Page 1

सटाना ( भहायाष्ट्र )--- कभमवीय बावयाव हीये ववयगाव भें नैतिक भल् ू मों ऩय संगोष्ट्ठी आमोजक –स्थानीम ब्रह्भाकुभायी

सेवाकेंद्र सटाना

(भहायाष्ट्र) भुख्म वक्िा ---ब्रह्भकुभाय बगवान ् बाई भाउं ट आफू ववषम --नैतिक भल् ू म से व्मक्क्ित्व ववकास वरंससऩर – श्रीभिी सोनवने एस एन फी के

स्थानीम ब्रह्भाकुभायी कजमि भुंफई

सहामक सिक्षऺका ---बाभये ए एस फी के अंजू फहन रबायी सटाना सेंटय फी के दीऩारी फहन बगवान ् बाई ने कहा की विमभान सभम क्जिनी बी सभस्मा हैं उन सफका कायण है नकायात्भक सोच। नकायात्भक सोच से िनाव फढ़िा है । िनाव भक् ु ि फनने


के सरए सकायात्भक ववचाय संजीवनी फूटी है । सकायात्भक ववचाय से ही भक्ु क्ि संबव है ।

21वीं सदी िनाव ऩण ू म होगी। ऐसे िनावऩूणम ऩरयक्स्थतिमों भें िनाव से भक् ु ि होने सकायात्भक ववचायों की आवश्मकिा है कहा कक जहां िनाव है वहां अनेक सभस्माएं फढ़ जािी हैं। िनाव के कायण आऩसी भिबेद, टकयाव फढ़ जािे हैं। जहां िनाव है वहां भानससक अिांति के वि होकय भनष्ट्ु म व्मसन, निा, डडरेिन के वि हो जािा है । उन्होंने फिामा कक भन चरने वारे नकायात्भक ववचायों के कायण ही भन भें घण ृ , नपयि, फैय, ववयोध, आवेि औय क्रोध उत्ऩन्न होिा है । नैतिक भल् ू मों को जीवन भें धायण कयने की रेयणा दे ना आज की आवश्मकिा है । उन्होंने कहा कक नैतिक भल् ू मों की कभी मही व्मक्क्िगि, साभाक्जक, ऩारयवारयक, याष्ट्रीम एवं अन्ियामष्ट्रीम सवम सभस्माओं का भूर कायण है । ववद्मार्थममों का भल् ू मांकन आचयण, अनस ु यण, रेखन,


व्मवहारयक ऻान व अन्म फािों के सरए रेयणा दे ने की आवश्मकिा है । ऻान की व्माख्मा कयिे हुए उन्होंने फिामा कक जो सिऺा ववद्मार्थममों को अंधकाय से रकाि की ओय, असत्म से सत्म की ओय, फन्धनों से भक्ु क्ि की ओय रे जाए वही सिऺा है । उन्होंने कहा कक अऩयाध भुक्ि सभाज के सरए संस्कारयि सिऺा जरूयी है । है ।

सटाना ( महाराष्ट्र ) कर्मवीर भावराव हीरे विरगाव में नैतिक मूल्यों पर संगोष्ठी  
सटाना ( महाराष्ट्र ) कर्मवीर भावराव हीरे विरगाव में नैतिक मूल्यों पर संगोष्ठी  
Advertisement