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ओएसिि ह द ॊ ी प्रेि प्रस्ततु त -

पिऱानी 3 नवम्बर 2012

नवकृति “ मने दे खी में माऱूम ििनों में सिर्फ़ बदऱाव

शतनवार

ै इन गसऱयों की शान-ओ-शौकत, ै क्या

ोती थी इि श र की रौनक |

ज़ार म ऱ िजाये तब इि इमारत की एक ईंट तोड़ी ी मकिद न ीॊ

ै य ाॉ, तेरी खद ु िे ि चान ज़रुरी

ै, ै ||”

संपादक की कलम से... एक मल ु ाकाि, मख् ु य अतिति के साि

ओएतसस उद्घाटन समारोह, एक झलक


संपादक की कलम से... िुफह होते ही क्रास, क्रास के फाद आने वारे ददन के ट्मट ॊ ा, योज़ का घोटना, फपय अगरे ददन ु -टे स्ट की च त क्रास, फस मही है CDC वषष की छोटी सी कहानी.....योज़ की उफाऊ, नीयस ददन माष....भन कयाह उठा- “फस! अफ औय नहीॊ!” | भ रते भन को तराश थी एक नए वव ाय की, एक “ऩरयवतषन” की | फपय आमा भौसभ ओएससस का...औय भैं एक आज़ाद ऩॊछी की बाॊतत, अनेक आशाएॉ सरमे उड़ तनकरी सऩनों की सैय ऩय | भीदटॊग्स, इवें ट्स की तैमायी, क्रफ को सॊ ासरत कयना एक नमा अनब ु व था | मह वव ाय जहाॉ जीवन की नीयसता का अॊत कय गमा वहीॊ भुझे एक नमी ऊजाष से ऩरयऩूणष कय गमा | ऩय भन भें एक सॊको

बी था

“कैसे होगा सफ कुछ” | इसी दौयान एक वव ाय का ऩुनजषन्भ हुआ “मह फदराव शामद भुझे एक नई ददशा दे ... जजॊदगी को एक नमा दृजटटकोण दे जामे |“ अत् भजस्तटक की आऻा का ऩारन कय भैं न रुकने के अडडग सॊकल्ऩ के साथ आगे फढ़

री | ऩूयी टीभ के सहमोग से ओएससस की तैमायी कैसे ऩूयी हो गई ऩता ही नहीॊ

रा | ओएससस के भतवारे सफ़य का आगाज़ हुआ डाॊस औय भाइभ क्रफ के अद्भत ु प्रदशषनों से | भदभस्त छात्र,

भ भाते स्टाल्स, अनेक खफ ू सयू त नज़ाये एक अदृश्म तयॊ ग का सॊ ाय कय गमे | अगरे 96 घॊटे न ससपष

भेयी बफट्ससमन जज़न्दगी अवऩतु ऩूये जीवन के अववस्भयणीम अनब ु वों भें से एक होंगे | आॉखें फड़ी फेसब्री से प्रतीऺा कय यहीॊ हैं, अऩने ओएससस की तैमारयमों का ऩरयणाभ दे खने को | एक अजीफ सी फे न ै ी ने भन को घेय सरमा है , ऩयन्तु अऩनी टीभ की भेहनत को दे ख कय आशाजन्वत हूॉ इस ओएससस को रेकय | अॊत भें अऩने ऩाठकों से मही कहना

ाहूॉगी फक ओएससस अद्भत ु ऩरों को जीने का भौका है | ओएससस की यॊ गीन

“यी-इन्वें टेड” दतु नमा का रुत्फ़ उठामें, मह तनजश् त ही आऩकी जज़ॊदगी के अववस्भयणीम रम्हों भें शभ ु ाय हो जामेंगे | तो भस्ती के स्वर्णषभ ऩरों भें बीगने को तैमाय हो जाइमे... हय च त ॊ ा को ऩीछे छोड़कय एक नमी उभॊग के साथ जज़ॊदगी खुर के जीने को तैमाय हो जाइमे | आइमे ददर खोर कय स्वागत कयते हैं सार के सफसे फड़े जश्न का – “ओएससस – 2012 ..... द रीइन्वें शन” का | यी -इन्वें शन स्थान का, यी -इन्वें शन प्रणारी का, यी -इन्वें शन गततववचधमों का ...ओएससस 2012 के ढाॊ ागत, साॊस्कृततक औय प्रास्ततु तक ऩरयवतषनों के साथ ऩयन्तु

उन्हीॊ

इन्रधनष ु ी यॊ गों औय भधयु फहायों को सरए आऩके सभऺ प्रस्तुत है “नवकृतत” | - नीतत

ओएसिि ह न्दी प्रेि िररवार फकशन, सुयसब | सुसभत, अनज ु ा, तनशाॊक, योदहत, ससद्ाॊत, तनतीश, धनॊजम, नेहा | वैबव, सोभजी, ईशान, शसशन, नीतत, श्रेय, सॊवेदा, अॊशर ु , भाधव, यजत, सचु ता | अबम, आततप, अनॊत,अतनरुद् अग्रवार, अतनरुद् सभश्र, याजेश, ऩायस, सोनारी, करयश्भा, यवव, नीततका, भॉतनका, खश ु फू , आददत्म, अर्खरेश , ददवमाॊशु | अच त ष , अददतत, प्रणम, आकृतत, यजत, अॊफकता, मश, सम ु श, दे वेन्र, सत्मभ, प्राॊजर, प्रवीन , तनकेश |

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एक मल ु ाकाि, मख् ु य अतिति के साि फक मह इसका सही भाध्मभ नहीॊ है तो उन्होंने नुक्कड़ नाटकों की सहामता से अऩना सन्दे श रोगों को ऩहुॉ ाने का तनणषम सरमा| उनका भानना है फक ससनेभा औय बाषणों भें वो शजक्त नहीॊ जो नाटकों भें है क्मोंफक नाटक जीवन की वास्तववकता का मथाथष च त्रण कयते हैं| उनकी रगन तथा जन ू न ू को दे खते हुए उनके ऩरयवाय ने बी इस पैसरे का सभथषन फकमा| अऩने सन्दे श को रोगों तक ऩॉ हु ाने के सरए उन्हें कई फाधाओॊ का बी साभना कयना ऩड़ा| इस तयह के सॊवेदनशीर भद्द ु ों को उठाने ऩय कई फाय ऩसु रस व अनेक सयकायी सॊस्थाओॊ के ववयोध के कायण नाटक को फी ओएससस की

ाॊदनी भें

ाय

ाॉद रगाने ऩहुॉ े

भुख्म अततचथ अयववॊद गौड़ से रूफरू हुआ दहॊदी प्रेस क्रफ| अयववॊद अऩने नुक्कड़ नाटकों तथा यॊ गभॊ भें

के नाटकों के तनदे शन के सरए दे श बय प्रससद्

है |

उन्होंनें

अऩनी

कामषशारा

“अजस्भता” के भाध्मभ से अनेक याजनीततक व साभाजजक ववषमों ऩय प्रकाश डारा है | फ ऩन भें स्कूर भें हुए बेदबाव व ् ऩरयवाय भें हुई घटनाओॊ का उनऩय फहुत गहया प्रबाव ऩड़ा, तबी से उन्होंने तनणषम सरमा फक वे रोगों को साभाजजक कुप्रथाओॊ के प्रतत जागरूक कयें गे| वे अऩने इस रक्ष्म के प्रतत सभवऩषत थे फक उन्होंनें अऩनी इॊजीतनमरयॊग की ऩढ़ाई फी

भें छोड़कय ऩत्रकाय

फनने का तनश् म फकमा| ऩयन्तु जफ उन्हें रगा

भें फॊद कयने की बी नौफत आई, ऩयन्तु उन्होंने हाय

नहीॊ भानी औय अऩनी भॊजजर को ऩाने के सरए प्रमासयत यहे | दे श के मुवाओॊ को सॊदेश दे ते हुए उन्होंने कहा फक वे सभाज भें जो बी ववसॊगतत दे खते हैं, उन्हें नजयअॊदाज नहीॊ कयना प्रमास कयते यहना

ादहए|

उसे

ादहए तथा उसे फदरने के सरए


ओएतसस उद्घाटन समारोह, एक झलक

उद्घाटन के साथ ही बफट्स की हवा भें ओएससस के आगाज़ का अनुबव होने रगा| यीइन्वेंशन की थीभ ऩय आधारयत ओएससस 2012 के उद्घाटन सभायोह का ऩदाऩषण स्टे ज कॊट्रोल्ज़ द्वाया फनाए गए “ क्र” के साथ हुआ| स्टूका-फॉडी के प्रभुख अऩने वमॊग्मऩूणष वववयण के साथ क्रभश् भॊ ासीन हुए औय उसके फाद भहासच व औय अध्मऺ ने बी भुख्म अततचथ “अयववन्द गौड़”, प्रो. यघुयाभा औय प्रो. फी.एन.जैन के साथ आसन ग्रहण फकमा| इसके फाद दीऩ प्रज्जज्जवरन कय ओएससस का आचधकारयक शुबायम्ब हुआ| ADP के द्वाया फनाई गई

ाय

कराकृततमों को आरोफकत कय प्रदसशषत फकमा गमा| फपय भख् ु म अततचथ अयववन्द गौड़ ने अऩने बाषण भें 15 वषष ऩहरे एक तनणाषमक के रूऩ भें आने का जजक्र कयते हुए भजाफकमा अॊदाज़ भें कहा फक अफ भख् ु म अततचथ फनने के कायण उनका ‘प्रभोशन’ हो गमा है | ओएससस को दे श के सवषश्रेटठ आमोजनों भें से एक फताते हुए उन्होंनें कहा फक मह एकभात्र ऐसा पेस्ट है जो ऩूयी तयह छात्रों का, छात्रों के सरए औय छात्रों द्वाया आमोजजत फकमा जाता है | महाॉ तक फक उन्होंनें अगरे जन्भ भें बफट्स भें ऩढ़ने की इच्छा बी जादहय की| साभाजजक कामषकताष होने के कायण उन्होंनें नुक्कड़-नाटक औय भॊ

नाटक के जनभानस ऩय ऩड़ने वारे प्रबाव को सभझने के कायण

इसे अऩनी फात कहने का भाध्मभ फनामा| अॊत भें उन्होंनें छात्रों से आस-ऩास की दतु नमा को फेहतय फनाने की अऩीर की औय ओएससस के सपर आमोजन की काभना की| प्रो. फी.एन.जैन के बाषण की फायी आने ऩय साउॊ ड्स की ववद्मुत प्रणारी ठप्ऩ ऩड़ जाने से स्ऩीकसष फॊद


हो गए| बफट्ससमॊस के सरए मे ऩर शसभिंदगी बये यहे औय कयीफ 7-8 सभनट फाद ही बफजरी फहार हो ऩाई| प्रो. फी. एन. जैन ने अऩने बाषण के प्रायम्ब भें इस ऩय एक सॊक्षऺप्त दटप्ऩणी बी की औय फपय फतामा फक ओएससस के इस 42 वें सॊस्कयण भें 80 कॉरेज औय 20 ववश्वववद्मारमों के ववद्माथी बाग रे यहे हैं| ओएससस को बफट्ससमन जीवन का अववस्भयणीम अॊग फताते हुए उन्होंनें छात्रों से तनमभों का ऩारन कयने के साथ ओएससस का आनन्द रेने की अऩीर की| यघुयाभा सय ने ओएससस भें बाग रेने वारे सबी ववद्माचथषमों का उत्साहवधषन अऩने अतत सॊक्षऺप्त फकन्तु जनवप्रम बाषण द्वाया

फकमा| इसके फाद सबी क्रब्स औय डडऩाटष भेंट्स के सदस्मों के साभदू हक वीडडमो का प्रदशषन फकमा गमा| फपय भाईभ क्रफ द्वाया फनाए गए टी.वी. श्रॊख ृ रा “शेयरॉक” के बफट्ससमन सॊस्कयण को प्रस्तुत फकमा गमा जो कापी सयाहा गमा, ऩयन्तु एक घय की कहानी ऩय केजन्रत एक भाईभ प्रस्तुतत अऩनी अतनयॊ तयता के कायण रोगों का ध्मान खीॊ ने भें कुछ कभ काभमाफ हो ऩामी| भाईभ क्रफ की अन्म प्रस्तुततमों टॉभ एॊड जेयी, फकॊगफपशय एमयराइॊस, शैडो भाईभ, फी

तुय-है यीऩॉटय, टे म्ऩर यन, सत्मभेव जमते औय वीडडमो गेभ ‘कॉन्ट्रा’ को ऩसॊद फकमा गमा| फी -

भें डाॊस क्रफ के तड़के ने दशषकों क��� बयऩूय भनोयॊ जन फकमा औय अऩने

ुस्त प्रदशषन के कायण कापी वाह

-वाही रट ू ी| इसी के साथ ओएससस 2012 के उद्घाटन सभायोह का अॊत हुआ औय इसी के साथ अगरे तक ऩूये ऩरयसय को अऩने आगोश भें यखने वारा मह नशा बी हवा भें खुरने सा रगा है |

ाय ददन


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Navkriti-3rd November