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(A Monthly Research Journal Published in English, Hindi and Urdu)

Vol - 1

Issue - 2

April - 2018

Editor Anish Kumar Co-Editor Dr. Gulzar Ahmed Aasif R. Wani Ashok K. Sakhwar Shesh N. Vernwal

Website: www.pijssl.com E-mail: editor.pijssl@gmail.com

Praxis International Journal of Social Science and Literature

[Vol-1, Issue-2, April-2018]

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ामीण मिहला सशि रण एवं संवध ै ािनक ावधान ीलेखा कु मारी शोधाथ , एम. फल. हदी सािह य, म.गा.अ.िह.िव.िव.,वधा, महारा E-mail : srilekhakumari@gmail.com

----------------------------------------------------------मिहला सशि करण क बात करते ए सव

थम हमे जानना होगा क आिखर मिहला सशि करण या है?

वा तव म मिहला सशि करण एक िवचारधारा है, जो िश ा के मा यम से मिहला जाता है । नव

ी िव

सं कृ ित का मूलाधार है । प रवार, समाज, रा और मानवता से

को उनके अिधकार से अवगत कराया ी का सीधा सरोकार है । सं कृ ित क

ी से ही सुदढ़ ृ बनी है । मािहला सशि करण के बारे म जानने से पहले हमे यह समझ लेना चािहए क हम सशि करण से या समझते है?

सशि करण का ता पय कसी ि क उस मता से है िजससे उसमे अपने जीवन से जुडी उस मता से है िजससे मिहलाएं अपने शोषण व अपराध के िव आवाज उठा सके । अपने जीवन से जुड़े िनणय खुद ले सके । िविभ लेखक और िवमशकार ने िभ -िभ तरीके से मिहला सशि करण को प रभािषत कया है । मीना ी िनषाद सह मिहला सशि करण को प रभािषत करते ए कहती ह- “मिहला सशि करण अथात मिहला को वे सारे उपकरण उपल ध करवाना िजनक सहायता से आधी दुिनया उ ित कर सकती है, आगे बढ़ सकती है ।”1 स पूण मिहला

के िवकास हेतु मिहला

का सशि करण अितआव यक है । मिहला

सशि करण दोन श द एक दुसरे से जुड़ी ई है । मिहला

का िवकास और

क सामािजक ि थित पर नजर डाले तो पता चलता है, एक लंबे

अरसे से ही मिहला क ि थित दोयम दज क रही है । िपतृस ा मक समाज व था होने के कारण प रवार का संचालन पु ष /िपता रा कया जाता रहा है । ी के संप ूण जीवन चाह आ थक हो या शारी रक सभी पर िपतृस ा मक व था का िनयं ण रहता है । यही कारण है क ामीण मिहला का जीवन दन व दन बत-से ब र होते जा रहा है । वह कसी भी कार का िनणय वंय लेने म खुद को अ म पाती है । दुसरा कारण है ामीण तर म मिहला का अिशि त होना । यही कारण है क ामीण मिहलाएं अपने शोषण के िव

आवाज नह उठा पाती है । घर प रवार, ब े से िजतना समय िमलता

है पूजा–पाठ, त- योहार म उलझी रहती है । डॉ. आनंद कु मार खरे मिहला सशि करण के अथ को प रभािषत करते ए कहते ह–“सशि करण का अथ है आ म स मान, आ म िनभरता और आ मिव ास, य द कोई मिहला अपने अिधकार के बारे म सजग है, उसका आ म स मान बढ़ा है, तथा सश

है समथ है ।”2

िविभ योजना प रयोजना और पंचवष य योजना के मा यम से सरकार ने मिहला िश ा को बढ़ावा देने का पुरजोर यास कया और आशातीत सफलता भी िमली । उस प रवतन के संबंध म िस िश ा शा ी के . नटराजन ने कहा– “सौ वष पूव मरने वाला

ि

फर जीिवत हो तो उससे आ य च कत करने वाला सव थम और सबसे मह वपूण

प रवतन ि य क ि थित म ांितकारी प रवतन होगा ।”3 नारी पु ष क पूणता है । इसके िबना दूसरा अपूण है नारी सृि क मूल है । इसके िबना मानव समाज का क पना करना ही असंभव है । आदश

ी माँ, प ी, ेयसी, पु ी, देवी और दानवी भी है ।

तुत करने वाली सती भी है । नाना

ी पित त धम का पालन करने वाली अदभूत

प म मानव जीवन को सदैव से भािवत करने वाली नारी अनसूझ पहेली

रही है । परं तु यह यथाथ है क मानव सबंध को गित देने वाले जीवन नामक रथ का एक च

है, िजसक उपे ा करके

मानव-जीवन एक पग भी आगे नह बढ़ सकता । Praxis International Journal of Social Science and Literature

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डॉ. िवकास कु मार कहते है- “नारी सशि रण क अवधारणा साम यात: जो बात समझ म आती है वह है ऐसे यास क सम ता, जो वैयि क, सामूिहक या सं थागत तर पर नारी को

थक

ढ़य से वतं

करने, मयादा के

आवरण म िलपटे ढकोसल से उसे बचाने आ थक, मनोवै ािनक, सामािजक आ द ।”4 स दय से समाज के पु ष और नारी पी दो िह स म से नारी को ही समाज म कमजोर समझा जाता रहा है और िनि त तौर पर आज भी ऐसी ही धारणा बनी ई है । आज भी ामीण े म मिहला क ि थित म कोई िवशेष बदलाव नह आया है । अत: आज भी ामीण मिहला क ि थित बत से ब र है । युग से ही मिहला को अश समझा गया और उसे के वल गृह काय के िलए ही उपयु समझा गया िजससे उसका मनोवल और नैस गक कामनाएँ धीरे-धीरे कम होती गई । सशि करण के मा यम से उ ह इस दु चक से बाहर िनकालना अितआव यक है । िश ा के मा यम से ितभा को बढ़ावा देकर उ ह सश

ी को अपने अिधकार के

ित जाग कता,

बनाया जा सकता है । भारतीय समाज

ान, सूचना एवं उसक

व था मूलतः िपतृस ा

भारतीय संदभ म दृि पात करने से यह प ट होता है क हड़ पा और मोहन जोदड़ स यता

धान है, परं तु

म मातृ कु ल देिवय क पुजा

एक कार से मातृस ा का ही अंग है । वै दक स यता का अ ययन करने से पता चलता है- “य नाय तु पू य ते रम ते त देवता” के बाद समाज म

ी क ि थित िनरंतर दयनीय ही होती गई है । िपछले पाँच हजार वष म हम िपतृस ा ही

दखाई दे रही है । इससे पूव अलग-अलग समाज म मातृस ा भी रही है । वतमान समय म भी भारत के कु छ ा त म मातृस ाहै, क तु मातृस ा मक िपतृस ा है, के वल उसका

व था का व तुिन सव ण करने से पता चलता है क वहाँ भी कसी न कसी

प िभ है ।

मिहला सशि करण 21व सदी क एक मह वपूण और ब च चत िवचारधारा है । इसके अंतगत मिहला िश ा के मा यम से सामािजक, आ थक, राजनैितक और कानूनी संवेदनशीलता रा मिहला

पम

को िपतृस ा मक दृि कोण के

आंदोलन और यूएनडीपी अंतररा ीय सं था

कया जाता है ।

को

ी सशि करण के

ित जाग क कया जाता है । वै ीक तर पर बात कर तो नारीवादी ने मिहला

को सामािजक समानता, वतं ता और याय के राजनीितक

अिधकार को ा करने म मह वपूण भूिमका िनभायी है । मिहलाएं समाज का आधा अंश होती है, ले कन िपतृस ा मक सामािजक संरचना म िपतृस ा मक मू य ि य पर थोप दया जाता है । अतःसशि करण तभी साथक होगा जब मिहलाएं सव थम अपनी वहार और दृि कोण म बदलाव करेगी । मिहला सशि करण क दशा म सबसे बड़ा रोड़ा मिहला का अिशि त होना और जाग कता का न होना है । य द मिहला को समाज म अपने ि व िनमाण के िलए समान अवसर देकर मिहला मिहला

को िशि त बना दया जाय और सामािजक, आ थक, राजनैितक अिधकार के

ित जाग क हो जाएंगी तो

को कसी भी तर पर नह दबा पाएगा । समाज से असमानता तभी दूर कया जा सकता है जब

ी-पु ष के बीच आिधप य का समाज न हो, असमानता या

म चलाने का संबंध न हो, मािलक या नौकर का र ता न हो । मातृस ा और िपतृस ा दोन अवधारणाएँ ही अनुि चत है । वा तव म

ी-सशि करण का उ े य िपतृस ा मक समाज को चुनौती देना नह है बि क एक ऐसे समाज का िनमाण

करना है जो याय क नयी समझ पर आधा रत हो, जहाँ

ी-पु ष का संबंध मािलक-दास के वजाय साथी, हमराही होने का

भाव क म हो । वतं ता ाि के उपरांत मिहला को सभी े म पु ष के बराबर अिधकार दलाने म संिवधान िनमाता डॉ. भीमराव अंबेडकर का अिव मणीय योगदान है । भारतीय संिवधान के अनु छे द 14-16 म अपने ि व िवकाश हेत ु ीपु ष को समानता का दजा दान कयाहै । के वल संिवधान म मिहला

को अिधकार देने मा से स दय से शोिषत, वंिचत,

पीिड़त, उपेि त, तािड़त नारी को पूण पेन वतं ता िमल पाना संदेह द था । इन सम या को म न े जर रखते ए डॉ. अंबेडकर ने “िह दू कोड िबल” का िनमाण कया । डॉ. अंबेडकर का मानना था क “िववाह और संपि चिलत क़ानून म ाितकारी प रवतन लाएं िबना नारी क मुि

पर अिधकार संबंधी

संभव नह है ।”5

अिधकांश मिहलाएं अपने सामािजक, आ थक, राजनीितक, दािय व व संवैधािनक आिधकार को जानती तक नह । अिधकांश ामीण मिहला

को यह जानकारी नह है क उनके सुर ा के िलए या- या कानून बनाए गए ह । सामािजक

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े म क या के िववाह के समय दहेज देन े क था, मिहला

और अवय क बि य के साथ बला कार, कसी प रवार से

आपसी दु मनी िनकालने हेतु उनके प रवार के मिहला या बि य पर तेजाब डालना या उनके साथ बला कार करना, दहेज के िलए मिहला

को जलाना, आ मह या के िलए े रत करना,

ूण ह या के िलए दबाब डालना, अपने जीवन साथी को

चुनने का अिधकार न होना आ द के सामािजक अिधकार का हनन ही तो है । अतः िश ा, िववाह, उ रािधकार, िववाह िव छे द का अिधकार, संप ि मिहला प

के अिधकार को सुरि त करने हेतु मिहला

का अिधकार आ द सभी प

को लेकर

को सव थम िशि त करना और अपने अिधकार के िलए कानून के

को समझाना अितआव यक है । डॉ.अंबेडकर ने भारतीय नारी को समाज म समान अिधकार दलाने हेतु “िह दू कोड

िबल”6 के मा यम से संवैधािनक अिधकार दलाकर मिहला सशि करण म मह वपूण भूिमका िनभाए । समानता का अिधकार, वतं ता का अिधकार, शोषण के िव

अिधकार, धा मक वतं ता का अिधकार, िश ा व

सं कृ ित का अिधकार, संवैधािनक संर ण का अिधकार, दहेज िनषेध अिधिनयम 1961ई. भारतीय समाज म मिहला जाता है । एक तरफ समाज म

को िविभ

दैिवक

प ल मी, सर वती, दुगा, काली, गंगा, यवुना के

ी को दैिवय प म पूजा करते है, वही दूसरी तरफ मिहला

प म पूजा

के साथ घरे लू हसा से लेकर

सामूिहक बला कार दन-ब- दन बढ़ता ही जाता है । वष 2011 म इं दरा गांधी शांित पुर कार समारोह म रा पित णब मुखज ने मिहला

के सशि करण पर ज़ोर देते ए कहा था क “रा क आ थक गितिविधय म मिहला

क उिचत

भागीदारी के िबना सामािजक गित नह क जा सकती है ।”7 वा तव म देखा जाय तो “मिहला सशि करण” का अथ है मिहला

को आ मस मान देना, उनका आदर करना और

िवकास के सारे रा ते मुहैया कराते ए उ ह आ मिनभर बनाना, ता क अपनी अि त व क र ा खुद कर सके । मिहला सशि करण म मिहला

के िलए समानता क बात क जाती है । मिहला सशि करण म मिहलाएं अपनी अिधकार क

बात करती है । िवशेषकर ेड यूिनयन , कामगार मिहला

के वेतन म भेदभाव और काय थल पर मिहला

खराब होने, द तर म लिगक भेदभाव तथा िविभ सं थान म या समाज म यौन ताड़ना

क सम या

के काय करने और दहेज था

जैसी सम या को समा करने क बात क जाती है । मिहला क संवैधािनक अिधकार क बात करे और डॉ.अ बेडकर के “िह दू कोड िबल” को नजरअंदाज करना डॉ. अंबेडकर के नारी मुि अिभयान के साथ अ याय ही होगा । यही वह द तावेज़ है िजसम उ होन स दय से गुलामी क जंजीर म जकड़ी ई मिहला को वतं जीने के िलए और मानवीय हक दलाने क व था क थी । डॉ. अंबेडकर मिहला को िपतृस ा मक समाज व था से िनजात दलाने हेतु सन 1951 ई. म संसद म “िह दू कोड िबल” तुत कया । इस िवधेयक का उ े य था समाज म मिहला को िवशेष अिधकार देकर समानता के धरातल पर लाना । उस समय तो “िह दू कोड िबल” पास नह हो पाया िजस कारण िनराश होकर 27िसतंबर, 1951ई. को मं ीप रषद से इ तीफा दे दया । उनके रा िविभ

धारा

तुत “िह दू कोड िबल” उस समय तो पूण

प से पा रत नह हो पाया था, क तु समय-समय पर उसक

को वीकार कया जाता रहा है । िववाह, तलाक, सं पित, भरण-पोषण, दहेज, बाल-िववाह, द क हण,

ी धन संबंधी अिधिनयम, जैसे िवशेष िववाह अिधिनयम 1954 ई., िह दू उ रािधकार अिधिनयम 1956 ई., िह दू द क हण िनवाह अिधिनयम 1956 ई., िह दू िनवाह अिधिनयम 1959ई., मातृ व िहत लाभ अिधिनयम, बाल िववाह ितबंध अिधिनयम आ द पा रत कए गए, िजससे भारतीय नारी सुरि त एवं वतं जीवन िनवाह कर सके । संिवधान िनमाता डॉ. अंबेडकर का मानना ह क “अिधकार मांगने से नह िमलते है, बि क उसे छीनकर लेन ा पड़ता ह ।”8 मिहला

के उ थान के िलए िविभ अिधिनयम तो बनाए गए है, क तु पूण

प से लागू नह हो पाया है । य द

भारतीय नारी के उ थान संबंधी िवधेयक क इस कार िख ली नह उड़ाई जाती । वतमान समय म िविभ िवधेयक क धि या उड़ाकर खुले आम बाल िववाह व अनमेल िववाह नह होते, दहेज के कारण मासूम लड कय को मौत का घाट नह उतारा जाता । ज म होने से पहले ही ूण ह याएँ नह होती ।

ी िश ा का इतना हौवा खड़ा करने पर भी वतमान समय म

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मु ीभर नाम मा ही मिहलाएं िशि त हो पाई ह, इसम भी ामीण तर पर और दिलत मिहला का ितशत लगभग शू य ही है । भारतीय मिहला वग को यह अ छी तरह समझना पड़ेगा क साहस व संघष से ही उनका पुन मुि

थान और उनक

संभव है । कायरता म उसक दासता, गुलामी और पतन ही है । मिहला

को सश

बनाना वतमान समय का सबसे मह वपूण मु ा है । उ ह सश

बनाने का सबसे उपयोगी

तरीका उ ह उनक संवैधािनक अिधकार और कानूनी अिधकार क जानकारी देना है, ता क वह जान सके क कानून ने उ ह कतनी सुर ा दान क है । अपने ऊपर हो रहे अ याय, अ याचार, शोषण, उ पीड़न का मुक़ाबला कै से कर सकती है? मिहला

के संवध ै ािनक ावधान : संिवधान िनमाता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भारतीय संिवधान म मिहला

ावधान कया है । मिहला

के िलए िश ा,

ाि के प ात भारत के िवचारशील नेत ा

को पु ष के समान अिधकार का

वसाय, राजनीितक, समाजसेवा आ द सभी

ने समाज म समानता लाने हेतु मिहला

क बात क ले कन कु छ सामािजक कु सं कार , कु रीितय ने अभी तक मिहला

को सभी

खुले ए ह । वतं ता े म समान अिधकार देने

को पजड़े म जकड़ रखा है । आम ामीण

भारतीय नारी तो यह भी नह जानती है क उनके क याण हेत ु कौन से कानून बने है? उ ह अपने

ि

व िवकास हेत ु कौन-

कौन से अिधकार िमले है? भारतीय संिवधान

येक नाग रक को सामािजक याय, समानता, वतं ता, ित ा िबना कसी भेदभाव के

करता है । भारतीय संिवधान के अनु छे द 15 म कहा गया है क रा य कसी नाग रक के िव

दान

धम, मूलवंश, जाित, लग

या ज म थान या कसी एक के आधार पर भेद भाव नह करेगा । परं तु िवड बना यह है क वतमान समय म ि य के िव

उ पीड़न, बला कार, लिगक उ पीड़न िवशेषत: समूिहक

काय थल पर मिहला के साथ उ पीड़न बढ़ता ही जा रहा है । आजादी के 65 वष बाद भी मिहला के संवैधािनक अिधकार वा तव म नह िमल पाया है । यादातर इन अिधकार का उलंघन ही होता रहा है । ऐसा भी नह है क मिहला के तर को उठाने के िलए सरकार कोई कायनह कया हो । सरकार मिहला के तर उठाने के िलए मह वपूण यास कए ह । इं ि दरा गांधी आवास योजना, लाड़ली योजना, बेटी पढ़ा बािलका समृ

बेटी बचा

योजना, इं ि दरा मिहला िवकास योजना,

योजना, कशोरी बािलका योजना आ द सरकार ने मिहला

के िवकास के िलए बनाए ह । इतने सारे

ावधान के बावजूद भी ात होता है क मिहला वग अिधकांशत: उन सब यास से लाभाि वत नह हो पाया है । इनके पीछे अनेक कारण है । जैसे – 1.

ामीण मिहला

म िश ा क कमी ।

2. अिश ा के कारण ा प से ढ़वादीता का होना । ामीण मिहला अिशि त होने के कारण अपने संवैधािनक अिधकार को नह जान पाती ह और आसपास से कु छ जानकारी िमल भी जाती है तो सामंती समाज मिहला को आगे कदम बढ़ाने नह देती ह । और जो मिहलाए िह मत कर कदम बढ़ाती है वह लाभाि वत भी होती है । ऐसे मिहला क सं या अंशत: ही है । इसिलए उ िश ा ा कर रहे जाग क वग चाहे मिहला हो या पु ष उनका दािय व है क ामीण मिहला को उनके अिधकार के ित जाग क एवं सजग बनाएँ । भारतीय सिवधान म मिहला का अिधकार : भारतीय कानून भारतीय संिवधान रा अिधकृ त होता है । भारतीय संिवधान रा सामािजक याय का मानदंड दो कार से लागू कया गया है 1. “देश के सभी नाग रक को समान अिधकार देकर चाहे

ी हो या पु ष, इसे ही नाग रक का मौिलक अिधकार के

नाम से जाना जाता है । 2. सरकार क िस ांत को लागू करने के िलए िनदश देकर उ ह रा य के नीित–िनदशक त व कहा जाता है ।”9 भारतीय संिवधान भारतीय मिहला

के उ थान के उ े य से िवशेष अिधकार दान करती है जो इस कार है –

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1. “भारतीय संिवधान मिहला 2. संिवधान िनिहत य करेगी।”10

और पु ष म लिगक भेदभाव िमटाने क कनशा रखता है ।

प से यह उ मीद रखता है क सरकार सभी कमजोर वग क ि थित सुधारने के िलए िवशेष

समानता का अिधकार अनु छे द 14-18– अनु छे द (14-18) म भारतीय संि वधान समानता के अिधकार रा सभी

ि य

को वैधािनक,नाग रक एवं सामािजक समानता दान करती है । समानता के अिधकार के तहत मु य पाँच अिधकार शािमल ह1. “अनु छे द 14 म िविध के सम समता और िविध का समान संर ण 2. अनु छे द 15 म धम, मूलवंश, जाित, लग या ज म थान के आधार पर िवभेद का िनषेध कया गया है । 3. अनु छे द 16 म लोक िनयोजन के िवषय म अवसर क समानता का ावधान है । 4. अनु छे द 17 म अ पृ यता का अंत 5. अनु छे द 18 म उपािधय का अंत”11 मिहला             

के संवध ै ािनक अिधकारकामकाजी मिहला के अिधकार वैवािहक अिधकार धा मक अिधकार सामािजक अिधकार ावसाियक अिधकार कानूनी अिधकार संपि का अिधकार पा रवा रक अिधकार मिहला के मानव अिधकार िवचार और अिभ ि क वतं ता मणक वतं ता िनवास क वतं ता शोषण के िव अिधकार समाज म ी-पु ष म भेदभाव न कया जाए इसके र ोपाय के िलए भारतीय संिवधान के अनु छे द इस कार है-

अनु छेद -15 म धम के आधार पर भेदभाव पर ितबंध- भारतीय संिवधान के अनु छे द 15 जाित, धम, लग या ज म थान के आधार पर मिहला

को अयो य नह ठहराया जाएगा और कसी भी सावजिनक थान पर जैसे–मनोरंजन थल,

भोजनालय, थल या कु एं पर जाने क अनुमित दान करती है । अनु छेद -16 सावजिनक रोजगार के अवसर क समानता– भारतीय संिवधान क धारा 26 के अनुसार सावजिनक रोजगार के िलए सभी नाग रक को समान अवसर दान करती है । अनु छेद -19 भाषण देन े क

वतं ता के िवषय म समानता– भारतीय संिवधान क धारा 19 म सभी नाग रक को संगो ी

या सभा या सेिमनार म अपनी िवचार तुत करने क समान अवसर दान करती है । अनु छेद -23 मानव के प य (िव य और ापार )और बला कार म का िनषेध - मानव का प य और बेगार तथा इसी कार का अ य जबद ती डरा धमका कर िलया गया म का िनषेध कया जाता है और इस उपबंध का उ लंघन करना अपराध होगा तथा दंडनीय होगा । अनु छेद - 39 रा य ारा अनुसरणीय त व 1. भारतीय संिवधान समान

प से

ी-पु ष सभी नाग रक को जीिवका िनवहन हेतु पया साधन पा

करने का

अिधकार हो, 2. पु ष और ि य , दोन को समान काय के िलए समान वेतन हो, Praxis International Journal of Social Science and Literature

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3.

िमक पु ष और ि य के वा य और शि

तथा बालक क सुकुमार अव था का दु पयोग न हो तथा आ थक

आव यकता से िववश होकर नाग रक को ऐसे रोजगार म न जाना पड़े जो उनक आयु या शि

के अनुकूल न हो,

4. शैशव और कशोर अव था का शोषण से तथा नैितक और आ थक प र याग से संर ण हो, भारतीय संिवधान के अनु छेद – 42 - भारतीय संिवधान के अनु छे द 42 म भारतीय कामकाजी मिहला

के गभाव था के

दौरान काम करने क छू ट तथा मातृक अवकाश देने का अिधकार का ावधान ह । अनु छेद- 325 : धम, मूलवंश, जाित या लग के आधार पर कोई

ि

िनवाचन–नामावली म स मिलत कए जाने के िलए

अपा न होगा तथा कसी िवशेष िनवाचन नामावली म स मिलत कए जाने का दावा न करेगा । अनु छेद-326: लोकसभा और रा य क िवधानसभा के िनवाचन का वय क-मतािधकार के आधार पर होना । “लोकसभा तथा येक रा य क िवधानसभा के िलए िनवाचन वय क-मतािधकार के आधार पर ह गे अथात येक ि जो भारत का नाग रक है तथा जो ऐसी तारीख पर जैसे क समुिचत िवधान म डल रा िन मत कसी ितिथ के ारा या अधीन हो इसिलए िनयत क गई हो तथा इ स वष क अव था से कम नह है तथा इस संिवधान अथवा समुि चत िवधान-मंडल रा िन मत कसी िविध के अधीन िनवास, िचत-िवकृ ित, अपराध अथवा अनह (अयो य करार) नह कर दया गया है, ऐसे कसी िनवाचन म मतदाता के

या अवैध आधार के आचार पर

प म पंजीब होने का हकदर होगा ।”12

भारतीय संिवधान के अित र मिहला को संर ण देने वाले मह वपूण अिधिनयम इस कार ह “दहेज िनषेध अिधिनयम 1961  वे यावृित िनवारण अिधिनयम 1956(संशोधन1986)  िह दू िववाह अिधिनयम 1955  िवशेष िववाह अिधिनयम 1954  श रयत ाथना अिधिनयम 1937  िसनेमैटो ाफ अिधिनयम 1952  मुि लम िववाह भंग अिधिनयम 1959  ी अिश पण ( ितबंध )िनयम 1956  बाल िववाह अवरोध-अिधिनयम 1929  िच क सा गभ समा ी अिधिनयम 1956  िह दू गोद लेना एवं भरण-पोषण अिधिनयम1956  िह दू उ रािधकार अिधिनयम 1956  द ली पुिलश अिधनयम 1978(मिहला के साथ छे ड़खानी)”13 मिहला को उनके मानवोिचत अिधकार दलाने हेतु और उनके अिधकार का हनन रोकने हेतु तथा उसके वा तिवक हक दलाने हेतु अंतररा ीय मानव अिधकार आयोग, रा ीय मानव आयोग, रा य मानव अिधकार आयोग एवं रा ीय मिहला आयोग जैसी सं था का गठन कया गया । ये सं थाएं मिहला को जाग क कर उनके शोषण के िव आवाज उठाने क शि दान करती है । भूत पूव धानमं ी अटल िबहारी वाजपेयी ने रा मंडल के मिहला मामल के मंि य के छठी बैठक का उ घाटन करते ए कहा था क “मिहला का मानव अिधकार सुिनि त करना सभी नाग रक के बुिनयादी अिधकार क मह वपूण ितब ता है । इस ितब ता के अनुगमन के प म रा ीय मिहला आयोग ने मिहला पा रवा रक अदालत के नाम से मिहला लोक अदालत को ायोिजत करने का िनणय िलया ।”14 कामकाजी मिहला का अिधकार : वतमान समय म अिधकांश मिहलाए कही न कही काम करती ह । वह घर का दैिनक काय िनपटा कर पैसा कमाने के उ े य से घर के बाहर भी काय करती ह । इनके िलए भी कु छ मूल अिधकार दए गए ह, िज ह काय म लाने हेतु अलग-अलग कानून बनाए गए ह जो इस कार है काम करने वाले हर मिहला या पु ष को काम करने के िलय वेतन या मजदूरी िमलनी चािहए ।  यह वेतन या तन वाह कम से कम उतनी होनी चािहए, िजतनी सरकार ने तय क हो । यािन यूनतम मजदूरी िमलनी चािहए ।  बराबर के काम के िलये मिहला को पु ष के बराबर पैसा िमलना चािहये, इससे कम नह ।”15 Praxis International Journal of Social Science and Literature

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वतमान समय म पु ष से

येक

ित पधा करती

ई मिहलाएं घर एवं बाहर दोन क िज़ मेदारी

कु शलतापूवक िनवहन करती ई िनरं तर बढ़ती चली जा रही है । चाहे वह कोई भी राजनीित, िव ान, समाजसेवा, मीिडया या िश ा आ द अ य

े हो शासन, यांि क , िच क सा,

म नारी क सहभािगता सराहनीय है । इतना ही नह

बि क िजस चाँद को पृ वी म ई र मान कर पूजा जाता है उस चाँद पर जाने म औरत को कसी कार क िहच कचाहट नह

ई । इतना ही नह एवरे ट क ऊँचाई को नापने म भी मिहलाएं आगे रही । बछ ी पाल, क पना चावला, सुनीता

िविलय स इसका उदाहरण ह । आंत र म सबसे यादा समय तक ठहरने वाले वै ािनक सुनीता िविलय स ही है । इ ह ने देश का गौरव और नारी स मान बढ़ाकर इितहास म अपना थान अं कत कया है । आज

ी-पु ष के म य भेद हटाकर िवकास क ओर बढ़ती ई नारी को कानूनी

प से संपि

रखने या खरीदने,

चाहे खुद का कमाया हो या दान म िमला आ संपि

हो, कसी को भी दे

बेचने का अिधकार या उ रािधकारी का अिधकार है जो इस कार ह येक औरत अपने नाम से संप ि खरीद या इक ा कर सकती है । 

येक औरत अपने अिधकार क संपि

सकती है या बेच सकती है ।  समाज के येक औरत को यह कानूनी अिधकार है क अपनी कमाई का पैसा खुद ले ।  भारत के नाग रक होने के नाते मिहला को भी पु ष के समान अिधकार है संप ि खरीदने या बेचने का । संदभ थ ं : 1. ितवारी, वाित. (2007). म औरत ँ–मेरी कौन सुन ेगा. द ली : (संजीव काशन ), पृ 16 2. सह, िनशांत. मीना ी. (2009). मिहला सशि करण का सच. द ली : (ओमेग ा पि लके शन). पृ 1 3. नईम, मुह मद. (2014). मिहला सशि करण : चुनौितया एवं समाधान. द ली : (यूिनवर सटी पि लके शन). पृ 26 4. वही, पृ 27 5. वही, पृ 105 6. कालरा, डॉ. िवनोद. (2015). 7.

ी सशि करण िविवध प र े . द ली : (तेज काशन). पृ 115

होरा, आशारानी. (2006). औरत कल, आज और कल. द ली : (क याणी िश ा प रषद). पृ 133

8. चंदेल, डॉ. धमवीर. (2016). अंबेडकर के चतन म मानवािधकार. जयपुर : (पोइ टर पि लके सन). पृ 56 9. वही, पृ 63 10. शमा, रमा. िम ा, एम. के . (2012). मिहला

के कानूनी धा मक एवं सामािजक अिधकार. द ली : (अजुन

पि ल शग हाउस). पृ 38 11. मंगलानी, डॉ. पा. (1998).भारतीय शासन एवं राजनीित. जयपुर : (राज थान थ ं िह दी अकादमी). पृ 124 12. विश , ो.स रता. (2010). मिहला सशि करण. द ली : (क पना काशन). पृ 76 13. वही, पृ 82 14. वही, पृ 125 15. दवे, वी. डॉ. दीिपका. (2014). 21व सदी म मिहला सशि करण. द ली : (रावत काशन). पृ 30

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श्रीलेखा कुमारी  
श्रीलेखा कुमारी  
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