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साॊऩरा ( हरयमाणा) ---दीनफॊधु कि िोठी भें इश्वय प्रेभी बाई फहनों िे लरए ईश्वयीम सॊदेश िा प्रोग्राभ आमोजि ---स्थानीम ब्रह्भािुभायी साॊऩरा हरयमाणा भख् ु म वक्ता ---ब्रह्भिुभाय बगवान ् बाई भाउॊ ट आफू ववषम ---तनाव भुक्क्त औय ईश्वयीम सन्दे श फी िे प्रेभ फहन याजमोग लशक्षऺिा योहति हरयमाणा फी िे रीरा बाई सभवऩित िुभाय बगवान बाई ने िहा िी लशव सविआत्भाओॊ िे ऩयभवऩता हैं ऩयभवऩता ऩयभात्भा लशव िा मही ऩरयचम मदद सवि भनष्ु मात्भाओॊ िो ददमा जाए तो सबी सम्प्प्रदामों िो एि सत्र ू भें फाॉधा जा सिता है , क्मोंकि ऩयभात्भा लशव िा स्भतृ तचच- लशवलरॊग िे रूऩ भें सवित्र सविधभािवरॊबफमों द्वाया भान्म है । उन्होंने िहा िि सबऩभाओॊ िा िामण ढूढने िी पजाए तनवामण ढॊ ूूूूढ़े।उन्होंने िहा िि सबऩभा िा च तॊन िमने से तनाव िी उत्ऩवव होती है । बन िे वव ूामों िा प्रफाव


वातावमण ऩेड़-ऩौधों तथा दस ू मों व ऩवभॊ ऩम ऩड़ता है । भदद हबामे वव ूाम सिामात्ब है तो उसिासिामात्बि प्रफाव ऩड़ेगा। उन्होंने होते हुए फी बन बें हय य न हो पताभा िि जीवन िो मोगबत ु त,दीघाक्ूभ,ु शाॊत व सऩय मद्मवऩ भस ु रभान बाई भूतति ऩज ू ा नहीॊ ियते हैं तथावऩवे भक्िा भें सॊग-एअसवद नाभि ऩत्थय िो आदय से चूभते हैं। क्मोंकि उनिा मह दृढ़ ववश्वास है कि मह बगवान िा बेजा हुआ है । अत् मदद उन्हें मह भारूभ ऩड़ जाए कि खुदा अथवा बगवान लशव एि ही हैं तो दोनों धभों से बावनात्भि एिता हो सिती है । इसी प्रिाय ओल्ड टे स्टाभेंट भें भस ू ा ने जेहोवा िा वणिन किमा है । बगवान बाई ने िहा वह ज्मोततबफिंद ु ऩयभात्भा िा ही मादगाय है । इस प्रिाय ववलबन्न धभों िे फीच भैत्री बावना स्थावऩत हो सिती है । याभेश्वयभ ् भें याभ िे ईश्वय लशव, वॊद ृ ावन भें श्रीिृष्ण िे ईष्ट गोऩेश्वय तथा एरीपेंटा भें बत्रभूतति लशव िे चचत्रों से स्ऩष्ट है कि सवाित्भाओॊ िे आयाध्म ऩयभवऩता ऩयभात्भा लशव ही हैं। लशवयाबत्र िा


त्मोहाय सबी धभों िा त्मोहाय है तथा सबी धभिवारों िे लरए बायतवषि तीथि है । मदद इस प्रिाय िा ऩरयचम ददमा जाता है तो ववश्व िा इततहास ही िुछ औय होता तथा साम्प्प्रदातमि दॊ गे, धालभिि भतबेद, यॊ गबेद, जाततबेद इत्मादद नहीॊ होते। चहुॉओय भ्रातत्ृ व िी बावना होती। आज ऩुन् वही घड़ी है , वही दशा है , वही याबत्र है जफ भानव सभाज ऩतन िी चयभ सीभा ति ऩहुॉच चि ु ा है । ऐसे सभम भें िल्ऩ िी भहानतभ घटना तथा ददव्म सॊदेश सुनाते हुए हभें अतत हषि हो यहा है कि िलरमुग िे अॊत औय सतमग ु िे आदद िे इस सॊगभमग ु ऩय ऻान-सागय, प्रेभ विरुणा िे सागय, ऩततत-ऩावन, स्वमॊबू ऩयभात्भा लशव हभ भनुष्मात्भाओॊ िी फुझी हुई ज्मोतत जगाने हे तु अवतरयत हो चि ु े हैं। वे सािाय प्रजावऩता ब्रह्भा िे भाध्मभ द्वाया सहज ऻान व सहज याजमोग िी लशऺा दे िय वविायों िे फॊधन से भक् ु त िय तनववििायी ऩावन दे व ऩद िी प्राक्तत ियािय दै वी स्वयाज्म िी ऩन ु ् स्थाऩना िया यहे हैं।

शिर्डी (महाराष्ट्र )—शिवसाईं नगर के साईं पार्क में दिया शिवरात्रि निमित परमात्मा का का सत्य परिचय  
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