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छद्म रेखक


आऩ सबी मभत्रो का भै आबायी हु जो आऩने अऩने फहुभूल्म सभम से कुछ सभम ननकर कय

इनभे से कुछ कहाननमा भोदहत शभाथ जी के कहने ऩय मरखी थी एक प्रनतमोगगता के मरमे !

! आऩ सोच यहे होंगे मह क्मा नाभ हुवा ? तो

जगहों ऩय आऩको शब्दों भें भात्राओॊ भें गरनतमा

भेये ईस तुच्छ प्रमास को ददमा ! “छद्म रेखक “ बूमभका ना फाॊधते हुमे भै फस ईतना ही कहना चाहूॉगा के रेखन भेया ऩेशा नहीॊ है औय ना ही भै कोई ऩेशव े य रेखक हु ! वह आऩ ईस ऩुस्तक को ऩढकय खुद ही सभझ जामेंगे ! ‘छद्म ‘ माने झूठा ! मभथ्मा !भ्रभ ! चाहे जैसे इसका अथथ मरमा जामे !

हभाये मभत्र “भोदहत शभाथ “ जी को दे ख कय हभने बी मरखने का प्रमास ककमा , चॉूकक भै ईस

ववधा भें नौमसखखमा हु ईसमरमे भेया रेखन शामद हास्मास्ऩद हो ! त्रुटीमो से ऩरयऩूणथ ! हभाये अॊदय कबी -कबी ही रेखन का बूत

जागत ृ होता है ! इसमरए हभ खुद को ‘छद्म रेखक ‘ कहते है !चाहे जो बी हो रेककन आऩ

सबी का भागथदशथन फहुत जरुयी है ,प्रस्तुत ऩुस्तक भें भैंने अफ तक मरखे हुमे अऩने कुछ चुननन्दा रेख एवॊ कहाननमो का सभावेश ककमा है !

भुखऩष्ृ ठ साबाय : सुयेश कुभाय

तो भैंने उन्हें बी इसभें स्थान ददमा ! हाॊ कई मभरेंगी ! भैंने उन्हें सुधाया बी नहीॊ .

क्मोकक जैसे स्वरूऩ भें भैंने इन्हें प्रस्तुत ककमा था उसी भूर स्वरूऩ भें आऩके साभने ऩेश कयना

था ! आऩ ऩढ़ कय अऩने अभूल्म ववचायों से अवश्म अवगत कयामे !

क्मोकक भेयी प्रेयणा आऩके शब्द ही है ! औय हाॊ गरनतमा बी ददर खोर कय ननकार सकते है आऩ ! नहीॊ ननकारेंगे तो सुधायें गे कैसे ?

भैंने ईस ऩुस्तक भें हय तयह की कहाननमो का सभावेश ककमा है जजसभे कोई साभाजजक है ! कोई योभाॊचक !व्मॊग्म ! ! कोई जासूसी !

कहने का भतरफ है के इसभें भैंने मथासम्बव

अऩने हय तयह के रेखो का सभावेश ककमा है ! जो अफ तक आऩने ऩढ़ा है ! फस उसी का सॊकरन है मह ! एक छोटा सा प्रमास !

आऩके ईस मभत्र का ! अऩनी सभीऺामे , सुझाव ,मशकामते ,सन्दे श आऩ भुझे सीधे बेज सकते है !

दे वेन ऩाण्डेम पेसफुक आमडी : https://www.facebook.com/devenrrp जी भेर

: dvnpandey@gmail.com

माहू

: devenrrp@yahoo.com

© सवाथगधकाय सयु क्षऺत

: ‘छद्मरेखक ‘भें प्रकामशत सबी यचनाओ का सवाथगधकाय रेखक एवभ ‘’फ्रीराॊसय

टै रेंट्स ‘’ के ऩास सयु क्षऺत है .


फोनस सयु े श झुॊझरामा हुवा था ! आखखय सार बय के इन्तेजाय के फाद फोनस मभरा था , खुश होने के फजाम वह कापी नायाज था . “ मह क्मा है माय ? हभें कहा गमा था के फोनस भें एक फेमसक सैरयी मभरेगी ! औय हाथ भें थभा ददमा गमा मह , आधी फेमसक से बी कभ “

“जाने दे सयु े श ! अफ गस् ु सा कयने से क्मा पामदा है ? भैनेजभें ट ने कह तो ददमा की ईस फाय कम्ऩनी कापी घाटे भें यही है , इसके फावजूद अगय हभें फोनस के तौय ऩय कुछ ददमा है तो हभें इसभें खुश ही होना चादहमे ! खाभखाह ददर छोटा क्मों कयता है ? दो ददन फाद ददवारी है ,भड ू भत खयाफ कय .” सतीश जो के याजेश का अच्छा मभत्र एवॊ सहकभी था ,याजेश को सभझाते हुमे कह यहा था . “तू नहीॊ सभझता सतीश ! मह भैनेजभें ट के चोंचरे है ,कहते है कम्ऩनी घाटे भें थी ! भै कहता हु क्मा कम्ऩनी जफ पामदे भें होती है क्मा तफ कभथचारयमों को अरग से कुछ दे ती है क्मा ? नहीॊ न ! कपय मह कटौती मसपथ हभाये फोनस भें ही क्मों ? “ सयु े श शब्ु ध था ! हो बी क्मों ना ? कापी ददनों से वही ऩयु ाना

भोफाईर ईस्तेभार कय यहा था ! हय फाय सोचता था के ईस सैरयी भें एक फदढ़मा सा ‘स्भाटथ पोन ‘ तो रे ही रेगा .

रेककन सायी सैरयी तो आजीववका ननबाने भें ही खत्भ हो जाती थी ,ऊऩय से फ़्रैट के मरमे हुवा रोन बी हय भाह सैरयी से कट जाता है ! जो फचता था उसभे भहीने का खचाथ बी तो चराना ऩड़ता है !रेककन भैनेजभें ट को इन सफसे क्मा रेना दे ना ! उन्हें तो मसपथ फहाने फना कय कभथचारयमों का खून चुसना बय आता है .

“ तू ही फता सतीश , ऩच्चीस हजाय की भाभर ू ी सी सैरयी भें आखखय क्मा क्मा करू ? दस हजाय घय की ककश्त भें कट जाते है कपय बफजरी बफर ,भहीने का याशन , छोटू की पीस भाॉ –फाऩ का खचाथ ,अॊजरी को बी तो ऩैसे ऩकड़ाने होते है , सोचा था के ईस फाय ददवारी का फोनस मभरेगा तो एक स्भाटथ पोन रे ही रॉ ग ू ा ! रेककन अफ इतने भें क्मा रॉ ग ू ा ?

सतीश ,सभझ गमा था के सयु े श कापी नायाज है ! उसे सभझाना व्मथथ है ,फात टारने की गयज से उसने कहा .

“ चर माय ऑकपस के फाद कही फैठते है ! थोडा गभ गरत कय मरमा जामे ,कापी ददन हो गमे साथ ड्रॊक ककमे हुमे “


“ ठीक है “ सयु े श की बी सहभती फन गई ! उसे माद नहीॊ आ यहा था के वह वऩछरी फाय कफ फैठा था

,जजन्दगी सॊवायने की जद्दोजहद भें उसने अऩने शौको से भह ु पेय मरमा था ! एक अयसा हो गमा था गथमेटय भें कपल्भ दे खे हुमे ! घय खयीदने के मरमे रोन तो ऩास हो ही गमा था ,रेककन डाउनऩेभेंट बी तो दे ना होता है ! जो बी सेववॊग्स थी सफ ननकर गई . ठीक छह फजे ! योज की तयह सयु े श ने अऩना फैग बया ,सबी सहकमभथमों से ववदा री . ‘है प्ऩी ददवारी ‘ फॉस की आवाज ने भानो सयु े श के जरे ऩय नभक नछडक ददमा ! “आऩको बी दीऩावरी की शब ु काभनामे सय “ सयु े श ने अननच्छा से फॉस को हाथ मभराते हुमे शब ु काभनामे दी . “ हाॊ आऩके मरमे तो है हैप्ऩी ददवारी ! भोटा फोनस मभरा होगा , आऩ रोगो ऩय थोड़े ही कम्ऩनी के नपे-नक ु सान

रागू होते है ! वह तो मसपथ हभ कभथचारयमों के मरमे है “ सयु े श अऩनी भन की फात भन

भें ही यखे था .

औऩचारयकतामे ऩण ू थ कयने कयने के ऩश्चात ,सतीश औय सयु े श साथ चर ददमे . चॉ कू क स्टे शन ज्मादा दयू नहीॊ था इसमरमे दोनों ऩैदर ही चर ददमे ! कॊधो ऩय रटकता फैग भानो उसे

दनु नमा सफसे फड़ा फोझ प्रतीत हो यहा था .

“सयु े श जाने दे बाई ,अफ भड ू भत खयाफ कय ! हभें तो माय फोनस बी मभर गमा ,रेककन फॉस को तो

वह बी नहीॊ मभरा ! कपय बी उन्होंने दे खो हभें कैसे शब ु काभनामे दी .”

“ उसकी साईड भत रे सतीश ! उसे फोनस ना बी मभरे तो बी क्मा पकथ ऩड़ता है ? ऩचास हजाय

की सैरयी भझ ु े मभरे तो भै बी कबी फोनस ना भाॊगु “ सयु े श को सतीश की फॉस तयपदायी कयना अच्छा नहीॊ रगा था .

“ तो दे खखमे ककस कदय मह फच्ची अऩनी जान जोखखभ भें डारते हुमे ईस यस्सी ऩय चरकय ददखामेगी ! औय बी कई कायनाभे जजसे दे ख कय आऩ है यत भें ऩड़ जामेंगे ! आईमे साहे फान ,आईमे .”ढोर की थाऩ ऩय आती ईस आवाज ने सयु े श की तन्रा बॊग की .

“ सयु े श ! रगता है कोई भदायी –वदायी टाईऩ का खेर हो यहा है ,कापी राग खड़े है चर दे खते है “ सतीश ने सयु े श का भड ू फदरने की गयज से कहाॊ ! औय बफना उत्तय की प्रतीऺा ककमे उसे खीॊचता

चरा गमा .


बीड़ चीयते हुमे दोनों आगे ऩहुॊचे ! एक छोटी सी फच्ची जजसकी उम्र भजु श्कर से चाय मा ऩाॊच सार होगी! भैरे कऩडे ऩहें हुमे ,जजसभे जगह जगह ऩैफद ॊ रगे हुमे थे , एक सॊकये रयॊग भें से अऩना ऩयू ा शयीय ईस कदय ननकार यही थी के दे खने वारो आॉखे आश्चमथ से फ़ैर गई .

“शाफास भनु नमा ! अफ दे खखमे कदयदान ,ककस तयह से मह छोटी फच्ची इन अॊगायों ऩय नॊगे ऩाॉव चर

कय ददखामेगी “ दस सार का फच्चा जो के यॊ गत भें कोमरे को बी भात दे यहा था ! अऩनी कभय भें रटके हुमे ढोर ऩय थाऩ दे ते हुमे कह यहा था .

सयु े श है यत से मह दे ख यहा था ! औय रडकी ने दहकते शोरो ऩय चरना आयम्ब ककमा ,उसके चेहये

ऩय कोई मशकन तक थी , कापी दे य तक उसका मह क्रभ चरता यहा . “सयु े श ,क्मा उस फच्ची को ददथ नहीॊ हो यहा होगा ? “

“ सतीश ! मह इनकी ट्रे ननॊग का दहस्सा है ,मह ननममभत अभ्मास के फाद ईस कक्रमा के आदद हो चक ु े

है !”

“ अफ रड़की आठ पुट ऊऩय यस्सी ऩय चरते हुमे कयतफ ददखामेगी “ रडके की आवाज ने दोनों का ध्मान अऩनी ओय खखॊचा . रडकी अफ दो फॉस के सहाये खड़े खम्फो ऩय फॊधी यस्सी ऩय खड़ी थी ! वह अऩना सॊतर ु न फनाने की

कोमशश कय यही थी ! औय उसने यस्सी ऩय चरना शरू ु ककमा ! एक याउॊ ड ऩाय कयने के फाद दस ु ये याउॊ ड भें उसने यस्सी ऩय चरते हुमे कयतफ ददखाने शरू ु कय ददमे ! दशथको के साथ साथ सयु े श औय सतीश की साॊसे बी हरक भें अटक गई . रडकी एक फायगी रडखडाई ! औय दशथको की चीख ननकर गई ,सयु े श ने भन ही भन ईश्वय से रडकी

की सराभती की प्राथथना की .

रेककन अचानक रडकी का सॊतर ु न बफगड़ा ! ईस से ऩहरे के वह खद ु को सम्बारती , उसका नाजक ु

शयीय कठोय जभीन टकया गमा ! रडका ढोर पेंक कय रडकी की ओय दौड़ ऩड़ा .

रडकी के सय भें चोट रगी जजस से उसका खून फहने रगा ! रेककन आश्चमथ मह था के इतनी चोट

के फावजद ू रडकी यो नहीॊ यही थी ,वह खड़ी होने का प्रमत्न कय यही थी ,उसे चोट रगने का ददथ नहीॊ था ,उसे डय मह था के रोगो को खेर ऩसॊद नहीॊ आमा ! खेर ऩसॊद नहीॊ मानी के ऩैसे नहीॊ .

औय वही हुवा ! दनु नमा के झॊझटो भें ना ऩडनेवारी बीड़ चुऩचाऩ खखसक रगी ,रेककन सयु े श उस रडकी की ओय फढ़ा जो उस रडके की गोद भें थी ! रड़का अऩने भैरे फस् ु शटथ से उसके भाथे का खन ू ऩोंछ यहा था .


सतीश बी सयु े श के साथ आगे फढा . “ ईसे चोट रगी है ! मसय से खन ू फह यहा है ,ईराज कयवाना होगा नहीॊ तो कुछ बी हो सकता है “

सयु े श ने फच्चे की ओय दे खते हुमे कहा .

“कुछ नहीॊ होगा साफ ! मे ठीक हो जामेगी ,घय जाकय हल्दी रगा दॊ ग ू ा “ रडके ने सयु े श की ओय

दे खते हुमे कहा .

“ मह गॊबीय चोट है फच्चे ! दवाखाने रे जाना होगा “ सयु े श ने फच्ची को टटोरते हुमे कहा . “ साफ अगय दवाखाने रे जाने के ऩैसे होते तो दो वक्त का खाना ना खा रेते हभ ? “ फच्चे के ईन शब्दों ने सयु े श के रृदम को बेद ददमा . उसने फच्ची को गोद भें उठामा ! सतीश ने बी सहामता की . “चरो भेये साथ “ कहते हुमे सयु े श ने ऑटो रुकवाई . दवाखाने भें रड़की की भयहभऩट्टी की गई ! चाय टाॉके रगे , दवाईमा मरखी गई ! सयु े श ने जेफ टटोरी औय ऩैसे ननकार कय दवाखाने औय दवाई का खचाथ ननकारा . वह रड़का कृतग्म बाव से सयु े श को दे खता यहा . “नाभ क्मा है तम् ु हाया ? “ सयु े श ने ऩछ ू ा . “ पजरु है साफ जी “ रड़के ने जवाफ ददमा औय ईस से ऩहरे के सयु े श कुछ औय ऩछ ू े उसने खद ु ही

कहना शरू ु कय ददमा .

“ वह भेयी फहन है भनु नमा नाभ है उसका ,हभ शहय के फाहय की फस्ती भें यहते है ! प्राजस्टक की

तारऩत्री से फना हुवा घय है साफ ! फाऩू शयाफ के चरते ख़तभ हो गमा ! भाॉ को तो फचऩन भें ही खो ददमा था ,हभ दोनों ही फस्ती के फज ु ुगो से मह सफ सीखते है जजसे हभ सडको ऩय ददखाते है “ “ तो ऩढाई कफ कयते हो ? ‘सतीश ने ऩछ ू ा . “क्मा साफ ? हभाये हुमरमे से आऩको रगता है के हभने कबी स्कूर का भह ुॊ बी दे खा है ? हभ को खाने कभाने से ही पुसथत नहीॊ मभरती ! दो वक्त की योटी मभर जामे वही फहुत है “ सयु े श को ऩता नहीॊ क्मों अऩना कभ मभरा हुवा फोनस माद आने रगा ! तबी डॉक्टय भनु नमा को साथ मरमे फाहय आमे !


“ मभस्टय सयु े श ! अफ मह ठीक है ,गचॊता की कोई फात नहीॊ है ,टाॉके रगा ददमे है ! फस दवाईमा

सभम ऩय रेते यहना “

“ धन्मवाद डॉक्टय साहफ “ सयु े श ने भनु नमा की ओय दे खते हुमे कहा जजसके मसय ऩय ऩट्टी फॊधी हुमी थी .सहसा उसे कुछ माद आमा औय उसने अऩना फैग टटोरा औय एक ऩैकेट ननकार कय भनु नमा की ओय फढामा .

“ मह रो फेटा ! मभठाई ,कर ददवारी है ना “ मभठाई का नाभ सन ु ते ही भनु नमा के भह ु से ककरकायी

सी ननकर गई .

सतीश ने बी अऩनी मभठाई पजरु को दे दी . सयु े श ने फोनस के ऩैसे ननकारे औय पजरु की ओय फढ़ा ददमे . “ नहीॊ साफ ! भै मह नहीॊ रे सकता ,आऩने भनु नमा का इराज कयामा, उसकी दवाईमा खयीदी,अफ

औय अहसान नहीॊ साफ “ पजरु के चहये ऩय मभरे जर ु े बाव थे ,

“ चुऩचाऩ यख रो ! अबी भनु नमा को दवाई चरने तक खाना वाना खखराना है न ? कहा से रामेगा

,यख रे ! जफ फड़ा हो जाना तफ चुका दे ना “

पजरु को कुछ कहते न फना ! उसने ऩैसे यख मरमे .

भड़ ु ा

सयु े श अबी जाने के मरमे भड ू ा ही था के पजरु ने उसका हाथ ऩकड मरमा ! सयु े श पजरु की ओय

“ साफ जी वह आऩ रोग कहते है ना ‘हप्ऩी ददवारी ! आऩको बी ‘हप्ऩी ददवारी “ पजरु ने कहा . “है प्ऩी ददवारी छोटू तम् ु हे औय भनु नमा को बी “ सयु े श सतीश के साथ ननकर ऩड़ा ! “ तो सयु े श चरे गभ –गरत कयने ? ‘’ “ कौन सा गभ ? “सयु े श ने कहा तो सतीश बी भस् ु कुया ददमा सभाप्त


जख्भी वजद ु ‘ तो दे खा आऩने के ककस कदय इन तीन ‘दरयॊदो ’ ने अऩनी दरयॊदगी एक भासूभ के साथ ददखाई !आखखय क्मों ? क्मा वजह है के सभाज ईस कदय अऩनी भानवता खोते जा यहा है ? कफ तक

हभ मु ही खड़े तभाशा दे खते यहें गे ? कफ तक भासूभ फेदटमा दरयॊदगी की बें ट चढती यहें गी ?भत बूमरमे के अगय आज हभ खाभोश है तो कर को मह आग आऩके घय बी ऩहुॉच सकती है !आऩकी खाभोशी ही आऩकी कभजोयी है ! भानवता ऩय एक औय फदनुभा दाग रगाती ईस घटना

के गवाह आऩ सफ है ! सोगचमे ज़या ......... इसी के साथ ‘’ दरयॊदगी ‘’ का मह एवऩसोड सभाप्त होता है !आज का एवऩसोड कैसा रगा मह आऩ हभें एस एभ ् एस के जरयमे फता सकते है ,

अनकट एवऩसोड्स के मरमे ‘रॉग ऑन’ कीजजमे हभायी वेफसाईट ‘’ब्रेककॊग न्मूज डॉट कॉभ ‘ ऩय ! कर दे खखमे ककस तयह से अऩनों ने ही रूटी एक भासूभ की अस्भत ..भीनाऺी खोटे ‘’ दरयॊदगी ‘’ के मरमे ‘ब्रेककॊग न्मूज ‘!

शदू टॊग खत्भ ही हुई थी के भीनाऺी का पोन फज उठा ‘हे ल्रो , हे ‘रवरीन ‘ व्हाट्स अऩ ? रवरीन ( पोन ऩय रयप्राई ) : क्मा माय ? हभेशा की तयह आज बी रेट ? भीनाऺी : क्मा करू माय ? आखखय प्रोग्राभ बी तो जरुयी है ! ऐसे ही टॉऩ टी आय ऩी नहीॊ फटोय यहा मह प्रोग्राभ . रवरीन : हा हा क्मों नहीॊ ,साये क्राईभ शोज को ऩीछे छोड़ यही हो तभ ु , सभाज सेवा का ठे का जो रे यखा है भैडभ ने , अफरा नायी की आवाज जो हो तभ ु .

भीनाऺी : व्हाट यबफश ! अफरा ? अये माय मु क्नो इट्ज भाई जॉफ , भाई बफजनेस ! ब्रडी ‘सभाज सेवा ‘

रवरीन : हा हा हा

ओह्ह कभ ऑन डोंट एॊग्री माय, जस्ट ककड्डॊग ! अच्छा मह फता क्रफ कफ

आ यही है ? हभ रोग वेट कय यहे है महाॉ कफ से , भीनाऺी ( हॊ सते हुमे): हाहाहा ,फस आ ही यही हु सीधे वही ,तू पोन यख !


इतना कह के भीनाऺी ने पोन खद ु ही काट ददमा , अबी पोन कटा ही था के रयॊग कपय फजी ... ‘ ओफ्पो मह रवरीन बी ना ....ओह्ह्ह बाई का पोन ‘ आठ घंटे ऩहरे ...... ऩुमरस स्टे शन भें एक अधेड़ व्मजक्त ने प्रवेश ककमा , उसके साथ भें एक मुवती थी जजसकी उम्र कुछ अट्ठायह –उन्नीस के आस ऩास थी !

‘नभस्काय साहफ ‘ अधेड़ ने फड़ी ही दमनीम भर ु ा भें इॊस्ऩेक्टय की औय हाथ जोड़कय कहा , ‘ हाॊ ठीक है ठीक है ,कदहमे क्मा काभ है ?’ ऩमु रमसमे ने जो के कोई कफ़ल्भी भैगजीन ऩढ़ यहा था ,

उस अधेड़ ऩय अहसान सा कयते हुमे कहा .

‘ साहफ , मह भेयी बफदटमा है ‘काजर ‘

अधेड़ ने मव ु ती की औय दे खते हुमे कातय बाव से कहा.

‘हम्भ ‘ ऩमु रमसमे ने सय से ऩाॉव तक मव ु ती को स्कैन कय रीमा , औय उसकी नजये मव ु ती के

अस्तव्मस्त हुमे दऩ ु ट्टे से झरकते सीने ऩय जा गचऩकी , उसने झट से भैगजीन एक औय यखी औय अऩनी फैठने की भर ु ा ठीक की ! रडकी ने उसकी नजयो को अऩने वजूद ऩय चब ु ते हुमे भहसूस ककमा औय अऩना दऩ ु ट्टा फड़ी ही शारीनता से सॊवाया . ‘हाॊ तो सभस्मा क्मा है आऩकी ?’ इॊस्ऩेक्टय ने फेरुखी से कहा , नजये अबी बी रडकी की औय ही थी औय वह आॉखे झुकामे खड़ी थी ! ‘’ जी साहफ फात दयअसर मह है के भेयी फेटी ‘ अग्रवार ‘ कॉरेज भें ऩढ़ती है !कुछ ददनों ऩहरे ही एडमभशन हुवा है , कॉरेज भें पफनतमा कसता है ,

एक रडका है जो भेयी फेटी को छे ड़ता

है , गन्दी गन्दी

‘ तो इसभें इतना टें शन नई रेने का , होता है मह सफ मही तो कॉरेज राईप है अॊकर ,फेटी को इॊजॉम कयने दो ! मही तो उम्र है इॊजॉम कयने की ‘ इॊस्ऩेक्टय ने फेऩयवाही से कहा. ‘ नहीॊ साहफ , आऩ जो सभझ यहे है फात वह बफरकुर बी नहीॊ है ! वो रडके आमे ददन नछछोयी हयकते कयते यहते है भेयी फेटी के साथ ,


‘ तो वप्रॊमसऩर से जा के मभरो ना ...महाॉ क्मा कयने आमे हो ? स्टूडेंटस को सम्बारना उनका काभ है , हभाया नहीॊ ‘ इॊस्ऩेक्टय ने अऩनी वही शैरी अऩनाई ,

‘वे स्टूडेंट नहीॊ है साहफ वे शैतान है , फात मसपथ महाॉ तक थी तो ठीक ठाक थी रककन उस ददन तो उन रडको ने हद ऩाय कय दी ‘

‘’ भतरफ पुर एॊड पाईनर कय ही ददमा क्मा ?’’ इॊस्ऩेक्टय ने कहा तो अधेड़ सकऩका गमा ! ‘ नहीॊ साहफ आऩ जैसा सभझ यहे है वैसा कुछ बी नहीॊ हुवा है ,आऩ भेयी फात तो सुननमे ‘ ‘ओह्ह्ह ,अच्छा चरो फताओ रेककन जल्दी हाॊ , अबी रॊच कयने जाना है ‘ ईस फाय कपय से उसकी नजये रडकी ऩय थी . औय रडकी जजतना उसकी नजयो से फच सकती थी उतना वह फच यही थी अऩने वऩता की आड़ रेकय . ‘ उस ददन हभेशा की तयह भेयी फेटी कॉरेज से आ यही थी तो उन रडको ने बफच यास्ते भें ही उसका हाथ ऩकड़ मरमा , औय उसे अऩने साथ चरने को कहा , भेयी फेटी ने उसे धक्का ददमा तो उस रडके ने उस ऩय हाथ उठा ददमा , जजस वजह से उसे कापी चोट बी आई ,’ ‘ ओह्ह्ह तफ तो हभको जख्भ दे खना होगा , बफना दे खे ईस फात की ऩुजष्ट कैसे होगी ? ‘ भक्कायी फहये रहजे भें उस ऩुमरसवारे ने कहा .

‘ साहफ चोट ददखा नहीॊ सकता अऩ सभझने की कोमशश कीजजमे ,’ ‘ चमरए आऩ कहते है सभझ रेते है , हाॊ उसके फाद क्मा हुवा ? क्मा आऩ उन रडको से मभरे ?’ ‘जी हाॊ भै उनसे मभरा , औय उनसे ईस फाफत जवाफ भाॉगा तो उन्होंने भुझे वऩटा औय भेये साथ फदतभीजी बी की ‘ अधेड़ के चेहये ऩय अफ फेफसी के बाव थे .

‘ भतरफ फेटी के साथ साथ फाऩ की वऩटाई बी फ्री ‘ ऩुमरमसमे के इतना कहते ही वहा भौजूद भातहत हॊ सने रगे ,

‘क्मों हॊ स यहे है आऩ सफ ? क्मा फात हुमी ऐसी ? एक फुढा फेफस व्मजक्त महाॉ अऩनी फ़रयमाद मरखने आमा है औय आऩ सबी उसकी फेफसी का भजाक उड़ा यहे हो ? आऩको शभथ नहीॊ आती ?’ मुवती ने अऩना साया गुस्सा ननकारते हुमे रगबग गचल्राते हुमे कहा ,


ऩुमरस स्टे शन एक ऩर के मरमे ननस्तब्ध हो गमा , ‘ ऐ रडकी महाॉ गचल्रा भत सभझी मह तेये फाऩ का घय नहीॊ है , ऩुमरस स्टे शन है ‘ ऩुमरमसमे ने बफपयते हुमे कहा .

‘ साहफ इसकी तयप से भै भाफ़ी भाॊगता हु , भाफ़ कय दीजजमे फच्ची है नासभझी भें फोर गई साहफ ‘ फूढ़े ने हाथ जोड़ते हुमे कहा .. ‘ औय तू बी चऩ ु यह ,भै फात कय यहा हु ना ‘ फढ़ ू े ने फेटी को रगबग डाॊटते हुमे कहा ‘’ ठीक है ठीक है , चरो नाभ फताओ उस रडके का जजसने तम् ु हायी रडकी को छे ड़ा है ‘ ‘ जी उसका नाभ ‘जग ु र प्रबाकय ‘ है साहफ औय उसके साथ सात रडके औय यहते है हभेशा ‘ ‘ जग ु र प्रबाकय ?????? क्मा आऩ ‘’नववन ‘ जी के फेटे की फात कय यहे है ?’ ‘जी साहफ ‘ ‘ अफे जानता है तू ककसऩय तोहभत रगा यहा है फड् ु ढे ‘ इॊस्ऩेक्टय का रहजा अचानक कड़ा हो गमा .

फुढा औय उसकी फेटी सन्न यह गमे . ‘उसका फाऩ ‘साॊसद ‘ है ईस इराके से , वे इतने बरे आदभी है औय तू उनऩय इल्जाभ रगा यहा है ओह्ह्ह अफ सभझा भै सायी फात ‘’

इॊस्ऩेक्टय रगबग दाॊत वऩसते हुमे फोरा ... ‘क्मा कहना चाहते है आऩ इॊस्ऩेक्टय ‘ रडकी ने अऩनी दहम्भत जुटा कय कहा . ‘ तुभ दोनों फाऩ फेटी उस बरे भानस ऩय कीचड़ उछारकय ऩैसे कभाना चाहते हो ? हे बगवान इॊसाननमत ककतनी गगय गई है एक फाऩ ऩैसो के मरमे खद ु अऩनी फेटी को इस्तेभार कय यहा है ‘ ‘जुफान को रगाभ दो इॊस्ऩेक्टय ‘ फूढ़े ने कहा .. चटाक .... औय फूढ़े की कनऩटी सुखथ हो गई इॊस्ऩेक्टय के चाॊटे से ,


‘फाफा ‘ रडकी चीख उठी औय अऩने वऩता को सम्बारने दौड़ ऩड़ी . ‘उठा अऩने फाऩ को औय रेकय चरती फन महाॉ से वयना धॊधा कयने के आयोऩ भें अन्दय फॊद कयवा दॊ ग ू ा तुभ दोनों को चर ननकर महाॉ से ‘ फुढा औय उसकी फेटी वहा से ननकर गमे , फूढा अऩभान का घूॉट ऩीकय यह गमा . दयवाजे ऩय खड़े हवरदाय ने फूढ़े से कहा . ‘ अॊकर जी महाॉ सय टकया कय आऩको कुछ नहीॊ मभरनेवारा , वह रड़का सॊसद का फेटा है औय

उसकी औय से महाॉ हय हफ्ते भोटी यकभ आती है , इसमरए महाॉ कोई आऩकी फ़यीमाद नहीॊ सन ु ेगा . ‘ भै चऩ ु नहीॊ यहूॉगा , ‘ फढ़ ू े ने कहा ...... उसी वक्त ककसी औय जगह ऩय ..... ‘अफे माय जग ु र ,चर आज भड ू फना है चरते है ‘ सभीय ने कहा ,,,सभीय जो के अऩने ऩहनावे औय यहन सहन से ही ककसी यईस फाऩ की बफगड़ी औराद ददख यहा था ,

‘ अफे सारे अबी ठीक से शाभ तो होने दे , तू तो आज फड़ा फेसब्र हो यहा है क्मा फात है ? जुगर ने कहा !

‘ अफे कुछ नहीॊ माय फस भन था औय क्मा , दे ख नहीॊ यहा क्मा ? फारयश हो यही है कफ से औय हभ सारे तेये फ़ाभथ हॉउस ऩय फैठे ऩक यहे है ‘ सभीय ने कहा,

‘ ह्म्म्भ सभीय सही कह यहा है चरो माय महाॉ फैठ कय वऩने भें कोई भजा नहीॊ है ,क्रफ चरते

है कुछ फदढ़मा नशा कयते है माय , अफ ईस जव्हस्की भें दभ नहीॊ यहा ‘ डेननमर ने कहा जो उन्ही का साथी था ..

उसके कहते ही सबी हॊ स ऩड़े . सात बफगडैर दोस्तों का ग्रुऩ , जो कॉरेज भें छॊ टे हुमे भाने जाते थे , सबी साधन सम्ऩन्न ऩरयवाय से थे ऩैसो की कोई कभी नहीॊ थी ! ऐसा कोई शौक नहीॊ जो उन्होंने ना ऩार यखा हो ! उनके जरवे कॉरेज भें हय ओय थे !


उन सबी की राईपस्टाईर स्टूडेंट्स के मरमे जरन की चीज थी ! औय उन्ही भें से एक था ‘सभीय ‘ जजसने कुछ भहीनो ऩहरे ही कॉरेज ज्वाइन ककमा था !

फस कपय क्मा था जान ऩहचान हुमी औय वह बी ईस ग्रुऩ का दहस्सा फन गमा ! फस अफ ऩढाई कहा से होती ? क्मा राईप थी मह ....? योज क्रफ जाना , डी जे के कानपाडू म्मूजजक ऩय नशे भें धत्ु त होकय डाॊस कयना , आधी यात को मसटी हाईवे ऩय फाईक्स की ये मसॊग कयना , रडककमों के साथ छे ड़ खानी कयना, आमे ददन कोई ना कोई कानन ू तोड़ना तो अफ आभ फात हो चक ु ी थी ! आखखय दोस्त का फाऩ साॊसद जो था , तो कौन सजा दे ता , याते यॊ गीन औय ददन गर ु जाय होने रगे ,घयवारे भोडनथ सोच के थे तो फहाय आने जाने ऩय बी कोई ददक्कत ना होती थी , भहीने दो भहीने भें ‘गोवा ‘ जाना तो जैसे ननमभ फन चक ु ा था , उस ददन ‘जग ु र ‘ का जन्भददन था ,इसमरए फ़ाभथहॉउस जाने का प्रान था ! रेककन वहा भजा नहीॊ आमा तो सबी ननकर मरमे क्रफ की ओय ! आठ दोस्त दो वैगन भें सवाय ,,,,,राईववॊग ऩय ‘सभीय ‘ क्रफ भें ऩहुॊचे तो भाहौर उपान ऩय था ! कदभ तेज म्मूजजक ऩय गथयकने रगे ,फोतरे खारी होने रगी , उसी वक्त , स्थान : ब्रेककंग न्मूज का ऑकपस ‘ ‘भीनाऺी भैडभ आऩसे कोई फुजुगथ मभरने आमे है ‘ ‘’ ओफ्पो क्मा माय ? उनसे कहो के भै फीजी हु ‘ ‘ कहा था रेककन उन्होंने अऩना नाभ ‘ प्रकाशयाज ‘ फतामा था औय कहा था के आऩ उन्हें जानती है ‘ ‘ प्रकाश याज ? ह्म्म्भ अच्छा बेजो उन्हें ‘ कुछ दे य फाद एक अधेड़ व्मजक्त ने वहा प्रवेश ककमा ,भीनाऺी की नजये उसे ही दे ख यही थी !


‘ भीनाऺी फेटा , ऩहचाना भुझे ? भै तुम्हाया क्रास टीचय , माद है ना ? ‘ फूढ़े ने चहकते हुमे कहा , ‘ आऩको कैसे बूर सकती हु सय ‘ भीनाऺी ने फनावटी भुस्कान के साथ कहा ,उसे कोफ़्त होने रगी थी ,आखखय ‘रवरीन ‘ के साथ क्रफ जाने का वक्त हो यहा था , ‘ फेटा तुभ फड़ा अच्छा काभ कय यही हो ! भै जफ बी तुम्हे टीवी ऩय दे खता हु भेया सीना चौड़ा हो जाता है ‘ ‘ जी सय ,अच्छा आज आऩ कैसे महाॉ आ गमे ? ‘ भीनाऺी ने टारने की गयज से कहा , ‘फेटा भेयी एक ऩये शानी है ,भै सफ जगह जाकय आ चक ू ा हु रेककन भझ ु े ननयाशा ही हाथ रगी है ,भझ ु े उम्भीद है के तभ ु भेयी भदद कय सकती हो फेटा ‘ फढ ु ा ददन दहन ् सा फोरा ‘ जी कदहमे भै क्मा कय सकती हु ‘ भीनाऺी हगथमाय डारते हुमे फोरी ! सच तो मह था के उसे फढ़ ू े की भौजद ू गी बफरकुर बी यास नहीॊ आ यही थी. ‘ फेटा भेयी फेटी भस ु ीफत भें है , एक सॊसद का रडका उसऩय फयु ी ननगाह यखे हुमे है ! भैंने ईस फाफत ऩुमरस भें बी मशकमात की थी रेककन उन्होंने भुझे धक्के भाय कय ननकार ददमा ,भेयी फेटी ऩय औय भुझ ऩय ही तोहभत रगा दी के भै औय भेयी फेटी ‘धॊधा ‘ कयते है ‘ आखखय भै कहा जाऊ ? ककसके ऩास अऩनी मशकामत दजथ कयाऊ ? वह ददनदहाड़े धभकी दे ता है के भेयी फेटी को उठा रे जामेगा , फुढा पपक ऩड़ा .. भीनाऺी का पोन फज उठा .... ‘अये फाफा आ यही हु ना ? क्मा फाय फाय रयॊग कय यही है ‘ भीनाऺी ने पोन ऩय झुझराते हुमे कहा . कपय वह फूढ़े से भुखानतफ हुमी . ‘जी कदहमे भै इसभें आऩकी क्मा भदद कय सकती हु ?’ ‘ भै तुम्हाया प्रोग्राभ दे खता हु फेटा , भै चाहता हु उसभे तुभ मह भुद्दा उठाओ , भेयी फेटी को चैन से जीने का हक़ ददरवाओ ,इसभें मसपथ तभ ु ही भेयी भदद कय सकती हो ‘


‘’दे खखमे अॊकर , एक फात आऩको सभझनी चादहमे भेया प्रोग्राभ मसपथ फरात्काय , साभूदहक फरात्काय ,जैसी घटनाओॊ को ही कवय कयता है ! भाभूरी छे ड़छाड़ की घटनाओॊ को नहीॊ , भीनाऺी ने बफना ककसी रागरऩेट के दो टूक कह ददमा , ‘रेककन फेटा मह भाभूरी छे ड़ छाड़ नहीॊ है उन्होंने जफयदस्ती कयने की कोमशश की है ‘ ‘ ओफ्पो आऩ सभझते नहीॊ है ,हभाया प्रोग्राभ मसपथ ‘फरात्काय ‘ को ही ददखाता है ,औय आऩकी फेटी का फरात्काय नहीॊ ह���वा है अबी ‘ फढ ु ा सॊन्न यह गमा मह जवाफ सन ु कय .. ‘ आऩ सभखझमे फात को ,शो की टी आय ऩी का मही तो याज है ,रोग फरात्काय दे खना चाहते है , उन्हें वह अऩयाध नहीॊ भनोयॊ जन रगता है ! ‘ इसका भतरफ जफ तक भेयी फेटी का फरात्काय ना हो तफ तक वह तम् ु हाये मरमे खफय नहीॊ है ?’

‘ नहीॊ ‘ दो टूक जवाफ ... फूढ़े के सब्र का फाॉध टूट गमा ..... वह खद ु को सम्बार नहीॊ ऩामा औय भीनाऺी के ऩैयो भें गगय ऩड़ा ! ‘ भेयी भदद कयो भीनाऺी ,तुभ भेयी फेटी सभान हो भुझ ऩय अहसान ही कय दो ! एक राचाय फाऩ तुभसे दमा की बीख भाॉगता है ‘

‘ओफ्पो एक तो भुझे वैसे ही रेट हो यहा है औय ऊऩय से मह नौटॊ की, मसक्मोरयटी !!!!!!!!!!!!’ औय फूढ़े को को धक्के दे कय ननकार ददमा गमा ..वह गगडगगड़ाता यहा योता यहा ,रेककन भीनाऺी ऩय कोई असय नहीॊ हुवा ,वह अफ पोन ऩय थी ! ककसी दस ू यी जगह ऩय ‘’भजा आ गमा माय जुगर

‘ रेककन सभीय असरी भजा तो तफ आमेगा जफ कोई रडकी साथ हो ‘ जुगर ने कुदटर भुस्कान के साथ कहा !


ईस वक्त वे सबी क्रफ से फाहय ननकर यहे थे ! ‘ क्मों ना माय कोई ‘कॉरगरथ ‘ हामय कय रे ? एक दोस्त ने कहा , ‘ अफे माय तुभ रोग बी ना यहोगे सारे पट्टू के पट्टू ,अफे ‘कॉरगरथ ‘ बी कोई भजे की चीज है ? उसभे भजा कहा , ‘ जुगर ने कहा ,उसकी आॉखों भें तैयते रार डोये उसऩय सवाय वासना साफ़ उजागय कय यही थी ! ‘

तो तुभ क्मा चाहते हो जुगर ? इसके अरावा औय क्मा ऑप्शन है ?’

सभीय ने कहा , ‘तू चर,ऩीछे वारी गाडी भें फैठ ,औय तभ ु तीनो इसके साथ यहो फे , औय फाकी के हभ चाय अगरी गाडी भें फैठते है ,चऩ ु चाऩ साथ चर कोई जग ु ाड़ कय रेते है यस्ते भें ‘ जग ु र ककसी ननणथम ऩय ऩहुॉच चक ू ा था , सबी गाडी भें फैठे , सभीय कापी खश ु रग यहा था ,उसकी धडकने तेज थी , वह गाडी की राईववॊग सीट ऩय फैठा औय गाडी ‘जग ु र ‘ के वैगन के ऩीछे चर ऩड़ी , पोन का ब्रूटूथ ऑन था जजस से जुगर ,सभीय से कनेक्टे ड था ! गाडी यास्ते ऩय दौड़ यही थी , सभीय औय जुगर यास्ते भें आती जाती रडककमों को वासना बयी ननगाहों से दे खते यहे ,

भन भें आते सभीय ने गाडी के फाहय सय ननकार कय एक रड़की ऩय अश्रीर पब्ती कस दी ,रडकी तभतभा कय यह गई , ‘हे ल्रो सभीय ,भेयी फात सुन आगे के भोड़ ऩय एक आईटभ नजय आ यही है , फड़े भोडनथ कऩड़े ऩहन यखी है एकदभ ऩटाखा है माय मभर जाए तो भजा आमे क्मा फोरता है ? उठा रू ?’ जुगर की ईस फात से सभीय के फदन भें झुयझुयी दौड़ गई , ‘कैसी फात कय यहा है माय ? ऐसे कैसे ककसी को बी यास्ते से उठा रेंगे कोई दे ख मरमा तो ?’ आखयी सवार भें नछऩी हाभी को जुगर ताड़ गमा था ,


‘डोंट वयी माय ,वैसे बी रडकी भोडनथ ददख यही है माय ,रगता है गाडी कही खयाफ हो गई है उसकी औय उसे क्मा ऐतयाज होगा माय उसे बी भजा आमेगा , औय वैसे बी गाडी के नम्फसथ वारे राईट्स तो फॊद है अऩने कोई नहीॊ ऩहचानेगा ,यास्ते ऩय बी कोई दस ू यी गाडी नहीॊ ददख यही है कही ,फोर जल्दी गाडी उसके साभने आ यही है अऩनी , क्मा फरा है माय कसभ से भेया ईभान तो ऩर बय भें डोर गमा है ‘ जुगर ने उत्तेजजत होते हुमे कहा .. ‘ऊ उठा रे ‘ सभीय ने अऩनी घफयाहट ऩय ननमॊत्रण यखते हुमे कहा ,औय गाडी रडकी के ऩास रुकी ,जग ु र ने खखड़की से मसय ननकरा औय उस रडकी को आवाज दी , ‘ एक्सक्मज ू भी मभस ,क्मा आऩ फता सकती है के ‘शास्त्री कॉरोनी’ कहा है ? ‘जी वो ..’ कहने के मरमे रडकी आगे फढ़ी ,औय फस मही गजफ हो गमा .. कुछ सभझने से ऩहरे ही गाडी का दयवाजा खर ु ा औय चाय हाथो ने रडकी को दफोच मरमा .गाडी का दयवाजा फॊद हो गमा ,

सभीय अऩनी गाडी से मह दृश्म दे खता यह गमा , रडकी का चेहया तो नहीॊ दे ख ऩामा वह रेककन उसका कपगय दे ख के ही सभीय उत्तेजजत हो गमा था ! गाडी चरती यही , औय अन्दय है वाननमत का खेर चरता यहा ,फायी फायी से जुगर ,औय उसके सागथमो ने अऩनी हवस मभटाई ,रडकी तड़ऩती यही ,चीखती यही ,दमा की बीख भाॊगती यही रेककन स्टीरयमो की आवाज भें चखे दफ गई ! दमा की उम्भीद खूॊखाय जानवयों से नहीॊ की जाती ,औय ईस वक्त वे चायो जानवय ही थे ,इॊसानी खार ओढ़े हवस के बूखे बेड्डमे,

एक जगह ऩय गाडी रुकी ,सभीय अऩनी फायी का इन्तेजाय कय यहा था , जुगर गाडी से फाहय ननकरा औय सभीय की तयप ननकरा .

‘सभीय तुभ हभाये ग्रुऩ के नए भेम्फय हो इसमरमे तुम्हाया नम्फय फाद भें आमेगा ऩहरे तीनो को जाने दो ‘ जुगर ने पैसरा सुनाते हुमे कहा ,

‘ओके कोई फात नहीॊ ,भै आयाभ से ननऩट रॉ ग ू ा हे हेहे ‘ सभीय ने हॊ सते हुमे कहा तो तीनो साथी गाडी से उतय कय आगे वारी गाडी भें चरे गमे ,


कुछ दे य फाद सबी वाऩस आ गमे , अफ फायी थी सभीय की ! सभीय को अऩनी धडकनों को काफू कयना ईस वक्त दनु नमा का सफसे भुजश्कर काभ भहसूस हो यहा था , वह गाडी की ओय फढा,औय वहा जुगर ने अऩनी गाडी आगे फढ़ा दी !

‘फेस्ट ऑफ़ रक सभीय ‘ जुगर ने थ्ब्स अऩ कयते हुमे कहा ,तो सभीय के चेहये ऩय एक शैतानी भुस्कयाहट फ़ैर गई ! अफ सभीय गाडी भें था , गाडी चर ऩड़ी थी ऩूयी यफ्ताय ऩय ,रडकी उसके साभने ऩड़ी थी ननढार सी , उसकी साॉसे तेज चर यही थी , सीट ऩय खन ू के धब्फे साफ़ ददखाई दे यहे थे , रेककन हवस के रार डोयों के आगे सभीय को उस खन ू की रारी ददखाई नहीॊ ऩड़ी , रड़की के चेहये ऩय उसके कऩडे ऩड़े हुमे थे , उसका चेहये को छोड़ फाकी शयीय रगबग अनावत्ृ त था ,जजस वजह से सभीय की उत्तेजना फढ़ गई थी ,उसने अऩना शटथ उतायने भें ऩर बय की बी दे य नहीॊ की ! औय अगरे ही ऩर वह रडकी के ऩास था ,उसने उसके दोनों हाथो को ऩकड़ा ! रडकी की प्रनतकाय कयने की ऺभता खत्भ हो चक ु ी थी , उसने घट ु ी सी आवाज भें कहा .. ‘भुझे छोड़ दो ,जाने दो भुझे ‘ रेककन उसकी ईस फायीक सी आवाज को सभीय ने अनसुना कय ददमा ,

औय उसने उसके भुह से कऩड़ा हटा ददमा ...... फस इसी ऩर ...एक जोयदाय बफजरी सी गगयी सभीय के वजूद ऩय .. ‘न नहीॊ ‘ एक चीख सी ननकर गई उसके कॊठ से ,, उसकी अॊतयात्भा तक काॊऩ गई ...उस रडकी का चेहया दे ख कय .. ‘भीनाऺी .भीनाऺी खोटे ‘ सभीय की सगी फहन ..... उफ्फ्प ,,,,,,सभीय जड़ हो गमा , ‘आह भुझे जाने दो ,’कहते हुमे भीनाऺी ने आॉखे खोरी .. औय वही जैसे कमाभत हो गई ...


‘भेया बाई ? भ भ भेया बाई ..न नहीॊ ‘ अफ तक उसका शरयय जख्भी था ,आत्भा जख्भी थी ,अफ उसका वजूद चोदटर था ‘ उसने एक झटके भें पैसरा मरमा औय ईस से ऩहरे के सभीय सभझ ऩाता ‘भीनाऺी ‘ ने गाडी का दयवाजा खोर ददमा औय चरती गाडी से छराॊग रगा दी ... उसका फेजान सा शयीय ऩथयीरी सडक ऩय रुढकता चरा गमा ... ‘ भेयी फहन नहीॊ यही , सफ भेयी वजह से ,मह भैंने क्मा ककमा ? ‘सभीय की अॊतयात्भा उसे गधक्काय यही थी ! ‘नहीॊ भै भाफ़ी के रामक नहीॊ ,भेया कोई प्रामजश्चत नहीॊ , भझ ु े जीने का कोई हक़ नहीॊ औय ना

ही इन सफको जीने का हक़ है ‘ कहते हुमे जग ु र ने राईववॊग सीट ऩय फैठे डेननमर ऩय छराॊग रगा दी ..डेननमर जो के मह सफ दे खकय हतप्रब था ,उसके कुछ सभझने के ऩहरे ही सभीय का ऩैय एक्सीमरये टय ऩय ऩड़ चक ु ा था ,गाडी अऩनी गनत से अगधक तेज होक दौड़ ऩड़ी .. औय सीधे ‘जग ु र ‘ की वैगन से टकयाई .. बडाक...... औय जुगर की वैगन अऩनी रें न तोडती हुमी ,साभने आते कॊटे नय से टकया गई , वैगन के ऩयखच्चे उड़ गमे ,,,,,,, औय उसभे फैठे सबी दरयॊदो के बी .... रेककन सभीय इतने ऩय बी नहीॊ रुका डेननमर उसको योकने की कोमशश कयता यहा , रेककन सभीय ऩय ऩागरऩन सवाय था , उसने तेजी से गाडी भोड़ी औय गाडी सीधे बब्रज की फाउॊ री तोड़ते हुमे ऩाय हो गई .... बडाक

...........औय गाडी बब्रज से ननचे सीधे ऩथयीरी ऩहाड्डमों ऩय गगय कय चकनाचयू हो गई

....सभीय का ऩागरऩन खत्भ

हो गमा ,,क्मोकक अफ सभीय बी खत्भ हो चक ु ा था .....

दो घंटे फाद ,हॉस्स्ऩटर भें ‘आह ,,’ एक कयाह के साथ भीनाऺी ने आॉखे खोरने की कोमशश की ,रेककन


नहीॊ खोर ऩामी ,,,उसके कानो भें ककसी की आवाज ऩड़ यही थी .. ‘ दे खखमे भाना के आऩने इन्हें सही सभम ऩय अस्ऩतार बती कया ददमा ! रेककन इनकी हारत इतनी नाजुक है के इनका फचना भुजश्कर है , हभने ऩूयी कोमशश कय री है ,रेककन इन ऩय उऩयी चोटों के अरावा अॊदरूनी चोट बी है कापी ! फस हभ ईस से ज्माद कुछ नहीॊ कय सकते ‘

भीनाऺी ने ऩूयी ताकत रगकय आॉखे खोरी ,मह जानने के मरमे के उसे ककसने चॊद घॊटो की जजन्दगी दी ....

जफ उसकी नजये दे खने की अभ्मस्त हुमी तफ साभनेवारे शख्स को दे ख कय उसकी आॉखों से आॊसू की दो फॉद ु े गगय ऩड़ी ..औय इसी के साथ उसने अऩनी आखयी साॊस री ‘ ‘ वह कोई औय नहीॊ वही फढ ु ा था , प्रकाश याज ‘ उसकी आॉखों से बी ‘फॉुदे ‘ छरक ऩड़ी ... अगरे ददन .. ‘’ ब्रेककंग न्मूज ‘’ चैनर ऩय आऩ दे ख यहे है हभाया प्रोग्राभ ‘ दरयंदगी ‘ तो दे खा आऩने ककस तयह से कर यात हभायी प्रवक्ता ‘ भीनाऺी खोटे ‘ शिकाय हुई एक जघन्म वायदात का .....ऩुशरस के अनुसाय ईस वायदात भें िाशभर सबी अऩयाधी सडक दघ घ ना भें भाये ु ट जा चक ु े है !

सभाप्त ....?

“प्माय “

‘’ प्माय ‘’ जैसे ववषम ऩय जो बी मरखा जामे वह कभ ही होगा ! इसके स्वरूऩ हभेशा फदरते यहते है

, प्माय ककसी एक रयश्ते का भोहताज नहीॊ यहा है ,मह जरुयी नही के प्माय मसपथ आमशक –भाशक ु ा तक ही मसमभत हो .

मह बाई –फहन का बी हो सकता है ! दोस्तों का बी हो सकता है ,फाऩ का फेटे से फेटे का फाऩ से , भाॉ का अऩने ऩत्र ु ो से ,


प्माय ही तो साये ववश्व की फनु नमाद है , चमरमे इस ववषम ऩय ज्मादा बाषण ना दे कय सीधे सीधे

उदाहयण ऩय आते है ,ऩहरा उदाहयण एक भक ू जजव का अऩने दस ु ये साथी के प्रनत असीभ प्माय का बाव दशाथता है जो मह साबफत कयता है के प्माय जैसी बावना ऩय मसपथ ‘’भानव ‘’ ववशेष का ही अगधकाय नहीॊ है .

घय की हार ही भें भयम्भत की गमी थी , रेककन उन ददनों फयसात कापी तेज हो गमी थी,वरुण याजा बी अऩने प्माय के वशीबत ू होकय धयती ऩय अऩना सवथस्व रट ु ाने को जैसे तत्ऩय हो गमे थे ! कहते है

‘’फयसात ‘’ प्माय का भौसभ होता है , रेककन मह प्माय का भौसभ बफचाये उस व्मजक्त के मरमे कापी ऩये शानी बया साबफत हो यहा था !

घय की दीवायों ऩय ऩय अबी कुछ ही भहीने ऩहरे रकड़ी की प्राई का इॊटीरयमय ककमा गमा था ,रेककन बायी फयसात की वजह से कुछ दीवाये नभी ऩाकय रयस यही थी !

अफ इसका क्मा कये ? तो उन भहोदम ने दीवाय ऩय ऩट्ट ु ी –शट्ट ु ी ऩोतने का कामथक्रभ फनामा ,जजसके मरमे उन्हें रयसाव वारे दहस्से का रकड़ी का इॊटीरयमय ननकारना था !

तो उन्होंने वही ककमा , इसी दौयान रकड़ी का एक पट्टा ननकारते हुमे एक दृश्म ऩय उनकी नजय ऩड़ी ,जजससे वह दठठक गमे , वहा दीवाय ऩय एक नछऩकरी एक ‘’कीर’’ से बफॊधी हुमी थी , कीर उस नछऩकरी के ऩैय को फीॊधती हुमी दीवाय भें धॊसी हुमी थी ,जजस वजह से नछऩकरी दहरने डुरने भें असभथथ थी .

उस व्मजक्त को उसकी इस अवस्थ ऩय दमा आई औय उन्होंने उसे ननकारने की सोची ,रेककन तबी उनके ददभाग भें मह ववचाय उबया के मह नछऩकरी आखीय कफ महाॉ पॊसी!

तफ उन्होंने अॊदाजा रगामा के अबी तीन भहीने ऩहरे जफ इॊटीरयमय रगामा जा यहा था तो शामद उसी

दौयान मह नछऩकरी महाॉ से गज ु यी होगी औय इॊटीरयमय की एक कीर की चऩेट भें आ गमी होगी ,क्मोकक उसके फाद तो महाॉ कोई काभ नहीॊ ककमा गमा है ,इसका भतरफ मह नछऩकरी महाॉ तीन भहीने से पॊसी है ?

तो वह अफ तक जीववत कैसे है ? वह दहर डुर नहीॊ सकती तो वह खाना क्मा खाती है ? आखखय बख ू े कैसे जीववत यहती है ? ऩानी तो खैय दीवाय से रयसता ही है रेककन खाने का क्मा ?

मही सोचते हुमे उन भहोदम ने कुछ दे य उस नछऩकरी को उसी हारत भें छोड़ कय उसकी ननगयानी कयने की ठानी ! कुछ दे य इन्तेजाय कयने के फाद उनकी नजय एक दस ू यी नछऩकरी ऩय ऩड़ी जो के एक कोने से

ननकरी , वह आकाय भें इस नछऩकरी से छोटी एवॊ ऩतरी थी उसके भह ु भें एक भयी हुमी ‘’चीॊटी’’ दफी हुमी थी , जो उसने धीये से आकय उस बफॊधी हुमी नछऩकरी के भह ु भें डार दी ,औय वह बफॊधी हुमी नछऩकरी अऩनी ऺुधा शाॊत कयने भें रग गमी ,


मह दृश्म दे खकय वे भहोदम अवाक यह गमे , ‘’ तो क्मा मह दस ू यी नछऩकरी तीन भहीने इस नछऩकरी को खखराती यही ? क्मा एक भक ू औय अदने से जीव भें इतना रगाव अऩने साथी के मरमे हो सकता है ? उफ्फ्प

कपय उन भहोदम ने बफना कोई सभम व्मथथ ककमे फड़ी ही सावधानी से उस नछऩकरी को उस ककर से भक् ु त कय ददमा,

आज उन्हें प्माय औय रगाव का एक अद्भत ु ान से . ु उदाहयण दे खने को मभरा था उस फेजफ एक दस ु या उदाहयण.....सभझदाय कहे जानेवारे प्राखणमों का याजेश ने प्रमभरा के फगैय कबी अऩने

जीवन की कल्ऩना बी नहीॊ की थी , प्रमभरा बी याजेश को ऩर

बय बी अऩनी आॉखों से दयू नहीॊ होने दे ना चाहती थी ,रेककन सभाज की फॊददशे ....?

प्रमभरा ने इस फाफत अऩने ऩरयवाय से फात कयने की सोची , रेककन जैसा के उसे उम्भीद थी वही हुवा घयवारे नायाज , उन्हें रगा फेटी हाथ से जाने रगी है ! प्रमभरा के सय ऩय उस रपॊगे ,ननकम्भे ,आवाया याजेश का बत ू चढ़ गमा है ,उसे सभझ नहीॊ है ,कही नादानी भें कुछ ऐसा ना कय फैठे जजससे वह अऩनी जजन्दगी तो खयाफ कये ही कये रेककन ऩरयवाय की इज्जत ऩय बी फट्टा रगा दे .

भाॉ ने प्रमभरा को सभझामा , रेककन प्माय भें रोग सभझ जामे तो रोग दीवाने क्मों फने ? ऐसे हारात

भें तो अऩने ऩरयवाय वारे ही सफसे फड़े दश्ु भन नजय आते है ! उनकी सराहे फेतक ु ी रगने रगती है !

उनकी बावनामे हभाये प्माय के साभने फेभानी रगने रगती है , दो –चाय सार के प्माय के साभने नौ भहीने कोख भें यखके ददथ सहनेवारी भाॉ के प्माय का कद छोटा रगने रगता है , अऩने अयभानो का गरा घोंट कय हभाये अयभानो को ऩयू ा कयनेवारे फाऩ का प्माय बी इस नमे रयश्ते के साभने पीका ऩड जाता है

! खून के रयश्ते इस ददर के रयश्ते के आगे कैसे फेफस हो जाते है ? जो अऩने है वे ही ऩर बय भें ककसी ऩयामे से बी ज्मादा फेगाने हो जाते है ?

प्रमभरा अगरे ददन याजेश से मभरी ,दोनों प्रेभी मभरे औय आॊसव ु ो का सागय फहा ददमा मभरके ,कुछ दे य योना धोना सभायोह चरता यहा , जफ सभाऩन हुवा तफ याजेश ने प्रमभरा को अऩने साथ चरने को कहा !

‘’भेये साथ चरो ,हभ इस फेयहभ दनु नमा से दयू चरे जामेंगे ,जहा मसपथ तभ ु औय भै हु फस, औय कोई नहीॊ ,जहा कोई प्माय का दश्ु भन ना ऩहुॉच सके ‘’ प्रमभरा के ददर भें याजेश के इन शब्दों से घफयाहट औय फेचैनी दोनों होने रगी , उसका भन ककसी उधेड़फन ु भें रगा यहा ,कुछ सभम की कशभकश के फाद आखखयकाय प्रमभरा ने ननणथम रे मरमा ,


‘याजेश भै सफ कुछ छोड़ कय तम् ु हाये साथ नहीॊ आ सकती , तभ ु एक फाय भेये भाता वऩता को भनाने की कोमशश कयो हो सकता है के वे भान जाम , भै उन्हें नायाज नहीॊ कय सकती याजेश , आखखय उनको द्ु ख दे कय भै कैसे खश ु यह सकती हु ?

‘’ तभ ु जानती हो प्रमभरा के वे भझ ु े नहीॊ अऩनामेंगे, तम् ु हे उनभे से औय भझ ु भें से एक चुनाव कयना ही होगा , वैसे बी शादी के दो एक सार फाद सबी भान ही जाते है ,क्मा भै अऩने भाॉ फाऩ को नहीॊ छोड़ यहा ? भझ ु े तकरीप नहीॊ है क्मा ?

याजेश सभझाता यहा रेककन प्रमभरा ना सभझी, प्रमभरा ‘’प्माय ‘’ के वशीबत ू होकय याजेश से दयू जा यही थी !

‘’भाॉ फाऩ का प्माय ‘’ याजेश का प्माय सभझने ऩय याजी नहीॊ था इस फात को ,वह मसपथ अऩनी तकरीप सभझ यहा था प्रमभरा की तकरीप नहीॊ ,उसकी फेफसी से उसे कोई भतरफ नहीॊ था ,

प्माय ऩय स्वाथथ हावी हो गमा था .प्रमभरा चरी गई रेककन याजेश के भन भें गस् ु सा छोड़ गई ,याजेश मह सह नहीॊ ऩा यहा था के प्रमभरा उसे ठुकया कय चरी गई , प्रमभरा ककसी औय की कैसे हो सकती है ?

कुछ सभम बफता ,प्रमभरा की शादी तम हो गई , याजेश ने इसी बफच कई फाय पोन ऩय फात की , प्रमभरा उसे हय फाय सभझाती रेककन ऊसऩय कोई असय नहीॊ हुवा ,उरटे याजेश ने उस ऩय फेवपा होने का ठप्ऩा रगा ददमा ,याजेश का प्माय नपयत भें फदरने रगा . उसी नपयत के वशीबत ू प्रमभरा ऩय हुवा वह जानरेवा हभरा ,जजसने प्रमभरा को जीते जी भयने ऩय भजफयू कय ददमा .. डोक्टयस ने जवाफ दे ददमा था , वे प्रमभरा की जान तो फचा सकते थे रेककन उसके आॉखों की यौशनी

औय उसकी आवाज नहीॊ रौटा सकते , ‘’तेज़ाफ’’ का फल्फ चेहये ऩय पटने से तेज़ाफ आॉखों औय गरे तक ऩहुॉच गमा था ,जान फची मही गनीभत थी ,

याजेश को ऩकड मरमा गमा था , उसे अऩने ककमे ऩय कोई अफ़सोस नहीॊ ,उसे ख़ुशी हुई के उसका प्माय अफ ककसी औय का नहीॊ हो सकता ! ‘’प्माय ?....प्माय का नघनौना स्वरूऩ , प्माय जफ हभ सभझते है के ‘प्माय ‘ जैसे शब्दो��� की आज के जभाने भें कोई अहमभमत नहीॊ है ,भोडनथ

होते मव ु ा ऩीढ़ी के मरमे प्माय मसपथ एक भजे की चीज है , आज ककसी औय के साथ तो कर ककसी औय के साथ ,


रेककन इसी फीच हाई प्रोपानमर सभझे जानेवारे सभाज भें से ककसी एक्ट्रे स की आत्भहत्मा की खफय आती है !

औय उसके आत्भहत्मा की वजह उसका अधुया प्माय ! जजसे अऩनी जजन्दगी भानकय सवथस्व रट ु ाती यही उसी की दगाफाजी वह सह ना सकी औय आखखयी यास्ते के तौय ऩय भौत का आसान यास्ता चुन मरमा ! तफ मह सोच फदर जाती है के

प्माय को ही अऩना सवथस्व भानने वारे अबी तक भौजूद नहीॊ है ,

आखखय मह ‘प्माय ‘ इतने यॊ ग कैसे ददखाता है ?

ऩर बय भें इॊसान कैसे फदर जाता है ? एक कहानी भें कहानी की नानमका कहती है ... ‘’ ककसी बी इॊसान से कबी इतना प्माय भत कयो के उसे अऩना सफ कुछ सौंऩ दो ,उसके जाने के फाद कपय आऩके ऩास जीने के मरमे कुछ नहीॊ फचता

‘’ककतनी अजीफ फात है ना ? अफ औय क्मा उदाहयण द ू

इस प्माय जैसे उरझे हुमे ववषम ऩय ?अफ हभ इस से ज्मादा प्माय ऩय क्मा मरखे ? प्माय मरखने की मा कहने की चीज नहीॊ है वह मसपथ भहसस ु ककमा जा सकता है !

सभाप्त

दरयॊदा कौन ?


‘’'योहन ' भै अफ बी कहता हु महाॉ रुकना सेप नहीॊ है !’’ ‘’चऩ ु कय माय ! औय ध्मान उस फन्दे ऩय दे जो उस फोयी को घसीट कय रे जा यहा है .’’

‘‘रेककन भदन ,मह फन्दा इतनी यात को बरा इस तयह जॊगर भें मह फोयी रेकय क्मों आमा है ? दे ख सबी हभायी तयह ऩागर तो नहीॊ होंगे जो आधी यात की जॊगरे भें ये व ऩाटी भें शामभर होने आमे है !जरुय मह फन्दा कोई दो नम्फयी है ,भेयी फात भान तो हभें इसका ऩीछा नहीॊ कयना चादहए ‘’ ‘’चऩ ु चाऩ खखसक रे वहा ऩाटी का बी टाईभ हो यहा है ,औय हभ इसका ऩीछा कय यहे है .’’ भदन की ऩीछा कयनेवारी फात भानकय योहन ,औय भोहनीश ने गरती कय दी ! ऐसा वे सोच यहे थे ,रेककन अफ क्मा कय सकते थे , ''श श ..वह फन्दा फोयी भें से कुछ ननकार यहा है ' योहन ने कहा तो दोनों उस फोयी को दे खने रगे !

औय वह शख्स उस फोयी भें एक इॊसानी जजस्भ को फाहय खीॊचता है , इॊसान अचेतावस्था भें है ! 'अफे मह क्मा कय यहा है ? हे बगवान कुछ गरत हो यहा है ननकर रो महाॉ से आदभी


खतयनाक रग यहा है मह ' घफयाते हुमे भदन ने कहा ! 'चऩ ु चाऩ दे खते यहो माय ,' भदन ननबीक होकय दे खता यहा

औय तबी उस शख्स ने वह हयकत कय दी जजसका उन्हें इल्भ बी नहीॊ था ! उसने अऩनी कभय भें से फड़ा सा चाक़ू ननकारा औय उस फोयी ऩय झुक कय कुछ कयने रगा ! 'अफे योहन मह कय क्मा यहा है ? '

औय उस शख्स ने जफ अऩना हाथ ऊऩय उठामा तो उसके हाथ भें एक मसय था ! कटा हुवा इॊसानी मसय ! ' बागो महाॉ से '' भोहनीश डय की अगधकता से चीख ऩड़ा . औय उस चाक़ू वारे व्मजक्त का ध्मान उन तीनो की औय ऩड़ा , वह एक ऩर को दठठका ,रेककन अगरे ही ऩर चाकू हाथ भें मरमे उसने उन तीनो की ओय दौड़ रगा दी ! 'बागो वह हभायी औय आ यहा है ' चीखने की फायी अफ योहन की थी .

रेककन वह शख्स अचानक झाड्ड़मो भें कूद ऩड़ा औय गामफ हो गमा ! रेककन तीनो दोस्त बागते यहे ,कापी दयू तक बागने के फाद तीनो हाफ्ने रगे औय एक ऩेड़ के सहाये रुक गमे !

'फस अफ औय नहीॊ बाग जाता ह्म्फ़ ह्म्फ़ , भैंने कहा था उस कभीने का ऩीछा भत कयो रेककन तुझे ही खज ु री थी ' भदन ने कहा .

'अफे भझे क्मा ऩता था के वह दरयॊदा है , रेककन वह था कौन ?'

'मह सवार भुझ से ही ऩूछ रो ' मह सदथ आवाज योहन के ऩीछे से गूॊजी ,औय योहन झटके से ऩीछे भुड़ा ,

औय उसी ऩर योहन का मसय धड से अरग होकय जभीॊ ऩय आ गगया ! दरयन्दे ने चाक़ू का वाय कापी जोय से ककमा था .

मह दृश्म दे ख कय भोहनीश औय भदन जड़ हो गमे उनके ऩैयो ने जवाफ दे ददमा ! औय उस दरयन्दे के चेहये ऩय एक भुस्कान तैय गमी ,उसका चाक़ू वारा हाथ घुभा , औय साये जॊगरे एक ह्रदम ववदायक चीख गूॊज उठी !

अगरे ददन ,' रोकयाज न्मज ू ' की सखु खथमों भें थी वह खफय .

' मसयकटे कानतर का कहय , कर यात भदनगढ़ के जॊगरो से चाय सय कटी राशें फयाभद , इस एक सार भें कुर मभरा कय मह ऩॊरहवी घटना है औय अफ तक भत ृ को की सॊख्मा 21 ऩाय हो चक ु ी है ,औय प्रशाशन हाथ ऩय हाथ धये फैठी है ! कानतर की सनक अफ हद ऩाय चक ु ी है

कानतर हय वायदात के फाद भत ृ क का सय रे जाता है ,कोई नहीॊ जानता के वह ऐसा क्मों कयता है , आईमे इस फाये भें हभ इस केस की छानफीन कयनेवारे उऩननयीऺक इॊस्ऩेक्टय

'प्रवीन प्रबाकय ' से मह जानने की कोमशश कयते है के आखखय ऩुमरस प्रशाशन इन गॊबीय


घटनाओॊ को रेकय इतनी सुस्त क्मों है ?'

'तो प्रबाकय जी क्मा कहना चाहें गे आऩ अऩनी ड्डऩाटथ भेंट की इस नाकाभी ऩय ' 'दे खखमे दीऩाॊशु जी आऩ कापी काबफर ऩत्रकाय है इसका भतरफ मह नहीॊ के आऩ हभाये

ड्डऩाटथ भेंट की धजज्जमा उडामे ,हभ बी खारी हाथ नहीॊ फैठे है हभायी तफ्तीश जायी है , कानतर जल्द ही हभाये कब्जे भें होगा ' प्रवीन ने अऩनी सपाई दे ते हुमे कहा . ' फुया ना भाने प्रबाकय जी ,रेककन आऩका ड्डऩाटथ भेंट तो अफ तक भत ृ को के मसयों को बी नहीॊ खोज सका ,औय आऩ कानतर को ऩकड़ने का दावा कयते है '

' दीऩाॊशु जी अगय आऩको मह काभ इतना ही सयर रगता है तो आऩ ही क्मों नहीॊ खोज राते कानतर को ? ऩमु रस अऩना काभ अच्छी तयह से जानती है , औय आऩसे बी हभ सहमोग की

अऩेऺा कयते है तो आऩ सहमोग कीजजमे खखॊचाई नहीॊ ,फस इसके आगे भै औय कुछ नहीॊ कहूॉगा ' कहते हुमे प्रबाकय अऩनी ऩुमरस जीऩ भें अऩने भातहतो के साथ फैठ गमा ! दीऩाॊशु : 'तो दे खा आऩने ऩुमरस ककस तयह अऩनी जजम्भेदायी से ऩल्रा झाड यही है , ऩुमरस के

ऩास बरे ही अऩयाधी तक ऩहुॉचने के मरए कोई यास्ता ना हो रेककन हभाये ऩास कुछ ऐसे सुफूत है जो कानतर को ऩहचानने भें सहामक हो सकते है , क्मा है वह सुफूत ? इसका खर ु ासा होगा अज यात ग्मायह फजे एक्सरूमसव ऑन 'रोकयाज न्मूज ' ! भै सॊवाददाता 'दीऩाॊशु गुप्ता ' कैभयाभैन ' दीऩू चौयमसमा ' के साथ रोकयाज न्मूज .

दीऩाॊशु योज की तयह यात नौ फजे अऩनी फाईक से अऩने ऑकपस के मरमे ननकरा ही था के उसके साभने ' प्रवेश रार ' आ गमा !

प्रवेश रार को दे ख कय दीऩाॊशु के चेहये ऩय मशकन उबय आई ! 'कही जा यहे है दीऩाॊशु जी ? '

'हा, ऑकपस जाना है ना न्मूज ब्रोडकास्ट के मरमे ' दीऩाॊशु ने उसे टारने की गयज से कहा ! ' आऩ से कुछ काभ था ' 'कैसा काभ ?'

एक खफय थी ! मसयकटे कानतर के फाये भें ' क्मा कहा ? दीऩाॊशु तुयॊत हयकत भें आ गमा

'चमरमे आऩको रे चरता हु उस जगह जहा से भै आमा हु आऩ बी वह नजाया दे ख कय बौचक्के हो जामेंगे ' 'भै अबी आमा प्रवेश जी रुककमे 'कहते हुमे दीऩाॊशु अऩने घय भें बागा औय थोड़ी ही दे य भें वावऩस आ गमा उसके हाथ भें एक ऩोटे फर हैंडी कैभ था ! औय दोनों फाईक ऩय फैठ कय यवाना हो गमे ! प्रवेश रार के फतामे यस्ते ऩय फाईक दौड़ यही थी


! जफ रुकी तफ साभने एक रकड़ी का ऩुयाना भकान था !

वह दहस्सा दरदर वारा था ,नदी भें रगाताय आती फाढ़ से वह जभीॊन रगबग दरदरी हो गमी थी ! ऩहरे वहा कापी रकड़ी के कायखाने थे जहा रकड्डमा काटकय सप्राई की जाती थी रेककन जॊगरो की कटाई से दयसार नदी ने बी अऩना रुख फदर मरमा औय नतीजा फाढ़ के रूऩ भें साभने था , जजरा सयकाय ने भाभरे गॊबीयता को दे खते हुमे वहा कटाई ऩय योक रगा दी ! इस फात को ऩाॊच सार हो गमे ,तफ से वह जगह आफाद नहीॊ यही रोगो का उस औय आना जाना नहीॊ यहा ! हाॊ फस ऩयु ाने रकड़ी के कायखाने औय कुछ रकड़ी के भकान फचे हुमे थे जो अफ जीणथ शीणथ थे ! प्रवेश रार बी रकड़ी सप्रामय था रेककन सयकाय के आदे श के फाद उसे बी भजफयू न मह काभ फॊद कयना ऩड़ा ! उसी मसरमसरे भें उसकी भर ु ाकात दीऩाॊशु से हुई थी जजसकी भदद से उसने रकड़ी व्माऩारयमों की आवाज भीड्डमा तक ऩहुॊचाई ! ' दीऩाॊशु जी वह दस ु ये छोय ऩय जो रकड़ी का भकान दे ख यहे है ना भैंने उसी भें उस

सॊददग्ध व्मजक्त को एक फोयी रे जाते हुमे दे खा था जफ भै अऩने कुछ ऩुयाने साभान अऩने कायखाने से ननकारने के मरमे आमा था ' 'रेककन तुम्हे कैसे ऩता के वह व्मजक्त मसयकटा कानतर है ?'

'भैंने मसपथ अॊदाज रगामा क्मोकक फोयी से खन ू टऩक यहा था ,चमरमे इस से ऩहरे की वह आ जामे हभें उसके कभये की छानफीन कय रेनी चादहमे '

'चरो ' कहते हुमे दीऩाॊशु ने कैभया ऑन कय ददमा ! घय भें प्रवेश कयते ही एक दग थ ध सी दीऩाॊशु ने भहसूस की ! ु न्

दीऩाॊशु ने भेज ऩय यखी एक ऩुस्तक को दे खा जो कापी खस्ताहार थी ,

'मह क्मा है कुछ कारा तॊत्र जैसा मरखा है इस ऩय , ' ऩुस्तक हस्तमरखखत थी औय कापी ऩुयानी थी

'औय प्रवेश जी मह ऩुस्तक तो रगबग तीन चाय सौ सार ऩुयानी रग यही है ददनाॊक बी कुछ अट्ठायवी सदी का है इस ऩय '

औय मह नोट फूक कैसी है ऩुस्तक के ऩास ?

'दे ख रीजजमे दीऩाॊशु जी ! रेककन जल्दी कीजजमे भुझे महाॉ डय रग यहा है कही कानतर वावऩस ना आ जामे '

'एक मभनट प्रवेश जी ! इस नोट फुक भें कोई ववगध मरखी है , मह क्मा है आखखय ?

' एक कारी कढ़ाही जजसे मसद्ध कयके यखा गमा हो ! उसे कारी बफल्री के खन ू से अमबभॊबत्रत ककमा गमा हो ,


उसके फाद कढाई भें फकये के खन ू उफारे इस दौयान साधक को साधना भन्त्र कहना जरुयी है औय कपय इसके फाद जाती अनुसाय भानव भजस्तष्क ! ध्मान यहे भजस्तष्क की भात्रा जाती

अनुसाय कभ ज्मादा होनी चदहमे !सही प्रकाय से भजस्तष्क डारने के फाद उसे उफरने दे ! कपय इसका प्राशन कये इस तयह से मह कक्रमा अरग अरग साधना ववगध के अनुसाय चाय सार दोहयामे !

फस इतना ऩढ़ने के फाद ही दीऩाॊशु के ऩसीने छूट गमे !

'क क क्मा फकवास है मह ? क्मा तॊत्र साधना के मरमे वह सफको भायता है ? औय क्मा वह मसय काट कय ददभाग खा जाता है ?' वेक्क्क्क्क ... दीऩाॊशु के भजस्तष्क भें उस नघनौने ववचाय के ऩनऩते ही उसे उरटी आ गई !

'' दीऩाॊशु जी ,इन रकड़ी के भकानों भें ननचरे तल्रे ऩय बी कभये है ,हभें एक फाय वहा बी दे ख रेना चादहमे !

औय दोनों ने तहखाने भें प्रवेश ककमा ! औय वह का दृश्म दे ख कय दीऩाॊशु के ददभाग की नसे जैसे पटने को फेताफ हो गई ,

वहा एक रकड़ी की अरभायी थी जजसभे कई सायी इॊसानी खोऩड्डमा थी !रेककन हय खोऩड़ी ऩय यॊ ग ऩुते हुमे थे ककसी ऩय गेरुवा ,ककसी ऩय नीरा ककसी ऩय ऩीरा 'म मह क्मा है प्रवेश जी ,इॊसानी मसयों को आखखय ऐसे क्मों यॊ गा गमा है आखखय क्मा भकसद हो सकता है इसका ? ' दीऩाॊशु जी कानतर ने हय खोऩड़ी को उसकी जानतनुसाय वगीकृत ककमा हुवा ताकक वह मह माद यख सके के उसने ककस जाती के ककतने ददभाग खामे है , वह असीभ फर एवॊ फुवद्ध चाहता है जो उसे इसी तयह से मभर सकती है ककताफ भें मही तरयका ददमा गमा है ! वह ककताफ महाॉ एक ऩयु ाने ऩेड़ की खद ु ाई भें उसे मभरी थी !

' मह सफ आऩको कैसे ऩता प्रवेश जी " दीऩाॊशु चौंक कय ऩछ ू ने के मरमे भुड़ा

'क्मोकक भै ही हु वह कानतर ' बफना कोई भौक़ा ददमे प्रवेश दीऩाॊशु ऩय ऩास ही यखा हुवा फड़े पर के चाक़ू से प्रहाय कय ददमा, चाक़ू के तेज पर ने दीऩाॊशु का गरा काट ददमा , वह तडऩने रगा ,औय प्रवेश वहमशमत बयी भस् ु कान रेकय घट ु नों के फर फैठ गमा दीऩाॊशु के ऩास !

उसने दीऩाॊशु के फारो को अऩनी भुट्ठी भें बीॊच मरमा औय चाकू से ............................... दो ददन फाद ,

प्रवेश, ऩुमरस स्टे शन भें इॊस्ऩेक्टय प्रबाकय के साभने हथकड्ड़मो भें !

एक व्मजक्त जो के कापी गुस्से भें है , इॊस्ऩेक्टय साहफ इसी कभीने ने भेये बाई को भाया है ,


दीऩाॊशु ने ऩयसों पोन ऩय कहा था के वह ककसी ख़ास न्मूज के मरए जा यहा है प्रवेश के साथ , औय उसके फाद भेये बाई की सय कटी राश ही फयाभद हुई शहय के फाहय से ! इसे छोड़ना भत ,छोड़ना भत इस नयबऺी को !

प्रबाकय जभाने बय की क्रूयता मरमे हुमे प्रवेश के साभने खड़ा हुवा उसे घूय यहा है , औय उसने झटके से उसके फारो को भुट्ठी भें बीॊच मरमा 'कभीने दरयन्दे फोर ऐसा क्मों कय यहा है तू ? कहा नछऩा के यखे है साये मसय ,फता कभीने '

'दे खखमे इॊस्ऩेक्टय साहफ कानन ू हभ बी जानते है ,हभ ननदोष है ,आऩ हभसे ऐसा सर ु क ू नहीॊ कय सकते '

'तझ ु े तो भै।।। '

इतना कहने से ऩहरे एक वकीर ऩमु रस स्टे शन भें आते हुमे , अऩने हाथो को योक रो इॊस्ऩेक्टय , भेय क्रामॊट ऩय हाथ न उठामे मह कानन ू के खखराप है ,अबी कोई आयोऩ साबफत नहीॊ हुवा है ! मसपथ दीऩाॊशु उसके साथ गमा था इस आधाय ऩय आऩ इसे कानतर नहीॊ भान सकते ,अऩनी

नाकामभमों को छुऩाने के मरमे आऩ ककसी ननदोष को अऩयाधी नहीॊ फना सकते ' वकीर ने अऩनी फात खत्भ की !

' आऩको जो बो कहना हो आऩ वह कोटथ भें कहे ,ऍफ़ आई आय दजथ हो चुकी है ,कर कोटथ भें

ऩेशी है ,इन सॊगीन आयोऩों ऩय इसे अगग्रभ जभानत नहीॊ मभर सकती आऩ कर तक इन्तेजाय कये '

कोटथ भें ऩहरी ऩेशी भें ही प्रवेश ननदोष साबफत हो गमा ! उसके वकीर ने फड़ी आसानी से प्रवेश को उसका व्माऩय फॊद होने के चरते हुमे भानमसक आघात की दहु ाई दे ते हुमे औय उसे क़त्र के वक्त ककसी दस ू यी जगह ऩय होने के सुफूत दे ददमे जजसके चरते केस खारयज हो गमा ,औय फेवजह मसपथ शक के आधाय ऩय एक भानमसक योगी को प्रताड्ड़त कयने के मरमे कोटथ ने ऩुमरस को पटकाय बी रगाई

'' तू मह भत सभझना के तू फच गमा है , भेयी नजये अफ हभेशा तुझ ऩय यहें गी अफ अऩने दीन गगन ने शुरू कय दे ' जफ प्रवेश प्रबाकय के ऩास से गुजया तफ प्रबाकय ने उसे कहा ! ' भेयी शुब काभनामे आऩके साथ है ' प्रवेश ने जरे ऩय नभक नछडक ददमा ,

'नहीॊ मह नहीॊ हो सकता मह कानतर भेये बाई का कानतर ननदोष कैसे साबफत हो सकता है ? कानून को सुफूत चादहमे तो भै राऊॊगा इस खन ु ी के खखराप सुफूत , आज से हय ऩर भेयी ननगाहें इसका वऩछा कयें गी ' कसभसाते हुमे आरोक गुप्ता ने भन ही भन दाॊत वऩसते हुमे कहा , रेककन अफ क्मा हो सकता था ? चाय ददन फाद प्रवेश ककसी खतयनाक इयादे से एक घय की औय फढ़ते हुमे ,उसके चेहये ऩय शैतानी चभक बफखयी


ऩड़ी थी , इस फात से अनजान के दो जोड़ी आॉखे उसे ही घूय यही थी , उसका ऩीछा कय यही थी !

योज की तयह अऩनी ड्मट ू ी ऩूयी कयके प्रबाकय अऩने घय ऩहुॊचा , घय ऩहुॉच कय उसने अऩनी वदी उतायी औय सोपे ऩय फैठ गमा ! अचानक एक ठॊ डी हवा के झोंके ने प्रबाकय को चौंकामा ''भैंने तो खखड़की फॊद की थी मह हवा कहा से आ यही है , ओह्ह खखड़की खर ु ी है '

औय तयु ॊ त ककसी खतये की आशॊका से प्रबाकय उठ फैठा उसने अऩने रयवाल्वय वारे दयाज को

दे खा रेककन तफ तक एक साए ने उस ऩय हभरा कय ददमा , चाक़ू के वाय को पुती से प्रबाकय फचा गमा औय वह ऩरटा तो साभने प्रवेश खड़ा था हाथ भें चाक़ू मरमे !

' कभीने तू भझ ु े कानतर साबफत कये गा ? हाॊ भैंने खन ू ककमे है , कईमों के ककमे ,रेककन जॊगर भें

हुई भौतों का जजम्भेदाय भै नहीॊ ! ऩमु रस ने अऩनी नाकाभी को छुऩाने के मरमे उन कत्रो को बी मसयकटे कानतर का कायनाभा फता ददमा ,जफकक मसयकटा तो भै हु , चरो कोई फात नहीॊ इस से भेया नाभ तो हुवा ,रेककन अफ तू नहीॊ फचेगा प्रबाकय !

कहते हुमे उसने प्रबाकय ऩय छराॊग रगाई रेककन प्रबाकय उसे फचा गमा जजस से प्रवेश पशथ ऩय भुह के फर गगया , भौक़ा दे ख कय प्रबाकय ने प्रवेश को दफोच मरमा ! अफ प्रवेश की गदथ न उसके हाथो भें थी ,औय प्रवेश का चाकू दयू गगया था ,

प्रबाकय प्रवेश से भजफूत था ,!

' कभीने तेयी इतनी औकात हो गमी के तू भुझे भायने आ गमा ,गरत हयकत की फच्चू ,अफ तू जज़ॊदा नहीॊ जाएगा , जान ना चाहता है ना जॊगरे वारा कायनाभा ककसने ककमा ? तो सुन, वह

भैंने ककमा भै हु वह खन ु ी ! सारा इॊटेमरजेंस ऑकपसय था वह, भेये खखराप रगे कयप्शन चाजेस की जाॊच कय यहा था ,कापी सफ ु त ू जट ु ा मरमे थे ,अफ उसे दठकाने तो रगाना ही था औय तन ू े बी कभ उत्ऩात नहीॊ भचामा !

इसी का पामदा उठामा सोचा उसे भाय कय उसका सय गामफ कय दॊ ग ू ा भाभरा अऩनेआऩ मसयकटा ऩय आ जाएगा ! रेककन उन तीन रडको ने भझ ु े ऐसा कयते दे ख मरमा तो अफ भै रयस्क कैसे रेता ? भाय ददमा उन्हें बी , हाॊ हा हा नाभ तेया काभ भेया आह ह ह '' खचाक से चाक़ू प्रबाकय के ऩैयो को चीयता चरा गमा , प्रबाकय अऩना फखान कयने की यौ भें अऩनी ऩकड ढीरी कय चुका था जजसका ऩरयणाभ उसे बुगतना ऩड़ा !

'सारे कभीने , कहते हुमे प्रबाकय ने काॊच का गुरदान प्रवेश के सय ऩय दे भाया प्रवेश घामर हो गमा फुयी तयह से , औय इसी का पामदा उठाते हुमे प्रबाकय ने टूटा हुवा गर ु दान प्रवेश के ऩेट भें


घुसा ददमा ..

प्रवेश गचखते हुमे गगय ऩडा , तडऩने रगा वह दरयॊदा .. दस ु या दरयॊदा आॉखों भें खन ू मरमे उसकी औय फढ़ा ..प्रबाकय प्रवेश के मशगथर ऩड़े जजस्भ की ओय झुका रेककन ....

अचानक प्रवेश ने अऩने हाथ भें भौजूद चाक़ू से प्रबाकय के गरे ऩय वाय कय ददमा ,रहू की धाय फह ननकरी औय प्रबाकय अऩना गरा ऩकड़कय रोटने रगा ! दोनों दरयन्दे एकदस ू ये से कभ नहीॊ थे ! प्रवेश प्रबाकय की ऩीठ ऩय चढ़ फैठा औय उसने प्रबाकय के फार अऩनी भट्ठ ु ी भें ऩकड मरमे ... 'खचाक ...'

एक झटके भें दस ु ये दरयन्दे का सय उस दरयन्दे के हाथ भें झर ू गमा .! प्रबाकय के कटे सय की ओय दे खकय उसने चैन की सान्स री ..औय इसी के साथ प्रवेश बी ननढार हो गमा उसका बी कापी खन ू फह यहा था !

रेककन प्रवेश की मह भुस्कान मसपथ चॊद ऩरो के मरमे ही थी टनाक ......

एक रोहे की यॉड प्रवेश के सय ऩय ऩडी औय वह औॊधा हो गमा ,उसकी आॉखे फॊद होने रगी ,अऩने हभरावय को दे खने के मरमे उसने आॉखे खोरी जजसने उसके ऩीछे से उसके सय ऩय वाय ककमा था तो साभने

आरोक .... दीऩाॊशु गुप्ता का बाई ,

' कभीने कोटथ ने तुझे छोड़ददमा ! ऩुमरस ने बी छोड़ ददमा, रेककन भैंने नहीॊ , भै जानता था के

तू जरुय कोई हयकत कये गा जजस से भै तुझे फेनकाफ करूॉगा ! उसी ददन से भै तेया ऩीछा कय यहा हु भौके की तराश भें , जफ तू इस इॊस्ऩेक्टय के घय भें खखड़की से आमा भै तफ बी तेये ऩीछे था , तुभ दोनों को ऩागरो की तयह रड़ते दे ख कय भैंने इन्तेजाय कयना फेहतय सभझा ,औय अफ तू भेये ऩैयो भें ऩडा है ,नीच ,नयबऺी ,आज तुझे वैसी ही भौत दॊ ग ू ा जैसी तू सफको दे ता आमा है !

कहने के साथ ही ऩड़े हुमे चाक़ू को आरोक ने उठामा औय उस दरयन्दे की गदथ न भें एक ही प्रहाय भें ऩेवस्त कय दी .. एक पव्वाया सा छूटा खून का औय वह दरयॊदा शाॊत हो गमा हभेशा के मरमे !


आरोक ने दरयन्दे के फारो को ऩकड़ा औय चाक़ू का एक प्रहाय ........................ मसयकटे का आतॊक हभेशा के मरमे खत्भ ?????? अगरे ददन ' रोकजन सभाचाय ' ' मसयकटे कानतर का कहय कपय एक फाय! औय इस फाय सीधे ऩुमरस ड्डऩाटथ भेंट ऩय ,इॊस्ऩेक्टय प्रबाकय जो इस केस की जाॊच कय यहे थे कर यात उनकी औय इस केस भें सॊददग्ध यहे प्रवेश रार दोनों की ह्त्मा उनके घय ऩय हुमी ! अॊदाजा रगामा जा यहा है के प्रवेश, प्रबाकय से अऩने ऊऩय रगे आयोऩों के मसरमसरे भें फात कयने आमे होंगे ,औय तबी कानतर ने भौक़ा दे ख कय हभरा कय ददमा ,दोनों राशो के सय गामफ है प्रवेश रार के ऩहचानऩत्र से उनकी मशनाख्त हुई ! क्मा इस 'मसयकटे कानतर ' का कहय मु जायी यहे गा ? सभाप्त

घदटमा भानशसकता ऩयसों वऩकननक का प्रान था , हभ सबी ऑकपस के मभत्रगन तैमाय होकय ननकरे थे ,हभने एक मभनन फस फुक की थी ,

वऩकननक स्थर कापी दयू था ,हये बये ऩहाड़ तथा जॊगर ,दयू दयू तक इॊसानी फजस्तमा नहीॊ थी , भै ववॊडो सीट ऩे फैठा था ,अचानक फस रुकी ,क्मोकक आगे ऩुमरस खड़ी थी !


भैंने दे खा के क्मा भाजया है तो नजय ऩड़ी ! ऩास सड़क के ककनाये झाड्डमों भें एक रड़की की राश ऩड़ी हुमी थे , भै दे ख के एकदभ बौचक यह गमा ,वऩकननक साया भूड खयाफ हो गमा !

रड़की भुजश्कर से फीस फाईस सार की यही होगी ,ऩहनावे से सॊऩन्न घयाने की रग यही थी ,

तबी फस चर ऩड़ी ,औय फस भें चचाथ शुरू हो गमी ,सफ अऩने अऩने तकथ दे ने रगे ,वैसे रड़की की हारत से रग यहा था के वो ककसी की वासना का मशकाय हुमी थी ,

एक बाई साहफ ने कहना शरू ु कय ददमा ‘’ दे खो माय रड़ककमा अऩनी ऐसी हारत के मरए खद ु जजम्भेदाय होती है , ऐसा ऩहनावा ऩहनती है के कोई बी फहक जामे ‘’

भैंने इस फात का ववयोध ककमा ‘’ आऩको उस रड़की के ऩहनावे भें क्मा गरत ददखा जीॊस औय टीशटथ ऩहने थी ,’’ उन्होंने कहा’’उतना बी कापी होता है ककसी को फहकाने के मरए ‘’ तो भैंने कहा ‘’आऩ को शभथ आनी चादहए ऐसी फात कयते हुए बी ,आऩ कुछ नीच रोगो के द्वाय ककमे हुए नीच कामथ को सही ठहया यहे है ,आऩका कहना है रड़ककमों का ऩहनावा जजम्भेदाय है इसके मरए ,क्मा इॊसान के अॊदय का नछऩा हुआ जानवय जजम्भेदाय नहीॊ इसके मरए ? आऩ अऩनी अॊधी वासना के झोंके का दोष ककसी के ऩहनावे ऩे भढ दे ते हो ,अगय ऩहनावा ही जजम्भेदाय है तो ज्मादातय गाव दे हातो भें जो ये ऩ हो यहे है क्मा वो रड़ककमा जीॊस ,स्कटथ ,ऩहनती है ? साडी ऩहन ने वारी भदहराओॊ के साथ मह होता है उनका बी ऩहनावा ही जजम्भेदाय है ,फुकाथ ऩहन ने वारी मुवती के साथ घय वारे फरात्काय कय यहे है ,खद ु फाऩ ,बाई ,भाभे ,चाहे ,सफ रयश्तों को ताक ऩे यख के कय यहे है क्मा इसके मरए बी ऩहनावा ही जजम्भेदाय है ? इसके मरए मसपथ गन्दी सोच औय आऩ जैसे रोगो की ऩुरुष भानमसकता ही जजम्भेदाय है जो ककसी की भौत को बी सही ठहया सकते है ,हभ अऩने अॊदय के

जानवय को काफू नहीॊ कय ऩाते तो इसभें हभाया दोष है ,ककसी के कऩड़ो का नहीॊ ,काभाॊध रोग कऩडे

नहीॊ दे खते ,रयश्ते नहीॊ दे खते फस ताय ताय कय दे ते है ,सौ फात की एक फात अगय मह रड़की आऩ की रयश्तेदाय होती तो क्मा तफ बी आऩ मही कहते ? इतना सुनते ही वे गुस्सा हो गए ‘’ फ़ारतू फात भत कयो दे वेन ‘’

भैंने कहा ‘’ क्मों मे फ़ारतू कैसे ? आऩ मसपथ सुन नहीॊ ऩाए , औय जजनके साथ फीतेगी उनका अॊदाजा रगा ऩामेंगे ? आऩको मसपथ सुनके तकरीप हुमी , औय इसके घयवारो की हारत का अॊदाजा होगा आऩको .ऐसे फमान दे ने से ऩहरे कभ से कभ एक फाय तो सोच मरमा कयो ,.. वे व्मजक्त चऩ ु हो गए औय कपय फहस नहीॊ की ,

रेककन साये यास्ते औय साया ददन भन भें उथरऩुथर फनी यही हभ ऩुरुषों की इस घदटमा भानमसकता ऩय क्मों हभ खद ु को इॊसान कहते है ? क्मा इस रामक है ?


सभाप्त

भनहूस

कुछ ददन ऩहरे की फात है भै ऑकपस से हभेशा की तयह रेट आ यहा था ,जफ भै अऩने घय से कुछ दयू ी ऩय था ,

तबी यास्ते के एक कूड़े के ढे य ऩे फैठा कुत्ता जोय जोय से यो यहा था , उसके योने की

आवाज सन्नाटे भें गूॊज उठी ,यात के रगबग साढे फायह फज यहे थे ....उसकी आवाज भें

अजीफ सा ददथ था ,जजसे रोग भौत की भनहूमसमत कहते है , इतने भें भैंने दे खा के एक व्मजक्त दौड़ा चरा आमा औय कुत्ते को भायने के मरए ऩत्थय उठामा ,

भुझसे दे खा नहीॊ गमा औय भै फीच भें आ गमा उसके फाद जो हुवा वो इस प्रकाय है , भै :रुको बाई ,इस फेजुफान को क्मों भाय यहे हो ? व्मजक्त : दे ख नहीॊ यहे हो साहफ मे भनहूमसमत पैरा यहा है , भै : ककसी भनहूमसमत ?

व्मजक्त :कुत्ते का योना भनहूस होता है साहफ , जहा योता है वहा ककसी ना ककसी की भौत जरूय होती है , भै : कभार है ऐसे कैसे उसके योने से ककसी के भयने का क्मा सॊफॊध ? व्मजक्त : क्मोकक कहावत है कुत्ते भौत को दे ख रेते है ,

भै : इसका भतरफ इन्हें भौत अथाथत ‘मभदत ू ‘ ददखाई दे ते है ,जो के भनुष्म को नहीॊ ददखाई दे ते ?

व्मजक्त : जी ,इसीमरए भै इसे भाय के बगा यहा था , (इसी फीच कुत्ता यो यहा था ,तो भैंने अऩने हाथ भें री हुमी कोन वारी आईसक्रीभ उसके साभने पेंक दी ,कुता उस ऩय झऩट ऩड़ा औय खाने रगा ) भै : रे बाई भौत तो चऩ ु हो गमी अफ ,

व्मजक्त : आऩ को भजाक रगता है ,इसे भाके बगाओ वयना कपय योमेगा ,

भै :अये बाई अबी तो दे खा फेचाया बख ू ा है इसमरए यो यहा है ,ककसी की भौत ऩय नहीॊ ,औय वैसे बी तभ ु इसे क्मों भायोगे ? इसका कसयू क्मा है ? इसे भौत ददखाई दे ती है

इसमरए ? इसभें इसकी क्मा गरती है बाई , भौत तो सबी को आनी है चाहे मे योमे मा ना योमे , व्मजक्त : तो अऩने घय के साभने रे जाओ ना इसे , भै : नहीॊ रे जा सकता क्मोकक वहा के कुत्ते इसे यहने नहीॊ दें गे ,अये जफ आदभी नहीॊ


यहने दे ते तो कुत्ते तो कपय बी बफन ददभाग के है ,औय वैसे बी एक फात फताओ आजकर तो रोग ककसी के भयने ऩय नहीॊ योते ,ककसी को पकथ ही नहीॊ ऩडता ,इॊसाननमत खत्भ हो यही है वहा इस बफचाये भें थोड़ी सी है तो क्मा गरत है ? व्मजक्त : क्मा फकते हो ? इसभें कैसे इॊसाननमत है ? भै : जो ककसी अनजान की भौत ऩे योमे वो तो इॊसान से फढकय हवा ना ? फजाम ऩत्थय भायनेवारे के ? इस जानवय को ऩता बी नहीॊ के कौन भयनेवारा है कपय बी शोक भना यहा है क्मा मे कभ है , आऩ ककसी ऐसे की भौत ऩय योते हो जजसे आऩ नहीॊ जानते ? व्मजक्त चऩ ु हो गमा ,

व्मजक्त : ठीक है भै चरता हू आऩसे फहस कयके कोई भतरफ नहीॊ वैसे बी कुत्ता बाग गमा है , वो फॊधू जैसे ही भड़ ु े वैसे ही एक भोटय साईककर उन्हें कहते हुए तेजी से ननकर गमी ,फार फार फचे वयना टक्कय रगना तम था ,उस भोटयसाईककर वारे ने उनकी भाता जी फहनजी को कृताथथ कयते हुए चाय शब्द फाईक चराते हुए ही बफना रुके सूना ददए , भै : बाई कभ से कभ कुत्ते का योने का भतरफ अफ सभझ रो बाई ,उसकी वजह से फच गमे ,उसने चौकन्ना कय ददमा वयना आज तो गमे थे ,

इतना कह के भै चरता फना ,औय वो बाईसाहफ भोटय सानमकर वारे की भाताजी फहनजी के ऩीछे रग गमे ,

सभाप्त .........

भै इतना दहम्भती नहीं हु ! योज की तयह वह अऩनी मशफ्ट खत्भ कयके घय की औय जा यहा था . यास्ता कापी हरयमारी बया है ,एक तयप घने ऩेड़ औय ऩहाड़ औय सीधी सी सडक ,दस ु य औय दहन्द ू आश्रभ थे जो अबी हार ही के कुछ सारो भें फने थे जजनभे भहादे व औय श्री

याभ के भॊददय

औय एक गौशारा बी है .

उसका मह योज का ननमभ था के वह आते सभम व्मस्त सडक से घय जाने के फजाम इस सडक से ऩैदर घय जाना ऩसॊद कयता , हाॊ इस तयह से उसे रगबग तीन ककरोभीटय ऩैदर चरना ऩड़ता


था जो के उसे ऩसॊद था क्मोकक अफ कुछ ददनों से हरकी हरकी तोंद बी ननकर यही थी ,जजसे सभम यहते दफाना आवश्मक था क्मोकक कसयत कयने के मरमे अफ वक्त ननकारना भुजश्कर था .

वैसे बी गहय जाने के मरमेइसके अरावा दस ु या यास्ता बी था ,जो के एक व्मस्त सडक थी ,उस

सडक से ऑटो से आने के फजाम इस सडक से ताज़ी हवा रेते हुमेसुफह का आनन्द रेना उसे ऩसॊद था . वैसे इस यास्ते भें उसे कबी कबाय उसके ऩरयगचत बी मभर जामा कयते थे जो के हभेशा अऩने अऩने दऩ ु दहमा ऩय सवाय यहते थे ! वे उसे फर ु ाते औय अऩनी दऩ ु दहमा ऩय फैठने को कहते ,रेककन वह उन्हें नम्रता से भना कय दे ता था! हाॊ उसकी इस आदत के चरते उसे रोग ज़या कॊजूस टाईऩ सभझने रगे जो कुछ ऩैसे फह्चाने की खानतय ऩैदर ही चरना ऩसॊद कयता था .

रेककन उसे इसकी ऩयवाह नहीॊ थी ,शामद ही कबी की हो , उन भूखो को क्मा ऩता के सुफह क्मा होती है ,सौंधी मभटटी की खश ु फु ,जॊगर की शीतर हवामे,हरकी धध ुॊ भें चरना ,भॊददय औय आश्रभ से आती आहुनत की भहक ,

इन सफका आनन्द उन्हें क्मा ऩता जो दो ऩग चरने के मरमे ही दऩ ु दहमा इस्तेभार कयते है

.आश्रभ के आगे वारे यास्ते ऩय एक नारा सा फन गमा था ,ऩानी के प्रवाह से जो यास्ते को बफच से काटता था ,वाही नजदीक ही ऩानी एक ऩाईऩरामीॊन थी जजसके एक कोने से ऩानी फहता था ,उसी ऩानी के प्रवाह ने मह नारा फनामा था , रगाताय फहने से नारे का ऩानी स्वच्छ यहता था ,उसी ऩानी भें गचड्डमों के एक झुण्ड योजाना सुफह सुफह अठखेमरमा कयता था , उसे मह दे खना फहु ऩसॊद था ! आज बी वह उस नारे की तयप फढ़ यहा था ,रेककन उसे उन गचड्डमों के झण् ु ड भें एक अजीफ सी हरचर ददखाई थी .

क्मा भाजया है ? सोचते हुमे वह आगे फढा .मु तो मह एक छोटी फात थी ,रेककन छोटी छोटी फातो का फतॊगड फनाना उसका ऩुयाना शौक था . औय दृश्म दे खते ही ऩरबय को वह ठीठक गमा ,दृश्म ही ऐसा था , ऩानी भें एक तीन पूट के साॊऩ ने एक नन्ही गचड्ड़मा को धयदफोचा था , औय गचड्ड़मा पडपडायही थी ,फाकी गचड्डमों का झुण्ड उस गचड्डमा को छुड़ाने की कोमशश कय यहा था वे कबी साॊऩ को


चोंच से भायती तो कबी ऩॊजो से ,रेककन साॊऩ बी ऩूया अड्ड़मर था ,वह गचड्ड़मा को छोड़ने को तैमाय नहीॊ था , गचड्ड़मा आधी उसके भुह भें थी ,औय आधी फाहय ,

उसने मह ददशी दे खा तो उसे गचड्ड़मा की उस दशा ऩय दमा आई ,उसका भन ववचमरत हो गमा ,वह सोचने रगा के उस नन्ही जान को कैसे फचामे? क्मा ऩता वह फचेगी मा नहीॊ ,अगय साॊऩ ने अऩने ववष दॊ त उस ऩय जभा ददए होंगे तो सभझो के कुछ नहीॊ हो सकता . तो क्मा उसे ऐसे ही छोड़ द ू ? नहीॊ .ऐसे कैसे कय सकता हु ,बरे ही उसे फचानेके फाद वह जहय से भय जाम ,रेककन तफ कभ से कभ मह सुकून तो होगा के उसने कोमशश तो की थी . मही सोचकय उसने महाॉ वहा नजये दौडाई औय ऩास ननशाना फना कय पेंके

के कुछ ऩत्थय उठा मरमे ,औय साॊऩ को

रेककन साॊऩ ने बी जजद ऩकड़ी थी के चाहे जो हो जाम वह उस गचड्ड़मा को नहीॊ छोड़ेगा . अफ वह सोच भें ऩड गमा के का कये ,अगय ऩत्थय से भारूॊगा तो साॊऩ गचड्ड़मा को खझॊझोड़ दे गा , तफ उसने साॊऩ की हारत दे खख ,साॊऩ उस गचड्ड़मा को आधा गटक चुका था ,उसका भुह पैरा हुवा था औय उसभे गचड्ड़मा आधी सभाई हुमी थी .

अफ उसने कोई अन्म उऩाम ना दे ख के झऩट कय साॊऩ का भुह दफोच मरमा ,औय अऩना एक ऩैय बी साॊऩ के ऩूॊछऩय यख ददमा ,वह जानता था के साॊऩ की हारत ऐसी है के वह वाय नहीॊ कय ऩामेगा .

उसने सावधानी से साॊऩ के भुह ऩय ऩकड फनाए यखी औय गचड्ड़मा को उसके भुह से खखॊच मरमा ,औय खीॊचते ही साॊऩ को बी एक झटके से झाड्ड़मो भें उछार ददमा ,

उसने गचड्डमा को ऩानी भें यखा ,उसकी साथी गचड्ड़मा उसे दे ख यही थी ,गचड्ड़मा ऩानी भें ननश्चेत ऩड़ी थी ,फाकी की गचड्ड़मा उसे जगा यही थी . रेककन कुछ ही दे य भें गचड्ड़मा ने ऩॊख पडपडामे औय उठ के खड़ी हो गमी ,


मह दे ख कय उसने बगवान को धन्मवाद ददमा के साॊऩ ने शामद अऩने ववष दाॊतों का प्रमोग नहीॊ ककमा ,मा कपय साॊऩ ववषहीन था ,चाहे जो बी हो रेककन उसका प्रमत्न ववपर नहीॊ हुवा . अफ वह ननजश्चॊत था औय ख़श ु ी से अऩने घय की औय चर ऩड़ा. चरते चरते उसके भन भें एक सवार उबया ‘’ कैसे रोग अऩने साभने इतने ऩशु कटते दे ख रेते

है ,दे खते है मह अरग फात है रेककन खद ु ही काट ते है ,कैसे ? इसके मरए तो कापी दहम्भत

चादहमे होगी ( मह फात उनऩय रागू नहीॊ होती जजनका जीवन इसी ऩय ननबथय है ,मह उनऩय रागू होती है जो मसपथ जीब के स्वाद के मरमे ऩशु ऩक्षऺमों का बऺण कयते है ) ... ‘’ चरो अच्छा हुवा के भै इतना दहम्भती नहीॊ हु ,’’ कह कय वह भस् ु कुयाता हुवा चर ददमा .... रडका कौन था ? नाभ क्मा था उसका ? ..... मह भहत्वऩण ू थ नहीॊ , इस घटना से आऩने क्मा सभझा मह भहत्वऩण ू थ है सभाप्त

फर ु ॊदी का फोझ ' क्मा माय अमभत कभ ऑन माय मही तो उम्र है भजे कयने की औय तू इसी उम्र भें इतनी टें शन रेकय फैठा है ? ' प्रशाॊत ने अऩने दोस्त 'अमभत ' से कहा !

अमभत : नहीॊ माय भै टें शन नहीॊ रे यहा , भझ ु े फस जया सी कफ़क्र है .

'डोंट वयी माय स्टडीज के फाद की कफ़क्र भत कय , अफ तक भै तेया साथ दे ता आमा हु , आगे बी भै तेये साथ हु ! कैरयमय की कफ़क्र भत कय बाई सफ तेया ही तो है ! ऩाऩा का बफजनेस आखखय भझ ु े ही तो सम्बारना है !' प्रशाॊत ने अमभत को आश्वश्त कयते हुमे कहा . 'ककतना कये गा माय तू ? भम्भी -ऩाऩा की भौत के फाद एक तू ही तो है जजसने भझ ु े सम्बारा है ! कॉरेज की पीस ,ऩढाई का खचाथ ,सबी तो तन ू े ही ककमा है ! इतने अहसान है तेये भझ ु ऩय , अफ

औय इतना अहसान भत राद भझ ु ऩय के फोझ इतना हो जाम के सायी जजन्दगी तेया दोस्त खड़ा ना हो सके '

'चुऩ कय सारे , क्मा फकवास रगा यखी है, अहसान -अहसान ! मह रफ्ज़ इस्तेभार कयके अऩनी

दोस्ती को गारी भत दे ! औय माय भै अकेरे बरा क्मा कय सकता हु जफ तू भेये साथ नहीॊ होगा ?


इसमरमे कफ़क्र छोड़ औय अऩना कैरयमय भेये साथ शरू ु कय ऩाऩा के बफजनेस भें हाथ फॊटा कय सभझे ? ' 'नहीॊ माय भै अफ अऩने ऩैयो ऩय खड़ा होना चाहता हु , कुछ ऐसा कयना चाहता हु के भझ ु े अऩने वजूद के होने ऩय पक्र हो सके ' ' ओके बाई कय मरमो पक्र अऩने वजूद ऩय ! अफ चर ज़या कैं टीन चरते है 'नमभता ' आई होगी माय ' 'नमभता ' का नाभ रेते हुमे उसके चेहये ऩाय आती चभक साफ़ ददखी थी ! दोनों कैं टीन की औय चर ऩड़े ,

प्रशाॊत एक बफजनेस टामकून का फेटा था ,रेककन ऩैसो का घभॊड कबी उसे छु बी नहीॊ ऩामा ,

अमभत एक भध्मभवगीम ऩरयवाय से था ! वही कहानी जो अक्सय भध्मभवगीम ऩरयवाय के साथ दोहयाई जाती यही है ,

अमभत का ऩरयवाय बी औयो की तयह फड़ी भजु श्कर से अऩने एकरौते फेटे की ऩढाई का खचाथ उठा यहा था !

हभाया फेटा हभायी तयह अबावो भें ना जजमे इसमरमे उसके भाॉ फाऩ ने उसे शहय के यईसों का कॉरेज सभझे जानेवारे कॉरेज भें एडमभशन ददरामा था !

नमा एडमभशन था सो यै गगॊग तम थी , औय उसका बम बी हय स्टूडेंट की तयह अमभत को था ! रेककन यै गगॊग के दौयान ही उसकी भर ु ाक़ात प्रशाॊत से हुई ! प्रशाॊत ने उसे इस नमे भाहौर भें अभ्मस्त होने भें कापी भदद की ! औय धीये धीये दोनों की दोस्ती ऩयवान चढने रगी !

इसी बफच बायी फयसात के कायण ऩहाड़ धॊसने से अमभत ने अऩने घय के साथ साथ अऩने ऩरयवाय को बी खो ददमा !

अफ वह ननताॊत अकेरा था ! बववष्म अॊधकायभम था , रेककन प्रशाॊत ने उसे कबी अकेरा नहीॊ छोड़ा ! हय कदभ ऩय प्रशाॊत अमभत के आगे ही खड़ा नजय आमा ! उनकी दोस्ती एक मभसार फन चुकी थी साये कॉरेज भें !

अमभत ने अऩने ऩरयवाय के साथ साथ कई भासभ ू ो को भयते दे खा था ! अऩने भाॉ फाऩ की राशो को

वह मसपथ अऩने घय के भरफे की वजह से ही ऩहचान ऩामा था ! इस हादसे ने उसे अन्दय तक दहरा ददमा था ! इसी घटना ने जजन्दगी के मरमे उसकी सोच फदर कय यख दी थी !

वह साभाजजक कामो भें ज्मादा रुगच रेने रगा था ! कई 'एन जी ओ ' से वह जुड़ा हुवा था ! अऩने स्तय ऩय जो हो सके वह वह सफ कयता था इस सभाज के मरमे ! प्रशाॊत को उसका इस तयह से दस ु यो के मरमे जीना ऩसॊद नहीॊ था !

वह चाहता था अमभत उसके बफजनेस भें हाथ फॉटामे ,ना की सभाजसेवा कये !

' अफे माय तू बी ना क्मा जरुयत है तझ ु े सभाजसेवा कयने की ? तेये आगे सायी जजन्दगी ऩड़ी है बाई !


अये तेये आगे अबी तो सायी दनु नमा झुक कय सराभ फोरेगी , फहुत सह मरमा तन ू े अफ तेये खश ु यहने के ददन आमे है तो तू ऩागर फन यहा है ! इन सफभे कुछ नहीॊ यखा ! मह सफ मसपथ ककताफो भें अच्छा रगता है असर भें नहीॊ !

रेककन अमभत ऩय इसका कोई असय नहीॊ हुवा ! ' दे ख दोस्त , भझ ु े इस काभ भें ख़ुशी होती है ! भझ ु े ककसी की सराभी नहीॊ चादहमे फस ककसी की

भदद कयके जो दव ु ाए मभर जाती है भेये मरमे वही कापी है ! अऩने मरमे तो सबी जीते है दोस्त ,

दस ु ये के मरमे कबी जीकय दे खो ! मह बफजनेस भेये फस का नहीॊ है , औय माय सायी जजन्दगी तो भै तेये सहाये नहीॊ यह सकता न ?

भझ ु े ऩता है तझ ु े अऩने दोस्त को आगे फढ़ता दे ख ख़ुशी होगी , रेककन भै इसके मरमे नहीॊ फना ,' प्रशाॊत उसे भनाने की हय कोमशश कयता रेककन सफ फेकाय !

कॉरेज का आखखयी ददन बी आ गमा , आज प्रशाॊत कापी खुश था क्मोकक उसने 'नमभता ' के आगे बी अऩने प्माय का इजहाय कय ददमा था , जजसे नमभता ने एक्सेप्ट कय मरमा था ! वह अऩनी ख़ुशी फाॉटने के मरमे अमभत को ढूॊढ यहा था !

'क्मा हुवा प्रशाॊत , ककसे ढूॊढ यहे हो ' नमभता ने उसे ऩयशान दे ख कय ऩछ ु ा ! ' नमभता , भै अमभत को ढूॊढ यहा हु , ऩागर कही का ऩता नहीॊ कहा चरा गमा ' प्रशाॊत के शब्दों से उसकी ऩये शानी साफ़ झरक यही थी ! ' उसे कॉर कय के ऩछ ू रो ना ' नमभता के कहते ही प्रशाॊत ने अमभत का नम्फय डामर ककमा ! 'ओफ्पो जस्वच ऑप है उसका पोन '

'सारे को कहते बी नहीॊ फनता, कही जाना है तो फताकय जामे , उसके घय ही जाना होगा ,नमभता भै थोड़ी दे य भें आता हु उस से मभरकय '

'प्रशाॊत .......' नमभता की फात अधूयी ही यह गई क्मोकक प्रशाॊत इतनी तेजी से बगा था के ऩर बय भें नजयो से ओझर हो गमा !

दयवाजे ऩय दस्तक दी , दयवाजा अमभत ने ही खोरा था !

' क्मा कय यहा है तू महाॉ ? भै वहा ऩागरो की तयह तझ ु े ढूॊढ यहा हु औय तू महाॉ .........'' गस् ु से से बफपयते प्रशाॊत की नजये

फेड ऩय भौजद ू सट ू केस ऩय ऩड़ी ,जजसभे कऩडे सरीके से यखे हुमे थे ! 'म मह क्मा है अमभत ? ' अमभत अऩना सय झुकामे खड़ा था !


'अमभत फता भझ ु े ,मह कहा जाने की तैय्मायी कय यहा है तू ? ' बफपयते हुमे प्रशाॊत ने कहा !

' भझ ु े ऩता था प्रशाॊत तू भझ ु े जाने नहीॊ दे गा इसमरमे भै चऩ ु के से ननकरा जाना चाहता था ' अमभत ने कहा ! ' रेककन कहा जा यहा है ? क्मों ?

अमभत ने एक मरपापा अऩनी जेफ से ननकार कय प्रशाॊत की ओय फढ़ा ददमा .

प्रशाॊत ने फेसब्री से मरपापा खोरा औय उसभे से ननकरे हुमे 'कागज़ ' को एक ही साॊस भें ऩयू ा ऩढ़ डारा ! ' इतनी फड़ी फात तन ू े भझ ु से नछऩाई ? दोस्त कहता है ना भझ ु े ? औय भझ ु े इस रामक बी नहीॊ सभझा के भझ ु े मह फता सके ?

क्मों कय यहा है तू ऐसा ? क्मा कभी यह गई माय अऩनी दोस्ती भें ? अये ऩगरे ककस फात की कभी है तझ ु े महाॉ ? क्मों तझ ु े मही काभ कयना है , भेये साथ चर आज ही बफजनेस ज्वाइन कय फस , भै तझ ु े कही नहीॊ जाने दॊ ग ू ा प्रशाॊत ने ननणाथमक स्वय भें कहा !

' इसमरमे भै तझ ु े इस ववषम भें कुछ बी फताना नहीॊ चाहता था ! भझ ु े ऩता था तू भझ ु े जाने नहीॊ दे गा ! तेये सहाये भै काभमाफ तो हो जाऊॉगा भेये दोस्त ,रेककन वह जजन्दगी उधाय की जजन्दगी होगी ,रोग हभेशा मही कहें गे के वह दे खो अमभत जजसने प्रशाॊत को सीढ़ी फनाकय काभमाफी ऩाई , इस 'फर ॊ ी का फोझ ' भै नहीॊ सह ु द ऩाऊॊगा माय '

अमभत के शब्दों भें ददथ उतय आमा था .

'फहुत फड़ी फात कह दी तन ू े बाई , एक झटके भें अऩने दोस्त को खुद से अरग कय ददमा , अये माय जो भेया है उस ऩय तेया बी फयाफय का हक़ है , भै तझ ु े जानता हु भेये साभने तो कभ से कभ मह झूठे फहाने भत फना ! हभ तो चाहते ही मही है के हभायी ऩहचान हभायी दोस्ती से हो , तो इसभें रोग कहा से आ गमे ?'

सच तो मह है के सभाज सेवा का बत ू तेये मसय चढ़ा है , इसके आगे हभायी दोस्ती तझ ु े नजय नहीॊ आती ,ठीक है तू जाना चाहता है तो चरा जा भै होता कौन हु तझ ु े योकनेवारा ? रेककन भेयी एक फात हभेशा माद यखना दोस्त ,

भाना के भझ ु े अऩने ऩैसो का घभॊड नहीॊ है रेककन मह फात बी सच है के दनु नमा भें ऩैसा जजसके ऩास है रोगो ऩय

उसका याज है ' तेयी सभाजसेवा तझ ु े मसपथ दो वक्त की योटी ही दे सकती है ! कय रे अऩने भन की कय रे ,रें तझ ु े आना तो भेये ऩास ही है !

जफ तेया सभाजसेवा का मह बत ू तेये सय से उतय जामे तो आ जाना भेये ऩास , भेयी दोस्ती तफ बी वैसी ही यहे गी जैसी अफ है '

प्रशाॊत ने अऩने भन की ऩीड़ा अऩने शब्दों से उजागय की !

' भझ ु े भाफ़ कयना दोस्त , औय हाॊ आज तो तू नमभता को प्रऩोज कयनेवारा था क्मा हुवा उसका ? ' अऩनी रयजती आॉखों को उस से चयु ाते हुमे अमभत ने कहा ! ' चुऩ कय सारे फात भत फदर अफ '


'' भै तेये मह फहाने अच्छी तयाह से जानता हु , अफ फाते भत फना ,जफ जाना ही है तो मह सफ जानकय क्मा कये गा तू ? ' प्रशाॊत योषऩण ू थ शब्दों भें फोरा तो अमभत के चेहये ऩय एक हरकी सी भस् ु कयाहट फ़ैर गई . औय वह एकटक प्रशाॊत की औय दे खने रगा ,भस् ु कयाहट कामभ थी !

उसे ऐसे अऩने ऩास दे खते हुमे दे ख कय प्रशाॊत सकऩका गमा , 'अफे ऐसे क्मा दे ख यहा है माय , हाॊ फाफा उसने हाॊ कय दी ,,,,अफ खुश।।???' प्रशाॊत का इतना कहना था के अमभत ने उसे जोय से गरे रगा मरमा . 'अफे क्मा कय यहा है माय ..रोग दे खेंगे तो क्मा कहें गे ? छोड़ भझ ु े '

प्रशाॊत फोरा ,रेककन अमभत ऩय इसका कोई असय नहीॊ हुवा , 'अये रोगो को फोरना है तो फोरने दे , आखख़यकाय तझ ु े तेया प्माय मभर ही गमा .,इस फात की भझ ु े ककतनी ख़ुशी है मह तू नहीॊ सभझ सकता ' अमभत ने कहा .

'हाॊ जैसे तेये जाने की ककतनी तकरीप है भझ ु ,े मह तू नहीॊ सभझ सकता ' प्रशाॊत का गस् ु सा कभ नहीॊ हुवा था . 'दे ख माय फस कय अफ फचऩना भत कय औय चुऩचाऩ भेये साथ चर , तन ू े इतनी भेहनत की है ,ददन यात ऩढाई की है क्मा मसपथ इसी ददन के मरमे ? '

प्रशाॊत उसे सभझाने कोई भौका नहीॊ छोड़ यहा था ,

' प्रशाॊत इसभें भेयी ख़ुशी है माय , अऩनों के मरमे तो सबी जीते है , रेककन दस ु यो के मरमे जीने भें

अरग ही भजा है ,तो अफ सभझाना छोड़ औय ख़श ु ी ख़श ु ी भझ ु े ववदा कय ताकक भझ ु े अऩने पैसरे ऩय द्ु ख न हो '

' ओके अफ सोच ही मरमा है तो भै क्मा कय सकता हु , ' सॉयी माय भझ ु े अबी ननकरना है , भेयी ट्रे न है आधे घॊटे भें '

'क्मा ? अफे तू ..........' आगे कुछ फोरते ना फना प्रशाॊत को तो खीज कय उसने एक जोयदाय भक् ु का अमभत के चेहये ऩय दे भाया ,

' आह ,,,भाफ़ कय दे माय ,भझ ु े तझ ु े ऩहरे ही फता दे ना चादहए था ,' भक् ु का वाकई कापी जोय का ऩड़ा था उसे .

प्रशाॊत को अऩनी गरती का अहसास हुवा औय उसने झट से अऩने दोस्त को गरे रगा मरमा , उसकी आॉखों से जो सैराफ अफ तक रुका हुवा था वह अफ पुट ऩड़ा , ' तू ककतना भतरफी है कभीने ,स्वाथी है तू ,तझ ु े मसपथ अऩनी ख़श ु ी ऩड़ी है ,भेयी तकरीप की ऩयवाह नहीॊ तझ ु े ' पपक ऩड़ा प्रशाॊत

अमभत ने खद ु को फड़ी भजु श्कर से योक यखा था ,वह जानता था के अगय उसकी आॊख से एक बी आॊसू

ननकरा तो वह कभजोय ऩड़ जामेगा ,नहीॊ जा ऩामेगा !


' फस बाई ,अफ योमेगा तो भै नहीॊ जा ऩाऊॊगा ,औय माय भै कही दस ू यी द���ु नमा भें नहीॊ जा यहा ,आता यहूॊगा सार दयसार ,हाॊ शादी भें तो आना ही है ना तेयी ?

'चुऩ कय सारे वयना एक घस ूॊ ा औय जड़ दॊ ग ू ा , शादी भें तो आना ही होगा तझ ु े वयना भै नहीॊ

कयनेवारा शादी ,अच्छा चर तझ ु े ट्रे न तक छोड़ कय आता हु ,' प्रशाॊत अऩनेआऩ को सम्बारते हुमे फोरा ,वह मह सभझ चक ू ा था के अमभत अफ अऩने पैसरे ऩय अड्डग है ,

एकदभ सही वक्त ऩय अमभत औय प्रशाॊत स्टे शन ऩहुॊचे थे ,उनके आते ही ट्रे न बी आ गई थी . 'दे खा आज बगवान बी भेये साथ नहीॊ है ,चाॉद मभनट बी नहीॊ दे सकता था भझ ु े , ट्रे न बी तयु ॊ त आ गई चर जल्दी फैठ अॊदय ,औय ऩहुॉच कय कॉर करयमो वयना सभझ रेना ,' प्रशाॊत फोरा , 'ठीक है अफ भै चरता हु माय, कपय मभरेंगे ' अमभत ने कहा औय दोनों माय एकदस ू ये के गरे मभरे , .

गाडी यफ़्ताय ऩकड़ चुकी थी ,औय ट्रे न नजयो से ओझर हो चुकी थी , प्रशाॊत ने अऩनी आॉखे ऩोंछी जो गीरी हो चुकी थी .

उस ददन के फाद ददन ऩॊखो ऩय सवाय होकय ऐसे गज ु यते चरे गमे के कफ भहीने फीते कफ सार गमा कुछ ऩता नहीॊ ,

कापी कुछ फदर गमा था ,

प्रशाॊत ने बी अऩनी काबफमरमत के फर ऩय अऩने वऩता के बफजनेस को कापी फढ़ामा , प्रशाॊत की गगनती शहय के टॉऩ यईसों भें होने रगी थी , सभम ने प्रशाॊत को कापी ज्मादा ऩरयऩक्व एवॊ व्मवहारयक फना ददमा था !

प्रशाॊत अफ काभमाफी का आदद हो चक ू ा था , रेककन इतने ऩय बी उसे सॊतोष ना था , अफ वह काभमाफी की उस ये स का दहस्सा फन चुका था जजसका कोई अॊत नहीॊ , औय अमभत ?????

उसका पोन मदा कदा आता यहता था , उस भैगजीन भें खफय छऩी थी प्रशाॊत की शादी की , खफय ऩढ़ कय अमभत का हाथ अऩनेआऩ टे रीपोन की ओय फढ़ा . प्रशाॊत का नम्फय डामर ककमा ,

रयॊग सन ु ते ही उसकी धडकने तेज हो गई थी ,

'हे ल्रो ' एक अऩरयगचत भदाथने आवाज ने पोन का जवाफ ददमा ,

' जी भै अमभत फोर यहा हु , भझ ु े प्रशाॊत से फात कयनी है ' अमभत ने कहा . ' सॉयी सय वे इस वक्त भीदटॊग भें व्मस्त है ,आऩ अऩना सन्दे श छोड़ सकते है ' 'जी उनसे कदहमेगा के उनके दोस्त अमभत का पोन था ' ' जरुय सय '

इतना कह कय पोन कट गमा ,

' भेया दोस्त अफ कापी फड़ा आदभी फन गमा है , ' भन ही भन भस् ु कुयाते हुमे अमभत ने कहा


अमभत ने कई फाय पोन रगामा रेककन हभेशा व्मस्त ,

दयवाजे ऩय हुमी दस्तक ने अमभत को चौंका ददमा ,अमभत ने दयवाजा खोरा , ' सय आऩका कूरयमय आमा है ' कूरयमय फॉम ने एक ऩासथर अमभत के हाथ भें दे ते हुमे कहा , अमभत ऩासथर रेकय अन्दय आ गमा . फ्रॉभ : प्रशाॊत अग्रवार

नाभ दे खकय उसे ख़ुशी हुई ,' बरे ही ककतना बी फड़ा हो जामे आखखय है तो भेया दोस्त ही ' कम्ऩते हाथो से उसने ऩासथर खोरा .. एक सन् ु दय से शादी के काडथ ऩय उसकी नजये गचऩक कय यह गई साथ भें एक गचट्ठी बी थी ,

' तझ ु े क्मा रगता है के जैसे तू भझ ु े जाकय बर ू गमा वैसे ही भै बी तझ ु े बर ू जाउॊ गा ? ,फड़ी दोस्ती ननबामी सारे तन ू े ,कहा था आता यहे गा दो सार हो गमे रेककन तू आमा नहीॊ फस पोन कय दे ता है ,ऩता है सारे भझ ु े गरयमा यहा है

के फड़ा आदभी फन गमा है तो पोन उठाने को सभम नहीॊ है ,

रेककन माय तझ ु े क्मा ऩता महाॉ तो बफजनेस फचामे यखना ,भाकेट भें ऩोजीशन फनामे यखना कोई आसान

काभ थोड़े ही है जानता ही है भाककथट कॉम्ऩटीशन ककतना तगड़ा है ,

ओह्ह भै बर ू ही गमा था के तझ ु े कैसे ऩता होगा मह सफ ,तू तो सारा सभाज के मरमे जीनेवारा इॊसान है ,

हा भद्द ु े की फात 'नमभता ' से अफ भै शादी कय यहा हु ,काडथ तो मभर ही गमा होगा साहफ को , ,आ जाना चऩ ु चाऩ , नहीॊ आमा तो सारे वहा आकय भारूॊगा तझ ु े . स्वाथी कही का , प्रशाॊत . ऩत्र ऩढ़कय भस् ु कान औय चौड़ी हो गमी अमभत के चेहये ऩय , इसी के साथ मरफ़ाफ़े भें से दटकट ननकार मरमे अमभत ने ,

औय धन्मवाद कहने के मरमे पोन ननकारा नम्फय डामर कयने ही वारा था के रूक गमा ' फीजी होगा कभीना ' ...औय खुद ही हॊ स ददमा वह .

ऩयु े अग्रवार फॊगरो को दल् ु हन की तयह सजामा गमा था ,

दे शबय के प्रनतजष्टत ऩरयवाय वहा ऩय अऩनी मशयकत कय यहे थे , यात का वक्त था रेककन ददन जैसा भाहौर फना हुवा था . फॊगरो के फाहय भहॊ गी गाड्डमों का ताॉता रगा हुवा था , एक से एक यईस , भेहभानों का आगभन हो यहा था ,

इस चकाचौंध को दे ख कय अमभत एकफायगी तो जैसे स्तब्ध यह गमा ,


इतने फड़े औय बव्म भाहौर भें वह खुद को असहज भहसस ू कय यहा था ,

नमभता के साथ खड़े प्रशाॊत को दे खते ही वह प्रशाॊत की औय दौड़ ऩड़ा , ' अफे प्रशाॊत '

' सारे अफ आमा तू ? इतनी दे य भें ?' कहकय प्रशाॊत ने अमभत को फाॊहों भें बय मरमा , दोनों ऩागरऩन की हद तक खुश थे ,

नमभता को मह दे ख कय अजीफ रगा .

'क्मा मह अमभत है ? इसी की इतनी तायीफ़ कयता है प्रशाॊत ?' उसे अमभत को इतन भहत्व दे ना कुछ अच्छा नहीॊ रगा .

अमभत जल्द ही शादी के काभो भें हाथ फॊटाने रगा ,

भौक़ा दे ख कय नमभता ने प्रशाॊत को अऩने ऩास इशाये से फर ु ामा , ' क्मा मही तम् ु हाया दोस्त अमभत है ?' ' हाॊ क्मों ?' प्रशाॊत ने ऩछ ु ा

' इसका ऩहनावा दे खो , क्मा इस भहकफ़र भें इस तयह का ऩहनावा अच्छा रगता है ?' नमभता ने नाक बौ मसकोड़ते हुए कहा . ' नमभता इॊसान की ऩहचान उसके कऩड़ो से नहीॊ होती। वह भेया दोस्त है ,'

प्रशाॊत ने भस् ु कुयाते हुमे कहा . ' भैंने मह नहीॊ कहा के उसे ऩसॊद भत कयो ,रेककन उसे ढॊ ग के कऩड़े तो ऩहनने चादहमे , आखखय महाॉ ककतनी फड़ी फड़ी हजस्तमा आई हुमी है ,भीड्डमा है , सफ तम् ु हे ही कवये ज कय यहे है ,ऐसे भें वह तम् ु हाये साथ यहे गा तो अच्छा नहीॊ रगेगा ,रोग फाते फनामेंगे , इस से तम् ु हाया अऩभान तो होगा ही साथ ही साथ उसका बी होगा ,भै नहीॊ चाहती के तम् ु हाये दोस्त का अऩभान हो ' ओके फाफा भै कुछ कयता हु ' कहकय प्रशाॊत अमभत की औय फढ़ गमा . ' अमभत भेये साथ आ ज़या ' 'क्मा हुवा माय ' अमभत प्रशाॊत के साथ हो मरमा प्रशाॊत एक कभये भें आकय रूका ,

अमभत उसे दे ख यहा था , प्रशाॊत ने ददवाय भें भौजूद वाडथ यॉफ खोर ददमा

'मह क्मा है प्रशाॊत ?' कुछ सभझ भें न आने की वजह से अमभत ने ऩछ ू ा

' अफे कऩडे है माय , भेयी शादी है ,ऐसे ही थोड़े ना है , चर पटापट इनभे से कोई एक मसरेक्ट कय औय चर जल्दी यस्भ शरू ु होनेवारी है ' प्रशाॊत ने कह ददमा . फस ..अमभत सभझ गमा उसका कहना .

प्रशाॊत बी उसके भनोबावों को सभझ चुका था , वह उसके ऩास ऩहुॊचा 'क्मा हवा ? अये माय ऐसा कुछ नहीॊ है जैसा तू सभझ यहा है , फस माय तेये दोस्त का शौक है मह के उसका दोस्त बी दल् ु हे से कभ ना रगे ,अये माय आऩनी दोस्ती ककसी कऩडे -शऩड़े की भोहताज है


क्मा ? रेककन माय कुछ जगहों ऩय थोड़ा फहुत पोभेमरटीज ननबानी ऩड़ती है, मह फस वही है । दे ख अफ भझ ु े गरत भत सभझ माय , '

' भझ ु े अऩने दोस्त ऩय खुद से ज्मादा मकीॊ है माय ,ऐसा कहकय भझ ु े शमभिंदा भत कय ,चर जा फाहय भै तैमाय होकय आता हु ' अमभत ने भस् ु कुयाते हुमे कहा तो प्रशाॊत खुश हो गमा ,

औय प्रशाॊत के जाते ही अमभत की आॉखों से आॊसू छरक ऩड़े , आज उसे अऩने ऩास कुछ बी ना होने का अफ़सोस हुवा ऩहरी फाय . तैमाय होकय अमभत फाहय ननकरा ,

नमभता मह दे ख कय खश ु हो गई के अमभत ने उनकी फात भान री , वह अमभत के ऩास दे ख कय भस् ु कुया दी ,

अमभत बी भस् ु कुया ददमा .

रेककन उसके भन भें उथर ऩथ ु र भची हुमी थी , उनकी ऩहचान ही उनके आड़े आ यही है , क्मा भेयी वजह से प्रशाॊत को फेइज्जती सहनी ऩड़ेगी ऐसे ही ? उसने भौके का ख्मार कयते हुमे इन ववचायों को झटक ददमा , शादी हो गमी , भेहभानों के इस झभेरे भें ककसी ने अमभत की सध ु नहीॊ री , अमभत सभझता था मह सफ , वह उनभे से नहीॊ थे जो छोटी सी गरतपभी की वजह से दस ु यो को इल्जाभ दे ! उसे अऩने दोस्त ऩय मकीॊ था ,

अगरी सफ ु ह जफ वह ननकरने रगा प्रशाॊत उसके साभने खड़ा हुवा . ' इतनी जल्दी क्मा है माय .आमा है तो कुछ ददन रुक कय जा ,भाफ़ कय दे माय भै व्मस्त था इसमरमे ज्मादा फाते नहीॊ कय ऩामा

तझ ु े क्मा सभझाना माय तू खद ु ही सभझदाय है सफ सभझता है , रुक जा दोऩहय भें तझ ु े छोड़ दॊ ग ू ा भै .

दे ख भना भत कयना मसपथ कुछ दे य के मरमे कह यहा हु अमभत ने सहभती भें सय दहरा ददमा ,

औय अमभत घय भें चहरकदभी कय के अऩना भन फहरा यहा था , वह घय की ख़फ ू सयू ती ननहाय यहा था ,

' प्रशाॊत हद होती है हय फात की , क्मा अमभत ,अमभत रगा यखा है ,अफ तम् ु हायी जजन्दगी भें भै बी हु ' अमभत के कानो भें मह शब्द ऩड़े जो के ऩास के कभये से आ यहे थे ,कभये का दयवाजा खुरा हूवा था , ' नमभता ,अमभत के फाये ऐसी फाते भत कयो , उसे भझ ु से कुछ नहीॊ चादहमे , भै खुद उसके ऩीछे ऩड़ा यहता हु ' प्रशाॊत ने सभझाने की कोमशश की .


' क्मों क्मा जरुयत है तम् ु हे ? जफ वह खुद भना कयता है तो क्मों तभ ु उसके ऩीछे ऩड़े यहते हो ? ,खुद

को दे खो सभाज भें इज्जत है तम् ु हायी , कोई ये ऩट ु े शन है ,जफ से वह गमा था तफ से तभ ु ने कापी कुछ हामसर ककमा था , अफ वह कपय अ गमा तो कही तभ ु कपय उसके ऩीछे ऩड़ कय ........'

' फकवास फॊद कयो नमभता ......'कहते हुए प्रशाॊत का हाथ उठा गमा नमभता के गार की ओय . रेककन बफच भें उसके हाथ को अमभत ने योक मरमा .

' क्मा कय यहा है प्रशाॊत ? अबी कर ही शादी हुमी है तभ ु दोनों की , भेयी वजह से इतना तनाव क्मों ?' प्रशाॊत नजये चुयाने रगा , 'बाबी ,भझ ु े कुछ नहीॊ चादहए आऩ फेवजह ऩये शान भत होईमे , भै तो महाॉ आमा बी था तो इसी के कहने ऩय ,भेयी वजह से आऩ आऩस भें भत रड्ड़मे वैसे बी भै जा ही यहा था . अमभत चरा गमा .....

उसके फाद ना कबी अमभत का नम्फय रगा औय ना ही कोई खफय , प्रशाॊत , सफ कुछ बर ु ा कय कपय से अऩने बफजनेस भें रग गमा , भज़फयू ी थी उसकी क्मोकक बफजनेस बावनाओॊ से नहीॊ चरता ,

' नमभता , भै शाभ को दे य से आउॊ गा ,मभस्टय एन्थोनी से बफजनेस डीर है होटर 'केऩटाउन' भें , सो ख़मार यखना खुद का ओके ?' 'ओके ड्डमय ,रव मु ' रव मु टू '

दो घॊटे फाद ..

शहय भें ये ड अरटथ घोवषत कय ददमा गमा था , चप्ऩे चप्ऩे ऩय मभमरट्री औय ऩमु रस की टुकड्डमा ददखने रगी थी ,

शहय भें आतॊकवाददमों द्वाया हभरे की खफये शाभ की खफयों भें प्रभख ु थी ! न्मज ू दे ख कय नमभता का ददर धक से फैठ गमा ,

' शहय के ऩाॊचमसताया होटर केऩटाउन' एक जफयदस्त आतॊकवादी हभरा हुवा , जजसभे कई रोग भाये गमे है , आतॊकवादी ऩयू ी तैय्मायी के साथ आमे थे ,उनके ऩास बायी भात्रा भें हगथमायों का जखीया है ,जजस से वे ऩमु रस को कड़ी टक्कय दे यहे है ,

कई फड़े यैंक के ऩमु रस अगधकायी बी इस हभरे भें शहीद हुमे है , होटर भें अबी कई रोगो के भाये जाने की खफय है ,

औय हभरा फदस्तयू जायी है , कई फड़े बफजनेस टाइकून्स बी इसी होटर भें फॊधक फनामे जा चक ु े है , हभरे की गॊबीयता दे खते हुमे केंर की औय एन एस जी का दस्ता यवाना हो चक ु ा है , नमभता ने प्रशाॊत का पोन रगामा रेककन नॉट यीचेफर !!....अफ क्मा ? कुछ घॊटे फाद ...

शहय के हारात अफ काफू भें आ चुके थे , रेककन होटर भें आतॊकवादी अफ बी फॊधको को भाय यहे थे


, साया दे श इस हभरे को साॊसे योके दे ख यहा था , सबी फॊधको के मरमे दव ु ामे कय यहे थे ! होटर भें रूभ नम्फय पोटी पॉय ,जजसभे प्रशाॊत अऩने रोगो के साथ फॊधक था , 'क्मा चाहते हो तभ ु रोग ' एक अधेड़ से व्मजक्त ने ऩछ ू ा .. ये ट ये ट ये ट ...

गोमरमा चरी औय अधेड़ का ननजीव शयीय प्रशाॊत के साभने आ गगया ,

'ककसी औय को कुछ ऩछ ू ना है ? ' आतॊकवादी ने अऩनी ‘ए. के. सैतामरस’ तानते हुमे कहा , सफ सन्न यह गमे जुफान जैसे तारू से गचऩक गई थी उनकी , प्रशाॊत के भाथे ऩय ऩसीना उबय आमा था !

'तभ ु रोगो को जजतने ऩैसे चादहमे उतने भै दे दॊ ग ू ा फस भझ ु े जाने दो ' प्रशाॊत ने दहम्भत जट ु ा कय

कहा तो सबी हॊ स ऩड़े , धडाक ......

फन्दक ू के फट की चोट प्रशाॊत के भह ुॊ ऩय हुमी औय उसने खून पेंक ददमा ,

गोमरमों की आवाजो से शहय का वह दहस्सा गॉज ू यहा था ,

प्रशाॊत अऩने कभये भें भौजद ू था , दो आतॊकी उनके साभने खड़े थे ,फाकी फाहय ऩहया दे यहे थे , बड़ाभ .. ग्रेनेड का एक धभाका हुवा औय कभया धए ु ॊ से फहय गमा तड तड .. गोमरमों की आवाजे गज ूॊ ने रगी ,

कभाॊडोज वहा ऩहुॉच चुके थे , वे आतॊकवाददमों का फखफ ू ी भक ु ाफरा कय यहे थे , अचानक कभये के फाहय से आनेवारी आवाजे शाॊत हो गमी ,

अॊदय के दोनों आतॊकी सावधान हो गए , एक ने इशाया ककमा ,, फाहय झाॉका औय मही गरती कय गमा वह,

एक चाक़ू उसके भाथे भें ऩेवस्त हो गमा .... जो के एक कभाॊडो का था ,

दस ु या आतॊकी कुछ सभझता इससे ऩहरे ही वह जवान अऩनी जगह से उछर चक ु ा था ,औय उसी आतॊकी ऩय कूद ऩड़ा था ,

आतॊकी गन ऩय ऩकड फना यहा था , रेककन

'धाम ' की आवाज के साथ उसीकी खोऩड़ी भें सयु ाख कय ददमा उस जवान ने ,

एक फायगी उस जवान ने कभये भें नजय दौडाई उसकी नजये 'प्रशाॊत ' ऩय ऩड़ी .....


अचानक फाथरूभ से दो आतॊकी ननकरे ,औय ननकरते ही पामरयॊग शरू ु हो गई .....

फ़ौयान कभाॊडोज ने पूती ददखाते हुए एक को भाय गगयामा ... रेककन दस ु ये ने इस फाय पामरयॊग का रूख फॊधको की औय कय ददमा ....जजनभे प्रशाॊत सफसे आगे था .

रेककन उस कभाॊडो ने सायी गोमरमा अऩने ऊऩय झेर री .....

'आह ....' एक कयाह के साथ ही उस जवान ने अऩनी वऩस्टर का भह ु खोर ददमा औय वह आतॊकवादी गोमरमों से छरनी ऩड़ा नजय आमा ,

वऩस्टर चरती यही ,,,तफ तक चरी जफ तक उसकी गोमरमा ना खत्भ हो गई .

औय वह जवान , जजसने गोमरमा खामी प्रशाॊत के दहस्से की .उसने अऩना नकाफ उताय ददमा .. 'अमभत ' फयफस ही प्रशाॊत के भह ु से ननकरा ...

'अमभत ,नहीॊ मह क्मा ककमा तन ू े अमभत ' प्रशाॊत बफरख ऩड़ा .

' भाफ़ कयना माय ,दस ु या यास्ता नहीॊ था भेये ऩास ' अमभत ने उखडती साॉसों ऩय काफू कयते हुए कहा . ' सारे भझ ु े तेया वह रेटय उसी ददन पाड़ दे ना चादहमे था ,जजसभे तझ ु े मभमरट्री ज्वाइन कयने का ऑपय था ,काश काश '

' अफे सारे ऐसा कयता तो आज भेयी जगह ऩय तू ऩडा नजय आता '' अमभत को भस् ु कुयाने भें भेहनत कयनी ऩड़ यही थी .

' भेये जीने का मही भकसद था माय , ' अमभत ने कहा तो यो ऩड़ा प्रशाॊत .......

कभाॊडोज ने इभायत से आतॊकवाददमों का सपामा कय ददमा , कई वीयो ने अऩनी जान दे कय औयो को फचामा ,

' तू सच फोर यहा था माय ऩैसो से मह फर ॊ ी भै कबी नहीॊ ऩा सकता था ,कबी नहीॊ , तू कहता था ु द ना के तू भेये अहसानों के फोझ तरे नहीॊ खड़ा यह सकता , अफ भै कैसे खड़ा यहू ? फोर सारे फोर ,,,चऩ ु क्मों है अफ फोरता क्मों नही ? नहीॊ फोरा तो कपय से एक घस ूॊ ा भह ु ऩय ऩड़ेगा ,अबी बर ू ा नहीॊ होगा वऩछरे घस ूॊ े को ' के कॊधो ऩय जवानो ने हाथ यखा ,अमभत दनु नमा छोड़ चूका था ,

रेककन उसने अऩनी जजन्दगी दाॊव ऩय रगा कय दस ु यो के ददरो भें हभेशा के मरमे अऩनी जगह फना री ,साया दे श ग़भगीन था ,इस घटना से ,उन वीयो की शहादत ऩय , जो मसपथ दस ु यो के मरमे जीते थे ,

नमभता प्रशाॊत को सयु क्षऺत दे ख कय खुश थी ! उस ऩगरी को क्मा ऩता था के उसकी खुमशमा ककसने रौटाई . सभाप्त


छद्म लेखक अंक 1