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श्रीयाभऩुय (भहायाष्ट्र)—भें सर्व धभव एकता ऩय चचाव आमोजक --स्थानीम ब्रह्भाकुभायीज श्रीयाभऩुय (भहायाष्ट्र) वर्षम –सर्व धभव एकता ऩय चचाव भुख्म अततथथ --आर्व ऑफ़ लरवर्ग ---भहे श ऩढ़ाये भस्ु स्रभ ---हाजी यपीक जैन श्र्ेताम्फय ---शेरेश फाफुरयमा लसख धभव ---भसयीन फाफज ू ी फी के बगर्ान ् बाई भाउं र् आफू फी के भंदा फहन प्रबायी

ब्रह्भाकुभायीज श्रीयाभऩुय

(भहायाष्ट्र) फी के अश्र्नी फहन , फी के सीभा फहन उऩस्स्थत थे

इस अवसय ऩय फी के बगवान ् बाई ने कहा की वर्तभान भें दन ु मा भें ज्ञान दे नेवारी सस्थामे फहुर् है रेककन


सभाज की स्स्थतर् सबी दे ख यहे है क्मा है वास्र्व भें इस बोतर्क ज्ञान से भानव का ऩरयवर्तन नही होर्ा है भानव के ऩरयवर्तन के लरए ऩयभात्भ ज्ञान की आवश्मकर्ा है | ववश्व ऩरयवर्तन के लरए ऩयभात्भा हभे मही ज्ञान दे र्े है की र्भ ु एक आत्भा हो आऩस भें बाई बाई हो आऩ सबी का घय चाॉद सूयज र्ायागण से बी ऩय ऩयभधाभ शाॊतर्धाभ है आऩ सबी का वऩर्ा एक ऩयभात्भा है अफ सभम चक्र के अनुसाय आऩ सबी को दे ह सहहर् दे ह के सवत सम्फधो को ऩदाथत को छोड़ वावऩस आऩने घय जाना है | जैसा कभत आऩ कयर्े हो वैसा आऩको पर लभरर्ा हैं |र्ुम्हाये जीवन की हय घटनामो भें कुछ न कुछ कल्माण सभम हुआ होर्ा है इस प्रकाय के ज्ञान से आऩसी बाईचाया आएगा हभ र्नाव टें शन से छुट जामेगे ववषम वासनाओ से छुट जामेगे इससे स्वमॊ का औय ववश्व का बी ऩरयवर्तन हो जामेगा

श्रीरामपुर (महाराष्ट्र)—में सर्व धर्म एकता पर चर्चा  
श्रीरामपुर (महाराष्ट्र)—में सर्व धर्म एकता पर चर्चा  
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