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िहिन्दू धर्मर -संस्कृिति सम्पूणर मानवतिा के िलिए चनु ौतिी : जवाहिर लिालि नेहिरु यूिनविसर टी मे बहिु-चिचर ति व बहिु-प्रतिीिक्षिति मिहिषासरु की शहिादति िदवस का आयोजन हिुआ. बहिुजन मीिडिया (फे सबक ु ) पर िमलिे हिाइप के कारण सभागार प्रोग्राम स्टाटर हिोतिे-हिोतिे भर गया. बाद मे आये कई लिोगों को चार घंटे खड़े रहिकर इस आयोजन का उपभोग करना पड़ा. पूवर घोिषति वक्ताओ ं मे प्रो.िववेक कुमार, कं चा इलिैया और चंद्रभान प्रसाद को छोड़कर प्रायः सभी ने अपनी उपिस्थिति दजर कराई. डिॉ.तिलि ु सी राम, प्रेम कुमार मिण, रमिणका गप्तु ा, अनीतिा भारतिी, वामन मेश्राम, डिॉ.उिदति राज तिथिा अन्य वक्ताओ ं के साथि फे सबक ु िमत्र दसु ाधर् जी भी मंच पर उपिस्थिति रहिे. मंच संचालिन एआईबीएसएफ़ के राष्ट्रीय अध्यक्षि िजतिेन्द्र यादव तिथिा िवषय प्रवतिर न प्रेम कुमार मिण ने िकया. मिण के िवषय प्रवतिर न ने जहिां मिहिषासरु के प्रिति श्रोतिाओ ं मे नए िसरे से िजज्ञासा पैदा कर दी, वहिी जीतिेन्द्र यादव के सरलि मगर असाधर्ारण मंच संचालिन से वक्ता िवषयांतिर हिोने से बचतिे रहिे. इस अवसर पर फॉरवडिर प्रेस के मशहिूर सम्पादक प्रमोद रंजन के संपादन मे बिलिजन कल्चरलि मूवमेट द्वारा प्रकािशति पस्ु तिक "िकसकी पूजा कर रहिे हिै बहिुजन? मिहिषासरु : एक पनु पार ठ" पस्ु तिक का िवमोचन हिुआ. वक्ताओं के िलिए चचार का जो िवषय रखा गया थिा, वहि थिा- ‘िहिन्दू िमथिक और बहिुजन संस्कृिति’. वैसे तिो हिर वक्ता ने लिोगों को प्रभािवति िकया, िकन्तिु यहि प्रो. तिलि ु सी राम थिे िजनको समय सीमा पार हिोने के बावजूद श्रोतिाओ ं ने वक्तव्य जारी रखने के िलिए बाध्य िकया. अध्यक्षिीय भाषण डिॉ उिदति राज ने िदया. डिॉ.राज ने भूमडिं लिीकरण अिप्रय सच्चाई बयान कर इसके प्रिति व्यवहिािरक नज़रिरया अपनाने के िलिए बाध्य कर िदया. उन्हिोंने कहिा, ‘भूमडिं लिीकरण,उदारीकरण और िनजी करण एक सच्चाई हिै, िजसकी चपेट मे आने से रूस और चीन जैसे शिक्तशालिी देश भी खदु को नहिीं रोक पाए. ऐसे मे भारति मे जब हिम िनजी क्षिेत्र मे आरक्षिण की मांग उठातिे हिै तिो कई लिोग कहितिे हिै िक ऐसा करके हिम िनजीकरण का समथिर न करतिे हिै. यहि समाज के िहिति मे हिोगा िक हिम िनजीकरण की सचाई को कबूलिकर समाज के िहिति मे सहिी स्ट्रेटजी अपनाएँ.’ डिॉ.उिदतिराज के पूवर अिन्तिम वक्ता के रूप मे दसु ाधर् को अपनी बाति रखने के िलिए आमंित्रति िकया गया. समय ज्यादा हिो गया थिा. िलिहिाज़रा बहिुति कम समय मे अपनी बाति रखनी थिी.उन्हिोंने कहिा,’दिु नया के तिमाम समाज िवज्ञािनयों ने कहिा हिै िक यिद शोिषतिों को शासकों के वचर स्व को तिोड़ना हिै तिो उन्हिे उनकी सांस्कृितिक वचर स्वतिा को तिोड़तिे हिुए अपना वैकिल्पक सांस्कृितिक वचर स्व स्थिािपति करना हिोगा. ऐसा दिु नया के तिमाम देशो मे हिुआ हिै. जहिां तिक भारति का सवालि हिै यहि संघषर लिम्बे समय से चलिा आ रहिा हिै. यहि काम मध्य यगु के संतिों ने िकया, आधर्िु नक भारति मे फुलिे, शाहिूजी, पेिरयार, बाबासाहिेब आंबेडिकर ने यहि कायर अंजाम िदया. आज़राद भारति मे कांशीराम ने इसे बिलिष्ठतिा पूवरक अंजाम िदया. उनके अन्दोलिनों के फलिस्वरूप उत्तर भारति मे लिोग िहिन्दू-देवी-देवतिाओं की तिस्वीरे घरों से िनकालि कर नदी-तिालिाबों मे डिुबोने लिगे. बाद मे जब उनकी िशष्य मायावतिी जी के हिाथिों मे सत्ता आई उन्हिोंने उसका इस्तिेमालि वैकिल्पक सांस्कृितिक प्रतिीक खड़ा करने मे िकया. वैकिल्पक सांस्कृितिक प्रतिीक


खड़ा करने मे शायद मायावतिी जैसा सत्ता का इस्तिेमालि िवश्व इितिहिास मे िकसी ने नहिीं िकया. िविभन्न प्रान्तिों मे सउत्साहि मनाया जा रहिा मिहिषासरु का शहिादति िदवस िहिन्दू-धर्मर -संस्कृिति के िखलिाफ लिम्बे समय से चलि रहिी बहिुजन संस्कृिति की लिड़ाई की हिी एक कड़ी हिै. लिेिकन आज हिमे िवचार करने की जरुरति हिै िक लिम्बे समय से चलि रहिी इस लिड़ाई का पिरणाम क्या िनकलिा? मेरे ख्यालि से पिरणाम नहिीं के बराबर सामने आया. इसका सबूति िहिन्दू-धर्मर –संस्कृिति के प्रवतिर कों की वतिर मान पीढ़ी का शिक्त के स्रोतिों पर 80-85 प्रितिशति कब्ज़रा हिै. ऐसा इसिलिए हिुआ िक हिमने वैकिल्पक सांस्कृितिक लिड़ाई लिड़तिे समय िहिन्दू धर्मर संस्कृिति के पीछे उसके प्रवतिर कों के असलि लिक्ष्य को ध्यान मे नहिीं रखा. इसके प्रवतिर क िवदेशी आयर थिे. दिु नया मे हिर कालि मे हिी िवजेतिाओं का असलि लिक्ष्य िविजति देश के संपदा-संसाधर्नों पर कब्ज़रा जमाना तिथिा पराधर्ीन बनाये गए लिोगों के सस्तिे श्रम का शोषण करना रहिा हिै. िहिन्दू धर्मर दरअसलि वणर -व्यवस्थिा आधर्ािरति वणर -धर्मर हिै. वणर -धर्मर मे जीवन का चरम लिक्ष्य मोक्षि अिजर ति करने के िलिए िविभन्न वणों को कमर िनिदर ष्ट िकये गए. ये कमर हिी धर्मर थिे, िजनका िनष्ठापूवरक अनपु ालिन करतिे हिुए मोक्षि प्राप्त िकया जा सकतिा थिा. इसमे ब्राह्मण का कमर इंटेलिेक्चअ ु लि प्रोफे शन अथिार ति अध्ययन-अध्यापन, पौरोिहित्य और राज्य सञ्चालिन मे मंत्रणादान, क्षिित्रय का भू-स्वािमत्व, राज्य और सैन्य सञ्चालिन तिथिा वैश्य का कायर क्या हिो सकतिा हिै, आप को बतिलिाने की जरुरति हिी नहिीं. इस व्यवस्थिा मे बहिुजनों को कुछ नहिीं िमलिा, िसवाय तिीन उच्चतिर वणों की सेवा के . वहि भी पािरश्रिमक रिहिति. तिो िमत्रों हिमारा िहिन्दू धर्मर संस्कृिति के िखलिाफ संघषर अबतिक इसिलिए व्यथिर रहिा क्योंिक हिमने इस बाति को ध्यान मे रखा हिी नहिीं िक इसके पीछे आयों का मख्ु य लिक्ष्य िचरस्थिाई तिौर पर शिक्त के स्रोतिों पर अपनी भावी पीढ़ी का वचर स्व रखना रखना थिा. यिद हिम समझे हिोतिे तिो उनका वचर स्व तिोड़ने की कोिशश िकये हिोतिे. तिब आज की भांिति आयों की मौजूदा पीढ़ी का शिक्त के स्रोतिों पर 80-85 % कब्ज़रा नहिीं हिोतिा. आज की तिारीख मे पूरे िवश्व मे हिी िकसी भी परंपरागति सिु वधर्ा व शिक्तसंपन्न तिबके का िकसी भी डिेमोके िटक कं ट्री मे शिक्त के स्रोतिों पर 80-85 %कब्ज़रा नहिीं हिै. ऐसे मे िहिन्दू-धर्मर -संस्कृिति न िसफर बहिुजन बिल्क सम्पूणर मानवतिा के िलिए हिी चनु ौतिी हिै. अतिः हिमे िहिन्दू धर्मर –संस्कृिति के पीछे इसके प्रवतिर कों के िनिहिति लिक्ष्य को ध्यान मे रखतिे हिुए हिी आगे की लिड़ाई की रणनीिति बनानी हिोगी, यहि कहिकर उन्हिोंने अपने वक्तव्य की समािप्त की . आयोजन बहिुति हिी सफलि रहिा, यहि कायर कम की समािप्त बाद आयोजकों के चेहिरे पर िखंची मस्ु कान की लिम्बी लिकीर बतिा रहिी थिी. आयोजन मे शािमलि श्रोतिाओ ं और अितििथियों के चेहिरे पर भी संतििु ष्ट का गहिरा भाव थिा जो बतिा रहिा थिा िक अगलिे सालि आयोजक शायद और बड़े पैमाने पर इसका आयोजन करे.

हिन्दू धर्म-संस्कृति सम्पूर्ण मानवता के लिए चुनौती  

जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी में बहु-चर्चित व बहु-प्रतीक्षित महिषासुर की शहादत दिवस के आयोजन पर विभिन्न वक्ताओं के विचार, विशेषतौर पर श्री एच...