अंग माधुरी, बर्ष-४७, अंक-३ - ४

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पमिका नै जन - आंदोलन

दाम:३० रू. अंमिका भार्ा की प्रथम मामसक पमिका बर्ष : ४७ अंक : ०३ - ०४ संस्थापक संपादक : डॉ. नरेश पाण्डेय ‘र्कोर’

फरवरी - मार्ष २०१६

संपादक : कं दन अममताभ


पमिका नै जन - आंदोलन

अंमिका भार्ा की प्रथम मामसक पमिका बर्ष : ४७, अंक : ०३- ०४, फरवरी-मार्ष-१६

संस्थापक संपादक

डॉ. नरेश पाण्डेय ‘चकोर’ संपादक

कुं दन अमिताभ

अुंग िाधरी लेली अुंमगका भाषा िुं ं॑ मलखलऽ िौमलक आरो अप्रकामसत रचना आिुंमित छै । साफसाफ मलखलऽ या टुंमकत रचना कं॑ सुंपादकीय पता पर भेमजयै । नीर्ं ं॑ देलऽ िेलऽ कोय भी तरीका स ं॑ रर्ना भेज ं॑ सकै मियै : १. कृमतदेि फॉन्ट या यूमनकोड फॉन्ट िुं ं॑ टाइप करलऽ रचना के सॉफ्ट कॉपी ई िेल सुं ं॑ भेजऽ । २. साफ - साफ मलखलऽ या टुंमकत रचना के बम़ियाुं फोटो खींची कं॑ िाट् सएप नुंबर पर भेजऽ या ई िेल स ं॑ भेजऽ । ३. साफ-साफ मलखलऽ या टुंमकत रचना डाक स ं॑ भेजऽ । ४. रचना सथुं ं॑ आपनऽ नाि, पता, फोटो, िोबाईल नुं., ई-िेल पता, अद्यतन सुंमिप्त पररचय जरूर भेजऽ ।

संपादकीय संपकष

सहायक संपादक

मिधशेखर पाण्डेय प्रकाशक

श्रीिती द्रौपदी मदवयाुंश शेखर प्रकाशन, 59, गा​ाँधीनगर, बोररुंग रोड (पमि​ि), पटना - 800 001 , मबहार, भारत

CH-1 / 24, कें द्रीय मिहार, सेक्टर - 11, खारघर, निी िुंबई– 410 210 , िहाराष्ट्र, भारत

मोबाईल / वाट् सएप नं. : 09869478444 ई मेल : kundan.amitabh@angika.com ANG MADHURI

मो. 8002099017 / 9430919959

A Monthly Magazine of Angika Language & Literatures in Angika Language

मैनमे जंि एमडटर

सहयोि रामश

शमशशेखर पाण्डेय मिधशेखर पाण्डेय इन्दशेखर पाण्डेय डॉ.सररता सहािनी पमिका रूपांकन

पमिका लोगो रूपाुंकन: आनुंदी प्रसाद बादल आिरण कला ि सज्जा: िाधरी अमिताभ

एक अंक : 15 रू. बामर्षक: 150 रू. (वयमि) , 750 रू. (सुंस्था, पस्तकालय) आजीवन (१० साल ) : 1200 रू. (वयमि), : 7500 रू. (सुंस्था, पस्तकालय) संरक्षक (१० साल ) : 10000 रू. (वयमि) मवमशष्ट संरक्षक (१० साल ) : 20000 रू. (वयमि) पी.डी.एफ. (ईमेल द्वारा) - बामर्षक : (वयमि): 150 रू. (भारत) , 1500 रू. (मवदेश), सुंस्था: 4500 रू. (मवदेश)

पमिका सज्जा ि रूपाुंकन,शब्द सुंयोजन: कुं दन अमिताभ श्रीिती द्रौपदी मदवयाुंश द्वारा िमद्रत आरू शेखर सब्भे भगतान चेक/ बैंकड्राफ्ट द्वारा ‘श्रीिती द्रौपदी मदवयाुंश’ के प्रकाशन, ५९, गा​ाँधीनगर, बोररुंग रोड (पमि​ि), पटना नाि सं॑ प्रकाशक के पता पर भेजना चामहयऽ । १ स ं॑ प्रकामशत

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अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३ - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


इ अक ं म ं॑ संपादकीय आधा आबादी कं॑ पूरा आजादी कब ं॑ / कुं दन अमिताभ प्राचीन अुंमगका सामहत्य, बासी-टटका, गब्भा, िाद-अनिाद और लोग / कुं दन अमिताभ

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पाठक मंर् : मेल-ईमेल हमिूुं चाहै मछयै मक अुंग िाधरी एक मिचार िुंच बनी जाय / राके श पाठक 12 प्रसन्नता हुई यह जानकर मक ‘अुंग िाधरी’ प्रकामशत होती रहेगी / डॉ. अरूणेन्द्र भारती 13 अुंग िाधरी के नयका अुंक आकषष क आरो अद्धभत / सधीर किार ‘प्रोग्रािर’ 13 ‘चकोर स्िमृ त अुंक’ अुंग सपूत श्री चकोर को अमद्वतीय श्रद्धाुंजमल / डॉ. अिरेन्द्र 14 चकोर स्िमृ त अुंक बहुत ही हृदय स्पशी / डॉ. मशवनुंदन लाल 14 अुंक का फॉन्ट साईज भी हि बजगों के मलए बडा आरािदायक / डॉ. रािनुंदन मवकल 15 अुंग िाधरी का प्रकाशन िुंदनीय ि चकोरजी को सच्ची श्रद्धाुंजमल / पण्डरीक रत्न 15

प्रार्ीन अंमिका सामहत्य दोहाकोश – गीमत : षट् दशष न-खुंडन / मसद्ध सरहपाद (सरह)

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वाद - अनवाद दोहाकोश – गीमत : षट् दशष न-खुंडन / ( महन्दी अनवाद ) / पुं. राहुल साुंकृत्यायन 18

कहानी सिधी / डॉ. रािनुंदन मवकल चनिमतया फूआ / राके श पाठक

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कमवता अब ना रहै महय धीर / डॉ. मशवनुंदन लाल बसुंत बडी दूर छै / प्रो. (डॉ.) लखन लाल मसुंह ‘आरोही’ होली / डॉ. रािनुंदन मवकल अुंमगका गीत / सधीर किार प्रोग्रािर

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बासी - टटका स्त्री के िुंमदर प्रिेश / राके श पाठक

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लोि उलूपी झा / कुं दन अमिताभ

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िब्भा मबगडी गेल्हौं बेटा / लालेन्द्र किार ललन

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िप - सरक्का जीका आरू मिलायतीराि के रऽ होलै आिना–सािना / डॉ. लमलत लामलत्य 36

डॉ. र्कोर स्ममृ त : कावयांजमल (ितांक स ं॑ आिू) चकोर जी के प्रमत दो शब्द / अमभ. अुंजनी किार ‘शिा​ा ’ नया चाुंद / डॉ. रािनुंदन मवकल डॉ. चकोर : श्रद्धाुंजमल गीत / ब्रह्मदेव मसुंह ‘लोके श’

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डॉ. र्कोर स्ममृ त : संस्मरण (ितांक स ं॑ आिू) चकोर जी िहान मिभूमत छे ला/ डॉ. अरूणेन्द्र भारती

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पस्तक-पमिका ममललै हलर्ल

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देस के रऽ मिमभन्न भागऽ िुं ं॑ सिारोहपूिषक िनैलऽ गेलै डॉ. 'चकोर' जयुंती सरकार सुं ं॑ करलऽ गेलै अमिलुंब अकादिी कायाष लय उपलब्ध कराबै के िा​ाँग मबहार अुंमगका अकादिी कं॑ मिललै कायाष लय भिन, जमल्दये होतै उदघाटन ! दूरदशष न स ं॑ अुंमगका भासा िुं ं॑ सीधा प्रसारन लेली भेजलऽ गेलै प्रस्ताि पटना ि ं॑ बनतै अुंमगका भिन गौति सिन ‘अुंग रत्न’ सुं ं॑ समिामनत फलिररया ि ं॑ धूिधाि सुं ं॑ िनैलऽ गेलै राि मि​िाह उत्सि

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- अंि माधरी में मवज्ञापन की दरें (रू.) पृष्ठ अुंमति किर पष्ठृ —परू ा अुंदर के किर पष्ठृ —पूरा अुंदर के किर पष्ठृ —आधा अुंदर के पष्ठृ —पूरा अुंदर के पष्ठृ —आधा अुंदर के पष्ठृ —एक चौथाई

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रंिीन 10000 8000 6000 5000 4000 3000

श्वेत-श्याम 8000 6000 5000 4000 3000 2000

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- संपादकीय -

आधा आबादी कं॑ पूरा आजादी कब ं॑ अंतराष स्रीय िमहला मदिस के लगीच रहला सुं ं॑ िमहला हक सुंबधुं ी चरचा के जोर पकडना लामजिी ही छै । िीमडया िुं ं॑ प़िी-सनी कं॑ आरू आि जीिन िुं ं॑ देखी –सनी कं॑ खसनिा एहसास होय छै आरू ऐन्हऽ लौकै छै मक नै खाली भारत ि ं॑ बमल्क पूरे दमनया िुं ं॑ िमहला के हालत िुं ं॑ बडा सधार होय रहलऽ छै आरू िमहला ससिीकरन के रफ्तार बडा तेज छै । ऐन्हऽ लगै छै जे िमहला मसनी के रऽ महस्सा िुं ं॑ मनरनायक ताकत आबी रहलऽ छै । िमहला मसनी हर िू िेि ि ं॑ सफलता के परचि फहराय रहलऽ छै जेकरा िुं ं॑ अखनी तलक िरद मसनी के कं दन अममताभ आमधपत्य छे लै । ई कछ हद तक ही सही छै । गौर करला सुं ं॑ पता चलै छै मक प़िाय-मलखाय, स्िास्​्य, रोजगार, सरिा सुं ं॑ ल ं॑ करी कं॑ आिजीिन के रऽ छोटऽ–छोटऽ साधन, सहुमलयत, अमधकार के स्तर प ं॑ िरद आरू जनानी के बीच बहुत बडऽ फासला छै । िरद बाहुल्य सिाज के तरफ सुं ं॑ मनत सभ्य सिाज आरू सभ्य जीिन सैली के रऽ पररभासा ग़िलऽ जाय छै । आरो ओह ं॑ पररभासा कं॑ औरत के चररि आरू मजुंदगी के रऽ ऊपर लागू करै के बलजोबरी करलऽ जाय छै । िैन्हऽ सभ्य सिाज जेकरा िुं ं॑ जनानी मसनी खली कं॑ मजय ं॑ सकं॑ आज भी एक सपना ही छै । सिाज ि ं॑ आपनऽ मस्थमत बनाबै रखै लेली भी जनानी मसनी कं॑ रोज ब रोज एगो अघोमसत लडाय लडै ल ं॑ पडै छै , हर आपनऽ - परायऽ सुं ं॑ । रोज-रोज के घटना ई एहसास मदलाबै ल ं॑ काफी छै मक बाहर त ं॑ बाहर आपनऽ घऽर िुं ं॑ भी िमहला मसनी असरमित िहसूस करै छै । घोर अिानिीय अत्याचार कं॑ सहतुं ं॑ हुअ ं॑ पेट िुं ं॑ पली रहलऽ बच्ची के गभष कं॑ मगराबै प ं॑ िजबूर होय ल ं॑ पडै छै । घऽर, दफ्तर सुं ं॑ ल ं॑ कं॑ खेत-खिार प,ं॑ मसनेिाघरऽ सुं ं॑ ल ं॑ कं॑ स्कूलकॉलेज तक िुं ं॑ असलील हरकत आरू सारीररक हिला तक के मसकार होय ल ं॑ पडै

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३ - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६ )

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जहा​ाँ तलक आपनऽ देस के बात छै , प्रधानिुंिी द्वारा घोमसत ‘बेटी बचाओ – बेटी प़िाओ’ कायष क्रि िमहला ससिीकरन के रऽ मदसा िुं ं॑ उठैलऽ एगो बडऽ िहत्िपूनष कदि छै । िोन्हैं मबहार राज्य िुं ं॑ लडकी मसनी कं॑ इसकूल भेजै लेली साईमकल, भोजन ि अन्य साधन उपलब्ध कराय कं॑ देलऽ जाय रहलऽ प्रोत्साहन भी कामबले तारीफ छै । मफर भी एगो बात सिझ सुं ं॑ परे छै मक िमहला ससिीकरन के लुंबा-चौडा बात करै िाला राजनीमतक दल मसनी िमहला मसनी कं॑ ल ं॑ कं॑ जों तमनयो टा गुंभीर छै , त ं॑ िमहला आरिन मिधेयक कं॑ कानूनी दरजा मदलाय करी कं॑ लागू कराय िुं ं॑ एतना मिलुंब कै हने होय रहलऽ छै ? ई सही छै मक िमहला आरिन मिधेयक के लागू होला स ं॑ जादे िमहला मसनी कं॑ राजनीमत सुं ं॑ जडै के सहजता सुं ं॑ िौका मिलतै । जेकरा सुं ं॑ सिाज िुं ं॑ बहुत बडऽ बदलाि के अपेिा छै । जहा​ाँ तलक राजनीमत िुं ं॑ िमहला मसनी के भागीदारी के बात छै त ं॑ दमनया के रऽ बाकी देसऽ के तलना िुं ं॑ भारत लगातार मपछडतुं ं॑ जाय रहलऽ छै । सुंसद िुं ं॑ िमहला मसनी के सुंख्या के िािला िुं ं॑ भारत सन २०१४ ई. िुं ं॑ ११७ िा​ाँ स्थान पर रहै जबमक आजकऽ तारीख िुं ं॑ नीचुं ं॑ मगरी कं॑ ई १४४ िा​ाँ स्थान प ं॑ पहुचाँ ी गेलऽ छै । ऐसनऽ तब ं॑ छै जब ं॑ अखनकऽ लोकसभा िुं ं॑ िमहला साुंसदऽ के सुंख्या अखनी तलक के राजनीमतक इमतहास िुं ं॑ सबसुं ं॑ जादा छै । लोकसभा िुं ं॑ िमहला साुंसद के रऽ महस्सा १२ फीसदी छै , जबमक राजसभा िुं ं॑ ई महस्सा १२.८ फीसदी छै । जब ं॑ मक दमनया भर िुं ं॑ िमहला भागीदारी के रऽ ई औसत २२ छै । भारतीय राजनीमत िुं ं॑ िमहला के रऽ भागीदारी के नकारात्िक पहलू ई छै मक राजनीमत िुं ं॑ िुंसिाद आरू िोट पॉमलमटक्स के महसाब स ं॑ ही अखनी तलक ई िगष कं॑ भागीदारी मिललऽ छै नै मक कोनो सरोकार के तहत । आय भी आपनऽ सिाज िुं ं॑ िमहला के रऽ कोनो स्ितुंि आिाज नै रहला सुं ं॑ जादातर राजनीमतक दल िमहला िद्दा प ं॑ जना-तेना बात करी कं॑ खाली खानापूती ही करै छै । नीमतश किार न ं॑ स्थानीय पुंचायत ि मनकाय के चनािऽ िुं ं॑ जनानी मसनी कं॑ पचास फीसदी आरिन द ं॑ करी कं॑ एगो ठोस रस्ता जरूर मदखैन ं॑ छै । जेकरा स ं॑ िमहला नेतत्ृ ि के रऽ एगो नया फौज तैयार होतै । ऐन्हऽ फौज जेकरा मक जिीनी हकीकत सुं ं॑ रूबरू होय कं॑ बलुंद हौसला के साथ अपनऽ नेतत्ृ ि ि​िता िुं ं॑ पारुंगत होय कं॑ रास्रीय आरू राज्यीय स्तर प ं॑ आगू आबै के िौका मिलतै । जिीनी हालत तमभये बदलतै जब ं॑ लोकसभा, राजसभा, मिधानसभा, मिधान पररसद, पुंचायत आरू हर स्थानीय मनकाय के 6

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०3 - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


साथ-साथ कानून कं॑ िूतष रूप दै िाला सुंस्था मसनी िुं ं॑ िमहला मसनी के भागीदारी पचास फीसदी तलक समनमस्चत हुअ ं॑ । िूिेन एिपॉिरिेंट यामन िमहला ससमिकरन प ं॑ िहृ त स्तर प ं॑ काि करी चकलऽ ‘गेट्स फाउुंडेसन’ के रऽ ‘िेमलुंडा गेट्स’ के िानना छै मक सिाज िुं ं॑ फै ललऽ करीमत सब ही िमहला ससमिकरन के रऽ रस्ता िुं ं॑ सबसुं ं॑ बडऽ बाधा छे कै । िमहला ससमिकरन के रऽ अमभयान िुं ं॑ िरद मसनी कं॑ साथ रखना जरूरी छै । िमहला सब के रऽ हालत िुं ं॑ सधार तमभये लानलऽ जाब ं॑ सकं॑ छै जब ं॑ मक कोनो िमहला के पररिार के हर परूस के रऽ िानमसकता कं॑ बदलै िुं ं॑ काियाबी मिली जाय । िेमलुंडा गेट्स के िानना छै मक ससि िमहला मसनी सिाज कं॑ बदल ं॑ सकै छै । लेमकन ससमिकरन खाली िमहला के रऽ भरोसे नै हुअ ं॑ सकै छै । अनेक सिाजऽ िुं ं॑ िमहला के रऽ रस्ता के बाधा बनै िाला सािामजक करीमत के रऽ सुंरिक िरद ही होय छै । अपनऽ जीिन के रऽ रोजिराष के पहलू प ं॑ भी िमहला के रऽ कोय मनयुंिन नै रहै छै । यहा​ाँ तलक मक सरीर कं॑ स्िस्थ रखै िास्तें दू बार गभाष धारन के बीच अुंतर रखै प ं॑ भी ओकरऽ कोय जोर नै । पमत तय करतै मक पररिार के ना चलतै । जरा सा भी ितभेद होला प ं॑ गाली -गलौज, िार-मपटाई के मसलमसला आरुंभ होय जाय छै । िमहला के ससि होला स ं॑ ओकरा उपर कोनो तरह के बलजोबरी होय के सुंभािना कि रहै छै । जामहर छै िमहला मसनी कं॑ ससि बनाबै लेली ओकरा उमचत समिान देना आरू ओकरऽ अमधकार के रिा करना जरूरी छै । तमभये ओकरा िुं ं॑ आत्िमिस्िास पैदा हुअ ं॑ सकतै आरो उमचत नेतत्ृ ि ि​िता पैदा हुअ ं॑ सकतै । िुंबई िुं ं॑ लगभग दस साल पहलुं ं॑ प्रारुंभ करलऽ गेलऽ ‘जेंडर इक्िमलटी िूि​िेंट इन स्कूल्स ’ ई बात के रऽ बहुत बडऽ उदाहरन छे कै मक जब-ं॑ जब ं॑ लडका-लडकी मसनी आपनऽ उपर थोपलऽ गेलऽ गलत सिामजक प्रथा के मिली कं॑ मिरोध करै छै त ं॑ के तना बडऽ बदलाि आबी जाय छै । लडकी के रऽ सादी के रऽ की उिर होना चामहयऽ, घऽर के कािऽ िुं ं॑ िरदुं ं॑ हाथ बाँटाब ं॑ या नै बाँटाब,ं॑ घरेलू महुंसा के रऽ प्रमतरोध के ना करना चामहयऽ, ऐन्हऽ बहुत तरह के िद्दा प ं॑ ओकरा मसनी के बीच जागरूकता ऐलऽ छै । ई उपलमब्ध तब ं॑ आरू बडऽ लग ं॑ लागै छै जब ं॑ अपना सब ई कडिा हकीकत सुं ं॑ रूबरू होय मछयै मक भारत जैसनऽ देस िुं ं॑ ४३ फीसदी यिक के ई िानना छै मक कभी-कभी िमहला मसनी के मपटाई होना ही चामहयऽ ।

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यहा​ाँ तलक मक प्रायः सास ि ननद के रूप िुं ं॑ एगो िमहला भी खद दोसरऽ िमहला के आजादी कं॑ मछनी लै लेली तत्पर होय जाय छै । दोसरा यहा​ाँ सुं ं॑ आपनऽ घऽर िुं ं॑ ऐलऽ बहू कं॑ तरह-तरह सुं ं॑ प्रतामडत करना ओकरऽ स्िभाि बनी जाय छै । बहू कं॑ िानमसक आरू सारीररक रूप स ं॑ जलील करना, ओकरा प ं॑ दोसारोपन करी कं॑ गलाि जैसनऽ मजुंदगी मजयै प ं॑ िजबूर करना कोनो-कोनो सास के सहज स्िभाि बनी जाय छै , जे पस्त दर पस्त कब ं॑ पाररिाररक सुंस्कार के रऽ महस्सा बनी जाय छै , पता भी नै चल ं॑ सकं॑ छै । घूिी–मफरी कं॑ अहि सिाल अनत्तररत ही रही जाय छै मक सिाज कं॑ अपेिाकृत जादे िानिीय आरू वयिहाररक बनाबै लेली िमहला के रऽ हर िेि िुं ं॑ सिमचत भागीदारी ि समिान द ं॑ कं॑ ससि बनाबै के िोकाि हामसल करना आमखर के समनमस्चत करतै ? अपना सब हर बात लेली सरकार प ं॑ ही कै न्हें मनभष र होय जाय मछयै ? मक खाली सरकार के चाहला-करला सुं ं॑ ही सब सािान्य होय जैतै ? ऐन्हऽ सोचना िास्ति िुं ं॑ सिस्या के रऽ िूल मनदान सुं ं॑ पलायन के रऽ िनोिमृ त्त कं॑ ही पररलमित करै छै । जरूरत छै खद आगे आबै के । अपना सब कं॑ हर मस्थमत िुं ं॑ ऐसनऽ िाहौल बनाना चामहयऽ मक हर िमहला कं॑ िरद सदृस सिान रुप स ं॑ सािामजक, धामिष क आरू सािष जमनक गमतमिमध िुं ं॑ भाग लै के अिसर मिल,ं॑ सिाज िुं ं॑ बराबर के सािामजक मस्थमत ि ं॑ रह,ं॑ मसिा के रऽ सिान अिसर मिल,ं॑ सिान रोजगार के रऽ अिसर मिल,ं॑ सिान मित्तीय ि आमथष क मिकल्प के रऽ अमधकार, सिान सािामजक आरू आमथष क न्याय के रऽ अमधकार, सरमित आरू आरािदायक काि के िाहौल मिल,ं॑ समिान आरू गररिा के साथ आपनऽ इच्छा अनरूप जीिन मजअ ं॑ सकं॑ । एगो िरद के रूप िुं ं॑ आरू एक िमहला के रूप ि ं॑ भी अपना सब के प्रयास ई होना चामहयऽ मक आपनऽ आचरन, वयिहार आरू िापदुंड ऐन्हऽ राखाँऽ जेकरा सुं ं॑ घऽर ि बाहर के हर िमहला कं॑ एक सचिच के आजाद इुंसान ऐसनऽ मजुंदगी मजऐ के अिसर मिल ं॑ । ऐकरा स ं॑ अुंततः हर पररिार, सिाज आरू देस के ही भला छै ।

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अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०3 - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


प्रार्ीन अंमिका सामहत्य, बासी-टटका, िब्भा, वाद-अनवाद और ‘लोि’ अुंग िाधरी के मदसुंबर – 2015 – जनिरी – 2016 अुंक के मलए मिले आपके उत्साहजनक ि हृदय-स्पशी प्रमतसाद हेत हि आप सभी सधी पाठकों ि लेखकों के प्रमत आभार ि कृतज्ञता प्रकट करते हैं । िस्ततः अुंग िाधरी ि डॉ. नरेश पाण्डेय चकोर के प्रमत आपलोगों के असीि स्नेह ि तत्परता से हिें अपनी उत्कृष्ट रचनायें प्रेमषत करने का ही यह नतीजा रहा मक मपछला अुंक आपकी इच्छा के अनरूप सुंग्रहणीय बन पडा । कछ मिद्वानों के ित िें अुंग िाधरी के सुंपादकीय महन्दी िें ना होकर अुंमगका भाषा िें ही हों । तो कछ का कहना है मक यह महन्दी िें ही होना चामहए । िैंने इस सुंबुंध िें अुंग िाधरी के प्रकाशन िें जारी परुंपरा को एक मदशा – मनदेशक िानते हुए इसे अुंमगका के साथ महन्दी िें भी जारी रखने का मनणष य मलया है । जैसा मक हि सभी जानते हैं मक अुंग िाधरी के सुंस्थापक सुंपादक डॉ. नरेश पाण्डेय चकोर अुंमगका भाषा की इस पमिका िें महन्दी िें ही सुंपादकीय मलखा करते थे । यह ना के िल उनकी बमल्क सुंपूणष अुंगिामसयों के राष्ट्रिादी और सिन्ियिादी सोच और मिचारों को पररलमित करता है । कई मिद्वानों के नजर िें अुंग िाधरी को िख्यतः अुंमगका भाषा की एक मिशद्ध सामहमत्यक पमिका के कलेिर िें ही प्रकामशत होनी चामहए । िैं उनकी बातों से सहिमत प्रकट करते हुए बस इतना जोडना चाहूगाँ ा मक एक मिशद्ध सामहमत्यक पमिका के रुप िें भी सिय के उन िहत्िपूणष सिालों से भी इसे रूबरू होते रहना होगा जो सिाज को और अुंततः सामहत्य को प्रभामित करता है । एक मिशद्ध सामहमत्यक पमिका के स्िरूप िें इसकी साथष कता तभी बनी रहेगी जब यह उन िहत्िपूणष सिालों के जबाब ढू़िने हेत आगे आकर हस्तिेप करे । लोक सामहत्य, लोक कला, गीत -सुंगीत और लोक सुंस्कृमत के अन्य उपादानों की सिग्रता अगर सामहत्य स्िरूप िें प्रकट हो सके तभी अुंमगका भाषा सामहत्य की इस पमिका के प्रकाशन का िकसद पूरा हो पाएगा । इस अुंक से हि कछ और स्थाई - स्तुंभ का प्रकाशन प्रारुंभ कर रहे हैं । मजनिें ‘प्रार्ीन अंमिका सामहत्य’, ‘बासी-टटका’, ‘िब्भा’, ‘वाद-अनवाद’ और ‘लोि’ िख्य हैं । आने िाले अुंकों िें ‘साक्षात्कार’, ‘समीक्षा’ ‘यािा वृतांत’, ‘आत्म-अध्यात्म’, ‘वयथा-कथा’ आमद कछ अन्य स्थाई-स्तुंभ भी शरू मकये जाएाँगें । इन स्तुंभों के मलये आपकी स्तरीय रचनायें सादर आिुंमित हैं । ‘प्रार्ीन अंमिका सामहत्य’ अुंतगष त हि आठिीं सदी के अुंमगका के आमद कमि सरह (या सरहपा) से लेकर उन्नीसिीं सदी तक के अुंमगका कमियों / रचनाकारों की रचनाओुं

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३ - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)

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को प्रकामशत करने का प्रयास करेंगे । िहीं ‘बासी-टटका’ िें श्री राके श पाठक की सि-सािमयक मिषयों पर आधाररत आलेखों को मनयमित रूप से प्रकामशत मकया जाएगा । ‘िब्भा’ िें अुंग िाधरी िें पहली बार छप रहे अुंमगका भाषा के एकदि नये सामहत्यकारों की गद्य और पद्य रचनाओुं को स्थान मिलेगा । ‘वाद-अनवाद’ िें अनमदत रचनायें छपेंगीं जो या तो अन्य भाषाओुं की रचनाओुं का अुंमगका िें अनिाद होगा या मफर अुंमगका भाषा की रचनाओुं का अन्य भाषाओुं िें अनिाद होगा । अुंमगका वयुंग्य सामहत्य के मलए ‘िप-सरक्का’ स्थाई – स्तुंभ मजसका प्रकाशन मपछले अुंक से प्रारुंभ हुआ, मनयमित जारी रहेगा । ‘पि-पष्ट्प’ अब ‘पाठक मंर् : मेल-ईमेल’ के रूप िें अितररत होगा मजसिें पाठकों द्वारा डाक, ईिेल, एस.एि.एस, िाट् सएप आमद द्वारा भेजे गए प्रमतमक्रयाओुं को जगह मदया जाएगा । ‘लोि’ िें चमचष त चेहरों की जानकारी और उपलमब्धयों पर सुंमिप्त चचाष करेंगें । कहानी, कमिता, सुंस्िरण, सिीिात्िक आलेख, अनिाद, सिसामियक मिषयों पर आधाररत आलेख जैसी रचनाओुं के अलािा भी अगर आप चाहते हैं मक अुंग िाधरी िें सामहत्य की मकसी मिधा पर मकसी स्थाई-स्तुंभ की शरूआत कर मनयमित रूप से उसके मलए आलेख मलखें तो इसके मलए आपका हामदष क स्िागत है । आपके नाि से स्थाई-स्तुंभ प्रारुंभ करने िे हिें अपार खशी प्राप्त होगी । बहरहाल मैं श्री राके श पाठक जी का शुक्रगुजार हूँ कक उन्होंने अंग माधुरी में अंकगका के स्थाई-स्तंभ (बासी-टटका) कनयकमत रूप से कलखने के मेरे आग्रह को आगे बढ़कर बडे गमम जोशी व उत्साह से स्वीकारा । वे लगभग पूर्म कवकलांगता की कस्थकत में रहते हुए भी ऐसा जज्बा किखा रहे हैं जो अप्रकतम व अनुकरर्ीय तो है ही साथ ही यह भी िशाम ता है कक अंकगका भाषा की सेवा के कलए वे ककतने प्रकतबद्ध हैं और इसके कलए उनमें ककतना समपम र् और लगन है । कबहार के जमुई कजले के बेलछी गाूँव में २ जनवरी १९५० ई. को जन्मे श्री पाठक ने बी.ए. तक की कशक्षा ग्रहर् की है । बचपन से पोकलयो के कशकार है. । शुरू में एक पैर से चल सकते थे पर कपछले कई बषों से वे चलने में असमथम हैं और व्हील चेयर ही उनका एक मात्र चलने का जररया है । ट् यूशन व लेखन कर अथोपाजम न करते हैं । श्री राके श पाठक अंकगका साकहत्य जगत के जाने-पहचाने साकहत्यकारों में से हैं । कवकभन्न कहंिी और अंकगका पत्र-पकत्रकाओं में तथा असम के 10

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कहन्िी अखबारों में वे बराबर ही छपते रहते हैं । इन्होंने कहन्िी, अंकगका के अलावा बंगला, असकमया और अूँग्रेजी साकहत्य का गहरा अध्ययन ककया है । अंकगका में उनकी कई ककताबें प्रकाकशत हुई हैं । वे कई सम्मान से सम्माकनत हुये हैं, कजनमें प्रमुख है—बषम २०१५ ई. का लाला लाजपत राय राष्ट्रीय कशखर सम्मान । आशा है स्थाई-स्तंभ , बासी-टटका के माध्यम से अंकगका साकहत्य मे एक नये आयाम का सज ृ न करेंगें । भगवान उन्हें स्वस्थ रखते हुए िीर्ाम यु करें, हमारी ऐसी ही कामना है । अंग माधुरी पररवार उनके प्रकत हाकिम क आभार और कृतज्ञता प्रकट करता है । ‘गप-सरक्का’ में इस बार कहंिी के प्रख्यात व्यंग्य रचनाकारों में से एक, नेशनल बुक रस्ट, इंकिया के संपािक िॉ. लकलत लाकलत्य जी की अंकगका में अनुकित रचना छप रही है । मैं उनका शुक्रगुजार हूँ कक उन्होंने अपनी रचना का अंकगका में अनुवाि करने की स्वीकृकत िी । अंग माधुरी पररवार उनके इस साधुवाि के कलए उनके प्रकत हाकिम क आभार व कृतज्ञता प्रकट करता है । िेश कीसौ कामयाब मकहलाओं में अंग क्षेत्र की मंजूषा लोककला कलाकार श्रीमती उलूपी झा के चुने जाने पर अंग माधुरी की हाकिम क बधाई और शुभकामनायें । इससे कनिःसंिेह मंजूषा कला को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान हाकसल हुई है । िैं अपने सुंपादन सहयोगी ि िैनेमजुंग एमडटर, श्री मिधशेखर पाण्डेय जी के प्रमत भी इस बात के मलए मिशेष रूप से आभार प्रकट करता हूाँ मक िे अुंग िाधरी के सिय पर प्रकाशन के मलए हिेशा ही उत्सक ि प्रयासरत रहते हैं । िैं उन सभी सामहमत्यक सधीजनों का पनः शमक्रया अदा करना चाहता हूाँ और उनके प्रमत हामदष क आभार प्रकट करना चाहता हूाँ मजनके रचनात्िक सहयोग और अुंमगका को आगे ले जाने की अदमय इच्छा शमि की िजह से पमिका का प्रकाशन सुंभि हो पाता है । कछ अपररहायष कारणों से अुंग िाधरी के हाल के कछ िहीनों के अुंक आपके सि​ि कछ मिलुंब से ही पहुचाँ ेंगें । हिारी कोमशश है मक जलाई िाह से अुंग िाधरी आपके हाथों िें सिय से पहुचाँ जाए । आपकी रचनाओुं एिुं प्रमतमक्रयाओुं का हिें सदैि इुंतजार रहता है । शभकािनाओुं समहत । कं दन अममताभ

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पाठक मंर् : मेल-ईमेल हममूं र्ाहै मियै मक अंि माधरी एक मवर्ार मंर् बनी जाय ‘अंग िाधरी’ कं॑ जारी रखै लेली बहुत-बहुत धन्यिाद । ई मचट्ठी साथुं ं॑ हमिुं ं॑ दू टा अुंमगका कहानी, कच्छू अुंमगका कमिता आरो चार टा अुंमगका आलेख भेजी रहलऽ मछयै । हमिुं ं॑ चाहै मछयै मक अुंग िाधरी खाली कमिते, कहानी ता​ाँय सीमित नै रही जाय । एक मिचार िुंच बनी जाय । एकरा िुं ं॑ सिसािमयक, सािामजक, रास्रीय आरमन सिस्यािूलक मिचारात्िक अुंमगका गद्य भी छापलऽ जाय । यह ं॑ लेली आपन ं॑ क अिलोकनाथष कछ अुंमगका आलेख भेजी रहलऽ मछयै – स्थाई स्तुंभ ‘बासी-टटका’ लेली । प़िी कं॑ देखबै । स्थानीय ि आरो राज्यऽ के अखबारऽ, पमिका आमद िुं ं॑ बराबर छपतुं ं॑ रहै मछयै । हमिूुं चाहै मछयै मक अुंमगकऽ िुं ं॑ मिचारात्िक गद्य लेखन हुअ ं॑ । ितरमक होय नै छै । एक त ं॑ मिचारात्िक लेख मलखै िाला के किी, दोसरऽ छापै िाला के किी । िू त ं॑ आदरनीय चकोर जी छे ला जे हिरऽ मिचारात्िक, सोधात्िक आलेख कं॑ बरिहल अुंग िाधरी िुं ं॑ छापै छे ला । मकताबो छापै छे ला । जब ं॑ छपै के साधन, पमिका, पस्तक, प्रकाशके नै मिलतै, मकताब-पमिका कीनी कं॑ प़िै िाला प़िबैय्ये नै मिलतै तब ं॑ लेखक मलखतै कथी ल ं॑ । अुंमगका के यह ं॑ मिडुंबना छे कै । ई बात नै छै मक गद्य लेखन लेली अुंमगका भासा सिथष नै छै । अुंमगका भासा के सब्द एतना ससि, सिथष छै मक एकरा िुं ं॑ हर तरह के गद्य रचना करलऽ जाब ं॑ पार ं॑ । ितरमक छापैिाला नै । मकताब-पमिका कीनी कं॑ प़िैिाला प़िबैय्या नै । अुंमगका भासा-भासी मसनी पान-जदाष खाय कं॑ बीडी-मसगरेट पीबी कं॑ हजार-दू हजार टका थूकी मदय ं॑ पार ं॑ , धईया​ाँ िुं ं॑ उडाय मदय ं॑ पार ं॑ । लेमकन िहीना िुं ं॑ सौ-पचास टका के मकताब-पमिका कीनी कं॑ नै प़ि ं॑ पार ं॑ । ई हालत देखी कं॑ मलखै सुं ं॑ िऽन हटी जाय छै । तब ं॑ आपन ं॑ अुंग िाधरी कं॑ ल ं॑ कं॑ आगू बम़ियै । हिरऽ लेखकीय सहयोग मिलतुं ं॑ रहतै । चकोर जी कं॑ अिर बनैलुं ं॑ रमखयै । हिरऽ सभकािना छै ।

राके श पाठक द्वारा- सरेंद्रनाथ काकोटी, हाउस नुं. – 23, िीर मचला राय पथ, जोनकपर, बीरूबारी, गिाहाटी – 781 016 तारीख : 10-12-2015

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प्रसन्नता हुई यह जानकर मक ‘अंि माधरी’ प्रकामशत होती रहेिी आज की डाक से आपके द्वारा प्रेमषत ‘अुंग िाधरी’ का मदसुंबर -15 – जनिरी -2016 ‘डॉ. चकोर स्िमृ त अुंक’ मिल गया है । यह अुंक देख कर मिश्वास ही नहीं हुआ मक ‘अुंग िाधरी’ द्वारा प्रकाशन मकया गया है । सच, चकोर जी के गजर जाने के बाद बस एक ही सिाल बार-बार जेहन िें उठता रहता था मक ‘अुंग िाधरी’ अब कै से प्रकामशत होगी, इसे कौन चलायेगा ? और भी ढेरों सिाल...मजसका जबाब हिें मिल गया । बहुतबहुत प्रसन्नता हुई यह जानकर मक ‘अुंग िाधरी’ हिेशा प्रकामशत होती रहेगी, आगे भी ............ । आपने मजस कशलता के साथ इसे सुंपामदत मकया है, िो कामबले तारीफ है । यकीन नहीं होता मक आप नये-नये हैं । मबल्कल सधे-सधाये सुंपादक के बतौर आपने अपने कायष को अुंजाि मदया है । बहुत-बहुत बधाई स्िीकार करें । छपाई-सफाई भी बहुत बेहतर है । प्रूफ भी सही है । मजस पररश्रि के साथ आपने कायष मकया है, आगे भी करते रहेंगें । ‘चकोर जी’ का आपको आशीिाष द प्राप्त है, सूक्ष्ि शरीर से आगे भी मिलता रहेगा । चकोर जी से सुंबमुं धत आलेख ि एक कमिता आपकी सेिा िें भेज रहा हूाँ । सही लगे तो प्रकामशत करेंगें । कभी िुंबई आना हुआ तो अिश्य िलाकात करूाँगा । मफल्ि मनिाष ण – मनदेशन, कथा-पटकथा-गीत से जडे होने के चलते आना-जाना लगा रहता है । अुंमगका िें यमद कभी मफल्ि मनिाष ण की योजना बनी तो अिश्य आपको सूमचत करूाँगा । नि-बषष की हामदष क बधाई स्िीकार करें । सहयोग भाि बनाये रखें ।

डॉ. अरूणेन्र भारती सेिक दिाखाना, सभाष चौक, िासदेिपर, िुंगेर (मबहार) – 811 202 तारीख : 15-2-2016

अंि माधरी के नयका अंक आकर्षक आरो अद्धभत

आकषष क

आरो अद्धभत छै अुंग िाधरी के नयका अुंक । सुंपादक कुं दन अमिताभ आरो सुंपादक िुंडल कं॑ धन्यिाद ।

सधीर कमार ‘प्रोग्रामर’, अुंग लोक, समिता मसनेिा के बगल िें, बाई पास रोड, सलतानगुंज, भागलपर

तारीख : 15-2-2016

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‘र्कोर स्ममृ त अंक’ अंि सपूत श्री र्कोर को अमद्वतीय श्रद्धांजमल

अंमगका आुंदोलन और सामहत्य के

परूष नरेश पाण्डेय चकोर अपने जीिन के अुंमति काल तक अपनी िातृभाषा ‘अुंमगका’ के मलए सोचते रहे, करते रहे । इस भाषा को आुंदोलन और सामहत्य देने के मलए उन्होंने ‘अुंग िाधरी’ का प्रकाशन, सुंपादन आरुंभ मकया । आज उसी पमिका का ‘चकोर स्िमृ त अुंक’ देखकर भींग जाना स्िाभामिक है । जो हो श्री चकोर के जीिन, वयमित्ि और सामहत्य को कुं दन अमिताभ ने अपनी मजस अद्भत कशलता से उदघामटत मकया है, िह मनःसुंदेह पाठकों को अमभभूत करता है । महन्दी के कई ख्यामत प्राप्त लेखकों के आलेखों को रखने के अमतररि चकोर जी के जीिन के कछ िहत्िपूणष छायामचिों को अुंक िें डालकर अमिताभ जी ने स्िमृ त अुंक को मचरस्िरणीय बना मदया है । यह अुंक अुंग सपूत श्री चकोर को अमद्वतीय श्रद्धाुंजमल है ।

डॉ. अमरेन्र, लाल खाुं दरगाह लेन, सराय, भागलपर—812002, मबहार । तारीख : 15-2-2016

र्कोर स्ममृ त अंक बहुत ही हृदय स्पशी ‘अंग िाधरी’ का ‘डॉ. चकोर स्िमृ त अुंक’ मिला । बहुत ही हृदय स्पशी कलेिर और आलेख सिेटे हुए है यह अुंक । अुंग िाधरी’ के सभी अुंक इसी तरह का कलेिर और स्तरीय रचनाएाँ लेकर आता रहे, यही कािना है । िैं िूलतः भागलपर, मबहार का मनिासी हूाँ मकुं त गोिा िें बस गया हूाँ । सरकारी सेिा से मनित्त ृ होकर पठन-पाठन और सामहमत्यक अमभरूमच से सुंबद्ध मक्रया-कलापों िें सिय वयतीत कर रहा हूाँ । कमिताएाँ, कहामनया​ाँ मलखता रहता हूाँ ,जो मिमभन्न पि-पमिकाओुं िें छपती रहती हैं । अुंमगका िें कछ गीत रचे हैं । एक यहा​ाँ भेज रहा हूाँ । प्रकाशन के उपयि सिझें तो ‘अुंग िाधरी’ के आने िाले अुंक िें अिश्य प्रकामशत करें ।

डॉ. मशवनंदन लाल टी – 8, लि​िी अपाटष िेंट, यशिुंतनगर, फोंडा गोिा – 403 401 तारीख : 17-2-2016

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अंक का फॉन्ट साईज भी हम बजिों के मलए बडा आरामदायक ‘डॉ. चकोर स्िमृ त अुंक’ मिला, प़िा, बडा अच्छा लगा । सभी के मिचार स्िगीय चकोर जी को और भी िहान बनाते हैं । अुंक का फॉन्ट साईज भी हि जैसे बजगों के मलए बडा आरािदायक है । इसके प्रकाशन के मलए बहुत-बहुत धन्यिाद । इसी अुंक िें श्री राके श पाठक जी की कहानी ‘नै होय छे लै’ प़िी । बहुत अच्छी लगी । ग्रािीण रहन-सहन के साथ-साथ ग्रामय जीिन, मकसान जीिन का ग्रािीण भाषा िें बडा सन्दर एिुं िामिष क मचिण हुआ है । कहानी के अुंत को थोडा और ब़िाया जा सकता था । श्री पाठक जी को िेरी शभकािनायें । तीन कमितायें भेज रहा हूाँ । कमितायें कै सी लगीं, कहेंगें ।

डॉ. रामनंदन मवकल मसगमनया ओसन, फ्लैट नुं. – 1601, सेक्टर – 10 A, ऐरौली, निी िबुं ई – 400 708, िहाराष्ट्र । तारीख : 22-2-2016

अंि माधरी का प्रकाशन वंदनीय व र्कोर जी को सच्र्ी श्रद्धांजमल

आज

ही आपके सुंपादकत्ि िें अुंमगका जनपदीय भाषा के दधीमच परिश्रद्धेय गोलोकिासी स्ि. चकोर को सिमपष त ‘डॉ. चकोर स्िमृ त अुंक’ प्राप्त हुआ । सिष प्रथि उनको िेरी ओर से श्रद्धा –सिन और आपको अनेकानेक साधिाद । स्ि. चकोर जी ररश्ते िें हिारे िौसाजी थे, पर हिारी तीन पीमढयों के सुंग उनका लगाि और आत्िीयता अमिस्िरणीय है । उनका िेरे प्रमत बडा ही स्नेह था । मजस कारण हिारे बीच बनती बहुत थी और ठनती भी बहुत । पर स्नेह, समिान और सुंिाद हिेशा बना रहा । िगर अफसोस यह है मक उनके चले जाने का सिाचार मिलुंब से प्राप्त हुआ । कछ मदन पूिष ही हिने एक दूसरे का कशलिेि पूछा था फोन के िाध्यि से । आपका हिारा पररचय नहीं है पर उनके िाध्यि से आपकी भी चचाष हुआ करती थी । खासकर ई-पमिका, ई-सिाचार पि ि िेबसाइट को लेकर । िे वयमिगत रूप से चकोरजी कि अुंग िाधरी ज्यादा थे । खले मकताब ि मखले गलाब की तरह । एक बार उन्होंने अत्युंत रूग्नािस्था िें िझे फोन मकया । िैंने पूछा

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आपकी आिाज काफी धीिी आ रही है, हा​ाँफ रहे हैं, खैररयत तो है । उनेहोंने कहा अब उम्र हो गई है, शरीर अब साथ नहीं दे रहा । सब लटपटाय गेलऽ छै । पता नञ ‘अुंग िाधरी’ के की होतै । अब ं॑ तोहरे मसनी बच्चा बतरू पर ही हय भार ऐतौ, से तोंय पटना कमहया ऐभो । अब ं॑ तोहरे मसनी हेकरा आगू ब़िाबऽ । िैंने उनसे कहा पहले आप अपने पररिार िें ही बात करें । मफर िे िझे इसके टेमक्नकल चीजें बताने लगे । िैंने उनसे कहा मक आप ज्यादा ही टेंसन ले रहे हैं । आपको कछ नहीं होगा, आप स्िस्थ हो जाएाँ, मफर मिलेंगें तो बातें होंगीं । उनको अपनी नहीं ‘अुंग िाधरी’ के सेहत की ज्यादा मफक्र थी । पर आज उनके धरोहर को आपने उनके पररजनों के सहयोग से जो आगे ब़िाने का कायष अपने हाथ िें मलया है, िह सराहनीय ि िुंदनीय है । यही स्ि. चकोर जी को सच्ची श्रद्धाुंजमल है । यह हि जैसौं के मलए अत्युंत हषष का मिषय है । आपको बहुत-बहुत शभकािना ि बधाई । ईश्वर से ‘अुंग िाधरी’ की सफलता की कािना करता हूाँ । ‘अुंग िाधरी’ का िाधयष बना रहे । शिा जलती रहे, परिाने को और क्या चामहए !

पण्डरीक रत्न स्िराुंजमल, िख्य द्वार, श्री कृष्ट्ण जन्िस्थान, िथरा, उत्तर प्रदेश – 281 001 तारीख : 20-2-2016

- आभार अुंग िाधरी के रऽ आजीवन सदस्य बनै लेली डॉ. सबोध कमार (मवलासपर, मध्य प्रदेश), श्री वीरेन्र कमार मसंह (सलतानिंज, मबहार) आरू सुंरिक सदस्य सुं ं॑ मवमशष्ट संरक्षक बनै लेली श्री कं दन अममताभ, मंबई के अलािा बामषष क सदस्यता ग्रहण करै िाला मसनी के प्रमत हामदष क आभार प्रकट करै मछयै । प्रकाशक

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प्रार्ीन अंमिका सामहत्य दोहाकोश – िीमत : र्ट् दशषन-खंडन मसद्ध सरहपाद (सरह)

- रर्ना काल 8िीं. सदी

ब्राह्मण – ब्रमहणेंमह ि जानन्तमह भेउ । एिइ पमढअउ ए च्चउिेउ ॥ िरि पामण कस लई पढन्तुं । घरमहुं बइसी अमग्ग हुणन्तुं ॥ कज्जे मिरमहअ हुअिह होिें । अमक्ख डहामिअ कडअुं घूिें ॥ एकदमण्ड मिदण्डी भअिा​ाँ बेसें । मिणआ होइअइ हुंस उएस ॥ मिच्छे महुं जग िामहअ भल्लें । धमिाधमि ण जामणअ तल्ले ॥ पाशपत – अइररएमहुं उद्दूमलअ च्छारें । सीसस िामहअ ए जड-भारें॥ घरहीं बइसी दीिा जाली । कोणमहुं बइसी घण्टा चाली॥ अमक्ख मणिेसी आसण बन्धी । कण्णेमहुं खसखसाइ जण धन्धी॥ रण्डी-िण्डी अण्णमि बेसें । मदमक्खज्जइ दमक्खण - उद्देसें ॥

- साभार पस्तकदोहा कोश ग्रन्थकार मसद्ध सरहपाद संपादकिहापुंमडत राहुल साुंकृत्यायन प्रकाशन बर्ष १९५७ ई. प्रकाशक -

जैन – दीहणक्ख जइ िमलणें बेसें । णग्गल होइ उपामडअ के सें॥ खबणेमहुं जाण मिडुंमबअ बेसें । अप्पण बामहअ िोक्ख उबेसें ॥ जइ णग्गामिअ होइ िमत्त, ता सणह मसआलह ॥ लोिपाडणें अमत्थ मसमद्ध, ता जबइ मणअमबह । मपच्चीगहणे मदट्ठ िोक्ख, ता िोरह चिरह॥ (क्रमशः - अिला अंक मं)ं॑

मबहार राष्ट्रभाषा पररषद, पटना

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वाद - अनवाद दोहाकोश – िीमत : र्ट् दशषन-खंडन मसद्ध सरहपाद (सरह) - मल ू रर्ना भार्ा -

अंमिका - महन्दी अनवादक महापंमडत राहुल सांकृत्यायन

- साभार पस्तकदोहा कोश ग्रन्थकार मसद्ध सरहपाद संपादकिहापुंमडत राहुल साुंकृत्यायन प्रकाशन बर्ष १९५७ ई. प्रकाशक -

ब्राह्मण – ब्राह्मण न जानते भद । यों ही प़िे चारो िेद ॥ ि​िी पानी कश लेइ पढन्त । घरही बैठी अमग्न होिन्त ॥ काज मबना ही हुतिह होिें । आाँख जलािें कडये धएुं ॥ एकदमण्ड मिदण्डी भगिा भेसे । ज्ञानी होके हुंस उपदेसै ॥ मि्येही जग बहा भूलैं भूलैं । धिष -अधिष न जाना तल्यैं ॥ पाशपत – शैि साध लपेटे राखी । ढोसे जटा भार ये िाथी ॥ घरिे बैठे दीिा बालें । कोने बैठे घुंटा चालें ॥ आाँख लगाये आसन बाुंधे । कानमहुं खसखसाय जन िूढे ॥ रुंडी-िडुं ी अन्य हु भेसे । दीख पडत दमिणा उदेसे ॥ जैन – दीघष नखी यमत िमलने भेसे । नुंगे होइ उपासे के से ॥ िपणक ज्ञान-मिडुंमबत भेसे। आति बाहर िोि उदेसे ॥ यमद नुंगेपन होइ िमि, तो शनक-शगृ ालहु ॥ लोि उपाडे अमस्त मसमद्ध, तो यिमत-मनतमबहु । मपमच्छ गहे जो दीख िोि, तो िोरहु चिरहु ॥ (क्रमशः - अिला अंक मं)ं॑ )

मबहार राष्ट्रभाषा पररषद, पटना 18

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३ - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


- अंमिका कहानी -

समधी हमिुं ं॑ कहै मछहौं , टेमपू छोडी दहो । हिरा नञ छं॑ अत्त ं॑ डॉ. रामनंदन मवकल कमव, कथाकार, आलोर्क ( महन्दी, अंमिका )

- संपकष मसिमनया ओसन, फ्लैट नं. – 1601, सेक्टर – 10 A, ऐरौली, नवी मबं ई – 400 708, महाराष्ट्र , भारत

“ समधी कोठरी मं ं॑ बैठी कं॑ र्पर्ाप सनी रहलऽ िे ला । र्पर्ाप सोर् ं॑ लािलात, कत्त ं॑ शौकऽ सं ं॑ बेटा के रऽ मबयाह करलां, बराती मं ं॑ बैंडबाजा मं ं॑ नार्लांकदलां, कत्त ं॑ नोट उडाय देलां ।”

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औकात मक सिधी ऐता त ं॑ मदन भर गाडी राखी कं॑ हुनकऽ सेिा सत्कार करुंऽ । सनथैं सिमधन के पमत कहलकै – “धीरे बोलऽ सिधी कोठरी िुं ं॑ बैठलऽ छौं, सनथौं ।“ हय सनी कं॑ सिमधन कह ं॑ लागलै – “सनता त ं॑ सनता – बलैयै से, सनी कं॑ की करता, नञ ऐता आरो की । हिरा नञ चामहयऽ । हमिुं ं॑ फे रू कहै मछयौं, छोडी द ं॑ टेमपू ।” सिधी कोठरी िुं ं॑ बैठी कं॑ चपचाप सनी रहलऽ छे ला । चपचाप सोच ं॑ लागलात, कत्त ं॑ शौकऽ सुं ं॑ बेटा के रऽ मबयाह करलाुं, बराती िुं ं॑ बैंड-बाजा िुं ं॑ नाचलाुं-कदलाुं, कत्त ं॑ नोट उडाय देलाुं । जेिरऽ सुं ं॑ बहू कं॑ छारी देलाुं । दकानी पर बोलाय कं॑ पसुंद कराय कं॑ जेबर मकनलाुं । कहूाँ कोय किी नञ करलाुं । िुंझला सिधी यहीं महनके शहरऽ िुं ं॑ बीिार छऽथ हुनका देखै ल ं॑ ऐलाुं त ं॑ यहूाँ आबी गेला​ाँ । नञ ऐला स ं॑ भी सिाजऽ िुं ं॑ बदनािी । सिधी उठी कं॑ तैयार हुअ ं॑ लागला । कपडा मपन्हतुं ं॑ – मपन्हतुं ं॑ सनलका सिमधन के रऽ आिाज फे रू जोरऽ–जोरऽ सुं ं॑ आबी रहलऽ छे लै । जानै छै परकलऽ मगदराुं ककडी – फूट खाय छै । महनकऽ महसकऽ लागी जैतै । महसकऽ त ं॑ छोडैये पडतै । आब ं॑ महनका सुं ं॑ हिरा की सरोकार । मबयाह होय गेलै । आब ं॑ खाली बेटी – दिाद सुं ं॑ ररस्ता । महनका सुं ं॑ की । छोडऽ हटाबऽ । तब ताुंय कोठरी सुं ं॑ तैयार होय कं॑ सिधी बाहर आबी गेला । छोटका सिधी कं॑ कहलकात, “ हिरा िाँझला सिधी कं॑ देखै ल ं॑ अस्पताल जाना छै , हमिुं ं॑ जाय छी । सुंझकी हिरऽ गाडी छै , हमिुं ं॑ पटना जैबऽ । जाि के पहलें आबी कं॑ सिान लेलुं ं॑ जैबऽ ।” हय कही कं॑ सिधी जी बाहर मनकली गेलै । कहल ं॑ गेलै, “हमिुं ं॑ टेंपो ल ं॑ जाय मछयौं ।”

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सिधी बाहर आबी कं॑ िह ं॑ टेमपो िुं ं॑ बैठलै आरो कहलकै , “चलऽ अपोलो अस्पताल ।” िहा​ाँ जाय कं॑ देखै छ ं॑ मक हुनकी िाँझली बेटी-दिाद िहीं छै । दिाद कहलकै , “पापा हिरऽ दोस्त के गाडी खडी छै , ओहो मसनी यहीं छै । आपन ं॑ कं॑ राती इसटेसन छोडी देतै ।” सिधी बाहर आबी कं॑ टेमपो बाला सुं ं॑ मबल िा​ाँगलकै । टेमपो बाला न ं॑ मबहान स ं॑ तखनकऽ तलक के मबल बताय कं॑ कहलकै , “सर िैं पैसा मसन्हा साहब से ले लूगाँ ा । िे हिेशा िेरा टेमपो िाँगाते हैं ।” सिधी कहलकै , “तोहें हुनका सुं ं॑ पैसा नञ िा​ाँमगहऽ, आपनऽ पेिेंट ल ं॑ आरू जा ।” हय कही कं॑ सब पैसा चकता करी कं॑ हुनी छोटका सिधी कं॑ फोन करी कं॑ कही देलकै , “हमिुं ं॑ मदन भरी के रऽ टेमपो के भाडा के भगतान करी देल ं॑ मछयै । फोन ई लेली करी देमलयै मक कहीं आपन्हौं सुं ं॑ भी पैसा नञ ल ं॑ मलअ ं॑ ।” हय कही कं॑ सिधी फोन काटी देलकै । सिधी कं॑ याद छै शादी के सिय बराती िुं ं॑ नञ त ं॑ हुनकऽ कोय भाय, नञ

“ सिधी उठी क॑ तैयार हुअ ॑ लागला । कपडा मपन्द्हतुं ॑ – मपन्द्हतुं ॑ सनलका सिमधन के रऽ आवाज फे रू जोरऽ–जोरऽ सुं आबी रहलऽ छेलै । जानै छै परकलऽ मगदराुं ककडी – फूट खाय छै । महनकऽ महसकऽ लागी जैतै । महसकऽ त ॑ छोडैये पडतै । आब ॑ महनका सुं ॑ हिरा की सरोकार । मबयाह होय गेलै । आब ॑ खाली बेटी – दिाद सुं ॑ ररस्ता । महनका सुं ॑ की । छोडऽ हटाबऽ । ” बहनोय, नञ गोमतया । कोय नञ । पछलुंऽ छे लै, “आपन ं॑ के कोय भाय, बहनोय नञ ऐलऽ छै की ?” हुनी कहलुं ं॑ छे लै, “सब्भे हिरा सुं ं॑ जरै छै । हिरऽ तरक्की देखी कं॑ हिरा सुं ं॑ सब्भे दरू होय गेलऽ छै ।” ितरमक सिधी देखन ं॑ छे लै मक बराती िुं ं॑ हुनकऽ खाली सा़ि़ू, पा​ाँच सा़ि़ू सपररिार उपमस्थत छऽथ । आब ं॑ सिधी कं॑ सिझ िुं ं॑ ऐलै मक जेना सिमधन हिरा कही कं॑ आपनऽ घरऽ सुं ं॑ जाय ल ं॑ मि​िश करन ं॑ छै , िह ं॑ रुं हुनी आपनऽ सब पररिारऽ सुं ं॑ वयिहार करी कं॑ भगैल ं॑ होतै । तहीं सुं ं॑ कोय नञ च़िै छै महनकऽ घऽर । िुंझला सिधी कं॑ देखै ल ं॑ बेटी दिाद के साथुं ं॑ सिधी अस्पताल के भीतर गेला । िहा​ाँ िुंझला सिधी के ओपन हाटष सजष री होलऽ छे लै । हुनका नसें कपडा बदली कं॑ 20

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खाना मखलाय रहलऽ छे लै । देखी कं॑ बडी खश । हुनका बोलना िना छे लै । लेमकन स्नेह त ं॑ आुंखी सुं ं॑ छलकी जाय छै । हाथ जोडी कं॑ परनाि-पाती होलै । हुनी हौले सुं ं॑ कहलकै , “आब ं॑ ठीक छौं । आब ं॑ लुंबा सिय तलक आपन ं॑ सुं ं॑ बातचीत होत ं॑ रहतै ।” बेटी दिाद आगू पीछू । िहीं कैं टीन िुं ं॑ सब्भैं खाना खाय कं॑ बाहर दन्न ं॑ ऐला त ं॑ देखै छै मक दिादऽ साथुं ं॑ काि करै िाला एगो आरो आदिी पामकिं ग िुं ं॑ गाडी खडा करी कं॑ बच्चा-बतरू सथुं ं॑ आबी रहलऽ छै । देखथैं बेटी दन्न ं॑ िखामतब होय कं॑ कहलकै , “भाभी जी, आपके पापा हैं ना ? मजनसे पहली बार िैं नहीं मिल पाया था ? ” बेटी के हािी भरला प ं॑ सब्भैं गोड छूबी कं॑ परनाि करलकै आरो कहलकै , “पापा, आपके बारे िें सना है मक आप हाथ बहुत अच्छा देखते हैं । हिलोग जब रायपर िें थे तो आप आये थे परुंत जब तक िैं आपसे मिलता आप लौट चके थे । हिलोग सपररिार आपको बहुत याद करते हैं । ईश्वर की बडी कृपा मक आप से भेंट हो गई । आप िेरे डेरा पर चमलये ।” कत्त ं॑ खामतर,कत्त ं॑ अपनत्ि, कहै के रऽ बात नञ । सब्भै के रऽ हाथ आरो कुं डली देखी कं॑ जरूरी स्टोन आरो पूजा बताय कं॑ कहलकै , “ आब ं॑ हिरा जाना चामहयऽ फे रू छोटका सिधी के यहा​ाँ सुं ं॑ सिान भी लाना छै ।” दिाद के रऽ दोस्तें कहलकै , “पापा, हिलोग आपको स्टेशन छोडेंगें ।” बेटी-दिाद कं॑ अस्पताल छोडी कं॑ सिधी छोटका सिधी के यहा​ाँ आबी गेला । हुनका सथुं ं॑ एगो आदिी, एगो जनानी आरू बच्चा बतरू मसनी कं॑ देखी कं॑ छोटका सिधी आरू सिमधन भौंचक । सिधी बतैलकै , “महनका मसनी हिरऽ दिाद के रऽ दोस्त आरू हुनकऽ पररिार के छे कै आरू हिरा आपनऽ गाडी सुं ं॑ इसटेसन छोडै ल ं॑ ऐलऽ छै ।” सिमधन न ं॑ खाना खाय ल ं॑ पछलकै त ं॑ सिधी कहलकै , “ हमिुं ं॑ त ं॑ खाना महनके यहा​ाँ खाय लेमलयै, आब ं॑ नञ खैबऽ । ” छोटका सिधीं कहलकै मक आरू जन त ं॑ हुनका यहा​ाँ पहलऽ बेर ऐलऽ छै , ई लेली कि सुं ं॑ कि चाय त ं॑ पीबी मलअ ं॑ । चाय पीबी कं॑ सिान के रऽ साथुं ं॑ मबदा ल ं॑ कं॑ सिधी गाडी प ं॑ बैठी गेला । सिमधन झरोखा सुं ं॑ हाथ महलाय कं॑ परदा मगराय देलकी । सिधी इसटेसन रिाना । तलसीदासऽ के हय पुंती होकरऽ महरदय कं॑ बार-बार महलोरी रहलऽ छे लै ; “आित महय हरषे नहीं नैनन नहीं स्नेह । तलसी तहा​ाँ न जाईये कुं चन बरसे िेघ ॥”

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- अंमिका कहानी -

र्नवमतया फूआ इनरदेि िामलक िान ं॑ मक गािऽ के रऽ पचास-साठ

राके श पाठक - संपकष द्वारा- सरेन्द्रनाथ काकोटी हाउस नुं. : 23, बीर मचला राय पथ, जोनकपर, बीरूबारी, गिाहाटी - 781 016 असि, भारत

“ ओकरा बी.ए. पास करतं॑ नै करैत ं॑ बडका तीनों बेटा आरू पतौहू मं॑ जे महाभारत मर्लै मक बँटवारा होइये कं॑ रूकलै । माय-बाप लेली दस बीघा मनकाली कं॑ जे बर्लै , र्ारो बेटा मं॑ बटी िेलै । पेटपोंिना बेटा पर माय के बेसी ममता िेलै । माय के दृढ प्रमतज्ञा- "हममं ं॑ रहबऽ तं॑ िोटका ननआँ दन्नं ं॑ ।"

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बीघा के जोतदार बाबू इुंद्रदेि नारायण मसुंहऽ के चारो बेटा ि ं॑ स ं॑ िाय के पेटपोंछना बेटा रमजनरा िानुं ं॑ मक राजेन्द्र मसुंह प़िै मलखै ि ं॑ बडी तेज छे लै । पमहला-दोसरा मकलास स ं॑ खाली िैमरके नै इ.ए.बी.ए. ता​ाँय फस्टे करन ं॑ छे लै । कमहयो सेकेंडथडष नै ऐलऽ छे लै । ओकरा बी.ए. पास करत ं॑ नै करैत ं॑ बडका तीनों बेटा आरू पतौहू ि ं॑ जे िहाभारत िचलै मक बाँटिारा होइये कं॑ रूकलै । िाय-बाप लेली दस बीघा मनकाली कं॑ जे बचलै, चारो बेटा ि ं॑ बटी गेलै । पेटपोंछना बेटा पर िाय के बेसी ि​िता छे लै । िाय के दृढ प्रमतज्ञा- "हमिुं ं॑ रहबऽ त ं॑ छोटका ननआाँ दन्नुं ं॑ ।" सेहे रमजनरा बू़िा-बू़िी कं॑ ल ं॑ कं॑ सरबन किार बनी गेलऽ । महस्सा िुं ं॑ मिललऽ खेत-खररहान, बागबगैचा देख ं॑ लगलऽ । देखत-ं॑ देखत ं॑ चार साल बीती गेलै । यह ं॑ बीचऽ िुं ं॑ चार-चार टा बच्चा-बतरू के बापऽ बनी गेलऽ छे लै । खेती स ं॑ गजर-बसर जब ं॑ सुंभि नै हुअ ं॑ लगलै तब ं॑ गोहाटी िुं ं॑ एक टा िारिाडी सेठऽ कन िनीिी करै िला अपनऽ दोस्तऽ के मसफाररस प ं॑ िह ं॑ सेठऽ कन िनीिी कर ं॑ लगलऽ छे लै । नौकरी करतुं ं॑ साल भर स ं॑ उपर होय गेलऽ छे लै ितरमक रमजनरा के रऽ िऽन गोहाटी िुं ं॑ नै बैठलऽ छे लै । एक त ं॑ अपनऽ जनिभूमि स ं॑ येत्त ं॑ दूर कमहय्यो गेलऽ नै छे लै । िैमरक पास त ं॑ अपनऽ जनि भूमि सुं ं॑ एत्त ं॑ दूर कमहयऽ गेलऽ नै छे लै । िैमरक तलक त ं॑ गािे के रऽ इसकूल िुं ं॑ प़िन ं॑ छे लै । िैमरक पास करी कं॑ बडी दूर गेलऽ रहै त ं॑ सलतानगुंज िरारका कौलेज िुं ं॑ प़िै लेली । िोहो जाडा गिी के रऽ छिी ि ं॑ घोरे चल्लऽ आबै छे लै । गोहाटी िें रमजनरा के रऽ िऽन नै बैठै के रऽ दोसरऽ कारन छे लै अपनऽ लोगऽ के अभाि। अपनऽ भासा अुंमगका

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बोलै बमतयािै बला कोय अपनऽ नै छे लै । गोहाटी िुं ं॑ दरभुंगा - मिमथलाुंचल, सिस्तीपर िैशाली-िजफ्फपर, आरा, छपरा आरनी मजला के लोग भरलऽ छै ितरमक भागलपर मजला आरो अुंग िेि के लोग खोजलऽ प ं॑ नै मिलै छै । गािऽ के जे दोस्त ओकरा गोहाटी आनलै छे लै सेठिाुं ओकरऽ दीिापर के अपनऽ गद्दी िुं ं॑ भेजी देन ं॑ छे लै कै हने मक ओकरऽ जग्घऽ प ं॑ रमजनरा कं॑ लगाय देन ं॑ छे लै । जनि स ं॑ सनत ं॑ आबै िला अुंमगका भासा सनै लेली रमजनरा के रऽ कान तरसी गेलऽ छे लै ।

“ “धौ बरिांही साँय मक्खर कामो करै ल ं॑ नै दै िै ।“ यवक के भासा सनी कं॑ रमजनरा र्ौंकी िेलऽ िे लै- ठे ठ अंमिका भासा, एकदम ओकरऽ िामऽ के रऽ । कत्ते मदनऽ बाद ओकरा कानऽ म ं॑ अमररत घोरैलऽ िे लै । कत्त ं॑ मदन बाद लिलऽ िे लैओकरऽ कोय्यो अपनऽ ओकरा सामने बैठलऽ िै । अपनऽ भासा बोली के रऽ टान ऐहने जबरदस्त होय िै । एकरऽ ममठास के रऽ कीमत एकरा स ं॑ दूर होला के बादे पता र्लै िै । िडऽ स ं॑ भी बेसी ममट्ठऽ ।” एक मदन के रऽ बात छे कै, रमजनरा तगादा िुं ं॑ मनकललऽ छे लै सायमकल ल ं॑ कं॑ । अखनी गोहाटी के िख्य िाके ट फैं सी बजार स ं॑ दोसरऽ िाके ट पल्टन बाजार पहुचाँ ले छे लै मक अचानक झऽर पड ं॑ लगलऽ छे लै । रमजनरा कं॑ असाि के रऽ मबन िौसि के बरसात सुं ं॑ बडी ची़ि छे लै । बद-बदाब ं॑ लगलऽ छे लै- "भला बताबऽ त,ं॑ ई बैसाखऽ के कडकमडया रौदा ि ं॑ झऽर पडै के कोनऽ कारन मछकै .... की जे देस मछकै असाि....बूनबादर के रऽ कोनऽ सिय - कसिय नय... अखनी तडतमडया रौदा आरो अखमनये झऽरबरसात....।" िने िऽन क़ितुं ं॑ रमजनरा पलटन बजार के कोना प ं॑ बनलऽ एकटा बडका मबमल्डुंग के रऽ छोटका रुं बरुंडा के आगू िुं ं॑ साइमकल खडा करी कं॑ बरुंडा िुं ं॑ ठारऽ होय गेलऽ छे लै । िहाँ ऽ प ं॑ झऽर के दू-चार बून पडी गेलऽ छे लै । जेबी स ं॑ रूिाल मनकाली कं॑ िहाँ पोछला के बाद अगल बगल िुं ं॑ नजर दौडैलकै – देखलकै - बरुंडा के रऽ एक टा कोना िुं ं॑ हररयर रुं िैलऽ लूगाँ ी आरो उज्जर रुं िैलऽ मचक्कट अधबैंय्या अुंगा मपन्हल ं॑ एक टा यिक फटल रुं एक टा बोरा प ं॑ बैठी कं॑ आगू िुं ं॑ लोहा के रऽ फिाष रखी कं॑ एक टा टटलऽ जत्ता िुं ं॑ का​ाँटी ठोकी रहलऽ छे लै । रमजनरा कछ देर ओकरा का​ाँटी ठोकतुं ं॑ देखत ं॑ रहलऽ छे लै । ऊ यिक अचानक का​ाँटी ठोकना छोडी कं॑ दमहना हाथऽ के रऽ थप्पड स ं॑ बा​ाँया हाथऽ प ं॑ बैठलऽ िक्खर कं॑ चट् स ं॑ िारी कं॑ कहन ं॑ छलै- “धौ बरगाुंही सा​ाँय िक्खर कािो करै ल ं॑ नै दै छै ।“ यिक के भासा सनी कं॑ रमजनरा चौंकी गेलऽ छे लै- ठे ठ अुंमगका भासा, एकदि

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ओकरऽ गािऽ के रऽ । कत्त ं॑ मदनऽ बाद ओकरा कानऽ ि ं॑ अिररत घोरैलऽ छे लै । कत्त ं॑ मदन बाद लगलऽ छे लै- ओकरऽ कोय अपनऽ ओकरा सािने बैठलऽ छै । अपनऽ भासा बोली के रऽ टान ऐहने जबरदस्त होय छै । एकरऽ मिठास के रऽ कीित एकरा स ं॑ दरू होला के बादे पता चलै छै । गडऽ स ं॑ भी बेसी मिठ्ठऽ । रमजनरा अपना कं॑ रोकं॑ नै सकलऽ छे लै । ऊ यिक लगा​ाँ जाय कं॑ पछन ं॑ छे लै“तोरऽ घरऽर कहा​ाँ मछकौं ?“ “मबहार... भागलपर मजला...“ - यिक रमजनरा दन्नुं ं॑ अचरज स ं॑ देखी कं॑ कहन ं॑ छे लै। “भागलपर मजला िुं ं॑ कहा​ाँ ?“ - रमजनरा फे रू पछन ं॑ छे लै, यिक िुं ं॑ ओकरऽ उत्सकता ब़िी गेलऽ छे लै । “सलतानगुंज लगा​ाँ.......।“ “हिरो घऽर सलतानगुंज स ं॑ थोडे दरू प ं॑ शुंभगुंज थाना लगा​ाँ किीचक गािऽ िुं ं॑ छै ।“ रमजनरा हुलसी के मबना पछले कही देन ं॑ छे लै । “ हिरऽ घऽर सलतानगुंज स ं॑ लगभग एक कोस दरू दमक्खन एक टा गािऽ ि ं॑ ।“ ऊ यिक रमजनरा दन्न ं॑ ताकी कं॑ कहने छे लै। “हिरऽ नाि राजेन्द्र मसुंह... तोरऽ नाि की ?“ “हिरऽ नाि बध्दन राि “ - ऊ यिक जिाब देन ं॑ छे लै । तब तलक बादर फटी गेलऽ छे लै, झऽर पडना बुंद होय गेलऽ छे लै । रमजनरा अपनऽ साइमकल पर च़िी कं॑ तगादा करै लेली चल्लऽ गेलऽ छे लै । ऊ यिक दोहराय रहलऽ छलै- “शुंभगुंज लगा​ाँ.... किीचक गाि... रमजन्नर मसुंघ नाि...।“ ई घटना के बाद रमजनरा जब ं॑ भी पल्टन बजार के ऊ िरुंडा पर के बद्दन राि के रऽ जूता िरमित के दोकान के सािने स ं॑ पार होय छे लै साइमकल पर स ं॑ उतरी कं॑ बध्दन राि नािक ऊ यिक स ं॑ अुंमगका िुं ं॑ दू गाल बमतयाय लै छे लै । हाल सिाचार पूछी लै छे लै । कमहयऽ-कमहयऽ एतबार के छिी के मदन सपरी कं॑ फसष त स ं॑ घुंटा-दू-घुंटा जाय कं॑ बैठी कं॑ बोली बमतयाय लै छे लै- दख-दख के रऽ बात । ऐसनऽ करै के पीछू शायद अपनऽ भाषा बोली के रऽ रस छे लै । अपनऽ जड-जिीन के जडाि छे लै । अपनऽ मजलाजिार के अपनापन के मखचाब छे लै । बीचऽ िें कछ मदन बद्धन के दोकान बुंद छे लै । बद्धन स ं॑ बमतयाबै के लालसा ल ं॑ कं॑ रमजनरा जाय छे लै ितरमक बद्धन के बुंद दोकान के सािने स ं॑ लौटी जाय छे लै िने िऽन मखमसयैलऽ- मनराश होलऽ । आरू एक मदन जब ं॑ गेलऽ छे लै तब ं॑ देखन ं॑ छे लै बद्धन पमहले जैसनऽ टटलऽ जत्ता िुं ं॑ का​ाँटी ठोकी रहलऽ छे लै । रमजनरा हसी ुं कं॑ पछन ं॑ छे लै- “की हो दोस्त बद्धन कहा​ाँ गायब होय गेलऽ छे ला ?“ 24

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०3 - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


“िािू के बेटा के रऽ मबहा छे लै ओह ं॑ न्यौता परै लेली नमनहर चल्लऽ गेलऽ छे मलयै ।” बद्धन जिाब देन ं॑ छे लै । साथुं-ं॑ साथुं ं॑ ईहो कहन ं॑ छे लै- “हे हो िामलक हिरऽ िाय तोरा बोलैन ं॑ छौं । “ बद्धन के ई बात सनी कं॑ रमजनरा कं॑ अपनऽ कानऽ प ं॑ मबसिास नै होलऽ छे लै । अचरज स ं॑ बोललऽ छे लै- “तोरऽ िायऽ हिरा कथी ल ं॑ बोलैन ं॑ छै ?” ऊ त ं॑ िाइए कह ं॑ पारै छै , तब ं॑ काल्ह एतबार मछकै ... हिरऽ घऽर..।“ “गोहाटी िुं ं॑ तोरऽ घऽर छौं कहा​ाँ ?” “गनेसीपाडा िुं ं॑ शुंकर होटल के ठीक बगल िुं.ं॑ ... ठीक सडक प.ं॑ ..।” “ठीक छै , काल्हे नौ-दस बजे तलक पहुंची जैभौं ।” कही कं॑ रमजनरा अपनऽ साइमकल पर च़िी कं॑ आगू ब़िी गेलऽ छे लै ।

“ रमजनरा के माय कहन ं॑ िेली - “रे नूनू तोरऽ जनम यह ं॑ र्नवमतया फआ के हाथ पर होलऽ िौ... दू- अढ़ाय बररस के उममर ताँय र्नवमतया फूआ रोज आबी कं॑ तोरा कडुआ तेलऽ के मामलस करी देन ं॑ िेलौ....“ “र्नवमतया फूआ... तोंय िोहाटी मं.ं॑ ... हय के ना भ ं॑ िेलै... घरऽ स ं॑ एत्त ं॑ दूर आबी कं॑ ई नदी-नाव संजोि के ना होय िेलै? “ - रमजनरा के रऽ बोली अर्रज स ं॑ भरलऽ िेलै । ” रमजनरा बध्दन राि कन जाय के बात कही त ं॑ देन ं॑ छे लै ितरमक िनऽ िुं ं॑ खदबदी होय रहलऽ छे लै- गेला प ं॑ चाह-चूह त ं॑ मपयै लेली देलऽ जैतै.... राजपूत होय कं॑ एक टा हररजन के हाथऽ के चाह...मजन्दा िाछी त ं॑ मनगललऽ नै जाब ं॑ पारै छै .... ऊ मदन ससरा फगआ िेस्तर जे ओकरा डेरा िुं ं॑ आबी कं॑ नाली साफ करै छे लै, सडक बो़िै के काि करै छे लै, होटलऽ िुं ं॑ ओकरऽ सािन्है के कसी प ं॑ बैठी कं॑ की सानऽ स ं॑ चाहऽ के चस्की मलअ ं॑ लगलऽ छे लै... गाि होमतयै तब ं॑ देखाय देमतयै.... भारत अजाद होय गेलऽ छै त ं॑ की होतै... छोटका मसनी मक बडका के िाथा पर च़िी कं॑ िततै... िारतुं-ं॑ िारतुं ं॑ पीठी के चिडी उधेडी देमतयै... गरदन के िैल छोडाय देमतयै.... जिीनदारी चल्लऽ गेलै त ं॑ की होलै.... रजपूती दबदबा अखमनयऽ तलक कायि छै .... ओह.... बद्धन राि के बात िानी कं॑ हमि ं॑ त ं॑ धरि सुंकट िुं ं॑ पडी गेलुंऽ.... सा​ाँप-छूछून्नर के रऽ हाल होय गेलऽ... नै मनगलतुं ं॑ बनै छै ... नै उगलतुं.ं॑ ..।“ धरि सुंकट िुं ं॑ पडलऽ रमजनरा अपनऽ साइमकल लेन ं॑ पहुचुं ी गेलऽ छे लै गनेसीपाडा, िख्य गोहाटी शहर स ं॑ करीब करीब पा​ाँच मकलोिीटर दूर । देहाती इलाका ।

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एक दन्न ं॑ धानऽ के खेत आरू दोसरऽ दन्न ं॑ बसलऽ गनेसीपाडा । बीचऽ स ं॑ पार होलऽ पक्की सडक कोनऽ देहाती छौडी के तीसी के रऽ तेल दै के झाडलऽ बा​ाँधलऽ िाथा के सीधा फाडलऽ िा​ाँग रुं चिकी रहलऽ छे लै । जैसनऽ मक असाि िुं ं॑ गरीब-गरूआ मसनी के घऽर रहै छै , बा​ाँसऽ के टमटया प ं॑ ि​िी के लेप द ं॑ कं॑ देिाल ठाडऽ करी देलऽ जाय छै आरू उपर ि ं॑ सखलऽ कास के छप्पर छारी देलऽ जाय छै िैसने घऽर चारो दन्न ं॑ बनलऽ छे लै । देखी कं॑ रमजनरा कं॑ लगलऽ छे लै मक ऊ गनेसीपाडा िुं ं॑ नै, सोझे अपनऽ गाि किीचक िुं ं॑ आबी गेलऽ छै । ओह ं॑ रुं ि​िी के रऽ देबाल, फूसऽ के छौनी बला घऽर । शुंकर होटल के िामलक शुंकर झा एक टा ओसरा िुं ं॑ बनलऽ अपनऽ छोटऽ रुं ‘शुंकर होटल’ िुं ं॑ कोयला के भिी के आगू िुं ं॑ बैठलऽ चाह खौलाय रहलऽ छे ला । हुनकऽ बारह तेरह बररस के बेटा गहकी कं॑ चाह मिठाय परोसी रहलऽ छे लै । रमजनरा जाय कं॑ पूछलकै - “बध्दन राि का घर मकधर है ?” शुंकर झा िहाँ ऽ स ं॑ कछ नै बोली कं॑ एक टा घरऽ के दआरी प ं॑ जाय कं॑ हकै न ं॑ छे लै “बध्दन भाय घरऽ िुं ं॑ छ ं॑ ?“ हा​ाँक सनी कं॑ बध्दन घरऽ से बहराय ऐलऽ छे लै आरू हाँस्सी कं॑ कहत-ं॑ कहत ं॑ रमजनरा कं॑ ऐ ुंगना िुं ं॑ ल ं॑ गेलऽ छे लै, “आमबयै िामलक आमबयै....।” ऐ ुंगना िुं ं॑ आबी कं॑ रमजनरा आरो हैरान रही गेलऽ छे लै ई देखी कं॑ मक किीचक के घऽर मसनी िुं ं॑ बनलऽ ऐ ुंगना जैसनऽ बनलऽ ऐ ुंगना, एक दन्न ं॑ लुंबा रुं ओसरा आरू ओसरा प ं॑ बनलऽ दू ठो कोठरी । असाि िुं ं॑ ई रुं घऽर कहा​ाँ बनै छै । गोबर से मनपलऽ एाँगना िुं ं॑ असि के रऽ बनलऽ बेंतऽ के रऽ दू टा िो़िा रखलऽ छे लै । ओकरे िुं ं॑ स ं॑ एक टा िो़िा पर बडी आदर-समिान स ं॑ रमजनरा कं॑ बैठाय कं॑ बध्दन राि िाय कं॑ हा​ाँक लगैन ं॑ छे लै- “िाय गे.... देखैं रमजन्नर िामलक आबी गेल्हैन.........।” रमजनराुं िाथा उठाय कं॑ ओसरा दन्न ं॑ ताकलकै । देखलकै ठीक ओकरऽ िाय के रऽ उमिर के रऽ एक टा कररया रुं सखल-पकलऽ जनानी ितरमक छोटऽ छोटऽ छापा िला हलका लाल रुंग के साफ-स्थर समडया मपन्हलें कोठरी स ं॑ बहराय कं॑ ओसरा पर स ं॑ उतरी कं॑ एाँगना िुं ं॑ रमजनरा के आगू िुं ं॑ ठाडी होय गेलऽ छे लै । “की रे नूनू मचन्हलैं अपनऽ चनिमतया फआ कं॑...?” ई छे ली बद्धन रािऽ के िाय । तखनी रमजनरा चनिमतया दन्न ं॑ ताकी कं॑ कछ्छू याद करै के कोमशश करी रहलऽ छे लै । रमजनरा तखनी बारह-तेरह बररस के छे लै जखनी चनिमतया कं॑ अुंमति बेर देखन ं॑ छे लै गािऽ िुं ं॑ । रमजनरा के िाय कहन ं॑ छे ली - “रे नूनू तोरऽ जनि यह ं॑ चनिमतया फूआ के हाथ पर होलऽ छौ... दू- अ़िाय बररस के उमिर ता​ाँय चनिमतया फूआ रोज आबी कं॑ 26

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०3 - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


तोरा कडु आ तेलऽ के िामलस करी देन ं॑ छे लौ....“ “चनिमतया फूआ... तोंय गोहाटी िुं.ं॑ ... हय के ना भ ं॑ गेलै... घरऽ स ं॑ एत्त ं॑ दूर आबी कं॑ ई नदी-नाि सुंजोग के ना होय गेलै? “ - रमजनरा के रऽ बोली अचरज स ं॑ भरलऽ छे लै । “बधना के बाबू त ं॑ गोहामटये िुं ं॑ नी किाय छलैन... सेहे हिहूुं यहीं आबी गेला​ाँ....।” “हे गे िाय ! खाली बमतयैथैं रहभैं मक िामलक के कच्छू आदर-सतकारऽ करभैं ?” - बद्धन अपनऽ िाय क टोकन ं॑ छे लै । ितरमक बद्धन के रऽ बातऽ पर मधयान नै द ं॑ कं॑ चनिमतया कहन ं॑ छे लै- बधना जोन मदना आबी कं॑ हिरा कहन ं॑ छे लै मक िाय गे नाना कन के रऽ रमजन्नर िामलक स ं॑ आज हिरऽ भेंट भेलै, तखमनये हमिुं ं॑ तोरा मचन्हीं लेल ं॑ छे मलयऽ नूनू ।” “िाय गे तोंय चाहऽ के पानी चूल्हा पर च़िाबुं.ं॑ .. हमिुं ं॑ शुंकर झा के होटल स ं॑ कछू मिठाय ल ं॑ आबै मछयै ।” खशी स ं॑ हुलसी कं॑ बद्धन राि कहन ं॑ छे लै । “हय की बोलै छें नूनू.... सौंसे मजनगी मबती गेलऽ... अब ं॑ चला-चली के बेला िुं ं॑ बाभन राजपूत के धरि भरस्ट करै के पाप कै हन ं॑ िाथऽ प ं॑ लेबऽ, छोटऽ जात हररजन के रऽ बेटी होय कं॑ एक टा राजपूतऽ के बेटा के अपनऽ छूलऽ चाह मपलाय देला स ं॑ हिरा िरलऽ प ं॑ नरकऽ ि ं॑ जगह नै मिलतऽ.... “ जो शुंकर पुंडीजी के बेटा जनादष न नूनू कं॑ कमहयैं मक ऊ अपनऽ हाथ स ं॑ एक मगलास इसपेसल चाह आरू बम़ि​िका रुं चार टा मिठाय द ं॑ जैतै...” - िाय के रऽ कहना िानी कं॑ बद्धन शुंकर झा के होटल दन्न ं॑ चल्लऽ गेलै । थोडे देर िुं ं॑ लौटलै तब ं॑ शुंकर झा के रऽ बेटा जनाष दन साथ छे लै एगो हाथऽ िुं ं॑ चाह के मगलास आरो दोसरऽ हाथऽ िुं ं॑ मिठाय के रऽ प्लेट लेन ं॑ । हररजन के एाँगना िुं ं॑ बैठी कं॑ जनाष दन झा ब्रामहण के हाथऽ के चाह पीबी कं॑ मिठाय खाय कं॑ आरू एकटा हररजन जनानी चनबमतया स ं॑ गािऽ-घरऽ के हाल-सिाचार जानी कं॑, अपनऽ घरौआ भासा अुंमगका िुं ं॑ िऽन भरी कं॑, अघाय कं॑ बोली बमतयाय कं॑ किीचक गािऽ के समिामनत राजपूत िामलक इन्द्रदेि नारायण मसुंह के बेटा राजेन्द्र मसुंह (रमजनरा) जब ं॑ अपनऽ डेरा पर जाय लेली िो़िा पर स ं॑ उठी कं॑ ठा़िऽ भेलै तखनी चनबमतया फे नू कहन ं॑ छे लै- “बडकी भौजी िन ं॑ मक तोरऽ िाय तोरा लेली ठे कआ, पेडुमकया भेजैन ं॑ छौन नूनू, चलऽ लै मलहऽ झा जी के रऽ होटल िुं ं॑ हमिुं ं॑ रखबाय देन ं॑ मछहौं .... तेबारी जी के िाँझला बेटा जगदमबा नूनू द्वारा तोरा लगा​ाँ भेजबाय लेली भौजीं मनहौरा करी रहलऽ छे ली । जगदमबा नूनू कही रहलऽ छे ल्हैन जे हुनका त ं॑ मदिापर जाना छै ... रमजन्नर नूनू स ं॑ भेंट करै के टैि नै मिलतैन । तखमनये हमिुं ं॑ भौजी स ं॑ भेंट करै लेली तोरा कन पहुचाँ ी गेलऽ छे ला​ाँ । हमिुं ं॑ कहमलयै हे हो जगदुंबा नूनू ,गोहाटी पहुचाँ ला प ं॑ आधा

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३ - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)

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घुंटा बादे तोरा मदिापर के बस मिलथौं । भौजी के देलऽ सिान लै ल ं॑ । एक जगह बताय देभौं । िही ठाि रखी मदहऽ, रमजन्नर नूनू कं॑ मिली जैतै । हमिुं ं॑ हररजन होय कं॑ राजपूतऽ के खाय मपयै के सिान के ना छूबै... दोसरऽ सिान रहमतयै तब ं॑ हमहीं ल ं॑ जैमतयै । से हे जगदमबा नूनूये के रऽ हाथऽ स ं॑ झाजी के होटल ि ं॑ रखबाय देन ं॑ मछहौं । हमिुं ं॑ हाथ नै लगैन ं॑ मछहौं । छतैलऽ नै छौन । खाय मलहऽ । भौजी कहन ं॑ छे ली “हे गे चनिमतया, छोटका नूनू कं॑ हिरऽ हाथऽ के बनैलऽ ठेकआ, पेंडुमकया बडी पमसन पडै छै ।” “हे हो जनाष दन िामलक ऊ मदन के रखलऽ िोटरी आनी कं॑ रमजन्नर िामलक कं॑ द ं॑ दहो“ - शुंकर होटल के सािने आबी कं॑ शुंकर झा के बेटा जनाष दन झा स ं॑ चनबमतया ई आग्रह करन ं॑ छे लै । जनाष दन छौंडा िोटरी आनी कं॑ रमजनरा के हाथऽ ि ं॑ पकडाय देन ं॑ छे लै । िाय के भेजलऽ ठेकआ, पेंडुमकया के िोटरी हाथऽ िुं ं॑ पकडल ं॑ रमजनरा सोच ं॑ लगलऽ छे लै- बडऽ के , किीचक गािऽ के पचास-साठ बीघा के जोतदार बडका जात िाला राजपूत िामलक इुंद्रदेि नारायण मसुंह के बेटा राजेन्द्र मसुंह जे हरदि बडका जात के घिुंड िुं ं॑ चूर रहै छै से आकी किीचक के हररजन टोला के िरलऽ गाय बैल के चिडा स ं॑ अपनऽ हाथ स ं॑ जत्ता बनािै िला गनौरी राि के बेटी चनबमतया जे एक तरफ त ं॑ राजपूत के जात नै लेली ली खाय-पीयै के रऽ सिानऽ के िोटरी नै छलकै आरू दोसरऽ तरफ गौआुं होय के करतब मनभाबै लेली ऊ िोटरी ब्रामहण यिक स ं॑ अनिाय कं॑ ब्रामहण के रऽ होटल िुं ं॑ रखबाय देलकै । अपनऽ परुंपरा गत धरि मनभािै के प्रमत आरू गौआाँ के करतब मनभाबै के प्रमत सजग रहै िाली चनबमतया किीचक के के करो दीदी, के करो िौसी त ं॑ के करो फआ लगै छे लै ितरमक ब्रामहण, राजपूत टोले नै, कोयरी टोला, यादि टोला के रऽ कोय जादब जी अरकी िुंडल जी के भी कोय बच्चा बतरू चनबमतया कं॑ “चनबमतया दीदी“ “चनबमतया िौसी“ आकी ‘चनबमतया फूआ’ जैसनऽ अपनत्ि स ं॑ भरलऽ समिामनत समबोधन नै करल ं॑ छे लै । खाली ‘चनबमतया-चनबमतया’ कही कं॑ ही हाँकाबै छे लै । “िाय कं॑ मचट्ठी मलखी कं॑ बताय मदहऽ रमजन्नर नूनू मक सब सिान तोरा मिली गेल्हौं ।” - चनबमतया कहन ं॑ छे लै । “तोंय मचुंता नै करुं.ं॑ .. हमिुं ं॑ मचट्ठी नै फोन करी कं॑ आइए िाय कं॑ बताय देबै मक चनबमतया फूआुं हिरा तोरऽ भेजलऽ सब सिान द ं॑ देलकै ।” - बडी आत्िीयता स ं॑ आरू बडी भािक होय कं॑ कहन ं॑ छे लै रमजनरा । महरदय के मनिष लता सुं ं॑ आाँखी प ं॑ पडलऽ जात-पात के परदा हटी चकलऽ छे लै । तथाकमथत ऊच्चऽ जात के घिुंड के बा​ाँध टटला स ं॑ आिेग सुं ं॑ प्रिामहत हुअ ं॑ लागलऽ मनशछ्ल दृमष्ट िुं ं॑ ‘‘चनबमतया फूआ’’ जैसनऽ अपनत्ि भरलऽ समिामनत शब्द निजीिन रुं उपलाय गेलऽ छे लै रमजनरा के िहाँ ऽ स ं॑ अनप़ि मकुं त कतष वय आरू नीमतगत धामिष क परुंपरा मनभािै के ज्ञान स ं॑ भरलऽ चनबमतया के रऽ बात-मिचार सनी कं॑ । 28

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०3 - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


- अंमिका कमवता अब ना रहै महय धीर

समख, अब ना रहै महय धीर

डॉ. मशवनुंदन लाल

- संपकष टी-8, लि​िी अपाटष िेंट, यशिुंतनगर, फोंडा, गोिा – 403 401, भारत

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ऐलै बसुंत पर ऐलै नाही कुं त दरुंत सखी िोरा पीर असिय सािन नयनन बसी गेलै थिै ना बहै अमत नीर एहनो तपन तन िन दही गेलै गेलै दही सपना के भीर कतनो गे दाह-प्रिाह न सीतल बही गे जे गेलै से उिीर नेमहया के पुंमखया पसलीं जतन जोरी ओछी के गे आस-अचाँ ीर सेही दरमदमनया​ाँ आधी-आधी रमतया​ाँ रटै पीउ-पीउ महय चीर सेही गे बसुंत कोइली बन कहुकै हूकै महय मबस-बझ तीर प्रान उदान अटमक पथ जोहत छूटत पल-पल धीर । अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३- ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


- अंमिका कमवता बसंत बडी दूर िै

हिरा िालूि छै

प्रो. (डॉ.) लखन लाल मसुंह ‘आरोही’

- संपकष अध्यि - मबहार अुंमगका अकादिी, ‘ऋतुंबरा’ खैरा, पो. - पतसौरी खैरा, मजला- बा​ाँका - 813 107 मबहार, भारत

आबी गेलऽ छै बसुंत परकीरती िुं ं॑ ल ं॑ कं॑ फूलऽ के हाँसी कोयल रऽ काकली भौंरा के रऽ गुंजार गुंधऽ के बहार परानऽ के सुंचार पर हिरऽ देसऽ के बसुंत अभी छै दूर उदास छै अिलतास चमपा​ाँ अमभयो अच्छर नै चीन्है छै अुंमति आदिी के लोर अमभयो नै सखलऽ छै ! भरसटाचार के ताुंडि छै िुंहगाई के िार छै देस के ओठऽ के पलास उदास छै कै सुं ं॑ मखलतै गलिोहर देस के बसुंत बडी दूर छै ।

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३ - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)

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- अंमिका कमवता होली

ऐलै अनुंग िधप गजुं ारै, बहलै पिन िसुंत हो, उडलै रुंग-अबीर गलाल, चहु ाँ मदस फूल अनुंत हो ।

डॉ. रामनंदन मवकल

- संपकष मसगमनया ओसन, फ्लैट नुं. – 1601, सेक्टर – 10 A, ऐरौली, निी िबुं ई – 400 708, िहाराष्ट्र , भारत

परबाुं बही – बही देह दखाबै, पमछयाुं खेलै धरखेल हो, अुंगना, ओसरा, चौपालऽ प,ं॑ बाजै ढोल िदृ गुं हो । भैरननाथ होमलया गािै, जानी नाचै झकोर हो, मबरमहन ताकै गा​ाँि डगररया, ऐतै बालि िोर हो । हदगद्दी सुं महयरा डोलै, आाँखी के डोरी लाल हो, घरे िुं ं॑ देिर, गोतनी बडकी, रही-रही िस्की के धिाल हो । खेली कं॑ रुंग अबीर उडाबऽ, भूलुं ं॑ परनका टाट हो, गाबऽ नाचऽ गाुंि गमलयारा, सब्भै कं॑ लैकै सुंग हो ।

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अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३- ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


- अंमिका कमवता अंमिका िीत

ममल्लत स ं॑ बरसै, खपसी कं॑ फहार हो सधीर कमार प्रोग्रामर

- संपकष अुंग लोक, समिता मसनेिा के बगल िें, बाई पास रोड, सलतानगुंज, मजला: भागलपर, मपन : 813213, मबहार, भारत

रसुं-ं॑ रसुं ं॑ फनगी पर च़ितै मबहार हो मक जोर, जरा जोर स ं॑ लगाबऽ मबहारी.................... जोर, जरा जोर स ं॑ लगाबऽ । गुंगा के गोदी िुं ं॑ गाबै िल्हार हो खोजै छै दमनया​ाँ मबहारी कहार हो हिरऽ अुंमगका कं॑ सब्भै स ं॑ प्यार हो मक प्यार के रऽ धार कं॑ ब़िाबऽ मबहारी....................... प्यार के रऽ धार कं॑ ब़िाबऽ ।

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३ - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)

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- िब्भा मबिडी िेल्हौं बेटा मबगडी गेल्हौं बेटा तोरऽ मलखै प़िै के ना​ाँि नै िार-पीट िुं ं॑ सिय मबताबै कछ्छू करै के काि नै ।

लालेन्र क.प्र. ललन

पछला प ं॑ बस यह ं॑ कहै छौं मलखी प़िी कं॑ होतै की ? बेरोजगार सब्भे प़िलऽ छै ई कलुंक कं॑ धोतै की ?

इसकूल जाय के करहौं बहाना बडका नेता बनी गेलऽ छै बैठी जाय छौं बगीच्चा िुं ं॑ जौने भैंस चरैन ं॑ छै ओकरे स्िजन िुंतरी-सुंतरी गाय चराबै िाला सुंगीं िामहर दोल-दमलच्चा िुं ं॑ । गौरि िह ं॑ ब़िैन ं॑ छै । ओकरा सुं ं॑ िास्टर का​ाँपैं छौं भागहौं ढेले िारी कं॑ नै मकताब के याद करै छौं याद करै छौं गारी कं॑ ।

लाल रुंग नेता हि बनभौं काटभौं मबहार के िाटी पसअऽ के बचलऽ चारा कं॑ लेभौं आपस िुं ं॑ बा​ाँटीं ।

काला आखर भैंस बराबर मडग्री ओकरा लेली पत्थर तोरऽ मजनगी तोंय कूटानी बादे के मजनगी बदतर ।

धोती साडी बेची कं॑ करभौं मबहार कं॑ नुंगा बात-बात िुं ं॑ खून खराबा रचभौं ऐन्हऽ हथकुं डा ।

- संपकष H.N. - 2956, गली नुं. - 4, W.N. - 10, लि​िण मिहार, गडगा​ाँि, हररयाणा - 112 006, भारत

जन्म मतमथ - २५ फरवरी १९७६ ई., मशक्षा - इंजीमनयररंि मडप्लोमा । मल ू तः मबहार के लक्खीसराय (पहलकरऽ मिं रे ) मजलान्तिषत मबिवे िाँव के मनवासी श्री लालेन्र कमार प्रसाद ललन महन्दी, भोजपरी आरू अंमिका मं ं॑ िीत,िजल आरू एकांकी मलखै िै । महनकऽ कि समय दमका मं ं॑ मबतलऽ िै । महनका अंमिका मं ं॑ मलखै के प्रेरना अंमिका के महाकमव, डॉ. समन सूरो जी स ं॑ ममललै । महनकऽ ई पहलऽ अंमिका रर्ना िे कै जे कोनो पि-पमिका मं ं॑ प्रकामसत होय रहलऽ िै । लालेन्र जी कं॑ अंि माधरी पररवार के तरफऽ सं ं॑ बधाय आरू सभकामना ।

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अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३ - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


- डॉ. र्कोर स्ममृ त : संस्-मरण - बासी-टटका

स्त्री के मंमदर प्रवेश हिरऽ

राके श पाठक - संपकष द्वारा- सरेन्द्रनाथ काकोटी हाउस नुं. : 23, बीर मचला राय पथ, जोनकपर, बीरूबारी, गिाहाटी - 781 016 असि, भारत

“ हिरऽ देशऽ के सािामजक आरो धामिष क परुंपरा के इमतहास बताबै छै मक भारत िुं ं॑ िुंमदर ईश्वरोपासना, अराधना आरू बहुत हद ता​ाँय पाररिाररक, सािामजक कलह के मनपटारा के रऽ कें द्र छे लै । ”

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देशऽ के सािामजक आरो धामिष क परुंपरा के इमतहास बताबै छै मक भारत िुं ं॑ िुंमदर ईश्वरोपासना, अराधना आरू बहुत हद ता​ाँय पाररिाररक, सािामजक कलह के मनपटारा के रऽ कें द्र छे लै । पुंमडत-पजारी-परोमहत जहा​ाँ िुंमदर िुं ं॑ भि मसनी कं॑ भगिानऽ के पूजा-पाठ कराबै ि ं॑ सहायता करै छे ला िहीं सिाजऽ के करता-धरता मसनी िुंमदरऽ के एुंगना िुं ं॑ बैठी कं॑ लोगऽ के कलह के मनपटारा कराबै छे लात । ितर आज िुंमदर खद्दे कलह के जड बनी गेलऽ छै । ई देशऽ के राि-रहीि के कलह त ं॑ जग जामहर छै । साठ-पैंसठ बररस स ं॑ उप्पर होय गेलऽ छै । िािला कोट ि ं॑ अटकलऽ छै । आय ता​ाँय ई फै सला नै हुअ ं॑ देलऽ जाय रहलऽ छै मक िुंमदर राि के बन ं॑ नै मक रहीि के । जे मचमडय़ा​ाँ-चनिन, पीपरी ता​ाँय स ं॑ ल ं॑ कं॑ आदिी आरो हाथी-घोडा तक कं॑ घऽर दै बला छऽत हुनके आज अदना आदिी जेकरऽ सा​ाँस के डोरी राि-रहीिऽ के हाथऽ िुं ं॑ छै सुं ं॑ राि-रहीि के घऽर बनाबै लेली िानुं ं॑ मक िुंमदर बनािै लेली िार-काट िचाय रहलऽ छै । राि-रहीि के िुंमदर के कलह त ं॑ कमहयो साई ुं बाबा के िुंमदर के कलह । आरो अब ं॑ िुंमदर िुं ं॑ स्त्री प्रिेश के कलह । िुंमदर खद्दे एक बडक़ा कलह । मपछला मदन एकटा शमन िुंमदर िे स्त्री के प्रिेश कं॑ ल ं॑ कं॑ कलह खडा भेलै । देखतुं-ं॑ देखतुं ं॑ ई बडक़ा मितुंडािाद बनी गेलै । एक तरफ देश भरी के जनानी सडक़ पर उतरी गेली त ं॑ दोसरा तरफ टी.िी. चैनल पर गरिागरि बहस मछडी गेलै । एकटा िठाधीश न ं॑ त ं॑ ई कही कं॑ शमन कं॑ भगिान के पदे स ं॑ खाररज करी देलकात मक शमन देिता नै िाि एक ग्रह छै त । टी.िी. पर बहस करै िला मसनी ि ं॑ स ं॑ कोय-कोय शास्त्र-पराण के उदाहरण दै कं॑ परुंपरा मनभािै के राग अलापलकात त ं॑ कोय-पमि​िताअपमि​िता के प्रश्न खडा करी देलकात ।

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३ - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


जहा​ाँ ता​ाँय परुंपरा मनभािै के बात छै त ं॑ आज हमिुं ं॑ मसनी कहा​ाँ अपनऽ परनका सनातनी परुंपरा मनभाय रहलऽ छी । हमिुं ं॑ मसनी जे ऋग्िैमदक आयष जन के सुंतान मछका​ाँ हुनकऽ पहनाबा मक पैन्ट, शटष , कोटष , टाई छे लै ? हुमनयों मसनी मक िॉि-डैड उच्चारण करै छे ला ? एक दूसरा स ं॑ भेंट होला पर ‘हाय-हेलो’ कहै छे ला ? कें डल लाइट डीनर करै छे ला ? ई सब परुंपरा की सनातनी मछकै ? नै, एकदि नै । आय हमिुं ं॑ मसनी सनातनी रही गेलऽ छी खाली नािे के । बोली-चाली, पहनािा, खाना-पीना, जीिन पद्धमत स ं॑ हमिुं ं॑ अपनऽ पूिषज ऋग्िैमदक आयष जन के सब टा परुंपरा कमहये मतयागी देन ं॑ छी । ऐसनऽ करना हिरा मसनी के गलती नै सिय के िा​ाँग छे लै । हर तरह के रेिाज, परुंपरा कमहयऽ स्थायी नै रहै छै । सिय आरू जरूरत के िोतामबक बदलतुं ं॑ रहै छै । जब ं॑ खान-पान, रहन-सहन, बोली-चाली, भमि-भाि सब बदली जाय छै त ं॑ स्त्री के िुंमदर प्रिेश के परुंपरा कै हने नै बदल ं॑ पारै छै । जमद एकरा जबरदस्ती रोकलऽ जाय त ं॑ बेसी मदन तक नै । सिय के िाुंग के अनसार ई परुंपरा खद्दे टूटी जैतै । हिा चली चकलऽ छै । कोय एकरा रोकै नै पारै छै । अब ं॑ बात रही जाय छै पमि​िता-अपमि​िता के रऽ । कै हने मक स्त्री रजस्िला होय छै , ई बातऽ के आधार बनाय कं॑ हिरऽ देशऽ के सब टा शास्त्र-पराण (िेदऽ के छोडी कं॑) स्त्री कं॑ अपमि​ि घोमषत करी देन ं॑ छै । स्त्री के प्रमत ई तरह के िनोभाि रखना स्त्री के प्रमत घोर अन्याय मछकै । रजस्िला होना एक टा अमनिायष जैमिक आरो प्राकृमतक मनयि मछकै । स्त्री जानी-बझी

“ ई अवस्था लेली नारी विष कं॑ परूर् समाज न ं॑ एतना न ं॑ नीर्ा देखैने िै , सैकडों बररस स ं॑ ई रं मघन करन ं॑ िै मक स्त्री खद्दे ई अवस्था लेली खद कं॑ दोर्ी मानी लै िै । पाररवाररक, सामामजक, धाममषक काम स ं॑ खद्दे अपना कं॑ दरू करी लै िै । मंमदर की, मंमदर के िाया तक स ं॑ सवा हाथ दरू े रहै के कोमशश करै िै । ई तरह के हीन भावना ग्रमसत स्त्री की वू अवस्था मं ं॑ धोखा द ं॑ कं॑ मंमदर मं ं॑ जाब ं॑ पारै िै ? ” कं॑ ई मस्थमत िुं ं॑ नै आबै छै । स्त्री कं॑ ई अिस्था लेली नारी िगष कं॑ परूष सिाज न ं॑ एतना न ं॑ नीचा देखैने छै , सैकडों बररस स ं॑ ई रुं मघन करन ं॑ छै मक स्त्री खद्दे ई अिस्था लेली खद कं॑ दोषी िानी लै छै । पाररिाररक, सािामजक, धामिष क काि स ं॑ खद्दे अपना कं॑ दूर करी लै छै । िुंमदर की, िुंमदर के छाया तक स ं॑ सिा हाथ दूरे रहै के कोमशश करै छै । ई तरह के हीन भािना ग्रमसत स्त्री की िू अिस्था िुं ं॑ धोखा द ं॑ कं॑ िुंमदर िुं ं॑ जाब ं॑ पारै छै ? कमहयऽ नै । परुष सिाज के स्त्री पर एतना त ं॑ मिश्वास करने चामहयऽ । आज नारी कं॑ जब ं॑ परुषऽ के बराबरी के हक मिली रहलऽ छै तब ं॑ िुंमदर प्रिेशऽ िुं ं॑ भी ई हक मिलना ही चामहयऽ ।

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३ - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)

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अंमिका वयंग्य संसार : िप - सरक्का

जीका आरू मवलायतीराम के रऽ होलै आमना –सामना ( हास्य-वयुंग्य अुंमगका भासा लोक सामहत्य के रऽ अमभन्न अुंग

रहलऽ छै । आजकल के रऽ तनाि स ं॑ भरलऽ मजनगी ि ं॑ हास्य-वयुंग्य कछ जादे ही िहत्िपूनष होय गेलऽ छै । अुंग िाधरी के रऽ स्थाई-स्तुंभ के रूप िुं ं॑ ‘गप - सरक्का’ आरुंभ करै के िकसद वयुंग्य मिधा के रऽ िहत्ता कं॑ रेखाुंमकत करतुं ं॑ हुअ ं॑ एकरा प्रिखता के साथ प्रकामसत करी कं॑ अुंमगका के रऽ श्रेस्ठ वयुंग्य सामहत्य कं॑ सािने लाना छै । ‘गप डॉ. लमलत लामलत्य - सरक्का’ स्तुंभ लेली आपन ं॑ सुं ं॑ िौमलक अुंमगका िुं ं॑ मलखलऽ - संपकष स्तरीय वयुंग्य आलेख आिुंमित छै । महुंदी वयुंग्य सम्राट ‘हररशुंकर संपादक, ं॑ ं॑ नेशनल बक रस्ट, इंमडया, परसाई’ के अनसार जरूरी नै छै मक वयुंग्य िुं हाँसी आब । जों वयुंग्य चेतना कं॑ झकझोरी दै छै , मिद्रूप कं॑ सािने लानी ठाडऽ करी दै छै , नेहरू भवन, 5, इंमस्टट् यूशनल एररया, आत्िसािात्कार कराबै छै , सोचै लेली बाध्य करै छै , वयिस्था के रऽ फे ज-2, वसंत कं ज, सराुंध कं॑ इुंमगत करै छै आरू पररितष न लेली प्रेररत करै छै , त ं॑ िू नई मदल्ली –110070 सफल वयुंग्य छे कै । ई स्तंभ म ं॑ अबरी दाफी महंदी के रऽ प्रख्यात - अंमिका अनवाद - वयंग्य रर्नाकारऽ मं॑ स ं॑ एक, डॉ. लमलत लामलत्य के रऽ मूल महंदी मं ं॑ मलखलऽ िेलऽ आरू अंमिका मं ं॑ अनमदत रर्ना िपी कं दन अममताभ रहलऽ िै । समप्रमत लमलत जी नेशनल बक रस्ट, इंमडया मं ं॑ संपादक िे का । अपनऽ रर्ना के अंमिका मं॑ अनवाद के अनममत दै लेली सामहत्यकार ममि डॉ. लमलत लामलत्य जी के प्रमत हामदषक आभार व कृतज्ञता प्रकट करै मियै । - संपादक )

‘िप-सरक्का’ स्तंभ लेली आपन ं॑ स ं॑ अंमिका म ं॑ मलखलऽ स्तरीय वयंग्य रर्ना आमंमित िै । संपादक 36

बात मबल्कल नया जिाना के रऽ छै । आमखर िीमडया अपनऽ काि करी ही रहलऽ छै , ई खबर सुं ं॑ अपनऽ पाण्डेय जी कछ जादा ही उत्सामहत छै , होना भी चामहयऽ, आमखर अखबार कं॑ दीिक जैसनऽ चाटी जाय छे लै । पत्नी हुनकऽ जरूरत स ं॑ जादा दखी छे लै, दक्खऽ के सरुंग हर पल ओकरा प ं॑ िुंडरैतुं ं॑ रहै छे लै, जब ं॑ इच्छा होय छे लै तब ं॑ बरसी जाय । ओन्हौं भारत के रऽ जनानी मसनी कं॑ बरसै लेली पुंचाुंग कं॑ देखै के जरूरत नै पडै छै ।

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३ - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


बाजार ि ं॑ चल्ली जाय छै त ं॑ दकानदार पगलाय जाय छै - भैय्या ई साडी के तना िुं ं॑ देल्हो,अच्छा बताबऽ - बधिार कं॑ कहन ं॑ छे ल्हो नया स्टॉक आबी जैतै, ऐलै मक ? पकाबै ि ं॑ उस्ताद । देस के रऽ पमत आमखर कै न्हुं ं॑ आमजज आबी गेलऽ छै ? आमखर महनकऽ भी कोय स्टेटस छै मक नै, जब ं॑ देखऽ अपनऽ िमहला - िुंडल ि ं॑ हर पत्नी अपनऽ पमत के चगली िऽन भरी नै करी मलअ ं॑ त ं॑ ओकरऽ खाना नै पचै छै । अखनी बजार िुं ं॑ सेल के जोर जारी छे लै । पत्नी के रऽ प्यार सुं ं॑ आतुंमकत पमत हिरऽ ितलब अपनऽ लोकमप्रय िोहल्ला प्रेिी मिलायतीराि पाण्डेय के रऽ सर आय दफ्तरी काि स ं॑ दखी छे लै । की कर,ं॑ सरकारी बाबू छे ला , िू भी िैसनऽ मिभागऽ िुं ं॑ जेकरऽ काि छे लै खमबा प ं॑ बल्ब लगाना । िन ं॑ जैन्जा​ाँ अन्हार, िैन्जा​ाँ उजाला लानै के मजमिा । अपनऽ काि िुं ं॑ कोय भी हाल िुं ं॑ कोताही नै बरतै छे लै । जे कही मदअ ं॑ ओकरऽ खमबा प ं॑ बल्ब जगिगाब ं॑ लगै छे लै । खद पाण्डेय जी कं॑ बडा राहत मिलै छे लै, चलऽ हुनकऽ प्रयास स ं॑ कहीं त ं॑ उजाला छै । रोज-बे रोज के अपराध िुं ं॑ भी हुनकऽ उजाला स ं॑ कटौती होलऽ छे लै । आय घऽर तनी जल्दी आबी गेलै, सोचलकै सर ददष छै त ं॑ पत्नी बाि लगाय देतै, पर भला हुअ ं॑ िमहला िुंडल के रऽ मकिी पाटी के रऽ, जेकरा चलतुं ं॑ पत्नी जी छे ली कहा​ाँ जै, िू त ं॑ तैयार होय कं॑ खसबू िाला इि मछडकी कं॑ कहीं िटरगस्ती करै लेली चल्ली गेलऽ होतै । कोठरी िुं ं॑ मबस्तर प ं॑ पडलऽ पाउडर के मडब्बा आरू इि के सीसी पूरा िनऽ सुं ं॑ चगली करी रहलऽ छे लै । दरद छे लै मक ब़िले जाय रहलऽ छे लै, जेना नगर मनगि के पानी िाला पाइप मपछला कत्त ं॑ रोजा सुं ं॑ आजादी िहसूस करी रहलऽ छे लै आरू सोनू के रऽ जकाि के रऽ िामनुंद बहै िुं ं॑ अपनऽ सान सिझी रहलऽ छे लै । आमखर आजाद भारत के स्ितुंि इकाई के रऽ सदस्य प्राउड भी फील न कर,ं॑ ऐन्हऽ कमहय्यो हुअ ं॑ सकै छै ,नय न ं॑ ? थकलऽ–हारलऽ बेचारा अन्हारऽ कं॑ उमजयारा िुं ं॑ बदली दै िाला मिलायती राि बखार िुं ं॑ तप ं॑ लागलै, आिाज भारी होय गेलै, लगलै कहीं कोय बेसरा राग अलापी मदअ ं॑ त ं॑ कोनो अलग दजाष के सुंगत नय लगी जाय । बहरहाल घर के रऽ िहारानी िन ं॑ मक श्रीिती मिलायतीराि पाण्डेय घर आमबये गेली, शाि के रऽ सहानऽ ि​ि ि ं॑ । हुनका लगा​ाँ डप्लीके ट चाबी रहै छे लै । ऐलै त ं॑ देखलकै पाण्डेय जी मबस्तर प ं॑ ऐसनऽ पटैलऽ पडलऽ छै जे अब ं॑ गेलै आरू तब ं॑ गेलै के हालत हुअ ं॑ । हालात भी कछ ऐसने छे लबो करलै ! फोन लगाय देलकै अपनऽ एगो सहेली कं॑, बोल ं॑ लगलै -बमहन की करुंऽ, कछू ठीक नै लगी रहलऽ छै , अखनी ऐमलयै त ं॑ ,देखमलयै ,महनी कछू बोल ं॑ ही नै सकं॑ छै , ओना त ं॑ ठीक ही छै । दोसरऽ दन्न ं॑ सुं ं॑ आिाज छे लै,अपना सब सािना ि ं॑ पमत मसनी के की औकात जे बोल,ं॑ पर बमहन जैसनऽ भी रह,ं॑ घर चलाबै छै ,मखलाबै भी छै , यार कछू गडबड नै होना चामहयऽ ।

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३ - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)

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तोंय कही त ं॑ ठीक्के रहलऽ छैं । अच्छा कछ करै मछयौ । ओुंय फोन रखी देलकै । महन्नुं ं॑ पत्नी अपनऽ सखी के फोन के प्रतीिा िुं ं॑ छे लै । िन बहलाबै लेली टेलीमिजन खोली लेलकै । पहलऽ ही सिाचार रहै देस आरू दमनया िुं ं॑ इहबोला के बाद एगो आरू खतरनाक बीिारी बडी तेजी स ं॑ गोर पसारी रहलऽ छै , ओकरऽ नाि जीका छे कै । ई एगो घातक िायरस छे कै जेकरऽ आक्रिन अब तलक बीस देसऽ प ं॑ होय चकलऽ छै । ई िायरस बहुत सीधा -सादा िनस्यऽ प ं॑ मनसाना साधै छै । एकरऽ आक्रिन स ं॑ कुं पकुं पी, बखार, जी मिचलाना, जोडऽ के ददष एतना तेजी स ं॑ फै लै छै मक जों आपन ं॑ िजबूत नै होमलऐ त ं॑ ई आपन ं॑ कं॑ अपनऽ लपेट िुं ं॑ ल ं॑ लेतै ,आरू िहीनों आपन ं॑ कं॑ मबछौना प ं॑ घोलटाय देतै । कछू करै के हालत िुं ं॑ भी नै रहब ं॑ । पत्नी कं॑ लगलै कहीं पाण्डेय जी ई लपेट िुं ं॑ त ं॑ नै आबी गेलै । लगले हुनकऽ िाथऽ प ं॑ ठुंडा पिी मसनी रख ं॑ लागलै । जोर जोर स ं॑ कहलऽ जाय रहलऽ छे लै -भूत मपसाच मनकट नै आि ं॑ ,िहािीर जब ं॑ नाि सनाि ं॑ । आिाज जोरदार छे लै । बगल के रऽ िहािीर न ं॑ सनलकै - कह ं॑ लगलै – भौजी, कै हन ं॑ हा​ाँक पाडल्हऽ । मिसेज पाण्डेय न ं॑ पकार कं॑ दरमकनार करी देलकै । कोय आरू मदन होमतयै त ं॑ सनी भी लेमतयै । आय ओकरऽ एकिाि पमत के िािला छे लै । िू ओकरा हेराब ं॑ ल ं॑ नै चाहै छे लै । चाहै छे लै ओकरा बा​ाँहऽ िुं ं॑ हिेसा लेली हेराय जाय लेली । हर पत्नी के अुंमति नतीजा त ं॑ यह ं॑ होय छै । ओना पानी चाय लानै ल ं॑ पमत पूछी मलअ ं॑ त ं॑ पत्नी मसनी के िहाँ एना फूली जाय छै जेना पमत लेली चाय बनाबै ल ं॑ ओकरा अिेररका जाय ल ं॑ पडै छै । क़िै त ं॑ सब्भे छै चाय बनाबै स ं॑ ,पर िज़बूरी िुं ं॑ द ं॑ दै छै अलसैलऽ चाय । बहरहाल मिलायती राि पाण्डेय कं॑ थकािट के साथ झपकी लगी गेलऽ छे लै । जब ं॑ आाँख खललै त ं॑ िहारानीजी हुनकऽ गोरऽ प ं॑ झकलऽ छे लै, आाँखऽ िुं ं॑ लोर छे लै, चेहरा प ं॑ उमिीद के रऽ भाि,ठीक होय जाय प्रभ िाला । सनै छो, अब ं॑ हमिुं ं॑ कहीं नै जैभौं,आपन ं॑ के साथ जन्ि जन्िान्तर तलक मनबैभौं । पाण्डेय जी आकमस्िक पत्नी प्रेि प ं॑ न्योछािर होलऽ जाय रहलऽ छे लै । हुनी कहलकै भाग्यिान आय दफ्तर िुं ं॑ िऽन नै लगलै , सोचलुंऽ तोरा हाथऽ के अदरक िाला चाय पीबै त ं॑ ठीक होय जैबै । ऐसनऽ ! हमिुं ं॑ त ं॑ सिझी बैठलऽ छे मलयै मक आपन ं॑ कं॑ कहीं जीकाुं तुं ं॑ नै लपेटी लेलकै । बडा खतरनाक कीटाण होय छै ,अखमनये त ं॑ टी िी प ं॑ सिाचार सनमलयै । अब ं॑ बोलै के बारी अपनऽ मिलायती राि के रऽ छे लै । कह ं॑ लगलै- डामलिं ग तोरा होतुं ं॑ हुअ ं॑ हिरा कोनो आरू िायरस के जरुरत रत्ती भर भी नै । अच्छा सनऽ,चाय बनाय कं॑ लानऽ । पत्नी न ं॑ चाय के बात सनलकै आरू िायरस के नै । आमखर बाल -बाल बचलै मिलायती राि पाण्डेय जी । दमनया भी किाल के , बची गेल ं॑ पाण्डेय जी । बची गेलऽ पत्नी के सहाग । पत्नी हनिान जी के रऽ िूरत के सािने िूरत बनी खडी छे ली । पाण्डेय जी के प्यार पत्नी कं॑ ल ं॑ कं॑ अपनऽ सपना िुं ं॑ तैर ं॑ लगलै । आमखर कोनऽ जिाना िुं ं॑ नेशनल तैराक जे छे ला । 38

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०3 - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


डॉ. नरेश पाण्डेय ‘र्कोर’

जन्म : 03 जनवरी,1938 ई. - मनधन : 14 नवंबर, 2015 ई.

- डॉ. चकोर स्िमृ त कावयाुंजमल- डॉ. चकोर स्िमृ त सुंस्िरण ( गताुंक सुं ं॑ आगू....................................................... क्रिशः) अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३ - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)

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- डॉ. र्कोर स्ममृ त : कावयांजमल र्कोर जी के प्रमत दो शब्द

अमं गका िय रहलऽ छै, मजनकऽ ही आिास ‘चकोरजी’ अुंमगका के , छे लै कामलदास । रोली – चुंदन स ं॑ लाल, बरबस लगै ललाट बोलै ि ं॑ भी खरुंटल, छे लै हुनी सपाट । अमभ. अुंजनी किार ‘शिा​ा ’

सौसे अुंमगकािय छे लै चकोर जी के देह हर अुंमगका भाषी सुं,ं॑ रक्खै छे लै स्नेह । अुंग िाधरी बनैलकै , जनपद के पहचान अुंमगका कमि कं॑ मिललै, ढेरों ही समिान ।

- संपकष -

मदल खोली कं॑ देलकै , अुंमगका कं॑ चकोर सब लोगऽ के आाँख स,ं॑ ठप-ठप टपकै लोर ।

ब्लॉक रोड सलतानगुंज, भागलपर – 813 213, छलै गरू सिान अरू अमभभािक के तल्य रसुं-ं॑ रसुं ं॑ अब सिझत,ं॑ आब ं॑ हुनकऽ िल्य । मबहार, भारत

भरलकं॑ पटना िुं ं॑ जें, अुंमगका के हु​ुंकार अुंमगका आुंदोलन के , चोखऽ होलै धार । निन करै छै अुंजनी, हुनका बारुंबार, करऽ हुनकऽ सपना, मिली जली साकार । 40

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३ - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


- डॉ. र्कोर स्ममृ त : कावयांजमल नया र्ांद

र्किा चकोर कहा​ाँ उडी गेलै, अुंमगका के होलै अिसान । ऐलै अिािस उजाला धधाँ लैलै, चकिा, चकोर आरो चाुंद । डॉ. रािनुंदन मवकल

कथा आरो मखस्सा कत्तो करऽ, गेला पर लौटलै नै कोनो इुंसान । साधक के भूिी ई साधक के धरती, साधक चकोर गेलै, होलै अिसान । - संपकष मसगमनया ओसन, फ्लैट नुं. – 1601, सेक्टर – 10 A, ऐरौली, निी िबुं ई – 400 708, िहाराष्ट्र, भारत

किष के पूजा आरो किे के आदर, किष करऽ आर-पार पैिऽ समिान । मनष्ट्पाप योगी चकोर जेना – बनी देखऽ अुंमगका के चाुंद । होलै अनाथ अुंग िाधरी के चाुंद, के करऽ िाथुं पगडी, सोचै छुं चाुंद । कुं दन अमिताभुं लोकलकै चाुंद, ‘नया चाुंद’ अुंमगका के नया चाुंद ।

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- डॉ. र्कोर स्ममृ त : कावयांजमल डॉ. र्कोर : श्रद्धांजमल िीत अुंमगका के लेखक कमि सुंत भी बेजोड । िे थे हिारे परि पज्ू य श्रद्धेय ‘चकोर’ ।।

ब्रह्मदेव मसुंह ‘लोके श’

- संपकष ग्राम : देवधा, पो: बाथ, भािलपर, मबहार, भारत

अुंमगका के अुंगदतू , अुंमगका के अुंगद, मजनके दशष न से हो जाता था िन गदगद । बजने लगता था अन्तर िें अनहद, मखल जाता था , सारे ज्ञान के शतदल ।। मजनकी बडाई के नहीं हैं ओर-छोर, िे थे हिारे परि पूज्य श्रद्धेय ‘चकोर’ ।। भागलपर मजला ग्राि देिधा मनिासी, मजनके हृदय बसे थे श्रीराि अमिनाशी । चेहरे पर कभी नहीं आती थी उदासी, पार हुये, पार मकये मकतने को चौरासी । ‘सीताराि’ जपते थे उनके दो ठोर । िे थे हिारे परि पूज्य श्रद्धेय ‘चकोर’ ।। द्रौपदी के पमत शमश मिध इन्द सररता के मपताजी, प़िते थे िे प्रमतमदन श्री रािायण गीताजी, मजनके हृदय थे मिराजिान श्रीरािचुंद्र सीताजी, लगी रहतीं थीं नजरें मजनकी श्री हनिानजी की ओर, िे थे हिारे परि पूज्य श्रद्धेय ‘चकोर’ ।। रचते थे गीत भजन सदस ् ामहत्य सन्दर थे मिशद्ध सुंत, िन मनिष ल बाहर-अुंदर, कथनी और करनी िें जरा सा नहीं अन्तर, पकडे थे और पकडाते थे भमि के डोर, िे थे हिारे परि पूज्य श्रद्धेय ‘चकोर’ ।।

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अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०३ - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


- डॉ. र्कोर स्ममृ त : संस्मरण -

र्कोर जी महान मवभूमत िे ला

डॉ. अरूणेन्र भारती - संपकष -

सेिक दिाखाना, सभाष चौक, िासदेिपर, िगुं ेर (मबहार) – 811 202

“ मवसवासे नैय भेलै मक र्कोर जी के साथ अब ं॑ िूटी िेलै । ठप्प स ं॑ लोर आँखीं स ं॑ टपकी िेलै । आँखी स ं॑ र्समा हटाय कं॑ लोर पोिमलयै आरू सोर् ं॑ लािमलये.... अब ं॑ की होतै .... अंि माधरी के ना प्रकामसत होतै....”

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भोरे भोर अखबारऽ प ं॑ नजर ठहरी गेलै । मिसिासे नैय भेलै मक चकोर जी के साथ अब ं॑ छूटी गेलै । ठप्प स ं॑ लोर आाँखीं स ं॑ टपकी गेलै । आाँखी स ं॑ चसिा हटाय कं॑ लोर पोछमलयै आरू सोच ं॑ लागमलये.... अब ं॑ की होतै .... अुंग िाधरी के ना प्रकामसत होतै....एकरा के देखतै...खूब..ढे रों सिाल.....िनऽ िुं ं॑ आब ं॑ आरू जाब ं॑ लगलै । पनर-ं॑ बीस बररस पमहले के रऽ याद ताजा होय गेलै..। तब ं॑ िॉडल हाय इसकूल, िगुं ेर ि ं॑ अिाडष सिारोह के आयोजन स्िगीय उिेश िोहन गप्ता जी द्वारा करलऽ गेलऽ छे लै । ओह ं॑ अिसर प ं॑ चकोर जी िुंचऽ प ं॑ मिराजिान छे ला । हिहूाँ हुनकरे सािने ि ं॑ आगू के रऽ करसी प ं॑ बैठलऽ हुनका ताकी रहलऽ छे मलऐ । हमिर नाुंि जब ं॑ पकारलऽ गेलै तब ं॑ चकोर जी करसी प ं॑ सुं ं॑ उठी कं॑ आगू आबी कं॑ हिरा आपनऽ हाथ स ं॑ समिान पि थिैलकै आरू अप्पन बेटा िामफक गला लगाय कं॑ कहलकै – “भारती जी खूब मलमखयै...अुंमगका भासा िुं ं॑ भी मलमखयै आरू ‘अुंग िाधरी’ िुं ं॑ भेमजयै... । ” िऽन ि ं॑ परक्का छूट ं॑ लागलै । बाद िुं ं॑ अुंमगका िुं ं॑ मलखना प्रारुंभ करमलऐ.....मफरू त ं॑ िडी कं॑ नै देखमलऐ । अुंमगका िुं ं॑ ‘ दरद सूरूजिखी के ’ कमिता सुंग्रह, ‘भोर होतै कमहया’ अुंमगका उपन्यास, अुंमगका लघ कथा सुंग्रह आरू कई एक पस्तक प्रकामसत करमलऐ । ‘अुंग िाधरी’ ि ं॑ बराबर कमिता, गीत, लघकथा प्रकामसत होत ं॑ रहलै । चकोर जी सुं ं॑ हिेसा िोबाईल सुं ं॑ सुंपकष होतुं ं॑ रहलै ..। महन्दी ि ं॑ हमिर कहानी सुंग्रह, ‘सिुंदर चप है’, ‘समृ ष्ट आपकी दृमष्ट हिारी’, आरो उपन्यास, ‘शहर िसीहा नही’ के रऽ सिीिा, अनशीलन सिीिा पस्तक चकोर जीं प्रकामसत करी कं॑ जे हमिर उत्साह ब़िैलकै हुनकऽ िू योगदानऽ कं॑ हमिुं ं॑

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कबहूाँ भल ं॑ नै पारबै । सदैि हमिुं ं॑ हुनकर ऋनी रहबै । अुंमगका िहोत्सि पटना िुं ं॑ भी हुनी हिरा समिामनत करलकै । हुनकऽ आमसरिाद प्रारुंभ स ं॑ ही हिरा मिलत ं॑ रहलै एकरा ि ं॑ दू राय नै छै । ई हिरा कमहय्यो एहसास नै होलै मक चकोर जी हिरा भूली गेलै या हि हुनका स ं॑ दूर मछयै । हर दू तीन िहीना प ं॑ फोनऽ प ं॑ हाल चाल पूछल ं॑ मबना चकोर जी नै रहै छे लै । “भारती जी, ‘अुंग िाधरी’ मिली रहलऽ छै मक नै....अगला अुंक लेली कमिता भेजी मदहो......िगुं ेर जाय के प्रोग्राि छे लै....मिली कं॑ बात करमथहौं...लेमकन स्िास्थय ठीक नै छै ...नै जाब ं॑ पारभौं ।” फोनऽ प ं॑ कहमलयै, “एगो महन्दी िुं ं॑ उपन्यास छपी कं॑ आबी रहलऽ छै – ‘शेष है मजुंदगी’, आपन ं॑ स ं॑ लोकारपन करैबै....। ‘शहर िसीहा नहीं’ प ं॑ मफल्ि बनी गेलै...सेंसर

चकोर जी एगो िहान मिभूमत छे ला । हुनकऽ आमसरिाद हिरा पमहने भी मिललऽ छे लै...आगू भी सूक्ष्ि सरीर स ं॑ मिलतुं ं॑ रहतै ... । अुंमगका सेिा करतुं ं॑ रहबै जब ं॑ तलक सास ाँ छै ......’अुंग िाधरी’ लेली मलखत ं॑ रहबै... । ‘चकोर जी’ अिर रहतै...जब तलक अुंमगका रहतै । होय गेलै....ररमलज होली िातष तलक होतै...।” “अुंमगका िुं ं॑ एगो मफल्ि बनाहो नै...।” “िौका मिलतै त ं॑ जरूर बनैबै...।” लेमकन ...जब ं॑ तलक ‘शेष है मजन्दगी’ उपन्यास प्रकामसत होय कं॑ हिरा लगा​ाँ ऐलै...चकोर जी के साथ छूटी गेलै । बहुत चोट पहुचाँ लै मदलऽ प.ं॑ ..। दोसरऽ एगो आरू साथी िगुं ेर के रऽ छुं दराज भाय गजरी गेलै इह ं॑ बीच । ई दू गो गि सुं ं॑ उबर ं॑ नै पारलऽ मछयै ...। सच्चो अखनी तलक मकताब के रऽ बुंडल िैसने पडलऽ छै । एकरे नाुंि मजनगी छे कै..भोर के बाद साुंझ...साुंझ के बाद भोर...। आगू..मजनगी चलत ं॑ रहै छै । चकोर जी एगो िहान मिभूमत छे ला । हुनकऽ आमसरिाद हिरा पमहने भी मिललऽ छे लै...आगू भी सूक्ष्ि सरीर स ं॑ मिलतुं ं॑ रहतै ... । अुंमगका सेिा करतुं ं॑ रहबै जब ं॑ तलक सा​ाँस छै ......’अुंग िाधरी’ लेली मलखत ं॑ रहबै... । ‘चकोर जी’ अिर रहतै...जब तलक अुंमगका रहतै । 44

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- पस्तक-पमिका ममललै १. नया भार्ा-भारती संवाद : महन्दी िैिामसक पमिका, अुंक - जलाई – मसतुंबर 15 , सुंपादक - ऩपृ ेन्द्रनाथ गप्त, श्री उमदत आयतन, ब्रह्मस्थान पथ, शेखपरा, पटना – 800 014, मबहार । पष्ठृ – १८८, िूल्य : ७५ रू. २. कौमशकी : (महन्दी िैिामसक पमिका),अुंक – निुंबर 2015 – जनिरी 2016, सुंपादक – कै लाश झा ‘मकुं कर’, महन्दी भाषा सामहत्य पररषद, खगमडया, मबहार । पष्ठृ – ६८, िूल्य – ३० रू. ३. अंि धािी :अुंमगका िैिामसक पमिका, अुंक – जनिरी – िाचष 2016, (अुंमगका सुंस्िरण अुंक) सुंपादक - अमनरूद्ध प्रसाद मि​िल, सिय सामहत्य समिेलन, पनमसया, बा​ाँका, मबहार । पष्ठृ – १२४, िूल्य – २५ रू. ४. समय :महन्दी िैिामसक पमिका, अुंक—जनिरी-िाचष २०१६,सुंपादक - अमनरूद्ध प्रसाद मि​िल, सिय सामहत्य समिेलन, पनमसया, बा​ाँका, मबहार । पष्ठृ -८, िूल्य – ५ रू.

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- हलर्ल ( साभार : www.angika.com ) देस के रऽ मवमभन्न भािऽ मं ं॑ समारोहपूवषक मनैलऽ िेलै डॉ. 'र्कोर' जयंती भािलपर / पटना / मबं ई : ३ जनवरी, २०१६ : अुंमगका परोधा डॉ. नरेश पाण्डेय 'चकोर' के रऽ ७८िाुं जयुंती देश के रऽ मिमभन्न महस्सा ि ं॑ सिारोह पूिषक सुंपन्न होलै । भागलपर आरू पटना ि ं॑ २ जनिरी कं॑ जबमक िुंबई ि ं॑ आय ३ जनिरी कं॑ हुनकऽ जयुंती सिारोह िनैलऽ गेलै । पटना के रऽ सिारोह ि ं॑ लोकभासा कमि गोस्ठी भी आयोमजत करलऽ गेलऽ रहै । जाहन्िी अुंमगका सुंस्कृमत सुंस्थान, अमखल भारतीय अुंमगका सामहत्य कला िुंच, अुंग उत्थनान्दोलन समिमत, अुंग िमि िोचाष , अमखल भारतीय अुंग-अुंमगका मिकास िुंच, अुंमगका.कॉि, अुंमगका सामहत्य कला िुंच, मबहार महन्दी सामहत्य समिेलन आमद अनेक सुंस्था न ं॑ अुंमगका परोधा डॉ. चकोर के ७८िा​ाँ जयुंती िनैलकै । मबहार महन्दी सामहत्य समिेलन द्वारा पटना ि ं॑ कल आयोमजत जयुंती सिारोह के अध्यिता डॉ. अमनल सलभ न ं॑ करलकै । अमतमथ मसनी के रऽ स्िागत, समिेलन के प्रधानिुंिी आचायष श्रीरुंजन सूररदेि न ं॑ आरू धन्यिाद ज्ञापन प्रधानिुंिी कृष्ट्ण रुंजन न ं॑ करलकै । सभा कं॑ सुंबोमधत करी कं॑ आपनऽ मिचार रखै िाला िें सामिल छे लै : िाननीय राजसभा साुंसद रिीन्द्र मकशोर मसन्हा, अध्यिडॉ. अमनल सलभ, उपाध्यि डॉ. शुंकर प्रसाद, प्रो. िासकीनाथ झा, कै लाश चौधरी, मिधशेखर पाण्डेय, हररशुंकर प्रसाद, डॉ. समखत ि​िाष , प्रो. सशील झा, नरेन्द्र झा । ई अिसर पर महन्दी िैिामसक, 'नया भाषा भारती सुंिाद' के रऽ नया अुंकऽ के लोकापष न भी होलै । डॉ. नरेश पाण्डेय 'चकोर' के रऽ ७८िाुं जयुंती सिारोह के रऽ उद्घाटन करतुं ं॑ िाननीय राजसभा साुंसद रिीन्द्र मकशोर मसन्हा कहलकै मक दशकों पूिष सुं ं॑ पटना िुं ं॑ जे मगनलऽ-चनलऽ सामहत्यकारऽ कं॑ हुनी सामहत्य सज ृ न आरू आयोजनऽ िुं ं॑ लगातार समक्रय देखने छै ओकरा ि ं॑ चकोरजी न ं॑ हिेसा ही हुनका आकमसष त करन ं॑ छै । अध्यि- डॉ. अमनल सलभ न ं॑ कहलकै मक डॉ. चकोर न ं॑ अुंमगका सामहत्य के सेिा िहमसष दधीमच के रऽ भाि सुं ं॑ ही करन ं॑ छै । डॉ. चकोर के सुंपूनष िखिुंडल सरलता, िदृ ता आरू पूजाभाि के रऽ प्रतीक मबमब जैसनऽ झलकै रहै । हुनकऽ सभ आरू मिसाल भाि पर हिेसा मदखै िाला नयनामभराि चुंदन रेखा हुनकऽ आध्यामत्िक वयमित्ि कं॑ रेखाुंमकत करै रहै। ई अिसर पर आयोमजत लोकभासा कमिगोस्ठी िुं ं॑ अुंमगका, िमज्जका, िगही, भोजपरी आरू िैमथली के रऽ कमि मसनी न ं॑ लोकजीिन के रऽ मिमिध रुंगऽ के कमिता सें श्रोता मसनी कं॑ िुंि​िग्ध करी देलकै । लोकभासा कमिगोस्ठी ि ं॑ सामिल होयिाला कमि छे लै - पुं मशिदत्त मिश्र, राजीि किार मसुंह पररिलेन्द, डॉ. उदय शुंकर शिाष , राजकिार प्रेिी, डॉ. भगिान मसुंहभास्कर, डॉ. अचष ना मिपाठी, सरोज मतिारी, किारी िेनका, ओिप्रकाश पाण्डेय प्रकाश, आचायष आनुंद मकशोर शास्त्री, डॉ. अमभिन्य प्रसाद िौयष , मिनय किार मिष्ट्णपरी, सभाष चन्द्र मकुं र, डॉ. आर. प्रिेश, भागित शरण झा अमनिेष, नेहाल मसुंह मनिष ल, श्याि मबहारी प्रभाकर, मदनेश्वर लाल मदवयाुंश, िोहन दूब,े जयप्रकास पजारी, किलेन्द्र झा किल आरू समच्चदानुंद मसुंह । 46

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'अुंग उत्थनान्दोलन समिमत' आरू 'अुंग िमि िोचाष ' के रऽ सुंयि बैनर तले भागलपर िें आयोमजत सिारोह ि ं॑ अुंमगका के िररस्ठ सामहत्यकार डॉ. अिरेन्द्र के अध्यिता ि ं॑ शमनिार कं॑ डॉ. नरेश पाण्डेय चकोर के ७८िीं जयुंती िनैलऽ गेलै । िौका पर समिमत के रऽ रास्रीय अध्यि गौति सिन न ं॑ डॉ. चकोर के वयमित्ि पर प्रकास डाललकै आरू दू मिनट के िौन रखी कं॑ हुनका श्रद्धाुंजमल देलऽ गेलै । अमखल भारतीय अुंग-अुंमगका मिकास िुंच, जाहन्िी अुंमगका सुंस्कृमत सुंस्थान, आरू अुंमगका.कॉि के रऽ सुंयि तत्िाधान िें निी िुंबई ि ं॑ आयोमजत सिारोह ि ं॑ अुंमगका सामहत्यकार कुं दन अमिताभ न ं॑ मिचार वयि करत ं॑ कहलकै मक डॉ. चकोर द्वारा अुंमगका भाषा के सुंरिण आरू सुंिद्धष न लेली करलऽ गेलऽ भगीरथ प्रयास खाली रास्रीय ही नै िैमस्िक स्तर पर भी अमद्वतीय नजर आबै छै । भासा के सुंरिन ि सुंिद्धष न के िेि िुं ं॑ करलऽ गेलऽ हुनकऽ अिदान यग-यग तक भासा सिमृ द्ध के िागष प्रसस्त करतुं ं॑ रहतै। अुंमगका सामहत्य कला िुंच न ं॑ राजधानी पटना के रऽ पनाईचक िुं ं॑ आयोमजत एगो बैठक ि ं॑ स्ि. डॉ. नरेश पाण्डेय चकोर कं॑ श्रद्धा सिन अमपष त करलकै । श्रद्धा सिन अमपष त करै िाला ि ं॑ सामिल रहै - मिभरुंजन, साथी सरेश सूयष आरू प्रो. डॉ. मदिाकर । अमखल भारतीय अुंमगका सामहत्य कला िुंच तरफऽ सुं ं॑ भागलपर िुं ं॑ जन्ि मदिस के रऽ आयोजन करलऽ गेलै ।

सरकार सं ं॑ करलऽ िेलै अमवलंब अकादमी कायाषलय उपलब्ध कराबै के माँि पटना : ४ जनवरी, २०१६ : मबहार अुंमगका अकादिी एक अदद कायाष लय लेली तरसी रहलऽ छै । जबमक मबहार अुंमगका अकादिी के रऽ गठन के लगभग ६ िहीना बीती चकलऽ छै । ई बाबत अुंमगका सामहत्यकार सीनी के रऽ बैठक मिभरुंजन के रऽ अध्यिता ि ं॑ २ जनिरी कं॑ पनाईचक, पटना ि ं॑ होलै । जेकरा ि ं॑ सरकार स ं॑ अमिलुंब कायाष लय उपलब्ध कराबै के िा​ाँग करलऽ गेलऽ छै । सामहत्यकारऽ मसनी के कहना छै मक कायाष लय के अभाि ि ं॑ अकादिी के रऽ मिस्तार नै हुअ ं॑ पाबी रहलऽ छै । सामहत्यकार मसनी न ं॑ आसुंका जतैने छै मक ई निगमठत अकादिी सथुं ं॑ समनयोमजत सामजस रचलऽ जाय रहलऽ छै । तामक अुंमगका अकादिी के िाध्यि सुं ं॑ अुंमगका भासा आरू सुंस्कृमत कं॑ सुंरमित आरू सुंिमद्धष त करला स ं॑ रोकलऽ जाब ं॑ सकं॑ । अुंमगका सामहत्य कला िुंच के रऽ बैठक के अध्यिता करतुं ं॑ एकरऽ सुंयि समचि मिभरुंजन न ं॑ कहलकै मक िाननीय िख्यिुंिी नीमतश किार न ं॑ पूिी आरू उत्तर पूिी मबहार के रऽ िख्य भासा अुंमगका कं॑ बोलै िाला के रऽ समिान करतें हुअ ं॑ अुंमगका अकादिी के रऽ गठन करी कं॑ एकरऽ अध्यि भी िनोमनत करी देलकै । एकरऽ बािजूद अुंमगका अकादिी लेली कायाष लय उपलब्ध नै कराना मचुंता के रऽ बात छे कै ।िख्यिुंिी न ं॑ अुंमगका कं॑ समिान देन ं॑ रहै जेकरऽ फलस्िरूप अुंमगका भासा-भासी न ं॑ परजोर िोट करी कं॑ नीमतश किार िें मिस्िास वयि करलकै । लेमकन अुंमगका भासा-भासी अब ं॑ अपना कं॑ ठगलऽ िहसूस करै लगलऽ छै । साथी सरेश सूयष न ं॑ कहलकै मक कायाष लय नै होला स ं॑ अुंमगका अकादिी के रऽ मिस्तार आरू

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कायष क्रि अिरूद्ध छै । सूयष न ं॑ कहलकै मक अुंमगका पूिी मबहार, पूिी-उत्तरी मबहार, झारखुंड के रऽ सुंथालपरगना िेि के लोगऽ के िातभृ ासा छे कै । एकरऽ सिद्ध ृ सामहत्य आरू सुंस्कृमत बरसों स ं॑ उपेमित रहलऽ छै । नीमतश किार न ं॑ एकरा सुंरमित आरू एकरा फल-ं॑ फूल ं॑ दै के िास्तें जे कदि उठैने छै , ओकरा िट्ठी भर अमधकारी दबाय कं॑ सरकार के मिरूद्ध कूटनीमतक सडयुंि रची रहलऽ छै । प्रो. डॉ. मदिाकर न ं॑ कहलकै मक उपेमित भासा, सुंस्कृमत, सामहत्य आरू धरोहर कं॑ सुंरमित करै िास्तें सरकार फुं ड उपलब्ध कराबै छै । फे रू अमधकारी सब के सा​ाँस कै न्हें फूली रहलऽ छै , ई सिझ स ं॑ परे छै । हुनी कहलकै मक ई भासा के प़िाय स्नातकोत्तर स्तर पर मबहार के रऽ मतलकािा​ाँझी भागलपर मिश्वमिद्यालय, भागलपर आरू झारखुंड के रऽ दिका मिश्वमिद्यालय िुं ं॑ होय छै ।

मबहार अंमिका अकादमी कं॑ ममललै कायाषलय भवन, जमल्दये होतै उदघाटन ! पटना : ५ जनवरी, २०१६ : मबहार अुंमगका अकादिी लेली कायाष लय भिन के पहचान करी कं॑ एकरऽ आिुंटन लेली कागजी प्रमकया प्रगमत पर छै । जमल्दये बेली रोड मस्थत ई कायाष लय भिन कं॑ मबहार अुंमगका अकादिी के नाि करी कं॑ एकरऽ उदघाटन करलऽ जैतै । अुंमगका.कॉि स ं॑ ई बात करतुं ं॑ मबहार अुंमगका अकादिी के अध्यि डॉ. लखनलाल आरोही न ं॑ बतैलकै मक उच्च मशिा मिभाग के मनदेशक प्रो. एि. खामलद मिजाष फीता काटी कं॑ एकरऽ उदघाटन करतै । डॉ. आरोही न ं॑ बतैलकै मक उच्च मशिा मिभाग के रऽ मनदेशक कं॑ मबहार अुंमगका अकादिी के रऽ मिस्ततृ मजमिेिारी आरो कािकाज कं॑ रेखाुंमकत करी कं॑ जानकारी द ं॑ देलऽ गेलऽ छै । सथें हुनका चालू आरू आगािी मित्तीय बषष लेली योजना सौंपी कं॑ पयाष प्त धनरामश आिुंमटत करै के अनरोध करलऽ गेलऽ छै । मनदेशक न ं॑ इ सुंबुंध िें सकारात्िक डेग उठाबै के बात कहन ं॑ छै ।

दूरदशषन स ं॑ अंमिका भासा मं ं॑ सीधा प्रसारन लेली भेजलऽ िेलै प्रस्ताव भािलपर : ११ जनवरी, २०१६ : अब ं॑ दूरदशष न सुं ं॑ अुंमगका िुं ं॑ कायष क्रि के सीधा प्रसारन करलऽ जैतै । झारखुंड के रऽ देिघर िुं ं॑ उच्च ि​िता के मिनी दूरदशष न कें द्र बनला स ं॑ इ सुंभि हुअ ं॑ पारतै । एकरा बनाबै के प्रस्ताि प्रसार भारती के रऽ िख्य कायष कारी अमधकारी जिाहर मसरकार न ं॑ कें द्र सरकार कं॑ भेजन ं॑ छै । सुंताली ि अुंमगका भासा आधाररत कायष क्रिऽ कं॑ ब़िािा दै के उद्देश्य स ं॑ साुंसद मनमशकाुंत दबे न ं॑ प्रसार भारती कं॑ 13 फरिरी 2015 िुं ं॑ ही पि भेजी कं॑ देिघर िुं ं॑ दूरदशष न कें द्र बनाबै के आग्रह करन ं॑ रहै । हुनकऽ ई पि के आलोक िुं ं॑ प्रसार भारती न ं॑ देिघर िुं ं॑ मिनी दूरदशष न कें द्र बनाबै के प्रस्ताि तैयार करी कं॑ सरकार के रऽ सैद्धाुंमतक स्िीकृमत लेली भेजी देन ं॑ छै । दरू दशष न कें द्र बनाबै िुं ं॑ कल 32.17 करोड के खचष होतै । एकरऽ प्राक्कलन भी तैयार करी लेलऽ गेलऽ छै । जिाहर मसरकार न ं॑ साुंसद कं॑ पि भेजी कं॑ बतैन ं॑ छै मक सरकार के सैद्धाुंमतक िुंजूरी मिलथैं प्रोग्रामिुंग आरो पररयोजना के कायाष न्ियन प ं॑ गमतमिमधयऽ पर तत्काल काि शरू होय जैतै । काि शरू करै लेली तत्काल 2.59 करोड के रामश के जरूरत पडतै । ितष िान ि ं॑ देिघर ि ं॑ 100 िाट एफएि ि​िता िाला एलपीटी कें द्र सुंचामलत होय रहलऽ छै । 48

अंि माधरी (बर्ष : ४७, अंक : ०3 - ०४, फरवरी - मार्ष - २०१६)


पटना म ं॑ बनतै अंमिका भवन भािलपर : ११ जनवरी, २०१६ : अुंमगका के रऽ मिकास िास्तें योजना तैयार होय गेलऽ छै । अुंग जनपद ि ं॑ रहै िाला लोगऽ मसनी आरू सामहत्यकारऽ सभ्भै के रऽ सहयोग चामहयऽ । मबना सहयोग के रऽ मिकास सुंभि नाय छै । उि बात मबहार अुंमगका अकादिी के अध्यि प्रो लखनलाल मसुंह आरोही न ं॑ अपनऽ समिान ि ं॑ आयोमजत सिारोह ि ं॑ कहलकै । सिारोह के आयोजन लोकमहत जागरण सुंघ के ओर स ं॑ कला कें द्र ि ं॑ करलऽ गेलऽ रहै । एकरऽ पहल ं॑ मबहार-झारखुंड के अुंग िेि अुंतगष त मिमभन्न मजला के सामहत्यकारऽ, बमद्धजीमियऽ, सािामजक कायष कताष ि सिाजसेिी आरमन्ह न ं॑ बके द ं॑ करी ि िाला पहनाय कं॑ समिामनत करलकै । सिारोह के दौरान स्िागताध्यि डॉ मिधानचुंद्र यादि, सुंयोजक सूरज प्रभात, अध्यि अमधि​िा मनमशत मिश्रा, प्रिीण झा, सुंदीप झा, सुंयोमजका किला कोिल न ं॑ पस्पगच्छ देलकै । िानस सद्भािना समिेलन के प्रधान सुंरिक मदिाकर चुंद्र दबे न ं॑ कहलकै मक अुंमगका िास्तें सभ्भे कं॑ आगू आबै ल ं॑ पडतै । भजन गायक कमपलदेि कृपाला न ं॑ स्िागत गान गैलकै । कला कें द्र के प्राचायष रािलखन मसुंह गरुजी, मिश्व शाुंमत सेिा समिमत के अध्यि कसि शिाष , सनीता मसुंह, अनीता लोमहया न ं॑ अुंग-अुंमगका लेली होय रहलऽ प्रयास के सराहना करलकै ।िरीय मचमकत्सक डा डीपी मसुंह न ं॑ कहलकै मक प्रो आरोही स्कूली जीिन िुं ं॑ गरु रही चकलऽ छै । हुमनये सामहत्य के दीिा देलकै , तमभये आय सामहत्य पर भी पकड छै । अुंमगका लेखक नुंदलाल यादि सारस्ित रमचत गजल के पस्तक सारस्ित िाणी के लोकापष ण प्रो आरोही, डॉ डीपी मसुंह, मदिाकर चुंद्र दबे, डॉ मिधानचुंद्र यादि, कसि शिाष , पारस कुं ज आरमन्ह करलकै । समिान सिारोह िुं ं॑ गनगमनया के सामहत्यकार सरेश सूयष, इुंद्रदेि, िरुण किार, िुंगेर के मिजेता िदगलपरी, बाुंका के प्रो निीन मनकुं ज, प्रभाष चुंद्र राि आमद शामिल होलै । मबहार अुंमगका अकादिी के अध्यि प्रो आरोही न ं॑ कहलकै मक पटना ि ं॑ अुंमगका भिन मनिाष ण लेली प्रयास चली रहलऽ छै । ऐसनऽ पाुंडमलमप, जे मक श्रेष्ठ होतै, ओकरऽ प्रकाशन लेली लेखकऽ कं॑ पाण्डमलमप अनदान देलऽ जैतै । कला कें द्र के तरफऽ सुं ं॑ कें द्र के प्राचायष रािलखन मसुंह गरुजी न ं॑ मबहार अुंमगका अकादिी अध्यि प्रो लखन लाल मसुंह आरोही सुं ं॑ िलाकात करलकै आरो कला कें द्र के मिकास कं॑ ल ं॑ करी कं॑ िदद िाुंगलकै । श्री मसुंह न ं॑ आपनऽ स्िमनमिष त िुंजूषा पेंमटुंग भेंट करलकै । इस िौका प ं॑ पररमध के मनदेशक उदय भी िौजूद रहै ।

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िौतम समन ‘अंि रत्न’ सं ं॑ सममामनत भािलपर: २ जनवरी, २०१६ : स्थानीय कजिली चौक मस्थत गा​ाँधी शाुंमत प्रमतस्ठान िुं ं॑ ‘रास्रीय, सामहमत्यक ि साुंस्कृमतक िुंच कावय यािा’ के रऽ दसिा​ाँ बारमसक सािारोह के िौका प ं॑ भागलपर मिश्वमिद्यालय के कल गीतकार डॉ. आिोद किार मिश्र आरू भागलपर मजला पररसद के रऽ पूिष चेयरिैन सह िरीय का​ाँग्रेसी नेता, डॉ. शुंभ दयाल खेतान न ं॑ अुंग-अुंमगका के रऽ िामजब समिान ि अमधकार हेत हिेसा सिमपष त रहै लेली ि सामहत्य, कला ि सिाज सेिा िुं ं॑ सुंलग्न रही कं॑ अुंमगका उत्थान िुं ं॑ िहत्िपूनष भमिका मनभाबै लेली अुंग उत्थानोन्दलन समिमत, मबहार-झारखुंड सह अुंग िमि िोचाष के रऽ रास्रीय अध्यि गौति सिन कं॑ ‘अुंग रत्न’ समिान सुं ं॑ समिामनत करल ं॑ छै । िुंच के तरफ सुं ं॑ प्रसमस्त पि, प्रतीक मचन्ह, अुंग िस्त्र प्रदान करलऽ गेलै । ई अिसर प ं॑ सिोच्च न्यायालय के रऽ िरीय अमधि​िा , एस.के .िाथर, डॉ. भूपन्े द्र िुंडल, डॉ. अिरेंद्र, डॉ. जयुंत जलद, कथाकार रुंजन, बाबा मदनेश तपन, गीतकार राजकिार, रािाितार राही, सुंजय किार, अमधि​िा ओिप्रकाश िणष िाल, अमश्वनी पुंमडत, प्रीति मिश्वकिाष , आरमन िौजूद रहै ।

फलवररया म ं॑ धूमधाम स ं॑ मनैलऽ िेलै राम मववाह उत्सव भािलपर : १२ जनवरी, २०१६ : जाह्निी अुंमगका सुंस्कृमत सुंस्थान के तत्िाधान िुं ं॑ भागलपर मजला के फलिररया गािऽ ि ं॑ ई साल के सरूआत ि ं॑ धूिधाि स ं॑ राि मि​िाह उत्सि िनैलऽ गेलै । ई अिसर पर डॉ. चकोर के मलखलऽ अुंमगका भजन गैलऽ गेलै आरू अुंमगका कमि समिेलन के रऽ आयोजन भी करलऽ गेलै । ज्ञातवय छै मक ई कायष क्रि िुं ं॑ मदिुंगत अुंमगका परोधा डॉ. नरेश पाण्डेय चकोर मपछला चालीस साल स ं॑ लगातार भाग ल ं॑ रहलऽ छे लै । हुनका लेली ई कायष क्रि ि ं॑ भाग लेना हुनकऽ जीिन के रऽ एगो िहत्िपूनष महस्सा ि ं॑ स ं॑ छे लै । हुनी ई कायष क्रि ि ं॑ जनकपर के रऽ डोमिन के रूप धरी कं॑ नाचै लगै रहै । जाह्निी अुंमगका सुंस्कृमत सुंस्थान के तत्िाधान िुं ं॑ आयोमजत ई कायष क्रि ि ं॑ एगो अुंमगका कमि समिेलन के भी आयोजन करलऽ गेलै । जेकरा ि ं॑ भाग लै िाला प्रिख कमि िुं ं॑ सामिल रहै - कृष्ट्णानुंद पाण्डेय, मसयाशरण पाण्डेय, नीरज पाण्डेय आरू निकुं ज पाण्डेय । मदिुंगत अुंमगका परोधा डॉ. नरेश पाण्डेय चकोर के मपछला चालीस साल सुं ं॑ लगातार भाग लेत ं॑ रहै के चलतें ई कायष क्रि के रऽ ऐमतहामसक िहत्ि भी छै । 50

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- लोि उलूपी झा हाल िुं ं॑ अुंग प्रदेस के रऽ िहत्िपूणष िुंजूषा लोक कला कं॑ रास्रीय स्तर पं॑ नया पहचान हामसल होलऽ छै । देस के रऽ १०० काियाब िमहला िं॑ शामिल होय करी कं॑ ई पहचान मदलाबै िाला छे कै भागलपर के रऽ िुंजषू ा लोक कला कलाकार उलूपी झा । उलूपी नं॑ खाली िुंजषू ा लोक कला कं॑ शौक के रूप िुं ं॑ ही नै अपनैल ं॑ छै बमल्क एकरा एगो अथोपाजष न के जररया बनाय कं॑ खद कं॑ सश्ि उद्यिी के रूप िुं ं॑ आगू लानी कं॑ िुंजषू ा लोक कला िुं ं॑ नया जान भी फूाँकनं॑ छै । ई उपलमब्ध सुं ं॑ उलूपी, अुंग िेि के लोक कलाकारऽ मसनी के बीच िुं ं॑ प्रेरणा के बहुत बडऽ स्त्रोत के रूप िुं ं॑ उभरलऽ छै । उलूपी झा के रऽ राष्ट्रीय स्तर के रऽ ई उपलमब्ध ई लेली भी आरू िहत्िपूणष होय जाय छै कै न्हें मक ई लोक कला के िहत्ि कं॑ लं॑ कं॑ अुंग िेि के रऽ लोगऽ बीच भी कोय खास जागरूकता नै छै । राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली गेला पं॑ ऐमतहामसक िहत्ि के रऽ िुंजूषा लोक कला के मिकास, सुंरिण, सुंिद्धष न, प्रचार, प्रसार के प्रमत जनिानस िुं ं॑ नया तरह के जागरूकता ऐतै, एकरा िुं ं॑ कोय शक नै छै । भारत के रऽ िमहला एिुं बाल मिकास िुंिालय के रऽ ओर सुं ं॑ अलग-अलग िेि िं॑ उत्कृ ष्ट योगदान करै िाला चनलऽ गेलऽ देस के रऽ सौ काियाब िमहला मसनी जेकरा िुं ं॑ भागलपर के श्रीिती उलूपी झा भी छै कं॑ राष्ट्रपमत प्रणब िखजी द्वारा 26 जनिरी कं॑ गणतुंि मदिस के अिसर पर समिामनत करलऽ जैतै । सौ काियाब िमहला मसनी कं॑ चनै के प्रमक्रया मपछला तीन िाह सं॑ चली रहलऽ छे लै । जेकरा िुं ं॑ बीस अलग-अलग श्रेणी िुं ं॑ नािाुंकन होलै । सबसुं ं॑ पहलुं ं॑ फे सबक के रऽ िाध्यि सुं ं॑ ई िमहला मसनी के नािाुंकन होलै । चयन लेली पहलऽ जरूरी शतष ई छे लै मक फे सबक पर कि से कि सौ लाइक िू िमहला कं॑ मिलना चामहयऽ । एकरऽ बाद पहलऽ चरण िं॑ अलग-अलग कोमट िुं ं॑ 200 िमहला चनलऽ गेलै । कला ि सुंस्कृ मत श्रेणी िुं ं॑ देशभर के 13 िमहला चनलऽ गेलै । जेकरा िुं ं॑ तीजन बाई सरीखा मसद्धहस्त कलाकार भी छै । दोसरऽ चरण िुं ं॑ िोमटुंग के आधार पर चयन होना छे लै । एकरा लेली िोमटुंग िेबसाइट के िाध्यि सं॑ होना छे लै । 20 मदसुंबर तक िोमटुंग के अुंमति मतमथ छे लै । िोमटुंग के आधार पं॑ देस भर के सौ िमहला के अुंमति रूप सं॑ चयन होय गेलै । जेकरा िुं ं॑ भागलपर के उलूपी झा भी एक छै । िुंजूषा कला सं॑ जडलऽ कलाकार एकरा बडऽ उपलमब्ध िानी रहलऽ छै । श्रीिती उलूपी झा नं॑ 2008 ई. िुं ं॑ निगमछया िुं ं॑ िुंजूषा कला के रऽ एगो कायष शाला िुं ं॑ महस्सा लेन ं॑ रहै । एकरऽ बाद हुनी िमहला मसनी कं॑ प्रमशिण मदअं॑ लगलै । 2013 ई. िुं ं॑ पटना िुं ं॑ गणतुंि मदिस पर मनकाललऽ गेलऽ झाुंकी िुं ं॑ िुंजूषा के प्रदशष नी लगैलऽ गेलऽ छै । मदल्ली िं॑ 2014 ई. ि 2015 ई.िुं ं॑ अन्तरराष्ट्रीय वयापार िेला िुं ं॑ भी िुंजूषा के प्रदशष नी लगाय कं॑ खूब िाहिाही लूटलकै । 2015 ई. िुं ं॑ मबहार राज्य परस्कार सं॑ भी समिामनत करलऽ गेलऽ रहै । उलूपी झा िुंजषू ा कला कं॑ िृहत मिस्तार दै लेली अलग-अलग चीजऽ पं॑ पेंमटुंग करं॑ लागलै । मबहार सरकार के रऽ साइमकल योजना कं॑ िुंजूषा कला िं॑ उके री करी कं॑ हुनी िख्यिुंिी मनतीश किार के रऽ ध्यान ई कला दन्नुं ं॑ आकमषष त करलकै । उलूपी झा के िुंजूषा पेंमटुंग राष्ट्रपमत, प्रधानिुंिी मसनी जैसनऽ िहत्िपूनष लोगऽ मसनी कं॑ भी भेंट करलऽ गेलऽ छै । हुनी िुंजूषा आटष ररसचष फाउुंडेशन नाि के सुंस्था सुं ं॑ करीब 250 िमहला मसनी कं॑ जोडी कं॑ िुंजूषा कला के प्रमशिण दं॑ रहलऽ छै । महनकऽ पेंमटुंग जापान भी भेजलऽ गेलऽ छै । उलूपी झा कं॑ अुंग िाधरी पररिार के असुंख्य बधाई आरू शभकािना । ( उलूपी झा के पि श्री मिकास झा सुं ं॑ सुंिाद ि दैमनक भास्कर ि ं॑ छपलऽ खबर प ं॑ आधाररत - कं दन अममताभ)

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अंि माधरी

फरवरी - मार्ष -२०१६

भारत सरकार द्वारा पुंजीकृ त पुंजीयन सुंख्या—२२१९४ / ७०

डाक मिभाग द्वारा पुंजीकृ त पुंजीयन सुंख्या पी.टी. १३/२०१५-१७

अंि माधरी सदस्य सूर्ी मवमशष्ट संरक्षक सिष श्री सदानन्द मसुंह, श्री अमश्वनी किार चौबे, डॉ. अमनल सलभ, डॉ. मिजय किार िेहता, डॉ. उत्ति किार मसुंह, डॉ. मशिनारायण, डॉ. मिद्यारानी, डॉ. बहादर मिश्र, श्री राजीि पररिलेन्द, श्री मिभूमत प्रसाद पाण्डेय, श्री कुं दन अमिताभ ।

संरक्षक सदस्य सिष श्री गुंगाधर पाण्डेय, डॉ. नागेन्द्र किार दूबे, डॉ. एन. पी. नारायण, डॉ. रेखा मिश्र, डॉ. किार भिनेश, डॉ. िध ि​िाष , श्री हररशुंकर श्रीिास्ति ‘शलभ’, श्री रुंजन, डॉ. तेजनारायण कशिाहा, श्री मदनेश बाबा, डॉ. प्रदीप प्रभात, श्री प्रद्यमन प्रसाद पाुंडेय, श्री चन्दप्रकाश जगमप्रय, श्री रमिशुंकर पाण्डेय, डॉ.इन्दभूषण मिश्र ‘देिेन्द’, श्री सधीर किार ‘प्रोग्रािर’, डॉ. िधसूदन झा, श्री मिजेता िदगलपरी, डॉ.सकलदेि शिाष , डॉ.अरूणेन्द्र भारती, श्री राके श पाठक, श्री रािाितार राही, श्री मदिाकर चन्द्र दबू े, डॉ. धनञ्जय मिश्र, श्री. सरेन्द्र प्र. यादि, श्री. आर प्रिेश, श्रीिती िीरा झा, डॉ. कल्याणी कसि मसुंह ।

आजीवन सदस्य सिष श्री डॉ. भूतनाथ मतिारी, डॉ. अिर किार मसुंह, श्री अुंजनी किार शिाष , श्री शुंकर प्रसाद श्रीमनके त, श्री नपृ ेन्द्रनाथ गप्त, श्री अमनरूध्द प्रसाद मि​िल, श्री िदन प्रसाद, श्री रािमकुं कर झा, श्री नरेश िोहन मतिारी, डॉ. रिेश शिाष ‘आत्िमिश्वास’, श्री किीन्द्र चौधरी, श्री कनक लाल चौधरी ‘कणीक’, डॉ. रासमबहारी मसुंह, प्रो.(डॉ. ) लखनलाल मसुंह ‘आरोही’,डॉ. आिोद किार मिश्र, श्री हीरा प्रसाद हरेन्द्र, श्री नन्ददलार मतिारी, डॉ. तारा मसुंह, श्री कै लाश झा मकुं कर, श्री मपयषू मतिारी, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद िोदी, श्री रािधारी मसुंह ‘कावयतीथष ’, श्री नीरज किार पाण्डेय, डॉ. रमि घोष, डॉ. कृष्ट्णा मसुंह, श्री नन्दलाल यादि ‘सारस्ित’, श्री प्रसून लताुंत, श्रीमनिास मतिारी, श्रीिती प्रमिला देिी ि​िाष , श्री देिेन्द्र किार मिश्र, श्री मिभूमत भूषण मतिारी, श्री जयप्रकाश जयी, डॉ. मनगि प्रकाश नारायण, श्री प्रभाष चन्द्र मसुंह (कोको), श्री गणपमत मि​िेदी, श्रीिती शभलक्ष्िी पाण्डेय (नायडू), श्री राज भारती, श्री रमिशुंकर रमि, श्री िनोज आनन्द, श्रीिती प्रेिमशला मसहुं, श्री मजतेन्द्र ठाकर, डॉ. उग्रनाथ मिश्र, प्रो. डॉ. रािदेि प्रसाद, श्री अिधेश्वर प्रसाद मसुंह, श्री रािबालक मसुंह, श्री रािचन्द्र ‘रमसक’ (स्िािी आगिानन्दज ् ी), डॉ. ए. कीमतष िद्धष न, श्री रूद्रदेि अके ला, डॉ. सबोध किार, श्री िीरेन्द्र किार मसुंह ।

शेखर प्रकाशन

59, िाँधीनिर, बोररंि रोड (पमिम), पटना - 800 001 मो. : 9430919959, 8002099017

श्रीमती रौपदी मदवयांश द्वारा ममरत आरू शेखर प्रकाशन, ५९, िाँधीनिर, बोररंि रोड (पमिम), पटना - १ स ं॑ प्रकामशत


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