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फीदय (कननाटक ) कृषि षिऻननं केंद्र जनिनडन (फीदय ) सकनयनत्भक सोच औय नैतिक भल् ू म ऩय प्रोग्रनभ ककमन गमन आमोजक स्थननीम-- ब्रह्भनकुभनयीज ऩनिनधनभ फीदय (कननाटक ) भुख्म िक्िन ---फी के बगिनन ् बनई भनउं ट आफू षििम--नैतिक भूल्मों औय सकनयनत्भक चचंिन यषि दे शभख ु प्रनचनमा डॉ बगििी िरयष्ठ रेक्चयनय फी के ज्मोति फहन यनजमोग शशक्षऺकन ब्रह्भनकुभनयीज फीदय (कननाटक ) फी के ये खन यनजमोग शशक्षऺकन फीदय ऩनिनधनभ फी के भनरुिी बनई बगिनन ् बनई ने कहन की ििाभनन सभम जजिनी बी सभस्मन हैं उन सफकन कनयण है नकनयनत्भक सोच।


नकनयनत्भक सोच से िननि फढ़िन है । िननि भक् ु ि फनने के शरए सकनयनत्भक षिचनय संजीिनी फट ू ी है । सकनयनत्भक षिचनय से ही भुजक्ि संबि है ।

21िीं सदी िननि ऩण ू ा होगी। ऐसे िननिऩण ू ा ऩरयजस्थतिमों भें िननि से भक् ु ि होने सकनयनत्भक षिचनयों की आिश्मकिन है कहन कक जहनं िननि है िहनं अनेक सभस्मनएं फढ़ जनिी हैं। िननि के कनयण आऩसी भिबेद, टकयनि फढ़ जनिे हैं। जहनं िननि है िहनं भननशसक अशनंति के िश होकय भनुष्म व्मसन, नशन, डडप्रेशन के िश हो जनिन है । उन्होंने फिनमन कक भन चरने िनरे नकनयनत्भक षिचनयों के कनयण ही भन भें घण ृ , नपयि, फैय, षियोध, आिेश औय क्रोध उत्ऩन्न होिन है । नैतिक भल् ू मों को जीिन भें धनयण कयने की प्रेयणन दे नन आज की आिश्मकिन है । उन्होंने कहन कक नैतिक भूल्मों की कभी मही व्मजक्िगि, सनभनजजक, ऩनरयिनरयक, यनष्रीम एिं अन्ियनाष्रीम सिा सभस्मनओं कन भर ू कनयण


है । षिद्मनचथामों कन भूल्मनंकन आचयण, अनस ु यण, रेखन, व्मिहनरयक ऻनन ि अन्म फनिों के शरए प्रेयणन दे ने की आिश्मकिन है । ऻनन की व्मनख्मन कयिे हुए उन्होंने फिनमन कक जो शशऺन षिद्मनचथामों को अंधकनय से प्रकनश की ओय, असत्म से सत्म की ओय, फन्धनों से भजु क्ि की ओय रे जनए िही शशऺन है । उन्होंने कहन कक अऩयनध भुक्ि सभनज के शरए संस्कनरयि शशऺन जरूयी है । है ।

बीदर (कर्नाटक ) कृषि विज्ञानं केंद्र जनवाडा (बीदर )  
बीदर (कर्नाटक ) कृषि विज्ञानं केंद्र जनवाडा (बीदर )  
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