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याहता (भहायाष्ट्र )—राॊडगे वस्ती याहता भहायास्र भें शिवयात्रि के ननशभत ददमा ऩयभात्भा का सन्दे ि ददमा गमा आमोजक –स्थानीम ब्रह्भाकुभायी

सेवाकेंद्र याहता

(भहायाष्ट्र ) भुख्म वक्ता ---ब्रह्भकुभाय बगवान ् बाई भाउॊ ट आफू ववषम –-ईश्वयीम सन्दे ि फी के गीताजरी फहन याहता

स्थानीम ब्रह्भाकुभायी प्रबायी

भहायाष्ट्र

फी के सुशिर बाई फी के त्रफरााबाई फी के भहे ि बी उऩस्स्थत थे बगवान बाई ने कहा की याभेश्वयभ ् भें याभ के ईश्वय शिव, वॊद ृ ावन भें श्रीकृष्ट्ण के ईष्ट्ट गोऩेश्वय तथा एरीपेंटा भें त्रिभूनता शिव के चििों से स्ऩष्ट्ट है कक सवाात्भाओॊ के आयाध्म ऩयभवऩता ऩयभात्भा शिव ही हैं। शिवयात्रि का


त्मोहाय सबी धभों का त्मोहाय है तथा सबी धभावारों के शरए बायतवषा तीथा है । मदद इस प्रकाय का ऩरयिम ददमा जाता है तो ववश्व का इनतहास ही कुछ औय होता तथा साम्प्प्रदानमक दॊ गे, धाशभाक भतबेद, यॊ गबेद, जानतबेद इत्मादद नहीॊ होते। िहुॉओय भ्रातत्ृ व की बावना होती। आज ऩुनः वही घड़ी है , वही दिा है , वही यात्रि है जफ भानव सभाज ऩतन की ियभ सीभा तक ऩहुॉि िक ु ा है । ऐसे सभम भें कल्ऩ की भहानतभ घटना तथा ददव्म सॊदेि सुनाते हुए हभें अनत हषा हो यहा है कक कशरमुग के अॊत औय सतमग ु के आदद के इस सॊगभमग ु ऩय ऻान-सागय, प्रेभ वकरुणा के सागय, ऩनतत-ऩावन, स्वमॊबू ऩयभात्भा शिव हभ भनुष्ट्मात्भाओॊ की फुझी हुई ज्मोनत जगाने हे तु अवतरयत हो िक ु े हैं। वे साकाय प्रजावऩता ब्रह्भा के भाध्मभ द्वाया सहज ऻान व सहज याजमोग की शिऺा दे कय ववकायों के फॊधन से भक् ु त कय ननववाकायी ऩावन दे व ऩद की प्रास्तत कयाकय दै वी स्वयाज्म की ऩन ु ः स्थाऩना कया यहे हैं।

राहता (महाराष्ट्र )—लांडगे वस्ती राहता महारास्ट्र में शिवरात्रि के निमित दिया परमात्मा का सन्देश दिय  
राहता (महाराष्ट्र )—लांडगे वस्ती राहता महारास्ट्र में शिवरात्रि के निमित दिया परमात्मा का सन्देश दिय  
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