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याजोंद (हरयमाणा )—स्थानीम सेवाकेंद्र स्नेह मभरन का प्रोग्राभ आमोजक –स्थानीम ब्रह्भाकुभायी

सेवाकेंद्र याजोंद

(हरयमाणा ) भुख्म वक्ता ---ब्रह्भकुभाय बगवान ् बाई भाउं ट आफू ववषम –-नैततक मिऺा का भहत्व प्राचामय –अिोक नाफय फी के प्रेयणा फहन याजमोग मिक्षऺका याजोंद हरयमाणा फी के उषा

फहन

याजमोग मिक्षऺका असंध

हरयमाणा फी के भेहयचंद बाई जी वरयष्ठ याजमोगी कयनार


प्रबु चचंतन,आत्भचचंतन से भनष्ु म को अततंद्रद्रम सुख मभरता है । इस सुख के साभने संसाय के साये सख ु पीके रगते हैं। मह फातें प्रजावऩता ब्रम्हाकुभायी ईश्वयीम ववश्वववद्मारम भाउं ट आफू के याजमोगी बगवान बाई ने कहीं। वे महां केंद्र भें ईश्वय प्रेभी श्रद्धारओ ु ं को संफोचधत कय यहे हैं। उन्होंने कहा कक भनुष्म को आत्भवान होने के नाते तीन फातों का ऻान होना जरूयी है । एक भैं कौन हूं। दो-भेया आत्त्भक वऩता कौन है औय तीन भैं कहां से आमा हूं। उन्होंने कहा कक हभ ज्मोततस्वरूऩ आत्भाएं हैं। हभ सबी तनयाकाय आत्भाएं तनयाकाय ऩयभ वऩता ऩयभात्भा मिव के फच्चे हैं। हभ सबी चांद, सूम,य ताया गण के ऩाय सन ु हयी रार प्रकािभम दतु नमा से आए हैं। उन्होंने कहा कक आज हभ उस ऩयभात्भा को बूर गए हैं।


अऩने को बर ू गए हैं। इसमरए संसाय भें बटक यहे हैं। ऩयभात्भा गुणों, िांतत,आनंद, प्रेभ का सागय है । हभें बी सद्गण ु ों के ववकास की ओय ध्मान दे ना चाद्रहए। उन्होंंंने कहा आत्भा के ऩतन का कायण दे हबान है । जफ भनष्ु म का दे हबान प्रफर हो जाता है तो वह काभ,क्रोध,रोब, भोह, अहं काय, आद्रद ववकायं ंोंं के वि भें होकय अऩनी द्रदव्म ित्क्त भें खो दे ता है । इंद्रद्रमों का गुराभ हो जाता है । तफ प्रकृतत बी तभो प्रधान हो जाती है । भनुष्म दख ु ी औय अिांत यहता है । उन्होंने कहा अफ बक्त की ऩुकाय सुनकय तनयाकाय मिव धयती ऩय अवतरयत हो चक ु े हैं।


उनको मसपय बत्क्त बाव से माद कयने की आवश्मकता है । मिव हभें कभय गतत का ऻान औय मोगाभ्मास का ऻान दे कय भनोववकायों को जीतने का आदे ि दे यहे हैं। जो भनुष्म अऩने ववकायों को जीतेगा, सद्गुणों को अऩनाएगा, वत स्वर्णयभ दतु नमा भें दे वऩद ऩाता है । फी के भेहयचंद बाई जी वरयष्ठ याजमोगी ने

कहा कक सत्संग से प्राप्त ऻान ही

हभायी असरी कभाई है । इसे न तो चोय चुया सकता है औय न आग जरा सकती है । ऐसी कभाई के मरए हभें सभम तनकारना चाद्रहए। सत्संग के द्वाया ही हभ अच्छे संस्काय प्राप्त कयते हैं औय अऩना व्मवहाय सुधाय ऩाते हैं। उन्होंने याजमोग की भहत्ता फताई औय कहा कक याजमोग के द्वाया ही हभ अऩने संस्कायों को सतो प्रदान फना सकते हैं। इंद्रद्रमों ऩय काफू कय सकते हैं। केंद्र की फीके प्रेयणा फहन

ने ईश्वयीम भहावाक्म


सन ु ाए। इस भौके ऩय नगय ऩंचामत अध्मऺ भभता याठौय सद्रहत फडी संख्मा भें रोग भौजूद थे। प्रबु वचन भनष्ु म को आत्भवान होने के नाते तीन फातों का ऻान होना जरूयी है । औय ऻान ही हभायी असरी कभाई है ।

राजोंद (हरियाणा )—स्थानीय सेवाकेंद्र स्नेह मिलन का प्रोग्राम  
राजोंद (हरियाणा )—स्थानीय सेवाकेंद्र स्नेह मिलन का प्रोग्राम  
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