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नेवासा (भहायाष्ट्र )—भहहरा भॊडर बेंडा नेवासा भें हदमा शिवयात्रि ननशभत ऩयभात्भा का का सत्म ऩरयचम आमोजक –स्थानीम ब्रह्भाकुभायी

सेवाकेंद्र नेवासा

(भहायाष्ट्र ) भख् ु म वक्ता ---ब्रह्भकुभाय बगवान ् बाई भाउॊ ट आफू ववषम –-ईश्वयीम सन्दे ि सभाजसेवक आफासाहे फ फी के वॊदना फहन स्थानीम ब्रह्भाकुभायी नेवासा भहायाष्ट्र फी के रुतज ु ा फहन नेवासा डॉ बायत गोये िेवगाव फी के फूरे बाई कामयक्रभ की िुरू भें सभाजसेवक आफासाहे फ ने बगवान बाई का सन्भान नारयमर औय िार से ककमा


बगवान बाई ने कहा की शिव सवयआत्भाओॊ के ऩयभवऩता हैं ऩयभवऩता ऩयभात्भा शिव का मही ऩरयचम महद सवय भनुष्ट्मात्भाओॊ को हदमा जाए तो सबी सम्प्रदामों को एक सि ू भें फाॉधा जा सकता है , क्मोंकक ऩयभात्भा शिव का स्भनृ तचच- शिवशरॊग के रूऩ भें सवयि सवयधभायवरॊत्रफमों द्वाया भान्म है । मद्मवऩ भस ु रभान बाई भनू तय ऩज ू ा नहीॊ कयते हैं तथावऩवे भक्का भें सॊग-एअसवद नाभक ऩत्थय को आदय से चूभते हैं। क्मोंकक उनका मह दृढ़ ववश्वास है कक मह बगवान का बेजा हुआ है । अतः महद उन्हें मह भारभ ू ऩड़ जाए कक खद ु ा अथवा बगवान शिव एक ही हैं तो दोनों धभों से बावनात्भक एकता हो सकती है । इसी रकाय ओल्ड टे स्टाभेंट भें भस ू ा ने जेहोवा का वर्यन ककमा है । बगवान बाई ने कहा वह ज्मोनतत्रफिंद ु ऩयभात्भा का ही मादगाय है । इस रकाय ववशबन्न धभों के फीच भैिी बावना स्थावऩत हो सकती है । याभेश्वयभ ् भें याभ के ईश्वय शिव, वॊद ृ ावन भें श्रीकृष्ट्र् के ईष्ट्ट गोऩेश्वय तथा एरीपेंटा भें त्रिभूनतय शिव के चचिों से स्ऩष्ट्ट है कक सवायत्भाओॊ के


आयाध्म ऩयभवऩता ऩयभात्भा शिव ही हैं। शिवयात्रि का त्मोहाय सबी धभों का त्मोहाय है तथा सबी धभयवारों के शरए बायतवषय तीथय है । महद इस रकाय का ऩरयचम हदमा जाता है तो ववश्व का इनतहास ही कुछ औय होता तथा साम्प्रदानमक दॊ गे, धाशभयक भतबेद, यॊ गबेद, जानतबेद इत्माहद नहीॊ होते। चहुॉओय भ्रातत्ृ व की बावना होती। आज ऩन ु ः वही घड़ी है , वही दिा है , वही यात्रि है जफ भानव सभाज ऩतन की चयभ सीभा तक ऩहुॉच चक ु ा है । ऐसे सभम भें कल्ऩ की भहानतभ घटना तथा हदव्म सॊदेि सन ु ाते हुए हभें अनत हषय हो यहा है कक कशरमग ु के अॊत औय सतमग ु के आहद के इस सॊगभमग ु ऩय ऻान-सागय, रेभ वकरुर्ा के सागय, ऩनतत-ऩावन, स्वमॊबू ऩयभात्भा शिव हभ भनष्ट्ु मात्भाओॊ की फझ ु ी हुई ज्मोनत जगाने हे तु अवतरयत हो चुके हैं। वे साकाय रजावऩता ब्रह्भा के भाध्मभ द्वाया सहज ऻान व सहज याजमोग की शिऺा दे कय ववकायों के फॊधन से भक् ु त कय ननववयकायी ऩावन दे व ऩद की राप्तत कयाकय दै वी स्वयाज्म की ऩन ु ः स्थाऩना कया यहे हैं।

नेवासा (महाराष्ट्र )—महिला मंडल भेंडा नेवासा में दिया शिवरात्रि निमित परमात्मा का का सत्य परिचय  
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