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बुधवार, 20 अ ल ै 2016

और Russia Beyond The Headlines की संयक्त ु पिरयोजना

राजनीित : ूस और भारत की दो ती तोड़ने की अमरीकी कोिशशें कभी सफ़ल नहीं होंगी, यह कहना है ूसी िवशेष्ों का

घूमता आईना

भारत और ूस की दो ती बुत पक्की

ि क्स िवकास बैंक के साथ सहयोग भारत की ाथिमकता

अब अमरीका यह कोिशश कर रहा है िक वह भारत को फुसला ले और भारत व ूस की परम्परागत दो ती को तोड़कर ुद भारत के साथ सैन्य-राजनीितक गठबन्धन कर ले। अिनल जनिवजय ूस-भारत संवाद

िपछले स‍ाह अमरीकी र्ा मन् ी ए टन काट्र ने भारत की या ा की। उन्होंने भारत के र्ा मं ी मनोहर पिर्कर से मुलाकात की। इस मुलाकात में जो सहमितयाँ ुई ह, उनके अनुसार दोनों देशों की सेनाएँ अब एक दूसरे के सैन्य साजो सामान और अ‍ों का इ तेमाल कर सकेंगी। अब भारत और अमरीका ज द ही लॉिजि टक सपोट् एग्रीमेंट पर ह ता्र करगे। अमरीकी र्ा मं ी ए टन काट्र ने इस बारे में िव तृत जानकारी देते ुए बताया िक समझौता हो जाने के बाद दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे की सैन्य आपूित्, मरम्मत सुिवधा , जंगी जहाजों और ईंधन भरने के िलए प्लेटफॉम् को उपयोग में ला सकेंगी। इसका मतलब ये होगा िक दोनों देश एक दूसरे के सैन्य िठकानों का इ तेमाल कर सकेंग।े इस समझौते का एक दूसरा प् ये भी है िक अमरीका की भारत के सैन्य िठकानों पर आवाजाही बढ़ जाएगी। इसके बाद भारत की बुत सी खुिफया चीजें अमरीका के िलए खुिफया नहीं रह जाएंगी। भारत में ुई सारी वाता् में अमरीका का मुख्य ध्यान इसी बात की ओर लगा ुआ है िक कैसे भारत के हिथयारों के बाज़ार में घुसा जाए और ूसी र्ा

उद्योग के साथ भारत के परम्परागत ूप से चले आ रहे सम्पको्ं को तोड़ा जाए। अब हम देख रहे ह िक न केवल ौद्योिगकी के ्े में भारत-अमरीकी सहयोग तेज़ी से बढ़ रहा है, बि क सैन्य-राजनीितक ्े में भी दोनों देश आपस में सहयोग कर रहे ह। जैस-े जैसे चीन के साथ भारत के िर ते ख़राब हो रहे ह, भारत अमरीका के साथ सहयोग बढ़ाने की तैयारी दिश्त कर रहा है।

उदाहरण के िलए िपछले साल अमरीका, भारत और जापान ने ’मालाबार’ नामक सँयु‍ नौसैिनक अभ्यास िकया, िजससे चीन बुत नाराज़ ुआ। यह नौसैिनक अभ्यास सन् 2007 के बाद पहली बार िकया गया था। अभ्यास ख़त्म होने के बाद भारत ने घोषणा की िक अब ये अभ्यास ितवष् ुआ करगे। िपछले आठ साल से चीन के िवरोध

के कारण ये सैन्याभ्यास नहीं िकए जा रहे थे, लेिकन अब अमरीका के नेतत्ृ व में ्े ीय ताक़तें चीन की नाराज़गी मोल लेने के िलए तैयार ह। िवशेष्ों के अनुसार, दि्णी-पूवी् एिशया में तनाव बढ़ने का कारण यह है िक चीन की ्े ीय महत्वाकां्ाएँ बढ़ती जा रही ह और वह िव तारवादी नीित चला रहा है। िपछले समय में भारत और चीन के बीच भी दि्णी चीन सागर पर िनयन् ण

करने के िलए आपसी ितयोिगता बढ़ती जा रही है। हालाँिक औपचािरक ूप से देखा जाए तो इस इलाके को लेकर पेइिचंग और वािशंगटन के बीच जो ज़ोरा-ज़ोरी हो रही है, उससे भारत को कोई लेनादेना नहीं है। भारत का इस इलाके से बस, इतना ही िर ता है िक उसका 50 ितशत यापार दि्णी चीन सागर के रा ते होता है। इसके अलावा भारत के राजनेता यह सोचते ह िक अपनी िव तारवादी नीित पर अमल करते ुए चीन िसफ़् दि्णी चीन सागर तक ही सीिमत नहीं रहेगा, बि क भिव य में वह िहन्द महासागर में भी अपने पैर फैलाने की कोिशश करेगा। भारत ूस के र्ा उद्योग के िलए एक महत्वपूण् सहयोगी देश है। सन् 2013 में ूस ने अपने हिथयारों के कुल िनया्त का 35 ितशत िह सा भारत को िनया्त िकया था, िजसकी क़ीमत 4 अरब 70 करोड़ डॉलर थी। ऐसा लग रहा था िक ि थित ऐसी ही बनी रहेगी और भारत ूसी हिथयारों का मुख ख़रीददार बना रहेगा। लेिकन आशा के िवपरीत िदसम्बर 2015 में धानमन् ी नरेन् मोदी की ूस की या ा के दौरान भारत ने ूसी सैन्यतकनीक की ख़रीद के बड़े समझौते नहीं िकए। नरेन् मोदी ने इस िदशा में भारत के ज दबाज़ी न करने का िनण्य िलया धानमन् ी और यादातर अनुबन्धों को अिनि‍त नरेन् मोदी काल के िलए ठण्डे ब ते में डाल िदया। की मा को मा को भारत को अपने ही राजनीितक या ा के बाद दोनो देशों के वु में बनाए रखना चाहता है। नरेन् नेता के बीच मोदी से मुलाक़ात करते ुए लदीिमर आपसी भरोसा पूितन ने बताया िक मा को चाहता है बढ़ा है। िक भारत सँय‍ ु रा£ सुर्ा पिरषद का थाई सद य बन जाए क्योंिक भारत

सन्तुिलत और िज़म्मेदार िवदेश नीित चलाने वाली एक बड़ी महाशि‍ है। हालाँिक ूस के ाच्य अध्ययन सं थान के िवशेष् लदीिमर सोतिनकफ़ का कहना है िक भारत और अमरीका की िनकटता से ूसभारत िर तों के िलए कोई बड़ा ख़तरा नहीं है। भारत िपछली सदी के सातवें दशक की तरह गुटिनरपे्ता की अपनी नीित पर कायम रहते ुए बु वु ीय सम्बन्ध बना सकता है। उन्होंने कहा — यह नहीं मानना चािहए िक यिद भारत अमरीका से िनकटता बढ़ाने की नीित चलाएगा तो इसका यह मतलब है िक वह ूस से या ि क्स-दल से दूर जा रहा है। धानमन् ी मोदी का उ‍े य सभी महाशि‍यों के साथ एक जैसे िर ते बनाए रखना भी हो सकता है। भारत के साथ हमारा रणनीितक सहयोग जारी है। भारत द्वारा अमरीका के साथ गहरे िर ते बनाने से मा को और िद‍ी के बीच आपसी सहयोग पर कोई असर नहीं पड़ा है। अब सवाल यह उठता है िक क्या भारत ूस, अमरीका और चीन जैसी महाशि‍यों के साथ अपने िर ते बनाते ुए इनके बीच सन्तुलन को सुरि्त रख पाएगा क्योंिक ये सभी महाशि‍याँ भारत को अपनी-अपनी तरफ़ खींचने की कोिशश करगी। कुछ िवशष्ों के अनुसार, वािशंगटन इस बात की भरपूर कोिशश करेगा िक भारत-ूसी सहयोग को भंग कर िदया जाए। अब तो यही आशा की जा सकती है िक भारतीय नेता ठण्डे िदमाग से काम लेंगे और अमरीका के साथ ज़ूरी दूरी को बनाए रखते ुए पि‍म और ूस के बीच चल रहे टकराव की िबसात पर भारत को मोहरा नहीं बनने देंग।े

ूस सीिरयाई पालमीरा से बाूदी सुरगों को हटाने में मदद कर रहा है आतंकवािदयों से पालमीरा को छुड़ाने के बाद यह ज़ूरी है िक वहाँ िबछी बाूदी सुरगों को साफ़ िकया जाए। इसके िलए ूसी िव फोट िवशेष् सीिरया पुच चुके हैं। िसगे्य िफ़दोतफ़ ूस-भारत संवाद

ूसी सेना सीिरयाई सरकार के अनुरोध पर सीिरया पुची थी। ूसी सैिनकों ने सीिरया पुचकर सबसे पहले सीिरया की जनता को मानवीय सहायता पुचानी शुू की। इसके बाद वे यह कोिशश करने लगे िक सीिरया में युद्धिवराम लागू िकया जाए। अब जैस-े जैसे सीिरया की सरकारी सेना और सीिरयाई जनसेना आतंकवािदयों के िख़लाफ़ अपनी सिक्रयता बढ़ा रही ह, ूसी सेना दूसरी िदशा में काम कर रही है। आजकल ूसी सैिनक ूसी वायुसने ा की सहायता से मु‍ कराए गए ाचीन पालमीरा नगर में आतंकवािदयों द्वारा लगाई गई बाुदी

सुरगों को हटाने का काम कर रहे ह। पालमीरा पर ’इ लामी राज्य’ (इरा) के आतंकवािदयों ने मई 2015 में कब्ज़ा िकया था, उसके बाद उन्होंने पूरे नगर में जगह-जगह बाूदी सुरगें िबछा दीं। अब ूसी िव फोट िवशेष् इन सुरगों को नाकाम कर रहे ह। जैसािक ूस के र्ा मन् ालय से ूस-भारत संवाद के संवाददाता को जानकारी िमली है, ूसी िव फोट िवशेष्ों ने अभी तक पालमीरा में लगे 150 से यादा बमों और बाूदी सुरगों का पता लगाकर उन्ह न‍ कर िदया है और क़रीब सवा िकलोमीटर लम्बी सड़क को पूरी तरह से िव फोट मु‍ कर िदया है। यह एक बेहद मुि कल और बेहद जिटल काम है। ूसी सेना के िव फोट िवशेष्ों को क़रीब 180 हैक्टर के इलाके की जाँच करके उसे बम-मु‍ करना है। जब यह काम पूरा हो जाएगा तो ूसी जीणो्द्धार िवशेष् िव‍ के अन्य िसद्ध जीणो्द्धार िवशेष्ों के साथ िमलकर पालमीरा की

ऐितहािसक इमारतों के पुनुद्धार का काम शुू करगे। िवशेष् अभी तक एकमत से यह तय नहीं कर पाए ह िक आतंकवािदयों ने पालमीरा को कुल िकतना नुक़सान पुचाया है और पालमीरा का िफर से पुनुद्धार करने में िकतना समय लगेगा। ूस के िसद्ध हेरिमताज संग्रहालय के महािनदेशक िमख़ाइल िपआतरोव की ने कहा िक ूसी िवशेष् जीणो्द्धार का काम शुू करने की तैयारी कर रहे ह। आज ज़ूरत इस बात की है िक सारी दुिनया हमारे इस काम का समथ्न करे और जीणो्द्धार का यह काम यूने को के नेतत्ृ व में एक बड़े अन्तररा£ीय अिभयान में बदल जाए। िमख़ाइल िपआतरे की ने कहा — हेरिमताज इस काम में सिक्रय ूप से हाथ बँटाएगा और एक मुख सहभागी रहेगा। उन्होंने कहा — मेरा मानना है िक पालमीरा में इस तरह से काम िकया जाए िक हम िसफ़् एक पय्टक केन् के ूप में ही पालमीरा का जीणो्द्धार

ि क्स िबजनेस एसोिसएशन के भारतीय भाग के अध्य् कार िसंह कंवर का कहना है िक ि क्स-दल की अध्य्ता के काल में ि क्स िवकास बैंक के साथ सहयोग थािपत करना और पिरयोजना के िलए िव् जुटाना भारत की ाथिमकता होगी। उन्होंने कहा िक इस नए बैंक के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने और सिक्रय करने की ज़ूरत है। अब हम पिरयोजनाएँ तैयार करने और उन पर अमल करने के िलए ि क्स बैंक का सहयोग लेने की ओर िवशेष ध्यान देंग।े भारत ि क्स-दल में और ि क्स िबजनेस एसोिसएशन में अपनी अध्य्ता की अविध में एक समग्र ृि‍कोण सुिनि‍त करने और एसोिसएशन के भीतर सभी काय्कारी दलों के साथ काम करने की कोिशश करेगा। उन्होंने कहा िक यावसाियक वग् हमारे देशों को एकदूसरे के िनकट लाने में बड़ी भूिमका िनभाएगा।

अगली छमाही में भारत में ूसी कमाज़ कों की जुड़ाई और िबक्री िफर शुू होगी

ूस के कमाज़ क कारख़ाने के महािनदेशक िसगे्य कगोिगन ने बताया िक सन् 2016 की दूसरी छमाही में भारत में कमाज़ कों की जुड़ाई और िबक्री का काम िफर से शुू हो जाएगा। कमाज़ ने इसके िलए एक थानीय कम्पनी के साथ अनुबन्ध िकया है। िसगे्य कगोिगन ने बताया — िफ़लहाल भारत में काम बन्द है। इसका कारण यह है िक हम भारत के िमकिनयमों से अच्छी तरह पिरिचत नहीं ह। भारत में मज़दूरी के िनयम ऐसे ह िक हमारे सामने कई मुसीबतें खड़ी हो गईं और हम किठनाइयों में फँस गए। हमें अपना उत्पादन बन्द करना पड़ा। हमने सारे तैयार क बेच िदए और अब एक थानीय कम्पनी के साथ कों की जुड़ाई का अनुबन्ध िकया है, जो भारतीय बाज़ार में अगली छमाही में हमारे िलए काम करेगी।

मुिक्तदाता ूस

बाघ संर्ण सम्मेलन में मोदी ने की पूितन की शंसा

ूस की वायुसन े ा ‍ारा िवगत 30 िसतम्बर 2015 को आतंकवादी िगरोह ’इ लामी राज्य’ के िख़लाफ़ सैन्य अिभयान शुू िकया गया था। ूसी वायुसन े ा ‍ारा की गई सैन्य-कार्वाई की सहायता से अभी तक सीिरयाई सेना ने 400 से अिधक नगरों, बि तयों और गाँवों को आतंकवािदयों से मुक्त करा िलया है। सीिरयाई भूिम का क़रीब 10 हज़ार वग् िकलोमीटर इलाका आतंकवािदयों से वािपस छीन िलया गया है। सीिरया में क़रीब दो हज़ार ऐसे आतंकवािदयों को भी ख़त्म कर िदया गया, जो ूस के रहने वाले थे।

भारत के धानमन् ी नरेन् मोदी ने नई िद‍ी में तीसरे एिशयाई बाघ संर्ण सम्मेलन में ूस के रा£पित लदीिमर पूितन के यासों की शंसा करते ुए कहा िक 2010 में बाघों की सुर्ा और संर्ण के सवाल पर पहला सम्मेलन रा£पित पूितन ने ही आयोिजत िकया था। साँ‍ िपतेरबुग् (सेण्ट पीटस्बग्) में ुए इस सम्मेलन में बाघों की सुर्ा करने तथा बाघों की जाित को पृथ्वी पर से गायब न होने देने के िलए 33 करोड़ डॉलर इक‍े िकए गए थे। मोदी ने कहा - बाघों को बचाकर दरअसल हम अपनी कृित और पया्वरण को ही बचा रहे ह। वन्यजीवों के िबना वन की क पना नहीं की जा सकती और दोनों एक दूसरे के पूरक ह। वनों का और वनजीवों का खात्मा मानव की सुर्ा के िलए भी खतरे की घण्टी है। इस िसलिसले में मैं बताना चाहता ू िक ूस के रा£पित लदीिमर पूितन ने 2010 में ूस में बाघ संर्ण सम्मेलन का आयोजन िकया था, जो मील का पत्थर सािबत ुआ। नरेन् मोदी ने कहा बाघों की सुर्ा करके हम अपने और अपनी आने वाली पीिढ़यों के भिव य को भी सुरि्त कर रहे ह।

न कर, जहाँ ढेर सारे पय्टक आएँग,े बि क पालमीरा को बदी के िख़लाफ़ संघष् का तीक बना दें, जहाँ लोगों को एक बदी के ूप में आतंकवाद की याद आए। वह एक ऐसा मारक हो, जहाँ सचमुच मृितयाँ सुरि्त रह। एक और काम जो पूरा करना होगा, वह यह है िक पालमीरा से चुराए गए ऐितहािसक मारकों को ढढ़ढढ़कर वािपस लाना होगा। पालमीरा के ऐितहािसक मारकों में से बुत से मारकों को चुराकर उनकी िवदेशों को त करी कर दी गई है। लेिकन अभी

भी यह सम्भावना है िक उन्ह वािपस लौटाया जा सकता है। िमख़ाइल िपआतरे की ने कहा — वैसे तो चुराए गए मारकों के यापार और त करी का एक पूरा तन् ही बना ुआ है, जो सारी दुिनया में काम करता है। इराक में बग़दाद के संग्रहालय से जो चीज़ें चुराई गई थीं, उनमें से 40 ितशत चीज़ें वािपस आ चुकी ह। इसिलए यहाँ भी मेरा ख़याल है िक यादातर मारक वािपस लौट आएँग।े मुझे लगता है िक पालमीरा में जो कुछ भी चोरी ुआ है, वह सब िमल जाएगा।

पालमीरा में आतंकवािदयों ‍ारा लगाई गई बाूदी सुरगों को ूँढकर उनकी सफाई करते ुए ूसी िव फोट िवशेष्।

मुम्बई और िपतेरबुग् को जोड़ेगा एक नया गिलयारा ूस, अज़रबैजान और ईरान िमलकर एक पिरवहन पिरयोजना शुू करने जा रहे हैं। यह नया माग् वेज नहर के िलए चुनौती बन जाएगा। ओ गा समफ़ालवा व ग् याद

हाल ही में ूस के िवदेशमन् ी िसगे्य लवरोफ़ ने बताया िक ’उ्रदि्ण’ नामक नया पिरवहन गिलयारा काि पयन सागर के पि‍मी तटवती् इलाके से होकर अज़रबैजान के रा ते ूस से ईरान तक जाएगा। ूस, अज़रबैजान और ईरान के िवदेशमिन् यों के बीच ुई वाता् में इस पिरयोजना पर अमल करने के बारे में सहमित हो गई है। ूस के िवदेशमन् ी िसगे्य लवरोफ़ ने कहा – इस पिरयोजना में तीनों देशों के पिरवहन मन् ालयों को यह िज़म्मेदारी लेनी होगी िक वे इस पिरयोजना के तकनीकी और िव्ीय प्ों पर नज़र रखेंग।े तीनों देशों के सीमाकर (क टम) िवभागों और कौन्सुल िवभागों को भी आपस में सहयोग करना होगा। ईरान के िवदेशमन् ी मौहम्मद जवाद

ज़रीफ़ ने कहा – इस पिरयोजना पर अमल करने के बाद मालों की आवाजाही काफ़ी तेज़ हो जाएगी। ’उ्र-दि्ण’ पिरवहन गिलयारे का एक महत्वपूण् िह सा अज़रबैजान होकर ूस से ईरान तक जाने वाला रा ता ईरान पर लगे अन्तररा£ीय ितबन्धों के कारण अभी तक अधूरा पड़ा ुआ था। अब ईरान पर से ितबन्ध हटने के बाद गिलयारे के इस िह से पर भी काम शुू हो जाएगा और ज दी ही ूसी नगर साँ‍ िपतेरबुग् (सेण्ट पीटस्बग्) से भारतीय बन्दरगाह मुम्बई तक जाने वाला 7.2 हज़ार िकलोमीटर लम्बा ’उ्र-दि्ण’ गिलयारा बनकर तैयार हो जाएगा। इस गिलयारे के रा ते भारत, ईरान और फ़ारस की खाड़ी के दूसरे देशों से माल ूस और यूरोप के दूसरे देशों तक जाया करेगा। अभी तक भारत और ूस के यूरोपीय िह से के बीच मालों की ढुलाई के िलए िजस रा ते का इ तेमाल िकया जाता है, वह साँ‍ िपतेरबुग् से शुू होकर सारे यूरोप को पार कर वेज नहर के रा ते मुम्बई तक पुचता है। मुम्बई से साँ‍ िपतेरबुग् माल पुचने में 40 िदन का समय लगता है। लेिकन नए पिरवहन

गिलयारे से िसफ़् 14 िदन लगा करगे। यह नया रा ता साँ‍ िपतेरबुग् से शुू होकर म ‍ा और अ ाख़न (ूस) से बाकू (अज़रबैजान) और बेन्देर अब्बास (ईरान) होकर मुम्बई तक जाएगा। इस नए रा ते से माल की ढुलाई बेहद

इस रा ते को पूरी तरह से चालू करने के िलए काि पयन सागर के पि‍मी तट पर कज़िवन – अ तारा (ईरान) – अ तारा (अज़रबैजान) के बीच नई रेलवे लाईन िबछानी पड़ेगी। यह रेलवे लाईन अज़रबैजानी अ तारा को ईरानी

उ्र-दि्ण गिलयारा टोल-टैक्स के कारण 2017 तक बनकर वेज नहर से गुज़रना तैयार हो जाएगा महगा पड़ता है स ती पड़ेगी क्योंिक अभी वेज नहर से गुज़रना बुत महगा पड़ता है। वेज नहर का टोल-टैक्स बुत यादा है। ’उ्र-दि्ण’ पिरवहन गिलयारा 2017 तक बनकर तैयार हो जाएगा। इस गिलयारे के िनमा्ण के बारे में ूस, भारत और ईरान ने सन् 2000 में एक समझौते पर ह ता्र िकए थे। िवगत फ़रवरी में ूसी रेलवे तथा अज़रबैजानी रेलवे के बीच इस बात पर सहमित हो गई थी िक भारत – ईरान – अज़रबैजान – ूस माग् पर अज़रबैजानी और ूसी रेलवे मालों की ढुलाई िकया करगी।

अ तारा, रे त और कज़िवन नगरों से जोड़ेगी। सन् 2015 में कज़िवन और रे त के बीच रेलवे माग् शुू हो गया है। अब रे त से अ तारा के बीच रेलवे लाईन िबछाने की योजना बनाई जा रही है। िविभ्‍ सू ों के अनुसार इस नई रेलवे लाईन पर शुू में 40 लाख से एक करोड़ टन तक मालों की ढुलाई की जा सकेगी, जो बाद में बढ़कर डेढ़ से दो करोड़ टन ितवष् हो जाएगी। इन् ान्यूज एजेन्सी के महािनदेशक अिलक्सेय िबज़बरोदफ़ ने कहा – आिथ्क ृि‍ से देखा जाए तो इस

पिरयोजना पर िबना कोई भारी खच् िकए तुरन्त अमल िकया जा सकता है क्योंिक इस पिरवहन गिलयारे का आधारभूत ढाँचा क़रीब-क़रीब तैयार है। हाँ, ईरान में रेलवे लाईन अभी तक नहीं िबछाई गई है। लेिकन जब तक रेलवे लाईन नहीं बन जाती तब तक उस रा ते पर कों से मालों की ढुलाई की जा सकती है। अज़रबैजान में पूरा ढाँचा तैयार है। िपछले पन् ह साल में इस ढाँचे के िनमा्ण पर भारी िनवेश िकया गया है। अब इस नए रा ते को शुू करने तथा इस रा ते पर माल ढुलाई का िकराया तय करने तथा क टम औपचािरकता को तय करने की ज़ूरत है। तीन देशों के िवशेष् आजकल इसी काम में लगे ुए ह। भारत और ूस को अपना यापार बढ़ाने के िलए इस नए पिरवहन कारीडोर की बेहद ज़ूरत है। भारत ूस से नए माल ख़रीदना चाहता है, लेिकन इसके साथ-साथ भारतीय मालों की भी सप्लाई बढ़ाना चाहता है। परमाणु पिरयोजना सिहत नई पिरयोजनाएँ शुू होने की बदौलत यह गिलयारा बड़ा उपयोगी िसद्ध होगा और इस पर बड़ी मा ा में मालों की ढुलाई की जाएगी।

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और Russia Beyond The Headlines की संयक्त ु पिरयोजना

सहयोग

बुधवार, 20 अ ल ै 2016

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सहयोग : ाजील, ूस, भारत, चीन और दि्ण अ ीका - पाँच देशों का दल है ि क्स

गोवा में ि क्स िशखरसम्मेलन के िलए तैयािरयाँ

भारतीय नौसेना का नया िवमानवाहक युद्धपोत कैसा होगा?

भारत ने गोवा में आगामी 15-16 अक्तूबर को होने वाले आठवें ि क्स िशखर-सम्मेलन की तैयािरयाँ ज़ोरशोर से शुू कर दी है। िदल्ली में ि क्स में भारत की अध्य्ता के शुभक ं र का अनावरण िकया गया। ददन उपाध्याय ूस-भारत संवाद

इस मौके पर भारत की ि क्स वेबसाइट का भी शुभारभ िकया गया। ि क्स समूह के पाँच भावशाली देशों — ाजील, ूस, भारत, चीन और दि्ण अ ीका का यह िशखर-सम्मेलन इस वष् भारत की अध्य्ता में होगा। िवगत 15 फरवरी 2016 को ूस के बाद भारत एक वष् के िलए ि क्स का अध्य् बन गया है। भारत 31 िदसम्बर तक ि क्स का अध्य् रहेगा। इससे पहले जुलाई 2015 में ि क्स का सातवाँ िशखर-सम्मेलन ूस के उफा नगर में आयोिजत िकया गया था। ि क्स में भारत की अध्य्ता काल के शुभक ं र के अनावरण को समिप्त िवशेष समारोह में बोलते ुए िवदेश मन् ी सुषमा वराज ने कहा िक ि क्स की अध्य्ता के दौरान भारत का ध्येय होगा — ि क्स समूह के देशों के िलए उ्रदायी, समावेशी और सामूिहक समाधान तैयार करना। ि क्स में भारत की अध्य्ता काल के इस शुभक ं र से भी हमारा यह उ‍े य कट होता है। इस शुभक ं र में ि क्स देशों का ितिनिधत्व करनेवाले रगों के साथ भारत का रा£ीय पु प कमल िचि त िकया गया है। यह ि क्स की भावना को रेखांिकत करने के साथ-साथ पूरे वष् ि क्स की गिरमा का पिरचायक भी रहेगा। ि क्स में भारत की अध्य्ता के दौरान मं ी और अिधकारी तर की तथा तकनीकी और ्े ीय तर की 50 से ज्यादा बैठकें आयोिजत की जाएँगी। सुषमा वराज ने कहा — ि क्स की िविभ्‍ सं था की थापना करना, पहले ुए सम्मेलनों में तय िकए गए उ‍े यों को पूरा करना और ि क्स की मौजूदा णािलयों के बीच से सहयोग के िवक प खोजना हमारी ाथिमकता होगी। उन्होंने ज़ोर िदया िक ि क्स की अध्य्ता के इस दौर में हमारा उ‍े य है — समूह के िलए उ्रदायी, समावेशी और सामूिहक समाधान तैयार करना तथा ि क्स के काय्क्रमों में जनसाधारण की सहभािगता को अिधकािधक बढ़ाना। हम यास करगे िक देश के िविभ्‍ राज्यों में ि क्स के िविभ्‍ समारोहों का आयोजन संभव हो सके। आजकल भारत धानमं ी नरेन्

पािक तान और उसके राजनीितक व सैिनक सहयोगी चीन के िलए यह नया आधुिनकतम भारतीय िवमानवाहक यु‍पोत ‘िवशाल’ सीधी-सीधी चुनौती बन जाएगा। इ या क्रामिनक, कं तािन्तन बगदानफ़ लेन्ता डॉट आर यू

जुलाई 2015 में ि क्स का सातवाँ िशखर-सम्मेलन ूस के उफा नगर में आयोिजत िकया गया था िजसमें पाँचों ि क्स देशों के बीच आिथ्क सहयोग की रणनीित वीकार की गई थी। अब भारत की बारी है। अगला िशखर-सम्मेलन गोवा में होगा। मोदी के ‘मेक इन इिण्डया’ काय्क्रम के तहत ि क्स देशों से अिधकािधक िनवेश आकिष्त करने और उनके बीच यापािरक और आिथ्क सहयोग के तर को ऊँचा उठाने के उ‍े य से िविभ्‍ ्े ों में ाथिमकता ा‍ पिरयोजना की एक सूची बनाने में लगा ुआ है।

भारत के कई राज्यों में ि क्स समारोहों का आयोजन भारतीय अथ् यव था के बुिनयादी ढाँचे से जुड़ी इन संभािवत पिरयोजना की सूची गोवा में आगामी िशखर-सम्मेलन में अनुमोदन के िलए तुत की जाएगी। गौरतलब है िक िपछले वष् अपनी अध्य्ता के दौरान ूस ने भी उफा में ुए ि क्स सातवें िशखर-सम्मेलन के दौरान लगभग 60 पिरयोजना की एक ऐसी ही सूची तैयार की थी। उफ़ा में ि क्स देशों के बीच आिथ्क सहयोग की रणनीित वीकार की गई थी। अब

अपनी बारी आने पर भारत िविनमा्ण, खिनज सं करण, ऊजा् और कृिष सिहत अनेक ्े ों में यापार, िनवेश तथा आिथ्क सहयोग िवकिसत करने से जुड़ी योजना पर काम कर रहा है। उफ़ा िशखर-सम्मेलन के दौरान धानमन् ी मोदी ने आजकल दुिनया में फैली आिथ्क मंदी को ध्यान में रखते ुए ि क्स देशों के बीच सहयोग को सघन बनाने के उ‍े य से एक दससू ी काय्क्रम पेश िकया था िजसके अनुसार ि क्स में भारत की अध्य्ता की मूल िवषयव तु इस बात को सुिनि‍त करना है िक ि क्स देश समग्र ूप में अपनी अथ् यव था के सम् तुत सवालों के समाधान खोजने के िलए िमल-जुल कर काम कर। बेशक भारत उन पहलकदिमयों के आधार पर ही आगे बढ़ना और िवकास के नए रा ते तय करना चाहता है, जो ूस ने उफा सम्मेलन में तय की थीं। िनरन्तरता बनी रहे, ि क्स के िलए यह ज़ूरी है। हाल ही में मा को में भारत के राजदूत पंकज सरन ने कहा िक आठवें ि क्स

िशखर-सम्मेलन के िलए तैयािरयाँ करते ुए भारत ि क्स-समूह के पूवव् ती् अध्य् ूस से साथ ज़ूरी सलाहमशिवरा करता रहेगा। ि क्स अध्य् के ूप में अपने काम को लेकर हम ऐसा ृि‍कोण अपनाएँगे िक उससे िव‍ अथ् यव था को लाभ हो।

अ ल ै में आिथ्क मसलों पर ि क्स समूह की बैठक 2016 में ि क्स में अपनी अध्य्ता के दौरान भारत सेवा के ्े मे ि क्स समूह के देशों के बीच सहयोग को और अिधक बढ़ाने तथा उनके बीच पार पिरक माल यापार को सीिमत और ितबंिधत करनेवाली गैर-सीमाशु क बाधा से िनपटने के िलए समाधानों की एक योजना बनाने से जुड़े यासों के िलए पहलें भी पेश करेगा। इस उ‍े य से वह अ ल ै माह में ‘आिथ्क और यापािरक मसलों पर

ूसी हिथयार और ’मेक इन इिण्डया’ ूस भारत का अकेला ऐसा सहयोगी देश है, जो सैन्य-तकनीकी ्े में भारत के साथ पूरी ईमानदारी और िवश्वास के साथ सहयोग कर रहा है। वीक्तर िलतोफ़िकन िनज़वीिसमया गज़ेता

भारत के र्ा मन् ालय ने िवदेशी सैन्य तकनीक की ख़रीद के बारे में जो सूचना जारी की है, उसके अनुसार सैन्यतकनीकी ्े में ूस भारत का सबसे बड़ा सहयोगी है। सन् 2012 से 2015 के बीच भारत ने ूस ने 5 अरब डॉलर के हिथयार ख़रीदे ह। ूस के बाद इस ्े में सहयोगी के ूप में अमरीका का नाम आता है, िजससे भारत ने कुल 4 अरब 40 करोड़ डॉलर के हिथयार ख़रीदे ह। क़रीब-क़रीब यही ि थित हिथयारों के बारे में िकए गए अनुबन्धों की भी है। भारत ने िविभ्‍ देशों के साथ कुल 67 अनुबन्ध िकए ह, िजनमें से 18 अनुबन्ध ूस के साथ िकए गए ह, 13 अनुबन्ध अमरीका के साथ और 6 अनुबन्ध ाँस के साथ िकए गए ह। इसिलए पि‍म के वघोिषत िव्‍ेषकों द्वारा जब इस तरह की बातें कही जाती ह िक ूस भारतीय बाज़ार से बाहर हो रहा है; िद‍ी और मा को के बीच सहयोग घटता जा रहा है; भारत की सेना को अब ूसी हिथयारों की ज़ूरत नहीं रही ... तो ये झूठी बातें सुनकर हसी आती है। यह भी सच है िक भारत के र्ा मन् ालय द्वारा जारी की गई इस सूचना में यह देखकर िकसी भी ूसी िवशेष् को कोई आ‍य् नहीं ुआ िक भारत सबसे यादा हिथयार और सैन्यतकनीक की ख़रीद ूस से ही करता

’मेक इन इिण्डया’ काय्क्रम के तहत ’ ह्मोस’ िमसाइल का िनमा्ण सबसे पहली पिरयोजना। है। भारत की थलसेना, वायुसने ा और नौसेना में इ तेमाल होने वाले टकों, वचािलत तोपों, िरएिक्टव अिग्नवष्क णािलयों, लड़ाकू, बमवष्क और हमलावर िवमानों, राडारयु‍ सुदरू टोही और संचालक िवमानों, हैिलकॉप्टरों, िवमानवाहक युद्धपोतों, सामान्य युद्धपोतों, एटमी और डीजल पनडुिब्बयों, रॉकेट क्रूजर पोतों और तटीय सुर्ा पोतों का 70 ितशत से यादा िह सा ूस और सोिवयत संघ के उत्पाद ह। और आज भारतीय सेना द्वारा इ तेमाल िकए जाने वाले 40 ितशत हिथयार भी ूस के ही बने ुए ह या ूस से िमले लायसेन्स के आधार पर भारत के थानीय कारख़ानों में जोड़े गए ह। भारत

की वायुसने ा में 80 ितशत हिथयार और सैन्य उपकरण ूसी ह और नौसेना में 75 ितशत। इसिलए यह कहना िक ूस भारतीय बाज़ार से बाहर होता जा रहा है, एक जानबूझकर बोले जा रहे झूठ और ि थित का आकलन करने की अ्मता के अलावा और कुछ नहीं है। लेिकन यह कहना भी उिचत नहीं होगा िक भारत के सैन्य-तकनीकी ्े में ूस का ही एकछ राज्य है। यह एकािधकार न कभी था और न ही ूस इसका दावा करता है। इधर भारत के नेता ने अपनी सेना और र्ा उद्योगों के सामने एक नया महत्वाकां्ी उ‍े य रखा है, िजसका

एक मुख िसद्धान्त है िक हिथयारों की ृि‍ से सेना िकसी एक ही देश पर िनभ्र नहीं होनी चािहए और भारतीय सेना के पास अलग-अलग िक़ म के हिथयार होने चािहए। दूसरा िसद्धान्त, िजसपर धानमन् ी नरेन् मोदी बुत ज़ोर दे रहे ह, वह यह है िक भारत को िवदेशों से हिथयार ख़रीदने नहीं ह, बि क उनका ’मेक इन इिण्डया’ काय्क्रम के अन्तग्त भारत में ही, भारत के र्ा उद्योग के द्वारा ही उत्पादन िकया जाना चािहए। ूस दुिनया का अकेला ऐसा देश है, िजसने भारत के साथ सैन्य-तकनीकी सहयोग करते ुए भारत के ’मेक इन इिण्डया’ काय्क्रम को वीकार कर िलया है और इस आधार पर ही भारत

ि क्स सम्पक् समूह’ की एक बैठक करेगा। इस बैठक में ि क्स देशों के ितिनिध भारत की संभािवत ाथिमकता ा‍ पिरयोजना की सूची सिहत यापार और आिथ्क मु‍ों पर िवचारिविनमय करगे। वे िश्ा, वा थ्य और पय्टन के ्े ों में सहयोग को ोत्सािहत करने के िलए समूह के देशों में वीजा णाली के उदारीकरण पर भी चचा् करगे। इसके बाद, सम्पक् समूह ि क्स देशों के यापार और अथ् यव था मंि यों की बैठक के िलए एक एजेण्डा तैयार करेगा। यह बैठक भी गोवा िशखर-सम्मेलन के दौरान ही आयोिजत की जाएगी। भारत अपनी अध्य्ता में होने वाले इस िशखर-सम्मेलन के माध्यम से ि क्स देशों की जनता के बीच संवाद और सम्पक् की िक्रया आरम्भ करना चाहता है। इस उ‍े य से काय्क्रमों की एक िविवधतापूण् ख ृं ला तैयार की गई है, िजसमें ि क्स यापार मेला, ि क्स िफ म महोत्सव, ि क्स युवा मंच और ि क्सअंडर-17 फुटबाल टना्मण्े ट शािमल ह।

के साथ हर सहयोग करने को तैयार है। ज़रा, बुउ‍ेशीय लड़ाकू िवमान एसयू-30 एमकेआई को लें। ूस ने इस िवमान का िनमा्ण िवशेष ूप से भारत के िलए, भारत की ज़ूरतों के अनुूप िकया है। िवमान के नाम में अँग्रज़ े ी का जो ’आई’ अ्र शािमल है, उसका मतलब ही है – इिण्डया। यह िवमान ूस के लायसेन्स पर ूसी त‍ोलौजी के अनुसार भारत में ही बनाया जा रहा है। सँय‍ ु ूप से बनाए जा रहे ूसीभारतीय सुपरसोिनक िमसाइल ’ ‍ोस’ में ’मेक इन इिण्डया’ काय्क्रम पर अमल की नीित साफ़-साफ़ िदखाई पड़ती है। भारत के र्ा अनुसन्धान और िवकास संगठन डीआरडीओ के कारख़ाने में ही इस िमसाइल का उत्पादन िकया जाता है। यहाँ भारतीय िवमानवाहक युद्धपोत ’िवक्रमािदत्य’ को याद करना भी अ ासंिगक नहीं होगा, िजसका आधुिनकीकरण ूस में ही िकया गया है। भारतीय गोदी में बनाए गए और िपछले साल ही पानी में उतारे गए िवमानवाहक युद्धपोत ’िवक्रान्त’ को भी याद िकया जा सकता है, िजसके न शे और िडजाइन ूस के ’नेव की िडजाइन ब्यूरो’ ने ही तैयार िकए ह। सैन्य-तकनीकी ्े में ूस और भारत के बीच जो अभूतपूव् सहयोग हो रहा है, उसके बुत से कारण ह। इनमें से एक कारण यह है िक अभी तक बीते साठ वषो्ं में ूस और भारत के बीच आपसी सहयोग में कभी कोई गम्भीर अन्तिव्रोध नहीं रहा। भारत में िविभ्‍ पािट्यों की सरकार रही, लेिकन दो देशों के बीच सहयोग बना रहा। हमारे बीच हमेशा एक-दूसरे के ित सम्मान, मै ी और िव‍ास की भावना बनी रही। दु:ख-सुख में हमारे दोनों देश एक-दूसरे के साथ खड़े रहे। हमें िव‍ास है िक आगे भी हमारे िर ते इसी तरह के बने रहगे।

भारत के नए िवमानवाहक युद्धपोत के िनमा्ण का टेण्डर पाने के िलए ूस और ाँस के बीच ित पधा् हो रही है। भारतीय नौसेना ने इन दोनों देशों की कम्पिनयों को इस िनिवदा में भाग लेने के िलए आमिन् त िकया है। लेिकन मीिडया में जो जानकािरयाँ सामने आ रही ह, उनके अनुसार ूसी ताव भारतीय नौसेना को सबसे यादा पसन्द आ रहा है। सन् 2010 में जब भारतीय नौसेना के िलए नया िवमानवाहक युद्धपोत ’िवशाल’ बनाने की घोषणा की गई थी, तभी नौसेनाध्य् िनम्ल कुमार वमा् ने कहा था िक नौसेना को एक ऐसे िवशाल िवमानवाहक युद्धपोत की ज़ूरत है, िजसपर लड़ाकू िवमानों के साथ-साथ राडार से िनगरानी करने वाले िवमान और रणनीितक ईंधन आपूित् िवमान भी तैनात हों। भारतीय सेना ने इस नए युद्धपोत के िलए जो मापदण्ड रखे ह, उनसे यह मालूम ुआ िक नौसेना को एकदम नई िक़ म के नए िवमानवाहक युद्धपोत की ज़ूरत है, िजसमें एटमी इजन लगा ुआ

हो और िजसकी जल-िव थापन ्मता कम से कम 65 हज़ार टन हो। भारत के पारम्पिरक िवरोधी देश पािक तान की नौसेना की ्मता को देखते ुए कहा जाना चािहए िक इतना भारी और आधुिनकतम एटमी िवमानवाहक युद्धपोत भारत के िलए ज़ूरत से यादा होगा। लेिकन पािक तान के राजनीितक और सैिनक सहयोगी चीन के िलए यह युद्धपोत सीधी-सीधी चुनौती बन जाएगा। चीन ने सन् 2000 से ही िहन्द महासागर में ’मोितयों की माला’ नामक रणनीित लागू कर रखी है। अपनी इस रणनीित के तहत वह िहन्द महासागर में अपने सैिनक अ‍े बना रहा है। सन् 2013 से उसने अपनी इसी रणनीित पर चलते ुए पािक तान के ग्वादर बन्दरगाह को भी अपने संचालन में ले िलया है। भारत द्वारा अपने इस नए िवमानवाहक युद्धपोत के िलए तय िकए गए उ तरीय मापदण्डों और भारत में ही ुद उसका िनमा्ण करने के िनण्य से युद्धपोत के िनमा्ण में सहयोग करने वाले उन देशों के िलए किठनाई पैदा हो गई है, िजन्ह उसका िडजाइन तैयार करना है और उसके िलए यन् उपकरण जुटाने ह। दुिनया में बुत कम देश ऐसे ह, जो िवशाल िवमानवाहक युद्धपोत का िनमा्ण कर सकते ह और भारत के इस

नए िवमानवाहक युद्धपोत की पिरयोजना को पूरा कर सकते ह। आइए पहले बात कर, ाँसीसी कम्पिनयों की। भारत के िवमानवाहक युद्धपोत ’िवशाल’ का िनमा्ण करने के िलए ाँसीसी एटमी युद्धपोत पीए-2 का िडजाइन क़रीब-क़रीब उिचत जान पड़ता है। उसकी जल-िव थापन ्मता को भारतीय पिरयोजना के तर तक घटाने के बाद ाँसीसी िडजाइन की ्मता 62 हज़ार टन रह जाएगी और उस युद्धपोत पर क़रीब 40 िवमान तैनात िकए जा सकेंग।े इस ित पधा् में शािमल दूसरा देश है — ूस। ूसी कम्पनी ’नेव की पिरयोजना िडजाइन ब्यूरो’ के काम से भारतीय नौसेना अच्छी तरह पिरिचत है क्योंिक भारतीय िवमानवाहक युद्धपोत आईएनए ’िवक्रमािदत्य’ का आधुिनकीकरण इसी ूसी कम्पनी ने िकया है। बुत यादा सम्भावना इस बात की है िक लम्बे समय से चली आ रही भारतीय परम्परा के अनुसार दोनों ित पिध्यों में से कोई भी देश अकेले इस पिरयोजना का पूरा अनुबन्ध ा‍ नहीं करेगा। शायद दो देशों की कम्पिनयों को िमलाकर बुप्ीय कंसोिस्यम बनाया जाएगा, िजसमें शािमल हर कम्पनी को अपना-अपना काम पूरा करना होगा। शायद भारतीय नौसेना नए िवमानवाहक युद्धपोत पर भी उसी िक़ म के िवमान तैनात करना चाहेगी, जो िवमान आजकल भारतीय नौसेना और वायुसने ा के पास उपलब्ध ह। आजकल िवमानवाहक युद्धपोत ’िवक्रमािदत्य’ पर ूस में बने िमग-29 के िवमान तैनात ह और नए बन रहे िवमानवाहक युद्धपोत ’िवक्रान्त’ के िलए भारत ाँ सीसी िवमान ’रफ़ाल-एम’ ख़रीदने जा रहा है। जहाँ तक नए िवमानवाहक युद्धपोत के िनमा्ण का सवाल है तो युद्धपोत का िनमा्ण करने वाले िसफ़् दो ही ित पधी् ह — ाँस और ूस। इनमें भी ाँस के िलए उतने ताक़तवर एटमी इजन का िनमा्ण करना संभव नहीं है, िजतना ताक़तवर एटमी इजन ’िवशाल’ जैसे युद्धपोत को चलाने के िलए ज़ूरी होगा। भारत के इस नए िवमानवाहक युद्धपोत के िलए ऐसा स्म एटमी इजन िसफ़् ूस ही अपने एटमी िरएक्टर ’िरद्म200’ के आधार पर बना सकता है। इस तरह अन्त में नए भारतीय िवमानवाहक युद्धपोत के िनमा्ण के िलए िसफ़् दो ही रा ते बाक़ी रह जाते ह — 1. युद्धपोत की बॉडी का िनमा्ण ाँसीसी ढग से िकया जाए, िजसमें ूसी एटमी इजन लगा हो और िजस पर ूसी िवमानन तकनीक और ूसी िवमान तैनात िकए जाएँ। 2. युद्धपोत की बॉडी का िनमा्ण ूसी ढग से िकया जाए, िजसमें ूसी एटमी इजन लगा हो और िजस पर ाँसीसी िवमानन तकनीक और ूसी व ाँसीसी िवमान तैनात हों।

भारत ने ूस से उसका आधा तेल और गैस भण्डार ख़रीदा ूस की सबसे बड़ी तेल िनकासी कम्पनी ने अपने एक महत्वपूण् तेल और गैस भण्डार का आधा िह सा भारत की चार तेल कम्पिनयों को बेच िदया है। अिलक्सेय ल सान ूस-भारत संवाद

ूस की सबसे बड़ी सरकारी तेल िनकासी कम्पनी ’रोसने त’ ने पूवी् साइबेिरया में उपि थत अपने सबसे बड़े तेल भण्डार का आधा िह सा भारत को बेच िदया है। रोसने त ने ’वनकोरने त’ नामक तेल भण्डार का 49.9 ितशत िह सा भारतीय कम्पिनयों को बेचा है। इसका 26 ितशत िह सा भारत की सरकारी कम्पनी ओएनजीसी ने ख़रीदा है और बाक़ी 23.9 ितशत िह सा ऑयल इिण्डया, इिण्डयन ऑयल और भारत पै ोसोसे्स नामक कम्पिनयों ने ख़रीदा है। इस तेल व गैस भण्डार में क़रीब 50 करोड़ टन तेल और कण्डेनसेट तथा 182 अरब घनमीटर गैस है। ’रोसने त’ कम्पनी ने बताया िक इस ख़रीद-फ़रोख्त के अनुबन्ध पर ज दी ही ह ता्र कर िदए जाएँग।े ूसी िनवेश कम्पनी ीिमयर के िव्‍ेषक इ या बलाकीरफ़ ने कहा – भारतीय ख़रीददारों के साथ कुछ भी तय करना बड़ा आसान होता है। भारतीय यापारी वा तव में सौदा करना जानते ह। उन्होंने कहा िक भारतीय कम्पिनयाँ बुत यादा सौदेबाज़ी नहीं करतीं। वे िसफ़् अपना ही फ़ायदा नहीं देखती ह। भारतीय समाचार-प ’इकोनोिमक टाइम्स’ के अनुसार, यह सौदा क़रीब 3 अरब डॉलर का है। ूसी अख़बार ’वेदाम ती’ िलखता है – यह सौदा पूरा होने के बाद दुिनया के तेल व गैस ्े का सबसे बड़ा सौदा होगा। भारतीय कम्पिनयों ने इस तेल भण्डार से तेल और गैस की िनकासी करने के िलए आव यक धन जुटाने में सहायता की है। सन् 2016 में रोसने त कम्पनी भारतीय कम्पनी ए सार ऑयल िलिमटेड को ितवष् एक करोड़ टन तेल की सप्लाई शुू करने जा रही है तथा इसके बदले

ूस के साइबेिरयाई तेल भण्डार में तेल की िनकासी। वह ए सार कम्पनी में 49 ितशत की साझेदार बन जाएगी। ए सार कम्पनी 20 लाख टन ते ल का शोधन करने वाले विदनार तेलशोधन कारख़ाने और 2 हज़ार पै ोल-पम्पों की मािलक है। रोसने त को इस समय नए तेल भण्डारों की खोज करने और अभी तक ढढ़े गए तेल व गैस भण्डारों का िवकास करने के िलए धन की ज़ूरत है। ूसी

भारतीय यापारी वा तव में सौदा करना जानते ह राजकीय िनवेश कम्पनी ’िफ़नाम’ के िव्‍ेषक अिलक्सेय कलाच्योफ़ ने कहा – दुिनया के बाज़ार में तेल और गैस की कीमतें धराशायी हो जाने के बाद ूसी कम्पिनयों के सामने नए तेल भण्डारों की खोज करने और पहले ही ढढ़े जा चुके भण्डारों से िनकासी शुू करने के िलए संसाधनों की कमी हो गई है। तेल कम्पिनयों ने पहले जो अिग्रम अनुबन्ध कर रखे थे, उन अनुबन्धों की वजह से ही ’रोसने त’ पर क़रीब 3.4 अरब डॉलर का ऋण भी चढ़ गया है। ’एमएफ़एक्स ोकर’ कम्पनी के िव्‍ेषक-िवशेष् अिलक्सान्दर ग्रेिचन्कफ़ ने बताया – पहले

’रोसने त’ ने यह कोिशश की थी िक वह वनकोर तेल भण्डार का एक िह सा चीनी कम्पनी ’सीएनपीसी’ को बेच दे। लेिकन यह सौदा पूरा नहीं ुआ। चीनी कम्पनी इस सम्पि् को ख़रीदने के िलए उसका ठीक-ठीक दाम तय नहीं कर पाई। अिलक्सेय कलाच्योफ़ ने कहा – भारतीय िनवेशकों ने चीनी िनवेशकों के मुक़ाबले कहीं यादा अच्छा दाम िदया। चीनी िनवेशकों से हमें बुत यादा आशाएँ थीं, लेिकन वे ऐसे ख़रीददार सािबत ुए, िजनसे कुछ भी कहलवा पाना बुत मुि कल था। लेिकन कुछ िवशेष् भारतीय िनवेशकों की तरफ़ ूस के इस ुख को कोई दीघ्कालीन वृि् नहीं मानते। अिलक्सान्दर ग्रेिचन्कफ़ ने सतक्ता बरतते ुए कहा – िसफ़् इसी एक सौदे के आधार पर मैं यह नहीं कह सकता ू िक ूस चीन की तरफ़ से मुहँ मोड़कर भारत की तरफ़ मुहँ करके खड़ा हो गया है। हाँ, ऐसा हो सकता है िक ’रोसने त’ कम्पनी ने िसफ़् एक ही सहयोगी के भरोसे न रहकर कई सहयोिगयों को ढढ़ना तय कर िलया हो तािक उसके सामने सहयोगी के चुनाव की सम्भावना बनी रहे। इस समय िरजव् सहयोगी के ूप में उसे भारत का सहयोग िमला जो ूस के तेल िनया्त ्े के िलए एक अच्छा सहयोगी िसद्ध हो सकता है।


िव्ान- ौद्योिगकी

और Russia Beyond The Headlines की संयक्त ु पिरयोजना

बुधवार, 20 अ ल ै 2016

hindi.rbth.com

िव्ान- ौद्योिगकी : सोिवयत संघ के रॉकेट उद्योग से आधुिनक ूस के िनजी उपग्रहों तक अन्तिर् िवजय के बीते 55 बरस

चलो िदलदार चलो, चाँद के पार चलो इस साल यूरी गगािरन की पहली अन्तिर् उड़ान को 55 साल पूरे हो गए। ूस में लोग अब दूसरे िसतारों पर पुचने का सपना देख रहे हैं और उन्होंने अपने अन्तिर् यान बनाने शुू कर िदए हैं।

ूस ने बनाया नया अन्तिर् अड्डा

िवक्तोिरया ज़िवयालवा ूस-भारत संवाद

सोिवयत जनता की कई पीिढ़याँ यही सोचते-सोचते बड़ी ुईं िक वे ‍ाण्ड पर अपनी िवजय का इितहास िलखेंगी। आइए, आज इस बात की चचा् कर िक िसतारों को जीत पाने का वह सपना कहाँ तक पुचा।

ूस का नया अन्तिर् अड्डा ‘व तोचनी’।

अन्तिर् में शीत-युद्ध 12 अ ल ै 1961 को यूरी गगािरन की अन्तिर्-उड़ान सोिवयत-संघ की ारिम्भक बड़ी उपलिब्धयों में से एक थी। लेिकन जब तक सारी दुिनया िदल थाम के अन्तिर् में मानव की पहली उड़ान के बारे में चचा् कर रही थी, अमरीकी सरकार भारी िचन्ता में पड़ी ुई थी क्योंिक आर-7 नामक िजस रॉकेट ने गगािरन के अन्तिर्-यान ’व तोक-1’ को अन्तिर् में पुचाया था, उस रॉकेट का िनमा्ण दरअसल अमरीका तक परमाणु बम पुचाने के िलए िकया गया था। वे शीत-युद्ध के िदन थे और अन्तिर् वह जगह थी, जहाँ दोनों महाशि‍याँ एक-दूसरे के िवुद्ध खुले आम ताल ठोंकने से बचकर भी एक-दूसरे को अपनी ताक़त और अपने पु‍ों की मछिलयाँ िदखा सकती थीं। आठवें दशक के शुू में सोिवयत अिधकारी भी यह जानकारी पाकर बेहद िचिन्तत ुए थे िक अमरीका ने अन्तिर् में जाने-आने के िलए शटल अन्तिर्यान बना िलया है। सोिवयत संघ को डर था िक अमरीका अपने

12 अ ल ै 1961 को यूरी गगािरन ने पहली बार अन्तिर् में उड़ान भरी थी। इस शटल अन्तिर्यान का उपयोग अन्तिर् में एटम बम तैनात करने और अन्तिर् में काम कर रहे सोिवयत उपग्रहों को चुराने के िलए कर सकता है। अमरीका को इस तरह की हरकतें करने से रोकने के िलए सोिवयत सरकार ने भी अपनी पूरी ताक़त ’एनेिग्या-बुरान’ नामक शटल अन्तिर्यान का िनमा्ण करने में झोंक दी। लेिकन सोिवयत संघ में शुू ुए

पेरे ोइका यानी पुनग्ठन, सोिवयत संघ के पतन और िपछली सदी के अिन्तम दशक में ूस में फैले आिथ्क संकट ने उन सारे यासों पर पानी फेर िदया। ूस में आिथ्क किठनाइयाँ इतनी यादा थीं िक मीर-2 अन्तिर्- टेशन का िनमा्ण करने की पिरयोजना भी रोक दी गई। मीर-2 अन्तिर्- टेशन को अन्तिर् में काम कर रहे ’मीर’ नामक अन्तिर्टेशन की जगह लेनी थी।

अन्तररा£ीय अन्तिर् टेशन के कमी्दल के सद य।

ित पधा् से सहयोग की ओर जून -1992 में ूस और अमरीका ने अन्तिर् में सहयोग और अनुसन्धान के बारे में एक समझौते पर ह ता्र िकए। ूसी अन्तिर् संगठन ’रोसकोसमोस’ ने अमरीकी अन्तिर् संगठन ’नासा’ के सामने अन्तररा£ीय अन्तिर् टेशन बनाने का ताव रखा, िजसका िनमा्ण शुू में अमरीका, कनाडा, जापान और यूरोपीय अन्तिर् एजेन्सी

िमलकर करना चाहते थे। अब िपछले अनेक वषो्ं से सभी देशों के अन्तिर्या ी ूसी अन्तिर्यान ’सोयूज’ में बैठकर ही अन्तररा£ीय अन्तिर् टेशन तक आते-जाते ह।

चाँद पर पहली मानव-बि तयाँ िवगत माच् महीने के अन्त में ूस की सरकार ने 2016 से 2025 तक नए अन्तिर् काय्क्रम का अनुमोदन

िकया है िजसमें अन्तिर् में काय्रत अन्तररा£ीय अन्तिर् टेशन के ूसी िह से के िवकास को ाथिमकता दी गई है। अन्तररा£ीय अन्तिर् टेशन का उपयोग भी अब 2024 तक िकया जाएगा। ूसी अन्तिर् संगठन ’रोसकोसमोस’ के मुख ईगर कमारोफ़ के अनुसार, रोसकोसमोस यूरोपीय अन्तिर् एजेन्सी और नासा के साथ

ूसी अन्तिर् संगठन ’रोसकोसमोस’ ने जानकारी दी है िक ूस के नए अन्तिर् अड्डे व तोचनी से पहला ्ेपण 27 अ ल ै को सुबह भारतीय समयानुसार 7 बजकर 31 िमनट पर होगा। सूचना में कहा गया है िक ’रोसकोसमोस’ के िवशेष्ों ने अन्तिर्-अड्डे व तोचनी, रॉकेट और अन्तिर्-यान की सभी णािलयों को ्ेपण के िलए तैयार करना शुू कर िदया है। आगामी 23 अ ल ै को रॉकेट को ्ेपण थल पर तैनात कर िदया जाएगा। ूस के नए अन्तिर्-अड्डे व तोचनी का िनमा्ण अमूर देश में सन् 2010 में शुू िकया गया था। पूरे अन्तिर् अड्डे का पिरसर 700 वग् िकलोमीटर के इलाके में फैला ुआ है। व तोचनी अन्तिर् अड्डे से ूस अन्तिर् सम्बन्धी सभी कार्वाइयाँ सहज ही पूरी कर सकेगा और कज़ाख़ तान के बायकानूर अन्तिर्-अड्डे पर ूस की िनभ्रता काफ़ी कम हो जाएगी। 27 अ ल ै को नए अन्तिर् अड्डे व तोचनी से ्ेिपत रॉकेट ’सोयूज-2.1ए’ अन्तिर् यान ’आइ त-2-डी’ और ’िमख़ईल लमानोसफ़’ तथा नैनोउपग्रह ’समसेय़-218’ को अन्तिर् में पृथ्वी की पिरिध पर पुचाएगा।

मंगल ग्रह से जुड़ी सँय‍ ु अन्तिर् पिरयोजना पर काम करने के बारे में िवचार-िवमश् कर रहा है। लेिकन अगले दस साल तक ूस का सारा ध्यान पृथ्वी की िनकटवती् पिरिध, अन्तिर्ीय रेिडयोधिम्यता तथा सूय् की सिक्रयता के अनुसन्धान की ओर केिन् त रहेगा। योजना के अनुसार, सन् 2030 में ूसी लोग चन् मा पर उतरकर मानवबि तयाँ बसाना शुू कर देंगे क्योंिक पृथ्वी पर संसाधन धीरे-धीरे कम होते जा रहे ह और वे देर-सवेर ख़त्म हो जाएँग।े तब मानवजाित को चन् मा और मंगल का ही इ तेमाल करना पड़ेगा।

िसतारे हमारे बुत क़रीब ह िपछले समय में ूस में अनेक ऐसी िनजी अन्तिर् कम्पिनयाँ सामने आई ह, जो छोटे अन्तिर् यानों के िनमा्ण के काम से जुड़ी ुई ह। बुत से ऐसे शौकीन लोग भी ह, जो िसतारों से जुड़ी अपनी अन्तिर् योजना के िलए सामूिहक सहयोग के आधार पर धन की तलाश कर रहे ह। इस साल ूस के इजीिनयिरग िव‍िवद्यालय के वै्ािनक ’मयाक’ नाम का एक छोटा उपग्रह छोड़ने की योजना बना रहे ह। इसका उ‍े य उस तकनीक का परी्ण करना है, जो अन्तिर्ीय कूड़े की सम या का समाधान कर सकती है। िवगत माच् के अन्त में ही ूसी अन्तिर् संगठन ने एक िनजी कम्पनी को मोकूस् को यह इजाज़त दे दी है िक वह एक ऐसे शटल अन्तिर् यान का िनमा्ण करे, जो पय्टकों को अन्तिर् में ले जा सके। को मोकूस् कम्पनी सन् 2020 में ऐसे पहले पय्टक-दल को अन्तिर् की सैर कराना चाहती है। अन्तिर् की सैर करने के िलए पय्टक को बस दो-ढाई लाख डॉलर खच् करने होंग।े

्ु ग्रहों से पृथ्वी की सुर्ा की ूस ने नई त‍ोलौजी खोजी ्ु ग्रहों को अन्तिर् में तब न िकया जाना चािहए, जब वे पृथ्वी के पास से गुज़र चुके हों। उन्हें न करने के िलए एटम बमों का उपयोग करना होगा। याना पिचलीिन्त्सवा ूस-भारत संवाद

आने वाले 185 सालों में हमारी पृथ्वी के पास से कुल 39 ्ु ग्रह गुज़रगे। हाल ही में साइबेिरयाई वै्ािनकों ने यह ताव रखा है िक इन खगोलीय िपण्डों को तब न‍ िकया जाना चािहए, जब ये पृथ्वी के पास से गुज़र चुके हों।

पृथ्वी के आस-पास घूमते 11 हज़ार खगोलीय िपण्ड हमारी पृथ्वी के िनकट आने वाले ्ु ग्रहों की कुल संख्या 11 हज़ार से यादा है, िजनमें से कुछ ्ु ग्रह तो पृथ्वी के िलए भयानक ख़तरा भी पैदा कर सकते ह। लेिकन वै्ािनकों ने इनमें 39 ्ु ग्रहों को पृथ्वी के िलए िवशेष ूप से खतरनाक माना है। ये िवशाल खगोलीय िपण्ड अचानक आकर पृथ्वी से टकरा जाएँगे और हमें इस बारे में पहले से कोई जानकारी

िव फोट करने का योग करके देखा और यह ख़याल रखा िक उ रेिडयमधमी्यता से ग्र त ्ु ग्रह के टुकड़े पृथ्वी पर नहीं िगर। इस योग के बाद हम यह सुझाव दे रहे ह िक ्ु ग्रह को तब न‍ िकया जाए, जब वह पृथ्वी के पास से गुज़रकर पृथ्वी से दूर जा रहा हो। यह क़दम अिधक सुरि्त और भावशाली होगा। कम्प्यूटर पर योग करने के िलए वै्ािनकों ने 200 मीटर यास वाले अलोिफ़स नामक ्ु ग्रह की तरह के एक खगोलीय िपण्ड की क पना की, जो सन् 2029 में पृथ्वी के िनकट आएगा और पृथ्वी से िसफ़् 38 हज़ार िकलोमीटर की दूरी पर उसके पास से गुज़रेगा। इस तरह के ्ु ग्रह को िव फोट करके उड़ाने के िलए कम से कम एक मेगाटन टीएनटी की ज़ूरत होगी, जो 1945 में िहरोिशमा पर िगराए गए एटम बम से 50 गुना अिधक शि‍शाली होगा।

नहीं होगी, इस बात की संभावना बुत कम है। हाँ, 300 मीटर यास से छोटे उ कािपण्ड कभी भी अचानक आकर धरती पर िगर सकते ह। इस तरह के छोटे-छोटे उ कािपण्ड भी अगर पृथ्वी से आकर टकराएँगे तो कोई महानगर या कोई देश दुिनया के न शे से ग़ायब हो सकता है। दुिनया के अनेक देशों के वै्ािनक बड़ी संख्या में इस सम या पर काम कर रहे ह िक पृथ्वी के िलए खतरा पैदा करने वाले इन खगोलीय िपण्डों का रा ता अन्तिर् में कैसे बदला जाए। िकसी ्ु ग्रह के आकार पर ही यह िनभ्र करता है िक उससे िनबटने के िलए कौनसा तरीका अपनाया जाएगा। उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ िदया जाए या उसे पीछे की तरफ़ ढकेला जाए और उसका रा ता बदल िदया जाए।

्ु ग्रह बार-बार पृथ्वी की तरफ़ लौटते ह ऐसे बुत से ्ु ग्रह ह, जो एक िनि‍त समय के बाद थोड़ा-सा रा ता बदलकर बार-बार पृथ्वी की तरफ़ लौटते ह। ूस के तोम क राजकीय िव‍िवद्यालय के वै्ािनकों

हमारी पृथ्वी के िनकट आने वाले ्ु ग्रहों की कुल संख्या 11 हज़ार से यादा है। ने यह सुझाव िदया है िक पृथ्वी के िलए खतरनाक खगोलीय िपण्डों को िव फोट करके उस समय न‍ कर िदया जाना चािहए, जब वे पृथ्वी के

िनकट से गुज़रकर आगे की तरफ़ बढ़ जाएँ। तोम क राजकीय िव‍िवद्यालय के अनु यु‍ गिणत और मैकिे नक्स

सं थान की वै्ािनक तितयाना गलुिशना ने ूस-भारत संवाद को बताया – सुपरकम्प्यूटर कीफ़ साइबेिरया की मदद से हमने एक ्ु ग्रह पर परमाणु

मुम्बई को प्लेग से बचाने वाला ूसी िचिकत्सक एक ूसी िचिकत्सक 19वीं सदी में भारत आया और उसने हैजे का टीका िवकिसत िकया। मुम्बई ि थत एक प्लेग केन् का नाम इस महान िचिकत्सक के नाम पर है। अजय कमलाकरन ूस-भारत संवाद

डाक्टर वि दमार हाफ़िकन का जन्म 1860 में ूस के ओद्देसा शहर में ुआ था। उनकी िश्ा-दी्ा साँ‍ िपतेरबुग् में ुई। शुू में उन्होंने ूस के ख्यात जीविव्ानी डा. इ या मेचिनकफ़ के साथ काम िकया, िजनको 1908 में िचिकत्सा का नोबेल पुर कार ा‍ ुआ था। 19वीं सदी के उ्राध् में यूरोप और एिशया के बड़े इलाकों में हैजे की महामारी फैलती थी। डा. हाफ़िकन अपनी वै्ािनक मेधा से 1892 में हैजे का टीका िवकिसत करने में सफल रहे। यही नहीं, इस महान िचिकत्सक ने अपनी जान की भी परवाह नहीं की और हैजे के टीके का खुद पर ही

परी्ण कर डाला। दुभा्ग्य से यूरोप के िचिकत्सा समुदाय ने उनकी इस साहिसक उपलिब्ध को मान्यता नहीं दी। इसिलए डा. हाफ़िकन ने भारत जाने का िनण्य िकया, जो उन िदनों तरह-तरह की महामािरयों की चपेट में था। डा. हाफ़िकन ने पेिरस में हैजे का जो टीका िवकिसत िकया था, उसका योग उन्होंने माच् 1893 में िकया। उन िदनों डा. हाफ़िकन कोलकाता में हैजे के िवुद्ध अकेले ही लड़ रहे थे। उन्होंने कोलकाता में हजारों लोगों को यह टीका लगाया। धीरे-धीरे ूस के इस दयालु िचिकत्सक के बारे में ख़बर पूरे देश में फैल गई। िफर उन्होंने जाड़े भर असम के चायबागानों में मज़दूरों को टीका लगाया। उन्होंने गंगा के मैदानी इलाकों के लोगों का भी उपचार िकया। डा. हाफ़िकन के सहकिम्यों की एक िरपोट् से पता चलता है िक असम के चायबागानों में िजन लोगों को यह टीका लगा था, उनके बीच मृत्यु-दर केवल 2 ितशत थी, जबिक िजन लोगों को टीका नहीं लगा था, उनके बीच मृत्यु-

दर 22 से लेकर 45 ितशत तक थी। डा. हाफ़िकन का अगला पड़ाव मुम्बई शहर बना, जो उन िदनों िग टी प्लेग की चपेट में था। मुम्बई में प्लेग ने आतंक फैला रखा था। शहर में अक्टबर 1896 से लेकर जनवरी 1897 के बीच प्लेग से 3148 लोगों की मृत्यु हो चुकी थी। अँग्रज़ े प्लेग फैलने पर भयभीत हो उठे थे। चूिँ क प्लेग से मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही थी, इसिलए डा. हाफ़िकन और उनके भारतीय सहकिम्यों को तेज़ी से कार्वाई करनी थी। लगातार तीन महीने तक काम में लगे रहने के बाद आिख़र उन्ह सफलता िमली। वा तव में जब उन्होंने गैरपारम्पिरक िविधयों का उपयोग िकया, तो वे टीके का आिव कार करने में भी सफल हो गए। डा. हाफ़िकन ने भारतीय प्लेग आयोग को बताया मेरी योगशाला में दूध या घी में प्लेग के कीटाणु के फलने-फूलने को लेकर योग िकए जा रहे ह। हम इस बात की जाँच-परख कर रहे ह िक घी में कीटाणु िकस हद तक फलते-फूलते ह, क्योंिक

्ु ग्रह के टुकड़ों का क्या होगा? यह तरीका िकतना सुरि्त होगा और कहीं ऐसा तो नहीं होगा िक यिद मानवजाित इस तरह से ्ु ग्रह को न‍

करने का िनण्य ले ले तो उस ्ु ग्रह के टुकड़े ज़मीन पर ही आ िगर? तितयाना गलुिशना ने बताया – कम्प्यूटर पर िकए गए योग और परी्ण ने िदखाया िक ्ु ग्रह पर धमाका होने पर ्ु ग्रह का एक िह सा गैसों और तरल पदाथ् में बदल जाएगा तथा पूरा ्ु ग्रह दस-दस मीटर आकार के टुकड़ों में टट जाएगा। पृथ्वी की सुर्ा की ृि‍ से देखा जाए तो ्ु ग्रह

अन्तिर् में एटम बम के इ तेमाल पर ितबन्ध लगा ुआ है के ये सबसे बड़े टुकड़े होंग।े और चूिँ क रॉकेट ्ु ग्रह पर पीछे से आकर वार करेगा, इसिलए ्ु ग्रह के सारे टुकड़े आगे की तरफ़ बढ़ जाएँग,े उनके पृथ्वी पर िगरने की कोई सम्भावना नहीं होगी। वै्ािनकों ने कहा िक भौितकी के िनयमों के अनुूप इस िव फोट के कुछ समय बाद न‍ कर िदए गए इस ्ु ग्रह के टुकड़े िफर से पृथ्वी के पास से गुज़र सकते ह क्योंिक वे अपने

सुिनि‍त रा ते पर ही चल रहे होंग।े लेिकन कम्प्यूटर पर िकए गए योग और परी्ण ने िदखाया िक छोटे-छोटे उ कािपण्डों में बदल चुके इन टुकड़ों की वषा् पता भी नहीं लगेगी। ये टुकड़े पृथ्वी की पूरी पिरिध पर फैल जाएँगे और इनमें से कुछ टुकड़े ही ज़मीन पर िगर सकते ह। तितयाना गलुिशना ने कहा – हमारे परी्ण के दौरान एक लाख टुकड़ों में से िसफ़् एक ही टुकड़ा पृथ्वी पर िगरा। हालाँिक इस नई त‍ोलौजी की आलोचना करने वाले लोगों की भी कमी नहीं है। तोम क पोिलटैि‍क िव‍िवद्यालय के वै्ािनकों का कहना है िक सुपरकम्प्यूटर पर िकए गए योग के पिरणामों को वा तव में लागू करना बड़ा मुि कल लग रहा है। इस नई त‍ोलौजी के आलोचकों का कहना है िक ्ु ग्रह को न‍ करने के िलए ज़ूरी िव फोट िसफ़् एटम बम के माध्यम से ही िकया जा सकता है और अन्तिर् में एटम बम के इ तेमाल पर ितबन्ध लगा ुआ है। इसके अलावा उस बम को ्ु ग्रह तक सटीक ूप से पुचाने का सवाल भी अभी तक एक अनसुलझी सम या बना ुआ है।

ूसी िव‍िवद्यालयों में दािखला लेने के िलए पाँच क़दम ूस दुिनया के उन कुछ देशों में से एक है, जहाँ िकसी भी िवश्विवद्यालय में िवदेशी छा ों को ूसी छा ों के साथ िनशु क िश्ा पाने की सुिवधा उपलब्ध है।

ूसी वै्ािनक डा. वि दमार हाफ़िकन।

ग्लेब योदरफ़

यहाँ के भोजन में घी का काफी योग होता है। ये योग सफल रहे और डा. हाफ़िकन ने मुम्बई के रोिगयों को प्लेग का टीका लगाने से पहले खुद अपने ऊपर ही इसका परी्ण िकया। उन्होंने खुद को टीके की चार गुनी मा ा लगाई, िजसके कारण उन्ह एक स‍ाह तक बुखार के िरएक्शन का क‍ भोगना पड़ा। भायखला जेल के वयंसिे वयों को प्लेग का टीका लगाया गया। वयंसवे क समूह के 7 सद यों की मृत्यु हो गई, लेिकन पाया गया िक टीका लगाने से प्लेग में 50 ितशत की कमी हो गई है। अगले पाँच वषो्ं तक डा. हाफ़िकन

ूस का िश्ा मन् ालय िवदेशी छा ों को ूस के िव‍िवद्यालयों में िश्ा पाने के िलए छा वृि्याँ देता है। ूस में आकर िवदेशी छा न केवल िनशु क ‍ातक व ‍ातको्र तर की िश्ा ा‍ कर सकते ह, बि क वे ूसी िव‍िवद्यालयों में िनशु क शोध और अनुसन्धान भी कर सकते ह। 2016-17 के िश्ा-स में ूस के िव‍िवद्यालयों में पढ़ने वाले 15 हज़ार िवदेशी छा ों में शािमल होने के िलए आपको नीचे िलखे पाँच क़दम उठाने होंग।े

मुम्बई के आस-पास प्लेगरोधी टीका लगाने के काम में जुटे रहे। उनके जीवन के अिन्तम आठ वष् कोलकाता में बीते। इस दौरान उन्होंने भारत सरकार के िलए एक वतन् अनुसन्धानकता् के तौर पर काम िकया। रेबीज़-रोधी सीरम के पिरर्ण की मांग सिहत उनके अिधकांश िवचारों को अिधकािरयों ने अ वीकार कर िदया। डा. हाफ़िकन ने 1915 में 55 वष् की आयु में भारत छोड़ा। मुम्बई के िजस सं थान में वे काम िकया करते थे, 1925 में उनके सम्मान में उसका नाम बदलकर हाफ़िकन अनुसन्धान सं थान कर िदया गया। उनकी मृत्यु 1930 में ि वटजरलैंड के लुसान शहर में ुई।

ूस-भारत संवाद

1. पंजीकरण िवदेशों के साथ सां कृितक सम्बन्धों के

िलए उ्रदायी ’रोसस दू िनिच तवा’ संगठन ूस की सरकार द्वारा िवदेशी छा ों के िलए तय छा वृि्यों का िवतरण करता है। इस साल ूस में पढ़ने के इच्छुक छा ों के चयनिक्रया को बुत सहज बना िदया गया है। अगर आप ूस में पढ़ना चाहते ह तो आपको पहले इस िलंक www. russia.study/en पर जाकर अपना पंजीकरण करना होगा।

2.

ाथ्ना-प

पंजीकरण करने के बाद आपको एक ाथ्ना-प िलखना होगा, िजसमें यह बताना होगा िक आप ूस में क्यों पढ़ना चाहते ह। इसके अलावा आपको एक फ़ाम् भी भरना होगा, िजसमें अपनी अभी तक की िश्ा और उपलिब्धयों के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ आपको यह भी िलखना होगा िक आप अपनी आगे की िश्ा िकस िवषय या िकस ्े में पाना चाहते ह। आपका फ़ाम् आपके देश से ूस पुचने वाले अन्य फ़ामो्ं की फ़ाइल में जुड़ जाएगा।

3. उ्र की ती्ा कीिजए आजकल छा ों का चयन ’रोसस ू द िनिच तवा’ की भारतीय शाखा िश्ा मन् ालय के साथ िमलकर करती है। अगर आपका चयन हो जाता है तो आपको इण्टर यू और परी्ा के िलए बुलाया जाएगा।

4. िव‍िवद्यालय का चयन इण्टर यू और परी्ा में सफल होने के बाद आप ूस के उन िकन्हीं भी छह िव‍िवद्यालयों को अपना अनुरोधप भेज सकते ह, िजनमें आप दािखला लेना चाहते ह। यिद सभी छह िव‍िवद्यालय आपको वेश नहीं देते ह तो ूस का िश्ा मन् ालय आपको िकसी अन्य िव‍िवद्यालय में पढ़ने के िलए आमिन् त करेगा।

5. ूस या ा की तैयारी जब कोई ूसी िव‍िवद्यालय इस बात की पुि‍ कर देगा िक वह आपको दािखला देने के िलए तैयार है, तब आप ूस जाने की तैयारी कीिजए।


और Russia Beyond The Headlines की संयक्त ु पिरयोजना

पय्टन

बुधवार, 20 अ ल ै 2016

hindi.rbth.com

पय्टन : बैकाल एक जादुई झील है, जो अपने जादू से यहाँ आने वाले हर आदमी को अपने वश में कर लेती है और बार-बार अपने पास बुलाती है

बैकाल झील साइबेिरया का स ा मोती थानीय लोग इसे ’साइबेिरया का मोती’ कहते हैं। बाहरी लोग इसके ऐश्वय् को देखने के िलए यहाँ आते रहते हैं। लेिकन बैकाल झील हमारी आधुिनक सभ्यता का िशकार होती जा रही है। ओ गा िचिरदिनचेन्का ूस-भारत संवाद

थानीय भाषा में बैकाल का अथ् है — ’समृ द्ध झील’। साइबे िरया के सुदरू दि्णी िह से में ि थत यह झील पारम्पिरक पय्टक थलों से बुत यादा दूर ि थत है। 12,000 वग् मील से भी अिधक ्े फल में फैली इस झील के अनुपम सौन्दय् और अ‍ुत छटा को देखकर लोग मुग्ध हो जाते ह। वन पितयों व जीव-जन्तु की दज्नों ऐसी जाितयाँ ह, जो िसफ् यहीं पर पाई जाती ह। ऐसी दुलभ् जाितयों में कण्हीन बैकाल सील मछली और ओमुल मछली भी शािमल ह। ओमुल मछली खाने में बड़ी वािद‍ होती है और थानीय खानपान में इसका काफी योग होता है। बैकाल झील दुिनया भर में इसिलए जानी जाती है क्योंिक इसमें पूरी दुिनया का कुल बीस ितशत मीठा पानी इक‍ा है और यह दुिनया की सबसे गहरी झील है। इसकी गहराई 5,315 फुट

है। यूने को ने 1996 में इसे िव‍ धरोहरों की सूची में शािमल कर िलया था। तब से अनिगनत वै्ािनक खोजी दल यहाँ पर आ चुके ह। यहाँ आने वाले पय्टकों की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही है। 15 जू न से 15 अग त के बीच सवा्िधक पय्टक बैकाल झील को देखने के िलए आते ह। इन िदनों इस इलाके में मौसम ऐसा होता है िक बड़े आराम से लोग पैदल या ा कर सकते ह, साइिकल चला सकते ह, तम्बू लगाकर रात गुज़ार सकते ह, झील में डोंगी चला सकते ह और मछली पकड़ सकते ह। पारम्पिरक हम्माम ’बान्या’ को भी पय् ट क खू ब पसन्द करते ह। बान्या ूसी शैली का एक ऐसा हमामघर होता है, जहाँ भाप से नहाया जाता है। जाड़े में बैकाल झील पूरी तरह से जम जाती है। उस समय पय्टक झील के ऊपर जमी बफ़् पर कु्ों द्वारा खींची जाने वाली लेज में बैठकर घूमते ह और बरफ की मोटी परत में छेद करके बैकाल में मछली पकड़ने का आनन्द लेते ह। कुछ पय्टक ाँस-साइबेिरयाई रेलवे से या ा करते समय इस देश की राजधानी इकूत्् क नगर में उतर जाते ह और लगे हाथ बैकाल झील को भी देख लेते ह। वहाँ से लोग िलि त्वयांका गाँव चले जाते ह, जो लगातार िवकिसत

हो रहा है और जहाँ सुिवधाएँ बढ़ती जा रही ह। यहाँ पर आपको अक्सर जापानी और यूरोपीय मेहमान िदखाई पड़गे। अ ख़ोन द्वीप इकूत्् क नगर से लगभग 200 मील दूर उ्र की िदशा में ि थत है। यह इलाका अभी भी पूरी तरह से दुगम् जंगली इलाका है। बैकाल झील में ि थत 27 द्वीपों में से अ ख़ोन सबसे बड़ा द्वीप है। टैक्सी या बस से इकूत्् क से यहाँ पुचा जा सकता है। इस द्वीप पर बसे सबसे बड़े गाँव ुझीर तक पुचने के िलए आधे िदन की मनोहारी सड़क या ा के बाद नाव की या ा भी करनी पड़ेगी। यहाँ आकर ऐसा लगता है, मानो समय की साँस थम गई है। अ ख़ोन के 1500 िनवासी बाहरी सभ्यता की य त और तनावपूण् जीवनशैली से आज भी पूरी तरह से सुरि्त ह। क़रीब दस साल पहले सन् 2005 में अ ख़ोन द्वीप पर बसे तीन गाँवों में िबजली भी पुच चुकी है। साइबेिरया के लोग कृित से तारतम्य थािपत करके जीने और परम्परा का सम्मान करने के सवाल पर बड़ा गव् महसूस करते ह। अ ख़ोन में ऐसे लोगों से मुलाक़ात की जा सकती है। थानीय बुया्त जाित के लोग अ ख़ोन के पि‍मी तट पर ि थत शमानका िशला की पूजा करते ह।

बैकाल की या ा 2 क्यों कर?

1

यह िवश्व की मीठे पानी की सबसे बड़ी, सबसे गहरी और सबसे पुरानी झील है। इसमें जीव-जन्तु की 848 अि‍तीय जाितयाँ और वन पितयों की 133 अि‍तीय जाितयाँ पाई जाती हैं।

गोकी् की ये तीन िकताबें ज़ूर पढ़ गोकी् ने 1906 में ’माँ’ उपन्यास िलखा था, जो दुिनया का सवो््म उपन्यास माना जाता है और जो समाजवादी यथाथ्वाद को उकेरने वाली दुिनया की पहली रचना है। फ़ीबी तापिलन ूस-भारत संवाद

आज से क़रीब 150 साल पहले जन्म लेने वाले अिलक्सेय पेशकफ़ ने 20 साल की उ में गोकी् यानी कड़वा तख‍ुस रख िलया था क्योंिक वे उस समय राजनीितक ूप से भी सिक्रय थे। उन्होंने अपनी आत्मकथात्मक रचना के अलावा अनेक कहािनयाँ, उपन्यास और नाटक िलखे ह।

1. माँ हाल ही में िद‍ी के मेधा बुक्स काशन ने मक्सीम गोकी् के मुनीश नारायन सक्सेना द्वारा अनूिदत उपन्यास ’माँ’ का नया सं करण कािशत िकया है। ’माँ’ उपन्यास िहन्दी में कािशत होने के बाद ही भारत के छा ों और मज़दूरों के बीच बेहद लोकि य ुआ

था। आज हालत यह है िक हर साल इसका एक नया सं करण सामने आता है और िहन्दी के कई काशक इसे कािशत कर चुके ह। माँ उपन्यास में विण्त घटनाएँ एकदम स ी ह। 1902 में मज़दूरों ने मई िदवस के अवसर पर एक जुलस ू का आयोजन िकया था और तत्कालीन ूस की सेना ने उस जुलस ू को िततर-िबतर करके जुलस ू का आयोजन करने वाले मज़दूर नेता को िगर तार कर िलया था। क्रािन्तकारी मैकिे नक प्योतर ज़लोमफ़ ने इस जुलस ू में सिक्रय ूप से भाग िलया था। इन प्योतर ज़लोमफ़ से रे णा ग्रहण करके गोकी् ने अपने उपन्यास माँ के नायक पािवल लासफ़ की रचना की और उनकी माँ ही इस उपन्यास की मुख्य नाियका ह। लदीिमर लेिनन ने माँ उपन्यास को समय की कसौटी पर खरा उतरा उपन्यास बताया था। इसमें ूस में उस समय चल रहे मज़दूर आन्दोलन का स ा िच उभारा गया है। इस उपन्यास में कारख़ानों में काम करने वाले मज़दूरों के जीवन और उनके मािलकों की क्रूरता

अिलक्सेय पेशकफ़ ने गोकी् यानी कड़वा तखल्लुस रख िलया था। और सनक के अनेक यथाथ्वादी िच तुत िकए गए ह। उपन्यास में माँ के आत्मिव्‍ेषण के सहारे मज़दूरों के नज़िरए और उनके राजनीितक अिभयानों का वण्न िकया गया है। मज़दूरों की बातें सुनकर माँ के भीतर अनेक भावनात्मक पिरवत्न आते ह और वह अपने भय और म की ि थित से उबर जाती है।

2. सूरज के बेटे

न्याय और असमानता का सवाल उठाया है। गोकी् के इस नाटक का एक पा तासफ़ भिव यवाणी करता है िक ज दी ही रसायनशा जीवन के गु‍ रह यों को खोल देगा और सौ साल बाद ही हम परखनली में जीवन की रचना करने लगेंगे और मौत एक परखनली से हार जाएगी। रसायनों की बोतलों में पैदा होने वाले बुलबुले और भाप बीसवीं सदी में जीवन को बड़ी तेज़ी से बदल देंग।े आज मज़दूर वग् िव ोह पर उताू है, जबिक आत्मसन्तु‍ और आत्मिवमोही मध्यवग् िसफ़् बड़े धुधं ले ूप में ही यह समझ पा रहा है िक एक नया सामािजक योग शुू होने जा रहा है।

’सूरज के बेट’े मक्सीम गोकी् का एक िव‍ िसद्ध नाटक है, जो 1905 के तत्कालीन ूस की क्रािन्तकारी धरती में उभर रहे समाज के बारे में है। िहन्दी में इस नाटक का अनुवाद अब तक उपलब्ध नहीं है। 3. मेरा बचपन इस नाटक में गोकी् ने सामािजक 1966 में गोकी् की आत्मकथा का

यह ूस के भीतर बौ‍ धम् के साथ-साथ शमान धम् का भी केन् है। सैकड़ों की संख्या में पय्टक साइबेिरयाई ओझा के आनु ािनक नृत्यों को देखने या बौ‍ मठों में ध्यान करने के िलए आते हैं।

साइिकल चलाने से लेकर तैराकी, जीप चलाने, राि टग, घुड़सवारी, मछली पकड़ने और झील के तट पर आरामदायक युतो्ं या िकराए पर िमलने वाले तम्बु में िटकने आिद तक का आनन्द उठा सकते हैं।

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इसकी िगनती दुिनया के सबसे लोकि य रोमांचक पय्टन थलों में की जाती है। यहाँ आप पैदल या ा करने तथा

पहला भाग ’मेरा बचपन’ िहन्दी में अनूिदत ुआ िजसमें गोकी् के बचपन का बेहद मािम्क वण्न है। ’मेरा बचपन’ की शुूआत लेखक के िपता के अिन्तम सं कार के एक ृ य से होती है। िपता की आँखों पर ताम्बे के काले िसक्के रखकर उनकी आँखों की चमक को छुपा िदया गया है। गोकी् ने बड़ी सादगी के साथ एक ब े की नज़र से िपता के अिन्तम सं कार का िज़क्र िकया है। ब ा अपनी नानी के पीछे िछपने की कोिशश कर रहा है और इस बात को लेकर परेशान है िक वहाँ िम‍ी पर फुदक रहे कुछ जीिवत मेंढ़कों को भी िपता की क़ में िज़न्दा ही दफ़ना िदया जाएगा। उसके बाद बुत से िववरण ह – बफ़ी्ली ठण्ड की कँपकँपाहट और झनझनाहट, ूसी जीवन की किठनाइयों के बीच ुशी के कुछ ्ण, चेचक, बफ़ी्ले तूफ़ान तथा केतली से वोद्का के घूटँ ...इन भयानक िववरणों से भी, िजन्ह ब ा पूरी तरह से समझ नहीं पाता, ब े के मन में भय का संचार होता है। गोकी् की आत्मकथा में यह गुण छुपा ुआ है िक वह एक राजनीितक आशावाद पैदा करती है। मक्सीम गोकी् िलखते ह – जीवन हमें हमेशा आ‍य्चिकत करता है... वह हमें रचनात्मक उछाह देता है... हमारे मन में हमेशा जलती रहने वाली आशा की एक मशाल जलाता है िक आगे हमारा जीवन पहले से यादा बेहतर, यादा उ₨वल और यादा मानवीय होगा।

बैकाल जाते समय आपको साइबेिरयाई अंचल की छटा और वहाँ हो रहे िवकास-कायो्ं को देखने का अवसर िमलता है।

यह िशला बैकाल के आस-पास ि थत पिव मानी जाने वाली अनेक जगहों में से एक है। यहाँ आने वाले पय्टकों को भी यह सलाह दी जाती है िक वे थानीय लोगों की आ था का आदर कर और शमानका िशला की त वीर न खींचें या उनकी पिव कलाकृितयों को ्ित न पुचाएँ, जो अक्सर पेड़ों पर बनाए गए िवशेष िच‍ों और कपड़ों या िसक्कों के पिव चढ़ावे के ूप में होती ह। अ ख़ोन में पय्टकों को रग-िबरगी ाकृितक छटा देखने को िमलती है। इसके पूवी् तट पर ऊँच-े ऊँचे पहाड़ खड़े ुए ह, जबिक अन्य िदशा में

जंगल और तेपी िदखाई देती है। यहाँ पर एक छोटा-सा मु थल भी है। िव‍ के सभी िह सों से आने वाले पय्टकों के िलए यहाँ ढेर सारे हॉ टल बने ुए ह। कहा जाता है िक बैकाल एक जादुई झील है, जो अपने जादू से यहाँ आने वाले हर आदमी को अपने वश में कर लेती है। ऐसे बुत से पय्टक ह, जो इस झील को िसफ् एक बार देखने की इच्छा से यहाँ आए थे, लेिकन अब वे बार-बार यहाँ आते ह। इसका मतलब यह है िक इस रह यमय जगह में कोई न कोई ऐसी बात जूर है, जो अनन्त काल तक मौजूद रहेगी।

ूसी कुलनामों का मतलब जानें और यि‍ के नाम के बाद िकसी भी यि‍ के नाम में िपता का नाम जोड़े जाने की परम्परा शुू की गई। जैसे वसीली इवानािवच िप ोफ़। इस नाम में वसीली यि‍ का नाम है, इवान उसके िपता का नाम और िप ोफ़ उस अिलक्सेय िमख़ेइफ़ यि‍ का कुलनाम। ूस-भारत संवाद आज ूस में जो कुलनाम इ तेमाल ूस में अपे्कृत कुलनामों की परम्परा िकए जाते ह, उनमें से बुत से कुलनाम शुू ुए यादा समय नहीं बीता है। (सरनेम) ऐसे नामों के आधार पर बने ह, समाज के ऊँचे तबकों ने 16 वीं शताब्दी में कुलनाम वीकारने शुू िकए और कृषक समाज ने, उ्‍ीसवीं शताब्दी के ूसी कुलनाम बापअन्त में, जब ूस में कृिषदास रखने दादा के पेशे से भी की परम्परा ख़त्म कर दी गई। आम तौर पर ूसी कुलनामों का अन्त ’ओफ़’ बन जाते ह या ’येफ़’ ध्विनयों के साथ या ’इन’ ध्विन के साथ होता है। जैसे मान लीिजए िजनका अब यापक तर पर इ तेमाल िकसी का नाम शुू में रखा गया — नहीं िकया जाता, जैसे मकार नाम से इवान िप ोफ़ यानी इवान जो प्योतर मकारफ़ कुलनाम सामने आया, या का बेटा है। और इवान की बाद की मत्वेय नाम से मत्वेइफ़ कुलनाम बना, पीिढ़यों ने इस कुलनाम ’िप ोफ़’ को ही या लूका नाम की वजह से ही लूिकन अपना िलया और आगे सुरि्त रखा। कुलनाम सामने आया। आम तौर पर जो इस तरह ’िप ोफ़’ नाम का एक कुल ूसी कुलनाम बुत यादा सुनाई देता सामने आया। लेिकन अभी भी यि‍ है, वह है इवानोफ़। ूस में कुछ ऐसे लोग भी रहते ह, के नाम के साथ उसके िपता का नाम सुरि्त रखने की ज़ूरत महसूस हो िजनका कुलनाम उनके बाप-दादा रही थी। इसके िलए कुलनाम से पहले के पेशे के आधार पर बना है —

जैसे कुि नत्सोफ़ (लोहार), िरबाकोफ़ (मछे रा), प्लोतिनकफ़ (बढ़ई) या मेलिनकफ़ (चक्कीवाला) आिद। ूस में बड़ी संख्या में लोगों के कुलनाम जानवरों और पि्यों के नाम पर भी बने ुए ह। जंगली जानवरों में िमदवेदफ़ े (भालू), वो कफ़ (भेिड़या), सोबलेफ़ (सेबल), घरेलू जानवरों में क लोफ़ (बकरा), बरानफ़ (भेड़ा) और बीकफ़ (बैल) जैसे जानवरों के नामों के आधार पर ूसी कुलनाम बने ह। राजनीित् या लेखक आिद साव्जिनक काय्कता् आम तौर पर अपने कुलनाम बदलकर तख़‍ुस या उपनाम रख लेते ह। जैसे लदीिमर उ यानफ़ 1917 की ूसी क्रािन्त से पहले ’लेिनन’ के उपनाम से अपने लेख िलखा करते थे। लेिनन तख‍ुस उन्होंने ूस की साइबेिरयाई नदी ’लेना’ के नाम पर रखा था और बाद में सारी दुिनया उन्ह लदीिमर लेिनन के नाम से ही जानने लगी। और बो शेिवक पाटी् में उनके सहयोगी इओिसफ़ जुगा‍ीली ने अपना उपनाम ’ ताल’ (लोहा) शब्द के आधार पर तािलन रखा। बो शेिवक पाटी् के एक अन्य नेता िविच लाव क्रयािबन ने अपना उपनाम ’मोलत’ (दलना) शब्द के आधार पर ’मोलतफ़’ रखा।

जेट लड़ाकू िवमान िदए ह, जो ूस के अपने एसयू-27 लड़ाकू िवमानों से भी कहीं अिधक उ्‍त ह। ूस भारत को नवीनतम एस-400 िमसाइल वायुर्ा णाली भी देने को तैयार है।

अमरीका, ि टेन, ाँस, जाड्न, संय‍ ु अरब अमीरात, तुकी्, इण्डोनेिशया, चीन और दूसरे कई पि‍मी व मुि लम देशों ने पािक तान का प् िलया था। पािक तािनयों ने अपने ही 30 लाख बंगाली नागिरकों का नरसंहार कर भारत पर यह युद्ध थोपा था। जहाँ एक ओर पि‍म के तथाकिथत लोकतांि क देशों ने पािक तान का समथ्न िकया, वहीं दूसरी ओर ूस ने सँय‍ ु रा£ में भारत की िनन्दा करने वाले अमरीका- ायोिजत तावों को वीटो कर िदया। यही नहीं, सोिवयत संघ ने अपना शान्त महासागरीय नौसैिनक बेड़ा भी िहन्द महासागर में उतारकर अमरीका और ि टेन की संय‍ ु ूप से भारतीय शहरों पर आक्रमण करने की योजना को भी िवफल कर िदया था।

यिक्त को उसका कुलनाम पूवज ् ों से िमलता है, जो उसके कुल की जड़ों का पता बताता है। कुछ कुलनामों में तो यिक्त के गुण और पेशा भी पूरी तरह से उभर आते हैं।

िवचार

भारत और ूस के बीच सदाबहार दो ती के कारण राकेश कृ णन िसंह ूस-भारत संवाद

भारत और ूस के बीच के जुड़ाव को ही दो ती का नाम िदया जाता है। पाँच दशकों से भी अिधक समय से दोनों देशों के लोगों के मन में एक दूसरे के ित मै ीपूण् भावनाएँ रही ह। हालाँिक उत्साह में इधर कुछ कमी जूर आई है, लेिकन इसके बावजूद दोनों देश आज भी एक दूसरे के िव‍ त सहयोगी ह। भारत व ूस की दो ती तब शुू ुई थी, जब भारत एक गरीब देश था

और हिथयारों, तकनीक तथा औद्योिगक िनवेश के िलए ूस पर पूरी तरह से िनभ्र था। आज भारत की अथ् यव था ूसी अथ् यव था से बड़ी है, लेिकन दोनों देश िमलकर बराबर के सहयोिगयों के तौर पर काम कर रहे ह। भारत और ूस के बीच सदाबहार दो ती के कारण इस कार ह:

भारत और ूस की जनता के बीच समानता भारत और ूस के लोग िनजी तौर पर बेहद भावुक होते ह। अपिरिचत लोगों या सहकिम्यों के बीच रहने पर वे कम

बोलते ह और उनके बीच तुरन्त दो ताना सम्बन्ध नहीं बन पाते। दोनों देशों के लोगों के जीवन में पिरवार का बड़ा महत्व है। सं कृत और ूसी भाषा के बीच इतना िविच साम्य है िक हमारा ध्यान बरबस ही उस ओर चला जाता है। ख्यात ूसी शब्द – वोदका का ही उदाहरण लें, िजसका आिवभा्व सं कृत के शब्द ‘उदक’ से ुआ है। सं कृत िव‍ की ाचीनतम भाषा है। ऐसा लगता है िक ाचीन भारत के िनवासी अपनी भाषा-सं कृित को सर वती नदी के तट से उराल पव्तमाला तक ले गए

और उसके फल वूप ही ूसी भाषा ऊजा् सहयोग का भी िवकास ुआ। जहाँ ूस पूरी दुिनया में ऊजा् का सबसे बड़ा उत्पादक देश है, वहीं अमरीका दोनों भूराजनीितक ितद्वंद्वी नहीं और चीन के बाद भारत दुिनया में ऊजा् यूरिे शया के िव तृत भूभाग पर ि थरता का तीसरा सबसे बड़ा उपभो‍ा है। बनाए रखने के सवाल पर भारत और वैि‍क मंदी के बावजूद भारत में पहले ूस के सामिरक िहत एक समान ह। की तरह तेल, गैस व एटमी िबजली की अफ़ग़ािन तान, सीिरया और उक्रईना में असीिमत मांग बनी ुई है। दोनों देशों के िहत समान ह। चूिँ क भारत ूस इन सभी ऊजा् संसाधनों का और ूस अगल-बगल में ि थत नहीं ह, दुिनया का सबसे बड़ा उत्पादक देश इसिलए उनके बीच सीमा िववाद और है, जो भारत को उनकी सप्लाई करना पानी के बँटवारे जैसे िववादा पद मु‍े चाहता है। दोनों देशों के बीच अत्यिधक भी नहीं उठते। दोनों देशों के बीच सीधी दूरी होने की मजबूरी के चलते अब तक झड़प होने की संभावना नहीं है। ऐसा नहीं हो सका है।

ूस-भारत संवाद सूचना , िटप्पिणयों तथा सां कृितक, राजनीितक, यावसाियक, वै्ािनक व ूस के सामािजक जीवन से जुड़े िवचारों और िव्‍ेषणों का यापक सार करने वाले बुभाषी मीिडया Russia Beyond the Headlines का एक िह सा है। Russia Beyond the Headlines का पिरिश‍ दुिनया के 21 देशों में 14 भाषा में 26 महत्वपूण् और भावशाली समाचार-प ों में कािशत होता है। इसके अलावा RBTH की 16 भाषा में 19 वेबसाइट भी ह। अपने कािशत पिरिश‍ों और इण्टरनेट वेबसाइटों में RBTH वतन् और पेशवे र ूसी और िवदेशी प कारों की सहायता से ूस में घटने वाली घटना के बारे में सामग्री कािशत करता है। इसके अितिर‍ RBTH ूस और अन्तररा£ीय मंच पर घटने वाली घटना के बारे में िवशेष्ों के िवचारों को भी यापक ूप से सािरत करता है। वेब पता - http://hindi.rbth.com, ई-मेल - rusbharat@rbth.com दूरभाष - 007 (495) 775 3114 फैक्स - 007 (495) 988 9213 पता : कमरा नम्बर - 720, िबि डग नम्बर - 4, 24 ा दा माग्, मा को, ूस, 125993। इस पिरिश‍ को आप इण्टरनेट पर भी ई-पेपर सं करण के ूप में इस वेब पते पर देख सकते ह – rbth.com/e-paper ये गेनी अबोफ़ – काशक, सेवोलद पू या - मुख्य संपादक, कं तांितन फ़ेत्स – संपादक, िसगे्ई िफ़दोतफ़ - सहायक संपादक, अिनल जनिवजय - अितिथ संपादक, अन् य े िशमा की् - कला संपादक, अन् य े ज़ाइत्सेफ़ - फ़ोटो िवभाग के मुख, मीला दमागात् कया - लेआउट िवभाग की मुख, मरीया अिशपकोवा - लेआउट िडजाइनर।

काशन के िलए अंक 18 अ ल ै 2016 को भारतीय समय के अनुसार 18:00 बजे तैयार।

र्ा ौद्योिगकी ूस और भारत के बीच कई दशकों से र्ा सौदे होते रहे ह। ूस उ तकनीकी हिथयारों का एक िव‍सनीय सप्लायर रहा है। ूस भारत को नवीनतम िमसाइल त‍ोलौजी भी दान करता रहा है। ूसी त‍ोलौजी िमलने की वजह से ही भारत ने िमसाइल त‍ोलौजी के ्े में बुत ऊँची छलांग लगाई है और हमोस व आकाश जैसे सवो््म िमसाइलों का उत्पादन शुू िकया है। पृथ्वी ण े ी की िमसाइलें भी ूसी त‍ोलौजी पर ही आधािरत ह। ूस ने भारत को सुखोई एसयू-30

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एक दूसरे के िलए खड़े होने की िज़‍ 1979 में जब सोिवयत सं घ ने अफ़ग़ािन तान में घुसपैठ की, तो भारत ने सोिवयत संघ के इस काम की आलोचना नहीं की। इस बात को लेकर पि‍मी देशों के पेट में खूब दद् ुआ। पि‍मी देशों ने इसे भारत का ढोंग कहा। परन्तु भारत तो 1971 के युद्ध के दौरान सोिवयत संघ द्वारा िदए गए समथ्न का, बस, बदला चुका रहा था, िजसमें

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