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वर्ष-1 | अंक-40 | 18 - 24 सितंबर 2017

आरएनआई नंबर-DELHIN/2016/71597

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08 सुलभ

सुलभ ग्राम में राजू श्रीवास्तव डॉ. पाठक के मुरीद बन गए विख्यात हास्य कलाकार

17 खुला मंच

नए भारत की जीवनरेखा

जापान और भारत के संबंधों पर प्रधानमंत्री के विचार

27 प्रेरक

बांस की साइकिल

ग्रामीणों को रोजगार देने के लिए बांस से साइकिल बनाने का प्रयोग

समग्र स्वच्छता, सर्वत्र स्वच्छता

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उत्तर प्रदेश के अपने गृह जनपद कानपुर में किया राष्ट्रव्यापी ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभ‌ियान का शुभारंभ


02 आवरण कथा

18 - 24 सितंबर 2017

समग्र स्वच्छता, सर्वत्र स्वच्छता रा

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उत्तर प्रदेश में अपने गृह जनपद कानपुर के ईश्वरीगंज से राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान ‘स्वच्छता ही सेवा’ का शुभारंभ किया। इस मौके पर स्वच्छता के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य के लिए सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक सहित कई विभूतियाें को राष्ट्रपति ने सम्मानित किया

एसएसबी ब्यूरो

ष्ट्रपति बनने के बाद रामनाथ कोविंद 15 सितंबर को पहली बार उत्तर प्रदेश में अपने गृह जनपद कानपुर पहुंचे। यहां उन्होंने राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान ‘स्वच्छता ही सेवा’ का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने उपस्थितजनों को स्व‍च्छ‍ता ही सेवा

की शपथ भी दिलाई, जिसमें स्वच्छ स्वास्थ्य वर्धक और न्यू इंडिया के निर्माण का संकल्प लिया गया। इस मौके पर राष्ट्रपति कोविंद ने स्वच्छता के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने वाली विभूतियों और ग्राम स्तर के उन नायकों को भी सम्मानित किया, जिन्होंने ईश्वरीगंज गांव को ओडीएफ घोषित कराने में अपना योगदान दिया है।

ईश्वरीगंज का चयन

गौरतलब है कि इससे पहले 27 अगस्त 2017 को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2017 से गांधी जयंती, 2 अक्टूबर 2017 तक 'स्वच्छता ही सेवा' कैंपेन चलाने के लिए पूरे देश का आह्वान किया था। इस कैंपेन का मुख्य उद्देश्य पूरे देश में स्वच्छता को बढ़ावा देना और जनआंदोलन की तरह इस अभियान को

चलाना है। इसी कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपति कोविंद ने ईश्वरीगंज गांव से की है। इस अभियान की शुरुआत के लिए ईश्वरीगंज गांव को चुने जाने के पीछे खास वजह यह रही कि यहां के लोगों के अथक प्रयास के बाद इसे खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया है। ईश्वरीगंज से 60 किमी दूरी पर स्थित गांव परौंख में राष्ट्रपति का जन्म हुआ था।


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आवरण कथा

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विश्व का सबसे बड़ा शौचालय भारत में

विश्व का सबसे बड़ा शौचालय भारत में बन रहा है। यह शौचालय महाराष्ट्र के पुणे बॉर्डर के पास पंढरपुर में बन रहा है- डॉ. विन्देश्वर पाठक

रा

ष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के द्वारा ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के शुभारंभ के मौके सम्मानित होने वाले सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक ने इस मौके पर मीडिया के साथ बातचीत में बताया कि विश्व का सबसे बड़ा शौचालय भारत में बन रहा है। यह शौचालय महाराष्ट्र के पुणे बॉर्डर के पास पंढरपुर में बन रहा है। इस शौचालय में 2,858 सीटें हैं। इससे पहले चीन में 1000 सीट का शौचालय था।

4 लाख लोग करेंगे इस्तेमाल

कानपुर के पहले ओडीएफ गांव ईश्वरीगंज में आयोजित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के कार्यक्रम में शामिल होने आए डॉ. विन्देश्वर पाठक देश में चल रहे स्वच्छता अभियान को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में बन रहा शौचालय आधा बन चुका है। इसका इस्तेमाल दो लाख

देश में 6 लाख 44 हजार गांव हैं। सुलभ इंटरनेशनल 15 लाख घरों और 9 हजार सार्वजनिक स्थान में शौचालय बना चुकी है। देश में 8 करोड़ शौचालय की जरूरत है स्वच्छता में सबकी भागीदारी

ही जिम्मेदारी नहीं है। यह हम सबकी जिम्मेदारी है।

गांव का सबक

राष्ट्रपति ने कहा कि गंदगी किसी भी समाज के लिए अभिशाप है। बहू-बेटियां खुले में शौच करने जाती हैं तो बड़े-बूढ़े तब तक मानसिक तनाव में होते हैं, जब तक वे लौट नहीं आती। एक सर्वे के मुताबिक साढ़े छह करोड़ लोग गंदगी के कारण मानसिक बीमारी से ग्रस्त हैं। स्वच्छता के लिए काम करना सही मायने में मानवता की सेवा है। स्वच्छता के लिए हमें सदियों पुरानी मानसिकता को बदलना होगा। राष्ट्रपति ने अमिताभ बच्चन के स्वच्छता संबंधी विज्ञापन दरवाजा बंद तो बीमारी बंद का जिक्र करते हुए कहा, वह विज्ञापन वाकई अच्छा लगता है। बच्चन मुफ्त में यह काम कर रहे हैं। यह काम एक

राष्ट्रपति ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत स्व‍च्छता और आरोग्यता के लिए संघर्ष कर रहा है। आज हम सभी जन आरोग्यता व्यक्तिगत स्वच्छता और पर्यावरण स्वच्छ‍ता की शपथ ले रहे हैं। स्वच्छता केवल सफाई कर्मचारियों और सरकार के विभागों की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि यह ऐसा राष्ट्रीय आंदोलन है, जिसमें सभी की भागीदारी आवश्यक है। आज हमें हमारे घरों, सार्वजनिक स्थलों गांवों और शहरों को साफ करने के लिए प्रयत्न करने होंगे। इसका उद्देश्य यह है कि वातावरण स्वच्छ हो और हर स्थान पर सफाई हो। इससे लोगों को समृद्धि का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि ईश्वरीगंज गांव से सीख लेकर इलाके के सभी लोग सफाई पर जोर दें और गंगा को स्वच्छ करने में योगदान करें। हमने जो शपथ ली है, वह स्वच्छता से जुड़ाव को रेखांकित करती है। हम सबको गांव शहर साफ रखने का प्रयास मिलकर करना है। यह सरकार की

गंदगी तो अभिशाप

लोग कर रहे हैं। जल्द ही शौचालय पूरा बनकर तैयार हो जाएगा। फिर 4 लाख लोग हर दिन इस शौचालय का इस्तेमाल करेंगे।

प्रधानमंत्री ने सुझाव मांगे

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने उनको एक पत्र लिखा है। उनकी मंशा है कि 2 अक्टूबर 2019 तक भारत स्वच्छ अभियान का लक्ष्य पूरा कर ले। इस संबंध में प्रधानमंत्री ने सुझाव मांगे हैं। उनका कहना है कि एक शौचालय बनाने में 12 हजार रुपए के बजाय 25 हजार रुपए दिए जाएं। इससे 10 फीसदी शौचालय के मॉनिटरिंग करने वाले को मिल जाएंगे। पांच फीसदी देखरेख करने वाली कंपनी को मिल सकते हैं। इस संबंध में उन्होंने सरकार को यह सुझाव पहले ही दिया है कि हर गांव में एक लड़के को प्रशिक्षित कर शौचालय की देखभाल के लिए रखा जाए। यह भी शर्त होनी चाहिए कि एक साल में शौचालय खराब होने पर मुफ्त में बनाया जाए।

सुलभ की उपलब्धि

डॉ. पाठक ने जानकारी दी कि देश में 6 लाख 44 हजार गांव हैं। सुलभ इंटरनेशनल 15 लाख घरों और 9 हजार सार्वजनिक स्थान में शौचालय बना चुकी है। देश में 8 करोड़ शौचालय की जरूरत है।

राष्ट्र निर्माता कर सकता है। मैं आप सबको उसी श्रेणी में रखता हूं। देश का हर नागरिक राष्ट्र निर्माता है। हमें केवल इसके बोध की जरूरत है।

पाल राम नाईक, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती, कानपुर से लोकसभा सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी भी उपस्थित थे।

उन्होंने कहा कि देश अस्वच्छता के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका बीड़ा उठाया है। आज हम सब इस अभियान की शुरुआत कर रहे हैं। ईश्वरीगंज के लोगों ने जिस तरह अपने गांव को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाया है, उससे लगता है कि हमारा देश अस्वच्छता पर जरूर विजय प्राप्त करेगा। राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छ भारत का मिशन हासिल करना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्य

अपने घर आया हूं

निर्णायक लड़ाई

स्वच्छता केवल सफाई कर्मचारियों और सरकार के विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह ऐसा राष्ट्रीय आंदोलन है, जिसमें सभी की भागीदारी आवश्यक है- राष्ट्रपति कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद यह मेरी कानपुर की पहली यात्रा है। मैं अपने घर आया हूं। यह मेरा जन्मस्थान है। मैं यहां की मिट्टी में पला-बढ़ा हूं। पहले बीएनएसडी इंटर कॉलेज, फिर डीएवी में पढ़ाई की। शहरवासियों के स्नेह और मां गंगा के आशीर्वाद से इस मुकाम तक पहुंचा हूं। मैं भले ही पूरे देश का राष्ट्रपति हूं, लेकिन मातृ राज्य उत्तर प्रदेश से लगाव कुछ ज्यादा ही रहेगा। मैं आपके बीच रहा हूं, आपका मुझसे भावनात्मक जुड़ाव है। इसीलिए आपको भी लगता होगा कि कोविंद भले ही राष्ट्रपति भवन में बैठे हों, पर हम भी किसी राष्ट्रपति से कम नहीं हैं। आपको मेरे से आने से जितनी खुशी हुई है, उससे कहीं ज्यादा मुझे हुई है।


04 आवरण कथा

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‘स्वच्छता ही सेवा है’ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संबोधन

देश में अस्वच्छता के विरूद्ध लड़ी जा रही निर्णायक लड़ाई को और तेज करने के उद्देश्य से देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कानपुर आए और स्वच्छता को सेवा से जोड़ा। प्रस्तुत है कानपुर में महामहिम के संबोधन के मुख्य अंश

भा

रत के राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद यह मेरी पहली कानपुर यात्रा है। कानपुर मेरा जन्म स्थान तो है ही, मेरी शिक्षा भी यहीं हुई है। यहां की यादें मेरे मन में रची-बसी हैं। जिला कानपुर देहात के एक गांव से मैंने अपनी जीवन यात्रा शुरू की थी। आज मैं जहां तक पहुंच सका हूं उसके पीछे आप सभी की शुभकामनाएं और इस धरती के आशीर्वाद की शक्ति शामिल हैं। मुझे कानपुर के गौरवशाली इतिहास का एक अध्याय हमेशा प्ररेणा देता रहा है। इस हलाके की सड़कों-गलियों और गांवों ने सन् 1857 की आजादी की पहली लड़ाई के दौरान नाना साहब, तात्या टोपे और उनके लड़ाकू दोस्तों की बहादुरी देखी है। आज हमारा देश अस्वच्छता के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है। हमारे पास स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केवल दो वर्षों का समय है। ‘स्वच्छता ही सेवा’ का यह अभियान इस मिशन को ताकत देने का देशव्यापी प्रयास है। ईश्वरीगंज गांव के लोगों ने जिस जिम्मेदारी के साथ अपने गांव को ‘खुले में शौच से मुक्त’ बनाया है, उसे देखते हुए मुझे पूरा विश्वास है कि हमारा देश अवश्य ही अस्वच्छता के लिए उदाहरणीय योगदान देने वाले आज के पुरस्कार विजेताओं को भी मेरी हार्दिक बधाई। मैं चाहता हूं कि इस गांव से सीख लेकर इस इलाके के सभी लोग सफाई पर जोर दें तथा गंगा नदी को भी साफ करने में योगदान करें। आज हम सबने जो शपथ ली है वह सार्वजनिक स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वच्छता और पर्यावरण की स्वच्छता के परस्पर जुड़े होने का रेखांकित करती है। हमारे घर, सार्वजनिक स्थान, गांव और शहर हमेशा साफ रहें या प्रयास हम सब को मिल कर करना है। हमारा उद्देश्य है कि समग्र स्वच्छता हो और सर्वत्र स्वच्छता हो। स्वच्छता केवल सफाई कर्मियों और सरकारी विभागों की ही जिम्मेदारी नहीं है। यह बात लगभग सौ साल पहले महात्मा गांधी ने खुद सफाई करते हुए सबको सिखाने की कोशिश की थी। बापू कहा करते थे कि जब तक आप अपने हाथ में झाड़ू और बाल्टी नहीं उठाएंगे तब तक आप अपने गांव और शहर को साफ नहीं कर पाएंगे। सन् 2014 की गांधी जयंती के दिन से चल रहे स्वच्छ भारत मिशन के सभी लक्ष्यों को प्राप्त करना ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रति हमारी

सच्ची श्रद्धांजलि होगी। केवल लक्ष्यों को प्राप्त ही नहीं करना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि स्वच्छता की सुविधाओं का स्थाई रूप से इस्तेमाल होता रहे और स्वच्छता की जड़ें मजबूत रहें। गंदगी किसी भी समाज के लिए अभिशाप है। मल से जो बीमारियां होती हैं उनके कारण होने वाला आर्थिक नुकसान देश के जीडीपी के 6.4 के बराबर आंका गया है। ऐसी बीमारियों से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अधिक परेशानी होती है। उनकी कमाने की क्षमता भी कम हो जाती है। कहा जा सकता है कि स्वच्छता के लिए काम करना सही मायनों में मानवता की सेवा है। स्वच्छता के लक्ष्यों के बारे में किसी भी तरह के समझौत की तनिक भी गुंजाइश नहीं है। खुले में शौच के कारण होने वाली बीमारियों से छोटे बच्चों की आंतों में सूजन हो जाती है, खाना बदन को लगता नहीं है। बच्चों की लंबाई कम रह जाती है। उनकी बुद्धि के विकास पर असर पड़ता है। भारी संख्या में बच्चे डायरिया के कारण मौत का शिकार होते हैं। पीने के पानी को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बनाने का सबसे बड़ा कारण मल से पैदा होने वाले संक्रमण ही हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए सब का एकजुट होकर काम

करना जरूरी है। स्वच्छ भारत मिशन द्वारा स्वच्छता को एक सामूहिक मुद्दा बनाया गया है। गांव से लेकर केंद्र सरकार तक हर स्तर पर तथा समाज के हर तबके की भागीदारी तय की गई है। महिलाओं के अनेक स्वयं-सहायता समूह सक्रिय हैं। यहां उपस्थित सात विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों की सक्रियता इस मिशन में व्यापक भागीदारी का उदाहरण है। सिविल सोसाइटी, सैन्य बलों, इंटर-फेथ ग्रुप, एनसीसी -एनएसएस जैसे युवा संगठनों, पंचायती राज संस्थाओं और कॉरपोरेट सेक्टर की निरंतर भागीदारी से इस अभियान को तथा स्वच्छ भारत मिशन को विशेष ऊर्जा प्राप्त होगी, लेकिन आम जनता के सहयोग के बिना यह मिशन पूरा नहीं हो सकता। स्वच्छ भारत मिशन का एक बहुत बड़ा प्रयास है, पूरे देश में लगभग छह लाख प्रशिक्षित स्वच्छाग्रहियों की एक सेना तैयार करना। देश के हर गांव में एक स्वच्छाग्रही इस मिशन की पताका लेकर अपने सभी ग्रामवासियों के साथ स्वच्छता की ओर बढ़ेगा। स्वच्छता के लिए सदियों पुरानी आदतों को बदलना है। यह समाज की सोच में बदलाव का

सरकार के स्वच्छ भारत मिशन ने लोगों में नई चेतना जगाई है। मिशन के तहत स्वच्छता का कवरेज 39 प्रतिशत से बढ़कर आज 67 प्रतिशत हो गया है। खुले में शौच करने वाले लोगों की संख्या 55 करोड़ से घटकर 30 करोड़ पर आ गई है

अभियान है। यह उस निर्दयता को रोकने का अभियान है, जिसके दबाव में हमारी माताएं, बहनें और बेटियां खुले में शौच के लिए मजबूर की जाती रही हैं और उनके सम्मान और सुरक्षा की अनदेखी की जाती रही है। कई ऐसे उदाहरण सामने आ रहे हैं जब हमारी बच्चियों ने अपने होने वाले ससुराल में शौचालय न होने के कारण शादी से इंकार कर दिया है। ऐसी नवयुवतियां हम सब के लिए प्ररेणास्रोत हैं। इन क्रांतिकारी कदमों के लिए मैं उनका अभिनंदन करता हूं। स्वच्छता मिशन ने हमारे समाज के कुछ बहुत अच्छे पहलू उजागर किए हैं। अनेक स्थानों पर लोगों ने निगरानी समितियां बनाई है। जागरूक लोग खुले में शौच करने वाले लोगों को सम्मान के साथ फूल माला देकर ऐसा न करने का अनुरोध करते हैं। इन प्रयासों का अच्छा प्रभाव देखने को मिल रहा है। लेकिन अभी भी स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों को पाने के लिए कई क्षेत्रों में काफी काम करना बाकी है। कूड़ा, कचरा, मल-मूल के निस्तारण पर काफी तेजी से काम करना है। ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की सोच के साथ कचरे से बिजली बनाने जैसे कार्यों को तेजी से करना है। सभी पहलुओं पर शीघ्रता से काम करना है। काम करने का समय कम है। हममें से हर एक को यह ठान लेना है कि इस मिशन को हम समय पर पूरा करके ही रहेंगे। प्रधानमंत्री ने स्वच्छता पर जोर देते हुए कहा है कि शौचालय का निर्माण देवालय से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। सरकार के स्वच्छ भारत मिशन ने लोगों में नई चेतना जगाई है। मिशन के तहत स्वच्छता का कवरेज 39 प्रतिशत से बढ़कर आज 67 प्रतिशत हो गया है। खुले में शौच करने वाले लोगों की संख्या 55 करोड़ से घटकर 30 करोड़ पर आ गई है। आप सब जानते हैं कि आज इस अभियान के आरंभ के साथ ही पूरे देश में जहां कहीं भी, विद्यालयों, आंगनवाड़ियों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों पर, यह काम अभी तक अधूरा है, वहां इसको पूरा करने की शुरूआत की जा रही है। हम सब के जीवन में यह क्षण बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि हम सब इस क्रांतिकारी अभियान के श्रीगणेश के अवसर पर साक्षी बन रहे हैं। स्वच्छ भारत की नींव पर ही स्वच्छ भारत और समृद्ध भारत का निर्माण होगा। आइए हम सब भारतवासी मिलकर स्वच्छता की ओर एक और कदम बढ़ाएं। मुझे विश्वास है कि स्वच्छता का संकल्प लेकर राष्ट्र निर्माता की अपनी-अपनी भूमिका को हम सब सफलतापूर्वक अदा करेंगे।


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आवरण कथा

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वर्ष उत्तर प्रदेश को खुले में शौचमुक्त कर दिया जाएगा। योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री का मिशन अब स्वच्छ भारत और समर्थ भारत का हिस्सा है। प्रदेश सरकार ने छह माह के अंदर 10 लाख से अधिक शौचालयों का निर्माण कराया है। हम जन सहभागिता के माध्यम से स्वच्छ उत्तर प्रदेश, समर्थ उत्तर प्रदेश और सशक्त उत्तर प्रदेश की कल्पना को साकार कर सकते हैं।

गंगा को भूल नहीं सकती : उमा

गंगा की मंत्री थी, गंगा को भूल नहीं सकती हूं। मंत्रालय भले ही बदल गया हो, लेकिन मेरा जीवन गंगा पर ही शुरू और गंगा पर खत्म होता है। यह बात केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने कही।

कानपुर को तोहफा

ईश्वरीगंज के लोगों ने जिस तरह अपने गांव को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाया है, उससे लगता है कि हमारा देश अस्वच्छता पर जरूर विजय प्राप्त करेगा – राष्ट्रपति कोविंद डॉ. पाठक का सम्मान

इस मौके पर राष्ट्रपति ने सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक को स्वच्छता के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में इंडिया सैनिटेशन कोलेशन की नैना लाल किदवई भी शामिल हैं। राष्ट्रपति ने सम्मानित होने वाली विभूतियों के कार्यों की सराहना की। उन्होंने प्रदेश सरकार और देश की ओर से उनका अभिनंदन किया।

मानसी से प्रभावित

स्वच्छता के लिए काम कर रहीं कानपुर की

एनसीसी कैडेट मानसी द्विवेदी से राष्ट्रपति बेहद प्रभावित दिखे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मानसी में राष्ट्र निर्माता की झलक दिखती है। हम सबका आशीर्वाद उन्हें मिलेगा तो वह अपने लक्ष्य को अवश्य पा लेंगी।

गंगा की भी सफाई करें

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छता के लिए काम करना सही मायनों में मानवता की सेवा है। ईश्वरीगंज के लोगों ने अपने गांव को खुले में शौचमुक्त कर अनुकरणीय काम किया है। अब गांववासी गंगा की सफाई में भी योगदान दें। राष्ट्रपति ने कहा

कि गांव के जिन लोगों ने इस कार्य में योगदान किया है, उन्हें देश भर में बैठे लोग देख पा रहे हैं। दूरदर्शन इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण कर रहा है। संबोधन के बीच में लोगों ने तालियां बजाईं तो राष्ट्रपति ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह तालियां इसीलिए बज रहीं हैं कि लोगों को दूरदर्शन पर दिखाया जा रहा है। जो लोग तालियां नहीं बजा रहे हैं, वह चिंता न करें, उन्हें भी दिखाया जाएगा। इस पर लोगों ने जमकर तालियां बजाईं। कार्यक्रम को राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री उमा भारती तथा क्षेत्रीय सांसद मुरली मनोहर जोशी ने भी संबोधित किया।

कोविंद के स्वागत से अभिभूत

इस अवसर पर राज्यपाल राम नाईक ने कहा, ‘मैं सोच रहा था कि कोविंद जब राष्ट्रपति बनकर यहां आएंगे तो उनका स्वागत कैसे होगा। आज मुझे यहां के लोगों के चेहरे पर ऐसी खुशी दिखाई दे रही है जैसे लंका पर विजय पाकर श्रीराम वापस लौटे हों।’ राज्यपाल ने उपस्थित लोगों से कहा कि आपके घर में यदि देवघर न हो तो चलेगा, लेकिन आपके घर में शौचालय होना चाहिए। सबके मन में एक इच्छा होनी चाहिए कि अपने परिवार की लज्जा का रक्षण करने के लिए घर में शौचालय बनवाएंगे।

योगी ने दिलाया भरोसा

कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा, ‘गंगा के किनारे बसे हर जिले में गंगा महोत्सव मनाया जाएगा, साथ ही उन्होंने अपराधियों से खाली कराई जमीन पर गरीबों के लिए टॉयलेट बनवाने के लिए मुफ्त पट्टे दिए जाने की बात भी कही। उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि अगले

इस अवसर पर कानपुर के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने लोगों से स्वच्छता को सेवा के रूप में अपनाने की अपील की। ईश्वरीगंज गांव में स्वच्छता ही सेवा अभियान के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने कहा कि जब कानपुर से चुनाव लड़ रहे था तो लोग पूछते थे कि कानपुर को क्या देंगे। हमने कोई वादा नहीं किया लेकिन कहा कि जो देंगे, अच्छा देंगे। तीन साल बाद हमने कानपुर को भारत का राष्ट्रपति दिया है। इससे बड़ा तोहफा और कुछ नहीं हो सकता। जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भाजपा के सदस्य बने थे तब वह पार्टी के अध्यक्ष थे। आज जब कोविंद राष्ट्रपति बने हैं तो वे कानपुर के सांसद हैं। जोशी ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वे कोई भी बड़ा अभियान कानपुर से ही शुरू करें।

बिल्ट, यूज, मेनटेन, ट्रीट

राजस्थान और महाराष्ट्र की तर्ज पर अब उत्तर प्रदेश में कंपनियों को आमंत्रित कर स्वच्छता को बढ़ावा दिया जाएगा। यह बात एचएसबीसी की पूर्व प्रमुख व इंडिया सैनिटेशन कोलेशन की प्रमुख नैनालाल किदवई ने कही। उन्होंने कहा कि कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) के तहत तमाम कंपनियां सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्य करती हैं। कुछ कंपनियों और एनजीओ के जरिए महाराष्ट्र व राजस्थान में स्वच्छता को लेकर हमारे कार्य चल रहे हैं। अब हम योजना बना रहे हैं कि इन दोनों राज्यों की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में स्वच्छता को लेकर सीएसआर फंड का इस्तेमाल किया जाए ताकि उसके सहयोग से स्वच्छता अभियान चलाया जा सके। उन्होंने कहा कि वह सहारनपुर से हैं, इसलिए यहां के लिए उनके मन में खास लगाव है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने मंच पर आने का न्योता दिया है, उनसे मिलकर आगे की योजनाएं बनाएंगे। ईश्वरीगंज में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के मंच से किदवई ने कहा कि उनकी संस्था स्वच्छता के क्षेत्र में वित्तीय संसाधन मुहैया कराती है। हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन को आगे बढ़ाना है। स्वच्छता में हम शौचालय के रखरखाव, मल प्रबंधन आदि पर काम करते हैं। हमारा मूल मंत्र है बीयूएमटी यानी बिल्ट, यूज, मेनटेन, ट्रीट।


06 संवाद

18 - 24 सितंबर 2017

पटना में आयोजित पार्लियमेंटेरियन कॉन्क्लेव में स्वच्छ भारत अभियान की चुनौतियां, विषय पर बातचीत करते हुए सुलभ स्वच्छता व सामाजिक सुधार आंदोलन के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक ने कहा कि शौचालय को लेकर हमारा एक विचार था, जिसे हमने इम्प्लीमेंट किया और आज हमने देश के कुछ हिस्सों से मैला ढोने की प्रथा को खत्म किया है। उन्होंने कहा कि विचार सभी के पास होते हैं, लेकिन उन विचारों को इम्प्लीमेंट करने की ताकत होनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी जी और मुझमें एक बात समान है कि हम दोनों ईमानदार हैं। आज एक ईमानदार पीएम से पूरे देश का नक्शा बदल रहा है। उन्होंने कहा कि सभी को ईमानदार होना चाहिए, जब तक सभी लोग ईमानदार नहीं होंगे, तब तक देश विकास की राह पर नहीं बढ़ सकता है। समाज के प्रति सभी की जवाबदेही होनी चाहिए। पार्लियामेंटेरियन कॉन्क्लेव में ममता मेहरोत्रा ने सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक से विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत है उस बातचीत के प्रमुख अंश

‘समाज के प्रति सभी की जवाबदेही हो तय’ प्रियंका तिवारी

स्वच्छता का मुद्दा पहली बार किसी सरकार ने उठाया है, इससे आपको क्या महसूस होता है और इससे आपको कितनी मजबूती मिल रही है? आवश्यकता इस बात की है कि देश समाज के लिए आपने क्या किया। अब ये है कि स्वच्छता की बात सभी लोग करने लगे हैं, लेकिन 1969 में मैं जिस समय आया था उस समय देश के किसी गांव में शौचालय नहीं था। महिलाओं को, बेटियों को अंधेरे में शौच के लिए बाहर जाना पड़ता था, जिससे उन्हें तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उस दौर में लड़कियां स्कूल भी नहीं जाती थीं, जो जाती भी थीं वह दोपहर तक घर चली जाती थीं, क्योंकि स्कूल में शौचालय नहीं थे। इसके अलावा

बाहर शौच जाने से इसका सीधा असर वातावरण पर पड़ता था, जिससे बच्चों को डायरिया, हैजा जैसी बिमारियां हो जाती थी और उन्हें बचाना मुश्किल हो जाता था। शहरों में भी स्थिति कुछ ज्यादा अच्छी नहीं थी। शहरों में 85 प्रतिशत घर ऐसे थे जहां पर कमाऊ शौचालय थे, उन्हें महिलाएं साफ करती थीं। ऐसी महिलाओं को लोग छूते नहीं थे, उन्हें अछूत कहते थे। दीप से दीप जलता है, बुद्ध ने कहा है कि अपना दीपक स्वयं जलाओ। गांधी ने स्वयं कहा है कि जब तक ये मैला ढोएंगी इनके साथ खाना कोई नहीं खाएगा। भुवनेश्वर में 1934 में गांधी ने लोगों को खाने पर बुलाया तो खाने के समय लोगों ने कहा कि गांधी इनके साथ खाना हम नहीं खाएंगे। फिर गांधी ने लिखा कि भारतीय अंग्रेज की गोलियां खा लेंगे, लेकिन अछूतों के साथ खाना नहीं खाएंगे। हमारे

पास जो तकनीक है उससे इस प्रथा की समाप्ति नहीं हो सकती थी।

आपको इसकी प्रेरणा कहां से मिली? मैं भी पटना विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र का प्राध्यापक बनना चाहता था, लेकिन बन नहीं पाया। मैं हाई स्कूल का शिक्षक जरूर बना, छोटी मोटी नौकरियां भी कीं। बाद में पटना गांधी संग्राहलय में हम लोगों की एक संस्था थी, बिहार गांधी की जन शताब्दी समिति, जो गांधी जी का 100वां जन्मदिवस मनाने के लिए बनाई गई थी। उसी में मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करने आया। हमारे महासचिव ने कहा कि मैला ढोने की प्रथा अमानवीय है इसे गांधी समाप्त करना चाहते थे तो आप इस काम को करो। हमने उनसे कहा कि मैं तो

ब्राह्मण हूं कैसे कर सकता हूं? बचपन में हमने एक डोम को छू दिया था, जिसपर दादी ने हमें गाय का गोबर और मूत्र पिलाकर शुद्धि कराई थी। 100 वर्ष पहले गांधी ने चंपारण से सत्याग्रह की शुरुआत की थी और चंपारण में ही बेतिया नामक जगह से हमने भी स्वच्छता और मैला ढोने की प्रथा खत्म करने की शुरुआत की। हम बेतिया में 3 महीने रहे, उनके साथ खाना खाया, उनसे बात की। इस घटना के बाद हमने तय कर लिया की हम देश से मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करके ही रहेंगे। लेकिन सिर्फ मैला ढोने की प्रथा समाप्त कर देने भर से समस्या का निदान नहीं होने वाला था। इसके लिए हमने टेक्नोलॉजी का अविष्कार किया, जिससे मैला ढोने की जरूरत ही ना पड़े। हमने मानव मल से खाद बनाने, उससे उत्पन्न होने वाली गैस से लैंप जलाने, जेनरेटर चलाने, रसोई


18 - 24 सितंबर 2017

संवाद

डॉ. पाठक के साथ दीप प्रज्ज्वलित करते जगदीश चंद्र

पीएम मोदी पर लिखी पुस्तक ममता मेहरोत्रा को देते डॉ. पाठक

डॉ. पाठक को स्मृति चिन्ह प्रदान करतीं ममता मेहरोत्रा

कॉन्क्लेव में अन्य ​अतिथियों के साथ डॉ. पाठक

डॉ. पाठक से बात करते वरुण गांधी

पंकज त्रिपाठी को स्मृति चिन्ह प्रदान करते डॉ. पाठक

गैस के रूप में इसका इस्तेमाल करने की तकनीक इजाद की है। यदि हम इस टेक्नोलॉजी का अविष्कार नहीं किए होते तो आज भी देश में खुले में शौच जाने और मैला ढोने की प्रथा समाप्त नहीं होती। इसके साथ ही न ही गांधी का सपना सच होता और न ही प्रधानमंत्री जी का भारत को स्वच्छ करने का सपना पूरा हो पाता। यह एक सोच है, विचार है। इसे सभी को अपने अंदर आत्मसात करने की आवश्यकता है। पहले जब मैं किसी के पास जाता था तो लोग कहते थे पाठक जी आप शौचालय की बात करेंगे, उससे पहले आप चाय पी लीजिए। हमने कहा चाय तो आती रहेगी हम बात शुरु करते हैं। तो उन्होंने कहा कि पाठक जी शौचालय की बात पर चर्चा कीजिएगा तो मुंह में गंध नहीं आएगी। इस समय बिहार ही नहीं पूरे विश्व में शौचालय की चर्चा कोई नहीं करता था। ये है कि यदि आप किसी चीज को सोचते हैं ,तो उसे इंप्लीमेंट भी करना चाहिए। हमारी शादी 22 साल की उम्र में हो गई थी और मेरे इस काम को देखकर मेरे ससुर ने हमें डांटा था और बोले की मैं आपका चेहरा नहीं देखना चाहते। हमारे बिहार में बड़ों से ऊंची आवाज में बात करने की प्रथा नहीं है, लेकिन उस समय मैं बड़ी हिम्मत करके उनसे बोल पाया था कि मैं तो अब इतिहास का पन्ना पलटने चला हूं, या तो पलट दूंगा या खो जाऊंगा। हमें बहुत खुशी होती है कि देश के प्रधानमंत्री स्वच्छता और शौचालय की बात करते ही नहीं, बल्कि उसके लिए अभियान भी चलाया है। गांधी के बाद सभी राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सिर्फ इस पर चर्चा की

‘यदि हमने इस टेक्नोलॉजी का अविष्कार नहीं किया होते तो आज भी देश में खुले में शौच जाने और मैला ढोने की प्रथा समाप्त नहीं होती। इसके साथ ही न ही गांधी का सपना सच होता और न ही प्रधानमंत्री जी का भारत को स्वच्छ करने का सपना पूरा हो पाता-डॉ. विन्देश्वर पाठक’ है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे जन जन तक पहुंचाने का कार्य किया है। मोदी जी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने शौचालय और स्वच्छता को इतना महत्व दिया है। अब जब स्वच्छ भारत की चर्चा हो ही रही है तो हम आपको बताना चाहेंगे कि हमने प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस 17 सिंतबर को एक कार्यक्रम स्वच्छ भारत, स्वस्थ्य भारत, हरित भारत का आयोजन किया है। आंकड़ो के मुताबिक अभी कई राज्य खुले में शौच मुक्त होने में बहुत पीछे हैं। इन राज्यों में बदलाव के लिए आप इस पर क्या सुझाव देना चाहेंगे? इस क्षेत्र में जो कार्य राज्य या केंद्र सरकार कार्य कर रही है, वह अच्छा कार्य कर रही है, लेकिन इसके अलावा हमारे पास 6 लाख 46 हजार गांव ऐसे हैं जहां खुले में शौच जाने के लिए लोग मजबूर हैं और इसे खत्म करना है तो हमारे पास एक ही रास्ता है। इसके लिए हम 18 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी से मिले और उनसे कहा कि यदि बचे हुए समय में कार्य पूरा करना है तो हमें प्रत्येक गांव में एक व्यक्ति

को शौचालय बनाने की ट्रेनिंग देनी होगी, जिससे वह अपने गांव के प्रत्येक घरों में जाकर लोगों को शौचालय और स्वच्छता के महत्व को बताएगा, उन्हें मोटिवेट करेगा। इसके साथ ही उन्हें शौचालय बनाने की ट्रेनिंग भी देगा और गांव में शौचालय बनवाने का कार्य करेगा। यदि एक व्यक्ति एक महीने में 20 शौचालय बनाता हैं तो 12 महीने में वह 240 शौचालय बनाएगा। 240 को 6 लाख 46 हजार से गुणा किजिएगा तो वह 15 करोड़ के लगभग पहुंच जाएगा और हमें 7-8 करोड़ शौचालय ही बनवाने हैं। इस तरहा हम इस कार्य को एक साल में ही पूर कर सकते हैं। इसके अलावा यह भी है कि 12 हजार में अच्छा शौचालय नहीं बन सकता है। इसका उपाय यह है कि यदि बैंक से लोन मिल जाए तो मकान मालिक अच्छा शौचालय बनवा लेगा। इसके साथ ही लोगों को अपनी जिम्मेदारी के साथ कार्य को पूरा करना चाहिए, जिस तरह हम लोग कार्य करवाते हैं। हमारे यहां क्या है कि सरकारी अधिकारी आता है, काम करवाता है और चला जाता है, लेकिन कार्य पूरा हुआ उसमें क्या कमी रह गई इसकी जवाबदारी किसी की भी नहीं होती, चाहे वह अधिकारी हो

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या राजनेता। एनजीओ कुछ अच्छे भी हैं, बुरे भी हैं। हमारा कहना है कि जो अच्छे एनजीओ हैं उसे सेलेक्ट करके उन्हें ये काम सौंपिए। इसके लिए उन्हें 15 प्रतिशत पैसा, 10 प्रतिशत पैसा गांव के उस व्यक्ति को दीजिए, जो कार्य करेगा और 5 प्रतिशत पैसा उसको दीजिए, जो को-ऑर्डिनेट करेगा। ऐसा करने से पूरे भारत को 2019 तक स्वच्छ और खुले में शौच मुक्त बनाया जा सकता है। अभी प्रधानमंत्री के सपने को पूरा करने में एक साल बचा हुआ है, यदि सभी मिलकर ईमानदारी से, गुणवत्ता युक्त कार्य करेंगे तो हम इस लक्ष्य को जरूर पूरा कर लेंगे। हमने बिहार के कई क्षेत्रों में शौचालय बनवाएं हैं और आगे बनवाने का कार्य कर भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज के प्रबुद्धजनों को एक साथ लेकर चला जाए तो वह इस काम को अच्छे से संभाल लेंगे और वह इस कार्य की जवाबदेही भी लेंगे। इसके साथ ही डॉ. पाठक ने कहा कि जो बिहार के लड़के हैं, वह सुलभ की टेक्नोलॉजी को सीख कर अपने अपने गांव में इसके माध्यम से शौचालय बनवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुलभ की टेक्नोलॉजी पेटेंट फ्री है। उन्होंने कहा कि इन सब काम के लिए रोजगार बहुत है, लेकिन कोई इसे करना ही नहीं चाहता है। हम चाहते हैं कि बिहार के युवा इसके लिए आगे आएं और अपने अपने गांवों को स्वच्छ व स्वस्थ्य बनाने में हम सब का सहयोग करें। हमने जितने भी कार्य किए हैं, उससे आप लोग सीखें फिर उसे अपने गांव में इजाद करें। जो भी इसके लिए हिम्मत करेगा उसका हम पूरा सहयोग करेंगे।


08 सुलभ

18 - 24 सितंबर 2017

सुलभ आकर हुआ मेरा जीवन सार्थक-राजू श्रीवास्तव सुलभ भ्रमण

विख्यात हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव सुलभ ग्राम पधारे तो डॉ. पाठक के व्यक्तित्व और सामाजिक सुधारों के मुरीद बन गए

प्रियंका तिवारी

हते हैं हंसना सेहत के लिए लाभदायक होता है और किसी रोते हुए को हंसाने की कला हर किसी में नहीं होती, लेकिन इसी प्रतिभा के धनी राजू श्रीवास्तव हैं। उन्होंने न केवल कॉमेडी के जरिए लोगों का मनोरंजन किया, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के ब्रांड एंबेस्डर भी हैं। बता दें कि राजू श्रीवास्तव सुलभ ग्राम के दर्शन करने आए, इस दौरान उन्होंने सुलभ वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से लेकर कर सुलभ स्कूल

के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व स्कैवेंजर्स बहनों, वृंदावन की विधवा माताओं और सुलभ परिवार के लोगों से मुलाकात की। सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक ने राजू श्रीवास्तव और उनके साथ आए अतिथियों का शॉल, पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह प्रदान कर स्वागत किया। इस दौरान डॉ पाठक ने राजू श्रीवास्तव को 2 लाख रुपए का चेक दिया, जिसे उन्होंने सुलभ स्कूल को दान कर दिया। इस मौके पर डॉ पाठक ने कहा कि राजू जी ने सुलभ ग्राम आकर हम लोगों का हृदय जीत लिया है। हम सब आपके बहुत आभारी हैं कि

डॉ. पाठक ने देश के लिए उत्कृष्ठ कार्य किया है, जिसकी जितनी तारीफ की जाए कम है। डॉ. पाठक देश के लिए आईडियल हैं, इनसे लोगों को सीखना चाहिए

आप यहां आए और हमारे अविष्कारों को गंभीरता से देखा। सुलभ ग्राम पधारे राजू श्रीवास्तव ने कहा कि अब तक की जीवन यात्रा में यहां आने के बाद मुझे लगता है कि मेरा जीवन सार्थक हुआ है। हमें यहां बहुत कुछ सीखने को मिला। मैं इसे लोगों तक पहुंचाने का काम करूंगा। मैं बॉलीवुड और अपने कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को बताऊंगा कि देश में एक ऐसी भी जगह है, जहां गांधी के दर्शन होते हैं, जहां के लोग समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्वों के लिए समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. पाठक ने देश के लिए उत्कृष्ठ कार्य किया है, जिसकी जितनी तारीफ की जाए कम है। डॉ. पाठक देश के लिए आईडियल हैं, इनसे लोगों को सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉ. पाठक बहुत ही गुणी और विद्वान हैं, इनसे हमें सीखने की जरूरत है। हमने यहां के बच्चों से

एक नजर

डॉ. पाठक ने किए हैं कई महान कार्य सुलभ ग्राम में गांधी जी के दर्शन होते हैं

समाज के अंतिम व्यक्ति की मदद करता है सुलभ

मुलाकात की, जो बहुत तेज हैं। आज के बच्चे बड़ों से ज्यादा जागरूक हो गए हैं, अब हमें इनसे सीखने की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी हम सब की है, इसीलिए हम सब को मिलकर अपने आसपास,


18 - 24 सितंबर 2017

मोहल्ले, गलियों को स्वच्छ रखने के लिए पहल करने की आवश्यकता है। ये तभी संभव है जब हम सब अपनी जिम्मेदारी को समझेंगे और उसे ईमानदारी से निभाएंगे तो भारत को स्वच्छ और स्वस्थ्य होने से कोई रोक नहीं सकता हैं। उन्होंने कहा कि मैं आज

यहां से एक सोच लेकर मुंबई जा रहा हूं, जिसका पूरे सुलभ ग्राम में बड़ी ही गहनता से पालन होता है। इसके साथ ही उन्होंने देश के तमाम ज्वलंत मुद्दों और क्रिकेट पर अपनी कॉमेडी के माध्यम से बच्चों और सभागार में उपस्थित लोगों का जमकर मनोरंजन

किया। डॉ पाठक ने बताया कि सुलभ के माध्यम से हमने गांधी के सपने को पूरा करने का प्रयास किया है। गांधी जी कहते थे कि हमें आजादी बाद में चाहिए लेकिन स्वच्छ भारत पहले चाहिए। महात्मा गांधी की बात को पीएम मोदी ने साकार किया है। वह देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने स्वच्छता और शौचालय की बात कही है। उन्होंने ये बातें सिर्फ देश में ही नहीं विदेशों में भी कही हैं। कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव लोगों के बीच में रहते हैं। राजू जी द्वारा कहीं बातों का लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसीलिए पीएम मोदी ने राजू श्रीवास्तव को स्वच्छ भारत का ब्रांड एम्बेस्डर बनाया है। आपने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत

सुलभ

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मेहनत की है। इसके लिए हम आपको बहुत बहुत बधाई देते हैं। सुलभ समाज के सबसे निचले पायदान पर रहने वाले लोगों की मदद करने का काम करता है। अगर सुलभ ने यह पहल न की होती तो आज भी देश से मैला ढोने की प्रथा खत्म नहीं होती। आज सुलभ की पहल ने ही उन्हें स्वावलंबी बना दिया है। वह पापड़, अचार, मालाएं बनाती हैं और बेचती हैं। मंदिरों में पूजा करती हैं, सबके साथ खाना खाती हैं। गांधी जी का हमेशा से यही सपना था कि देश से छूआछूत की समस्या को मिटाया जाए। इसके लिए सुलभ ने सकारात्मक पहल की है और समाज के लोगों ने हमारे इस पहल को स्वीकार भी किया है।


10 आयोजन

18 - 24 सितंबर 2017

स्वच्छाथॉन को मिली अंतरराष्ट्रीय कामयाबी स्वच्छता पहल

स्वच्छता के प्रसार की चुनौतियों के समाधान के लिए पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा आयोजित स्वच्छाथॉन 1.0 को मिली भारी सफलता

एक नजर

पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने पहली बार आयोजित किया हैकेथॉन स्वच्छाथॉन में तीन हजार से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया प्रतिभागियों ने छह श्रेणियों के तहत अपनी प्रस्तुति दी

का मूल्यांकन मंत्रालय द्वारा तैयार रूपरेखा के आधार पर किया गया जिसमें समाधान की मौलिकता, उपयोगिता, लागत, प्रभावी उपयोगिता, आसान रख-रखाव, गुणवत्ता और पर्यावरण अनुकूलता को ध्यान में रखा गया।

पहला पुरस्कार तीन लाख रुपए का

एसएसबी ब्यूरो

क तरफ जहां स्वच्छता के मुद्दे पर भारत सरकार का फोकस लगातार बना हुआ है, वहीं स्वच्छता से जुड़े अभियानों और कार्यक्रमों को अपेक्षा से ज्यादा सफलता मिल रही है। ऐसा ही एक कार्यक्रम नई दिल्ली में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया। इस आयोजन को स्वच्छाथॉन 1.0 नाम दिया गया। कार्यक्रम का मकसद देश के विभिन्न हिस्सों में स्वच्छता और सफाई की चुनौतियों के समाधान के वैकल्पिक तरीकों और तकनीक की खोज करना था। मंत्रालय ने चुनौतियों के समाधान के लिए स्कूलों, कॉलेजों, संस्थाओं, स्टार्ट-अप और अन्य समूहों को मौजूदा और नए समाधानों के साथ आमंत्रित किया। नवोन्मेषियों के आगे छह श्रेणियों के तहत अपनी प्रस्तुति देने के लिए कहा गया था। ये श्रेणियां थीं1. शौचालयों के उपयोग की निगरानी करना 2. व्यवहार में तेजी से बदलाव लाना 3. दुर्गम क्षेत्रों में शौचालय प्रौद्योगिकी लागू करना 4. स्कूलों के शौचालयों के रखरखाव और संचालन

के लिए कार्यकारी समाधान करना 5. सैनिटेरी कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए तकनीकी समाधान करना 6. मलमूत्र पदार्थों के शीघ्र अपघटन का समाधान करना

तकनीकी समाधान की तथा 484 दुर्गम क्षेत्रों में शौचालय प्रौद्योगिकी की थी। स्वच्छाथॉन को मिली कामयाबी का इससे भी अंदाजा लगया जा सकता है कि इसके लिए अमेरिका और पेरू जैसे देशों से भी प्रविशिष्टियां आईं।

यह हैकेथॉन सभी के लिए खुला था और इसे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक समर्थन भी मिला। इसमें कुल 3,053 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जिनमें 633 प्रविष्टियां तेजी से व्यवहार बदलने की, 229 मलमूत्र पदार्थों के शीघ्र अपघटन की, 750 शौचालय उपयोग की निगरानी की, 552 स्कूलों शौचालयों के रखरखाव और संचालन की और 405 सैनिटेरी कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए

उम्मीदवारों ने स्वच्छता क्षेत्र के श्रेष्ठ समर्थकों एवं आमंत्रित विशेषज्ञों की गठित ज्यूरी के समक्ष अपने प्रोटोटाइप/रणनीतियों का एक संक्षिप्त प्रदर्शन दिया। अंतिम निर्णय के लिए गठित ग्रैंड ज्यूरी में सुलभ प्रणेता विन्देश्वर पाठक, इंडिया सैनिटेशन कोलेशन की अध्यक्ष नैना लाल किदवई के साथ सचिव पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेशवरन अय्यर शामिल थे। प्रविष्टियों

विदेशों से भी प्रविष्टियां

ग्रैंड ज्यूरी में डॉ. पाठक

स्वच्छाथॉन के विजेताओं के अंतिम निर्णय के लिए गठित ग्रैंड ज्यूरी में सुलभ प्रणेता विन्देश्वर पाठक, इंडिया सैनिटेशन कोलेशन की अध्यक्ष नैना लाल किदवई के साथ सचिव पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेशवरन अय्यर शामिल थे

स्वच्छाथॉन के विजेताओं को पेयजल और स्वच्छता राज्यमंत्री एस.एस. अहलूवालिया और रमेश जिगािजनागी द्वारा सम्मानित किया गया। हर श्रेणी में प्रथम, द्वितीय और तृतीय के तौर पर कुल तीन पुरस्कार दिए गए। प्रथम पुरस्कार के तौर पर सभी विजेताओं को तीन लाख रुपए दिए गए। इसी तरह द्वितीय पुरस्कार के लिए डेढ़ लाख रुपए और तृतीय पुरस्कार के लिए 50 हजार रुपए विजेताओं को दिए गए। जो लोग सम्मानित किए गए उसमें छात्र, स्वयंसेवी तकनीकी संस्थाएं और उत्साही नवोन्मेषी शामिल थे।

नई अवधारणा

इस अवसर पर पेयजल और स्वच्छता राज्यमंत्री अहलूवालिया ने युवा नवोन्मेषकों द्वारा स्वच्छाथॉन में की गई उनकी भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि स्वच्छाथॉन मंत्रालय द्वारा अपनाई गई एक नई अवधारणा थी, क्योंकि सरकारी कार्यक्रमों को प्रौद्योगिकी के साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है। अहलूवालिया ने स्वच्छ भारत अभियान द्वारा अब तक की गई प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि स्वच्छाथॉन जैसे कार्यक्रमों में नवोन्मेषकों और युवाओं की बढ़ती भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

स्वच्छाथॉन पर ई-बुक

अहलूवालिया ने अपने मंत्रालय के अधिकारियों को


18 - 24 सितंबर 2017

सभा को संबोधित करते पेयजल और स्वच्छता राज्यमंत्री एस.एस. अहलुवालिया

स्वच्छाथॉन-1.0 के विजेताओं को पुरस्कार

आयोजन

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स्वच्छाथॉन-1.0 के विजेताओं को पुरस्कार

स्वच्छाथॉन 1.0 के प्रतिभागियों के साथ एस.एस. अहलूवालिया, रमेश जिगा​िजनागी, परमेशवरन अय्यर, नैना लाल किदवई और डॉ. विन्देश्वर पाठक

पेयजल एवं स्वच्छता सचिव परमेशवरन अय्यर सलाह दी कि वे स्वच्छाथॉन के लिए जितनी भी स्वीकृत प्रविष्टियां हैं, उसे एक ई-बुक के तौर पर सामने लाएं, ताकि इससे इस क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को मदद औऱ प्रेरणा मिले। यही नहीं, अगर यह ई-बुक तैयार होता है तो आगे स्वच्छाथॉन-2 आयोजित करने में भी पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय को अनुभव के स्तर पर मदद मिलेगी। रमेश जिगा​िजनागी ने देश में स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाने के लिए नई विचारधाराओं की आवश्यकताओं पर जोर दिया और हैकेथॉन में नए विचारों का योगदान देने वाले सभी प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने यह आशा व्यक्त की कि स्वच्छाथॉन में प्राप्त विचारों से इस नागरिक आंदोलन में नई विचारधारा लागू करने और इसे और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

पेयजल और स्वच्छता राज्यमंत्री अहलूवालिया ने स्वच्छ भारत अभियान द्वारा अब तक की गई प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि स्वच्छाथॉन जैसे कार्यक्रमों में नवोन्मेषकों और युवाओं की बढ़ती भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी स्वच्छता का बढ़ा प्रतिशत

इस मौके पर पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेशवरन अय्यर ने स्वच्छ भारत अभियान द्वारा अब तक की गई प्रगति की चर्चा की। उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत अभियान के आरंभ में स्वच्छता का प्रतिशत 39 फीसदी था, जो बढ़कर अब 67 फीसदी हो गया है, जो बहुत उत्साहजनक है। अय्यर ने जानकारी दी कि 2.35 लाख गांवों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया है और यह प्रगति स्वतंत्र रूप से तीसरे पक्ष द्वारा सत्यापित भी की गई है।

माशेलकर समिति

पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के सचिव ने कहा कि स्वच्छाथॉन में प्रस्तुत विचार देश के कुछ हिस्सों में व्यावाहरिक रूप से आने वाली कुछ विशेष चुनौतियों का सामना करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने स्वच्छाथॉन में भाग लेने वाले नवोन्मेषकों से अनुरोध किया कि वे मंत्रालय की माशेलकर समिति के समक्ष अपने विचार रखें, ताकि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा सके। अय्यर ने सभी भागीदारों को यह स्मरण कराते हुए प्रेरित किया कि स्वच्छ भारत अभियान का प्रतीक-चिन्ह अपने में एक जन-

पेयजल और स्वच्छता राज्यमंत्री अहलूवालिया सामूहिक स्रोत विचार था, यह किसी एक व्यक्ति के विचार से अधिक महत्वपूर्ण था, जो देश को आगे ले जा सकता है।

कार्यक्रम के सहयोगी

स्वच्छाथॉन के विजेताओं को ज्यूरी द्वारा समुचित मूल्यांकन के आधार पर प्रत्येक श्रेणी में पुरस्कृत किया गया। गई। स्वच्छाथॉन के पुरस्कार व समापन समारोह को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के सहयोग से आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के सहयोगियों में केपीएमजी, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, वाटर एड, रोटरी इंडिया लिटरेसी मिशन, एचएमईएल, एक्सचेंर और डिटॉल बनेगा स्वच्छ इंडिया शामिल थे।


12 सम्मेलन

18 - 24 सितंबर 2017

‘नारी एकरूपता की खोज’

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मॉरिशस में त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

मॉरिशस में त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें गोवा की राज्यपाल डॉ. मृदुला सिन्हा और सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक की प्रेरणास्पद उपस्थिति सबसे महत्वपूर्ण रही

डॉ. अशोक कुमार ज्योति

त समुंदर पार मॉरिशस की धरती पर फीनिक्स में लेखिका संघ, नई दिल्ली, भारत भारतीय उच्चायोग, मॉरिशस, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद्, नई दिल्ली, महात्मा गांधी संस्थान, मॉरिशस, हिंदी स्पीकिंग यूनियन, मॉरिशस और आर्य सभा, मॉरिशस के संयुक्त तत्त्वावधान में एक त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 1 से 4 सितंबर, 2017 तक किया गया। 1 सितंबर, 2017 को समारोह का उद्घाटन इंदिरा गांधी भारतीय सांस्कृतिक संबंध केंद्र, फीनिक्स, मॉरिशस में किया गया। समारोह की अध्यक्षता गोवा की राज्यपाल माननीया डॉ. मृदुला सिन्हा ने की। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थीं मॉरिशस- की शिक्षा एवं मानव संसाधन, तृतीयक शिक्षा तथा वैज्ञानिक अनुसंधान-मंत्री लीला देवी दुकन-लछुमन, विशिष्ट वक्ता थे मॉरिशस में भारतीय उच्चायोग के उच्चायुक्त अभय ठाकुर और विशिष्ट अतिथि थे विश्व-प्रसिद्ध समाजसेवी एवं समाजशास्त्री सुलभ-संस्थापक पद्मभूषण डॉ. विन्देश्वर पाठक। इस अवसर पर कुमकुम झा द्वारा माननीया राज्यपाल के हिंदी-उपन्यास ‘सीता पुनि बोली’ के मैथिली अनुवाद, डॉ. विमलेश कांति वर्मा की पुस्तक ‘मॉरिशस का सृजनात्मक हिंदी साहित्य और प्रवासी भारतीय हिंदी साहित्य’, डॉ. उदय नारायण गंगू की पुस्तक ‘मॉरिशस की संस्कृति और साहित्य’ और लेखिका संघ की स्मारिका का लोकार्पण किया गया। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में गोवा की राज्यपाल ने कहा कि मॉरिशस और भारत की नारियों में प्रायः सबकुछ एकरूप-सा है। चिंतन, मनन, पहनावा, खान-पान इत्यादि में भारत और मॉरिशस की नारियों में एकरूपता है। डॉ. मृदुला सिन्हा ने कहा कि यह समझने की बात है कि जब महिलाएं पर्दा-प्रथा में आ गईं, शिक्षा में पिछड़ने लगीं, विकास में पिछड़ गईं तो कई पुरुषों ने आगे आकर नारियों के उत्थान का कार्य किया, जिनमें महात्मा ज्योतिबा फुले, स्वामी विवेकानंद, राजा राममोहन राय इत्यादि प्रमुख हुए। इसीलिए पुरुष और नारी एक-दूसरे के बिलकुल विपरीत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व की महिलाओं को सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से और पारिवारिक स्तर पर एकरूपता प्रदान करने की आवश्यकता है। उन्होंने गोवा में सभी धर्मावलंबियों की महिलाओं के अध्ययन का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां की सभी महिलाएं समानता और विकास की दृष्टि से समभाव रखती हैं। उन्होंने कहा कि गोवा की नागरिक संहिता में सभी महिलाओं को समान अधिकार दिए

डॉ. मृदुला सिन्हा के हिंदी उपन्यास ‘सीता पुनि बोली’ का श्रीमती कुमकुम झा द्वारा मैथिली अनुवाद ‘सीता पुनि बाजलि’ का लोकार्पण के साथ डॉ. विन्देश्वर पाठक गए हैं और मुस्लिम पुरुषों को तीन तलाक देने का अधिकार बहुत पहले से नहीं है। आज महिलाएं जल, थल और नभ पर दीख रही हैं। इसी तरह हर क्षेत्रा में एकरूपता होनी चाहिए। राज्यपाल डॉ. मृदुला सिन्हा ने विश्व की महिलाओं का आह्वान करते हुए कहा कि ‘कर्तव्य की लागत लगाकर अधिकार अर्जित करो।’ सुलभ-स्वच्छता एवं सामाजिक सुधार-आंदोलन के संस्थापक माननीय डॉ. विन्देश्वर पाठक जी ने ‘नारी उत्थान और प्रयोग’ विषय पर अपने उद्गार प्रस्तुत किए। डॉ. पाठक ने कहा कि ‘हमने सुलभस्वच्छता-आंदोलन के माध्यम से नारी की समता और उत्थान के लिए बहुत सारे कार्य किए हैं।’ उन्होंने नारी के सभी रूपों की विशेषताओं की चर्चा करते हुए उसके माता-रूप का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी भी वर्ग अथवा समाज को ऊपर उठाने के लिए यह आवश्यक है कि वहां स्त्री-पुरुषों को पूर्ण शिक्षा दी जाए। शिक्षा ही नारियों को सम्मानजनक स्थान देगी। शिक्षा ही उन्हें आर्थिक समानता की ओर ले जाएगी और इससे संपूर्ण विश्व की नारियों को एक मंच पर आकर विचार-विमर्श

का अवसर मिलेगा, जैसी पहल अभी लेखिका संघ, नई दिल्ली द्वारा की गई है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर की नारियां अब स्वावलंबी होकर अनेक क्षेत्रों में पुरुषों से भी आगे निकल गई हैं। इस उद्घाटन-सत्र के प्रारंभ में मॉरिशस में भारतीय उच्चायोग की द्वितीय सचिव डॉ. नूतन पांडेय ने सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों का स्वागत किया। लेखिका संघ की अध्यक्ष डॉ. मधु पंत ने संस्था के इतिहास और उसकी गतिविधियों के बारे में सभा को जानकारी दी और महिला-लेखन की आवश्यकता पर बल दिया। पहले दिन के दूसरे सत्र में ‘साहित्य और नारी’ विषयक परिचर्चा में डॉ. मधु पंत ने ‘बाल-साहित्य: नारी सशक्तीकरण का आधार’, महात्मा गांधी संस्थान, मॉरिशस की प्राध्यापिका डॉ. अलका धनपत ने ‘विदेशों में नारी साहित्य’, दिल्ली विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोपफेसर डॉ. श्रीमती सुशील गुप्त ने ‘नारी अस्मिता: एक चुनौती’, विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरिशस की उपमहासचिव डॉ. माधुरी रामधारी ने ‘मॉरिशसीय साहित्य में नारी रचनाकार’, सिंगापुर से पधारीं सुनंदा ने ‘नारीप्रेरणा द्वारा नारी-सशक्तीकरण’ और रिंटू चक्रवर्ती

‘हमने सुलभ-स्वच्छता-आंदोलन के माध्यम से नारी की समता और उत्थान के लिए बहुत सारे कार्य किए हैं’- डॉ. विन्देश्वर पाठक

ने ‘सामाजिक उत्थान में महिला साहित्यकारों का चिंतन’ विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस सत्र की अध्यक्षता महात्मा गांधी संस्थान, मॉरिशस की महानिदेशिका सूर्याकांति गयान ने की और संचालन किया डॉ. रश्मि शर्मा ने। तीसरे सत्र ‘प्रवास और भारतीय अस्मिता’ में आर्य सभा, मॉरिशस के प्रधान डॉ. उदय नारायण गंगू ने प्रारंभिक वक्तव्य दिया। भारतीय उच्चायोग, मॉरिशस की द्वितीय सचिव और लेखिका डॉ. नूतन पांडेय ने ‘प्रवासी भारतीयों द्वारा अस्मिता की खोज में किए जा रहे साहित्यिक प्रयास’, मनोवैज्ञानिक लेखिका धीरा वर्मा ने ‘प्रवासी पीड़ा और अंतर्द्वंद्व’ और महात्मा गांधी संस्थान, मॉरिशस की प्रवक्ता संध्या अन्चाराज ने ‘स्वातंत्रयोत्तर प्रवासी कहानीसाहित्य में नारी-अस्मिता और उसका बदलता स्वरूप’ विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विमलेश कांति वर्मा ने की और संचालन किया क्षिप्रा भारती ने। 2 सितंबर, 2017 के पहले सत्र में ‘नारीसशक्तीकरण और नारी-चेतना’ विषय पर प्रारंभिक वक्तव्य दिया हिंदी स्पीकिंग यूनियन, मॉरिशस के अध्यक्ष डॉ. राज नारायण गति ने। इस सत्र में दिल्ली की वरिष्ठ लेखिका डॉ. मंजू गुप्ता ने ‘विश्व में नारीचेतना के स्वर’, महात्मा गांधी संस्थान, मॉरिशस की


18 - 24 सितंबर 2017 आई.सी.सी.आर. चेयर, भारतीय दर्शन, प्रो. आभा सिंह ने ‘नारी-सशक्तीकरण: दशा और दिशा’, रत्ना सुखलाल ने ‘मॉरिशसीय कथा-साहित्य में भारतवंशी श्रमिक नारी की यात्रा’, मैथिली-लेखिका कुमकुम झा ने ‘मॉरिशसीय कवयित्रियों में साहित्य और संगीत का अंतस्संबंध’, बाल-साहित्यकार क्षिप्रा भारती ने ‘नारी-सशक्तीकरण: एक अध्ययन’, महात्मा गांधी संस्थान, मॉरिशस की प्रवक्ता अंजलि चिंतामणि ने ‘मन्नू भंडारी के कथा-साहित्य में अभिव्यक्त नारीचिंतन’ विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. मीरा सीकरी ने की और संचालन किया डॉ. नमिता पांडेय ने। दूसरे दिन के दूसरे सत्र में लेखक-लेखिकाओं ने ‘साहित्य की समृद्धि में लोक-संस्कृति की भूमिका का मूल्यांकन’ विषयक परिचर्चा में भाग लिया। इसमें प्रारंभिक वक्तव्य दिया महात्मा गांधी संस्थान, मॉरिशस के आई.सी.सी.आर. चेयर, हिंदी, डॉ. उमेश कुमार सिंह ने। इसमें दिल्ली की वरिष्ठ लेखिका डॉ. सरोज सक्सेना ने ‘साहित्य की समृद्धि में लोक-साहित्य की भूमिका’, हिंदी स्पीकिंग यूनियन की सदस्य और महात्मा गांधी संस्थान, मॉरिशस की सेवानिवृत्त प्रवक्ता डॉ. मालती ऑकल ने ‘मॉरिशसीय साहित्य में अभिव्यक्त लोक-संस्कृति’ और नई दिल्ली से प्रकाशित प्रसिद्ध सामाजिक-साहित्यिक-सांस्कृतिक मासिक पत्रिका ‘पांचवां स्तंभ’ की संपादक संगीता सिन्हा ने ‘लोक-

‘पूरे विश्व की महिलाओं को सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से और पारिवारिक स्तर पर एकरूपता प्रदान करने की आवश्यकता है’-डॉ. मृदुला सिन्हा साहित्य: कितना सार्थक, कितना सामयिक’ विषयों पर अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। इस सत्र की अध्यक्षता मॉरिशस भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन की अध्यक्ष डॉ. सरिता बुद्धू ने की और संचालन किया निशा भार्गव ने। तृतीय सत्र में गोवा की महामहिम राज्यपाल डॉ. मृदुला सिन्हा की अध्यक्षता एवं सुलभ-संस्थापक पद्मभूषण डॉ. विन्देश्वर पाठक के सान्निध्य में ‘नारी-चेतना के उभरते स्वर’ शीर्षक कविसम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय कवयित्रियां थीं श्रीमती आशा रानी, सुनंदा वर्मा, डॉ. मधु पंत, नीलम वर्मा, निशा भार्गव, उमा मालवीय, डॉ. सरोजनी प्रीतम, डॉ. रश्मि शर्मा, ललिता पांडेय, डॉ. निर्मला देवी तथा मॉरिशस की कवयित्रियां थीं कल्पना लालजी, मधु गजाधर, सुमति बुधन, पंडिता जहाजिया इत्यादि। 3 सितंबर, 2017 को सभी लेखिकाओं ने मॉरिशस का भ्रमण किया। 4 सितंबर, 2017 को कार्यक्रम के समापन-सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की समीक्षा प्रस्तुत की गई और ‘नारी एकरूपता की खोज’ में लेखिका संघ की वैश्विक भूमिका पर ध्यानाकर्षण किया गया।

हरियाणा

प्रदेश

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कृषि

पॉलि हाउस से नई हरित क्रांति इजरायल की तकनीक का हरियाणा की खेती और चेन्नई के जल शोधन में इस्तेमाल भारत में बिना शोर-शराबे के क्रांति ला रहा है

चा

र साल पहले हरियाणा के कैथल जिले के 42 वर्षीय किसान अवतार सिंह गुड़गांव से गुजर रहे थे तो उन्होंने पहली बार एक खेत में काफी ज्यादा पॉलि हाउस (उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पादों की रक्षा के लिए पॉलीथीन से बना घर) देखा। कुछ रिश्तेदारों से पूछताछ करने के बाद वह करनाल में 2010-11 में स्थापित इंडो-इजरायल परियोजना सेंटर एक्सिलेंस फॉर वेजिटेबल पहुंच गए। सिंह को वहां इजरायल की कृषि तकनीक, कम लागत वाली ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था और रोगमुक्त पौध बनाने के बारे में जानकारी मिली। उन्हें बिना सीजन वाली सब्जी उगाने का तीन दिन का प्रशिक्षण मिला। सिंह ने कहा, प्रशिक्षण के बाद हमने अपने खेत में पॉलि हाउस स्थापित किया और आज खीरा और शिमला मिर्च की पैदावार खुले खेत के मुकाबले चार गुना बढ़ गई है। साथ ही आय में भी चार गुने का इजाफा हुआ। करनाल में सब्जियों के लिए सेंटर फॉर एक्सिलेंस भारत व इजरायल के बीच 2008-10 के एक्शन प्लान का हिस्सा है। यह हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात में सेंटर फॉर एक्सिलेंस की स्थापना पर ध्यान केंद्रित करता है। साल 2013 मंट स्थानीय अनुकूलता वाले फलों के लिए भारत-इजरायल सेंटर फॉर एक्सिलेंस सिरसा जिले में खोला गया। इजरायल ने ड्रिप सिंचाई की

तकनीक से वहां की खेती में बदलाव कर दिया। करनाल में बागवानी के उपनिदेशक दीपक कुमार दत्तरवल ने कहा, ‘2010-11 में केंद्र खोले जाने के बाद उन्होंने 15,000 किसानों को प्रशिक्षण दिया है।’ उन्होंने आगे बताया, ‘किसान बागवानी की ओर बढ़ रहे हैं, क्योंकि पारंपरिक फसलों, मसलन गेहूं व धान के मुकाबले इसमें ज्यादा लाभ है। अन्य कारण मिट्टी का क्षरण, जमीन के आकार में सिकुड़न और भूजल का गिरता स्तर है।’ हरियाणा सरकार के आंकड़ों से पता चलता है कि कुल 44.23 लाख हेक्टेयर में से करीब 50 फीसदी क्षेत्र मिट्टी क्षरण, लवणता और जलजमाव आदि से समस्याग्रस्त है। साथ ही जरूरत से ज्यादा पानी के दोहन के चलते कुल 22 जिले में से 10 को पहले से ही डार्क जोन में रख दिया गया है। वैसे इजरायल की तकनीक के फायदे और बढ़ते लाभ के बावजूद हरियाणा में बागवानी में तेज रफ्तार से इजाफा नहीं हो रहा है। किसानों व विशेषज्ञों ने कहा कि यह मुख्य रूप से उच्च निवेश और इससे जुड़े जोखिम के चलते है। एक एकड़ में पॉलि हाउस स्थापित करने की लागत करीब 30 लाख रुपए है, जिसमें से 65 फीसदी हरियाणा सरकार से सब्सिडी मिलती है। सिंह ने कहा, अभी भी किसानों को 10-12 लाख का इंतजाम खुद करना होता है। किसान क्रेडिट कार्ड की उधारी सीमा 3 लाख रुपए तक है। ऐसे

करनाल से 2300 किलोमीटर दूर चेन्नई में भी इजरायल की तकनीक वहां के लोगों को राहत पहुंचा रही है। ईस्ट कोस्ट रोड पर 20 से ज्यादा एकड़ में फैले नीमली डीसैलिनेशन प्लांट चेन्नई में पेय जल का प्रमुख स्रोत बन गया है

एक नजर

करनाल में सब्जियों के लिए सेंटर फॉर एक्सिलेंस काम कर रहा है यह सेंटर भारत-इजरायल के एक्शन प्लान का हिस्सा है

पॉलि हाउस के लिए किसानों को 65 फीसदी सब्सिडी मिलती है

में किसानों को या तो साहूकारों या बैंक पर निर्भर होना पड़ता है। साथ ही इससे जोखिम भी जुड़ा हुआ है। अगर फसल नाकाम होता है तो उन्हें भारी ब्याज लागत और उच्च इनपुट लागत का भार सहना होता है। 50 फीसदी किसानों के साथ ऐसा हुआ है, जिन्होंने बिना प्रशिक्षण के इस तकनीक पर हाथ आजमाने की कोशिश की। हर तीन साल पर पॉलीथीन बदलने की लागत 3 लाख रुपए बैठती है। हरियाणा सरकार एक किसान को सिर्फ एक एकड़ जमीन पर ही सब्सिडी मुहैया कराती है। करनाल से 2300 किलोमीटर दूर चेन्नई में भी इजरायल की यह तकनीक वहां के वाशिंदों को राहत पहुंचा रहा है। ईस्ट कोस्ट रोड पर 20 से ज्यादा एकड़ में फैले नीमली डीसैलिनेशन प्लांट चेन्नई में पेय जल का प्रमुख स्रोत बन गया है। इसका निर्माण इजरायल की आईडीई तकनीक और वीए टेक वाबैग ने किया है और 2013 में परिचालन शुरू होने के बाद से वह रोजाना 10 करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति कर रही है। यह संयंत्र समुद्री जल को पेय जल में बदलती है और इसकी आपूर्ति चेन्नई के दक्षिणी उपनगरीय इलाकों में 10 लाख लोगों को करती है।


14 संबोधन

18 - 24 सितंबर 2017

विवेकानंद के शिकागो संबोधन के 125 वर्ष पूरा होने पर प्रधानमंत्री का उद्बोधन

‘वंदे मातरम’ कहने का हक सफाई करने वालों को

शिकागो धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण के 125 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर की 40 हजार यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के विद्यार्थियों को संबोधित किया चलते नहीं, सफाई करने वाले लोगों के चलते स्वस्थ हैं। डॉक्टर से भी ज्यादा अगर उनके प्रति आदर रहे, तब ‘वंदे मातरम’ कहने का आनंद आता है।’

विवेकानंद नहीं होते तो...

एक नजर

11 सितंबर, 1893 को स्वामी विवेकानंद ने शिकागो धर्म संसद को संबोधित किया था

9/11 की दहशत याद रखने वाली दुनिया को 9/11 के सबक को भुला दिया ‘यंग इंडिया, न्यू इंडिया’ कार्यक्रम के तहत पीएम मोदी का प्रेरक उद्बोधन

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एसएसबी ब्यूरो

मी विवेकानंद ने शिकागो की धर्म संसद में 11 सितंबर, 1893 को अपना ऐतिहासिक भाषण दिया था और पश्चिम की दुनिया काे पूरब की आध्यात्मिक श्रेष्ठता से परिचित कराया था। इस भाषण के 125 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर की 40 हजार यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने इस मौके पर स्वच्छता के संकल्प को भी याद किया और कहा, ‘गंदगी करने वाले से ज्यादा बड़े राष्ट्रभक्त देश को साफ-सुथरा रखने वाले सफाई कर्मचारी हैं।’ ‘यंग इंडिया, न्यू इंडिया’ कार्यक्रम के तहत छात्र-छात्राओं को संबोधित करते पीएम मोदी ने कहा, ‘विवेकानंद जी ने ‘आइडिया’ को ‘आइडियलिज्म’ में कनवर्ट किया। उन्होंने रामकृष्ण मिशन को जन्म दिया, लेकिन विवेकानंद मिशन को जन्म नहीं दिया।

क्या कभी किसी ने सोचा कि किसी लेक्चर के 125 वर्ष मनाए जाएंगे। जब इस भाषण की शताब्दी मनाई गई थी, तब मैं शिकागो में था।’ उन्होंने विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण को मौजूदा दौर के लिए भी प्रेरक और प्रासंगिक बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर उनके एक सदी से पहले दिए सबक को अगर हम याद रखते तो न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के कई ऐसी चुनौतियां नहीं होतीं, जो आज हैं।

‘वंदे मातरम’ कहने का हक

उन्होंने कहा कि, ‘वंदे मातरम सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। हृदय में भारत भक्ति का भाव सहज रूप से जग जाता है। मैं पूरे हिंदुस्तान को पूछ रहा हूं कि क्या हमें ‘वंदे मातरम’ कहने का हक है। मैं जानता हूं

कि मेरी ये बात बहुत लोगों को चोट पहुंचाएगी। 50 बार सोच लीजिए कि क्या हमें ‘वंदे मातरम’ कहने का हक है क्या? हम लोग पान खाकर के उस भारत मां पर पिचकारी मारें और फिर ‘वंदे मातरम’ बोलें। सारा कूड़ा-कचरा भारत मां पर फेंकें और फिर ‘वंदे मातरम’ बोलें। ‘वंदे मातरम’ बोलने का पहला हक सफाई करने वाले सच्चे संतानों का है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि, ‘हम ये जरूर सोचें कि भारत माता ‘सुजलाम सुफलाम’ है। हम सफाई करें या न करें, गंदा करने का हक हमें नहीं है। गंगा के प्रति श्रद्धा हो, गंगा में डुबकी लगाने से पाप धुलते हों, लेकिन उस गंगा को गंदा करने से हम रोक पाते हैं क्या? क्या आज विवेकानंद होते तो इस बात पर हमें डांटते कि नहीं डांटते। हम अस्पतालों और अच्छे डॉक्टरों के

‘हम अस्पतालों और अच्छे डॉक्टरों के चलते नहीं, सफाई करने वाले लोगों के चलते स्वस्थ हैं। डॉक्टर से भी ज्यादा अगर उनके प्रति आदर रहे, तब ‘वंदे मातरम’ कहने का आनंद आता है’ –प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

उन्होंने कहा कि, ‘एक बार मैंने बोल दिया पहले शौचालय फिर देवालय, तो बहुत लोगों ने मेरे बाल नोच लिए। लेकिन आज मुझे खुशी है कि देश में ऐसी बेटियां हैं कि जो शौचालय नहीं तो शादी नहीं ऐसा व्रत लेती हैं। हम समयानुकल परिवर्तन में भरोसा करने वाले लोग हैं, इसीलिए हजारों साल से टिके हैं। हमारे बीच ऐसे लोग होते हैं जो बुराइयों के खिलाफ लड़ने में आगे आते हैं। विवेकानंद नहीं होते तो हम सांपसपेरों के देश, एकादशी और पूर्णिमा को क्या खाना, यही हमारी पहचान थी। उन्होंने दुनिया को बता दिया कि जो आप सोचते हैं वो हमारी संस्कृति नहीं है।’

9/11 के दो स्मरण

पीएम मोदी ने स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए कहा कि पिछली शताब्दी में एक 9/11 वो था, जब उन्होंने अपने ओजस्वी भाषण से दुनिया को हिला दिया था। जबकि इस सदी की शुरुआत में जो 9/11 हुआ, उसने अमेरिका समेत पूरे विश्व की मानवीयता को झकझोर कर रख दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार अगर दुनिया विवेकानंद के विचारों को लेकर आगे बढ़ी होती तो इस सदी के 9/11 जैसी मानवता विरोधी घटना नहीं होती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, ‘विश्व को 2001 से पहले पता ही नहीं था कि 9/11 का मतलब क्या है। दोष दुनिया का नहीं, दोष हमारा था कि हमने ही उसे भुला दिया था। अगर हम न भुलाते तो शायद 21वीं सदी का 9/11 न होता। सवा सौ साल पहले भी एक 9/11 हुआ था, जिस दिन इस देश के एक नौजवान ने दुनिया को भारत की ताकत का परिचय करा दिया।’

तालियों की गूंज

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘उस समय तक विश्व को पता नहीं था कि ‘लेडीज एंड जेंटलमैन’ के सिवा भी कोई बात हो सकती है। जिस समय ‘सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका’ के शब्द निकले मिनटों तक तालियों की गूंज थी। उस महापुरुष ने पल दो पल में पूरे विश्व को अपना बना लिया। वो पूरे विश्व की संस्कृतियों को अपने में समेट कर पूरे विश्व को अपनत्व का प्रमाण देता है।’


18 - 24 सितंबर 2017

संबोधन

शिकागो संबोधन

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11 सितंबर 1893 को शिकागो के विश्व धर्म संसद में दिए स्वामी विवेकानंद के भाषण ने रातों-रात उन्हें अमेरिकी मीडिया का चहेता बना दिया

मेरिका में 1893 में हुई विश्व धर्म संसद से पहले स्वामी विवेकानंद एक लगभग अनजान नाम थे। 11 सितंबर 1893 को विश्व धर्म संसद में दिए उनके भाषण ने रातों-रात उन्हें अमेरिकी मीडिया का चहेता बना दिया। 30 साल के इस भारतीय संन्यासी ने अपनी वाग्मिता और धर्म चिंतन से हिंदू धर्म के प्रतिनिधि के तौर पर पूरी दुनिया को अपना मुरीद बना लिया। अमेरिका जाने से पहले विवेकानंद के पास ऊनी कपड़े बनवाने, वहां रहने, खाने-पीने तक के पैसे नहीं थे। 12 जनवरी 1863 में तत्कालीन कलकत्ता के एक कुलीन परिवार में जन्मे नरेंद्रनाथ दत्त स्वामी रामकृष्ण परमहंस के शिष्य बनने के बाद स्वामी विवेकानंद बन गए। आज दुनिया उन्हें इसी रूप में जानती है। चार जुलाई 1902 को महज 39 वर्ष की अल्पायु में समाधि में लीन हो गए थे। विवेकानंद का विश्व धर्म संसद के पहले दिन दिया गया भाषण उनकी यशस्वी कीर्ति का सबसे बड़ा

आधार बना। प्रस्तुत है उनका यह ऐतिहासिक भाषणअमेरिका के बहनो और भाइयो! आपके इस स्नेहपूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय अपार हर्ष से भर गया है। मैं आपको दुनिया की सबसे प्राचीन संत परंपरा की तरफ से धन्यवाद देता हूं। मैं आपको सभी धर्मों की जननी की तरफ से धन्यवाद देता हूं और सभी जाति, संप्रदाय के लाखों, करोड़ों हिंदुओं की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं। मेरा धन्यवाद कुछ उन वक्ताओं को भी जिन्होंने इस मंच से यह कहा कि दुनिया में सहनशीलता का विचार सुदूर पूरब के देशों से फैला है। मुझे गर्व है कि मैं ऐसे धर्म से हूं, जिसने दुनिया को सहनशीलता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है। हम सिर्फ सार्वभौमिक सहनशीलता में ही

विश्वास नहीं रखते, बल्कि हम विश्व के सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं। मुझे गर्व है कि मैं ऐसे देश से हूं, जिसने इस धरती के सभी देशों और धर्मों के परेशान और सताए गए लोगों को शरण दी है। मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि हमने अपने हृदय में उन इस्राइलियों की पवित्र स्मृतियां संजोकर रखी हैं, जिनके धर्म स्थलों को रोमन हमलावरों ने तोड़-तोड़कर खंडहर बना दिया था और तब उन्होंने दक्षिण भारत में शरण ली थी। मुझे इस बात का गर्व है कि मैं ऐसे धर्म से हूं, जिसने महान पारसी धर्म के लोगों को शरण दी और अब भी उन्हें पाल-पोस रहा है। भाइयो, मैं आपको एक श्लोक की कुछ पंक्तियां सुनाना चाहूंगा जिसे मैंने बचपन से स्मरण किया और दोहराया है और जो रोज करोड़ों लोगों द्वारा हर दिन दोहराया जाता है: जिस तरह अलग-अलग स्रोतों से निकली विभिन्न नदियां अंत में समुद्र में जाकर मिलती हैं, उसी तरह मनुष्य अपनी इच्छा के अनुरूप अलग-अलग मार्ग चुनता

स्वामी के दो रूप

विवेकानंद मिशन को जन्म नहीं दिया। बात छोटी होती है, लेकिन इशारा काफी होता है। उसकी कैसी नींव मजबूत बनाई होगी उन्होंने। फाउंडेशन कितना स्ट्रांग होगा, विजन कितना क्लीयर होगा, एक्शन प्लान कितना साफ होगा। भारत के विषय में कितनी गहराई से अनुभूति होगी तभी 120 साल बाद भी वो आंदोलन उसी भाव से चल रहा है।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, ‘आज विवेकानंद जी को अलग रूप में समझने की आवश्यकता है। आप बारीकी से देखेंगे तो उनका दो रूप ध्यान में आएंगे। उन्हें विश्व में जहां अवसर मिला भारत का महिमामंडन, भारतीय चिंतन, परंपराओं का महिमामंडन करने से वो कभी थकते नहीं थे। ये एक रूप था विवेकानंद का। दूसरा रूप यह था कि जब भारत में बात करते थे तो हमारी बुराइयों को खुलेआम कोसते थे। हमारी भीतर की दुर्बलताओं पर कुठाराघात करते थे। काफी कठोर भाषा का प्रयोग करते थे। समाज की हर बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाते थे। उस समय के सामाज की कल्पना कीजिए। जब रिचुअल्स का महत्व ज्यादा था। पूजापाठ की परंपरा समाज की सहज प्रवृत्ति थी। ऐसे समय 30 वर्ष का नौजवान कह दे कि मंदिर में बैठे रहने से भगवान मिलने वाले नहीं हैं। जन सेवा, प्रभु सेवा, जनता जनार्दन की सेवा करो तब जाकर प्रभु प्राप्त होंगे, कितनी बड़ी ताकत थी।’

महात्मा और स्वामी

उन्होंने कहा, ‘वे (स्वामी विवेकानंद) संत परंपरा के थे, लेकिन जीवन में कभी गुरु खोजने नहीं निकले थे। ये सीखने और समझने का विषय है। वो गुरु खोजने नहीं निकले थे, वे सत्य की तलाश में थे। महात्मा गांधी भी जीवन भर सत्य की तलाश से जुड़े रहे थे। परिवार में आर्थिक स्थिति कठिन थी। रामकृष्ण जी मां काली के पास भेजते हैं, तुझे जो चाहिए मां काली से मांग। जब बाद में पूछा कि कुछ मांगा तो कहा कि नहीं। कौन सा मिजाज होगा। जो

है। वे देखने में भले ही सीधे या टेढ़े-मेढ़े लगें, पर सभी भगवान तक ही जाते हैं। वर्तमान सम्मेलन आज तक की सबसे पवित्र सभाओं में से है, ये गीता में बताए गए इस सिद्धांत का प्रमाण है। जो भी मुझ तक आता है, चाहे वह कैसा भी हो, मैं उस तक पहुंचता हूं। लोग चाहे कोई भी रास्ता चुनें, आखिर में मुझ तक ही पहुंचते हैं। सांप्रदायिकताएं, कट्टरताएं और इनके भयानक वंशज हठधर्मिता लंबे समय से पृथ्वी को अपने शिकंजों में जकड़े हुए हैं। इन्होंने पृथ्वी को हिंसा से भर दिया है। कितनी बार ही यह धरती खून से लाल हुई है। कितनी ही सभ्यताओं का विनाश हुआ है और न जाने कितने देश नष्ट हुए हैं। अगर ये भयानक राक्षस नहीं होते तो आज मानव समाज कहीं ज्यादा उन्नत होता, लेकिन अब उनका समय पूरा हो चुका है। मुझे पूरी उम्मीद है कि आज इस सम्मेलन का शंखनाद सभी हठधर्मिताओं, हर तरह के क्लेश, चाहे वे तलवार से हों या कलम से और सभी मनुष्यों के बीच की दुर्भावनाओं का विनाश करेगा।

जमशेद जी टाटा की प्रेरणा

प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि, ‘विवेकानंद की सफलता का कारण ये था कि उनके भीतर आत्मसम्मान और आत्मगौरव का भाव था। ‘आत्म’ मतलब व्यक्ति नहीं, बल्कि जिस देश का वो प्रतिनिधित्व कर रहे थे, उसकी महान विरासत है। विवेकानंद ने जमशेद जी टाटा से कहा था कि भारत में उद्योग लगाओ, मेक इन इंडिया बनाओ। जमशेद जी टाटा ने स्वयं माना है कि उनके उद्योग लगाने के पीछे विवेकानंद जी की ही प्रेरणा थी।’ काली के सामने खड़े होकर भी मांगने के लिए तैयार नहीं है। भीतर वो कौन सा लौह तत्व होगा, कौन सी ऊर्जा होगी, जिसमें ये सामर्थ्य पैदा हुआ।’

नारी सम्मान

इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘क्या हम अपने समाज की बुराइयों के खिलाफ नहीं लड़ेंगे। अमेरिका की धरती पर विवेकानंद जी ‘ब्रदर्स एंड सिस्टर्स ऑफ अमेरिका’ कहें तो हम नाच उठें, लेकिन अपने नौजवानों को कहना चाहूंगा कि क्या

हम नारी का सम्मान करते हैं। हम लड़कियों के प्रति आदर भाव से देखते हैं क्या। जो देखते हैं उनको मैं सौ बार नमन करता हूं। अगर जो उन्हें बराबरी से नहीं देखते तो फिर उन्हें विवेकानंद जी के सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका पर तालियां बजाने का हक है कि नहीं इस पर पचास बार सोचना पड़ेगा।’

मिशन और नाम

प्रधानमंत्री ने कहा कि, ‘लगभग 120 साल पहले उन्होंने रामकृष्ण मिशन को जन्म दिया।

प्रथम कृषि क्रांति का विचार

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘भारत में प्रथम कृषि क्रांति का विचार भी स्वामी विवेकानंद ने ही दिया था। उस उम्र में उन्होंने आधुनिक खेती की बात की थी। वो नवाचार और अनुसंधान के हिमायती थे। हमारी देश के युवा पीढ़ी में भी ये जज्बा होना चाहिए। कभी-कभी असफलता ही सफलता का रास्ता दिखाती है। हिंदुस्तान बहुत बड़ा मार्केट है अपने देश के नौजवानों की बुद्धि और सामर्थ्य का इंतजार कर रहा है।’


16 खुला मंच

18 - 24 सितंबर 2017

‘डिजाइन सिर्फ यह नहीं है कि चीज कैसी दिखती या महसूस होती है। डिजाइन यह है कि चीज काम कैसे करती है’ -स्टीव जॉब्स

अभिमत

प्रेम प्रकाश

लेखक ढाई दशकों से पत्रकारिता से जुड़े तथा विभिन्न रचनात्मक संस्थाओं में सक्रिय हैं

न्यू इंडिया की रफ्तार

14 सितंबर का दिन भारत के इतिहास में स्वर्णिम दिवस बन गया जब प्रधानमंत्री नरेंद मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अाबे ने बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखी

गति की कसौटी

देश में बुलेट ट्रेन लाने की पहल इस मायने में खास है, क्योंकि इससे भारत विकास का ग्लोबल ब्रांड बन जाएगा

ति और तकनीक, इस साझे के बिना आज जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। यही कारण है कि यह साझा आज विकास की भी कसौटी बन गया है। इस कसौटी पर ‘न्यू इंडिया’ भी कसा जाए और जल्द से जल्द खरा उतरे, इस लिहाज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते साढ़े तीन साल में कई कदम बढ़ाए हैं। स्किल से लेकर डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया तक सरकार ने जो भी कदम उठाए हैं, उसकी दिशा एक ही है- विकसित और समर्थ भारत। इस लिहाज से जापान की मदद से देश में बुलेट ट्रेन लाने की उनकी पहल इस मायने में खास है क्योंकि इसके साथ ही अगले पांच साल में भारत विकास के एक ग्लोबल ब्रांड के तौर पर दुनिया के सामने होगा। गौरतलब है कि जापान में 1959 में बुलेट ट्रेन पर काम शुरू हुआ और टोक्यो ओलंपिक के समय 1964 में उसका उद्घाटन भी हो गया था। भारत में भी अहमदाबाद से मुंबई जो मेट्रो दौड़ने वाली है, वह परियोजना पांच साल के भीतर-भीतर समाप्त हो जाएगी। दुनिया में सबसे सुरक्षित तीव्रगति की रेलगाड़ी जापान की 'शिंकान्सेन' यानी 'मुख्य पथ की रेल' मानी जाती है, जो 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है तथा चुंबकीय रेल पथ पर उसने 603 किमी प्रति घंटे की गति का कीर्तिमान स्थापित किया है। 14 सितंबर को गुजरात के शहर अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन निर्माण कार्य के भूमिपूजन समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एवं जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे, दोनों भावुक दिखे, तो यह एक सहज स्थिति ही थी। कहने की जरूरत नहीं कि वह दिन दो देशों में मधुर एवं आत्मीय संबंधों से परे अटूट विश्वास और अपनत्व का उत्सव बन गया। समारोह में दिए गए शिंजो आबे के संबोधन में बहुत कई गूढ़ संदेश निहित थे। उन्होंने कहा, ‘एक शक्तिशाली भारत ही जापान के हित में है।’ भारत अपने उद्यम से अपने सामर्थ्य को जिस तरह आगे भढ़ाने में लगा है, उसमें जापान जैसे भरोसेमंद मित्र का साथ हमारे लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं है।

टॉवर

(उत्तर प्रदेश)

सा

ढ़े तीन साल पहले तक जिस ‘गुजरात मॉडल’ की चर्चा होती थी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब इसे ‘न्यू इंडिया’ विजन की शक्ल में बदल दिया है। स्किल से डिजिटल इंडिया का मंत्र देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजादी के 75 साल पूरे होते-होते भारत को दुनिया के उन देशों की कतार में लाने का संकल्प लिया है, जिन्हें सर्वाधिक विकसित और समृद्ध माना जाता है। इस लिहाज से 14 सितंबर का दिन भारत के इतिहास में स्वर्णिम दिवस बन गया जब प्रधानमंत्री नरेंद मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अाबे ने महत्वाकांक्षी अहमदाबादमुंबई हाई स्पीड नेटवर्क परियोजना (बुलेट ट्रेन परियोजना) की आधारशिला रखी। नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के लिए यह परियोजना कितना अहम है और वह इसके लिए किस तत्परता से लगी है इसकी इससे बड़ी मिसाल क्या हो सकती है कि पहले बुलेट ट्रेन परियोजना का काम दिसंबर 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसे स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ यानी 15 अगस्त 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह से देश को 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर न सिर्फ बहुप्रतीक्षित बुलेट ट्रेन परियोजना का तोहफा मिलेगा, बल्कि देश के सामने एक गौरवशाली अवसर भी होगा जब वह अपनी विकासयात्रा पर हर्ष और गर्व दोनों का अनुभव करे। दरअसल, यह यात्रा जिस पर भारत ने पहले ही कदम बढ़ा दिया है, वह एक देश के ब्रांड में बदलने की यात्रा होगी और इसकी मंजिल अब बहुत दूर नहीं है। अमेरिका, जापान और चीन जैसे देशों ने तकनीक और उद्यम के रास्ते दुनिया के आगे विकास का जो मॉडल पेश किया है, भारत उस मॉडल को अपने प्रतिबद्ध मानव संसाधन के साथ अक नई ऊंचाई

पर ले जाना चाहता है। एक ऐसी ऊंचाई जिसमें एक तरफ आधुनिकतम तकनीक होगी, वहीं देश की समृद्धि के लिए असंख्य अवसर। कहने की जरूरत नहीं कि अहमदाबाद-मुंबई बुलेट परियोजना से ब्रांड इंडिया को नई ऊंचाई हासिल करने में बड़ी मदद मिलेगी। इसके साथ ही दुनिया के विकसित देशों के साथ कदमताल मिलाते हुए भारत विकास के संदर्भ में अग्रणी देशों की श्रेणी में आकर खड़ा हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद मोदी जिस ब्रांड इंडिया का जिक्र अपने भाषणों में बार-बार करते रहे हैं, बुलेट ट्रेन परियोजना उस ब्रांड इंडिया को पूरी तरह से साकार करती हुई दिखाई देती है। बुलेट ट्रेन परियोजना से देश प्रतिभा, व्यापार, परंपरा, पर्यटन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकसित राष्ट्रों के समकक्ष आकर खड़ा हो जाएगा। बुलेट ट्रेन के आने से देश की अर्थव्यवस्था को तो गति मिलेगी ही, साथ ही देश के पर्यटन, प्रौद्योगिकी, प्रतिभा और व्यापार को भी सीधे लाभ पहुंचेगा। बुलेट ट्रेन परियोजना को भारत की विदेश नीति की भी एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। इस परियोजना से देश के वित्तीय संसाधनों की बचत होगी। 508 किलोमीटर के अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड नेटवर्क परियोजना की कुल लागत 1.10 लाख करोड़ रुपए है। जापान इस परियोजना के लिए कम ब्याज दर पर 90,000 करोड़ रुपए का ऋण उपलब्ध कराएगा, जो योजना की कुल लागत का 80 प्रतिशत है। भारत सरकार को ऋण उपलब्ध होने के 15 वर्ष बाद से अगले 50 वर्षों तक 0.1 की ब्याज दर से भुगतान करना होगा। सामान्यतः ऐसे किसी भी ऋण की ब्याज दर 20-30 वर्ष की अवधि के लिए 3-7 प्रतिशत के बीच होती है, जबकि भारत को यह ऋण 0.1 की ब्याज दर पर उपलब्ध हो रहा है और इसकी अदायगी की समय सीमा भी ऋण

पहले बुलेट ट्रेन परियोजना का काम दिसंबर 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसे स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ, यानी 15 अगस्त 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है


18 - 24 सितंबर 2017 उपलब्ध होने के 15 वर्ष बाद से अगले 50 वर्षों तक की रखी गई है। बुलेट ट्रेन परियोजना से देश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। इससे बुलेट ट्रेन से जुड़े अन्य उद्यम विकसित होंगे, स्टेशनों का निर्माण होगा, बुलेट ट्रेन से जुड़े अन्य उद्यमों का भी विकास होगा। जिस तरह से जापान के यहां मारूति उद्यम लगाने के बाद भारत ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में पीछे मुड़कर नहीं देखा, उसी तरह यह भारतीय रेल परिवहन को तकनीकी स्वावलंबन के नए मुकाम तक ले जाएगा। आज ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भारत-जापान के 250 ऑटोमोबाइल कल-पुर्जों के निर्माता एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। जापान के सहयोग से भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र को जिस तरह से पंख लग गए, हाई स्पीड नेटवर्क के क्षेत्र में भी ऐसी ही उम्मीद की जा रही है। एक्सप्रेस वे, मेट्रो लाइन, एयरपोर्ट निर्माण से किसी शहर का जितना विकास होता है, बुलेट ट्रेन परियोजना से देश में उससे कई गुणा ज्यादा विकास होगा। बात रोजगार सृजन की करें तो एक अनुमान के मुताबिक, बुलेट ट्रेन परियोजना से 4000 प्रत्यक्ष और 20,000 अप्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन होगा। अकेले वडोदरा में हाई स्पीड रेल प्रशिक्षण संस्थान अगले 3 वर्ष में 4000 कामगारों को प्रशिक्षित करने का काम करेगा। इन प्रशिक्षित कामगारों का उपयोग इस योजना के परिचालन और मरम्मत संबंधी कार्यों के लिए किया जाएगा। इसके अलावा जापान 300 भारतीय युवाओं को हाई स्पीड रेल नेटवर्क प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण देगा। जो युवा होने के कारण नयी प्रौद्योगिकी को सहजता से ग्रहण करने में सक्षम होंगे। इसके अलावा 20,000 अप्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन होने का आकलन किया गया है। इतनी बड़ी परियोजना से देश के विनिर्माण क्षेत्र को भी गति मिलेगी। निकट भविष्य में बुलेट ट्रेन के कल-पुर्जों का निर्माण देश में ही होने की उम्मीद जताई जा रही है। परियोजना से न केवल देश के विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश में नई प्रौद्योगिकी का भी विकास होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने विगत वर्षों में देश कौशल विकास पर काफी जोर दिया है। अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड नेटवर्क परियोजना से भी देश के राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन को बढ़ावा मिलेगा। नई प्रौद्योगिकी के आने से देश को प्रशिक्षित कामगारों की आवश्यकता होगी। परियोजना में ब्लास्ट-लेस ट्रैक और समुद्र में सुरंग बनाने के लिए नई प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाएगा। इस नई प्रौद्योगिकी के लिए प्रशिक्षित कामगारों की आवश्यकता को पूरा करने में राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन की अहम भूमिका होगी। इसके साथ ही वड़ोदरा में हाई स्पीड रेल प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की जाएगी, जो देश में हाई स्पीड नेटवर्क के लिए मजबूत आधारशिला का काम करेगा। यह संस्थान वर्ष 2020 के अंत तक अपना काम शुरू कर देगा। बुलेट ट्रेन परियोजना के शुभारंभ के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने हाई स्पीड कनेक्टिविटी को अपना लक्ष्य और देश का भविष्य बताया। बुलेट ट्रेन परियोजना की नई प्रौद्योगिकी से न सिर्फ रेल नेटवर्क में बल्कि देश के परिवहन क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आने की उम्मीद है। इससे विमानन और हाई स्पीड रेल नेटवर्क में कड़ी प्रतिस्पर्धा की होगी। नतीजतन विमानन और हाई स्पीड रेल सेवाओं की गुणवत्ता में तेजी से वृद्धि होगी। इसके पहले कदम के रूप में बुलेट ट्रेन के किराए को राजधानी एक्सप्रेस के समकक्ष रखा गया है।

खुला मंच

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नरेंद्र मोदी

संबोधन

प्रधानमंत्री

नए भारत की जीवनरेखा

मैं नई रेलवे फिलॉस्फी को नए भारत के निर्माण की जीवनरेखा मानता हूं। भारत की अबाध प्रगति का संपर्क अब और भी तेज गति से जुड़ गया है

मु

झे प्रसन्नता है कि मेरे अनन्य मित्र जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे का भारत में और विशेष रूप से गुजरात में स्वागत करने का अवसर मुझे मिला है। प्रधानमंत्री आबे और मैं कई बार अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की साइडलाइंस पर मिले हैं, लेकिन भारत में उनका स्वागत करना मेरे लिए विशेष रूप से हर्ष का विषय होता है। मुझे उनके साथ साबरमती आश्रम जाने का अवसर मिला। हम दोनों दांडी कुटीर भी गए। हम दोनों ने मिल कर जापान के सहयोग से बनाए जा रहे मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेलवे प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया। यह एक बहुत बड़ा कदम है। यह सिर्फ हाई स्पीड रेल की शुरुआत नहीं है। भविष्य में हमारी आवश्यकताओं को देखते हुए मैं इस नई रेलवे फिलॉस्फी को नए भारत के निर्माण की जीवनरेखा मानता हूं। भारत की अबाध प्रगति का संपर्क अब और भी तेज गति से जुड़ गया है। आपसी विश्वास और भरोसा, एक दूसरे के हितों और चिंताओं की समझ और उच्च स्तरीय सतत संपर्क, यह भारत जापान संबंधों की खासियत है। हमारी स्पेशल स्ट्रैटजिक और ग्लोबल पार्टनरशिप का दायरा सिर्फ द्विपक्षीय या क्षेत्रीय स्तर तक ही सीमित नहीं है। वैश्विक मुद्दों पर भी हमारा सहयोग घनिष्ठ है। पिछले वर्ष मेरी जापान यात्रा के समय

- 17 डस्ंिर 2017 िर्ष-1 | अंक-39 | 11 /2016/71597 आरएनआई नंिर-DELHIN

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हमने परमाणु उर्जा के शांतिपूर्ण प्रयोग के लिए एक ऐतिहासिक समझौता किया था। इसके रैटिफिकेशन के लिए मैं जापान के जनमानस, जापान की संसद, और खास तौर पर प्रधानमंत्री आबे का ह्रदय से आभार प्रकट करता हूं। क्लीन एनर्जी और क्लाइमेट चेंज के विषय पर हमारे सहयोग के लिए इस समझौते ने एक नया अध्याय जोड़ा है। 2016-17 में भारत में जापान से 4.7 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 80 प्रतिशत अधिक है। अब जापान भारत

सरकार में बढ़ी महिला शक्ति

रकार में हो रहे बदलावों और बढ़ती महिलाओं की शक्ति को प्रमुखता से प्रकाशित करने और हम लोगों तक पहुंचाने के लिए हम सुलभ स्वच्छ भारत के बहुत आभारी हैं। इसके साथ ही इसमें महिलाओं के विकास और न्यू इंडिया के विजन पर विशेष तवज्जो दी गई है, जो कि बहुत ही सराहनीय कार्य है। सुलभ स्वच्छ भारत ने हमेशा से गुणवत्ता वाली खबरें प्रकाशित होती रही हैं। हम आशा करते हैं कि आगे भी हमें ऐसे ही आपका सानिध्य मिलता रहेगा और आप हमें देश और समाज के विभिन्न सकारात्मक पहलुओं से रुबरु कराते रहेंगे। पूजा सिरोही, देवास, मध्य प्रदेश

में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है। यह साफ दर्शाता है कि भारत के आर्थिक विकास और सुनहरे कल के प्रति जापान में कितना विश्वास और आशावादी वातावरण है। इस निवेश को देख कर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में भारत और जापान के बीच बढ़ते बिजनस के साथ पीपुल टू पीपुल संबंध भी बढ़ेंगे। हमने जापान के नागरिकों के लिए विजा ऑन अराइवल की सुविधा तो पहले से ही दे रखी है। अब हम इंडिया पोस्ट और जापान पोस्ट के सहयोग से एक कूल बॉक्स सर्विस भी शुरू करने जा रहे हैं, ताकि भारत में रह रहे जापानी लोग सीधा जापान से अपने पसंदीदा भोजन मंगा सकें। साथ ही साथ मेरा जापानी बिजनस समुदाय से यह भी अनुरोध है कि भारत में अधिकाधिक जापानी रेस्त्रां खोलें। आज भारत कई स्तरों पर आमूलचूल परिवर्तन की राह पर चल रहा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनस हो या स्किल इंडिया, टैक्स रिफार्म हो या मेक इन इंडिया, भारत पूरी तरह ट्रांसफॉर्म हो रहा है। मुझे प्रसन्नता है कि जापान की कई कंपनियां हमारे राष्ट्रीय फ्लैगशिप कार्यक्रमों से गहन तौर पर जुड़ रही हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी बातचीत और किए गए समझौते भारत और जापान की साझेदारी को सभी क्षेत्रों में और अधिक मजबूत करेंगे।

पृष्ठों की उम्दा साज-सज्जा

सु

लभ स्वच्छ भारत में स्वच्छता के साथ ही साथ सरकार और समाज से जुड़े विभिन्न पहलुओं को भी उजागर किया जाता है। इसके साथ ही यह समाचार पत्र सरकार द्वारा लाई गई योजनाओं और तथ्यों को हम सबके सामने लाने का कार्य कर रहा है। सुलभ स्वच्छ भारत की डिजाइन और अंदरुनी पृष्ठों की साज-सज्जा काफी बेहतर है। हर बार हमें समाचार पत्र की अलग अलग सज्जा काफी आकर्षित करती है। विभिन्न पहलुओं के साथ साथ अच्छे ग्राफिक्स भी छापे जाते हैं। सामग्री और सज्जा में सुलभ स्वच्छ भारत किसी से कम नहीं है। विकल्प शर्मा, पटना, बिहार


18 फोटो फीचर

18 - 24 सितंबर 2017

सुलभ ग्राम में राजू

जाने-माने कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव के सुलभ ग्राम आने पर न सिर्फ यहां हर तरफ प्रसन्नता की लहर बिखर गई, बल्कि खुद श्रीवास्तव भी सुलभ के कार्यों को देखकर अभिभूत रह गए फोटो ः मोंटू

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18 - 24 सितंबर 2017

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पानी की न्यूनतम खपत क साथ काम करने वाले शौचालय के बारे में श्रीवास्तव को बताते डॉ. पाठ क

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राजू श्रीवास्तव को मधुबनी

सुलभ टीम डॉ. पाठक और

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रीवास्तव

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राजू लंबे भाषणों में उनकी अदा ही ब यकीन नहीं करते क्योंकि हुत कुछ कह जात ी है


20 जेंडर

18 - 24 सितंबर 2017

नाविका सागर परिक्रमा

विश्व परिक्रमा के लिए नौसेना की महिला जवानों की टीम रवाना पहली बार भारतीय नौसेना के पोत वाहक जहाज आईएनएसवी ‘तारिणी’ पूरे संसार की जल यात्रा के लिए चालक दल की सभी महिला सदस्यों के नेतृत्व में निकला है

प्र

एसएसबी ब्यूरो

धानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने महिलाओं की सशक्तिकरण के लिए कई प्रयास किए हैं, लेकिन उनकी सोच सिर्फ महिलाओं की सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे एक कदम आगे है। वे कहते हैं कि अब मुद्दा महिलाओं के विकास का ही नहीं, बल्कि महिलाओं के नेतृत्व में विकास का है। दरअसल पीएम मोदी की पहल ने महिलाओं में विश्वास भरने के साथ ही भरोसा भी उत्पन्न किया है। वे महिलाओं को यह यकीन दिलाने में भी सफल रहे हैं कि सम्मान और विकास के बारे में सोचने और कुछ कर गुजरने वाला एक व्यक्ति सरकारी तंत्र के उच्च शिखर पर बैठा है जो नारी शक्ति के साथ खड़ा है। इसी भरोसे और विश्वास के साथ भारतीय नौसेना की 6 महिला अफसरों ने दुनिया की अपनी यात्रा ‘नाविका सागर परिक्रमा’ की शुरुआत की। प्रधानमंत्री ने इन महिला अफसरों को शुभकामनाएं दी हैं। पीएम मोदी ने टि्वटर पर लिखा, ‘आज विशेष दिन है। नौसेना की छह महिला अधिकारियों ने आईएनएसवी तरिणी से दुनिया का चक्कर लगाने की यात्रा शुरू की।’ पीएम मोदी ने दूसरे ट्वीट में लिखा, ‘पूरा देश एक साथ मिलकर नाविका सागर परिक्रमा की टीम को शुभकामनाएं दे रहा है और उनकी इस असाधारण यात्रा के लिए शुभेक्षा।’ रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने गोवा से भारतीय नौ सेना के पोत वाहक जहाज ‘ता​िरणी’ (आईएनएसवी ता​िरणी) को झंडी दिखाकर रवाना किया। गोवा के आईएनएस मंडोवी नौका पुल से रवाना किए गए इस पोत की विशेषता यह है कि इसमें सभी महिला क्रू शामिल है। पहली बार भारतीय नौसेना के पोत वाहक जहाज आईएनएसवी ता​िरणी पूरे संसार की जल यात्रा के लिए चालक दल की सभी महिला सदस्यों के नेतृत्व में निकला है। समुद्री यात्रा की समाप्ति पर इस जहाज के अप्रैल, 2018 में वापस गोवा लौटने की आशा है। यह अभियान पांच चरणों में पूरा होगा। यह आस्ट्रेलिया के फ्रीमेनटेली, न्यूजीलैंड लाइटलेटन, पोर्टसिडनी के फॉक लैंड और दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन आदि चार बंदरगाहों पर रूकेगा। इस अवसर पर गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिक्कर नौ सेनाध्यक्ष एडमिरल सुनील लांबा,

एक नजर

रक्षा मंत्री ने ‘नाविका सागर परिक्रमा’ को झंडी दिखाकर रवाना किया इस समुद्री यात्रा की समाप्ति अप्रैल, 2018 में होगी यह समुद्री यात्रा पांच चरणों में पूरी होगी

फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल ए.आर.करवे, दक्षिणी नौ सेना कमान के कमांडरइन-चीफ वाइस एडमिरल आर.हरि कुमार और नौ सेना के सेवानिवृत्त एवं सेवारत अधिकारियों के साथ-साथ सिविलियन गणमान्य व्यक्तियों, क्रू चालक दल एवं सेलर्स के पारिवारिक सदस्य भी मौजूद थे। इस अवसर पर आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री ने कहा, ‘यह दिन हमारे देश के इतिहास का ऐतिहासिक दिवस है। यह विश्व के नौपरिवहन इतिहास में दर्ज होगा आज विश्व के समक्ष हमारी महिलाएं उस कार्य का संचालन कर रही है जिसके बारे में विश्व की अधिकतर नौसेना सोच भी नहीं पाती है।’ निर्मला सीतारमण ने आगे कहा, ‘इस पहल के लिए मैं भारतीय नौ सेना की प्रशंसा करती हूं कि मैं उन अनुभवी परामर्शदाताओं और प्रेरकों की सराहना

करती हूं जिन्होंने इन साहसी और निर्भीक महिलाओं को प्रेरणा दी और प्रशिक्षण दिया।’ उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक महत्त्वपूर्ण अवसर पर मौजूद होना मेरे लिए गर्व की बात है। मैं चालक दल की महिला सदस्यों को सफलता की शुभकामनाएं देती हूं। नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुनील लांबा ने भारतीय नौसेना की समुद्री यात्रा अभियानों की शानदार परंपरा पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि 1988 में ‘समुद्र अभियान के साथ’ इसका शुभारंभ हुआ था। इस ऐतिहासिक समुद्र यात्रा की शुरूआत पहली बार अकेले कैप्टन दिलीप डोंडे (सेवानिवृत्त) ने की थी। इसके साथ कमांडर अभिलाष डोमी ने संसार की जलयात्रा में नौराष्ट्रों को जलमार्ग के जरिए बिना रूके साहस के साथ पूरा किया था। उन्होंने कहा कि सभी महिला क्रू का यह अभियान पहले के प्रयासों विस्तारित रूप है। यह महिला

समुद्री यात्रा में पर्यावरण हितैषी गैर परपंरागत ऊर्जा स्रोतों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाना भी है

सशक्तिकरण-‘नारी शक्ति’ दिशा में किए जा रहे सरकार के प्रयासों का प्रतिबिंब है। आईएनएसवी तरिणी 55 फुट का जलयान है इसे स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है। इसे इसी वर्ष के आरंभ में भारतीय नौ सेना में शामिल किया गया है। विश्व के फॉरम पर यह ‘मेक-इन-इंडिया’ पहल को प्रदर्शित करता है। आईएनएसवी तरिणी के दल में कप्तान लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी एवं क्रू सदस्यों में लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवाल, पी. स्वाति, लेफ्टिनेंट एस. विजयादेवी, लेफ्टिनेंट बी. ऐश्वर्या एवं लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता शामिल हैं। समुद्र यात्रा के दौरान चालक दल गहरे समुद्र में प्रदूषण की जांच करेगा और इस संबंध में रिपोर्ट देगा समुद्री सेलिंग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न बंदरगाह पड़ावों पर स्थानीय पी.आई.ओ. के साथ व्यापक विचार-विमर्श भी करेगा। इस दौरान यह साहसिक दल भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमबी) को मौसम के पूर्वानुमान की सही जानकारी प्रदान करने के लिए मौसम विज्ञान/समुद्री/लहरों के बारे में नियमित रूप से आंकड़े इकट्ठा करेगा और उन्हें लगातार नवीन जानकारी भी उपलब्ध कराएगा। इससे अनुसंधान और विकास संगठनों को विश्लेषण में भी मदद मिलेगी। इस अभियान का विषय ‘नाविका सागर परिक्रमा’ रखा गया है यह महिलाओं का उनकी अंतनिर्हित शक्ति के जरिए सशक्तिकरण किए जाने की राष्ट्री य नीति के अनुरूप है। इसका उद्देश्य भारत में महिलाओं के प्रति सामाजिक दृष्टिाकोण और सोच में बदलाव लाना है। समुद्री यात्रा में पर्यावरण हितैषी गैर परपंरागत ऊर्जा स्रोतों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाना भी है।


18 - 24 सितंबर 2017

स्वच्छता पहल

स्वच्छता

नवी मुंबई में प्रदूषण का स्तर घटा

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नवी मुंबई मनपा क्षेत्र के ऐरोली उपनगर की हवा न सिर्फ नवी मुंबई, बल्कि पूरे राज्य के सभी शहरों की अपेक्षा स्वच्छ मिली है आनंद भारती

को लेकर चल रही देशकोशिशोंभर मेंके स्वच्छता कुछ बेहद अहम नतीजे सामने

आने लगे हैं। इस तरह का एक नतीजा नवी मुंबई महा नगरपालिका क्षेत्र में प्रदूषण में कमी के रूप में सामने आई है। आर्थिक वर्ष 201516 की तुलना में आर्थिक वर्ष 2016-17 में नवी मुंबई शहर के पर्यावरण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उम्मीद है कि नए वित्तीय वर्ष में भी इस पूरे क्षेत्र में स्वच्छता की दृष्टि से सुधार का सिलसिला जारी रहेगा। इसी के साथ मनपा क्षेत्र में दैनिक कचरे के संकलन में भी करीब 4.50 प्रतिशत वृद्धि होने की जानकारी मिली है। इस दौरान शहर की आबादी में भी 1.4 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है। आर्थिक वर्ष 2015-16 में 695 मेट्रिक टन कचरे को संकलित किया गया था। आर्थिक वर्ष 2016-17 में यह 4.50 प्रतिशत बढ़कर 726 मेट्रिक टन हो चुका है। यह कचरा शहर की करीब 6,343 निवासी संकुलों, 800 व्यापारिक

एक नजर

दैनिक कचरे के संकलन में भी करीब 4.50 प्रतिशत वृद्धि 92 प्रतिशत कचरा अकेले शहर के निवासी क्षेत्रों से उठाया गया ऐरोली उपनगर की हवा महाराष्ट्र के अन्य शहरों की अपेक्षा स्वच्छ

व वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों तथा 3,977 औद्योगिक इकाइयों से संकलित किया गया था। संकलित किए गए दैनिक कचरे में से करीब 92 प्रतिशत कचरा अकेले शहर के निवासी क्षेत्रों से उठाया गया है। संकलित हुए कचरे में से मात्र एक प्रतिशत कचरा ही धातुओं के रूप में संकलित किया गया है। शेष अन्य कचरे का समावेश है। इस समय नवी मुंबई शहर भर से हर दिन औसतन 422 मेट्रिक टन कचरे को उठाया जा रहा है।

अब असम के लोगों का भी बनेगा आधार कार्ड

ऐरोली सबसे स्वच्छ

प्रदूषक तत्वों में कमी

नवी मुंबई मनपा क्षेत्र के पर्यावरण स्थिति की जांच में जो निष्कर्ष सामने आया है उसमें ऐरोली उपनगर की हवा न सिर्फ नवी मुंबई, बल्कि पूरे राज्य के सभी शहरों की अपेक्षा स्वच्छ मिली है। मनपा क्षेत्र की पर्यावरण गुणवत्ता में भी आर्थिक वर्ष 2015-16 की तुलना में आर्थिक वर्ष 201617 में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। शहर के पर्यावरण गुणवत्ता निर्देशांक (एनवायरोमेंटल क्वालिटी इंडेक्स) 73.66 व पर्यावरण सुधार कार्य निर्देशांक 672.50 में गत वर्ष की तुलना में क्रमशः 2.7 और 7.9 अंकों की वृद्धि हुई है। इसमें शहर की हवा व पानी की गुणवत्ता में सुधार, दैनिक कचरे के संकलन, वर्गीकरण व उसे जैविक तरीके से नष्ट करने अथवा उसका पुनः उपयोग करने, पानी की गुणवत्ता की नियमित देखभाल करने, पानी के अपव्यय में आई खासी कमी, कांदलवन के वनक्षेत्र के संरक्षण, शहर के निवासियों की शिकायतों का प्रभावी निवारण व निवासियों के सहभाग जैसे विभिन्न कार्यों का समावेश है।

पर्यावरण स्थिति की रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक वर्ष 2016-17 के दौरान नवी मुंबई शहर में एसओ2, एनओएक्स व ओजोन के प्रदूषकों के प्रमाण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा निश्चित किए गए निम्नतम प्रमाण से कम पाए गए हैं। इसके प्रमुख कारणों में मनपा क्षेत्र में मौजूद औद्योगिक परिसर की सड़कों का कंक्रीट निर्माण करने, 22 औद्योगिक समूहों द्वारा पारंपरिक ईंधन के बदले पाइप नेचुरल गैस ईंधन का उपयोग शुरू करने, पत्थर की खदानों पर प्रतिबंध लगने जैसे कारण शामिल हैं। नवी मुंबई में आर्थिक वर्ष 2015-16 में पूरे वर्ष के दौरान जहां 85 प्रदूषित दिन पाए गए थे, वहीं आर्थिक वर्ष 2016-17 में घटकर यह मात्र 30 दिन रह गया है। मनपा प्रशासन अब इसे और कम करने की कोशिश में है। मनपा प्रशासन इस समय अपने क्षेत्र में रोज संकलित होने वाले कचरे में से सूखे व गीले कचरे को अलग करने के लिए 100 प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त करने की कोशिश में है।

कार्ड प्राप्त कर सकते हैं और इसे नागरिकता के सबूत के रूप में पेश कर सकते हैं। हालांकि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने मई में आधार नंबर के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया था। यह फैसला तब लिया गया जब केन्द्र ने यह स्पष्ट किया था कि आधार न तो नागरिकता प्रदान करता है और न ही यह नागरिकता का सबूत है। सोनोवाल ने कहा कि आधार से पढ़ाई के लिए राज्य से बाहर जाने वाले छात्रों को फायदा होगा, जहां शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए यह अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने आधार के लिए डाटा कलेक्शन की प्रक्रिया एक साल में पूरी करने को कहा। बैठक में

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मिनी सचिवालय के निर्माण के लिए बराक वैली में जमीन की पहचान करने को कहा ताकि उनमें जो अलगाव या विराग की भावना है उसे दूर किया जा सके। सचिवालय बराक वैली में रहने वाले लोगों को आसानी से विभिन्न सेवाएं मुहैया कराएगा। साथ ही क्षेत्र की ग्रोथ को स्पीड अप करेगा। मुख्यमंत्री सोनोवाल ने राज्य में नवगठित जिलों में अदालतें बनाने के लिए न्यायिक विभाग को कार्रवाई करने का निर्देश दिया। साथ ही राज्य के लॉ कॉलेजों के पाठ्यक्रम को अपग्रेड करने के लिए तरीकों का सुझाव दिया। ताकि इन लॉ कॉलेजों को देश के बेस्ट लॉ कॉलेजों जैसा बनाया जा सके।

कम प्रदूषित दिन

असम के लोगों को भी अब आधार कार्ड बनवाने होंगे। राज्य में आधार कार्ड के लिए बायोमैट्रिक डाटा के कलेक्शन की प्रक्रिया दिसंबर में शुरु हो जाएगी

राज कश्यप

सम के लोगों को भी अब आधार कार्ड बनवाने होंगे। राज्य में आधार कार्ड के लिए बायोमैट्रिक डाटा के कलेक्शन की प्रक्रिया दिसंबर में शुरू हो जाएगी। जम्मू कश्मीर के बाद असम ऐसा राज्य है जहां आधार की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। आधार 12 डिजिट का नंबर है जो यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया(यूआईडीएआई) सभी नागरिकों को जारी करता है। शुक्रवार को रिव्यू मीटिंग में सामान्य प्रशासन विभाग(जीएडी) ने असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल को जानकारी दी कि आधार कार्ड के लिए डाटा कलेक्शन 1 दिसंबर से शुरू होगा और एक साल में पूरी प्रक्रिया संपन्न हो जाएगी। अधिकारियों ने यह

जानकारी दी। मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि आधार के लिए डाटा कलेक्शन के काम में लोकल वेंडर्स को शामिल करना चाहिए। उन्हें पूरे प्रक्रिया के जरिए युवाओं को रोजगार मुहैया कराने का अवसर प्रदान करना चाहिए। राज्य के 3.18 करोड़ लोगों को आधार कार्ड मुहैया कराने पर 160 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। सोनोवाल ने सामान्य प्रशासन विभाग से जागरुकता अभियान शुरू करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधार कार्ड के महत्व के बारे में लोगों को स्ट्रीट प्ले और शॉर्ट फिल्मों के जरिए जागरुक करना चाहिए। आपको बता दें कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत तीन जिलों गोलाघाट, नगांव और सोनितपुर में नामांकन प्रक्रिया शुरू की गई थी लेकिन इस आशंका के चलते इसे आगे नहीं बढ़ाया गया कि अवैध प्रवासी आधार


22 स्वास्थ्य

18 - 24 सितंबर 2017

पारिवारिक तनाव से बढ़ रहा बच्चों में एडीएचडी रोग बाल

रोग

भारत में लगभग 1.6 प्रतिशत से 12.2 प्रतिशत तक बच्चों में एडीएचडी की समस्या पाई जाती है

ध्ययन के अनुसार, भारत में लगभग 1.6 प्रतिशत से 12.2 प्रतिशत तक बच्चों में एडीएचडी की समस्या पाई जाती है। अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिस्ऑर्डर अथवा ध्यान की कमी और अत्यधिक सक्रियता की बीमारी को एडीएचडी कहा जाता है। एडीएचडी की समस्या ऐसे परिवारों में अधिक बिगड़ सकती है, जहां घर में तनाव का वातावरण रहता है और जहां पढ़ाई पर अधिक जोर देने की प्रवृत्ति रहती है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के मुताबिक, एडीएचडी की समस्या ज्यादातर प्री-स्कूल या केजी कक्षाओं के बच्चों में होती है। कुछ बच्चों में, किशोरावस्था की शुरुआत में स्थिति खराब हो सकती है। यह वयस्कों में भी हो सकता है। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल ने कहा, "एडीएचडी वाले बच्चे बेहद सक्रिय और कुछ अन्य व्यवहारगत समस्याएं प्रदर्शित कर सकते हैं। उनकी देखभाल करना और उन्हें कुछ सिखाना

विद्यार्थी योजना

12वीं के पूर्व छात्रों को भी विद्यार्थी योजना का लाभ

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया कि मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना का लाभ पूर्व में 12वीं पास छात्रों को भी मिलेगा

मुश्किल हो जाता है। वे स्कूल में भी जल्दी फिट नहीं हो पाते हैं और कोई न कोई शरारत करते रहते हैं। यदि इस कंडीशन को शुरू में ही काबू न किया जाए तो यह जीवन में बाद में समस्याएं पैदा कर

सकती हैं।" उन्होंने कहा, "यद्यपि, एडीएचडी का कोई इलाज नहीं है, परंतु उपचार के लक्षणों को कम करने और ऐसे बच्चों की कार्यप्रणाली में सुधार के उपाय किए जा सकते हैं। कुछ उपचार विकल्पों में दवाएं, मनोचिकित्सा, शिक्षा या प्रशिक्षण या इनका मिश्रण शामिल है। एडीएचडी के लक्षणों को अक्सर तीन श्रेणियों में बांटा जाता है : ध्यान न देना, जरूरत से अधिक सक्रियता और असंतोष। चीनी, टीवी देखने, गरीबी या फूड एलर्जी से एडीएचडी नहीं होता।" डॉ. अग्रवाल ने बताया, "शिक्षा, समर्थन और रचनात्मकता से ऐसे बच्चों में इस स्थिति का प्रबंधन करने में काफी मदद मिल सकती है। यद्यपि एडीएचडी वाले बच्चों के साथ ठीक से रह पाना एक चुनौती है, लेकिन समय को प्राथमिकता देने और हर चीज टाइम टेबल के हिसाब से करने पर मदद मिल सकती है। माता-पिता को यह याद रखना चाहिए कि एडीएचडी से आपके बच्चे की बुद्धि या क्षमता का पता नहीं चल पाता है। बच्चे की शक्तियों का पता लगाएं और बेहतर परिणामों के लिए उन शक्तियों पर ध्यान दें।" (आईएएनएस)

ध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया कि मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना का लाभ इस वर्ष चिन्हित शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश लेने वाले उन विद्यार्थियों को भी मिलेगा, जिन्होंने 12वीं की परीक्षा पूर्व के वर्षों में 75 प्रतिशत से अधिक अंकों से उत्तीर्ण की है। मुख्यमंत्री चौहान ने युवाओं का आह्वान किया कि असाधारण, सफल और सार्थक जीवन को लक्ष्य बनाएं। रोडमैप तैयार करें। कठोर परिश्रम करें। ऊंचा सोचें। व्यक्ति जैसा सोचता है, वैसा ही बन जाता है। युवा ठान ले तो कुछ भी असंभव नहीं है। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के तहत उन छात्रों को लाभ मिलता है, जिन्होंने 12वीं की परीक्षा में 75 फीसदी से अधिक अंक लाए हैं। प्रमुख संस्थानों में दाखिला लेने पर फीस का खर्च सरकार उठाती है। उन्होंने युवाओं को सलाह देते हुए कहा कि अंधानुकरण उचित नहीं है। प्रदेश में युवाओं के लिए अनंत संभावनाएं हैं। नए निवेश से रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। स्व-रोजगार के भी भरपूर अवसर हैं। खाद्य प्र-संस्करण इकाइयां पंचायतवार लगाई जा सकती हैं। चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का न्यू इंडिया युवा बनाएंगे। उनके नवाचारों, उद्यमिता प्रयासों को सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा। युवाओं का आह्वान किया कि वे रचनात्मक कार्यो से जुड़ें। पौधरोपण, नदी जल संरक्षण, पर्यावरण चेतना, शिक्षा की गुणवत्ता आदि का कोई भी एक कार्य अवश्य करें। (आईएएनएस)


18 - 24 सितंबर 2017

छोटे बच्चों को नहीं दें गाय का दूध

अब डिजिटल होगा असम का हर गांव

विशेषज्ञों का कहना है कि एक साल से कम उम्र के बच्चों के लिए गाय का दूध नहीं दिया जाना चाहिए

डिजिटल भारत के प्रधानमंत्री के सपने को आगे बढ़ाने के लिए व राज्य के कोने कोने को इंटरनेट से जोड़ने के लिए असम सरकार ने गूगल इंडिया के साथ करार किया है

वाहाटी के जनता भवन के सम्मेलन कक्ष में राज्य सरकार तथा गूगल के बिच एक समझौते पर हस्ताक्षर हुआ। इस मौके पर मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि सरकार राज्य के 26 हजार गांवों और डेढ़ हजार चाय बागानों में इंटरनेट कनेक्शन प्रदान करने के लिए काम करेगी जिससे लोगो में इंटरनेट को लेकर ज्ञान बढ़े। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार स्टार्टअप और स्टैंडअप योजना को सफल बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है जो तकनीक योजना की सफलता में अहम भूमिका अदा करेगी। वहीं दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के लिए गुवाहाटी को प्रवेश द्वार के रूप में पेश करने का जरिया भी बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखकर काम कर रही है और कौशल विकास के साथ वैश्विक शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए गूगल के साथ यह करार अहम साबित होगा। सोनोवाल ने कहा की प्रौद्योगिकी के बिना इस सफलता को हासिल नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने सुचना प्रौद्योगिकी विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी मंजूर करने के साथ गांवों के अनुकूल बनाने के लिए कदम उठाने के लिए कहा जिससे ग्रामीण विकास में मदद मिल सके। (गुवाहाटी ब्यूरो)

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स्वास्थ्य शोध

डिजिटल असम

गु

स्वास्थ्य

क वर्ष की उम्र से नीचे के बच्चों को गाय का दूध देने से उनके श्वसन और पाचन तंत्र में एलर्जी संबंधी रोगों के बढ़ने का जोखिम होता है, क्योंकि वह दूध में मौजूद प्रोटीन को पचा नहीं पाते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि जिन शिशुओं को मां का

दूध नहीं मिलता तो उनके स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए पोषण के वैकल्पिक रूप की आवश्यकता होती है। बाल विशेषज्ञों का कहना है कि अगर गाय का दूध इस प्रारंभिक अवधि में दिया जाता है तो लौह तत्व की निम्न सांद्रता से एनीमिया का खतरा

हो सकता है। डैनोन इंडिया की हेल्थ एंड न्यूट्रीशन साइंस विभाग के नंदन जोशी ने कहा, "गाय का दूध सदियों से हमारी संस्कृति से जुड़ा हुआ है, लेकिन यह एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नहीं दिया जाना चाहिए। यह शिशु की अपरिपक्व किडनी पर तनाव डाल सकता है और पचाने में भी मुश्किल होता है।" वहीं, एक साल से ऊपर के शिशुओं को घर का अनुपूरक भोजन खिलाया जा सकता है, जबकि एक साल से कम उम्र के बच्चों को विशेष हाइड्रोलाइज्ड और एमिनो एसिड-आधारित भोजन की जरूरत होती है जिससे एलर्जी न होती हो। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) में पता चला कि केवल 40 प्रतिशत बच्चों को समय पर अनुपूरक भोजन मिल पाता है, जबकि केवल 10 प्रतिशत बच्चे ही छह से 23 महीने के बीच पर्याप्त आहार प्राप्त कर पाते हैं। भारत में अधिकतर शिशुओं को गाय का दूध दिया जाता है, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कम होती है। रैपिड सर्वे ऑन चिल्ड्रेन (आरएसओसी) में पता चला कि एक साल से कम उम्र के स्तनपान से वंचित 42 फीसदी शिशुओं को गाय का दूध दिया जाता है। (आईएएनएस)

मणिपुर स्टार्टअप

रोजगारकर्मी नहीं रोजगार सृजक बनें युवा : बीरेन सिंह

मणिपुर में स्टार्टअप को बढ़वा दे रही है प्रदेश सरकार

णिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा है कि सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था सुधारने की दिशा में स्थानीय उद्यमियों को आगे बढ़ाने के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों के निर्यात से उद्यमियों को सहायता मिलेगी और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। रोमी इंडस्ट्रीज मेगा इवेंट-2017 के उद्घाटन के मौके पर उन्होंने कहा कि स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए स्टार्टअप इंडिया की अगुआई में राज्य सरकार 35 करोड़ रुपए पहले ही आवंटित कर चुकी है। उन्होंने कहा कि उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुआई वाली केन्द्र सरकार पहले ही स्टार्टअप इंडिया अभियान की शुरुआत कर चुकी है। इसका लक्ष्य साहसी उद्यमियों को प्रोत्साहित करना तथा

बेरोजगार युवाओं के लिये रोजगार सृजित करना है। मुख्यमंत्री ने बेरोजगार युवाओं से रोजगारकर्मी बनने की अपेक्षा रोजगार सृजक बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि हमें अपने आर्थिक फायदे या आराम के बारे में सोचने के साथ-साथ राज्य की समृद्धि और भले के लिए भी काम करना होगा। उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार योजनाओं और नीतियों को जनता से रूबरू कराएगी। उन्होंने सभी बैंकों से भी स्थानीय उद्यमियों को व्यापार शुरू करने के लिए ऋण प्रदान कर उन्हें प्रोत्साहित करने की अपील की। सरकार की प्राथमिकता जनसेवा से बढ़कर और कुछ नहीं है। युवाओं की क्षमताओं को निखारने के लिए प्रदेश सरकार ने कई कौशल विकास कार्यक्रमों की शुरुआत की है। प्रशिक्षित करने के बाद बेरोजगार युवाओं के लिए

रोजगार के नए मार्ग खुलेंगे। इन कार्यक्रमों से प्रदेश में रोजगार,उत्पादन क्षमता तथा औसत आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सूक्ष्म उद्योगों की प्रगति के लिए सुव्यवस्थित और उचित योजना की सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने प्रदेश के युवाओं से हिम्मत नहीं हारने की अपील करते हुए कहा कि नई सरकार सभी संभावनाओं को प्रोत्साहित करने, सहायता करने और आगे बढ़ाने के लिए हमेशा तैयार है। सिंह ने राज्य के विकास के लिए लोगों से सहयोग और समर्थन देने की अपील की। प्रदेश में रह रहे विभिन्न समुदायों के बीच मतभेद उत्पन्न कर प्रदेश की एकता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। (गुवाहाटी ब्यूरो)


24 लोक

18 - 24 सितंबर 2017

लोक उत्सव

पर्यटकों को लुभाता है सापुतारा मॉनसून उत्सव

इस उत्सव के दौरान स्थानीय डांग लोक जनजाति को देश-विदेश के लोगों से मिलने का मौका मिलता है तथा उनके लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं

गु

जरात के इकलौते हिल स्टेशन सापुतारा में एक महीने तक चलने वाला मानसून उत्सव पर्यटकों एवं घूमने-फिरने के शौकीन लोगों के लिए आकर्षक जगह है। मॉनसून उत्सव में रिमझिम बारिश के बीच प्रदर्शनी, साहसिक गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, भोजन महोत्सव, इंटरैक्विट, खेल, प्रतियोगिताएं, फ्लैश मॉब तो पर्यटकों को आकर्षित करते ही हैं साथ ही बोट राइडिंग और रोप-वे का लुत्फ भी उठाया जा सकता है। एक महीने तक चलने वाला मानसून उत्सव इस साल 10 सितंबर को खत्म हो गया, लेकिन पहाड़ियों में आनंद का लुत्फ उठाने वाले अगले साल मानसून उत्सव में शामिल हो सकते हैं। गुजरात पर्यटन निगम के प्रबंध निदेशक जेनू देवान ने कहा, "टूरिज्म ऑफ गुजरात लि. (टीसीजीएल) पिछले सात सालों से सापुतारा मॉनसून उत्सव का आयोजन कर रहा है, जो सापुतारा के सुंदर मॉनसून का आनंद लेने के लिए पर्यटकों को प्रोत्साहित करती है। इस उत्सव के दौरान कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन किया

जाता है, जिनमें प्रदर्शनी, साहसिक गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, भोजन महोत्सव, इंटरैक्विट, खेल, प्रतियोगिताएं, फ्लैश मॉब समेत कई कार्यक्रम शामिल हैं।" उन्होंने बताया कि इस उत्सव के दौरान पर्यटकों को सापुतारा लेक, गांधी शिखर, इको प्वाइंट, वैली व्यू प्वाइंट, गिरा, गिरमाल और मायादेवी जलप्रपात, शाबरी धाम, पंपा सरोवर, पांडव गुफा, उनाई मंदिर, सितवन, रतज प्राप, धुपगढ़ के निकट त्रिधारा, हटगध किला, वन नर्सरी और आदिवासी संग्रहालय के गाइडेड टूर पर ले जाया जाता है। देवान ने कहा, "टीसीजीएल द्वारा हर साल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, ताकि सापुतारा को एक हिल स्टेशन के रूप में बढ़ावा मिले और पर्यटकों को इस बारे में जानकारी मिले कि यहां कई सारे प्राकृतिक और सांस्कृतिक आर्कषण हैं। मॉनसून उत्सव के कारण सापुतारा अब नागपुर, पुणे, मुंबई और नासिक जैसे नजदीकी शहरों के पर्यटकों का महत्वपूर्ण गंतव्य बन चुका है।" उन्होंने कहा, "इस उत्सव के दौरान स्थानीय

डांग लोक जनजाति को देशविदेश के लोगों से मिलने का मौका मिलता है तथा उनके लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं। इस दौरान कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें पर्यटकों को स्थायीन जनजाति के जीवनशैली की जानकारी मिलती है।" उन्होंने बताया कि गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने सापुतारा में पर्यटन विकास के लिए सापुतारा क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठन किया है, जो पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 419.1 हेक्टेयर क्षेत्र में नियोजित विकास की योजनाएं बना रही है। सापुतारा गुजरात का इकलौता हिल स्टेशन है, जो समुद्र से 3,000 फीट की ऊंचाई पर है। गुजरात और उसके आसपास के इलाकों में यह हिल स्टेशन काफी लोकप्रिय है। यह पश्चिमी घाट के डांग जंगल क्षेत्र में एक सपाट इलाके में है, जो सहयाद्री पर्वत श्रंखला का भाग है। माना जाता है कि यह सांपों के निवास स्थान के ऊपर स्थित है। स्थानीय समुदाय होली के दिन यहां सर्पगंगा नदी के किनारे सांपों की तस्वीरों की पूजा करती है। सापुतारा को एक नियोजित हिल स्टेशन के रूप में विकसित किया गया है। जहां पर्यटन विभाग का चौबीसो घंटे चलने वाला सूचना केंद्र है। इसके अलावा गुजरात पर्यटन विभाग का गेस्ट हाउस, गार्डन, स्वीमिंग पूल, बोल क्लब, ऑडिटोरियम, रोप वे और संग्रहालय भी है। यहां का तापमान गर्मियों में अधिकतम 32 डिग्री सेल्सियस से न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस होता है जबकि सर्दियों के दौरान अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमश: 16 डिग्री सेल्सियस और 10 डिग्री सेल्सियस होता है। मॉनसून (जुलाई से सितंबर) में यहां सालाना 255 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की जाती है। यही कारण है कि हर साल सापुतारा मॉनसून उत्सव का आयोजन किया जाता है। (आईएएनएएस)

सौर अध्ययन

तारे के कारण धूमकेतु धरती से टकरा सकते हैं 24 तारे हमारे सौर मंडल की ओर बढ़ रहे और ऐसे में अगले लाखों सालों में वे धूमकेतुओं को छितरा देंगे

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ज्ञानिकों का कहना है कि 24 तारे हमारे सौरमंडल की ओर बढ़ रहे और ऐसे में अगले लाखों सालों में वे धूमकेतुओं को छितरा सकते हैं, फलस्वरुप वे धरती से टकराएंगे। जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोनोमी के अनुसंधानकर्ताओं ने इस बात की गणना की कि कैसे तारे भटककर आउर्ट क्लाड में पहुंच जाते हैं। आउर्ट क्लाउड सौर तंत्र के चारों ओर बर्फीली वस्तुओं का एक आवरण है। अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि बिल्कुल इतने करीब आने से ये तारे चक्कर काट रहे इन धूमकेतुओं को इतना तेज धक्का दे सकते हैं वे सौरमंडल के अंदर आ सकते हैं और ऐसे में उनके धरती से टकराने का जोखिम पैदा होगा। इस टीम ने अनुमान लगाया कि अगले दस लाख सालों में करीब 19-24 तारे 3.26 प्रकाश वर्ष दूरी के अंदर आ जाएंगे, यानी इतने नजदीक आ जाएंगे कि धूमकेतुओं को अपने रास्ते से भटका सकते हैं। मैक्स प्लांक के कोरिन बैलर जोंस ने ‘गार्डियन’ से कहा, ‘इस दूरी पर किसी वस्तु के आने से निश्चित ही आपको चिंता होनी चाहिए।’ यह अध्ययन अस्ट्रोनोमी एंड एस्ट्रोफीजिक्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है।


18 - 24 सितंबर 2017

ड्रायपिटिस कलामी

अब्दुल कलाम के नाम पर पौधे की नई प्रजाति का नामकरण

वैज्ञानिकों ने पौधे की एक नई प्रजाति का पता लगाया है। इस पौधे से जुड़ा शोधपरक लेख न्यूजीलैंड से प्रकाशित होने वाले ‘फाइटोटेक्सा’ जर्नल में प्रकाशित हुआ

श्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित बोटैनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (बीएसआई) के वैज्ञानिकों ने ‘यूफोर्विएसी’ कुल के एक नए पौधे की खोज की है। उन्होंने देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नाम पर इस पौधे का नाम ‘ड्रायपिटिस कलामी’ रखा है। पहली बार किसी पौधे की प्रजाति का नामकरण कलाम के नाम पर किया गया है। इस पौधे की खोज बीएसआई के वैज्ञानिक डॉ. गोपाल कृष्ण, के. कार्तिकेयन, विल्सन एरिसडेसॉन और तापस चक्रवर्ती की टीम ने की है। पौधे की इस प्रजाति को पश्चिम बंगाल के बक्सा राष्ट्रीय उद्यान एवं जालदापारा राष्ट्रीय उद्यान से खोजा गया है। इसका नमूना बीएसआई के तहत आने वाले सेंट्रल नेशनल हरबेरियम (सीएनएच) हावड़ा में सहेज कर रखा गया है। इस अहम खोज में शामिल रहे वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. गोपाल कृष्ण ने बताया कि इस पौधे के रासायनिक घटक एवं औषधीय जानकारी के लिए आगे भी शोध करने की जरूरत है। इस पौधे से जुड़ा शोधपरक लेख न्यूजीलैंड से प्रकाशित होने वाले ‘फाइटोटेक्सा’ जर्नल में प्रकाशित हुआ था। जर्नल में शोधकर्ताओं की टीम ने बताया है कि बक्सा राष्ट्रीय उद्यान और जालदापारा राष्ट्रीय उद्यान में वनस्पतियों की सूची बनाते वक्त उपउष्णकटिबंधीय नम अर्ध-सदाबहार वनों की एक गीली जगह से ‘ड्रायपिटिस’ के कुछ नमूने मिले।

नमूनों के आलोचनात्मक परीक्षण और उससे जुड़े दस्तावेजों के अध्ययन से पता चला कि इस प्रजाति की खोज अब तक नहीं हुई थी और कहीं इसका जिक्र भी नहीं मिलता है। कृष्ण ने बताया कि इसी के बाद तय किया गया कि कलाम के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए पौधे की इस प्रजाति का नाम ‘ड्रायपिटिस कलामी’ रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि इस पौधे के क्या फायदे हैं और औषधि के लिहाज से यह कितनी लाभदायक है, इस पर शोध चल रहा है। गौरतलब है कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ ने कुछ महीने पहले अपने वैज्ञानिकों की ओर से खोजे गए एक जीवाणु को अंतरिक्ष वैज्ञानिक रहे कलाम का नाम दिया था। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के फिल्टरों में खोजे गए इस जीवाणु को ‘नासा’ ने कलाम के सम्मान के तौर पर ‘सोलीबैकिलस कलामी’ नाम दिया था। (एजेंसी)

स्वास्थ्य

गुड न्यूज

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शोध

वैज्ञानिकों ने बनाया शरीर के अंदर देखने वाला कैमरा

यह तकनीक इतनी संवेदनशील है कि यह प्रकाश के छोटे निशान का भी पता लगा सकती है, जो शरीर के ऊतकों के माध्यम से एंडोस्कोप से गुजरती है

ब्रिटेनेन मेंएकवैज्ञानिकोंऐसे

कैमरे को विकसित किया है जिसके जरिए डॉक्टर इंसानी शरीर के अंदर देख सकते हैं। बायोमेडिकल ऑप्टिक्स एक्सप्रेस के जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, डॉक्टरों के चिकित्सा उपकरणों को ट्रैक करने में मदद करने के लिए बनाए गए इस डिवाइस को एंडोस्कोप नाम से जाना जाता है जो कि आंतरिक स्थितियों की जांच करने के लिए उपयोग किया जाएगा, यह नया डिवाइस शरीर के अंदर प्रकाश के स्रोतों का पता लगा सकता है। स्कॉटलैंड में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर केव धालीवाल ने कहा, "यह एक बेहतर तकनीक है जो हमें मानव शरीर के अंदर देखने की अनुमति देती है. इसमें विभिन्न अनुप्रयोगों को करने के लिए विशाल क्षमता है।" धलीवाल ने कहा कि एक्स-रे या अन्य महंगी विधियों का उपयोग किए बिना या फिर इसे बिना गाइड किए ट्रैक कर पाना संभव ही नहीं है कि एन्डोस्कोप शरीर में किस जगह स्थित है। रोशनी को एंडोस्कोप के जरिए शरीर से

गुजारा जाता है, लेकिन यह आमतौर पर सीधे जाने के बजाय ऊतक और अंगों से टकराते हुए या उनके ऊपर से कूदते हुए निकल जाती है। इससे एन्डोस्कोप कहां है इसका स्पष्ट चित्र नहीं मिल पाता है। नए कैमरे में उन्नत तकनीक का फायदा उठाया गया है जिसके जरिए प्रकाश के अलग-अलग कणों का पता लगाया जा सकता है, जिसे फोटोन कहा जाता है। यह तकनीक इतनी संवेदनशील है कि यह प्रकाश के छोटे निशान का भी पता लगा सकती है, जो शरीर के ऊतकों के माध्यम से एंडोस्कोप से गुजरती है। अध्ययन में पता चला है कि प्रारंभिक परीक्षणों में प्रोटोटाइप डिवाइस सामान्य प्रकाश की स्थिति में ऊतक के 20 सेंटीमीटर के माध्यम से बिंदु प्रकाश स्रोत के स्थान को ट्रैक कर सकता है। (एजेंसी)

तारामंडल

शोध

आकाशगंगा में मिला बड़ा ब्लैक होल यदि इसकी पुष्टि हो जाती है तो यह आकाशगंगा में पाया जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा ब्लैक होल होगा

काशगंगा के केंद्र के पास एक बड़ा सा ब्लैक होल पाया गया है। हमारे सूर्य से लगभग एक लाख गुना बड़ा यह ब्लैक होल एक

जहरीली गैस के बादल से घिरा हुआ पाया गया है। यदि इसकी पुष्टि हो जाती है तो यह आकाशगंगा में पाया जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा ब्लैक होल

होगा। इससे बड़ा ब्लैकहोल सैगीटेरियस ए है, जो कि तारामंडल के बिल्कुल केंद्र में स्थित है। जापान की कीओ यूनिवर्सिटी के अंतरिक्षयात्री चिली में अल्मा टेलीस्कोप का इस्तेमाल करके गैसों के एक बादल का अध्ययन कर रहे थे और उसकी गैसों की गति को समझने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने पाया कि दीर्घवृत्ताकार बादल के अणु बेहद तीव्र गुरूत्वीय बलों द्वारा खींचे जा रहे थे। यह बादल आकाशगंगा के केंद्र से 200 प्रकाशवर्ष दूर था और 150 खरब किलोमीटर के दायरे में फैला था। कंप्यूटर मॉडलों के अनुसार, इसका सबसे

अधिक संभावित कारण एक ब्लैक होल है, जो 1.4 खरब किलोमीटर से अधिक का नहीं है। वैज्ञानिकों ने बादल के केंद्र से आने वाली रेडियो तरंगों की भी पहचान की। ये तरंगें ब्लैक होल की मौजूदगी का संकेत देती हैं। कीओ यूनिवर्सिटी के अंतरिक्षयात्री तोमोहारू ओका ने कहा, ‘आकाशगंगा में मध्यम द्रव्यमान वाले ब्लैक होल की यह पहली पहचान है।’ ओका ने ‘द गार्जियन’ को बताया, यह नया ब्लैकहोल किसी पुराने छोटे तारामंडल का मूल भी हो सकता है। (एजेंसी)


26 ऊर्जा

18 - 24 सितंबर 2017

हिमाचल प्रदेश अब इको-फ्रेंडली राज्यों में शुमार उज्ज्वला योजना

एक नजर

14 लाख परिवार पहले से एल.पी.जी. गैस प्रयोग कर रहे हैं साल के अंत तक राज्यों में 50 नई गैस एजेंसियां खोली जाएंगी गैस रिफिल के 2 नए बॉटलिंग प्लांट खोले जाएंगे

जी. कनेक्शन प्रदपन करने का लक्ष्य मात्र आठ महीनों में ही पूरा कर लिया गया। खुद प्रधानमंत्री भी इस योजना की सफलता से काफी संतुष्ट हैं और वे इसका जिक्र अपनी सरकार की कामयाबी के तौर पर विभिन्न मौकों पर करते रहते हैं।

सबको लाभ

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी क्षेत्रों में ईंधन के लिए उपयोग में लाई जा रही वनों की लकड़ी के प्रयोग की प्रथा के लिए वरदान साबित हो रही है

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माचल प्रदेश में पर्वतीय और वन क्षेत्र काफी है। इस कारण जहां इस राज्य को प्रकृति का अप्रतिम वरदान प्राप्त है, वहीं इसकी सुरक्षा नए दौर में वहां एक चुनौती का रूप भी ले चुकी है। प्रदेश में पर्वतीय और वन क्षेत्रों में लकड़ियों के लिए पेड़ों की कटाई एक बड़ी समस्या रही है। ऐसा नहीं कि वहां यह सिर्फ व्यावसायिक कारणों से ही होता है। असल में लकड़ियों को सस्ते ईंधन के साधन के तौर पर देखने की एक नई परंपरा ही विकसित हो गई है। इस कारण वहां पर्यावरणीय स्थिति में तो गंभीर बदलाव आ ही रहे हैं, खासतौर पर घरों में महिलाओं के स्वास्थ्य पर गहरा असर देखा जा रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी क्षेत्रों में ईंधन के लिए उपयोग में लाई जा रही वनों की लकड़ी के प्रयोग की प्रथा के लिए वरदान साबित हो रही है।

सोलन से शुरुआत

हिमाचल प्रदेश के सोलन में शुरू की गई इस योजना के पहले चरण में 200 परिवारों को मुफ्त एल.पी.जी. कनेक्शन प्रदान किए गए तथा 1,450 गरीब परिवारों को पंजीकृत किया गया। हिमाचल प्रदेश राज्य के गरीबी के नीचे रहने वाले सभी परिवारों को प्रधनमंत्री उज्वला योजना के तहत आगामी 2 सालों में मुफ्त गैस कनेक्शन बांटे जाएंगे जिससे आम जनमानस की जंगली लकड़ी पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी तथा कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा।

एल.पी.जी. का इस्तेमाल

वर्ष 2011 के सर्वेक्षण के अनुसार हिमाचल प्रदेश के कुल 16 लाख परिवारों में से 14 लाख परिवार घरेलू ईंधन के लिए एल.पी.जी. कनेक्शन के उपयोग कर रहे हैं तथा बाकी बचे 2 लाख परिवारों को आगामी 2 सालों के भीतर इस कार्यक्रम के अन्तर्गत कवर कर लिया जाएगा। हिमाचल प्रदेश में औसतन 80 प्रतिशत आबादी गैस कनेक्शन धारक है, जबकि बिहार, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में मात्र 60 प्रतिशत जनसंख्या ही एल.पी.जी. गैस कनेक्शन के अन्तर्गत कवर की गई है। हिमाचल में घरेलू ईंधन के लिए गैस का इस्तेमाल करने वालों की औसतन संख्या राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत पहाड़ी राज्य के गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 2,82,370 परिवारों को आगामी दो वर्षो में मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे तथा चूल्हा आदि उपकरणों को आसान ब्याज मुक्त किश्तों पर प्रदान किया जाएगा। राज्य के जनमानस को एल.पी.जी. गैस सुविधा प्रदान करने के लिए इस समय 172 डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर कार्यरत हैं तथा इस साल के अंत तक 50 नई गैस एजेंसियां राज्य में खोली जाएंगी। राज्य में गैस रिफिल के 2 नए बोटलिंग प्लांट खोले जाएंगे

तथा नई ढांचागत सुविधाओं के विकसित होने से राज्य के 500 युवाओं को रोजगार के साधन उपलब्धध होंगे।

प्रदूषण और रोगों से मुक्ति

राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में धुएं के प्रदूषण में होने वाले अस्थमा आदि रोगों से मुक्ति मिलेगी तथा राज्य में ईंधन की लकड़ी के लिए वनों पर दवाब कम किया जा सकेगा, जिससे राज्य में हरियाली बढ़ेगी तथा राज्य के नागरिकों को स्वच्छ वातावरण तथा साफ हवा मिलेगी। राज्य में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना राज्य के सोलन जिला में शुरू की गई है। प्रधानमंत्री योजना से राज्य देश के सर्वाधिक इको-फ्रेंडली राज्यों में शामिल हो गया है। इस योजना से राज्य के गरीबी रेखा से रहने वाले 3 लाख गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं जबकि गैस चूल्हा जैसे उपकरण खरीदने के लिए आसान किश्तों पर धन मुहैया करवाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया में शुरू किए गए इस फ्लैगशिप कार्यक्रम में आगामी तीन सालों में देश में 85 करोड़ गरीब परिवारों को एल.पी.जी. कनेक्शन के माध्यम से स्वच्छ ईंधन प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है तथा पहले साल के लिए निर्धारित 1.5 करोड़ एल.पी.

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत पहाड़ी राज्य के गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 2,82,370 परिवारों को आगामी दो वर्षो में मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे तथा चूल्हा आदि उपकरणों को आसान ब्याज मुक्त किश्तों पर प्रदान किया जाएगा

हिमाचल सरकार ने प्रदेश को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए ‘माता शवरी सशक्तिकरण योजना’ शुरू की थी, जिसके तहत अनुसूचित जाति की गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन प्राप्त करने के लिए 1300 रुपए की अधिकतम राशि की सीलिंग के साथ 50 प्रतिशत अनुदान सहायता राशि प्रदान की जा रही थी। राज्य के प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र से 75 परिवारों को लाभान्वित करने के लक्ष्य से वार्षिक 5100 परिवारों को इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया था। पर केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अन्तर्गत पूरे समाज के गरीब वर्ग की महिलाओं को कवर किया गया है, जो कि पूरे समाज को लाभान्वित करेगा।

गैस कंपनियों को मदद

हालांकि गैस वितरण कंपनियां राज्य की पूरी जनसंख्या को पहले से ही एल.पी.जी. गैस सुविधा के अंतर्गत लाने का भरसक प्रयत्न करती रही हैं, लेकिन गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों के आर्थिक संकट तथा सीमित ढांचागत सुविधाओं की कमी से ये कंपनियां अपना लक्ष्य प्राप्त करने में कामयाब नहीं हो सकीं। अब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के प्रदान किए गए बजट प्रावधान से यह स्वप्न हकीकत में बदलता नजर आ रहा है।

गरीब महिलाओं को प्राथमिकता

राज्य के बढ़ते औद्योगिकरण से भी हवा की गुणवता पर काफी विपरीत प्रभाव पड़ा है तथा राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर काफी ऊंचा रिकार्ड किया गया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत पूरे देश में 5 करोड़ गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे तथा इस योजना के शुरू होने के पहले वर्ष में ही गरीबी रेखा के अंतर्गत आने वाली 2.25 करोड़ महिलाओं को पंजीकृत किया गया है। आज देश में एल.पी.जी. उपभोक्ताओं की संख्या 20 करोड़ पार कर गई है। जबकि वर्ष 2014 में मात्र 14 करोड़ लोग एल.पी. जी. सुविधा का उपयोग कर रहे थे। आगामी तीन वर्षो में केंद्र सरकार ने इस आगामी तीन वर्षो में सुविधा के सफल कार्यन्वन के लिए 8000 करोड़ रुपए की धनराशि का प्रावधान किया है।


18 - 24 सितंबर 2017

अभिनव

प्रेरक

27

प्रयोग

रोजगार का जरिया

बांस की साइकिल

वायुसेना से सेवानिवृत्त शशिशेखर पाठक ने ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने और रोजगार देने के लिए शुरू किया बांस से साइकिल बनाने का अभिनव प्रयोग

एसएसबी ब्यूरो

रकार की तरफ से इन दिनों स्टार्ट अप को लेकर कई सारे पहल हो रहे हैं। कमाल की बात है देश में नवाचार की प्रवृति शहरों से ज्यादा गांवों में देखी जाती है। यह अलग बात है कि बावजूद इस प्रवृति के गांवों से शहरों की ओर रोजगार के लिए पलायन जारी है। ऐसे में महाराष्ट्र का एक युवक ऐसा है, जो गांव में रहने वाले ग्रामीणों को रोजगार के साथ हुनर भी सिखा रहा है। हम बात कर रहे हैं वायुसेना से सेवानिवृत्त शशिशेखर पाठक की। शशिशेखर बताते हैं, ‘एयरफोर्स में पायलट के पद पर काम करते थे। 10 साल देश की सेवा करने के बाद रिटायरमेंट ले लिया। रिटायरमेंट के बाद कुछ

करने की चाह शुरू से ही थी। मैंने पुणे के दक्षिण में कुछ जमीन खरीदी थी। जहां जमीन खरीदी, वो गांव कितना अविकसित है, इसका इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज भी उस गांव में मोबाइल के सिग्नल ठीक से नहीं आते हैं।’ गांव के लोगों को रोजगार देने के बारे में वे आगे बताते हैं कि जब भी मैं गांव जाता तो वहां के लोग मुझसे कहते 'दादा कोई काम दिला दो'। उस दौरान मैं यह सोचता रहता था कि मैं उनके लिए क्या कर सकता हूं। उस गांव में बांस की खेती होती है, तो हमने ये सोचना शुरू किया कि बांस से ऐसा हम क्या बना सकते हैं कि उनको रोजगार मिले। मुझे कहीं से पता चला कि विदेशों में बांस की साइकिल बनती है तो उस पर हमने काम करना शुरू कर दिया। करीब दो साल लगा मुझे उसे सीखने में।

‘दो साल के बाद हमने एक साइकिल बनाई, जिसकी लोगों ने तारीफ की। हमें बेहतर रिस्पांस मिला। हमारा उद्देश्य है कि हम जो बांस की साइकिल बनाएं, उसकी क्वालिटी विदेशों में बन रही साइकिलों से भी अच्छी हो’ - शशिशेखर पाठक

उन्होंने बताया कि हालांकि सारी चीजें गांव के युवक नहीं सीख पाते हैं, क्योंकि कुछ टेक्निकल चीजें होती हैं, जो वो नहीं कर सकते है। साइकिल बनाने के लिए हमें अच्छी क्वालिटी के बांस की जरूरत होती है। इसीलिए हम गांव के लोगों से थोड़ा मंहगे दाम में बांस खरीद लेते हैं, जिससे उन्हें भी खुशी मिलती है कि उनका बांस मंहगे दाम में बिका है। शशिशेखर की कोशिश है कि जल्द ही वे इसी गांव में साइकिल बनाना शुरू करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके। उन्होंने बताया कि इस काम की शुरुआत उन्होंने चार साल पहले की थी। इस बीच हमने करीब दस साइकिलें बनाई हैं। बांस की साइकिल का जो फ्रेम बनाया जाता है, उसका वजन लगभग 2 किलोग्राम के आस-पास होता है। इसीलिए ये आयरन की साइकिल से हल्की और ज्यादा आरामदायक होती है। शशिशेखर ने बताया कि वे लगन से तो जरूर काम कर रहे हैं पर अभी बांस की साइकिल के लिए लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि हमारी साइकिल की क्वालिटी आयरन साइकिल से भी ज्यादा अच्छी है। उन्होंने बताया

एक नजर

रिटार्यड एयरफोर्स पायलट अब जुटे समाजसेवा में विदेशों में इस तरह की साइकिलें पहले से बनती हैं

साइकिल के लिए बांस की खरीद से किसानों की बढ़ी आमदनी

कि अभी इसको बनाने में लागत ज्यादा आ रही है। लेकिन उनकी कोशिश है कि जल्द ही इसकी लागत को कम कर दिया जाएगा। अभी जो लोग शशिशेखर के साथ जुड़े हैं, वे पूरे समय उनके साथ काम नहीं करते हैं। दरअसल चावल की खेती के बाद गांव के किसान खाली हो जाते हैं तो इन्हीं दिनों वे शशिशेखर के साथ जुड़कर काम करते हैं। शशिशेखर उन्हें काम के मुताबिक मेहनताना देते हैं। सब कुछ ठीक रहा तो अगले कुछ सालों में यह गांव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्टार्ट अप से जुड़े विजन का मॉडल गांव होगा।


28 गुड न्यूज

18 - 24 सितंबर 2017

अंटार्कटिका ग्लेशियर

अंटार्कटिका की गर्म गुफाओं में नए जीव जगत की उम्मीद

माउंट इरेबस की अधिकतक गुफाओं से मिले डीएनए अंटार्कटिका में अन्य स्थानों पर पाए जाने वाले मॉस, शैवाल और अकशेरुकी जीवों सहित पेड़ों और जानवरों के डीएनए से मिलते जुलते हैं

वै

ज्ञानिकों का मनना है कि अंटार्कटिका ग्लेशियरों के भीतर गर्म गुफाओं में जीव जन्तुओं और वनस्पतिओं की रहस्मयी दुनिया हो सकती है। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (एएनयू) की ओर से किए गए अध्ययन में पाया गया कि अंटार्कटिका के रोस द्वीप में सक्रिय

ज्वालामुखी माउंट इरेबस के इर्द गिर्द के क्षेत्र में झरनों के बहाव ने बड़ी गुफा का जाल बना दिया है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इन गुफाओं से मिले मृदा के नमूनों के अध्ययन से इसमें शैवाल, मॉस और छोटे जन्तुओं के अंश पाए गए। एएनयू फेनर स्कूल ऑफ इंन्वॉयरमेंट एंड सोसाइटी के सी

महिला

फ्रासर ने कहा, ‘गुफाएं अंदर बेहद गर्म हो सकती हैं। कुछ गुफाओं में तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तक भी हो सकता है। आप वहां टी शर्ट भी पहन कर आराम से रह सकते हैं।’ पोलर बायोलॉजी जनरल में प्रकाशित अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता फ्रेसर ने कहा, ‘गुफा के मुहाने में रोशनी है और कुछ गुफाओं में जहां बर्फ की पर्त पतली है वहां अंदर की ओर रोशनी के फिल्टर्स हैं।’ उन्होंने कहा कि माउंट इरेबस की अधिकतक गुफाओं से मिले डीएनए अंटार्कटिका में अन्य स्थानों पर पाए जाने वाले मॉस, शैवाल और अकशेरुकी जीवों सहित पेड़ों और जानवरों के डीएनए से मिलते जुलते हैं। उन्होंने कहा कि इस अध्ययन से एक झलक मिलती है कि अंटार्कटिका की बर्फ के अंदर क्या हो सकता है। वहां वनस्पतियों और जंतुओं की नई प्रजातियां भी मौजूद हो सकती हैं. ’’ वैज्ञानिक ने कहा, ‘‘ अगला कदम गुफाओं को अधिक नजदीकी से देखना और किसी जीवित जीव जन्तु की तलाश करना है. अगर वहां वे मौजूद हैं तो एक नई दुनिया का पता लग पाएगा।’’ (एजेंसी)

सशक्तिकरण

वित्तीय तौर पर सबल बनेंगी महिलाएं

जेसीआई, ग्रेटर झांसी ने महिलाओं को पापड़, बरी और अचार बनाने का प्रशिक्षण दिया

इलाके के गरीब परिवार से नाता रखने बुदेवाली ं लखंडमहिलाओं के लिए दैनिक उपयोग के

उत्पाद रोजगार और आय का जरिया बन सकते हैं, इसी को ध्यान में रखकर जूनियर चैंबर इंटरनेशनल (जेसीआई), ग्रेटर झांसी ने महिलाओं को पापड़, बरी

और अचार बनाने का प्रशिक्षण दिया। जेसीआई ग्रेटर द्वारा मनाए जा रहे जेसी सप्ताह के दूसरे दिन घरेलू कामकाजी महिलाओं को रामकली ने चावल के पापड़, मूंग की दाल की बरी एवं अचार बनाने की विधि सिखाई। प्रशिक्षण प्राप्त करने आई महिलाओं

को इन दैनिक उपयोग के उत्पाद बनाने में प्रयुक्त होने वाले सामान सहित उनको किस अनुपात में मिलाना होता है, इससे अवगत कराया गया। साथ ही बनाने का तरीका भी बताया गया। जेसीआई ग्रेटर की अध्यक्ष डॉ. ममता दासानी ने बताया कि घरेलू कामकाजी महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर विकसित हों, इसी मकसद से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिलाएं कम लागत में दैनिक उपयोग में आने वाली सामग्री का निर्माण कर ज्यादा आय अर्जित कर सकती हैं। डॉ. दासानी के मुताबिक, 'जेंडर इक्वलिटी' विषय पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें श्रुति आनंद, रश्मि अग्रवाल व बलविंदर कौर को विजेता घोषित किया गया। (आईएएनएस)

कार्बन

उत्सर्जन

वैश्विक तापमान बढ़ाने में कार्बन उत्सर्जक कंपनियां जिम्मेदार

शोध से पता चला है कि दुनिया में तापमान वृद्धि के लिए 90 बड़े कार्बन उत्पादकों की भूमिका है

दु

नियाभर में 90 बड़े कार्बन उत्पादकों द्वारा किया गया उत्सर्जन पृथ्वी पर तापमान वृद्धि में प्रमुख कारक हैं। कुल तापमान वृद्धि में इनका आधा योगदान है। यही नहीं इसकी वजह से वर्ष 1880 से वैश्विक समुद्र स्तर में करीब 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। एक अंतर्राष्ट्रीय शोध इसका खुलासा किया गया है। शोध में 1880 से 2010 तक करीब 16 फीसदी वैश्विक औसत तापमान वृद्धि के लिए बीपी, शेवरॉन, कोनोकोफिलिप्स, एक्सोनमोबिल, पीबॉडी, शेल एंड टोटल सहित 50 निवेशक स्वामित्व वाले कार्बन उत्पादकों को दोषी ठहराया गया है और इसी अवधि में करीब 11 फीसदी वैश्विक समुद्र स्तर में वृद्धि हुई है। इस तरह का पहला शोध वैज्ञानिक जर्नल 'क्लाइमेट चेंज' में बीते सप्ताह प्रकाशित हुआ। इसमें विशेष जीवाश्म ईंधन उत्पादकों द्वारा उत्सर्जन से वैश्विक जलवायु परिवर्तन में संबंध को दर्शाया गया है। शोध में गैस, तेल व कोयला उत्पादकों और सीमेंट निर्माताओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए उनके उत्पादों व उत्पादन प्रक्रिया व निष्कर्षण से पैदा होने वाली कार्बन डाई आक्साइड व मीथेन उत्सर्जन से वैश्विक तापमान व समुद्र स्तर में वृद्धि की गणना की गई है। (आईएएनएस)


18 - 24 सितंबर 2017

हिंदी दिवस

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हिंदी दिवस

हिंदी भाषाओं के बीच संपर्क सेतु : राष्ट्रपति

राजभाषा विभाग और भारत सरकार द्वारा आयोजित हिंदी दिवस समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश भर में स्थित विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और कार्यालयों के प्रमुखों को राजभाषा कार्यान्वयन में उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत किया

रा

एसएसबी ब्यूरो

जभाषा विभाग और गृह मंत्रालय द्वारा दिनांक 14 सितंबर, 2017 को विज्ञान भवन के प्लेनरी हॉल, नई दिल्ली में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि माननीय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के कर-कमलों से देश भर में स्थित विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, कार्यालयों के प्रमुखों को राजभाषा कार्यान्वयन में उत्कृष्ट कार्य हेतु पुरस्कृत किया गया। पुरस्कार विजेताओं को शील्ड तथा प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। हिंदी दिवस पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम की अध्यक्षता गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने की और गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर तथा किरेन रिजिजू भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। इस अवसर पर भारत सरकार के कई सांसद और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि हमारे महापुरुषों ने हिंदी की ताकत को पहचाना और स्वतंत्रता के बाद हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया। संविधान सूची में 22 भाषाओं को मान्यता दी गई है और इन सभी के संदर्भ में निर्देश भी दिए गए हैं। हिंदी का अस्तित्व व विकास गैर हिंदी भाषी लोगों के बोलने और समझने तथा उपयोग करने पर बढ़ता है। उनका कहना था कि विदेशी मूल के विद्वानों ने भी हिंदी की सेवा में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। आज आवश्य2कता इस बात की है कि हिंदी भाषी लोगों को आगे आकर सभी भाषाओं के साथ समन्वय बिठाते हुए हिंदी की प्रगति में योगदान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह हम सभी का दायित्व बनता है कि हम सभी भाषाओं का सम्मान करें। राष्ट्रपति ने कहा कि हिंदी सभी भारतीय भाषाओं के बीच संपर्क भाषा की भूमिका निभाती है। यह हमारी राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती है। यह एक सार्थक पहल होगी जब स्वेच्छा और आपसी सद्भाव से प्रेरित होकर हिंदी भाषी लोग अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को सीखें और गैर-हिंदी भाषी भी इसी प्रकार हिंदी को अपनाएं। उन्होंने भाषा नीति व शिक्षा नीति में आपसी सहयोग और आदान- प्रदान के आधार पर बहुभाषिकता को बढ़ावा देने व आम सहमति से हिंदी को संपर्क भाषा के रूप में आगे बढ़ाने पर बल देने को कहा। कोविंद ने हिंदी में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 तक इंटरनेट पर हिंदी का उपयोग बढ़ेगा तथा डिजिटल साक्षरता, ई-महाशब्दाकोश से लोग लाभान्वित होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इतिहास गवाह है कि

एक नजर

क्षेत्रीय शब्दों से हिंदी के शब्द भंडार को बढ़ाएं : राजनाथ सिंह

‘लीला’ मोबाइल ऐप का लोकार्पण किया गया ऐप से जनसामान्य को हिंदी सीखने में सुविधा होगी

जब-जब देश को एकजुट करने की आवश्यकता पड़ी, हिंदी भाषा ने हमेशा महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है। देश के स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी ने राष्ट्र प्रेम और स्वाभिमान की अद्भुत भावना जागृत करने में अहम भूमिका निभाई थी। हिंदी भाषी के कई महापुरुषों का जिक्र करते हुए सिंह का कहना था कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने कहा था, ‘स्वतंत्रता आंदोलन मेरे लिए केवल स्वराज का नहीं अपितु स्वर भाषा का भी प्रश्न है।’ उन्होंने कहा कि राष्ट्र के एकीकरण के लिए सर्वमान्य भाषा से प्रभावशाली और बलशाली तत्व और कोई नहीं है। संविधान ने हम सब पर राजभाषा हिंदी के विकास और प्रयोग-प्रसार का दायित्व सौंपा है। यह कार्य सभी के सहयोग और सदभाव से ही संभव है। उन्हों्ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेपद 351 के अनुसरण में क्षेत्रीय भाषाओं के प्रचलित एवं लोकप्रिय शब्दों को ग्रहण करके हिंदी के शब्द भंडार को निरंतर समृद्ध करने की आवश्यकता है। हमारे लोकतंत्र को निरंतर प्रगतिशील और अधिक

मजबूत बनाने के लिए हमें संघ के काम-काज में हिंदी का और राज्यों के कामकाज में उनकी प्रांतीय भाषाओं का प्रयोग बढ़ाना होगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि आज समय आ गया है कि हम विदेशी भाषा के प्रति अत्यधिक आकर्षण की वर्षों पुरानी अपनी मानसिकता को बदलें और अपनी भाषाओं के सामर्थ्य और स्वा‍भाविक शक्ति को पहचान कर इन्हें मन से अपनाएं। सिंह ने कहा कि आज का दिन मूल्यांकन का दिन है। इससे भविष्य की दिशा तय करने में आसानी होती है। हिंदी दिवस समारोह में किरेन रिजिजू ने कहा कि मातृभाषा हिंदी न होने पर भी उन्हें हिंदी भाषा का उपयोग करने में गर्व की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि संविधान की अपेक्षाओं के अनुरूप हिंदी का प्रयोग, विकास एवं प्रचार-प्रसार सतत रूप से करना देश के हर नागरिक का उत्तरदायित्व है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रयोग बढ़ा है, लेकिन अब भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। राजभाषा नीति का मुख्य उद्देश्य

‘इतिहास गवाह है कि जब-जब देश को एकजुट करने की आवश्यकता पड़ी, हिंदी भाषा ने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। देश के स्वतंत्रता आंदोलन मंे हिंदी ने राष्ट्र प्रेम और स्वा​िभमान की अद्भुत भावना जागृत करने में अहम भूमिका निभाई थी’ - राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री

सरकारी काम-काज को मूल रूप से हिंदी में करना है। कार्यालयीन कार्य मूल रूप से हिंदी में किए जाने से ही राजभाषा हिंदी का प्रयोग बढ़ेगा तथा सही अर्थों में राजभाषा नीति का कार्यान्वयन संभव होगा । रिजिजू ने केंद्र सरकार के प्रशासनिक प्रधानों से यह अनुरोध भी किया कि वे अपने कार्यालयों में राजभाषा संबंधी सभी कार्यकलापों में व्यक्तिगत रुचि लेते हुए, सरकार की राजभाषा नीति से संबंधित अधिनियम एवं नियमों तथा राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन से संबंधित माननीय राष्ट्रपति जी के आदेशों का गंभीरता से अनुपालन सुनिश्चित कराएं। किरेन रिजिजू ने राष्ट्र प्रेम की भावना से एकजुट होकर हिंदी को यथोचित सम्मान देते हुए एक सशक्त, श्रेष्ठ और आधुनिक भारत के निर्माण के लिए मिल कर कार्य करने के लिए कहा। इस मौके पर राजभाषा विभाग द्वारा सी डैक के सहयोग से तैयार किए गए लर्निंग इंडियन लैंग्वेज विद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (लीला) के मोबाइल ऐप का लोकार्पण भी किया गया। इस ऐप से देश भर में विभिन्न भाषाओं के माध्यम से जन सामान्य को हिंदी सीखने में सुविधा और सरलता होगी तथा हिंदी भाषा को समझना, सीखना तथा कार्य करना संभव हो सकेगा। सचिव राजभाषा ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया तथा सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी। ज्ञात हो कि हिंदी भाषा के देशव्यापी प्रसार और स्वीकार्यता को देखते हुए 14 सितंबर, 1949 को इसे संघ की राजभाषा का दर्जा दिया गया था। इस दिवस की स्मृति में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है तथा विभिन्न मंत्रालयों द्वारा राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए, हिंदी सप्ताह, पखवाड़ा, माह का आयोजन किया जाता है। इस क्रम में राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय प्रत्ये‍क वर्ष हिंदी दिवस समारोह का आयोजन करता है जिसमें वर्षभर के दौरान राजभाषा हिंदी में उत्कृष्ट कार्य हेतु राजभाषा गौरव और राजभाषा कीर्ति पुरस्कार के अंतर्गत विभिन्न वर्गों में पुरस्कार दिए जाते हैं।


30 लोक कथा य

18 - 24 सितंबर 2017

पेड़ का सपना

ह एक बहुत पुरानी बात है। किसी नगर के समीप एक जंगल में तीन वृक्ष थे। वे तीनों अपने सुख-दुःख और सपनों के बारे में एक दूसरे से बातें किया करते थे। एक दिन पहले वृक्ष ने कहा – “मैं खजाना रखने वाला बड़ा सा बक्सा बनना चाहता हूँ। मेरे भीतर हीरे-जवाहरात और दुनिया की सबसे कीमती निधियां भरी जाएं। मुझे बड़े हुनर और परिश्रम से सजाया जाए, नक्काशीदार बेल-बूटे बनाए जाएं, सारी दुनिया मेरी खूबसूरती को निहारे, ऐसा मेरा सपना है।” दूसरे वृक्ष ने कहा – “मैं तो एक विराट जलयान बनना चाहता हूं, ताकि बड़े-बड़े राजा और रानी मुझपर सवार हों और दूर देश की यात्राएं करें, मैं अथाह समंदर की जलराशि में हिलोरें लूं, मेरे भीतर सभी सुरक्षित महसूस करें और सबका यकीन मेरी शक्ति मंल हो... मैं यही चाहता हूं।” अंत में तीसरे वृक्ष ने कहा – “मैं तो इस जंगल का सबसे बड़ा और ऊंचा वृक्ष ही बनना चाहता हूं। लोग दूर से ही मुझे देखकर पहचान लें, वे मुझे देखकर ईश्वर का स्मरण करें, और मेरी शाखाएं स्वर्ग तक पहुंचें... मैं संसार का सर्वश्रेष्ठ वृक्ष ही बनना चाहता हूं।” ऐसे ही सपने देखते-देखते कुछ साल गुजर गए। एक दिन उस जंगल में कुछ लकड़हारे आए| उनमें से जब एक ने पहले वृक्ष को देखा तो अपने साथियों से कहा – “ये जबरदस्त वृक्ष देखो! इसे बढ़ई को बेचने पर बहुत पैसे मिलेंगे।” और उसने

हर से दूर एक घने जंगल में एक आम का पेड़ था और एक लंबा और घना नीम का पेड़ था। नीम का पेड़ अपने पड़ोसी आम के पेड़ से बात तक नहीं करता था | उसको अपने बड़े होने

पहले वृक्ष को काट दिया। वृक्ष तो खुश था, उसे यकीन था कि बढ़ई उससे खजाने का बक्सा बनाएगा। दूसरे वृक्ष के बारे में लकड़हारे ने कहा – “यह वृक्ष भी लंबा और मजबूत है। मैं इसे जहाज बनाने वालों को बेचूंगा।” दूसरा वृक्ष भी खुश था, उसकी चाह भी पूरा होने वाली थी। लकड़हारे जब तीसरे वृक्ष के पास आए तो वह भयभीत हो गया।वह जानता था कि अगर उसे काट दिया गया तो उसका सपना पूरा नहीं हो पाएगा एक लकड़हारा बोला – “इस वृक्ष से मुझे कोई खास चीज नहीं बनानी है, इसीलिए इसे मैं ले लेता हूं और उसने तीसरे वृक्ष को काट दिया। पहले वृक्ष को एक बढ़ई ने खरीद लिया और उससे पशुओं को चारा खिलानेवाला कठौता बनाया। कठौते को एक पशुगृह में रखकर उसमें भूसा भर दिया गया। बेचारे वृक्ष ने तो इसकी कभी कल्पना भी नहीं की थी। दूसरे वृक्ष को काटकर उससे मछली पकड़नेवाली छोटी नौका बना दी गई। भव्य जलयान बनकर राजा-महाराजाओं को लाने-लेजाने का उसका सपना भी चूर-चूर हो गया। तीसरे वृक्ष को लकड़ी के बड़े-बड़े टुकड़ों में काट लिया गया और टुकड़ों को अंधेरी कोठरी में

रखकर लोग भूल गए। एक दिन उस पशुशाला में एक आदमी अपनी पत्नी के साथ आया और स्त्री ने वहां एक बच्चे को जन्म दिया।वे बच्चे को चारा खिलानेवाले कठौते में सुलाने लगे। कठौता अब पालने के काम आने लगा| पहले वृक्ष ने स्वयं को धन्य माना कि अब वह संसार की सबसे मूल्यवान निधि अर्थात एक शिशु को आसरा दे रहा था। समय बीतता गया और सालों बाद कुछ नवयुवक दूसरे वृक्ष से बनाई गई नौका में बैठकर मछली पकड़ने के लिए गए, उसी समय बड़े जोरों का तूफान उठा और नौका तथा उसमें बैठे युवकों को लगा कि अब कोई भी जीवित नहीं बचेगा। एक युवक नौका में निश्चिंत सा सो रहा था। उसके साथियों ने उसे जगाया और तूफान के बारे में बताया। वह युवक उठा और उसने नौका में खड़े

होकर उफनते समुद्र और झंझावाती हवाओं से कहा – “शांत हो जाओ”, और तूफान थम गया| यह देखकर दूसरे वृक्ष को लगा कि उसने दुनिया के परम ऐश्वर्यशाली सम्राट को सागर पार कराया है। तीसरे वृक्ष के पास भी एक दिन कुछ लोग आए और उन्होंने उसके दो टुकड़ों को जोड़कर एक घायल आदमी के ऊपर लाद दिया। ठोकर खाते, गिरते- पड़ते उस आदमी का सड़क पर तमाशा देखती भीड़ अपमान करती रही। वे जब रुके तब सैनिकों ने लकड़ी के सलीब पर उस आदमी के हाथों-पैरों में कीलें ठोंककर उसे पहाड़ी की चोटी पर खड़ा कर दिया। दो दिनों के बाद रविवार को तीसरे वृक्ष को इसका बोध हुआ कि उस पहाड़ी पर वह स्वर्ग और ईश्वर के सबसे समीप पहुंच गया था, क्योंकि ईसा मसीह को उसपर सूली पर चढ़ाया गया था।

पर घमंड था| एक बार एक रानी मधुमक्खी नीम के पेड़ के पास पहुंची और कहा “नीम भाई मैं आपके यहां पर अपने शहद का छत्ता बना लूं? ” नीम के पेड़ ने कहा “नहीं जा जाकर कहीं और अपना

छत्ता बना।” इतना सुनकर आम के पेड़ ने कहा, “ भाई छत्ता क्यों नहीं बना लेने देते, यह तुम्हारे पेड़ पर सुरक्षित रह सकेंगी।” इतने पर नीम के पेड़ ने आम के पेड़ को जवाब दिया कि मुझे तुम्हारी सलाह कि आवश्यकता नहीं है। रानी मधुमक्खी ने फिर से आग्रह किया तो भी नीम के पेड़ ने मना कर दिया। रानी मधुमक्खी आम के पेड़ के पास गई और कहने लगी क्या मैं आपकी शाखा पर अपना छत्ता बना लूं? इस पर आम के पेड़ ने उसे सहमति दे दी और रानी मधुमक्खी ने छत्ता बना लिया और सुखपूर्वक रहने लगी।

तभी कुछ दिनों बाद कुछ व्यक्ति वहां पर आए और कहने लगे कि इस आम के पेड़ को काटते हैं, लेकिन एक व्यक्ति कि नजर मधुमक्खी के छत्ते पर पड़ी और उसने कहा यदि हम इस पेड़ को काटते हैं तो यह मधुमक्खी हमें नहीं छोड़ेगी, अतः हम नीम के पेड़ को काटते हैं, इससे हमको कोई खतरा नहीं है और लकड़ियां भी हमें अधिक मात्रा में मिल जाएंगी| यह सब बाते सुनकर नीम डर गया, लेकिन अब वह कर भी क्या सकता था? दूसरे दिन सभी व्यक्ति आए और पेड़ काटने लगे तो नीम ने चिल्लाना शुरू किया “ मुझे बचाओ – मुझे बचाओ नहीं तो ये लोग मुझको काट डालेंगे” तब मधुमक्खियों ने उन लोगों पर हमला कर दिया और उन्हें वहां से भगा दिया। नीम के पेड़ ने मधुमक्खियों को धन्यवाद दिया तो इस पर मधुमक्खियों ने कहा, “ धन्यवाद हमें नहीं आम भाई को दो यदि वह हमसे नहीं कहते तो हम आपको नहीं बचाते।”

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बस्तर इलाके में सीआरपीएफ के जवानों ने सेवा की नई मिसाल पेश की

त्तीसगढ़ के नक्सली प्रभावित दक्षिण बस्तर इलाके में सीआरपीएफ के जवानों ने नई मिसाल पेश की है। कटेकल्याण के टेटम गांव की एक बीमार आदिवासी महिला कोसी को जवानों ने स्ट्रेचर बना कर कई किलोमीटर दूर एंबुलेंस तक ले गए। सीआरपीएफ की एक टुकड़ी असिस्टेंट कमांडेंट देवाराम चौधरी और एसआई अमिताभ खांडेकर के नेतृत्व में सर्चिंग पर निकली थी। जवानों ने रास्ते में नयनार पटेलपारा गांव में एक महिला कोसी को दर्द से कराहते देखा। उसके परिजनों ने बताया

नन्हा पायलट

न्यूजमेकर 14 साल का भारतीय छात्र मंसूर अनीस बना सबसे कम उम्र का पायलट

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मंसूर अनीस

वीं में पढ़ने वाला भारतीय छात्र मंसूर अनीस सबसे कम उम्र का पायलट बन गया है। मंसूर को पिछले सप्ताह कनाडा की एविएशन अकादमी से सिंगल इंजन फ्लाइट उड़ाने का सर्टिफिकेट मिला है। मंसूर दुबई के शरजाह में पढ़ता है। मंसूर को पॉयलट का सर्टिफिकेट देने से पहले फ्लाइ्ंग टेस्ट भी कराया गया, जिसमें वह पास हो गया। बताया जा रहा है कि मंसूर रेडियो कॉम्युनिकेशन टेस्ट भी पास कर चुका है और इसमें उसे 96 परसेंट अंक हासिल हुए हैं। कनाडा में विमान उड़ाने के लिए जो योग्यता चाहिए होती है उसे मंसूर ने इतनी कम उम्र में ही पूरी कर ली है। मंसूर को टेस्ट के लिए जब फ्लाइट दी गई तो उसने सफलतापूर्वक उसे उड़ाकर दिखा दिया। इसके

बाद एएए एविएशन फ्लाइट एकैडमी ने मंसूर को सर्टिफिकेट जारी किया। उल्लेखनीय है कि दुनिया में सबसे कम उम्र का पायलट बनने का रिकॉर्ड जर्मनी के एक लड़के नाम था, जिसने 15 साल की उम्र मे जर्मनी सर्टिफिकेट हासिल किया था। इसके बाद 34 घंटे की ट्रेनिंग पूरी करने वाले अमेरिका के 14 साल के एक लड़के को यह खिलाब मिला था। ध्यान रहे कि कनाडा में पायलट की लाइसेंस पाने के लिए न्यूनतम उम्र 14 साल है। इससे कम उम्र के लड़कों को यहां प्लेन उड़ाने की ट्रेनिंग नहीं दी जाती। बताया जा रहा है कि मंसूर का बड़ा भाई क्वैद फैजी भी पायलट है और उसी को देखकर मंसूर के मन में पायलट बनने का ख्वाब जागा था।

कि कोसी बहुत बीमार है, लेकिन उसे अस्पताल ले जाने की सुविधा नहीं है, क्योंकि नक्सलियों ने रास्ता काट दिया है। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। बस इतना सुनना था कि वीर जवानों ने बांस का स्ट्रेचर तैयार किया और महिला को स्ट्रेचर पर बिठा कर अपनी सुरक्षा में अस्पताल तक पहुंचाया। कंधे पर स्ट्रेचर उठाए जवान पहुंच विहीन मार्ग, पहाड़ और नदी नालों वाला ढाई किलोमीटर का रास्ता पार किया। सड़क पर खड़ी एंबुलेंस 108 में महिला को बिठाया और इलाज के लिए उसे कटेकल्याण अस्पताल रवाना किया।

शरारती सचिन

सचिन तेंदुलकर

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स्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने इस बात का खुलासा किया है कि वे किस क्षेत्र में बेहतर स्कोर नहीं कर पाए। क्रिकेट में रनों का पहाड़ खड़ा करने वाले सचिन तेंदुलकर ने यह खुलासा अपने बचपन की एक तस्वीर को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए किया। तस्वीर में छोटे सचिन किताब और कलम से लैस हैं। तस्वीर को देख कर कोई सहज ही इस बात का अनुमान लगा सकता है कि वे बचपन में पढ़ाकू

आरएनआई नंबर-DELHIN/2016/71597; संयुक्त पुलिस कमिश्नर (लाइसेंसिंग) दिल्ली नं.-एफ. 2 (एस- 45) प्रेस/ 2016 वर्ष 1, अंक - 40

बचपन में शरारत करने के लिए प्रसिद्ध मास्टर ब्लास्टर ने अपनी तस्वीर साझा करते हुए बताया कि वे पढ़ाई के क्षेत्र में खराब स्कोरर थे थे। लेकिन ऐसा है नहीं। सचिन ने खुद ही इस बात का खुलासा करते हुए लिखा है इस क्षेत्र में कभी भी अच्छा स्कोर नहीं बना पाए। उन्होंने लिखा है, मैं इस क्षेत्र में कभी भी अच्छा स्कोर नहीं था। प्रोफेसर पिता की संतान सचिन बचपन में बेहद शरारती थे और पढ़ाई लिखाई में उनका मन कभी नहीं लगा। दशकों तक क्रिकेट के मैदान पर गेंदबाजों की शुनाई करने वाले सचिन को क्रिकेट का भगवान कहा जाता है।

सुलभ स्वच्छ भारत (अंक - 40)  
सुलभ स्वच्छ भारत (अंक - 40)  
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