनिटर स्क्रीन स्थापित की जाएंगी। यह सुधार सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन लाने के लिए 32 वर्षीय राजकुमार मोहम्मद द्वारा घोषित ‘विजन 2030’ नामक एक विस्तृत योजना का भाग है। पिछले महीने एक शाही आज्ञप्ति में कहा गया कि अगली जून से महिलाओं को गाड़ी चलाने की अनुमति होगी। देश में कॉन्सर्ट एक बार फिर से शुरू हो गए हैं और कुछ समय में सिनेमा के भी फिर से लौटने की भी संभावना है। हाल में राजकुमार ने कहा कि नरमपंथी इस्लाम की वापसी देश के आधुनिकीकरण की उनकी योजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नई घोषणाओं के बावजूद महिलाओं को अभी भी इस देश में गंभीर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है। वहां महिलाओं को सख्त ड्रेस कोड का पालन करना पड़ता है और किसी अपरिचित पुरुष से उनका कोई संबंध नहीं हो सकता। यदि वह यात्रा करना चाहती हैं या स्वास्थ्य सेवा का उपयोग करना चाहती है तो उन्हें किसी पुरुष अभिभावक के साथ जाना पड़ता है या उसकी लिखित अनुमति प्राप्त करनी पड़ती है।

हॉकिंग की पीएचडी को 20 लाख लोगों ने देखा हॉकिंग का शोध कार्य इतना लोकप्रिय हुआ कि इसे जारी करते ही कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की वेबसाइट ठप हो गई के लक्षण' शीर्षक वाले पृष्ठ को डाउनलोड करने का प्रयास किया। विश्वविद्यालय के आर्थर स्मिथ ने इन आंकड़ो को 'अद्वितीय' बताया है। संचार विभाग के उप प्रमुख स्मिथ ने बताया, ‘स्मिथ का शोधपत्र अपोलो रिपॉजिटरी विश्वविद्यालय की अब तक की सबसे अधिक देखी जाने वाली सामग्री बन गई है।’ उन्होंने कहा, ‘अनुमान के मुताबिक प्रोफेसर हॉकिंग का पीएचडी शोधलेख किसी भी रिसर्च रिपॉजिटरी से सबसे अधिक देखा जाने वाला शोधलेख है। हमने पहले कभी ऐसे आंकड़े नहीं देखे हैं।’ 75 वर्षीय हॉकिंग ने कैंब्रिज के ट्रिनिटी हॉल में अध्ययन के दौरान 134 पृष्ठों के दस्तावेज को

आईएएनएस

और ब्रह्मांड विज्ञानी ब्रिटिशस्टीफनभौतिकहॉकिंगशास्त्रीके पीएचडी शोधपत्र को

सार्वजनिक किए जाने के कुछ ही दिनों में दुनिया भर

में 20 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा है। हॉकिंग का 1966 में किया गया यह शोध कार्य इतना लोकप्रिय हुआ कि इसे जारी करते ही कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की वेबसाइट का प्रकाशन अनुभाग ठप हो गया। करीब पांच लाख से ज्यादा लोगों ने 'ब्रह्मांड के विस्तार

अनुमान के मुताबिक प्रोफेसर हॉकिंग का पीएचडी शोधलेख किसी भी रिसर्च रिपॉजिटरी से सबसे अधिक देखा जाने वाला शोधलेख है - आर्थर स्मिथ

एक नजर

हॉकिंग ने 1966 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से किया था पीएचडी

पांच लाख ने ब्रह्मांड के विस्तार वाले पृष्ठ को डाउनलोड करना चाहा यूनिवर्सिटी में 65 पौंड जमा कर स्कैन कराया जा सकता है शोधपत्र

लिखा था। इस दौरान वह 24 वर्षीय परास्नातक के छात्र थे। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में 1962 से रहने वाले खगोलविद हॉकिंग ने 'ए ब्रिफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' किताब लिखी है, जो अब तक के सबसे प्रभावशाली वैज्ञानिक कार्यो में से एक माना जाता है। हॉकिंग के पीएचडी शोधपत्र को पूरी तरह से पढ़ने के इच्छुक व्यक्ति विश्वविद्यालय के पुस्तकालय जाकर 65 पौंड का भुगतान कर एक कॉपी स्कैन करा सकते हैं और फिर उसे पढ़ सकते हैं।


22 गुड न्यूज

06 - 12 नवंबर 2017

गांधीवादी मेडौख को जमनालाल बजाज पुरस्कार

संयुक्त राष्ट्र वन्यजीव सम्मेलन की मेजबानी करेगा भारत

मेडौख फ्रेंच यूरोप व मध्य-पूर्व में शिक्षक व युवाओं को अहिंसा का पाठ पढ़ाने के लिए जाने जाते हैं

एक नजर

मनीला में सीएमएससीओपी-12 के समापन पर आधिकारिक रूप से यह घोषणा की गई

लोकतंत्र, स्वतंत्रता और मानवाधिकार के निष्ठावान समर्थक हैं मेडौख अल-अक्सा विश्वविद्यालय में फ्रेंच विभाग के प्रोफेसर और निदेशक हैं मेडौख

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रत अगले संयुक्त राष्ट्र वैश्विक वन्यजीव संरक्षण एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रजाति संरक्षण सम्मेलन- 2020 की मेजबानी करेगा। फिलीपींस की राजधानी मनीला में यह घोषणा की गई। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की तरफ से किए गए एक ट्वीट में कहा गया है, ‘भारत अगले सीएमएस कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज, सीएमएससीओपी-13 की मेजबानी करेगा। मनीला में सीएमएससीओपी-12 के समापन पर आधिकारिक रूप से यह घोषणा की गई।’ इस संबंध में यह घोषणा फिलीपींस की राजधानी में आयोजित छह दिवसीय ऑफ द पार्टीज टू द कन्वेंशन ऑन माइग्रेटरी स्पेसीज (सीएमएस सीओपी-12) के सम्मेलन की 12वीं बैठक के आखिरी दिन हुई। तीन वर्षों में एक बार आयोजित होने वाले सीएमएस सीओपी सम्मेलन में भाग लेने के लिए 120 देशों के प्रतिनिधि पहुंचे थे। पहली बार यह सम्मेलन किसी एशियाई देश में आयोजित किया गया। सीएमएस के कार्यकारी सचिव ब्रैडनी चैंबर्स ने कहा, ‘एक सप्ताह तक गहन वार्ता के बाद संबंधित देशों द्वारा धरती के प्रवासी वन्यजीवों को संरक्षित करने के अपने प्रयासों को आगे बढ़ाने की एक मजबूत प्रतिबद्धता का परिणाम निकलकर सामने आया है।’ मनीला में आयोजित सीएमएस सीओपी-12 सम्मेलन के 38 साल के इतिहास की सबसे बड़ी बैठक रही है, जिसे 'बॉन कन्वेंशन' के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि जर्मनी के इसी शहर में इस पर हस्ताक्षर हुए थे। सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण परिणाम भी सामने आए हैं, जिसमें 120 देशों में ओल्ड वर्ल्ड वल्चर्स की 15 प्रजातियों को संरक्षित करने वाली बहु-प्रजाति कार्य योजना भी शामिल है। (एजेंसी)

वर्ष 2006 में मेडौख और उनके दाेस्तों ने शांति केंद्र की स्थापना की थी

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लस्तीन के प्रख्यात गांधीवादी जियाद मेडौख को इस वर्ष का प्रतिष्ठित जमनालाल बजाज अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है। यह पुरस्कार भारत के बाहर गांधीवादी मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए दिया जाता है। लोकतंत्र, स्वतंत्रता और मानवाधिकार के निष्ठावान समर्थक मेडौख गाजा में अल-अक्सा विश्वविद्यालय में फ्रेंच विभाग के प्रोफेसर और निदेशक हैं। अपने छात्रों के बीच अहिंसा का शानदार उदाहरण पेश करने के लिए प्रख्यात मेडौख फ्रेंच बोलने वाले देशों में फिलिस्तीन

के प्रसिद्ध वक्ताओं में से एक हैं और यूरोप व मध्यपूर्व में शिक्षक व युवाओं को अहिंसा का पाठ पढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 2006 में वे और उनके दोस्तों ने महात्मा गांधी के अहिंसक अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के आधार पर शांति केंद्र की स्थापना की थी, जिसने फिलिस्तीन में अहिंसा प्रतिरोध के रूप में शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्ष 2011 में वे फ्रांस के 'नाइट ऑफ द आर्डर ऑफ एकेडमिक पालम्स' पाने वाले पहले फिलिस्तीनी नागरिक बने थे। मेडौख के अलावा, ग्रामीण विकास

ब्रांड एंबेसडर बने क्रिकेटर सुरेश रैना

विज्ञान समिति (जीआरएवीआईसी) के संस्थापक और सचिव शशि त्यागी को भी 'रचनात्मक कार्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान' के लिए पुरस्कार दिया गया। नई दिल्ली स्थित सलाम बालक ट्रस्ट के संस्थापक और ट्रस्टी प्रवीण नायर को 'महिला और बच्चों के विकास और कल्याण' के लिए पुरस्कार दिया गया। वहीं, जन स्वास्थ्य सहयोग एनजीओ को 'ग्रामीण विकास में विज्ञान व प्रौद्योगिकी का प्रयोग' के लिए पुरस्कार दिया गया। यह पुरस्कार महात्मा गांधी के अनुयायी और महान उद्योगपति जमनालाल बजाज की याद में हर वर्ष दिया जाता है। पुरस्कारों के 40वें संस्करण में आयोजित विशेष समारोह में केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सभी विजेताओं को पुरस्कार भेंट किए। (एजेंसी)

जीएमसी के ब्रांड एंबेसडर बने रैना स्वच्छ भारत के भी ब्रांड एंबेसडर हैं

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रतीय क्रिकेट खिलाड़ी सुरेश रैना को एक समारोह में गाजियाबाद नगर निगम (जीएमसी) का ब्रैंड एंबेसडर बनाया गया। स्वच्छ भारत अभियान के संयुक्त सचिव और निदेशक वीके जिंदल ने इसकी घोषणा की। इस मौके पर जिंदल ने कहा, ‘गाजियाबाद के लिए यह गर्व की बात है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्टार खिलाड़ी रैना जीएमसी के ब्रांड एंबेसडर बने हैं और साथ ही स्वच्छ भारत के भी ब्रांड

एंबेसडर हैं।’ ग ा जि य ा ब ा द निगम आयुक्त सीपी सिंह ने कहा, ‘मैं आभारी हूं कि रैना ने जीएमसी के ब्रैंड एंबेसडर बनने के मेरे प्रस्ताव को स्वीकार किया।’ रैना गाजियाबाद के निवासी हैं। यह उत्तर प्रदेश में 16 नगरपालिका निगमों के बीच एकमात्र ऐसा शहर है, जिसे खुले में शौच से मुक्त घोषित

किया गया है। इस अवसर पर रैना ने कहा, ‘मैं नगर निगम को अपनी सर्वश्रेष्ठ सेवा दूंगा। मैं इस शहर से भावुक रूप से जुड़ा हुआ हूं। इससे मुझे विश्व कप का खिताब जीतने तक की क्षमता मिली थी।’ (एजेंसी)


06 - 12 नवंबर 2017

भारतीय महिला ने फेसबुक पर खोजा बग फेसबुक के बिजनेस एप वर्कप्लेस पर बग का पता लगाया पुणे की विजेता पिल्लई ने

पु

णे में रहनेवाली विजेता पिल्लई ने फेसबुक के बिजनेस एप्प वर्कप्लेस पर एक बग ढूंढा है। उन्होंने एक बड़ी खामी बताई, जिसे नजरअंदाज किए जाने पर बड़ा नुकसान हो सकता था। फेसबुक ने विजेता को इस खामी को सामने लाने

के लिए रिवॉर्ड देने की घोषणा की है। फेसबुक की तरफ से विजेता को 10,000 डॉलर ईनाम के रूप में दिया जाएगा। फेसबुक ने हाल ही अपने बिजनेस चैटिंग एप वर्कप्लेस को लांच किया था। बिजनेस चैटिंग एप स्लैक के जैसा ही है। कॉरपोरेट सेक्टर में स्लैक ज्यादा उपयोग किया जाता है और कंपनी अपने वर्कप्लेस एप के जरिए स्लैक की मॉनोपॉली खत्म करना चाहती है। विजेता ने वर्कप्लेस एप में जो कमी ढूंढी है, वो इसके एक्सेस राइट्स से जुड़ी हुई है। ये खामी इस तरह थी कि वर्कप्लेस में शामिल कोई भी कर्मचारी ऐडमिन के अकाउंट को रिसेट कर सकता है और उसके डिटेल्स बदल सकता है। (एजेंसी)

गूगल फोटोज अब पालतू जानवरों को भी पहचानेगा

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गूगल फोटो के इस नए फीचर से पालतू जानवरों के फोटो भी शेयर किए जा सकेंगे

टो शेयरिंग और स्टोरेज सेवा गूगल फोटो ने एक नया फीचर शुरू किया है, जो यूजर के पालतू कुत्तोंबिल्लियों की पहचान कर सकता है। इससे पहले गूगल फोटो केवल मनुष्यों की पहचान करने में सक्षम था। गूगल ने एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा, ‘इसे ज्यादातर देशों में आज जारी किया जा रहा है। इससे आप लोगों के साथ अब अपने कुत्तों और बिल्लियों के फोटो को समूहीकृत कर पाएंगे। आप उनकी तस्वीर के साथ उनके नाम का लेबल लगा

सकते हैं, ताकि सर्च में उन्हें तुरंत ढूंढा जा सके या फिर आप अपने पालतू जानवर के साथ खुद की फोटो को बडी़ आसानी से ढूंढ सकेंगे।’ ब्लॉग पोस्ट में आगे कहा गया कि इससे अब अपने पालतू जानवरों का एलबम, मूवीज या फोटो बुक बनाना आसान होगा। गूगल फोटो सेवा की घोषणा साल 2015 के मई में की गई थी। गूगल फोटो यूजर्स को 16 मेगापिक्सल के फोटो तथा 1080 पी रेजोल्यूशन वाले वीडियो की असीमित स्टोरेज की सुविधा प्रदान करता है। (एजेंसी)

गुड न्यूज

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अगले वर्ष तक देश में 53 करोड़ स्मार्टफोन यूजर्स मीडिया एजेंसी जेनिथ ने पेश किए आगामी वर्ष के संभावित स्मार्टफोन यूजर्स के आंकड़े

दु

निया में स्मार्टफोन रखनेवालों की संख्या बढ़ती जा रही है और 2018 तक सबसे ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स चीन में होंगे, जिनकी संख्या करीब 1.3 अरब होगी। इसके बाद भारत में स्मार्टफोन रखनेवाले 53 करोड़ लोग होंगे। अमेरिका का नंबर तीसरा होगा, जहां कुल 22.9 करोड़ स्मार्टफोन यूजर्स होंगे। अमेरिका की मीडिया एजेंसी जेनिथ द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक स्मार्टफोन रखनेवालों की संख्या में 2018 में विस्तार होगा। एजेंसी ने कहा कि 2018 में 52 देशों के 66 फीसदी लोगों के पास स्मार्टफोन होगा, जबकि 2017 में यह आंकड़ा 63 फीसदी था। ब्राडकास्टिंगकेबल डॉट कॉम की रिपोर्ट में इस अध्ययन के हवाले से बताया गया कि स्मार्टफोन और अन्य मोबाइल डिवाइसों का प्रयोग बढ़ने का मतलब है कि ब्रांड्स और उपभोक्ताओं के बीच ज्यादा से ज्यादा संपर्क बढ़ेगा। यह उपभोक्ताओं को कहीं भी और किसी भी वक्त मीडिया सामग्री से अधिक से अधिक जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा। जेनिथ ने अनुमान लगाया है कि 2017 में सभी इंटरनेट विज्ञापन का 59 फीसदी हिस्सा मोबाइल डिवाइस पर देखे जानेवाले विज्ञापन का होगा। इस

अनुमान में इंटरनेट विज्ञापन के साल 2018 तक 59 फीसदी तथा 2019 तक 62 फीसदी बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। जेनिथ के प्रमुख (अनुमान) और निदेशक (ग्लोबल इंटेलीजेंस) जोनाथ बनार्ड के हवाले से कहा गया, ज्यादातर ग्राहकों और विज्ञापनदाताओं के लिए मोबाइल इंटरनेट ही अब सामान्य इंटरनेट है। अध्ययन में कहा गया कि 2018 तक लोगों द्वारा इंटरनेट पर बिताये गये कुल समय का 73 फीसदी समय मोबाइल डिवाइस पर बिताया जाएगा, जो कि साल 2017 की तुलना में 70 फीसदी अधिक है। जेनिथ ने अनुमान लगाया है कि 2019 तक कुल इंटरनेट इस्तेमाल का 76 फीसदी हिस्सा मोबाइल पर होगा। देश में फिलहाल 30-40 करोड़ स्मार्टफोन यूजर्स हैं। (एजेंसी)

अब मोबाइल फोन पर भी 'दूरदर्शन'

दूरदर्शन के पांच चैनल अब 16 शहरों में मोबाइल फोन पर उपलब्ध

ज के जमाने में जब सारी दुनिया मोबाइल फोन में सिमट रही है, ऐसे में टीवी इससे कैसे दूर रह सकता है। जहां टीवी के ज्यादातर चैनल्स ऐप के जरिए स्मार्टफोन में अपनी जगह बनाने में लगे हैं, इसी के साथ कदमताल करते हुए दूरदर्शन ने भी अपने पांच चैनल 16 शहरों में मोबाइल फोन पर उपलब्ध करा दिए हैं। इनमें डीडी न्यूज, डीडी किसान और डीडी स्पोर्ट्स चैनल भी शामिल हैं। यह जानकारी प्रसार भारती ने एक ट्वीट के जरिए दी है। ये चैनल दिल्ली, लखनऊ, जालंधर, मुंबई, अहमदाबाद, भोपाल,

रायपुर, इंदौर, औरंगाबाद, कोलकाता, पटना, रांची, गुवाहाटी, कटक, बेंगलुरु और चेन्नई में उपलब्ध होंगे। प्रसार भारती दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो का संचालन करता है। दूरदर्शन ने स्मार्टफोन उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या और मोबाइल पर टीवी के बढ़ते क्रेज को देखते हुए यह सेवा शुरू की है। (एजेंसी)


24 स्वास्थ्य

06 - 12 नवंबर 2017

सीवेज नमूनों में मिले पोलियो वायरस भारत को 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया जा चुका है पर देश में ओरल पोलियो वैक्सीन के उपयोग से जुड़ा मौजूदा टीकाकरण कार्यक्रम इस बीमारी के फैलाव की वजह बन सकता है

शौचालय का इस्तेमाल सोच को दर्शाता है डॉ. उदित राज

दिल्ली के जेजे कॉलोनी में बारह लाख से निर्मित सार्वजनिक शौचालय का उद्घाटन भाजपा सांसद डॉ. उदित राज ने किया

एक नजर

पोलियो यानी पोलियोमाइलिटिस एक संक्रामक रोग है यह वायरस के कारण होता है जो तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है

बिना लक्षणों के भी संक्रमित लोग वायरस फैला सकते हैं

सहित भारत के विभिन्न हिस्सों से एकत्र हैदराबाद 14 सीवेज नमूनों में वैक्सीन से उत्पन्न पोलियो

वायरस (वीडीपीवी) मिले हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) के उपयोग से जुड़ा मौजूदा टीकाकरण कार्यक्रम बीमारी के फैलाव की वजह बन सकता है। भारत को हालांकि 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया गया था। पोलियो, जिसे पोलियोमाइलिटिस भी कहा जाता है, एक संक्रामक रोग है। यह वायरस के कारण होता है जो तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे किसी भी अन्य समूह की तुलना में वायरस से सबसे अधिक संक्रमित होते हैं। बिना लक्षणों के भी, पोलियो वायरस से संक्रमित लोग वायरस फैला सकते हैं और दूसरों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन

कुछ उपचार

• बिस्तर पर आराम • दर्द निवारक • सांस लेने में सहायता करने के लिए पोर्टेबल वेंटिलेटर • विकृति और मांसपेशियों का नुकसान रोकने के लिए व्यायाम • फलों और सब्जियों सहित पौष्टिक आहार

पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे किसी भी अन्य समूह की तुलना में पोलियो वायरस (वीडीपीवी) से सबसे अधिक संक्रमित होते हैं (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल ने कहा, ‘घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि किसी भी वाइल्ड पोलियो वायरस का पता नहीं लगा है। भारत पिछले 5 वर्षो से पोलियो मुक्त है। जिस स्ट्रेन का पता चला है, वह वैक्सीन से उत्पन्न पोलियो वायरस (वीडीपीवी) है, न कि एक वाइल्ड पोलियो वायरस। सीवेज के पानी मे पहले भी पी 2 का वीडीपीवी स्ट्रेन मिल चुका है, क्योंकि पी 2 ओरल वैक्सीन हाल तक बच्चों को दी जा रही थी।’ उन्होंने कहा, ‘वर्तमान वीडीपीवी स्ट्रेन को सीवेज के पानी में देखा गया है, न कि किसी बच्चे में। बच्चों को वीडीपीवी ट्रांसमिशन का जोखिम नगण्य है। 25 अप्रैल, 2016 से मौजूदा पोलियो नीति के अनुसार, ट्राइवेलेंट वैक्सीन को बाजार से वापस ले लिया गया है और इसे बाइवेलेंट वैक्सीन में बदल दिया गया है। 9 मई को भारत को ट्राइवेलेंट वैक्सीन मुक्त घोषित किया गया था। इसमें 3 प्रकार के पोलियो सीरोटाइप होते हैं- टाइप 1, टाइप 2 और टाइप 3। बाइवेलेंट वैक्सीन में टाइप 2 वायरस नहीं है।’ पोलियो के लगभग एक प्रतिशत मामलों में लकवाग्रस्त पोलियो विकसित हो सकता है। कुछ

लक्षणों में स्राव, आंतों और मांसपेशियों में दर्द, अंगों में ढीलापन, अचानक पक्षाघात और अस्थायी या स्थायी विकृत अंग, विशेष रूप से कूल्हों, एंकल और पैरों में परेशानी शामिल है। डॉ. अग्रवाल ने बताया, ‘पोलियो से लड़ने के लिए दो टीके उपलब्ध हैं- निष्क्रिय पोलियो वायरस (आईपीवी) और ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी)। आईपीवी में इंजेक्शन की एक श्रृंखला होती है, जो जन्म के 2 महीने बाद शुरू होती है और जब तक बच्चा 4 से 6 साल का नहीं होता, तब तक टीका जारी रहता है। ओपीवी पोलियो वायरस के एक कमजोर रूप से बनाया गया है। यह संस्करण कई देशों में पसंद का टीका है, क्योंकि यह कम लागत, लगाने में आसान है और बढ़िया परिणाम देता है।’ सार्वजनिक स्वच्छता और व्यक्तिगत स्वच्छता से पोलियो के फैलाव को कम करने में मदद मिल सकती है। रोग को रोकने के लिए सबसे प्रभावी तरीका है पोलियो की वैक्सीन। इसके अलावा, ऐसे पोलियो के लिए कोई इलाज नहीं है और फोकस आराम प्रदान करने, तेजी से सुधार और जटिलताओं को रोकने पर है। (एजेंसी)

सां

सद डॉ. उदित राज ने बवाना के जेजे कॉलोनी में सार्वजनिक शौचालय का उद्घाटन किया यह शौचालय लगभग 12 लाख रुपए की लागत से बनकर तैयार हुआ है, जिसे डॉ. उदित राज ने अथक प्रयासों से द रणछोड़ फाउंडेशन से फंड कराया । सांसद डॉ. उदित राज ने संबोधित करते हुए कहा कि लोगों को शौचालय के प्रति सोच बदलने की जरुरत है। यहां जब शौचालय बनाने का निर्णय लिया गया था तब लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था, लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि अगर वे और उनके बच्चे बाहर खुले में शौच जाएंगे तो उनकी सोच कैसे बदलेगी। जब आप साफ सुथरी जगह का इस्तेमाल करेंगे तो आपकी सोच भी वैसी ही होगा। मैं डीडीए को भी धन्यवाद देता हूं जिन्होंने यहां शौचालय बनाने के लिए पर्याप्त जगह दी। मैं यहां आसपास रहने वाली सभी क्षेत्रवासियों से यह भी अपील करता हूं कि इसका इस्तेमाल तो करे ही साथ साथ ही इसकी साफ सफाई का भी खास ध्यान रखें। डॉ. उदित राज ने शौचालय के साथ साथ बवाना गांव के द्वार का भी उद्घाटन किया और वहां के ग्रामीणों की मांग को भी पूरा करने का वादा किया। ग्रामवासी वहां खाली पड़ी जमीन पर पार्प व ओपन जिम बनाने की मांग को सांसद के समक्ष रखी जिसे उदित राज ने स्वीकारते हुए जल्द ही कार्य शुरू कराने का वादा किया। शौचालय उद्घाटन के अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला उत्तरपश्चिम के जिलाध्यक्ष नीलदमन खत्री, बवाना वार्ड 30 से निगम पार्षद वेदप्रकाश, बवाना वार्ड 34 से निगम पार्षद आनंद सिंह भी शामिल हुए। (एजेंसी)


06 - 12 नवंबर 2017

क्या आपका बच्चा 100 फीसदी आरडीए प्राप्त कर रहा है!

स्वास्थ्य

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जंक फूड खाने और शारीरिक श्रम कम करने से बच्चों को नहीं मिल पा रहा 100 फीसदी आरडीए

एक नजर

आरडीए का अर्थ है- रिकामेंडेड डायटरी एलाउंस

खास तौर पर 4-12 वर्षों के बच्चों के लिए कंपलीट न्यूटरीशन जरूरी बच्चे के विकास के लिए माइक्रो न्यूटिरयंटस बेहद महत्वपूर्ण

आईएएनएस

जकल के दौर में बढ़ते बच्चों में मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में कई चुनौतियां हैं। इसके लिए कई कारक जिम्मेदार हैं जैसे जंक फूड खाना और बच्चों का पहले की तुलना में बाहर कम खेलने जाना। मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाना और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बच्चों में निरंतर मजबूत करना आज की जरूरत है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आपका बच्चा 100 फीसदी आरडीए प्राप्त कर रहा है? हमारा रोग प्रतिरोधक क्षमता हमें कई वायरस, बैक्टीरिया और बाहरी तत्वों के हमले से

हमारे शरीर की रक्षा करता है। इसीलिए हमारे लिए जरूरी है कि हम अपने प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर करें जो बीमारियों से लड़ता है। कई बार पारंपरिक खाना पूरा नहीं पड़ता है। इससे बच्चों को 100 फीसद आरडीए (रिकामेंडेड डायटरी एलाउंस) नहीं मिल पाता है। इस अंतर को माइक्रो न्यूट्रेंटस से पूरा करना पड़ता है।

अगर बच्चे को सेहतमंद और पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिल रहा है तो उन्हें सप्लीमेंट की जरूरत है जिससे बच्चों का संपूर्ण विकास हो और वे बेहतरीन रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करें’ - डॉ. स्वाति भावे

पीएम ने बच्चों में मधुमेह पर चिंता जताई

प्र

प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो संबोधन 'मन की बात' में कम उम्र के लोगों को मधुमेह होने का किया जिक्र

धानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीवनशैली से जुड़ी मधुमेह जैसी बीमारियों से बच्चों के ग्रस्त होने को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए परिवारों से नियमित शारीरिक व्यायाम और योग के जरिए स्वस्थ जीवनशैली

नेशनल रिसर्च काउंसिल के फूड व न्यूटरिशन बोर्ड नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेज ने भी आरडीए को महत्वपूर्ण पौष्टिक पदार्थ (कैलोरी) बताया है, इसकी रोजाना आपूर्ति जरूरी होती है। कंसल्टेंट न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. नीति देसाई ने कहा, ‘4 से 12 साल के बच्चों के लिए कंपलीट न्यूटरीशन की जरूरत होती है, क्योंकि यह हमारे सेहत की नींव रखते हैं। यह जरूरी है कि इस दौरान बच्चे विटामिन्स और माइक्रोन्यूटरियंटस का 100 प्रतिशत आरडीए प्राप्त करें। चटर-पटर खाने वाले बच्चों को निश्चत खाने की मात्रा में पौष्टिक भोजन मुहैया करवाना मां के लिए चुनौती वाला काम होता है। सप्लीमेंट से इस अंतर को पाटा जा सकता है। क्योंकि यह माइक्रो

अपनाने का आग्रह किया। मोदी ने अपने मासिक रेडियो संबोधन 'मन की बात' में कहा, ‘पहले जो बीमारियां बड़ी उम्र में होती थीं, वह आजकल बच्चों में देखने को मिल रही हैं। मुझे यह जानकर अचंभा

हुआ कि आजकल बच्चों को भी मधुमेह की बीमारी हो रही है। इतनी कम उम्र में इस तरह की बीमारियां होने का मुख्य कारण कम शारीरिक गतिविधि और हमारे खान-पान की आदतों में बदलाव है।’ कार्यक्रम में पार्थ शाह नाम के शख्स ने फोन कर 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस घोषित करने की सलाह दी। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन के उपलक्ष्य में 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। पेशे से चिकित्सक इस श्रोता ने प्रधानमंत्री से पूछा कि बच्चों में मधुमेह की बीमारी से निपटने के लिए क्या किया जाना चाहिए। पीएम मोदी ने जवाब में परिवारों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके बच्चे अधिक से अधिक शारीरिक गतिविधियों में शामिल हों, उनकी

न्यूटरियंटस और विटामिन मुहैया करवाता है, ताकि बच्चे को रोजाना बताई गई इनकी मात्रा मिल सके और वे अपनी विकास की पूरी क्षमताओं को प्राप्त कर सकें।’ इंडियन एसोसिएशन ऑफ पेडरियाटिक्स (आईएपी) की पूर्व अध्यक्ष डॉ. स्वाति भावे ने कहा, ‘एक बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए माइक्रो न्यूटिरयंटस बेहद महत्वपूर्ण हैं। यह शरीर का डिफेंस मैकेनिज्म है, क्योंकि यह रोगजनकों को मारता है व बीमारी को रोकता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के अन्य कारक हैं- पर्याप्त नींद, नियमित फिजिकल एक्टीविटी, सकारात्मक मानसिक स्थिति और कम से कम मानसिक दबाव। अगर बच्चे को पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिल रहा है तो उन्हें सप्लीमेंट की जरूरत है, जिससे उनका संपूर्ण विकास हो और वे बेहतरीन रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करें।’ बच्चों को स्कूल सहित अन्य गतिविधियों व रोजाना के कार्यों को करने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। साथ ही उन्हें मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता की जरूरत होती है ताकि वे बीमारियों से अपना बचाव करें। बीमारियों से बचाव सबसे ज्यादा जरूरी है। विटामिन ए, सी, ई, जिंक और आयरन शरीर के तीन स्तरीय नेचुरल डिफेंस सिस्टम को मजबूत करते हैं। तीन स्तरीय नेचुरल डिफेंस सिस्टम में शारीरिक अड़चनें, कोशिकाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता और एंटीबाडी प्रोडक्शन है। इनसे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। अब यह आपको तय करना है कि आप अपने बच्चे की कैसे रक्षा करते हैं और उसे मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता मुहैया करवाने के लिए 100 प्रतिशत आरडीए मुहैया करवाते हैं।

घर के अंदर की गतिविधियां सीमित रहें और वे बाहरी गतिविधियों में व्यस्त हों। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘परिवारों को सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बच्चे खुले मैदान में खेलें। यदि संभव हो तो बड़ों को भी बच्चों के साथ जाकर खुले मैदान में खेलना चाहिए। एलेवेटर के बजाए बच्चों को सीढ़ियों का इस्तेमाल करने के लिए कहा जाना चाहिए। रात्रि भोजन के बाद परिवारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे बच्चों के साथ सैर करें। उन्होंने कहा कि 'योगा फॉर यंग इंडिया' कार्यक्रम स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने और जीवनशैली से संबंधित बीमारियों से निपटने में युवाओं के लिए मददगार है। योग सरल और सुविधानजनक है। किसी भी उम्र के लोग बड़ी आसानी से कहीं भी योग कर सकते हैं।’ (एजेंसी)


26 पर्यावरण

06 - 12 नवंबर 2017

91 प्रमुख जलाशयों में जल संग्रहण स्तर लगातार 70 फीसदी 26 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के दौरान इन जलाशयों में 109.878 बीसीएम जल का संग्रहण

आईएएनएस

में 26 अक्टूबर को देशसमाप्तके 91हुएप्रमुसप्ताहख जलाशयों के दौरान 109.878 बीसीएम

(अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 70 प्रतिशत है। 18 अक्टूबर, 2017 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान यह 70 प्रतिशत था। 26 अक्टूबर का संग्रहण स्तर पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 96 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षो के औसत जल संग्रहण का 95 प्रतिशत रहा। इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं। उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केंद्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 13.56 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 75 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि मंस इन जलाशयों की

देश के 91 प्रमुख जलाशयों की जल संग्रहण क्षमता, देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है

संग्रहण स्थिति 70 प्रतिशत थी। पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 14.94 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 79 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 85 प्रतिशत थी। पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते

हैं। इस क्षेत्र में सीडब्ल्यूसी की निगरानी में 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 20.74 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 77 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 85 प्रतिशत थी। मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में

भारतीय गिद्ध की 4 प्रजातियां वैश्विक संरक्षण सूची में

संयुक्त राष्ट्र के मनीला में आयोजित वैश्विक वन्यजीव सम्मेलन में हुई घोषणा

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लीपींस में संयुक्त राष्ट्र के एक वैश्विक वन्यजीव सम्मेलन में भारत की लुप्तप्राय चार गिद्ध प्रजातियों के साथ ही दुनिया भर के गिद्धों की 15 प्रजातियों को संरक्षण देने वाली एक बहुप्रजाति कार्य योजना को स्वीकृति दे दी गई। इसी तरह, व्हेल शार्क को भी वैश्विक संरक्षण के दायरे में शामिल किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा ट्वीट कर बताया गया- ‘मनीला में आयोजित सीएमएससीओपी-12 में अफ्रीकी-यूरेशियाई गिद्धों को संरक्षित करने वाली बहु-प्रजाति कार्य योजना को स्वीकृति दे दी गई है।’ ट्वीट में यह भी कहा गया है- ‘व्हेल शार्क को संपूर्ण संरक्षण मिलेगा। सीएमएस एप्प आई लिसनिंग

एक नजर

इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है

इनमें से 37 जलाशयों से पनबिजली परियोजनाएं जुड़ी हैं

कम संग्रहण करने वालाें में राजस्थान, झारखंड और ओडिशा शामिल

कुल उपलब्ध संग्रहण 26.49 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 63 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 90 प्रतिशत थी। दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना (टीजी), एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 34.15 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 66 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 50 प्रतिशत थी। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, उत्तराखंड, एपी और टीजी (दोनों राज्यों में दो मिश्रित परियोजनाएं) आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि के लिए पिछले साल की तुलना में कम संग्रहण करने वाले राज्यों में राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़ और तेलंगाना शामिल हैं।

सीएमएससीओपी-12 मनीला में स्वीकृत।’ यह घोषणा फिलीपींस की राजधानी में आयोजित छह दिवसीय ऑफ द पार्टीज टू द कन्वेंशन ऑन माइग्रेटरी स्पेसीज (सीएमएस सीओपी-12) के सम्मेलन की 12वीं बैठक के आखिरी दिन हुई। इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत सहित 120 देशों के प्रतिनिधि पहुंचे थे। (एजेंसी)


पुआल जलाने की गतिविधि 30 फीसदी घटी एनजीटी के फटकार के बाद पंजाब सरकार ने राज्य में पुआल जलाने के मामले में कमी की बात कही

पं

जाब सरकार ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) को बताया है कि राज्य में पुआल (फसल के अवशेष) जलाने की गतिविधि में पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी गिरावट आई है। न्यायाधिकरण ने इस महीने की शुरुआत में पंजाब सरकार पर किसानों को प्रोत्साहित नहीं करने को लेकर फटकार लगाई थी और उन्हें पुआल का प्रबंधन करने में मदद करने के लिए कहा था। पुआल का वजन 3.5 करोड़ टन होने का अनुमान है, जिसे किसान सर्दियों और गर्मियों में फसलों के बीच अंतर बनाने के लिए आग के हवाले कर देते हैं। न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ को पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने बताया, ‘इस साल पुआल जलाने के 14,432 मामले सामने आए हैं, जबकि 2016 में इनकी संख्या 22,269 थी।’ न्यायाधिकरण ने केंद्र सरकार से पुआल जलाने के खिलाफ किसानों को प्रोत्साहित करने पर स्पष्टीकरण मांगा है। इस महीने की शुरुआत में पंजाब सरकार ने किसानों को समर्थन देने के लिए केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता के रूप में 2,000 करोड़ रुपए की मांग की थी। यह मदद किसानों के

एनजीटी ने 2015 में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से इस परंपरा को रोकने के लिए कहा था

एक नजर

06 - 12 नवंबर 2017

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माथेरान टॉय ट्रेन 18 महीने बाद बहाल

110 साल पुरानी इस ट्रेन की सेवा फिलहाल आंशिक रूप से बहाल

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थेरान टॉय ट्रेन लगभग 18 महीने के अंतराल बाद आंशिक रूप से बहाल कर दी गई। 110 साल पुरानी इस ट्रेन के कई बार पटरी से उतरने के बाद इसे मई 2016 में बंद कर दिया गया था। मध्य रेलवे (सीआर) के सीपीआरओ सुनील उदासी ने बताया, ‘यह रेल सेवा माथेरान-अमन लॉज सेक्टर के बीच बहाल हुई है। इन दोनों स्थलों के बीच की दूरी लगभग 3.5 किलोमीटर है। हम जल्द से जल्द इस पूरे 21 किलोमीटर लंबे नेरल-माथेरान मार्ग पर रेल सेवा दोबारा शुरू करने की योजना बना रहे हैं।’ मध्य रेलवे ने फिलहाल इस मार्ग पर रोजाना 12 शटल ही शुरू किए हैं। पहली ट्रेन सुबह 8.50 बजे माथेरान से प्रस्थान करेगी और सुबह 9.25 बजे अमन लॉज से लौटेगी। मध्य रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज

से टॉय ट्रेन 'फूल रानी' में सुरक्षा उपाय बढ़ाए हैं। इसके साथ ही सुरक्षित एयरब्रेक प्रणाली के साथ वास्तविक मैन्युअल ब्रेक्स को बदला गया है। ट्रेन के वास्तविक प्रारूप में मैन्युअल ब्रेक थे। नई एयर ब्रेक प्रणाली में ट्रेन चालक गाड़ी की रफ्तार धीमी कर सकता है और ब्रेक पॉर्टर की मदद के बगैर ही ब्रेक लगा सकता है। उदासी ने कहा कि शीर्ष अधिकारियों के निरीक्षण से पहले ट्रेन का सुरक्षा और संचालन संबंधी अंतिम ट्रायल किया गया। इसके बाद सोमवार से ट्रेन को चलाने की मंजूरी दे दी गई। (एजेंसी)

असमिया साहित्यकार के घर का संरक्षण

पड़ोसी राज्यों में पुआल जलाने का असर दिल्ली की आबो-हवा पर पंजाब में इस साल पुआल जलाने के 14,432 मामले सामने आए हैं

पिछले साल राज्य में ऐसे मामलों की संख्या 22,269 थी

खेतों में पड़े धान के पुआल को हटाने के लिए मांगी गई थी, ताकि इसे जलने से बचाया जा सके। एनजीटी ने पहले फसल को जलाने को लेकर पर्यावरण जुर्माना राशि तय की थी। जिसमें दो एकड़ से कम जमीन वाले छोटे भूस्वामियों पर 2,500 रुपए, दो एकड़ जमीन से लेकर पांच एकड़ वाले मझोले भूस्वामियों पर पांच हजार रुपए और पांच एकड़ से अधिक जमीन वाले किसानों पर 15,000 रुपए की जुर्माना राशि तय की गई थी। पड़ोसी राज्यों में फसल के अवशेष जलाने से इसका सीधा प्रभाव दिल्ली में हवा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है, जो बिगड़ती ही जा रही है। एनजीटी ने 2015 में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से इस परंपरा को रोकने के लिए कहा था। बाद में एनजीटी ने सरकारों से छोटे किसानों को फसल के अवशेषों का प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा था। (आईएएनएस)

स्टेट न्यूज

दिवंगत असमिया साहित्यकार लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ के आवास का संरक्षण करेगी ओडिशा सरकार

डिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने घोषणा की है कि राज्य सरकार दिवंगत असमिया साहित्यकार लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ के संबलपुर स्थित आवास की मरम्मत और संरक्षण करेगी। पटनायक ने कहा, ‘मैं और ओडिशा के लोग लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ का बेहद सम्मान करते हैं। राज्य सरकार अपने खर्च पर उनके आवास की मरम्मत करेगी और उसका संरक्षण करेगी।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि इसके साथ दोनों राज्यों के बीच का सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होगा।’ पटनायक ने असम के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री नव कुमार डोले और मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार ऋषिकेश

गोस्वामी से बातचीत के दौरान यह आश्वासन दिया। असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के निर्देश के अनुसार, डोले और गोस्वामी ओडिशा सरकार से इस मसले पर बातचीत के लिए राज्य में हैं। सरकार ने आश्वासन दिया कि इस विरासत को ढहाने नहीं दिया जाएगा। ओडिशा के पर्यटन मंत्री अशोक चंद्र पांडा ने कहा कि प्रारंभ में इमारत की मरम्मत पर 50 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इससे पहले 27 अक्टूबर को सोनोवाल ने पटनायक से फोन पर बात करके उनसे बेजबरुआ के आवास का संरक्षण करने का आग्रह किया था, जो असम के लोगों की भावनाओं से जुड़ा है। (एजेंसी)


28 विविध सोनपुर मेले में इस वर्ष नहीं चहकेंगी चिड़िया 06 - 12 नवंबर 2017

पटना हाई कोर्ट के आदेश पर सोनपुर मेले में आकर्षण का केंद्र 'चिड़िया बाजार' पर रोक

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आईएएनएस

हार के विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले में इस बार आने वाले लोगों को न ही चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई देगी और न ही खरीदार देशविदेश की चिड़ियों को ही खरीद सकेंगे। यही नहीं, इस वर्ष हाथी दौड़ प्रतियोगिता भी नहीं होगी। हाथी केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ही दिखाई देंगे। न्यायालय के आदेश पर प्रशासन ने सोनपुर मेले में आकर्षण का केंद्र 'चिड़िया बाजार' पर रोक लगा दी गई है। सोनपुर में लगने वाला पशु मेला इस बार दो नवंबर से शुरू हो रहा है। करीब एक माह तक चलने

वाला यह मेला इस बार 32 दिनों का होगा। इस मेले में गाय, भैंस, घोड़े समेत अनेक पशुओं को बिक्री के लिए लाया जाता है। सोनपुर मेले में चिड़ियों की खरीद-बिक्री को रोक लगाने के लिए पटना उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत चिड़ियों की खरीद-बिक्री पर

रोक लगाने के आदेश सरकार सरकार को दिए हैं। इस मेले में दुनियाभर से लोग आते हैं। इसमें एक से बढ़ कर एक पशु-पक्षी खरीद-बिक्री होती है, लेकिन इस बार पक्षियों की बिक्री इस मेले में नहीं होगी। पहले यहां तोता सहित कई पक्षियों की कई तरह की वेराइटी खरीदारों को मिल जाती थी तथा आने वाले बच्चे भी इस बाजार में पक्षियों को देखकर मनोरंजन करते थे। इसी तरह मोर, गौरैया, मैना, साइबेरियन, पहाड़ी मैना, कोयल समेत अनेक पक्षी को भी बिक्री के लिए लाया जाता था, जिस कारण इस मेले में लगने वाले बाजार को 'चिड़िया बाजार' का नाम दिया गया था। सारण के जिलाधिकारी हरिहर प्रसाद ने कहा कि इस बार हाथी की भी कोई प्रतियोगिता नहीं होगी और न ही पशु क्रूरता नियम का उल्लंघन होगा। उन्होंने कहा कि चिड़िया बाजार को भी बंद कर दिया गया है। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सोनपुर मेले में पक्षियों की बिक्री पर रोक के पालन करने के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों में वन के अधिकारी के अलावा पुलिस अधिकारी, स्वयंसेवी संस्था के एक सदस्य और दंडाधिकारियों को रखा गया है।

वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सोनपुर मेले में पक्षियों की बिक्री पर रोक के पालन करने के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है

सोलर सिस्टम के बाहर मिले 20 नए ग्रह

वैज्ञानिकों ने सोलर सिस्टम के बाहर 20 नए ग्रहों की खोज की है, जहां जीवन होने की उम्मीद है

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ह्मांड के रहस्यों की खोज कर रहे वैज्ञानिकों ने 20 नए संभावित ग्रहों की खोज की है, जहां जीवन हो सकता है। नासा के केपलर टेलिस्कोप

से मिले डेटा से पता चला है कि सोलर सिस्टम से बाहर मौजूद इन ग्रहों पर ऐलियन मौजूद हो सकते हैं। वैज्ञानिक इस खोज से काफी उत्साहित हैं। इस लिस्ट में कई ग्रह ऐसे हैं जो हमारे सूरज की तरह ही स्टार की परिक्रमा करते हैं। एक परिक्रमा पूरी करने में कुछ ग्रह तो काफी लंबा समय लेते हैं। कुछ ग्रह पृथ्वी के 395 दिन के बराबर समय में एक परिक्रमा पूरी करते हैं। जबकि कुछ ग्रहों को एक परिक्रमा करने में सबसे कम समय (पृथ्वी के 18 दिन के बराबर) लगता है।

नासा के के2 मिशन से जुड़े जेफ कॉगलिन ने कहा कि लिस्ट में शामिल एक साल में 395 दिन वाले एक्सोप्लेनेट पर जीवन की उम्मीद सबसे ज्यादा है। के2, नासा के ग्रहों की खोज से जुड़े केपलर मिशन का दूसरा फेज है। केओएल-7923.01 ग्रह पृथ्वी के 97% आकार का ही है। अपने स्टार (सूरज जैसा स्टार) से दूर होने के कारण यह ग्रह पृथ्वी से ठंडा है। गौर करने वाली बात यह है कि इसका स्टार भी हमारे सूरज से थोड़ा ठंडा है। ऐसे में माना यह जा रहा है कि यह पृथ्वी पर टुंड्रा क्षेत्र की तरह हो सकता है। हालांकि यह इतना गर्म है कि वहां पानी मौजूद हो सकता है। नासा की टीम 70 से 80 फीसदी आश्वस्त है कि ये ठोस ग्रह हैं। 'न्यू साइंटिस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक अभी स्पष्ट रूप से वैज्ञानिक इस बात की पुष्टि नहीं कर सकते हैं क्योंकि इसके लिए और ज्यादा डेटा और निगरानी की जरूरत है। (एजेंसी)

एक नजर

इस बार मेले में हाथी दौड़ प्रतियोगिता भी नहीं होगी

इस वर्ष सोनपुर मेला 32 दिनों का होगा

सोनपुर पशु मेले की ख्याति विदेशों तक रही है

इस पशु मेले की ख्याति विदेशों तक में है। पहले इस मेले में हाथी सहित अन्य पशुओं को खरीदने के लोग दूर-दूर से आते थे। पूर्णिमा के दिन हाथी स्नान और हाथी दौड़ प्रतियोगिता को देखने के लिए विदेशों से भी लोग आते रहे हैं। सारण जिला प्रशासन का कहना है कि इस वर्ष शाही स्नान और केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हाथी लाए जाएंगे और इसके अलावा किसी भी हाल में हाथियों की सार्वजनिक प्रदर्शनी नहीं लगाई जाएगी। इस मेले को ऐतिहासिक बनाने में पर्यटन विभाग जुटा हुआ है। राज्य पर्यटन विभाग आने वाले लोगों का सुविधा मुहैया कराने के लिए विशेष टूर पैकेज की घोषणा की है। पर्यटन विकास निगम के महाप्रबंधक जयनाथ महतो ने बताया कि इन पैकजों में कई तरह की श्रेणियां रखी गई हैं। इसके लिए बुकिंग शुरू कर दी गई है।

बनेंगे विषाणु जांच केंद्र

श्चिम बंगाल सरकार ने पुणे के राष्ट्रीय वायरोलॉजी संस्थान (एनआईवी) के सहयोग से विषाणु जांच केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है। स्वास्थ्य सेवा निदेशक बी.आर. सत्पथी ने बताया, ‘हां, हम केंद्रों की स्थापना करेंगे। हम कोलकाता और इससे बाहर भी एक केंद्र खोलने की योजना बना रहे हैं। हमने अभी इनकी संख्या के बारे में कोई फैसला नहीं किया है।’ (एजेंसी) वर्गीकृत विज्ञापन


06 - 12 नवंबर 2017

हवा से पानी बनाती है यह मशीन!

विविध

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कोलकाता की कंपनी एकेवीओ ने नवाचार के क्षेत्र में पहल करते हुए पानी की समस्या को हल करने की पहल की है

अंधाधुंध ढांचागत विकास पर वैज्ञानिक चिंतित ज

आईएएनएस

ल को लेकर विभिन्न प्रांतों और देशों में तकरार होता ही रहता है, ऐसे में कोलकाता की कंपनी एकेवीओ ने नवाचार के क्षेत्र में पहल करते हुए पानी की समस्या को हल करने की पहल की है। कंपनी ने हवा की नमी से पानी बनाने वाली मशीन लांच की है। एकेवीओ ने शुरुआती तौर पर व्यावसायिक उपयोग के लिए 500 लीटर और 1000 लीटर क्षमता की मशीनें लांच की गई हैं। 1000 लीटर पानी बनाने वाली मशीन की कीमत करीब साढ़े नौ लाख रुपए होगी। एकेवीओ के निदेशक नवकरण सिंह बग्गा ने कहा, ‘हवा से पानी बनाने की मशीन बनाने वाली एकेवीओ देश की पहली स्वदेशी कंपनी है। देश में कुछ कंपनियां इस क्षेत्र में कार्य कर रही हैं, लेकिन वे बाहर से मशीनें मंगाती हैं। ऐसे में उनकी लागत ज्यादा हो जाती है। हमने शोध एवं अनुसंधान पर फिलहाल ढाई करोड़ रुपए खर्च किए हैं और इस मशीन का विकास किया है।’ उन्होंने कहा कि बाहर की कंपनियों की मशीनों की तुलना में एकेवीओ मशीन पानी उत्पादन के लिए 50 फीसदी कम बिजली खपत करती हैं। बग्गा ने

‘वर्ष 2030 तक केवल 60 फीसदी पानी उपयोग के लिए रहेगी। ऐसे में हमें पर्यावरण के प्रति जागरूक होने की जरूरत है।’ - नवकरण सिंह बग्गा, एकेवीओ के निदेशक

एक नजर

ऐसी मशीन बनाने वाली एकेवीओ देश की पहली स्वदेशी कंपनी है अन्य कंपनियां विदेशों से एेली मशीनें लाकर बेचती हैं

फिलहाल 500 और 1000 लीटर क्षमता की ही मशीनें लांच

कहा, ‘हम प्रधानमंत्री मोदी जी की ‘मेक इन इंडिया’ पहल का समर्थन करते हुए अनूठी परियोजना लेकर आए हैं, जिससे जल संकट का निदान भी हो सकता है। अगले दो साल में इस परियोजना पर हम 10 करोड़ रुपए खर्च करेंगे। हम जल्द ही घरेलू उपयोग के लिए ऐसी मशीन लांच करने की तैयारी कर रहे हैं। घरेलू उपयोग के लिए हम 40 लीटर और 100 लीटर प्रतिदिन पानी बनाने वाली मशीन लांच करेंगे। इनकी कीमत क्रमश: 35 हजार रुपए और 70 हजार रुपए होगी।’ दुनिया भर में भूजल स्तर नीचे जा रहा है, पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है। आज प्रांतों और शहरों में जल स्तर काफी नीचे चला गया है और भूजल के दोहन पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। ऐसे में हवा से पानी बनाने की मशीन काफी उपयोगी साबित हो सकती है। बग्गा के मुताबिक, ‘वर्ष 2030 तक केवल 60 फीसदी पानी उपयोग के लिए रहेगी। ऐसे में हमें पर्यावरण के प्रति जागरूक होने की जरूरत है।’

विश्व में अंधाधुंध तरीके से ढांचागत परियोजनाओं का विकास मानव जाति को कई खतरों की ओर ले जा रहा है

वि

श्व के सभी देश विकास की अलगअलग परिभाषाएं गढ़कर अंधाधुंध तरीके से सड़क निर्माण और ढांचागत परियोजनाओं का विकास करने में जुटे हैं, जो मानव जाति को आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय खतरों की ओर ले जा रहा है। क्वींसलैंड की जेम्स क्रुक यूनिवर्सिटी में प्राध्यापक विलियम लॉरेंस ने कहा, ‘हमने दुनिया भर में प्रमुख सड़कों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की जांच-पड़ताल की है।’ उन्होंने कहा, ‘यह देखना हैरत भरा रहा कि इनके पीछे कितने खतरे छुपे हुए हैं।’ उच्चवर्षा वाले क्षेत्रों और एशिया-प्रशांत, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों में सबसे जरूरी प्राथमिकता लाखों किलोमीटर लंबी नई सड़कों की योजनाओं व उनके निर्माण तक सीमित है। लॉरेंस ने कहा, ‘बारिश के कारण सड़कों पर गढ्ढे, बड़ी-बड़ी दरारें और भूस्खलन जैसी समस्याएं बहुत तेजी से होती हैं। ये परियोजनाएं शीघ्र ही बड़े धन अपव्यय में बदल जाती हैं।’ अगले तीन सालों में एशिया के विकासशील देशों में पक्की सड़कों की लंबाई दोगुनी होने की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘गीले, दलदली या पहाड़ी क्षेत्रों के लिए योजनाबद्ध नई सड़कों का निर्माण नहीं किया

एक नजर

लॉरेंस ने की बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं की समीक्षा

3 वर्षों में एशियाई देशों में पक्की सड़कों की लंबाई दोगुनी हो जाएगी

दलदली या पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण से हो सकता है नुकसान

जाना चाहिए, इससे केवल नुकसान होगा और यह केवल आर्थिक मानदंडों पर आधारित है।’ कोस्टारिका में अलॉयंस ऑफ लीडिंग एनवायरमेंटल रिसचर्स एंड थिंकर्स (एएलईआरटी) के शोधार्थी व अध्ययन के सह-लेखक इरीन बर्गयूस ने कहा, ‘अगर आप पर्यावरण और सामाजिक लागतों को जोड़ते हैं, तो निष्कर्ष नई सड़कों के खिलाफ ही सामने निकलकर आएगा। खासकर वन क्षेत्रों में, जहां उच्च पर्यावरणीय मानक मौजूद हैं।’ लॉरेंस के अनुसार, ‘जनता अक्सर खराब सड़कों के भारी कर्ज का हर्जाना भुगतती है। कुछ सड़क निर्माणकर्ता और राजनेता समृद्ध होते हैं और वास्तविक विकास के अवसर आसानी से गंवा दिए जाते हैं।’ (एजेंसी)


30 गुड न्यूज

06 - 12 नवंबर 2017

समान काम के लिए समान वेतन पटना हाई कोर्ट ने बिहार में नियोजित शिक्षकों के मामले में यह फैसला दिया

टना उच्च न्यायालय ने राज्य में नियोजित शिक्षकों को राहत देते हुए कहा कि समान काम के लिए समान वेतन लागू होना चाहिए। न्यायालय ने नियोजित शिक्षकों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया। पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन की खंडपीठ ने नियोजित शिक्षकों की तरफ से दायर जनहित याचिकाओं की सुनवाई के बाद कहा कि समान काम के बदले समान वेतन की मांग सही है।

नियोजित शिक्षकों के वकील दिनू कुमार ने बताया कि अदालत ने कहा कि ऐसा नहीं करना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन भी है। इस फैसले के बाद राज्य के करीब 3.50 लाख नियोजित शिक्षकों ने राहत की सांस ली है। बिहार के नियोजित शिक्षक अपनी इस मांग को लेकर काफी दिनों से आंदोलनरत थे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नियोजित शिक्षकों की मांगों को गैरवाजिब करार दिया था। इसके बाद नियोजित शिक्षकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया था कि राज्य के माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों से समान कार्य तो लिया जा रहा है, लेकिन वेतन समान नहीं दिया जा रहा है। अदालत के इस फैसले का विभिन्न शिक्षक संघों ने स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत करार दिया है। (एजेंसी)

नवी मुंबई मनपा का साहसिक फैसला

नवी मुंबई महानगरपालिका चाहती है कि 14 किलोमीटर वाशी-बेलापुर सायन-पनवेल महामार्ग की देखभाल करने का जिम्मा उसे मिले

सौर परियोजनाओं को 2,300 करोड़ रुपए का कर्ज

देश में ग्रिड से जुड़ी रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए विश्व बैंक की भागीदारी में एसबीआई की कर्ज योजना

एक नजर

जेएसडब्ल्यू, हिंदुजा, टाटा और हीरो आदि को मिल चुका है कर्ज एसबीआई ने 43 परियोजनाओं को ऋण मुहैया कराया है

इन कर्जों की वसूली में दिक्कत नहीं आने की उम्मीद जताई गई है

रकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने विश्व बैंक की भागीदारी में देश में ग्रिड से जुड़ी रूफटॉप (छत के ऊपर की) सौर परियोजनाओं के लिए 2,317 करोड़ रुपए के ऋण मुहैया कराने की घोषणा की है। एसबीआई के अध्यक्ष रजनीश कुमार ने बताया कि विश्व बैंक की तरफ से एसबीआई को व्यवहार्य रूफटॉफ परियोजनाओं के लिए ऋण मुहैया कराने के लिए 62.5 करोड़ डॉलर का लाइन ऑफ क्रेडिट (ऋण व्यवस्था) सुविधा मिली है।

उन्होंने कहा, ‘सौर परियोजनाओं को ऋण देने का लाभ यह है कि अन्य ऊर्जा परियोजनाओं की तरह इसमें ईंधन की आपूर्ति को लेकर कोई जोखिम नहीं है, दूसरे यह हमारी धरती की सुरक्षा में मदद करेगा।’ एसबीआई के बयान में कहा गया कि ये ऋण डेवलपरों और एंड यूजर्स को वाणिज्यिक, संस्थागत और औद्योगिक भवनों में रूफ टॉप सौर प्रणाली स्थापित करने के लिए दिए जाएंगे। इसमें कहा गया कि एसबीआई के मानकों का पालन करने

सौर परियोजनाओं को ऋण देने का लाभ यह है कि अन्य ऊर्जा परियोजनाओं की तरह इसमें ईंधन की आपूर्ति को लेकर कोई जोखिम नहीं है - रजनीश कुमार, एसबीआई के अध्यक्ष

वाले, तकनीकी क्षमता और संबंधित अनुभव रखने वाले तथा जिनकी अच्छी साख हो, उन्हें ही यह ऋण दिया जाएगा। अब तक कई कंपनियों को ऋण दिया गया है, जिसमें जेएसडब्ल्यू एनर्जी, हिंदुजा रिन्यूवेबल्स, टाटा रिन्यूवेबल इनर्जी, अडानी समूह, ऐज्यूर पॉवर, क्लीनटेक सोलर और हीरो सोलर एनर्जी शामिल है। कुमार ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत एसबीआई ने अब तक 43 परियोजनाओं को 2,766 करोड़ रुपए का ऋण मुहैया कराया है, जिससे ग्रिड में कुल 695 मेगावॉट रूफटॉप क्षमता जुड़ेगी। सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए एसबीआई ने अब तक कुल 12,000 करोड़ रुपए का ऋण मुहैया कराया है, जिसमें से इस क्षेत्र में अभी तक एक भी ऋण के फंसने की चिंता सामने नहीं आई है। (आईएएनएस)

वी मुंबई महानगरपालिका ने अपने क्षेत्र को सुसज्जित करने की दिशा में एक और साहसिक फैसला किया है। वह अपने क्षेत्र से गुजरने लगभग 14 किलोमीटर वाशी-बेलापुर सायन-पनवेल महामार्ग की देखभाल स्वयं करेगी और समय-समय पर इसकी मरम्मत भी करेगी। इस पहल को अमली जामा पहनाते हुए मनपा महासभा ने इस संबंधित प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी और अब उसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेज रही है। वहां से हरी झंडी मिलते ही महामार्ग के उस हिस्से को चमकाने का काम शुरू कर देगी। उल्लेखनीय है कि सायन-पनवेल महामार्ग की हालत हमेशा दयनीय बनी रहती है। खासकर बारिश के मौसम में वाहनों और यात्रियों को भारी संकट का सामना करना पड़ता है। इसके लिए लोग मनपा को ही जिम्मेदार बताते हैं। उनका तर्क होता है कि वे टैक्स मनपा को देते हैं तो जवादेही भी उसी को लेनी चाहिए। लोग उस दौरान शिकायतों की भरमार लगा देते हैं। मनपा को जवाब देते नहीं बनता है। इस वज़ह से नवी मुंबई मनपा की इमेज लगातार खराब होती जा रही थी। यही सब सोचकर और लोगों की दिक्कतों का ख़याल कर मनपा ने यह साहसिक कदम उठाया और तय किया कि सड़कों को दुरुस्त रखने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। मनपा को उम्मीद है कि उसकी स्थिति में सुधार होगा और साफ-सुथरे शहरों में नवी मुंबई की गिनती शीर्ष पर होगी। अभी यह देश में आठवें स्थान पर है। मनपा को इस बात पर नाज है कि फुटबाल विश्व कप के सफल आयोजन के कारण नवी मुंबई का नाम दुनिया के नक़्शे पर आ गया है. यहां आठ मैच खेले गए। उस दौरान भी मनपा ने सायन-पनवेल महामार्ग को चकाचक कर सबको चौंका दिया था। ताजा मुहिम को अगर राज्य सरकार ने मनपा के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी तो सबसे पहले सड़क किनारे जमा मलबे को हटाने, फालतू झाड़ियों को साफ करने और लाइटों को दुरुस्त करने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। इससे वाहनों को गुजरने में दिक्कत नहीं होगी और यात्रियों को सुविधा भी होगी। मनपा की छवि सुधरेगी और शहर की इज्जत बढ़ेगी। (मुंबई ब्यूरो)


06 - 12 नवंबर 2017

लोक कथा

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बुआजी की आंखें

प्र

भागीरथ कानोडिया

द्युम्नसिंह नाम का एक राजा था। उसके पास एक हंस था। राजा उसे मोती चुगाया करता और बहुत प्यार से उसका पालन किया करता। वह हंस नित्य प्रति सायंकाल राजा के महल से उड़कर कभी किसी दिशा में और कभी किसी दिशा में थोड़ा चक्कर काट आया करता। एक दिन वह हंस उड़ता हुआ दीवानजी की छत पर जा बैठा। उनकी पुत्रवधु गर्भवती थी। उसने सुन रखा था कि गर्भावस्था में यदि किसी स्त्री को हंस का मांस खाने को मिल जाए तो उसकी होने वाली संतान अत्यंत मेधावी, तेजस्वी और भाग्यशाली होती है। अनायास ही छत पर हंस आया देखकर उसके मुंह में पानी भर आया। उसने हंस को पकड़ लिया और रसोईघर में ले जाकर उसे पकाकर खा गई। इस बात का पता न उसने अपनी सास को लगने दिया, न ससुर को और न पति को, क्योंकि उसे भय था कि अगर राजा को इस बात का सुराग लग गया तो बड़ा अनिष्ट हो जायगा। उधर जब रात होने पर हंस राजमहल में नहीं पहुंचा तो राजा-रानी को बहुत चिंता हुई। उनका मन व्याकुल हो गया। चारों ओर उसकी खोज में आदमी दौड़ाए गए। लेकिन हंस कहीं हो तब मिले न! राजा ने अड़ोस-पड़ोस के शहरों-कस्बों में भी सूचना कराई कि अगर कोई हंस का पता लगा सके तो राज्य की ओर से उसे बहुत बड़ा पुरस्कार दिया जायगा। दस-बीस दिन निकल गए। कुछ भी पता नहीं लग सका। चूंकि वह हंस राजा ओर रानी को बहुत प्रिय था, अत: वे उदास रहने लगे। एक दिन एक कुटनी राजा के पास आई और बोली कि वह हंस का पता लगा सकती है, लेकिन उसे थोड़ा-सा समय चाहिए। राजा ने कहा, "मेरे राज्य के पंडित-जयोतिषी, हाकिम-हुक्काम और मेरे इतने सारे गुप्तचरों में कोई भी पता नहीं लगा सका, तुम कैसे पता लगा सकोगी?" कुटनी ने कहा, "मुझे अपनी योग्यता पर विश्वास

है। अगर अन्नदाता का हुक्म हो तो एक बार आकाश के तारे भी तोड़कर ले आऊं। आप मुझे थोड़ा-सा समय दीजिए और आवश्यक धन दे दीजिए। उसे वापस ला सकूं या नहीं, लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाती हूं कि उसका अता-पता आवश्य ले आऊंगी।" राजा ने स्वीकार कर लिया और कुटनी अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए चल पड़ी। सबसे पहले कुटनी ने यह पता लगाया कि शहर के धनिक घरों में कौन-कौन स्त्री गर्भवती है। उसे पता था कि गर्भावस्था में किसी स्त्री को यदि हंस का मांस मिल जाए तो वह बिना खाए नहीं रहेगी। साथ ही यह भी जानती थी कि साधारण घर की कोई स्त्री राजा का हंस पकड़ने का साहस नहीं कर सकती। खोजते-खोजते उसे पता लगा कि दीवान की पुत्रवधू गर्भवती है। अत: उसके मन में संदेह हो गया कि हो सकता है, राजा का हंस उड़ते-उड़ते किसी दिन इनके घर की छत पर आ गया हो और गर्भावस्था में होने के कारण लोभवश यह स्त्री उसे खा गई हो। कुटनी ने सोचा, किसी भी स्त्री के साथ निकटस्थ मैत्री करने के लिए उसके पीहर के हालचाल जानना आवश्यक है। इसीलिए कुटनी उसके पीहर के गांव पहुंची। वहां जाकर उसने पीहरवाले सारे लोगों के नाम-धाम तथा उनके घर में बीती हुई खास-खास पुरानी घटनाओं की जानकारी ली। उसे पता लगा कि दीवानजी की पुत्रवधू की बुआ छोटी उम्र में ही किसी साधु के साथ चली गई थीं और आज तक लौटकर नहीं आई है। उसने सोचा, अब दीवानजी के घर जाकर उनकी पुत्रवधू की बुआ बनकर भेद लेने का अच्छा अस्त्र अपने हाथ आ गया। वह दीवनजी के घर गई। उनकी पुत्रवधू के साथ बहुत स्नेह-ममत्व की बात करने लगी और बोली; "बेटी, मैं तेरी बुआ हूं। हम दोनों आज पहली बार मिली हैं। तुम जानती ही हो कि मैं तो बहुत पहले घर छोड़कर एक साधु के साथ चली गई थी। हल ही में

घर लौटकर आई और भाई से मिली तो उसने बताया कि तुम यहां ब्याही गई हो और तुम्हारे ससुर राज्य के दीवान हैं। यह जानकर मन में तुमसे मिलने की बहुत उत्कंठा हुई तो यहां चली आई। तुम्हें देखकर मेरे मन में बहुत ही हर्ष हुआ। भगवान तुम्हें सुखी रखें और तुम्हारी कोख से एक कांतिवान तेजस्वी पुत्र पैदा हो। मैं परसों वापस जा रही हूं और तुम्हारे लड़का होने के बाद भाई-भाभी को साथ लेकर बच्चे को देखने यहां आऊंगी।" दीवान की पुत्रवधू ने भोलेपन के कारण उसकी बातों का विश्वास कर लिया और बोली, "बुआजी, आप आई हैं तो दस-बीस दिन तो यहां रहिए। जाने की इतनी जल्दी भी क्या पड़ी है!" बुआ बनी हुई कुटनी को और क्या चाहिए था ! उसने वहां रहना स्वीकार कर लिया। थोड़े ही दिनों में बुआ-भतीजी खूब हिल-मिल गईं। एक दिन बातों-ही बातों में बुआजी ने कहा, "बेटी, गर्भावस्था में किसी स्त्री को अगर हंस का मांस खाने को मिल जाए तो बहुत अच्छा परिणाम निकलता है। उसके प्रभाव से होनेवाली संतान बहुत ही तेजस्वी और कांतिवान होती है; किंतु हंस तो मानसरोवर छोड़कर और कहीं होते नहीं, इसीलिए यह काम हो तो कैसे !" यह सुनकर उसने अपने हंस खाने की बात बुआजी को सहजभाव से बता दी। सुनकर बुआ ने कहा, "बेटी, यह अचरज की बात है कि तुम्हारे यहां राजा के पास हंस था ! तुमने जो कुछ किया, वह बहुत अच्छा किया, किन्तु तुम्हें किसी के सामने इस घटना का जिक्र नहीं करना चाहिए। मेरे सामने भी नहीं करना था, लेकिन मुझसे कही हुई बात तो कहीं जाने वाली नहीं है, इसीलिए जिक्र कर दिया तो भी कोई बात नहीं! कुछ दिन और बीत गए, तब कुटनी ने कहा, "बेटी, अगर भगवान के सामने तुम हंस खाने की बात स्वीकार कर लो तो हंस की हत्या का पाप तो सिर से उतर ही जायगा, सुपरिणाम भी बढ़ जाएगा। मंदिर के पुजारी से कहकर मैं ऐसी व्सवस्था कर दूंगी कि जिस

वक्त वहां तुम सारी घटना बताकर अपराध स्वीकार करो, उस वक्त पुजारी भी वहां नहीं रहे तथा और भी कोई न रहे, हम दो ही रहेंगी। उसने ऐसा करना स्वीकार कर लिया। कुटनी लुक-छिपकर राजा के पास पहुंची और बोली, "आपसे वायदा किया था, उसके अनुसार हंस का अता-पता लगा लाई हूं। ऐसा कहकर उसने सारी घटना राजा को बताई। राजा ने कहा, "इसका प्रमाण क्या है? वह बोली, "फलां दिन आप मंदिर में आ जाएं और हंस खाने वाली स्त्री की स्वीकारोक्ति स्वयं अपने कानों सुन लें। राजा ने ऐसा करने की ‘हां’ भर ली। नियत दिन पूर्व-योजना के अनुसार कुटनी ने राजा को एक जरा ऊंचे स्थान पर रखे हुए एक बड़े-से ढोल में छिपा दिया और बुआ-भतीजी मंदिर पहुंचीं। मंदिर का पट खुला था। पुजारी या और दूसरा कोई भी व्यक्ति वहां नहीं था। अब बुआजी ने शुरू किया, "हां, तो बेटी क्या बात हुई थी उस दिन? दीवान की पुत्रवधू ने घटना आरंभ की। वह थोड़ी-सी घटना ही कह पाई थी कि कुटनी ने सोचा, राजा ध्यानपूर्वक सुन तो रहा है न, इसीलिए वह ढोल की तरफ इशारा करके बोली, "ढोल रे ढोल, सुन रे बहू का बोल। उसका इतना कहना था कि भतीजी का माथा ठनका। उसे वहम हो गया कि हो न हो, दाल में कुछ काला है। मालूम होता है, मैं तो ठगी गई हूं। वह चुप हो गई। बुआ बोली; "हां तो बेटी, आगे क्या हुआ ? इस पर भतीजी बोली, "उसके बाद तो बुआजी मेरी आंख खुल गईं, सपना टूट गया।" ज्यों ही भतीजी की आंख खुली, त्यों ही बुआजी की आंखें भी खुली-की-खुली रह गईं। उसके पांव तो भतीजी से भी भारी हो गए और उसके लिए उठकर खड़े होना भी मुश्किल हो गया।


32 अनाम हीरो

डाक पंजीयन नंबर-DL(W)10/2241/2017-19

06 - 12 नवंबर 2017

अनाम हीरो

मेजर देवेंद्र पाल सिंह

करगिल का हीरो बना ब्लेड रनर क

करगिल युद्ध में गंभीर रूप से घायल मेजर देवेंद्र आज एक सफल ब्लेड रनर हैं

रगिल युद्ध में मेजर देवेंद्र पाल सिंह दुश्मनों से बजे उठ जाते थे और अपनी प्रैक्टिस शुरू कर देते। कुछ लड़ते हुए बुरी तरह से घायल हो चुके थे। एक महीनों की प्रैक्टिस के बाद वे पांच किलोमीटर तक चलने तोप का गोला उनके नजदीक आ फटा। उन्हें नजदीकी लग गए। कुछ समय बाद उनकी मेहनत फौजी अस्पताल लाया गया, जहां रंग लाई और वे अपने कृत्रिम पैर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। लेकिन 25 वर्ष का वह नौजवान अस्पताल से छुट्टी मिलने के से मैराथन में दौड़ने लगे। फिर उन्हें सैनिक मरने को तैयार नहीं था। जब बाद उन्होंने बैसाखी के सहारे साउथ अफ्रीका से फाइबर ब्लेड से उन्हें नजदीकी मुर्दाघर ले जाया गया चलना शुरू कर दिया। कुछ बने अच्छे कृत्रिम पैरों के बारे में जानकारी मिली, जो अधिक लचीले तो एक अन्य चिकित्सक ने देखा और दौड़ने के लिए बेहतर थे। इस कि अभी तक उनकी सांसे चल समय बाद उनके कृत्रिम पैर तरह धीरे-धीरे उनकी दौड़ने की रही है। उन्हें बचाने के लिए उनका लगा दिया गया गति बढ़ती गई और उन्होंने अपनी एक पैर भी काटना पड़ा। मेजर की विकलांगता को हरा दिया। 17 वर्ष इच्छाशक्ति और मजबूत इरादों से उनकी जान तो बच गई लेकिन उन्हें अब एक नया जीवन बाद आज देवेंद्र भारत के एक सफल ब्लेड रनर हैं और जीना सीखना था। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्होंने उनके नाम 2 वर्ल्ड रिकॉर्ड हैं। वे कहते हैं, ‘मुझ जैसे लोगों बैसाखी के सहारे चलना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद को विकलांग या कमजोर कहकर संबोधित किया जाता है उनके कृत्रिम पैर लगा दिया गया। देवेंद्र हर रोज सुबह तीन लेकिन मुझे लगता है कि हम चैलेंजर हैं।

न्यूजमेकर

बुलेट ट्रेन का कम्यूनिटी आला लोगो पुलिसिंग के शेख

पि

चक्रधर आला

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद के छात्र चक्रधर आला को बुलेट ट्रेन का लोगो बनाने का श्रेय मिला

छले कुछ समय से भारत में बुलेट प्रोजेक्ट की हलचल मची हुई है। अहमदाबाद में प्रोजेक्ट की नींव भी रखी जा चुकी है और अब बुलेट प्रोजेक्ट को उसका लोगो भी मिल गया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद के 27 साल के एक छात्र चक्रधर आला को बुलेट ट्रेन का लोगो बनाने का श्रेय मिला है। बुलेट ट्रेन का लोगो चुनने के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित की गई थी, जिसमें आला का लोगो अव्वल नंबर पर आया। ग्राफिक डिजाइन के दूसरे साल के पोस्ट ग्रेजुएट

छात्र चक्रधर आला ने इस साल अप्रैल में हुए कॉम्पटिशन के तहत लोगो की डिजाइन की थी। आला ने अपने लोगो में इंजन पर चीते का डिजाइन बनाया है। आला ने बताया कि उन्होंने लोगो में चीते को इसीलिए चुना क्योंकि चीता रफ्तार और विश्वसनीयता को दिखाता है। आला को जानेमाने आर्टिस्ट सतीश गुजराल ने एक लाख रुपए का पुरस्कार दिया है। एनआईडी-बेंगलुरु के दो छात्र इस प्रतियोगिता में रनर अप रहे, जिनमें फर्स्ट रनर अप को 75,000 और सेकेंड रनर अप को 50,000 का पुरस्कार दिया गया।

आईपीएस शेख आरिफ हुसैन को आईएसीपी के प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया

त्तीसगढ़ के बालोद जिले में कम्यूनिटी पुलिसिंग के लिए जिले के तत्कालीन एसपी शेख आरिफ हुसैन को इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ चीफ ऑफ पुलिस (आईएसीपी) के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय अवार्ड से नवाजा गया है। आईपीएस शेख आरिफ हुसैन ने कैलिफोर्निया में विश्वभर से आए पुलिस अधिकारियों को सामुदायिक पुलिसिंग में खुद के प्रयोग बताए। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने हुसैन को बधाई दी है। न्यू ओरलेंस पुलिस डिपार्टमेंट द्वारा अमेरिका के कैलिफोर्निया में आयोजित सम्मान समारोह में आरिफ को आईएसीपी अवार्ड से सम्मानित किया।

आरएनआई नंबर-DELHIN/2016/71597; संयुक्त पुलिस कमिश्नर (लाइसेंसिंग) दिल्ली नं.-एफ. 2 (एस- 45) प्रेस/ 2016 वर्ष 1, अंक - 47

शेख आरिफ हुसैन आरिफ ने बालोद में पदस्थ रहने के दौरान मिशन जीव दया, ई रक्षा व पूर्ण शक्ति नाम के तीन कार्यक्रम चलाए। कम्यूनिटी पुलिसिंग के उनके इस काम के लिए इससे पहले राष्ट्रीय स्तर पर भी पुरस्कार मिल चुका है। 125 वर्ष पुरानी संस्था इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ चीफ ऑफ पुलिस 18 वर्ष से सामुदायिक पुलिसिंग में पुरस्कार दे रही है, जो इस क्षेत्र का अंतराराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च पुरस्कार है। आरिफ ने कहा कि इस सम्मान की असली हकदार बालोद की जनता व बालोद पुलिस है, जिन्होंने कल्पना को हकीकत में बदलने में मेरा मनोबल बढ़ाया।

सुलभ स्वच्छ भारत (अंक 47)  
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