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उत्कर्ष vad&2

Maharashtra

Manipur

फीजी में भारत - 2017

Punjab

Tamil Nadu

भारत का उच्चायोग, सव ू ा, फीजी


विषय सच ू ी • प्रस्तावना

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भारत की प्रमुख योजनाएं • ‘मेक इन इडं िया’

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• महिला सशक्तिकरण

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• ई-गवर्नेंस

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• सितारों का सफ़र

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चार राज्य

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• आकर्षक महाराष्ट्र

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• मणिपुर

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• पंजाब

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• मनभावन तमिलनाडु

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नमस्ते पैसिफ़िका

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फीजी में भारत

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• प्रशान्त में भारत

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• भारत: विकास के प्रति एक समर्पित भागीदार

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• बैंक आफ बड़ौदा

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• न्यू इडं िया एश्योरेंस

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• वैपकोस

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• सवू ा में भारतीय टीम

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उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी


प्रस्तावना

स वार्षिक पत्रिका ‘उत्कर्ष’ का हमने पिछले वर्ष प्रथम संस्करण प्रकाशित किया था। उल्लेखनीय है कि इस प्रथम संस्करण को सभी क्षेत्रों से अति उत्साहपरू ्ण प्रंशसनीय प्रतिक्रियाएं मिली हैं। इस सराहना ने न के वल हमारे मनोबल को बढ़ाया है बल्कि इस वर्ष एक और व्यापक ससं ्करण लाने के लिए हमें प्रेरित भी किया है जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के समग्र ब्यौरे के साथ-साथ भारत और फीजी के परिप्रेक्ष्य में होने वाली विविध घटनाओ ं और गतिविधियों की एक झांकी प्रस्ततु की जा सके । पिछले साल की तरह, हम इस संस्करण में भी अपने पाठकों के लिए चार भारतीय राज्यों के बारे में विशेष सामग्री दे रहे हैं। एक ऐतिहासिक वर्ष यह एक घटनाओ ं से भरपूर वर्ष होने के साथ भारत और फीजी दोनों के लिए कई अर्थों में एक ऐतिहासिक वर्ष था। भारत ने 15 अगस्त 2017 को स्वतंत्रता के 70 साल पूरे कर लिए। भारत सरकार आगामी वर्ष को भारत@70 के नाम से मना रही है। भारत आज जीवंत लोकतंत्र के साथ एक स्वतंत्र न्यायपालिका और मुक्त प्रेस वाला एक परिपक्व राष्ट्र है। भारत को यह स्वतंत्रता गांधीवादी मूल्यों के आधार पर एक लंबे और कठिन संघर्ष के बाद मिली। भारत ने खुद को एक मजबूत लोकतांत्रिक साख वाले राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है जहां समाज के सभी वर्गों के लिए समान स्थान है। भारत@70 समारोह: नमस्ते पैसिफि‍का भारत@70 को यादगार बनाने के लिए, सवू ा में भारतीय उच्चायोग ने अपने कार्यालयएलआईसीआई बिल्डिंग को 15 अगस्त, 2017 के दिन भारतीय ध्वज के रंगों से प्रकाशित किया। हमारे देश के इतिहास में इस महत्वपरू ्ण अवसर को उल्लास के साथ मनाने के लिए परू े वर्षभर के समारोह का शभु ारंभ किया गया ताकि भारतीय तिरंगे की जगमगाहट फीजी के आकाश में हमेशा बरकरार रहे। उच्चायोग की और से छह माह लंबे इस सांस्कृ तिक उत्सव को ‘नमस्ते पैसिफिकाभारत का एक पर्व’ नाम दिया गया। यह विशाल सांस्कृ तिक आयोजन फीजी के साथ-साथ उच्चायोग के समवर्ती क्षेत्राधिकार में आने वाले छः प्रशांत द्वीपीय देशों- कुक आइलैंड्स, किरीबास, नाउरू, तोंगा, तवु ालु और वानअ ू ातू में भी उल्लास के साथ मनाय जा रहा है।

इस ऐतिहासिक महोत्सव में पूरे भारत के 12 प्रसिद्ध कला समहू ों से 125 से अधिक कलाकारों को शामिल करते हुए सांस्कृ तिक प्रस्तुतियों का एक ऐसा गुलदस्ता पेश किया जाएगा जिसमें प्रशांत क्षेत्र के दर्शकों के सामने भारतीय संस्कृ ति का एक विविधतापूर्ण और जीवंत स्वरूप साकार हो सके । इस क्षेत्र में इतने बड़े स्तर पर भारत की ओर से यह ‘अपनी तरह का पहला’ उत्सव है! महोत्सव का उद्घाटन 28 अक्टूबर 2017 को फीजी गणराज्य के राष्ट्रपति, माननीय मेजर जनरल (सेवानिवत्तृ ) चोची कौनोसी कोनरोते ने अपने कर कमलों से किया।

यह एक घटनाओ ं से भरपूर वर्ष होने के साथ भारत और फीजी दोनों के लिए कई अर्थों में एक ऐतिहासिक वर्ष था। भारत ने 15 अगस्त 2017 को स्वतंत्रता के 70 साल पूरे कर लिए। भारत सरकार आगामी वर्ष को भारत@70 के नाम से मना रही है।

नोवोटेल, लामी और सवू ा के इस रंगारंग उद्घाटन समारोह में भारत के साबरी बंधु समेत विश्व प्रसिद्ध सफ ू ी/बॉलीवडु गायकों ने दिल की गहराईयों में उतर जाने वाली प्रस्ततु ियां दीं। भारत के प्रमख ु पांच सितारा होटल- अशोका के दो मास्टर शेफ के तत्वावधान में प्रतिष्ठित ग्रैंड पैसिफिक होटल में भारत के व्यंजनों को कें द्र में रखते हुए फूड फे स्टिवल मनाया गया। विश्व मं च पर फीजी के लिए एक और शानदार वर्ष दूसरी तरफ, 2017 में फीजी ने अपने हिस्से में आए गौरव और विशेषाधिकार के क्षणों का खूब आनंद मनाया। 2016 में रग्बी सेवन्स में विश्व विजय के बाद, फीजी के लिए एक और बड़े गौरव का क्षण तब आया जब जून 2017 में स्वीडन के साथ न्यूयॉर्क में इसने महासागर सम्मेलन की सफलतापूर्वक सहमेजबानी की। इसी के साथ 1992 के संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) जिसे प्रायः सीओपी-23 के रूप में जाना जाता है, के 23 वें वार्षिक सम्मेलन में फीजी को अध्यक्ष बनाया गया। नवंबर, 2017 में जर्मनी के बॉन शहर में फीजी ने सीओपी 23 का बड़ी सहजता के साथ एक शानदार आयोजन किया। ऐतिहासिक महत्व के इस विशाल और जटिल सम्मेलन का संचालन करते हुए फीजी ने साबित कर दिया कि वह जलवायु परिवर्तन की चुनौती के खिलाफ प्रतिबद्ध दुनिया के तमाम देशों को उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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एक परिपक्व, गतिशील और जिम्मेदार नेतृत्व देने में सक्षम है। गौरतलब है कि सीओपी-23 के आयोजनों में भी, फीजी ने जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका का निर्वाह किया। इस दौरान विवादित मुद्दों पर सर्वसम्मति से काम करना, छोटे विकासशील द्वीपीय देशों (एसआईडीएस) की ओर से मजबूती से बात रखना उल्लेखनीय रहा। वास्तव में फीजी ने पूरी मानवता की ओर से अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह किया ताकि हम अपनी भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक बेहतर दुनिया छोड़ सकें । सच कहें तो फीजी ने विश्व के लिए “तालानोआ” की वास्तविक भावना का प्रदर्शन किया। ‘तालानोआ’ फीजी में, और वास्तव में प्रशांत क्षेत्र में प्रयोग होने वाला एक शब्द है जो किस्सों, विचारों को साझा करते हुए सर्वसम्मति से काम करने और बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय तक पहुंचने की प्रक्रिया को परिभाषित करता है। इस पूरी प्रक्रिया में भारत ने फीजी के साथ काम किया। फीजी के सीओपी -23 प्रेसीडें सी ट्रस्ट फंड में भारत ने 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान किया। इसी के साथ दोनों देशों के तकनीकी दलों ने जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में विभिन्न मुद्दों पर भी सहयोग किया। नवंबर 2014 में भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी की फीजी यात्रा न के वल भारत-फीजी सबं ंधों के लिए बल्कि सभी 14 प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ सबं ंधों की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण थी। इसी यात्रा के दौरान सवू ा में प्रथम भारत प्रशांत द्वीपीय सहयोग शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ।

2016 में रग्बी सेवन्स में विश्व विजय के बाद, फीजी के लिए एक और बड़े गौरव का क्षण तब आया जब जून 2017 में स्वीडन के साथ न्यूयॉर्क में इसने महासागर सम्मेलन की सफलतापूर्वक सह-मेजबानी की। इसी के साथ 1992 के सयं ुक्त राष्ट्र फ्रे मवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) जिसे प्रायः सीओपी-23 के रूप में जाना जाता है, के 23 वें वार्षिक सम्मेलन में फीजी को अध्यक्ष बनाया गया। फोरम की दसू री बैठक अगस्त 2015 में जयपुर में संपन्न हुई जिसमें फीजी के प्रधानमंत्री रियर एडमिरल (सेवानिवृत्त) माननीय चोसैया वोरें गे बईनिमरामा शामिल हुए थे। माननीय प्रधानमंत्री बईनिमरामा ने मई 2016 में भी भारत का दौरा किया और भारत के प्रधानमंत्री के साथ सद्भावपूर्ण चर्चा की। जलवायु परिवर्तन और अक्षय विकास पर साझेदारी सीओपी 23 की पर्वू पीठिका के रूप में दो और एफआईपीआईसी शिखर सम्मेलनों के दौरान प्राप्त सफलताओ ं की बुनियाद पर, भारत ने 25-26 मई 2017 को सवू ा में भारत-प्रशांत द्वीप समहू अक्षय विकास सम्मेलन (आईपीआईएसडीसी) का आयोजन किया, जिसकी मेजबानी विदेश मामलों के राज्य मत्री ं , जनरल (डॉ.) विजय कु मार सिंह (सेवानिवृत्त) ने की। सम्मेलन में सभी 14 पीआईसी देशों और भारत सरकार की पर्यावरण एजेंसियों और 4

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

अनसु ंधान संगठनों के प्रतिनिधि मडं लों की उच्च स्तरीय भागीदारी देखी गई। सम्मेलन का विवरण इस ससं ्करण में उपलब्ध है। विकास के लिए समर्पित एक भागीदार के रूप में भारत भारत ने इन सम्मेलनों के दौरान जो वादे किए और जो प्रतिबद्धताएं व्यक्त कीं, उनको परू ा करने के लिए इस वर्ष विशेष रूप से कार्य किया। हम इस पत्रिका में फीजी और प्रशांत क्षेत्र के एक प्रतिबद्ध विकास भागीदार के रूप में भारत की भमिक ू ा पर समर्पित एक अलग से लेख प्रस्ततु कर रहे हैं। एसएमई सेक्टर के लिए समर्थन भारत ने फीजी के एसएमई यानी लघु एवं मध्यम उद्यम वाले क्षेत्र को अपना सहयोग जारी रखते हुए 2.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनदु ान दिया जिसे इसी वर्ष जारी भी कर दिया गया। 2.8 मिलियन डालर के शेष अनदु ान को जारी करने के लिए समझौते के ज्ञापन पर जल्द ही हस्ताक्षर किए जाएगं े। इस प्रकार कु ल अनदु ान राशि बढ़ कर 5 मिलियन डॉलर हो जाएगी। भारत के माननीय प्रधानमत्री ं श्री नरें द्र मोदी ने नवंबर 2014 में अपनी फीजी यात्रा के दौरान यह वादा किया था। ं न के पश्चात कृ षि को बढ़ावा ऊष्णकटिबं धीय चक्रवात विस्ट 2016 में, भारत ने फीजी के कृषि मंत्रालय को सब्जियों के 5 टन बीज उपहार में दिए थे जिनका बाजार मूल्य 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। भारत और फीजी के बीच दोस्ती के ये बीज 2017 में उगे। फीजीयन किसानों ने उच्च गुणवत्ता वाले इन बीजों की बुवाई कर सब्जियों की जबर्दस्त पैदावार ली। फीजी सरकार की और से चीनी उद्योग को पुनर्जीवित करने की योजना को समर्थनः कृषि क्षेत्र की बात करें तो भारत का फीजी में योगदान काफी बड़ा रहा है। ये भारत ही है जिसने फीजी के चीनी उद्योग के पनु रूत्थान और पनु र्जीवन के लिए सरकार की योजना में बढ़ चढ़कर सहायता के लिए पहल की। फीजी में चीनी उद्योग को पनु र्जीवित करने के लिए भारत सरकार ने फीजी सरकार की रणनीतिक योजना में मदद के तौर पर 1.06 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनदु ान दिया है। इसमें विशेष रूप से कृषि उपकरणों और वाहनों की खरीद,कटाई,ढुलाई,रोपनी और जतु ाई में गन्ना उत्पादकों की आवश्यकताओ ं को परू ा करने में मदद शामिल है। इस धनराशि से प्राप्त किए जाने वाले उपकरण में पांच टाटा लॉरी, पांच महिद्रा ं ट्रैक्टर,यांत्रिक बवु ाई मशीन और अन्य कृषि उपकरण शामिल हैं। नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा हम इस क्षेत्र में अपने भागीदारों के साथ जलवायु परिवर्तन अनुकू लन और अक्षय विकास को बढ़ावा देने के चलाई जा रही परियोजनाओ ं पर काम कर रहे हैं। इस दिशा में एक बड़े उत्साहपूर्ण प्रयास के रूप में भारत ने दिसं बर 2017 में किरीबास के शहरी जिले दक्षिण तारावा के लिए सौर ऊर्जा की क्षमता वाली प्रकाश व्यवस्था हेतु 1.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर की उपहार राशि दी। परियोजना का उद्देश ्य दक्षिण तारावा के परिवारों को के रोसिन लालटे न की जगह सौर प्रकाश उपलब्ध कराना था। इसके चलते घरों में ऊर्जा की खपत में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। यह परियोजना किरीबास को सौर ऊर्जा प्रकाश व्यवस्था से लै स करके ऊर्जा खपत में लाखों डॉलर की बचत करे गी। यह परियोजना इन समुद ायों की के रोसिन लालटे न पर निर्भरता कम करने में भी मदद करे गी।


रात के समय अध्ययन करने वाले स्कू ली छात्रों के लिए यह एक बहु त बड़ा उपहार साबित होगा। सौर ऊर्जा का उपयोग भारत ने सभी 14 प्रशांत द्वीपीय देशों में 1.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत से 2800 घरों के सौर विद्युतीकरण की परियोजना शुरू की है। सात प्रशांत द्वीप देशों के 43 ‘सौर मित्रों’ की रे फ्रेशर ट्रेनिंग सितंबर 2016 में फीजी में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। सभी 14 प्रशांत द्वीप देशों के कु ल 70 सौर मित्रों ने सितंबर 2017 तक अपना प्रशिक्षण पूरा कर लिया। यह एक ऐसी अनूठी परियोजना है, जिसमें जलवायु परिवर्तन के खिलाफ तैयारी और सौर ऊर्जा के उपयोग के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण पर भी ध्यान दिया गया है।

क्षमता निर्माण और मानव सं साधन विकास क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास के मामले में, भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति कार्यक्रम वर्ष भर प्रभावी रूप से काम करते रहे जिनमें सभी सात प्रशांत द्वीपीय देशों के प्रतिभागी शामिल हुए। इन कार्यक्रमों का विवरण आगे के पृष्ठों में दिया गया है। सितंबर, 2017 में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) का फ्रे मवर्क एग्रीमेंट लागू हो गया। अक्षय विकास और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 2017 की यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी। इस उच्चायोग के अधिकार क्षेत्र में आने वाले छः देश – फीजी, किरीबास, नाउरू, तोंगा, तुवालु और वानूआतू इस अंतरराष्ट्रीय समझौते के हस्ताक्षर कर्ताओ ं में शामिल हैं जिसके लिए भारत और फ्रांस की ओर से संयक्त ु पहल की गई है। आईएसए के फ्रे मवर्क एग्रीमेंट का अनमु ोदन करके फीजी, नाउरू और तवु ालू आईएसए के संस्थापक सदस्य हो गए हैं। हम एक सफल अतं रराष्ट्रीय सौर गठबंधन ( आई.एस.ए) स्थापना सम्मेलन और मार्च 2018 में होने वाले सौर शिखर सम्मेलन की ओर आशा से देख रहे हैं।

समुद्र के जलस्तर में उठान से समुदायों की सुरक्षा नाउरू के एनेटन जिले में भारत की आर्थिक मदद से बनने वाली समुद्री दीवार का निर्माण कार्य वर्ष 2017 में परू ा हो गया। यह समुद्री दीवार इस जिले के समदु ायों को समुद्री स्तर के उठान और तटीय क्षरण के प्रतिकूल प्रभाव से सरु क्षित रखेगी। यह और ऐसी अन्य भागीदारी वाली विकास परियोजनाओ ं फोकस में राज्य का विवरण आगे के पृष्ठों में दिया गया है। इस बार हम चार भारतीय राज्यों- महाराष्ट्र, पंजाब, मणिपरु और तमिलनाडुपर विशेष सामग्री दे रहे हैं। इस जानकारी के आधार पर आप अपने पर्यटन, भारत-सं युक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के तहत सात प्रशांत द्वीपीय व्यापार और निवेश गंतव्य के बारे में आवश्यक निर्णय ले सकते हैं। देशों के लिए परियोजना जलवायु परिवर्तन के विपरीत प्रभावों से संघर्ष प्रशांत द्वीपीय देशों के लिए आभार एक बड़ी चुनौती है। इस संदर्भ में भारत सरकार ने अपनी ओर से सहायता इस अवसर पर मैं फीजी सरकार और उच्चायोग के अधिकार क्षेत्र आने वाले की पहल करते हुए 1 सितंबर 2017 को सात प्रशांत देशों के लिए ‘जलवायु छह अन्य प्रशांत द्वीपीय देशों की सरकारों का हृदय से आभार व्यक्त करना प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली’ की स्थापना की। यह कार्य भारत-संयक्त ु राष्ट्र चाहता हूं जिन्होंने हमारी सभी गतिविधियों को अपना भरपरू समर्थन दिया। विकास साझीदारी कोष के द्वारा किया गया। भारत अगले 10 वर्षों में इस मैं उच्चायोग की परू ी टीम को भी धन्यवाद देना चाहता हूं कि जिनके अथक कोष में 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर देने के लिए प्रतिबद्ध है। 2017 में 5 प्रयास और सहयोग से उपर्युक्त परियोजनाएं वास्तविकता में परिवर्तित हो मिलियन अमेरिकी डॉलर दिए जा चुके हैं। इस मद्ु दे पर पत्रिका में आगे और सकीं। मैं भारत के पर्यटन कार्यालय,सिडनी के सहयोग के लिए भी आभारी हूं अधिक जानकारी दी गई है। जिन्होंने इस प्रकाशन के लिए भारत में पर्यटन पर उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री और फोटोग्राफ उपलब्ध कराए हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा और गैर सं चारी रोगों से लड़ाई फीजी और इस उच्चायोग के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी प्रशांत द्वीपीय और इस तरह जब हम वर्ष 2018 को फीजी और संबंधित देशों के साथ अपने देशों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत के योगदान की चर्चा किए बिना उत्कर्ष रिश्तों में और मजबतू ी तथा बड़ी साझेदारी का वर्ष मान रहे हैं, मैं ‘उत्कर्ष’ के पत्रिका की यह प्रस्तावना अधरू ी ही रहेगी। इस दसू रे ससं ्करण को बहुत खश ु ी,सम्मान और शायद गर्व के स्पर्श के साथ प्रस्ततु कर रहा हू।ं मैं चाहता हंे कि इस अक ं के बारे में आप अपनी प्रतिक्रिया वर्ष के दौरान हम स्वास्थ्य जागरूकता अभियान आयोजित कर रहे हैं अवश्य दें ताकि हम अगले वर्ष इसे और बेहतर कर सकें । जिनमें भारतीय डॉक्टर मुफ्त स्वास्थ्य जांच प्रदान करते हैं। भारत आज चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्र में एक पसंदीदा गंतव्य है। हमने गैर-संचारी रोगों से इसी के साथ सभी पाठकों को नववर्ष की शभु कामनाए।ं आशा है कि आप लड़ने के लिए योग को एक प्रभावी उपकरण के रूप में भी बढ़ावा दिया है। सबका सहयोग पहले की तरह ही मिलता रहेगा। जून 2017 में फीजी और अन्य प्रशांत द्वीपीय देशों में तीसरा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस उमंग और उत्साह के साथ मनाया गया। योग दिवस का मुख्य समारोह सूवा के अल्बर्ट पार्क में मनाया गया जिसमें 3000 स्कू ली बच्चों सहित 4000 से अधिक लोग शामिल हुए। उच्चायोग ने इस वर्ष भारतीय सांस्कृ तिक कें द्र में एक उच्च शिक्षित भारतीय योगाचार्य की भी नियुक्ति की है। यहां विभिन्न रोगों के उपचार के लिए योग आधारित विशेष (विश्वास सपकाल) कार्यक्रम शामिल किए गए हैं। स्वस्थ जीवनशैली के लिए मैं पाठकों को भारत के उच्चायुक्त उच्चायोग से संपर्क करने और इस आंदोलन में शामिल होने के लिए कुक आईलैंड्स, फीजी, किरिबास, प्रोत्साहित करना चाहता हूं। नाउरू, तोंगा, तुवालु और वानूआतू उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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‘मेक इन इडं िया’

भारत के विनिर्माण उद्योग का रूपांतरण

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रत के माननीय प्रधानमत्री ं महामहिम श्री नरें द्र मोदी द्वारा राष्ट्र निर्माण के लिए व्यापक स्तर पर जो कई पहल की गई, उसी के तहत सितंबर, 2014 में मेक-इन-इडि ं या की भी शरुु आत हुई। भारत को वैश्विक डिजाइन और विनिर्माण कें द्र में बदलने के लिए प्रकल्पित मेक-इन-इडि ं या अभियान एक गंभीर स्थिति से निपटने के लिए उचित समय पर अपनी दस्तक दे रहा था। 2013 तक, अत्यधिक प्रचारित उभरते बाजारों का बल ु बल ु ा फूट चुका था, और एक दशक में भारत की विकास दर अपने निम्नतम स्तर तक गिर गई थी, ब्रिक्स राष्ट्रों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का वादा धुधं ला हो चुका था, और भारत को कथित ‘नाज़ुक पांच’ में से एक के रूप में चिह्नित किया जा रहा था। अतं रराष्ट्रीय निवेशक इस बहस में उलझे थे कि क्या दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र जोखिम भरा है या वहां अवसर हैं। भारत के 1.2 अरब नागरिकों ने सवाल किया कि क्या भारत सफल होने के लिहाज़ से बहुत बड़ा था या असफल होने के लिहाज़ से बहुत बड़ा था। भारत गंभीर आर्थिक विफलता की कगार पर था।

प्रक्रिया इसी सक ू में भारत में मेक-इन-इडि ं ट की पृष्ठभमि ं या कार्यक्रम शरूु किया गया था और बहुत जल्दी ही यह भारत के असखं ्य हितधारकों और भागीदारों के लिए एक नारा बन गया। यह भारत के नागरिकों और व्यापारिक नेततृ ्व के लिए आगे बढ़ने का एक शक्तिशाली प्रेरक आह्वान और दुनिया भर के सभं ावित भागीदारों और निवेशकों के लिए एक निमत्रं ण था। लेकिन, मेक-इन-इडि ं या एक प्रेरक नारे 6

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

से कहीं ज्यादा कु छ है।यह परु ानी पड़ चुकी प्रक्रियाओ ं और नीतियों के व्यापक और अभतू पर्वू जीर्णोद्धार का प्रतिनिधित्व करता है। सबसे महत्वपरू ्ण बात यह है कि यह अभियान सरकार की मानसिकता में बड़े बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें प्रधान मत्री ं के ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के सिद्धांत के परिप्रेक्ष्य में सरकारी सोच में आमल ू परिवर्तन दिखाई देता है। सरकारी विभाग अब अपने को आदेश जारी करने वाली एजेंसी की बजाए व्यापार भागीदार मान कर काम कर रहे हैं।

“मेक-इन-इडं िया कहकर, हम न के वल कंपनियों को कम लागत में विनिर्माण के लिए आमंत्रित कर रहे हैं,बल्कि उन्हें अपने उत्पादों के लिए एक बड़े बाजार का मौका भी दे रहे हैं।” नरेंद्र मोदी भारत के माननीय प्रधानमंत्री योजना किसी भी आदं ोलन को शरू ु करने के लिए ऐसी रणनीति की आवश्यकता होती है,जो समान रूप से प्रेरित करती हो, सशक्त करती हो और सक्षम बनाती हो। मेक-इन-इडि ं या को एक अलग तरह के अभियान की जरूरत थी। ठे ठ आकड़ े पहुचं ाने ं ों से लदे अख़बारी विज्ञापनों के बजाय, इसके लिए संदश


की ऐसी व्यवस्था करनी थी जो सचू नापरक, अच्छी तरह से तैयार की हुई और सबसे महत्वपरू ्ण कि वह विश्वसनीय हो। इसके माध्यम से (क) विदेशों में सभं ावित भागीदारों, भारतीय के व्यापारिक समहू ों और नागरिकों के बीच भारत की क्षमताओ ं को लेकर विश्वास जगाना था; (ख) 25 उद्योग क्षेत्रों पर बड़ी मात्रा में तकनीकी जानकारी के लिए एक ढांचा प्रदान करना था; और (ग) सोशल मीडिया के माध्यम से एक बड़े स्थानीय और वैश्विक श्रोताओ ं तक पहुचं बनानी थी ताकि उन्हें अवसरों, सुधारों आदि के बारे में नवीनतम जानकारियां दी जा सकें ।

वर्ष भारत की EDOB

रैंि‍कंग

2014

2015

2016

2017

2018

142

134

130

131

100

औद्योगिक नीति और सवं र्धन विभाग (डीआईपीपी) ने कु छ खास एजेंसियों के साथ मिलकर पहले बुनियादी ढांचे को ठीक करने पर काम किया। इसके तहत एक विशेष सहायता डेस्क और पहली बार मोबाइल वेबसाइट तैयार की गई जिसके द्वारा कई प्रकार की व्यापक सचू नाओ ं को एक सहज विषयसचू ी में सरल तरीके से उपलब्ध कराया गया। मखु ्य रूप से मोबाइल स्क्रीन के लिए डिज़ाइन की गई इस साइट को इस तरह बनाया गया कि उपयोगकर्ता सचू नाओ ं के जंगल में गमु होने की बजाय अपनी जानकारी को बड़े आसानी

से प्राप्त कर सके । 25 औद्योगिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग ब्रोशर तैयार किए गए जिनमें महत्वपरू ्ण तथ्य, आक ं ड़े, नीतियां, नई बातें और सबं ंधित क्षेत्र के सपं र्क सत्रू दिए गए थे। ये सभी जानकारियां प्रिंट और आनलाईन दोनों रूप में उपलब्ध कराई गई ं। प्रगति बहुत कम समय में परु ाने और अड़ंगा लगाने वाले ढांचे को तोड़ कर उसकी जगह एक ऐसी पारदर्शी तथा उपयोगकर्ता के अनुकू ल प्रणाली खड़ी कर दी गई है,जो निवेश को आकर्षित करने, नवाचार को बढ़ावा देने, कौशल विकसित करने, बौद्धिक सपं दा (आईपी) की रक्षा करने और सर्वोत्तम श्रेणी की विनिर्माण आधारभतू सरं चना को बनाने में मदद कर सके । इन उपायों से बात बन रही है, इसका सबसे बड़ सबतू यह है कि अर्थव्यवस्था के प्रमख ु क्षेत्रों जैसे रे लवे, रक्षा, बीमा और चिकित्सा उपकरणों के मामले में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश तेजी से बढ़ा है। भारतीय दतू ावासों और वाणिज्य कें द्रों को भी कहा गया है कि वे चिह्नित क्षेत्रों में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए संभावित निवेशकों तक आवश्यक जानकारी पहुचं ाएं और उनसे संवाद स्थापित करें । डीआईपीपी ने जापान से निवेश प्रस्तावों को सुविधाजनक बनाने और तेजी से निपटान करने के लिए एक विशेष प्रबंधन टीम की स्थापना की है, जिसे ‘जापान प्लस’ के नाम से जाना जाता है और इसे अक्टूबर 2014 से लागू कर दिया गया है। इसी प्रकार,जनू 2016 में शरू ु किया गया ‘कोरिया प्लस’, दक्षिण कोरिया से फास्ट उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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ट्रैक निवेश प्रस्तावों की सुविधा प्रदान करता है और भारतीय बाजार में प्रवेश करने की इच्छा रखने वाली कोरियाई कंपनियों को सभी तरह की सहायता प्रदान करता है। रक्षा, रे लवे, अतं रिक्ष इत्यादि जैसे विभिन्न क्षेत्रों को निवेश के लिए खोला गया है। साथ ही, निवेश की सुविधा और व्यवसाय करने में आसानी लाने के लिए नियामक नीतियों को भी सहज बना दिया गया है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में छह औद्योगिक गलियारे विकसित किए जा रहे हैं। इन गलियारों के साथ प्रमख ु औद्योगिक शहर भी जुड़ेंगे। आज, भारत की विश्वसनीयता पहले से कहीं अधिक मजबतू है। भारत में आज गति, ऊर्जा और आशावाद का माहौल है। मेक-इन-इडि ं या के माध्यम से निवेश के द्वार खल ु रहे हैं। कई उद्यम इस कार्यक्रम के मत्रं को अपना रहे हैं। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अब दुनिया की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था बनने की अपनी राह पर चल पड़ा है।

मिसाइलों, रडार, इलेक्ट्रॉनिक यद्ध ु प्रणाली आदि जैसे रक्षा के सभी प्रमख ु क्षेत्रों में विदेशी निवेश खल गया है । ु रक्षा मंत्रालय के शोध विभाग के रूप में गठित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) भारतीय सशस्त्र बलों के लिए उनकी जरूरत के अनुसार अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों के विकास में लगा हुआ है। रक्षा क्षेत्र की बढ़ रही जरूरतों के लिए पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2014-15 से 2016-17) में, रक्षा पंूजीगत उपकरणों की खरीद को लेकर विदेशी विक्रे ताओ ं के साथ 58 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

रक्षा क्षेत्र में मेक-इन-इंडिया मेक-इन-इडि ु कर दिया गया है। इसके ं या अभियान को रक्षा क्षेत्र में भी शरू तहत अब लड़ाकू वाहन, यद्ध ु विमान, यद्ध ु पोत, हथियार, गोला बारूद,

यू.एस.$ 80.00

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

यू.एस.$ 320.00 यू.एस.$ 240.00 यू.एस.$ 180.00 यू.एस.$ 80.00 2013-14

2014-15 रक्षा निर्यात में वार्षिक वृद्धि

2015-16


महिला सशक्तिकरण

भा

उज्ज्वला

रत में 24 करोड़ से अधिक परिवार निवास करते हैं जिनमें से लगभग 10 करोड़ परिवार अब भी खाना पकाने के लिए एलपीजी ईधन ं से वंचित ह।ैं लकड़ी, कोयला, के रोसिन आदि के जलने से जो धुआं निकलता है, उससे घरे लू प्रदषण ू होता है जो बेहद खतरनाक है क्योंकि अशद्ध ु ईधन ं से महिलाओ ं और बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल

प्रभाव होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार यह घरे लू प्रदषण ू पीने के बराबर होता है जिससे ू एक घंटे में 400 सिगरे ट का धंआ कई प्रकार के श्वसन रोग और बीमारियां पैदा होती ह।ैं इसके अलावा इन महिलाओ ं और बच्चों को जलावन की लकड़ी इकट्ठा करने की परे शानी से भी गजु रना पड़ता है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी (बलिया, 1 मई 2016) प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) का लक्ष्य इन परिवारों को खाना पकाने के लिए स्वच्छ और शद्ध ु एलपीजी ईधन ं प्रदान करके उनके स्वास्थ्य को बेहतर करना है ताकि उन्हें न तो अपनी धुआंग्रस्त रसोई में अपना स्वास्थ्य खराब करना पड़े और न ही जलावन की लकड़ी इकट्ठा करने के लिए असुरक्षित क्षेत्रों में भटकना पड़े। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना माननीय प्रधानमंत्री श्री नरें द्र मोदी द्वारा शरू ु की गई थी। इस योजना का शभु ारंभ प्रधानमंत्री श्री नरें द्र मोदी ने 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में किया। इस योजना के तहत गरीब परिवारों की महिलाओ ं को 5 करोड़ एलपीजी कनेक्शन मफु ्त में उपलब्ध कराए जाने का संकल्प था। इसका उद्देश्य महिलाओ,ं विशेष रूप से ग्रामीण भारत में महिलाओ ं के सशक्तिकरण को सुनिश्चित करना है। ये कनेक्शन इन परिवारों की महिलाओ ं के नाम पर जारी किए जाते ह।ैं इस योजना को लागू करने के लिए 8 अरब रुपये (123 मिलियन यूएस डॉलर के बराबर) आवंटित किए गए ह।ैं माननीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (उज्ज्वला स्कीम) की सीमा का विस्तार किया है ताकि इसमें 8 करोड़ गरीब परिवारों को भी शामिल किया जा सके । इसके तहत उन्हें खाना पकाने के मफु ्त गैस कनेक्शन दिए जाएंगे। इस योजना के माध्यम से 3 करोड़ से अधिक परिवारों को खाना पकाने के लिए गैस कनेक्शन की सुविधा मिल चुकी है। यह योजना सरकार को तीन साल की अवधि तक गरीब महिलाओ ं को वित्तीय सहायता के साथ खाना पकाने के गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने की अनुमति देती है। योजना के तहत सुविधा पाने वाले परिवारों की पहचान सामाजिक-आर्थिक जनगणना 2011 के आंकड़ों के माध्यम से की जाती है। उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के साथ बात करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी (नई दिल्ली, 13 फरवरी, 2018)

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ई-गवर्नेंस

रकारों और नागरिकों के बीच विश्वास का सजृ न ही सुशासन का मल ू है। मानव जाति के कल्याण के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित नये स्थायी विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने के लिए सचू ना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) को एक आवश्यक उपकरण के रूप में चिह्नित गया है। इस बात को विश्व स्तर पर स्वीकारा गया है कि आईसीटी अच्छे शासन को बढ़ावा देती है। नीतिगत प्रक्रिया में नागरिक को शामिल करके और पारदर्शी तथा जिम्मेदार शासन को बढ़ावा देकर आईसीटी विश्वास का माहौल पैदा करती है। ई-गवर्नेंस के माध्यम से, नागरिकों को सुविधाजनक, कु शल और पारदर्शी तरीके से सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती ह।ैं आईसीटी बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण कार्यों और लोक प्रशासन संचालन की दक्षता को सुधारने में भी मददगार है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम सरकार द्वारा 2015 में फ्लैगशिप कार्यक्रम के रूप में घोषित डिजिटल इडि ं या की पहल का लक्ष्य नागरिकों, व्यवसायों और देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना तथा समाज को उच्च बौद्धिक पंजू ी वाली एक ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना है। ‘डिजिटल इडि ं या’ के नौ स्तंभों में से, सरकार ने जिन अन्य बातों पर बल दिया है, उनमें शामिल हैं: 1. ब्रॉडबैंड हाइवे का निर्माण; 2. ई-शासन-प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकार में सुधार; 3. ई-क्रांति - सेवाओ ं को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से महु यै ा कराना। व्यापक रूप से डिजिटल भारत पहल का उद्देश्य इन परिकल्पनाओ ं को प्राप्त करने में मदद करना है : 1. हर नागरिक की उपयोगिता के अनरू ु प डिजिटल आधारभतू संरचना 2. मांग के अनसु ार शासन और सेवाएं 3. नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण

‘नागरिक अनुकू ल शासन के लिए भारतीय प्रतिमान’

हाल के वर्षों में सरकार ने नागरिक अनुकू ल ई-गवर्नेंस को लेकर अनेक पहल की हैं। ससं ्कृ तिक, भाषा और प्रवृत्तियों में बड़ी विविधता को देखते हुए कु छ पहल तो वास्तव में हमारे देश के लिए अनठू ी है। भारत की डिजिटल पहचान हेतु आधारभूत सं रचना भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIAI) नामक एक संगठन के माध्यम से सरकार ने प्रत्येक नागरिक को विशिष्ट पहचान (UID) देने की एक महत्वाकांक्षी ई-गवर्नेंस परियोजना शरू ु की है। यआ ू ईडी का लक्ष्य ‘आधार’ नामक बॉडीमेट्रिक्स (शारीरिक चिन्हों जैसे ऊँगली के निशान अथवा आँखों की पतु लियों द्वारा व्यक्ति विशेष की पहचान की पद्धति) और जनसांख्यिकीय जानकारी के माध्यम से किसी भी भारतीय निवासी की पहचान को सत्यापित करने के लिए एक वास्तविक समय सेवा प्रदान करना है। सरकार ने इसके माध्यम से कई सेवाओ ं और कल्याणकारी योजनाओ ं को लागू करना शरू ु कर दिया है। इसके चलते समाज में नागरिकों की निचली पंक्ति को वास्तविक लाभ मिल रहा है और उसका स्तर ऊपर उठ रहा है। के वल अधिकृ त व्यक्तियों तक लाभ पहुचं ाने के उद्देश्य से सरकार, एलपीजी सब्सिडी, छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, पेंशन और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) आदि जैसी कई कल्याणकारी योजनाओ ं के साथ आधार संख्या को जोड़ने में सफल रही है। एकीकृ त भुगतान परिपथ नागरिकों के बीच प्रत्येक स्तर से डिजिटल वित्तीय लेनदेन को बढ़ावा देने और उसे सुविधाजनक बनाने के लिए एकीकृ त मचं और एप्लिके शन(ऐप) विकसित किए गए हैं। यनि ू फाइड पेमटें ् स इटं रफे स (यपू ीआई- एकीकृ त भगु तान परिपथ) एक ऐसी प्रणाली है, जो कई बैंक खातों को (किसी भी भागीदारी वाले बैंक के साथ) एक मोबाइल एप्लिके शन में सक्षम बनाती है। इसके द्वारा कई बैंकिंग सुविधाओ,ं सीमलेस फंड रूटिंग और व्यापारिक भगु तान को एक

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ही छतरी के नीचे समेट दिया गया है। भारत इटं रफे स फॉर मनी (BHIM-भीम) ऐप की शरुु आत से जनता के बीच डिजिटल वित्तीय लेनदेन को सरल, आसान और तेज बनाया गया है। मोबाइल नंबर से जडु ़ा आधार नंबर इस एप्लिके शन(ऐप) को अनठू ा बनाता है। भारत की भुगतान कें द्रित आधारभूत सं रचना सरकार द्वारा लॉन्च न्यू एज गवर्नेंस एकीकृ त मोबाइल अप्लीके शन (यएू मएएनजी) एक बड़ी उपलब्धि है। इसके जरिए नागरिक अपने मोबाइल पर कें द्र, राज्यों और यहां तक कि स्थानीय निकायों और अन्य निजी अभिकरणों

से 200 से अधिक ई-गवर्नेंस सेवाएं प्राप्त कर सकता है। नागरिकों को मोबाइल ऐप, वेब, आईवीआर और एसएमएस जैसे अनेक चैनलों में यएू मएएनजी सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिन्हें स्मार्ट फोन, फीचर्स फोन, कंप्यूटर और टैबलेट के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है। यएू मएएनजी (UMANG) भी आधार आधारित प्रमाणीकरण तंत्र का उपयोग करता है। सरकार द्वारा गवर्नमेंट ई-मार्के टप्लेस (जीईएम) की भी शरू ु आत की गई है ताकि सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता, दक्षता और गति को बढ़ावा दिया जा सके । यह ई-बीडिंग (बोली लगाना), रिवर्स ई-नीलामी और मांग समहू न की सुविधा देता है ताकि सरकारी उपयोगकर्ताओ ं को बेहतर सेवा मिल सके । ई-गवर्नेंस के कार्यान्वयन और रखरखाव में दूरसं चार क्षेत्र की भूमिका अ) भारत सरकार की पहल (जीओआई) सार्वभौम सेवा दायित्व अर्थात यूनिवर्सल सर्विस आब्लिगेशन (यूएसओ) निधि का प्रावधान: एनटीपी-199 के बाद यनि ू वर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (यएू सओएफ) की परिकल्पना ग्रामीण क्षेत्रों समेत सभी अनदेखे क्षेत्रों में व्यापक सेवा प्रावधानों के बीच सतं ल ु न स्थापित करने के लिए की गई है। देश में ग्रामीण, छूट गये क्षेत्रों और नहीं पहुचं पाने वाले क्षेत्रों में दरू संचार आधारभतू संरचना की तैनाती और उसकी मजबतू ी में मदद के लिए यएू सओएफ लगातार सक्रिय है। राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड नीति-2004: सभी नागरिकों को देशव्यापी ई-गवर्नेंस तक पहुचं प्रदान करने के लिए, अतं र्निहित दरू संचार बुनियादी ढांचे के रूप में उच्च गति की उपलब्धता वाला सस्ता ब्रॉडबैंड अनिवार्य रूप से महत्वपरू ्ण है। इस सिलसिले में राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड नीति-2004 को ई-गवर्नेंस लागू करने के सरकार के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करने वाला पहला कदम माना जा सकता है। 12

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राष्ट्रीय दूरसच ं ार नीति-2012: ब्रॉडबैंड आधारभतू संरचना का विस्तार देश के नागरिकों के लिए डिजिटल समावेशन की कुं जी है। ब्रॉडबैंड का प्रवेश और देश के जीडीपी के बीच प्रत्यक्ष सहसबं ंध रहा है। इस वास्तविकता को स्वीकार करते हुए, सरकार के दृष्टि पत्र, राष्ट्रीय दरू संचार नीति 2012 (एनटीपी -2012) में देश को एक सशक्त और समावेशी ज्ञान-आधारित समाज में बदल देने की परिकल्पना की है। नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, प्रशासन, बैंकिंग इत्यादि जैसे महत्वपरू ्ण क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस के जरिए भागीदार बनाना एनटीपी -2012 का प्रमख ु उद्देश्य रहा है ताकि न्यायसंगत और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके ।

डिजिटल इडं िया और भारतनेट का कार्यान्वयन: ब्रॉडबैंड आधारभतू संरचना को मजबतू करने के लिए एक पहल के रूप में, भारत सरकार ने 2012 में 2,50,000 ग्राम पंचायतों को चरणबद्ध तरीके से कनेक्टिविटी प्रदान करने का प्रयास किया है। इसके लिए राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (एनओएफएन) की स्थापना की गई है जो पर्याप्त बैंडविड्थ वाली ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी सुनिश्चित करे गा। G2C, B2B, P2P, B2C आदि जैसी सेवाएं जिनमें ई-शिक्षा, सदु रू स्वास्थ्य निगरानी, ई-गवर्नेंस, मौसम, कृषि इत्यादि की बेहतरी के उपाय हैं, उन तक अब आम आदमी भी अपनी पहुचं बना सकता है। बताते चलें कि डिजिटल इडि ं या अभियान के व्यापक उद्देश्यों को परू ा करने के लिए “NOFN को बढ़ाकर एक समग्र प्रोजेक्ट का रूप दे दिया गया है। ब) सरकार द्वारा ई-गवर्नेंस के प्रयासों को एकीकृ त स्वरूप देने के लिए भारतीय

जनता को राहत प्रदान करने और वित्तीय समावेशन को विस्तारित करने के लिए ट्राई (TRAI) ने नवंबर 2016 में प्रति लेनदेन (प्रत्येक में आठ चरण) की दर को घटाकर अधिकतम 50 पैसा (.008 अमेरिकी डालर) कर दिया। जबकि पहले यह दर प्रति सत्र 1.5 रुपए (0.023अमेरिकी डॉलर के बराबर) थी और प्रत्येक सत्र में 5 चरण ही शामिल थे।


दरू संचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) की पहल ब्रॉडबैंड की शीघ्र उपलब्धता: ब्राडबैंड को तेजी से विस्तार करने के लिए अप्रैल, 2015 में ट्राई ने राज्यों और कें द्र सरकार से जडु ़े सभी राइट्स आफ वे प्रस्तावों को एकल खिड़की और समयबद्ध सीमा में मजं रू ी देने के लिए सरकार के सामने अनश ु सं ायें रखीं। ट्राई ने सरकार को एक और प्रस्ताव दिया है जिसमें ई-शासन सेवाओ ं को महु यै ा कराकर माडल यजू र और एक ं र टिनेंट की भमिक ू निभाने का सझु ाव दिया गया है। इसके तहत यएू सओएफ के द्वारा सब्सिडी देकर ग्रामीण और दरू दराज के क्षेत्रों के सरकारी स्कू लों को ब्राडबैंड दिया जा सकता है और इसी तरह ई-शिक्षा, ई-गवर्नेंस, एम-हेल्थ, एम-बैंकिंग से जडु ़ी परियोजनाओ ं को भी सफल बनाया जा सकता है। भारतनेट का कार्यान्वयन: फरवरी, 2016 में ट्राई ने भारतनेट के लिए कार्यान्वयन रणनीति से सबं ंधित अपनी सिफारिशें सरकार को भेज दी। इसमें निजी हित और दीर्घ अवधि तक सेवाओ ं की उपलब्थता सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) का सझु ाव दिया गया है। देश व्यापी ब्राडबैंड नेटवर्क , भारतनेट के लिए बिल्ड-ओन-ऑपरे ट

ट्रांसफर/ बिल्ड-ऑपरे ट-ट्रांसफर जैसे मॉडलों को वरियता देने की बात कही गई है। यूएसएसडी आधारित मोबाइल बैंकिंग लेनदेन (USSD based mobile banking transactions): ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं,जिनके पास फीचर (मल ू ) फोन हैं। यएू सएसडी आधारित प्रोग्राम का उपयोग मल ू फीचर फोन का इस्तेमाल करते हुए बैंकिंग लेनदेन करने के लिए किया जा सकता है। ट्राई ने लोगों को राहत प्रदान करने और उनके वित्तीय समावेशन को विस्तारित करने के लिए, नवबं र 2016 में उच्चतम शलु ्क प्रति लेनदेन अधिकतम 50 पैसे (0.008 अमेरिकी डॉलर के बराबर) तक कम कर दिया, प्रत्येक में 8 चरण वाले 1.50 रुपये की पर्वू दर से ( ईक यएू स $ 0.023) प्रति सत्र, जहां प्रत्येक सत्र में 5 चरण शामिल थे। आधार आधारित ई-के वाईसी मानदडं : नया मोबाइल कनेक्शन लेने के लिए आधार को इलेक्ट्रानिक के वाईसी का एक वैध दस्तावेज माना जा सके , इसके लिए ट्राई ने अपनी सिफारिशें रखी हैं। इसके बाद सरकार ने अगस्त, 2016 में ई-के वाईसी दिशानिर्देश जारी किए ताकि उपभोक्ताओ ं के लिए आवेदन करने और उसका सत्यापन कराने की प्रक्रिया तेज और सरल बनाई जा सके ।

सार्वजनिक वाई-फाई के माध्यम से ब्रॉडबैंड का विस्तार: देश में इटं रनेट का विस्तार करने के लिए, मार्च, 2017 में ट्राई ने ‘सार्वजनिक वाईफाई नेटवर्क के माध्यम से ब्रॉडबैंड के प्रसार’ नाम से अपनी एक विज्ञप्ति जारी की। इसमें अन्य बातों के अलावा ट्राई ने सरकार से उन नियामक और वाणिज्यिक बाधाओ ं को दरू करने की सिफारिश की है जिनके चलते देश भर में सहज और सल ु भ वाईफाई सुविधा को उपलब्ध कराने में दिक्कत आ रही है। डाटा खरीदने से जुड़ी चुनौती को दूर करना: ग्रामीण इलाकों में गरीबी के चलते डाटा खरीदने से जडु ़ी चुनौती को दरू करने के लिए, ट्राई ने दिसम्बर, 2016 में सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था। ‘उचित डेटा के प्रावधान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में डेटा उपयोग को प्रोत्साहित करना’ शीर्षक वाले इस प्रस्ताव में ग्रामीण इलाकों में प्रति माह 100 एमबी मफु ्त डेटा देने की बात कही गई है। इस योजना के कार्यान्वयन की लागत यएू सओएफ से जटु ाई जा सकती है। ऊपर बताए गए विभिन्न उपायों से नागरिकों तक ई प्रशासन सेवाओ ं के प्रसार में निश्चित रूप से मदद मिलेगी। इससे भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज बनाने और व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने का लक्ष्य भी परू ा हो सके गा।

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रा

ष्ट्रीय विकास के लिए एक उपकरण के रूप में वाह्य अंतरिक्ष का उपयोग करना भारत की समृद्ध परंपरा रही है। गरीबों में भी सबसे गरीब हमेशा भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के लाभार्थी रहे हैं। भारतीय उपग्रह देश की लगभग 1.3 अरब आबादी के जीवन को बेहतर बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं। इसमें किसानों से लेकर मछुआरे तक शामिल हैं। अपना सत्तरवां जन्मदिन मना रहा भारत आज अतं रिक्ष प्रौद्योगिकी के सनु हरे यगु में प्रवेश कर चुका है। सैटेलाइट आधारित टेलीविजन, बैंकिंग, स्मार्ट सिटी विकास, मौसम पर्वा ू नमु ान, स्मार्ट फोन, ई-गवर्नेंस, नौ-संचालन जैसी सुविधाएं लोगों के जीवन को आसान बना रही है। इससे पता चलता है कि उच्च प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके आम आदमी का जीवन बेहतर बनाने के लिए भारत कितना बेचनै है। अतं रिक्ष की खोज के लिए भारत ने 1969 में भारतीय अतं रिक्ष अनसु धं ान संगठन (इसरो) का गठन किया जिसका वार्षिक बजट इस समय 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर है। आज देश के पास अतं रिक्ष की कक्षा में 44 उपग्रहों का समहू है और हम चार टन वाले संचार उपग्रहों को ख़ुद से अतं रिक्ष में स्थापित कर सकते हैं। हम न के वल अपना उपग्रह खदु बनाते हैं बल्कि उसे अपने बनाए राके ट से अतं रिक्ष में स्थापित भी कर सकते हैं। अभी हाल ही में भारत ने अपने यहां निर्मित उपग्रह मगं लयान या मगं ल आर्बिटर मिशन को 20 करोड़ किलोमीटर की दरू ी पर मगं ल ग्रह की यात्रा पर भेजा है।

“2013 में भारत ने मंगल ग्रह के लिए मंगलयान का पहला मिशन प्रक्षेपित किया था। 24 सितंबर 2014 को भारत को उस समय बहुत बड़ी उपलब्धि मिली जब यह उपग्रह मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश कर गया। इसके साथ ही भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया जिसने अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह की कक्षा तक अपना उपग्रह भेज दिया। 1972 में भारत ने अपना पहला उपग्रह अतं रिक्ष में भेजा। प्रसिद्ध गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम से जाना जाने वाला 360 किलोग्राम का यह उपग्रह पर्वू वर्ती यएू सएसआर की मदद से कक्षा में ले जाया गया था। अतं रिक्ष विज्ञान की इस छोटी सी शरुु आत ने इसरो के लिए सितारों तक पहुचं ने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। इस साल अगले कु छ महीनों में ही भारत अपने सबसे भारी उपग्रह जीएसएटी-11 को लॉन्च करने की उम्मीद करता है,जो लगभग 5725 किलोग्राम वजन का होगा। ‘बाहुबली’ लॉन्च करके भारतीय अतं रिक्ष एजेंसी ने दमखम की एक नयी

2017 में इसरो की उपलब्धियां • • • • 14

130+ उपग्रह कक्षा में स्थापित दक्षिण एशियाई देशों को उपग्रह की भेंट मगं लयान अनंत यात्रा की ओर बढ़ा शुक्र अभियान की शरुु आत

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दुनिया में प्रवेश कर लिया है। भारी वजन वाले उपग्रहों को लांच करने के अरबों डालर के बाजार में अब भारत भी शामिल है। इसरो के चेयरमैन डॉ ए.एस. किरण कु मार ने विनम्रता भरे शब्दों में कहा, ‘हमने यह सुनिश्चित करने के लिए जी-जान लगा दिया कि यह नया परू ्ण आत्मनिर्भर भारतीय रॉके ट अपने पहले ही लॉन्च में सफल हो।’ भारी वज़न को उठाने वाला यह रॉके ट 8 टन वज़नी उपग्रह को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है, जो भारत के चालक दल मॉड्यल ू को ले जाने के लिए पर्याप्त है। प्रसंगवश, इस लॉन्च ने इसके चारों तरफ़ मोटे-मोटे अक्षरों में लिखे मेड इन इडि ं या’को एक नया आयाम दे दिया है’। इसरो जल्दी ही 2-3 सदस्यों वाले मानव दल को अतं रिक्ष में भेजने वाला है। इसके साथ ही रूस, यएू सए और चीन के बाद अब भारत, मानव अतं रिक्ष उड़ान कार्यक्रम वाला चौथा देश बन जाएगा। उल्लेखनीय है कि इसरो ने अतं रिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय के महिला होने पर ज़ोर दिया है ! कु मार सैद्धांतिक तौर पर इस बात की पुष्टि करते हैं कि जीएसएलवी एमके -3 या उसके किसी अन्य संस्करण को भविष्य में मानव दल को अतं रिक्ष में भेजने के लिए प्रयोग करने पर विचार किया जाएगा।’. भारत में पहले से ही दो रॉके ट प्रयोग में हैं। पहला है दमदार पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हिकल (पीएसएलवी),जो अतं रिक्ष में 1.5 टन के उपग्रहों को ले जा सकता है और चद्रं मा तथा मगं ल ग्रह के लिए भारत के मिशन का यह पसदं ीदा वाहन था। दसू रा राके ट है जिओसिक्रो ं नस सैटेलाइट लॉन्च व्हिकल मार्क II जो 2 टन वर्ग के उपग्रहों को ले जा सकता है। इन दोनों को मिलाकर इसरो ने अबतक पचास रॉके ट लॉन्च किए हैं। हाल ही में इसरो ने एक ही मिशन में कक्षा में 104 उपग्रहों को सफलतापूर्वक स्थापित करते हुए एक विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इससे पहले यह रिकार्ड रूस के नाम था जिसने एक साथ 39 उपग्रहों को लॉ ंच किया था। इस साल भारत ने ऐसी अतं रिक्ष कूटनीति शरू ु की जिसका पहले कोई उदाहरण नहीं मिलता। पहली बार नई दिल्ली ने दक्षिण एशियाई देशों के लिए 450 करोड़ रुपये के एक विशेष उपहार के माध्यम से अतं रिक्ष प्रौद्योगिकी की अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है। भारत ने ब्रह्मांड में उस समय अपनी एक


सितारों का सफ़र

बाह्य अतं रिक्ष के लिए भारत की खोज: आर्यभट्ट से मगं लयान तक

बहुत ही अनठू ी जगह बना ली, जब नई दिल्ली ने ‘दक्षिण एशिया सैटेलाइट’ के रूप में अपने पड़ोसियों को आकाश में भारी वजन वाला उपग्रह उपहार में दिया।’ भारत ने ‘पहले पड़ोसी’ वाली अपनी नीति को विस्तारित करते हुए उसे दिल खोल कर अतं रिक्ष की बल ु ंदियों तक पहुचं ा दिया। अपने पड़ोसियों के उपयोग के लिए सचं ार उपग्रह का यह निःशलु ्क ‘उपहार’ अपने आप में अनठू ा है। अतं रिक्ष परिवहन की दुनिया में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता है। अब तक के सभी अतं रिक्ष प्रक्षेपण व्यवसायिक गतिविधि के तहत लाभ के लिए किए गए हैं। ‘दक्षिण एशिया सैटेलाइट’ 2230 किलोग्राम का है जो 235 करोड़ रुपये (36.07 मिलियन अमरीकी डालर) की लागत वाला एक संचार उपग्रह है। इस उपग्रह की विशिष्टता यह है कि इसमें एक ऐसा संकेत है,जिसका विस्तार परू े दक्षिण एशिया में है और भारत ने इस अतं रीक्ष संदश े वाहक को अपने पड़ोसियों के लिए उपहारस्वरूप दिया है। दक्षिण एशिया सैटेलाइट में 12 क्यू बैंड ट्रांसपोंडर ह,ैं जिसका उपयोग भारत के पड़ोसी अब अब अपने संचार को बढ़ाने के लिए कर सकते ह।ैं प्रत्येक देश की पहुचं कम से कम एक ट्रांसपोंडर तक होगी,जिसके माध्यम से वे अपनी प्रोग्राम का प्रसारण कर सकते ह।ैं इसके जरिए सबके लिए साझा ‘दक्षिण एशियाई कार्यक्रम’ भी प्रसारित किया जा सकता है। प्रत्येक देश अपना खदु का जमीनी आधारभतू ढांचा विकसित कर रहा है, हालांकि इसके लिए भारत भी सहायता का हाथ बढ़ाने और जानकारियां देने के लिए तैयार है। सरकार के अनुसार, यह उपग्रह हमारे पड़ोसियों को टेलीविजन, डायरे क्ट-टू-होम (डीटीएच), बहुत ही छोटा एपर्चर टर्मिनल (वी-एसएटी),

टेली-एजुकेशन, टेलीमेडिसिन और आपदा प्रबंधन सहायता जैसे दरू संचार के अनुप्रयोगों और सेवाओ ं की पूरी श्रृंखला उपलब्ध कराएगा। इस उपग्रह में भागीदारी करने वाले देशों के बीच सुरक्षित हॉट लाइन स्थापित करने की क्षमता होगी। भक ू ं प, चक्रवात, बाढ़, सनु ामी से ग्रस्त दक्षिण एशियाई देशों में जरूरत के समय महत्वपरू ्ण संचार सम्पर्क प्रदान करने में इस उपग्रह की बड़ी भमिक ू होगी।

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शांति के इस मीठी पहल में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग (सार्क ) के छ: देश अर्थात् अफगानिस्तान, नेपाल, भटू ान, मालदीव, बांग्लादेश और श्रीलंका शामिल हैं। 2013 में भारत ने मगं ल ग्रह के लिए मगं लयान का पहला मिशन प्रक्षेपित किया था। 24 सितंबर 2014 को भारत को उस समय बहुत बड़ी उपलब्धि मिली जब यह उपग्रह मगं ल ग्रह की कक्षा में प्रवेश कर गया। इसके साथ ही भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया जिसने अपने पहले ही प्रयास में मगं ल ग्रह की कक्षा तक अपना उपग्रह भेज दिया। यह एक ऐसी उपलब्धि है जिसे अतं रिक्ष की दुनिया के दिग्गज देश रूस और अमेरिका भी हासिल नहीं कर पाए थे। मगं लयान को मात्र 180 दिन के मिशन के लिए बनाया गया था, लेकिन इस साल मगं लयान ने कक्षा में सफलता पर्वक ू अपने 1000 दिन परू े कर लिये और यह अभी भी अपने भक ू े न्द्र को आक ं ड़े और फोटोग्राफ भेज रहा है। अभी हाल ही में इसने मगं ल ग्रह की परू ी गोलाई को दर्शाते हुए एक फोटो भेजी जिसे दुनिया की सम्मानित पत्रिका - नेशनल ज्योग्राफ़ी – के कवर

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पृष्ठ पर जगह दी गयी। अगले वर्ष के प्रारंभ में भारत चद्रं मा के लिए अपना दसू रा मिशन - चद्रं यान 2 – भेजने की योजना बना रहा है। इसके माध्यम से चद्रं मा की सतह पर स्वेदेशी रोवर और अपना ध्वज उतारने की तैयारी है। ग्रहों का अन्वेषण करने की अपनी मुहिम को जारी रखते हुए शुक्र और पनु ः मगं ल की यात्रा की योजना बनाई जा चुकी है। मानव दल को अंतरिक्ष में भेजने की भी योजना है। भारत की धरती से भारत का राके ट इस्तेमाल करते हुए भारतीय दल को अंतरिक्ष में भेजने के लिए भारत के नवीनतम रॉके ट जीएसएलवी एमके III को सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है। यह तो के वल शुरुआत है। सितारों की दुनिया में पहुंचकर ब्रह्मांड के रहस्यों की खोज अपना हमारी नियति है। भारत की इन उपलब्धियों के जो भी मतलब हों, लेकिन एक बात निश्चित है कि अंतरिक्ष में भारत की क्षमताओ ं का अधिकतम लाभ हमारे आम नागरिक को मिलता रहेगा।


आकर्षक महाराष्ट्र

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस

हाराष्ट्र भारत के पश्चिमी तट पर स्थित है। यह क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है, जिसका क्षेत्रफल देश के कु ल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 9 .4% है और आबादी के मामले में यह दसू रा सबसे बड़ा राज्य है। राज्य की राजधानी मबंु ई को देश की वित्तीय राजधानी भी कहा जाता है। राज्य में 720 किमी की समुद्री तट रे खा है। जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) - देश का सबसे बड़ा मालवाही बंदरगाह है,जो 34 कंटेनर फ्रे ट स्टेशन (सीएफएस) और 46 अतं र्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी) से जडु ़ा हुआ है। 11 हवाई अड्डों, 18 राष्ट्रीय राजमार्गों और 6,000 किमी रे लवे नेटवर्क के साथ यह राज्य सभी प्रमख ु शहरों से व्यवस्थित रूप से जडु ़ा हुआ है। महाराष्ट्र,भारत के निर्यात में सबसे बड़े योगदानकर्ताओ ं में से एक के रूप में उभरा है और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आकर्षित करने वाले अग्रणी राज्यों में से एक है। यहां बॉलीवडु होने के कारण यह राज्य लोकप्रिय है। बता दे कि दर्शक सखं ्या की दृष्टि से बालीवडु दुनिया का सबसे बड़ा फिल्म उद्योग है। इतिहास: मानव निवास की परु ातनता की दृष्टि से इस राज्य का इतिहास पाषाण यगु की अवधि (1.27 मिलियन वर्ष पर्वू ) तक जाता है। 1 मई 1960 को अलग-अलग मराठी भाषियों को मिलाकर महाराष्ट्र राज्य बनाया गया था। तब से यह राज्य देश के सभी मोर्चों पर अग्रणी रहा है। जलवायु : इस राज्य की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसनू वाली है। मार्च से

झल ु में मानसनू आ जाता है। मानसनू ु सा देने वाली गर्मियों के बाद जनू के शरू के मौसम की समृद्ध हरियाली हल्की सर्दी के दौरान भी रहती है। महाराष्ट्र सिर्फ भौगोलिक अभिव्यक्ति वाला राज्य ही नहीं है, बल्कि इसका अपना एक व्यक्तित्व भी है,जिसका निर्माण यहां के लोगों के सामहिक ू प्रयासों से हुआ है। प्राकृ तिक और सांस्कृ तिक विविधता ने यहां एक अनठू ी मराठी ससं ्कृ ति के विकास में मदद की है। अच्छी तरह से सुविकसित आधारभतू संरचनायें, प्रचुर मात्रा में प्राकृ तिक संसाधन, सभी प्रमख ु क्षेत्रों से कनेक्टिविटी, कु शल जनशक्ति और गुणवत्तापरू ्ण शिक्षा महाराष्ट्र को नए उद्योगों की स्थापना के लिए एक आदर्श स्थल बनाती है। राज्य ने आधारभतू संरचना और स्मार्ट सिटी के विकास पर अपना ध्यान विशेष रूप से कें द्रित किया है।

प्रति व्यक्ति आय 2,252 अमेरिकी डॉलर (2015-16) एफडीआई आवक 114 बिलियन अमेरिकी डॉलर (2000-17)

(इसमें दादरा और नगर हवेली के साथ दमन और दीव भी शामिल हैं)

वार्षिक तेल उत्पादन क्षमता 18,500 मीट्रिक टन (2015-16) उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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विनिर्माण उद्योग कपड़ा और वस्त्र उत्पादनः इस क्षेत्र में अके ले महाराष्ट्र की भागीदारी 11.4% है। यह क्षेत्र राज्य में कु शल और अकु शल मजदरू ों दोनों ही के लिए दसू रा सबसे बड़ा रोजगार सृजन वाला क्षेत्र है। खाद्य प्रससं ्करण- राज्य के प्रमख ु खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में चीनी, दधू , मुर्गी, चावल और आटा मिल, खाद्य तेल और फल तथा सब्जी की इकाइयां शामिल हैं। भारत में अगं रू का सबसे बड़ा उत्पादक होने के कारण राज्य में अगं रू प्रससं ्करण उद्योग और शराब उद्योग को बढ़ावा देने वाले यहां विशेष सुविधाएं हैं। ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट- स्थापित निर्माताओ ं की मजबतू उपस्थिति और कंपोनेंट आपर्तिकर्ता ओ ं तथा विक्रे ताओ ं के नेटवर्क के साथ ू इस राज्य की देश के ऑटोमोबाइल उत्पादन में लगभग 38% के मलू ्य की भागीदारी है। राज्य के प्रमख ु ऑटोमोबाइल कें द्रों में पुण,े नासिक, औरंगाबाद और नागपरु शामिल हैं।

“सभ ं ावना + नीति + कार्य प्रदर्शन = प्रगति” माननीय प्रधानमत्ं री श्री नरें द्र मोदी

सच ू ना प्रणाली: महाराष्ट्र के हिस्से में सॉफ्टवेयर निर्यात का 20% से अधिक है। पुणे सॉफ्टवेयर निर्यात में भारत के शीर्ष तीन शहरों में से एक है। राज्य सरकार ज्ञान पार्क , पेटेंट आदि जैसे विभिन्न औद्योगिक निवेश पर छूट आदि के लिए अपनी औद्योगिक नीति के तहत प्रोत्साहन प्रदान करती है। बायोटे क्नोलॉजी और फार्मास्यूटिकल्स: देश के बायोटेक राजस्व में महाराष्ट्र की भागीदारी एक-तिहाई से अधिक है। मबंु ई और पुणे जिलों में सालाना 78 मिलियन अमेरिकी डॉलर का राजस्व अर्जित होता है। यह राज्य भारत के दवा उत्पादन में 20% का योगदान देता है। रत्न एवं आभूषण: महाराष्ट्र रत्न भडं ार और खनन क्षमता के मामले में भारत के प्रमख ु राज्यों में से एक है।

जीई मल्टी मॉडल उत्पादन सवि ु धा का उद्घाटन 18

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इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण (ईएसडीएम) भारत के ईएसडीएम क्षेत्र में औद्योगिक उत्पादन के मामले में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 30.5% है। 2020 तक राज्य में ईएसडीएम क्षेत्र के 400 अरब डॉलर मलू ्य तक पहुचं ने की उम्मीद है। राज्य ने पुणे, औरंगाबाद और नवी मंबु ई क्षेत्रों में तीन नये विकास क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर स्थापित करने का फै सला किया है। राज्य में दो अच्छी तरह से स्थापित ईएसडीएम कें द्रों- पुणे और तालेगांव के पास भारत के दो सबसे बड़े बंदरगाहोंजवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट और मंबु ई पोर्ट ट्रस्ट के साथ उत्कृ ष्ट सम्पर्क का भौगोलिक लाभ है। बॉलीवुड मबंु ई-हिदं ी सिनेमा, जिसे अक्सर बॉलीवडु कहा जाता है, असल में भारतीय हिदं ी भाषा का फिल्म उद्योग है, जो भारत के महाराष्ट्र राज्य की राजधानी मबंु ई में स्थित है। दादासाहेब फाल्के को बॉलीवडु समेत भारतीय सिनेमा का जनक माना जाता है। फिल्म निर्माण के मामले में भारतीय सिनेमा दुनिया का सबसे बड़ा फिल्म उद्योग है।

आगामी मुख्य परियोजनाओ ं में शामिल हैं: • 2.5 बिलियन अमरीकी डॉलर के निवेश वाला नवी मबंु ई अतं रराष्ट्रीय हवाई अड्डा • नागपरु में राष्ट्रीय निवेश और विनिर्माण क्षेत्र • स्मार्ट सिटी मिशन के लिए महाराष्ट्र के नासिक, ठाणे, पिंपरी चिचं वड, सोलापरु , कल्याण-डोंबिवली, औरंगाबाद और पुणे शहर को चिह्नित किया गया है आगामी महत्वपूर्ण औद्योगिक कॉरिडोर : • दिल्ली मबंु ई औद्योगिक कॉरिडोर (डीएमआईसी) जिसका राज्य में परियोजना प्रभाव क्षेत्र 18% है। • बेंगलरू ु मबंु ई औद्योगिक कॉरिडोर (बीएमआईसी)। सांगली या सोलापरु को विशेष कें द्र के रुप में विकसित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार से सैद्धांतिक रूप से स्वीकृ त। अटल महाफान विकास अभियान महाराष्ट्र की राज्य सरकार ने सहकारी क्षेत्र के लिए अटल महाफान विकास अभियान शुरू किया है। आगे चलकर यह योजना सहकारी समितियों को नए व्यवसाय शुरू करने में मदद करे गी। तदनुसार, यह योजना पूरे राज्य में गैर -बैंकिंग व्यवसायों को बढ़ावा देगी। इस योजना के तहत, राज्य सरकार नए व्यवसाय (स्टार्टअप) की स्थापना के लिए 5000 सहकारी समितियों के लिए धन उपलब्ध कराये गी और समाज को भी मार्गदर्शन करे गी। जलवायु स्मार्ट ग्राम कार्यक्रम महाराष्ट्र के जनजातीय क्षेत्रों के लिए एक जलवायु स्मार्ट ग्राम कार्यक्रम शरुु किया गया है। इसके माध्यम से जिन बातों को बढ़ावा देना है उनमें- जतु ाई


मक्त ु खेती, एकीकृ त पोषक तत्व और जल प्रबंधन तथा उचित कटाई और भडं ारण शामिल है। इसका उद्देश्य महाराष्ट्र के जनजातीय क्षेत्र में किसानों के हित का ध्यान रखना है। मुख्यमं त्री कृ षि सं जीवनी योजना -2017 महाराष्ट्र की राज्य सरकार ने राज्य के 41 लाख किसानों के लिए मखु ्यमत्री ं कृषि संजीवनी योजना-2017 शरू ु की है जिसे मखु ्यमत्री ं कृषि संजीवनी माफी योजना भी कहते हैं। इस माफी योजना का उद्देश्य उन किसानों का कर्ज माफ करना है जो अपने ऊर्जा बिलों का भगु तान करने में असमर्थ हैं। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार 41 लाख किसानों के 10,890 करोड़ रुपये के बकाए का प्रबंधन करे गी।

प्रधान मं त्री आवास योजना (पीएमएई) महाराष्ट्र की राज्य सरकार ने प्रधान मत्री ं आवास योजना (पीएमएई) के तहत राज्य में 1,82,783 नए घर बनाने की मजं रू ी दी है। राज्य में आवास योजना MAHDA (महाराष्ट्र आवास और विकास प्राधिकरण) द्वारा लागू की जा रही है। कें द्र सरकार ने महाराष्ट्र राज्य को पीएमएवाई के तहत 2022 तक 19 लाख घर बनाने के लिए चुना है। गणेश चतुर्थी: भारत में सबसे लोकप्रिय देवताओ ं में से एक भगवान गणेश, ज्ञान और अच्छे भाग्य के प्रतीक हैं। प्रायः गणेश जी की मर्ति ू या उनकी तस्वीर को पर्वू दिशा में उगते सरू ज के सामने घर में मखु ्य द्वार पर या अन्य दरवाजों पर लगाया जाता है। भारत में गणेश (या गणपति) को विघ्न हर्ता के रूप में पजू ा

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जाता है। उन्हें सभी बाधाओ ं को दरू करने वाला माना जाता है। प्रत्यक्ष तौर पर गणेश चतुर्थी यहां का सबसे बड़ा त्यौहार है। त्रिपुरि पुर्णिमा: हिदं ू कै लेंडर के अनसु ार कार्तिक महीने के पंद्रहवें दिन यह त्यौहार मनाया जाता है। शिवरात्रि के बाद शिव को समर्पित यह सबसे महत्वपरू ्ण त्यौहार है। महाराष्ट्र कई धार्मिक और सांस्कृ तिक परंपराओ ं का कें द्र है। महाराष्ट्र के गांवों में, मेले और त्यौहारों के ईर्द-गिर्द जीवन घमू ता है। प्रत्यक्ष तौर पर गणेश चतुर्थी है यहां सबसे बड़ा त्यौहारहै, क्योंकि इसमें चारों ओर भगवान गणेश के बड़े जल ु सू और रंगीन मर्ति ू यां दिखाई देती हैं। लेकिन महाराष्ट्र में ऐसे कई और त्यौहार हैं, जिन्हें बहुत ही उत्साह और उमगं के साथ मनाया जाता है। गुड़ी पाड़वा: यह नए साल की शरुु आत का प्रतीक है और भारत के प्रमख ु त्यौहारों में से एक है। विशेष रूप से इसे महाराष्ट्र, आध्रं प्रदेश और कर्नाटक में मनाया जाता है। मकर सक ं ्रांति और रथ सप्तमी: इसकी उत्पत्ति सर्यू की गतिविधियों से हुई है। नई शरुु आत में निहित संभावनाओ ं का समावेश इस त्यौहार में है। मकर संक्रांति का आगमन जिन कई गतिविधियों के साथ होता है, उनमें मकर संक्रांति के खास लड्डू

उत्साहपर्वक ू पतंगों की उड़ान, किसी पवित्र नदी में डुबकी, तिल के तेल के साथ स्नान, तिल के तेल के दीपक के साथ पितरों की शांति के लिए प्रर्थना, तिल-गुड़ (समृद्धि का प्रतीक) का आदान-प्रदान शामिल हैं। रथ सप्तमी भी परू े भारत में तापमान में क्रमिक वृद्धि को दर्शाती है और वसंत के आगमन की घोषणा करती है। हिदं ू पंचांग में पांचवां महीना श्रावण इस तरह के उत्सवों से भरा पड़ा है। लेकिन ‘नारियल त्यौहार’ वास्तव में विशेष है। यह त्यौहार महाराष्ट्र में मानसनू के अतं का प्रतीक है। इसे श्रावण की पहली पर्णि ू मा के दिन मनाया जाता है। चकि ंू नारियल को मराठी में ‘नारल’ कहा जाता है, इसलिए यह विशेष त्यौहार ‘नारली पुर्णिमा’ के रूप में भी लोकप्रिय है। इसे ‘श्रावण पर्णि ू मा’, ‘राखी पर्णि ू मा’ या ‘रक्षा बंधन’ जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है। व्यंजन विविधता परू ्ण भौगोलिक परिदृश्य की भांति महाराष्ट्र के पास खान-पान की भी एक विविध और समृद्ध विरासत है। स्वाद की गढ़ू ता और शालीनता दीपमाला के साथ त्रिपुरी पूर्णिमा

पकवान

मौसम पर बहुत सीमा तक निर्भर होती हैं- कच्चे आम, रताम्बी (कोकम) और नारियल गृष्म ऋतु की गर्मी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, जबकि चने के कु रकु रे आटे में सब्जी लेपित लप्सी और तली हुई चीज़ें मानसनू के मौसम में होती हैं। इसी प्रकार तिल तथा गुड़ से भरपरू मिठाई का आनंद सर्दी में लिया जाता है। प्रत्येक उत्सव किसी न किसी व्यंजन का अवसर होता है। यहां हर मौसम के लिए कु छ न कु छ विशेष है। हां इस सबके बीच ‘भेल परु ी’ और मबंु ई की सैंडविच की परंपरा समानांतर चलती है। इनका आनंद कभी भी मबंु ई की सड़को के किनारे लिया जा सकता है।

अल्फांसो आम त्यौहार के मौकों पर तैयार की जानेवाली मीठी रोटी- पुरण पोली

श्रीखंड

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विरासत स्थल

महाराष्ट्र में सबसे अच्छी तरह से संरक्षित कु छ ऐसे प्राचीन विरासत स्थल हैं, जो अतीत से आज भी हमें जोड़े रखे हैं। एलोरा: यह महाराष्ट्र में सबसे आकर्षक परु ातात्विक स्थलों में से एक है। लगभग 1,500 साल परु ाना यह स्थल चट्टानों को काटकर बनाने वाली वास्क तु ला का प्रतीक है। ये 34 गफु ाएं वास्तव में चट्टानों में उके रे गये बौद्ध, हिदं ू और जैन धार्मिक स्मारक ह।ैं इन्हें 1983 में विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया था।

आगा खान पैलेस: पुणे स्थित यह इमारत भारत के स्वतत्रं ता आदं ोलन के इतिहास में अपना एक प्रमख ु स्थान रखती है। महात्मा गाधं ी, उनकी पत्नी,उनके सचिव और अन्यों को यहां 1942 से कै द में रखा गया था। यह अब गाधं ी राष्ट्रीय स्मारक सोसाइटी के मखु ्यालय के रूप में कार्य करता है, जहां ‘खादी’ बनाना एक प्रमख ु गतिविधि है। इस शानदार महल में जहां कोई अतीत के साथ गहन जडु ़ाव महससू कर सकता है, वहीं अपने सदंु र और शातं बगीचों के लिए भी यह महल प्रसिद्ध है।

कास पठार: यह रंगीन फूलों की एक चादर से घिरा हुआ स्थल है जहां दरू -दरू तक फूलों के सिवाय कु छ और नहीं है। कास को यनू से ्को का विश्व धरोहर स्थल घोषित कर दिया गया है और इसका कारण काफी स्पष्ट है- वह यह कि इसे सहज जीवन के आवास के रूपों के रूप में स्वीकार किया जाता है, जो दुनिया में कहीं और नहीं है! लेकिन वास्तव में जो कु छ चकित करता है, और एक लभु ावनी रंगीन तस्वीर प्रस्ततु करता है,वह मानसनू के मौसम के दौरान हजारों फूलों का खिलना है, जब पठार गल ु ाबी, नीले, बैंगनी और इसी तरह के असखं ्य छोटे-छोटे फूलों के पौधों के आवरण में भव्यतम रूप से ढक जाता है। जल ु ाई महीने के आख़िरी में जो नज़ारा शरूु होता है, वह परू े अगस्त और सितबं र महीने के दौरान प्रभावशाली रूप से बदलता जाता है।

कुंभोज: यह पर्यटकों के लिए एक आकर्षक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां बाहुबली या महावीर की 28 फीट ऊंची मर्ति ू स्थापित है जो वास्तव में कर्नाटक के श्रवण-बेलगोला की विशाल मर्ति ू से प्रेरित है। अभिलेखों के अनसु ार यह स्थान 1156 सीई में एक प्रसिद्ध जैन तीर्थयात्रा कें द्र था। पहाड़ी की चोटी पर बनी बाहुबली की मल ू मर्ति ू को कु छ विद्वान बहुत प्राचीन मानते हैं।

गेटवे ऑफ इडं िया : 1911 में किंग जॉर्ज पचं म और क्वीन मैरी की भारत यात्रा की स्मृति में निर्मित यह एक इडं ो-सरसेनिक शैली की मेहराब है जिसे एक गेटवे के रूप में जॉर्ज विट्टेट द्वारा डिजाइन किया गया था। यहां से एलिफ़ैं टा द्वीप और उसके चारों तरफ़ के अन्य समद्रु तटों पर जाने के लिए नौकाएं भी मिलती हैं।

वेंगर्ला ु : इसे अक्सर सिधुं दुर्ग जिले की ‘मणि’ के रूप में जाना जाता है। श्री देवी सतेरी और श्री रामेश्वर को समर्पित मदि ं रों के रूप में इसकी समृद्ध सासं ्कृ तिक विरासत और इसके धार्मिक प्रतीकों के कारण इसकी अधिक प्रसिद्धि है। ये मदि ं र इस क्षेत्र के दो सबसे महत्वपरू ्ण मदि ं र हैं और इसके अलावे यहां बहुत सारे मदि ं र हैं। प्रत्येक मदि ं र अपने अद्वितीय विरासत मलू ्यों और कम से कम एक किंवदतं ी के साथ जडु ़ा हुआ है। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस: इसे पहले मबंु ई में विक्टोरिया टर्मिनस के नाम से जाना जाता था। यह भारत में विक्टोरियन गोथिक रिवाइवल वास्शि तु ल्प का एक उत्कृ ष्ट उदाहरण है जिसमें भारत की पारंपरिक वास्क तु ला की विशेषताओ ं को भी बड़ी खबू सरू ती के साथ सजं ोया गया है।

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मणिपुर

“भारत की मणि”

णिपरु का शाब्दिक अर्थ है ‘भारत की मणियक्त ु भमि ू ’ जो उत्तर पर्वू भारत में हरी-भरी वादियों के बीच स्थित है। इसे देखकर लगता है कि मानों यह प्रकृ ति के शानदार हाथों द्वारा निष्पादित कला की उत्कृ ष्ट कलाकृ ति हो। वास्तव में उत्कृ ष्ट प्राकृ तिक सौंदर्य और प्राकृ तिक महिमाओ ं से भरा हुआ यह एक ऐसा राज्य है, जिसकी सदंु रता से प्रेरित होकर श्रीमती सेंट क्लेयर ग्रिमवडु ने कहा है, “दुनिया के अनेकानेक शानदार स्थलों की तल ु ना में एक मनोहक स्थल कहीं अधिक संदु र होता है।” भारत के पहले प्रधानमत्री ं स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसे “भारत का गहना” कहते हुए इसके प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया था। “देश में करघों की सख ं ्या के मामले में मणिपुर चौथे स्थान पर है। यह भारत के सबसे बड़े बांस उत्पादक राज्यों में से एक है”। इतिहास: शुरु से ही एक विविधतापूर्ण और गर्वान्वित इतिहास वाला मणिपुर 1891 के एंग्लो-मणिपुरी युद्ध में हार के बाद एक रियासत राज्य के रूप में ब्रिटिश शासन के तहत शामिल हुआ था। 1947 में भारत की आजादी के बाद, मणिपुर की रियासत को 15 अक्टूबर 1949 में भारतीय संघ में मिला लिया गया था। 21 जनवरी, 1972 को इसे 60 सीटों की विधान सभा के साथ मणिपुरके नाम से भारत का पूर्ण राज्य बना दिया गया। इस राज्य से लोक सभा में दो सदस्य और राज्यसभा में एक सदस्य को भेजने का प्रावधान है। जनसांख्यिकी : मणिपरु की आबादी में 63% लोग 15-59 साल के कार्य आयु वर्ग से हैं। मणिपरु की कु ल जनसखं ्या 27 लाख है। महत्वपूर्ण आगामी परियोजनाएं : • खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के आधुनिकीकरण पर कें द्रित परियोजनायें। खाद्य प्रसंस्करण योजना के लिए राष्ट्रीय मिशन के तहत 37 परियोजनाएं 22

TRANSCEND - Vol - 2 - High Commission of India, Suva, Fiji

मणिपुरी नतृ ्य आवटि ं त की गई हैं। इसी के साथ खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला योजना और एकीकृ त शीत श्रृंखला, मलू ्य वृद्धि और संरक्षण बुनियादी ढांचा योजना के तहत एक-एक परियोजना आवटि ं त की गई है। • मणिपरु में मोरे ह से निकलने वाला भारत-म्यांमार-थाईलैंड (आईएमटी) त्रिपक्षीय राजमार्ग • स्मार्ट सिटी मिशन, जिसके लिए मणिपरु के इम्फाल शहर को चिह्नित किया गया है। जीएसडीपी (वर्तमान मलू ्य) 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर (2015-16) प्रति व्यक्ति आय 849 अमेरिकी ड़ॉलर (2015-16) नवीकरणीय ऊर्जा में हिस्सेदारी 41% जीएसडीपी विकास दर (YoY) 6% (2015-16) मुख्य कारक कृषि और सबं ंधित क्षेत्र कृषि क्षेत्र राज्य के कु ल घरे लू उत्पाद (एसडीपी) में एक बड़े हिस्से का योगदान देता है। 2011 की जनगणना के अनसु ार, मणिपरु में कु ल कर्मियों में से 52.81% किसान और कृषि मजदरू हैं। चावल मखु ्य भोजन है और इसे पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में उगाया जाता है। यह राज्य के कु ल खाद्यान्न उत्पादन का लगभग 98% है।


बागवानी मणिपरु बागवानी के विकास के लिए बिल्कु ल उपयक्त ु है। राज्य में उगाए जाने वाले प्रमख ु फल अनानास, नारंगी, नींब,ू के ले, अमरूद, आड़ू और सेब हैं। वर्ष 2013-14 के दौरान फल और सब्जियों का औसत वार्षिक उत्पादन क्रमशः 0.52 मिलियन मीट्रिक टन और 0.26 मिलियन मीट्रिक टन था। रेशम कीट पालन मणिपरु में रे शम की चार किस्में पायी जाती हैं; मल्बरी, एरी, मगु ास और ओक तसर। मणिपरु में रे शमकीट पालन परियोजना की शरुु आत स्थानीय महिलाओ ं को रोजगार प्रदान करने के लिए की गई थी। भारत सरकार के माध्यम से जापान सरकार की सहायता से यहां 94.71% वृक्षारोपण का लक्ष्य हासिल किया गया है। बांस-उत्पादन उद्योग मणिपरु भारत के सबसे बड़े बांस उत्पादक राज्यों में से एक है और देश के बांस उद्योग में एक प्रमख ु योगदानकर्ता है। देश भर में बांस की कु ल फसल भमि ू की बात हो तो उसमें मणिपरु की हिस्सेदारी 14% है जबकि भारत के उत्तर पर्वी ू क्षेत्र में यह आक ं ड़ा 25% है।

अनूठा हथकरघा मणिपरु भारत के हथकरघा क्षेत्र में विशेष स्थान रखता है। हथकरघा उद्योग राज्य का सबसे बड़ा कु टीर उद्योग है। यह उद्योग प्राचीन काल से फलताफूलता आ रहा है। इस उद्योग की एक खासियत यह है कि यहां सिर्फ़ महिलाएं ही बनु कर का काम करती हैं। 2017 के राष्ट्रीय हथकरघा जनगणना रिपोर्ट अनसु ार मणिपरु में 2.71 लाख करघे हैं। अनूठी हस्तकला चकि ंू यहां गन्ना और बांस प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, इसलिए टोकरी बनाना मणिपरु के लोगों का लोकप्रिय व्यवसाय रहा है। विभिन्न डिजाइनों वाले अलग-अलग आकार की टोकरियों का निर्माण घरे लू और अनुष्ठानिक उपयोग के लिए किया जाता है। इसी तरह, मछली पकड़ने के उपकरण भी गन्ना और बांस से बनते हैं। अधिकांश बर्तन हस्तनिर्मित होते हैं और विभिन्न रंगों (लाल, काले-लाल और काले रंग) वाले होते हैं। एड्ं रो, सेक्मई, चायरन, थोंगजाओ, नंगु बी और सेनापति जिले के कु छ हिस्से में बर्तन निर्माण का विकास गहन रूप से हो रहा है। चक्पा महिलाएं अच्छा बर्तन बनाती हैं और वे अनुष्ठान और औपचारिक उद्देश्यों के लिए विभिन्न प्रकार के बर्तन बनाती हैं।

मुख्यमंत्री-जी हाकशेल्गी तेंगबांग (सीएमएचटी) मणिपरु सरकार ने गरीबों के लिए मखु ्यमत्री ं -जी हकशेल्गी तेंगबांग (सीएमएचटी) की शरुु आत की है। गरीब और दिव्यांगों के कल्याण के लिए यह एक स्वास्थ्य बीमा योजना है। तदनसु ार, सीएमएचटी के तहत विभिन्न सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य कें द्रों और सचू ीबद्ध निजी अस्पतालों में जरूरतमदं ों को नकद रहित उपचार की व्यवस्था है। प्रधान मंत्री सहज बिजली हर घर योजना मणिपरु की राज्य सरकार ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सभी परिवारों के लिए बिजली उपलब्ध कराने के लिए “प्रधान मत्री ं सहज बिजली हर घर योजना” या “SAUBHAGYA” शरू ु की है। यह योजना कें द्रीय राज्य मत्री ु की गई है। ं स्वतंत्र प्रभार (बिजली और नयी तथा नवीकरणीय ऊर्जा) द्वारा शरू मुख्यमंत्री-जी शोथाराबासिगं ी तेंगबांग (सीएमएसटी) मणिपरु के सामाजिक कल्याण विभाग ने दिव्यांगों (पीडब्लूडी) के लिए मखु ्यमत्री ं -जी शोथाराबासिंगी तेंगबांग (सीएमएसटी) की शरुु आत की है। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य दिव्यांगों के जीवन स्तर को बढ़ाना और उनके समावेशी विकास को सुनिश्चित करना है। उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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पेड़-पौधे और जीव-जन्तु वनस्पतियों और जीव-जन्ओ तु ं की एक अद्भुत विविधता से परिपरू ्ण मणिपरु के भौगोलिक क्षेत्र का 67% इलाका पहाड़ और जंगल से ढका है। पहाड़ी श्रृंखलाओ ं की ऊंचाई के आधार पर वहां की जलवायविक स्थिति उष्णकटिबंधीय से लेकर उप-उच्चपर्वतीय रहती है। गांव, सेनापति जिले का दौरा करने वाले प्रत्येक यात्री के लिए एक अद्वितीय विरासत स्थल ऐतिहासिक स्थल है। एक खड़ी पहाड़ी पर निर्मित, माके ल, वही जगह है, जिसे शानदार लोकतक झील, मोरे ह शहर की रणनीतिक स्थिति, तैरते हुए नागाओ ं की उत्पत्ति स्थान माना जाता है। यहां आना मणिपरु जाने वाले प्रत्येक के बल ु -लैमजाओ राष्ट्रीय उपवन का अनठू ापन, संगाई हिरण, प्राकृ तिक रूप यात्री के लिए एक अद्भुत अनभु व है। विलोंग खल ु ेन एनएच 39 से लगभग 37 से गठित चनू ा पत्थर की गफ ु ाओ ं के साथ-साथ डिजुकोई लिलिज का सौंदर्य, किमी दरू स्थित है। यहां के घरों की संरचना दुनिया के अन्य हिस्सों में स्टोनहेंस प्राचीन हरी पहाड़ियों और घाटियों, घमु ावदार नदियों, निरंतर गिरते झरनों,मन के समान ही है। यह अनेक यात्रियों के लिए काफी हद तक अब भी अज्ञात है। को मोह लेने वाले पेड़-पौधों और जीव जन्ओ तु ं के साथ-साथ एक समृद्ध इमा मार्के ट: इमा मार्के ट को एशिया के सबसे बड़ा महिला बाजारों में से एक माना कला और संस्कृ ति, लोकगीत, मिथक और किंवदतं ियों, स्वदेशी खेलों और जाता है जो कंगला के पश्चिमी द्वार से बेहद मामल ू ी दरू ी पर है। 3000 से अधिक कलात्मक हथकरघों और हस्तशिल्प से बना एक अद्भुत राज्य है मणिपरु । “इमास” (माताओ)ं वाले स्टाल्स के साथ यह एक ऐसा बाजार है जिसे परू ी तरह ये सब मिलकर मणिपरु को पृथ्वी पर स्वर्ग बना देते हैं और इस प्रकार इसे महिलाएं चलाती हैं। परुु षों को इस बाजार में सामान बेचने की अनमु ति नहीं है। पर्यटकों के लिए एक मनमोहक गतं व्य बना देते हैं। सब्जिया,ं फल, मछलियां और घरेलू किराने के सामान एक हिस्से में जबकि दसू रे खांगखुई लाइम गुफाए:ं यह पर्वू -ऐतिहासिक गफ ु ा मणिपरु के उखरुल जिले हिस्से में उत्तम हथकरघा और घरेलू उपकरण बेचे जाते हैं। के प्रमख ु पर्यटक आकर्षणों में से एक है। खदु ाई से पाषाणकालीन समदु ायों के प्रमाण मिले है। इस चनू ा पत्थर गफ ु ा में पर्यटन की असीम संभावना है। यहां देश के भीतर और बाहर दोनों जगहों से छात्रों, परु ातत्त्वविदों और शोधकर्ताओ ं को आकर्षित किया जा सकता है।

डिजक ु ो घाटी : नागालडैं के साथ लगती सीमा पर स्थित मणिपरु के सेनापति जिले की यह घाटी ऐसे फूलों की विस्तृत श्रृंखला के लिए प्रसिद्ध है,जो हर मौसम में खिले रहते हैं। इसे राज्य में सबसे अच्छी पैदल यात्रा वाले पर्यटन स्थलों में से एक माना जाता है। हर साल घरेलू और विदेशी आगतं ुकों की सखं ्या यहां बढ़ती ही जा रही है। यह घाटी क्षितिज में एक हरे रंग की कालीन की तरह फै ली हुई है और कभी भी अपने आगतं ुकों को लभु ाने में विफल नहीं होती है। सेनापति जिले में यांगखुलेन, मखेल और विलोंग: यांगखल ु ेन का परु ाना 24

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

खोंगजोम युद्ध स्मारक: यह भारत-म्यान्मार मार्ग पर इम्फाल से लगभग 36 किलोमीटर की दरू ी पर स्थित है। यह वही स्थल था,जहां मणिपरु के महान योद्धाओ ं में से एक मेजर जनरल पाओना ब्रजबाशी ने 1891 में हमलावर ब्रिटिश सेना की श्रेष्ठ शक्ति के खिलाफ अपनी बहादरु ी साबित कर दी थी। वह पहाड़ी जिसकी तलहटी में उन्होंने मातृभमि ू की रक्षा करते हुए अपना जीवन उत्सर्ग कर दिया, मणिपरु ी योद्धाओ ं के अतीत में किये गये वीरतापरू ्ण कार्यों की याद दिलाती है। खेबा पहाड़ी के ऊपर एक यद्ध ु स्मारक बनाया गया है। यहां हर साल 23 अप्रैल को खोंगजोम दिवस मनाया जाता है।


उत्सव, मेले और व्यं जन

मणिपरु उत्सवों की भमि ू है। यहां परू े साल आनदं और खशु ी के त्यौहार चलते रहते ह।ैं मणिपरु में परू ा वर्ष त्यौहारों के एक चक्र का प्रतिनिधित्व करता है। शायद ही कोई ऐसा महीना हो जो त्यौहार के बिना गजु रता हो। यह विशिष्टता मणिपरु के निवासियों के लिए, उनकी सासं ्कृ तिक, सामाजिक और धार्मिक आकाक् ं षाओ ं का प्रतीक है। शारीरिक क्रीड़ा, मानसिक मनोरंजन और भावनात्मक अभिव्यक्ति के द्वारा यहां के लोग जीवन की एकरसता को ख़त्म कर देते हैं जिससे उन्हें अधिक सहजतापर्वक ू एक परू ्ण जीवन जीने में मदद मिलती है। गंग-नागी: यह त्यौहार दिसम्बर/जनवरी के महीने में पांच दिनों के लिए मनाया जाता है। गगं -नागी काबईु नागाओ ं का एक महत्वपरू ्ण त्यौहार है। यह त्यौहार पहले दिन ओमेन लेने समारोह के साथ शरू ु होता है और बाकी के दिनों में सामान्य भोज, बजु ुर्ग परुु ष और महिलाओ ं के साथ लड़के -लड़कियों का नृत्य और विदाई के उपहारों का प्रदर्शन आदि चलता रहता है।

लुई-नागी-नी : यह हर साल फरवरी के 15 वें दिन मनाया जाने वाला नागाओ ं का एक सामहिक ू त्यौहार है। यह बीज बोने से जडु ़ा हुआ त्यौहार है जिसके बाद नागा समहू से संबंधित जनजातियां अपनी खेती शरू ु करती हैं। सामाजिक-जटु ान, गीत, नृत्य और आनंद उत्सव का इस त्यौहार में बोलबाला रहता है। नागा एकजटु ता के बंधन को मजबतू करने और नैतिकता को प्रोत्साहित करने में इस वार्षिक त्यौहार की एक महत्वपरू ्ण भमिक ू ा होती है। याओशागं : फाल्गुन (फरवरी / मार्च) के पर्णि ू मा दिवस से शरूु होने वाला यह त्यौहार पाचं दिनों के लिए मनाया जाता है, याओशागं मणिपरु का प्रमख ु त्यौहार है। थाबल चोंगबा विशेष रूप से इस त्यौहार से जडु ़ा है। बता दें कि थाबल चोंगवा एक प्रकार का मणिपरु ी लोक नृत्य है, जिसमें लड़के -लड़कियां एक साथ एक-दसू रे का हाथ पकड़कर एक गोला बनाते हुए गाते और नृत्य करते हैं। इस दौरान लड़के -लड़कियां ही नहीं बल्कि बजु ुर्ग महिलाएं भी घर-घर से दान एकत्र

करती हैं। इस एकत्रित धन को पार्टियों और उत्सवों पर खर्च कर दिया जाता है। दरअसल, मणिपरु का याओशागं त्यौहार कु छ-कु छ वैसा ही है जैसा कि बगं ाल में दुर्गा पजू ा, उत्तर भारत में दिवाली और असम में बिहू है। चीराओबा : यह मणिपरु ी नया साल है। इस दौरान लोग अपने घरों को साफ करते हैं और सजाते हैं तथा पर्व-त्यौहार के लिए विशेष व्यंजन तैयार करते हैं, जिन्हें पहले विभिन्न देवताओ ं को समर्पित किया जाता है। यह अप्रैल महीने के दौरान मनाया जाता है। इस त्यौहार में एक अनुष्ठान के तहत गांव वाले निकटतम पहाड़ी की चोटी पर चढ़ते हैं ताकि वे अपने सांसारिक जीवन में भी अधिक ऊंचाई तक पहुचं सकें । निंगोल चक-कोउबा: मणिपरु ियों विशेष रूप से मीतियों का यह एक उल्लेखनीय सामाजिक त्यौहार है। इस दौरान परिवार की विवाहित बेटियां अपने बच्चों के साथ अपने माता-पिता के घर आती हैं और शानदार भोजन का आनंद लेती हैं। यह पारिवारिक पनु र्मिलन का ही एक रूप है। यह मणिपरु पंचांग प्रणाली के अनसु ार हियांगी (नवंबर) के महीने में नये चद्रं मा के दसू रे दिन मनाया जाता है। चुंफाः यह तांगखल ु नागाओ ं का त्यौहार है। इसे दिसंबर के महीने में सात दिनों के लिए मनाया जाता है। इस त्यौहार का आयोजन फसल के बाद किया जाता है। इसमें अतं िम तीन दिन सामाजिक सभाओ ं और आनन्द के लिए समर्पित होते हैं। मणिपरु के व्यंजन: मणिपरु के लोग अपने भोजन को तले हुए के बजाय मखु ्य रूप से उबालकर और वाष्प द्वारा तैयार करके ग्रहण करते हैं। मणिपरु ी थाली मखु ्य रूप से चावल, सब्जियों, सलाद, मछली और मासं की करी से सजी होती है। भोजन निश्चित रूप से स्वादिष्ट होता है, लेकिन सगु धं तो अद्भुत होती है। यहां के लोग शाकाहारी और मासं ाहारी दोनों ही व्यंजनों के प्रेमी हैं। कु छ स्वादिष्ट व्यंजनों में नग्री, चामथोंग, एरोम्बा, मोरोक मेट्पा और कई अन्य हैं।

एरोम्बा

नग्री उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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पंजाब

जहां से भारत शरू ु होता है

स्वर्ण मं दिर

पं

जाब भारत के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित एक राज्य है जिसकी गणना भारत के सबसे समद्ध ृ राज्यों में से एक के रूप में होती है। पंजाब का नाम दो शब्दों - पंज (पांच) और आब (जल) से बना है जिसका मतलब है पांच नदियों की भमि ू । पंजाब की ये पांच नदियां सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब और झेलम ह।ैं भारतीय हिस्से के पंजाब में अब के वल सतलज, रावी और ब्यास नदियां ही बहती ह।ैं अन्य दो नदियां अब पाकिस्तान स्थित पंजाब राज्य में हैं। कृषिः पंजाब की अर्थव्यवस्था का मखु ्य आधार कृषि है। यहां के अन्य प्रमख ु उद्योगों में वैज्ञानिक उपकरण, विद्युत सामान, वित्तीय सेवायें, मशीनों के उपकरण, वस्त्र, सिलाई मशीन आदि के निर्माण को गिनाया जा सकता है। यह राज्य अनाज के कु ल उत्पादन में लगभग दो तिहाई का योगदान देता है और साथ ही देश में तीसरा सबसे बड़ा दधू उत्पादक राज्य है। यह गेहूं का अग्रणी उत्पादक है, जिससे राष्ट्रीय खाद्य सरु क्षा में योगदान मिलता है। बुनियादी सरं चना: भारत में पंजाब की आधारभतू संरचना सबसे अच्छी मानी जाती है। इसमें सड़क, रे ल, वायु और नदी परिवहन सम्पर्क शामिल हैं, जिनका परू े राज्य में व्यापक जाल फै ला हुआ है। इतिहास: एक विशिष्ट ससं ्कृ ति वाले इस राज्य में दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओ ं में से एक के अवशेष मिले हैं। पजं ाबी भाषा की उत्पत्ति भारोपीय परिवार की भाषाओ ं से हुई है, जिसमें फारसी और लैटिन भी शामिल हैं। भारतीय राज्य पंजाब 1947 में बनाया गया था। के यर कंपेनियन कार्यक्रम पंजाब की राज्य सरकार ने “के यर कंपेनियन कार्यक्रम” नामक स्वास्थ्य देखभाल योजना शरू ु की है। इस योजना का उद्देश्य मरीजों के जीवन में बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सेवाओ ं को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम राज्य भर में बेहतर पारिवारिक जडु ़ाव और शिक्षा के साथ जागरूकता पैदा कर रहा है। अन्नपूर्णा अक्षय पत्र योजना अन्नपरू ्णा अक्षय पत्र योजना चडं ीगढ़ में हरियाणा और पंजाब सरकार द्वारा संयक्त ु रूप से शरू ु की गई एक नयी मध्याह्न भोजन योजना है। इस योजना के तहत, गरीबों को बाजार की तल ु ना में कम लागत पर भोजन प्रदान किया जा रहा है। चडं ीगढ़ में इस योजना को पहले से ही बहुत लोकप्रियता मिली हुई है। 26

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पजं ाब की कु ल जनसखं ्या 28 जीएसडीपी (वर्तमान मलू ्य) - 64 मिलियन है बिलियन अमेरिकी डॉलर (2016-17) • पंजाब की कु ल जनसंख्या जीएसडीपी विकास दर (YoY) - 9% (2016-17) का 75% हिस्सा अपनी प्रति व्यक्ति आय - 1,920 अमेरिकी आजीविका के लिए प्रत्यक्ष डॉलर (2016-17) रूप से कृषि क्षेत्र पर निर्भर है। कृषि योग्य भमि ू 83% • जनसंख्या का 65% भाग

15-59 साल के कार्य आयु वर्ग में आता है। • शहरीकरण दर 37% है। भगत पूरण सिंह सेहत बीमा योजना: पंजाब सरकार ने राज्य भर में शुरू की गयी अपनी कृषि अनुकू ल नकदी मुक्त स्वास्थ्य बीमा योजना का विस्तार करने का फै सला किया है। इस योजना के तहत जरूरत मंद किसानों को मुफ्त स्वास्थ्य उपचार की पेशकश की जाती है। पंजाब सरकार ने इस परियोजना के पहले चरण में भगत पूरण सिंह सेहत बीमा योजना के तहत पहले से ही सक्रिय 3,03,074 नक़दी रहित किसान स्वास्थ्य बीमा कार्ड वितरित किए। महत्वपूर्ण आगामी परियोजनाए:ं • लुधियाना मेगा फूड पार्क , मोहाली नॉलेज सिटी, पर्वी ू समर्पित फ्रे ट कॉरिडोर और चडं ीगढ़ मेडिसिटी के साथ-साथ ग्रीनफील्ड लाइट इजं ीनियरिंग पार्क • स्मार्ट सिटी मिशन, जिसके लिए पंजाब के लुधियाना, जालंधर और अमृतसर शहर को चिह्नित किया गया है


प्रस्तावित औद्योगिक कॉरिडोर • पर्वी ू समर्पित फ्रे ट कॉरिडोर जिसमें पजं ाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच 447 किमी का विद्युतीकृ त एकल ट्रैक खडं शामिल है। पंजाब ऋण छूट योजना पंजाब सरकार ने मनसा जिले में 7 जनवरी 2018 को कर्ज से दबे हुए किसानों के लिए पंजाब ऋण छूट योजना (पहला चरण) की शरुु आत की है। इसके बाद, राज्य सरकार 2 लाख रुपये तक के कर्ज में दबे छोटे और सीमांत किसानों को कर्ज से छूट देने जा रही है।

से एक है। लाइट इज ं ीनियरिंग पजं ाब,भारत में मशीन टूल्स, हैंड टूल्स, साइकिल और साइकिल की उपकरण सामग्री के निर्माण में अग्रणी है। यह 15% साइकिल उत्पादन और देश में 80% साइकिल के उपकरण उत्पादन में अपना योगदान देता है । कपड़ा और वस्त्र भारत में कपास के कु ल धागा उत्पादन में पंजाब की हिस्सेदारी 14% है। वस्त्र उद्योग में कु ल निर्यात का 38% पंजाब से होता है। यह कच्चे धागे, होजरी और बने बनाये कपड़ों के प्रमख ु निर्यातकों में से एक है। नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय ऊर्जा बिजली वितरण के लिए राज्य स्तरीय 400 किलोवाट रिंग मेन सिस्टम विकसित करने में पजं ाब अग्रणी है। राज्य में 2022 तक 2400 मेगावॉट अक्षय ऊर्जा पैदा करने की अनमु ानित क्षमता है।

जुड़ाव की कड़ियों को मजबूत करना

टैक्सटाइल आधारित उद्योगों जैसे वस्त्र विनिर्माण, कताई और होजियरी निर्यात में पजं ाब एक प्रमख ु कें द्र के रूप में सामने आया है। परिधान पार्क के विकास के लिए अनुकू ल कपड़ा नीति और अन्य प्रोत्साहनों के के साथ-साथ राज्य निवेश के लिए कई अवसर प्रदान करता है। इसके अलावा, पंजाब की अर्थव्यवस्था में इजं ीनियरिंग क्षेत्र एक प्रमख ु योगदान है। पिछले दशक में, इसमें 16% से अधिक की वृद्धि हुई है, और यह पंजाब के कु ल औद्योगिक उत्पादन का 23% है। पंजाब की मखु ्य शक्ति सवु ्यवस्थित रूप से स्थापित इसकी सक्ू ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की समृद्ध परिवेश प्रणाली रही है। पजं ाब लगभग 1.56 मिलियन एमएसएमई का ठिकाना है जो वास्तव में औद्योगिक विकास के सबसे महत्वपरू ्ण स्तंभों में से एक है। भारत में सिच ं ाई के तहत आने वाला सबसे बड़ा कृषि क्षेत्र बिजली अधिशेष वाला राज्य पंजाब 133 किमी प्रति 100 वर्ग किमी के साथ सभी भारतीय राज्यों में उच्चतम सड़क घनत्व वाला राज्य है। इस कारण यहां परिवहन और यातायात की बड़ी अच्छी स्थिति है। 2,100 किलोमीटर की रे लवे आधारभतू संरचनाओ,ं 64,000 किमी सड़कों और 5 हवाई अड्डों के माध्यम से पंजाब सभी प्रमख ु शहरों से अच्छी तरह से जडु ़ा हुआ है। यह निर्यात और आयात को आसान बनाने वाले 13 मालवाही फ्रे ट स्टेशनों और

अतं र्देशीय मालवाही डिपो के साथ राज्य के लिए एक मजबतू लाजिस्टिक्स का आधार प्रदान करता है। खाद्य प्रससं ्करण पंजाब राष्ट्रीय भडं ार में गेहूं और चावल के सबसे ज्यादा योगदानकर्ताओ ं में

ऐतिहासिक स्थल

अमृतसर और आनंदपुर साहिब: पंजाब में सिखों के लिए ये दो सबसे पवित्र स्थल हैं, जो उनकी धार्मिक परंपराओ ं और इतिहास के साथ निकटता से जुड़े हुए हैं। अमतृ सर का शाब्दिक अर्थ है अमतृ का सरोवर।

लुधियाना: 15 वीं शताब्दी में लोदी सुल्तानों के शासन के दौरान स्थापित, लुधियाना पंजाब के विनिर्माण कें द्र के लिए जाना जाता है। यहां 1500 एकड़ में फै ला हुआ प्रसिद्ध पंजाब कृषि विश्वविद्यालय भी है। वर्ष 1967 में स्थापित नेहरू रोज गार्डन, लुधियाना के आसपास के सबसे प्राकृ तिक और हरित स्थलों में से एक है। यह पूरे एशिया महाद्वीप में सबसे बड़ा गुलाब उद्यान है। उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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पठानकोट : इसे उत्तरी राज्यों, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर का प्रवेश द्वार माना जाता है। हिमालय की तलहटी में यातायात का यह एक कें द्र है, जो भारत के मैदानी इलाकों के साथ प्रमुख राजमार्गों और रे लवे पटरियों से जुड़ा हुआ है।

रामबाग उद्यान: यह उद्यान,महाराजा रणजीत सिंह के उस ग्रीष्मकालीन महल से घिरा हुआ है जो अब एक संग्रहालय है। यहां प्रदर्शन के लिए मुगल काल के हथियार रखे गये हैं। पंजाब के शासकों के घरों में बनाये गये चित्र और कोहिनूर हीरे की प्रतिकृ ति भी यहां उपलब्ध है। गुरदासपुर: पंजाब का उत्तरी-जिला गुरदासपुर ब्यास और रावी नदियों से घिरा हुआ है और ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दोनों ही लिहाज़ से बहुत महत्वपूर्ण है। शाहपुर कंडी में रावी नदी के किनारे -किनारे वाले प्रागैतिहासिक गुफाओ ं को संस्कृ त महाकाव्य महाभारत के नायक पांडवों से जोड़ा जाता है।

उत्सव, मेले और व्यं जन

पटियाला: यह पंजाब की सबसे प्रसिद्ध रियासत रही है। शानदार किले और महल, संग्रहालय और पूजा स्थल, उद्यान और वन्यजीव अभ्यारण्य इसके इतिहास, संस्कृ ति, कला और शिल्प का एक परिपूर्ण रूप प्रस्तुत करते हैं।

स्वर्ण मंदिर: इसे हरमंदिर या दरबार साहिब के रूप में भी जाना जाता है। यह मंदिर संगमरमर के 67 फीट के चौकोर मंच पर बनाया गया है और इसकी संरचना दो मंजिली है। मंदिर की शीर्ष संरचना शुद्ध सोने के पत्तरों से ढकी हुई है।

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लोहड़ी : यह अग्नि और सूर्य भगवान को समर्पित एक त्यौहार है। लोग अच्छी फसल के लिए भगवान का धन्यवाद देने के लिए धार्मिक पूजा-स्थलों पर विभिन्न खाद्य पदार्थ ले जाते हैं। लोहड़ी की एक प्रमुख विशेषता अग्निक्रीड़ा (बोनफायर) है जिसे रात में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। बसंत पंचमी : पंजाब के विभिन्न हिस्सों में बसंत पंचमी के दौरान पतंग उड़ाने की प्रतियोगिताओ ं की एक परंपरा है। लोगों का गिद्दा और भांगड़ा जैसे लोक नृत्यों में थिरकना बहुत ही सामान्य है। बसंत पंचमी के मेले में झूले, चूड़ियां, कपड़े, दुपट्टे और विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों की बिक्री की दुकानों का नज़र आना एक आम दृश्य है। क़िला रायपुर ग्रामीण क्रीड़ा त्यौहार (आधुनिक ग्रामीण मिनी ओलंपिक के रूप में लोकप्रिय): हर साल, किला रायपुर के लोग पंजाब के ग्रामीण और ग्राम-जीवन से निकटता के साथ जुड़े विभिन्न खेलों का प्रदर्शन और प्रतिस्पर्धा करते हैं। पटियाला हे रिटे ज उत्सव: यह उत्सव शीश महल आर्ट गैलरी परिसर में आयोजित किया जाता है जिसमें पंजाब की समद्ध ृ सांस्कृ तिक विरासत को पटियाला के विशेष संदर्भ वाले नाटक समेत विभिन्न सांस्कृ तिक और शास्त्रीय प्रदर्शनों के जरिए दिखाया जाता है।


गुरू नानाक चोला मे ला: गुरुद्वारा चोला साहिब उस स्थल की याद में आध्यात्मिक आनंद का कें द्र है जहां माना जाता है कि गुरु नानक ने अपनी यात्रा के दौरान पानी के झरने बहा दिये थे। शहीद-ए-आज़म भगत सिंह का शहादत दिवस: शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के शहीद दिवस पर हर साल राज्य स्तरीय आयोजन किया जाता है जिसमें से मुख्य आयोजन भगत सिंह के पूर्वजों के गांव खट्कर कलां में होता है। बै साखी : 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की याद में यह त्यौहार मनाया जाता है। पारंपरिक रूप से यह एक फसल त्यौहार ही है और पंजाबियों के लिए नये साल की शुरुआत भी इसी दिन से होती है। इस त्यौहार का एक बड़ा आकर्षण क्रमशः पुरुषों और महिलाओ ं द्वारा जोशीले भांगड़ा और गिद्दा नृत्य का प्रदर्शन है।

पटियाला शिल्प मे ला: इस मेले का आयोजन शीश महल आर्ट गैलरी परिसर में किया जाता है, जिसमें देश भर के कु शल कारीगर और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अपने-अपने शिल्प का प्रदर्शन करते हैं। यहां पूरे भारत से व्यंजनों को शामिल करते हूए फूड कोर्ट का प्रदर्शन होता है। इस दौरान सभी कलाकार और कारीगर अपने हुनर का जीवंत प्रदर्शन करते हैं।

होला मोहल्ला

लोहड़ी की रात

बैशाखी की मस्ती उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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मनभावन तमिलनाडु

खदु अनभु व करें

MEENAKSHI TEMPLE, MADURAI

मिलनाडु का एक शानदार अतीत है जिसमें भौगोलिक दृष्टि से विशाल, आकर्षक और हरियाली से भरपरू पहाड़ों, चमकदार समद्रु तटों, नदियों, झीलों और झरनों की मौजदू गी महत्वपरू ्ण रही है। तमिलनाडु के लोगों, स्थलों, शासकों, जीवन शैली और संस्कृ ति के बारे में यहां की समृद्ध और उज्जवल सांस्कृ तिक विरासत बहुत कु छ बयान करती है। इसका वर्तमान नाम वर्ष 1969 में रखा गया था। योगदानकर्ता: तमिलनाडु में उत्कृ ष्ट सड़क और रे ल नेटवर्क के साथ एक अच्छी तरह से विकसित बुनियादी ढांचा है। राज्य में भारत की दसू री सबसे लंबी तट रे खा है, जो 1,076 किमी लम्बी है। यहां 3 बड़े बंदरगाह और 17 मझोले बंदरगाहों के साथ सात हवाई अड्डे हैं, जो यातायात और परिवहन की उत्कृ ष्ट सुविधा देते हैं। ऑटोमोबाइल और ऑटो-पार्ट्स, इजं ीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल, कपड़ा और परिधान उत्पादों, चमड़े के उत्पादों, रसायन, प्लास्टिक इत्यादि जैसे कई उद्योगों में अग्रणी होने के साथ राज्य में कई प्रकार जीएसडीपी (वर्तमान मलू ्य) यएू सडी 191 अरब (2016-17) प्रति व्यक्ति आय यएू सडी 2,284 (2016-17) एफडीआई आवक 27 अरब अमेरिकी डॉलर (2000-17) (इसमें पडु ुचरे ी भी शामिल है) जीएसडीपी विकास दर (वाईओवाई) 12% (2016-17) 30

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

मीनाक्षी मंदिर, मदुरै

की और भी विनिर्माण सुविधाएं हैं। जनसांख्यिकीय रुप से 66% तमिलनाडु की आबादी 15-59 साल के कार्ययोग्य आयु वर्ग में है। तमिलनाडु भारत का 6 वां सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है, जो देश की कु ल जनसंख्या का लगभग 6% है। तमिलनाडु की कु ल आबादी 7.215 करोड़ है। मुख्य परियोजनाएं : • इन्नोर एलएनजी परियोजना- प्रति वर्ष 5 एमटी एलएनजी की अनमु ानित क्षमता के साथ इसे इडि ं यन आयल एलएनजी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किया जा रहा है। • जीके इडं स्ट्रियल पार्क - तिरुचिरापल्ली में आने वाली 600.466 एकड़ की फै ब्रिके शन-कें द्रित औद्योगिक सुविधा। • स्मार्ट सिटीज मिशन के लिए तमिलनाडु से जिन शहरों को चिह्नित किया गया है, उसमें तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली, तिरुवनतं परु म, तजं ावरु , तिरुपरु , सेलम, वेल्लोर, कोयबं टूर, मदरु ै, थथू ुकु डी, चेन्नई और इरोड शामिल हैं। प्रमुख औद्योगिक गलियारे : • चेन्नई बैंगलरू ु औद्योगिक कॉरिडोर (सीबीआईसी) 560 किमी लंबा गलियारा है, जो तमिलनाडु में 21992.38 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फै ला हुआ है मुख्य क्षेत्र ऑटोमोबाइल और ऑटो-पार्ट्स भारत से कु ल ऑटो निर्यात में 21% योगदान इस राज्य का है। यह यात्री वाहनों का निर्यात कें द्र भी है, जो भारत के कु ल निर्यात का 70% है। तमिलनाडु की


राजधानी चेन्नई भारत के सबसे बड़े ऑटो हब में से एक है। भारत में सबसे बड़ा टायर विनिर्माण राज्य यही है। यहां 80 से अधिक ऑटो पार्ट्स निर्माता हैं। एयरोस्पेस तमिलनाडु भारत में एकमात्र राज्य है जिसमें 4 अतं रराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं। इसके बेहतर उपयोग के लिए राज्य इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए स्पेशल परपज एविएशन रिसोर्स क्लस्टर एसईजेड (sparcs) की योजना बनाई गई है। इसके तहत एक लाख उच्च श्रेणी के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार

के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। राज्य ने 830 मिलियन अमरीकी डॉलर के अनमु ानित निवेश के साथ एक एकीकृ त एयरोस्पेस पार्क की स्थापना के लिए पेरामबलरु क्षेत्र में 1,214 हेक्टेयर भमि ू भी निर्धारित की है। फार्मास्युटिकल और बायोटे क्नोलॉजी तमिलनाडु देश के कु ल फार्मास्युटिकल उत्पादन में 10% का हिस्सेदार है। भारत में फार्मास्युटिकल उत्पादकों की बात करें तो यह पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक है। राज्य में मौजदू ा और उभरते एसईजेड और समर्पित बायो-फार्मास्युटिकल पार्क जो कई सुविधाएं प्रदान करते हैं उनमें शोध प्रयोगशालाए,ं उन्नत चिकित्सा उपकरण और आनवु ांशिक इजं ीनियरिंग की सुविधाएं शामिल हैं। कपड़ा और वस्त्र तमिलनाडु भारत में परिधान उत्पादन में पहले स्थान पर और कपड़ा उत्पादन में दसू रे स्थान पर है। यहां भारत का सबसे बड़ा कताई उद्योग है, जो देश की कु ल स्थापित क्षमता का लगभग 40% है। वस्त्र और परिधान क्षेत्र एक साथ राज्य की आबादी के 35% को रोजगार प्रदान करते हैं। राज्य में लगभग 6 वस्त्र पार्क और 2 परिधान पार्क बनने वाले हैं। सच ू ना प्रौद्योगिकी तमिलनाडु भारत का चौथा सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर निर्यातक है। देश के कु ल आईटी निर्यात का 10% से अधिक इस राज्य से होता है। राज्य में 14.8 टीबीपीएस के साथ भारत में सबसे बड़ी दरू संचार बैंडविड्थ और उच्चतम टेली-घनत्व है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में लगभग 1780 आईटी इकाइयां हैं जो 400,000 से अधिक पेशवे रों को रोजगार देती हैं। खाद्य प्रससं ्करण

तमिलनाडु के ला, अगं रू , चाय और कु क्कु ट उत्पादों के साथ विविध बागवानी फसलों का अग्रणी उत्पादक है। राज्य में विविध मिट्टी के प्रकार और 7 कृषिजलवायु क्षेत्र हैं जो विभिन्न बागवानी फसलों को विकसित करने के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करते हैं। तमिलनाडु से कृषि निर्यात में समुद्री भोजन और मसालों की बड़ी हिस्सेदारी है। नवीकरणीय ऊर्जा तमिलनाडु के पास एक फायदेमदं भौगोलिक स्थिति है जिसके चलते यहां 500 मेगावाट की बायोमास पावर और 5.5 -6 किलोवाट / वर्ग मीटर / दिन की सौर ऊर्जा की सभं ावना है। राज्य में भारत की उच्चतम अक्षय ऊर्जा क्षमता है। पवन ऊर्जा उत्पादन इकाइयों की स्थापित क्षमता के मामले में इसका विश्व में 10 वां स्थान है।

तमिलनाडु सरकार ने स्वच्छ और हरित तमिलनाडु में योगदान देने के लिए राज्य भर में 70 लाख पेड़ लगाए हैं।

अम्मा मारुनथगम (फार्मेसी) - जनू 2016 में, तत्कालीन मखु ्यमत्री ं सश्ु री जयललिता ने अम्मा मारुनथगम नामक एक योजना की शरुु आत की। एआईएडीएमके सरकार ने चेन्नई और कु ड्डालोर, ईरोड, काचं ीपरु म, मदरु ै, सेलम, शिवगगं ाई और विरुधुनगर जैसे जिलों में सौ से अधिक फार्मेसियों को खल ु वाया, जहां बाजार मलू ्य पर 15 फीसदी की छूट के साथ दवाएं बेची जाती हैं।

अम्मा की 70 वीं जयंती पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अम्मा टू व्हीलर योजना शुरू की। यह योजना तमिलनाडु भर में महिलाओ ं के लिए फायदेमंद होगी।

अम्मा उनवागम (कैं टीन) - अम्मा उनवागम या अम्मा कैं टींस चेन्नई में अत्यधिक सब्सिडी वाली सरकार-चालित रेस्तरां या कैं टीन श्रृंखला के रूप में लॉन्च की गई ं जो बहुत सस्ते दरों पर गुणवत्ता वाला भोजन प्रदान करती हैं। अम्मा उनवागम श्रमिकों और कम आय समहू वाले परिवारों के लिए एक वरदान साबित हुई है।

2014 में कैं टीन में भोजन की गुणवत्ता की जांच करती हुई सश् ु री जयललिता

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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धरोहर वाले स्थान

तमिलनाडु परंपरा से सराबोर एक ऐसी भमि ू है जहां प्राचीन ससं ्कृ ति और परंपराएं आज भी प्रासगिक ं और जीवतं हैं। तजं ावरु , तिरुचिरापल्ली और मदरु ै के मदि ं र कस्बों में, लबं े नक्काशीदार मदि ं र टावर या गोपरु म आकाश को छूने का प्रयास करते ह।ैं कोडाईकनाल का सदंु र पहाड़ी रिसॉर्ट, कन्याकु मारी और चेन्नई (एक आधुनिक महानगर और सासं ्कृ तिक राजधानी) में खत्म होती धरती, सभी एक साथ, दक्षिण भारत में एक आकर्षक वलय का निर्माण करते हैं। चेन्नई (या मद्रास जो इसे पहले कहा जाता था), कोरोमडं ल तट पर स्थित तमिलनाडु की राजधानी है। यह दक्षिण भारत का एक प्रमख ु औद्योगिक, वाणिज्यिक, सांस्कृ तिक, आर्थिक और शैक्षणिक कें द्र है। भारतीय शहरों में आबादी की दृष्टि से इसका छठा स्थान है। सदंु र समद्रु -तट, आधुनिक हवाई अड्डे, व्यापक राजमार्ग, सुविधाजनक बहु परिवहन प्रणाली, थीम पार्क , औद्योगिक शहर, और हाइ-टेक सॉफ़्टवेयर सिलिकॉन घाटी पार्क आज की चेन्नई की शोभा बढ़ाते हैं। द्रासुराम का ऐरावतेश्वर मंदिर 12 वीं शताब्दी के चोल राज्य का एक अच्छी तरह से संरक्षित मंदिर है। मंदिर के स्तंभों में अद्वितीय और उत्कृ ष्ट लघु मूर्तियां हैं। 14 वीं शताब्दी के दौरान मंदिर के चारों ओर बड़ी पत्थर की मूर्तियों को ईटं और मोर्टार मूर्तियों के साथ बदल दिया गया था। यूनेस्को ने इसे 2004 की सूची में विश्व धरोहर स्मारक घोषित किया है।

नीलगिरी माउंटेन रे लवे भारत में विरासत का एक और नमनू ा है। यह रे ल उधगमडं लम और मेत्पतु ालयम को जोड़ती है। इस ट्रेन की यात्रा सभी आयु वर्ग के यात्रियों को मत्रं मगु ्ध कर देती है। यह ट्रेन 208 घमु ावदार रास्तों, 16 सरु ं गों, 250 पल ु ों और कई झरनों, चट्टानी किनारों और चाय बागानों को लांघती हुए 26 किमी की दरू ी को तय करती है। वर्ष 2005 में यनू ेस्को ने दार्जिलिंग हिमालयी रे लवे के विश्व धरोहर स्थल के विस्तार के रूप में नीलगिरी माउंटेन रे लवे को भी शामिल किया।

ममल्लापुरम- यह चेन्नई के 58 किलोमीटर दक्षिण में है। इसमें एक आकर्षक 20 किलोमीटर सागर तट है जो स्थानीय और अतं रराष्ट्रीय दोनों पर्यटकों को आकर्षित करता है। गगं ायकोंडा चोलापरु म, तजं ावरु से 70 किमी दरू है। चोल राजवश ं के शक्तिशाली 32

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

राजा राजेंद्र चोल-1 ने यहां अपनी नई राजधानी की स्थापना की और भगवान शिव के लिए एक शानदार मदि ं र का निर्माण किया, जो तजं ावरु के बड़े मदि ं र के बराबर है। परू ा क्षेत्र मीलों तक तरोताज़ा परिदृश्य, नदी और हरियाली से भरा हुआ है। मदि ं र अपने विशाल और समृद्ध नक्काशीदार शिल्प के लिए जाना जाता है। एक बड़ा नदं ी, सीढ़ियों के सिरे पर एक शेर का सिर और द्वारपाल की विशालकाय मर्ति ू यां इस मदि ं र की कई विशेषताओ ं में शामिल है। यनू से ्को ने वर्ष 2004 में महाबलीपरु म को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया।

श्री ब्रह्देश्वर मंदिर : इसे राजा चोलन प्रथम [985-1012] और बड़ा राजराजेश्वर मदि ं र भी कहा जाता है। दोनों को एक-दसू रे से अलग नहीं किया जा सकता है। यह मदि ं र 1010 इस्वी में बनाया गया था। 2010 में इसने अपनी 1 हजार वीं वर्ष गांठ मनाई। अनठू ी और उत्कृ ष्ट वास्क तु ला के कारण यनू ेस्को ने 1987 में इस मदि ं र को विश्व धरोहर स्मारक घोषित किया।

उत्सव, मेला और व्यं जन

चाहे घर हो या धार्मिक प्रतिष्ठान, आमतौर पर तमिलनाडु में त्यौहार बड़े ही धमू धाम से मनाए जाते हैं। त्यौहार के बहाने यहां लोग धार्मिक, सामाजिक और पारिवारिक आधार पर अलग-अलग जगहों पर इकट्ठा होते हैं और पजू ापाठ के साथ खबू आनंद मनाते हैं। पोंगल: इसे मकर सक्रां ं ति के रूप में भी जाना जाता है। इसे सर्यू भगवान को समर्पित धन्यवाद के दिन के रूप में मनाया जाता है। यह अपने खगोलीय महत्व के कारण विशेष है। इस दिन उत्तरायण की शरुु आत होती है। सर्यू अगले छह महीने की अवधि के लिए उत्तर की तरफ मकर राशि में प्रवेश करता है। पोंगल आमतौर पर उज्जवार थिरुनाल या किसान महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। चिकित्सा पर्यटन: यह एक उद्योग है जिसमें अरबों डॉलर का वार्षिक कारोबार है और इसे स्वास्थ्य पर्यटन भी कहा जाता है। इसके तहत एक सस्ती और अच्छे चिकित्सा उपचार की तलाश में, एक स्थान से दसू रे स्थान पर या एक देश से दसू रे की यात्रा की जाती है। जिन कारणों से तमिलनाडु राज्य को चिकित्सा पर्यटन की दृष्टि से विशेष स्थान प्राप्त है, उनमें अतं रराष्ट्रीय मानक के अस्पतालों की उपलब्धता के साथ-साथ सबकु छ का ख्याल रखने के लिए विभागीय विशेषज्ञ, कम लागत, नवीनतम टेक्नोलॉजीज की उपलब्धता, विशेष रूप से योग्य चिकित्सा प्रैक्टिशनर्स, आपातकालीन उपचार या लघु सचू ना पर उपचार और रोगियों के लिए भाषाई दभु ाषियों की उपलब्धता जैसी सुविधाएं शामिल हैं।


रामेश्वरम रामेश्वरम मन्नार की खाड़ी में स्थित एक छोटा द्वीप और बड़ा तीर्थ कें द्र है। यह पंबन ब्रिज द्वारा मखु ्य भमि ू से जडु ़ा हुआ है। हर दिन, इस द्वीप पर भारतीय उपमहाद्वीप के सभी हिस्सों से हजारों तीर्थयात्री अपने पापों से मक्त ु होने और अपने पर्वू जों के लिए अनुष्ठान करने के लिए आते हैं। नाट्यान्जली उत्सव - चिदंबरम: भरतनाट्यम की कला को पुनर्जीवित करने और उसे समेकित करने के लिए 1981 में एक वार्षिक कार्यक्रम शरू ु किया गया था जिसका आयोजन मंदिर के गर्भगहृ के सामने होता है। पांच दिवसीय कार्यक्रम में अब भारतनाट्यम, कुचीपडु ी, मोहिनी अट्टम, कथक, ओडिशी प्रदर्शन करने के लिए 300 से 400 नर्तकियां भाग लेती ह।ैं ‘नाट्यांजली ट्रस्ट’ द्वारा आयोजित यह उत्सव पूरी दुनिया के कला प्रमियों में बहुत ही लोकप्रिय है।

व्यंजनः तमिलनाडु के व्यंजनों में मुख्य रूप से चावल से बने व्यंजन शामिल हैं। स्थानीय रूप से उपलब्ध अनाज, दाल, सब्जियां और सुगंधित मसालों की विविधता यहां के व्यंजनों में स्वाद और सुगंध जोड़ते हैं। तमिलनाडु में भोजन को टिफिन / नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात के खाने में वर्गीकृ त किया जाता है। ब्रेक फास्ट में वाष्पित इडली, चावल पैन के क, वड़ा, पोंगल, सांभर के साथ सुजी-उपमा, चटनी और मिर्च पाउडर की किस्में लोकप्रिय हैं।

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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“... महामहिम राष्ट्रपति, सरकार और

भारत के लोगों को बधाई। यह बधाई के वल इसलिए नहीं कि आप अपनी आजादी की 70 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, बल्कि इसलिए भी कि आप सबने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में अपनी अप्रतिम प्रतिष्ठा को बनाए रखा है।... नमस्ते पैसिफिका महोत्सव से निस्संदेह हमारे रिश्तों में एक और अध्याय का शुभारंभ होगा।

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TRANSCEND - Vol - 2 - High Commission of India, Suva, Fiji


नमस्ते पैसिफ़िका:

भारत महोत्सव

भारतीय सांस्कृतिक महोत्सव “नमस्ते पैसिफिका” का शुभारंभ फीजी में भारतीय उच्चायोग ने, फीजी और इसके अधिकार क्षेत्र (कुक आईलैंड्स, किरीबास, नाउरू, तोंगा, तवु ालु और वानअ ू ात)ू के छह अन्य प्रशांत द्वीप देशों में 28 अक्टूबर 2017 को भारत के अभी तक के सबसे बड़े सांस्कृ तिक महोत्सव “नमस्ते पैसिफिका” का शभु ारंभ किया। छह महीने लंबा यह महोत्सव भारत@70, यानी 2017 में भारत की स्वतंत्रता के 70 वर्ष परू ा होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है। इस दौरान ‘विविध और समृद्ध भारतीय संस्कृ ति के कु छ आकर्षक पहलओ ु ं को प्रस्ततु करने के साथ-साथ शांति, खश ी, एकता और अख ड ता’ का स दं श े देने की तैयारी है। ु ं यह महोत्सव भारतीय ससं ्कृ ति मत्रा ं लय, पर्यटन मत्रा ं लय, विदेश मत्रा ं लय, भारतीय सांस्कृ तिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के साथ सार्वजनिक और निजी उपक्रमों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव का उद्घाटन फीजी गणराज्य के राष्ट्रपति, महामहिम मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) चोची कौनोसी कोनरोते ने किया। महोत्सव का उद्घाटन करते हुए महामहिम राष्ट्रपति ने अपने सबं ोधन में फीजी के विकास में गिरमिटियों के योगदान और भारतीय ससं ्कृ ति में निहित सद्भाव और शातं ि के सदं शे को प्रमख ु ता दी।

और समृद्ध रंगों के साथ अपने प्रदर्शन में उतारा। जब साबरी ब्रदर्स ने शाहरुख खान की फिल्म “मैं हूं ना” के अपने प्रसिद्ध गीत जैसे ‘तमु से मिलके दिलका जो हाल..’ गाया तो सभी श्रोता मन्त्रमगु ्ध हो गए। साबरी ब्रदर्स ने अपनी कला का प्रदर्शन फीजी के पांच शहरों में किया। इस दौरान फीजी गणराज्य के महामहिम राष्ट्रपति की उपस्थिति में 28 अक्टूबर 2017 को उन्होंने राजधानी सवू ा में अपनी प्रस्ततु ि दी। बाद में उन्होंने लंबासा, बा, लाटुका और नाउसोरी में भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। फीजी के अटॉर्नी जनरल और अर्थव्यवस्था, लोक उद्यम, सिविल सेवा तथा संचार मामलों के मत्री ं माननीय श्री अय्याज सैयद खय्यूम लाटुका समारोह में मखु ्य अतिथि थे जबकि फीजी के इन्फ्रास्ट्रक्चर एडं ट्रांसपोर्ट विभाग के माननीय सहायक मत्री ं विजय नाथ ने नाउसोरी में इस अवसर की शोभा बढ़ायी।

नमस्ते पैसिफिका के उद्घाटन समारोह में साबरी ब्रदर्स

नमस्ते पैसिफिका का उद्घाटन समारोह। बाएं से – मुख्य न्यायाधीश एथ ं नी गेट्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसपोर्ट मामलों के सहायक मंत्री माननीय विजय नाथ, श्रीमती (डा.) सपकाल, महिला, बाल एवं गरीबी उन्मूलन मामलों के सहायक मंत्री माननीय वीणा भटनागर, फीजी गणराज्य के महामहिम राष्ट्रपति मेजर जनरल (सेवानिवत्त ृ ) चोची कौनोसी कोनरोते और फीजी में भारतीय उच्चायुक्त महामहिम श्री विश्वास सपकाल

उद्घाटन समारोह में आए मेहमानों को विश्व प्रसिद्ध भारतीय कव्वाल और बॉलीवडु गायक, ‘साबरी ब्रदर्स’ ने अपने हृदयस्पर्शी प्रदर्शन से मगु ्ध कर लिया। साथ ही, भारत के प्रमख ु पाचं सितारा होटल अशोक से आए दो मास्टर शेफ ने मेहमानों के लिए ऐसे व्यंजन परोसे जिनका स्वाद आत्मा की गरहाइयों में उतर गया। फीजी गणराज्य के महामहिम राष्ट्रपति और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने स्वादिष्ट भारतीय भोजन की भरपरू प्रशसं ा की। फीजी के मखु ्य न्यायाधीश, माननीय एथं नी गेट्स के साथ-साथ वहां के मत्रि ं यों, स्थायी सचिवों और कई राजनयिकों ने भी समारोह की शोभा बढ़ायी। नमस्ते पैसिफिका एक सासं ्कृ तिक उपहार है जिसका छह महीने (अक्टूबर 2017 - मार्च 2018) तक लोग आनदं ले सकते ह।ैं साबरी ब्रदर्स (23-30 अक्टूबर 2017) महोत्सव में भारत के प्रसिद्ध कव्वाल और बॉलीवडु गायक, आफताब साबरी और हाशिम साबरी ने सफ ू ी संगीत, गज़ल और कव्वाली की ऐसी प्रस्ततु ि दी जिसका अनभु व उपस्थित दर्शकों में से बहुत कम को ही था। साबरी ब्रदर्स ने भारत की गंगा-जमनु ी संस्कृ ति को महोत्सव की मनोदशा, आध्यात्मिक स्वाद

भारत का फूड फेस्टिवल (26-30 अक्टूबर 2017) भारतीय व्यंजनों को शामिल किए बिना भारत का कोई महोत्सव परू ा नहीं हो सकता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए, भारतीय उच्चायोग ने भारत के बेहतरीन होटल, द अशोक से फीजी में दो मास्टर शेफ (शेफ प्रजित प्रसन्ना कु मार और शेफ के दार सिंह रावत) को सवू ा में प्रतिष्ठित ग्रैंड पैसिफ़िक होटल में कु छ चुनिंदा स्वादिष्ट भारतीय व्यंजनों का प्रदर्शन करने के लिए बल ु ाया। दोनों शेफ ने 29 अक्टूबर 2017 को भारतीय सासं ्कृ तिक कें द्र, सवू ा में एक कार्यशाला भी आयोजित की। उन्होंने 27 अक्टूबर को ग्रैंड पैसिफ़िक होटल में एक प्रतिष्ठित सभा में कु छ खास मेहमानों को स्वादिष्ट भोजन परोसे जिसमें फीजी के प्रधानमत्री ं कार्यालय के स्थायी सचिव श्री योगेश करण भी शामिल हुए। 28 अक्टूबर 2017 को फीजी गणराज्य के महामहिम राष्ट्रपति, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) चोची कौनोसी कोनरोते की उपस्थिति में फूड फे स्टिवल का आयोजन संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम ने आम जनता में भारतीय व्यंजनों के बारे में बहुत रुचि पैदा की और इसकी सभी ने जी भरके सराहना की।

नोवोटे ल, लामी में आयोजित फूड फेस्टिवल के दौरान भारतीय शेफ के साथ माननीय राष्ट्रपति जी

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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मीरा दास (1 - 12 नवंबर 2017) भारत के सबसे प्रतिष्ठित एकल ओडिसी कलाकारों में से एक, मीरा दास ने फीजी में दर्शकों के सामने सदंु र और उत्कृ ष्ट नृत्य प्रस्ततु किया। उन्होंने 05 नवंबर 2017 को सवू ा में नोवोटेल होटेल में अपने शास्त्रीय नृत्य की मोहकता, रचनात्मकता और गहन ज्ञान के साथ दर्शकों को भारतीय कला की विशिष्टता का परिचय कराया। उनके नृत्य को फीजी में स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओ ं की मत्री ं माननीय सश्ु री रोज़ी सोफिया अकबर द्वारा विशेष रूप से सराहा गया जो एक खास प्रस्ततु ि के दौरान मखु ्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। सुश्री मीरा दास और उनके समूह ने तोंगा, वानूअातू और किरीबास में कलाप्रेमियों की खूब ‘वाह वाही’ लूटी। वास्तव में प्रशांत क्षेत्र के

आकर्षक रामायण आधारित संगीत नृत्य नाटिका का प्रदर्शन देखा। 24 नवंबर 2017 को सवू ा में उद्घाटन समारोह की शोभा फीजी की रोजगार, उत्पादकता और औद्योगिक सबं ंध मत्री ं माननीय जॉन उस्माते द्वारा बढ़ायी गयी। यह कार्यक्रम दक्षिण प्रशांत विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया था। नौसेरी में हुए कार्यक्रम में फीजी की स्थानीय शासन, शहरी विकास, आवास और पर्यावरण मत्री ं , माननीय परवीन बाला ने मखु ्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर कलाकारों का उत्साह वर्धन किया। लगभग 20,000 लोगों ने लाइव प्रदर्शन का आनंद लिया, जबकि लाखों लोगों ने इसे दुनिया के कई हिस्सों में सोशल मीडिया पर देखा और सराहा। सच कहें तो यह नमस्ते पैसिफिका महोत्सव के सबसे लोकप्रिय कार्यक्रमों में से एक था।

मीरा दास अपनी नतृ ्य मंडली के साथ

दर्शकों ने पहली बार इस भारतीय नृत्य शैली की इतनी मनमोहक प्रस्तुति देखी थी। उन्होंने किरीबास में स्कू ल के बच्चों के लिए कार्यशालाएं भी आयोजित कीं। मीरा जी की नृत्य-नटिका ‘अहिल्या’ विशेष रूप से दर्शकों द्वारा पसंद की गई। जटायु मोक्षम- रामलीला (24 नवंबर-1 दिसबं र 2017) फीजी में लगभग 2000 रामायण मडं लियां मौजदू हैं। इसे देखते हुए भारत से किसी प्रसिद्ध रामायण आधारित समहू को लाना भारतीय उच्चायोग के सहज विकल्प था। भारतीय उच्चायोग ने तमिलनाडु, चेन्नई के कला क्षेत्र फाउंडेशन की प्रस्ततु ि जटायु मोक्षम् को प्रदर्शन के लिए चयनित किया। इसका मचं न सवू ा, लंबासा, नाउसोरी, बा और नादी में किया गया। जटायु मोक्षम एक प्रसिद्ध नृत्य नाटिका है जो छः भाग वाले प्राचीन रामायण संग्रह पर आधारित है। इसे नृत्य नाटिका में रुपांतरित करने का काम श्रीमती रुक्मिणी देवी अरुं डले ने किया है। इस अद्भुत प्रस्ततु ि में रामायण की परिवर्तनकारी घटना को दर्शाते हुए भगवान राम के व्यक्तित्व से जडु ़े मानवीय पहलओ ु ं को उभारा गया है। ‘राम लीला’ नामक शो ने फीजी में एक बड़ा उत्साह पैदा किया। फीजी के विभिन्न शहरों अर्थात् - सवू ा, लंबासा, बा और नादी में हजारों लोगों ने 36

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

युगपुरुष कई लोगों ने महात्मा गांधी के बारे में सनु ा है, लेकिन बहुत कम जानते हैं कि कै से ‘मोहनदास करमचदं गांधी’ महात्मा बन गए थे (उच्च मनोदशा, ज्ञान और निःस्वार्थता के लिए प्रशसि ं त व्यक्ति)। इसलिए, भारतीय उच्चायोग ने ‘नमस्ते पैसिफिका’ के बैनर तले दुनिया भर में प्रसिद्ध नाटक, ‘यगु परुु ष’ को फीजी में मचं न के लिए चुना। इस नाटक में महात्मा गांधी और उनके आध्यात्मिक सलाहकार श्रीमद राजचद्रं के बीच विशेष संबंधों को बड़े ही रोचक तरीके से दिखाया गया है। ‘यगु परुु ष’ नाटक ने परू े एशिया, यरू ोप और उत्तरी अमेरिका में 230 से अधिक शहरों में अपनी प्रस्ततु ि दी है। इसका मचं न 29 नवबं र 2017 को सवू ा में और 30 नवबं र 2017 को लाटुका में गिरमिट सेंटर में किया गया। समारोह की शोभा फीजी के पर्यटन मत्री ं माननीय फै य्याज कोया और वहां के सहायक स्वास्थ्य मत्री ं माननीय वीणा भटनागर ने बढ़ाई। गांधी जी और उनके आध्यात्मिक सलाहकार की तस्वीरों का अनावरण करने के लिए 29 नवंबर को भारतीय सांस्कृ तिक कें द्र, सवू ा में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। फीजी में महिला, बाल और गरीबी उन्मूलन के लिए सहायक मत्री ं माननीय श्रीमती वीणा भटनागर की उपस्थिति से कार्यक्रम यादगार बन गया।


जटायु मोक्षम् नतृ ्य नाटिका

जटायु मोक्षम् नतृ ्य नाटिका

सवू ा में युगपुरुष नाटक का मंचन माननीय रोजी अकबर और महामहिम उच्चायुक्त के साथ सश् ु री मीरा दास

रोजगार मंत्री जॉन उस्माते के साथ जटायु मोक्षम नतृ ्य समूह के कलाकार

भारतीय शेफ के दार सिहं रावत (बाए)ं और प्रजीत कुमार, ग्रैंड पैसिफि‍क होटल में भारतीय फूड फेस्टिवल के दौरान तैयार एक भारतीय व्यंजन प्रदर्शित करते हुये

महामहिम फै याज कोया और माननीय वीणा भटनागर द्वारा युगपुरुष नाटक का उद्घाटन

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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फीजी में भारत

एफ.आई.पी.आई.सी.II के दौरान जयपरु में माननीय प्रधानमत्री ं श्री नरेन्द्र मोदी विदेश मत्री ं श्रीमती सषु मा स्वराज के साथ फीजी के माननीय प्रधानमत्री ं बईनिमरामा और वहां के उद्योग, व्यापार, पर्यटन, स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवा के मत्ं रियों का स्वागत करते हुए। (21 अगस्त, 2015)

फी

जी के साथ भारत के संबंध प्रगाढ़ होते जा रहे हैं। ये दो देश भौगोलिक रुप से बहुत दरू हैं लेकिन ऐतिहासिक और सांस्कृ तिक दृष्टि से बहुत नजदीक हैं। भारत के माननीय प्रधानमत्री ं श्री नरें द्र मोदी, अक्सर “वसुधवै कु टुंबकम”् का उल्लेख करते हैं, जिसका अर्थ है,‍ “परू ी दुनिया एक परिवार है”। भारत की विदेश नीति अनिवार्य रूप से इस दृष्टिकोण पर आधारित होती है, जिसमें अतं रराष्ट्रीय शांति और सभी के कल्याण की तलाश रहती है। इस प्रयास में, भारत और फीजी दोनों एक साथ हैं। भारत फीजी की विकास प्रक्रिया में एक प्रतिबद्ध भागीदार है। हमारे दोनों देश अब आधुनिक और बहुमख ु ी भागीदारी बनाने की ओर अग्रसर हैं। उच्च स्तरीय आदान-प्रदान नवबं र 2014 में भारतीय प्रधानमत्री ं की फीजी की ऐतिहासिक यात्रा से न के वल दोनों देशों के बल्कि भारत और सभी 14 प्रशांत द्वीपीय देशों के बीच सबं ंधों को एक नई उंचाई मिली। इस यात्रा से फीजी में पहले भारतप्रशांत द्वीपसमहू सहयोग (एफ.आई.पी.आई.सी) शिखर सम्मेलन का मार्ग प्रशस्त हो गया। फीजी के प्रधानमत्री ं , रीयर एडमिरल (सेवानिवृत्त) माननीय चोसैया वोरें गे बईनिमरामा ने अगस्त 2015 में जयपरु में आयोजित एफ.आई. पी.आई.सी. के दसू रे शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया। माननीय बईनिमरामा इसके बाद मई, 2016 में भी भारत आए और भारत के माननीय प्रधानमत्री ं से मल ु ाकात की। भारत-प्रशांत द्वीप समूह अक्षय विकास शिखर सम्मेलन पिछले साल उच्चतम स्तर पर हुए आदान-प्रदान के बाद 2017 में उपर्युक्त दो शिखर सम्मेलनों में की गयी प्रगति को ठोस आकार देने का काम किया गया। इस दिशा में 25-26 मई 2017 को भारत की ओर से सवू ा में भारत38

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

प्रशांत द्वीप समहू अक्षय विकास सम्मेलन (आई.पी.आई.एस.डी.सी.) का आयोजन हुआ जिसमें भारत के विदेश राज्य मत्री ं , जनरल डॉ विजय कु मार सिहं (सेवानिवृत्त) के साथ 14 प्रशांत द्वीप देशों के उच्च नेततृ ्व ने भाग लिया। माननीय मत्री ं जनरल (डॉ.) सिहं ने फीजी एसएमई क्षेत्र को 1.76 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान की। जैसा कि भारतीय राज्य मत्री ं ने

नई दिल्ली में भारत और फीजी के विदेश विभागों के बीच विचार-विमर्श (21 फरवरी, 2017)

घोषित किया था, भारत ने जनू 2017 में फीजी के सीओपी-23 प्रेसीडेंसी ट्रस्ट फंड में 10 लाख अमेरिकी डॉलर का सहयोग दिया। वर्ष के दौरान हुई महत्वपूर्ण यात्राएं समझौते / एमओयू हस्ताक्षरः 25-26 मई 2017 को सवू ा में भारत-प्रशातं द्वीपसमहू अक्षय विकास सम्मेलन के दौरान, भारत ने फीजी, कुक आईलैंड्स, नाउरू, समोआ और निउ के साथ सचू ना प्रौद्योगिकी (सीईआईटी) में उत्कृ ष्टता कें द्रों की स्थापना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए। भारत और फीजी ने यवु ा विकास, नवीकरणीय ऊर्जा और सचू ना प्रसारण के क्षेत्र में सहयोग के लिए तीन समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए।


सवू ा में भारत-प्रशांत द्वीप समूह अक्षय विकास सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में समूह की तस्वीर (25 मई, 2017)

इडं ियन नेशनल डिफेंस अकादमी के प्रतिनिधि मंडल से 21 मई 2017 को फीजी गणराज्य के माननीय राष्ट्रपति की औपचारिक भेंट

आईपीआईएसडीसी में फीजी के साथ समझौते पर हस्ताक्षर

29 मई 2017 को नई दिल्ली में फीजी के रक्षा मंत्री तीनों सेनाओ ं द्वारा प्रस्तुत गार्ड ऑफ ऑनर का अवलोकन करते हुए

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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माननीय अटॉर्नी जनरल श्री अय्याज सैयद खय्यूम ने माननीय विदेश मंत्री सषु मा स्वराज से मुलाकात की

24 जनवरी 2017 को ‘भारत के निर्वाचन आयोग’ और ‘फीजी चुनाव कार्यालय’ के बीच सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ। इससे दोनों लोकतंत्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। मार्च में, फीजी के अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक उद्यम, सिविल सेवा और संचार मत्री ं माननीय अय्याज सैयद खय्यूम ने भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों बीच एयर सेवा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसी प्रकार, जेट एयरवेज और फीजी एयरवेज ने कोड-शेयरिंग समझौते पर हस्ताक्षर किए और दोनों देशों के नागरिकों के बीच अधिकाधिक आदान-प्रदान के लिए मार्ग प्रशस्त किया। फीजी के रक्षा और राष्ट्रीय सरु क्षा मत्री ु बं ोला ने मई 2017 में भारत का ं माननीय रातु इनोके कुं बआ दौरा किया। इस यात्रा के दौरान रक्षा के क्षेत्र में सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। फीजी के कृषि और सीओपी-23 जलवायु चैंपियन मत्री ं माननीय इनिया सेरुइरातु ने 31 अगस्त-1 सितंबर 2017 के बीच फीजी की सीओपी 23 टीम के साथ फिक्की के बिजनेस एडं क्लाइमेट शिखर सम्मेलन

योजना के तहत गोद लिया है, जो उष्णकटिबंधीय चक्रवात विसं ्टन के दौरान क्षतिग्रस्त हो गये थे। इन गोद लिए गए स्कू लों की मरम्मत के लिए भारत सरकार ने फरवरी 2017 में फीजी को 13 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान की। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन फीजी का अतं रराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) का संस्थापक सदस्य बनना इस वर्ष की बहुत बड़ी उपलब्धि थी। फीजी ने अन्य देशों के साथ आईएसए के फ्रे मवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किया और इसकी पुष्टि की। भारत और फ्रांस की यह सयं क्त ु पहल दिसबं र 2017 में लागू हुई है। इसके तहत सभी आईएसए

सदस्यों के लाभ के लिए सौर ऊर्जा के दोहन का संकल्प लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस तीसरा अतं रराष्ट्रीय योग दिवस फीजी में बड़े जोश और उत्साह के साथ मनाया गया। 21 जनू 2017 को अल्बर्ट पार्क में आयोजित मखु ्य कार्यक्रम में 3000 स्कू ली-बच्चों सहित 4000 से अधिक लोगों की भागीदारी देखी गई। हरियाणा प्रतिनिधिमंडल द्वारा भारतीय उच्चायोग की यात्रा।

में भाग लिया। दोनों पक्षों ने फरवरी में नई दिल्ली में तीसरे विदेश कार्यालय परामर्श के दौरान द्विपक्षीय सबं ंधों की समीक्षा भी की। हरियाणा के कृषि, विकास और पंचायत, खान और भवि ू ज्ञान, पशपु ालन और डेयरी तथा मत्स्य पालन मत्री ं श्री ओम प्रकाश धनखड़ के नेततृ ्व में एक प्रतिनिधि मडं ल ने विशेष रूप से फीजी सरकार के साथ कृषि क्षेत्र में सहयोग के अवसरों का पता लगाने के लिए 19-20 जनू को फीजी का दौरा किया। भारत ने फीजी के 20 स्कू लों को फीजी सरकार की ‘एडॉप्ट ए स्कू ल’ 40

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी


प्रशान्त में भारत

जयपुर में एफआईपीआईसी के दौरान भारत के प्रधान मंत्री के साथ प्रशांत द्वीपीय नेता

आईपीआईएसडीसी के दौरान कुक आईलैंड्स के साथ बैठक

कुक आईलैंड्स वित्त मत्री ं श्री मार्क स्टीफन ब्राउन ने 25-26 मई 2017 को सवू ा में आयोजित भारत-प्रशांत द्वीपसमहू अक्षय विकास शिखर सम्मेलन में कुक द्वीप समहू के प्रतिनिधिमडं ल का नेततृ ्व किया। । यात्रा के दौरान कुक द्वीपसमहू में भारत ने सचू ना प्रौद्योगिकी में उत्कृ ष्टता कें द्र (सीईआईटी) स्थापित करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए। भारत ने 1 मार्च 2017 को कुक द्वीपसमहू में अस्पताल समेत 16 सामदु ायिक विकास परियोजनाओ ं के लिए कुक द्वीपसमहू सरकार को 6,90,846 अमेरिकी डॉलर प्रदान किए। 22 जनू को राष्ट्रीय स्टेडियम, रारोटोंगा में कुक द्वीपसमहू में योग 2017 का अतं रराष्ट्रीय दिवस मनाया गया। स्वास्थ्य मत्रा ं लय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। किरीबास उच्चायक्त ु माननीय श्री विश्वास सपकाल ने 27 मार्च 2017 को किरीबास गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम श्री तनेती मामाऊ को अपना परिचय पत्र प्रस्ततु किया।

उच्चायुक्त ने 27.3.2017 को किरीबास गणराज्य के राष्ट्रपति माननीय श्री तनेती मामाऊ को अपना परिचय पत्र प्रस्तुत किया।

माननीय संसद सदस्य टेकेना तिरोआ ने 25-26 मई 2017 को सवू ा में आयोजित भारत-प्रशांत द्वीपसमहू अक्षय विकास शिखर सम्मेलन में किरीबास के प्रतिनिधिमडं ल का नेततृ ्व किया। किरीबास ने अतं रराष्ट्रीय सौर गठबंधन के फ्रे मवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए और इस प्रकार दिसंबर 2017 में लागू हुए इस महत्वपरू ्ण समझौते के हस्ताक्षरकर्ताओ ं में से एक बन गया। नमस्ते पैसिफिका महोत्सव के बैनर तले, भारत से प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना सश्ु री मीरा दास ने 11 नवंबर, 2017 को बैटियो स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, किरीबास में अपनी प्रस्ततु ि दी। सांस्कृ तिक मामलों के सचिव इस कार्यक्रम में मखु ्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। 21 जनू 2017 को किरीबास में राष्ट्रीय खेल परिसर, बैटियो, तारवा में अतं रराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। राष्ट्रपति और देश की प्रथम महिला ने इस कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से भाग लेकर आयोजन को अपनी ओर से भरपरू प्रोत्साहन दिया। इस दौरान शिक्षा मत्री ं और कई सरकारी सचिव भी उपस्थित थे। नाउरू उच्चायक्त ु माननीय श्री विश्वास सपकाल ने 22 मार्च 2017 को नाउरू गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम श्री बैरन दिवावेसी वागं ा को अपने परिचय पत्र प्रस्ततु किया। उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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तुवालु उच्चायक्त ु माननीय श्री विश्वास सपकाल ने 12 अप्रैल 2017 को तवु ालु के गवर्नर जनरल माननीय सर इकोबा ताइया इटालेली को अपने प्रमाण पत्र प्रस्ततु किए। माननीय माटिया तोउफा, उप प्रधान मत्री ं और वित्त और आर्थिक विकास मत्री ं ने 25-26 मई 2017 को सवू ा में आयोजित भारत-प्रशातं द्वीप समहू सतत विकास शिखर सम्मेलन में तवु ालु से प्रतिनिधिमडं ल का नेततृ ्व किया। तवु ालु ने अतं रराष्ट्रीय सौर गठबधं न के फ्रे मवर्क समझौते पर हस्ताक्षर करके उसकी पुष्टि की है और इस प्रकार सौर ऊर्जा के अधिकाधि‍क उपयोग को बढ़ावा देने के आईपीआईएसडीसी में नाउरू के साथ समझौते पर हस्ताक्षर

भारत ने अगस्त 2015 में नाउरू के एनेटन जिले में समुद्री दीवार बनाने के लिए 4,50,175 अमेरिकी डॉलर दिए। यह परियोजना 23 मार्च 2017 को नाउरू के राष्ट्रपति और उच्चायक्त ु द्वारा शरू ु की गई थी। नाउरू के राष्ट्रपति ने 2526 मई 2017 को सवू ा में आयोजित भारत-प्रशातं द्वीप समहू अक्षय विकास शिखर सम्मेलन में अपने देश के प्रतिनिधिमडं ल का नेततृ ्व किया। इस दौरान नाउरू में सचू ना प्रौद्योगिकी में उत्कृ ष्टता कें द्र (सीईआईटी) स्थापित करने के लिए भारत के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए गए। 23 जनू 2017 को नाउरू के नागरिक कें द्र में अतं रराष्ट्रीय योग दिवस-2017 मनाया गया। राष्ट्रपति ने मखु ्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम में भाग लिया। नाउरू ने भी अतं रराष्ट्रीय सौर गठबधं न के फ्रे मवर्क समझौते पर हस्ताक्षर करके उसकी पुष्टि की है। इस प्रकार इस महत्वपरू ्ण अतं रराष्ट्रीय गठबधं न में वह सह-ससं ्थापक भारत और फ्रांस के बाद का तीसरा ससं ्थापक सदस्य बन गया है। तोंगा उच्चायक्त ु माननीय श्री विश्वास सपकाल ने 8 फरवरी 2017 को तोंगा के राजा, महामहिम तपु ौ-VI को अपना परिचय पत्र प्रस्ततु किया।

तोंगा के कृषि, खाद्य, वन और मत्स्य पालन मत्री ं माननीय सेमिसी फकाहाऊ ने 25-26 मई 2017 को सवू ा में आयोजित भारत-प्रशांत द्वीपसमहू अक्षय विकास शिखर सम्मेलन में अपने देश के प्रतिनिधिमडं ल का नेततृ ्व किया। तोंगा ने अतं रराष्ट्रीय सौर गठबंधन के फ्रे मवर्क समझौते पर भी हस्ताक्षर किए और इस प्रकार जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई के लिए हुए इस महत्वपरू ्ण समझौते के हस्ताक्षर कर्ताओ ं में से एक बन गया। 24 जनू 2017 को तोंगा के सिविक सेंटर में अतं रराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। ‘नमस्ते पैसिफिका’ महोत्सव के बैनर तले भारत से विश्व प्रसिद्ध ओडिशी नृत्यांगना सश्ु री मीरा दास ने 3 नवबं र, 2017 को तोंगा के नुकू आलोफा शहर में तनआ ु होटल में प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में मखु ्य अतिथि थीं, माननीय लपु ेलो हलावेलु मोहेफो वर्जीनिया रोज टुइटा जो तोंगा की राजकु मारी की बेटी हैं। 42

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

3 जुलाई 2017 को सवू ा में प्रशांत जलवायु सम्मेलन में तुवालु के माननीय प्रधानमंत्री के साथ उच्चायुक्त

लिए इस महत्वपरू ्ण अतं रराष्ट्रीय गठबधं न के ससं ्थापक सदस्यों में से एक बन गया है। 23 जनू 2018 को तवु ालु के टाउन हॉल, फुनाफुटी में अतं रराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। तवु ालु में योग को बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली। गृह मत्रा ं लय के सहायक सचिव सश्ु री लनीता फलासी ने भी समारोह में हिस्सा लिया। भारत ने नवबं र 2017 में तवु ालु को तीन सरकारी भवनों के निर्माण के लिए 2,75,122 अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान की है। वानूआतू जलवायु परिवर्तन अनुकू लन मत्री ं , मौसम विज्ञान, भ-ू खतरे , पर्यावरण, ऊर्जा और आपदा प्रबंधन मत्री ु रोरोआ ने 25-26 मई ं माननीय हमी लिनी वानअ 2017 को सवू ा में आयोजित भारत-प्रशांत द्वीपसमहू अक्षय विकास शिखर सम्मेलन में अपने प्रतिनिधिमडं ल का नेततृ ्व किया। वानआ ू तू ने अतं रराष्ट्रीय सौर गठबंधन के समझौता फ्रे मवर्क पर हस्ताक्षर किया है और इस प्रकार सितंबर 2017 में लागू होने वाले इस महत्वपरू ्ण समझौते के हस्ताक्षरकर्ताओ ं में से एक बन गया है। ‘नमस्ते पैसिफिका’ महोत्सव के बैनर तले, भारत से प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना सश्ु री मीरा दास ने 07 नवंबर, 2017 को वानआ ू तू में पोर्ट विला के कन्वेंशन सेंटर में अपनी कला का प्रदर्शन किया। समारोह में 1200 से अधिक लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर कार्यवाहक प्रधान मत्री ं मखु ्य अतिथि थे।

प्रशांत जलवायु सम्मेलन में 4 जुलाई 2017 को सवू ा में वानूआतू के उप-प्रधानमंत्री के साथ उच्चायुक्त


भारत:

विकास के प्रति एक समर्पित भागीदार

27 फरवरी 2016 को उष्णकटिबंधीय चक्रवात विंस्टन के पीड़ितों के लिए राहत सामग्री लेकर भारतीय वायु सेना का सी-17 विमान नादी, फीजी में पहुंचा

मानवीय सहायता और आपदा राहत भारत और फीजी के दिल एक साथ धड़कते हैं। भारत ने फरवरी 2016 में उष्णकटिबधं ीय चक्रवात विसं ्टन के कारण होने वाले विनाश के बाद फीजी के लोगों के दर्द को महससू किया। जब चक्रवात का फीजी पर हमला हुआ उसके छठे दिन 3 मिलियन यएू स डॉलर की भारतीय राहत सहायता फीजी पहुचं ी। भारत ने फीजी के प्रधानमत्री ं के पनु र्वास और राहत कोष में 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया और फीजी के ‘एडोप्ट ए स्कू ल’ कार्यक्रम में भी भाग लिया। फरवरी 2017 में 20 स्कू लों की मरम्मत के लिए फीजी को 1.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनदु ान दिया गया था।

‘स्कू ल अपनाओ’ कार्यक्रम के तहत 20 स्कू लों के नवीकरण के लिए 2.17 मिलियन फीजीयन डालर (1.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर) का चेक सौंपते हुए उच्चायुक्त।

भारत और फीजी ने परंपरागत रूप से ऐतिहासिक और सासं ्कृ तिक सबं धं ों की मजबतू नींव पर गर्मजोशी भरे सौहार्दपरू ्ण सबं धं ों का आनदं लिया है। इसलिए भौगोलिक दृष्टि से दरू ये दोनों राष्ट्र सासं ्कृ तिक और ऐतिहासिक रूप से बहुत करीबी हैं। वे न के वल अपनी विकास प्रक्रियाओ ं में भागीदारी करते हैं, बल्कि एक-दसू रे के हितों और सामान्य लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न अतं रराष्ट्रीय मचं ों पर भी एक-दसू रे से सहयोग करते हैं। एसएमई क्षेत्र में सहायता भारत ने बार-बार यह दिखाया है कि वह फीजी का एक प्रतिबद्ध विकास भागीदार है। दोनों देशों के बीच की साझेदारी के जो कई उदाहरण हैं, उनमें से एक है, फीजी के एसएमई क्षेत्र को भारत का निरंतर समर्थन। नवबं र 2014 में फीजी की अपनी यात्रा के दौरान, भारत के माननीय प्रधानमत्री ं श्री नरेंद्र मोदी ने फीजी के एसएमई क्षेत्र के लिए 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता की घोषणा की थी। 13 सितबं र 2017 को फीजी में भारतीय उच्चायक्त ु श्री विश्वास सपकाल ने तीसरी किश्त के रुप में 580,904.38 फीजीयन डालर (लगभग यएू स डॉलर 2,89,000) का चेक फीजी के उद्योग, व्यापार, पर्यटन, भमि ू और उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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खनिज ससं ाधन मत्री ं माननीय श्री फै याज कोया को सौंप दिया। इस प्रकार फीजी को कु ल 4.7 मिलियन फीजीयन डालर (यएू स डॉलर 2.2 मिलियन लगभग) की सहायता राशि मिल चुकी है। शीघ्र ही 2.8 मिलियन यएू स डॉलर की एक और राशि जारी करने के लिए समझौते के ज्ञापन पर जल्द ही हस्ताक्षर किए जाएगं ।े तब कु ल सहायता राशि 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो जाएगी। फीजी सरकार इस अनदु ान का उपयोग अपने स्माल एडं माइक्रो बिजनेस ग्रांट फे सिलिटी को प्रभावी बनाने के लिए कर रही है। इसके द्वारा फीजी सरकार जहां अपने मौजदू ा सक्ू ष्म और लघु व्यवसायों की मदद कर रही है, वहीं इस क्षेत्र के स्टार्ट अप्स को भी अनदु ान देने पर काम हो रहा है। कैं टीन व्यवसाय, कु क्कु ट, मधुमक्खी पालन, पशुधन खेती, बाजार वेंडिंग, बेकरी, सिलाई, सड़क के किनारे स्टाल, सिलाई, हस्तशिल्प व्यवसाय आदि जैसी गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला है जिसके लिए लघु एवं सक्ू ष्म व्यवसायियों को अनदु ान दिया जा रहा है। प्रत्येक को 1000 फीजीयन डालर का अनदु ान दिया जाता है जो काम शरूु करने के लिए मजबतू आधार प्रदान करता है।

उनका आदर्श उपयोग हो सके । लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत वित्त पोषण के अलावा, 7 दिसबं र 2017 को, फीजी में भारत के उच्चायक्त ु माननीय श्री विश्वास सपकाल ने 2,172,576.35 फीजीयन डालर (यएू स डालर 1.06 मिलियन) का चेक, रियर एडमिरल (सेवानिवृत्त) माननीय चोसैया वोरें गे बईनिमरामा को प्रदान किया। इस राशि का उपयोग फीजी शगु र कॉर्पोरे शन की सामरिक योजना के तहत फीजी में चीनी उद्योग को पनु र्जीवित करने के लिए किया जाएगा। महु यै ा कराई गई राशि का उपयोग विशेष रूप से कृषि उपकरण और वाहनों की खरीद के लिए होगा जिसमें गन्ना रोपाई, कटाई, ढुलाई और खेती से जडु ़ी 5 टाटा लॉरी, 5 मैकेनिकल के न प्लांटर्स और 5 महिद्रा ं ट्रैक्टर शामिल हैं - सभी ‘मेड इन इडि ं या’ हैं। फीजी शगु र कॉर्पोरे शन के दस मिल इजं ीनियरों ने 21 दिसबं र, 2017 को पुणे के

सौर ऊर्जा का उपयोग करते हुए 14 पीआईसी देशों द्वारा जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई। (16 अगस्त 2016)

फीजी के कृषि मंत्री को 5 टन से अधिक सब्जियों के बीज सौंपते उच्चायुक्त। (27 अक्टूबर 2016)

कृषि और चीनी उद्योग में सहायता भारतीय नौसेना जहाज सुमित्रा ने अक्टूबर 2016 में फीजी का दौरा किया था। आईएनएस सुमित्रा द्वारा लाये गए 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर मलू ्य के पाचं टन सब्जी के बीज फीजी सरकार के कृषि मत्री ं को सौंपे गए थे। फीजी के किसानों ने इन बीजों से उच्च पैदावार ली है। भारत फीजी के चीनी उद्योग को अपनी सहायता प्रदान करता रहा है। ‘रारावाई में सह-उत्पादन बिजली सयं त्रं ’ के लिए 70 मिलियन यएू स डालर का लाइन ऑफ

फीजी के माननीय प्रधानमंत्री को फीजी शुगर कॉर्पोरेशन के लिए यूएस डॉलर 1.06 मिलियन की सहायता राशि सौंपते हुए उच्चायुक्त।

क्रेडिट (एलओसी) लागू होने की प्रक्रिया में है। इससे पहले, भारत ने जल ु ाई 2005 में फीजी में चीनी मिलों के उन्नयन के लिए 50.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण दिया था। चीनी उद्योग के उन्नयन के लिए यएू स डॉलर 5.38 मिलियन का एक और ताजा लाइन ऑफ क्रेडिट प्रदान किया गया है। हालाकि ं , फीजी सरकार वर्तमान में इन एलओसी के पनु र्गठन पर काम कर रही है ताकि 44

उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

वसतं दादा शगु र इसं ्टीट्यटू (वीएसआई), में तीस हफ्ते का प्रशिक्षण परू ा किया। स्नातक समारोह में मखु ्य सचं ालन अधिकारी नवीन चन्द्र ने भाग लिया, जिन्होंने भारत सरकार की ओर से दिए जा रहे समर्थन के लिए एफएससी का आभार व्यक्त किया । जलवायु परिवर्तन अनक ु ू लन और शमन के लिए सहायता भारत ‘जलवायु परिवर्तन अनुकू लन’ प्रक्रिया में सहायता प्रदान करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। भारत फीजी समेत 14 प्रशातं द्वीप देशों में से प्रत्येक में 200 घरों का सौर विद्युतीकरण करे गा। विदेश मत्रा ं लय ने 1.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की अनमु ानित लागत के साथ इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए राजस्थान के बेयरफुट कॉलेज के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। परियोजना के तहत, भारत सरकार राजस्थान के बेयरफुट कॉलेज में 70 ‘सौर मित्रों’ को छः महीने का लबं ा प्रशिक्षण प्रदान करे गी। ऐसा प्रशिक्षण वर्ष 2012 से हो रहा है। इससे पहले, 43 ‘सौर मित्रों’ ने इस तरह के प्रशिक्षण को परू ा किया था। डिजाइन में बदलावों पर विचार करने के लिए उन्हें एक महीने के रिफ्रे शर प्रशिक्षण की आवश्यकता थी। परियोजना में, पहले चरण के तहत, 43 सौर मित्रों को अगस्त-सितम्बर 2016 में उपयक्त ु प्रौद्योगिकी और विकास कें द्र (सीएटीडी), नादं ावा, फीजी में एक महीने का रिफ्रे शर प्रशिक्षण दिया गया था। 70 ‘सौर मित्रों’ के प्रशिक्षण का एक और बैच सितबं र 2017 में परू ा हो चुका है। दसू रा चरण 14 प्रशातं द्वीप देशों में 200 घरों को सौर विद्युतीकरण प्रदान करने का है। सौर विद्युतीकरण उपकरण की आपर्ति ू बेयरफुट कॉलेज द्वारा की जाएगी और फिर सबं धं ित देशों में ले जाकर उन्हें सेट किया जाएगा। मानव सस ं ाधन विकास और क्षमता निर्माण के लिए सहायता हर साल, 100 से अधिक फीजी अधिकारी ‘भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) योजना के तहत छात्रवृत्ति का लाभ उठाते हैं जिसके तहत उन्हें प्रतिष्ठित भारतीय ससं ्थानों में स्वच्छता, प्रबधं न, जल ससं ाधन विकास, सचू ना प्रौद्योगिकी इत्यादि से लेकर विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया जाता है। फीजी के 30 से अधिक छात्र प्रसिद्ध भारतीय विश्वविद्यालयों में स्नातक / स्नातकोत्तर / डॉक्टरे ट पाठ्यक्रमों के लिए भी छात्रवृत्ति प्राप्त करते हैं। इसी के साथ कई फीजी छात्र आईसीसीआर छात्रवृत्ति का लाभ उठाते हुए हर साल प्रमख ु भारतीय ससं ्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त करते हैं।


विदेश राज्य मंत्री (डॉ) वी के सिहं (सेवानिवत्त ृ ) सवू ा में सहायता चेक सौंपते समय (26 मई, 2017)

एचसीआई, सवू ा के समवर्ती मान्यता वाले देश भारत ने 1 मार्च 2017 को कुक आईलैंड्स में अस्पताल समेत 16 सामदु ायिक विकास परियोजनाओ ं के लिए कुक द्वीपसमहू सरकार को यएू स डॉलर 6,90,846 प्रदान किया। इससे पहले 2015-16 में, भारत सरकार ने दस

और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को भी कम करने में सहायक होगी। इससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती हो सके गी। इसी के साथ एलईडी रोशनी वाले बल्बों को बढ़ावा दिया जाएगा जिससे खतरनाक पारे वाले फ्लोरोसेंट ट्यबू ों का उपयोग खत्म किया जा सके । इस परियोजना के कारण खतरनाक के रोसिन लालटेन के उपयोग में कमी आएगी जिसके परिणामस्वरूप आकस्मिक आग और सपं त्तियों तथा जीवन की हानि भी कम हो जाएगी। यह रात के दौरान अध्ययन करने के लिए, बिजली से वचि ं त स्कू ली बच्चों के लिए वरदान साबित

भारत के हाई कमिश्नर श्री विश्वास सपकाल किरीबास के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करते हुए

सामदु ायिक विकास परियोजनाओ ं के लिए कुक द्वीप समहू को 1,24,332 अमेरिकी डॉलर प्रदान किए थे। भारत सरकार ने विकास सहयोग का दायरा व्यापक करने के लिए सभी प्रशातं द्वीप देशों को दी जाने वाली ग्रान्ट-इन-एड को सालाना 2,00,000 अमेरिकी डॉलर तक कर दिया है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार की विकास गतिविधियों को बल प्रदान करने के लिए किया जाएगा। हाल ही में, भारत ने दिसबं र 2017 में दक्षिण तारावा के शहरी जिलों के लिए सौर कु शल प्रकाश व्यवस्था हेतु किरीबास को 1.1 मिलियन अमरीकी डॉलर प्रदान किए हैं। परियोजना का उद्शदे ्य दक्षिण तारावा परिवारों को के रोसिन लैंप के बदले सौर रोशनी का उपयोग करने में सक्षम बनाना है ताकि घरे लू उपयोग में बेहतर ऊर्जा इस्तेमाल हो सके । यह परियोजना किरीबास को ऊर्जा में लाखों की बचत करने में मदद करे गी

होगी। अतीत में भारत सरकार ने 2006 से लेकर अब तक किरीबास को विभिन्न सामदु ायिक विकास परियोजनाओ ं के लिए 5,34,108 अमेरिकी डॉलर दिए हैं। इस राशि का उपयोग सरकारी प्रेस में सुधार के साथ-साथ जेनरे टर / चेरी पिकर ट्रक / अस्पतालों के लिए स्वास्थ्य उपकरण खरीदने तथा क्लीनिकों की मरम्मत के लिए हुआ है। भारत ने अगस्त 2015 में नाउरू के एनेटन जिले में समुद्री दीवार के निर्माण के लिए 450,175 अमेरिकी डॉलर दिए थे। परियोजना को 23 मार्च 2017 को नाउरू के राष्ट्रपति और उच्चायक्त ु ने लॉन्च किया था। भारत सरकार ने नाउरू उत्कर्ष - वर्ष - 2 - भारत का उच्चायोग, सवू ा, फीजी

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भारत-सयं ुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के तहत सात प्रशांत देशों के लिए परियोजना

सवू ा में भारतीय उच्चायोग, और संयक्त ु राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यएू नडीपी) सवू ा ने 1 सितंबर 2017 को सात प्रशांत द्वीप देशों में जलवायु प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली परियोजना शरू ु की। यह भारत-संयक्त ु राष्ट्र विकास भागीदारी निधि के तहत शरू ु की गई पहली ऐसी परियोजना है जिसे दक्षिण-दक्षिण सहयोग के संयक्त ु राष्ट्र कार्यालय द्वारा प्रबंधित किया जाएगा और यएू नडीपी, फीजी के माध्यम से लागू किया जाएगा। भारत अगले 10 वर्षों में फंड को 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस संदर्भ में 2017 में, यएू स $ 5 मिलियन प्रदान किए जा चुके हैं। यह एक बहु-देशीय परियोजना है। कुक आईलैंड्स, किरीबास गणराज्य, मार्शल आईलैंड्स गणराज्य, माइक्रोनेशिया के संघीय राज्य, नाउरू गणराज्य, सोलोमन आईलैंड्स और तोंगा रियासत इसके भागीदार देश हैं। इस परियोजना का उद्देश्य इन सात प्रशांत द्वीप देशों (पीआईसी) में प्राकृ तिक आपदाओ ं से लड़ने की क्षमता बढ़ाना है। इसके चलते एजेंडा 2030 के 17 लक्ष्यों (विशेष रूप से लक्ष्य 13 जो जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कार्र वाई से संबंधित है) को प्राप्त करना सगु म हो जाएगा। की ससं द के लिए महिद्रा ं वाहन की खरीद हेतु अमेरिकी डॉलर 31,180 की मजं रू ी दी है। वाहनों को 30 जनवरी 2018 को उच्चायक्त ु द्वारा नाउरू ससं द के सभापति को सौंप दिया गया है। भारत ने 31 जनवरी, 2018 को आजादी की अपनी 70 वीं वर्षगाठं के जश्न के अवसर पर नाउरू पुलिस की वर्दी के लिए 41,419 अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान की है। भारत सरकार ने जल ु ाई 2014 में तोंगा को सनु ामी चेतावनी प्रणाली के लिए 300,000 अमेरिकी डॉलर प्रदान किए। अक्टूबर 2014 में ‘लोक सेवा आयोग आईसीटी इफ् ं रास्ट्रक्चर के कार्यालय अपग्रेड’ के लिए 115,000 अमेरिकी डॉलर प्रदान किया गया था। इसी के साथ सितबं र 2015 में अवैध ट्रांसमिशन सहित स्पेक्ट्रम निगरानी और हस्तक्षेप निरोधी यत्रों ं के लिए 71,627 अमेरिकी डॉलर प्रदान किए गए। हमने नवबं र 2017 में तवु ालु को तीन सरकारी भवनों के निर्माण के लिए 275,122 अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान की है। भारत ने नवबं र 2017 में जर्मनी के बॉन में सीओपी-23 में छः सदस्यीय तवु ालु प्रतिनिधिमडं ल के लिए हवाई जहाज का किराया (35,767 अमेरिकी डॉलर) भी प्रदान किया। इसके अलावा, नवबं र 2017 में, हमने तवु ालु में एसएमई व्यापार मेला आयोजित करने के लिए तवु ालु की सरकार को 7837 अमेरिकी डॉलर का अनदु ान दिया । मार्च 2015 में चक्रवात पाम के बाद, भारत ने वानआ ू तू को मानवीय सहायता के रूप में 250,000 अमेरिकी डॉलर का अनदु ान दिया। 46

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अक्टूबर 2016 में वानआ ू तू की अपनी यात्रा के दौरान, तत्कालीन भारतीय ऊर्जा राज्य मत्री ू तू में 76 स्कू लों में आईटी उपकरण ं श्री पीयुष गोयल ने वानआ की खरीद के लिए वानआ ू तू विदेश मत्री ं को 1,90,000 अमेरिकी डॉलर का चेक सौंपा था। जनवरी 2018 में, भारत ने एलईडी बल्ब और ऊर्जा कु शल उपकरणों की खरीद के लिए वानआ ू तू को 200,000 अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान की।


बैंक आफ बड़ौदा

दरू दर्शिता और उद्यम की एक गाथा 1908 में एक छोटी सी इमारत से शरुु होकर मंबु ई के अपने गगनचुम्बी हाई-टेक बड़ौदा कॉरपोरे ट सेंटर तक पहुचं ने और 25 से अधिक देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाले बैंक आफ बड़ौदा की कहानी हम सबके सामने बेहतरीन दृष्टिकोण, उद्यम शीलता, वित्तीय समझदारी और कारपोरे ट शासन की एक अनूठी मिशाल है। यह कॉर्पोरे ट ज्ञान और सामाजिक गौरव की रोशनी में लिखी गई एक कहानी है। यह निजी पंूजी, रियासती संरक्षण और राज्य स्वामित्व के साए में लिखी एक कहानी है। कारपोरे ट प्रतिष्ठा के क्षेत्र में असाधारण उंचाई हासिल करने के पीछे बैंक ऑफ बड़ौदा के साधारण बैंकरों का योगदान भल ु ाया नहीं जा सकता। यह एक ऐसी कहानी है जिसे उन सभी लाखों लोगों- ग्राहकों, हितधारकों, कर्मचारियों और जनता के साथ साझा करने की आवश्यकता है - जो अंततः एक श्रेष्ठ संस्थान बनाने में योगदान देते ह।ैं बैंक ऑफ बड़ौदा ने 1961 में सवू ा में मार्क स्ट्रीट पर अपनी पहली शाखा खोल कर फीजी में अपनी यात्रा शरू ु कर दी थी। अब बैंक ऑफ बड़ौदा फीजी में अपने लगभग 100,000 ग्राहकों के समर्थन के साथ बढ़ता जा रहा है। अपने ग्राहकों की सभी बैंकिंग आवश्यकताओ ं को परू ा करने के लिए बैंक के पास फीजी में शाखाओ ं का एक विस्तृत नेटवर्क है। फीजी में 58 साल के ऑपरे शन में, बीओबी ने किफायती बैंकिंग सेवाएं प्रदान की ह।ैं इसके ग्राहकों में बड़े व्यापारिक घरानों के साथ माइक्रोफाइनेंस उद्यमी, छोटे और मध्यम उद्यमी (एसएमई), खदु रा व्यापारी, विनिर्माण इकाईयां, कृषि आधारित गतिविधियां, मत्स्य पालक, डेयरी उद्यमी, कु क्कु ट पालक जैसे व्यवसायियों की विविध श्रंखला है। इन सबकी बैंकिंग जरूरतें पूरा करके बैंक ने फीजी के सामाजिक-आर्थिक विकास में भाग लिया है। रिजर्व बैंक ऑफ फीजी / फीजी सरकार के मार्गदर्शन में बैंक आफ बड़ौदा समाज के गरीब वर्गों के लिए माइक्रो फाइनेंस और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम भी चला रहा है। बैंक आफ बड़ौदा, फीजी देश की अर्थव्यवस्था के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। देश के आर्थिक विकास को नित नई ऊंचाईयों तक ले जाने के लिए प्रयास करना इसकी पहली प्राथमिकता है।

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भारतीय जीवन बीमा निगम ने भारत और फीजी दोनों जगह एक ही वर्ष अर्थात 1956 में अपना परिचालन शरू ु किया और यहां तक के सफर में 61 साल की सेवा परू ी की है। एलआईसीआई के रूप में लोकप्रिय यह कंपनी शरू ु से ही फीजीयन अर्थव्यवस्था का महत्वपरू ्ण अंग रही है। आज जीवन बीमा पालिसी बाजार में इसकी हिस्सेदारी 63% है जबकि प्रीमियम बाजार में इसका 71% बाजार पर कब्जा है। एलआईसीआई के पास सूवा में इसका मखु ्य कार्यालय है और लाटुका में एक शाखा कार्यालय तथा लंबासा में एक विपणन कार्यालय है। इसमें 10 सेल्स एंड सर्विस पॉइटं ् स हैं जो ग्राहकों को महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। एलआईसीआई के पास आबादी के सभी हिस्सों को बेचने के लिए 15 उत्पाद हैं। इसके सबसे लोकप्रिय उत्पाद मनी बैक पॉलिसी और न्यू बुला गोल्ड हैं जहां परिपक्वता की तारीख के बाद भी एक विस्तारित अवधि के लिए मफु ्त बीमा कवर दिया जाता है। इसके अलावा, लक्ष्य क्लासिक योजना, सेवानिवृत्ति की तैयारी के लिए बहुत लोकप्रिय तरीका है। अपनी विभिन्न पालिसियों में एलआईसीआई की ओर से कई प्रकार की सुविधाएं दी जाती हैं जैसे- स्थाई विकलांगता लाभ, टर्म राइडर, क्रिटिकल इलनेस और अंतिम संस्कार के लिए सुविधा। प्रत्येक कै लेंडर वर्ष में यह लगभग 10,000 नई पालिसीज पूरी करता है। वर्ष 2017 में, रिकॉर्ड 11,173 नई पालिसियां पूरी कर ली गई ह।ैं इस समय एलआईसीआई के पास कु ल 63,133 पालिसियां ह।ैं फीजी में एलआईसीआई की सबसे खास बात यह है कि इसके द्वारा घोषित बोनस का स्तर लगातार ऊं चा बना रहा है। इसने 2017 के दौरान पॉलिसी पे आउट के रूप में 67 मिलियन फीजीयन डालर से

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अधिक का भुग तान किया जबकि 9.44 मिलियन फीजीयन डालर के बोनस की घोषणा की। एलआईसीआई के पास 608 मिलियन फीजीयन डालर से अधिक का परिसंप त्ति आधार है। एलआईसीआई ने फीजी की अर्थव्यवस्था के विकास में उदारतापूर्वक योगदान दिया है। आज तक फीजी में इसकी ओर से 557 मिलियन फीजीयन डालर का निवे श किया गया है जो मुख ्यतः अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढां चे में हु आ है। एक संगठन के रूप में एलआईसीआई की प्रतिबद्धता जीवन बीमा पॉलिसियों से आगे तक है। एलआईसीआई ने चक्रवात से पीड़ित इलाकों में स्कू ल को गोद लेने के लिए एक कदम उठाया है। इसके लिए फीजी सरकार के माध्यम से 40,000 फीजीयन डालर का भगु तान किया गया है। एलआईसीआई अपनी सेवा को और अधिक सुलभ बनाकर फीजी के सभी लोगों को सर्वोत्तम सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। पॉलिसी धारकों को देश में कहीं से भी प्रीमियम का भगु तान करने के लिए वैकल्पिक चैनलों की शरुु आत की गई है। इसके लिए एलआईसीआई ने बीओबी, एएनजेड, एचएफसी, बीएसपी, वेस्टपैक और ब्रेड बैंक के साथ समझौता किया है। इसी के साथ एलआईसीआई का पोस्ट फीजी और वोडाफोन के साथ भी समझौता है। हाल ही में एलआईसीआई को फीजी बिजनेस पुरस्कार 2017 से भी नवाजा गया है। जीवन के हर मोड़ पर, जीवन में हर उम्र के लिए है एलआईसीआई।


न्यू इडं िया एश्योरेंस न्यू इडि ं या एश्योरें स (एनआईए) एक प्रसिद्ध जनरल इशं ्योरें स कंपनी है जिसका स्वामित्व मखु ्यतः भारत सरकार के पास है। यह कंपनी पिछले 64 वर्षों से फीजी में काम कर रही है। नेट प्रीमियम आधार पर फीजी में यह सबसे बड़ी सामान्य बीमा कंपनी है। फीजी की अर्थव्यवस्था ने इस उपलब्धि को पाने में जिस तरीके से हमारा साथ दिया है, उसके लिए आभार। न्यू इडि ु ना ं या एश्योरें स के पास सभी अन्य सामान्य बीमा कंपनियों की तल में फीजी में शाखाओ ं का सबसे बड़ा नेटवर्क है। इसकी मखु ्य शाखाएं सवू ा, नादी, लाटुका और लंबासा में हैं। कु ल परिसंपत्ति के आधार पर एनआईए सबसे बड़ी सामान्य बीमाकर्ता कम्पनी है। फीजी में मौजदू सामान्य बीमा कंपनियों के बीच हमारी साल्वेंसी मार्जिन सबसे ज्यादा है। हम फीजी की एकमात्र सामान्य बीमाकर्ता हैं जिसे य.ू एस.ए. की सर्वश्रेष्ठ कंपनी एएम द्वारा ‘ए’ (उत्कृ ष्ट) क्रेडिट रे टिंग का गौरव प्रदान किया गया है। एनआईए मखु ्य रूप से सपं त्ति, ऑटोमोबाइल और देयता बीमा में काम कर रही है। देश में उद्योग, व्यापार और वाणिज्य तथा आम जनता का हित हमेशा हमारी प्राथमिकता रहा है। भारत सरकार का उपक्रम होने के नाते हम भारतीय उच्चायोग, फीजी के माध्यम से भारतीयों और फीजी के लोगों (विशेष रूप से भारतीय मल ू के लोगों) के बीच सांस्कृ तिक संबंधों को मजबतू करने में अपना प्रयास करके खश ु ी का अनभु व करते हैं। वर्ष 2017 के दौरान, एनआईए ने निम्नलिखित गतिविधियों में भारतीय उच्चायोग को अपना समर्थन दिया है: (1) भारत सरकार के विदेश मामलों के राज्य मत्री ं माननीय श्री वीके सिंह के नेततृ ्व में भारत सरकार द्वारा आयोजित जलवायु परिवर्तन और अक्षय विकास पर अतं रराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन (मई, 2017) (2) 21 जनू , 2017 को तीसरा अतं रराष्ट्रीय योग दिवस समारोह (3) अक्टूबर 2017 में भारतीय फूड फे स्टिवल समेत भारत की आजादी के 70 वें वर्ष का जश्न मनाने के लिए “नमस्ते पैसिफिका” महोत्सव के तहत विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला। (4) हमारे मखु ्य सचं ालन अधिकारी श्री सभु ाष मेहता ने अतिथि वक्ताओ ं में से एक के रूप में 2017 में जलवायु परिवर्तन पर अतं रराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया हमने दोनों देशों के सांस्कृ तिक संबंधों को मजबतू करने के लिए भारत-फीजी फ्रें डशिप फोरम के गठन में भी महत्वपरू ्ण भमिक ू ा निभाई। मार्च 2017 में होली कार्यक्रम आयोजित करने में आईएफएफएफ की हमने मदद की। वर्ष 2017 के दौरान निम्नलिखित गतिविधियों में भी न्यू इडि ं या एश्योरें स सक्रिय रूप से भारतीय उच्चायोग से जडु ़ा रहा है: (1) इडि ं या हाउस में गणतंत्र दिवस समारोह (2) इडि ं या हाउस में स्वतंत्रता दिवस समारोह (3) आईसीसी में गांधी जयंती उत्सव (4) 126 वीं अम्बेडकर जयंती (5) सितंबर 2017 में आईसीसी और एनआईए में हिदं ी दिवस समारोह (6) इडि ं या हाउस में दिवाली उत्सव

न्यू इडि ं या एश्योरें स का सौभाग्य है कि हमें भारतीय उच्चायोग के साथ मिलकर अपनी गतिविधियों को करने का मौका मिलता है। हमें उम्मीद है कि आगे भी हम मिल-जल ु कर काम करते रहेंगे।

हमारे सीओओ और मानव संसाधन विकास मत्रा ं लय, भारत सरकार में राज्य मत्री ं माननीय डॉ. सत्यपाल सिंह

हमारे सीओओ और भारत सरकार के विदेश राज्य मत्री ं माननीय श्री वी के सिंह

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वैपकोस

फीजी में सफलता की कहानी डब्ल्यू.ए.पी.सी.ओ.एस. लिमिटेड (भारत सरकार का एक उपक्रम) परामर्श, इजं ीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) में एक वैश्विक अगुआ है जो जल, विद्युत और बुनियादी ढांचा परियोजनाओ ं के सतत विकास के लिए एकीकृ त और अनुकू लित समाधान प्रदान करता है। दिसंबर 2015 में फीजी जल प्राधिकरण (डब्ल्यू.ए.एफ.) ने हमें एक कांट्रैक्ट दिया जिसके तहत हमें कें द्रीय / पूर्वी और पश्चिमी शहरी कें द्र में पानी और अपशिष्ट जल के पाइप नेटवर्क को अपग्रेड करने के लिए व्यावसायिक सेवाएं देनी ह।ैं दसू रे शब्दों में हमें डिजाइन और अनुबंध निर्माण के लिए ग्राहक प्रतिनिधि बनाया गया। डब्ल्यूएएफ को दी गई उच्च मानक सेवाओ ं के आधार पर हमें फीजी रोड अथॉरिटी से सड़क, पुलों और जेट्टीज के लिए पेशेवर सेवा कार्यों की जिम्मेदारी मिली। इसी के साथ फीजी के वित्त मंत्रालय ने हमें सरकारी शिपिंग सेवाओ ं और समुद्री दीवार को बेहतर करने का काम दिया। जल प्राधिकरण की परियोजनाओ ं को (18 नंबर) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इसी के साथ एफआरए के लिए हमने ब्रिज मलू ्यांकन रिपोर्ट को भी उच्च मानकों के साथ पूरा कर लिया है। हमारे अन्य कार्य तेजी से पूरा होने की कगार पर ह।ैं इस बीच अर्थव्यवस्था मंत्रालय के लिए सर्वेक्षण और भ-ू तकनीकी जांच के लिए निविदा कार्य प्रगति पर है। वैपकोस ने फीजी में विभिन्न विभागों को कई प्रस्ताव भी दिए हैं जिनमें से कई को लेकर जल्दी ही काम शरू ु होने वाला है। फीजी की कु छ सफल परियोजनाओ ं की तस्वीरें नीचे दी गई ह:ैं

नमाउ बांध के निर्माण के लिए चल रहा नदी डायवर्जन कार्य

वैपकोस और फीजी के अर्थव्यवस्था मंत्रालय, इन्फ्रास्ट्रक्चर और परिवहन मंत्रालय तथा सरकारी नौवहन सेवा के साथ बैठक

प्रवासियों के साथ:

44वें भारत को जानो कार्यक्रम में कुल प्रतिभागियों में से एक-तिहाई फीजी से थे

विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज और माननीय श्री एम जे अकबर के साथ भारत को जानो कार्यक्रम के प्रतिभागी। 50

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सव ू ा में भारतीय टीम

मुख्य सपं ादकः विश्वास सपकाल – उच्चायुक्त कार्यकारी मुख्य सपं ादकः सज ं य कुमार – अताशे पब्लिसिटी नवाचार निदेशकः रविकांत यादव – सहायक सेक्शन आफिसर कला, शोध एवं डिजाइन – सोनिया खान – सहायक प्रोग्राम आफिसर सेरिमा द्रोतिनी – सहायक पब्लिसिटी आफिसर योगेन्द्र कुमार – पुस्तकालय प्रमुख विशेष धन्यवाद – भारत पर्यटन – सिडनी

भारतीय उच्चायोग, एल.आई.सी.आई बिल्डिंग, लेवल-7, बट् स्ट्रीट, सवू ा, फीजी टे लीफोनः + (679) 3301125 | फै क्सः + (679) 3301032 | आपात्कालीन सपं र्कः + (679) 9921474 ईमेलः hc.suva@mea.gov.in | वेबसाइटः http://www.indianhighcommissionfiji.org/ @IndiaInFiji

@HCI_Suva

India In Fiji


तीसरा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

तीसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सवू ा, फीजी स्थित एल्बर्ट पार्क में स्कू ली बच्चे

एल्बर्ट पार्क में वीआईपी अतिथि (बाएं से दाए)ं - तत्कालीन शिक्षा मंत्री माननीय महेन्द्र रेड्डी, फीजी गणराज्य की सस ं द के सभापति और मुख्य अतिथि माननीय डा. चीको लुवेनी, महिला, बाल एवं गरीबी उन्मूलन मंत्री माननीय मेरेसेइनी वूनीवांगा और फीजी में भारत के उच्चायुक्त महामहिम विश्वास सपकाल

फीजी गणराज्य की सस ं द के सभापति और मुख्य अतिथि माननीय डा. चीको लुवेनी लोगों को सबं ोधित करते हुए

तीसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दौरान नाउरू के राष्ट्रपति महामहिम श्री बैरन वांगा (पहली पंक्ति के बीच में)

किरीबास के राष्ट्रपति महामहिम श्री तनेती मामउ अपनी धर्मपत्नी के साथ किरीबास में तीसरे योग दिवस में भाग लेते हुए

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India in Fiji 2017 - Transcend Volume 2 (Hindi)  

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