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वह ीं दे शवासियों के सिए पैिे कम पड़ जाते है


जह ाँ अनेकत में एकत दिख ई है ज ती

वह ाँ अनेकत तो है परं तु एकत नह ं प ई ज ती


अब भी वक़्त है सही मायने में बनाओ

mera bharat mahaan  

my own written poem

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