Page 1

लुई ब्रेल दिवस 17 एक लिपि जो एक दृष्टि भी है

18 30

फोटो फीचर सुलभ ग्राम में नीतू चंद्रा

साहित्य

28

सम्मान

नए साल पर सर्वेश्वर की ​कविता

‘मिथिला रत्न’ से सम्मानित हुए डॉ. पाठक

sulabhswachhbharat.com आरएनआई नंबर-DELHIN/2016/71597

अंदर पढ़ें

01 04 06 07 08 09 09 10

1. ब्रांड इंडिया विकास व छवि पर जोर 2. आधार कार्ड शुचिता का आधार 3. रोजगार रोजगार के नए अवसर 4. रेलवे दौड़ेगी स्वदेशी ट्रेन 5. स्वच्छता स्वच्छता सर्वेक्षण-2018 6. बिजली हर गांव होगा रोशन 7. ऊर्जा सौर ऊर्जा में तेज प्रगति 8. पर्यावरण बीएस-4 और बीएस-6 9. स्वास्थ्य पूर्ण टीकाकरण 10. अर्थव्यवस्था जीडीपी में उछाल 11. डिजिटल इंडिया गांव-कस्बों तक विस्तार 12. रक्षा अपने बूते रक्षा 13. मिशन-2020 विकास का रोडमैप 14. नोटबंदी आर्थिक फैसले से लाभ 15. कालाधन कालेधन पर लगाम 16. कृषि अन्नदाता होंगे खुशहाल 17. जेंडर महिलाओं का दमखम 18. सिनेमा बायोपिक की बहार

11 12 14 16 16 20 23 24 29 32

नववर्ष की शुभकामनाए

वर्ष-2 | अंक-03 | 01 - 07 जनवरी 2018

ब्रांड इंडिया की बढ़ेगी चमक बी

वर्ष 2018 में भारत जहां प्रधानमंत्री की सक्रियता के कारण ग्लोबल प्लेयर के तौर पर अपनी हैसियत को और मजबूत करेगा, वहीं देश के भीतर सरकार का ध्यान खासतौर पर पूर्वोत्तर राज्यों के विकास पर होगा

एसएसबी ब्यूरो

ते तीन वर्षों में भारत वैश्विक मंचों पर एक ऐसे देश के रूप में उभरा है, जो न सिर्फ दुनिया का सबसे युवा प्रतिभाओं का देश है, बल्कि उसके पास भविष्य की चुनौतियों का दक्षता से सामने करने वाला काबिल नेतृत्व भी है। इन वर्षों में भारत ने जिस तरह समावेशी विकास कार्यक्रमों के साथ ऊर्जा से लेकर रक्षा तक अपनी प्राथमिकताओं को रेखांकित किया है, उससे ब्रांड इंडिया के तौर पर देश को एक नई शिनाख्त मिली है। यह शिनाख्त जहां विश्व अर्थव्यवस्था के लिए उम्मीद का सबसे बड़ा सबब है, वहीं यह विकास और समृद्धि के नए रोडमैप को भी दुनिया के सामने बिछाने वाले देश की पहचान को पुख्ता करता है। नए साल में भारत जहां आर्थिक समृद्धि का नय अध्याय लिखेगा, वहीं दूसरी तरफ रोजगार और नौकरियांे की बहार देश में आएगी। रक्षा के क्षेत्र में मेक इन इंडिया युवाओं को रोजगार सुलभ कराने का एक बड़ा कारक बनेगा। शिक्षा से लेकर आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे नया साल बड़ी उपलब्धियां लेकर आएगा। गरीबों और पिछड़े लोगों के लिए कई नई सहुलियतें नए साल में मिलने लगेंगी। किसानों की आय को दोगुना करने के प्रयासों की दिशा में नया साल असरदार साबित होगा। पर्यावरण से लेकर स्वच्छता के माेर्चे पर कई नए मुकाम इसी साल हासिल किए जाएंगे। स्वदेशी ट्रेन से लेकर उड़ान तक यातायात के साधन ज्यादा आरामदायक और बेहतर होंगे। सरकार गांव और गरीबों के लिए कई नई शुरुआत इस नए साल में करेगी। पूरब से पश्चिम तक और उत्तर


02

से दक्षिण तक देश की उम्मीदों और आकांक्षाओं से भरा यह साल वाकई में एक ऐसा साल साबित हो सकता है, जिसे इतिहास में याद रखा जाए। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर देश की गतिविधियां बढ़ेंगी और दुनिया में भारत की छवि और ज्यादा मजबूत होकर उभरेगी। कोशिश ब्रांड इंडिया को वैश्विक स्तर पर और ज्यादा भरोसेमंद बनाने की है।

ग्लोबल प्लेयर

कई सर्वे में इस बात का उल्लेख पहले ही हो चुका है कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि काफी सुधरी है। इस लिहाज से देखें तो अंतरराष्ट्रीय सक्रियता के मामले में प्रधानमंत्री के लिए 2018 भी 2017 की तरह व्यस्तताओं से भरा होगा। भारत को ग्लोबल प्लेयर बनाने की कोशिशों के तहत 2018 में भी प्रधानमंत्री अपना अभियान जारी रखेंगे। जनवरी में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत

आवरण कथा

01 - 07 जनवरी 2018

के दौरे पर होंगे। इजरायली प्रधानमंत्री के साथ प्रधानमंत्री 16 जनवरी को भारत के प्रीमियम फॉरेन पॉलिसी फोरम- रायसीना डायलॉग को भी संबोधित करेंगे। इसके बाद जॉर्डन के राजा यहां आ सकते हैं।

इस बार 26 जनवरी खास

बेंजामिन नेतन्याहू के दौरे से भारत और इजरायल के बीच रिश्ते अगले स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है, वहीं जॉर्डन के राजा के दौरे से पश्चिम एशिया में उतार-चढ़ाव के बीच भारत की विदेश नीति में पारंपरिक संतुलित नजरिया दिखेगा। प्रधानमंत्री पिछले दो दशकों में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में हिस्सा लेने के लिए दावोस पहुंचने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे, वहीं गणतंत्र दिवस समारोह में 10 आसियान नेताओं की मौजूदगी से दक्षिण-पूर्व एशिया में संतुलन बनाने वाली ताकत के रूप भारत की भूमिका को मान्यता मिलेगी। ऐसा पहली बार

हाल के वर्षों में भारत ने जिस तरह समावेशी विकास कार्यक्रमों के साथ ऊर्जा से लेकर रक्षा तक अपनी प्राथमिकताओं को रेखांकित किया है, उससे ब्रांड इंडिया के तौर पर देश को एक नई शिनाख्त मिली है

होगा, जब 10 विदेशी नेता देश के गणतंत्र दिवस समारोह में मौजूद होंगे।

फ्रांस के साथ विशेष करार

फरवरी का महीना भी मोदी के लिए कम व्यस्त नहीं रहेगा। इस दौरान प्रधानमंत्री के यूएई और फिलिस्तीन जाने की उम्मीद है। इसके अलावा वह फ्रांस के राष्ट्रपति और कनाडा के प्रधानमंत्री की मेजबानी भी करेंगे। इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए) समिट भी फ्रांस के राष्ट्रपति के दौरे के आसपास ही होगा और इसमें कई अंतरराष्ट्रीय नेता शिरकत करेंगे। फ्रांस के राष्ट्रपति के दौरे में हिंद महासागर साझेदारी का मुद्दा सर्वोच्च प्राथमिकता में होगा। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूड्यू के दौरे से भारत और कनाडा के बीच व्यावसायिक और राजनीतिक रिश्तों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। पिछले एक साल में जस्टिन की कैबिनेट के तकरीबन सभी अहम सदस्य भारत आ चुके हैं। कनाडा के पीएम के दौरे का मामला भी पिछले कई महीने से चल रहा था। इस बीच, फरवरी-मार्च के दौरान बिम्सटेक समिट के दौरान प्रधानमंत्री नेपाल भी जा सकते हैं। अप्रैल में प्रधानमंत्री पहली बार

खास बातें 10 विदेशी नेता देश के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होंगे पीएम के लिए 2018 भी अंतरराष्ट्रीय व्यस्तताओं वाला होगा पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र विकास के लिए 90 करोड़ रुपए की घोषणा कॉमनवेल्थ समिट में हिस्सा लेने लंदन जाएंगे।

ब्रिक्स से लेकर एससीओ तक

2018 के दूसरे हिस्से में पीएम ब्रिक्स समिट के लिए साउथ अफ्रीका जा सकते हैं। इसके अलावा, जी20 समिट के लिए अर्जेंटीना, इंडिया-आसियान और ईस्ट एशिया समिट्स के लिए सिंगापुर के उनके दौरे प्रस्तावित हैं। जून में शांग्रीला संवाद के लिए वे सिंगापुर भी जा सकते हैं। इस बीच, प्रधानमंत्री जून


01 - 07 जनवरी 2018

में एससीओ समिट के लिए चीन भी पहुंच सकते हैं। अगर वे 2018 में चीन जाते हैं तो यह लगातार चौथा साल होगा, जब वह चीन की यात्रा करेंगे। इसकी शुरुआत 2015 में द्विपक्षीय दौरे के साथ हुई है। 2016 में वह जी-20 समिट और 2017 में ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने वहां गए। इस बात को लेकर भी चर्चा है कि चीन और सऊदी अरब के टॉप नेता भी 2018 में चीन जा सकते हैं।

पूर्वोत्तर पर फोकस

बात देश के भीतर की करें तो सबका साथ, सबका विकास का मंत्र देने वाली सरकार का सबसे ज्यादा फोकस संभवत: पूर्वोत्तर राज्यों पर रहने वाला है। पूर्वोत्तर के राज्यों के विकास के लिए सरकार ने अलग से एक डेडिकेटेड मंत्रालय पहले ही बना दिया है। यह केंद्र सरकार के एक्ट इस्ट पॉलिसी के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पूर्वात्तर क्षेत्र को बाढ़ आपदा से निपटने के लिए सरकार की पहल पर बीते वर्ष में नीति आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में पूर्वोत्तर क्षेत्र में जल प्रबंधन के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। समिति पन बिजली, कृषि, जैव विविधता संरक्षण, बाढ़ से होने वाले मिट्टी के क्षरण में कमी लाने, अंतर्देशीय जल यातायात, वन, मछली पालन और ईको-पर्यटन के रूप में जल प्रंबधन के लाभों को बढ़ाने का काम करेगी। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय इसका समन्वय करेगा। समिति को अपनी रिपोर्ट जून, 2018 तक देने के लिए कहा गया है।

पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र विकास

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने ‘पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र विकास’ के लिए 90 करोड़ रुपए की घोषणा की। इस योजना की शुरुआत पायलट आधार पर

2 साल के लिए पहले चरण में तामंगलांग जिले से हुई। पूर्वोत्तर का पूरा क्षेत्र सुगम्य नहीं है। दूरदराज क्षेत्र में तुरंत पहुंचना सुलभ नहीं है। इसको देखते हुए भारत की पहली ‘एयर डिस्पेंसरी’ पूर्वोत्तर राज्य को मिला है। इसके तहत हेलीकॉप्टर के जरिए चिकित्सा सेवा दी जाएगी। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने इस पहल के लिए 25 करोड़ रुपए की आरंभिक धनराशि जारी कर दी है। पूर्वोत्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के लिए भी प्रचार-प्रसार के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसके लिए दिल्ली में एक पूर्वोत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक एवं सूचना केंद्र स्थापित करने की घोषणा पहले ही हो चुकी है। पूर्वोत्तर क्षेत्र से बाहर किसी भी अन्य राज्य की तुलना में उत्तर-पूर्व के छात्रों की संख्या जेएनयू में सबसे अधिक है। जेएनयू में लगभग 8 हजार से अधिक छात्र हैं। इसे देखते हुए 24 जुलाई 2017 को नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में बराक छात्रावास का शिलान्यास किया गया। पिछले वर्ष बंेगलुरू विश्वविद्यालय में भी विशिष्ट रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र की छात्राओं के लिए एक छात्रावास का शिलान्यास किया गया था। इस वर्ष पूर्वोत्तर के छात्रों को शिक्षा

सबका साथ, सबका विकास का मंत्र देने वाली सरकार का सबसे ज्यादा फोकस संभवत: पूर्वोत्तर राज्यों पर रहने वाला है

03

आवरण कथा

की मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार कुछ और नई पहल कर सकती है। मेघालय में मिशन फुटबॉल का उद्देश्य जमीनी स्तर की प्रतिभाओं को सामने लाना और उन्हें निखारने व बच्चों और युवाओं को पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी के तौर पर सामने लाना है। इसमें केंद्र सरकार का पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय मदद कर रहा है। इस मंत्रालय के सहयोग से मेघालय में 38 करोड़ रुपए की लागत से फुटबॉल स्टेडियम बनाया गया है।

किया गया।

ऊर्जावान पूर्वोत्तर

16 दिसंबर, 2017 को मिजोरम में 60 मेगावॉट की ट्युरिअल जल विद्युत परियोजना राष्ट्र को समर्पित किया गया। 1302 करोड़ रुपए की लागत की यह परियोजना मिजोरम में स्थापित सबसे बड़ी परियोजना है। परियोजना से अतिरिक्त 60 मेगावाट बिजली प्राप्त होने के साथ ही मिजोरम राज्य अब सिक्किम और त्रिपुरा के बाद पूर्वोत्तर भारत का तीसरा बिजली सरप्लस वाला राज्य बन जाएगा।

सड़क से संवाद तक

उद्यम को बढ़ावा

पूर्वोत्तर क्षेत्र में उद्यमिता और स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने के लिए नॉर्थ ईस्ट कॉलिंग’ उत्सव 9 दिसंबर, 2017 में नई दिल्ली में आयोजन हुआ। इस अवसर पर 100 करोड़ रुपए की प्रारंभिक पूंजी से ‘नॉर्थ ईस्ट वेंचर फंड’ को लॉन्च किया गया। इस कोष को पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय और उत्तर पूर्व वित्त विकास कॉरपोरेशन का संयुक्त उद्यम है। उत्तर पूर्व भारत में सतत पोषणीय पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए उत्तर पूर्व पर्यटन विकास परिषद का भी गठन

पूर्वोत्तर क्षेत्र में राजमार्गों के विकास के लिए एक विशेष निगम ‘राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम’ की स्थापना की गई है। इसका उद्देश्य क्षेत्र के हर जिले को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ना है। यह निगम ब्रह्मपुत्र नदी पर तीन नए पुलों का निर्माण कर रहा है। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र में 34 सड़क परियोजनाओं का क्रियान्वयन कर रहा है, जिसमें 10 हजार करोड़ रुपए की लागत से 1,000 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हो रहा है। केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर में 19 जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एनडीए सरकार 5,300 करोड़ रुपए की लागत से एक व्यापक दूरसंचार योजना लागू कर रही है। अगरतला बांग्लादेश के कॉक्स बाजार के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय गेटवे से जुड़ने वाला देश का तीसरा शहर है। इससे जहां दूरसंचार संपर्क में सुधार हुआ है, वहीं क्षेत्र के आर्थिक विकास को रफ्तार मिलेगी।


04

आधार

01 - 07 जनवरी 2018

पेंशनभोगियों का आधार

विकास का 'आधार' स्वच्छ और पारदर्शी शासन प्रक्रिया में आधार कार्ड की बड़ी भूमिका होगी। सरकार ने इसके लिए कई योजना भी बनाई है

कें

आधार से जुड़ेंगे वोटर कार्ड

एसएसबी ब्यूरो

द्र सरकार ने संसद में भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी- लांड्रिंग (मेंटेनेस ऑफ रिकॉर्ड्स) पारित किया। इस कानून के तहत सरकार ने कई योजनाओं और सेवाओं के साथ आधार नंबर से लिंक करना अनिवार्य कर दिया। आधार लिंक हो जाने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा। सब्सिडी बिचौलिए की जेब में न जाकर लाभुकों को मिलेगा। अब तक देशभर में 30 करोड़ पैनकार्ड में से 14 करोड़ पैन कार्ड आधार से लिंक किए जा चुके हैं। वहीं करीब 100 करोड़ बैंक खातों में से 70 फीसदी बैंक खाते आधार से जोड़े जा चुके हैं। आधार से लिंक कराने की डेटलाइन को थोड़ा बढ़ाते हुए नई डेटलाइन 31 मार्च, 2018 कर दी गई है। यानी नए साल में ऐसा कोई बैंक खाता नही होगा , जो आधार से जुड़ा न हो।

पेंशनभोगियों का आधार

पेंशनभोगियों के लिए आधार पर केंद्रित डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट लांच किया गया है। इससे पेंशन का लाभ पाने के लिए अब पेंशनभोगियों का खुद से मौजूद होना जरूरी नहीं है। पेंशनभोगी किसी भी सीएससी सेंटर पर आधार नंबर का विवरण देकर

खास बातें आधार कार्ड से भ्रष्टाचार पर लगी लगाम 30 करोड़ में से 14 करोड़ पैन कार्ड आधार से लिंक अब वोटर कार्ड भी होगा आधार से लिंक

दस दिन में पासपोर्ट

रजिस्ट्री के लिए आधार जरूरी एक व्यक्ति एक पीएफ खाता इसे हासिल कर सकते हैं। बुढ़ापा पेंशन से लेकर विधवा पेंशन के लिए सरकारी विभागों में आधार नंबर रजिस्टर कराना अनिवार्य कर दिया। आधार नंबर जोड़े जाने से फर्जी पेंशनधारक खत्म हुए। अकेले उत्तराखंड में 70 हजार पेंशनधारक फर्जी पाए गए।

आधार से जुड़ा निवेश

आधार नंबर का इस्तेमाल स्टॉक मार्केट में निवेश के लिए ही नहीं म्युचुअल फंड स्कीम, जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा के लिए भी आधार नंबर को अनिवार्य कर दिया गया है। आईटीआर में कुछ लोग फर्जी निवेश दिखाकर आयकर में चोरी करते थे। आधार से निवेश में जोड़े जाने से अब आयकर चोरी रूकेगी।

रजिस्ट्री के लिए आधार जरूरी

बेनामी संपत्ति पर अंकुश लगाने के लिए संपत्ति के रजिस्ट्रेशन के लिए आधार जरूरी कर दिया गया है। नई रजिस्ट्री कराने वाले क्रेता और विक्रेता दोनों के आधार नंबर होना अनिवार्य है। जिनके पास आधार कार्ड नहीं हैं, उनका आधार के लिए उसी

टीडीएस रिटर्न में तेजी

समय रजिस्ट्री ऑफिस में पंजीकरण किया जा रहा है। पुरानी रजिस्ट्री, किसानों के नाम से उनके खेत तथा अन्य प्रापर्टी भी आधार से लिंक करने के लिए सरकार अभियान चलाने की तैयारी में है।

2.33 करोड़ फर्जी राशन कार्ड

आधार नंबर से राशन कार्ड को जोड़ने की योजना से सरकारी खजाने को राहत मिली है। खाद्य सब्सिडी में सालाना 14 हजार करोड़ रुपए की चोरी रूक गई। आधार लिंकिंग से देशभर में कुल 2.33 करोड़ राशन कार्ड फर्जी मिले। इन कार्डों को रद्द कर दिया गया है। केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में 23.20 करोड़ राशन कार्ड हैं, जिसे शत प्रतिशत डिजिटल किया जा चुका है। अब तक 77 फीसदी राशन कार्ड को आधार से जोड़ा जा चुका है। इसमें 2.33 करोड़ राशन कार्ड फर्जी मिले।

एक करोड़ फर्जी जॉब कार्ड रद्द

मनरेगा में अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायतों को देखते हुए आधार नंबर को इस योजना के लिए अनिवार्य कर दिया। आधार नंबर लिंक होने पर मनरेगा में देशभर में एक करोड़ से ज्यादा जॉब कार्ड फर्जी मिले। सरकार ने तत्काल प्रभाव से फर्जी जॉब कार्ड को रद्द कर दिया।

एक व्यक्ति, एक पीएफ खाता

सरकार ने पीएफ खाते के लिए आधार अनिवार्य कर दिया है। जो व्यक्ति अलग-अलग समय में अलग-अलग कंपनियों में काम किया। उनके पीएफ खाते अलग-अलग खोले गए। आधार से पीएफ खाता जुड़ जाने से अलग-अलग खातों को एक ही खाते से जोड़ने में सहूलियत हो गई है। लोगों को इसका लाभ मिलने लगा है। पीएफ खाते

अपने जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन रखने के लिए सरकार ने डिजिटल लॉकर की सुविधा दी है, जहां आप जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाण जैसे अहम दस्तावेजों को ऑनलाइन स्टोर कर सकते हैं


01 - 07 जनवरी 2018

अगर आधार न होता...

आधार कार्ड सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बनकर ही नहीं उभरा, बल्कि उसका एक मानवीय पक्ष भी है, जिसके बारे में देश के बहुत सारे लोग नहीं जानते ​​हैं

बेटा लौटा घर

इसी तरह ओम प्रकाश का आधार कार्ड नहीं बन सका, क्योंकि उनकी डिटेल्स झारखंड के रहने वाले एक शख्स ओम प्रकाश के ही नाम से मिल गई। ओम प्रकाश के पिता आधार की तारीफ करते नहीं थकते। ओम प्रकाश के पिता का कहना है कि सभी उम्र के लोगों, बच्चे से लेकर जवान के पास आधार कार्ड होना चाहिए। तीसरा बच्चा, नीलकांत भी अपने परिवार से सिर्फ इसीलिए मिल सका, क्योंकि उसकी डिटेल्स तिरुपति के रहने वाले एक शख्स से मैच हो गई।

धार कार्ड ने रायबरेली के एक बुजुर्ग का जीवन बदल दिया। अगर आधार न होता तो वह व्यक्ति गुमनामी के अंधेरे में खो गए होते। रायबरेली के रालपुर कस्बे में एक बुजुर्ग कई दिनों से भीख मांग रहे थे। लोग उन्हें भिखारी समझकर नजरअंदाज कर रहे थे। इसी बीच अनंगपुरम स्कूल के स्वामी भास्कर स्वरूप जी महराज की नजर उन पर पड़ी। वह उस बुजुर्ग को आश्रम ले गए। वहां उसे नहलाया गया। उसके बढ़े हुए बाल काटे गए। उसके कपड़े से आधार कार्ड के साथ एक करोड़ छह लाख 92 हजार 731 रुपए के एफडी के कागजात मिले। आधार कार्ड के जरिए उनके परिवार से परिवार से संपर्क किया गया तो बुजुर्ग की पहचान मुथैया नादर, पुत्र सोलोमन के रूप में हुई। वह तमिलनाडु के तिरूनेलवेली के रहने वाले करोड़पती कारोबारी निकले। उसके घरवालों ने बताया कि हम मुथैया नादर को जगह-जगह ढूंढ रहे थे। वह कई महीनों से लापता थे। बुजुर्ग के घरवालों को खबर लगते ही उसकी बेटी गीता तमिलनाडु से लखनऊ और फिर वहां से रालपुर पहुंची। गीता अपने पिता को वापस तमिलनाडु ले गई।

के ऑनलाइन निपटान के लिए खाते का सत्यापन आधार डेटाबेस के आधार पर करने से कहीं से भी चूक होने की आशंका नहीं है।

आधार आधारित डिजिटल लॉकर

अपने जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन रखने के लिए सरकार ने डिजिटल लॉकर की सुविधा दी है, जहां आप जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाण जैसे अहम दस्तावेजों को ऑनलाइन स्टोर कर सकते हैं। यह सुविधा पाने के लिए बस आपके पास आधार कार्ड होना चाहिए। इस सुविधा की खास बात ये है कि एक बार लॉकर में अपने

आठ साल की बच्ची आई घर गीता का कहना है कि उसके पिता मुथैया नादर पांच-छह महीने पहले ट्रेन से सफर के दौरान गुम हो गए थे। जहरखुरानी गिरोह के शिकार होने के कारण वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठे और भिखारी बनकर घूमते रहे। उन्हें वापस पाकर अब मैं बेहद खुश हूं। इससे पहले भी बिछड़े लोगों को आधार कार्ड की वजह से वापस अपना परिवार मिला और परिवार को उनका बिछड़ा परिजन।

मंदबुद्धि बच्चे का सहारा

दो साल पहले इंदौर से गायब हुआ मंदबुद्धि बच्चा बेंगलुरू के एक संस्थान में रह रहा था। आधार कार्ड बनाने के लिए बच्चे का भी फिंगर प्रिंट लिया गया। सॉफ्टवेयर ने फिंगर प्रिंट को स्वीकार नहीं किया। तकनीकी खामी पता करने पर पता चला कि उसका पहले से ही आधार कार्ड बना हुआ है। उस आधार कार्ड के जरिए उसकी पहचान मोनू चंदेल के रूप में हुई। फिर इंदौर में रह रहे उसके पिता रमेश चंदेल से संपर्क किया गया और उन्हें उनका बच्चा सौंप दिया गया। आधार कार्ड ने दो साल से परिवार से बिछड़े बच्चे को मिलाने का भी काम किया है।

बिलासपुर, हिमाचल के स्वारघाट की 8 साल की बच्ची चार साल बाद 12 वर्ष की उम्र में पटियाला के पिंगला आश्रम से मिली। यहां भी आश्रम में आधार कार्ड बनाने के लिए बच्ची को लाया गया तो पता चला कि इसका आधार पहले से बना हुआ है। फिर उस आधार कार्ड के जरिए ही बच्ची को उसके परिवार तक पहुंचाया जा सका।

कुछ घंटों में मिला बच्चा

मुजफ्फरनगर में खालापार निवासी एक युवक ने पांच वर्षीय बच्चे का एडमिशन मीनाक्षी चौक के नजदीक स्कूल में कराया था। उसके अगले दिन बच्चा खेलते-खेलते स्कूल से बाहर निकल गया और भटक गया। बच्चा भटकते हुए कंपनी बाग में पहुंच गया। बच्चा नाम पता बता पाने में असमर्थ था। तहसील कर्मचारी ने उसे एसडीएम सदर रेनू सिंह के पास पहुंचा दिया। एसडीएम ने बच्चे का ख्याल रखते हुए अपने अधीनस्थ को जनवाणी केंद्र भेजा। वहां आधार कार्ड मशीन पर बच्चे के फिंगर ट्रेस कराया गया तो बच्चे की आईडी सामने आ गई। ऐसा आधार कार्ड बने होने से मुमकिन हुआ कि कुछ ही घंटों बाद बच्चा अपने परिवार से मिल गया।

दस्तावेज अपलोड करने के बाद आपको कहीं भी अपने सर्टिफिकेट की मूल कॉपी देने की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए आपके डिजिटल लॉकर का लिंक ही काफी होगा।

रोक लगाने में मदद मिली है। मई 2016 में प्राप्त आंकड़े के मुताबिक 3.34 करोड़ गैस कनेक्शन नकली, जाली या असक्रिय थे। इससे 21 हजार करोड़ रुपए की बचत सरकार को हुई।

सरकार ने रसोई गैस कनेक्शन से आधार लिंक करना अनिवार्य कर दिया। इसके साथ ही गैस सब्सिडी आधार लिंक्ड बैंक खाते में डायरेक्ट ट्रांसफर बेनिफिट के तहत जाने लगा है। इससे नकली कनेक्शन और चोर-बाजारी की समस्या पर

स्कॉलरशिप में आए दिन रिश्वतखोरी, दलाली और फर्जीवाड़े की खबरें मिलती थीं, लेकिन आधार नंबर अनिवार्य करने के बाद इस तरह के समाचार मिलने बंद हो गए हैं। अब कोई फर्जीवाड़ा कर भी ले तो आधार नंबर के कारण पकड़ा जा रहा है। समाचार अब इस तरह से सुनने में आते हैं। आधार

एलपीजी के 3.34 करोड़ फर्जी कनेक्शन

05

आधार

स्कॉलरशिप के लिए आधार अनिवार्य

लिंक के कारण स्कॉलरशिप में हो रहे फर्जीवाड़े पर लगाम लगी है।

आधार से जुड़ेंगे वोटर कार्ड

राष्ट्रीय निर्वाचन नामावली परिशोधन एवं प्रमाणीकरण कार्यक्रम के तहत आधार कार्ड, मोबाईल नंबर एवं ई-मेल मतदाता सूची डाटाबेस में शामिल किया गया है। इससे किसी व्यक्ति का नाम दो जगह के मतदाता सूची में नहीं रह सकेगा। फर्जी वोटिंग पर रोक लगेगी एवं मतदान की प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी

मिड-डे मील योजना में लाखों फर्जी छात्र केंद्र सरकार ने मिड डे मील योजना में आधार को मार्च, 2017 में अनिवार्य किया। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त, 2017 तक में सिर्फ 3 राज्यों में 2.72 लाख फर्जी छात्र-छात्राओं की पहचान की गई। आंध्र प्रदेश में 2.15 लाख, अरुणाचल प्रदेश में 42,414 और मणिपुर में लगभग 14,000 विद्यार्थियों के नाम मिड-डे मील से हटाए जा चुके हैं।

टीडीएस रिटर्न में तेजी

आयकर विभाग आईटीआर भरने के लिए पैन और आधार को लिंक्ड कराना अनिवार्य कर दिया। इसके माध्यम से टैक्स पेयर का आधार नंबर के जरिए ई-वेरिफिकेशन की सुविधा मिली हुई है। आधार लिंक्ड करने के बाद आईटीआर समिट करते समय ओटीपी देते ही ई-वेरिफिकेशन हो जाता है। इसके तहत आईटीआर भरने के बाद एकनॉलेजमेंट पेपर को प्रिंट करके, साइन करके सेंट्रल प्रोसेस सेंटर भेजने की जरूरत नहीं रहती। ऐसे में आईटीआर के प्रोसेस होने में तेजी आई। इतना ही नहीं, टीडीएस रिटर्न प्रोसेस में भी तेजी आई।

दस दिन में पासपोर्ट

पासपोर्ट के लिए आधार नंबर अनिवार्य है। पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन करते समय आवेदनकर्ता को पहचान और पते के प्रमाण के तौर पर सिर्फ आधार नंबर देना है। आधार नंबर देने से दस दिनों में पासपोर्ट जारी हो जाएगा। पासपोर्ट के लिए आवदेन करने वाले को 3 दिनों के अंदर अप्वांइटमेंट मिल जाएगा और अन्य 7 दिनों के अंदर पासपोर्ट की प्रोसेसिंग होकर उनके घर पर पहुंच जाएगा। यहां तक कि पासपोर्ट को जारी करने के लिए जरूरी पुलिस सत्यापन आपको बाद की तारीख में किया जाएगा।

रेल टिकट में दलालों पर अंकुश

दलालों की वजह से जन सामान्य लोगों को ट्रेन में आरक्षित टिकट लेने में काफी मशक्कत करनी होती है। दलालों पर अंकुश लगाने के लिए आईआरटीसी ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग के लिए आधार से वेरिफिकेशन करने पर 1 महीने में 12 टिकट बुक करने की अनुमति दी है। आधार वेरिफिकेशन के बगैर सिर्फ 6 टिकट बुक करा सकते हैं। तत्काल टिकट सर्विस के दुरुपयोग में भी कमी आएगी।


06

रोजगार

01 - 07 जनवरी 2018

हर हाथ को काम

बेरोजगारी का दंश झेलने वाले युवाओं के लिए नया साल रोजगार और नौकरियों का तोहफ लेकर आने वाला है

खास बातें

नए साल में बढ़ेंगे रो जगार के ज्यादा अवसर

देश में पहली बार बनेगी राष्ट्रीय रोजगार नीति आर्थिक और श्रमि क नीतियों में संशोधन की तैयार ी

एसएसबी ब्यूरो

या साल देश के युवाओं के लिए नौकरियों की सौगात लेकर आने वाला है। अनुमान है कि करीब एक करोड़ नए रोजगार के अवसर युवाओं के सामने आएंगे। देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मेक इन इंडिया योजना की शुरुआत की गई। इसको लेकर नीति आयोग के महानिदेशक (डीएमईओ) और सलाहकार अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए 2020 तक 10 करोड़ नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि हम चौथे तकनीकी रेवॉल्यूशन के दौर से गुजर रहे हैं। सरकार मेक इन इंडिया के जरिए 2020 तक 10 करोड़ युवाओं को रोजगार देने के मिशन के साथ काम कर रही है।

बेरोजगारी होगी दूर

मेक इन इंडिया के तहत भारत में शुरू होने वाले उद्योगों के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत होगी। इसीलिए युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए कौशल विकास मंत्रालय द्वारा कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिसके तहत युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

25 प्रतिशत होगा प्रत्यक्ष निवेश

उत्पादों के देश में बनने के बाद रक्षा सौदों की लागत घटेगी और बिचौलियों से बचा जा सकेगा। कंपनियों से मिलने वाले करों से राज्य सरकार की आय बढ़ेगी और देश के हर भाग में रोजगार की उपलब्धता बढ़ेगी। भारतीय कंपनियों के उत्पादों की सीधी टक्कर अब विदेशी कंपनियों के उत्पादों से होगी और देश की जनता को इस प्रतिद्वंदिता का लाभ मिलेगा। रोजमर्रा के जरूरत की चीजों के दाम घटेंगे और गुणवत्ता बेहतर होगी।

मजबूत होगी अर्थव्यवस्था

मोदी सरकार देश में पहली बार एक राष्ट्रीय रोजगार नीति बना रही है। आगामी केंद्रीय बजट में इसकी घोषणा हो सकती है। रोजगार नीति आने से देश में प्रत्येक साल एक करोड़ रोजगार सृजन का रास्ता साफ हो जाएगा। इस नीति में सभी सेक्टरों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। नौकरी के सृजन के लिए समग्रता के साथ सरकार एक रोडमैप भी बना रही है। केंद्र की इस

केंद्र सरकार का लक्ष्य मेक इन इंडिया के तहत भारत को विश्व में निर्माण क्षेत्र का केंद्र बनाना है। इसके साथ-साथ देश के भीतर ही उन्नत प्रौद्योगिकी और तकनीकी से निर्माण क्षेत्र में विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। एक अनुमान है कि 2022 आते-आते देश के जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत हो जाएगी। मेक इन इंडिया के पूर्णतया मूर्त रूप लेने से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। युवाओं को देश में रोजगार मिलेगा और विदेशी आयात में कमी आएगी। विदेशी मुद्रा की बचत होगी और सरकारी कोष को मजबूती मिलेगी। रक्षा

पहली बार रोजगार नीति

राष्ट्रीय रोजगार नीति के माध्यम से नियोक्ताओं को और अधिक रोजगार देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, तो नौकरियों को आकर्षक बनाने के लिए सेक्टरों के अनुसार उद्यम से जुड़े नियमों और नीतियों में सुधार किया जाएगा। रोजगार नीति के माध्यम से सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों को संगठित क्षेत्र से जोड़ना है, ताकि उन्हें न्यूनतम मजदूरी और पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा मिल सके। इसके लिए सरकार आर्थिक, सामाजिक और श्रमिक नीतियों में संशोधन भी करेगी। राष्ट्रीय रोजगार नीति के तहत सभी सेक्टरों में रोजगार की संभावना तलाशी जाएगी। सेक्टर वाइज रोजगार के लिए एक टारगेट तय किया जाएगा। टारगेट पांच साल के लिए तय किया जाएगा, जिसे एक समय अंतराल पर मॉनीटर किया जाएगा। सिर्फ मेक इन इंडिया ही नहीं, बल्कि कई ऐसी अन्य योजनाएं हैं, जो रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत में शुरू होने वाले उद्योगों के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत होगी। इसीलिए युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं


01 - 07 जनवरी 2018

07

रोजगार

पटरी पर दौड़ेगी स्वदेशी ट्रेन

लिए सरकार प्रयासरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए, 83 हजार किलोमीटर के राजमार्गों के निर्माण और चौड़ीकरण की योजना को लागू करने के लिए 7 लाख करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना के लागू होने से 15 करोड़ श्रम दिवसों का रोजगार युवाओं को मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार बनने के बाद से देश में राजमार्गों के निर्माण कार्यों में तेजी आई है। 2016-17 के दौरान प्रतिदिन अब तक की सबसे तेज गति से राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया। प्रति दिन 22 किमी. राजमार्गों का निर्माण हुआ, जो 201516 में 16 किमी. प्रतिदिन था

भारत का पहला स्वदेशी ट्रेन नए साल के अंत तक पटरियों पर उतरेगी

रे

लवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत का पहला स्वदेशी ट्रेन सेट नए साल के अंत तक पटरियों पर दौड़ने लगेगी। यह ट्रेन काफी हद तक दिल्ली में चलने वाली मेट्रो ट्रेन जैसा है, लेकिन इसका निर्माण बड़े स्तर पर हुआ है और यह 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। मेट्रो ट्रेन के विपरीत 16 डिब्बों वाला यह ट्रेन सेट लंबी दूरी तय करने में समर्थ होगी। रेलवे बोर्ड के सदस्य रविंद्र गुप्ता ने कहा,

यह भारत का पहला ट्रेन सेट होगा और यह दिसंबर 2018 तक पटरियों पर दौड़ने लगेगी। उन्होंने कहा कि शुरू में यह कुर्सी यान होगा, लेकिन बाद में इसमें शयन की भी व्यवस्था होगी। गुप्ता ने कहा कि ट्रेन सेट के लाभ ये होंगे कि वे अधिक आरामदायक होंगे, तेज गति से अधिक चक्कर लगाए जा सकेंगे और सामान्य ट्रेनों की तुलना में ये यात्रियों को उनके गंतव्यों पर जल्द पहुंचाएंगे।

रेलवे में पहली बार इन ट्रेन सेटों में स्वचालित दरवाजे होंगे जो स्टेशनों पर अपने आप खुलेंगे और अपने आप बंद होंगे तथा इनमें बड़ी खिड़कियां होंगी। सभी डिब्बे पूरी तरह वातानुकूलित होंगे और जैव शौचालयों से लैस होंगे। पहले ट्रेन सेट को या तो दिल्ली-लखनऊ या फिर दिल्लीचंडीगढ़ मार्ग पर सेवा में लाए जाने की संभावना है।

मीडिया और मनोरंजन में रोजगार

सीआईआई और ग्लोबल मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी की रिपोर्ट से यह अनुमान सामने आया है कि आने वाले पांच वर्षों में भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में सात से आठ लाख नौकरियां निकलने जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में मीडिया और मनोरंजन की सामग्रियों को लेकर रुझान काफी बढ़ा है, जिसके चलते इस सेक्टर में रोजगार के अवसर काफी बढ़ने वाले हैं।

मुद्रा योजना

ऐसी होगी स्वदेशी ट्रेन तेज गति से अधिक चक्कर स्वचालित दरवाजे स्टेशनों पर अपने आप खुलेंगे और बंद होंगे

सामान्य ट्रेनों की तुलना में यात्री जल्द गंतव्य तक पहुंचेंगे

स्टार्टअप इंडिया

यह योजना उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो लोग अपना खुद का कारोबार शुरू करना चाहते हैं। इसके तहत कारोबार शुरू करने की इच्छा रखने वाले लोगों को आर्थिक मदद दी जाती है और साथ ही उन्हें टैक्स में छूट भी मिलती है। इस योजना के तहत अब तक 1,81,119 मोड्यूल का पंजीकरण हो चुका है। इसकी शर्तों में ये भी शामिल किया जा रहा है कि कितने लोगों को रोजगार मिलेगा।

डिजिटल इंडिया

डिजिटल इंडिया की योजना से युवाओं के लिए

इन ट्रेन सेटों में स्वचालित दरवाजे होंगे

बाकी ट्रेनों के मुकाबले इनमें बड़ी खिड़कियां होंगी

रोजगार के नये अवसर पैदा हुए। सरकार के हर क्षेत्र में ई- क्रांति के कदम से स्वास्थ्य के क्षेत्र में गांवों और गैर महानगरीय शहरों को नए उत्पाद और सेवा देने वाले युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे है। इसी तरह पर्यटन के क्षेत्र में भी डिजिटल क्रांति ने नए बाजार खोलकर युवाओं को रोजगार के काफी अवसर दिए हैं।

कौशल विकास योजना

इसके लिए 21 मंत्रालयों और 50 विभागों में फैले कौशल विकास कार्य को एक ही मंत्रालय के अधीन लाया गया। अगले चार साल में एक करोड़ युवकों

सभी डिब्बे पूरी तरह वातानुकूलित होंगे और जैव शौचालयों से लैस होंगे

छोटे कारोबारियों को मदद करने के लिए इस योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपए तक के लोन दिए जाते हैं। इस योजना के तहत तीन तरह के लोन दिए जाते हैं। शिशु योजना के तहत 50 हजार रुपए तक के और किशोर योजना के तहत 50 हजार से 5 लाख रुपए तक के लोन दिए जाते हैं। जबकि तरुण योजना के तहत 5 लाख से 10 लाख रुपए तक के लोन दिए जाते हैं। मुद्रा बैंक से देश के करीब 5

2015-16 ₨3,48,80,924

कारोबारी को 2016-17 कर्ज 2017-18 ₨2,54,89,165

को प्रशिक्षित करने के लिए 12,000 करोड़ रुपए के बजट के साथ प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना शुरू की गई। इसमें 20 लाख से अधिक युवक पहले ही लाभान्वित हो चुके हैं। इसके तहत देशभर में फैले हुए 978 रोजगार कार्यालय राष्ट्रीय कॅरियर सेवा पोर्टल में एकीकृत किए गए हैं। 15 करोड़ श्रम दिवसों का रोजगार– देश के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के

₨3,97,01,047

(15 दिसंबर तक)

करोड़ 77 लाख छोटे कारोबारियों को फायदा हुआ है। छोटी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और दुकानदारों को इससे लोन मिलता है। इसके साथ ही सब्जी वालों, सैलून, खोमचे वालों को भी इस योजना के तहत लोन दिए जाने का प्रावधान है। इससे रोजगार सृजन करने और देने वालों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी हुई है।


08

स्वच्छता

01 - 07 जनवरी 2018

स्वच्छता सर्वे- 2018 की उलटी गिनती शुरू 40 करोड़ लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाले स्वच्छता प्रयासों से नागरिकों के जुड़ाव को मापने के लिए देशभर में सर्वेक्षण

खास बातें नागरिक प्रतिक्रिया और स्वतंत्र आकलन के लिए अंक बढ़े

कें

एसएसबी ब्यूरो

द्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुताबिक देशभर में पहली बार कराए जा रहे इस सर्वेक्षण के तहत सभी शहरों और कस्बों में लगभग 40 करोड़ लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाले स्वच्छता के स्तर का मूल्यांकन किया जाएगा। विश्व में इस प्रकार का यह सबसे बड़ा सर्वेक्षण है। 2016 और 2017 में घोषित ऐसे सर्वेक्षणों के परिणामों से शहरों और नागरिकों में जोश और उत्साह बढ़ने के साथ ही सभी हितधारकों के बीच स्वस्थे प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिला, जिससे देश के सभी शहरी क्षेत्रों में सर्वेक्षण के दायरे का विस्तारर हुआ। राज्य

स्वच्छता की राह

6,40, 867 गांवों में से 2,92,896 गांव हुए ओडीएफ 8 राज्यों के 8 राज्य 568.15 255 जिले सिक्किम, लाख ओडीएफ हिमाचल घरों में उत्तराखंड, प्रदेश, केरल, शौचालय बने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, स्वच्छता बिहार, गुजरात, दमन क्षेत्र झारखंड और दीव 38.70% और पश्चिम से बढ़ बंगाल के और चंडीगढ़ खु ल े में कर 52 जिलों के शौच से 74.15% 4470 गांव मुक्त हुआ हुए ओडीएफ

इस बार अभिनव तरीकों को पुरस्कृत किया जाएगा सरकारों, विशेषज्ञों और अन्यक हितधारकों के साथ व्यायपक विचार-विमर्श के आधार पर और स्वच्छा भारत मिशन (शहरी) की प्रगति के अनुरूप स्ववच्छ सर्वेक्षण- 2018 की कार्यविधि और वेटेज में कुछ बदलाव भी किए गए हैं। आवास और शहरी मामले मंत्रालय में सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने कहा कि स्वच्छता की प्रगति का मूल्यांकन करने में नागरिकों की भागीदारी की

आवश्यकता को ध्यान रख कर जमीनी स्तर पर परिणाम हासिल किए जाएंगे। 2017 के सर्वेक्षण की तुलना में नागरिकों की प्रतिक्रिया के लिए कुल वेटेज और स्वच्छता पर स्वतंत्र अवलोकन के लिए 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है। स्वच्छता के अभिनव तरीकों और स्वच्छता के मानदंड समाधानों के लिए शहरों को बढ़ावा मानदंड 2017 2018 देने के वास्ते एक नया मानदंड ओडीएफ में प्रगति 30% 30% ‘अभिनव’ शुरू किया गया है, जिसके ठोस कचरे को एकत्रित कर ले जाना 40% 30% लिए 5 प्रतिशत वेटेज रखा गया है। स्वच्छता के स्तर में लगातार सुधार ठोस कचरे का प्रसंस्करण और निपटान 20% 25% सुनिश्चित करने की आवश्यकता और तैयार किए जा रहे बुनियादी ढांचे के सूचना, शिक्षा और संचार 5% 5% प्रबंधन पर बल देते हुए दुर्गा शंकर क्षमता निर्माण 5% 5% मिश्रा ने कहा कि हाल के सर्वेक्षण में नवाचार - 5% शौचालयों में जलापूर्ति की उपलब्धता, कुल अंक 2,000 4,000 सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों की परिचालन और प्रबंधन राशि तथा उपभोग शुल्क (यूजर चार्ज) के जरिए मूल्यांकन वेटेज बुनियादी मूल्यांकन श्रेणी 2017 2018 एसडब्ल्यूएम ढांचे, विज्ञापन से मिलने सेवा स्तर पर प्रगति 45% 35% वाला राजस्व, नगरपालिका (बुनियादी ढांचागत निर्माण, प्रक्रियाएं, परिचालन) कर आदि की रिकवरी का नागरिक प्रतिक्रिया 30% 35% मूल्यांकन किया जाएगा। स्वतंत्र क्षेत्र अवलोकन 25% 30% गीले कचरे का प्रबंधन, स्रोत पर ही नगरपालिका के कचरे

सतत पहलों और विकेंद्रीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर जोर को अलग-अलग करना, विकेंद्रीकृत कंपोस्ट खाद बनाने आदि के लिए वेटेज 5 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। प्रचलन पर ध्यान देते हुए इस सर्वेक्षण में राज्य और शहर की सरकारों द्वारा यूजर चार्ज लेने, कंपोस्ट खाद की बिक्री और मार्केटिंग, स्वच्छता कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति, कूड़ा एकत्रित करने वाले वाहनों की जीपीएस ट्रैकिंग और सार्वजनिक शौचायलों के प्रबंधन से संबंधी जारी अधिसूचनाओं के परिणामों को भी पुरस्कृत किया जाएगा। स्वच्छता बुनियादी ढांचे और सेवा के स्तर में सुधार की प्रगति के बारे में शहरों के दावों की सख्त जांच सुनिश्चित करना। इस बार के सर्वेक्षण में सभी मानदंडों के संदर्भ में निगेटिव अंक का भी प्रावधान है। इसके तहत अगर शहर की सरकारों द्वारा किए गए दावे स्वतंत्र आकलनकर्ताओं द्वारा गलत पाए गए तो ऐसे मानदंडों के संदर्भ में शून्य अंक के अलावा उन्हें 35 निगेटिव अंक दिए जाएंगे। 2018 के इस सर्वे में 4041 शहरों और कस्बों को कवर किया जाएगा तथा इसके परिणाम मार्च में घोषित किए जाएंगे। इसके लिए अन्य 500 शहरों और कस्बों की राष्ट्रीय रैंकिंग के अलावा 3541 कस्बों, राज्य और क्षेत्रीय रैंकिंग की भी घोषणा की जाएगी। इस सर्वेक्षण के अंतर्गत कुल 4000 अंकों के लिए विभिन्न वेटेज के साथ 71 स्वच्छता संबंधी मानदंडों के आधार पर शहरों की रैंकिंग की जाएगी।


01 - 07 जनवरी 2018

09

ऊर्जा

सौर ऊर्जा में आगे बढ़ेगा भारत सरकार सोलर फोटोवोल्टिक मैन्यूफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देने के लिए 11 हजार करोड़ रुपए का पैकेज देने पर विचार कर रही है

कें

एसएसबी ब्यूरो

द्र की एनडीए सरकार ने 2022 तक सोलर बिजली उत्पादन को एक लाख मेगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध दिखाई दे रही है। सरकार सोलर फोटोवोल्टिक मैन्यूफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देने के लिए 11 हजार करोड़ रुपए का पैकेज देने पर विचार कर रही है ताकि ऊर्जा की जरूरतें भी पूरी हों और प्रकृति का संरक्षण भी साथ-साथ जारी रहे।

बजट में होगा जिक्र

वर्ष 2018 के पहले महीने में ही स्कीम को अंतिम रूप दिया जाएगा और इसकी घोषणा एक फरवरी 2017 को बजट में की जा सकती है, जिसे वित्तीय वर्ष 2018-19 में लागू किया

जाएगा। इस स्कीम में निवेश राशि के 30 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का प्रस्ताव है। जो सब्सिडी नहीं लेंगे उन्हें तीन प्रतिशत तक सस्ता कर्ज मिलेगा। साथ ही मशीनरी के आयात पर आयात शुल्क नहीं लगाने का फैसला हो सकता है, ताकि मशनीरी के मूल्य में कमी की जा सके। इसके अलावा मंत्रालय सोलर सेक्टर के आधुनिकीकरण के लिए ‘टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड’ बनाने पर विचार कर रहा है।

तीन वर्षों की कामयाबी

ऊर्जा क्षेत्र का कायापलट करने के लिए सरकार ने पिछले तीन सालों में कई योजनाओं को लागू किया, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इस दौरान सौर ऊर्जा में 370 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। पहले के लगभग 2.6 गीगावॉट की तुलना में अब 12.2 गीगावॉट से अधिक हो गई है। इसे 2022 तक 100 गीगावॉट करने का लक्ष्य है। वहीं सोलर

रूफ टॉप की स्थापित क्षमता में 15 गुना वृद्धि हुई है। 2014-15 में यह 41 मेगावॉट थी, जो 2016-17 में बढ़कर 656 मेगावॉट हो गई।

नई स्कीम पर विचार

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय सौर ऊर्जा के उत्पादन में तेजी लाने के लिए नई स्कीम पर विचार कर रही है। इस स्कीम के तहत सोलर फोटोवोल्टिक (पीवी) मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में 11 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। इसके लिए मंत्रालय ने एक प्रस्ताव तैयार किया है।

सोलर अलायंस की तारीफ

विश्व का सबसे बड़ा भूमि पर स्थापित सौर संयंत्र भारत में है और विश्व का सबसे बड़ा रूफटॉप दोनों ही भारत में हैं। इसीलिए इंटरनेशनल सोलर अलायंस ने भारत को जगतगुरु की पदवी दी है।

खास बातें सबसे बड़ा भूमि पर स्थापित सौर संयंत्र भारत में हैं सोलर सेक्टर के आधुनिकीकरण के लिए ‘टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड’ निवेश राशि के 30 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का प्रस्ताव

हर गांव होगा रोशन

एसएसबी ब्यूरो

रकार नए साल में देश के सभी गांवों में बिजली पहुंचाने की दिशा में सक्रिय है। दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत जिस गति से ग्रामीण विद्युतीकरण का काम हो रहा है, उससे यह असंभव सा लगने वाला काम संभव लग रहा है। तीन साल पहले एनडीए सरकार के गठन के समय देश के 18,452 गांव बिजली से वंचित थे, जिनमें से 13 मई, 2017 के अनुसार 13,551 गांवों में बिजली

सरकार नए साल में 4941 गांवों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य पूरा करने में जुटी है

पहुंच चुकी है। बाकी बचे 4941 गांवों में बिजली पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है।

उत्पादन बढ़ा, बर्बादी रुकी

सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का असर है कि देश में लगातार बिजली उत्पादन में बढ़ोत्तरी हो रही है। इसकी दो बड़ी वजहें हैं। एक तरफ वितरण में होने वाला नुकसान कम हुआ है। दूसरी ओर सफल कोयला एवं उदय नीति से उत्पादन बढ़ा है। जैसे- 2013-14 में बिजली उत्पादन 96,700 करोड़ यूनिट हुआ था, जो

2014-15 में बढ़कर 1,04,800 करोड़ यूनिट हो गया।

सबसे कम मूल्य

यह दौर आगे भी जारी रहा और 201617 में बिजली उत्पादन 1,16,000 करोड़ यूनिट हो गया। 2017 तक बिजली हानि या चोरी घटकर 25 प्रतिशत रह गई है। 2017 पहला ऐसा वर्ष है जब बिजली की अधिकता रही। 2016-17 में पहली बार नवीकरणीय ऊर्जा की शुद्ध बढ़त परंपरागत ऊर्जा की शुद्ध बढ़त से अधिक रही। सौर और पवन ऊर्जा अब तक के

सबसे कम मूल्य पर उपलब्ध है।

सौर ऊर्जा का बढ़ा जोर

देश के कुल ऊर्जा उत्पादन में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ रही है, जिससे परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। 2022 तक देश के हर घर को चौबीसों घंटे बिजली देने का लक्ष्य है। जिस गति से काम चल रहा है, उससे अब यह प्राप्त कर लेना आसान लगने लगा है। पहले यह कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि देश में ऐसा भी हो सकता है।


10

पर्यावरण

01 - 07 जनवरी 2018

पीएम 2.5 प्रदूषण का गिरेगा स्तर!

खास बातें

दिल्ली में 1 अप्रैल 2018 से बीएस-4 ग्रेड के पेट्रोल और डीजल के बजाय बीएस-6 ग्रेड का ईंधन मिलेगा

बी

एसएसबी ब्यूरो

ते वर्ष ने जाते-जाते प्रदूषण के बढ़े खतरे को लेकर पूरे देश को चेता दिया है। खासतौर पर वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली और मुंबई सहित सभी महानगरों में स्थिति ऐसी रही कि सरकारों को नेशनल ग्रीन ट्रिव्यूनल ने कई तरह की सख्ती के निर्देश दिए। नए साल में सबसे ज्यादा ध्यान प्रदूषण फैला रहे वाहनों पर अंकुश लगाने पर दिया जाएगा।

पीएम 2.5

ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों से दो खतरे होते हैं। इनसे निकलते पार्टिकुलेट मैटर यानी पीएम 2.5 जैसे खतरनाक कण और नाइट्रोजन ऑक्साइड गैस, जिसे नॉक्स भी कहा जाता है। जहां एक ओर पीएम 2.5 जैसे कण अस्थमा, ब्रांकाइटिस, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों के कारण हो सकते हैं, वहीं वाहनों से निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड वातावरण में मौजूद हाइड्रोकार्बन के साथ रिएक्शन कर जमीनी स्तर पर खतरनाक ओजोन गैस बनाती है।

बीएस-6 ग्रेड

वाहनों के ईंधन से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए भारत सरकार पेट्रोल और डीजल के मानक में सुधार करने की कोशिश लगातार कर रही है। इसके तहत दिल्ली में 1 अप्रैल 2018 से बीएस-4 ग्रेड के पेट्रोल और डीजल के बजाय बीएस-6 ग्रेड का ईंधन मिलेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा सरकारी तेल कंपनियों से बातचीत के बाद यह फैसला लिया है।

डीजल इंजन

वायु प्रदूषण को लेकर एनजीटी की तरफ से सख्ती के निर्देश

दरअसल वाहनों से होने वाले प्रदूषणों के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार मूल रूप से डीजल इंजन ही हैं। 2020 से लाए जा रहे यूरो-6 नॉर्म, यानी भारत स्टेज 6 या बीएस-6 मानक आ जाने से प्रदूषण काफी हद तक काबू में आएगा। भारत की प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में यह मानक एक बड़ी क्रांति ला सकते हैं, लेकिन चुनौती यह भी है कि 2020 तक सड़कों पर भारी संख्या में जमा हो चुके पुराने वाहनों को कम कैसे किया जाए? इस लिहाज से

बीएस-6 मानक आने से वायु प्रदूषण पर काफी हद तक लगेगी रोक बीएस-6 गाड़ियों में एडवांस एमिशन कंट्रोल सिस्टम फिट होगा

वर्ष 2018 और 2019 काफी महत्वपूर्ण वर्ष होंगे, क्योंकि इन्हीं दो वर्षों में भारत स्टेज6 को लेकर सारी जरूरी तैयारियां पूरी करनी होगी। मंत्रालय ने कंपनियों से 1 अप्रैल, 2019 तक एनसीआर के अन्य शहरों में भी बीएस-6 ग्रेड के ईंधन को बेचने की संभावनाएं तलाशने को कहा है। मंत्रालय का कहना है कि इससे दिल्ली और आसपास के शहरों में प्रदूषण की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।

कार्बन उत्सर्जन में कमी

पेरिस जलवायु सम्मेलन में भारत ने वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर लगाम लगाने की बात कही थी। इसके बाद से ही प्रदूषण रोकने वाले नए नियम को लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। बीएस-6 नियम आने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। 1 अप्रैल 2017 से ही पेट्रोलियम मंत्रालय ने पूरे देश में बीएस-4 ग्रेड के पेट्रोल और डीजल की बिक्री

शुरू की थी। अब मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस ने भारत स्टेज-6 फ्यूल नॉर्म को 1 अप्रैल 2018 से अमल में लाने का निर्णय लिया है। पहले यह नॉर्म 2020 से लागू किया जाना था। सीएसई ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे प्रदूषण को कम करने में मददगार बताया है। पीएम 2.5 की वैल्यू जब 400 एमजीसीएम तक पहुंच जाती है तो उसमें 120 एमजीसीएम से ज्यादा का योगदान वाहनों से होने वाले प्रदूषण कणों से ही होता है। बीएस-6 फ्यूल आने से पर्टिकुलेट मैटर में इनकी 20 से 40 एमजीसीएम तक ही हिस्सेदारी रहेगी।

सल्फर की कम मात्रा

सीएसई के मुताबिक, बीएस-6 फ्यूल से सल्फर की मात्रा बीएस-4 से 5 गुना तक कम होगी। यह काफी क्लीन फ्यूल है। इस फ्यूल के इस्तेमाल से सड़कों पर चल रही पुरानी गाड़ियों में भी फैल रहा प्रदूषण कम होगा। बीएस-6 गाड़ियों में भी एडवांस एमिशन कंट्रोल सिस्टम फिट होगा। हालांकि, इसका पूरा लाभ तब मिलेगा, जब गाड़ियां भी पूरी तरह से बीएस-6 टेक्नोलॉजी आधारित तैयार की जाएंगी। सीएसई के मुताबिक, इंडस्ट्री को इस दिशा में कदम आगे बढ़ाने चाहिए।

पेरिस जलवायु सम्मेलन में भारत ने वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर लगाम लगाने की बात कही थी। इसके बाद से ही प्रदूषण रोकने वाले नए नियम को लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं

बीएस नॉर्म्स

वायु प्रदूषण फैलाने वाले मोटर गाड़ियों सहित सभी इंजन वाले उपकरणों के लिए 'भारत चरण उत्सर्जन मानक' (बीएस) की शुरुआत केंद्र सरकार ने वर्ष 2000 में की थी। इसके विभिन्न मानदंडों को समय और मानकों के अनुसार, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन के मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर लाया जाता है। भारत चरण (बीएस) मानदंड यूरोपीय नियमों पर आधारित हैं। ये एमिशन स्टैंडर्ड केंद्र सरकार द्वारा तय किया जाता है जो गाड़ी में लगे इंजन की प्रदूषण क्षमता को बताता है।

यूरोपीय तर्ज पर आधारित

भारत स्टेज के मानक यूरोपीय मानक यूरो-4 और यूरो-6 पर आधारित है और इसी की तर्ज पर इसे अमल में लाया जाता है। ये मानक दुनिया भर में ऑटोमोबाइल कंपनियां इस्तेमाल करती हैं। इनसे ये पता चलता है कि कोई वाहन वातावरण को कितना प्रदूषित करता है। वर्तमान में जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान के कुछ हिस्सों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत में बीएस-4 ईंधनों की आपूर्ति की जा रही है, जबकि देश के बाकी हिस्से में बीएस-3 ईंधन की आपूर्ति की जा रही हैं।

नए ईंधन का मूल्य

स्वच्छ पेट्रोल-डीजल बनाने के लिए ऑयल रिफाइनरियों को 28000 करोड़ रुपए का निवेश करना होगा। फ्यूल कितना महंगा होगा या नहीं होगा यह उस वक्त क्रूड (कच्चा तेल) की कीमतों पर निर्भर करेगा।


01 - 07 जनवरी 2018

पूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य पूरा होगा

बीएस-6 मानक

वाहनों पर एक खास फिल्टर लगाए जाएंगे

इनमें डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर यानी डीपीएफ होंगे इससे 80 से 90 फीसदी पीएम 2.5 जैसे कण हवा में आने से रोके जासकेंगे

इसमें सिलेक्टिव कैटलिटि े क रिडक्शन टेक्नोलॉजी इस्तेमाल होगी इससे नाइट्रोजन ऑक्साइड को काबू में किया जा सकेगा

बीएस-6 मानकों के लागू होने पर कारों के साथ-साथ ट्रकों, बसों जैसे भारी वाहनों में भी फिल्टर लगाने जरूरी होंगे मौजूदा भारत स्टेज-4 और भारत स्टेज3 मानकों के तहत यह शर्तें लागू नहीं होती थी, जिससे काफी प्रदूषण होता है

सहयोग की मांग

सरकार ने ऑटो कंपनियों से इसके लिए सहयोग मांगा है। इस वक्त देश में कई कंपनियां यूरो 6 नॉर्म्स की गाड़िया एक्सपोर्ट कर रही हैं। बीएस 6 नॉर्म्स टू-व्हीलर पर भी लागू होंगे। उत्सर्जन मानक या एमिशन नॉर्म ये तय करते हैं कि किसी भी गाड़ी से ईंधन के जलने पर वातावरण कितना प्रदूषित हो रहा है। उत्सर्जन मानक तय करने में गाड़ी में डाले जाने वाले ईंधन की क्वालिटी और इंजन टेक्नोलॉजी का सबसे ज्यादा महत्व होता है।

एक बड़ा कदम

जैविक ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे अनूप बंदीवदेकर कहते हैं, ‘भारत स्टेज-6 मानकों को लागू करना एक बड़ा प्रभावी कदम है और इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए, लेकिन सड़क के व्यवहारिक हालात में सही परिणाम हासिल करने के लिए बीएस-6 से भी आगे 6- बी और 6- सी जैसे मानकों की ओर बढ़ना होगा।’

ईंधन की क्वॉलिटी

भारत स्टेज-6 मानक ईंधन की क्वॉलिटी पर भी लागू होंगे। अभी ईंधन में सल्फर की मात्रा 50 पीपीएम होती है, जो भारत स्टेज-6 मानकों में घटकर 10 पीपीएम रह जाएगी, यानी अभी के स्तर से 80 प्रतिशत कम। इस उम्दा ईंधन की वजह से नए स्टैंडर्ड के फिल्टर लगाना मुमकिन होगा।

निवेश करना होगा

सेंटर फॉर साइंस एंड इन्वायरमेंट यानी सीएसई की अनुमिता रॉय चौधरी कहती हैं कि यह सच है कि हमारी रिफायनरियों को निवेश करना होगा, लेकिन उन्हीं ने यह वादा किया था कि 2020 तक वे यूरो- 6 मानकों का ईंधन मुहैया कराएंगे। अब यह जिम्मेदारी ऑटोमोबाइल कंपनियों की है कि वह इन मानकों की गाड़ियां तैयार करें।

11

स्वास्थ्य

पू

तीव्र मिशन इंद्रधनुष के तहत कुल मिलाकर 118 जिलों, 17 शहरी क्षेत्रों और पूर्वोत्तर राज्यों के 52 जिलों को लक्षित किया जाएगा

एसएसबी ब्यूरो

र्ण टीकाकरण में तेजी लाने और निम्न टीकाकरण वाले शहरी क्षेत्रों एवं अन्य इलाकों पर अपेक्षाकृत ज्यादा ध्यान देने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक आक्रामक कार्ययोजना तैयार की है। इस कार्य योजना का लक्ष्य वर्ष 2018 तक पूर्ण टीकाकरण है। योजना के मुताबिक राज्य 07 अक्टूबर, 2017 से लगातार चार महीनों तक हर माह की सात तारीख से सात कार्य दिवसों के दौरान तीव्र मिशन इंद्रधनुष अभियान चलाएगी, जिसमें रविवार, अवकाश दिवस एवं सामान्य टीकाकरण दिवस शामिल नहीं हैं। तीव्र मिशन इंद्रधनुष के तहत कुल मिलाकर 118 जिलों, 17 शहरी क्षेत्रों और पूर्वोत्तर राज्यों के 52 जिलों को लक्षित किया जाएगा।

तीव्र मिशन इंद्रधनुष

तीव्र मिशन इंद्रधनुष के तहत उन शहरी क्षेत्रों पर अपेक्षाकृत ज्यादा ध्यान दिया जाएगा, जिन पर मिशन इंद्रधनुष के तहत फोकस नहीं किया जा सका था। शहरी क्षेत्रों में इससे वंचित रही आबादी के

मानचित्रण और इन क्षेत्रों में टीकाकरण सेवाएं मुहैया कराने के लिए एएनएम की आवश्यकता आधारित तैनाती के जरिए यह काम पूरा किया जाएगा। शहरों के इन क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी तैनाती के लिए क्षेत्रीय कर्मचारियों को आवाजाही संबंधी सहायता मुहैया कराई जाएगी।

निगरानी और जवाबदेही

सभी स्तरों पर गहन निगरानी एवं सुदृढ़ जवाबदेही व्यवस्था स्थापित की जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर कैबिनेट सचिव और राज्य स्तर पर मुख्‍य सचिव इस दिशा में हो रही तैयारियों एवं प्रगति की समीक्षा करेंगे। तीव्र मिशन इंद्रधनुष के लिए चिन्हित प्रत्येक जिले पर संबंधित भागीदार प्रत्येक जिले हेतु चिन्हित मुख्य व्यक्ति के जरिए करीबी नजर रखेंगे। इसके अलावा तीव्र मिशन इंद्रधनुष के विभिन्न चरणों के पूरा हो जाने के बाद तीव्र मिशन इंद्रधनुष के सत्रों को सामान्य टीकाकरण सूक्ष्म योजनाओं के साथ एकीकृत करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। इन सत्रों के एकीकरण पर संबंधित भागीदार और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी करीबी नजर रखेंगे।

समन्वय पर जोर

तीव्र मिशन इंद्रधनुष की एक विशिष्ट खूबी यह है कि इसके तहत अन्य मंत्रालयों व विभागों विशेषकर महिला एवं बाल विकास, पंचायती राज, शहरी विकास, युवा मामले, एनसीसी इत्यादि से जुड़े मंत्रालयों एवं विभागों के साथ सामंजस्य बैठाने पर अपेक्षाकृत ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। विभिन्न विभागों के जमीनी स्तर वाले कामगारों जैसे कि आशा, एएनएम, आंगनवाड़ी कर्मचारियों, एनयूएलएम के तहत जिला प्रेरकों, स्वयं सहायता समूहों के बीच समुचित सामंजस्य तीव्र मिशन इंद्रधनुष के सफल क्रियान्वयन के लिहाज से अत्यंत आवश्यक है।

चार चरण

मिशन इंद्रधनुष के चार चरणों को देश के 528 जिलों में पूरा किया जा चुका है। मिशन इंद्रधनुष के तहत अब तक 2.47 करोड़ से ज्यादा बच्चों और लगभग 67 लाख गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया है। मिशन इंद्रधनुष के प्रथम दो चरणों के परिणामस्वरूप एक साल में पूर्ण टीकाकरण कवरेज में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इससे पहले इसमें 1 प्रतिशत की ही वृद्धि हुई थी। इसमें शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है।


12

भा

अर्थव्यवस्था

01 - 07 जनवरी 2018

नया साल करेगा मालामाल

नए साल में देश को सबसे बड़ी खुशखबरी आर्थिक मोर्चे पर मिलेगी। अर्थव्यवस्था की बढ़ती रफ्तार से दुनिया की तमाम रेटिंग एजेंसियां खुश हैं और माना जा रहा है कि ब्रिटेन-फ्रांस को पछाड़ भारत नए साल में दुनिया की टॉप-5 अर्थव्यवस्था वाला देश बनेगा एसएसबी ब्यूरो

रत नए साल में ब्रिटेन और फ्रांस को पछाड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। हाल ही जारी एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। सेंटर फॉर इकोनॉमिक ऐंड बिजनस रिसर्च कंसल्टंसी के 2018 वर्ल्ड इकोनॉमिक लीग टेबल में ऊर्जा एवं तकनीक के सस्ते साधनों की बदौलत वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेज वृद्धि का अनुमान जताया गया है। भारत भी इसी ट्रेंड पर आगे बढ़ रहा है। इससे अगले 15 सालों तक टॉप 10 सबसे बड़ी इकॉनमिज में एशियाई अर्थव्यवस्थाओं का दबदबा बढ़ता रहेगा। सीईबीआर के डेप्युटी चेयरमैन डगलस मैकविलियम्स ने कहा, 'तात्कालिक झटके के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था 2018 में फ्रांस और यूके से आगे निकल जाएगी और डॉलर के मामले में दोनों को पछाड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी।' मैकविलियम्स ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी की वजह से भारत के विकास की गति थोड़ी मंद पड़ी। इससे पहले रॉयटर्स के पोल में भी अर्थशास्त्रियों ने यही राय जाहिर की थी। सीईबीआर से पहले भी कई वैश्विक एजेंसियां मजबूत हो रही भारतीय अर्थव्यस्था के बारे में अपना अनुमान जता चुकी हैं।

जापानी वित्तीय सेवा कंपनी नोमुरा का अनुमान है कि 2018 जनवरी से मार्च तक भारतीय अर्थव्यवस्था में तेज सुधार देखने को मिल सकता है। इसके अनुसार 2018 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5% की दर से आगे बढ़ सकती है। नोमुरा की कंपोजिट लीडिंग इंडेक्स के अनुसार नए नोटों के चलन और वैश्विक मांग में सुधार से अक्टूबर-दिसंबर में विकास दर में तेजी आने की संभावना है। हाल ही में नोमुरा ने भारत की ग्रोथ के बारे में पॉजिटिव रिपोर्ट दी थी। नोमुरा में इमर्जिंग मार्केट्स इकनॉमिक्स के हेड रॉबर्ट सुब्बारमण का कहना था कि भारत कई ग्लोबल शॉक से बचा हुआ है और अगले साल उसकी ग्रोथ 7.5 पर्सेंट रह सकती है। नोटबंदी के शॉक, जीएसटी और बैंक फंडिंग जैसी इवेंट्स गुजर चुकी हैं। अब ग्रोथ तेज होने की उम्मीद है। अगले साल की पहली छमाही में हमें भारत की ग्रोथ 7.8 पर्सेंट रहने की उम्मीद है। साल 2018 में हम 7.5 पर्सेंट ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। भारतीयों को अहसास होगा कि यह टिकाऊ ग्रोथ है। उसकी ग्रोथ दूसरे इमर्जिंग देशों से अधिक रह सकती है। अगले साल हम चीन की ग्रोथ 6.4

पर्सेंट और भारत की 7.5 पर्सेंट रहने की उम्मीद कर रहे हैं।’ एसोचैम ने कहा है कि 7% विकास दर का उसका अनुमान एनडीए सरकार की नीतियों में स्थिरता, अच्छे मॉनसून, औद्योगिक गतिविधियों एवं ऋण वृद्धि में तेजी और स्थिर विदेशी मुद्रा दर के अनुमानों पर आधारित है। 2018 के लिए जारी एसोचैम के आउटलुक में कहा गया है कि, ‘2017-18 की दूसरी तिमाही में 6.3 फीसद पर पहुंची भारत की जीडीपी विकास दर की तुलना में सितंबर 2018 की तिमाही तक आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। प्रसिद्ध निवेश संस्था गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2018-19 में भारत 8 फीसदी की दर से विकास करेगा। इसके पीछे का मुख्य कारण होगा, बैंकों का पुनर्पूंजीकरण। गोल्डमैन का मानना है कि बैंकों के पूंजीकरण से देश के क्रेडिट डिमांड और निजी निवेश को मजबूती मिलेगी। गोल्डमैन के मुताबिक, ‘हम भारत की जीडीपी विकास को वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 8 फीसदी पर निर्धारित कर रहे हैं। 2017-18 में हालांकि जीडीपी विकास 6.4 फीसदी पर रहा,

डिजिटलीकरण, वैश्वीकरण और सुधारों के चलते आने वाले दशक में दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश भारत होगा

खास बातें आर्थिक विकास दर 8% हो सकता है- विश्व बैंक 2018 में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5% की दर से आगे- नोमुरा 2018-19 में 8 फीसदी की दर से विकास करेगा – गोल्डमैन सैक्स जिसका मुख्य कारण नोटबंदी और जीएसटी का शुरुआती प्रभाव रहा, लेकिन बैंकों का पुनर्पूंजीकरण जीडीपी के विकास में मददगार साबित होगा।’ भारत अगले 10 वर्षों में दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो जाएगा। वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने दावा किया है कि डिजिटलीकरण, वैश्वीकरण और सुधारों के चलते आने वाले दशक में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगी। मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि डिजिटलीकरण से जीडीपी वृद्धि को 0.5 से 0.75 प्रतिशत की


01 - 07 जनवरी 2018 बढ़त मिलेगी और अनुमान है कि 2026-27 तक भारत की अर्थव्यवस्था 6,000 अरब डॉलर की हो जाएगी। मॉर्गन स्टेनली के अनुसार आने वाले दशक में भारत की सालाना जीडीपी वृद्धि दर 7.1 से 11.2 के बीच रहेगी। अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग संस्था मूडीज के इंवेस्टर सर्विस सर्वे में पता चला है कि भारत की विकास दर अगले 12 से 18 महीने के दौरान 6.5 से 7.5 प्रतिशत के दायरे में रहेगी। सर्वेक्षण में 200 से ज्यादा मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि संभावना को लेकर विश्वास व्यक्त किया। सर्वे में शामिल सभी लोगों का मानना था कि जीएसटी के लागू होने से 12 से 18 माह में आर्थिक वृद्धि बढ़ेगी। मूडीज को विश्वास है कि आर्थिक वृद्धि की रफ्तार अगले 3-4 साल में बढ़कर 8 प्रतिशत के आसपास पहुंच जाएगी। मूडीज के सहायक प्रबंध निदेशक मैरी डिरोन का कहना है कि भारत में चल रहे आर्थिक और संस्थागत सुधारों और आने वाले समय में होने वाले बदलावों को देखते हुए नोटबंदी से पैदा हुई अल्पकालिक अड़चन के बावजूद अगले कुछ महीनों के दौरान भारत उसके जैसे दूसरे देशों के मुकाबले अधिक तेजी से वृद्धि करेगा। इसके पहले जीएसटी को लेकर वर्ल्ड बैंक ने सकारात्मक टिप्पणी की। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि जीएसटी जैसे कर सुधार के परिणामस्वरूप भारत 8 प्रतिशत की विकास दर हासिल कर सकता है। वर्ल्ड बैंक ने कहा कि जीएसटी का लागू होना एक संरचनात्मक बदलाव इसीलिए है, क्योंकि इसने पूरे देश को एक बाजार के रूप में बदलने का काम किया है। इस कर सुधार के बाद 8 प्रतिशत की विकास दर हासिल करने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। जीएसटी अगर कुशल तरीके से क्रियान्वित होता है, तो विकास की गति तेज होगी। इसके पहले अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) भारत की विकास दर में 2017-2018 तक तेजी आने की उम्मीद जता चुकी है। आईएमएफ ने 2018 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.8 फीसदी की दर से विकास करने का अनुमान व्यक्त किया है, जो मौजूदा आर्थिक गतिविधियों की तुलना में कहीं अधिक है। आईएमएफ ने अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि भारत की विकास दर में 2017 और 2018 तक तेजी आने की उम्मीद है, जो अप्रैल, 2017 में जताए गए अनुमान के अनुकूल है। भारत की अर्थव्यवस्था की गति और इसकी मजबूती पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में माना गया है कि भारत चीन से आगे बढ़कर वैश्विक विकास के आर्थिक स्तंभ के रूप में उभरा है और आने वाले दशक में वो नेतृत्व जारी रखेगा। सेंटर फॉर इंटरनेशल डेवलपमेंट (सीआईडी) ने 2025 तक सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में भारत को सबसे ऊपर रखा है। सीआईडी के अनुमान के अनुसार भारत 2025 तक सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं की सूची में सबसे ऊपर है। भारत में अर्थव्यवस्था के ग्रोथ की गति औसत 7.7 प्रतिशत की वार्षिक रहेगी। सीआईडी के रिसर्च से ये निकलकर आया है

कि वैश्विक आर्थिक विकास की धुरी अब भारत है। चीन की तुलना में दुनिया का भारत पर भरोसा बढ़ा है, जो आने वाले एक दशक से अधिक समय तक कायम रह सकता है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने आर्थिक परिदृश्य-2018 के बारे में एक शोध पत्र में कहा है कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का बुरा समय बीत चुका है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत तथा अगले वित्त वर्ष के लिए 7.2 प्रतिशत का पूर्वानुमान भी व्यक्त किया है। उसने कहा, ‘प्रमुख नीतिगत बदलावों का असर समाप्त हो जाने के बाद हमें अगली चार से छह तिमाहियों में आर्थिक वृद्धि में क्रमिक सुधार की उम्मीद है।’ अगली कुछ तिमाहियों में वृद्धि दर सात प्रतिशत पर पहुंच जाएगी। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास को सकारात्मक बताया है। यूएन ने साल 2018 में भारत की विकास दर 7.2 और 2019 में 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। दुनिया की अर्थव्यवस्था पर जारी रिपोर्ट में यूएन ने कहा गया है कि भारी निजी उपभोग, सार्वजनिक निवेश और संरचनात्मक सुधारों के कारण साल 2018 में भारत की विकास दर वर्तमान के 6.7 प्रतिशत से बढ़कर 7.2 प्रतिशत हो जाएगी और ये विकास दर साल 2019 में 7.4 प्रतिशत तक पहुंचेगी।‘वर्ल्ड इकोनोमिक सिचुएशन एंड प्रोस्पेक्ट 2018’ रिपोर्ट में यूएन ने कहा है कि कुल मिला कर दक्षिण एशिया के लिए आर्थिक परिदृश्य बहुत अनुकूल नजर आ रहा है। एक अमेरिकी टॉप थिंक-टैंक काउंसिल में भारत, पाकिस्तान और साउथ एशिया मामलों की वरिष्ठ सदस्य अलीसा एयर्स ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था उसे व्यापक वैश्विक महत्व और देश की सैन्य क्षमताओं के विस्तार तथा आधुनिकीकरण के लिये ऊर्जा दे रही है। अलीसा के अनुसार, ‘भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को बेहतर वैश्विक उछाल दिया है। इसकी मदद से भारत अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रहा है।’ फोर्ब्स में छपे लेख में अलीसा कहती हैं, ‘पिछले वर्षों में भारत दुनिया भर में विदेशी और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों के संदर्भ में एक बड़ा कारक बनकर उभरा है और अब वैश्विक मंच पर अब भारत ज्यादा मुखर दिखाई दे रहा है। दरअसल भारत खुद को एक ‘प्रमुख शक्ति’ के रूप में देख रहा है।’ चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि भारत विदेशी कंपनियों के लिए खूब आकर्षण बन रहा है। अखबार ने एक लेख में कहा है कि कम लागत में उत्पादन धीरे-धीरे चीन से हट रहा है। अखबार ने लिखा है कि भारत सरकार ने देश के बाजार के एकीकरण के लिए जीएसटी लागू किया है। यह अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने वाला है। इस नई टैक्स व्यवस्था से मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इसमें राज्य और केंद्र के विभिन्न करों को मिला दिया गया है। लेख में कहा गया है कि आजादी के बाद के सबसे बड़े आर्थिक सुधार जीएसटी से फॉक्सकॉन जैसी बड़ी कंपनी भारत में निवेश करने के अपने वादे के साथ आगे बढ़ेंगी।

13

अर्थव्यवस्था

बिजनेस रैकिंग के लिए राज्यों में होड़ बिजनेस रैंकिग में नंबर वन बनने की चाहत के कारण कई राज्यों में आपसी प्रतिस्पर्धा शुरू हुई

रा

ज्यों ने देश में बिजनेस रैकिंग में टॉप करने के लिए प्रतिस्पर्धा शुरू कर दी है। वहीं केंद्र ने राज्यों की ओर से किए गए दावों को सत्यापित करने के लिए 6,000 से अधिक उपयोगकर्ताओं से इंडिविजुअली फीडबैक लेने की प्रक्रिया शुरू की है। स्टेट बिजनेस रिफॉर्म्स इंडेक्स के लागू होने के बाद यह पहला मौका है, जब डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी ऐंड प्रमोशन (डीआईपीपी) यह सुनिश्चित करने के लिए वास्तविक यूजर्स के साथ बात करेगा कि क्या सुधार जमीनी स्तर पर हो रहा है। यह वर्ल्ड बैंक की ओर से बनाई जाने वाली ग्लोबल डूइंग बिजनेस रैंकिंग की तरह है, जिसमें इस साल भारत 30 स्थानों की छलांग के साथ 100वें नंबर पर रहा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'हमने यह सर्वे करने के एक बाहरी एजेंसी हायर की है। हर यूजर से आमने-सामने मिलने से बेहतर संवाद होगा और अच्छा फीडबैक मिलेगा।' अंतिम रैंकिंग के मार्च 2018 के अंत तक घोषित होने की उम्मीद है। इस साल डीआईपीपी ने परिवहन, राज्य उत्पाद शुल्क, स्वास्थ्य, दवा और उर्वरक सेक्टरों में करीब 400 से अधिक रिफॉर्म्स पर फोकस करते हुए एक सूची तैयार की। इन सुधारों को 11 क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है। इसमें लेबर रेग्युलेशन, कांट्रैक्ट इनफोर्समेंट, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन, सिंगल-विंडो सिस्टम, भूमि की उपलब्धता एवं आवंटन और कंस्ट्रक्शन परमिट शामिल हैं। राज्यों को भी एनवायरमेंट रजिस्ट्रेशन,

पानी और बिजली के लिए उपयोगिता परमिट प्राप्त करने, टैक्स के भुगतान, सूचना और पारदर्शिता के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाना होगा। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने पिछले साल की राज्य रैंकिंग में पहला स्थान हासिल किया था। इस साल तेलंगाना अब तक 76 पर्सेंट रिफॉर्म एजेंडा लागू करके बढ़त हासिल किए हुए है। यह रैंक डायनमिक है और नए साल में अंतिम रैंकिंग की घोषणा के समय इसमें कई बदलाव आएंगे। अधिकारी ने कहा, 'हमने कई राज्यों पर ध्यान दिया था, जिन्होंने सुधारों को बहुत सकारत्मक रूप से नहीं लिया था, लेकिन इस साल वे ज्यादा सकारात्मक गतिविधि कर रहे हैं।' कम आयवाले राज्यों ने पिछले साल 70-90 पर्सेंट रिफॉर्म्स को पूरा किया। हालांकि, राज्यों को सिंगल-विंडो क्लियरेंस और निरीक्षण को घटाने जैसे काम करने की ज्यादा जरूरत है। पिछले साल राज्यों के विनियामक और राजकोषीय प्रोत्साहन अनुमोदन, वैट के लिए ई-पंजीकरण, प्रोफेशनल टैक्स और ऑनलाइन भुगतान के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम को ज्यादा हाईलाइट किया गया था। राज्यों ने ई-समन के लिए भी प्रोविजन बनाए, जिला और कमर्शल कोर्ट में क्षमता बढ़ाई और एनवायनरमेंट-पलूशन क्लियरेंस संबंधी ऐप्लिकेशन के लिए ऑटोमेटिक साल्यूशन लागू किए। 2017 रैंकिंग के लिए पिछले साल से कई सुधारों को शामिल किया गया है और उनके सफल कार्यान्वयन के बारे में आकलन किया गया है।


14

डिजिटल

01 - 07 जनवरी 2018

डिजिटल दौर में दो कदम और आगे... देश के 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को अगले साल 2018 के मध्य तक ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने का लक्ष्य है

खास बातें छह करोड़ परिवारों को डिजिटल साक्षर करने में जुटी सरकार देश में स्थापित हुए 2.5 लाख कॉमन सर्विस सेंटर 2011 में हुई थी भारत नेट योजना की शुरुआत

डि

एसएसबी ब्यूरो

जिटल क्रांति के दौर में तो भारत करीब तीन दशक पहले ही शामिल हो गया था, पर बीते कुछ वर्षों में इस क्रांति ने भारत में विभिन्न सेक्टरों में जिस तेजी से दस्तक दी है, उससे भारतीय समाज और अर्थ जीवन का पूरा नक्शा ही बदल गया है। नए वर्ष में केंद्र सरकार देश के सभी ग्राम पंचायतों को इंटरनेट सेवा से जोड़ने जा रही है। इसके लिए भारत नेट योजना के तहत

सभी ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ा जाना है। इस योजना के तहत देश के 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को अगले साल 2018 के मध्य तक ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ देने का लक्ष्य है। जुलाई 2017 तक इस योजना के तहत एक लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। केंद्रीय कानून व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस सिलसिले में कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा कि केंद्र सरकार देश के सभी ग्राम पंचायत में इंटरनेट सेवा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस योजना के तहत वर्ष 2018 के मध्य तक गांवों में डिजिटल क्रांति का एक नया

दौर शुरू करना है। गांवों को ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से जोड़ने की प्रक्रिया पर तेजी से काम चल रहा है। इसे केंद्र सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय फाइबर ऑप्टिक्स कार्यक्रम के अंतर्गत पूरा किया जाएगा। अब तक एक लाख गांवों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने का काम पूरा हो चुका है। इसके तहत करीब ढाई लाख ग्राम पंचायतों को जोड़ा जाएगा। डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम के तहत तीन वर्षों में देश के

छह करोड़ परिवारों को डिजिटल साक्षरता में सक्षम बनाने के अभियान में सरकार पहले से जुटी है। देश को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने की दिशा में सरकार किस तेज रफ्तार से काम कर रही है, इसका अंदाजा आपको इससे होगा कि 2011 में शुरू हुई भारत नेट योजना के तहत 2014 तक यूपीए शासनकाल के दौरान सिर्फ 358 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाया गया था, जबकि एनडीए सरकार पिछले तीन वर्षों में 210,000 किलोमीटर

केवल ‘स्वयं’ जैसी योजना की ही बात की जाए तो नौवीं कक्षा से लेकर स्नातक स्तर तक उसके पाठ्यक्रम की संपूर्ण सामग्री विद्यार्थी को घर बैठे सुलभ है


01 - 07 जनवरी 2018

चीन और जापान से आगे

जो विकास की धारा से कटे हुए वर्ग के लिए बहुत बड़ी सौगात है।

एक ताजा सर्वे में पता चला है कि डिजिटल पेमेंट्स के मामले में भारत ने यूनाइटेड किंगडम, चीन और जापान जैसे देशों को भी काफी पीछे छोड़ दिया है

कें

द्र सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए हर तरह की कोशिशें की हैं। अब उन प्रयासों से मिली सफलता का लोहा दुनिया भी मानने लगी है। एक ताजा सर्वे में पता चला है कि डिजिटल पेमेंट्स के मामले में भारत ने यूनाइटेड किंगडम, चीन और जापान जैसे देशों को भी काफी पीछे छोड़ दिया है। एफआईएस के सर्वे में डिजिटल भुगतान प्रणाली में भारत को 25 देशों में सबसे विकसित माना गया है। एफआईएस अमेरिका स्थित एक बैंकिंग टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर है, जिसने हर वक्त उपलब्धता, स्वीकार किए जाने लायक और तत्काल भुगतान के मापदंडों के आधार पर यह सर्वे किया है।

लोकप्रिय हुआ यूपीआई

इस सर्वे से यह भी साफ हो गया है कि यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने भी लोकप्रियता के नए शिखर को छू लिया है, यानी लोग कैश की जगह प्वॉइंट ऑफ सेल मशीन और ई-वॉलेट का ऑप्टिकल फाइबर का जाल बिछा चुकी है।

डिजिटल पारदर्शिता

आज देश की युवा शक्ति भारत का गौरव है, देश की आशाओं का केंद्र है। भारतीय युवाओं का संपूर्ण विकास देश की प्राथमिकता है और इन युवाओं की प्राथमिकताओं में सर्वोच्च है- भ्रष्टाचार मुक्त सरकारी तंत्र। इसी विचार को कार्यान्वित करने के उद्देश्य के साथ वर्ष ‘डिजिटल इंडिया’ की शुरुआत की गई। सरकारी कामकाज में भागीदारीयुक्त पारदर्शिता और जिम्मेदार सरकार बनाना, नागरिकों हेतु सरकारी सेवाओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप में उन तक पहुंचाना इसके लक्ष्य रहे हैं। साथ ही साधन-संपन्न और वंचित वर्ग के बीच की खाई को पाटना भी सरकार के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। सरकार इस तथ्य में विश्वास करती है कि प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह संपन्न वर्ग का हो या वंचित वर्ग का, सभी का समय अमूल्य है, जिसे हर जगह लंबी-लंबी लाइनों में लगकर नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। इस विचार को क्रियान्वित करने के लिए संपर्ण ू तंत्र का डिजिटलीकरण किया जाना आवश्यक है। ‘डिजिटल इंडिया’ इसी लक्ष्य की ओर एक पहल है। इस माध्यम से देश को डिजिटल के

इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं। पिछले नवंबर महीने में इससे लेनदेन की संख्या 10.5 करोड़ को पार कर गई। यह संख्या अक्टूबर के 7.68 करोड़ से 37 फीसदी ज्यादा है।

भीम ऐप्प

सबसे बड़ी बात यह है कि यूपीआई से लेनदेन में तब बहुत ज्यादा इजाफा हुआ जब सरकार ने पिछले साल 30 दिसंबर को भीम ऐप्प लांच किया। पिछले नवंबर महीने में अकेले भीम ऐप्प से 81 लाख से ज्यादा बार और 2,500 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेनदेन हुआ।

रैंक में लेवल 5 पर भारत

गौरतलब है कि फ्लेवर्स ऑफ फास्ट के नाम से तैयार एफआईएस सर्वे के लिए फास्टर पेमेंट्स इनोवेशन इंडेक्स (एफपीआईआई) का इस्तेमाल किया गया। इसके तहत 1 से 5 तक के स्केल का उपयोग हुआ, जिसमें लेवल- 1 तेज पेमेंट, लेवल- 3 लोगों तक पहुंच और 24 तौर पर सशक्त ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने का पूर्ण प्रयास किया जा रहा है।

2.5 लाख कॉमन सर्विस सेंटर

डिजिटल इंडिया का लाभ पहुंचाने के लिए देश में 2.5 लाख कॉमन सर्विस सेंटर का नेटवर्क स्थापित किए गए। इस उद्यमिता से गरीब, वंचित, दलित एवं महिलाओं को बड़ी संख्या में जोड़ा गया, ताकि ‘सबका साथ सबका विकास’ की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा सके। इन केंद्रों में 34 हजार से अधिक महिलाएं जन औषधि, आधार सेवा, टिकट बुकिंग जैसी इकाइयों के साथ जुड़कर कार्य कर रही हैं। डिजिटलीकण द्वारा कार्य में दक्षता लाकर, मानवीय श्रम को कम करके तथा उत्पादन में बढ़ोत्तरी द्वारा प्रत्येक क्षेत्र में क्रांति उत्पन्न करने के प्रयास जारी है।

शिक्षा के नए सबक

यदि हम बढ़ती अर्थव्यवस्था और उसमें युवा भारत के योगदान की बात करते हैं तो हमें इस बात पर भी ध्यान देना पड़ेगा कि उन्नत

15

डिजिटल

डिजिटल एम्स

‘डिजिटल एम्स’ सरकार की एक ऐसी महत्वाकांक्षी

घंटे उपलब्धता और लेवल- 5 उपभोक्ता को आकर्षित करने वाले अतिरिक्त क्षमता शामिल हैं। भारत की आईएमपीएस विश्व की एकमात्र प्रणाली पाई गई है जो तेज भुगतान संवर्द्धन सूचकांक रैंक में लेवल 5 पर है।

विशेष छूट

डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अभी हाल ही में 2,000 रुपए तक के डिजिटल ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) का वहन खुद करने का फैसला किया है। केंद्रीय कैबिनेट ने इस प्रस्ताव पर हरी झंडी दी। यह सुविधा नए साल के पहले दिन से शुरू होनी है। इसका मतलब यह है कि 2000 रुपए तक भुगतान पर उपभोक्ताओं को कोई शुल्क नहीं देना होगा। यह सुविधा भीम, यूपीआई और डेबिट कार्ड सब पर मिलेगी। डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में इस वर्ष स्वाभाविक रूप से कई नए कीर्तिमान स्थापित करेगा, क्योंकि यह मुद्दा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। कल का सामना करने के लिए वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता है, जो कि केवल डिजिटलीकरण द्वारा ही संभव हो सकता था। केंद्र सरकार द्वारा इस से संबंधित अनेक योजनाओं को मूर्त रूप दिया गया है।

ई-शिक्षा

केवल ‘स्वयं’ जैसी योजना की ही बात की जाए तो नौवीं कक्षा से लेकर स्नातक स्तर तक उसके पाठ्यक्रम की संपर्ण ू सामग्री विद्यार्थी को घर बैठे सुलभ है। ई-पाठशाला, मिड डे मील निगरानी ऐप्प, शाला सिद्धि, शाला दर्पण, ओलैब डिजिटल योजना, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल, राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क, ई-ग्रंथालय, उन अनेक योजनाओं में से हैं,

योजना है, जो स्वास्थ्य सुविधाओं को सीधे सामान्य जन से जोड़ती है। इसका उद्देश्य यूएआईडीएआई और एम्स से सीधे तौर पर जोड़ना है। ई-स्वास्थ्य योजना स्वास्थ्य योजनाओं का एक सीधा-सरल विकल्प है। एम रक्त कोष सभी ब्लडबैंकों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है, जो जरूरतमंद लोगों को सीधे तौर पर लाभान्वित करता है।

किसानों से मिटती दूरी

सरकार ने विकास के क्रम में किसानों के, गांवों के बीच की खाई को पाटने के लिए ऐसे कई एप्प जारी किए हैं, जो सीधे तौर पर इस वर्ग की समस्याओं का समाधान करते हैं। जैसे- ई-पंचायत द्वारा ग्रामीण वर्ग अपने लिए बनी सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करके उनका लाभ उठा सकता है। एम किसान, किसान पोर्टल, किसान सुविधा ऐप्प, पूसा कृषि, सॉयल हेल्थ कार्ड ऐप्प, इनाम, फसल बीमा मोबाइल ऐप्प, एग्री मार्केट ऐप्प, फर्टिलाइजर मोबाइल ऐप्प आदि ऐसे ऐप्प हैं, जो किसान और बाजार के बीच एक ऐसा समन्वयन स्थापित करते हैं, जिनकी सहायता से किसान घर बैठे उन्नत खेती और उसके विकास से जुड़ी सभी प्रकार की योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकता है। भूमि की उर्वरकता की जानकारी से लेकर मंडी में फसलों के उचित रेट तक का संपूर्ण ज्ञान इसमें मौजूद है। इससे किसान बिचौलियों द्वारा किए जाने वाले शोषण से भी बच सकता है।

‘निर्भया’ और ‘हिम्मत’

महिला-सुरक्षा एक ऐसा विषय है, जिसे लंबे समय से एक सशक्त और प्रभावी समाधान की तलाश थी। ‘निर्भया ऐप्प और ‘हिम्मत ऐप्प’ ऐसे माध्यम के रूप में ऐसे ही विकल्प सामने आए हैं, जो किसी भी प्रकार की विपत्ति के समय महिलाओं की सुरक्षा को सशक्त बनाते हैं। ये वर्तमान समय में महिलाओं की जीवनशैली, उनके कामकाजी जीवन, उनकी सुरक्षा आदि को बल देते हैं।

‘स्मार्ट वर्क’

सरकार अपने कार्य में पारदर्शिता के प्रति आरंभ से ही कटिबद्ध है, इसीलिए उसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली के स्तर से लेकर न्याय व्यवस्था तक में सबकी भूमिका स्पष्ट करने हेतु अनेक ऐप्प जारी किए हैं। इन सबका उद्देश्य ‘हार्ड वर्क’ को ‘स्मार्ट वर्क’ में बदलना है, जो तकनीक के विकास के माध्यम से ही संभव है, क्योंकि आज विकास में भारत की दावेदारी विश्व-मंच पर है।


16 खुला मंच

01 - 07 जनवरी 2018

नए साल का स्वागत हमारे लिए सब कुछ सही करने का एक और मौका होता है - ओपरा विनफ्रे

अपने बूते सुरक्षा

दुनिया की नजरों में भारत अपने विकास के साथ हर तरह की सक्षमता को साथ लेकर आगे बढ़ने वाला देश है

हान कूटनीतिज्ञ और जर्मन साम्राज्य के संस्थापक बिस्मार्क कहा करते थे कि राष्ट्र की ताकत तभी तक है जब तक उसकी सुरक्षा अक्षुण्ण है। इस लिहाज से देखें तो भारत ने गत वर्षों में अपनी हैसियत काफी मजबूत कर ली है। सरकार की प्राथमिकताअों में देश की रक्षा-सुरक्षा सर्वोपरि है। बीता वर्ष रक्षा के क्षेत्र में देश कई ऐसे घटनाक्रमों का गवाह बना जिनसे ना सिर्फ दुनिया में भारत का मान बढ़ा, बल्कि देशवासियों में भी सुरक्षा की भावना मजबूत हुई। अब हम रक्षा क्षेत्र में दूसरे देशों पर अवलंबित होने के बजाय अपना पुरुषार्थ दिखाने वाला देश बन चुके हैं। रक्षा उत्पादों के निर्माण में आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ के सहारे देश काफी आगे बढ़ चुका है। हाल ही में नौसेना पनडुब्‍बी आईएनएस- कलवारी को प्रधानमंत्री ने राष्‍ट्र को समर्पित किया है। फ्रांस की मदद से स्वदेश में निर्मित इस पननडुब्बी से समुद्र में भारत की ताकत खासी बढ़ी है। दुश्मनों के लिए घातक साबित होने वाली यह पनडुब्बी मिसाइल, तारपीडो और माइंस लेकर लगातार 50 दिनों तक समुद्र में रह सकती है। इससे पहले विश्‍व की सबसे तेज सुपर-सोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस ने नवंबर 2017 में उस समय इतिहास रच दिया, जब पहली बार भारतीय वायुसेना के अग्रणी युद्धक विमान सुखोई-30 एमके-1 से उसकी सफल परीक्षण उड़ान हुई। हवा से सतह पर मार करने में सक्षम ब्रह्मोस मिसाइल को दुश्मन के इलाके में बने आतंकी शिविरों पर दागा जा सकता है। इसके साथ ही जमीन से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल को भी सफलतापूर्वक लांच किया गया। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत देश में बने हल्के लडाकू विमान तेजस के पहले स्क्वैड्रन को वायुसेना में पहले ही शामिल कर किया जा चुका है। उधर, मिग-29 विमानों का आधुनिकीकरण देश में ही किया जा रहा है। रक्षा के क्षेत्र में भारत की बढ़ी ताकत का लोहा दुनिया के बाकी देश भी मानते हैं औऱ इस कारण हमारी हैसियत ग्लोबली एक एेसे देश की हो गई है, जो अपने विकास के साथ हर तरह की सक्षमता को साथ लेकर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

टॉवर

(उत्तर प्रदेश)

अभिमत

नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री

भारत का मिशन 2022

2022 में हमारा देश अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष मनाएगा। हम सभी ने संकल्प लिया है ‘न्यू इंडिया’ के निर्माण का। करने के लिए बहुत कुछ है, बस हमें संकल्प लेना है और उसे सिद्ध करना है

19

27 के आस-पास का ही समय था जब साइमन कमीशन का गठन किया गया था। इसके खिलाफ जिस तरह भारतीय उद्योग जगत उस समय लामबद्ध हुआ, वो अपने आप में एक बहुत ही ऐतिहासिक और प्रेरणादायक घटना थी। अपने ‍हितों से ऊपर उठकर उद्योग जगत ने साइमन कमीशन के गठन के खिलाफ आवाज उठाई थी। जैसे उस समय भारतीय समाज का हर अंग राष्ट्राहित को लेकर के आगे आया, वैसे ही भारतीय उद्यमियों ने भी अपनी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में लगाया। जैसे 90 साल पहले सामान्य आदमी अपनी दैनिक जिम्मेवारियों के साथ-साथ देश की जिम्मेवारियों को उठाने के लिए आगे आया था, वैसा ही दौर फिर एक बार हम सबके सामने आया है। इस समय देश के लोगों की आशाएंआकांक्षाएं जिस स्तर पर हैं, मैं समझता हूं उसे आप भी भली भांति समझ सकते हैं। स्वतंत्रता के बाद बहुत कुछ हुआ है। लेकिन यह भी सत्य है कि इन वर्षों में हमारे सामने कई चुनौतियां खड़ी हुई हैं। आजादी बाद के 70 सालों में हमारे यहां एक ऐसा सिस्टम बना है, जिसमें कहीं न कहीं, कोई न कोई गरीब हमेशा इस सिस्टम के साथ लड़ता रहा। बहुत छोटी-छोटी चीजों के लिए उसे संघर्ष करना पड़ा है। उस गरीब को बैंक अकांउट खुलवाना हो तो सिस्टम उसके आड़े आ जाता था, उसे गैस का कनेक्शन चाहिए तो दस जगह उसको चक्कर काटना पड़ता था। अपनी ही पेंशन पाने के लिए, अपने बच्चों की स्कॉलरशिप पाने के लिए उसको यहां-वहां कमीशन देना होता था। सिस्टम के साथ इस लड़ाई को बंद करने का काम मेरी सरकार कर रही है। हम एक ऐसे सिस्टम का निर्माण कर रहे हैं। जो न सिर्फ पारदर्शी हो, बल्कि संवेदनशील भी हो। एक ऐसा सिस्टम जो लोगों की आवश्यकताओं को समझे। इसलिए जब हमने जनधन योजना शुरू की तो उसे इतना शानदार रिस्पांस मिला। आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि जब यह योजना शुरू हुई तो हम यह लक्ष्य तय नहीं कर पाए थे कि कितने गरीबों के बैंक अकांउट खोलने हैं। कारण यह था

कि सरकार के पास ऐसा कोई डेटा नहीं था, कोई जानकारी नहीं थी। हमें बस यह एहसास था कि गरीब को बैंक के दरवाजे से लौटा दिया जाता है। कभी डांटकर, कभी ये कागज लाओ, वो कागज लाओ जैसा बहाना बनाकर। आज जब मैं यह देखता हूं कि जनधन योजना के माध्यम से तीस करोड़ से ज्यादा गरीबों ने अपने बैंक के खाते खुलवाए हैं तो लगता है कि गरीबों की कितनी बड़ी आवश्यकता की हम एक पूर्ति कर पाए हैं। एक स्टडी में यह बात उभर कर के आई है कि ग्रामीण क्षेत्रों जहां ऐसे खाते ज्यादा खुले हैं, वहां महंगाई दर में भी कमी आई है। यानी गरीब की जिंदगी में कितना बड़ा बदलाव इस एक योजना से हुआ है। हमारी सरकार ने लोगों की समस्याओं, उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी योजनाएं बनाने का निरंतर प्रयास किया है। लोगों की जिंदगी आसान बने, ईज ऑफ लीविंग बढ़े, इस विजन को हमने प्राथमिकता दी है। गरीब महिलाओं को गैस के धुएं से मुक्ति मिले और इसलिए उज्ज्वला योजना शुरू की। हमने तीन करोड़ से ज्यादा महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिया। अब एक और स्टडी में सामने आया है कि इस योजना के बाद ग्रामीण इलाकों में फ्यूल इंफ्लेशन में भी काफी मात्रा में गिरावट आई है यानी गरीब को इंधन के लिए अब कम पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। हम गरीब की एक-एक आवश्यकता, एक-एक समस्या को पकड़ कर, उसे सुलझाने के लिए एक के बाद एक कदम उठा रहे हैं। गरीब महिलाओं को लगातार शर्मिंदगी का

90 साल पहले सामान्य आदमी अपनी दैनिक जिम्मेवारियों के साथ-साथ देश की जिम्मेवारियों को उठाने के लिए आगे आया था, वैसा ही दौर फिर एक बार हम सबके सामने आया है


01 - 07 जनवरी 2018 सामना न करना पड़े। उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा पर असर न हो। इसीलिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत पांच करोड़ से ज्यादा शौचालय बनवाए गए हैं। गरीबों को रहने के लिए पक्‍के घर मिल सके। वो जितना किराए पर खर्च करते हैं, लगभग उतने में ही उनके पास अपना घर हो जाए, इसीलिए प्रधानमंत्री आवास योजना को हमने आरंभ किया है। मैं गरीबी की दुनिया से निकल कर आपके बीच आया हूं। सीमित संसाधन, सीमित पढ़ाई, लेकिन अपने अथाह असीमित और इसी दुनिया ने मुझे सिखाया कि देश की आवश्यकताओं को समझते हुए, गरीबों की आवश्यकताओं को समझते हुए हम कार्य करें, फैसले लें, उन्हें लागू करें। जैसे मुद्रा योजना युवाओं की एक बहुत बड़ी आवश्यकता की पूर्ति कर रही है। कोई भी नौजवान अपने दम पर जैसे ही कुछ करना चाहता है उसके सामने पहला सवाल यही होता है कि पैसे कहां से आएंगे। मुद्रा योजना के तहत ये गांरटी सरकार दे रही है। पिछले तीन वर्षों में करीब-करीब पौने दस करोड़ लोन लोगों को हमने मुद्रा योजना से लोन स्वीकृत किया है। बिना बैंक गारंटी इन पौने दस करोड़ युवाओं को करीब चार लाख करोड़ रूपए से ज्यादा हम दे चुके हैं। युवाओं की बहुत बढ़ी जरूरत के साथ यह सरकार खड़ी है और इसी का परिणाम है कि देश को पिछले तीन साल में लगभग तीन करोड़ नए आंत्रप्रेन्योर मिले हैं। पिछले तीन वर्षों में 21 सेक्टरों में 87 महत्व पूर्ण रिफॉर्म इस सरकार ने किए हैं। इसी का नतीजा आपको अर्थव्यवस्था से जुड़े अलग-अलग पैरामीटर्स में आज नजर आ रहा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में भारत सिर्फ तीन वर्षों में 142 से 100वें नंबर पर पहुंच गया है। भारत का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व लगभग 30 हजार करोड़ डॉलर से बढ़कर 40 हजार करोड़ डॉलर के पार पहुंच गया है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैकिंग 21 अंक उछली है। लॉजिस्टिक परफार्मेंस इंडेक्स में 19 अंकों का सुधार हुआ है। अगर कुल एफडीआई की बात करें तो पिछले तीन वर्षों में देश में विदेशी निवेश में लगभग 70 प्रतिशत की बढोत्तरी हुई है। घरेलू बाजार में पैसेजेंर व्हीकल बिक्री की ग्रोथ नवंबर में 14 प्रतिशत से ज्यादा रही है। कॉमर्शियल व्हीकल की बिक्री, जो कि देश में इकोनॉमिक एक्टिविटी को दर्शाती है, उसमें 50 प्रतिशत से ज्यादा की ग्रोथ हुई है। थ्री व्हीलर की बिक्री, जिसे रोजगार का भी एक इंडीकेटर माना जा सकता है, उसमें नवंबर महीने में लगभग 80 प्रतिशत की ग्रोथ देखी गई है। टू-व्हीलर, जिसकी बिक्री गांवों में और मध्यम वर्ग की आय में बढोत्तरी को दर्शाती है, उसमें 23 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। इतने बड़े स्तर पर परिवर्तन तभी आता है जब अर्थव्यवस्था पर सामान्य आदमी का भरोसा बढ़ता है। 2022 में हमारा देश अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष मनाएगा। हम सभी ने संकल्प लिया है ‘न्यू इंडिया’ के निर्माण का। करने के लिए बहुत कुछ है, बस हमें संकल्प लेना है और उसे सिद्ध करना है। जब हमारे संकल्प सिद्ध होंगे तो देश भी सिद्ध होगा। (फिक्की की 90वीं वार्षिक आम बैठक के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री के संबोधन का संपादित अंश)

ल​ीक से परे

प्रियंका तिवारी

खुला मंच

17

लेखिका युवा पत्रकार हैं और देश-समाज से जुड़े मुद्दों पर प्रखरता से अपने विचार रखती हैं

एक लिपि जो एक दृष्टि भी है

लुई ब्रेल ने दृष्टिबाधितों के लिए तो लिपि बनाई ही, उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ी भूमिका निभाई

सा

धारण पृष्ठभूमि और असाधरण संघर्ष और उपलब्धि, लुई ब्रेल की जिंदगी को इस तरह देखकर दुनिया में न जाने कितने लोगों ने प्रेरणा पाई होगी। दृष्टिबाधितों के मसीहा एवं ब्रेल लिपि के आविष्कारक लुई ब्रेल की आंखों की रोशनी महज तीन साल की उम्र में एक हादसे के दौरान नष्ट हो गई थी। ब्रेल ने अपनी इस स्थिति को कभी अपना दुर्भाग्य नहीं बनने दिया। 1825 में उन्होंने मात्र 16 वर्ष की उम्र में एक ऐसी लिपि का आविष्कार कर दिया जिसे ब्रेल लिपि कहते हैं। इस लिपि के आविष्कार ने दृष्टिबाधित लोगों की शिक्षा में क्रांति ला दी। क्रांति की यह मिसाल और मशाल आज भी उनके नाम और अवदान के साथ जीवित है। बताते हैं कि गणित, भुगोल एवं इतिहास विषयों में प्रवीण लुई की अध्ययन काल में ही फ्रांस की सेना के कैप्टन चार्ल्स बार्बियर से मुलाकात हुई थी। उन्होंने सैनिकों द्वारा अंधेरे में पढ़ी जाने वाली नाइट राइटिंग व सोनोग्राफी के बारे में बताया। यह लिपि उभरी हुई तथा 12 बिंदुओं पर आधारित थी। यहीं से लुई ब्रेल को आइडिया मिला और उन्होने इसमें संशोधन करके 6 बिंदुओं वाली ब्रेल लिपि का आविष्कार कर दिया। प्रखर लुई ने इसमें सिर्फ

18

दवचार

नमो सूत्र 2017

04

सवच्छता

सवच्छाग्रही बना पूरा िेश

30

28

गौरव

डूडल पर ्छाए भारतीय

दसनेमा

2017 की ऑफबीट दफलमें

harat.com

sulabhswachhb

- 31 दिसंबर 2017 वर्ष-2 | अंक-02 | 25 /2016/71597 आरएनआई नंबर-DELHIN

2017 दशखर पर भारत

कर दवश्व बैंक अमेररकी दिंक टैंक से ले में भारत और संयुक्त राष्ट्र ने 2017 है की उन्नदत की सराहना की

लुई ब्रेल दिवस (4 जनवरी) पर विशेष

अक्षरों या अंकों को ही नहीं बल्कि सभी चिन्हों को भी प्रर्दशित करने का रास्ता निकाला। उनकी प्रतिभा का आलम यह था कि उन्हें बहुत जल्द ही विद्यालय में अध्यापक के रूप में नियुक्त किया गया। शिक्षक के रूप में भी वो सभी विद्यार्थियों के प्रिय थे। लुई ब्रेल सजा देकर पढ़ाने में विश्वास नहीं करते थे। उन्होंने शिक्षा पद्धति को एक नया आयाम दिया तथा स्नेहपूर्ण शिक्षा पद्धति से अनूठी मिसाल कायम की। उनका जीवन कतई आसान नहीं था। परंतु उनके अंदर आत्मविश्वास से भरी ऐसी शक्ति विद्यमान थी, जिसने हमेशा आगे बढ़ने को प्रोत्साहित किया। समाज में एक ऐसा वर्ग भी विद्यमान था, जिसने उनकी योग्यता को उनके जीवन काल में अनेकों बार उपेक्षित किया। अपने धुन के पक्के लुई ब्रेल

मिलकर करें काम

स्वच्छ भारत अभियान में पूरे देश की भागीदारी है। सुलभ स्वच्छ भारत ने भी अपने सतत प्रयासों और खबरों के माध्यम से इस अभियान को लेकर जागरूकता फैलाई है। नए अंक से पता चला कि 7 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है। बहुत ही खुशनुमा अहसास देने वाली खबर थी। लेकिन अभी भी हमें लम्बा रास्ता तय करना है। जरुरत है उनको जगाने की और उन तक सही जानकारी पहुंचाने की। सुलभ के साथ हम सब मिलकर ये काम बखूबी करें रक्षित जोशी, शिमला, हिमाचल

को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था। वो तो एक सन्यासी की तरह अपने कार्य को अंजाम तक पहुंचाने में पूरी निष्ठा से लगे रहे। उनको जीवनकाल में जो सम्मान नहीं मिल सका वो उनको मरणोपरांत फ्रांस में 20 जून 1952 को मिला। उनके पार्थिव शरीर को मृत्यु के 100 साल बाद वापस राष्ट्रीय सम्मान के साथ दफनाया गया। अपनी ऐतिहासिक भूल के लिए फ्रांस की समस्त जनता तथा नौकरशाहों ने लुई ब्रेल के नश्वर शरीर से माफी मांगी। भारत में 2009 में 4 जनवरी को उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया जा चुका है। लुई ब्रेल का जीवन एपीजे अब्दुल कलाम के कथन को सत्यापित करता है। कलाम साहब ने कहा था- ‘अपने मिशन में कामयाब होने के लिए आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित्त होना पड़ेगा।’

ऊर्जा सरंक्षण की जरुरत

आज के दौर की सबसे बड़ी जरुरत है पर्यावरण सरंक्षण। आने वाली पीढ़ियों के लिए अगर हम सच में कुछ करना चाहते हैं तो पर्यावरण सरंक्षण से बेहतर कुछ भी नहीं है। इस बार की प्रति में ‘ऊर्जा का घर’ शीर्षक आलेख में पढ़ा कि कैसे चेन्नई के डॉ. सुरेश ने अपने घर को ही उर्जा का ठिकाना बना रखा है। बायोगैस से लेकर जल-संचयन और सोलर तक से उर्जा प्राप्त करते हैं। उनके इस मॉडल को यदि हम सब अपना लें तो उर्जा की जो भी किल्लत है, धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी और पर्यावरण को भी हमारा योगदान रहेगा। राजेंद्र सहनी, हाजीपुर , बिहार


18

सुलभ ग्राम में स्वागत

फोटो फीचर

फिल्म निर्माता और अभिनेत्री नीतू चंद्रा दिल्ली स्थित सुलभ ग्राम में पधारीं। यहां उन्होंने अपने इस अनुभव को भावुकता के साथ साझा किया कि कैसे शुरुआती संघर्ष के दिनों में सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक ने उनकी मदद की। फोटो ः जयराम

01 - 07 जनवरी 2018


01 - 07 जनवरी 2018

नीतू चंद्रा ने सुलभ ग्राम के भ्रमण के दौरान यहां की व्यवस्था, सुविधाओं और स्वच्छता तकनीक में खासी दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने सुलभ द्वारा किए गए कार्यों को न सिर्फ सराहा, बल्कि इन्हें काफी महत्वपूर्ण भी बताया

फोटो फीचर

19


20

आर्थिक शुचिता

01 - 07 जनवरी 2018

आर्थिक हरियाली का वर्ष

आर्थिक सुधारों की दिशा में केंद्र सरकार ने पहला बड़ा कदम उठाते हुए नोटबंदी की घोषणा की थी। नोटबंदी पर काफी बहस भी हुई। नोटबंदी से क्या लाभ हुए और क्या हानि हुई, इस पर आज भी बहस जारी है। 2017 में नोटबंदी का वह असर नहीं दिखा, जिसकी उम्मीद की जा रही थी,लेकिन नया साल नोटबंदी के फायदे का साल होगा, यह तय माना जा रहा है। नोटबंदी के एक दो नहीं, बल्कि सौ से अधिक ऐसे फायदे हैं, जिसका पूरा लाभ देश को मिलेगा। प्रस्तुत है नोटबंदी के वे फायदे, जो नए साल में देश को मिलेंगे –

नोटबंदी की उपलब्धियां 09 नोटबंदी के बाद 961 करोड़ रुपए की ऐसी प्रॉपर्टी का पता चला, जिसका कभी खुलासा ही नहीं किया गया था 10 नोटबंदी के बाद तीन लाख से अधिक शेल, यानी मुखौटा कंपनियों का पता लगा, जिनपर कार्रवाई की जा रही है

11 सरकार ने 2.24 लाख कंपनियों को बंद कर दिया। ये कंपनिया सरकार की अनुमति के बिना अपने ऐसेट्स को बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकती हैं

12 नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत 21,000 लोगों ने 4,900 करोड़ रुपए मूल्य के कालेधन की घोषणा की

13 नोटबंदी के दौरान 35 हजार संदिग्ध फर्जी कंपनियों ने 17 हजार करोड़ डिपॉजिट किए, जो सरकार की नजर में आ गए 01 नोटबंदी के बाद 16.6 खरब नोट सिस्टम में वापस आ गए। 16 हजार करोड़ रुपए को छोड़कर सभी कैश बैंक में जमा हो जाने से बिना हिसाब वाले पैसों का पता चला

02 अधिकतर कैश के बैंकिंग सिस्टम में आने से इन पैसों को कानूनी दर्जा मिला और नोटबंदी अवैध धन रखने वालों के खिलाफ एक्शन लेने का एक जरिया बना 03 चालू खाता, बचत खाता जमाओं में कम से कम 2.50-3.00 प्रतिशत की वृद्धि हुई

04 मुद्रा बाजार की ब्याज दरों में गिरावट हुई और म्युचुअल फंडों के साथ बीमा क्षेत्र में धन का प्रवाह बढ़ा 05 आयकर विभाग ने संदिग्ध लेन-देन को लेकर 517 नोटिस जारी किए थे, जिसके बाद 1833 करोड़ रुपए की 541 संपत्तियां जब्त की गई

06 नोटबंदी के बाद 17.73 लाख संदिग्ध मामलों की पहचान की गई, जिनमें 3.68 लाख करोड़ रुपए की हेरा-फेरी हुई है 07 आयकर विभाग द्वारा 9 नवंबर 2016 से लेकर मार्च 2017 के बीच चलाए गए करीब 900 सर्च अभियान में 900 करोड़ रुपए की संपत्ति सीज की गई

08 नोटबंदी के बाद पता लगा कि 1 लाख 48,165 लोगों ने ही लगभग 4 लाख 92,207 करोड़ रुपए जमा किए यानी भारत की 0.00011% जनसंख्या ने ही देश में उपलब्ध कुल कैश का लगभग 33 प्रतिशत जमा किया

14 बैंकों ने 35 हजार कंपनियों और 58 हजार बैंक खातों की जानकारी वित्त मंत्रालय को दी, जिसके बाद इन पर एक्शन लिया गया

15 नोटबंदी के बाद एक कंपनी के 2,134 बैंक खातों के बारे में पता चला। इन कंपनियों के खातों में 10,200 करोड़ रुपए जमा किए गए थे, जो पकड़े गए

16 नोटबंदी के बाद तीन से चार खरब डॉलर के संदिग्ध ट्रांजेक्शंस हुए, इसके लिए 1.8 लाख नोटिस भेजे गए और अब इन पर कार्रवाई करने की तैयारी है 17 नोटबंदी के बाद फर्जी कंपनियों के डायरेक्टर्स का भी पता लगा। इसके तहत पिछले तीन वित्तीय वर्षों से वित्तीय विवरण न भरने वाले 3.09 लाख कंपनी बोर्ड डायरेक्टर्स को अयोग्य घोषित कर दिया गया

18 नोटबंदी के बाद पता लगा कि 3000 डायरेक्टर्स 20 से ज्यादा कंपनियों के बोर्ड डायरेक्टर थे, जो कानूनी सीमा से ज्यादा है 19 नोटबंदी के बाद कैश डीलिंग से लोग बच रहे हैं और लेन-देन में पारदर्शिता आई


आर्थिक शुचिता

01 - 07 जनवरी 2018

21

20 नोटबंदी के बाद तीन लाख करोड़ से अधिक रकम बैंकों में जमा कराई गई

22 17.73 लाख संदिग्ध पैन कार्ड धारकों का पता चला

36 पीओएस मशीनों पर डेबिट कार्ड ट्रांजेक्शंस की संख्या अगस्त 2016 के 13.05 करोड़ से बढ़कर अगस्त 2017 में 26.55 करोड़ हो गई

21 नोटबंदी के बाद 23.22 लाख बैंक खातों में लगभग 3.68 लाख करोड़ रुपए के संदिग्ध कैश जमा हुए, जिसका पता सरकार को लग गया 23 बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने 4.7 लाख से अधिक संदिग्ध लेन-देन की जानकारी इकट्ठा की 24 जांच, जब्ती और छापों में 29,213 करोड़ रुपए की अघोषित आय का पता चला 25 नोटबंदी के बाद 813 करोड़ रुपए से अधिक की बेनामी संपत्ति जब्त कर ली गई

26 नोटबंदी के बाद 400 से अधिक बेनामी लेन-देन की पहचान हुई और 29 हजार 200 करोड़ से अधिक अघोषित आय का पता चला

मशीनों की संख्या बढ़कर 28.82 लाख हो गई

35 नोटबंदी से पहले भारत में पहले कुल 15.11 लाख पीओएस मशीनें थीं, लेकिन पिछले 1 वर्ष में 13 लाख से अधिक पीओएस मशीनें जोड़ी गई हैं

37 पीओएस मशीनों पर डेबिट कार्ड के द्वारा अगस्त 2016 में 18,370 करोड़ रुपए के ट्रांजेक्शंस हुए थे, जबकि अगस्त 2017 में यह 35,413 करोड़ रुपए हो गए

38 अगस्त 2016 में 26,849 करोड़ रुपए के आईएमपीएस ट्रांजेक्शंस हुए थे, जो अगस्त 2017 में बढ़कर 65,149 करोड़ रुपए हो गए 39

27 नोटबंदी के बाद से सोने की स्मगलिंग में बड़ी गिरावट आई, क्योंकि मार्केट में कम पूंजी थी और निगरानी सख्त हुई

मोबाइल वॉलेट के द्वारा ट्रांजेक्शंस अगस्त 2016 में 7.07 करोड़ से 3 गुना बढ़कर अगस्त 2017 में 22.54 करोड़ हो गए

40 मोबाइल वॉलेट के द्वारा अगस्त 2016 में 3,074 करोड़ रुपए के ट्रांजेक्शन्स हुए थे, जबकि अगस्त 2017 में 7,262 करोड़ रुपए के ट्रांजेक्शंस हुए

28 नोटबंदी के बाद भारत एक लेस कैश सोसाइटी की दिशा में डिजिटल ट्रांजेक्शंस 300 प्रतिशत तक बढ़े

29 कैशलेस लेन-देन लोगों के जीवन को आसान बनाने के साथ-साथ हर लेन-देन से काले धन को हटाते हुए क्लीन इकोनॉमी बनाने में भी मददगार साबित हुआ

41 मोबाइल वॉलेट से लेन-देन की संख्या में हर साल 94 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है, जो 2022 तक 126 प्रतिशत सलाना दर से बढ़ते हुए 32,000 अरब रुपए पर पहुंच जाएगा

42 नोटबंदी के बाद यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई और सरकार की तरफ से लाए गए भीम मोबाइल ऐप्प का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। एूपीआई-भीम से नवंबर 2016 में 0.1 लाख, अक्टूबर 2017 तक 23.36 लाख रुपए रोजाना लेन-देन होता है। नए साल में इसमें और वृद्धि के अनुमान हैं

30 चलन में रहने वाली नकदी में भारी गिरावट हुई और कैश 17.77 लाख करोड़ रुपए से कम होकर 4 अगस्त 2017 को 14.75 लाख करोड़ पर आ गया। यानी अब महज 83 प्रतिशत ही प्रभावी नकदी है

32 नोटबंदी के बाद डिजिटल लेन-देन काफी तेजी से बढ़ा। अगस्त 2016 में 87 करोड़ डिजिटल लेन-देन हुए थे, जबकि 2017 में यह संख्या 138 करोड़ हो गई, यानी 58 प्रतिशत की वृद्धि

44 नोटबंदी के बाद क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में भी 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़त हुई है

31 लेस कैश व्यवस्था से वस्तु एवं सेवाएं तो सस्ती हुई ही, साथ ही साथ आवास, शिक्षा, चिकित्सा उपचार आदि की लागत भी कम हुई

33 वर्ष 2017-18 में डिजिटल लेनदेन में 80 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। यह रकम कुल मिलाकर 1800 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है 34 अक्टूबर 2016 में 15.11 लाख की तुलना में अगस्त 2017 में कार्ड उपयोग वाली पीओएस

जीडीपी

43 ई-टोल पेमेंट में बड़ा उछाल। जनवरी 2016 में यह आंकड़ा 88 करोड़ से बढ़कर अगस्त 2017 में यह आंकड़ा 275 करोड़ रुपए हो गया 45 ऑनलाइन इनकम टैक्स रिटर्न भरने में 2016-17 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न की ई-फाइलिंग में करीब 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है 46 ई-कॉमर्स के लिए रुपे कार्ड का इस्तेमाल बढ़ा है। इसके साथ ही ई-कॉमर्स पर किए जाने वाला खर्च भी दोगुना से अधिक बढ़ा है 47 नोटबंदी के चलते आतंकवादियों और नक्सलवादियों की कमर टूटी

48 पत्थरबाजों को पैसे देने के लिए अलगाववादियों के पास धन की कमी हुई

49 पत्थरबाजी की घटनाएं पिछले वर्ष की तुलना में घटकर मात्र एक-चौथाई रह गईं

श्रम

मानव संस

आधारभ ूत

ाधन

उत्पादक व ृद्धि

पूंजी

50 पत्थरबाजी की घटनाएं (नवंबर 2015 – अक्टूबर 2016) 2683 से घटकर (नवंबर 2016- जुलाई 2017) महज 639 ही रह गईं 51 पत्थरबाजी में पहले 500 से 600 लोग होते थे, अब 20-25 की संख्या भी नहीं होती है 52 नोटबंदी के बाद नक्सली घटनाओं में 20% से ज्यादा की कमी आई

53 अक्टूबर 2015 से नवंबर 2016 में 1071 नक्सली घटनाएं हुईं। वहीं 2016 के अक्टूबर से अब तक मात्र 831 रह गई

54 नोटबंदी के बाद पता लगा कि पांच सौ के हर 10 लाख नोट में औसत 7 और 1000 के हर 10 लाख नोटों में औसत 19 नोट नकली थे 55 2016-17 में कुल 762 हजार जाली नोट पकड़े गए

56 जाली नोट पकड़े जाने में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 20% की वृद्धि हुई 57 नोटबंदी के बाद टैक्स बेस बढ़ने से टैक्सेशन न्यायसंगत हो रहा है


22

आर्थिक शुचिता

01 - 07 जनवरी 2018

58 सरकार गरीबी उन्मूलन और घरों, सड़क, रेलवे, आदि जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए और अधिक संसाधनों का इस्तेमाल कर पा रही है

78 सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाने के लिए 1.3 करोड़ कर्मचारियों को इएसआईसी में पंजीकरण किया गया

60 ई-रिटर्न की संख्या में बड़ी वृद्धि हुई है। 2016-17 में 2.35 करोड़ से बढ़कर 2017-18 में 3.01 करोड़ हो गई

80 नोटबंदी से बिचौलियों का अंत हुआ और श्रमिकों को सीधा भुगतान होने लगा

59 टैक्सपेयर्स की संख्या में 26.6 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई। 2015-16 में 66.53 लाख थी, जो 2016-17 में बढ़कर 84.21 लाख हो गई

79 श्रमिकों को अधिकार और सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाएं भी मिलनी शुरू हो गई

61 नोटबंदी के बाद 4 लाख 73 हजार से अधिक संदिग्ध लेन-देन का पता चला

81 भुगतान सुनिश्चित करने के लिए वेतन भुगतान कानून (पेमेंट ऑफ वेजेज एक्ट) में ऐतिहासिक संशोधन किया गया

63 पर्सनल इनकम टैक्स के एडवांस्ड टैक्स कलेक्शन में पिछले साल के मुकाबले 41.79 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई

83 टैक्स कंप्लायंस में भारी वृद्धि हुई जिससे देश की जनकल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने की क्षमता में बढ़ोत्तरी हुई

62 नोटबंदी के बाद 56 लाख से अधिक नए करदाता जुड़े

64 निजी आयकर का अग्रिम संग्रह पिछले वर्ष की तुलना में 41.79 % बढ़ा

65 नोटबंदी के बाद पूर्वोत्तर के राज्यों में आयकर संग्रह में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2016-17 में नगालैंड में आयकर संग्रह में करीब 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई

66 04 अगस्त तक लोगों के पास 14,75,400 करोड़ रुपए की करेंसी सर्कुलेशन में थे। जो वार्षिक आधार पर 1,89,200 करोड़ रुपए की कमी दिखाती है 67 6 लाख करोड़ रुपए के हाई वैल्यू नोट्स प्रभावी रूप से कम हुए, जो इस समय सर्कुलेशन में आए नोटों का 50 प्रतिशत है 68 नोटबंदी के कारण ‘कैश बब्बल’ यानी नकदी के ढेर से भारत बच गया

69 नोटबंदी के निर्णय ने भारत को अमेरिका की 2008 जैसी महामंदी से बचाया 70 चलनिधि यानी लिक्वीडिटी की कमी से उत्पन्न हुई समस्या से मुक्ति मिली

71 जीडीपी औसत नकदी में पिछले वर्ष नवंबर से पहले 11.3 प्रतिशत की तुलना में 9.7 प्रतिशत हो गया है 72 तीन से चार खरब डॉलर के ट्रांजेक्शंस संदिग्ध लग रहे हैं, इसके लिए 1.8 लाख नोटिस भेजे गए 73 नोटबंदी के बाद अधिक से अधिक क्षेत्रों को संगठित किया जाना संभव हुआ

74 संगठित किए जाने की वजह से गरीबों के लिए नौकरी के ज्यादा अवसर पैदा हुए। फॉर्मल जॉब्स की संख्या बढ़ी 75 नौकरियों के संगठित होने से देश ने स्वच्छ अर्थव्यवस्था की तरफ कदम बढ़ाया जो आगे भी जारी रहेगा

76 नोटबंदी के बाद मजदूरों के सारे अधिकार मिलने लगे हैं, सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं भी मिलनी शुरू हुई 77 एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों का अब ईपीएफओ एवं इएसआईसी में नामांकन हो चुका है

82 वेतन सीधे बैंक खाते में डालने के लिए श्रमिकों के 50 लाख नए बैंक खाते खोले गए

84 सरकार का राजस्व बढ़ा और जन कल्याण एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अधिक से अधिक खर्च किया जा रहा है 85 सागरमाला और भारतमाला जैसी परियोजनाओं को नोटबंदी के बाद अधिक धन मुहैया कराया जा सका है 86 नोटबंदी के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सामरिक क्षमताओं के विकास में तेजी आई

87 नोटबंदी के वक्त सेंसेक्स करीब 25 हजार के आस-पास था। अब मुंबई स्टॉक एक्सचेंज का शेयर सूचकांक करीब 33 हजार के इर्द-गिर्द है 88 नोटबंदी के वक्त निफ्टी करीब आठ हजार अंकों के करीब थी, जो अब 10,500 के इर्द गिर्द है

89 नोटबंदी के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और बिकवाली घटी है। यानी भारतीय अर्थव्यवस्था में एक स्थायित्व का भाव है 90 नोटबंदी से इएमआई दरों में कमी से लेकर किफायती आवास तक, वित्तीय साधनों में बचत बढ़ने से लेकर शहरी निकायों के राजस्व में वृद्धि हुई 91 ऋण दरों में लगभग 100 बेसिस प्वांइट्स की गिरावट आई

92 ऋण चुकाने पर लगने वाला ब्याज घटा और इएमआई कम हुई

93 नोटबंदी के बाद रियल एस्टेट की कीमतें घटी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ब्याज पर छूट मिली और रेट-कट्स के परिणामस्वरूप इएमआई भी घटी 94 नोटबंदी के बाद देश भर के शहरी स्थानीय निकायों का राजस्व लगभग 3 गुना बढ़ा 95 उत्तर प्रदेश में शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के राजस्व में 4 गुना वृद्धि हुई

96 मध्य प्रदेश और गुजरात के शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के राजस्व में लगभग 5 गुना वृद्धि हुई

97 लोगों की कुल वित्तीय बचत, यानी ग्रॉस फाइनेंसियल सेविंग्स जो 5 वर्षों से जीएनआईडी के लगभग 10% पर अटकी हुई थी, नोटबंदी के बाद 11.8% तक पहुंच गई 98 2016-17 में जीएनआईडी के डिपॉजिट्स, शेयर एंड डिबेंचर्स, बीमा फंड एवं पेंशन और प्रोविडेंट फंड की कुल वित्तीय बचत 9% से बढ़कर 13.3% हो गई 99 विकसित अर्थव्यवस्थाओं के हिसाब से ये पॉजिटिव ट्रेंड है, जिनमें फाइनेंसियल एसेट्स में निवेश का हिस्सा ज्यादा है

100 नोटबंदी के बाद लोगों के निवेश रेगुलेटेड मार्केट में आ रहे हैं, जहां स्थिरता भी है और अच्छे रिटर्न की गारंटी भी है

101 ऐसे एसेट्स जिनका प्रबंधन म्यूचुअल फंड द्वारा किया जाता है, वे सितंबर 2017 के अंत तक 20.4 ट्रिलियन पर पहुंच गए हैं, जो अब तक का उच्चतम स्तर है


01 - 07 जनवरी 2018

सुधार

कालेधन से मुक्ति का नया साल

23

कालेधन पर रोक के लिए केंद्र की एनडीए सरकार पूरी तत्परता से काम कर रही है। नए साल में कई काले धनकुबेरों के नाम देश के सामने उजागर होंगे कड़े कदम उठाए हैं।

आधार से जुड़ेंगे बैंक खाते

का

एसएसबी ब्यूरो

लेधन पर रोक लगाने के लिए सरकार एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रही है। इसके लिए ही सरकार ने नोटबंदी और जीएसटी जैसे साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय लिए। अब विदेशों में जमा भारतीयों के कालेधन का पता लगाने के लिए सरकार ने स्विट्जरलैंड के साथ एक करार किया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अनुसार इस करार से एक जनवरी से दोनों देशों के बीच कर संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान हो सकेगा। स्विट्जरलैंड में संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के साथ और आपसी सहमति के करार पर दस्तखत के बाद भारत और स्विट्जरलैंड 1 जनवरी, 2018 से कर सूचनाओं का स्वत: आदान-प्रदान कर सकेंगे। स्विटजरलैंड के साथ सहयोग बढ़ाने के साथ मोदी सरकार लगातार कालेधन को खंगालने में जुटी हुई है। सरकार देश के भीतर और बाहर कालेधन के मामले पर पूरी तरह से सक्रिय है। इस सिलसिले में ताजा हमला बेनामी संपत्ति पर किया गया है। आयकर विभाग क्लीन मनी अभियान के अंतर्गत नोटबंदी के दौरान बैंक खातों में जमा बेनामी संपत्ति को खंगालने में जुटा हुआ है। इसके साथ ही आयकर विभाग अब 8 नवंबर के पहले और वित्त वर्ष 2010-11 के बाद के संदिग्ध कैश डिपॉजिट और लेनदेन की जानकारी जुटाने में लगा हुआ है। जिन लोगों ने नोटबंदी के पहले भी बड़ी मात्रा में बैंक खातों में नकदी जमा की थी सरकार उन खातों की भी छानबीन कर रही है।

नोटबंदी से कालेधन पर प्रहार

8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री ने नोटबंदी की घोषणा की। इस क्रांतिकारी फैसले से कालेधन, नकली नोटों

के कारोबार और भ्रष्टाचार पर नकेल कसने में बड़ी मदद मिली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने देश को बताया कि 99 प्रतिशत पुरानी मुद्रा बैंकों में वापस आ गई। नोटबंदी के निर्णय को देखें तो इसका स्पष्ट उद्देश्य कालेधन, नकली नोटों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना था। इससे बाजार में घूम रही आवारा पूंजी, यानि काला धन बैंकिंग प्रणाली में लाना संभव हो सका है।

बेनामी लेनदेन पर सख्ती

बेनामी लेनदेन अधिनियम 1988 को संशोधित करके सरकार ने इसे नया स्वरूप प्रदान किया। आयकर विभाग ने दूसरों के बैंक खाते में कालाधन जमा करने वालों को कई बार चेतावनी दी थी। अब दोषियों के खिलाफ बेनामी लेनदेन अधिनियम के तहत मुकदमा चलेगा। बेनामी लेनदेन रोकथाम (संशोधन) कानून लागू करके इन संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। सरकार की इस कवायद का नतीजा ये है कि पहले 10 महीनों की कार्रवाई में ही 1350 करोड़ रुपए से अधिक की बेनामी संपत्ति जब्त की जा चुकी है। 650 से अधिक संदिग्ध बेनामी संपत्तियों पर कार्रवाई की जा चुकी है।

डबल टैक्स अवोइडेन्स एग्रीमेंट

‘डबल टैक्स अवोइडेन्स एग्रीमेंट’, की व्यवस्था देश या देश से बाहर निवेश करने वाले व्यापारियों और निवेशकों को प्रभावित करती है। सरकार ने सिंगापुर, मॉरीशस और पनामा देशों के साथ डबल टैक्स अवोइडेन्स एग्रीमेंट की शुरुआत कर टैक्स चोरी पर

कालेधन पर लगाम लगाने के लिए पैन कार्ड और दूसरी कई योजनाओं से आधार को लिंक करना एक बहुत ही अचूक कदम है। ये निर्णय छोटे स्तर के भ्रष्टाचारों पर भी नकेल कसने में काफी कारगर साबित हो रहा है। गैस सब्सिडी को सीधे आधार से जुड़े बैंक खातों में देकर, सरकार ने हजारों करोड़ों रुपए के घोटाले को खत्म कर दिया। इसी तरह राशन कार्ड पर मिलने वाली खाद्य सब्सिडी को भी सीधे खाते में देकर हर साल लगभग 50 हजार करोड़ रुपए से ऊपर की बचत की जा रही है। मनरेगा के तहत जॉब कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने से भी करोड़ों रुपए की बचत हुई है।

पारदर्शिता को बढ़ावा

सरकार ने देश में डिजिटलीकरण और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया है। सरकार ने डिजिटल क्रांति और डिजिटल भुगतान के स्वाइप मशीनें, पीओसी मशीनें, पेटीएम और भीम ऐप्प जैसे सरल उपायों को अपनाया है। जनता भी सहजता के साथ इसे अपना रही है। इससे देश मे डिजिटल और इलेक्ट्रानिक लेनदेन बढ़ा है। नोटबंदी के बाद से करदाताओं की संख्या में 25.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष 5 अगस्त तक भरे गए 2.22 करोड़ ई-रिटर्न की तुलना में इस साल यह संख्या बढ़कर 2.79 करोड़ हो गई। यानी इस अवधि के दौरान कुल 57 लाख रिटर्न ज्यादा भरे गए। इसका सीधा अर्थ है कि कर की चोरी पर लगाम लगी है।

राजनीतिक चंदे पर चोट

राजनीतिक दल किसी भी व्यक्ति से कैश में बड़ा चंदा नहीं ले सकते। मौजूदा वित्त वर्ष के बजट में ये प्रावधान किया गया कि सभी राजनीतिक पार्टियां एक व्यक्ति से कैश में सिर्फ 2000 रुपए तक ही चंदा ले सकती हैं। इस राशि से अधिक चंदा ऑनलाइन या चेक के तौर पर ही लिया जा सकता है। इससे पहले राजनीतिक दलों को अपनी आय में से 20 हजार से

10 महीनों की कार्रवाई में ही 1350 करोड़ रुपए से अधिक की बेनामी संपत्ति जब्त की जा चुकी है। 650 से अधिक संदिग्ध बेनामी संपत्तियों पर कार्रवाई की जा चुकी है

खास बातें काले धन पर स्विट्जरलैंड के साथ हुआ जरूरी करार 01 जनवरी से कर सूचनाओं का स्वत: होगा आदान-प्रदान बेनामी लेनदेन अधिनियम संशोधन के साथ 1988 लागू कम के चंदे को घोषित करने से छूट मिली हुई थी।

फर्जी कंपनियों पर कार्रवाई

नोटबंदी के बाद सरकार ने काला धन जमा करने के लिए बनाई गई तीन लाख से भी अधिक फर्जी कंपनियों का पता लगाया। इनमें से ज्यादातर कंपनियां नेताओं और व्यापारियों के कालेधन को सफेद करने का काम करने में लगी थीं। सरकार की कार्रवाई में ऐसी दो लाख से ज्यादा कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा चुका है। नोटबंदी के दौरान इन फर्जी कंपनियों में जमा 65 अरब रुपए की पड़ताल की जा रही है। कार्रवाई के दौरान ऐसी कंपनियों का भी पता लगा जहां एक पते पर ही 400 फर्जी कंपनियां चलाई जा रहीं थी।

रियल एस्टेट में कैश लेनदेन पर लगाम

रियल एस्टेट में कालेधन का निवेश सबसे अधिक होता था। पहले की सरकारें इसके बारे में जानती थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करती थी। इस कानून के लागू होते ही में रियल एस्टेट में लगने वाले कालेधन पर रोक लग गई।

ऑनलाइन नीलामी

सरकार सभी प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। इसकी वजह से पारदर्शिता बढ़ी है और घोटाले रुके हैं।


24

कृषि

01 - 07 जनवरी 2018

अन्नदाता होंगे खुशहाल

नया साल हमारे अन्नदाताओं के लिए ऐसा बहुत कुछ लेकर आएगा जिससे उनकी कमाई और ज्यादा बढ़ेगी

कृष‌िको म‌िला बाजार

भा

एसएसबी ब्यूरो

रत सरकार वर्ष 2014 से ही अपनी दो प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट है। ये दो प्राथमिकताएं हैं, युवाओं के साथ गांव और किसानों का विकास। एनडीए सरकार ने ने सत्ता संभालते ही देश के अन्नदाताओं के कल्याण के लिए काम करना शुरू कर दिया था। सरकार का लक्ष्य 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का सपना है और उसी विजन के आधार पर नीतियां तय की जा रही हैं। सरकार की योजनाओं के चलते खेत-खलिहान लहलहाने लगे हैं, जिससे हमारे अन्नदाताओं के चेहरे भी चहकने लगे हैं।

राष्ट्रीय कृषि बाजार के माध्यम से किसानों और उनके उत्पाद खरीदने वालों के बीच बिचौलियों की मौजूदगी को खत्म कर दिया गया है। ई-नाम के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का शीघ्र भुगतान संभव हुआ है। पारंपरिक बाजार बिक्री में जहां भुगतान में 10-15 दिन तक का समय लग जाता था, वहीं ई-नाम के जरिए केवल कुछ घंटों में भुगतान कर दिया जाता है। ई-नाम पर अभी 455 मंडियां जुडी हुई हैं। नए साल में और भी मंडियां इससे जुड़ेंगी।

फसल की सुरक्षा

किसानों को न्यूनतम प्रीमियम पर अधिकतम मुआवजा ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की विशेषता है। इसके तहत किसानों को अब 33 फीसदी फसल नुकसान पर भी मुआवजा मिलता है। पहले यह सीमा 50 प्रतिशत की थी। 2016-17 में फसल बीमा योजना के लिए मुआवजे पर केंद्र

सरकार ने 13,240 करोड़ रुपए खर्च किए। चालू वित्त वर्ष में इसके लिए 9,000 करोड़ की रकम मुहैया कराई गई है। किसानों के हित में बनने वाली किसी भी अन्य योजना के मुकाबले इस योजना का महत्व कई गुना अधिक इसीलिए है, क्योंकि यह अन्य योजनाओं की समीक्षा कर, उसके गुण-दोषों की विवेचना के आधार पर बनाई गई है। इसके तहत खरीफ की फसल के लिए 2 प्रतिशत प्रीमियम और रबी की फसल के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना होता है, जबकि वार्षिक वाणिज्यि क एवं बागवानी फसलों के लिए पांच प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना होता है।

क‌िसानों की आय

नए साल में किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार मोदी अनाजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में और बढ़ोत्तरी कर सकती है। इससे पहले सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी कर किसानों को बड़ी राहत दी थी। 2016-17 की खरीफ फसल की दालों में अरहर के समर्थन मूल्य को 4,625 रुपए से बढ़ाकर 5,050 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया। इसी तरह उड़द के मूल्य को 4, 625 रुपए से बढ़ाकर 5,000 रुपए प्रति क्विंटल और मूंग के लिए 4,850 रुपए से बढ़ाकर 5,250 रुपए तक कर

खास बातें ई-नाम कृषि से जुड़ा एक एक पैनइंडिया इलेक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल किसानों को अब 33 फीसदी फसल नुकसान पर मिलता है मुआवजा ड्रॉप-मोर क्रॉप योजना से 15.86 लाख हेक्टेयर खेतों को सिंचाई सुविधा दिया गया है। बाकी फसलों का समर्थन मूल्य भी इसी तर्ज पर बढ़ाया जा चुका है। इससे किसानों की आमदनी में इतनी बढ़ोत्तरी हुई कि उनकी जिंदगी फिर से चहकने लगी।

मुनाफे का धान

धान की खरीद में लेवी प्रणाली खत्म कर सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। अपनी उपज अब वे सीधे सरकारी केंद्रों पर बेच सकते हैं। कोई बिचौलिया नहीं, जो उन्हें परेशान करे। धान की न सिर्फ कीमत अच्छी मिलने लगी है, बल्कि कीमत की वसूली का रास्ता भी आसान हो गया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत देश में


01 - 07 जनवरी 2018

खेती में स्टार्टअप्स

निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी से देशभर में एग्रीटेक स्टार्टअप्स को नए सिरे से फंडिंग मुहैया कराने की दिशा में जोर बढ़ा है

सहयोगी सेक्टर के लिए कुल बजटीय आवंटन में 24 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी की गई और यह 1,87,233 करोड़ रुपए रहा।

बाजार और कृषि

यु

वाओं की उद्यमशीलता को प्रोत्साहन देने के लिए स्टार्ट अप इंडिया की योजना शुरू की तो युवा उद्यमियों ने इसे हाथों हाथ लिया। यह योजना न केवल औद्योगिक-व्यापारिक गतिविधियों के पक्ष में माहौल बनाने में सफल साबित हो रही है, बल्कि रोजगार के तमाम अवसर भी इसके माध्यम से बढ़ रहे हैं। खास तौर पर कृषि क्षेत्र को भी आगे बढ़ाने में स्टार्टअप बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

योजनाओं से प्रोत्साहन

इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन की रिपोर्ट बताती है कि देश की जीडीपी में खेती का योगदान वित्तीय वर्ष 2017 के दौरान 1,640 डॉलर से ज्यादा रहा।

250 एग्रीटेक स्टार्टअप्स

खेती की प्रक्रिया को उन्नत बनाने और उसमें व्यापक सुधार लाने में इन स्टार्टअप्स की बड़ी भूमिका सामने आ रही है। देश में 157.35 मिलियन हेक्टेयर खेती की जमीन है और खेती 28.5 लाख हेक्टेयर खेत में पानी पहुंचाया गया है। 2016-17 में (पर ड्रॉप-मोर क्रॉप) की सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत 15.86 लाख हेक्टेयर खेतों को सिंचाई के अंतर्गत लाया गया। नए साल में इसकी पहुंच और बढ़ने वाली है।

सुधरी खेतों की सेहत

किस जमीन पर कौन सी फसल होगी, किस जमीन की उर्वरा शक्ति कैसी है, इसकी जानकारी किसान को उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने सॉयल हेल्थ कार्ड शुरू किया। मोदी सरकार ने फसलों के अनुसार इस योजना शुरुआत की है। इसकी मदद से किसानों को पता चल जाता है कि उन्हें किस फसल

से जुड़े करीब 12 करोड़ किसानों को देश भर में संचालित करीब 250 एग्रीटेक स्टार्टअप्स मदद मुहैया करा रहे हैं। दरअसल केंद्र सरकार के प्रोत्साहन के कारण एग्रीटेक स्टार्टअप्स को विभिन्न स्रोतों से फंडिंग हासिल करने में मदद मिली है।

उत्पादों में वृद्धि

‘इंक-42 डेटा लैब्स’ की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों में पिछले वर्षों के दौरान तेजी से बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। वर्ष 2011-12 में भारत से 24.7 अरब डॉलर के खेती के उत्पादों का निर्यात किया गया, जबकि वर्ष 2015-16 में यह बढ़ कर 32.08 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यानी इसमें वार्षिक रूप में करीब 6.75 फीसदी की दर से वृद्धि हुई है।

बजट बढ़ा

वर्ष 2017-18 के केंद्रीय बजट में खेती और के लिए कितना और किस क्वालिटी का खाद उपयोग करना है। अभी तक 10 करोड़ से ज्यादा किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिए जा चुके हैं।

नए अंदाज में खेती

जैविक उत्पादों की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए सरकार जैविक खेती के विकास के लिए काम कर रही है। 2015 से 2018 तक 10000 समूहों के अन्तर्गत 5 लाख एकड़ क्षेत्र को जैविक खेती के दायरे में लाया है। अब तक राज्य सरकारें 7,186 समूहों के माध्यम से 3.59 लाख एकड़ भूमि को जैविक खेती के दायरे में ला चुकी हैं। देश के उत्तर पूर्वी राज्यों की भौगोलिक दशा

2014 में 70 लाख किसानों तक एसएमएस के माध्यम से ये सूचनाएं पहुंचती थीं, वहीं आज 2 करोड़ 10 लाख किसानों तक सूचनाएं पहुंचने लगी हैं

पिछले कुछ दशकों में सतत औद्योगिक ग्रोथ के बावजूद भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था में खेती सेक्टर अब भी हाशिए पर है। बाजार आधारित सर्वेक्षणों से यह बात सामने आई है कि फूड प्रोसेसिंग की बढ़ती जरूरतों और देश की आबादी तक पोषक खाद्य पदार्थ मुहैया कराने के लिहाज से कृषि सेक्टर में अभी और तेजी आने की उम्मीद है।

फंडिंग पर जोर

पिछले कुछ सालों में डेटा-आधारित सिस्टम के जरिए संगठित तरीके से तकनीकी सुधारों ने खेती की प्रक्रिया को दोबारा से खड़ा करने में किसानों को मदद मुहैया कराई है। इसका मकसद छोटे किसानों को बेहतर जीवन मुहैया कराना है। इस दिशा में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी से देशभर में एग्रीटेक स्टार्टअप्स को नए सिरे से फंडिंग मुहैया कराने की दिशा में जोर बढ़ा है।

ग्लोबल इनोवेशन फंड

नोएडा-आधारित इएम-3 एग्री सर्विसेज को हाल ही में सीरीज बी फंडिंग राउंड के तहत ग्लोबल इनोवेशन फंड से 10 मिलियन डॉलर की रकम हासिल हुई है। दूसरी ओर, क्रोफार्म नामक एग्रीटेक स्टार्टअप को प्री-सीरीज फंडिंग के तहत पांच करोड़ रुपए मिले हैं। इएम-3 को अपने भौगोलिक दायरे को बढ़ाने के लिए यह मदद मुहैया कराई गई है। को देखते हुए जैविक खेती पर विशेष बल दिया जा रहा है, जिसके लिए 2015 से 2018 तक 400 करोड़ की परियोजना चल रही है। 2015 -17 तक 143.13 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं, जिनसे 2016-17 तक 1975 समूहों के माध्यम से 39,969 किसानों को जैविक खेती का काम कर रहे हैं।

बड़ी राहत

25

कृषि

मोदी सरकार ने खेती के लिए ऋण लेने की सुविधा भी बढ़ाई है। अब 10 लाख करोड़ का कृषि ऋण किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ-साथ जिन राज्यों में किसानों की आर्थिक स्थिति खराब है और ऋण लौटाने में दिक्कत हो रही है, वहां स्थानीय सरकार से बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश बढ़ी है। सरकार 3 लाख रुपए तक के अल्प अवधि फसल ऋण पर 3 प्रतिशत दर से ब्याज में भी रियायत देती है। ब्याज रियायत योजना 2016-17 के अंतर्गत,

प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में 2 प्रतिशत की ब्याज रियायत पहले वर्ष के लिए बैंकों में अलग से उपलब्ध रहेगी।

अनाज मोटा, फायदा मोटा

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) के अंतर्गत 29 राज्यों के 638 जिलों में दाल, 25 राज्यों के 194 जिलों में चावल, 11 राज्यों के 126 जिलों में गेहूं और देश के 28 राज्यों के 265 जिलों में मोटा अनाज के लिए योजना लागू की गई है। इससे चावल, गेहूं, दालों, मोटे अनाजों के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाया जा सकेगा। एनएफएसएम के अंतर्गत किसानों को बीजों के वितरण (एचवाईवी/ हाईब्रिड), बीजों के उत्पादन (केवल दालों के), आईएनएम और आईपीएम तकनीकों, संसाधन संरक्षण प्रौद्योगि​िकयों/उपकणों, प्रभावी जल प्रयोग साधन, फसल प्रणाली जो किसानों को प्रशिक्षण देने पर आधारित है, को लागू किया जा रहा है।

मुनाफे की मछली

देश में ब्लू रिवोल्यूशन के जरिए किसानों को आय के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराने के संकल्प से सरकार ने मत्स्य प्रबंधन और विकास के लिए अगले पांच साल में 3000 करोड़ रुपए की योजना दी है। 15 0 0 0 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र विकसित किया गया है। 2012-14 में मत्स्य उत्पादन जहां 186.12 लाख टन था, वहीं 2014-16 में 209.59 लाख टन हो गया।

विश्व का बड़ा झींगा निर्यातक देश

भारत 2016 में विश्व का एक बड़ा झींगा निर्यातक देश बना था। तब भारत से झींगा निर्यात सालाना 3.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार 2022 तक यह आंकड़ा 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 'हम लोग 2022 तक भारत से झींगा निर्यात में दोगुनी वृद्धि की उम्मीद करते हैं।'

पशुधन की फ‌िक्र

मिशन मोड में लागू की गई गोकुल योजना का उद्देश्य देश की पशुधन संपदा को संवर्धित करके किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारना है। इससे देशज पशुधन के जेनटि े क स्टॉक संवर्धित होगा और दूध उत्पादन भी बढ़ेगा। इस योजना में 14 गोगुल गांव स्थापित किए गए हैं। 41 बुल मदर फार्म का आधुनिकीकरण किया गया है। देश में दूध उत्पादन 155 मिलियन टन के पास पहुंच चुका है। मौसम विज्ञान से किसानों को लाभ पहुंचाने की नीति सरकार ने शुरू की है। मौसम विज्ञान से मिलने वाली सीधी सूचनाओं से किसानों को बहुत फायदा हुआ है। इसके लिए एक विशेष कृषि ऐप्प भी शुरू किया गया है। मौसम के बारे में किसानों को एसएमएस से मिलने वाली सूचना से हर दिन के काम को सही ढंग से करने में बड़ी मदद मिलती है। 2014 में 70 लाख किसानों तक एसएमएस के माध्यम से ये सूचनाएं पहुंचती थीं, वहीं आज 2 करोड़ 10 लाख किसानों तक सूचनाएं पहुंचने लगी हैं।


26

सुलभ

01 - 07 जनवरी 2018

विद्रोह से क्रान्ति तक, डा. पाठक की कहानी: नीतू चंद्रा प्रसिद्ध अभिनेत्री और फिल्मकार नीतू चंद्रा सुलभ प्रणेता डॉ. पाठक से मिल कर बेहद भावुक हो गईं और बचपन की उन यादों में खो गईं जब डॉ. पाठक ने विदेश जाने में उनकी मदद की थी

खास बातें

अयोध्या प्रसाद सिंह

सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक सही मायने में देश के असली हीरो हैं। जिस तरह से उन्होंने अछूत कहे जाने वाले लोगों को नई जिंदगी दी और उनके लिए लड़ाई लड़ी, सच में उनकी यात्रा विद्रोह से क्रान्ति (रिवोल्ट टू रेवोलुशन) तक की है। भगवान ने बहुत कम फरिश्ते धरती पर भेजे हैं और डॉ. पाठक भी उन्हीं फरिश्तों में से एक हैं।’ यह बातें बॉलीवुड अभिनेत्री और प्रोड्यूसर नीतू चंद्रा ने सुलभ ग्राम में कही। डॉ. पाठक से मिलते वक्त नीतू चंद्रा बेहद भावुक हो गईं। डॉ. पाठक को रीयल हीरो ऑफ इंडिया बताते हुए उन्होंने कहा कि आप का काम सच में महान है, समाज के सबसे पिछड़े तबके के लोगों की जिंदगियों में खुशियां लाने के लिए हम सबको आपसे सीख लेनी चाहिए।

जीवन पर बने फिल्म

नीतू चंद्रा ने डॉ. पाठक की सराहना करते हुए कहा कि आपने जो पूरी जिंदगी में किया है, उस काम से बहुत लोगों की जिंदगियां बदली। लाखों लोगों को उससे प्रेरणा मिली है। इस पर एक खूबसूरत बायोपिक बननी चाहिए। जिससे पूरी दुनिया आपका काम देखे और प्रेरणा ले सके। आपकी कहानी इतनी लाजवाब और मानवता भरी है कि आपकी जिंदगी पर बनी फिल्म आस्कर सहित अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में जरूर जाएगी। एक प्रोड्यूसर के रूप में नीतू चंद्रा ने फिल्म बनाने में रूचि दिखाई।

डॉ. पाठक ने की मदद

नीतू चंद्रा ताईक्वंडो में ब्लैक बेल्ट चैंपियन हैं और भारत का विश्व स्तर पर 3 बार प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। उन्होंने अपने स्कूल के दिनों का एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि जब वो सातवीं कक्षा में पढ़ती थीं, तब पहली बार भारत का प्रतिनिधित्व करने देश से बाहर जाना था, लेकिन कोई भी उनका स्पांसर बनने को तैयार नहीं था। तब डॉ. पाठक ने उनकी मदद की थी और स्पांसर बन कर मुझे बाहर भेजा। इसीलिए सुलभ इंटरनेशनल और डॉ. पाठक से उनका एक भावुकता भरा जुड़ाव है। उन्होंने डॉ. पाठक के काम और सुलभ ग्राम को ग्रेट इनोवेशन बताया।

सिनेमा भी है नौकरियों का साधन

फिल्मों पर बात करते हुए उन्होंने कहा सिनेमा नौकरियां पैदा करने का एक बड़ा साधन है। छोटी जगहों पर भी लोगों को सिनेमा से काम मिलता है। सिनेमा के प्रसार के साथ नीतू ने क्षेत्रीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देना होगा। अपने प्रोडक्शन हाउस ‘चंपारण टॉकिज’ के बारे में उन्होंने कहा कि पिछले साल हमने इस बैनर तले

सही मायने में देश के असली हीरो हैं डॉ. पाठक डॉ. पाठक के जीवन पर बायोपिक दुनिया के लिए जरूरी क्षेत्रीय भाषा को फिल्मों के जरिए मिले बढ़ावा

मैं अपनी आत्मकथा लिख रहा हूं और उसके लिए एक उपयुक्त शीर्षक की तलाश में था। आज मुझे वह मिल गया।... जैसा कि नीतू ने सुझाया, अपनी आत्मकथा को मैं विद्रोह से क्रान्ति (रिवोल्ट टू रेवोलुशन) का नाम दूंगा: डॉ. पाठक क्षेत्रीय भाषा में ‘मिथिला मखान’ बनाई थी। इस फिल्म के लिए मुझे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। उन्होंने बताया कि हाल ही में हमने भोजपुरी भाषा में ‘देसवा’ फिल्म बनाई है, जो कि ‘निओबिहार’ नाम के यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है। यह पिछले 54 सालों में पहली फिल्म है जो गोवा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में दिखाई गई। इस फिल्म को कई विदेशी फिल्म समारोहों में भी दिखाया जा चुका है। नीतू ने कहा कि वह क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को आगे बढाने का काम कर रही हैं।

हमारी कहानी को मिला नाम

डॉ. पाठक ने इस मौके पर कहा नीतू चंद्रा को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमें गर्व है कि बिहार से निकलकर कोई लड़की इतना अच्छा काम कर रही है। डॉ. पाठक ने बताया कि मैं अपनी आत्मकथा लिख रहा हूं और उसके लिए एक उपयुक्त शीर्षक की तलाश में था। आज मुझे वह मिल गया। उन्होंने अपने बचपन की कहानी सुनते हुए कहा कि वह दृश्य बेहद भयावह था जब एक अछूत समझे जाने वाले इंसान को मैंने छू लिया और मेरे घर वाले मुझे शुद्ध करने के रास्ते तलाशने लगे। शायद वहीं से समाज के खिलाफ मेरा विद्रोह शुरू हुआ और जो अंत में क्रान्ति में बदल गया। इसीलिए जैसा कि नीतू ने सुझाया, अपनी आत्मकथा को मैं विद्रोह से क्रान्ति (रिवोल्ट टू रेवोलुशन) का नाम दूंगा । नीतू चंद्रा ने प्रसिद्ध नाटक ‘उमराव जान’ का जिक्र किया, जिसमें उमराव जान का किरदार वह

पिछले कई सालों से निभाती आ रही हैं। इस नाटक में वह 17 साल से लेकर 65 साल तक की बूढी औरत का किरदार निभाती हैं। अपने इसी नाटक से जुड़ी हुए लड़कियों की आजादी पर उन्होंने एक आत्मभाषण (मोनोलॉग) भी सुनाया। नीतू ने उम्मीद जाहिर कि उनको अपने नाटक का मंचन करने के लिए कभी सुलभ ग्राम में बुलाया जाए। नीतू चंद्रा ने सुलभ द्वारा विकसित तकनीक को लेकर आश्चर्य भी जताया। सबसे पहले वह सुलभ वाटर एटीएम गईं, जहां लोगों को 1 और 5 रुपए में शुद्ध पानी मिलता है। उन्होंने कहा कि पानी के लिए भी एटीएम होता है, यह अद्भुत है। सुलभ हेल्थ सेंटर का दौरा करते हुए उन्होंने डॉ. नमिता माथुर से पूरी जानकारी ली कि किस तरह से गरीब लोगों का वहां पर सस्ता इलाज किया जाता है। सुलभ शौचालय में डिजिटल पेमेंट की व्यवस्था देखकर उन्होंने कहा कि समय के साथ खुद को अपडेट रखना बहुत जरुरी है। शौचालय में ही महिलाओं के लिए मात्र 2 रूपए में सेनेटरी नैपकिन और साथ ही उसके डिस्पोजल की व्यवस्था देख नीतू बहुत ही खुश हुईं। सुलभ ग्राम में बायोगैस प्लांट को देखकर नीतू आश्चर्य चकित रह गईं। प्लांट से बन रही बिजली और इस्तेमाल को देख कर उन्होंने कहा सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। यह टेक्नोलॉजी सच में लाजवाब है और इससे प्रदूषण भी कम किया जा सकता है। इससे पहले कि कोई बाहर से आकर हमारी इस टेक्नोलाजी को ले जाए और अपना बताने लगे, हमारी सरकार को खुद ही

इस ओर ध्यान देकर इसे पूरे देश में प्रचारित करना चाहिए। बायोगैस प्लांट से बनी गैस पर उन्होंने कुछ देर के लिए खाना भी पकाया। साथ ही गैस से जलने वाली मेंटल लैंप को भी जलाया।

शिक्षा भी, रोजगार भी

नीतू चंद्रा ने सुलभ स्कूल का मुआयना किया। सुलभ पब्लिक स्कूल में 60 फीसदी बच्चे गरीब घरों से पढ़ने आते हैं। स्कूल में भ बच्चों की पढाई के साथ-साथ उनके कौशल विकास को भी निखार रहा है, जिससे कि वे आसानी से रोजगार पा सकें। यह देखकर वह काफी खुश हुईं और उन्होंने सुलभ की इस पहल को बच्चों के लिए बहुत जरुरी बताया। कढ़ाई-बुनाई से लेकर टाइपिंग, ब्यूटीकेयर, फैशन डिजाइनिंग और सेनेटरी नैपकिन बनाने के एक साल का कोर्स स्कूल में उपलब्ध है।

सुलभ म्यूजियम

सुलभ टॉयलेट म्यूजियम में नीतू चंद्रा ने इत्मीनान से हर एक टॉयलेट को देखा। हड़प्पा सभ्यता से लेकर मुगलकाल तक और ब्रिटिश शासन से लेकर वर्तमान के आधुनिक शौचालायों के मॉडल देखकर उन्होंने म्यूजियम की काफी सराहना की। इस मौके पर सुलभ के चेयरमैन एस.पी. सिंह ने स्वच्छता को लेकर सरकार की पहल पर ख़ुशी जताई और कहा कि अब डॉ. पाठक के काम को अमली जामा पहनाया जा रहा है। उन्होंने सिनेमा को समाज का आइना बताया और कहा कि सिनेमा के माध्यम से भी बदलाव लाया जा सकता है, नीतू भी वही काम कर रही हैं। इससे पहले सुलभ ग्राम में नीतू चंद्रा के आगमन पर फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया गया। पूर्व स्कैवेंजर्स और वृंदावन की विधवा माताओं ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया। डॉ. पाठक ने इस मौके पर नीतू को एक शौचालय का मॉडल स्मृति चिन्ह के रूप में देकर सम्मानित किया। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी पर लिखी अपनी किताब ‘द मेकिंग ऑफ ए लीजेंड’ भी भेंट की।


01 - 07 जनवरी 2018

27

सम्मान

‘मिथिला रत्न’ से सम्मानित हुए डॉ. पाठक

अखिल भारतीय मिथिला संघ की स्वर्ण जयंती समारोह में 24 राज्यों से हजारों की संख्या में मिथिला वासी शामिल हुए

खास बातें

अखिल भारतीय मिथिला संघ का दिल्ली में स्वर्ण जयंती समारोह बिहार के सीतामढ़ी में मां सीता के भव्य मंदिर बनाने का संकल्प के काम की वजह से दुनिया करती है डॉ. पाठक की तारीफ रोटी-बेटी का जो संबंध है वह और भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि मिथिला की मेधा और श्रम शक्ति का परचम पूरी दुनिया में है। बिहार सरकार को भी इस शक्ति का उपयोग कर राज्य को बेहतर बनाना चाहिए।

जब मैथिली में ली शपथ

अयोध्या प्रसाद सिंह

खिल भारतीय मिथिला संघ ने अपना स्वर्ण जयंती समारोह दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित किया। कार्यक्रम मंव 24 राज्यों से हजारों की संख्या में मिथिला वासियों ने शिरकत की। इस मौके पर सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक को ‘मिथिला रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने माला, पाग पहनाकर व स्मृति चिन्ह देकर डॉ. पाठक को सम्मानित किया। इस अवसर पर पुरी के पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी भी उपस्थित थे। अखिल भारतीय मिथिला संघक शोध पत्रिका ‘तीरभुक्ति’ के नए अंक का लोकार्पण भी इस अवसर पर किया गया। समारोह में स्वागताध्यक्ष भाजपा के राज्य सभा सांसद प्रभात झा, मधुबनी से सांसद हुकुमदेव नारायण यादव और अखिल भारतीय मिथिला संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय चंद्र झा भी उपस्थित रहे।

पाठक जी की पहचान पूरे विश्व में

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने डॉ. पाठक की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमारी मिट्टी डॉ. पाठक जैसे लोगों को पैदा करती है, जिनका जीवन समाज के पिछड़े लोगों के उद्धार के लिए समर्पित है। डॉ.

पाठक के काम की वजह से पूरी दुनिया उनकी तारीफ करती है। उन्होंने कहा कि मिथिला की भूमि ने हमेशा से ही देश को त्याग और बलिदान की परंपरा सिखाई है। कपिल मुनि और राजा जनक जैसे लोगों से शुरू होकर फणीश्वरनाथ रेणु तक सबने देश को कुछ न कुछ दिया है। प्रजातंत्र की भी सही मायने में शुरुआत मिथिला से ही हुई थी। मिथिला वासियों के साथ-साथ पूरे देश के लिए आस्था का केंद्र मां सीता के मंदिर के लिए उन्होंने आश्वासन दंते हुए कहा कि मैं अपने स्तर पर सरकार से अनुरोध करूंगी कि सीतामढ़ी में माता सीता का भव्य मंदिर बने।

गांधी की लाठी मिथिला की

इस अवसर देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मैथिली भाषा का जिक्र करते हुए कहा उन्हें गर्व है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के शासनकाल में मैथिली भाषा को संविधान की 8 वीं अनुसूची में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि मिथिला की सांस्कृतिक विरासत प्रसिद्ध पाग के प्रति सम्मान जताते हुए भारत सरकार ने इसके ऊपर अगस्त महीने में डाक

टिकट जारी किया था। उन्होंने मैथिली साहित्य की तारीफ करते हुए कहा कि महाकवि विद्यापति ने ही मातृभाषा के प्रति प्रेम पैदा किया। मैथिली साहित्य में विद्यापति युग की तुलना शेक्सपियर के अंग्रेजी साहित्य से की जाती है। राजनाथ सिंह ने योग को लेकर मिथिला के योगदान पर कहा कि योग की शुरुआत भारत से हुई और भारत में योग की शुरुआत मिथिला से हुई। मुंगेर का बिहार योग विद्यालय विश्व प्रसिद्ध है। स्वतंत्रता संग्राम में मिथिला के योगदान पर उन्होंने कहा कि जिस लाठी का सहारा लेकर गांधी जी ने भारत को आजादी दिलाई वह लाठी गांधी जी मिथिला वासियों ने 12 अक्टूबर 1934 को गोरघट गांव में भेंट की थी।

नेपाल और भारत साथ आए

मिथिला में जन्म लेने वाले पुरी के पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने इस मौके पर कहा कि मिथिला का कुछ क्षेत्र भारत के पड़ोसी देश नेपाल में है। भविष्य में कोई ऐसा कार्यक्रम हो जिसमें भारत और नेपाल दोनों जगह के मिथिलावासी सम्मिलित हो सकें। इससे भारत और नेपाल के बीच

जिस लाठी का सहारा लेकर गांधी जी ने भारत को आजादी दिलाई वह लाठी गांधी जी मिथिला वासियों ने 12 अक्टूबर 1934 को गोरघट गांव में भेंट की थी

इस मौके पर बिहार के मधुबनी से भाजपा सांसद हुकुमदेव नारायण यादव ने बताया कि लोकसभा में मुझसे कहा गया कि हिंदी या अंग्रेजी में ही शपथ लेनी होगी। लेकिन मैंने साफ माना कर दिया और अंत में तीन दिन बाद मैंने मैथिली में शपथ ली। उन्होंने कहा कि हम मिथिलावासी सब कुछ छोड़ सकते हैं, लेकिन अपनी बोली और भाषा नहीं छोड़ सकते। हम इसके सम्मान के लिए हमेशा लड़ते रहेंगे।

मां सीता का बने भव्य मंदिर

इस अवसर पर भाजपा के राज्य सभा सांसद प्रभात झा ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर जल्द से जल्द बने, ये हम सभी चाहते हैं। साथ ही सीतामढ़ी में मां सीता का भी भव्य मंदिर बने। उन्होंने कहा कि मैंने केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार से भी अनुरोध किया है कि जल्द ही मां सीता के भव्य मंदिर की रूपरेखा तैयार कर काम आरंभ हो। साथ उन्होंने महाकवि विद्यापति के जन्म स्थान विस्फी के जीर्णोद्धार के लिए भी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने आदि शंकराचार्य से शास्त्रार्थ करने वाले मिथिला निवासी मंडन मिश्र के निवास स्थान महिषि को लेकर भी कहा कि हम सरकार से इस स्थान को भी विकसित करने का आग्रह करते हैं। इस मौके पर मैथिली के प्रसिद्ध रचनाकार लक्ष्मण झा सागर को बाबू साहेब चौधरी पुरस्कार, वरिष्ठ साहित्यकार विरेंद्र मल्लिक को भोगेंद्र झा सम्मान, मैथिली के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. भीमनाथ झा को यात्री सम्मान और डॉ. आभा झा चौधरी को मिथिला विभूति सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मिथिला की संस्कृति से जुड़े पाग, पान, मखाना और मछली के साथ पेंटिंग्स की प्रदर्शनी भी लगाई गई।


28

आयोजन

01 - 07 जनवरी 2018

सुलभ-प्रांगण में कवि-सम्मेलन सुलभ ग्राम में आयोजित कवि सम्मेलन में सुलभ प्रणेता ने गाए स्वच्छता के गीत

‘हं

डॉ. अशोक कुमार ज्योति

सना मेरा काम, हंसाना मेरा काम’... सहज और सरल गीत की इन पक्तियों को वैसे ही सहज और सरल व्यक्तित्व के स्वामी डॉ. विन्देश्वर पाठक जी की मधुरिम ध्वनि में सुनने का मौका मिला दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी, सुलभ साहित्य अकादमी तथा हिंदी साहित्य मंथन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अखिल भारतीय कविसम्मेलन के अवसर पर। सुलभ ग्राम में, आयोजित यह कवि-सम्मेलन ‘स्वच्छ भारत, समृद्ध भारत’ को समर्पित था। सुलभ-स्वच्छता एवं सामाजिक सुधारआंदोलन के प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक ने कार्यक्रम को अपना सानिध्य प्रदान किया। उन्होंने स्वच्छता पर केंद्रित अपनी रचनाएं सुनाईं, जिसे श्रोताओं ने बहुत पसंद किया-

स्वच्छ रहो और स्वस्थ रहो

(माननीय प्रधाानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की तरफ से राष्ट्र को आह्वान)

मां-बहनों की लाज बचाओ - 2 मां-बहनों की लाज बचाओ - 2 चलो चलो मेरे साथ - 2 चलो चलो मेरे साथ - 2 चलो गांवों में मेरे साथ - 2 लोगों को हम समझाएं - 1 खुले रूप में शौच न जाएं - 2 बीमारी को दूर भगाएं - 2 अपने घर में शौचालय बनवाएं - 2 चलो चलो मेरे साथ - 2 हम भी साफ हों, देश साफ हो - 2 गांधी जी का था सपना - 2 स्वच्छ रहो और स्वस्थ रहो - 2 सारा देश हो साफ अपना - 2 मेरा भी है यह सपना - 3 चलो चलो मेरे साथ - 5 युवा कवि विजय भारद्वाज ने काव्य-पाठ का श्रीगणेश

गांव-गांव में ‘सुलभ धाम’

गीतकार एवं संगीतकार:

डॉ- विन्देश्वर पाठक

चलो चलो मेरे साथ - 2 उठाओ झाडूृ अपने हाथ - 2 साफ करो-गंदगी को साफ करो - 2 साफ करो-गंदगी को साफ करो - 2 चलो चलो मेरे साथ - 2 चलो चलो मेरे साथ - 2 चलो काशी के अस्सी घाट - 2 उठाओ फावड़ा अपने हाथ - 2 साफ करो-मिट्टी को साफ करो - 2 साफ करो-मिट्टी को साफ करो - 2 चलो चलो मेरे साथ - 2 चलो चलो मेरे साथ - 2 बनाओ ‘इज्जत घर’ मेरे साथ - 2

किया- तेरी कृपा बिना मां शब्द, छंद, बंध ना हे शारदे! तुझे मेरी अमर्त्य वंदना! सुषमा भंडारी ने अपने भावों को माहिया छंद में व्यक्त करते हुए कविताएं प्रस्तुत कीं आंखों में समुदं र है डूब के देख जरा तू इसके अंदर है। इस मां की ममता को क्या कोई जान सका इस मां की क्षमता को। सुषमा भंडारी ने स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करते हुए एक रचना सुनाईऐ भारती मैं तेरे कदमों में सर झुकाऊं स्वच्छ कर लूं अपना तन-मन स्वच्छता के गीत गाऊं। कल बह रही थीं नदियां स्वरों की जैसी लहरी, क्यों हो गई है कचरा क्यों आज हैं ये ठहरी, संकल्प लूं मैं इतना गंदगी को मैं मिटाऊं, स्वच्छ कर लूं अपना तन-मन स्वच्छता के गीत

सु

ग्रामीण शिक्षा जागरूकता दिवस के अवसर पर गोरखपुर के गजपुर में बाल पुस्तकालय की स्थापना हुई

लभ स्वच्छता अभियान अब अपने ‘सुलभ धाम’ के नये अवतार के साथ भारतवर्ष के उन गांवों की ओर उन्मुख हो गया है जहां का जनमानस तथा विद्यालयों के बच्चे अभी भी स्वच्छता के प्रति उदासीन हैं। ‘नागरिक स्वावलंबन एवं स्वाभिमान विकास परिषद्’ के कार्यक्रम के अंतर्गत इसके संस्थापक डॉ. हरिविलास चौधरी ‘शक्तिबोध’ नें गत 19 नवंबर 2017 को गोरखपुर जनपद (उ.प्र.) के गजपुर ग्राम में ‘ग्रामीण शिक्षा जागरूकता दिवस’ का शुभारंभ कर एक ‘बाल-पुस्तकालय’ की स्थापना की। मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् प्रो.गौरीशंकर राय तथा जाने मानें हिंदी के साहित्यकार सतीश चंद्र त्रिपाठी जी की अध्यक्षता

में यह आयोजन हुआ । डॉ.हरिविलास चौधरी ‘शक्तिबोध’ गावों में शिक्षा के प्रति जागरूकता को बढ़ाने का संदेश दिया तथा स्वच्छता के उन्होंने इस जागरूकता का प्रथम सोपान बताया। ‘कर्मवीर’ डॉ.विन्देश्वर पाठक जी द्वारा स्थापित ‘सुलभ अंतरराष्ट्रीय समाजसेवी संस्था’ को ‘सुलभ धाम’ की संज्ञा देते हुए स्वच्छता के प्रति इसके आदर्शों को अपनाने का अनुरोध किया । यह भी बताया कि स्वच्छता के साथ ज्ञानार्जन की चाह बढ़ती है, बच्चों का पुस्तकों के प्रति लगाव बढ़ता है। उन्होनें कहा कि पिछडे़ ग्रामीण क्षेत्र में बाल-पुस्तकालय की स्थापना शिक्षा के प्रति जागरूकता का बुनियादी आधार है ।

गाऊं। जो ढ़ो रहे हैं मैला, मैं उनको ये बताऊ, अब छोड़ दें प्रथा ये मैं गीत ये ही गाऊ, अज्ञान का अंधेरा, मैं भी तो कुछ मिटाऊ, स्वच्छ कर लूं अपना तन-मन स्वच्छता के गीत गाऊं। ये भेदभाव कैसा जलता अलाव कैसा, जब प्यार का हो मरहम तब दर्द-ओ-घाव कैसा, धरती है स्वर्ग मेरी, इस स्वर्ग को बचाऊं, स्वच्छ कर लूं अपना तन-मन स्वच्छता के गीत गाऊं। हिंदी के मंचों पर बहुत ही तेजी से अपना स्थान पुख्ता कर रहे युवा कवि मनीष मधुकर संचालन मेंआयोजित इस कवि-सम्मेलन की अध्यक्षता देश के प्रसिद्ध कवि देवेंद्र माझी जी ने की। प्रसिद्ध हास्य कवि श्री विनोद पाल, विमलेंदु सागर, डॉ. कल्पना कुमारी झा, श्रीमती वीणा बिष्ट, अनीता झा एवं मृणाभ कुमार ने अपनी-अपनी कविताओं के माध्यम से स्वच्छता और मानवता का संदेश दिया और लोगों का मन मोह लिया। विजय भारद्वाज के वीर रस के काव्य ने सभा में एक नई ऊर्जा भर दी तो, वहीं विनोद पाल ने श्रोताओं को खूब हंसाया। मनीष मधुकर ने घर में पिता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहाचार दिनों में पा गया जीवन का सब सार बाबू जी जब से गए बिखर गया परिवार। विमलेंदु सागर ने स्वच्छता पर केंद्रित रचनाएं सुनाईं। वहीं शहीदों के सम्मान में निम्नलिखित पक्तियों का पाठ कर उन्होंने सभा को भाव-विभोर कर दिया। कहे ‘जय हिंद’ न वो बदनसीब होता है नसीब वाला ही मां के करीब होता है। इस कार्यक्रम के मीडिया सहयोगी के रूप में मासिक पत्रिका ‘पीसमेकर’ के संवाददाता, कई साहित्यकार, सुलभ व्यावसायिक प्रशिक्षण-केंद्र तथा सुलभ पब्लिक स्कूल की छात्रा-छात्राएं एवं शिक्षकगण तथा सुलभ इंटरनेशनल के कार्यकर्तागण बड़ी संख्या में मौजूद रहे। दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के सहायक पुस्तकालय अध्यक्ष एवं सूचना अधिकारी महेश अरोड़ा ने धन्यवाद-ज्ञापन किया।


01 - 07 जनवरी 2018

29

जेंडर

महिलाओं के लिए अच्छे दिन

भारतीय महिलाओं के लिए अच्छे दिनों की शुरुआत तो वैसे पहले ही हो गई थी, 2018 में भी यह सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है

एसएसबी ब्यूरो

र्ष 2017 को भारत के कई अखबारों और पत्रिकाओं ने महिला कामयाबी का साल बताया है। 2017 की तरह ही 2018 में भी देश की आधी दुनिया के हिस्से तरक्की और कामयाबी के कई नए सुलेख जुड़ेंगे, ऐसी उम्मीद है

जयपाल को बधाई

भारत के लिए नववर्ष की शुरुआत एक सुखद सूचना के साथ हो रही है। ‘पोलिटिको’ पत्रिका ने 2018 की पहली पावर लिस्ट में भारतीय मूल की अमेरिकी महिला सांसद प्रमिला जयपाल को शामिल किया है। उन्हें यह स्थान सदन में 'विरोध का नेतृत्व' करने के लिए दिया गया है। पावर लिस्ट में शामिल 18 लोगों में 52 वर्षीय जयपाल को पांचवां स्थान मिला है। वह भारतीय मूल की पहली अमेरिका महिला हैं, जिनका नाम पोलिटिको के पावर लिस्ट में शामिल किया है। पत्रिका के अनुसार, जयपाल तेजी से बढ़ती हुई लोकतांत्रिक स्टार और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुखर आलोचक हैं। उन्होंने सदन में विरोधी के नेता के रूप में काम किया है। जयपाल के दोस्त और रिपब्लिकन सभा के नए साथी

सदस्य रो खन्ना के हवाले से पोलिटिको ने बताया है कि कांग्रेसेशनल प्रोग्रेसिव कॉकस के पहले उपाध्यक्ष से लेकर उन्होंने 'कैपिटल हिल पर नागरिक अधिकारों और प्रवासी सुधार के लिए अथक अधिवक्ता' के रूप में काम किया है। पोलिटिको में बताया गया है कि जयपाल भारतीय प्रतिनिधि सभा में काम करने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं जो शायद ही कभी कोई चुनौती लेने से पीछे रहती हों।

महिला आरक्षण

भारत सरकार महिला आरक्षण विधेयक के साथ-साथ पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण को लेकर विचार कर रही है। सब कुछ ठीक रहा तो इस वर्ष इस दिशा में बड़ी कामयाबी मिल सकती है। इससे महिलाओं की लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत और पंचायत चुनावों में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित हो जाएगी। अभी तक पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं के लिए केवल 33 प्रतिशत सीटें ही आरक्षित हैं। कानून बनने के बाद यह व्यवस्था पूरे देश में लागू हो जाएगी। सरकार ने महिलाओं को मंत्रिमंडल में ही स्थान नहीं दिया, बल्कि अपनी नीतियों और योजनाओं से साबित किया है कि महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण को लेकर कितनी संवेदनशील है। सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए योजनाओं

महिला हॉकी के नाम रहेगा 2018

भारतीय महिला टीम 2018 में होने वाले वर्ल्ड कप में भी खिताबी जीत दर्ज कर सकती है

हिला एशिया कप के रोमांचक मुकाबले में भारतीय हॉकी टीम ने चीन को पेनाल्टी शूटआउट में 5-4 से मात दे दी। टीम इंडिया की कप्तान रानी ने शूटआउट में विजयी गोल दागा। साथ ही सविता ने सही समय पर चीन के प्रयास को असफल करते हुए भारत को जीत दिलाई। भारतीय महिला हॉकी टीम ने चीन को 5-4 से मात देते ही इतिहास रच दिया है। भारत ने 13 साल बाद किसी महाद्वीपीय खिताब को अपने नाम किया है। भारतीय टीम ने इस मुकाबले में शानदार खेल दिखाया और जीत की दहलीज पर कदम रखा। इस टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर सविता

को चुना गया और साथ ही प्लेयर ऑफ द मैच मोनिका को चुना गया। इस जीत के साथ विश्व कप में खेलने का रास्ता भी खुल गया है। दरअसल, 2018 में इंग्लैंड में महिला वर्ल्ड कप होना है और भारतीय महिला टीम ने इस जीत के साथ विश्व कप के लिए क्वालीफाई कर लिया है। इस जीत से पहले 2004 में भारतीय महिला टीम ने जापान को 1-0 से मात दी थी और इस जीत के साथ ही भारतीय महिला टीम ने एशिया कप जीता था। वहीं इसी साल जापान को मात देकर टीम इंडिया फाइनल मुकाबले में पहुंची थी, जहां बेहतरीन खेल दिखाते हुए भारतीय महिला टीम ने खिताबी जीत दर्ज की।

खास बातें ‘पोलिटिको’ की 2018 की पहली पावर लिस्ट में जयपाल का नाम प्रमिला जयपाल, भारतीय मूल की अमेरिकी महिला सांसद हैं महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण को लेकर विचार मंथन जारी के क्रियान्वयन के अलावा समाज के प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं को प्रोत्साहन देने का काम कर रही हैं। सरकार महिलाओं को सशक्त करने के अपने दायित्व का निर्वाह पूरी ईमानदारी से कर रही है।

शिक्षा को बढ़ावा

महिलाओं की शिक्षा और समृद्धि के लिए सरकार ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ रखी है। सरकार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना की सफलता किसी से छिपी नहीं है। वहीं 0-10 साल की कन्याओं के लिए सुकन्या समृद्धि योजना देश की बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने का कार्य किया है। इस तरह सरकार ने बेटियों की शिक्षा और समृद्धि दोनों को सुनिश्चित किया है। सरकार बालिकाओं के लिए मुफ्त शिक्षा और छात्रवृत्तियां दे रही है।

महिला स्वास्थ्य

महिला स्वास्थ्य को सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से करोड़ों गरीब परिवारों की महिलाओं को प्रदूषण युक्त चूल्हे के धुएं से मुक्ति दिलाने का काम किया है। गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की महिलाओं को एलपीजी गैस कनेक्शन और चूल्हा मुफ्त उपलब्ध कराया है। गर्भवती कामकाजी महिलाओं के लिए वैतनिक मातृत्व अवकाश की अवधि 12 सप्ताह से बढ़ा कर 26 सप्ताह की है। मातृत्व अवकाश के समय घर से भी काम करने की छूट दे दी है।

अब और अन्याय नहीं

एनडीए सरकार पूरी तरह से महिलाओं की मुक्ति और न्याय की पक्षधर रही है। ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से मुक्ति दिलाई, वहीं यौन उत्पीड़न से निवारण के लिए ई-प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया गया है। इस ई-प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन ही शिकायत दर्ज करा सकेंगी। केंद्र सरकार में करीब 30 लाख से ज्यादा कर्मचारी हैं।


30

साहित्य कविता

बच्चों को दीजिए संस्कार टीवी देखने से पहले टाइम दीजिए। संपत्ति देने से पहले सन्मति दीजिए। स्वतंत्रता देने से पहले संस्कार दीजिए। शिक्षा देने से पहले संस्कृति दीजिए। व्यापार देने से पहले व्यवहार दीजिए। कार देने से पहले नवकार दीजिए। कॉलेज से पहले कर्म का नॉलेज दीजिए। दोस्तों से पहले परिवार दुलार दीजिए। परिवर्तन से पहले मातापिता का प्यार दीजिए। जमाने की हवा देने से पहले अपना अनुभव दीजिए। तो बन जाएगा आपकी आंखों का तारा, सारे संसार का दुलारा।

01 - 07 जनवरी 2018

साहसी बालक

हर के बाहर एक विशाल पार्क था। उसी के साथ एक गहरी नदी तीव्र वेग से बहती थी। शाम के समय बच्चे, बूढ़े और जवान सभी पार्क में बिछी हरी हरी दूब, क्यारियों में खिले रंग बिरंगे फूल, तरह तरह के पेड़, लताएं और फव्वारों के बीच बैठकर फुरसत के क्षणों का आनंद लूटते थे। एक दिन पार्क में दो बच्चे खेलते कूदते नदी के तट पर पहुंच गए। शरारत तो बच्चों का स्वभाव है। दोनों एक दूसरे के साथ धक्का मुक्की करते हुए नदी में जा गिरे। नदी में बहते-डूबते बच्चों पर मां की निगाह पड़ी और वह एकदम बदहवास सी पागलों की तरह चिल्लाने लगी- अरे, कोई मेरे बच्चों को बचाओ। देखो, मेरे दोनों बच्चे डूब रहे हैं। कोई तो सहायता करो। वह तीर की तरह तैर कर, डूबते-उठते बच्चों के पास पहुंचा। उन्हें पकड़ कर पीठ पर लादा और तैरते हुए बच्चों को सुरक्षित किनारे पर ले आया। सभी दर्शक उसकी उदार साहसिकता को देखकर अचंभित रह गए। सभी मुक्त कंठ से लड़के की प्रशंसा करते हुए कह रहे थे यह तो कोई मसीहा है, जो अचानक प्रकट होकर बच्चों की रक्षा के लिए आ गया। बच्चों की मां ने रोते रोते लड़के को सैंकड़ों

स समय रावण मरणासन्न अवस्था में था, उस समय भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि इस संसार से नीति, राजनीति और शक्ति का महान पंडित विदा ले रहा है, तुम उसके पास जाओ और उससे जीवन की कुछ ऐसी शिक्षा ले लो जो और कोई नहीं दे सकता। श्रीराम की बात मानकर लक्ष्मण मरणासन्न रावण के सिर के नजदीक जाकर खड़े हो गए। रावण ने कुछ नहीं कहा। लक्ष्मण जी वापस रामजी के पास लौटकर आए। तब भगवान ने कहा कि यदि किसी से ज्ञान प्राप्त करना हो तो उसके चरणों के

नए साल की शुभकामनाएं! - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

दुआएं दे डाली। उसने कई बार प्यार से उसका माथा चूमा। इस साहसी और वीर बालक का जन्म एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। इस बालक में आरंभ से ही उदारता, साहसिकता और परोपकारिता कूट कूट कर भरी हुई थी। वह साहसी तो था ही, साथ ही वह सादगी पसंद, सत्यवादी और न्यायप्रिय भी था। अपने इन्हीं गुणों के कारण वह हमेशा प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहा और एक दिन अमेरिका का राष्ट्रपति बना। जानते हो यह लड़का कौन था। इस लड़के का नाम था जार्ज वाशिंगटन। जिस मनुष्य में सादगी हो, सच्चाई हो, साहस और धैर्य हो, मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों से जूझने का दिल हो। वह महापुरूष तो बनेगा ही।

रावण की तीन बातें

जि

कविता

पास खड़े होना चाहिए न कि सिर की पास। यह बात सुनकर लक्ष्मण जाकर इस बार रावण के पैरों की तरफ खड़े हो गए। उस समय महापंडित रावण ने लक्ष्मण को तीन बातें बताईं, जो जीवन में सफलता की कुंजी हैपहली बात जो रावण ने लक्ष्मण को बताई वह यह थी कि शुभ कार्य जितनी जल्दी हो कर डालना और अशुभ को जितना टाल सकते हो टाल देना चाहिए, यानी शुभस्य शीघ्रम। मैं श्रीराम को पहचान नहीं सका और उनकी शरण में आने में देरी कर दी, इसी कारण मेरी यह हालत हुई। दूसरी बात यह कि अपने प्रतिद्वंद्वी या अपने शत्रु को कभी अपने से छोटा नहीं समझना चाहिए, मैं यह भूल कर गया। मैंने जिन्हें साधारण वानर और भालू समझा उन्होंने मेरी पूरी सेना को नष्ट कर दी। मैंने जब ब्रह्माजी से अमरता का वारदान मांगा था, तब मनुष्य और वानर के अतिरिक्त कोई मेरा वध न कर सके ऐसा कहा था, क्योंकि मैं मनुष्य और वानर को तुच्छ समझता था। यही मेरी गलती हुई। आप भी इन बातों को गांठ बांध कर रख लें और इन्हें समय समय पर याद करते रहें।

नए साल की शुभकामनाएं! खेतों की मेड़ों पर धूल-भरे पांव को, कुहरे में लिपटे उस छोटे-से गांव को, नए साल की शुभकामनाएं! जांते के गीतों को, बैलों की चाल को, करघे को, कोल्हू को, मछुओं के जाल को, नए साल की शुभकामनाएं! इस पकती रोटी को, बच्चों के शोर को, चौके की गुनगुन को, चूल्हे की भोर को, नए साल की शुभकामनाएं! वीराने जंगल को, तारों को, रात को, ठंडी दो बंदूकों में घर की बात को, नए साल की शुभकामनाएं! इस चलती आंधी में हर बिखरे बाल को, सिगरेट की लाशों पर फूलों-से ख्याल को, नए साल की शुभकामनाएं! कोट के गुलाब और जूड़े के फूल को, हर नन्ही याद को, हर छोटी भूल को, नए साल की शुभकामनाएं! उनको जिनने चुन-चुनकर ग्रीटिंग कार्ड लिखे, उनको जो अपने गमले में चुपचाप दिखे, नए साल की शुभकामनाएं!


01 - 07 जनवरी 2018

आओ हंसें दो टेस्ट

संता की मां की तबीयत खराब हुई। वह मां को अस्पताल ले गया। अस्पताल में डॉक्टर ने कहा कि दो टेस्ट कराने

होंगे। संता जोर-जोर से रोने लगा- ‘हे भगवान अब क्या होगा। मां तो पढ़ी-लिखी भी नहीं है।’

सु

जीवन मंत्र

आप हर समय कैलेंडर के एक बंद पन्ने को खोलकर नए विचार और प्रगति के लिए एक नई जगह खोजते हैं

पति रोज रात को शक्कर का डिब्बा खोलकर देखता और सो जाता। पत्नी से रहा नहीं गया। एक दिन उसने पति से पूछ ही लिया‘क्यूं जी, ये रोज रोज आप शक्कर का डिब्बा खोलकर क्या देखते हैं?’ पति : अरे, डॉक्टर ने कहा है घर पर रोज शुगर चेक कर लिया करो।

सुडोकू का हल इस मेल आईडी पर भेजेंssbweekly@gmail.com या 9868807712 पर व्हॉट्सएप करें। एक लकी व‌िजते ा को 500 रुपए का नगद पुरस्कार द‌िया जाएगा। सुडोकू के हल के ल‌िए सुलभ स्वच्छ भारत का अगला अंक देख।ें

सुडोकू-02 का हल

संता की तपस्या

• 1 जनवरी सेना चिकित्सा कोर स्थापना दिवस, • • • •

नया साल दिवस 3 जनवरी शाकम्भरी जयंती 4 जनवरी लुई ब्रेल दिवस 5 जनवरी गुरु गोविंद सिंह जयंती 7 जनवरी

राजिम भक्तिन माता जयंती

सुडोकू 02 के लकी व‌िजते ा

नितिन गांव-मनेशी, जिला-अर्की, ​िहमाचल प्रदेश

बाएं से दाएं

वर्ग पहेली - 03

1. कुछ, थोड़ा (4) 3. अच्छी रुचि (3) 5. मक्खन (4) 6. अरदली, नौकर (4) 7. तीसरी बार (3) 10. कटौती, नुक्सान, कमी (2) 11. भीत (3) 12. चकत्ता (3) 13. राजा, भूप (2) 15. धोबी (3) 18. रावण (4) 19. ठोस के गलने का तापमान (4) 21. शंका, संदहे (3) 22. मृत्यु, शरीर का अंत (4)

ऊपर से नीचे

1. कमर (2) 2. दूसरों की भलाई (5) 3. अच्छी नीति (3) 4. रौब, प्रतिष्ठा (3) 5. भाग्य (3) 8. रात ही रात में (4) 9. कमल (4) 12. दमन करने वाला (5) 14. तमगा (3) 16. स्थान (3) 17. लेखनी (3) 20. मरा हुआ (2)

वर्ग पहेली-02 का हल

महत्वपूर्ण दिवस

डोकू -03

रंग भरो

शुगर चेक

बंता ने ईश्वर को खुश करने के लिए घोर तपस्या की ! ईश्वर खुश हुए और प्रकट होकर कहा- ‘मांग , मांग वत्स तुझे क्या चाहिए?’ बंता- ‘सिस्टम से चलिए प्रभु। पहले तपस्या भंग करने के लिए स्वर्ग से अप्सराएं आती थीं। उसका क्या हुआ?’

31

इंद्रधनुष


32

सिनेमा

डाक पंजीयन नंबर-DL(W)10/2241/2017-19

01 - 07 जनवरी 2018

बायोपिक की बहार

इस वर्ष उर्दू लेखक सआदत हसन मंटो से लेकर रानी लक्ष्मीबाई सहित कई बायोपिक आने की उम्मीद है

मंटो

एसएसबी ब्यूरो

जिस कलमकार ने जमाने से पहले का लिखते हुए सभी को भौचक्क किए रखा, उस कमलकार की जिंदगी की कहानी बड़े पर्दे पर दिखने को तैयार है। जी हां, लुधियाना में पैदा हुए और लाहौर में आखिरी सांसें लेने वाले सआदत

हसन मंटो की जिंदगी पर फिल्म बन रही है और नवाजुद्दीन सिद्दीकी मंटो का किरदार निभा रहे हैं। नंदिता दास ने मशहूर लेखक सआदत हसन मंटो की बॉयोपिक पूरी कर ली है। फिल्म पोस्ट प्रोडक्शन के दौर में है और इस साल के मध्य तक रिलीज हो जाएगी।

'सैल्यूट'

भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा पर 'सैल्यूट' नाम से बायोपिक फिल्म बन रही है। इस फिल्म को सिद्धार्थ रॉय कपूर प्रोड्यूस कर रहे हैं और इसका निर्देशन महेश मथाई करेंगे। पहले राकेश शर्मा के किरदार को आमिर खान निभाने वाले थे पर अब खबर है कि यह भूमिका शाहरुख खान करेंगे। लंबी चर्चा के बाद शाहरुख ने इसके लिए हामी भर दी है। राकेश शर्मा भारत

के पहले अंतरिक्ष यात्री हैं। 3 अप्रैल 1984 को उन्होंने अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी थी और अंतरिक्ष में करीब 7 दिन 21 घंटे और 40 मिनट बिताकर वापस लौटे थे।

‘गोल्ड’

गोल्ड भारत के राष्ट्रीय खेल हॉकी की नेशनल टीम का हिस्सा रह चुके खिलाड़ी बलबीर सिंह की बायोपिक है। बलबीर सिंह साल 1948 में हुए ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य थे। रीमा कागती द्वारा डॉयरेक्टेड इस फिल्म में अक्षय कुमार और नागिन फेम एक्ट्रेस मौनी राय लीड रोल में हैं। हॉकी के दीवाने और अक्षय कुमार के फैंस इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा टीआरपी क्वीन मौनी राय को फिल्मों में देखने के लिए उनके फैंस उत्सुक हैं।

‘मणिकर्णिका’

‘मणिकर्णिका‘ झांसी की रानी की कहानी पर आधारित फिल्म होगी। इसके डॉयरेक्टर कृष हैं। खास बात यह है कि इस फिल्म में बॉलीवुड की क्वीन कंगना रनौत रानी लक्ष्मीबाई का किरदार निभा रही हैं। इतना ही नहीं इस फिल्म से टीवी एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे बॉलीवुड में डेब्यू कर रही हैं। बेहतरीन स्टारकास्ट, उम्दा प्लॉट और फेमस डॉयरेक्टर की वजह से लोग इस फिल्म को देखने में दिलचस्पी दिखा सकते हैं।

आनंद कुमार

आखिरी बार फिल्म 'काबिल' में नजर आए ऋतिक रोशन जल्द ही सुपर-30 के आनंद कुमार के जीवन पर बनने वाली बायोपिक में लीड रोल निभाएंगे। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान

आरएनआई नंबर-DELHIN/2016/71597; संयुक्त पुलिस कमिश्नर (लाइसेंसिंग) दिल्ली नं.-एफ. 2 (एस- 45) प्रेस/ 2016 वर्ष 2, अंक - 3

(आईआईटी) की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के लिए चर्चित संस्थान 'सुपर 30' के संस्थापक आनंद कुमार पर बन रही बायोपिक इस साल 23 नवंबर को रिलीज होगी। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श द्वारा ट्विटर पर बायोपिक की रिलीज डेट साझा करने के साथ ही 'आनंद सुपर 30' ट्रेंड करने लगा। विकास बहल के निर्देशन में बन रही इस फिल्म को फैंटम और रिलाइंस इंटरटेनमेंट प्रोड्यूस कर रहे हैं। खबर है कि आनंद कुमार की बायोपिक में करीब 20 बिहारी कलाकारों को मौका दिया जाएगा। फिल्म के निर्माण के सिलसिले में कुछ दिन पहले ही निर्देशक विकास बहल पटना आए थे। बायोपिक में आनंद के जीवन संघर्ष से लेकर छात्रों के परिवेश को भी प्रदर्शित किया जाएगा। सुपर 30 से अभी तक 450 में से 390 स्टूंडेंट आईआईटी में चुने जा चुके हैं।

शहीद विक्रम बत्रा

14 साल पहले जिसने भी परदे पर कारगिल शहीद विक्रम बत्रा को देखा था वो उनके बारे में और जानने की इच्छा जरूर रखता होगा। ‘एलओसी’ नाम की जेपी दत्ता की इस फिल्म में अभिषेक बच्चन ने विक्रम बत्रा का किरदार निभाया था। अब अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा विक्रम बत्रा पर एक बायोपिक करने जा रहे हैं। गौरतलब है कि कैप्टन विक्रम बत्रा ने कारगिल के युद्ध में एक सिपाही को बचाते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। ‘एलओसी’ में उनकी लड़ाई को काफी विस्तृत तौर पर दिखाया गया, लेकिन 24 साल के इस लड़के की जिंदगी के बारे में लोग हमेशा से कुछ और भी जानना चाहते हैं। यह सिद्धार्थ की लगातार दूसरी आर्मी फिल्म होगी। अय्यारी में भी वो एक आर्मी ऑफिसर बने हैं। फिल्म का निर्माण शीघ्रता से पूरा करने की कोशिश की जा रही है।

‘पैडमैन’

बॉलीवुड की हिट मशीन कहे जाने वाले सुपरस्टार अक्षय कुमार की एक और रियलिस्टिक फिल्म अगले साल रिलीज होने जा रही है। इसका नाम ‘पैडमैन’ होगा। यह फिल्म तमिलनाडु के पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित समाज सेवक अरुणाचलम मुरुगनाथम की बायोपिक है। इसमें दिखाया जाएगा कि कैसे वह ग्रामीण महिलाओं के लिए सस्ते और ईको फ्रेंडली सैनिटरी पैड्स बनाने वाले पहले आदमी बने थे। साथ ही उनके जीवन के संघर्ष को भी फिल्म में दिखाया जाएगा। फिल्म को आर. बाल्की डॉयरेक्ट कर रहे हैं। यह अक्षय कुमार और राधिका आप्टे की एक साथ पहली फिल्म है।

सुलभ स्वच्छ भारत - वर्ष-2 - (अंक 03)  
सुलभ स्वच्छ भारत - वर्ष-2 - (अंक 03)  
Advertisement