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बगवान ् बाई ने कहा की भनुष्म जैसा कभम कयता है वैसा उसका पर मभरता है कभो फनता मा कंगार बी फनता

से ही व्मक्तत भहान

है । उन्होंने फतामा कक

वाक्मभकी याभामण मरखने से ऩूवम डाकू थे। उन्होंने याभामण ग्रंथ को मरखकय अच्छा कभम कय भहानता


हामसर की है । भनुष्म को फडे कभम का फडा पर मभरता है । साथ ही व्मक्तत को अऩने अंदय दे खकय जीवन के उद्दे श्म की ऩहचान कयनी चाहहए। उन्होंने फतामा कक जीवन की हय घटना के ऩीछे कुछ न कुछ कममाण होता है । भनष्ु म को अऩना भन प्रबु चचंतन भें रगाना चाहहए। व्मक्तत को हय घटना ऩय जो हुआ अच्छा हुआ, जो होगा वह बी अच्छा होगा औय जो हो यहा ह,ैै वह अच्छा हो यहा है जैसी सोच यखनी चाहहए। याजमोग केन्र के ज्मोतत फहन

ने कहा कक भनष्ु म

को कबी बी अऩने उद्दे श्म से बटकना नहीं चाहहए। जफ तक भनुष्म अऩने आऩ को नहीं ऩहचान सकता, तफ तक वह बटकता यहता है। भनष्ु म अऩनी इंहरमों को वश भें कयके ही सही भागम ऩय चर सकता है । जेरय चक्रऩानी गोत्तभ ने कहा क्रोध से

आंतरयक रूऩ से

अकेरा, फेसहाया, कभजोय, अऩभान जनक भहसस ू कयता है । साथ ही भनुष्म की शांतत एकाग्रता बंग हो जाती है ।


जेरय वेकटे श याव

ने कहा कक भनोफर फढाने के मरए

भनष्ु म को भानमसक कसयत कयना जरूयी है । जीवन भें ऩरयक्थथतत आएगी रेककन धैमत म ा जरूयी है सभथमा को शं कयने से भहान फनते है काममक्रभ भें भारुती बाई भौजद ू थे।

बीदर (कर्नाटक) जिला जेल में कर्मो की गुह्य गति पर प्रोग्राम  
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